बगलामुखी 36 अक्षरी मंत्र के लाभ baglamukhi 36 akshari mantra ke laabh
बगलामुखी 36 अक्षरी मंत्र के लाभ baglamukhi 36 akshari mantra ke laabh
बगलामुखी 36 अक्षरी मंत्र के लाभ baglamukhi 36 akshari mantra ke laabh मैं जय माता दी, जय महाकाल। आप सभी का स्वागत करता हूं। आज मैं आप लोगों के लिए एक शक्तिशाली मंत्र लेकर आया हूं जो अद्भुत है और रहस्यमयी है, जो ब्रह्मांड में समस्त शक्तियों को संचालित करता है। यह साधना बहुत ही अद्भुत और रहस्यमयी है।
इस साधना को संपन्न कर लेने के बाद साधक की समस्त प्रकार की मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं, शत्रुओं का नाश हो जाता है। बहुत ही अद्भुत समय भी है, और किसी भी समय इस साधना को अगर संपन्न कर लिया जाए तो यह समझ लीजिए सोने पर सुहागा है।
तंत्र की सभी विद्याएं चाहे वह काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुरभैरवी, धुमावती, बगलामुखी हों, माँ बगलामुखी को दश महाविद्या माना गया है।
ऐसी मान्यता है कि माता बगलामुखी की शक्तियों के सामने समस्त ब्रह्मांड की कोई भी शक्ति टिक नहीं सकती।
इसलिए शत्रु पर विजय प्राप्त, शत्रु भय से मुक्ति तथा प्रभावशाली वाक् सिद्धि प्राप्ति के लिए मां बगलामुखी की साधना संपन्न करने पर यह साधना बहुत जल्दी सिद्ध हो जाती है।
इस साधना में एक खास संख्या में बगलामुखी मंत्र का अगर जाप कर लिया जाए तो सामान्य बाधा तो दूर हो ही जाती है और साधक की समस्त प्रकार की मनोकामनाएं भी पूर्ण हो जाती हैं।
लेकिन अगर कोई बहुत बड़ी शत्रु बाधा या शत्रुता आपके जीवन में जीवन-मरण का प्रश्न हो तो ऐसे में कम से कम आपको 36,000 मंत्र का जाप तो करना ही पड़ेगा।
इस मंत्र का जाप करने वाला कभी भी शत्रु से हारता नहीं है। ऐसे साधक को हर प्रकार के वाद-विवाद में विजय मिलती है, वह अपनी बातों को सही सिद्ध कर पाता है क्योंकि उसे वाक् सिद्धि मिल जाती है।
इस मंत्र को अचूक माना गया है इसलिए जो कोई इसकी जप संख्या में जप करके सिद्ध करता है, उसे सभी प्रकार की जीवन में जो भी परेशानियां हैं, वह समाप्त हो जाती हैं और उसको हार का सामना नहीं करना पड़ता। ऐसे व्यक्तियों के किए हुए प्रयत्न कभी निष्फल हो ही नहीं सकते, साथ ही उसकी हर मनोकामना भी पूर्ण होती है।
लेकिन सही मन से, समर्पण से, विश्वास से, श्रद्धा से। उस वक्त खुशी की बात है इस मंत्र का, जो मैं बताऊंगा, 11 माला मंत्र का जाप करके हवन कर लेना है। हवन कैसे करना है, मैं आपको बताऊंगा।
जब आप इस साधना को संपन्न करेंगे, इसमें पीला वस्त्र लगता है। पीला आसन, पीला वस्त्र पहनकर पीले आसन पर मां बगलामुखी की तस्वीर, यंत्र जो है, स्थापित कर दीजिए।
एक माला हरिद्रा गणपति का, एक माला भैरव का, एक माला गणपति का आपको करके, जाप करके हाथ में जल लेकर अपनी मनोकामनाओं का संकल्प लेकर इस मंत्र का जाप करना है। और मंत्र में कुछ विशेष चीजें हैं जो मैं आप लोगों को बताऊंगा कि आप कैसे करना है और किस चीज से हवन करना है।
अगर आप उससे हवन कर लेंगे, इसका फल जल्दी आपको मिल जाएगा। कुछ विशेष मनोकामना की पूर्ति भी इस हवन से आप कर सकते हैं। धन, प्रसिद्धि, ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए दूध में भिगोए हुए तिल, चावल से हवन डालेंगे तो आपकी मनोकामना प्राप्त हो जाएगी।
कई प्रकार की चीजें हैं, मैं जो अधिक समय नहीं लेना चाहता हूं क्योंकि मां की जयंती है। कुछ चीजें ऐसी हैं, सावधानियां बरतनी पड़ती हैं।
तो आप उससे अगर कोई दिक्कत परेशानी हो तो संपर्क करके इसकी विधिवत जानकारी ले सकते हैं कि किस प्रकार से करना है।
इस मंत्र का जाप जो है आपको रात के मध्य करें तो ज्यादा अच्छा है, संभव हो तो 10 से 4 के बीच। इसके अलावा साधना के दौरान पीला वस्त्र धारण करना है, मैंने बता दिया है।
उस दिन ना बाल कटाएं, ब्रह्मचर्य का पालन करें और एक ही टाइम भोजन करना है, वो भी सात्विक। तो यह साधना बहुत सरल है।
इसमें कुछ मंत्र मैंने रावण संहिता और कुलार्णव तंत्र, मंत्र महोदधि से मैंने प्राप्त किया है, जो मैंने स्वयं अपने लिए भी प्रयोग किया है, लोगों को प्रयोग कराया है और आपको भी बताऊंगा कि इसमें प्रणव और बीज को कैसे लगाकर आप अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति एक दिन में ही जाप करके प्राप्त कर सकते हैं।
कोई दिक्कत हो, परेशानी हो तो हमसे संपर्क कर सकते हैं या फिर किसी योग्य गुरु से भी संपर्क कर सकते हैं। जय माता दी, जय महाकाल।
मां बगलामुखी साधना रहस्य Maa Baglamukhi Sadhana Rahasya PH.85280 57364
मां बगलामुखी साधना रहस्य Maa Baglamukhi Sadhana Rahasya PH.85280 57364
मां बगलामुखी साधना रहस्य Maa Baglamukhi Sadhana Rahasya PH.85280 57364 सबसे पहले आप मां बगलामुखी के बारे में बताइए। चमत्कार! पॉलिटिशियन, फिल्म स्टार्स, मूवी स्टार्स, ये मां बगलामुखी के टेम्पल पे बहुत रेगुलरली जाते हैं। इतनी पावर आती है उस टेम्पल में जाके, मतलब वहां पर जाकर आप बाकायदा फील करेंगे कि ये मंदिर की जो एनर्जी है, जो मां बगलामुखी की एनर्जी है, वो एक ऐसी एनर्जी है कि अगर उनकी एनर्जी का एक अंश भी हमारे साथ मिल जाए तो हम बिल्कुल अनबीटेबल हो जाएंगे।
मां बगलामुखी की जो पूजा कर ले या फिर जिससे प्रसन्न हो जाएं मां बगलामुखी, उसका कोई शत्रु नहीं रहता। बिल्कुल। और देखिए, आप बहुत युगों से इनकी पूजा चली आ रही है। रावण का जो बेटा था मेघनाद, उसने मां बगलामुखी को साधने का सोचा।
मां बगलामुखी को कैसे प्रसन्न करें, ?
मैं अपनी ऑडियंस के साथ एक उपाय आज शेयर करूंगी। जब हम बगलामुखी माता के मंदिर भी जाते हैं तो वहां पे गुप्त पूजा होती है। ये तो पॉसिबल नहीं है आज की दुनिया में कि लोगों के दुश्मन ना हों और ये भी पॉसिबल नहीं है कि वो दुश्मन आपका कुछ ना करे।
हम सतयुग में नहीं रह रहे। बिल्कुल। कि अगर एक दैविक शक्ति आपके साथ है तो आपका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, वो है मां बगलामुखी की पावर। जिनके ऊपर कुछ कराया गया है, अगर वह मां बगलामुखी के टेम्पल में जाएं तो उनको बहुत फायदा होगा। बेस्ट टाइम कौन सा है,
कब मां बगलामुखी साधना की पूजा करना ?
महाविद्याओं पर, उसमें आज जिस महाविद्या पर हम बात करेंगे वह है मां बगलामुखी। मां बगलामुखी को कहा जाता है शत्रुओं का नाश करने वाली, तंत्र मंत्र अगर आपके ऊपर किसी ने किया है तो उसका नाश करने वाली देवी।
यानी कि अगर आप किसी भी तरीके के संकट में हैं तो मां बगलामुखी की पूजा अगर आप करते हैं, उनको प्रसन्न आप कर लेते हैं तो सारी मुसीबत आपके ऊपर से खत्म हो जाती है।
यह मां जितनी सौम्य हैं, यह उतनी ही क्रोध में भी आ जाती हैं जब उनके भक्त पर कोई उंगली भी रख देता है। हम एक सीरीज कर रहे हैं दश महाविद्याओं पर, उनके साथ आपको आज के पॉडकास्ट में बताएंगे मां बगलामुखी के बारे में।
तो चलिए, आप तैयार हो जाइए और सीधे हम आपको मिलवाते जो सीरीज हम कर रहे हैं दश महाविद्या पर और वह और आगे बढ़ गई है और आगे बढ़ते हुए अब बगलामुखी की आज हम बात करेंगे। मां बगलामुखी का, के बारे में मैं कहूंगा कि शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जिसने या तो नाम ना सुना हो या मां बगलामुखी के बारे में थोड़ा बहुत ना जानता हो।
बट आज हम डीप डाइव करेंगे, मां बगलामुखी को बहुत करीब से मैं समझने की कोशिश करूंगा क्योंकि आपने तो समझा ही है और थोड़ा सा हम लोग भी समझ लें। सबसे पहले आप मां बगलामुखी के बारे में बताइए कि यह कैसी देवी हैं और इनका रूप कैसा है, इनको कैसे प्रसन्न कर सकते हैं,
कैसे आप बगलामुखी से कनेक्ट कर सकते हैं?
बगलामुखी एक बहुत ही शक्तिशाली एनर्जी है, 10 महाविद्या में से एक है और बहुत इम्पोर्टेंट डेइटी है। और मैं ये कहूंगी कि अगर एक वर्ड में उनको डिस्क्राइब करना हो तो मैं वो वर्ड यूज करूंगी, चमत्कार। ओके। इतने चमत्कार हुए हैं मां बगलामुखी के उसमें और बहुत मेरे क्लाइंट्स मुझे बताते हैं, मेरे साथ पर्सनली हुए हैं। मां बगलामुखी एक ऐसी एनर्जी है जिसकी शायद आज जो संसार को है, सबसे ज्यादा जरूरत है। पैराग्राफ भी बना दो ३से 4 लाइन के
वो कॉम्पिटिशन में आपको आगे करा सकती हैं, वह एनिमीज के ऊपर प्रिसाइड करती हैं, दुश्मनों का स्तंभन करती हैं और प्रोटेक्शन फ्रॉम इविल, प्रोटेक्शन फ्रॉम ब्लैक मैजिक, आपको तंत्र मंत्र से बचाती हैं अगर किसी गलत तरीके से उसका प्रभाव हो और बहुत ज्यादा आपको शक्ति प्रदान करने वाली हैं और इजीली अप्रोचेबल, अगर आप मानें।
पॉलिटिशियन, फिल्म स्टार्स, मूवी स्टार्स, यह मां बगलामुखी के टेम्पल पर बहुत रेगुलरली जाते हैं। बड़े-बड़े बिजनेसमैन, जितने भी लोग प्रिकॉशन से या किस मोटिव से? बहुत सारे तो अपने दुश्मनों को हराने के लिए जाते हैं, बहुत सारे बिजनेस में तरक्की के लिए जाते हैं।
नेगेटिव एनर्जी, देखिए जितना बड़ा आपका काम, उतनी ज्यादा आपके ऊपर नेगेटिव एनर्जी। बिल्कुल। लोग बिल्कुल नहीं छोड़ते प्रभाव करना, वशीकरण करना। वशीकरण को रिमूव करने के लिए बहुत सारे लोग जाते हैं, पूजा पाठ करवाने के लिए लोग जाते हैं। ऐसा कहते हैं कि गुप्त पूजाएं होती हैं।
जी। मां बगलामुखी के जो टेम्पल्स हैं वो दतिया में हैं, कांगड़ा में हैं और ये जो दो टेम्पल्स हैं ना, मां बगलामुखी के प्रमुख हैं। दतिया में भी बहुत लोग जाते हैं और कांगड़ा में भी बहुत लोग जाते हैं। सोशल मीडिया पर बहुत सारी रील्स आती हैं, शायद हिमाचल के कांगड़ा वाले जो बगलामुखी देवी का, ना बहुत लोग जाते भी हैं वहां पर।
हां, मैं भी रेगुलरली जाती हूं। हमारे, हमारे जो रुद्राक्ष हैं वो भी वहां पे पहले एनर्जाइज्ड होते हैं, उसके बाद ही हम क्लाइंट्स को देते हैं। तो वो एक ऐसी एनर्जी है कि अगर उनकी एनर्जी का एक अंश भी हमारे साथ मिल जाए तो हम बिल्कुल अनबीटेबल हो जाएंगे।
और इसीलिए लोग वहां जाते हैं। और उनको पीतांबरा भी कहते हैं। उनका कलर जो है वो येलो है और जो प्लैनेट को वो गवर्न करती है, वो प्लैनेट है मंगल या मार्स। आपको पता है कि अगर मंगल आपके चार्ट में खराब है तो आपको मां बगलामुखी के पास जाना है।
अगर मंगल की महादशा है, आपको प्रॉब्लम्स आ रही हैं, अगर आपका कॉम्पिटिशन बहुत बढ़ गया है, अगर आपको लगता है कि लोग आपको छोड़ ही नहीं रहे, हर तरफ से दुश्मन घेरे हुए हैं, ऐसे लोगों को मां बगलामुखी से बहुत इंस्टेंट रिलीफ मिलता है। अच्छा।
यानी कि बगलामुखी को लेकर एक बात तो आपने क्लियर कर दी है कि अगर आप किसी युद्ध की जगह पर हैं या आपकी लाइफ में किसी भी तरीके का आप एक वॉर ज़ोन सा फील कर रहे हैं या फिर आपके शत्रु बन रहे हैं, दुश्मन बन रहे हैं, एनिमी आपके बहुत ज्यादा हो गए हैं तो आपको मां बगलामुखी से कनेक्ट होना चाहिए।
बगलामुखी मां आईं कहां से, इनका जो प्राकट्य हुआ वो कैसे हुआ, मां बगलामुखी ने क्यों अवतार लिया? कहते हैं कि एक बार धरती पर बहुत ही बड़ा संकट आ गया था, एक ऐसा तूफान आ गया था जो थम ही नहीं रहा था। अच्छा। और श्री हरि विष्णु को लगा कि शायद अब प्रकृति का जो भविष्य है, वो संकट में है।
तो उन्होंने मां आदिशक्ति का आह्वान किया और जो पूजा उन्होंने की, जो तप उन्होंने किया, उससे जो शक्ति उत्पन्न हुई, वह मां बगलामुखी हैं। और उन्होंने श्री हरि विष्णु की तपस्या से प्रसन्न होकर संसार को भी बचाया और यह भी कहा कि मैं आगे भी अपने भक्तों की रक्षा करती रहूंगी।
तो मां का जो रूप है, इसको हम उग्र और सौम्य दोनों कह सकते हैं। उनके फेस पर एक स्लाइट सी स्माइल है, लेकिन यह हम बिल्कुल भी यह ना सोचें कि उनके अंदर वो शक्ति नहीं है। क्योंकि उनका जो फॉर्म 10 महाविद्या में दिखाया जाता है, उसमें उन्होंने शत्रु की जीभ या जिह्वा पकड़ी हुई है और एक हाथ से उनके हाथ में जो है वो शस्त्र है।
तो वो ये कहती हैं, स्तंभन की शक्ति रखती हैं और वो यह कहती हैं कि मैं शत्रुओं का विनाश एकदम कर सकती हूं। शी इज एक्सट्रीमली पावरफुल। और मैंने इतने चमत्कार होते हुए देखे हैं। मेरे एक क्लाइंट रिसेंटली गए थे और उनको कोई टेंडर में प्रॉब्लम आ रही थी, काफी बड़ा टेंडर था और उनके फेवर में नहीं जा रहा था, ऐसा उनको सूत्रों से पता चला।
और जब वह वहां पर गए और उनको एक ही लाइन में मां ने बोला कि इस डेट को तुम्हारे फेवर में जाएगा और जा, मैं तुझसे प्रसन्न हुई। और वो क्लाइंट आया, उसने मुझे यह बात बताई और वह डेट आई नहीं थी और सारी चीजें उसके विपरीत होने लग गईं और उसने, उसने बिल्कुल दिल छोड़ दिया और उसने कहा कि अब क्या फायदा, अब तो कुछ नहीं हो सकता।
मैंने उसको फिर भी यही गाइडेंस दिया कि आप ये साधना करते रहो, करते रहो, करते रहो। और जिस दिन उसको टेंडर मिला, जिस डेट पे उन्होंने कहा था, उसको मिला और उसने कहा कि ऐसा हो ही नहीं सकता था कि ऐसा हो।
पर चमत्कार, मैंने आपको शुरू में ही कहा था, चमत्कार की देवी है। जितने भी लोग ये पॉडकास्ट देख रहे हैं और उनको अपने जीवन में चमत्कार की उम्मीद है, बिल्कुल, वो बगलामुखी टेम्पल जरूर जाएं। आप भी गए होंगे बगलामुखी मंदिर? मेरे को, एज ऑलवेज, सपनों में उन्होंने बुलाया और मैंने नहीं सुना था जब मैं पहली बार गई और हिमाचल में चार साल पहले। अच्छा।
कैसे आया यह सपना और कैसे आपका पहुंचना हुआ वहां? मेरे को स्वप्न में कोई ना कोई फॉर्म मां का दिखता है। आपको मैं बता ही चुकी हूं कि पहले मेरा जुड़ाव शिवजी के साथ था और फिर शिवजी ने मुझे बोला कि अब आपको मां की शक्ति के साथ जुड़ना है।
मां काली के पॉडकास्ट में भी मैंने आपको कहा था कि जब तक हम शिवजी की साथ लेवल तक नहीं लेकर जाते, हम शक्ति तक अपने आप नहीं पहुंच पाते। भैरव या शिवजी, भैरव के फॉर्म में शक्तियों को जो है, वो गार्ड करते हैं। और जो मां बगलामुखी के टेम्पल में जो कांगड़ा वाला है, उसमें भी बाहर भैरव का बहुत बड़ा स्वरूप है और बहुत पावरफुल एनर्जी।
आप वहां पर पैर रखेंगे, आपके अंदर एक अलग सी वाइब्रेशन जागेगी। और वो वाइब्रेशन बिल्कुल सुला देने वाली, शांत वाइब्रेशन नहीं है। उसको फील करके आपको लगेगा कुछ भी पॉसिबल है, एवरीथिंग इज पॉसिबल। इतनी पावर आती है उस टेम्पल में जाके।
और वहां का अगर आप भोग खाएं, जो पीले चावल हैं वहां के, अगर आप वो खाएं, आपको लगेगा अब मैं इन्विंसिबल हूं। अब कुछ भी हो सकता है। सो शी इज द गॉडेस ऑफ पॉसिबिलिटी। मतलब वहां पर जाकर आप बाकायदा फील करेंगे कि ये मंदिर की जो एनर्जी है, जो मां बगलामुखी की एनर्जी है, बिल्कुल, कहते हैं मां बगलामुखी की जो पूजा कर ले या फिर जिससे प्रसन्न हो जाएं मां बगलामुखी, उसका कोई शत्रु नहीं रहता, उससे कोई जीत नहीं सकता क्योंकि वो फिर अजय हो जाता है।
बिल्कुल। अब इसमें मैं स्पिरिचुअलिटी का एक कांसेप्ट एज ऑलवेज जोडूंगी, तुषार। दुश्मन होता कौन है? हमारी प्रत्यक्ष लाइफ में तो दुश्मन हमारे कॉम्पिटिटर्स हो सकते हैं और आजकल मैंने आपको बोला कि नजर लगाने की प्रवृत्ति और वशीकरण कराने की तो कॉमन ही हो गई है।
बिल्कुल। तो इसलिए हम सबको मां बगलामुखी को जरूर उनकी पूजा अर्चना करनी चाहिए। लेकिन हमारे इंटरनल दुश्मन कौन हैं? हमारा ग्रीड, हमारा एंगर, हमारा डिस्पेयर। तो डेस्प्रिंग भी अपने में एक षड्यंत्र कह सकते हैं जिसमें उम्मीद ही खत्म हो गई, आशा ही खत्म हो गई।
तो जब हम मां बगलामुखी को साधते हैं ना, हमें सिर्फ एक्सटर्नल दुश्मनों की तरफ नहीं देखना, हमें अपने मन के डार्कनेस की तरफ भी देखना है। और मैं हमेशा अपने स्टूडेंट्स को यही समझाती हूं जब हम 10 महाविद्या की वर्कशॉप करते हैं, हम इसको काफी समझते हैं कि इस साल हम कौन से दुश्मन को हराएंगे ?
क्या हम अपने क्रोध को हराएंगे, क्या हम अपनी निराशा को हराएंगे, क्या हम अपने डिसिप्लिन के प्रॉब्लम को हटाएंगे? किस चीज को हटाएंगे? यानी खुद को स्ट्रॉन्ग कर लें हम इतना, इतना स्ट्रॉन्ग बना लें खुद को कि हम किसी दुश्मन से फाइट करके जीत सकें।
ये भी एक दुश्मन को हराने वाली बात होगी। बिल्कुल, बिल्कुल। और देखिए आप, बहुत युगों से इनकी पूजा चली आ रही है। रावण का जो बेटा था, उसने मां बगलामुखी को साधने का सोचा जब उसको पता चला कि श्री रामचंद्र और हनुमान जी और उनकी सारी सेना इस तरफ आ रही है।
तो उन्होंने यह कहा था अपने सैनिकों को कि मेरा यज्ञ बिल्कुल भी भंग नहीं होना चाहिए। और आपको पता है कि रावण कितना पंडित था और उसका बेटा भी काफी जानकार था। जब श्री राम को यह बात पता चली तो उनको लगा कि अगर माता इससे प्रसन्न हो गईं तो यह सारी सेना को मार देंगी और हम बिल्कुल भी ये युद्ध जीत नहीं पाएंगे।
तो उन्होंने हनुमान जी को यह आदेश दिया कि आप जाकर इस यज्ञ को तुरंत भंग कीजिए। और वह यज्ञ भंग हुआ। नहीं तो अगर मां प्रकट हो जातीं तो रामायण किस तरफ जाती, ये हमें पता है।
तो आप यह समझ लीजिए कि अगर वो मां बगलामुखी के सहारे ऐसे चल रहे थे तो अगर आज हम, आज हम उनको प्रसन्न कर पाएं… यानी कि युद्ध और महायुद्ध से पहले मां बगलामुखी की पूजा या उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश देवताओं ने भी की या फिर उस स्तर के जो महायोद्धा रहे, उन्होंने भी की है।
कृष्ण और अर्जुन ने भी की। अच्छा। इसीलिए मैं आपको महाभारत बोल बैठी थी। तो कृष्ण और अर्जुन ने भी अपना युद्ध शुरू करने से पहले उन्हीं को साधा था। अच्छा। और वो प्रकट भी हुई थीं। यानी कि बड़े लेवल पर पूजा की गई और तभी शायद वजह है कि ये कहा जाता है कि मां बगलामुखी को अगर आपने प्रसन्न कर लिया तो आप अजय हो जाते हैं। कैसे प्रसन्न करें?
कैसे प्रसन्न करें? देखिए, मां काली के लिए मैंने आपको बोला था कि उनकी मंत्र साधना करें। अब हर महाविद्या के लिए मैं अपनी ऑडियंस के लिए थोड़ा आसान करना चाहूंगी क्योंकि हमारे काम भी हैं, ऑफिस भी है, बच्चे भी हैं, घर भी है और तरह-तरह की जिम्मेवारियां हैं।
मां बगलामुखी का बहुत ही, बहुत ही शक्तिशाली मंत्र है जो अभी मैं स्क्रीन पर दिखा रही हूं। यह मंत्र अगर हम दिन में एक बार भी कर लें, 108 बार कर लें तो आप समझ जाइए कि इससे बेटर कुछ हो ही नहीं सकता। लेकिन अगर एक बार भी कर लें और हम अपने बच्चों को याद करा दें तो ये हमारे अराउंड एक बहुत ही अच्छा प्रोटेक्टिव लेयर बना देता है।
लेकिन ये थोड़ा मुश्किल सा मुझे मंत्र लगता है क्योंकि आसान नहीं होगा किसी भी बच्चे के लिए, किसी भी बड़े के लिए कंठस्थ कर पाना। जी। तो क्योंकि ऐसा है, इसलिए मैं इनके लिए जो आपको बताने जा रही हूं, वो एक बड़ा यूनिक सा उपाय है।
बगलामुखी मां का एक यंत्र आता है। और यंत्र, देखिए यंत्र, तंत्र, मंत्र, ये तीनों चीजें साइड बाय साइड जाती हैं। जब हम मंत्र के प्रभाव को उतना नहीं बढ़ा पाते तो हम यंत्र से उसको बढ़ाते हैं। बगलामुखी मां का जो यंत्र है, हम उसकी बड़ी स्पेशल एनर्जाइजेशन और पूजा करते हैं।
मैं अपने बहुत सारे क्लाइंट्स को वो देती भी हूं ताकि उनकी लाइफ में जो मैंने क्लियर की है, उसके साथ-साथ ये यंत्र भी काम करता रहे। स्पेशली ऐसे लोग जो बहुत ज्यादा पाठ नहीं कर सकते या मंत्र सिद्धि नहीं कर सकते। तो ये जो यंत्र है, ये बहुत स्पेसिफिक यंत्र होता है।
मैं अपनी ऑडियंस के साथ एक उपाय आज शेयर करूंगी। और वो यह है कि अगर आप इस यंत्र को अपने ईस्ट कॉर्नर में लगा लें, अच्छा, ईस्ट की दीवार पर आप इसको लगा लें और यह बहुत ही शक्तिशाली होता है। और जो भी आपके दुश्मन हैं, उनकी फोटोज के छोटे-छोटे प्रिंट आउट लेके एंटी-क्लॉकवाइज डायरेक्शन में इस यंत्र के लगा दें।
जैसे पहला फोटो आपने यंत्र के ऊपर लगाया, ऊपर मतलब यंत्र से दीवार पे लगाया और फिर उसके बाद नेक्स्ट को लेफ्ट पे और फिर लेफ्ट पे। ऐसे एंटी लगाना है। ये आपने करना है अमावस्या वाले दिन और करना सुबह है अमावस्या वाले दिन।
और जिस दिन आप ये करेंगे, उस दिन आप 108 बार जरूर मंत्र की चैटिंग करेंगे, चाहे आप उसके बाद ना करें। और यह यंत्र जो है, इनकी शक्तियों के ऊपर काम करता रहेगा। 60 दिन के अंदर जब उसके थर्ड अमावस्या आएगी, आपको यह जितनी भी पिक्चर्स हैं, उनको जला देना है और अपने घर के बाहर फेंक देना है या बाहर जाकर वीराने में जला देना है।
और यंत्र वहीं पर रहेगा। तो यंत्र क्या करता है? यंत्र अपनी शक्ति का प्रभाव आपके पूरे एरिया में, आपके घर में, आपके बिजनेस में देता रहता है। ये उपाय आप अपनी फैक्ट्री या ऑफिस में भी कर सकते हैं। थोड़ा सा ऑड हो जाएगा अगर किसी ने देखा, तो आप उसको ढक सकते हैं पीले से छोटे से पर्दे के साथ ताकि डे-टू-डे दिखाई ना दे।
और ये आपके दुश्मनों का जो है, वो विनाश कर देगा। अब यहां मैं यह बताना चाहती हूं कि दुश्मनों के विनाश का क्या मतलब है। क्या वो शारीरिक रूप से उनको कोई तंगी आएगी? नहीं, ऐसा नहीं है। जो भी उनके साथ आपके नेगेटिव कॉर्ड हैं, जैसे जो आप पेहाम करने की कोशिश कर रहे हैं या आपको लगता है उनकी इंटेंशन है आपको करने, वो दूर हो जाएगी।
उनको कोई हम तांत्रिकों की तरह कोई ऐसा खत्म नहीं कर रहे। हां, नहीं, फिजिकली उन्हें नहीं कर रहे। तो ये एक जो उपाय है, वो बहुत पावरफुल है। जो यंत्र होता है, वो बहुत पावरफुल होता है। और जब हम देते हैं, हम एक स्पेशल तरीके से उसकी पूजा करके देते हैं।
जब हम बगलामुखी माता के मंदिर भी जाते हैं तो वहां पर गुप्त पूजाएं होती हैं जो आप पहले से बुक करा सकते हैं विद अ वेरी स्पेसिफिक इंटेंशन कि मुझे यह चाहिए। ओके। यह पूजा वो पंडित जी आपको बता देंगे कि आपको एक ही बार आना है या वहां पर आपको 11 दिन लगातार करानी है। ये आपकी प्रॉब्लम की इंटेंसिटी पर डिपेंड करता है।
अब आ गए कि हम डे-टू-डे मां की साधना कैसे करें। बगलामुखी मां की फोटो लगा के, लेकिन ईस्ट फेसिंग ही आपको बैठना है, ईस्ट में उनकी फोटो लगा के। उनको सॉलिड जो हल्दी की गांठें होती हैं, ठोस हल्दी की गांठों की माला बनाकर चढ़ाएं।
और यह हर रोज नहीं चढ़ानी है, आपने एक बार चढ़ा दिया तो आप पूर्णिमा की पूर्णिमा उसको चेंज कर सकते हैं। जो उतारी हुई है, वो हम बहा सकते हैं, जल प्रवाह कर सकते हैं। जल प्रवाह नहीं कर सकते तो हम किसी पीपल के पेड़ के नीचे उसको छोड़ के आ सकते हैं।
जो आपने यह पूजा करी, घी के दिए से उनकी पूजा होती है और मीठे चावल, मीठा लड्डू, येलो कलर की कोई भी चीज करें। जब भी आप मां बगलामुखी, जिनको पीतांबरा भी कहा जाता है, उनकी पूजा अर्चना कर रहे हैं, आपको बिल्कुल पीले वस्त्र पहनने हैं और पीले आसन पर ही बैठना है।
और इनकी पूजा दिन में करें। जब भी हम चाहते हैं… एक और बहुत अच्छा उपाय है मां का। जिनके बच्चे का फोकस एंड कंसंट्रेशन नहीं है, अगर वह बच्चा 13 साल से, मतलब टीनएजर नहीं है, 13 साल से कम है उसकी आयु, 12 वर्ष तक जो है बच्चे, उनके बेडरूम में आप ईस्ट फेसिंग वॉल पे, वैसे तो आप अपना स्टडी टेबल भी ईस्ट फेसिंग कर लीजिए
बच्चा बैठे तो ईस्ट की तरफ देखे, वहां पर अगर आप मां बगलामुखी का जो यंत्र है, वह लगा देते हैं, वो यंत्र पूरे टाइम काम करेगा आपके बच्चे के फोकस के ऊपर। बच्चे आजकल देखिए, डिस्ट्रैक्ट हो जाते हैं आईपैड में, यू नो, टैबलेट्स में या खेलने जाते हैं तो बहुत आके टेक्नोलॉजी में लग जाते हैं या खेलने में, पढ़ना नहीं चाहते।
ऐसे में अगर आप मां का यंत्र वहां लगाते हैं और उस यंत्र की पूरी एनर्जी उस बेडरूम में जाती है तो इससे आपके बच्चे की कंसंट्रेशन बिल्कुल शार्प हो जाएगी। ओके, ओके। अगर आपका बच्चा 13 साल के ऊपर है तो बेडरूम में यंत्र लगाना सही नहीं होगा।
ऐसे में आप मां का एक छोटा सा जो नाम है, उसको लिख के येलो पेपर पे उसके स्टडी टेबल के ऊपर ऐसे करके चिपका दीजिए, लैमिनेट करा लीजिए और चिपका दीजिए।
वो भी एक यंत्र का काम करेगा बिकॉज़ यंत्र एक सर्टेन एज तक ही हम ऐसा कर सकते हैं, उसके बाद हमें उसको मंदिर में रखना होगा। अगर वो भी नहीं, जब भी आपका बच्चा पाठ हो, आप कोशिश कीजिए कि आप मां के आगे रखी हुई हल्दी जिसका मंत्र उच्चारण से आपने जिसको एनर्जाइज्ड किया, अपने बच्चे के माथे पे, नाभी पे और गले पे लगा दीजिए।
क्योंकि वाक् सिद्धि की भी मां हैं ये। वाक् सिद्धि, प्रधान सिद्धि क्या है? कि जो हम बोलें वो सच हो और जो हम बोलें वो सबके हित में हो। और जैसे प्रेडिक्शन करते हैं लोग, तो प्रेडिक्शन जो है वो ट्रू हो जाना। जो मैं कह रही हूं, मेरे, मेरी जिह्वापे जो है, मां सरस्वती का वास हो।
खासकर वो लोग जो यह चाहते हैं कि मैंने जो कहा, उसे दुनिया सुने या मैं जो कह रहा हूं, उससे लोग इंप्रेस हों, चाहे वो इंटरव्यूज में जाने वाले लोग हों, ग्रुप डिस्कशन में जो लोग रहते हैं, क्या ये जरूरी है कि वो लोग मां बगलामुखी की पूजा करेंगे तो उनकी जो बोलने की प्रभाव है, वो प्रभाव बढ़ेगा? वो प्रभाव बढ़ेगा।
लेकिन जैसे बच्चे अब मंत्र नहीं कर सकते हैं तो यहां पर हम जो है, यंत्र का प्रयोग करेंगे। तो अगर आपकी ग्रुप डिस्कशन है, आप उस यंत्र को अपने सामने रखें, ईस्ट की तरफ फेस करें और आप अपनी पढ़ाई वहीं पर करें और फिर उस यंत्र को वापस जो है, मंदिर में प्लेस कर दें। आप उस यंत्र के साथ-साथ काम करें और आपका जो है, बहुत ही, बहुत ही अच्छे रिजल्ट्स आएंगे कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स में, स्कूल्स में, ग्रुप डिस्कशन में, इंटरव्यूज में, पॉडकास्ट में।
बिल्कुल। अच्छा, अक्सर मैं आपसे ये पूछता हूं कि किसी भी देवी का जब आपकी लाइफ में उनकी एनर्जी का आना शुरू होता है तो क्या फील होता है ? मां बगलामुखी जब आपकी लाइफ में आना शुरू होती हैं, उनकी कृपा आना शुरू होती है तो किस तरीके के इंडिकेशंस आपकी लाइफ में आना शुरू होते हैं ?
मां बगलामुखी जब हमारी लाइफ में एंटर करती हैं, सबसे पहले हमारे में बहुत कॉन्फिडेंस आता है। ओके। आप याद कीजिए, मंगल ग्रह के क्या-क्या एट्रिब्यूट हैं ? करेज, बहुत पावर, बहुत कॉन्फिडेंस। आपने पिछले पॉडकास्ट में मुझे बताया है कि ये पर्टिकुलर देवी जो है, वो किसी एक ग्रह से कनेक्टेड है। तो क्या मां बगलामुखी मंगल से हैं ? जी, मंगल से कनेक्टेड हैं।
और मंगल ग्रह कॉन्फिडेंस का ग्रह है, करेज का ग्रह है, हनुमान जी को याद कीजिए, बिल्कुल। है ना, और भक्ति का ग्रह है। तो जब आपके दिल में ये फीलिंग आने लग जाए, होप आने लग जाए, आपको लगे कि दुश्मन आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकते हैं, मां मेरे साथ है, यह सारी जो फीलिंग होती है, वो इसकी होती है।
देखिए, यह तो पॉसिबल नहीं है आज की दुनिया में कि लोगों के दुश्मन ना हों और यह भी पॉसिबल नहीं है कि वो दुश्मन आपका कुछ ना करे। हम सतयुग में नहीं रह रहे, बिल्कुल। तब भी वैसे तो युद्ध होते ही थे। बिल्कुल, बिल्कुल।
लेकिन उनके होते हुए भी अगर आप में कॉन्फिडेंस है कि अगर एक दैविक शक्ति आपके साथ है तो आपका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, वो है मां बगलामुखी की पावर। तो बहुत ही प्रभावशाली उपाय जो मैंने बताया है, मैंने खुद करके देखा है और बहुत क्लाइंट्स ने भी बताया है।
अगर ऑडियंस में किसी के साथ चमत्कार हुए हैं तो कमेंट्स में जरूर बताएं क्योंकि यह एक चमत्कार की मां हैं। आप गए… अच्छा नहीं, मैं बगलामुखी मंदिर नहीं गया। बट आपकी बात जब मैं सुन रहा था क्योंकि मेरे बहुत सारे फ्रेंड्स हैं जो कि कांगड़ा में जो बगलामुखी मंदिर है, वहां जाते हैं।
एक मेरी फ्रेंड है जो सही में, उन्होंने मुझे बहुत सारी चीजें बताईं, उन्होंने मुझे बताया भी कि कई बड़े-बड़े पॉलिटिशियन वहां बगलामुखी के मंदिर में जाते थे और वहां पर पूजा पाठ करके अपने चुनाव जीते हैं वो लोग।
बड़े-बड़े, मैं किसी का नाम नहीं लूंगा लेकिन बहुत ज्यादा मेरे आसपास बहुत सारे ऐसे लोग हैं और आपने आज जो बातें कहीं, मुझे लग रहा है कि मुझे भी बुलाया जा रहा है कि आ जाओ भई, बहुत टाइम हो गया आपको इंडिकेशन देते हुए।
तो मैं बहुत जल्द शायद पूरे परिवार के साथ वहां पर जाऊं। वेल, दश महाविद्याओं में से एक हैं मां बगलामुखी, तो तंत्र से रेलेवेंस इनका होगा, इनका कोई ना कोई कनेक्ट तंत्र के साथ भी होगा। क्या मां बगलामुखी की कनेक्टिविटी तंत्र के साथ है? जो तांत्रिक हैं, वो कैसे कनेक्ट करते हैं?
तांत्रिक मां बगलामुखी की सिद्धियों को साधते हैं, स्तंभन करते हैं, वशीकरण का भी प्रयोग करते हैं। लेकिन मैं यह सोचती हूं कि जिनके ऊपर कुछ कराया गया है, अगर वो मां बगलामुखी के टेम्पल में जाएं तो उनको बहुत फायदा होगा क्योंकि ये जितना भी करा-कराया होता है, वो मां बगलामुखी के टेम्पल पर उतर जाता है।
अच्छा। और अगर आप अपने पेशेंट को वहां नहीं ले जा पा रहे हैं तो आप उनके साइड पर बैठ के, चाहे मन ही मन इस मंत्र का जाप करते रहें। पॉसिबल ही नहीं है कि जिस जगह पर उनका यंत्र लगा हुआ है, अगर कोई बहुत बीमार है तो आप उसके बेड के ऊपर जो दीवार है, उसके ऊपर यह यंत्र लगा दीजिए।
यह यंत्र उस व्यक्ति को इतना, इतना होप फुल कर देगा कि उसकी बॉडी जो है, रिएक्ट करने लग जाएगी, इतना पॉजिटिवली। क्या ये मार्केट से यंत्र खरीदा और लगा दिया, इतना भर काफी है या इसकी एनर्जी बढ़ानी पड़ेगी ?
जैसे आपने कहा कि आपके पास जितने यंत्र होते हैं, आप जो देते हैं लोगों को, वो आप एनर्जाइज्ड करके देते हैं, उसकी पूजा पाठ एक प्रोसेस है जो आपने बताया भी कि मंत्र के थ्रू करते हैं। क्या लाकर लगा देना काफी है या एनर्जाइज्ड करना पड़ेगा ? देखिए, अगर आप नॉर्मल पानी पी रहे हैं तो आप लाकर भी पी सकते हैं।
अल्कलाइन वॉटर पीना है तो आपको उसको बना के पीना होगा जिसके और भी फायदे हैं। तो जब हम इसको एनर्जाइज्ड करते हैं मंत्रों के थ्रू, इसका बिल्कुल एक अलग इफेक्ट होता है। पर मैं ये नहीं कहूंगी कि यंत्र में अपनी पावर में कोई कमी है। लेकिन डेफिनेटली अगर हम उसको और भी शार्प करें, लेजर बीम की तरह बना लें तो असर जो है, वो जल्दी होता है।
अच्छा, बेस्ट टाइम कौन सा है? कब मां बगलामुखी की पूजा करना, किन डेज में पूजा करना आपको बहुत जल्दी फल दे सकती है? नवरात्रि आ रहे हैं, आप नवरात्रों में फर्स्ट नवरात्रि से शुरू कर दीजिए और यह सबसे बेस्ट टाइम होगा इनकी साधना शुरू करने के लिए।
और ट्यूसडे इनके लिए बहुत अच्छा माना जाता है और सैटरडे भी इनके लिए बहुत अच्छा माना जाता है। तो ये जो दो डेज हैं, इनमें भी आप शुरू कर सकते हैं। लेकिन अगर नवरात्रों में कर सकें तो नथिंग लाइक इट। कोई खास तरीके का, क्योंकि आपने पिछले पॉडकास्ट में बताया था कि एक पर्टिकुलर भैरव हैं जो हर दश महाविद्याओं के साथ अटैच हैं।
इन देवी के साथ, मां बगलामुखी के साथ अगर हम देखें तो एक भैरव होंगे जो कि अटैच होंगे। तो क्या मां बगलामुखी का जो… क्या जो मतलब आम आदमी जो एक गृहस्थ फैमिली मैन है, वो पूजा करता है तो क्या उनकी पूजा भैरव के साथ या उन देवता के साथ करना जरूरी है ?
जैसे आपने शिव की बात की कि पहले शिव की पूजा करो, फिर आप दश महाविद्या से कनेक्ट होगे। तो क्या दश महाविद्याओं में मां बगलामुखी की पूजा करने से पहले भी आपको शिव की पूजा करनी चाहिए? जी।
और इसीलिए जो वहां पे कांगड़ा में टेम्पल है, उसके बाहर ही भैरव जी स्थापित हैं। बताया कि हां, बड़ा भव्य, बहुत, बहुत भव्य हैं। तो जैसे भी आप उनकी पूजा कर सकें, मदिरा से कर सकें, मंत्र से कर सकें, अगर आप वहां जा रहे हैं तो आपको पता चल जाएगा।
लेकिन अगर आप घर पे कर रहे हैं तो आप गणेश जी की वंदना से शुरू करें और उसके बाद शिव जी का करें या भैरव जी का करें और उसके बाद ही मां की।
ये एक प्रोसेस आप फॉलो करें तभी आपको बेहतर तरीके से आपको फल मिल पाएगा। अच्छा, एक लास्ट क्वेश्चन मेरा आपसे ये रहेगा, मैंने बहुत जगहों पर सुना है कि मां बगलामुखी का हवन करिए, मां बगलामुखी… तो क्या हवन से खास कनेक्टिविटीमां बगलामुखी की है ?
सभी महाविद्या की है। अच्छा। हवन एक अगेन, उग्र फॉर्म है किसी भी चीज को करने का। और हम उसमें आहुति देते हैं, अपनी ऑफरिंग्स देते हैं और प्रे करते हैं कि जो देवता हैं, वो उसको एक्सेप्ट करें, अग्नि देवता और बहुत सारे देवताओं का जब हम आह्वान करते हैं।
मैंने पर्टिकुलर नोटिस किया है कि हवन करके जब हम अपना शुरू करते हैं और जब हम उद्यापन करते हैं तो भी हवन करना… हवन इज अ वेरी पावरफुल प्रोसेस। मैं यह कहूंगी कि अगर आप मंत्र सिद्धि कर रहे हैं किसी भी महाविद्या की तो बहुत जरूरी है कि आप रोज हवन करें।
वैसे भी अगर आप हवन करते हैं, आपके घर की ऊर्जा जो है, वो अलग ही लेवल की हो जाती है। किसी के घर में घुसते ही बता सकते हैं कि इनके घर में रोज हवन होता है। स्पेशली पीपल जो औरा पढ़ सकते हैं, जो एनर्जीज को पढ़ सकते हैं, जी, वो एकदम घुसते ही आपको बता देंगे कि आप बहुत… एक जो स्पेस होती है ना तुषार, वो जागृत हो जाती है मंत्र से और हवन से और यंत्र से। बिल्कुल। चलिए, बहुत-बहुत अच्छा लगा मुझे।
आज आपने हवन वाली बात जो कही है, वो तो मेरा पर्सनल क्वेश्चन था आपसे क्योंकि हवन को लेकर बहुत समय से मेरे मन में था कि… क्योंकि मुझे बहुत अट्रैक्ट करता है कहीं पर भी अगर हवन हो रहा है या मैं अगर हवन में शामिल हूं तो बड़ा एक अच्छा सा फील होता है, एक एक्टिवेटेड सा फील होता है। सो दैट वाज माय पर्सनल क्वेश्चन।
थैंक यू, आपने हम… हर एक सवाल का जवाब दिया और हमारे जो व्यूवर्स हैं, क्योंकि एक सीरीज हम कर रहे हैं, अगर आपने अभी तक पिछले पॉडकास्ट नहीं देखे हैं तो आप जरूर जाकर उन पॉडकास्ट को देखिए क्योंकि हर एक देवी पर हमने कोई ना कोई अलग-अलग तरीके से डीप डाइव किया है। सो थैंक यू आज के लिए इस पॉडकास्ट के लिए। थैंक यू।
Shodashi Mahavidya Sadhana षोडशी महाविद्या साधना रहस्य नमस्कार, नमस्कार, आज हमें बहुत हर्ष के साथ साझा करना है कि श्री वर्धि ज्योतिष ने एक बार फिर दस महाविद्या में तीसरी महाविद्या माँ त्रिपुर बाला (त्रिपुर सुंदरी) की कथा आपके सामने प्रस्तुत की है। आइए जानते हैं कैसी हैं माता त्रिपुर सुंदरी।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के देवबंद में स्थित त्रिपुरा बलमा का शक्ति पीठ त्रिपुरा सुंदरी पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है और देशभर से श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना करने आते हैं। भारतीय और सनातन पद्धति के अनुसार हर साल चित्रा मास की चतुर्थी के मौके पर देवबंद स्थित शक्ति पीठ में बहुत बड़ा उत्सव मनाया जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, उन्हें एक बार महर्षि परशुराम के शिष्य ऋषि “सुमेधा” द्वारा रचित त्रिपुरा रहसिम में वर्णित किया गया था। पुस्तक में भगवान परशुराम,दत्रात्रे और हयग्रीव और अगस्त्य मणि द्वारा संवादात्मक तरीके से भगवती के प्रकट होने की कहानी और महत्व का विस्तार से वर्णन किया गया है।
वह कहानी जो उनके मूल से प्रचलित है। उनके अनुसार जब यह कथा भगवान शिव की तीसरी आंख से प्रचलित होती है। उनके अनुसार जब कामदेव को भगवान शिव की तीसरी आंख ने खा लिया और माता गोरा ने कम्पीड के शरीर की राख को इकट्ठा किया और उसका पुतला बनाया और भगवान आशुतोष से कहने लगे कि हे स्वामी, इस पुतले में अपने प्राणों की आहुति दे दो क्योंकि गणपति का कोई मित्र नहीं है। तो यह हमारे गणपति हैं जो उनके साथ खेलेंगे।
मां जगदम्बा के आग्रह पर योगेश्वर भगवान महाकाल ने इस पुतले में अपने प्राणों की आहुति दे दी थी, लेकिन शिव के क्रोध के कारण इस राख में तमुगन के परमाणु थे। वह दुबले-पतले आदमी के रूप में जीवित हो उठा, लेकिन राख में तमोगोना होने के कारण वह असुर बन गया। इस राख के पुतले में जो जीव आया वो महालक्ष्मी का नौकर था जिसका नाम “माणिक्य” शेखर था और घटना कुछ इस तरह थी।
एक समय था जब देवी लक्ष्मी गंगा के तट पर घूंट भरकर आंखें बंद करके माता त्रिपुर सुंदरी का ध्यान कर रही थीं। उसने अपने नौकर माणक्य शेखर से कहा कि मेरी गर्मी में भीगना मत। यह कहकर कि आप मेरी रक्षा करें, लक्ष्मी ध्यान में लगी हुई हैं ?
और माणिक्य शेखर पहरा देता रहा, उसी समय एक सुंदर स्त्री “अलकनंदा” नदी में स्नान करने आई। अंदर गोते लगाते हुए उसका पैर फिसल गया और वह डूबने लगी और वह उसकी मदद के लिए रोने लगी, उसकी चीख सुनकर मनक्या शेखर भाग जाता है और इस रमणी की जान बचाता है, इस रमणी की खूबसूरत जवानी देखकर मनकिया शेखर के दिल में काम आ जाता है। माणिक्य शेखर का घटिया रवैया इस तरह देखकर माता लक्ष्मी की शरण में आ गई ?
रोते हुए रमानी ने उचित घटना जानने के बाद मां लक्ष्मी ने मांक्य शेखर को असुर के जंगल में जाने का श्राप दे दिया। तभी इस माणिक्य शेखर की आत्मा इस पुतले में उतर आई।
इस तरह वह असुर बन गया और कुछ दिनों बाद वह असुर ी भावनाओं को दिखाने लगा और उसने गणेश का अपमान किया ? और कार्तिकेय से युद्ध शुरू हुआ?
अंत में, उन्होंने धन, महिमा, वीरता और शक्ति प्राप्त करने के लिए 10,000 वर्षों तक गंगा के तट पर ध्यान किया। जब भगवान शंकर उसकी गर्मी से प्रसन्न हो गए तो वह उनसे पहले पहुंचे और उनसे आशीर्वाद लेने को कहा, तब इस दैत्य ने वरदान के रूप में जीवन का उपहार मांगा अर्थात उसने अनंत काल की इच्छा व्यक्त की, लेकिन ईश्वर उसे अमर करने में असफल रहे, इसलिए वह निराश हो गया और वापस गर्मी में चला गया और इससे संतुष्ट होकर एक लाख वर्षों तक ध्यान किया।
भगवान आशुतोष ने उन्हें तीनों लोकों और देवों पर शासन करने के लिए कहा, उन्होंने सभी असुर ों, मनुष्यों आदि को जीतने का आशीर्वाद दिया। लेकिन उन्होंने ब्रह्मादि देवताओं को अपने अधीन नहीं रखा, न ही अमरता का वरदान दिया। असुर इससे संतुष्ट नहीं हुआ और फिर गर्म हो गया। उपर्युक्त व्यक्ति ने दो मिलियन वर्षों तक गंभीर गर्मी को सहन किया, उसकी महान गर्मी के कारण, अंदर के सभी देवताओं के सिंहासन हिलने लगे और पृथ्वी पानी से भर गई।
इस प्रकार संपूर्ण ब्राह्मण अर्थव्यवस्था का विनाश देखकर भगवान आशुतोष ने आश्वासन दिया कि देवताओं, नए मनुष्यों, अद्वितीय जानवरों, पेड़-पहाड़ों, हिरणों, सांपों, पक्षियों, क्रेते की पतंगों आदि यज्ञ, गंधर्व, विद्याधर, किन्नर, पेश, वर्मा, विष्णु और महेश और प्रसिद्ध अस्त्र-शस्त्रों से असुर की मृत्यु नहीं होनी चाहिए। बस इस आशीर्वाद के प्रभाव में, इस असुर ने खुद को अमर साबित कर दिया और देवताओं को परेशान करना शुरू कर दिया और अंदर की सारी दुनिया पर अपना शासन प्राप्त कर लिया।
एक बार ब्रह्मा, विष्णु, महेश की त्रिदेवियों पर विजय पाने की इच्छा से वह उनके घरों की ओर बढ़ा, इस असुर को अपनी ओर आता देख त्रिदेव को उसके घर के साथ दर्शन नहीं हो सके। कुछ समय बाद उसी असुर का रवैया इंद्राणी की तरफ आकर्षित हो गया इसलिए इंद्राणी को जानने के बाद वह अपने पिता बेर के साथ कैलाश पर्वत पर माता पार्वती की शरण में रहने लगी। जब असुर को पता चला कि इंद्राणी ने कैलाश की शरण ली है तो वह अपनी सेना के साथ कैलाश की ओर चला गया, लेकिन जब गणेश ?
मुझे पता चला कि मेरा भाषण मित्र आ रहा था। इसलिए वह खुशी-खुशी उसका स्वागत करने आया। लेकिन इस राक्षस में उन्होंने गणेश जी द्वारा दिए गए सम्मान मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि जाओ और अपने पिता शंकर से कहो कि इंद्राणी के साथ मेरी शरण में चलो, उसके अपमान जनक शब्दों को सुनकर श्री गणेश को गुस्सा आ गया और दोनों के बीच झगड़ा शुरू हो गया।
असुर की इस हरकत पर श्री भगवान महाकाल क्रोधित होकर त्रिशूर लेकर उनकी ओर दौड़े, तब भगवती परवानी ने भगवान आशुतोष को रोकते हुए कहा, “हे प्रभु, यह असुर आपके आशीर्वाद के कारण बहुत गर्व महसूस कर रहा है।
तो इसे आपके हाथों से नहीं मारा जा सकता है, तब माता जगदंबा ने त्रिशूल को अपने हाथ में उठाया और उसे “भिंड” कहकर संबोधित किया और कहा कि यदि तुम मेरु पर्वत की कैलाश चोटी पर आओ तो तुम्हारा सिर सौ टुकड़ों में टूट जाएगा, उसी दिन से उसका नाम भांडासुर पड़ा। भांडसौर ने दस दिशाओं को पालकी वाहन बनाया और शक्ति की शक्ति से भंडारा ने सौ ब्राह्मणों पर अधिकार प्राप्त कर लिया।
तारक सूर नाम का एक असुर था, वह पांच ब्राह्मणों का प्रतिनिधित्व करता था, उसने अपनी बेटी का विवाह भांडसौर से किया और पांच ब्राह्मणों को भंडासुर को दान कर दिया, इसलिए भांडसौर एक सौ पांच ब्राह्मणों का शासक बन गया और देवताओं पर गंभीर अत्याचार करने लगा। इसके बाद देवताओं ने त्रिपुर सुंदरी भगवती का महायज्ञ शुरू किया, शिव, विष्णु आदि सभी देवता यज्ञ में उपस्थित थे।
इस यज्ञ में देवगुरु बृहस्पति ने पूर्ण यज्ञ किया, उनके पूर्ण यज्ञ से एक विशाल ज्वाला निकली, जिसमें से योग्या और भगवती त्रिपुर सुंदरी का उदय हुआ, जिसके बाद देवी ने नारद को शांति दूत बनाकर भेजा, लेकिन इस राक्षस ने भांडसौर पर विश्वास नहीं किया और माता जगदंबा से युद्ध करने के लिए तैयार हो गए, जिसके बाद उन्होंने मां भवानी के साथ मिलकर काम किया। उन्होंने युद्ध में भयंकर युद्ध लड़ा, अंत में भगवती के हाथों बचाए जाने के बाद वह अपने घर में बच गए। रूप।
भांडसौर का उद्धार प्राप्त करने के बाद, देवता इंद्राणी सुंदर होने लगीं। यह देवी मुक्ति मुक्ति प्रदायिनी है। इनके नाम अन्यत्र हैं- षोडशी, ललिता, लीलावती, लीलामती, ललिताम्बिका, लिलैशी, राजराजेश्वरी। इनकी चार भुजाएं और तीन आंखें हैं।
सदाशिव पर कमल के आसन पर विराजमान इनके चारों हाथ फेक्शन, कर्ब, धनुष-बाण से सुशोभित हैं। यह देवी दयालु है जिसके प्रति मनुष्य इस देवी की शरण पाता है। उसमें और देवताओं में कोई अंतर नहीं है।
इन्हें पच्चावतंत्र कहा जाता है यानी जिनके पांच मुख होते हैं। चूंकि वे चार दिशाओं में चार हैं और शीर्ष पर एक हैं, इसलिए कहा जाता है कि उनके पांच चेहरे हैं।
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बगलामुखी अनुष्ठान – बगलामुखी अनुष्ठान के फायदे – चमत्कारी Bagalamukhi Ritual – Benefits of Bagalamukhi Ritual – Miraculous गुरु मंत्र साधना में आपका स्वागत है। आज हम बगलामुखी अनुष्ठान क्या लाभ है ,क्या महत्व है। अनुष्ठान किस लिए करते हैं। इसकी पूरी जानकारी दे रहा हूं दर्शकों बहुत सारी कमेंट मेरे पास आते हैं कर्ज बहुत है, धन की समस्या है कोई कहता है इस रोग से ग्रस्त है तकलीफ है। सभी समस्या का एक समाधान है बगलामुखी अनुष्ठान
कुछ लोग कहते है मेरी दुश्मनी बढ़ती जा रही है बहुत से मेरे गुपत शत्रु है उनका पता नहीं है। कोई व्यापारी लोग मेरे पास आते हैं प्रतिस्पर्धा के कारण मेरे को मेरे व्यापार में बहुत सारी दिक्कतें आ रही है। वह हमारे बारे में बुरा सोच रहे है। बगलामुखी अनुष्ठान करे
हमारे बारे में बुरा कर रहा है और कोई घरेलू संबंध में भी बगलामुखी का अनुष्ठान का महत्व है। जैसे की घर में धन की समस्या है,बहुत कर्जा बढ़ गया है काम बिलकुल बंद हो गया है।बगलामुखी अनुष्ठान करे
कोई व्यक्ति जादू टोना कर रहा है। दस विद्या से बगलामुखी यह सभी प्रकार के समस्या को दूर करने के लिए बगलामुखी अनुष्ठान करे अपने शास्त्रों में आठ नंबर की जो देवी है, उसे बगलामुखी देवी कहते हैं।
उसे सारे दुखों को दूर करते हुए किसी को कोर्ट कचहरी का प्रॉब्लम है। किसी का झगड़ा चल रहा है,तो उसमें विजय प्राप्त करने के लिए पूर्वी के जमाने के राजा रजवाड़े में तो ब्राह्मणों के माध्यम से यह बगलामुखी का अनुष्ठान वह करते थे।
अगर आप किसी कोई पसंद करते है आप उसके साथ शादी करना चाहते है पर आप के प्रेम विवाह में बाधा उत्पन्न हो रही है ,तो आप बगलामुखी अनुष्ठान जरूर करे आप की समस्या बहुत ही तीव्र गति से ख़तम होगी।
इस अनुष्ठान के माध्यम से आप किसी भी कार्य जीत हासिल कर सकते है। वोटो में जीत हासिल करने के लिए बड़े बड़े पॉलीटीशन माँ बगलामुखी अनुष्ठान करवाते है।
आपार धन ऐश्वर्य के लिए आप माँ बगलामुखी अनुष्ठान करवा सकते है। वशीकरण उच्चाटन स्तंभन क्रिया इस अनुष्ठान से करवा सकते है।
बगलामुखी की साधना उपासना करने से विरोधी हमारे सामने टिक नहीं पाते हैं। इनकी उपासना से जीवन और खुशहाल हो जाता है। यदि किसी व्यक्ति को अपने जीवन में लंबे समय से कोई कष्ट या चिंता है तो वह मां बगलामुखी माता अनुष्ठान करवा के पुण्य अर्जित करें जो भी व्यक्ति बगलामुखी की अनुष्ठान करवाता है। वह सभी दुखों से दूर हो जाता हैऔर सर्वशक्ति संपन्न हो जाता है।
मां बगलामुखी देवी की जो भी अन्य इसी प्रकार की परेशानी किसी प्रकार की विपदा किसी प्रकार के रोग से ग्रसित हैं। मां बगलामुखी देवी का दिव्य अनुष्ठान करवाए और अपने जीवन में अनेक दुर्लभ लाभ प्राप्त करें।
बगलामुखी अनुष्ठान का प्रभाव परचंड है इसको किसी भी कार्य के की सिद्धि के लिए उपयोग कर सकते है। हर कामना की पूर्ति के लिए अलग समाग्री का इस्तमाल होता है।
धन प्राप्ति के लिए बगलामुखी मंत्र – सबसे प्रभावशाली मंत्र Bagalamukhi Mantra for getting money ph. 85280-57364
धन प्राप्ति के लिए बगलामुखी मंत्र – सबसे प्रभावशाली मंत्र
धन प्राप्ति के लिए बगलामुखी मंत्र – सबसे प्रभावशाली मंत्र Bagalamukhi Mantra for getting money जय माई महारानी की भक्तों को मेरा नमस्कार हमने अभी तक आप सभी को मां के कई अध्याय के बारे में बताएं। हम आपको भगवती साधारण तंत्र प्रयोग के बारे में बताएंगे जो सभी अत्यंत प्रभावकारी हैं और बगलामुखी का कोई भी साधना इन प्रयोगों को आसानी से कर सकता है। उन्हें बताने जा रहा हु आपको बता दूं कि इस प्रयोग से मंत्र जप से धन ऐश्वर्या को प्राप्त करोगे। यद्यपि देवी का मंत्र पिछली कई पोस्ट में हम ने आपको दिया है।
लेकिन आज मैं एक बार फिर वह मंत्र वापस आपके लिए दोहरा रहे मंत्र इस प्रकार है
धन प्राप्ति के लिए बगलामुखी मंत्र – सबसे प्रभावशाली मंत्र Bagalamukhi Mantra for getting money
धन प्राप्ति के लिए बगलामुखी मंत्र Bagalamukhi Mantra for getting money- सबसे प्रभावशाली मंत्र साधना विधि
बगलामुखी देवी के मंत्र का सवा लाख जाप कर शकर के मधु गुड़ में शक्कर मिला के कर लिया जाए सरसों से हवन करने से अभीष्ट व्यक्ति वशीभूत हो जाता है, दूध मिश्रय चावलों हवन करने से धन संपति ऐश्वर्या की प्राप्ति होती है।
तेल में भिगोकर नीम की पत्तियों के हवन से विद्वेषण किरया हो सफल बनाया जा सकता है
तथा तेल नमक और हल्दी के हवन से सतंभन होता ४ लाख जपसे करके दशांश हवन गग्गल तिल के द्वारा हवन करने से जेल से छुटकारा मिलता है।
मंत्र का सवा लाख शब्द करने के बाद कुम्हार के चौक की मिट्टी 4 अंगुल की अरंड की लकड़ी और मीठा लास यानी मधु और शक्कर से बनाया हुआ भुने चावलों के द्वारा लाजा से हवन करने से शरीर के समस्त रूपरोग नष्ट हो जाते है
इस साधना को बिना गुरु के मार्गदर्शन और आज्ञा से न करे
Tara sadhna Benefits ग्रीन तारा साधना के लाभ और महत्त्व ph. 85280 57364
Tara sadhna Benefits ग्रीन तारा साधना के लाभ और महत्त्व ॐ नमः शिवाय मां शक्ति को नमन करता हूं मैं अपना post भगवान शिव और देवी मां शक्ति को नमन करके शुरू करता हूं आज मैं आपको ग्रीन तारा मंत्र green tara sadhna के बारे में बताने जा रहा हूं .
Tara sadhna Benefits ग्रीन तारा साधना के लाभ और महत्त्व
सभी मंत्र इतने शक्तिशाली हैं यदि आप भगवान में विश्वास रखते हैं और नियमित रूप से किसी भी मंत्र का जाप करते हैं तो निश्चित रूप से मंत्र उसमें विश्वास रखना महत्वपूर्ण है इसलिए आज मैं आपको ‘ग्रीन’ के बारे में बताने जा रहा हूं।
तारा मंत्र’ अगर आप इस मंत्र का जाप शुरू करते हैं तो आपको क्या लाभ मिल सकता है मैं यह वीडियो मां शक्ति के आशीर्वाद से बना रहा हूं ताकि ,मैं आपको ग्रीन तारा मंत्र green tara sadhna के बारे में बता सकूं अगर हम हिंदू धर्म के बारे में बात करते हैं।
तो एक देवी तारा 10 महाविद्या में से एक है अगर हम बौद्ध धर्म के बारे में बात करते हैं। देवी ग्रीन तारा इसके लिए जानी जाती हैं देवी ग्रीन तारा को तिब्बत में मूल देवी के रूप में जाना जाता है।
तारा tara ग्रीन ताराके नाम से कई देवियां लेकिन मूल देवी हरी तारा देवी हैं इसलिए आज मैं आपको ग्रीन तारा देवी के मंत्र के बारे में बताने जा रहा हूं कि ,आपको क्या लाभ मिल सकता है, या तो आप मंत्र जाप चाहते हैं ,या यदि आप सुनना पसंद करते हैं तो टिप्पणियों में लिखें, मैं मंत्र जाप को रिकॉर्ड करूंगा लेकिन आज मैं आपको इसके लाभ बताने जा रहा हूं कि ग्रीन तारा मंत्र green tara sadhna ग्रीन तारा क्या है
तारा की छवि अपने आप में इतनी सारी छवियां दिखाती है। देवी जिनका एक कदम हमेशा हर एक की मदद करने के लिए आगे रहता है। वह है हरी तारा देवी हरी तारा देवी हरी ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है। हम कई समस्याओं में हरी तारा देवी tara devi का जप और लाभ ले सकते हैं यदि आपको कोई गंभीर बीमारी है तो आपका इलाज चल रहा है।
यह हमेशा कहा जाता है कि दवा के साथ-साथ, प्रार्थना की भी आवश्यकता होती है. इसलिए यदि आपको दवा के साथ प्रार्थना की आवश्यकता महसूस होती है ,तो हरे तारा मंत्र का जाप करना शुरू करें, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप इस मंत्र का कितनी बार जाप करते हैं, इसमें कोई नियम नहीं है जैसे कि आपको एक स्थान पर बैठना है आप पूरे दिन इसका जाप कर सकते हैं।
आप इसे दिन में कभी भी और कहीं भी जप कर सकते हैं आप अपने जीवन में किसी भी समस्या से छुटकारा पाने के लिए ‘ग्रीन तारा देवी’ tara devi मंत्र का जाप कर सकते हैं, हमेशा याद रखें कि चाहे हम किसी भी स्वचालित चिकित्सा का पालन कर रहे हों या मंत्र का जाप कर रहे हों, विश्वास रखें और कभी दवा न छोड़ें क्योंकि आप कितने दिनों से जप कर रहे हैं और कितने विश्वास के साथ परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि इसलिए कभी भी अपनी दवाएं न छोड़ें लेकिन यह महत्वपूर्ण है।
भगवान में भी आस्था रखें तो मंत्र जाप करते रहें उस बीमारी से आपको जरूर छुटकारा मिलेगा ग्रीन तारा tara हरे रंग की ऊर्जा है।,और हरी ऊर्जा हमारे हृदय चक्र से संबंधित है जो मंत्र हृदय चक्र को खोलता है।
वह हरा तारा tara मंत्र है इसलिए जब हृदय चक्र में हरी ऊर्जा भर जाती है , तो निश्चित रूप से आपका हृदय चक्र सक्रिय हो जाएगा, खुला, और संतुलित और जब हृदय चक्र खुलता है तो हृदय से संबंधित सभी रोग स्वचालित रूप से हल हो जाएंगे
जैसे ही आप मंत्र का जाप करते हैं, हरी ऊर्जा आपके ऊपर देवी का आशीर्वाद भर जाएगा और आपका हृदय चक्र स्वचालित रूप से खुलने लगेगा दिल से संबंधित सभी समस्याएं आप इसके लिए ग्रीन तारा मंत्र green tara sadhna का उपयोग कर सकते हैं, इसके अलावा।
रिश्तों में भी हृदय चक्र हमारे जीवन में हमारे संबंधों को निर्धारित करता है यदि आपके संबंध किसी के साथ कमजोर हैं तो आप उन संबंधों को ठीक करने के लिए ग्रीन तारा मंत्र green tara sadhna का उपयोग कर सकते हैं। साथ ही मैं आपको एक और बात बतादूं एक और बात यह है कि बैठना और जप करना महत्वपूर्ण नहीं है यदि आप सुनते हैं तो भी आपको लाभ मिलेगा।
या वक्ता भी तब भी यह आश्चर्यजनक परिणाम देता है। इसलिए यदि आपके संबंध कमजोर या बदतर हैं तो ग्रीन तारा मंत्र green tara sadhna का जाप करना शुरू करें यह हर प्रकार के संबंध को ठीक कर देगा इससे आपको बीमारियों से छुटकारा मिलेगा। आपके संबंधों में सुधार होगा यदि आपके घर में किसी भी प्रकार की समस्या है तो परिवार के सदस्य एक-दूसरे को पसंद नहीं करते हैं।
परिणाम परिवार के सदस्य एक साथ रहेंगे और खुशी से रहेंगे इसके अलावा आप हरे तारा tara मंत्र का उपयोग प्रेम, सौंदर्य आदि के लिए कर सकते हैं, सिवाय इसके कि यदि आप किसी भी प्रकार की इच्छा पूरी करना चाहते हैं ,तो भी आप देवी ग्रीन तारा tara devi से अनुरोध कर सकते हैं और हरे तारा मंत्र का जाप करना शुरू कर सकते हैं। आपकी मंशा स्पष्ट होनी चाहिए जब भी हम किसी शक्ति के मंत्र का जाप करें, हमेशा एक विश्वास और विश्वास होना चाहिए और मंत्र का जाप करना शुरू करें।
भले ही आप कोई संकल्प न लें तो कम से कम अपने मन में इरादा रखें, कि देवी कृपया मेरी इच्छा पूरी करें। मैं इस इच्छा के लिए 21 दिनों के लिए इस मंत्र का जाप शुरू कर रहा हूं। और देखें कि , आपकी इच्छा कितनी तेजी से पूरी होगी मुझे कई मंत्रों का अनुभव है इसलिए मुझे पता है कि मंत्र कितनी तेजी से फल प्रदान करता है।
यदि आप जाप करते हैं तो किसी भी इच्छा के लिए नियमित रूप से मंत्र मुझे पता है कि आपको किस प्रकार के परिणाम मिलते हैं। लेकिन मैंने ग्रीन तारा मंत्र green tara sadhna पर एक पोस्ट बनाया जब मैंने इसका अनुभव किया क्योंकि ग्रीन तारा को तिब्बत की देवी के रूप में जाना जाता है, हम उसे पहले नहीं जानते थे।
इसलिए जब मैंने उसके मंत्र का जाप किया तो मुझे यह पोस्ट तब मिला जब मैंने यह पोस्ट लिखा ताकि आप भी लाभ उठा सकें ताकि आप भी लाभ उठा सकें।
‘ग्रीन तारा मंत्र green tara sadhna‘ का जाप कर सकते हैं और देवी से किसी भी प्रकार की इच्छा पूरी करने का अनुरोध कर सकते हैं, उनके मंत्र का जाप करने के लिए आपके घर में देवी का होना महत्वपूर्ण नहीं है, इस मंत्र में ऐसा नहीं होता है यदि आप देवी को रखना चाहते हैं तो आप एक परं प्राण परतिष्ठा प्रतिमा ला सकते हैं।
और जरा देखिए कि आप पर ग्रीन तारा tara का आशीर्वाद कैसे काम करेगा, देवी बहुत दयालु हैं जब भी आप देवी से कुछ भी अनुरोध करते हैं तो हमेशा मदद ककरती है दोस्तों ये हरे तारा मंत्र के कुछ लाभ हैं
जिन्हें मैंने आपके साथ साझा किया है यदि आप चाहते हैं कि मैं इस मंत्र को रिकॉर्ड करूं तो मैं वह भी करूंगा मुझे भी उम्मीद है कि आपको आज का पोस्ट पसंद आएगा और आप अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए मंत्र का जाप निश्चित रूप से करेंगे। अगले वीडियो में मिलते हैं तब तक धन्यवाद
हरा तारा मंत्र जपने के क्या फायदे हैं?
हरा रंग खुशहाली का माना जाता है हरा तारा साधना करने से साधक के जीवन खुशहाली और आनंद की प्रपाती होती है
तारा साधना क्या है?
तारा साधना तारा देवी की साधना है जो माँ काली का रूप है साधक की हर कामना पूर्ण करता है तारा महाविद्या के अंतर्गत आनेवाली शक्ति है
तारा माता की पूजा कैसे करें?
यदि आप तारा माता की पूजा करने की विधि और मन्त्रों की अधिक जानकारी चाहते हैं, तो आप संबंधित पुस्तकों और वेबसाइटों से सहायता ले सकते हैं। ध्यान दें कि इसके लिए आपको प्रमाणित गुरु की निगरानी और मार्गदर्शन की आवश्यकता हो सकती है
मां तारा का बीज मंत्र क्या है?
मां तारा का बीज मंत्र है “ॐ तारायै नमः”। इस मंत्र का जाप करने से हम तारा माता की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और आत्मिक विकास की ओर प्रगामी हो सकते हैं। यह मंत्र शांति और सकारात्मक ऊर्जा को प्रकट करने में सहायक होता है। जप के दौरान इस मंत्र को ध्यानपूर्वक और श्रद्धा से उच्चारण करें ताकि इसकी शक्ति आपके मन, शरीर और आत्मा को प्रभावित कर सके।
मां तारा कौन है?
मां तारा एक प्रमुख हिंदू देवी हैं और दस महाविद्या में से एक है जो हिंदू धर्म में पूजी जाती हैंवह प्रकृति, सृष्टि और नष्टि की देवी मानी जाती हैं। उन्हें सबसे पहले तिब्बती बौद्ध धर्म में पूजा जाता था, जहां परिपूर्ण बोधिसत्व के रूप में उनका महत्त्व था।
कैसे जाने की किसी ने काला जादू कर दिया है kaise jaane ke kisi ne kala jaadu kar diya hai
कैसे जाने की किसी ने काला जादू कर दिया है kaise jaane ke kisi ne kala jaadu kar diya hai
कैसे जाने की किसी ने काला जादू कर दिया है kaise jaane ke kisi ne kala jaadu kar diya haiकैसे जाने की किसी ने काला जादू कर दिया है, किसी ने कुछ किया है ?कैसे पता करें अगर किसी ने कुछ किया है तो क्या है उस जादू का ? कलयुग के इस जमाने में लोग काफी स्वार्थी हो गए हैं और लोग अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए किसी भी हद तक चले जा रहे हैं।
पहले के समय में लोग एक दूसरे की आवश्यकता पड़ने पर सहायता करते थे,परंतु वर्तमान के समय में लोग सहायता करना तो दूर बल्कि एक दूसरे को किसी भी प्रकार से नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं।
हमारे आस पास ऐसे कई व्यक्ति होते हैं जिन्हें हम पसंद नहीं करते हैं या फिर वह हमें पसंद नहीं करते हैं । कई बार तो यह पसंद नापसंद सिर्फ आपसी मन मुटाव तक सीमित होती है परंतु अब लोग काफी ऐडवान्स हो गए हैं । साथ ही चालक हो गए हैं ।
इसलिए वह किसी से भी सामने से लड़ने की जगह पर उसके खिलाफ़ पीठ पीछे साजिश करते हैं और किसी भी प्रकार से उसे नुकसान पहुंचाने का प्रयास करते हैं। परन्तु जब साजिशें करने के बावजूद भी सामने वाले व्यक्ति का कुछ भी नुकसान नहीं होता है
तो अंत में व्यक्ति थक हार कर तंत्र मंत्र की शरण में जाता है और फिरसामने वाले व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक नुकसान पहुंचाने के लिए उसके ऊपर किसी भी प्रकार का काला जादू या फिर तांत्रिक क्रिया करवा देता है ।
जो सामान्य लोग होते हैं, उन्हें तो यह पता भी नहीं चलता है की उनके ऊपर उनके किसी दुश्मन ने काला जादू करवा दिया है क्योंकि उनके पास ऐसा कोई तरीका उन्हें मालूम नहीं होता है, जिसका इस्तेमाल करके वह यह जान सकें किउनके ऊपर काला जादू हुआ है या नहीं।
और इस पोस्ट में हम आपको यह बताने वाले हैं की किसी ने कुछ किया है यान नहीं । कैसे जाने चलिए जानते हैं कि किसीने कुछ किया है या नहीं कैसे पता करें। अगर आप यह जानना चाहते है की किसीने आपके ऊपर कुछ किया है तो इसके लिए नीचे हम आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहे हैं जिसे करके आप आसानी से इसके बारे में पता लगा सकते है की किसी ने आपके ऊपर काला जादू किया है या नहीं।
किसी ने जादू टोना कर दिया उसके यह लक्षण है
किसी ने जादू टोना कर दिया उसके यह लक्षण है
नंबर एक लक्षण – व्यक्ति की सांसें तेज हो जाना
तांत्रिक प्रयोग किए गए व्यक्ति की सांसें तेज हो जाना। अगर किसी व्यक्ति के ऊपर तांत्रिक क्रिया या फिर काले जादू का इस्तेमाल किया गया होता है तो उस व्यक्ति की सांसे लेने की गति तेज हो जाती है । आपने ऐसा अक्सर फिल्मों में देखा होगा परंतु वास्तव में भी ऐसा होता है । यह भी प्रेत बाधा या तांत्रिक प्रयोग का एक प्रमुख संकेत माना जाता है ।
नंबर दोलक्षण – व्यक्ति को डरावने सपने आना
तांत्रिक प्रयोग किए गए व्यक्ति को डरावने सपने आना आपकी जानकारी के लिए बतादें की रात के समय में काली शक्तियां बहुत ही ज्यादा ऐक्टिव हो जाती है और यही वजह है कि तांत्रिक लोग तथा अघोरीबाबा रात के समय में ही तांत्रिक क्रिया करते हैं
तभी यह अपने लक्ष्य पर हावी होने की कोशिश करती हैं। ऐसी अवस्था में जीस किसी भी व्यक्ति के ऊपर तांत्रिक प्रयोग किया गया होता है। उसे रात को सोते समय डरावने सपने आते हैं। या फिर अगर वह सोया हुआ होता है तो वह अचानक से चीखकर जाग जाता है। हालांकि कभी कभी अगर उसे डरावने सपने आते हैं तो इसे तंत्र मंत्र का हिस्सा नहीं माना जाना चाहिए।
नम्बर तीन – पीड़ित को होने वाली शारीरिक और मानसिक हानि
पीड़ित को होने वाली शारीरिक और मानसिक हानि ऐसा कहा जाता है की जब किसी व्यक्ति के ऊपर काले जादू का इस्तेमाल किया गया होता है या उस पर तांत्रिक विधि की गई होती है तो उसे शारीरिक और मानसिक नुकसान होने लगते हैं ।
अचानक से ही उसके विचार यहाँ वहाँ भटकने लगते हैं या फिर उसेहमेशा अपनी बॉडी में कमजोरी महसूस होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उस इंसान की जीवनी शक्ति मंत्र या फिर तंत्र प्रयोग के द्वारा कमजोर होने लगती है।
जिसके कारण उसे शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है और इस प्रकार व्यक्ति को कमजोरी महसूस होने लगती है।
आप तरह से जान सकते है जादू टोना किया कराया है या नहीं ?
प्रयोग नंबर 1- एक पानी के गिलास से जाने
व्यक्ति आसानी से यह जान सकता है की उसके ऊपर काले जादू का इस्तेमाल किया गया है या नहीं या फिर उसके ऊपर तांत्रिक विद्या का प्रयोग किया गया है या नहीं। इसके लिए उसे करना यह है की रात को जब वह सोने जाएं तो उसे एक गिलास में पानी भरकर उसे अपने बेड के नीचे रख देना है।
साथ ही मन में यह संकल्प लेना है की अगर हमारे ऊपर किसी भी प्रकार की नेगेटिव एनर्जी का इस्तेमाल किया गया है तो वह सारी नेगेटिव एन र्जी पानीके अंदर समाहित हो जाए। इसके बाद आपको सुबह उठकर उस गिलासके पानी को चेक करना है अगर उसमें ज्यादा ही बासीपन नजर आता है या फिर उसका कलर हल्का सा भी पीला नजर आताहै तो आपको यह समझ जाना चाहिए कि किसी ने आपके ऊपर कुछ तांत्रिक विद्या करवाई है?
प्रयोग नंबर 2 – नींबू का भी इस्तेमाल करके
दोस्तों नींबू का भी इस्तेमाल करके यह पता लगाया जा सकता है की तंत्र मंत्र हुआ है या नहीं। फल और सब्जियां नेगेटिव एनर्जी से बहुत ही ज्यादा प्रभावित होती है। अगर आप यह जानना चाहते है की किसी ने आपके ऊपर कुछ किया है या नहीं तो इसका पता लगाने के लिए आपको रात को सोते समय एक नींबू को अपने तकिये के नीचे रख देना है और आपको अपने मन में यह सोचना है की अगर आपके आस पास किसी भी प्रकार की नेगेटिव एनर्जी है।
तो वह इस नीम्बू में समाहित हो जाए। इसके बाद आपको सुबह उठकर नींबू को देखना है। अगर आपके ऊपर कालाजादू कियागया होगा तो नींबू बहुत ज्यादा मुरझा जाएगा और उसका रंग भी काला पड़ जाएगा।
प्रयोग नंबर 3 – दीपक का इस्तेमाल करके पता करें
दीपक का इस्तेमाल करके पता करें दोस्तों इस विधि का इस्तेमाल करके आपअपने घर पर काला जादू हुआ है या नहीं या फिर अपने खुद के ऊपर काला जादू हुआ है या नहीं इसके बारे में पता कर सकते हैं।
इसके लिए आपको करना यह है की आपको एक छोटे से मिट्टी के दिवाली में सरसों का तेल डालना है। इसके बादआपको उसके अंदर दो लौंग और कपूर पाउडर डालना है। उसके बाद आपकोदीपक डालकर दीपक को जला देना है।इसके बाद आपको कुछ ऐसा प्रबंध करना है की दीपक को ज्यादा हवा ना लगे।
उसके बादआपको वहाँ से चले जाना है और फिर सुबह उठकर आपको देखना है अगर दीपक आपको बुझा हुआ दिखाई देता है तो आपको यह समझ जाना चाहिए कि किसी नेआपका बुरा करने के लिए आपके घर के ऊपर या फिर आपके ऊपर काले जादू का इस्तेमाल किया है या फिर तांत्रिक विद्या का इस्तेमाल किया है।
प्रयोग नंबर 4 नमक के पानीसे पता करें
दोस्तों एक छोटे से उपाय नमक के पानीसे पता करें। काला जादू अपने ऊपर अथवा अपने घर के ऊपर काले जादू का इस्तेमाल किया गया है या नहीं इसका पता लगाने के लिए आपको किसी भी रात को बजे के आसपास एक गिलास पानी लेना है और आपको उसके अंदर सादा नमक डालना है और फिर आपको चम्मच की सहायता से नमक को पानी में अच्छी तरह से मिक्स कर देना है।
इसके बाद आपको इसनमक वाले पानी को ले जाकरअपने घर के किसी भी कोने में रख देना है। अगर सुबह होने के बाद यह पानी काले पानी के रूप में चेंज हो जाए तो समझ लीजिए किआपके घर के ऊपर या फिर आपके ऊपर तांत्रिक विद्या अथवा काले जादू का इस्तेमाल किया गया है।
माँ तारा कैंसर से मुक्ति साधना maa tara cancer mukti sadhna ph.85280 57364
माँ तारा कैंसर से मुक्ति साधना maa tara cancer mukti sadhna स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्यायें प्राचीन काल से ही मानव के साथ जुड़ी हुई हैं। प्रत्येक काल में उपलब्ध साधनों के द्वारा ही इनका उपचार किया जाता रहा है।
पहले वर्तमान समय के अनुसार रोगी को रोगमुक्त करने के लिये पर्याप्त सुविधायें नहीं थी। इसलिये तब रोगों को मंत्रजाप एवं विभिन्न अनुष्ठानों के माध्यम से दूर किया जाता था । आश्चर्य की तो यह है कि मंत्रजाप आदि से रोगी रोगों से मुक्त होकर स्वस्थ हो जाते थे, मंत्रजाप द्वारा रोगों से मुक्त होने की यह एक ऐसी विधा है जो हर काल और समय में प्रभावी रही है।
आज भी मंत्रजाप द्वारा सामान्य एवं जटिल रोगों से मुक्त होना सम्भव है। कैंसर तक के रोगी मंत्रजाप से स्वस्थ होते देखे गये हैं । इसमें आवश्यकता केवल इस बात की है कि अनुष्ठान एवं मंत्रजाप विद्वान आचार्य के दिशा-निर्देश में हो। मैं यहां कैंसर से मुक्ति के बारे में एक प्रयोग लिख रहा हूं।
इस अनुष्ठान के द्वारा कैंसर का रोगी ठीक हो जाता है। माँ तारा का यह अनुष्ठान भी 31 दिन का है । इस अनुष्ठान को सम्पन्न करने के लिये शुभ मुहूर्त में चांदी पर विधिवत् निर्मित तारा महाविद्या यंत्र, पंचमुखी लघु रुद्राक्ष माला, लौबान, केशर, पीली सरसों, सुपारी, लौंग, बेसन के लड्डू, ताम्र पात्र, पीले रंग के वस्त्र, पीले रंग का कम्बल आसन आदि वस्तुओं की आवश्यकता रहती है ।
माँ तारा कैंसर से मुक्ति साधना विधि maa tara cancer mukti sadhna
(तारा महाविद्या यंत्र के लिए फ़ोन करे 85280 57364 । ) यह अनुष्ठान शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू किया जाना उचित होता है लेकिन अगर रोगी की हालत अधिक खराब हो तो इसे किसी भी मंगलवार के दिन से भी प्रारम्भ किया जा सकता है। अनुष्ठान के लिये प्रातःकाल का समय उपयुक्त रहता है । इस अनुष्ठान को सम्पन्न कराने के लिये किसी योग्य विद्वान ब्राह्मण की मदद भी ली जा सकती है। ब्राह्मण को यह अनुष्ठान प्रात: 4 बजे के आसपास ही करना चाहिये।
अनुष्ठान को प्रारम्भ करने के लिये सबसे पहले आसन बिछाकर पश्चिम की तरफ मुंह करके बैठ जायें। अगर रोगी अनुष्ठान के दौरान उसी साधना कक्ष उपस्थित रहे तो अनुष्ठान का प्रभाव और भी बढ़ जाता है। अनुष्ठान कक्ष में रोगी की उपस्थिति अच्छी रहती है। अगर रोगी स्नान करने में सक्षम है तो स्नान करके अनुष्ठान कक्ष में बैठ सकता है। अक्षमता की स्थिति में हाथ, पांव तथा मुंहा का स्पंज स्नान किया जा सकता है।
यह इसलिये आवश्यक समझा जाता है कि अनुष्ठान में उच्चारित मंत्रों को रोगी सुन सके। अगर रोगी की अनुपस्थिति में अनुष्ठान किया जा रहा हो तो अनुष्ठान में उच्चारित मंत्रों को टेप कर लें। बाद में रोगी टेप चलाकर मंत्रोच्चारण को सुन सकता है। पर तारा महाविद्या यंत्र अनुष्ठान की शुरूआत लकड़ी की चौकी पर केसरी रंग का वस्त्र बिछाकर की जाती है। उस चौकी पर एक चांदी की प्लेट रखकर, उसमें केसर से त्रिकोण बनाकर उसमें तारा यंत्र को पंचामृत से स्नान करवाकर विधिवत् स्थापित किया जाता है।
इसके उपरान्त पीली सरसों की एक ढेरी बनाकर उसके ऊपर एक तांबे का पात्र रखा जाता है। उसमें थोड़ी सी पीली सरसों, पांच सुपारी, पांच लौंग, पांच बेसन के लड्डू, सप्तरंगी के थोड़े से पुष्प और तीन सप्तमुखी रुद्राक्ष रखे जाते हैं । इन तीनों रुद्राक्षों को अनुष्ठान शुरू करने से पहले रोगी के शरीर पर धारण कराया जाता है और अनुष्ठान समाप्त होने पर रोगी के शरीर से उतारकर तामपात्र में रख दिया जाता है।
पीली सरसों, सुपारी, लौंग, लड्डू, सप्तरंगी पुष्प आदि को भी रोगी के हाथों से स्पर्श करवाया जाता है। ताम्रपात्र की स्थापना के बाद उसके सामने गाय के घी का एक दीपक प्रज्ज्वलित कर रख दें। साथ ही शुद्ध लौबान का चूर्ण बनाकर उसी घी में मिला दें। शुद्ध लौबान के प्रयोग से शीघ्र ही साधना कक्ष सुगन्धित होने लग जाता है।
यदि रोगी साधना कक्ष में उपस्थित नहीं रह सकता तो उसके कक्ष में भी मंत्र पाठ सुनाने के दौरान इसी तरह का दीपक जलाकर रखने की व्यवस्था करनी पड़ती है । दीप और पात्र स्थापना के बाद यंत्र को 21 बार माँ के तांत्रोक्त मंत्र के साथ केसर तिलक अर्पित करना चाहिये और साथ ही बार – बार माँ का आह्वान करते रहना चाहिये।
माँ के आह्वान के बाद शुद्ध आचरण एवं पूर्ण भक्तिभाव युक्त होकर माँ के सामने अनुष्ठान के संकल्प को दोहराना चाहिये। फिर माँ की आज्ञा शिरोधार्य करके रुद्राक्ष माला से 21 मालाएं अग्रांकित मंत्र की जपनी चाहिये। मंत्र जाप पूर्ण हो जाने के उपरान्त 21 बार माँ के तांत्रोक्त स्तोत्र का पाठ भी करना चाहिये ।
स्तोत्र पाठ के बाद भी एक माला मंत्र जाप और करना चाहिये । मंत्रजाप और स्तोत्र पाठ पूर्णत: समर्पित भाव एवं श्रद्धा के साथ करना चाहिये । इस दौरान मंत्रजाप करने वाले ब्राह्मण की पूर्ण एकाग्रता अपने इष्ट पर बनी रहनी चाहिये। दीपक अखण्ड रूप से निरन्तर जलते रहना चाहिये ।
साधना कक्ष में किसी अन्य के आने पर पूर्णत: पाबन्दी रहनी चाहिये । यद्यपि इसमें रोगी को सुनाने के लिये मंत्रजाप और स्तोत्र पाठ को टेपरिकोर्डर में टेप करने के लिये एक व्यक्ति उपस्थित रह सकता है। इस प्रकार जब प्रथम दिन का मंत्रजाप और स्तोत्र पाठ पूर्ण हो जाये तो माँ के सामने एक बार पुनः अपने संकल्प को दोहराना चाहिये । माँ का आह्वान करते हुये उन्हें वापि अपने लोक को लौट जाने की प्रार्थना करें।
इसके उपरांत अपने आसन से उठना चाहिये। उठने के पश्चात् आसन को भी एक ओर उठा कर रख कर साधना कक्ष को बंद कर देना चाहिये। वैसे विधान तो यह है कि रात्री के समय भी माँ का आह्वान के साथ दीप प्रज्ज्वलित करके और आसन पर पुनः बैठकर एक माला मंत्रजाप एवं एक स्तोत्र पाठ पूरा करना चाहिये। पूरे अनुष्ठान के दौरान मंत्रजाप करने वाले ब्राह्मण को शुद्ध आचरण बनाये रखना चाहिये ।
अनुष्ठान का यह क्रम पूरे 31 दिन तक इसी प्रकार से बनाये रखें। इस दौरान प्रत्येक दिन प्रातःकाल यंत्र का पंचामृत से स्नान, केसर तिलक और दीप समर्पण, माँ का आह्वान एवं संकल्प क्रम को दोहरा कर मंत्रजाप व स्तोत्र पाठ करते रहना चाहिये। उसी प्रकार दिन के कार्यक्रम को विश्राम देना चाहिये।
इस दौरान प्रत्येक सातवें दिन ताम्रपात्र में भरी सामग्री को किसी केसरी वस्त्र में बांधकर सात ताजे बेसन लड्डू के साथ किसी भिखारी को दे दें अथवा वस्त्र एवं बेसन के लड्डू भिखारी को देकर शेष सामग्री को किसी बहते हुये जल में प्रवाहित कर दें ।
ताम्रपात्र को पुनः पहले की तरह ही उन्हीं सामग्रियों से भरकर यंत्र की बगल में स्थापित कर दें । 31वें दिन अनुष्ठान के पूर्ण होने की प्रक्रिया में मंत्रजाप और स्तोत्र पाठ पूर्ण करके और माँ के आह्वान के उपरान्त
परिवार एवं आस पड़ोस में माँ के प्रसाद के रूप में बेसन के लड्डू वितरण करवा देने चाहिये । पूजा सामग्री को पूर्णवत् किसी भिखारी अथवा बहते जल में पात्र एवं दीपक सहित ही प्रवाहित करवा देना चाहिये । माँ के यंत्र को अपने पूजास्थान पर स्थापित कर दें तथा रुद्राक्ष की माला को रोगी के गले में धारण करवा दें।
अनुष्ठान सम्पन्न होने पर ब्राह्मण देवता को भोजन करायें और दान-दक्षिणा देकर उन्हें प्रसन्नतापूर्वक विदाई दें। अनेक अवसरों पर इस अनुष्ठान के दौरान ही रोगी को लाभ मिलने लगता है। इस रोग के कारण रोगी के जो कष्ट निरन्तर बढ़ रहे होते हैं, उनका बढ़ता रुक जाता है और इसके बाद धीरे-धीरे रोगी स्वयं को पहले से अच्छा महसूस करने लगता है।
कुछ रोगियों को अनुष्ठान के 21वें दिन से लाभ मिलता देखा गया है। इसके बाद लाभ मिलने की कुछ धीमी होती है किन्तु रोगी का रोग धीरे-धीरे ही दूर होने लगता है।
इसमें सबसे बड़ी बात यह देखने में आती है कि जो दवायें अपना प्रभाव नहीं दे पा रही थी, अब उनका असर भी रोगी पर दिखाई देने लगता है। इसमें एक केस ऐसा देखने में आया जहां कैंसर के एक रोगी के बचने की आशा लगभग समाप्त हो गई थी। डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया था।
फिर एक परिचित द्वारा इस अनुष्ठान के बारे में जानकारी मिली। एक विद्वान आचार्य की देख-रेख में इस अनुष्ठान को करवाने का मन बना लिया। परिवार वालों ने यह अनुष्ठान केवल इसलिये करवाया कि चलो, अन्तिम प्रयास है, करके देख लेते हैं। बाद में इसी अनुष्ठान के कारण से रोगी के प्राणों की रक्षा हुई थी ।
विद्वान आचार्यों का मत है कि एक बार के अनुष्ठान से अगर लाभ का अंशमात्र भी दिखाई दे, तो आशा छोड़नी नहीं चाहिये। एक अनुष्ठान के बाद दूसरा अनुष्ठान भी करवाने का प्रयास करना चाहिये । यदि कोई साधक किसी गंभीर रोग से ग्रस्त है तो उसे उपरोक्त अनुसार अनुष्ठान सम्पन्न करना चाहिये ।
मेरा विश्वास है कि उसे अवश्य ही स्वास्थ्य की प्राप्ति होगी ।
माँ तारा कैंसर से मुक्ति साधना मंत्र maa tara cancer mukti sadhna तारा का तांत्रोक्त मंत्र
: तारा माँ का तांत्रोक्त षडाक्षरी मंत्र निम्न प्रकार है- ऐं ॐ ह्रीं क्रीं हूँ फट् माँ का तांत्रोक्त स्तोत्र अन्यत्र देखा जा सकता है ।
किसी भी प्रकार के तांत्रिक अनुष्ठानों की शुरूआत करने से पहले इस संबंध में विद्वान आचार्य से परामर्श अवश्य कर लेना चाहिये। किसी अनुष्ठान के लिये मंत्र का चुनाव अथवा स्तोत्र आदि का पाठन पुस्तकीय आधार पर स्वयं शुरू कर लेना खतरनाक सिद्ध हो सकता है । अत: इन्हें किसी आचार्य अथवा गुरु के माध्यम से ही ग्रहण करना चाहिये
Tarapith Tantrik तारा पीठ के तंत्रोपासक भैरवानन्द जी महाराज ph.85280 57364
Tarapith Tantrik तारा पीठ के तंत्रोपासक भैरवानन्द जी महाराज
Tarapith Tantrik तारा पीठ के तंत्रोपासक भैरवानन्द जी महाराज : बंगाल के प्राचीन तारा पीठ पर मेरे ऊपर भी एक महातांत्रिक की कृपा दृष्टि हुई थी। वह महातांत्रिक कामाख्या के पास रहते थे और वर्ष में कम से कम दो बार अपने साधना स्थल से निकल कर माँ तारा का आशीर्वाद लेने के लिये तारापीठ आया करते थे ।
इन्हें महातांत्रिक भैरवानंद Tarapith Tantrik के नाम से जाना जाता है। बंगाल के दक्षिणेश्वर के पास बारह वर्ष तक उन्होंने अपने गुरु के सान्निध्य में रह कर कई तरह की तांत्रिक साधनाएं सम्पन्न की थी, लेकिन उनके गुरु अघोर पंथ से संबंध रखते थे। भैरवानंद Tarapith Tantrik का लक्ष्य तारा महाविद्या को सम्पूर्णता के साथ स्वयं में आत्मसात करना और तंत्र की उच्च सिद्धियां प्राप्त करना था । अपने मुख्य लक्ष्य के विषय में भैरवानंद जी ने कई बार अपने गुरु के सामने प्रकट भी किया, किन्तु उनके गुरु ने उनकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया।
फिर एक दिन अचानक उन्होंने गुरु आज्ञा लेकर दक्षिणेश्वर के अपने आश्रम का परित्याग कर दिया। बंगाल छोड़कर वह बनारस में रहने लगे, लेकिन वहां भी उनका मन नहीं लगा, तो वह बनारस से नेपाल चले गये । नेपाल में वह कई वर्ष तक रहे और इस दौरान उन्होंने कई तरह की साधनाएं सिद्ध की। नेपाल से आकर वह हिमाचल प्रदेश में कई वर्ष भटकते रहे तथा कई तांत्रिकों के साथ रहकर अपना अनुभव एवं ज्ञान बांटते रहे।
अन्ततः वह अपनी यात्रा के अन्त में कामाख्या के तंत्र क्षेत्र में पहुंच गये । कामाख्या में ही उनकी भेंट एक सिद्ध तारा साधक से हुई और उन्हीं के मार्गदर्शन में रहकर उन्होंने तारा महाविद्या को आत्मसात करने में सफलता प्राप्त की । तारा महाविद्या को पूर्णतः से सिद्ध करने में इस महातांत्रिक को सात वर्ष का समय लगा।
असम के कामाख्या क्षेत्र में तांत्रिक Tarapith Tantrik भैरवानन्द की इतनी प्रसिद्धि है कि उनकी एक झलक पाने के लिये लोग घंटों नहीं कई-कई दिनों तक इंतजार में बैठे रहते हैं, परन्तु . भैरवानन्द Tarapith Tantrikमनमौजी तांत्रिक हैं। अपनी मर्जी से ही लोगों से भेंट करते हैं। उनकी मर्जी न हो तो, डांट-डपट कर अपने पास पहुंचे लोगों को दूर हटवा देते हैं अथवा स्वयं ही लोगों की भीड़ से बचने के लिये कुछ दिनों के लिये अन्यत्र किसी गुप्त स्थान पर चले जाते हैं।
सैंकड़ों लोगों के ऐसे अनुभव रहे हैं कि जिस किसी पर एक प्रसन्न होकर तांत्रिक भैरवानन्द Tarapith Tantrik ने आशीर्वाद प्रदान कर दिया तो उस व्यक्ति का भाग्य स्वतः ही चमक जाता है । रातोंरात उस व्यक्ति की स्थिति में बदलाव आ जाता है, लेकिन हर किसी के भाग्य में किसी सिद्ध साधक का आशीर्वाद प्राप्त करना नहीं होता ।
Maa Tara Rahasya माँ तारा tara साधना रहस्य और ऐतिहासिक तथ्य
Maa Tara Rahasya माँ तारा tara साधना रहस्य और ऐतिहासिक तथ्य
Maa Tara Rahasya माँ तारा tara साधना रहस्य और ऐतिहासिक तथ्य: तंत्र शास्त्र में जिन महाविद्याओं का विस्तारपूर्वक वर्णन हुआ है, उनकी साधना, उपासनाएं, दिव्य साक्षात्कार और परम सिद्धि पाने के साथ-साथ अलग-अलग प्रकार की अभिलाषाओं एवं इच्छाओं की पूर्ति के उद्देश्य के लिये भी की जाती है ।
तांत्रिकों की यह समस्त महाविद्याएं अमोघ शक्ति की स्वामिनी मानी गयी हैं, जो प्रसन्न होने पर अपने साधकों के सभी दुःख, दर्द आदि को मिटाकर उन्हें समस्त सुख, सम्पन्नता प्रदान कर देती है।
तंत्र की दस महाविद्याओं में तारा tara नामक महाविद्या को आद्य जननी माँ काली के बाद द्वितीय स्थान प्रदान किया गया है । तारा tara महाविद्या का स्वरूप भी महाकाली से काफी समानता रखता है । यद्यपि यह भंवरे के समान काली न होकर नील वर्ण वाली है ।
अतः गहन विद्वता की सूचक भी है । इसीलिये इन्हें एक नाम नील सरस्वती भी प्रदान किया गया है । यद्यपि माँ तारा tara को तांत्रिकों और अघोरियों की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्राचीन समय से मान्यता दी गयी है, लेकिन यह साधारण भक्तों को भी प्रसन्न होकर ज्ञान, बुद्धि, वाक्शक्ति प्रदान करके महापुरुष बना देती है ।
यह अपने भक्तों की पुकार शीघ्र ही सुनकर भयंकर विपत्तियों से उन्हें रक्षा प्रदान करती है और अन्त में उन्हें मोक्ष तक प्रदान करा देती है। औघड़ों की कोई भी तंत्र साधना बिना तारा tara महाविद्या को प्रसन्न किये सम्पन्न हो ही नहीं सकती।
तांत्रिकों ने अपनी साधनाओं के आधार पर माँ तारा tara के आठ विविध रूप माने हैं। माँ तारा tara के यह आठ रूप क्रमशः तारा, उग्रतारा, महीग्रा, वज्रा, काली, नील सरस्वती, कामेश्वरी और चामुण्डा हैं। यद्यपि इन आठ रूपों में से तीन स्वरूपों की साधना, उपासना का ही अधिक प्रचार-प्रसार रहा है ।
माँ तारा tara के यह तीन स्वरूप भी तारा, उग्रतारा tara और नील सरस्वती रूप में तांत्रिकों द्वारा पूजे जाते रहे हैं। तारा tara के यह स्वरूप भारतीय तांत्रिकों के साथ-साथ जैनियों, बौद्धों द्वारा भी पूजे गये और इनसे संबंधित तंत्र साधनाएं भारत भूमि के साथ-साथ नेपाल, तिब्बत, चीन, जापान, मंगोलिया, श्रीलंका तक खूब प्रचलित रही हैं ।
श्री तारा tara के रूप में तारा tara महाविद्या को ‘एक जटा तारा’ भी कहा जाता है । यह अपने इस स्वरूप में समस्त संसार का कल्याण करने वाली है। एक जटा के रूप में माँ तारा tara की साधना अघोरियों में होती है ।
उग्रतारा tara के रूप में यह महाविद्या भयानक विपत्तियों से उद्धार करती है और निःसंतानों को सन्तान सुख प्रदान करती है। तंत्रशास्त्र में इन्हें पुत्र प्रदायनी महाविद्या कहा जाता है। नील सरस्वती के रूप में तारा tara महाविद्या अपने भक्तों को वासिद्धि प्रदान करती है ।
हमारे देश में तारा tara महाविद्या की साधना के कई स्थान प्रसिद्ध हैं, जिनमें अग्रांकित पांच तारा tara पीठ अत्यन्त प्रभावशाली हैं । इन तारा tara पीठों पर आज भी अनेक तांत्रिक, मांत्रिक और औघड़ों को विभिन्न प्रकार के तांत्रिक अनुष्ठान सम्पन्न करते हुये और अपनी आराध्य देवी को प्रसन्न करते हुये देखा जा सकता है ।
कामाख्या स्थित महोग्रा सिद्ध पीठ तो अनेक औघड़ों को शव साधना करते हुये भी देखा जा सकता है । यह औघड़ सिद्ध पीठ के आस-पास की गुफाओं में ही रहते हैं और वहां स्थित महा शमशान में अपनी साधना करते हैं। माँ तारा tara के इन पांच सिद्ध पीठों में से एक बिहार राज्य के सहसरा जिले के महिषा ग्राम में स्थित है ।
इस सिद्धपीठ में माँ तारा tara के तीनों रूपों, जैसे श्री तारा tara (एक जटा), उग्रतारा tara और नील सरस्वती को एक साथ प्रतिष्ठित किया गया है। यह एक सिद्ध स्थान है। यहां पहुंचते ही भक्तों के मन में विशेष भावों की जाग्रति होने लगती है ।
मेरा स्वयं का कई बार का अनुभव है कि माँ के इन तीनों स्वरूपों दर्शन मात्र से समस्त प्रकार की तांत्रिक अभिचार क्रियायें स्वतः ही नष्ट हो जाती हैं और साधक पर सुख, सौभाग्य की वर्षा होने लग जाती है। ऐसे प्रमाण मिले हैं कि महिषा ग्राम के इस तारा tara पीठ की स्थापना महर्षि वशिष्ठ ने की थी।
आचार्य महामुनि वशिष्ठ को ही तारा tara महाविद्या का प्रथम साधक माना जाता है। इसी पीठ पर रहकर महर्षि वशिष्ठ ने अपनी आराध्य जननी को प्रसन्न किया था और उनकी कृपा से कई तरह की सिद्धियां प्राप्त की थीं।
इसलिये तांत्रिक ग्रंथों में इस पीठ का उल्लेख वशिष्ठोपासित पीठ या वशिष्ठापाधिरा तारा tara पीठ के रूप में किया गया 1 तारा tara महाविद्या का दूसरा सिद्धपीठ पश्चिम बंगाल में रामपुर हाट रेलवे स्टेशन से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ।
इस पीठ को तारा tara पीठ के नाम से जाना जाता है। इस तारा tara पीठ के साथ भी महर्षि वशिष्ठ का गहरा संबंध रहा है । इसी स्थान पर वशिष्ठ जी को अगमोक्त पद्धति (तंत्र की एक विशिष्ट प्रक्रिया) से माँ की साधना करने का आदेश प्राप्त हुआ था और उसी के बाद वह अपनी तांत्रिक साधनाओं में पूर्ण सफलता प्राप्त कर सके थे।
यह तारा tara पीठ प्राचीन उत्तरवाहिनी नदी द्वारिका के किनारे एक महाशमशान में स्थित है। इसी तारा tara पीठ पर रहकर वामाक्षेपा ने माँ का साक्षात्कार पाया था । वामाक्षेपा अपनी तंत्र साधना के उस स्तर तक पहुंच गये थे कि माँ को अपने भक्त की देखभाल के लिये आना पड़ता था।
अपनी साधना से वामाक्षेपा उस बालोचित्त अवस्था में पहुंच गये थे कि माँ को स्वयं अपना स्तनपान कराकर उनकी क्षुधा शांत करनी पड़ती थी ।
माँ तारा tara का यह पीठ इतना अद्भुत और चेतना सम्पन्न है कि यहां बैठकर माँ का स्मरण करने मात्र से ही शरीर में झुरझुरी सी होने लगती है और बाह्य चेतना का लोप होने लगता है। यह पीठ 1008 नरमुण्डों की पीठ पर स्थापित किया गया है ।
इस पीठ पर माँ की नियमित पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक कि उन्हें चिताभस्म का स्नान न करवा दिया जाये और चिता से उठती गंध से भासित न कर दिया जाये । इस सिद्ध पीठ पर बैठकर तंत्र साधना करने की लालसा प्रत्येक तंत्र साधकों के मन में रहती है। इसलिये यह तांत्रिक और अघोरियों का मुख्य आकर्षक केन्द्र बना रहता है।
माँ तारा tara का तीसरा सिद्धपीठ आसाम में कामाख्या के पास योनि मण्डल के अन्तर्गत स्थित है। यह सिद्धपीठ महोग्रा सिद्धपीठ के नाम से विख्यात है । इस सिद्धपीठ की भी बहुत महिमा है। यहां पर औघड़ों और कापालिकों का सदैव तांता लगा रहता है। वर्ष में कम से कम दो बार तो यहां सभी तारा tara साधक अवश्य ही एकत्रित होते हैं और आगे की साधना का उपक्रम लेकर जाते हैं। यह पीठ नीलकूट पर्वत पर स्थित है।
चौथा सिद्धपीठ श्री जालन्धर सिद्धपीठ के नाम से जाना जाता है, जिसकी पहचान चामुण्डा पीठ के रूप में हुई है। यहां माँ तारा tara ( श्री तारा) की वज्रेश्वरी के रूप में प्रतिष्ठा की गयी है । यह पीठ भी एक शमशान में स्थित है ।
तारा tara महाविद्या का पांचवा सिद्धपीठ उत्तरप्रदेश में मिर्जापुर जनपद में विंध्याचल क्षेत्र में शिवपुर के पास गंगा किनारे रामाया घाट स्थिम महाशमशान में स्थित है। यह पीठ भी तारापीठ के नाम से ही जाना जाता है । माँ का यह सिद्ध पीठ अद्भुत चेतना सम्पन्न है।
इसलिये तंत्र साधना में गहरी रुचि रखने वाले तांत्रिकों, भैरवियों, अघोरियों में इसके प्रति विशेष आकर्षण है।माँ तारा tara के इन सिद्धस्थलों पर स्वयं मेरी भेंट अनेक तांत्रिकों, अघोरियों, भैरवियों आदि के साथ होती रही है।
इन सिद्धस्थलों के अलावा भी नेपाल, लेह, लद्दाख, हिमाचल के कुल्लू-मनाली क्षेत्र और बद्री-केदार क्षेत्र में अनेक ऐसे पवित्र और प्रभावशाली स्थान हैं, जहां तारा tara साधक अपनी साधनाओं में सफलता प्राप्त करते हैं । इन स्थानों पर अब भी अनेक तंत्र साधकों को अपनी तंत्र साधनाओं में निमग्न देखा जा सकता है।