Taratak Meditation kundalini jagarn karni ke pahile seedhee त्राटक ध्यानकुण्डलिनी जागरण करने की पहली सीढ़ीTaratak Meditation kundalini jagarn karni ke pahile seedhee त्राटक ध्यानकुण्डलिनी जागरण करने की पहली सीढ़ी

 Taratak Meditation kundalini jagarn karni ke pahile seedhee त्राटक ध्यानकुण्डलिनी जागरण करने की पहली सीढ़ी

Taratak Meditation kundalini jagarn karni ke pahile seedhee त्राटक ध्यान कुण्डलिनी जागरण करने की पहली सीढ़ी प्रिय दोस्तो आज Taratak Meditation kundalini jagarn के विषय पर आप को जानकारी देने का प्रयास करूंगा ।आपने त्राटक के सबंधित कुछ जानकारी सुनी होगी आप ने त्राटक कोई प्रकार की विधि विधान सुने या पढे होंगे जो ईस प्रकार है सूर्य त्राटक के चंद्र त्राटक दीपक त्राटक बिंदू त्राटक आदि आप के मन त्राटक सम्बन्धित कोई प्रकार के शंकाए उत्पन होती कोन सा त्राटक करना चाहिए ।
Taratak Meditation kundalini jagarn karni ke pahile seedhee त्राटक ध्यानकुण्डलिनी जागरण करने की पहली सीढ़ी
Taratak Meditation kundalini jagarn karni ke pahile seedhee त्राटक ध्यानकुण्डलिनी जागरण करने की पहली सीढ़ी

 

आप को त्राटक करने का समय किस समय त्राटक करना चाहिए सभी त्राटक को करना का अलग अलग समय होता है । जो आप को मालूम नही होता जिस की वजह से आप को सफलता नही मिलती

त्राटक किया है और क्यू करे ?  Taratak Meditation

त्राटक एक तरह की आँखो की कसरत है जिसे करने से आँखे की रोशनी और उर्जा बढ़ती है । आँखो की शक्तिया जाग्रत होती है । हमारे योग शास्त्र के हठ योग साधना पद्धति में एक क्रिया होती है जिसका नाम है त्राटक है ।सही तरीके से त्राटक करने से कई – कई साल पुराना चश्मा भी उतर जाता है। त्राटक से आंख की कई प्रकार की बिमारियों नाश हो जाता है ।
जिससे आप की आँखो की रोशनी ईतनी बड़ जाती है आप अंधेरे मे भी सहजता से देख सकते है ।

त्राटक करने से साधक आँखो मे चुबकय शक्ति पैदा हो जाती है जिससे दूर पड़ी चीज को आपनी खींच सकते है ।त्राटक करने से ईतनी शक्ति आ जाती है कि आप जो काम स्वंय आपने हाथो से नही कर पाते वह त्राटक साधना से बड़ी सहजता से कर पाते है आप लोहे की रॉड को आपनी आँखो से सहजता से मोड़ सकते है ।

त्राटक करने से आज्ञा चक्र जाग्रत हो जाता है दिव्य दृष्टि हासिल हो जाती है आस पास की सकारात्मक नकारात्मक अदृश्य वस्तु को देखना, दूरस्थ दृश्यों को ज्ञात करना दूसरे के मनोभावों को ज्ञात सम्मोहन, आकर्षण आदि सिद्धीया सहिज प्राप्त हो जाती है । लाभ ये है कि आप भविष्य में घटने वाली किसी भी घटना का पूर्वानुमान लगा सकने में सक्षम हो जाते हैं। त्राटक सिद्धीया सहजता से प्राप्त नही होती ईस के लिए बहुत कठिन परिश्रम (मेहनत ) करनी पड़ती है ।

त्राटक करने का समय बहुत धीरे धीरे बढ़ाना चाहिए जिससे आँखों पर जोर ना पड़े | यह साधना लगातार तीन महीने तक करने के बाद उसके प्रभावों का अनुभव साधक को मिलने लगता है।
आप को पहिले बताया गया है त्राटक करने के कई तरीके और विधान है लेकिन आप को बिंदू त्राटक से शुरूआत करनी चाहिए । अगर आप बिंदू त्राटक से शुरूआत करते है तो आप की आँखे सूर्य और दीपक त्राटक करने मे सक्षम हो जाती है और आप को ज्यादा कठिनाई नही होती है ।

त्राटक की शुरुआत बिंदु त्राटक से करनी चाहिए जिस तरह से बगैर पहली कक्षा में सफल हुए आप दूसरी में नहीं जा सकते । उसी प्रकार बिंदू त्राटक के बिना आप और त्राटक नही कर सकते ।

बिंदू के बाद आप दीपक त्राटक Taratak Meditation

करे दीपक के बाद चंद्र त्राटक के बाद सूर्य त्राटक करे । सूर्य त्राटक मे सावधानी बरतनी चाहिए ।बिंदू त्राटक की विधी – बिंदू त्राटक करने से पहले आपनी आँखो को शुद्ध जल के छींटे मारे
आप को त्राटक करने का समय किस समय त्राटक करना चाहिए सभी त्राटक को करना का अलग अलग समय होता है । जो आप को मालूम नही होता जिस की वजह से आप को सफलता नही मिलती ।त्राटक किया है और क्यू करे ?
त्राटक एक तरह की आँखो की कसरत है जिसे करने से आँखे की रोशनी और उर्जा बढ़ती है । आँखो की शक्तिया जाग्रत होती है । हमारे योग शास्त्र के हठ योग साधना पद्धति में एक क्रिया होती है जिसका नाम है त्राटक है ।सही तरीके से त्राटक करने से कई – कई साल पुराना चश्मा भी उतर जाता है। त्राटक से आंख की कई प्रकार की बिमारियों नाश हो जाता है । Taratak Meditation

जिससे आप की आँखो की रोशनी ईतनी बड़ जाती है आप अंधेरे मे भी सहजता से देख सकते है । त्राटक करने से साधक आँखो मे चुबकय शक्ति पैदा हो जाती है जिससे दूर पड़ी चीज को आपनी खींच सकते है ।त्राटक करने से ईतनी शक्ति आ जाती है कि आप जो काम स्वंय आपने हाथो से नही कर पाते वह त्राटक साधना से बड़ी सहजता से कर पाते है आप लोहे की रॉड को आपनी आँखो से सहजता से मोड़ सकते है ।

त्राटक करने से आज्ञा चक्र जाग्रत हो जाता है दिव्य दृष्टि हासिल हो जाती है आस पास की सकारात्मक नकारात्मक अदृश्य वस्तु को देखना, दूरस्थ दृश्यों को ज्ञात करना दूसरे के मनोभावों को ज्ञात सम्मोहन, आकर्षण आदि सिद्धीया सहिज प्राप्त हो जाती है । लाभ ये है कि आप भविष्य में घटने वाली किसी भी घटना का पूर्वानुमान लगा सकने में सक्षम हो जाते हैं। त्राटक सिद्धीया सहजता से प्राप्त नही होती ईस के लिए बहुत कठिन परिश्रम (मेहनत ) करनी पड़ती है ।Taratak Meditation

त्राटक करने का समय बहुत धीरे धीरे बढ़ाना चाहिए जिससे आँखों पर जोर ना पड़े | यह साधना लगातार तीन महीने तक करने के बाद उसके प्रभावों का अनुभव साधक को मिलने लगता है।
आप को पहिले बताया गया है त्राटक करने के कई तरीके और विधान है लेकिन आप को बिंदू त्राटक से शुरूआत करनी चाहिए । अगर आप बिंदू त्राटक से शुरूआत करते है तो आप की आँखे सूर्य और दीपक त्राटक करने मे सक्षम हो जाती है और आप को ज्यादा कठिनाई नही होती है । Taratak Meditation

त्राटक की शुरुआत बिंदु त्राटक से करनी चाहिए जिस तरह से बगैर पहली कक्षा में सफल हुए आप दूसरी में नहीं जा सकते । उसी प्रकार बिंदू त्राटक के बिना आप और त्राटक नही कर सकते । बिंदू के बाद आप दीपक त्राटक करे दीपक के बाद चंद्र त्राटक के बाद सूर्य त्राटक करे । सूर्य त्राटक मे सावधानी बरतनी चाहिए ।बिंदू त्राटक की विधी – बिंदू त्राटक करने से पहले आपनी आँखो को शुद्ध जल के छींटे मारे
बिंदु त्राटक dindu taratak : एक सफेद कागज पर या ड्राइंग पेपर लेकर उसके बीच में एक छोटा-सा काली मिर्च के आकार का काले रंग का गोल बिंदु बनाए उसे बोर्ड के ऊपर चिपका दें या उस कागज को कमरे की दीवार पर इसे पर्याप्त उंचाई पर चिपका सकते है । Taratak Meditation

अब उस कागज से लगभग तीन फुट की दूरी पर जमीन पर आसन बिछाकर सुखासन अथवा पद्मासन में बैठ जायें और काले बिंदु पर दृष्टि को एकाग्र कर लें। शुरू शुरू मे आप की आँखे बहुत ज्यादा पानी निकलगा घबराने कोई बात नही है ।शुरुआत मे ऐसा होता है । शुरुआत 10 मिनट से करे योग्य गुरू के परामर्श के अभ्यास को थोड़ा थोड़ा बड़ाते जाए । देर के अभ्यास के पश्चात् जब काला बिंदु कभी ओझल हो जाये और कभी पुनः प्रकट होने लगे तो समझना चाहिए कि आपको सफलता मिलना आरंभ हो गई है और अभ्यास निरंतर जारी रखें।कुछ दिनों के अभ्यास के पश्चात जब काला बिंदु नजरों से पूर्णतः ओझल हो जाये और जिस कागज पर आप त्राटक कर रहे वो पूरी तरह सफेद चमकने लगे गा और दीवार भी सफेद हो जाए गी। अगर आप को ऐसा अनुभव हो समझ लेना कि आप का त्राटक का पहला चरण पूर्ण हो गया है ।

2 दीपक त्राटक deepak taratak  Taratak Meditation

दीपक त्राटक बहुत प्रभावकारी माना गया है ईस को करने कि बाद साधक को त्राटक की कुछ शक्तिया हासिल हो जाती है । बंद कमरे त्राटक करना चाहिए जिस मे वायु प्रवेश न कर पाए जिससे दीपक की लौ ना हिले । दीपक त्राटक रात्रि के समय या प्रतिः काल शुद्ध देसी घी का एक दीपक या मोमबत्ती जलाकर अपनी आंखों की सीध में ढाई-तीन फीट की दूरी पर रख लेना चाहिए। बैठने की स्थिति जमीन पर आसन बिछाकर अथवा या कुर्सी पर बैठकर भी बनाई जा सकती है । दीपक को जलाकर उसकी लौ पर अपना ध्यान केन्द्रित करें। कुछ देर के अभ्यास के पश्चात् फूंक मारकर लौ को बुझा दें और अंधेरे में देखने का अभ्यास करें। पहले दिन पॉच मिनट से शुरू कर के हर तीन चार दिन में एक मिनट ही बढाना चाहिये । अपनी आंखों की क्षमता के अनुसार इसको चालीस मिनट या अधिक समय तक ले जाना चाहिये। धीरे-धीरे आपको रोशनी का तेज बढ़ता हुआ दिखाई देगा। कुछ दिनों उपरांत आपको रोशनी के प्रकाश के बिना कुछ नहीं दिखाई देगा। आप समझ लेना कि आप कि त्राटक का दुसरा चरण सम्पन्न हुआ
। दुसरे चरण से काफी त्राटक सिद्धीया सहजता से प्राप्त हो जाती है ।

त्राटक

Taratak Meditation
सम्बन्धित जरूरी बाते

त्राटक करने का समय बहुत धीरे धीरे बढ़ाना चाहिए जिससे आँखों पर जोर ना पड़े | सूर्य त्राटक करने का समय होता है सूर्य उदय से 30 मिनट तक आप त्राटक कर सकते है अगर आप ईस के बाद त्राटक करते है तो उस समय सूर्य की रोशनी तेज हो जाती है जिससे आप की आँखे खराब हो सकती है ।शाम को सूर्य अस्त होने से आधा घंटा पहले त्राटक कर सकते है । दीपक त्राटक शुरू करने का समय रात्रि 11बजे या सुबह 4 बजे प्रतः काल करने ठीक है । त्राटक हमेशा गुरु के मार्गदर्शन से करना चाहिए

 

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