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रंभा अप्सरा साधना और अनुभव rambha 

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रंभा अप्सरा साधना और अनुभव rambha apsara sadhna अप्सरा का साथ ऐसा साथ है जिस के बाद समय को तो जैसे पर लग जाते है समय का तो पता ही नहीं चलता है । ना तो दिन का पता चलता है नहीं ही रात का पता चलता ।  इस  अवस्था ज्ञानी जनों ने आनंद अवस्था कहा है ।  जिसे समय का पता ही नहीं चलता इस पृथ्वी पर कोई ना कोई तपस्वी तपस्या करने बैठता था ।  तो स्वर्ग लोक में देवराज इंद्र को लगने लगता था । जब उनका सिहासन खतरे में है और वे बिना बात को पूरी तरह से समझे तपस्वी की तपस्या को भंग करने के लिए किसी ना किसी खूबसूरत अप्सरा को भेज देते थे । और फिर वो ऋषि अप्सरो के मोह पाश फसकर  कामदेव के बाणों से आहत होकर तपस्वी अप्सराओ के  के पीछे लग जाते थे ।  जिस के बाद अपनी तपस्या छोड़ कर उस अप्सरा के पीछे लग जाते थे।

 

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जब महान ऋषि कांडू गोमती नदी के किनारे बैठकर घोर तपस्या में लीन थे।  तब उनकी तपस्या से भयभीत होकर देवराज इंद्र ने स्वर्ग से सुंदर अप्सरा को चुना ऋषि की तपस्या को भंग करने के लिए भेजा । महा ऋषि  उस अप्सरा को देखते सार मोहित हो गए और तपस्या छोड़ कर उस अप्सरा के आनंद में लीं हो गए । और समय का तो जैसे पता ही नहीं चला कई  महीने कई  साल  व्यतीत हो गए एक दिन ऋषि की आँख खुली तो वो बोले मैं संध्या  पूजन करके आता हु  । अप्सरा बोली इतने साल बाद आप को आज आप को संध्या पूजन की याद आई सुबह ही तो आई हो वो बोली मुझे आये 907  साल हो  गए  है ।  अप्सरा का साथ इतना आनंददाई था महाऋषि को पता ही नहीं चला कब 907 निकल गए ।

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