urvashi apsara
उर्वशी अप्सरा साधना प्रत्यक्षीकरण urvashi apsara sadhana
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 उर्वशी अप्सरा साधना प्रत्यक्षीकरण urvashi apsara pratyakshkran sadhana mantra vidhi urvashi apsara sadhana

 

गुरु मंत्र साधना मे का स्वागत है आज हम उर्वशी अप्सरा साधना urvashi apsara sadhana के  बारे  चर्चा करेंगे  पहले  हम यह जानते   है कि अप्सरा  कौन होती है आज मैं    विस्तार   से  नही   बता पाउँगा यह विषय बहुत  लम्भा  है  उस कि लिए  एक अलग से पोस्त लिखी  जायेगी अप्सरा स्वर्ग कि खूबसूरत सुंद्र्रीया होती है  प्राचीन काल से ही भारतीय साधना पद्धति में सौन्दर्य की साधना करना भी एक आवश्यक गुण माना गया है।  urvashi apsara sadhana
 
 
 
urvashi apsara sadhana सौन्दर्य शब्द को लेकर के समाज में आज जो भी धारणा होउसके विषय में तो कुछ भी नहीं कहा जा सकताकिंतु प्राचीन काल में ऋषियों के मन में सौन्दर्य को लेकर के न तो कोई द्वन्द्व थान उनके मन में कोई ऐसी धारणा थी कि सौन्दर्य की उपासना अपने आपमें कोई अश्लील धारणा है। यही कारण हैकि प्राचीन ग्रंथों में सौन्दर्य का मूर्ति रूप अप्सरा को मान कर   सौन्दर्य को ही उपासना करने का प्रयास किया हैक्योंकि सौन्दर्य नारी के माध्यम से अपने सर्वोतकृष्ट रूप में स्पष्ट हो सकता है urvashi apsara sadhana 
 
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urvashi apsara sadhana  हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार अप्सरा देवलोक में रहने वाली अनुपम

 
अति सुंदरअनेक कलाओं में पूर्णतेजस्वी और अलौकिक दिव्य दैविक शक्ति है जो साधक की  हर  इच्छा को पूरा  कर सकती है। अप्सरा देवलोक में देवराज इंद्र की सेवा में रहती थीं और इंद्र के मनोरंजन के साथ ही साथ पुण्य कर्मों से स्वर्ग गए प्राणियों को भी अपने रूप-सौन्दर्य और नृत्य से आनंदित करती  रह्ती  है। 
 
  कई बार देवराज इंद्र अप्सराओ के रूप सौन्दर्य का इस्तेमाल एक हथियार के तौर पर भी करते थे जब उन्हें किसी व्यक्ति की तपस्या से अपनी गद्दी जाने का डर सताने लगता था।आप्सराऐ इन्द्र  के  आदेश   के अनुसार ऋषि मुनियो  की  तप्स्या मोह माया    से भंग  करने  का कार्य भी करती है अप्सरा साध्ना  को सिद्ध करने वाला  साध्क  आपार धन दोल्त को प्राप्त करता  है  इतिहास साक्षी है कि स्वामी शंकराचार्य  जी ने इसी लाधना को सम्पन्न कर अपने शिष्य पद्मपाद को अतुलनीय वैभव का स्वामी बना दिया
 

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URVASHI APSARA SADHANA AUR ANUBHAV

उर्वशी और पुरुरवा की प्रेम कहानी-LOVE STORY OF URVASHI  apsara AND PURURAVA

अर्जुन की किस बात पर सबसे सुंदर अप्सरा urvashi apsara ने दिया था नपुंसकता का शाप, जानिए

 

 
ईस साधना   मे  ज्यादा सम्ग्री  की जरूरत   नही   पड़ती   है एक  अप्सरा माला  की ज़रूरत  पड़ती है अप्सरा   माला  पार्ण  परतिष्ठत  होनी चाहिए ­और पाँच गुलाब के  फूल  गुलाब  कि  फूल  न  मिले तो कोई और  सुगंधित फूल  भी  रख सकते हो  एक  गुलाबी  वस्त्र   एक  अगरबत्ती और किसी भी  चीज़ जरूरत  नही  है यह  सब  समान  आप कोआसानी से  उपलब्ध हो जाती  है  अगर  आप  को यह  साधना सिद्ध  करनी  हो तो आप हम से  संपर्क   कर सकते  है urvashi apsara
 
  इंटरनेट  कि  ऊपर  बहुत  सारी  साधना   उपलब्ध है जिस   मे मंत्र  साधना  विधान   बता रखा  है  कितनो  को    सिद्धि प्राप्त  हुई है आप सब लोग जानते  ही है   अब फिर  आपने  विषय  की और आते है  अब सवाल ये है पहले  उर्वशी  साधना   ही  क्यू  करे  और  भी   बहुत  सारी  अप्सराए  होती  है लेकिन उर्वधी   पहले  क्यू करे  उर्वशी  एक  प्रधान और प्रमुख   अप्सरा है अगर आप उर्वशी कर लेते हो तो आप  अन्य  अप्सरा   खुद पर  खुद  सिद्ध हो जाती  है  urvashi apsara
 
 
 उर्वशी का  रूप  बहुत ही सुंदर हैवह चिरयौवना हैवह 18 वर्ष की उम्र की युवती के समान अल्हड़ मदमस्त और यौवन रस से परिपूर्ण  है।  उर्वशी  का   सारा  शरीर एक खूबसूरती सुन्दरता से परिपूर्ण रहता है,  जिसको देखकर व्यक्ति तो क्यादेवता भी मोहित हो जाते हैं। विश्वामित्र संहिता के अनुसार गोरा अण्डाकार चेहरालम्बे और एड़ियों को छूते हुए घने  श्याम केश, , गोरा रंग ऐसाकि जैसे स्वच्छ दूध में केसर मिला दी होबड़ी-बड़ी की आँखें छोटी चिबुकसुंदर और गुलाबी होंठआकर्षक चेहरा और अद्वितीय आभा से युक्त शरीर … सब मिलाकर एक | ऐसा सौन्दर्य जो हाथ लगने पर मैला हो जाए। ऐसी ही सौन्दर्य की सम्राज्ञी उर्वशी  है |
 
विश्वामितर  एक  ऐसे  ऋषि  है  जिन्हों  ने    सब  से  पेहली  उर्वशी  अप्सरा  को सिद्ध  किया  था   ईस  के  सम्बन्धी   एक कथा आती  है विश्वामित्र ने जब यह सुना कि उर्वशी इन्द्र के दरबार को सौन्दर्य नृत्यांगना हैतो उन  के मन  मे  आया  उर्वशी  मेरे  आशर्म  मे भी  उर्वशी  नृत्य करे। उन्होंने आज्ञा दी कि उर्वशी मेरे आश्रम में भी नृत्य करे। 
 
 
 विश्वामित्र   जी  अपना संदेश इन्द्र तक पहुंचा दिया इन्द्र ने मना कर दिया यह किसी भी प्रकार से सम्भव नहीं है।विश्वामित्र तो हठी ऋषि थे उन्होंने  आपनी मंत्र शक्ति द्वारा   उर्वशी को अपने आश्रम में बुलाया और कहा – तुम्हें ठीक वैसा ही नृत्य करना होगा जैसा इन्द्र की सभा में तुम करती हो।  उर्वशी ने   ऐसा   करने  से  मना  कर  दिया  इन्द्रलोक चली गई।विश्वामित्र  ने उसी क्षण प्रतिज्ञा  की  कि  मैं तंत्र की रचना करूंगा तंत्र शक्ति   से उर्वशी को अपने आश्रम में बुला कर ,नृत्य  करवाऊंगा और इसी प्रतिज्ञा   कि  परिणाम से  उर्वशी तंत्र। की रचना   की  हजारों शिष्यओ  के सामने उर्वशी का  नृत्य संपन्न करवाया 
 
और विश्वामित्र   जी कि बाद  बहुत  सारे  साधको ने इस  अप्सरा को सिद्ध किया  जिंदगी  में  सभी भोगो को भोगा  विश्वामित्र के बाद उनके शिष्य भूरिश्रवाचिन्मयदेवसुत,गन्धरऔर यहां तक कि देवी विश्रा औररत्नप्रभा ने भी उर्वशी सिद्ध कर जीवन के सम्पूर्ण भोगों का भोग किया। गोरखनाथ ने भी इस साधना के माध्यम से चिरयौवन प्राप्त किया और गोरक्षपुर में उन्होंने हजारों शिष्यों के सामने सदेह उर्वशी को बुलाकर अद्वितीय नृत्य सम्पन्न करवाया।  और  भी  बहुत सारे  साधको ने  सिद्ध कर आपार धन दोलत  को प्राप्त करा  आप भी  जिंदगी  इस  साधना  को  संपन्न  कर जिदगी  का  हर सुख  पा  सकते हो 
 
 
 
 
 

(अप्सरा साधना के लाभ ) अप्सरा साधना का हमारे जीवन मे महत्व (Benefits of Apsara ) Our life of Apsara is important

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जय महाकाल
 
 
 

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  1. अप्सरा साधना किस उम्र का वियक्ती कर सकता है ?

    अप्सरा साधना किसी भी उम्र का साधक कर सकता चाहे वो बूढ़ा अप्सरा साधना हो या जवान हो यह बात मेटर नहीं करती आप की साधना करने की लगन होनी चाहिए बहुत से ऋषि लोगो ने बुढ़ापे में करा और लाभ प्रपात करे इस साधना को करने से बूढ़ा वियक्ति भी जवान की तरह हो जाता है

  2. क्या गर्भावस्था के दौरान अप्सरा साधना की जा सकती है?

    इस का जवाब नहीं है


  3. हिंदू पौराणिक कथाओं में, क्या अप्सरा साधना वास्तव में मौजूद है?

    हिंदू धर्म की कोई भी साधना पूजा गलत नहीं हो सकती क्योंकि हिंदू यह सनातन धर्म है इसलिए यदि आप पूछ रहे हैं कि साधना आदि के बारे में सोचा नहीं गया है तो हां लेकिन इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपनी साधना कहां से जहाज करते हैं, जिसका अर्थ है कि आपको अपनी साधना कहां से मिली, यह बात भी बहुत कुछ निर्भर करती है । यदि आपने किसी सिद्ध व्यक्ति के साथ साधना की है तो आपकी साधना आपको सफलता की ओर ले जाएगी और आप जो भी साधना करना चाहते हैं उसे करके आसानी से पाप कर सकते हैं।

  4. यह स्वर्ग की अप्सरा कोण थी

    यह अप्सराएँ सागर मंथन से निकली थी उन्होंने किसी को भी पति रूप में स्वीकार नहीं किया इस लिए वे इंद्र (स्वर्ग) के दरबार में नर्तकों के रूप में बनी रही ।


  5. भारत में अप्सराओं का इतिहास क्या है?

    अप्सरा, भारतीय धर्म और पौराणिक कथाओं में, खगोलीय गायकों और नर्तकों में से एक, जो गंधर्वों, या खगोलीय संगीतकारों के साथ मिलकर स्वर्ग के स्वामी भगवान इंद्र के स्वर्ग में निवास करते हैं। मूल रूप से पानी देवियों, अप्सरा दोनों देवताओं और पुरुषों के लिए कामुक खुशी प्रदान करते हैं
    अप्सरा एक आध्यात्मिक अवधारणा है, जो हर चीज में सुंदरता की सराहना करने की हमारी क्षमता का स्रोत है – लोगों में, प्रकृति में, ब्रह्मांड में, हमारे निकट और प्रिय को संजोने के लिए, दोस्ती का खजाना और इतने पर। यह एक अमूर्त अवधारणा है जिसे विद्याधारा (“प्रेरित ज्ञान धाराओं”) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जो सभी प्रेरणा का स्रोत है, या “आध्यात्मिक ऊर्जा का वर्ग” है जो लौकिक और आध्यात्मिक स्थानों (इसलिए प्रेरणादायक) के बीच सीमा का विस्तार करने में सक्षम है।

  6. अप्सरा साधना के क्या-क्या दुष्परिणाम होते हैं?

    कोई भी शक्ति का कोई दुष्परिणाम नहीं होता अगर आप अच्छे गुरु की देख रेख में करते है दूसरा अगर आप अप्सरा का सम्बन्धी जो नियम है अगर आप उन नियम को तोड़ते हो तब भी दुष्परिणाम भोगने पद सकते है

  7. क्या अप्सरा दर्शन संभव है ?

    हां अप्सरा दर्शन संभव है यह संभव है आप की मेहनत पर आप किस तरह से साधना करते है ! यह आप पर निर्भर है इस में मेहनत के साथ नियम भी जरूरी है


  8. उर्वशी अप्सरा ने किस पांडव को नपुंसक हो जाने का शाप दिया था?

    एक दिन जब चित्रसेन अर्जुन को संगीत और नृत्य की शिक्षा दे रहे थे, वहाँ पर इन्द्र की अप्सरा उर्वशी आई और अर्जुन पर मोहित हो गई। अवसर पाकर उर्वशी ने अर्जुन से कहा, “हे अर्जुन! आपको देखकर मेरी काम-वासना जागृत हो गई है, अतः आप कृपया मेरे साथ विहार करके मेरी काम-वासना को शांत करें।” उर्वशी के वचन सुनकर अर्जुन बोले, “हे देवि! हमारे पूर्वज ने आपसे विवाह करके हमारे वंश का गौरव बढ़ाया था अतः पुरु वंश की जननी होने के नाते आप हमारी माता के तुल्य हैं। देवि! मैं आपको प्रणाम करता हूँ।” अर्जुन की बातों से उर्वशी के मन में बड़ा क्षोभ उत्पन्न हुआ और उसने अर्जुन से कहा, “तुमने नपुंसकों जैसे वचन कहे हैं, अतः मैं तुम्हें शाप देती हूँ कि तुम एक वर्ष तक पुंसत्वहीन रहोगे।” इतना कहकर उर्वशी वहाँ से चली गई।

    जब इन्द्र को इस घटना के विषय में ज्ञात हुआ तो वे अर्जुन से बोले, “वत्स! तुमने जो व्यवहार किया है, वह तुम्हारे योग्य ही था। उर्वशी का यह शाप भी भगवान की इच्छा थी, यह शाप तुम्हारे अज्ञातवास के समय काम आयेगा। अपने एक वर्ष के अज्ञातवास के समय ही तुम पुंसत्वहीन रहोगे और अज्ञातवास पूर्ण होने पर तुम्हें पुनः पुंसत्व की प्राप्ति हो जायेगी।”
    अर्जुन बने बृहन्नला

  9. रावण को किस अप्सरा से श्राप मिला था?

    रावण ने अप्सरा रंभा को देखा जो उसके सौतेले भाई कुबेर की वधू थी। रावण रंभा को देखकर कामातुर हो गया और उसके साथ बल प्रयोग कर सतीत्व भंग कर डाला। जब यह बात नलकुबेर को पता चली तो उसने रावण को शाप दिया कि यदि वह किसी भी स्त्री की इच्छा के बिना उसे स्पर्श करेगा तो उसके सिर के सौ टुकड़े हो जाएंगे।

  10. क्या स्वर्ग की अप्सराएं अविवाहित होती थी?

    हां अप्सरा स्वर्ग में अविवाहित होती थी यह किसी भी देवता के साथ विवाह नहीं करती ! यह अपनी इच्छा से विवाह करवा सकती है ! यह विवाह के बंदन में जायदा समय तक नहीं रहती

  11. अब सवाल ये है पहले  उर्वशी  साधना   ही  क्यू  करे  और  भी   बहुत  सारी  अप्सराए  होती  है लेकिन उर्वधी   पहले  क्यू करे  ?

    उर्वशी  एक  प्रधान और प्रमुख   अप्सरा है अगर आप उर्वशी कर लेते हो तो आप  अन्य  अप्सरा   खुद पर  खुद  सिद्ध हो जाती  है  urvashi apsara
     

  12. उर्वशी अप्सरा की उत्पति कैसे हुई थी इस की क्या कथा है ?

     श्रीमद्भागवत के अनुसार यह उर्वशी स्वर्ग (हिमालय के उत्तर का भाग) की सर्वसुन्दर अप्सरा थी। एक बार इन्द्र की सभा में उर्वशी के नृत्य के समय राजा पुरुरवा (चंद्रवंशियों के मूल पिता) उसके प्रति आकृष्ट हो गए थे जिसके चलते उसकी ताल बिगड़ गई थी। इस अपराध के कारण इन्द्र ने रुष्ट होकर दोनों को मर्त्यलोक में रहने का शाप दे दिया था।
    मर्त्यलोक में पुरुरवा और उर्वशी कुछ शर्तों के साथ पति-पत्नी बनकर रहने लगे। इनके 9 पुत्र आयु, अमावसु, विश्वायु, श्रुतायु, दृढ़ायु, शतायु आदि उत्पन्न हुए। उर्वशी को इन्द्र बहुत चाहते थे।
    माना जाता है कि नारायण की जंघा से उर्वशी की उत्पत्ति हुई है, लेकिन पद्म पुराण के अनुसार कामदेव के ऊरू से इसका जन्म हुआ था।
    उर्वशी तो अजर-अमर है। यही उर्वशी एक बार इन्द्र की सभा में अर्जुन को देखकर आकर्षित हो गई थी और इसने इन्द्र से प्रणय-निवेदन किया था, लेकिन अर्जुन ने कहा- ‘हे देवी! हमारे पूर्वज ने आपसे विवाह करके हमारे वंश का गौरव बढ़ाया था अतः पुरु वंश की जननी होने के नाते आप हमारी माता के तुल्य हैं…।’ अर्जुन की ऐसी बातें सुनकर उर्वशी ने कहा- ‘तुमने नपुंसकों जैसे वचन कहे हैं अतः मैं तुम्हें शाप देती हूं कि तुम 1 वर्ष तक पुंसत्वहीन रहोगे।’
    इस तरह उर्वशी के संबंध में सैकड़ों कथाएं पुराणों में मिलती हैं।

 

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