नाभि दर्शना अप्सरा साधना nabhi darshana apsara sadhna
नाभि दर्शना अप्सरा साधना nabhi darshana apsara sadhna
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नाभि दर्शना अप्सरा साधना nabhi darshana apsara sadhna

 

 

नाभि दर्शना अप्सरा साधना nabhi darshana apsara sadhna गुरु मंत्र साधना डॉट कॉम में   आप   सबका स्वागत   है  ।   दर्शना  अप्सरा  के संबंध  में बात  करेंगे  नाभि दर्शना  अप्सरा पर  मुख्य अप्सराओं के अंतर्गत आती हैं    । तंत्र ग्रंथों के अनुसार इसका रूप  नाभिदर्शना, षोडश वर्षीय अत्यन्त सुकुमार और सौन्दर्य की सम्राज्ञी है। उसका सारा शरीर कमल से भी ज्यादा नाजुक और गुलाब से भी ज्यादा सुंदर है।  उसके सारे शरीर से धीमी धीमी खुशबू प्रवाहित होती रहती है। जो कि उसकी उपस्थिति का भान कराती रहती है    ।  इस अप्सरा की काली और लम्बी आंखें, लहराते हुए झरने की तरह केश  और इसे इन्द्र का वरदान प्राप्त है, कि जो भी इसके सम्पर्क में आता है  ।  वह पुरुष, पूर्ण रूप से रोगों से मुक्त होकर चिर यौवनमय बन जाता है  । उसके शरीर का काया कल्प हो जाता है। और पौरुष की दृष्टि से वह अत्यन्त प्रभावशाली बन जाता है। स्थापना को महाकवि कालिदास जी ने मिश्रित कर आसरा के सानिध्य के कारण ही मस्ती उमंग जोश से काव्य लिखते गई जिसके कारण वह महाकवि बने वह महाकवि बने अंग्रेजी में मुहावरा है – There is a woman behind every successful man. अर्थात प्रत्येक सफल व्यक्ति के पीछे एक नारी होती है। इसमें कोई संदेह भी नहीं।  नाभि दर्शना अप्सरा साधना nabhi darshana apsara sadhna

 

नाभिदर्शना अप्सरा को विविध उपहार देने का शौक है। नाभि दर्शना अप्सरा साधना nabhi darshana apsara sadhna

 

जो पुरुष इसके सम्पर्क में आता है, उसे यह हीरे, मोती, स्वर्ण मुद्राओं से एवं विविध उपहारों से प्रदान  कर देती है। जीवन भर उस पुरुष के अनुकूल रहती हुई।  .वह उसका प्रत्येक मामले में मार्गदर्शन करती रहती है, मां की तरह साधक को भोजन भी कराती है , प्रेमिका की तरह सुख एवं आनन्द की वर्षा करती रहती है। इस साधना को सिद्ध करने वाला साधक मनवांछित कला और ज्ञान को प्राप्त करता है महाकवि कालिदास जी ने इस साधना महाकवि बनकर संसार में व्याख्या प्राप्त करा महाकवि कालिदास ईश्वर अभिलाष उमंग और आदि में एक राजपुर से कम नहीं थे नाभि दर्शना अप्सरा साधना nabhi darshana apsara sadhna

 

महाराज भोज   भी   उनकी   इन   उपलब्धियों   से   अनभिज्ञ   नहीं   थे (नाभि दर्शना अप्सरा साधना nabhi darshana apsara sadhna )

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और   परस्पर मित्र-भाव होने   के कारण   अन्ततोगत्वा   एक दिन कालीदास   ने महाराज भोज   के समक्ष      इस   रहस्य   का   उद्घाटन   भी   कर   दिया   कि   ऐसा सब कुछ उनके जीवन में कैसे संभव हो पा रहा है। राजा भोज के अत्यधिक हठ करने पर एक दिन कालीदास ने राजा भोज के समक्ष नाभिदर्शना को प्रत्यक्ष प्रगट कर दिखा दिया, रूप में, सौन्दर्य में, और यौवन में वह छलकते हुए जाम की तरह थी, उसका सारा शरीर गौर वर्ण और चन्द्रमा की चांदनी में नहाया हुआ सा लग रहा था, पुष्प से भी कोमल और नाजुक नाभिदर्शना को कालीदास के कक्ष में थिरकते देख कर राजा भोज अत्यधिक संयमित होते हुए भी बेसुध से हो गए, उनकी आंखों के सामने हर क्षण नाभिदर्शना ही दिखाई देती रही। राजा भोज ने ऐसी सुंदरता कभी नहीं देखी थी  उस सुंदरता को देख कर दंग  रह गए ।  महाकवि कालिदास जी को  यह हीरे, मोती, स्वर्ण मुद्राओं से एवं विविध उपहारों से प्रदान  कर देती इस लेया वो राज्य  पुरष से कम  नहीं थे ।  अगर आप भी महाकवि कालिदास जी की तरह राजा की तरह ज़िंदगी जीना चाहते हो तो आप यह साधना जरूर करें नाभि दर्शना अप्सरा साधना nabhi darshana apsara sadhna

अधिक जानकारी  के लिए  तंत्र गुरु जी को संपर्क करें  85280  57364

 

Guru Mantra Sadhna

कैसी होती थीं अप्सराएं, जानिए…

 

 

 

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