Category: अप्सरा साधना

ईस श्रेणी में हम अप्सरा साधना Apsara sadhna  के बारे में रहस्य और रोमांचक जानकारी प्रदान करेंगे ! कैसे आप अप्सरा को प्रीमिका रूप में सिद्ध कर अपने अकेलेपन दूर कर सकते है

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apsara sadhana vs yakshini sadhana अप्सरा और यक्षिणी कौंन शक्तिशाली ph.85280-57364 आज का जो हमारा विषय रहेगा, वह रहेगा अप्सरा और यक्षिणी साधना को लेकर। अप्सरा और यक्षिणी, दोनों साधना में से कौन सी साधना हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ है, इस विषय में हम बात करेंगे। कृपया इस वीडियो को अंत तक जरूर देखिए।

जो अप्सरा साधना है, यह भी दैविक साधना होती है और जो यक्षिणी साधना है, यह भी दैविक साधना होती है। अप्सरा को आप सिर्फ प्रेमिका रूप में ही कर सकते हैं, लेकिन यक्षिणी को आप मां, बहन, पत्नी रूप में कर सकते हैं।

अप्सरा कभी भी मां, बहन, प्रेमिका रूप में सिद्ध नहीं होती है। अगर कुछ लोग बोलते हैं तो यह बिल्कुल गलत है। अप्सरा जब भी आती है तो प्रेमिका रूप में ही आती है।

बुलाने की कोई कोशिश करता है उस तरीके से, तो उस तरीके से वह सिद्ध नहीं होती है। क्योंकि अप्सरा एक ऐसी साधना होती है जो कभी भी जोड़े में नहीं होती है।

अप्सरा और परी कभी जोड़े में नहीं रहती हैं, बाकी जैसे यक्ष और यक्षिणी होते हैं, पति-पत्नी हैं, देवता और देवी हो गए। मतलब हर एक शक्ति एक जोड़े में चलती है।

पर लेकिन अप्सरा होती है, यह जोड़े में नहीं चलती है कभी भी। तो इसीलिए इसकी जो कामना पूरी नहीं होती है, जो उनकी इच्छा होती है, वह पूरी नहीं होती है।

अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए ही वह अपने प्रेमी की तलाश करती है, जो साधक उसके लिए सही होता है तो उसको सिद्ध हो जाती है, वरना आपके काम तो करती ही रहेगी अप्रत्यक्ष रूप में।

दूसरी चीज मैं आपको यह बताता हूं, अगर आपने प्रेमी रूप में इसको कर लिया, अगर आपकी प्रेमिका है तो आपको उससे दूरी बनानी पड़ेगी, पत्नी से दूरी बनानी पड़ेगी।

अप्सरा यह नहीं चाहती है कि कभी भी जो आपका प्रेम है, किसी दूसरी औरत को आप दो, यह उसको बर्दाश्त नहीं होता है। तो इसीलिए यह साधना करने वाले साधक जो होते हैं, इनको दूसरी औरत, प्रेमिका या पत्नी रखना सही नहीं है।

अगर रखेगा तो उसको कष्ट होगा। एक मेरे दोस्त हैं रणवीर, उनकी एक प्रेमिका थी और वह प्रेमिका बाल-बाल मरते हुए बची क्योंकि वह उसको मिलने के लिए अक्सर जाता था, अप्सरा को वो चीजें पसंद नहीं थीं। तो इसका यह भी कारण है।

देखिए, जो यक्षिणियों की साधनाएं हैं, हमारे भारतीय तंत्र में मिलती हैं और जितने भी इसके मंत्र हैं, यह सब कीलित होते हैं। कोई आपको गुरु चाहिए जो मंत्र को जागृत कर सके। जो अप्सरा के मामले में ऐसा नहीं है। अप्सरा के मंत्र कोई भी कीलित नहीं हैं।

यह साधना गुरु परंपरा से ही चलती आ रही है, इसमें कोई कील, कोई बंधन नहीं है। तंत्र की जितनी भी साधनाएं हैं जो भारतीय तंत्र के अंतर्गत आती हैं, तो वह सारी ही कीलित होती हैं। कोई अगर आज की डेट में किसी ग्रंथ से पढ़कर अप्सरा-यक्षिणी साधना करना चाहे, वो कभी उसको सिद्ध नहीं हो सकती।

अप्सरा के मामले में यह नहीं है। अप्सरा को कोई भी करेगा तो उसको रिजल्ट मिलेगा। यह इसके कुछ कारण हैं। ऐसा गुरु ढूंढना पड़ेगा जो यक्षिणी साधना आपको करवा सके। अप्सरा साधना के तो साधक आपको मिल जाएंगे।

तो ये कुछ बातें हो गईं। अब कुछ और बातें मैं आपसे करता हूं। कुछ अप्सराएं स्वर्ग में रहती हैं। इसी चीज के चलते जो स्वर्ग की अप्सराएं होती हैं, वह अधीन होती हैं देवराज इंद्र के। अगर अप्सरा को जाना होगा तो वह जाएगी।

अगर साथ में इंद्र का भी आप जाप कर लोगे, तो उसमें कोई भी रुकावट पैदा नहीं हो सकती। तो यह इसकी खास बात है। भगवान इंद्र को भी साथ में प्रसन्न करोगे तो साधना जल्दी सफल होगी। वहीं जो यक्षिणियों के जो स्वामी हैं, यक्षराज कुबेर को बोला गया है और जो कुबेर हैं, उनके स्वामी माने गए हैं। कुछ यक्षिणी कुबेर के अधीन होती हैं।

जैसे कुछ अप्सराएं स्वर्ग में रहती हैं, कुछ अप्सरा अप्सरा लोक में ही रहती हैं और ज्यादातर वह धरती के ऊपर भ्रमण करती रहती हैं। अपना इनका कोई भी लोक नहीं होता है, धरती के ऊपर भ्रमण करती रहती हैं, इसीलिए तो जल्दी सिद्ध हो जाती हैं।

जो यक्षिणी साधना है, जो यक्ष लोक है, बिल्कुल धरती के करीब है। हमारी जो मंत्र की वाइब्रेशन है, तो वह वहां तक जल्दी पहुंचती है, वह भी साथ में जल्दी सिद्ध होती है। इसके लिए गुरु चाहिए जो आपके मंत्र को निष्कीलित कर सके।

यह कुछ खास बातें हो गईं। अब इस पर कुछ और चर्चा करते हैं। जब भी अप्सरा आती है तो उससे फूलों की खुशबू आती है। चाहे वह अप्सरा 1 किलोमीटर दूर क्यों ना हो, तो वहां से भी आपको फूलों की ही खुशबू महसूस कर सकते हैं आप।

यक्षिणी के मामले में चमेली की खुशबू आती है जब कोई भी यक्षिणी को सिद्ध करता है, तो समझ जाना चाहिए कि यक्षिणी आपके आसपास है। अगर कोई व्यक्ति यक्षिणी को पत्नी रूप में सिद्ध करता है, पत्नी रूप में सिद्ध करने के बाद दूसरा विवाह करा लेता है, तो तंत्र ग्रंथों में यही लिखा है, तो उसकी मृत्यु हो जाती है।

एक दफा अगर आपने यक्षिणी को पत्नी रूप में मान लिया, तो आप फिर दूसरी पत्नी से शादी नहीं कर सकते क्योंकि जो सनातन धर्म की संस्कृति है, उसमें एक शादी ही मान्य है, मान्यता दी गई है।

दूसरी शादी करोगे तो फिर उसमें आपको दिक्कत आनी शुरू हो जाएगी, आपकी मौत हो जाएगी। ऐसा मैं नहीं बोल रहा हूं, भारतीय तंत्र ग्रंथ में जिक्र मिलता है। हर एक तंत्र ग्रंथ में यह बात बोली गई है।

इस साधना को करने के लिए आपको एकांत जगह चाहिए होगी। एकांत जगह में ही आप यक्षिणी और अप्सरा साधना को करिए। सुंदर वस्त्र पहन के करिए।

यक्षिणी को अगर आप मां, बहन, पत्नी रूप में कर रहे हो, तो इस चीज का आप ध्यान रखें कि जो आपकी बहन है, आपकी मां है, उसके साथ आपके रिलेशन अच्छे होने चाहिए।

ऐसा नहीं है कि आप मां और बहन का कोई सम्मान नहीं करते हो, तो फिर वह आपको सिद्ध होने में दिक्कत करेगी। असल में भी आपको रिश्ते निभाने पड़ेंगे, अगर नहीं निभाते हो तो प्रॉब्लम आएगी। तो यह कुछ बातें हैं अप्सरा और यक्षिणी को लेकर।

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APSARA SADHNA KI NIYAM अप्सरा साधना के नियम – अप्सरा प्रत्यक्ष होगी कुछ दिनों में

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जो अप्सरा साधना है, यह भी दैविक साधना होती है और जो यक्षिणी साधना है, यह भी दैविक साधना होती है। अप्सरा को आप सिर्फ प्रेमिका रूप में ही कर सकते हैं, लेकिन यक्षिणी को आप मां, बहन, पत्नी रूप में कर सकते हैं। अप्सरा कभी भी मां, बहन, प्रेमिका रूप में सिद्ध नहीं होती है।

अगर कुछ लोग बोलते हैं तो यह बिल्कुल गलत है। अप्सरा जब भी आती है तो प्रेमिका रूप में ही आती है। बुलाने की कोई कोशिश करता है उस तरीके से, तो उस तरीके से वह सिद्ध नहीं होती है। क्योंकि अप्सरा एक ऐसी साधना होती है जो कभी भी जोड़े में नहीं होती है।

अप्सरा और परी कभी जोड़े में नहीं रहती हैं, बाकी जैसे यक्ष और यक्षिणी होते हैं, पति-पत्नी हैं, देवता और देवी हो गए। मतलब हर एक शक्ति एक जोड़े में चलती है। पर लेकिन अप्सरा होती है, यह जोड़े में नहीं चलती है कभी भी।

तो इसीलिए इसकी जो कामना पूरी नहीं होती है, जो उनकी इच्छा होती है, वह पूरी नहीं होती है। अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए ही वह अपने प्रेमी की तलाश करती है, जो साधक उसके लिए सही होता है तो उसको सिद्ध हो जाती है, वरना आपके काम तो करती ही रहेगी अप्रत्यक्ष रूप में।

दूसरी चीज मैं आपको यह बताता हूं, अगर आपने प्रेमी रूप में इसको कर लिया, अगर आपकी प्रेमिका है तो आपको उससे दूरी बनानी पड़ेगी, पत्नी से दूरी बनानी पड़ेगी।

अप्सरा यह नहीं चाहती है कि कभी भी जो आपका प्रेम है, किसी दूसरी औरत को आप दो, यह उसको बर्दाश्त नहीं होता है। तो इसीलिए यह साधना करने वाले साधक जो होते हैं, इनको दूसरी औरत, प्रेमिका या पत्नी रखना सही नहीं है। अगर रखेगा तो उसको कष्ट होगा।

एक मेरे दोस्त हैं रणवीर, उनकी एक प्रेमिका थी और वह प्रेमिका बाल-बाल मरते हुए बची क्योंकि वह उसको मिलने के लिए अक्सर जाता था, अप्सरा को वो चीजें पसंद नहीं थीं। तो इसका यह भी कारण है।

देखिए, जो यक्षिणियों की साधनाएं हैं, हमारे भारतीय तंत्र में मिलती हैं और जितने भी इसके मंत्र हैं, यह सब कीलित होते हैं। कोई आपको गुरु चाहिए जो मंत्र को जागृत कर सके। जो अप्सरा के मामले में ऐसा नहीं है। अप्सरा के मंत्र कोई भी कीलित नहीं हैं।

यह साधना गुरु परंपरा से ही चलती आ रही है, इसमें कोई कील, कोई बंधन नहीं है। तंत्र की जितनी भी साधनाएं हैं जो भारतीय तंत्र के अंतर्गत आती हैं, तो वह सारी ही कीलित होती हैं। कोई अगर आज की डेट में किसी ग्रंथ से पढ़कर अप्सरा-यक्षिणी साधना करना चाहे, वो कभी उसको सिद्ध नहीं हो सकती।

अप्सरा के मामले में यह नहीं है। अप्सरा को कोई भी करेगा तो उसको रिजल्ट मिलेगा। यह इसके कुछ कारण हैं। ऐसा गुरु ढूंढना पड़ेगा जो यक्षिणी साधना आपको करवा सके। अप्सरा साधना के तो साधक आपको मिल जाएंगे।

तो ये कुछ बातें हो गईं। अब कुछ और बातें मैं आपसे करता हूं। कुछ अप्सराएं स्वर्ग में रहती हैं। इसी चीज के चलते जो स्वर्ग की अप्सराएं होती हैं, वह अधीन होती हैं देवराज इंद्र के। अगर अप्सरा को जाना होगा तो वह जाएगी।

अगर साथ में इंद्र का भी आप जाप कर लोगे, तो उसमें कोई भी रुकावट पैदा नहीं हो सकती। तो यह इसकी खास बात है। भगवान इंद्र को भी साथ में प्रसन्न करोगे तो साधना जल्दी सफल होगी। वहीं जो यक्षिणियों के जो स्वामी हैं, यक्षराज कुबेर को बोला गया है और जो कुबेर हैं, उनके स्वामी माने गए हैं। कुछ यक्षिणी कुबेर के अधीन होती हैं।

जैसे कुछ अप्सराएं स्वर्ग में रहती हैं, कुछ अप्सरा अप्सरा लोक में ही रहती हैं और ज्यादातर वह धरती के ऊपर भ्रमण करती रहती हैं। अपना इनका कोई भी लोक नहीं होता है, धरती के ऊपर भ्रमण करती रहती हैं, इसीलिए तो जल्दी सिद्ध हो जाती हैं।

जो यक्षिणी साधना है, जो यक्ष लोक है, बिल्कुल धरती के करीब है। हमारी जो मंत्र की वाइब्रेशन है, तो वह वहां तक जल्दी पहुंचती है, वह भी साथ में जल्दी सिद्ध होती है। इसके लिए गुरु चाहिए जो आपके मंत्र को निष्कीलित कर सके।

यह कुछ खास बातें हो गईं। अब इस पर कुछ और चर्चा करते हैं। जब भी अप्सरा आती है तो उससे फूलों की खुशबू आती है। चाहे वह अप्सरा 1 किलोमीटर दूर क्यों ना हो, तो वहां से भी आपको फूलों की ही खुशबू महसूस कर सकते हैं आप। यक्षिणी के मामले में चमेली की खुशबू आती है जब कोई भी यक्षिणी को सिद्ध करता है, तो समझ जाना चाहिए कि यक्षिणी आपके आसपास है।

अगर कोई व्यक्ति यक्षिणी को पत्नी रूप में सिद्ध करता है, पत्नी रूप में सिद्ध करने के बाद दूसरा विवाह करा लेता है, तो तंत्र ग्रंथों में यही लिखा है, तो उसकी मृत्यु हो जाती है। एक दफा अगर आपने यक्षिणी को पत्नी रूप में मान लिया, तो आप फिर दूसरी पत्नी से शादी नहीं कर सकते क्योंकि जो सनातन धर्म की संस्कृति है, उसमें एक शादी ही मान्य है, मान्यता दी गई है।

दूसरी शादी करोगे तो फिर उसमें आपको दिक्कत आनी शुरू हो जाएगी, आपकी मौत हो जाएगी। ऐसा मैं नहीं बोल रहा हूं, भारतीय तंत्र ग्रंथ में जिक्र मिलता है। हर एक तंत्र ग्रंथ में यह बात बोली गई है।

इस साधना को करने के लिए आपको एकांत जगह चाहिए होगी। एकांत जगह में ही आप यक्षिणी और अप्सरा साधना को करिए। सुंदर वस्त्र पहन के करिए।

यक्षिणी को अगर आप मां, बहन, पत्नी रूप में कर रहे हो, तो इस चीज का आप ध्यान रखें कि जो आपकी बहन है, आपकी मां है, उसके साथ आपके रिलेशन अच्छे होने चाहिए।

ऐसा नहीं है कि आप मां और बहन का कोई सम्मान नहीं करते हो, तो फिर वह आपको सिद्ध होने में दिक्कत करेगी। असल में भी आपको रिश्ते निभाने पड़ेंगे, अगर नहीं निभाते हो तो प्रॉब्लम आएगी। तो यह कुछ बातें हैं अप्सरा और यक्षिणी को लेकर।

रंजिनी अप्सरा साधना।केवल 5 दिन में होगी सिद्ध।करेंगे सभी कामranjani apsara sadhana. keval 5 din mein hoga siddh.karenge sabhee kaam PH.85280 57364

रंजिनी अप्सरा साधना।केवल 5 दिन में होगी सिद्ध।करेंगे सभी कामranjani apsara sadhana. keval 5 din mein hoga siddh.karenge sabhee kaam.

रंजिनी अप्सरा साधना।केवल 5 दिन में होगी सिद्ध।करेंगे सभी काम  ranjani apsara sadhana. keval 5 din mein hoga siddh.karenge sabhee kaam.

 

रंजिनी अप्सरा साधना – केवल 5 दिन में होगी सिद्ध।करेंगे सभी काम Ranjani apsara sadhana. keval 5 din mein hoga siddh.karenge sabhee kaam.  जय श्री महाकाल। सभी साधक एवं साधिकाओं को मेरा सादर प्रणाम। दोस्तों, आज मैं आपके लिए एक साधना लेकर आया हूं, जिसका नाम है रंजनी अप्सरा। दोस्तों, यह सिंपल अप्सरा, इसमें साधारण साधना है कि कोई भी साधक, सामान्य साधक भी इसको कर सकता है। 

 इसका पूर्ण विस्तार से जानकारी बहुत अच्छा है और बहुत अच्छे से मैं जानकारी दूंगा इसकी। तो जो भी साधक या साधिका इस साधना को करना चाहते हैं, तो दोस्तों, रंजनी अप्सरा क्या है कि साधारण अप्सराओं की शास्त्रों के भीतर कुछ थोड़ा सा परिवर्तन है इसमें। सुगंधित द्रव्य एवं विविध इत्रों में तीव्र रूचि रखने वाली, साधना शाम के पहर में की जाती है। इसकी साधना सौम्य है, यह शाम के समय में की जाती है। 

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रंजिनी अप्सरा मंत्र  

“ॐ ऐं रंजिनी मम प्रियाय वश्य आज्ञा पालय फट् ”

रंजिनी अप्सरा साधना विधि 


जिसमें साधक को  लिए आवश्यक है कि वह अपने साधना स्थल को भली-भांति सजा-संवार कर रखें। अगर आप चाहें तो आप कमरे में कर सकते हैं। इसके लिए कोई निर्जन कमरे में कर सकते हैं। कमरे में आपको एक केवड़े के पत्ते बिछा लेने हैं। केवड़े का जल का छिड़काव करें कमरे में जिससे कमरा थोड़ा सुगंधित रहे, क्योंकि उसको केवड़े की खुशबू बहुत पसंद है।

और इसमें हल्का रंग, हल्के हरे रंग का बहुत महत्व है। इसमें हरे रंग के कपड़े पहनें, यह शुभ रहेगा और जो कुछ भी रहेगा आपका, हरे कलर का वस्त्र है। दोस्तों, आपका कोई बंधन नहीं है। किसी भी प्रकार के वस्त्र पहन सकते हैं, लेकिन साफ-स्वच्छ होने चाहिए। 

आप पजामा-कुर्ता, पैंट-शर्ट, जो भी आप चाहें, पहन सकते हैं। और जैसे स्त्रियां चाहें, अपना श्रृंगारित होकर बैठ सकती हैं। अपना पूरा श्रृंगार करके बैठ सकती हैं। आसन आपका है और सामने एक बाजोट रखना है, मतलब लकड़ी का पटरा रखना है। 

उस पर आपको हल्का सा हरा, सॉरी माफ करना, हल्का सा हरा रंग का कपड़ा बिछाना है। और अगर वह कपड़ा रेशमी हो, तो बहुत अच्छा। और रेशमी हो तो उस पर चारों ओर गोटा लगा दें। इससे बहुत अच्छा माना गया है।

चंदन या फिर केवड़े की सुगंध वाली अगरबत्ती लगाएं, जिससे वातावरण को जो सुगंधित करेगा और रंजनी अप्सरा का आवाहन करना है। और प्रतिष्ठा का जो विशिष्ट उपाय है, सुगंधित रंजनी यंत्र को भोजपत्र पर या लकड़ी के बाजोट पर स्थापित करना है और जो मंत्र है, उसका 11 माला जप करना है। यंत्र पर किसी सुगंधित मतलब फूल की पंखुड़ियां बिखेर दें। 

जैसे बेला और हिना का इत्र या गुलाब की पंखुड़ियां, या चमेली का फूल हुआ, जो भी आपको चाहिए सुगंधित, उसकी पंखुड़ियां आप उस यंत्र पर बिखेर दें। और इतना ध्यान रहे कि इसमें दीपक की आवश्यकता नहीं है। जब मंत्र जप करते समय अप्सरा प्रकट हो, तो उसके साक्षात उपस्थित होने पर उसे कोई आभूषण भेंट करें। आभूषण ना हो तो आप उसे जो माला आपने रखी है, वह माला आपको पहना सकते हैं।

तो सुगंधित पुष्प के, जैसे गुलाब की और चमेली के फूल की माला आप उसको उसके गले में पहनाएं। और यह एक बार में ही सिद्ध हो जाएगी। इतनी ताकतवर शक्ति है यह। तो बहुत ही आसानी पूर्वक आपको पहली बार में सिद्ध हो जाएगी। 

लेकिन दोस्तों, उतावलापन नहीं होना चाहिए साधना में, इस चीज का विशेष ध्यान रखें। दिशा का कोई विधान नहीं है इसमें। और यह साधना केवल 5 दिनों की है।

और अगर किसी कारणवश आपका साधना में प्रकटीकरण नहीं हो पाए, तो इसलिए हताश ना हों। 5 दिनों की साधना है, जो सप्ताह के किसी भी दिन प्रारंभ कर सकते हैं। इसमें दिन का भी कोई बंधन नहीं है कि आप इस दिन से, किसी भी दिन प्रारंभ कर सकते हैं।

अनुभवी साधकों का यह कहना है कि वास्तव में अप्सरा साधना प्रथम बार में ही सिद्ध हो जाती है। मेरा मानना है कि रंजनी अप्सरा प्रथम बार में ही आपको सिद्ध हो जाएगी और हर एक कार्य आपका पूर्ण करेगी। 

तो जो भी साधक-साधिका इस साधना को लेना चाहते हैं, जल्द से जल्द संपर्क कर लें और अपने आने वाले जीवन की हर एक समस्या का समाधान इस साधना से पा सकते हैं। और आपकी जो रहेगी रंजनी अप्सरा, यह आप इसको मित्र के रूप में भी ले सकते हैं, अपनी प्रेमिका के रूप में भी ले सकते हैं, अपनी मां के रूप में ले सकते हैं, अपनी बहन के रूप में ले सकते हैं। 

तो मैं कहूंगा कि आप अगर अविवाहित हैं, आपकी शादी नहीं हुई है, तो प्रेमिका के रूप में रखें तो ज्यादा आपके लिए उत्तम रहेगी, अच्छे से कार्य करेगी आपके लिए। तो बाकी कोई जानकारी चाहिए तो चैनल पर दिए गए नंबर से संपर्क करें व्हाट्सएप पर। जय श्री महाकाल, जय श्री महाकाल

Apsara Sadhna anubhav अप्सरा संभोग क्यों करती है – अप्सरा कैसे करती है संभोग 💘 Apsara Sadhna

Apsara Sadhna anubhav अप्सरा संभोग क्यों करती है - अप्सरा कैसे करती है संभोग Apsara Sadhna Why does an Apsara mate - How does an Apsara mate

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Apsara Sadhna anubhav अप्सरा संभोग क्यों करती है – अप्सरा कैसे करती है संभोग 💘 Apsara Sadhna Why does an Apsara mate – How does an Apsara mate गुरु मंत्र साधना.com में आप सबका फिर से स्वागत है। देखिए आज का जो टॉपिक रहने वाला है क्या अप्सरा से संभोग किया जा सकता है? क्या अप्सरा संभोग करती है? ठीक है तो किस प्रकार करती है? तो इसी टॉपिक के बारे में आज मैं बात करने वाला हूं। देखिए ऐतिहासिक तथ्यों के मुताबिक पुराणों के मुताबिक ग्रंथों के मुताबिक अप्सरा से आप संभोग भी कर सकते हैं। अप्सरा से आप संतान भी हासिल कर सकते हैं। ठीक है

 

मतलब अप्सरा गर्भवती हो सकती है। ऐसा ऐतिहासिक तथ्य हमें मिलता है। जैसे विश्वामित्र जो ऋषि थे। ठीक है उन्होंने मेनका के साथ प्रेम करा और उससे एक बच्ची उत्पन्न हुई जिसका नाम शकुंतला था। शकुंतला के बारे में आप सबको पता है।

ठीक है तो इसी तरीके से आप अप्सरा को सिद्ध करके आप उनसे विवाह कर सकते हैं। विवाह करके आगे संतान भी प्राप्त की जा सकती है। जो अप्सरा से संतान की प्राप्ति होगी वह बहुत ही खूबसूरत संतान होगी और दैविक शक्तियों से संपन्न होगी।

तो यह है आप इसे कर सकते हैं संभोग और आगे संतान की इच्छा भी हासिल कर सकते हैं। कोई बहुत बड़ी बात नहीं है। ठीक है? इतिहास में चीजें आई हैं तो इसका मतलब हम शादी भी कर सकते हैं और संभोग भी कर सकते हैं। ठीक है अब टॉपिक यह आता है कि अप्सरा किसके साथ संभोग करेगी और किसके साथ शादी करेगी। ठीक है

तो वह व्यक्ति भी ऐसा होना चाहिए जिसके साथ वो प्रेम कर सके या उसके साथ वो संभोग कर सके। देखिए यह चीजें एक तो होता है बंदे के कर्म  चक्र । ठीक है जैसे अगर आपका पिछले जन्म में कुछ भक्ति है जिससे आपका जो ओरा है काफी स्ट्रांग है। ठीक है

तो आपकी ओर अप्सरा आकर्षित हो सकती है। ठीक है दूसरा जो ब्रह्मचर्य का पालन करता है। ठीक है वह एक तेजस्वी व्यक्ति होता है। तेज से परिपूर्ण होता है। उसकी ब्रह्मचर्य का भी पालन करता है। और जो एक जो धार्मिक चीजों को भी फॉलो करता है। भगवान का पूजा पाठ भी करता है और ब्रह्मचर्य का पालन भी करता है।

तो उसकी ओर भी अवसर आकर्षित हो सकती है। ठीक है? क्योंकि आपका जो तेज है उसी से ही शक्तियां मोहित होती हैं। आपके ओरा से ही शक्तियां मोहित होती हैं। ठीक है? अगर आपका ओरा नहीं है तो तेज नहीं है तो कौन सी अप्सरा आपकी ओर मोहित हो सकती है? ठीक है

अप्सरा उन्हीं साधकों की ओर मोहित होती हैं जो तेजस्वी होते हैं। ठीक है? जिनका तेज होता है ब्रह्मचर्य का पालन करोगे तो शरीर में तेज उत्पन्न होगा ओज उत्पन्न होगा उसी ओज से जो अप्सरा है आपकी ओर आकर्षित हो गया ठीक है तो यह चीज है तो आप तेजस्वी बनिए ठीक है

अप्सरा के साथ आप विवाह भी कर सकती हैं और जो आपको चाहिए वह सारा कुछ हासिल होगा अब दूसरी चीज और आती है ब्रह्म ब्रह्मचर्य के पालन के साथसाथ शराब, मीट, अंडा जो ये चीजें हैं, गुटका लोग खाते हैं, बीड़ी पीते हैं। तो ये चीजें भी छोड़नी पड़ेगी। ठीक है

केवल आपने वो ब्रह्मचर्य का पालन ही नहीं करना है। साथ में यह सारी चीजें छोड़नी है। साफ सुथरे रहना है। ठीक है ब्रह्मचर्य का पालन करना है। आपकी ओर अप्सरा जरूर आकर्षित होगी। ठीक है। अप्सरा की दो तरीके से साधना होती है। एक तो अप्सरा को अपनी ओर वशीकरण के मंत्रों से वशीकरण किया जाता है। ठीक है

वो साधना अलग है आकर्षित करने वाली। दूसरी साधना है केवल आप मंत्रों से उसको जाप कर रहे हैं। ठीक है एक तरीके से वह आराधना होती है। मंत्रों से आप जाप करते हो। अब इसमें क्या रहता है अप्सरा का फैसला रहता है कि आपके पास आए या ना आए। ये दो तरीके की साधनाएं होती हैं। इसको अप्सरा का वशीकरण आकर्षण करना है तो उसकी अलग विद्या है।

जिसको अप्सरा की आराधना करनी है तो उसके लिए अलग विद्या है। ठीक है? दोनों ही लाभदायक होती हैं। जो आकर्षण वाली है वह थोड़ा सा जल्दी इफेक्ट करती है और अफरा को आना ही पड़ता है। तो आज के लिए बस इतना ही। अगर कोई आपका सवाल है नीचे कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं। फोन नंबर भी दे रखा है तो फोन भी कर सकते हैं। जय श्री महाकाल।

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apsara vashikaran sadhna अप्सरा वशीकरण साधना रहस्य ph 85280 57364 गुरुमंत्र साधना कॉ में आप सब का स्वागत है मैंने तंत्र के ऊपर बहुत सारी साधना बना चुका हूं कुछ साधकों का यह प्रश्न था कि हम अपसरा साधना करते हैं और उसमें ना तो कुछ अनुभव हो रहे हैं ना तो प्रत्यक्षीकरण हो रहा है  साधना भी विधिवत तरीके से की जा रही है फिर भी उसमें सफलता प्राप्त नहीं हो पा रही है 

इस विषय के बारे में बताएं ऐसा हमें बहुत सारे मैसेज प्राप्त होते हैं बहुत सारे फोन कॉल आते हैं कि हमार हमें यह समस्या का सामना करना पड़ रहा है अपसरा  कोई भी हमें प्रत्यक्ष नहीं हो रही है

 हम कई बार सवा सवा लाख के अनुष्ठान कर चुके हैं फिर भी वह शक्ति हमारे सामने उपस्थित नहीं हो पा रही है तो ऐसे में हम क्या करें तो उन साधकों के लिए मैं एक चीज बोलूंगा अगर कोई शक्ति आपके सामने प्रत्यक्ष नहीं हो पा रही है प्रत्यक्षीकरण नहीं हो रहा है तो आप उस शक्ति का वशीकरण करो एक वशीकरण एक बेटर सलूशन हो सकता है 

किसी भी शक्ति को अगर हम वश में कर ले तो वह हमारे मुताबिक ही काम करती है आप किसी भी चीज को वश में कर सकते हो वशीकरण का यह फायदा होता है आपके अधीन रहते हुए सब कार्य करती है

 उसको मजबूर होकर ही आपके सामने उपस्थित होना पड़ेगा क्योंकि वह शक्ति आपके वश में है वशीकरण आकर्षण विद्या जो है अप्सराओं के ऊपर  के ऊपर की जा सकती है 

जिससे वह जल्दी आपके सामने उपस्थित होंगे वशीकरण विद्या आकर्षण विद्या अप्सरा  के ऊपर की जा सकती है जिससे आपके सामने वो जल्दी उपस्थित हों और आपके सभी कार्य करेंगे

 किसी शक्ति का वशीकरण की विद्या जो है बहुत कम साधकों को पता है किस तरीके से वशीकरण करना है शक्ति का तो बहुत कम साधक इन चीजों के बारे में जानते हैं अगर कोई साधक कर लेता है तो उसके सामने वह शक्ति उपस्थित होगी इसमें कोई भी दोराय नहीं है कैसे भी शक्ति क्यों ना हो अफसरा हो यनी हो उसको आना ही पड़ेगा

 आपके  सामने तो यह साधना जो है आकर्षण वाली मैं तो आपको करवा सकता हूं अगर कोई साधक करना चाह रहा है तो दिए गए नंबरों के ऊपर कांटेक्ट कर सकते तो आप इस साधना को कर सकते हैं देखो जो वशीकरण वाली किसी विद्या को वश में करने वाली जो साधनाए होती है थोड़ी कठिन होती हैं पर इनका रिजल्ट बहुत ही अच्छा मिलता है 

उस शक्ति को विवश होकर आपके सामने आना ही पड़ेगा दुनिया की कोई ताकत नहीं उसको रोक पाएगी  ठीक है दूसरी चीज क्या है इसमें दूसरी चीज के ऊपर बात करते हैं 

कुछ लोग कहते हैं कि हम क्रोध भैरव  की शक्ति चलाएंगे जिसके माध्यम से शक्ति को आपके सामने आना पड़ेगा तो मैं आपको यही कहूंगा क्रोध बैरव की जो साधना है किसी शक्ति के ऊपर चलाने से व शक्ति आपसे बिगड़ सकती है ठीक है हो सकता है वो शक्ति जबरदस्ती वाला काम होता है ठीक है 

आप किसी को जबरदस्ती अपने पास ला रहे हो ठीक है तो शक्ति तो आ जाएगी पर उसमें कहीं पर भी कोई भी गलती होगी तो शक्ति आपको छोड़ेगी नहीं ठीक है तो इसीलिए क्रोध बैरव की जो शक्ति का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए शक्ति के ऊपर ठीक है शक्ति तो आती है पर दूसरी बात यह हो जाती है तो आपको साइड इफेक्ट देकर जाती है 

तो क्रोध भैरव  की जो साधना करवाने वाला साधक आपको आसानी से मिलेगा भी नहीं करवाते हैं तो आधी अधूरी चीजें करवाते हैं तो उसमें आपको प्रॉब्लम हो सकती है तो इसीलिए सजेशन मैं यह देता हूं कि आप वशीकरण की विद्या का इस्तेमाल करते हुए अप्सरा  को वश में करो और अपने कार्य करवा यह तरीका बेस्ट है ठीक है दूसरे तरीके क्या है जबरदस्ती वाले वह फायदेमंद नहीं है 

उसमें साइड इफेक्ट हो सकते हैं पर इसमें कोई साइड इफेक्ट नहीं क्योंकि आप उसको प्रेम से आकर्षण से उसको अपने वश में कर रहे हो तो यह चीज बुरी नहीं है प्रेम से ही किसी शक्ति को पाना चाहिए तो व प्रेम क्या है 

वशीकरण विद्या से आप वशीकरण विद्या का इस्तेमाल करते हुए उस साधना को कर सकते हैं अगर आपका कोई भी सवाल है इस साधना के संबंधित तो आप दिए गए नंबरों के ऊपर कॉल कर सकते हैं जय श्री महाकाल

मधुमती विद्या – साधना सबसे बड़ी आकर्षण वशीकरण की साधना ph.8528057364

श्री विद्या एक दिवसीय साधना – ( एक दिन में आपार धन दौलत की साधना ) एक दिन की साधना से सारे सपने पूरे होंगे ph .85280 57364

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 apsara sadhna अप्सराएं साधना जो आपको अमीर बन सकते गुरु मंत्र साधना। कॉम में स्वागत है आज मैं आपको ऐसे अप्सरो के बारे में जानकारी जो आप को धन और समृद्ध बना देगी किसी भी प्रकार की कमी नहीं होगी आप आपार  धन दौलत हासिल कर सकते हो कुछ एतिहासिक  तथ्य भी प्रदान करुगा जिसे आपको मोटिवेशन भी प्रपात होगा। 

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कौंन है अप्सरा जो आपको समृद्ध बना सकती है उर्वशी अप्सरा ,रतनमाला अप्सरा , नाभि दर्शना अप्सरा यह अप्सरा को सिद्ध कर आप करोड़पति बन सकता है इस के इलावा और भी अप्सरा जो आपको समृद्ध बना सकती है पर इतहास में यह अप्सरा का ही जिक्र  है। 

उर्वशी अप्सरा साधना को  विश्वामित्र के बाद उन  के  शिष्य भूरिश्रवा, चिन्मय, देवसुत,गन्धर, और यहां तक कि देवी विश्रा और रत्नप्रभा ने भी उर्वशी सिद्ध कर आपार धन दौलत को प्रपात कर जीवन के सम्पूर्ण भोगों का भोग किया। 

इतिहास साक्षी है कि स्वामी शंकराचार्य ने उर्वशी अप्सरा साधना को सम्पन्न कर अपने शिष्य पद्मपाद को अतुलनीय वैभव का स्वामी बना। 

नाभि दर्शना साधना से महाकवि कालिदास जी एक राजापुरष की तरह अपना जीवन जीते थे ऐश्वर्य, विलास, उमंग, ओज, प्रभाव, वर्चस्व, कला आदिराज़ अप्सरा साधना ही थी नाभि दर्शना अप्सरा साधन से ही उन को धन दौलत प्रपात होता था राजा भोज भी इस रहस्य को भली भाँती जानते थे 

रतनमाला अप्सरा इस अप्सरा को मैंने अपने शिष्य गौरव को करावा  था जिस को सिद्ध कर वो आपार धन दौलत को प्रपात करा इन साधना को बारे में मैंने वीडियो बना रखा है इन सब साधना की जानकारी के वीडियो के  लिंक नीचे मिल जायेगा आज के लिए  बस इतना ही जय श्री महाकाल 

 

लीलावती अप्सरा साधना lilavati Apara sadhna ph.85280 57364

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लीलावती अप्सरा साधना lilavati Apara sadhna ph.85280 57364 आज साधना को मैं देने जारहा हूं मैं पूर्ण भौतिक सुख साधनों केलिए जान जाति है और शीघ्र ही फलिबुत होने वाली है साधना बहुत ही शक्तिशाली और संपन्न कहीं जाति है

इस साधना को संपन्न करने से जीवन में हर प्रकार का ऐश्वर्या और सुख साधन प्राप्त होता है जो की सहजता से मिलने लगता है साथ ही इस साधना को करने से व्यक्ति में आकर्षण शक्ति उत्पन्न होने लगती है किसी भी कार्य के लिए जय तो उसे निरसा नहीं होना पड़ता अर्थात उसके प्रत्येक कार्य में सिद्धि प्राप्त होने लगती है

प्रत्येक कार्य बने लगता हैं प्रत्येक गृहस्ती व्यक्ति को तो एक बार जीवन में इस साधना को अवश्य ही संपन्न करना चाहिए जिससे की ग्रस्त सुख का पूर्ण आनंद लेते हुए जीवन व्यतीत कर सके यदि आप देखने में सुंदर नहीं तो आपको भी ये साधना निश्चित करनी चाहिए क्योंकि साधना को करने से आपके अंदर आकर्षण शक्ति का विकास होगा और आपके प्रत्येक कार्य बने लगेंगे यदि कोई व्यक्ति हैं भावना से ग्रस्त है कोई उसको पूछता नहीं है

समाज में या परिवार में उसकी कोई वैल्यू नहीं है जिसके करण वह हैं भावना ग्रस्त हो गया है तब ऐसे में इस साधना को संपन्न कर स्वयं में आकर्षण शक्ति को जगाया जाता है और लोगों के बीच में अपने आप को लोकप्रिय बनाने का साधन प्राप्त होता है और जिससे व्यक्ति की सभी के बीच में पूछ होने लगती है वह सभी का chheta बन जाता है और साथ ही इस साधना के प्रभाव से धीरे-धीरे आपकी रंग रूप में भी निखार आने लगता है

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लीलावती अप्सरा साधना मंत्र:– lilavati Apara sadhna ph.85280 57364

।। ॐ हूं हूं लीलावती कामेश्वरी अप्सरा प्रत्यक्षं सिद्धि हूं हूं फट् ।।

lilavati Apara sadhna अप्सरा साधना साधना विधि 

बात करते हैं तो पीले या लाल पूजा के समय देवी को अर्पण करना है चित्र रखे उसको या फिर यंत्र रखें उसको पुष्प हार आपको रखना है गुलाब के पुष्प का एक हार  आपको रखना है दो हर प्रतिदिन रखिएगा एक हर पूजा के समय देवी को अर्पण करना है

चित्र रखे उसको या फिर यंत्र रखें उसको दूसरा हर यदि इस साधना कल के दौरान जब भी देवी प्रकट होगी उसी दिन आपको अर्पण कर देना है साधना का विधान मूलतः है चंद्र ग्रहण के समय में अत्यधिक श्रेष्ठ बताया गया है 21 या 41 दिन की साधना भी है तो आज हम बात करें 21 दिवसीय साधना किस प्रकार संपन्न कर रहे हैं के साथ साथ दूध से बना हुआ नैवेद्य आपको रखना है

या फिर पंचमेवा आप रख सकते हैं जल का एक पत्र आपको रखना है और इसके अतिरिक्त घी का दीपक आपको लगाना है दीपक आप प्रयोग कर सकते हैं होगा यदि घी के दीपक का प्रयोग करते हैं और वस्त्र कि यदि बात करते हैं तो पीले या लाल रंग के दोनों ही प्रकार के आसान वस्त्र आप प्रयोग कर सकते हैं आसान उनका हो कंबल का हो आपका भी और चौकी पत्ते पर बिछड़ेंगे

वह भी लाल या पीले रंग के ही होने चाहिए यह थी सामग्री जो इस साधना काल में आपको प्रयोग करनी है चलिए बात करते हैं किस प्रकार से साधना को संपन्न करना है किसी भी शुभ योग सिद्ध मुहूर्त में जिस दिन शुक्रवार पड़ता हो उसे दिन आपको यह साधना आरंभ करनी है रात्रि 10:00 के बाद में उत्तर मुख होकर के इस साधना को संपन्न किया जाना है

पहले आसन के ऊपर पेट के ऊपर चौकी पर कोई भी चीज जो आपके पास है उसके ऊपर लाल या पीला जो वस्त्र अपने लिए है उसे बढ़ा दीजिए उसके ऊपर देवी का प्राण प्रतिष्ठित यंत्र स्थापित कीजिए चित्र है तो चित्र विस्थापित कीजिए और साथ ही एक संकल्प हेतु और साथ में इस जल का क्या करना है उसका प्रयोग भी इस साधना काल में बताया जाएगा संकल्प लेना है

उसके बाद संकल्प लीजिए दाहिने हाथ में जल लेकर के अपने ऊपर जल चढ़ाना है यंत्र आदि के ऊपर जल छिड़कने जो पूजन सामग्री उसे पर जल चढ़ाना है यही शुद्ध आज मैंने क्योंकि अनेकों बार बता चुका हूं फिर भी प्रश्न आता है की शुद्धि आंचल होता क्या है के बाद में संकल्प लेना है संकल्प में अपना नाम अपना गोत्र उसे दिन करती थी वाले नक्षत्र बोलना है से आप साधना सर्व प्रकार की सिद्धि या कामना हेतु बोलना जो की श्रेष्ठ रहेगा साथ ही इस साधना को प्रेसी के रूप में प्रेमिका के रूप में संपन्न करना है

लेकिन प्रेमिका के रूप में संपन्न करना श्रेष्ठ माना गया है तो जवाब साधना में संकल्प ले तो उसे समय कम ना करें कि मैं लीलावती अप्सरा को अपनी प्रेमिका के रूप में प्रीति के रूप में संपन्न करना का चाहता हूं सिद्ध करना चाहता हूं और अपने सभी मनोरथ की पूर्ति हेतु यह साधना कर रहा हूं इस प्रकार से अपने संकल्प लेना है

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‘सुरसुन्दरी’ यक्षिणी साधना sursundari yakshini ph.8528057364

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Divyangana sadhna vidhi –Divyangana apsara mantra जय हो ओम नमः शिवाय सभी श्रोताओं का मैं हार्दिक स्वागत करता हूं प्रिया साधको आप सभी कुशलपूर्वक रहें यही मेरी कामना होती है और गुरुदेव भगवान शिव का आशीर्वाद आप सब पर हमेशा बनी रहेगी ऐसी मेरी कामना है आज इस post को लाने का तात्पर्य एक एक अप्सरा साधना और apsara का मंत्र और उनकी जो भी labh आप सबको प्राप्त हो सकती है

उस विषय में हम लोग चर्चा करेंगे जानेंगे आज दिव्यांगना अप्सरा के बारे में हो चुकी दिव्यांगना अप्सरा के ऊपर यह पहला वीडियो है जब मैं आप सबके समक्ष इस अप्सरा के बारे में इस गोपनीय मंत्र को उजागर करने जा रहा हूं

अतः इस अप्सरा के लाभ और इस अप्सरा का वर्णन कि वह कैसी है कैसी दिखती है सारी बातें करेंगे और अंतत उस दिव्य मंत्र को भी जानेंगे कि उस मंत्र को कैसे उपयोग करना है

जिससे आप अपने जीवन को धंय धन बना सके दिव्यांगना दूसरा मैं उन सभी श्रोताओं के लिए उन सभी साधक साधिकाओं के लिए जरूरी है जो आज के समय में बहुत तरह की दिक्कतों से प्रॉब्लम से गुजर रहे कि एक सबसे बड़ी बात है कि आज के समय पर बहुत लोग विश्वास भी नहीं करते होंगे

इन सारी चीजों पर और बहुत सारे लोग जो है उन्हें ऐसा भी लगता होगा कि संभव नहीं है अब जरा को सब के बस की बात नहीं है सिद्ध कर पाना लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है यह गलत बात अप्सरा कोई भी साधक या साधिका सिद्ध कर सकता और जो सबसे बड़ी बात मैं कहता हूं कि अप्सरा जो है

वह आप अगर आप से सिद्ध ना भी हो अगर आप उतना समय नहीं दे पाते हैं उतना नियम पालन नहीं कर पाते लेकिन फिर भी अगर आप अप्सरा के मंत्र जप को करते हैं तो भी मैं करता हूं कि आपकी कोई भी मन की इच्छा जो भी आपके मन में इच्छा रहेगी आप देखोगे कि धीरे-धीरे आपकी इच्छा पूरी होती जाएगी अब दूसरा जो है आपकी वह इच्छा पूरी कर देती है

अब आज के समय में और देखता हूं बहुत सारे श्रोताओं के कमेंट भी आते हैं बहुत लोग परेशान है बहुत-बहुत रख्या डिक रूप से प्रॉब्लम से इस लिए मैं इस तरह की साधना है लाता हूं और जिसमें से अप्सरा साधना एक सबसे सरल विशिष्ट साधना होती है

मंत्र बहुत अपने आप पर बहुत अद्भुत होते हैं मंत्र में बहुत शक्ति होती है इसलिए मैं कहता हूं कि इस यह सारे मंत्र को अगर आप मंत्र जप भी करोगे तो आपके मन की जो भी छाए हैं वह देखोगे आपके स्वत ही वह पूर्ण होगी ही होगी वह धीरे-धीरे आपको खुद प्रतीत होने लगेगा कि आपके मन में जो भी चाहती वह पूरी होंगी

चाहे वह इच्छा आपको किसी को पाने की हो अगर या कोई जॉब पाने की व पढ़ाई में अच्छे अकरने की वह चाहे घर में किसी कला से रिलेटेड कोई आपको दिक्कत हो या किसी को केस मुकद्दमा के दिक्कतें हो किसी को व्यापार के दिक्कतें हो या जिनको मिश्रा बहुत तरह के रोग बीमारियों की दिक्कत हो जो भी दिक्कतें हैं वह सारी चीजें आप सब  पूरी कर देती है  और ऐसा होता तो पको यह सारी अप्सराओं  की साधना अगर कर सके तो बहुत अच्छा

साधना नहीं भी कर सके तो नित्य अगर आप जितना हो सके एक माला दो माला भी अगर संकल्प लेकर उस मंत्र का जप भी करेंगे तो आपकी इच्छा पूरी हो जाएगी कोई भी एक इच्छा आप हाथ में जल से  संकल्प करें और संकल्प करके उनको बोल के वह आप छोड़ दें गिरा दें और उसके बाद आपको मंत्र जप करें आप देखोगे कि आप कोई भी जो इच्छा रखोगे वह की पूरी हो जाएगी

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लेकिन अप्सरा साधना में क्या होती है कि एक इच्छा नहीं आपके मन में जो भी बाहर रहते हैं ना वह सारी चीजें आपको मिल जाती है और मैं इसी सब में एक सरल और सबसे सरल कर सकते हैं और जल्दी सिद्ध हो जाने वाली apsara है चीज जो है दिव्यांग अनाप-शनाप कि अप्सरा के बारे में अभी तक तो हम लोगों ने जाना है कि अप्सरा  चाहे वह उर्वशी हो चाहे वह नाभि दर्शन आप दूसरा हो चाहे  चाहे तिलोत्तमा अप्सरा की भी बात हम लोगों ने की है

रत्नमाला अप्सरा की बात की है तो यह सारी अब जरा इनके अलावा भी जैसे  रंभा अप्सरा है और भी जो भी ऑप्शन है सारी अप्सराओं का काम यही है कि अपने साधक और साधिकाओं की हर इच्छा को पूर्ण करना उन्हें खुश रखना  जब साधक के जीवन में उतरती है तो प्रत्येक साधक की या साधिका के जीवन में आनंद का अनुभव आ जाता है आपकी कल्पना शक्ति ऐश्वर्य संगीत कला सौंदर्य माधुर्य यश कीर्ति का संचार आपके अंदर हो जाता है और ऐसी ही अब सारी चीजों का संचार आपके शरीर में हो जाए

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इस मंत्र  का जाप पूर्णिंमा से अगली पूर्णमा तक करे रोज 21 माला जप करें  गुरु के मार्गदर्शन में करें  अप्सरा की पूजा भी नित्य करें  अप्सरा को मौसमी फल का भोग लगाए कमरे में गुलाब का अतर का छिड़काव  करें  

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tilottama apsara sadhna तिलोत्तमा Tilottama अप्सरा साधना से धन-ऐश्वर्य और सुंदरता प्रपात होती हैं benefits of tilottama apsara Sadhana तिलोत्तमा Tilottama एक अत्यंत सुंदर अप्सरा थी जो स्वर्ग में निवास करती है । उसकी सुंदरता को लेकर वेदों में 108 अप्सराओं में उन्हें सबसे सुंदर माना गया है। पुराणों के अनुसार, तिलोत्तमा Tilottama की रचना ब्रह्माजी ने की थी जब उन्होंने सम्पूर्ण सृष्टि की सुन्दर वस्तुओं से तिल-तिल भरकर उसे बनाया। इससे उसका नाम तिलोत्तमा Tilottama पड़ा तिलोत्तमा Tilottama का अर्थ ,तिलोत्तमा Tilottama अप्सरा फोटो ,तिलोत्तमा Tilottama किसकी रचना है,तिलोत्तमा Tilottama अप्सरा की कहानी

अप्सराएं, भारतीय पौराणिक साहित्य में सुंदरता और दिव्यता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत होती हैं। इनमें से एक महत्त्वपूर्ण अप्सरा है – तिलोत्तमा Tilottama । इस लेख में हम जानेंगे कि तिलोत्तमा Tilottama अप्सरा की साधना क्यों और कैसे की जाती है और इससे कैसे आप सुख और समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं।

तिलोत्तमा Tilottama अप्सरा का प्रत्यक्षीकरण एक श्रमसाध्य कार्य है, और इसमें मेहनत बहुत ही जरुरी है। इसके बाद, जीवन में कोई भी दुर्लभ नहीं रह जाता।

इसके साथ ही, तिलोत्तमा Tilottama अप्सरा अप्रत्यक्ष रूप से भी साधक की सहायता करती हैं। साधना की शुरुआत होते ही धीमी धीमी खुशबू का प्रवाह होता है, जो तिलोत्तमा Tilottama के सामने होने की पूर्व सूचना के रूप में है।

तिलोत्तमा Tilottama साधना करने से साधक को सभी सुखों की प्राप्ति होती है। यह एक अद्वितीय अनुभव है जो साधक को आत्मा के साथ जोड़ता है।

साधना करते समय खुशबू का अनुभव साधक को धीरे-धीरे समृद्धि की दिशा में मोड़ने लगता है। यह खुशबू तिलोत्तमा Tilottama के सामने होने का सूचक होती है और साधना की सफलता की पूर्व सूचना देती है।

यहां महत्त्वपूर्ण है कि खुशबू का मौजूद होना तिलोत्तमा Tilottama साधना की सफलता का सूचक नहीं होता, बल्कि यह भी एक ऊँची भौतिकीकृत ऊँचाई को दर्शाता है।

अप्सरा के प्रत्यक्षीकरण का पूरा कार्यक्रम एक श्रमसाध्य है, और इसमें मेहनत बहुत ही जरुरी है। एक बार इस साधना के बाद कुछ भी दुर्लभ नहीं रह जाता, इसमें कोई दोराय नहीं है।

इसमें मेहनत का महत्वपूर्ण स्थान है, और साधक को अपनी उत्साही मेहनत से सफलता प्राप्त करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

सामान्यतः, अप्सरा साधना गोपनीयता की श्रेष्णी में आती है, लेकिन इसे साधारित व्यक्ति भी कर सकता है। इसमें किसी विशेष ज्ञान या पंडित तांत्रिक की आवश्यकता नहीं है।

इन साधनाओं की खास बात यह है कि इन्हें साधारित व्यक्ति भी कर सकता हैं, मतलब उसको पंडित तांत्रिक बनाने की कोई अवश्यकता नहीं है।

 

तिलोत्तमा Tilottama अप्सरा की कहानी

तिलोत्तमा Tilottama अप्सरा की कहानी
तिलोत्तमा Tilottama अप्सरा की कहानी

तिलोत्तमा Tilottama की कई कथाएं पुराणों में मिलती हैं, जिनमें से एक कथा यह है:

कश्यप ऋषि के दो पुत्र थे, हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष। हिरण्यकशिपु के वंश में निकुंभ नामक एक असुर उत्पन्न हुआ था, जिसके दो पुत्र सुन्द और उपसुन्द थे। इन दोनों बड़े शक्तिशाली थे और उन्होंने त्रिलोक्य विजय की इच्छा से विन्ध्यांचल पर्वत पर तप किया। इस तप से प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने उन्हें वर मांगने का कहा, लेकिन उन्होंने अमरत्व का वर मांगा।

ब्रह्मा ने इसे देने से इनकार कर दिया, उन दोनों ने सोचा कि वे दोनों भाई कभी आपस में नहीं लड़ते। वे हमेशा प्यार से रहते हैं और दोनों एक-दूसरे से बेहद प्यार करते हैं। उन्हें पूरा विश्वास था कि वे कभी भी एक-दूसरे के ख़िलाफ़ कुछ नहीं करेंगे। इसीलिए उन्होंने यह सोचकर भगवान ब्रह्मा से यह वरदान मांगा कि इस संसार में एक-दूसरे को छोड़कर कोई भी उन्हें मार न सके।

। इसके बाद सुन्द और उपसुन्द ने त्रिलोक्य में अत्याचार करना शुरू किया, जिससे सभी देवता और देवी बहुत दुःखी हो गए। तब ब्रह्मा ने तिलोत्तमा Tilottama नामक अप्सरा को सृष्टि किया और उन्हें दोनों भाइयों को आपस में लड़ाने के लिए भेजा।

फिर उन्होंने वरदान पाकर सुन्द और उपसुन्द को अपने प्रेम में लिपटा रखा, ताकि वे कभी एक दूसरे के खिलाफ कुछ ना करें। लेकिन दुर्वासा ऋषि के शाप के कारण, तिलोत्तमा Tilottama बाण की पुत्री बनी और विशेष मास में सूर्य के रथ पर रहने लगी।

इसी प्रकार, तिलोत्तमा Tilottama की एक और कथा विवरण करती है कि वह कश्यप और अरिष्टा की कन्या थी, जो पूर्वजन्म में ब्राह्मणी थी और उसे स्नान के अपराध में अप्सरा होने का शाप मिला था।

तिलोत्तमा Tilottama की और एक कथा है जो कहती है कि उसका जन्म ब्रह्मा के हवनकुंड से हुआ था। इस कथा के अनुसार, ब्रह्मा ने तिलोत्तमा Tilottama को सृष्टि के लिए सुंदर वस्तुओं में से तिल-तिल भर लिया और उससे इस अप्सरा की रचना की। इस कारण उसका नाम तिलोत्तमा Tilottama पड़ा।

तिलोत्तमा Tilottama ने ब्रह्मा के आदेश पर सून और उपसुन्द के पास गई और वहां उनके बीच विवाद बढ़ा दिया। दोनों भाई उसे पाने के लिए आपस में लड़ने लगे और उस लड़ाई में दोनों ही भाई मारे गए। इस प्रकार, तिलोत्तमा Tilottama की यह  कथा है 

तिलोत्तमा Tilottama की कई रूपांतरण कथाएं हैं, लेकिन उनमें से एक कथा कहती है कि उसे दुर्वासा ऋषि के शाप से बाण की पुत्री बना दिया गया था। इस शाप के बाद तिलोत्तमा Tilottama को विशेष मास में सूर्य के रथ पर रहना पड़ता था।

तिलोत्तमा Tilottama की कथाएं पुराणों में रची गई हैं और इनमें उसकी भक्ति, सौंदर्य, और प्रेम की महत्ता का वर्णन है। इसके जीवन कथाओं से हमें सीखने को मिलता है कि कैसे अद्भुतता और सुंदरता के साथ-साथ दुःख और भीषणता का सामना करना हो सकता है।

तिलोत्तमा Tilottama साधना मंत्र 

ईं श्रीं श्रीं श्रीं तिलोत्त्मा श्रीं श्रीं श्रीं ईं स्वाहा

तिलोत्तमा Tilottama साधना विधि 

साधना करने से पहले साधक को स्नान करना जरुरी है, और यदि वह स्नान करने में असमर्थ है, तो धोकर, धुले वस्त्र पहनकर, साधना शुरु कर सकता है।

रात में ठीक 10 बजे के बाद साधना शुरु करना उत्तम है, और रोज़ दिन में एक बार स्नान करना अत्यंत आवश्यक है।

साधना करते समय साधक को दिन में एक बार स्नान करना चाहिए, और वह साफ और शुद्ध वस्त्र पहने हुए होना चाहिए।

साधना में अप्सरा, गुरु, धार्मिक ग्रंथों और नैतिकता के प्रति सम्मान और आदर होना चाहिए।

साधक को यह ध्यान में रखना चाहिए कि साधना का समय एक ही रखना चाहिए और वह नियमित रूप से साधना करना चाहिए।

सामग्री:

  1. तिल (सीसम) के बीज
  2. फूल, चांदन, कुमकुम
  3. गंध (सुगंधित तैल)
  4. अद्भुत (आभूषण)
  5. धूप और दीप
  6. पूजा की थाली
  7. प्रासाद (फल, मिठाई)

पूजा विधि:

  1. शुद्धि का संकल्प: पूजा करने से पहले, मन से शुद्धि का संकल्प लें और अपने उद्देश्य का दृढ़ निर्धारण करें।
  2. पूजा स्थल स्थापना: एक शुद्ध और सुरक्षित स्थान पर पूजा स्थल स्थापित करें।
  3. तिलोत्तम की मूर्ति पूजा:  यंत्र  के सामने बैठें। उसको फूल, चांदन, कुमकुम, गंध, और अद्भुत से सजाएं।
  4. मंत्र जप: तिलोत्तम के नाम का मंत्र जप करें। आप अपनी भक्ति या गुरुदेव के द्वारा सुझाए गए मंत्र का चयन कर सकते हैं।
  5. आरती: तिलोत्तम की आरती गाएं और दीप और धूप के साथ पूजा को समाप्त करें।
  6. प्रासाद: फल, मिठाई, और अन्य प्रसाद साधक के लिए रखें।
  7. आत्मा समर्पण: पूजा के दौरान और उसके बाद, अपनी आत्मा को अप्सरा  के साथ समर्पित करें और उसकी कृपा का आभास करें।

 पूजा में आदतन श्रद्धा और पवित्रता के साथ बैठें और इसे एक आनंदमय और सकारात्मक अनुभव किसी को  न बताए 

क की माला से 51 माला जपे और ऐसा 11 या 21 दिन करनी हैं। बिना गुरु आज्ञा से ही अप्सरा साधना करें। इस के लिए यंत्र माला की जरूरत होगी वह हम से  प्रपात कर सकते है  किसी भी  मार्ग दर्शन के लिए करें  फ़ोन नंबर 8528057364 

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kamekshi apsara sadhana कामाक्षी अप्सरा साधना – सबसे जल्दी सिद्ध होने अप्सरा  गुरु मंत्र साधना में आपका हार्दिक स्वागत है। आज मैं एक ऐसे अप्सरा की जानकारी देना वाला हु जो अप्सरा आपकी ज़िंदगी बदल सकती है।  इस अप्सरा को सिद्ध करने के बाद आपकी ज़िंदगी आपार धन दौलत मान सामान  की कोई कमी नहीं होगी आपको आपार धन दौलत सुख समृद्धि की कोई  कमी नहीं रहेगी।

इस अप्सरा को सिद्ध करने के पश्चात् आप को कभी भी वशीकरण की साधना या किसी भी प्रकार के टोटके को करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्युकी यह अप्सरा कामदेव की अप्सरा है। कामदेव वशीकरण आकर्षण देवता  है। 

इस साधना को करने के पश्चात् आप के भीतर आक्रषण  की शक्ति प्रपात होगी। जिस के बाद आप की और सब लोग अकृषित होंगे जो लोग आपको पसंद नहीं करते है आप को करने लगेंगे। आप की वाणी और शरीर के भीतर कामुक और वशीकरण शक्ति प्राप्त हो जाएगी।

फिर आप किसी को भी जो काम बोलोगे आप के काम को मना  नहीं कर सकता चाहे वो व्यक्ति कितना मंत्री राज मंत्री कोई भी हो जहां जाओगे सब लोग आप के अधीन हो जाएगे। आप किसी से भी इस साधना से धन लाभ ले सकते है।

अगर आप किसी सरकारी नौकरी की तयारी कर रहे है नहीं लग रही है। तो यह साधना करने  के पश्चात् लग जाएगी अगर दुकान पर ग्राहक नहीं आ रहे है।  काम डप पड़ा काम निश्चित ही चलेगा बहुत ग्राहक आएगे आप संभाल नहीं पाएँगे।

काम का संबध मूलाधार चक्र से है जब मूलाधार चक्र संबध धन दौलत से है जब यह चक्र     ब्लॉक हो जाता है तब आप के  धन ऐश्वर्य के सब रास्ते  बंद  हो जाते है। जब यह अप्सरा की साधना करते हो तो आपके धन ऐश्वर्य के रास्ते अपने आप खुल जाते है।

अकस्मात धन प्राप्त होता है जिसे के लोटरी सट्टे गाड़ा धन शेयर  मार्किट अदि से अचानक लाभ हो सकता है ,या पुरानी कबाज़ी  ज़मीन प्राप्त हो सकती है या अचानक से  सराकरी  प्राप्त हो सकती है । यह अप्सरा आपको भूत भविष्य का ज्ञान देती है।

इस के इलावा जैसे को लड़का लड़की से प्रेम करता है पर दूसरे और से प्रेम नहीं है कहने जका मतलब एक तरफा प्रेम है तो इस साधना के पश्चात् कोई  भी लड़की या लड़का मना नहीं करेगा। अगर किसी व्यक्ति शादी नहीं हो रही है तो, इस साधना के पश्चात् शादी आपकी मनचाही जगह पर होगी। दोने परिवारों की सहमती के साथ होगी।

  बहुत सारे  लोग फ़ोन करते है उनका पति या पत्नी का किसी और के साथ चक्र चल रहा है तो यह साधना के पश्चात पति पत्नी मैं आपसी प्रेम बढ़ेगा। अगर किसी व्यक्ति के शरीर में कोइ रोग है तो इस साधना के पश्चात् समापत हो जाएगा और उसका शरीर सुन्दर और आकर्षक हो जाएगा।

 

कामाक्षी अप्सरा साधना मंत्र – सबसे जल्दी सिद्ध होने अप्सरा 

ॐ नमो काम कामेच्छायै स्वाहा

इस मंत्र का जप २१ दिन २१ माला करे और नित्य इस अप्सरा की पूजा  करे और अप्सरा को भोग में सफेद मिठाई रखे। इस साधना को करने के लिए आपको आपको अप्सरा यन्त्र माला की जरूरत होगी 

 

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