यंत्र मंत्र तंत्र ज्ञान mantra-tantra-yantra गुरु मंत्र साधना एक मंत्र तंत्र साधना विज्ञान एक प्लेटफार्म है यहा पर मंत्र तंत्र साधना सम्बन्धी ज्ञान प्रदान किया जाता है जो ज्ञान साधू संताओ से प्रपात किया है । इस वेबसाइट में तंत्र की लेख और वीडियो प्रपात होंगे ।
मुठकरनी क्या होती है सम्पूर्ण जानकारी muthkarni kya hota hai ph.85280 57364
मुठकरनी क्या होती है सम्पूर्ण जानकारी muthkarni kya hota hai ph.85280 57364
मुठकरनी क्या होती है सम्पूर्ण जानकारी muthkarni kya hota hai ph.85280 57364 मुठकरनी क्या होती है इस विषय के बार में बात करेंगे ,यह क्या होती कैसे काम करती है। इस विषय के बारे में बात करूँगा। मुठकरनी एक तंत्र विद्या और महाविद्या का पार्ट है। यह विद्या प्राचीन काल से चली आ रही है। यह विद्या राक्षस लोगो की विद्या है। मुठकरनी विद्या कई प्रकार की होती है। एक मुठकरनी विद्या वशीकरण के लिए इस्तमाल की जाती है। एक शत्रु नाश के लिए किया जाता है। मुठकरनी कैसे की जाती है इस विषय पर बात करते है।
एक दूर से की जाती है मतलब फोटो पर या घर की दिशा की और की जाती है एक साधक मंत्र पढ़ कर एक हाथ में उड़द के कुछ दाने उस व्यक्ति की फोटो या उस के घर की दिशा उसका नाम लेकर फेकता है उसे उस व्यक्ति का नुकसान हो जाता शरीर में अचानक से दर्द उठता वो व्यक्ति बीमार हो जाता है। इस विद्या से किसी भी व्यक्ति को पेरलाइस भी ज़िंदगी भर के लिए किया जाता सकता है या व्यक्ति को ख़तम भी किया जा सकता है।
मुठकरनी से मरने वाले व्यक्ति की रिपोर्ट में हार्टअटैक से मौत का कारन आता है। कुछ इस विद्या के ऐसे जानकार भी है जो जब वो अपनी मुठी खोलते है वो दूसरे व्यक्ति दो मिनट २ में ही नुकसान पंहुचा सकते है। एक ऐसे व्यक्ति को मैंने अपनी ज़िंदगी में देखा था जब अपनी मुठ जब खोलता था सामने वाले की टांग टूट जाती थी या बाजू टूट जाती थी एक मिंट में ही वो अपनी मुठ से लोगों नुकसान पंहुचा सकता था। ऐसे बहुत कम लोगो के पास यह शक्ति होती है।
दूसरा इस विद्या से चलती करोबार को ख़तम किया जा सकता है अगर आप की दुकान पर कुछ उड़द के दाने पड़े है। या कोई पानी फेक कर चला जाएगा फिर आप का काम बंद हो जाएगा इस तरह से मुठकरनी किया जा सकता है। मुठकरनी का प्रयोग वशीकरण के लिए भी किया जाता है ,उच्चाटन के लिए भी अचानक से मानसिक हालत खराब हो जाती है व्यक्ति अपने आप को खतम कर लेता है। मुठकरनी को कई तरह से किया जा सकता है।
मुठकरनी से कैसे बचे ?
जब व्यक्ति पर यह प्रयोग किया जाता है। अगर वो व्यक्ति किसी मंदिर या किसी धार्मिक स्थान पर होता है तो मुठकरनी वापस चली जाती है। और जिस व्यक्ति ने यह प्रयोग किया होता उस पर वापस चली जाते है। मुठकरनी से बचने के लिए नियमित पूजा पाठ और कवच पाठ करते रहे फिर आप बच सकते है। अच्छे गुरु के पास जाए फिर भी बच सकते है। और कोई रास्ता नहीं है। आप हम से फ़ोन पर संपर्क कर सकते है। जय महाकाल ph.85280 57364
डेढ़ फुटिया साधना और सम्पूर्ण साधना dedh phutiya saadhana PH 8528057364
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डेढ़ फुटिया साधना और सम्पूर्ण साधना dedh phutiya saadhana जय महाकाल मैं गुरुमन्त्रसाधना कॉम में एक बार फिर आप सभी का स्वागत करता हूं आज हम बात करेंगे डेढ़ फुटिया साधना के बारे में इस साधना को कैसे सिद्ध किया जा सकता है
मेरे पास आप लोगों के बहुत से फोन आ रहे थे गुरुजी मुंजा साधना के बारे में बताइए कल कच्चा कलवा के बारे में बताइए या डेढ़ फुटिया साधना के बारे में ही बता दीजिए बहुत से लोगों को फोन आया कि गुरुजी हम गए थे वहां उन्होंने शक्तिपात या ट्रांसफर के नाम पर हमसे लाखों रुपए लूट लिया हमने गुरुजी सुना है कि डेढ़ फुटिया बहुत खतरनाक होता है
डेढ़ फुटिया भूत | डेढ़ फुटिया शक्ति
यह प्राण भी ले लेता है तो आप लोग मत डरिए ऐसा कुछ भी नहीं होता है डेढ़ फुटिया बहुत ही उत्तम साधना होती है यह साधना खतरनाक नहीं होती हां तामसिक साधना है यह तो सत्य है इस साधना को आपको किसी योग्य गुरु से उससे सामग्री प्राप्त करके उसके मार्गदर्शन में ही करना चाहिए और इस साधना से कोई प्राण हानि नहीं होती है
इसलिए निश्चिंत रहिए डेढ़ फुटिया मुंजा कच्चा कलवा के बारे में जो यूट्यूब है वह अगर ब्रेन वाश नहीं करेंगे डराए नहीं धमका जाएंगे नहीं तो कैसे लोग उनके पास जाएंगे कैसे वह आपकी जेब से आपका ही पैसा ट्रांसफर करा लेंगे ट्रांसफर शक्तिपात के नाम पर इसलिए कोई बात नहीं कोई डरना नहीं साधना निश्चिंत होकर कीजिए
डेढ़ फुटिया जिन
आज मैं आप लोगों को बहुत ही अद्भुत साधना ल फुटिया की सरल सुगम रूप से दे रहा हूं और बहुत ही अच्छे ढंग से साधना को आप कर सकते हैं तो इसलिए कोई दिक्कत नहीं डरना नहीं बहुत जल्दी से सफल और सिद्ध हो जाने वाली यह साधना है डेढ़ फुटिया सिद्ध करके आप उससे हर प्रकार के कार्य करवा सकते हैं डेढ़ फुटिया जब सिद्ध हो जाता है तो हर कार्य करने में माहिर है उसके लिए कोई भी काम बुरा नहीं होता कोई भी काम अच्छा नहीं होता है
डेढ़ फुटिया साधना के लाभ
डेढ़ फुटिया आपको गड़ा हुआ धन भी लाकर देता है पैसा भी ट्रांसफर फर कर सकता है लेकिन यह बहुत ही जटिल क्रिया है तो इसके चक्कर में मत पड़ो हा वशीकरण करना है मोहन करना है सम्मोहन करना है मारण उच्चाटन करना है झगड़ा कहीं लगाना है या दुश्मन को समाप्त करना है या किया कराया तंत्र बाधा को दूर करना है और सबसे उत्तम है कि गड़े हुए धन के बारे में बहुत ही सटीक जानकारी बताता है कि वहां कौन सी साया है कितना नीचे धन है धन में क्या है धन में कौन सी शक्ति रक्षा कर रही है
धन को कैसे निकाला जाए अगर धन पर कोई शय है तो उसे साफ कैसा किया जाए इस सब जानकारीप्रदान करता है और साधक के साथ रहकर साधक का जिंदगी भर उसकी सुरक्षा भी करता है और उसके सभी आदेशों का पालन भी करता है कहा गया है
डेढ़ फुटिया के द्वारा किया गया वशीकरण की कोई काट नहीं होती किसी का भी ऐसा नहीं है जिसका वशीकरण एक कर ना सके साधक अपने शत्रु या किसी भी शत्रु का नाश करने में काबिल हो जाता है और किसी भी शत्रु का व नाश कर सकता तो डेढ़ फुटिया साधना कैसे करें और कैसे इसका उपयोग करें इसके बारे में मैं चर्चा कर रहा हूं
ज्यादा विस्तृत बताने से क्या होता है लेख लम्बा हो जाता है फिर बाद में साधक ही लोग होते हैं उनको भी लगता है कितना है बहुत टाइम लग रहा है यह साधना का मंत्र भी बहुत छोटा है
डेढ़ फुटिया मंत्र | डेढ़ फुटिया सिद्धि
पावला पावला एकासी केला एकासी नर मनमना हाड ले पावनानि स्वामी तत्व दे जो न दे तो माता स्मशानी की दुहाई!
डेढ़ फुटिया साधना विधि
डेढ़ फुटिया यंत्र हरे हकी की माला कस्तूरी तिलक दारू की बोतल अगर आप मास का कच्चे मास का प्रयोग कर सकते हैं तो कच्चा मास और सुगंधित इतने की जरूरत होती है जो प्राण प्रतिष्ठित मंत्र सिद्ध चेतन संकल्पित पहले ही करा अपने किसी योग गुरु से आपको प्राप्त कर लेना चाहिए इस साधना में सबसे पहले कि साधना को आप किसी भी अमावस्या के दिन से कर सकते हैं
आप इस डेढ़ फुटिया की साधना किसी शमशान में भी कर सकते हैं या कहीं एकांत निर्जल स्थल पर नदी के किनारे भी कर सकते हैं या अपने घर में ही कहीं एकांत में इस साधना को संपन्न कर सकते हैं सबसे पहले कि रेशमी साधक को अपने चारों तरफ घेरा लगाए व घेरे का मंत्र मैं दे दूंगा जब साधक साधना करेगा और साथ में एक सिद्ध कवच रुद्राक्ष के रूप में अपने गुरु से सिद्ध करा ले और उसको गले में धारण करें
उसके बाद सामने यंत्र को स्थापित कर दे रेशमी कपड़े के ऊपर वहां एकाक्षी नारियल रख के और दीपक जला ले अगर साधक मास का प्रयोग करता है तो दारू में भिगोकर अपने चारों तरफ फेंकी थोड़ी थोड़ी देर में तीन माला मंत्र का जाप करना है
इसमें प्रतिदिन और यह साधना मात्र सात दिन या 11 दिन की है अगर आप छह माला मंत्र का जाप करते हैं तो आप इसे सात दिन में कर सकते हैं अगर आप इसे तीन माला मंत्र का जाप करते हैं तो आपको 11 दिन का टाइम लगेगा दीपक जला लेना चाहिए भोग के लिए मैंने आपको बता ही दिया है
डेढ़ फुटिया की फोटो- डेढ़ फुटिया साधना अनुभव
आप देखेंगे प्रथम या दूसरे दिन से ही आपको आभास होने लगेगा कि आपके आसपास कोई आ रहा है हवाओं कान में सुरसुरा हट कभी ठंड कभी गर्मी कभी हल्की आवाज भी सुनाई दे सकती है
तो आप देखेंगे छह से सात दिन होते होते डेढ़ फुटिया अपने आप ही आपके सामने धुआ के रूप में प्रकट होकर उसकी आवाज आएगी व बोलेगा कि आपने मुझे यहां क्यों बुलाया है तब आपको उससे तीन वचन लेना है वचन कैसे लेना है वो आप अपने गुरु से पहले ही पूछ ले क्योंकि रीजन क्या है कि आपकी क्या इच्छा है किस लिए आप साधना कर रहे हो गुरु उसी हिसाब से आपको बताया गया कि वचन क्या लेना है
अधिकतर वचन यही होता है कि मैं जब बुलाऊंगा आना पड़ेगा जो काम कहूंगा करना पड़ेगा और जब भी मैं कहूंगा आपको जाना पड़ेगा वचन ले लेने के बाद उसको बचा हुआ मास उसको भोग दे दे अगर आप मास नहीं प्रयोग करना चाहते हैं तो आप दारू का प्रयोग कर सकते हैं
दारू का प्रयोग तो करना ही पड़ेगा आपको दारू उसे दे अगर मास नहीं प्रयोग करते हैं तो वापस घर आ जाए शमशान में है तो घर में है तो दूसरे रूम में जाकर सो जाएं लेकिन उसके बाद जब आप पीछे मुड़कर आएंगे दोबारा पीछे नहीं मुड़ के देखना है पीछे की तरफ नहीं देखना है ड़ फुटिया की साधना करने से पहले आप अपने इष्ट देव की अनुमति ले ले
अपने गुरु की अत ले ले अपने पित्र की अपने कुल देवता इष्ट की अनुमति ले लेना चाहिए और किसी योग्य गुरु से इसकी पूरी जानकारी समझ के उसे यंत्र प्राप्त करके माला प्राप्त करके सामग्री प्राप्त करके ही ढ़ फुटिया की साधना करना चाहिए क्योंकि इससे कुछ छ जो खट कर्म होते हैं मारण उच्चाटन विद स्तन कित करने के लिए इससे अद्भुत साधना इस ब्रह्मांड में कोई नहीं है यह तामसिक क्रिया है और कोई भी ऐसा काल जादू नहीं है जो डेढ़ फुटिया ना कर सके
यह साधना अपने आप में अद्भुत है सरल है सुगम है और जब भी आपको टिया से काम लेना है तो आप सात बार 11 बार मंत्र का जाप करें वो छाया रूप में आपको दिखा देने लगेगा उसकी आवाज आने लगेगी जो भी आपको उससे काम करवाना है उसे बता दीजिए भोग लगा दीजिए व अपने आप ही काम का टाइम दे दीजिए आपको काम करके दे देगा और आपकी मनोकामनाएं भी पूर्ण कर देगा
आपको किसी प्रकार की कोई दिक्कत भी नहीं आएगी भविष्य में बहुत से लोग कहते हैं गुरु जी हम ड़ फुटिया या तामसिक साधनाए करेंगे तो क्या हमारा उद्धार होगा एकदम उद्धार होगा लोगों के डर और भय में ना रहकर साधनाम बने आगे बढ़े और साधना करें कोई दिक्कत परेशानी होती है तो आप हमसे गुरुमन्त्रसाधना। कॉम मर संपर्क करें लेकिन ट्रांसफर शक्तिपात के नाम पर अपने पैसे को बर्बाद ना करें आगे आपकी इच्छा है पैसा आपका है इसमें हम कुछ नहीं कर सकते हैं जय माता दी जय महाकाल
Sifli ilm jadu tona सिफली इल्म क्या है- सिफली इल्म रहस्य ph 8528057364 आज मैं आप सब लो सब लोगों को सिफली इल्म के बारे में बताने वाला हूं यह सिफली इल्म क्या होता है या सिफली जादू जिसको बोला जाता है यह क्या चीज है इसी विषय के बारे में आज हम बात करेंगे तो देखिए जैसे कि एक तंत्र है ठीक है तंत्र के अंदर अंतर्गत दो तरीके से चीजें होती है एक सात्विक एक तामसिक तरीके से ठीक है जो हम सात्विक तरीके से करते हैं कोई चीज वह साम्य तंत्र के अंतर्गत आने वाली चीजें होती है
एक तामसिक तरीके से करते हैं तो कोल तंत्र के अंतर्गत आने वाली चीजें होती है ठीक है यह दो कांसेप्ट हो गए बिल्कुल इसी तरह से जो मुस्लिम तंत्र है उसमें भी यह चीज होती जो सात्विक तरीके से किया जाता है उसको नूरी इलम बोला जाता है जो तामसिक तरीके से किया जाता है उसको हम बोलते हैं सिफली इलम नूरी इलम और सिफली इलम ठीक है य दो तरीके के इलम है
अब आपको क्लियर हो गया होगा कि सिफली इलम किसको बोलते सिफली इल्म की जितनी भी साधना यह कब्रिस्तान के अंदर की जाती है ठीक है कब्रिस्तान के अंदर की जाती है शराब मीट अंडा सब चलता है इसके अंदर यहां तक कि इसमें बली पशुओं की बली भी दी जाती है ठीक है और यह बहुत तीव्र तंत्र होता है ठीक है थोड़ी सी भी गलती होने के ऊपर भारी नुकसान हो सकता है
जिस भी के ऊपर यह सिफली इल्म करवाया जाता है उसकी जिंदगी बर्बाद हो जाती है ठीक है तो सिफली इलम की का क्या है सिफली इलम से ही की जाती है यह भी एक बात है सिफली इलम से ही सिफली इलम की काट होती है अब नूरी इलम से सिफली इलम की काट नहीं कर सकते केवल कुछ समय के लिए उसको रोका जा सकता है पर उसको काटना संभव नहीं है ठीक है सिफली इलम को सिफली इलम से ही काटा जा सकता है
लोहे को लोहा काटता है ठीक है बिल्कुल उसी तरह ही सिफली इलम से ही इसको काटा जा सकता है कोई दूसरा उपाय नहीं है तो यह चीज हो गई ठीक है दूसरी चीज यह है अगर कोई व्यक्ति मेलड़ी मसानी का साधक है तो किसी भी शक्ति को वह काट सकता है ठीक है चाहे वह शक्ति नूरी इलम की हो चाहे वह शक्ति सिफली इलम की हो चाहे वह ब्लैक मैजिक की हो कोई भी तरीके की कोई चीज हो उसको काट सकता है ठीक है यह सिस्टम है
अगर और अधिक जानकारी चाहिए तो मैंने नंबर दे रखे हैं तो आप फोन कर सकते हो बहुत ही कम समय में मैंने आपको पूरी जानकारी दी है आज के लिए बस इतना ही जय श्री महाकाल
sifli ilm ke lakshan सिफली इल्म लक्षण क्या है पूरा रहस्य ph.85280 57364
sifli ilm ke lakshan सिफली इल्म लक्षण क्या है पूरा रहस्य
sifli ilm ke lakshan सिफली इल्म लक्षण क्या है पूरा रहस्यgurumantrasadhna.com में आप सबका स्वागत है आज मैं आपको सिफली इल्म के बारे में बताऊंगा ठीक है पहले भी वैसे मैं बता चुका हूं सिफली इल्म के बारे में ठीक है पर इस post लेख में मैं आपको जिन लोगों के ऊपर सिफली इल्म हो चुका है ठीक है तो उसके कुछ लक्षण बताऊंगा जिससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि आप भी सिफली इलम के शिकार है या नहीं ठीक है देखिए अगर आपके ऊपर भी सिफली इलम होता है ठीक है
कुछ भी करने का मन नहीं करता है सिर दर्द रहता है ठीक है और बैठे बैठे ही आपको आल आलस पड़ा रहता है ठीक है शरीर में ऐसे लगता है कोई आप बीमार हो आप थर्मामीटर में चेक करेंगे तो आपका बुखार भी नॉर्मल आएगा ठीक है
उसके अलावा कभी-कभी शरीर के अंदर ऐसी बीमारियां पैदा होती है ठीक है शरीर में दिक्कत आती है जब आप अल्ट्रासाउंड वगैरह करवाते एमआरआई करवाते हैं तो उसमें कुछ भी नहीं आता है ठीक है अगर मेडिकल रिपोर्ट में भी कुछ ना आए तो समझ लेना चाहिए कि आपके ऊपर कुछ किया गया है ठीक है तो इसके अलावा और भी बहुत सारे लक्षण है
चेहरे के ऊपर जो चमक होती है वह खत्म हो जाती है ठीक है चेहरा कमजोर सा हो जाता है बुरे बुरे रात को सपने आते हैं तो समझ लेना चाहिए क्या आपके ऊपर भी कुछ किया गया है ठीक है और भी इसके अलावा कुछ कारण है जैसे किसी काम के लिए जाना और काम का ना बनना ठीक है यह भी इसका कारण है ठीक है
अगर किसी के ऊपर मारने के मकसद से इसका प्रयोग किया गया हो तो उस व्यक्ति को अचानक से अटैक आएगा और उसकी मृत्यु हो जाएगी तो यह भी एक कारण है ठीक है उसको हालांकि कोई दिल का कोई रोग नहीं होगा फिर भी उसकी मृत्यु हो जाएगी और उसके कारण उसकी उसकी डेथ हो जाएगी ठीक है यह भी एक कारण है ठीक है सिफली इलम का तो यह समझ लेना चाहिए कि सिफली इलम किया क्या है ठीक है
उसके अलावा और क्या है कि अचानक से जो कोई आप काम कर रहे हैं उसमें क्या होता है काम बनते बनते बिगड़ने शुरू हो जाते हैं ठीक है तो यह भी एक सिफली इलम का ही समझ सकते हो आप अचानक से आपकी आपको डिप्रेशन के शिकार होना यह भी एक लक्षण है आप डिप्रेशन के शिकार हो जाओगे और अपने आप को मारने की कोशिश करोगे तो यह भी एक सिफली इलम का ही एक लक्षण है ठीक है
सिफली इलम वाला क्या है अगर कोई व्यक्ति बिल्कुल सात्विक हो ठीक है अचानक से शराब पीने लगे गलत काम करने लगे तो समझ जाना चाहिए उसके ऊपर कोई दूसरी शक्ति हावी हुई है उसी कारण ही वह यह सारा कुछ कर रहा है तो ये भी एक सिफली इलम का एक कारण हो सकता है ठीक है
कई तरीके से सिफली इलम किया जाता है कभी तो किसी को मारने के लिए किया जाता है किसी को बीमार करने के लिए या किसी का उच्चाटन करने के लिए वो उसका मनो चाट हो जाए और अपने आप को खुद ही खत्म कर ले तो यह कुछ कारण होते हैं ठीक है यह कुछ लक्षण होते हैं जिनसे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आपके ऊपर कुछ सिफली इलम किया गया है
अच्छा इसका जो निवारण है वो भी सिफली इलम से ही संभव है ठीक है कोई दूसरे तरीके से आप इसका निवारण भी नहीं कर सकते अगर कोई व्यक्ति बोले कि भाई मैं इसको पूजा पाठ करूंगा तो वो ठीक हो जाएगा पर ऐसा नहीं है ठीक है
इलम की काट इलम से ही होती ये भी एक मैं आपको बता देता हूं ठीक है कितने भी आप पाठ कर लो तो नहीं होगा ठीक है पाठ करने से क्या होगा थोड़े टाइम के लिए वो चीज आपसे दूर हो जाएगी और जब आप पाठ को बंद कर दोगे फिर वो चीज उपस्थित हो जाएगी ठीक है तो ये सिस्टम होता है
क्योंकि वो जो भी खिलाया पिलाया होता है वो बॉडी के अंदर ही होता है और वो इतनी जल्दी निकलता नहीं है ठीक है तो भाई सिस्टम होता है ऐसा आदमी आपको ढूंढना है जो सिफली इलम जानता हो तो वही उसको ठीक कर सकता है ठीक है नहीं तो बहुत मुश्किल है
किसी व्यक्ति का बचना इस से कि बहुत सारे ऐसे लोग भी हमारे पास आते हैं जिनके कारोबार अच्छे चल रहे होते हैं अचानक ही कारोबार बंद हो जाता है कस्टमर ही नहीं आता है फैक्ट्री बंद हो जाती है या उसकी दुकान चलना बंद हो जाती है तो समझ लेना चाहिए कि कुछ किया गया है ठीक है तो ये सब चीजों से निजात पाने के लिए या कुछ जानने के लिए तो मैंने नंबर दे रखा तो आप फोन कर सकते है
दूसरी चीज क्या है भाई हर चीज के निवारण के लिए कुछ चार्जेस लगते हैं ठीक है ऐसा तो है नहीं फ्री में ही कोई काम होता है क्योंकि हमें भी उन चीजों को रिमूव करने के लिए बहुत सारी चीजें करनी पड़ती है और अपनी मेहनत के हिसाब से हम पैसा मांगते हैं ठीक है अगर कोई व्यक्ति पेड़ सर्विस चाहता है तो नंबर दे रखे हैं तो आप कॉल कर सकते हैं ठीक है तो फ्री वाले तो कृपया दूर ही रहे तो ज्यादा अच्छा है जय श्री महाकाल जी
तंत्र में उपयोगी साधन और उनकी वैज्ञानिक उपयोगिता Instruments used in Tantra and their scientific utility
तंत्र में उपयोगी साधन और उनकी वैज्ञानिक उपयोगिता Instruments used in Tantra and their scientific utility
तन्त्र में उपयोगी साधन और उनकी वैज्ञानिक उपयोगिता Instruments used in Tantra and their scientific utility तन्त्र में उपयोगी साधन और उनकी वैज्ञानिक उपयोगिता यह हम पहले बता चुके हैं-तन्त्र में सभी प्राकृतिक उपयोगी साधनों से उनके गुण, धर्म एवं क्रियाकारित्व के आधार पर यथा समय सहायता ली जाती है।
इसके साथ ही हमने ‘तम्ब शक्ति’ ग्रन्थ में यह भी स्पष्ट किया था कि ‘किसी भी कार्य की सिद्धि के लिये बिजली के तारों की तरह पृथ्वी, जल, तेज, वायु और आकाश इन पांच तत्त्वों में से कुछ . का मिश्रण करने पर ही वस्तु की प्रयोगात्मकता सिद्ध होती है।’
और यह भी सत्य है कि सत्त्व, रजस् एवं तमस्’ रूप तीन गुणों के मिश्रण से ही सृष्टि होती है, किसी एक से नहीं केवल उनकी न्यूनाधिकता से वस्तु में गुण-धर्म आदि बदल जाते हैं और उसमें कार्य करने की शक्ति आ जाती है।
यही बात वेदान्त के ‘पञ्चीकरण- सिद्धान्त’ में बताई गई है । अतः तन्त्र में भी उसकी सिद्धि के लिए अनेक सहायक तत्त्वों का वैज्ञानिक दृष्टि से सहयोग प्राप्त किया जा सकता है, जिनका निर्देश इस प्रकार है-
(१) आध्यात्मिक तत्त्व साधना के लिये शरीर, मन एवं अन्यान्य इन्द्रियों का सहयोग सबसे पहले अत्यावश्यक है। स्थिर शरीर स्वस्थ हो, स्वच्छ हो, कार्य करने में समर्थ हो और द्वन्द्व- शीत, गर्मी, वायु आदि के सहन करने में सक्षम हो; क्षुधा, तृषा, आसन और मल-मूत्रादि के वेगों को धारण करने में शिथिल न हो। मन – चंचलता, व्यर्थ चिन्तन और अनुत्साह से मुक्त होकर एका- ग्रता का अभ्यासी हो ।
इन्द्रियाँ – वासना – वृत्ति के प्रति उदासीन, संयमशील तथा अपने-अपने स्वभाव के प्रति आवश्यकता से अधिक लोलुप न हों । इनके साथ ही चित्तवृत्ति की निर्मलता और अहंकार का सर्वतोभावेन त्याग साधक के कार्य को बहुत ही सरलता से आगे बढ़ाते हैं । आत्मा सभी इन्द्रियों का अधिष्ठाता है। उसी के प्रकाश से सभी इन्द्रियाँ कार्य करती हैं। इनके साथ ही आत्मा को परमात्मा के साथ जोड़ने का प्रयास ही उपासना का अर्थ है। इस प्रकार की उपासनाओं में तन्त्र द्वारा की जाने वाली उपासना भी एक महत्त्वपूर्ण उपासना है।
जब कोई किसी प्रकार की साधना द्वारा किसी सिद्धि को प्राप्त करना चाहता है तो उसे आध्यात्मिक दृष्टि से अपने मन को स्थिर बनाना चाहिये । मन की स्थिति से ही अन्य इन्द्रियाँ सुस्थिर होती हैं और उसका प्रभाव यह होता है कि सभी प्रकार से साधक का लक्ष्य एकांगी हो जाता है और जिसे ‘ह्वील पावर’ आत्मशक्ति कहते हैं, उसके द्वारा जप, तप, तान्त्रिक विधि आदि की मिश्रित रूप से सिद्धि मिलती है ।
(२) आधिदैविक तत्त्व आत्मबल के साथ-साथ देवबल भी किसी साधना में परम आवश्यक है । देवता को अनुकूल बना लेने से दैवी तत्त्व से युक्त वस्तु अपने. वास्तविक स्वरूप में फलवती होती है। तन्त्रसाधना में अनेक वस्तुएँ ऐसी प्रयोग में लाई जाती हैं, जिनके आधार पर उनके गुण-धर्मों का फल प्राप्त किया जाता है। इस तत्त्व को जगाने के लिये दो तरह के प्रयास किये जाते हैं – १. कार्यसाधक देव के मन्त्र का जप और
२. वस्तु को अभिमन्त्रित करना । जैसे किसी वृक्ष की जड़ (मूल) का प्रयोग करना है, तो पहले लक्ष्मी प्राप्ति का लक्ष्य हो तो -लक्ष्मी के मन्त्र का जप करना चाहिए तथा फिर उस वृक्षमूल की सिद्धि का मन्त्र जप करें। इसके साथ ही यदि लक्ष्मी प्राप्ति के लिये शिव, विष्णु, गणपति, हनु- मान आदि देवताओं से कामना करनी हो, तो इनमें से किसी एक के मन्त्र का जप भी करना चाहिए।
(३) श्राधिभौतिक तत्व ‘पृथ्वी, जल, तेज, वायु और आकाश’ ये पाँच तत्त्व आधिभौतिक कहलाते हैं । तन्त्र-प्रयोग में इनका सहयोग बड़ा ही महत्त्वपूर्ण है । तान्त्रिक कार्यों में सिद्ध मन्त्र को पृथ्वी पर या सोना, चाँदी, ताँबा और लोहे पर लिखकर उसकी पूजा की जाती है। पृथ्वी में गड्ढा खोद कर यन्त्र गाड़ दिये जाते हैं। वृक्ष के पांचों अंग-मूल, शाखा, पत्र, पुष्प और फल या बन्दे को अभिमन्त्रित कर, प्रयोग में लिया जाता है।
अनेक विध वनस्पति से प्राप्त सामग्री द्वारा कर्मों के अनुसार हवन होता है। जल को अभिमन्त्रित कर, रोग-निवृत्ति के लिए पिलाया जाता है । जल में देवी-देवताओं का आवाहन करके उनकी पूजा की जाती है तथा जल में हाजरात के प्रयोग भी देखे गये हैं । अग्नि में धूप और हवन का विधान है। धूप के तन्त्र-प्रयोगों में अष्टांग धूप, षडंगधूप और गूगल, राल, लोबान आदि प्रमुख हैं। वायु की तन्मात्रा गन्ध है । सुगन्धित पदार्थों से देवताओं की पूजा और मन्त्र जपकर फूंक मारने का प्रयोग भी प्रसिद्ध है ।
आकाश तत्त्व का सम्बन्ध शब्द से है। शब्द की ध्वनि, उच्चारण, जप, पाठ, प्रार्थना आदि सभी तान्त्रिक साधना में परम उपयोगी हैं। इस तरह स्थूल रूप से उपर्युक्त पांचों तत्त्वों में सभी का समावेश हो जाता है ।
ये तत्त्व साधक के द्वारा पूर्ण रूप से आत्मसात् किये जाएँ, यह वाञ्छनीय है, किन्तु इसका यह अर्थ कदापि नहीं है कि यदि पूर्ण- रूपेण पालन न किया जा सके, तो कोई साधना ही न करे। हाँ, इतना अवश्य है कि इस ओर प्रवृत्ति रहनी चाहिए और जहाँ तक सम्भव हो, कालिक प्रभाव में न आकर स्थिर मन, स्थिर विचार और स्थिर विश्वास से कार्य करें, अवश्य सिद्धि होगी ।
shiv tantra शिव तंत्र शास्त्र आधुनिक विज्ञान और तंत्र ph. 8528057364
shiv tantra शिव तंत्र शास्त्र आधुनिक विज्ञान और तंत्र ph. 8528057364
shiv tantra शिव तंत्र शास्त्र आधुनिक विज्ञान और तंत्र ph. 8528057364 आधुनिक विज्ञान और तंत्र प्रत्येक बुद्धि-सम्पन्न व्यक्ति के मन में सदैव एक यह तर्क रहता है कि – “आज विज्ञान जितना विकसित हो गया है और हमारे जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है, उसी तरह तन्त्र से भी पूर्ति सम्भव है क्या ?”
अथवा “जब विज्ञान ने सभी आवश्यकताओं की पूर्ति के उपकरण उपस्थित कर दिए हैं, फिर तन्त्र और उनकी साधनाओं से क्या लाभ है ?” इन दोनों प्रश्नों का समाधान हम इस प्रकार कर सकते हैं— “विज्ञान जिन साधनों से हमारी आवश्यकताओं की पूर्ति करता है, वे साधन क्रमशः एक-दूसरे के अधीन हैं, अर्थात् वे परापेक्षी हैं, उनका उप- योग स्वतन्त्र रूप से नहीं हो सकता, जबकि तन्त्र-साधना द्वारा स्वतन्त्र रूप से सिद्धि प्राप्त की जा सकती है।
विज्ञान की सिद्धि कुछ समय तक ही लाभप्रद होती है, किन्तु तन्त्र द्वारा प्राप्त सिद्धि चिर स्थायी हो सकती है। विज्ञान बाह्य रूप से सहयोगी बनता है, जबकि तन्त्र हमारे आन्तरिक मस्तिष्क को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करते हैं। इसलिए परतन्त्रता की अपेक्षा स्वतन्त्रता ही श्रेयस्कर है ।
वैसे विज्ञान के लक्ष्य भौतिक कार्यों की उपलब्धि तक ही सीमित हैं, जबकि तन्त्र का उद्देश्य इस लोक की सुख-सुविधाओं की पूर्ति के साथ-साथ जीव को शिवस्वरूप बनाना भी है। जीव और शिव की व्याख्या ‘कुलार्णव तन्त्र’ में इस प्रकार दी गई है—
अर्थात् घृणा, लज्जा, भय, शंका, जुगुप्सा-निन्दा, कुल, शील और जाति ये आठ पाश कहे गए हैं, इनसे जो बंधा हुआ है, वह जीव है । इन्हीं पाशों से छुड़ाकर (तन्त्र जीव को) सदाशिव बनाते हैं। इस तरह दोनों के उद्देश्यों में भी पर्याप्त अन्तर है और विज्ञान से तन्त्रों के उद्देश्य महान् हैं।
तन्त्रों की इस स्वतन्त्र वैज्ञानिकता के कारण ही प्रकृति की चेतन- अचेतन सभी वस्तुओं में आकर्षण – विकर्षण उत्पन्न कर, अपने अधीन बनाने के लिए कुछ देवी तथ्यों का आकलन किया गया है।
जैसे विज्ञान एक ऊर्जा शक्ति से विभिन्न यन्त्रों के सहारे स्वेच्छानुसार रेल, तार, मोटर, बिजली आदि का प्रयोग करने के द्वार खोलता है, वैसे ही तन्त्र- विज्ञान परमाणु से महत्तत्त्व तक की सभी वस्तुओं को आध्यात्मिक एवं उपासना-प्रक्रिया द्वारा उन पर अपना आधिपत्य जमाने की ऊर्जा प्रदान करता है।
अनुपयोगी तथा अनिष्टकारी तत्त्वों पर नियन्त्रण रखने की शक्ति पैदा करता है तथा इन्हीं के माध्यम से अपने परम तथा चरम लक्ष्य की सिद्धि तक पहुँचाता है। मन्त्र जप एवं तान्त्रिक विधानों के बल पर मानव की चेतना ग्रंथियां इतनी जागृत हो जाती हैं कि उनके इशारे पर बड़ी से बड़ी शक्ति से सम्पन्न तत्त्व भी वशीभूत हो जाते हैं।
तान्त्रिका साधना निष्ठ होने पर वाणी, शरीर तथा मन इतने सशक्त बन जाते हैं कि उत्तम इच्छाओं की प्राप्ति तथा अनुत्तम भावनाओं का प्रतीकार सहज बन जाता है । भारत तन्त्रविद्या का आगार रहा है। प्राचीन काल में तन्त्र- विज्ञान पूर्ण विकास पर था, जिसके परिणाम स्वरूप ही ऋषि-मुनि, सन्त-साधु, यती-संन्यासी, उपासक आराधक अपना और जगत् का कल्याण करने के लिए असाध्य को साध्य बना लेते थे
। ‘मन्त्राधीनास्तु देवताः’ इस उक्ति के अनुसार देवताओं को अपने अनुकूल बनाकर छायापु रुष, ब्रह्मराक्षस योगिनी, यक्षिणी आदि को सिद्ध कर लेते थे और उनसे भूत-भविष्य का ज्ञान तथा अतर्कित- अकल्पित कार्यों की सिद्धि करवा लेते थे ।
पारद, रस, भस्म और धातु-सिद्धि के बल पर दान-पुण्य, जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति, बड़े-बड़े यज्ञ योगादि के लिए अपेक्षित सामग्री की प्राप्ति आदि सहज हो कर लेते थे और सदा अयाचक वृत्ति से जीवन बिताते थे ।
यह सत्य है कि सभी वस्तुओं के सब अधिकारी नहीं होते हैं और न सभी लोग सब तरह के विधानों के जानने के ही। साधना को गुप्त रखने का तन्त्रशास्त्रीय आदेश भी इसीलिए प्रसिद्ध है- और- गोपनीयं गोपनीयं गोपनीयं प्रयत्नतः । ‘Hold fast silence what is your own lest icy fingers be laid upon your lips to seal them forever.” ( प्रयत्नपूर्वक मौन रखिये ताकि आपके होठ सदा के लिये बन्द न हो जायँ ।)
अतः सारांश यह है कि ऐसी वस्तुओं को गुप्त रखने में ही सिद्धि है । तन्त्र योग में शरीर और ब्रह्माण्ड का जितना अद्भुत साम्य दिखाया गया है, वैसा अन्यत्र कहीं भी ब्रह्माण्डे’ (जैसा पिण्ड-शरीर में, वैसा ही दुर्लभ है। ‘यथा पिण्डे तथा ब्रह्माण्ड में) इस उक्ति को केवल पुस्तकों तक ही सीमित न रखकर प्रत्येक वस्तु को उसके गुणों के अनुसार पहचानकर उसका उचित तन्त्र द्वारा विनियोग करते हुए प्रत्यक्ष कर दिया है।
तन्त्र के प्रयोगों में भी एक अपूर्व वैज्ञानिकता है, जो प्रकृति से प्राप्त पञ्चभूतात्मक पृथ्वी, जल, तेज, अग्नि, वायु और आकाश- वस्तुओं के सहयोग से जैसे एक वैज्ञानिक रासायनिक प्रक्रिया के द्वारा नवीन वस्तु की उपलब्धि करता है वैसे ही-नई-नई सिद्धियों को प्राप्त करता है।
तन्त्रों ने प्रकृति के साथ बड़ा ही गहरा सम्बन्ध स्थापित कर रखा है। इसमें छोटे पौधों की जड़ें, पत्ते, शाखाएँ, पुष्प और फल सभी अभि- मन्त्रित उपयोग में लिए जाते हैं। मोर के पंख तान्त्रिक विधान में ‘पिच्छक’ बनाने में काम आते हैं तो माष के दाने कुछ प्रयोगों में अत्या- वश्यक होते हैं। सूर्य ग्रहण और चन्द्र ग्रहण में तान्त्रिक साधना का बड़ा ही महत्त्व है।
श्मशान, शून्यागार, कुछ वृक्षों की छाया, नदी-तट आदि इस साधना में विशेष महत्त्व रखते हैं। स्नान, गन्ध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, आरती और पुष्पांजलि आदि पूजा पद्धति की क्रियाएं तन्त्रों के द्वारा ही सर्वत्र व्याप्त हुई हैं । इस तरह तन्त्र विज्ञान और विज्ञान तन्त्र का परस्पर पूरक है, यह कहा जाए तो कोई अत्युक्ति नहीं है।
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मंत्र तंत्र साधना रहस्य mantra tantra yantra rahsya ph.8528057364 साधना की उपयोगिता अब हमारे मस्तिष्क में ये प्रश्न उठता है कि साधना की क्या उपयोगिताएं है? इस प्रश्न का उत्तर प्राप्त करने के लिए साधना की अवधारणा पर ध्यान केन्द्रित करना होगा। वर्तमान समय में सर्व अशान्ति विध्यमान है। यह जगत् माया का क्रीडास्थल है।
जहाँ मनुष्य आँख मिचौली खेल रहा है। उसकी आंखों पर अन्धकार अर्थात् अज्ञानता की पट्टी बंधी हुई है। वह सारे संसार में विचरण करता है शान्ति व सुख की तलाश में दर-बदर की ठोकरें खाता है, मगर उसे कहीं शान्ति नहीं मिलती वह जितना सोचता है। उसके अनुसार कार्य करता है।
दुखों की जंजीरों में बंधता चला जाता है। उसे स्वतन्त्रता, संतोष कहीं नहीं मिलता। वस्तुतः वह अपनी इच्छाओं का गुलाम बना हुआ है। वह एक मृग की तरह इस मायावी संसार में अपनी प्यास बुझाने के लिए घूमता रहता है और जब वह थक हारकर बैठ जाता है तो उसे अपने भीतर की आवाज सुनाई देती है। हृदय गूंजने लगता है।
शास्त्र बताते हैं कि भगवान ही एकमात्र विशुद्ध आनन्द हैं। वास्तविक ज्ञान है,परम सत्य है, और सर्व प्रेम का स्रोत हैं, और जब वह इस बारे में सोचता है तो उसके आँखों पर बंधी अज्ञानता की पट्टी खुल जाती है. उसके जीवन में सत्य उतर जाता है। हृदय के अन्तर तल में भगवान के आनन्द की तरंगें उठने लगती हैं।
भगवान के चरणों का स्मरण साधना की पहली सीढ़ी है। दुनिया के पाखण्ड धोखे देने वाले हैं, परन्तु भगवान की प्राप्ति सच्ची महान प्राप्ति है। आज की दुनिया वैज्ञानिक युग में निवास करती हैं। प्रत्येक मनुष्य स्वार्थी होने के साथ इस जगमगाहट के पीछे डूबता जा रहा है।
जो लोग इस अड़चन में नहीं पड़ते वहीं साधक बने हुए हैं और भगवान की प्राप्ति में लगे हैं. लेकिन जो लोग संसार की इस विपत्ति से परेशान रहते हैं वह ईश्वरीय खोज में लग जाते हैं भगवान को प्राप्त करना उनका परम लक्ष्य बन जाता है और सुख, शान्ति, संतोष प्राप्ति की पहली क्रिया साधना है।
इस कारण इसकी उपयोगिता और अधिक बढ़ गई हैं। वास्तविक सुख क्या है? इसका एकमात्र उत्तर हैं-परमात्मा, संसार की समस्त इच्छाओं के शान्त हो जाने पर एक अनंत सुख की अनुभूति होती है उसे परमात्मा कहते हैं अतः परमात्मा को प्राप्त करना ही मनुष्य का एकमात्र उद्देश्य रहता है और इसी परमात्मा की प्राप्ति के लिए वह साधना करता है।
वर्तमान युग के विद्वान अपने आपको ज्ञाता कहते हैं और दैविक ज्ञान को मन्दबुद्धि का परिचायक बताते हैं, लेकिन वास्तव में वे अज्ञानी हैं।
क्योंकि सबसे बड़ी पराक्रम शक्ति वही ईश्वर है, क्योंकि ईश्वर के ही करुणा के कारण उन्हें 64 हजार योनियों में सबसे श्रेष्ठ मनुष्य योनि में जन्म मिला। ज्ञान साधना का विरोध ती नहीं है।
वह तो उसमें रहने वाले अज्ञान – मात्र का विरोधी है। अज्ञानता का नाश करके साधनाओं के स्वरूप की रक्षा करने में ज्ञान का महत्व है। यह कोई अनुभवी महापुरुष ही जान सकता है।
ज्ञान सम्पन्न पुरुष कभी साधना का विरोध नहीं करते, जैसे दूसरे साधकों द्वारा प्रयत्नपूर्वक साधनाएं होती है ठीक उसी प्रकार ज्ञानी के शरीर के भीतर साधना होती रहती है। साधना में प्रवृत्ति ही दुख की आत्यान्तिक निवृत्ति और परमानन्द प्राप्ति के लक्ष्य को बताती हैं। लक्ष्य की सिद्धि की उपयोगिता ही साधना की अन्तिम कड़ी है। अतः साधना मनुष्य जीवन का एक है।
श्रद्धा, विश्वास धारणा
किसी भी साधन को प्रारम्भ करने से पूर्व साधक को उसके प्रति पूर्ण श्रद्धावान्, विश्वासी अर्थात् प्रास्थावान् एवं धैर्यवान् होना आवश्यक है । जो साधक साधन के प्रति श्रद्धा अथवा अनास्था रखते हैं, उन्हें सिद्धि प्राप्त नहीं होती । अतः साधक को चाहिए कि यदि किसी साधन के विषय में उसके मन में तनिक भी सन्देह हो तो उसे करना कदापि प्रारम्भ न करे ।
इसी प्रकार साधना काल में साधक का धैर्यवान् होना परम आवश्यक है । जो साधक साधन में आने वाली कठिनाइयों के कारण अपना धैर्यं तथा साहस छोड़ बैठते हैं, उन्हें भी सिद्धि प्राप्त नहीं होती ।
अनेक बार ऐसा भी सुना और देखा गया है कि साधना काल मेंने वाली कठिनाइयों से विचलित हो जाने के कारण साधक को शारीरिक अथवा अन्य प्रकार की हानियाँ उठानी पड़ी हैं ।
अतः जब साधक में कठिनाइयों से लोहा लेने का साहस न हो, तब तक उसे किसी भी साधन में प्रवृत्त नहीं होना चाहिए ( तान्त्रिक साधनों का मार्ग खतरों से भरा हुआ बताया गया है। इसमें तनिक सी भी असावधानी, प्रमाद, भूल अथवा साहसहीनता साधक के लिए प्राणघातक सिद्ध हो सकती है।
क्या हम मृतात्माओं से बातें कर सकते हैं ? | मरे हुए इंसान से बात करने का तरीका how to talk to a dead person
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क्या हम मृतात्माओं से बातें कर सकते हैं ? | मरे हुए इंसान से बात करने का तरीका how to talk to a dead person हमारे-आपके चारों ओर एक ऐसी भी दुनिया है जो दिखाई नहीं देती लेकिन उतनी ही वास्तविक है जितनी कि यह धरती। इस अदृश्य दुनिया के अनदेखे प्राणी बराबर इस प्रयत्न में रहते हैं कि वे आपके माध्यम से अपनी बातें कह सकें और अपनी इच्छाएं पूरी कर सकें।
तो आइए, इस रोचक लेख में इस अनदेखे प्राणियों के बारे में जाने-समझें… प्रेतात्माओं के अस्तित्व और स्वरूप को समझने से पूर्व सृष्टि की संरचना समझ लेनी आवश्यक है। हमारी धारणा यह है कि जो इन्द्रियों की पकड़ में है, वही वास्तविक है।
वास्तविकता तो यह है कि जो हमें दिखाई देता है, या जो हमें सुनाई पड़ता है, वह तो इस सृष्टि का लाखवां हिस्सा ही हो सकता है। इसके परे भी सृष्टि है, जो इन चर्मचक्षुओं से न तो दिखाई देती है और न मानव कर्ण उनकी ध्वनियों को सुन सकते हैं। पाश्चात्य विद्वान् ब्लास्की, मैडम जोन, कर्नल आंत और भारतीय मनीषी स्वामी विवेकानन्द, योगीराज सच्चिदानन्द आदि ने यह स्वीकार किया है कि इस सृष्टि से परे भी विशाल सृष्टि है और कई लोक हैं।
इन लोकों को भारतीय दर्शन मूलांक, भूलोक, भुवलोक आदि के नाम से पुकारता है। इन साधकों ने इन लोकों को देखा है, समझा है और अपने ग्रन्थों में इनका विस्तार वर्णन किया है। मिस्टर डब्ल्यू वीटर की ‘अदर साइड ऑफ़ डेथ’, श्रीमती एनी बेसेन्ट की ‘लाइफ आफ्टर डेथ’ आदि ग्रन्थ इसके उदाहरण हैं।
1 मरे हुए इंसान से बात करने का तरीका – स्थूल से भी परे सूक्ष्मतर
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वास्तविकता यह है कि हम जो कुछ भी देखते है, सुनते हैं या स्पर्श करते हैं, वही राय कुछ नहीं है। यह तो केवल स्थूल है। इस स्थूल शरीर के परे भी अन्य सात प्रकार के शरीर हैं, जो क्रमशः सूक्ष्मतर होते जाते हैं। इन शरीरों को इच्छा-शरीर, भावना-शरीर, या सूक्ष्म शरीर के नामों से पुकारा गया है।
इसी पृष्ठभूमि में हम मृत्यु को समझें। ज्यों ही हमारा भौतिक शरीर समाप्त होता है, इसका विखण्डन हो जाता है। ऐसा होते ही इच्छा-शरीर स्वतः ही सक्रिय हो जाता है और अपनी ही गति से कार्य करने लग जाता है। इस इच्छा शरीर की भी एक सीमा है, एक निश्चित जीवन है।
इसके बाद इस इच्छा शरीर का भी विखण्डन हो जाता है और इससे भी सूक्ष्म शरीर क्रियाशील हो जाता है। इस प्रकार से यह निश्चित है कि जो मृत्यु होती है, वह केवल इस शरीर के बाह्यकार की होती है । इसके मूलाधार आत्मा की मृत्यु नहीं होती।
आत्मा इससे सूक्ष्म शरीर में जाकर क्रियाशील हो जाती है। सूक्ष्म शरीर भौतिक उसमें भी इच्छाएं, शरीर का सूक्ष्म रूप है। अतः आकांक्षाएं, भावनाएं बराबर सूक्ष्म शरीर इन इच्छाओं- आकांक्षाओं की पूर्ति में बराबर संलग्न रहता है। जीवित रहती हैं।
इतना होते हुए भी वह सूक्ष्म शरीर अक्षम है। मानव शरीर इच्छाओं की पूर्ति का प्रयत्न कर सकता है, परन्तु सूक्ष्म शरीर में यह क्षमता नहीं है। सूक्ष्म शरीरों में स्थित आत्माएं व्यग्र रहती हैं, इच्छाओं की पूर्ति के लिये । वे आत्माएं इसी संसार के आस-पास भटकती रहती हैं और इस प्रयत्न में रहती हैं कि जैसे भी हो, कोई मानव शरीर मिल जाए, जिसके माध्यम से वे अपनी इच्छाएं पूर्ण कर सकें।
जिस व्यक्ति में जितनी ज्यादा संवेदनशीलता होती है, वह व्यक्ति उतना ही अच्छा माध्यम बनता है। कई बार माध्यमों के बगैर ही इन सूक्ष्म शरीरों की वाणी को समझा जा सकता है। योगीजन ऐसा कर सकते हैं। इसके लिए मन की एकाग्रता जरूरी है, जो ध्यान, योगासन, आदि के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है।
इसलिये योगी सीधे ही माध्यम बन जाते हैं। सूक्ष्म शरीर कुछ समय के लिए उनके शरीर को अधिकृत कर लेता है। यह बात भी निश्चित है कि यह सूक्ष्म शरीर एक प्रकार से इच्छा- शरीर है। यह क्षण भर में दूर की घटनायें देख-सुन सकता है। अतः योगी जब भविष्यवाणी करते हैं तब सूक्ष्म शरीरों की इन आत्माओं के माध्यम से ही करते है ।
इन आत्माओं को कोलाहल या तीव्र प्रकाश सह्या नहीं होता । अतः ये मद्धिम रोशनी तथा बिल्कुल शान्त वातावरण में ही आती है और पूछने पर बात कहती हैं तथा अपने अनुभव सुनाती हैं।
इन आत्माओं से सम्पर्क स्थापित करने के लिए कई साधन है, जिनमें प्लेंचित प्रयोग, तिपाई प्रयोग,उंझा बोर्ड प्रयोग, स्वतः लेखन प्रयोग, माध्यम प्रयोग आदि प्रचलित है।
2 मरे हुए इंसान से बात करने का तरीका – प्लेंचित
आत्मायों से सम्पर्क स्थापित करने के लिए प्लॅचित का प्रयोग काफी समय से किया जाता रहा है। प्लेंचित लकड़ी का सपाट तख्ता होता है, जो चौकोर या पान की शक्ल का होता है।
इसमें नीचे की तली में दो बालबियरिंग लगा दिए जाते हैं, जिसके छर्रे ऊपर की ओर रहते हैं। इससे चारों तरफ घूमने में आसानी रहती है। नीचे नोक वाले भाग में एक सुराख़ होता है जिसमें पेंसिल खोंस दी जाती है। इस प्रकार बालबियरिंग और पेंसिल का छिला हुआ सिरा एक सीधी स्थिति में आ जाते है । शान्त वातावरण में विशेषकर रात्रि में एक कमरे में चार-पांच व्यक्ति मद्धिम रोशनी में बैठ जाते हैं।
प्रयोग से पूर्व यदि कमरे को धोकर साफ कर लिया जाए और प्रयोग के समय कोई सुगन्धित अगरबत्ती लगाई जाए, तो अच्छा रहता है। चार- पांच व्यक्तियों में यदि एक-दो औरतें हों तो उचित रहा है। औरतें अपेक्षाकृत ज्यादा संवेदनशील होती है, और आत्माओं के लिए अच्छा माध्यम बन सकती हैं । जब यह प्रयोग प्रारम्भ करना हो तब तीन या पांच व्यक्ति उस प्लेंचित पर अपनी एक-एक उंगली हल्के से रख दें और फिर अपने मन में किसी मृतात्मा का आह्वान करें।
यह कोई आवश्यक नहीं है कि जिस मृतात्मा का आह्वान करें वह वहां आ ही जाए क्योंकि कई बार जिस मृतात्मा का हम आह्वान करते हैं, वह सुक्ष्म शरीर से भी कोई और किसी अन्य ऊँचे लोक में चली गई होती है। ऐसी स्थिति में उसका आना सम्भव नहीं होता ।
प्रत्येक व्यक्ति अपने मन में एक-एक मृतात्मा का आह्वान करता है। उनमें से कोई एक मृतात्मा अवश्य ही कुछ मिनटों के अन्दर आ जाती है। इसका प्रमाण यह है कि जब मृतात्मा आती है, तब वह पेंसिल स्वतः ही घूमने लगती है। इसकी जांच के लिए आप धीरे से प्रश्न कीजिए कि क्या आप आ गए हैं ?
तब मृतात्मा पेंसिल की नोंक से ‘हाँ’ या ‘येस’ शब्द लिखेगी। ऐसी स्थिति में आपको यह आभास हो जायगा कि मृतात्मा आपके पास मौजूद है। इसके बाद जब आप उसका नाम पूछेंगे तब आप देखेंगे कि आपके हाथों की उंगलियों के स्पर्श से ही वह पेंसिल घूम रही है और अपना नाम लिख रही है।
जब प्लेंचिट या पेंसिल रुक जाए तब आप कागज पर उसका नाम आसानी से पढ़ सकते हैं। इस बात का ध्यान रहे कि मृतात्मा अत्यन्त ही भावुक और संवेदनशील होती है, इसलिये उसे छोटी सी अवज्ञा या अपमान से क्रोध आ जाना स्वाभाविक है |
इसलिये अत्यन्त विश्वासपूर्वक और श्रद्धापूर्वक नम्रता के साथ प्रश्न करना चाहिए। इस प्रयोग में मृतात्मा का पढ़ा-लिखा होना आवश्यक है।
कई बार ऐसा भी अनुभव में आया है कि ज्यों ही हम यह प्रयोग प्रारम्भ करते हैं, त्यों ही स्वतः ही कागज पर उल्टी-सीधी लकीरें बन जाती है या पेंसिल थरथराती है, परन्तु वह लिखती कुछ भी नहीं है। ऐसी स्थिति में यह समझ लेना चाहिए कि मृतात्मा पढ़ी-लिखी नहीं है। जब यह ज्ञात हो जाए तब उसे नम्रता पूर्वक विदा करके किसी अन्य मृतात्मा का आह्वान करना चाहिए।
3 मरे हुए इंसान से बात करने का तरीका- तिपाई
इंग्लैण्ड आदि देशों में टेबल का या तीन पैरों बाली तिपाई का ही प्रयोग किया जाता हैं । इसमें तिपाई के दो पैरों के नीचे कागज को मोड़ कर रख दिया जाता है तथा तीसरे के पैर के नीचे कोई चीज न रहने से वह सामान्यतया कुछ ऊँचा उठ जाता है। यदि तिपाई के उस कोने को हल्के से कम्पन के साथ दबाया जाए तो नंगे फर्श पर उस टेबल के पैर से खट-खट की ध्वनि निकलती है। शान्त वातावरण में ३ से ५ व्यक्ति टेबल के इर्द- गिर्द बैठ जाते हैं।
जब मृतात्मा का आह्वान किया जाता है तब स्वतः ही यह टेबल पैर से खट की ध्वनि करता है। इससे यह ज्ञात हो जाता है कि उस कमरे में मृतात्मा का आह्वान हो चुका है। इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि उन तीन या पांच व्यक्तियों के हाथों का हल्का सा स्पर्श टेबल पर बना रहे । इसके बाद थोड़े से उच्च स्वर में मृतात्मा को समझा दिया जाता है कि यदि प्रश्न का उत्तर हाँ में देना हो तो एक बार खट की ध्वनि की जानी चाहिए और यदि नहीं में उत्तर देना हो तो दो बार ध्वनि होनी चाहिए।
अब आप अपने प्रश्न कर सकते हैं। प्रश्नों का क्रम स्पष्ट और सही तरीके से होना चाहिए। उदाहरण के लिए- १. क्या आप आ गए हैं ? खट | इ२. क्या आप हमारे प्रश्नों के उत्तर देना चाहेंगे ? – खट । ३. क्या राजेन्द्र इस समय दिल्ली में है ?- खट-खट । ४. क्या वह इस शहर में ही है? खट |
4 मरे हुए इंसान से बात करने का तरीका- उंझा
इस प्रयोग में एक बोर्ड का उपयोग होता है, जो कि अण्डाकार लकड़ी का तख्ता होता है और इसके नीचे एक लकड़ी से तख्ते पर घिर्निया बंधी हुई होती है जिससे कि यह हल्के से स्पर्श से ही बाएं या दाएं घूम सकती है।कोई मानव शरीर मिल जाए, जिसके माध्यम से वे अपनी इच्छाएं पूर्ण कर सकें।
इसके सामने एक नोकदार चिन्ह होता है तथा सामने एक तख्ती लगी रहती है जिस पर ‘ए’ से लेकर ‘जेड’ तक अक्षर समान दूरी पर लिखे होते हैं तथा १ से ९ तक के तथा शुन्य के अंक भी लिखे होते हैं | जब प्रयोग करना हो, तब एक साफ धुले हुए कमरे में एक या तीन या पांच व्यक्ति बैठ जायें और कमरे का दरवाजा थोड़ा-सा खुला रखें। इसके बाद किसी मृतात्मा का आह्वान करें जो कि सामान्यतः अंग्रेजी पढ़ा-लिखा हो। (ऊंझा बोर्ड पर अंग्रेजी के ही अक्षर लिखे होते हैं। यदि उस बोर्ड पर हिन्दी के अक्षर लिखे हों तो हिन्दी पढ़े-लिखे किसी मुतात्मा का आह्वान भी किया जा सकता है ।)
इसके बाद प्रयोग करने वाला उंझा बोर्ड के सामने बैठ जाए और अपना दाहिना हाथ धीरे से उंझा बोर्ड पर रख दे। इस बात का ध्यान रखे कि हाथ अत्यन्त हलके रूप में बोर्ड को स्पर्श करता हो। इसके बाद किसी मृतात्मा का आह्वान करे और उससे प्रश्न करे।
प्रश्न करने के बाद आप अनुभव करेंगे कि वह बोर्ड स्वतः ही चलने लग गया है, और बोर्ड के सामने की सूई एक-एक अक्षर पर टिककर दाएं- बाएं घूमकर अगले अक्षर पर टिक जाती है और इस प्रकार आपके पूछे गए प्रश्न का उत्तर दे देती है। कई बार प्रश्नों के उत्तर देने के बाद मृतात्मा उत्तर देना बन्द कर देती है।
इससे यह समझ लेना चाहिए कि या तो मृतात्मा इस प्रश्न का उत्तर देना नहीं चाहती या वह थक गई है। ऐसी स्थिति में उससे यह प्रश्न पूछ लेना चाहिए कि क्या आप थक गए हैं? उत्तर हां में मिलने पर उस मृतात्मा को विदा कर देना चाहिए और किसी अन्य मृतात्मा का अह्वान किया जाना चाहिए।
5 मरे हुए इंसान से बात करने का तरीका स्वतः लेखन
इस पद्धति का पाश्चात्य देशों विशेष रूप से इंगलैण्ड में बहुत अधिक प्रयोग होता है। इस सम्बन्ध में यूरोप के प्रसिद्ध विद्वान मिस्टर होम के प्रयोग विश्वविख्यात हैं। इस प्रयोग में किसी ऐसे माध्यम की आवश्यकता होती है जो शान्त, सरल और निष्कपट हो |
यदि वह बालक हो तो उत्तम होगा। उनके मन में इस विद्या से संबन्धित किसी प्रकार की उपेक्षा या घृणा के भाव न हों। उसके हाथ में एक पेंसिल और खाली कागज दे दिया जाता है। उसके बाद किसी मृतात्मा का आह्वान किया जाता है और यह प्रार्थना की जाती है कि वह बालक के माध्यम से प्रश्नों के उत्तर दे । आह्वान करने के कुछ समय बाद वह बालक अर्धचेतन सा लगने लगेगा। ऐसा अनुभव होगा कि उस बालक को नींद सी आ रही है।
वह लगभग तन्द्रावस्था में दिखाई देगा। जब ऐसी स्थिति आ जाए तब यह समझ लेना चाहिए कि उस बालक के शरीर में मृतात्मा का आह्वान हो चुका है। इसके बाद आप उससे प्रश्न कीजिए और वह आपके प्रश्नों के उत्तर उस कागज पर बराबर देता रहेगा।
इससे कई हत्याकाण्डों के गुप्त रहस्य, षड़यंत्र और भविष्य में होने वाली अनेक अद्भुत बातें स्पष्ट हुई हैं। श्रीमती अरुणा कुमारी भारत में विख्यात महिला है। उनके पति श्री नरपतसिह का कुछ समय पहले निधन हो गया था तब से वह पूर्णतः साधु जीवन व्यतीत करती है।
स्वतः लेखन प्रयोग का यह महिला एक जीता जागता उदाहरण है। इस महिला के माध्यम से उसके पति ने ८०० पृष्ठ लिखे थे, जिसमें इस बात का वर्णन था कि उसकी हत्या किन परिस्थितियों में हुई। इसी सूचना के आधार पर हत्यारे पकड़े जा सके थे। यह बात ध्यान देने योग्य है कि ये पृष्ठ अंग्रेजी भाषा में लिखे गए थे और स्वयं माध्यम ( अरुणा कुमारी) को अंग्रेजी भाषा का ज्ञान नहीं है।
गत वर्ष मेरे एक परिचित व्यक्ति ने मुझ से इस प्रकार का प्रयोग सीख कर अपने घर में एक व्यक्ति के माध्यम से मृतात्मा का आह्वान किया । जो व्यक्ति माध्यम बना था उसकी उम्र लगभग २२ वर्ष की थी परन्तु वह माध्यम सरल, निष्कपट और भोला-भाला था। व्यक्ति ने आह्वान तो किसी अन्य मृतात्मा का किया था, परन्तु उससे पूर्व ही किसी दुष्ट मृतात्मा ने उस युवक के शरीर में प्रवेश कर लिया और प्रयोग कर्त्ता के प्रश्नों के उत्तर देने शुरू कर दिए।
जब प्रश्नोत्तर समाप्त हो गए और प्रयोगकर्त्ता ने उसे जाने के लिए कहा तब मृतात्मा ने जाने से इंकार कर दिया और कहा कि मैं इस घर को बरबाद करके ही जाऊंगा परन्तु मेरी इच्छा पूरी कर दी जाय तो मैं तुरन्त चला जाऊंगा | प्रयोगकर्त्ता ने जब उसकी इच्छा पूछी, तो माध्यम द्वारा उत्तर दिया कि मैं तुम्हारी पुत्री के साथ सम्भोग करने की इच्छा रखता हूं। उसकी वह मांग नितान्त अनुचित थी । जब प्रयोगकर्ता ने यह बात मानने से इन्कार कर दिया, तब उसने देखा की कुछ समय बाद ही माध्यम की आँखें पथरा गई हैं। और उसके मुह से सफेद-सफेद झाग निकल रहा है।
ऐसा लग रहा था जैसे उस माध्यम का गाला दबाया जा रहा हो। यही नहीं, कुछ समय बाद प्रयोगकर्त्ता के घर के पर्दों में आग लग गई और दूसरे दिन तो घर में बहुत अधिक उपद्रव हुआ। मृतात्मा की एक मांग थी कि यदि मेरी इच्छा पूरी नहीं की गई तो मैं तुम्हारे घर के सभी सदस्यों की हत्या कर दूंगा और इसके लिए मैं केवल तीन दिन का समय देता हूँ ।
प्रयोगकर्त्ता घबरा गए और उन्होंने तुरन्त मुझे टेलीफोन किया। दूसरे ही दिन मैंने वहां जाकर उस मृतात्मा से बात की और समझा-बुझा कर उसे जाने के लिये कहा परन्तु उसने जाने से मना कर दिया। तब कुछ विशेष मन्त्रों के प्रयोग से उस मृतात्मा को हटाना पड़ा। जब ऐसी विकट परिस्थिति उत्पन्न हो जाए तब क्रोध या जिद्द न करके नम्रतापूर्वक उस मृतात्मा को प्रस्थान करने के लिए कहना चाहिए।
6 मरे हुए इंसान से बात करने का तरीका – माध्यम प्रयोग
इस प्रयोग को कहीं पर भी किसी भी समय किया जा सकता है। भारत में अधिकतर यही प्रयोग किया जाता है। इसमें किसी साफ, चिकनी सतह पर चाक से या किसी रंग से एक सफेद घेरा बना लेना चाहिए और उस घेरे के चारों तरफ अक्षर लिख लेना चाहिए तथा १ से ९ तक के अंक भी इसी घेरे के बाहर क्रम से लिख लेने चाहिए। जब प्रयोग करना हो तो एक साफ कटोरी घेरे के बीच में उल्टी रख देनी चाहिए । रखने के पूर्व एक माचिस की तीली जलाकर उसे कटोरी में घुमा कर वह कटोरी शुद्ध कर लेनी चाहिए तथा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कमरे का वातावरण पूर्णतया शान्त हो ।
बहुत ही हल्की रोशनी हो तथा कमरे में कोई सुगन्धित अगरबत्ती लगी हुई हो। इस प्रयोग में तीन व्यक्ति भाग ले सकते हैं। तीनों व्यक्तियों को चाहिए कि वे अपनी तर्जनी उंगली का हल्का सा स्पर्म उस कटोरी पर रखें और किसी ऐसी प्रेतात्मा का आह्वान करें जो सामान्य पढ़ी-लिखी हो ।
जब वह मृतात्मा आ जाएगी तब उस कटोरी में स्वतः कम्पन प्रारम्भ हो जायेगा और वह बिना दबाव दिए ही अपने स्थान से अक्षरों तथा अंकों के बीच घूमने लग जाएगी या सरकने लग जाएगी। अब ऐसी स्थिति का जाए तब हमें प्रश्न करने चाहिए। इसी प्रकार के एक प्रयोग में मैंने एक मृतात्मा का आह्वान किया और उससे निम्न प्रकार से प्रश्नोत्तर हुए
: १- इस घर में चोरी कब हुई ?
उत्तर मिला — परसों।
२- क्या सोने का जेवर इस घर से बाहर ले जाया गया है ?
उत्तर मिला — नहीं।
३- क्या चोर इस घर का है, या बाहर का ?
उत्तर — घर का ही। मिला
४- चोर कौन है ?
उत्तर मिला — राकेश |
५- राकेश तो गृह स्वामी का पुत्र है ?
उत्तर मिला – – हाँ ।
६- क्या उसने चोरी की है ?
उत्तर मिला — हाँ ।
७- उसने सोने का गहना कहाँ रखा है ?
उत्तर मिला — छत पर कबाड़खाने में ।
जब ऊपर जाकर कबाड़खाना खोला गया, तो कोने में एक डिब्बे में छिपाया हुआ सोने का आभूषण मिल गया। इस प्रकार मृतात्मा के माध्यम से खोए हुए व्यक्ति, चोरी की हुई वस्तु, परीक्षा का परिणाम आदि कई प्रश्नों के उत्तर ज्ञात कर सकते हैं। वास्तविकता यह है कि हम में और प्रेतात्मा में कोई अन्तर नहीं है।
हमारे पास भौतिक शरीर है, जबकि उनके पास सूक्ष्म शरीर है। सूक्ष्म शरीर के माध्यम से ये बहुत शीघ्र अत्यन्त दूर जा सकते हैं और सम्बन्धित सूचना एकत्र करके हमारे प्रश्नों के जवाब दे सकते हैं। हम इस भौतिक शरीर से ऐसा नहीं कर पाते।
नमक से शत्रु का नाश | शत्रु का नाश करने वाला मंत्र मंत्र namak se shatru ka nash ph.85280 57364
नमक से शत्रु का नाश |शत्रु का नाश करने वाला मंत्र namak se shatru ka nash ph.85280 57364
नमक से शत्रु का नाश |शत्रु का नाश करने वाला मंत्र namak se shatru ka nash ph.85280 57364 नमक से शत्रु का नाश करना तांत्रिक के लिए कोई नया काम नहीं है। तंत्र में ऐसी अनेक शक्तियां होती हैं जिनकी मदद से शत्रु का नाश किया जा सकता है। अगर कोई तांत्रिक या अघोरी नमक पर जादू टोना कर दे, तो नमक से शत्रु का नाश करना आसान हो जाता है।
एक तांत्रिक जानता है कि नमक को कैसे ऐसी काली शक्तियों से बांधा जाए, जिससे नमक से शत्रु का नाश संभव हो। आज आप ऐसे ही तांत्रिक उपाय पढ़ेंगे, जिनका उपयोग करके आप अपने शत्रु को हरा सकते हैं और उसे मृत्यु की गहरी निद्रा में सुला सकते हैं। प्रिय पाठकों, चलिए जानते हैं कि नमक से शत्रु का नाश कैसे करना है।
नमक से शत्रु का नाश करना उतना ही कठिन है जितना की किसी मृत व्यक्ति को फिर से जीवित करना. यदि कोई साधक अपने शत्रु का नाश करना चाहता है तो वह तंत्र के मार्ग पर चलकर कुछ ऐसी विधियां अपना सकता है जिनके माध्यम से शत्रु का नाश किया जा सकता है. नमक से शत्रु का नाश करने का टोटका करके साधक अपने शत्रु से अपना प्रतिशोध पूरा कर सकता है और यदि शत्रु को इस भूलोक से मुक्त करना चाहते है तो भी आप टोटका कर सकते है.
बहुत से लोगों को यह धरना है कि नमक से शत्रु का नाश नहीं किया जा सकता है और यदि टोटका या उपाय किया जाए तो शत्रु के बजाय हमें ही नुकसान होने लगता है। ऐसे साधकों को हम यह कहना चाहेंगे कि आप शत्रु को तब तक कोई हानि न पहुंचाएं जब तक कि शत्रु आपको क्षति न करें। तंत्र अपनी रक्षा के लिए किया जाता है, न कि किसी को पीड़ा पहुंचाने के लिए।
तंत्र के अनुसार, साधक जटिल कार्य को सरलता से कर सकता है। यदि आप अपने शत्रु पक्ष के पीड़ित हैं, तो हम आपको अनेक चमत्कारी विधियाँ बताएँगे जिनकी सहायता से आप अपने शत्रु का सर्वनाश कर सकते हैं। उन विधियों में से एक है नमक से शत्रु का नाश करना। यदि आप नमक पर मंत्रों का जाप करके अपने शत्रु के घर में रख दें, तो शत्रु का नाश हो सकता है, लेकिन मंत्रों की विधि अत्यधिक जटिल होती है।
जैसा कि आप जानते हैं, नमक खाने में कड़वा और तीखा लगता है, उसी तरह यदि आप अपने शत्रु को नमक पर टोटका करके खिला देंगे या उसके घर में छिपा देंगे, तो आपके शत्रु का जीवन भी नमक की भांति कठोर और कड़वा बन जाएगा। नमक से शत्रु का नाश करना आसान नहीं है क्योंकि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में समय की कमी होती है और टोटके और उपाय में समय लगाना अनिवार्य होता है।
सेंधा नमक से शत्रु का नाश करना एक प्राचीन का उपयोग है। इसके अलावा, काली बिल्ली के कपाल, मल, मूत्र, नख और बाल, चंदन का टीका, गोबर के उपले, गाय का घी, केवड़ा और पुष्प भी शत्रु का नाश करने में मदद कर सकते हैं।
शत्रु का नाश करने के लिए बिल्ली के कपाल और नमक का उपयोग करना बहुत सरल है। जो व्यक्ति अपने शत्रु का नाश करना चाहता है, उसे शनिवार के दिन उपरोक्त सभी सामग्री को एकत्रित करके किन्नरों के अंतिम संस्कार के स्थान पर जाना चाहिए। वहां बैठकर, अपने सामने काली बिल्ली के कपाल को रखें और उसे सेंधा नमक से भर दें। इसके बाद, गाय के सूखे उपले पर चंदन से अपने शत्रु का नाम लिखें और गाय का घी डालकर कपाल के पास रखें और उसे जला दें। इन सभी कार्यों के बाद, काली बिल्ली के नख पर केवड़े का इत्र लगाएं और अपने दाहिने हाथ में लेकर इस शक्तिशाली मंत्र का 1100 बार जाप करें
मंत्र जाप के बाद, साधक को बिल्ली के नख को कपाल में रखने के बजाय उसे नमक के अंदर गाड़ देना चाहिए। उसके बाद, साधक को उन्नीस पुष्प दाहिने हाथ में लेकर जलते उपले के ऊपर चढ़ाना चाहिए। इसके बाद, साधक को बिल्ली के मल में बिल्ली का मूत्र मिलाकर घोल बनाना चाहिए। उस घोल से साधक को कपाल के चारों तरफ सुरक्षा घेरा बनाना चाहिए और अपने मन में शत्रु का स्मरण करना चाहिए। नमक से शत्रु का नाश करने की विधि को आगे बढ़ाते हुए, साधक को कपाल में भरे नमक को बाहर निकालना चाहिए और इस नमक को अपने शत्रु के घर के बाहर रखना चाहिए। नमक में रखा बिल्ली का नख को साधक को बाहर निकाल
munja sadhna- प्राचीन चमत्कारी सात्विक सौम्य मुंजा साधना ph.85280 57364
munja sadhna- प्राचीन चमत्कारी सात्विक सौम्य मुंजा साधना ph.85280 57364 नमस्कार प्रिय मित्रों, गुरु मंत्र साधना में आप सबका हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ। आप अपने इस प्यारी gurumantrasadhna.comआलौकिक साधनाओं में। दोस्तों आपने देश में भूतों से ज्यादा, प्रेतों से ज्यादा, पिशाचिनी से ज्यादा एक साधना युगों से बहुतायत में रही है, बहुत ज्यादा होती आ रही है वह किस की साधना है वह मुंजा साधना, मुंजा साधना महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा होती है।
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वैसे पूरे देश में होती है लेकिन अलग अलग नामों से होती है। कहीं कुछ कहते हैं, कहीं कुछ कहते हैं, कहीं कुछ कहता है। महाराष्ट्र में पूजा करते हैं तो पूरे देश में साधना होती है। अलग अलग नामों से होती है और बहुत होती है। क्यों होती है ? इसलिए वो तो होती है। एक तो यह साधना सरल है, आसानी से हो जाती है। दूसरी साधना में क्या साइडइफेक्ट बहुत कम है।
तीसरी, इस साधना में जो काम मुंजा कर सकता है वो काम एक प्रेत नहीं कर सकता, पिशाच नहीं कर सकता, पिशाचनी नहीं कर सकते। एक बार को प्रेत, प्रेत, पिशाच, पिशाच, भूत, भूतनी इनको मंदिर में जाते हुए देर लगेगी।
लेकिन मुंजा जब मंदिर में चला जाता है, किसी का घर कीलन किया उसमें कोई शक्ति नहीं जा सकती जिसमें मुंजा जा सकता है। जो काम कोई नहीं कर सकता वह काम मुंजा कर सकता है।
इसलिए मुंजा की साधना बहुत फेमस साधन है। मैंने अपने उस यूटूब चैनल में मुंजा के बारे में काफी विस्तार से बताया। आज मुंजा को मन्त्रों से कैसे सिद्ध करते हैं, इसके बारे में बताता है।
यह पीपल मुंजा की साधना मुंजा के साधना कई प्रकार की होती है और कई प्रकार के मेरे पास मुंजा साधना के मंत्र हैं। कई प्रकार की सिद्धियां अलग अलग प्रकार के मुंजा जैसे देव मुंजा होता है, पिंपल मुंजा होता है, शमशान मुंजा, मसान, मुंजा होता है, पिशाच मुंजा होता है। सब के सब के अलग अलग रूप होते हैं। अलग अलग साधनाओं के प्रकार होते हैं तो कैसे कैसे की जाती है। सबका अलग ढंग होता है।
आज मैं पिम्पल मुंजा की साधना बताता हूं जिसमें पिंपल, मुंजा, मृत देवता टाइप पर जो मुंजा होता है वह पकड़ में आ जाता है। मुंजा साधना का मुझे अच्छा एक्सपीरियंस। 28 दिन तक मुंजा का साथ रहा हूं।
छत्तीसगढ़ रायगढ़ में है, रायगढ़ में काम पड़ गया था। वहां कुछ काम करने के लिए मैं एक महीना करीब रुका था। एक फ्लैट में उस फ्लैट में 28 28 दिन उस फ्लैट में रहने का काम पड़ा। उसमें 16 से ज्यादा मुंजा लड़के लड़कियां थी।
उनमें एक सरदार थी, जिसका नाम था गीता। वो छोटी सी थी खेल रही थी। बिल्डिंग पर कुछ इंटों से कुछ बनाया हुआ था। वह टूट गया और वह गिर गया तो काफी मलबा उसके ऊपर गिरा तो वह मर गई और उसी जगह स्थान पर मुंजा के रूप में वहां रहती है तो 28 दिन तक उनके साथ रहना पड़ा तो मंजू को अच्छी तरह से जानकारी मुझे हो गई।