Author: Rodhar nath

मैं रुद्र नाथ हूँ — एक साधक, एक नाथ योगी। मैंने अपने जीवन को तंत्र साधना और योग को समर्पित किया है। मेरा ज्ञान न तो किताबी है, न ही केवल शाब्दिक यह वह ज्ञान है जिसे मैंने संतों, तांत्रिकों और अनुभवी साधकों के सान्निध्य में रहकर स्वयं सीखा है और अनुभव किया है।मैंने तंत्र विद्या पर गहन शोध किया है, पर यह शोध किसी पुस्तकालय में बैठकर नहीं, बल्कि साधना की अग्नि में तपकर, जीवन के प्रत्येक क्षण में उसे जीकर प्राप्त किया है। जो भी सीखा, वह आत्मा की गहराइयों में उतरकर, आंतरिक अनुभूतियों से प्राप्त किया।मेरा उद्देश्य केवल आत्मकल्याण नहीं, अपितु उस दिव्य ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाना है, जिससे मनुष्य अपने जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझ सके और आत्मशक्ति को जागृत कर सके।यह मंच उसी यात्रा का एक पड़ाव है — जहाँ आप और हम साथ चलें, अनुभव करें, और उस अनंत चेतना से जुड़ें, जो हमारे भीतर है ।Rodhar nath https://gurumantrasadhna.com/rudra-nath/

kala ilm kala jadu काला इल्म और काले जादू का रहस्य सबसे शक्तिशाली विद्या kala ilm kala jadu ph.85280 57364

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kala ilm kala jadu काला इल्म और काले जादू का रहस्य सबसे शक्तिशाली विद्या   g urumantra.com में आप सबका फिर से स्वागत है। आज का जो हमारा विषय रहेगा, वो काले इल्म को लेकर रहेगा। देखिए, काला इल्म क्या है और किस तरीके से काम करता है और इसकी शक्ति क्या है, तो इन्हीं चीजों के बारे में हम आज बात करेंगे।

मैं आपको बता दूँ कि इल्म तीन तरीके के होते हैं: एक नूरी इल्म होता है, एक सिफ़ली इल्म होता है, एक काला इल्म होता है। इल्म को हम तीन पार्ट में डिवाइड करते हैं। नूरी इल्म के ऊपर भी मैं  पोस्ट बना चुका हूँ, सिफ़ली के ऊपर भीपोस्ट  बना चुका हूँ।

अब बारी आती है काले इल्म के बारे में। अगर आपने वो पोस्ट अभी तक पढ़ा  नहीं  हैं, तो आप वो पोस्ट पढ़े  करें ताकि आपको बेहतर रूप में समझ आ सके।

चलो, थोड़ा सा मैं आपको बता भी देता हूँ। देखो, जो नूरी इल्म होता है, जो पीर-फ़कीर हो गए, इनकी साधना का इस्तेमाल करके हम किसी का अगर कोई अच्छा करते हैं, तो वो नूरी इल्म होता है। देवी-देवताओं की साधना करके अगर किसी का कुछ होता है, तो वो भी नूरी इल्म है।

दूसरा सिफ़ली होता है, जो कब्रिस्तान के अंदर किया जाता है। इसमें बहुत सारी चीजें होती हैं। उसके ऊपर मैं अलग से पोस्ट बना चुका हूँ, इन दोनों के ऊपर बना चुका हूँ, नूरी और सिफ़ली के ऊपर। आज मैं बात सिर्फ़ काले इल्म के बारे में ही करूँगा।

देखिए, काला इल्म क्या है? सिफ़ली इल्म से थोड़ा अलग होता है क्योंकि सिफ़ली इल्म ज़्यादातर कब्रिस्तान में किया जाता है। काला इल्म है श्मशान की क्रिया, श्मशानी क्रिया भी बोल सकते हो आप। कुल मिलाकर, काला इल्म बहुत स्पीड से काम करता है।

इनकी शक्तियाँ होती हैं, वो गोली की तरह काम करती हैं। जैसे आप लगा लीजिए, महाकाली हो गईं, काल भैरव हो गए, माता मैदान वाली हो गईं, चौगान वाली हो गईं, इस तरीके से जो माताएँ हैं, तामसिक शक्तियाँ हैं, जिनको तामसिक भोग लगता है, यह काम करती हैं काले इल्म में।

जिस हिसाब से आपका भोग-प्रसाद रहेगा, उसी हिसाब से काम होते हैं। कुछ लोग मुर्गे की कलेजी लगाते हैं, कुछ लोग बकरे की कलेजी लगाते हैं, कुछ लोग सूअर का देते हैं, कुछ लोग पैसे का देते हैं, मतलब सबका अलग-अलग है।

जितना बड़ा सिस्टम रहता है, उतना बड़ा काम होता है। हर चीज के लिए भोग अलग-अलग होता है, जिसमें मांस वगैरह लगता है, शराब लगती है। पहले शक्ति की साधना की जाती है, फिर उसको काम बताया जाता है जब साधना सिद्ध हो जाती है।

सिद्ध होने के बाद उसी मंत्र से आपको उस शक्ति का भोग-प्रसाद लगाना है। भोग-प्रसाद लगाकर उस भोग-प्रसाद को श्मशान में रखा जाता है। फिर वह शक्ति गोली की तरह काम करती है। सात्विक भोग में भी काम करती है, पर तामसिक में थोड़ा जल्दी हो जाता है काम, तो इसीलिए वो चीज होती है।

काला इल्म, जो हम काम करते हैं, मतलब तामसिक भोग लगाकर उसको चलाते हैं, तो वो हो जाता है काला इल्म। इसके अंदर मैंने आपको बता दी कि कौन-कौन सी शक्तियाँ काम करती हैं। बहुत सुपरफास्ट यह काम करता है काला इल्म। मतलब इतने स्पीड से काम करता है कि कुछ ऐसे साधक हैं जो केवल 2 घंटे के अंदर-अंदर ही रिजल्ट दे देते हैं।

हर बंदे की पावर और ऊर्जा के ऊपर यह चीजें काम करती हैं। जितना पावरफुल होगा जो बंदा, उसका उतनी जल्दी ही काम होता है। 2 घंटे के अंदर भी काम हो सकता है, कुछ इससे भी तेज हैं जो 2 मिनट में ही सामने वाले को रिजल्ट दे देते हैं। पर उस हर चीज के लिए टाइम लगता है, टाइम पीरियड के बाद ही चीजें सिद्ध होती हैं।

तो यह होता है काला इल्म। नूरी इल्म, काला इल्म और सिफ़ली इल्म, ये तीन तरीके के इल्म हैं। तीनों के ऊपर मैंने अलग-अलग पोस्ट लिख  दिए हैं। अगर आपने नहीं देखे हैं, तो आप देख सकते हैं। काले इल्म में शक्ति सुपरफास्ट तरीके से काम करती है।

काले इल्म की मैंने काल भैरव साधना भी अपने चैनल के ऊपर दी है, महाकाली की साधना के बारे में भी मैंने अनुभव बताया है, तो आप वो भी देख सकते हो। कुल मिलाकर, काला इल्म आप यह बोल सकते हो, किसी शक्ति से सुपरफास्ट तरीके से काम करवाना ही काला इल्म है।

जिस हिसाब से काम होता है, उसी हिसाब से भोग-प्रसाद लगता है। जैसे किसी शक्ति का कोई काम छोटा होता है, तो मुर्गे से भी चल जाता है और बड़ा होगा तो बकरा चलेगा, फिर सूअर चलेगा, फिर अलग-अलग चीजें हैं।

हम किसी भी चीज को रिकमेंड नहीं करते, ना तो किसी का प्रचार करते हैं। केवल एक जानकारी पर्पस के लिए मैंने यह पोस्ट बनाया है। अगर आपको जानकारी पसंद आई हो, तो आप पोस्ट को ज़रूर लाइक कर सकते हैं। नंबर दे रखा है, अगर इसके अलावा और भी जानकारी चाहिए तो आप फ़ोन भी कर सकते हैं। जय श्री महाकाल।

yakshini-sadhna यक्षिणी साधना के लाभ – यक्षिणी साधना रहस्य – धन ऐश्वर्या और भोग प्रदान करने वाली की देवी का रहस्य yakshini

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yakshini-sadhna यक्षिणी साधना के लाभ – यक्षिणी साधना रहस्य – धन ऐश्वर्या और भोग प्रदान करने वाली की देवी का रहस्य yakshini गुरु मंत्र साधना.कॉम में आप सबका फिर से स्वागत है। आज का जो मेरा कॉन्सेप्ट रहेगा, यक्षिणी साधना को लेकर रहेगा और यक्षिणी साधना के बारे में मैं आपको पूरी जानकारी प्रदान करूँगा।

देखिए, जो यक्षिणियाँ होती हैं, यह भी एक तरीके से दैविक शक्ति होती हैं, उनको दैविक शक्ति बोला गया है। यह कई तरीके की होती हैं, जैसे 36 प्रकार की होती हैं, इसमें से जो आठ होती हैं, यह प्रमुख होती हैं, 36 में से चार जो यक्षिणियाँ होती हैं 

इनको गोपनीय रखा गया है। जो 32 यक्षिणियाँ हैं, यही ज़्यादातर जो हैं, साधकों के बीच में रही हैं। बाकी जो चार यक्षिणियाँ हैं, इनको गोपनीय रखा गया है, इसके बारे में किसी भी साधक को नॉलेज नहीं है, इन्हीं 32 यक्षिणियों में से आठ यक्षिणी प्रमुख मानी गई हैं, यह इनका कॉन्सेप्ट है।

जो ये यक्षिणियाँ होती हैं, जो यक्षराज कुबेर हैं, उनके अधीन ये रहती हैं, उनके मुताबिक ही चलती हैं क्योंकि यक्षराज बोला गया है कुबेर जी को और कुबेर जो उनको आज्ञा करेंगे, उनके मुताबिक ही वह चलेंगी। वैसे तो यह महादेव की सेवा में हाजिर रहती हैं, जो इनके प्रधान हैं, इनके अधिपति हैं, वो जो ज़िम्मेदारी सौंपी गई है, कुबेर जी को सौंपी गई है, कुबेर जी ही इनका करते हैं आगे जो कुछ भी देखरेख या उनके मार्गदर्शन से आगे चलती हैं।

देखिए, जो यक्षिणियों का जन्म हुआ है, यह महादेव के पसीने से हुआ है, जब महादेव के ऊपर कामदेव ने तीर चलाए थे, वो तीर उनके जाके बॉडी के ऊपर लगे थे, महादेव क्रोधित हो गए और आगे उनका जो तीसरा नेत्र है, वह खुला, कामदेव को भस्म कर दिया गया। वही जो कामुकता थी, उनके चेहरे के ऊपर पसीने के रूप में निकलने लगी।

वही जो आगे चलके जहाँ-जहाँ गिरी धरती के ऊपर, वहाँ-वहाँ यक्षिणियाँ पैदा हो गईं, तो यह इनका कॉन्सेप्ट है। जो आगे ऋषि होते हैं, उनको जाके ये परेशान करने लगीं, उनके साथ वो जो भोग की इच्छा करने लगीं, तो उन्होंने इनको श्राप दे दिया, जाओ, आप अपने जो देवत्व है, उसको खत्म कर दोगे, मतलब दैविकता से नीचे गिर गए, पहले यह देवताओं के समान ही थीं, इनको रखा गया था।

जब इन्होंने इस तरीके से कुछ हरकतें कीं, उनको नीचे कर दिया गया, अपने उसी दैविक गुण को पाने के लिए जो होती हैं, यह लोग इनको सिद्ध करते हैं, यह सिद्ध होती हैं, पर जो उन्होंने आगे जैसे उनसे क्षमा याचना करी, तो उन्होंने उनको माफ़ कर दिया, और यह बोला कि जो भी तुम्हें व्यक्ति, साधक सिद्ध करेगा, उसके बाद ही आप अपने जो वापस देवत्व गुण हैं, उनको प्राप्त करोगी।

उसके बाद यह खुद यह ढूँढती हैं कि कोई इनको साधक सिद्ध करे, हम भी अपने देवत्व गुण को प्राप्त करें। तो ये इसका कॉन्सेप्ट होता है।

यह बहुत ही पॉजिटिव शक्ति है। जब बंदे की ज़ुबान के ऊपर इसका नाम जाता है, तो अंदर से पॉजिटिविटी फील होती है, पर यह देवताओं से थोड़ी सी नीचे हैं, पर यह एक दैविक शक्ति ही आप इनको मान सकते हैं, अप्सरा हो गईं, यक्षिणियाँ हो गईं, एक दैविक ही शक्ति हैं, जो देवताओं के पास रहती हैं, इसमें से भी कुछ तामसिक हैं, जो 12 तामसिक हैं, जो 12 हैं, राजसिक हैं, 12 ही जो हैं, सात्विक मानी गई हैं।

आठ इसमें से प्रमुख मानी गई हैं, जैसे कुछ एक-दो के नाम मैं आपको बताऊँगा, जैसे कामेश्वरी यक्षिणी होती है, कोई भी व्यक्ति अगर अपना ऐसा रूप चाहता है कि उसकी ओर सब लोग आकर्षित हों, उसकी काम की जो इच्छा है, वो उसकी पूर्ति हो, तो कामेश्वरी यक्षिणी को सिद्ध किया जाता है।

कामेश्वरी यक्षिणी को सिद्ध करने के बाद दुनिया की कोई भी स्त्री उस व्यक्ति से आकर्षित होने से नहीं बच सकती है। दुनिया की तमाम औरतों के साथ वो भोग-विलास करता है, जो कामेश्वरी यक्षिणी को सिद्ध कर लेता है, कामना पूरी करने वाली यक्षिणी होती है, खुद वह साधक के साथ संभोग-विलास करती है, अलग-अलग रूपों में भोग-विलास करती है। धरती की जो भी खूबसूरत लड़कियाँ होंगी, उनके थ्रू वो विलास करवाती है। ये कामेश्वरी यक्षिणी है।

एक है सुरसुंदरी। सुरसुंदरी के नाम से ही आपको थोड़ा लग रहा होगा। देखिए, जो सुरसुंदरी है, ये सुर का मतलब होता है देवता, सुंदर, देवताओं के समान सुंदरता देने वाली जो यक्षिणी है, वह है सुरसुंदरी, यह भी बहुत ही शक्तिशाली यक्षिणी होती है। आपके अंदर सुंदरता इतनी ज़्यादा भर देगी कि कोई भी व्यक्ति आपकी ओर आकर्षित हो जाएगा

चाहे देवता हो, चाहे अप्सरा हो, कोई भी, इस लेवल तक आपको सुंदरता प्रदान करेगी, इस लेवल की यह शक्तियाँ होती हैं। जो यक्षिणियों की पूजा करता है, उसको कभी भी धन की कमी नहीं रहती, धन उसको भरपूर मिलता है, क्योंकि यक्षराज कुबेर के अधीन हैं और कुबेर को तो धन का स्वामी बोला गया है, तो इसीलिए कुछ ऐसी यक्षिणियाँ हैं, जो आपको बहुत सारी चीज़ें देती हैं।

पद्मिनी यक्षिणी  आप समझ सकते होंगे, मतलब ऐसे सुरमा दे देगी आपको, आप पहनोगे, लगाओगे आँखों में, तो कोई आपको देख नहीं पाएगा, अदृश्य होने की शक्ति और ऐसी-ऐसी शक्तियाँ। पैसे के मामले में है, तो आप पद्मिनी यक्षिणी को सिद्ध कर लो, पैसा आपको इतना आएगा, बहुत ज़्यादा।

लक्ष्मी यक्षिणी होती है, उसको कर लो आप, पैसा आपके घर में भर जाएगा, इतना पैसा देती हैं।देखिए, यह अलग-अलग रूप में किया जा सकता है।

इसको यह ज़्यादातर सात्विक रूप में ही चलती है, तामसिक भी होती हैं, इसमें से 12 यक्षिणियाँ मैंने आपको बताया, तो तामसिक रूप में भी ये चलती हैं, राजसिक रूप में भी और सात्विक रूप में, ये होता है इनका सिद्ध।

जो तामसिक यक्षिणियों को सिद्ध करता है व्यक्ति, तो उसके काम गोली की तरह होते हैं। एक ऐसा साधक मैं जानता था, वो उसने एक ऐसी यक्षिणी को सिद्ध कर रखा था, जो तामसिक रूप में उनके साथ रहती थी वो, और कोई भी काम लेने के लिए वह बहुत बड़ा एक बलिदान करता था। अगर मैं इस  पोस्ट के अंदर बताऊँगा, तो वो चीज़ें सही नहीं हैं।

अंत में वो व्यक्ति बुरी तरीके से फँस गया क्योंकि उसने जो है, आदमियों का जो खून होता है, उसका चस्का लगा दिया सबको और हर वक्त उसको आदमियों की ज़रूरत पड़ती थी, जो उनका खून निकाल सके। इस तरीके से जो चीज़ें होती हैं, इनमें नहीं जाना चाहिए। सात्विक रूप में, पॉजिटिव रूप में ही आप करो, तो ज़्यादा बेहतर है।

अगर आप चाहते हो कि आपकी ज़िंदगी बदले, आपकी ज़िंदगी के अंदर ऐश्वर्य आए, सुख-शांति आए, आप ये यक्षिणियों की साधना आप ज़रूर कर सकते हैं, यक्षिणी, यक्षिणियों का ऐसा कॉन्सेप्ट है, आपकी ज़िंदगी में हर चीज़ का अंबार लग जाएगा, क्योंकि ये पॉजिटिव शक्तियाँ हैं। 

कुछ भी बुरा नहीं करती हैं, पॉजिटिव वे में ही ये चलती हैं, तो एक मैं ऐसा वीडियो थोड़े दिन बाद फिर लेके आऊँगा, वो रहेगा यक्षिणियों के बारे में, कौन सी यक्षिणी आपको क्या देती है, कौन सी यक्षिणी आपको करनी चाहिए, उस टॉपिक के ऊपर मैं बात करूँगा, उस टॉपिक में मैं डिटेल के साथ बताऊँगा कि ये यक्षिणी कर लोगे तो यह मिलेगा, यह यक्षिणी कर लोगे तो यह मिलेगा।

सबसे इसका फ़ायदा यह होता है, आप माँ-बहन, पत्नी रूप में भी कर सकते हैं, प्रेमिका रूप में भी कर सकते हैं। पर एक चीज़ मैं आपको और बोलता हूँ, पत्नी रूप में करोगे, और दूसरी शादी कर लोगे, जब भी आप करोगे शादी, तो आपकी मृत्यु निश्चित है।

तो उन्हीं लोगों को पत्नी रूप में करनी चाहिए, जिनको आगे शादी-ब्याह नहीं करना क्योंकि इनके अंदर तलाक़ का कोई सिस्टम नहीं है। जिस समय आपकी इंसान के साथ आपने शादी कर ली, तो उस समय आपकी मृत्यु है। यह मैं नहीं बोल रहा हूँ, ये भगवान शिव बता रहे हैं,

दूसरी चीज़, यक्षिणियों के जितने भी मंत्र हैं, यह सब कीलित हैं। इसको खोलने के लिए कोई भी ऐसा साधक चाहिए, जो उनको खोल सके, भगवान शिव का जो भी तंत्र है, वह कीलित है, सिद्ध कर ही नहीं सकते आप।

सिद्ध करने के लिए आपको ऐसा व्यक्ति ढूँढ़ना पड़ेगा, जिसके पास निष्कीलन करने का सिस्टम हो, तभी ही जाके यह यक्षिणियाँ सिद्ध होंगी, अदरवाइज़ इनको सिद्ध करना मुश्किल है, करोगे क्योंकि तंत्रों के अंदर इसके मंत्र दे रखे हैं, तो अगर इस तरीके से होने लगा, तो सब लोग कर लेते, करते वही हैं, जिनके पास इसको खोलने की चाबी होती है, वही कर पाते हैं।

ये शक्तियों के बारे में फिर पता कैसे चलता है? जैसे किसी व्यक्ति ने कोई बड़ी शक्ति को सिद्ध कर रखा, तो वही शक्तियाँ इनको आगे बताती हैं कि यह विद्या ऐसे सिद्ध होगी, ऐसे होगी, फिर यह लुप्त विद्याएँ वापस आती हैं, वरना ये विद्याएँ वापस नहीं आती हैं।

बहुत सारी चीज़ें विलुप्त हो गईं, इसी तरीके से, इसी कॉन्सेप्ट से वो चीज़ें वापस आ जाती हैं क्योंकि जो लोग ये विद्याओं को जानते थे, बाद में मर जाते हैं, तो मामला वहीं दफ़्न हो जाता है, अपने साथ ही वो ले जाते हैं।

तो फिर आगे यह विद्याएँ इस तरीके से फिर दोबारा से लौटती हैं, क्योंकि किसी भी चीज़ का कोई अंत नहीं, आज कोई विद्या कोई व्यक्ति कर रहा है, वो इसलिए कर पा रहा है क्योंकि उसके पास निष्कीलन करने का सिस्टम होता है। वह कभी नहीं कर पाता है, जिसके पास वह सिस्टम न हो,

तो भाई, आज के लिए इतना ही। एक लेख  और बनेगा, जिसके अंदर एक-एक यक्षिणी का डिटेल सहित बात करूँगा, कौन सी यक्षिणी क्या करती है, कैसे करती है, उस कॉन्सेप्ट के बारे में बात करूँगा मैं। आज आपके लिए इतना ही, बस मेरे को जाने की आज्ञा दीजिए, जय श्री महाकाल।

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नमस्कार, आप सबका हमारे चैनल गुरुमंत्रसाधना.कॉम में फिर से स्वागत है। देखिए, जो आज का टॉपिक रहने वाला है, वह हमारा टॉपिक रहेगा तंत्र विद्या से, ब्लैक मैजिक से, काले जादू से, काले इल्म से, सिफली इल्म से, किसी भी प्रकार के जादू-टोना, तंत्र-मंत्र से कैसे बच सकते हैं, कैसे सुरक्षित कर सकते हैं, नेगेटिव चीजों से कैसे बचें, नेगेटिव शक्तियों से कैसे बचें। इसी टॉपिक के ऊपर बात करूँगा। जो भी चीज मैं आपको बताऊँगा, बिल्कुल फ्री वाली चीजें बताऊँगा।

अब मैं आपको एक चीज बताता हूँ, हर व्यक्ति अपने साथ सुरक्षा लेकर चलता है। अब सुरक्षा कई तरीके की हो सकती है। भौतिक सुरक्षा होती है, सिक्योरिटी गार्ड आप रख लो, गनमैन रख लो, वो आपकी भौतिक सुरक्षा हो गई। 

एक तांत्रिक सुरक्षा भी एक बहुत लाज़मी पार्ट होता है। तो बाहरी सुरक्षा तो आपको नजर आ जाती है, तांत्रिक जो सुरक्षा है, यह भी एक बहुत जरूरी पार्ट है। कुछ लोग मेरे से सवाल पूछते हैं, अगर जादू-टोना रियल में होता है, तो ये बड़े-बड़े जो पॉलिटिशियन हैं, इनके ऊपर क्यों नहीं होता है? बहुत सारे लोग इनके दुश्मन हैं, तो इनके ऊपर करके आसानी से यह बात मतलब किसी को पता भी नहीं चलेगा और मामला भी साफ हो जाएगा और यह तो बहुत आसान तरीका है। 

अगर कोई करना चाहे तो आसान तो है। जो बड़े-बड़े पॉलिटिशियन हैं, उनके ऊपर इसलिए नहीं हो सकता है क्योंकि वह महंगे-महंगे कवच पहन के चलते हैं, बगलामुखी के कवच, महंगे-महंगे कवच पहनते हैं। इसीलिए कोई भी तांत्रिक इनके ऊपर कुछ नहीं बिगाड़ सकता है।

 क्योंकि लोग ओपनली हमें भी चैलेंज करते हैं, अगर दम है तो आप फलाने आदमी के ऊपर करके बताओ, जो फलाना पॉलिटिशियन है, वो यह कर रहा है, वो कर रहा है, आप उसके ऊपर करके दिखाओ। तो भाई इसीलिए यह चीजें नहीं होती हैं। 

दूसरी चीज, अगर कोई व्यक्ति किसी के ऊपर कुछ करना चाहे तो उसकी डिटेल होनी उसके पास लाज़मी है। डिटेल के साथ-साथ उसके शरीर का कोई पार्ट, रुमाल हो या आपका बाल हो या नाखून हो, तब पॉसिबल है ऐसा कि किसी के ऊपर कुछ किया जा सके, अदरवाइज पॉसिबल नहीं है।

चलो मैं अपने टॉपिक के ऊपर आता हूँ। मैं आपको फ्री के तरीके बताऊँगा जिससे आप इन चीजों से बच सकते हो। यह ऐसे तरीके रहेंगे, कोई भी तंत्र साधना कर लो, तो उसमें भी आपकी सुरक्षा पक्की है। उसमें भी आपका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है, चाहे रात को आप श्मशान में चले जाओ, इस लेवल की सुरक्षा आपको मिलने वाली है। 

तो फ्री की चीजें ही बताऊँगा मैं लगभग और किस तरीके से किसी के ऊपर किया जाता है, वो कैसे बचा जाता है, इसको पूरा डिटेल के साथ बताऊँगा। देखो, हर गरीब आदमी तो महंगे कवच पहन नहीं सकता। 

पहली बात यह है, हम करते तो कोई पहन नहीं सकता, अफोर्ड नहीं कर सकता। कोई गरीब आदमी महंगे कवच नहीं पहन सकता, आपको पता ही है क्योंकि उसका तो बेचारे का गुज़र-बसर भी बहुत मुश्किल से होता है, तो वो क्या चीज कर सकता है जिससे उसको सुरक्षा मिल सकती है? तो मैं आपको वही चीज बताने वाला हूँ।

अब आप सुनिए। देखिए, हर बंदे की बॉडी के पास एक शैडो होती है, जिसको हम ऑरा बोलते हैं, आपकी ऊर्जा होती है। जब भी अगर किसी को कुछ करना होता है, अगर आपका ऑरा वीक है, तब आपको यह चीजें बहुत जल्दी नुकसान पहुँचाएँगी। 

अगर आपका ऑरा स्ट्रांग है, कोई भी शक्ति आपके पास आएगी और टकरा के वापस चली जाएगी। ऑरा का काम यह होता है, आपकी ऊर्जा होती है। आपकी ऊर्जा जब कम होती है, तो तभी ही छोटी-छोटी चीजें आपको घेर लेती हैं, जल्दी से पकड़ लेती हैं। 

अच्छा, यह ऑरा बनता कैसे है? ऑरा बनता है आपके पूजा-पाठ से। जितना ज्यादा पूजा-पाठ करते जाओगे, आपके अगल-बगल एक लेयर बनती जाएगी, वह लेयर आपकी सुरक्षा करती है।

 अगर वो लेयर छोटी हो जाए, किसी दूसरे व्यक्ति ने कुछ आपके ऊपर कर दिया, तो लेयर आसानी से टूट भी जाती है एक झटके में। अपने ऑरा को जितना स्ट्रांग रखोगे, उतना ज्यादा आप बचोगे। अब सामने वाले को भी क्या है, फिर डबल मेहनत करनी पड़ेगी आपके ऊपर कुछ करने के लिए। 

अगर आपकी ऊर्जा 100 की है, तो उस सामने वाले को 200 की ऊर्जा लानी पड़ेगी, तभी आपको वो कर सकता है। जहाँ वीक हुए, वहीं पर आपके ऊपर अटैक हो जाता है। 

तो बेसिकली इस तरीके से काम होता है। कुछ लोग बोलते हैं कि बॉडी में बहुत सारी नेगेटिव चीजें उनको पकड़ लेती हैं। जब ऑरा वीक होता है, तो नेगेटिव चीज भी आपके ऊपर इम्पैक्ट करेगी, बहुत जल्दी आपके पास आएगी। उसको पता है यह आदमी कमजोर सा है।

 यह सच्चाई है मैं आपको बता रहा हूँ। जब भी इंसान कमजोर होता है, उनके ऊपर चीजें हावी होती हैं। चाहे कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा नशे के अंदर है, तो उसके अंदर भी ये चीजें हावी हो जाती हैं। 

रात को अचानक से उनकी बॉडी के ऊपर दबाव पड़ता है, वो चिल्लाते हैं, आवाज नहीं आती, तो इस तरीके से भी उनके साथ होता है क्योंकि हावी हो जाती हैं गलत चीजें बहुत जल्द।

अच्छा, आपको मैं कुछ रेमेडी बताने वाला हूँ जिससे आप ऑरा को स्ट्रांग कर सकते हैं। देखो, सबसे पहली बात आ गई, अगर आपके पास पूजा-पाठ के लिए समय नहीं है, आप बिजी रहते हो, तो आप हमसे कवच मँगवा करके भी पहन सकते हो। 

अगर नहीं ऐसा आप अफोर्ड नहीं कर सकते हो, तो भाई कोई दिक्कत नहीं। तो मैं आपको प्रैक्टिकल चीजें बताने वाला हूँ। देखो, सबसे पहले होता है भैरव अष्टकमभैरव अष्टकम की अगर आप साधना कर लेते हो, इसकी साधना होती है 40 दिन की और वह आपने जमके कर ली, उसके बाद आप भले श्मशान में चले जाओ, कहीं पर भी चले जाओ, कोई भी शक्ति आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। ऐसे ही मेरा एक साधक है, उसका नाम आशु है। 

उसका मैंने अनुभव पूरी डिटेल के साथ बता दिया है, फुल डिटेल काल भैरव अष्टकम के ऊपर। किस तरीके से उसके साथ अनुभव हुए, क्या हुआ, किस तरीके से उसकी मदद होती है।

काल भैरव अष्टकम करने के बाद बहुत सारी उसने ऐसी चीजें करीं, तो वो चीजें उसके पास भटकती नहीं हैं, उसको दिखाई देती हैं, उसके पास आने की हिम्मत नहीं करतीं, मतलब दूर रहती हैं बहुत ज्यादा। तो इतनी पावरफुल चीज है, आप उसका कर सकते हो। उसका पूरा अनुभव अगर आपको सुनना है डिटेल सहित, तो मैंने डाल रखा है उसका वीडियो, तो आप सुन लीजिए।

दूसरी चीज है, अगर कोई मुसलमान भाई है, तो हिंदू भी कर सकता है, आयतुल कुरसी करे, दरूद शरीफ के साथ कर ले। और यह भी बहुत पावरफुल चीज है, 313 मर्तबा 40 दिन तक अगर किया जाए, तो यह भी बहुत जल्दी आपको बहुत तगड़ा प्रोटेक्शन देगी, जो आपका प्रोटेक्शन रहेगा, बहुत अच्छे तरीके से करेगी। इवन आप खुद को भी सुरक्षित कर सकते हो, दूसरों को भी, इतनी आपके अंदर पावर आती है।

 तो उसका भी जो एक अनुभव है सेपरेट, तो आयतुल कुरसी के बारे में वो मैं जरूर आगे डालूँगा अपने इस चैनल पे। तो मेरे एक कुलदीप सिंह हैं, एक साधक हैं हमारे।

उनको हमने यह आयतुल कुरसी करवाई थी। एक और साधक है, वह लुधियाना से है, उसका नाम है देशराज सिंह। जो देशराज सिंह था, उसको माला की जरूरत पड़ी और यह कुलदीप सिंह उत्तराखंड, हरिद्वार के नजदीक का था। 

मैंने इसको फोन करा, आप माला भेज दीजिए इस बंदे को, शुद्ध स्फटिक की माला चाहिए। उस बंदे ने उसके ऊपर जाप वगैरह करके, वह डेली जाप करता था आयतुल कुरसी का। तो चलो, उसने बोला इसी माला के ऊपर कर लेता हूँ, करके भेजा। 

जैसे ही उसने पकड़ा, तो उसको बहुत जबरदस्त करंट लगा। ऐसा रियलिटी में संभव है। मतलब वो हैरान मान गया कि उसके साथ हुआ क्या। तो भाई, यह चीज इम्पॉसिबल नहीं है। क्योंकि उसको करंट इसलिए लगा क्योंकि उसकी बॉडी के अंदर कोई नेगेटिव चीज थी। जैसे ही उसने उस माला को छुआ, तो झटका लगा। तो दूसरी चीज यह हो गई प्रोटेक्शन के लिए।

तीसरी चीज आप बजरंगबली जी का कर सकते हैं। बजरंगबली जी का ज्यादा रेकमेंड मैं इसलिए नहीं करता हूँ क्योंकि भाई पवित्रता की इसमें बहुत जरूरत होती है। 

अगर आपको पवित्र साधनाएँ करनी हैं, सात्विक साधनाएँ करनी हैं, सोम्य साधना करनी है, तब तो आप यह करो। अगर आपको श्मशानी क्रिया करनी है, तो उस तरीके से करना है। 

आप मांस-मछली खाने वाले हो, दारू-अंडा पीते हो, आप तामसिक बंदे हो, तो आपको यह साधना नहीं करनी। उसके अलावा और भी चीजें हैं, जो हर तरीके का बंदा कर सकता है, सात्विक और तामसिक। आप सुबह 4:00 बजे उठ के हरि ओम का जाप करते हो, ओंकार की साधना करते हो, आपके अंदर भी वह आपका जो ऑरा है, कई गुना बढ़ जाएगा। 

यह रियलिटी है, ओंकार से बहुत तेजी से ऑरा बढ़ता है। चारों तरफ आप एक सुरक्षा कवच बनेगा, वो सुरक्षा कवच आपको हर तरीके की मुसीबत से बचाएगा। ओंकार का भी आप जाप कर सकते हो। सात्विक हो, वह भी करें, तामसिक है, वह भी करें। 

सुबह 4:00 बजे उठ के करें 2 घंटे 40 दिन तक। 40 दिन आप कर लो, आपको जिंदगी में बदलाव ना मिले, तो तब मेरे को फोन करना, आपकी पूरी जिंदगी में बहुत बड़ा चेंज आएगा। अगर आप वो भी नहीं करना चाहते, तो आप कोई भी मंत्र का जाप कर सकते हैं, कोई भी मंत्र, एवरीथिंग। 

देवी कवच कर लीजिए, कोई भी स्तोत्र का पाठ कर लीजिए, तो उससे भी आपका ऑरा बनेगा। ऐसा नहीं है कि इन कवचों से ही बनता है। कवच से थोड़ी सी इसकी सुरक्षा बड़ी हो जाती है। ऑरा जो भी या आप जाप करोगे, उससे ऑरा बनना ही बनना है।

दूसरी चीज, जितना तगड़ा आपका ऑरा रहेगा, जितना स्ट्रांग आपका ऑरा रहेगा, कोई भी बाहरी शक्ति आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। एक मेरे साधक हैं, उनका नाम गुरजीत सिंह था, वो गुवाहाटी में जॉब करते थे। 

उनका रियल एक्सपीरियंस जो है, मैं सब बताता हूँ एक वीडियो में, क्योंकि बताना बहुत जरूरी है, चाहे कोई सुने चाहे ना सुने, मेरा फर्ज है पूरी बात करना। गुरजीत सिंह है उनका नाम और अपना एक कमरे में बैठे हुए थे, ऊपर से उनकी छत में आवाज आ रही थी, जैसे कोई ठक-ठक करता हो, कोई छत को खड़खड़ाता हो, इस तरीके से। 

पहले तो उनको लगा चलो कोई कुछ और मामला होगा, उन्होंने इग्नोर करा। जब वह ज्यादा आने लगी आवाज, क्योंकि उस छत के ऊपर कोई जाता नहीं है, क्योंकि ऊपर जाने के लिए कोई सीढ़ी नहीं है। 

उसके दिमाग में आया, यह तो कोई सीढ़ी है ही नहीं, तो फिर ऊपर बंदा पहुँचा कैसे? तो फिर उसने सोचा कि कोई दूसरी चीज आने की कोशिश कर रही है। तो उसने उसकी एक दोस्त थी, उसको फोन करा, पहचान में थी एक लड़की, क्योंकि वो भी तंत्र के बारे में रिसर्च करता रहता था हर समय। उसको फोन करा, उसने मेरे साथ यह हो रहा है। 

तो उसने क्या बोला कि अपनी सेल्फी वाले जो कैमरे से फोटो खींच के भेजो। सेल्फी खींच के भेजी, तो उसके पास भी एक कैमरा था, कुछ मशीन थी, और उसके अंदर फोटो डालो, तो पता चल जाता है आदमी की कितनी ऊर्जा है, आभामंडल कैसा है उसका और उसका ऑरा कितना स्ट्रांग है। 

जब उसने देखा कि उसका ऑरा बिल्कुल वीक है, तो उसने बोला अपना तुरंत जाप शुरू कर दो, नहीं तो वो शक्ति तुम्हारे ऊपर हावी हो जाएगी। जैसे-जैसे वह जाप करता गया, वो शक्ति उससे दूर जाती गई। तो बिल्कुल यह रियलिटी वाली बात बता रहा हूँ, यह चीजें काम करती हैं।

दूसरी चीज, जिस माला से आप जाप करते हैं, वह माला आप जिंदगी में एक ही रखो, जिससे आप सभी तरीके के जाप करो। जब एक माला से आप लगातार 20 साल तक, 25 साल तक जाप करते हैं, उसके अंदर भी एक ऊर्जा आ जाती है, उसके अंदर भी एक एनर्जी पैदा हो जाती है। 

कोई व्यक्ति अगर उस माला को पहनेगा, उसको सुरक्षा मिलती है। अपनी माला को चार्ज रखो, उससे जाप करो। अगर आप बिना माला के जाप करते हो, तो उस माला को अपने हाथ में रख के ही जाप करो, फिर ताकि जो आपकी ऊर्जा है, उस माला के अंदर भी जाती रहे। 

आपकी ऊर्जा कल को खत्म हो जाए, तो उस माला की ऊर्जा आपके पास रहेगी। इसके लिए क्या है, माला एक रखो, इसके अंदर आपकी ऊर्जा रहेगी। तो यह बात मैंने आपको बताई है।

ओंकार का तरीका मैंने बताया आपको। लगातार आप जाप कीजिए, घर के अंदर पॉजिटिविटी आएगी, नेगेटिविटी खत्म हो जाएगी। देखो जैसे सूरज होता है, सूरज की रोशनी होती है, अंधेरे को खत्म करती है, इसी तरीके से नेगेटिव चीजों को खत्म करने के लिए सिर्फ और सिर्फ एक चीज है, पॉजिटिव शक्ति। 

पॉजिटिव शक्ति तब आएगी जब आप उसके लिए आप कुछ करोगे, मंत्र जाप करोगे, पूजा-पाठ करोगे, तो यह होता है। अब बहुत सारे लोगों के मेरे को यह भी फोन आते हैं कि हम फलाने तांत्रिक से यह उपाय करवाया, कुछ समय तक तो सब ठीक था, उसके बाद फिर दिक्कत आ गई। यह भी लोग हमें बोलते हैं।

 देखिए, यह चीज इसलिए होती है कि वो कुछ दिनों के लिए तो वो कर देते हैं, उसके बाद क्या होता है, जैसे-जैसे वो चीजें सही हो जाती हैं, सामने वाले को फिर से पता चल जाता है, इनका सब सही हो गया, वो फिर से कुछ ना कुछ कर देते हैं। इसीलिए दोबारा दिक्कत आती है। तो ऐसे ही समझो कि दोबारा दिक्कत आ रही है क्योंकि वो दोबारा से कर रहा है।

 तो सामने वाला फिर से पैसे चार्ज करता है। मेरे को और पैसे… ऐसे तीन-चार बार लोग पैसे लुट चुके हैं इस तरीके से। तो मैं यही चाहता हूँ कि आप खुद से अपनी ऊर्जा बनाइए, खुद से अपने आप को प्रोटेक्ट करिए। खुद के डॉक्टर आप खुद बनिए, खुद के तांत्रिक खुद बनिए। दूसरों के पास जाने की जरूरत नहीं। 

अगर ज्यादा मेजर इशू हो, तो आप संपर्क हमसे कर सकते हैं। अगर आपके पास इतना भी समय नहीं है कि आप पूजा-पाठ कर सको, तो आप हम से कवच मँगवा सकते हैं, बगलामुखी सिद्ध कवच भेज देंगे। किसी भी तरीके का आप कवच मँगवा सकते हैं।

 वो कवच पहनने के बाद आपके अंदर वो सुरक्षा आ जाएगी। सिद्ध माला भी भेजते हैं, उस माला को पहनते सार आपके अंदर वह ऊर्जा प्रवाहित होती है और दूसरी शक्ति आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। तो यह सिस्टम रहता है।

जितनी ज्यादा आपके कर्म के अंदर पॉजिटिविटी रहेगी, उतना ही ज्यादा गलत चीजें दूर भागेंगी, जैसे सूर्य से अंधेरा दूर भागता है। इसी तरीके से नेगेटिव चीजों का भी एक ही सोल्यूशन है, पॉजिटिविटी बढ़ाइए। घर में दीपक जलाइए। किसी भी शक्ति का दीपक जलाइए, दूर भागेंगी। ओंकार का जाप करिए। अगर कोई सिख भाई है, तो मूल मंत्र का पाठ करिए। 

इस तरीके से आप सही कर सकते हो। अगर कोई व्यक्ति मुस्लिम है, तो आयतुल कुरसी पढ़िए, सबसे बेस्ट चीज है, सुरक्षा बनी रहेगी। तो हिंदुओं के लिए तो बहुत सारी चीजें बताई हैं मैंने कि वह ओंकार का भी जाप कर सकता है, देवी कवच भी पढ़ सकता है, और काल भैरव अष्टकम भी पढ़ सकता है, काल भैरव कवच भी पढ़ सकता है। 

किसी भी स्तोत्र की साधना वो कर ले, तो उसको ऊर्जा मिलेगी। उससे सुरक्षित रहेगा वह। दूसरी चीज क्या है, यह एक-दो दिन पढ़ने से कुछ नहीं होगा। 

तकरीबन 40 दिन तक इनको करो, फिर उसके बाद आप रिजल्ट देखो। फिर ऐसा नहीं है कि आपको दोबारा पढ़ना ही नहीं है, 40 दिन पढ़ दिया तो उसको डेली पढ़ो, उसको अपडेट करते रहो। 

माला को हाथ में लेकर पढ़ोगे तो ऊर्जा माला में प्रवाहित होगी और एक आगे जल रख लो, तो वह ऊर्जा जल में भी जाती रहेगी। कोई भी दिक्कत आती है घर में, तो आप जल का छिड़काव कर सकते हैं, वो जल अपने पास सुरक्षित रखो।

यह सब तरीके मैंने आपको फोकट के तरीके बताए हैं, बिल्कुल फ्री फंड के तरीके हैं। इसको करने के बाद कोई तांत्रिक आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। फिर भी आपको कोई गाइडेंस चाहिए, आप हमें गाइड करिए, तो हम गाइडेंस देने के लिए भी बैठे हुए हैं, नंबर दे रखा है, तो आप फोन कर सकते हैं।  बहुत सारे मैंने एक्सपीरियंस आपके साथ शेयर करे, तो बस आज के लिए इतना ही। जय श्री राम।

pari sadhna vs apsara sadhna परी और अप्सरा में क्या अंतर है कौंन जायदा शक्तिशाली pari apsara sadhna

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Pari sadhna vs Apsara sadhna परी और अप्सरा में क्या अंतर है कौंन जायदा शक्तिशाली pari apsara sadhna

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pari sadhna vs apsara sadhna परी और अप्सरा में क्या अंतर है कौंन जायदा शक्तिशाली pari apsara sadhna- GurumantraSadhna.com में आप सबका फिर से स्वागत है। आज का हमारा विषय रहेगा हमारी साधना और अप्सरा साधना को लेकर रहेगा, कौन सी साधना हमें करनी चाहिए, कौन सी साधना सर्वश्रेष्ठ है, इस विषय में हम बात करेंगे। पहले हमने अप्सरा और यक्षिणी के बारे में वीडियो बनाया था, आज हम बना रहे हैं अप्सरा और परी के बारे में।

देखिए, जो अप्सरा है और परी है, एक ही, लगभग दोनों एक जैसी चीजें होती हैं। इनमें ज्यादा कोई फर्क नहीं है। पहले हम बताते हैं अप्सरा। अप्सरा एक दैविक साधना है। यह सनातन धर्म की साधना है। वहीं पर जो परी होती है, यह मुस्लिम धर्म में आती है, यह मुस्लिम धर्म की साधना होती है।

तो इनमें यह फर्क होता है। अप्सरा साधना को भी प्रेमिका रूप में किया जाता है, परी को भी प्रेमिका रूप में ही किया जाता है। इसमें कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है।

अप्सरा साधना को करने के लिए थोड़ा सा कर्मकांड की जरूरत पड़ती है, लेकिन परी साधना में कोई कर्मकांड, कुछ नहीं, जीरो। अप्सरा साधना के जो मंत्र हैं, वो निष्कीलित हैं और जो परी साधना के मंत्र हैं, वह भी निष्कीलित हैं।

उनके लिए कीलन-कूलन कुछ करने की जरूरत नहीं। अप्सरा साधना अगर कोई व्यक्ति कर लेता है, ठीक है, तो गलती करने पर, बड़ी गलती करने पर, उसको भयानक दंड भोगना पड़ता है।

और यही जो परी साधना है, इसमें अगर आप गलती करते हो, ठीक है, उसमें आपको परी श्राप दे सकती है, आपको श्रापित कर सकती है। श्राप देने के बाद, श्रापित होने के बाद, आपकी जिंदगी खराब हो जाएगी पूरी तरीके से।

इनमें यह फर्क है। परी साधना जैसे मुस्लिम साधना होती है, ठीक है, तो इनके लिए जो कवच हम लगाते हैं, आयतुल कुर्सी लगाते हैं और दुरूद शरीफ लगाते हैं।

और वहीं ही अप्सरा साधना के लिए आप जो कवच लगाते हो, ठीक है, वो आप वज्र कवच लगा सकते हैं या फिर आप हनुमान जी का कोई भी, बजरंग बाण या कोई भी, पढ़ के आप लगा सकते हैं घेरा।

अप्सरा का जो स्थान है, या तो धरती पर रहती है या तो स्वर्ग पर रहती है, लेकिन जो परी होती है, यह कोह-क़ाफ़ में रहती है। परी का एक क्षेत्र निर्धारित होता है, उस क्षेत्र के बाहर वह काम नहीं करती। तो जो अप्सरा साधना है, इसका कोई क्षेत्र नहीं है।

कहीं पर भी आ-जा सकती है, कहीं पर भी आपका काम कर सकती है। सबसे जल्दी सिद्ध होने वाली जो साधना है, वह परी है। अप्सरा साधना सिद्ध होने में समय लेती है।

अप्सरा साधना करने वाले की जो बॉडी है, उससे गुलाब की खुशबू आती है। वहीं जो परी साधना करता है, तो उससे चमेली की खुशबू आती है। यह भी इसमें फर्क होता है। दोनों ही साधना घर के अंदर की जा सकती हैं।

अगर एकांत जगह में करोगे, तो उसका ज्यादा बेनिफिट है। जो परी साधना है, ठीक है, इनमें जो फर्क होता है, फर्क किस चीज का होता है, ये, आज के लिए बस इतना ही। जय श्री महाकाल। अगर आपको यह वीडियो पसंद आया हो, तो हमें जरूर बताएं।

karna pishachini कान में भूत भविष्य वर्तमान बताने वाली साधना के नुकसान karna matangi vartali devi

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karna pishachini कान में भूत भविष्य वर्तमान बताने वाली साधना के नुकसान karna matangi vartali devi

 

karna pishachini कान में भूत भविष्य वर्तमान बताने वाली साधना के नुकसान karna matangi vartali devi गुरु मंत्र साधना.कॉम में आप सबका फिर से स्वागत है। आज का जो हमारा टॉपिक रहने वाला है, वह रहेगा कि जो शक्तियां कान में आपका भूत, भविष्य, वर्तमान काल बताती हैं, उसके साइड इफ़ेक्ट क्या होते हैं।

देखिए, हमारे पास बहुत सारे ऐसे केस आ रहे हैं, जिन्होंने कर्ण मातंगी की साधना को करा, कर्ण पिशाचिनी को करा या फिर वार्ताली देवी को करा या हनुमान जी की कोई सिद्धि करी। कान में बताने वाली लगभग जितनी भी साधनाएं हैं, जिन-जिन लोगों ने करी हैं, उनको उस चीज़ के साइड इफ़ेक्ट दिख रहे हैं। मेरे को फोन कर रहे हैं कि यह साइड इफ़ेक्ट हो रहा है, वह हो रहा है। इसमें क्या साइड इफ़ेक्ट होते हैं, उसके बारे में मैं बात करूंगा।

पिछले दो-चार दिन पहले ही मेरे पास एक साधक आया था, जिसने हनुमान जी की कान में भूत, भविष्य, वर्तमान काल बताने वाली साधना को करा था। साधना बिल्कुल उसकी अच्छी चल रही थी। उसने साधना को कम्प्लीट करा। कुछ दिन बाद ही उसके कान में दर्द होना शुरू हो गया। बहुत सारे डॉक्टरों के पास उसने दिखाया, बहुत सारे टेस्ट करवा दिए और टेस्ट में कुछ नहीं आता था।

karna pishachini कान में भूत भविष्य वर्तमान बताने वाली साधना के नुकसान karna matangi vartali devi
karna pishachini कान में भूत भविष्य वर्तमान बताने वाली साधना के नुकसान karna matangi vartali devi

कान उसका दर्द करता रहता है, निरंतर कान दर्द करता रहे। बंदा दुखी होकर मेरे को फोन करता है, “गुरु जी, मेरे कान में दर्द हो रहा है बहुत ज़्यादा और बहुत सारे डॉक्टरों को दिखा चुका हूँ।” तो मैंने करी थी हनुमान जी के कान वाली साधना।

जब उसने मेरे को विधि-विधान बताया तो मेरे रोंगटे खड़े हो गए क्योंकि वह विधि-विधान ही गलत था। ज़्यादातर जो लोग इंटरनेट से साधना करते हैं, उनके साथ यही होता है। एक अच्छे गुरु से मार्गदर्शन लेकर साधना करिए, फिर आपको कोई दिक्कत नहीं है।

कुल मिलाकर, फिर आगे मैंने उसका समाधान बताया। उस समाधान से उसके जो कान में दर्द होता था, जड़ से खत्म हो गया। ऐसे बहुत सारे साधक आ चुके हैं हमारे पास। कर्ण मातंगी के साधक, हर तरीके के साधक आ चुके हैं।

जिन्होंने कर्ण पिशाचिनी करी थी, एक ऐसे साधक हैं पालमपुर से, उसके कान के अंदर निरंतर ही रक्त निकलता है, खून निकलता रहता है। जब भी वह वैसे उंगली लगाता है, तो खून आता है और उसके अंदर दर्द भी होता है।

कान के अंदर कभी-कभी, जैसे वह रात को सोता है, तो कोई कान के अंदर बहुत ज़ोर से चीख मारता है। वह रात को सही से सो भी नहीं पाता है। इस तरीके से साइड इफ़ेक्ट हो रहे हैं, जो कान में साधना कर रहे हैं। कुछ लोगों के कान दर्द हो रहे हैं, खून आ रहे हैं, रात को सो नहीं पाते हैं। देखिए, तरह-तरह के साइड इफ़ेक्ट उन लोगों को हो रहे हैं।

तो इस चीज़ से बचने के लिए आपको तो मैं एक चीज़ ही बोलूंगा कि आप बिना गुरु मार्गदर्शन के कोई भी साधना ना शुरू करें, नहीं तो आपको इसी तरीके से दिक्कत आ सकती है। स्पष्ट रूप में मैं बात करता हूँ, क्योंकि ये बहुत बड़ी शक्तियां हैं।

अगर थोड़ा सा भी काम बिगड़ जाता तो कुछ लोग ज़िंदगी भर के लिए बहरे भी हो सकते हैं, चाहे वह हनुमान जी की साधना हो, चाहे वह कर्ण मातंगी की हो, चाहे वार्ताली की हो। किसी भी तरह की साधना हो, बिना गुरु मार्गदर्शन के ना करें तो बेस्ट है।

करोगे, तो फिर भाई भरोगे। कुछ ऐसे लोग भी हैं जो ज़िंदगी भर के लिए बहरे हो गए। एक व्यक्ति अमन नरुला है, उसने भी कर्ण पिशाचिनी की साधना शुरू करी। मतलब अघोरी से मंत्र लेकर उसने साधना शुरू करी और अघोरी ने इसको मंत्र दे दिया, “इस तरीके से कर लो भाई।

और जैसे उसने कुछ दिन साधना करी, उसके बाद क्या हुआ, कर्ण पिशाचिनी आई और कान में उसने भयंकर सी चीख मारी, भयंकर सी चिल्लाई, फूँक मारी। फूँक मारने से क्या हुआ, ज़िंदगी भर के लिए वह व्यक्ति बहरा हो गया। आज की डेट में भी वह व्यक्ति बहरा है।

ऐसा काम कभी ना करें जिससे आपको साइड इफ़ेक्ट हो। हमेशा जो भी साधना करो, एक अच्छे गुरु के मार्गदर्शन में करो, तो ही आपके लिए सही है, नहीं तो आपको बहुत सारे साइड इफ़ेक्ट भोगने पड़ सकते हैं।

आज के लिए बस इतना ही। आप मेरे को आज्ञा दीजिए, फिर हम नए टॉपिक के ऊपर बात करेंगे।

third eye sadhna इस्लामिक दिव्या दृष्टि साधना एक दिन में दिव्या दृष्टि हासिल करें ph. 85280 57364

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third eye sadhna इस्लामिक दिव्या दृष्टि साधना एक दिन में दिव्या दृष्टि हासिल करें ph. 85280 57364 गुरुमंत्र साधना में आप सबका फिर से स्वागत है। ठीक है, हमारे चैनल में आपका फिर से स्वागत है। ठीक है, तो आज जो मैं आपको एक साधना बताने वाला हूँ, ठीक है, यह दिव्य दृष्टि हासिल करने की साधना है। 

ठीक है, इससे आप मात्र एक दिन के अंदर दिव्य दृष्टि हासिल कर सकते हैं। आसपास की जो भी शक्तियाँ हैं, आप उनको देख सकते हैं, जैसे अगल-बगल भूत-प्रेत होते हैं, आपके पितर होते हैं, बहुत सारी चीजें होती हैं, उनको नंगी आंखों से देखा जा सकता है। 

अगर पूर्ण रूप से सिद्धि कर ली जाए, इसकी 10 दिन की होती है, तो अगल-बगल की जितनी भी शक्तियाँ हैं, सब देख सकते हैं, आप उनके साथ संपर्क कर सकते हैं। ठीक है, कभी-कभी क्या होता है हम अप्सरा को सिद्ध करते हैं, यक्षिणी को सिद्ध करते हैं, भूतनी को सिद्ध करते हैं, बहुत सारी साधनाओं को सिद्ध करते हैं, तो प्रत्यक्ष रूप में नहीं आ पातीं। 

ठीक है, जब आप यह साधना कर लोगे, उसके बाद आप प्रत्यक्ष रूप में उनको देख सकते हैं, उनके साथ बातचीत भी कर सकते हैं। इस साधना का सबसे बड़ा बेनिफिट यह है, मात्र एक दिन के अंदर ऐसा संभव हो सकता है। 

यह साधना हमने लगभग सात-आठ साल पहले, मेरा एक दोस्त है जो इन चीजों को नहीं मानता था, बिल्कुल कोरा आदमी था। इन चीजों के ऊपर वह हंसता था और अंधविश्वास मानता था। तो फिर मैंने उसको बोला कि आप एक दिन सिर्फ आप यह करके देख लो।

 ठीक है जी, आपको पता चल जाएगा कि यह चीजें होती हैं कि नहीं होती हैं। हाँ जी, मात्र एक दिन करके देख लो, इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। तो उसने मजाक-मजाक में ही इसको शुरू कर लिया और एक दिन पूरा उसको करा। आप मानोगे नहीं, उसके जो पड़ोस में एक डेथ हुई थी, उनको चाचा ही बोलते थे, उनका एक हाथ जो होता है ना, वह कटा हुआ था।

 हाँ जी, जिस वक्त उनकी मृत्यु हुई थी, तो सेम टू सेम वैसे रूप में ही उनको दिखाई दिया। जब उन्होंने देखा, उसको देखते सार ही उनको बुखार चढ़ गया। ठीक है, इतना ज्यादा वह डर गए, उनको बुखार हो गया और दो दिन तक वह बुखार से तपते रहे। जी, क्योंकि इन चीजों को देखना हर व्यक्ति के बस की बात नहीं है। 

ठीक है, लोग बोल तो देते हैं जोश-जोश में हम करेंगे जी, ठीक है, पर किसी चीज को देखना अपनी आंखों से, तो एक बहुत बड़ी बात है। ठीक, तो उन्होंने देखा उसको और दंग रह गए और डरते हुए उनको बुखार हो गया। तो यह जो साधना है, वही लोग करें जिनके अंदर दम है अगल-बगल की चीजों को देखने का। 

वो व्यक्ति ना करें जिनके अंदर डर है किसी किस्म का भी और वो जल्दी भयभीत हो जाते हैं। तो वो लोग यह ना करें क्योंकि हर जगह ही आपको बहुत सारी आत्माएं रहती हैं। हर जगह संसार में इतनी ज्यादा आबादी आम व्यक्तियों की नहीं है, जितनी ज्यादा आत्माओं का बसेरा है। उससे ज्यादा तो आत्माएं यहाँ रहती हैं, भटक रही हैं। 

तो बात यही आती है कि वही व्यक्ति करे जो व्यक्ति उन चीजों को देखने का दम रखता हो। ठीक है, कोई भी दूसरा व्यक्ति इन चीजों को ना करे। ठीक है जी, क्योंकि जब आप इसकी साधना करोगे तो सारा कुछ आपको नंगी आंखों से नजर आएगा ही आएगा। 

ठीक है, तो यह सिस्टम है। तो फिर वही जो मेरा दोस्त बोलने लगा कि मेरा इन चीजों से पीछा छुड़वाओ, मेरे को हर जगह चीजें नजर आती हैं। हाँ जी, हाँ जी। तो फिर हमने उसको एक अभिमंत्रित करके एक सुरमा दिया, आँखों में लगा ले, दोबारा कुछ नहीं दिखेगा। 

हाँ जी, उसके बाद कुछ भी नजर नहीं आया। ठीक है, तो ये होता है इसके अंदर सिस्टम। वही व्यक्ति करे जिसके अंदर मतलब देखने का दम हो। ठीक है, , आपको पता है भाई, इंसानों से ज्यादा तो यहाँ भूत-प्रेत और आत्माओं का बसेरा है। जी, बिल्कुल सही है। 

रुद्रनाथ जी, जो यह साधना है, इसके अंदर , आपको मैं एक चीज बोलता हूँ, मिलेगी ही मिलेगी। ठीक है, इस चीज की हम गारंटी से बोल सकते हैं। ठीक है, यह इस्लामिक विद्या है एक तरीके की, ठीक, कुरान की बहुत बड़ी विद्या है, जिसकी हम साधना करवाएंगे। 

ठीक, इसमें 100% उस व्यक्ति को वह चीज मिलनी ही मिलनी है। तो इसमें समय कितना रहता है करने का? देखिए, इसका वैसे अगर आप करोगे, 11 दिन का सवा लाख अनुष्ठान करना पड़ेगा। सवाल आपका क्या? जी, 40 दिन की साधना रहेगी वैसे तो। पहले ही दिखना शुरू हो जाएगा सब। 

अगर जैसे लोग बोलते हैं पूर्ण रूप में हमें वह सब कुछ देखना है, तो यह होता है सिस्टम। जी, जी। पूर्ण रूप में सिद्धि करनी है और परमानेंट रहे आपके साथ, आप उस दिव्य दृष्टि का इस्तेमाल कर सकें, तो वह आप कर सकते हो। 

कुछ साधक ऐसे भी थे , जिनके पास वो महसूस करते थे कि हमारे पास कोई अप्सरा है, यक्षिणी आती है, ठीक है, एक झलक सी महसूस होती है पर हमें आंखों से दिखाई नहीं देती है। ठीक है, जी, जी। 

अगर वो व्यक्ति यह साधना कर लेता है, उसको दिखाई भी देगी, उससे बात भी करेगी। जी, जो व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण चाहता है, वह प्रत्यक्षीकरण उसको बहुत कम समय में हो जाएगा क्योंकि उसके पास ऑलरेडी दिव्य दृष्टि होगी। जी, तो बिना उसके देख पाएगा वो।

 ठीक है, महसूस सबको होता है, जिस शक्ति को आप याद कर रहे हो, तो वो शक्ति को तो आना ही आना है। ठीक है, पर वो आती जरूर है। आप कर्ण पिशाचिनी को, पहले दिन से ही आती है। ठीक है, पर किसी को दिखाई नहीं देती।

 महसूस, अपनी उपस्थिति तो आपको दिखा देगी कि मैं यहाँ मौजूद हूँ, पर दिखाई देने में तो ऐसी साधनाएं सपोर्ट करती हैं। फिर आप बड़ी आसानी से देख सकते हैं। कोई पूजा-पाठ आप करते हो, तो पूजा-पाठ जब आप करते हो, तो देवदूत आपके साथ रहते हैं भगवान के, तो उनको भी इसके माध्यम से देखा जा सकता है, उनसे मार्गदर्शन हासिल किया जा सकता है।

 ठीक है, तो उनको भी पता चल जाता है कि यह व्यक्ति हमें देख सकता है। हाँ जी, तो ऐसी बहुत सारी चीजें हैं। फिर जो व्यक्ति थोड़ा आध्यात्मिक क्षेत्र का हो, तो वो तो उसके लिए तो यह चीज ठीक है। जो बंदा एकदम अनाड़ी है, तो अगर वह करेगा, तो उसकी लाइफ थोड़ी सी डिस्टर्ब हो सकती है। 

जी, जी। डिस्टर्ब वैसे हो सकती है क्योंकि हर जगह उसको दिखेंगी चीजें और उनसे बात करेंगी तो। ठीक है, हो जाता है। बहुत से लोग जल्दबाजी में कर लेते हैं, जब चीजें दिखनी शुरू होती हैं, तो वो जो है, अपना संतुलन खो देते हैं। पहले करना है, बहुत अच्छा लग रहा है।

 यह मैंने नोटिस किया है, काफी साधक ऐसे हैं जो बाद में मानसिक रूप से विक्षिप्त हुए हैं, परेशान। देखिए, व्यक्ति मानसिक रूप में विचलित होगा ही। जो व्यक्ति मतलब अज्ञानी आदमी है ना, जिसको ज्ञान नहीं है इन चीजों का, जी, तो वो तो एक बार विचलित होगा ही क्योंकि उसने कभी फेस टू फेस वो चीजों को नहीं देखा है कभी भी। ना, तो ये होता है सिस्टम।

 देखने का अंदर दम होना चाहिए। ठीक है जी, तो मेरे हिसाब से आज के लिए बस इतना ही। ठीक है, जो भी अगर किसी को सवाल का जवाब चाहिए तो नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर दें। ठीक है जी, जी। तो हम बातचीत करेंगे। फोन नंबर भी दे रखा है मैंने बाकायदा, वो कॉल भी कर सकता है अगर कुछ जानकारी चाहिए। जय श्री महाकाल जी, , धन्यवाद आपका फिर से। ठीक है।

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APSARA SADHNA KI NIYAM अप्सरा साधना के नियम – अप्सरा प्रत्यक्ष होगी कुछ दिनों में

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APSARA SADHNA KI NIYAM अप्सरा साधना के नियम – अप्सरा प्रत्यक्ष होगी कुछ दिनों में गुरु मंत्र साधना  में आप सबका फिर से स्वागत है। तो मैं आपको अप्सरा साधना के ऐसे नियम बताऊंगा जिससे अप्सरा आपके सामने प्रत्यक्ष हो जाएगी। तो सबसे पहला नियम यही है कि आप इसको प्रेमिका रूप में ही करें, माँ या बहन रूप में आप इसको नहीं कर सकते।

उसके पीछे का जो कारण है कि ये एक ऐसे वर्ग की साधना होती है, इसको प्रेमिका रूप में ही किया जाता है, ये जोड़े में नहीं होती है। बहुत सारी शक्तियाँ जोड़े के अंदर होती हैं, यक्ष के साथ यक्षिणी होती है, देवता के साथ देवी होती है। उसी तरीके से जो अप्सरा होती है बिल्कुल अकेली होती है। तो इसको आप देता हूं।

दूसरी चीज़ क्या है, अप्सरा स्वयं सिद्ध होना चाहती है और साधक को संकेत देती है। मैं आपको संकेत बताता हूँ। अगर आपको सपने के अंदर अप्सरा दिखाई देती है, बार-बार सपने के अंदर आती है, तो समझ लेना चाहिए कि अप्सरा आपको सिद्ध होना चाहती है।

 दूसरे नंबर के ऊपर क्या होता है, कभी-कभी दूर से घुंघरुओं की आवाज़ सुनाई देती है, तो भी आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि अप्सरा आपको सिद्ध होना चाहती है। 

तीसरे नंबर के ऊपर हल्की सी सुगंध आपको आती है, हल्की सी, तो आप समझ सकते हैं कि अप्सरा आपको सिद्ध हो चुकी है। केवल वह इसलिए प्रत्यक्ष नहीं हो पा रही है क्योंकि वहाँ का जो वातावरण है उसके लिए सूटेबल नहीं है, कुछ शक्तियाँ उसको रोक रही हैं। 

जहाँ आप रह रहे हो, हर एक क्षेत्र के अंदर बहुत सारी गुप्त शक्तियाँ होती हैं, कभी-कभी वो रोकती हैं, कभी-कभी कुल का पितर रोकता है, तो कभी-कभी क्षेत्रपाल रोकता है। तो इन्हीं कारण वो अप्सरा आती है लेकिन सामने रूप में आपको दिखाई नहीं देती। 

तो उसके लिए डिमांड यह होती है, उपयुक्त स्थान आपको ढूंढना पड़ेगा, वहाँ पर यह अप्सरा आएगी। संकेत आपको दे रही है, वह चाहती है कि आप उसको मतलब आप उसके साथ कांटेक्ट में आएं, पर दिक़्क़त यही आती है, कि आपका वातावरण अनुकूल नहीं है।

तीसरी चीज़ मैं आपको यह बताता हूँ कि इसके लिए गुरु की बहुत ज़रूरी है, ज़रूरत होती है। तीसरा नियम यह कहता है कि आपके पास अच्छा गुरु होना चाहिए। तो गुरु ही आपको बताएगा कि उपयुक्त स्थान कौन सा है, कहाँ आपके पास अप्सरा प्रत्यक्ष होगी। 

तो एक तो यह है। चौथा नियम इसमें यह है कि आप जब भी अप्सरा करें तो बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू सब छोड़ दें। ज़ाहिर सी बात है कि कोई इंसान भी ऐसे लोगों के साथ कांटेक्ट में नहीं आना चाहेगा जिसके दाँत बीड़ी-सिगरेट के कारण ख़राब हो चुके हैं, सड़े हुए दाँत, दुर्गंध आती है, तो ऐसे लोगों से कौन बात करना चाहेगा? 

इसीलिए क्या है, इन चीज़ों को त्याग दें। बिल्कुल शुद्ध रहें। एक तो यह है और डेली बेसिस के ऊपर स्नान करें। स्नान में आप दूध से स्नान कर सकते हैं। सबसे मेन चीज़ है दूध, दूध से आप स्नान कर सकते हैं। तो अगर आप करोगे तो बेस्ट है, अगर नहीं करते हो तो पानी में आप थोड़ा सा कोई पवित्र जल डाल लें, उससे स्नान करें। तब भी चल जाएगा। तो एक नियम यह हो गए।

और कुछ मैं आपको नियम बताता हूँ। अप्सरा के कभी भी आप प्रत्यक्षीकरण के पीछे मत भागिए। बहुत सारे लोग बोलते हैं प्रत्यक्षीकरण करना है, मेरे को अप्सरा का प्रत्यक्षीकरण करना है। प्रत्यक्षीकरण के चक्कर में क्या होता है, बहुत ज़्यादा परीक्षा होती है। 

अब प्रत्यक्षीकरण के चक्कर में न पड़ें। उसको आप बोलें कि आप यहाँ मेरे पास आओ। आप उसको बुलाओ और वह अपनी उपस्थिति का एहसास कराएगी, इतना ही बहुत है। और केवल आपको काम करवाने से मतलब होना चाहिए कि आप उससे कोई काम करवाओ, अप्सरा से। वो काम अटके हुए वह करवाओ। तो इस तरीक़े से आप करिए।

 प्रत्यक्षीकरण के पीछे भागोगे ना तो बहुत ही ज़्यादा इसके लिए परीक्षा होती है। ब्रह्मचर्य की परीक्षा होती है। तो ब्रह्मचर्य की परीक्षा का भी मैं आपको बताता हूँ, इसके लिए कुछ जड़ी-बूटियाँ होती हैं, कुछ मंत्र होते हैं जिससे ब्रह्मचर्य बचा रहता है, वो केवल आपको गुरु बता सकता है, गुरु के निर्देश में ही करें।

जहाँ आप अप्सरा की साधना कर रहे हो, तो उस जगह को अच्छे तरीक़े से धो लें, अगर दूध और गंगाजल डाल के उस जगह को स्नान कराएं। मैं यह नहीं बोल रहा हूँ 50 लीटर आप दूध से उसको धोएं, थोड़ा सा दूध डालें, थोड़ा सा गंगाजल डालें, उससे पोछा लगा लें। पहले सर्फ़ से पोछा लगा लें फिर उसके बाद इसका पोछा लगा दें, तो यह भी बेस्ट हो गया काम। 

थोड़ा सा इत्र वग़ैरह ख़ूब छिड़काएं, उस कमरे को सुगंधित कर दें। और उस कमरे के अंदर कोई नहीं आना चाहिए, फ़ालतू सामान अगर उसमें पड़ा हुआ है तो वो निकाल दें।

बिल्कुल ख़ाली कमरा होना चाहिए, उसमें आपका आसन होना चाहिए, अप्सरा की फ़ोटो होनी चाहिए, अप्सरा का यंत्र होना चाहिए, बस इससे ज़्यादा कुछ नहीं। 

जहाँ आप सोते हैं तो साथ में ही एक स्थान अप्सरा को भी दें कि वह आपके साथ सोए, एक जगह कि वो आपके सोने के लिए। उसके लिए भी थोड़ा सा स्थान रखें। पत्नी रूप में कर रहे हैं तो तब स्थान रख सकते हैं, प्रेमिका रूप में ज़रूरत नहीं है। तो ये चीज़ हो गई अप्सरा के लिए।

और उसके अलावा क्या होता है, सुरक्षा कवच। सुरक्षा कवच की बात करते हैं, बेहद ज़रूरी है। सुरक्षा कवच अगर आप नहीं लगाते तो अप्सरा के साथ कोई दूसरी नेगेटिव शक्ति भी आएगी जो आपको डिस्टर्ब कर देगी, आपको भटका देगी आपके लक्ष्य से। इसीलिए क्या है सुरक्षा कवच अति इंपॉर्टेंट चीज़ है, वह लगा के, घेरा लगा के ही बैठें। यह भी एक नियम है।

उसके अलावा कुछ और मैं नियम आपको बताता हूँ। जब भी, एक नियम और है। यह नियम बहुत ही इंपॉर्टेंट नियम है। अगर आप इस नियम को फ़ॉलो करोगे तो भाई बहुत अच्छी बात है, आपकी सेफ़्टी रहेगी नहीं तो आप ख़तरे में आ सकते हैं। 

तो नियम यह कहता है कि अगर आप प्रेमिका रूप में उसके कारण सिद्ध हो, तो दूसरी प्रेमिका से आप संपर्क तोड़ दें। अगर आपकी प्रेमिका है तो उससे संपर्क तोड़ दें, अन्यथा आपको भी नुक़सान होगा, उस प्रेमिका को भी नुक़सान होगा। 

अप्सरा आपको भी नहीं छोड़ेगी और न उस प्रेमिका को छोड़ेगी। पहले ही यह चीज़ बता चुका हूँ, फिर से बता रहा हूँ कि आप अपनी प्रेमिका को जो है छोड़ दीजिए अगर अप्सरा को प्रेमिका रूप में आप कर रहे हैं। 

तो अप्सरा नहीं चाहेगी कि उसके अलावा आप दूसरे से प्रेम करें। तो यह नियम बहुत ही इंपॉर्टेंट है, कोई गुरु नहीं बताता है। तो यह नियम भी ज़रूरी है। ब्रह्मचर्य को सुरक्षित करने के लिए डाइट प्लान होता है, तो वो पूरा एक गुरु बताता है किस तरीक़े से आपको डाइट लेनी है, कौन सी लेनी है। 

मैं सार से आपको निचोड़ एक ही निकालता हूँ कि आपको गर्म चीज़ें निषिद्ध हैं। गर्म चीज़ें जितनी ज़्यादा खाओगे, अंदर कामुकता आएगी, कामुकता आएगी तो ब्रह्मचर्य टूटेगा। तो यह नियम भी आप ध्यान में रखिए। 

 मैं यह चाहता हूँ कि कम से कम टाइम में मैं ज़्यादा से ज़्यादा बातें बता सकूँ। मेरा एक ही लक्ष्य है।

तो आगे हम बढ़ते हैं। कुछ नियम और हैं। जो भी आप आसन इस्तेमाल करें, जो भी माला, जो भी कपड़ा आप इस्तेमाल करें अप्सरा के लिए, अप्सरा साधना में जो भी चीज़ें आप इस्तेमाल करो, या तो व्हाइट होनी चाहिए या तो गुलाबी होनी चाहिए। यह भी एक नियम है। 

इसको भी आप फ़ॉलो करिए, व्हाइट या गुलाबी। ये दो रंग ही अप्सरा को प्रिय होते हैं। बहुत ज़्यादा, अगर दीवार हो सके तो पूरी गुलाबी कर दीजिए, हल्का सा गुलाबीपन होना चाहिए। नहीं तो आप उसको व्हाइट कलर करवा सकते हैं, तब भी आपका चल जाएगा। 

एकदम अच्छे से व्हाइट कलर होना चाहिए। तो यह नियम हैं अप्सरा के। एक-आध नियम कोई छूट गए तो फिर आप मेरे को कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। तो आज के लिए बस इतना ही, जय श्री महाकाल।

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apsara sadhana vs yakshini sadhana अप्सरा और यक्षिणी कौंन शक्तिशाली ph.85280-57364 आज का जो हमारा विषय रहेगा, वह रहेगा अप्सरा और यक्षिणी साधना को लेकर। अप्सरा और यक्षिणी, दोनों साधना में से कौन सी साधना हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ है, इस विषय में हम बात करेंगे। कृपया इस वीडियो को अंत तक जरूर देखिए।

जो अप्सरा साधना है, यह भी दैविक साधना होती है और जो यक्षिणी साधना है, यह भी दैविक साधना होती है। अप्सरा को आप सिर्फ प्रेमिका रूप में ही कर सकते हैं, लेकिन यक्षिणी को आप मां, बहन, पत्नी रूप में कर सकते हैं।

अप्सरा कभी भी मां, बहन, प्रेमिका रूप में सिद्ध नहीं होती है। अगर कुछ लोग बोलते हैं तो यह बिल्कुल गलत है। अप्सरा जब भी आती है तो प्रेमिका रूप में ही आती है।

बुलाने की कोई कोशिश करता है उस तरीके से, तो उस तरीके से वह सिद्ध नहीं होती है। क्योंकि अप्सरा एक ऐसी साधना होती है जो कभी भी जोड़े में नहीं होती है।

अप्सरा और परी कभी जोड़े में नहीं रहती हैं, बाकी जैसे यक्ष और यक्षिणी होते हैं, पति-पत्नी हैं, देवता और देवी हो गए। मतलब हर एक शक्ति एक जोड़े में चलती है।

पर लेकिन अप्सरा होती है, यह जोड़े में नहीं चलती है कभी भी। तो इसीलिए इसकी जो कामना पूरी नहीं होती है, जो उनकी इच्छा होती है, वह पूरी नहीं होती है।

अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए ही वह अपने प्रेमी की तलाश करती है, जो साधक उसके लिए सही होता है तो उसको सिद्ध हो जाती है, वरना आपके काम तो करती ही रहेगी अप्रत्यक्ष रूप में।

दूसरी चीज मैं आपको यह बताता हूं, अगर आपने प्रेमी रूप में इसको कर लिया, अगर आपकी प्रेमिका है तो आपको उससे दूरी बनानी पड़ेगी, पत्नी से दूरी बनानी पड़ेगी।

अप्सरा यह नहीं चाहती है कि कभी भी जो आपका प्रेम है, किसी दूसरी औरत को आप दो, यह उसको बर्दाश्त नहीं होता है। तो इसीलिए यह साधना करने वाले साधक जो होते हैं, इनको दूसरी औरत, प्रेमिका या पत्नी रखना सही नहीं है।

अगर रखेगा तो उसको कष्ट होगा। एक मेरे दोस्त हैं रणवीर, उनकी एक प्रेमिका थी और वह प्रेमिका बाल-बाल मरते हुए बची क्योंकि वह उसको मिलने के लिए अक्सर जाता था, अप्सरा को वो चीजें पसंद नहीं थीं। तो इसका यह भी कारण है।

देखिए, जो यक्षिणियों की साधनाएं हैं, हमारे भारतीय तंत्र में मिलती हैं और जितने भी इसके मंत्र हैं, यह सब कीलित होते हैं। कोई आपको गुरु चाहिए जो मंत्र को जागृत कर सके। जो अप्सरा के मामले में ऐसा नहीं है। अप्सरा के मंत्र कोई भी कीलित नहीं हैं।

यह साधना गुरु परंपरा से ही चलती आ रही है, इसमें कोई कील, कोई बंधन नहीं है। तंत्र की जितनी भी साधनाएं हैं जो भारतीय तंत्र के अंतर्गत आती हैं, तो वह सारी ही कीलित होती हैं। कोई अगर आज की डेट में किसी ग्रंथ से पढ़कर अप्सरा-यक्षिणी साधना करना चाहे, वो कभी उसको सिद्ध नहीं हो सकती।

अप्सरा के मामले में यह नहीं है। अप्सरा को कोई भी करेगा तो उसको रिजल्ट मिलेगा। यह इसके कुछ कारण हैं। ऐसा गुरु ढूंढना पड़ेगा जो यक्षिणी साधना आपको करवा सके। अप्सरा साधना के तो साधक आपको मिल जाएंगे।

तो ये कुछ बातें हो गईं। अब कुछ और बातें मैं आपसे करता हूं। कुछ अप्सराएं स्वर्ग में रहती हैं। इसी चीज के चलते जो स्वर्ग की अप्सराएं होती हैं, वह अधीन होती हैं देवराज इंद्र के। अगर अप्सरा को जाना होगा तो वह जाएगी।

अगर साथ में इंद्र का भी आप जाप कर लोगे, तो उसमें कोई भी रुकावट पैदा नहीं हो सकती। तो यह इसकी खास बात है। भगवान इंद्र को भी साथ में प्रसन्न करोगे तो साधना जल्दी सफल होगी। वहीं जो यक्षिणियों के जो स्वामी हैं, यक्षराज कुबेर को बोला गया है और जो कुबेर हैं, उनके स्वामी माने गए हैं। कुछ यक्षिणी कुबेर के अधीन होती हैं।

जैसे कुछ अप्सराएं स्वर्ग में रहती हैं, कुछ अप्सरा अप्सरा लोक में ही रहती हैं और ज्यादातर वह धरती के ऊपर भ्रमण करती रहती हैं। अपना इनका कोई भी लोक नहीं होता है, धरती के ऊपर भ्रमण करती रहती हैं, इसीलिए तो जल्दी सिद्ध हो जाती हैं।

जो यक्षिणी साधना है, जो यक्ष लोक है, बिल्कुल धरती के करीब है। हमारी जो मंत्र की वाइब्रेशन है, तो वह वहां तक जल्दी पहुंचती है, वह भी साथ में जल्दी सिद्ध होती है। इसके लिए गुरु चाहिए जो आपके मंत्र को निष्कीलित कर सके।

यह कुछ खास बातें हो गईं। अब इस पर कुछ और चर्चा करते हैं। जब भी अप्सरा आती है तो उससे फूलों की खुशबू आती है। चाहे वह अप्सरा 1 किलोमीटर दूर क्यों ना हो, तो वहां से भी आपको फूलों की ही खुशबू महसूस कर सकते हैं आप।

यक्षिणी के मामले में चमेली की खुशबू आती है जब कोई भी यक्षिणी को सिद्ध करता है, तो समझ जाना चाहिए कि यक्षिणी आपके आसपास है। अगर कोई व्यक्ति यक्षिणी को पत्नी रूप में सिद्ध करता है, पत्नी रूप में सिद्ध करने के बाद दूसरा विवाह करा लेता है, तो तंत्र ग्रंथों में यही लिखा है, तो उसकी मृत्यु हो जाती है।

एक दफा अगर आपने यक्षिणी को पत्नी रूप में मान लिया, तो आप फिर दूसरी पत्नी से शादी नहीं कर सकते क्योंकि जो सनातन धर्म की संस्कृति है, उसमें एक शादी ही मान्य है, मान्यता दी गई है।

दूसरी शादी करोगे तो फिर उसमें आपको दिक्कत आनी शुरू हो जाएगी, आपकी मौत हो जाएगी। ऐसा मैं नहीं बोल रहा हूं, भारतीय तंत्र ग्रंथ में जिक्र मिलता है। हर एक तंत्र ग्रंथ में यह बात बोली गई है।

इस साधना को करने के लिए आपको एकांत जगह चाहिए होगी। एकांत जगह में ही आप यक्षिणी और अप्सरा साधना को करिए। सुंदर वस्त्र पहन के करिए।

यक्षिणी को अगर आप मां, बहन, पत्नी रूप में कर रहे हो, तो इस चीज का आप ध्यान रखें कि जो आपकी बहन है, आपकी मां है, उसके साथ आपके रिलेशन अच्छे होने चाहिए।

ऐसा नहीं है कि आप मां और बहन का कोई सम्मान नहीं करते हो, तो फिर वह आपको सिद्ध होने में दिक्कत करेगी। असल में भी आपको रिश्ते निभाने पड़ेंगे, अगर नहीं निभाते हो तो प्रॉब्लम आएगी। तो यह कुछ बातें हैं अप्सरा और यक्षिणी को लेकर।

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APSARA SADHNA KI NIYAM अप्सरा साधना के नियम – अप्सरा प्रत्यक्ष होगी कुछ दिनों में

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apsara sadhana vs yakshini sadhana अप्सरा और यक्षिणी कौंन शक्तिशाली apsara sadhana yakshini sadhana आज का जो हमारा विषय रहेगा, वह रहेगा अप्सरा और यक्षिणी साधना को लेकर। अप्सरा और यक्षिणी, दोनों साधना में से कौन सी साधना हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ है, इस विषय में हम बात करेंगे। कृपया इस  post को अंत तक जरूर पढ़ो ।

जो अप्सरा साधना है, यह भी दैविक साधना होती है और जो यक्षिणी साधना है, यह भी दैविक साधना होती है। अप्सरा को आप सिर्फ प्रेमिका रूप में ही कर सकते हैं, लेकिन यक्षिणी को आप मां, बहन, पत्नी रूप में कर सकते हैं। अप्सरा कभी भी मां, बहन, प्रेमिका रूप में सिद्ध नहीं होती है।

अगर कुछ लोग बोलते हैं तो यह बिल्कुल गलत है। अप्सरा जब भी आती है तो प्रेमिका रूप में ही आती है। बुलाने की कोई कोशिश करता है उस तरीके से, तो उस तरीके से वह सिद्ध नहीं होती है। क्योंकि अप्सरा एक ऐसी साधना होती है जो कभी भी जोड़े में नहीं होती है।

अप्सरा और परी कभी जोड़े में नहीं रहती हैं, बाकी जैसे यक्ष और यक्षिणी होते हैं, पति-पत्नी हैं, देवता और देवी हो गए। मतलब हर एक शक्ति एक जोड़े में चलती है। पर लेकिन अप्सरा होती है, यह जोड़े में नहीं चलती है कभी भी।

तो इसीलिए इसकी जो कामना पूरी नहीं होती है, जो उनकी इच्छा होती है, वह पूरी नहीं होती है। अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए ही वह अपने प्रेमी की तलाश करती है, जो साधक उसके लिए सही होता है तो उसको सिद्ध हो जाती है, वरना आपके काम तो करती ही रहेगी अप्रत्यक्ष रूप में।

दूसरी चीज मैं आपको यह बताता हूं, अगर आपने प्रेमी रूप में इसको कर लिया, अगर आपकी प्रेमिका है तो आपको उससे दूरी बनानी पड़ेगी, पत्नी से दूरी बनानी पड़ेगी।

अप्सरा यह नहीं चाहती है कि कभी भी जो आपका प्रेम है, किसी दूसरी औरत को आप दो, यह उसको बर्दाश्त नहीं होता है। तो इसीलिए यह साधना करने वाले साधक जो होते हैं, इनको दूसरी औरत, प्रेमिका या पत्नी रखना सही नहीं है। अगर रखेगा तो उसको कष्ट होगा।

एक मेरे दोस्त हैं रणवीर, उनकी एक प्रेमिका थी और वह प्रेमिका बाल-बाल मरते हुए बची क्योंकि वह उसको मिलने के लिए अक्सर जाता था, अप्सरा को वो चीजें पसंद नहीं थीं। तो इसका यह भी कारण है।

देखिए, जो यक्षिणियों की साधनाएं हैं, हमारे भारतीय तंत्र में मिलती हैं और जितने भी इसके मंत्र हैं, यह सब कीलित होते हैं। कोई आपको गुरु चाहिए जो मंत्र को जागृत कर सके। जो अप्सरा के मामले में ऐसा नहीं है। अप्सरा के मंत्र कोई भी कीलित नहीं हैं।

यह साधना गुरु परंपरा से ही चलती आ रही है, इसमें कोई कील, कोई बंधन नहीं है। तंत्र की जितनी भी साधनाएं हैं जो भारतीय तंत्र के अंतर्गत आती हैं, तो वह सारी ही कीलित होती हैं। कोई अगर आज की डेट में किसी ग्रंथ से पढ़कर अप्सरा-यक्षिणी साधना करना चाहे, वो कभी उसको सिद्ध नहीं हो सकती।

अप्सरा के मामले में यह नहीं है। अप्सरा को कोई भी करेगा तो उसको रिजल्ट मिलेगा। यह इसके कुछ कारण हैं। ऐसा गुरु ढूंढना पड़ेगा जो यक्षिणी साधना आपको करवा सके। अप्सरा साधना के तो साधक आपको मिल जाएंगे।

तो ये कुछ बातें हो गईं। अब कुछ और बातें मैं आपसे करता हूं। कुछ अप्सराएं स्वर्ग में रहती हैं। इसी चीज के चलते जो स्वर्ग की अप्सराएं होती हैं, वह अधीन होती हैं देवराज इंद्र के। अगर अप्सरा को जाना होगा तो वह जाएगी।

अगर साथ में इंद्र का भी आप जाप कर लोगे, तो उसमें कोई भी रुकावट पैदा नहीं हो सकती। तो यह इसकी खास बात है। भगवान इंद्र को भी साथ में प्रसन्न करोगे तो साधना जल्दी सफल होगी। वहीं जो यक्षिणियों के जो स्वामी हैं, यक्षराज कुबेर को बोला गया है और जो कुबेर हैं, उनके स्वामी माने गए हैं। कुछ यक्षिणी कुबेर के अधीन होती हैं।

जैसे कुछ अप्सराएं स्वर्ग में रहती हैं, कुछ अप्सरा अप्सरा लोक में ही रहती हैं और ज्यादातर वह धरती के ऊपर भ्रमण करती रहती हैं। अपना इनका कोई भी लोक नहीं होता है, धरती के ऊपर भ्रमण करती रहती हैं, इसीलिए तो जल्दी सिद्ध हो जाती हैं।

जो यक्षिणी साधना है, जो यक्ष लोक है, बिल्कुल धरती के करीब है। हमारी जो मंत्र की वाइब्रेशन है, तो वह वहां तक जल्दी पहुंचती है, वह भी साथ में जल्दी सिद्ध होती है। इसके लिए गुरु चाहिए जो आपके मंत्र को निष्कीलित कर सके।

यह कुछ खास बातें हो गईं। अब इस पर कुछ और चर्चा करते हैं। जब भी अप्सरा आती है तो उससे फूलों की खुशबू आती है। चाहे वह अप्सरा 1 किलोमीटर दूर क्यों ना हो, तो वहां से भी आपको फूलों की ही खुशबू महसूस कर सकते हैं आप। यक्षिणी के मामले में चमेली की खुशबू आती है जब कोई भी यक्षिणी को सिद्ध करता है, तो समझ जाना चाहिए कि यक्षिणी आपके आसपास है।

अगर कोई व्यक्ति यक्षिणी को पत्नी रूप में सिद्ध करता है, पत्नी रूप में सिद्ध करने के बाद दूसरा विवाह करा लेता है, तो तंत्र ग्रंथों में यही लिखा है, तो उसकी मृत्यु हो जाती है। एक दफा अगर आपने यक्षिणी को पत्नी रूप में मान लिया, तो आप फिर दूसरी पत्नी से शादी नहीं कर सकते क्योंकि जो सनातन धर्म की संस्कृति है, उसमें एक शादी ही मान्य है, मान्यता दी गई है।

दूसरी शादी करोगे तो फिर उसमें आपको दिक्कत आनी शुरू हो जाएगी, आपकी मौत हो जाएगी। ऐसा मैं नहीं बोल रहा हूं, भारतीय तंत्र ग्रंथ में जिक्र मिलता है। हर एक तंत्र ग्रंथ में यह बात बोली गई है।

इस साधना को करने के लिए आपको एकांत जगह चाहिए होगी। एकांत जगह में ही आप यक्षिणी और अप्सरा साधना को करिए। सुंदर वस्त्र पहन के करिए।

यक्षिणी को अगर आप मां, बहन, पत्नी रूप में कर रहे हो, तो इस चीज का आप ध्यान रखें कि जो आपकी बहन है, आपकी मां है, उसके साथ आपके रिलेशन अच्छे होने चाहिए।

ऐसा नहीं है कि आप मां और बहन का कोई सम्मान नहीं करते हो, तो फिर वह आपको सिद्ध होने में दिक्कत करेगी। असल में भी आपको रिश्ते निभाने पड़ेंगे, अगर नहीं निभाते हो तो प्रॉब्लम आएगी। तो यह कुछ बातें हैं अप्सरा और यक्षिणी को लेकर।

dedh footiya jinn डेढ़ फूटिया जिन्न जो बना सकता है किसी भी व्यक्ति को एक दिन में अमीर dedh footiya

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dedh footiya jinn डेढ़ फूटिया जिन्न जो बना सकता है किसी भी व्यक्ति को एक दिन में अमीर dedh footiya

 

dedh footiya jinn डेढ़ फूटिया जिन्न जो बना सकता है किसी भी व्यक्ति को एक दिन में अमीर dedh footiya गुरु मंत्र साधना.कॉम में आप सबका फिर से स्वागत है। देखिये, जो आज का मेरा टॉपिक रहने वाला है, वह डेढ़ फुटिया मसान के बारे में रहेगा। देखिये, डेढ़ फुटिया मसान होता क्या है ? मसान, डेढ़ फुटिया या डेढ़ फुटिया जिन्न भी लोग बोल सकते हैं, तो क्या चीज होती है, उसी के बारे में ही आज का मेरा टॉपिक रहेगा।

देखिये, यह एक पाताल की शक्ति होती है। यह धरती के नीचे रहता है, ठीक है? कभी-कभी ये कुछ ऐसी जगह होती हैं, जहाँ ये पाए जाते हैं, वहाँ से कुछ तांत्रिक इनको लेके आते हैं अपने मंत्रों के ज़ोर पर। ठीक है? कभी-कभी क्या होता है, मंत्रों के ज़ोर से इनको धरती से भी निकाला जाता है। कोई ऐसी जगह होती है, वहाँ पाताल से इनको जाग्रत करके बुलाया जाता है, ठीक है?

एक तो इसका यह सिस्टम होता है और यह क्या काम कर सकता है? एक मिनट के अंदर ही आपको कोई भी सामान कहीं पड़ा हुआ है तो उसको आप मंगवा सकते हैं, ठीक है? किसी भी सामान को एक मिनट में दूसरी जगह पहुँचाना इसके बाएँ हाथ का खेल है, ठीक है?

और यह बहुत ही कॉस्टली सेल होता है। जो लोग इनको खरीदना चाहते हैं तो करोड़ों में पैसा देते हैं। ज़रूरी यह नहीं कि करोड़ों का ही सेल होता है, और जिस हिसाब से कस्टमर है, उस हिसाब से ही यह सेल होता है। कुछ लोगों को यह फ्री में भी मिल जाता है, कुछ लोग कम से कम पैसा देके इसको खरीद लेते हैं।

जो भी इसको खरीदता है, ठीक है, तो ज़्यादा समय के लिए इसको पास नहीं रखता है। बड़े लेवल के दो-चार काम करवाते हैं, फिर आगे दूसरे बंदे को या तो ट्रांसफर किया जाता है या तो फिर आप इसका विसर्जन कर सकते हैं, उसको आज़ाद कर सकते हैं, ठीक है? ज़्यादा काम इससे लोग लेते नहीं हैं क्योंकि ये क्या है, अगर एक बार बिगड़ जाए तो आदमी को मार भी सकता है, ठीक है?

इसके काम क्या होते हैं? जो यह काम कर सकता है, कहीं से भी पैसा उठा के आप मंगवा सकते हैं, पैसा उठा सकते हैं, ठीक है? इसकी सबसे पहली पावर यह होती है, कहीं से भी आप पैसे उठवा लीजिए। सबसे पहली चीज़।

दूसरी चीज़, किसी को मारना, किसी के गर्भ के अंदर पल रहे बच्चे को मारना इसके बाएँ हाथ का खेल होता है, ठीक है? दो-चार सेकंड में यह काम तमाम कर सकता है। इस तरीके से कि यह काम करता है। बिल्कुल छोटा सा होता है, डेढ़ फुट के करीब होता है, इसीलिए इसको डेढ़ फुटिया बोला जाता है।

अब यह जो शक्ति है, ठीक है, बहुत ही शक्तिशाली होती है, ठीक है? लंबे समय तक रखना इसको रिस्क वाला काम होता है, ठीक है? जो भी तांत्रिक-मांत्रिक होते हैं, ठीक है, कुछ समय के लिए इसको रखते हैं, उसके बाद इसका विसर्जन कर देते हैं, ठीक है? कुछ जो भी लोग इनको खरीदते हैं, केवल चोरी करवाने के लिए ही खरीदते हैं।

जिसको बड़ी-बड़ी चोरियाँ करवानी हों तो वही बंदा ही इसको खरीदता है, ठीक है? गलत कामों के लिए, चाहे तो किसी को मारने के लिए, बस दो ही मकसद हैं इसके। यह इतना शक्तिशाली होता है, अगर आप 101 टन का, अगर आप इसको हम एक ट्रक बोलते हैं, ट्रक को भी उठा के लेके आ सकता है बड़ी आसानी से, इतनी इसके अंदर पावर होती है, ठीक है?

पर इसको ज़्यादा समय के लिए रखना बेवकूफी है। इसको थोड़े समय बाद यूज़ करने के बाद आप इसका विसर्जन ज़रूर कर दें, रखिए मत। रखने से क्या होता है, कभी भी आपका कुछ भी नुकसान कर सकता है एक मिनट के अंदर-अंदर।

बहुत ही डेंजर भी इसको बोल सकते हैं अगर यह बिगड़ जाए, ठीक है? एक बच्चे की तरह होता है, किसी की भी खटिया खड़ी कर सकता है, इसलिए कुछ समय तक इसको रखो, उसके बाद उसका विसर्जन कर दो, ठीक है?

अगर आपको रखना ही है, क्योंकि अगर आप बोलो ना, आप बहुत बड़े तांत्रिक हो, कहीं पर भी अगर आपकी छोटी सी गलती हो गई तो कहने को जो अच्छे तांत्रिक होते हैं, वे लोग भी इनको संभाल नहीं पाते हैं, ठीक है?

कुछ समय के बाद रखते हैं, फिर उसको छोड़ देते हैं, ठीक है? ये इसका काम होता है। यह बहुत महँगे मिलते हैं, कुछ लोगों को ऐसे ही मिल जाते हैं, ठीक है? खेतों के अंदर भी मिल सकते हैं और यह जो शक्ति होती है, बहुत ही ज़्यादा शक्तिशाली मसानी शक्ति होती है एक तरीके से।

आज के लिए बस इतना ही। 

गर इससे अलावा भी कोई जानकारी चाहिए तो आप हमें कमेंट बॉक्स में उस जानकारी के बारे में पूछ सकते हो, फिर उसके ऊपर हम अलग से वीडियो बनाएँगे। आज के लिए बस इतना ही। जय श्री महाकाल।