sulemani panch peer sadhna सुलेमानी पाँच पीर साधना
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गुरु मंत्र साधना कॉम मे स्वागत है आज हम sulemani panch peer sadhna सुलेमानी पाँच पीर साधना के बारे मे बात करेंगे मुस्लिम धरम की सुलेमानी तंत्र साधनो के अंतर्गत आती है ईस साधना को करने के बाद आप मुस्लिम धरम की कोई भी साधना कर सकते है भाव के मुस्लिम धर्म की हर साधना करने की ऊर्जा आप के शरीर मे आ जाती है
अगर आप को मुस्लिम तंत्र मे परवेश करना चाहते है तो आप यह साधना ज्रूर करे ईस मंत्र को आरध्ना और साधना के तोर पर भी कर सकते है अगर आप ईस मंत्र की साधना करते है तो आप दुनीया का हर नम्मुंकिन काम कर सकते ईस विद्या को सिद्धि करने के बाद तंत्र के खटकरम जैसे के मारन सम्मोहनVashikaran एक क्षण मे कर सकते है बिना खलाए पीलाए ईस मंत्र की आरध्ना करने पर साधक की मनोकामना पूरन होती है पीर बहुत जल्दी खुश हो जाते है और साधक की हर कार्य को पस्स्न्ता पूर्वक करते है sulemani panch peer sadhna सुलेमानी पाँच पीर साधना
यह जतनी जल्दी परसन होते है उतनी जल्दी नाराज भी हो जाते है ईस लिए साधक वो किरया कभी भी नही करनी चाहीए जिस से पीर नाराज हो मैंने ईस साधना को बहुत सारे साधकों को करवाया ईस साधना का नतीजा बहुत अच्छा निकला ईस साधना के सबंधी एक अनुभव आप लोगो के साथ शेयर करना चाहता हु sulemani panch peer sadhna सुलेमानी पाँच पीर साधना
ब्रिजेश एक अच्छा साधक था उस के गुरु जी गुजर चुके थे वो अच्छे गुरु की तलाश मे था हर जगह वो गुरु की तलाश मे ग्या जहा भी कोईकहता वाहा वो चला जाता पर और इंटरनेट के तमाम पलेटफार्म पर सर्च करा उस को ईस चकर मे उस ने पैसे और टाइम दोनों खराब करे फिर भी कोई उस को कोई अच्छा गुरु मिल नही रहा था ईस लिए उस ने एक न्यू आइडिया दिमाग मे आया जो उस के गुरु जी ने ख्वाजा पीर जी का मंत्र दिया था उस ने मंत्र को सर्च करा सर्च रीजल्ट मे सभ से ऊपर मेरी वैबसाइट आई सेम वही मंत्र था वो मंत्र सरिफ मेरी वेबसाइट पर ही था
पहले मैं अपने मंत्र वैबसाइट पर परकाशित करता था कुछ पाखंडी तांतिरको मेरे मंत्रो का गलत इस्तमाल करते थे लोगो से पैसे लूटते मुझे बहुत सारे साधको के फोन आए तो मैने मंत्रो को गुप्त कर दिया sulemani panch peer sadhna सुलेमानी पाँच पीर साधना
ब्रिजेश आपने गुरु का मंत्र मेरे वैबसाइट पर देखा और मुझे फोन करा गुरु जी मैंने आप ने गुरु का मंत्र आप के ब्लॉग मे देखा यह मंत्र मेरे गुरु से मुझे प्रपात होया था क्याआप मेरे गुरु को जानते है और भी बहुत सारे स्वाल पूछे मैंने उसकी सभी जिज्ञासा को दूर किया बहुत सारी जिज्ञासा को दूर किया अब उस को विश्वास हो ग्या मैं उस की मदद कर सक्ता हु sulemani panch peer sadhna सुलेमानी पाँच पीर साधना
फिर उस का फोन आया गुरु जी आप मुझे कोई साधना करवाए फिर मैंने उस की रुचि की अनुसार पाँच पीर साधना कारवाई साधना की कुछ दिन बाद उस की पत्नी को पीर बाबा की दर्शन होए अब अपने विष्य की और आते है मैं उस को फ़ोन कर रहा था मेरे एक आदत है जिस को भी मैं साधना करवाता हु उस को मैं हर रोज़ फ़ोन करता हु ताकि कोई घबराह कर कोई गलत फैसला न ले ले अमन कोई भी मैं फ़ोन कर रहा था वो फ़ोन उठा नहींरहा था sulemani panch peer sadhna सुलेमानी पाँच पीर साधना
इस लिए मुझे फ़िक्र हो गई फिर ३ दिन बाद उस का फ़ोन आया उस ने बताया गुरु जी मुझे कुछ दिन पहले पीर बाबा के दर्शन होए उन्होंने मुझे कुछ मांगने को कहा तो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या मांगू कुछ समझ नहीं आ रहा था इस लिए मैंने उन से हनुमान और भैरव को रक्षा के लिए मांग पीर कुछ टाइम कि लिए चुप हो गए फिर बोले चलो दिया जब उन्होंने यह कहा तो मैं उस शक्ति को सहन नहीं कर पाया और मैं हॉस्पिटल पहुंच गया बहुत सारे साधको पता ही नही होता है की क्या मांगना है ईस कारण वो ऐसी ग्लातीया अक्सर करते रहते है आप पहली ही सोच कर बेठे की आप को क्या मांगना है बहुत सारे साधक उट पटाक मांग कर अपना टाइम खराब sulemani panch peer sadhna सुलेमानी पाँच पीर साधना
अभ आप बताए कि आगे मुझे क्या करना है सर्व प्रथम तुम पीर बाबा से यह कहो कि मैं हनुमान भैरव की शक्ति को सहन का मेरे शरीर में बल प्रधान करो जब उस ने यह प्राथना करी तो वो पहले की तरह नार्मल हो गया
उसे की साधना को खडित हो चुकी थी क्योकि ४०दिन से पहले ही साधना खंडित हो चुकी थी जैसे ही वो ठीक हो कर घर पहुँचा उस ने यह साधना दुबारा शुरू करी
अभ उस ने फिर से साधना शुरू करी उस बार उस ने पीर बाबा की दर्शन पाने की लिए साधना को शुरू करा पहले से कही जायदा पर्किषा का सामना करना था इस बार उस के ब्रह्मचर्या की परीक्षा हुई जो बहुत कठिन थी उस की मैंने पहले से तैयारी करवा दी थी क्युकी मुझे पता था की क्या होने वाला है इस लिए मैंने उस को चेतना शक्ति जाग्रत करने की विधि समझा दी थी sulemani panch peer sadhna सुलेमानी पाँच पीर साधना
अभ कुछ साधको को चेतना शक्ति के बारे में कुछ पता नहीं होगा चेतना शक्ति का अर्थ है कि दिमाग और बुद्धि को इस तरह सही और गलत सतय और असतया सवपन और हक़ीक़त का पता चलना
उद्धरण के जैसे आप कोई स्वपन देख रहे हो स्वपन जो कुछ हो रहा होता उस का हमें पता चल जाता है के यह सिर्फ स्वपन ही है भाव के सत्य और असत्य की असलीयत का पता चलना एक चेतन अवस्था की निशानी है यही चेतन अवस्था है आप को चेतन अवस्था के बारे में आप को कम शब्दों में समझा दियाsulemani panch peer sadhna सुलेमानी पाँच पीर साधना
अभ आप ने विषय की और आते है
मैंने उस को चेतन अवस्था जाग्रत करने के कुछ प्रयोग करवाए और पूरे तयारी के साथ साधना शुरू करवाई
साधना शुरू किए कुछ दिन होए थे उस के स्वपन में eek सुन्दर सी लड़की दिखाई दी वो लड़की को देख कर आकर्षित हो गया और उस की और बढ़ना शुरू कर दिया जब वो आगे बढ़ रहा था तो अचानक उस को याद आ गया के मैं साधना कर रहा हु मैं कोई भी गलत काम नहीं कर सकता अभ उस को सत्य और असत्य का पता ;चल गया था यह सभ चेतना शक्ति के कारन था उस की चेतना शक्ति कमजोर थी उस को सत्य और असत्य का पता लेट चला अब उस ने चेतना शक्ति को बढ़ना का अभयास कई गुना बढ़ा दिया sulemani panch peer sadhna सुलेमानी पाँच पीर साधना
अब उस की हर बार परीक्षा हुई लेकिन उस की चेतना शक्ति जाग्रत होने के कारन हर बार उन परीक्षा में सफल होया
असल ज़िंदगी में भी उस को कई लड़कीओ के साथ संपर्क होया वो सब समझ गया के यह परीक्षा हो रही है फिर भी वो सावधान रहा
फिर उस के स्वपन में सट्टे के नंबर आने लगे वो भी सीधे नंबर जो भी अगर कोई सट्टे के नंबर की साधना करता है उस को कभी भी सीधे नम्बर नहीं आते वो नंबर संकेत के रूप में होते है उस का नंबर बनाना पड़ता लेकिन उस को जो नंबर आ रही थे वो सीधे आ रहे थे उस ने नम्बर लगा कर देखा वो नंबर लग रहे थे फिर उस मुझ से पूछा की नम्बर लग सकता हु मैंने उस को अगर तुम नंबर लागते हो सकता है २ ४ क्रोड़ तुम कमा सकते हो पर जो तुम चाहते हो वो तुम्हे प्रपात नहीं होगा
उस बाद बहुत बार स्वपन के माध्यम से सट्टे के नंबर दिखाई दिए पर अमन ने सट्टे का नंबर नहीं लाग्या भाव के अभ ब्रिजेश के लालच की परीक्षा होई
ब्रिजेश ko एक सपना आया वो एक बस में सफर कर रहा है बस के कंडक्टर ने एक जगह बस को रूका खाने पीने के लिए एक छोटा सा ढाबा था सरिफ उस ढाबे में एक बाबा ही था बाबा के कपड़े सफ़ेद थे और सफेद ही पगड़ी पहने थे वहां पर कोई नहीं था
बाबा ने बहुत प्रेम से अमन परांठे खलाए ब्रिजेश इतने स्वादिष्ट पराठे कभी नहीं खाए थे जब वो सुबह उठा तो उस का पेट भरा होया था गले में उस सी पराठेऔ का स्वाद जुबान पर था इस के बाद ब्रिजेश को पीर बाबा के तीन बार दर्शन हुए और ीक बार पत्नी को दर्शन होए जो बच्चा होगा वो मेरा ही होगा मैं हे ले कर जाऊंगा ब्रिजेश को हर रोज़ सट्टे के नंबर भी आते रहे पर उस ने लगाए नहीं sulemani panch peer sadhna सुलेमानी पाँच पीर साधना
ब्रिजेश की साधना का ३९ दिन था पीर बाबा और उन के साथ एक छोटा सा बच्चा था पीर बाबा के साथ जो बच्चा था वो बोलै के साधना को दुबारा शुरू करो उस ने हंकार वश बोले के जब मेरा बर्ह्मचर्य टूटा ही नही तो मैं फिर यह साधना दोबारा क्यों करूँ फिर वो बच्चा बोले तुम्हारा ब्रह्मचर्य इस लिए नहीं तोता क्यों कि हमने टूटने नहीं दिया लो आज हे तुहारा बर्ह्मचर्य टूट जाएगा अमन जब खाना खा रहा था अचानक उस का ब्रह्मचर्यटूटा गया उसने मुझे फ़ोन किया और सारा कुछ बताया मुझे उस क़ी बाते सुन कर बहुत गुस्सा तुम बहुत बड़े हो चुके जो बढ़ी जुबान लडाते हो तुम्हे हंकार वश यह बाते नहीं कहनी थी वो तुम्हारी परीकिशा ले रहे थे तुन्हे साधना दुबारा करने की जरूरत नहीं पड़ती sulemani panch peer sadhna सुलेमानी पाँच पीर साधना
अगर तुम यह बोल देते के मैं करने को त्यार हु तुम ने काम क्रोध लोभ को जीत लिया था जो इंसान का सभ से बढ़ा शत्रु है जो बढे बढ़े इंसानो और ज्ञानो की बुद्धि का जो हरण कर लेता जिसे अहंकार कहा जाता है तुम उस से जीत नहीं पाए बड़ी शकतो के मामले में आप की भावना यह होनी चाहिए के मैं उस शक्ति को खुश करने का प्रयास कर रहा हु न के यह मैं किसी शक्ति को सिद्ध कर रहा हु आप बड़ी शकतो को सिद्धि नहीं कर सकते यह बात अपने दिमाग में ऐड कर लो sulemani panch peer sadhna सुलेमानी पाँच पीर साधना
ब्रिजेश मुझे पूछा के गुरूजी अभ आगे क्या करना है तुम कल पीर बाबा का जाप करना और जाप करने के बाद शमा याचना करना जो तुम ने अंहकार जो गलती की है फिर बाब और बच्चा उस के सपने में आए अमन ने उस बच्चे से कहा पीर बाबा मेरे से बात नहे कर रहे उस बच्चे ने बोलै तुम ने पीर उन के दर्शन करने की मनोकामना को बोल कर यह साधना की थी सो तुम हे ीक बार की बजाए तीन बार दर्शन हो गए है और तुम क्या चाहते हो अगर पीर बात करने है तो डरा साधना शुरू करोअमन ने साधना दुबारा शुरू करी और दो बारे इस साधना को करा sulemani panch peer sadhna सुलेमानी पाँच पीर साधना
इस साधना की पूर्ण सिद्धि को प्रपात करा उस के बाद उस ने इस सिद्धि की मददत से बहुत सारे लोगो की इस सिद्धि के दुवारा मदद की एक इंग्लैंड से eek औरत जिस का पति गुजर चूका था उस की जायदात पर देवर जेठ ने कब्ज़ा कर लिया था क्यों की कागजो में वो सारी जमीन उन के नाम पर थी बहुत बढे बड़े वकीलों ने हाथ खड़े कर दिए थे उस लड़को को अमन बहुत टाइम से जाता था ब्रिजेश ने पीर बाबा की मदद ली वो औरत का शाम को फ़ोन आया के मैं केस जीत गई हु इस सभ कुछ आप की कारन होया है आप को भेट के टूर पर कुछ देना चाहती हु अमन ने लेने से इंकार कर दिया वो इंग्लैंड की currency का ५ लाख रुपया था जो इंडिया रुपया में काम से कम २ ३ करोड़ था अमन पैसे ले कर आराम की ज़िंदगी जी सकता था पर उस ने लालच नहीं किया sulemani panch peer sadhna सुलेमानी पाँच पीर साधना
ब्रिजेश के पास इस साधना को सिद्धि करने के बाद खटकर्मो की सिद्धि आ गई थी खटकर्म जैसे २) स्तम्भन, (३) मोहन, (४) उच्चाटन, (५) वशीकरण (६) आकर्षण विद्वेषण, (९) मारण आदी इस बारे में अमन को खुद को भी नहीं पता था
एक दिन ब्रिजेश के मन मे आया के यह मंत्र बहुत प्रभावकारी है इस मंत्र के द्वारा कुछ प्रयोग करके देखना की चाहिए ीक लड़की की फोटो के ऊपर पाँच पीर मंत्र का जाप किया उस लड़की का १घंटे में फ़ोन आया वो लड़की वश में हो चुकी थी फिर ब्रिजेश का फ़ोन इस लड़की के ऊपर मैंने वशीकरण किया है उस से कैसे तोड़ना है फिर मैंने उस को समझया के जिस तरह तुम ने किया इस तरह इसको तोड़ना है अमन इस विद्या के द्वारा बहुत सारे कार्य करवाएsulemani panch peer sadhna सुलेमानी पाँच पीर साधना
इसके बारे में अगर मैं जायदा विस्तार से बताऊँगा तो वीडियो थोड़ा लंबा हो जाएगा अभ आपने विषय की और आते है यह साधना बहुत सरल और प्रभावकारी साधना है इस साधना को करने के बाद आप तंत्र का खटकर्म बहुत ही आसनी से कर सकते है जितना जायदा आप इस का जाप करते है उतनी जायदा आप को सिद्धया प्रपात होगी यह सुलेमानी तंत्र के अंतर्गत आते है आज के लिए बस इतना ही अगर आप का कोई इस साधना के सम्भंधी तो आप यूट्यूब के कमेंट बॉक्स में जरूर लिखे sulemani panch peer sadhna सुलेमानी पाँच पीर साधना
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अगर आप को साधना सम्बन्धी रूचि रखते है आप हमारी website पर साधना पर बने रहे WWW.Gurumantrasadhna.com नाग साधना , गंधर्व साधना , अप्सरा साधना , विद्याधर साधना , सिद्ध साधना, यक्ष साधना , यक्षिणी साधना , भैरव साधना , भैरवी साधना आदि सकारात्मक शक्तियों की बात की गई है तो वहीं दैत्य साधना , दानव साधना, राक्षस साधना , पिशाच साधना , पिशाचिनी साधना , गुह्मक साधना, भूत साधना , बेताल साधना , योगिनी साधना वीर साधना , पीर साधना, कुंडलिनी जागरण साधना, देवी देवताओ की साधना , आदि सकारात्मक शक्तियों की साधना के लिए हमारी website के सदस्य बने WWW.Gurumantrasadhna.com फोन नम्बर 085280 57364
भुवनेश्वरी साधना महाविद्या मंत्र तंत्र साधना रहस्य
(Bhuvaneshvari Mahavidya MANTRA TANTRA
SADHNA)
आज हम भुवनेश्वरी साधनामहाविद्या के संबंधित Bhuvaneshvari Mahavidya MANTRA TANTRA SADHBNA) चर्चा करेंगे गए यह साधना दस कि अंतर्गत आने वाली साधना है यह साधना साधक हर कार्य मे विजय प्राप्त अर्थात सफलता दिलाती है ! “ह्रीं” इस शब्द या परम बीजाक्षर की महत्ता लिखनेमें तो स्वयं ब्रम्हा विष्णु महेश भी असमर्थ हैं , इस बीज मन्त्रजो माँ भुवनेश्वरी Bhuvaneshvari Mahavidya का बीज मंत्र माना जाता हैं भुवनेश्वर का शब्द भुवन + ईश्वरी से बना है मतलब सारे भवनो की इश्वरी हमारे ग्रंथो मे 14 भवनो का जिक्र आता है जैसे कि जिस मे हमारा पृथ्वी लोक भी आता है अर्थात हमारी ईश्वर शक्ति है वो भुवनेश्वर महाविद्या। ही है ।
आप किसी भी क्षेत्र का क्यू ना हो आप सभ जानते है कि सभ कामो मे business study नौकरी हो हर काम competition है।
अगर आप नौकरी कि लिए जाते है 100 सीट पर 10000 फॉर्म अप्लाई किए जाते है 10000 मे से आप कि नंबर कैसे संभाव है यह आप सोच सकते है आगर आप माँ भावनेश्वरी की साधना करती है तो आप को ईस मामले टेंशन लेने की जरूरत नही है
माँ भुवनेश्वरी की कृपा से आप हर क्षेत्र मे विजय प्राप्त कर सकते है चाहे आप का सामने वाला कोम्प्तीटर कितना भी बलवान क्यू ना हो आप उस बहुत ही आसानी विजय प्राप्त कर सकते है ! ईस साधना को भगवान सूर्य ने आपने शिश पवनपुत्र हनुमान को प्रदान किया था जब दशरथनंदन राम का युद्ध महाबली रावण कि साथ चल रहा था उस समय भगवान् राम चिंता युक्त हो कर हनुमान जी से बोले रावण
बड़ा मायावी और प्रपंची है। उच्चकोटि की |सिद्धियां उसके पास है और समस्त प्रकृति को वह अपने नियंत्रण में ले चुका है…सारी प्रकृति उसके इशारों पर नृत्य करती है। साथ ही साथ उसके पास अद्वितीय दिव्यास्त्रों की भरमार है और उनमें कुछ तो ऐसे हैं जो समस्त ब्रह्माण्ड को विनष्ट करने में सक्षम है। Bhuvaneshvari Mahavidya
तो तुम्हारा क्या विचार है हनुमान?-राम ने पूछा।
हनुमान बोले प्रभु मुझे स्मरण आ रहा है, कि बाल्यावस्था में शिक्षा प्राप्त करने के दौरान मुझे एक अद्वितीय महातेजस्वी साधना पद्धति मेरे गुरु सूर्यदेव ने प्रदान की थी, जो भुबनेश्वरी Bhuvaneshvari Mahavidya से सम्बन्धित है।
उनके अनुसार समस्त देवियों की शक्ति को भुवनेश्वरी के रूप में सिद्ध कर लेने से बह साधक अजेय हो जाता है और फिर उसके सामने समस्त प्रैलोक्प के देवता, दानव, मनुष्य,गन्धर्व आदि भी युद्ध में टिक नहीं सकते।
जब यह साधना सम्पन्न होती है, उसी क्षण से श्त्रू की हार निश्चितहो जाती है और उसकीविजय भी उतनी ही निश्चित हो जाती है, जितना कि सूर्य और चन्द्र का अस्तित्व में होना।“
–और प्रभुराम मुस्करा दिए, ‘आपने परम भक्त की प्रसन्नता के लिए भक्त हनुमान के निवेदन पर उसी क्षण भुवनेश्वरी साधना एवं अनुष्ठान का प्राराम किया एवं उसे सफलता पूर्वक सम्पन्न किया Bhuvaneshvari Mahavidya
और इतिहास भी इस बात का गवाह है, कि जो रावण नाभि में अमृत कुण्ड स्थापित होने की वजह से अजेय था,
अंततः काल के विकराल पंजों से बच नहीं पाया ..वास्तव में ही यह साधना अपने-आप में महातेजस्वी अद्वितीय है। ऐसा आज तक हुआ ही नहीं, कि व्यक्ति यह साधना सम्पन्न करे और उसका परिणाम उसे न मिले।
पहले दिए गए साधना का एक ही तथ्य स्पष्ट कियागया है। वैसे इसके सफलतापूर्वक सम्पन्न होने पर स्थितियां |साधक ईस साधना को करने के बाद जिंदगी कि हर मोड़ पर सफलता प्राप्त करता है Bhuvaneshvari Mahavidya
साधक जिस भी कार्य मे हाथ डालता है सफलता उस के कदम चूमती है उसे हर क्षेत्र मे विजय प्राप्त होती है !अगर नौकरी प्राप्त नही हो रही आप बार बार interview दे देकर थक चुकि है
तो यह साधना आप कि लिए है आप को नौकरी भी प्रपात होगी नौकरी मे जल्द parmotion प्राप्त होगा ईस तरह आप जिंदगी उच पदवी को प्राप्त कर
लेगे ! Bhuvaneshvari Mahavidya
ईस साधना कि सिद्ध होने कि बाद साधक के बाद पैसे की कमी नही रहती है जिंदगी मे जल्दी तरक्की को प्राप्त होता है अगर आप भी अपनी जिंदगी मे सफलता प्राप्त करना चाहते है तो आप यह साधना जरूर करें !
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उर्वशी अप्सरा की उत्पति कैसे हुई थी इस की क्या कथा है ?
क्या स्वर्ग की अप्सराएं अविवाहित होती थी?
रावण को किस अप्सरा से श्राप मिला था?
उर्वशी अप्सरा ने किस पांडव को नपुंसक हो जाने का शाप दिया था?
क्या अप्सरा दर्शन संभव है ?
अप्सरा साधना के क्या-क्या दुष्परिणाम होते हैं?
भारत में अप्सराओं का इतिहास क्या है?
यह स्वर्ग की अप्सरा कोण थी
हिंदू पौराणिक कथाओं में, क्या अप्सरा साधना वास्तव में मौजूद है?
क्या गर्भावस्था के दौरान अप्सरा साधना की जा सकती है?
अप्सरा साधना किस उम्र का वियक्ती कर सकता है ?
गुरु मंत्र साधना मे का स्वागत हैआज हम उर्वशी अप्सरा साधना urvashi apsara sadhana केबारेचर्चा करेंगेपहलेहम यह जानते है कि अप्सराकौन होती है आज मैंविस्तारसेनही बता पाउँगा यहविषय बहुतलम्भाहैउस कि लिएएकअलग से पोस्त लिखीजायेगी अप्सरा स्वर्ग कि खूबसूरतसुंद्र्रीया होती हैप्राचीन काल से ही भारतीय साधना पद्धति में सौन्दर्य की साधना करना भी एक आवश्यक गुण माना गया है। urvashi apsara sadhana
उर्वशी किसकी पत्नी थी?
urvashi apsara sadhana सौन्दर्य शब्द को लेकर के समाज में आज जो भी धारणा हो, उसके विषय में तो कुछ भी नहीं कहा जा सकता, किंतु प्राचीन काल में ऋषियों के मन में सौन्दर्य को लेकर के न तो कोई द्वन्द्व था, न उनके मन में कोई ऐसी धारणा थी कि सौन्दर्य की उपासना अपने आपमें कोई अश्लील धारणा है।
यही कारण है, कि प्राचीन ग्रंथों में सौन्दर्य का मूर्ति रूप अप्सरा को मान करसौन्दर्य को ही उपासना करने का प्रयास किया है, क्योंकि सौन्दर्य नारी के माध्यम से अपने सर्वोतकृष्ट रूप में स्पष्ट हो सकता है urvashi apsara sadhana
urvashi apsara sadhana
urvashi apsara sadhana हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार अप्सरा देवलोक में रहने वाली अनुपम
, अति सुंदर, अनेक कलाओं मेंपूर्ण, तेजस्वी और अलौकिक दिव्य दैविक शक्ति है जो साधक कीहरइच्छा को पूराकर सकती है।अप्सरा देवलोक में देवराज इंद्र की सेवा में रहती थीं और इंद्र के मनोरंजन के साथ ही साथ पुण्य कर्मों से स्वर्ग गए प्राणियों को भी अपने रूप-सौन्दर्य और नृत्य से आनंदित करतीरह्तीहै।
कई बार देवराज इंद्र अप्सराओ के रूप सौन्दर्य का इस्तेमाल एक हथियार के तौर पर भी करते थे जब उन्हें किसी व्यक्ति की तपस्या से अपनी गद्दी जाने का डर सताने लगता था।आप्सराऐ इन्द्रकेआदेशके अनुसार ऋषि मुनियो कीतप्स्या मोह मायासे भंगकरनेका कार्य भी करती हैअप्सरा साध्नाको सिद्धकरने वालासाध्कआपार धन दोल्त को प्राप्त करताहैइतिहास साक्षी है कि स्वामी शंकराचार्यजी ने इसी लाधना को सम्पन्न कर अपने शिष्य पद्मपाद को अतुलनीय वैभव का स्वामी बना दिया
ईस साधना मेज्यादा सम्ग्रीकी जरूरत नही पड़ती है एकअप्सरा मालाकी ज़रूरतपड़ती है अप्सरामालापार्ण परतिष्ठतहोनी चाहिए और पाँच गुलाब केफूलगुलाबकि फूल न मिले तो कोई औरसुगंधित फूल भीरख सकते हो एकगुलाबीवस्त्रएकअगरबत्ती और किसी भीचीज़जरूरतनहीहैयहसब समानआप कोआसानी सेउपलब्ध हो जातीहैअगरआप को यहसाधना सिद्धकरनीहो तो आप हम से संपर्क करसकतेहैurvashi apsara
इंटरनेटकि ऊपरबहुतसारीसाधना उपलब्ध है जिसमेमंत्रसाधनाविधानबता रखाहै कितनोकोसिद्धि प्राप्तहुई है आप सब लोग जानतेही है अब फिर आपनेविषयकी और आते हैअब सवाल ये है पहलेउर्वशीसाधनाहीक्यू करेऔर भी बहुतसारीअप्सराएहोतीहैलेकिन उर्वधी पहलेक्यू करेउर्वशीएकप्रधान और प्रमुख अप्सरा है अगर आप उर्वशी कर लेते हो तो आप अन्यअप्सरा खुद पर खुदसिद्ध हो जातीहै urvashi apsara
उर्वशी कारूपबहुत ही सुंदर है, वह चिरयौवना है, वह 18 वर्ष की उम्र की युवती के समान अल्हड़ मदमस्त और यौवन रस से परिपूर्ण है। उर्वशीका सारा शरीर एक खूबसूरती सुन्दरता से परिपूर्ण रहता | है, जिसको देखकर व्यक्ति तो क्या, देवता भीमोहित होजाते हैं। विश्वामित्र संहिता के अनुसार गोरा अण्डाकार चेहरा, लम्बे और एड़ियों को छूते हुए घनेश्याम केश, , गोरा रंग ऐसा, कि जैसे स्वच्छ दूध में केसर मिला दी हो, बड़ी-बड़ी की आँखें छोटी चिबुक, सुंदर और गुलाबी होंठ, आकर्षक चेहरा और अद्वितीय आभा से युक्त शरीर … सब मिलाकर एक | ऐसा सौन्दर्य जो हाथ लगने पर मैला हो जाए। ऐसी ही सौन्दर्य की सम्राज्ञी उर्वशीहै |
विश्वामितर एक ऐसेऋषिहैजिन्होंने सबसे पेहली उर्वशीअप्सराको सिद्धकिया था ईस केसम्बन्धी एक कथा आतीहै विश्वामित्र ने जब यह सुना कि उर्वशी इन्द्र के दरबार को सौन्दर्य नृत्यांगना है, तो उन के मन मे आयाउर्वशीमेरेआशर्ममे भीउर्वशी नृत्य करे। उन्होंने आज्ञा दी कि उर्वशी मेरे आश्रम में भी नृत्य करे।
विश्वामित्र जीअपना संदेश इन्द्र तक पहुंचा दिया इन्द्र ने मना कर दिया यह किसी भी प्रकार से सम्भव नहीं है।विश्वामित्र तो हठीऋषि थे , उन्होंने आपनी मंत्र शक्ति द्वारा उर्वशी को अपने आश्रम में बुलाया और कहा – तुम्हें ठीक वैसा ही नृत्यकरना होगाजैसा इन्द्र की सभा में तुम करती हो।
उर्वशी ने ऐसाकरने सेमनाकर दियाइन्द्रलोक चली गई।विश्वामित्रने उसी क्षण प्रतिज्ञा कीकि मैं तंत्र की रचना करूंगा तंत्र शक्तिसे उर्वशी को अपने आश्रम में बुला कर ,नृत्य करवाऊंगा और इसी प्रतिज्ञा कि परिणाम से ‘उर्वशी तंत्र‘। की रचना की हजारों शिष्यओके सामने उर्वशी का नृत्य संपन्न करवाया
और विश्वामित्रजी कि बादबहुतसारे साधको ने इस अप्सरा को सिद्ध किया जिंदगीमेंसभी भोगो को भोगाविश्वामित्र के बाद उनके शिष्यभूरिश्रवा, चिन्मय, देवसुत,गन्धर, और यहां तक कि देवी विश्रा औररत्नप्रभा ने भी उर्वशी सिद्ध कर जीवन के सम्पूर्ण भोगों का भोग किया।
गोरखनाथ ने भी इस साधना के माध्यम से चिरयौवन प्राप्त किया और गोरक्षपुर में उन्होंने हजारों शिष्यों के सामने सदेह उर्वशी को बुलाकर अद्वितीय नृत्य सम्पन्न करवाया।औरभीबहुत सारेसाधको ने सिद्ध करआपार धन दोलतको प्राप्त कराआप भीजिंदगीइससाधनाकोसंपन्नकर जिदगीका हर सुखपासकते हो
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अप्सरा साधना किस उम्र का वियक्ती कर सकता है ?
अप्सरा साधना किसी भी उम्र का साधक कर सकता चाहे वो बूढ़ा अप्सरा साधना हो या जवान हो यह बात मेटर नहीं करती आप की साधना करने की लगन होनी चाहिए बहुत से ऋषि लोगो ने बुढ़ापे में करा और लाभ प्रपात करे इस साधना को करने से बूढ़ा वियक्ति भी जवान की तरह हो जाता है
क्या गर्भावस्था के दौरान अप्सरा साधना की जा सकती है?
इस का जवाब नहीं है
हिंदू पौराणिक कथाओं में, क्या अप्सरा साधना वास्तव में मौजूद है?
हिंदू धर्म की कोई भी साधना पूजा गलत नहीं हो सकती क्योंकि हिंदू यह सनातन धर्म है इसलिए यदि आप पूछ रहे हैं कि साधना आदि के बारे में सोचा नहीं गया है तो हां लेकिन इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपनी साधना कहां से जहाज करते हैं, जिसका अर्थ है कि आपको अपनी साधना कहां से मिली, यह बात भी बहुत कुछ निर्भर करती है । यदि आपने किसी सिद्ध व्यक्ति के साथ साधना की है तो आपकी साधना आपको सफलता की ओर ले जाएगी और आप जो भी साधना करना चाहते हैं उसे करके आसानी से पाप कर सकते हैं।
यह स्वर्ग की अप्सरा कोण थी
यह अप्सराएँ सागर मंथन से निकली थी उन्होंने किसी को भी पति रूप में स्वीकार नहीं किया इस लिए वे इंद्र (स्वर्ग) के दरबार में नर्तकों के रूप में बनी रही ।
भारत में अप्सराओं का इतिहास क्या है?
अप्सरा, भारतीय धर्म और पौराणिक कथाओं में, खगोलीय गायकों और नर्तकों में से एक, जो गंधर्वों, या खगोलीय संगीतकारों के साथ मिलकर स्वर्ग के स्वामी भगवान इंद्र के स्वर्ग में निवास करते हैं। मूल रूप से पानी देवियों, अप्सरा दोनों देवताओं और पुरुषों के लिए कामुक खुशी प्रदान करते हैं अप्सरा एक आध्यात्मिक अवधारणा है, जो हर चीज में सुंदरता की सराहना करने की हमारी क्षमता का स्रोत है – लोगों में, प्रकृति में, ब्रह्मांड में, हमारे निकट और प्रिय को संजोने के लिए, दोस्ती का खजाना और इतने पर। यह एक अमूर्त अवधारणा है जिसे विद्याधारा (“प्रेरित ज्ञान धाराओं”) के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जो सभी प्रेरणा का स्रोत है, या “आध्यात्मिक ऊर्जा का वर्ग” है जो लौकिक और आध्यात्मिक स्थानों (इसलिए प्रेरणादायक) के बीच सीमा का विस्तार करने में सक्षम है।
अप्सरा साधना के क्या-क्या दुष्परिणाम होते हैं?
कोई भी शक्ति का कोई दुष्परिणाम नहीं होता अगर आप अच्छे गुरु की देख रेख में करते है दूसरा अगर आप अप्सरा का सम्बन्धी जो नियम है अगर आप उन नियम को तोड़ते हो तब भी दुष्परिणाम भोगने पद सकते है
क्या अप्सरा दर्शन संभव है ?
हां अप्सरा दर्शन संभव है यह संभव है आप की मेहनत पर आप किस तरह से साधना करते है ! यह आप पर निर्भर है इस में मेहनत के साथ नियम भी जरूरी है
उर्वशी अप्सरा ने किस पांडव को नपुंसक हो जाने का शाप दिया था?
एक दिन जब चित्रसेन अर्जुन को संगीत और नृत्य की शिक्षा दे रहे थे, वहाँ पर इन्द्र की अप्सरा उर्वशी आई और अर्जुन पर मोहित हो गई। अवसर पाकर उर्वशी ने अर्जुन से कहा, “हे अर्जुन! आपको देखकर मेरी काम-वासना जागृत हो गई है, अतः आप कृपया मेरे साथ विहार करके मेरी काम-वासना को शांत करें।” उर्वशी के वचन सुनकर अर्जुन बोले, “हे देवि! हमारे पूर्वज ने आपसे विवाह करके हमारे वंश का गौरव बढ़ाया था अतः पुरु वंश की जननी होने के नाते आप हमारी माता के तुल्य हैं। देवि! मैं आपको प्रणाम करता हूँ।” अर्जुन की बातों से उर्वशी के मन में बड़ा क्षोभ उत्पन्न हुआ और उसने अर्जुन से कहा, “तुमने नपुंसकों जैसे वचन कहे हैं, अतः मैं तुम्हें शाप देती हूँ कि तुम एक वर्ष तक पुंसत्वहीन रहोगे।” इतना कहकर उर्वशी वहाँ से चली गई।
जब इन्द्र को इस घटना के विषय में ज्ञात हुआ तो वे अर्जुन से बोले, “वत्स! तुमने जो व्यवहार किया है, वह तुम्हारे योग्य ही था। उर्वशी का यह शाप भी भगवान की इच्छा थी, यह शाप तुम्हारे अज्ञातवास के समय काम आयेगा। अपने एक वर्ष के अज्ञातवास के समय ही तुम पुंसत्वहीन रहोगे और अज्ञातवास पूर्ण होने पर तुम्हें पुनः पुंसत्व की प्राप्ति हो जायेगी।” अर्जुन बने बृहन्नला
रावण को किस अप्सरा से श्राप मिला था?
रावण ने अप्सरारंभा को देखा जो उसके सौतेले भाई कुबेर की वधू थी। रावण रंभा को देखकर कामातुर हो गया और उसके साथ बल प्रयोग कर सतीत्व भंग कर डाला। जब यह बात नलकुबेर को पता चली तो उसने रावण को शाप दिया कि यदि वह किसी भी स्त्री की इच्छा के बिना उसे स्पर्श करेगा तो उसके सिर के सौ टुकड़े हो जाएंगे।
क्या स्वर्ग की अप्सराएं अविवाहित होती थी?
हां अप्सरा स्वर्ग में अविवाहित होती थी यह किसी भी देवता के साथ विवाह नहीं करती ! यह अपनी इच्छा से विवाह करवा सकती है ! यह विवाह के बंदन में जायदा समय तक नहीं रहती
अब सवाल ये है पहले उर्वशी साधना ही क्यू करे और भी बहुत सारी अप्सराए होती है लेकिन उर्वधी पहले क्यू करे ?
उर्वशी एक प्रधान और प्रमुख अप्सरा है अगर आप उर्वशी कर लेते हो तो आप अन्य अप्सरा खुद पर खुद सिद्ध हो जाती है urvashi apsara
उर्वशी अप्सरा की उत्पति कैसे हुई थी इस की क्या कथा है ?
श्रीमद्भागवत के अनुसार यह उर्वशी स्वर्ग (हिमालय के उत्तर का भाग) की सर्वसुन्दर अप्सरा थी। एक बार इन्द्र की सभा में उर्वशी के नृत्य के समय राजा पुरुरवा (चंद्रवंशियों के मूल पिता) उसके प्रति आकृष्ट हो गए थे जिसके चलते उसकी ताल बिगड़ गई थी। इस अपराध के कारण इन्द्र ने रुष्ट होकर दोनों को मर्त्यलोक में रहने का शाप दे दिया था। मर्त्यलोक में पुरुरवा और उर्वशी कुछ शर्तों के साथ पति-पत्नी बनकर रहने लगे। इनके 9 पुत्र आयु, अमावसु, विश्वायु, श्रुतायु, दृढ़ायु, शतायु आदि उत्पन्न हुए। उर्वशी को इन्द्र बहुत चाहते थे। माना जाता है कि नारायण की जंघा से उर्वशी की उत्पत्ति हुई है, लेकिन पद्म पुराण के अनुसार कामदेव के ऊरू से इसका जन्म हुआ था। उर्वशी तो अजर-अमर है। यही उर्वशी एक बार इन्द्र की सभा में अर्जुन को देखकर आकर्षित हो गई थी और इसने इन्द्र से प्रणय-निवेदन किया था, लेकिन अर्जुन ने कहा- ‘हे देवी! हमारे पूर्वज ने आपसे विवाह करके हमारे वंश का गौरव बढ़ाया था अतः पुरु वंश की जननी होने के नाते आप हमारी माता के तुल्य हैं…।’ अर्जुन की ऐसी बातें सुनकर उर्वशी ने कहा- ‘तुमने नपुंसकों जैसे वचन कहे हैं अतः मैं तुम्हें शाप देती हूं कि तुम 1 वर्ष तक पुंसत्वहीन रहोगे।’ इस तरह उर्वशी के संबंध में सैकड़ों कथाएं पुराणों में मिलती हैं।
उर्वशी किसकी पत्नी थी?
उर्वशी राजा पुरुरवा की पत्नी थी। उर्वशी राजा पुरुरवा के साथ बहुत लम्बे समय तक रही और उर्वशी से राजा पूर्व को ९ पुत्र प्रपात हुए। पुत्रो के नाम आयु, अमावसु, श्रुतायु, दृढ़ायु, विश्वायु, शतायु अदि।
उर्वशी ने अर्जुन को कौन सा वरदान दिया?
कौन सी अप्सरा अर्जुन से शादी करना चाहती थी? उर्वशी अप्सरा अर्जुन के साथ शादी करना चाहती थी पर अर्जुन ने मना कर दिया था जिस के कारन उर्वशी ने नाराज हो कर अर्जुन को दिया था
उर्वशी की शादी हो चुकी है? उर्वशी की शादी हो चुकी है वो पुरुरवा राजा के साथ हुई थी।
उर्वशी मेनका और रंभा कौन है? उर्वशी उर्वशी मेनका और रंभा प्रधान अप्सरा है यह स्वर्ग में इंद्र के अप्सरा है।
उर्वशी किसकी पत्नी थी?
उर्वशी राजा पुरुरवा की पत्नी थी। उर्वशी राजा पुरुरवा के साथ बहुत लम्बे समय तक रही और उर्वशी से राजा पूर्व को ९ पुत्र प्रपात हुए। पुत्रो के नाम आयु, अमावसु, श्रुतायु, दृढ़ायु, विश्वायु, शतायु अदि।
कौन सी अप्सरा अर्जुन से शादी करना चाहती थी?
उर्वशी अप्सरा अर्जुन के साथ शादी करना चाहती थी पर अर्जुन ने मना कर दिया था जिस के कारन उर्वशी ने नाराज हो कर अर्जुन को दिया था
उर्वशी की शादी हो चुकी है?
उर्वशी की शादी हो चुकी है वो पुरुरवा राजा के साथ हुई थी।
उर्वशी मेनका और रंभा कौन है?
उर्वशी उर्वशी मेनका और रंभा प्रधान अप्सरा है यह स्वर्ग में इंद्र के अप्सरा है।
what is yakshini यक्षिणी क्या है ? yakshini sadhnaआज हम यक्षिणी साधना के उपर चर्चा करेंगे कौन सी यक्षिणी की साधना आप के लिए उपयोग रहेंगी। पहले हम यक्षिणी साधना के विषय मे समाज में बहुत सी गलत धारणाएँ हैं । कुछ लोगों का मानना है कि यक्षिणी खून मनुष्य का खून चूसती हैं। yakshini sadhna
हिन्दू धर्मशास्त्रों में मनुष्येतर जिन प्राणि-जातियों का उल्लेख हुआ है, उनमें देव, गन्धर्व, यक्ष, किन्नर, नाग, राक्षस, पिशाच प्रादि प्रमुख हैं। इन जातियों के स्थान जिन्हें ‘लोक’ कहा जाता है-भो मनुष्यजाति के प्राणियों से भिन्न पृथ्वी से कहीं अन्यत्र अवस्थित हैं। इनमें से कुछ जातियों का निवास प्रकाश में और कुछ का पाताल में माना जाता है। | इन जातियों का मुख्य गुण इन को सार्वभौमिक सम्पन्नता है, अर्थात् इनके लिए किसी वस्तु को प्राप्त कर लेना अथवा प्रदान कर देना सामान्य बात है। ये जातियाँ स्वयं विविध सम्पत्तियों को स्वःमिनी हैं। मनुष्य जाति का जो प्राणी इनमें से किसी भी जाति के | किसी प्राणी की साधना करता है अर्थात् उसे जप, होम, पूजन आदि | द्वारा अपने ऊपर अनुरक्त कर लेता है, उसे ये मनुष्येतर जाति के
प्राणी उसकी अभिलाषित वस्तु प्रदान करने में समर्थ होते हैं। इन्हें | अपने ऊपर प्रसन्न करने एवं उस प्रसन्नता द्वारा अभिलषित वस्तू प्राप्त करने की दृष्टि से हो इनका विविध मन्त्रोपचार आदि के द्वारा साधन किया जाता है जिसे प्रचलित भाषा में ‘सिद्धि’ कह कर पुकारा जाता है।
यक्षिणियाँ भी मनुष्येतर जाति की प्राणी हैं। ये यक्ष जाति के पुरुषों की पत्नियां हैं और इनमें विविध प्रकार की शक्तियाँ सन्निहित | मानी जाती हैं। विभिन्न नामवारिणी यक्षिणियाँ विभिन्न शक्तियों | से सम्पन्न हैं-ऐसी तान्त्रिकों को मान्यता है । अतः विभिन्न कार्यों | की सिद्धि एवं विभिन्न अभिलाषाप्नों को पूति के लिए तंत्रशास्त्रियों
द्वारा विभिन्न यक्षिणियों के साधन की क्रियाओं का आविष्कार किया गया है। यक्ष जाति चूकि चिरंजीवी होती है, अतः यक्षिणियाँ भी प्रारम्भिक काल से अब तक विद्यमान हैं और वे जिस साधक पर प्रसन्न हो जाती हैं, उसे अभिलषित वर अथवा वस्तु प्रदान करती हैं।
अब से कुछ सौ वर्ष भारतवर्ष में यक्ष-पूजा का अत्यधिक प्रचलन था । अब भो उत्तर भारत के कुछ भागों में ‘जखैया’ के नाम से यक्षपूजा प्रचलित है। पुरातत्त्व विभाग द्वारा प्राचीन काल में निर्मित यक्षों की अनेक प्रस्तर मूर्तियों की खोज की जा चुकी है। देश के विभिन्न पुरातत्त्व संग्रहालयों में यक्ष तथा यक्षिणियों की विभिन्न प्राचीन मूर्तियाँ भी देखने को मिल सकती हैं।
कुछ लोग यक्ष तथा यक्षिणियों को देवता तथा देवियों की ही एक उपजाति के रूप में मानते हैं और उसी प्रकार उनका पूजन तथा आराधनादि भी करते हैं। इनकी संख्या सहस्रों में हैं
प्रत्येक व्यक्ति के मन यक्षिणी साधना के सम्बन्ध में कई प्रकार की धारणा है कुछ साधक इस विषय अंजान है ज्ञानता के कारण इस साधना के बारे में गलत सोचते है इस साधना तामसिक साधना समझते हैं बहुत से लोग यक्षिणी का नाम सुनते ही डर जाते हैं कि ये बहुत भयानक होती हैं, किसी चुडैल कि तरह, किसी प्रेतानी कि तरह, मगर ये सब सब आज्ञानता पूरन बाते है । यक्षिणी साधना के विषय मे समाज जो असत्य मिथ्या धारणाओं को दूर करने का प्रयत्न करूंगा अस्ल में यक्षिणी साधना क्या इस के विषय बताने का प्रयत्न करूंगा है । कोई भी साधना करने से पहले उस साधना की प्रारम्भिक जानकारी होने जरूरी है हम भटक न सकें । yakshini sadhna
यक्षिणी साधना परिचय yakshni sadhna related introduction
यक्षिणी एक सौम्य और दैविक शक्ति होती है देवताओं के बाद देवीय शक्तियों के मामले में यक्ष का ही नंबर आता है हमारे भारतीय पौराणिक ग्रंथो में बहुत सारी प्रमुख रहस्यमयी जातियां का वर्णन मिलता है । जैसे कि देव गंधर्व ,यक्ष, अप्सराएं, पिशाच, किन्नर, वानर, रीझ, ,भल्ल, किरात, नाग आदि यक्षिणी भी इन रहस्यमय शक्तियो के अंतर्गत आती है । देवताओं के कोषाध्यक्ष महर्षि पुलस्त्य पौत्र विश्रवा पुत्र कुबेर भी यक्ष जाती के हैं । जैसे कि देवताओं के राजा इंद्र है वैसे ही यक्ष यक्षिणी काराजा कुबेर है कुबेर को यक्षराज बोला जाता है यक्ष यक्षिणीया कुबेर के आधीन होती है। https://www.youtube.com/watch?v=1Pe7EGmcHtA&t=7s
यक्षिणी साधना को किसी रूप में सिद्ध किया जाता है yakshni sadhna ko kis roop me siddh kiya jata hai
कुछ साधको के मन शंकाआऐं होता है कि यह किसी रूप मे सिद्ध होती है कुछ लोगों की धारणा यह सिर्फ प्रेमिका रूप में सिद्ध की जा सकती है जो कि बिलकुल गलत है साधक इच्छा अनुसार किसी भी रूप सिद्ध कर सकता है । इच्छा अनुसार, माता , पुत्रीव स्त्री ( पत्नी ) के रूप में सिद्ध कर सकते है यक्षिणियों की साधना अनेक रूपों में की जाती है, जैसे माँ, बहन, पत्नी अथवा प्रेमिका के रूप में इनकी साधना की जाती है, ओर साधक जिस रूप में इनको साधता है ये उसी प्रकारका व्यवहार व परिणाम भी साधक को प्रदान करती हैं, माँ के रूप में साधने पर वह ममतामयी होकर साधक का सभी प्रकार से पुत्रवत पालन करती हैं तो बहन के रूप में साधने पर वह भावनामय होकर सहयोगात्मक होती हैं, ओर पत्नी या प्रेमिकाके रूप में साधने पर उस साधक को उनसे अनेक सुख तो प्राप्त हो सकते हैं किन्तु उसे अपनी पत्नी व संतान से दूर हो जाना पड़ता है ।उड्डीश तंत्र में जिक्र मिलता है कि इस को किसी भी रूप मे सिद्ध किया जा सकता है । yakshini sadhna
सर्वासां यक्षिणीना तु ध्यानं कुर्यात् समाहितः ।
भविनो मातृ पुत्री स्त्री रुपन्तुल्यं यथेप्सितम् ॥
तन्त्र साधक को अपनी इच्छा के अनुसार बहिन , माता , पुत्रीव स्त्री ( पत्नी ) के समान मानकर यक्षिणियों के स्वरुप में साधना अत्यन्त सावधानीपूर्वक करना चाहिए । कार्य में तनिक – सी भी असावधानी हो जाने से सिद्धि की प्राप्ति नहीं होती ।
इस श्लोक से उपरोक्त बात स्पष्ट होती है कि आप इच्छा अनुसार, माता , पुत्रीव स्त्री ( पत्नी ) के रूप में सिद्ध कर सकते है ।
अष्टम यक्षिणी प्रमुख आठ यक्षिणीया ashat yakshni parmukh aath yakshniya
जैसे कि मनुष्यो कुछ विशेष मनुष्य होते है उसी तरह यक्षिणी में भी कुछ विशेष यक्षिणीया होती है । सभी योनियों में इस तरह से होता है । इनमे से निम्न 8 यक्षिणियां प्रमुख मानी जाती है
1.सुर सुन्दरी यक्षिणी yakshini sadhna
2.मनोहारिणी यक्षिणी yakshini sadhna
3.कनकावती यक्षिणी yakshini sadhna
4.कामेश्वरी यक्षिणी yakshini sadhna
5.रतिप्रिया यक्षिणी yakshini sadhna
6.पद्मिनी यक्षिणी yakshini sadhna
7.नटी यक्षिणी yakshini sadhna
8.अनुरागिणी यक्षिणी yakshini sadhna
किस यक्षिणी की साधना से क्या फल मिल सकता kiss yakhni ke sadhna se kya phal milta hai
सुर सुन्दरी यक्षिणी – यह यक्षिणी सिद्ध होने के बाद साधक को ऐश्वर्य, धन, संपत्ति आदि प्रदान करती है।
रति प्रिया यक्षिणी साधक और साधिका यदि संयमित होकर इस साधना को संपन्न कर लें तो निश्चय ही उन्हें कामदेव और रति के समान सौन्दर्य मिलता है।
पद्मिनी यक्षिणी यह अपने साधक को आत्मविश्वास व स्थिरता प्रदान करती है और हमेशा उसे मानसिक बल प्रदान करती
नटी यक्षिणी को विश्वामित्र ने भी सिद्ध किया था।यह अपने साधक कि पूर्ण रूप से सुरक्षा करती है।
अनुरागिणी यक्षिणी साधक पर प्रसन्न होने पर उसे नित्य धन, मान, यश आदि प्रदान करती है और साधक की इच्छा होने पर सहायता करती है
विशेष कामना पूर्ति के हिसाब से अलग अलग साधनाओ को किया जाता है
यक्षिणी अन्य साधना से जल्दी सिद्ध होती है yakshni any sadhna se jaldhi siddhi hote hai
हमारे प्राचीन भारतीय ग्रंथो में बहुत सारे लोको का वर्णन मिलता है इस ब्रह्मांड में कई लोक हैं। सभी लोकों के अलग-अलग देवी देवता हैं जो इन लोकों में रहते हैं । पृथ्वी से इन सभी लोकों की दूरी अलग-अलग है। मान्यता है नजदीकि लोक में रहने वाले देवी-देवता जल्दी प्रसन्न होते हैं, क्योंकि लगातार ठीक दिशा और समय पर किसी मंत्र विशेष की साधना करने पर उन तक तरंगे जल्दी पहुंचती हैं। यही कारण कि यक्ष, अप्सरा, किन्नरी आदि की साधना जल्दी पूरी होती है, क्योंकि इनके लोक पृथ्वी से पास हैं।
तंत्र ग्रंथो के अनुसार यक्षिणी साधना को संपन्न करने के लिए विशेष नियम tantra gratho ki anusaar yakshni sadhna ko sampan kani ki lea vishesh niyam
भोज्यं निरामिष चान्नं वर्ज्य ताम्बूल भक्षणम् ॥
उपविश्य जपादौ च प्रातः स्नात्वा न संस्पृशेत् ॥
यक्षिणी साधन में निरामिष अर्थात् मांस तथा पान का भोजन सर्वथा निषेध है अर्थात् वर्जित है । अपने नित्य कर्म में , प्रातः काल स्नान आदि करके मृगचर्म ( के आसन ) पर बैठकर फिर किसी को स्पर्श न करें । न ही जप और पूजन के बीचमें किसी से बात करें ।
अपना नित्यकर्म करने के पश्चात् निर्जन स्थान में इसका जप करना चाहिए । तब तक जप करें , जब तक मनवांछित फल देने वाली ( यक्षिणी ) प्रत्यक्ष न हो । क्रम टूटने पर सिद्धि में बाधा पड़ती है । अतः इसे पूर्ण सावधानी तथा बिना किसी को बताए करें
hanumat Margdarshan sadhna हनुमत मार्गदर्शन साधना hanumat Margdarshan sadhna hanumat Margdarshan sadhna हनुमत मार्गदर्शन साधना जीवन में कई बार आकस्मिक व ठोस निर्णय लेने पड़ते हैं। कभी घर परीवार या ऑफिस से सम्बंधित, निर्णय लेने होते हैं, कभी व्यवसाय से, तो कभी रिश्तेदारों से सम्बंधित । एक असमंजस की स्थिति होती है। एक मन कहता है कि हमें यह कार्य कर लेना चाहिये तो एक मन कहता है कि नहीं। किसी कार्य को करें या नहीं करें, आज करें या कल करें, यह काम लाभदायक होगा या हानिकारक, कुछ समझ में नहीं आता। ऐसे समय में आगर कोई दिव्य शक्ति हमारे लिए समाधान का माध्यम बन सकती हैं।
जी हां, दिवय शक्तियो के माध्यम से हमें संकेत मिल सकता है कि अमुक कार्य हमें करना चाहिए या नहीं, यदि वह कार्य हमारे लिए लाभदायक होगा तो कार्य करने के संकेत मिल जायेंगे। यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाए तो उस सम्बन्ध में इस साधना द्वारा निश्चित उत्तर प्राप्त किया जा सकता है। इस साधना को करने से साधक को हनुमान जी स्वयं दर्शन देकर साधक के सभी प्रश्नो का उतर देते है ।
यह साधना परम गोपनीय साधना है । साध्ना विधि पवित्र ही रक्तवस्त्र (लाल व्स्तर) धारण कर रक्त आसन (लाल आसन) के ऊपर बैठे। हनुमान जी की रक्तचन्दन की प्रतिमा स्थापित कर के उस मूर्ति की प्रतिष्ठा कर – ‘ पंचोपचार पूजन करे, सिन्दूर चढावे और गुड के पूरमे का नैवेद्य लगाये । उस नैवेद्य को आठ पहर मूर्ति के सामने धरा रहने दे। जब दूसरे दिन नैवेध लगावे, उस समय पिछले दिन के नैवेद्य को उठाकर किसी पात्र में इकट्ठा करता जाऐ और अनुष्ठान होने के बाद किसी गरीब ब्राह्मण को दे देवे, अथवा पृथ्वी में गाड़ देते । घृत का दीपक जलाये, निर्जनस्थान में रात्रि के समय ग्यारह सौ ११०० मन्त्र का जप करे और फिर मौन रहे । hanumat Margdarshan sadhna उसी पूजन के स्थान पर रक्तवस्त्र के ऊपर सो जावे। ऐसा करने से ग्यारह दिन के भीतर श्रीहनुमानजी महाराज रात्रि के समय ब्रह्मचारी का स्वरूप धारण करके स्प्न में साधक को दर्शन देते हैं, साधक के प्रश्न का यथोचित उत्तर देते हैं और साधक को अभिलाषित वार्ता बताते हैं—इसमें सन्देह नहीं है । यह हमारा कई वार अनुभव किया हुआ सिद्ध प्रयोग एक महात्मा से मिला था। यह दुष्ट पुरुषों को देना योग्य नहीं है।
चाहिए यह हमे पता नहीं कभी हम व्यक्ति पहिचाने में गलत कर जाते है हमे भारी नुकसान उठाना पड़ता है अगर आप यह साधना सिद्ध कर लेते है तो आप को चिंता करने की बात नहीं यह साधना से आप अच्छे बुरे का पता कर सकते है देवी मां आप का जिंदगी भर मार्गदर्शन करती है । यह साधना को सिद्ध करने से साधक मान सम्मान सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है ।maa durga Trikal gyan sadhna
Bajrang Astra sadhna बजरंग अस्त्र साधना यह साधना शत्रुनाशक साधना है ईस साधना को करने सेआप किसी भी शत्रु को परास्त कर सक्ते ईस साधना को सिद्ध करने; के; बाद; किसी भी शत्रुको परास्त कर सकते है ।आप सभी तरह से अच्छे हैं फिर भी आपकी तरक्की से लोग जलते हो और आपके विरुद्ध षड्यंत्र रचते हो। ऐसे समय में यदि आप सच्चे हैं तो श्री बजरंग अस्त्र आपको बचाता है और शत्रुओं को दंड देता है।
बजरंग अस्त्र से शत्रु को उसके किए की सजा मिल जाती है,इसके प्रयोग से हनुमानजी तुरंत ही आपके मन की बात सुन लेते हैं। इसका प्रयोग तभी करें जबकि यह सुनिश्चित हो कि आप पवित्र से सध्ना करे हैं।इसके प्रयोग से हनुमानजी तुरंत ही आपके मन की बात सुन लेते हैं। यह प्रयोग शत्रु को तन-मन-से शिथिल करके पंगु बना देता है। आप भी अपने शत्रुओं पर विजय पाना चाहते हैं या किसी भी तरह के संकट को मुंहतोड़ जवाब देना चाहते हैं तो बजरंग अस्त्र साधना आव्श्य करे जिसका वार कभी खाली नहीं जाता। Bajrang Astra sadhna
बजरंग अस्त्र साधना sadhna vidhi
| सर्वप्रथम किसी शुभ मङ्गलवार के दिन नहा-धोकर एकान्त पवित्र स्थान में । हनमानजी का चित्र रखें और उनकी पूजा करें। तत्पश्चात् इस मन्त्र का एक माला जप करें। यह क्रम दैनिक पूजा के रूप में २१ दिनों तक चलना चाहिए। इस अवधि में साधक पूर्ण संयम, पवित्रता, ब्रह्मचर्य और निष्ठापूर्वक रहे। उसे हर तरह से स्वयं को सात्त्विक विचारों में लीन और हनुमन्त-चिन्तन में मग्न रखना चाहिए।
पूजा में प्रतिदिन सात लड्डु और सात पान के बीड़े नैवेद्य रूप में अर्पित करना चाहिए। मूर्ति या चित्र पर सिंदूर-लेप और पूजा में धूप-दीप का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। इस प्रकार २१ दिनों तक (और हो सके तो ४१ दिनों तक) प्रतिदिन नियम-निष्ठा के साथ १ माला (१०८ दानों का) जप करते रहें। अवधि पूरी हो जाने पर यही मन्त्र पढ़कर २१ बारआहुति देते हुए हवन करें। इस प्रकार यह मन्त्र सिद्ध हो जायेगा। |
मन्त्र सिद्ध हो जाने पर यदि कभी आवश्यकता पड़े तो शत्रु के दमन हेतु इसका प्रयोग किया जा सकता है। प्रयोग का नियम इस प्रकार हैकहीं एकान्त में भूमि पर एक मानवाकृति बनायें।
उसे शत्रु का चित्र मानकर उसे बन्धन में करने के लिए मोम की चार कीलें बनाकर चित्र के चारों ओर जमा दें। ध्यान रहे कि चित्र बनाने से लेकर अन्त तक साधक मन ही मन मन्त्र का जप करता रहे। चित्र बन जाने और उस पर मोम की कीलें लगा चुकने के पश्चात् हनमानी पूजा करें और नैवेद्य में खीर अर्पित करें। इसके पश्चात् चित्र की छाती में शत्र का नाम लिखें और मन्त्र पढ़ते हुए उसके सिर पर जूते से दो बार प्रहार करें। चित्र के चारोओर ‘बीज-मन्त्र’ भी लिखना चाहिए।।