Category: yakshini sadhana

इस श्रेणी में यक्षिणी साधना yakshini-sadhana के बारे में  जानकारी देंगे

yakshini-sadhna यक्षिणी साधना के लाभ – यक्षिणी साधना रहस्य – धन ऐश्वर्या और भोग प्रदान करने वाली की देवी का रहस्य yakshini

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yakshini-sadhna यक्षिणी साधना के लाभ – यक्षिणी साधना रहस्य – धन ऐश्वर्या और भोग प्रदान करने वाली की देवी का रहस्य yakshini गुरु मंत्र साधना.कॉम में आप सबका फिर से स्वागत है। आज का जो मेरा कॉन्सेप्ट रहेगा, यक्षिणी साधना को लेकर रहेगा और यक्षिणी साधना के बारे में मैं आपको पूरी जानकारी प्रदान करूँगा।

देखिए, जो यक्षिणियाँ होती हैं, यह भी एक तरीके से दैविक शक्ति होती हैं, उनको दैविक शक्ति बोला गया है। यह कई तरीके की होती हैं, जैसे 36 प्रकार की होती हैं, इसमें से जो आठ होती हैं, यह प्रमुख होती हैं, 36 में से चार जो यक्षिणियाँ होती हैं 

इनको गोपनीय रखा गया है। जो 32 यक्षिणियाँ हैं, यही ज़्यादातर जो हैं, साधकों के बीच में रही हैं। बाकी जो चार यक्षिणियाँ हैं, इनको गोपनीय रखा गया है, इसके बारे में किसी भी साधक को नॉलेज नहीं है, इन्हीं 32 यक्षिणियों में से आठ यक्षिणी प्रमुख मानी गई हैं, यह इनका कॉन्सेप्ट है।

जो ये यक्षिणियाँ होती हैं, जो यक्षराज कुबेर हैं, उनके अधीन ये रहती हैं, उनके मुताबिक ही चलती हैं क्योंकि यक्षराज बोला गया है कुबेर जी को और कुबेर जो उनको आज्ञा करेंगे, उनके मुताबिक ही वह चलेंगी। वैसे तो यह महादेव की सेवा में हाजिर रहती हैं, जो इनके प्रधान हैं, इनके अधिपति हैं, वो जो ज़िम्मेदारी सौंपी गई है, कुबेर जी को सौंपी गई है, कुबेर जी ही इनका करते हैं आगे जो कुछ भी देखरेख या उनके मार्गदर्शन से आगे चलती हैं।

देखिए, जो यक्षिणियों का जन्म हुआ है, यह महादेव के पसीने से हुआ है, जब महादेव के ऊपर कामदेव ने तीर चलाए थे, वो तीर उनके जाके बॉडी के ऊपर लगे थे, महादेव क्रोधित हो गए और आगे उनका जो तीसरा नेत्र है, वह खुला, कामदेव को भस्म कर दिया गया। वही जो कामुकता थी, उनके चेहरे के ऊपर पसीने के रूप में निकलने लगी।

वही जो आगे चलके जहाँ-जहाँ गिरी धरती के ऊपर, वहाँ-वहाँ यक्षिणियाँ पैदा हो गईं, तो यह इनका कॉन्सेप्ट है। जो आगे ऋषि होते हैं, उनको जाके ये परेशान करने लगीं, उनके साथ वो जो भोग की इच्छा करने लगीं, तो उन्होंने इनको श्राप दे दिया, जाओ, आप अपने जो देवत्व है, उसको खत्म कर दोगे, मतलब दैविकता से नीचे गिर गए, पहले यह देवताओं के समान ही थीं, इनको रखा गया था।

जब इन्होंने इस तरीके से कुछ हरकतें कीं, उनको नीचे कर दिया गया, अपने उसी दैविक गुण को पाने के लिए जो होती हैं, यह लोग इनको सिद्ध करते हैं, यह सिद्ध होती हैं, पर जो उन्होंने आगे जैसे उनसे क्षमा याचना करी, तो उन्होंने उनको माफ़ कर दिया, और यह बोला कि जो भी तुम्हें व्यक्ति, साधक सिद्ध करेगा, उसके बाद ही आप अपने जो वापस देवत्व गुण हैं, उनको प्राप्त करोगी।

उसके बाद यह खुद यह ढूँढती हैं कि कोई इनको साधक सिद्ध करे, हम भी अपने देवत्व गुण को प्राप्त करें। तो ये इसका कॉन्सेप्ट होता है।

यह बहुत ही पॉजिटिव शक्ति है। जब बंदे की ज़ुबान के ऊपर इसका नाम जाता है, तो अंदर से पॉजिटिविटी फील होती है, पर यह देवताओं से थोड़ी सी नीचे हैं, पर यह एक दैविक शक्ति ही आप इनको मान सकते हैं, अप्सरा हो गईं, यक्षिणियाँ हो गईं, एक दैविक ही शक्ति हैं, जो देवताओं के पास रहती हैं, इसमें से भी कुछ तामसिक हैं, जो 12 तामसिक हैं, जो 12 हैं, राजसिक हैं, 12 ही जो हैं, सात्विक मानी गई हैं।

आठ इसमें से प्रमुख मानी गई हैं, जैसे कुछ एक-दो के नाम मैं आपको बताऊँगा, जैसे कामेश्वरी यक्षिणी होती है, कोई भी व्यक्ति अगर अपना ऐसा रूप चाहता है कि उसकी ओर सब लोग आकर्षित हों, उसकी काम की जो इच्छा है, वो उसकी पूर्ति हो, तो कामेश्वरी यक्षिणी को सिद्ध किया जाता है।

कामेश्वरी यक्षिणी को सिद्ध करने के बाद दुनिया की कोई भी स्त्री उस व्यक्ति से आकर्षित होने से नहीं बच सकती है। दुनिया की तमाम औरतों के साथ वो भोग-विलास करता है, जो कामेश्वरी यक्षिणी को सिद्ध कर लेता है, कामना पूरी करने वाली यक्षिणी होती है, खुद वह साधक के साथ संभोग-विलास करती है, अलग-अलग रूपों में भोग-विलास करती है। धरती की जो भी खूबसूरत लड़कियाँ होंगी, उनके थ्रू वो विलास करवाती है। ये कामेश्वरी यक्षिणी है।

एक है सुरसुंदरी। सुरसुंदरी के नाम से ही आपको थोड़ा लग रहा होगा। देखिए, जो सुरसुंदरी है, ये सुर का मतलब होता है देवता, सुंदर, देवताओं के समान सुंदरता देने वाली जो यक्षिणी है, वह है सुरसुंदरी, यह भी बहुत ही शक्तिशाली यक्षिणी होती है। आपके अंदर सुंदरता इतनी ज़्यादा भर देगी कि कोई भी व्यक्ति आपकी ओर आकर्षित हो जाएगा

चाहे देवता हो, चाहे अप्सरा हो, कोई भी, इस लेवल तक आपको सुंदरता प्रदान करेगी, इस लेवल की यह शक्तियाँ होती हैं। जो यक्षिणियों की पूजा करता है, उसको कभी भी धन की कमी नहीं रहती, धन उसको भरपूर मिलता है, क्योंकि यक्षराज कुबेर के अधीन हैं और कुबेर को तो धन का स्वामी बोला गया है, तो इसीलिए कुछ ऐसी यक्षिणियाँ हैं, जो आपको बहुत सारी चीज़ें देती हैं।

पद्मिनी यक्षिणी  आप समझ सकते होंगे, मतलब ऐसे सुरमा दे देगी आपको, आप पहनोगे, लगाओगे आँखों में, तो कोई आपको देख नहीं पाएगा, अदृश्य होने की शक्ति और ऐसी-ऐसी शक्तियाँ। पैसे के मामले में है, तो आप पद्मिनी यक्षिणी को सिद्ध कर लो, पैसा आपको इतना आएगा, बहुत ज़्यादा।

लक्ष्मी यक्षिणी होती है, उसको कर लो आप, पैसा आपके घर में भर जाएगा, इतना पैसा देती हैं।देखिए, यह अलग-अलग रूप में किया जा सकता है।

इसको यह ज़्यादातर सात्विक रूप में ही चलती है, तामसिक भी होती हैं, इसमें से 12 यक्षिणियाँ मैंने आपको बताया, तो तामसिक रूप में भी ये चलती हैं, राजसिक रूप में भी और सात्विक रूप में, ये होता है इनका सिद्ध।

जो तामसिक यक्षिणियों को सिद्ध करता है व्यक्ति, तो उसके काम गोली की तरह होते हैं। एक ऐसा साधक मैं जानता था, वो उसने एक ऐसी यक्षिणी को सिद्ध कर रखा था, जो तामसिक रूप में उनके साथ रहती थी वो, और कोई भी काम लेने के लिए वह बहुत बड़ा एक बलिदान करता था। अगर मैं इस  पोस्ट के अंदर बताऊँगा, तो वो चीज़ें सही नहीं हैं।

अंत में वो व्यक्ति बुरी तरीके से फँस गया क्योंकि उसने जो है, आदमियों का जो खून होता है, उसका चस्का लगा दिया सबको और हर वक्त उसको आदमियों की ज़रूरत पड़ती थी, जो उनका खून निकाल सके। इस तरीके से जो चीज़ें होती हैं, इनमें नहीं जाना चाहिए। सात्विक रूप में, पॉजिटिव रूप में ही आप करो, तो ज़्यादा बेहतर है।

अगर आप चाहते हो कि आपकी ज़िंदगी बदले, आपकी ज़िंदगी के अंदर ऐश्वर्य आए, सुख-शांति आए, आप ये यक्षिणियों की साधना आप ज़रूर कर सकते हैं, यक्षिणी, यक्षिणियों का ऐसा कॉन्सेप्ट है, आपकी ज़िंदगी में हर चीज़ का अंबार लग जाएगा, क्योंकि ये पॉजिटिव शक्तियाँ हैं। 

कुछ भी बुरा नहीं करती हैं, पॉजिटिव वे में ही ये चलती हैं, तो एक मैं ऐसा वीडियो थोड़े दिन बाद फिर लेके आऊँगा, वो रहेगा यक्षिणियों के बारे में, कौन सी यक्षिणी आपको क्या देती है, कौन सी यक्षिणी आपको करनी चाहिए, उस टॉपिक के ऊपर मैं बात करूँगा, उस टॉपिक में मैं डिटेल के साथ बताऊँगा कि ये यक्षिणी कर लोगे तो यह मिलेगा, यह यक्षिणी कर लोगे तो यह मिलेगा।

सबसे इसका फ़ायदा यह होता है, आप माँ-बहन, पत्नी रूप में भी कर सकते हैं, प्रेमिका रूप में भी कर सकते हैं। पर एक चीज़ मैं आपको और बोलता हूँ, पत्नी रूप में करोगे, और दूसरी शादी कर लोगे, जब भी आप करोगे शादी, तो आपकी मृत्यु निश्चित है।

तो उन्हीं लोगों को पत्नी रूप में करनी चाहिए, जिनको आगे शादी-ब्याह नहीं करना क्योंकि इनके अंदर तलाक़ का कोई सिस्टम नहीं है। जिस समय आपकी इंसान के साथ आपने शादी कर ली, तो उस समय आपकी मृत्यु है। यह मैं नहीं बोल रहा हूँ, ये भगवान शिव बता रहे हैं,

दूसरी चीज़, यक्षिणियों के जितने भी मंत्र हैं, यह सब कीलित हैं। इसको खोलने के लिए कोई भी ऐसा साधक चाहिए, जो उनको खोल सके, भगवान शिव का जो भी तंत्र है, वह कीलित है, सिद्ध कर ही नहीं सकते आप।

सिद्ध करने के लिए आपको ऐसा व्यक्ति ढूँढ़ना पड़ेगा, जिसके पास निष्कीलन करने का सिस्टम हो, तभी ही जाके यह यक्षिणियाँ सिद्ध होंगी, अदरवाइज़ इनको सिद्ध करना मुश्किल है, करोगे क्योंकि तंत्रों के अंदर इसके मंत्र दे रखे हैं, तो अगर इस तरीके से होने लगा, तो सब लोग कर लेते, करते वही हैं, जिनके पास इसको खोलने की चाबी होती है, वही कर पाते हैं।

ये शक्तियों के बारे में फिर पता कैसे चलता है? जैसे किसी व्यक्ति ने कोई बड़ी शक्ति को सिद्ध कर रखा, तो वही शक्तियाँ इनको आगे बताती हैं कि यह विद्या ऐसे सिद्ध होगी, ऐसे होगी, फिर यह लुप्त विद्याएँ वापस आती हैं, वरना ये विद्याएँ वापस नहीं आती हैं।

बहुत सारी चीज़ें विलुप्त हो गईं, इसी तरीके से, इसी कॉन्सेप्ट से वो चीज़ें वापस आ जाती हैं क्योंकि जो लोग ये विद्याओं को जानते थे, बाद में मर जाते हैं, तो मामला वहीं दफ़्न हो जाता है, अपने साथ ही वो ले जाते हैं।

तो फिर आगे यह विद्याएँ इस तरीके से फिर दोबारा से लौटती हैं, क्योंकि किसी भी चीज़ का कोई अंत नहीं, आज कोई विद्या कोई व्यक्ति कर रहा है, वो इसलिए कर पा रहा है क्योंकि उसके पास निष्कीलन करने का सिस्टम होता है। वह कभी नहीं कर पाता है, जिसके पास वह सिस्टम न हो,

तो भाई, आज के लिए इतना ही। एक लेख  और बनेगा, जिसके अंदर एक-एक यक्षिणी का डिटेल सहित बात करूँगा, कौन सी यक्षिणी क्या करती है, कैसे करती है, उस कॉन्सेप्ट के बारे में बात करूँगा मैं। आज आपके लिए इतना ही, बस मेरे को जाने की आज्ञा दीजिए, जय श्री महाकाल।

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lakshmi yakshini महालक्ष्मी यक्षिणी साधना-सरल यक्षिणी साधना

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नमस्कार दोस्तों, गुरु मंत्र साधना में से एक में आपका फिर से स्वागत है, आज मैं आप लोगों के लिए लक्ष्मी यक्षिणी साधना लेकर आया हूं, हालांकि तांत्रिक लेखन में इनका वर्णन शायद ही कभी किया जाता है, लेकिन मैंने उन्हें आपके लिए ढूंढ लिया है, यह एक ऐसी देवी है जिसके बहुत अच्छे परिणाम हैं, अगर कोई उन्हें साबित कर दे तो यह उसे अमीर बनाता है और अगर उसकी साधना में एक गलती है। अगर आप जाएंगे तो वे आपको गरीब बना देंगे, इसलिए आपको उनकी साधना का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

यदि आपको उनकी साधना करनी है, तो आपको ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 4:00 बजे उठना होगा और इसे सुबह 4:00 बजे करना होगा यानी प्रकाश नहीं निकलता है और अंधेरा रहता है। यदि आप इसे घर पर कर रहे हैं तो आपके पास एक पवित्र स्थान होना चाहिए या आपको उस स्थान को पवित्र और शुद्ध करना चाहिए। जब तक आपकी साधना चल रही है तब तक कोई भी अशुद्ध व्यक्ति या स्त्री आपके घर को स्पर्श न करे और न ही जब तक आपकी साधना चलती रहे तब तक आपको अपने घर आने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। आपको अपने कमरे में धूप का चश्मा, दीपक, चंदन, फूल आदि देने हैं और इसे आपको खुद साफ करना है।

अपने कमरे में फूलों की माला लटकाएं, खुशबू के साथ खुशबू छिड़कें और कमरे को पूरी तरह से सजाएं ताकि जब देवी आएं तो वह बहुत खुश हों। आपको देवी लक्ष्मी की तरह उसकी पूजा करनी चाहिए क्योंकि वह देवी लक्ष्मी की सेवक है और आपको सब कुछ दे सकती है। उनकी साधना के लिए, आपको उत्तर भदपद में उनकी एक मूर्ति बनानी होगी। आप अष्टधातु की एक छोटी मूर्ति बना सकते हैं और आपको सुबह उन्हें गंगा जल से स्नान कराना है। आपको केसरिया और कस्तूरी का तिलक लगाना है, आपको कुशा के आसन पर बैठना है और आपको चमकीले पीले कपड़े पहनने हैं। मूर्ति के नीचे एक पीला कपड़ा भी बिछाया जाना चाहिए।

आपको भक्ति के साथ इसकी पूजा करनी है, आपको भक्ति के साथ पानी पीना है और अपने दिल में एक मूर्ति पहननी है, कल्पना करें कि यह आपके दिल में रह रहा है। जाप तुलसी के गुलाब पर आपको 51 गुलाब के फूल का जाप करना है और भांग के लड्डू बनाकर उनके सामने रखना है, इस साधना को आपको 51 दिनों तक करना है। अंतिम दिन यक्षिणी देवी आपको दर्शन देंगी, मैं आपको पाठ में जो विवरण मिलता है उसे बताता हूं, जब वह आ रही होती हैं तो ऐसा लगता है जैसे राजा महाराज आ रहे हैं! इससे पहले, देवता पहले से उनका स्वागत करने की तैयारी करते हैं।

चारों ओर शांति है डर का कोई ठिकाना नहीं है, देवी को ज्यादातर सपने में देखा जाता है और बड़ी सुंदरता के साथ पेश किया जाता है, ऐसा कहा जाता है कि वह बहुत सुंदर है और 16 से 17 साल की लड़की की तरह दिखती है, यह चांदी के रंग की होती है, उसे मुर्गिनी भी कहा जाता है, यानी हिरण और चंपा शाखा जैसी आंखों के साथ। यहां एक पेड़ है जिसे चंपा कहा जाता है, यह बहुत सुंदर है। वह अपनी नाक में सोने की नाक पहनकर और दोनों हाथों में कमल का फूल पकड़े हुए आती हैं, आपको समझना चाहिए कि देवी लक्ष्मी एक ही हैं। कहा जाता है कि यदि उसकी कृपा प्राप्त हो जाए तो वह धन के धनी हो जाती है और क्रोधित हो जाए तो साधक को भिखारी बना देती है।

अर्थात अपनी साधना में आलस्य नहीं करना चाहिए, पूर्ण स्वच्छ रहना चाहिए, पूर्ण ब्रह्मचर्य धारण करना चाहिए और गंदी चीजों, गंदे विचारों, गंदे विचारों से दूर रहना चाहिए। यदि आप उसे देवी लक्ष्मी की साधना के रूप में सोचते हैं और ऐसा करते हैं, तो वह जल्द ही खुश हो जाएगी और आपको सब कुछ देगी। यह आपको धन, सम्मान, महिमा, प्रसिद्धि, शोहरत सब कुछ देगा और कहा जाता है जिसके पास धन और धन होता है उसे किसी चीज की कमी नहीं होती। यदि आप उनका सही ढंग से पालन करते हैं, तो वे आपको यहां विकल्प भी देंगे और यदि आप उच्च गुणवत्ता की तलाश में हैं, तो यह आपके साथ तीन प्रारूपों में से एक को भी स्थापित करेगा। चलिए आपको उनकी साधना का मंत्र बताते हैं, उनका मंत्र इस प्रकार है।

मँत्रः ॐ ऐं ह्री श्रीं कमल धारिणी लक्ष्मी यक्षिणी श्रीं स्वाहा ।। 

 

चामुण्डा यक्षिणी साधना chamunda yakshini sadhna ph. 8528057364

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चामुण्डा यक्षिणी साधना chamunda yakshini sadhna ph. 8528057364 आज एक बार फिर आप सभी का स्वागत करता हूं चामुण्डा यक्षिणी के बारे में तो बताइए उनकी साधनाएं तो बताइए इस साधना को कर लेने से साधक  के समस्त प्रकार की जो कुंडलिया है जागृत होने लगते हैं  अपने बहुत ही साधको  को भी कराया है चामुण्डा यक्षिणी साधन प्रयोग इसी  को संपन्न करके साधक  के जितने भी शत्रु हैं अंदर बाहर है स्वयं ही नष्ट होने लगते हैं

   21 दिनों तक इसको करे  चामुण्डा यक्षिणी  है वह प्रकट साधक  को वचन भी देती है और वचन के माध्यम से बढ़कर साधक  के जीवन में जितने भी परेशानियां है समस्याएं हैं दूर करती है। और कोई घटना घटने वाली होती है तो उसे सड़क के कानों में बता देती है 

इसको करने से  माता से साधक की जो भूत भविष्य वर्तमान मन मस्तिष्क में प्रकट होने लगती है के कान में जब विचारों के माध्यम से बताने लगते हैं सामने वाला कौन है कहां से आया है  आने का उद्देश्य क्या है उसका तो मैं कहूंगा की दिव्य दृष्टि साधना के लिए यह साधना है

चामुण्डा यक्षिणी मंत्र 

ॐ नमो चामुण्डे प्रचण्डे इन्द्राय ॐ नमो विप्र चाण्डालिनी शोभिनी प्रकर्षिणी कर्षय आकर्षय द्रव्यमानय प्रबलमानय हुँ फट् स्वाहा ।

साधन विधि – प्रथम दिन उपवास कर शीतलता से रहे, क्रोध न करे । पृथ्वी पैर शयन करे । मीठा भोजन करे तथा भोजन करते-करते छोड़ दे । फिर अपवित्र स्थान में मन्त्र का जप करे । प्रतिदिन १००० मन्त्र का जप करे । २१ दिन तक जप करते रहने से सिद्धि प्राप्त होती है । आरम्भ में सात दिन तक पृथ्वी पर शयन करे । उस अवधि में आश्चर्य दिखाई देंगे। तीसरे दिन स्वप्न में यक्षिणी का रौद्र रूप दिखाई देता है । यदि स्वप्न में दिखाई न दे तो २१ दिन तक फिर जप करे । उस स्थिति में ‘चामुण्डा यक्षिणी’ का स्त्री रूप प्रत्यक्ष दिखाई देता है । उसे देखकर भयभीत न हो। उस रूप द्वारा छल करने पर भी डरे नहीं। वह अभक्ष वस्तु लाकर दे, अनाचार करे फिर भी मन को शंकित न करे तो मंत्र सिद्ध हो जाता है और लक्ष्मी प्रत्यक्ष होकर, साधक के घर में निवास करती है

‘सुरसुन्दरी’ यक्षिणी साधना sursundari yakshini ph.8528057364

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‘सुरसुन्दरी’ यक्षिणी साधना sursundari yakshini ph.8528057364

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‘सुरसुन्दरी’ यक्षिणी साधना sursundari yakshini ph.8528057364 हिन्दू धर्मशास्त्रों में मनुष्येतर जिन प्राणि-जातियों का उल्लेख हुआ है, उनमें देव, गन्धर्व, यक्ष, किन्नर, नाग, राक्षस, पिशाच आदि प्रमुख हैं । इन जातियों के स्थान जिन्हें ‘लोक’ कहा जाता है-भी मनुष्यजाति के प्राणियों से भिन्न पृथ्वी से कहीं प्रत्यत्र प्रवस्थित हैं।

इनमें से कुछ जातियों का निवास आकाश में और कुछ का पाताल में माना जाता है । इन जातियों का मुख्य गुण इनको सार्वभौमिक सम्पन्नता है, अर्थात् इनके लिए किसी वस्तु को प्राप्त कर लेना अथवा प्रदान कर देना सामान्य बात है ।

ये जातियाँ स्वयं विविध सम्पत्तियों की स्वा- मिनी हैं। मनुष्य जाति का जो प्राणी इनमें से किसी भी जाति के किसी प्राणी की साधना करता है अर्थात् उसे जप, होम, पूजन आदि द्वारा अपने ऊपर अनुरक्त कर लेता है, उसे ये मनुष्येतर जाति के प्राणी उसकी अभिलाषित वस्तु प्रदान करने में समर्थ होते हैं।

इन्हें अपने ऊपर प्रसन्न करने एवं उस प्रसन्नता द्वारा अभिलषित वस्तु प्राप्त करने की दृष्टि से ही इनका विविध मन्त्रोपचार आदि के द्वारा साधन किया जाता है जिसे प्रचलित भाषा में ‘सिद्धि’ कह कर पुकारा जाता है । यक्षिणियाँ भी मनुष्येतर जाति की प्रारणी हैं।

ये यक्ष जाति के पुरुषों की पत्नियाँ हैं और इनमें विविध प्रकार की शक्तियाँ सन्निहित मानी जाती हैं । विभिन्न नामवारिणी यक्षिणियाँ विभिन्न शक्तियों से सम्पन्न हैं- ऐसी तांत्रिकों की मान्यता है ।

अतः विभिन्न कार्यों की सिद्धि एवं विभिन्न अभिलाषात्रों की पूर्ति के लिए तंत्रशास्त्रियों द्वारा विभिन्न यक्षिणियों के साधन की क्रियाओं का श्राविष्कार किया गया है। यक्ष जाति चूँकि चिरंजीवी होती है, अतः पक्षिणियाँ भी प्रारम्भिक काल से अब तक विद्यमान हैं और वे जिस साधक पर प्रसन्न हो जाती हैं, उसे अभिलषित वर अथवा वस्तु प्रदान करती हैं।

अब से कुछ सौ वर्ष भारतवर्ष में यक्ष-पूजा का अत्यधिक प्रचलन था । अब भी उत्तर भारत के कुछ भागों में ‘जखैया’ के नाम से यक्ष- पूजा प्रचलित है। पुरातत्व विभाग द्वारा प्राचीन काल में निर्मित यक्षों अनेक प्रस्तर मूर्तियों की खोज की जा चुकी है।

देश के विभिन्न पुरातत्त्व संग्रहालयों में यक्ष तथा यक्षिणियों की विभिन्न प्राचीन मूर्तियाँ भी देखने को मिल सकती हैं। कुछ लोग यक्ष तथा यक्षिणियों को देवता तथा देवियों की ही एक उपजाति के रूप में मानते हैं और उसी प्रकार उनका पूजन तथा आराधनादि भी करते हैं। इनकी संख्या सहस्रों में हैं ।

‘सुरसुन्दरी’ यक्षिणी साधन मन्त्रः-

ॐ ह्रीं श्रागच्छ आगच्छ सुन्दरि स्वाहा ।”

साधन विधि – दिन में तीन बार एकलिंग महादेव का पूजन करे तथा उक्त मंत्र को तीनों काल में तीन-तीन हजार जपे । एक मास तक इस प्रकार साधन करने से ‘सुरसुन्दरी यक्षिणी’ प्रसन्न होकर साधक के समीप आती है। जब यक्षिणी प्रकट हो, उस समय साधक को चाहिये कि वह उसे अर्ध्य देकर प्रणाम करे। जब यक्षिणी यह प्रश्न करे – ” तूने मुझे कैसे स्मरण किया ?” उस समय साधक यह कहे – “हे कल्याणी ! मैं दरिद्रता से दग्ध हूँ । आप मेरे दोष को दूर करें ।” यह सुनकर यक्षिणी प्रसन्न होकर साधक को दीर्घायु एवं घन प्रदान करती है ।

Dhanda Yakshini धनदा यक्षिणी साधना आपार धन दौलत के लिए Ph.85280 57364

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Dhanda Yakshini धनदा यक्षिणी साधना आपार धन दौलत के लिए Ph.85280 57364 बहुत सारी ऐसी साधना है जो व्यक्ति के जीवन को बदल देती हैं और यह जो बदलाव होता है।  यह आंतरिक बदलाव है एक ऊर्जा के द्वारा हो रहा बदलाव है जो व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन लेकर आता है। अगर  परेशान है  आध्यात्मिक अथवा भौतिक मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहते हैं।  की कॉल करें  आगे बात करे है यह परिवर्तन इस तरीके का होता है कि जब व्यक्ति की अंदर की ऊर्जा कम होती है। 

 

तो उसे समय ऐसी अवस्थाएं व्यक्ति के जीवन में घटित होने लगते हैं कि व्यक्ति मेहनत तो बहुत करता है लेकिन मेहनत करने के साथ-साथ व्यक्ति को वह फल प्राप्त नहीं होता है। जो फल उसको प्राप्त होना चाहिए उसे मेहनत के आधार पर तो ऐसी बहुत सारी साधनाएं होती हैं ,जो साधनाएं व्यक्ति के स्त्री तत्व को बढ़ाती हैं व्यक्ति के लिए धन के मार्ग खोल देती हैं और उसके साथ-साथ व्यक्ति की जो भौतिक उन्नति होना शुरू हो जाती है। 

धन के आगमन के मार्ग बनने लगते हैं और ऐसे बहुत सारी परिवर्तन होते हैं जो व्यक्ति के जीवन में आते हैं बहुत सारे लोगों ने धनदा यक्षिणी कवच धारण किया हम से मंगाया प्राप्त किया और उसके बाद जब उन लोगों ने धारण किया तो बहुत अच्छे परिणाम मिले  यहां तक की कुछ लोगों की ऐसी परिणाम थे कि जब उन्होंने धारण किया तो उसके बाद उनके जीवन में परिवर्तन आने लगा किसी को नौकरी नहीं लग रही थी तो नौकरी लग गई। 

लेकिन इन तमाम चीजों में वक्त लगता है और ऐसा भी नहीं है कि हर व्यक्ति के साथ ऐसी स्थिति होगी क्योंकि अगर किसी का श्री  तत्व थोड़ा कमजोर है तो उसको जल्दी प्रभाव आ जाएगा अगर किसी का श्री तत्त्व ज्यादा कमजोर है तो उसमें थोड़ा सा वक्त लगेगा 20 से 21 दिन का भी वक्त लग सकता है

व्यक्ति कर्म तो कर रहा है लेकिन उसे कम का फल उसको मिलना शुरू हो जाता है तो आज हम आपको एक साधना बताने वाले हैं यह साधना धनदा यक्षिणी साधना है धन्य दायक यक्षिणी  जो है यह एक यक्षिणी है और यह यक्षिणियों से भी बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो की डरते हैं और जानना चाहते हैं की आखिरी यक्षिणी क्या है किस तरीके की होती हैं

यह यक्ष  कुल  से होती है जो यक्षिणी होती है और अगर स्पष्ट तौर पर हम आपको समझाने की कोशिश करें तो आप शायद आसानी से समझ जाएंगे जो धन के देवता हैं जिनका धन के यक्ष  कह सकते हैं अधिपति कह सकते हैं वह है कुबेर महाराज और कुबेर महाराज भी यश बोलते हैं. तो अब आप समझ गए होंगे की यक्षिणी जो होती हैं वह यश की  होती हैं। और उनके पास जो धन के स्रोत हैं वह होते हैं और उसके बाद यह धन के मार्ग  उसके लिए धन के मार्ग खुल जाते हैं तो साधना आपको बता देते हैं। 

Dhanda Yakshini Sadhna धनदा यक्षिणी साधना  विधि 

साधना आपको रविवार से करनी है और इस समय जब आप साधना करेंगे इस समय आपके दूध की मिठाई का भोग रखना है। यदि यह भी संभावना हो सके दूध की मिठाई का अगर आप भोग नहीं रख सकते हैं । तो आप जो दूध में मलाई होती है उसे मलाई में चीनी मिलाकर उसको रख सकते हैं। 

अपने लकड़ी के चौक के ऊपर लाल वस्त्र के ऊपर एक यंत्र बनाएं जो की धनदा  यक्षिणी यंत्र है जो की यह साधना हमारे आंतरिक चेतना शिक्षक की विशुद्ध घोर मार्ग के द्वारा निकाली हुई साधना है यह कहीं उल्लेख के साधन नहीं है ना ही किसी भी पुस्तक में आपको ही साधना मिलेगी

 

यह मंत्र है और यह जो जब है यह आपको रुद्राक्ष माला से आपको जाप  करना है और जब आप यह जब जाप करेंगे ,तो इसमें आप काम से कम 41 दिन तक आप जब करिए 41 दिन अगर संभव न हो तो 21 दिन तक आप जब करिए लेकिन यह जो आप जब करेंगे 21 दिन तक यह आप नित्य 108 माला जाप करिए 108 माला अनिवार्य है। 

लेकिन फिर भी अगर आप नहीं कर सकते तो कम से कम फिर आप इंसान माला प्रतिदिन जाप करिए और कोई बंधन नहीं है। बिल्कुल सहज साधना है बिल्कुल सरल साधन है। इसके बाद आपके जीवन में धान के मार्ग बनने लगेंगे और इसके साथ-साथ यदि आप धनदा यक्षिणी कवच धारण कर लेते हैं। 

तो इससे भी आपको बहुत ज्यादा फल प्राप्त होगा और तीव्र प्रभावित हो जाएगा यह प्रभाव जो आप साधना करेंगे तो अगर आप धंधा एक्शन प्राप्त करना चाहते हैं तो जो हमारा नंबर है उसे नंबर पर आप कॉल कर सकते हैं। कॉल करने के बाद आपको उसे पर जानकारी मिल जाएगी और आप वहकवच  प्राप्त करके आपको धारण कर लीजिए उसके बाद आप यह साधना करिए 

अप्सरा साधना के नियम – यक्षिणी के साधना Rules of Apsara Sadhna – Rules of Sadhna of Yakshini ph. 85280-57364

अप्सरा साधना के नियम - यक्षिणी के साधना Rules of Apsara Sadhna - Rules of Sadhna of Yakshini

अप्सरा साधना के नियम – यक्षिणी के साधना Rules of Apsara Sadhna – Rules of Sadhna of Yakshini  ph. 85280-57364

अप्सरा साधना के नियम - यक्षिणी के साधना Rules of Apsara Sadhna - Rules of Sadhna of Yakshini
अप्सरा साधना के नियम – यक्षिणी के साधना Rules of Apsara Sadhna – Rules of Sadhna of Yakshini

अप्सरा साधना के नियम – यक्षिणी के साधना Rules of Apsara Sadhna – Rules of Sadhna of Yakshini हर साधना के नियम होते है जिनको फॉलो करना बहुत जरूरी है अगर आप इन  नियमो को फॉलो करते हो तो आप उस साधना में सफल हो सकते है  अप्सरा यक्षिणी और कारन पिशाचिनी इतर योनि की साधना के नियम एक जैसे होते है यह नियम निम्न लिखे अनुसार है 

 

1  अप्सरा साधना के नियम – यक्षिणी के साधना के नियम

 

अप्सरा साधना को कोई भी संपन्न कर सकता है, चाहे स्त्री हो या पुरुष।

१८ से लेकर ६०-७० वर्ष के बीच के व्यक्ति अप्सरा साधना कर सकते हैं।

साधना करने से पहले मार्गदर्शन प्राप्त करें।

मंत्र जाप करते समय आँखें बंद करें।

गुरु से दिक्षा प्राप्त करें।

साधना को बीच में छोड़कर न जाएं।

स्त्रियों को मासिक धर्म के कारण ३ दिन की छूट मिलती है।

साधना को निश्चित समय पर शुरू करें, और १०-१५ मिनट बढ़ते जाएं।

साधना में उपांशु जाप का प्रयोग करें, अर्थात् बुदबुदाने के साथ जाप करें और होंठ हिलने दें।

जल्दबाजी नहीं करें, साधना की निर्धारित अवधि में करें।

कुछ साधकों को बीच में ही साधना सफल हो गई मानकर उन्होंने साधना को छोड़ दिया, लेकिन अप्सराएँ परीक्षाओं का आयोजन करती रहती हैं।

 

2  अप्सरा साधना के नियम – यक्षिणी के साधना के नियम साधना के प्रति पूर्ण विश्वास रखें।

 

साधना के दौरान अपनी कामनाओं को नियंत्रित करें, और वासनाओं का कोई स्थान न दें, क्योंकि ऐसे विचार साधना को असफल बना सकते हैं।

कुछ साधक अप्सराओं के साथ शारीरिक संबंध की कल्पना करने लगते हैं, इसलिए ऐसी भावनाओं से बचें, क्योंकि ऐसी भावनाएँ साधना को असफल बना सकती हैं।

साधना के दौरान खुशबू का अहसास हो सकता है, और किसी के आस-पास चलने का भाव आ सकता है। सभी योग्यताओं को ध्यान में रखें।

कहा जाता है कि जब तक अप्सराएँ वचन नहीं देती, तब तक उनकी बातों पर विश्वास न करें।

साधना के प्रति पूर्ण विश्वास रखना जरूरी है, और साधना के प्रति समर्पण दिखाना भी।

उम्मीद है कि ये नियम आपके लिए उपयोगी सिद्ध होंगे।

 

3  अप्सरा साधना के नियम – यक्षिणी के साधना के नियम  के लिए स्थान का चयन:

साधना के लिए एकांतिक स्थान का चयन करें, जिससे कि आपकी पूजा या साधना में किसी प्रकार का व्यवधान न हो।

मंत्र जप की संख्या को पूरा करने के साथ-साथ, आपको एकाग्र भाव में पूजा अथवा साधना करनी चाहिए। जप के स्थान को शुद्ध और शांतिपूर्ण बनाए रखना आवश्यक है।

  • शास्त्रों में पवित्र नदियों के किनारे, पर्वतों, जंगलों, तीर्थ स्थलों, गुफाओं आदि को प्राथमिकता दी गई है। इन स्थलों पर मन स्वतः ही एकाग्र होने लगता है।
  • अपने घर में भी एकांतिक कमरे को शुद्ध और स्वच्छ बनाकर पूजा और साधना कर सकते हैं।

साधना के लिए एकांतिक स्थान का चयन करते समय आसन की विशेष ध्यान देना चाहिए।

 

 

3 अप्सरा साधना के नियम – यक्षिणी के साधना के नियम के लिए उपयुक्त आसन का चयन करें:

 

आप पालथी मारकर बैठ सकते हैं और मेरुदंड को सीधा रख सकते हैं।

कुशासन, रेशमी आसन, ऊनी आसन, म्रगचर्म आसन या व्याघ्र चर्म आसन में से साधना के अनुकूल आसन का चयन करें।

पूजा आराधना के समय उपयुक्त माला और यंत्र का उपयोग करें:

शिव-उपासना में रुद्राक्ष की माला और यंत्र का प्रयोग करें।

अप्सरा साधना के लिए अप्सरा माला और यंत्र गुटका का उपयोग करें।

लक्ष्मी उपासना में कमल गट्टे की माला का प्रयोग करें।

बगुलामुखी उपासना में हल्दी की माला का उपयोग करें।

4 अप्सरा साधना के नियम – यक्षिणी के साधना के नियम जप कार्य के लिए माला का उपयोग करें:

माला के सहाय्य से मंत्र जप करें। प्रातःकाल माला को नाभि के सामने, दोपहर को ह्रदय के सामने, सायंकाल मस्तक के सामने रखें।

मंत्र जप करते समय माला को गोमुखी में रखें।

5 अप्सरा साधना के नियम – यक्षिणी के साधना के नियम साधना के समय विशेष ध्यान दें

साधना काल में मल-मूत्र विसर्जन की विवशता होने पर पूनः हाथ-पैर और मुख धोकर आरंभ करें।

साधना किसी योग्य गुरु के निर्देशन में करना चाहिए।

साधना के दौरान दिशा का ध्यान रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नोट: शिव मंत्र और गणेश मंत्र की कम से कम 5 माला प्रतिदिन की अवश्यकता होती है।

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rakta chamunda रक्तचामुण्डा यक्षिणी सब से तीव्र वशीकरण साधना Ph.85280 57364

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rakta chamunda रक्तचामुण्डा यक्षिणी सब से तीव्र वशीकरण साधना रक्तचामुण्डा साधना आपार  वशीकरण हासिल करने की साधना जिसे से स्त्री पति पत्नी ,प्रेमिका को वश में किया 

rakta chamunda रक्तचामुण्डा यक्षिणी सब से तीव्र वशीकरण साधना Ph.85280 57364
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ॐ सिद्धि रक्त चामुण्डे घुरंघुरं अमुकीवशमानय स्वाहा । “

rakta chamunda रक्तचामुण्डा यक्षिणी  साधना  साधन विधि – इस रक्तचामुण्डा यक्षिणी मन्त्र से अभिमंत्रित गुड़हल के सहस्र फूलों से हवन करने पर राजा वशीभूत होता है । ( ४४ ) कनेर के सहस्र फूलों से हवन करने पर सब लोग वशीभूत होते हैं । कपूर के साथ सेवती के सहस्र फूलों का हवन करने से द्रव्य-प्राप्ति होती है। जुही के सहस्र फूलों का हवन करने से पुत्र प्राप्ति होती है स्त्री का नाम लेकर हवन करने से स्त्री की प्राप्ति होती है। सेमल के सहस्र फूलों का हवन करने से शत्रु की मृत्यु तथा उच्चाटन होता है ।

निवारी के सहस्र फूलों का हवन करने से शत्रु का नाश होता है । सहस्र कमलों से हवन करने पर अकाल में बादल होकर वर्षा होती है । ‘अमुक रोगी के रोग का नाश हो’ इस प्रकार कहते हुए सहस्र कचनार के फूलों से हवन करने पर रोगी का रोग नष्ट होता है । अलसी के सहस्र फूलों से हवन करने पर सबकी वृद्धि होती है तथा गरा के सहस्र फूलों से हवन करने पर सुभिक्ष होता है और वर्षा होती है । यह ‘ रक्तचामुण्डा यक्षिणी मन्त्र’ अनेक प्रकार की अभि-! लाषाओं को पूर्ण करने वाला है । मन्त्र में जिस स्थान पर ‘अमुक’ शब्द आया है, वहाँ साध्य व्यक्ति के नाम का उच्चारण करना चाहिए ।

तुलसी यक्षिणी साधना tulsi yakshini sadhana

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तुलसी यक्षिणी साधना tulsi yakshini sadhana ph. 8580 57364

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तुलसी यक्षिणी साधना tulsi yakshini sadhana गुरु मंत्र साधना  में आप सब का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन करता हूं ! मेरे प्रिय भाई बहनों आज मैं आपके लिए लाया हूं ! तुलसी यक्षिणी साधना यूट्यूब पर पहली बार राज्य प्राप्ति तुलसी यक्षिणी साधना tulsi yakshini sadhana  किसी ने नहीं दी है !  और किसी भी चैनल पर देख लेना यूट्यूब पर किसी भी प्रकार से राजदा यक्षिणी साधना अभी तक नहीं दी है ! आप लोगों ने नाम भी नहीं सुना होगा तुलसी यक्षिणी साधना का यक्षिणी  हैं!  जिनको माता भी में सिद्ध किया जाता है!  यह यक्षिणी  आपको राजा महाराजा तक बना सकती हैं! राज्य प्राप्ति करा सकती हैं वोटो में  जीतना चाहते हैं ,किसी भी प्रकार का प्रधान , नगर महापालिका, विधायक, सांसद, बन सकते है  और कोई चुनाव किसी भी प्रकार का कोई कंपटीशन हो मैं आपको सफलता दिलाती हैं!  तुलसी यक्षिणी साधना अगर आप तुलसी यक्षिणी साधना को सिद्ध कर लेते हैं तो आप राजा महाराजा यानी राष्ट्रपति प्रधानमंत्री तक बन सकते हैं !राजदा यक्षिणी साधना से आप सर्वोच्च शिखर पर पहुंच सकते हैं  !आप विश्व में अपना नाम लिखा सकते हैं, विश्व रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा सकते हैं!  मेरे प्रिय भाई बहनों राजदा यक्षिणी साधना में आपको बताऊंगा विधिवत तुलसी यक्षिणी साधना कर लेते हो तो आपके भाग्य में ना होते हुए भी आपको राज और महाराज तक प्राप्त हो सकता है !

 

तुलसी यक्षिणी साधना विधि 

इस साधना को  किसी भी दिनवार   से कर सकते है  घर में पूरब और उत्तर के कोने में ईशान दिशा में तुलसी होनी चाहिए तुलसी आपके सामने हो पास बैठ के यह साधना करेंगे दीपक जलाएं और खोया का मिठाई का कोई खीर की  मिठाई का प्रसाद रखें गंगा जल  रखें और सोलह सिंगार चढ़ाएं पहले दिन और रुद्राक्ष की माला से तुलसी की माला से लाल चंदन या सफेद चंदन की माला से कर सकते है  ! जप का १० %  हवन  करे और तरपन  मार्जन भी करें  !  इस लेकिन पत्नी और प्रेमिका बनाने की भूल मत करना यह यक्षिणी माता और बहन  इन्हीं रूपों में सिद्ध हो सकती हैं सबसे उत्तम माता रूप में इनको सिद्ध करना उत्तम है माता रूप में सिद्ध करना और साधना के दौरान भूमि सेन और ब्रह्मचर्य व्रत भी रखें काला और नीला वस्त्र भी ना पहने वस्त्र पहने या सफेद वस्त्र पहने ऐसे 3 में से कोई भी वस्त्र एक पहने आपका उत्तर में हो और दिशा में होना चाहिए स्थान में सुविधा ना हो तो घर में पूरा में तुलसी के सामने के साधना की जाती है तुलसी की जड़ में !तुलसी यक्षिणी पूजन किया जाता है

 

कनक यक्षिणी साधना प्रत्यक्षीकरण kanak yakshini sadhna ph. 85280 57364

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कनक यक्षिणी साधना प्रत्यक्षीकरण kanak yakshini sadhna ph. 85280 57364

कनक यक्षिणी साधना प्रत्यक्षीकरण kanak yakshini sadhna

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कनक यक्षिणी साधना प्रत्यक्षीकरण kanak yakshini sadhna ph. 85280 57364  नमस्कार दोस्तों guru mantra sadhna पर आपका एक बार फिर से स्वागत है ! आज मैं एक फिर से नई यक्षिणी साधना लेकर आया हूं !कनक यक्षिणी के नाम से जानते हैं कनक यक्षिणी की साधना करने से पहले आप लोग को यह जानना जरूरी है ,कि 

कोई भी यक्षिणी की अगर आप साधना करते हैं को सबसे पहले 1 महीने तक कुबेर जी का और भगवान शिव का मंत्रों द्वारा विधिवत जो है पूजन करना चाहिए ! और उसके बाद फिर दशांश हवन करना चाहिए कुबेर जी का और भगवान शिव का मंत्रों का कर सकते हैं !

आप एक साथ कर सकते हैं और किस यशराज का जो मंत्र होता है ! वह यह है यशराज  मंत्र आपको ही जाप करना है  आपको हवन करना पड़ता है ! ताकि अगर कभी धन की बात है तो धन यक्षिणी प्रदान कर सके क्योंकि धन तभी प्रदान करेगी जब यक्ष राज्य उसको अनुमति प्राप्त हो जाएगी तो यह बात 1 महीने पहले कर लेना ! उसके बाद ही आप सब ने कुबेर से आज्ञा से यक्षिणी साधना को शुरू करें !

 और यह नियम हर यक्षिणी पर लागू है चाहे कोई भी यक्षिणी क्यों ना हो मंत्र अगर यह नहीं करते हैं ! तो यह जो है वह वित्तेश्वराय नमः मंत्र भी कर सकते हैं और भगवान शिव के लिए ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप किया जा सकता है

कनक यक्षिणी साधना  विधि   kanak  sadhna

कनक यक्षिणी साधना  विधि   kanak yakshini sadhna तो अगर आप कनक यक्षिणी की साधना करते हैं तो उसके लिए आपको जो है यह साधना आपको किसी भी अमावस्या से आपको शुरू करनी है और रात्रि के 1:00 बजे आपको एकांत और निर्जन वन में इसकी साधना करनी पड़ेगी तरीके से होती है  मंत्र को आपको जो है इस मंत्र को आपको जाप करना है और मंत्र आपका 150000 जपने सिद्ध हो   जाएगा  डेढ़ लाख आपको इस मंत्र का जाप करना होगा 21 दिनों के भीतर किस  भी दिनांक तक आपको लगातार जो इसकी साधना करनी है और 21 दिनों के बाद यह मंत्र आपका सिद्ध हो जाएगा  यक्षिणी  आपको दर्शन देगी!

कनक यक्षिणी साधना मंत्र – ॐ ह्रीं कनक क्लीं यक्षिणी नमः ॐ हू कुरु ठह ठह स्वाहा ॐ क्लीं फट स्वाहा

 

 

कनक यक्षिणी साधना  अनुभव  kanak yakshini sadhna

अब मैं बताता हूं इस साधना को करने के बाद आपको किस प्रकार से यक्षिणी के दर्शन होंगे यह खतरानाक कितनी मानी जाती है और इस का रूप भयानक होता है यह ६० साल की औरत के रूप में आती है  है जब यक्षिणी आती है आपकी साधना को  आज किसके आते ही मल मूत्र की वर्षा शुरू हो जाती है कि आपको ऐसा नजर आएगा कि लेट्रिन और मल और पेशाब यह सब चारों तरफ आपके गिर रही है आपके ऊपर गिर रही है यह जो है हार्ड अर्मास की माला धारण किया

 

 

कनक यक्षिणी साधना  सवरूप   kanak yakshini sadhna

वह आपकी तरफ आती है कंधे की हड्डी और मांस की बनी हुई जो है  !वह योग गुरु के निर्देशन में ही करनी चाहिए और साधना इसकी सफल जरूर होती है ! इसलिए योग गुरु के निर्देशन में ही करेंगे तो भी तो ही आपको जो है सफलता मिलेगी और उसकी शक्ति को आप सह पाएंगे नहीं तो यह भयानक जो है आती है रूप है यह 60 वर्ष की 

बुढ़िया के समान नजर आती है और सिर पर जिसके मतलब सारे बाल जो हैं आपको इसके सफेद सफेद से दिखाई पड़ते हैं बालों में आते ही नजर आती है ! और हाथ पैरों में केवल हड्डियों का ढांचा आपको नजर आएगा बुढ़िया स्त्री के रूप में दिखाई पड़ेगी !और मुंह में एक दांत भी नहीं दिखता है ! 

जब भी आती है तो ऐसे नजर आता कि इसके मुंह में एक भी दांत नहीं है !और सारे बदन और क बालों पर झुर्रियां पड़ी हुई दिखती है ` और बदल की लंबाई अधिक दिखाई पड़ती  अत्यधिक इसकी जो है लंबाई अत्यधिक है तो यह बहुत ही खतरनाक रूप दिखाई पड़ता है

कनक यक्षिणी साधना के लाभ    kanak yakshini sadhna
कनक यक्षिणी साधना के लाभ kanak yakshini sadhna इसकी साधना करने के बाद या इसको विदा करने के बाद तुरंत आप किसी बड़ी देवी देवता की साधना कर ले नहीं तो यह आपकी हालत बहुत खराब कर देगी ! इसकी सिद्धि जो है ज्योतिषियों के लिए भूत भविष्य वर्तमान जानने के लिए !और हर प्रकार के उत्तर प्रश्नों का जवाब जानने के लिए की जाती है !
आपको हर प्रकार की बातें गोपनीय विद्या और अजीब अजीब दुनिया के रहस्य भूत प्रेतों से मुलाकात और ऐसे ही अन्य लोगों से आपकी बहुत ज्यादा संपर्क करवा देती है!  यह आपके जो है सभी सवालों का जवाब दे देती हैं आप इसे जो भी पूछते हो यह बताती रहती है उसे और जिसे कर्ण पिशाचिनी साधना है यह उसी तरह की भी साधना इस शैक्षणिक की मानी जाती है और हमेशा जो है यह आपके उसी तरह कान में बताती है जैसे कर्ण पिशाचिनी बताती हैं

आपको ठीक उसी तरह यह भी आपके कान में आपके प्रश्नों का जवाब बता देती है !नहीं तो आपके मन में एक बार डाल देती है !जिससे आपको जो है आपको बात पता चल जाती है दोनों तरह से ही आपको यह आपके प्रश्नों का हर व्यक्ति के प्रश्नों का जवाब देती है ! घटना के बाद आदमी जो है पैसे उसके पास बहुत सारे  आने लगते हैं ! और वह धन का बहुत बड़ा मालिक बन जाता है !  

यह आपको कामुक बना देती है स्त्रियों से संसर्ग आपका करवाती है !  आप धीरे-धीरे गलत चीजों में फंसते चले जाते हो इसलिए इस शक्ति को  अपने कंट्रोल में रखना बहुत जरूरी है ! अगर कोई उसकी साधना करता है तो उसे अपने इस को कंट्रोल में रखना बहुत जरूरी है ,नहीं तो यहां यह आप उसको जो नुकसान पहुंचा देगी ! और शक्तियां तो बहुत देती है लेकिन यह जो नुकसान पहुंचाए इसलिए अगर बड़े देवी देवता की साधना अगर आप साथ में नहीं करते हो तो आपके लिए मुश्किल हो सकती है! इसकी सिद्धि के बाद आप बड़े देवी देवताओं की साधना जरूर करें ताकि इसका प्रभाव न पड़े

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पीपल यक्षिणी वशीकरण साधना pipal yakshini sadhana ph. 85280 57364    गुरु मंत्र  साधना   डॉट कॉम तथा शास्त्रों में कहीं गई ज्ञानवर्धक जानकारी के माध्यम से अपना जीवन सफल बनाने के इच्छुक हैं !या आप इन चीजों में रूचि रखते हैं तो आप हमारे वेबसाइट को allow  करो  !

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और अपने जीवन को सुखमय बनाए है जैसा कि आप सब जानते ही होंगे यह मान्यता है, कि पीपल पेड़ पर 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास होता है! श्री डाकिनी शाकिनी भूत प्रेत इत्यादि आंखों में पीपल पेड़ के साथ जोड़ा जाता है!  इसलिए पीपल पेड़ से संबंधित जितने सारे तंत्र मंत्र टोने टोटके आपको मिलेंगे अन्य पेदो२ पर नही मिलेगे  ! दोस्तों आज  हम जानेंगे वशीकरण प्रयोग इस प्रयोग में वशीकरण हेतु शक्ति को आवाहन किया जाता है !

पीपल यक्षिणी वशीकरण साधना  विधि  pipal yakshini sadhana 

पीपल यक्षिणी वशीकरण साधना  विधि  pipal yakshini sadhana  ध्यान रहे कोई भी वशीकरण प्रयोग वाममार्गी या अघोरी वशीकरण प्रयोग को पूरी सावधानी से करनी चाहिए !सिर्फ आजमाने के लिए प्रयोग ना करें !साधना में कौन-कौन सी सामग्री की आवश्यकता पड़ेगी ! तो इसमें आपको चाहिए थोड़ा मांस का टुकड़ा चोमुखा दीपक चमेली का तेल दो सुपारी तथा चार लोंग यह  सामग्री को लेकर किसी पुराने पीपल वृक्ष के पास चले जाएं आपको किसी अमावस्या को रात्रि 10:00 से 2:00 के मध्य ही करनी  हैं करने के लिए ऐसे समय का चयन करें जब उस पेड़ के आसपास हमको यह प्रयोग करते हुए देखे न

पीपल  समक्ष पहुंचकर उस चौमुखी दीपक में चमेली का तेल डालकर रोईया सूती कपड़े के 32 से उसे जलाएं इस दीपक को चार दिशाओं की ओर करके पेड़ के नीचे जमीन पर रख दे !उस दिए को इस प्रकार रखें कि उसका एक मुख दक्षिण दिशा की ओर हो दूसरा मुक्त पश्चिम दिशा की ओर हो दो सुपारी तथा चार लोंग को दीपक के तेल में छोड़ दे इसके दक्षिण की ओर मुख करके खड़े हो जाए के बाद दिखाए गए मंत्र को ११०८ बार जप करें इसमें मंत्र का सटीक उच्चारण करना अत्यंत आवश्यक है इसलिए ध्यान पूर्वक सुनिए मंत्र है

पीपल यक्षिणी वशीकरण साधना  मंत्र  pipal yakshini sadhana mantra

 

ओम क्लीम क्लीम क्लीम श्रीम ओम ओम फट स्वाहा ओम क्लीम क्लीम क्लीम श्रीम ओम ओम फट स्वाहा

ध्यान रहे कि जब तक मंत्र जब चलता रहे दिया जलता रहे यानी जब भी उसमें तेल खत्म होने को आए तब फिर से चमेली का तेल उसमें डाल दे जप  खत्म होने के पश्चात उस दिए में से एक लॉन्ग अपने साथ वापस ले आए वापस आते समय पीछे मुड़कर ना देखें चाहे! किसी भी प्रकार का आवाज ही क्यों ना सुनाई दे यह अत्यंत आवश्यक चेतावनी है ! जो लोंग  आप लेकर आये वो किसी भी स्त्री या पुरुष को खिलाया जाएगा सदा के लिए आपका हो जाएगा ! यदि किसी व्यक्ति स्त्री या पुरुष फेंक कर भी मारा जाए तो वह बस में हो जाएगा लेकिन इस पर ध्यान रखने वाली बात यह है कि फेंकते समय अपने बाएं हाथ का ही इस्तेमाल करें!  इस मंत्र में  अमुक का पर्योग  नहीं किया गया है इसका मतलब है कि इस प्रयोग को करते समय किसी विशिष्ट व्यक्ति का नाम लेने की आवश्यकता नहीं है!  आप जिसे चाहे उसे वश में कर सकते हैं!