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Panch Bawri पांच बावरी का इतिहास और प्राचीन साधना रहस्य ph 85280 57364

 

सबल सिंह बावरी और केसरमल बावरी का पत्थर हो जाना

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हरी सिंह बावरी को राजगद्दी पर बैठे हुए अभी कुछ ही दिन हुए थे कि उनके दोनों छोटे सबल सिंह बावरी और के केसरमल बावरी ने अपने बड़े भाई हरि सिंह बावरी से शिकार खेलने की आज्ञा मांगी और उन से आज्ञा लेकर शिकार के लिए जंगल की तरफ वह दोनों भाई रवाना होगे दोनों भाई साबर सिंह बावरी और केसरमल बावरी जंगल की तरफ शिकार के लिए जा रहे तो उनको रास्ते में माता मनसा देवी का मंदिर दिखा और इन दोनों भाइयों ने मंदिर की तरफ दोनों हाथ जोड़कर मन्नत मांगी कि हे मां मनसा हम तेरे दरबार में चढ़ाएंगे अगर हमें जंगल में शिकार मिल जाए जंगल में जाने पर जब सबल सिंह बावरी और बाबरी को शिकार नहीं मिला । तब माता मनसा देवी की मन्नत पूरी ना होने के कारण दोनों भाई माता मनसा देवी से खफा हो जाते हैं और माता रानी के मंदिर के ऊपर मुकट उतारने लग जाते हैं । माता मनसा देवी ने अपनी शक्ति से इन दोनों भाइयों को पत्थर का बना दिया ।

 

मनसा देवी का पांच बावरी Panch Bawri को 64 जोगणी की शक्ति प्रदान करना

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जब इस बात का पता हरी सिंह बावरी को लगा तब उसने माता रानी के मंदिर में आकर माता से क्षमा याचना मांगी । माता ने हरी सिंह बावरी की क्षमा याचना की अपना शीश काटकर माता को चढ़ा दिया माता मनसा देवी ने प्रसन्न होकर हरी सिंह बावरी को जीवत किया और साबर सिंह बावरी और केसरमल बावरी को भी गलती के लिए माफ कर दिया ,और हरी सिंह बावरी पर प्रसन्न होकर

माता मनसा देवी ने माता काली की 64 जोगणी की शक्ति का वरदान इन पांचो बावरियों को सामान्य रूप में दे दिया और फिर इस राज्य में एक दुर्घटना घटी इस खुशहाल खरखड़ी राज्य में भूकंप आने के कारण पूरे राज्य को तहस-नहस और इस एप्स में प्रजा के साथ-साथ माता को पूरी और हेमराज बाबरी भी चल बसे और इस राज्य में कुछ नागरिक और पांच बावरी बहन शैडो और उनकी ताई राजदेवी शेष बचे कुदरत की करोपी देखते हुए पांचो बावरियों ने स्थान को छोड़ने का मन बना लिया तब पांच बावरी ताई राधे हरि नगरी छोड़कर दिल्ली शहर में जमुना किनारे एक झोपड़ी बनाकर रहने लगे ।

 

Rodhar nathhttp://gurumantrasadhna.com
मैं रुद्र नाथ हूँ — एक साधक, एक नाथ योगी। मैंने अपने जीवन को तंत्र साधना और योग को समर्पित किया है। मेरा ज्ञान न तो किताबी है, न ही केवल शाब्दिक यह वह ज्ञान है जिसे मैंने संतों, तांत्रिकों और अनुभवी साधकों के सान्निध्य में रहकर स्वयं सीखा है और अनुभव किया है।मैंने तंत्र विद्या पर गहन शोध किया है, पर यह शोध किसी पुस्तकालय में बैठकर नहीं, बल्कि साधना की अग्नि में तपकर, जीवन के प्रत्येक क्षण में उसे जीकर प्राप्त किया है। जो भी सीखा, वह आत्मा की गहराइयों में उतरकर, आंतरिक अनुभूतियों से प्राप्त किया।मेरा उद्देश्य केवल आत्मकल्याण नहीं, अपितु उस दिव्य ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाना है, जिससे मनुष्य अपने जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझ सके और आत्मशक्ति को जागृत कर सके।यह मंच उसी यात्रा का एक पड़ाव है — जहाँ आप और हम साथ चलें, अनुभव करें, और उस अनंत चेतना से जुड़ें, जो हमारे भीतर है ।Rodhar nath https://gurumantrasadhna.com/rudra-nath/
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