दैविक साधना davik-sadhna हम इस श्रेणी में देवी देवताओं की रहस्मय साधना पर चर्चा करेंगे ! जिस साधना को आप अपने घर पर सिद्ध करके लाभ प्रपात कर सकते है ! gurumantrasadhna.com
munja sadhna चमत्कारी मुंजा साधना 7 दिन में प्रत्यक्ष प्रकट होगा बिना मंत्र जाप के munja sadhna
munja sadhna चमत्कारी मुंजा साधना 7 दिन में प्रत्यक्ष प्रकट होगा बिना मंत्र जाप के munja sadhna गुरु मंत्र साधना में आप सबका फिर से स्वागत है आज मैं आप लोगों के लिए एक ऐसी साधना लेकर आया हूं ठीक है यह साधना रहेगी मुंजा साधना यह कोई साधना नहीं है यह मतलब सात दिन का प्रयोग ही होता है इसमें कोई मंत्र जाप कुछ नहीं होता है ठीक है और केवल छोटा सा प्रयोग होता यह जो प्रयोग है केवल सात दिन तक चलेगा सातव दिन में मुंजा आप के सामने उपस्थित हो जाएगा ठीक है
आप उसका कोई मंत्र जाप नहीं कर रहे हो केवल एक तरीके से आप उसको अपना दोस्त बनाने की कोशिश कर रहे हो ठीक है मुंजा आप का जो होता है दोस्त बन जाता है यह मुंजा को दोस्त बनाने की साधना होती है एक दफा अगर आपका वो दोस्त बन गया दुनिया का कोई भी काम आप करवा सकते हो ठीक है छोटे से छोटा बड़े से बड़ा कोई भी काम चुटकियों में य कर देता है ठीक है कोई चीज एक जगह से दूसरी जगह मंगवानी हो चुटकी में आ जाएगी
कोई सामान इधर का उधर करना हो गोदाम शिफ्टिंग यह सारा काम इसका चुटकियों का खेल होता है एक जगह से दूसरी जगह चीजों को ट्रांसफर करनाय बाए हाथ का काम करता है ठीक है एक तो ये सात्विक चीज है पहले मैं आपको बता दूं
मुंजा एक ऐसी शक्ति है जैसे बच्चे होते हैं ठीक है जो 10 से 12 साल की जज के जो बच्चे होते हैं ठीक है और जैसे किसी बच्चे ने उसने गुरु दीक्षा ले रखी है या जो यग तो पहनते हैं ना मतलब पुराने टाइमों में गुरुकुल की शिक्षा होती थी वो दीक्षा दी जाती थी ठीक है आज भी संस्कृत कॉलेजों में दी जाती है
अगर उस तरीके से वह कुछ नित्य कर्म करता है पूजा पाठ करता है ठीक उसकी डेथ हो जाती है तो व मुंजा श्रेणी में जाता है ठीक है वो मुंजा बनता है क्योंकि जो उसके कुछ लक्ष्य थे जिनको वो पूरा करना चाहता था वो व्यक्ति जब जि मतलब वो बच्चा जब जिंदा था पूरे नहीं हो पाए तो अब भटके का ठीक है व ज्यादातर पीपल के पेड़ के ऊपर ही रहता है ठीक है अगर एक तरीका आपको बता दूंगा
उससे आप उसको अपना दोस्त बना सकते हो ए रिक्वेस्ट कर सकते हो दोस्ती की ठीक है और बिल्कुल आसान तरीका वो रहेगा ठीक है एक बार आपका दोस्त बन गया जिंदगी भर आप उससे कोई भी काम लो कोई बड़ी बात नहीं है एक नागपुर से लेडीज है उनको मैंने करवाई है उनको सफल भी हुई है उनकी जो कॉल रिकॉर्डिंग है आपको मैं सुनाऊंगा जरूर ठीक है उनका मैं ना नंबर वगैरह जो होता है ठीक है
उसका अरेंजमेंट उनकी जो उनसे एक बार बात करके रिकॉर्डिंग बनाऊंगा और आपको सुनाऊंगा क्या उनका अनुभव रहा बहुत ही सुंदर अनुभव होता है ठीक है
रिकॉर्डिंग सुनाने का मतलब यह होता है अंदर से प्रेरणा मिले पास आप लोगों बहुत सारी लोगों की रिकॉर्डिंग मैं डाल चुका हूं जिन्होंने सफलता हासिल करी ठीक है तो ये बहुत आसान सा प्रयोग होता है कोई साथ नहीं कोई मंत्र जाप नहीं कुछ नहीं जो व्यक्ति आज के समय में बिजी रहता है
उसके पास समय नहीं है पूजा पाठ करने का मंत्र जाप करने का तो यह प्रयोग वह कर सकता है ठीक है यह प्रयोग मैं आपको इंटरनेट के ऊपर नहीं दे सकता मेरी मजबूरी है ठीक है यह प्रयोग मैं आपको यहां पर नहीं बता सकता
यह मेरी मजबूरी है ठीक है इसके लिए आपको नंबर मैंने दे रखा है उसके ऊपर आप फोन कर सकते हो ठीक है यह होता है आप यह मत सोचिए कि कोई चार्जेस है ठीक है बिना चार्ज के भी मैं साधनाए को सिखाता हूं वोह बंदा करने वाला चाहिए ठीक है मतलब यह होता है
अगर इंटरनेट के ऊपर डाल देंगे कोई साधना बहुत सारे लोग क्या करते तांत्रिक वही प्रयोग आगे 50 हजार का एक एक लाख का सेल करते हैं ये चीजें गलत है मैं ये नहीं चाहता हूं कि कोई भी इस तरीके से उसका लोगों को ठगे ठीक है
अगर आप ये प्रयोग करना चाहते हैं तो नंबर दे रखा है मैंने और आप उसके ऊपर फोन कर सकते हैं और यह आपको प्रयोग करवा दिया जाएगा फ्री ऑफ कोट कोई पैसा नहीं कुछ नहीं ठीक है जय श्री महाकाल
डेढ़ फुटिया क्या होता है सम्पूर्ण जानकारी ded futiya kya hai ph.85280 57364
डेढ़ फुटिया क्या होता है सम्पूर्ण जानकारी ded futiya kya hai ph.85280 57364
डेढ़ फुटिया क्या होता है सम्पूर्ण जानकारी ded futiya kya hai ph.85280 57364 आजकल बहुत सारे प्रश्न आ गए हैं हमारे पास डेढ़ फुटिया जिनके बारे में बताओ कौन है यह जिन्न है कि कोई राक्षस हैं कोई शैतान है कोई अवतार हैं कोई चमत्कारी है नहीं कि डेढ़ फुटियाजिन्न है जो बेहद शक्तिशाली होते हैं
प्राचीन समय में जब राक्षसों का संघार हुआ था दैत्यों का वध किया गया था उस समय किसी वजह से किसी पुण्य के कारण कि किसी सिद्ध पुरुष है या भगवान की शरण में आने के कारण कुछ जिन बच गए थे आज के समय में कलियुग में जो बेहद शक्तिशाली चमत्कारी होते हैं कि यह कोई हवा नहीं है इनका शरीर होता है है यह उड़ सकते हैं कहीं भी जा सकते हैं कहीं से भी ला सकते हैं गायब हो सकते हैं
इनकी शक्ति की कोई सीमा नहीं है इनकी शक्ति बहुत है कि जिन डेढ़ फुटिया जन्म यह दो प्रकार के होते होते हैं नेशनल ओर इंटरनेशनल है जो नेशनल दिन होते हैं वह केवल इंडिया में काम कर सकते हैं कि किसी भी चीज को कही भी ले जा सकते हैं वह कहीं से भी लेकर और सकते हैं दूसरे डेढ़ फुटिया जिन्न होते हैं
इंटरनेशनल वह पूरे विश्व में कहीं भी जा सकते हैं कोई चीज कहीं से भी ट्रांसफर कर सकते हैं भूमि व खजाने मनी ट्रांसफर करवाना की अहम भूमिका रहती है कि इनको संभावना पेट कठिन काम में किसी एक व्यक्ति के बस को संभावना नहीं होता है
एक डेढ़ फुटिया जिन जिनका मास्टर होता है जो डेढ़ फुटिया जिन्न पकड़ सकता है उसके आदेश को चलता है होता है अगर कंट्रोलर से आपे से बाहर हो जाता है क्योंकि अगर डेढ़ फुटिया जिन्हें एक बार कंट्रोल से बहार हो जाता है वह लाशों के अंबार लग जाते हैं बहुत ही खतरनाक शक्ति है
जो साधक लंबे समय से तंत्र क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं केवल वही इस डेढ़ फुटिया जिनकी तरफ जाने की सोची अन्यथा कोई भी साधक जो नया हो यह शक्ति से कमजोर हो डेढ़ फुटिया की तरफ जाने का प्रयास ना करें यो यो उसके लिए हानिकारक होगा कि आप सोच भी नहीं सकते एक महाशक्ति है डेढ़ फुटिया जिन आपने क्या समझा ऐसे यह जब चाहे तब तबाही मचा दें
किसी की भी जिंदगी में है कि डेढ़ फुटिया कभी भी सिद्ध नहीं किया जा सकता केवल इस की खरीद-फरोख्त की जाती है जिसकी कीमत बहुत करोड़ों में होती हैं संकल्प के द्वारा एक से दूसरे को ट्रांसफर किया जाता है इसे कहते हैं मैं आप लोगों से यही निवेदन करूंगा इस डेढ़ फुटिया जिनसे आप दूर रहेंगे वहीं आपके लिए बेहतर होगा जय श्री कृष्णा
kamakhya tantra सबसे शक्तिशाली कामाख्या तंत्र रहस्य ph 8528057364
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kamakhya tantra सबसे शक्तिशाली कामाख्या तंत्र रहस्य ph 8528057364 गुरुमंत्र साधना कॉम में आप सब का फिर से स्वागत है। मैंने तंत्र के बारे में बहुत सारे पोस्ट प्रकाशित करे हैं । आज उनमें से ही एक मैं विषय लेकर आया हूं ,कामाख्या साधना और कामाख्या तंत्रkamakhya tantra क्या है इसके बारे में आपको डिटेल सहित बताऊंगा।
मैं कामाख्या देवी के बारे में अगर आपको जानकारी चाहिए तो व आप गल कर सकते हैं। मैं इस पोस्ट में केवल कामाख्या जो साधना है। उसके बारे में ही बताऊंगा कामाख्या एक ऐसी देवी है।
जिसके अंदर एक वशीकरण की शक्ति है, यह वशीकरण की देवी इसको माना गया है। कामाख्या का वशीकरण ऐसा है जिससे आप देवी देवताओं को भी बांध सकते हो वश में कर सकते हो पीर पैगंबरों को वश में कर सकते हो। जिन्नातों को वश में कर सकते हो कोई भी ऐसी चीज नहीं है जिसको हम कमखया सिद्धि से वश में नहीं कर सकते हैं।
एक वशीकरण की बहुत बड़ी शक्ति है ठीक है इनकी अगर आप साधना सिद्धि कर लेते हो तो आपके अधीन जितने किसी भी देवी देवता को आप अपने वश में कर सकते हैं। सभी देवी देवता आपके अधीन काम करेंगे जिन्नात हो गए पैगंबर हो गए बहुत सारी चीजें इनके अंदर काम करती है।
आप इनकी शक्ति से किसी को भी वश में कर सकते हो इंसानों को भी कर सकते हो इंसानों की तो क्या औकात है। जब आप इतनी इतनी बड़ी-बड़ी चीजें आप बच में कर सकते हैं ,तो इंसान की औकात क्या है ऐसा वशीकरण आप कर सकते हो कि बड़ी-बड़ी शक्तियां आपकी गुलाम बनाकर काम करेंगी।
बेसिकली जो कामाख्या तंत्र kamakhya tantra है कामाख्या तंत्र kamakhya tantra में किसी शक्ति की आराधना या साधना करने के बारे में नहीं है केवल उस शक्ति का वशीकरण के बारे में बताया गया है एक हम किसी शक्ति की साधना करते हैं आराधना करते हैं उससे वह शक्ति प्रसन्न होती है और हमें वह वरदान देती है या कोई कार्य करती है ठीक है वह तो साधना के माध्यम से आप कर सकते हो ठीक है
आराधना करके भी आप उसको खुश करके कोई चीज हासिल कर सकते हो यहां पर जो कांसेप्ट आ रहा है व वशीकरण का आ रहा है किसी शक्ति को हम अपने वश में करके कंट्रोल करके उनके थ्रू अपना काम निकाले वही चीज तो तंत्र है आप वैसे साधना करते या व देवी देवताओं की कभी भी आपका कोई कार्य बहुत कम लोगों के होते हैं
अगर आपका डायरेक्ट वशीकरण करते हो तो प्रत्यक्षीकरण भी बड़ी आसानी से आप कर लोगे उस देवता को अपने वश में भी कर लोगे जहां आराधना और साधना फेल हो जाती है वहां फिर कामाख्या तंत्र काम करता है कामाख्या तंत्र का एक ही उद्देश्य है
किसी भी शक्ति को अपने वश में करना वशीभूत करना ठीक है लंबे समय से कोई आप अप्सरा की साधना कर रहे हो अपसरा आपके सामने उपस्थित नहीं हो पा रही है आ ही नहीं रही है आप कितना लंबे समय से आप साधना कर रहे हो बहुत शिद्दत से जाप भी करते हो पर नहीं आती है
नहीं आती है तो फिर क्या करेंगे उस शक्ति का वशीकरण अगर आप अप्सरा का कामाख्या तंत्र के थ्रू वशीकरण करते हैं तो उसको आना पड़ेगा आपके सामने और आपके कार्य को करना पड़ेगा यह होता है कामाख्या तंत्रkamakhya tantra ठीक है किसी को किसी भी शक्ति को अपना गुलाम बनाकर काम करवाना वह चीज है
कामाख्या तंत्र kamakhya tantra कामख्या साधना जितनी आसान लगती है उतनी आसान होती नहीं है क्योंकि इसमें अपनी जो इंद्रिया हैं उनको कंट्रोल में करना अपने आप को वश में करना पड़ेगा तब आपके अधीन संसार होगा सब चीजें होंगी पहले अपने मन को जीतना पड़ेगा इंद्रियों को जीतना पड़ेगा जब आप कामाख्या साधना करते हैं तो आपके ऊपर बड़ी-बड़ी परीक्षाएं होती हैं बड़ी-बड़ी परीक्षाएं ली जाती है ठीक है बहुत अच्छी-अच्छी लड़कियां आपकी जिंदगी में आएंगी जो बोलेगी मेरे साथ आप भोग विलास करो तो यह चीजें कंट्रोल करना कोई खेल नहीं है
कामख्या की सिद्धि करना मतलब अपनी इंद्रियों को कंट्रोल में करना ब्रह्मा विष्णु महेश नहीं कर पाए अपनी इंद्रियों को कंट्रोल तो आपकी क्या औकात है मैं ऐसा नहीं बोल रहा हूं कि यह संभव नहीं है संभव है पर एक अच्छे गुरु का मार्गदर्शन चाहिए तब जाक साधना आप कर सकते हो अगर आप कामख्या तंत्र के संबंधित या कामाख्या साधना के संबंधित कोई जानकारी चाहते हैं और अधिक हमसे बात करना चाहते हैं ठीक है नंबर आपको दे रहा हूं
उससे डायरेक्ट आप बात कर सकते हैं ठीक है नंबर में आपको स्क्रीन के ऊपर दिखाई दे रहा होगा तो आप उसके थ्रू आप बात कर सकते हैं इस विषय के ऊपर जो भी साधना आपकी सिद्ध नहीं हो पा रही है
कामाख्या तंत्र kamakhya tantra का यूज करके आप उस साधना को सिद्ध कर सकते हैं आज के लिए बस इतना ही मेरे को बताना था के कामाख्या तंत्र के बारे में और कामाख्या सिद्धि के बारे में दोनों चीज मैं बता चुका हूं आज के लिए बस इतना ही जय श्री महाकाल
shamshan kali sadhna labh शमशान काली साधना के लाभ गुरुमंत्र साधना कॉ में आप सबका फिर से स्वागत है । मैंने साधना के ऊपर बहुत सारी वीडियो अभी तक डाल चुका हूं और बहुत सारे साधक इन साधना से लाभ प्राप्त कर चुके है । आज का जो हमारा विषय है । शमशान काली साधना के बारे में है । आज मैं आपको बताऊंगा शमशान काली साधना के क्या लाभ है । और इसकी सिद्धि से आप क्या-क्या कर सकते है । और इसकी साधना भी बताने वाला हूं देखिए जो शमशान काली है । यह महाकाली का सबसे शक्तिशाली स्वरूप है ।
अगर कोई साधक इनकी साधना कर लेता है । दुनिया का कोई भी ऐसा काम नहीं जो आप ना कर पाओ असंभव से असंभव काम आप कर सकते कुछ ऐसे तरीके भी है । ं जिससे आपको साधना करने की जरूरत नहीं है ।
केवल आप इनका भोग प्रसाद लगा दीजिए देवी आपके सब काम करेंगे साधना सिद्धि करने की तो जरूरत ही नहीं है । अगर आप केवल भोग प्रसाद लगा दोगे तब भी काम हो जाएगा अगर आप इसके साथ ही अगर आप साधना कर दोगे तो वह काम तेजी से होगा तो काम 40 दिन में होगा तो वह काम आपका दो चार दिन में हो जाएगा कभी-कभी एक एक घंटे में भी कुछ साधकों के काम होते है ।
उस लेवल तक पहुंचने के लिए खैर आपको मेहनत करनी पड़ेगी तब आप एक घंटे के अंदर-अंदर भी बड़े से बड़ा काम ले सकते हो शमशान खाली एक ऐसी तगड़ी शक्ति है । जो बड़े से बड़ा काम कर सकती है । अगर आप इसकी सिद्धि कर लेते हो एक बार साधना कर लेते हो तो कोई भी असंभव से संभव काम चुटकी में कर लोगे मारण वशीकरण उच्चाटन सब क्रियाए बहुत तेजी से होंगे सुपर फास्ट कोई भी शायद इतनी तेजी से कोई देवी देवता काम नहीं करता होगा।
जितनी जल्दी यह करके मेरे पास एक क्लाइंट आए थे उनका जो एक लड़का था उसको जेल हो गई थी जमानत नहीं मिल पा रही थी और मैंने इधर से भोग प्रशाद लगाया एक घंटे के अंदर अंदर रही उसको जमानत मिल गई इतनी तेजी से य चीजें काम करती है । ठीक है ।
इन शक्तियों का आप इस्तेमाल कर सकते हो कोई भी आपका काम है । कभी रुकेगा आपके जो क्लाइंट के काम है । वो भी नहीं रोकेंगे ठीक है । तो ये महाकाली का सबसे शक्तिशाली स्वरूप है । अगर आप इसकी साधना करना चाहते हो तो मैं नीचे लिंक दे दूंगा
आप उस लिंक के ऊपर क्लिक करके पूरी साधना विधि विधान हासिल कर सकते हो पर मैं फिर आपको एक चीज कहूंगा बिना गुरु के मार्गदर्शन से कोई साधना करोगे तो कोई नुकसान होगा तो मेरी उसमें कोई गारंटी नहीं है । पहले बता देना जरूरी है । भाई तो आप अपने ही गारंटी के ऊपर साधना करिएगा ठीक है । तो आज के लिए बस इतना ही जय श्री महाकाल
Krityaa Sadhna कृत्या साधना रहस्य विस्तार सहित ph.85280 57364
Krityaa Sadhna कृत्या साधना रहस्य विस्तार सहित ph.85280 57364
Krityaa Sadhna कृत्या साधना रहस्य विस्तार सहित गुरुमंत्र साधना डॉट कॉम में आप सबका फिर से स्वागत है आज हमारे साथ हैं अशोक कुमार चंद्रा जी ठीक है जो हमें बताएंगे कृत्या साधना के बारे में य कृत्या कौन होती है कितने प्रकार की होती है और इस साधना का हमारी जिंदगी में इस साधना के क्या फायदा है तो चीज बताएंगे अशोक कुमार चंद्रा जी अशोक कुमार जी आपका फिर से बहुत-बहुत स्वागत है हमारे इस वेबसाइट पर जी बहुत-बहुत धन्यवाद रुद्रनाथ जी आपने यह बहुत अच्छा प्रश्न किया कि कृत्या क्या होती है
कृत्या क्या होती है
पहले तो हमें इस बारे में ही जानना है क्योंकि मेरे को तो पता है ठीक है जो बहुत सारे लोग हैं उनको नहीं पता है साधक ठीक है अब मैं उनके ही प्रश्न आपके समक्ष रखूंगा जो जो वो सोच सकते हैं ठीक है तो आप सबसे पहला प्रश्न है कृत्या क्या होती है जी ये जो कृत्या है ये एक तरीके से एक देवीय शक्ति होती है बिल्कुल नाम से ही आपको महसूस हो रहा होगा देव्य नाम जैसे एक होता है स्त्री का बिल्कुल ये एक देव्य शक्ति होती है और सभी देवी देवताओ की अपनी एक की कृत्या होती है
बिल्कुल जैसे हर देवता के अपने भैरव होते हैं उसी हिसाब से इन सबकी कृत्या अलग होती है तो इसमें होता क्या है कि कृत्या जो है एक तरीके से समझ लीजिए इतना तीव्र वर्क करती है मन की गति से बहुत अच्छा मेरे को एक चीज बताओ कितने प्रकार की होती है क्योंकि मेरे को वन बाय वन सबके प्रश्नों के उत्तर देने पड़ेंगे कृत्या जो है जो भगवान शिव के द्वारा जिस का वर्णन मिलता है
उनकी जो भी लीलाए घटनाए घटित हुई है भूतकाल में तो उस हिसाब से तीन प्रकार की कृत्या होती है ठीक है इनका जो निर्माण है माता महाकाली माता महालक्ष्मी माता महारा सरस्वती महा सरस्वती के रूप में मिलकर हुआ है
बिल्कुल और इनको भगवान शिव ने जब भी जरूरत पड़ती है सृष्टि संहार की या कुछ भी का काम होता है तो या कोई कहीं भी जरूरत पड़ती है तो इनको जो है उत्पन्न किया जाता है
मेरा दूसरा प्रश्न अब और है जो उसका साधक होता है तो उसको क्या बेनिफिट है यह बहुत अच्छा सवाल है देखए बेनिफिट पहले है ना बाकी सब चीज बाद में जी देखिए ऐसे मैं एक उदाहरण देता हूं अगर कोई जैसे जंगल का शेर या कोई चीता बाग या लियो कोई भी ऐसा जानवर खतरनाक जानवर अगर किसी गांव के अंदर आ जाता है तो आप समझ सकते हैं गांव की क्या स्थिति हो जाती है
बिल्कुल तो ऐसी कृत्या साधक होता है यदि जिस साधक के पास कृत्या शक्ति होती है तो उसके प्रतिद्वंदी की उसके शत्रुओं का क्या हाल हो सकता है आप समझ सकते हैं
इस उदाहरण से बिल्कुल वो जो है उससे बचकर भागेंगे कि उसकी निगाह ना पड़ जाए उसके कृत्या साधक उनके ऊपर बिल्कुल यह बहुत खतरनाक शक्ति होती है
इसको अच्छा एक चीज तो हम समझ गए किय शत्रुओं का नाश करते दूसरा फायदा क्या है देखिए दूसरा फायदा यह होता है जैसे बड़ी से बड़ी दुष्ट आत्मा होती है जो शरीर छोड़ के नहीं जाती जिन जिन्ना होती नहीं है उनको उनको बुरी तरह से लह लुहान कर देती है
उनके अंग भंग कर देती है उनके टुकड़े टुकड़े कर देती है उनको पूर्ण रूप से उनका अस्तित्व नष्ट कर देती है
जब कोई ऐसी शक्ति किसी पीड़ित व्यक्ति के शरीर में आ जाती है जैसे किसी के शरीर में जिन्नात आ गया और वो नहीं निकल पा रहे हैं तब शिव कृत्या का आवाहन करके उसको अंदर के अंदर टुकड़े कर करके खत्म किया जाता है यानी उसको पूर्ण रूप से उस सक्रिय ऊर्जा को निष्क्रिय ऊर्जा में बदल दिया जाता है
इसके क्या फायदे हैं दो फायदे तो हो गए इसके इसका एक बीमारी में उपयोग किया जाता है यदि किसी को लंबे समय से कोई बीमारी है तो उसका उच्चाटन किया जा सकता है बक उसम बीमारी में यह होता है जैसे किसी को कोई सा भी रोग पीड़ित है और रहस्य में बीमारी है दवाइयों से भी ठीक नहीं हो रहा है और काफी समय हो चुका है तो जब कृत्या का आवान करके उसको जल दिया जाता है पीने के लिए या उसके नाम से हवन किया जाता है या तर्पण होता है मार्जन होता है तो वह जो रोगी है वह ठीक होने लगता है एक तरीके से चमत्कार होता है
उसमें बिल्कुल रोगी ठीक हो जाता है हां वह 100% पर सही होता है ठीक ठीक ठीक आजकल यह ज्यादा चल रहा जैसे किसी के पैरों में दर्द हाथों में दर्द कमर में दर्द कंधे में दर्द यानी कि जो 30 साल से ऊपर की उम्र के स्त्री पुरुष है उनको य दिक्कत बांधा आ जाती है तो उनको वास्तविकता पता नहीं चल पाती है कि क्यों होती है समस्याए तो इस तरह की चीजों का कृत्या से निवारण बहुत अच्छा होता है अभी मेरे प एक केस था देहरादून का था तो वो बंदे को 5 साल से सिर में दर्द था
दुनिया भर के एमआरआई करा लिए मशीनों से जांचे करवा ली ब्लड टेस्ट नसो का टेस्ट ने क्या क्या करवा लिया वो कभी ठीक ही नहीं हुआ जब एक दिन उसको ज्यादा दर्द उठ जब किसी ने बताया होगा तो वो फिर मेरे से उसने कांटेक्ट किया तो मैंने उसके 15 मिनट लिए 15 मिनट में पूरा मैटर क्लोज कर दिया परमानेंटली लाइफ टाइम के लिए आज लगभग छ सात साल हो गए अभी तक उसे कोई दर्द नहीं उठा तो व ऐसी चीज थी जैसे एक छोटा सा जिन उसके दिमाग के अंदर बैठा हुआ था
वह उसको पीड़ा देता था जब भी धूप निकलती थी तो वह धूप से उसको कुछ क्रिया करता था और उसको दर्द करना शुरू कर देता था इसमें मैंने कृत्या शक्ति से उसको काट कर तो उसको अंदर के अंदर उसको निष्क्रिय कर दिया खत्म कर दिया उसको शक्ति ने तब जाके वो बिल्कुल ठीक हो गया मैंने कहा कोई नहीं आएगी बिल्क और कृत शक्ति में एक विशेषता और होती है कि यह मन की गति से चलती है और जो भी शत्रु होते हैं ना जो हम प्रयोग करते हैं हमने कृत्या मैंने जब उस लगभग मेरे को 10 साल हो गए
तो मैंने जब य कृत्या सिद्ध की थी उस समय तो मेरे को उस समय अजीब सा लग रहा था कि पता नहीं कुछ काम होगा या नहीं होगा लेकिन जैसे-जैसे फलीभूत होती गई वैसे-वैसे कार्य बहुत तीक्षण होते गए जल्दी जल्दी काम होते गए किसी को दिक्कत है बांधा है मंत्र पढा मानसिक रूप से आज्ञा चक्र में जो भी कार्य है वह संपन्न कराया उधर वहां पर संपन्न हुआ थड़ाई पर उधर वो बंदा ठीक हो गया तो यह ऐसे बहुत पावरफुल काम करती है
हलक सबसे ज्यादा जो लोग इसका दुरुपयोग करने की कोशिश करते हैं मारण प्रयोग में मार सबसे ज्यादा उपयोग किया जाता है लेकिन ऐसे लोगों के पास यह शक्ति नहीं रुकती है यह शक्ति तभी रुकती है जब आप अच्छा काम करते है अगर आप को और विस्तार सहित जानकारी चाहिए तो नीचे वीडियो दे रहा हु अंत तक सुने हमारा वीडियो अंत तक सुने
श्री विद्या एक दिवसीय साधना – ( एक दिन में आपार धन दौलत की साधना ) एक दिन की साधना से सारे सपने पूरे होंगे ph .85280 57364
श्री विद्या सभी सिद्धिऔ की स्वामिनी है ब्रह्मांड में जितनी भी रिद्धिया सिद्धिया यह सब इनके आधीन है यह सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली साधना में से एक है अगर कोई व्यक्ति इसको प्रसन्न कर लेता है तो उसे स्वतः ही हज़ारों सिद्धिया प्रपात हो सकती है।
मैंने जितने भी लोगो को यह साधना सभी लोगो को इस का रिजलट मिला है। लाखों के कर्ज समापत हुए ,मनचाही नौकरी प्राप्त करी , खुद का घर प्राप्त हुआ जिसकी जो जो कामना थी पूरी हुई। आज तक जितनी भी लोगो को साधना करवाई किसी ने यह नहीं कहा मेरी कामना पूरी नहीं हुई।
अगर आप आर्थिक समस्या से जूझ रहे है ,धन की समस्या से बहुत समय से परेशान है ,आप का किसी भी प्रकार से कोई समाधान नहीं हो रहा है। केवल एक दिन की साधना से धन की सभी समस्या समापत होगी आपके सभी सपने पूरे होंगे और सर्व मनोकामना पूर्ण होंगी । इस साधना के दौरान अनुभव प्रपात होंगे आपको पता चल जाएगा देवी की कृपा हो चुकी है पर आपको किसी के साथ साँझा नहीं करना है
Neel Saraswati sadhna नील सरस्वती साधना रहस्य ph.85280 57364 आदौ सरस्वती पूजा श्री कृष्णेन विनिर्मितायत्प्रसादान्मुनिश्रेष्ठ मूर्खोभवति पण्डितःदेवी भागवत में नारद मुनि भगवान नारायण से देवी|
सरस्वती का चरित्र जानने की इच्छा प्रकट करते हैं। उनकी जिज्ञासा का शमन करते हुए भगवान नारायण कहते हैं -| सर्वप्रथम श्रीकृष्ण ने सरस्वती की पूजा की जिसकी कृपा से श्रीकृष्ण महान् विद्वान, जगद्गुरु बनें।शुक्ल यजुर्वेद की रचना महर्षि याज्ञवल्क्य ने की।
ऐसी मान्यता है कि याज्ञवल्क्य ने मां सरस्वती की आराधना कर उन्हें प्रसन्न किया एवं उनकी कृपा से शुक्ल यर्जुवेद की रचनाकरने में समर्थ हुए थे। प्रसंग है कि महर्षि याज्ञवल्क्य अपना सारा ज्ञान भूल चुकेथे और उन्हें यह समझ नहीं आ रहा था कि वे किस प्रकारनवीन वेद की रचना कर पाएंगे? फिर याज्ञवल्क्य को स्मरण आया कि जब भी देवताओं को ज्ञान प्राप्ति में बाधा आई है।
उन्होंने देवी सरस्वती की कृपा से उस संकट को पार किया है। श्री मद्भागवत् में इस प्रसंग का उल्लेख आया है। अतःयाज्ञवल्क्य सरस्वती की स्तुति करते हुए कहते हैं-हे देवी! एक बार सनत्कुमार ने ब्रह्माजी से ब्रह्मज्ञान के विषय में पूछा।
उस समय ब्रह्म सिद्धान्त की व्याख्या करने में ब्रह्मा मूक की भांति अक्षम हो गए थे। उसी समय स्वयं श्रीकृष्ण वहां आ गए एवं उन्होंने कहा, हे प्रजापते! आप भगवतीसरस्वती को अपना इष्ट देवी बनाकर उनकी स्तुति कीजिये ।
परमात्मा श्रीकृष्ण की आज्ञा पाकर ब्रह्माजी ने भगवती सरस्वती की स्तुति की। फिर, सरस्वती की कृपा से वे ब्रह्म ज्ञान के विषय में उत्तम सिद्धान्त का विवेचन करने में सफल हो गए। इसी प्रकार जब पृथ्वी ने शेषनाग से ज्ञान का एक रहस्य पूछा तब वे मौन हो गए।
तदुपरान्त व्यथित हृदय शेषनाग ने कश्यप ऋषि के आज्ञानुसार देवी सरस्वती का पूजन किया ।तदन्तर वे भ्रम का नाश करने वाले पवित्र सिद्धान्त का विवेचन कर सके।
इसी प्रकार जब व्यास जी ने वाल्मीकि से पुराण सूत्र पूछातब वे मौन हो गए। जगदम्बा सरस्वती का स्मरण करने के बाद ही मुनि वाल्मीकि पुराण सिद्धान्त का प्रतिपादन करने में सफल हो पाए।
भगवान श्रीकृष्ण के अंश से उत्पन्न व्यासनी उस पुराण सूत्र को सुनकर पुष्कर क्षेत्र में देवी सरस्वती की आराधनाकिए। फिर सरस्वती वर पाही और पुराणों की रचना करने में समर्थ हुए। हालांकि बाद में यहमाना गया कि व्यास मुनि नील सरस्वती की कृष्ण से पुराणों की रचना कर गए।
इन्द्र ने भी जब भगवान शंकर से तत्वज्ञान के सम्बन्ध में पूछा तब सरस्वती का ध्यान करके ही शिवजी ने इन्द्र को ज्ञानोपदेश दिया। इन्द्र ने जब देवगुरु बृहस्पति से शब्द शास्त्र के सम्बन्धमें पूछा तब ने स्वयं दिव्य पुष्कर क्षेत्र में एक हजार बरसों तक तप किया और सरस्वती कृपा से वे शब्द शास्त्र के ज्ञान में सिद्ध हुए एवं फिर एक हजार बरसों तक उन्होंने इन्द्र को शब्द शस्त्रानयाज्ञवल्क्य आगे कहते हैं कि जब पंचानन शिव, चतुराननब्रह्मा एवं सहखमुख वाले शेष नाग आपकी स्तुति नहीं करपा रहे हैं, फिर मैं आपकी स्तुति किस प्रकार कर पाऊंगा?
याज्ञवल्क्य की इस प्रकार स्तुति करने पर देवी सरस्वती ने उसे साक्षात् दर्शन दिया, जिसके प्रभाव व याज्ञवल्क्यशुक्ल यजुर्वेद की रचना कर पाए।याज्ञवल्क्य रचित सरस्वती स्तोत्र का जो व्यक्ति नियमित| रूप से पाठ करता है, वह बृहस्पति के समान मान बक्ता होजाना है।क्या नील सरस्वती, सरस्वती से भिन्न है?
सरस्वती की कल्पना तुषार द्वार (बर्फ के हार की तरह या श्वेत रूप में की गई है। परन्तु नाम तंत्र में उच्छिष्ट गणपति की संगिनी नील सरस्वती हैं, सरस्वती का नील रूपा दस महाविद्या में दूसरे स्थान पर अवस्थित देवी तारा जो संसार बंधनों से भक्तों को तार देती हैं का एक रूप नील सरस्वती है इस रूप में भगवती तारा अपने साधकों को हर प्रकार की शत्रु बाधा से मुक्त कर देती है। यह भी माना गया है कि नीलसरस्वती के रूप में महाविद्या तारा में काली का रूप समाहित| हो गया है।
इसलिए नील सरस्वती की आराधना करते हुए साधक नग कहते हैं।
घोर रूपे महरावे सर्व शत्रु भयंकर यो वरदे देवि आहि माम् शरणागत के नियमित साधकों को यह ज्ञातहोगा कि महाविद्या तारा की साधना तंत्र मार्ग केअनुयायियों के लिए अत्यावश्यक है। देवी तारा भोग औरमोक्ष दोनों प्रदान करती है। पूर्ण मोक्ष की स्थिति नहीं मिलती है, थोड़ा उधेड़बुन में व्यक्ति अटका रह जाता है कि छोड़ दिया जाए कि ना छोड़ दिया जाए?
परंतु नील सरस्वती देवी तारा का एक रूप है उनकी कृपा से साधक अपने शत्रुओं का आमूल चूल विनाश कर देता है।भौतिक सुविधाओं के मार्ग में जिसे प्रेय का मार्ग भी कहा गया है, उस मार्ग पर शत्रु बाधा का शमन जीवन से कष्टों का अंत है।
नील सरस्वती देवी साधना विधि
धवल रूप में सरस्वती शुद्ध बुद्धि की परिचायक है औरनील रूप में शुद्ध बुद्धि के साथ जुड़े हुए पराक्रम की नील सरस्वती उच्छिष्ट गणपति की संगिनी है जो शत्रु संहार केलिए बेजोड़ हैं।आमतौर पर मनुष्य अपने आंतरिक शत्रुओं से जूझ रहा होता है। एक शब्द में इसे डिप्रेशन या नकारात्मकता कहाजाएगा।
नील सरस्वती ज्ञात और अज्ञात आंतरिक और बाह्यदोनों शत्रुओं का सर्वनाश कर देती है जिसके बाद परिमार्जितबुद्धि शुभ के पथ पर अग्रसर हो जाता है। यह साधना आश्विन नवरात्रि अथवा किसी भी पुष्य नक्षत्रपर प्रातः प्रारंभ की जा सकती है।
साधक श्वेत धोती पहनकर पूर्व दिशा की ओर मुंह कर बैठें। यदि अपने बालकों कोभी साधना कराना चाहते हैं तो उन्हें भी श्वेत धोती पहना कर अपने साथ बैठाएं, चन्दन का तिलक करें, सामने एक बाजोटपर सफेद वस्त्र बिछाकर उस पर गुरु चित्र / गुरु विग्रह / गुरुयंत्र / गुरु पादुका, सरस्वती चित्र लगाएं। शुद्ध घी का दीपक तथा अगरबत्ती जलाएं।
तांबे के पात्र में पीले पुष्प के आसनपर पीले अक्षत रखें और उस पर नील सरस्वती मंत्रों से प्राण प्रतिष्ठित ‘सरस्वती यंत्र’ स्थापित करें।भाग्योदय हेतु इस विशेष साधना में सरस्वती पूजन से पूर्व गुरु पूजन कर गुरुदेव से साधना में सफलता की कामना अवश्य करनी चाहिए।
इसी क्रम में सर्वप्रथम गुरु पूजन सम्पन्न करें। गुरुदेव से साधना में सफलता की प्रार्थना हेतु ध्यान करें
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।गुरुः साक्षात् पर ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ।।
निखिल ध्यान के पश्चात् गुरु चित्र / विग्रह / यंत्र /
पादुका को जल से स्नान करावें
ॐ निखिलम् स्नानम् समर्पयामि ।।
इसके पश्चात् स्वच्छ वस्त्र से पौंछ लें निम्न मंत्रों का उच्चारण करते हुए कुंकुम, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, धूप-दीप सेपंचोपचार पूजन करें
.-ॐ निखिलम् कुंकुमं समर्पयामि ।
ॐ निखिलम् अक्षतान् समर्पयामि ।
ॐ निखिलम् पुष्पम् समर्पयामि ।
ॐ निखिलम् नैवेद्यम् निवेदयामि ।
ॐ निखिलम् धूपम् आम्रापयामि, दीपम्दर्शयामि ।
(धूप, दीप दिखाएं)अब तीन आचमनी जल गुरु चित्र / विग्रह / यंत्र /
पादुका परघुमाकर छोड़ दें। इसके पश्चात् गुरु माला से गुरु मंत्र की एक माला मंत्र जप करें-॥
ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः ।।
गुरु मंत्र का जप करने के पश्चात् दोनों हाथों में पीले पुष्पलेकर
निम्न मंत्र से सरस्वती का ध्यान करें-
शवासनां सर्पभूषां कीं चापि कपालकंचषकं त्रिशूलं च दधतीं च चतुष्करैः ।मुण्डमाला धरांत्र्यक्षां भजे वार्ताः सरस्वतीम् ।।
शव आसन पर विराजमान सर्पों के आभूषण धारण की हुई, शत्रुओं का नाश करने वाली, चारों हाथों में कपाल, त्रिशूलएवं मुण्ड माला धारण की हुईं, तीन नेत्रों वाली भगवती नीलसरस्वती का मैं नित्य ध्यान करता हूं।ध्यान के पश्चात् पुष्पों को सरस्वती यंत्र पर अर्पित करदें।
इसके पश्चात् साधक ‘मणिमाला’ से निम्न मंत्र की 1माला मंत्र जप करें।मन्त्र।।
मंत्र जप के बाद माला को यंत्र के ऊपर रख दें और ध्यानअवस्था में बैठकर भगवती सरस्वती से शुद्ध वाणी एवंभाग्योदय हेतु प्रार्थना करें। इसके पश्चात् सरस्वती का मूलमंत्र ‘ॐ ऐं ॐ‘ का कम से कम एक घड़ी अर्थात् 24 मिनट तक जप करते रहें। इस प्रकार यह साधना सम्पन्न होती है।साधना की पूर्णता के पश्चात् अगले दिन यंत्र एवं माला को सफेद वस्त्र में बांधकर जल में विसर्जित कर दें।
56 कलवे कौन है -56 कलवों क्या इतिहास है साधना रहस्य ph.8528057364
56 कलवे कौन है – 56 कलवों क्या इतिहास है सम्पूर्ण रहस्य
56 कलवे कौन है -56 कलवों क्या इतिहास है साधना रहस्य ph.8528057364 जय मां भगवती नमस्कार दोस्तों आप सभी का समस्या तंत्र चैनल में बहुत-बहुत स्वागत है दोस्तों आप सभी के लिए एक नई साधना एक नया रहस्य दोस्तों आप लोगों ने सुना ही होगा 56 कलवे के बारे में दोस्तों यह जो 56 कलवे होते हैं या अपने आप में यह समझ ले एक मां शक्ति है जिन लोगो के पास यह कल्वे गए वो वो खुद एक शक्ति बन गए गुरु मछिंद्रा नाथ से गुरु गोरखनाथ को मिले इस्माल योगी को मिले इस्माल योगी और गुरु गोरखनाथ से लोना चमारन को मिले पांच बावरी Panch Bawri को गोगा जाहिर वीर की मदद करने पर 56 कल्वो शक्ति प्रपात करना जिस को भी ५६ कल्वे प्राप्त हुए वो सिद्ध बन गया
56 कलवे कौन है -56 कलवों क्या इतिहास है साधना रहस्य
लोग उसके पूजा करने लगे जिसकी भी ज़िंदगी में यह होते है वो सिद्ध हो जाता है लोग उनकी साधना करते हैवह असीम शक्तिओ का मालिक बन जाता है। इतहास साक्षी है पांच बावरी Panch Bawri सिर धड़ से अलग होने पर भी लड़ते रहे।और शासक नवरंग शाह बादशाह को सबक सिख्या।
किसी की खबर मंगवानी हो ५६ कल्वे शक्ति के द्वारा किसी को पीड़ा देनी हो शमशान की शक्ति का काट करना हो वह बांधनी कोख खोलनी हो ५६ कल्वे से सब संभव है ।
हाजिरी मंगवानी हो मारण करना हो आकर्षण करना हो वशीकरण करना हो उच्चाटन करना हो सभी षट्कर्म कर देते है । इस सभी क्रियाएं 56 कलुआ के द्वारा की जा सकती है और साथ ही किसी की भी पूछा देना किसी भगत के द्वारा वह भी 56 कलवे करते हैं उस कार्य को भी 56 कलवे सिद्ध करते हैं ।
56 कलवे के द्वारा किसी भी व्यक्ति की सालों पुरानी बातें वह भगत खोल के रख सकता है। इनकी शक्ति से भूत भविष्य जान सकते है और बदल सकते है।जिन लोगों को भी जिन लोगों को नहीं मतलब जिन भी शक्तियों को 56 कलवे करने प्राप्त हुए हैं जैसे पांच बावरी को गोगा राणा को उन सभी को शराब चढ़ाई जाती है भोग लगाई जाती है
वह जो शराब है वह 56 कलवे का भोग होता है जिनके द्वारा यह कार्य लेती हैं और हर बड़ी शक्ति के साथ बहुत सारी शक्तियां चलती है जो कुछ उनके नीचे कार्य करते हैं तो कुछ उनके साथ कार्य करती हैं
जो शिवजी से उत्पन्न हुए थे दोस्तों किसी का काम करना है यह बहुत तेजी से काम करता है लेकिन इसको संभालने के लिए आपके पास कोई बड़ी शक्ति होनी चाहिए ज्यादा करके 56 कलवा मां काली के पास रहते हैं
क्योंकि यह मां काली को अपना मानते हैं और इनको काबू करने के लिए मां काली का आपके ऊपर आशीर्वाद कृपा होना चाहिए क्योंकि यह जल्द किसी का सुनते नहीं है क्योंकि इनके पास एक तेज दिव्य शक्ति रहती है जो मां काली शिवजी से प्राप्त होते रहता है और यह छोटे बालक होने की वजह से या कहीं भी आते जाते रहते हैं
जैसे किसी भी मंदिर में श्मशान में पीर के स्थान पर और कई कई जगहों पर आते जाते रहते हैं और कोई भी देवी देवता इन्हें रोकने नहीं है क्योंकि यह एक शाक्तिशाली के स्वरूप का रहता है और इसे कोई जल्द झगड़ा नहीं लेता है और देवी देवता इन्हें छोटा बालक समझ कर छोड़ देते हैं और दोस्तों इसका प्रयोग ज्यादा करके मारण उच्चाटन में किया जाता है यह एक मिथ है। यह हर तरह का काम कर सकता है साधक सिद्ध बनने के लिए करते है।
और यह खटकर्म मिंटो में कर सकता इसे मारण उच्चाटन के लिए भेजा जा सकता है और जब इसे मार उच्चाटन के लिए भेजा जाता है तो इसके साथ कोई और शक्ति साथ में भेजी जाती है जो इसको संभाल सके और इसका साधना दोस्त जल्द कोई लोग नहीं करते हैं कि आपकी या जल्द सिद्ध नहीं होता है और आप कोई शक्ति के माध्यम से इसे भूल भी लेते हैं
तो वह आपका कार्य तो करेगा लेकिन उसके साथ बड़ी शक्ति कोई रखनी पड़ेगी जैसे आपने किसी को उच्चाटन के लिए इसे भेजा और वह गया उसे यह नहीं पता चलेगा कि उच्चाटन में कितना उच्चारण करना है यह मर भी सकता है क्योंकि वह एक बालक है उसे पता नहीं चलेगा इसलिए साथ में कोई बड़ी शक्ति होनी चाहिए और बड़ी शक्ति जल्द उच्चाटन मारण नहीं करती है
दोस्तों इसकी भारतीय को आप समझे और दोस्तों जब यह नाराज होता है तो यह किसी का सुनता नहीं है इसलिए दोस्तों इसकी साधना बहुत सोच समझकर करें क्योंकि यह 56 कलुआ ज्यादा करके मीनाक्षी करता है और इसकी साधना मां काली शिवजी की आहुति देकर साधना किया जाता है
जिससे आपको किसी भी प्रकार का नुकसान ना हो और उसे लेवल पर मां काली शिवजी का कृपा होनी चाहिए आप पर और दोस्तों यह साधना ज्यादा करके रात्रि को शमशान में किया जाता है और आपके पास सुरक्षा रेखा मजबूत होना चाहिए और साधना करते समय आपके गुरु होने चाहिए जो आपको साधना करते समय आपको संभाल सके और यह आपको साधना करना है
मधुमती विद्या – साधना सबसे बड़ी आकर्षण वशीकरण की साधना ph.8528057364
मधुमती विद्या – साधना सबसे बड़ी आकर्षण वशीकरण की साधना ph.8528057364
Madhumati vidya मधुमती विद्या – साधना सबसे बड़ी आकर्षण वशीकरण की साधना ph.8528057364 आप सभी को तो आप लोगों ने देख लिया होगा अभी जो आज जो योगिनी साधना मैं दे रहा हूं इनका नाम है मधुमती योगिनी बहुत ही अच्छी योगिनी है और इनका जो साधन है वह भी बहुत अच्छी है कोई इंसान अगर चाहे तो अगर नया साधक भी कर सकता है यह साधना में आपको जो है जो नॉर्मली साधना का नियम है वह सारा मानना होता है
पहले बता दो यह योगिनी सिद्ध होने के बाद क्या क्या काम करती है सिद्ध हो जाता है माता रूप में सिद्ध होगी तो आपको जो आपको जो है छठ कर्म से लेकर तंत्र में जितने भी चीज हैं मतलब यह शक्ति कोई भी चीज मतलब ऐसा नहीं है कि नहीं कर सकती है लिमट होता है कि यह नहीं कर सकता है कर सकती ऐसा कुछ है के द्वारा तंत्र का जितना भी चीज किया जा सकता है
सही करवा सकते हो इतना पावरफुल है और मधुमती योगिनी है सुंदर है बहुत ही और इनको आपको माता रूप में सिद्ध करना है और यह आपको आपको आपको करना है पूर्णिमा के दिन से पूर्णिमा के दिन से रात को 10 या 11 बजे आपको अच्छा सा एक जगह देख लेना है
जहां पर आप जो है इसको करोगे और यह देखिए तीन चार दिन पहले से प्रेक्टिस करेगा विधि विधान का क्या करते डायरेक्टली साधना में बैठ जाते हैं उसके बाद साधना सफल नहीं होता है क्योंकि उनको लंबे समय तक बैठने की आदत ही नहीं है चैटिंग तो मैं कभी बोल रहा हूं बहुत सारे लोग को डायरेक्टली
साधन विधि – जो मनुष्य इस मन्त्र का एक वर्ष तक प्रतिदिन १०८ की संख्या में जप करता है, उसे यह विद्या सिद्ध होती है । यह विद्या समस्त ज्ञानों की प्रकाशक है । यह सुमेरू, दिशा, सागर, नदी, रत्न, पुरी, स्त्री, वनस्पति तथा पाताल स्थित सभी अलम्य द्रव्यों का आकर्षण करती है । इसके द्वारा राजा का पुर, स्थान तथा वृतान्त सभी जाना जा सकता है । साधक मनुष्य रात्रिकाल में शैया पर १०८ बार इस मन्त्र का जप करके सिद्धि को प्राप्त होता है ।
yogini sadhana – प्राचीन योगिनी साधना विधि विधान सहित ph.8528057364
yogini sadhana – प्राचीन योगिनी साधना विधि विधान सहित ph.8528057364
yogini sadhana – प्राचीन योगिनी साधना विधि विधान सहित ph.8528057364 नारी का प्रत्येक स्वरूप मधुर होता है, प्रत्येक स्वरूप की जीवन में एक निश्चित अर्थवत्ता व महत्वपूर्ण स्थान होता है। चाहे वह मां का स्वरूप हो, बहन का हो या वह पुत्री के रूप में हो चाहे वह पत्नी हो अथवा प्रेमिका या मित्र के रूप में ही क्यों न हो।
स्वरूपों में भिन्नता हो सकती है. किन्तु गहन दृष्टि से देखें, तो प्रत्येक स्वरूप ममत्व की किसी अन्तःसलिला का प्रवाह लेकर ही गतिशील होता है, आप्लावित कर देने की चेष्टा में ही निमग्न होता है, क्योंकि ऐसा करना प्रत्येक स्त्री का मूल धर्म होता है, लेकिन इन सभी स्वरूपों से कुछ पृथक, जो स्वरूप विशिष्ट ही नहीं विशिष्टतम होता है, उसी एक स्वरूप का नाम है योगिनी !
योगिनी एक नाटी देह में आबद्ध होते हुए, नारी मन की समस्त कोमल भावनाओं को एकत्र कर उपस्थित होते हुए भी अन्ततोगत्वा शक्ति का एक पुंज ही होती है, जो नाटी देह का आश्रय लेकट सम्मुख आती है, क्योंकि शक्ति का आश्रय स्थल सदैव से ही नाटी को स्वीकार किया गया है। केवल साधक ही नहीं, प्रत्येक सामान्य मनुष्य के जीवन में भावनाएं होती है, जो उसे सहज प्रवाह दे सकती हैं। जीवन से यदि भावनाओं को ही निकाल दिया जाए, तो मनुष्य व यंत्र में अंतर ही क्या रह जाएगा? किन्तु मनुष्य यंत्र नहीं हो सकता।
1 को एक पहले ही इस युग की सभ्यता’ ने मनुष्य यंत्र बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है जिसके परिणाम की अधिक व्याख्या या वर्णन की आवश्यकता नहीं है। जो सम्मुख है, वह है एक यंत्रवत् जीवन जिसमें न किसी के प्रति कोई ममत्व है, न अपनत्व, न उछाह न वेग, न प्रेम और न ही फिर इन भावनाओं के अभाव में जीवन के प्रति कोई लक्ष्य ही।
किसी भी व्यक्ति से पूछ कर देखिए, कि उसके जीवन में जो आपाधापी चल रही है या जिस आपाधापी का न केवल उसने सृजन कर लिया है वदन् जिसका वह निरन्तर पोषण भी करता जा रहा है, उसका अर्थ क्या है? क्यों वह सदैव इतना उद्विग्न बना रहता है?
इसके मूल्य पर उसे क्या प्राप्त हो जाएगा? किसी के पास भी इसका निश्चित उत्तर नहीं होगा, क्योंकि इन बातों का कोई निश्चित उत्तर हो भी नहीं सकता। भावनाएं जो जीवन की सर्वोच्च उपलब्धि हो सकती हैं, जब उसी का अभाव हो गया, उसी का हनन् करके कुछ निर्मित करने की चेष्टा की, तो भूल तो वहीं से प्रारम्भ ही हो गयी।
और इसी बिन्दु पर आकर योगिनी साधना का महत्व स्वयमेव स्पष्ट हो जाता है, क्योंकि योगिनी साधना का अर्थ ही है- भावनाओं की साधना, अपनत्व व ममत्व की साधना, जीवन में जो कुछ विस्मृत हो चला हो, जो कुछ टूट गया हो या जो कुछ रिक्त रह गय हो, उन सभी को अर्जित कर लेने या पुनः प्राप्त कर लेने की साधना यह तो भावनाओं का ही बल होता है कि जीवन में कोई भी व्यक्ति वह सब कुछ कर जाता है, जो अन्यथा उसके सहज बल से सम्भव नहीं था और यहां यह ध्यान रखने की बात है, कि बल का तात्पर्य शरीरिक बल से नहीं होता है।
यह तो मानसिक बल होता है, जो एक नर को पुरुष बनने की ओर तथा पुरुष को पुरुषोत्तम बनने की ओर उत्प्रेरित करता है और इसके मूल में होती हैं वे भावनाएं, जिनके मूल में होता है प्रेम! (यह कहना शायद पुनरोक्ति हो। जाएगा कि प्रेम का आधार होती है स्त्री) जो अपनत्व का भाव पत्नी के रूप में अधिक स्पष्टता से सामने आता है, प्रेमिका के रूप में वही भाव इस रूप में किंचित परिवर्तित हो जाता है, कि वह अपने प्रिय को सभी रूपों में केवल श्रेष्ठ ही नहीं श्रेष्ठतम देखना चाहती है. क्योंकि सामाजिक शिष्टाचार के अन्तर्गत एक प्रेमिका से अधिक पत्नी को अपनी मनोभावनाएं प्रकट करने की छूट होती है।
अंतर केवल सामाजिक बंधनों का ही होता है, अन्तर्मन का नहीं और यही जीवन में सर्वाधिक संतोष और संतोष से भी कहीं अधिक एक अनोखी सौ तृप्ति का कारण बन जाता है। कोई मेरे लिए भी चिंतायुक्त बना रहता है, कोई |
कहे-अनकहे रूप में मुझ पर अपना प्रेम बरसाता ही रहता है, कोई मेरे बारे में भी सोचता रहता है और सबसे बड़ी बात तो यह कि कोई मेरे सारे अस्तित्व पर अपना अधिकार मानता है होती हैं
ये तो जीवन की बड़ी अनोखी सी आश्वस्तिया जिनके ताने-बाने में बुना जीवन ही सही रूप में गतिशील होता हुआ पूर्णता की ओर अग्रसर हो सकता है। क्योंकि ऐसी आश्वस्ति मिल जाने का अर्थ होता है. एक प्रकार का सुरक्षा बोध मिल जाना और भावनाओं के आधार पर मिली आश्वस्ति ही वास्तविक सुरक्षा बोध दे सकती है अन्यथा व्यक्ति इसी को प्राप्त करने की चेष्टा में पता नहीं कहां-कहां भटक आता है।
जीवन एक निरपेक्ष घटना नहीं होती है। प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह किसी भी पद प्रतिष्ठा अथवा आर्थिक स्थिति का क्यों न हो. अपने जीवन का ताना-बाना किसी व्यक्ति या और अधिक विशद रूप में कहें तो किसी भावना से जोड़ कर ही बुनना चाहता है। सामान्यतयः व्यक्ति अपने जीवन को या अपनी अस्मिता को अपने परिवार से जोड़ कर जीवित रखना चाहता है। इसमें कोई अनुचित बात भी नहीं है।
परिवार जैसी सामाजिक संस्था के निर्माण के पीछे उद्देश्य ही यही रहा है, किन्तु निरन्तर बढ़ते हुए आर्थिक एवं अन्यान्य दबावों के बाद क्या आज यह सम्भव रह गया है. कि व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों से कुछ अलग हट कर अपने जीवन को आहलाद व मधुरता देने वाले क्षणों के विषय में चिंतन तक कर सके ?
जीवन में ऐसी स्थिति आ जाने पर जिस प्रवाह की आवश्यकता होती है, वह किसी गणित की अपेक्षा केवल साधनाओं से ही उपलब्ध हो सकती है, क्योंकि प्रत्येक साधना स्वयं में शक्ति का एक-एक अजरा प्रवाह ही तो होती है। और यही तथ्य योगिनी साधना के विषय में भी पूर्णतयः सत्य है।
आज समाज में योगिनी शब्द को लेकर क्या धारणा है, इसको कदाचित विस्तार से बताने की आवश्यकता नहीं अनेक व्यक्तियों की दृष्टि में भैरवी व योगिनी के मध्य भी कोई भेद नहीं होता। यूं भैरवी की प्रस्तुति ही कहा प्रासंगिक रूप में सम्भव हो पायी है?
किन्तु योगिनी इतना हल्का शब्द नहीं होता। योगिनी स्वयं में शक्ति तत्व की एक विशिष्ट प्रस्तुति व स्वरूप होती है, जिसकी साधना सम्पन्न करना प्राण तत्व को संचेतन कटने का एक उपाय होता है। यह सत्य है कि योगिनी की प्रस्तुति एक प्रेमिका रूप में होती है।
किन्तु यह आवश्यक नहीं कि प्रेमिका शब्द से सदैव वासनात्मक अर्थ ही अभिप्रेत हो क्या प्रेमिका शब्द से एक महिला मित्र का अर्थ अभिप्रेत नहीं हो सकता है?
वस्तुत योगिनी का वर्णन प्रेमिका रूप में होने के जो है वह है कि भारतीय समाज इतना की मान्यताओं में महिला मित्र की कभी कोई ही नहीं रही. लेकिन जो भावगत है वह सदैव से यही रहा है। साथ ही प्रेमिका का तात्पर्य होता है, ऐसी स्त्री, जो अपने प्रिय पर अपना सावरकर देने में ही अपना सुख मन हो और न केवल विलक्षण सौन्दर्य के मेंट इस रूप में भी योगिनी की कोई भी उभी करने में असमर्थ ही होगी।
जीवन को भावनाओं के आधार पर पुनः निर्मित करने व योगिनी के रूप में एक वास्तविक प्रेमिका प्राप्त करने के को घटित होने वाली ‘योगिनी एकादशी के अवसर पर एक विशिष्ट साधना पद्धति प्रस्तुत की जा रही है, जिसे सकर वे अपने भावनाशून्य हो रहे जीवन में हास्य, विनोद व मधुरता जैसे कुछ नये पृष्ठ जोड़ पाने में समर्थ हो सकते हैं।
योगिनी साधना विधि
इस साधना में प्रवृत्त होने वाले साधकों के लिए आवश्यक है कि वे ताम्रपत्र पर अंकित ‘योगिनी यंत्र’ व सफेद हकीक की माता को साधनात्मक उपकरण के रूप में प्राप्त कर लें। यह साधना उपरोक्त दिवस (योगिनी एकादशी) के अतिरिक्त किसी भी शुक्रवार को सम्पन्न की जा सकती है।
साधना में वस्त्र आदि का रंग श्वेत होना चाहिए तथा दिशा उत्तर मुख होनी चाहिए। इस साधना में किसी विशेष विधि-विधान को सम्पन्न करने की आवश्यकता नहीं है। यंत्र व माला का सामान्य पूजन करने पश्चात् दत्तचित्त भाव से निम्न मंत्र की ग्यारह माला मंत्र जप सम्पन्न करें- खिलता हुआ गोरा रंग भरा भरा सा पुष्ट मांसल बदन, अंडाकार चेहरा, खंजन पक्षी की भांति नयन और उन नयनों की एक-एक चपलता में झिलमिलाते प्रेम के कई कई सदिश योगिनी तो स्वयं में एक उपमा है, उसकी उपमा दें भी तो किससे दें विक प्रेमिका अवसर पर ही है,
यह एक दिवसीय साधना है तथा साधना सम्पन्न करने के दूसरे दिन यंत्र ६ माला को किसी स्वच्छ जलाशय में या निर्जन स्थान पर विसर्जित कर देना चाहिए। जैसा कि प्रारम्भ में कहा, योगिनी शक्ति तत्व का ही एक विशिष्ट प्रस्तुतिकरण होती है, अतः यह स्वाभाविक ही है, कि इसे मनोयोग पूर्वक सम्पन्न करने वाले साधक को जीवन के प्रत्येक पक्ष में अनुकूलता मिलने की क्रिया स्वयमेव |
प्रारम्भ हो जाए, चाहे वह धन सम्बन्धी पक्ष हो, स्वास्थ्य की समस्या हो सौन्दर्य प्राप्ति की कामना हो या गृहस्थ जीवन के किसी भी पक्ष को स्पर्श करता कोई भी पक्ष क्यों न हो। प्रस्तुत साधना की एक अन्य गुहा विशेषता यह साधना भी है। अनुभवों को भी है कि यह प्रबल पौरुष प्राप्ति की साधना सम्पन्न करने के उपरान्त अपने गोपनीय ही रखें।