Author: Rodhar nath

मैं रुद्र नाथ हूँ — एक साधक, एक नाथ योगी। मैंने अपने जीवन को तंत्र साधना और योग को समर्पित किया है। मेरा ज्ञान न तो किताबी है, न ही केवल शाब्दिक यह वह ज्ञान है जिसे मैंने संतों, तांत्रिकों और अनुभवी साधकों के सान्निध्य में रहकर स्वयं सीखा है और अनुभव किया है।मैंने तंत्र विद्या पर गहन शोध किया है, पर यह शोध किसी पुस्तकालय में बैठकर नहीं, बल्कि साधना की अग्नि में तपकर, जीवन के प्रत्येक क्षण में उसे जीकर प्राप्त किया है। जो भी सीखा, वह आत्मा की गहराइयों में उतरकर, आंतरिक अनुभूतियों से प्राप्त किया।मेरा उद्देश्य केवल आत्मकल्याण नहीं, अपितु उस दिव्य ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाना है, जिससे मनुष्य अपने जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझ सके और आत्मशक्ति को जागृत कर सके।यह मंच उसी यात्रा का एक पड़ाव है — जहाँ आप और हम साथ चलें, अनुभव करें, और उस अनंत चेतना से जुड़ें, जो हमारे भीतर है ।Rodhar nath https://gurumantrasadhna.com/rudra-nath/

भूत कैद करने का सिद्ध मंत्र इस से भूत होगा आपकी मुठी में ph. 85280-57364

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भूत कैद करने का सिद्ध मंत्र इस से भूत होगा आपकी मुठी में bhoot ko kaid karne ka mantra

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भूत कैद करने का सिद्ध मंत्र इस से भूत होगा आपकी मुठी में bhoot ko kaid karne ka mantra
भूत कैद करने का सिद्ध मंत्र इस से भूत होगा आपकी मुठी में bhoot ko kaid karne ka mantra

 

bhoot ko kaid karne ka mantra भूत कैद करने का सिद्ध मंत्र इस से भूत होगा आपकी मुठी में और आपके सब काम करेगा यह सिद्ध मंत्र है

bhoot ko kaid karne ka mantra भूत कैद करने का सिद्ध मंत्र

बंध बंध शिव बंध शिव बंध शिव बंध शिव बंध शिव बंध शिव बंध शिव बंध शिव बंध शिव ।

शिवलिंग, तांबे या पीतल की परात, बेलपत्र, धतूरे का फल, अकवन (आक) का फूल, अड़हुल का फूल, कनेर का फूल, भांग की पत्तियाँ (सूखी या हरी), दूध एक लीटर, आसन रंग का कम्बल, उड़द और शुद्ध जल संकलित करें। किसी एकांत कमरे में दक्षिण की ओर मुंह करके आसन विछाकर बैठ जाएं। सामने परात रखकर शिवलिंग स्थापित करें और मन्त्र का जप करते हुए उस पर उड़द, फूल एवं पत्तियाँ एक-एक करके चढ़ाएं। १२१ बार मन्त्र का जप करें। तत्पश्चात् शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। इसके बाद मन्त्रजप करके दूध चढ़ाएं। परात की सामग्री को जल एवं दूध के साथ उबालें। जब इसकी चाशनी खीर की तरह बन जाए, तो उसे किसी पीपल के पेड़ के नीचे जड़ में डाल दें। यह क्रिया २१ दिनों तक करे ।

 

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त्रिकालदर्शी सात्विक – कर्ण पिशाचिनी सिद्धि मंत्र ,साधना karna pishachini siddhi mantra ph.85280 57364

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त्रिकालदर्शी सात्विक - कर्ण पिशाचिनी सिद्धि मंत्र ,साधना karna pishachini siddhi mantra ph.85280 57364

त्रिकालदर्शी सात्विक – कर्ण पिशाचिनी सिद्धि मंत्र ,साधना karna pishachini siddh mantra ph.85280 57364

त्रिकालदर्शी सात्विक - कर्ण पिशाचिनी सिद्धि मंत्र ,साधना karna pishachini siddhi mantra ph.85280 57364
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त्रिकालदर्शी सात्विक – कर्ण पिशाचिनी सिद्धि मंत्र ,साधना karna pishachini siddh mantra ph.85280 57364  इस साधना से  आप को निश्चित ही त्रिकाल ज्ञान हासिल होगा ,आप इस से त्रिकालदर्शी बन सकते है। यह साधना सात्विक और सौम्य  है इस साधना से त्रिकाल ज्ञान भूत भविष्य वर्तमान का ज्ञान साधक को हो जाता है। 

 

गुप्त त्रिकालदर्शी देवी  कर्ण पिशाचिनी सिद्धि मंत्र karna pishachini siddh mantra

 

ॐ लिङ्ग सर्वनाम शक्ति भगती कर्ण पिशाचनी चण्ड-रूपी सच सच मम वचन दे स्वाहा।

कर्ण पिशाचिनी सिद्धि मंत्र – साधना विधि   karna pishachini siddh mantra – sadhna vidhi

पान, सुपारी, लौंग, सिन्दूर, नारियल, अगर ज्योति, लाल वस्त्र, जल का लोटा, लाल चन्दन की माला ।  एक लाख । स्थान एकान्त कमरा एक बटुक सहित कुमारी भोजन । तर्पण- मार्जन |

नवरात्र । यदि ग्रहणकाल में प्रारम्भ करें तो स्पर्श से पन्द्रह मिनट पूर्व से प्रारम्भ करें और मोक्ष के पन्द्रह मिनट बाद तक करें। ग्रहण में नदी के किनारे या श्मशान में जप करें।

सभी सामग्री अपने साथ रक्खें। सफेद चन्दन चूरा, लाल चन्दन चूरा, लोहबान, गुग्गुल प्रत्येक ५-५ छटाँक, कपूर ५ पॅकेट, लौंग १० ग्राम, अगर ५० ग्राम, तगर ५० ग्राम, केशर ढ़ाई ग्राम, कस्तूरी १ ग्राम, बादाम ५० ग्राम, काजू ५० ग्राम, अखरोट ५० ग्राम, गोला ५० ग्राम छुहारे ५० ग्राम, मिसरी १ कुज्जा लें- इन सबको कूटकर मिला लें।

इसमें घी भी मिला लें। फिर खीर बनाए चावल कम दूध ज्यादा रक्खें खीर में ५ मेवे डालें देशी घी, शहद, चीनी-त्रिमधु डालें।

नवरात्र में भूत-शुद्धि, स्थान- शुद्धि, गुरु-स्मरण, गणेश पूजा, नवग्रह पूजा से पूर्व एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछायें उस पर ताँबे का लोटा या कलश स्थापित करें। कलश पर नारियल रक्खें लोटे या कलश के चारो ओर पान, सुपारी, सिन्दूर, १२ लड्डू इत्यादि वस्तुएँ रक्खें। कलशपूजन करें। साष्टाङ्ग प्रणाम करें। फिर कन्धे पर लाल परना रखकर जप करें।

जप पूर्ण होने पर पहले सामग्री से फिर खीर से तथा अन्त में त्रिमधु से हवन करें। पहले क्षमा प्रार्थना कर साक्षात् देवी रूपी कलश को लेटकर दण्डवत् करें। मन्त्र का चमत्कार अनुष्ठान करने से देवी कण में आकर भूत भविष्य वर्तमान की जानकारी प्रदान करेगी है। अनुष्ठान के दिनों में ब्रह्मचर्य, एकान्त वास करें। झूठ न बोलें।

https://www.youtube.com/watch?v=ag6UITU621I&t=2053s&pp=ygUba2FybmEgcGlzaGFjaGluaSBmZWFyIGZpbGVz

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दिव्य शक्ति प्राप्त करने का मंत्र -रक्षपाल देवता साधना Divya Shakti Prapt Karne Ka Mantra ph.85280 57364

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दिव्य शक्ति प्राप्त करने का मंत्र -रक्षपाल देवता साधना Divya Shakti Prapt Karne Ka Mantra

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दिव्य शक्ति प्राप्त करने का मंत्र -रक्षपाल देवता साधना Divya Shakti Prapt Karne Ka Mantra
दिव्य शक्ति प्राप्त करने का मंत्र -रक्षपाल देवता साधना Divya Shakti Prapt Karne Ka Mantra

दिव्य शक्ति प्राप्त करने का मंत्र -रक्षपाल देवता साधना यह साधना सौम्य  और सात्विक है इस साधना से रक्षपाल देवतासाधक को दिव्य शक्ति प्रदान करते है और मनचाहा वरदान भी प्रदान करते है 

दिव्य शक्ति प्राप्त करने का मंत्र Divya Shakti Prapt Karne Ka Mantra

माता भेखलिया दे ढकें जन्म लेया । ताम्ब कुण्डे सिङ्ग लेया, बारह माह खेल खिलाया। अज वडेरा, कल वडेरा, पत्थाया पत्यया । घुंघयां सरलियां जोतां गांदा। ढाकें तेरी रम्भी विराजे, सिरें तेरें लम्बा टोप विराजे । पिट्ठी तेरिया किरलू । हत्थें तेरें नरेलू सोहन्दा, चिट्ठा चोला लम्बा डोरा । मण्डिया- दा, मण्डियाल कुल्लेए-दा कोली चम्वे-दा, चम्वलाय मणि महेशे दा, चेला सिमरिया ओखिया वेला दर्शन देने गुरु मेरे । मेहरा दिया घडिया औणा । सदेयां औणा भेजेयां जाणा, मैं बार-बार गुलाम तेरा ।

Divya Shakti Prapt Karne Ka Mantra दिव्य शक्ति प्राप्त करने का मंत्र साधना विधि

जल, गन्ध, अक्षत, फूल, धूप, ज्योति, नैवेद्य के रूप में हलुवा और हाथ से काता हुआ सूत – यह आठो सामग्री लेकर रात्रि एक प्रहर बाद (सबेरे तीन और चार बजे के बीच) पीपल के वृक्ष के नीचे जाए। पीपल के चारो तरफ प्रदक्षिणा कर दे। जनेऊ के रूप में तीन धागे पीपल के चारो ओर बाँधे; पत्तों पर पूजन सामग्री रखे। धूप- ज्योति जलाये फिर गुरु व गणेशजी का सुमिरन करके पीपल के नीचे एक माला जप करे।

जप के बाद ज्योति लेकर घर वापस आ जाय और अपने पूजन कक्ष में पूजनोपरान्त फिर एक माला जप करे। रविवार के दिन सुबह-शाम घर पर दो माला जप करें। ४१ दिन के भीतर ही रक्षपाल प्रकट होकर वर प्रदान करते हैं।

पराए परुष को पत्नी से दूर करने का मंत्र पराया परुष होगा दूर ph. 85280-57364

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पराए परुष को पत्नी से दूर करने का मंत्र पराया परुष होगा दूर

पराए परुष को पत्नी से दूर करने का मंत्र पराया परुष होगा दूर ph. 85280-57364

ॐ अंजुनी पुत्र पवनसुत हनुमान वीर वैताल साथ लावे मेरी सौत । (अमुक) से पति को छुड़ावे उच्चाटन करे करावे मुझे वेग पति मिले। मेरा कारज सिद्ध न करे तो राजा राम की दुहाई |

सामग्री- जलपात्र, सियारसिंगी, दो हकीक पत्थर हकीक माला । समय — दिन या रात का कोई भी समय आसन । दिशा — पश्चिम दिशा । जपसंख्या – पाँच हजार तेल का दीपक माला- आसन – नीले रंग का सूती अवधि — जो भी सम्भव हो  करना चाहिए।

फिर सियार के पहले पाँच हजार मन्त्रजप करके इस मन्त्र को सिद्ध सिंगी के सामने दो हकीक पत्थर रख दें। एक पर उस स्त्री का नाम लिखें, दूसरे हकीक पत्थर पर नाम न लिखें, अपितु यह लिखें कि अमुक स्त्री से जिस पुरुष भी सम्बन्ध हो, वह विच्छेद हो जाए।

फिर दोनों हकीक पत्थर सियारसिंगी के सामने रखकर हकीक माला से पाँच हजार जप करें। मन्त्रजप पूरा होने पर सियारसिंगी के साथ उस हकीक पत्थर को, जिस पर स्त्री का नाम अंकित है, लाल कपड़े में बांधकर  संदूक में रख दें और वह दूसरा हकीक पत्थर जमीन में गाड़ दें।

पराए परुष को पत्नी से दूर करने का मंत्र पराया परुष होगा दूर
पराए परुष को पत्नी से दूर करने का मंत्र पराया परुष होगा दूर

इस प्रकार करने से उस स्त्री के अन्य जितने भी पुरुषों से सम्बन्ध होंगे, वे सम्बन्ध खत्म हो जायेंगे और उनमें परस्पर लड़ाई-झगड़ा होगा। यह प्रयोग पति कर सकता है या प्रेमी कर सकता है। जिसे यह विश्वास हो कि मेरी प्रेमिका के सम्बन्ध अन्य पुरुषों से हैं।

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गुरु गोरखनाथ का भूत भविष्य वर्तमान मंत्र – नाथ पंथ की साधना guru gorakhnath ka bhoot bhavishya vartman mantra ph. 85280-57364

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गुरु गोरखनाथ का भूत भविष्य वर्तमान मंत्र

गुरु गोरखनाथ का भूत भविष्य वर्तमान मंत्र – नाथ पंथ की साधना guru gorakhnath ka bhoot bhavishya vartman mantra  ph. 85280 57364

 

गुरु गोरखनाथ का भूत भविष्य वर्तमान मंत्र
गुरु गोरखनाथ का भूत भविष्य वर्तमान मंत्र

 

guru gorakhnath ka bhoot bhavishya vartman mantra गुरु गोरखनाथ का भूत भविष्य वर्तमान मंत्र बताइए यह बहुत समय से साधक जानो की डिमांड थी। आज आप को प्राचीन नाथ पंथ का मंत्र की जानकारी देने वाला हु इस गुरु गोरखनाथ मंत्र से भूत भविष्य वर्तमान मंत्र से आप को त्रिकाल ज्ञान की प्रपात होगा। आप निश्चित ही त्रिकाल ज्ञान को हासिल करोगे और आप को इस की अच्छी जानकारी हो जाएगी यह नाथ पंथ का प्राचीन मंत्र है 

गुरु गोरखनाथ का भूत भविष्य वर्तमान मंत्र guru gorakhnath ka bhoot bhavishya vartman mantra  भूत भविष्य वर्तमान शाबर मंत्र 

ॐ नमो वीर हनुमान हाथ बताशा मुख में पानी आओ हनुमान बताओ
हाल, कालरथी का चला अंजनी का जालर (अमुक) मनुज का पीछा
आगा भविष्य सब ऊंचानीचा पाप पुण्य सेब चोखा चोखा तुरत ही
बताओ न बताओ तो माता अंजनी का दूध हराम गुरु गोरख
उचारे, अंजनी का जाया हनुमान म्हारो काज सवारे मेरी भक्ति गुरु की
शक्ति बले मन्त्र ईश्वरो वाचा

guru gorakhnath ka bhoot bhavishya vartman mantra गुरु गोरखनाथ का भूत भविष्य वर्तमान मंत्र विधि विधान 

वैसे यह मन्त्र पर्व काल ग्रहण काल या दीपावली होली, नवरात मे एक हजार आठ संख्या में सिद्ध हो जाता है मगर उसके अलावा ४१ दिन में सवा लाख जाप पूर्ण करने का विधान है साधना के अंतिम दिन दशांश का हवन जरूर करे और श्रीफल अग्नि में भेंट दें भोग भी लगाए मन्त्र सिद्ध हो जाएगा जब कभी इस मेन्त्र का प्रयोग करना हो तो व्यक्ति को सामने बिठा कर गूगल की धूनी करे और इस मन्त्र का २१,या ४१ बार जाप मन मे करे और मन्त्र अमुक की जगह उस व्यक्ति का नाम ले कर ध्यान करे आपको उस व्यक्ति के बारे में जो जानना हो वो में उसे बता सकते हो इस प्रयोग को जन कल्याण के लिए प्रयोग में लाये । जय अलख जय गिरनारी । आदेश ।

 

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kamekshi apsara sadhana कामाक्षी अप्सरा साधना -सबसे जल्दी सिद्ध होने अप्सरा ph. 85280-57364

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kamekshi apsara sadhana कामाक्षी अप्सरा साधना - सबसे जल्दी सिद्ध होने अप्सरा

kamekshi apsara sadhana कामाक्षी अप्सरा साधना – सबसे जल्दी सिद्ध होने अप्सरा ph. 85280 57364

 

kamekshi apsara sadhana कामाक्षी अप्सरा साधना - सबसे जल्दी सिद्ध होने अप्सरा
kamekshi apsara sadhana कामाक्षी अप्सरा साधना – सबसे जल्दी सिद्ध होने अप्सरा

kamekshi apsara sadhana कामाक्षी अप्सरा साधना – सबसे जल्दी सिद्ध होने अप्सरा  गुरु मंत्र साधना में आपका हार्दिक स्वागत है। आज मैं एक ऐसे अप्सरा की जानकारी देना वाला हु जो अप्सरा आपकी ज़िंदगी बदल सकती है।  इस अप्सरा को सिद्ध करने के बाद आपकी ज़िंदगी आपार धन दौलत मान सामान  की कोई कमी नहीं होगी आपको आपार धन दौलत सुख समृद्धि की कोई  कमी नहीं रहेगी।

इस अप्सरा को सिद्ध करने के पश्चात् आप को कभी भी वशीकरण की साधना या किसी भी प्रकार के टोटके को करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्युकी यह अप्सरा कामदेव की अप्सरा है। कामदेव वशीकरण आकर्षण देवता  है। 

इस साधना को करने के पश्चात् आप के भीतर आक्रषण  की शक्ति प्रपात होगी। जिस के बाद आप की और सब लोग अकृषित होंगे जो लोग आपको पसंद नहीं करते है आप को करने लगेंगे। आप की वाणी और शरीर के भीतर कामुक और वशीकरण शक्ति प्राप्त हो जाएगी।

फिर आप किसी को भी जो काम बोलोगे आप के काम को मना  नहीं कर सकता चाहे वो व्यक्ति कितना मंत्री राज मंत्री कोई भी हो जहां जाओगे सब लोग आप के अधीन हो जाएगे। आप किसी से भी इस साधना से धन लाभ ले सकते है।

अगर आप किसी सरकारी नौकरी की तयारी कर रहे है नहीं लग रही है। तो यह साधना करने  के पश्चात् लग जाएगी अगर दुकान पर ग्राहक नहीं आ रहे है।  काम डप पड़ा काम निश्चित ही चलेगा बहुत ग्राहक आएगे आप संभाल नहीं पाएँगे।

काम का संबध मूलाधार चक्र से है जब मूलाधार चक्र संबध धन दौलत से है जब यह चक्र     ब्लॉक हो जाता है तब आप के  धन ऐश्वर्य के सब रास्ते  बंद  हो जाते है। जब यह अप्सरा की साधना करते हो तो आपके धन ऐश्वर्य के रास्ते अपने आप खुल जाते है।

अकस्मात धन प्राप्त होता है जिसे के लोटरी सट्टे गाड़ा धन शेयर  मार्किट अदि से अचानक लाभ हो सकता है ,या पुरानी कबाज़ी  ज़मीन प्राप्त हो सकती है या अचानक से  सराकरी  प्राप्त हो सकती है । यह अप्सरा आपको भूत भविष्य का ज्ञान देती है।

इस के इलावा जैसे को लड़का लड़की से प्रेम करता है पर दूसरे और से प्रेम नहीं है कहने जका मतलब एक तरफा प्रेम है तो इस साधना के पश्चात् कोई  भी लड़की या लड़का मना नहीं करेगा। अगर किसी व्यक्ति शादी नहीं हो रही है तो, इस साधना के पश्चात् शादी आपकी मनचाही जगह पर होगी। दोने परिवारों की सहमती के साथ होगी।

  बहुत सारे  लोग फ़ोन करते है उनका पति या पत्नी का किसी और के साथ चक्र चल रहा है तो यह साधना के पश्चात पति पत्नी मैं आपसी प्रेम बढ़ेगा। अगर किसी व्यक्ति के शरीर में कोइ रोग है तो इस साधना के पश्चात् समापत हो जाएगा और उसका शरीर सुन्दर और आकर्षक हो जाएगा।

 

कामाक्षी अप्सरा साधना मंत्र – सबसे जल्दी सिद्ध होने अप्सरा 

ॐ नमो काम कामेच्छायै स्वाहा

इस मंत्र का जप २१ दिन २१ माला करे और नित्य इस अप्सरा की पूजा  करे और अप्सरा को भोग में सफेद मिठाई रखे। इस साधना को करने के लिए आपको आपको अप्सरा यन्त्र माला की जरूरत होगी 

 

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माँ तारा कैंसर से मुक्ति साधना maa tar

रेकी हीलिंग करने और करवाने के ख़तरे Risks of doing and getting Reiki healing done

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शत्रु नाशक टोटके लाल किताब – निश्चित ही शत्रु पराजित होगा ph. 85280-57364

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शत्रु नाशक टोटके लाल किताब - निश्चित ही शत्रु पराजित होगा

शत्रु नाशक टोटके लाल किताब – निश्चित ही शत्रु पराजित होगा ph. 85280-57364

शत्रु नाशक टोटके लाल किताब - निश्चित ही शत्रु पराजित होगा
शत्रु नाशक टोटके लाल किताब – निश्चित ही शत्रु पराजित होगा

 

शत्रु नाशक टोटके लाल किताब – निश्चित ही शत्रु पराजित होगा  shatru nashak totke lal kitab नमस्कार मित्रों गुरु मंत्र साधना  के माध्यम से लाला किताब के टोटके  लेकर आता हूं ,आज का यह टोटका है शत्रु नाशक टोटका है क्योंकि शत्रु चाहे जितना शक्तिशाली हो इस टोटके के सामने टिक नहीं सकता। आपके जीवन में शत्रु आपको परेशान करने की कोशिश शत्रु आपको चाय रहा है, कि आप परेशान हो जाएगा  जीवन में बड़ा ही बाधा डाल रहा है ,आपके विकास को रोकना चाहता है। 

  • त्रु नाशक टोटके लाल किताब
  • शत्रु नाश के लिए उपाय
  • शत्रु नाशक उपाय

आप उसके सामान बलवान नहीं है ,तब भी डरने  की जरूरत नहीं है।  यह छोटे छोटे टोटके बड़े से बड़े शत्रु का शमन कर सकते हैं। शत्रु बाधा से पीड़ित है जीवन में शत्रुओं ने आपको नाच नचा के रखा है। कोई  रास्ता नहीं नजर आ रहा है तो एक रास्ता मैं देता हूं। जीवन में शत्रु बाधा से जीवन की परेशानी दूर हो जाए शत्रु आपके भिड़ गया है। और आप शत्रु के संकट है आपका एक लक्ष्य रह गया है। आप चिंता मत करें  इस टोटके से पराजित हो सकता है पर करना क्या है। 

कुछ टोटके मैं आपको देता हूं और यह टोटके कम से कम जरूर करे।  और चारों टोटके बेहद असरदार है बड़े से बड़े शत्रु का शमन  करने में सक्षम है करना क्या है। 

1 शत्रु नाशक टोटके लाल किताब – शत्रु नाश के लिए उपाय

shatru nashak totke lal kitab पहले टोटका रविवार के दिन से दिन ये टोटका करना है। रविवार के दिन चमेली के पेड़ से चमेली का जो फूल होता है।  उसे फूल की जड़ अर्थात पेड़ की जड़ आप ले आए और एक तांबे की तबीयत या चांदी की ताबीज में ,उसे जड़ को डालकर के रश्मि रंग का धागा लेकर के रविवार के दिन ही पूजा पाठ करके धूप दिखा करके ,उसे चमेली की जड़ को अपने धरण करले चमत्कार देखेंगे की शत्रु अपने आप को किसी और शत्रु से भीड़ जाएगा। आपका कार्य कोई और उसके ऊपर निश्चित रूप से करेगा वह निश्चित रूप से इस चमेली की जड़ में इतनी ताकत है शत्रु का शमन हो सकता है। 

2 शत्रु नाशक टोटके लाल किताब – शत्रु नाश के लिए उपाय

shatru nashak totke lal kitab दूसरा प्रयोग  सिद्धिमांज की डोरी कमर में रविवार के दिन आप धारण करें रविवार को सुबह सूर्योदय से लेकर शाम सूर्यास्त मूंज की डोरी अपने कमर में चुपके से बांधे और उसे शत्रु का नाम सारे दिन में कम से कम 11 21 51 बार ले तो निश्चित रूप से देख लीजिएगा।  उसे वह शत्रु इस मांज की डोर में बंद जाएगा और आपके ऊपर प्रहार नहीं कर पाएगा आपके जीवन से   खत्म हो जाएगा पराजित हो जाएगा।

3 शत्रु नाशक टोटके लाल किताब – शत्रु नाश के लिए उपाय

 shatru nashak totke lal kitab नंबर तीन लाल कनेर यह जॉइन 90 दिन का सिद्धांत है।  अर्थात 90 दिन का या 91 दिन भी कर सकते हैं। इसमें करना क्या है लाल कनेर के पुष्प आप 11 पुष्प 21 पुष्प लेकर के आए 21 51 लेकिन ध्यान रहे। आप के पीछे राजतंत्र का राज मंत्री क्यों न पीछा  लगा हो  आपके पीछे जो है बहुत महत्वपूर्ण सिद्धांत है विघ्न विनायक भगवान गणपति आपके जीवन से शत्रु को हटा देंगे करना क्या है। 

लाल कनेर के पुष्प हो सके तो वन डे दिन 1 दिन 21 दिन 90 दिन भी एक सिद्धांत बना ले   ओम गणेशया नमः  लगातार लाल कनेर पुष्प चढ़ाए और निवेदन करें कि प्रभु यह लाल कनेर मैं आपको इसलिए अर्पण कर रहा हूं।  कि मेरे जीवन में जो यह प्रबल शत्रु लगा हुआ है।  इससे मुझे मुक्ति दिलाए तू क्यों कि जब जीवन में विघ्न होता है तो शत्रुघ्न करता है जब जीवन में विघ्न रहेगा ही नहीं तो शत्रु आपके जीवन से हट जाएगा गणपति आपके जीवन से शत्रु हटा देंगे। 

4 शत्रु नाशक टोटके लाल किताब – शत्रु नाश के लिए उपाय

shatru nashak totke lal kitab एक रामबाण उपचार देता हूं नंबर 4  माता धूमावती  शत्रु नाशनी होती शनिवार के दिन माता की आराधना करें लेकिन इसमें विशेष क्या है। किसी योग्य गुरु की देख रेख  में करे  क्योंकि धूमावती माता आपके शत्रु के को स्तंभ कर देती है आपका पीछा तो धूमावती साधना  शनिवार के दिन करे और गुरु आज्ञा से शत्रु का शमन निश्चित होगा। 

5 शत्रु नाशक टोटके लाल किताब – शत्रु नाश के लिए उपाय

shatru nashak totke lal kitab पांचवा सिद्धांत है  शनिवार के दिन से शुरू करें 43 डेज जिसमें एक  सिक्का ले जिसके  बीच में छेद हो गंदे नाले में अपने शत्रु का नाम लेकर के 40 43 डेज आप उसे सिक्के को फेंकने का प्रयास करें ४३ दिन के बाद शत्रु आपके चरण गिर जाएगा।  इसको आप देख लीजिएगा पंच महायोग आपके जीवन में शत्रुघ्न योग बना देंगे। 

आपके जीवन से शत्रु को निश्चित रूप से निकाल के दर फेंकने में समर्थ  है। आप अगर शत्रु बाधा से योग सिद्धांतों को करके देखिए विश्वास मानिए गए ,कि आपके जीवन में शत्रु रहेंगे ही नहीं जिनके जीवन में शत्रु नहीं होंगे।  उनके जीवन में विकास होगा क्योंकि झगड़ा झांझर मुकदमा यह मनुष्य को पीछे ले जाते हैं ,तो इसे आप पीछा छुड़ाकर के अपने जीवन में हर प्रकार की खुशियां लाने का प्रभाव करें। बहुत बहुत धन्यवाद 

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अप्सरा साधना के नुकसान Disadvantages of Apsara Sadhana

गुप्त शत्रु की पहचान कैसे करें: सुरक्षित रहने के लिए अच्छे तरीके How to Spot a Secret Enemy: Ways to Stay Safe

 

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फोटो से शत्रु नाश होगा निश्चित enemy destroyed by photo

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फोटो से शत्रु नाश होगा निश्चित enemy destroyed by photo
फोटो से शत्रु नाश होगा निश्चित enemy destroyed by photo

फोटो से शत्रु नाश होगा निश्चित इस मंत्र से शत्रु का नाश पक्का होगा और वो पागल हो जाएगा फिर आपको कभी परेशान नहीं करेगा यह प्रयोग प्राचीन है

प्रतिमा मारण मन्त्र खंग मारै कालिका । भुजंग मारै भैरव। झपट के मारै दुर्गा। कहे अलमस्त । वो ही पस्त । जो मुझको सतायेगा ।

श्मशान में जाकर किसी शनिवार की रात्रि को कोई जलती हुई चिता देखकर समस्त वस्त्र उतार कर उसके समक्ष बैठ जाएं और इस मन्त्र का जप करें। सूर्योदय से पहले उस चिता को प्रणाम करें और उसका कोयला तथा राख लेकर आ जाएं। अपने शत्रु के पाँव तले की धूल लेकर उसमें राख मिलाकर पीली मिट्टी की शत्रु की प्रतिमा बनाएं। इसको कोयले के ढेर पर रखकर श्मशान वाला कोयला इसके हृदय पर रख दें और पुनः कोयलों से ढक कर उसे सुलगा दें; साथ-ही-साथ ऊपर बताए गये मन्त्र का जप करते रहें। जैसे-जैसे प्रतिमा ताप पायेगी, वैसे-वैसे शत्रु ताप से पीड़ित होकर तड़पेगा। जैसे ही पूर्ण ताप पाकर प्रतिमा चटकेगी, शत्रु भी मृत्यु को प्राप्त हो जायेगा |पर उक्त मन्त्र का १०८ बार जप करें। खैर या आक की लकड़ी जलाकर इस वस्त्रको आग में तपायें। कपड़ा जलने न पाये। शत्रु पागल हो जायेगा। अच्छा करने के
लिए गधे के मूत्र से उस कपड़े को धोकर सुखा दें।

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अप्सरा साधना के नुकसान Disadvantages of Apsara Sadhana ph. 85280-57364

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अप्सरा साधना के नुकसान Disadvantages of Apsara Sadhana ph. 85280-57364

 

अप्सरा साधना के नुकसान Disadvantages of Apsara Sadhana
अप्सरा साधना के नुकसान Disadvantages of Apsara Sadhana

अप्सरा साधना के नुकसान Disadvantages of Apsara Sadhana अगर किसी साधना के फायदे होते हैं, तो उसके कुछ नुकसान भी होते हैं। जिन्हें हम आपको बताने जा रहे हैं।

साधकजनों किसी भी अप्सरा साधना को करने से पहले, एक गुरु के मार्गदर्शन का बहुत महत्व होता है।

किसी भी अप्सरा साधना को गुरु के मार्गदर्शन के बिना न करें, अन्यथा आपको क्षति हो सकती है।

जब आप अप्सरा साधना करना शुरू करते हैं, तो एक बात का ध्यान रखें कि आपकी साधना बीच में नहीं रुकनी चाहिए और आपकी साधना टूटनी नहीं चाहिए।

सबसे पहले, किसी भी गुरु के मार्गदर्शन में, आप साधना शुरू कर रहे हैं, तो उस साधना के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करें, क्योंकि आपको अधूरी जानकारी के साथ साधना करनी नहीं चाहिए।

अगर आपकी साधना बीच में रुक जाती है या आप किसी कारणवश साधना बंद कर देते हैं, तो आपका मानसिक संतुलन खराब हो सकता है और आप पागल भी हो सकते हैं।

शादीशुदा को इस अप्सरा साधना को बिल्कुल नहीं करना चाहिए। जो लोग अविवाहित हैं, वे इसे एक बार आजमा सकते हैं।

जब आप अप्सरा साधना करते हैं, तो आपको उसे देवी या माँ के रूप में पूजन करना चाहिए, उसे पत्नी या गर्लफ्रेंड के रूप में पूजन नहीं करना चाहिए।

जब आपके सामने कोई अप्सरा आती है, तो आप उसे देखकर बहुत मोहित हो जाते हैं, लेकिन उस समय आपको खुद को नियंत्रित करना होता है।

जब आप अप्सरा की सफलता प्राप्त कर लेते हैं, तो वह आपको संभोग  के लिए काम उत्तेजित करेगी, लेकिन आपको इसे करना नहीं है।

अगर आपने अप्सरा को पत्नी या गर्लफ्रेंड के रूप में प्राप्त किया है, तो आप अपने जीवन के बाकी समय के लिए शादी नहीं कर सकते। अगर आप ऐसा करते हैं तो आपका जीवन भी खतरे में पड़ सकता है।

अपसरा को प्रमाणित करने के बाद, जो भी वादा आपने उससे किया है, आप उसे किसी से नहीं साझा करेंगे।

जैसे आप लोग पूरी शुद्ध मानसिकता के साथ तपस्या या देवी-देवताओं की पूजा करते हैं, उसी तरह आपको अप्सरा की पूजा भी करनी चाहिए।

जब आप अपसरा साधना करते हैं, तो उस समय आपको पैरों के चलने की आवाज़ या किसी के शरीर को स्पर्श करने की आवाज़ महसूस हो सकती है।

आपको साधना को बीच में नहीं बंद करना चाहिए, अन्यथा इसके भयानक परिणाम हो सकते हैं।

जिन लोगों का हृदय कमजोर हो, उन्हें इस साधना को बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसे लोग साधना के दौरान की अनुभव से डर सकते हैं, आपको हृदयघात भी हो सकता है, जिसके कारण आपका जीवन भी जा सकता है।

अगर आप अप्सरा को दिए गए वादे को तोड़ते हैं, तो उसी समय वह आपको छोड़कर अपने लोक में वापस जा सकती है।

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शत्रु नाशक हनुमान मंत्र – गुप्त शत्रु की उल्टी गिनती शुरू ph. 85280-57364

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शत्रु नाशक हनुमान मंत्र - गुप्त शत्रु की उल्टी गिनती शुरू shatru nashak hanuman mantra

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शत्रु नाशक हनुमान मंत्र shatru nashak hanuman mantra गुप्त शत्रु की उल्टी गिनती शुरू

ॐ नमो हनुमंत बलवंत माता अजंनी पुत्र हल हलंत आशो चढ़ंत, आओ गढ़ किल्ला तीरंत आओ लंका जाल बाल भस्म करि आओ ले लांगू लंगूर ते लपटाय सुमिरते पटका ओचंद्री चंद्रावली भवानी मिल गावै मंगलवार जीत राम लक्ष्मण हनुमान जी आओ जी तुम जाओ सात पान का बीड़ा चाबत मस्त सिन्दूर चढ़ो आओ, मंददरी के सिंहासन डुलंता आओ यहं आओ हनुमान माया जाग तें नृसिंह माया आगे, भैरों किलकिलाय ऊपर हनुमंत गाजैं, दुर्जन को मार दुष्ट को मार संहार, राजा हमारे सत्त गुरु हम सत्त गुरु के बालक मेरी भक्ति गुरु की शक्ति फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा ।

शत्रु नाशक हनुमान मंत्र विधि 

सर्वप्रथम किसी शुभ मंगलवार के दिन नहा-धोकर एकांत व पवित्र स्थान में हनुमानजी का चित्र (या मूर्ति) रखें और उनकी पूजा करें। तत्पश्चात् इस मन्त्र का एक माला जप करें। यह क्रम दैनिक पूजा के रूप में पूरे इक्कीस दिनों तक चलना चाहिए। इस अवधि में साधक पूर्ण संयम, पवित्रता, ब्रह्मचर्य और निष्ठापूर्वक रहे। उसे हर तरह से स्वयं को सात्विक विचारों में लीन और हनुमंत चिंतन में मग्न रखना चाहिए।

पूजा में प्रतिदिन सात लड्डू और सात पान बीड़े नैवेद्य रूप में अर्पित करने चाहिए। इस प्रकार इक्कीस दिनों तक (यदि हो सके तो इकतालीस दिनों तक) प्रतिदिन नियम-निष्ठा के साथ एक माला (एक सौ आठ दानों की) जप करते रहें । अवधि पूरी हो जाने पर यही मन्त्र पढ़कर इक्कीस बार आहुति देते हुए हवन करें।

इस प्रकार यह मन्त्र सिद्ध हो जाएगा। मन्त्र सिद्ध हो जाने पर यदि कभी आवश्यकता पड़े तो शत्रु के दमन हेतु इसका प्रयोग किया जा सकता है। प्रयोग का नियम यह है कि कहीं एकांत में भूमि पर एक मानवाकृति बनाएं। उसे शत्रु का चित्र मानकर, उसे बंधन में करने के लिए मोम की चार कीलें बनाकर चित्र के चारो ओर जमा दें।

ध्यान रहे, चित्र बनाने से लेकर अंत तक साधक मन ही मन उपर्युक्त मन्त्र को जपता रहे। चित्र बन जाने और उस पर मोम की कीलें लगा देने के बाद हनुमानजी की पूजा करें और नैवेद्य में खीर अर्पित करें। इसके पश्चात् चित्र की छाती पर शत्रु का नाम लिखें और मन्त्रोच्चारण करते हुए उसके सिर पर जूते या चप्पल से दो बार प्रहार करें। इस प्रयोग से शत्रु का दमन हो जाएगा।

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