शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है
शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है
शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है गुरु मंत्र साधना को में आप सबका स्वागत है जिन का नाम आपने अक्सर सुना होगा जिन मुस्लिम धर्म की शक्ति है जैसे हमारे पुराणों में भूत प्रेत के बारे में आता है। वैसे ही मुस्लिम धर्म में कुरान के अंदर जिन के बारे में जानकारी मिलती है।
आज मैं जिन के बारे में बात करेंगे ,जब किसी के शरीर में आता है। उसके क्या लक्षण होते है, क्यों आता है कैसे आता है और इसके क्या लक्षण होते हैं। किसी के शरीर में आता है उसको क्या परेशानी हो सकती। इन सब बातों के बारे में विस्तार सहित जानकारी परदान करूंगा। इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें तब आपको समझ में आएगा आप इससे कैसे बच सकते हैं औरों को भी बचा सकते हैं।
शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है
शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है
किसी के शरीर में क्यों आता है इसके बारे में जानकारी प्रदान करेंगे पहले इस की हम पसंद के बारे में जानेंगे इ.फको तेज खुशबू बहुत पसंद होती है। उसके अलावा सुंदर लड़कियां बहुत पसंद होती है, यह ज्यादातर जवान लड़कियों के शरीर में आता है। उनके साथ गलत काम करता है जब भी उनके शरीर में आता है उनके के साथ गलत काम करता है।
जिसके साथ यह गलत काम करता है उसको पता नहीं चलता है एक बेहोशी की तरह रात के समय सिस्टम हो जाता है और उसे लड़की को पता नहीं चलता है क्या हुआ था।
औरत के शरीर में जिन्न होने के लक्षण
सुबह शरीर में दर्द होता है और शरीर टूटता है। सारा दिन उन लड़कियों के शरीर में थकावट और कमजोरी महसूस होती है पता नहीं चलता क्या हो रहा है। बहुत कम मामलों में ऐसा होता है कि लड़की को पता चल जाता है उसके साथ कोई शक्ति सेक्स कर रही है।
आदमी शरीर में जिन्न होने के लक्षण
हम बात करेंगे किसी आदमी के शरीर में क्यों आता है इस विषय मैं बात करेंगे बहुत कम आदमियों के शरीर में जिन्न आता है जब कोई आदमी जिन्न साधना करता है , उसको वश में करने की कोशिश करता साधना में कोई रक्षा नहीं लगाई जाती है या कोई गलती हो जाती है। तब आप के शरीर जिन्न प्रवेश करता है। इसके क्या लक्षण होते है आप का कभी भी सिर घूमने लगता है और चक्र आते है यह कुछ समय तक होगा फिर नार्मल हो जाओगे बीच बीच में यह आपको दिक्कत हो सकती है। इस के इलावा और भी कारन हो सकते है अगर आप को परेशानी है सम्पर्क करें ph 85280 57364
बाबा बालक नाथ साधना Baba Balak Nath Sadhna Mantra ph.8528057364
बाबा बालक नाथ साधना Baba Balak Nath Sadhna Mantra
जय महाकाल बाबा बालक नाथ साधना Baba Balak Nath Sadhna साधनाओं में बहुत ज्यादा अच्छी साधना है। तो अब मैं आपको इसमें साधना देने जा रहा हूँ। बाबा बालकनाथ जी के जो बहुत बड़े सिद्ध संत थे, आप अधिकतर देखेंगे पंजाब या हिमाचल में इनकी बहुत ज्यादा मान्यता है।
इनके बहुत सारे भक्त आपको मिल जायेंगे। यहाँ पर इनके बहुत सारे मंदिर भी हैं। पंजाब और यह इनका जो मेन मंदिर है वो दियोटसिद्ध हिमाचल में पड़ता है और इनकी दोस्तों जो साधना है जो आप अगर ऑनलाइन ढूंढेंगे तो अधिकतर आपको चौकी वगैरा की साधना मिलेगी।
चौकी इस मतलब होता है कि उस साधना करने के बाद बाबा जी जो है की शक्ति होती है आपके शरीर में एंटर करेगी और आप को जो लोगों के आपके पास आएंगे उनका निवारण करेंगे। दिक्कतों तो कारन लोग जाते दिखाई देते हैं।
उसके अलावा यह पहली बार इस तरह की दूर आपको साधना दूसरे तरीके की मैं आपको दे रहा हूँ। तो दोस्तों इस साधना की सबसे पहले मैं आपको नाम बताता है।
तो दोस्तो इस के लाभ सबसे पहले तो उन लोगों के लिए है जो साधना क्षेत्र से पहले ही जुड़े हुए हैं क्योंकि यह आपकी स्प्रिचुअलिटी का लेवल ऊपर बढ़ाने में या अध्यात्म में आगे बढ़ने में बहुत ज्यादा सहायता करते हैं।
चाहे आप योग मार्ग से हों या तंत्र मार्ग से, दोनो ही मार्ग में ये बहुत ज्यादा सहायक होते हैं। उसके बाद दोस्तों कि जो लोग तंत्र मार्ग, ज्ञान योग मार्ग से नहीं जुड़े हुए, जो नॉर्मल लोग हैं उन लोगों के लिए दोस्तों यह आपकी इच्छा पूर्ति के लिए बहुत ज्यादा सहायता करते हैं चाहे आपके जीवन में किसी भी तरीके की समस्या हो यह बहुत ही तीक्ष्णता से उसको सॉल्व करने में आपकी मदद करते हैं।
तो दोस्तों आपने अधिकतर साधना जो की होगी उनमें देखा होगा कि साधना करने के बाद आपके जीवन में कुछ होने के अपने रस्ते बनने लग जाते हैं। मगर इस साधना की मदद से कितनी भी बड़ी समस्या हो जो भी आपकी समस्या हो उसको जो भी इंसान सुलझा सकता हो उस तरीके के इंसान आपके जीवन में अपने आप खींचकर ले आते हैं और आपके अगर जीवन में किसी धन की समस्या आ रही है ,तो उसको भी बहुत ही आराम से उस तरीके के इंसान लाकर आपकी जो धन की समस्या है वो भी आराम से सुलझा देते हैं।
उसके बाद दोस्तों और इसके अगर आपके ऊपर किसी ने तंत्र वगैरह कर रखा है आपके परिवार के ऊपर तो आपने ज्यादातर साधना देखी होगी। उसमें क्या होगा उसमें से तंत्र जो हटता होगा मगर सिर्फ हटाते ही नहीं।
जिसने भी उसको आपके, आपके परिवार को किया होगा, आपके ऊपर कुछ किया होगा, उसको जाकर दंड भी देते हैं और उसके जीवन में परेशानियां भी लानी शुरू कर देते हैं। अगर वह रुकता नहीं है तो। तो दोस्तों इस तरह की बहुत ही साधना है। उसके बाद दोस्तों इसमें जो जाप की संख्या है वह भी बहुत कम है जिसके कारण कोई भी इंसान इसको बहुत ही आराम से कर सकता है।
फिर दोस्तों इसमें इस साधना को करने के बाद हम देखेंगे कि आप पर शिवजी जी की असीम कृपा आने लग जाती है। क्योंकि दोस्तों ये तो बाबा अलखनाथ जी थे। अपने जब जीवित थे तो उस टाइम इन्होंने बहुत सारा शिवजी जी की तपस्या की थी जिस करके शिवजी जी ने अपनी जो शक्तियां थी वो इनमें सीधे ट्रांसफर कर दी थी कि इतने बड़े साधक से साधक सिद्ध।
उसके बाद दोस्तों इसमें यह जो साधना है इसमें जो आप कुछ जब जाप करेंगे तो आपको अलग अलग ही अनुभव होंगे। बहुत तीक्षण अनुभव होंगे तो इसमें बिल्कुल भी आपको डरना नहीं है और अपने साधना में लगे रहना है क्योंकि यह सब परीक्षाएं होती है।
जो तीक्षण साधनाएं होती हैं उनकी। और उसके बाद जब इसका फल आपको मिलता है तो आप के जीवन ही पूरी पूर्णतः बदल जाता है। एक और दोस्तों जानकारी मैं आपको देना चाहूंगा कि इस साधना में जब आप काम लेते हैं तो अधिकतर देखा जाता है कि उनके जो सेवक होते हैं मतलब भूत, प्रेत, पिशाच वगैरह होते हैं।
मगर जो यह बाबा नाथ हैं, इनके सेवक जो होते हैं वह अधिकतर बहुत बड़े बड़े संत होते हैं। तो इसलिए जो उनकी कार्य क्षमता है वह और ज्यादा तीक्षण और बिल्कुल ही अलग होती है।
जो लोग अपने इस साधना को करने के बाद दुरुपयोग करने की कोशिश करते हैं, उनका अपने आप ही खुद ही नुकसान होना शुरू हो जाता है। मगर जब ऐसी साधनाओं का सही उपयोग किया जाता है तभी उसका जो लाभ होता है वह होता है और आप अगर जो आपकी इच्छाएं होंगी, अगर किसी को नुकसान पहुंचाने की होंगी या जैसे किसी से जलन होकर आप इच्छाएं कर रहे हैं तो इस तरह की साधना है तो ऐसी इच्छाओं की पूर्ति में बिल्कुल भी सहायता नहीं करती।
बल्कि आपके जीवन में जो है समस्या आनी शुरू हो जाएगी क्योंकि आपने इनसे ऐसी अजीब सी अजीब सी इच्छाएं की पूर्ति आपने करनी चाही तो वह आपके जीवन में परीक्षा लेंगे ताकि आपके जीवन में सुधार हो सके। आपको नुकसान इस तरह नहीं।
आपको थोड़ा समझ देने के लिए आपको थोड़ा आपकी परीक्षा लेंगे। थोड़ी जिंदगी में दिक्कतें क्रिएट करेंगे। फिर उसके बाद आपके जीवन में जो बदलाव आना शुरू हो जाएगा और आप पॉजीटिव जो हो जाएंगे तो आपको लाभ देना शुरू कर देंगे। तो इस तरह यह साधना होती है वह काम करती है।
दोस्तों मैं आपको विधि बताता हूं कि किस तरह करनी है इसमें। दोस्तों जो आसन सफेद होगा ठीक है वह सफेद होगा। जो आपको दिशा जो है उत्तर रखनी होगी। उसके बाद माला रुद्राक्ष की आपने इस्तेमाल करनी है। भोग में अपने रूप मनाना है।
भोग में देना है रोट की विधि ऑनलाइन कहीं पर भी ढूंढ सकते हैं। इनको रोज़ का भोग जो है वह अपने देना है और जो दीपक लगेगा वह घी का है। साथ में अपने धूप दीप वगैरह तो जलानी ही है।
उसके बाद दोस्तों जब आपने इस को शुरू करना है उसके बाद आपने सबसे पहले एक माला इनका मंत्र जाप करना है। करने के बाद आपने कोई बर्तन अपने सामने रख लेना है और थोड़ा पानी भी रख लेना है। इनको अपने मानस में इमेजिन करके आपने इस तरह सोचना है और इनको पहले तो आमंत्रित करना है कि आओ सामने बैठे ।
उसके बाद इनके सबसे पहले अपने पैर धुलाने हैं, उसके बाद अपने पैर धुलाने के बाद अपने जो मतलब अपना जो आगे का मंत्र है वह जाप करने शुरू कर देना है इसमें। दोस्तों इस साधना में आपने 5 का मंत्र जाप करना है कुल पर भी 41 दिनों के अंदर अंदर ।
दोस्तों जो बाबा बालक नाथ जी हैं। जो जब जीवित थे तब तक वह बालक के ही रूप में थे तब तो दोस्तों इनका जो साधना परीक्षा होती है वह भी कम बहुत ज्यादा अलग होती है।
एक सबको डराया जाता है मगर साथ के साथ ही आपके जीवन में अलग सी ही परेशानियां जैसे नटखट बालक जो होते हैं परेशानियां खड़ी करते रहते हैं कि कहीं न कहीं फंसा दिया कि जाप ना कर पाए। कुछ ना कर पाए।
मैं यह नहीं कहूंगा कि इतना ज्यादा फैला दिया कि बिल्कुल रोक दिया। मगर थोड़ी बहुत परेशानियां परीक्षा जो है इंसान की भी जाती है ताकि देखने के लिए कि कोई भी इंसान कितना ज्यादा साधना के लिए एकाग्र है और कितना ज्यादा डिमोट है तो उस चीज़ के लिए जो आपकी परीक्षाएं हो जाती है।
अब इसका दोस्त मैं मंत्र है वह आपको मंत्र में पूरा नहीं दूंगा यहां पर क्योंकि मैंने पिछली बार भी मैंने पोस्ट पर मंत्र नहीं दिया तो लोगों ने मेरे से मंत्र लेकर अपनीपोस्ट बनानी शुरू कर दी। मैंने कुछ में देखा है कोई मंत्र। और दोस्तों और भी मैंने चीजें देखी हैं। जैसे कई में मैंने मंत्र दे दिया तो उसी को कॉपी करके पूरा पेस्टकर दिया।
तो दोस्तों इसमें मैं जो मंत्र है आधा अधूरा दूंगा ताकि अगर कोई आगे कॉपी करेगा तो आप उस मंत्र को देखकर पहचान पाए कि हाँ यह मंत्र यहां से कॉपी किया हुआ है तो मंत्र मैं आपको आधा दे रहा हूं।
उसकी स्वयं दोस्तों उसमें कुछ है जो मैं मिसिंग छोड़ रहा हूं। उसके बाद बाबा बालक नाथ है। आग आवेश स्वाहा यह मंत्र। दोस्तों इसको आप जब आप करेंगे आपके जीवन में पूर्णतः बदलाव आने लग जाएंगे और आप बहुत ज्यादा पॉजिटिव होंगे और आपके जीवन जो है वह ज्यादा सुख में होता जाएगा।
जब आप अपना जाप कंप्लीट कर लेंगे उसके बाद आपको हवन करना है जिसमें घी, काले तिल, लौंग और काली मिर्च और पीली सरसों इन सबका समान करना है। खासकर जब अपने आपको धन लाभ चाहिए तो पीली सरसों का इस्तेमाल अपने कर नहीं करना वरना आप उसको उस समय के लिए छोड़ भी सकते हैं।
उसको जरूरी नहीं है कि इस्तेमाल किया जाए तो यह चीज। दोस्तों साधना। इसके बाद दोस्तों को इसमें एक उग्र साधना भी है। इसमें सेकंड पार्ट जो है इसमें वह भी है मगर वह मैं बहुत ही कम। जो खुद अच्छे साधक होंगे उन्हीं को दूंगा। तो यह था पूरा साधना। जय श्री महाकाल
बाबा बालक नाथ जी कौन थे?
बाबा बालकनाथ जी के जो बहुत बड़े सिद्ध संत थे, आप अधिकतर देखेंगे पंजाब या हिमाचल में इनकी बहुत ज्यादा मान्यता है। इनके बहुत सारे भक्त आपको मिल जायेंगे। यहाँ पर इनके बहुत सारे मंदिर भी हैं। यह शिव के अवतार है
बाबा बालक नाथ किसका अवतार है?
शिव अवतार है बाबा बालकनाथ जी
बाबा बालक नाथ में महिलाओं की अनुमति क्यों नहीं है?
बाबा बालक नाथ जती सती योगी है और बाल ब्रह्मचारी थे। हनुमान की तरह बाबा बालक नाथ में महिलाओं की अनुमति नहीं है
क्या बाबा बालक नाथ और कार्तिकेय एक ही हैं?
क्या बाबा बालक नाथ और कार्तिकेय एक नहीं है दोनों अलग अलग है। बाबा बालक नाथ और कार्तिकेय एक दोनों मोर की सवारी करते है इस लिए लोग भर्मित हो जाते है।
दरियाई काली साधना – महाकाली का सबसे शक्तिशाली मंत्र साधना ph.85280 57364
https://www.youtube.com/watch?v=IhqUVIaDhrk दरियाई काली साधना – महाकाली का सबसे शक्तिशाली मंत्र साधना गुरु मंत्र साधना डॉट कॉम में आप सब का हार्दिक स्वागत है। मैं बहुत सारी साधनाओं के ऊपर बना चुका हूं। वह सारी साधनाएं मैंने अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करी हैं। तो आज एक ऐसी साधना के बारे में मैं चर्चा करूंगा। जिसको करने के बाद कोई दूसरी साधना करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। इस लेवल की साधना है। साधक सर्व शक्तिमान बन जाएगा। इस लेवल की साधना है। उसका नाम है दरियाई काली, काली कि आप ने बहुत सारी साधनाएं की होंगी और महाकाली के बहुत सारे रूप हैं। एक काली है, एक महाकाली है, एक रोडका काली हैं, एक शमशान काली हैं तो एक दक्षिण काली है। तो काली के भिन्न रूप हैं और भिन्न प्रकार के साधनाएं हैं तो भिन्न प्रकार की साधनाएं हैं। हर साधना का अपनी जगह महत्तव है, हर साधना अपनी जगह महत्व रखती है। कोई ये जो महाकाली का रूप है ये तीन बार निकाली है। ये काली ज्यादातर दरिया में पाई जाती है जिसको दरियाई काली भी कहा जाता है। एक दरियाई काली होती है। इस साधना को करने से पहले अगर आपने ख्वाजा पीर की साधना कर रखी है तो ये साधना आपके लिए सहायक होगी। साधना करने में कोई मुश्किलात पेश नहीं होंगी। आप घर पर सकते हैं। अगर ख्व्वाजा की साधना नहीं कर रखी है तो भी कोई दिक्कत है। फिर भी आप इस साधना को कर सकते हैं। ये साधना दरिया के किनारे की जाती है और जब आप दरिया किनारे साधना करोगे तो दरिया उस नदी के किनारे बहुत बड़े बड़े आपको मगरमच्छ दिखाई देंगे। बहुत प्रकार की दिखाई देंगे।
दरियाई काली साधना आपार धन दौलत और शक्तिशाली बनने की साधना – महाकाली का सबसे शक्तिशाली मंत्र साधना ph.85280 57364
यहां पर कभी कुछ साधकों को शेषनाग तख्त दिखाई दिए थे। तो अगर आप ने साधना को बीच में छोड़कर चले गए तो उस टाइम पर आप पागल भी हो सकते हैं। ऐसी चीजों को देखने के बाद आप को निडरता पूर्वक अपने आप बैठे रहना है। आसन से नहीं उठाना है। किसी भी हालत में अगर बैठे रहेंगे तो कोई दिक्कत नहीं होंगे। 40 दिन की साधना है। जाप को पूरा कर लेंगे। 40 दिन होगा। उसके बाद बड़ी बड़ी शक्तियां उनके सामने आकर खड़ी होंगी। उससे पहले भी वहां ज्यादा परीक्षा होगी। पहले आपको डराने के लिए बड़े बड़े मगरमच्छ, शेषनाग, बड़े बड़े सर्प आपको दिखाई दे सकते हैं। पानी के अंदर बहुत सारी चीजें दिखाई देती हैं, पर आपको डरना नहीं है। खैर, आप को बड़े बड़े लालच दिए जाएंगे। हीरे मोती की थालियां लेकर आएंगी। कई तरह के लालच दिए जाऐगे अभी सोने की थाली ले लो और आप इस साधना को छोड़ दो। हीरे जवाहरात देंगे, सब कुछ देंगे। आप को फिसलना नहीं है, लगे रहना है। यह 40 दिन के पूरे हो जाएंगे। फिर एक बहुत बड़ी लहर आएगी। जिस लहर को देख के पानी की लहर को लेकर घबरा जाओगे और घबराना नहीं है, बैठे रहना है, उसमें सिर्फ महाकाली का नीलवर्ण स्वरूप दिखाई देगा। फिर वे साधना संपन्न हो जाएगी। इस साधना को सिद्ध करने के बाद दुनिया का हर काम आप कर सकते। कोई काम रोक नहीं सकते। आप सर्व शक्तिमान हो जाओ। आप दुनिया के साथ नहीं चलोगे। दुनिया के मुताबिक काम करें। इतने ज्यादा शक्तिशाली हो जाओगे कि आपके आगे बहुत सारी शक्तियां काम करेंगी। आप उनके हाथ जोड़कर आगे खड़ी रहेंगी। तो आपका नाम भी सिद्धो में होगा। जैसे सिद्ध गुरु गोरखनाथ जी। वैसे तो यह साधना कोई साधारण साधना नहीं है। इसको करने में जितना मैं बता रहा हूँ इसको करना उतना ही मुश्किल है। बहुत सारी परीक्षाओं के बाद आप इसी को हासिल करो। पर जब हम प्राप्ति के बारे में सोचते हैं तो आप परीक्षाओं को भूल जाओगे। यह सोचना कि आपको प्राप्त क्या होने वाला है। प्राप्ति को तो देखो। शराब क्या होने वाली है। अगर करना चाहते हो अगर आपको मौत की परवाह नहीं है तो मौत वगैरह तो इसमें कुछ होती नहीं है। अगर आप अपने डर से जीत सकते हो, अगर आप डर से जी सकते हो, किसी भी तरीके का डर नहीं लगता है, फिर आप साधना को कर सकते हो। वही बंदा साधना को कर सकता है निडर है । और जिसके अंदर डर है साधना को करने का वही साधना वो कर सकता है। वाकई कोई बंदा तो इस साधना को साधारण व्यक्ति तो कर ही नहीं सकता । यह भी नहीं है कि काम नहीं करने को सारा कुछ किया जा सकता है। बस आपके अंदर दृढ इच्छा होनी चाहिए। आप पहाड़ को भी हिला सकते हैं। तो आज के लिए बस इतना ही। जय श्री महाकाल।
ॐ गुरु जी
लंका सो कोट समुद्र सी खाई
दरयाई पीर करो चढ़ाई
लहर लहर चले आठ पहर चले।
दरियाई काली चले।
भैरों हनुमान चले।
जल जोगनी मसानी चले।
लहर लहर लहराती चले।
जल का मसाण चले।
काला कमान चले।
गोराखपा की आन चले।
मेरे गुरु की शक्ति चले।
मेरा बंधा बंधे मेरा छोड़ा छूटे।
चले मन्त्र ईश्वर बाँचा
देखूं दरियाई तेरी आन का तमाशा।
इस मंत्र का जप २.30 घंटे करना है एक आसान पर बैठ कर करना है इस साधना को 11 ,21 41 , में कर सकते है यह गुपत साधना बिना गुरु के न करे नुकसान हो सकता है।
Jind Baba sadhna चमत्कारी जींद बाबा की 11 दिन की आसान साधना सभी मनोकामनाए पूर्ण करेगी
Jind Baba sadhna चमत्कारी जींद बाबा की 11 दिन की आसान साधना सभी मनोकामनाए पूर्ण करेगी
Jind Baba sadhna चमत्कारी जींद बाबा की 11 दिन की आसान साधना सभी मनोकामनाए पूर्ण करेगी गुरु मंत्र साधना में आपका हार्दिक स्वागत है दोस्तों जिन और जिंद यह दो अलग-अलग चीज होती हैं जिन जो होते हैं। वह अलग होते हैं और जिंद जो है अलग होते हैं दोनों के पास शक्ति जो होती है वो बराबर होती है। फर्क कितना होता है यह महाकाली की सेवा में होते हैं। जिंद जो हैं वह अच्छे कार्यों के लिए ज्यादा प्रयोग किए जाते हैं और अच्छे कार्य को ही करते हैं।
जो कि जिन होते हैं वह गलत कार्य को भी करते हैं गलत कार्य पर चलाए भी जाते हैं। बहन बेटी पर मोहित होकर उनको दुख भी देते हैं जिंद में बात करू हैं स्थान देवता से पूजे जाते है के नाम से पूजा होती और वह बहुत सारे संकटों को दूर भी करते हैं जींद जो होते है दूर करते हैं इनके राज्सथान बहुत स्थान है। जिंद बाबा होते हैं वह बहुत सारे कार्य को करने में सक्षम होते हैं बहुत सारी आपकी इच्छाओं को पूर्ण करने में सक्षम होते हैं।
तो आज मैं आपको जिद बाबा की साधना के बारे में बता रहा हूं। जिन बाबा की सेवा के बारे में बता जो कि बहुत सरल साधना है और बहुत ही आसान साधना है। बहुत ही आसान ना कोई खर्च है ज्यादा ना कोई ध्यान नहीं लगाना है कुछ नहीं करना, मैं आपको बता रहा हूं क्या करना है ना इसमें कोई किसी तरीके डर नहीं है और बात रही गुरु के तो भगवान शंकर को गुरु मानकर आप इस सेवा को कर सकते हैं। अब भगवान शंकर को किस प्रकार से गुरु बनाया जाता है धरण किया जाता है वह मैं आपको अगली पोस्ट में बताऊंगा।
Jind Baba sadhna चमत्कारी जींद बाबा साधना विधि
तो जब इस साधना को किया जाता है तो यह ग्यारह शुक्रवार शनिवार को की जातीनी एक हफ्ते में दो शुक्रवार शनिवार एक । एक एक हफ्ते में दो शुक्रवार शनिवार हो गया ना। तो वह एक माने जाएंगे यानी इस शुक्रवार को शनिवार के ग्यारह जोड़े आपको करने होते हैं। अब करना क्या है इस साधना को। इसमें जो भोग जाता है, आक आपके पेड़ के नीचे भोग जाता है और वह दिन के छिपने से पहले आप सुबह कर सकते बिल्कुल पाक साफ होकर जाना होता है।
सुनसान जगह पर आपका पेड़ ढूंढना है आपको और आपके पेड़ जब आपको मिल जाए तो चावल और हल्दी यानी चावलों को हल्दी में रंग ले पानी डाल और उन चावलों को थोड़े से चावल लेकर आपको आपके पेड़ के नीचे जाने हैं। जाना है और वहां पर आपको प्रार्थना करने जिंद बाबा मैं आपको दावात देने आया हूं, यह जिंद बाबा मैं आपको दावत देने आया हूं। स्वीकार करें। कल मैं आपका भोग लेकर आऊंगा।
इतना कहकर आपको आ जाना और मुड के नहीं देखना पीछे आप शुक्रवार को करते हैं और फिर शनिवार को आपको जो भोग ले जाना होता है। दिन छुपने से पहले दो तो पानी की रोटी होनी चाहिए पानी की रोटी पानी की रोटी बनाते ना एक तो चकले बनाते हैं पोलथान वाली रोटी होती
पानी की रोटी हाथों से बनाते हैं दो पानी की रोटी और दो ही हरि मिर्च और दो ही प्याज और दो पानी की बोतल छोटी फिर दो पानी की थैली। यह लेकर जाना होता है
शनिवार को शनिवार को जब जाते हैं दिन छिपने से पहले दो पानी की रोटी लेकर तो उनके ऊपर एक हरी मिर्च और एक प्याज यह रख लें यानि कि अलग-अलग दो रोटी, दो प्याज हो गई, दो हरी मिर्च हो गई वह सामग्री जो है भोग है उनका यह आपके पेड़ के नीचे रख दे और जिद बाबा से प्रार्थना करें, जिद बाबा यह आपका भोग है इसे स्वीकार करें पानी की थोड़ा सा वहां पर पानी गिर दे।
और जब आप यह अपना भोग स्वीकार करो, जो भी आपकी इच्छा हो, वह इच्छा आपको वहां पर बोलनी है। यह प्रक्रिया आपको हर शुक्रवार, शनिवार करनी है यानि शुक्र शनिवार ग्यारह जोड़े आपको करनी होती है है, तो आप देखेंगे कि जैसे-जैसे आप आपके सेवा बढ़ती जाएगी तो ग्यारह शुक्रवार, शनिवार से पहले आप जो इच्छा हो जाएगी। यह स्वयं सिद्ध किया हुआ कार्य मैं आपको बता रहा जो मैंने खुद किया था।
तो इसमें ना तो किसी खास उसकी जरूरत की जरूरत ना खास मंत्र जने की जरूरत है, सिर्फ से है। इस से को आप करते हैं तो ही इच्छा ऐसी होनी चाहिए जो कि लाभ हो, किसी को नुकसानदायक ना हो।
आपके घर की कोई ऐसी बीमारी है जो लंबे समय से चल रही है, ठीक घर में बरकत नहीं हो रही, आपकी नौकरी नहीं लग रही, काम में मन नहीं लगता, यह सारी चीजें जो है, यह सारी चीजों को हल करने के लिए जो है वह सक्षम है। बहुत सारे राजस्थान के इलाकों में जिद बाबा की पूजा होती है, इंटरनेट पर भी आपको देखने को मिल जाएगा। वो मैंने आपको बताया।
चौसठ योगिनी कौन है – 64 योगिनी की कथा – चौसठ योगिनी रहस्य ph.85280 57364
chausath yogini rahasya चौसठ योगिनी कौन है – 64 योगिनी की कथा – चौसठ योगिनी रहस्य चौसठ योगिनीयों का प्रादुर्भाव मां काली से ही हुआ है। चौसठ योगिनीयों सृष्टि के विभिन्न आयामों पर शासन करती हैं और हर एक योगिनी का एक विशिष्ट चरित्र है। मुख्यतः इनका संबंध या कहें सामान्य कारक आठ मात्रिकाओं से है।
guru mantra sadhna आपका अभिनंदन करता है। सनातन धर्म के साथ सम्बंधित रोचक तथा ज्ञानवर्धक वृतांतों के लिए बने अवश्य रहे । हम हमारे धर्म ग्रंथों से ली गई कथाएं डालते हैं।
आदि शक्ति काली के ही भिन्न-भिन्न अवतारी अंश हैं और देवी महात्मा के अनुसार इन आठ देवियों ने शुंभ और रक्तबीज । राक्षसों के विरुद्ध युद्ध में मां दुर्गा की सहायता की थी और देवी दुर्गा ने स्वयं मातिकाओं की रचना की थी।
इनमें से सात दी शक्तियों को संबंधित देवों के ही नारित्व रूप माना जाता है। ये सात देवी अपने पतियों के वाहन तथा आयुद्ध के साथ यहाँ उपस्थित होती हैं। आठवीं मात्रिका स्वयं मां काली है। हर एक मातिका की सहायक आठ शक्तियां हैं इसीलिए इनकी संख्या चौसठ हो जाती है।।
चौसठ योगिनी कौन है – 64 योगिनी की कथा – चौसठ योगिनी रहस्य ph.85280 57364
सर्वप्रथम जानते हैं कि यह मातिकाएं कौन- कौन है और किन देवों से संबंधित है। नंबर एक। ब्रह्माणी भगवान ब्रह्मा उनके चार सिर और चार भुजाएं हैं। ब्रह्मा जी की ही तरह इनका वाहन हंस है। नंबर दो महेश्वरी भगवान शिव, भगवान शिव की ही तरह उनकी जटाओं में अर्धचंद्र है और उनका वाहन नंदी है। चतुर्भुजाओं में त्रिशूल, खटगा आदि हैं। नंबर तीन कमारी कार्तिकेय जी उनका वाहन मयूर है। वे अपने हाथों में शक्ति, दंड आदि धारण करती हैं।
नंबर चार। वैष्णवी भगवान विष्णु। वनमाला पहने हुए देवी वैष्णवी के दो हाथों में चक्र हैं। इनकी सवारी विष्णु जी की ही तरह गरुड़ ही है। नंबर पांच देवराज इेंद्र। वे अपने वहां हाथी पर विराजमान होकर वज्र धारण करती हैं। नंबर छः। वाराही वारा भगवान विष्णु के वारा अवतार की ही तरह दिन देववी का चेहरा वाराह व धड़ मनुष्य का है। हाथों में दंड खड़ग खेत का और पाश धारण करती हैं और कहीं कहीं भैंसे पर भी सवार दिखाई गई हैं।
नंबर सात नर से ही भगवान नरसिंह इनका चेहरा सेह व धड़ मानव का है और हाथों में शंकर, चक्रृत, शूल डमरु आदि धारण करती हैं और अंत में आती है। मां काली जिन्हें चामुंडा के नाम से भी जानते हैं, एकमात्र। ऐसी मात्रिका हैं जिन्हें किसी भी देव के स्त्री शक्ति अवतार के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाता।
यह देवी के हाथों में कपाल। शूल नर मुुंड तथा अग्नि है तथा इनका वाहन सियार है, जैसे हमने पहले बताया योगिनीिया, साक्षात आदि काली के ही अवतार हैं तथा सदैव माता पार्वती की सखियों की ही तरह उनके साथ ही रहती हैं। देवी पार्वती द्वारा लड़े गए प्रत्येक युद्ध में समस्त योगिनियों ने भाग लिया था और अपनी वीरता का परिचय दिया था।
महाविद्याएं सिद्ध विद्याएं भी योगनियों की ही श्रेणी में आती हैं। यह भी मां काली की ही भिन्न-भिन्न अवतारी अंश हैं। समस्त योगिनिया अलौकिक शक्तियों से संपन्न है तथा इंद्रजाल, जादू, वशीकरण, मारण, आदि कर्म इन्हीं की कृपा द्वारा सफल हो पाते हैं। मुख्य रूप से आठ योगिनिया अपने गुणों तथा स्वभाव से भिन्न-भिन्न रूप धारण करती हैं।
ये सभी तंत्र तथा योग विद्या में भी निपुण है। स्कंद पुराण के काशी खंड। पूर्वाध के अनुसार भगवान शंकर राजा देवोदास से काशीपुरी प्राप्त करना चाहते थे परंतु राजा देवोदास धर्म पूर्व प्रजा का पालन करते और उनके राज्य में अपराध नाम की कोई चीज़ न थी। भगवान शिव के कहने पर समस्त देवताओं ने उन सर्वत्र शुद्ध राजा के छिद्र अर्थात कोई कमी ढूंढने की बहुत चेष्टा की किन्तु वह असफल रहे।
इंद्र आदि देवताओं ने देवोदास के राज्य तथा शासन को असफल बनाने के लिए अनेक प्रकार के विघ्न उपस्थित किए किंतु राजा ने अपने तपोबल से उन सब विघनों पर विजय पाई। मंदराचल से महादेव जी ने चौसठ योगिनियों को राजा के छिद्र दोष देखने के लिए काशी भेजा।
उन योगिनियों ने विभिन्न रूप धारण कर लिए। अलग अलग रूप धारण कर अलग-अलग कार्यों में लग गई वह योगनिया बारह महीनाों तक काशी में रहकर निरंतर चेष्टा करते रहने पर भी राजा का कोई छिद्र अर्थात दोष ना पा सकें परंतु वह सब लौटकर मंदराचल भी नहीं गई।
तब से लेकर आज तक योगिनियों ने कभी भी काशी को नहीं छोड़ा हालांकि वे तीनों लोकों में घूमते हैं। आगे व्यास जी के पूछने पर स्कंददेव इन योगनियों के बारे में बताते हैं कि यदि कोई मनुष्य इन चौसठ नाम का प्रतिदिन , दोपहर और संध्या के समय जप करें तो उसके। भूत प्रेत द्वारा दिए गए सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।
इनके चौसठ नाम का पाठ करने वाले को ना डाकिनी शाकिनीष्मंड और ना ही कोई अन्य कष्ट दे सकता है। यह नाम, युद्ध, वाद, विवाद आदि में भी विजय प्रदान करते हैं। जो योगिनी पीठों की सेवा करता है उसे वाछित शक्तियां प्राप्त। और यदि कोई अन्य मे्रो को भी उनके आसनों के सामने दोहराता है उसे भक्ति प्राप्त होती हैं।
यज्ञ, पूजा और प्रसाद तथा धूप और दीपक के समर्पण से योगिनी जल्दी ही प्रसन्न हो जाती हैं और वे सभी इच्छाओं को अवश्य पूर्ण करती हैं। अश्व युज के महीने में शुक्ल पक्ष के पहले चंद्र के दिन से शुरू होकर नौवे दिन तक मनुष्य को योगिनियों की पूजा करनी चाहिए। इससे वह जो चाहे प्राप्त कर सकता है।
काशी तीर्थ यात्रा करते समय इनकी आराधना भी अवश्य करनी चाहिए अन्यथा उनके कार्यों में ये विघन डाल सकती है। अलग-अलग पुराणों में इन चौसठ योगििनियों के नामों में थोड़ा अंतर अवश्य मिलता है।
वैसे तो भारत में इनके कई पीठ हैं पर मुख्य पीठ थोड़ीसा और मध्यप्र प्रदेश में स्थित है। जय मां काली। आज के पोस्ट में बस इतना ही। आशा करते हैं कि आपको आज का पोस्ट पसंद आया होगा। इसे लाइक अवश्य करें।
किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए आप सबसे क्षमा चाहते हुए आपसे निवेदन है कि प्रेम पूर्वक परमपिता परमात्मा को ह्रदय में धारण करें और बोले वैदिक सनातन धर्म की सदा ही जय ।
हिल हुल परी साधना /हिल हुल परी अमल 1 दिन की परी साधना बहुत ही आसान अमल
हिल हुल परी साधना 1 दिन की परी साधना बहुत ही आसान अमल
हिल हुल परी साधना 1 दिन की परी साधना बहुत ही आसान अमलजय महाकाल दोस्तों आज की इस पोस्ट में मैं आपके लिए एक अमल लेकर आया हूं जो की हिलहुल परी का है. अब आप सोचते होंगे की परी क्या चीज है और यह कहां पर रहती है. यह रहती है जो झाड़ जो दरखत बहुत ज्यादा मिलती है.
उसी पर यह रहती है और बहुत ही प्यारी होती है आपके कम भी आसानी से कर देती है और इसका अमल जो है वह भी बहुत ही आसान सा है और बहुत ही तुरंत एकदम फास्ट होता है एक या दो या तीन मि के अंदर अंदर ही ये आपके सामने हाजिर हो जाती है या तो आपको लेकिन आपके पीछे एक बार लग गई तो यह आपका पीछा नहीं छोड़ती है.
एक बात ध्यान में रख ले अब इस से कोई काम भी आप इससे काम करवा सकते हो इसको अपनी दोस्त भी बना सकते हो.
हिल हुल परी साधना 1 दिन की परी साधना बहुत ही आसान अमल
हिल हुल परी साधना विधि / हिल हुल परी अमल विधि
अब इसका अमल किस तरीके से करना है सबसे पहले तो वो जान ले. देखिये इसका अमल करने के लिए आपको इतवार बुध या फिर जुमरात इन तीन दिनों में से एक दिन का जो है तो एक दिन लेना पड़ेगा तीन दिनों में से और रात का वक्त होना चाहिए. ईशा के बाद आप कभी भी सयम से करना ठीक है. नौ बजे, बाद जब मर्ज़ी इसको कभी भी कर सकते हो. आप ठीक है.
ईशा के बाद का टाइम ले . उसके बाद क्या आपको करना है. इसमें आपको कोई चीज है ना ही आपको हिसार करना है ना ही बहुत बड़ा जाप जो है तो पढ़ते हुए बैठना है आधा एक घंटा. कुछ भी इसके नहीं करना है और ना ही कोई समान लाना है.
खुशूबू अगर आपके पास है तो लगा ले. अगर नहीं है तो मत लगाए. कपड़े भी अगर आपके पास है तो पहने अगर नहीं है तो पुराने फटे पुराने जो भी है उसी को इस्तेमाल कर सकते हो.
अब इसको करना कैसे है सबसे पहले तो ये जान लो इस अमल को करने के लिए आपको एक लोटे में या फिर एक बर्तन में पानी लेना होगा जो की पाक और साफ पानी हो, साफ सुथरा पानी हो जिसको किसी ने भी छुआ तक ना हो वह पानी चाहे तो आप नल से या फिर डायरेक्टली भर सकते हो और उसके बाद में इस अमल को आप कर सकते हो.
अमल को करने का यह है की एक लोटे में या फिर कोई भी बर्तन में पानी लेना होगा. पानी लेकर के आपको ईशा की नमाज के बाद में कभी भी भी जा सकते हो तो आपको एक लोटे में पानी लेकर के उसमें वह पानी दाल करके जाना होगा.
ठीक है और जहां पर हरा दरखत है. वहां पर जाकर आपको बैठना होगा और वहां पर जाकर के आपको हल्की- हल्की सी पेशाब करनी होगी. ठीक है, यह अमल जो है तो सिर्फ मर्दों के लिए. मैं बता रहा हूं सिर्फ मर्द लोग ही इसको करें और औरतें जो है वह नहीं कर सकती. ठीक है.
तो इस अल को करने के लिए एक लोटे में पानी ले पानी लेकर के उस लेकर के और वहां पर पेशाब को बैठ जाए. और जिस तरीके से हम तहारत करते हैं उस तरीके से पानी जो तो अपनी उस जगह पर डालें जहां पर हम करते हैं. ठीक है, उसे जगह पर आधा पानी डालें. और आधे पानी जो बचत है वह. जो है आपके सामने दरखत के नीचे ही आपको बैठना पड़ेगा.
पेशाब के लिए तो आप करोगे तो उसमें का जो पानी बचेगा आधा उसे पानी को आप दरखत पर फेंक दो. ठीक है जो भी आपके सामने आप पेशाब के लिए बैठे हो तो उसे दरक्त पर उसे पानी को फेंक दो और खड़े होकर के तीनमर्तबा इस नाम को पुकारो
हिल हुल
इस नाम को तीन मर्तबा आपको पुकारना है. इसको बोला जाता है पर वहाँ पर इतनी फास्टली आ जाती है बहुत ही जल्दी जाती है मतलब दरखत पर रहती है. तो आपको सिर्फ इतना काम करना है की वहां पर जाना है.
जाकर आपको जो है तो पेशाब के लिए बैठना है उस दरखत के नीचे जहां पर दाल है उसके नीचे पेशाब को बैठना है और जो पानी बचे उसे पानी से जो आपने पानी लाया है और बचा हुआ जो पानी बच जाता है तो उसकोदरखत के ऊपर फेंकना है बने नहीं झड़ जहां पर पत्ते वगैरा रहते हैं। उसे साइड में पूरा पानी जो है तो जोर से फेंक देना है और उसके बाद में तीन मर्तबा इस नाम को पुकारना है
हिल हुल
तो इस परी को जैसे ही आप बुलाओगे तो यह तुरंत ही आपके सामने हो जाएगी या आपको आवाज़ देगी या फिर आपके पीछे से आएगी या आगे से आएगी लेकिन आपके काम जरूर करेगी.
उम्मीद करता हूं आपको पोस्ट अच्छी लगी होगी अगर आपको पसंद आई है तो इसे लाइक करें और अपने दोस्तों के साथ ज्यादा से ज्यादा शेयर करें
kam pishachini sadhana काम पिशाचिनी की साधना – त्रिकालदर्शी महावशीकरण साधना ph.8528057364
kam pishachini sadhana काम पिशाचिनी की साधना – त्रिकालदर्शी महावशीकरण साधना ph.8528057364
kam pishachini sadhana काम पिशाचिनी की साधना – त्रिकालदर्शी महावशीकरण साधना ph.8528057364नमस्कार दोस्तों आज मैं काम पिशाचिनी की साधना दे रहा हूं वैसे तो साधना को एक तांत्रिक साधना होती है। मुख्य तौर पर काम की प्राप्ति इच्छित प्रेमी या प्रेमिका की प्राप्ति इच्छित पति या पत्नी की प्राप्ति क्या सांसारिक भोग की वस्तुओं की प्राप्ति के लिए किया जाता है। यह साधना कर्ण पिशाचिनी साधना से थोड़ा अच्छा है क्यों की आप इस काम पिशाचिनी कट्रोल कर सकते है। यह आप को कर्ण पिशाचिनी साधना की तरह भूत भविष्य बता सकती है। उसके इलावा किसी का भी वशीकरण कर सकते है। और यह तामसिक शक्ति होती है इसे मांस भोग चढ़ाया जाता है यह 5 दिनों के साधन होती है।
kam pishachini sadhana काम पिशाचिनी की साधना मंत्र
ओम क्लीम क्लीम क्लीम काम पिशाचिनी आगाछ आगाछ मम कार्य सिद्धिम कुरू कुरू फट स्वाहा
kam pishachini sadhana काम पिशाचिनी की साधना विधि
अमावस की रात से साधना को किया जा सकता है और 5 दिनों में साधना में पूर्ण सफलता हमको प्राप्त होती ही होती है इसमें आप दक्षिण की दिशा में मुंह करके एक काला कपडा बढ़ा ले किसी भी लकड़ी की चौकी के ऊपर उसके ऊपर आप एक कलश स्थापित करें तांबे का तथा कुछ उसके के ऊपर फूल स्थापित करें लाल रंग के सुगंधित इतर का छिड़काव कर ले।
तथा भोग में से मांस मदिरा का भोग लगाए मध्य रात्रि बाद से इस साधना को शुरू करना है 12 से 3:30 के बीच साधना को संपन्न करना है गुप्त मंत्र का बैर की लकड़ी तेल की सहायता से जलाना है किसी को खुशबूदार तेल का उपयोग कर सकते कपूर का प्रयोग बिल्कुल भी नहीं करना है साधना में सामग्री के माध्यम से चढ़ाकर।
इसमें गुप्त मंत्र के स्वाहा शब्द बोलने के बाद ही आहुति उसमें छोड़नी है आपको इस प्रकार से 1100 आहुति आपको प्रतिदिन चढ़ाने है। उसे भोग को किसी भी चढ़ाए गए भोग को नदी तालाब के किनारे संज्ञा जंगल में छोड़ना है को किसी भी विरानी स्थान वृक्ष के नीचे साधना के पश्चात बाकी आसान आपका 5 दिनों तक वैसा का वैसा ही बढ़ा रहेगा वहां किसी प्रकार की भी साफ सफाई नहीं होगी। तो इस प्रकार से आपको 5 दिनों की यह साधना पूर्ण करनी है।
प्रत्यक्ष रूप से यह शक्ति यह काम पिशाचिनी आपके सामने उपस्थित हो जाती है तीन वचन लेने के पश्चात आपके अनुकूल हो जाएगी और आपकी हर प्रकार की यह पल भर में संपन्न करेगी इस साधना में सुरक्षा खींच ले और शरीर बंधन अनिवार्य है।
agni-prakat-karne-ka-mantra अग्नि प्रकट करने का मंत्र – मंत्र जप करते होगी अग्नि प्रकट
agni-prakat-karne-ka-mantra अग्नि प्रकट करने का मंत्र – मंत्र जप करते होगी अग्नि प्रकट
agni-prakat-karne-ka-mantra अग्नि प्रकट करने का मंत्र – मंत्र जप करते होगी अग्नि प्रकट नमस्कार दोस्तों आज मैं आपको अग्नि उत्पन्न करने वाले मंत्र के विषय में बताने जा रहा हूं जैसे कि हम लोग जानते हैं कि हमारे पुराने काल में अर्थात जो ऋषि मुनि तपस्या करते थे और यज्ञ करते थे तो वह भगवान अग्नि का आवाहन करने के बाद उनको प्रकट करते थे मंत्रो के द्वारा ही अपने यज्ञ की अग्नि को प्रज्वलित कर लेते थे।
आज मैं आपको एक ऐसे मंत्र के विषय में बताऊंगा प्रयोग से आप भी अग्नि को उत्पन्न कर सकते हैं और उसके द्वारा अपने कार्यों को सिद्ध कर सकते हैं दोस्तों अपने पुराने समय की किताबों में या पुरानी कथाओं में अग्नि के विषय में सुना भी होगा जाना होगा कि मंत्रो के द्वारा भी अग्नि को उत्पन्न किया जा सकता है
अर्थात आप अपने मंत्र शक्ति से भी आग को उत्पन्न कर सकते हैं दोस्तों हम भगवान सूर्य की आराधना करते हैं और उनको प्रसन्न करने के लिए नाना प्रकार के कर्म करते हैं और भगवान सूर्य भी अपने कर्मों के लिए सुबह प्रातः काल प्रकट होते हैं और इस संसार को ऊर्जा प्रदान करते हैं जिससे सभी जीवो का भरण पोषण होता है।
उसी प्रकार पुरातन समय में जब ऋषि मुनि मंतर करते थे और अग्नि को भी हम लोग देवता की संज्ञा में रखते हैं अर्थात जब हम ऋषि मुनि अग्नि देव का स्मरण करते थे तो वह प्रकट होते थे और उसे अग्नि प्रकट होकर यज्ञ कुंड को प्रज्वलित करती थी। उसके बाद देवता हवन के जरिए भोजन प्राप्त करते थे पृथ्वी हवन के जरिए भोजन प्राप्त करते थे इस समय मित्रों का प्रयोग करके आप भी अग्नि को प्रकट कर सकते हैं और अग्निदेव को प्रसन्न कर सकते हैं
दोस्तों एक विशेष बात यह है कि यदि आप इस मंत्र का संकल्प लेते हैं, कि मैं इस मंत्र का प्रयोग करूंगा तो उसके लिए एक नियम का पालन करना अति आवश्यक है। आप संकल्प लेने के बाद इस साधना को बीच में नहीं छोड़ सकते यदि आप बीच में छोड़ने का निश्चय करते हैं तो यह आपके लिए हानिकारक हो सकता है
अग्नि प्रकट करने का मंत्र
ॐ वं वहि तुभ्यं नम:
agni-prakat-karne-ka-mantra अग्नि प्रकट करने का मंत्र साधना विधि
आपको कि इस मंत्र का जब आपको अमावस्या की रात में बजे के बाद प्रारंभ करना है और उसके लिए आप किसी पवित्र स्थान पर बैठ जाए और अग्नि देव की एक तस्वीर या उनकी एक प्रतिमा सामने रखकर 11 लाख बार का उच्चारण करें मंत्र उच्चारण करने के बाद आपको अपने अंदर कुछ ऊर्जा प्रतीत होने लगेगी और यदि आपने अपने पूजा स्थल पर क्या साधना स्थल पर दिया प्रज्वलित किया है। तो वह उसकी लो बढ़ जाएगी और धीरे धीरे यह मंत्र आप द्वारा सिद्ध कर लिया जाएगा। पर इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आप शुद्ध हो कर साधना करें। अग्नि सभी प्रकार की अशुद्धि को जलाकर भस्म कर देती है। अतः आपके मन में भी पूर्ण रूप से विश्वास होना चाहिए कि भगवान अग्नि देव हम पर प्रसन्न होंगे।
najar bandhne ka mantra नजर बांधने का मंत्र – काले इल्म का सबसे शक्तिशाली मंत्र
najar bandhne ka mantra नजर बांधने का मंत्र – काले इल्म का सबसे शक्तिशाली मंत्र
नजर बांधने का मंत्र najar bandhne ka mantra- काले इल्म का सबसे शक्तिशाली मंत्र आज मैं आपको एक कैसे मंत्र के बारे में बताना चाहता हूं अपने सब आज तक सुना होगा। हो सकता आपने सुना भी ना हो कुछ ऐसा उसे मंत्र से कारण होता है। हमने होता देखा है लेकिन हमको पता नहीं होता यह मंत्र है क्या खासकर मंत्र का इस्तेमाल जादूगर बड़े बड़े तांत्रिक या फिर पहले के टाइम में राजा महाराजा भी करते थे इस के अलावा सैनिक भी इस्तेमाल करते से ऋषि मुनि भी मंत्र का इस्तेमाल करते थे। नजर बांधने के मंत्र से आप किसी नज़र बांध कर जैसा दृश्य दिखाना चाहते है वो आप दिखा सकते है उसको वैसा दिखाई देगा। इस की विस्तृत जानकारी आगे प्राप्त होगी पूरा लेख ध्यान से पढ़े।
najar bandhne ka mantra नजर बांधने के मंत्र प्रयोग क्यों किया जाता है और क्या है रहस्य
आज के समय में कुछ लोग जादू का खेल दिखाते हैं जादू का खेल दिखाने के पीछे जो रीजन है वह होता है नजर का धोखा मैजिशियन हमें मैजिक दिखाते हैं। वह सिर्फ हमारी आंखों का धोखा होता है वह क्या है, वह आज हम आपको बताने वाले हैं। मैं आज आपके साथ अपना एक बहुत ही बड़ा ज्ञान यानी कि इलम का मतलब होता है, ज्ञान शेयर करने वाला हूं।
जो आप सब लोगों ने सुना होगा देखा होगा और आप जानते नहीं होता कैसे है लोगों ने देखा ही होगा। कुछ लोग ऐसे कार्य करते हैं हमारी आंखों के सामने हमें लगता है वह माया है। आखरी माया है यह क्या है।
वैसे तो अपनी जगह पर सब कुछ होता है जादू भी है तंत्र मंत्र भी है ठीक है। अपनी जगह पर सब कुछ है लेकिन कुछ लोग माया नजर बंदी से भी करते हैं। मैं आज आपको एक नजर बांधने का ऐसा मंत्र बताने वाला हूं।
अगर आप इसे सिद्ध कर लेते हैं ,अभी आपको किसी की नजर बांधते हो आप उसे मंत्र का जाप करिए और जो भी आपके आसपास लोगों के उनकी नजर बंद जाएगी। उनके सामने आप कुछ भी करेंगे उनको पता नहीं लगेगा उनको वैसे ही आप दिखते रहेंगे जैसी पोजीशन में आप बैठे थे।
जिस में मंत्र पढ़कर छोड़ेंगे इस पोजीशन में जिस पोजीशन में आप बैठे हो उसकी वही दिखता रहेगा और उसकी नजरों का धोखा रहेगा आप उसके अलावा उसके कहीं चले जाइए पानी पीकर आ जाइए उठकर अपना काम करके आ जाइए उसको पता भी नहीं लगेगा एक तरह से आप मैजिक भी दिखा सकते हैं।
आप जानते होंगे कुछ लोग क्या करते हैं एक पेन ले लेते हैं। पेन को हाथ से गायब कर देते हैं 10 के नोट को हाथ में लेकर उसको गायब कर देते हमें पता नहीं लगता हमें तो मतलब की मुट्ठी बंदी दिखती है। लेकिन वह इंसान मुट्ठी खोल के उसके अंदर 10 रुपए रखे 10 क़े नौट 100 बनाना है 10 का निकाल कर सो कर के बंद कर देता हमको पता भी नहीं लगता।
हम वही पोजीशन में देखते हैं जिस पोजीशन में उसने मुट्ठी बंद की थी और मंत्र इस तरह से फूंक देता है तो हमारी दृष्टि बन जाती है हमारी नजर बन जाती हम सोचते हैं यह माया है
कुछ लोग माया भी करते होंगे लेकिन खास कर लोग नजर बंदी करते हैं। आज हम आपको ऐसे ही मंत्र बताने वाले हैं इस मंत्र से आप जादूगर भी बन सकते हैं। मैजिशियन भी बन सकते हैं आप इसे नजरबंदी कर सकते हैं। कोई लोग किसी को परेशान कर रहे हैं तो आप उनकी मदद करना चाहते हैं तो आप इसका सहारा ले सकते हैं।
कुछ लोग ऐसे होते हैं गलत रास्ते पर चल जाते हैं उन्हें गलत रास्ते से बचने के लिए इस मंत्र का इस्तेमाल कर सकते हैं उनकी नजरों का धोखा देकर उन्हें हम कुछ भी समझ सकते हैं आज हम आपको इस मंत्र के बारे में सारी जानकारी देंगे सबसे पहले तो हम आपको बता देंगे कि जो नजर बंदी का मंत्र आपको कैसे शुद्ध करना है सिंपल सी विधि है
najar bandhne ka mantra नजर बांधने के मंत्र की विधि
आप इसे अगर ग्रहण में करेंगे तो सबसे अच्छा उपाय है ग्रहण वाले दिन आप चाहे तो नदी में जाइए नदी में इतना पानी हो नाभी तक पानी में खड़े हो जाइए। हाथ में पानी लीजिए जो आप नदी में या गंगा में या किसी तीर्थ स्थल पर जाते हैं हाथ में इस तरह से पानी ले लीजिए पानी को इस तरह से नीचे छोड़ते जाइये ,और मंत्र का जाप करते जाइए रोकना नहीं है। लगातार लगातार बोलते रहना पानी भी लगाकर उठाते रहना और आपकी आंखें बंद होनी चाहिए।
तो आप यह ध्यान में रखिए जब भी आप मंत्र शुद्ध करते हैं तो आपका मुख जहां पर ग्रहण लगा हो वहां पर होना चाहिए या पूर्व की तरफ भी हो सकता है। वरना दिशा का इतना भरम नहीं होता।
जब हम ग्रहण में मंत्र शुद्ध करते दिशा कोई भी हो भावना शुद्ध होनी चाहिए। लोक कल्याण की होनी चाहिए किसी भी मंत्र का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए गलत भावना से हमें शुद्ध नहीं करना चाहिए। लोगों मित्रों का इस्तेमाल गलत कार्य के लिए अनैतिक करते हैं।
कुछ लोग इसका निर्दोष स्त्रियों पर भी करते हैं मैं आपको पहले ही मैसेज दे देता हूं। अगर आप इन मंत्रो का गलत इस्तेमाल करेंगे तो आपको उसका हर जाना भोगना पड़ेगा।
आप अगर आप इस मंत्र का निर्दोष प्राणी के ऊपर करते हैं तो आपको उसका उल्टा प्रभाव भी भोगना पड़ सकता है। तो आप जब भी कोई मंत्र करें साधना करें भक्ति भावना शुद्ध हो लोक कल्याण की खबर से साधना ना करें।
यदि हमारी एक विधि ग्रहण में आप चाहे तो ग्रहण में आप घर बैठकर भी जप कर सकते हैं। इसमें कोई जोत नहीं लगनी पश्चिम की कोई दिशा का बहम नहीं है। आप पूर्व की तरह मुंह कर दीजिए उत्तर की तरफ मुंह कर लीजिए पश्चिम की तरफ मुंह कर लीजिए जहां आपका दिल करे। वैसे पूर्व की तरफ करें तो ज्यादा अच्छा है।
मंत्र का जाप करके आपको सिद्ध कर सकते हैं वरना आप चाहे तो इन मित्रों को अब नवरात्रों में कर सकते हैं। क्योंकि यह मंत्र भैरवनाथ का मंत्र है ऐसा मंत्र है इतना पावरफुल है बहुत ज्यादा जिसके किसी की भी नज़र बांध सकते है।
लेकिन आपको फिर बोलते उसका गलत इस्तेमाल न करें भैरव का मंत्र है तो अभी से नवरात्रि में भी कर सकते हैं 9 नवरात्रि में 11 9 नवरात्रि 11 दिन काव्य संकल्प ले सकते हैं बता देते आप चाहे तो दुर्गा मां की मूर्ति रख सकते हैं काली मां की मूर्ति रख सकते हैं आप चाहो तो भैरव का मंदिर है भैरव के मंदिर में जाकर भी आप इसे जाप कर सकते हैं
आपको डेली जाप करना होगा 21 दिन तक करना होगा अगर आप सुबह शाम 11:11 वाला जाप करते तो अच्छा है अगर आप सुबह शाम नहीं कर सकते तो आप एक टाइम में 11 वाला डेली जाप कीजिए। आपको शुद्ध करना है तो मेहनत भी बहुत करनी होगी। मंत्र को शुद्ध के लिए इसका जितना आप जब करेंगे। जितना मंत्र का जाप करेंगे उतना ही है काम करेगा मैं तो आपको सलाह दूंगा। आप ग्रहण का इंतजार कीजिए ग्रहण में करे।
1 लाख के समान जाप माना जाता ग्रहण में करेंगे तो सबसे ज्यादा मंत्र प्रभाव मिलेंगे जैसे ग्रहण में खड़े होकर पानी में हम जाप करें। जिस तरह पानी की गति होगी इतनी गति से आपका मंत्र काम करेगा। आप चाहे तो नवरात्रि में कर सकते हैं और आप चाहे तो उसे डेली जाप करके भी शुद्ध कर सकते हैं। वैसे होली दीपावली है तो होली दीपावली पर भी कर सकते हैं।
दीपावली पर आप चाहे तो वहां शुद्ध कर सकते हैं लेकिन आप डेली चाहे वह भी कर सकते हैं। आप किसी भी शुक्ल पक्ष से शुरू कर लीजिए आपको लगातार 41 दिन इसकी साधना करनी होगी आपको डेली 10 माला निकालनी होगी समय निकाल लिए जो समय निकालेंगे आपको वही समय फिक्स करना होगा। वैसे आप इसकी माला रात के समय निकालेंगे तो ज्यादा अच्छा रहेगा और आपको मैं बता देता हूं।
उसके लिए आपको किस किस सामग्री की जरूरत होती है आपको पहले ही बता चुका हूं एक लकड़ी की चौकी ले लीजिए। उसके ऊपर आप काले रंग का कपड़ा बढ़ा लीजिए कल आप तो आप काले रंग का कपड़ा बढ़ा लीजिए सरसों के तेल का दीपक जला लीजिए एक थाली में रख लीजिए।
नजर बांधने का मंत्र najar bandhne ka mantra
ॐ नमो काला भैरों, घुंघरा वाला हाथ खड्ग फूलों की माला, चौंसठ योगिनी संग मे चाला, देखो खोलि नज़र का ताला, राजा प्रजा ध्यावे तोहि, सब की दृष्टि बांध दे मोहि, मैं पूजों तुमको नित ध्याय, राजा प्रजा मेरे पाय लगाय, भरी अथाई सुमिरो तोय, मेरा किया सब कुछ होय, देखूं भैरों तेरी शक्ति शब्द सांचा, पिंज कांचा, पुरो मंत्र ईश्वरो वाचा। (साधक अपना नाम ले
नजर बांधने najar bandhne ka mantra मंत्र प्रयोग क्या ?
नज़र बांधने का प्रयोग किसी व्यक्ति की नज़र बांधने के लिए क्या जाता है इस से जो भी आप उस व्यक्ति को जो दिखाना चाहते है वो वयक्ति वही देखेगा वो उस के लिए यह नज़र का धोखा होगा।
नजर बांधने najar bandhne ka mantra मंत्र प्रयोग क्यू किया जाता है ?
नजर बांधने मंत्र प्रयोग जादू के करतब दिखाने के लिए या किसी दुश्मन को भर्मित करने के लिए किया जाता है।
[sc_fs_multi_faq headline-0=”p” question-0=”नजर बांधने najar bandhne ka mantra मंत्र प्रयोग क्या ?” answer-0=”नज़र बांधने का प्रयोग किसी व्यक्ति की नज़र बांधने के लिए क्या जाता है इस से जो भी आप उस व्यक्ति को जो दिखाना चाहते है वो वयक्ति वही देखेगा वो उस के लिए यह नज़र का धोखा होगा। ” image-0=”” headline-1=”h3″ question-1=”नजर बांधने najar bandhne ka mantra मंत्र प्रयोग क्यू किया जाता है ?” answer-1=”नजर बांधने मंत्र प्रयोग जादू के करतब दिखाने के लिए या किसी दुश्मन को भर्मित करने के लिए किया जाता है। ” image-1=”” count=”2″ html=”true” css_class=””]
दिव्य दृष्टि प्राप्त करने का मंत्र – दिव्य दृष्टि सिद्धि divya drshti praapt karane ka mantra
दिव्य दृष्टि प्राप्त करने का मंत्र – दिव्य दृष्टि सिद्धि divya drshti praapt karane ka mantra यदि आप दिव्य दृष्टि प्राप्त करना चाहते हैं, तो हम आपको बताएंगे कि यह कैसे करना है, इसलिए हमारे साथ रहें, दोस्तों, हमारी साइट पर आपका स्वागत है।तांत्रिक साधु बनना उतना आसान नहीं है जितना हम सोचते हैं दोस्तों। साधक बनने के लिए आपको बहुत कुछ सहना पड़ता है, कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।
कई लोग सिर्फ साधक के नाम पर, केवल पैसे ठगने की प्रक्रिया में हैं। ऐसे कई ज्योतिषी हैं जहां वे बड़ी से बड़ी विपत्ति को भी दूर कर देते हैं। लेकिन कुछ ज्योतिषी धन धोखा देने के बारे में भी सोचते हैं।
तो दोस्तों आज मैं आपके सामने एक ऐसा मंत्र बताऊंगा जहां आपको गर्व महसूस होगा। और आप इतना शक्तिशाली मंत्र सिद्ध कर सकते हैं, एक बार इस मंत्र को सिद्ध कर लेने के बाद आपको दिव्य दृष्टि की शक्ति प्राप्त हो जाएगी।
दिव्य दृष्टि प्राप्त करने का मंत्र – दिव्य दृष्टि सिद्धि divya drshti praapt karane ka mantra
साधक दिव्य दृष्टि प्राप्त करने के लिए तंत्र किरया में मेहनत करते हैं लेकिन अभी तक सफल नहीं हुए हैं। क्योंकि दिव्य दृष्टि को पूरा करने के लिए अपने शरीर को पूर्णता के लिए समर्पित करना आवश्यक है।
आप इस शरीर में आराम नहीं कर सकते हैं और आपको दिन में तीन बार नहीं खाना चाहिए? इसके कुछ महत्वपूर्ण नियम हैं और इस नियम का पालन करना आसान नहीं है। जी हां, अगर आपका मन शुद्ध है तो यह सब काम आपके लिए आसान हो सकता है। इतिहास में केवल कुछ ही महात्मा के पास दिव्य दृष्टि थी।
उदाहरण के लिए, महाभारत में युद्ध के दौरान, धृतराष्ट्र देख नहीं सकता था, और जन्म से अंधा था, इसलिए संजय उसके पास ही रहा। वह जानता है कि संजय को वेदव्यास से प्राप्त हुईदिव्य दृष्टि प्राप्त हुई थी इसलिए महाभारत में युद्ध का परिणाम जो भी हो, संजय अपनी दिव्य आंखों से सभी परिणामों को देखते थे और उन्हें राजा दरिताष्टर को सुनाते थे।
महाभारत शुरू होने से पहले भगवान श्री कृष्ण ने बंदू अर्जुन को को उपदेश दिया था, जिसे हम भागवत गीता के नाम से जानते हैं। धर्मोपदेश देते समय भगवान श्री कृष्ण अर्जुन ने विराट रूप के दर्शन दिए और उस समय दर्शन देने के कारण अर्जुन को दिव्य दृष्टि देनी पड़ी, अन्यथा अर्जुन इतने विशाल विराट रूप को अपनी आंखों से नहीं देख पाते।
तीसरा, आप रामायण के बारे में जानते हैं। उन्होंने रामायण होने से पहले ही पूरी रामायण लिख दी थी और यह तभी संभव हो पाया था जब कठोर साधना किया और ब्रह्म देव से कृपा प्राप्त की और दिव्य दृष्टि भी प्राप्त की। वाल्मीकि जी अपनी दिव्य दृष्टि से भूत, भविष्य और वर्तमान को जानने में सक्षम था।
आज हम जानेंगे कि दिव्य दृष्टि क्या होती है। हम इसे कैसे प्राप्त करते हैं और इसके बहुत मजबूत लोगो के क्या लाभ हैं?
आपने तीसरी आंख के बारे में सुना होगा और आपने इसे भगवान शिव की तस्वीर में देखा होगा और यह दिव्य आंख, दिव्य दृष्टि है। जब आप इस आंख को खोलते हैं, तो ये शक्तियां मनुष्य के जीवन में संचारित होती हैं जिसका आप अनुमान भी नहीं लगा सकते हैं।
इस आंख को खोलते समय घर बैठे तीनों लोकों की यात्रा करते हुए भूत, भविष्य और वर्तमान को आसानी से जाना जा सकता है। ये आंखें हम मनुष्यों को दिखाई नहीं देती हैं, लेकिन वेदिव्या दृष्टी में दिखाई देती हैं, यदि आप आप तीसरी आंख को जगाना चाहते हैं या फिर उसी से देखना चाहते हैं, आइए आपको बताते हैं कि आप कैसे सफल हो सकते हैं।
सबसे पहले किसी सुनसान जगह पर हाथ में 108 मनको की माला लेकर बैठ जाएं। अगले मंत्र को पढ़ते रहें। आप तब तक मंत्र जप करते रहे जब तक आपकी तीसरी आंख को अनुभव नहीं हो जाता। इस मंत्र का जाप करते समय अपने मन को एक प्रबल बल से जोड़ें और किसी अन्य चीज़ की ओर न अकृषित हो । बस अपने मन और शरीर को पूरी तरह से भगवान को समर्पित कर दें। इस मंत्र का जाप करने से आप स्वयं समझ सकते हैं कि इस मंत्र में बहुत शक्ति है।