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शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है

शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है

शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है

 

शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है
शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है

शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है  गुरु मंत्र साधना को में आप सबका स्वागत है जिन का नाम आपने अक्सर सुना होगा जिन मुस्लिम धर्म की शक्ति है जैसे हमारे पुराणों में भूत प्रेत के बारे में आता है। वैसे ही मुस्लिम धर्म में कुरान के अंदर जिन के बारे में जानकारी मिलती है। 

आज मैं जिन के बारे में बात करेंगे ,जब किसी  के शरीर में आता है।  उसके क्या लक्षण होते है, क्यों आता है कैसे आता है और इसके क्या लक्षण होते हैं। किसी के शरीर में आता है उसको क्या परेशानी हो सकती। इन सब बातों के बारे में विस्तार सहित जानकारी परदान करूंगा।  इस  लेख को अंत तक जरूर पढ़ें तब आपको समझ में आएगा आप इससे कैसे  बच सकते हैं औरों को भी बचा सकते हैं।

शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है

शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है
शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है

किसी के शरीर में क्यों आता है इसके बारे में जानकारी प्रदान करेंगे पहले इस की हम पसंद के बारे में जानेंगे इ.फको तेज खुशबू बहुत पसंद होती है। उसके अलावा सुंदर लड़कियां बहुत पसंद होती है, यह ज्यादातर जवान लड़कियों के शरीर में आता है। उनके साथ गलत काम करता है जब भी उनके शरीर में आता है उनके के साथ गलत काम करता है। 

जिसके साथ यह गलत काम करता है उसको पता नहीं चलता है एक बेहोशी की तरह रात के समय सिस्टम हो जाता है और उसे लड़की को पता नहीं चलता है क्या हुआ था।

औरत के शरीर में जिन्न होने के लक्षण

सुबह शरीर में दर्द होता है और  शरीर टूटता है। सारा दिन उन लड़कियों के शरीर में थकावट और कमजोरी महसूस होती है  पता नहीं चलता क्या हो रहा है। बहुत कम मामलों में ऐसा होता है कि लड़की को पता चल जाता है उसके साथ कोई शक्ति सेक्स कर रही है।

आदमी शरीर में जिन्न होने के लक्षण

हम बात करेंगे किसी आदमी के शरीर में क्यों आता है इस विषय मैं बात करेंगे बहुत कम आदमियों के शरीर में जिन्न आता है जब कोई आदमी जिन्न  साधना करता है , उसको वश में करने की कोशिश करता साधना में  कोई रक्षा नहीं लगाई जाती है या  कोई गलती  हो जाती है।  तब आप के शरीर जिन्न  प्रवेश करता है। इसके क्या लक्षण होते है आप का कभी भी सिर घूमने  लगता है और चक्र आते है यह कुछ  समय तक होगा फिर नार्मल हो जाओगे बीच बीच में यह आपको दिक्कत हो सकती है। इस के इलावा और भी कारन हो सकते है अगर आप को परेशानी है  सम्पर्क करें ph 85280 57364 

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चौसठ योगिनी कौन है – 64 योगिनी की कथा – चौसठ योगिनी रहस्य ph.85280 57364

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चौसठ योगिनी कौन है – 64 योगिनी की कथा – चौसठ योगिनी रहस्य ph.85280 57364

 

chausath yogini rahasya चौसठ योगिनी कौन है – 64 योगिनी की कथा – चौसठ योगिनी रहस्य चौसठ योगिनीयों का प्रादुर्भाव मां काली से ही हुआ है। चौसठ योगिनीयों सृष्टि के विभिन्न आयामों पर शासन करती हैं और हर एक योगिनी का एक विशिष्ट चरित्र है। मुख्यतः इनका संबंध या कहें सामान्य कारक आठ मात्रिकाओं से है।

guru mantra sadhna आपका अभिनंदन करता है। सनातन धर्म के साथ सम्बंधित रोचक तथा ज्ञानवर्धक वृतांतों के लिए बने अवश्य रहे । हम हमारे धर्म ग्रंथों से ली गई कथाएं डालते हैं। 

आदि शक्ति काली के ही भिन्न-भिन्न अवतारी अंश हैं और देवी महात्मा के अनुसार इन आठ देवियों ने शुंभ और रक्तबीज । राक्षसों के विरुद्ध युद्ध में मां दुर्गा की सहायता की थी और देवी दुर्गा ने स्वयं मातिकाओं की रचना की थी।

इनमें से सात दी शक्तियों को संबंधित देवों के ही नारित्व रूप माना जाता है। ये सात देवी  अपने पतियों के वाहन तथा आयुद्ध के साथ यहाँ उपस्थित होती हैं। आठवीं मात्रिका स्वयं मां काली है। हर एक मातिका की सहायक आठ शक्तियां हैं इसीलिए इनकी संख्या चौसठ हो जाती है।।

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सर्वप्रथम जानते हैं कि यह मातिकाएं कौन- कौन है और किन देवों से संबंधित है। नंबर एक।
ब्रह्माणी भगवान ब्रह्मा उनके चार सिर और चार भुजाएं हैं। ब्रह्मा जी की ही तरह इनका वाहन हंस है। नंबर दो महेश्वरी भगवान शिव, भगवान शिव की ही तरह उनकी जटाओं में अर्धचंद्र है और उनका वाहन नंदी है। चतुर्भुजाओं में त्रिशूल, खटगा आदि हैं। नंबर तीन कमारी कार्तिकेय जी उनका वाहन मयूर है। वे अपने हाथों में शक्ति, दंड आदि धारण करती हैं।

नंबर चार। वैष्णवी भगवान विष्णु। वनमाला पहने हुए देवी वैष्णवी के दो हाथों में चक्र  हैं। इनकी सवारी विष्णु जी की ही तरह गरुड़ ही है। नंबर पांच  देवराज इेंद्र। वे अपने वहां हाथी पर विराजमान होकर वज्र धारण करती हैं। नंबर छः। वाराही वारा भगवान विष्णु के वारा अवतार की ही तरह दिन देववी का चेहरा वाराह व धड़ मनुष्य का है। हाथों में दंड खड़ग खेत का और पाश धारण करती हैं और कहीं कहीं भैंसे पर भी सवार दिखाई गई हैं।

नंबर सात नर से ही भगवान नरसिंह इनका चेहरा सेह व धड़ मानव का है और हाथों में शंकर, चक्रृत, शूल डमरु आदि धारण करती हैं और अंत में आती है। मां काली जिन्हें चामुंडा के नाम से भी जानते हैं, एकमात्र। ऐसी मात्रिका हैं जिन्हें किसी भी देव के स्त्री शक्ति अवतार के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाता।

 यह देवी के हाथों में कपाल। शूल नर मुुंड तथा अग्नि है तथा इनका वाहन सियार है, जैसे हमने पहले बताया योगिनीिया, साक्षात आदि काली के ही अवतार हैं तथा सदैव माता पार्वती की सखियों की ही तरह उनके साथ ही रहती हैं। देवी पार्वती द्वारा लड़े गए प्रत्येक युद्ध में समस्त योगिनियों ने भाग लिया था और अपनी वीरता का परिचय दिया था।

महाविद्याएं सिद्ध विद्याएं भी योगनियों की ही श्रेणी में आती हैं। यह भी मां काली की ही भिन्न-भिन्न अवतारी अंश हैं। समस्त योगिनिया अलौकिक शक्तियों से संपन्न है तथा इंद्रजाल, जादू, वशीकरण, मारण,  आदि कर्म इन्हीं की कृपा द्वारा सफल हो पाते हैं। मुख्य रूप से आठ योगिनिया अपने गुणों तथा स्वभाव से भिन्न-भिन्न रूप धारण करती हैं।

ये सभी तंत्र तथा योग विद्या में भी निपुण है। स्कंद पुराण के काशी खंड। पूर्वाध के अनुसार भगवान शंकर राजा देवोदास से काशीपुरी प्राप्त करना चाहते थे परंतु राजा देवोदास धर्म पूर्व प्रजा का पालन करते और उनके राज्य में अपराध नाम की कोई चीज़ न थी। भगवान शिव के कहने पर समस्त देवताओं ने उन सर्वत्र शुद्ध राजा के छिद्र अर्थात कोई कमी ढूंढने की बहुत चेष्टा की किन्तु वह असफल रहे।

इंद्र आदि देवताओं ने देवोदास के राज्य तथा शासन को असफल बनाने के लिए अनेक प्रकार के विघ्न उपस्थित किए किंतु राजा ने अपने तपोबल से उन सब विघनों पर विजय पाई।   मंदराचल से महादेव जी ने चौसठ योगिनियों को राजा के छिद्र  दोष देखने के लिए काशी भेजा।

उन योगिनियों ने विभिन्न रूप धारण कर लिए। अलग अलग रूप  धारण कर अलग-अलग कार्यों में लग गई वह योगनिया बारह महीनाों तक काशी में रहकर निरंतर चेष्टा करते रहने पर भी राजा का कोई छिद्र अर्थात दोष ना पा सकें परंतु वह सब लौटकर मंदराचल भी नहीं गई।

तब से लेकर आज तक योगिनियों ने कभी भी काशी को नहीं छोड़ा हालांकि वे तीनों लोकों में घूमते हैं। आगे व्यास जी के पूछने पर स्कंददेव इन योगनियों के बारे में बताते हैं कि यदि कोई मनुष्य इन चौसठ नाम का प्रतिदिन , दोपहर और संध्या के समय जप करें तो उसके। भूत प्रेत द्वारा दिए गए सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

इनके चौसठ नाम का पाठ करने वाले को ना डाकिनी शाकिनीष्मंड और ना ही कोई अन्य कष्ट दे सकता है। यह नाम, युद्ध, वाद, विवाद आदि में भी विजय प्रदान करते हैं। जो योगिनी पीठों की सेवा करता है उसे वाछित शक्तियां प्राप्त। और यदि कोई अन्य मे्रो को भी उनके आसनों के सामने दोहराता है उसे भक्ति  प्राप्त होती हैं।

यज्ञ, पूजा और प्रसाद तथा धूप और दीपक के समर्पण से योगिनी जल्दी ही प्रसन्न हो जाती हैं और वे सभी इच्छाओं को अवश्य पूर्ण करती हैं। अश्व युज के महीने में शुक्ल पक्ष के पहले चंद्र के दिन से शुरू होकर नौवे दिन तक मनुष्य को योगिनियों की पूजा करनी चाहिए। इससे वह जो चाहे प्राप्त कर सकता है।

काशी तीर्थ यात्रा करते समय इनकी आराधना भी अवश्य करनी चाहिए अन्यथा उनके कार्यों में ये विघन डाल सकती है। अलग-अलग पुराणों में इन चौसठ योगििनियों के नामों में थोड़ा अंतर अवश्य मिलता है।

वैसे तो भारत में इनके कई पीठ हैं पर मुख्य पीठ थोड़ीसा और मध्यप्र प्रदेश में स्थित है। जय मां काली। आज के पोस्ट  में बस इतना ही। आशा करते हैं कि आपको आज का पोस्ट  पसंद आया होगा। इसे लाइक अवश्य करें।

किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए आप सबसे क्षमा चाहते हुए आपसे निवेदन है कि प्रेम पूर्वक परमपिता परमात्मा को ह्रदय  में धारण करें और बोले वैदिक सनातन धर्म की सदा ही जय ।

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इंद्रजाल मोहिनी मंत्र | सबसे सरल मोहिनी मंत्र – तीव्र साधना ph.8528057364

इंद्रजाल मोहिनी मंत्र | सबसे सरल मोहिनी मंत्र - तीव्र साधना

इंद्रजाल मोहिनी मंत्र | सबसे सरल मोहिनी मंत्र – तीव्र साधना ph.8528057364

इंद्रजाल मोहिनी मंत्र | सबसे सरल मोहिनी मंत्र - तीव्र साधना
इंद्रजाल मोहिनी मंत्र | सबसे सरल मोहिनी मंत्र – तीव्र साधना

इंद्रजाल मोहिनी मंत्र सबसे सरल मोहिनी मंत्र मेरा प्रयास यही रहता है कि मैं जनकल्याण के लिए जितना मेरे से हो सके मैं करूं कहीं गलत जगह ना भटके किसी की और की आवश्यकता ना पड़े। इसलिए मैं आज इंद्रजाल मोहिनी मंत्र देने जा रहा हूं । 

इंद्रजाल मोहिनी मंत्र का इस्तेमाल कभी भी गलत इरादे से नहीं करना चाहिए।  यह मंत्र इंद्र के द्वारा सिद्ध मंत्र है और केवल नेक इरादों के साथ ही इसके इस्तेमाल की अनुमति दे रहा हूं। 

अगर आप भी किसी को अपने वश में करना चाहते हैं अपने अधीन करना चाहते हैं तो यह इंद्रजाल मोहित मोहिनी मंत्र का बहुत बढ़िया काम आएगा। मंत्र  वैसे तो इंद्रजाल मोहिनी मंत्र का इस्तेमाल आप किसी भी दिन कर सकते हैं।  लेकिन अमावस की रात्रि को यह उपाय करने से ज्यादा जल्दी असर मिलेगा मतलब अगर यह अमावस की रात्रि को कर जाए तो उसका असर जल्दी मिलेगा। 

 

इंद्रजाल मोहिनी मंत्र | सबसे सरल मोहिनी मंत्र – तीव्र साधना 

 ॐ नमो मन मोहिनी रानी मोहिनी चला सैर को मस्तक धर तेल का दीप जल मोहूं, सब जगत मोहूं, और मोहूं मोहनी रानी जा शय्या बैठी मोहर दरबार गौरा पार्वती की दुहाई। लोनी चमारी की दुहाई फिरे नहीं हनुमन्त की आन ।

 

इंद्रजाल मोहिनी मंत्र | सबसे सरल मोहिनी मंत्र – तीव्र साधना विधि 

मन्त्र के प्रयोग से पहले इसे सिद्ध कर लेना आवश्यक है। दीपावली की रात्रि को ३२० मन्त्र के जप से इसकी सिद्धि मानी जाती है। जिस व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करना हो, उसके शरीर पर ७ बार मन्त्र का उच्चारण करते हुए अभिमन्त्रित तेल का छींटा दें तो निश्चित रूप से वह मोहित होता है। यदि किसी सभा को मोहित करना हो तो चमेली के तेल को अभिमन्त्रित करके बिन्दी लगानी चाहिये ।

इंद्रजाल मोहिनी मंत्र 2 

२. ॐ नमो मन मोहनी रानी सिंहासन बैठी मोह रही दरबार मेरी भक्ति गुरु की शक्ति दुहाई गौरा पार्वती बजरंगबली की आन नहीं तो लोना चमारी की आन लगे ।

इस मन्त्र के प्रयोग की विधि उपर्युक्त मन्त्र की तरह ही है । अन्तर इतना ही है कि उसकी सिद्धि ३२० मन्त्र के जप से होती है और इस मन्त्र की सिद्धि केवल २०० मन्त्रजप से ही हो जाती है।

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gupt mohini गुप्त मोहिनी मंत्र – प्रभावशाली मोहिनी विद्या ph.85280 57364

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gupt mohini गुप्त मोहिनी मंत्र – प्रभावशाली मोहिनी विद्या ph.85280 57364

पुतली मोहन मंत्र – गुप्त मोहिनी मंत्र ओम नमः शिवाय बहुत से ऐसे गूढ़ रहस्य  हैं जो मानव जाति के संपर्क में नहीं आ पाए।  वह लाखों सालों से छुपी पड़े हैं और कुछ ऐसे ग्रंथ है जो की आज तक पढ़े  बिना यूंही बंद के बंद पड़े हैं। लेकिन आज मैं आपको एक ऐसा गुड रहस्य बताऊंगा जो आपकी इच्छा को पूर्ण कर देगा। 

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मोहिनी मंत्र में अपार शक्ति होती है किसी को  देखते ही देखते ही  आपके वश में कर सकते हैं।  कुछ ऐसा ही इस गुप्त मोहिनी मंत्र में आपको बताऊंगा कि किसी को भी आपके समीप ला देगा और इसको करना बहुत ही सरल है लाखों वर्षों से इसको गुप्त रखा गया है और पिछले जमाने में ऐसा होता था, कि लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी कोई तांत्रिक इस मंत्र को किसी को नहीं बताता था। 

लेकिन चैनल पर आपको ऐसे ऐसे दुर्लभ मंत्र यंत्र और तंत्र मिलेंगे इंटरनेट पर आप इस को  ढूंढ भी नहीं सकते न जाने कहां कहां से किन कबीलो से पंडितों से मैं यह सारे ग्रहण किए है। और उसके बाद आपको देता हूं और आज का जो मोहिनी मंत्र है वह है किसी भी अपने साथी को चाहे वह स्त्री हो या पुरुष को अपने वशीभूत कर सकता है। 

मैं  अक्सर  देखता हूं कि  रिश्तो में दरार आ जाती हैं धीरे धीरे जो है  वह खत्म होना शुरू हो जाता है।  आप इस मंत्र को अपने साथी पर लगा सकते हैं जिससे कि क्षणभर में वह आपके वश में हो जाएगा और पूरी उम्र आप जो कहोगे  मानेगा।  एक ऐसा गुप्त मंत्र है जो की लाखों खर्च करने पर भी आपको नाम मिले सकता। आज मैं इस वेबसाइट  पर आपको फ्री में दे रहा हूं आपको क्या करना है कि यह जो साधन है। 

पुतली मोहन मंत्र – गुप्त मोहिनी मंत्र

बांधूं इन्द्र को, बांधूं तारा बांधूं बांधूं लोहे का आरा उठे इन्द्र न बोले बाबा | सूख साख धूनि हो जाये। तन ऊपर फेंकी, कड़े होय सूत । मैं तो बन्धन बांध्यो, सास ससुर जाया पूत । भन बांधूं, मन्त्र बांधूं विद्या के साथ चार खूंट फिर आये फलानी फलाने के साथ।

पुतली मोहन मंत्र – गुप्त मोहिनी मंत्र विधि 

यदि कामिनी को मोहित करना हो तो शनिवार के दिन उसके बायें पांव के नीचे की मिट्टी और यदि पुरुष को आकर्षित करना हो तो शनिवार के दिन ही पुरुष के दाहिने पांव के नीचे की मिट्टी लेकर एक प्रतिमा बनायें। जिस लिंग (स्त्री अथवा पुरुष) का आकर्षण करना हो, उसी की प्रतिमा बना करके अर्द्धरात्रि को एकान्त में वस्त्रहीन होकर उस प्रतिमा को धूप-दीप दिखाकर जप करते रहें। लगभग घण्टे भर बाद इस सूत से उस प्रतिमा को लपेटकर गुप्त कर लें और प्रभाव देखें ।

 

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बंगाली मारण प्रयोग -सबसे तीव्र मारण प्रयोग और प्रभावशाली ph 85280 57364

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बंगाली मारण प्रयोग -सबसे तीव्र मारण प्रयोग और प्रभावशाली ph 85280 57364
बंगाली मारण प्रयोग -सबसे तीव्र मारण प्रयोग और प्रभावशाली ph 85280 57364

बंगाली मारण प्रयोग -सबसे तीव्र मारण प्रयोग और प्रभावशाली ph 85280 57364 जय महाकाल मेरे प्रिय साधक और मित्रों कैसे हैं आप सब लोग उम्मीद करता हूं आप सब ठीक ही होंगे कि आज मैं आप लोगों के सामने लुट बंगाल का है या बांग्लादेश का भी आप बोल सकते हो सबसे खतरनाक मंत्र है  और इस मंत्र का नाम अगर आप वेस्ट बंगाल में या  बांग्लादेश में अगर नाम लोगे कुछ तो लोग थर-थर कांपने लगते हैं या फिर कि यहां पर भी अगर आपको जानकर लोगों के सामने इस बांध मंत्र का अगर नाम लोगे है तो सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है कि यह वह मंत्र है सबसे खतरनाक मंत्र उसे बोलते हैं

बान मंत्र बंगाल में बोलते बाल मारना समझे आप बांध मारना है कि यह इतना खतरनाक मंत्र है बांध मारना अगर आप कि अपने दुश्मन को और बाद एक प्रकार के लिए मित्रों जिस तरह आप रामायण में या कथा मैं लेकर होंगे हर तरह के अलग-अलग बांध निकाल कर मर तीर निकाल के मारते हैं ना अलग-अलग तरह के तीर निकालते मारते हुए

इसे ही अलग-अलग तरह के बाद मस्त रहें परीक्षाओं से ज्यादा बांध मंत्र है यह भी उसी में का एक बाद मंत्र है बंगाली मंत्र है और मैं इसको मंत्र को कि अगर आप पढ़ते हुए आगे वाले व्यक्ति को ऐसे देखते हुए अगर इस मंत्र को पढेंगे तो आगे वाले की छाती में तीर जाकर लगेगा वह दृश्य ₹3 मंत्रों का उस तीर जाकर लगेगा और जगह पर छाती पकड़ कर नीचे गिर जाएगा और उसके मुंह से खून निकलना चालू हो जाएगा कि यह इतना खतरनाक मंत्र है

केवल तीन बार पढ़ना है कितने बजे सिर्फ तीन बार यह स्वयं-सिद्ध मंत्र इस को जागरूक करने की जरूरत ने स्वयं सिद्ध मंत्र है सिर्फ तीन बार पढ़ना है और आगे वाले व्यक्ति को देखना है तीर उसके जाकर सीने में लगेगा और वह खून की उल्टी करके जगह पर मर जाएगा लेकिन मित्रों मैं यह जितना खतरनाक मंत्र है

इस मंत्र की उग्रता को देखते हुए हमने केवल इसका मंत्र ही आप लोगों के सामने साझा किया है कि इस क्रिया को करते समय हाथ में एक वस्तु पकड़नी होती है कि आपके जो सीधे हाथ से दाएं हाथ में एक वस्तु को पकड़े रहना होता है मुट्ठी में और उस दुश्मन को देखते हुए मंत्र पढ़ना होता है और वह क्या चीज है मैं आपको नहीं बता सकता क्योंकि यह इतना खतरनाक मंत्र है अगर यह गलत इंसान के हाथ लग गया है तो बहुत नुकसान हो सकता है और थोड़ी सी थोड़ी सी बात पर कोई भी व्यक्ति किसी के ऊपर बान उठाकर मार सकता है

तो इसलिए मैं यह बाल मंत्र केवल आपके सामने साझा कर रहा हूं और एक बात आपको बता दूं आप कितना भी कमेंट बॉक्स में कमेंट करेंगे या फ़ोन करके पता करने की कोशिश करेंगे तो भी आपको वह चीज क्या है जिसे हाथ में पकड़कर मंत्र पढ़ा जाता है वह हम नहीं बताएंगे क्योंकि इससे कि आम जो लोग हैं उन लोगों को बहुत ज्यादा नुकसान हो सकता है

बेगुनाह मासूम लोगों की इसमें बहुत से लोगों की जान की नुकसान हो सके मित्रों छोटी सी छोटी सी बातों में इंसान बांध चला देगा थोड़ा सा गुस्सा आया बांध चला देगा लेकिन एक व्यक्ति के पीछे उसका पूरा परिवार होता है इस बात की सोच रखनी चाहिए इस बात के बारे में सोचना चाहिए है तो अगली बार फिर एक बंगाली मंत्र के साथ आपके सामने उपस्थित होऊंगा तब तक के लिए जय महाकाल 

इम्नामीन। सलास मातिन ।

इस मन्त्र का एक हजार जप प्रतिदिन करें और ४० दिन तक निरन्तर करें। इसके बाद कुम्हार के चाक की मिट्टी या शत्रु के पांव तले की मिट्टी ले आएं। इस मिट्टी में थोड़ा-सा रंग मिला करके शत्रु के त्वचा वाला रंग बना लें और फिर मिट्टी की एक प्रतिमा बना लें। श्मशान से हड्डियाँ प्राप्त करके छोटी-सी एक माला बना लें। इस माला पर एक बार मन्त्र का जप करके प्रतिमा के सिर पर एक जूता मारें । इसके बाद फिर जप करें और फिर एक जूता मारें। यह क्रिया करते रहें। इससे शत्रु के सिर पर चोट लगेगी। यदि यह प्रयोग ४० दिन तक निरन्तर किया गया तो शत्रु का सिर फूटकर उसकी बोलो राम हो जाएगी।

 

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Kachha Kalua – कच्चा कलुआ साधना – सम्पूर्ण रहस्य के साथ ph.8528057364kala Jadu tona ke lakshan काला जादू टोना का लक्षण 

कर्ण पिशाचिनी सिद्धि मंत्र | कर्ण पिशाचिनी विद्या ph.85280 57364

कर्ण पिशाचिनी सिद्धि मंत्र | कर्ण पिशाचिनी विद्या

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कर्ण पिशाचिनी साधना कर्ण पिशाचिनी का प्रयोग लोकसिद्धि के लिए बहुत ही प्रभावी है। यह साधना उग्र श्रेणी में आती है। अतः किन्हीं सिद्ध गुरुदेव का सहारा लेना चाहिये; अन्यथा सङ्कट में पड़ सकते हैं।

कर्णपिशाचिनी की उग्रता को कम करने के लिए घी कुवार या घृत-कुमारी नामक पौधे की जड़ और उसके पत्तों का गूदा बहुत उपयोगी है। जड़ को विधिवत् उखाड़कर सिद्ध कर अपने पास रखने से और उसके पत्तों के गूदे या रस को सारे शरीर तथा मस्तक में लगाने से उग्रता सौम्यता में बदल जाती है ।

1 कर्ण पिशाचिनी सिद्धि मंत्र

– ॐ नमः कर्ण पिशाचिनी अमोघ सत्यवादिनी ! मम कर्णे अवतरावतर, अतिता नागत वर्तमनानी दर्शय, मम भविष्यं कथय कथय, ह्रीं कर्ण पिशाचिनी स्वाहा ।

लोहे का एक त्रिशूल बनाकर पञ्चोपचारों या षोडशोपचारों से उसका पूजन कर साधनास्थल में जमीन में गाड़ दें। दिन में घी का दिया जलाकर मन्त्र का ११०० जप करें। फिर आधी रात को त्रिशूल का पूजन कर घी और तेल के दीपक जलाकर ग्यारह दिन तक ग्यारह सौ मन्त्रजप करें। अन्त में ‘कर्णपिशाचिनी’ प्रकट होकर वर प्रदान करेंगी, जिससे किसी भी प्रकार के प्रश्नों का उत्तर ज्ञात होने लगेगा। यह अति उग्र साधना है। अतः सिद्ध गुरुदेव के सान्निध्य में ही करें।

 

2 कर्ण पिशाचिनी सिद्धि मंत्र

“ॐ ह्रीं चण्डवेगिनी वद वद स्वाहा ।”

साधन विधि- सर्व प्रथम इस मंत्र का १०००० जप करना चाहिए। तदुपरान्त किसी कृष्ण वर्ण ( काले रंग) की क्वारी कन्या को अभिमंत्रित कर उसका पूजन करे और उसके हाथों, पाँवों में कुकुम लगाये । अलकों में मल्लिका- पुष्प तथा कनेर के पुष्प लगाकर लाल रंग के डोरे से वेष्टित करे। इस साधन के द्वारा कर्णं पिशाचिनी यक्षिणी साधक के वशीभूत होकर उसे तीनों लोक और तीनों काल के शुभाशुभ का ज्ञान कराती रहती है। साधक को चाहिये कि वह मंत्र सिद्ध हो जाने पर अभिमंत्रित लाल सूत्र, मल्लिका पुष्प तथा लाल कनेर के पुष्प को धारण किये रहे ।

 

3 पिशाची साधन मन्त्र-

ॐ फट् फट् हुँ हुँ : भोः भोः पिशाचि भिन्द भिन्दछिन्द छिन्द लह लह दह दह पच पच मध्य मध्य पेय पेजय धून धून महासुर पूजिते हुं हूँ स्वाहा । —

साधन विधि – रात्रि के समय उच्छिष्ट मुख से श्मशान में बैठ- कर उक्त मन्त्र का जप करे। दस लाख की संख्या में जप करने से सिद्धि प्राप्त होती है तथा पिशाची साधक के समक्ष प्रकट होकर उसे अभिलाषित वर प्रदान करती और सदैव उसके वशीभूत रहती है । पिशाची जिस समय प्रकट हो, उस समय साधक को अर्ध्य, गंधादि द्वारा उसका पूजन करना चाहिए तथा जन काल में भी पूजनादि करना चाहिए । यह ध्यान रखना चाहिए कि मन्त्र जाप के समय में न तो साधक ही किसा व्यक्ति को देखे और न कोई अन्य प्राणी ही साधक को देख पाये । किसी के देख लेने पर जप निष्फल हो जाता है ।

त्रिकालदर्शी बनने की मातंगी साधना Matangi sadhna ph.85280 57364

 

 

कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini

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कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini कर्ण पिशाचिनी एक पिशाच वर्ग की शक्ति है जो कान  में भूत भविष्य वर्तमान बताती है।  भौतिक आकांक्षाओं से पीड़ित लोग कर्ण पिशाचिनी की साधना  करने को लालायित रहते हैं ।

यह सिद्ध होने पर भूतकाल और वर्तमान काल की बातें बतला देती है, असाधारण परिस्थितियों में भविष्यत् को बत- लाने की क्षमता भी आती है किन्तु इसके लिए अधिक श्रम और साहस की आवश्यकता रहती है।

कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini
कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini

वर्तमान में चाहे विश्व के किसी भी हिस्से की जात पूछी जाय यह सही उत्तर दे देती है, एक हद तक यह व्यक्ति के अन्तः स्तल के विचारो को भी जान सकती है। किन्तु किसी के विचारों की बदले की शक्ति इसमे नही है ।

पिशाचि शब्द सुनते ही रोंगटे खड़े होने लगते हैं ऐसा लगता है कि  कोई मांसाहारी भूत प्रेत जैसी ही कोई शक्ति होगी पिसाची शक्ति शक्ति के ह्रदय चक्र शरीर में विद्यमान है इन्हीं शब्द चक्र में एक हृदय चक्र है स्वामिनी अधिकांश रोग हमारे शरीर में जितने वह सब हमें पिशाचिनी शक्ति की वजह से ही लगते हैं। 

पिशाचि शब्द की आधार की परिभाषा आती है समझ सकते हैं कि किसी एक विषय अथवा वस्तु में हृदय का लगातार लगे रहना किसी एक विषय को जब हम इतना अधिक पसंद करने लग जाए कि अपना तन मन धन यहां तक की अपना आत्मा को शांत करने के लिए तैयार हो जाए तो। हमारा मन धन के लिए कभी वैभव के लिए और भी न जाने कितने विषय वस्तुओं के लिए हम प्रयासरत रहते हैं और हमारा हृदय इस दुनिया से हटना ही नहीं चाहता  इस सुभाव को  पिसाच सुभाव कहा जाता है। 

 Karna Pishachini  पिशाची देवी का सवरूप 

लेकिन बावजूद इसके देवी पिसाची बहुत ही सुंदर है कमल के आसान  पर बैठी हाथ  में दिव्या पुष्प पकडे हुए और एक हाथ में एक अग्नि से जलता हुआ एक कटोरा पकड़े  हुए बैठे हुए है। दिव्या पिशाची देवी की आराधना का और  कुलांतक पीठ से निकलता है। मानसिक और बौद्धिक रोग है और मनोज जनित जितने भी रोग  हैं। नष्ट करने में देवी पिशाची  के मंत्र सर्वश्रेष्ठ है उनका ध्यान स्तुति बहुत लाभदायक है। 

 

लोगों को चमत्कृत करने के लिए, अपना प्रभाव जमाने के लिए और इन प्रदर्शनों के फलस्वरूप धन अर्जन के लिए कर्ण पिशाचिनी के प्रति लोग अधिक आकृष्ट होते हैं । इसके संबंध में कुछ भी लिखने से पहले एक बात स्पष्ट कर दूं कि मैं ज्ञान मार्ग में प्रवृत्त हो चुका हूँ, ये आनन्दमार्गी चुटकुले हैं, इनके प्रति मुझे कोई भी दिलचस्पी नही चमत्कार जैसी चीज मेरे मे नही है और जब नही है तो दिखावा कैसे करू ?

सच यह है कि अर्थ और सुविधाओं के मामले मे आवश्यकता तक सोचता हूं मुझे किसी भी प्रकार की कोई सिद्धि नही मिली फिर भी भारतीय मन्त्रो की शक्ति का परिचय मुझे है । ज्ञान मार्ग जिस विराट् शून्य में रमना चाहता है उसमे प्रदर्शनीय, सिद्धि या चमत्कार नाम को कोई चीज होती ही नहीं। गोपीनाथ कविराज नौर. योगीराज अरविन्द के पास लोगों ने कौन – सा चमत्कार देखा ।

किन्तु तो उनको मिला उसके लिए कौन लालायत नहीं है ? ज्ञान मार्ग का यह भाव है। कामनाओं से प्रेरित होकर जो प्रयोग किये जाते हैं वे ऐसे ही ४८ रहते हैं जैसे किसी को एक शहर से दूसरे शहर जाना होता है ।

ऐसे लोग एक सीमित दिशा और दृश्य का अनुभव प्राप्त करते है किन्तु जिनको केवल चलना है उनके अनुभव मे सारे नगर वन, पहाड़, मैदान आ जाते हैं । ज्ञानमार्ग मे इन सारी सिद्धियो का रहस्य खुल जाता है या यों कहे कि पोल खुल जाती है और अभिरुचि समाप्त हो जाती है। एक बार एक सज्जन आये और मुझसे उलझ पड़े, बार-बार कहने लगे तुम ऐसी पुस्तकें क्यो लिखते हो ?

एक मोह उपजा देते हो, मन मे वैचारिक विप भर देते हो मेरा उत्तर था आप क्यों पढ़ते हो ? अपवाद स्वरूप ही ऐसे लोगों से साबका पड़ा और मेरे मन में यह आया कि चलो, इस विषय पर कुछ भी नही कहेंगे किन्तु इसके साथ ही उन पत्रों का क्या करूं जिन्होंने मेरी पूर्ण लिखित पोस्ट  में दिये गये प्रयोग किये और सफल हुए, जिन लोगो ने विश्वास पूर्वक उन प्रयोगो के बारे मे पूछा जो लेख  इस विशाल वर्ग की आस्था ने मुझे चुप नही रहने दिया और मैंने फिर कलम  उठा ली यही सोचकर कि यदि वर्ष भर मे पांच व्यक्ति भी इन प्रयोगों मे लाभ उठाते हैं

तो यह पुण्य का ही काम है। जो लोग सफल नहीं हो रहे वे भी कम-से-कम भगवान का स्मरण कर रहे हैं, अपने पाप धो रहे हैं कोई दुष्कर्म नही कर रहे, न मैं कोई घटिया उपन्यास लिखकर लोगों की वासना उभार रहा हूं । हरेक व्यक्ति का अपना मिशन होता है।

आस्तिकता का प्रसार और भारतीय संस्कृति एवं विज्ञान के प्रति लोगों की रुचि जागृत करना मेरा जीवन का लक्ष्य है । धर्म नेता नही होना चाहता, न अपने नाम से कोई . सम्प्रदाय चलाना चाहता हूं, मुझे मेरे देश वासियों से स्नेह है और जीवन भारत के प्रति आस्था जगाना मेरा नशा है। यह व्यवसाय नहीं शोक है ।

वे हजारों लोग मेरे इस कथन के साक्षी हैं जिनके विस्तृत पत्रो के उत्तर मैंने एक पूरे लेख के आकार में निःशुल्क दिये हैं अब भी दे रहा हूं, भले ही इससे मेरे निजी जीवन मे गतिरोध उत्पन्न हो जाता हो । उन अनजान लोगों के दुःख में भागीदार होने में मुझे बढ़ा सन्तोष मिलता है । आध्यात्मिक साधना करने से उनका आत्मविश्वास और मनोबल बढ़ता है ।

 

जिन रहस्यों को प्रकट करने में कोई बाधा नहीं थी उनको स्पष्ट करने में मैंने कोई संकोच नही किया किन्तु जिनको सार्वजनिक रूप से घोषित करने के हित की अपेक्षा अहित हो सकता था उनका उल्लेख या संकेत मैंने नही किया है ।

प्रश्न उठता है क्या ये प्रयोग मैंने किये हैं?

कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini
कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini

में एक ही उत्तर देता हूं- नही क्या ये अनुष्ठान सच हैं- इस प्रश्न के उत्तर में मैं कहूंगा- मैंने जीवन पग-पग पर इनकी शक्ति को देखा है, इनको झूठ या अविश्वसनीय मानने का अपराध मैं नहीं कर सकता ।

आदमी का जीवन बहुत छोटा होता है और वह सारे अनुष्ठान कर ले यह संभव ही नहीं फिर भी अनेकों प्रयोग मैंने किये हैं अथवा कराये हैं । कर्ण पिशाचिनी के संबंध में सूक्ष्म और रहस्य को बातें प्राप्त करने के लिये मुझे बहुत कुछ करना पड़ा है। जिन लोगो को यह प्रयोग सिद्ध है वे कुछ भी बतलाने के लिए तैय्यार नही और मैं स्वयं करूं – यह पसन्द नही ।

इसलिए उन लोगों से रहस्य उगलवाने के लिए इस साधना के गूढ रहस्यो पर इस तरह विवेचन करने लगता जिससे वे समझें कि यह भी पूरा जानता है और फिर मेरे कहे में संशोधन कराने जैसी ही स्थिति रहने देता। इस तरह से इस प्रयोग के जटिल रहस्यो का स्पष्टीकरण मेरे सन्तोष तक प्राप्त करने के बाद ही लिखने का साहस कर रहा हूं ।

जाने क्यों पाठकों का इस प्रयोग के प्रति इतना रुझान है और इन लोगों का इतना दबाव रहा है कि मुझे इस प्रयोग के बारे में बहुत कुछ जानना पड़ा और उसको प्रामाणिक स्तर पर पेश करने के लिए सभी पक्षों पर विचार करना पड़ा। कर्ण पिशाचिनी के अनेक मंत्र हैं

और उनकी साधना विधि में भी थोड़ा बहुत अन्तर है इस मन्त्र को सतर तरह से लिखने को विधि मैंने देखी है उसी तरह कर्ण पिशाचिनी में भी चालीस से अधिक मंत्र हैं । कौन-सा मंत्र किसके अनुकूल पड़ेगा इसका निर्णय कुलाकुल चक्र और मित्रार चक्र को देखकर कर लेना चाहिए ये चक्र ‘ मंत्र विज्ञान’ में दिये गये हैं । 

एक स्थान पर ग्रहण के दिन खाट में बैठकर बहुत कम मात्रा मे जप करने पर कर्ण पिशाचिनी सिद्ध होने की बात मैंने लिखी थी। यह मेरा इस प्रयोग मे ग्रहणकाल की स्वत: निर्णय नही था शास्त्रोक्त बात थी। पवित्र अतः मंत्र साधन के उपयुक्त समझ कर खाट को श्मशान पीठ के रूप माना गया है किन्तु इतनी कम मात्रा मे जप करने पर सिद्धि उनको ही मिलती है जिन्होने इस संबंध में कुछ किया है।

जिसने पहले कुछ भी नही किया या जो इससे विपरीत गुण वाले प्रयोग कर चुके हैं उनको इतनी संख्या मे जप करने से सफलता नही मिल सकती । जैसा इसका नाम है वैसा ही इसका स्वरूप और स्वभाव है । स्वा- भाविक है इस प्रकार के प्रयोग करने के लिए अतिरिक्त साहस की आव- श्यकता होगी इसलिए साहसी और वीर व्यक्ति इस संबंध मे सोचें ।

. कई लोगों ने शंका की थी कि व्यक्ति की मृत्यु के समय ऐसी साधनायें कष्ट कर रहती हैं, ऐसी बात नही है । पिशाचवर्गी होने के कारण इनमे क्रूरता तो रहती ही है, दूसरी बात यह भी है कि इनके अति संपर्क से व्यक्ति के स्वभाव में पैशाचिकता प्रकट होने लगती है।

हालांकि मंत्र के कारण वचन बद्ध होकर ये हमारे काम तक सीमित रहते हैं फिर भी इनके कागुण लुप्त नही होते और हम उनसे प्रभावित होते ही हैं।

कर्ण पिशाचिनी साधना Karna Pishachini कहाँ  करनी चाहिए ?

कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini
कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini

पिशाचिनी होने के कारण इसकी साधना घर मे नही करनी चाहिए । श्मशान एकान्त वन प्रान्त और शिव मंदिर इस साधना क्रे उपयुक्त स्वल हैं। घर करने से सफलता देर मे मिलती है और घर का वातावरण दूषित होता है । सिद्ध होने के बाद तो यह नियंत्रित हो जाती है इसलिए दूषित नही कर पाती किन्तु सिद्ध होने से पहले स्वतंत्र रहती है ।

कर्ण पिशाचिनी Karna Pishachini साधना को किस रूप में करें  

इस तीन रूपों में माना जा सकता है मां, बहन और पत्नी मां और बहन के रूप में मानने पर इसमें इतनी शक्ति नही आती पत्नी के रूप मे मानने पर इसकी सामथ्यं पूर्ण रूप से प्रकट होती है । किन्तु अपने स्वभाव के अनुसार यह पत्नी सुख में बाधा पहुंचाती है।

हां, व्यभिचारी बनाकर वैयमिक सुख में कमी नही आने देती पर पत्नी के नाम से जो व्यक्ति हमारे घर में है उसे कष्ट देती है। आवेश या दिखने जैसे कष्ट नही बल्कि उसके स्वास्थ्य मे ह्रासमोर चिन्तायें उत्पन्न करती है। मां और बहन रूप में मानने पर इनके सुखो मे बाधा पहुंचाती है ।

कर्ण पिशाचिनी कितने दिन में सिद्ध हो जाती है ?

कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini
कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini

बहुत काम समय में सिद्ध हो जाती है  इसकी बहुत सारी  विधि है वाम मार्ग दिक्षण  मार्ग किश मार्ग से कर रहे हो यह डिपेंड करता है कुछ २१ , ११ , ४१ ,  दिन की होती है अघोर मार्ग में यह साधना जल्दी सिद्ध हो सकती है 

कर्ण पिशाचिनी क्या क्या कर सकती है

 आज के समय में हर व्यक्ति करना चाहता है क्योंकि एकमात्र यह ऐसी सिद्धि है पिशाचिनी की जो अपने जातक को बहुत सारी शक्तियां प्रदान करती है ऐसी शक्तियां प्रदान करती है जिससे कि व्यक्ति कहीं से भी धन को अर्जित  करने लगता है किसी भी व्यक्ति का जटिल से जटिल अगर कार्य कहीं रुक गया है या कोई कार्य फस गया है तो इस कार्य को आसानी से करने के लिए भी कर्ण पिशाचिनी कार्य करती है दोस्तों आज हम आपको बताएंगे कि किन लोगों  को इस साधना को पूरा करना चाहिए

 

कर्ण पिशाचिनी साधना अनुभव karna pishachini sadhna anubhav

कर्ण पिशाचिनी साधना अनुभव karna pishachini sadhna anubhav

 

 

कर्ण पिशाचिनी साधना अनुभव karna pishachini sadhna anubhav

 

 

कर्ण पिशाचिनी साधना अनुभव karna pishachini sadhna anubhav एक कर्ण पिशाचिनी साधक का अनुभव तंत्र के पारस्परिक ग्रन्थों में काल के आवरण को भेद कर अतीत व भविष्य को देखने के अनेक प्रयोग बताये गये हैं हाजरात, वार्ताली, चक्रेश्वरी, यक्षिणी, कर्ण पिशाचिनी आदि अनेक मंत्र हैं, जो भूत-भविष्यत् का ज्ञान करने की क्षमता प्रदान करते हैं।

ये स्वप्न दृष्टि और शब्द के माध्यम से काम करते हैं । जैसा इनका नाम है वैसा इनका स्वरूप और शक्ति है । इनको सिद्ध करने में कोई अधिक कष्ट या विशेष शुद्धि को आवश्यकता नहीं रहती ।

कर्ण पिशाचिनी साधना अनुभव karna pishachini sadhna anubhav
कर्ण पिशाचिनी साधना अनुभव karna pishachini sadhna anubhav

बहुत_सभव है—हम मे से अधिकांश ने ऐसे व्यक्तियो को देखा हो जो हमारे विचारों को ही पढ-सुन लेते हों, वे हमे देखते ही हमारे प्रश्नों को कागज पर लिखकर रख लेते हों, हमारे परिवार को सारी पृष्ठभूमि मे नामोल्लेख’ करके बतला देते हो, और तो और उन्होंने अपने कागज पाच प्रश्न लिखे हो और आपने तीन ही प्रश्न सोचे हो शेष दो प्रश्न आप बाद में सोचें और आपको आश्चर्य हो कि उस व्यक्ति ने आपके प्रश्न पहले हो कैसे लिख दिये !

हमारी सामान्य बुद्धि के लिए यह बहुत बड़ा चमत्कार है किन्तु तंत्र मार्ग में यह निकृष्ट और साधारण-सी पैशाचिक साधना है। पूछने पर ऐसे व्यक्ति ज्योतिष को गणित, किसी देवता की कृपा या अपने आपको अंतर्द्रष्टा होने की बात कहेंगे किन्तु ऐसा है नहीं उनके पास पिशाचिनी है|

जिन लोगों के पास यह शक्ति है वे लोगों को चमत्कृत करके अपना प्रभाव जमा सकते हैं, उनके पास पैसे की कमी नही रहती । किन्तु उनका जीवन सुखमय नही रहता – इसके कई कारण हैं, पहली बात तो यह है कि पैशाचिक साधना होने के कारण व्यक्ति पिशाच बुद्धि और चरित्र वाला हो जाता है । स्नानादि करके स्वच्छ और दिव्य रहना उसके स्वभाव नही रहता ।

यों अपने को प्रदर्शित करने या पोश लोगो की संगति मे बैठने के कारण वे राजसी वैभव और कपड़ों का शौक कर लेते हों। किन्तु यह उनका धर्म नही होता। दूसरी बात यह कि ऐसे लोगो में असत्य भाषण की आदत भी पड़ जाती है।

शास्त्र कहते हैं—“सत्य संघाः देवा. असत्य सधाः राक्षसा:” इसलिए राक्षसी साधना के प्रभाववश वे असत्य बोलने लगें तो कोई आश्चर्य नही । कर्ण पिशाचिनो को स्वयं को शक्ति होती है, इसका स्वयं का वातावरण होता है।

वर्तमान मे इसकी अव्याहत गति है, भूतकाल मे भी यह चलती है किन्तु भविष्यत् में गमन करने के लिए इसे पूरी सामय्यं मिलनी चाहिए और यह सामर्थ्य साधक स्वयं प्रकट करता है। समय के पार देखने के लिए दिव्य दृष्टि चाहिए और दिव्य दृष्टि मिलती है मन की निर्मलता से मन पर छाये मैल उसकी अनुभव शक्ति को मन्द कर देते हैं हमारे आस-पास के आग्रहो मे मन की शक्ति बिखरे-बिखरी रहती है ।

यद्यपि कर्ण पिशाचिनी हमारी अर्जित शक्ति है और वह मशीन की * तरह अथक भाव से हमारा काम करती रहती है फिर भी वह हमारी शक्ति नही है, वह हमसे भिन्न है, मानसिक निर्मलता से जो कुछ भी मिलता है वह हमारे मन का हो जाता है ।

साधना के उच्च स्तर मे जाने पर ऐसी शक्ति स्वतः प्रस्फुटित हो जाती है और उसके साथ ही उसमे इतनी शक्ति आ जाती है कि वह अनिष्ट निवारण भी कर सकता है। अब प्रस्तुत है एक कर्ण पिशाचिनी की साधना करने वाले का अनुभव |

शंकर समझता है आज की दुनिया में चमत्कार को नमस्कार करते हैं । साधारण आदमी की तरह जीने से क्या लाभ कुछ विशेष किया जाय, कुछ अतिरिक्त पाया जाय । कर्ण पिशाचिनी उसे सरल नजर आती है ।

उसकी साधना विधि समझकर अनुकूल मुहूर्त में साधना प्रारंभ कर देता है । पांचवे दिन ठीक दो पहर में जब वह विश्राम कर रहा होता है। तो धर्म निद्रित अवस्था मे उसे एक स्त्री नजर आती है स्त्री कोई घोर रूपा नही है किन्तु इतनी मौम्य और सुन्दर भी नही है कि उसकी तरफ देखता ही रह जाय साधारण श्यामल शरीर, मध्यम कद, अलंकार रहित किन्तु उसके ललाट में आडा एक नेत्र जिसमें से तेज रोशनी-सो निकलती लगती है और उसकी तरफ देखा नही जा सकता ।

उसके पीछे घडी मारी फौज रहती है जिसमें वे सारे लोग मौजूद हैं जिनको शंकर ने देखा था और मर गये थे । ऐसे अनेकों लोग हैं। उस पिशाचिनी ने शंकर के मस्तक पर धर रखा है किन्तु वह इतना भयभीत हो जाता है कि कुछ बोलना तो दूर आंख मूंद कर देवी कवच का पाठ करने लगता है और उठ जाता है । क्षण भर में सारा दृश्य लुप्त हो जाता है ।

प्रयोग अधूरा रह जाता है । अगर शकर भयभीत न होता और उससे बात करता तो कर्ण पिशाचिनी उसके साथ सदा के लिए आ जाती। यह साधना पिशाच वर्ग की है। इसलिए इसे वचन बद्ध किया जाता है। यद्यपि यह मूर्तिमान रूप मे साथ नही रहती फिर भी इसे रहने के लिए एक नियत रूप और आकार देना ही पडता है और एक बार जिस रूप मे रहने के लिए कह दिया उस व्यक्ति के घर में वह चीज रह नही सकेगी।

माना हमने उसे चिडिया के रूप में रहने के लिए वचन दे दिया तो अब हमारे घर में चिड़िया जैसी चीज रह नहीं सकेगी। पत्नी के रूप में यह सबसे अधिक शक्तिशाली और आज्ञाकारी रहती है पर इस रूप मे रखने पर वैध पत्नी का मुध नहीं मिलने का ।

इसकी मादा करते समय आसन को विधाये ही रहना पड़ता है। ऐसा नही कि काम करते समय आसन बिछा दिया और फिर समेटकर य दिया । मंत्र जप करते समय ग्वार पाठा सदा हाथ में रखना पड़ता है । ग्यार पठे के प्रभाव मे यह उम्र रूप में नहीं आती।

ग्वारपाठे को संस्कृत मै कुमारी कहते हैं, आयुर्वेद को दृष्टि से यह बात दोष को कम करती है। इन दोनो दृष्टियों से यह ग्वार पाठा तमोगुण को उग्रता कम करने वाला .हता है। यह प्रत्येक तमोगुणों या पैशाचिक योनियों का गुण है कि वे साधना करते समय दिये गये वचन का पालन करने के लिए मजबूर हैं ।

इस प्रकार का वचन भंग करना उनको व्यवस्था में दण्डनीय होता है फिर त्र बल से ये लोक बरबस रोच कर लाये जाते हैं, ये प्रसन्न अपनी इच्छा नही होते । भूत साधना से वश में आया प्रेत अपने आप मे सुखी और बसन्न नही होता क्योकि उसको गुलाम बनाया जाता है किन्तु साधना की क्ति और मंत्र के प्रभाव के आगे वे विवश हैं ।

पिशाचिनी की साधना करते समय सभी को इसी प्रकार के दृश्य दिखाई दें यह आवश्यक नही, किसी को भिन्न प्रकार के आभास भी हो सकते हैं और किसी को कोई रूप या आकार दिखाई न देकर केवल कान ने ही सुनाई पड़ सकता है और स्पष्ट आवाज आने से पहले भयंकर गर्जन चिंघाड़ सुनाई दे सकती है इनसे डरे बिना जो सुने उसका उत्तर दे देना चाहिए।

श्री कृष्ण साधना प्रत्यक्ष दर्शन साधना shree krishna sadhna ph.8528057364

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श्री कृष्ण साधना प्रत्यक्ष दर्शन साधना shree krishna sadhna ph.8528057364

 श्री कृष्ण साधना प्रत्यक्ष दर्शन साधना shree krishna sadhna ph.8528057364 श्रीकृष्ण साधना की जितने भी कृष्ण भक्त हैं या भगवान विष्णु के भक्त हैं अपने जीवन को कृष्ण में करते हुए मुक्ति को प्राप्त हो जाए उनके लिए साधना बहुत ही उपयोगी है पूछते हैं कि हम भगवान कृष्ण में बहुत श्रद्धा रखते हैं कुछ लोग हैं जो कहते हैं हम भगवान विष्णु में बहुत श्रद्धा रखते हैं दोनों एक ही है रखते हैं और एकादशी का व्रत भी रखते हैं तो ऐसी कोई साधना बताइए जिससे कि हम कर रहे हैं उससे कुछ अच्छा हमें अनुभव हो साथ में तपस्या करें

यह तपस्या के जैसे ही काम करेगा भगवान श्री कृष्ण की जोड़ी साधना है जिसमें 11 दिन यह साधना है जिसमें जैसा कि आप पूरे श्रद्धा भाव से नवरात्रि में जैसे आपने पूजन किया होगा वैसे ही 11 दिन की साधना है जिसमें 11 दिन तक आप भगवान कृष्ण के मंत्र का जप करेंगे और 11 दिन के बाद जो 11 दिन पूर्णाहुति होगी उसके बाद आपको यह योग्यता प्राप्त हो जाएगी कि आप इनके मंत्र को अगर जब करेंगे

आगे यह मंत्र जप के प्रभाव नजर आएंगे आपको यानी कि अनुभव होना शुरू हो जाएंगे कृष्ण जी साधना में यह लेना कि प्रभु मैं आपकी साधना तो शुरू कर रहा हूं लेकिन दर्शन आप तभी देना चाहे आप सपने में दर्शन आप तभी देना जब आप मुझे अपने लोक में ले जाने के लिए राजी हो मृत्यु के बाद आप मुझे मुक्ति देने के लिए राजी हो तभी आप मुझे दर्शन देना स्वीकार कर लेंगे

आपकी इस प्रार्थना को जैसे 11 दिन की आपने साधना करी तो हो सकता है बहुत से लोगों को 11 दिन में ही प्रभु के दर्शन हो स्वप्न में हो या फिर ऐसा हो सकता है कि 11 दिन की साधना के बाद भी जब प्रतिदिन एक माला पांच माला उस मंत्र के जिससे आप साधना करेंगे उसको चालू रखेंगे

तो कुछ समय के बाद आपको भगवान के दर्शन हो यह दर्शन होते ही हैं लेकिन क्योंकि आप पहले ही अपनी मनोकामना बता देंगे कि प्रभु दर्शन तब देना जब आपको मुक्ति स्वीकार हो क्या आप मुझे मुक्ति देने के लिए तैयार हैं आप मुझे स्वीकार करते हैं अपने लोक में लेकर जाएंगे आप मुझे नरक यात्रा नहीं देखने देंगे जब आपको यह मेरी मनोकामना स्वीकार हो पूरी कर सकते हैं

यह वर मुझे दे सके तभी आप मुझे दर्शन देना चाहे आप जैसा देना चाहे सपने में देना चाहे साक्षात देना चाहे जहां जिस रूप में आप दर्शन देना चाहे आप मुझे दर्शन देना जब आपको यह मेरी जो मनोकामना है यह स्वीकार हो

आप मुझे मुक्ति प्रदान करेंगे और अपने लोक में लेकर जाएंगे साधना करें जो लोग हैं जो कृष्ण भगवान को मानते हैं जो वृंदा वृंदावन जगन्नाथ पुरी और द्वारकाधीश जो कृष्ण भगवान के स्थानों पर जाते हैं और चाहते हैं कि उन्हें मुक्ति प्राप्त हो तो बस यूं ही उनका नाम लेने की वजह आप यह साधना करें

उसके बाद आप कोई अनुमति प्राप्त हो जाएगी कि आप जिस मंत्र से साधना करेंगे पूरे जीवन आप उसको कभी भी कहीं भी घूमते फिरते बिना नागे

अब जब करते हैं तो उसकी गिनती होगी वह आपके भाग्य से जुड़ता जाएगा और आपकी जीवात्मा शक्तिशाली होती जाएगी

उसका फायदा है साधना का बिना साधना के सिर्फ जप करने से कुछ नहीं होता ना कोई फल मिलता है ना कुछ बस श्रद्धा से आप जब तेरे पवित्रता बनी रहेगी मन को शांति मिलेगी

श्री कृष्ण मंत्र

ऊँ क्लीं कृष्णाय नमः

 

श्री कृष्ण साधना विधि 

 

लेकिन उसकी गिनती नहीं होती है गिनती तब होती है जब आप किसी भी मंत्र को सही नियम के अनुसार साधना के रूप में करें तो आप इस साधना को किसी भी एकादशी से शुरू करें 11 दिन के लिए 11 दिन आप जप करें हो सके

तो प्रतिदिन जप के बाद हवन करें जप संख्या जो रहेगी वह पांच माला कम से कम 11 माला 21 माला आप अपनी स्वेच्छा से चुन सकते हैं कि आप कितनी जब करना चाहते हैं जरूरी नहीं है कि इसमें कौन माला की जाए आप अपनी स्वेच्छा से कर सकते हैं उसके बाद हम रात्रि बजे से आपने 8:09 बजे जब शुरू किया और 10:00 बजे तक 11:30 बजे तक 10:30 बजे तक हो गया आधे घंटे में उसके बाद आप छोटा सा हवन कर सकते हैं

जिसमें हूं कि आप इसी जो मंत्र के अब जब करेंगे उसी करनी होगी जो कि मात्र एक माला क्या होती रहेगी एक माला की बस आप हवन कर देना इसमें ज्यादा करने की जरूरत नहीं है क्योंकि जब आप हमेशा करते रहेंगे भोजन करा सकते हैं बहुत अच्छी बात है या फिर किसी मंदिर में भी सीधे आप दान दे सकते हैं

ऐसा करने के बाद आप दिन रात घूमते फिरते चलते-फिरते कभी भी भगवान कृष्ण का जिसमें मंत्र से आप साधना करते हैं उसे कर सकते हैं और आपको उसे नसीब शांति मिलेगी बल्कि आपको मुक्ति भी प्राप्त हो सकती है

इस साधना को करने से यह जो मंत्र है जब उसका आपकी जब की अनुमति मिल जाएगी और पूरे जीवन आप इसको जपते रहेंगे तो आपकी मुक्ति जो है वह निश्चित है

आपको भगवान विष्णु के लोक में स्थान अवश्य मिलेगा क्योंकि भगवान कृष्ण का क्या स्थान है विष्णु लोग क्योंकि भगवान विष्णु के अवतार हैं तो भगवान विष्णु ने जहां भगवान कृष्ण आपको लेकर जाएंगे वही आपकी स्थिति होगी जिन्हें जिन्होंने अभी यह बताया कि उन्हें भगवान के दर्शन वह तो हम नहीं बताएंगे

लेकिन हाथ दर्शन हुए बहुत सारे साधकों को स्वप्न में दर्शन भी दर्शन ही होते हैं उसे आप भ्रांति ना समझना स्वप्न में दर्शन होना भी बड़ी बात होती है क्योंकि यूं ही आप जीते रही आपको कभी दर्शन नहीं होंगे लेकिन साधना के समय किसी विशेष क्रिया के समय अगर आपको दर्शन होते हैं तो

वह दर्शन ही होते हैं जो शक्ति अपनी इच्छा से देती है तो बहुत सारी लोगों ने बताया कि उन्हें साक्षात दर्शन हुए सपने में प्रभु के बहुत भाग्यशाली हैं लेकिन ऐसा किया जाए कि ऐसी मनोकामना के साथ करें कि हमें मुक्ति देने के लिए राजी हो प्रभु तभी आप हमें दर्शन देना तो ऐसी मनोकामना के साथ संकल्प लेकर

आपको करते हैं 11 दिन की तो उसके बाद से आपके जीवन में आना शुरू हो जाएगी एक बात ध्यान रखना पत्नी का दुख बच्चों का दुख परिवार का दुख यह सब भूल जाना जब साधना करते हैं एक बात निश्चित समझकर ही करना चाहिए क्या आप के ऊपर जिम्मेदारी जरूर होती है इन लोगों को सुखी रखने की पहुंचाने की लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अपने जीवन को समापत ही करलो

भगवान कृष्ण का साथ होता है तो धीरे-धीरे होने लगती है एक बात ध्यान रखना कि जो होता है अच्छे के लिए होता है यह निश्चित है सोचना चाहिए यह ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि जो कुछ हो गया है यह तो वह गलत हो रहा है जो कि हम तो आध्यात्मिक हैं हम तो पूजन पाठ करते फिर भी गलत हो रहा है जो होता है वो अच्छे के लिए ही होता है

हर इच्छा सही होता है हां लेकिन अध्यात्म का रास्ता चुनना हमारे ऊपर है कि हर इच्छा के बावजूद भी हमारे जीवन में उन्नति होती जाए इसके लिए क्या करना है अध्यात्म से जुड़ना जरूरी है जो भी ऐसा करेंगे

उनको आगे भविष्य की चिंता नहीं करना चाहिए प्रभु के ऊपर छोड़ देना चाहिए प्रभु अपने आप आपके जीवन में सब कुछ अच्छा ही करेंगे जिससे आपका भी भला हो और आपके परिवार का भी भला हो जो भी है

साधना करना चाहते हैं 11 दिन की साधना कर सकते हैं कर सकते हैं कर सकते हैं जो भी माल आपके पास है और उसमें यंत्र की जरूरत नहीं है जब भी कर सकते हैं उसकी भी गिनती होती है जो भी जितने भी भक्त हैं उनके लिए

 

कर्ण पिशाचिनी विद्या | कर्ण पिशाचिनी सिद्धि मंत्र ph.85280 57364

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कर्ण पिशाचिनी विद्या | कर्ण पिशाचिनी सिद्धि मंत्र

कर्ण पिशाचिनी विद्या | कर्ण पिशाचिनी सिद्धि मंत्र
कर्ण पिशाचिनी विद्या | कर्ण पिशाचिनी सिद्धि मंत्र

कर्ण पिशाचिनी विद्या | कर्ण पिशाचिनी सिद्धि मंत्र इस पोस्ट  का उद्देश्य केवल ज्ञान और जानकारी के लिए है, यदि आप इसका अभ्यास करना चाहते हैं, तो इसे एक सिद्ध व्यक्ति की देख रेख में करें, अन्यथा आप स्वयं इसे नुकसान करेंगे।

मैं यहाँ सच्चाई जान सकता हूँ, यह आपको किसी भी व्यक्ति का अतीत का वर्तमान बताने में सक्षम है, इसलिए कर्ण पिशाच की उपलब्धि के लिए सभी प्रयास शुरू कर देता है, लेकिन एक बात भूल जाता है कि हर योनि की एक गरिमा होती है,  और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लोग इसका नाम सुनकर ही उसे प्राप्त करना चाहते हैं, वह इसको  प्रपात  ले लेते हैं, लेकिन 6 महीने से अधिक समय तक उसे संभाल नहीं पाते हैं, कारण है अधूरा ज्ञान, सबसे महत्वपूर्ण बात आपको बता दें कि कर्ण पिशाचिनी की सफलता, आम आदमी।

यह आम आदमी के लिए नहीं है और आम आदमी को कर्ण पिशाचिनी की सिद्धि भी नहीं करनी चाहिए, जो इसे प्राप्त करता है वह हमेशा परिवार से अलग रहता है और ध्यान में जरा सी भी चूक हो जाए तो कर्ण पिशाचिनी उसकी सारी कुछ  ले लेती है, जिसके कारण उसके परिवार में अकाल मृत्यु भी हो जाती है। 

 ऐसा लगता है कि परिवार का नाश हो जाता है, इसलिए जो वामपंथी साधक तांत्रिक या अघोरी है, वही कर्ण पिशाचिनी को प्राप्त कर सकता है, परिवार में रहकर कभी प्राप्त नहीं हो सकता, अगर वह भी चली जाती है, तो परिवार का विनाश हो जाता है।  लोगों को इसे हासिल करने की कोशिश नहीं  करनी चाहिए।

मित्रों, हिन्दू धर्म में मरने वाले लोगों को गति और कर्म के अनुसार बांटा जाता है। पिशाच क्या है? लेकिन पिशाच योनि में चले जाते हैं। पिशाच योनि में जाने का सबसे महत्वपूर्ण कारण अकाल मृत्यु है। वहां जानवरों द्वारा आकस्मिक मृत्यु या यूं कहें कि अधूरी इच्छाओं से दुर्घटनावश मरने वाले लोग पिशाच पिशाच बन जाते हैं। यही कारण है कि पिशाच योनि में भी जाते हैं दोस्त पिशाच एक नकारात्मक ऊर्जा पर अपना प्रभाव डालते हैं जिस पर पिशाच सवारी करता है

कर्ण पिशाचिनी: परिवार की रक्षा या नाश?

कर्ण पिशाचिनी एक ऐसी सिद्धि है जो आम आदमी के लिए नहीं है और उसे प्राप्त करने की सलाह नहीं दी जाती है। जो भी इसे प्राप्त करता है, वह हमेशा अपने परिवार से अलग रहता है और ध्यान में छोटी सी भूल होने पर भी कर्ण पिशाचिनी उसकी सारी आवाज सुन लेती है, जिसके परिणाम स्वरूप उसके परिवार के सदस्यों की मौत हो सकती है। 

परिवार का पूर्ण विनाश हो जाता है। इसलिए कर्ण पिशाचिनी को प्राप्त करने के लिए केवल वामपंथी साधक, तांत्रिक या अघोरी ही सक्षम होते हैं, जो परिवार से अलग रहकर इसे प्राप्त कर सकते हैं। इसे परिवार में रहते हुए प्राप्त करना संभव नहीं है। यदि कर्ण पिशाचिनी भी इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति परिवार से अलग हो जाता है, तो उसके परिवार का नाश हो जाता है।

इसलिए हमें इसे हासिल करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। मित्रों, हिन्दू धर्म में मरने वाले व्यक्तियों को उनके कर्मों और गति के आधार पर फल दिया जाता है। पिशाच शब्द का अर्थ क्या है? यहां परिवार में ही पिशाच योनि में प्रवेश होते हैं।

पिशाच योनि में प्रवेश का सबसे महत्वपूर्ण कारण अकाल मृत्यु होती है। यहां जानवरों द्वारा अकस्मात मृत्यु या अपूर्ण इच्छाओं के परिणाम स्वरूप मरने वाले व्यक्तियों को पिशाच बनना पड़ता है। इसलिए पिशाच योनि में प्रवेश होता है। दोस्तों, पिशाच एक नकारात्मक ऊर्जा पर अपना प्रभाव डालते हैं, जिस पर पिशाच सवारी करता है।

परिवार के रिश्तों के बारे में आपको अवगत करते रहते हैं। यदि किसी प्रयासकर्ता ने इस तत्व को प्राप्त कर लिया हो और किसी अनजान व्यक्ति के सामने चला जाए, तो कर्ण पिशाचिनी उसकी सभी जानकारी को कुछ ही मिनटों में साधक के कानों में बता देती है। खाने के बाद वह यह पता लगा सकती है कि उसने क्या खाया है, उसके पास कितना धन है, रास्ते में कितना खर्च हुआ है, उसके परिवार में कौन-कौन हैं, उसके सभी रिश्तेदारों के नाम, और वहाँ तक कि उसके पूरे परिवार के सदस्यों के नाम भी कर्ण पिशाचिनी अपने साधक को बता सकती है कि किसी भी समय परिवार के सभी लोगों की जानकारी उपलब्ध हो।

यह स्थिति में समाज एक-दूसरे के बारे में अच्छी और बुरी बातें करता रहता है। इसका साधक पर गहरा प्रभाव पड़ेगा और वह पागल हो सकता है। मित्रों, यह पिशाच शीघ्र ही प्राप्त हो सकता है, लेकिन साधक की यह उम्मीद रखी जाती है कि वह इसमें पूरी आस्था और विश्वास के साथ रहें। पिशाच के साथ-साथ इस संसार से इन पिशाच साधकों का मुक्ति भी संभव नहीं है, जब तक कि विपदा आने से पहले।

 

 “कर्ण पिशाच साधना”

कर्ण पिशाच साधना के लिए आपको चौघड़िया मुहूर्त में ध्यान देना चाहिए। इस साधना के दौरान आपको एक पीतल या कांसे की थाली में सिंदूर के साथ अपनी उंगली से एक त्रिशूल बनाना होगा। इसके बाद, आपको शुद्ध गाय और तेल के दो दीपक जलाने होंगे, और सामान्य तरीके से पूजा करनी होगी। इसके बाद, आपको मंत्र का 11 बार जाप करना होगा।

कर्ण पिशाच बनने तक मंत्र का दोहराने से निम्नलिखित होता है: “ऊं नमः कर्ण पिशाचिनी अमोघ सत्यवादी”

कर्ण पिशाच साधना करने से पहले कुछ ज्ञान अवश्य प्राप्त किया जा सकता है। इस साधना को करने के लिए ध्यान देने वाले व्यक्ति को ध्यान देना चाहिए कि कुछ छोटी सी भूल हो जाए तो कर्ण पिशाचिनी क्रोधित होकर दंड दे सकती है। जो लोग कर्ण पिशाच की पूजा करते हैं, वे पिशाच  दुनिया से चले जाते हैं। ऐसे लोगों को मोक्ष प्राप्त नहीं होता है। पिशाचिनी अपने भेष को बदलकर साधक के पास ही रहती है।

मोक्ष प्राप्त करने के लिए केवल मानव जीवन ही संभव है। मानव योनि को दुर्लभ माना जाता है, क्योंकि यह मानव शरीर मिलना महान भाग्य है। भगवान भी मानव शरीर के लिए तृष्णा करते हैं। तृष्णा को पूरा करने के लिए, आपको नीच योनियों की पूजा करनी चाहिए। ध्यान देना चाहिए कि पिशाच को भी मुक्त होने की इच्छा होती है, लेकिन उसके पास मनुष्य का शरीर नहीं होता है, और न ही कोई अन्य साधन होता है। वह आपकी सभी इच्छाओं को पूरा कर सकता है।

इस प्रकार, कर्ण पिशाच साधना एक प्रभावशाली तकनीक है जो मनुष्य को उच्चतम स्तर की मुक्ति तक पहुंचा सकती है। यह साधना आपके जीवन को सकारात्मकता और समृद्धि के नए मार्गों की ओर ले जा सकती है। इसलिए, इसे यथाशक्ति और श्रद्धा से अपनाएं और इसके लाभों का आनंद लें।