Tag: यक्षिणी साधना कैसे करे

yakshini-sadhna यक्षिणी साधना के लाभ – यक्षिणी साधना रहस्य – धन ऐश्वर्या और भोग प्रदान करने वाली की देवी का रहस्य yakshini

yakshini-sadhna यक्षिणी साधना के लाभ - यक्षिणी साधना रहस्य - धन ऐश्वर्या और भोग प्रदान करने वाली की देवी का रहस्य yakshini

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yakshini-sadhna यक्षिणी साधना के लाभ – यक्षिणी साधना रहस्य – धन ऐश्वर्या और भोग प्रदान करने वाली की देवी का रहस्य yakshini गुरु मंत्र साधना.कॉम में आप सबका फिर से स्वागत है। आज का जो मेरा कॉन्सेप्ट रहेगा, यक्षिणी साधना को लेकर रहेगा और यक्षिणी साधना के बारे में मैं आपको पूरी जानकारी प्रदान करूँगा।

देखिए, जो यक्षिणियाँ होती हैं, यह भी एक तरीके से दैविक शक्ति होती हैं, उनको दैविक शक्ति बोला गया है। यह कई तरीके की होती हैं, जैसे 36 प्रकार की होती हैं, इसमें से जो आठ होती हैं, यह प्रमुख होती हैं, 36 में से चार जो यक्षिणियाँ होती हैं 

इनको गोपनीय रखा गया है। जो 32 यक्षिणियाँ हैं, यही ज़्यादातर जो हैं, साधकों के बीच में रही हैं। बाकी जो चार यक्षिणियाँ हैं, इनको गोपनीय रखा गया है, इसके बारे में किसी भी साधक को नॉलेज नहीं है, इन्हीं 32 यक्षिणियों में से आठ यक्षिणी प्रमुख मानी गई हैं, यह इनका कॉन्सेप्ट है।

जो ये यक्षिणियाँ होती हैं, जो यक्षराज कुबेर हैं, उनके अधीन ये रहती हैं, उनके मुताबिक ही चलती हैं क्योंकि यक्षराज बोला गया है कुबेर जी को और कुबेर जो उनको आज्ञा करेंगे, उनके मुताबिक ही वह चलेंगी। वैसे तो यह महादेव की सेवा में हाजिर रहती हैं, जो इनके प्रधान हैं, इनके अधिपति हैं, वो जो ज़िम्मेदारी सौंपी गई है, कुबेर जी को सौंपी गई है, कुबेर जी ही इनका करते हैं आगे जो कुछ भी देखरेख या उनके मार्गदर्शन से आगे चलती हैं।

देखिए, जो यक्षिणियों का जन्म हुआ है, यह महादेव के पसीने से हुआ है, जब महादेव के ऊपर कामदेव ने तीर चलाए थे, वो तीर उनके जाके बॉडी के ऊपर लगे थे, महादेव क्रोधित हो गए और आगे उनका जो तीसरा नेत्र है, वह खुला, कामदेव को भस्म कर दिया गया। वही जो कामुकता थी, उनके चेहरे के ऊपर पसीने के रूप में निकलने लगी।

वही जो आगे चलके जहाँ-जहाँ गिरी धरती के ऊपर, वहाँ-वहाँ यक्षिणियाँ पैदा हो गईं, तो यह इनका कॉन्सेप्ट है। जो आगे ऋषि होते हैं, उनको जाके ये परेशान करने लगीं, उनके साथ वो जो भोग की इच्छा करने लगीं, तो उन्होंने इनको श्राप दे दिया, जाओ, आप अपने जो देवत्व है, उसको खत्म कर दोगे, मतलब दैविकता से नीचे गिर गए, पहले यह देवताओं के समान ही थीं, इनको रखा गया था।

जब इन्होंने इस तरीके से कुछ हरकतें कीं, उनको नीचे कर दिया गया, अपने उसी दैविक गुण को पाने के लिए जो होती हैं, यह लोग इनको सिद्ध करते हैं, यह सिद्ध होती हैं, पर जो उन्होंने आगे जैसे उनसे क्षमा याचना करी, तो उन्होंने उनको माफ़ कर दिया, और यह बोला कि जो भी तुम्हें व्यक्ति, साधक सिद्ध करेगा, उसके बाद ही आप अपने जो वापस देवत्व गुण हैं, उनको प्राप्त करोगी।

उसके बाद यह खुद यह ढूँढती हैं कि कोई इनको साधक सिद्ध करे, हम भी अपने देवत्व गुण को प्राप्त करें। तो ये इसका कॉन्सेप्ट होता है।

यह बहुत ही पॉजिटिव शक्ति है। जब बंदे की ज़ुबान के ऊपर इसका नाम जाता है, तो अंदर से पॉजिटिविटी फील होती है, पर यह देवताओं से थोड़ी सी नीचे हैं, पर यह एक दैविक शक्ति ही आप इनको मान सकते हैं, अप्सरा हो गईं, यक्षिणियाँ हो गईं, एक दैविक ही शक्ति हैं, जो देवताओं के पास रहती हैं, इसमें से भी कुछ तामसिक हैं, जो 12 तामसिक हैं, जो 12 हैं, राजसिक हैं, 12 ही जो हैं, सात्विक मानी गई हैं।

आठ इसमें से प्रमुख मानी गई हैं, जैसे कुछ एक-दो के नाम मैं आपको बताऊँगा, जैसे कामेश्वरी यक्षिणी होती है, कोई भी व्यक्ति अगर अपना ऐसा रूप चाहता है कि उसकी ओर सब लोग आकर्षित हों, उसकी काम की जो इच्छा है, वो उसकी पूर्ति हो, तो कामेश्वरी यक्षिणी को सिद्ध किया जाता है।

कामेश्वरी यक्षिणी को सिद्ध करने के बाद दुनिया की कोई भी स्त्री उस व्यक्ति से आकर्षित होने से नहीं बच सकती है। दुनिया की तमाम औरतों के साथ वो भोग-विलास करता है, जो कामेश्वरी यक्षिणी को सिद्ध कर लेता है, कामना पूरी करने वाली यक्षिणी होती है, खुद वह साधक के साथ संभोग-विलास करती है, अलग-अलग रूपों में भोग-विलास करती है। धरती की जो भी खूबसूरत लड़कियाँ होंगी, उनके थ्रू वो विलास करवाती है। ये कामेश्वरी यक्षिणी है।

एक है सुरसुंदरी। सुरसुंदरी के नाम से ही आपको थोड़ा लग रहा होगा। देखिए, जो सुरसुंदरी है, ये सुर का मतलब होता है देवता, सुंदर, देवताओं के समान सुंदरता देने वाली जो यक्षिणी है, वह है सुरसुंदरी, यह भी बहुत ही शक्तिशाली यक्षिणी होती है। आपके अंदर सुंदरता इतनी ज़्यादा भर देगी कि कोई भी व्यक्ति आपकी ओर आकर्षित हो जाएगा

चाहे देवता हो, चाहे अप्सरा हो, कोई भी, इस लेवल तक आपको सुंदरता प्रदान करेगी, इस लेवल की यह शक्तियाँ होती हैं। जो यक्षिणियों की पूजा करता है, उसको कभी भी धन की कमी नहीं रहती, धन उसको भरपूर मिलता है, क्योंकि यक्षराज कुबेर के अधीन हैं और कुबेर को तो धन का स्वामी बोला गया है, तो इसीलिए कुछ ऐसी यक्षिणियाँ हैं, जो आपको बहुत सारी चीज़ें देती हैं।

पद्मिनी यक्षिणी  आप समझ सकते होंगे, मतलब ऐसे सुरमा दे देगी आपको, आप पहनोगे, लगाओगे आँखों में, तो कोई आपको देख नहीं पाएगा, अदृश्य होने की शक्ति और ऐसी-ऐसी शक्तियाँ। पैसे के मामले में है, तो आप पद्मिनी यक्षिणी को सिद्ध कर लो, पैसा आपको इतना आएगा, बहुत ज़्यादा।

लक्ष्मी यक्षिणी होती है, उसको कर लो आप, पैसा आपके घर में भर जाएगा, इतना पैसा देती हैं।देखिए, यह अलग-अलग रूप में किया जा सकता है।

इसको यह ज़्यादातर सात्विक रूप में ही चलती है, तामसिक भी होती हैं, इसमें से 12 यक्षिणियाँ मैंने आपको बताया, तो तामसिक रूप में भी ये चलती हैं, राजसिक रूप में भी और सात्विक रूप में, ये होता है इनका सिद्ध।

जो तामसिक यक्षिणियों को सिद्ध करता है व्यक्ति, तो उसके काम गोली की तरह होते हैं। एक ऐसा साधक मैं जानता था, वो उसने एक ऐसी यक्षिणी को सिद्ध कर रखा था, जो तामसिक रूप में उनके साथ रहती थी वो, और कोई भी काम लेने के लिए वह बहुत बड़ा एक बलिदान करता था। अगर मैं इस  पोस्ट के अंदर बताऊँगा, तो वो चीज़ें सही नहीं हैं।

अंत में वो व्यक्ति बुरी तरीके से फँस गया क्योंकि उसने जो है, आदमियों का जो खून होता है, उसका चस्का लगा दिया सबको और हर वक्त उसको आदमियों की ज़रूरत पड़ती थी, जो उनका खून निकाल सके। इस तरीके से जो चीज़ें होती हैं, इनमें नहीं जाना चाहिए। सात्विक रूप में, पॉजिटिव रूप में ही आप करो, तो ज़्यादा बेहतर है।

अगर आप चाहते हो कि आपकी ज़िंदगी बदले, आपकी ज़िंदगी के अंदर ऐश्वर्य आए, सुख-शांति आए, आप ये यक्षिणियों की साधना आप ज़रूर कर सकते हैं, यक्षिणी, यक्षिणियों का ऐसा कॉन्सेप्ट है, आपकी ज़िंदगी में हर चीज़ का अंबार लग जाएगा, क्योंकि ये पॉजिटिव शक्तियाँ हैं। 

कुछ भी बुरा नहीं करती हैं, पॉजिटिव वे में ही ये चलती हैं, तो एक मैं ऐसा वीडियो थोड़े दिन बाद फिर लेके आऊँगा, वो रहेगा यक्षिणियों के बारे में, कौन सी यक्षिणी आपको क्या देती है, कौन सी यक्षिणी आपको करनी चाहिए, उस टॉपिक के ऊपर मैं बात करूँगा, उस टॉपिक में मैं डिटेल के साथ बताऊँगा कि ये यक्षिणी कर लोगे तो यह मिलेगा, यह यक्षिणी कर लोगे तो यह मिलेगा।

सबसे इसका फ़ायदा यह होता है, आप माँ-बहन, पत्नी रूप में भी कर सकते हैं, प्रेमिका रूप में भी कर सकते हैं। पर एक चीज़ मैं आपको और बोलता हूँ, पत्नी रूप में करोगे, और दूसरी शादी कर लोगे, जब भी आप करोगे शादी, तो आपकी मृत्यु निश्चित है।

तो उन्हीं लोगों को पत्नी रूप में करनी चाहिए, जिनको आगे शादी-ब्याह नहीं करना क्योंकि इनके अंदर तलाक़ का कोई सिस्टम नहीं है। जिस समय आपकी इंसान के साथ आपने शादी कर ली, तो उस समय आपकी मृत्यु है। यह मैं नहीं बोल रहा हूँ, ये भगवान शिव बता रहे हैं,

दूसरी चीज़, यक्षिणियों के जितने भी मंत्र हैं, यह सब कीलित हैं। इसको खोलने के लिए कोई भी ऐसा साधक चाहिए, जो उनको खोल सके, भगवान शिव का जो भी तंत्र है, वह कीलित है, सिद्ध कर ही नहीं सकते आप।

सिद्ध करने के लिए आपको ऐसा व्यक्ति ढूँढ़ना पड़ेगा, जिसके पास निष्कीलन करने का सिस्टम हो, तभी ही जाके यह यक्षिणियाँ सिद्ध होंगी, अदरवाइज़ इनको सिद्ध करना मुश्किल है, करोगे क्योंकि तंत्रों के अंदर इसके मंत्र दे रखे हैं, तो अगर इस तरीके से होने लगा, तो सब लोग कर लेते, करते वही हैं, जिनके पास इसको खोलने की चाबी होती है, वही कर पाते हैं।

ये शक्तियों के बारे में फिर पता कैसे चलता है? जैसे किसी व्यक्ति ने कोई बड़ी शक्ति को सिद्ध कर रखा, तो वही शक्तियाँ इनको आगे बताती हैं कि यह विद्या ऐसे सिद्ध होगी, ऐसे होगी, फिर यह लुप्त विद्याएँ वापस आती हैं, वरना ये विद्याएँ वापस नहीं आती हैं।

बहुत सारी चीज़ें विलुप्त हो गईं, इसी तरीके से, इसी कॉन्सेप्ट से वो चीज़ें वापस आ जाती हैं क्योंकि जो लोग ये विद्याओं को जानते थे, बाद में मर जाते हैं, तो मामला वहीं दफ़्न हो जाता है, अपने साथ ही वो ले जाते हैं।

तो फिर आगे यह विद्याएँ इस तरीके से फिर दोबारा से लौटती हैं, क्योंकि किसी भी चीज़ का कोई अंत नहीं, आज कोई विद्या कोई व्यक्ति कर रहा है, वो इसलिए कर पा रहा है क्योंकि उसके पास निष्कीलन करने का सिस्टम होता है। वह कभी नहीं कर पाता है, जिसके पास वह सिस्टम न हो,

तो भाई, आज के लिए इतना ही। एक लेख  और बनेगा, जिसके अंदर एक-एक यक्षिणी का डिटेल सहित बात करूँगा, कौन सी यक्षिणी क्या करती है, कैसे करती है, उस कॉन्सेप्ट के बारे में बात करूँगा मैं। आज आपके लिए इतना ही, बस मेरे को जाने की आज्ञा दीजिए, जय श्री महाकाल।

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apsara sadhana vs yakshini sadhana अप्सरा और यक्षिणी कौंन शक्तिशाली ph.85280-57364 आज का जो हमारा विषय रहेगा, वह रहेगा अप्सरा और यक्षिणी साधना को लेकर। अप्सरा और यक्षिणी, दोनों साधना में से कौन सी साधना हमारे लिए सर्वश्रेष्ठ है, इस विषय में हम बात करेंगे। कृपया इस वीडियो को अंत तक जरूर देखिए।

जो अप्सरा साधना है, यह भी दैविक साधना होती है और जो यक्षिणी साधना है, यह भी दैविक साधना होती है। अप्सरा को आप सिर्फ प्रेमिका रूप में ही कर सकते हैं, लेकिन यक्षिणी को आप मां, बहन, पत्नी रूप में कर सकते हैं।

अप्सरा कभी भी मां, बहन, प्रेमिका रूप में सिद्ध नहीं होती है। अगर कुछ लोग बोलते हैं तो यह बिल्कुल गलत है। अप्सरा जब भी आती है तो प्रेमिका रूप में ही आती है।

बुलाने की कोई कोशिश करता है उस तरीके से, तो उस तरीके से वह सिद्ध नहीं होती है। क्योंकि अप्सरा एक ऐसी साधना होती है जो कभी भी जोड़े में नहीं होती है।

अप्सरा और परी कभी जोड़े में नहीं रहती हैं, बाकी जैसे यक्ष और यक्षिणी होते हैं, पति-पत्नी हैं, देवता और देवी हो गए। मतलब हर एक शक्ति एक जोड़े में चलती है।

पर लेकिन अप्सरा होती है, यह जोड़े में नहीं चलती है कभी भी। तो इसीलिए इसकी जो कामना पूरी नहीं होती है, जो उनकी इच्छा होती है, वह पूरी नहीं होती है।

अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए ही वह अपने प्रेमी की तलाश करती है, जो साधक उसके लिए सही होता है तो उसको सिद्ध हो जाती है, वरना आपके काम तो करती ही रहेगी अप्रत्यक्ष रूप में।

दूसरी चीज मैं आपको यह बताता हूं, अगर आपने प्रेमी रूप में इसको कर लिया, अगर आपकी प्रेमिका है तो आपको उससे दूरी बनानी पड़ेगी, पत्नी से दूरी बनानी पड़ेगी।

अप्सरा यह नहीं चाहती है कि कभी भी जो आपका प्रेम है, किसी दूसरी औरत को आप दो, यह उसको बर्दाश्त नहीं होता है। तो इसीलिए यह साधना करने वाले साधक जो होते हैं, इनको दूसरी औरत, प्रेमिका या पत्नी रखना सही नहीं है।

अगर रखेगा तो उसको कष्ट होगा। एक मेरे दोस्त हैं रणवीर, उनकी एक प्रेमिका थी और वह प्रेमिका बाल-बाल मरते हुए बची क्योंकि वह उसको मिलने के लिए अक्सर जाता था, अप्सरा को वो चीजें पसंद नहीं थीं। तो इसका यह भी कारण है।

देखिए, जो यक्षिणियों की साधनाएं हैं, हमारे भारतीय तंत्र में मिलती हैं और जितने भी इसके मंत्र हैं, यह सब कीलित होते हैं। कोई आपको गुरु चाहिए जो मंत्र को जागृत कर सके। जो अप्सरा के मामले में ऐसा नहीं है। अप्सरा के मंत्र कोई भी कीलित नहीं हैं।

यह साधना गुरु परंपरा से ही चलती आ रही है, इसमें कोई कील, कोई बंधन नहीं है। तंत्र की जितनी भी साधनाएं हैं जो भारतीय तंत्र के अंतर्गत आती हैं, तो वह सारी ही कीलित होती हैं। कोई अगर आज की डेट में किसी ग्रंथ से पढ़कर अप्सरा-यक्षिणी साधना करना चाहे, वो कभी उसको सिद्ध नहीं हो सकती।

अप्सरा के मामले में यह नहीं है। अप्सरा को कोई भी करेगा तो उसको रिजल्ट मिलेगा। यह इसके कुछ कारण हैं। ऐसा गुरु ढूंढना पड़ेगा जो यक्षिणी साधना आपको करवा सके। अप्सरा साधना के तो साधक आपको मिल जाएंगे।

तो ये कुछ बातें हो गईं। अब कुछ और बातें मैं आपसे करता हूं। कुछ अप्सराएं स्वर्ग में रहती हैं। इसी चीज के चलते जो स्वर्ग की अप्सराएं होती हैं, वह अधीन होती हैं देवराज इंद्र के। अगर अप्सरा को जाना होगा तो वह जाएगी।

अगर साथ में इंद्र का भी आप जाप कर लोगे, तो उसमें कोई भी रुकावट पैदा नहीं हो सकती। तो यह इसकी खास बात है। भगवान इंद्र को भी साथ में प्रसन्न करोगे तो साधना जल्दी सफल होगी। वहीं जो यक्षिणियों के जो स्वामी हैं, यक्षराज कुबेर को बोला गया है और जो कुबेर हैं, उनके स्वामी माने गए हैं। कुछ यक्षिणी कुबेर के अधीन होती हैं।

जैसे कुछ अप्सराएं स्वर्ग में रहती हैं, कुछ अप्सरा अप्सरा लोक में ही रहती हैं और ज्यादातर वह धरती के ऊपर भ्रमण करती रहती हैं। अपना इनका कोई भी लोक नहीं होता है, धरती के ऊपर भ्रमण करती रहती हैं, इसीलिए तो जल्दी सिद्ध हो जाती हैं।

जो यक्षिणी साधना है, जो यक्ष लोक है, बिल्कुल धरती के करीब है। हमारी जो मंत्र की वाइब्रेशन है, तो वह वहां तक जल्दी पहुंचती है, वह भी साथ में जल्दी सिद्ध होती है। इसके लिए गुरु चाहिए जो आपके मंत्र को निष्कीलित कर सके।

यह कुछ खास बातें हो गईं। अब इस पर कुछ और चर्चा करते हैं। जब भी अप्सरा आती है तो उससे फूलों की खुशबू आती है। चाहे वह अप्सरा 1 किलोमीटर दूर क्यों ना हो, तो वहां से भी आपको फूलों की ही खुशबू महसूस कर सकते हैं आप।

यक्षिणी के मामले में चमेली की खुशबू आती है जब कोई भी यक्षिणी को सिद्ध करता है, तो समझ जाना चाहिए कि यक्षिणी आपके आसपास है। अगर कोई व्यक्ति यक्षिणी को पत्नी रूप में सिद्ध करता है, पत्नी रूप में सिद्ध करने के बाद दूसरा विवाह करा लेता है, तो तंत्र ग्रंथों में यही लिखा है, तो उसकी मृत्यु हो जाती है।

एक दफा अगर आपने यक्षिणी को पत्नी रूप में मान लिया, तो आप फिर दूसरी पत्नी से शादी नहीं कर सकते क्योंकि जो सनातन धर्म की संस्कृति है, उसमें एक शादी ही मान्य है, मान्यता दी गई है।

दूसरी शादी करोगे तो फिर उसमें आपको दिक्कत आनी शुरू हो जाएगी, आपकी मौत हो जाएगी। ऐसा मैं नहीं बोल रहा हूं, भारतीय तंत्र ग्रंथ में जिक्र मिलता है। हर एक तंत्र ग्रंथ में यह बात बोली गई है।

इस साधना को करने के लिए आपको एकांत जगह चाहिए होगी। एकांत जगह में ही आप यक्षिणी और अप्सरा साधना को करिए। सुंदर वस्त्र पहन के करिए।

यक्षिणी को अगर आप मां, बहन, पत्नी रूप में कर रहे हो, तो इस चीज का आप ध्यान रखें कि जो आपकी बहन है, आपकी मां है, उसके साथ आपके रिलेशन अच्छे होने चाहिए।

ऐसा नहीं है कि आप मां और बहन का कोई सम्मान नहीं करते हो, तो फिर वह आपको सिद्ध होने में दिक्कत करेगी। असल में भी आपको रिश्ते निभाने पड़ेंगे, अगर नहीं निभाते हो तो प्रॉब्लम आएगी। तो यह कुछ बातें हैं अप्सरा और यक्षिणी को लेकर।

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लक्ष्मी यक्षिणी साधना-Mata lakshmi yakshini sadhna Ph. 85280 – 57364

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लक्ष्मी यक्षिणी साधना-Mata lakshmi yakshini sadhna 

लक्ष्मी यक्षिणी साधना-Mata lakshmi yakshini sadhna Ph. 85280 – 57364
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लक्ष्मी यक्षिणी साधना-Mata lakshmi yakshini sadhna Ph. 85280 – 57364 नमस्कार दोस्तों धर्म रहस्य चैनल पर आपका एक बार फिर से स्वागत है ! मैं बात करूंगा लक्ष्मी यक्षिणी साधना के बारे में वैसे तो तांत्रिक ग्रंथों में इनका विवरण बहुत ही कम मिलता है, खोज करके निकाला है! 

तो यह अद्भुत प्रभाव वाली शुद्ध रूप वाली कहलाती है इनका प्रभाव बहुत ही अच्छा है अगर कोई निश्चित कर लेता है तो उसे  Malamal  कर देती हैं !  और अगर गलती हो जाए तो फिर से को दरिद्री भी बना देती हैं इसलिए इनकी साधना में इस विशेष ख्याल रखना चाहिए ! और शुभ फलों को देने वाली देवी को प्रसन्न करने के लिए इनकी साधना करनी चहिए!

पहले सुबह प्रातः काल 4:00 से ही इनकी साधना करनी है, आपको सुबह उठकर 4:00 का मतलब है!  कि प्रकाश निकला ना हो और रात्रि जाने वाली हो तू सुबह की ठीक 4:00 बजे से आप किसी भी मौसम में कर सकते है  साधना शुरू कर सकते हैं !  

 

इनकी साधना के लिए जो विशेष नियम होता है यह होता है कि 21 पवित्र स्थान की आपको इसके लिए बहुत आवश्यकता है ! अगर घर में ही करते हैं तो भी आपको जो स्थान होगा उसे बहुत ही ज्यादा पवित्र करना होगा  ! 

कोई आपके मकान को अपवित्र व्यक्ति कभी भी न छुपाए जब तक आपकी साधना चल रही है मकान में किसी भी वियकती का प्रवेश बिल्कुल ना हो और  साधना काल में उस मकान की सफाई लिपाई पुताई धूप चंदन धूनी  आपको देनी है ! उस कमरे में पुष्पों की माला लटका देनी होंगी ,चित्र खुशबू और इन सब चीजों का विशेष प्रयोग करना होगा  एक अच्छा  वातावरण तैयार करना होगा !

जैसे कि वह देवी जब आए तो अत्यधिक खुश होकर कि आपके सामने प्रकट हो ! इसलिए इनकी साधना में बिल्कुल उसी तरह आपको करनी होती जैसे माता लक्ष्मी की साधना होती हैक !  यह उन्हीं की यक्षिणी है उन्हीं की सेविका है !  उनकी सेविका होने की वजह से बहुत ही धन  देने में सक्षम  है ! आपको किस प्रकार करनी है साधना में बता रहा हूं !

 

लक्ष्मी यक्षिणी साधना-Mata lakshmi yakshini sadhna साधना विधी

लक्ष्मी यक्षिणी साधना-Mata lakshmi yakshini sadhna साधना विधी  – सबसे पहले उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में लक्ष्मी की मूर्ति जो है आपने बनानी है वह अष्टधातु में बनाकर आपको स्थापित कर लेनी है अगर संभव नहो तो आप पर्तिमा  को स्थापित  कर सकते है !  गंगाजल में स्नान करा कर मस्तिष्क पर केसर और कस्तूरी का आपको जो है लिप लगाना है ! तिलक आपको उसके माथे पर लगाना और आपको स्वयं जो है कुशासन पर बैठकर चमकदार वस्तु को धारण करना है !

 और पीले रंग का आसन अपने नीचे रखना है उस पर मूर्ति रखी जाएगी ! उसके नीचे भी पीले रंग का कपड़ा होना चाहिए इसके बाद फिर स्नानादि करके और भक्ति भाव से आपको संकल्कप करना है ! और उस पर प्रार्थना करनी है जल का भक्ति भाव से पान करें फिर उसके बाद हृदय में मूर्ति का चित्र जो है आपको स्थापित करके की माला से लेकर  मंत्र का जाप करना  है आपको 51 माला जो है लड्डू आपको बनाकर सामने रखना है इस प्रकार आपको 51 दिन आपको लगातार करना है दिन जो है आपको यक्षिणी निश्चित रूप से दर्शन देगी !

अब यक्षिणी  का वर्णन ग्रंथों में मिलता है मैं बता रहा हूं भाई जिस समय यह आती है उसके पूर्व राजा और महाराजाओं की भांति उसके आगमन की तैयारी देवता लोग कर जाते हैं ! चारो और शांती हो जाती है दर का कोई स्थान नही रहता ! 

अर्थात  दर्द की कोई जगह ही नहीं होती   इसमें इसका स्वरूप साक्षात आंखों से दिखाई नहीं देता स्वप्न में दर्शन देती है ,और अद्भुत सुंदरता का वर्णन उसका तंत्र ग्रंथो  में  हुआ है!   

एक सुंदर गोरे वर्ण की आठारह और बीस की उम्रकी लडकी  के रूप में दर्शन देती है!  मृगनयनी अर्थात मृग की तरह  आंखें होती है वही जो है चंपे की डाल के अनुसार  उस तरह की इनकी बाहें होती हैं ! नाक में स्वर्णनाथ पहने हुए साक्षात देवी अवतार नजर आती है हाथों में कमल का फूल धारण किए हुए आती है रूप स्वरूप इस माता लक्ष्मी की तरह  होता है क्योंकि यह उन्हीं की सेविका है प्रभाव इसका जो है प्रसन्न हो जाए तो साधक को मालामाल कर देती है

 

अगर आप  इस की  पूजा सही ढंग से नहीं करता है!  इसलिए इसकी पूजा में इस बात का बहुत ध्यान रखना है साफ-सफाई और नियमावली सही ढंग की होनी चाहिए ! 

गंदगी मन में गंदे विचार गंदी चीजें गंदी बातें करना या इस तरह का गलत  आचरण करना !  ब्रह्मचर्य का पूर्ण निष्ठा से पालन करना यह सब अनिवार्य चीजें हैं ! यहां पर आप इसकी अगर लक्ष्मी यक्षिणी की साधना करते हैं और बिल्कुल आप ही मान लीजिए कि जिस प्रकार माता लक्ष्मी को प्रसन्न किया जाता है ! 

आने  समय वाली और सब कुछ आपको दे देगी धन वैभव सम्मान सभी कुछ आपको देने में सक्षम है !  यह धन पर्धायक और बहुत ही शक्तिशाली है ! क्योंकि माता लक्ष्मी की सेविका है और कहते हैं दिन में जिसके पास धन सम्मान वैभव आ जाए  उस के पास सब कुच्छआ गया ! यह आप की  आर्थिक मदद करेगी अगर आप अगर उच्च कोटि के साधक हुए तो हर प्रकार से आपके साथ तीनों संबंधों में से कोई एक संबंध भी बना लेगी!  यह अद्भुत शुद्धता मैंने यक्षिणी साधना आपको  बताई है !

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