प्राचीन चमत्कारी ब्रह्मास्त्र माता बगलामुखी साधना अनुष्ठान Ph. 85280 57364
बगलामुखी साधना विशेष Baglamukhi Sadhana Special
विशेष- यदि आप मंत्रजप का संकल्प संस्कृत में उच्चारित कर सकते हैं तो इसकी विधि ऊपर दी गई है । संकल्प लेते समय संवत्, मास, वार, तिथि तथा ग्रहों की राशि आदि, जो उस समय विद्यमान हों, उन्हें ही उच्चारित करना चाहिये। मंत्रजप का उद्देश्य रिश्तों में अविश्वास, सन्देह, संघर्ष एवं कलह की स्थिति देखने को मिल रही है ।
समर्पण की जगह संघर्ष ने ले ली है। प्रेम का स्थान अविश्वास और संदेह ने ले लिया है। इन सबका परिणाम है कि पारिवारिक कलह, हिंसा, तलाक, एक-दूसरे को धोखा देने की घटनायें बढ़ती जा रही हैं।
तलाक की दर भी तीव्रगति से बढ़ रही है। तलाक का अर्थ है वैवाहिक जीवन में प्रेम, समर्पण, त्याग की जगह अविश्वास, घृणा एवं संघर्ष का इस सीमा तक बढ़ जाना कि पति-पत्नी दोनों को ही यह लगने लगे कि अब एक साथ रहना संभव नहीं है।
ऐसी स्थितियों में उन दोनों का एक साथ शांतिपूर्वक रह पाना मुश्किल बन जाता है और वह शीघ्रताशीघ्र एक-दूसरे से अलग होकर स्वतंत्र हो जाना चाहते हैं। तलाक के ऐसे मामलों के लिये सामाजिक परिस्थितियां तो उत्तरदायी रहती ही हैं, कई अन्य कारण भी जिम्मेदार रहते हैं ।
इस प्रकार के कारणों का उल्लेख तंत्रशास्त्र एवं अन्य दूसरे ग्रंथों में विस्तारपूर्वक दिया गया है। आमतौर पर ऐसा देखने में आता है कि जिन परिवारों में माता-पिता या अन्य बुजुर्ग सदस्यों को पूर्ण मान-सम्मान नहीं मिलता, उनकी संतानें भी सुखी नहीं रह पाती । इनकी संतानों के विवाह जैसे मांगलिक कार्यों में बहुत अधिक विलम्ब होता है, उनके गृहस्थ जीवन में भी निरन्तर उथल-पुथल मची रहती है ।
उनकी संतानों को गृह क्लेश का सामना करना पड़ता है, जिसकी परिणिति अनेक बार तलाक के रूप में सामने आती है। इन लोगों को संतान सुख भी प्राप्त नहीं हो पाता । इसी तरह जिन परिवारों में कुल देवता, देवी का अपमान, निरादर किया जाता है या परिवार के किसी कमजोर सदस्य को सताया, दबाया जाता है या बार-बार अपमानित किया जाता है, उनकी संतानें उन्मुक्त स्वभाव को अपनाने वाली होती हैं ।
इनके पुत्र- पुत्रियां, दोनों का ही गृहस्थ जीवन सुचारू रूप से नहीं चल पाता। ऐसे अधिकतर मामलों में शीघ्र तलाक की स्थितियां निर्मित होने लगती ‘ अनुभवों में ऐसा आया है कि अगर समय रहते समुचित प्रबन्ध कर लिये जायें तो तलाक जैसी स्थिति को उत्पन्न होने से रोका जा सकता है तथा टूटते हुये गृहस्थ जीवन को बचाया जा सकता है।
ऐसी विषम परिस्थितियों से बचने के लिये तांत्रिक सम्प्रदाय और वैदोक्त पद्धति में अनेक उपाय एवं प्रयोग दिये गये हैं, जिनको सविधि सम्पन्न करने से माता-पिता के पापकर्मों का तो प्रायश्चित हो ही जाता है, कई अन्य तरह के दोष भी समाप्त हो जाते हैं । तलाक स्तम्भंक शाबर प्रयोग : यद्यपि पापकर्मों से मुक्ति पाने के लिये शास्त्रों एवं वैदोक्त प्रणाली में अनेक विधान और उपाय बताये गये हैं। इन सबका इस प्रसंग में वर्णन कर पाना सम्भव नहीं है।
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