Category: यंत्र मंत्र तंत्र ज्ञान

यंत्र मंत्र तंत्र ज्ञान mantra-tantra-yantra  गुरु मंत्र साधना एक मंत्र तंत्र साधना विज्ञान एक प्लेटफार्म है यहा पर मंत्र तंत्र साधना सम्बन्धी ज्ञान प्रदान किया जाता है जो ज्ञान   साधू  संताओ से प्रपात किया है । इस वेबसाइट में तंत्र की  लेख और वीडियो प्रपात होंगे । 

बंगाल का जादू |कामरु देश का जादू कैसे सीखें – विस्तार सहित ph. 85280 57364

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बंगाल का जादू |कामरु देश का जादू कैसे सीखें – विस्तार सहित ph. 85280 57364 गुरु मन्त्र साधना में आपका हार्दिक  स्वागत है। आज मैं बंगाल के जादू के बारे में जानकारी प्रदान करूंगा। बंगाल का जादू के बारे में मैं बहुत  समय से सोच रहा था। कि इस के बारे में साधक  साधक भाईओं को जानकारी प्रदान करूं  पर मैं अपने काम काज के चलते इस विषय जानकारी नहीं दे नहीं पाया।

बंगाल का का जा जादू क्या होता है इस  के बारे में विस्तार सहित जानकारी प्रदान करुगा। आप इस पोस्ट को पूरा पढ़े तब आप इस के रहस्य जान सकते सकते है। हमारी website पर तंत्र से जुड़ी जानकारीया प्राप्त होती है आप हमारी   website से जुड़े तंत्र और धारमिक जानकारीया प्रपात करने के लिए और के लोगों साथ भी शेयर करो। 

बंगाल का जादू |कामरु देश का जादू कैसे सीखें - विस्तार सहित ph. 85280 57364
बंगाल का जादू |कामरु देश का जादू कैसे सीखें – विस्तार सहित ph. 85280 57364

इन विषय पर चर्चा होगी 

  • ढाका बंगाल का जादू
  • आसाम बंगाल का जादू
  • बंगाल का जादू कैसे सीखें
  • आसाम बंगाल का जादू
  • बंगाल का जादू
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  • बंगाल में काला जादू कहां होता है
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बंगाल के जादू का इतिहास  और परिचय

 

 

बंगाल के जादू का इतिहास और परिचय – बंगाल के जादू बहुत लोगो के बीच में मशहूर  है। प्रचीन काल से  बंगाल जादू देना और तंत्र मंत्र के लिए  जाना जाता रहा है।

यहां पर प्राचीन काल  से ही  मायावी विधा का गढ़ माना जाता है। बंगाल का जादू इतना ज जयादा  प्रभावशाली माना जाता है के किसी भी बसी आदमी को जानवर बनाकर  कर उनसे काम लिया जाता था।

 इस तरह  की विघा पाई जाती थी। कुछ लोगो का  मानता है आज 1 आज भी बंगाल के कुछ गाँव  के अंदर ऐसे लोग है। जो आज भी किसी भी आदमी  को जानवर  बना सकते है।

सवामी राम क एक पुस्तक है हिमालय के संतो के संग निवास में बंगाल के  जादू को चमत्कार को देखा है। इसका इव्हासिक तथ्य और भी मिलता है। कि सिख के पहले गुरु नानक देव जी जब बंगाल गए थे। 

उनको साथ उनका एक शिषय भाई मरदाना जी को एक बंगाली औरत  ने भेड़ बना दिया था इसका कप्पा मैं आपको कथा नहीं बताउगा दो ‘इंटरनेंट पर  यूट्यूब में देख सकते है। इस कथा से यह सिद्ध होता है कि वास्तव में ऐसी  विद्या माजूद थी  जिस से किसी को  भी  जानवर बनाया जा सकता है। 

इसके इलावा बंगाल को आदमी को जानवर, तो सकता कई शाबर मंत्रो में बंगाल के जादू का जिकर का  कमरुदेश के  नाम से  मिलता है। बंगाल कमरुदेश के नाम से जाना जाता है। कुछ लोग कमरुदेश को आसाम बंगाल जादू देश देश को अलग मानते है।  नाथ पंथ का प्रचार और प्रसार बंगाल से  हुआ है। यह है। यह भी बताया जाता है नाथ योगीओं ने  ही बंगाल  लोगों को यह बंगाल के सिखाया था।

कई जगह शाबर मंत्रो में कामरूदेश के साथ नाथ योगी ईसमाईल योगी और कामरू देश की जादूगरनी लोना चमारन  का जिक्र मिलता मिलता है।   मायावी  विद्या  देवता भगवान शिव को माना जाता है।

मायावी  विदया के देवता भगवान शिव है उनसे यह मायावी विद्या भगवान शिव  से रावन को मिली और उसके बाद यह नाथ योगीयों को प्रापत हुई नाथ योगीयों में गुरु गरोखनाथ जो से यह विघा सभी नाथ योगी तक को प्राप्त हुई

उसके इस्मायल योगी और लोना चमारी कामरुदेश यानी बंगाल से थी। यह बंगाल के जादू के नाम से जाना जाता है। यह है बंगाल के जादू कर इतहास  आज के समय में बंगाल का जादू संभव है।  इस विषय पर बात है करेंगे।

बंगाल के कुछ ऐसे स्थान है माना जाता यह माना  जाता है आज भी बंगाल का जादू होता है। ‘इस के पीछे का सच इस पोस्ट में  जानकारी प्रदान करुगा। मायोंग बंगाल के जादू का प्रसिद्ध स्थान माना गया है।

कुछ लोग बोलते है आज भी वहां जदूगर माजूद है। किसी को भी जानवर बना माना आज के समय पर बड़े बड़े जादूगर माजूद  है । यह  सच  नहीं  है  यह पहले समय में ऐसा होता था पर अब नही हैं।

कुछ लोग “इस चक्र जाते है ऐसे कुछ नही है। उनका बड़ा  नुकसान हो  जाता है  ठगी का शिकार हो ‘जाते है। कहीं पर भी बंगाल में  ऐसा कुछ नहीं है  बंगाल का जाद ख़तम  चुका है। कुछ ऐसे हैं स्थान  वह पर  अभी भी  बंगाल जादू होता है। मैं उसकी जानकारी यहां पर नहीं दे सकता है। वहाँ  पर भीड  हो जाएगी  गुप्त स्थान इसके लिए  सम्पर्क करना होगा। 

बंगाल का जादू कैसे सीखे ?

बंगाल का जादू आपको अच्छे गुरु की तलाश करें  बंगाल जादू सीखने के  गुरु की तलाश  बंगाल का जादू  हो  बंगाल के जादू का माहिर हो । बंगाल जादू को सीखने के लिए  मयोग जाना होगा वहाँ पर  एक लाइब्रेरी है। लाइब्रेरी बहुत सारी  प्राचीन बंगाल के जादू की किताबे पढ़कर आप सीख सकते है।  पर वो किताबें  बंगाली भाषा के अंदर है आपको बंगाली आनी जरूरी है।  बंगाल का जादू सीखने के लिए  हम से संपर्क कर सकते है ph. 85280 57364 

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शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है

शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है

शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है

 

शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है
शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है

शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है  गुरु मंत्र साधना को में आप सबका स्वागत है जिन का नाम आपने अक्सर सुना होगा जिन मुस्लिम धर्म की शक्ति है जैसे हमारे पुराणों में भूत प्रेत के बारे में आता है। वैसे ही मुस्लिम धर्म में कुरान के अंदर जिन के बारे में जानकारी मिलती है। 

आज मैं जिन के बारे में बात करेंगे ,जब किसी  के शरीर में आता है।  उसके क्या लक्षण होते है, क्यों आता है कैसे आता है और इसके क्या लक्षण होते हैं। किसी के शरीर में आता है उसको क्या परेशानी हो सकती। इन सब बातों के बारे में विस्तार सहित जानकारी परदान करूंगा।  इस  लेख को अंत तक जरूर पढ़ें तब आपको समझ में आएगा आप इससे कैसे  बच सकते हैं औरों को भी बचा सकते हैं।

शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है

शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है
शरीर में जिन्न होने के लक्षण और जिन्न शरीर में क्यों आता है

किसी के शरीर में क्यों आता है इसके बारे में जानकारी प्रदान करेंगे पहले इस की हम पसंद के बारे में जानेंगे इ.फको तेज खुशबू बहुत पसंद होती है। उसके अलावा सुंदर लड़कियां बहुत पसंद होती है, यह ज्यादातर जवान लड़कियों के शरीर में आता है। उनके साथ गलत काम करता है जब भी उनके शरीर में आता है उनके के साथ गलत काम करता है। 

जिसके साथ यह गलत काम करता है उसको पता नहीं चलता है एक बेहोशी की तरह रात के समय सिस्टम हो जाता है और उसे लड़की को पता नहीं चलता है क्या हुआ था।

औरत के शरीर में जिन्न होने के लक्षण

सुबह शरीर में दर्द होता है और  शरीर टूटता है। सारा दिन उन लड़कियों के शरीर में थकावट और कमजोरी महसूस होती है  पता नहीं चलता क्या हो रहा है। बहुत कम मामलों में ऐसा होता है कि लड़की को पता चल जाता है उसके साथ कोई शक्ति सेक्स कर रही है।

आदमी शरीर में जिन्न होने के लक्षण

हम बात करेंगे किसी आदमी के शरीर में क्यों आता है इस विषय मैं बात करेंगे बहुत कम आदमियों के शरीर में जिन्न आता है जब कोई आदमी जिन्न  साधना करता है , उसको वश में करने की कोशिश करता साधना में  कोई रक्षा नहीं लगाई जाती है या  कोई गलती  हो जाती है।  तब आप के शरीर जिन्न  प्रवेश करता है। इसके क्या लक्षण होते है आप का कभी भी सिर घूमने  लगता है और चक्र आते है यह कुछ  समय तक होगा फिर नार्मल हो जाओगे बीच बीच में यह आपको दिक्कत हो सकती है। इस के इलावा और भी कारन हो सकते है अगर आप को परेशानी है  सम्पर्क करें ph 85280 57364 

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agni-prakat-karne-ka-mantra अग्नि प्रकट करने का मंत्र - मंत्र जप करते होगी अग्नि प्रकट

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agni-prakat-karne-ka-mantra अग्नि प्रकट करने का मंत्र – मंत्र जप करते होगी अग्नि प्रकट

agni-prakat-karne-ka-mantra अग्नि प्रकट करने का मंत्र – मंत्र जप करते होगी अग्नि प्रकट नमस्कार दोस्तों आज मैं आपको अग्नि उत्पन्न करने वाले मंत्र के विषय में बताने जा रहा हूं जैसे कि हम लोग जानते हैं कि हमारे पुराने काल में अर्थात जो ऋषि मुनि तपस्या करते थे और यज्ञ करते थे तो वह भगवान अग्नि का आवाहन करने के बाद उनको प्रकट करते थे मंत्रो के द्वारा ही अपने यज्ञ की अग्नि को प्रज्वलित कर लेते थे। 

आज मैं आपको एक ऐसे मंत्र के विषय में बताऊंगा प्रयोग से आप भी अग्नि को उत्पन्न कर सकते हैं और उसके द्वारा अपने कार्यों को सिद्ध कर सकते हैं दोस्तों अपने पुराने समय की किताबों में या पुरानी कथाओं में अग्नि के विषय में सुना भी होगा जाना होगा कि मंत्रो के द्वारा भी अग्नि को उत्पन्न किया जा सकता है

अर्थात आप अपने मंत्र शक्ति से भी आग को उत्पन्न कर सकते हैं दोस्तों हम भगवान सूर्य की आराधना करते हैं और उनको प्रसन्न करने के लिए नाना प्रकार के कर्म करते हैं और भगवान सूर्य भी अपने कर्मों के लिए सुबह प्रातः काल प्रकट होते हैं और इस संसार को ऊर्जा प्रदान करते हैं जिससे सभी जीवो का भरण पोषण होता है। 

उसी प्रकार पुरातन समय में जब ऋषि मुनि मंतर करते थे और अग्नि को भी हम लोग देवता की संज्ञा में रखते हैं अर्थात जब हम ऋषि मुनि अग्नि देव का स्मरण करते थे तो वह प्रकट होते थे और उसे अग्नि प्रकट होकर यज्ञ कुंड को प्रज्वलित करती थी। उसके बाद देवता हवन के जरिए भोजन प्राप्त करते थे पृथ्वी हवन के जरिए भोजन प्राप्त करते थे इस समय मित्रों का प्रयोग करके आप भी अग्नि को प्रकट कर सकते हैं और अग्निदेव को प्रसन्न कर सकते हैं

दोस्तों एक विशेष बात यह है कि यदि आप इस मंत्र का संकल्प लेते हैं, कि मैं इस मंत्र का प्रयोग करूंगा तो उसके लिए एक नियम का पालन करना अति आवश्यक है। आप संकल्प लेने के बाद इस साधना को बीच में नहीं छोड़ सकते यदि आप बीच में छोड़ने का निश्चय करते हैं तो यह आपके लिए हानिकारक हो सकता है 

अग्नि प्रकट करने का मंत्र

ॐ वं वहि तुभ्यं नम:

agni-prakat-karne-ka-mantra अग्नि प्रकट करने का मंत्र साधना विधि 

आपको कि इस मंत्र का जब आपको अमावस्या की रात में बजे के बाद प्रारंभ करना है और उसके लिए आप किसी पवित्र स्थान पर बैठ जाए और अग्नि देव की एक तस्वीर या उनकी एक प्रतिमा सामने रखकर 11 लाख बार का उच्चारण करें मंत्र उच्चारण करने के बाद आपको अपने अंदर कुछ ऊर्जा प्रतीत होने लगेगी और यदि आपने अपने पूजा स्थल पर क्या साधना स्थल पर दिया प्रज्वलित किया है। तो वह उसकी लो बढ़ जाएगी और धीरे धीरे यह मंत्र आप द्वारा सिद्ध कर लिया जाएगा। पर इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आप शुद्ध हो कर साधना करें।  अग्नि सभी प्रकार की अशुद्धि को जलाकर भस्म कर देती है। अतः आपके मन में भी पूर्ण रूप से विश्वास होना चाहिए कि भगवान अग्नि देव हम पर प्रसन्न होंगे। 

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Exploring the Gayatri Mantra: Revealing its Significance, Advantages, and Historical Context The Gayatri mantra, an ancient Sanskrit incantation resonating across four millennia, occupies a profound space not only in antiquated spiritual traditions but also within contemporary popular culture.

This sacred utterance, revered by yogis and introduced to mainstream awareness through the Battlestar Galactica series and Deva Premal’s enchanting kirtan melodies, extends beyond being mere phonetic sounds.

It encapsulates deep-seated wisdom and cosmic enlightenment, thereby transforming the journey of understanding into a path of devotion and illumination.

In the forthcoming discourse, we embark on a voyage into the depths of the Gayatri mantra, wherein we unravel its core essence, merits, and origins.

The Gayatri Mantra: An Insight

At its core, the Gayatri mantra stands as a composition in Sanskrit that traces its origins to the Vedic era (1500-500 BCE). Serving as one of humanity’s oldest and most potent mantras, it encompasses within its syllables a reservoir of universal knowledge.

Revealing the Essence

Comprising 24 syllables, the Gayatri mantra is structured as follows:

Om bhuh, bhuvah, swaha (Aumm Bhoor Bhoo-va Su-va-ha)
Tat savitur varenyam (Tat Sa-vee-toor Var-ayn-yam)
Bhargo devasya dhimahi (Bar-go Day-vas-ya Dhee-ma-hee)
Dhiyo yo nah prachodayat (Dhee-yo Yo Nah Pra-cho-da-yaat)

Unraveling the Significance

The interpretation of the Gayatri mantra leads us to its fundamental message:

“O Divine mother, may the radiance of your pure divine light grace all dimensions (physical, mental, and spiritual) of our existence. Banish any shadows from our hearts and bestow upon us the illumination of true wisdom.”

Vyaas Houston’s rendition offers accessibility: “Earth, atmosphere, heavens. We meditate on the sacred light of the radiant source. Let that kindle our thoughts.” In the realm of yoga, the term “effulgent” symbolizes the luminous magnificence permeating celestial dimensions.

A Passage through the Components

Breaking down the Gayatri mantra uncovers layers of profound meaning:

Om: The primordial sound
Bhur: The human form, earth, corporeal existence
Bhuvah: Vital energies, celestial realm, consciousness
Suvah: The soul, inner expanse, spiritual domain, bliss
Tat: That
Savitur: The Sun, solar energies
Varenyam: To select, the finest, revere
Bhargo: Radiance, self-illuminating, divine light
Devasya: The divine, radiant
Dhimahi Dhiyo: the intellect
Yo: Which
Nah: Our, of us
Prachodayat: Illuminate, inspire
Embodiment of Illumination and Wisdom

Throughout diverse cultures and epochs, the sun has emblemized spiritual enlightenment. “Savitur” alludes to Savitri, the Vedic sun deity. The Gayatri mantra personifies universal light through Gayatri Devi, the cosmic mother and the force behind the sun. Chanting this mantra establishes a connection to cosmic frequencies, aligning us with higher dimensions.

Tracing the Origins

The narrative of the Gayatri mantra carries a tale of anger, envy, desire, and absolution. It commences with King Vishwamitra and Sage Vashista. Through trials, Vishwamitra’s pursuit of spiritual ascension culminated in the unveiling of the mantra. This narrative underscores the notion that enlightenment is attainable by all who diligently practice, transcending barriers of ego.

Illuminating Benefits

Regular recitation of the Gayatri mantra accumulates spiritual brilliance, elevating not only individual vibrations but also those of the collective. Chanting resonates with our intrinsic nature, reinforcing our inherent flawlessness and connection to the cosmos. This practice begets serenity, elation, elegance, abundance, and serves as a shield against negativity. Daily chanting is believed to dissolve karmic imprints from past incarnations.

Chanting Technique and Visual Deliberation

Reciting the Gayatri mantra at dawn and dusk, focusing on each syllable and its resonance, can evoke a profound impact. Visualizing the sun’s radiance permeating your heart, emanating outward to bless the world, enriches the experience. Silent recitation amplifies its potency.

Guidance in Nine Stages

Follow these steps for a potent chanting experience:

Sit in a serene enclave.
Close your eyes and inhale deeply.
Center your awareness on your breath.
Chant the mantra audibly, in a hushed tone, and then silently.
Sustain focus with each repetition.
Internalize the chant for a deeper connection.
Continue for as long as desired.
Breathe deeply after chanting to sense the mantra’s effects.
Engage in daily repetition for an inflow of positive energy.
Enhancing Practice through Visual Media

Engaging with Gayatri mantra videos aids in mastering pronunciation and rhythm. Diverse interpretations are accessible, each resonating distinctively. Explore platforms like YouTube for versions that harmonize with your being.

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पुरुष विवाह मंत्र – पुत्र के विवाह के उपाय – शादी होगी शीघ्र विधि विधान आज के समय में कन्याओं के माता-पिता को ही नहीं, बल्कि पढ़े-लिखे, नौकरी करने वाले युवकों के माता-पिता को भी अपने पुत्रों के विवाह के मामले में परेशान होना पड़ रहा है।

बहुत से युवकों का बड़े प्रयास के उपरांत लम्बे समय तक विवाह सम्पन्न नहीं हो पाता। पढ़े-लिखे और अच्छी नौकरी अथवा व्यवसाय होने के उपरान्त भी ऐसे युवकों को 35-40 वर्ष तक भी कुंवारेपन का सामना करना पड़ता है।

युवकों के वैवाहिक विलम्ब के पीछे भी लगभग वैसे ही कारण जिम्मेदार देखे जाते हैं, जैसे कि कन्याओं के मामले में पाये जाते हैं लेकिन इनके मामले में भी यह देखा गया है कि कुछ विशिष्ट तांत्रोक्त उपायों के प्रयोगों से विवाह बाधा की समस्या दूर हो जाती है तथा शीघ्र ही घर में मांगलिक कार्य सम्पन्न होने की आशा बन जाती है ।

पुरुष विवाह मंत्र – पुत्र के विवाह के उपाय – शादी होगी शीघ्र विधि विधान 

विवाह बाधा निवारक एक ऐसा ही तांत्रोक्त प्रयोग निम्न प्रकार है- इस तांत्रोक्त अनुष्ठान को किसी भी कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि के दिन से शुरू किया जा सकता है । यह अनुष्ठान भी कुल 41 दिन का है।

अनुष्ठान के सम्पन्न होते-होते लड़के के रिश्ते के बारे में रुकी हुई बात फिर से होने लग जाती है। अगर इस अनुष्ठान को किसी देवी मंदिर में बैठकर अथवा शिवालय में बैठकर सम्पन्न किया जा सके, तो इसका परिणाम शीघ्र ही मिलता है ।

इस अनुष्ठान को घर पर भी सम्पन्न किया जा सकता है । इस अनुष्ठान की सबसे मुख्य बात यह है कि मंदिर जाकर देवी प्रतिमा अथवा शिव-पार्वती को अष्टगंध युक्त टीका लगाकर उनका अक्षत, पुष्पमाला, धूप, दीप, कपूर से पूजन करें। सामर्थ्य हो तो देवी प्रतिमा को वस्त्र अर्पित करें अन्यथा उन पर चुनरी चढ़ायें |

गुड़ का नैवेद्य लगाकर किसी गाय को खिला दें। घर पर अनुष्ठान को सम्पन्न करते समय अपने पूजास्थल पर घट की स्थापना घट पर श्रीफल की स्थापना करें । श्रीफल को चुनरी चढ़ायें तथा उसके सामने घी का दीपक जलाकर मन ही मन माँ के सामने प्रार्थना करें तथा शीघ्र गृहस्थ का सुख प्रदान कराने का अनुरोध करें।

पुरुष विवाह मंत्र – पुत्र के विवाह के उपाय – शादी होगी शीघ्र

तत्पश्चात निम्न मंत्र की तीन मालाएं अथवा एक माला जाप करें :-

स देवि नित्यं परितप्यमान, स्त्वामेव सीतेल्यभिभाषमाणः । दृढ़ व्रतो राज सुतो महात्मा, तवैव लाभाय कृत प्रयत्नः ॥

मंत्र– यह वाल्मीक रामायण का मंत्र है जो अत्यन्त अद्भुत और प्रभावशाली है।

 

मंत्रजाप के दौरान अखण्ड घी का दीपक जलते रहना चाहिये । मंत्रजाप स्वयं अपने मस्तक पर अष्टगंध का लेप लगाकर करना चाहिये । श्रीफल को भी प्रतिदिन अष्टगंध का लेप करना चाहिये। यह तांत्रिक अनुष्ठान 41वें दिन पूर्ण हो जाता है ।

अत: उस दिन मंत्रजाप सम्पन्न होने के पश्चात् सम्पूर्ण पूजा समाग्री को किसी नदी में प्रवाहित कर देना चाहिये अथवा भूमि में गड्ढा खोद कर दबा देना चाहिये । अनुष्ठान उपरांत स्वयं अपने मस्तक पर अष्टगंध का टीका लगाकर रखना चाहिये ।

इसके प्रयोग से साधक में सम्मोहन शक्ति विकसित होती है तथा किसी अज्ञात शक्ति की प्रेरणा से प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह पुरुष हो या स्त्री, कारोबारी या व्यवसायी हो अथवा अपरिचित ग्राहक, साधक से मेल-जोल बढ़ाने का प्रयास करने लगता है ।

इस अनुष्ठान से शीघ्र ही विवाह कार्य सम्पन्न हो जाता है, साथ ही यह अनुष्ठान संतान प्राप्ति हेतु भी चमत्कारिक सिद्ध होता है ।

इस अनुष्ठान के दौरान एक विशेष बात का भी ध्यान रखना चाहिये कि घट स्थापना के बाद साधक के अतिरिक्त किसी अन्य व्यक्ति को न तो उसका स्पर्श करना चाहिये और न ही उसे अपने स्थान से हटाना चाहिये । उसका विस्थापन अनुष्ठान समाप्ति के पश्चात् ही होना चाहिये । घट पर रजस्वला स्त्री की छाया भी नहीं पड़े, इसका विशेष ध्यान रखना चाहिये।

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बंगाल का मोहिनी मंत्र-सबसे सरल और खतरनाक मोहिनी मंत्र जय श्री महाकाल दोस्तों स्वागत है आपका वेबसाइट में स्वागत है।  आशा आप सभी सही होंगे स्वस्थ होंगे बंगाल का मोहिनी मंत्र देने जा रहे हैं, दोस्तों बहुत ही दुर्लभ मंत्र है। यह आज तक वेबसाइट पर किसी भी चैनल पर यह मंत्र नहीं बताया होगा न ही मिलेगा आज के बाद दोस्तों अगर किसी कॉपी करके डाल दिया जाए तो कह नहीं सकते। 

आज की तारीख से पहले किसी भी वेबसाइट पर यह मंत्र नहीं मिलेगा बहुत ही दोस्तों अचूक भाव है मंत्र प्रभाव करता है। सामने वाले के ऊपर हे माता बंगालन का मंत्र है कोई भी स्त्री या पुरुष प्रेमी प्रेमिका पति पत्नी से इस्तमाल कर सकता है। लेकिन किसी भी गलत प्रयोजन से बिल्कुल भी ना करें दोस्तों कोई भी लड़की हो या लड़का हो जिसके ऊपर यह प्रयोग किया गया.

मंत्रो में जैसे जैसे शब्द इस्तेमाल किए गए हैं शाबर मंत्र है। दोस्तों आपके पास या फिर जब तक आपको देखे ना उसको चैन नहीं मिलेगा। आपके पास आया ना मिले ना वह व्यक्ति दोस्तों बीमार होने लग जाएगा जब तक मिलेगा नहीं  फिर आपकी आवाज ना सुन ले उसे चैन नहीं मिलेगा ,चाहे वह कहीं पर भी क्यों ना हो कितनी ही दूरी क्यों ना हो आपस में कैसा ही मतभेद क्यों नहीं सब खत्म हो जाएगा। इस मंत्र का प्रभाव दोस्तों इस तरह से काम करता है बोल रहे हैं जब आप मंत्र पढ़ेंगे आप खुद देख सकते हैं शब्दों को मंत्र में देख सकते है। 

बंगाल का मोहिनी मंत्र

ॐ नमो आदेश नाथ जी को आदेश ढाके बंगाल
की मोहिनी चलाऊ अमुकी को अपने वश में
कराउ बंगालन चले मोहिनी संग अमुक का तोड़े
अंग अंग मोहे न देखे मोहे न सुने हो जावे तंग जब
तक मुझसे न मिले मचल मचल जाए चलो
बंगालन मोहिनी संग मोहे तोरी आस अमुकी लावो
अमुक के पास दुहाई नवनाथ की ढाके बंगाल की
आदेश आदेश आदेश

बंगाल का मोहिनी मंत्र साधना विधि 

बंगाल का मोहिनी मंत्र साधना बहुत आसान और सरल विधि है दोस्तों इसकी अपने करना क्या है। दोस्तों किसी भी शनिवार से या फिर अमावस्या पूर्णिमा इन 3 दिनों में किसी भी दिन से आप शुरू कर सकते हैं।  इस प्रयोग को जैसा कि आपको बताया बगालन का मंत्र है बंगालन मंत्र उठाकर बंगाल वाली कालका। उसे देवी का मंत्र माता रानी का आदिशक्ति का दोस्तों आपका मुंह उत्तर पूर्व दक्षिण तीनों में से किसी भी एक दिशा में रख सकते हैं करना क्या है। 

सबसे पहले काला कपड़ा बिछाए उसके ऊपर माता रानी का चित्र स्थापित करें नागौर और उसकी माता रानी को चुनरी नारियल की भेंट चढ़ाए उसके बाद दोस्तों माता रानी को तिलक करें और एक लाल फूल की गुलाब की माला ले सकते हैं।  माल माता रानी को छोड़ा है नॉर्मल गुलाब के फूल चावल चढ़ाए  कुमकुम हल्दी से माता रानी को चढ़कर पूजा करें। माता रानी का कुमकुम से तिलक करें। अपने आप को तिलक करें कोई भी आसान ले सकते हैं। 

दोस्तों हर किसी को अलग अलग समय होता है। लेकिन जितने भी रात्रि के प्रयोग होते हैं उनकी ऊर्जा बहुत ही तेज और भयंकर होती है।  और जिस समय रात से 12:00 बज रहे हैं। 11:00 बजे 12:00 बजे उस टाइम लेटा होगा आदमी जिसके ऊपर हमने यह प्रयोग करना है। अगर वह सो रहा है दोस्तों उसके ऊपर और भी दुगनी तेजी से जो भी ऊर्जा होगी मंत्र की प्रभाव करती है। रात्रि को 10 से 12 बजे के बीच में स्त्रियों को करें या फिर सुबह सुबह 4:00 से 6:00 बजे करो

सबसे पहले दोस्तों गुरु मंत्र और गणेश मंत्र यह हर पोस्ट में कहा जाता है। और गुरु धारण करना बहुत जरूरी दोस्तों जीवन में गुरु मंत्र के बाद दोस्तों गणेश मंत्र उसके बाद भोलेनाथ का ओम नमः शिवाय का एक माला का मंत्र जाप करें मूल मंत्र दिया गया। 

दोस्तों इसका 51 बार जाप करना है अपने सिर्फ 51 बार  मोहिनी मंत्र जाप करने के लिए बोला लेकिन लोग कमेंट आया व्हाट्सएप पर पोस्ट के नीचे भी गुरुजी क्या हम ज्यादा मंत्र जाप नहीं कर सकते हैं

तो देखिए भोजन सिर्फ इंसान को उतना करना चाहिए जो हजम हो सके मंत्रो में ऊर्जा होती तरंगे होती है।  हर किसी को अपना अपना प्रभाव होता है तेजी से और कम गति से चलने का और इतना बताया गया। दोस्तों उतना ही करें फेर बदल ना करें उसमें मूल मंत्र का जाप करना है जो कि आपको पोस्ट में लिखित रूप में भी मिलेगा।

इस मंत्र का दोस्तों अपने जाप करना है जब जाप हो जाए अगर लड़की करें जैसा यह हमने मंत्र बोलकर बताया है। सेम यह लड़कों के लिए मंत्र अगर किसी लड़की या कोई पति कर रहा है। अमुकी की जगह पर उसका नाम ले फिर अपना और अगर कोई लड़की है कर रही है।

तो पहले अपने बॉयफ्रेंड का या औरत कर रही है तो पहले अपने पति का नाम उसके बाद अपना इस तरीके से इसको इस्तेमाल करना है। याद रखेगा दोस्तों जब आपका यह मंत्र कंप्लीट हो जाए एक गाय का गोबर के उपले पर बाद में उसका देसी घी डाले कर दो लौंग और दो छोटी इलायची मंत्र के अंत में स्वाहा बोलते हुए हवन करें। 

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बीवी को मायके से बुलाने का ताबीज – चमत्कारी मंत्र के साथ ph.85280 57364

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बीवी को मायके से बुलाने का ताबीज – चमत्कारी मंत्र के साथ ph.85280 57364

बीवी को मायके से बुलाने का ताबीज – चमत्कारी मंत्र के साथ और  इस मंत्र साधना से आप अपनी रूठ कर गई  बीवी को बुला सकते है कुछ दिनों में ही बीवी वापस आएगी अगर आप यह प्रयोग कर लेते हो। 

बीवी को मायके से बुलाने का ताबीज - चमत्कारी मंत्र के साथ ph.85280 57364
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बीवी को मायके से बुलाने का ताबीज – चमत्कारी मंत्र के साथ

ॐ नमो भोगराज भयंकर सो दिखै पाव परंता ॐ ससुराल वापसी मन्त्र परिभूय उत उधरई जोई जोई देखे मारकर तासो नमो ठः ठः ठः स्वाहा । 

यदि किसी व्यक्ति की पत्नी ससुराल से रूठकर मायके चली गयी हो। बार-बार मनाने या आग्रह के बावजूद भी जिद पर अड़ी हो कि हम किसी कीमत पर ससुराल नहीं जायेंगे, तब उसके पति को उपरोक्त मन्त्र का जप प्रारम्भ करना चाहिए। और इस मंत्र  को लिख  कर ताबीज बना कर बाजू में बांधना है। 

इस मन्त्र का २१ बार जप करना चाहिए। ४१ दिन के पश्चात् मन्त्र सिद्ध हो जाता है। उसके बाद सांभर (नमक) को १०८ बार इस मन्त्र से अभिमन्त्रित करके उस नमक को किसी बहाने अथवा किसी वस्तु में मिलाकर अपनी पत्नी को खिलवा देना चाहिए। नमक खाते ही वह स्त्री ससुराल वापस आ जायेगी और फिर कभी रूठकर नहीं जायेगी।

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सौतन से छुटकारा पाने का मंत्र – पति को पराई स्त्री से दूर करें ph. 85280-57364

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sautan se chutkara pane ka mantra सौतन से छुटकारा पाने का मंत्र - पति को पराई स्त्री से दूर करें ph. 85280-57364

sautan se chutkara pane ka mantra सौतन से छुटकारा पाने का मंत्र – पति को पराई स्त्री से दूर करें ph. 85280-57364

 

sautan se chutkara pane ka mantra सौतन से छुटकारा पाने का मंत्र - पति को पराई स्त्री से दूर करें ph. 85280-57364
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sautan se chutkara pane ka mantra सौतन से छुटकारा पाने का मंत्र – पति को पराई स्त्री से दूर करें  यह प्रयोग तब किया जाता है जब पति किसी अन्य स्त्री के जाल में फंस गया हो और पत्नी की तरफ ध्यान नहीं दे रहा है तब उस पराई स्त्री के जाल से पति को मुक्त कर अपने प्रति प्रेम बढ़ाने के लिए यह प्रयोग किया जाता है। इस प्रयोग से पति और उसमें भयंकर लड़ाई हो जाती है और वे भविष्य में एक-दूसरे का मुँह भी देखना पसन्द नहीं करते।

sautan se chutkara pane ka mantra सौतन से छुटकारा पाने का मंत्र

ॐ अंजनी पुत्र पवनसुत हनुमान वीर वैताल साथ लावे मेरी सौत (अमुक) से पति को छुड़ावे, उच्चाटन करे करावे मुझे वेग पति मिले, मेरा कारज सिद्ध न करे तो राजा राम की दुहाई |

सामग्री – जलपात्र, सियारसिंगी, दो हकीक पत्थर, तेल कादीपक माला- हकीक माला । समय — दिन या रात का कोई भी समय आसन । दिशा — पश्चिम दिशा जपसंख्या— पाँच हजार आसन – नीले रंग का सूती अवधि — जो भी संभव हो।

sautan se chutkara pane ka mantra vidhi सौतन से छुटकारा पाने का मंत्र विधि 

सामने सियारसिंगी रख दें और उसके सामने ही हकीक पत्थर रख दें। एक पत्थर पर पति का नाम लिखें और दूसरे पत्थर पर उस स्त्री का नाम लिख दें। फिर उपर्युक्त मन्त्र का मात्र पाँच हजार जप के बाद जिस हकीक पत्थर पर स्त्री का नाम लिखा है, वह पत्थर सुनसान स्थान पर जमीन में गाड़ दें और जिस पत्थर पर पति का नाम लिखा है, वह पत्थर सियारसिंगी के साथ अपने सन्दूक में रख दें। इस प्रकार करने से सौत से छुटकारा मिल जाता है, पति का उस स्त्री से भयंकर झगड़ा होता है और भविष्य में उनमें किसी प्रकार का कोई सम्बन्ध नहीं रहता।

 

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भूत कैद करने का सिद्ध मंत्र इस से भूत होगा आपकी मुठी में ph. 85280-57364

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भूत कैद करने का सिद्ध मंत्र इस से भूत होगा आपकी मुठी में bhoot ko kaid karne ka mantra

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bhoot ko kaid karne ka mantra भूत कैद करने का सिद्ध मंत्र इस से भूत होगा आपकी मुठी में और आपके सब काम करेगा यह सिद्ध मंत्र है

bhoot ko kaid karne ka mantra भूत कैद करने का सिद्ध मंत्र

बंध बंध शिव बंध शिव बंध शिव बंध शिव बंध शिव बंध शिव बंध शिव बंध शिव बंध शिव ।

शिवलिंग, तांबे या पीतल की परात, बेलपत्र, धतूरे का फल, अकवन (आक) का फूल, अड़हुल का फूल, कनेर का फूल, भांग की पत्तियाँ (सूखी या हरी), दूध एक लीटर, आसन रंग का कम्बल, उड़द और शुद्ध जल संकलित करें। किसी एकांत कमरे में दक्षिण की ओर मुंह करके आसन विछाकर बैठ जाएं। सामने परात रखकर शिवलिंग स्थापित करें और मन्त्र का जप करते हुए उस पर उड़द, फूल एवं पत्तियाँ एक-एक करके चढ़ाएं। १२१ बार मन्त्र का जप करें। तत्पश्चात् शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। इसके बाद मन्त्रजप करके दूध चढ़ाएं। परात की सामग्री को जल एवं दूध के साथ उबालें। जब इसकी चाशनी खीर की तरह बन जाए, तो उसे किसी पीपल के पेड़ के नीचे जड़ में डाल दें। यह क्रिया २१ दिनों तक करे ।

 

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बंगाली मारण प्रयोग -सबसे तीव्र मारण प्रयोग और प्रभावशाली ph 85280 57364

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बंगाली मारण प्रयोग -सबसे तीव्र मारण प्रयोग और प्रभावशाली ph 85280 57364
बंगाली मारण प्रयोग -सबसे तीव्र मारण प्रयोग और प्रभावशाली ph 85280 57364

बंगाली मारण प्रयोग -सबसे तीव्र मारण प्रयोग और प्रभावशाली ph 85280 57364 जय महाकाल मेरे प्रिय साधक और मित्रों कैसे हैं आप सब लोग उम्मीद करता हूं आप सब ठीक ही होंगे कि आज मैं आप लोगों के सामने लुट बंगाल का है या बांग्लादेश का भी आप बोल सकते हो सबसे खतरनाक मंत्र है  और इस मंत्र का नाम अगर आप वेस्ट बंगाल में या  बांग्लादेश में अगर नाम लोगे कुछ तो लोग थर-थर कांपने लगते हैं या फिर कि यहां पर भी अगर आपको जानकर लोगों के सामने इस बांध मंत्र का अगर नाम लोगे है तो सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है कि यह वह मंत्र है सबसे खतरनाक मंत्र उसे बोलते हैं

बान मंत्र बंगाल में बोलते बाल मारना समझे आप बांध मारना है कि यह इतना खतरनाक मंत्र है बांध मारना अगर आप कि अपने दुश्मन को और बाद एक प्रकार के लिए मित्रों जिस तरह आप रामायण में या कथा मैं लेकर होंगे हर तरह के अलग-अलग बांध निकाल कर मर तीर निकाल के मारते हैं ना अलग-अलग तरह के तीर निकालते मारते हुए

इसे ही अलग-अलग तरह के बाद मस्त रहें परीक्षाओं से ज्यादा बांध मंत्र है यह भी उसी में का एक बाद मंत्र है बंगाली मंत्र है और मैं इसको मंत्र को कि अगर आप पढ़ते हुए आगे वाले व्यक्ति को ऐसे देखते हुए अगर इस मंत्र को पढेंगे तो आगे वाले की छाती में तीर जाकर लगेगा वह दृश्य ₹3 मंत्रों का उस तीर जाकर लगेगा और जगह पर छाती पकड़ कर नीचे गिर जाएगा और उसके मुंह से खून निकलना चालू हो जाएगा कि यह इतना खतरनाक मंत्र है

केवल तीन बार पढ़ना है कितने बजे सिर्फ तीन बार यह स्वयं-सिद्ध मंत्र इस को जागरूक करने की जरूरत ने स्वयं सिद्ध मंत्र है सिर्फ तीन बार पढ़ना है और आगे वाले व्यक्ति को देखना है तीर उसके जाकर सीने में लगेगा और वह खून की उल्टी करके जगह पर मर जाएगा लेकिन मित्रों मैं यह जितना खतरनाक मंत्र है

इस मंत्र की उग्रता को देखते हुए हमने केवल इसका मंत्र ही आप लोगों के सामने साझा किया है कि इस क्रिया को करते समय हाथ में एक वस्तु पकड़नी होती है कि आपके जो सीधे हाथ से दाएं हाथ में एक वस्तु को पकड़े रहना होता है मुट्ठी में और उस दुश्मन को देखते हुए मंत्र पढ़ना होता है और वह क्या चीज है मैं आपको नहीं बता सकता क्योंकि यह इतना खतरनाक मंत्र है अगर यह गलत इंसान के हाथ लग गया है तो बहुत नुकसान हो सकता है और थोड़ी सी थोड़ी सी बात पर कोई भी व्यक्ति किसी के ऊपर बान उठाकर मार सकता है

तो इसलिए मैं यह बाल मंत्र केवल आपके सामने साझा कर रहा हूं और एक बात आपको बता दूं आप कितना भी कमेंट बॉक्स में कमेंट करेंगे या फ़ोन करके पता करने की कोशिश करेंगे तो भी आपको वह चीज क्या है जिसे हाथ में पकड़कर मंत्र पढ़ा जाता है वह हम नहीं बताएंगे क्योंकि इससे कि आम जो लोग हैं उन लोगों को बहुत ज्यादा नुकसान हो सकता है

बेगुनाह मासूम लोगों की इसमें बहुत से लोगों की जान की नुकसान हो सके मित्रों छोटी सी छोटी सी बातों में इंसान बांध चला देगा थोड़ा सा गुस्सा आया बांध चला देगा लेकिन एक व्यक्ति के पीछे उसका पूरा परिवार होता है इस बात की सोच रखनी चाहिए इस बात के बारे में सोचना चाहिए है तो अगली बार फिर एक बंगाली मंत्र के साथ आपके सामने उपस्थित होऊंगा तब तक के लिए जय महाकाल 

इम्नामीन। सलास मातिन ।

इस मन्त्र का एक हजार जप प्रतिदिन करें और ४० दिन तक निरन्तर करें। इसके बाद कुम्हार के चाक की मिट्टी या शत्रु के पांव तले की मिट्टी ले आएं। इस मिट्टी में थोड़ा-सा रंग मिला करके शत्रु के त्वचा वाला रंग बना लें और फिर मिट्टी की एक प्रतिमा बना लें। श्मशान से हड्डियाँ प्राप्त करके छोटी-सी एक माला बना लें। इस माला पर एक बार मन्त्र का जप करके प्रतिमा के सिर पर एक जूता मारें । इसके बाद फिर जप करें और फिर एक जूता मारें। यह क्रिया करते रहें। इससे शत्रु के सिर पर चोट लगेगी। यदि यह प्रयोग ४० दिन तक निरन्तर किया गया तो शत्रु का सिर फूटकर उसकी बोलो राम हो जाएगी।

 

kala Jadu tona ke lakshan काला जादू टोना का लक्षण ph.8528057364

Kachha Kalua – कच्चा कलुआ साधना – सम्पूर्ण रहस्य के साथ ph.8528057364kala Jadu tona ke lakshan काला जादू टोना का लक्षण