Category: स्वास्थ्य

दुकान पर किसी ने कुछ किया है कैसे पता करें (Dukan par kisi ne kuch kiya hai kaise pata kare)

दुकान पर किसी ने कुछ किया है कैसे पता करें (Dukan par kisi ne kuch kiya hai kaise pata kare)

दुकान पर किसी ने कुछ किया है कैसे पता करें (Dukan par kisi ne kuch kiya hai kaise pata kare)

दुकान पर किसी ने कुछ किया है कैसे पता करें (Dukan par kisi ne kuch kiya hai kaise pata kare)
दुकान पर किसी ने कुछ किया है कैसे पता करें (Dukan par kisi ne kuch kiya hai kaise pata kare)

अरे यार, क्या आपका भी चलता हुआ बिज़नेस एकदम से रुक गया है? मतलब, सब कुछ फर्स्ट-क्लास चल रहा था और अचानक से आपको ऐसा फील हो रहा है जैसे दुकान पर किसी की नज़र लग गई हो या किसी ने कुछ कर दिया हो? भाई देख, ये एक ऐसी प्रॉब्लम है जो बहुत से दुकानदारों को फेस करनी पड़ती है। कभी-कभी हमें समझ ही नहीं आता कि इतनी मेहनत करने के बाद भी रिजल्ट क्यों नेगेटिव आ रहा है। तो चलो, आज इसी टॉपिक पर डिटेल में बात करते हैं। हम ये जानने की कोशिश करेंगे कि अगर दुकान पर किसी ने कुछ किया है तो कैसे पता करें। क्या कहते हो?

 दुकान में कुछ गड़बड़ होने के संकेत: यह कैसे जानें कि दुकान पर किसी ने कुछ किया है (Dukan me kuch gadbad hone ke sanket: Yah kaise janein ki dukan par kisi ne kuch kiya hai)

देखो भाई, जब दुकान पर कोई नेगेटिव एनर्जी या किसी की बुरी नज़र का असर होता है, तो कुछ चीजें बदलने लगती हैं। यूँ कहें तो, माहौल में एक अजीब सा भारीपन आ जाता है। अगर आप इन छोटे-छोटे बदलावों पर ध्यान दो, तो आपको आसानी से पता चल सकता है। ज़रा सोचो, क्या आपके साथ भी ऐसा हो रहा है?

अचानक से ग्राहकों का आना कम हो जाना और दुकान पर किसी ने कुछ किया है इसका पता कैसे करें (Achanak se grahako ka aana kam ho jana aur dukan par kisi ne kuch kiya hai iska pata kaise karein)

भाईसाहब, सबसे पहला और सबसे बड़ा साइन यही होता है। आपका काम बढ़िया चल रहा था, कस्टमर आ रहे थे, सेल भी अच्छी हो रही थी, लेकिन फिर अचानक, बिना किसी कारण के, ग्राहकों ने आना ही बंद कर दिया। मतलब, मार्केट में कोई बड़ा बदलाव भी नहीं हुआ, आपने अपनी सर्विस या प्रोडक्ट की क्वालिटी भी कम नहीं की, फिर भी दुकान खाली रहने लगी। ग्राहक दुकान के दरवाज़े तक आते हैं और बिना कुछ खरीदे वापस चले जाते हैं। अगर ऐसा हो रहा है, तो भाई मान लो न, कुछ तो गड़बड़ है। यह एक बहुत बड़ा संकेत हो सकता है कि आपकी दुकान पर किसी की बुरी नज़र लगी है। समझे?

 दुकान में घुसते ही भारीपन और टेंशन फील होना और अगर दुकान पर किसी ने कुछ किया है तो इसका पता कैसे करें (Dukan me ghuste hi bharipan aur tension feel hona aur agar dukan par kisi ne kuch kiya hai to iska pata kaise karein)

अरे दोस्त, एक और बात पर ध्यान दीजिए। क्या आपको अपनी ही दुकान में घुसते हुए एक अजीब सी बेचैनी होती है? मतलब, जैसे ही आप शटर उठाते हो, एक नेगेटिव वाइब, एक भारीपन सा महसूस होता है? आपका वहां बैठने का मन नहीं करता, हर समय एक अनजानी सी टेंशन बनी रहती है। स्टाफ के बीच छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई-झगड़े होने लगते हैं। घर पर सब ठीक रहता है, लेकिन दुकान में आते ही मूड खराब हो जाता है। सच बताऊँ, अगर आपको ऐसा फील हो रहा है, तो इसे इग्नोर मत करो। यह भी एक बड़ा इशारा हो सकता है। मानते हो न?

दुकान में बार-बार लड़ाई-झगड़े होना: एक संकेत कि दुकान पर किसी ने कुछ किया है और इसका पता कैसे करें (Dukan me baar-baar ladai-jhagde hona: Ek sanket ki dukan par kisi ne kuch kiya hai aur iska pata kaise karein)

जरा सोच के देखो, पहले आपके और आपके स्टाफ के बीच सब कुछ कितना अच्छा था। सब मिलकर काम करते थे। लेकिन अब? अब तो छोटी-छोटी बात पर बहस हो जाती है। ग्राहकों के साथ भी बिना वजह कहासुनी हो रही है।

दुकान का माहौल इतना टॉक्सिक हो गया है कि कोई भी शांति से काम नहीं कर पा रहा। भाई, ये जो माहौल में अचानक से नेगेटिविटी आई है, ये भी एक साइन है कि आपकी दुकान की पॉजिटिव एनर्जी को किसी ने डिस्टर्ब किया है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप  के बारे में पढ़ सकते हैं। सही है न?

बार-बार पैसों का नुकसान होना: यह जानना कि दुकान पर किसी ने कुछ किया है और पता कैसे करें (Baar-baar paiso ka nuksan hona: Yah janna ki dukan par kisi ne kuch kiya hai aur pata kaise karein)

ओहो जी, एक और बड़ी प्रॉब्लम। आपकी दुकान में रखा हुआ सामान बार-बार खराब हो रहा है। कभी कोई मशीन खराब हो जाती है, तो कभी कोई सामान टूट-फूट जाता है। गल्ले में रखे पैसे चोरी हो जाते हैं या हिसाब में गड़बड़ होने लगती है। मतलब, कहीं न कहीं से पैसों का नुकसान लगातार हो रहा है। अगर ऐसा बार-बार हो रहा है, तो यह सिर्फ एक इत्तेफाक नहीं हो सकता। आपको इस पर ध्यान देना पड़ेगा। क्या कहते हो?

दुकान के बाहर अजीब चीजें मिलना और दुकान पर किसी ने कुछ किया है इसका पता कैसे करें (Dukan ke bahar ajeeb cheezein milna aur dukan par kisi ne kuch kiya hai iska pata kaise karein)

अरे भाई, ये तो सबसे डायरेक्ट साइन है। अगर आपको अपनी दुकान के दरवाज़े के पास या शटर के कोने में कोई अजीब चीज़ मिले, जैसे सिंदूर, हल्दी, कोयला, कीलें, या कटा हुआ नींबू, तो समझ जाओ कि किसी ने जानबूझकर कुछ किया है। ये चीजें अक्सर तंत्र-मंत्र या टोने-टोटके में इस्तेमाल होती हैं। ऐसी चीज़ों को कभी भी हाथ से नहीं उठाना चाहिए। यह एक बहुत ही सीरियस मामला हो सकता है। नींबू के बारे में और जानने के लिए आप  का विकिपीडिया पेज देख सकते हैं। समझ गए न?

 हेल्थ प्रॉब्लम्स का बढ़ जाना और अगर दुकान पर किसी ने कुछ किया है तो पता कैसे करें (Health problems ka badh jana aur agar dukan par kisi ne kuch kiya hai to pata kaise karein)

तुम देखो, जबसे दुकान में प्रॉब्लम शुरू हुई है, क्या आपकी या आपके स्टाफ की हेल्थ भी खराब रहने लगी है? हर समय थकान, सिरदर्द, या कोई न कोई छोटी-मोटी बीमारी लगी रहती है। डॉक्टर को दिखाने पर भी कोई खास वजह समझ नहीं आती। भाई, नेगेटिव एनर्जी का असर सिर्फ बिज़नेस पर ही नहीं, बल्कि हमारी हेल्थ पर भी पड़ता है। अगर ऐसा है, तो आपको सच में सोचने की ज़रूरत है।

अब क्या करें? अगर दुकान पर किसी ने कुछ किया है तो कैसे पता करें और उसका उपाय (Ab kya karein? Agar dukan par kisi ne kuch kiya hai to kaise pata karein aur uska upaye)

अच्छा भई, अब जब हमने लक्षणों की बात कर ली, तो सवाल उठता है कि इसका सोल्यूशन क्या है? देखो ना, घबराने से तो कुछ होगा नहीं। हमें इसका हल निकालना पड़ेगा। कुछ आसान से उपाय हैं जिन्हें आप ट्राई कर सकते हैं।

1. साफ-सफाई का ध्यान रखें: भाई, सबसे पहले तो अपनी दुकान की रोज़ अच्छे से साफ-सफाई करो। गंगाजल का छिड़काव करो। माना जाता है कि जहां सफाई होती है, वहां पॉजिटिव एनर्जी खुद-ब-खुद आती है।

2. धूप-अगरबत्ती जलाएं: रोज़ सुबह-शाम दुकान में गूगल, लोबान या कपूर की धूप जलाएं। इसकी खुशबू से नेगेटिव एनर्जी दूर भागती है और माहौल पॉजिटिव बनता है।

3. नमक का पोछा: हफ्ते में एक बार पानी में समुद्री नमक मिलाकर दुकान में पोछा ज़रूर लगाएं। अरे मानते हो, नमक नेगेटिविटी को सोखने में बहुत पावरफुल माना जाता है।

4. हनुमान चालीसा का पाठ: अगर हो सके, तो रोज़ सुबह दुकान में हनुमान चालीसा का पाठ करें या उसे अपने फोन पर चला दें। प्रभु की कृपा से सब ठीक हो जाएगा। तेरा ही सहारा है प्रभु\!

5. नींबू-मिर्च लटकाएं: यह एक बहुत पुराना और असरदार उपाय है। शनिवार के दिन एक नींबू और सात हरी मिर्च को एक धागे में पिरोकर दुकान के बाहर लटका दें। इसे हर शनिवार बदलते रहें।

6. वास्तु का ध्यान दें: कभी-कभी दुकान का वास्तु ठीक न होने से भी ऐसी प्रॉब्लम्स आती हैं। किसी अच्छे वास्तु शास्त्र के जानकार से सलाह ले सकते हैं।

तो भाई, अगर आपको भी लग रहा है कि आपकी दुकान पर किसी ने कुछ किया है, तो इन बातों पर ध्यान दीजिए और ये छोटे-छोटे उपाय करके देखिए। मन में विश्वास और पॉजिटिविटी बनाए रखना सबसे ज़रूरी है। भगवान ने चाहा तो आपका बिज़नेस फिर से पहले जैसा दौड़ने लगेगा। ठीक है न? बताओ ज़रा, क्या ख्याल है?

बगलामुखी मंत्र के नुकसान से बचने के लिए इन नियमो को फॉलो करो (Baglamukhi Mantra Ke Nuksan Se Bachne Ke Liye In Niyamo Ko Follow Karo)

बगलामुखी मंत्र के नुकसान से बचने के लिए इन नियमो को फॉलो करो (Baglamukhi Mantra Ke Nuksan Se Bachne Ke Liye In Niyamo Ko Follow Karo)

 

बगलामुखी मंत्र के नुकसान से बचने के लिए इन नियमो को फॉलो करो (Baglamukhi Mantra Ke Nuksan Se Bachne Ke Liye In Niyamo Ko Follow Karo)

बगलामुखी मंत्र के नुकसान से बचने के लिए इन नियमो को फॉलो करो (Baglamukhi Mantra Ke Nuksan Se Bachne Ke Liye In Niyamo Ko Follow Karo)
बगलामुखी मंत्र के नुकसान से बचने के लिए इन नियमो को फॉलो करो (Baglamukhi Mantra Ke Nuksan Se Bachne Ke Liye In Niyamo Ko Follow Karo)

अरे यार, सुनो! जब भी हम माँ बगलामुखी की बात करते हैं, तो हमारे मन में एक बहुत ही पॉवरफुल शक्ति का ख्याल आता है। भाईसाहब, माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या हैं और उनकी साधना बहुत ही असरदार मानी जाती है। लोग इन्हें स्तंभन की देवी कहते हैं, मतलब वो किसी भी चीज़ को, किसी भी बुरी शक्ति को रोक सकती हैं, शांत कर सकती हैं। लेकिन देखो, जितनी ज़्यादा पॉवर होती है, उतनी ही ज़्यादा ज़िम्मेदारी भी होती है, है ना?

अगर इस मंत्र का जाप सही तरीके से, पूरे नियम और अनुशासन के साथ न किया जाए, तो इसके कुछ नुकसान भी फील हो सकते हैं। तो भाई, आज हम इसी बारे में बात करेंगे कि बगलामुखी मंत्र के नुकसान से बचने के लिए हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। चलो, शुरू करते हैं, क्या कहते हो?

 

क्यों है बगलामुखी मंत्र साधना में सावधानी जरूरी? (Kyon Hai Baglamukhi Mantra Sadhana Mein Savdhani Jaruri?)

 

देखो भाई, बगलामुखी मंत्र कोई साधारण मंत्र नहीं है। यह एक तांत्रिक मंत्र है। जब कोई साधक इसका जाप करता है, तो बहुत ज़्यादा एनर्जी पैदा होती है। जरा सोचो, अगर इतनी एनर्जी को संभालने का सही मेथड हमें पता न हो, तो क्या होगा? यह एनर्जी हमें फायदा पहुँचाने की जगह, हमारा ही नुकसान कर सकती है। इसीलिए गुरु और शास्त्र, दोनों ही इस साधना में बहुत सावधानी बरतने को कहते हैं। अगर ज़रा सी भी चूक हुई, तो मामला गड़बड़ हो सकता है। समझ गए न?

 

बगलामुखी मंत्र के नुकसान से बचने के ख़ास नियम (Baglamukhi Mantra Ke Nuksan Se Bachne Ke Khas Niyam)

 

अच्छा तो, अब आते हैं मेन पॉइंट पर। अगर आप यह साधना कर रहे हैं या करने की सोच रहे हैं, तो इन नियमों को अपनी डायरी में लिख लो। भाई मान लो, ये नियम आपकी सुरक्षा के लिए ही हैं।

 

 सबसे पहले एक योग्य गुरु का होना (Sabse Pehle Ek Yogya Guru Ka Hona)

 

भाईसाहब, ये पहला और सबसे ज़रूरी नियम है। बिना गुरु के इस साधना को करने की गलती कभी मत करना। तुम्हे क्या लगता है, किताबें पढ़कर या ऑनलाइन वीडियो देखकर कोई भी यह साधना कर सकता है? बिलकुल नहीं। एक योग्य गुरु ही आपको मंत्र की सही दीक्षा देगा, उसका सही प्रोनाउन्सिएशन (उच्चारण) बताएगा और साधना के दौरान आने वाली परेशानियों से आपको बचाएगा। गुरु एक प्रोटेक्शन शील्ड की तरह काम करता है। अगर कुछ ऊँच-नीच हो भी जाए, तो गुरु उसे संभाल लेता है। मानते हो न?

 

संकल्प और उद्देश्य का शुद्ध होना (Sankalp Aur Uddeshya Ka Shuddh Hona)

 

अरे देखो, तुम ये साधना क्यों करना चाहते हो? तुम्हारा इंटेंशन क्या है? यह बहुत मैटर करता है। अगर आप किसी का बुरा करने, किसी को परेशान करने या किसी गलत काम के लिए इस मंत्र का यूज़ कर रहे हो, तो माँ कभी प्रसन्न नहीं होंगी। सच बताऊँ, इसका उलटा असर आप पर ही पड़ेगा। आपका उद्देश्य हमेशा सात्विक और धर्म के अनुसार होना चाहिए। जैसे कि, शत्रुओं से रक्षा, केस-मुकदमे में जीत या जीवन में आ रही रुकावटों को दूर करना। किसी का अहित करने का भाव मन में आया, तो समझो खेल बिगड़ गया।

 

शारीरिक और मानसिक शुद्धता बहुत ज़रूरी (Sharirik Aur Mansik Shuddhta Bahut Jaruri)

 

जी, साधना के दौरान आपको फिजिकल और मेंटल, दोनों लेवल पर प्योर रहना पड़ेगा।

  • शारीरिक शुद्धता: रोज़ स्नान करें। हमेशा साफ़ और धुले हुए कपड़े पहनें। माँ बगलामुखी की साधना में पीले कपड़े पहनना सबसे अच्छा माना जाता है। अपना पूजा का स्थान भी बिलकुल साफ़-सुथरा रखें।
  • मानसिक शुद्धता: अपने मन में किसी के लिए भी गलत विचार न लाएं। गुस्सा, जलन, लालच, इन सब चीज़ों से दूर रहें। मन को बिलकुल शांत और स्थिर रखने की कोशिश करें। समझे?
खान-पान में सात्विकता (Khan-Paan Mein Satvikta)

 

अरे भाई, जब आप इतनी बड़ी साधना कर रहे हो, तो खान-पान का तो ध्यान रखना ही पड़ेगा। साधना के दिनों में आपको पूरी तरह से सात्विक भोजन ही करना चाहिए। इसका मतलब है, मांस, मछली, अंडा, शराब, सिगरेट, और यहाँ तक कि लहसुन-प्याज जैसी तामसिक चीज़ों से भी बिलकुल दूर रहना है। जैसा अन्न, वैसा मन, ये कहावत तो सुनी ही होगी न? सात्विक भोजन आपकी एनर्जी को सही दिशा में बनाए रखने में हेल्प करता है।

अधिक जानकारी के लिए आप मंत्र साधना के सामान्य नियमों के बारे में पढ़ सकते हैं, जिससे आपको एक बेसिक आईडिया मिलेगा।

 

मंत्र जाप की सही विधि और सावधानियां (Mantra Jaap Ki Sahi Vidhi Aur Savdhaniyan)

 

अब कुछ प्रैक्टिकल बातों पर आते हैं जो जाप के समय ध्यान रखनी हैं।

सही माला और आसन का प्रयोग (Sahi Mala Aur Aasan Ka Prayog)

 

भाई देख, बगलामुखी मंत्र का जाप हमेशा हल्दी की माला से ही किया जाता है। किसी और माला का इस्तेमाल न करें। बैठने के लिए ऊनी या कुश का आसन इस्तेमाल करें। ज़मीन पर डायरेक्ट बैठकर जाप करने की गलती न करें, क्योंकि इससे आपकी जप ऊर्जा ज़मीन में चली जाती है।

 

ब्रह्मचर्य का पालन करना (Brahmacharya Ka Palan Karna)

 

जी हाँ, यह थोड़ा मुश्किल लग सकता है, लेकिन इस साधना की सफलता के लिए यह बहुत ज़रूरी है। साधना काल में साधक को पूरी तरह से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। क्या कहूँ, यह नियम आपकी आध्यात्मिक ऊर्जा को बचाने और उसे सही दिशा में लगाने के लिए होता है।

 

अगर साधना बीच में टूट जाए तो क्या करें? (Agar Sadhana Beech Mein Toot Jaye Toh Kya Karein?)

 

मान लो, किसी वजह से आपकी साधना बीच में टूट जाती है या कोई गलती हो जाती है। तो क्या करें? अरे सुनो, सबसे पहले तो घबराना नहीं है। आपको तुरंत अपने गुरु से संपर्क करना चाहिए। वो आपको इसका सही समाधान बताएँगे। इसके अलावा, आप माँ बगलामुखी से क्षमा-याचना कर सकते हैं और फिर से संकल्प लेकर साधना शुरू कर सकते हैं। लेकिन गुरु की सलाह के बिना कुछ भी अपने मन से मत करना, ठीक है न?

 

मंत्र के फायदे कब नुकसान में बदल जाते हैं? (Mantra Ke Fayde Kab Nuksan Mein Badal Jate Hain?)

 

जरा सोच के देखो, एक चाकू डॉक्टर के हाथ में हो तो जीवन बचाता है और वही चाकू किसी गलत इंसान के हाथ में हो तो जीवन ले लेता है, सही है न? वैसे ही यह मंत्र है।

  • जब आप इसका प्रयोग अपनी ईगो या घमंड को बढ़ाने के लिए करते हैं।
  • जब आप छोटी-छोटी बातों पर लोगों को डराने या उन पर अपनी पॉवर दिखाने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं।
  • जब आप इसे एक ‘शॉर्टकट’ मानकर बिना मेहनत के सब कुछ पाना चाहते हैं।

ऐसी सिचुएशन में, यह मंत्र आपको फायदा देने की बजाय आपकी मानसिक शांति छीन सकता है, आपके बने-बनाए काम बिगाड़ सकता है और आपको अंदर से खोखला कर सकता है।

माँ बगलामुखी के बारे में और गहराई से जानने के लिए आप उनका विकिपीडिया पेज भी पढ़ सकते हैं।

 

निष्कर्ष (Conclusion)

 

तो भाई, कुल मिलाकर बात ये है कि माँ बगलामुखी की साधना एक बहुत ही गंभीर और शक्तिशाली साधना है। यह कोई मज़ाक नहीं है। अगर आप इसे पूरे सम्मान, श्रद्धा, और सही नियमों के साथ करते हैं, तो माँ की कृपा से आपके जीवन की बड़ी से बड़ी मुश्किल भी हल हो सकती है। लेकिन अगर आपने नियमों को अनदेखा किया या इसका गलत इस्तेमाल करने की सोची, तो इसके नुकसान उठाने के लिए भी तैयार रहना पड़ेगा।

इसीलिए, जो भी कीजिए, अपने गुरु के मार्गदर्शन में कीजिए और अपनी नीयत हमेशा साफ़ रखिए। प्रभु की लीला देखो, सब अच्छा ही होगा। याद रखोगे न?

Bhuvaneshvari Sadhna भुवनेश्वरी साधना: शिव द्वारा प्रदत्त एक वरदान

Bhuvaneshvari Sadhna भुवनेश्वरी साधना और भुवनेश्वरी मंत्र

Bhuvaneshvari Sadhna भुवनेश्वरी साधना: शिव द्वारा प्रदत्त एक वरदान

Bhuvaneshvari Sadhna भुवनेश्वरी साधना और भुवनेश्वरी मंत्र
Bhuvaneshvari Sadhna भुवनेश्वरी साधना और भुवनेश्वरी मंत्र

 

Bhuvaneshvari Sadhna भुवनेश्वरी साधना: शिव द्वारा प्रदत्त एक वरदान वरदायक स्वरूप है वह 10 महाविद्याओं में से एक महाविद्यालय माता भुवनेश्वरी शक्ति माना गया सर्वोच्च शिखर पर आप पहुंच सकते हैं आदित्य दरिद्रता आपकी कोसों-कोसों दूर चली जाती है।

 भुवनेश्वरी पूर्ण लक्ष्मी युक्त बन कर के 16 श्रृंगार करके आपके घर के अंदर स्थापित हो जाती है और जीवन में कुछ भी आपको प्रदान करने के लिए सफल भी रहती है। यह साधना और सही भी है।

वास्तव में क्या है कि वास्तव में जो भुवनेश्वरी साधना है वो जीवन का एक वरदान है जो कि शिव के द्वारा यह साधना दी गई है। देखिए हम सब इस भुवनेश्वरी साधना के माध्यम से सब कुछ प्राप्त कर सकते हैं। 

जो हमें अपने जीवन में चाहिए। धन, यश, मान, प्रतिष्ठा, ऐश्वर्य, भोग, विलास, पूर्णता, सफलता, अनुकूलता, व्यापार वृद्धि, सब कुछ जो अपने जीवन में आप प्राप्त करना चाहते हैं, वो सारी चीजें आप भुवनेश्वरी के द्वारा प्राप्त कर सकते हैं।

 

भुवनेश्वरी साधना – त्र्यात्मक शक्ति: लक्ष्मी, सरस्वती और महाकाली का समन्वित रूप

देखिए लक्ष्मी जहां इसमें व्यापार वृद्धि, आर्थिक उन्नति और भौतिक समृद्धि देने में बिल्कुल समर्थ है वहीं पर सरस्वती जो कि माँ विद्या, प्रतिष्ठा, सम्मान व सिद्धि और कला, संगीत आदि में, इन क्षेत्रों में आपको पूर्णतः समर्थ है, वो शक्ति पूर्णतः सहायक है। 

वहीं पर महाकाली शत्रु संहार करने में, विरोधियों पर विजय प्राप्त करने में और जीवन की जितनी भी समस्त विपरीत जो परिस्थिति है, उन सबको दूर करने में और उन आपके कार्य बनाने में वो भी समर्थ है। ऐसी कोई शक्ति नहीं है कि जो इनसे बाहर हो।

 देखिए माता भुवनेश्वरी को तीनों शक्तियों का समन्वित रूप कहा गया है। यानी कि भुवनेश्वरी की जो साधना करते हैं, तीनों शक्तियां एक ही साधना से संपन्न हो जाती हैं – लक्ष्मी, सरस्वती भी और महाकाली भी, और जीवन में किसी भी प्रकार का अभाव रहता ही नहीं है बिल्कुल भी।

 इसीलिए इस साधना को त्र्यात्मक साधना कहा गया है क्योंकि एक अकेली भुवनेश्वरी की साधना करने से तीनों शक्तियां यह सिद्ध हो जाती हैं और जब तीनों शक्तियां यह सिद्ध हो जाएंगी तो फिर आगे बचा ही क्या।

 

एक सौम्य और सुरक्षित भुवनेश्वरी साधना

देखिए वैसे तो जो 10 महाविद्या कलयुग में बहुत जल्दी आपको सफलता प्रदान करती हैं , वह इन 10 महाविद्याओं में एक ऐसी साधना है जो सौम्य साधना है। जिस साधना को करने से किसी भी प्रकार की हानि नहीं हो सकती, चाहे साधना बीच में छूट जाए तब भी किसी प्रकार की हानि नहीं हो सकती। 

ऐसी साधना पूर्णता प्राप्त करने के लिए जरूर करनी चाहिए। इस साधना को करने से किसी भी प्रकार का कोई नुकसान होता ही नहीं है। सच्चाई जो है, एक भुवनेश्वरी एक ऐसी देवी है 10 महाविद्याओं में कि जिनकी साधना करने में आपको किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है। इस साधना को कोई भी स्त्री कर सकती है, कोई भी पुरुष कर सकता है, कोई व्यक्ति कर सकता है या फिर युवा कर सकता है, किसी प्रकार की कोई प्रॉब्लम नहीं।

 

भुवनेश्वरी साधना में सफलता के लिए आवश्यक विश्वास

 

आवश्यकता है सिर्फ एक चीज की: विश्वास। गुरु के ऊपर विश्वास, सामग्री के ऊपर विश्वास, अपने ऊपर पूर्ण विश्वास, साधना के ऊपर और माता के ऊपर पूर्ण विश्वास। केवल यह चीज आपके पास होनी चाहिए, साधना आपकी 100% सफल होगी ही होगी, किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत हो ही नहीं सकती है। केवल 21 दिन की साधना करो और सारी चीजें प्राप्त करो।

 

भुवनेश्वरी साधना के लाभ: पापों का नाश और भोग-मोक्ष की प्राप्ति

 

मैं नहीं मानता कि इससे बड़ी साधना कोई और दूसरी हो सकती है क्योंकि भुवनेश्वरी साधना की जो देवी है, उसकी आराधना करने से आपके जीवन के जो पाप हैं, वह सभी समाप्त होते हैं। पूर्व जन्म के जो भी आपके किए गए बुरे कर्म हैं, वह भी सब समाप्त हो जाते हैं, वह सब दूर हो जाते हैं 

और साधक भौतिक पदार्थों को भोक्ता हुआ पूर्ण सुख और सम्मान प्राप्त करता है और अंत में वह मोक्ष प्राप्त करता है इस साधना को करने वाला। क्योंकि यह जो भुवनेश्वरी साधना है, यह भोग की और मोक्ष की, दोनों रूपों को देने वाली यह उच्च कोटि की साधना है। इस साधना को करने से आपको लाभ ही लाभ होगा, नुकसान तो कुछ होने वाला ही नहीं है।

 

भुवनेश्वरी साधना की सरलता और सुगमता

 

और अगर आप यह जो महत्वपूर्ण साधना अगर इसको करते हो तो मात्र भुवनेश्वरी की साधना करने से जीवन के सारे कार्य सहज ही संभव हो जाते हैं। हालांकि जो ये भुवनेश्वरी साधना है, ये एक महाशक्ति साधना है और 10 महाविद्याओं में से एक महाविद्या है, पर फिर भी यह साधना जो और दूसरी साधनाएं हैं, उनकी अपेक्षा बहुत ही सरल और सुगम साधना भी है।

 इसका कोई भी विपरीत प्रभाव होता है, वह नहीं पड़ता है बिल्कुल भी। इस साधना को कोई गृहस्थ भी कर सकता है, योगी भी कर सकता है, स्त्री-पुरुष कोई भी कर सकता है, जो थोड़ा बहुत पढ़ा-लिखा है वह भी कर सकता है और अपने जो जीवन की उसके अंदर अभाव है, उन सभी को खत्म कर सकता है।

 

नवरात्रि में भुवनेश्वरी साधना का विशेष महत्व

 

और सबसे बड़ी बात तो यह है कि अगर आप इस साधना को नवरात्रि में, इस साधना को संपन्न करते हैं ना, तो प्रत्यक्ष दर्शन भी संभव होते हैं। इस साधना से आप इस साधना से देखेंगे कि पांचवें-छठे दिन से ही आपको अनुभूति प्रारंभ हो जाती है और साधना समाप्त होते-होते भगवती के दर्शन हो सकते हैं आपको।

 क्योंकि कलयुग में देखिए यह हम लोगों का सौभाग्य है कि ऐसी साधना है जो हमारे बीच में है कि हम देवी का प्रत्यक्ष दर्शन कर सकें और अपने आप को धन्य कर सकें। 

लेकिन आवश्यकता किस बात की है कि कम से कम 1 लाख जाप उन 9 दिनों के अंदर पूरा हो जाना चाहिए, मतलब कि 15000 मंत्रों का जाप डेली होना चाहिए। 

और इस साधना को सुबह में भी कर सकते हो, शाम में भी कर सकते हो, किसी दोनों टाइम कर सकते हो, कोई प्रॉब्लम नहीं है इसमें।

 

भुवनेश्वरी साधना के लिए आवश्यक सामग्री

 

और देखिए इस साधना को सिद्ध करने के लिए जो आवश्यक सामग्री है वह मैं आपको बता देता हूं। एक तो भुवनेश्वरी सर्व सिद्धि प्रदायिनी गुटिका, भुवनेश्वरी माला, और एक रक्षा माला। यह चार सामग्रियों की आपको आवश्यकता होगी इस साधना में। 

और यह चारों सामग्री प्राण प्रतिष्ठित और प्राण चैतन्य होनी चाहिए। और अगर आपको ऐसी सामग्री चाहिए तो मैंने व्हाट्सएप नंबर दिया हुआ है, आप वहां से मुझे व्हाट्सएप कर सकते हो,लेख  में ही मैंने दिया है और आप यह सामग्री प्राप्त कर सकते हो और साधना शुरू कर सकते हो। 

अगर आप ऑर्डर करते हैं तो फिर हंड्रेड परसेंट आपको सामग्री मिलेगी ही मिलेगी, आप बेझिझक करके ऑर्डर कर सकते हैं सामग्री के लिए, किसी भी प्रकार से आपके साथ अन्याय नहीं होगा, यह मेरा दावा है।

 

भुवनेश्वरी साधना के नियम और ध्यान रखने योग्य बातें

 

और देखिए जब आपको यह सामग्री प्राप्त हो जाए तो आप इस साधना को शुरू करें। आप किसी कभी नवरात्रि में आप इसको शुरू कर सकते हैं या फिर किसी भी महीने की जो शुक्ल पक्ष आता है, उसकी चतुर्दशी को भी यह साधना प्रारंभ कर सकते हैं।

 

भुवनेश्वरी साधना के लिए समय और स्थान

 

साधना रात और दिन, दोनों टाइम कर सकते हो, किसी प्रकार की कोई प्रॉब्लम नहीं है। अब मैं इसमें जो कुछ ध्यान रखने योग्य जो बातें हैं, जो साधना के नियम हैं, उसको मैं कुछ समझा देता हूं तुम्हें। पहले देखिए, साधना गृहस्थ व्यक्ति भी कर सकता है और उनको इन नियमों का पालन करना ही होगा।

भुवनेश्वरी साधना किसी भी समय आप प्रारंभ कर सकते हो, परंतु नवरात्रि में करने से इस साधना में विशेष महत्व होता है। नवरात्रि के प्रथम दिन से ही आप इस साधना को प्रारंभ करना चाहिए और अष्टमी तक या नवमी तक इसका समापन कर देना चाहिए।

 

भुवनेश्वरी साधना में व्यक्तिगत शुद्धि और आचरण

ठीक है, इस साधना को कोई भी स्त्री-पुरुष कर सकता है। हां, यदि स्त्री साधना काल में रजस्वला हो जाए तो यह साधना उसी दिन से आपको समाप्त कर देनी है, आगे उस साधना को फिर नहीं करना है। 

जब आप ठीक हो जाए तब उसके बाद ही साधना शुरू करें। साधना काल में स्त्री संग वर्जित है। साधक शराब बिल्कुल ना पिए, जुआ ना खेले और स्त्री का संगम ना करे। स्त्री संग आप समझ रहे हैं कि आपको ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना है।

 

भुवनेश्वरी साधना में पूजन सामग्री और आसन

 

साधना रात्रि माला की आवश्यकता होगी, उसका ही आपको उपयोग करना है। रुद्राक्ष की माला इस साधना में बिल्कुल भी प्रयोग नहीं करनी है। सफेद रंग का आसन होना चाहिए और पूर्व दिशा या उत्तर दिशा की तरफ मुंह करके ही आपको बैठना है। 

सामने जो आपके तेल का दीपक लगा हुआ हो, ठीक है, और तेल का दीपक किसी भी तेल का, जैसे तिल का तेल हो गया या किसी सरसों का तेल हो गया, इसका आप दीपक लगा सकते हैं। और साधना काल में चाहे तो आप अखंड दीपक भी लगा सकते हैं और नहीं तो फिर आप ऐसा भी कर सकते हैं कि जब तक मंत्र जाप चले तब तक दीपक जो वह जलता रहना चाहिए।

 अगरबत्ती लगाना कोई अनिवार्य भी नहीं है और लगाना चाहो तो लगा भी सकते हो। ठीक है, जो भुवनेश्वरी यंत्र है, वह प्राण प्रतिष्ठित होना चाहिए और चित्र भी इसके साथ होना चाहिए। चित्र चाहे तो आप नेट से भी निकाल करके उसको मढ़वा करके रख सकते हैं।

 

भुवनेश्वरी साधना  विधि की सरलता
 

और जो पहला दिन है, पहले दिन से ही पूजन करके, ध्यान करके मंत्र जप प्रारंभ करना कर देना चाहिए। इसमें कोई जटिल विधि-विधान नहीं है। इसमें आप पंचोपचार पूजन कर सकते हो। यदि केवल तुम भुवनेश्वरी का दर्शन करना हो तो मात्र भुवनेश्वरी मंत्र का ही जाप करना चाहिए, पर यदि कोई विशेष इच्छा हो तो इस मंत्र में और पहले और अंत में उससे संबंधित जो बीज मंत्र है। 

उसको लगा देना चाहिए। जैसे कि उदाहरण के लिए, रोग निवारण के लिए जो बीज मंत्र होता है, वह होता है ‘वं’। तो अब और जो देवी का मंत्र है वह है ‘ह्रीं’। तो आपको क्या करना है कि जब आप रोग मुक्ति के लिए मंत्र जाप करें तो इसमें आपको बोलना होगा ‘वं ह्रीं वं’।

इस प्रकार से मतलब कि आगे भी और पीछे भी। इस मंत्र का जाप इस प्रकार से होना चाहिए। इस प्रकार से जो है भुवनेश्वरी के जो मंत्र हैं, दोनों तरफ लगा करके बीच और उसको एक मंत्र माना गया है।

 

भुवनेश्वरी साधना में  वस्त्रों से संबंधित नियम
 

प्रातः ही स्वच्छ वस्त्र धारण करके साधक जो है, मंत्र जाप में उसमें बैठना चाहिए और चाहे तो वह दूसरी बार रात्रि में भी पुनः साधना कर सकता है और स्नान करने के बाद ही रात्रि को बैठे। मतलब कि स्नान करना चाहिए। यदि सर्दी हो तो कंबल ले सकता है, ऊनी वस्त्र ओढ़ सकता है।

 वह सिले हुए वस्त्र आपको इसमें नहीं पहनने हैं। कच्छा-बनियान जिसे पहनकर के बैठते हैं, बिल्कुल नहीं। इसमें आपको धोती बांधनी है और धोती ही ओढ़नी है, चाहे आप स्त्री हैं चाहे आप पुरुष हैं।

 अच्छा एक चीज और, अगर रेशमी वस्त्र है तो उसे आप एक बार साधना कर ली तो दूसरे दिन भी उसका उपयोग कर सकते हैं। 

लेकिन अगर आपके वस्त्र ऊनी हैं या मतलब कि जैसे कि सूती वस्त्र हैं तो उन्हें एक बार पहनने के बाद फिर धो करके ही उसको उपयोग में लाना है। ठीक है, उसको जरूर धो लेना।

 

भुवनेश्वरी साधना में  आहार और शयन के नियम

 

रात्रि में भूमि में शयन करेंगे, मतलब पृथ्वी पर लेटना है, खटिया-पलंग पर आपको नहीं लेटना है। भोजन एक समय, एक स्थान पर बैठकर के जितना भी किया जा सके आप भोजन करें, ऐसा नहीं कि जगह-जगह खाते रहेंगे। पर शराब, मांस, लहसुन, प्याज ये सब इसमें वर्जित है।

 इसके अलावा आप दिन में दो बार फल भी खा सकते हैं और दूध, चाय, पानी यह तो आप जितनी बार चाहे उतनी बार पी सकते हैं, कोई दिक्कत नहीं है इसमें। ठीक है, और भुवनेश्वरी देवी का जो चित्र है उसको कांच के फ्रेम में मढ़वा करके सामने रख लें। बिना यंत्र के और बिना चित्र के मंत्र जाप निरर्थक है इसके अंदर। ठीक है।

 

भुवनेश्वरी साधना में  विभिन्न कामनाओं के लिए बीज मंत्र

 

देखिए इस साधना में अगर आप किसी विशेष कार्य के लिए साधना कर रहे हैं तो फिर मैं आपको बता देता हूं और लिख करके भी दे दूंगा कि देखिए अगर आप निष्काम भाव के लिए साधना कर रहे हैं तो ‘ह्रीं’ का इस्तेमाल आपको करना है आगे पीछे। अगर माता के प्रत्यक्ष दर्शन करना है तो ‘ऐं ह्रीं ऐं’, इस मंत्र का भी आप जाप कर सकते हैं।

अगर आर्थिक उन्नति के लिए करना है तो केवल ‘ह्रीं’ का ही आप जाप करेंगे। अगर व्यापार वृद्धि के लिए कर रहे हैं तो ‘आं ह्रीं आं’। इस प्रकार से। अगर सुख-समृद्धि के लिए कर रहे हैं तो ‘श्रीं’ का आपको इस्तेमाल करना है। शत्रु संहार के लिए ‘रां’ बीज का इस्तेमाल करना है।

 रोग निवारण के लिए, मैं बता चुका हूं, ‘वं’। भाग्योदय के लिए ‘हं’। पुत्र प्राप्ति के लिए ‘यं’। मोक्ष प्राप्ति के लिए ‘लं’। और राज्य के पद के लिए या फिर अपनी नौकरी में पद के लिए, जैसे कि चाहते कि पदोन्नति हो, उसके लिए ।

अगर मुकदमा है तो उसमें सफलता के लिए इसमें आप ‘ढं’ का इस्तेमाल । ठीक है, सुख-शांति के लिए ‘जं’। अगर पत्नी अपने पति के लिए कर रही है या पति अपनी पत्नी के लिए कर रहा है तो ‘नं’ का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

सम्मान चाहिए, यश चाहिए तो आप इसमें ‘क्षं’ का इस्तेमाल कर सकते हैं। विद्या प्राप्ति के लिए ‘हं’ का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति जैसे खो जाता है, उसके लिए आप साधना कर रहे हैं इसको तो आप करेंगे ‘ॐ’ का इस्तेमाल और उसके ऊपर बिंदी।

अगर तांत्रिक प्रभाव किया या तो आप खाली ‘ह्रीं’ का मंत्र जाप करें या फिर इसमें तीन शब्दों का उच्चारण होता है, इनको मिलाकर के भी आप जाप कर सकते हैं। 

यह संपूर्ण मंत्र जैसे कि ‘ऐं’ का इस्तेमाल करते हैं तो माता सरस्वती के लिए, ‘ह्रीं’ का इस्तेमाल करते हैं तो यह महालक्ष्मी के लिए और अगर आप केवल ‘ह्रीं ह्रीं ह्रीं’ इसका ही उच्चारण करते हैं तो भी कोई दिक्कत नहीं है, तब भी भुवनेश्वरी का ही बीज मंत्र है। ठीक है, दोनों में से किसी भी मंत्र का आप जाप कर सकते हैं।

 

भुवनेश्वरी साधना  संपूर्ण साधना विधि

 

अब देखिए मैं आपको इस साधना को किस प्रकार से करना है, वो मैं आपको बता देता हूं। देखिए वीडियो तो इसमें लंबा हो जाएगा 100% है क्योंकि समझाना है तो वीडियो लंबा होगा ही होगा, इसलिए व्यर्थ की बातें तो करें ना कोई कि भई वीडियो लंबा है, फलाना है, यह सब चीजें ना करें। जिनको देखना है, वही देखें और प्यार से देखें।

 

भुवनेश्वरी साधना में  पूजन की तैयारी

 

अब देखिए आपको इसमें क्या करना है कि जो सामग्री है, आप उसे प्राप्त कर चुके हैं तो आप प्रातः काल ही स्नान आदि करके और अपना वस्त्र धारण करके अपने पूजा कक्ष में चले जाएं या एकांत कक्ष में चले जाएं। प्रतिदिन जिस समय साधना पहले दिन शुरू करेंगे, प्रतिदिन आपको उसी समय साधना शुरू करनी है, शाम में भी और सुबह में भी।

 और साधना आपको लगातार 21 दिन करनी है यह। ठीक है, उस चौकी पर आप लाल रंग का वस्त्र बिछा लें और थोड़े से चावल लेकर के उस पर ‘ह्रीं’ (ह पर बड़ी ई की मात्रा और अं की बिंदी) यह चावल से लिखें। ठीक है, थोड़े से चावल डालकर के उसको लिख लें चावल से और उस पर आपको भुवनेश्वरी यंत्र को स्थापित कर देना है। उसके साथ ही साथ भुवनेश्वरी का चित्र आप सामने रखेंगे।

 बराबर में भगवान शिव का चित्र, परिवार का हो तो अच्छी बात है और साथ में ही अपने गुरु का चित्र, जो भी आपके गुरु हैं। अगर आपके गुरु कोई देहधारी हैं तो उनका चित्र, अगर भगवान शिव को गुरु माना है तो फिर उनका चित्र आप रख सकते हैं। 

अब इसमें आपको कुंकुम चाहिए, थोड़े चावल चाहिए, पुष्प चाहिए। अगर आप चाहें तो इसमें भोग भी आप रख सकते हैं, उस भोग को आप स्वयं ग्रहण कर लेंगे पूजा करने के बाद। 

सबसे पहले आपको दीपक जलाना है। ठीक है, दीपक मैं बता चुका हूं कौन सा जलाना है। धूपबत्ती, अगरबत्ती भी जला सकते हो। अगर आपको इस साधना में पूर्ण सफलता प्राप्त करनी है तो एकाग्रचित होकर के आप इस साधना को करें।

 

भुवनेश्वरी साधना गुरु पूजन और आज्ञा
 

जब आप यह सारी क्रियाएं कर लें, सबसे पहले आपको अपने गुरु का स्मरण करना है, उनका पंचोपचार पूजन करना है। पंचोपचार का मतलब यह होता है कि टीका लगा दें, चावल चढ़ा दें, पुष्प चढ़ा दें, धूप-दीप दिखा दें, बस। 

और अगर चाहते हैं तो प्रसाद भी रख सकते हैं। जब आप पंचोपचार पूजन कर लेंगे, पूजन करने के बाद गुरुजी से हाथ जोड़कर के प्रार्थना करें कि “गुरुदेव, मैं भुवनेश्वरी महाविद्या की साधना करने जा रहा हूं और इस साधना में मुझे पूर्ण सफलता मिले, जिसके लिए मुझे आप आशीर्वाद दीजिए और मुझे आज्ञा प्रदान कीजिए।” 

और गुरु मंत्र का कम से कम एक माला या दो माला का जाप जरूर कर लें, जो भी आपका गुरु मंत्र है। ठीक है, अगर आपने भगवान शिव को गुरु माना है तो फिर भगवान शिव का आपको पूजन उसी तरीके से करना है और आप ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र का जाप कर सकते हैं।

 और यह रुद्राक्ष की माला से ही करना है आपको गुरु मंत्र और रुद्र, जो भी शिव मंत्र है या फिर कोई भी दूसरा मंत्र है, तो उसका आप जो भी आपका गुरु मंत्र है, रुद्राक्ष की माला से ही आपको जाप करना है इसमें।

 

भुवनेश्वरी साधना में  रक्षा विधान

 

जब आप इतना कार्य कर लेंगे, उसके बाद आपको क्या करना है, एक रक्षा विधान करना है। क्योंकि जब यह साधना कितनी भी सौम्य हो, लेकिन फिर भी आप रक्षा विधान का इस्तेमाल जरूर करें क्योंकि अगर आप एक हवन भी करते हैं तो वहां भी आपको रक्षा विधान करना चाहिए। 

अब आपको क्या करना होगा कि अपने जो बायां हाथ है, उस पर थोड़े से चावल रखें और उन चावलों से आपको क्या करना होगा, सभी दिशाओं में फेंकते हुए एक मंत्र जाप करना है। वो मैं आपको बता देता हूं, “ओम अपसर्पन्तु ये भूता ये भूता भूमि संस्थिताः ये भूता विघ्नकर्तारस्ते नश्यन्तु शिवाज्ञया।” 

ऐसा कुछ मंत्र होता है जो आपको बोलते हुए सारे चावल सभी दिशाओं में फेंक देने हैं। यह बहुत ही तीव्र और प्रभावशाली रक्षा विधान है। इस विधान को करने से आपके पूजा के अंदर कोई भी नेगेटिव एनर्जी प्रवेश नहीं कर सकती।

 

भुवनेश्वरी साधना में  यंत्र और गुटिका पूजन
 

उसके बाद आप माता का पंचोपचार पूजन करें। जैसे मैंने बताया, टीका लगाएं, चावल चढ़ाएं, पुष्प चढ़ाएं और जो यंत्र है, यंत्र का, भुवनेश्वरी यंत्र का भी आपको पूजन करना है।

 यंत्र का पूजन आप कुंकुम से टीका लगाकर के, अक्षत यानी कि चावल से, पुष्प से और जो धूप-दीप है, उसे दिखाकर के आप यंत्र का पूजन करें। 

उसी प्रकार से गुटिका जो है, जो सर्व सिद्धि गुटिका है, उस गुटिका को यंत्र के ठीक बाएं तरफ आपको स्थापित करना है, यंत्र के बाएं तरफ। जैसे आपने यंत्र का किया है, जब आप उसका पूजन कर लेंगे।

 

भुवनेश्वरी साधना में  ध्यान और संकल्प
 

ठीक है, उसके बाद आप माता भुवनेश्वरी का ध्यान करेंगे। आंख बंद करके आपको 2 मिनट माता का ध्यान करना है। ठीक है, माता का ध्यान करने के बाद उनसे आज्ञा लेंगे और साथ में ही आप संकल्प भी ले सकते हैं अगर किसी विशेष कार्य के लिए आप कर रहे हैं तो।

 अगर किसी विशेष कार्य के लिए आप कर रहे हैं तब आपको संकल्प लेना है। यदि आप माता के दर्शन के लिए प्रार्थना कर रहे हैं तो आप माता के दर्शन के उद्देश्य से भी आप संकल्प ले सकते हैं कि “मैं (अपना नाम), (अपने गोत्र), मैं माता भुवनेश्वरी की साधना करने जा रहा हूं और माता भुवनेश्वरी प्रत्यक्ष रूप से मुझे दर्शन देकर के मुझे कृतार्थ करें, मुझे आशीर्वाद प्रदान करें।”

 ऐसा आप कर सकते हैं संकल्प। अगर आप संकल्प नहीं लेते हैं तो तब भी कोई प्रॉब्लम नहीं है। माता की इच्छा होगी तो जरूर आपको दर्शन देगी, लेकिन संकल्प लेकर के माता बंध जाती है कि आपने संकल्प लिया है। तो इसलिए यह सब माता के ऊपर ही छोड़ दें तो बहुत अच्छा रहेगा।

 

भुवनेश्वरी साधना में  मंत्र जाप
 

और इसके बाद रक्षा बंधन कर लेना है और फिर आपको मंत्र जाप शुरू करना है। मंत्र मैंने आपको पहले भी बता दिया है, मैं फिर दोबारा आपको बता रहा हूं। जो मंत्र आपको जपना है, वो मंत्र है ‘ऐं ह्रीं श्रीं’, केवल इतना छोटा सा मंत्र है। और अगर आप यह मंत्र नहीं जप सकते हैं 

तो केवल आपको जपना चाहते हैं तो ‘ह्रीं’ शब्द का, ‘ह्रीं’ जो बीज मंत्र है, इसको भी जप सकते हैं। मतलब कि ‘ऐं’ और ‘श्रीं’ को हटाकर के केवल ‘ह्रीं’ जो है, उसको भी जप सकते हैं ‘ह्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं’, इस तरीके से। और भुवनेश्वरी माला से मंत्र जाप करेंगे। प्रतिदिन आपको 51 माला का जाप करना है अगर आप 21 दिन की साधना कर रहे हैं। 

जैसे कि मान लिया आप किसी शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी से साधना शुरू की है, 21 दिन की साधना करना चाहते हैं तो 51 माला का आप जाप करेंगे। ऐसा भी कर सकते हैं कि 51 माला रात्रि में, 51 माला का आपका जाप हो जाएगा, उस प्रकार से 11 दिन में ही आपकी साधना संपन्न हो जाएगी। 

और अगर एक ही वक्त आपको करनी है साधना तो फिर आप 51 माला का जाप करेंगे तो 21 दिन में आपके मंत्र जाप पूरे हो जाएंगे। और अगर नवरात्रि में कर रहे हैं, आपको नौ दिन में साधना पूरी करनी है तो कम से कम 150 माला आपको करनी है, वह सुबह-रात्रि दोनों को मिलाकर के 150 माला होनी चाहिए। ठीक है, तब भी आप इस साधना को पूर्ण कर सकते हो।

 

भुवनेश्वरी साधना  का समापन

और अगर आप चाहते हैं कि अब इसके बाद साधना हमें नहीं करनी है तो आप क्या करेंगे, यंत्र को, माला को, गुटिका को और रक्षा माला को आप बहते हुए पानी में विसर्जित कर देंगे। और देखिए प्रतिदिन साधना करने के बाद माता से रक्षा की प्रार्थना जरूर आपको करनी है कि “हे माता, आप ही मेरी रक्षक हैं, इसलिए आप ही मेरी रक्षा करेंगी।” 

और कुछ आपको नहीं बोलना है। “और जो भी मैंने जाप किया है, मैं आपको समर्पित करता हूं।” ठीक है, यह कहकर के साधना से फिर आपको उठ जाना है प्रणाम करके। और हो सके तो बाद में गुरु मंत्र का एक माला या दो माला का जाप कर लें तो अच्छा रहेगा। अगर करना चाहते तो कर सकते हैं, एक माला गुरु मंत्र कर लीजिए फिर बाद में।

 

भुवनेश्वरी साधना अंतिम शब्द

 

देखिए इस साधना में मैं आपको यह भी बता चुका हूं कि आपको अनुभूतियां भी होंगी, आपको यह भी बता चुका हूं कि किन-किन बातों का आपको ध्यान रखना है। सारी कुछ चीजें मैं इस साधना में ही आपको बता चुका हूं, इसलिए मुझे कुछ एक्स्ट्रा बताने की अब आवश्यकता है

 नहीं। ठीक है, इसी के साथ अब मैं  post को यहीं पर समाप्त करता हूं। मेरे साथ बोलिए, बोलिए वीर बजरंगबली हनुमान जी महाराज की जय, बोलिए मेरे परमहंस गुरुदेव की जय।

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रंभा अप्सरा साधना: एक दिवसीय सिद्धि प्रयोग

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rambha apsara रंभा अप्सरा साधना: एक दिवसीय सिद्धि प्रयोग

जय गुरुदेव, जय महाकाली! आप सभी साधकों का हमारी वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉट कॉम के इस लेख में स्वागत है। रंभा अप्सरा प्रयोग एक ऐसी साधना जो अद्भुत यौन, अद्भुत सम्मोहन शक्ति प्रदान करने वाली, इच्छाओं की पूर्ति करने वाली और प्रेमिका रूप में सिद्ध होने वाली।

रंभा अप्सरा साधना और साधकों के भय

बहुत से लोगों में एक कॉमन सा डर बना रहता है कि अप्सरा को प्रेमिका रूप में अगर सिद्ध कर लें तो विवाह में समस्या तो नहीं आएगी ? अगर प्रेमिका रूप में सिद्ध कर लें तो शादीशुदा जीवन में गड़बड़ तो नहीं होगी ? तो आपको बता दें कि अप्सरा में ऐसी कोई भी समस्या नहीं होती है। 

यक्षिणी साधनाओं के विधान अलग होते हैं, लेकिन अप्सरा में आप उसको शादीशुदा होने पर भी प्रेमिका रूप में सिद्ध करेंगे तो भी शादीशुदा जीवन में प्रेम बढ़ेगा। अगर आप शादीशुदा नहीं हैं और आप अप्सरा साधना करके प्रेमिका रूप में सिद्ध कर रहे हैं, सुंदर पत्नी की प्राप्ति होगी, प्रेम करने वाली पत्नी की प्राप्ति होगी।

रंभा अप्सरा साधना में चूक के परिणाम

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लेकिन साधना में अगर आपने चूक कर दी, साधना में अगर आपने कोई गड़बड़ कर दी या साधना को खंडित कर दिया तो आपसे लड़ने वाली पत्नी भी प्राप्त होगी, इसमें भी कोई संदेह नहीं है। 

लेकिन साधना को सोच समझकर, पहले से प्री-प्लान करके बनाएं कि आप इतने दिन की साधना करेंगे, कोई काम तो नहीं है, आपको कोई डिस्टर्ब तो नहीं करेगा? इन सब चीजों का ध्यान रखें।

रंभा अप्सरा साधना के लाभ और विकल्प

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क्योंकि लोग बड़े परेशान रहते हैं, इसलिए हम कहते हैं कि अगर अप्सरा को प्रत्यक्ष रूप में ना सिद्ध कर सकते या इतना समय नहीं है तुम्हारे पास 11 दिन, 21 दिन, 41 दिन या सवा लाख मंत्र जप अनुष्ठान करने की क्षमता नहीं है, तो एक दिवसीय प्रयोग कर लिया करो अप्सरा से संबंधित। 

 उससे होगा क्या ? आपके जो स्वभाव है, जो आपका व्यक्तित्व है, उसमें सम्मोहन शक्ति आएगी। चमत्कारिक रूप से आपका जो उम्र है वो आपकी उम्र से कम दिखने लगेगी, आपमें नवीनता आ जाएगी। 

सिर्फ मन में नहीं, तन में भी बहुत चमत्कारिक आपका व्यवहार हो जाएगा। लोग आपकी बातों को जो इग्नोर करते थे, वे लोग भी आपकी तरफ आकर्षित होंगे। ये अप्सरा साधना के प्रभाव हैं, इसमें मतलब कोई अलग से ऐसी बात नहीं है, सामान्य अप्सरा साधना में ये होता ही है।

 

रंभा अप्सरा साधना सिद्धि की विशेषताएं

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अप्सरा की विशेषता यह है कि अगर उसको प्रेमिका रूप में आपने सिद्ध कर लिया है तो जीवन पर्यंत उसके मंत्र से उसका आवाहन करने पर आपके कार्य सिद्ध कर देती है और प्रत्यक्ष रूप से सिद्ध होने पर तो व्यक्ति के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, अप्सरा साधना सतत अलग-अलग विधि से एक वर्ष तक की जाए तो सिद्धि हो ही जाती है।

साधना की विधियां

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अलग विधि से कैसे ? तो अलग विधि से आपने दिशा का चयन कर लिया, आप दिशा बदल दें। दक्षिण को छोड़कर तीनों दिशाओं में अलग-अलग साधना कर सकते हैं, अलग-अलग अनुष्ठान कर सकते हैं।  कपड़ों में आप उससे संबंधित जैसे इस साधना में गुलाबी वस्त्र, पीले वस्त्र पहने जा सकते हैं, सफेद वस्त्र पहने जा सकते हैं, तो अलग-अलग वस्त्रों के साथ आप उसको पहन सकते हैं। 

मुख्य रूप से गुलाबी वस्त्र पहने जाते हैं अप्सरा साधना में। इसके साथ और स्थान का परिवर्तन कि आप अन्य किसी स्थान पर जाकर साधना या प्रयोग कर रहे हैं, तो स्थान को भी आप बदल सकते हैं। 

लेकिन अगर आपके पास परमानेंट एक ही कमरा है जहां पर आप साधना कर सकते हैं और आपके अलावा वहां कोई नहीं जाएगा, तो फिर स्थान बदलने की आवश्यकता नहीं, फिर उसी में करें कि आपके अलावा कोई नहीं जाता। 

लगता है कि इस बार आपने साधना की, फिर उसके बाद आपको रूम छोड़ना पड़ेगा, घर परिवार वाले आते-जाते रहते हैं, तो फिर आप स्थान चेंज करें बार-बार, उससे आपको ज्यादा लाभ होगा। 

लेकिन अगर परमानेंट है जहां पर आपके अलावा कोई नहीं जाएगा, भले चार महीने, 10 महीने भी साधना करें तो दिक्कत नहीं, तो फिर आप वहां पर करें। एक अनुष्ठान कंप्लीट हो, दूसरा अनुष्ठान ले लें।

 

रंभा अप्सरा साधना के अलौकिक अनुभव

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 साधनाएं और उनके प्रभाव ऐसे हैं कि कभी-कभी जब हम साधना में बैठते ना, तो हमारे साथ जो घटनाएं होती हैं, हम खुद आश्चर्यचकित हो जाते हैं कि ऐसा कैसे हुआ। क्योंकि वो शक्तियां हैं, वो हमारी सोच से बहुत परे है, बहुत परे। 

वो बहुत एडवांस हैं, एडवांस लाइजेशन, वे एडवांस हैं। तो वो हम जो नहीं सोचते उससे ज्यादा है। क्योंकि हमने जो चीजें देखीं, हम जिन चीजों को देखते हैं, जिनसे बात करते हैं, सामान्य सी हो गई सारी चीजें। 

लेकिन जब विशेष शक्तियों की साधना करते हैं तो बहुत सारी ऐसी घटनाएं होती हैं जो चमत्कारिक रूप से प्रसन्न कर देती हैं मन को। क्योंकि शक्ति का, नई शक्ति का सामने आना या फिर उसके द्वारा आपको एक नया अनुभव देना, बहुत अलौकिक अनुभव होते हैं।

 

साधकों द्वारा की जाने वाली सामान्य गलतियां

 

साधना में इन चीजों का बड़ा महत्व है। लेकिन दिक्कत कहां हो जाती है सामान्य साधकों के लिए? अपनी साधना के बारे में या तो बहुत सारे लोगों को बता देते हैं। 

हमने कई लोगों को देखा है कि वे लोग फोन करते हैं कि हमने हमारे गुरु जी से फलां साधना ली है, हम कर रहे हैं लेकिन अनुभव नहीं हो रहे। 

हम बोले, कहां से अनुभव होंगे? तुमने तुम्हारे गुरुजी से साधना ली, पहला अनुष्ठान भी तुम्हारा कंप्लीट नहीं हुआ और तुमने हमें बता दिया। 

भाई क्यों बता रहे हो? मैं तुम्हारी साधना पर और गुरु पर तुम्हें विश्वास नहीं है तो सिद्ध कैसे होगी? उसने तो तुम्हारी पहले ही परीक्षा ले रखी और जब हमें बताया तो तुमने 10 और लोगों को फोन लगाकर बताया होगा।

 भाई, वो तो आपको कम से कम साधना के दो, चार, पांच, दस अनुष्ठान हों, उसके बाद भी आपको लग रहा है अनुभव नहीं हो रहा, जबकि मैंने अनुष्ठान अच्छे से किए हैं, सही मंत्र, नियम पालन करके किए हैं, उसके बाद भी कुछ नहीं हो रहा है, तब आप उसकी चर्चा करें किसी अन्य से, अपने गुरु से, अगर उसका समाधान नहीं हो रहा तो किसी अन्य गुरु से चर्चा करके उस संबंध में राय लें तो बात अलग है। 

चलती साधना में कभी किसी को नहीं बताना चाहिए। हम लोग जब साधना में बैठते हैं, हम किसी को नहीं बताते। पारिवारिक सदस्यों को भी मालूम नहीं होता कि हम क्या कर रहे हैं। वो लोग बस है कि ठीक है पूजा चल रही है, सामान्य पूजा चल रही है। नहीं पता होता कि कोई साधना चल रही है, कुछ चल रहा है। 

तो बहुत सारे लोग बखान कर देते हैं, सबके सामने बखान कर देते हैं। नहीं करना चाहिए। ऐसे में आप अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारते हैं, समय भी खराब होता है और साधना भी सिद्ध नहीं होती। 

फिर गुरु को दोष देते हैं, मंत्र को दोष देते हैं, साधना को दोष देते हैं और सनातन को दोष देते हैं। तो भाई, ना धर्म की गलती है, ना गुरु की गलती है, ना मंत्र की गलती है, गलती सभी आपकी है। आंख बंद करके यदि विचार करोगे कि क्या-क्या गलतियां की हैं, सब सामने आ जाएगी।

रंभा अप्सरा साधना एक दिवसीय प्रेमिका सिद्धि प्रयोग

चलिए विषय वस्तु पर आते हैं। प्रेमिका रूप में इसको सिद्ध किया जाता है, रंभा अप्सरा साधना है। आप इसको 11 दिन, 21 दिन जैसा करना चाहें वैसा कर सकते हैं। लेकिन एक दिन की साधना यह करनी चाहिए अगर आप इसके तत्व को, इसकी कृपा को जीवन में उतारना चाहते हो तो एक दिन की साधना भी इसकी की जा सकती है।

 

रंभा अप्सरा साधना हेतु सामग्री और तैयारी

 

किसी भी शुक्ल पक्ष के शुक्रवार को रात्रि 11 बजे के बाद की यह साधना है। गुलाबी वस्त्र, आसन, पूर्व या उत्तर मुखी हों। स्नान के पश्चात पुराने कोई वस्त्र या किसी को ना छुएं, सीधे गुलाबी वस्त्र धारण करके, आसन गुलाबी हो। 

बहुत से लोग कहते हैं साहब, आसन कहां से लाएं इतने कलर के? तो कोई बात नहीं, जो आसन हो उसके ऊपर गुलाबी कपड़ा बिछा लो। एक बाजोट सामने रखो जो आपकी नाभी से ऊपर हाइट हो, नहीं हाइट हो तो नीचे ईंट वगैरह लगा लो, कोई सामान लगाकर उसको हाइट दे दो। 

अब लोग बहुत से लोग पूछते हैं बाजोट क्या होता है? बाजोट मतलब लकड़ी का वह पटिया जिसके ऊपर सामग्री रखी जाती है। 

उसके ऊपर एक तांबे की प्लेट रखो और उसमें अप्सरा, रंभा अप्सरा सम्मोहन यंत्र को और अप्सरा माला को भी वहां पर भी कपड़ा बिछा देना है। प्लेट में एक अलग प्लेट में माला रखो, एक अलग प्लेट में यंत्र रखो।

 

रंभा अप्सरा साधना मंत्र और पूजन विधि

 

पहले अपना पवित्रीकरण, आचमन करो। घी का या चमेली के तेल का दीपक प्रज्वलित करो। इत्र खुद भी लगाना है चमेली का तो ज्यादा बढ़िया और अपने आसपास भी छिड़कें। हो सके तो एक माला खुद धारण कर लें, एक यंत्र के आसपास लपेट। यंत्र को स्नान करवा लें सामान्य जल से, उसके बाद कुमकुम, चावल, केसर, फल, अक्षत आदि से उसका पूजन करें। पूजन के पश्चात 51 माला मंत्र का जप करना है। मंत्र को नोट करिए, आगे की प्रोसेस बताते हैं:

यह संपुट बीज मंत्र है। 51 माला जप आपका मंत्र जप हो जाए, उसके बाद आपके बाएं हाथ या उल्टे हाथ में, लेफ्ट हैंड में यंत्र को दबा लें और खड़े होकर एकदम सामने दीवार हो तो दीवार पर त्राटक करते हुए, कोशिश करें त्राटक करने की, बहुत से लोगों को प्रैक्टिस नहीं, कर पाते। त्राटक करते हुए 15 मिनट तक फिर मंत्र जप करें और उसके बाद वापस यंत्र को उसके यथा स्थान रख दें।

 

रंभा अप्सरा साधना प्रयोग समाप्ति के बाद की प्रक्रिया

 

मिठाई का भोग लगाएं और प्रयोग समाप्ति जब आपकी हो जाती है उसके बाद 11 दिन तक उस माला को गले में धारण करके रखें। ग्यारहवें दिन रात्रि को या बारहवें दिन यंत्र और माला को पवित्र नदी, सरोवर, जल में विसर्जित कर दें। 

यह इसका रंभा अप्सरा सिद्धि का चमत्कारिक एक दिवसीय प्रयोग है। मंत्र जप तो एक ही दिन करना, बाकी माला धारण करना है, तो आप इसके लाभ ले सकते हैं। आप चाहें तो इस प्रयोग को कितने भी दिन आगे बढ़ा सकते हैं, 11 दिन, 21 दिन, 41 दिन, आपके ऊपर है।

 

निष्कर्ष और अन्य सेवाएं
 

चलिए आज के लिए इतना ही। जो लोग जीवन में विभिन्न समस्याओं से परेशान हैं लेकिन समझ में नहीं आया कि जीवन संघर्ष क्यों है, उन्हें अपनी कुंडली विश्लेषण या ऑरा स्कैनिंग जरूर करवानी चाहिए।

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Urvashi apsara sadhana -उर्वशी अप्सरा साधना – इस विधि से अप्सरा होंगी प्रत्यक्ष 100% PH.85280 57364

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जय गुरुदेव जय महाकाली आप सभी साधकों का गुरु मंत्र साधना की आपकी अपनी इस वेबसाइट पर स्वागत है। आज उर्वशी अप्सरा से संबंधित एक विशेष प्रयोग दे रहे हैं। बहुत अच्छा प्रयोग है, कोई बहुत बड़ा विधि विधान नहीं है, छोटा सा प्रयोग है लेकिन अप्सरा का सानिध्य और कृपा प्राप्ति होती है। इसमें अप्सरा के प्रत्यक्षीकरण के भी बहुत ज़्यादा चांस हैं कि आपको उसके प्रत्यक्षीकरण हो जाएं। अगर प्रत्यक्षीकरण नहीं भी होता है तो उसके सानिध्य की प्राप्ति आपको प्रतिक्षण होगी।

Urvashi apsara sadhana – उर्वशी अप्सरा साधना के लाभ

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जब कोई दैविक शक्ति आपके आसपास रहेगी तो आपके चेहरे का तेज, आपका बोलचाल की भाषा, आपकी सम्मोहन शक्ति बहुत अधिक प्रखर हो जाएगी और आपके कार्य सिद्ध होने लग जाएंगे। जिन कार्यों में बहुत रोड़े आते हैं वह सारे कार्य भी आपके सिद्ध होने लग जाएंगे और बिना सोचे जो चीज सोची नहीं है वह भी होगी।

 जो सफलता आपने कभी सोची भी नहीं है वह भी प्राप्त होगी। जब कोई दैविक शक्तियां आपके साथ में होती है तो असंभव को भी संभव कर देती है, असंभव को भी संभव कर देती है और भाग्योदय होता ही है।

Urvashi apsara sadhana Vidhi  उर्वशी अप्सरा

साधना की विधि

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ऐसी दैविक साधना को आपको जरूर करना चाहिए और क्योंकि इसको स्त्री पुरुष कोई भी कर सकता है, कोई बहुत बड़ा विधान नहीं है इसका, छोटा सा विधान है।

 1 –  Urvashi apsara sadhana उर्वशी अप्सरा साधना की – अवधि का चयन

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आप साधना कर सकते है 7 दिन, 11 दिन, 21 दिन या 41 दिन, इनमें से आप चयन कर लें आप कितने दिन की साधना करने में सक्षम हैं। जितने दिन ज्यादा करेंगे उतने अनुभव ज्यादा बढ़ेंगे। 

लेकिन अगर आपको लगता है कि आपने ज्यादा दिन की साधना नहीं कर सकते हो तो फिर 7 दिन का ही संकल्प लो क्योंकि साधना अगर बीच में तोड़ते हो तो खंडित होती है तो उसका भी दोष लगता है। तो इसलिए जो संकल्प लिया है जितने दिन का उतने दिन साधना पूरी करनी चाहिए और उतने दिन में चीजें कंप्लीट करनी चाहिए।

2 –  Urvashi apsara sadhana – उर्वशी अप्सरा साधना का समय और स्थान

तो इसको कैसे करना और कब करना है? तो जब भी शुक्ल पक्ष हो और शुक्ल पक्ष में पुष्य नक्षत्र आए, चाहे वो सोमवार से शनिवार रविवार तक किसी भी दिन में आ जाए, शुक्ल पक्ष होना चाहिए यानी उजाली के दिन। 

कैलेंडर में लिखा हुआ रहता है कृष्ण पक्ष शुक्ल पक्ष तो देख लेना और शुक्ल पक्ष में जब भी पुष्य नक्षत्र आए उस पुष्य नक्षत्र में आपको यह साधना करनी है। 

उस दिन रात्रि काल से साधना स्टार्ट करनी है। कहां करनी है? घर के एकांत कमरे में कर सकते हैं, आप छत पर अगर आपका बना हुआ है थोड़ा सा तो वहां पर कर सकते हैं, नदी के किनारे कर सकते हैं। अब जैसे नदी किनारे आप करते हैं तो फिर क्या होता है सामग्री रोज उठा के लानी पड़ती है।

3 –  Urvashi apsara sadhana उर्वशी अप्सरा साधना  में  प्रारंभिक
तैयारी और शरीर बंधन

 

आपको जब भी करें, किसी भी मंत्र से आप शरीर बंधन कर लें वरना इसी वेबसाइट के पुराने लेख में हमने विभीषण कृत साबर मंत्र दिया हुआ है, उस साबर मंत्र से भी आप शरीर बंधन कर सकते हैं, वह स्वयं सिद्ध है। फिर भी जब उसको नवरात्र आदि में एक-एक माला कर लेंगे नौ दिन तो वह और प्रभावी हो जाएगा। जब आप यह साधना करें तो उस मंत्र का प्रयोग किया जा सकता है तो उससे आपका शरीर बंधन हो जाएगा और फिर आप इस साधना को कर सकते हैं।

4 –  Urvashi apsara sadhana उर्वशी अप्सरा साधना विधि

 

इस साधना में आप उत्तर या पश्चिम मुखी होकर बैठें। ठीक है, इसमें सफेद वस्त्र आसन हो और सामने एक लकड़ी का पटिया हो उस पे भी सफेद कपड़ा बिछा दें। 

वहां पर उर्वशी अप्सरा यंत्र स्थापित करें। ठीक है, उर्वशी माला स्थापित करें या स्फटिक माला स्थापित करें, साथ में चार स्फटिक के दाने स्थापित करें, एक पान का बीड़ा स्थापित करें, सफेद फूलों की एक माला वहां पर रख दें यंत्र के ऊपर हम चढ़ाने के लिए, वो पूजन के बाद में चढ़ाएंगे और उसके साथ में मजमुहा या फिर आप गुलाब का इत्र वहां पर रख दें।

अब अपना पवित्रीकरण आचमन कर लें, उसके बाद में घी का दीपक अपने लेफ्ट साइड पर प्रज्वलित करें जिसमें लंबी बाती हो जो आपकी और मुंह करके हो। 

आप चाहे तो उसको यंत्र के और आपके ठीक बीच में भी स्थापित कर सकते हैं। इसके बाद में दीपक का पूजन करेंगे, पहले अपना पवित्रीकरण आचमन जरूर कर लें फिर दीपक का पूजन करेंगे और दीपक को प्रणाम करेंगे साक्षी भाव से कि हमारी साधना के आप साक्षी हैं।

इसके बाद में आप यंत्र को जल से स्नान करवाएं, दूध है तो उससे भी स्नान करवा दें, पुनः जल से कर दें, नहीं तो जल से भी करेंगे तो चलेगा। 

फिर कुमकुम केसर और कपूर तीन चीजें मिलाकर पहले से तैयार रखें, उनकी पहली बिंदी यंत्र के मध्य में लगाएं, मध्य बिंदु पे जहां पर संबंधित शक्ति वास करती है। उसके बाद उसके बाहरी आवरण पर बिंदु लगाकर उसको उसकी जगह पर स्थापित करें। माला की पूजा भी आप कर दें।

 उसके बाद में थोड़ा सा इत्र निकालें, यंत्र के और माला के आसपास इत्र को छिड़क दें, थोड़ा सा इत्र अपने ऊपर भी छिड़क लें, फिर इत्र को वापस रख दें। जो आपने माला ली है सफेद वो माला चढ़ा दें। 

एक दोने में कोई सा भी एक फल उनको अर्पित करें। ठीक है, इस प्रकार आप पूजन करेंगे। पान का बीड़ा भी उनको आप समर्पित करेंगे अर्पित करेंगे कि आप इसको स्वीकार करें।

5 –  Urvashi apsara sadhana  उर्वशी अप्सरा साधना – संकल्प विधि

इसके बाद में हाथ में जल लेकर आप संकल्प लेंगे अमुक नाम, अमुक गोत्र मैं उर्वशी अप्सरा सिद्धि निमित्त या दिव्य साधना का… देखो क्या होता है ना संकल्प का बहुत महत्व है। 

बिना संकल्प आपको अनुभव वगैरह भी उस टाइप से हो नहीं पाते हैं इसलिए संकल्प का बहुत महत्व है। तो संकल्प लें कि मैं अपना नाम गोत्र और उर्वशी अप्सरा सिद्धि प्राप्ति निमित्त, अप्सरा का सानिध्य प्राप्ति निमित्त, कृपा आशीर्वाद मार्गदर्शन प्राप्ति निमित्त मैं यह दिव्य साधना करने जा रहा हूं। ठीक है, इस प्रकार आप छोड़ दें।

 अगर आप उनको इष्ट रूप में करना चाहते हैं, मार्गदर्शक के रूप में करना चाहते हैं, अगर कोई प्रेमिका या पत्नी रूप में करना चाहता है तो फिर उस प्रकार से संकल्प ले सकता है कि मैं इन्हें इनका सानिध्य प्राप्ति निमित्त अमुक रूप में इनकी प्राप्ति निमित्त इनकी दिव्य साधना करने जा रहा हूं। बोल के जल छोड़ दें।

इस प्रकार आप इसमें आप यह भी बोल सकते हैं कि हे वरुण देव आपके माध्यम से और अग्नि देव की साक्षी में मैंने यह संकल्प लिया है, मेरा यह संकल्प अप्सरा तक आप पहुंचाने की कृपा करें। बोल के जल छोड़ दें।

6 –  Urvashi apsara sadhana उर्वशी अप्सरा साधना  में तिलक और मंत्र जाप

उसके बाद में आप देखो खुद का तिलक भी लगाना जरूरी है। जो त्रिगंध आपने तैयार किए कुमकुम केसर कपूर से, यंत्र पूजन के साथ अपन को भी लगाना है। दोनों अलग-अलग करके रखें, पहले अपना लगा ले तिलक फिर हाथ धोकर फिर आप यंत्र का पूजन करें, उसकी अलग रखें मतलब दो भाग में कर लें। 

ठीक है, अब दोनों ही हमने जगह बता दिया आपको कहां करना है। फिर क्या करना है? एक मंत्र आपको स्क्रीन पर दे रहे हैं, यह जो पहला वाला मंत्र है, इसको एक माला जप करना है उसी माला से। तो इससे पहले एक माला गणेश मंत्र और चार माला गुरु मंत्र का जप कर लें, आपने जो भी गुरु मंत्र है आपका जहां से भी दीक्षा ली है, उसके बाद में इस मंत्र का जप करें।

 मंत्र को भी नोट कर लें: तक्षम सर्वा सरस आगच्छागच्छ हुम। यह मंत्र है, इस मंत्र का एक माला जप करें। फिर जो आपने त्रिगंध तैयार की है, वह जो आपने चार स्फटिक के दाने रखे हैं उन पर भी तिलक करें। उसके बाद में उर्वशी अप्सरा का मंत्र नोट करिए: ॐ श्री उर्वशी आगच्छागच्छ स्वाहा । इस मंत्र की आप 51 माला जप करेंगे।

Urvashi apsara sadhana  उर्वशी अप्सरा साधना- काल के अनुभव

 इस प्रकार आप 7 दिन, 11 दिन, 21 दिन, 41 दिन का यह प्रयोग कर सकते हैं और इस साधना काल में आपको एक दिव्य महक आना, खुशबू आना, किसी का पास में होना, पीछे से हाथ लगा देना, इस टाइप की चीजें होती है तो डरने की बात नहीं है, यह तो अप्सरा का स्वभाव है, तो ये चीजें होती है।

Urvashi apsara sadhana उर्वशी अप्सरा साधना प्रत्यक्षीकरण और

सिद्धि

आप इस साधना को करें। अप्सरा अगर प्रकट होती है तो जो सफेद फूलों की माला आप क्योंकि इसमें जितने दिन करेंगे उतने दिन सफेद फूल की माला आपको लगेगी, किसी दिन अगर ना हो पाए तो फिर आप उसकी जगह अन्य फूल ले सकते हैं, गेंदा आदि फूल, गुलाब आदि फूल, तो उसी माला को आपको अप्सरा को पहनाना होता है जिससे वह आपके वश में होती है।

बाय चांस ऐसा नहीं होता है क्योंकि 90% टाइम तो ऐसा होता है कि अप्सरा सामने नहीं आती, आते हो गिने चुने 10% लोग हैं जिनको दर्शन होते हैं और उनमें से भी एकाध प्रतिशत होते हैं जिनको वचन होते हैं। 

तो आपको क्या करना है कि इसमें घबराने वाली बात नहीं है कि मेरे सामने नहीं आई तो मेरी साधना सिद्ध नहीं हुई। साधना तो सिद्ध होगी क्योंकि आपने संकल्प लिया और मंत्रो अधीन हो देवता, देवता मंत्र के अधीन है तो अप्सरा सिद्धि होगी ही होगी।

 बस यह है कि आप उसका प्रत्यक्षीकरण नहीं कर पाए। तो आप सतत साधना करते रहें, जैसे एक अनुष्ठान पूरा हुआ फिर अगले महीने अनुष्ठान ले लें या फिर एक-दो दिन छोड़ के फिर अनुष्ठान ले या फिर इसी अनुष्ठान को आगे बढ़ा दें।

 तो अवश्य ही अप्सरा के दर्शन, सानिध्य प्राप्ति या वचन होते हैं अगर आप उसको लंबे समय तक करें। ठीक है, जबकि एक ही अनुष्ठान में उसका सानिध्य अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त हो जाता है और आप उसके चमत्कार अपने जीवन में देखना शुरू कर देंगे।

Urvashi apsara sadhana  उर्वशी अप्सरा साधना  के नियम

अब इसमें नियम क्या है? इसमें नियम है ब्रह्मचर्य का पालन रखें, जमीन पर शयन करें, अपना बिछौना चद्दर वदर जो भी लगाना है लगा के। ठीक है, एक समय भोजन करें बिना लहसुन प्याज का, गुस्सा नहीं करना।

 मोबाइल वगैरह का कम उपयोग करें, किसी पर गुस्सा नहीं करें, किसी की बुराई चुगली ना करें, बेईमानी ना करें कहीं पे, इन सब चीजों का ध्यान रखें। यह तो नॉर्मल भी अपने जीवन में चीजें होनी चाहिए, साधना काल में तो होना ही चाहिए लेकिन सामान्य रूप से भी एक सही व्यक्ति के जीवन में यह सारे गुण होना चाहिए।

Urvashi apsara sadhana उर्वशी अप्सरा साधना के अंतिम प्रभाव

तो इस प्रकार अगर आप इस साधना को करेंगे अवश्य ही यह दिव्य साधना सिद्ध होगी और जीवन में चमत्कारिक अनुभव होंगे और जीवन में अनेक चमत्कार आपको दिखेंगे। जिस प्रकार गुलाब अपनी महक से आसपास के वातावरण को सुगंधित कर देता है, आप जहां भी जाएंगे आपका प्रभाव आसपास के वातावरण को दिव्य कर देगा, सम्मोहित कर देगा। 

आप जहां बोलना शुरू करेंगे लोग सम्मोहन के मारे एकटक होकर सुनते जाएंगे। तो यह इसके प्रभाव है और हर व्यक्ति चाहता है कि उसे ऐसा मान सम्मान मिले। 

 उसके लिए ऐसी दिव्य साधनाएं बहुत जरूरी है, चाहे वो आपके चेहरे पर तेज और सम्मोहन के लिए हो, चाहे दूसरों को वशीभूत करने के लिए हो, अपनी कार्य सिद्धि के लिए हो या अप्सरा का सानिध्य प्राप्त करने के लिए हो। तो इस साधना को अवश्य करें।

अन्य जानकारी एवं संपर्क

चलिए आज के लिए इतना ही।  guru mantra sadhna वेबसाइट पर तो हमने काफी सारे लेख दिए ही हैं इसके अलावा भी साधना के विभिन्न लेख जय महाकाली ज्योतिष केंद्र वाली वेबसाइट पर भी दिए गए हैं, आप उनको देख सकते हैं और उनसे संबंधित साधनाओं को करके अनेक लाभ उठा सकते हैं। 

जो लोग अपना कुंडली विश्लेषण या ओरा स्कैनिंग करवाना चाहते हैं, नीचे नंबर दिया गया है उस पर संपर्क कर सकते हैं। बातचीत का समय दिन में 12:00 से चार है, मैसेज वगैरह आप कभी भी कर सकते हैं। चलिए आज के लिए इतना ही। जय गुरुदेव जय महाकाली।  ph.85280 57364

महाविद्या त्रिपुर भैरवी साधन रहस्य Tripura Bhairavi Sadhana ph.85280 57364

महाविद्या त्रिपुर भैरवी साधन रहस्य Tripura Bhairavi Sadhana

 


 

महाविद्या त्रिपुर भैरवी साधन रहस्य Tripura Bhairavi Sadhana

महाविद्या त्रिपुर भैरवी साधन रहस्य Tripura Bhairavi Sadhana
महाविद्या त्रिपुर भैरवी साधन रहस्य Tripura Bhairavi Sadhana

महाविद्या त्रिपुर भैरवी साधन रहस्य Tripura Bhairavi Sadhana यह सवाल का जवाब जितने लोग दे पाएंगे, कोई भी दो लोगों को और मैं अपनी तरफ से एक छोटा सा वाउचर दूंगा, जितनी भी मेरी क्षमता है उसके हिसाब से मैं आप लोगों को दूंगा। गले में मुंडमाला धारण की। अब सवाल उठता है कि वह मुंडमाला है क्या? जितनी भी गुप्त योगिनियां हैं, उनकी अधिष्ठात्री देवी हैं।

 वो जो अंश अंदर गया, वो सूक्ष्म वाक् के रूप में स्थापित हुआ। तो हर पल त्रिपुर भैरवी की स्थापना, कितनी भैरवियां होंगी और वह कैसे स्थापित होंगी? जिस आमन में जो देवी स्थापित हैं, उनके अंडर में एक तंत्र है या ऐसा कह लीजिए उनके अंडर में कुछ तंत्र हैं और जितने भी तंत्र हैं, उनके उपतंत्र हैं। 

इनके मंत्र का जो हृदय है और जो अगली महाविद्या उनके मंत्र का जो हृदय है, वह सेम है और वह क्यों है, यह आपके कुल देवता के माध्यम से करते हैं।

 डीएनए से सुना होगा आपने, भाई एक ही डीएनए चला आ रहा है। अग्नि तत्व, हिरण्यगर्भा, सुंदरता, भुवन, लय और फिर वापस से। फिर आप बोलेंगे तो साइकिल कंप्लीट हो गई, पर बाकी महाविद्या कहां से? वहां पर अब शुरू होता है असली शो।

राम-राम, नमस्ते। मैं आज रात को यह लेख लिख रहा हूं क्योंकि दिन में क्या है कि यहां पर बहुत सारा शोर आता है, तो मैं लिख नहीं पा रहा था और कुछ व्यस्तता के कारण अब शायद मैं कुछ दिनों तक लिख नहीं पाऊंगा। 

इसलिए मैं एक साथ दोनों लेख यहीं पर बना रहा हूं। नवरात्र का समय है, चैत्र नवरात्र शुरू हैं, तो हमारी जो श्रृंखला थी 10 महाविद्या की, उसी को आगे बढ़ाते हैं और आज हम बात करेंगे पांचवी महाविद्या की, जो कि त्रिपुर भैरवी हैं।


 

पिछली महाविद्याओं का संक्षिप्त पुनरावलोकन

 

हमने क्या देखा ? जब कुछ नहीं था, सब कुछ काला था, काली। फिर हिरण्यगर्भा, पहला हिरण्य गर्भ, अग्नि तत्व, उसकी उत्पत्ति, मातारा। फिर हमने देखा कि कैसे इन तीन पुरों में सुंदरता को व्यक्त किया गया। उसके बाद हमने देखा कि कैसे भुवन तैयार हुआ, उस भुवन की अधिष्ठात्री देवी भुवनेश्वरी, जो सभी भुवनों को धारण करती हैं और सभी भुवनों का निर्माण करती हैं। अब भुवन तो निर्माण हो गए, अब आगे क्या?


 

त्रिपुर भैरवी : नित्य लय की अधिष्ठात्री देवी

 

तो जब कोई भी चीज का निर्माण होता है, तो उसका लय भी होता है। विनाश उचित शब्द नहीं है यहां पे, लय होता है। तो लय बहुत किस्म से होते हैं। एक होता है जो पूर्ण रूप से सर्वत्र हो और एक होता है नित्य हो। तो जो नित्य लय होता है, उसकी देवी हैं त्रिपुर भैरवी।

 जैसे त्रिपुर सुंदरी तीन पुरों की सुंदरता को धारण करती हैं, वैसे ही त्रिपुर भैरवी तीन पुरों के भय को। रव है, नित्य जितने भी लय हैं, इनके आदेश के बगैर या यह कह लीजिए कि इनके बगैर नहीं होते। यही उस नित्य लय की अधिष्ठात्री देवी हैं।

 

त्रिपुर भैरवी साधन के विभिन्न रूप

 

भैरवी के बहुत रूप हैं। अन्नपूर्णा भैरवी हैं, भुवनेश्वरी भैरवी हैं, सकल सिद्धिदा भैरवी, कालेश भैरवी, रुद्र भैरवी हैं, कामेश्वरी भैरवी हैं, नित्या भैरवी हैं। बहुत सारी भैरवी हैं। कैसे? जितने भैरव हैं, उतनी भैरवी हैं। 64 भैरव हैं, 64 भैरवी हैं। 

32 भैरव हैं, 32 भैरवी हैं। अष्ट भैरव हैं, अष्ट भैरवी हैं। आप जिस परंपरा में, जिस व्याख्या के अनुसार भैरव को रखेंगे, उसी व्याख्या के अनुसार भैरवी भी स्थापित हो जाएंगी क्योंकि वह भैरवी ही भैरव की शक्ति है।

जैसे हमारे शरीर में रक्त की कोशिकाएं बनती हैं और बिगड़ती हैं, तो जहां-जहां जैसे जब तक आपके शरीर में रक्त है, काली स्थापित हैं, उस रक्त का पान निरंतर करती रहती हैं। 

 जब तक इस दुनिया में रक्त है, तब तक काली हैं। जैसे ही आपकी कोशिकाएं खत्म हुईं, तो उस कोशिका को खत्म करने की जो अधिष्ठात्री देवी हैं, वह त्रिपुर भैरवी हैं। नित्य लय, हर एक क्षण में, हर एक वस्तु में, हर एक अवस्था में।


 

त्रिपुर भैरवी का स्वरूप और विवाद

 

एक बहुत इंपॉर्टेंट चीज है कि त्रिपुर भैरवी का जो रूप है, वह अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग तरीके से बताया गया है, तो वहां पर काफी डिस्प्यूट है। अब कहीं बताया गया कि भई वह अरुण वस्त्र में हैं, लाल वस्त्रों में हैं और आभा उनकी बहुत ही चमकदार है, रक्त चंदन का स्तनों पर लेप करती हैं, गले में मुंडमाला है। मुंडमाला उनकी जितने भी रूप हैं। 

 सभी रूपों में दिया गया है। कहीं पर वस्त्र के साथ हैं, कहीं पर वस्त्र के बिना। त्रिपुर भैरवी का जो एक्चुअल रूप है, मतलब मैं किसी धारणा की और किसी किताब की बात नहीं कर रहा हूं, पर जो त्रिपुर भैरवी का एक्चुअल रूप है, वो अगर आप उस पद्धति से या उस विधि से देखें, तो वह काली की तरह ही होना चाहिए। 

विवस्त्र, में पुस्तक रखी गई है, अक्षमाला रखी गई है, अभय मुद्रा और वर मुद्रा तो होती ही है। बट मुझे ऐसा लगता है कि जितनी भी भैरवियां हैं, सबके अलग-अलग रूप हैं क्योंकि अलग-अलग मंत्र। तो जब मंत्र बदलते हैं, तो अधिष्ठात्री देवता का स्वरूप भी बदलता है। 

अन्नपूर्णा भैरवी रुद्र भैरवी की तरह नहीं दिखती होंगी। रुद्र भैरवी कभी भी नित्या भैरवी की तरह नहीं दिखती होंगी। नित्या भैरवी कभी भी कामेश्वरी भैरवी की तरह नहीं दिखती होंगी। इनका सबका रूप अलग-अलग है और ये सब लय कर रहे हैं किस-किस स्थिति में, यह बहुत डिटेल विषय है।


 

त्रिपुर भैरवी मुंडमाला का रहस्य: 50 वर्ण और शब्द ब्रह्म

 

तो भैरवी जो हैं, वह गले में मुंडमाला धारण की हुई हैं और यह मुंडमाला वाली बात सभी प्रकार के रूपों में बोला गया है, व्याख्या हुई है। अब सवाल उठता है कि वो मुंडमाला है क्या? मैंने आपको बताया था, त्रिपुर सुंदरी जो हैं, शशि जब वह सुंदरता को व्यक्त करती हैं, तो वह शब्दों के रूप में करती हैं।

 इसे हम शब्द ब्रह्म कहते हैं और वह शब्द ब्रह्म इन 50 मातृकाओं से निर्मित होते हैं, जो 50 मातृकाएं अ से लेकर क्ष तक हैं, जिनसे अक्षर बनते हैं। अ क्ष अक्ष से लेकर क्र में अग्नि तत्व, प्रज्वलित जो तत्व है, जिसके कारण उस सुंदरता का व्याप्त होना, प्रकट होना पॉसिबल हुआ है। तो जो अक्षरों से वह इस सुंदरता को व्यक्त करती हैं। 

 भुवन, भुवनेश्वरी इस भुवन को बनाती हैं, उन अक्षरों को धारण करते हुए, उन्हीं अक्षरों का लय करते हुए त्रिपुर भैरवी स्थापित रहती हैं। तो क्योंकि जिन अक्षरों का वह लय कर रही हैं, वह भी 50 हैं, तो जो मुंडमाला है, वह भी 50 वर्णों की ही होगी।

अब इस वर्णमाला में एक भेद है, बहुत, बहुत ही इंटरेस्टिंग सा भेद है। अ से लेकर अः तक जो हमारे 16 स्वर हैं, वे 16 भैरव हैं। उनकी अभिव्यक्ति भैरव के रूप में की गई, जो कि 16 कला मैंने आपको पहले बताया था। और क से लेकर क्ष तक जो वर्ण हैं, वह भैरवी हैं। वह पुरुष है, यह प्रकृति है। क से लेकर क्ष तक व्यंजनों को योनि कहा गया है।

 

सूक्ष्म वाक् और भैरवी की स्थापना

 

यह जो 50 मातृकाओं का उन्होंने ह्रास करने के बाद, उस 50 मातृकाओं की मुंडमाला को धारण करती हैं। यह सूक्ष्म वाक् के रूप में धारण करती हैं। जैसे मैंने बताया था, चार वाणियां हैं: परा है, पश्यंति है, मध्यमा है, वैखरी है। वैखरी लोकल भाषा में बोली जाती है। 

तो जो वैखरी वाणी है, उस वैखरी वाणी में वह स्वर अभिव्यक्त हुए, पर उस वैखरी वाणी जब वह बाहर गई, तो उसका एक अंश अंदर भी गया और वह जो अंश अंदर गया, वह जो अंश अंदर गया, वह सूक्ष्म वाक् के रूप में स्थापित हुआ। तो हर पल त्रिपुर भैरवी की स्थापना होती रहती है, ताकि वह नित्य लय कर सकें आपके शरीर में, इस प्रकृति में, हर एक तत्व में।


 

मां ललिता की रथ वाहिनी और गुप्त योगिनियों की अधिष्ठात्री

 

एक और बहुत इंटरेस्टिंग बात है इनकी, जो त्रिपुर भैरवी हैं, वह मां ललिता की रथ वाहिनी, मां ललिता की रथ वाहिनी हैं, रथ को वो चलाती हैं। और जितनी गुप्त योगिनियां हैं, जितनी भी गुप्त योगिनियां हैं, उनकी अधिष्ठात्री देवी हैं। कुछ-कुछ ग्रंथों में, कहीं-कहीं पर इनके जो भैरव हैं, वह काल भैरव कहे गए हैं दक्षिणामूर्ति रूप में।

 अब काल भैरव क्यों कहे गए? इनको कालरात्रि का स्थान दिया गया है। जैसा मैंने आपको बताया था, जो हमारी 10 महाविद्या हैं, वह चार त्रियों में विभाजित की हुई हैं: महाविद्या, महामाया, महामेधा, महास्मृति, महामोहा च भवती, महादेवी, महासुरी, प्रकृतिस्त्वं च सर्वस्य गुणत्रयविभाविनी। कालरात्रि, महारात्रि, मोहारात्रि च दारुणा। चार रात्रियां। इनको कालरात्रि कहा गया है।

 

पाठकों के लिए एक सवाल: चार रात्रियां

 

कालरात्रि में तीन देवियां हैं: कालरात्रि, महारात्रि, मोहारात्रि। इन तीनों में, इन तीनों कैटेगरी में कौन-कौन सी देवियां हैं, यह सवाल का जवाब जितने लोग दे पाएंगे, अगर ज्यादा लोग देंगे, तो जस्ट रैंडम लॉटरी से पिक करूंगा, कोई भी दो लोगों को और मैं अपनी तरफ से एक छोटा सा वाउचर दूंगा, जितनी भी मेरी क्षमता है उसके हिसाब से मैं आप लोगों को दूंगा। 

और ऐसे अब मैं और भी सवालों की सीरीज चलाऊंगा, मतलब पांच सवाल होंगे और पांचों सवाल के जो पांचों सही जवाब देगा, उस इंसान को, वह कोई पुरुष भी हो सकता है, कोई महिला भी हो सकती है, उस इंसान को मैं अपनी तरफ से एक वॉच… ऐसे दो लोगों को चूज करूंगा, उनको एक वाउचर दूंगा, जो भी होगा छोटा-मोटा, जो भी मेरी क्षमता में होगा। 

तो यह सवाल रहा कि कालरात्रि, महारात्रि, मोहारात्रि में कौन-कौन सी देवियां हैं? क्योंकि दारुणा रात्रि तो वैसे भी सबको पता ही है कि उसमें एक ही देवी है। 

तो जो बची हुई देवियां हैं, उनकी कैटेगरी आप बताइए। तो जो और सटीक, एक बार में सटीक जवाब देना होगा, ट्रायल-एरर नहीं चलेगा कि आज बोल दिया, फिर कल बोल दिया, ना। जिस लेख में कहा, एक ही बार में जवाब आना चाहिए और उस समय काल के अंतराल के अंदर आना चाहिए। ऐसा ना हो कि वो क्रॉस कर जाए, फिर आप जवाब दे रहे हैं।


 

काली, त्रिपुर सुंदरी और त्रिपुर भैरवी का कार्यक्षेत्र

 

अच्छा, अभी देखिए क्या होता है। जहां-जहां पर, जहां-जहां पर रक्त है, वहां-वहां पर काली हैं। जहां-जहां पर सुंदरता है, वहां-वहां पर त्रिपुर सुंदरी शोडशी हैं। जहां-जहां पर नित्य लय होता है, वहां-वहां पर त्रिपुर भैरवी हैं। यह मुख्य देवी हैं। 

अब ये देवी, लय तो सब, सब जगह हो रहा है, सर्वत्र हो रहा है, हर एक वस्तु में हो रहा है, उस प्रकृति में, तो कितनी भैरवियां होंगी और वो कैसे स्थापित होंगी? देखिए, जितने भी आमन हैं, सभी आमन में एक देवियां स्थापित की गई हैं। 

जिस आमन में जो देवी, इस पर मैं एक लेख दूंगा बहुत डिटेल में। जिस आमन में जो देवी स्थापित हैं, उनके अंडर में एक तंत्र है या ऐसा कह लीजिए उनके अंडर में कुछ तंत्र हैं और जितने भी तंत्र हैं, उनके उपतंत्र हैं। त्रिपुर भैरवी इन सब की अधिष्ठात्री हैं।

 

कुल देवता और डीएनए: लय की प्रक्रिया

 

बहुत ही रहस्यमय देवी हैं, जैसा मैंने बताया कि इनका रूप मल्टीपल जगहों पर, मल्टीपल तरीके से दिया गया है। अस्त्र भी लोगों ने बदल दिए हैं। पर यह मेरी धारणा, मेरे अनुसार, वे विवस्त्रा हैं, मुंडमाला गले में है और बहुत ही रौद्र रूप है इनका, कालरात्रि हैं। 

अब सवाल उठता है कि यह जो नित्य लय करते हैं, यह देवियां डायरेक्टली करती हैं क्या? नहीं, यह आपके कुल देवता के माध्यम से करते हैं। डीएनए से सुना होगा आपने, भाई एक ही डीएनए चला आ रहा है, है ना ? वह जो सिंगल सेल है, आरएनए स्ट्रक्चर है, वह कैसे काम करता है? कुल, आपके पित्रों के थ्रू। 

तो जो कुल की देवी हैं, उन देवी के माध्यम से। अच्छा, इसमें भी बहुत सारे अलग-अलग चेन हैं, बहुत डिटेल टॉपिक है, इस पर भी मैं आगे एक लेख दूंगा। नित्य जितने भी तने भी लय की जा रही है, यह इसी तरीके से की जा रही है।


 

त्रिपुर भैरवी के मंत्र और उनका रहस्य

 

एक बहुत इंटरेस्टिंग सी बात इनके, इनके मंत्र। एक तो इनके मंत्र 17-अक्षरी होते हैं क्योंकि अगर कम अक्षरों का मंत्र दिया जाए, तो उसकी क्षमता, उसकी एनर्जी बहुत ज्यादा होगी। तो आमतौर पर इनके जो मंत्र हैं, वह 17 अक्षरों का होता है या 19 अक्षरों का होता है।

 इनके मंत्र का जो हृदय है और जो अगली महाविद्या हैं, उनके मंत्र का जो हृदय है, वह सेम है। और वह क्यों है, यह मैं आपको तब बताऊंगा जब मैं अगली महाविद्या पर बात करूंगा, तो मंत्र का हृदय होता है, यह इस पर भी अगर आप चाहें तो मैं आगे एक लेख दूंगा। बट जो हृदय है, इन दोनों का सेम है और इन दोनों को एक पर्टिकुलर नाम से बुलाया जाता है, 

एक और, अच्छा यह वीर रात्रि में आती हैं, यह कालरात्रि भी हैं और वीर रात्रि भी हैं, एक और बात थी जो कई जगहों पर शास्त्रों में मेंशन है, जिसको मैं थोड़ा सा खंडन करता हूं कि इनको एक ही तरीके से एक ही जगह पर स्थापित किया गया है। 

जैसे कि मैंने बताया कि काल भैरव इनके भैरव हैं, पर यह बहुत रहस्यमय देवी हैं, एक जगह पर स्थापित नहीं होती हैं। इनकी स्थापना अलग-अलग रूपों में होती है और इनके भैरव भी बदलते हैं। जैसे मैंने बताया, बहुत सारी भैरवी। लेकिन कब बदलते हैं, इसका कहीं भी विवरण नहीं है। यह साधना का विषय है।

 

राहु और केतु: त्रिपुर भैरवी के मुख्य साधक

 

इनके जो मुख्य साधक हुए, वे राहु और केतु हैं। अब आप खुद ही समझ लीजिए, कितनी मायावी हैं ये। इनके मुख्य जो साधक रहे हैं, वह केतु और राहु रहे हैं। राहु-केतु के बारे में तो आपको पता ही होगा। अब वो कथा तो कहकर कोई फायदा नहीं क्योंकि कथा का लाभ तो आप कहीं से भी ले सकते हैं, वो तो बहुत इजीली अवेलेबल है।


 

सृष्टि-स्थिति-लय का चक्र और अगली महाविद्या

 

तो मैंने आपको बहुत पहले एक बात बताई थी कि जो भी, जो भी लय होता है, वह एक, जैसे सृष्टि है, फिर स्थिति है, फिर लय है और यह साइकिल है, चलता रहता है, है ना? तो जो नित्य, तो नित्य सृष्टि भी होगी। तो मतलब जैसे ही लय हुआ, वैसे ही वापस से वही सेम प्रोसेस शुरू हो गई। 

वही अग्नि तत्व, हिरण्यगर्भ, सुंदरता, भुवन, लय और फिर वापस सेम। फिर आप बोलेंगे तो साइकिल कंप्लीट हो गई, फिर बाकी महाविद्या कहां से हैं? वहां पर अब शुरू होता है असली शो। यहां तक तो ठीक है, अब शुरू होगा इसके बाद असली शो।

 

त्रिपुर भैरवी श्रोताओं के लिए संदेश और कुछ
महत्वपूर्ण बातें

 

तो आपके बहुत सारे सवाल थे, अब मैं इस लेख में सवाल तो नहीं ले रहा हूं। इसको मैं यहीं पर विराम देता हूं और आपसे अब कुछ एक-दो विषयों पर बात करूंगा, यहीं बैठे-बैठे लिख रहा हूं इसके, इस लेख के बाद। और लेखों को आप पूरा पढ़ें। 

जैसे मैंने आपको बताया, अगर आपने इस वेबसाइट को फॉलो नहीं किया तो करिए क्योंकि उससे आपको नोटिफिकेशन मिलेगी नए लेख कब आ रहे हैं। और आप लेख पूरा पढ़ेंगे तो आपको बहुत सारे सवालों के जवाब स्वतः मिलेंगे। कोशिश करिए कि एकांत में या शांत वातावरण में पढ़ें ताकि डिस्टरबेंसस ना हों। 

आपको कोई डिस्टरबेंस बीच में होगी तो आप शायद पॉइंट मिस कर जाएंगे। बहुत फोकस के साथ पढ़ें और समय जब हो, तब आराम से पढ़ें। ऐसा कोई नहीं है कि आपको अभी, आज लेख आया तो आज ही पढ़ना है। 

गर आपको बहुत ज्यादा इंटरेस्ट आ रहा है उसमें, तो आप उसका पूर्ण लाभ लें, इसलिए आप ध्यान से, बहुत फोकस के साथ पढ़ें जब भी आप स्थिति में बैठकर पढ़ पाएं,

 एक और बात है कि बहुत सारे लोग मेल लिखते हैं, मैं जवाब देने में थोड़ा लेट हो जाता है क्योंकि व्यस्त होने के कारण कई बार मैं देख नहीं पाता हूं मेल, तो थोड़ा क्षमा करिएगा उस चीज के लिए। 

और कई बार मैं जल्दी-जल्दी में कुछ ऐसा रिप्लाई भी लिख दूंगा जो शायद मुझे ही बाद में लगा कि मैंने पूर्ण रिप्लाई नहीं था क्योंकि मुझे नहीं लगता किसी को वेट कराना अच्छा नहीं लगता है। पर हो सकता है कि मैं आपको किश्तों में आंसर दूं, बाद में कभी। 

अगेन, मैंने कहा ना कि अगर मेरे को समय रहा तो मैं जरूर उस चीज को करूंगा। चलिए, एक और बात आपसे बस बोल देता हूं कि 10 महाविद्याओं की जो यह सीरीज है, यह कंप्लीट नहीं है। 

क्योंकि मैं बहुत शॉर्ट में आपको बता रहा हूं चीजों को लेकर, बहुत, बहुत ही बेसिक सा वो दे रहा हूं। बाद में मैं और डिटेल में आऊंगा वन बाय वन क्योंकि अभी डिटेल देने का प्रश्न इसलिए नहीं उठता क्योंकि इंट्रोडक्टरी है ये।

 मतलब आप बस जानिए उस चीज को। बहुत स्पेसिफिक मंत्र का एक्सप्लेनेशन और वह सब चीजें मैं अभी नहीं कर रहा हूं। वो मैं बहुत बाद में करूंगा। 

जो सवाल है, वह आप मुझे मेल करके लिखिए, कमेंट पे नहीं क्योंकि एक जन ने कमेंट लिखा, दूसरा उसको पढ़ के… तो मेल पर लिखना उचित है, बाकी आपकी इच्छा है। 

आप अगर मेरी बात ना सुनकर कमेंट पर लिख रहे हैं, तो उसका भी सम्मान करूंगा मैं। पर यह आपका ही नुकसान है क्योंकि फिर आपका अगर आंसर सही हो और आपको देख के किसी ने बोल दिया, तो फिर तो दो लोग, दो उम्मीदवार हो गए उस वाउचर के। चलिए फिर, आज्ञा लेता हूं आपसे और दोबारा आपसे मुलाकात होगी। नमस्ते, राम-राम।

श्री हरिद्रा गणेश साधना पूजा के लाभ और क्यों करना चाहिए ?

श्री हरिद्रा गणेश साधना पूजा के लाभ और क्यों करना चाहिए ?

श्री हरिद्रा गणेश साधना पूजा के लाभ और क्यों करना चाहिए ?

श्री हरिद्रा गणेश साधना पूजा के लाभ और क्यों करना चाहिए ?
श्री हरिद्रा गणेश साधना पूजा के लाभ और क्यों करना चाहिए ?

ॐ गं गणपतये नमः। हरिद्रा गणेशाय नमः।

Haridra Ganesh Sadhana आज का जो विषय है, वह है श्री हरिद्रा गणेश पूजा-साधना के लाभ और क्यों करनी चाहिए हरिद्रा गणेश की साधना।  श्री हरिद्रा गणेश की साधना के लाभ और क्यों करना चाहिए हरिद्रा गणेश की साधना ? देखो, सबसे पहली चीज क्या है, हरिद्रा गणेश की साधना। भई, भगवान श्री गणेश के अलग-अलग रूप हैं, ठीक है ना? भगवान श्री गणेश के अलग-अलग रूप हैं, लेकिन अगर आप हरिद्रा गणेश जी की साधना करते हैं तो सर्वप्रथम यह गणपति, हरिद्रा गणपति, मां बगलामुखी के पुत्र स्वरूप गणपति माने जाते हैं

 

माँ बगलामुखी का आशीर्वाद और तेज बुद्धि

 

हरिद्रा गणेश, हरिद्रा मतलब हल्दी और मां का एक नाम पीतांबरा। मां को पीला रंग और हल्दी बहुत प्रिय है, तो भगवान श्री गणेश की अगर हरिद्रा रूप में हम पूजन करते हैं तो सर्वप्रथम मां बगलामुखी का आपको आशीर्वाद प्राप्त होता है।

भगवान श्री गणेश से बुद्धि आपकी बहुत प्रखर हो जाती है, बहुत तेज हो जाती है। यानी कि जैसे सामने वाला व्यक्ति आपसे कुछ बात कर रहा है या आप कहीं कोई व्यापार कर रहे हो, नौकरी कर रहे हो, काम कर रहे हो, तो आपकी बुद्धि के अंदर वो चीज आएगी जो आप अपनी वाणी से बोलेंगे, जो आपको सफल बनाएगी।

 

धन, मान-सम्मान और आध्यात्मिक उन्नति

 

 जब बुद्धि अच्छी होती है और जब वाणी अच्छी होती है तो धन के रास्ते बेहतर हो जाते हैं क्योंकि जो ज्योतिष के अंदर जो गले का स्थान होता है, यह द्वितीय स्थान माना जाता है, उसको कुटुंब का स्थान माना जाता है, इसको परिवार का स्थान माना जाता है, मुख्यतः आपके धन का स्थान माना जाता है।

तो हरिद्रा गणेश जी की साधना करने से जब आपकी बुद्धि अच्छी होगी, प्रखर होगी और उसके संग-संग जब आप जो है, अच्छा बोलेंगे, आपका कंठ का स्थान यानी कि कुंडली के अंदर दूसरा घर आपका जब एक्टिवेट होगा, तो आपके परिवार के लोग, आपके आसपास के लोग आपका सहयोग करेंगे, आपका काम बढ़ेगा और आपका धन बढ़ेगा।

जब बुद्धि अच्छी होगी, वाणी अच्छी होगी, धन की मात्रा आगे बढ़ेगी तो आपका मान-सम्मान, प्रतिष्ठा स्वयं बढ़ जाएगी। और जब व्यक्ति का मन शांत होता है, बुद्धि स्थिर होती है, प्रबल होती है, धन का आगमन आपकी जरूरत के अनुसार  होता रहता है,  आपका जो विश्वास है, आध्यात्मिक  हो जाता है।

 जब आप आध्यात्मिक हो जाते हैं तो ईश्वर भी आपकी जरूरतों को, जैसे भौतिक उन्नति को बढ़ाता है। और जब भौतिक उन्नति बढ़ती है तो आपके जीवन में सुख बढ़ता है, पारिवारिक सुख बढ़ता है और सकारात्मक विकास होता है

साधना का सार

तो इसलिए हमें हरिद्रा गणेश की आराधना करना चाहिए। अगर आप चाहते हो जीवन के अंदर कि मां बगलामुखी का आशीर्वाद आप पर बरसता रहे, उत्तम वाणी हो, उत्तम बुद्धि हो, मान-सम्मान-प्रतिष्ठा बढ़े, आध्यात्मिक ज्ञान बढ़े, भौतिकता की जो जरूरत की चीजें हैं।  वो आपको प्राप्त होती रहें, सुखी दांपत्य जीवन, सुखी पारिवारिक जीवन, सुखी सकारात्मक सोच का विकास हो, तो उसके लिए हरिद्रा गणेश की आराधना करना अति आवश्यक है।

 

ज्योतिषीय दृष्टिकोण: ग्रहों पर प्रभाव

 

आप बुद्धि के देवता भगवान श्री गणेश को बोला जाता है और मैं आपको यहां पर ज्योतिष का, अध्यात्म के संग में थोड़ा एस्ट्रोलॉजी की बात यहां पर आपको मैं बताना चाहूंगा कि भगवान श्री गणेश की पूजा कर रहे थे, सबसे पहली चीज क्या है कि कुंडली के अंदर जो आपके केतु ग्रह होते हैं, जो राहु ग्रह होते हैं, वो पॉजिटिव होने लगते हैं, साथ ही साथ बुध ग्रह पॉजिटिव हो जाते हैं।

गुरु ग्रह की विशेष कृपा

 

लेकिन यहां पर हरिद्रा गणेश की पूजा हो रही है यानी हल्दी स्वरूप गणेश की पूजा हो रही है तो आपके गुरु ग्रह भी अच्छे हो जाएंगे। तो अब आप यह देखिएगा कि भगवान श्री गणेश की आराधना करने से सबसे पहले क्या है कि  केतु यानी कि भ्रमजाल यानी आपके मन में जो भ्रम पैदा होता है, जो अचानक आपके जीवन में परिवर्तन होता है, तो उस पर आपका कंट्रोल होने लगता है, आप कंट्रोल करने लगते हो।

उसके बाद राहु जो आपको भ्रमित भी करता है और अचानक समस्या लाकर खड़ा कर देता है, तो वो भी पॉजिटिव होकर आपका सहयोग करने लगता है।

आपकी कुंडली के दो ग्रह हो गए। तीसरे नंबर पर वाणी का, क्रिएटिविटी का, नॉलेज का जो ग्रह है बुध, वो आपको सहयोग करने लगता है भगवान हरिद्रा गणेश की साधना से।

 उसके बाद में भगवान श्री गणेश का पीतांबरा स्वरूप होना यानी क्या होता है कि देव गुरु बृहस्पति जो आपकी कुंडली के अंदर हैं, वह पॉजिटिव हो जाते हैं

 जैसे वह पॉजिटिव होते हैं, सकारात्मक होते हैं, तो देव गुरु बृहस्पति संतान के, अध्यात्म के, सुख के, ऊंचाइयों के, स्वर्ण के, देवत्व के, पितरों के, गुरु के स्वरूप माने जाते हैं, तो वो आपकी कुंडली में इन सब चीजों का सकारात्मक प्रभाव देने लगते हैं, आपको प्राप्त होने लगती हैं।

निष्कर्ष

नेक्स्ट  भगवान श्री गणेश की, हरिद्रा गणेश की किस प्रकार से मंत्र जाप किया जाएगा, बहुत आसानी से कर सकते हैं, उस विषय में चर्चा करेंगे। आज की चर्चा यहीं समाप्त करते हैं।

आशा करता हूं post  आपको पसंद आई होगी। कुंडली विश्लेषण, कुंडली मिलान, किसी मुहूर्त की जानकारी के बारे में और ऑरा स्कैनिंग के लिए आप संपर्क कर सकते हैं। जय माता दी।

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बगलामुखी साधना रहस्य Baglamukhi Sadhna Rahsya

 

मां बगलामुखी: पूजा, मंत्र जप और साधना रहस्य का खजाना

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बगलामुखी साधना रहस्य Baglamukhi Sadhna Rahsya

सबसे पहले आप मां बगलामुखी के बारे में बताइए।  चमत्कार! पॉलिटिशियन, फिल्म स्टार्स, मूवी स्टार्स, ये मां बगलामुखी के टेम्पल पे बहुत रेगुलरली जाते हैं। इतनी पावर आती है उस टेम्पल में जाके, मतलब वहां पर जाकर आप बाकायदा फील करेंगे कि ये मंदिर की जो एनर्जी है, जो मां बगलामुखी की एनर्जी है, वो एक ऐसी एनर्जी है कि अगर उनकी एनर्जी का एक अंश भी हमारे साथ मिल जाए तो हम बिल्कुल अनबीटेबल हो जाएंगे।

मां बगलामुखी की जो पूजा कर ले या फिर जिससे प्रसन्न हो जाएं मां बगलामुखी, उसका कोई शत्रु नहीं रहता। बिल्कुल। और देखिए, आप बहुत युगों से इनकी पूजा चली आ रही है। रावण का जो बेटा था मेघनाद, उसने मां बगलामुखी को साधने का सोचा।

मां बगलामुखी  को  कैसे प्रसन्न करें ?

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मैं अपनी ऑडियंस के साथ एक उपाय आज शेयर करूंगा । जब हम बगलामुखी माता के मंदिर भी जाते हैं तो वहां पे गुप्त पूजा होती है। ये तो पॉसिबल नहीं है आज की दुनिया में कि लोगों के दुश्मन ना हों और ये भी पॉसिबल नहीं है कि वो दुश्मन आपका कुछ ना करे।

हम सतयुग में नहीं रह रहे। बिल्कुल। कि अगर एक दैविक शक्ति आपके साथ है तो आपका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, वो है मां बगलामुखी की पावर। जिनके ऊपर कुछ कराया गया है, अगर वह मां बगलामुखी के टेम्पल में जाएं तो उनको बहुत फायदा होगा। बेस्ट टाइम कौन सा है,

कब मां बगलामुखी  साधना  की पूजा करना ?

 

 

 महाविद्याओं पर, उसमें आज जिस महाविद्या पर हम बात करेंगे वह है मां बगलामुखी। मां बगलामुखी को कहा जाता है शत्रुओं का नाश करने वाली, तंत्र मंत्र अगर आपके ऊपर किसी ने किया है तो उसका नाश करने वाली देवी।

यानी कि अगर आप किसी भी तरीके के संकट में हैं तो मां बगलामुखी की पूजा अगर आप करते हैं, उनको प्रसन्न आप कर लेते हैं तो सारी मुसीबत आपके ऊपर से खत्म हो जाती है।

यह मां जितनी सौम्य हैं, यह उतनी ही क्रोध में भी आ जाती हैं जब उनके भक्त पर कोई उंगली भी रख देता है।  हम एक सीरीज कर रहे हैं दश महाविद्याओं पर, उनके साथ आपको आज के पॉडकास्ट में बताएंगे मां बगलामुखी के बारे में।

तो चलिए,  आप तैयार हो जाइए और सीधे हम आपको मिलवाते जो सीरीज हम कर रहे हैं दश महाविद्या पर और वह और आगे बढ़ गई है और आगे बढ़ते हुए अब बगलामुखी की आज हम बात करेंगे। मां बगलामुखी का, के बारे में मैं कहूंगा कि शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जिसने या तो नाम ना सुना हो या मां बगलामुखी के बारे में थोड़ा बहुत ना जानता हो।

बट आज हम डीप डाइव करेंगे, मां बगलामुखी को बहुत करीब से मैं समझने की कोशिश करूंगा क्योंकि आपने तो समझा ही है और थोड़ा सा हम लोग भी समझ लें। सबसे पहले आप मां बगलामुखी के बारे में बताइए कि यह कैसी देवी हैं और इनका रूप कैसा है, इनको कैसे प्रसन्न कर सकते हैं,

कैसे आप बगलामुखी से कनेक्ट कर सकते हैं?

बगलामुखी एक बहुत ही शक्तिशाली एनर्जी है, 10 महाविद्या में से एक है और बहुत इम्पोर्टेंट डेइटी है। और मैं ये कहूंगी कि अगर एक वर्ड में उनको डिस्क्राइब करना हो तो मैं वो वर्ड यूज करूंगा , चमत्कार। ओके। इतने चमत्कार हुए हैं मां बगलामुखी के उसमें और बहुत मेरे क्लाइंट्स मुझे बताते हैं, मेरे साथ पर्सनली हुए हैं। मां बगलामुखी एक ऐसी एनर्जी है जिसकी शायद आज जो संसार को है, सबसे ज्यादा जरूरत है। 

वो कॉम्पिटिशन में आपको आगे करा सकती हैं, वह एनिमीज के ऊपर प्रिसाइड करती हैं, दुश्मनों का स्तंभन करती हैं और प्रोटेक्शन फ्रॉम इविल, प्रोटेक्शन फ्रॉम ब्लैक मैजिक, आपको तंत्र मंत्र से बचाती हैं अगर किसी गलत तरीके से उसका प्रभाव हो और बहुत ज्यादा आपको शक्ति प्रदान करने वाली हैं और इजीली अप्रोचेबल, अगर आप मानें।

पॉलिटिशियन, फिल्म स्टार्स, मूवी स्टार्स, यह मां बगलामुखी के टेम्पल पर बहुत रेगुलरली जाते हैं। बड़े-बड़े बिजनेसमैन, जितने भी लोग प्रिकॉशन से या किस मोटिव से? बहुत सारे तो अपने दुश्मनों को हराने के लिए जाते हैं, बहुत सारे बिजनेस में तरक्की के लिए जाते हैं।

नेगेटिव एनर्जी, देखिए जितना बड़ा आपका काम, उतनी ज्यादा आपके ऊपर नेगेटिव एनर्जी। बिल्कुल। लोग बिल्कुल नहीं छोड़ते प्रभाव करना, वशीकरण करना। वशीकरण को रिमूव करने के लिए बहुत सारे लोग जाते हैं, पूजा पाठ करवाने के लिए लोग जाते हैं। ऐसा कहते हैं कि गुप्त पूजाएं होती हैं।

जी। मां बगलामुखी के जो टेम्पल्स हैं वो दतिया में हैं, कांगड़ा में हैं और ये जो दो टेम्पल्स हैं ना, मां बगलामुखी के प्रमुख हैं। दतिया में भी बहुत लोग जाते हैं और कांगड़ा में भी बहुत लोग जाते हैं। सोशल मीडिया पर बहुत सारी रील्स आती हैं, शायद हिमाचल के कांगड़ा वाले जो बगलामुखी देवी का, ना बहुत लोग जाते भी हैं वहां पर। हां, मैं भी रेगुलरली जाती हूं।

हमारे, हमारे जो रुद्राक्ष हैं वो भी वहां पे पहले एनर्जाइज्ड होते हैं, उसके बाद ही हम क्लाइंट्स को देते हैं। तो वो एक ऐसी एनर्जी है कि अगर उनकी एनर्जी का एक अंश भी हमारे साथ मिल जाए तो हम बिल्कुल अनबीटेबल हो जाएंगे। और इसीलिए लोग वहां जाते हैं।

और उनको पीतांबरा भी कहते हैं। उनका कलर जो है वो येलो है और जो प्लैनेट को वो गवर्न करती है, वो प्लैनेट है मंगल या मार्स। आपको पता है कि अगर मंगल आपके चार्ट में खराब है तो आपको मां बगलामुखी के पास जाना है।

अगर मंगल की महादशा है, आपको प्रॉब्लम्स आ रही हैं, अगर आपका कॉम्पिटिशन बहुत बढ़ गया है, अगर आपको लगता है कि लोग आपको छोड़ ही नहीं रहे, हर तरफ से दुश्मन घेरे हुए हैं, ऐसे लोगों को मां बगलामुखी से बहुत इंस्टेंट रिलीफ मिलता है।

अच्छा। यानी कि बगलामुखी को लेकर एक बात तो आपने क्लियर कर दी है कि अगर आप किसी युद्ध की जगह पर हैं या आपकी लाइफ में किसी भी तरीके का आप एक वॉर ज़ोन सा फील कर रहे हैं या फिर आपके शत्रु बन रहे हैं, दुश्मन बन रहे हैं, एनिमी आपके बहुत ज्यादा हो गए हैं तो आपको मां बगलामुखी से कनेक्ट होना चाहिए। बगलामुखी मां आईं कहां से, इनका जो प्राकट्य हुआ वो कैसे हुआ, मां बगलामुखी ने क्यों अवतार लिया?

मां बगलामुखी ने क्यों अवतार लिया ?

कहते हैं कि एक बार धरती पर बहुत ही बड़ा संकट आ गया था, एक ऐसा तूफान आ गया था जो थम ही नहीं रहा था। अच्छा। और श्री हरि विष्णु को लगा कि शायद अब प्रकृति का जो भविष्य है, वो संकट में है। तो उन्होंने मां आदिशक्ति का आह्वान किया और जो पूजा उन्होंने की, जो तप उन्होंने किया, उससे जो शक्ति उत्पन्न हुई, वह मां बगलामुखी हैं। और उन्होंने श्री हरि विष्णु की तपस्या से प्रसन्न होकर संसार को भी बचाया और यह भी कहा कि मैं आगे भी अपने भक्तों की रक्षा करती रहूंगी।

तो मां का जो रूप है, इसको हम उग्र और सौम्य दोनों कह सकते हैं। उनके फेस पर एक स्लाइट सी स्माइल है, लेकिन यह हम बिल्कुल भी यह ना सोचें कि उनके अंदर वो शक्ति नहीं है। क्योंकि उनका जो फॉर्म 10 महाविद्या में दिखाया जाता है, उसमें उन्होंने शत्रु की जीभ या जिह्वा पकड़ी हुई है और एक हाथ से उनके हाथ में जो है वो शस्त्र है।

तो वो ये कहती हैं, स्तंभन की शक्ति रखती हैं और वो यह कहती हैं कि मैं शत्रुओं का विनाश एकदम कर सकती हूं। शी इज एक्सट्रीमली पावरफुल। और मैंने इतने चमत्कार होते हुए देखे हैं। मेरे एक क्लाइंट रिसेंटली गए थे और उनको कोई टेंडर में प्रॉब्लम आ रही थी, काफी बड़ा टेंडर था और उनके फेवर में नहीं जा रहा था, ऐसा उनको सूत्रों से पता चला।

और जब वह वहां पर गए और उनको एक ही लाइन में मां ने बोला कि इस डेट को तुम्हारे फेवर में जाएगा और जा, मैं तुझसे प्रसन्न हुई। और वो क्लाइंट आया, उसने मुझे यह बात बताई और वह डेट आई नहीं थी और सारी चीजें उसके विपरीत होने लग गईं और उसने, उसने बिल्कुल दिल छोड़ दिया और उसने कहा कि अब क्या फायदा, अब तो कुछ नहीं हो सकता।

मैंने उसको फिर भी यही गाइडेंस दिया कि आप ये साधना करते रहो, करते रहो, करते रहो। और जिस दिन उसको टेंडर मिला, जिस डेट पे उन्होंने कहा था, उसको मिला और उसने कहा कि ऐसा हो ही नहीं सकता था कि ऐसा हो।

पर चमत्कार, मैंने आपको शुरू में ही कहा था, चमत्कार की देवी है। जितने भी लोग ये पॉडकास्ट देख रहे हैं और उनको अपने जीवन में चमत्कार की उम्मीद है, बिल्कुल, वो बगलामुखी टेम्पल जरूर जाएं।

आप भी गए होंगे बगलामुखी मंदिर ?

मेरे को, एज ऑलवेज, सपनों में उन्होंने बुलाया और मैंने नहीं सुना था जब मैं पहली बार गई और हिमाचल में चार साल पहले। अच्छा। कैसे आया यह सपना और कैसे आपका पहुंचना हुआ वहां? मेरे को स्वप्न में कोई ना कोई फॉर्म मां का दिखता है।

आपको मैं बता ही चुकी हूं कि पहले मेरा जुड़ाव शिवजी के साथ था और फिर शिवजी ने मुझे बोला कि अब आपको मां की शक्ति के साथ जुड़ना है। मां काली के पॉडकास्ट में भी मैंने आपको कहा था कि जब तक हम शिवजी की साथ लेवल तक नहीं लेकर जाते, हम शक्ति तक अपने आप नहीं पहुंच पाते।

भैरव या शिवजी, भैरव के फॉर्म में शक्तियों को जो है, वो गार्ड करते हैं। और जो मां बगलामुखी के टेम्पल में जो कांगड़ा वाला है, उसमें भी बाहर भैरव का बहुत बड़ा स्वरूप है और बहुत पावरफुल एनर्जी। आप वहां पर पैर रखेंगे, आपके अंदर एक अलग सी वाइब्रेशन जागेगी। और वो वाइब्रेशन बिल्कुल सुला देने वाली, शांत वाइब्रेशन नहीं है।

उसको फील करके आपको लगेगा कुछ भी पॉसिबल है, एवरीथिंग इज पॉसिबल। इतनी पावर आती है उस टेम्पल में जाके। और वहां का अगर आप भोग खाएं, जो पीले चावल हैं वहां के, अगर आप वो खाएं, आपको लगेगा अब मैं इन्विंसिबल हूं। अब कुछ भी हो सकता है।

सो शी इज द गॉडेस ऑफ पॉसिबिलिटी। मतलब वहां पर जाकर आप बाकायदा फील करेंगे कि ये मंदिर की जो एनर्जी है, जो मां बगलामुखी की एनर्जी है, बिल्कुल, कहते हैं मां बगलामुखी की जो पूजा कर ले या फिर जिससे प्रसन्न हो जाएं मां बगलामुखी, उसका कोई शत्रु नहीं रहता, उससे कोई जीत नहीं सकता क्योंकि वो फिर अजय हो जाता है। बिल्कुल।

अब इसमें मैं स्पिरिचुअलिटी का एक कांसेप्ट एज ऑलवेज जोडूंगी, तुषार। दुश्मन होता कौन है? हमारी प्रत्यक्ष लाइफ में तो दुश्मन हमारे कॉम्पिटिटर्स हो सकते हैं और आजकल मैंने आपको बोला कि नजर लगाने की प्रवृत्ति और वशीकरण कराने की तो कॉमन ही हो गई है। बिल्कुल।

तो इसलिए हम सबको मां बगलामुखी को जरूर उनकी पूजा अर्चना करनी चाहिए। लेकिन हमारे इंटरनल दुश्मन कौन हैं? हमारा ग्रीड, हमारा एंगर, हमारा डिस्पेयर। तो डेस्प्रिंग भी अपने में एक षड्यंत्र कह सकते हैं जिसमें उम्मीद ही खत्म हो गई, आशा ही खत्म हो गई।

तो जब हम मां बगलामुखी को साधते हैं ना, हमें सिर्फ एक्सटर्नल दुश्मनों की तरफ नहीं देखना, हमें अपने मन के डार्कनेस की तरफ भी देखना है। और मैं हमेशा अपने स्टूडेंट्स को यही समझाती हूं जब हम 10 महाविद्या की वर्कशॉप करते हैं, हम इसको काफी समझते हैं कि इस साल हम कौन से दुश्मन को हराएंगे? क्या हम अपने क्रोध को हराएंगे, क्या हम अपनी निराशा को हराएंगे, क्या हम अपने डिसिप्लिन के प्रॉब्लम को हटाएंगे? किस चीज को हटाएंगे?

यानी खुद को स्ट्रॉन्ग कर लें हम इतना, इतना स्ट्रॉन्ग बना लें खुद को कि हम किसी दुश्मन से फाइट करके जीत सकें। ये भी एक दुश्मन को हराने वाली बात होगी। बिल्कुल, बिल्कुल। और देखिए आप, बहुत युगों से इनकी पूजा चली आ रही है।

रावण का जो बेटा था, उसने मां बगलामुखी को साधने का सोचा जब उसको पता चला कि श्री रामचंद्र और हनुमान जी और उनकी सारी सेना इस तरफ आ रही है। तो उन्होंने यह कहा था अपने सैनिकों को कि मेरा यज्ञ बिल्कुल भी भंग नहीं होना चाहिए।

और आपको पता है कि रावण कितना पंडित था और उसका बेटा भी काफी जानकार था। जब श्री राम को यह बात पता चली तो उनको लगा कि अगर माता इससे प्रसन्न हो गईं तो यह सारी सेना को मार देंगी और हम बिल्कुल भी ये युद्ध जीत नहीं पाएंगे।

तो उन्होंने हनुमान जी को यह आदेश दिया कि आप जाकर इस यज्ञ को तुरंत भंग कीजिए। और वह यज्ञ भंग हुआ। नहीं तो अगर मां प्रकट हो जातीं तो रामायण किस तरफ जाती, ये हमें पता है।

तो आप यह समझ लीजिए कि अगर वो मां बगलामुखी के सहारे ऐसे चल रहे थे तो अगर आज हम, आज हम उनको प्रसन्न कर पाएं… यानी कि युद्ध और महायुद्ध से पहले मां बगलामुखी की पूजा या उन्हें प्रसन्न करने की कोशिश देवताओं ने भी की या फिर उस स्तर के जो महायोद्धा रहे, उन्होंने भी की है। कृष्ण और अर्जुन ने भी की। अच्छा।

इसीलिए मैं आपको महाभारत बोल बैठी थी। तो कृष्ण और अर्जुन ने भी अपना युद्ध शुरू करने से पहले उन्हीं को साधा था। अच्छा। और वो प्रकट भी हुई थीं। यानी कि बड़े लेवल पर पूजा की गई और तभी शायद वजह है कि ये कहा जाता है कि मां बगलामुखी को अगर आपने प्रसन्न कर लिया तो आप अजय हो जाते हैं। कैसे प्रसन्न करें? कैसे प्रसन्न करें?

देखिए, मां काली के लिए मैंने आपको बोला था कि उनकी मंत्र साधना करें। अब हर महाविद्या के लिए मैं अपनी ऑडियंस के लिए थोड़ा आसान करना चाहूंगी क्योंकि हमारे काम भी हैं, ऑफिस भी है, बच्चे भी हैं, घर भी है और तरह-तरह की जिम्मेवारियां हैं।

मां बगलामुखी का बहुत ही, बहुत ही शक्तिशाली मंत्र है जो अभी मैं स्क्रीन पर दिखा रही हूं। यह मंत्र अगर हम दिन में एक बार भी कर लें, 108 बार कर लें तो आप समझ जाइए कि इससे बेटर कुछ हो ही नहीं सकता। लेकिन अगर एक बार भी कर लें और हम अपने बच्चों को याद करा दें तो ये हमारे अराउंड एक बहुत ही अच्छा प्रोटेक्टिव लेयर बना देता है।

लेकिन ये थोड़ा मुश्किल सा मुझे मंत्र लगता है क्योंकि आसान नहीं होगा किसी भी बच्चे के लिए, किसी भी बड़े के लिए कंठस्थ कर पाना। जी। तो क्योंकि ऐसा है, इसलिए मैं इनके लिए जो आपको बताने जा रही हूं, वो एक बड़ा यूनिक सा उपाय है।

बगलामुखी मां का एक यंत्र आता है। और यंत्र, देखिए यंत्र, तंत्र, मंत्र, ये तीनों चीजें साइड बाय साइड जाती हैं। जब हम मंत्र के प्रभाव को उतना नहीं बढ़ा पाते तो हम यंत्र से उसको बढ़ाते हैं। बगलामुखी मां का जो यंत्र है, हम उसकी बड़ी स्पेशल एनर्जाइजेशन और पूजा करते हैं।

मैं अपने बहुत सारे क्लाइंट्स को वो देती भी हूं ताकि उनकी लाइफ में जो मैंने क्लियर की है, उसके साथ-साथ ये यंत्र भी काम करता रहे। स्पेशली ऐसे लोग जो बहुत ज्यादा पाठ नहीं कर सकते या मंत्र सिद्धि नहीं कर सकते। तो ये जो यंत्र है, ये बहुत स्पेसिफिक यंत्र होता है।

मैं अपनी ऑडियंस के साथ एक उपाय आज शेयर करूंगा । और वो यह है कि अगर आप इस यंत्र को अपने ईस्ट कॉर्नर में लगा लें, अच्छा, ईस्ट की दीवार पर आप इसको लगा लें और यह बहुत ही शक्तिशाली होता है। और जो भी आपके दुश्मन हैं, उनकी फोटोज के छोटे-छोटे प्रिंट आउट लेके एंटी-क्लॉकवाइज डायरेक्शन में इस यंत्र के लगा दें।

जैसे पहला फोटो आपने यंत्र के ऊपर लगाया, ऊपर मतलब यंत्र से दीवार पे लगाया और फिर उसके बाद नेक्स्ट को लेफ्ट पे और फिर लेफ्ट पे। ऐसे एंटी लगाना है। ये आपने करना है अमावस्या वाले दिन और करना सुबह है अमावस्या वाले दिन। और जिस दिन आप ये करेंगे, उस दिन आप 108 बार जरूर मंत्र की चैटिंग करेंगे, चाहे आप उसके बाद ना करें।

और यह यंत्र जो है, इनकी शक्तियों के ऊपर काम करता रहेगा। 60 दिन के अंदर जब उसके थर्ड अमावस्या आएगी, आपको यह जितनी भी पिक्चर्स हैं, उनको जला देना है और अपने घर के बाहर फेंक देना है या बाहर जाकर वीराने में जला देना है। और यंत्र वहीं पर रहेगा।

तो यंत्र क्या करता है? यंत्र अपनी शक्ति का प्रभाव आपके पूरे एरिया में, आपके घर में, आपके बिजनेस में देता रहता है। ये उपाय आप अपनी फैक्ट्री या ऑफिस में भी कर सकते हैं। थोड़ा सा ऑड हो जाएगा अगर किसी ने देखा, तो आप उसको ढक सकते हैं पीले से छोटे से पर्दे के साथ ताकि डे-टू-डे दिखाई ना दे।

और ये आपके दुश्मनों का जो है, वो विनाश कर देगा। अब यहां मैं यह बताना चाहती हूं कि दुश्मनों के विनाश का क्या मतलब है। क्या वो शारीरिक रूप से उनको कोई तंगी आएगी? नहीं, ऐसा नहीं है। जो भी उनके साथ आपके नेगेटिव कॉर्ड हैं, जैसे जो आप पेहाम करने की कोशिश कर रहे हैं या आपको लगता है उनकी इंटेंशन है आपको करने, वो दूर हो जाएगी।

उनको कोई हम तांत्रिकों की तरह कोई ऐसा खत्म नहीं कर रहे। हां, नहीं, फिजिकली उन्हें नहीं कर रहे। तो ये एक जो उपाय है, वो बहुत पावरफुल है। जो यंत्र होता है, वो बहुत पावरफुल होता है। और जब हम देते हैं, हम एक स्पेशल तरीके से उसकी पूजा करके देते हैं।

जब हम बगलामुखी माता के मंदिर भी जाते हैं तो वहां पर गुप्त पूजाएं होती हैं जो आप पहले से बुक करा सकते हैं विद अ वेरी स्पेसिफिक इंटेंशन कि मुझे यह चाहिए। ओके। यह पूजा वो पंडित जी आपको बता देंगे कि आपको एक ही बार आना है या वहां पर आपको 11 दिन लगातार करानी है। ये आपकी प्रॉब्लम की इंटेंसिटी पर डिपेंड करता है।

अब आ गए कि हम डे-टू-डे मां की साधना कैसे करें। बगलामुखी मां की फोटो लगा के, लेकिन ईस्ट फेसिंग ही आपको बैठना है, ईस्ट में उनकी फोटो लगा के। उनको सॉलिड जो हल्दी की गांठें होती हैं, ठोस हल्दी की गांठों की माला बनाकर चढ़ाएं। और यह हर रोज नहीं चढ़ानी है, आपने एक बार चढ़ा दिया तो आप पूर्णिमा की पूर्णिमा उसको चेंज कर सकते हैं। जो उतारी हुई है, वो हम बहा सकते हैं, जल प्रवाह कर सकते हैं।

जल प्रवाह नहीं कर सकते तो हम किसी पीपल के पेड़ के नीचे उसको छोड़ के आ सकते हैं। जो आपने यह पूजा करी, घी के दिए से उनकी पूजा होती है और मीठे चावल, मीठा लड्डू, येलो कलर की कोई भी चीज करें।

जब भी आप मां बगलामुखी, जिनको पीतांबरा भी कहा जाता है, उनकी पूजा अर्चना कर रहे हैं, आपको बिल्कुल पीले वस्त्र पहनने हैं और पीले आसन पर ही बैठना है। और इनकी पूजा दिन में करें। जब भी हम चाहते हैं…

एक और बहुत अच्छा उपाय है मां का। जिनके बच्चे का फोकस एंड कंसंट्रेशन नहीं है, अगर वह बच्चा 13 साल से, मतलब टीनएजर नहीं है, 13 साल से कम है उसकी आयु, 12 वर्ष तक जो है बच्चे, उनके बेडरूम में आप ईस्ट फेसिंग वॉल पे,

वैसे तो आप अपना स्टडी टेबल भी ईस्ट फेसिंग कर लीजिए, बच्चा बैठे तो ईस्ट की तरफ देखे, वहां पर अगर आप मां बगलामुखी का जो यंत्र है, वह लगा देते हैं, वो यंत्र पूरे टाइम काम करेगा आपके बच्चे के फोकस के ऊपर। बच्चे आजकल देखिए, डिस्ट्रैक्ट हो जाते हैं आईपैड में, यू नो, टैबलेट्स में या खेलने जाते हैं तो बहुत आके टेक्नोलॉजी में लग जाते हैं या खेलने में, पढ़ना नहीं चाहते।

ऐसे में अगर आप मां का यंत्र वहां लगाते हैं और उस यंत्र की पूरी एनर्जी उस बेडरूम में जाती है तो इससे आपके बच्चे की कंसंट्रेशन बिल्कुल शार्प हो जाएगी। ओके, ओके। अगर आपका बच्चा 13 साल के ऊपर है तो बेडरूम में यंत्र लगाना सही नहीं होगा। ऐसे में आप मां का एक छोटा सा जो नाम है, उसको लिख के येलो पेपर पे उसके स्टडी टेबल के ऊपर ऐसे करके चिपका दीजिए, लैमिनेट करा लीजिए और चिपका दीजिए।

वो भी एक यंत्र का काम करेगा बिकॉज़ यंत्र एक सर्टेन एज तक ही हम ऐसा कर सकते हैं, उसके बाद हमें उसको मंदिर में रखना होगा। अगर वो भी नहीं, जब भी आपका बच्चा पाठ हो, आप कोशिश कीजिए कि आप मां के आगे रखी हुई हल्दी जिसका मंत्र उच्चारण से आपने जिसको एनर्जाइज्ड किया, अपने बच्चे के माथे पे, नाभी पे और गले पे लगा दीजिए। क्योंकि वाक् सिद्धि की भी मां हैं ये।

वाक् सिद्धि, प्रधान सिद्धि क्या है ?

कि जो हम बोलें वो सच हो और जो हम बोलें वो सबके हित में हो। और जैसे प्रेडिक्शन करते हैं लोग, तो प्रेडिक्शन जो है वो ट्रू हो जाना। जो मैं कह रही हूं, मेरे, मेरी जिह्वापे जो है, मां सरस्वती का वास हो। खासकर वो लोग जो यह चाहते हैं कि मैंने जो कहा, उसे दुनिया सुने या मैं जो कह रहा हूं, उससे लोग इंप्रेस हों, चाहे वो इंटरव्यूज में जाने वाले लोग हों, ग्रुप डिस्कशन में जो लोग रहते हैं, क्या ये जरूरी है कि वो लोग मां बगलामुखी की पूजा करेंगे तो उनकी जो बोलने की प्रभाव है, वो प्रभाव बढ़ेगा? वो प्रभाव बढ़ेगा।

मां बगलामुखी की पूजा करेंगे तो उनकी जो बोलने की प्रभाव है, वो प्रभाव बढ़ेगा ?

लेकिन जैसे बच्चे अब मंत्र नहीं कर सकते हैं तो यहां पर हम जो है, यंत्र का प्रयोग करेंगे। तो अगर आपकी ग्रुप डिस्कशन है, आप उस यंत्र को अपने सामने रखें, ईस्ट की तरफ फेस करें और आप अपनी पढ़ाई वहीं पर करें और फिर उस यंत्र को वापस जो है, मंदिर में प्लेस कर दें। आप उस यंत्र के साथ-साथ काम करें और आपका जो है, बहुत ही, बहुत ही अच्छे रिजल्ट्स आएंगे कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स में, स्कूल्स में, ग्रुप डिस्कशन में, इंटरव्यूज में, पोस्ट  में।

बिल्कुल। अच्छा, अक्सर मैं आपसे ये पूछता हूं कि किसी भी देवी का जब आपकी लाइफ में उनकी एनर्जी का आना शुरू होता है तो क्या फील होता है? मां बगलामुखी जब आपकी लाइफ में आना शुरू होती हैं, उनकी कृपा आना शुरू होती है तो किस तरीके के इंडिकेशंस आपकी लाइफ में आना शुरू होते हैं?

मां बगलामुखी जब हमारी लाइफ में एंटर करती हैं, सबसे पहले हमारे में बहुत कॉन्फिडेंस आता है। ओके। आप याद कीजिए, मंगल ग्रह के क्या-क्या एट्रिब्यूट हैं? करेज, बहुत पावर, बहुत कॉन्फिडेंस। आपने पिछले पॉडकास्ट में मुझे बताया है कि ये पर्टिकुलर देवी जो है, वो किसी एक ग्रह से कनेक्टेड है। तो क्या मां बगलामुखी मंगल से हैं?

तो क्या मां बगलामुखी मंगल से हैं ?

जी, मंगल से कनेक्टेड हैं। और मंगल ग्रह कॉन्फिडेंस का ग्रह है, करेज का ग्रह है, हनुमान जी को याद कीजिए, बिल्कुल। है ना, और भक्ति का ग्रह है। तो जब आपके दिल में ये फीलिंग आने लग जाए, होप आने लग जाए, आपको लगे कि दुश्मन आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकते हैं, मां मेरे साथ है, यह सारी जो फीलिंग होती है, वो इसकी होती है।

देखिए, यह तो पॉसिबल नहीं है आज की दुनिया में कि लोगों के दुश्मन ना हों और यह भी पॉसिबल नहीं है कि वो दुश्मन आपका कुछ ना करे। हम सतयुग में नहीं रह रहे, बिल्कुल। तब भी वैसे तो युद्ध होते ही थे। बिल्कुल, बिल्कुल।

लेकिन उनके होते हुए भी अगर आप में कॉन्फिडेंस है कि अगर एक दैविक शक्ति आपके साथ है तो आपका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, वो है मां बगलामुखी की पावर। तो बहुत ही प्रभावशाली उपाय जो मैंने बताया है, मैंने खुद करके देखा है और बहुत क्लाइंट्स ने भी बताया है। अगर ऑडियंस में किसी के साथ चमत्कार हुए हैं तो कमेंट्स में जरूर बताएं क्योंकि यह एक चमत्कार की मां हैं।

आप गए… अच्छा नहीं, मैं बगलामुखी मंदिर नहीं गया। बट आपकी बात जब मैं सुन रहा था क्योंकि मेरे बहुत सारे फ्रेंड्स हैं जो कि कांगड़ा में जो बगलामुखी मंदिर है, वहां जाते हैं। एक मेरी फ्रेंड है जो सही में, उन्होंने मुझे बहुत सारी चीजें बताईं, उन्होंने मुझे बताया भी कि कई बड़े-बड़े पॉलिटिशियन वहां बगलामुखी के मंदिर में जाते थे और वहां पर पूजा पाठ करके अपने चुनाव जीते हैं वो लोग।

बड़े-बड़े, मैं किसी का नाम नहीं लूंगा लेकिन बहुत ज्यादा मेरे आसपास बहुत सारे ऐसे लोग हैं और आपने आज जो बातें कहीं, मुझे लग रहा है कि मुझे भी बुलाया जा रहा है कि आ जाओ भई, बहुत टाइम हो गया आपको इंडिकेशन देते हुए। तो मैं बहुत जल्द शायद पूरे परिवार के साथ वहां पर जाऊं।

वेल, दश महाविद्याओं में से एक हैं मां बगलामुखी, तो तंत्र से रेलेवेंस इनका होगा, इनका कोई ना कोई कनेक्ट तंत्र के साथ भी होगा।

क्या मां बगलामुखी की कनेक्टिविटी तंत्र के साथ है?

जो तांत्रिक हैं, वो कैसे कनेक्ट करते हैं? तांत्रिक मां बगलामुखी की सिद्धियों को साधते हैं, स्तंभन करते हैं, वशीकरण का भी प्रयोग करते हैं। लेकिन मैं यह सोचती हूं कि जिनके ऊपर कुछ कराया गया है, अगर वो मां बगलामुखी के टेम्पल में जाएं तो उनको बहुत फायदा होगा क्योंकि ये जितना भी करा-कराया होता है, वो मां बगलामुखी के टेम्पल पर उतर जाता है।

अच्छा। और अगर आप अपने पेशेंट को वहां नहीं ले जा पा रहे हैं तो आप उनके साइड पर बैठ के, चाहे मन ही मन इस मंत्र का जाप करते रहें। पॉसिबल ही नहीं है कि जिस जगह पर उनका यंत्र लगा हुआ है, अगर कोई बहुत बीमार है तो आप उसके बेड के ऊपर जो दीवार है, उसके ऊपर यह यंत्र लगा दीजिए।

यह यंत्र उस व्यक्ति को इतना, इतना होप फुल कर देगा कि उसकी बॉडी जो है, रिएक्ट करने लग जाएगी, इतना पॉजिटिवली। क्या ये मार्केट से यंत्र खरीदा और लगा दिया, इतना भर काफी है या इसकी एनर्जी बढ़ानी पड़ेगी?

यंत्र खरीदा और लगा दिया, इतना भर काफी है या इसकी एनर्जी बढ़ानी पड़ेगी?

जैसे आपने कहा कि आपके पास जितने यंत्र होते हैं, आप जो देते हैं लोगों को, वो आप एनर्जाइज्ड करके देते हैं, उसकी पूजा पाठ एक प्रोसेस है जो आपने बताया भी कि मंत्र के थ्रू करते हैं। क्या लाकर लगा देना काफी है या एनर्जाइज्ड करना पड़ेगा?

देखिए, अगर आप नॉर्मल पानी पी रहे हैं तो आप लाकर भी पी सकते हैं। अल्कलाइन वॉटर पीना है तो आपको उसको बना के पीना होगा जिसके और भी फायदे हैं। तो जब हम इसको एनर्जाइज्ड करते हैं मंत्रों के थ्रू, इसका बिल्कुल एक अलग इफेक्ट होता है।

पर मैं ये नहीं कहूंगी कि यंत्र में अपनी पावर में कोई कमी है। लेकिन डेफिनेटली अगर हम उसको और भी शार्प करें, लेजर बीम की तरह बना लें तो असर जो है, वो जल्दी होता है। अच्छा,

बगलामुखी की पूजा करना का बेस्ट टाइम कौन सा है ?

कब मां बगलामुखी की पूजा करना, किन डेज में पूजा करना आपको बहुत जल्दी फल दे सकती है? नवरात्रि आ रहे हैं, आप नवरात्रों में फर्स्ट नवरात्रि से शुरू कर दीजिए और यह सबसे बेस्ट टाइम होगा इनकी साधना शुरू करने के लिए।

और ट्यूसडे इनके लिए बहुत अच्छा माना जाता है और सैटरडे भी इनके लिए बहुत अच्छा माना जाता है। तो ये जो दो डेज हैं, इनमें भी आप शुरू कर सकते हैं। लेकिन अगर नवरात्रों में कर सकें तो नथिंग लाइक इट। कोई खास तरीके का, क्योंकि आपने पिछले पॉडकास्ट में बताया था कि एक पर्टिकुलर भैरव हैं जो हर दश महाविद्याओं के साथ अटैच हैं।

इन देवी के साथ, मां बगलामुखी के साथ अगर हम देखें तो एक भैरव होंगे जो कि अटैच होंगे। तो क्या मां बगलामुखी का जो… क्या जो मतलब आम आदमी जो एक गृहस्थ फैमिली मैन है, वो पूजा करता है तो क्या उनकी पूजा भैरव के साथ या उन देवता के साथ करना जरूरी है?

तो क्या उनकी पूजा भैरव के साथ या उन देवता के साथ करना जरूरी है ?

जैसे आपने शिव की बात की कि पहले शिव की पूजा करो, फिर आप दश महाविद्या से कनेक्ट होगे। तो क्या दश महाविद्याओं में मां बगलामुखी की पूजा करने से पहले भी आपको शिव की पूजा करनी चाहिए? जी। और इसीलिए जो वहां पे कांगड़ा में टेम्पल है, उसके बाहर ही भैरव जी स्थापित हैं। बताया कि हां, बड़ा भव्य, बहुत, बहुत भव्य हैं।

तो जैसे भी आप उनकी पूजा कर सकें, मदिरा से कर सकें, मंत्र से कर सकें, अगर आप वहां जा रहे हैं तो आपको पता चल जाएगा। लेकिन अगर आप घर पे कर रहे हैं तो आप गणेश जी की वंदना से शुरू करें और उसके बाद शिव जी का करें या भैरव जी का करें और उसके बाद ही मां की।

ये एक प्रोसेस आप फॉलो करें तभी आपको बेहतर तरीके से आपको फल मिल पाएगा। अच्छा, एक लास्ट क्वेश्चन मेरा आपसे ये रहेगा, मैंने बहुत जगहों पर सुना है कि मां बगलामुखी का हवन करिए, मां बगलामुखी… तो क्या हवन से खास कनेक्टिविटीमां बगलामुखी की है?

सभी महाविद्या की है। अच्छा। हवन एक अगेन, उग्र फॉर्म है किसी भी चीज को करने का। और हम उसमें आहुति देते हैं, अपनी ऑफरिंग्स देते हैं और प्रे करते हैं कि जो देवता हैं, वो उसको एक्सेप्ट करें, अग्नि देवता और बहुत सारे देवताओं का जब हम आह्वान करते हैं।

मैंने पर्टिकुलर नोटिस किया है कि हवन करके जब हम अपना शुरू करते हैं और जब हम उद्यापन करते हैं तो भी हवन करना… हवन इज अ वेरी पावरफुल प्रोसेस। मैं यह कहूंगी कि अगर आप मंत्र सिद्धि कर रहे हैं किसी भी महाविद्या की तो बहुत जरूरी है कि आप रोज हवन करें। वैसे भी अगर आप हवन करते हैं, आपके घर की ऊर्जा जो है, वो अलग ही लेवल की हो जाती है। किसी के घर में घुसते ही बता सकते हैं कि इनके घर में रोज हवन होता है।

स्पेशली पीपल जो औरा पढ़ सकते हैं, जो एनर्जीज को पढ़ सकते हैं, जी, वो एकदम घुसते ही आपको बता देंगे कि आप बहुत… एक जो स्पेस होती है ना , वो जागृत हो जाती है मंत्र से और हवन से और यंत्र से। बिल्कुल। चलिए, बहुत-बहुत अच्छा लगा मुझे।

आज आपने हवन वाली बात जो कही है, वो तो मेरा पर्सनल क्वेश्चन था आपसे क्योंकि हवन को लेकर बहुत समय से मेरे मन में था कि… क्योंकि मुझे बहुत अट्रैक्ट करता है कहीं पर भी अगर हवन हो रहा है या मैं अगर हवन में शामिल हूं तो बड़ा एक अच्छा सा फील होता है, एक एक्टिवेटेड सा फील होता है। सो दैट वाज माय पर्सनल क्वेश्चन।

 क्योंकि एक सीरीज हम कर रहे हैं, अगर आपने अभी तक पिछले पॉडकास्ट नहीं देखे हैं तो आप जरूर जाकर उनपोस्ट को पढ़े को देखिए क्योंकि हर एक देवी पर हमने कोई ना कोई अलग-अलग तरीके से डीप पोस्ट किया है। 

What is Black Magic? How can we protect ourselves from it? ph. +91 85280-57364

What is Black Magic? How can we protect ourselves from it? Black magic, also referred to as witchcraft, is the practice of using supernatural power to harm or personal gain and also to carry out criminal acts to harm a person emotionally, mentally, or financially.

 

What is Black Magic? How can we protect ourselves from it?

What is Black Magic? How can we protect ourselves from it?
What is Black Magic? How can we protect ourselves from it?

 

What is Black Magic? How can we protect ourselves from it? Black magic, also referred to as witchcraft, is the practice of using supernatural power to harm or personal gain and also to carry out criminal acts to harm a person emotionally, mentally, or financially.

 It is done with the hair of the victim and clothes, as well as photos or staring directly at the eyes. 

Black magic isn’t an entirely new concept, it’s been used for centuries which is why we should be cautious in the current season of Kalyug when you’re in the presence of a small number of well-wishers.

 

Black magic or witchcraft, is the practice of using supernatural power to harm or self-centered purposes, and for devious practices that harm the person physically, mentally or financially. It is done by touching hair, clothing photos, or even looking at the eyes of the victim. 
The practice of black magic is not an entirely new concept, it’s been used for centuries which is why we should be cautious in the season of Kalyug in which you’re only surrounded by a few people who wish you well.
People with weak horoscopes, or those with negative positions for planets within horoscopes could be to be the target of black magic since they are afflicted with a weak aura surrounding them.
It is rare to see that we are the victims of these issues at an early age, however, there are a few basic signs like sleep disturbances nightmares, and bad dreams such as falling off of a cliff or darkening the complexion. symptoms of headaches, unusual behaviour and more.

Black magic is a way to make people vulnerable to the bogus fears of others It also reverses luck and creates confusion.
I’d like to ask you a few inquiries!

  • Do you or your family members have been victimized by frequent incidents?
  • Do you feel like you are plagued by luck every day?
  • Do you feel emotionally and mentally always in control?
  • Are you losing job opportunities, business or occupation frequently?
  • Are you concerned that you’re hurting yourself mentally, physically or financially?
  • Are you constantly feeling of sadness?
  • Do you experience frequent financial losses?
  • Are you getting bored with the world and often thinking of leaving your family?
  • Does your relationship seem to be failing after all the effort?
  • If you answered YES to one of these concerns, then I believe you could have been a victim to the black magician and I’m here to aid you.

I’ll suggest certain astrological solutions to guard the people you love and protect your entire family from the black spells of:

  • Try this method during the night of Amavasya. Use a black thread to make seven knots of equal distance over the thread. Turn seven dried red chillies seven times on the thread, then wrap them around a black cloth. The cloth should be burned outside of your building or home before putting oil on the thread of black on the right ankle.
  • Also, I suggest you give seven of your black clothing to people who are not printed in the evening of Amavasya.
  • I would suggest that you do not drink alcohol since those who do consume the drink are more prone to negative energy.
  • I would suggest that you turn salt seven times around the person counterclockwise, then dissolve it in any body of water.
  • If you feel you’re feeling attracted by some negative thing, or your appearance is a little different than usual, then you must use camphor each day and night in your home.
  • Black rai, tulsi leaves lemon’s peel as well as til seeds. Add the nilgiri leaf or oil and simmer it in boiling water for 7 minutes. Then split it into seven parts and sprinkle each one on your body. Then repeat it seven days in a row.
  • Based on my research I have observed, that you’re more vulnerable to negativity If you’re Rahu or Ketu is in close proximity the Sun and Moon so you must talk to an experienced astrologer identify solutions for these shifts of the planet.
  • In addition, I recommend that you sing ‘Om Ram Rahave Namah’ and “Om Kem Ketave Namah for a few minutes to keep Rahu and Ketu in good spirits.
  • There are a few poojas that I’d recommend you do at home in case you feel that you’re under the influence of the eye of evil. Chaandi Paath Kaal Bhairav puja and Durga Saptashi puja are all highly advised.
  • I also suggest keeping ‘Bhairav Yatra within your house to boost your aura, as your aura is like a shield that protects your body from harm.
  • Then, you should be aware of severe symptoms, such as bruises on your body, itchiness painful burning or stinging sensations across your body, or your body is not reacting to medications for an illness or suicidal ideation and lack of breath, I’d highly recommend you to take thorough actions and be sure that you see an astrologer in order to determine the causes and possible solutions.

Let Lord Ganesha keep you safe from the negative energies of the Universe.
Popular Astrologer Chirag Daruwalla is the son of Astrologer Bejan Daruwalla.

 The astrologer is famous for his precise forecasts of astrology for the future of health, career and love, as well as finance and business. Visit their website bejandaruwalla.com to find advice regarding issues in your life.
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कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini

कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini

कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini

 

कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini कर्ण पिशाचिनी एक पिशाच वर्ग की शक्ति है जो कान  में भूत भविष्य वर्तमान बताती है।  भौतिक आकांक्षाओं से पीड़ित लोग कर्ण पिशाचिनी की साधना  करने को लालायित रहते हैं ।

यह सिद्ध होने पर भूतकाल और वर्तमान काल की बातें बतला देती है, असाधारण परिस्थितियों में भविष्यत् को बत- लाने की क्षमता भी आती है किन्तु इसके लिए अधिक श्रम और साहस की आवश्यकता रहती है।

कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini
कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini

वर्तमान में चाहे विश्व के किसी भी हिस्से की जात पूछी जाय यह सही उत्तर दे देती है, एक हद तक यह व्यक्ति के अन्तः स्तल के विचारो को भी जान सकती है। किन्तु किसी के विचारों की बदले की शक्ति इसमे नही है ।

पिशाचि शब्द सुनते ही रोंगटे खड़े होने लगते हैं ऐसा लगता है कि  कोई मांसाहारी भूत प्रेत जैसी ही कोई शक्ति होगी पिसाची शक्ति शक्ति के ह्रदय चक्र शरीर में विद्यमान है इन्हीं शब्द चक्र में एक हृदय चक्र है स्वामिनी अधिकांश रोग हमारे शरीर में जितने वह सब हमें पिशाचिनी शक्ति की वजह से ही लगते हैं। 

पिशाचि शब्द की आधार की परिभाषा आती है समझ सकते हैं कि किसी एक विषय अथवा वस्तु में हृदय का लगातार लगे रहना किसी एक विषय को जब हम इतना अधिक पसंद करने लग जाए कि अपना तन मन धन यहां तक की अपना आत्मा को शांत करने के लिए तैयार हो जाए तो। हमारा मन धन के लिए कभी वैभव के लिए और भी न जाने कितने विषय वस्तुओं के लिए हम प्रयासरत रहते हैं और हमारा हृदय इस दुनिया से हटना ही नहीं चाहता  इस सुभाव को  पिसाच सुभाव कहा जाता है। 

 Karna Pishachini  पिशाची देवी का सवरूप 

लेकिन बावजूद इसके देवी पिसाची बहुत ही सुंदर है कमल के आसान  पर बैठी हाथ  में दिव्या पुष्प पकडे हुए और एक हाथ में एक अग्नि से जलता हुआ एक कटोरा पकड़े  हुए बैठे हुए है। दिव्या पिशाची देवी की आराधना का और  कुलांतक पीठ से निकलता है। मानसिक और बौद्धिक रोग है और मनोज जनित जितने भी रोग  हैं। नष्ट करने में देवी पिशाची  के मंत्र सर्वश्रेष्ठ है उनका ध्यान स्तुति बहुत लाभदायक है। 

 

लोगों को चमत्कृत करने के लिए, अपना प्रभाव जमाने के लिए और इन प्रदर्शनों के फलस्वरूप धन अर्जन के लिए कर्ण पिशाचिनी के प्रति लोग अधिक आकृष्ट होते हैं । इसके संबंध में कुछ भी लिखने से पहले एक बात स्पष्ट कर दूं कि मैं ज्ञान मार्ग में प्रवृत्त हो चुका हूँ, ये आनन्दमार्गी चुटकुले हैं, इनके प्रति मुझे कोई भी दिलचस्पी नही चमत्कार जैसी चीज मेरे मे नही है और जब नही है तो दिखावा कैसे करू ?

सच यह है कि अर्थ और सुविधाओं के मामले मे आवश्यकता तक सोचता हूं मुझे किसी भी प्रकार की कोई सिद्धि नही मिली फिर भी भारतीय मन्त्रो की शक्ति का परिचय मुझे है । ज्ञान मार्ग जिस विराट् शून्य में रमना चाहता है उसमे प्रदर्शनीय, सिद्धि या चमत्कार नाम को कोई चीज होती ही नहीं। गोपीनाथ कविराज नौर. योगीराज अरविन्द के पास लोगों ने कौन – सा चमत्कार देखा ।

किन्तु तो उनको मिला उसके लिए कौन लालायत नहीं है ? ज्ञान मार्ग का यह भाव है। कामनाओं से प्रेरित होकर जो प्रयोग किये जाते हैं वे ऐसे ही ४८ रहते हैं जैसे किसी को एक शहर से दूसरे शहर जाना होता है ।

ऐसे लोग एक सीमित दिशा और दृश्य का अनुभव प्राप्त करते है किन्तु जिनको केवल चलना है उनके अनुभव मे सारे नगर वन, पहाड़, मैदान आ जाते हैं । ज्ञानमार्ग मे इन सारी सिद्धियो का रहस्य खुल जाता है या यों कहे कि पोल खुल जाती है और अभिरुचि समाप्त हो जाती है। एक बार एक सज्जन आये और मुझसे उलझ पड़े, बार-बार कहने लगे तुम ऐसी पुस्तकें क्यो लिखते हो ?

एक मोह उपजा देते हो, मन मे वैचारिक विप भर देते हो मेरा उत्तर था आप क्यों पढ़ते हो ? अपवाद स्वरूप ही ऐसे लोगों से साबका पड़ा और मेरे मन में यह आया कि चलो, इस विषय पर कुछ भी नही कहेंगे किन्तु इसके साथ ही उन पत्रों का क्या करूं जिन्होंने मेरी पूर्ण लिखित पोस्ट  में दिये गये प्रयोग किये और सफल हुए, जिन लोगो ने विश्वास पूर्वक उन प्रयोगो के बारे मे पूछा जो लेख  इस विशाल वर्ग की आस्था ने मुझे चुप नही रहने दिया और मैंने फिर कलम  उठा ली यही सोचकर कि यदि वर्ष भर मे पांच व्यक्ति भी इन प्रयोगों मे लाभ उठाते हैं

तो यह पुण्य का ही काम है। जो लोग सफल नहीं हो रहे वे भी कम-से-कम भगवान का स्मरण कर रहे हैं, अपने पाप धो रहे हैं कोई दुष्कर्म नही कर रहे, न मैं कोई घटिया उपन्यास लिखकर लोगों की वासना उभार रहा हूं । हरेक व्यक्ति का अपना मिशन होता है।

आस्तिकता का प्रसार और भारतीय संस्कृति एवं विज्ञान के प्रति लोगों की रुचि जागृत करना मेरा जीवन का लक्ष्य है । धर्म नेता नही होना चाहता, न अपने नाम से कोई . सम्प्रदाय चलाना चाहता हूं, मुझे मेरे देश वासियों से स्नेह है और जीवन भारत के प्रति आस्था जगाना मेरा नशा है। यह व्यवसाय नहीं शोक है ।

वे हजारों लोग मेरे इस कथन के साक्षी हैं जिनके विस्तृत पत्रो के उत्तर मैंने एक पूरे लेख के आकार में निःशुल्क दिये हैं अब भी दे रहा हूं, भले ही इससे मेरे निजी जीवन मे गतिरोध उत्पन्न हो जाता हो । उन अनजान लोगों के दुःख में भागीदार होने में मुझे बढ़ा सन्तोष मिलता है । आध्यात्मिक साधना करने से उनका आत्मविश्वास और मनोबल बढ़ता है ।

 

जिन रहस्यों को प्रकट करने में कोई बाधा नहीं थी उनको स्पष्ट करने में मैंने कोई संकोच नही किया किन्तु जिनको सार्वजनिक रूप से घोषित करने के हित की अपेक्षा अहित हो सकता था उनका उल्लेख या संकेत मैंने नही किया है ।

प्रश्न उठता है क्या ये प्रयोग मैंने किये हैं?

कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini
कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini

में एक ही उत्तर देता हूं- नही क्या ये अनुष्ठान सच हैं- इस प्रश्न के उत्तर में मैं कहूंगा- मैंने जीवन पग-पग पर इनकी शक्ति को देखा है, इनको झूठ या अविश्वसनीय मानने का अपराध मैं नहीं कर सकता ।

आदमी का जीवन बहुत छोटा होता है और वह सारे अनुष्ठान कर ले यह संभव ही नहीं फिर भी अनेकों प्रयोग मैंने किये हैं अथवा कराये हैं । कर्ण पिशाचिनी के संबंध में सूक्ष्म और रहस्य को बातें प्राप्त करने के लिये मुझे बहुत कुछ करना पड़ा है। जिन लोगो को यह प्रयोग सिद्ध है वे कुछ भी बतलाने के लिए तैय्यार नही और मैं स्वयं करूं – यह पसन्द नही ।

इसलिए उन लोगों से रहस्य उगलवाने के लिए इस साधना के गूढ रहस्यो पर इस तरह विवेचन करने लगता जिससे वे समझें कि यह भी पूरा जानता है और फिर मेरे कहे में संशोधन कराने जैसी ही स्थिति रहने देता। इस तरह से इस प्रयोग के जटिल रहस्यो का स्पष्टीकरण मेरे सन्तोष तक प्राप्त करने के बाद ही लिखने का साहस कर रहा हूं ।

जाने क्यों पाठकों का इस प्रयोग के प्रति इतना रुझान है और इन लोगों का इतना दबाव रहा है कि मुझे इस प्रयोग के बारे में बहुत कुछ जानना पड़ा और उसको प्रामाणिक स्तर पर पेश करने के लिए सभी पक्षों पर विचार करना पड़ा। कर्ण पिशाचिनी के अनेक मंत्र हैं

और उनकी साधना विधि में भी थोड़ा बहुत अन्तर है इस मन्त्र को सतर तरह से लिखने को विधि मैंने देखी है उसी तरह कर्ण पिशाचिनी में भी चालीस से अधिक मंत्र हैं । कौन-सा मंत्र किसके अनुकूल पड़ेगा इसका निर्णय कुलाकुल चक्र और मित्रार चक्र को देखकर कर लेना चाहिए ये चक्र ‘ मंत्र विज्ञान’ में दिये गये हैं । 

एक स्थान पर ग्रहण के दिन खाट में बैठकर बहुत कम मात्रा मे जप करने पर कर्ण पिशाचिनी सिद्ध होने की बात मैंने लिखी थी। यह मेरा इस प्रयोग मे ग्रहणकाल की स्वत: निर्णय नही था शास्त्रोक्त बात थी। पवित्र अतः मंत्र साधन के उपयुक्त समझ कर खाट को श्मशान पीठ के रूप माना गया है किन्तु इतनी कम मात्रा मे जप करने पर सिद्धि उनको ही मिलती है जिन्होने इस संबंध में कुछ किया है।

जिसने पहले कुछ भी नही किया या जो इससे विपरीत गुण वाले प्रयोग कर चुके हैं उनको इतनी संख्या मे जप करने से सफलता नही मिल सकती । जैसा इसका नाम है वैसा ही इसका स्वरूप और स्वभाव है । स्वा- भाविक है इस प्रकार के प्रयोग करने के लिए अतिरिक्त साहस की आव- श्यकता होगी इसलिए साहसी और वीर व्यक्ति इस संबंध मे सोचें ।

. कई लोगों ने शंका की थी कि व्यक्ति की मृत्यु के समय ऐसी साधनायें कष्ट कर रहती हैं, ऐसी बात नही है । पिशाचवर्गी होने के कारण इनमे क्रूरता तो रहती ही है, दूसरी बात यह भी है कि इनके अति संपर्क से व्यक्ति के स्वभाव में पैशाचिकता प्रकट होने लगती है।

हालांकि मंत्र के कारण वचन बद्ध होकर ये हमारे काम तक सीमित रहते हैं फिर भी इनके कागुण लुप्त नही होते और हम उनसे प्रभावित होते ही हैं।

कर्ण पिशाचिनी साधना Karna Pishachini कहाँ  करनी चाहिए ?

कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini
कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini

पिशाचिनी होने के कारण इसकी साधना घर मे नही करनी चाहिए । श्मशान एकान्त वन प्रान्त और शिव मंदिर इस साधना क्रे उपयुक्त स्वल हैं। घर करने से सफलता देर मे मिलती है और घर का वातावरण दूषित होता है । सिद्ध होने के बाद तो यह नियंत्रित हो जाती है इसलिए दूषित नही कर पाती किन्तु सिद्ध होने से पहले स्वतंत्र रहती है ।

कर्ण पिशाचिनी Karna Pishachini साधना को किस रूप में करें  

इस तीन रूपों में माना जा सकता है मां, बहन और पत्नी मां और बहन के रूप में मानने पर इसमें इतनी शक्ति नही आती पत्नी के रूप मे मानने पर इसकी सामथ्यं पूर्ण रूप से प्रकट होती है । किन्तु अपने स्वभाव के अनुसार यह पत्नी सुख में बाधा पहुंचाती है।

हां, व्यभिचारी बनाकर वैयमिक सुख में कमी नही आने देती पर पत्नी के नाम से जो व्यक्ति हमारे घर में है उसे कष्ट देती है। आवेश या दिखने जैसे कष्ट नही बल्कि उसके स्वास्थ्य मे ह्रासमोर चिन्तायें उत्पन्न करती है। मां और बहन रूप में मानने पर इनके सुखो मे बाधा पहुंचाती है ।

कर्ण पिशाचिनी कितने दिन में सिद्ध हो जाती है ?

कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini
कर्ण पिशाचिनी का इतिहास और सम्पूर्ण रहस्य History of Karna Pishachini

बहुत काम समय में सिद्ध हो जाती है  इसकी बहुत सारी  विधि है वाम मार्ग दिक्षण  मार्ग किश मार्ग से कर रहे हो यह डिपेंड करता है कुछ २१ , ११ , ४१ ,  दिन की होती है अघोर मार्ग में यह साधना जल्दी सिद्ध हो सकती है 

कर्ण पिशाचिनी क्या क्या कर सकती है

 आज के समय में हर व्यक्ति करना चाहता है क्योंकि एकमात्र यह ऐसी सिद्धि है पिशाचिनी की जो अपने जातक को बहुत सारी शक्तियां प्रदान करती है ऐसी शक्तियां प्रदान करती है जिससे कि व्यक्ति कहीं से भी धन को अर्जित  करने लगता है किसी भी व्यक्ति का जटिल से जटिल अगर कार्य कहीं रुक गया है या कोई कार्य फस गया है तो इस कार्य को आसानी से करने के लिए भी कर्ण पिशाचिनी कार्य करती है दोस्तों आज हम आपको बताएंगे कि किन लोगों  को इस साधना को पूरा करना चाहिए