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दिव्य शक्ति प्राप्त करने का मंत्र -रक्षपाल देवता साधना Divya Shakti Prapt Karne Ka Mantra ph.85280 57364

दिव्य शक्ति प्राप्त करने का मंत्र -रक्षपाल देवता साधना Divya Shakti Prapt Karne Ka Mantra ph.85280 57364

दिव्य शक्ति प्राप्त करने का मंत्र -रक्षपाल देवता साधना Divya Shakti Prapt Karne Ka Mantra
दिव्य शक्ति प्राप्त करने का मंत्र -रक्षपाल देवता साधना Divya Shakti Prapt Karne Ka Mantra

दिव्य शक्ति प्राप्त करने का मंत्र -रक्षपाल देवता साधना यह साधना सौम्य  और सात्विक है इस साधना से रक्षपाल देवतासाधक को दिव्य शक्ति प्रदान करते है और मनचाहा वरदान भी प्रदान करते है 

दिव्य शक्ति प्राप्त करने का मंत्र Divya Shakti Prapt Karne Ka Mantra

माता भेखलिया दे ढकें जन्म लेया । ताम्ब कुण्डे सिङ्ग लेया, बारह माह खेल खिलाया। अज वडेरा, कल वडेरा, पत्थाया पत्यया । घुंघयां सरलियां जोतां गांदा। ढाकें तेरी रम्भी विराजे, सिरें तेरें लम्बा टोप विराजे । पिट्ठी तेरिया किरलू । हत्थें तेरें नरेलू सोहन्दा, चिट्ठा चोला लम्बा डोरा । मण्डिया- दा, मण्डियाल कुल्लेए-दा कोली चम्वे-दा, चम्वलाय मणि महेशे दा, चेला सिमरिया ओखिया वेला दर्शन देने गुरु मेरे । मेहरा दिया घडिया औणा । सदेयां औणा भेजेयां जाणा, मैं बार-बार गुलाम तेरा ।

Divya Shakti Prapt Karne Ka Mantra दिव्य शक्ति प्राप्त करने का मंत्र साधना विधि

जल, गन्ध, अक्षत, फूल, धूप, ज्योति, नैवेद्य के रूप में हलुवा और हाथ से काता हुआ सूत – यह आठो सामग्री लेकर रात्रि एक प्रहर बाद (सबेरे तीन और चार बजे के बीच) पीपल के वृक्ष के नीचे जाए। पीपल के चारो तरफ प्रदक्षिणा कर दे। जनेऊ के रूप में तीन धागे पीपल के चारो ओर बाँधे; पत्तों पर पूजन सामग्री रखे। धूप- ज्योति जलाये फिर गुरु व गणेशजी का सुमिरन करके पीपल के नीचे एक माला जप करे।

जप के बाद ज्योति लेकर घर वापस आ जाय और अपने पूजन कक्ष में पूजनोपरान्त फिर एक माला जप करे। रविवार के दिन सुबह-शाम घर पर दो माला जप करें। ४१ दिन के भीतर ही रक्षपाल प्रकट होकर वर प्रदान करते हैं।

Rodhar nathhttp://gurumantrasadhna.com
मैं रुद्र नाथ हूँ — एक साधक, एक नाथ योगी। मैंने अपने जीवन को तंत्र साधना और योग को समर्पित किया है। मेरा ज्ञान न तो किताबी है, न ही केवल शाब्दिक यह वह ज्ञान है जिसे मैंने संतों, तांत्रिकों और अनुभवी साधकों के सान्निध्य में रहकर स्वयं सीखा है और अनुभव किया है।मैंने तंत्र विद्या पर गहन शोध किया है, पर यह शोध किसी पुस्तकालय में बैठकर नहीं, बल्कि साधना की अग्नि में तपकर, जीवन के प्रत्येक क्षण में उसे जीकर प्राप्त किया है। जो भी सीखा, वह आत्मा की गहराइयों में उतरकर, आंतरिक अनुभूतियों से प्राप्त किया।मेरा उद्देश्य केवल आत्मकल्याण नहीं, अपितु उस दिव्य ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाना है, जिससे मनुष्य अपने जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझ सके और आत्मशक्ति को जागृत कर सके।यह मंच उसी यात्रा का एक पड़ाव है — जहाँ आप और हम साथ चलें, अनुभव करें, और उस अनंत चेतना से जुड़ें, जो हमारे भीतर है ।Rodhar nath https://gurumantrasadhna.com/rudra-nath/
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