मैं रुद्र नाथ हूँ — एक साधक, एक नाथ योगी। मैंने अपने जीवन को तंत्र साधना और योग को समर्पित किया है। मेरा ज्ञान न तो किताबी है, न ही केवल शाब्दिक यह वह ज्ञान है जिसे मैंने संतों, तांत्रिकों और अनुभवी साधकों के सान्निध्य में रहकर स्वयं सीखा है और अनुभव किया है।मैंने तंत्र विद्या पर गहन शोध किया है, पर यह शोध किसी पुस्तकालय में बैठकर नहीं, बल्कि साधना की अग्नि में तपकर, जीवन के प्रत्येक क्षण में उसे जीकर प्राप्त किया है। जो भी सीखा, वह आत्मा की गहराइयों में उतरकर, आंतरिक अनुभूतियों से प्राप्त किया।मेरा उद्देश्य केवल आत्मकल्याण नहीं, अपितु उस दिव्य ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाना है, जिससे मनुष्य अपने जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझ सके और आत्मशक्ति को जागृत कर सके।यह मंच उसी यात्रा का एक पड़ाव है — जहाँ आप और हम साथ चलें, अनुभव करें, और उस अनंत चेतना से जुड़ें, जो हमारे भीतर है ।Rodhar nath
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गुप्त शत्रु की पहचान कैसे करें: सुरक्षित रहने के लिए अच्छे तरीके How to Spot a Secret Enemy: Ways to Stay Safe ph. 85280-57364
गुप्त शत्रु की पहचान कैसे करें: सुरक्षित रहने के लिए अच्छे तरीके How to Spot a Secret Enemy: Ways to Stay Safe
परिचय आजकल की तेजी से बदलती दुनिया में, हमारी गोपनीयता और सुरक्षा का महत्वपूर्ण रोल होता है। गुप्त शत्रु से बचने के लिए, हमें उनकी पहचान करने के तरीकों को समझना महत्वपूर्ण है। इस लेख में, हम आपको बताएंगे कि आप गुप्त शत्रु की पहचान कैसे कर सकते हैं और अपनी सुरक्षा को कैसे बढ़ा सकते हैं।
गुप्त शत्रु कौन हो सकते हैं?
व्यक्तिगत दुश्मन
अक्सर हमारे जीवन में व्यक्तिगत विवादों या किसी व्यक्ति से संघर्ष की वजह से गुप्त शत्रु बन सकते हैं। ये लोग आपके खिलाफ चुगली करते हैं और आपकी परेशानियों का उपयोग करके आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं।
व्यापारिक दुश्मन
व्यापार में कई बार आपकी सफलता की वजह से आपके व्यापारिक संघर्ष करने वाले लोग भी गुप्त शत्रु बन सकते हैं। वे आपके व्यवसाय को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर सकते हैं।
गुप्त शत्रु की पहचान कैसे करें?
अनोखे बर्तनों की सतर्कता अगर आपके आसपास कुछ अनोखे बर्तन या उपकरण दिखाई देते हैं जिन्हें आपने खरीदा ही नहीं है, तो यह एक संकेत हो सकता है कि कोई आपके बारे में जानकारी चुरा रहा है।
अचानक बदलते व्यवहार
आपके आसपास के लोगों का व्यवहार अचानक से बदल जाता है और वे आपके प्रति सावधानियां दिखाने लगते हैं, तो यह एक संकेत हो सकता है कि कोई आपके खिलाफ कुछ कर रहा है।
सुरक्षा के उपाय
सतर्कता बनाए रखें अपने आसपास के लोगों के साथ सतर्क रहें और अपनी व्यक्तिगत जानकारी को सावधानीपूर्वक सुरक्षित रखें।
ऑनलाइन सुरक्षा का ध्यान रखें अपने ऑनलाइन खातों की सुरक्षा के लिए मजबूत पासवर्ड और दो-प्रमाणितीकरण का उपयोग करें।
निष्कर्ष गुप्त शत्रु की पहचान करना आपकी सुरक्षा की प्राथमिकता होनी चाहिए। सतर्क रहें और अपनी व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए उपरोक्त उपायों का पालन करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) मुझे अपनी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करनी चाहिए?
आपको अपने आसपास के लोगों के साथ सतर्क रहकर और अपनी व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखकर सुरक्षा की दिशा में कदम उठाना चाहिए। ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा सकते हैं?
आप ऑनलाइन सुरक्षा के लिए मजबूत पासवर्ड उपयोग करके, दो-प्रमाणितीकरण का उपयोग करके, और अद्यतन और सुरक्षित रहने वाले सॉफ़्टवेयर का उपयोग करके कदम उठा सकते हैं। गुप्त शत्रु से बचने के लिए कौन-कौन से तरीके अधिक प्रभावी हो सकते हैं?
गुप्त शत्रु से बचने के लिए सतर्क रहना, अनोखे बर्तनों की सतर्कता बनाए रखना, और अचानक बदलते व्यवहार पर ध्यान देना अधिक प्रभावी तरीके हो सकते हैं। क्या ऑनलाइन गोपनीयता सुरक्षित होती है?
जी हां, ऑनलाइन गोपनीयता को सुरक्षित बनाने के लिए आपको मजबूत पासवर्ड और सुरक्षित सॉफ़्टवेयर का उपयोग करना चाहिए। क्या गुप्त शत्रु की पहचान करना वास्तव में महत्वपूर्ण है?
जी हां, गुप्त शत्रु की पहचान करना आपकी सुरक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे आप खुद को उनके हाथों सुरक्षित रख सकते हैं।
mahakal shatru nashak mantra महाकाल शत्रु नाशक मंत्र इस साधना से आप शत्रु के नाश होगा और शत्रु पागल हो जाएगा ph.8528057364
महाकाल शत्रु नाशक मंत्र
ॐ काली कङ्काली महाकाली के पुत्र कङ्काल भैरव ! हुक्म है – हाजिर रहे, मेरा कहा तुरन्त करे। मेरा भेजा रक्षा करे। लान बाँघूँ बान चलते के-फिरते के औसान बाँघूँ। दश दिशा, दसों सूर नव-नाथ बहत्तर वीर बाँधू, पाँच हाथ की काया, कुबेर की माया बाँयूँ । फूल में भेजूँ — फूल में जाय । मेरे ‘अमुक’ शत्रु का कलेजा खाय। थर-थर काँपे, हल-हल हिले, गिर- गिर पड़े। मेरा भेजा सवा मास, सवा दिन, सवा पहर ‘अमुक’ को बावला न करे, तो माता काली की शय्या पर पग धरे । वाचा छोड़ कुवाचा करे, तो धोबी की नाँद, चमार के कुण्ड में पड़े, रुद्र की नेत्र की ज्वाला पड़े, पारबती के चीर पर चोट पड़े। दुहाई काली माई की। कामरू कामाक्षा की। गुरू गोरखनाथ की ।
गाय के गोबर का चौका ( लीपकर ) देकर दक्षिण की तरफ मुख करके बैठें। ‘कालरात्रि’ में यह साधना करना उत्तम है। पूजन में लाल कनेर का फूल, सिन्दूर, नींबू, लौंग और लड्डू आदि रखें। चार मुख का दिया, फूलों की माला भी रखें। १०८ बार मन्त्र का जप करें और इतनी ही बार चीनी और घी मिलाकर हवन करें।
हवन की समाप्ति पर यदि भैरव जी प्रकट हों, तो उन्हें फूलों की माला अर्पित करें, लड्डू का भोग दें और प्रणाम कर उनसे कार्य सिद्ध करने की प्रार्थना करें। १. मन्त्र सिद्ध हो जाने पर एक नींबू पर शत्रु का नाम सिन्दूर से लिखें। २१ बार मन्त्र का जप कर उस नींबू में २ सुइयाँ चुभो दें और एक मिट्टी की छोटी-सी हण्डी में उसे रखकर श्मशान में गाड़ दें।
जब तक यह गड़ा रहेगा, शत्रु को भयानक पीड़ा होगी। २. शत्रु के पहनने का कोई कपड़ा प्राप्त कर उस पर श्मशान के कोयले से शत्रु का चित्र बनायें। चित्र में प्राण-प्रतिष्ठा करें और शत्रु का नाम लिखें। फिर इस कपड़े पर उक्त मन्त्र का १०८ बार जप करें।
खैर या आक की लकड़ी जलाकर इस वस्त्र को आग में तपायें। कपड़ा जलने न पाये। शत्रु पागल हो जायेगा। अच्छा करने के लिए गधे के मूत्र से उस कपड़े को धोकर सुखा दें
shatru maran mantra शत्रु नाश के लिए मंत्र तीव्र मारण प्रयोग ph. 85280 57364
shatru maran mantra शत्रु नाश के लिए मंत्र तीव्र मारण प्रयोग
सर्व शत्रु नाशक मंत्र shatru maran mantra
ॐ ह्रीं अमुकस्य हन हन स्वाहा ।
इस मन्त्र-जप का अनुष्ठान रात्रिकाल में किया जाता है। इसके लिए कनेर के १००८ फूलों एवं सरसो के तेल की जरूरत प्रत्येक दिन पड़ती है। इन दोनों सामग्रियों की व्यवस्था पहले ही कर ली जाती है। इस मन्त्र का कुल १०,००० जप करने के पश्चात् मन्त्र सिद्ध हो जाता है। इसका प्रत्येक अर्द्धरात्रि के समय से २००८ बार जप किया जाता है।
इसकी शुरुआत किसी भी दिन की रात्रिकाल को की जा सकती है। शुरू किये गये दिन से ११ दिनों तक लगातार रात्रि के समय जप करना आवश्यक होता है । मन्त्र जप किसी निर्जन स्थान अथवा श्मशान में किया जाता है।
सूखी लकड़ी को सुलगाकर आग बना लेना चाहिए और उसके बाद मन्त्र जप शुरू कर देना चाहिए। प्रत्येक मन्त्र जप से पूर्व कनेर का फूल लेकर तेल में डुबोना चाहिए और उसके बाद मन्त्र पढ़कर उक्त फूल को आग में डाल देना चाहिए।
ऐसा प्रत्येक दिन १००८ बार करना चाहिए। अमुकस्य की जगह दुश्मन का नाम लेते रहना चाहिए। इस मन्त्र की सिद्धि के पश्चात् शत्रु की मौत सुनिश्चित है। यह प्रयोग निन्दनीय तथा वर्जित है ।
कर्ण पिशाचिनी साधना के छुपे रहस्य उजागर करेंगे इस पोस्ट में Deep secrets of Karna Pishachini Sadhana ph. 85280-57364
कर्ण पिशाचिनी कौन है कर्ण पिशाचिनी विद्या क्या है
कर्ण पिशाचिनी साधना के छुपे रहस्य उजागर करेंगे इस पोस्ट में Deep secrets of Karna Pishachini Sadhana कर्ण पिशाचिनी भौतिक आकांक्षाओं से पीड़ित लोग कर्ण पिशाचिनी की आराधना करने को लालायित रहते हैं ।
यह सिद्ध होने पर भूतकाल और वर्तमान काल की बातें बतला देती है, असाधारण परिस्थितियों में भविष्यत् को बत- लाने की क्षमता भी आती है किन्तु इसके लिए अधिक श्रम और साहस की आवश्यकता रहती है।
निम्न विषयो पर चर्चा होगी
कर्ण पिशाचिनी कौन है
कर्ण पिशाचिनी विद्या क्या है
कर्ण पिशाचिनी क्या क्या कर सकती है
कर्ण पिशाचिनी कितने दिन में सिद्ध हो जाती है
वर्तमान में चाहे विश्व के किसी भी हिस्से की जात पूछी जाय यह सही उत्तर दे देती है, एक हद तक यह व्यक्ति के अन्तः स्तल के विचारो को भी जान सकती है। किन्तु किसी के विचारों की बदले की शक्ति इसमे नही है ।
लोगों को चमत्कृत करने के लिए, अपना प्रभाव जमाने के लिए और इन प्रदर्शनों के फलस्वरूप धन अर्जन के लिए कर्ण पिशाचिनी के प्रति लोग अधिक आकृष्ट होते हैं । इसके संबंध में कुछ भी लिखने से पहले एक बात स्पष्ट कर दूं कि मैं ज्ञान मार्ग में प्रवृत्त हो चुका हूँ, ये आनन्दमार्गी चुटकुले हैं, इनके प्रति मुझे कोई भी दिलचस्पी नही चमत्कार जैसी चीज मेरे मे नही है और जब नही है तो दिखावा कैसे करू ?
सच यह है कि अर्थ और सुविधाओं के मामले मे आवश्यकता तक सोचता हूं मुझे किसी भी प्रकार की कोई सिद्धि नही मिली फिर भी भारतीय मन्त्रो की शक्ति का परिचय मुझे है । ज्ञान मार्ग जिस विराट् शून्य में रमना चाहता है उसमे प्रदर्शनीय, सिद्धि या चमत्कार नाम को कोई चीज होती ही नहीं। गोपीनाथ कविराज नौर. योगीराज अरविन्द के पास लोगों ने कौन – सा चमत्कार देखा ।
किन्तु तो उनको मिला उसके लिए कौन लालायत नहीं है ? ज्ञान मार्ग का यह भाव है। कामनाओं से प्रेरित होकर जो प्रयोग किये जाते हैं वे ऐसे ही ४८ रहते हैं जैसे किसी को एक शहर से दूसरे शहर जाना होता है ।
ऐसे लोग एक सीमित दिशा और दृश्य का अनुभव प्राप्त करते है किन्तु जिनको केवल चलना है उनके अनुभव मे सारे नगर वन, पहाड़, मैदान आ जाते हैं । ज्ञानमार्ग मे इन सारी सिद्धियो का रहस्य खुल जाता है या यों कहे कि पोल खुल जाती है और अभिरुचि समाप्त हो जाती है।
एक बार एक सज्जन आये और मुझसे उलझ पड़े, बार-बार कहने लगे तुम ऐसी पुस्तकें क्यो लिखते हो ? एक मोह उपजा देते हो, मन मे वैचारिक विप भर देते हो मेरा उत्तर था आप क्यों पढ़ते हो ? अपवाद स्वरूप ही ऐसे लोगों से साबका पड़ा और मेरे मन में यह आया कि चलो, इस विषय पर कुछ भी नही कहेंगे किन्तु इसके साथ ही उन पत्रों का क्या करूं जिन्होंने मेरी पूर्ण लिखित लेख में दिये गये प्रयोग किये और सफल हुए,
जिन लोगो ने विश्वास पूर्वक उन प्रयोगो के बारे मे पूछा जो अपने वेबसाइट लेख इस विशाल वर्ग की आस्था ने मुझे चुप नही रहने दिया और मैंने फिर कतम उठा ली यही सोचकर कि यदि वर्ष भर मे पांच व्यक्ति भी इन प्रयोगों मे लाभ उठाते हैं तो यह पुण्य का ही काम है। जो लोग सफल नहीं हो रहे वे भी कम-से-कम भगवान का स्मरण कर रहे हैं, अपने पाप धो रहे हैं कोई दुष्कर्म नही कर रहे, न मैं कोई घटिया उपन्यास लिखकर लोगों की वासना उभार रहा हूं ।
हरेक व्यक्ति का अपना मिशन होता है। आस्तिकता का प्रसार और भारतीय संस्कृति एवं विज्ञान के प्रति लोगों की रुचि जागृत करना मेरा जीवन का लक्ष्य है । धर्मनेता नही होना चाहता, न अपने नाम से कोई . सम्प्रदाय चलाना चाहता हूं, मुझे मेरे देश वासियों से स्नेह है और जीवन भारत के प्रति आस्था जगाना मेरा नशा है। यह व्यवसाय नहीं शोक है ।
वे हजारों लोग मेरे इस कथन के साक्षी हैं जिनके विस्तृत पत्रो के उत्तर मैंने एक पूरे लेख के आकार में निःशुल्क दिये हैं अब भी दे रहा हूं, भले ही इससे मेरे निजी जीवन मे गतिरोध उत्पन्न हो जाता हो । उन अनजान लोगों के दुःख में भागीदार होने में मुझे बढ़ा सन्तोष मिलता है । आध्यात्मिक साधना करने से उनका आत्मविश्वास और मनोबल बढ़ता है ।
४ε प्रस्तुत पुस्तक उन अनेक प्रश्नों का उत्तर है जो कृपालु पाठको ने किये हैं और उसके लिए है जो प्रश्न नही कर सके । जिन रहस्यों को प्रकट करने में कोई बाधा नहीं थी उनको स्पष्ट करने में मैंने कोई संकोच नही किया किन्तु जिनको सार्वजनिक रूप से घोषित करने के हित की अपेक्षा अहित हो सकता था उनका उल्लेख या संकेत मैंने नही किया है ।
प्रश्न उठता है क्या ये प्रयोग मैंने किये हैं? में एक ही उत्तर देता हूं- नही क्या ये अनुष्ठान सच हैं- इस प्रश्न के उत्तर में मैं कहूंगा- मैंने जीवन पग-पग पर इनकी शक्ति को देखा है, इनको झूठ या अविश्वसनीय मानने का अपराध मैं नहीं कर सकता । – आदमी का जीवन बहुत छोटा होता है और वह सारे अनुष्ठान कर ले यह संभव ही नहीं फिर भी अनेकों प्रयोग मैंने किये हैं अथवा कराये हैं ।
कर्ण पिशाचिनी के संबंध में सूक्ष्म और रहस्य को बातें प्राप्त करने के लिये मुझे बहुत कुछ करना पड़ा है। जिन लोगो को यह प्रयोग सिद्ध है वे कुछ भी बतलाने के लिए तैय्यार नही और मैं स्वयं करूं – यह पसन्द नही । इसलिए उन लोगों से रहस्य उगलवाने के लिए इस साधना के गूढ रहस्यो पर इस तरह विवेचन करने लगता जिससे वे समझें कि यह भी पूरा जानता है और फिर मेरे कहे में संशोधन कराने जैसी ही स्थिति रहने देता।
इस तरह से इस प्रयोग के जटिल रहस्यो का स्पष्टीकरण मेरे सन्तोष तक प्राप्त करने के बाद ही लिखने का साहस कर रहा हूं । जाने क्यों पाठकों का इस प्रयोग के प्रति इतना रुझान है और इन लोगों का इतना दबाव रहा है कि मुझे इस प्रयोग के बारे में बहुत कुछ जानना पड़ा और उसको प्रामाणिक स्तर पर पेश करने के लिए सभी पक्षों पर विचार करना पड़ा।
कर्ण पिशाचिनी के अनेक मंत्र हैं और उनकी साधना विधि में भी थोड़ा बहुत अन्तर है इस मन्त्र को सतर तरह से लिखने को विधि मैंने देखी है उसी तरह कर्ण पिशाचिनी में भी चालीस से अधिक मंत्र हैं । कौन-सा मंत्र किसके अनुकूल पड़ेगा इसका निर्णय कुलाकुल चक्र और मित्रार चक्र को देखकर कर लेना चाहिए ये चक्र ‘ मंत्र विज्ञान’ में दिये गये हैं ।
एक स्थान पर ग्रहण के दिन खाट में बैठकर बहुत कम मात्रा मे जप करने पर कर्ण पिशाचिनी सिद्ध होने की बात मैंने लिखी थी। यह मेरा इस प्रयोग मे ग्रहणकाल की स्वत: निर्णय नही था शास्त्रोक्त बात थी। पवित्र अतः मंत्र साधन के उपयुक्त समझ कर खाट को श्मशान पीठ के रूप माना गया है किन्तु इतनी कम मात्रा मे जप करने पर सिद्धि उनको ही मिलती है जिन्होने इस संबंध में कुछ किया है।
जिसने पहले कुछ भी नही किया या जो इससे विपरीत गुण वाले प्रयोग कर चुके हैं उनको इतनी संख्या मे जप करने से सफलता नही मिल सकती । जैसा इसका नाम है वैसा ही इसका स्वरूप और स्वभाव है । स्वा- भाविक है इस प्रकार के प्रयोग करने के लिए अतिरिक्त साहस की आव- श्यकता होगी इसलिए साहसी और वीर व्यक्ति इस संबंध मे सोचें ।
कई लोगों ने शंका की थी कि व्यक्ति की मृत्यु के समय ऐसी साधनायें कष्ट कर रहती हैं, ऐसी बात नही है । पिशाचवर्गी होने के कारण इनमे क्रूरता तो रहती ही है, दूसरी बात यह भी है कि इनके अति संपर्क से व्यक्ति के स्वभाव में पैशाचिकता प्रकट होने लगती है।
हालांकि मंत्र के कारण वचन बद्ध होकर ये हमारे काम तक सीमित रहते हैं फिर भी इनके कागुण लुप्त नही होते और हम उनसे प्रभावित होते ही हैं। पिशाचिनी होने के कारण इसकी साधना घर मे नही करनी चाहिए ।
श्मशान एकान्त वन प्रान्त और शिव मंदिर इस साधना क्रे उपयुक्त स्वल हैं। घर करने से सफलता देर मे मिलती है और घर का वातावरण दूषित होता है । सिद्ध होने के बाद तो यह नियंत्रित हो जाती है इसलिए दूषित नही कर पाती किन्तु सिद्ध होने से पहले स्वतंत्र रहती है ।
इस तीन रूपों में माना जा सकता है मां, बहन और पत्नी मां और बहन के रूप में मानने पर इसमें इतनी शक्ति नही आती पत्नी के रूप मे मानने पर इसकी सामथ्यं पूर्ण रूप से प्रकट होती है । किन्तु अपने स्वभाव के अनुसार यह पत्नी सुख में बाधा पहुंचाती है।
हां, व्यभिचारी बनाकर वैयमिक सुख में कमी नही आने देती पर पत्नी के नाम से जो व्यक्ति हमारे घर में है उसे कष्ट देती है। आवेश या दिखने जैसे कष्ट नही बल्कि उसके स्वास्थ्य मे ह्रासमोर चिन्तायें उत्पन्न करती है। मां और बहन रूप में मानने पर इनके सुखो मे बाधा पहुंचाती है ।
कर्ण पिशाचिनी क्या क्या कर सकती है
कर्ण पिशाचिनी भूत भविष्य वर्तमान की जानकारी दे सकती है।
कर्ण पिशाचिनी आपके आदेश अनुसार आपके के अन्य कार्य भी कर सकती है।
कर्ण पिशाचिनी आपके आदेश के अनुसार शत्रु का नाश भी कर सकती है।
कर्ण पिशाचिनी लाटरी सटे का नंबर दे सकती है।
कर्ण पिशाचिनी खजाने का रहस्य बता सकती है।
शेयर मार्किट में शेयर की जानकारी दे सकती।
किसी रोग को ख़तम कर सकती है और रोग को ख़तम करने की दवा बता सकती है
कर्ण पिशाचिनी सिद्धि कैसे प्राप्त करें
कर्ण पिशाचिनी सिद्धि प्रपात करने के लिए एक गुरु की आवश्यकता होती है जो आप को इस साधना की जानकारी प्रदान करता है। गुरु के बिना यह साधना में भारी नुकसान हो सकता है बिना गुरु के न करे। इस साधना से पहले किसी रक्षा मंत्र को सिद्ध करे।
कर्ण पिशाचिनी कितने दिन में सिद्ध हो जाती है
कर्ण पिशाचिनी को सिद्ध करने की अलग अलग विधि विधान है कोई विधान २१ है कोई ११ और कोई ४० दिन का है। यह डिपेंड करता आप कोन सा विधि विधान कर रहे हो
भैरव प्रत्यक्ष दर्शन साधना bhairav pratyaksh darshan sadhana ph.85280 57364
भैरव प्रत्यक्ष दर्शन साधना bhairav pratyaksh darshan sadhana
भैरव प्रत्यक्ष दर्शन साधना bhairav pratyaksh darshan sadhana भैरव साधना भैरव तंत्र के प्रमुख देवता हैं ये शिव के स्वरूप हैं तथा अमित शक्ति के भण्डार भी हैं। काल भैरव, बाल भैरव (वटुक भैरव) श्मशान भैरव, स्वर्ण भैरव आदि अनेक रूप हैं इनके । सात्विक, राजस और तामस रूप मे इनकी विभिन्न प्रयोजनों से इनकी साधना की जाती है।
भैरव प्रत्यक्ष दर्शन साधना
भैरव को बुलाने का मंत्र
bhairav pratyaksh darshan sadhana
प्राचीन भैरव मंत्र
भैरव साधना के लाभ
कलियुग सर्वाधिक प्रतिष्ठित देव हैं तथा शंकर के अंश होने के कारण शीघ्र प्रसन्न होने वाले भी हैं। माना भैरव शान्त स्वरूप भी हैं, किन्तु उनकी स्वाभाविक रूप राशि भी इतनी उम्र रहती है कि सामान्य साहस जवाब दे जाता है।
सिंह कितना भी सोम्य हो, विकराल सर्प कुछ भी न कहे किन्तु उनका सौन्दर्य इतना उत्कट होता है कि भय जनक बन जाता है और जब तक उससे निकटस्थता न हो भय बना ही रहता है।
मेरा अपना विचार है कि ” धनदा रति प्रिया यक्षिणी” या ‘कर्ण “पिशाचिनी’ जैसे प्रयोगों को अपेक्षा भैरव का प्रयोग किया जाए तो वह अधिक अच्छा रहता है । यक्षिणी या पिशाचिनी के प्रयोग आखिर अपने गुण और प्रभाव से प्रभावित करते हो हैं ।
कर्णं पिशाचिनी वालों को मैंने देखा है, उनका बुढ़ापा पहलवान के बुढ़ापे जितना कष्ट कर हो जाता है। वे अपनी व्यथा को खुद ही भोगते रहते हैं । वैसे भी कर्ण पिशाचिनी से भूत और वर्तमान की बता कर लोगो को चमत्कृत करने और पैसा पैदा करने के सिवा कुछ नहीं किया जाता।
यह दूसरी बात है कि कोई अत्यन्त समझदार व्यक्ति उसका दूसरा हितकर और स्थायी प्रयोग कर ले।’ भैरव की साधना घर मे नहीं करनी चाहिए। यद्यपि घर में साधना करने में कोई तात्त्विक बाधा नहीं है । एकान्त कमरे में की जा सकती है।
फिर भी एतियात के तौर पर किसी एकान्त स्थान में करना उचित रहता है। वाकला भैरव का प्रिय भोजन है बाक्ला उबले हुए चोले को कहते हैं । अगर उनका रूप अधिक भयावह लगे तो उनको नैवेद्य माल्य अर्पित करके ।
‘शान्ताकारं भुजगशयनं … इस मंत्र से प्रार्थना कर ले । मन में यह विश्वास रखे कि भगवान भैरव भक्त रक्षक हैं, वे सदा अपने भक्तों पर कृपा करते हैं। तंत्र में ऐसे प्रयोग हैं जो बड़े सरल हैं और जिनसे अनेक कष्ट सिद्ध किए जा सकते हैं ।
bhairav sadhanaभैरव को बुलाने का मंत्र
भैरव साधना का शाबर प्रयोग मंत्र — “काली काली महाकाली के पुत्र कंकाल भैरव हुकम हाजिर रहे मेरा भेजा रक्षा करे लान बांधूं बान चलते के फिरते के ओसाण बांधूं दशों सुर बांधू नौ नाड़ी बहतर कोठा बाघूँ फूल में भेजू फूल में जाये कोठे जी पंडे थर-थर कांपे हल हल हले गिर-गिर पड़े उठ उठ भागे बक बक बके मेरा भेजा सवा घड़ी सवा पहर सवा दिन सवा मास सवा पहर सवा दिन सवा मास सवा बरस को बावला न करे तो माता काली की शैय्या पर पग धरे बाचा चूके तो ऊभा सूखे वाचा छोड़ कुवाचा करे धोबी को नाद चमार के कंडे मे पड़े मेरा भेजा बावला न करे तो रुद्र के नेत्र से आंख की ज्वाला’ कढे सिर की जटा टूट भूमि में गिरे माता पार्वती के चीर पे चोट पड़े बिना हुकुम नही मारना हो काली के पुत्र ईश्वरो वाचा सत्यनाम -आदेश गुरु को”
bhairav sadhana vidhi भैरव साधना विधि
– गाय के गोबर से तिकोना चौका (लीप कर) देकर दक्षिण के तरफ मुख करके बैठे । काल रात्रि (वर्ष में तीन काल रात्रियों मानी जाती हैं जिन में शिव रात्रि, प्रमुख है) मे अथवा जिस दिन सूर्य ग्रहण हो उस रात्रि में यह प्रयोग करना चाहिए। एक ही आसन पर अविचल उक्त मंत्र का एक हजार जप करे।
पूजा सामग्री में लाल कनेर के फूल, सिन्दूर, लड्डू और लोंग का जोड़ा रखे। चार मुख का दीपक (बड़े दीपक में चारों ओर जलती हुई चार बत्तियों वाला दीपक) जलाये । दीपक में तिल्ली ( या सरसों) का तेल जलाया जाय। फूलों का गजरा पास मे रखे ।
एक हजार जप करने के बाद तिल और चीनी व घी मिलाकर इसी मंत्र से एक सौ आहुति देकर हवन करे । हवन करते समय या समाप्ति पर भैरव प्रकट हों तो निर्भीक भाव से फूलों की माला उनके गले में पहना दें नैवेद्य अर्पित कर दे । साष्टांग उनको प्रसन्न करे फिर जो कुछ भी उससे मांगे वही मिलेगा ।
muslim maran मुसलमानी मारण मंत्र | सुलेमानी मारण मंत्र
बिस्मिल्लाहिरहमार्निरहीम कहर नायिल कहर्की कहर कहर काया कहा हारो ! ( मन्त्र के आदि – अंत में प्रत्येक ११ बार दरुद् पढ़ें)
इसे पश्चिम की ओर मुंह करके इस्लामी तरीके से पूर्ण एकाग्रचित्तता से जप करें। यह मन्त्र प्रतिदिन रात्रि या सुबह की पहली नमाज के समय एक हजार बार जप करें और सजदा करें। शत्रु के बालों को एकत्रित करके मोंम का एक पुतला बनाएं। मोम में कपूर मिलाएं। इस पुतले पर बाल स्थापित करके १०८ बार मन्त्र से अभिपूरित करें। यह जब हो जाए तो झाडू की सींक का तीर कमान बनाकर १००० बार मन्त्र से अभिपूरित करें। अब पूर्ण मन्त्र पढ़कर ध्यान लगाकर शत्रु की छवि केन्द्रित करें और यह स्मरण करते हुए मन्त्र पढ़ें कि शत्रु का कलेजा तीर से घायल हो रहा है। तीर पुतले पर चलाएं; तीर जहाँ लगेगा वहाँ शत्रु को भीषण पीड़ा प्रारम्भ हो जाएगी।
बिस्मिल्लाह अर्रहमान निर्ररहीम साह चक्र की बावड़ी। कले मोतियन काहार । लंका सौ कोट समुद्र सी खाई। जहाँ फिरे मोहम्मदा वीर की दुहाई । कौन वीर आगे चले। सुलेमान वीर चले। दुर्शनी वीर चले। नादिरशाह वीर चले । मुट्ठी पीर चले। नहीं चले तो हजरत सुलेमान की दुहाई। शब्द सांचा । पिण्ड कांचा । चलो मन्त्र ईश्वरो वाचा |
इस मन्त्र को गुरुवार के दिन रात्रि के समय बबूल के वृक्ष के नीचे पश्चिमाभिमुख बैठकर इस भाँति जपें कि ३० दिन में १०,०००० जप पूर्ण हो जाए। जप के काल में या जप की पूर्णता पर मुट्ठी पीर हाजिर होंगे, उन्हें प्रसन्न कर लें ।
काले जादू से छुटकारा पाने के लिए कुछ आसान उपाय how to get rid of black magic
काले जादू से छुटकारा पाने के लिए कुछ आसान उपाय how to get rid of black magic
संक्षेप
how to get rid of black magic इस लेख में, हम आपको काले जादू से छुटकारा पाने के कुछ आसान और प्रभावी उपायों के बारे में बताएंगे। ये तरीके आपकी सुरक्षा और रक्षा में मदद कर सकते हैं और आपको नकारात्मक शक्तियों से बचाने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
how to get rid of black magic सबसे पहले क्या है काला जादू?
काले जादू, जिसे काला जादू भी कहा जाता है, एक प्रकार का ऐसा जादू है जिसमें नकारात्मक शक्तियों का प्रयोग किया जाता है। यह जादू विशेष रूप से किसी व्यक्ति को हानि पहुंचाने, उसके भविष्य को प्रभावित करने, या उसके वशीभूत करने के लिए किया जाता है। काले जादू के प्रभाव को खत्म करने के लिए नीचे दिए गए उपायों का प्रयोग करें।
उपाय 1: सकारात्मक सोच how to get rid of black magic
काले जादू के प्रभाव को खत्म करने का पहला कदम है सकारात्मक सोच का विकास करना। नकारात्मक शक्तियों का सामना करने के लिए, आपको आत्मविश्वास को बढ़ाने और सकारात्मकता को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की आवश्यकता होती है। ध्यान देने वाले व्यक्ति के साथ सकारात्मक रहने से, आप खुद को काले जादू के प्रभाव से बचा सकते हैं।
उपाय 2: धार्मिक अभ्यास how to get rid of black magic
धार्मिक अभ्यास करना भी काले जादू से बचने के लिए एक अच्छा उपाय है। धार्मिक ग्रंथों को पढ़ना, पूजा-पाठ करना और धार्मिक संघ में शामिल होना आपकी आध्यात्मिकता को मजबूत करेगा। इससे आपको नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव का सामना करने में मदद मिल सकती है।
उपाय 3: प्राकृतिक चिकित्सा how to get rid of black magic
प्राकृतिक चिकित्सा उपाय भी काले जादू के प्रभाव से निजात पाने के लिए मददगार साबित हो सकते हैं। जड़ी-बूटियों का उपयोग, धार्मिक चिकित्सा विधियों का अनुसरण करना, और योग और मेडिटेशन का प्रयोग करना शरीर और मन को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
उपाय 4: वास्तु शुद्धि how to get rid of black magic
काले जादू के प्रभाव से बचने के लिए, अपने घर में वास्तु का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण है। सही वास्तु के अनुसार अपने घर को सजाने और सभी क्षेत्रों को स्वच्छ और व्यवस्थित रखने से आपको नकारात्मक ऊर्जा से बचने में मदद मिल सकती है।
उपाय 5: आध्यात्मिक गुरु की सहायता how to get rid of black magic
काले जादू के प्रभाव से मुक्ति प्राप्त करने के लिए, आध्यात्मिक गुरु से संपर्क करना भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। एक अनुभवी आध्यात्मिक गुरु आपको सही मार्गदर्शन और उपायों की सिफारिश कर सकते हैं जो काले जादू के प्रभाव को खत्म करने में मदद कर सकते हैं।
उपाय 6: प्राकृतिक उपचार how to get rid of black magic
आयुर्वेदिक और हर्बल उपचार भी काले जादू से छुटकारा पाने में सहायक हो सकते हैं। ये उपाय प्राकृतिक और सुरक्षित होते हैं और आपको नकारात्मक ऊर्जा से बचाने में मदद कर सकते हैं।
उपाय 7: अपने विचारों को शुद्ध करें how to get rid of black magic
कई बार हमारे विचार भी हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं। काले जादू से बचने के लिए, अपने विचारों को शुद्ध रखना भी महत्वपूर्ण है। नकारात्मक विचारों को दूर रखने के लिए ध्यान देना और सकारात्मकता को अपने जीवन का हिस्सा बनाना आपको नकारात्मक शक्तियों से बचा सकता है।
उपाय 8: वशीकरण से बचें how to get rid of black magic
काले जादू के प्रभाव से बचने के लिए, आपको वशीकरण जैसी नकारात्मक ताकतों से दूर रहना चाहिए। वशीकरण से बचने के लिए अपने दिमाग को सकारात्मक और स्वयं के नियंत्रण में रखने का प्रयास करें।
उपाय 9: कर्म और पुण्य how to get rid of black magic
काले जादू से बचने के लिए, आपके कर्मों और पुण्य का महत्व होता है। नकारात्मक कर्मों के स्थान पर सकारात्मक कर्म करने से आपको नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिल सकती है।
उपाय 10: ध्यान और धारणा how to get rid of black magic
ध्यान और धारणा के अभ्यास से भी काले जादू से छुटकारा प्राप्त किया जा सकता है। नियमित ध्यान करने से आपका मन शांत होता है और आपको नकारात्मक शक्तियों का सामना करने की क्षमता मिलती है।
उपाय 11: संगठना कौशल how to get rid of black magic
अपने जीवन को संगठित रखना भी नकारात्मक ऊर्जा से बचने में मदद कर सकता है। समय के साथ संगठित रहने से आप नकारात्मकता के प्रभाव को कम कर सकते हैं और सकारात्मक ऊर्जा को अपने जीवन में आने दे सकते हैं।
उपाय 12: व्यायाम और योग how to get rid of black magic
व्यायाम और योग का अभ्यास भी आपको नकारात्मक ऊर्जा से बचने में सहायक हो सकता है। नियमित व्यायाम करने से आपका शरीर स्वस्थ और मन शांत रहता है जिससे आप काले जादू के प्रभाव से बच सकते हैं।
उपाय 13: अपने प्रियजनों का साथ how to get rid of black magic
अपने प्रियजनों का साथ होना भी आपको काले जादू के प्रभाव से बचने में मदद कर सकता है। प्रेम और समर्थन के वातावरण में रहने से आपको नकारात्मक ऊर्जा से दूर रहने की शक्ति मिलती है।
उपाय 14: अच्छे संबंध how to get rid of black magic
अच्छे संबंध बनाना और उन्हें निभाना भी काले जादू से छुटकारा पाने में सहायक हो सकता है। सच्चे और समर्थित संबंधों में रहने से आपको नकारात्मकता के प्रभाव से बचने में मदद मिल सकती है।
उपाय 15: सकारात्मक आत्मविश्वास how to get rid of black magic
सबसे अहम उपाय है सकारात्मक आत्मविश्वास का विकास करना। खुद के और अपने शक्तियों के प्रति विश्वास रखने से आप काले जादू से छुटकारा पा सकते हैं। नकारात्मक ऊर्जा को पराजित करने के लिए, सकारात्मक सोचने और सक्रिय रहने का संकल्प लें।
समापन भाग how to get rid of black magic
काले जादू से छुटकारा पाना आसान नहीं हो सकता है, लेकिन ये उपाय आपको इसके प्रभाव से बचने में मदद कर सकते हैं। सकारात्मक सोच, धार्मिक अभ्यास, प्राकृतिक चिकित्सा, और संगठित जीवन जीने के माध्यम से आप नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। ध्यान देने वाले विचार, धारणा, और अच्छे संबंध बनाना भी आपकी सुरक्षा में मदद करेंगे। ध्यान रहे कि ये उपाय केवल असरदार हो सकते हैं जब आप नियमित रूप से इन्हें अपनाते हैं और पूरे मन से उन पर ध्यान देते हैं।
5 अद्वितीय पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या काले जादू सच में होता है?
हां, काले जादू वास्तव में एक प्रकार का जादू है जिसमें नकारात्मक शक्तियों का प्रयोग किया जाता है। लोग इसे दूर हटाने के उपाय ढूंढते हैं ताकि वे सकारात्मक और सुरक्षित जीवन जी सकें।
2. क्या धार्मिक अभ्यास काले जादू के प्रभाव को खत्म कर सकता है?
धार्मिक अभ्यास करना नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकता है। धार्मिक ग्रंथों को पढ़ना, पूजा-पाठ करना, और धार्मिक संघ में शामिल होना आपकी आध्यात्मिकता को मजबूत कर सकता है जिससे आप नकारात्मकता के प्रभाव से बच सकते हैं।
3. क्या वशीकरण वाकई में काले जादू का हिस्सा है?
हां, वशीकरण एक प्रकार का काला जादू है जिसमें नकारात्मक ऊर्जा का प्रयोग किया जाता है। इसके जरिए किसी व्यक्ति को अपने वश में किया जा सकता है।
4. क्या प्राकृतिक उपचार काले जादू के प्रभाव को खत्म कर सकते हैं?
हां, प्राकृतिक उपचार काले जादू के प्रभाव से छुटकारा पाने में मदद कर सकते हैं। जड़ी-बूटियों का उपयोग, धार्मिक चिकित्सा विधियों का अनुसरण करना, और योग और मेडिटेशन का प्रयोग करना शरीर और मन को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
5. क्या सकारात्मक सोच काले जादू के प्रभाव से बचाने में मदद करती है?
हां, सकारात्मक सोच का विकास काले जादू के प्रभाव से बचने में मदद करता है। नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव को खत्म करने के लिए, आपको आत्मविश्वास को बढ़ाने और सकारात्मकता को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की आवश्यकता होती है।
ध्यान देने वाले पाठकों, काले जादू से छुटकारा पाना आपके जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो सकता है। उम्मीद है कि ये उपाय आपको इस नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति प्रदान करेंगे और आपको सकारात्मक और सुरक्षित जीवन जीने में मदद करेंगे।
इस लेख का उद्देश्य सिर्फ जानकारी प्रदान करना है और किसी भी नकारात्मक प्रभाव को दूर करने के लिए आध्यात्मिक गुरु या चिकित्सक की सलाह लेना उचित हो सकता है।
इच्छा पूर्ति गणेश मंत्र – गणेश जी का सबसे शक्तिशाली मंत्र ph.85280 57364
इच्छा पूर्ति गणेश मंत्र – गणेश जी का सबसे शक्तिशाली मंत्र
इच्छा पूर्ति गणेश मंत्र ganesh icchapurti mantra ओम नमः शिवाय दोस्तों गुरु मंत्र साधना में आपका हार्दिक स्वागत है दोस्तों कोई भी ऐसा हम कार्य करते हैं जो शुभ कार्य हो किसी की शादी हो पूजा हो पाठ हो कोई साधना हो चाहे कोई भी ऐसा शुभ कार्यऔ में गणेश का वंदन करते हैं। भगवान गणेश का नाम लेते हैं हर कार्य में भगवान गणेश का पूजन किया जाता है। ताकि उसे कार्य में आने वाले विघ्न को भगवान गणेश हर सके इसलिए उन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है।
भगवान गणेश का जो नाम है वह चाहे पंडित हो चाहे वह तांत्रिक हो चाहे वह अघोरी हो चाहे ,वह सात्विक साधना कर रहा हो, चाहे वह तांत्रिक साधना कर रहा हो बिना गुरु और बिना गणेश पूजन के कोई भी साधना कोई भी साधना पूर्ण नहीं होती।
भगवान गणेश का आवाहन भगवान गणेश का पूजन करना ही पड़ता है ,और आज मैं आपके सामने ऐसा मंत्र लेकर आया हूं। भगवान गणेश की साधना बहुत ही दुर्लभ साधना है बहुत अच्छी साधना है और ब्रह्मांड का सबसे उच्चतम मंत्र ,जो मैं आज आपको बताने वाला हूं। भगवान गणेश का को सबको पता ही है कि भगवान गणेश जो है वह भगवान भोलेनाथ के पुत्र हैं। उनके बेटे हैं माता पार्वती के अपटन से पैदा हुए और प्रथम में पूज्य देव है सबसे पहले सबसे प्रथम जो है।
वह भगवान गणेश की पूजा होती है। उसके बाद किसी और देवता की पूजा की जाती है। कोई भी साधना के समय हम प्रार्थना करते हैं कि भगवान गणेश के वह समस्त विघ्नो को हमारे हर सकें और हमारी जो साधना हमारी जो सेवा है हमारे जो शुभ कार्य है। वह पूर्ण हो भगवान गणेश की जो हम साधना करते हैं तो माता लक्ष्मी का आशीर्वाद माता लक्ष्मी का आगमन पूजा करते हैं।
तो उसे घर में माता लक्ष्मी के साथ महालक्ष्मी भी विराजमान रहती हैं। और साथ ही जो रिद्धि सिद्धि हैं जो कि भगवान गणेश की पत्नियों हैं, भगवान गणेश की आज्ञा के बिना उसे घर में प्रवेश नहीं करती। जिस घर में भगवान गणेश का नाम ले जाता जो साधक जो सेवक जो पूजा पाठ है साधना करते हैं ,भगवान रिद्धि सिद्धि स्वयं स्थापित हो जाती है और साधक की हर इच्छा पुरी होती है ।
समस्त सिद्धियां प्रदान होती है और बुद्धि के देवता कहे जाने वाले भगवान गणेश बल बुद्धि को अगर पितरों को प्रसन्न करना हो तो सुबह सुबह ब्रह्म मुहूर्त में गणेश पाठ किया जाता है। और सूर्य को अर्घ दिया जाता है। जिससे कि भगवान गणेश की चालीसा और सूर्य को अर्घ देने से हमारे पितर हैं वह प्रसन्न होते हैं।
जितने भी हमारे पितर दोष हैं, वह सभी पितर दोष जो है वह समाप्त होते हैं। भगवान गणेश के बारे में जितनी महिमा का गुणगान किया जाए उतना कम है। जिन्हें बेसन के लड्डू प्रिय हैं तो आज मैं आपको भगवान गणेश की साधना के बारे में बताने जा रहा हूं कि किस तरीके से आप भगवान गणेश की साधना करके आप हर एक इच्छा जीवन पूरी कर सकते हो सुख में जीवन व्यतीत कर सकते हो साथ साथ में अपने घर में दुकान में नौकरी में साथ साथ में आपके घर में जो बिगड़े हुए काम है, वह आपके बन सकते हैं।
इच्छा पूर्ति गणेश मंत्र – गणेश जी का सबसे शक्तिशाली मंत्र
इच्छा पूर्ति गणेश मंत्र – गणेश जी का सबसे शक्तिशाली मंत्र यह शाबर मंत्र हर अच्छा को करेगा पूरी ph
गं गणपतये नमः
इच्छा पूर्ति गणेश मंत्र – गणेश जी का सबसे शक्तिशाली मंत्र साधना विधि
गणपति मन्त्र सामग्री – जलपात्र, लाल पुष्प, गणपति की मूर्ति या चित्र, सुगन्धित अगरबत्ती, शुद्ध घृत का दीपक । माला – मूंगे की या लाल रक्त चन्दन की माला । समय- दिन का कोई भी समय | आसन – लाल रंग का सूती या ऊनी आसन दिशा- पूर्व । साधक पूर्व की तरह मुंह करके बैठे। जपसंख्या – सवा लाख । अवधि- पाँच, ग्यारह या इक्कीस दिन । गणेश के 12 नामो का जप करें
साधक किसी भी बुधवार से यह साधना प्रारम्भ कर सकता है। यह प्रयोग जीवन में कल्याण-कामना के लिए किया जाता है। घर में विवाह कार्य सफलतापूर्वक सम्पन्न हो जाये, घर में सुख-शान्ति बनी रहे या किसी कार्य में विघ्न न आवे, इसके लिए यह प्रयोग किया जाता है।
बुधवार के दिन प्रातः स्नान कर सामने गणपति की मूर्ति या चित्र स्थापित कर उसका सामान्य पूजन करें और इसके बाद मन्त्र का जप प्रारम्भ कर दें। जितने दिन में यह साधना सम्पन्न करनी हो, उसी अनुपात में नित्य- मन्त्र जप सम्पन्न करें।
साधना समाप्त होने पर किसी ब्राह्मण-पुत्र या कुंवारी कन्या को भोजन कराकर उसे दक्षिणा, वस्त्र आदि भेंटस्वरूप प्रदान करें और गणपति का विग्रह या मूर्ति अपने पूजा-स्थान में या घर में स्थापित कर दें। ऐसा करने पर निकट भविष्य में होने वाला कोई विघ्न उपस्थित नहीं होता ।
riddhi siddhi shabar mantra रिद्धि सिद्धि शाबर मंत्र साधना भगवन गणपति की प्राचीन साधना ph.85280 57364
riddhi siddhi shabar mantra रिद्धि सिद्धि शाबर मंत्र साधना भगवन गणपति की प्राचीन साधना ऋद्धि सिद्धि ये दो बहने हैं। ये जहां भी जाती हैं, एक साथ जाती हैं।भोज-भंडारा सबको खिलाने से पहले, पांच बूंदी के लड्डू निकालकर, उन परकामिया सिंदूर लगाएं। श्री गणपति का पूजन करें। एक कलश में एक लड्डू रखकर कुएं पर जाकर जल भरें और मंत्र पढ़कर चारों लड्डू कुएं में छोड़ दें। फिर ‘कलश स्थापन’ कर, उपर्युक्त मंत्र को एक हजार बार जपकर ब्राह्मणों को भोजन खिलाएं, तो भंडार में अन्न न घटे।
मंत्र इस प्रकार है-
रिद्धि सिद्धि शाबर मंत्र
ॐ नमो आदेश श्री गुरु को । गजानन वीर बसे मसान । अब दो ऋद्धि का वरदान । जो जो मांगूं, सो-सो आन। पांच लड्डू, शिर सिन्दूर हाट बाट की। माटी मसान की। सेष ऋद्धि सिद्धि हमारे साथ। शब्द सांचा, फुरो मंत्र, ईश्वरो वाचा ।