श्री कृष्ण साधना प्रत्यक्ष दर्शन साधना shree krishna sadhna ph.8528057364
श्री कृष्ण साधना प्रत्यक्ष दर्शन साधना shree krishna sadhna ph.8528057364
श्री कृष्ण साधना प्रत्यक्ष दर्शन साधना shree krishna sadhna ph.8528057364 श्रीकृष्ण साधना की जितने भी कृष्ण भक्त हैं या भगवान विष्णु के भक्त हैं अपने जीवन को कृष्ण में करते हुए मुक्ति को प्राप्त हो जाए उनके लिए साधना बहुत ही उपयोगी है पूछते हैं कि हम भगवान कृष्ण में बहुत श्रद्धा रखते हैं कुछ लोग हैं जो कहते हैं हम भगवान विष्णु में बहुत श्रद्धा रखते हैं दोनों एक ही है रखते हैं और एकादशी का व्रत भी रखते हैं तो ऐसी कोई साधना बताइए जिससे कि हम कर रहे हैं उससे कुछ अच्छा हमें अनुभव हो साथ में तपस्या करें
यह तपस्या के जैसे ही काम करेगा भगवान श्री कृष्ण की जोड़ी साधना है जिसमें 11 दिन यह साधना है जिसमें जैसा कि आप पूरे श्रद्धा भाव से नवरात्रि में जैसे आपने पूजन किया होगा वैसे ही 11 दिन की साधना है जिसमें 11 दिन तक आप भगवान कृष्ण के मंत्र का जप करेंगे और 11 दिन के बाद जो 11 दिन पूर्णाहुति होगी उसके बाद आपको यह योग्यता प्राप्त हो जाएगी कि आप इनके मंत्र को अगर जब करेंगे
आगे यह मंत्र जप के प्रभाव नजर आएंगे आपको यानी कि अनुभव होना शुरू हो जाएंगे कृष्ण जी साधना में यह लेना कि प्रभु मैं आपकी साधना तो शुरू कर रहा हूं लेकिन दर्शन आप तभी देना चाहे आप सपने में दर्शन आप तभी देना जब आप मुझे अपने लोक में ले जाने के लिए राजी हो मृत्यु के बाद आप मुझे मुक्ति देने के लिए राजी हो तभी आप मुझे दर्शन देना स्वीकार कर लेंगे
आपकी इस प्रार्थना को जैसे 11 दिन की आपने साधना करी तो हो सकता है बहुत से लोगों को 11 दिन में ही प्रभु के दर्शन हो स्वप्न में हो या फिर ऐसा हो सकता है कि 11 दिन की साधना के बाद भी जब प्रतिदिन एक माला पांच माला उस मंत्र के जिससे आप साधना करेंगे उसको चालू रखेंगे
तो कुछ समय के बाद आपको भगवान के दर्शन हो यह दर्शन होते ही हैं लेकिन क्योंकि आप पहले ही अपनी मनोकामना बता देंगे कि प्रभु दर्शन तब देना जब आपको मुक्ति स्वीकार हो क्या आप मुझे मुक्ति देने के लिए तैयार हैं आप मुझे स्वीकार करते हैं अपने लोक में लेकर जाएंगे आप मुझे नरक यात्रा नहीं देखने देंगे जब आपको यह मेरी मनोकामना स्वीकार हो पूरी कर सकते हैं
यह वर मुझे दे सके तभी आप मुझे दर्शन देना चाहे आप जैसा देना चाहे सपने में देना चाहे साक्षात देना चाहे जहां जिस रूप में आप दर्शन देना चाहे आप मुझे दर्शन देना जब आपको यह मेरी जो मनोकामना है यह स्वीकार हो
आप मुझे मुक्ति प्रदान करेंगे और अपने लोक में लेकर जाएंगे साधना करें जो लोग हैं जो कृष्ण भगवान को मानते हैं जो वृंदा वृंदावन जगन्नाथ पुरी और द्वारकाधीश जो कृष्ण भगवान के स्थानों पर जाते हैं और चाहते हैं कि उन्हें मुक्ति प्राप्त हो तो बस यूं ही उनका नाम लेने की वजह आप यह साधना करें
उसके बाद आप कोई अनुमति प्राप्त हो जाएगी कि आप जिस मंत्र से साधना करेंगे पूरे जीवन आप उसको कभी भी कहीं भी घूमते फिरते बिना नागे
अब जब करते हैं तो उसकी गिनती होगी वह आपके भाग्य से जुड़ता जाएगा और आपकी जीवात्मा शक्तिशाली होती जाएगी
उसका फायदा है साधना का बिना साधना के सिर्फ जप करने से कुछ नहीं होता ना कोई फल मिलता है ना कुछ बस श्रद्धा से आप जब तेरे पवित्रता बनी रहेगी मन को शांति मिलेगी
श्री कृष्ण मंत्र
ऊँ क्लीं कृष्णाय नमः
श्री कृष्ण साधना विधि
लेकिन उसकी गिनती नहीं होती है गिनती तब होती है जब आप किसी भी मंत्र को सही नियम के अनुसार साधना के रूप में करें तो आप इस साधना को किसी भी एकादशी से शुरू करें 11 दिन के लिए 11 दिन आप जप करें हो सके
तो प्रतिदिन जप के बाद हवन करें जप संख्या जो रहेगी वह पांच माला कम से कम 11 माला 21 माला आप अपनी स्वेच्छा से चुन सकते हैं कि आप कितनी जब करना चाहते हैं जरूरी नहीं है कि इसमें कौन माला की जाए आप अपनी स्वेच्छा से कर सकते हैं उसके बाद हम रात्रि बजे से आपने 8:09 बजे जब शुरू किया और 10:00 बजे तक 11:30 बजे तक 10:30 बजे तक हो गया आधे घंटे में उसके बाद आप छोटा सा हवन कर सकते हैं
जिसमें हूं कि आप इसी जो मंत्र के अब जब करेंगे उसी करनी होगी जो कि मात्र एक माला क्या होती रहेगी एक माला की बस आप हवन कर देना इसमें ज्यादा करने की जरूरत नहीं है क्योंकि जब आप हमेशा करते रहेंगे भोजन करा सकते हैं बहुत अच्छी बात है या फिर किसी मंदिर में भी सीधे आप दान दे सकते हैं
ऐसा करने के बाद आप दिन रात घूमते फिरते चलते-फिरते कभी भी भगवान कृष्ण का जिसमें मंत्र से आप साधना करते हैं उसे कर सकते हैं और आपको उसे नसीब शांति मिलेगी बल्कि आपको मुक्ति भी प्राप्त हो सकती है
इस साधना को करने से यह जो मंत्र है जब उसका आपकी जब की अनुमति मिल जाएगी और पूरे जीवन आप इसको जपते रहेंगे तो आपकी मुक्ति जो है वह निश्चित है
आपको भगवान विष्णु के लोक में स्थान अवश्य मिलेगा क्योंकि भगवान कृष्ण का क्या स्थान है विष्णु लोग क्योंकि भगवान विष्णु के अवतार हैं तो भगवान विष्णु ने जहां भगवान कृष्ण आपको लेकर जाएंगे वही आपकी स्थिति होगी जिन्हें जिन्होंने अभी यह बताया कि उन्हें भगवान के दर्शन वह तो हम नहीं बताएंगे
लेकिन हाथ दर्शन हुए बहुत सारे साधकों को स्वप्न में दर्शन भी दर्शन ही होते हैं उसे आप भ्रांति ना समझना स्वप्न में दर्शन होना भी बड़ी बात होती है क्योंकि यूं ही आप जीते रही आपको कभी दर्शन नहीं होंगे लेकिन साधना के समय किसी विशेष क्रिया के समय अगर आपको दर्शन होते हैं तो
वह दर्शन ही होते हैं जो शक्ति अपनी इच्छा से देती है तो बहुत सारी लोगों ने बताया कि उन्हें साक्षात दर्शन हुए सपने में प्रभु के बहुत भाग्यशाली हैं लेकिन ऐसा किया जाए कि ऐसी मनोकामना के साथ करें कि हमें मुक्ति देने के लिए राजी हो प्रभु तभी आप हमें दर्शन देना तो ऐसी मनोकामना के साथ संकल्प लेकर
आपको करते हैं 11 दिन की तो उसके बाद से आपके जीवन में आना शुरू हो जाएगी एक बात ध्यान रखना पत्नी का दुख बच्चों का दुख परिवार का दुख यह सब भूल जाना जब साधना करते हैं एक बात निश्चित समझकर ही करना चाहिए क्या आप के ऊपर जिम्मेदारी जरूर होती है इन लोगों को सुखी रखने की पहुंचाने की लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अपने जीवन को समापत ही करलो
भगवान कृष्ण का साथ होता है तो धीरे-धीरे होने लगती है एक बात ध्यान रखना कि जो होता है अच्छे के लिए होता है यह निश्चित है सोचना चाहिए यह ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि जो कुछ हो गया है यह तो वह गलत हो रहा है जो कि हम तो आध्यात्मिक हैं हम तो पूजन पाठ करते फिर भी गलत हो रहा है जो होता है वो अच्छे के लिए ही होता है
हर इच्छा सही होता है हां लेकिन अध्यात्म का रास्ता चुनना हमारे ऊपर है कि हर इच्छा के बावजूद भी हमारे जीवन में उन्नति होती जाए इसके लिए क्या करना है अध्यात्म से जुड़ना जरूरी है जो भी ऐसा करेंगे
उनको आगे भविष्य की चिंता नहीं करना चाहिए प्रभु के ऊपर छोड़ देना चाहिए प्रभु अपने आप आपके जीवन में सब कुछ अच्छा ही करेंगे जिससे आपका भी भला हो और आपके परिवार का भी भला हो जो भी है
साधना करना चाहते हैं 11 दिन की साधना कर सकते हैं कर सकते हैं कर सकते हैं जो भी माल आपके पास है और उसमें यंत्र की जरूरत नहीं है जब भी कर सकते हैं उसकी भी गिनती होती है जो भी जितने भी भक्त हैं उनके लिए
Goga jaharveer sadhna प्राचीन नाथपंथ की गोगा जाहरवीर साधना ph. 8528057364
Goga jaharveer sadhna प्राचीन नाथपंथ की गोगा जाहरवीर साधना ph. 8528057364
Goga jaharveer sadhna प्राचीन नाथपंथ की गोगा जाहरवीर साधना ph. 8528057364 ओम नमः शिवाय दोस्तों शिव परिवार में आपका हर भाइयों गोगा जाहरवीर साधना Goga jaharveer sadhna बहुत सारे हमारे भाई बहन गोगा जाहरवीर साधना Goga jaharveer sadhna के बारे में पूछ रहे थे कि गोगा जाहरवीर की साधना बताइए गोगा जाहरवीर की साधना Goga jaharveer sadhna बताइए गोगा जाहरवीर का जन्म स्थान गोगामेडी में है राजस्थान में है
बहुत बड़ा मेला जो है वह लगता है वहीं की समाधि है हिंदू लोग गोगा जाहर वीर और मुस्लिम लोगों का पीर के नाम से पूजते हैं भादो नवमी को इनका जन्म हुआ था इसी महीने में भादो का जो यह समय चल रहा है जैसे सावन खत्म होकर भादो शुरू होता है
तो गोगा जाहरवीर की सेवा शुरू हो जाती है गोगा जाहरवीर के दरबार में लोग हाजिरी देना शुरू कर देते हैं और गोगा जाहरवीर बहुत बड़े पीर और इनके साथ पीर पैगंबर साथ-साथ में बहुत सारे देवी देवताओं के साथ चलते हैं
जैसे कि मैंने आपको बताया गोगा जाहरवीर पदम नाग अवतार है गुरु गोरखनाथ के चेले हैं गुरु गोरखनाथ के चेले बनने का सफर और तमाम शक्तियों को प्राप्त करना जैसे 56 कलवे चौसठ योगिनी उन्होंने प्राप्त करते हो तंत्र मंत्र की जो शिक्षा प्राप्त करी थी शुरू हुआ था
जब माता बाछल नेम को देश निकाला दिया था उन्होंने अर्जुन सर्जन क्योंकि इनकी मौसी के लड़के थे उनको उनका शीश काट दिया था को देश निकाला कर दिया था तो राज्य से निकाल दिया था माता बाछल ने गोगा जी गुरु गोरखनाथ की शरण में गए
वहां पर इन्होंने गुरु धारण की और तमाम शिक्षा प्राप्त की 64 जोगनी है वह माता काली से गुरु गोरखनाथ के द्वारा बताए रास्ते से शिक्षा प्राप्त की और पूर्ण संत की शिक्षा प्राप्त की थी गोगा जी महाराज ने गोगा जी महाराज पहले से पीछे भाइयों ने
जब जब इनकी मां के पेट में थे तो जब लोगों ने बोलना शुरू किया इनकी मां को के पति तपस्या के लिए गए हैं और गर्भ में किसका बच्चा है तो उन्होंने पहली बार जो है मां के गर्भ से बोलकर अपनी मां की लाज बचाई थी
गोगा जाहरवीर को सभी लोग पूजते हैं हिंदू मुस्लिम सिख इसाई सभी लोग और सारे धर्म को एक करने का प्रतीक माना जाता है गोगा जाहरवीर के साथ ख्वाजा पीर माता काली माता मदानन माता मसानी खेड़ा महाराज भैरव बाबा हनुमान जी बहुत सारे देव जो हैं
वह गोगा जाहरवीर के साथ चलते हैं गोगा जाहरवीर के साथ चलते है आपको बताइए नीला घोड़ा और नरसिंह पांडे जो किं के वजीर थे नरसिंह पांडे आगे और पीछे भज्जू कोतवाल जो है वह सदैव रहते हैं
Goga jaharveer sadhna गोगा जाहरवीर साधना विधि
Goga jaharveer sadhna गोगा जाहरवीर साधना विधि
Goga jaharveer sadhnaइनके साथ इस साधना में ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है और अब बता दो मैं आपको की साधना कैसे करनी है साधना है इस साधना की शुरुआत आप गोगा नवमी के दिन जो यह किसी भी शुल्क पक्ष भारतीय किसी और वीरवार से आप इस साधना को शुरू कर सकते हैं
जो अगर शुक्ल पक्ष की व्यवस्था करोगे तो कैसे में बहुत बढ़िया दिन है और अगर गोगा नवमी के दिन करोगे तो इससे बड़ा दिन कोई हो ही नहीं सकता भाई इनकी जो साधना है उनकी साधना गोगामे डी घर में गोगा मेडी पर या फिर लोग घर में भी को मेड़ी बनाकर जिस तरीके से लोग शिवलिंग स्थापित कर लेते हैं और देवताओं की मूर्ति स्थापित कर लेते हैं अपने घर में आंगन में उसी तरीके से गोगा जाहरवीर की मूर्ती को स्थापित कर लेते मंत्र द्वारा और उनकी पूजा करते हैं और वहां पर इनकी साधना कर सकते हैं
या फिर एकांत कमरे में बिछड़कर छिड़ककर खुशबूदार बनाकर उस कमरे में आप इस साधना को शुरू कर सकते हैं। अकेले ऊपर शाहदरा में नीले कपड़े ऑफिस सफेद कपड़े ऑफिस पीले कपड़ों का इस्तेमाल होता है यानी कि जो आप साधना काल में बैठोगे तो आपके पास नीले सफेद या पीले कपड़े पहने होना चाहिए
हम करते हैं शुरुआत साधना की पहली दिन जब साधना की शुरुआत करेंगे यह साधना शाम को आपको करनी होती है 7:00 के बाद आपको इस साधना को करना है कोशिश आपको जब करनी है जो इस साधना को जब सब सो जाएं बाद रूम में 10 बजे 12:00 से पहले कोई साधना को करना है पहले दिन वीरवार के दिन पहले दिन आप करेंगे तो सुबह उठकर नहा कर पथवारी माता पर जाना है और मंदिर जाकर दो लोग और एक बतासा माता पथवारी को भोग लगाना
घर आ जाएंगे घर आने के बाद गोगा जाहरवीर कि जो है साफ सफाई करके इतर छिड़के गोगा जाहरवीर की तस्वीर या फिर कोई मूर्ती जो कपड़ा है वह चौकी पर बिठाकर गोगा वीर की जो तस्वीर आपको उस पर रखनी है और घी का दीपक जाहरवीर मंत्र से नाम का जलाना है इतर छिड़कना है अगरबत्ती आपको जलानी है बात बता रहा हूं कि अगर कपड़ा नीला हो तो और अच्छी बात है बैठकर आपको गोगाजी का ध्यान करना है और हाथ में जल लेकर प्रण करना कि गोगा जाहरवीर हे बाबासाधना में सफलता दे हाथ में गंगाजल आप ले सकते हैं । गोगा जाहरवीर बाबा 41 दिन की साधना करने जा रहा हूं साधना में मुझे सफल करो ज्ञान में प्रदान करो जैसे ही सेवा करो सेवा स्वीकार करो तो पहले दिन आपको यह पढ़ लेगा और उस पानी को धरती पर छोड़ देना
Goga jaharveer sadhnaगोगा जाहरवीर मंत्र जी का शाबर मंत्र
धन-धन गोगा मंडली, धन-धन गोगा सुल्तान । पर्वत धूना धुमिया गोगा चढे जहान ।। गोगा सन्धि कोठडी मली बिशियर नाग । साधू चले वन्खंदी आ करके तमाम ।। सारे हाथ निवामदे सीता के प्रभू राम । दाई मोढे ऊपर कालका बाये चले हनुमान ।। माथे ऊपर नाहर सिंह तू नागो का सुल्तान । फुरो मंत्र इस्वरिये वाचा देखू जाहरवीर तेरे शब्द ओर कलाम का तमाशा ।। आदेश गुरु जी आदेश गुरु जी आदेश गुरु जी
swapna matangi स्वप्न मातंगी साधना और स्वप्न वाराही साधना स्वप्न मातंगी साधना इस साधना से मातंगी देवी और वीणावादिनी वाराही अपनी साधक को स्वप्ने में दर्शन दे करके भूत भविष्य वर्तमान का सब रहस्य बता देती आप इस साधना भूत सारे रहस्य जान सकते है इस का मंत्र आप को निम्न है
swapna matangi mantra स्वप्न मातंगी साधना और स्वप्न वाराही मंत्र
पहला मन्त्र मातङ्गी माता का है। यदि एक दिन में ही शुभा शुभ जानना हो तो निराहार रहकर ११ माला जप कर सो जायँ। सब कुछ स्वप्न में दिखाई देगा । ५ माला नित्य जपते रहने से जब आवश्यकता हो, सभी शुभ-अशुभ ध्यान में या स्वप्न में दिखाई देने लगता है।
प्रत्येक अष्टमी को कभी खीर, कभी हलुआ और कनेर या गुड़हल के फूल, कमलगट्टा, गुग्गुल आदि से जप का दशांश होम करते रहना चाहिये। तीनों मन्त्रों की विधि समान है। सदैव श्रद्धा से जप करने से ‘वीणावादिनी’ या ‘वाराही’ दोनों में से कोई नित्य दर्शन देती हैं और सभी कार्यों को पुत्रवत् बताती रहती हैं।
shabar mantra rahsya जीवन में सफलता हेतु शाबर मंत्र रहस्य ph.85280 57364
shabar mantra rahsya जीवन में सफलता हेतु शाबर मंत्र रहस्य जीवन में सफलता हेतु शाबर मंत्र Shabar Mantra साधनाएं यह सर्वथा सत्य है, कठिन कार्य और सूखी रोटी लोग विवशता में ही स्वीकार करते हैं। व्यक्ति सहजता चाहता है। प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में सहजता की स्थिति को ही खोजता रहता है।
shabar mantra rahsya जीवन में सफलता हेतु शाबर मंत्र रहस्य ph.85280 57364
शाबर मंत्र shabar mantra क्या है?
शाबर मंत्र एक प्रकार का तंत्र है जो हिंदू तंत्र शास्त्र का हिस्सा है। इसे मुख्य रूप से तंत्रिक क्रियाओं और मंत्रों का संग्रह माना जाता है जो शक्तिशाली और सिद्ध करने वाले माने जाते हैं। शाबर मंत्रों के अंतर्गत, विभिन्न देवी-देवताओं, ग्रहों, नवग्रहों, नग-नागिनों आदि को शाबर मंत्र की शक्ति के द्वारा प्रसन्न करने की सिद्धि बताई जाती है। यह मंत्रों का विशेष उपयोग और विभिन्न क्रियाओं को संपन्न करने के लिए जाप, ध्यान और आसन की विधियों पर आधारित होता है। शाबर मंत्रों का अध्ययन और उपयोग धार्मिक और तांत्रिक प्रयोगों में व्यापक रूप से किया जाता है।
shabar mantra rahsya जीवन में सफलता हेतु शाबर मंत्र रहस्य ph.85280 57364
शाबर मंत्र shabar mantra का इतिहास
शाबर मंत्र shabar mantra की प्राचीनता शाबर मंत्र का इतहास महाभारत के काल का है महाभारत का युद्ध ऐतिहासिक युद्ध है यह कौरव व पांडवों के बीच में हुआ था। युद्ध से पहले अर्जुन को दिव्यास्त्र प्राप्त करने थे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अर्जुन को भगवान शिव से अस्त्र प्राप्त करने के लिए पहले परीक्षा देनी पड़ी फिर उसके समय ही शाबर मंतर को रचना हुई थी
यह संभव है कि भिन्न-भिन्न सामाजिक स्थितियों के साथ-साथ सहजता की स्थितियों को परिभाषित करने में अंतर हो, किंतु वस्तु स्थिति तो सहजता को प्राप्त करने की ही होती है।
यहां तक मानव प्रायः जो जाने अनजाने में अपराध कर बैठता है, उसके मूल में जाकर अगर सूक्ष्मता से अध्ययन किया जाए, तो वहां भी प्रायः किसी सहजता को प्राप्त करने की ही चेष्टा होती है।
सहजता को प्राप्त करना मानव का स्वाभाविक गुण है, क्योंकि सहजता के द्वारा ही ऐश्वर्य और चिंतारहित जीवन की स्थिति उत्पन्न होती है। सम्मान, सुरक्षा, निश्चिंता, किसी भी आशंका से मुक्त होना, जैसी कुछ स्थितियां आदि वास्तव में सहजता की स्थिति के ही कुछ अन्य भेद हैं।
मानव जो परिश्रम करके धनोपार्जन करता है, उसकी जड़ में केवल भरण-पोषण करना ही नहीं होता, वरन् व्यक्ति अपने भावी जीवन को सुरक्षित करने का प्रयास करता है। प्रयासरत रहना तो सूचक होता है कि मानव वास्तविक नहीं, अर्थों में कर्मयोगी है।
शाबर मंत्रो Shabar Mantra का संसार अभी तक अप्रकट और गुप्त है। शाबर मंत्र Shabar Mantra केवल ऐसे मंत्र नहीं हैं, जो कि कुछ सामान्य समस्याओं के निदान के लिए गोरखनाथ द्वारा रचे गए थे, अपितु शाबर मंत्र Shabar Mantra तो उचित साधना सामग्री की सहायता से एक पूरी साधनात्मक पद्धति है।
शाबर मंत्र shabar mantra की परिभाषा
इस शाबर मंत्र Shabar Mantra पद्धति की विशेषता यह है कि यह पूर्ण रूप से प्रकृति से जुड़ी है। बिल्ली की नाल, सियारसिंगी,हत्थाजोड़ी, बघनरवा ऐसी ही पशु जगत से प्राप्त शाबर तंत्र की साधना सामग्रियां हैं।
आज शाबर मंत्र Shabar Mantra को एक सनसनीखेज और गोपनीय मंत्र के रूप में प्रस्तुत किया जाता है और अधिकांश साधक उसे किसी सरल साधना की ‘भांति अंगीकार करते हैं। इसमें उन पुस्तकों का भी कम योगदान नहीं है, जो आज शाबर मंत्रो Shabar Mantra को एक शीघ्र बिकाऊ माल की भांति लेकर बाजार में आ गईं और व्यवसायी लेखकों में चटखारे के साथ प्रस्तुत करने में होड़ लग रही है।
शाबर मंत्र Shabar Mantra इतने घटिया नहीं हैं। हालांकि शाबर तंत्र में कुछ व्यसनों के सेवन की स्वीकृति है, किंतु वह भी किसी योग्य गुरु के निर्देशन में । शाबर मंत्र Shabar Mantra तो इतना गहरा तंत्र है कि अगर उचित मार्गदर्शन मिल जाए तो कुछ हल्के व्यसनों के साथ शाबर मंत्रो Shabar Mantra से समाधि की अवस्था भी प्राप्त की जा सकती है।
हालांकि शाबर मंत्र Shabar Mantraों से आध्यात्मिक सिद्धि प्राप्त करने की धारणा किसी भी सामान्य साधक को असंभव लगेगी, किंतु अगर तात्विक दृष्टि से ध्यान दें तो शाबर मंत्र Shabar Mantra ध्वनि के माध्यम से की गई एक अलौकिक क्रिया ही होती है।
जिस प्रकार उच्च आवृत्ति की ध्वनि तरंगें, हालांकि दृष्टिगोचर नहीं होती, किंतु तीक्ष्ण प्रभाव डालने में समर्थ होती हैं, ठीक वही क्रिया शाबर मंत्रो Shabar Mantra के सृजन में भी होती है। फिर उसमें इस बात का कोई महत्त्व नहीं रह जाता है कि विभिन्न ध्वनियों के संयोजन से कौन-सा मंत्र बन रहा है।
shabar mantra rahsya जीवन में सफलता हेतु शाबर मंत्र रहस्य ph.85280 57364
आज का युग व्यस्तता और भौतिकवाद का युग है और जितनी अधिक दौड़ व्यक्ति को शरीर से नहीं करनी पड़ती, उससे अधिक दौड़ मानसिक रूप से करनी पड़ती है। शीघ्र आवागमन के लिए व्यक्ति के पास वाहन तो उपलब्ध हो गया है, शीघ्र वार्तालाप के लिए दूरभाष उपकरण भी आ गए हैं, किंतु इसके उपरांत भी क्या व्यस्तता में कोई कमी आई है ?
ऐसी स्थिति में ऐसे साधक से यह कहना कि वह प्रतिदिन निर्जन स्थान में छह घंटे का समय साधना में दे तो उचित नहीं होगा। शाबर मंत्र Shabar Mantra सिद्धि इसी दिशा में एक सहायक विद्या है, जिसे साधक कहीं भी, कभी भी सरलतापूर्वक कर सकता है और उसे जब भी समय मिले, जितना भी अवकाश हो, अगर शाबर मंत्र Shabar Mantra का उच्चारण कर लेता है तो उसे दिन-प्रतिदिन के कार्यों में एक विचित्र-सी सरलता अनुभव होने लग जाती है और साथ ही समाज के तनाव से मुक्ति मिलने लग जाती है ।
शाबर मंत्र Shabar Mantraों के माध्यम से समस्त साधनाएं, इष्ट साधनाएं संपन्न की जा सकती हैं। ध्यान की गहराइयों में उतरने के लिए एवं ध्यानातीत अवस्था तक • जाने के लिए भी शाबर मंत्र Shabar Mantraों का सफलतापूर्वक प्रयोग किया जा सकता है।
जिन साधकों के पास साधना हेतु उनके दैनिक जीवन क्रम में कुछ समय रहता है, वे अगर शाबर मंत्रो Shabar Mantra का प्रतिदिन जप करें तो उन्हें विशेष सहायता प्राप्त होने लग जाती है और चित्त निर्मलता की ओर बढ़ने लगता है।
शाबर मंत्र Shabar Mantra साधना के लिए गुरु गोरखनाथ के आशीर्वाद के पश्चात दूसरी आवश्यकता गुरु की है। गुरु केवल एक शब्द नहीं… एक अक्षर नहीं….एक संपूर्णता है, जीवन का रस है, माधुर्य है, जीवन को ऊपर उठाने की क्रिया है, विष को अमृत बना देने का रहस्य है।
गुरु प्राप्ति के पश्चात शाबर मंत्रो Shabar Mantra में सबसे उल्लेखनीय बात है, इसमें न तो दिशा का बंधन है, न विशेष वस्त्रों का। न आसन का, न धूप-दीप का, न पुष्प का और न किसी निर्धारित संख्या में मंत्र जप करने का। शाबर की अनूठी भेंट यह है कि शाबर मंत्र Shabar Mantra सिद्धि जिसकी प्राप्ति, जिसकी उपस्थिति ही स्वयं में कभी-कभी अनेक गुत्थियों का समाधान बन जाती है। यह मेरा परामर्श है, आप इसे नसीहत भी कह सकते हैं।
इस संदर्भ में एक दृष्टांत प्रस्तुत है। एक शिकारी ने एक दिन बाज पकड़ा। बाज ने शिकारी से कहा- “मैं तुम्हें दो बातों का परामर्श देता हूं, ध्यान देकर सुनो-पहली सीख यह है कि बातों पर बिना सोचे समझे विश्वास नहीं करना चाहिए और दूसरी यह है कि जो वस्तु हाथ से चली जाए, उसके लिए शोक नहीं करना चाहिए।”
कुछ समय शांत रहने के पश्चात बाज ने शिकारी के प्रति आत्मीय भाव दर्शाकर कहा—“मेरे पेट में अनमोल हीरा है, अगर तुम मुझे मुक्त कर दोगे, तो मैं तुम्हारा अहसान मानकर हीरा उगलकर तुम्हें इनाम दे दूंगा।” शिकारी हीरा पाने के लोभ में उसकी बात को भूल गया और उस पर विश्वास कर उसे छोड़ दिया।
बाज उड़कर एक ऊंचे खंडहर की चोटी पर जा बैठा और शिकारी से बोला- “अरे मूर्ख! मेरी सीख को इतनी शीघ्र भूल गए, मैंने क्या कहा था कि शीघ्रता में बिना सोचे समझे किसी की बातों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।”
बाज की बात सुनकर शिकारी सिर पीट-पीटकर रोने लगा। उसे रोते देखकर बाज ने पुनः कहा और लो तुम तो मेरी दूसरी बात को भी भूल गए और वह उड़कर दूसरी दिशा की ओर चला गया। आप ऐसा न करें, आप मेरे परामर्श को सदैव स्मरण रखें और उन पर चलें।
शाबर मंत्र Shabar Mantra की विशेषता यह है, न कोई लंबा-चौड़ा विधि-विधान, न कोई किलष्ट मंत्रोच्चारण, न व्यर्थ का आडंबर… क्योंकि शाबर साधनाएं रची ही गई हैं, गृहस्थ साधकों के जीवन की व्यस्तताओं को ध्यान में रखकर पूर्ण प्रामाणिकता के साथ।
क्या शाबर मंत्र Shabar Mantra हानिकारक है?
गुरु के बिना करना शाबर मंत्र Shabar Mantra करना हानिकारक है
कलयुग में श्रेष्ठ मंत्र कौन सा है?
कलयुग में शाबर मंत्र Shabar Mantra सब से श्रेष्ठ मंत्र होते है यह अन्य मंत्रो से जायदा जल्दी सिद्ध होते है
शाबर मंत्रो Shabar Mantra की रचना किसने की ?
इस की रचना भगवान शिव से नाथ पंथ को प्रपात होई इस का विस्तार गुरू गोरखनाथ ने किया शाबर मंत्रो Shabar Mantrao का संसार अभी तक अप्रकट और गुप्त है। शाबर मंत्र Shabar Mantra केवल ऐसे मंत्र नहीं हैं, जो कि कुछ सामान्य समस्याओं के निदान के लिए गोरखनाथ द्वारा रचे गए थे, अपितु शाबर मंत्र Shabar Mantra तो उचित साधना सामग्री की सहायता से एक पूरी साधनात्मक पद्धति है।
Tara sadhna Benefits ग्रीन तारा साधना के लाभ और महत्त्व ph. 85280 57364
Tara sadhna Benefits ग्रीन तारा साधना के लाभ और महत्त्व ॐ नमः शिवाय मां शक्ति को नमन करता हूं मैं अपना post भगवान शिव और देवी मां शक्ति को नमन करके शुरू करता हूं आज मैं आपको ग्रीन तारा मंत्र green tara sadhna के बारे में बताने जा रहा हूं .
Tara sadhna Benefits ग्रीन तारा साधना के लाभ और महत्त्व
सभी मंत्र इतने शक्तिशाली हैं यदि आप भगवान में विश्वास रखते हैं और नियमित रूप से किसी भी मंत्र का जाप करते हैं तो निश्चित रूप से मंत्र उसमें विश्वास रखना महत्वपूर्ण है इसलिए आज मैं आपको ‘ग्रीन’ के बारे में बताने जा रहा हूं।
तारा मंत्र’ अगर आप इस मंत्र का जाप शुरू करते हैं तो आपको क्या लाभ मिल सकता है मैं यह वीडियो मां शक्ति के आशीर्वाद से बना रहा हूं ताकि ,मैं आपको ग्रीन तारा मंत्र green tara sadhna के बारे में बता सकूं अगर हम हिंदू धर्म के बारे में बात करते हैं।
तो एक देवी तारा 10 महाविद्या में से एक है अगर हम बौद्ध धर्म के बारे में बात करते हैं। देवी ग्रीन तारा इसके लिए जानी जाती हैं देवी ग्रीन तारा को तिब्बत में मूल देवी के रूप में जाना जाता है।
तारा tara ग्रीन ताराके नाम से कई देवियां लेकिन मूल देवी हरी तारा देवी हैं इसलिए आज मैं आपको ग्रीन तारा देवी के मंत्र के बारे में बताने जा रहा हूं कि ,आपको क्या लाभ मिल सकता है, या तो आप मंत्र जाप चाहते हैं ,या यदि आप सुनना पसंद करते हैं तो टिप्पणियों में लिखें, मैं मंत्र जाप को रिकॉर्ड करूंगा लेकिन आज मैं आपको इसके लाभ बताने जा रहा हूं कि ग्रीन तारा मंत्र green tara sadhna ग्रीन तारा क्या है
तारा की छवि अपने आप में इतनी सारी छवियां दिखाती है। देवी जिनका एक कदम हमेशा हर एक की मदद करने के लिए आगे रहता है। वह है हरी तारा देवी हरी तारा देवी हरी ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है। हम कई समस्याओं में हरी तारा देवी tara devi का जप और लाभ ले सकते हैं यदि आपको कोई गंभीर बीमारी है तो आपका इलाज चल रहा है।
यह हमेशा कहा जाता है कि दवा के साथ-साथ, प्रार्थना की भी आवश्यकता होती है. इसलिए यदि आपको दवा के साथ प्रार्थना की आवश्यकता महसूस होती है ,तो हरे तारा मंत्र का जाप करना शुरू करें, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप इस मंत्र का कितनी बार जाप करते हैं, इसमें कोई नियम नहीं है जैसे कि आपको एक स्थान पर बैठना है आप पूरे दिन इसका जाप कर सकते हैं।
आप इसे दिन में कभी भी और कहीं भी जप कर सकते हैं आप अपने जीवन में किसी भी समस्या से छुटकारा पाने के लिए ‘ग्रीन तारा देवी’ tara devi मंत्र का जाप कर सकते हैं, हमेशा याद रखें कि चाहे हम किसी भी स्वचालित चिकित्सा का पालन कर रहे हों या मंत्र का जाप कर रहे हों, विश्वास रखें और कभी दवा न छोड़ें क्योंकि आप कितने दिनों से जप कर रहे हैं और कितने विश्वास के साथ परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि इसलिए कभी भी अपनी दवाएं न छोड़ें लेकिन यह महत्वपूर्ण है।
भगवान में भी आस्था रखें तो मंत्र जाप करते रहें उस बीमारी से आपको जरूर छुटकारा मिलेगा ग्रीन तारा tara हरे रंग की ऊर्जा है।,और हरी ऊर्जा हमारे हृदय चक्र से संबंधित है जो मंत्र हृदय चक्र को खोलता है।
वह हरा तारा tara मंत्र है इसलिए जब हृदय चक्र में हरी ऊर्जा भर जाती है , तो निश्चित रूप से आपका हृदय चक्र सक्रिय हो जाएगा, खुला, और संतुलित और जब हृदय चक्र खुलता है तो हृदय से संबंधित सभी रोग स्वचालित रूप से हल हो जाएंगे
जैसे ही आप मंत्र का जाप करते हैं, हरी ऊर्जा आपके ऊपर देवी का आशीर्वाद भर जाएगा और आपका हृदय चक्र स्वचालित रूप से खुलने लगेगा दिल से संबंधित सभी समस्याएं आप इसके लिए ग्रीन तारा मंत्र green tara sadhna का उपयोग कर सकते हैं, इसके अलावा।
रिश्तों में भी हृदय चक्र हमारे जीवन में हमारे संबंधों को निर्धारित करता है यदि आपके संबंध किसी के साथ कमजोर हैं तो आप उन संबंधों को ठीक करने के लिए ग्रीन तारा मंत्र green tara sadhna का उपयोग कर सकते हैं। साथ ही मैं आपको एक और बात बतादूं एक और बात यह है कि बैठना और जप करना महत्वपूर्ण नहीं है यदि आप सुनते हैं तो भी आपको लाभ मिलेगा।
या वक्ता भी तब भी यह आश्चर्यजनक परिणाम देता है। इसलिए यदि आपके संबंध कमजोर या बदतर हैं तो ग्रीन तारा मंत्र green tara sadhna का जाप करना शुरू करें यह हर प्रकार के संबंध को ठीक कर देगा इससे आपको बीमारियों से छुटकारा मिलेगा। आपके संबंधों में सुधार होगा यदि आपके घर में किसी भी प्रकार की समस्या है तो परिवार के सदस्य एक-दूसरे को पसंद नहीं करते हैं।
परिणाम परिवार के सदस्य एक साथ रहेंगे और खुशी से रहेंगे इसके अलावा आप हरे तारा tara मंत्र का उपयोग प्रेम, सौंदर्य आदि के लिए कर सकते हैं, सिवाय इसके कि यदि आप किसी भी प्रकार की इच्छा पूरी करना चाहते हैं ,तो भी आप देवी ग्रीन तारा tara devi से अनुरोध कर सकते हैं और हरे तारा मंत्र का जाप करना शुरू कर सकते हैं। आपकी मंशा स्पष्ट होनी चाहिए जब भी हम किसी शक्ति के मंत्र का जाप करें, हमेशा एक विश्वास और विश्वास होना चाहिए और मंत्र का जाप करना शुरू करें।
भले ही आप कोई संकल्प न लें तो कम से कम अपने मन में इरादा रखें, कि देवी कृपया मेरी इच्छा पूरी करें। मैं इस इच्छा के लिए 21 दिनों के लिए इस मंत्र का जाप शुरू कर रहा हूं। और देखें कि , आपकी इच्छा कितनी तेजी से पूरी होगी मुझे कई मंत्रों का अनुभव है इसलिए मुझे पता है कि मंत्र कितनी तेजी से फल प्रदान करता है।
यदि आप जाप करते हैं तो किसी भी इच्छा के लिए नियमित रूप से मंत्र मुझे पता है कि आपको किस प्रकार के परिणाम मिलते हैं। लेकिन मैंने ग्रीन तारा मंत्र green tara sadhna पर एक पोस्ट बनाया जब मैंने इसका अनुभव किया क्योंकि ग्रीन तारा को तिब्बत की देवी के रूप में जाना जाता है, हम उसे पहले नहीं जानते थे।
इसलिए जब मैंने उसके मंत्र का जाप किया तो मुझे यह पोस्ट तब मिला जब मैंने यह पोस्ट लिखा ताकि आप भी लाभ उठा सकें ताकि आप भी लाभ उठा सकें।
‘ग्रीन तारा मंत्र green tara sadhna‘ का जाप कर सकते हैं और देवी से किसी भी प्रकार की इच्छा पूरी करने का अनुरोध कर सकते हैं, उनके मंत्र का जाप करने के लिए आपके घर में देवी का होना महत्वपूर्ण नहीं है, इस मंत्र में ऐसा नहीं होता है यदि आप देवी को रखना चाहते हैं तो आप एक परं प्राण परतिष्ठा प्रतिमा ला सकते हैं।
और जरा देखिए कि आप पर ग्रीन तारा tara का आशीर्वाद कैसे काम करेगा, देवी बहुत दयालु हैं जब भी आप देवी से कुछ भी अनुरोध करते हैं तो हमेशा मदद ककरती है दोस्तों ये हरे तारा मंत्र के कुछ लाभ हैं
जिन्हें मैंने आपके साथ साझा किया है यदि आप चाहते हैं कि मैं इस मंत्र को रिकॉर्ड करूं तो मैं वह भी करूंगा मुझे भी उम्मीद है कि आपको आज का पोस्ट पसंद आएगा और आप अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए मंत्र का जाप निश्चित रूप से करेंगे। अगले वीडियो में मिलते हैं तब तक धन्यवाद
हरा तारा मंत्र जपने के क्या फायदे हैं?
हरा रंग खुशहाली का माना जाता है हरा तारा साधना करने से साधक के जीवन खुशहाली और आनंद की प्रपाती होती है
तारा साधना क्या है?
तारा साधना तारा देवी की साधना है जो माँ काली का रूप है साधक की हर कामना पूर्ण करता है तारा महाविद्या के अंतर्गत आनेवाली शक्ति है
तारा माता की पूजा कैसे करें?
यदि आप तारा माता की पूजा करने की विधि और मन्त्रों की अधिक जानकारी चाहते हैं, तो आप संबंधित पुस्तकों और वेबसाइटों से सहायता ले सकते हैं। ध्यान दें कि इसके लिए आपको प्रमाणित गुरु की निगरानी और मार्गदर्शन की आवश्यकता हो सकती है
मां तारा का बीज मंत्र क्या है?
मां तारा का बीज मंत्र है “ॐ तारायै नमः”। इस मंत्र का जाप करने से हम तारा माता की कृपा प्राप्त कर सकते हैं और आत्मिक विकास की ओर प्रगामी हो सकते हैं। यह मंत्र शांति और सकारात्मक ऊर्जा को प्रकट करने में सहायक होता है। जप के दौरान इस मंत्र को ध्यानपूर्वक और श्रद्धा से उच्चारण करें ताकि इसकी शक्ति आपके मन, शरीर और आत्मा को प्रभावित कर सके।
मां तारा कौन है?
मां तारा एक प्रमुख हिंदू देवी हैं और दस महाविद्या में से एक है जो हिंदू धर्म में पूजी जाती हैंवह प्रकृति, सृष्टि और नष्टि की देवी मानी जाती हैं। उन्हें सबसे पहले तिब्बती बौद्ध धर्म में पूजा जाता था, जहां परिपूर्ण बोधिसत्व के रूप में उनका महत्त्व था।
Pratyangira Devi प्रत्यंगिरा देवी साधना रहस्य ph.85280 57364
Pratyangira Devi प्रत्यंगिरा देवी साधना रहस्य ph.85280 57364 प्रणाम! तो नमः शिवाय! सृष्टि बहुत विशाल है और इस विशाल सृष्टि में, यहाँ बहुत सारे ‘रूप’ हैं और देवी योगमाया के बहुत सारे ‘स्वरूप’ हैं यानी यहां रूपों की प्रकृति के रूप में व्याख्या की गई है, कि महान ऋषियों और सिद्धों के लिए भी इस की महिमा का गुणगान करना लगभग असंभव है। देवी की महिमा के बारे में बताते हुए देवी-ऋषि मार्कण्डेय के विभिन्न रूपों का वर्णन ऐसा किया है।
मार्कण्डेय पुराण में, हमें देवी के विभिन्न ‘स्वरूपों’ के नाम प्राप्त होते हैं, उसकी महिमा और उसके बारे में विभिन्न जानकारी। और सिद्धों ने देवी के विभिन्न रूपों और ‘स्वरूपों’ के विषय पर बहुत विस्तार से समझाया है और बहुत अलग परंपराओं में उनकी पूजा प्रक्रिया के विषय पर, और विधियों के साथ, स्पष्टता के साथ, उन्हें साधको के सामने प्रस्तुत किया और उन्हें गुरुकुल परंपराओं में आगे बढ़ाया।आज मैं खुद ऐसी ही एक देवी के बारे में बात करूंगा, जिनका नाम प्रत्यांगिराPratyangira है।
Pratyangira Devi प्रत्यंगिरा देवी साधना रहस्य ph.85280 57364
प्रत्यांगिरा Pratyangira क्या है ?
Pratyangira Devi प्रत्यंगिरा देवी साधना रहस्य ph.85280 57364
प्रत्यांगिरा’ Pratyangira शब्द को समझने से पहले, आपको सबसे पहले दो शब्दों को समझना होगा- एक, ‘रुद्’ है; और दूसरा है ‘विरुद्ध’। ‘रुद्र’ का अर्थ क्या है?
कि जीवन में अगर कोई प्रवाह है … विचार करें, पानी का कुछ फव्वारा या पानी का झरना, झरना, या नदी है, जब यह तेजी से एक दिशा में जाता है, तो यह है इसका ‘रुद्रता’। और अचानक, जब कोई इसे रोकता है, और वह नदी उसी ‘वेग’ के साथ वापस बहने लगती है। इसे ‘विरुधाता’ या ‘विरुद्ध’ कहा जाता है।
एक है नदी नीचे की ओर बह रही है, और किसी ने इसे रोक दिया (यानी नदी के प्रवाह को रोक दिया,) एक बांध बनाया। इसे विरुधाता नहीं कहा जाता है। ‘विरोध होना’ का अर्थ यह है कि नदी तेजी से जाती है और प्रहार करती है, और यह उसी तेजी के साथ वापस आती है।
तो, योग माया जिन्होंने इस पूरी सृष्टि को बनाया यह सृष्टि असाधारण है, यह जंगल असाधारण है, यह पेड़, यह … हम मनुष्य, ये ‘जीव-‘जंतु , यह ‘काश’, यह ‘पांच तत्व’ यानी पांच तत्व, और कौन जानता है कि इस सृष्टि में सभी अनगिनत तत्व क्या मौजूद हैं! और उनके भीतर विभिन्न प्रकार के’ गुण हैं।
इन गुणों में एक बात है- यह वही ‘विरुध’ शक्ति ही है। वास्तव में यह ‘विरुध’ शक्ति स्वयं देवी प्रत्यांगिरा Pratyangira के नाम से जानी जाने लगी। अब, आप इसे कैसे समझेंगे? अब आप इसे देखें, उदाहरण के लिए – यह छोटा सा पेड़ मेरे करीब है, कांटों की एक झाड़ी, आप देख रहे हैं, यह शीर्ष तक सूख गया है, आप देखते हैं।
और यह इस धरती से कितना ‘विरुध’ जा सकता है [यानी इस संदर्भ में, पेड़ पृथ्वी से कितना लंबा हो सकता है]। जब यह छोटा था, तो यह धीरे-धीरे बड़ा हुआ और ऊपर पहुंच गया। लेकिन ऊंचाई पर पहुंचने के बाद, इसकी एक सीमा होती है।
इस धरती पर कोई भी पेड़, कितना भी लंबा होगा, उस पेड़ के टूटने की बहुत संभावना बढ़ जाएगी; और वह पेड़ आसानी से टूट जाएगा क्योंकि तेज हवाएं इसे तोड़ देंगी। अर्थ, इस सृष्टि का एक ‘नियम’ अर्थात नियम या नियम है कि जब भी तुम इन ‘नीति’ अर्थात् नीति और ‘नियम’ के बीच में आओगे, तो यह सृष्टि तुम्हें तोड़ देगी।
वैसे भी, यह एक और रहस्यमय तत्व है। मैं आपको इसके अलावा एक और बात बताना चाहता हूं कि, ‘विरोधी कर्म ‘ या ‘विरोधी होना’ सृष्टि के प्रत्येक ‘का’ [अर्थात कण] में मौजूद है।
उदाहरण के लिए, यह कांटेदार पेड़, अगर मैं यहां से आगे बढ़ता हूं, तो देखो [ईशापुत्र को देखो], मेरे चेहरे के करीब, यह कांटे आ गए हैं। अब, यह कांटा मेरे विरुद्ध कार्य करेगा।
यह मुझे ‘उपदेश’ यानी निर्देश या प्रवचन या मेरी त्वचा देगा या यह मुझे तुरंत सावधान करेगा, ‘सावधान, अगर तुम आगे बढ़ोगे तो मेरे ये नुकीले कांटे तुम्हारे शरीर के भीतर होंगे’ मतलब, ये ‘कांटाक’ यानी पेड़ों या पौधों के नुकीले हिस्से, ये कांटे यहां मेरे रास्ते को के खिलाफ हैं। वे किस के खिलाफ हैं? वे मेरी ‘गति’ यानी गति या गति के खिलाफ हैं।
लेकिन हमने प्रत्यांगिरा Pratyangira शक्ति को इससे क्यों जोड़ा? उदाहरण के लिए, देखिए मैंने कांटे का एक छोटा सा टुकड़ा तोड़ दिया है, यह छोटा सा कांटा । अब देखिए, यह छोटा सा कांटा मेरे लिए हथियार का काम कर सकता है।
मान लीजिए कि मैं इस कांटे को छुपाकर अपने पास रख लेता हूं और कोई छोटा जानवर या इंसान जो अचानक मेरे साथ दुर्व्यवहार करने आता है, और मैं इस पर कांटे लगाता हूं, फिर यह ‘चला जाएगा’।
मतलब ये कांटा जो अब तक मेरे रास्ते में रोड़ा था, जब मैंने इसे बुद्धिमत्ता के साथ हटा दिया और इसका उपयोग करना शुरू किया, फिर यह मेरी शक्ति बन गया। तो, इस नियम को सिखाने के लिए, या जब महादेव ने देवी को इस नियम के बारे में बताना चाहा, उस ‘विरुध’ शक्ति को देवी के भीतर से प्रकट होना था। आप पूछेंगे- कैसे? मैं आपको यह बताऊंगा।
प्रत्यांगिरा Pratyangira देवी कथा महादेव और पार्वती
Pratyangira Devi प्रत्यंगिरा देवी साधना रहस्य ph.85280 57364
सिद्धों की कहानी के अनुसार, कैलाश के महान शिखर पर, गुरु के रूप में मौजूद हैं महादेव वह स्वयं ईश्वर है, लेकिन गुरु का रूप धारण करने के बाद, वह अपने प्रेमी या पत्नी [जो उपस्थित है] को विद्यार्थी के रूप में ‘उपदेश’ अर्थात प्रवचन दे रहा है, एक छात्र होने के नाते। इसलिए देवी नीचे बैठी है और महादेव ऊपर विराजमान हैं।
वरोध हर जगह मौजूद हैं; शिवगण जैसा कि कुछ ही दूरी पर मौजूद है। और फिर देवी के सवालों का जवाब देते हुए, महादेव देवी के अपने रूप योगमाया पर बहुत विस्तार से बोल रहे हैं। , ‘हे देवी, तामसिक शक्तियों में, ठीक वैसे ही जैसे धूमावती है जो अपने ही शिव का ‘भक्षण’ करती है, और उसे ‘धूम्र’ यानी धुआं के रूप में प्रकट करती है,
वह वह असाधारण शक्ति है। कौन है ‘क्रूर’ यानी क्रूरऔर किसी भी प्रकार के ‘सत्ता’ यानी बल के खिलाफ खड़े होने की शक्ति और क्षमता रखता है। लेकिन धूमावती के साथ-साथ ऐसी तांत्रिक देवी भी हैं जो बहुत खतरनाक हैं, देवियां जिनका ‘वेग’ अत्यधिक ‘प्राचंद’ अर्थात तीव्र है, जिन्हें ‘कृत्य’ कहा गया है। 64 कृत्य हैं।
ये ‘कृत्य’ मृत्यु की देवी हैं- वे ‘मारन की देवियां’ हैं। अगर ‘कृत्य’ किसी पेड़ को छूता भी है … ‘कृत्य’… एक तरह से, आप इसे ‘कुछ नष्ट हो रहा है’ कह सकते हैं … यदि यह ‘जड़ी’ [यानी शाखा] वर्तमान में ठीक है, तो यह सुंदर है एक समय में यह [पेड़] भी था, लेकिन एक ‘कृत्य’ ने इसे छुआ, इसलिए यह सूख गया।
अब, इसमें जीवन छिपने की संभावना है। जब ‘कृत्य ‘ इसे छोड़ देगा, तो फिर से पत्ते उस पर आ जाएंगे। तो, मतलब … कि ‘कृत्य’ ऐसा ‘काल’ है यानी समय, यह ऐसा ‘संक्रोमन’ [यानी संक्रमण] या [यह] ऐसी बीमारी है; या फिर यह ऐसी स्थिति है जब ‘जीवनी’ शक्ति [यानी जीवन शक्ति] नष्ट होने लगती है।
तब देवी ने कहा, ‘क्या इससे बढ़कर कोई शक्ति है?’ तब महादेव कहते हैं, ‘हां। हे देवी, आपके भीतर ही छिपा है, ऐसा ही एक ‘स्वरूप’ है जो ‘विरोधी’ शक्ति से इतना भरा हुआ है कि अपने ‘विरोधी’ के सामने किसी के लिए भी टिक पाना या टिक पाना बिल्कुल भी संभव नहीं है। तब देवी ने कहा, ‘मैं अपना यह स्वरूप देखना चाहती हूं।
तब भगवान देवी को अपनी आँखें बंद करने के लिए कहता है, और उसके मंत्र दीक्षा को पूरा करते हुए, वह उसे यंत्र पर अपने भीतर ध्यान करने के लिए कहता है; और अपने भीतर के मंत्र का ध्यान करते हुए, वह [यानी महादेव] देवी को योग की गहरी अवस्था में जाने के लिए ‘उपदेश’ देते हैं।
इसलिए जैसा कि महादेव कहते हैं, देवी स्वयं ऐसा करती चली जाती हैं। और फिर देवी की आंखें क्रोध से भरने लगती हैं। यह तामस तत्व के साथ छायांकित हो जाता है। और धीरे-धीरे देवी की आंखें ‘ज्वालामुखी ‘ यानी ज्वालामुखी की तरह बहुत गर्म हो जाती हैं। और वह आँखें खोलटी है। और उसकी लाल आंखों से, एक दिव्य शक्ति उभरती है जो सीधे ब्रह्मांड में जाती है और एक देवी का रूप धारण करती है।
यह देवी हर तत्व को रोक देती है वह ‘वायु’ को रोकती है, वह ‘अग्नि’ को रोकती है, वह ‘पृथ्वी’ को रोकती है। वह ‘आकाश’ तत्व को रोकती है। पांचतत्व की ‘गति’ [यानी गति या गति] को रोककर, वह उन्हें ‘प्रलय’ यानी विघटन या विनाश के मुंह में डालने की कोशिश करती है। फिर महादेव कहते हैं, ‘देवी, रुक जाओ!
सृष्टि को अपनी गति से आगे बढ़ने दो। फिर महादेव के आदेश पर उस देवी ने फिर से… ‘विरुध’ शक्ति से भरी हुई, वह ‘क्रूर’ देवी, माँ पार्वती की आँखों में फिर से वापस आ जाता है, फिर से आँखों में अवशोषित हो जाता है।
तब महादेव पूछते हैं, ‘अरे देवी, क्या अब आपको इस ‘विरुध’ शक्ति के बारे में पता चला? तब देवी कहती हैं, ‘हां, अब मुझे अपने भीतर छिपी इस ‘विरुद्ध’ शक्ति का पता चल गया है। इस प्रकार देवी की उत्पत्ति हुई।
Pratyangira Devi प्रत्यंगिरा देवी साधना रहस्य ph.85280 57364
प्रत्यांगिरा Pratyangira देवी एक पुराणिक कथा 2
लेकिन इसके बाद मैं भी आपके सामने एक पुराणिक कहानी रखना चाहता हूं।यह है, एक नरसिंह अवतार (यानी भगवान विष्णु का एक अवतार) था … इसलिए, वह बहुत क्रोध से भर गया, भगवान नारायण, कि वह सोचने लगा, ‘मैं इस धरती पर कितनी बार अवतार लेने जा रहा हूँ?
और इस धरती पर किसके साथ लड़ो? क्योंकि यह अवतार बहुत असाधारण है… ईश्वर को कितनी बार इंसान के रूप में अवतार लेना पड़ता है, इतनी ही बार अनंत संभावनाएं होती हैं … वह कितने लोगों से लड़ेगा? वह कितने पापियों से लड़ेगा? हर बार पृथ्वी को सुधारने या बेहतर होने के लिए बनाया जाता है। हर बार ब्रह्मांड के कोनों को बेहतर बनाया जाता है या स्थितियों में सुधार किया जाता है। फिर पापियों की संख्या बढ़ जाती है।
यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। इसलिए, उन्होंने सोचा ‘इस बार, यह सीमा तक पहुंच गया है। यही कारण है कि इस बार, इस धरती पर, हिरण्यकश्यपु के वध के साथ-साथ इस धरती पर अब इस प्रकार के कितने ‘ तत्व’ विद्यमान हैं, मैं उन सभी को एक समय में ही नष्ट कर दूंगा, ताकि कहानी स्वयं समाप्त हो जाए। लेकिन, इस सृष्टि को बनाए रखने के लिए, सभी की आवश्यकता है।
उदाहरण के लिए- आप। तुम में से, ऐसे कई लोग हैं जो मुझे प्यार करते हैं। इसी कारण से, मैं भी, जब भी मुझे समय मिलता है, मैं आपके सामने कुछ या अन्य शब्द लेकर आता हूं; अपनी साधनाओं को भी छोड़कर मैं आपके सामने आता हूं।
और, मैं अपनी कुछ बातें और विचार आपके सामने रखता हूं। और, यह आवश्यक नहीं है कि आप मेरी सभी बातों से सहमत हों। मैंने कभी यह कोशिश नहीं की, कि आपको मेरे साथ सहमत होने की आवश्यकता है। फिर सोचिए, ऐसे भी हैं इतने सारे लोग जो मेरी हर बात सुनता है, तुम्हारी तरह ‘ध्यान’ के साथ, प्यार के साथ, और उन्हें अपने दिलों में प्रवेश करते है ।
और कुछ लोगों को यह बिल्कुल पसंद नहीं है। उन्हें लगता है कि मैं इतनी बेकार की बातें बोल रहा हूं, कि मैं इतनी बकवास बोल रहा हूं, क्योंकि उनका दिमाग, उनका ‘नाड़ी टंटू’ जाती हैं।
लेकिन मैंने कभी नहीं सोचाता कि ऐसे बेकार लोग मर जाए । मैं कहता हूं, ‘उनका जीवन भी खुशियों से भर जाए। ऐसे दिन भी आएं कि मैं जो भी कहूं, वे भी समझ पाएंगे’ क्योंकि सिद्धों के जीने का यही तरीका है।
यही कारण है कि इस धरती पर, तामस ‘तत्व’ रखने की भी आवश्यकता कम है। यही कारण है कि सिद्ध कभी भी उस तामस के खिलाफ नहीं गया। लेकिन भगवान नारायण इतने क्रोधित हो गए कि उन्होंने कहा, ‘अब, मैं ऐसे किसी तामसिक व्यक्ति को नहीं छोड़ूंगा।
फिर, जब हिरण्यकश्यपु मारा गया, तो नरसिंह अवतार के साथ, उन्होंने सभी तामसिक तत्वों का ‘प्रतिरोध’ करना शुरू कर दिया। और ऐसा होने के कारण पृथ्वी का संतुलन बिगड़ने लगा। और जब ऐसी स्थिति आई, तब देवताओं ने महादेव को पुकारा।
और फिर महादेव अपना रूप बदलकर विष्णु भागवान को रोकने चला गया। फिर जब भगवान विष्णु ने यह देखा, कि, ‘मैं शिव के सामने टिक नहीं पाऊंगा’, फिर उन्होंने खुद को तामसिक रूप में बदल दिया। उसने स्वयं को तामसिक बना लिया।
और उस रूप में अब आप इसे बहुत अच्छी तरह से कहते हैं – इसे ‘गंडबेरूड’ कहा जाता है। नारायण ने गंडबेरूड रूप धारण किया और भागवान शिव ने शरभ का रूप धारण किया अब, उन्होंने एक-दूसरे से लड़ना शुरू कर दिया – यह गंडबेरूड और शरभ।
अगर ‘हरि’ और ‘हर’, तो दोनों लड़ते हैं, तो क्या उनमें से कोई नहीं जीतेगा क्योंकि वे दोनों ही एक माया ही हैं। लेकिन फिर भी अपने-अपने रूपों को मानकर दोनों के बीच एक युद्ध होने लगता है।
और यही कारण है कि जब युगों तक उनका युद्ध चलता रहा, तो अंत में, कैलाश की सबसे ऊंची चोटी पर जाकर देवताओं ने मां योगमाया से प्रार्थना की, ‘देवी, अब आपको ही कुछ करना होगा’। तब देवी फिर से ध्यान में चली गईं, और उनकी आंखों से उसी ‘विरोधी’ शक्ति को बाहर लाया, जो ‘विरोधी’ शक्ति से परिपूर्ण थी, जिसे ‘विरुध चित भी कहा जाता है, जो आपके और मेरे भीतर भी छिपा हुआ है।
और फिर, वह देवी इस आकाश मंडल से गुजरते हुए भगवान विष्णु और शिव की ओर जाता है। जहां वे दोनों युगों के लिए लड़ रहे थे, शरभ का रूप धारण कर रहे थे और गेंदबारुंड का रूप धारणकर रहे थे। तो, देवी उनके बीच में जाती है और उन दोनों को अपने हाथों से पकड़ लेती है, और उन्हें पकड़ता रहता है।
और वह उन दोनों से कहती है, ‘आप दोनों के भीतर जो भी शक्ति और क्षमताएं हैं; अपनी ताकत का उपयोग करें; यदि आप अपनी ताकत के बारे में थोड़ा सा भी गर्व और अहंकार रखते हैं, तो इसे परीक्षण के लिए रखें।
लेकिन, दोनों ‘स्वरूप’ देवी के सामने खड़े नहीं हो पा रहे हैं, ठहर नहीं पा रहे हैं। अंत में, शरभ और गेंदबारुंड , दोनों देवी के सामने सिर झुकाते हैं, क्षमा मांगते हैं। और फिर दोनों अपने ‘वास्तुविक’ रूपों में लौट आते हैं। और देवी भी अपने ‘वताविक’ रूप में लौट आती हैं।
महर्षि मार्कण्डेय काप्रत्यांगिरा Pratyangira के वर्णन
महर्षि मार्कण्डेय इस ‘स्वरूप’ का वर्णन करते हैं; लेकिन इस ‘स्वरूप’ के ‘दर्शन’ को सबसे पहले प्राप्त करने के लिए या इसे प्रकट करने के लिए, दो ऋषि- महर्षि प्रत्यंगिर और महर्षि अंगिरस, ये दोनों ऋषि हिमालय की ओर, कैलाश शिखर की ओर जाते हैं, और कैलाश पहुंचने से पहले, हिमालयी ‘ यानी हिमालय पर्वतमाला में , वे बैठते हैं और घोर तपस्या करते हैं। और
आगम और निगमों को प्राप्त करते हुए, वे धीरे-धीरे तमस की एक अजीब स्थिति में पहुंच जाते हैं, जहां उनके भीतर एक ‘विरोधी भाव’ बनने लगती है। और फिर, वे इस ‘विरोधी’ शक्ति को समझने लगते हैं।
प्रत्यांगिरा Pratyangira देवी के नाम का रहस्य
और फिर देवी से प्रार्थना करते हुए, उन्होंने देवी को उसी रूप में प्रकट किया, जो देवी का रूप था ‘परम विरोधी’ ‘विरोधी स्वरूप’। तब प्रसन्न होकर देवी ने कहा, ‘तुम दोनों ने मेरी विद्या प्राप्त कर ली है; आप दोनों ने मेरी कलाएं प्राप्त की हैं।
यही कारण है मैं आपके दोनों नाम स्वीकार करता हूं। यही कारण है कि अब मेरा नाम, [महर्षि] प्रत्यंगीर और [महर्षि] ‘अंगिरस’ के कारण ‘प्रत्यांगिरा’ बन जाएगा।
उस समय से, देवी, ‘विरोधीनी देवी’ को ‘प्रत्यांगिरा’ Pratyangira के नाम से जाना जाने लगा। कितने तंत्र, मंत्र, कृत्य, विद्याएं, सृष्टि तत्व मौजूद हैं, उन सबके खिलाफ जाने की क्षमता, उनके खिलाफ विपक्ष में खड़े होने के लिए सभी इस देवी के भीतर मौजूद हैं। हालांकि वर्तमान समय में लोग कहते हैं कि यह देवी केवल क्षत्रियों यानी योद्धा जाति से संबंधित है, यह सब झूठ है।
सिद्धों ने इस देवी की साधना-पूजा के बारे में विस्तार से बताया है। और आप पहले से ही जानते हैं कि जाति, या रीति-रिवाज, ऊपरी, निचले, अछूत … सिद्धों में यह सब मौजूद नहीं है।
सिद्धों की परंपरा में यह सब नाटक कहीं भी मौजूद नहीं है। इसलिए, देवी एक असाधारण शक्ति से भरी हुई है। देवी के कई रूप हैं। देवी का एक रूप है जिसे हम ‘महाप्रतियांगिर’ कहते हैं। एक है ‘प्रत्यांगिरा Pratyangira और दूसरा है ‘विपरित प्रत्यांगिरा Pratyangira। और दूसरा है ‘क्रूर प्रत्यांगिरा’।
तो, इस तरह देवी के कई भेद हैं। ‘विपरित प्रत्यांगिरा’ Pratyangiraका अर्थ यह है कि यदि कोई व्यक्ति स्वयं प्रत्यांगिरा शक्ति का उपयोग मुझ पर कर रहा है, तब मैं प्रत्यांगिरा Pratyangira देवी के विपरित स्वरूप का उपयोग करके उसी प्रत्यांगीरा शक्ति को वापस भेज सकता हूं।
विचार करें, कि कोई मुझ पर ‘कृत्य’ का उपयोग करता है, इसके बाद मैंने उनके खिलाफ ‘क्रूर प्रत्यांगीरा’ का इस्तेमाल किया। इस प्रकार शास्त्रों में वर्णन मिलता है, लेकिन, यह एक ऐसी विद्या है जिसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी व्यापक शोध की आवश्यकता है।
यदि आप हम मनुष्यों को देखें, और हमारे ‘चित यानी मन को देखें, फिर हमारे मन में भी ‘विरोधी’ करना छिपा हुआ है। हम कई कारणों से एक व्यक्ति के खिलाफ जाते हैं। … ‘द्वेष ‘ के कारणों के लिए, ‘इरशा-दवेश’ के कारणों के लिए ।
हम किसी की ‘ख्याति’ यानी ख्याति या प्रसिद्धि, या किसी की ‘सौंदर्य’ [यानी सुंदरता], या किसी के ‘ यानी महानता या परिपक्वता को बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं, तो हम ऐसा करते हैं। अगर हम अपना ‘बाहूबल’ दिखाना चाहते हैं तो भी हम ऐसा करते हैं।
अगर हम अपना ‘अहमकार’ दिखाना चाहते हैं तो भी हम ऐसा करते हैं। किसी भी तरह से जब हम खुद को पेश करना शुरू करते हैं, तो हम किसी अन्य व्यक्ति के खिलाफ ‘विरुद्ध’ खड़े हो जाते हैं।
और कई बार आपको पता भी नहीं चलता, ऐसे व्यक्ति जिससे आपका कोई लेना-देना नहीं है, उस व्यक्ति के खिलाफ भी आपके मन में आप उस व्यक्ति के खिलाफ खड़े हो जाते हैं!
तो यह तामसिक चेतना ‘विरोध’ करने के लिए यानी किसी चीज़ किसी के खिलाफ या विरोध में जाने के लिए जो हमारे भीतर है, हमारे भीतर एक गुण, हमारे भीतर तमस, इसकी उत्पत्ति तामसिक शक्ति-प्रत्यंगिरा pratyangira pratyangira की यह छोटी सी ‘सबूत ‘ ही है।
लेकिन यह आपके लिए हानिकारक है; और हमारे लिए भी। इसी से ‘पाप’ पैदा होता है। यह मैंने आपको शुरुआत में इस ‘कांटे’ के माध्यम से समझाया था
यह कांटा मेरे रास्ते में बाधा डालता है लेकिन जब मैंने यहां से एक कांटा तोड़ दिया, तो यह मेरे लिए एक हथियार बन गया। आपके भीतर भी आपके मस्तिष्क में, आपके शरीर में, आपके ‘नाड़ी तंत्र’ में, आपके पूरे शरीर में, ‘विरोधी’ करने की ताकत है।
लेकिन बिना किसी कारण के किसी के खिलाफ ‘विरोध’ करना, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करना, आत्म-नियंत्रण खोना, ‘आपा’ खोना -यह मूर्खता है। लेकिन अगर कोई अन्याय करता है, तो कोई अत्याचार करता है, और आप चुप रहते हैं, इसके कारण तुम दागी हो जाते हो, तुम्हारे भीतर का सत्त्व गुण नष्ट हो जाता है, पापी बनने लगते हो।
यही कारण है कि आपको निश्चित रूप से अन्याय के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए, कोई फर्क नहीं पड़ता कि यह कोई भी हो, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो।
इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। तो, यह वही शक्ति जो आपको लड़ने की इतनी क्षमता देती है, और आपको ऐसी बुद्धि देती है जहां आपको लड़ना पड़ता है, और आपको किस विधि से लड़ना है, क्योंकि हम इस ब्रह्मांड की तुलना में बहुत छोटे हैं। हम 4-5 फीट इंसान हैं। दस फीट, चौदह फीट-आप इससे लंबा नहीं हो सकते, है ना? ब्रह्मांड इतना बड़ा है।
आजकल आप 6 फीट से ज्यादा लंबे नहीं होते हैं। दुनिया के सबसे लंबे व्यक्ति की ऊंचाई 7 से 8 फीट के बीच होगी, यहां तक कि वह इससे लंबा नहीं हो सकता है। वैसे भी तुम्हारे भीतर एक असाधारण क्षमता है, जिसे ‘प्रत्यांगिरा’ Pratyangira कहा जाता है। योगी भी योगिक विधियों से प्रत्यांगिरा साधना करते हैं, और तांत्रिक तंत्राचार्य अपनी ‘अवारण पूजा’ के माध्यम से साधना करते हैं।
लेकिन यह प्रत्यांगिरा Pratyangira साधना ऐसी है कि इसे ‘महाकवाच’ कहा जा सकता है क्योंकि इसकी उपस्थिति में कुछ भी नहीं टिकेगा। मैंने बहुत से लोगों को देखा है… शनिचर, जिसका अर्थ है शनि महाराज की स्तुति गाओ। वे कहते हैं कि शनि सर्वश्रेष्ठ हैं, वह एक सर्वोच्च न्याय प्रदाता हैं। शनि जैसे देवता, और महाविद्याओं में, मेरी ‘आराध्या’ और जिनसे मैं बहुत प्यार करता हूं, मां धूमावती उनकी तरह शक्ति भी जो [ नहीं रह पाएगी, वह प्रत्यांगिरा Pratyangira है।
और जहां, 64 कृत्य भी नाचते रहेंगे और कुछ नहीं कर पाएंगे , वह प्रत्यांगिरा Pratyangira है। इस वजह से प्रत्यंगिरा pratyangira महाविद्या होने के साथ-साथ उपमहाविद्या भी मानी जाती है। और परमाविद्या में, परमविद्या के अनुसार उनका महान तामसिक रूप माना जाता है।
तो, यही कारण है कि यह आवश्यक है कि आप इसे समझने की कोशिश करें कि यह देवियों की सिर्फ कहानी है। जो मैंने आपको बताया था; या फिर आपके मस्तिष्क से या इस सृष्टि की रचना से, या हमारे जीवन से जुड़ा कोई और रहस्यमय तत्व जुड़ा हुआ है, या इसका भी कोई और अर्थ है?
आइए इन सब बातों को जानें और जानें कि प्रत्यांगिरा Pratyangira कौन है [या क्या]। प्रत्यांगिरा Pratyangira साधना आपको उच्च स्तर और क्षमताओं का सर्वोच्च मस्तिष्क प्रदान कर सकती है। मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा। मैं इसे केवल यह कहकर छोड़ दूंगा कि तुम्हारे भीतर भी तमस तत्व है; लेकिन इसे कांटे के रूप में हटाया जा सकता है और किसी के लाभ के लिए उपयोग किया जा सकता है।
और सिद्धों ने केवल यही किया, और अपनी उन्नति और सिद्धत्व की प्राप्ति के लिए प्रत्यांगिरा Pratyangira जैसी शक्ति का उपयोग किया। और यह कैसे संभव होगा? अब आपको यही जानना है। इसलिए, आप प्रत्यांगिरा Pratyangira को जानने का प्रयास करें।
मैं जल्द ही लौटूंगा नई जानकारी के साथ। तब तक, कृपया मेरे प्यार को स्वीकार करें। अपनी खोज जारी रखें। खोज करते रहो। सीखते रहो और अपने जीवन को आनंद से, ज्ञान से भरते रहो। तो नमः शिवाय! आदेश! प्रणाम! नमस्कार
प्रत्यंगिरा देवी कौन है
प्रत्यंगिरा देवी जगदंबा पार्वती की विरोधनी शक्ति है। प्रत्यांगिरा’ Pratyangira शब्द को समझने से पहले, आपको सबसे पहले दो शब्दों को समझना होगा- एक, ‘रुद्’ है; और दूसरा है ‘विरुद्ध’। ‘रुद्र’ का अर्थ क्या है कि जीवन में अगर कोई प्रवाह है … विचार करें, पानी का कुछ फव्वारा या पानी का झरना, झरना, या नदी है, जब यह तेजी से एक दिशा में जाता है, तो यह है इसका ‘रुद्रता’। और अचानक, जब कोई इसे रोकता है, और वह नदी उसी ‘वेग’ के साथ वापस बहने लगती है। इसे ‘विरुधाता’ या ‘विरुद्ध’ कहा जाता है।
प्रत्यंगिरा साधना क्या है?
प्रत्यंगिरा साधना एक तांत्रिको की पसदीदा साधना है इस साधना तांत्रिको को सुरक्षा और तंत्र कार्य को वापस पलटने की साधना कैसे भी तांत्रिक की शक्ति को पलट सकते है।
कर्ण पिशाचिनी विद्या | कर्ण पिशाचिनी सिद्धि मंत्र इस पोस्ट का उद्देश्य केवल ज्ञान और जानकारी के लिए है, यदि आप इसका अभ्यास करना चाहते हैं, तो इसे एक सिद्ध व्यक्ति की देख रेख में करें, अन्यथा आप स्वयं इसे नुकसान करेंगे।
मैं यहाँ सच्चाई जान सकता हूँ, यह आपको किसी भी व्यक्ति का अतीत का वर्तमान बताने में सक्षम है, इसलिए कर्ण पिशाच की उपलब्धि के लिए सभी प्रयास शुरू कर देता है, लेकिन एक बात भूल जाता है कि हर योनि की एक गरिमा होती है, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लोग इसका नाम सुनकर ही उसे प्राप्त करना चाहते हैं, वह इसको प्रपात ले लेते हैं, लेकिन 6 महीने से अधिक समय तक उसे संभाल नहीं पाते हैं, कारण है अधूरा ज्ञान, सबसे महत्वपूर्ण बात आपको बता दें कि कर्ण पिशाचिनी की सफलता, आम आदमी।
यह आम आदमी के लिए नहीं है और आम आदमी को कर्ण पिशाचिनी की सिद्धि भी नहीं करनी चाहिए, जो इसे प्राप्त करता है वह हमेशा परिवार से अलग रहता है और ध्यान में जरा सी भी चूक हो जाए तो कर्ण पिशाचिनी उसकी सारी कुछ ले लेती है, जिसके कारण उसके परिवार में अकाल मृत्यु भी हो जाती है।
ऐसा लगता है कि परिवार का नाश हो जाता है, इसलिए जो वामपंथी साधक तांत्रिक या अघोरी है, वही कर्ण पिशाचिनी को प्राप्त कर सकता है, परिवार में रहकर कभी प्राप्त नहीं हो सकता, अगर वह भी चली जाती है, तो परिवार का विनाश हो जाता है। लोगों को इसे हासिल करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
मित्रों, हिन्दू धर्म में मरने वाले लोगों को गति और कर्म के अनुसार बांटा जाता है। पिशाच क्या है? लेकिन पिशाच योनि में चले जाते हैं। पिशाच योनि में जाने का सबसे महत्वपूर्ण कारण अकाल मृत्यु है। वहां जानवरों द्वारा आकस्मिक मृत्यु या यूं कहें कि अधूरी इच्छाओं से दुर्घटनावश मरने वाले लोग पिशाच पिशाच बन जाते हैं। यही कारण है कि पिशाच योनि में भी जाते हैं दोस्त पिशाच एक नकारात्मक ऊर्जा पर अपना प्रभाव डालते हैं जिस पर पिशाच सवारी करता है
कर्ण पिशाचिनी: परिवार की रक्षा या नाश?
कर्ण पिशाचिनी एक ऐसी सिद्धि है जो आम आदमी के लिए नहीं है और उसे प्राप्त करने की सलाह नहीं दी जाती है। जो भी इसे प्राप्त करता है, वह हमेशा अपने परिवार से अलग रहता है और ध्यान में छोटी सी भूल होने पर भी कर्ण पिशाचिनी उसकी सारी आवाज सुन लेती है, जिसके परिणाम स्वरूप उसके परिवार के सदस्यों की मौत हो सकती है।
परिवार का पूर्ण विनाश हो जाता है। इसलिए कर्ण पिशाचिनी को प्राप्त करने के लिए केवल वामपंथी साधक, तांत्रिक या अघोरी ही सक्षम होते हैं, जो परिवार से अलग रहकर इसे प्राप्त कर सकते हैं। इसे परिवार में रहते हुए प्राप्त करना संभव नहीं है। यदि कर्ण पिशाचिनी भी इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति परिवार से अलग हो जाता है, तो उसके परिवार का नाश हो जाता है।
इसलिए हमें इसे हासिल करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। मित्रों, हिन्दू धर्म में मरने वाले व्यक्तियों को उनके कर्मों और गति के आधार पर फल दिया जाता है। पिशाच शब्द का अर्थ क्या है? यहां परिवार में ही पिशाच योनि में प्रवेश होते हैं।
पिशाच योनि में प्रवेश का सबसे महत्वपूर्ण कारण अकाल मृत्यु होती है। यहां जानवरों द्वारा अकस्मात मृत्यु या अपूर्ण इच्छाओं के परिणाम स्वरूप मरने वाले व्यक्तियों को पिशाच बनना पड़ता है। इसलिए पिशाच योनि में प्रवेश होता है। दोस्तों, पिशाच एक नकारात्मक ऊर्जा पर अपना प्रभाव डालते हैं, जिस पर पिशाच सवारी करता है।
परिवार के रिश्तों के बारे में आपको अवगत करते रहते हैं। यदि किसी प्रयासकर्ता ने इस तत्व को प्राप्त कर लिया हो और किसी अनजान व्यक्ति के सामने चला जाए, तो कर्ण पिशाचिनी उसकी सभी जानकारी को कुछ ही मिनटों में साधक के कानों में बता देती है। खाने के बाद वह यह पता लगा सकती है कि उसने क्या खाया है, उसके पास कितना धन है, रास्ते में कितना खर्च हुआ है, उसके परिवार में कौन-कौन हैं, उसके सभी रिश्तेदारों के नाम, और वहाँ तक कि उसके पूरे परिवार के सदस्यों के नाम भी कर्ण पिशाचिनी अपने साधक को बता सकती है कि किसी भी समय परिवार के सभी लोगों की जानकारी उपलब्ध हो।
यह स्थिति में समाज एक-दूसरे के बारे में अच्छी और बुरी बातें करता रहता है। इसका साधक पर गहरा प्रभाव पड़ेगा और वह पागल हो सकता है। मित्रों, यह पिशाच शीघ्र ही प्राप्त हो सकता है, लेकिन साधक की यह उम्मीद रखी जाती है कि वह इसमें पूरी आस्था और विश्वास के साथ रहें। पिशाच के साथ-साथ इस संसार से इन पिशाच साधकों का मुक्ति भी संभव नहीं है, जब तक कि विपदा आने से पहले।
“कर्ण पिशाच साधना”
कर्ण पिशाच साधना के लिए आपको चौघड़िया मुहूर्त में ध्यान देना चाहिए। इस साधना के दौरान आपको एक पीतल या कांसे की थाली में सिंदूर के साथ अपनी उंगली से एक त्रिशूल बनाना होगा। इसके बाद, आपको शुद्ध गाय और तेल के दो दीपक जलाने होंगे, और सामान्य तरीके से पूजा करनी होगी। इसके बाद, आपको मंत्र का 11 बार जाप करना होगा।
कर्ण पिशाच बनने तक मंत्र का दोहराने से निम्नलिखित होता है: “ऊं नमः कर्ण पिशाचिनी अमोघ सत्यवादी”
कर्ण पिशाच साधना करने से पहले कुछ ज्ञान अवश्य प्राप्त किया जा सकता है। इस साधना को करने के लिए ध्यान देने वाले व्यक्ति को ध्यान देना चाहिए कि कुछ छोटी सी भूल हो जाए तो कर्ण पिशाचिनी क्रोधित होकर दंड दे सकती है। जो लोग कर्ण पिशाच की पूजा करते हैं, वे पिशाच दुनिया से चले जाते हैं। ऐसे लोगों को मोक्ष प्राप्त नहीं होता है। पिशाचिनी अपने भेष को बदलकर साधक के पास ही रहती है।
मोक्ष प्राप्त करने के लिए केवल मानव जीवन ही संभव है। मानव योनि को दुर्लभ माना जाता है, क्योंकि यह मानव शरीर मिलना महान भाग्य है। भगवान भी मानव शरीर के लिए तृष्णा करते हैं। तृष्णा को पूरा करने के लिए, आपको नीच योनियों की पूजा करनी चाहिए। ध्यान देना चाहिए कि पिशाच को भी मुक्त होने की इच्छा होती है, लेकिन उसके पास मनुष्य का शरीर नहीं होता है, और न ही कोई अन्य साधन होता है। वह आपकी सभी इच्छाओं को पूरा कर सकता है।
इस प्रकार, कर्ण पिशाच साधना एक प्रभावशाली तकनीक है जो मनुष्य को उच्चतम स्तर की मुक्ति तक पहुंचा सकती है। यह साधना आपके जीवन को सकारात्मकता और समृद्धि के नए मार्गों की ओर ले जा सकती है। इसलिए, इसे यथाशक्ति और श्रद्धा से अपनाएं और इसके लाभों का आनंद लें।
कैसे जाने की किसी ने काला जादू कर दिया है kaise jaane ke kisi ne kala jaadu kar diya hai
कैसे जाने की किसी ने काला जादू कर दिया है kaise jaane ke kisi ne kala jaadu kar diya hai
कैसे जाने की किसी ने काला जादू कर दिया है kaise jaane ke kisi ne kala jaadu kar diya haiकैसे जाने की किसी ने काला जादू कर दिया है, किसी ने कुछ किया है ?कैसे पता करें अगर किसी ने कुछ किया है तो क्या है उस जादू का ? कलयुग के इस जमाने में लोग काफी स्वार्थी हो गए हैं और लोग अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए किसी भी हद तक चले जा रहे हैं।
पहले के समय में लोग एक दूसरे की आवश्यकता पड़ने पर सहायता करते थे,परंतु वर्तमान के समय में लोग सहायता करना तो दूर बल्कि एक दूसरे को किसी भी प्रकार से नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं।
हमारे आस पास ऐसे कई व्यक्ति होते हैं जिन्हें हम पसंद नहीं करते हैं या फिर वह हमें पसंद नहीं करते हैं । कई बार तो यह पसंद नापसंद सिर्फ आपसी मन मुटाव तक सीमित होती है परंतु अब लोग काफी ऐडवान्स हो गए हैं । साथ ही चालक हो गए हैं ।
इसलिए वह किसी से भी सामने से लड़ने की जगह पर उसके खिलाफ़ पीठ पीछे साजिश करते हैं और किसी भी प्रकार से उसे नुकसान पहुंचाने का प्रयास करते हैं। परन्तु जब साजिशें करने के बावजूद भी सामने वाले व्यक्ति का कुछ भी नुकसान नहीं होता है
तो अंत में व्यक्ति थक हार कर तंत्र मंत्र की शरण में जाता है और फिरसामने वाले व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक नुकसान पहुंचाने के लिए उसके ऊपर किसी भी प्रकार का काला जादू या फिर तांत्रिक क्रिया करवा देता है ।
जो सामान्य लोग होते हैं, उन्हें तो यह पता भी नहीं चलता है की उनके ऊपर उनके किसी दुश्मन ने काला जादू करवा दिया है क्योंकि उनके पास ऐसा कोई तरीका उन्हें मालूम नहीं होता है, जिसका इस्तेमाल करके वह यह जान सकें किउनके ऊपर काला जादू हुआ है या नहीं।
और इस पोस्ट में हम आपको यह बताने वाले हैं की किसी ने कुछ किया है यान नहीं । कैसे जाने चलिए जानते हैं कि किसीने कुछ किया है या नहीं कैसे पता करें। अगर आप यह जानना चाहते है की किसीने आपके ऊपर कुछ किया है तो इसके लिए नीचे हम आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहे हैं जिसे करके आप आसानी से इसके बारे में पता लगा सकते है की किसी ने आपके ऊपर काला जादू किया है या नहीं।
किसी ने जादू टोना कर दिया उसके यह लक्षण है
किसी ने जादू टोना कर दिया उसके यह लक्षण है
नंबर एक लक्षण – व्यक्ति की सांसें तेज हो जाना
तांत्रिक प्रयोग किए गए व्यक्ति की सांसें तेज हो जाना। अगर किसी व्यक्ति के ऊपर तांत्रिक क्रिया या फिर काले जादू का इस्तेमाल किया गया होता है तो उस व्यक्ति की सांसे लेने की गति तेज हो जाती है । आपने ऐसा अक्सर फिल्मों में देखा होगा परंतु वास्तव में भी ऐसा होता है । यह भी प्रेत बाधा या तांत्रिक प्रयोग का एक प्रमुख संकेत माना जाता है ।
नंबर दोलक्षण – व्यक्ति को डरावने सपने आना
तांत्रिक प्रयोग किए गए व्यक्ति को डरावने सपने आना आपकी जानकारी के लिए बतादें की रात के समय में काली शक्तियां बहुत ही ज्यादा ऐक्टिव हो जाती है और यही वजह है कि तांत्रिक लोग तथा अघोरीबाबा रात के समय में ही तांत्रिक क्रिया करते हैं
तभी यह अपने लक्ष्य पर हावी होने की कोशिश करती हैं। ऐसी अवस्था में जीस किसी भी व्यक्ति के ऊपर तांत्रिक प्रयोग किया गया होता है। उसे रात को सोते समय डरावने सपने आते हैं। या फिर अगर वह सोया हुआ होता है तो वह अचानक से चीखकर जाग जाता है। हालांकि कभी कभी अगर उसे डरावने सपने आते हैं तो इसे तंत्र मंत्र का हिस्सा नहीं माना जाना चाहिए।
नम्बर तीन – पीड़ित को होने वाली शारीरिक और मानसिक हानि
पीड़ित को होने वाली शारीरिक और मानसिक हानि ऐसा कहा जाता है की जब किसी व्यक्ति के ऊपर काले जादू का इस्तेमाल किया गया होता है या उस पर तांत्रिक विधि की गई होती है तो उसे शारीरिक और मानसिक नुकसान होने लगते हैं ।
अचानक से ही उसके विचार यहाँ वहाँ भटकने लगते हैं या फिर उसेहमेशा अपनी बॉडी में कमजोरी महसूस होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उस इंसान की जीवनी शक्ति मंत्र या फिर तंत्र प्रयोग के द्वारा कमजोर होने लगती है।
जिसके कारण उसे शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है और इस प्रकार व्यक्ति को कमजोरी महसूस होने लगती है।
आप तरह से जान सकते है जादू टोना किया कराया है या नहीं ?
प्रयोग नंबर 1- एक पानी के गिलास से जाने
व्यक्ति आसानी से यह जान सकता है की उसके ऊपर काले जादू का इस्तेमाल किया गया है या नहीं या फिर उसके ऊपर तांत्रिक विद्या का प्रयोग किया गया है या नहीं। इसके लिए उसे करना यह है की रात को जब वह सोने जाएं तो उसे एक गिलास में पानी भरकर उसे अपने बेड के नीचे रख देना है।
साथ ही मन में यह संकल्प लेना है की अगर हमारे ऊपर किसी भी प्रकार की नेगेटिव एनर्जी का इस्तेमाल किया गया है तो वह सारी नेगेटिव एन र्जी पानीके अंदर समाहित हो जाए। इसके बाद आपको सुबह उठकर उस गिलासके पानी को चेक करना है अगर उसमें ज्यादा ही बासीपन नजर आता है या फिर उसका कलर हल्का सा भी पीला नजर आताहै तो आपको यह समझ जाना चाहिए कि किसी ने आपके ऊपर कुछ तांत्रिक विद्या करवाई है?
प्रयोग नंबर 2 – नींबू का भी इस्तेमाल करके
दोस्तों नींबू का भी इस्तेमाल करके यह पता लगाया जा सकता है की तंत्र मंत्र हुआ है या नहीं। फल और सब्जियां नेगेटिव एनर्जी से बहुत ही ज्यादा प्रभावित होती है। अगर आप यह जानना चाहते है की किसी ने आपके ऊपर कुछ किया है या नहीं तो इसका पता लगाने के लिए आपको रात को सोते समय एक नींबू को अपने तकिये के नीचे रख देना है और आपको अपने मन में यह सोचना है की अगर आपके आस पास किसी भी प्रकार की नेगेटिव एनर्जी है।
तो वह इस नीम्बू में समाहित हो जाए। इसके बाद आपको सुबह उठकर नींबू को देखना है। अगर आपके ऊपर कालाजादू कियागया होगा तो नींबू बहुत ज्यादा मुरझा जाएगा और उसका रंग भी काला पड़ जाएगा।
प्रयोग नंबर 3 – दीपक का इस्तेमाल करके पता करें
दीपक का इस्तेमाल करके पता करें दोस्तों इस विधि का इस्तेमाल करके आपअपने घर पर काला जादू हुआ है या नहीं या फिर अपने खुद के ऊपर काला जादू हुआ है या नहीं इसके बारे में पता कर सकते हैं।
इसके लिए आपको करना यह है की आपको एक छोटे से मिट्टी के दिवाली में सरसों का तेल डालना है। इसके बादआपको उसके अंदर दो लौंग और कपूर पाउडर डालना है। उसके बाद आपकोदीपक डालकर दीपक को जला देना है।इसके बाद आपको कुछ ऐसा प्रबंध करना है की दीपक को ज्यादा हवा ना लगे।
उसके बादआपको वहाँ से चले जाना है और फिर सुबह उठकर आपको देखना है अगर दीपक आपको बुझा हुआ दिखाई देता है तो आपको यह समझ जाना चाहिए कि किसी नेआपका बुरा करने के लिए आपके घर के ऊपर या फिर आपके ऊपर काले जादू का इस्तेमाल किया है या फिर तांत्रिक विद्या का इस्तेमाल किया है।
प्रयोग नंबर 4 नमक के पानीसे पता करें
दोस्तों एक छोटे से उपाय नमक के पानीसे पता करें। काला जादू अपने ऊपर अथवा अपने घर के ऊपर काले जादू का इस्तेमाल किया गया है या नहीं इसका पता लगाने के लिए आपको किसी भी रात को बजे के आसपास एक गिलास पानी लेना है और आपको उसके अंदर सादा नमक डालना है और फिर आपको चम्मच की सहायता से नमक को पानी में अच्छी तरह से मिक्स कर देना है।
इसके बाद आपको इसनमक वाले पानी को ले जाकरअपने घर के किसी भी कोने में रख देना है। अगर सुबह होने के बाद यह पानी काले पानी के रूप में चेंज हो जाए तो समझ लीजिए किआपके घर के ऊपर या फिर आपके ऊपर तांत्रिक विद्या अथवा काले जादू का इस्तेमाल किया गया है।
त्रिकालदर्शी बनने की मातंगी साधना Matangi sadhna ph.85280 57364
Matangi sadhna त्रिकालदर्शी बनने की मातंगी साधना हमारे गुरु मंत्र साधना में आपका स्वागत है! हर हर महादेव जय श्री महाकाल! आपने कई मंत्रों को देखा, सुना और पढ़ा होगा, लेकिन आज हम आपको एक बहुत ही विशेष मंत्र के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। यह मंत्र हमें एक साधक से मिला है और इसकी शक्ति अद्भुत है।
हमारे वेबसाइट पर आपको कई सारे मंत्र मिलेंगे, जिन्हें अभी तक आपने देखा नहीं होगा। इसलिए कृपया उन्हें भी जरूर सुनें और उन्हें अपने मित्रों के साथ शेयर करें। हमारे वेबसाइट पर आपको सभी प्रकार के मंत्र और तरीकों के बहुत सारे पोस्ट मिलेंगे।
आज हम एक विशेष और प्राचीन मंत्र के बारे में बात करेंगे, जिसे सनातन तंत्र में सिद्ध किया जाता है। इस मंत्र का सिद्ध करने से आपको लाभ प्राप्त हो सकता है। इस मंत्र को सिद्ध करने के लिए आपको शिव को अपना गुरु मानना चाहिए।
मातंगी Matangi साधना कैसे करें
गुरु से दीक्षा ले कर मातंगी साधना करे ध्यान दें, शिव साधना को शुरू करने से पहले आपको एक योग्य गुरु की गाइडेंस लेनी चाहिए और उनके मार्गदर्शन में किसी के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के नुकसान से आपको कोई चिंता नहीं होगी।
देवी मातंगी Matangi कौन थी?
देवी मातंगी कौन थी दस महाविद्या में से एक महाविद्या है जो सम्मोहन वशीकरण की विद्या है
मातंगी Matangi की पूजा किस दिन करनी है?
मातंगी Matangi की पूजा किसी भी दिन से शुरू कर सकते है इस में दिन का किसी भी दिन किया जा सकता है किया जा सकता नहीं है
मातंगी Matangi मंत्र से क्या लाभ है?
मातंगी साधना Matangi sadhna से आप किसी को भी सम्मोहन कर सकते है यह सम्मोहन की महा शक्ति है दूसरा इस का साधक भूत भविष्य वर्तमान का अच्छा जानकर होता है
सर्व ज्ञानी बनने का मंत्र मातंगी साधना Matangi sadhna ph.85280 57364
आपको कुछ दिनों तक शिव साधना करनी चाहिए और उसे किसी भी क्षेत्र में इस मंत्र का आचरण करना चाहिए। इस मंत्र की सिद्धि आपको व्यापार, धन, स्वास्थ्य या किसी अन्य मांग में मदद कर सकती है।
इस मंत्र का नियमित जाप करने से आपको आत्मसंयम, मानसिक शक्ति और आध्यात्मिक उन्नति मिल सकती है। इसके अलावा, शिव साधना से आपको शांति, सुख और समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है। यह मंत्र आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है और आपको सफलता की ओर ले जा सकता है।
अगर आप इस मंत्र की आचरणा करना चाहते हैं, तो पहले इसे अच्छी तरह से सीखें और इसकी विधि का पालन करें। ध्यान दें कि इस मंत्र को सही ढंग से चंद्रवम्दळ समय पर जपना चाहिए। आपको इस मंत्र का नियमित जाप करते हुए शिव साधना में समर्पित रहना चाहिए और उम्र भर के लिए इसका लाभ प्राप्त करने की कोशिश करें।
ध्यान दें, शिव साधना को शुरूकरने से पहले आपको एक योग्य गुरु की गाइडेंस लेनी चाहिए और उनके मार्गदर्शन में
किसी के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के नुकसान से आपको कोई चिंता नहीं होगी। हालांकि, अगर किसी के साथ कोई घटना होती है, तो इसमें हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। लेकिन इसके बावजूद, मैं आपको एक मंत्र बता रहा हूँ, जिसके अनुसार कोई भी समस्या उत्पन्न नहीं होगी। इसके लिए आपको अपने गुरु को शिव मान लेना चाहिए।
आपको कुछ दिन तक इसका जाप करना चाहिए। जब भी इनकी साधना करें, आपको पहले “ओम नमः शिवाय” का मंत्र जपना चाहिए। फिर आप इस साधना को शुरू कर सकते हैं। इसके लिए आपको पंच उपचार का पूजन करना चाहिए और एक छोटा सा स्थान बनाना चाहिए, जहां आप जप कर सकते हैं।
इसके लिए नियमित रूप से स्थान की पूजा करें। यदि ऐसा नहीं हो सकता है, तो कोई बात नहीं। जब आपकी साधना सिद्ध हो जाएगी, तब आप वहां से स्थान हटा सकते हैं। आप अपनी प्राथना और पूजा को अपने हिसाब से कर सकते हैं।
अगर किसी के साथ किसी भी प्रकार का नुकसान होता है, तो आपको कोई चिंता नहीं होगी। यद्यपि, यदि किसी के साथ कोई घटना घटित होती है, तो उसमें हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। फिर भी, मैं आपको एक मंत्र दे रहा हूँ जिसके अनुसार कोई भी समस्या उत्पन्न नहीं होगी। आपको अपने गुरु को भगवान शिव के रूप में स्वीकार करना चाहिए।
आपको कुछ दिनों तक इसका जाप करना चाहिए। जब भी आप इनकी साधना करें, आपको पहले से “ओम नमः शिवाय” मंत्र का जाप करना चाहिए। इसके बाद आप इस साधना को आरंभ कर सकते हैं। इसके लिए आपको पंच उपचार की पूजा करनी चाहिए और एक छोटे से स्थान को बनाना चाहिए जहां आप जप कर सकते हैं।
नियमित रूप से उस स्थान की पूजा करें। यदि ऐसा संभव नहीं है, तो यह बात नहीं। जब आपकी साधना सिद्ध हो जाएगी, तब आप वहां से स्थान हटा सकते हैं। आप अपनी प्रार्थना और पूजा को अपनी पसंद के अनुसार कर सकते हैं।
अपने मन में एक तंत्र के प्रति उत्सुक होने की इच्छा है, अपने मन को जागृत करने की इच्छा है और शक्ति को अपने मस्तिष्क में स्थापित करने की इच्छा है। मातंगी की साधना करने के लिए, आप किसी भी स्थान से माता की तस्वीर यहां से प्राप्त कर सकते हैं और आप उनकी पूजा पाठ भी कर सकते हैं।
यह आपको बाजार में आसानी से मिलेगा, चाहे आप यूट्यूब पर खोजें या गूगल पर सर्च करें, आपको मातंगी की तस्वीर मिल जाएगी। आप तस्वीर को प्रिंट करके अपने पूजा स्थल पर रख सकते हैं, इसमें कोई दिक्कत नहीं है। जब भी आपकी साधना पूरी होती है, आप उसे किसी नदी, दरिया, तालाब या किसी अन्य जलस्रोत में छोड़ सकते हैं।
आपको उसे सामान्य ढंग से विसर्जित करना है। आप उसके ऊपर सूरज की रोशनी, अगरबत्ती, कुमकुम आदि चीजें रख सकते हैं। विसर्जन के बाद आपको किसी भी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता है। मात्रा जाप के लिए आपको इस मंत्र का 11 माला का जप करना होगा, आप इससे अधिक माला का जप भी कर सकते हैं।
तो आपको इसमें यह मंत्र है जो आपको बता देते हैं मंत्र सुन लीजिएगा आप आपको स्क्रीन पर भी यह दिख जाएगा मंत्र का आपको जप करना आपको स्क्रीन पर दिख जाएगा इसमें कोई ज्यादा टेंशन की बात नहीं है इस मंत्र को आप आराम से कागज पर likhiyega ठीक है
मंत्र मातंगी साधना विधि Matangi mantra sadhna vidhi
सामन्य सामग्री है जो आपको सामान्य सी होती है आपको सबको पता ही है उसी के अनुसार आपको कम से कम पंच उपसर्ग मतलब पंच प्रकार की कुछ सामग्री रखनी है उससे आपको पूजा करनी है जैसे धूप दीप कुमकुम ये सारे होते सावन वगैरा फूल ऐसे पंच सामग्री से उनकी पूजा करनी वही सामान्य तौर पर आपको समझा रहा हूं ठीक है और उनकी साधना शुरू करने आपको गुरु मंत्र के तौर पर आप शिव को गुरु मान सकते उनकी 1 माला जप कीजिएगा
आप संकल्प ले सकते हो उसी शिव मंत्र से और फिर निमंत्रण से जो मैंने आपको बताया इस मंत्र से भी आप संकल्प तीन बार हाथ में पानी लेकर संकल्प लेकर करे मैं इतने रोजाना इतनी माला जब करूंगा आप सिद्धि के लिए आसन दीजिएगा फिर पानी छोड़िएगा और साधना शुरू कर दीजिएगा ये होता है सामान्य क्रिया का इसके बाद में आपको जो शक्तियां हैं। वो जैसे-जैसे आप जप करते-करते आगे जाते रहेंगे और शक्तियां आपसे जुड़ती रहेगी अ
गर मन लीजिए आप इतनी लंबी साधना ही नहीं कर सकते तो किसी भी दिन से शुरू कीजिएगा और आपकी जब भी सवाल आप कम से कम जब शुरू हो जाता है उसके बाद में आपको धीरे-धीरे कुछ खाओ मैं किसी प्रकार से कुछ ना कुछ छोटी सी साधना दी मैंने आपको बता दी पोस्ट अच्छा लगे लाइक शेयर और सब्सक्राइब जरूर करना हर-हर महादेव
तीसरा नेत्र त्रिकाल ज्ञान रहस्य – दिव्य दृष्टि प्राप्त करने का आसान तरीका An easy way to attain divine sight ph.85280 57364
तीसरा नेत्र त्रिकाल ज्ञान रहस्य – दिव्य दृष्टि प्राप्त करने का आसान तरीका An easy way to attain divine sight ph.85280 57364
तीसरा नेत्र त्रिकाल ज्ञान रहस्य – दिव्य दृष्टि प्राप्त करने का आसान तरीका ph.85280 57364 आपने काफी लोगों को ऐसे देखा होगा जो चेहरा देख कर ही केवल भूत भविष्य और वर्तमान बता देते हैं कि जैसे कि आपके पिता का क्या नाम है. आपके साथ क्या हुआ था क्या होने वाला है।
आपका घर कहां पर है क्या आप जानना चाहते हैं कि आपके मन में सवाल चल रहा है ऐसी चीजें आपने काफी बार सुनी होंगी और शायद भी देखी भी होंगी।
तो आपको बता दें कि इसे त्रिकाल दर्शन सिद्ध कहा जाता है। यानि कि जिस व्यक्ति के पास त्रिकाल दर्शन से अधिक होती है व्यक्ति भूत भविष्य और वर्तमान का पता लगा सकता है।
जैसे कि अगर यह सिद्धि प्राप्त कर लेते हैं तो इस सिद्धि को प्राप्त करने से जिस भी चेहरे को आप देखेंगे उस व्यक्ति की आंखों में देखकर केवल आप यह जान सकते हैं ,कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है और किन चीजों को वह जानना चाहता है किन परेशानियों का उसमें सामना किया है।
यहां तक कि त्रिकाल दर्शन सिद्धि से आप यह भी उसकी आंखों से खुद ही पूछ सकते हैं ,कि उसके पिता तो क्या नाम है उसकी माता का क्या नाम है। और उसका घर कहां पर है काफी लोग तो आपने खुद भी ऐसी देखेंगे कि यह भी बताते हैं कि आपकी जेब में क्या रखा है और आप कब पहुंचेंगे और कितने बजे पहुंचेंगे किस कारण की वजह से यहां पर आए हैं। तो यह सभी जितनी भी चीजें होती हैं। यह केवल त्रिकाल दर्शन सिद्ध से प्राप्त होती है। तो आज के इस लेख में हम आपको बताएंगे कि किस प्रकार त्रिकाल दर्शन सिद्धि प्राप्त की जाती है .
और किस प्रकार छोटे-छोटे त्रिकाल दर्शन सिद्धि के जो प्रयोग होते हैं उनका इस्तेमाल करते हुए भी आप अपने जीवन में अपने भूत भविष्य और वर्तमान को जान सकते हैं वैसे एक बात और आपको बता दें कि यह जो सिद्ध होती है
यह काफी सारे लोगों में ऑटोमेटिक होती है यानि कि आपने ऐसे लोग भी अवश्य ही देखे होंगे जो यह कहते हैं कि ऐसा होने वाला था यह हमें पहले ही पता था कि हमने सपने में देख लिया था तो ऐसे लोगों के पास ऑटोमेटिक ही त्रिकाल दर्शन सिद्ध होती है लेकिन इसकी इस्तेमाल कैसे करना है इन संकेतों को किस प्रकार समझना है
इस बारे में संपूर्ण ज्ञान न हो पाने के कारण वह इस ऑटोमेटिक विधायक का लाभ नहीं उठा पाते हैं बल्कि काफी लोगों में तो ऐसी भी शक्ति ऑटोमेटिक होती है कि अपने पितरों से अपनी कुल देवी से अपने कुलदेवता उसे बात भी कर पाते हैं यह भी त्रिकाल दर्शन सिद्धि के ही अंतर्गत आता है तो आपको बता दें कि किस प्रकार यह प्रयोग कर सकते हैं और किन-किन चीजों को आपको ध्यान रखना है
कौन-कौन से संकेत आपको फॉलो करने हैं लेकिन उससे पहले भगवान शिव को नमस्कार आप अवश्य कर लें और कमेंट में ॐ नमः शिवाय लिखते और post को लाइक जरूर करें जिससे इसी प्रकार की खास post आप कुछ समय पर और सबसे पहले मिला करें तो दोस्तों आपको बता दे कि वैसे तो मंत्र साधनाओं में बहुत सारी ऐसी साधनाएं होती हैं जिनके माध्यम से त्रिकाल दर्शन सिद्धि प्राप्त हो जाती है
त्रिकाल का मतलब है यानि कि तीनों काल को देख कि भूत-भविष्य-वर्तमान तीन काल होते हैं जिन्हें व्यक्ति आसानी से भांप लेता है देख लेता है। देखने का मतलब यह नहीं होता है ,कि उसने आंखें बंद कर ली और उसे टीवी की तरह बिल्कुल अंदर साफ-साफ दिखाई देने लग जाता है बल्कि ऐसा होता है। कि जैसे ही वे आंखें बंद करता है कोई ना कोई शक्ति उसे सब कुछ बिल्कुल पड़ती चली जाती है और बस फिर वही चीजें बता देता है।
आपको यह भी बता दें कि जो तीसरा नेत्र होता है वह हर एक इंसान का टीवी की तरह कार्य करता है। जैसे आप खोलकर देखते हैं बिल्कुल उसी प्रकार से तीसरा नेत्र भी पूरी तरह से सक्षम होता है ,कि अंदर टीवी की तरह देख सके आपने खुद भी इस चीज को काफी बार रियलाइज़ खुद किया होगा कि जब आप आंखें बंद करते हैं।
तो लोगों के चेहरे आपको बिल्कुल साफ नजर आते हैं या फिर कुछ चीजें आपको ऐसी नजर आती हैं। जो बिल्कुल क्लियर टीवी की तरह पिक्चर की तरह दिखाई देती हैं जब की आंखें बंद करने के बाद बिलकुल अंधेरा होना चाहिए।
लेकिन काफी लोगों के पास ऐसी सिद्धि ऐसी शक्ति ऑटोमेटिक होती है कि उन्हें टीवी की तरह अंदर ही अंदर दिखाई देने लग जाता है। जबकि अंदर कोई भी आंख नहीं होती है तो यह सारा कमाल तीसरे नेत्र का थर्ड आई का होता है ,जो कि हर एक इंसान के अंदर मौजूद रहती है काफी लोगों की थोड़ी-बहुत जागृत रहती है काफी लोगों की बिल्कुल भी जागृत नहीं रहती है।
जिन लोगों की बिल्कुल भी जागृत नहीं रहती है उन्हें आंखें बंद करके घोर अंधेरा काला अंधेरा ही दिखाई देता है। क्योंकि उनकी अंदर की आंखें बिल्कुल बंद होती हैं इसीलिए अगर त्राटक तक का प्रयोग किया जाए त्राटक प्रैक्टिस किया जाए जैसा कि हमने पिछले में बताया है ,कि दीपक जलाकर अगर उसे एक टुक लगाकर देखा जाए और फिर आंखें बंद कर कर उस प्रकाश को पकड़ा जाए ,तो इससे भी तीसरा नेत्र जागृत हो जाता है या फिर किसी भी चीज पर को उजाले की चीज है जैसे सूर्य है चंद्रमा है। आप इस पर थोड़ा-थोड़ा तरह ठप करके।
अपने प्रैक्टिस को बढ़ाकर अपने त्रिनेत्र को जागृत कर सकते हैं त्रिकाल दर्शन के लिए यह जाए होना बेहद आवश्यक होता है। इसी लिए भगवान शिव के जो साधक होते हैं उनका तीसरा नेत्र अपने आप ही जागृत होता है भगवान शिव के जो परम शुद्ध होते हैं उनके पास अपने आप यह त्रिकाल दर्शन सिद्धि होती है।
जिनको सिर्फ चेहरा देख कर ही वह भूत भविष्य वर्तमान पता लगा लेते हैं बल्कि बात करते-करते भी बाहर चीजों को हर बातों को भांप लेते हैं समझ जाते हैं और जान जाते हैं त्रिनेत्र जिस भी व्यक्ति का जागृत होता है। तो ऐसे व्यक्ति की जो सेंस होते हैं समझने की शक्ति होती है। वह आम इंसान से काफी ज्यादा बड़ी होती है काफी ज्यादा विकसित होती है।
लेकिन आप यह बात ध्यान रखें कि त्रिकाल दर्शन साधना करने के लिए इसके कुछ नियम मानना बेहद आवश्यक है जो आने वाले पोस्ट में हम इस साधना की विधि भी आपको बताएंगे।
और इसकी संपूर्ण नियमों को भी आपको जरूर ही समझेंगे कि किस प्रकार यह सारी चीजें आपको करनी है। लेकिन अगर आप चाहते हैं कि यह चीज आप में थोड़ी डेवलप हो जाए और खुद प्रैक्टिस करना चाहते हैं ,तो आपको तरह तक प्रैक्टिस मैं बस इसी से आपको भूत भविष्य वर्तमान की थोड़ी-बहुत झलक अपने आप ही दिखाई देने लग जाएगी आपको केवल इतना करना है कि एक दीपक जलाकर रोज शाम के समय जब सूरज ढल जाता है।
दीपक देखने का विशेष तरीका और उसके प्रभाव
आपको दीपक की लौ को देखने के लिए निचले दिए गए तरीके का पालन करना है। इसके माध्यम से, आप उस दीपक के प्रकाश को अपने अंदर देखने का अनुभव कर सकते हैं। यह तकनीक तीसरे नेत्र के माध्यम से रिकॉर्ड होती है और इसे आपको अभ्यास के लिए 5 से 10 मिनट तक करना चाहिए।
इसके बाद, जब आप अपनी आंखें बंद करेंगे, तो आपके सामने पहले जो अंधकार दिखता था, उसे एक दिव्य प्रकाश बदल जाएगा। इसके बाद, आपको उस दिव्य प्रकाश को लगातार देखते रहना है। जैसे-जैसे यह प्रकाश बढ़ता है, वह भी गोल होने लगता है।
इसका कारण है कि बहुत कम लोगों की शक्ति इसे पकड़ सकती है, और जब यह उधर जाता है, तो आपको फिर से दीपक पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इस तरीके का अनुसरण करने से व्यक्ति को त्रिकाल दर्शन की प्राप्ति होती है और इसे भाग्यशाली माना जाता है।
इस तकनीक का अनुसरण करने से आपको दीपक की लौ को अपने अंदर देखने का अनुभव होगा और आपके मन में शांति की अनुभूति होगी।
इस विशेष ध्यान विधि को नियमित रूप से अभ्यास करने से आप अपनी ध्यान क्षमता को सुधार सकते हैं और अपने जीवन में स्थिरता प्राप्त कर सकते हैं।
इसे अपने दैनिक जीवन में एक ध्यान अभ्यास के रूप में शामिल करें और अपनी आंतरिक शक्ति को जागृत करें। इस विशेष तकनीक का अभ्यास करने से आपका मानसिक तंत्र स्वस्थ रहेगा और आपको शांति और सुख की अनुभूति होगी।
इस प्रकार, दीपक देखने की विशेष तकनीक से आपको आंतरिक शक्ति और मानसिक स्थिरता प्राप्त हो सकती है। इस तकनीक का अभ्यास नियमित रूप से करें और इसे अपने जीवन में शामिल करें ताकि आप ध्यान की गहराई में जा सकें और आंतरिक शांति का आनंद ले सकें। यह विशेष तकनीक आपके जीवन को प्रकाशमय बना सकती है और आपको सकारात्मकता की ओर ले जा सकती है।
भगवान शिव ने हर एक इंसान को यह शक्ति देकर भेजा होता है लेकिन अगर खास साधना कर ली जाए तो इससे इस विद्या की प्राप्ति संपूर्ण रूप से हो जाती है तो अगर आप इस प्रकार से रोज त्राटक एक दीपक पर करते हैं भगवान शिव की फोटो पर एक दीपक अवश्य जलाना है क्योंकि भगवान शिव को प्रसन्न करना उनकी कृपा प्राप्त करना बेहद आवश्यक इस साधना के लिए जरूरी होता है तो यह सब चीजें आपको करनी है
उसके बाद आपने अपने आप ही भूत-भविष्य-वर्तमान देखने की शक्ति आने लग जाएगी आप खुद ही सभी चीजों को समझने लग जाएंगे और जो चीजें होने वाली होंगी इनके संकेत आपको खुद ही पता लगने लग जाएंगे अब यह किसी भी प्रकार से हो सकता है
जैसे कि सपने के माध्यम से या फिर आंखें खुली में भी आपको अपने आप ही आवाज होने लग जाएगा कि यह ऐसा होने वाला है तो बस मैं इसी को और अधिक एडवांस लेवल पर करते हैं तो इससे क्लियर दिखता है लेकिन इसकी झलक आपको थोड़ी-थोड़ी अवश्य ही मिलने लग जाएगी
अगर आप चाहते हैं कि इस शक्ति का इस्तेमाल किसी सवाल को जानने के लिए आप करना चाहते हैं तो वह भी आप कर सकते हैं आपको केवल इतना करना है कि बरगद का पत्ता तोड़ कर लाना है बरगद के पत्ते पर आपको धतूरे के फल के रस से अपने सवालों को गूलर की लकड़ी से लिखना है और इस पत्ते को फोल्ड करके अपने तकिए के नीचे रख कर सो जाना है
उसी रात उसी सवाल का जवाब आपको निश्चित रूप से एक स्वप्न के माध्यम से सब कुछ पता चल जाएगा इसी शक्ति को इस विधि को आप किसी भी मृत व्यक्ति से बात करने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं चाहे पित्त रहो या कोई भी यूनिक का कोई भी व्यक्ति हो अब किसी से भी इस शक्ति का इस्तेमाल करते हुए बात कर सकते हैं
यह जितने भी जानकारी हमने आपको बताई है यह तंत्र के अंतर्गत आती है जो कि त्रिकाल दर्शन के बारे में होती है काफी लोगों ने हमसे इस पूछा है कि भूत भविष्य और वर्तमान देखने के लिए कृपया आप इस पर थोड़ा प्रकाश डालें तो इस पोस्ट में हमने आपको बताया है कि
किस प्रकार यह सभी चीजे कार्य करते हैं किस प्रकार आप अपने अंदर भी बड़ी आसानी से इसे विकसित कर सकते हैं और थोड़ी बहुत झलक खुद भी अवश्य देखकर प्राप्त कर सकते हैं और जैसे ही आप इस प्रयोग को करना शुरू करेंगे तो हो सकता है कि आपको अगले दिन से ही आवास होने लगे और यह भी हो सकता है कि आपको कम से कम एक महीना लग जाए लेकिन आपको बिल्कुल भी रोकना नहीं है
जब हम विज्ञान की बात करते हैं, तो इसका एक विशेष महत्वपूर्ण संबंध हमारे त्रिकाल दर्शन से है। यह विज्ञान की एक पूर्णरूप से प्रभावी विधि है जिससे हम अपनी आत्मा की उन्नति कर सकते हैं। जब हम इसे सही ढंग से अपनाते हैं, तो हमें उस प्रभाव को प्राप्त होता है जो हम चाहते हैं। आइए हम इस विषय पर गहराई से बात करें।
त्रिकाल दर्शन एक अद्वैत साधना है, जिसमें हम अपने तीनों नेत्रों का प्रयोग करते हैं। यदि हम एक दीपक जलाकर और त्राटक करके अपने तीसरे नेत्र को जागृत करते हैं, तो हमें चमत्कारिक परिणाम महसूस होते हैं। रात्रि को स्वप्न में, यदि हम पहले से ही अध्यात्मिक हैं, तो हमें अपने अन्दर की गहराइयों का अनुभव होता है।
तीसरे नेत्र की महत्वता इसलिए होती है क्योंकि समय के साथ, तीसरे नेत्र के आसपास एक पत्थर की परत जमा होती है। यह परत तीसरे नेत्र को पूरी तरह से अवरुद्ध कर देती है, जिसके कारण हमें कुछ दिखाई नहीं देता। हमारी याददाश्त कमजोर होती है और हम अपने वर्तमान को भूलने लगते हैं।
हालांकि, यदि हम नियमित रूप से प्रैक्टिस करते हैं, तो हमारी मानसिक शक्ति वृद्धि करती है। रोजाना की प्रैक्टिस से हमारा तीसरा नेत्र पूर्णतया सक्रिय हो जाता है और हमें आकर्षित करने की क्षमता प्राप्त होती है।
तीसरे नेत्र को जागृत करना सबसे आसान है, और यह सभी चक्रों में विस्तार से बताया जाता है। इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए, हम आपको आने वाले lekh में विस्तृत जानकारी प्रदान करेंगे। यह आपकी साधना को सही ढंग से करने में मदद करेगा।
हालांकि, आपको यह भी ध्यान देना चाहिए कि त्रिकाल दर्शन का प्रयोग करना सबसे अच्छा है जब आप इसके बारे में समझ जाते हैं। अपनी ज्ञानवर्धकता के लिए, आपको लेख को एक बार और देखकर पढ़ना चाहिए। इस रूप में, आप अपने अंदर के त्रिकाल दर्शन की शक्तियों को जाग्रत कर सकेंगे। हम आशा करते हैं कि आपको हमारी जानकारी पसंद आई होगी। ओम नमः शिवाय। हर हर महादेव।