Monday, October 5, 2026
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11 दिवसीय प्रचंड सूर्य सम्मोहन साधना: हर किसी को बनाएं अपने अनुकूल surya sammohan sadhna

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11 दिवसीय प्रचंड सूर्य सम्मोहन साधना: हर किसी को बनाएं अपने अनुकूल surya sammohan sadhna
11 दिवसीय प्रचंड सूर्य सम्मोहन साधना: हर किसी को बनाएं अपने अनुकूल surya sammohan sadhna

11 दिवसीय प्रचंड सूर्य सम्मोहन साधना: हर किसी को बनाएं अपने अनुकूल surya sammohan sadhna

11 दिवसीय प्रचंड सूर्य सम्मोहन साधना: हर किसी को बनाएं अपने अनुकूल surya sammohan sadhna
11 दिवसीय प्रचंड सूर्य सम्मोहन साधना: हर किसी को बनाएं अपने अनुकूल surya sammohan sadhna
जय गुरुदेव  आपका एक बार फिर से हार्दिक स्वागत है और देखिए आज मैं आपके लिए जो साधना लेकर कहा वह सूर्य सम्मोहन साधना है बहुत ही तीव्र साधना है एक प्रकार से यह कहा जाए कि साधना जो सम्मोहन साधना होती है उनमें थ्रो मार उसको बोला जाता है वह यह साधना है सूर्य सम्मोहन साधना।
और एक समय का मैं आपको बता देता हूं इसका थोड़ा सा पीछे का जो कि यह साधना क्यों जरूरी है। देखिए एक बार ऐसा हुआ कि भगवान श्री कृष्ण संदीपन ऋषि जो उनके गुरु थे उनके चरण दबा रहे थे और अचानक से जंगल की ओर से एक हिरण दौड़ता हुआ आया था
और वहां पर पहुंच गया लेकिन उसके पीछे पीछे एक शेर भागता हुआ आया जो कि उसको मारने के लिए साक्षात् यम का रूप धारण करें हुए था और अचानक से क्या हुआ कि जो संदीपन ऋषि थे उनके प्रभाव क्षेत्र के अंदर आते ही वह दोनों अपना वैर भाव भूल गए और दोनों खेलने लगे।
जब इतना देखा तो फिर कृष्ण जी तो एकदम स्तब्ध हो गए। पूछने पर गुरुजी ने बताया कि यह सूर्य सम्मोहन साधना का प्रभाव है। इस साधना के प्रभाव से जो जीव होते हैं ना उनकी प्रकृति जो उसके विपरीत है, वह भी अनुकूल हो जाती है।
यह बहुत दुष्कर कार्य है लेकिन उन्होंने बताया कि अगर विपरीत परिस्थितियों से जीवन में उतरना पड़े जब समस्त लोग तुम्हारे खिलाफ हो जाएं तो यह साधना तुम्हें संपन्न करनी चाहिए जिससे कि तुम सबको अपने अनुकूल बना सको। इसके बाद फिर भगवान श्रीकृष्ण ने यह साधना सिद्धि की थी।
तो कुल मिलाकर के मैं यह आपको साधना बताने वाला हूं और इस साधना में आप यह मानकर चलिए कि आपके अंदर एक ऐसा व्यक्तित्व आ जाएगा, एक ऐसा ओज आ जाएगा कि आपको देखते ही लोग आपकी तरफ प्रभावित होंगे। यह सम्मोहन साधना है आपके व्यक्तित्व को निखारने की साधना है।

सूर्य सम्मोहन साधना विधि – surya sammohan sadhna vidhi 

इस साधना के बारे में मैं आपको समझा देता हूं कि साधना आपको कैसे करनी है। साधना केवल 11 दिन की है। किसी भी रविवार की रात्रि को 10:00 बजे से आपको यह साधना शुरू करनी है। स्नान करने के बाद सफेद रंग के वस्त्र आपको धारण करने हैं और सफेद रंग का ही आसन होना चाहिए आपका और पूर्व दिशा की तरफ को मुख करके बैठना है।
सामने जो लकड़ी की चौकी रहेगी उस पर भी सफेद रंग का कपड़ा आपको बिछाना है और उस पर आपको सूर्य सम्मोहन यंत्र स्थापित करना है। इसमें आपको दो सामग्री की आवश्यकता पड़ेगी, एक तो आपको सूर्य सम्मोहन यंत्र की आवश्यकता पड़ेगी और एक मणिमाला की आवश्यकता पड़ेगी। दोनों चीजें मंत्र सिद्ध और प्राणप्रतिष्ठायुक्त होनी चाहिए।
लकड़ी की जो चौकी है उस चौकी पर सूर्य सम्मोहन यंत्र को स्थापित करना है और उसका पंचोपचार पूजन करना है। पंचोपचार पूजन में धूप-दीप दिखाना होता है, एक घी का दीपक जला लें, धूपबत्ती अगरबत्ती दिखाएं, पुष्प चढ़ाएं और सिंदूर या केसर से तिलक करें और नैवेद्य (प्रसाद) चढ़ाएं। इसके बाद माला का भी पंचोपचार पूजन करना है।
फिर इस मणिमाला से तुम्हें 11 माला मंत्र का जप करना है। 11 दिनों तक 11 माला मंत्र का आपको जप करना है। मंत्र इस प्रकार से
है:
ॐ ह्रीं सूर्य सम्मोहय ह्रीं ॐ।
जब 11 दिन तुम्हारे पूरे हो जाएं तो ग्यारहवें दिन इस यंत्र को और माला को दोनों को कहीं भी बहते हुए पानी (नदी) में प्रवाहित कर देंगे। साधना के दौरान प्रतिदिन तुम्हें सुबह के समय सूर्य को जल जरूर देना है और रात्रि को साधना करनी है।
जब यह साधना तुम्हारी पूरी हो जाएगी ना तो तुम वास्तव में अपने व्यक्तित्व में देखोगे कि आश्चर्यजनक रूप से परिवर्तन मिलेगा। इसमें गजब का आकर्षण सम्मोहन होगा, पूर्ण रूप से सफलता प्राप्त करोगे। यह साधना जड़-चेतन के प्रति आकर्षण पैदा कर देगी, सब तुम्हारे अनुकूल बने रहेंगे।
यह साधना कितनी प्रचंड और श्रेष्ठ है यह तुम खुद ही अनुभव कर लोगे। 
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मैं रुद्र नाथ हूँ — एक साधक, एक नाथ योगी। मैंने अपने जीवन को तंत्र साधना और योग को समर्पित किया है। मेरा ज्ञान न तो किताबी है, न ही केवल शाब्दिक यह वह ज्ञान है जिसे मैंने संतों, तांत्रिकों और अनुभवी साधकों के सान्निध्य में रहकर स्वयं सीखा है और अनुभव किया है।मैंने तंत्र विद्या पर गहन शोध किया है, पर यह शोध किसी पुस्तकालय में बैठकर नहीं, बल्कि साधना की अग्नि में तपकर, जीवन के प्रत्येक क्षण में उसे जीकर प्राप्त किया है। जो भी सीखा, वह आत्मा की गहराइयों में उतरकर, आंतरिक अनुभूतियों से प्राप्त किया।मेरा उद्देश्य केवल आत्मकल्याण नहीं, अपितु उस दिव्य ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाना है, जिससे मनुष्य अपने जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझ सके और आत्मशक्ति को जागृत कर सके।यह मंच उसी यात्रा का एक पड़ाव है — जहाँ आप और हम साथ चलें, अनुभव करें, और उस अनंत चेतना से जुड़ें, जो हमारे भीतर है ।Rodhar nath https://gurumantrasadhna.com/rudra-nath/