Tag: हनुमान बेताल साधना

Hanuman Betal Sadhna हनुमान बेताल साधना 11 दिन में सिद्ध होगा ph.85280 57364

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Hanuman Betal Sadhna  हनुमान बेताल साधना 11 दिन में सिद्ध होगा ph.85280 57364
Hanuman Betal Sadhna हनुमान बेताल साधना 11 दिन में सिद्ध होगा ph.85280 57364

Hanuman Betal Sadhna हनुमान बेताल साधना 11 दिन में सिद्ध होगा ph.85280 57364 जय माँ कामाख्या, जय माँ जगदंबा। दोस्तों, सभी साधक-साधिकाओं का स्वागत है  gurumantrasadhna.com में। दोस्तों, आज मैं आप लोगों के लिए एक बहुत बड़ी शक्ति की साधना लेकर आज उपस्थित हुआ हूँ, और यह जो शक्ति की साधना बताने जा रहा हूँ, यह बहुत लोगों के रिक्वेस्ट पर डालने जा रहा हूँ। वो लोग जो बेताल साधना को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानते हैं, कई लोगों का सवाल है कि, “गुरुजी,

 

गुरुजी,सबसे ताकतवर बेतालों में से कौन है?” हनुमान बेताल साधना  Hanuman Betal Sadhna

और “कोई भी ताकतवर बेताल की साधना बताइए जो बलशाली हो, ठीक है, और हर आज्ञा का पालन करे, जो एक झटके में उसका काम पूरा करके दिखाए, और ताकतवर होने के साथ हमें नॉलेज भी दे सके।” और कुछ साधकों का ऐसा सवाल आया कि, “

तो उसी के लिए ही, इन दोनों के जो फासले हैं, उसको दूर करने के लिए आज हनुमान बेताल की साधना बताने आप लोगों को जा रहा हूँ, क्योंकि कई लोग इससे अनभिज्ञ हैं कि हनुमान बेताल, बेतालों में से कौन से नंबर में आते हैं, तो सबसे पहला होता है, बेतालों में सबसे ताकतवर बेताल है ग्यारह बेतालों में से श्मशान बेताल, और दूसरा होता है, जो दो नंबर में आएगा, वो होता है हनुमान बेताल,

कई लोग बोलते हैं कि, “गुरुजी, हनुमान बेताल Hanuman Betal Sadhna का प्रत्यक्ष होता है या नहीं? या फिर उनको हम क्या अदृश्य रूप में पूज सकते हैं?” देखो, यह एक ऐसी चीज़ है, इसका ऐसा विधान होता है जो आपको वह दिखाई नहीं देता, लेकिन आपके साथ चौबीसों घंटे अदृश्य रूप में रहता है। लेकिन उसको प्रत्यक्ष भी किया जा सकता है।

और कई लोगों का ऐसा सवाल है कि, “गुरुजी, कई लोग बताते हैं कि हनुमान बेताल देखने में इतने भयानक होते हैं, जिसको देखकर आप मर भी सकते हो। क्या ऐसा संभव है? क्या उसका कोई सौम्य रूप नहीं आ सकता?”

Hanuman Betal Sadhna हनुमान बेताल साधना सौम्य रूप में करना संभव है 

लेकिन इसका जवाब मैं आपको इस प्रकार दूँगा कि जो बेताल होते हैं, वो शिव के अंश हैं, शिव का एक रूप हैं, यह समझ सकते हैं। तो उसके हिसाब से क्या होता है, सत्यम शिवम् सुंदरम। तो उसमें भी एक सौम्य रूप होता है। जैसे एक भयानक रूप है, उसी प्रकार एक सौम्य रूप भी होता है, जो इतना खूबसूरत होता है कि राजकुमार से कम नहीं, एक राजा से कम नहीं, एक तेजस्वी योद्धा से कम नहीं।


तो बताते हैं इसकी विधि को, जानते हैं हम लोग अभी कि विधि इस प्रकार क्या होती है, कैसे किया जाएगा, कैसे इसको पूरा किया जा सकता है, कितने मंत्र होते हैं, हर चीज़ मैं आप लोगों को बता रहा हूँ, आप यहाँ पर सुनो। सबसे पहला होता है कि बेताल साधना को संपन्न करने के लिए आप लोगों के लिए विशेष मुहूर्त क्या-क्या होते हैं?

Hanuman Betal Sadhna हनुमान बेताल साधना  को संपन्न करने के लिए आप लोगों के लिए विशेष मुहूर्त क्या-क्या होते हैं?

किसी भी चंद्रग्रहण का दिन सबसे अच्छा माना गया है, दूसरा होता है किसी भी अमावस्या, या फिर जिस दिन मंगलवार या शनिवार पड़े, उस दिन भी आप कर सकते हैं। या फिर शिवरात्रि, या फिर होली के दिन, या फिर आप दीपावली के दिन भी कर सकते हो। यह विशेष मुहूर्त होते हैं कुछ, जिसमें आप बेताल की साधना Hanuman Betal Sadhna  कर सकते हो। शिवरात्रि हो तो और बढ़िया होता है, दीपावली हो तो और बढ़िया होता है, ग्रहण के दिन हो तो और बढ़िया है। यह तीनों दिन सबसे अच्छे होते हैं, या फिर श्रावण महीने में भी कर सकते हो,


Hanuman Betal Sadhna  – हनुमान बेताल साधना में क्या-क्या सामग्री आपको लेनी है

 

तो अभी बढ़ते हैं कि विधि में क्या-क्या सामग्री आपको लेनी है। सबसे पहला होता है कि यह कौन सी जगह में करना पड़ेगा आप लोगों को, यूँ तो होता है कि हनुमान बेताल की अगर साधना करनी है, तो आप लोगों को उजाड़ जगह में करना होगा, जंगल में करना होगा, वटवृक्ष के नीचे करना होगा, या फिर पीपल के वृक्ष के नीचे,

पीपल में करोगे तो जल्दी से आपको सफलता हासिल होगी, अगर मान लो आप बाहर नहीं कर सकते, तो एक ऐसा कमरा लेना होगा जो मिट्टी का हो, नीचे का जो भू-तल हो, वो मिट्टी का हो। ऐसे कमरे में आप कर सकते हैं, लेकिन कमरा घर के साथ जुड़ा हुआ नहीं होना चाहिए। कई लोग बताते हैं घर के साथ जुड़ा हो, ऐसा नहीं है, घर से अलग होना पड़ेगा वो कमरा, तीसरा हो गया कि अगर मान लो आप लोगों को इसमें और प्रभावी बनाना है, तो उसके लिए आप लोग श्मशान का भी चुनाव कर सकते हो, यह तीन जगह हो जाती हैं,

अभी इसका जो समय होता है करने का, वो होता है अर्धरात्रि, अर्थात मैंने बताया ही है कि 12:00 से लेकर 12:30 बजे के अंदर, उसके बीच में कर सकते हो। अभी वस्त्र आपको क्या लेने होंगे? देखो, अगर इसके वस्त्र आप लोग लेने के लिए जाओगे, तो सिर्फ काला लो, बिना सिले वाला, और काला ऊनी आसन लेना होगा। लेकिन याद रखना, इसमें कोई भी वस्तु चमड़े की पहन के नहीं जा सकते।

चप्पल, जूता, कुछ भी पहन रहे हो, तो अगर वह चमड़े का होगा, वो आप लोगों को नहीं लेना है, वो चमड़े की कोई भी वस्तु आप लोग पास मत रखो। और जितने भी दिन साधना करोगे, उतने ही दिन कोई भी चमड़े की वस्तु का कोई भी उपयोग मत करना,


यह हो गया एक चीज़। दूसरा होता है कि इस साधना में माला आपको क्या लेनी होगी, इसमें आप लोग रुद्राक्ष की माला लोगे, ठीक है, अगर घर में कर रहे हो तो, और घर में लेने की सामग्री भी अलग होती है। लेकिन अभी मैं आप लोगों को बता क्या रहा हूँ?

विधान, जो बाहर और श्मशान में करने का नियम है। तो उसके लिए आपको दो माला होंगी। एक तो होगा कमलगट्टे की माला, जो सात्विक विधि से या फिर तामसिक विधि से संस्कारित की जा चुकी हो।

अन्यथा आप लोग जो ओरिजिनल काले हकीक की माला होती है, वो काले हकीक की माला से जप कर सकते हो, या फिर मुंड माला से भी जप कर सकते हो, या फिर अस्थि माला से भी जप कर सकते हो, तो यह तीन-चार प्रकार की मालाएं हैं, इससे आप कर सकते हो: अस्थि माला, कमलगट्टे की माला, काला हकीक और मुंड माला।

यह चार मालाओं को आप लोग इस्तेमाल कर सकते हो, कोई दिक्कत नहीं है इसमें, और इसमें जो यह विधान है, यह तामसिक है।

इसमें आप उसको भोग दोगे क्योंकि बेताल होता है राजसिक शक्ति, रजोगुण इसके अंदर होते हैं, जो सात्विक, रजोगुणी भी है। सात्विक भोजन लोगे तो भी कर सकता है, अगर तामसिक वृत्ति का है, वो भी करेगा, बेताल सिर्फ तामसिक में ही नहीं आता। इसकी एक ही विधि होती है जो घर में करोगे, उसमें सात्विक भोग दिया जाता है, जैसे मिठाई हो गया, फल हो गया, इत्यादि चीजें है 


Hanuman Betal Sadhna  हनुमान बेताल – साधना में कौंन सी
सामग्री  जरूरत होगी 

 

तो अभी आप लोगों को इसमें क्या-क्या ले जाना है, श्मशान में करोगे या फिर बाहर में करोगे? सबसे पहला होता है, जो आसन लोगे वो कुशा का लो। उसमें, जिस प्रकार आप लोगों को मैंने एक में बताया था, यह कंकालेश्वर में, तो उसमें आप लोग कुशा का आसन लो, उस पर काला ऊनी आसन, उस पर बिछा लो, उस पर बैठो। ठंड का मौसम है, अगर कोई इसी समय करता है, तो इस प्रकार करेगा, और दूसरा होता है जो भोग में आप लोगों को साथ ले जाना होगा, वो क्या-क्या लेना होगा?

एक तो होगा आप लोगों को हर दिन एक बोतल शराब ले जाना होगा, दूसरा होता है आप लोगों को एक मुर्गा ले जाना होगा जो लाल हो या फिर काला हो। ऐसा काला मुर्गा, लाल मुर्गा, यह कुछ भी ले जाओ, तो मुर्गा एक ले जाओ और एक जो दारू है, वो ले जाओ। एक मीठा पान लेकर जाना है, उसके बाद आप लोगों को क्या करना होगा कि बकरे का सिर भी ले जाना है, बकरे का इसमें छाग भी ले जाना होगा। और दीया दो ले जाना है।

एक में होगा सरसों का तेल और एक जलेगा आप लोगों को क्या होता है, उसे, च़र्बी से, अभी आप लोगों को करना क्या है कि ये जो आप लोग चीजों को ले जाकर, उसी के साथ ही साथ आप लोग क्या ले जाना है कि भस्म ले जाना होगा, अभी देखिए, अगर किसी साधक ऐसा पूछे कि, “गुरुजी, हम सिटी में रहते हुए कहाँ मिलेगा?”

फिर, “गांव में रहते हैं, कभी-कभार यहाँ पर शहरों के श्मशान में ज्यादा लोग जलाते हैं, तो वहाँ पर राख मिल जाता है। लेकिन यहाँ पर कभी-कभी देहाती लोग मरते हैं, तो हमें भस्म कैसे प्राप्त होगा?” अगर मान लो भस्म नहीं मिलता है, तो आप लोग एक चीज़ ले सकते हो, वो होता है जल। लेकिन जल में जो होगा, वो गंगा का पानी थोड़ा-सा मिश्रण करके ले जाना है,


Hanuman Betal Sadhna हनुमान बेताल साधना विधि 

इसमें सुरक्षा घेरा तगड़ा लगेगा। एक तो होता है सुरक्षा मंत्र को सिद्ध करने के बाद, फूँक मारकर उसको संस्कारित करके, उसी से घेरा खींचा जाता है। दूसरा होता है, वो पानी से, आपको सुरक्षा का पानी के ऊपर दम करके मंत्र को, और यह जो वस्तु ले जाकर, उसमें छुरा या चाकू भी लेकर जाना है। 

तो आप लोगों को सबसे पहले क्या होता है, शिव के मंत्र को एक माला जप करना है, सबसे पहले, एक माला जप करने के बाद… देखो, एक माला के लिए इसमें आप लोग एक रुद्राक्ष की माला ले जाओ, ठीक है, जो सात्विक विधि से संस्कारित हो।

तो उस माला से ही शिव के मंत्र का जप करो, लेकिन उनसे भी पहले गणेश जी की स्तुति कर लेना, उनको सबसे पहले पूज लेना है उनका, उन्हें याद कर लेना है। उसके बाद साधना की सफलता हेतु उनको प्रार्थना करो।

उसके बाद शिव को आप लोग, उनका स्मरण करके दीया जलाओ, उसमें कौन-सा दीया जलाने के लिए मंत्र पढ़ा जाता है, ज्योत जलाने का वो मंत्र आप लोगों को बता दूँगा।

उसके बाद ज्योत जलाकर उनका एक माला जप करो। उसके बाद होता है हनुमान बेताल का आवाहन करके बेताल का जो दीया होता है, वो आप लोगों को जलाना पड़ता है।

यह साधना दो दिशा की ओर मुँह करके आप लोग कर सकते हो: एक होता है उत्तर, दूसरा होता है दक्षिण। यह दोनों दिशा की ओर मुँह करके आप कर सकते हो, इसमें कोई बंधन नहीं है।

कई लोग बताते हैं कि दक्षिण दिशा की ओर ही मुँह करके बैठना है, लेकिन ऐसी चीज़ नहीं है। दक्षिण करो या उत्तर करो, दोनों में से एक का चुनाव कर लो, बस उस तरफ आप लोगों को करना होगा, जो आप लोग दीयों को जलाओगे, एक दीया को आप घेरे के बाहर रखो, लेकिन जो आप लोग हनुमान बेताल Hanuman Betal Sadhna  का दीया सुरक्षा घेरे के अंदर जलाओ।

अगर मान लो ऐसा होता है कि तेल खत्म हो गया तो उसमें च़र्बी खत्म हुई तो दे सकते हो, तो च़र्बी थोड़ी-सी इतनी ले जाओ कि कम हो तो भी आप लोगों को कोई दिक्कत न हो, तो उसमें डाल सको। च़र्बी को पिघलाकर ले जाएं तो और बढ़िया है, तेल की तरह काम करेगी,


तो जैसे ही दीया जला दो, उसमें आप लोगों को क्या करना होगा कि यह जो लोबान होता है, लोबान का धूप लेकर जाना है, या फिर लोबान ही ले जाओ।

थोड़ा-सा कोयला जलाकर उस पर जला देना है, और सामने आप लोगों को एक केले का पत्ता ले जाना है, जो कोमल पत्ता हो जाता है, तो उस केले के पत्ते के ऊपर जो देसी दारू है, वो आप लोगों को रखना होगा, जो बोतल है दारू की, और वो बोतल को खोल के रखना होगा, उसके बाद जैसे उनका आवाहन कर लिया, उनका एक आकर्षण मंत्र होता है बेताल का।

उस बेताल का आकर्षण मंत्र को आप लोगों को इसमें आपको सात माला जप करना होगा, और हाँ, एक चीज़ भूल गया मैं आप लोगों को बताना कि शिव के मंत्र को जप करने के बाद गुरू मंत्र का आपको एक माला जप करना होगा, और जैसे यह करोगे, तब माँ काली का आवाहन करो, आवाहन के बाद आप लोगों को बेताल का जो आकर्षण मंत्र है। 

उसको आपको सात माला जप करना होगा, इस सीरियल से आप लोगों को आना होगा, लाइन के हिसाब से। तो उसका जप सात माला जैसे ही हो गया, उसके बाद आप लोग जो मुर्गा ले गए थे न, उसको बलि देना है, उसका सिर काटकर उसमें बस रख देना है। 

सिर को भी रख देना है, बस वो कर देना है। अगरबत्ती जलाने की जरूरत नहीं है, बस जो लोबान जलाया है, वही सही है, तो उसके बाद आप लोगों को करना है कि मूल मंत्र का जप करना होगा। अभी मूल मंत्र कितना जप करना है आप लोगों को?

हर रोज़ इक्कीस माला जप करना होगा इसमें भी, एक होता है विधान, जो सात्विक विधि से, उसमें आप लोगों को 51 माला जप करना पड़ता है, लेकिन इसमें आप लोग सिर्फ इक्कीस माला जप करोगे, तो यह समझ लो, कुल मिलाकर 28 माला, उसके आकर्षण मंत्र के साथ, बाकी गुरू मंत्र और शिव का मंत्र अलग हो गया, तो आप लोगों को हर रोज़ 36 माला जप करना होगा, पूरा कुल मिलाकर।

लेकिन जब यह सामग्री को लेकर वो चीजों को स्थापित कर दोगे उस स्थान में, तो आप लोगों को क्या करना होगा, सुरक्षा घेरा भी खींचना है। बिना सुरक्षा घेरे के इस साधना को कभी भूल से भी मत करना।

सुरक्षा के साथ शरीर का भी कीलन कर लेना है, उसके बाद आप लोगों को भूमि बंधन करना होगा, क्योंकि उस जगह में कोई भी दिगपाल जैसी चीजें या फिर कोई भी शक्ति का वास हो सकता है, तो उसके लिए आपके साधना में कोई विघ्न उत्पन्न न करें, जैसे क्षेत्रपाल हो गया, कभी-कभार क्षेत्रपाल भी इसमें डिस्टर्ब करता है लोगों को। तो उसके लिए क्या होता है, आप लोगों को जो भूमि बंधन होता है। 

वो भूमि को कीलन कर लो, भूमि बंधन कर दो, तो उसके बाद वह आप लोगों के बैठने के लायक बन जाता है, उसके बाद जैसे ही यह विधि कर दी, तो शरीर जारण… अगर मेरे से कोई साधना सीखेगा तो या फिर जो कर रहे हैं, मैं अपने साधकों को पहले शरीर जारण कराता हूँ। तो शरीर को जारित कर लेना अपनी मुद्राओं से, तो शरीर जारण के पश्चात साधना शुरू कर दो, जैसे उसका आकर्षण मंत्र हो, मूल मंत्र हो,


तो जैसे ही इन मंत्रों का आप लोग जब जप करोगे, तो उसमें अनुभव क्या-क्या होने लगता है, वो मैं आपको बताता हूँ। सबसे पहला क्या होता है कि हनुमान बेताल का जैसे ही आगमन घटता है, तो उसमें मैंने आप लोगों को बेताल की जानकारी में एक चीज़ बताया था कि बेताल पंचभूतों के अधिपति होते हैं, और जितनी भी शक्तियाँ होती हैं, बेताल सबसे अलग होते हैं।

तो यह याद रखना, जैसे ही हनुमान बेताल के मंत्रों को कम-से-कम, ज्यादा-से-ज्यादा आप लोग 11 माला के ऊपर कर दो, ग्यारह माला हो गया, उसके ऊपर जैसे पहुँच गया, 12, 13, 14 माला से, तो उसी में ही शक्तियों का अनुभव आप लोगों तक हो जाएगा।

आप जिस किसी मंत्र का जप करते हो, और यह एक ऐसा शाबर मंत्र होता है, जिसको जप करने के बाद उसके चारों ओर रहने वाले भूत, प्रेत, पिशाच जैसी अतृप्त आत्माएं आपको दिखना शुरू हो जाती हैं, और नग्न आंखों से देख पाओगे। लेकिन अगर मान लो ऐसा होता है कि साधक उसमें भयभीत होता है, तो साधक को तब क्या करना चाहिए?

शिव को याद करके, ठीक है, बेताल के मंत्र के जाप में आप लोगों को ज्यादा एकाग्रचित्त होकर, आपको बहुत ज्यादा ध्यान देना होगा, बस आँखों को बंद करके रखो।

Hanuman Betal Sadhna हनुमान बेताल साधना  के अनुभव 

 

जितने भी डरावने आवाज आएं, ऐसा लगेगा कोई पीठ पर आप लोगों को कोई नाखून से खरोंच रहा है, आपको नाखून धंसा रहा है, ऐसा लगेगा कि कोई शक्तियां आपके कान में आकर बहुत जोर से चिल्ला रही हैं, ऐसा लगे कि कान से खून निकल रहा है, लेकिन ऐसा नहीं होता है, उसके बाद ऐसा लगेगा कि कोई आग जला रहे हैं, इतनी बदबू आए, नाले-जैसी, सड़ी-गली चीज़ों की, भांति-भांति की बदबू आ सकती है।

अगर बाहर करोगे, तो इसमें आप लोगों को घबराना नहीं होता है। इसमें बस संयम की जरूरत है। ध्यान लगाना कि आप लोग मंत्रों में फोकस करो, मंत्र जप में फोकस करो। तो आप लोगों को बाहर ध्यान नहीं देना है। जो कोई जो कर रहा है करने दो, जो हो रहा है होने दो, जो सामने आ रहा है आने दो। बस आप लोगों को यह करना है कि जप को पूरा करना है।

और कई लोगों का असफल होने का कारण यह होता है कि जो लोग जप की संख्या को भूल जाते हैं, मंत्र गलत पढ़ लेते हैं। ऐसे जब उन लोगों को अजीब-अजीब अनुभव आते हैं, तो डर के मारे वो गलत मंत्र को पढ़ लेते हैं।

तो ऐसा न हो, मंत्र चाहे थोड़ा-सा एक-दो ज्यादा हो जाए, लेकिन एक-दो कम नहीं होना चाहिए। यह हमेशा याद रखना मेरी बात को, तो ध्यान उसमें लगाओ।

तो बाकी चाहे शक्तियां चारों तरफ से आएं या फिर जितने भी तरफ से, कोई दिक्कत नहीं, क्योंकि आप ऐसे एक बाघ और शेर को बुला रहे हो, जो उसमें अगर प्रवेश कर ले, तो उस शक्ति को अगर सामने मिल गया, तो भाग जाएगा। तो वो भी उससे डरते हैं।

चुड़ैल भी आ सकती है, अगर श्मशान में यह सब करोगे, तो उसका प्रभाव ज्यादा होता है। और अगर बाहर में करोगे, तो श्मशान से थोड़ा कम होता है, तो बाहर में रहने वाले कम-से-कम 200-400-500 मीटर में रहने वाले, इसमें भी शक्तियां होती हैं, वो सब आपके आसपास आना शुरू कर देंगी।

शायद पेड़ से कोई बोले, “कि भाग जा यहाँ से, नहीं तो मारे जाओगे।” तो कुछ भी बोल सकता है यहाँ पर, ऐसा कोई बहुत जोर से मंदिर में जो घंटा है, उसको बजा रहा है, तो ऐसा भी अनुभव होता है, क्योंकि यह अनुभव मैं अपने अनुभव से बता रहा हूँ कि ऐसा मेरे साथ भी हुआ था कि कोई मेरे कानों के पास आकर कोई घंटा बजा रहा है, बहुत जोरों से,


तो जैसे ही यह सब होता है, तो उसके बाद आप लोगों को यह साधना कितने दिन करनी होगी, बेताल की साधना, यह जो आप लोगों को बता रहा हूँ, यह आप लोगों के लिए ग्यारह दिन की साधना बता रहा हूँ, ग्यारह दिन का। ग्यारह दिन आप लोगों को करना होगा।

जैसे ही आप लोग इस अनुभव के साथ करोगे, तो आखिरी माला के बाद जितनी भी हलचल मची हुई थी, हर चीज़ शांत हो जाएगा, एकदम से सन्नाटा हो जाएगा। उसमें बस आपको करना क्या है कि जैसे पेड़ में कर रहे हो, अगर श्मशान में करो, जहाँ पर लोगों को जलाता है, चिता के ऊपर, वहाँ पर आप लोग अपने भोग को रखकर चले आओ, बिना पीछे देखे।

जैसे ही एक बार रखा जाएगा, बिना पीछे देखे चले आना है। लेकिन सिर को काटने से पहले यह जरूरी होता है खुद के शरीर का फिर से सुरक्षा करना, चाहे पेड़ के नीचे करो या फिर वहाँ पर। अगर पेड़ के नीचे कर रहे हो, तो सामग्रियों को उसी पेड़ के नीचे रखकर बस आप उनको प्रार्थना करो कि, “आपके लिए मैंने भोग रखा है, बेताल महाराज, आप इसको ग्रहण करो,” तो बस वो चीज़ें करके घर के लिए निकलना है।

और आने के बाद नहा कर ही आप लोगों को आपके कक्ष में या फिर घर में प्रवेश करना होगा। तो जैसे ही यह साधना कार्य हो गया, ऐसे आप लोग कम-से-कम नौ दिन करो, नौवें दिन तक पहुँचोगे, नौ दिन करो बस, नौवें दिन जैसे होगा, उसी में ही तब बेताल का आगमन होता है। , बेताल दूसरे दिन से आपको देखता ही रहता है कि साधक मेरे लिए जो प्रार्थना कर रहा है, कैसे कर रहा है, क्या कर रहा है। तुम्हारी हर गतिविधि उनके पास होती है, लेकिन तुम्हारे पास नहीं होती।

जैसे ही नौवें दिन होगा, या फिर आप लोग सातवें दिन के बाद, जितने भी दिन होगा, आठवें, नौवें, दसवें-ग्यारहवें दिन होगा, उन्हीं दिनों में बेताल आपके पास आएगा।

और जैसे ही बेताल पास… कितनी माला में वो प्रत्यक्ष होते हैं, मैं आपको बताता हूँ। ज्यादा-से-ज्यादा आप लोगों का 15-16 माला जैसे ही पार हो जाएगा, उसी में ही बेताल का आगमन होगा, और अभी बेताल के आगमन में कौन-सा एक जरूरी बात होता है, जो मैं बता रहा हूँ, ध्यान से सुनना सभी लोग।

जो शक्तियाँ आप लोगों को विचलित कर रही हैं आपको डिगने के लिए, ठीक है, बैठने के बाद मंत्र जप में विचलित कर रही हैं, डराने की कोशिश कर रही हैं, वो सभी चीखती-चिल्लाती हुई एकदम से शांत हो जाएंगी।

उस समय एक पत्ता तक नहीं हिलेगा, कीड़े-मकोड़े तक नहीं होंगे, यह समझ सकते हो। और उस समय में ऐसा होगा कि आंधी-तूफ़ान भी आ सकता है, ज्यादा हवा तेज भी हो सकती है। लेकिन याद रखना, इसमें बहुत लक्ष्य करने वाली बात है। देखना, अगर बहुत ज्यादा तूफान भी आ रहा है, हवा भी चल रही है, ठीक है, लेकिन आप लोगों के सामने जो दीया होगा न, वो दीया नहीं बुझेगा। इतना भी आप लोग लिखकर बता रहा हूँ।

जैसे आप लोग इसको लक्ष्य करोगे, तब आप लोगों को पता चलेगा, ऐसा लगेगा कि हर तरफ सन्नाटा छा जाता है, कोई आहट तक नहीं होती, और उसी में ही हवाओं से आवाज आएगी, “क्यों बुला रहा है मुझे?” लेकिन उस आवाज़ का कोई जवाब नहीं देना है।

आपके चारों ओर वो देखना शुरू कर देगा। चारों ओर आप लोगों को आभास कराएगा। आपका नाम पुकार कर भी आ सकता है कि, “चले जाओ यहाँ से,” “तुझे कुछ नहीं मिलने वाला यह सब करके,” तो आप लोगों को उसमें ध्यान नहीं देना, बस अपने काम को करते रहना है।

और जैसे ही आखिरी माला हो जाएगी, वो जगह शांत हो जाएगी, उसमें कुछ भी नहीं रहेगा। और जैसे ही बेताल का आगमन होता है, उसके बाद शक्तियाँ नहीं आएंगी आपके पास, बिल्कुल भी नहीं आएंगी, तो उसी प्रकार हर दिन की तरह भोग रखकर चले आना है।


और जैसे ही आप लोगों का ग्यारहवां दिन होगा, ग्यारहवें दिन आप लोग बस मूलमंत्र को जब जप करना शुरू ही करोगे, उसी में ही बेताल आप लोगों के सामने आकर खड़ा हो जाएगा। अभी सबसे पहले बेताल क्या होता है, एक भयंकर शक्ल लेकर आप लोगों के सामने खड़ा होता है, तो इसमें जो होता है कि पहले जो आप लोगों की मंत्र संख्या पूरी न हुई, तो भयंकर शक्ल लेकर आपके सामने प्रकट होगा।

तो उसके लिए एक तरकीब बता रहा हूँ, एक ट्रिक बता रहा हूँ, वो आप लोग इस्तेमाल करना तब। कि बेताल जैसे भयंकर शक्ल को अगर आप लोग देखोगे, तो थोड़ा-सा, मतलब, अगर कोई दिल का मरीज होगा, वो थोड़ा-सा उसमें भयभीत हो सकता है,

मतलब ज्यादा दिल का दौरा भी पड़ सकता है, ज्यादा डर भी सकते हैं बहुत ज्यादा, क्योंकि भयंकर अवश्य होता है, यह सही है। अगर किसी ने बताया है, तो बहुत भयंकर होता है, बिल्कुल भयंकर से भयंकर होता है, तो उसके लिए आखिरी दिन आप लोग बस विशेषकर ही इस माला का जप करते जाओ। अगर जैसे आपको लग रहा है कि किसी चीज़ का पैर देखने को मिलेगा, ठीक ह

अगर थोड़ा-सा पैर को भी देख लिया, किसी चीज़ को देख लिया, उस क्षण, तो थोड़ा-सा एकदम काला होगा वो, ऐसे, और काला-काला धुएं के जैसा होगा, और आकार में बड़ा एक इंसान, जिसका हाइट कम-से-कम 10-11 फिट होगा, 22 भी हो सकता है। तो कोई समय विकराल रूप लेकर आप लोगों के सामने आ सकता है, कोई भी विशाल रूप लेगा, तो उसमें डरना नहीं है, बस आप लोग दृष्टा बने रहना, कंट्रोल करते रहना है।

तो जैसे ही आप लोगों की आखिरी माला होगी, उसी में ही बेताल आप लोगों के सामने सौम्य शक्ल लेकर आप लोगों के सामने हाजिर होगा। और सौम्य रूप में क्या होता है? सफेद वस्त्र पहना हुआ एक इंसान होता है जो वृद्ध रूप में होते हैं, वृद्ध जैसे इंसान होते हैं, इसकी दाढ़ी-मूंछ बहुत ज्यादा होती है।

ऐसा लगता है, बहुत बड़े ज्ञानी होते हैं, बाबा होते हैं, एक अघोरी टाइप का होगा, लेकिन हाथ में एक तलवार भी हो सकती है या फिर कोई भी लाठी भी हो सकती है या फिर नहीं भी हो सकती है, लेकिन सफेद वस्त्र का वो इंसान होगा, और ऐसा उसमें सौंदर्य भरा होगा, ऐसा आकर्षक होगा कि आप लोग देखते ही दंग रह जाओगे कि यह सामने है क्या चीज़, बेताल जैसी चीज़ ही नहीं हो सकती आपके सामने।

और तब आप लोग बताओगे मुझे कि, “गुरुजी, बेताल कितना खूबसूरत होता है।” अगर उसका सौम्य रूप आप लोगों ने देखा होगा, तो उसी में ही मोहित हो जाओगे। ऐसा आकर्षक रूप होता है। और उसके जो आंखें होती हैं, अगर किसी को भी देख लिया, तो किसी भी इंसान को वो वश में करने के लिए एक क्षण ही काफी होगा।


तो उसी में ही आप लोगों से प्रसन्न होकर बेताल आपसे वरदान मांगने के लिए बोलता है, वर मांगने के लिए बोलता है हनुमान बेताल कि, “क्या इच्छा है? अपना बताइए, क्या चाहते हो आप? इतने दिन जो मेरी आपने आराधना की, मेरी साधना की, क्या चाहते हो आप मुझसे?” तो तब बोलना है कि,

“हे महाराज, मैं यही चाहता हूँ कि आप हमेशा मेरे साथ रहो, हमेशा मेरे परिवार की रक्षा करो, मेरी रक्षा करो, और मेरा जो भी कार्य आपको पूरा करना है, मेरी मदद कीजिए, जब भी मैं आपका आवाहन करूँ, उसी क्षण, उसी पलक झपकते ही आप मेरे सामने प्रकट होना है आपको, और समय के अनुसार अच्छा-बुरा जैसा भी कार्य मैं आपको दूँ, वह कार्य आप को करना होगा,” तो बेताल उसमें वचन देता है, और बेताल से कितने वचन लेना है?

कुल मिलाकर बेताल, हनुमान बेताल से आप लोग पाँच वचन लेना ही काफी है, और जो पाँच वचन होते हैं, क्या-क्या हैं प्रमुख वचन, वो मैं आपको बता दूँगा, वचन लेने के बाद बेताल पूछा जाता है कि, “आपको बुलाने का तरीका बताइए,” और या फिर एक ऐसा भी काम कर सकते हो कि उसमें आप एक शर्त बना सकते हो कि आपके जो माला है,

वो मैंने बता दी, या फिर आप मूलमंत्र ही बता दिए कि, “आपके मूलमंत्र को अगर मैं 11 बार जप कर आपका आवाहन करूँगा, तो उसी समय आपको आ जाना है मेरे पास।” तो उसी में ही बेताल उसमें हामी भर देगा, तो यह होता है। या फिर आप उससे बोल भी सकते हो कि, “आपको बुलाने का तरीका बताइए।”

तब बेताल आपको बता देगा कि, “इस प्रकार मेरे को आप बुला सकते हो, इतने बार जप करने पर मैं आ जाऊँगा,” जहाँ पर भी करो। और आप लोगों को पहले ही बोला है कि मुँह से नहीं, मन से भी बोलोगे तो भी आ जाएगी शक्ति।

तो उसमें कोई बड़ी बात नहीं है, तो जैसे ये सब हो जाता है, तो बेताल को आप लोग अपना जो भोग है, वो उन्हें अर्पित करो और उनको बताओ कि, “आपके लिए मैंने भोग रखा है, इस भोग को आप ग्रहण करो और हमारे ऊपर हमेशा आशीष बनाए रखो।”

तो बेताल उसको ग्रहण करके आपसे इजाजत मांगेगा, आदेश मिलने पर वो अपने स्वधाम लौट जाएगा। तो उसके बाद आप लोगों की साधना जैसे ही कंप्लीट हो गई, तो बताए गए तरीके से, उनको बुलाए गए तरीके से उनको बुलाओगे, आवाहन करोगे, वो तत्क्षण सिद्ध हो जाएगा आपके कार्यों को संपन्न करने के लिए,


अभी बताता हूँ आखिरी बात कि यह काम क्या-क्या कर सकता है, इससे लाभ क्या होता है। हनुमान बेताल की साधना से साधक को यह लाभ होता है कि साधक में बाहुबल बहुत ज्यादा होता है। कोई और उसको हरा नहीं सकता, और जो हनुमान बेताल होता है, ऐसा अंगरक्षक शक्ति होता है, जो कोई भी तंत्र से आप लोगों की रक्षा कर सकता है।

कैसा भी शत्रु हो, एक ही बार में पछाड़ सकता है, कोई भी स्थान में आप लोग आसानी से जा सकते हो, कई जादूगर अगर इसकी साधना करते हैं, तो इससे जादू के खेल भी दिखाते हैं। अब वस्तुओं को हवा में उठाना तथा अदृश्य कर देना, धन भी लाकर देता है। 

वो हनुमान बेताल अगर साधक आदेश करे तो, इसके जरिए कोई भी वज़नदार से वज़नदार, साधक चाहे सौ कुंतल का हो, ऐसे वजनदार वस्तु को भी आप उठा सकते हो, साधक निरोगी बनता है और उसे पूरे परिवार को निरोगी बना देता है।

कोई भी, किसी भी इंसान के बारे में भूत, भविष्य, वर्तमान, इन तीनों कालों के ज्ञान को आप लोग पता कर सकते हो। और एक छोटे से संकेत के बराबर बात को ही बता देगा, जो इंसान छुपा नहीं सकता। अगर पेट के अंदर की बात है, तो भी आपको पता चल जाएगा, लेकिन सामने होना आवश्यक है, तो यह जो बहुत जरूरी बातें हैं और

Hanuman Betal Sadhna  हनुमान बेताल साधना नियम क्या है 

 

इसमें जो नियम-विधि होता है, तो इसमें आप लोगों को सात्विक नियमों का अनुरूप चलना होगा, मांस, मछली, अंडा, शराब, इन चीजों के सेवन से दूर रहना है, संभोग इत्यादि, लड़कियों से, औरतों से दूर रहना है, खुद के बनाए हुआ हाथों का भोजन करो या फिर अपनी माता का, उसके बाद किसी का भी नहीं चलेगा। 

बस माता का या फिर स्वयं खुद के हाथों का बनाया हुआ भोजन करो, और हर सोमवार को, जितने दिन साधना चले, उसमें अगर बीच में सोमवार आया, तो शिव आराधना के लिए निराहार रहना होगा शाम 6:00 बजे तक, मतलब संध्या तक, यह समझ सकते हो, जब तक ज्योत न जलाओ, तो निराहार रहकर आप लोगों को व्रत रखना होगा और बाकी के दिन रखने की आवश्यकता नहीं है,


तो इस प्रकार आप लोगों के जो बेताल होते हैं, कार्य करता है। और ऐसा होता है कोई एक शत्रु आपको परेशान कर रहा है, तो वो शत्रु को आप लोगों के सामने उठाकर लाकर गिरा सकता है, कोई भी जगह में आप अकेले हो, तो वो उसके हाथों में बैठकर, कंधे पर बैठकर, कहीं पर भी पहुँच सकते हो, ट्रैवलिंग कर सकते हो, यह समझ सकते हो, और ऐसा होता है कि खाने की कोई वस्तु को आप उसके जरिए मंगा सकते हो, तत्क्षण आपको ला देगा।

और बेताल का ही बोलते हैं कि बेताल इतना काम नहीं कर सकता। बेताल के जैसी गति में करने वाला शक्ति मतलब सौ में से दो-तीन शक्ति ही होगी, जैसे हमजाद हो गया, ठीक है, लाल परी हो गई, देव शक्तियां हो गईं।

ऐसे गिने-चुने शक्ति ही होंगी जो बेताल के जैसा काम करेंगी, क्योंकि उसके काम में गति होती है। एक बेताल इतना समर्थ होता है कि मान लो एक लोहे का पुल है, पक्की पुल है। पुल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचा सकता है या फिर उसको तोड़ सकता है। 

 

इतना सामर्थ्य होता है। और इसका किस्सा मैं कभी आप लोगों को बताऊँगा, इस पुल का, तो एक जगह ऐसा घटित हुआ था। और उस बेताल की जानकारी बहुत जल्दी आप लोगों को दूँगा। तो दोस्तों, कैसा लगा आप लोगों को यह साधना की जानकारी?

यही आप लोगों से निवेदन करता हूँ मैं। और अगर किसी साधक या साधिका को यह साधना करना है या फिर बेताल का ट्रांसफर लेना है, तो हमसे संपर्क कर सकता है। तो अभी मैं सभी लोगों से इजाजत लेता हूँ। जय माँ कामाख्या, जय माँ जगदंबा।

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चमत्कारी वीर बेताल साधना – Veer Betal sadhna ph .8528057364

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चमत्कारी वीर बेताल साधना - Veer Betal sadhna ph .8528057364

चमत्कारी वीर बेताल साधना – Veer Betal sadhna ph .8528057364

चमत्कारी वीर बेताल साधना - Veer Betal sadhna ph .8528057364
चमत्कारी वीर बेताल साधना – Veer Betal sadhna ph .8528057364

 

चमत्कारी वीर बेताल साधना – Veer Betal sadhna ph .8528057364 वीर बेताल Veer Betal सिद्धि जो जीवन की अद्वितीय साधना है, जो व्यक्ति को रंक से राजा बना देती है, जो साधारण व्यक्ति को अद्वितीय बलशाली बना देती है और उसके द्वारा कठिन और असम्भव कार्य भी चुटकी बजाते सम्पन्न हो जाते हैं।

मैं यह कहूं कि ‘ वीर बेताल Veer Betal स्वयं में सरलता, दयालुता और ठगे जाने की सीमा तक बुद्धि से सरल, किसी दिद्युत शक्ति की ही दूसरी संज्ञा होती है, तो क्या अनेक पाठक मेरा विश्वास कर सकेंगे? केवल पाठक ही नहीं वीर बेताल Veer Betal के नाम से किसी रोमांचक अनुभूति की प्रतीक्षा में दिल थाम कर बैठे रहने वाले साधक मी सहसा मेरी बात पर विश्वास नहीं कर सकेंगे।इस तथ्य से परिचित हूं किन्तु जो सत्यता है वह यही है।

यह सत्यता स्वयं में विरोधाभासी भी है और हतप्रभ कर देने वाली भी. किन्तु निरपेक्ष रूप से सत्यता यही है। विरोधाभासी इस कारणवश, कि एक विद्युत शक्ति की तीव्रता से भरा व्यक्तित्व सरल, दयालु और ठगे जाने की सीमा तक बुद्धि से सरल कैसे हो सकता है? विद्युत का तो गुण ही होता है. आघात दे देना, भस्म कर देना, एक ही क्षण में सब कुछ जलाकर राख कर देना और जरा सा चूके, तो स्वयं सृजनकर्ता को ही दिनष्ट कर देना; किन्तु विद्युत की ऐसी धारणा केवल विज्ञान या साइंस में ही सम्भाव्य हो सकती है, भारतीय ज्ञान में नहीं।

वीर बेताल Veer Betal वस्तुतः ज्ञान पक्ष की एक विद्युत ही है, जिसको नियंत्रित करने वाला विज्ञान ही ‘साधना’ कहलाता है। ‘भारतीय विज्ञान’ जो साइंस नहीं है, नियंत्रण करने के आग्रह से युक्त कोई कला अथवा युक्ति भर ही होती है, क्योंकि नियंत्रित शक्ति ही सृजन कर सकती है, अनियंत्रित शक्ति नहीं।

वीर बेताल Veer Betal क्यों भारतीय चिंतन में जुगुप्सा उत्पन्न करने वाला हो गया? क्यों सामान्य साधक और गृहस्थ साथक उसके नान तक से ही घृणा करने लग जाते हैं? जैसे प्रश्नों के उत्तर में मैं वही कई बार दोहराई बात पुनः नहीं कहना चाहता कि गलत हाथों में पड़ यह साधना भी तंत्र व सावर मंत्रों की ही भांति निम्न दृष्टि से देखी जाने लग गई।

यह तो सत्य है कि ऐसी विलक्षण साधनाएं, जो अपने आप में अचूक थीं. गलत हाथों में पड़कर समाज की सामान्य धारा से बहिष्कृत कर दी गई. किन्तु क्या कभी किसी ने इस बात पर ध्यान देना चाहा है, कि क्यों ये साधनाएं गलत हाथों में जा पड़ी? क्या इसमें केवल उन्ही लोगों का योगदान रहा जिनकी प्रवृत्तिया दूषित थीं अथवा समाज का भी कोई योगदान रहा होगा?

कटु सत्य तो यही है कि ऐसी दुर्लभ विद्याओं के गलत हाथों में पड़ जाने का कारण स्वयं समाज ही होता है। जब समाज के प्रबुद्ध वर्ग के व्यक्ति ललक और गम्भीरता से स्वयं परीक्षण कर सत्यता को परखने की भावना व क्रिया त्याग देते हैं, तभी समाज में ऐसा क्षय होता है।

वस्तुतः कोई भी साधन स्वयमेव जाकर गलत हाथों में नहीं पड़ जाती। बस होता इतना ही है कि विवेचनादान, गम्भीर और प्रबुद्ध साधक अपनी बौद्धिकता के दम्भ में इन साधनाओं के प्रति एक प्रकार का उपेक्षा भाव (अथवा जिसे पूर्वाग्रह कहें तो अधिक उचित रहेगा ) मन में पनपा लेते हैं, जिससे साधना उनके मध्य में वितरित न होकर केवल ऐसे व्यक्तियों के मध्य प्रश्रय पा जाती है, जिनका लक्ष्य येन-केन-प्रकारेण स्वार्थ सिद्धि ही होता है। उग्र साधनाओं अथवा तीव्र साधनाओं के संदर्भ में तो यही बात विशेष रूप से होती है, क्योंकि जितनी उम्र साधना होगी स्वार्थ सिद्धि उतनी ही तीव्रता से हो सकेगी। |

पृथकतः कहना चाहूंगा कि कोई भी साधना अपने मूल स्वरूप में न तो उग्र होती है, न सौम्य केवल उसको प्रयुक्ति और किसी एक क्षेत्र में बार बार प्रयुक्ति ही उसे सौम्य या उग्र की संज्ञा दे जाती है। उदाहरणार्थं बगलामुखी महाविद्या साधना, जिसका केवल एक मात्र प्रयोग शत्रुनाश के लिए विख्यात होने के कारण वह उग्र साधनाओं की श्रेणी में स्थापित कर दी गई, जबकि भगवती बगलामुखी की यह सत्य है, कि वीर बेताल Veer Betal साधना को सम्पन्न करने के लिए साधक के पास अद्भुत बल और बल से भी अधिक मानसिक दृढ़ता का होना आवश्यक है, किन्तु इसमें इतना आश्चर्य क्यों ? इतनी वितृष्णा भी क्यों ? -जबकि इससे अधिक सरल और सहज कोई और साधना है. ही नहीं । एक अन्य सज्ञा पीताम्बरा भी है।

पीताम्बरा अर्थात् भगवान श्रीमन्नारायण की आधारभूत शक्ति पीताम्बर धारी की ही कियाशील शक्ति है पीताम्बरा अर्थात् भगवती बगलामुखी। 

वीर बेताल Veer Betal साधना प्राचीन काल में इस हेयता को नहीं प्राप्त हुई थी। यदि ऐसा होता तो क्यों हनुमान इसे सम्पन्न कर, केवल हनुमान ही नहीं वीर हनुमान की संज्ञा पर जाते? एक साधारण वानर से किस प्रकार ‘अतुलित बलधाम, हेमशैलाभदेह’ की स्थिति को प्राप्त कर लेते।

साधको  को जिज्ञासा हो सकती है. कि रामचरित मानस अथवा रामायण में तो ऐसा कोई उल्लेख नहीं मिलता, कि हनुमान ने दीर वैताल की साधना सम्पन्न की थी? प्रत्युत्तर में इतना ही कहना है कि रामचरित मानस में तो उस कसरत या दंड बैठक का भी वर्णन नहीं मिलता है. जिसे सम्पन्न कर हनुमान ने उपरोक्त स्थिति प्राप्त  साधनाओ की चर्चा करना रामचरित मानस का उद्देश्य है ही नहीं यह तो एक भक्ति परक रचना है, जिसमें प्रसंगवश हनुमान को ऐसी विदिध शक्तियां वर्णित होती जाती हैं, जो अष्टादश सिद्धियों के अन्तर्गत आती हैं।

यदि रामचरित मानस अष्टादश सिद्धियों को प्रकारांतर से स्वीकार करती है, हनुमान द्वारा अणिमा लघिमा का प्रयोग अथवा उनका आकाश गमन करना स्वीकार करती है, तो या प्रकारांतर से साधना की महत्ता को ही नहीं वर्णित कर जाती? जिस प्रकार आज ‘वीर’ शब्द किसी बलवान पौरुषवान व्यक्ति के केवल शरीर का ही पर्याय है,

उसी प्रकार प्रारम्भ में यह उस सम्मान का पर्याय था, जो किसी साधक द्वाटरा वीर बेताल Veer Betal साधना करने और उसमें सफल होने पर उसके नाम के साथ सम्मिलित कर उसके साधकत्व का समाज में सम्मान करने की बात होती थी। यह सत्य है कि वीर बेताल Veer Betal साधना को सम्पन्न करने के लिए साधक के पास अदभुत बल और बल से भी अधिक मानसिक दृढ़ता का होना आवश्यक है. किन्तु इसमें इतना आश्चर्य क्यों? इतनी वितृष्णा भी क्यों?

विद्युत नियंत्रण करने वाले व्यक्ति को भी तो कुछ क्षमताएं विकसित करनी पड़ती हैं, कुछ उपकरण या यंत्र साथ रखने पड़ते हैं अपने साथ तभी तो विद्युत की आक्रमणकारी शक्ति का प्रभाव समाप्त कर उसका कल्याणकारी उपयोग कर पाना संभव होता है। वीर बेताल Veer Betal साधना में विद्युत अर्थात इलेक्ट्रिक के दिपरीत प्रारम्भ से ही कोई विपरीत प्रभाव होता ही नहीं. किन्तु जैसा कि प्रारम्भ में कहा, कि वीर बेताल Veer Betal का स्वरूप इस प्रकार का होता है कि निर्णय ले सकता उसकी क्षमता से बाहर होता है और तब साधक, सावना के माध्यम से वस्तुतः उसे निर्देशित करने की कला ही सीखता है।

यह मिथ्या धारणा  है, कि वीर  बैताल इतर योनि की श्रेणी में आता है। वीर बेताल Veer Betal तो साक्षात् भगवान शिव का ही अंश और गण होता है तथा इसी कारण अपने स्वामी भोलेनाथ की ही भांति भोला भी होता है। वीर बेताल Veer Betal तो प्रत्यक्षीकरण की अपेक्षा समाहितीकरण की साधना ही अधिक होती है। तथा इसी कारणवश प्राचीन काल में गुरुजन अपने समीप रहने वाले शिष्यों को यह साधना अवश्यमेव सम्पन्न करा कर उन्हें दृढ़ता, पौरुषता के गुणों से युक्त करते थे, जिससे वे समाज में जाकर निर्विघ्नता के साथ सक्रिय रह सके। इसी का अत्यन्त सूक्ष्म  भेद यह है, कि जहां गुरु यह अनुभव करते थे कि उनका कोई शिष्य सीधे वीर ताल साधना को करने में असमर्थ है, तब वे उसे प्रारम्भ में हनुमान साधना सम्पन्न करवाते हुए वीर बेताल Veer Betal साधना तक ले जाते थे।

वीर बेताल Veer Betal तो हनुमान की ही भांति स्वामी भक्ति और सरलता का उदाहरण होता है, जिस प्रकार हनुमान सही जड़ी न पहचान पाने के कारण पूरा पर्यंत ही उठा लाए थे। प्राय: भोलेपन में वीर बेताल Veer Betal भी सिद्ध होने के बाद ऐसा कुछ कर सकता है। इसीलिए तो कहा कि कठिन वीर  साधना नहीं है, कठिन तो है वीर बेताल Veer Betal पर नियंत्रण रखना। पौरुष पर पौरुष ही नियंत्रण कर सकता है। केवल हनुमान या जामवन्त ही नहीं, वीर साधना की सिद्धि करने वाले अनेक राजपुरुष और व्यक्तित्व हुए हैं। 

विक्रमादित्य और कर्ण सरीखे ने समझ लिया था, कि यदि ये इतिहास के पन्नों अपना नाम दुर्धर्ष योद्धा के रूप में अंकित कराना हैं तो उन्हें पूर्ण प्रामाणिकता से वीर बेताल Veer Betal साधना सिद्धि प्राप्त करनी ही होगी उन्होंने ऐसा किया भी और कारणवश वीर विक्रमादित्य व वीर कर्ण के नाम से हमें अमर हो गए। क्या यह संभव नहीं, कि कर्ण में देने की जो उदारता थी, इतना भोलापन उतर आया उसके मूल में इसी वीर बेताल Veer Betal साधना का ही कोई कार्य कर रहा हो? तभी तो कर्ण को केवल वीर कर्ण नहीं दानवीर कर्ण भी कहा गया।

कालांतर में ज्यों ज्यों कतिपय कारणों से शिष्यों को धारणा शक्ति घटती गई, तेज व बल को समाहित करने की पात्रता का जो अभाव हो गया और जिसे परिलक्षित कर गुरुजनों ने अपने शिष्यों को बीर वैताल की मूल साधना के स्थान पर उनके भी साधक हनुमान की साधना को कराना आरम्भ करा दिया।

कदाचित वही कारण है वीर बेताल Veer Betal नाका इतिहास के पृष्ठों में सिमट जाने का। हनुमान की स्थापना आज गली-गली, चौराहे-चौराहे पर है। सम्भव है आने वाले दो सौ वर्षों में वीर्य, बल, तेज, ब्रह्मचर्य का इतना भी सम्मान न रह जाए और वीर बेताल Veer Betal साधना की ही भांति लोग हनुमान साधना को भी भय मिश्रित आश्चर्य से देखने लग जाए।

ऐसी स्थिति में दोष किसका होगा? यही कारण है कि साधना की अक्षुण्णता समाज में बनी रहनी चाहिए, जिससे न तो हमारी संतानें उससे वंचित हो न उसके विकृत अथवा कम प्रभावशाली रूप को प्राप्त करने के लिए विवश हो यही मंतव्य है, 

सम्भव है आने वाले दो सौ वर्षों में वीर्य, बल, तेज, ब्रह्मचर्य का इतना भी सम्मान न रह जाए और वीर बेताल Veer Betal साधना की ही भांति लोग हनुमान साधना को भी भय मिश्रित आश्चर्य से देखने लग जाएं। ऐसी स्थिति में दोष किसका होगा? साधना का परीक्षण अपने संन्यस्त शिष्यों के माध्यम से करने के बाद, इसे समाज के समक्ष स्पष्ट करना आवश्यक समझा, क्योंकि इस युग धर्म की यही अपेक्षा है तथा गुरुत्व के गुणों से युक्त व्यक्तित्व ही युग की अपेक्षा का वास्तविक आकलन कर सकते हैं।

पुन स्पष्ट करना चाहूंगा कि वीर बेताल Veer Betal साधना केवल पौरुष प्राप्ति की जीवन में निर्भय बनने की तथा साथ ही साथ अतुलित बल के स्वामी बनने की साधना होती है। शेष सब कुछ मूल साधना में सफल हो जाने के उपरांत ही घटित होना संभव हो पाता है, चाहे वह अष्टादश सिद्धियों का विषय हो अथवा दीर वैताल के माध्यम से मनोवांछित कार्य सम्पन्न कराने का इस साधना को सम्पन्न करने के इच्छुक योग्य गम्भीर साधक के लिए आवश्यक है 

वीर बेताल Veer Betal साधना विधि 

 

रात्रि में दस बजे के पश्चात् स्नान कर घर के किसी एकांत स्थान पर साधना में प्रवृत्त हो या इस साधना को किसी भी मंगलवार से की जा सकती है। घर के अतिरिक्त इसे किसी प्राचीन एवं निर्जन शिव मंदिर के प्रांगण अथवा किसी नदी, सालाब के किनारे निर्जन तट पर सम्पन्न करना भी शास्त्रोच्ति माना गया है। पहनने के वस्त्र आसन सामने बिछाने वाला वस्त्र सभी गहरे काले रंग के होने आवश्यक हैं।

साधक साधना में प्रवृत्त होने से पूर्व प्रत्येक छोटी से छोटी साधना सामग्री अपने समीप रख लें। साधना के बी में उठना, साधना भंग के समान हो जाता है। इस साधना की आवश्यक सामग्री ताम्रपत्र पर अंकित वीर बेताल Veer Betal यत्र एवं वीर बेताल Veer Betal माला हैं।

यंत्र को साधक अपने सामने बिछे काले वस्त्र पर किसी ताम्र पात्र में रख कर स्नान कराएं और वो-पोंछ कर पुनः (पात्र का जल फेंक दें) पात्र में स्थापित कर, सिंदूर व अक्षत से पूजन करें। पूजन के उपरांत यंत्र के ऊपर एक सुपारी रख कर उसका भी इसी प्रकार से पूजन कर

निम्न ध्यान

उच्चारित करें कु फं फुल्लार शब्दो वसति फणिजयते यस्य कण्ठे डि डि नितिडिन्नम् डमरु यस्य पाणी प्रकम्पम् । तक तक तन्दाति तन्दात् धीगति श्रीमति व्योमदार्मि सकल भय हरो भैरवो स स न पायात् ।।

इसके पश्चात ‘वीर बेताल Veer Betal माला से निम्न मंत्र को पन्द्रह (15) माला मंत्र जप सम्पन्न करें मंत्र ॥

ॐ वीर सिद्धिं दर्शय दर्शय फट् ॥ OM BHRAAM BHREEM BHROUM VEER SIDDHIM DARSHAY DARSHAY PHAT साधना का उपरोक्त क्रम आगामी चार दिनों तक (कुल पांच दिन ) तक अक्षुण्ण रूप से बनाएं रखें। यदि सम्भव हो, तो प्रत्येक दिन साधना उसी समय प्रारम्भ करे, जिस समय पर प्रथम दिन प्रारम्भ की थी। अंतिम दिन समस्त साधना सामग्री को किसी नदी, सरोवर अथवा शिव मंदिर में भेंट के साथ विसर्जित कर दें। जीवन में अभाव की समाप्ति, विश्वस्त सहायक, पौरुष व बल की यह अनुपम साधना है, जिसका अनुभव साधक स्वयं साधना सम्पन्न करने के उपरांत कर सकते। है। प्रस्तुत साधना में बटुक भैरव का समावेश साधना की अतिरिक्त विशिष्टता है

 

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