Tag: बगलामुखी साधना के नियम

बगलामुखी साधना के नियम baglamukhi sadhna ke niyam ph.85280 57364

बगलामुखी साधना के नियम baglamukhi sadhna ke niyam

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बगलामुखी साधना के नियम baglamukhi sadhna ke niyam

बगलामुखी साधना के नियम baglamukhi sadhna ke niyam सभी भक्तों को जय माई की। मां बगलामुखी की साधना के लिए नियम क्या होंगे? मैं , माता श्री बगलामुखी पीतांबरा के इस  website  के माध्यम से आप सभी भक्तों का हार्दिक स्वागत करता हूं, हार्दिक अभिनंदन करता हूं। मैं आशा करता हूं कि आप सभी स्वस्थ होंगे, मस्त होंगे। माता श्री बगलामुखी पीतांबरा की कृपा आप सभी भक्तों के ऊपर बनी रहे, ऐसी मैं भगवती बगलामुखी से कामना करता हूं

मैं आज इस एपिसोड के माध्यम से मां बगलामुखी की साधना के लिए क्या नियम आप अपने जीवन में अपनाएं, क्या सावधानी आपको अपने जीवन में रखनी होगी और कैसे आप गृहस्थ में रहकर के माता श्री बगलामुखी की साधना के किन नियमों का पालन कर सकते हैं। 

तो साधना के दिन आपको प्रातः काल सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके पीले वस्त्र पहनने चाहिए। उसके बाद पूजा के दौरान आपको पूर्व दिशा में मुंह आपको रखना होगा। 

पूर्व दिशा में आप मुंह रखें। माता श्री बगलामुखी की पूजा में पीले रंग का प्रयोग आप करें। जितनी भी सामग्री आप माता बगलामुखी को अर्पित करें, वह पीले रंग की होनी चाहिए, चाहे वस्त्र हैं, चाहे चावल हैं, फूल हैं, ठीक है, मिठाई है, जो-जो भी है, वह सब अधिकतर आप पीले रंग का ही भगवती को आप अर्पित करें। 

चंदन आदि जो है, पीले रंग का होना चाहिए और जिस भोजन को आप ग्रहण करते हैं, वह भोजन भी पीले रंग का ही होना चाहिए क्योंकि भगवती बगलामुखी को पीतांबरा नाम से जाना जाता है। माता बगलामुखी का जो वर्ण है, वह पीत वर्ण है और बगलामुखी माता को पीली वस्तुएं अत्यधिक प्रिय हैं।

माता बगलामुखी की पूजा में जिस आसन का प्रयोग करें, वह आसन भी आपका पीले रंग का होना चाहिए। वस्त्र जो आप पूजा में पहनें, वह वस्त्र भी आप पीले रंग के ही पहनें। 

फल पीले रंग के आप रखें और पूजन के बाद दान भी आपको अवश्य करना चाहिए। जो छोटी-छोटी बालिकाएं होती हैं, नौ वर्ष से छोटी जो बच्चियां होती हैं, कंजक होती हैं, उनको आप कुछ यथाशक्ति दक्षिणा भी अवश्य दें। 

व्रत रखने वाले लोग रात में फलाहार कर सकते हैं, परंतु उसमें भी आपको पीले रंग का ही फलाहार लेना होगा। साधना के दौरान आपको ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना होगा, आचार-विचार-व्यवहार से पवित्र रहना होगा। मंत्र जाप है, वह हल्दी की माला का ही आप इसमें प्रयोग करें।

 मंत्र जाप का जो समय है, वह रात्रि 10 बजे से लेकर प्रातः काल 4 बजे तक का जो समय है, यह सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। दीपक की बाती पीले रंग में रंग कर आप इसको सुखा लें, उसके बाद में इस बाती का आप प्रयोग करें।

साधना में सर्वश्रेष्ठ जो मंत्र है माता बगलामुखी का, वह मूल मंत्र है, वह 36 अक्षर का मंत्र है। यदि दीक्षा आपके पास है तो तभी आप इस मंत्र का जप करें, अन्यथा शतनाम का पाठ करें या माता बगलामुखी की चालीसा का आप पाठ करें। 

साधना अकेले में या तो फिर एकांत में हो या फिर मंदिर में हो, हिमालय या फिर किसी सिद्ध पुरुष के आश्रम में सानिध्य में बैठकर आप साधना करें। 

साधना में बगलामुखी माता का जो पूजन में यंत्र आपको चाहिए, वह या तो फिर ताम्रपत्र का होना चाहिए और वह भी अभिमंत्रित होना अत्यधिक जरूरी है या फिर आप यंत्र निर्माण करना यदि जानते हैं तो चने की दाल से आप यंत्र माता श्री बगलामुखी का बना सकते हैं।

 मां बगलामुखी के मंत्रों का जाप करने से दुखों का नाश हो जाता है और भगवती की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। भक्तों, मेरे द्वारा दी गई जानकारी यदि आपको अच्छी लगी हो तो चैनल और इंस्टा पेज को फॉलो अवश्य कर लें। जय मां बगलामुखी, जय श्री महाकाल।

प्राचीन चमत्कारी ब्रह्मास्त्र माता बगलामुखी साधना अनुष्ठान Ph. 85280 57364

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प्राचीन चमत्कारी ब्रह्मास्त्र माता बगलामुखी साधना अनुष्ठान

प्राचीन चमत्कारी ब्रह्मास्त्र माता बगलामुखी साधना अनुष्ठान Ph. 85280 57364

माँ बगलामुखी की ब्रह्मास्त्र साधना लड़ाई-झगड़ा, शत्रुओं से परेशानी, मुकदमेबाजी और न्यायालय आदि में पूर्ण विजय पाने के लिये बगलामुखी महाविद्या की पूजा-अर्चना करने, उनके अनुष्ठान सम्पन्न कराने का प्रचलन अनंतकाल से चला आ रहा है। प्राचीनकाल से ही नहीं, आधुनिक समय में भी असंख्य लोगों ने माँ बगलामुखी की कृपा से शत्रु बाधाओं एवं न्यायालय में विचाराधीन मुकदमों आदि समस्याओं पर विजय पायी है तथा अन्य नाना प्रकार की आपदाओं से मुक्ति प्राप्त की है। माँ बगलामुखी की कृपा से उनके भक्त साधारण स्थिति से उठकर असाधारण रूप से उच्च पद तक पाने में सफल हुये हैं ।

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माँ बगलामुखी की उपासना, अनुष्ठान आदि शत्रु बाधाओं के दौरान ही नहीं, अपितु अन्य अनेक कार्यों के निमित्त भी की जाती है। इनका सम्बन्ध एकाएक आर्थिक हानि से बचने, किसी अज्ञात भय से बचने, किसी के धोखे में फंस जाने, अकारण किसी के साथ लड़ाई-झगड़े में पड़ जाने, किसी अज्ञात शत्रु द्वारा परेशान किये जाने की भी समस्यायें हो सकती हैं। ऐसी समस्त प्रतिकूल स्थितियों से भी महामाई अपने साधकों को सहज ही निकाल लेती है। महामाई बगलामुखी की अनुकंपा से शीघ्र ही बिगड़े हुये काम बनने लगते हैं।

माँ बगलामुखी का दस महाविद्याओं में आठवां स्थान है। दरअसल आद्य शक्ति के दस रूप दसों दिशाओं में विद्यमान रहते हैं। उनमें दक्षिण दिशा की स्वामिनी महाविद्या बगलामुखी को माना गया है, इसलिये इनकी साधना का दक्षिण मार्ग ही अधिक प्रचलित है। शिवपुराण और देवी भागवत पुराण में शिव के दस रूपों की दस महाशक्तियां भी बताई गई हैं। यह दस महशक्तियां ही संसार में दस महाविद्याओं के रूप में पहचानी एवं पूजी जाती हैं। तंत्रशास्त्र में जगह-जगह इस बात का उल्लेख आया है कि शक्तिविहीन शिव भी शव के समान हो जाते हैं। शिव की जो भी क्षमताएं एवं शक्तियां हैं, उनके मूल में एक मात्र आद्यशक्ति ही कार्य करती है ।

शिव की दस आद्यशक्तियां हैं, जो इस प्रकार जानी जाती हैं- महाकाल शिव की शक्ति काली नामक महाविद्या है, शिव के काल भैरव रूप की शक्ति भैरवी नामक महाविद्या है, कबंध नामक शिव की शक्ति छिन्नमस्तका है, त्र्यंबकम् नामक शिव रूप की शक्ति हैं भुवनेश्वरी नामक महाविद्या, ठीक उसी प्रकार एकवक्त्र नामक महारुद्र शिव की महाशक्ति बगलामुखी नामक महाविद्या है। शिव के इस रूप को वल्गामुख शिव के नाम से भी जाना जाता है।