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माँ मातंगी साधना विधि और लाभ maa matangi sadhna

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माँ मातंगी साधना विधि और लाभ maa matangi sadhna

 
माँ मातंगी साधना विधि और लाभ maa matangi sadhna
माँ मातंगी साधना विधि और लाभ maa matangi sadhna

नमस्कार प्रिय, आप का स्वागत है गुरु मंत्र साधना में अभी आगे कार्तिक नवरात्री शुरू होने वाले  है इस समय में यदि किसी प्रकार की कोई साधना की जाती है, किसी प्रकार के मंत्र का जप किया जाता है तो निश्चित ही उसका प्रभाव शीघ्रातिशीघ्र प्राप्त होता है क्योंकि यह समय साधना सिद्धि का ही समय होता है। माँ मातंगी साधना करने का उचित समय है 

माँ मातंगी साधना का महत्व

आज जिस सिद्धि की, जिस साधना की मैं बात करने जा रहा हूँ, वह है माँ मातंगी की साधना। माँ मातंगी की साधना एक ऐसी साधना है जो प्रत्येक व्यक्ति को और प्रत्येक गृहस्थ को अवश्य ही एक बार जीवन में करनी चाहिए क्योंकि यह साधना एक ऐसी साधना है जो जीवन की प्रत्येक सुख सुविधा के साथ-साथ प्रत्येक समस्याओं के समाधान के लिए भी जानी जाती है।

कौन हैं माँ मातंगी ?

माँ मातंगी सभी दश महाविद्याओं में नवें स्थान पर आती हैं। श्री कुल की साधना अति श्रेष्ठ मानी जाती है। मातंगी को पूर्ण गृहस्थ सुख, भोग विलास, शत्रुओं का नाश, अपार सम्मोहन और वाक् सिद्धि के साथ-साथ कालज्ञान दर्शन और इष्ट दर्शन की प्राप्ति के लिए भी माना जाता है। कहा जाता है जिन पर इनकी कृपा हो जाती है, उसे जीवन में कुछ भी शेष नहीं रहता। उसे हर प्रकार से सभी साधन सर्व सुलभ हो जाते हैं।

माँ मातंगी साधना से प्राप्त होने वाले लाभ

आज के इस भौतिकवादी युग में सभी की चाह होती है की उसके पास अच्छा घर हो, मकान हो, सभी प्रकार के सुख साधन उपलब्ध हों और माँ मातंगी सर्व प्रकार के सुख और भोग वैभव देने के लिए जानी जाती हैं। माँ मातंगी सरस्वती के भी एक रूप माना जाता है। 

मातंगी की कृपा जिस पर हो जाती है उसे स्वतः ही संपूर्ण शास्त्र-वेदों का या संपूर्ण ज्ञान प्राप्त हो जाता है। वह किसी से भी वाद-विवाद में हार नहीं सकता अर्थात उसे हमेशा जितना ही होता है। उसके मुख से एक धारा प्रवाह के रूप में सभी प्रकार की बातें और सभी प्रकार का ज्ञान उद्गत होने लगता है। 

बोलता है तो उसकी वाणी अमृतधारा बरसाती है, ऐसा शास्त्र कथन है। इसीलिए होगा कि प्रत्येक गृहस्थी को एक बार जीवन में यह साधना करनी चाहिए क्योंकि जीवन में अनेकों अनेक बार ऐसा समय आता है जब व्यक्ति अपनी बात समझा नहीं पाता, अपनी बात को ठीक से रख नहीं पता।

 यदि ये साधना की जाए तो निश्चित ही वह अपनी बात को समझाने में और अपनी बात को दूसरों के समक्ष रखने में सक्षम हो जाता है, जिससे कई बार विपरीत परिस्थितियों में भी आपके लिए सुलभता प्राप्त हो जाएगी। आपके कार्य शीघ्रता से, सुलभता से बनने लगेंगे। ये है माँ मातंगी की साधना का प्रभाव।

 माँ मातंगी को उच्छिष्ट चांडालिनी भी कहते हैं जो सब प्रकार के शत्रुओं का और विघ्नों का नाश करती है। साथ ही साथ कर्णमातंगी साधना भी इन्हीं के अधीन आती है।  

कर्ण मातंगी को सिद्ध करने के बाद में माँ मातंगी कान में प्रश्नों के उत्तर बताती हैं। इस साधना का ज्योतिष, तंत्र या इस प्रकार के क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए विशेष महत्व होता है।

माँ मातंगी साधना की विधि

माँ मातंगी साधना विधि और लाभ maa matangi sadhna
माँ मातंगी साधना विधि और लाभ maa matangi sadhna

आज जिस साधना की बात कर रहा हूँ वह सरल होते हुए सभी गृहस्थियों के लिए है जिससे की जीवन में सुख शांति और वैभव की प्राप्ति हो, शत्रुओं का नाश हो और सब प्रकार से जीवन सुलभ और सुखमय बन सके। 

माँ मातंगी के विषय में महर्षि विश्वामित्र ने कहा है की जिसने मातंगी को सिद्ध कर लिया बाकी नौ महाविद्या उसे स्वतः प्राप्त हो जाती हैं। परंतु प्रियदर्शकों, सिद्धि प्राप्त करना कोई सरल नहीं है। 

लेकिन मैं ये मानता हूँ मातंगी की अगर कृपा भी मिल जाए तो भी हम सिद्धि के बिल्कुल निकट पहुँच गए हैं। चलिए जान लेते हैं ये साधना, ये सिद्धि कब से आरंभ करनी है, किस समय आरंभ करनी है, क्या हैं इसके नियम, क्या है इसकी साधना और किस प्रकार से साधना में सामग्री की आवश्यकता पड़ने वाली है।

माँ मातंगी साधना  कब और कैसे आरंभ करें ?

इस साधना को वैसे तो किसी भी सोमवार से या शुक्रवार से आरंभ किया जाता है परंतु गुप्त नवरात्रि का समय है तो प्रथम नवरात्रि से ही आप इस साधना को आरंभ कर सकते हैं। समय रहेगा रात्रि 9:00 बजे के बाद में। 

हमेशा बोलता हूँ वैसे 10:00 बजे के बाद साधना आरंभ करनी चाहिए लेकिन शास्त्र प्रमाण है रात्रि 9:00 बजे के बाद, तो आप 9:00 बजे के बाद में इस साधना को आरंभ कर सकते हैं।

 किसी शुभ समय को देखकर के रात्रि 9:00 बजे बाद शुभ चौघड़िया में, अमृत काल का चौघड़िया हो, शुभ का चौघड़िया हो, यह चर का चौघड़िया हो तो आप उस काल में इस साधना को आरंभ कर सकते हैं। तो ये साधना आपको रात्रि 9:00 बजे के बाद आरंभ करनी है। मुख आपको उत्तर या पश्चिम दिशा में करना है। आसन लाल होगा और वस्त्र भी लाल होंगे।

माँ मातंगी साधना आवश्यक सामग्री

जो बाजोट या पट्टे पर वस्त्र बिछाया जाएगा वह भी लाल रंग का ही होगा। मातंगी का चित्र और यंत्र रख करके आपको पूजा करनी है, साधना करनी है। यंत्र प्राण-प्रतिष्ठित होना चाहिए। प्राण प्रतिष्ठा विषय के संबंध में एक पोस्ट मैं पूर्व में दे चुका हूँ। 

वहाँ द्वारा प्राण प्रतिष्ठा विधि देख सकते हैं। निश्चित ही उस सूक्ष्म विधि से यंत्र की प्राण प्रतिष्ठा होती है और हर प्रकार से आपको लाभ मिलता है। लिंक आपको डिस्क्रिप्शन में दे दिया जाएगा।

यदि माँ मातंगी का चित्र उपलब्ध न हो तो उस परिस्थिति में जिस प्रकार से गणपति की स्थापना की जाती है सुपारी पर मौली लपेट करके, ठीक उसी प्रकार आप मातंगी का विग्रह की स्थापना कर सकते हैं। 

एक सुपारी पर थोड़ी सी मौली लगा करके, उस पर तिलक करके माँ मातंगी को यंत्र के समक्ष सुपारी को रख करके मातंगी का स्वरूप मानकर के साधना को संपन्न कर सकते हैं।

 माँ भगवती की तरह ही इनका पूजन करना है, षोडशोपचार रूप से। साथ ही साथ जब दश महाविद्याओं की पूजा की जाती है तो भैरव की पूजा अवश्य की जाती है, तो भैरव जी की पूजा इनके बायीं ओर करनी है।

 माँ भगवती का जहाँ आपने विग्रह रखा है, जहाँ यंत्र रखें उसके बायीं ओर भैरव जी की पूजा आपको करनी पड़ेगी। बात करें दीपक की, तो दीपक यहाँ पर शुद्ध देसी घी का आपको प्रज्वलित करना है। 

यदि आपके आसपास घी की व्यवस्था नहीं तो आप तिल तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। परंतु संभव हो तो घी का दीपक ही आप प्रज्वलित करें। माला या तो स्फटिक की हो, लाल हकीक या लाल मूंगे की हो या फिर हमेशा बोलता हूँ रुद्राक्ष की माला सर्व कार्य सिद्धि के लिए प्रयोग कर सकते हैं। 

तीनों में से कोई भी माला जो आपके पास उपलब्ध हो, प्राण प्रतिष्ठित माला हो, उससे आप इस साधना को कर सकते हैं। भोग प्रसाद में जो सामान्यतः माँ भगवती जगदंबा की, माँ काली की पूजा में जो सामग्री फल इत्यादि लगते हैं वही सामग्री रहेगी, अलग कुछ भी नहीं है।

 भोग के लिए आप लौंग, इलायची, बताशे के साथ-साथ कोई भी मीठी वस्तु या जैसे बेसन का लड्डू हो, बर्फी हो या कोई ऐसी वस्तु जो भोग के लिए आप समर्पित कर सकते हों। और कुछ न हो तो मिश्री को समर्पित अति प्रेम से कर सकते हैं लौंग, इलायची, बताशे के साथ।

माँ मातंगी साधना – पूजन और संकल्प की प्रक्रिया
 

हमेशा की तरह फिर कहूँगा साधना आरंभ करें उससे पूर्व माँ भगवती के मंदिर में जाकर साधना के लिए प्रार्थना कीजिएगा। भगवान शिव के मंदिर में भी जा सकते हैं, वहाँ प्रार्थना कीजिए साधना के लिए और फिर साधना में प्रवृत्त हो जाइए।

 बाकी साधना रात्रि 9:00 बजे आरंभ होगी तो आप दिन में उसकी पूरी तैयारी कर लीजिए। सर्वप्रथम उत्तर या पश्चिम मुख होकर के बाजोट पर माँ भगवती का चित्र, यंत्र, विग्रह स्थापित करके माँ भगवती के दायीं ओर आपकी बायीं ओर एक कलश स्थापित करना है। उस पर एक पानी का नारियल आपको स्थापित करना है। 

सर्वप्रथम अपने ऊपर आचमन कीजिए। थोड़ा सा जल अपने दाहिने हाथ में लेकर के शुद्धि के रूप में अपने ऊपर छिड़किए।

 आचमन शुद्धि के बाद में सर्वप्रथम आपको संकल्प लेना है। संकल्प के लिए अनेकों अनेक बार बता चुका हूँ, अपना नाम, गोत्र और अपना मनोरथ स्पष्ट करते हुए संकल्प लिया जाता है, उस दिन की तिथि, वार, नक्षत्र को बोलते हुए आप संकल्प लीजिए। 

संकल्प के लिए आपको अपने दाहिने हाथ में जल लेना है और उस जल को संकल्प बोलने के बाद में किसी प्लेट में, थाली में छोड़ देना है या फिर गणेश जी पर अर्पित कर देना। 

संकल्प के पश्चात् सर्वप्रथम गणेश जी का, उसके बाद गुरु का, कुलदेव, पितृदेव, स्थानदेव का पूजन करते हुए माँ भगवती का पूजन करना है। माँ भगवती मातंगी के पूजन के साथ-साथ भैरव जी का पूजन करना है और साथ ही आपको अपने इष्ट का ध्यान भी करना है, पूजन भी करना है। 

भगवान शंकर की ध्यान पूजन भी इसमें आपको करना चाहिए। सबका पूजन करने के बाद में आपको सर्वप्रथम गणेश जी की, उसके बाद गुरु मंत्र की एक-एक माला का जप करना है।

माँ मातंगी साधना  विनियोग एवं न्यास विधि

तत्पश्चात् आपको कम से कम 21 माला का जप मूल मंत्र का करना है, जो माँ भगवती मातंगी का मूल मंत्र है। लेकिन ये साधना तांत्रिक साधना है और पूर्व के अनेकों पोस्ट में बता चुका हूँ कि वैदिक और तांत्रिक साधनाओं में विनियोग, न्यास आदि होते हैं तो उनको करना अनिवार्य है।

 साधना में विनियोग, न्यास की विधि के लिए मैं आपको एक बार बता देता हूँ किस प्रकार से विनियोग होगा, किस प्रकार से न्यास होगा। वो आपको स्क्रीन पर मंत्र दिखाई भी दे रहे हैं। 

इन मंत्रों के माध्यम से आप विनियोग कर सकते हैं। यदि किसी को पढ़ने में, बोलने में असुविधा है तो उसके लिए मैं सूक्ष्म विधान और बता देता हूँ। 

विनियोग का तात्पर्य सिर्फ उस देवता को, जिसने इस मंत्र को बनाया उस ऋषि का नाम, उस देवता का नाम, जिसमें इस देवता की शक्ति है, उसको याद किया जाता है, उसके बारे में बताया जाता है।

 तो आप सिर्फ मातंगी का ध्यान कीजिए और अपने गुरु का ध्यान कीजिए। इतना भी करके आप विनियोग कर सकते हैं। हाथ में जल लेकर के न्यास के लिए क्या करना होता है ?

 सरल से सरल विधि देने का प्रयास कर रहा हूँ, क्योंकि जिनका अर्थ यही है, ऋषि ने न्यास, न्यास का अर्थ यही है कि मैं अपने इस अंग से भी आपको नमस्कार करता हूँ, अपने हृदय से भी नमस्कार करता हूँ, अपने मस्तक से भी नमस्कार करता हूँ, अपनी शिखा की तरफ से भी नमस्कार करता हूँ, अपनी पाँचों उंगलियों से नमस्कार करता हूँ एक-एक करके।

 तो यह न्यास है, इसे शुद्धि कहा जाता है कि हर प्रकार से मैंने शुद्धि कर ली है। यदि आपको बोलने में, मंत्रों को बोलने में असुविधा होती है तो आप बारी-बारी से सिर्फ ध्यान करके

 माँ भगवती को बारंबार प्रणाम करते हुए इस साधना को आरंभ कर सकते हैं और इतना करने के बाद भी आपको फल अवश्य ही प्राप्त होगा क्योंकि माँ मातंगी या कोई भी देवी की जब आराधना की जाती है तो हमेशा बताया है कि दुर्गा स्तुति, माँ भगवती जो हैं 

ये दुर्गा के ही स्वरूप हैं और दुर्गा जी भगवती स्तुति यानी प्रार्थना से प्रसन्न होती हैं, अन्य किसी साधन की आवश्यकता है ही नहीं। तो सिर्फ प्रार्थना कीजिए, मन से, हृदय से प्रार्थना कीजिए, अपने आप को समर्पित करते हुए, समर्पण भाव से प्रार्थना कीजिए अगर आपको कोई अन्य मंत्र उच्चारण करने में परेशानी आती है।

विनियोग मंत्र

चलिए सर्वप्रथम विनियोग की विधि देख लेते हैं। विनियोग का मंत्र आपकी स्क्रीन पर है। इस प्रकार है: दाहिने हाथ में जल लीजिएगा और फिर इस मंत्र को बोलिएगा:

ॐ अस्य मन्त्रस्य दक्षिणामूर्ति ऋषिः विराट् छन्दः मातंगी देवता ह्रीं बीजं हूं शक्ति विनियोगः।

जब आप इस मंत्र को बोल लें, दाहिने हाथ में जो जल लिया था उसे आप भूमि पर छोड़ दीजिए।

न्यास (ऋषि न्यास, करण्यास, हृदयादिन्यास)

चलिए अब न्यास करते हैं। सबसे पहले ऋषि न्यास है, फिर करण्यास है, फिर देहन्यासः। विधि मैंने पूर्व में बता दी कि सिर्फ इनसे नमस्कार करना है, इनसे प्रणाम करना है। सर्वप्रथम ऋषि न्यास। मैं बोलता जाऊँगा आप उसके अनुसार इसका ध्यान कर लीजिए। वैसे स्क्रीन पर पूर्ण रूप से लिखने का प्रयास किया है।

ऋषि न्यास:


सर्वप्रथम अपने सिर को स्पर्श करते हुए बोलिए: ॐ दक्षिणामूर्ति ऋषये नमः शिरसि।
दूसरे पर मुख को स्पर्श करना है आपने अपने दाहिने हाथ से और फिर बोलना है: विराट् छन्दसे नमो मुखे।फिर उसके बाद हृदय को स्पर्श करना है और बोलना है: मातंगी देवतायै नमो हृदि।

फिर उसके पश्चात् अपने गुप्त स्थान को, जांघ को स्पर्श करना है: ॐ ह्रीं बीजाय नमो गुह्ये।अपने पैरों को स्पर्श करना है: ॐ हूं शक्तये नमः पादयोःअपने नाभि को स्पर्श करना है: ॐ क्लीं कीलकाय नमः नाभौउसके बाद सभी अंग का स्पर्श करना है और बोलना है: विनियोगाय नमः सर्वांगे।

इस प्रकार से यह ऋषि न्यास हुआ। अब करण्यास है, अपनी हाथों से पाँचों उंगलियों से अलग-अलग न्यास, प्रणाम करना है। उसके बाद होता है हृदयादिन्यास अर्थात दोनों हाथों को जोड़ करके। 

तो जिस प्रकार मैंने बताया अंगों को स्पर्श करते हुए ठीक उसी प्रकार न्यास के सामने हिंदी में मैंने बताया है कि किस प्रकार से स्पर्श करना है। 

 अधिक विस्तारित न हो इसलिए मैं बोलकर नहीं बता रहा हूँ, सिर्फ आपको स्क्रीन पर दिखाई दे रहा है। इसके स्क्रीनशॉट ले सकते हैं, नोट कर सकते हैं। 

यदि फिर भी कोई समस्या आती है तो आप व्हाट्सएप करके मुझसे जान सकते हैं कि किस प्रकार न्यास करना है। करण्यास के बाद हृदयादिन्यास है, आपको स्क्रीन पर दिखाई दे रहा है।

 

ध्यान मंत्र

उसके बाद आपको मातंगी का ध्यान करना है। वहाँ पर पूर्ण समर्पण करते हुए आप इस मंत्र को बोलिए:

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपे संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

अर्थात, हे माँ आप मुझ पर दया करना, मुझे क्षमा भी करना यदि मुझसे कोई त्रुटि हो गई हो, कोई भूल हो गई हो और साथ ही साथ मुझे मेरी साधना में सिद्धि प्रदान कर देना। इस मंत्र का भाव है और माँ का विग्रह आप अपने सम्मुख रख कर के उनका ध्यान करते हुए इन तीन मंत्रों को आप सरलता से बोल सकते हैं।

 मातंगी साधना मूल मंत्र जाप

चलिए अब जान लेते हैं उस मंत्र को। वो मंत्र आपकी स्क्रीन पर है:

ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा॥

छोटा सा ये मंत्र है, 21 माला प्रतिदिन आपको करनी है। बहुत छोटा सा मंत्र है, 21 माला में ज्यादा समय नहीं लगने वाला। आपका प्रयास करेंगे तो निश्चित ही यह साधना आपकी सफल होगी। माँ भगवती मातंगी कृपा आपको प्राप्त होगी। 21 माला का आपको जप करना है। 

उससे पूर्व बता चुका हूँ, पहले गणेश जी की एक माला, फिर गुरु मंत्र की एक माला। यदि आपके गुरु नहीं हैं तो क्या करें ? पूर्व में अनेकों अनेक बार बता चुका हूँ, नमः शिवाय भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र का आप जप कर सकते हैं या फिर हमारे गुरुदेव द्वारा बताए गए मंत्र को भी मैं कई बार बता चुका हूँ: ॐ गुरुवे नमः। इस मंत्र का आप जप कर सकते हैं गुरु मंत्र के स्थान पर।

मातंगी साधना  का समापन (पूर्णाहुति)

जब आप मंत्र जाप पूर्ण कर लें, आपकी पूरी 21 माला पूर्ण हो जाए, उसके बाद अपने दाहिने हाथ में जल लीजिएगा और जल लेकर के माँ भगवती का ध्यान करके, माँ मातंगी का ध्यान करके उस जल को इस भाव से भूमि पर ही छोड़ दीजिए माँ के बाएं हाथ की तरफ कि माँ जो भी मैंने जप किया है, जो भी मैंने पुण्य किया है

 जो भी मैंने तप किया है वो सब मैं आपको समर्पित करता हूँ। यह हर साधना में मैं बोलता हूँ कि समर्पण के बाद आसन को प्रणाम करना है, तो यही समर्पण है। जो कुछ भी आपने जप किया है वो हाथ में जल लेकर के माँ के बाएं हाथ की तरफ छोड़ दीजिए। 

उसके बाद माँ भगवती की आपको आरती करनी है। आरती के पश्चात् लौंग, इलायची, बताशे के साथ-साथ किसी मीठे का आपको भोग लगाना है और भोग लगाकर उन्हें एक बार आचमन कराना है। उसके पश्चात् माँ को प्रणाम करके, आसन को प्रणाम करके आप खड़े हो जाइए।

माँ मातंगी साधना के नियम

संभव हो तो इन 9 दिनों में भूमि शयन करना। अपना भूमि पर ही आसन लगा करके, अपना बिस्तर लगा कर के वहीं शयन करना है जहाँ आपने दरबार लगा रखा है, जहाँ आपने माँ की चौकी लगा रखी है। वहीं पर आपको शयन करना है।


एक समय आपको भोजन करना है। भोजन सात्विक हो। संभव हो फलाहार करें, नहीं तो आप एक समय भोजन कर सकते हैं।

सात्विक रहते हुए साधना को आठ दिनों तक आपको करना है। नवें दिन इसकी पूर्णाहुति होगी।
नवें दिन जब आप साधना करेंगे तो उस दिन आपको सिर्फ प्रातःकाल माँ का पूजन करने के बाद में कम से कम एक माला का आपको इस जो मंत्र है, इस मंत्र से आपको माँ का हवन करना है।

 एक माला का हवन में गुरु मंत्र और गणेश जी की माला का भी आपको हवन करना है। ज्यादा नहीं करें गुरु मंत्र, गणेश मंत्र का, तो कम से कम 21-21 आहुति गुरु मंत्र, गणेश मंत्र की आपको अवश्य करनी है। भैरव जी की भी आहुति आपको इसमें करनी है। कम से कम 21 भैरव जी के भी करिएगा।

निश्चित ही माँ मातंगी की कृपा आपको प्राप्त हो जाएगी और आपके सभी कार्य सिद्ध होने लगेंगे। सर्व प्रकार से समाज में मान-सम्मान आपका बनने लगेगा। हर प्रकार की सफलता, सुख, वैभव मातंगी कृपा से आपको प्राप्त हो यही कामना है। माँ मातंगी कृपा आपको प्राप्त हो, उनकी सिद्धि प्राप्त हो यही दिल से कामना है।

मातंगी साधना  महत्वपूर्ण सूचना

 मेरा प्रयास रहता है की मैं प्रत्येक विषय वस्तु को बड़ी सरलता से, सहजता से आप तक पहुँचा सकूँ, परंतु फिर भी यदि किसी प्रश्न का, किसी विषय में समस्या आती है, किसी बात को समझने में आपको परेशानी आती है तो आप व्हाट्सएप कर सकते हैं। 

कृपया कॉल ना करें, फोन मेरे पास नहीं रहता है, वो जिस पर व्हाट्सएप चलता है तो आप व्हाट्सएप कर सकते हैं। संभवतः व्हाट्सएप का जवाब आपको कुछ विलंब से मिल जाए परंतु जवाब मैं अवश्य दूँगा और अभी तक जिन्होंने व्हाट्सएप किया है उन्हें ज्ञात होगा मैं रिप्लाई अवश्य करता हूँ। तो चलिए जानते हैं साधना की विधि को।

जय माता दी। जय श्री राम।

नोट बिना गुरु के साधना  न करे अगर मंत्र में या शलोक में कोई त्रुटि रह जाए तो बताओ 

मातंगी महाविद्या साधना का रहस्य तांत्रिक और कथा माता की ph.852857364

मातंगी महाविद्या साधना का रहस्य तांत्रिक और कथा माता की

 

मातंगी महाविद्या साधना का रहस्य तांत्रिक और कथा माता की

मातंगी महाविद्या साधना का रहस्य तांत्रिक और कथा माता की
मातंगी महाविद्या साधना का रहस्य तांत्रिक और कथा माता की

 मां मातंगी तांत्रिक सरस्वती हैं। मातंगी, मां मातंगी। कौन से खास तरीके हैं जिससे मां मातंगी की पूजा करें? मूंगे की माला को आप इस नवरात्रि में सिद्ध कर सकते हैं।

मां मातंगी से कौन सा प्लैनेट जुड़ा हुआ है? मातंगी से सन जुड़ा है, सूर्य। ओके। क्या माता की कृपा जब मिलने लगती है मातंगी की, तो कुछ खास तरीके के इंसिडेंट आपकी लाइफ में होने लगते हैं? सबसे पहले तो आपको चैनलिंग होने लगेगी।

जब आपके अंदर कॉन्फिडेंस और पावर आने लगे, समझ जाइए कि मां मातंगी आपने, उनकी कृपा आप पर हो गई। मां सरस्वती की पूजा करना और मां मातंगी की पूजा करना में अंतर कितना है? मां मातंगी की पूजा जो एक्सीलरेटेड फॉर्म है, आपके नीचे स्केट्स लग गए हैं।

अब आप बिल्कुल तेजी से भाग सकते हैं। लेकिन इसमें यह भी एक जरूरी है कि हमें केयरफुल रहना है। बहुत लोग 10 महाविद्या से डर जाते हैं, उनको लगता है ये बड़े उग्र फॉर्म हैं, क्या हो जाएगा?

म्यूजिशियन है कोई,  उसका बेटा भी सिंगर है। फैमिली में चेन में चली आती है सेम इंडस्ट्री में, क्या वो मां मातंगी की कृपा की वजह से हो रहा है? बिल्कुल।

तंत्र सब सक्सेसफुल लोग करते हैं। बड़े-बड़े लोग जो बड़े-बड़े पदों पर होते हैं, वो भले ही बाहर जाकर शो ऑफ करते हैं कि नहीं ये सब उनकी खुद की प्रैक्टिस की वजह से है, बट वो कहीं ना कहीं तंत्र हेल्प लेते हैं।

बिल्कुल लेते हैं। मेरे से हेल्प लेते हैं। जब तक आपकी इंटेंशन अच्छी है, तंत्र को यूज करना गलत नहीं। है।

 

मातंगी महाविद्या साधना – परिचय

हेलो, हाई, वेलकम। मैं हूं आपके साथ तुषार कौशिक। गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर आज का पोस्ट दश महाविद्याओं की सीरीज में सबसे ज्यादा इंटरेस्टिंग है क्योंकि मैं जो पोस्ट लिख रहा हूं या जो मेरा प्रोफेशन है, वह इन्हीं महाविद्या से जुड़ा हुआ है। आज की जो देवी रहेंगी, आज का जो 10 महाविद्याओं में रूप है, वो है मां मातंगी का।

मां मातंगी के बारे में जो मुझे बताया गया आज के इस पोस्ट में, वो यह है कि यह मां सरस्वती का तांत्रिक फॉर्म है।

यानी कि अगर मां सरस्वती की कृपा आपको एक्सीलरेशन के मोड में चाहिए, अगर आपको तंत्र के जरिए मां सरस्वती से कनेक्ट करना है, तो आपको मां मातंगी की पूजा करनी चाहिए।

और इस सीरीज को लगातार हम गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर कर रहे हैं डॉक्टर मनमीत के साथ। तो आइए, आज के इस पोस्ट को हम शुरू करते हैं और डॉक्टर मनमीत से जानना शुरू करते हैं मां मातंगी के बारे में।

आज की जो यह सीरीज है दश महाविद्याओं की, इसमें हम बात करेंगे आज मां मातंगी पर। और क्योंकि लगातार यह सीरीज बहुत पॉपुलर होती जा रही है और जितने भी पाठक हैं, वो कह रहे हैं कि अगला पोस्ट कब आएगा या अगली देवी के बारे में कब पता लगेगा।

तो आज मां मातंगी की बात करते हैं। रीजन बिहाइंड इट, जितना मैंने समझा, जितना मैंने पढ़ा, बाकी तो आप बताएंगी कि मां मातंगी जो हैं, वो परफेक्शन की देवी हैं।

वो स्किल्स की भी देवी कह सकता हूं, टैलेंट की भी देवी कह सकता हूं। पोस्ट लिखना भी एक टैलेंट है, तो बेसिकली मैं कहूंगा कि मुझे भी उनकी पूजा करनी चाहिए। तो बेसिकली, आप पहले मुझे मां मातंगी के बारे में बताइए, कौन हैं ये देवी? इनकी शुरुआत कैसे हुई है? कहां से इनका प्राकट्य हुआ?

मां मातंगी कौन हैं ?

 मां मातंगी तांत्रिक सरस्वती हैं।

और ये सरस्वती मां का जो, जिसको हम कहते हैं तांत्रिक फॉर्म है। ऑकल्ट की देवी हैं, लर्निंग की देवी हैं, स्पीच की देवी हैं, कम्युनिकेशन, एकेडेमिक्स, ऑकल्ट, एस्ट्रोलॉजी, डीपर साइंसेज, मैजिक, ओके, तंत्र। इसका जितना भी विजडम है, मां सरस्वती की जितनी भी लर्निंग्स हैं, वह आउटसाइड फोकस्ड है।

हमारी स्पीच, हमारी वाणी, हमारा बोलना, हमारा लिखना, पढ़ना। यह इनवर्ड फोकस्ड है। तो बाहर नॉलेज है, अंदर विजडम है। तो ये कहती हैं कि आप अपने सोल को टैप कीजिए, अपनी आत्मा को टैप कीजिए, अपने हायर सेल्फ के साथ मेडिटेशन में जाइए। तो यह बहुत मेडिटेटिव फॉर्म है मां का। और इनका कलर जो है, वह ग्रीन है एंड कपड़े इन्होंने रेड पहने हुए हैं।

मां मातंगी का प्राकट्य और स्वरूप

इनका जो पूरी काया है, वह एमरल्ड ग्रीन है। इनके पास एक पैरेट होता है। और इनका जो प्राकट्य है, वो कहते हैं इनको उच्छिष्ट चांडालिनी भी कहा जाता है।

ऐसा कहते हैं कि लॉर्ड शिवा और माता पार्वती जब एक बार खाना खा रहे थे और उन खानों में से कुछ थोड़ा जो खाना है, वो बच गया और नीचे गिर गया। उस नीचे गिरे हुए जो खाने से जो जन्म हुआ, वो इनका हुआ।

अच्छा, मतलब जो उनकी थाली से बाहर गिरा खाना, उससे मां मातंगी प्रकट हुईं।

मातंगी हैं, प्रकट हुईं। ऐसा कहते हैं कि वह मां पार्वती का उनके फादर के ऊपर एक वरदान था, एक विश थी जो उन्होंने उनको ग्रांट करी। ऋषि मातंग थे उनके फादर और उनकी बेटी हुईं मातंगी।

समाज में उपेक्षितों की देवी

अब क्योंकि वह आउटकास्ट फूड से जन्मीं, तो ऐसा भी कहते हैं कि शी इज द गॉडेस ऑफ द आउटकास्ट। जो शेड्यूल कास्ट होते हैं, या मैं यहां पे शेड्यूल कास्ट को कास्ट सिस्टम में नहीं गिनूंगी, मैं कहूंगी कि अगर आपको शेड्यूल कास्ट फील होता है अपने घर में, या अपने ऑफिस में, या अपनी सोसाइटी में, समाज में, अपने इन-लॉज के घर में, जहां भी आपको एज एन आउटसाइडर देखा जाता है या आपको एज एन आउटसाइडर फील होता है

तो यह वो देवी हैं जिनको आपको प्रसन्न करना है। क्योंकि ये आपकी फीलिंग को एकदम समझ सकती हैं और आपको बहुत कॉन्फिडेंस देती हैं स्पीच का, अपने लिए एक स्टैंड लेने का, खड़े होने का। तो जितने भी लोगों को बड़ा विक्टिमाइज्ड फील होता है, एब्यूज में रहते हैं या उनको लगता है कि हमें छोटी नजर से देखा जा रहा है, यह उनकी देवी है।

 

किन्हें करनी चाहिए मां मातंगी की साधना ?

 

ओके। ये जितने भी ऑकल्ट हैं, एस्ट्रोलॉजर्स हैं, हीलर्स हैं, कोचेस हैं, साइकिक्स हैं, मीडियम हैं, बनना चाहते हैं, इंट्यूशन स्ट्रांग करना चाहते हैं, ऐसे ज्ञान का कोष पाना चाहते हैं जो इजीली अवेलेबल नहीं है।

देखिए, कहते हैं कि ये सिद्धियां तो ऊपर से आती हैं या आप लोगों ने बहुत तंत्र-मंत्र किया होगा या साधना करी होगी पिछले जन्मों में, तब जाकर आपको ये स्थिति प्राप्त होगी।

यह कहीं पर लिखी नहीं हुई, इसकी बुक आप सीबीएसई या एनसीआरटी से खरीद के पढ़ नहीं सकते, कोई कोर्स नहीं है। तो इनको आप साधें।

मैं कहूंगी कि ना सिर्फ इन नवों में, पर अगर आप लाइट वर्कर हैं, एंपैथ, प्योर नॉलेज चाहिए, आपको आकाशिक रिकॉर्ड्स की नॉलेज चाहिए, पास्ट लाइव्स की नॉलेज चाहिए, किसी भी तरीके की यूनिवर्स की नॉलेज चाहिए, आपको इनको साधना चाहिए।

अगर हायर नॉलेज चाहिए, हायर नोट पर आपको जाकर कुछ सीखना है, कुछ अपने आप को टैलेंटेड बनाना है, तो आपको पूजा करनी चाहिए।

 

मां मातंगी की पूजा विधि

 

अच्छा, मां सरस्वती का आपने कहा कि यह तांत्रिक फॉर्म है। मां सरस्वती टैलेंट देती हैं, मां सरस्वती विजडम की गॉडेस हैं। और ऐसे में अगर मैं देखूं, जो लोग म्यूजिशियंस हैं, खासतौर पर जो लोग मां सरस्वती से रिलेटेड जो काम कर रहे हैं या उसमें परफेक्शन चाहते हैं, उन सब लोगों को पूजा करनी चाहिए। लेकिन आपने कहा ये तांत्रिक देवी हैं, तो जहां फॉर्म आ जाती है ना, बात आ जाती है तांत्रिक देवी हैं, तो कुछ खास तरीके भी होते हैं फिर उनकी पूजा के लिए। कौन से खास तरीके हैं जिससे मां मातंगी की पूजा करेंगे, तो बहुत जल्दी आपको वो कनेक्टिविटी बन जाएगी आपकी उनके साथ?

 

मातंगी महाविद्या साधना पूजा की सामग्री और मंत्र

 

बिल्कुल। मूंगे की माला लें और मूंगे की माला को आप इस नवरात्रि में सिद्ध कर सकते हैं। आपको वेस्ट की तरफ डायरेक्शन में बैठना है और कदंब के फूल से इनकी पूजा होती है, घी का दिया जला के होती है। और आप मां को बताएं कि आपको किस चीज में सिद्धि चाहिए।

सपोज आपको आकाशिक रिकॉर्ड्स पढ़ने हैं, सपोज आप म्यूजिशियन हैं या आपको किसी पर्टिकुलर इंस्ट्रूमेंट को साधना है, आपको वायलिन, तबला, गिटार, हारमोनियम, यह तो हो गए म्यूजिक के। अगर आपको किसी टाइप की नॉलेज चाहिए .

आप कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स में बैठ रहे हैं या आपको अपने बच्चों को वो करना है, तो आप एक पेन को साध सकते हैं, आप उनकी किताबें वहां पर रख सकते हैं उस टाइम के लिए, नवरात्रों के टाइम।

जिस भी फील्ड में आपको परफेक्शन चाहिए, कृपा चाहिए, उस चीज को, उसके उससे जुड़े इंस्ट्रूमेंट को आप वहां पर लेकर आइए।

आप वहां पर लेकर आइए और वहां पर आप रखिए और सब दिन उनका दिया जलाएं और उनका जो बीज मंत्र है, उनका जो मंत्र आप करेंगे, वह मंत्र जरूरी है कि आप या तो 10,000 बार करें या हजार बार करें या 100 बार करें, लेकिन नवरात्रों के टाइम पर ही करें। और वह मंत्र है:

ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा

। मैंने यहां स्क्रीन पर भी चला दिया है। एज ऑलवेज, हमें शुरू कहां से करना है? गणेश वंदना से करना है। उसके बाद इनके जो भैरव हैं, वह मातंग शिव हैं। और मातंग शिव का भी जो मंत्र है, आप सिंपली ओम नमः शिवाय भी कर सकते हैं।

आप एक बार कह दें कि मैं मातंग शिव से ले रही हूं कि मैं मातंगी को साधना चाहूंगी और फिर शुरू कर दें। रुद्राक्ष की माला पर ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय 108 बार करने के बाद आप मूंगे की माला ले लें, मां मातंगी का मंत्र करें।

और यह सारी मालाएं देखिए, अलग-अलग पाउच में जरूर होनी चाहिए, माला कभी गिरनी नहीं चाहिए। और आप इनको जो भी प्रसाद चढ़ाएं, वो ग्रीन कलर का हो या रेड कलर का हो। इनका नाइंथ डे होता है।

शी इज द नाइंथ महाविद्या। तो नाइंथ डे पर अगर आप इनको एक ग्रीन साड़ी चढ़ा सकते हैं या रेड साड़ी या ग्रीन एंड रेड साड़ी मिक्स करके चढ़ा सकते हैं।

गर आप ऐसी जगह जाते हैं जहां पर इनका टेंपल है, जैसे शृंगेरी में भी इनका टेंपल है, लेकिन अगर आप ऐसी जगह नहीं रहते जहां इनका डायरेक्ट टेंपल है, आप किसी भी टेंपल में मां को दे सकते हैं, नहीं तो आप इनको चढ़ा के किसी ब्राह्मण की वाइफ को दे सकते हैं।

मां मातंगी और सूर्य ग्रह का संबंध

अच्छा, प्लैनेट के अगर सिस्टम पर मैं जाऊं, तो आपने पहले के भी कई पोस्ट में मुझे बताया है कि जो हर महाविद्या है, वो किसी ना किसी प्लैनेट से जुड़ी हुई है। और आपको अगर उस पर्टिकुलर प्लैनेट को ठीक करना है, तो आप इन महाविद्या की पूजा कर सकते हैं। मां मातंगी से कौन सा प्लैनेट जुड़ा हुआ है?

मां मातंगी से सन जुड़ा है, सूर्य। और सूर्य से बड़ा… ग्रहों के राजा हैं।

नहीं, वो ग्रहों का राजा है। तो आप ये सोचिए कि इनकी कितनी पावर होगी कि इनका जो आधिपत्य है, वो सूर्य पर है। और अगर आप इनकी पूजा शाम को नहीं कर सकते और अगर करें भी, तो भी आपको सुबह जो है सूर्य को अर्घ्य देना ही देना है।

ओके। तो जो लोग मां मातंगी को साधते हैं, वो सूर्य को अर्घ्य जरूर देंगे।

वैसे भी आई थिंक हमें आदत बना ही लेनी चाहिए सूर्य को अर्घ्य देने की।

पक्की हो जानी चाहिए जिंदगी में। स्पेशली जो मेरे फ्रेंड्स हैं, जो इस फील्ड में हैं, जो और हायर नॉलेज चाहते हैं, उनको सूर्य को इसलिए भी अर्घ्य देना चाहिए क्योंकि उनकी लाइफ में सेल्फ-डिसिप्लिन आए। जैसे सूर्य देखिए, कितने डिसिप्लिन से रोज उठते हैं और उसी समय आते हैं।

हमें सनराइज और सनसेट का टाइम पता होता है। सो सन रिप्रेजेंट्स ब्रिलियंस, इट रिप्रेजेंट्स डिसिप्लिन, इट रिप्रेजेंट्स होप। सन कभी नहीं कहता, ‘आज मैं सैड हूं, आज मैं कम चमकूंगा।’ नहीं, वो तो बादल उनके सामने आ जाते हैं, वो तो उतने ही तेज से चमक रहे हैं।

सो ही रिप्रेजेंट्स इटरनल होप। मां मातंगी आल्सो रिप्रेजेंट्स इटरनल होप। अगर आपकी लाइफ में आपको लगता है कि आप कहीं आउटकास्ट हैं, आप ग्रीफ में हैं, आप डिप्रेशन में हैं, आपको लग रहा है कि शायद आप में टैलेंट पूरा नहीं है या टैलेंट होते हुए भी आपकी इज्जत पूरी नहीं है, बिल्कुल जैसा फील हो रहा है, तो मां मातंगी इज द गॉडेस टू प्रे टू।

 

कैसे जानें कि मां मातंगी की कृपा मिल रही है?

 

अच्छा, एक चीज और भी मैं यहां पर समझूंगा आपसे कि मां मातंगी की कृपा अगर किसी को मिल रही है, जैसे आपने अभी एक तरीका बताया कि नवरात्र में आप एक खास इंस्ट्रूमेंट जिसमें भी आपको अपना परफेक्शन चाहिए, आप उसमें पूजा करिए, क्या माता की कृपा जब मिलने लगती है मातंगी की, तो कुछ खास तरीके के इंसिडेंट आपकी लाइफ में होने लगते हैं?

जी बिल्कुल, बहुत ही अच्छा प्रश्न है। सबसे पहले तो आपको चैनलिंग होने लगेगी। चैनलिंग का मतलब, आप आपको एक आवाज अपने दिमाग में आएगी कि आप इसको ऐसा करिए, जिसे मन की आवाज कहते हैं।

हां, मन की आवाज, हायर कॉन्शसनेस।

बिल्कुल, स्पिरिट गाइड्स, मां मातंगी, कुछ भी कह सकते हैं। आपको यह लगेगा कि हां, अब मुझे ये ऐसे नहीं, ऐसे करना है। आपको गाइडेंस आती रहेगी अपने आप, आपको भी नहीं पता कि कैसे।

तो जो चीजों को आप शायद एक साल से ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं, किसी सुर को, ताल को, लय को या किताब पढ़ते-पढ़ते बहुत लोगों को नींद आ जाती है। आपको पता है तुषार, स्पिरिचुअल बुक्स जब लोग पढ़ते हैं, तो उनको लगता है… ओ, कई लोग सो भी जाते हैं ।

 क्योंकि हम, वो जो ज्ञान आ रहा है, वो हमारे अंदर एब्जॉर्ब ही नहीं हो पा रहा। हमारे में और उसमें वाइब्रेशन का फर्क है। इसमें मैं यह बताना चाहूंगी कि जो हमारा कामाख्या पर पोस्ट था, बहुत लोगों ने मुझे कहा कि हम, हमें चार या पांच अटेम्प्ट्स के बाद ही हम पूरा पढ़ पाए

क्यों? क्योंकि किसी को लगा कि मेरे सर में दर्द हो गई है, किसी को लगा कि मुझे नींद आ गई है, किसी को लगा कि मुझे समझ में नहीं आया, उनको तीसरी या चौथी बार समझ में आया।

इसका क्या मतलब है? कि आपकी वाइब्रेशन है और किसी बुक की या पोस्ट की जो वाइब्रेशन है, अगर वो मैच ना करे, तो आप एंड तक पढ़ नहीं सकते। वो जो नॉलेज निकल के आ रही है, वह आपके साथ मैच ही नहीं कर रही है।

ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहाज्ञान और सरलता का अनुभव

तो मां मातंगी को आप प्रे करें। कई लोग ना फॉरेन लैंग्वेजेस सीख रहे होते हैं, जर्मन, स्पैनिश, फ्रेंच जी, और सीख ही नहीं पा रहे होते। संस्कृत। और वो कहते रहते हैं कि ठीक से नहीं आ रहा।

एस्ट्रोलॉजी सीखने की कोशिश कर रहे हैं पर योग याद नहीं रह रहे, कारक याद नहीं रह रहा। तो इसमें आप मां मातंगी को प्रे करें कि आपकी लर्निंग को आसान कर दे। आपके अंदर एक ऐसी विजडम आ जाएगी, आपने कहा क्या साइंस हैं? ईज आ जाएगा, आराम आ जाएगा।

आपको वही काम करने में नए आइडियाज आएंगे, आपके अंदर उत्साह भर जाएगा, आपको किसी के सामने हिचकिचाहट नहीं होगी, आप कॉन्फिडेंस से बोल सकेंगे।

अगर ये सन को रूल करती हैं, तो सन कॉन्फिडेंस का कारक है, हमारे सोलर प्लेक्सस चक्र का कारक है। सोलर प्लेक्सस इज अबाउट पावर। ओके। तो जब आपके अंदर कॉन्फिडेंस और पावर आने लगे, समझ जाइए कि मां मातंगी आप पर, उनकी कृपा आप पर हो गई है।

 

मां सरस्वती और मां मातंगी की पूजा में अंतर

 

तो जो लोग स्पिरिचुअल पाथ पर लगातार आगे बढ़ रहे हैं, मुझे लगता है कि उन लोगों को तो मां मातंगी से सबसे पहले जुड़ जाना चाहिए।

लोग मां सरस्वती से भी बहुत जुड़े हुए हैं, वाग् सिद्धि के लिए भी जुड़े हुए हैं। और मां मातंगी आपको बिल्कुल इन्हीं इंटेंस ऑकल्ट की एनर्जी की तरफ लेके जा सकती हैं।

जितने भी लोग तांत्रिक हैं, जो भी हीलर्स बनना चाह रहे हैं, वो मातंगी से जुड़ें और मातंगी मां की कृपा अगर मिली, तो हायर नोट पर वो ऑकल्ट की प्रैक्टिस कर पाएंगे, मंत्र सिद्धि के लिए कर पाएंगे। सपोज वो अपने हाथों से किसी को मंत्र लिख के देते हैं, तो वो मंत्र उस इंसान को काम कर जाएगा।

अगर आप कोई दवाई बनाते हैं, जैसे मैं बैच फ्लॉवर बनाती हूं, तो मैं मां मातंगी को ही याद करके बनाती हूं। तो जो ड्रॉप्स उसके अंदर जा रहे हैं, वो सिद्ध ड्रॉप्स हैं।

जब दवाई मेरा स्टाफ बनाता है या जब दवाई मैं बनाती हूं या मेरे क्लाइंट्स बनाते हैं, इन तीनों में बहुत फर्क है। तो मां मातंगी को आप ऑकल्ट के किसी भी काम में यूज कर सकते हैं और उनकी पावर्स को यूज कर सकते हैं ताकि वो आपको इजी कर दे, आपके लिए यह पाथ खोल दें

जन्मजात प्रतिभा और पिछले जन्म के कर्म

तो तुषार, स्पिरिचुअल पाथ को हम चूज नहीं करते, स्पिरिचुअल पाथ हमको चूज करता है। और यह डिपेंड करता है कि आप अपने पूर्व जन्म से क्या कोष लेकर आए हैं।

हो सकता है पूर्व जन्म में आप बस कुछ बनने ही वाले थे और आपकी मृत्यु हो गई। या आपको इतनी नॉलेज आ गई पर आप उसको इंप्लीमेंट ही नहीं कर सके किसी भी कारणवश, ठीक है?

लेकिन इस जन्म में जब आप आओगे और आप मां मातंगी के साथ जुड़ोगे, तो आपको सबसे पहले यह पता चलेगा कि आप वहां कहां छोड़ के आए। कैसे? आपको सडनली एक विद्या आ जाएगी जो लोगों को साल लगेंगे समझने में, आपके सामने वो नंबर्स बोलेंगे, चार्ट बोलेगा, आपके सामने एक इंट्यूशन लाई जाएगी

। क्लाइंट आपके सामने बैठा है, आपके सामने एक इमेज आ जाएगी कि इन दोनों की कल लड़ाई हुई थी, यह डेंजर में है। क्लाइंट ने आपको कुछ भी नहीं बोला, पर ये जो सामने पिक्चर आ गई, यह बताती है कि आपने पिछले जन्म में अपनी दिव्य दृष्टि को खोलने की कोशिश की थी जो इस जन्म में आपको खुली है।

आपकी, आपको उसका फल मिल गया या मिलने वाला है और आपको मां मातंगी से जुड़ना है। तो ऐसे लोग तो या तो 10 महाविद्या की वर्कशॉप करें या इन्हीं 10 दिनों में मां मातंगी को जरूर साधें।

अच्छा, जो लोग कहते हैं कि यह बॉर्न टैलेंट है, जैसे कहते हैं कि अरे, ये बच्चा तो बचपन से बहुत अच्छा सिंगर है। या ये कुछ अलग तरह की सुपर नेचुरल ताकतें किसी को मिलती हैं। ये आपने जो अभी कहा कि पिछले जन्मों में आपने उसकी प्रैक्टिस की थी, उस जन्म में आपको रिजल्ट नहीं मिल पाया और इस जन्म में आपको रिजल्ट मिल रहा है।

बिल्कुल, बिल्कुल सही कहा आपने। और कुछ ऐसे भी तो लोग हैं जिन्होंने पिछले जन्म में बहुत कुछ किया और इस जन्म में वो एक्टिवेट ही नहीं हुआ। उनके अंदर एक चाह ही रह जाती है, एक-एक इच्छा ही रह जाती है और उनको लगता रहता है कि मुझे ये करना है पर टाइम ही नहीं मिलता।

लेट्स से कथक, लेट्स से सिंगिंग, लेट्स से एस्ट्रोलॉजी, उनको कुछ तो खिंचाव आता है। ऐसे लोगों को इन नौ दिनों में मां मातंगी को जरूर साधना चाहिए क्योंकि वो उसके बाद आपको क्लियर कर देंगी कि आपका रास्ता क्या है।

आपने कहा कि यह मां सरस्वती का तांत्रिक फॉर्म है, तो मां सरस्वती की पूजा करना और मां मातंगी की पूजा करना में अंतर कितना है?

मां मातंगी की पूजा जो एक्सीलरेटेड फॉर्म है, आपके नीचे स्केट्स लग गए हैं। अब आप बिल्कुल तेजी से भाग सकते हैं। लेकिन इसमें यह भी एक जरूरी है कि हमें केयरफुल रहना है क्योंकि एनर्जी हाई है।

मतलब एक छोटी-सी तार है जिसमें से थोड़ा करंट लग सकता है और एक बहुत बड़ी तार है। तो बहुत बड़ी तार आपको जल्दी तो करा देगी, लेकिन आपको जुड़ना होगा। बहुत लोग 10 महाविद्या से डर जाते हैं, उनको लगता है बड़े उग्र फॉर्म हैं, क्या हो जाएगा?

जी, जब तक आप कुछ बहुत गलत ना करें, तो कुछ भी नहीं होगा। तो अपने मन का भाव साफ रखिए, एक बच्चे की तरह मां को अप्रोच कीजिए।

आपको फीलिंग खुद ही आ जाएगी। हो ही नहीं सकता कि आप ये पोस्ट पढ़ रहे हैं जब तक आप इस सब्जेक्ट के साथ पिछले जन्म में नहीं जुड़े हैं। हो ही नहीं सकता। अगर आप यह पोस्ट पढ़ रहे हैं, इसका मतलब आप पिछले जन्म में या तो हीलर थे, ऑकल्टिस्ट थे, मीडियम थे, साइकिक थे, कुछ तो थे, आकाशिक रिकॉर्ड रीडर थे, कीपर थे, पिरामिड्स के साथ आपका जुड़ाव रह चुका है।

इस जर्नी को आपको जरूर फिर आगे पर्स्यू करना है। और यह नवरात्रों का टाइम बहुत पावरफुल टाइम है इस जर्नी के ऊपर लाइट डालने के लिए, इसको, इसको, इसके आगे से पर्दा हटाने के लिए। तो मां मातंगी इज द परफेक्ट चॉइस फॉर दैट।

क्या सफल लोग तंत्र की सहायता लेते हैं?

मां मातंगी की पूजा कौन लोग करें, यह तो आपने बताया। लेकिन कुछ ऐसी फैमिलीज होती हैं, जैसे क्योंकि मां मातंगी की हम बात कर रहे हैं, तो मैं ये बात कर रहा हूं जहां पर पीढ़ी दर पीढ़ी आप देखेंगे, तो सब एक ही लाइन में हैं। जैसे म्यूजिशियन है कोई, उसके सिंगर है उसका, तो वो भी सिंगर है। चेन में चली आती है। क्या वो मां मातंगी से हो रहा है?

बिल्कुल। जो उनका जुड़ाव है और जो उनकी उन्नति है। चलो जुड़ाव तो हो गया, उसके बाद उनकी प्रोग्रेस, उनकी उन्नति। तो कहीं ना कहीं या वो मां मातंगी को बहुत मानते हैं। यहां पर मैं आपको यह कहना चाहूंगी कि लोग प्रिटेंड करते हैं कि वे यह सब नहीं करते। तंत्र सब सक्सेसफुल लोग करते हैं।

ओके। जितने भी लोग किसी… आपके तो बड़े हाई-प्रोफाइल क्लाइंट्स हैं, तो आप नाम तो मत लीजिएगा, लेकिन आप क्या इस बात को कह सकते हैं कि बड़े-बड़े लोग जो बड़े-बड़े पदों पर होते हैं, वो भले ही बाहर जाकर शो ऑफ करते हैं कि नहीं ये सब उनकी खुद की प्रैक्टिस की वजह से है, बट वो कहीं ना कहीं तंत्र हेल्प लेते हैं?

बिल्कुल लेते हैं। मेरे से हेल्प लेते हैं। मेरे से पूजाएं कराते हैं। मेरे पुलिस और बिल्कुल पॉलिटिशियंस, बॉलीवुड के लोग आते हैं, सिंगर्स आते हैं, सिंगर्स की वाइफ्स आती हैं, एथलीट्स आते हैं, जो लोग बहुत इंटरनेशनल लेवल पर खेलने जाते हैं, वो आते हैं हरियाणा से। तो वो सब, वो, हां, वो सब तंत्र की हेल्प लेते हैं। बिल्कुल सब तंत्र की। बिजनेसमैन लेते हैं।

ओके। बिजनेसमैन लेते हैं। कुछ ऐसे लोग आते हैं जो प्रिजन में जा चुके हैं, जेल जा चुके हैं, उनको अपनी लाइफ में आगे कोई कुछ करना है। बहुत सारे तरह के लोग आते हैं और सब तंत्र की हेल्प लेते हैं। लोग कहते हैं सिर्फ कि वे हो, ये नहीं, वो नहीं। लेकिन तंत्र एक सटीक तरीका है किसी चीज को सिद्ध करने का। और जब तक आपकी इंटेंशन अच्छी है, तंत्र को यूज करना गलत नहीं है।

 

निष्कर्ष

चलिए, बहुत अच्छा लगा मुझे आज के इस पोस्ट में आपसे बात करके कि मां मातंगी पर हमने बात की और क्योंकि पोस्ट लिखना और इस फील्ड में आगे बढ़ना, यह भी कहीं ना कहीं मां मातंगी की कृपा बहुत जरूरी है। तो मुझे लगता है मुझ पर और आप पर, दोनों पर मां मातंगी की कृपा बनी रहनी चाहिए। आज के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

थैंक यू।