Category: दैविक साधना

दैविक साधना davik-sadhna हम इस श्रेणी में देवी देवताओं की रहस्मय साधना पर चर्चा करेंगे ! जिस साधना को आप अपने घर पर सिद्ध करके लाभ प्रपात कर सकते है ! gurumantrasadhna.com

Jind Baba sadhna चमत्कारी जींद बाबा की 11 दिन की आसान साधना सभी मनोकामनाए पूर्ण करेगी ph. +91 85280-57364

Jind Baba sadhna चमत्कारी जींद बाबा की 11 दिन की आसान साधना सभी मनोकामनाए पूर्ण करेगी

 

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Jind Baba sadhna चमत्कारी जींद बाबा की 11 दिन की आसान साधना सभी मनोकामनाए पूर्ण करेगी गुरु मंत्र साधना  में आपका हार्दिक स्वागत है दोस्तों जिन और जिंद  यह दो अलग-अलग चीज होती हैं जिन जो होते हैं। वह अलग होते हैं और जिंद जो है अलग होते हैं दोनों के पास शक्ति जो होती है वो बराबर होती है। फर्क कितना होता है यह महाकाली की सेवा में होते हैं। जिंद जो हैं वह अच्छे कार्यों के लिए ज्यादा प्रयोग किए जाते हैं और अच्छे कार्य को ही करते हैं।

जो कि जिन होते हैं वह गलत कार्य को भी करते हैं गलत कार्य पर चलाए भी जाते हैं। बहन बेटी पर मोहित  होकर उनको दुख भी देते हैं जिंद  में बात करू हैं स्थान देवता से पूजे जाते है  के नाम से पूजा होती और वह बहुत सारे संकटों को दूर भी करते हैं जींद जो होते है  दूर करते हैं इनके राज्सथान बहुत स्थान है। जिंद बाबा होते हैं वह बहुत सारे कार्य को करने में सक्षम होते हैं बहुत सारी आपकी इच्छाओं को पूर्ण करने में सक्षम होते हैं।

तो आज मैं आपको जिद  बाबा की साधना के बारे में बता रहा हूं। जिन बाबा की सेवा के बारे में बता जो कि बहुत सरल साधना है और बहुत ही आसान साधना है। बहुत ही आसान  ना कोई खर्च है ज्यादा ना कोई ध्यान नहीं लगाना है कुछ नहीं करना, मैं आपको बता रहा हूं क्या करना है ना इसमें कोई किसी तरीके डर नहीं  है और बात रही गुरु के तो भगवान शंकर को गुरु मानकर आप इस सेवा को कर सकते हैं। अब भगवान शंकर को किस प्रकार से गुरु बनाया जाता है धरण किया जाता है वह मैं आपको अगली पोस्ट  में बताऊंगा।

Jind Baba sadhna चमत्कारी जींद बाबा  साधना विधि 

तो जब इस साधना को किया जाता है तो यह ग्यारह शुक्रवार  शनिवार को की जातीनी एक हफ्ते में दो शुक्रवार  शनिवार एक  । एक एक हफ्ते में दो शुक्रवार  शनिवार हो गया ना। तो वह एक  माने जाएंगे यानी इस शुक्रवार को शनिवार के ग्यारह जोड़े आपको करने होते हैं। अब करना क्या है इस साधना को। इसमें जो भोग जाता है, आक आपके पेड़ के नीचे भोग जाता है और वह दिन के छिपने से पहले आप सुबह कर  सकते बिल्कुल पाक साफ होकर जाना होता है।

सुनसान  जगह पर आपका पेड़  ढूंढना है आपको और आपके पेड़  जब आपको मिल जाए तो चावल और हल्दी यानी चावलों को हल्दी में रंग ले पानी डाल और उन चावलों को थोड़े से चावल लेकर आपको आपके पेड़ के नीचे जाने हैं। जाना है और वहां पर आपको प्रार्थना करने जिंद बाबा मैं आपको दावात देने आया हूं, यह जिंद बाबा मैं आपको दावत देने आया हूं। स्वीकार करें। कल मैं आपका भोग लेकर आऊंगा।

इतना कहकर आपको आ  जाना और मुड के नहीं देखना पीछे आप शुक्रवार को करते हैं और फिर शनिवार को आपको जो भोग ले जाना होता है। दिन छुपने से पहले दो तो पानी की रोटी होनी  चाहिए पानी की रोटी पानी की रोटी बनाते ना एक तो चकले बनाते हैं पोलथान  वाली रोटी होती

पानी की रोटी हाथों से बनाते हैं दो पानी की रोटी और दो ही हरि मिर्च और दो ही प्याज और दो पानी की बोतल छोटी फिर दो पानी की थैली। यह लेकर जाना होता है

शनिवार को शनिवार को जब जाते हैं दिन  छिपने से पहले दो पानी की रोटी लेकर तो उनके ऊपर एक हरी मिर्च और एक प्याज यह रख लें यानि कि अलग-अलग दो रोटी, दो प्याज हो गई, दो हरी मिर्च हो गई वह सामग्री जो है भोग है उनका यह आपके पेड़  के नीचे रख दे और जिद  बाबा से प्रार्थना करें, जिद  बाबा यह आपका भोग है इसे स्वीकार करें पानी की  थोड़ा सा वहां पर पानी गिर दे।

और जब आप यह  अपना भोग स्वीकार करो, जो भी आपकी इच्छा हो, वह इच्छा आपको वहां पर बोलनी है। यह प्रक्रिया आपको हर शुक्रवार, शनिवार करनी है यानि शुक्र शनिवार ग्यारह जोड़े आपको करनी होती है है, तो आप देखेंगे कि जैसे-जैसे आप आपके सेवा बढ़ती जाएगी तो ग्यारह शुक्रवार, शनिवार से पहले आप जो इच्छा हो जाएगी। यह स्वयं सिद्ध किया हुआ कार्य मैं आपको बता रहा जो मैंने खुद किया था।

तो इसमें ना तो किसी खास उसकी जरूरत की जरूरत ना खास मंत्र जने की जरूरत है, सिर्फ से है। इस से को आप करते हैं तो  ही इच्छा ऐसी होनी चाहिए जो कि लाभ हो, किसी को नुकसानदायक ना हो।

आपके घर की कोई ऐसी बीमारी है जो लंबे समय से चल रही है, ठीक घर में बरकत नहीं हो रही, आपकी नौकरी नहीं लग रही, काम में मन नहीं लगता, यह सारी चीजें जो है, यह सारी चीजों को हल करने के लिए जो  है वह सक्षम है। बहुत सारे राजस्थान के इलाकों में जिद  बाबा की पूजा होती है, इंटरनेट पर भी आपको देखने को मिल जाएगा। वो मैंने आपको बताया।

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चौसठ योगिनी कौन है – 64 योगिनी की कथा – चौसठ योगिनी रहस्य ph.85280 57364

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चौसठ योगिनी कौन है – 64 योगिनी की कथा – चौसठ योगिनी रहस्य ph.85280 57364

 

chausath yogini rahasya चौसठ योगिनी कौन है – 64 योगिनी की कथा – चौसठ योगिनी रहस्य चौसठ योगिनीयों का प्रादुर्भाव मां काली से ही हुआ है। चौसठ योगिनीयों सृष्टि के विभिन्न आयामों पर शासन करती हैं और हर एक योगिनी का एक विशिष्ट चरित्र है। मुख्यतः इनका संबंध या कहें सामान्य कारक आठ मात्रिकाओं से है।

guru mantra sadhna आपका अभिनंदन करता है। सनातन धर्म के साथ सम्बंधित रोचक तथा ज्ञानवर्धक वृतांतों के लिए बने अवश्य रहे । हम हमारे धर्म ग्रंथों से ली गई कथाएं डालते हैं। 

आदि शक्ति काली के ही भिन्न-भिन्न अवतारी अंश हैं और देवी महात्मा के अनुसार इन आठ देवियों ने शुंभ और रक्तबीज । राक्षसों के विरुद्ध युद्ध में मां दुर्गा की सहायता की थी और देवी दुर्गा ने स्वयं मातिकाओं की रचना की थी।

इनमें से सात दी शक्तियों को संबंधित देवों के ही नारित्व रूप माना जाता है। ये सात देवी  अपने पतियों के वाहन तथा आयुद्ध के साथ यहाँ उपस्थित होती हैं। आठवीं मात्रिका स्वयं मां काली है। हर एक मातिका की सहायक आठ शक्तियां हैं इसीलिए इनकी संख्या चौसठ हो जाती है।।

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सर्वप्रथम जानते हैं कि यह मातिकाएं कौन- कौन है और किन देवों से संबंधित है। नंबर एक।
ब्रह्माणी भगवान ब्रह्मा उनके चार सिर और चार भुजाएं हैं। ब्रह्मा जी की ही तरह इनका वाहन हंस है। नंबर दो महेश्वरी भगवान शिव, भगवान शिव की ही तरह उनकी जटाओं में अर्धचंद्र है और उनका वाहन नंदी है। चतुर्भुजाओं में त्रिशूल, खटगा आदि हैं। नंबर तीन कमारी कार्तिकेय जी उनका वाहन मयूर है। वे अपने हाथों में शक्ति, दंड आदि धारण करती हैं।

नंबर चार। वैष्णवी भगवान विष्णु। वनमाला पहने हुए देवी वैष्णवी के दो हाथों में चक्र  हैं। इनकी सवारी विष्णु जी की ही तरह गरुड़ ही है। नंबर पांच  देवराज इेंद्र। वे अपने वहां हाथी पर विराजमान होकर वज्र धारण करती हैं। नंबर छः। वाराही वारा भगवान विष्णु के वारा अवतार की ही तरह दिन देववी का चेहरा वाराह व धड़ मनुष्य का है। हाथों में दंड खड़ग खेत का और पाश धारण करती हैं और कहीं कहीं भैंसे पर भी सवार दिखाई गई हैं।

नंबर सात नर से ही भगवान नरसिंह इनका चेहरा सेह व धड़ मानव का है और हाथों में शंकर, चक्रृत, शूल डमरु आदि धारण करती हैं और अंत में आती है। मां काली जिन्हें चामुंडा के नाम से भी जानते हैं, एकमात्र। ऐसी मात्रिका हैं जिन्हें किसी भी देव के स्त्री शक्ति अवतार के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाता।

 यह देवी के हाथों में कपाल। शूल नर मुुंड तथा अग्नि है तथा इनका वाहन सियार है, जैसे हमने पहले बताया योगिनीिया, साक्षात आदि काली के ही अवतार हैं तथा सदैव माता पार्वती की सखियों की ही तरह उनके साथ ही रहती हैं। देवी पार्वती द्वारा लड़े गए प्रत्येक युद्ध में समस्त योगिनियों ने भाग लिया था और अपनी वीरता का परिचय दिया था।

महाविद्याएं सिद्ध विद्याएं भी योगनियों की ही श्रेणी में आती हैं। यह भी मां काली की ही भिन्न-भिन्न अवतारी अंश हैं। समस्त योगिनिया अलौकिक शक्तियों से संपन्न है तथा इंद्रजाल, जादू, वशीकरण, मारण,  आदि कर्म इन्हीं की कृपा द्वारा सफल हो पाते हैं। मुख्य रूप से आठ योगिनिया अपने गुणों तथा स्वभाव से भिन्न-भिन्न रूप धारण करती हैं।

ये सभी तंत्र तथा योग विद्या में भी निपुण है। स्कंद पुराण के काशी खंड। पूर्वाध के अनुसार भगवान शंकर राजा देवोदास से काशीपुरी प्राप्त करना चाहते थे परंतु राजा देवोदास धर्म पूर्व प्रजा का पालन करते और उनके राज्य में अपराध नाम की कोई चीज़ न थी। भगवान शिव के कहने पर समस्त देवताओं ने उन सर्वत्र शुद्ध राजा के छिद्र अर्थात कोई कमी ढूंढने की बहुत चेष्टा की किन्तु वह असफल रहे।

इंद्र आदि देवताओं ने देवोदास के राज्य तथा शासन को असफल बनाने के लिए अनेक प्रकार के विघ्न उपस्थित किए किंतु राजा ने अपने तपोबल से उन सब विघनों पर विजय पाई।   मंदराचल से महादेव जी ने चौसठ योगिनियों को राजा के छिद्र  दोष देखने के लिए काशी भेजा।

उन योगिनियों ने विभिन्न रूप धारण कर लिए। अलग अलग रूप  धारण कर अलग-अलग कार्यों में लग गई वह योगनिया बारह महीनाों तक काशी में रहकर निरंतर चेष्टा करते रहने पर भी राजा का कोई छिद्र अर्थात दोष ना पा सकें परंतु वह सब लौटकर मंदराचल भी नहीं गई।

तब से लेकर आज तक योगिनियों ने कभी भी काशी को नहीं छोड़ा हालांकि वे तीनों लोकों में घूमते हैं। आगे व्यास जी के पूछने पर स्कंददेव इन योगनियों के बारे में बताते हैं कि यदि कोई मनुष्य इन चौसठ नाम का प्रतिदिन , दोपहर और संध्या के समय जप करें तो उसके। भूत प्रेत द्वारा दिए गए सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

इनके चौसठ नाम का पाठ करने वाले को ना डाकिनी शाकिनीष्मंड और ना ही कोई अन्य कष्ट दे सकता है। यह नाम, युद्ध, वाद, विवाद आदि में भी विजय प्रदान करते हैं। जो योगिनी पीठों की सेवा करता है उसे वाछित शक्तियां प्राप्त। और यदि कोई अन्य मे्रो को भी उनके आसनों के सामने दोहराता है उसे भक्ति  प्राप्त होती हैं।

यज्ञ, पूजा और प्रसाद तथा धूप और दीपक के समर्पण से योगिनी जल्दी ही प्रसन्न हो जाती हैं और वे सभी इच्छाओं को अवश्य पूर्ण करती हैं। अश्व युज के महीने में शुक्ल पक्ष के पहले चंद्र के दिन से शुरू होकर नौवे दिन तक मनुष्य को योगिनियों की पूजा करनी चाहिए। इससे वह जो चाहे प्राप्त कर सकता है।

काशी तीर्थ यात्रा करते समय इनकी आराधना भी अवश्य करनी चाहिए अन्यथा उनके कार्यों में ये विघन डाल सकती है। अलग-अलग पुराणों में इन चौसठ योगििनियों के नामों में थोड़ा अंतर अवश्य मिलता है।

वैसे तो भारत में इनके कई पीठ हैं पर मुख्य पीठ थोड़ीसा और मध्यप्र प्रदेश में स्थित है। जय मां काली। आज के पोस्ट  में बस इतना ही। आशा करते हैं कि आपको आज का पोस्ट  पसंद आया होगा। इसे लाइक अवश्य करें।

किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए आप सबसे क्षमा चाहते हुए आपसे निवेदन है कि प्रेम पूर्वक परमपिता परमात्मा को ह्रदय  में धारण करें और बोले वैदिक सनातन धर्म की सदा ही जय ।

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हनुमान देह रक्षा मंत्र – शरीर रक्षा मंत्र- प्राण रक्षा मंत्र ph. 85280-57364

हनुमान देह रक्षा मंत्र - शरीर रक्षा मंत्र- प्राण रक्षा मंत्र इस शाबर मन्त्र के आराध्य देवता श्री हनुमानजी हैं। इसे सिद्ध करके कहीं भी आत्मरक्षा के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है।

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हनुमान देह रक्षा मंत्र - शरीर रक्षा मंत्र- प्राण रक्षा मंत्र
हनुमान देह रक्षा मंत्र – शरीर रक्षा मंत्र- प्राण रक्षा मंत्र

हनुमान देह रक्षा मंत्र – शरीर रक्षा मंत्र- प्राण रक्षा मंत्र इस शाबर मन्त्र के आराध्य देवता श्री हनुमानजी हैं। इसे सिद्ध करके कहीं भी आत्मरक्षा के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है। शत्रुदल से घिर जाने पर अथवा भूत- प्रेतादि से आक्रांत होने पर इसका पाठ करते ही सारी आपदा दूर हो जाती है।

इस मन्त्र का जप करना ‘बीर चलाना’ कहा जाता है। यदि कोई व्यक्ति इसे विधिवत् सिद्ध कर चुका है, तो वह कैसे भी संकट के समय इसकी सहायता से संकट मुक्त हो सकता है।

कोई पैशाचिक विघ्न हो, प्रेतादि वायव्य आत्माओं का उत्पीड़न हो अथवा किसी के द्वारा किया गया कोई अभिचार कृत्य पीड़ा दे रहा हो या शत्रुओं ने घेर लिया हो अथवा हिंसक पशुओं के बीच पड़ जाने से प्राण संकट उत्पन्न हो गया हो तो ऐसे सभी अवसरों पर यह मन्त्र तुरन्त ही अपनी अमोघ शक्ति से आपदा का निवारण करके साधक को संकट मुक्त कर देता है।

हनुमान देह रक्षा मंत्र – शरीर रक्षा मंत्र- प्राण रक्षा मंत्र

जय हनुमान बारा वर्ष का जवान हाथ में लड्डू मुख में पान हांक मारत आय बाबा हनुमान मेरी भक्ति गुरु की शक्ति फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा ।

विशेष – जैसा कि कई बार इस बात को स्पष्ट किया जा चुका है कि किसी भी मन्त्र को प्रारम्भ में दीपावली या अन्य किसी शुभ तिथि को विधिवत् जपकर एवं हवन आदि क्रिया करके सिद्ध कर लेना चाहिए, क्योंकि सिद्ध मन्त्र ही प्रभावी होते हैं। सिद्ध किये जाने के बाद वे कभी भी पढ़े जाएं, तुरन्त अपना प्रभाव दिखलाते हैं।

साधक को प्रतिवर्ष दीपावली की आधी रात में अपने उस मन्त्र को इसी प्रकार पुनः सिद्ध करके वर्ष भर के लिए सशक्त कर लेना चाहिए। वैसे यदि कोई व्यक्ति अपने मन्त्र को प्रत्येक मंगलवार और रविवार की रात्रि में लोबान की धूनी देते हुए एक सौ पाँच सौ या एक हजार बार जप लिया करे तो वह मन्त्र निश्चित रूप से इन्द्र के वज्र की भांति अचूक, सशक्त और त्वरित परिणाम देने वाला हो जाता है।

प्रायः इस मन्त्र के सम्बन्ध में ग्रामीण जनों में कहा जाता है कि किसी ने ‘बीर चला दिया है, वस्तुतः बीर चलाना यही मन्त्र है। हनुमान जी स्वयं महावीर हैं, इसलिए उनका यह मन्त्र भी वीर की भांति चलकर अपना रहस्यमय एवं चमत्कारी प्रभाव दिखलाता है।

https://www.youtube.com/watch?v=3-dNYkY3I3c&pp=ygUmaGFudW1hYW4gYmFqcmFuZyBiYWFuIGhpc3RvcnkgaW4gaGluZGk%3D

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मनपसंद पत्नी प्राप्ति के उपाय और सुंदर पत्नी प्राप्ति मंत्र Ways to get a desired wife and mantra to get a beautiful wife ph. 85280-57364

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मनपसंद पत्नी प्राप्ति के उपाय और सुंदर पत्नी प्राप्ति मंत्र गुरु मंत्र साधना में  आपका स्वागत है आज मैं आपको इस वीडियो में बताने वाली हूं जो मंत्र है दुर्गा सप्तशती के अंतर्गत है जिन लड़कों का विवाह नहीं हो रहा है जो बाधा  आ रही है विवाह में वह दूर होती हैं और अच्छी सुंदर अनुकूल पत्नी प्राप्त होती है ,तो इस मंत्र को जो विधि है कितनी संख्या में जपे किस विधि से जपे और किन नियमों का पालन करें।

यह सब जानकारी में आपको इस पोस्ट में दूंगा  मैंने आपको बताया तो चलिए अब हम  इससे पहले मैं आपको बता देता हूं कि इसी प्रकार की जानकारियां जो हमारे हिंदू धर्म से जुड़ी हुई होती है व्रत और त्योहार से जुड़ी हुई होती हैं।  बहुत सारे मंत्रो  के बारे में हमारे शास्त्रों में बताए गए हैं। 

जिससे जपने से हमारी इच्छाएं पूर्ण होते हैं।  और हमारी जो कठिनाइयां हैं दूर होती है और बहुत सारे उपाय भी बताए गए हमारे शास्त्रों में आप तक पहुंचती रहती है। तो ऐसे ही जानकारी के लिए वेबसाइट से जुड़ेगा ताकि आने वाली हर पोस्ट आप तक पहुंच सके। 

इस मंत्र को जपने की विधि और कितनी संख्या में हम इसका जाप करें सबसे पहले किसी भी मंत्र का जब हम शुद्ध उच्चारण करते हैं।  तभी उसका हमें अनुकूल फल प्राप्त होता है तो उच्चारण पर विशेष ध्यान दें।  आपको इससे संबंधित अगर शुद्ध उच्चारण करने में कोई दिक्कत आ रही है योग्य पंडित से मिले। 

इस  जाप  को करने के लिए आप नवरात्र से भी प्रारंभ कर सकते हैं। नवरात्र के किसी भी दिन आप इस जप को प्रारंभ कर सकते हैं ,या फिर नवरात्रों के अतिरिक्त दिनों में भी आप इसका जाप  कर सकते हैं। 

मनपसंद पत्नी प्राप्ति के उपाय और सुंदर पत्नी प्राप्ति मंत्र को कब शुरू करें  ?

शुभ तिथि शुभ दिन देख कर इसका जप  प्रारंभ करना चाहिए।  शुक्ल पक्ष के अच्छी तिथि से इसका जाप  प्रारंभ करना चाहिए।  इस मंत्र को नवरात्रि के अतिरिक्त दिनों में भी शुरू किया जा सकता है।  इसका जब तिथि से इस जाप का प्रारंभ कर लेना चाहिए या किसी भी आप शुभ मुहूर्त से भी इस जप को प्रारंभ कर सकते हैं। इस जप को आप  पूर्व की ओर मुख करके बैठे। 

मनपसंद पत्नी प्राप्ति के उपाय और सुंदर पत्नी प्राप्ति मंत्र

 

(१) पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम् ।

  तारिणीं दुर्गसंसार सागरस्य कुलोद्भवाम् ॥

(दुर्गा. सप्त., २४)

इस मंत्र का अर्थ है  सुंदर पत्नी प्राप्त हो मानो अनुकूल चलने वाली मन  के अनुसार चलने वाली  मेरे मन के अनुसार हो इस संसार सागर से पर तारने वाली हो यानी कि इसमें सहायक हो  भक्त हो जो अपनी संसार सागर से तारे और कुलीन हो यानी कि अच्छे कुल की हो  इस प्रकार स्त्री के कामना इस मंत्र में की गई है और इसी के अनुसार फल भी प्राप्त होता है। 

मनपसंद पत्नी प्राप्ति के उपाय और सुंदर पत्नी प्राप्ति मंत्र विधि 

प्रातः काल शुद्ध होकर दुर्गाजी के चित्रपट या मूर्ति पर लाल पुष्प समर्पित करें। दीप प्रज्वलित करके षोडशोपचार पूजन करें, तथा उपर्युक्त मन्त्र की कम से कम 5 माला प्रतिदिन जप करें और  अर्गला स्तोत्र  १०८ बार जप करें । किसी ब्राह्मण से जप कराना हो तो भी एक माला जप स्वयं विवाह सम्पन्न होने तक करना चाहिए। साथ ही दुर्गासप्तशती का इसी मन्त्र से सम्पुट करके 18 पाठ करना या कराना चाहिए। अधिक तथा सम्पूर्ण जानकारी के लिए हमारी प्रकाशित पुस्तक ‘दुर्गा सप्तशती’ (भाषा- टीका) पढ़ें।

(२) ‘ॐ क्लीं विश्वावसुर्नाम गन्धर्वः कन्यानामधिपतिं लभामि देवदत्तां कन्यां सुरूपां सालंकारां तस्मै विश्वावसवे स्वाहा ।’

सवा लाख जप करने या कराने के बाद दशांश हवन, तर्पण, मार्जन और ब्राह्मण भोजन अवश्य कराना चाहिए।

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दिव्य शक्ति प्राप्त करने का मंत्र -रक्षपाल देवता साधना Divya Shakti Prapt Karne Ka Mantra ph.85280 57364

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दिव्य शक्ति प्राप्त करने का मंत्र -रक्षपाल देवता साधना Divya Shakti Prapt Karne Ka Mantra

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दिव्य शक्ति प्राप्त करने का मंत्र -रक्षपाल देवता साधना यह साधना सौम्य  और सात्विक है इस साधना से रक्षपाल देवतासाधक को दिव्य शक्ति प्रदान करते है और मनचाहा वरदान भी प्रदान करते है 

दिव्य शक्ति प्राप्त करने का मंत्र Divya Shakti Prapt Karne Ka Mantra

माता भेखलिया दे ढकें जन्म लेया । ताम्ब कुण्डे सिङ्ग लेया, बारह माह खेल खिलाया। अज वडेरा, कल वडेरा, पत्थाया पत्यया । घुंघयां सरलियां जोतां गांदा। ढाकें तेरी रम्भी विराजे, सिरें तेरें लम्बा टोप विराजे । पिट्ठी तेरिया किरलू । हत्थें तेरें नरेलू सोहन्दा, चिट्ठा चोला लम्बा डोरा । मण्डिया- दा, मण्डियाल कुल्लेए-दा कोली चम्वे-दा, चम्वलाय मणि महेशे दा, चेला सिमरिया ओखिया वेला दर्शन देने गुरु मेरे । मेहरा दिया घडिया औणा । सदेयां औणा भेजेयां जाणा, मैं बार-बार गुलाम तेरा ।

Divya Shakti Prapt Karne Ka Mantra दिव्य शक्ति प्राप्त करने का मंत्र साधना विधि

जल, गन्ध, अक्षत, फूल, धूप, ज्योति, नैवेद्य के रूप में हलुवा और हाथ से काता हुआ सूत – यह आठो सामग्री लेकर रात्रि एक प्रहर बाद (सबेरे तीन और चार बजे के बीच) पीपल के वृक्ष के नीचे जाए। पीपल के चारो तरफ प्रदक्षिणा कर दे। जनेऊ के रूप में तीन धागे पीपल के चारो ओर बाँधे; पत्तों पर पूजन सामग्री रखे। धूप- ज्योति जलाये फिर गुरु व गणेशजी का सुमिरन करके पीपल के नीचे एक माला जप करे।

जप के बाद ज्योति लेकर घर वापस आ जाय और अपने पूजन कक्ष में पूजनोपरान्त फिर एक माला जप करे। रविवार के दिन सुबह-शाम घर पर दो माला जप करें। ४१ दिन के भीतर ही रक्षपाल प्रकट होकर वर प्रदान करते हैं।

शत्रु नाशक हनुमान मंत्र – गुप्त शत्रु की उल्टी गिनती शुरू ph. 85280-57364

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शत्रु नाशक हनुमान मंत्र - गुप्त शत्रु की उल्टी गिनती शुरू shatru nashak hanuman mantra

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शत्रु नाशक हनुमान मंत्र shatru nashak hanuman mantra गुप्त शत्रु की उल्टी गिनती शुरू

ॐ नमो हनुमंत बलवंत माता अजंनी पुत्र हल हलंत आशो चढ़ंत, आओ गढ़ किल्ला तीरंत आओ लंका जाल बाल भस्म करि आओ ले लांगू लंगूर ते लपटाय सुमिरते पटका ओचंद्री चंद्रावली भवानी मिल गावै मंगलवार जीत राम लक्ष्मण हनुमान जी आओ जी तुम जाओ सात पान का बीड़ा चाबत मस्त सिन्दूर चढ़ो आओ, मंददरी के सिंहासन डुलंता आओ यहं आओ हनुमान माया जाग तें नृसिंह माया आगे, भैरों किलकिलाय ऊपर हनुमंत गाजैं, दुर्जन को मार दुष्ट को मार संहार, राजा हमारे सत्त गुरु हम सत्त गुरु के बालक मेरी भक्ति गुरु की शक्ति फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा ।

शत्रु नाशक हनुमान मंत्र विधि 

सर्वप्रथम किसी शुभ मंगलवार के दिन नहा-धोकर एकांत व पवित्र स्थान में हनुमानजी का चित्र (या मूर्ति) रखें और उनकी पूजा करें। तत्पश्चात् इस मन्त्र का एक माला जप करें। यह क्रम दैनिक पूजा के रूप में पूरे इक्कीस दिनों तक चलना चाहिए। इस अवधि में साधक पूर्ण संयम, पवित्रता, ब्रह्मचर्य और निष्ठापूर्वक रहे। उसे हर तरह से स्वयं को सात्विक विचारों में लीन और हनुमंत चिंतन में मग्न रखना चाहिए।

पूजा में प्रतिदिन सात लड्डू और सात पान बीड़े नैवेद्य रूप में अर्पित करने चाहिए। इस प्रकार इक्कीस दिनों तक (यदि हो सके तो इकतालीस दिनों तक) प्रतिदिन नियम-निष्ठा के साथ एक माला (एक सौ आठ दानों की) जप करते रहें । अवधि पूरी हो जाने पर यही मन्त्र पढ़कर इक्कीस बार आहुति देते हुए हवन करें।

इस प्रकार यह मन्त्र सिद्ध हो जाएगा। मन्त्र सिद्ध हो जाने पर यदि कभी आवश्यकता पड़े तो शत्रु के दमन हेतु इसका प्रयोग किया जा सकता है। प्रयोग का नियम यह है कि कहीं एकांत में भूमि पर एक मानवाकृति बनाएं। उसे शत्रु का चित्र मानकर, उसे बंधन में करने के लिए मोम की चार कीलें बनाकर चित्र के चारो ओर जमा दें।

ध्यान रहे, चित्र बनाने से लेकर अंत तक साधक मन ही मन उपर्युक्त मन्त्र को जपता रहे। चित्र बन जाने और उस पर मोम की कीलें लगा देने के बाद हनुमानजी की पूजा करें और नैवेद्य में खीर अर्पित करें। इसके पश्चात् चित्र की छाती पर शत्रु का नाम लिखें और मन्त्रोच्चारण करते हुए उसके सिर पर जूते या चप्पल से दो बार प्रहार करें। इस प्रयोग से शत्रु का दमन हो जाएगा।

शत्रु नाशक हनुमान मंत्र – गुप्त शत्रु की उल्टी गिनती शुरू

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sham Kaur Mohini माता श्याम कौर मोहिनी की साधना और इतिहास -ph.85280 57364

 

mahakal shatru nashak mantra महाकाल शत्रु नाशक मंत्र ph. 85280-57364

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mahakal shatru nashak mantra महाकाल शत्रु नाशक मंत्र इस साधना से आप शत्रु के नाश होगा और शत्रु पागल हो जाएगा ph.8528057364

महाकाल शत्रु नाशक मंत्र

ॐ काली कङ्काली महाकाली के पुत्र कङ्काल भैरव ! हुक्म है – हाजिर रहे, मेरा कहा तुरन्त करे। मेरा भेजा रक्षा करे। लान बाँघूँ बान चलते के-फिरते के औसान बाँघूँ। दश दिशा, दसों सूर नव-नाथ बहत्तर वीर बाँधू, पाँच हाथ की काया, कुबेर की माया बाँयूँ । फूल में भेजूँ — फूल में जाय । मेरे ‘अमुक’ शत्रु का कलेजा खाय। थर-थर काँपे, हल-हल हिले, गिर- गिर पड़े। मेरा भेजा सवा मास, सवा दिन, सवा पहर ‘अमुक’ को बावला न करे, तो माता काली की शय्या पर पग धरे । वाचा छोड़ कुवाचा करे, तो धोबी की नाँद, चमार के कुण्ड में पड़े, रुद्र की नेत्र की ज्वाला पड़े, पारबती के चीर पर चोट पड़े। दुहाई काली माई की। कामरू कामाक्षा की। गुरू गोरखनाथ की ।

https://www.youtube.com/watch?v=_FZEqSPCgPQ&pp=ygUHYmhhaXJhdg%3D%3D

गाय के गोबर का चौका ( लीपकर ) देकर दक्षिण की तरफ मुख करके बैठें। ‘कालरात्रि’ में यह साधना करना उत्तम है। पूजन में लाल कनेर का फूल, सिन्दूर, नींबू, लौंग और लड्डू आदि रखें। चार मुख का दिया, फूलों की माला भी रखें। १०८ बार मन्त्र का जप करें और इतनी ही बार चीनी और घी मिलाकर हवन करें।

हवन की समाप्ति पर यदि भैरव जी प्रकट हों, तो उन्हें फूलों की माला अर्पित करें, लड्डू का भोग दें और प्रणाम कर उनसे कार्य सिद्ध करने की प्रार्थना करें। १. मन्त्र सिद्ध हो जाने पर एक नींबू पर शत्रु का नाम सिन्दूर से लिखें। २१ बार मन्त्र का जप कर उस नींबू में २ सुइयाँ चुभो दें और एक मिट्टी की छोटी-सी हण्डी में उसे रखकर श्मशान में गाड़ दें।

जब तक यह गड़ा रहेगा, शत्रु को भयानक पीड़ा होगी। २. शत्रु के पहनने का कोई कपड़ा प्राप्त कर उस पर श्मशान के कोयले से शत्रु का चित्र बनायें। चित्र में प्राण-प्रतिष्ठा करें और शत्रु का नाम लिखें। फिर इस कपड़े पर उक्त मन्त्र का १०८ बार जप करें।

खैर या आक की लकड़ी जलाकर इस वस्त्र को आग में तपायें। कपड़ा जलने न पाये। शत्रु पागल हो जायेगा। अच्छा करने के लिए गधे के मूत्र से उस कपड़े को धोकर सुखा दें

shatru maran mantra  शत्रु नाश के लिए मंत्र तीव्र मारण प्रयोग ph. 85280-57364

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shatru maran mantra  शत्रु नाश के लिए मंत्र तीव्र मारण प्रयोग

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shatru maran mantra  शत्रु नाश के लिए मंत्र तीव्र मारण प्रयोग
shatru maran mantra  शत्रु नाश के लिए मंत्र तीव्र मारण प्रयोग

सर्व शत्रु नाशक मंत्र shatru maran mantra

 

 ॐ ह्रीं अमुकस्य हन हन स्वाहा ।

 

इस मन्त्र-जप का अनुष्ठान रात्रिकाल में किया जाता है। इसके लिए कनेर के १००८ फूलों एवं सरसो के तेल की जरूरत प्रत्येक दिन पड़ती है। इन दोनों सामग्रियों की व्यवस्था पहले ही कर ली जाती है। इस मन्त्र का कुल १०,००० जप करने के पश्चात् मन्त्र सिद्ध हो जाता है। इसका प्रत्येक अर्द्धरात्रि के समय से २००८ बार जप किया जाता है।

इसकी शुरुआत किसी भी दिन की रात्रिकाल को की जा सकती है। शुरू किये गये दिन से ११ दिनों तक लगातार रात्रि के समय जप करना आवश्यक होता है । मन्त्र जप किसी निर्जन स्थान अथवा श्मशान में किया जाता है।

सूखी लकड़ी को सुलगाकर आग बना लेना चाहिए और उसके बाद मन्त्र जप शुरू कर देना चाहिए। प्रत्येक मन्त्र जप से पूर्व कनेर का फूल लेकर तेल में डुबोना चाहिए और उसके बाद मन्त्र पढ़कर उक्त फूल को आग में डाल देना चाहिए।

ऐसा प्रत्येक दिन १००८ बार करना चाहिए। अमुकस्य की जगह दुश्मन का नाम लेते रहना चाहिए। इस मन्त्र की सिद्धि के पश्चात् शत्रु की मौत सुनिश्चित है। यह प्रयोग निन्दनीय तथा वर्जित है ।

 

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भैरव प्रत्यक्ष दर्शन साधना bhairav pratyaksh darshan sadhana ph.85280 57364

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भैरव प्रत्यक्ष दर्शन साधना bhairav pratyaksh darshan sadhana

 

भैरव प्रत्यक्ष दर्शन साधना bhairav pratyaksh darshan sadhana ph.85280 57364

भैरव प्रत्यक्ष दर्शन साधना bhairav pratyaksh darshan sadhana
भैरव प्रत्यक्ष दर्शन साधना bhairav pratyaksh darshan sadhana

भैरव प्रत्यक्ष दर्शन साधना bhairav pratyaksh darshan sadhana भैरव साधना भैरव तंत्र के प्रमुख देवता हैं ये शिव के स्वरूप हैं तथा अमित शक्ति के भण्डार भी हैं। काल भैरव, बाल भैरव (वटुक भैरव) श्मशान भैरव, स्वर्ण भैरव आदि अनेक रूप हैं इनके । सात्विक, राजस और तामस रूप मे इनकी विभिन्न प्रयोजनों से इनकी साधना की जाती है।

  • भैरव प्रत्यक्ष दर्शन साधना
  • भैरव को बुलाने का मंत्र
  • bhairav pratyaksh darshan sadhana
  • प्राचीन भैरव मंत्र
  • भैरव साधना के लाभ

कलियुग सर्वाधिक प्रतिष्ठित देव हैं तथा शंकर के अंश होने के कारण शीघ्र प्रसन्न होने वाले भी हैं। माना भैरव शान्त स्वरूप भी हैं, किन्तु उनकी स्वाभाविक रूप राशि भी इतनी उम्र रहती है कि सामान्य साहस जवाब दे जाता है।

सिंह कितना भी सोम्य हो, विकराल सर्प कुछ भी न कहे किन्तु उनका सौन्दर्य इतना उत्कट होता है कि भय जनक बन जाता है और जब तक उससे निकटस्थता न हो भय बना ही रहता है।

मेरा अपना विचार है कि ” धनदा रति प्रिया यक्षिणी” या ‘कर्ण “पिशाचिनी’ जैसे प्रयोगों को अपेक्षा भैरव का प्रयोग किया जाए तो वह अधिक अच्छा रहता है । यक्षिणी या पिशाचिनी के प्रयोग आखिर अपने गुण और प्रभाव से प्रभावित करते हो हैं ।

कर्णं पिशाचिनी वालों को मैंने देखा है, उनका बुढ़ापा पहलवान के बुढ़ापे जितना कष्ट कर हो जाता है। वे अपनी व्यथा को खुद ही भोगते रहते हैं । वैसे भी कर्ण पिशाचिनी से भूत और वर्तमान की बता कर लोगो को चमत्कृत करने और पैसा पैदा करने के सिवा कुछ नहीं किया जाता।

यह दूसरी बात है कि कोई अत्यन्त समझदार व्यक्ति उसका दूसरा हितकर और स्थायी प्रयोग कर ले।’ भैरव की साधना घर मे नहीं करनी चाहिए। यद्यपि घर में साधना करने में कोई तात्त्विक बाधा नहीं है । एकान्त कमरे में की जा सकती है।

फिर भी एतियात के तौर पर किसी एकान्त स्थान में करना उचित रहता है। वाकला भैरव का प्रिय भोजन है बाक्ला उबले हुए चोले को कहते हैं । अगर उनका रूप अधिक भयावह लगे तो उनको नैवेद्य माल्य अर्पित करके ।

‘शान्ताकारं भुजगशयनं … इस मंत्र से प्रार्थना कर ले । मन में यह विश्वास रखे कि भगवान भैरव भक्त रक्षक हैं, वे सदा अपने भक्तों पर कृपा करते हैं। तंत्र में ऐसे प्रयोग हैं जो बड़े सरल हैं और जिनसे अनेक कष्ट सिद्ध किए जा सकते हैं ।

bhairav  sadhana भैरव को बुलाने का मंत्र

भैरव साधना का शाबर प्रयोग मंत्र“काली काली महाकाली के पुत्र कंकाल भैरव हुकम हाजिर रहे मेरा भेजा रक्षा करे लान बांधूं बान चलते के फिरते के ओसाण बांधूं दशों सुर बांधू नौ नाड़ी बहतर कोठा बाघूँ फूल में भेजू फूल में जाये कोठे जी पंडे थर-थर कांपे हल हल हले गिर-गिर पड़े उठ उठ भागे बक बक बके मेरा भेजा सवा घड़ी सवा पहर सवा दिन सवा मास सवा पहर सवा दिन सवा मास सवा बरस को बावला न करे तो माता काली की शैय्या पर पग धरे बाचा चूके तो ऊभा सूखे वाचा छोड़ कुवाचा करे धोबी को नाद चमार के कंडे मे पड़े मेरा भेजा बावला न करे तो रुद्र के नेत्र से आंख की ज्वाला’ कढे सिर की जटा टूट भूमि में गिरे माता पार्वती के चीर पे चोट पड़े बिना हुकुम नही मारना हो काली के पुत्र ईश्वरो वाचा सत्यनाम -आदेश गुरु को”

bhairav  sadhana vidhi  भैरव साधना विधि 

– गाय के गोबर से तिकोना चौका (लीप कर) देकर दक्षिण के तरफ मुख करके बैठे । काल रात्रि (वर्ष में तीन काल रात्रियों मानी जाती हैं जिन में शिव रात्रि, प्रमुख है) मे अथवा जिस दिन सूर्य ग्रहण हो उस रात्रि में यह प्रयोग करना चाहिए। एक ही आसन पर अविचल  उक्त मंत्र का एक हजार जप करे।

पूजा सामग्री में लाल कनेर के फूल, सिन्दूर, लड्डू और लोंग का जोड़ा रखे। चार मुख का दीपक (बड़े दीपक में चारों ओर जलती हुई चार बत्तियों वाला दीपक) जलाये । दीपक में तिल्ली ( या सरसों) का तेल जलाया जाय। फूलों का गजरा पास मे रखे ।

एक हजार जप करने के बाद तिल और चीनी व घी मिलाकर इसी मंत्र से एक सौ आहुति देकर हवन करे । हवन करते समय या समाप्ति पर भैरव प्रकट हों तो निर्भीक भाव से फूलों की माला उनके गले में पहना दें नैवेद्य अर्पित कर दे । साष्टांग उनको प्रसन्न करे फिर जो कुछ भी उससे मांगे वही मिलेगा ।

 

माँ तारा कैंसर से मुक्ति साधना maa tar

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इच्छा पूर्ति गणेश मंत्र – गणेश जी का सबसे शक्तिशाली मंत्र यह शाबर मंत्र हर अच्छा को करेगा पूरी ph

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इच्छा पूर्ति गणेश मंत्र - गणेश जी का सबसे शक्तिशाली मंत्र

इच्छा पूर्ति गणेश मंत्र – गणेश जी का सबसे शक्तिशाली मंत्र ph.85280 57364 

इच्छा पूर्ति गणेश मंत्र - गणेश जी का सबसे शक्तिशाली मंत्र
इच्छा पूर्ति गणेश मंत्र – गणेश जी का सबसे शक्तिशाली मंत्र

इच्छा पूर्ति गणेश मंत्र ganesh icchapurti mantra ओम नमः शिवाय दोस्तों गुरु मंत्र साधना में आपका हार्दिक स्वागत है दोस्तों कोई भी ऐसा हम कार्य करते हैं जो शुभ कार्य हो किसी की शादी हो पूजा हो पाठ हो कोई साधना हो चाहे कोई भी ऐसा शुभ कार्यऔ में गणेश का वंदन करते हैं।  भगवान गणेश का नाम लेते हैं हर कार्य में भगवान गणेश का पूजन किया जाता है। ताकि उसे कार्य में आने वाले विघ्न को भगवान गणेश हर सके इसलिए उन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है। 

भगवान गणेश का जो नाम है वह चाहे पंडित हो चाहे वह तांत्रिक हो चाहे वह अघोरी हो चाहे ,वह सात्विक साधना कर रहा हो, चाहे वह तांत्रिक साधना कर रहा हो बिना गुरु और बिना गणेश पूजन के कोई भी साधना कोई भी साधना पूर्ण नहीं होती। 

भगवान गणेश का आवाहन भगवान गणेश का पूजन करना ही पड़ता है ,और आज मैं आपके सामने ऐसा मंत्र लेकर आया हूं। भगवान गणेश की साधना बहुत ही दुर्लभ साधना है बहुत अच्छी साधना है और ब्रह्मांड का सबसे उच्चतम मंत्र ,जो मैं आज आपको बताने वाला हूं।  भगवान गणेश का को सबको पता ही है कि भगवान गणेश जो है वह भगवान भोलेनाथ के पुत्र हैं। उनके बेटे हैं माता पार्वती के अपटन से पैदा हुए और प्रथम में पूज्य देव है सबसे पहले सबसे प्रथम जो है। 

वह भगवान गणेश की पूजा होती है। उसके बाद किसी और देवता की पूजा की जाती है।  कोई भी साधना के समय हम प्रार्थना करते हैं कि भगवान गणेश के वह समस्त विघ्नो  को हमारे हर सकें और हमारी जो साधना हमारी जो सेवा है हमारे जो शुभ कार्य है।  वह पूर्ण हो भगवान गणेश की जो हम साधना करते हैं तो माता लक्ष्मी का आशीर्वाद माता लक्ष्मी का आगमन पूजा करते हैं। 

तो उसे घर में माता लक्ष्मी के साथ महालक्ष्मी भी विराजमान रहती हैं।  और साथ ही जो रिद्धि सिद्धि हैं जो कि भगवान गणेश की पत्नियों हैं, भगवान गणेश की आज्ञा के बिना उसे घर में प्रवेश नहीं करती। जिस घर में भगवान गणेश का नाम ले जाता जो साधक जो सेवक जो पूजा पाठ है साधना करते हैं ,भगवान रिद्धि सिद्धि स्वयं स्थापित हो जाती है और साधक की हर इच्छा पुरी होती है । 

समस्त सिद्धियां प्रदान होती है और बुद्धि के देवता कहे जाने वाले भगवान गणेश बल बुद्धि को अगर पितरों को प्रसन्न करना हो तो सुबह सुबह ब्रह्म मुहूर्त में  गणेश पाठ किया जाता है।  और सूर्य को अर्घ  दिया जाता है।  जिससे कि भगवान गणेश की चालीसा और सूर्य को अर्घ  देने से हमारे पितर हैं वह प्रसन्न होते हैं। 

जितने भी हमारे पितर दोष  हैं, वह सभी पितर दोष जो है वह समाप्त होते हैं।  भगवान गणेश के बारे में जितनी महिमा का गुणगान किया जाए उतना कम है। जिन्हें बेसन के लड्डू प्रिय  हैं तो आज मैं आपको भगवान गणेश की साधना के बारे में बताने जा रहा हूं कि किस तरीके से आप भगवान गणेश की साधना करके आप हर एक इच्छा जीवन पूरी कर सकते हो  सुख में जीवन  व्यतीत कर सकते हो साथ साथ में अपने घर में दुकान में नौकरी में साथ साथ में आपके घर में जो बिगड़े हुए काम है, वह आपके बन सकते हैं। 

इच्छा पूर्ति गणेश मंत्र – गणेश जी का सबसे शक्तिशाली मंत्र  

इच्छा पूर्ति गणेश मंत्र - गणेश जी का सबसे शक्तिशाली मंत्र यह शाबर मंत्र हर अच्छा को करेगा पूरी ph
इच्छा पूर्ति गणेश मंत्र – गणेश जी का सबसे शक्तिशाली मंत्र यह शाबर मंत्र हर अच्छा को करेगा पूरी ph

गं गणपतये नमः 

इच्छा पूर्ति गणेश मंत्र – गणेश जी का सबसे शक्तिशाली मंत्र साधना विधि

गणपति मन्त्र सामग्री – जलपात्र, लाल पुष्प, गणपति की मूर्ति या चित्र, सुगन्धित अगरबत्ती, शुद्ध घृत का दीपक । माला – मूंगे की या लाल रक्त चन्दन की माला । समय- दिन का कोई भी समय | आसन – लाल रंग का सूती या ऊनी आसन दिशा- पूर्व । साधक पूर्व की तरह मुंह करके बैठे। जपसंख्या – सवा लाख । अवधि- पाँच, ग्यारह या इक्कीस दिन । गणेश के 12 नामो   का जप करें 

साधक किसी भी बुधवार से यह साधना प्रारम्भ कर सकता है। यह प्रयोग जीवन में कल्याण-कामना के लिए किया जाता है। घर में विवाह कार्य सफलतापूर्वक सम्पन्न हो जाये, घर में सुख-शान्ति बनी रहे या किसी कार्य में विघ्न न आवे, इसके लिए यह प्रयोग किया जाता है।

बुधवार के दिन प्रातः स्नान कर सामने गणपति की मूर्ति या चित्र स्थापित कर उसका सामान्य पूजन करें और इसके बाद मन्त्र का जप प्रारम्भ कर दें। जितने दिन में यह साधना सम्पन्न करनी हो, उसी अनुपात में नित्य- मन्त्र जप सम्पन्न करें।

साधना समाप्त होने पर किसी ब्राह्मण-पुत्र या कुंवारी कन्या को भोजन कराकर उसे दक्षिणा, वस्त्र आदि भेंटस्वरूप प्रदान करें और गणपति का विग्रह या मूर्ति अपने पूजा-स्थान में या घर में स्थापित कर दें। ऐसा करने पर निकट भविष्य में होने वाला कोई विघ्न उपस्थित नहीं होता ।