Category: दैविक साधना

दैविक साधना davik-sadhna हम इस श्रेणी में देवी देवताओं की रहस्मय साधना पर चर्चा करेंगे ! जिस साधना को आप अपने घर पर सिद्ध करके लाभ प्रपात कर सकते है ! gurumantrasadhna.com

satri betal sadhna स्त्री बेताल साधना 3 दिन में सिद्ध होने वाली १००१% सफल होगा

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satri betal sadhna स्त्री बेताल साधना 3 दिन में सिद्ध होने वाली १००१% सफल होगा नमस्कार, गुरुमन्त्रसाधना  में आप सभी का स्वागत है। आज मैं आपको बताने वाला हूँ स्त्री बेताल साधना के बारे में। जैसे मैंने वायु बेताल, अग्नि बेताल, ऐसे पुरुष बेताल की साधनाएँ दी हैं, तो बहुत सारे लोगों ने लाइव में पूछा भी है कि स्त्री बेताल की साधना कैसे करते हैं। तो इसके बारे में मैं, वैसे मेरे पास यह विधि बहुत दिन पहले से ही है।

यह ज्यादा डिफरेंस नहीं है नॉर्मल साधना में से, लेकिन इसमें कुछ-कुछ नियम अलग हैं और इस साधना से जो है बहुत सारे कार्य ऐसे आप कर सकते हैं जो आप नॉर्मल बेताल साधना करके नहीं कर सकते। जैसे पिछले समय में, जैसे जब राजा का समय था, ठीक है ?

जैसे विक्रम-बेताल आपने सुना है नाम, हाँ, तो राजा विक्रम जो थे वह बेताल की साधना इसलिए किए थे ताकि वो साम्राज्य को बढ़ा सकें, दूसरे शत्रु से विजय पा सकें, ताकि कोई उनको हरा न पाए, इसलिए वह बेताल की साधना करते थे।

और बेताल जो होता है, वह महाकाल के सेवक होते हैं, उनके साथ चलते हैं और महाकाल से ही बेतालिन का उत्पत्ति हुआ है। लेकिन बेताली, जिसे हम लोग स्त्री बेताल कहते हैं, वह भी महाकाल के ही एक तरीके से सेवक हैं और इनकी जो शक्तियाँ हैं, वह थोड़ा-सा भिन्न हैं बेताल से, मतलब पुरुष बेताल से।

स्त्री बेताल की अगर आप साधना करते हैं तो आपको जो है बहुत सारी शक्तियों का एक तरीके से आभास होता है। मतलब एक स्त्री बेताल के साथ जो है लगभग 3 से 4 पुरुष बेताल चलते हैं।

मतलब अगर आपने एक स्त्री की साधना कर ली तो लगभग उसके साथ आपको दो-तीन बेताल की शक्ति जो है आपको मिल जाएगी। ठीक है? कोई भी स्त्री बेताल अकेली नहीं रहती है।

तो इसीलिए वह भी एक तरीके से सोचें तो सही रहता है। आप तंत्र में बहुत ज्यादा ऊपर तक पहुँच सकते हो, बहुत कुछ सीख सकते हो आप उनसे। ब्लैक मैजिक में ऐसे भयानक यंत्र बनाना सीख जाओगे, उससे आप खुद क्रिया करना सीख जाओगे, वशीकरण तो चुटकियों में कर सकते हो।

लेकिन क्या है कि स्त्री बेताल की साधना जो है थोड़ा-सा उग्र है और यह सब लोगों के बस की बात नहीं है क्योंकि इसमें बहुत सारी डरावनी अनुभूतियाँ और खतरा होता है जीवन में। सुरक्षा कवच बहुत ही स्ट्रॉन्ग करना पड़ेगा क्योंकि अब आगे की वीडियो जैसे आएँगे वैसे-वैसे मैं सबकुछ ही डालूँगा, लेकिन कुछ-कुछ साधनाएँ मैं बहुत ही कठिन डालने वाला हूँ क्योंकि इतना दिन से तो मैं दो-तीन साल से डाल रहा हूँ साधनाएँ।

इसमें लोग भूत-प्रेतनी, ये सब कुछ तरीके की साधना आप लोग देख रहे हो, लेकिन यह जो साधनाएँ हैं ना, ये नॉर्मली आपको बहुत ही कम जगह देखने को मिलेंगी। स्त्री बेताल साधना, स्त्रियों में भी बहुत सारे और भी टाइप के बेताल होते हैं, वह भी मैं डालूँगा आगे और साधना। तो सुरक्षा घेरा के बिना नहीं करना है, न गुरु-दीक्षा के बिना करना है।

बहुत ही पावरफुल साधना है और अमावस्या के दिन से यह साधना करनी है। 31 डेज़ की साधना है। अगर आप किसी विशेष दिन में करते हैं, जैसे चंद्र ग्रहण हो गया, शिवरात्रि है, नवरात्रि है, तो उसमें जो है यह सिर्फ 11 दिन की साधना होगी। ठीक है?

और एक विधि है जो मैं नेक्स्ट वीडियो में बताऊँगा जिसमें आप इस चीज को 3 दिन में भी सिद्ध कर सकते हो, लेकिन उसके लिए जिगर वाला दिल होना चाहिए क्योंकि यह जो साधना तीन दिन में होती है उसमें एक तरीके से किसी मरी हुई औरत की बॉडी के ऊपर बैठकर यह साधना करनी पड़ती है और बहुत ही खतरनाक होती है ये सब, ठीक है?

तो एक तरीके से वह इल्लीगल भी है, नहीं करना चाहिए। लेकिन जो तरीका मैं बता रहा हूँ वह आप नॉर्मली खुद भी कर सकते हैं। तरीका यह है कि आपको अमावस्या का दिन चुनना है, ठीक है? बता रहा हूँ और इसमें आपको खून लगेगा, ठीक है?

आप बकरे का खून ले सकते हैं, हिरन का खून ले सकते हैं, जो भी है, लेकिन जो भी आप खून दे रहे हो उसी से कैटिगरी में रखिएगा, ठीक है? और हर दिन लगेगा। एक छोटा-सा ग्लास जैसे मिट्टी का ग्लास होता है ना, वह आपको लगेगा। मिट्टी का प्याला आप ले सकते हैं या फिर कोई नॉर्मल डिस्पोजल प्याला भी लें। ठीक है?

और आपको बकरे का भोग देना पड़ेगा उनको, जैसे मुर्गी का भी दे सकते हैं और आपको जो है यहाँ पर देसी दारू, वह आपको चढ़ाना है हर दिन उनके नाम पर, ठीक है? और इसमें जो है आपको सुरक्षा घेरा जो मैंने बताया था माता काली का, वह भी लगाना है और हनुमान जी का भी लगाना है, दोनों ही सुरक्षा घेरा, मतलब डबल सुरक्षा घेरा बनेगा

। हाँ, और एक कवच मैं बना के देता हूँ हर इंसान, मतलब जो भी मेरे से दीक्षा लेता है, जो भी शिष्य है मेरे, तो वह कवच अगर आप चाहें तो ले सकते हैं। मैं तो सजेशन यही दूँगा कि ले लीजिएगा कवच। इससे क्या होगा आपकी जान, सोचिए आप साधना नहीं कर रहे हो उस टाइम पे, जिस टाइम पर आप साधना जैसे दिन में आप हो या शाम में उस टाइम पे हम साधना नहीं कर रहे होते हैं, तो उस टाइम पर शरीर की रक्षा हो।

तो शरीर बंधन एक रक्षा कवच होता है, तो वह दिया जाता है। बाकी साधना में जब बैठोगे तब तो कवच लगा ही लोगे, सुरक्षा घेरा लगा ही लोगे, नो प्रॉब्लम। ठीक है? इसमें आपको जो है साधना को करने का समय एक महादेव, ठीक है? महादेव, छोटी-सी एक शिवलिंग ले लीजिएगा, ठीक है? और माता काली की छोटी-सी मूर्ति या एक फोटो ले लीजिएगा, ठीक है?

यह आपको लेकर जाना है जहाँ पर भी आप करोगे। कोशिश करना, ठीक है? कोई जंगल वगैरह, खाली जगह में यह साधना को करो ताकि उसको पूर्ण अनुभव और पूर्ण सिद्धि आपको मिल सके। ठीक है? जगह थोड़ी इसलिए आपको सुनसान रखनी है, आसपास में ऐसे भीड़भाड़ वाले जगह से थोड़ा-सा दूर। और आपको जो है काले वस्त्र का धारण करना है, ठीक है?

और आपको लाल सिंदूर का टीका लगाना है यहाँ पे, ठीक है? सर पे काले कलर का कपड़ा बाँध लीजिएगा, ठीक है? उसके बाद काले आसन में आपको दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके बैठना है। एक बाजोट लेना है, उसके ऊपर शिवजी और माता काली का जो भी फोटो या फिर जो मैं शिवलिंग बोला वह रखना है, ठीक है?

और उनको जो है स्नान आदि कराना है गंगाजल से, ठीक है? यह इसीलिए ताकि आप उस शक्ति को कंट्रोल कर पाओ, इसीलिए मैं इन दोनों की मूर्ति या शिवलिंग को लेने बोल रहा हूँ। ठीक है? पूजा कर लो। पूजा करने के बाद उनके सामने रक्त वगैरह नहीं चढ़ाना है, गलती मत करिएगा। थोड़ा-सा, क्योंकि सुरक्षा घेरा जो है थोड़ा बड़ा करके बनाओगे तो उनसे एक-दो फीट दूर में साइड में आपको जो है एक यंत्र बनाना है जिसे कहते हैं त्रिबेताल यंत्र।

वह जो साधना करेगा, जो लोग, उनको दिया जाएगा। बेताल यंत्र में थोड़ा-सा चेंज होता है, यह स्त्री बेताल यंत्र है। उस यंत्र के ऊपर, ठीक है? एक छोटा-सा घी का या सरसों का दीया जलाना है और दीया जला के, ठीक है? वह दीया के आसपास में एक जो सिंदूर होता है ना लाल कलर वाला, ऑरेंज वाला नहीं, लाल वाला सिंदूर से दीये के चारों तरफ जो है एक राउंड मार देना है और उसके नीचे जो है यंत्र को रख देना। व्हाइट कलर के कागज़ में भी बना सकते हैं, उसका कोई इशू नहीं है, ठीक है?

और यंत्र को आपको सिंदूर से बनाना है, सिंदूर के साथ थोड़ा-सा बकरे का खून मिलाकर यह बना लिए। उसके बाद जो है उसके सामने जो देसी दारू आपने रखा है वह रखना है, उसके बाद आपको जो मांस चढ़ाना है, ठीक है? और आपको जो है थोड़ा-बहुत आप जो है फूल वगैरह चढ़ा सकते हैं, बाकी आप न भी चढ़ाएँ वह भी चलेगा, ठीक है?

और इसमें जो है जो माला है, रुद्राक्ष का इस्तेमाल होगा क्योंकि बेताल साधना है और इसमें जो है गंगाजल जो आप सुरक्षा घेरा या फिर शरीर बंधन के लिए इस्तेमाल करेंगे। तो यह हो गया पूरा विधि और यह जब शुरू करोगे, शुरुआत के 2 से 3 दिन तक आपको कोई अनुभव नहीं मिलेगा, आपको लगेगा कोई साधना नहीं हो रहा है, क्या कोई अनुभव नहीं हो रहा है।

लेकिन आपको जैसे ही 7 दिन आप कंप्लीट कर लोगे, उसके बाद से आपका परीक्षा शुरू हो जाएगा। इसीलिए बोल रहा हूँ क्योंकि यह शक्तियाँ पहले न आने की एक्टिंग करते हैं ताकि आपको ऐसा लगे कि कुछ नहीं हो रहा है। उसके सात दिन बाद से आपको ऐसा लगेगा कि कुछ मैंने भयंकर कुछ स्टार्ट कर दिया है और मेरे साथ कुछ भी हो सकता है। ठीक है?

कुछ-न-कुछ बाधाएँ आएँगी, आप साधना करने जाओगे तो कुछ-न-कुछ बाधा आपको रोकने की कोशिश करेंगी, तो ये सब चीजें आएँगी। तो नेक्स्ट 7 दिन आपका जो है बहुत भयावह गुजरेगा। उसके बाद का जो सात दिन होगा, वह और भयानक होगा। मतलब आप जब साधना करने बैठोगे ऐसा लगेगा कोई जंगली जानवर आप पे हमला करने आ रहे हैं या फिर कोई पेड़ आपके ऊपर गिर रहे हैं, लेकिन नहीं गिरेगा, वो माया होती है, ठीक है?

बस सुरक्षा पर कंसन्ट्रेट करिएगा और अपना ध्यान और थर्ड आई पर अगर कोशिश करके थर्ड आई पे रखना और अपना जो मंत्र है, जो मैं दूँगा, वैसे बेताल का यह शाबर मंत्र है स्त्री बेताल का, उससे क्या होगा वह आकर्षित होती है जल्दी, ठीक है?

और यह लगभग 31 डेज़ के अंदर-अंदर यह शक्ति, 31 डेज़ का जो लास्ट दिन होगा, तो उस दिन जो यह शक्ति पूछती है, ठीक है? कि तुझे क्या चाहिए, मुझे क्यों बुलाया, ठीक है? इतना दिन से अब क्यों बुला रहा है तू? ठीक है? तब आपको आँखें खोलना है और उससे जो है अपना वचन ले लेना है। वचन तीन सभी को पता है कि आप मेरी हर बात मानोगी, जो मैं कहूँगा वह करोगी, आप मेरी और मेरे परिवार का कभी अहित नहीं करोगी, ठीक है?

और जब मैं चाहूँ तब आप मुझे छोड़कर चली जाएँ। ये तीन वचन का हमेशा ध्यान रखिए, लेना। क्योंकि यह जितना पॉज़िटिव काम करती है, उतना निगेटिव काम भी करती है, यह दोनों तरफ की खिलाड़ी है। इसीलिए बोल रहा हूँ कि यह शक्ति अगर आप सिद्ध कर लेते हैं, तो यह आपको पॉज़िटिव शक्तियों का भी काम आएगा और निगेटिव शक्तियों का भी काम करेगा और इसके अंडर में बेताल लोग रहते हैं बहुत सारे, ठीक है?

तो यह साधना जो है बहुत सारे लोगों ने माँगा था, पिछले में दिया स्त्री बेताल साधना और आगे और ठीक है? जो इस टाइप की शक्ति है और कम पावरफुल वाली भी है, वह आगे-आगे मैं दूँगा और आसान तरीका देखो अगर ढूँढोगे तो समय आपको ज्यादा देना पड़ेगा और अगर आप कठिन तरीका ढूँढोगे तो समय आपको कम लगेगा, ठीक है?

तो यही था स्त्री बेताल का साधना और बिना गुरु-दीक्षा के न करें, ठीक है? और बाकी चीजें, जो भी इंसान करना चाहता है कॉन्टैक्ट करिए, बता दूँगा। तो आज के लिए इतना ही, अपना ख्याल रखिएगा। जय माँ काली।

अगिया बेताल साधना विधि विधान और मंत्र Agiya betal sadhana ph.85280 57364

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अगिया बेताल साधना विधि विधान और मंत्र Agiya betal sadhana ph.85280 57364 नमस्कार दोस्तों! जय महाकाल, आज के पोस्ट में मैं बेताल की साधना दे रहा हूँ। हालाँकि इस बेताल की साधना के बारे में पहले के पोस्ट  में बहुत कुछ बता चुका हूँ, साधना विधि भी दिया हूँ, लेकिन वह मार्ग कुछ अलग था और यह जो विधान इसका देने जा रहा हूँ, वह विधान बहुत ही अलग है और इस विधान से बहुत ही जल्द इस साधना में सिद्धि प्राप्त होती है।

अब सबसे पहले तो इसके फायदे बता दूँ। वैसे फायदे तो अनगिनत हैं और बेताल की जो शक्ति होती है, वह भूत, प्रेत, जिन्न, आत्मा, परी इत्यादि से कहीं बढ़कर होती है। तो इसकी शक्ति बहुत ही ज्यादा होती है। तो यह हर प्रकार का कार्य, मतलब हर प्रकार का कार्य करने में हमारे लिए सक्षम होता है।

साधक के लिए यह हर प्रकार के कार्य करने में सक्षम होता है, लेकिन इसकी साधना भी उसी प्रकार से कठिन होती है। इस बारे में तो बहुत कुछ कर पाए हैं, जैसे भूत, वर्तमान, भविष्य की जानकारी प्राप्त कर लेना, धन प्रदान करती है यह शक्ति।

और सांसारिक कोई भी कार्य हो, कोर्ट-कचहरी इत्यादि कोई भी कार्य हो, वो हमारा संपन्न करती है। स्टूडेंट के लिए पढ़ाई में बहुत उन्नति देता है, पढ़ाई तथा काम-काज में बहुत ही उन्नति देता है, बरकत देता है, ज्ञान प्रदान करता है, धनवर्षा करता है।

सांसारिक सभी कार्य, लौकिक तथा अलौकिक कार्य हमारे बनाता है, षट्कर्म करता है। मतलब एक तरह से हर प्रकार का कार्य यह शक्ति हमारे लिए करती है सिद्ध होने के पश्चात्।

परंतु यह बहुत ही शक्तिशाली और बड़ी शक्ति है, तो इस प्रकार की शक्ति को सिद्ध करने के लिए हमारा मन भी वैसा स्ट्रांग होना चाहिए, क्योंकि विकराल रूप में भी हमारे सामने आ सकता है और अधिकांश तो विकराल रूप में ही हमारे सामने आता है।

तो हमको दृढ़ निश्चय के साथ इस साधना को करना है। जो भी करना चाहें, जिसमें दृढ़ निश्चय है, साहस है, वही इस प्रकार की साधना को करें, यही कहूँगा। क्योंकि अधिकांश लोग तो कर लेते हैं, लेकिन जब शक्ति सामने उपस्थित हो जाती है, तब वह उसको संभाल नहीं सकते और पीछे हट जाते हैं।

तो इसका बहुत ही विपरीत और बुरा प्रभाव हम पर कहीं न कहीं पड़ता ही पड़ता है। विघ्न भी बहुत होता है, कई प्रकार के नुकसान हो सकते हैं हमको और नुकसान भी होता है। इसलिए, जिसमें शौर्य और पूर्ण निष्ठा एवं दृढ़ संकल्प हो, वही इस प्रकार की उच्च कोटि की साधना को करें और इसमें सफलता प्राप्त करें।

Agiya betal sadhana vidhi अगिया बेताल साधना  विधि 

तो मैं उसका विधान बता देता हूँ। विधान इसका इस प्रकार है कि इस साधना को घर पर नहीं किया जा सकता है।

इस साधना को या तो श्मशान में किया जा सकता है या किसी ऐसे वीरान स्थान पर किया जा सकता है जहाँ पास कोई आता-जाता न हो, या फिर इस साधना को किसी शिव मंदिर के आसपास किया जा सकता है। इस साधना में दिशा दक्षिण की रहेगी और स्वयं के बैठने का आसन काला रहेगा इसमें।

और सुरक्षा घेरा बहुत ही जाग्रत आपका होना चाहिए, स्ट्रांग होना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की समस्या न आए साधना के दौरान। तो सुरक्षा घेरा आपको लगाना है, क्योंकि इस साधना में बहुत सारी बाधाएँ और बहुत सारी समस्याएँ आती हैं।

और इसमें उस बेताल के नाम से आपको भोग में शराब का भोग लगाना है। किसी भी पात्र में, पात्र ले लीजिए आप, तांबे का कोई भी पात्र ले लीजिए, कांसे का कोई पात्र ले लीजिए, उस पात्र में आप शराब भरकर उसके नाम से अर्पित करें।

इस साधना को ऐसे किसी भी दिन किया जा सकता है, किसी भी सोमवार के दिन से शुरू किया जा सकता है और इस साधना को किसी भी पक्ष में किया जा सकता है, चाहे आप कृष्ण पक्ष में करें, चाहे शुक्ल पक्ष में क्यों न करें। सोमवार शाम को शुरू किया जा सकता है।

यह 31 दिन की साधना होती है और 31 दिनों में हमको इस साधना में पूर्ण सफलता प्राप्त होती है। तो उसके पश्चात् हमको इस साधना में विशेष हमको ब्रह्मचर्य का ध्यान रखना है, सात्विक भोजन करना है तथा शुद्धता बिल्कुल बनाए रखना है।

स्नान इत्यादि करके शुद्ध, स्वच्छ वस्त्र पहन कर ही इस साधना को करना है। समय आपका रात्रि 10:00 बजे के बाद से, कभी भी इस साधना को शुरू कर सकते हैं।

दिशा तो आपकी दक्षिण रहेगी और इसमें आप एक दीपक लगा लें, घी का एक दीपक लगा लें और उस दीपक में उड़द के कुछ दाने छोड़ दें आप, पाँच साबुत उड़द दाल जो है, उसके पाँच दाने आप उस दीपक पर छोड़ दें।

इस प्रकार से आपको दीपक अपनी तरफ मुँह करके जलाना है। चाहें तो आप धूप इत्यादि भी, सुगंधित अगरबत्ती इत्यादि जला सकते हैं।

अब आपको उक्त मंत्र का नित्य 12 माला पाठ करना है। यह अमल आपको 21 दिनों तक पाठ करना है। 21 दिन का जब आपका साधना पूर्ण हो जाता है, अच्छा इसमें जो है, आप मंत्र का पाठ करने से पहले आप किसी भी शिव मंत्र का एक माला, मतलब 108 बार पाठ करेंगे। इसमें रुद्राक्ष की माला का प्रयोग होगा।

और इसमें आप इस बेताल के मंत्र का पाठ करने से पहले आप किसी भी शिव मंत्र का 108 बार आप पाठ कर लें, उसके बाद ही आप इस उक्त मंत्र का, बेताल मंत्र का पाठ करें। तो इस प्रकार से 21 दिन तक आपको 12 माला का पाठ करना है।

21 दिन जब आपके पूरे हो जाएँ, तो पूरे होने के पश्चात् आपको हवन करना है। इसके नाम से हवन आप आम की लकड़ी से कर सकते हैं। आम की लकड़ी और घी इसमें मिलाकर आपको अग्नि जला लेनी है किसी पात्र या जमीन पर कहीं पर भी।

तो जलाने के पश्चात् जो है, वह अग्नि में आपको उड़द के दाने से होम चढ़ाना है, इसमें मतलब आहुति चढ़ानी है आपको उड़द के दाने से। इस मंत्र को पूरा पढ़कर आपको उड़द के दानों से 108 बार आहुति चढ़ानी है।

तो इस प्रकार से आपको 11 दिनों तक आहुति चढ़ानी है। 21 दिन की साधना पूर्ण होने के पश्चात् उसी मंत्र से आपको 11 दिनों तक आहुति चढ़ानी है।

तो इस प्रकार से ग्यारह दिनों के अंतर्गत जो है, यह साधना पूरी तरह से सिद्ध हो जाती है और उसी अग्नि में से बेताल जो है, अगिया बेताल जो है, वह उत्पन्न होता है और आपके सामने प्रत्यक्ष भी होता है।

होने के पश्चात् उससे आपको वचन ले लेना है और वचन लेने के पश्चात् यह शक्ति हमेशा के लिए आपसे जुड़ जाएगी, आपके अनुकूल हो जाएगी। तो उसके पश्चात् आपकी साधना संपन्न हो जाएगी।

और इसमें जिन भी वस्तुओं का आपने प्रयोग किया, उस वस्तुओं को जिस स्थान पर आपने साधना की, वहीं पर छोड़ देना है और इसी उक्त मंत्र को पढ़कर इस शक्ति को जब भी आह्वान करेंगे, बुलाएँगे, तो वह शक्ति आपके सामने उपस्थित हो जाएगी। इतना ही विधान है साधना का। वह विशेष मंत्र मैं आपको बता देता हूँ:

अगिया बेताल साधना मंत्र  Agiya betal sadhana mantra

अगिया बेताल साधना विधि विधान और मंत्र Agiya betal sadhana ph.85280 57364
अगिया बेताल साधना विधि विधान और मंत्र Agiya betal sadhana ph.85280 57364

मंत्र बस इतना ही है और इतना ही संपूर्ण विधान है साधना का। तो आज के वीडियो में इतना ही। नमस्कार!

अगिया बेताल रहस्य agiya betal sadhna rahasya PH.85280 57364

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अगिया बेताल रहस्य कौंन होता है – क्या है इस की शक्ति agiya betal sadhna rahasya

 

अगिया बेताल रहस्य कौंन होता है - क्या है इस की शक्ति agiya betal sadhna rahasya
अगिया बेताल रहस्य कौंन होता है – क्या है इस की शक्ति agiya betal sadhna rahasya

agiya betal sadhna rahasya ओम नमः शिवाय। जय श्री राम।आज का हमारा विषय है अगिया बेताल। सबसे पहले प्रश्न उठता है कि कौन होते हैं। अगिया बेताल क्या है ? और दूसरा प्रश्न होता है कि कौन बनते हैं अगिया बेताल? तीसरा प्रश्न, कहाँ रहते हैं अगिया बेताल? और चौथा प्रश्न, कैसे सिद्ध होते हैं अगिया बेताल?

आज इस पोस्ट  के माध्यम से हम आप लोगों को अगिया बेताल की पूरी जानकारी देंगे, प्रामाणिकता के साथ, शोध के साथ, उदाहरण के साथ।

Agiya betal अगिया बेताल का अर्थ

 क्योंकि सोशल मीडिया पर जितनी जानकारी आप लोगों को अगिया बेताल के विषय में मिली है, उसमें से 98 प्रतिशत जानकारी सिर्फ कोरी कल्पना है और असत्य है, जिसका अगिया बेताल से कोई भी लेना-देना नहीं है।

उदाहरण दे रहा हूँ, लोग बोलते हैं कि अगिया बेताल के मुख से अग्नि निकलती है, आग की लपटें निकलती हैं। यह पूर्णतः गलत है। क्यों पड़ा अगिया बेताल नाम, यह भी बताएँगे।

बेताल में कई सारी प्रजातियाँ हैं, कई सारे बेताल हैं। उसमें से एक प्रजाति का बेताल ऐसा होता है कि जिसके शरीर के रोम-रोम से ताप निकलता है, मुख से ताप निकलता है, रोम-रोम से ताप निकलता है। उस बेताल को अगिया बेताल कहते हैं। यह ताप क्यों निकलता है, इसे पोस्ट में आगे जानेंगे।

एक उदाहरण दे रहे हैं कि जैसे एक गाँव में कई सारी बिरादरी के लोग रहते हैं और एक स्कूल में सबके बच्चे पढ़ने जाते हैं, तो कोई बच्चा तेज होता है, कोई कम तेज होता है, लेकिन स्कूल, क्लास, स्टैंडर्ड एक ही होता है। उसी प्रकार कई सारे बेताल होते हैं।

उनमें से जो बेताल सबसे तेज माना गया है, उस बेताल को अगिया बेताल कहते हैं। और आखिर अगिया बेताल तेज क्यों माना गया है, इसके विषय में आप लोगों को अब बताते हैं।

कौन बनते हैं अगिया बेताल agiya betal ?

इसमें याद रखिए, बहुत ध्यान से सुनिए, जितने भी साधक पॉडकास्ट पर बैठे हैं और आँख मूँदकर ज्ञान देते हैं, जीवन में कभी भी अगिया बेताल के विषय में यह रहस्य नहीं जानते होंगे।

दो ही शक्तियाँ अग्नि तत्व शक्ति हैं, हिंदू धर्म में ब्रह्म की शक्ति और मुस्लिम धर्म में जिन्न की शक्ति। यह दोनों शक्तियाँ अग्नि तत्व की हैं।

अब देखिए, गुरुकुल में रह के वेदों का अध्ययन करने वाला, यज्ञ परंपरा को मानने वाला, नियम से यज्ञ करने वाला, वह ब्राह्मण बालक जिसका कभी भी ब्रह्मचर्य खंडित न हुआ हो और उसका विवाह भी न हुआ हो और जो यज्ञोपवीत धारण कर चुका हो, ऐसे ब्राह्मण बालक की, जिनका विवाह न हुआ हो, ब्रह्मचर्य खंडित न हुआ हो और यज्ञोपवीत धारण किया हो और गुरुकुल में पढ़ रहा हो, ऐसा ब्राह्मण पुत्र जब मरता है और उसके अंदर कोई मोह व्याप्त रहता है, कोई उसकी अभिलाषा व्याप्त रहती है, तो वह बनता है अगिया बेताल।

एक नार्मल ब्राह्मण व्यक्ति मरता है, जो कर्मकांड करता है, पूजा-पाठ करता है या हनुमान जी की भक्ति करता है, तो ब्रह्मदेव बन जाता है, ब्रह्म राक्षस बन जाता है। आग लगाने की शक्ति उनमें भी होती है।

लेकिन गुरुकुल में रह के ब्राह्मण पुत्र पढ़ने वाला, जिसे वेद कंठस्थ हों, वेद का अध्ययन कर रहा हो, यज्ञ कर रहा हो और उस बालक का विवाह न हुआ हो, यज्ञोपवीत हो चुका हो और उसका वीर्य खंडित न हुआ हो, ब्रह्मचर्य खंडित न हुआ हो, ऐसा बालक एक शुद्ध बालक होता है।

एक उच्चकोटि की योनि उसको मिलती है, यदि उसके अंदर कोई अभिलाषा या मोह बचा रहता है। तो ऐसा युवा बालक बनता है अगिया बेताल। क्योंकि वेदों में अग्नि का बहुत महत्व है, बहुत सारे मंडल, ऋचा, सूत्र अग्नि को समर्पित हैं। तो ऐसा ही बालक बनता है अगिया बेताल।

अब आप लोगों को बताते हैं कि अगिया बेताल रहता कहाँ है और इसको सिद्ध कैसे किया जाता है।

इसके विषय में भी पूरी जानकारी आप लोगों को देंगे। लेकिन अगिया बेताल के ऊपर कुछ उदाहरण भी दे देते हैं और बाकी जानकारी, बेताल के विषय में और गूढ़ रहस्य जो हमने शोध में पाया है, यह आप लोगों को 2 फरवरी 2025, दिन रविवार, दोपहर 2:00 बजे अगिया बेताल के विषय में पूरी जानकारी खोल के देंगे क्योंकि थोड़ा समय का भी अभाव है।

जैसे उदाहरण दे रहे हैं, एक नार्मल आदमी मरता है तो भूत-प्रेत बनता है। एक पहलवान व्यक्ति मरता है तो वीर पहलवान बन जाता है। एक ब्राह्मण कर्मकांडी मरता है तो ब्रह्म बनता है।

नार्मल ब्राह्मण मरता है तो अपने घर का ब्रह्म बनता है और थोड़ा कर्मकांडी ब्राह्मण बनता है तो गाँव का ब्रह्म बन जाता है।

एक मंदिर का कोई पुजारी खत्म होता है, गिरी, गोसाईं, गोसाईं बाबा बन जाते हैं। एक औघड़ अगर मरता है, इच्छा बाकी है तो मसान बन जाता है।

इसी प्रकार जिनकी जैसी क्षमता है, वैसे ही मृत्यु के उपरांत उनकी योनि निर्धारित की गई है। तुमने ऐसा कर्म किया, तुम्हारे अंदर इतना अज्ञान था, इसलिए तुम इस कैटेगरी के बनोगे।

और जो बेताल हैं, यह उच्चकोटि के हैं। जो बेताल हैं, उच्चकोटि के हैं, बेताल ज्ञानियों में आते हैं।

अभी उसी गुरुकुल में 100 बच्चे पढ़ रहे हैं, अगर उन 100 बच्चों की अकाल मृत्यु हो जाए तो बाकी जो अलग बिरादरी के हैं, जो राजपूत हैं, यादव हैं, ये लोग अलग बेताल बनेंगे। लेकिन उसी में अगर ब्राह्मण पुत्र है, तो अगिया बेताल बनेगा। यह बात याद रखिएगा। आज के लिए इतना ही। जय श्री राम।

चौराहे वाली माता की कहानी – चौराहे वाली माता कौंन है

चौराहे वाली माता की कहानी - चौराहे वाली माता कौंन है

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चौराहे वाली माता की कहानी - चौराहे वाली माता कौंन है
चौराहे वाली माता की कहानी – चौराहे वाली माता कौंन है

चौराहे वाली माता की कहानी – चौराहे वाली माता कौंन है जय मां काली, तो आज का यह पोस्ट  बहुत ही ज्यादा खास होने वाला है क्योंकि इस पोस्ट  के माध्यम से मैं आपको यह बताऊंगी कि चौराहे वाली माता कौन है क्योंकि एक भाई ने प्रश्न किया था कि क्या चौराहे वाली माता ही माता शीतला है

तो अगर आपके मन में भी कुछ इसी प्रकार से प्रश्न चल रहे हैं कि कौन है चौराहे वाली माता या माता शीतला, क्या वे एक ही हैं, तो यह वीडियो आपके लिए ही है। तो अगर आप भी इस बारे में जानना चाहते हैं तो post को अंत तक जरूर पढ़े और इसके साथ ही 

 

तो आप सब ने मुझे यह कहते हुए कई पोस्ट  में पढ़ा  होगा कि माता चौराहे वाली को कोई भी साधना करने से पहले या किसी भी देवी-देवता को भोग देने से पहले या हवन करने से पहले इन माता को या चौराहे वाली माता को भोग देना बहुत ज्यादा जरूरी होता है।

तो अब मैं आपको यही बताऊंगी कि क्यों माता चौराहे वाली को भोग देना इतना ज्यादा जरूरी होता है, क्यों किसी भी साधना में माता चौराहे वाली को भोग दिया जाता है, क्या है इनका किसी भी साधना में स्थान, किस प्रकार से इनकी शक्तियां कार्य करती हैं, यह किस-किस प्रकार के कार्यों को करती हैं, कौन हैं माता चौराहे वाली।

लेकिन उससे पहले मैं आपको यह बता देती हूं कि कई व्यक्तियों के मन में यह कन्फ्यूजन होती है कि माता शीतला और माता चौराहे वाली एक ही हैं, लेकिन ऐसा नहीं है।

जो माता शीतला हैं, जो गर्दभ पर सवार होती हैं, जिनके एक हाथ में झाड़ू होता है, एक हाथ में जल का कलश होता है, वो माता पार्वती का स्वरूप हैं, वो स्वयं जगत जननी का ही एक अवतार हैं, जिनको माता शीतला कहा जाता है।

और माता शीतला, जिनका होली के बाद जो बसोड़े शुरू होते हैं, इस दिन माता की पूजा की जाती है, वह माता शीतला हैं।

और जो माता चौराहे वाली हैं, यह चौराहे वाली माता अलग हैं। इनको माता चौगानन, माता मदानन, माता मसानी, छोटी माता, चौराहे वाली माता, थानों वाली माता, कलरों वाली माता और बाहरली माता के नाम से जाना जाता है।

यानी कि जो माता चौराहे वाली हैं, इनका वास चौराहे, मैदान, चौगान, मसान, इन सभी स्थानों पर होता है और इनकी शक्तियां इन सभी स्थानों पर अपना कार्य करती हैं और अपनी पूर्ण शक्तियों के साथ ही इन स्थानों पर माता का वास होता है।

और चौराहे पर विशेष रूप से और मैदान में इस देवी का भोग दिया जाता है। और जो माता चौराहे वाली हैं, यह देवी सात्विक रूप से भी चलती हैं और तामसिक रूप से भी चलती हैं। और माता चौराहे वाली यानी जो माता मदानन हैं, माता मसानी हैं, माता चौगानन हैं, यह देवी बहुत ही ज्यादा शक्तिशाली होती हैं।

यानी कि इस देवी में इतना सामर्थ्य है कि यह देवी नकारात्मक शक्तियों के साथ-साथ सकारात्मक शक्तियों को भी रोक सकती हैं।

यानी कि भूत, प्रेत, जिन्न, मसान, इस प्रकार की जो नकारात्मक शक्तियां होती हैं, यह चाहे कितनी भी ताकतवर हों, कितनी भी भयानक शक्तियां हों, यह माता मदानन यानी कि जो माता चौराहे वाली होती हैं, इनके समक्ष नहीं टिक पातीं।

यानी कि अगर किसी व्यक्ति ने किसी का बुरा करने के लिए किसी नकारात्मक शक्ति को भेजा है और अगर वो व्यक्ति माता मसानी की यानी कि जो चौराहे वाली माता हैं, माता मदानन, माता चौगानन, इनकी शरण में चला जाए तो वह नकारात्मक शक्ति उस व्यक्ति का कुछ भी बुरा नहीं कर पाती।

और अब मैं आपको यह बता देती हूं कि मैं आपको चौराहे वाली माता को सभी साधना करने से पहले या हवन करने से पहले या भोग देने से पहले क्यों कहती हूं कि इस देवी का भोग देना जरूरी होता है।

क्योंकि जैसे मैंने आपको बताया कि इस देवी का वास चौराहे और मैदान में होता है, तो जब कोई सकारात्मक शक्ति या नकारात्मक शक्ति, यानी कि कई बार ऐसा होता है कि कोई भगत, साधक या तांत्रिक अपनी दुश्मनी को पूरा करने के लिए या किसी भी कारण से नकारात्मक शक्ति को व्यक्ति के ऊपर भेजता है, तो जब वो नकारात्मक शक्ति आप तक आती है तो वह नकारात्मक शक्ति चौराहे, मैदानों के माध्यम से होकर ही आप तक पहुंचती है।

तो अगर ऐसे में आपने चौराहे वाली माता को प्रसन्न किया हुआ है, चौराहे वाली माता आप से प्रसन्न हैं और आप चौराहे वाली माता को भोग देते हैं तो वो नकारात्मक शक्ति कभी भी आप तक नहीं आती। वो माता चौराहे वाली वहीं से ही उस नकारात्मक शक्ति को वापस भेज देती हैं और आपको बचा लेती हैं।

और उसी तरीके से जब आप कोई साधना करते हैं और जब आप साधना करते हैं तो उस साधना से प्रसन्न होकर सकारात्मक शक्तियां आपकी तरफ आकर्षित होती हैं और आपके घर तक आती हैं, आपके पास तक आती हैं।

और जब वह सकारात्मक शक्तियां आपके पास आती हैं तो वह सकारात्मक शक्तियां भी चौराहे और मैदान से होकर ही आपके पास आती हैं। और अगर ऐसे में आपने उस साधना में या उस हवन के दौरान या उस पूजा के दौरान आपने चौराहे वाली माता को भोग नहीं दिया होता तो ऐसे में वो चौराहे वाली माता उस सकारात्मक शक्ति को भी वहीं रोक लेती हैं।

और अगर आपने चौराहे वाली माता को भोग दिया होता है तो चौराहे वाली माता उस सकारात्मक शक्ति को आपके घर तक आने देती हैं और आप पर कृपा करने देती हैं।

तो इसीलिए ही मैं आपको अपनी हर पोस्ट में कहता हूं कि जब भी आप कोई साधना करें या जब भी आप कुछ हवन करते हैं, अनुष्ठान करते हैं या किसी भी देवी-देवता की कोई साधना करते हैं तो उस समय पर आप चौराहे वाली माता को भोग जरूर दें क्योंकि चौराहे वाली माता ही हैं जो आप तक शक्तियों को पहुंचा भी सकती हैं और शक्तियों को रोक भी सकती हैं।

और इसके साथ-साथ इसका फायदा यह भी है कि अगर आप चौराहे वाली माता को भोग देते हैं तो यह माता आपसे प्रसन्न हो जाती हैं।

और जब चौराहे वाली माता आपसे प्रसन्न हो जाती हैं तो आपको किसी भी नकारात्मक शक्ति का कोई भय नहीं रहता क्योंकि माता चौराहे वाली के समक्ष कोई भी शक्ति अपना कार्य कर ही नहीं पाती क्योंकि यह शक्ति एक पल में उस नकारात्मक शक्ति को नष्ट करने में समर्थ है।

यानी अगर किसी व्यक्ति के ऊपर कुछ बुरी शक्ति है या तांत्रिक क्रिया की हुई है या कोई भयंकर शक्ति उस व्यक्ति के ऊपर छोड़ी हुई है, अगर वह व्यक्ति चौराहे वाली माता का कोई उतारा करता है 

या चौराहे वाली माता के माध्यम से अपने संकटों को कटवाता है तो माता चौराहे वाली, माता मदानन, माता मसानी, माता चौगानन पल भर में उस व्यक्ति के ऊपर से नकारात्मक शक्ति को खत्म कर देती हैं। तो इस प्रकार से हैं माता चौराहे वाली।

तो आशा है जिन भाई ने यह प्रश्न किया था कि चौराहे वाली माता, माता शीतला एक ही हैं या कौन हैं चौराहे वाली माता, तो उनको समझ आया होगा। तो आपको जानकारी पसंद आई है तो पोस्ट  को लाइक करें और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर करें।

 

माँ शीतला मसानी की साधना कौंन शीतला मसानी और क्या लाभ sheetla masani sadhna ph.85280 57364

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माँ शीतला मसानी की साधना कौंन शीतला मसानी और क्या लाभ sheetla masani sadhna ph.85280 57364 यह लेख माँ शीतला मसानी की साधना के विषय में है, जिन्हें तंत्र की एक शक्तिशाली देवी माना जाता है। इसमें बताया गया है कि जो साधक तंत्र के क्षेत्र में उन्नति करना चाहते हैं या अपने जीवन से बाधाओं को दूर करना चाहते हैं, उनके लिए यह साधना किस प्रकार फलदायी हो सकती है। लेख में साधना की विधि, आवश्यक सामग्री और मंत्र का भी उल्लेख किया गया है।


हर हर महादेव। आज आपको साधना देने जा रहा हूँ जो आपको तंत्र सम्राट बना देगी। क्या बना देगी ? तंत्र सम्राट। रियल में जो तांत्रिक हैं, तंत्र भगत हैं, ओझा हैं, औघड़ हैं, जो तंत्र सम्राट बनना चाहते हैं, जो तंत्र की साधना करना चाहते हैं, अपनी गद्दी को चलाना चाहते हैं, जो लोग चाहते हैं कि उनके पास आएँ और उनके हर कार्य बनें, भूत, प्रेत, जिन्न, मसान को हटा सकें तो उनको शीतला मसानी की साधना करनी ही चाहिए।

माता देवियों की देवी महादेवी बोली जाती हैं, महा-क्रूरी महादेवी माता पार्वती की ही अवतार हैं, माता पार्वती का ही एक रूप हैं।

तंत्र की वह योगिनी हैं, तंत्र की वह सम्राज्ञी हैं कि 64 जो 360 मसानियाँ हैं, इसके अधीन चलते हैं। मसान इसके अधीन चलते हैं, भूत, जिन्न, मसान, देव सब इसके अधीन चलें। धरती पर मैक्सिमम जो मौतें होती हैं बीमारी से, वह माँ शीतला के ही ज़रिए होती हैं।

तो जो भी व्यक्ति माँ शीतला की साधना करता है उसके अंदर में एक अद्भुत साधना के ज़रिए शक्ति जागृत होती है। मैं आप लोगों को यही बोलना चाहूँगा कि माता शीतला की साधना हर व्यक्ति को करनी ही करनी चाहिए।

जिसने यह साधना नहीं करी, इसका मतलब है कि तुम समझ लो कि आपके घर पर कोई भी तंत्र कर सकता है। माँ शीतला तंत्र की देवी हैं।

शीतला मसानी, दो सौम्य रूप हैं माता के, एक सौम्य रूप माता शीतला और एक है शीतला मसानी। शीतला मसानी तंत्र की सम्राज्ञी हैं, 360 मसानियाँ उसके अंडर में चलती हैं, मसान उसके अंडर में चलते हैं, 84 मसान उसके अंडर में चलते हैं।

जो काली कुल की मसानियाँ हैं, वो भी उसके अंडर में चलती हैं, जो शीतला कुल की मसानियाँ हैं, वो भी उसके अंडर में चलती हैं।

माता धरती पर, इस धरा पर कुछ भी कर सकती हैं। इस धरा की, धरती की मालकिन हैं वो, इस धरा की मालकिन हैं और भैरव जी उसके साथ में चलते हैं, हनुमान जी उसके साथ में चलते हैं, छप्पन कलवा उसके साथ में चलते हैं।

समझ लो बंगाल का काला जादू जिसको बोला जाता है, बंगाल का काला जादू भी उसके अधीन आता है, उसको भी रोक लेती हैं। पूर्व की विद्या को भी रोक लेती हैं।

भारत में क्या छोड़ो, धरती पर किसी भी तरह की कोई भी काला जादू, पीला जादू, हरा जादू, जो भी तरीके की विद्याएँ हैं, सब माता शीतला के अंडर में ही चलता है, सबको वह रोक सकती हैं।

अब माँ शीतला की आपको साधना कैसे करनी है, मैं आपको बताऊँगा। माँ बहुत ही करुणामयी हैं, अपने बच्चों के लिए बहुत ही दयालु हैं और हर साधक को, हर भगत को यह साधना करनी चाहिए। माता शीतला के आटे के कुछ पुए बनाने चाहिए।

माँ शीतला मसानी  का भोग sheetla masani bhog 

जो साधना सामग्री है, कुछ पुए, आठ पूड़ी, घी का हलवा और खीर, यह माता का भोग है। और दो, तीन, चार जायफल, लौंग, बताशे। सर्वप्रथम जब माता शीतला की आपको साधना करनी है, माता चौगानन मसानी जो शीतला मसानी हैं, उनसे करनी है, तो यह सब तैयारी करके आपको यज्ञ पूजा सजानी है, हवन करना है।

हवन हर शुक्रवार-शुक्रवार करना होता है या फिर सोमवार, ये दोनों में से आपको एक बार, यह रेगुलर जो भगत हैं उनको करनी चाहिए। जो साधना करना चाहते हैं, वो लोग कम से कम स्टार्टिंग में 11 दिन की साधना करें।

sheetla masani sadhna तो आपको साधना करने से पहले क्या करना है?

किसी भी चार रास्ते पर जाकर सात कंकड़ उठाकर लेकर आना है और माता से प्रार्थना करनी है कि, “हे माँ, मैं आपकी साधना करना चाहता हूँ, आप मेरे साथ में वहाँ पर मेरे घर पर जो स्थान पर मैं साधना करूँ, वहाँ चलो।” सवा किलो चावल ले लें या सवा किलो जौ ले लें, कोरे पात्र में रख के उसके ऊपर सातों पत्थर रख देना है और एक सरसों के तेल का मिट्टी का दीया जलाना है।  यह सब सामान पहले तैयार कर लें।

माँ शीतला मसानी की साधना  विधि  sheetla masani  sadhna vidhi 

सामान तैयार कर पवित्रीकरण करें, पवित्रीकरण करने के बाद आप तीन बार आचमनी करें। आचमन करने के बाद सर्वप्रथम गणेश भगवान को याद करें, फिर अपने गुरु देवता को याद करें, काल भैरव को याद करें, इनकी एक-एक माला फिर आप जाप करना है, तीनों की। और एक-एक माला जाप करने के बाद फिर संकल्प लेके, “हे माँ,” विष्णु विष्णु विष्णु बोल के तीन बार संकल्प लें।

हाथ में थोड़ा जल लेकर उसमें थोड़ा अक्षत रख लें, अक्षत रख के एक-दो रुपये रख लें, सुपारी ले लें और आपको संकल्प लेना है।

संकल्प लेकर अपना नाम बोलें, पिताजी का नाम बोलें व दादाजी का नाम बोलते हुए कि, “मेरे कुल का उद्धार करो और मेरे परिवार में किसी भी प्रकार की तंत्र बाधा हो, तंत्र बाधा कट जाए, लक्ष्मी को अबाध करो और मेरे परिवार में किसी भी तरीके का रोग हो, उस रोग को काटें।”

हो सके तो आप इस संकल्प में पूरे परिवार का नाम भी ले सकते हैं, नाम लेते हुए अपनी मनोकामना की पूर्ति बोलते हुए आपको जल माता के चरणों में समर्पण कर देना है।

यह करने के बाद में आपको क्या करना है? मंत्र जप तो किया हुआ है, फिर 11-11 बार गुरु मंत्र जाप करें, 11 बार आपको गणपति मंत्र जाप करें, 11 बार आपको भैरव जी का मंत्र जाप करें। यह करने के बाद जो विशिष्ट मंत्र दे रहा हूँ, उस मंत्र का जाप करें।

माँ शीतला मंत्र sheetla masani  mantra

मंत्र है: “मंत्र “ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं शीतला देव्यै ह्रीं क्रीं ह्रीं नमो नमः।”

इसका 33 माला जाप करें। यह मंत्र आपको डिस्क्रिप्शन में लिखित रूप में दे दूँगा। इस मंत्र का आपको 33 माला जाप करना चाहिए। जैसे ही 11 दिन आपका यह जाप हो जाएगा, जाप होने के बाद आपको कम से कम 11 कन्याओं को भोज कराना चाहिए।

जैसे मैंने बोला हवन करना है आपको, उस दिन जाप हो गया, दूसरे दिन ही आपको आठ पूड़ी बना लेनी है, थोड़ा हलवा बना लेना है, खीर बना लेनी है, पुए बना लेने हैं, आटे के पुए बनते हैं, वो पुए बना लेने हैं। यह और पाँच-दस बताशे, लौंग ले लेने हैं।

हवन कुंड में अग्नि को सजा लेना है, अग्नि को सजाते हुए अपना पवित्रीकरण कर लें। पवित्रीकरण करके सभी को आह्वान करना है अपने देवी-देवताओं को, जिस तरीके से मैं हमेशा बताता हूँ।

देवी-देवता, गुरु देवता को, गणपति देवता को, काल भैरव को ध्यान करते हुए, वास्तु देवताओं को, ग्राम देवता को, क्षेत्रपाल देवताओं को, आपको आह्वान कर, पंच देवताओं को, प्रजापति दक्ष को और माता शीतला को आह्वान करते हुए सबको पहले पाँच-पाँच, एक-एक, दो-दो आहुतियाँ दे दें आप।

आहुति देने के बाद जो मंत्र मैंने बताया उस मंत्र की आप कम से कम 11 माला का हवन करें, ना हो सके पाँच माला का हवन करें और ना हो सके तीन माला का हवन करें। हवन किससे करना है? घी से करना है, उसमें चावल, जो सवा किलो चावल है, वो डालें। ठीक है?

वो हवन करें, पूरे परिवार को बिठा लें, हवन कर लें। और उसके बाद में आठों पूड़ी में थोड़ी-थोड़ी पूड़ी तोड़ के, हलवा लेकर, पूड़ी लेके और पुए लेकर माँ को भोग अर्पण करें। भोग अर्पण करने के बाद में माँ को दक्षिणा अर्पण करें, दक्षिणा अर्पण करने के बाद माँ से क्षमा याचना करें

कि, “माता, कोई भी हमसे त्रुटि हो गई है तो हमको क्षमा करना, हम आपके बच्चे हैं और हमारी मनोकामना की पूर्ति करना, जो हमने संकल्प लिया है उस संकल्प को सिद्ध करना।” ऐसे बोलते हुए फिर माता से क्षमा याचना करते हुए फिर माँ को जल अर्पण करना है, शांति देनी है। जल अर्पण करके प्रार्थना करें।

जो सामग्री बची होगी, जो अंदर जो भस्म बची है, उस भस्म से थोड़ी सी भस्म आप छान के रख लें और बाकी की पूरी भस्म और सवा किलो चावल आपको माता गंगा में, गंगा नदी में अर्पण करना चाहिए, गंगा नदी में विसर्जन कर देना चाहिए।

याद रहे, उसमें फूल वगैरह कुछ भी नहीं होने चाहिए, सिर्फ़ जली हुई सामग्री होनी चाहिए और सवा किलो जौ, बस यही होना चाहिए। आप देखेंगे कि सवा महीने में आपके पूरे परिवार में कोई तंत्र बाधा, कोई परेशानी, वह सब खत्म हो जाएगी और आपके परिवार में खुशहाली आएगी।

और आप अगर निरंतर शनिवार के दिन या शुक्रवार के दिन या रविवार के दिन यह पूजा को करते रहेंगे, आप तंत्र सम्राट ही बन जाएँगे।

देखेंगे धीरे-धीरे एक-दो साल में, तीन साल में आपके माँ का आपको प्रत्यक्षीकरण भी हो सकता है, माँ आपको प्रत्यक्ष रूप से भी दिख सकती हैं। और मेरे जितने भी साधक हैं, जिनको मैंने साधना कराई है, माँ प्रत्यक्ष दिखी ही दिखी हैं।

माँ शीतला इतना विशाल रूप दिखता है उनका, विशाल रूप, सर इतना विशाल, सबको दिखती हैं। जो भी साधकों को मैंने सिद्ध कराई, साधकों को माँ शीतला के दर्शन हुए हुए हैं। तो आपको तंत्र सम्राट बनना है तो शीतला की साधना, शीतला मसानी की साधना करनी ही करनी चाहिए। हर हर महादेव।

यह साधना बिना गुरु के मार्ग दर्शन से न करे 

महामृत्युंजय मंत्र के नुकसान – भूल से भी न करें ये 6 गलती ph.85280 57364

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महामृत्युंजय मंत्र के नुकसान - भूल से भी न करें ये 6 गलती ph.85280 57364
महामृत्युंजय मंत्र के नुकसान – भूल से भी न करें ये 6 गलती ph.85280 57364

महामृत्युंजय मंत्र के नुकसान – भूल से भी न करें ये 6 गलती ph.85280 57364 प्राण कुछ देर के लिए रोक सकता है, वो महामृत्युंजय के मंत्र में वो बल है। इसलिए ब्राह्मण कहते महामृत्युंजय का जाप कर, इसका अनुष्ठान कर लीजिए, जप कर लीजिए, उस जप को धारण कर लीजिए। पर एक बात आपसे हम कहना चाहेंगे — थोड़ा सा भले आपको बुरा लगे, चाहे भला लगे।

जितने website के माध्यम से पढ़ रहे हो, आस्था के माध्यम से सुन रहे हो, चाहे महामृत्युंजय मंत्र बजता रहता या गायत्री मंत्र आपने अपने मोबाइल में डाल लिया, हनुमान चालीसा आपने अपने मोबाइल में डाल ली — चलते-फिरते, खाते-पीते आप जप पर।

शिव महापुराण की कथा कहती है — महा मृत्युंजय वो मंत्र है जिस मंत्र के बल पर स्वयं भगवान शंकर सामने आकर खड़े हो जाते हैं मृत्यु को जीतने के लिए। और उस मंत्र को आप गलत काम कर रहे हो — उसमें भी बज रहा है, रिंगटोन में चालू कर दिया है।

मालूम पड़े — सोच, कर्म के लिए बैठे हो, कहीं वॉशरूम में गए हो, कहीं मुंह धो रहे हो, उल्लंघन कर रहे हो, गलत — किसी से झूठ बोल रहे हो, बात कर रहे हो और वो मंत्र तुम्हारे मोबाइल में बज रहा है। उसका दोष तुमको सहन करना पड़ेगा, उसका कष्ट तुमको सहना पड़ेगा। कोई दूसरा नहीं सहेगा।

मंत्र का प्रयोग, मंत्र का उपयोग आप करो — मना नहीं है, परंतु उस मंत्र का प्रयोग जब आपको लगे कि मुझे इस मंत्र की ज़रूरत है — तब उस मंत्र को छोड़ा जाए। भगवान राम के उस तरकश के अंदर कितने बाण थे, पर भगवान ने समय-समय पर छोड़े — कि हां, इस बाण की ज़रूरत है — छोड़ दिया जाए। अब इसकी ज़रूरत है — छोड़ दिया जाए। अब इसकी ज़रूरत — छोड़ दिया जाए।

लक्ष्मण जी ने बार-बार भगवान राम से कहा — एक मिनट में निपटा दो इस रावण को। भगवान कहते — नहीं, पहले छोटे-छोटे बाण छोड़े जाएंगे। डॉक्टर भी अगर टैबलेट देता है, डॉक्टर भी दवाई देता है, तो पहले छोटी-छोटी देता है — कि ये काम कर जाएगी, यह काम कर जाएगी, यह काम कर जाएगी।

जब इतने एमजी की काम नहीं करती — 60 एमजी, 70 एमजी, 200 एमजी की काम न करे, फिर 500 एमजी पर पहुँचता है कि हां, अब यह दवाई काम करेगी। 500 से फिर आगे बढ़ेगा — 550 एमजी की, 600 एमजी की।

जब ये काम न करे, तब दिया जाता है। उस मंत्र का प्रयोग करो, जपो — और जब हम किसी कष्ट में हो, तब किसी ब्राह्मण देवता के पास जाकर निवेदन कर कहें — ब्राह्मण देवता, हे ब्राह्मण देव, आपकी कृपा हो — हमें महामृत्युंजय मंत्र का अनुष्ठान करवाना है। मेरे दादा, मेरे पिता, मेरी माता, मेरी बहन, मेरा भाई — उसकी स्वास्थ्य। ब्राह्मण देवता संकल्प लें — और संकल्प लेकर फिर वो महामृत्युंजय मंत्र का स्मरण करे। उसका जो फल हो, उसका जो सुख हो — वह एक आनंद देने वाला है, उसका एक आनंद है — जीवन की शरणागति का पथ है, सुख देने वाला आनंद।

शिव मंत्र साधना से कुंडलिनी जागरण | सावन मास में पाएं दिव्य अनुभव

gray concrete statue under blue sky during daytime

sawan maas mein shiv sadhana शिव मंत्र साधना से कुंडलिनी जागरण | सावन मास में पाएं दिव्य अनुभव 

शिव मंत्र साधना से कुंडलिनी जागरण | सावन मास में पाएं दिव्य अनुभव
शिव मंत्र साधना से कुंडलिनी जागरण | सावन मास में पाएं दिव्य अनुभव

सावन मास शिव साधना शिव मंत्र साधना से कुंडलिनी जागरण | सावन मास में पाएं दिव्य अनुभव sawan maas mein shiv sadhana जय सियाराम प्यारे साधकों हर हर महादेव। आज की यह लेख बहुत ही महत्वपूर्ण होने वाली है। आज मैं जानकारी ले आया हूं सावन के इस पवित्र महीने में हम भगवान भोलेनाथ की किस प्रकार से साधना कर सकते हैं। 

क्या हमारा प्रोसेस रहेगा और किस प्रकार से हम भगवान शिव के मंत्र का जाप करके अपनी कुंडलिनी शक्ति को अनुभव कर सकते हैं।

अपनी दिव्य दृष्टि से सूक्ष्म जगत के हम दर्शन कर सकते हैं और अपनी वाक् सिद्धि को बहुत ज़्यादा प्रबल कर सकते हैं और बहुत ज़्यादा अपनी सिद्धि शक्तियों को प्राप्त करके लोक कल्याण का कार्य भी कर सकते हैं।

तो प्यारे साधकों यह पोस्ट आप ही के लिए है। यदि आप एक बेसिक साधक हैं, एक न्यू साधक हैं और आप भी मंत्रों का जाप करना चाहते हैं। आप भी अपने देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं या आप एक एडवांस लेवल के साधक हैं।

काफी समय से आप प्रयासरत हैं अपनी सिद्धि शक्ति को प्राप्त करने के लिए, अपनी दिव्य दृष्टि को एक्टिवेट करने के लिए या कुंडलिनी शक्ति को जागृत करने के लिए। तो प्यारे साधकों अब आपको किस प्रकार से प्लान करना है, वो मैं बता देता हूं।

sawan maas mein shiv sadhana चातुर्मास का महत्व और भोलेनाथ की कृपा

सावन मास शिव साधना शिव मंत्र साधना से कुंडलिनी जागरण | सावन मास में पाएं दिव्य अनुभव
सावन मास शिव साधना शिव मंत्र साधना से कुंडलिनी जागरण | सावन मास में पाएं दिव्य अनुभव

जैसे आप सभी जानते हैं 6 जुलाई से हमारे 1 नवंबर तक विष्णु भगवान पूर्ण रूप से योग निद्रा में चले गए हैं। अब इन चातुर्मास का जो अपने हमारे ग्रंथों के अंदर बहुत ज़्यादा महत्व होता है कि इस दौरान यदि कोई भी व्यक्ति अपने इष्ट की सेवा करता है या किसी भी देवी-देवता की सेवा भाव करता है तो 100% उसे पुण्यों की प्राप्ति होती है।

तो उसी प्रकार से अब इन चार महीनों को जो होल्ड करेंगे वह करेंगे हमारे भगवान भोलेनाथ शिव शंकर भोलेनाथ। तो शिव भगवान इन चार महीनों में आपकी सिद्धि साधनाओं को सफल करने वाले देवता बनेंगे।

sawan maas mein shiv sadhana सावन मास में साधना की योजना

a table with a bunch of items on top of it

तो इन चातुर्मास के अंदर आपको बोला जाता है तीर्थों के आप दर्शन कर सकते हैं। तीर्थों पे आप जाकर अपने गुरु मंत्र का जाप कर सकते हैं या कोई भी सिद्धि साधना करते हैं तो उसका पुण्य बहुत ज़्यादा मिलता है।

तो, इसी प्रकार से अभी सावन का जो महीना चालू होने वाला है, 11 जुलाई से चालू हो रहा है जो कि 9 अगस्त तक हमारा चलेगा। अब आप एक एडवांस लेवल के साधक हैं तो आप एक साधना उठा सकते हैं जो कि 11 तारीख से लेकर 9 अगस्त तक 30 दिन की एक साधना को भी आप उठा सकते हैं कि पूरा सावन के महीने में आप भगवान भोलेनाथ की सेवा करने जा रहे हैं।

यदि आप कोई जॉब करते हैं, कोई बिज़नेस करते हैं, ज़्यादा समय नहीं होता है, तो पूर्ण रूप से आप साप्ताहिक भी कर सकते हैं कि हर सोमवार के दिन चारों सोमवार जैसे 14 जुलाई, 21 जुलाई, 28 जुलाई और 4 अगस्त — इन चार महाशिवरात्रि का एक तरीके से जो पर्व है उसको सेलिब्रेट कर सकते हैं।

sawan maas mein shiv sadhana सावन मास शिव साधना  – साधना के विविध तरीके

a statue of a person sitting in a lotus position

इस दिन आप फलाहार ले सकते हैं या इस दिन आप फास्टिंग भी कर सकते हैं या कोई किसी भी जैसे शिव पुराण का पाठ करना हो इस प्रकार के पाठों को भी कर सकते हैं। यदि आप राम भक्त हैं, शिव या बालाजी के भक्त हैं तो आप रामायण जी का भी पाठ कर सकते हैं और भगवान भोलेनाथ को सुना सकते हैं।

तो इस प्रकार से भी आप प्लान करते हैं। किसी भी साधना को करने से पहले सबसे पहले हम भगवान गणेश जी का ध्यान करते हैं। उनका हम नमन करते हैं और गणेश जी का हम पंचोपचार से पूजन करते हैं।

कोई भी हम चौकी स्थापित कर सकते हैं। चौकी के ऊपर गणेश जी का पीले चावल छोड़कर हम पंचोपचार से पूजन करेंगे सर्वप्रथम। उसके बाद में आपने यदि गुरु दीक्षा ली हुई है तो आप गुरु का अपना पूजन करेंगे।

गुरु का पूजन करने के उपरांत यदि आपके कोई शरीरधारी गुरु नहीं हैं, आपने अपने इष्ट देवी-देवता या भगवान भोलेनाथ को ही अपना गुरु मान रखा है तो आप भगवान भोलेनाथ का पंचोपचार से पूजन करेंगे।

sawan maas mein shiv sadhana सावन मास शिव साधना –  मुख्य पूजन विधि और मंत्र जाप

a statue of a person sitting on top of a rock

उसके उपरांत आप अपने मेन मंत्र के ऊपर आएंगे। मतलब अपने मेन इष्ट के ऊपर आएंगे। आप भगवान भोलेनाथ के एक सुंदर से चित्र को रख सकते हैं। यदि आपके मंदिर में पहले से ही कोई मूर्ति है तो उसी मूर्ति को आप स्नान करा के बढ़िया तरीके से उनकी स्थापना कर सकते हैं।

पंचोपचार से पूजन करने के बाद में उनकी आरती करने के बाद में आप उनको मिष्ठान्न का भोग लगा सकते हैं। प्रसाद चढ़ा सकते हैं। फल फूल जो भी आप समर्पित करना चाहते हैं आप भगवान भोलेनाथ को समर्पित कर सकते हैं।

अब जब यह आपका पूजन क्रम कंप्लीट हो जाता है, तो सबसे पहले हमारा जो सबसे प्रभावी मंत्र होता है, शिव साधना के लिए पंचाक्षरी मंत्र है और शिव मंत्र यह इतना ज़्यादा पावरफुल होता है कि किसी भी व्यक्ति की कुंडलिनी शक्ति को बिना किसी पेन के उठाने का दम रखता है।

सबसे पावरफुल मंत्र बोला जाता है। क्योंकि कहीं ना कहीं हमारी जो कुंडलिनी शक्ति है वह माता पार्वती का ही स्वरूप है और जो हमारे शिव हैं जो ब्रह्म रंध्र से हमारे कुंडलिनी के साथ में जो मिलन होता है एक तरीके से बोला जाता है शिव शक्ति का मिलन — इसे ही हम कुंडलिनी शक्ति का जागरण कहते हैं।

तो इस हमारे शिव मंत्र का जो कि “नमः शिवाय” का मंत्र होता है जिसमें पांच अक्षर मंत्र होते हैं। यह अपने आप में बहुत ज़्यादा पावरफुल है। यदि हम इसमें आगे और पीछे प्रणव लगा देते हैं “ॐ” तो यह षडाक्षरी या षडक्षरी मंत्र बन जाता है।

sawan maas mein shiv sadhana सावन मास शिव साधना – कुंडलिनी जागरण की प्रक्रिया

सावन मास शिव साधना शिव मंत्र साधना से कुंडलिनी जागरण | सावन मास में पाएं दिव्य अनुभव
सावन मास शिव साधना शिव मंत्र साधना से कुंडलिनी जागरण | सावन मास में पाएं दिव्य अनुभव

अब जब कोई भी साधक शिव मंत्र का जाप करता है तो उसके शरीर की 72,000 नाड़ियां पूर्ण रूप से एक्टिवेट होकर उसके शरीर के अंदर में कॉस्मिक एनर्जी को भरने लग जाती है और पूरा ओरा उसका ब्लूइश कलर का दिखाई देने लगता है।

और शिव मंत्र एक बहुत ज़्यादा सौम्य मंत्र है। इसके जाप से हमारे शरीर के ऊपर कोई भी दुष्परिणाम नहीं आते हैं। तो कोई भी साधक अपने इस मंत्र का जाप करके कुंडलिनी शक्ति को आसानी से फील कर सकता है और सिद्धि शक्तियों को तुरंत से आकर्षित कर सकता है।

अब हमारा सबसे अहम पड़ाव जो होने वाला है इस साधना में वो रहेगा — संकल्प।

sawan maas mein shiv sadhana सावन मास शिव साधना – संकल्प और न्यास की विधि

सावन मास शिव साधना - संकल्प और न्यास की विधि
सावन मास शिव साधना – संकल्प और न्यास की विधि

कोई भी साधना की जाती है तो हम देवी-देवता से अपना संकल्प लगाते हैं। तो आप संकल्प लगाना सभी जानते हैं। आपको देवता का आह्वान करना होता है और उनसे प्रार्थना करनी होती है कि मेरा यह नाम है। मेरे पिता का यह नाम है, एड्रेस यह है, गोत्र यह है और मैं भगवान भोलेनाथ आपकी साधना करने जा रहा हूं।

कृपया करके आपकी जो भी मनोकामना है, वह आपको बोल देनी है और संकल्प में बोलना है कि मैं कम से कम इन 11 दिन के अंदर सवा लाख मंत्रों का जाप करूंगा या मैं इस पूरे सावन के महीने में 30 दिन के अंदर सवा पांच लाख मंत्रों का जाप करूंगा।

सबसे पहले तो आपको अपना बढ़िया तरीके से बैठ जाना है। न्यास करना है। मंत्र की ऊर्जा को अपने संपूर्ण शरीर के अंदर स्थापित करना है।

अब आपको सबसे पहले न्यास कर लिया कि यह मंत्र “ॐ नमः शिवाय” के न्यास का हिस्सा है, जो भगवान शिव को समर्पित है। “अंगुष्ठाभ्यां समर्पयामि” का अर्थ है “अंगूठे से स्पर्श करता हूँ”, “तर्जनीभ्यां समर्पयामि” का अर्थ है “तर्जनी उंगली से स्पर्श करता हूँ”, और “मध्यमाभ्यां समर्पयामि” — पूरे शरीर के अंगों को स्पर्श करके मंत्र की ऊर्जा को हम समाहित कर लेते हैं।

अब हम यहां पे प्रोटेक्शन हो गया है हमारा। ऊर्जा हम शिव तुल्य हो गए हैं शिव के मंत्र को जप करने के लिए।

sawan maas mein shiv sadhana सावन मास शिव साधना – ध्यान और इमेजिनेशन की महत्ता

अब आपको सबसे पहले थर्ड आई मतलब आंखों को भी आप बंद करके जाप कर सकते हैं ताकि आपका कंसंट्रेशन लेवल ज़्यादा से ज़्यादा बने। यदि आप आंख खोल के करते हैं तो आपकी आंखों की वजह से आपका ध्यान भटक सकता है।

तो आप आज्ञा चक्र पर इमेजिनेशन करेंगे कि आपका जो मंत्र है “ॐ नमः शिवाय” — वह पीले अक्षरों में गोल्डन कलर में आपकी थर्ड आई के पटल पर लिखा जा रहा है।

मन ही मन इस मंत्र का जाप करेंगे, और हार्ट के अंदर से उसकी गूंज सुननी है कि मंत्र की आवाज कैसी है।

जब आप आराम से, धीरे-धीरे मंत्र को फील करते हुए, सुनते हुए जाप करते हैं तो मंत्र की वाइब्रेशन आपके शरीर के अंदर गहराई तक जाती है।

sawan maas mein shiv sadhana बाधाएँ, अनुभव और अंतिम रहस्य

जब आपकी फ्रीक्वेंसी मंत्र से मेल खा जाती है तो आपकी कुंडलिनी शक्ति ऊपर की ओर चलना प्रारंभ कर देती है।

50% जाप के बाद आपको लग सकता है कि यह सब व्यर्थ है, छोड़ दूं। लेकिन यही समय है जब साधना परीक्षा लेती है।

आपको डरावने सपने आ सकते हैं, शरीर में दर्द हो सकता है — लेकिन ये संकेत हैं कि आपकी शक्ति जागृत हो रही है।

80% के बाद आपका मन उचाट हो सकता है। लेकिन नियम का पालन करना आवश्यक है। यदि कुंडलिनी किसी चक्र पर फंसी हो तो वह वहां से निकल कर ऊपर चढ़ती है।

अनुभवी साधकों की प्रेरणा

कुछ साधकों ने वर्षों तक सवा लाख पार्थिव शिवलिंग बनाकर सिद्धि प्राप्त की है। उनकी इच्छाएं स्वतः पूर्ण होती हैं।

सावन मास शिव साधना –  ध्यान का अंतिम चरण और निष्कर्ष

अब आपको ध्यान में कम से कम 40 मिनट से 1 घंटे तक बैठना है और मन ही मन शिव से संवाद करना है।जब आप इस प्रकार से जाप और ध्यान करते हैं तो 100% आपकी साधना सफल होती है। 

निष्कर्ष

तो प्यारे साधकों, इस सावन में आप अपनी साधना प्रारंभ कर सकते हैं। ध्यान करें, जाप करें और अपनी दिव्यता को प्राप्त करें।

https://www.youtube.com/watch?v=kl9Z0_ZXEj0&pp=ygUKc2hpdiB2aWRlbw%3D%3D

शुक्राचार्य मृत संजीवनी मंत्र – जो जीवन प्रदान करेगा साधक को shukracharya mrit sanjeevani mantra

शुक्राचार्य मृत संजीवनी मंत्र - जो जीवन प्रदान करेगा साधक को

शुक्राचार्य मृत संजीवनी मंत्र – जो जीवन प्रदान करेगा साधक को shukracharya mrit sanjeevani mantra 

शुक्राचार्य मृत संजीवनी मंत्र - जो जीवन प्रदान करेगा साधक को
शुक्राचार्य मृत संजीवनी मंत्र – जो जीवन प्रदान करेगा साधक को

शुक्राचार्य मृत संजीवनी मंत्र – जो जीवन प्रदान करेगा साधक को shukracharya mrit sanjeevani mantra गुरु मंत्र साधना डाट  कॉम में  आपका स्वागत है। श्री गुरु चरणों में नमन कर, श्री गणेश की वंदना करता हूँ। सर्वप्रथम मैं वेबसाइट के उन सभी प्रबुद्ध और मुखर पाठको का हार्दिक अभिनंदन करना चाहता हूँ।

आज के पोस्ट में हम चर्चा करते हैं मृत संजीवनी मंत्र के ऊपर। आपने नाम अवश्य सुना होगा। असुरों के गुरु शुक्राचार्य के पास यह विद्या थी। इस विद्या के दम पर, इस मंत्र के दम पर, वह देवासुर संग्राम में असुरों को पुनर्जीवित कर दिया करते थे।

जो असुर युद्ध में मारे जाते, वे सब पुनर्जीवित हो जाते। परिणाम स्वरूप, ये असुर देवताओं पर भारी पड़ते थे। यह विद्या केवल शुक्राचार्य के पास थी, देवगुरु बृहस्पति के पास नहीं थी। 

एक मंत्र है महामृत्युंजय मंत्र, भगवान शिव का मंत्र, बहुत प्रसिद्ध है। नाम से ही प्रकट होता है, महामृत्युंजय, मृत्यु को जीतने में सक्षम, महामृत्युंजय है।

और यह मंत्र क्या है? मृतसंजीवनी। जो मृत व्यक्ति को भी संजीवनी प्रदान कर उन्हें पुनर्जीवित कर दे, वह है मृत संजीवनी मंत्र। एक व्यक्ति को मरने से बचाता है, उसकी मृत्यु पर विजय प्राप्त कराता है और मृत व्यक्ति को पुनर्जीवित कर देता है।

तो आज का विषय है कि विभिन्न ग्रंथों में मृत संजीवनी विद्या के नाम पर, मंत्र के नाम पर, कई मंत्र मिलते हैं। मैं इस मंत्र की बात कर रहा हूँ। अनुभूत। 

कई मंत्रों के बारे में पढ़ा है, मृत संजीवनी विद्या के नाम पर कई पुस्तकें हैं मेरे पास। ‘त्रिपुर सुंदरी साधना’ में देवदत्त शास्त्री एक बहुत प्रतिष्ठित नाम हैं। यह तंत्र के क्षेत्र में, तंत्र साहित्य में, उनकी लिखी हुई पुस्तकें हैं।

स्मृति प्रकाशन, 134 चेतना बाग, इलाहाबाद से प्रकाशित यह पुस्तक, ‘त्रिपुर सुंदरी साधना’ इस पुस्तक का नाम है। इस पुस्तक के पेज नंबर 90 पर एक घटना का उल्लेख है इस मंत्र के बारे में कि स्वामी दिव्यानंद आश्रम जी महाराज, जो पुणे के थे, उनको यह मंत्र सिद्ध था। वैसे आज के समय में यह बहुत जटिल है, इसका साधन सरल नहीं है। हर व्यक्ति नहीं कर सकता।

लेकिन उनको यह विद्या सिद्ध थी कि उन्होंने सैकड़ों व्यक्तियों के सामने मृत कंकाल को पुनर्जीवित किया था। ऐसा इस पुस्तक में उल्लेख है। 

साथ में यह लिखा है इसमें कि यह तो बात हुई उनकी जिनको यह विद्या सिद्ध हो जाए, और आज के समय में यह बहुत जटिल, आम व्यक्ति के लिए असंभव-सी है। लेकिन फिर भी यह मंत्र आम व्यक्ति के लिए बहुत उपयोगी है। वह कैसे?

अल्पायु योग हो, कोई जटिल बीमारी हो, मृत्युतुल्य कष्ट हो, किसी भी प्रकार से कोई संकट, ऐसी बीमारी जो जानलेवा, प्राणलेवा हो, उसमें इस मंत्र का प्रयोग किया जा सकता है। 

shukracharya mrit sanjeevani mantra vidhi शुक्राचार्य मृत संजीवनी मंत्र साधना विधि –

108 बार यानी एक माला प्रतिदिन, 31 दिन तक जप करके और अभिमंत्रित जल उस रोगी को दिया जाए।

इस मंत्र से अभिमंत्रित जल उस व्यक्ति को पिलाया जाए। तो रोगी को, यदि कर सके, तो स्वयं रोगी को भी इस मंत्र का अनुष्ठान, जप करना चाहिए। मेरे एक मित्र की धर्मपत्नी को मस्तिष्क में ट्यूमर हो गया। उन सज्जन ने आकर अपनी समस्या बताई। मैंने इसी मंत्र का प्रयोग उनके लिए किया। वह सकुशल हैं, आज भी हैं।

तो इस मृतसंजीवनी मंत्र का प्रयोग, आज के इस पोस्ट में, किसी भी प्रकार की समस्या आपकी परिस्थितियों में, अपनों में किसी को हो, तो आप प्रयोग करके देख सकते हैं।

भगवती परांबा की कृपा हुई तो वह रोगमुक्त होंगे। आचार्य शंकर, अर्थात् जगद्गुरु शंकराचार्य, उनके गुरु श्री गोविंद पाद महाराज ने बद्रिकाश्रम में बैठकर उन्होंने ‘शुभोदय’ ग्रंथ की रचना की और उसी ‘शुभोदय’ के आधार पर आचार्य भगवत्पाद श्री शंकर ने ‘सौन्दर्यलहरी’ की रचना की।

यह स्तुतिपरक काव्य ‘सौन्दर्यलहरी’, उसमें कुल 103 श्लोक हैं। इस पुस्तक के अनुसार, श्लोकों से मंत्र बनते हैं। विशिष्ट लक्ष्मीधर, रमेश प्रकाशन, मद्रास की एक पुस्तक की टीका है, ‘सौन्दर्यलहरी’ पर। उसमें प्रत्येक श्लोक से यंत्र भी बनता है, मंत्र प्रयोग भी है, सब उसमें प्रत्येक मंत्र के विधान हैं।

लेकिन इस पुस्तक के अनुसार, देवदत्त शास्त्री जी के अनुसार, उनको इन 103 श्लोकों में से कुछ श्लोकों में मंत्र मिले। तो ‘सौन्दर्यलहरी’ के बीसवें श्लोक से यह मंत्र, जिसकी हम चर्चा कर रहे हैं, उद्धृत होता है।

यह मंत्र उस ‘सौन्दर्यलहरी’ के बीसवें श्लोक से बनता है। ‘सौन्दर्यलहरी’ संस्कृत में देखा जाए तो मूल रूप से वह भगवती त्रिपुरसुंदरी की ही आराधना है। दशमहाविद्याओं में तीसरी महाविद्या षोडशी, त्रिपुरसुंदरी, एक ही बात है।

तो हमें यदि इस मंत्र का प्रयोग करना है, तो सबसे पहले विनियोग।

shukracharya mrit sanjeevani mantra  शुक्राचार्य मृत संजीवनी मंत्र  विनीयोग

औंग् अस्य श्री मृत्संजीवनी विद्या मंत्रस्य भृगुर्ऋषिः , विराट छन्दः , चिदानन्द लहरी देवता , ह्रीं सर्वव्यापिनी प्राणेश्वरी बीजं , क्लीं कीलकम् , ह स क ह ल ह्रीं शक्तिः मृत्संजीवने विनीयोगः |

shukracharya mrit sanjeevani mantra शुक्राचार्य मृत संजीवनी मंत्र  

ओंग् ऐं श्रीं ह्रीं ह्सोः सर्वतत्त्वव्यापिनी जीव जीव प्राण प्राणे मृतामृते क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं हुं हुं मृत विद्रावणे प्राण तत्त्वे तत्त्वाति तत्त्वे सर्वेश्वरि वेदगुह्ये ह स क ह ल गर्भे सावित्रि ऐं वाचम्भरि काली क्लींग् जीवय जीवय स्वाहा ।

‘सौन्दर्यलहरी’ के बीसवें श्लोक से यह बनता है, जो मृतसंजीवनी मंत्र के नाम से जाना जाता है। और इसी मंत्र के प्रयोग से, जैसा उन्होंने उल्लेख किया, देवदत्त जी ने, स्वामी ब्रह्माश्रम जी महाराज ने एक कंकाल को जीवित किया था।

वह बहुत बड़ी बात है। हम उसे लेकर कोई कल्पना और कोई लक्ष्य न रखकर चलें। हमारा है, लेकिन यदि इस मंत्र के प्रयोग से कोई असाध्य रोगी रोगमुक्त हो सकता है, कोई व्यक्ति जीवन भर स्वस्थ रह सकता है, मृत्यु भय से मुक्त होकर जी सकता है, तो यह भी अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है, बहुत बड़ा काम है। नियमित रूप से इस मंत्र का, कभी भी किसी सिद्ध पर्व में, इस मंत्र का अधिकतम जप कर लेना चाहिए।

और 21 दिनों तक नियमित रूप से, 21 दिन एक माला प्रतिदिन जप करके, फिर न्यूनतम भी कम से कम 21 बार या 27 बार प्रतिदिन इस मंत्र के जप का, नियमित जप का, रूटीन या नियम रखा जाए, तो व्यक्ति स्वस्थ रह सकता है।

मृतसंजीवनी में और महामृत्युंजय में यही फर्क है। एक, आपका महामृत्युंजय, वह टॉनिक का काम करता है। वह स्वस्थ रहने में मदद करता है। लेकिन मृतसंजीवनी, वह तो मृत्यु के भय को टालने में, जो मृत हो चुका हो, उसे भी पुनर्जीवन प्रदान करने की क्षमता रखता है।

वह मृतसंजीवनी विद्या के नाम से और भी कई मंत्र मिलते हैं, लेकिन इस मंत्र का प्रयोग मैंने कई लोगों पर किया है, करवाया है। इसके अनुभूत, बहुत संतोषजनक परिणाम मिले हैं। इसलिए मैंने आज के पोस्ट में इस मंत्र की चर्चा की है।

उन्हीं प्रयोगों की चर्चा करने से… क्या होता है कि एक वैद्य हैं, उन्होंने आयुर्वेद की बहुत अच्छी शिक्षा प्राप्त की, बहुत विद्वान हैं आयुर्वेद के, लेकिन प्रैक्टिस नहीं की, कहीं रोगियों का उपचार करने का काम नहीं पड़ा, तो उनको, जो भी कुछ उनका अध्ययन है, उस पर उतना अधिकार, उतना कॉन्फिडेंस नहीं आ पाएगा, जितना एक कम पढ़े-लिखे को, उनसे, लेकिन जिसने उपचार किया हो, उसको अनुभव है इस बात का कि मैंने इस रोगी को इस रोग में यह औषधि दी और वह ठीक हुआ।

मैं कोई अधिक विद्वान व्यक्ति नहीं हूँ। मेरी ज्यादा किसी तरह की कोई गति इन विषयों में नहीं, लेकिन लगभग 50 वर्षों से मैं जिन विषयों से जुड़ा हूँ, ज्योतिष से। 

मेरे पास लोग कई तरह की समस्याएँ लेकर आते थे और उन समस्याओं के जो समाधान मैंने बताए और उनके समाधानों से लोगों का जो हित-साधन हुआ था, उन्हीं की चर्चा मैं इस चैनल के माध्यम से करने का प्रयास कर रहा हूँ।

आपके, आपके किसी भी इष्ट-मित्र की उसी तरह की समस्याएँ हों और जो समाधान मैं बता रहा हूँ, यदि उनको आप देखते हैं, निश्चित रूप से उनका हित-साधन होगा। यही एक ध्येय और यही एक उद्देश्य इस चैनल का है।

तो आप कोशिश करें, इस मंत्र को यदि देखना चाहें तो आप इस पुस्तक को, ‘त्रिपुर सुंदरी साधना’, देवदत्त शास्त्री की, इस पुस्तक को मँगा करके, जो मैंने अभी कहा, वह सब आप देख सकते हैं इसमें। 

आप बहुत धैर्य से सुनते हैं और वेबसाइट  को सहयोग करते हैं, इसके लिए आपका पुनः बहुत-बहुत आभार, बहुत-बहुत धन्यवाद। भगवती आप सब पर कृपा करें, इसी प्रार्थना के साथ मैं आपको नमन करता हूँ। नमस्कार।

Dattatreya Sadhana श्री चमत्कारी दत्तात्रेय तंत्र – दत्तात्रेय साधना साक्षात् दर्शन और त्रिकाल ज्ञान ph.85280 57364

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Dattatreya Sadhana श्री चमत्कारी दत्तात्रेय तंत्र दत्तात्रेय साधना साक्षात् दर्शन और त्रिकाल ज्ञान ph.85280 57364 जय गुरुदेव और दोस्तों, मेरे  gurumantrasadhna.com में आपका एक बार फिर से हार्दिक स्वागत है। आज की post आपके लिए बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण होने वाली है। मुझे कई बार कहा गया है कि भगवान दत्तात्रेय की साधना के बारे में आप बताइए और बहुत से कमेंट भी आए हैं और बहुत से मैसेज भी किए गए हैं। आज मैं आपको भगवान दत्तात्रेय की साधना बताऊंगा कि साधना किस प्रकार से की जाती है और भगवान दत्तात्रेय के दर्शन कैसे प्राप्त किए जाएं

इस साधना के द्वारा, देखिए मंत्र तो उनके बहुत हैं, लेकिन ज्यादातर मंत्रों में दर्शन की बात नहीं है। सिर्फ दत्तात्रेय भगवान को गुरु के रूप में माना जाता है और वह गुरु हैं भी, क्योंकि देखिए आप भगवान शिव को गुरु बनाते हैं, आप भगवान ब्रह्मा जी को भी, आप विष्णु भगवान को भी गुरु बना सकते हैं।

भगवान दत्तात्रेय कौन हैं? देखिए, मैं यहां पर आपको जो है ना, थोड़ा संक्षेप में बताऊंगा। ऐसा नहीं है कि मैं पूरा आपके यहां पर पूरा विस्तार से बताऊंगा, क्योंकि विस्तार से बताऊंगा तो लेख बहुत लंबा हो जाएगा। देखिए, तीनों जो देव हैं, त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु, महेश, शक्तियों का जो मिला-जुला रूप है एक, वह भगवान दत्तात्रेय हैं। यानी तीनों देवों की शक्तियां भगवान दत्तात्रेय के अंदर हैं और तीनों के स्वरूप ही भगवान दत्तात्रेय हैं।

तो देखिए, भगवान दत्तात्रेय को आप गुरु रूप में मान करके उनका पूजन, उनका मंत्र जाप कर सकते हैं और बहुत से लोग गुरु रूप में उनको मानते भी हैं। मुझे बहुत सारे लोगों ने बताया है कि जी, हमारे भगवान दत्तात्रेय हमारे गुरु हैं। इसमें कोई दोराय भी नहीं है बिल्कुल भी।

 जिस प्रकार से भगवान शिव को आप गुरु मानते हैं, उसी प्रकार से दत्तात्रेय को भी गुरु मानते हैं और बहुत लोग मानते भी हैं। आपको जो ज्यादातर लोग मंत्र जाप करते हैं, वह दत्तात्रेय गायत्री मंत्र जाप करते हैं या फिर और छोटा-मोटा कोई मंत्र है उनका, उसका जाप करते हैं। लेकिन आज मैं आपको बताऊंगा कि स्वप्न में या फिर वैसे कैसे आप दत्तात्रेय भगवान के दर्शन कर सकते हैं।

उस मंत्र के विषय में बताऊंगा और इस साधना के विषय में बताऊंगा। और भी यह जो साधना है, यह साधना बहुत एकदम सिंपल साधना है। करने का कोई डर नहीं, कोई भार नहीं। 

किसी प्रकार की कोई भी इस प्रकार की प्रॉब्लम आपको नहीं आने वाली है, जैसा कि आप दूसरी साधनाओं में अक्सर फील भी करें। यह जो साधना है, यह बिल्कुल एकदम सिंपल है।

 आप समझ करके चलिए कि अपने गुरु मंत्र का… आप अगर भगवान दत्तात्रेय को गुरु मानो या मत मानो, लेकिन आप जैसे भगवान शिव की पूजा करते हैं, जैसे आप विष्णु जी की करते हैं, उसी प्रकार से दत्तात्रेय भगवान की होती है।

दत्तात्रेय भगवान तीनों का ही स्वरूप मिलन हैं। इसलिए यह साधना बहुत महत्वपूर्ण भी हो जाती है कि भाई तीनों की अलग-अलग साधना न करके आप एक दत्तात्रेय की साधना कीजिए कि आप एक ही साथ साधना कर पाएंगे और जो अलग-अलग आप गुरु मानते हैं, तो तीनों को मिलाकर के एक ही शक्ति को आप गुरु मान सकते हैं।

 इसलिए भगवान दत्तात्रेय की साधना जो है, वह महत्वपूर्ण भी है। तो देखिए, यह साधना नॉर्मल कर सकते हैं, जिनके गुरु हैं वह भी कर सकते हैं, जिनके गुरु नहीं हैं वह भी कर सकते हैं। और हां, इसमें गुरु मंत्र जाप की कोई आवश्यकता नहीं होती है।

क्योंकि यह तो ऑलरेडी पहले गुरु हैं ही। पूरे संसार में, पूरे विश्व में, ब्रह्मांड में जब तीन लोकों की शक्तियां हैं और तीनों देवों की शक्तियों का मिला-जुला रूप है, तो फिर दूसरे गुरु मंत्र की क्या आवश्यकता है? 

इसमें यही तो सबसे बड़े गुरु हैं। यह तो भगवान शिव को गुरु मानो तब भी यह गुरु हैं, विष्णु भगवान को गुरु मानो तब भी यह गुरु हैं। इसलिए इसमें गुरु मंत्र की कोई आवश्यकता नहीं है। यह तो कोई भी साधना कर सकता है, चाहे वह स्त्री हो, चाहे वह पुरुष हो, बच्चा हो या वृद्ध हो, कोई भी कर सकता है।

 

दत्तात्रेय सिद्ध इंद्रजाल मंत्र – भगवान दत्तात्रेय मंत्र -दत्तात्रेय शाबर मंत्र


ॐ द्रां द्रीं द्रुम दत्तात्रेयाय स्वप्ने प्रकट प्रकट
अवतर अवतर नमः

दत्तात्रेय साधना विधि 

इसको सामान्य पूजा-पाठ करने वाला इस साधना को कर सकता है। अगर आप जो मैं आज साधना आपको बता रहा हूं, अगर आपने यह साधना की तो आपको भगवान दत्तात्रेय के दर्शन होंगे ही होंगे। इसमें किसी प्रकार की कोई भी ऐसी अलग से कोई व्यवस्था या ऐसी कोई त्रुटि होने की बात है ही नहीं। दर्शन यह अपने भक्त को जरूर देंगे।

तो देखिए, यह जो साधना करनी है, यह साधना कोई भी व्यक्ति कर सकता है, सामान्य पूजा-पाठ करने वाला, जिसने कभी पूजा-पाठ न भी किया हो, वह भी इस साधना को कर सकता है।

 सिंपल, सरल साधना है यह। इस साधना को करने के लिए आपको जो है, भगवान के लिए कुछ विशेष सामग्री की आवश्यकता होती है, इसमें जैसे कि यंत्र और माला। तो यह जो दोनों सामग्री हैं, यह मंत्र सिद्ध और प्राण प्रतिष्ठा युक्त होनी चाहिए। 

और अगर आपको ऐसी सामग्री चाहिए तो मैंने व्हाट्सएप नंबर दिया हुआ है लेख में, आप वहां से मुझे व्हाट्सएप करके और यह सामग्री आप प्राप्त कर सकते हैं। 

सामग्री तो आपको 100% मिलेगी, इसमें बिल्कुल भी संशय की कोई आवश्यकता है ही नहीं। भले ही आपको थोड़ा लेट हो जाए लेकिन सामग्री जरूर मिलेगी। तो यह सामग्री प्राप्त करने के बाद आप इनकी साधना करेंगे और देखिए…

 

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Batuk Bhairav sadhna बटुक भैरव साधना – बटुक भैरव मंत्र सिद्धि ph 8528057364 साथियों आज हम बटुक भैरव जी की साधना के बारे में जानेंगे भैरव बाबा को महाकाली का पुत्र भी माना जाता है काल भैरव बाबा की शनिवार को पूजा की जाती है यानी उनका दिन शनिवार को माना जाता है 

अब हम बात करते हैं बटुक भैरव बाबा की बाबा बहुत ही जल्दी खुश होने वाले देवता है भक्तों की मनोकामना बहुत जल्दी पूर्ण करते हैं कोई इंसान इनको अपना इष्ट मानकर यदि साधना करता है तो उनके जीवन के समस्त कष्ट समाप्त हो जाते हैं

 बटुक भैरव बाबा को इष्ट मानकर बाबा में आस्था रखते हुए वह मंत्रों का जाप करते हैं मेरे बाबा 24 घंटे उनके साथ रहते हैं वह उनकी रक्षा करते हैं बटुक भैरव बाबा की दो तरह से साधना की जाती है यदि आप गृहस्थ है तो आपको बटुक भैरव बाबा की सात्विक साधना करनी चाहिए और यदि  गृहस्थ नहीं है तो तामसिक साधना कर सकते हैं 

सात्विक साधना में सात्विक सामग्री का यूज होता है और तामसिक साधना में तामसिक वस्तुओं का उपयोग किया जाता है क्योंकि मैं वेजिटेरियन हूं और सात्विक सिद्धियों में यकीन रखता हूं तो मैं आपको भैरव बाबा की सात्विक साधना के बारे में ही बताऊंगा तामसिक साधना मेरा विषय नहीं है 

बटुक भैरव मंत्र

औम बं बटुक भैरवाय नमः

बटुक भैरव साधना विधि 

बाबा की साधना में सर्वप्रथम आप स्फटिक या रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करें लाल रंग के आसन पर बैठ जाए शनिवार या फिर रविवार के दिन इस प्रयोग को शुरू करें और 21 दिन तक रेगुलर आपको यह साधना करनी है नहा धोकर पूर्व या दक्षिण दिशा में बैठ जाएं बाबा की एक फोटो या फिर मूर्ति अपने सामने रख ले और ध्यान रहे आपको चावल और हल्दी के ऊपर बटुक भैरव यंत्र की स्थापना करनी है

 दोनों को पास में रखना है उनके फोटो को और उस यंत्र को फिर उस यंत्र के बीच में एक सुपारी रख दें सुपारी रखने के बाद में एक देसी घी का दीपक बाबा के सामने जला ले छुआरे का प्रसाद बाबा को अर्पित करें और जो प्रसाद आपने बाबा को अर्पित किया है वह पशु पक्षियों को खिला देना है 

साधना के 10 या 11 दिन के बाद में आपको अनुभूति होनी शुरू हो जाएगी जो सामग्री आपने बाबा की साधना यूज की है और जिस भैरव यंत्र को आपने यूज किया है उसे आप 21 दिन बाद में बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें मंत्र साधना पूर्ण होने के बाद आप चाहे तो एक माला प्रत्येक दिन कर सकते हैं 21 दिन तक ब्रह्मचर्य का आपको पालन करना है 

अपने गुरु के सानिध्य में ही इस साधना को करें और यह साधना आप सात्विक तरीके से करते हैं तो इनका गलत तरीके से दुरुपयोग आपको कभी नहीं करना है क्योंकि यह आपकी अच्छी नियत से और भी ज्यादा फलीप होती है 

यदि आप अपनी नियत में जरा सी भी खराबी रखते हैं या फिर किसी का भी अनिष्ट करने के लिए यह साधनाएं करते हैं तो उल्टा आपका अनिष्ट हो जाता है वीडियो पसंद आए तो चैनल को सब्सक्राइब जरूर करें शेयर सब्सक्राइब और लाइक करें जय माता दी जय बारो बाबा