Category: दैविक साधना

दैविक साधना davik-sadhna हम इस श्रेणी में देवी देवताओं की रहस्मय साधना पर चर्चा करेंगे ! जिस साधना को आप अपने घर पर सिद्ध करके लाभ प्रपात कर सकते है ! gurumantrasadhna.com

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ismail jogi sadhna इस्माइल जोगी साधना: नाथ पंथ और मुस्लिम साधना का समन्वय

🕌 इस्माइल जोगी साधना: नाथ पंथ और मुस्लिम साधना का समन्वय

ismail jogi sadhna इस्माइल जोगी साधना: नाथ पंथ और मुस्लिम साधना का समन्वय गुरु मंत्र साधना.com में आपका फिर से स्वागत है। आज हम एक नए विषय पर चर्चा कर रहे हैं। गुरु रुद्रनाथ और सागरनाथ। कभी रुद्रनाथ जिज्ञासु की भूमिका निभाते हैं तो कभी सागरनाथ जी जिज्ञासु की भूमिका निभाते हैं। दोनों ही एक से बढ़कर एक ज्ञानी हैं। कोई छोटा बड़ा नहीं है।

दोनों एक समान ज्ञानी हैं। हर बार इस मंच पर एक नया ज्ञान प्राप्त होता है साधक जन को। आज फिर इस श्रृंखला में नया ज्ञान लेकर आए हैं। चलो शुरू करते हैं। गुरु मंत्र साधना.com में आप सबका फिर से स्वागत है। जी।

आज का जो हमारा टॉपिक रहेगा इस इस्माइल योगी की साधना का रहेगा। ठीक है? इस इस्माइल योगी की साधना क्यों की जाती है? इसका क्या लाभ है? ठीक है? पूरा उस टॉपिक के ऊपर बातचीत करेंगे।

आज फिर हमारे गुरु मंत्र साधना.com पर सागरनाथ जी उपस्थित हैं जो आपको बताएंगे इस इस्माइल योगी की साधना का क्या महत्व है। जी जी सागरनाथ जी आप जी का स्वागत है फिर से। सबको एक बार राम राम। फिर से जय माता की। जय माता दी। राम राम जी।

तो रुद्रनाथ जी आपका एक बार फिर से धन्यवाद अपने वेबसाइट पे एक बार दोबारा फिर से बुलाने के लिए। जी तो आज हम ये लेके आए हैं इस्माइल जोगी। इस्माइल जोगी का जो मंत्र है या विधि-विधान है अक्सर नहीं मिलता। तो जिनके पास है उन्होंने अपने पास ही रख लिया है।

आगे बताया ही नहीं। ठीक है। इनका क्या महत्व है मैं बताता हूँ। तो ये गुरु के रूप में जैसे चलते हैं इस्माइल जोगी, जोगी तो हैं ही, इस्माइल जोगी के रूप में भी चलते हैं और दूसरी बात जहाँ पे कामरू का कामाख्या की पीठ है ना, कामरूपा जिसको आप बोल दो, कामाख्या मंदिर, वहाँ की स्थली, वहाँ पे ये बहुत ज्यादा पूजे जाते हैं।

साथ में इनके लूना चमारिन भी पूजी जाती है, जो लूना चमारिन है इनकी शिष्या मानी गई है, इनकी शिष्या मानी गई है और जो नार सिंह वीर है ना, वहाँ का जो मोहन का काम करता है, मोहन का जो वशीकरण बहुत प्रबल रूप से करता है, वो भी इनके साथ ही रहा है, लेकिन वो इनका शिष्य नहीं रहा जी। वो इनके साथ ही जैसे गुरु भाई बोल सकते हो आप। ठीक है?

📜 इस्माइल जोगी का महत्व और नाथ संप्रदाय से संबंध

 

और दूसरी चीज क्या है जी, जो ये इस्माइल जोगी जी हैं, गुरु गोरखनाथ जी ने शिक्षा प्राप्त करी है, शिक्षा हाँ, इनके शिष्य हैं। यही मैं बात बोलने लगा था। इनके शिष्य हैं। मतलब कि ये तंत्र के क्षेत्र में इनका जो लेवल है बहुत बड़ा है, जिसको बोलते हैं हाई डिग्रीहाई डिग्री

और दूसरी चीज क्या है जी, अब लोगों के मन-माइंड में आता है ना कि हिंदू धर्म में हम मुस्लिम साधना कर रहे हैं। जो मुस्लिम साधना का प्रचलन हुआ है, ये इस्माइल जोगी से ही हुआ है। जी ठीक है।

और दूसरी चीज, जो ये धर्म-कर्म के जो लोग ज्यादा करते हैं ना, मैं एक चीज बोलना चाहता हूँ जी, नाथ संप्रदाय के अंदर मुस्लिम साधना भी की जाती है और सनातन धर्म की भी की जाती है। ऐसे होती थी जब गुरु गोरखनाथ जी घर पे तो अभी हैं, लेकिन जब वो आए थे, प्रकट हुए थे, उन्होंने दीक्षा देनी शुरू की थी, जो मुसलमान थे, मुसलमान पद्धति के थे, ठीक है

उस समय वो उनके जब शिष्य बने, उनको पता लगा कि इनके अंदर नूर है, परमात्मा का दिया हुआ, कुछ कर सकते हैं। उन्होंने उनको दीक्षा दी, नाथ पंथ से ही दी और आगे उन्होंने क्या किया? जब उनसे दीक्षा ले ली, परफेक्ट हो गए, तो आगे अपना पंथ चलाना शुरू किया।

ये जो मंत्र आप मुस्लिम मंत्र पढ़ते हो ना, इल्म आलम, इल्म आलम, ये जितने भी पढ़ते हो, कालिम हाँ, आलम कालिम, ये वहीं से ही चले हुए हैं। बिल्कुल। देखो गुरु का तो मतलब होता है शिष्य को पावर देना।

शिष्य जैसे मर्जी उस गद्दी को आगे बढ़ाए, गुरु ऐसे नहीं बोलते। वो बोलते कि दूसरी चीज क्या है, नाथ संप्रदाय में मुस्लिम साधना भी एक समान की जाती है और यह भी की जाती है। दोनों का एक समानता है।

उसमें ये नहीं है तो कोई धर्म-कर्म का कोई आडंबर नहीं। गुरु तो सबके समान होते हैं। सीधी बात है। बिल्कुल। ठीक है ना? उनके घर में कोई ये धर्म मजहब नहीं चलता है। बिल्कुल वही चीज तो मैं बोल रहा हूँ उन लोगों को।

💡 साधना की विधि और स्वरूप

 

अब मैं बताता हूँ ये जो मेरे को साधना मिली थी, कहाँ से मिली थी? ये हरियाणा के जंगम थे। जंगम थे, उनके ऊपर भोलेनाथ की सवारी आती थी, बहुत गुस्से में आती थी, शांत रूप में नहीं आती थी, क्रोधित रूप में आती थी। क्रोधित रूप में सिगरेट ज्यादा पीते थे वो खुश हो के।

क्योंकि जब वो भजन करते थे, उनका चेहरा इतना लाल पड़ जाता था, जो जंगम खंजड़ी बजा के नहीं करते अपना भजन। हम हम वो करते थे। हमारे अच्छे मित्र मतलब कि अच्छे खासे मित्र बन गए थे। हम हम जैसे उनका लेवल बड़ा हुआ हमारा था। एक दूसरे को मेल-मिलाप हुआ। हम उनको अपना कुछ बताते, वो हमें अपना बताते।

जैसे लेन-देन चलता रहा। हम हम। तो वो आए शिवरात्रि में मेरे पास। भोलेनाथ का भोग लेने के लिए आते थे कि तू भाई इतना मेरे को उनके तरफ से दे दे। तो मैंने बोला कि उनके आपके लिए द्वार खुला है, जब मर्जी आओ, शिवरात्रि को छोड़ के भी आ सकते हो आप। कहते नहीं, जो उन्होंने मेरे को बोला है कि इसे शिवरात्रि की शिवरात्रि से मिलना है। जी जी जी।

तो वो अपने घर पे धुना लगा के उन्होंने उनको सिद्ध किया था इस्माइल जोगी। अच्छा जी। धुने के ऊपर किया था। उन्होंने मेरे को विधि क्या बताई थी? इतनी लंबी चौड़ी विधि नहीं है, जितनी हम सुनेंगे, यहाँ बताई जाएगी दूसरों के द्वारा। वो बोलते हैं इसमें पाँच लड्डू लगते हैं, पाँच पताशा। अच्छा जी।

धुना होता है, जो धुना, जो जिसको आप कंकड़-कंकड़ नहीं, उसको अँगीयारी बोलते हो ना, गोबर की गाय का उपला लेना है, उसके ऊपर उसको सुलगा के देना है। ये प्रतिदिन आपने 21 दिन करना है। उस धुने के साथ में 11 माला करनी है। तो 250 ग्राम बेसन भी लेना है इसके साथ में। ठीक ठीक ठीक ठीक।

इसके साथ क्या होगा, मैं अब आपको बताता हूँ। जो ख्वाजा साहब है ना, ख्वाजा पीर जिसको बोलते हैं, जो वरुण देव हैं हमारे इतिहास में सनातन धर्म में, ये वो रूप है। ये साथ में सिद्ध होंगे उनके। ठीक है? मतलब कि ये मल्टीपल कार्य करेंगे आपके लिए।

आपके सिर पे चौकी आनी, जैसे बैठे-बैठे किसी को हाल-चाल बताना, कान से निकालना, किसी की चौकी बाँधनी-खोलनी, ये भी कार्य करेंगे। यहाँ तक जब ये आपको सिद्ध हो जाएँगे, नरसिंह वीर की भी सिद्धि करवा देंगे, जो कामरूपा में पूजा जाता है, लूना चमारिन, मतलब जितने वीर तंत्र वाले ना, उनके आसपास के क्षेत्र में रहते हैं या उनके पास जो दीक्षा ली थी उन्होंने, वो सब आपके साथ चल पड़ेंगे।

📿 मंत्र, लाभ और अनुभव

 

और इनका स्वरूप कैसा है? जटाधारी हैं। सिर के ऊपर साफा बाँधते हैं जो नाथपंथ में बाँधा जाता है। हाथ में चिमटा है और कमंडल है। पाँव में खड़ाऊँ है। खड़ाऊँ है, ये इनकी पहचान है। ठीक ठीक ठीक ठीक। ठीक है? और इन्होंने गले में नादी पहनी हुई है, जैसे गुरु गोरखनाथ नहीं अपने शिष्यों को डलवाते थे। हम हम हम।

वैसा इनका। अब मैं मंत्र पे आता हूँ। अच्छा इनका, हाँ, चलो मंत्र के ऊपर आए, तो थोड़ा सा मैं यही पूछ रहा हूँ कि इसके क्या लाभ हैं? चलो आप पहले मंत्र बता दो। उसके बाद फिर हम लाभ पूछेंगे, क्या हैं इसके?

इस्माइल जोगी का शाबर मंत्र

 

मंत्र ऐसे है: खेरू ठेर करे, ख्वाजा सिजर परे, गुरु इस्मेल को हाजिर करे।

ये अढैया मंत्र है। फिर बोल देता हूँ। अढाई अक्षर का जिसको बोला जाता है, अढाई लाइन का। खेरू ठेर करे, ख्वाजा सिजर परे, गुरु इस्मेल को हाजिर करे। ठीक ठीक।

खेरू का मतलब होता है कि जो ना मुड़े, जो ना मुड़े, उसको खत्म कर दो। अगर जो खत्म हुआ हुआ है, उसको सही कर दो। ठीक है? ख्वाजा जो है, आपका साथ दे। सिजर परे का मतलब ये है जो गुरु इस्मेल हैं। मैंने पहले बोला था कि ये गुरु स्वरूप हैं। गुरु हैं। इनका नाम गुरु स्वरूप। गुरु इस्मेल को हाजिर करें। ठीक है?

जब भी वस्त्र डालने हैं, वस्त्र कोशिश करो कौन से डाल सको? सफेद डाल सको, पीले नहीं तो जोगिया कलर का डालो। या फिर तीसरा ग्रीन कलर का जो होता है, वो भी डाल सकता है। हाँ, ये भी चलेगा ना? चलेगा, चलेगा। लेकिन ज्यादातर असर इनका नाथ पंथ में ही चलेगा। कि मतलब कि ये भूल में मत रहें कि ये मैं आपको मुस्लिम मंत्र दे रहा हूँ। ये अढैया मंत्र है। ये नाथ पंथ का मंत्र है। प्रामाणिक मंत्र है।

अच्छा, अब आगे बात करते हैं। इसके क्या लाभ हैं? उसके बाद तीसरी चीज फिर हम बात करेंगे अनुभव की। फिर पोस्ट को करेंगे। लाभ, लाभ यही है कि सबसे पहले ये आपके गुरु बन जाएँगे। जब आप इस मंत्र को पढ़ोगे ना धुने के ऊपर, गुरु बन जाएँगे।

इस इस मंत्र से आपको भोलेनाथ की कृपा अपार मिल जाएगी। दूसरी ये जो मैंने आपको नरसिंह वीर के बारे में बोला है, लूना चमारिन के बारे में बोला है या गुरु गुरु गोरखनाथ जी के बारे में बोला है। इनकी भी आपको अपार कृपा मिल जाएगी।

आपके रुके हुए काम सारे चलने लग पड़ेंगे। आप गद्दी लगा सकते हो। सबसे बड़ी बात है जो गद्दी लगाना सीख गया, वो ऑलराउंडर बन गया। ठीक ठीक ठीक। ठीक। ठीक है।

और दूसरी चीज मैं आपको और बताता हूँ, जो ऐसी गुरु परंपरा की साधना की जाती है, तो आगे चलके जो गुरु होते हैं, सपने में आके आपको बहुत विचित्र साधना भी सिखाएँगे। जी।

भाई मेरे शिष्य ऐसे हैं, जो मेरे को खुद बोलते हैं कि आप मेरे पास आते हो, मेरे सपने में आते हो, मेरे से बात करते हो। मेरे को विधि बता-बताकर चले जाते हो आप। मेरा हल हो जाता है। ये ऐसा क्यों होता है? क्योंकि आपका गुरु परफेक्ट होना चाहिए। बिल्कुल बिल्कुल। सबसे बड़ी बात गुरु परंपरा से ये चीजें चलती हैं जी नाथ संप्रदाय में।

मैं एक यहाँ पे लास्ट सवाल ये कहना चाहता हूँ, ये मैं मंत्र या विधियाँ इतनी क्यों दे रहा हूँ? जैसे भगवान नारायण का जो स्वरूप है ना वेदव्यास जी, उन्होंने इतने पुराण रचे, 18 के 18 पुराण रचे, किस लिए? कि मनुष्य की भलाई के लिए, कि वो टस से मस न हों।

हमारा भी वही धर्म है। हमें ये नहीं कि मेरे पास पड़ा या गुरु जी ने दिया हुआ है, किताब में रख लिया। वो तो बात वहीं पे खत्म हो गई। जिसकी जितनी सोच है, वैसा करना है। बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल। हमें तो भंडारा लगाना है। सीधी बात है। बिल्कुल।

हमें चीजें लुप्त होने से बचानी हैं। सरेआम देना है लोगों को, अपने ठोक-बजा के, ठोक-ठोक के देना है। अगर कोई बंदा नहीं करेगा, तो उसके भी अपने कर्म हैं। अपने कर्म हैं। सीधी बात है। मेरा तो कर्म है देना। करना कि नहीं करना, वो तो उनकी अपनी जिम्मेवारी है। ठीक है जी।

इसके अनुभव क्या-क्या हो सकते हैं? लास्ट क्वेश्चन, उसके बाद समाप्त कर देंगे इसको। अनुभव सबसे ज्यादा कि ये सबसे पहले आपको ख्वाजा साहब दिखेंगे कि जैसे उनका पंजे जल में हाथ दिखता है ना, पंजा तरह में वो दिखेगा।

जब वो दिखने लग पड़ा, समझो आपको सीधी सीधी तरीके से सीधी डायरेक्ट मिलने वाली है। ठीक है ठीक ठीक ठीक। ये सपने में दिखेगा या वैसे दिखेगा?

नहीं, सपने में क्लियर होगा। आप बेड़ी-किश्ती में बैठकर जा रहे हो किसी पीर फ़कीर के साथ। ठीक है? क्योंकि ख्वाजा साहब भी इनके साथ चलते हैं ना वरुण स्वरूप पे। ठीक ठीक ठीक ठीक।

ठीक है? वीरों के भी दर्शन होंगे कि किसी ने कृपाण पकड़ा, किसी ने भाला पकड़ा, किसी ने ढाल पकड़ी हुई, आपकी रक्षा कर रहे हैं। ये वही साधना के जो वीर इनके साथ चलते हैं, वही आपकी रक्षा करेंगे। छोटी-छोटी निशानी आपको देते जाएँगे। जी।

जो आपने कभी देखी नहीं होंगी सपने में, वो बताएँगे बकायदा। ठीक है जी। बहुत ही बढ़िया पोस्ट हमारा अब बन चुका है। ठीक है। इस्माइल जोगी को लेकर। ठीक है। अगर कोई भी इंटरनेट पे, गूगल पे, कहीं पे भी ढूँढ़ लेना। नहीं मिलेगा। अच्छा, नहीं मिलेगा।

मैं बोलता हूँ, नहीं मिलेगा। जी। ठीक है जी। तो आज के लिए बस हम यहीं पर समाप्त करते हैं। ठीक है रुद्रनाथ जी। ठीक है जी। तो अगले जय माता की। हाँ जी। जय माता। और जय महाकाल की। जय श्री महाकाल।

Dhanteras धनतेरस पर क्या ख़रीदे क्या न खरीदे विस्तार सहित

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Dhanteras धनतेरस पर क्या ख़रीदे क्या न खरीदे विस्तार सहित

Dhanteras धनतेरस पर क्या ख़रीदे क्या न खरीदे विस्तार सहित

Dhanteras धनतेरस पर क्या ख़रीदे क्या न खरीदे विस्तार सहित
Dhanteras धनतेरस पर क्या ख़रीदे क्या न खरीदे विस्तार सहित

🙏 प्रस्तावना

Dhanteras धनतेरस पर क्या ख़रीदे क्या न खरीदे विस्तार सहित गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पे आपका स्वागत करता हु । तो आइए दोस्तों, आज हम लोग जानते हैं कि धनतेरस पे सोना चांदी महंगा भी है और विश्वास दिलाती हूं कि उससे ज्यादा प्रभाव देने वाली वस्तु आपको बताऊँगी जिसे खरीद कर आप अपने घर में अगर धनतेरस के दिन लाते हैं, तो इससे घर में जो धन संपत्ति है, वह तो बढ़ती ही बढ़ती है, साथ-साथ परिवार वालों की उन्नति और तरक्की भी होती है।

अब देखिए, धनतेरस को लेकर भी इस बार विवाद की स्थिति है। क्योंकि उदया सूर्योदय कालीन की तिथि को आप 19 तारीख को लोग मान रहे हैं।

लेकिन धनतेरस में एक विशेषता होती है कि जिस दिन सायं कालीन त्रयोदशी होती है, क्योंकि धनतेरस की पूजा हम शाम के शाम के टाइम करते हैं, तो जिस दिन शाम के समय त्रयोदशी तिथि होती है, उस दिन ही धनतेरस मनाया जाता है। तो धनतेरस इस बार यानी 2025 में 18 तारीख को मनाया जाएगा, 18 अक्टूबर को।

🗓️ Dhanteras धनतेरस का शुभ मुहूर्त और खरीदारी

अब धनतेरस 18 अक्टूबर को मनाया जाएगा। पूजा करने का और खरीदारी करने का शुभ मुहूर्त कौन सा होगा, आज के पोस्ट में वह भी जानेंगे। साथ-साथ कौन सी ऐसी वस्तु है, वस्तु है जो आप खरीद कर लाएं, क्योंकि देखिए सोना चांदी अब सबके बस में नहीं रहा।

सोने का रेट सभी को पता है कि बहुत ज्यादा हो चुका है। तो ऐसे में कौन सी ऐसी वस्तु खरीद लें, जिससे मां लक्ष्मी हमारी तरफ आकर्षित हो जाए। फिर जब भी हमारा इच्छा हो, जब भी हमारी जरूरत हो, उस जरूरत के अनुसार हम सोना चांदी खरीद कर अपने घर में ला सकते हैं।

क्योंकि आप तो जानते हैं यह सारा खेल तो मां लक्ष्मी का ही है। जिसके ऊपर मां लक्ष्मी मेहरबान हैं, वह कभी भी सोना चांदी खरीद सकता है। उसे किसी भी विशेष अवसर की शुभ मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती है। तो आज कुछ ऐसा करेंगे जिससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होंगी।

देखिए दोस्तों, समुद्र मंथन से धन्वंतरि जी प्रकट हुए जिनको कि भगवान विष्णु का ही स्वरूप माना जाता है और इनके हाथ में था तांबे का कलश और इसी कारण यह परंपरा, यह मान्यता है और विशेष गूढ़ रहस्य है कि धनतेरस के दिन अगर आप एक तांबे का, पीतल का लोटा या पीतल का दिया या पीतल की कोई भी चीज धनतेरस पे अगर आप खरीद कर लाते हैं ना, तो यह आपके लिए विशेष बन जाता है। बहुत शुभ हो जाता है।

धनतेरस के दिन अगर आप कोई विशेष वस्तु खरीद करके लाते हैं तो। तो आप पहली चीज पीतल जरूर खरीद के लाइएगा धनतेरस पे।

🚫 Dhanteras धनतेरस – शनिवार को क्या न खरीदें

अब देखिए, शनिवार का दिन पड़ रहा है। शनिवार के दिन बहुत सारी भ्रांतियां रहती है। मन में नकारात्मकता भी रहती है कि शनिवार है तो क्या खरीदें? क्या नहीं खरीदें? तो देखिए, शनिवार है तो एक चीज तो आपको बिल्कुल नहीं खरीदना है।

आज के दिन आपको सरसों का तेल, सरसों, लोहे की कोई वस्तु यह सब नहीं खरीदना है। और एक चीज का ध्यान रखिएगा, स्टील में भी लोहे का तत्व माना जाता है।

तो हो सके तो आज स्टील खरीदने से बचें। अगर कोई जरूरत की चीज खरीदना है तो एक दिन, 2 दिन पहले आप खरीद लें। लेकिन इस दिन आप बिल्कुल न खरीदें। इस विशेष बात का ध्यान रखें।

🧹 Dhanteras धनतेरस से पहले की तैयारी

और एक आध चीज है जो धनतेरस से पहले हमें ध्यान रखना चाहिए। देखिए, नियम यह कहता है कि जो धनतेरस की पूजा हम करते हैं, उससे पहले हमारे घर की सफाई हो जानी चाहिए।

अब देखिए, पूरी सफाई तो नहीं हो पाती है, लेकिन कोशिश करना चाहिए कि जो मुख्य जगह हैं, जैसे जहां पे आप पैसा वगैरह रखते हैं, तो उस जगह की सफाई आप कर दीजिए।

जैसे पैसे रखने के स्थान पे आप जो कपड़े वगैरह लगाकर मतलब रखकर, नीचे बिछा करके और आप पैसे रखते हैं, उस कपड़े को बदल दें। थोड़ा उस जगह को साफ कर दें।

उसमें हो सके तो परफ्यूम वगैरह डाल दें और वहां पे नए कपड़े नीचे बिछा दें जहां आप अपने पैसे अपनी ज्वेलरी रखते हैं। तो यह कार्य आप धनतेरस से पहले कर लें। धनतेरस की पूजा से पहले कर लें।

💰 Dhanteras धनतेरस खरीदारी के नियम और वस्तुएं

 

अब आइए, खरीदारियों के बारे में जान लेते हैं कि क्या खरीदारी करना चाहिए और कैसे नहीं। देखिए दोस्तों, यहां पे एक मतभेद है। यहां पे कुछ लोगों के मतानुसार हर साल मिट्टी की मूर्तियां नहीं खरीदना चाहिए। पर मेरे मतानुसार दिवाली नवीनता का स्वरूप माना जाता है।

तो इसलिए दिवाली की पर अगर आप मिट्टी के गणेश जी और लक्ष्मी जी खरीद कर लाते हैं, तो इससे आपके घर में वृद्धि होती है। लेकिन एक बात का ध्यान रखिए, यह जरूरी नहीं है। अगर आप चाहें तो चांदी के रखे हैं तो आप उनकी पूजा कर सकते हैं।

पीतल के रखे हैं तो आप उनकी पूजा भी कर सकते हैं। लेकिन मिट्टी की मूर्तियों की अपनी बात होती है। अलग ही बात होती है। और अगर आप गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम से जुड़े हुए हैं ना, तो आप एक बात मान लीजिए।

आप मेरे कहे अनुसार बहुत महंगी मिट्टी की मूर्तियां नहीं मिलती है, तो आप उन्हें खरीद कर अपने घर में ले आइए। मेरे कहे अनुसार इस दिवाली मिट्टी की मूर्तियां जो शुभ मुहूर्त मैं बताऊँगी, उसी शुभ मुहूर्त में ले आइए और उसी शुभ मुहूर्त में आप धनतेरस की पूजा करिए।

एक गलती मत करिएगा। धनतेरस की पूजा में नई मूर्तियों की पूजा नहीं होती है, बल्कि जो पिछले साल के हमारी मूर्तियां या फोटो होते हैं, उन्हीं की पूजा की जाती है।

🧹 Dhanteras धनतेरस झाड़ू खरीदना और सावधानियाँ

 

धनतेरस के दिन शनिवार का दिन पड़ रहा है। तो झाड़ू खरीदना विशेष शुभ होता है। लेकिन ध्यान रखें, झाड़ू कभी भी अकेले मत खरीदिए आप लोग। झाड़ू आप एक साथ कम से कम दो खरीदिए, तीन खरीदिए, लेकिन अकेले झाड़ू मत खरीदिए।

एक झाड़ू आप वो झाड़ू भी खरीदिए जो सीक वाली होती है, जिससे फर्श पे गिरा हुआ पानी वगैरह साफ करते हैं। तो अगर इमेज मुझे मिला तो मैं हां बोल दूँगी लगाने को।

तो यह सीक वाली झाड़ू भी आप खरीद करके साथ में जरूर लाइए। मैं बता रही हूँ, आप करिए और आपसे गारंटी के साथ विश्वास के साथ कहती हूँ कि निश्चित तौर पे जो दिवाली पे साथ में जुड़ के चलेगा ना, उसका पूरा वर्ष निश्चित तौर पे मैं यह नहीं कह रही हूँ कि अंबानी बन जाएगा।

लेकिन इतना तो है कि फर्क दिखेगा। फर्क साफ आपको दिखेगा जो दिवाली पर। इसीलिए तो मैं आपको एक-एक बारीक-बारीक बातें भी बताती जा रही हूँ कि आप ऐसे करिए, ऐसे करिए। मतलब क्या बताऊँ, दिल से एकदम निकाल करके सारी बातें रख देती हूँ कि आप लोग समझिए। आपकी परेशानी दूर हो। आपके कर्जे दूर हों।

📱 Dhanteras धनतेरस वेबसाइट पोस्ट और लाइव कार्यक्रम

 

आपकी इसीलिए अब दिवाली तक तो एक भी पोस्ट आप छोड़िएगा मत। और एक चीज और बताती हूँ। लाइव आऊँगी मैं दिवाली पे 18, 19 और 20 को लाइव आऊँगी। जैसा कि आप जानते हैं, 18 तारीख को हमारा लक्ष्मी प्राप्ति वाला हवन भी है तो पूरे दिन हवन में बीत जाएगा। हालाँकि, बहुत सारे लोग तो आ भी नहीं पाएंगे।

कम लोग आ पाएंगे क्योंकि ये दिवाली की सबके घर पूजा वगैरह सफाई है। लेकिन चलिए तो मैं मुझे तो वहाँ रहना होगा तो मैं तो वहाँ रहूँगी और लाइव वगैरह भी नहीं हो पाएगा। मैं आपको उसकी क्लिप वीडियो काट करके और शाम को मैं जैसे ही घर आऊँगी, नेटवर्क वगैरह की व्यवस्था मुझे मिलेगी, मैं तुरंत आपको वो वीडियो पोस्ट करूँगी।

क्योंकि लाइव वगैरह करने में बहुत संकट है, समस्या है और मैं एक-एक व्यक्ति को अपने ऑफिस से बतवाती कहलवाती भी जा रही हूँ। तो यहाँ पे देखिए, मैं बात कर रही थी कि मैं लाइव जुड़ूँगी और इसीलिए लाइव का जो टाइम है, वो मैं 10:00 बजे रख रही हूँ।

8:30 बजे आती थी, लेकिन मैं 10:00 बजे रख रही हूँ, क्योंकि 10:00 बजे जो है, वो मैं अपनी भी खरीदारी करूँगी। जब शाम को आऊँगी आपके हवन से लौट करके, तो अपनी भी खरीदारी करूँगी। तो 10:00 बजे का टाइम रख रही हूँ कि 10:00 बजे मैं लाइव आऊँगी।

10:00 बजे 18 तारीख को आऊँगी। 19 तारीख और 20 तारीख को लाइव में जुड़ना मत भूलिएगा। अगर वो लोग देखिए, आप कमेंट करके बताने में शर्माते होंगे, नहीं शर्माते होंगे। लेकिन महादेव जानते हैं कि ये जो दिवाली पे साथ में जुड़ता है ना, लाइव जुड़ता है, पोस्ट को देखता है, उसके जीवन में परिवर्तन आना 100% तय हो ही जाता है।

इतना तो तजुर्बा मेरा भी बहुत लंबा है। तो आप एक-एक पोस्ट को देखिएगा। लाइव को तो बिल्कुल भी मिस मत करिएगा। तो भूलिएगा मत, लाइव में 18, 19 और 20 को मैं आपके साथ जुड़ूँगी। तो इस विशेष बात का ध्यान रखिएगा, क्योंकि एक चीज बता दूँ ना, जब आपको कोई भी कार्य फायदा होता है ना, तो ऑटोमेटिक ही वह चीजें मुझे प्राप्त होती है।

उसका कुछ अंश तो बस आपके साथ जुड़कर के आप मैं चाहती हूँ कि जो भी परेशान लोग हैं, उनके जीवन में सुख शांति और समृद्धि आए। मैं एक प्रयास कर रही हूँ यह और जरूर आएगी ऐसा दिन।

🛒 Dhanteras धनतेरस पर खरीदने योग्य वस्तुएँ

अब क्या खरीदें धनतेरस पे? तो देखिए दोस्तों, धनतेरस पे अच्छी क्वालिटी का धनिया खरीद कर आप जरूर लाइएगा। अच्छी क्वालिटी का धनिया खरीद कर लाइएगा। और एक और विशेष चीज है, हो सके तो आप एक पैकेट चावल खरीद कर लाएं। जो भी पैकेट जितना बड़ा भी खरीद के लाएं, वो खरीद कर जरूर लाएं।

बढ़िया अच्छी क्वालिटी के और इस चावल का अक्षत के रूप में आप पूरे वर्ष भगवान भोलेनाथ को और जो भी पूजा वगैरह में विशेषकर भोलेनाथ को आप समर्पित करें, क्योंकि आज धनतेरस के दिन धन त्रयोदशी भी होती है। तो इस कार्य को आप जरूर करिए। खरीद के जरूर लाइए।

तीसरी चीज है हल्दी। हल्दी की गांठ या पिसी हुई हल्दी भी आप खरीद के जरूर लाएं। जो लोग अपनी पोटली वगैरह बनाते हैं, वो लोग कमलगट्टे की कमलगट्टा, गोमती चक्र और कौड़ियाँ भी खरीद कर जरूर लाएं।

और जो लोग जिन जिन लोगों की पोटली गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम से जा रही है, उन्हें तो कोई जरूरी नहीं है। लेकिन जो लोग अपनी पोटली बनाते हैं, उन लोगों को यह सामग्री भी जरूर खरीद कर ले आना चाहिए। और क्या चीजें खरीद कर लाना चाहिए?

झाड़ू मैंने बता ही दिया। धनतेरस के दिन कुछ मीठी वस्तु भी अपने घर के अंदर खरीद कर अवश्य लेकर आए। और धनतेरस के दिन एक और वस्तु है, वो है मिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन खरीद कर लाने से भी समृद्धि आती है। तो आप इसे जरूर खरीद कर लाएं। इन सामग्रियों को अपने घर में जरूर शामिल करें।

⏰ Dhanteras धनतेरस पूजा और खरीदारी का शुभ मुहूर्त

 

अब आइए, बात कर लेती हूँ कि धनतेरस पर पूजा और खरीदारी का शुभ मुहूर्त क्या है? देखिए दोस्तों, धनतेरस की पूजा या खरीदारी हमेशा स्थिर लग्न यानी वृषभ लग्न, सिंह लग्न में करना चाहिए। तो इस बार धनतेरस के का जो शुभ मुहूर्त मिल रहा है, वह हमें मिल रहा है।

दिन में 18 तारीख को दिन में 12:16 से लेकर के और अगले दिन तक 19 तारीख की सुबह 6:24 तक हमें मिल रहा है। तो यानी 12:1 से आप पूरे दिन खरीदारी कर सकते हैं और इसी शुभ मुहूर्त में शाम की पूजा भी कर सकते हैं।

एक और शुभ मुहूर्त पूजा का होगा जो मैं यहाँ लगा दूँगी। बाकी आपको मोटे तौर पे बता दूँ कि इसी शुभ समय में, इसी मुहूर्त में आपको अपनी पूजा और खरीदारी, क्योंकि वृषभ लग्न स्थिर लग्न माना जाता है और सिंह लग्न स्थिर लग्न माना जाता है। इस मुहूर्त में अगर आप लक्ष्मी पूजा करते हैं, खरीद कर कुछ लाते हैं तो वह आपके लिए बहुत ही फायदेमंद।

🧼 Dhanteras धनतेरस झाड़ू की पूजा और इस्तेमाल

 

अच्छा एक चीज़ और बता दूँ। धनतेरस के दिन खरीदी गई झाड़ू की पूजा कभी भी आपको धनतेरस के दिन अह नहीं करना है। इसको आप पूजा अगर करते हैं तो दिवाली के दिन करिए।

धनतेरस के दिन केवल आप उस झाड़ू पे हल्दी, गंगाजल छिड़ककर के और आप इस झाड़ू को जहाँ पे गंदे झाड़ू रखते हैं, जिसे यूज़ करते हैं, वहाँ न रखें। आप उत्तर पूर्व में जहाँ मंदिर है, मंदिर के आसपास में आप इस झाड़ू को रख लीजिएगा।

धनतेरस की झाड़ू को बहुत लोग दिवाली के दिन इस्तेमाल करते हैं। परंतु ऐसा नहीं करना चाहिए। जब भी धनतेरस की झाड़ू यूज़ करें, वह दिवाली के अगले दिन, अगले दिन जब सुबह सफाई करें तो आप उस झाड़ू का इस्तेमाल कर सकते हैं।

🪔 Dhanteras धनतेरस कुबेर और महादेव का अचूक उपाय

अब एक अचूक उपाय बताती हूँ जो धनतेरस पर आप सभी को अवश्य करना है। देखिए दोस्तों, आपने कुबेर का नाम तो सुना होगा, क्योंकि धनतेरस पे कुबेर जी की पूजा होती है। धन्वंतरि के साथ कुबेर जी की और अगर आप भोलेनाथ को जानते हैं तो कुबेर को कुबेर बनाने वाला अगर कोई है तो वह है महादेव।

तो इसलिए आज के दिन त्रयोदशी यानी प्रदोष का दिन भी है। तो आप एक कार्य करिए। आप 11 दीपक ले लीजिए।

तिल के तिल का या घी का 11 दीपक ले लीजिए और किसी भी शिव मंदिर में जाकर शाम के टाइम, शाम के टाइम जब थोड़ा-थोड़ा अंधेरा होने लगे, तो यह दीपक प्रज्वलित करके भोलेनाथ को ₹11, ₹1, ₹21, ₹101 जितनी आपकी व्यवस्था हो, उतनी दक्षिणा समर्पित करके 11 दीप तो यह दीपक जलाकर प्रज्वलित करके, हाथ जोड़ के और कह के आइएगा सात लक्ष्मी न आए तो कहिएगा, आज के साथ ही लक्ष्मी आएँगी आप घर की पूजा करते हैं।

सब कुछ करते हैं। लेकिन यह महादेव का यह उपाय जो है, वह आप सभी जरूर कर लीजिएगा। बाकी तो जो जो जरूरी बातें हैं, उपाय हैं, वह मैं लाइव में बताती ही रहूँगी। इस समय एक भी पोस्ट आप छोड़िएगा मत, क्योंकि देखते हैं आप कमेंट में बहुत सारी बातें लिख करके पूछते हैं, लोग बताते हो और जब मैं चिल्ला रही हूँ कि यह अवसर है, इस अवसर को हाथ से मत छोड़िए। तो, बहुत कम लोग समझते हैं। इसे समझिए।

 यह अनुष्ठान काफी पावरफुल है। यह अनुष्ठान मैं स्वयं करवाती आई हूँ। करीब-करीब 9 साल से और यह अनुष्ठान बहुत ही ज्यादा मतलब पूरे साल इसका लाभ मिलता है। तो मुझे लगा है कि जब इस चीज का लाभ मुझे मिल रहा है, मुझे पूरा विश्वास है तो यह आप तक भी पहुँचे। तो मैं एक प्रयास कर रही हूँ।

अगर आप बहुत परेशान हैं, बहुत दिक्कत में हैं तो आप यहाँ आकर जुड़कर माँ लक्ष्मी का हवन करा सकते हैं, पूजन करा सकते हैं, मंत्र जप करा सकते हैं और इसमें साथ में जुड़ सकते हैं।

🎁 Dhanteras धनतेरस अभिमंत्रित पोटली और लॉकेट

अब देखिए, हर साल की तरह इस साल भी दिवाली पे पोटली अभिमंत्रित होने जा रही है। जैसा कि आप जानते हैं कि हर साल दिवाली पे गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम से एक पोटली जाती है। धन पोटली और यह अभिमंत्रित होने जा रही है और साथ में रहेगा लक्ष्मी वृद्धि लॉकेट जो चांदी में करके आपको जाता है।

बहुत सारे लोग कई सालों से, तीन सालों से जा रहा है तो लक्ष्मी वृद्धि लॉकेट भी जाता है जो कि चांदी के लॉकेट में होता है। गले में लाल धागे में आप इसे पहन सकते हैं।

तो इससे लक्ष्मी की प्राप्ति होती है और बहुत ही उत्तम होता है। जिन लोगों को शर्म लगती है, संकोच लगती है, जैसे महिलाएँ हैं, वह नहीं पहनना चाहती हैं, वह अपने मंगलसूत्र में भी एक लाल धागे में कर करके मंगलसूत्र में एक लाल धागे में कर कर और इसे अपने मतलब अंदर डाल करके पहन सकती हैं।

यह लॉकेट काफी पावरफुल है, क्योंकि इस लॉकेट का असर मुझे बहुत ज्यादा दिखा है, इसलिए मैं आप लोगों को यह लॉकेट बताती हूँ और काफी लोग जो है इससे लाभान्वित भी कई सालों से हो रहे हैं तो यह बताना नहीं है, आपको इसका लाभ आप स्वयं देखेंगे।

🕉️ Dhanteras धनतेरस लक्ष्मी-नारायण प्रतिमा

और दोस्तों, इस बार जो है एक अच्छी और नई चीज मैंने आपके लिए की है। तो इस बार जो है लक्ष्मीनारायण की छोटी सी चरण दबाती हुई प्रतिमा मैं अभिमंत्रित करा रही हूँ और गारंटी से कह रही हूँ कि जिन घरों में यह प्रतिमा विराजमान होगी और केवल और केवल प्रतिदिन आप इनका धूप, दीप, चंदन और थोड़ा सा जल से अभिषेक कर देंगे और वो अभिषेक किया हुआ जल अपने घर में छिड़क देंगे।

गारंटी से कहती हूँ या लिख के कहती हूँ, अगला साल आपका नौ बदला तो आप कहिएगा, क्योंकि यह चीजें मैं अपने लोगों को काफी हद तक देती रहती हूँ। कराती रहती हूँ। तो मुझे विश्वास बहुत बहुत दृढ़ है।

बस करना इतना है कि आपको जहाँ कहीं लक्ष्मी जी की मूर्ति आप अपने तिजोरी में भी स्थापित कर सकते हैं। वैसे अच्छा मंदिर में रहेगा। स्थापित करिए। रोज इनको जल से स्नान कराइए।

उस जल को पूरे घर में छिड़किए। थोड़ा सा धूप, दीप, चंदन लगा के भोग लगा दीजिए। देखिए यह मूर्ति कैसे आपके घर में चमत्कार करती है। तो तीन चीजें इस बार जा रही हैं।

एक लक्ष्मी वृद्धि लॉकेट है और एक है हमारी धनपोटली और दूसरा है हमारा मूर्ति जा रही है माँ लक्ष्मी के विष्णु जी के चरण दबाते हुए। तो ये तीनों चीजें गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम से जा रही हैं।

जिन लोगों को भी यह चीजें चाहिए, वो चैनल पर चल रहे नंबर पर संपर्क करें और संपर्क करके ऑफिस में नाम लिखवाएँ और नाम लिखवा करके अब यह सामान प्राप्त कर सकते हैं।

📦 Dhanteras धनतेरस सामान की प्राप्ति और लाभ

अब देखिए दोस्तों, एक चीज बता दूँ, घबराइएगा मत। धीरे-धीरे यह सामग्रियाँ जाती हैं और जिनका नाम जैसे लिखा होता है, पहले से जिनकी बुकिंग होती है, उनका पहले जाता है, बाद में जिनका होता है, उनका बाद में जाता है तो धीरे-धीरे धैर्य के साथ यह चीजें आप तक पहुँचेंगी और इस चीज के लाभ की बात करूँ, तो लाभ पूछिए ही मत, इस चीज का अनगिनत लाभ है जो मैं कॉन्फिडेंस से विश्वास से कह रही हूँ, आप इस विश्वास को मेरे विश्वास को समझिए और आगे बढ़िए।

दिवाली की रात्रि में लक्ष्मी साधना कैसे करे (Diwali Ki Ratri Mein Lakshmi Sadhana Kaise Kare)

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दिवाली की रात्रि में लक्ष्मी साधना का महत्व (Diwali Ki Ratri Mein Lakshmi Sadhana Ka Mahatva)

दिवाली की रात्रि में लक्ष्मी साधना का महत्व (Diwali Ki Ratri Mein Lakshmi Sadhana Ka Mahatva)

दिवाली की रात्रि में लक्ष्मी साधना का महत्व (Diwali Ki Ratri Mein Lakshmi Sadhana Ka Mahatva)
दिवाली की रात्रि में लक्ष्मी साधना का महत्व (Diwali Ki Ratri Mein Lakshmi Sadhana Ka Mahatva)

अरे भाई, दीपावली की रात, जिसे महानिशा भी कहते हैं, वो टाइम है जब हम सब माँ लक्ष्मी को अपने घर वेलकम करते हैं। सच कहूँ, यह दिवाली की रात पूरे साल में सबसे ज्यादा इम्पोर्टेन्ट (Important) रात होती है, खासकर उन लोगों के लिए जो धन और समृद्धि को अपने जीवन में अट्रैक्ट (Attract) करना चाहते हैं।

आप मानो या न मानो, इस रात की गई साधना का रिजल्ट (Result) बहुत जल्दी और बहुत ज्यादा मिलता है। जनाब, यह सिर्फ पूजा नहीं है, यह एक तरह का एनर्जी (Energy) चैनल है जिसके जरिए हम पॉजिटिविटी और वेल्थ (Wealth) को फील (Feel) करते हैं।

इसीलिए हर कोई चाहता है कि वो इस स्पेशल (Special) रात पर सही तरीके से माँ लक्ष्मी की आराधना करें। हम आपको यहाँ बिल्कुल सरल तरीका बता रहे हैं, जिससे आप भी इस मैजिकल (Magical) रात का पूरा बेनिफिट (Benefit) उठा सकें। भई देख, तुम अगर फुल फोकस (Full Focus) के साथ ये साधना करोगे, तो तुम्हारा घर खुशियों से भर जाएगा, सही है न?

साधना की तैयारी और सही समय (Sadhana Ki Taiyari Aur Sahi Samay)

 

 

तैयारी की लिस्ट (Preparation List)

 

सुनो जरा, साधना स्टार्ट (Start) करने से पहले कुछ चीजें रेडी (Ready) रखना बहुत जरूरी है। हमारा मकसद है कि आपको बिल्कुल सिम्पल (Simple) और आसानी से मिलने वाली चीजों का यूज़ करना है, ताकि किसी तरह की टेंशन न हो।

सामग्री (Samagri) विवरण (Details)
माँ लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति/फोटो नई या साफ़ की हुई मूर्ति/फोटो।
पूजा का आसन (Seat) लाल या पीला रंग का आसन बिछाएँ।
दीपक (Lamp) शुद्ध घी या तिल के तेल का एक बड़ा और 11 छोटे दीपक।
अक्षत और कुमकुम रोली और चावल (साबुत चावल, टूटे नहीं)।
फूल और माला कमल का फूल (सबसे बेस्ट), या लाल गुलाब।
प्रसाद (Sweet Offerings) खीर, मिठाई, या बताशे/खील।
दक्षिणा कुछ कॉइन (Coin) और नोट (Note)।
शुद्ध जल गंगा जल या साफ पानी।
इत्र और धूप/अगरबत्ती सुगंध (Fragrance) बहुत ज़रूरी है।

 

पूजा का शुभ मुहूर्त (Auspicious Time for Puja)

 

वैसे तो पूरी रात ही लक्ष्मी साधना के लिए बहुत अच्छी होती है, तो भी मान लो कि आपको एक निश्चित टाइम पर बैठना है, तो सबसे इम्पोर्टेन्ट (Important) टाइम होता है प्रदोष काल (शाम) और महानिशा काल (आधी रात)।

  • प्रदोष काल: यह सूर्य अस्त होने के लगभग 2 घंटे बाद शुरू होता है। अक्सर लोग इसी टाइम में फैमिली (Family) के साथ पूजा करते हैं।
  • महानिशा काल: यह आधी रात के आसपास का टाइम होता है। साधकों (Sadhaks) के लिए यह टाइम सबसे बेस्ट (Best) माना जाता है। इस टाइम पर की गई साधना का पॉवर (Power) सबसे ज्यादा फील होता है। भाई, मान लो कि अगर आप देर रात तक जाग सकते हैं, तो यह टाइम मत छोड़ना, ठीक है न?

लक्ष्मी साधना की पूरी विधि (Lakshmi Sadhana Ki Poori Vidhi)

 

1. शुद्धिकरण और संकल्प (Purification and Vow)

 

अच्छा सुनो, साधना शुरू करने से पहले आप स्नान (Bath) करके साफ क्लॉथ (Clothes) पहन लें। मैं हमेशा कहता हूँ कि मन की शुद्धि सबसे जरूरी है।

  • जगह साफ करें: पूजा का स्थान अच्छी तरह से साफ करें।
  • आसन पर बैठें: लाल या पीले आसन पर ईस्ट (East) या नॉर्थ (North) की तरफ फेस (Face) करके बैठें।
  • संकल्प लें: आप हाथ में जल, फूल, और चावल लेकर संकल्प (Vow) करें कि आप किसलिए (For what reason) यह साधना कर रहे हैं। उदाहरण के लिए: “हे माँ लक्ष्मी, मैं (अपना नाम) धन, समृद्धि, और सुख के लिए यह साधना कर रहा हूँ।” जरा सोचो, जब तुम संकल्प लेते हो, तो तुम अपनी एनर्जी को एक डाइरेक्शन (Direction) देते हो।

 

2. गणेश वन्दना (Ganesh Worship)

 

तुम देखो, किसी भी पूजा को स्टार्ट करने से पहले गणेश जी की पूजा सबसे जरूरी है। तो आप सबसे पहले गणेश जी को जल, रोली, चावल, और दूर्वा (घास) ऑफर (Offer) करें।

  • उनका ध्यान करें और मन्त्र (Mantra) बोलें: ‘वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।
  • यार, हम गुरू को और गणेश जी को पहले इसलिए याद करते हैं, ताकि साधना में कोई प्रॉब्लम (Problem) न आए, समझे?

 

3. कलश स्थापना और दीपक प्रज्वलन (Kalash Sthapana and Lighting the Lamp)

 

  • कलश: एक कलश में जल भरें, उसमें सिक्का, सुपारी, और हल्दी डालें। ऊपर आम के पत्ते रखकर एक नारियल रखें।
  • दीपक: घी का एक बड़ा दीपक जलाएँ। यह दीपक पूरी रात जलते रहना चाहिए। यह दीपक आपकी वेल्थ (Wealth) और एनर्जी का सिम्बल (Symbol) है।

 

4. माँ लक्ष्मी की पूजा (Maa Lakshmi Puja)

 

अब सुनो, यह मेन (Main) पार्ट है।

  • आवाहन (Calling): माँ लक्ष्मी को इनवाइट (Invite) करें और आसन दें।
  • स्नान (Bath): माँ की मूर्ति या फोटो को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान कराएँ।
  • वस्त्र और आभूषण: उन्हें लाल वस्त्र (Red Clothes) और आभूषण (Jewellery) ऑफर करें।
  • कुमकुम और अक्षत: रोली और साबुत चावल (अक्षत) चढ़ाएँ।
  • पुष्प और माला: कमल का फूल या लाल फूल जरूर चढ़ाएँ।
  • इत्र (Perfume): माँ लक्ष्मी को इत्र बहुत पसंद है, तो इत्र लगाना न भूलें।
  • प्रसाद: खीर, मिठाई, और खील-बताशे चढ़ाएँ।
शक्तिशाली लक्ष्मी मंत्र और जाप (Shaktishali Lakshmi Mantra Aur Jaap)

 

क्या बताऊँ, साधना का कोर (Core) पार्ट है मंत्र जाप (Mantra Jaap)। जरा सोच के देखो, तुम अगर सही मंत्र को सही फीलिंग (Feeling) के साथ बोलते हो, तो पॉजिटिव एनर्जी (Positive Energy) कितनी बढ़ जाती है।

 

मुख्य लक्ष्मी मंत्र (The Main Lakshmi Mantra)

 

आप यह सरल और सबसे पावरफुल (Powerful) मंत्र यूज (Use) कर सकते हैं:

या इससे भी सरल:

 

जाप की विधि (Mala Jaap Method)

 

  • माला (Rosary): कमल गट्टे की माला (Lotus Seed Rosary) सबसे शुभ (Auspicious) मानी जाती है। अगर यह न हो, तो स्फटिक (Crystal) की माला यूज कर सकते हैं।
  • जाप संख्या: कम से कम एक माला (108 बार) जाप करना चाहिए। लेकिन अगर आप पूरी महानिशा में फोकस करके 11 माला या 21 माला जाप करते हैं, तो अरे वाह भई, आपको बहुत अच्छे रिजल्ट (Good Results) मिलेंगे।
  • ध्यान (Dhyan): तुम जाप करते समय सिर्फ माँ लक्ष्मी के स्वरूप (Form) का ध्यान करें। प्रभु की कृपा तभी मिलती है जब हमारा ध्यान फिक्स (Fixed) होता है।

भाई देख, तुम यह मंत्र जाप पूरी शांत जगह पर करो और मन में कोई डाउट (Doubt) मत रखना, ठीक बोला न?

साधना के बाद के जरूरी काम (Sadhana Ke Baad Ke Zaroori Kaam)

 

1. आरती (Aarti)

 

साधना पूरी होने के बाद, आप गणेश जी और माँ लक्ष्मी की आरती करें। आरती करते टाइम पूरे घर में एक पॉजिटिव (Positive) वाइब (Vibe) फील होना चाहिए। तुम बोलो तो सही, आरती के बिना पूजा कंप्लीट (Complete) नहीं होती।

 

2. दक्षिणा और प्रसाद (Donation and Offerings)

 

  • दक्षिणा: आप अपने सामने रखे कॉइन (Coin) और नोट (Note) को माँ के आशीर्वाद के रूप में उठा लें। इसे अगले दिन अपनी तिजोरी में रख दें। माना न?
  • प्रसाद: प्रसाद को पहले घर के मेम्बर्स (Family Members) में बाँटें, और फिर गरीबों को भी जरूर देंदेखा आपने, जब हम देते हैं, तभी हमें मिलता है।

 

3. साधना की समाप्ति (Conclusion of Sadhana)

 

अगले दिन, आप कलश के जल को पूरे घर में छिड़क दें। फूल और पुराने दीपक को किसी पवित्र जगह या बहते पानी में विसर्जन कर दें। यूँ कहें तो, तुम ने जो पॉजिटिविटी रात भर कलेक्ट की है, उसे अब चारों तरफ फैलाना है।

लक्ष्मी साधना के लिए जरूरी टिप्स (Lakshmi Sadhana Ke Liye Zaroori Tips)

 

अरे वाह भई, यह कुछ टिप्स (Tips) हैं जो तुम्हारी साधना को और ज्यादा सक्सेसफुल (Successful) बना सकते हैं:

  1. सफाई (Cleanliness): पूरे घर की सफाई बहुत जरूरी है। माँ लक्ष्मी को गंदगी बिल्कुल पसंद नहीं है। खासकर घर का नॉर्थ-ईस्ट (North-East) कोना बिल्कुल साफ होना चाहिए।
  2. सात्विक आहार (Simple Food): साधना से पहले और उस दिन आप लहसुन, प्याज, या नॉन-वेज (Non-Veg) फूड से दूर रहें। तुम्हें सात्विक भोजन ही करना है।
  3. श्रद्धा और विश्वास (Faith and Belief): यह सबसे इम्पोर्टेन्ट (Important) टिप है। अगर तुम्हारा विश्वास पक्का है, तो कोई भी मंत्र या विधि फेल नहीं हो सकती।
  4. एकाग्रता (Concentration): जाप करते टाइम इधर-उधर की बातें मत सोचो। सिर्फ और सिर्फ माँ लक्ष्मी पर फोकस (Focus) करो।

क्या ख़याल है? तुम अगर इन सिम्पल टिप्स को फॉलो (Follow) करोगे, तो तुम्हारी दिवाली की रात की साधना जरूर सक्सेसफुल (Successful) होगी। तो चलिए, आप अभी से तैयारी कर लीजिए

दीपावली और माँ लक्ष्मी के बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया पर जाएँ।

अधिक धन प्राप्ति के शास्त्रों के बारे में पढ़ें।

तुम सोचो न, यह सब करोगे न? मज़ा आया न?

आकाश परी साधना: Aakash Pari Sadhana Kya Hai?

आकाश परी साधना: Aakash Pari Sadhana Kya Hai?

आकाश परी साधना: Aakash Pari Sadhana Kya Hai?

 

आकाश परी साधना: Aakash Pari Sadhana Kya Hai?
आकाश परी साधना: Aakash Pari Sadhana Kya Hai?

आकाश परी साधना: Aakash Pari Sadhana Kya Hai? एक खूबसूरत, रहस्यमय और जादुई फोटो। बैकग्राउंड में रात का आसमान दिख रहा है, जिसमें तारे चमक रहे हैं और हल्का सा चाँद भी है। बीच में, एक खूबसूरत सी लड़की है, जिसे आप परी या अप्सरा मान सकते हैं। वह हवा में हल्के से उड़ रही है। उसके बाल बिखरे हुए हैं और चेहरे पर एक शांत सी स्माइल है।

उसके चारों ओर एक हल्की सी नीली-सुनहरी रोशनी है, जो उसकी डिवाइन एनर्जी को दिखा रही है। उसके एक हाथ में कोई जादुई चीज़ है, जिससे थोड़ी सी चमकीली एनर्जी निकल रही है। नीचे की ओर, एक व्यक्ति ध्यान मुद्रा में बैठा है, जिसकी आँखों पर हल्की सी रोशनी पड़ रही है। यह फोटो आध्यात्मिक और रहस्यमयी दोनों फील दे रही है।

आकाश परी साधना क्या है? (What is Aakash Pari Sadhana?)

 

देखो पाठकों, आज हम एक बहुत ही इंटरेस्टिंग और मिस्टीरियस टॉपिक पर बात करेंगे – आकाश परी साधना। अच्छा तो, बहुत से लोग यह सोचते हैं कि यह कोई जादुई या फिल्म जैसी चीज है। सच कहूँ तो, यह एक बहुत ही पुरानी और पावरफुल स्पिरिचुअल प्रैक्टिस है, जिसमें लोग एक खास तरह की एनर्जी, जिसे हम परी या अप्सरा कहते हैं, उससे कनेक्ट होने की कोशिश करते हैं।

अरे वाह भाई, आप सोच रहे होंगे कि यह सब क्या है। दरअसल, वैदिक और पौराणिक कथाओं में अप्सराओं का जिक्र बहुत होता है। वे स्वर्ग की बहुत ही सुंदर और अट्रैक्टिव एंटिटी थीं, जो देवों और गंधर्वों के साथ रहती थीं। ये कोई आम एंटिटी नहीं थीं, बल्कि इनके पास बहुत सी सुपरनेचुरल पावर थीं। जब हम आकाश परी साधना की बात करते हैं, तो हम इन्हीं अप्सराओं से कनेक्शन बनाने की कोशिश करते हैं ताकि हमें जीवन में सक्सेस और ब्लेसिंग्स मिल सकें।

इस साधना का मेन गोल यह है कि साधक अपने और उस परी के बीच एक डीप कनेक्शन बनाए। यह कोई फिजिकल कनेक्शन नहीं होता, बल्कि एक मेंटल और स्पिरिचुअल कनेक्शन होता है। यार, यह साधना करके लोग धन, प्यार, सक्सेस, और ब्यूटी जैसी चीज़ें अपनी लाइफ में अट्रैक्ट करना चाहते हैं, क्योंकि मानते हैं कि परियां ये सब दे सकती हैं।

 

आकाश परी साधना: क्यों और कैसे करें? (Aakash Pari Sadhana: Why and How to do it?)

पाठक दोस्तों, अब हम बात करेंगे कि यह आकाश परी साधना क्यों की जाती है। भई, हर साधना का कोई न कोई पर्पस होता है, ठीक उसी तरह इस साधना का भी। लोग इसे अपनी ज़िंदगी में सुख-समृद्धि पाने के लिए करते हैं। मान लो, किसी की लाइफ में फाइनेंशियल प्रॉब्लम चल रही है या फिर कोई अपने लव लाइफ में सक्सेस चाहता है, तो वे लोग यह साधना कर सकते हैं। यह बहुत ही सीरियस काम है, और इसे करने से पहले आपको खुद को पूरी तरह से रेडी करना पड़ता है।

यह एक बहुत ही सेंसिटिव और सीक्रेट साधना है। इसे करने के लिए आपको एक शांत जगह चाहिए, जहाँ कोई आपको डिस्टर्ब न करे। सच बताऊँ तो, यह साधना बिना किसी गुरु के गाइडेंस के नहीं करनी चाहिए। अगर आप अकेले करना चाहते हैं, तो आपको बहुत ही केयरफुल रहना पड़ेगा। इस साधना में धैर्य (पेशेंस) और डिसिप्लिन की बहुत जरूरत होती है। तुम सोचो न, यह कोई 1-2 दिन का काम नहीं है, इसमें लंबा टाइम लगता है।

 

आकाश परी साधना के लिए ज़रूरी चीज़ें (Aakash Pari Sadhana ke liye Zaroori Cheezein)

 

जनाब, किसी भी साधना को करने के लिए कुछ सामान की जरूरत होती है। आकाश परी साधना के लिए भी कुछ जरूरी चीज़ें चाहिए, जिन्हें हम पूजा सामग्री कहते हैं।

  • साधना का स्थान: सबसे पहले आपको एक साफ़-सुथरी जगह चाहिए। यह आपका कमरा भी हो सकता है, बस शर्त ये है कि कोई आपको डिस्टर्ब न करे।
  • आसन: एक साफ और नया आसन चाहिए। लाल, गुलाबी या सफ़ेद रंग का आसन अच्छा माना जाता है।
  • परी यंत्र: यह सबसे इम्पोर्टेंट आइटम है। यह एक स्पेशल यंत्र होता है, जिस पर परी को बुलाया जाता है। यह आपको किसी स्पिरिचुअल स्टोर में मिल जाएगा।
  • माला: स्फटिक या रुद्राक्ष की माला से मंत्र जप कर सकते हैं।
  • फूल: सफेद या गुलाबी रंग के फूल, खासकर गुलाब के फूल बहुत अच्छे होते हैं।
  • धूप और अगरबत्ती: अच्छी क्वालिटी की धूप और अगरबत्ती लें। इसकी खुशबू से पूरा एनवायरमेंट पॉजिटिव फील होता है।
  • मिठाई: मिश्री या दूध से बनी मिठाई अच्छी मानी जाती है।
  • दीपक: घी का दीपक जलाएँ, जो पूरी साधना के दौरान जलता रहे।

 

आकाश परी साधना मंत्र और विधि (Aakash Pari Sadhana Mantra aur Vidhi)

 

अरे भाई, साधना का सबसे इम्पोर्टेंट पार्ट है इसका मंत्र और विधि। बिना सही तरीके से मंत्र जप किए, कोई भी साधना सफल नहीं होती।

। बिस्मिल्लाह रहेमाने रहिम आकाश परि के पाव मे  घुंगरु,नाचति आवे-बजाती आवे,सोति हो तो जागकर आवे,जागती हो तो जल्द आवे,छमा छम करे-बादल मे घोर करे,मेरा हुकुम नही माने तो परि लोक से जमीन पर  गीरे,हज साल जहन्नुम भोगे,लाख लाख बिच्छुन कि पिडा भोगे,दुहाई सुलेमान पैगम्बर कि,दुहाई हसन-हुसैन साहब की,मेरी भक्ति गुरु कि शक्ति,फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा ।।

इस मंत्र को एक दिन में 108 बार या उससे ज्यादा जप करना होता है। ‘अमुक’ की जगह आप उस परी का नाम ले सकते हैं, जिसे आप बुलाना चाहते हैं। पर ये एक सिंपल मंत्र है, असली साधना में और भी पावरफुल मंत्र होते हैं, जो गुरु बताते हैं।

साधना की विधि:

  1. तैयारी: साधना के दिन, सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। साफ़-सुथरे कपड़े पहनें। अगर हो सके, तो लाल या गुलाबी रंग के कपड़े पहनें।
  2. स्थान: साधना के लिए जो जगह आपने चुनी है, उसे साफ करके एक चौकी रखें। उस पर लाल या गुलाबी कपड़ा बिछाएँ।
  3. यंत्र स्थापना: चौकी पर परी यंत्र रखें। यंत्र के सामने फूल, मिठाई और दीपक रखें।
  4. संकल्प: साधना शुरू करने से पहले एक छोटा सा संकल्प लें। मन में कहें कि आप किस मकसद के लिए यह साधना कर रहे हैं।
  5. मंत्र जप: अब माला लेकर मंत्र जप करना शुरू करें। यह मंत्र जप आपको रोज़ाना करना पड़ेगा, बिना किसी ब्रेक के। जरा सोच के देखो, यह कितना डिसिप्लिन मांगता है।
  6. ध्यान: मंत्र जप करते हुए, आपको परी का ध्यान करना है। उसकी एक खूबसूरत इमेज अपने दिमाग में बनाएं। मानो जरा, कि वो आपके सामने ही है।

आकाश परी साधना: साधना के फायदे (Aakash Pari Sadhana: Sadhana ke Fayde)

 

भाई, अगर यह साधना सक्सेसफुल हो जाती है, तो इसके बहुत सारे फायदे हो सकते हैं। लोग मानते हैं कि इस साधना से उनकी ज़िंदगी में पॉजिटिव चेंज आता है।

  • सुख-समृद्धि: कहते हैं कि परी के आशीर्वाद से आपकी लाइफ में धन की कमी नहीं रहती।
  • लव लाइफ में सुधार: अगर आप किसी से प्यार करते हैं और अपनी लव लाइफ में प्रॉब्लम फेस कर रहे हैं, तो यह साधना हेल्प कर सकती है।
  • सफलता: हर काम में सक्सेस मिलती है। आप जो भी करते हैं, उसमें आपको फेवर मिलता है।
  • ब्यूटी और अट्रैक्शन: कुछ साधक मानते हैं कि इस साधना से उनकी पर्सनैलिटी में अट्रैक्शन बढ़ता है। लोग उनसे अपने आप अट्रैक्ट होने लगते हैं।
  • मन की शांति: यह साधना आपके माइंड को भी शांत करती है और आपको एक अंदरूनी शांति फील होती है।

 

आकाश परी साधना के दौरान ध्यान देने वाली बातें (Aakash Pari Sadhana ke Dauran Dhyan Dene Wali Baatein)

 

पाठक भाइयों, यह साधना बहुत ही पावरफुल है, और इसीलिए इसमें कुछ बातों का खास ध्यान रखना पड़ता है।

  • ब्रह्मचर्य: इस साधना के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना बहुत जरूरी है।
  • शांति: साधना के समय आपको पूरी तरह से शांत रहना है। नेगेटिव थॉट्स को अपने दिमाग में नहीं आने देना है।
  • विश्वास: सबसे इम्पोर्टेंट बात है, आपका विश्वास (फेथ) और श्रद्धा (डिवोशन)। अगर आपका फेथ स्ट्रांग नहीं होगा, तो साधना सक्सेसफुल नहीं होगी।
  • साफ-सफाई: अपने शरीर की और साधना के स्थान की साफ-सफाई पर पूरा ध्यान दें।
  • खान-पान: साधना के दौरान सात्विक भोजन ही करें। नॉन-वेज और शराब से दूर रहें।

 

आकाश परी साधना के लिए ज़रूरी नियम (Aakash Pari Sadhana ke Liye Zaroori Niyam)

 

अरे देखो, यह साधना कोई बच्चों का खेल नहीं है। इसके कुछ कड़े नियम होते हैं, जिनका पालन करना ही पड़ता है।

  1. गुरु की गाइडेंस: अगर हो सके, तो किसी एक्सपर्ट गुरु की देखरेख में ही यह साधना करें।
  2. गुप्त रखें: इस साधना के बारे में किसी को न बताएं। इसे गुप्त रखना ही बेहतर होता है।
  3. ईमानदारी: आप इस साधना को क्यों कर रहे हैं, इसके प्रति पूरी तरह से ईमानदार रहें। आपका मकसद अच्छा होना चाहिए।
  4. धैर्य: आपको धैर्य रखना पड़ेगा। हो सकता है, आपको जल्दी रिजल्ट न मिले।
  5. अहिंसा: किसी भी जीव को कोई नुकसान न पहुंचाएं। जानवरों और इंसानों के प्रति दया का भाव रखें।

 

आकाश परी साधना से जुड़ी कुछ बातें (Aakash Pari Sadhana se Judi Kuch Baatein)

 

देखो ना, पौराणिक कथाओं में अप्सराओं का जिक्र कई बार आता है। जैसे कि उर्वशी, मेनका, रंभा और तिलोत्तमा। ये सब स्वर्ग की अप्सराएँ थीं, जो अपनी खूबसूरती और डांस के लिए जानी जाती थीं। इनकी कहानियाँ बहुत इंटरेस्टिंग हैं, आप विकिपीडिया पर इनके बारे में और भी पढ़ सकते हैं।

सच कहूँ तो, यह साधना आज के मॉडर्न वर्ल्ड में भी काफी पॉपुलर हो रही है, लेकिन इसका सही तरीका बहुत कम लोगों को पता है। बहुत से लोग इसे गलत तरीके से करते हैं और फिर उन्हें प्रॉब्लम हो सकती है। इसलिए, हमेशा ध्यान रखें कि अगर आप यह साधना कर रहे हैं, तो सारे नियम और डिसिप्लिन को फॉलो करें।

यह साधना सिर्फ कुछ पाने के लिए नहीं है, बल्कि यह आपके इनर सेल्फ को भी बदल देती है। आप ज्यादा पॉजिटिव और फोकस्ड महसूस करने लगते हैं। यह एक तरह की स्पिरिचुअल जर्नी है, जिसे आप अपने आप से कनेक्ट होने के लिए भी कर सकते हैं।

तो भाई, यह थी आकाश परी साधना के बारे में कुछ जानकारी। मुझे उम्मीद है कि आपको यह पढ़कर अच्छा लगा होगा। अगर आपका कोई सवाल है, तो कमेंट में पूछ सकते हो। क्या कहते हो?

राशि अनुसार लक्ष्मी मंत्र | Rashi Anusar Lakshmi Mantra

राशि अनुसार लक्ष्मी मंत्र | Rashi Anusar Lakshmi Mantra

राशि अनुसार लक्ष्मी मंत्र | Rashi Anusar Lakshmi Mantra

राशि अनुसार लक्ष्मी मंत्र | Rashi Anusar Lakshmi Mantra
राशि अनुसार लक्ष्मी मंत्र | Rashi Anusar Lakshmi Mantra

पैसा और सुकून क्यों जरूरी? | Why Money and Peace are Important?

 

अरे वाह भई, पाठक दोस्तों! क्या आप भी ज़िंदगी में पैसे की कमी से परेशान हैं? क्या खूब मेहनत करने के बाद भी सफलता नहीं मिल पाती? सच कहूँ तो, यह एक ऐसी प्रॉब्लम है जिससे बहुत से लोग गुजरते हैं। भाई, हर इंसान की ख्वाहिश होती है कि उसके पास ढेर सारा पैसा हो, घर में सुख-शांति रहे और ज़िंदगी में किसी चीज की कमी महसूस फील न हो। लेकिन, अक्सर ऐसा हो नहीं पाता।

जरा सोचो, हम सभी ने लक्ष्मी माता की पूजा के बारे में सुना है, पर क्या आप जानते हैं कि आपकी राशि के अनुसार देवी लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए कुछ खास मंत्र होते हैं? हाँ, बिलकुल। ये मंत्र आपके लिए स्पेशली डिज़ाइन किए गए होते हैं, जो आपकी राशि की एनर्जी और स्वभाव के हिसाब से काम करते हैं।

इस लेख में, हम आपको आपकी राशि के लिए ऐसे ही पावरफुल लक्ष्मी मंत्रों के बारे में बताएँगे, जिनका जप करके आप अपने जीवन में धन और समृद्धि ला सकते हैं। तो, चलो दोस्तों, अब बात करते हैं कि कैसे आप अपनी राशि के अनुसार सही मंत्र का चुनाव करके अपनी किस्मत को बदल सकते हो। क्या कहते हो?

मेष राशि: धन और शक्ति का मंत्र | Aries Rashi: Dhan Aur Shakti Ka Mantra

अच्छा भई, देखो। मेष राशि वाले लोग बहुत उत्साही, निडर और लीडरशिप क्वालिटी वाले होते हैं। आप लोग बहुत जल्दी काम करते हैं और एनर्जी से भरे होते हैं। लेकिन, कभी-कभी जल्दबाज़ी के चक्कर में नुकसान भी उठा लेते हैं। आपकी राशि का स्वामी ग्रह मंगल है, जो एनर्जी का प्रतीक है। तो, आपको एक ऐसे मंत्र की जरूरत है जो आपकी एनर्जी को सही दिशा दे सके।

मेष राशि का लक्ष्मी मंत्र | Aries Rashi Ka Lakshmi Mantra

 

ॐ ऐं क्लीं सौं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

यह मंत्र आपके लिए बहुत ही शक्तिशाली है। सच बताऊँ, यह आपकी अंदरूनी शक्ति को बढ़ाता है और आपको सही फैसले लेने में मदद करता है। मान लो, अगर आप कोई नया बिजनेस शुरू कर रहे हैं और आपको डर लग रहा है, तो इस मंत्र का जप करके आप उस डर को हटा सकते हैं।

इस मंत्र के फायदे | Is Mantra Ke Fayde

इस मंत्र से आपकी लीडरशिप क्वालिटी और भी निखरकर आएगी। यह आपको फाइनेंसियल ग्रोथ और स्थिरता देता है। आपका दिमाग और भी क्लियर हो जाएगा और आप पैसों से जुड़े सही डिसिज़न ले पाएंगे। अरे भाई, क्या बताऊँ, ये मंत्र आपको पॉजिटिव एनर्जी भी देता है ताकि आप अपनी लाइफ में तरक्की कर सकें।

मंत्र जप करने का तरीका | Mantra Jap Karne Ka Tarika

आप हर दिन सुबह नहाकर, साफ कपड़े पहनकर 108 बार इस मंत्र का जप करें। एक माला लेकर जप करना और भी अच्छा होगा। कोशिश करें कि आप पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। यह जाप शुक्रवार से शुरू करना सबसे अच्छा रहेगा।

वृषभ राशि: संपत्ति और स्थिरता का मंत्र | Taurus Rashi: Sampatti Aur Sthirta Ka Mantra

 

तुम देखो, वृषभ राशि वाले लोग बहुत ही शांत, धैर्यवान और प्रैक्टिकल नेचर के होते हैं। आप लोगों को अच्छी और आरामदायक लाइफ पसंद होती है और आप इसके लिए खूब मेहनत भी करते हैं। आपकी राशि का स्वामी ग्रह शुक्र है, जो सुख-समृद्धि का ग्रह माना जाता है। तो आपको ऐसा मंत्र चाहिए जो आपकी मेहनत का पूरा फल दे।

 

वृषभ राशि का लक्ष्मी मंत्र | Taurus Rashi Ka Lakshmi Mantra

 

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।

यह मंत्र आपकी लाइफ में पैसों की कमी को पूरा करता है। तुम मानो न, ये मंत्र आपको धन, संपत्ति और सारी सुख-सुविधाएं देता है। अगर आप कोई प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान कर रहे हैं, तो इस मंत्र का जप आपको उसमें मदद कर सकता है।

इस मंत्र के फायदे | Is Mantra Ke Fayde

इस मंत्र से आपको आर्थिक स्थिरता महसूस फील होगी। आप अपना काम करते रहेंगे और पैसा अपने आप आपकी ओर आएगा। यह मंत्र आपको हर काम में सफलता दिलाएगा, जिससे आप एक अच्छी और शानदार लाइफ जी पाएंगे।

मंत्र जप करने का तरीका | Mantra Jap Karne Ka Tarika

जरा सोचो, आपको हर दिन सुबह या शाम को एक फिक्स टाइम पर इस मंत्र का जप करना चाहिए। 108 बार जप करना पर्याप्त होगा। जप करने से पहले आप देवी लक्ष्मी के सामने एक दीपक और अगरबत्ती जला सकते हैं।

मिथुन राशि: बिजनेस और बुद्धि का मंत्र | Gemini Rashi: Business Aur Buddhi Ka Mantra

देख रहे हो ना, मिथुन राशि के लोग बहुत ही बुद्धिमान और मल्टी-टास्किंग होते हैं। आपका दिमाग हमेशा चलता रहता है और आप एक साथ कई काम कर सकते हैं। आप बहुत जल्दी बोर हो जाते हैं और नए-नए आइडियाज़ पर काम करना पसंद करते हैं। आपकी राशि का स्वामी ग्रह बुध है, जो बुद्धि और बिज़नेस का ग्रह है।

मिथुन राशि का लक्ष्मी मंत्र | Gemini Rashi Ka Lakshmi Mantra

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं हं हंसः सौं ॐ नमः

यह मंत्र आपके दिमाग को और भी तेज बनाएगा और आपको सही फैसले लेने में मदद करेगा। भाई, मान लो, अगर आपका कोई बिज़नेस चल नहीं रहा है तो इस मंत्र का जप करके आप नए तरीके ढूंढ सकते हैं।

इस मंत्र के फायदे | Is Mantra Ke Fayde

इस मंत्र से आपको बिजनेस और नौकरी में तरक्की मिलेगी। आप लोगों के साथ बेहतर डील कर पाएंगे और अपनी बात सही तरीके से रख पाएंगे। यह मंत्र आपके लिए नए अवसर भी पैदा करेगा।

मंत्र जप करने का तरीका | Mantra Jap Karne Ka Tarika

आपको इस मंत्र का जप सुबह और शाम, दोनों समय करना चाहिए। अगर हो सके तो 108 बार रुद्राक्ष की माला से जप करें। इसे हर दिन करने से आपको अच्छा रिजल्ट मिलेगा।

कर्क राशि: मन की शांति और समृद्धि का मंत्र | Cancer Rashi: Man Ki Shanti Aur Samriddhi Ka Mantra

तुम मानो न, कर्क राशि वाले लोग बहुत ही इमोशनल और केयरिंग होते हैं। परिवार और घर इनके लिए सबसे ज्यादा इंपॉर्टेंट होते हैं। लेकिन, कभी-कभी ज्यादा इमोशनल होने की वजह से ये लोग टेंशन में आ जाते हैं। आपकी राशि का स्वामी ग्रह चंद्र है, जो मन का कारक है।

कर्क राशि का लक्ष्मी मंत्र | Cancer Rashi Ka Lakshmi Mantra

ॐ श्रीं श्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं श्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।

यह मंत्र आपके मन को शांत रखने और आपके घर में सुख-शांति बनाए रखने के लिए है। यह आपके घर में एक पॉजिटिव एटमॉस्फेयर बनाएगा, जिससे आपको अच्छा फील होगा।

इस मंत्र के फायदे | Is Mantra Ke Fayde

इस मंत्र से आपको मानसिक शांति मिलेगी और आप इमोशनली स्ट्रांग बन पाएंगे। यह आपके घर में पैसों की कमी नहीं होने देगा और आपके परिवार को खुश रखेगा।

मंत्र जप करने का तरीका | Mantra Jap Karne Ka Tarika

आप इस मंत्र का जप रात में सोने से पहले करें। 108 बार जाप करना अच्छा रहेगा। अगर आप अपनी मां के हाथ से प्रसाद बनाकर मां लक्ष्मी को भोग लगाएँगे, तो और भी कृपा मिलेगी।

सिंह राशि: मान-सम्मान और वैभव का मंत्र | Leo Rashi: Maan-Samman Aur Vaibhav Ka Mantra

अरे देख लो, सिंह राशि के लोग राजा की तरह होते हैं। वे बहुत कॉन्फिडेंट, लीडरशिप क्वालिटी वाले और खुद को एक्सप्रेस करने वाले होते हैं। आप लोगों को पावर और मान-सम्मान बहुत पसंद है। आपकी राशि का स्वामी सूर्य है, जो प्रकाश और शक्ति का ग्रह है।

सिंह राशि का लक्ष्मी मंत्र | Leo Rashi Ka Lakshmi Mantra

 

ॐ ह्रीं श्रीं सौं महालक्ष्म्यै नमः।

यह मंत्र आपके जीवन में मान-सम्मान और वैभव लाता है। यह आपको राजा जैसा फील कराता है। तुम बताओ न, अगर आप किसी बड़े पद पर हैं, तो यह मंत्र आपको और भी सक्सेस देगा।

 

इस मंत्र के फायदे | Is Mantra Ke Fayde

इस मंत्र से आपकी समाज में इज्जत बढ़ेगी और लोग आपकी बात सुनेंगे। आपको हर काम में सफलता मिलेगी और आपका स्टेटस बढ़ेगा।

 

मंत्र जप करने का तरीका | Mantra Jap Karne Ka Tarika

 

आप इस मंत्र का जप सुबह सूर्योदय के समय करें। एक लाल आसन पर बैठकर 108 बार जप करना बहुत ही पावरफुल होगा।

कन्या राशि: उन्नति और सफलता का मंत्र | Virgo Rashi: Unnati Aur Safalta Ka Mantra

 

कहो जरा, कन्या राशि वाले लोग बहुत ही परफेक्शनिस्ट और लॉजिकल होते हैं। आप हर काम को बहुत ध्यान से और डिटेल में करते हैं। आप दूसरों की मदद भी करना पसंद करते हैं। आपकी राशि का स्वामी बुध है, जो बुद्धि और प्लानिंग का ग्रह है।

 

कन्या राशि का लक्ष्मी मंत्र | Virgo Rashi: Unnati Aur Safalta Ka Mantra

 

ॐ श्रीं श्रीं ऐं क्लीं सौं ॐ नमः।

यह मंत्र आपकी मेहनत को सही दिशा देता है। भाई, सोचो, आप बहुत मेहनत करते हैं, लेकिन अगर रिजल्ट नहीं मिल रहा है, तो यह मंत्र आपको सफलता तक पहुँचाने में मदद करेगा।

 

इस मंत्र के फायदे | Is Mantra Ke Fayde

 

इस मंत्र से आपको अपने काम में सफलता मिलेगी और आप अपने गोल्स को पूरा कर पाएंगे। यह आपको पैसों से जुड़े मामलों में भी सफलता दिलाएगा।

 

मंत्र जप करने का तरीका | Mantra Jap Karne Ka Tarika

आप इस मंत्र का जप बुधवार के दिन शुरू करें। हर दिन सुबह या शाम को एक शांत जगह पर बैठकर जप करें।

तुला राशि: सुख-शांति और बैलेंस का मंत्र | Libra Rashi: Sukh-Shanti Aur Balance Ka Mantra

 

अरे मान लो न, तुला राशि के लोग बहुत ही बैलेंस और न्याय पसंद होते हैं। आप लोगों को शांति और हार्मनी पसंद है। आप लोगों के बीच संतुलन बनाए रखना चाहते हैं। आपकी राशि का स्वामी शुक्र है, जो लग्ज़री और सुख-सुविधाओं का कारक है।

 

तुला राशि का लक्ष्मी मंत्र | Libra Rashi Ka Lakshmi Mantra

 

ॐ ह्रीं श्रीं श्रीं सौं श्रीं ह्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।

यह मंत्र आपके जीवन में बैलेंस और सुख-शांति लाता है। यह आपके घर में सुख-समृद्धि लाता है।

 

इस मंत्र के फायदे | Is Mantra Ke Fayde

 

इस मंत्र से आप अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में बैलेंस बना पाएंगे। आप लोगों के साथ बेहतर रिश्ते बना पाएंगे और आपको हर तरफ से सपोर्ट मिलेगा।

 

मंत्र जप करने का तरीका | Mantra Jap Karne Ka Tarika

आप इस मंत्र का जप शुक्रवार के दिन से शुरू कर सकते हैं। हर दिन सुबह 108 बार जप करना अच्छा रहेगा।

वृश्चिक राशि: रहस्य और शक्ति का मंत्र | Scorpio Rashi: Rahasya Aur Shakti Ka Mantra

आप सोचो न, वृश्चिक राशि वाले लोग बहुत ही इंटेंस और डिटरमाइंड होते हैं। आप लोग बहुत गहराई से सोचते हैं और किसी भी काम को पूरा करके ही दम लेते हैं। आपकी राशि का स्वामी मंगल है, जो साहस और शक्ति का ग्रह है।

वृश्चिक राशि का लक्ष्मी मंत्र | Scorpio Rashi Ka Lakshmi Mantra

 

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं ॐ श्रीं ह्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

यह मंत्र आपकी अंदरूनी शक्ति को बढ़ाता है। यह आपको हर मुश्किल से लड़ने की ताकत देता है।

इस मंत्र के फायदे | Is Mantra Ke Fayde

 

इस मंत्र से आपको लाइफ में हर तरह की प्रॉब्लम से लड़ने की ताकत मिलेगी। आप पैसों से जुड़े हर चैलेंज को आसानी से पार कर पाएंगे।

 

मंत्र जप करने का तरीका | Mantra Jap Karne Ka Tarika

 

आप इस मंत्र का जप रात में सोने से पहले करें। 108 बार जप करना बहुत ही पावरफुल होगा।

 

धनु राशि: भाग्य और तरक्की का मंत्र | Sagittarius Rashi: Bhagya Aur Tarakki Ka Mantra

 

सच में, धनु राशि के लोग बहुत ही आशावादी और पॉजिटिव होते हैं। आप लोग एडवेंचर पसंद करते हैं और नई-नई चीजें सीखना चाहते हैं। आपकी राशि का स्वामी ग्रह गुरु है, जो भाग्य और ज्ञान का कारक है।

 

धनु राशि का लक्ष्मी मंत्र | Sagittarius Rashi Ka Lakshmi Mantra

 

ॐ श्रीं ह्रीं सौं ॐ नमः

यह मंत्र आपके भाग्य को और भी मजबूत बनाता है। यह आपको हर काम में सफलता दिलाता है।

 

इस मंत्र के फायदे | Is Mantra Ke Fayde

 

इस मंत्र से आपकी किस्मत चमक सकती है। आपको नए और अच्छे मौके मिलेंगे, जिससे आपकी तरक्की होगी।

 

मंत्र जप करने का तरीका | Mantra Jap Karne Ka Tarika

 

आप इस मंत्र का जप गुरुवार के दिन शुरू करें। हर दिन सुबह नहाकर 108 बार जप करें।

 

मकर राशि: काम और करियर में तरक्की का मंत्र | Capricorn Rashi: Kaam Aur Career Mein Tarakki Ka Mantra

 

देखो जरा, मकर राशि के लोग बहुत ही मेहनती, अनुशासित और प्रैक्टिकल होते हैं। आप लोग अपने काम पर बहुत फोकस करते हैं और अपने गोल्स को पाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। आपकी राशि का स्वामी शनि है, जो कर्म और न्याय का ग्रह है।

 

मकर राशि का लक्ष्मी मंत्र | Capricorn Rashi Ka Lakshmi Mantra

 

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं क्लीं श्रीं ह्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।

यह मंत्र आपकी मेहनत का पूरा फल देगा। यह आपके करियर को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

 

इस मंत्र के फायदे | Is Mantra Ke Fayde

 

इस मंत्र से आपको अपने काम में सफलता मिलेगी। आप अपने बॉस और सहकर्मियों के बीच अच्छी पहचान बना पाएंगे।

 

मंत्र जप करने का तरीका | Mantra Jap Karne Ka Tarika

 

आप इस मंत्र का जप शनिवार के दिन शुरू करें। हर दिन 108 बार जप करना आपके लिए बहुत अच्छा होगा।

 

कुंभ राशि: लाभ और नए अवसर का मंत्र | Aquarius Rashi: Labh Aur Naye Avasar Ka Mantra

 

तुम समझो, कुंभ राशि के लोग बहुत ही इनोवेटिव और इंडिपेंडेंट होते हैं। आप लोग दूसरों से अलग सोच रखते हैं और समाज के लिए कुछ अच्छा करना चाहते हैं। आपकी राशि का स्वामी शनि है।

 

कुंभ राशि का लक्ष्मी मंत्र | Aquarius Rashi Ka Lakshmi Mantra

 

ॐ ह्रीं श्रीं सौं क्लीं ह्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।

यह मंत्र आपको नए और क्रिएटिव आइडियाज़ देता है। यह आपके लिए नए अवसर पैदा करता है।

 

इस मंत्र के फायदे | Is Mantra Ke Fayde

 

इस मंत्र से आप अपनी लाइफ में कुछ नया और बड़ा कर पाएंगे। आपको हर तरफ से लाभ मिलेगा और आप अपने गोल्स को पूरा कर पाएंगे।

 

मंत्र जप करने का तरीका | Mantra Jap Karne Ka Tarika

 

आप इस मंत्र का जप शनिवार के दिन शुरू करें। हर दिन सुबह 108 बार जप करना आपके लिए फायदेमंद होगा।

 

मीन राशि: मोक्ष और आध्यात्म का मंत्र | Pisces Rashi: Moksha Aur Adhyatm Ka Mantra

 

जरा बताओ, मीन राशि वाले लोग बहुत ही सेंसिटिव और दयालु होते हैं। आप लोग बहुत ही आध्यात्मिक और क्रिएटिव होते हैं। आप लोग बहुत ही इमोशनल होते हैं। आपकी राशि का स्वामी गुरु है।

 

मीन राशि का लक्ष्मी मंत्र | Pisces Rashi Ka Lakshmi Mantra

 

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

यह मंत्र आपको आध्यात्मिक शांति देता है। यह आपके मन को शांत रखता है और आपको हर मुश्किल से बाहर निकालता है।

 

इस मंत्र के फायदे | Is Mantra Ke Fayde

 

इस मंत्र से आपको मानसिक शांति मिलेगी। आप अपने काम में और भी फोकस कर पाएंगे और सफलता पा सकेंगे।

 

मंत्र जप करने का तरीका | Mantra Jap Karne Ka Tarika

 

आप इस मंत्र का जप हर दिन सुबह और शाम को करें। 108 बार जप करना बहुत ही अच्छा होगा।

इन मंत्रों की शक्ति और उपाय | The Power and Remedies of These Mantras

 

तो, देखा आपने? हर राशि के लिए एक खास लक्ष्मी मंत्र होता है। इन मंत्रों की शक्ति को अगर आप महसूस फील करना चाहते हैं, तो आपको कुछ बातें ध्यान में रखनी होंगी। सबसे जरूरी है कि आप पूरे विश्वास और भक्ति के साथ जप करें। अगर आप रोज एक ही समय पर जप करेंगे, तो इसका असर और भी ज्यादा होगा। अपने मन में कोई डाउट न रखें।

आप सोचो न, यह सिर्फ कुछ शब्द नहीं हैं, बल्कि यह देवी लक्ष्मी की कृपा पाने का एक सीधा रास्ता है। अगर आप इन मंत्रों का जप करते हैं, तो आपकी आर्थिक सिचुएशन बेहतर होगी और आपको मन की शांति भी मिलेगी। क्या कहते हो?

अब तो आप अपनी राशि के अनुसार सही मंत्र जानते हैं, तो कल से ही जप करना शुरू करें। मुझे पूरा यकीन है कि यह आपके जीवन में एक पॉजिटिव चेंज लेकर आएगा। ये सही है न?

 

Krodh Bhairav Mantra Sadhana | क्रोध भैरव मंत्र साधना ph.85280 57364

Krodh Bhairav Sadhana क्रोध भैरव मंत्र साधना विस्तार सहित

Krodh Bhairav Sadhana क्रोध भैरव मंत्र साधना विस्तार सहित

 

Krodh Bhairav Sadhana क्रोध भैरव मंत्र साधना विस्तार सहित
Krodh Bhairav Sadhana क्रोध भैरव मंत्र साधना विस्तार सहित

क्रोध भैरव मंत्र साधना क्या है? (What is Krodh Bhairav Mantra Sadhana?)

देखो, पाठक दोस्तों, आज हम जिस विषय पर बात करने वाले हैं, वो है क्रोध भैरव मंत्र साधना। अरे वाह भई, ये एक ऐसा टॉपिक है जिसमें बहुत से लोग इंटरेस्ट (रुचि) लेते हैं। अगर आप लाइफ (जीवन) में बहुत सारी प्रॉब्लम्स (समस्याओं) को फेस (सामना) कर रहे हो, और आपको ऐसा महसूस फील होता है कि कोई आप पर बुरा जादू या फिर ब्लैक मैजिक (काला जादू) कर रहा है, तो ये साधना आपके लिए एक बहुत ही पावरफुल (शक्तिशाली) सॉल्यूशन (समाधान) हो सकती है।

तो, भाई, ये साधना असल में भैरव बाबा का ही एक तरीका है जिनसे आप अपनी रक्षा कर सकते हो और अपने दुश्मन पर जीत हासिल कर सकते हो। ये साधना बहुत ही फास्ट (तेजी) से काम करती है, लेकिन इसके लिए कुछ रूल्स (नियमों) को फॉलो (पालन) करना बहुत ज़रूरी है। क्या कहते हो?

 

भगवान क्रोध भैरव की पहचान (Identification of Lord Krodh Bhairav)

 

अरे भाई, भैरव जी भगवान शिव के ही एक रौद्र (क्रूर) रूप हैं। आप देखो ना, उनके आठ मेन (मुख्य) फॉर्म्स (रूप) हैं, और उनमें से ही एक हैं भगवान क्रोध भैरव। उनका नाम ही उनकी पर्सनालिटी (व्यक्तित्व) के बारे में सब कुछ बता देता है – ‘क्रोध’। मतलब, वो बहुत जल्दी गुस्सा होते हैं, लेकिन उनका गुस्सा उन लोगों के लिए होता है जो बुरा काम करते हैं या दूसरों को परेशान करते हैं। सच बताऊँ, वो बुरी शक्तियों को तुरंत ख़त्म करने वाले हैं।

तुम सोचो, जब वो किसी पर क्रोधित होते हैं तो उस बुरी शक्ति का अंत हो ही जाता है। उनकी एक खास बात यह है कि वो अपने साधकों को बहुत ज़्यादा प्रोटेक्शन (सुरक्षा) देते हैं। उनकी पूजा करने से डर दूर हो जाता है और हिम्मत आ जाती है। तुम्हें अगर इस बारे में और जानना हो, तो तुम विकिपीडिया पर भी देख सकते हो, भाई, वहां भी बहुत जानकारी मिल जाएगी। सही है न?

 

क्रोध भैरव मंत्र साधना के फायदे (Benefits of Krodh Bhairav Mantra Sadhana)

 

अरे भाई, इस साधना के फायदे देखकर तुम खुद बोलोगे, “अरे वाह!” सच कहूँ, इस साधना के बहुत सारे बेनीफिट्स (लाभ) हैं।

  • सुरक्षा और कवच: तुम देखो, अगर तुम्हें लगता है कि कोई तुम्हारा बुरा चाहता है या तुम पर कोई नेगेटिव एनर्जी (नकारात्मक ऊर्जा) का अटैक (हमला) हो रहा है, तो ये मंत्र साधना एक शील्ड (ढाल) की तरह काम करेगी। ये तुम्हें हर तरह के ख़तरे से बचाएगी।
  • दुश्मन का विनाश: यह साधना आपके दुश्मनों को शांत करती है। कहो तो, अगर कोई आपको बार-बार परेशान कर रहा है, तो ये साधना उस इंसान को आपके रास्ते से हटा देगी या उसे नुकसान पहुँचाने से रोक देगी।
  • आत्मविश्वास में बढ़ोतरी: इस साधना से आपका कॉन्फिडेंस (आत्मविश्वास) और विल पावर (इच्छा शक्ति) बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है। आपको किसी भी सिचुएशन (परिस्थिति) में डर नहीं फील होता।
  • रुके हुए काम पूरे होना: क्या बताऊँ, भाई, कई बार हमारे काम बनते-बनते रुक जाते हैं। ऐसा लगता है जैसे कोई बैरियर (बाधा) आ गया है। इस साधना को करने से वो सारे बैरियर्स हट जाते हैं और सारे काम स्मूथ (आसानी से) होने लगते हैं।
  • अचानक आने वाले खतरों से बचाव: मान लो, कोई एक्सीडेंट (दुर्घटना) या कोई अनहोनी होने वाली है, तो ये साधना आपको पहले ही अलर्ट (चेतावनी) दे देती है और आप उससे बच जाते हो।

तुम देखो ना, ये सिर्फ एक पूजा नहीं है, ये एक पावरफुल लाइफ चेंजिंग (जीवन बदलने वाला) एक्सपीरियंस (अनुभव) है, क्या ख़याल है?

 

क्रोध भैरव मंत्र और उसकी विधि (Krodh Bhairav Mantra and its Method)

 

देखो, भाई, क्रोध भैरव मंत्र साधना के लिए सबसे ज़रूरी है कि आप मंत्र और उसकी विधि को सही से समझो। वरना, इसका असर नहीं होगा।

 

क्रोध भैरव मंत्र (Krodh Bhairav Mantra):

 

मंत्र कुछ ऐसा है:

ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं क्रोध भैरवाय नमः।

 

क्रोध भैरव मंत्र साधना की विधि (Method of Krodh Bhairav Mantra Sadhana):

 

तो, क्या बताऊँ, इसकी विधि को स्टेप बाय स्टेप (कदम दर कदम) फॉलो करना बहुत ज़रूरी है।

  1. तैयारी:
    • सबसे पहले, आप एक शांत जगह ढूंढो जहां आपको कोई डिस्टर्ब (परेशान) न करे।
    • एक लाल रंग का कपड़ा बिछाओ।
    • भैरव जी की एक तस्वीर या मूर्ति रखो।
    • एक दिया (तेल का दीपक) जलाओ, जिसमें सरसों का तेल हो।
    • अगरबत्ती या धूपबत्ती जलाओ।
    • एक रुद्राक्ष की माला लो।
  2. पूजा शुरू करना:
    • आपको रात के समय, 10 बजे के बाद ही इस साधना को करना चाहिए।
    • साधना शुरू करने से पहले नहाकर साफ़ कपड़े पहनो।
    • पूर्व दिशा की तरफ मुंह करके बैठो।
    • मन में भैरव जी का ध्यान करो और उनसे परमिशन (अनुमति) लो कि आप उनकी साधना कर रहे हो।
  3. मंत्र जप:
    • अब, रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का 11, 21, 51, या 108 बार जप करो।
    • मंत्र का उच्चारण साफ़ और सही होना चाहिए।
    • जप करते समय अपनी सारी प्रॉब्लम्स (समस्याओं) और दुश्मनों को मन में लाओ, और बोलो कि आप उन्हें ख़त्म करना चाहते हो।
  4. समापन:
    • जब जप पूरा हो जाए, तो भैरव जी को प्रणाम करो और अपनी परेशानी दूर करने के लिए उनसे रिक्वेस्ट (अनुरोध) करो।
    • दिया बुझाओ मत, उसे अपने आप बुझने दो।

बस हो गया, भाई, ये है पूरा प्रोसेस (प्रक्रिया)। क्या समझे?

 

क्रोध भैरव मंत्र साधना के नियम (Rules for Krodh Bhairav Mantra Sadhana)

 

देख रहे हो ना, किसी भी साधना को करने के लिए रूल्स बहुत इम्पोर्टेन्ट (महत्वपूर्ण) होते हैं। क्रोध भैरव मंत्र साधना भी कोई अपवाद नहीं है।

  • पवित्रता: इस साधना को करने के लिए आपको फिजिकली (शारीरिक रूप से) और मेंटली (मानसिक रूप से) शुद्ध होना होगा।
  • खाने-पीने का ध्यान: इस साधना के दिनों में नॉन-वेज (मांसाहार), शराब, और तंबाकू जैसी चीजों से पूरी तरह दूर रहना होगा।
  • ब्रह्मचर्य: जब तक आप ये साधना कर रहे हो, आपको ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ेगा।
  • सही समय: भाई, ये साधना रात में ही की जाती है, क्योंकि भैरव जी को रात का समय ज़्यादा पसंद है।
  • गुरु का आशीर्वाद: सच कहूँ, किसी भी साधना को करने से पहले गुरु का मार्गदर्शन और उनका आशीर्वाद लेना बहुत ज़रूरी है। वो आपको सही रास्ता दिखा सकते हैं।

अगर आप इन नियमों को फॉलो नहीं करोगे, तो इस साधना का पॉजिटिव (सकारात्मक) रिजल्ट (परिणाम) नहीं मिलेगा, बल्कि नेगेटिव (नकारात्मक) भी हो सकता है। अरे मान लो न?

 

क्रोध भैरव मंत्र साधना के लिए सावधानियां और चेतावनी (Precautions and Warnings for Krodh Bhairav Mantra Sadhana)

 

अरे बाप रे! अब यह वाला पॉइंट (बिंदु) बहुत ज़रूरी है। क्रोध भैरव मंत्र साधना बहुत पावरफुल है और इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

  • गुरु का होना ज़रूरी: अगर आप नए हो, तो बिना किसी एक्सपर्ट (विशेषज्ञ) गुरु के इस साधना को मत करना। वे आपको सही गाइडेंस (मार्गदर्शन) देंगे और किसी भी ख़तरे से बचाएंगे।
  • सही इंटेंशन (इरादा): तुम सोचो न, इस साधना को कभी भी किसी का बुरा करने या उसे बेवजह परेशान करने के लिए नहीं करना चाहिए। अगर आपकी इंटेंशन गलत है, तो इसका बुरा असर आप पर ही होगा।
  • साधना का बीच में छोड़ना: एक बार शुरू कर दिया तो साधना को बीच में मत छोड़ना। इससे भैरव जी नाराज़ हो सकते हैं।
  • डरना नहीं: साधना करते समय अगर आपको कुछ अजीब महसूस हो तो डरना मत। वो भैरव जी की मौजूदगी हो सकती है।

क्या कहूँ, ये साधना बहुत स्ट्रांग (मजबूत) है, और इसे बहुत ध्यान से करना चाहिए। वरना, आपकी मुश्किलें कम होने की जगह बढ़ भी सकती हैं। अब बताओ, क्या सोचते हो?

भूत डामर तंत्र क्रोध भैरव मंत्र और साधना: एक परिचय

भूत डामर तंत्र क्रोध भैरव मंत्र Bhoot Damar Krodh Bhairav mantra

भूत डामर  क्रोध भैरव मंत्र और साधना (Bhoot Damar Tantra Krodh Bhairav Mantra Aur Sadhana)

 

भूत डामर तंत्र क्रोध भैरव मंत्र और साधना: एक परिचय

भूत डामर तंत्र क्रोध भैरव मंत्र Bhoot Damar Krodh Bhairav mantra
भूत डामर तंत्र क्रोध भैरव मंत्र Bhoot Damar Krodh Bhairav mantra

भूत डामर तंत्र क्रोध भैरव मंत्र Bhoot Damar Krodh Bhairav mantra अरे वाह पाठक दोस्तों, जब हम तंत्र या साधना की बात करते हैं, तो हमारे मन में कई तरह के सवाल आते हैं, है ना? कुछ लोग इसे बहुत ख़तरनाक मानते हैं, तो कुछ लोग इसे एक खास किस्म की शक्ति पाने का रास्ता समझते हैं। आज हम एक ऐसे ही टॉपिक पर बात करने वाले हैं – भूत डामर तंत्र क्रोध भैरव मंत्र और साधना

जनाब, यह कोई मामूली विषय नहीं है। यह उन साधकों के लिए है जो सच में स्पिरिचुअल वर्ल्ड में बहुत गहराई तक जाना चाहते हैं। यह साधना बहुत पावरफुल और कॉम्प्लिकेटेड है। हम इस लेख में आपको इस साधना से जुड़ी सारी जरूरी जानकारी देंगे, लेकिन याद रखना, यह सिर्फ जानकारी है। किसी भी तरह का प्रैक्टिकल काम बिना एक सही गुरु के करना बहुत रिस्की हो सकता है। तो, चलो शुरू करते हैं, क्या कहते हो?

 

भूत डामर तंत्र क्या है ? (What is Bhoot Damar Tantra?)

 

भूत डामर तंत्र क्रोध भैरव मंत्र Bhoot Damar Krodh Bhairav mantra भई, सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि भूत डामर तंत्र क्या है। देखो, ‘भूत’ का मतलब सिर्फ वो नहीं होता जो हॉरर मूवीज में दिखाया जाता है। तंत्र में, भूत का मतलब होता है पंचमहाभूत – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश। इन सभी एलिमेंट्स को कंट्रोल करने की कला ही भूत डामर तंत्र है। ‘डामर’ का मतलब है कंट्रोल करना या अपने अधीन करना। तो, इसका सीधा मतलब है इन पंचतत्वों और उनसे जुड़ी अदृश्य शक्तियों को अपनी साधना के जरिए कंट्रोल करना।

तुम देखो ना, यह एक बहुत ही सीक्रेट और पावरफुल साधना मानी जाती है। इसका मकसद होता है कि साधक खुद को इतना मजबूत बना ले कि कोई भी नेगेटिव एनर्जी उस पर असर न कर सके। अरे देखो, इस साधना में मन और शरीर दोनों का बहुत ज्यादा प्योर होना जरूरी है। बिना प्योरिटी के, यह साधना कामयाब नहीं हो ही नहीं सकती।

क्रोध भैरव: शक्ति और प्रतीक ( Krodh Bhairav: Power and Symbol )

 

भूत डामर तंत्र क्रोध भैरव मंत्र Bhoot Damar Krodh Bhairav mantra अच्छा तो, अब बात करते हैं क्रोध भैरव की। भैरव जी भगवान शिव का एक रूप हैं। उनका रूप थोड़ा डरावना लग सकता है, लेकिन सच बताऊँ, यह उनका गुस्सा नहीं है। यह उनकी प्रोटेक्टिव एनर्जी है जो हर तरह के डर, नेगेटिविटी और बुराई को खत्म करती है। उनका क्रोध इस बात का प्रतीक है कि वह अपने भक्तों को हर तरह की बुरी शक्तियों से बचाते हैं।

जरा सोचो, वह अपनी ही एनर्जी से हमारे अंदर की बुरी चीजों को दूर कर देते हैं। इसी वजह से उन्हें ‘क्रोध’ भैरव कहा जाता है। वह हर तरह के ईविल को दूर करने वाले देवता हैं। उनका ध्यान करने से मन में एक अलग ही तरह का बल महसूस होता है। हम भी तो यही चाहते हैं कि कोई हमें गलत राह पर न ले जा सके, सही है ना?

विकिपीडिया पर भगवान भैरव के बारे में और जानकारी आप यहाँ पढ़ सकते हैं: Bhairava on Wikipedia

क्रोध भैरव मंत्र की महत्ता (Significance of Krodh Bhairav Mantra)

 

क्रोध भैरव मंत्र इस साधना का सबसे इंपोर्टेंट पार्ट है। यह सिर्फ कुछ शब्दों का एक कलेक्शन नहीं है। यह एक साउंड और एनर्जी है जो भैरव जी की शक्ति से जुड़ी होती है। भाई, इस मंत्र का सही तरीके से जप करने से साधक के अंदर एक अलग ही तरह की पावर आ जाती है। यह पावर उसे हर तरह की मुसीबत से बचाती है।

मान लो, आप किसी ऐसी सिचुएशन में फंस गए हैं जहाँ आपको बहुत डर लग रहा है। अगर आपने इस मंत्र की साधना की है, तो आपका डर अपने आप गायब हो जाएगा। यह मंत्र एक ढाल की तरह काम करता है। क्या बताऊँ, यह हमारे अंदर के मन के डर और बाहर की बुरी शक्तियों, दोनों से हमें बचाता है। लेकिन याद रखना, इसका असर तभी होता है जब आप इसे पूरी श्रद्धा और एक प्रॉपर गाइडेंस के साथ करते हैं। नहीं तो, इसका कोई फायदा नहीं है, मानो जरा।

मंत्र साधना के नियम और सावधानियाँ (Rules and Precautions for Mantra Sadhana)

 

भूत डामर तंत्र क्रोध भैरव मंत्र Bhoot Damar Krodh Bhairav mantra अरे भाई, इस साधना को करने के लिए कुछ बहुत ही स्ट्रिक्ट रूल्स होते हैं। यह साधना बहुत पावरफुल है, इसलिए इसमें जरा सी भी गलती बहुत भारी पड़ सकती है। तो चलिए, कुछ जरूरी नियम और सावधानियाँ जानते हैं:

  1. गुरु की जरूरत: सबसे इम्पोर्टेन्ट रूल है कि आप इस साधना को किसी सच्चे और एक्सपीरियंस्ड गुरु के बिना कभी भी शुरू न करें। गुरु आपको सही रास्ता दिखाएँगे और आपकी हेल्प करेंगे। बिना गुरु के साधना करने से आपको नेगेटिव रिजल्ट्स भी मिल सकते हैं। मुझे तो लगता है कि यही सबसे ज़रूरी पॉइंट है।
  2. सात्विक जीवन: इस साधना के दौरान आपको सात्विक जीवन जीना पड़ता है। मतलब, आपको अपने खाने-पीने और रहने के तरीके को बिलकुल सिंपल रखना होगा। आपको नॉन-वेज या किसी भी तरह के नशे से दूर रहना होगा।
  3. प्योरिटी: शरीर की साफ-सफाई के साथ-साथ मन की प्योरिटी भी बहुत जरूरी है। आपके मन में कोई गलत विचार नहीं आने चाहिए। आपको किसी को नुकसान पहुँचाने के बारे में नहीं सोचना चाहिए। अगर आप ऐसा करेंगे तो यह साधना काम नहीं करेगी।
  4. सही इंटेंशन: आपकी इंटेंशन (इरादा) बिलकुल प्योर होनी चाहिए। आप सिर्फ अपनी या किसी और की भलाई के लिए ही इस साधना को कर सकते हैं। अगर आप किसी को नुकसान पहुँचाने के लिए इसका यूज़ करेंगे, तो आपको बहुत नेगेटिव रिजल्ट मिल सकता है।
  5. सही जगह और समय: इस साधना को करने के लिए एक शांत और एकांत जगह होनी चाहिए। रात का समय इसके लिए सबसे बेस्ट होता है, क्योंकि उस समय शांति होती है और कोई आपको डिस्टर्ब नहीं करता।
  6. मेंटल स्ट्रेंथ: इस साधना को करने के लिए आपका मन बहुत मजबूत होना चाहिए। अगर आपका मन कमजोर है, तो यह साधना आपके लिए नहीं है। यह आपको मेंटली बीमार भी कर सकती है।
भाई मान लो न, ये सारे नियम इसलिए बनाए गए हैं ताकि आपकी साधना सफल हो और आपको कोई नुकसान न हो।
क्या यह साधना हर किसी के लिए है ? ( Is This Sadhana for Everyone ? )

 

भूत डामर तंत्र क्रोध भैरव मंत्र Bhoot Damar Krodh Bhairav mantra सच कहूँ तो, नहीं। भूत डामर तंत्र क्रोध भैरव मंत्र और साधना हर किसी के लिए नहीं है। यह साधना बहुत ही डीप और कॉम्प्लिकेटेड है। यह सिर्फ उन लोगों के लिए है जो सच में स्पिरिचुअल ग्रोथ चाहते हैं और जिनका मन बहुत स्ट्रॉन्ग है।

तुम समझो, अगर आप सिर्फ अपनी पावर बढ़ाने के लिए या किसी को नुकसान पहुँचाने के लिए यह साधना करेंगे, तो आपको बहुत बड़ा नुकसान होगा। यह साधना आपको सिर्फ तभी फायदा देगी जब आप इसे पूरी श्रद्धा और पॉजिटिव इंटेंशन के साथ करते हैं।

क्या बोलते हो? मानते हो न? तो, इस लेख का पूरा मतलब यही है कि आप इस साधना की पावर को समझें और इसे बिना सोचे-समझे न करें। यह सिर्फ एक जानकारी है, इसे नॉलेज की तरह ही लें, ठीक है न?

इस लेख में हमने आपको भूत डामर तंत्र क्रोध भैरव मंत्र और साधना के बारे में कुछ बेसिक बातें बताई हैं। अगर आप इस तरह के विषयों में और जानना चाहते हैं, तो हमें ज़रूर बताइए। आपकी क्या राय है, क्या कहोगे?

Batuk Bhairav Sadhna aur Anubhav बटुक भैरव साधना और अनुभव

Batuk Bhairav Sadhna aur Anubhav बटुक भैरव साधना और अनुभव

पाठक दोस्तों,

Batuk Bhairav Sadhna aur Anubhav बटुक भैरव साधना और अनुभव वाह रे, आज हम एक बहुत ही खास और powerful subject पर बात करने वाले हैं – बटुक भैरव साधना और उसके अनुभव। अरे भाई, जब भी spiritual path की बात आती है, तो बहुत लोग डर जाते हैं। सोचते हैं, “अरे बाप रे, ये तो बहुत tough होगा।

” लेकिन सच कहूँ, बटुक भैरव की साधना उतनी मुश्किल नहीं है, जितनी लगती है। यह तो एक protective shield की तरह है जो आपको हर तरह के danger से बचाता है। तो, चलो भई, इस spiritual journey पर एक साथ चलते हैं और इसे फील करते हैं।

 

Batuk Bhairav Sadhna: बटुक भैरव कौन हैं? (Who is Batuk Bhairav?)

Batuk Bhairav Sadhna aur Anubhav बटुक भैरव साधना और अनुभव
Batuk Bhairav Sadhna aur Anubhav बटुक भैरव साधना और अनुभव

देखो, बटुक भैरव भगवान शिव के ही एक सौम्य और child-like रूप हैं। वह काल भैरव का ही एक part हैं, लेकिन उनकी energy बहुत शांत और benevolent है। लोग उन्हें अक्सर protection और safety के लिए पूजते हैं। मान लो, आपको किसी भी तरह का डर है – चाहे वो enemy का हो, negative energy का हो, या फिर कोई invisible problem हो – तो बटुक भैरव आपको उनसे बचाते हैं। वो अपने devotees के लिए बिलकुल एक पिता की तरह हैं जो अपने बच्चे को protect करता है। यह साधना बहुत direct और effective है।

यह भी देखें: बटुक भैरव

Batuk Bhairav Sadhna बटुक भैरव साधना का महत्व (The Importance of Batuk Bhairav Sadhana)

 

जनाब, इस साधना का महत्व क्या है, ये आप तब समझेंगे जब आपको इसका experience होगा। सोचो जरा, जब आपकी life में हर तरफ से problems आ रही हों, कोई solution न दिख रहा हो, तब यह साधना काम आती है। यह हमें एक inner strength देती है।

क्या बताऊँ, यह spiritual practice आपको fearlessness देती है। आप अपनी life को एक नए perspective से देखना शुरू करते हैं। अरे भाई, यह साधना सिर्फ spiritual growth के लिए ही नहीं, बल्कि material success के लिए भी की जाती है। तुम सोचो न, जब आपके मन में कोई डर ही नहीं होगा, तो आप अपने काम में कैसे concentrate करेंगे, कैसे सफल होंगे?

बटुक भैरव साधना के लिए ज़रूरी नियम और सावधानियां (Essential Rules and Precautions for Sadhana)

 

भाई, किसी भी spiritual practice को करने से पहले कुछ rules follow करने बहुत ज़रूरी हैं। यह सिर्फ formality नहीं है, बल्कि discipline है जो आपको सही results देगा।

  1. पवित्रता (Purity): सबसे पहले, शरीर और मन दोनों की पवित्रता बहुत ज़रूरी है। साधना शुरू करने से पहले नहा-धोकर, साफ़ कपड़े पहनकर बैठें।
  2. सही गुरु का guidance: सच कहूँ, बिना गुरु के किसी भी powerful साधना को शुरू करना dangerous हो सकता है। एक qualified गुरु आपको सही path दिखा सकता है और आपकी गलतियों को सुधार सकता है।
  3. समर्पण (Dedication): मान लो न, साधना सिर्फ मंत्र पढ़ने का काम नहीं है, बल्कि यह आपके समर्पण और dedication का test है। इसे पूरी श्रद्धा के साथ करें।
  4. एकांत (Solitude): साधना के लिए एक शांत और एकांत जगह (place) चुनें, जहाँ आपको कोई disturb न करे।
  5. सात्विक भोजन (Sattvic Food): साधना के दौरान, सात्विक भोजन ही करें। non-veg और alcohol से दूर रहें।

सही है न? जब आप ये basic rules follow करेंगे, तो साधना का experience और भी deep होगा।

बटुक भैरव साधना मंत्र और पूजा विधि (Mantra and Worship Method)

 

भाई, बटुक भैरव की साधना में मंत्र और पूजा विधि का बहुत बड़ा role है। उनका सबसे powerful और well-known mantra है:

ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।

पूजा विधि:

  • आसन: सबसे पहले, एक लाल या काले रंग का आसन बिछाएं और उस पर बैठें।
  • दिशा: आपका face दक्षिण दिशा (south direction) की ओर होना चाहिए।
  • पूजा: बटुक भैरव की प्रतिमा या फोटो (photo) स्थापित करें। उन्हें सिंदूर, लाल फूल, और मीठे पकवान (sweets) अर्पित करें।
  • मंत्र जप: रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का जप करें। कम से कम 108 बार या 1, 5, 11 माला का जप करें।
  • ध्यान (Meditation): जप करते समय बटुक भैरव के बाल-रूप का ध्यान करें। imagine करें कि वो आपको अपनी protective energy से घेर रहे हैं।

भाई, जरा सोचो, जब आप इस मंत्र का जप करोगे तो कैसी vibrations feel होंगी। यह बहुत ही peaceful और powerful experience है।

Batuk Bhairav Sadhana Experiences: बटुक भैरव साधना के अनुभव

 

जरा बताओ, साधना करने के बाद कैसा feel होगा? क्या कहूँ, अनुभव बहुत अलग-अलग हो सकते हैं, हर किसी का experience unique होता है।

  • शांति का अनुभव (Experience of Peace): बहुत से साधक बताते हैं कि मंत्र जप के दौरान उन्हें एक गहरी शांति (deep peace) का experience होता है। मन में जो confusion और restlessness होती है, वो धीरे-धीरे कम होने लगती है।
  • अदृश्य सुरक्षा का एहसास (Feeling of Invisible Protection): कई लोगों को ये feel होता है कि कोई invisible power उनकी protection कर रही है। जैसे कि अगर कोई problem आने वाली हो तो वो अपने आप ही दूर हो जाती है।
  • सपने में दर्शन (Visions in Dreams): कुछ साधकों को सपने में बटुक भैरव के बाल-रूप के दर्शन हो सकते हैं। ये एक बहुत ही special और spiritual moment होता है।
  • इंसान और जानवर (Humans and Animals): ये तो बहुत interesting है। कई साधक बताते हैं कि साधना के बाद कुत्ते (dogs) उनके पास आते हैं और उन्हें देखकर friendly behave करते हैं, क्योंकि बटुक भैरव का वाहन (vehicle) कुत्ता है।

तुम समझो, ये सब experiences सिर्फ spiritual नहीं हैं, बल्कि ये इस बात का proof हैं कि आप सही path पर हो।

बटुक भैरव साधना में आने वाली बाधाएं और समाधान (Obstacles in Sadhana and Their Solutions)

 

अच्छा सुनो, कोई भी साधना इतनी easy नहीं होती। problems तो आती ही हैं, लेकिन हमें उनसे लड़ना आना चाहिए।

  • मन का भटकना (Mind Wandering): ध्यान लगाते समय मन बहुत भटकता है। इसका solution है patience. धीरे-धीरे practice करते रहो, मन अपने आप control में आ जाएगा।
  • Negative Energy: कई बार साधना करते समय negative energy का attack feel हो सकता है। इससे डरना नहीं है। अपने मंत्र पर focus करते रहिए।
  • समय का अभाव (Lack of Time): आजकल की busy life में time निकालना मुश्किल है। लेकिन मान लो, साधना के लिए time निकालना ही पड़ेगा। आप बस 15-20 मिनट से शुरू कर सकते हैं।

तो, इन challenges को हिम्मत से face करो, ठीक है क्या?

बटुक भैरव साधना के लाभ (Benefits of Batuk Bhairav Sadhana)

 

इस साधना को करने के बहुत सारे benefits हैं। मैं कुछ main benefits यहाँ बता रहा हूँ:

  • भय से मुक्ति (Freedom from Fear): सबसे बड़ा benefit है fear से liberation। आप निडर होकर life जी सकते हैं।
  • शत्रु बाधा से मुक्ति (Relief from Enemy Obstacles): अगर आपके enemies आपको परेशान कर रहे हैं तो यह साधना आपको उनसे protection देती है।
  • काम में सफलता (Success in Work): जब आपका मन शांत होता है और डर नहीं होता, तो आप अपने काम में ज्यादा concentrate कर पाते हैं, जिससे success मिलती है।
  • Spiritual Growth: यह साधना आपकी spiritual journey को accelerate करती है।

देख रहे हो न? ये benefits सिर्फ आपके spiritual life के लिए ही नहीं, बल्कि आपकी day-to-day life को भी better बनाते हैं।

बटुक भैरव साधना निष्कर्ष: एक spiritual यात्रा (Conclusion: A Spiritual Journey)

 

अरे भाई, बटुक भैरव साधना एक magical journey है, जो आपको बाहरी और भीतरी दोनों तरह के problems से बचाने में help करती है। यह सिर्फ एक ritual नहीं है, बल्कि खुद को जानने और अपनी inner strength को बढ़ाने का एक जरिया है। अगर आप dedication और pure heart से यह साधना करोगे, तो इसके results आपको जरूर मिलेंगे।

ठीक बोला न? तो, क्या कहते हो? करोगे न?

घर पर कैसे करें गणपति विसर्जन? जानें पूरी विधि और शुभ मुहूर्त (Ghar Par Kaise Karein Ganpati Visarjan? Janein Puri Vidhi aur Shubh Muhurat)

घर पर कैसे करें गणपति विसर्जन? जानें पूरी विधि और शुभ मुहूर्त (Ghar Par Kaise Karein Ganpati Visarjan? Janein Puri Vidhi aur Shubh Muhurat)

घर पर कैसे करें गणपति विसर्जन? जानें पूरी विधि और शुभ मुहूर्त (Ghar Par Kaise Karein Ganpati Visarjan? Janein Puri Vidhi aur Shubh Muhurat)

घर पर कैसे करें गणपति विसर्जन? जानें पूरी विधि और शुभ मुहूर्त (Ghar Par Kaise Karein Ganpati Visarjan? Janein Puri Vidhi aur Shubh Muhurat)
घर पर कैसे करें गणपति विसर्जन? जानें पूरी विधि और शुभ मुहूर्त (Ghar Par Kaise Karein Ganpati Visarjan? Janein Puri Vidhi aur Shubh Muhurat)

घर पर गणपति विसर्जन की पूरी विधि और शुभ मुहूर्त (Ghar par Ganpati Visarjan ki Puri Vidhi aur Shubh Muhurat)

अरे दोस्त, गणपति बप्पा का त्यौहार हमारे जीवन में ढेर सारी खुशियाँ लेकर आता है। हम सब बड़े धूम-धाम से बप्पा को घर लाते हैं, उनकी सेवा करते हैं और फिर, भाई, जब विसर्जन का दिन आता है, तो मन थोड़ा भारी हो जाता है। लेकिन देखो, यह विसर्जन भी उतना ही ज़रूरी है जितना कि स्थापना। विसर्जन का मतलब है कि बप्पा कैलाश पर्वत पर वापस जा रहे हैं, ताकि अगले साल फिर से हमारे घर आ सकें।

बहुत से लोग सोचते हैं कि गणपति विसर्जन कैसे करें, खासकर जब बाहर जाना पॉसिबल न हो। तो, चलो, आज हम आपको घर पर ही गणपति विसर्जन करने की पूरी और सिंपल विधि बताते हैं। क्या कहते हो?

 

गणपति विसर्जन 2025 का शुभ मुहूर्त (Ganpati Visarjan 2025 ka Shubh Muhurat)

भाईसाहब, कोई भी शुभ काम करने से पहले शुभ मुहूर्त देखना तो बनता है, है ना? गणपति विसर्जन के लिए अनंत चतुर्दशी का दिन सबसे बेस्ट माना जाता है। तुम देखो, इस दिन बप्पा को विदा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।

अनंत चतुर्दशी तिथि: रविवार, 7 सितंबर, 2025

सच बताऊँ, तो इस दिन विसर्जन के लिए कई अच्छे मुहूर्त होते हैं। आप अपने शहर के हिसाब से किसी पंडित जी से भी कंफर्म कर सकते हैं, लेकिन नीचे दिए गए टाइम स्लॉट्स आमतौर पर शुभ माने जाते हैं:

सुबह का मुहूर्त: सुबह 9:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक।
दोपहर का मुहूर्त: दोपहर 3:00 बजे से शाम 4:30 बजे तक।
शाम का मुहूर्त: शाम 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक।

तो, आप अपनी सुविधा के हिसाब से कोई भी एक टाइम चुन सकते हैं। ठीक है न?

गणपति विसर्जन से पहले की तैयारी (Ganpati Visarjan se Pehle ki Taiyari)

अच्छा भई, विसर्जन करने से पहले कुछ तैयारी करनी पड़ती है। जरा सोचो, बप्पा की विदाई भी तो शाही होनी चाहिए। आपको इन चीज़ों की ज़रूरत पड़ेगी:

एक बड़ा और साफ टब, बाल्टी या कोई बड़ा बर्तन।
साफ पानी (गंगाजल हो तो और भी अच्छा)।
फूल, दूर्वा और पान के पत्ते।
कपूर, अगरबत्ती, और दीया।
बप्पा का पसंदीदा भोग (जैसे कि मोदक या लड्डू)।
एक साफ कपड़ा या पाटा।

यह सब तैयार कर लीजिए, ताकि पूजा के टाइम कोई भाग-दौड़ न हो। समझे?

 घर पर गणपति विसर्जन की स्टेप-बाय-स्टेप विधि (Ghar par Ganpati Visarjan ki Step-by-Step Vidhi)

ओहो जी, अब आते हैं मेन प्रोसेस पर। देखो ना, यह विधि बहुत ही आसान है। बस मन में श्रद्धा और प्रेम होना चाहिए।

 सबसे पहले करें बप्पा की आखिरी पूजा और आरती (Sabse Pehle Karein Bappa ki Aakhri Puja aur Aarti)

विसर्जन से पहले, परिवार के सभी लोग मिलकर बप्पा की पूजा करें। जैसे आप रोज़ करते थे, वैसे ही उन्हें फूल, दूर्वा, और चंदन चढ़ाएं। इसके बाद, भाई, घी का दीपक जलाकर और कपूर से गणपति बप्पा की आरती करें। “जय गणेश, जय गणेश” गाते हुए पूरा माहौल भक्तिमय बना दीजिए। आपको एक अलग ही पॉजिटिव एनर्जी फील होगी।

 बप्पा को भोग लगाएं और क्षमा मांगें (Bappa ko Bhog Lagayein aur Kshama Mangein)

आरती के बाद, बप्पा को उनके फेवरेट मोदक या लड्डू का भोग लगाइए। सच कहूँ, यह एक बहुत इमोशनल मोमेंट होता है। हाथ जोड़कर बप्पा का धन्यवाद करें कि वो आपके घर आए और आपको अपनी सेवा का मौका दिया। अगर 10 दिनों की सेवा में कोई भूल-चूक हो गई हो, तो उसके लिए क्षमा मांग लीजिए। कहो तो, यह एक तरह से बप्पा से अपने दिल की बात कहने का समय है।

 मूर्ति को सम्मान के साथ उठाएं (Murti ko Samman ke Saath Uthayein)

अब, विसर्जन के लिए मूर्ति को उनके स्थान से थोड़ा सा हिलाएं। इसे “उत्तर पूजा” भी कहते हैं। इसका मतलब है कि अब स्थापना पूरी हो गई है और बप्पा जाने के लिए तैयार हैं। जयकारे लगाते हुए, “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ,” मूर्ति को बहुत ही आदर और सम्मान के साथ उठाएं।

घर में ऐसे करें विसर्जन (Ghar mein Aise Karein Visarjan)

बर्तन तैयार करें: जिस बड़े टब या बाल्टी को आपने चुना है, उसे साफ पानी से भर दें। उसमें थोड़ा गंगाजल और फूल पत्तियां डाल दीजिए, ताकि वह पवित्र हो जाए।
धीरे-धीरे विसर्जित करें: अब, बप्पा की मूर्ति को धीरे-धीरे उस बर्तन में विसर्जित करें। अरे मान लो, यह बिलकुल वैसे ही करना है जैसे आप किसी नदी या तालाब में करते हैं। मूर्ति को पानी में पूरा डुबो दें।
कुछ देर रुकें: मूर्ति को कुछ घंटों या एक-दो दिन के लिए उसी पानी में रहने दें। अगर आपकी मूर्ति मिट्टी की है, तो वह पूरी तरह से पानी में घुल जाएगी। मानते हो न, यही इको-फ्रेंडली तरीका सबसे बेस्ट है?

इको-फ्रेंडली गणपति विसर्जन का महत्व (Eco-Friendly Ganpati Visarjan ka Mahatva)

अरे सुनो, आजकल [इको-फ्रेंडली] विसर्जन का ट्रेंड बहुत बढ़ गया है, और यह बहुत अच्छी बात है। प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) से बनी मूर्तियां पानी में घुलती नहीं हैं और हमारे नदी-तालाबों को गंदा करती हैं। इससे पानी के जानवरों को भी नुकसान होता है।

लेकिन, जब आप घर पर मिट्टी की मूर्ति का विसर्जन करते हैं, तो आप पर्यावरण की रक्षा करते हैं। यह एक बहुत बड़ा पुण्य का काम है। तुम सोचो न, इससे बप्पा भी खुश होंगे।

 गणपति विसर्जन के बाद क्या करें? (Ganpati Visarjan ke Baad Kya Karein?)

भाई देख, विसर्जन के बाद भी कुछ बातें ध्यान में रखनी होती हैं।

पवित्र जल का उपयोग: जब मूर्ति पूरी तरह घुल जाए, तो उस पवित्र पानी को फेंकना नहीं है। आप उस पानी को अपने घर के गमलों में या गार्डन में डाल सकते हैं। इससे बप्पा का आशीर्वाद आपके घर में ही बना रहेगा।

बाकी सामग्री: पूजा की बाकी सामग्री, जैसे फूल, पत्ते, आदि को भी इकट्ठा करके या तो कंपोस्ट बना लें या किसी पेड़ के नीचे रख दें।

तो, इस तरह से आप घर पर ही बहुत शांति और भक्ति-भाव से गणपति विसर्जन कर सकते हैं। यह प्रोसेस न केवल आसान है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बहुत अच्छा है। इससे आपको एक अलग ही सुकून महसूस होगा। सही है न?

उम्मीद है, आपको यह पूरी जानकारी अच्छी लगी होगी। प्रभु की कृपा आप पर बनी रहे। क्या ख़याल है?

क्यों होती है गणपति की विदाई? जानें इसके पीछे का गहरा रहस्य (Kyu Hoti Hai Ganpati Ki Vidai? Jane Iske Piche Ka Gehra Rahasya)

क्यों होती है गणपति की विदाई? जानें इसके पीछे का गहरा रहस्य (Kyu Hoti Hai Ganpati Ki Vidai? Jane Iske Piche Ka Gehra Rahasya)

क्यों होती है गणपति की विदाई? जानें इसके पीछे का गहरा रहस्य (Kyu Hoti Hai Ganpati Ki Vidai? Jane Iske Piche Ka Gehra Rahasya)

क्यों होती है गणपति की विदाई? जानें इसके पीछे का गहरा रहस्य (Kyu Hoti Hai Ganpati Ki Vidai? Jane Iske Piche Ka Gehra Rahasya)
क्यों होती है गणपति की विदाई? जानें इसके पीछे का गहरा रहस्य (Kyu Hoti Hai Ganpati Ki Vidai? Jane Iske Piche Ka Gehra Rahasya)

अरे यार, हम सब हर साल कितने जोश और प्यार से गणपति बप्पा को अपने घर लाते हैं, है ना? दस दिनों तक उनकी पूजा-पाठ, आरती, मोदक का भोग, मतलब पूरा माहौल ही भक्ति वाला हो जाता है। लेकिन, भाईसाहब, कभी तुमने सोचा है कि जिन्हें हम इतने सम्मान से लाते हैं, उन्हें दस दिन बाद पानी में विसर्जित क्यों कर देते हैं? उनकी विदाई क्यों करते हैं? अच्छा तो, इसके पीछे कोई छोटा-मोटा रीजन नहीं, बल्कि बहुत गहरा रहस्य और ज्ञान छिपा है। तो चलिए, आज इसी बारे में डिटेल में बात करते हैं और इस रहस्य को समझने की कोशिश करते हैं। क्या कहते हो?

गणपति विदाई का असली मतलब क्या है: एक स्पिरिचुअल सफ़र (Ganpati Vidai Ka Asli Matlab Kya Hai: Ek Spiritual Safar)

देखो, गणपति की विदाई सिर्फ एक परंपरा या रिचुअल नहीं है। अरे भाई, यह तो एक गहरा आध्यात्मिक मैसेज देती है। जब हम बप्पा की मूर्ति घर लाते हैं, तो हम एक साकार रूप में भगवान की एनर्जी को इन्वाईट करते हैं। हम उस मिट्टी की मूर्ति में भगवान का रूप देखते हैं, उनसे कनेक्ट होते हैं, अपनी प्रॉब्लम्स शेयर करते हैं। सच बताऊँ, वो दस दिन हमें भगवान के बहुत करीब फील कराते हैं।

लेकिन, विसर्जन हमें सिखाता है कि भगवान किसी एक रूप में बंधे नहीं हैं। वो तो निराकार हैं, हर जगह हैं, कण-कण में हैं। मूर्ति तो बस एक माध्यम है, उस निराकार शक्ति से जुड़ने का। विदाई का मतलब है कि हम बप्पा के फिजिकल फॉर्म को तो विदा कर रहे हैं, लेकिन उनकी सीख, उनकी एनर्जी और उनका आशीर्वाद हमेशा के लिए अपने दिल में बसा रहे हैं। यूं कहें तो, यह हमें मोह से डिटैचमेंट (Detachment) का सबसे बड़ा लेसन सिखाता है। मानते हो न?

 क्यों होती है गणपति की विदाई: जीवन के साइकिल का सिंबल (Kyu Hoti Hai Ganpati Ki Vidai: Jeevan Ke Cycle Ka Symbol)

भाई देख, इस दुनिया में जो भी चीज बनी है, उसका अंत निश्चित है। यही नेचर का नियम है। इंसान का शरीर भी तो पंचतत्वों – पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश – से मिलकर बना है और अंत में इन्हीं में विलीन हो जाता है। ठीक वैसे ही, गणपति बप्पा की मूर्ति मिट्टी यानी पृथ्वी तत्व से बनती है। हम उसमें प्राण-प्रतिष्ठा करके जीवन डालते हैं और फिर दस दिन बाद उन्हें जल तत्व में विसर्जित कर देते हैं।

जरा सोचो, यह पूरा प्रोसेस जीवन और मृत्यु के साइकिल को दिखाता है। यह हमें याद दिलाता है कि यह शरीर नश्वर है, एक दिन इसे जाना ही है। असली चीज तो आत्मा है, जो अजर-अमर है। तो, गणपति विसर्जन का एक गहरा रहस्य यह भी है कि हमें फिजिकल चीजों से ज्यादा अटैच नहीं होना चाहिए क्योंकि सबकुछ टेम्परेरी है। अरे वाह भई, कितनी गहरी बात है, सही है न?

गणपति विदाई के पीछे की महाभारत वाली कहानी क्या है? (Ganpati Vidai Ke Piche Ki Mahabharat Wali Kahani Kya Hai?)

अच्छा भई, अब आपको एक बहुत इंटरेस्टिंग कहानी सुनाता हूँ। कहा जाता है कि [महाभारत] जैसे महान ग्रंथ को महर्षि वेदव्यास ने बोला था और भगवान गणेश ने उसे बिना रुके लिखा था। यह काम पूरे दस दिनों तक चला था। गणपति जी ने इस काम में इतनी मेहनत और कॉन्सेंट्रेशन लगाया कि उनका शरीर तप गया, मतलब उनके बॉडी का टेम्परेचर बहुत ज्यादा बढ़ गया।

जब दस दिन बाद लिखने का काम पूरा हुआ, तो वेदव्यास जी ने देखा कि गणेश जी का शरीर तो गर्मी से तप रहा है। भाई, उनके शरीर को ठंडा करने के लिए, वेदव्यास जी ने उन पर मिट्टी का लेप किया और फिर पास के एक सरोवर में ले जाकर उन्हें डुबकी लगवाई, ताकि उनके शरीर की गर्मी शांत हो सके। अरे वाह, मानते हैं कि तभी से गणेश जी को शीतल करने के लिए दस दिन बाद उनके मूर्ति रूप को जल में विसर्जित करने की परंपरा शुरू हुई। क्या बात है, मज़ा आया न?

क्यों जरूरी है गणपति की विदाई का यह नियम? (Kyu Jaruri Hai Ganpati Vidai Ka Yeh Niyam?)

जनाब, गणपति विसर्जन हमें यह भी सिखाता है कि हर मेहमान एक निश्चित समय के लिए ही आता है। जब गणपति हमारे घर आते हैं, तो वो अपने साथ ढेर सारी पॉजिटिव एनर्जी, खुशियां और आशीर्वाद लेकर आते हैं। वो हमारे सारे विघ्न, सारी निगेटिविटी को अपने अंदर सोख लेते हैं।

तो, जब हम उनकी विदाई करते हैं, तो ऐसा माना जाता है कि वो हमारे घर की सारी मुसीबतों, परेशानियों और निगेटिव एनर्जी को अपने साथ लेकर चले जाते हैं। और बदले में हमें सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद देकर जाते हैं। भाई मान लो, यह एक तरह से हमारे घर और मन की शुद्धिकरण का प्रोसेस है। इसीलिए तो हम सब गाते हैं, “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ\!” मतलब हम उन्हें खुशी-खुशी विदा करते हैं, ताकि वो अगले साल फिर से हमारे लिए खुशियां लेकर आएं। समझे क्या?

गणपति की विदाई से हमें क्या सीखना चाहिए? (Ganpati Ki Vidai Se Hume Kya Sikhna Chahiye?)

अरे दोस्त, गणपति की विदाई सिर्फ एक धार्मिक काम नहीं है, यह हमें लाइफ मैनेजमेंट के कई इंपॉर्टेंट लेसन सिखाती है।

1. बदलाव को एक्सेप्ट करना: विसर्जन हमें सिखाता है कि जीवन में बदलाव ही एकमात्र स्थायी चीज़ है। हमें हर सिचुएशन को एक्सेप्ट करना सीखना चाहिए।

2. मोह से मुक्ति: यह हमें सिखाता है कि हमें किसी भी चीज या इंसान से इतना मोह नहीं रखना चाहिए कि उसके जाने पर हम टूट जाएं। डिटैचमेंट बहुत जरूरी है, समझे?

3. निराकार पर विश्वास: यह हमें याद दिलाता है कि भगवान सिर्फ मूर्ति में नहीं, बल्कि हमारे अंदर, हमारे हर काम में और प्रकृति के हर कण में मौजूद हैं। हमें उस निराकार शक्ति पर विश्वास करना चाहिए।

4. जिम्मेदारी और पर्यावरण: आजकल जैसे [को-फ्रेंडली मूर्तियों का चलन बढ़ा है, यह हमें हमारी एनवायरनमेंट के प्रति जिम्मेदारी का भी एहसास कराता है। प्रभु की लीला देखो, पूजा के साथ-साथ प्रकृति की सेवा भी हो जाती है।

तो भाई, अगली बार जब आप गणपति बप्पा को विदा करें, तो दुखी मत होना। बल्कि इस बात को फील करना कि बप्पा आपके सारे दुख अपने साथ ले जा रहे हैं और उनका आशीर्वाद हमेशा आपके साथ रहेगा। यह विदाई अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत का प्रतीक है। क्या ख़याल है? सही पकड़ा न?