मैं रुद्र नाथ हूँ — एक साधक, एक नाथ योगी। मैंने अपने जीवन को तंत्र साधना और योग को समर्पित किया है। मेरा ज्ञान न तो किताबी है, न ही केवल शाब्दिक यह वह ज्ञान है जिसे मैंने संतों, तांत्रिकों और अनुभवी साधकों के सान्निध्य में रहकर स्वयं सीखा है और अनुभव किया है।मैंने तंत्र विद्या पर गहन शोध किया है, पर यह शोध किसी पुस्तकालय में बैठकर नहीं, बल्कि साधना की अग्नि में तपकर, जीवन के प्रत्येक क्षण में उसे जीकर प्राप्त किया है। जो भी सीखा, वह आत्मा की गहराइयों में उतरकर, आंतरिक अनुभूतियों से प्राप्त किया।मेरा उद्देश्य केवल आत्मकल्याण नहीं, अपितु उस दिव्य ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाना है, जिससे मनुष्य अपने जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझ सके और आत्मशक्ति को जागृत कर सके।यह मंच उसी यात्रा का एक पड़ाव है — जहाँ आप और हम साथ चलें, अनुभव करें, और उस अनंत चेतना से जुड़ें, जो हमारे भीतर है ।Rodhar nath
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नाभि दर्शना अप्सरा साधना विधि एक विस्तृत मार्गदर्शन
नाभि दर्शना अप्सरा साधना विधि एक विस्तृत मार्गदर्शन
कई लोगों के मैसेज आए कि आप एक बार नाभि दर्शन अप्सरा पर पुनः लेख लिख दीजिए। वैसे तो नाभि दर्शन लेख का, नाभि दर्शन अप्सरा का जो लेख है, वो हम गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम वेबसाइट पर दे चुके हैं। लेकिन फिर भी कई लोगों के मैसेज आए थे कि एक बार फिर से बना दिया जाए तो हमने सोचा कि इस वेबसाइट पर आप लोगों को दे देते हैं लिखकर।
और जिन लोगों को और भी लेख, जो नए साधक हैं, जो नए लोग यहां पर जुड़े हुए हैं, वो गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम वेबसाइट से जाकर पुराने लेखों में काफी सारी साधनाएं हैं जिनको सर्च कर रहे हैं, वहां से आप ले सकते हैं।
यहां पर आज पुनः साधना दे रहे हैं, इससे पूर्व हम हमारी उस वेबसाइट पर दे चुके हैं। इस दिन इसका विशेष मुहूर्त है क्योंकि चंद्र ग्रहण है। रात्रि को 11:30 से 3:30 बजे तक मुहूर्त है। चंद्र ग्रहण करने से बड़े लाभ हैं। इसके दोनों ही प्रयोग बताएंगे जो आपको आर्थिक, आध्यात्मिक और प्रत्यक्ष लाभ प्रदान करेंगे।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना के अभूतपूर्व लाभ
जबरदस्त साधना जिसको करने से व्यक्ति के निराश जीवन में उमंग आ जाती है, यौवन बढ़ने लगता है। स्त्री-पुरुष कोई भी कर सकते हैं, उनका सौंदर्य बढ़ता है, उनकी जो कामुकता है, बढ़ती है, उनकी जो वशीकरण, सम्मोहन शक्ति है, वह बढ़ती है, धन प्राप्ति के रास्ते खुलते हैं। कोई रोग आदि है, उसमें सहायता मिलती है, उसे ठीक होने में सहायता मिलती है, उसमें मदद मिलेगी। बहुत जबरदस्त और शक्तिशाली साधना, कोई भी साइड इफेक्ट नहीं।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना की प्रक्रिया और सफलता की अपेक्षाएं
नया हो या पुराना, हम यह नहीं कहते कि एक ही दिन में इसका प्रत्यक्षीकरण हो जाएगा क्योंकि साधना तो एक ही दिन की करना है आपको सूर्य-चंद्र ग्रहण में। और इसके बाद आप जब इसको साधना को आगे बढ़ाएंगे तो वो एक अलग विषय होगा, उसमें गुरु दीक्षित होना बहुत जरूरी है।
लेकिन किस्मत का कोई ठीक नहीं, अगर आपके पूर्व पुण्य अच्छे हों, अच्छे योग हों तो हो सकता है आपको वो एक दिन में प्रत्यक्षीकरण हो भी जाए। ना भी हुआ तो चिंता की बात नहीं, इसके जो शुभ फल आपको प्राप्त होना है, वो तो अगले कई महीनों तक आपको होते ही रहेंगे।
प्रत्यक्षीकरण होता है तो वचनबद्ध हो जीवन पर्यंत सखी रूप में या मित्र रूप में आपकी सहायता करती है। तो बहुत प्रभावशाली साधना है। सिद्ध होने के बाद कभी भी एक माला यंत्र के सामने मंत्र जाप करेंगे और अपना उनसे चित कार्य प्रकट करेंगे तो अगर वो प्रत्यक्ष रूप से नहीं सिद्ध हुई तो भी आपका काम करेगी और अगर प्रत्यक्ष रूप से सिद्ध हो गई तो भी सामने आकर काम करेगी।
जब आपको मंत्र आदि की विधि कंठस्थ हो जाए तो माला जप की आवश्यकता भी नहीं है, कहीं पर भी हाथ-पैर धोकर बैठ जाओ, 100 बार मंत्र का जाप कर लें तो आपकी कार्य सिद्धि करेगी। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हर प्रकार से बहुत प्रभावशाली साधना है।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना – सफलता के लिए दृढ़ता का महत्व
और अब तक हमारे पास जो पुराने वरिष्ठ गुरु भाइयों के गुजरात से या अन्य किसी जगह से फोन आए हैं, लगभग उन सभी ने सद्गुरुदेव से जब दीक्षा प्राप्त की थी तो नाभि दर्शन अप्सरा की ही की थी और उनके चौथे या पांचवें प्रयास में यह उनको सिद्ध हो गई थी।
खैर, उन लोगों के पास पहले इतना गाइडेंस नहीं था क्योंकि फोन वगैरह नहीं थे कि गुरुजी से बार-बार संपर्क हो सके, लेकिन फिर भी उन्होंने चार या पांच प्रयास में नाभि दर्शना के प्रत्यक्ष दर्शन किए थे।
जिनमें से गुजरात के एक गुरु भाई थे, उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से दर्शन किया लेकिन सबसे पहले सवाल सिद्ध कर लेते हैं तो कोई दिक्कत नहीं, वो कभी भी नुकसान नहीं पहुंचाएगी। ठीक है? तो क्यों अप्सरा है, उसको उससे कोई लेना-देना है, आपकी एक पत्नी हो कि कुछ भी हो, उससे मतलब नहीं। उनको तो उन्होंने यह चांस गंवाया।
ऐसी कई घटनाएं, कई लोगों के फोन आए। तो दोबारा उन्होंने खूब प्रयास किया लेकिन वो चीज नहीं हो पाई। तो कुछ फिर अलग तरीके से हमने रास्ते बताएं जहां से वो प्रयास कर रहे हैं।
मानसिक तैयारी और नाभि दर्शना अप्सरा साधना की नींव
तो होता क्या है कि साधनात्मक पथ में आपको मानसिक रूप से बहुत अच्छे से तैयार होना पड़ता है। शक्ति कब सामने आ जाए, हो सकता है एक बार में आ जाए, हो सकता है 10 बार में। इससे पहले हमने एक गुरु भाई का लिंक भी डाला था, उन्होंने 75वीं बार में यक्षिणी को सिद्ध किया था, 75 बार साधना की थी। तो प्रयास करने से सिद्धि जरूर मिलती है।
जिस प्रकार आप किसी बच्चे को स्कूल में बिठाते हैं तो उसे नौकरी तक पहुंचते-पहुंचते सालों लग जाते हैं, तो फिर साधनात्मक दृष्टि में हम यह क्यों सोचें कि पहले ही अटेम्प्ट में क्लियर कर लेंगे? हमें यहां पर थोड़ी सी मेहनत क्यों चला है ?
तो ऐसा विश्वास होगा तब जाकर उसको आपके अनुभव बढ़ेंगे। आप दूसरे में भी इसी कॉन्फिडेंस के साथ, इसी आत्मविश्वास के साथ करोगे तब कहीं जाके आप कुछ उसमें दर्शन ले सकते हो या अनुभव को बढ़ा सकते हो।
तो हो सकता है आपका भाग्य अच्छा हो तो एक बार में हो जाए या थोड़ी मेहनत ज्यादा करनी पड़े लेकिन भाव के साथ अगर आप मेहनत कर रहे हैं, ज़िद के साथ कर रहे हैं, हठयोगी साधना कर रहे हैं, साधना सिद्ध होती है।
इससे पहले हम मुद्राओं के बारे में भी काफी कुछ बता चुके हैं, विस्थापन मुद्रा, आवाहन मुद्रा, गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम वेबसाइट पर भी जो लेख लिखे थे वहां पर भी हमने मुद्राओं की जानकारी दे दी है। उनके माध्यम से उनको बुलाना, उनको स्थापना करना, उनको प्रसन्न करने की मुद्राएं बताई हैं, वो करना चाहिए। तो वो करके और फिर आगे बढ़ेंगे तो लाभ मिलेगा।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना में ज्योतिष का महत्व
कुंडली में जिन लोगों की चंद्रमा की स्थिति बहुत अच्छी होती है, पंचम भाव में बैठा हो, किसी बुरे ग्रह की दृष्टि ना हो, तो मित्र की दृष्टि हो तो और जल्दी प्रत्यक्षीकरण के योग होते हैं। तो कुंडली विश्लेषण जरूर करवा लेना चाहिए।
कोई दोष आदि हों तो उनका पता चल जाए ताकि आप निवारण कर पाएं। कहते हैं ना कि कोई शत्रु और पता चल जाए तो उससे बच के रहें, वैसे ही सबसे बड़े जो आपके जीवन के शत्रु हैं, आपकी कुंडली के दोष हैं। तो आप पहले उनसे निवारण पाएं और फिर साधना चाहिए।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना गुरु के मार्गदर्शन का पालन
हम बहुत से लोगों को फोन आते हैं, हम बोलते हैं कि आपकी कुंडली में शनि की स्थिति खराब है, आप शनि प्रसन्न साधना कर लीजिए, उसके बाद दूसरी साधना करना। लेकिन पता नहीं उन्हें क्या कीड़ा रहता है, फिर मैसेज करेंगे 10 बार, साधना कर लें, हम यह साधना कर लें, वो साधना कर लें।
तो फिर हम जवाब नहीं देते हैं क्योंकि एक बार समझाने पर अगर व्यक्ति को समझ नहीं आता तो उसको 10 बार भी समझाओ, उससे कोई मतलब नहीं, समय खराब होगा। तो जब एक बार हम बोल रहे हैं कि आपको पहले यह साधना करनी चाहिए तो उसको एक फोकस करो, क्यों भटक रहे हो ?
हमारे अनुभव से ही बोल रहे हैं ना। तो फिर ऐसे लोगों को समझाने का कोई औचित्य नहीं रह जाता, इसीलिए हम फिर डबल उनको मैसेज नहीं करते, ना ही उनका मैसेज चेक करते हैं।
विश्लेषण और संपर्क के लिए निर्देश
ठीक है? बहुत से लोग सुबह से फोन लगाते हैं जबकि सबको पता है कि जो फोन पर बात करने का समय है, दिन में 11 से 4:00 बजे तक ही है। कई लोगों को फोन रात को आते, साल हमें दिन में टाइम नहीं मिलता।
तो क्या कर सकते हैं, रात में हमारे पास टाइम नहीं होता है। आप अपनी छुट्टी के दिन कॉल कर लीजिए। कुछ इमरजेंसी है तो मैसेज डाल दीजिए, हम चेक करके रिप्लाई कर देंगे। तो ऐसी सारी चीजें हैं।
जो लोग अपना कुंडली विश्लेषण करवाना चाहते हैं, अपना नाम, जन्म तारीख, जन्म का समय और जन्म स्थान नीचे दिए गए नंबर पर व्हाट्सएप करें। इस नंबर पर कुंडली विश्लेषण शुल्क ₹500 डालकर उसका स्क्रीनशॉट व्हाट्सएप कर दें।
जिन लोगों की कुंडली नहीं है, वे हस्तरेखा के लिए सर से पैर तक की फोटो भेजें, सीधे हाथ की हथेली की फोटो, पुरुष हैं तो, स्त्री हैं तो उल्टे हाथ की हथेली की फोटो, जिसमें हाथ की रेखाएं स्पष्ट दिखें।
फोटो खींचते समय तीन चीजें, तीन चीजों के बिना, एक फोटो, ₹1100 डाल के उसका स्क्रीनशॉट… हमने एक मणिपुर चक्र विधान स्तोत्र भी दी है गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम वेबसाइट पर, वहां जाकर देख लें और प्रतिदिन उसका एक पाठ करिए।
हालांकि उसकी पूरी विधि है उसको सिद्ध करने की, लेकिन एक पाठ भी प्रतिदिन करते रहेंगे तो जीवन को खूब आनंद आएगा। किसी भी साधना पद्धति को, आप सबसे पहले अपने दैनिक पूजन में ऐसी साधना पद्धति ऐड कर लीजिए।
कुंडली विश्लेषण से हम बता ही देते हैं क्या-क्या करना है जिससे कि अगले 6 महीने में आपका जीवन स्तर बहुत अच्छा होने लग जाए। जितना ज्यादा करते जाएं, उतना बढ़ता जाए। तो ऐसे ही हमेशा साधना लेखों को अपना के अपने जीवन स्तर को सुधारना चाहिए, तब जाकर आपका प्रत्यक्षीकरण के लिए जो पर्याप्त औरा बनना चाहिए, आपका वह प्राप्त कर पाएंगे।
आपके पास पर्याप्त औरा नहीं है प्रत्यक्षीकरण के लिए तो शक्ति सामने होते हुए भी आप देख नहीं सकते, उसके लिए दिव्य मंडल की आवश्यकता होती है।
मुख्य नाभि दर्शना अप्सरा साधना विधि – मुहूर्त और तैयारी
स्नान आदि के पश्चात आप उत्तर मुख होकर बैठ जाएं आसन पर। एक पीला कपड़ा बिछा लें, स्वयं भी पीले वस्त्र धारण कर लें। सद्गुरुदेव का या आपके जो भी गुरुदेव हैं, उनकी तस्वीर रखें, उनका पंचोपचार पूजन करें। फिर एक ताम्र प्लेट में नाभि दर्शन महायंत्र स्थापित करें, उनका भी विधिवत पूजन करें, पंचोपचार पूजन करें और जो अप्सरा माला है, उसका भी पूजन करें।
पूजन करने के पश्चात हाथ में जल लेकर संकल्प लें। आपको स्क्रीन पर, आप चेक कर लीजिए ताकि आपको दिक्कत ना आए। डिटेल, “मैं… अमुक… गोत्र… यह साधना सिद्ध करना चाहता हूं जिससे वह जीवन भर मेरे वश में रहे और मुझे प्रिया की भांति सुख, आनंद, ऐश्वर्य प्रदान करे।” जल भूमि पर छोड़ दें। एक दीपक घी का, अप्सरा के सामने पूरे साधना काल में जलता रहे।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना मंत्र
ॐ ऐं श्रीं दर्शना अप्सरा प्रत्यक्षं श्रीं ऐं फट्।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना माला का महत्व
यह माला से जाप करें। ठीक है? क्यों नहीं बोला हमने लाल चंदन? क्यों नहीं बोला हमने हकीक? क्यों नहीं बोला? इसलिए कि हर माला को एक अलग तरीके से तैयार किया जाता है। मान लीजिए किसी माला में, जैसे वीर साधना होती है, उसमें तीन तरह के मोतियों की माला बनती है, सामान्यतः मार्केट में उपलब्ध नहीं होती है।
विशेष माला, विशेष संकल्प के साथ ही सिद्ध की जाती है जिससे आपको लाभ हो। इसलिए सही माला का प्रयोग करना। ठीक है?
नाभि दर्शना अप्सरा साधना जाप के दौरान और बाद की प्रक्रिया
आगे बढ़ते हैं। इस साधना में 21 माला जाप करने हैं वहीं रखकर और रात्रि को वहीं विसर्जन करें। साधना जाप के समय घुंघरू की आवाज आए, किसी के होने का एहसास हो तो आप डिस्टर्ब ना हों। आप चाहें 21 माला से ज्यादा मंत्र जाप करना तो भी कर सकते हैं।
और जब आपको एहसास हो कि कोई और है, आप अपना काम करते रहें। यदि शक्ति प्रत्यक्ष हो जाए तो नीचे रखी हुई माला उसे पहना दें और जो जाप की माला है, उसे स्वयं पहन लें। और एक-दो फूल माला रखनी हैं आपको, एक तो अप्सरा को पहना दें, एक खुद पहन लें।
अगर प्रत्यक्ष नहीं होती, केवल आभास होता है तो एक माला आप यंत्र के ऊपर पहना दें, अप्सरा वाली। जिससे आपने जाप किया, वो गले में पहन लें और फूल वाली माला भी गले में पहन लें।
वचन कैसे लें?
और मानसिक रूप से ही ध्यान करें कि मुझे पता है आप यहां पर प्रसन्न हैं, आप यहां पर उपस्थित हुई हैं तो आप मुझे वचन दीजिए कि मैं जब भी बुलाऊंगा, एक माला मंत्र जाप करके या सौ बार मंत्र पढ़कर, आप अवश्य आएंगी, जो काम आपसे निवेदन करूंगा।
वह आप करेंगी और मित्र या सखी रूप में सदैव मेरे साथ रहकर मेरे कार्य सिद्ध करेंगी, मेरी तरक्की करवाएंगी, हर प्रकार से धन-ऐश्वर्य से युक्त रखेंगी, यौवन-सौंदर्यता से युक्त रखेंगी, उत्तम स्वास्थ्य से मुझे युक्त रखेंगी। इस प्रकार बोलकर और जल छोड़ दें। जल हाथ मिले जाएगा।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना सिद्ध होने के बाद
फिर जब भी आपको कोई काम हो, एक माला मंत्र जप… यंत्र को, माला को छुपा के रखें। किसी और साहब ने, बॉक्स में पैक करके अपनी ऐसी जगह रखें जहां कोई छुए भी ना, जैसे की परछाई ना पड़े क्योंकि घर में लेडीज़ का टाइमिंग वगैरह आता है, उनकी परछाई पड़ती है तो ऐसे में अशुद्ध मानी जाती है शास्त्रों में।
तो आप उसको अलग रखें। और फिर जब भी हो, मुंह-हाथ धो के, स्नान करके बैठ जाएं, उसको सामने रखकर एक माला जाप करके अपनी इच्छित मनोकामना उनके सामने प्रकट कर दें। चाहे वो प्रत्यक्ष हों, चाहे ना हों, तो आपके अवश्य ही वो कार्य को सिद्ध करती हैं। चलिए, आज के लिए इतना ही। जय गुरुदेव, जय महाकाली
rambha apsara रंभा अप्सरा साधना: एक दिवसीय सिद्धि प्रयोग
जय गुरुदेव, जय महाकाली! आप सभी साधकों का हमारी वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉट कॉम के इस लेख में स्वागत है। रंभा अप्सरा प्रयोग एक ऐसी साधना जो अद्भुत यौन, अद्भुत सम्मोहन शक्ति प्रदान करने वाली, इच्छाओं की पूर्ति करने वाली और प्रेमिका रूप में सिद्ध होने वाली।
रंभा अप्सरा साधना और साधकों के भय
बहुत से लोगों में एक कॉमन सा डर बना रहता है कि अप्सरा को प्रेमिका रूप में अगर सिद्ध कर लें तो विवाह में समस्या तो नहीं आएगी ? अगर प्रेमिका रूप में सिद्ध कर लें तो शादीशुदा जीवन में गड़बड़ तो नहीं होगी ? तो आपको बता दें कि अप्सरा में ऐसी कोई भी समस्या नहीं होती है।
यक्षिणी साधनाओं के विधान अलग होते हैं, लेकिन अप्सरा में आप उसको शादीशुदा होने पर भी प्रेमिका रूप में सिद्ध करेंगे तो भी शादीशुदा जीवन में प्रेम बढ़ेगा। अगर आप शादीशुदा नहीं हैं और आप अप्सरा साधना करके प्रेमिका रूप में सिद्ध कर रहे हैं, सुंदर पत्नी की प्राप्ति होगी, प्रेम करने वाली पत्नी की प्राप्ति होगी।
रंभा अप्सरा साधना में चूक के परिणाम
rambha apsara रंभा अप्सरा साधना: एक दिवसीय सिद्धि प्रयोग
लेकिन साधना में अगर आपने चूक कर दी, साधना में अगर आपने कोई गड़बड़ कर दी या साधना को खंडित कर दिया तो आपसे लड़ने वाली पत्नी भी प्राप्त होगी, इसमें भी कोई संदेह नहीं है।
लेकिन साधना को सोच समझकर, पहले से प्री-प्लान करके बनाएं कि आप इतने दिन की साधना करेंगे, कोई काम तो नहीं है, आपको कोई डिस्टर्ब तो नहीं करेगा? इन सब चीजों का ध्यान रखें।
रंभा अप्सरा साधना के लाभ और विकल्प
rambha apsara रंभा अप्सरा साधना: एक दिवसीय सिद्धि प्रयोग
क्योंकि लोग बड़े परेशान रहते हैं, इसलिए हम कहते हैं कि अगर अप्सरा को प्रत्यक्ष रूप में ना सिद्ध कर सकते या इतना समय नहीं है तुम्हारे पास 11 दिन, 21 दिन, 41 दिन या सवा लाख मंत्र जप अनुष्ठान करने की क्षमता नहीं है, तो एक दिवसीय प्रयोग कर लिया करो अप्सरा से संबंधित।
उससे होगा क्या ? आपके जो स्वभाव है, जो आपका व्यक्तित्व है, उसमें सम्मोहन शक्ति आएगी। चमत्कारिक रूप से आपका जो उम्र है वो आपकी उम्र से कम दिखने लगेगी, आपमें नवीनता आ जाएगी।
सिर्फ मन में नहीं, तन में भी बहुत चमत्कारिक आपका व्यवहार हो जाएगा। लोग आपकी बातों को जो इग्नोर करते थे, वे लोग भी आपकी तरफ आकर्षित होंगे। ये अप्सरा साधना के प्रभाव हैं, इसमें मतलब कोई अलग से ऐसी बात नहीं है, सामान्य अप्सरा साधना में ये होता ही है।
रंभा अप्सरा साधना सिद्धि की विशेषताएं
rambha apsara रंभा अप्सरा साधना: एक दिवसीय सिद्धि प्रयोग
अप्सरा की विशेषता यह है कि अगर उसको प्रेमिका रूप में आपने सिद्ध कर लिया है तो जीवन पर्यंत उसके मंत्र से उसका आवाहन करने पर आपके कार्य सिद्ध कर देती है और प्रत्यक्ष रूप से सिद्ध होने पर तो व्यक्ति के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, अप्सरा साधना सतत अलग-अलग विधि से एक वर्ष तक की जाए तो सिद्धि हो ही जाती है।
साधना की विधियां
rambha apsara रंभा अप्सरा साधना: एक दिवसीय सिद्धि प्रयोग
अलग विधि से कैसे ? तो अलग विधि से आपने दिशा का चयन कर लिया, आप दिशा बदल दें। दक्षिण को छोड़कर तीनों दिशाओं में अलग-अलग साधना कर सकते हैं, अलग-अलग अनुष्ठान कर सकते हैं। कपड़ों में आप उससे संबंधित जैसे इस साधना में गुलाबी वस्त्र, पीले वस्त्र पहने जा सकते हैं, सफेद वस्त्र पहने जा सकते हैं, तो अलग-अलग वस्त्रों के साथ आप उसको पहन सकते हैं।
मुख्य रूप से गुलाबी वस्त्र पहने जाते हैं अप्सरा साधना में। इसके साथ और स्थान का परिवर्तन कि आप अन्य किसी स्थान पर जाकर साधना या प्रयोग कर रहे हैं, तो स्थान को भी आप बदल सकते हैं।
लेकिन अगर आपके पास परमानेंट एक ही कमरा है जहां पर आप साधना कर सकते हैं और आपके अलावा वहां कोई नहीं जाएगा, तो फिर स्थान बदलने की आवश्यकता नहीं, फिर उसी में करें कि आपके अलावा कोई नहीं जाता।
लगता है कि इस बार आपने साधना की, फिर उसके बाद आपको रूम छोड़ना पड़ेगा, घर परिवार वाले आते-जाते रहते हैं, तो फिर आप स्थान चेंज करें बार-बार, उससे आपको ज्यादा लाभ होगा।
लेकिन अगर परमानेंट है जहां पर आपके अलावा कोई नहीं जाएगा, भले चार महीने, 10 महीने भी साधना करें तो दिक्कत नहीं, तो फिर आप वहां पर करें। एक अनुष्ठान कंप्लीट हो, दूसरा अनुष्ठान ले लें।
रंभा अप्सरा साधना के अलौकिक अनुभव
rambha apsara रंभा अप्सरा साधना: एक दिवसीय सिद्धि प्रयोग
साधनाएं और उनके प्रभाव ऐसे हैं कि कभी-कभी जब हम साधना में बैठते ना, तो हमारे साथ जो घटनाएं होती हैं, हम खुद आश्चर्यचकित हो जाते हैं कि ऐसा कैसे हुआ। क्योंकि वो शक्तियां हैं, वो हमारी सोच से बहुत परे है, बहुत परे।
वो बहुत एडवांस हैं, एडवांस लाइजेशन, वे एडवांस हैं। तो वो हम जो नहीं सोचते उससे ज्यादा है। क्योंकि हमने जो चीजें देखीं, हम जिन चीजों को देखते हैं, जिनसे बात करते हैं, सामान्य सी हो गई सारी चीजें।
लेकिन जब विशेष शक्तियों की साधना करते हैं तो बहुत सारी ऐसी घटनाएं होती हैं जो चमत्कारिक रूप से प्रसन्न कर देती हैं मन को। क्योंकि शक्ति का, नई शक्ति का सामने आना या फिर उसके द्वारा आपको एक नया अनुभव देना, बहुत अलौकिक अनुभव होते हैं।
साधकों द्वारा की जाने वाली सामान्य गलतियां
साधना में इन चीजों का बड़ा महत्व है। लेकिन दिक्कत कहां हो जाती है सामान्य साधकों के लिए? अपनी साधना के बारे में या तो बहुत सारे लोगों को बता देते हैं।
हमने कई लोगों को देखा है कि वे लोग फोन करते हैं कि हमने हमारे गुरु जी से फलां साधना ली है, हम कर रहे हैं लेकिन अनुभव नहीं हो रहे।
हम बोले, कहां से अनुभव होंगे? तुमने तुम्हारे गुरुजी से साधना ली, पहला अनुष्ठान भी तुम्हारा कंप्लीट नहीं हुआ और तुमने हमें बता दिया।
भाई क्यों बता रहे हो? मैं तुम्हारी साधना पर और गुरु पर तुम्हें विश्वास नहीं है तो सिद्ध कैसे होगी? उसने तो तुम्हारी पहले ही परीक्षा ले रखी और जब हमें बताया तो तुमने 10 और लोगों को फोन लगाकर बताया होगा।
भाई, वो तो आपको कम से कम साधना के दो, चार, पांच, दस अनुष्ठान हों, उसके बाद भी आपको लग रहा है अनुभव नहीं हो रहा, जबकि मैंने अनुष्ठान अच्छे से किए हैं, सही मंत्र, नियम पालन करके किए हैं, उसके बाद भी कुछ नहीं हो रहा है, तब आप उसकी चर्चा करें किसी अन्य से, अपने गुरु से, अगर उसका समाधान नहीं हो रहा तो किसी अन्य गुरु से चर्चा करके उस संबंध में राय लें तो बात अलग है।
चलती साधना में कभी किसी को नहीं बताना चाहिए। हम लोग जब साधना में बैठते हैं, हम किसी को नहीं बताते। पारिवारिक सदस्यों को भी मालूम नहीं होता कि हम क्या कर रहे हैं। वो लोग बस है कि ठीक है पूजा चल रही है, सामान्य पूजा चल रही है। नहीं पता होता कि कोई साधना चल रही है, कुछ चल रहा है।
तो बहुत सारे लोग बखान कर देते हैं, सबके सामने बखान कर देते हैं। नहीं करना चाहिए। ऐसे में आप अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारते हैं, समय भी खराब होता है और साधना भी सिद्ध नहीं होती।
फिर गुरु को दोष देते हैं, मंत्र को दोष देते हैं, साधना को दोष देते हैं और सनातन को दोष देते हैं। तो भाई, ना धर्म की गलती है, ना गुरु की गलती है, ना मंत्र की गलती है, गलती सभी आपकी है। आंख बंद करके यदि विचार करोगे कि क्या-क्या गलतियां की हैं, सब सामने आ जाएगी।
रंभा अप्सरा साधना एक दिवसीय प्रेमिका सिद्धि प्रयोग
चलिए विषय वस्तु पर आते हैं। प्रेमिका रूप में इसको सिद्ध किया जाता है, रंभा अप्सरा साधना है। आप इसको 11 दिन, 21 दिन जैसा करना चाहें वैसा कर सकते हैं। लेकिन एक दिन की साधना यह करनी चाहिए अगर आप इसके तत्व को, इसकी कृपा को जीवन में उतारना चाहते हो तो एक दिन की साधना भी इसकी की जा सकती है।
रंभा अप्सरा साधना हेतु सामग्री और तैयारी
किसी भी शुक्ल पक्ष के शुक्रवार को रात्रि 11 बजे के बाद की यह साधना है। गुलाबी वस्त्र, आसन, पूर्व या उत्तर मुखी हों। स्नान के पश्चात पुराने कोई वस्त्र या किसी को ना छुएं, सीधे गुलाबी वस्त्र धारण करके, आसन गुलाबी हो।
बहुत से लोग कहते हैं साहब, आसन कहां से लाएं इतने कलर के? तो कोई बात नहीं, जो आसन हो उसके ऊपर गुलाबी कपड़ा बिछा लो। एक बाजोट सामने रखो जो आपकी नाभी से ऊपर हाइट हो, नहीं हाइट हो तो नीचे ईंट वगैरह लगा लो, कोई सामान लगाकर उसको हाइट दे दो।
अब लोग बहुत से लोग पूछते हैं बाजोट क्या होता है? बाजोट मतलब लकड़ी का वह पटिया जिसके ऊपर सामग्री रखी जाती है।
उसके ऊपर एक तांबे की प्लेट रखो और उसमें अप्सरा, रंभा अप्सरा सम्मोहन यंत्र को और अप्सरा माला को भी वहां पर भी कपड़ा बिछा देना है। प्लेट में एक अलग प्लेट में माला रखो, एक अलग प्लेट में यंत्र रखो।
रंभा अप्सरा साधना मंत्र और पूजन विधि
पहले अपना पवित्रीकरण, आचमन करो। घी का या चमेली के तेल का दीपक प्रज्वलित करो। इत्र खुद भी लगाना है चमेली का तो ज्यादा बढ़िया और अपने आसपास भी छिड़कें। हो सके तो एक माला खुद धारण कर लें, एक यंत्र के आसपास लपेट। यंत्र को स्नान करवा लें सामान्य जल से, उसके बाद कुमकुम, चावल, केसर, फल, अक्षत आदि से उसका पूजन करें। पूजन के पश्चात 51 माला मंत्र का जप करना है। मंत्र को नोट करिए, आगे की प्रोसेस बताते हैं:
ॐरंक्लींरंआगच्छक्षंरंनमः
यह संपुट बीज मंत्र है। 51 माला जप आपका मंत्र जप हो जाए, उसके बाद आपके बाएं हाथ या उल्टे हाथ में, लेफ्ट हैंड में यंत्र को दबा लें और खड़े होकर एकदम सामने दीवार हो तो दीवार पर त्राटक करते हुए, कोशिश करें त्राटक करने की, बहुत से लोगों को प्रैक्टिस नहीं, कर पाते। त्राटक करते हुए 15 मिनट तक फिर मंत्र जप करें और उसके बाद वापस यंत्र को उसके यथा स्थान रख दें।
रंभा अप्सरा साधना प्रयोग समाप्ति के बाद की प्रक्रिया
मिठाई का भोग लगाएं और प्रयोग समाप्ति जब आपकी हो जाती है उसके बाद 11 दिन तक उस माला को गले में धारण करके रखें। ग्यारहवें दिन रात्रि को या बारहवें दिन यंत्र और माला को पवित्र नदी, सरोवर, जल में विसर्जित कर दें।
यह इसका रंभा अप्सरा सिद्धि का चमत्कारिक एक दिवसीय प्रयोग है। मंत्र जप तो एक ही दिन करना, बाकी माला धारण करना है, तो आप इसके लाभ ले सकते हैं। आप चाहें तो इस प्रयोग को कितने भी दिन आगे बढ़ा सकते हैं, 11 दिन, 21 दिन, 41 दिन, आपके ऊपर है।
निष्कर्ष और अन्य सेवाएं
चलिए आज के लिए इतना ही। जो लोग जीवन में विभिन्न समस्याओं से परेशान हैं लेकिन समझ में नहीं आया कि जीवन संघर्ष क्यों है, उन्हें अपनी कुंडली विश्लेषण या ऑरा स्कैनिंग जरूर करवानी चाहिए।
कुंडली विश्लेषण के लिए अपना नाम, जन्म तारीख, समय और स्थान नीचे दिए गए नंबर पर, तो राइट हैंड, माता बहनें हो तो लेफ्ट हैंड। कुंडली विश्लेषण शुल्क ₹500, ऑरा स्कैनिंग शुल्क ₹500। चलिए आज के लिए इतना ही। जय गुरुदेव, जय महाकाली!
Urvashi apsara sadhana -उर्वशी अप्सरा साधना – इस विधि से अप्सरा होंगी प्रत्यक्ष 100% PH.85280 57364
जय गुरुदेव जय महाकाली आप सभी साधकों का गुरु मंत्र साधना की आपकी अपनी इस वेबसाइट पर स्वागत है। आज उर्वशी अप्सरा से संबंधित एक विशेष प्रयोग दे रहे हैं। बहुत अच्छा प्रयोग है, कोई बहुत बड़ा विधि विधान नहीं है, छोटा सा प्रयोग है लेकिन अप्सरा का सानिध्य और कृपा प्राप्ति होती है। इसमें अप्सरा के प्रत्यक्षीकरण के भी बहुत ज़्यादा चांस हैं कि आपको उसके प्रत्यक्षीकरण हो जाएं। अगर प्रत्यक्षीकरण नहीं भी होता है तो उसके सानिध्य की प्राप्ति आपको प्रतिक्षण होगी।
Urvashi apsara sadhana – उर्वशी अप्सरा साधना के लाभ
जब कोई दैविक शक्ति आपके आसपास रहेगी तो आपके चेहरे का तेज, आपका बोलचाल की भाषा, आपकी सम्मोहन शक्ति बहुत अधिक प्रखर हो जाएगी और आपके कार्य सिद्ध होने लग जाएंगे। जिन कार्यों में बहुत रोड़े आते हैं वह सारे कार्य भी आपके सिद्ध होने लग जाएंगे और बिना सोचे जो चीज सोची नहीं है वह भी होगी।
जो सफलता आपने कभी सोची भी नहीं है वह भी प्राप्त होगी। जब कोई दैविक शक्तियां आपके साथ में होती है तो असंभव को भी संभव कर देती है, असंभव को भी संभव कर देती है और भाग्योदय होता ही है।
Urvashi apsara sadhana Vidhi उर्वशी अप्सरा
साधना की विधि
ऐसी दैविक साधना को आपको जरूर करना चाहिए और क्योंकि इसको स्त्री पुरुष कोई भी कर सकता है, कोई बहुत बड़ा विधान नहीं है इसका, छोटा सा विधान है।
1 – Urvashi apsara sadhana उर्वशी अप्सरा साधना की – अवधि का चयन
आप साधना कर सकते है 7 दिन, 11 दिन, 21 दिन या 41 दिन, इनमें से आप चयन कर लें आप कितने दिन की साधना करने में सक्षम हैं। जितने दिन ज्यादा करेंगे उतने अनुभव ज्यादा बढ़ेंगे।
लेकिन अगर आपको लगता है कि आपने ज्यादा दिन की साधना नहीं कर सकते हो तो फिर 7 दिन का ही संकल्प लो क्योंकि साधना अगर बीच में तोड़ते हो तो खंडित होती है तो उसका भी दोष लगता है। तो इसलिए जो संकल्प लिया है जितने दिन का उतने दिन साधना पूरी करनी चाहिए और उतने दिन में चीजें कंप्लीट करनी चाहिए।
2 – Urvashi apsara sadhana – उर्वशी अप्सरा साधना का समय और स्थान
तो इसको कैसे करना और कब करना है? तो जब भी शुक्ल पक्ष हो और शुक्ल पक्ष में पुष्य नक्षत्र आए, चाहे वो सोमवार से शनिवार रविवार तक किसी भी दिन में आ जाए, शुक्ल पक्ष होना चाहिए यानी उजाली के दिन।
कैलेंडर में लिखा हुआ रहता है कृष्ण पक्ष शुक्ल पक्ष तो देख लेना और शुक्ल पक्ष में जब भी पुष्य नक्षत्र आए उस पुष्य नक्षत्र में आपको यह साधना करनी है।
उस दिन रात्रि काल से साधना स्टार्ट करनी है। कहां करनी है? घर के एकांत कमरे में कर सकते हैं, आप छत पर अगर आपका बना हुआ है थोड़ा सा तो वहां पर कर सकते हैं, नदी के किनारे कर सकते हैं। अब जैसे नदी किनारे आप करते हैं तो फिर क्या होता है सामग्री रोज उठा के लानी पड़ती है।
3 – Urvashi apsara sadhana उर्वशी अप्सरा साधना में प्रारंभिक
तैयारी और शरीर बंधन
आपको जब भी करें, किसी भी मंत्र से आप शरीर बंधन कर लें वरना इसी वेबसाइट के पुराने लेख में हमने विभीषण कृत साबर मंत्र दिया हुआ है, उस साबर मंत्र से भी आप शरीर बंधन कर सकते हैं, वह स्वयं सिद्ध है। फिर भी जब उसको नवरात्र आदि में एक-एक माला कर लेंगे नौ दिन तो वह और प्रभावी हो जाएगा। जब आप यह साधना करें तो उस मंत्र का प्रयोग किया जा सकता है तो उससे आपका शरीर बंधन हो जाएगा और फिर आप इस साधना को कर सकते हैं।
इस साधना में आप उत्तर या पश्चिम मुखी होकर बैठें। ठीक है, इसमें सफेद वस्त्र आसन हो और सामने एक लकड़ी का पटिया हो उस पे भी सफेद कपड़ा बिछा दें।
वहां पर उर्वशी अप्सरा यंत्र स्थापित करें। ठीक है, उर्वशी माला स्थापित करें या स्फटिक माला स्थापित करें, साथ में चार स्फटिक के दाने स्थापित करें, एक पान का बीड़ा स्थापित करें, सफेद फूलों की एक माला वहां पर रख दें यंत्र के ऊपर हम चढ़ाने के लिए, वो पूजन के बाद में चढ़ाएंगे और उसके साथ में मजमुहा या फिर आप गुलाब का इत्र वहां पर रख दें।
अब अपना पवित्रीकरण आचमन कर लें, उसके बाद में घी का दीपक अपने लेफ्ट साइड पर प्रज्वलित करें जिसमें लंबी बाती हो जो आपकी और मुंह करके हो।
आप चाहे तो उसको यंत्र के और आपके ठीक बीच में भी स्थापित कर सकते हैं। इसके बाद में दीपक का पूजन करेंगे, पहले अपना पवित्रीकरण आचमन जरूर कर लें फिर दीपक का पूजन करेंगे और दीपक को प्रणाम करेंगे साक्षी भाव से कि हमारी साधना के आप साक्षी हैं।
इसके बाद में आप यंत्र को जल से स्नान करवाएं, दूध है तो उससे भी स्नान करवा दें, पुनः जल से कर दें, नहीं तो जल से भी करेंगे तो चलेगा।
फिर कुमकुम केसर और कपूर तीन चीजें मिलाकर पहले से तैयार रखें, उनकी पहली बिंदी यंत्र के मध्य में लगाएं, मध्य बिंदु पे जहां पर संबंधित शक्ति वास करती है। उसके बाद उसके बाहरी आवरण पर बिंदु लगाकर उसको उसकी जगह पर स्थापित करें। माला की पूजा भी आप कर दें।
उसके बाद में थोड़ा सा इत्र निकालें, यंत्र के और माला के आसपास इत्र को छिड़क दें, थोड़ा सा इत्र अपने ऊपर भी छिड़क लें, फिर इत्र को वापस रख दें। जो आपने माला ली है सफेद वो माला चढ़ा दें।
एक दोने में कोई सा भी एक फल उनको अर्पित करें। ठीक है, इस प्रकार आप पूजन करेंगे। पान का बीड़ा भी उनको आप समर्पित करेंगे अर्पित करेंगे कि आप इसको स्वीकार करें।
इसके बाद में हाथ में जल लेकर आप संकल्प लेंगे अमुक नाम, अमुक गोत्र मैं उर्वशी अप्सरा सिद्धि निमित्त या दिव्य साधना का… देखो क्या होता है ना संकल्प का बहुत महत्व है।
बिना संकल्प आपको अनुभव वगैरह भी उस टाइप से हो नहीं पाते हैं इसलिए संकल्प का बहुत महत्व है। तो संकल्प लें कि मैं अपना नाम गोत्र और उर्वशी अप्सरा सिद्धि प्राप्ति निमित्त, अप्सरा का सानिध्य प्राप्ति निमित्त, कृपा आशीर्वाद मार्गदर्शन प्राप्ति निमित्त मैं यह दिव्य साधना करने जा रहा हूं। ठीक है, इस प्रकार आप छोड़ दें।
अगर आप उनको इष्ट रूप में करना चाहते हैं, मार्गदर्शक के रूप में करना चाहते हैं, अगर कोई प्रेमिका या पत्नी रूप में करना चाहता है तो फिर उस प्रकार से संकल्प ले सकता है कि मैं इन्हें इनका सानिध्य प्राप्ति निमित्त अमुक रूप में इनकी प्राप्ति निमित्त इनकी दिव्य साधना करने जा रहा हूं। बोल के जल छोड़ दें।
इस प्रकार आप इसमें आप यह भी बोल सकते हैं कि हे वरुण देव आपके माध्यम से और अग्नि देव की साक्षी में मैंने यह संकल्प लिया है, मेरा यह संकल्प अप्सरा तक आप पहुंचाने की कृपा करें। बोल के जल छोड़ दें।
6 – Urvashi apsara sadhana उर्वशी अप्सरा साधना में तिलक और मंत्र जाप
उसके बाद में आप देखो खुद का तिलक भी लगाना जरूरी है। जो त्रिगंध आपने तैयार किए कुमकुम केसर कपूर से, यंत्र पूजन के साथ अपन को भी लगाना है। दोनों अलग-अलग करके रखें, पहले अपना लगा ले तिलक फिर हाथ धोकर फिर आप यंत्र का पूजन करें, उसकी अलग रखें मतलब दो भाग में कर लें।
ठीक है, अब दोनों ही हमने जगह बता दिया आपको कहां करना है। फिर क्या करना है? एक मंत्र आपको स्क्रीन पर दे रहे हैं, यह जो पहला वाला मंत्र है, इसको एक माला जप करना है उसी माला से। तो इससे पहले एक माला गणेश मंत्र और चार माला गुरु मंत्र का जप कर लें, आपने जो भी गुरु मंत्र है आपका जहां से भी दीक्षा ली है, उसके बाद में इस मंत्र का जप करें।
मंत्र को भी नोट कर लें: तक्षम सर्वा सरस आगच्छागच्छ हुम। यह मंत्र है, इस मंत्र का एक माला जप करें। फिर जो आपने त्रिगंध तैयार की है, वह जो आपने चार स्फटिक के दाने रखे हैं उन पर भी तिलक करें। उसके बाद में उर्वशी अप्सरा का मंत्र नोट करिए: ॐ श्री उर्वशी आगच्छागच्छ स्वाहा । इस मंत्र की आप 51 माला जप करेंगे।
Urvashi apsara sadhana उर्वशी अप्सरा साधना- काल के अनुभव
इस प्रकार आप 7 दिन, 11 दिन, 21 दिन, 41 दिन का यह प्रयोग कर सकते हैं और इस साधना काल में आपको एक दिव्य महक आना, खुशबू आना, किसी का पास में होना, पीछे से हाथ लगा देना, इस टाइप की चीजें होती है तो डरने की बात नहीं है, यह तो अप्सरा का स्वभाव है, तो ये चीजें होती है।
Urvashi apsara sadhana उर्वशी अप्सरा साधना प्रत्यक्षीकरण और
सिद्धि
आप इस साधना को करें। अप्सरा अगर प्रकट होती है तो जो सफेद फूलों की माला आप क्योंकि इसमें जितने दिन करेंगे उतने दिन सफेद फूल की माला आपको लगेगी, किसी दिन अगर ना हो पाए तो फिर आप उसकी जगह अन्य फूल ले सकते हैं, गेंदा आदि फूल, गुलाब आदि फूल, तो उसी माला को आपको अप्सरा को पहनाना होता है जिससे वह आपके वश में होती है।
बाय चांस ऐसा नहीं होता है क्योंकि 90% टाइम तो ऐसा होता है कि अप्सरा सामने नहीं आती, आते हो गिने चुने 10% लोग हैं जिनको दर्शन होते हैं और उनमें से भी एकाध प्रतिशत होते हैं जिनको वचन होते हैं।
तो आपको क्या करना है कि इसमें घबराने वाली बात नहीं है कि मेरे सामने नहीं आई तो मेरी साधना सिद्ध नहीं हुई। साधना तो सिद्ध होगी क्योंकि आपने संकल्प लिया और मंत्रो अधीन हो देवता, देवता मंत्र के अधीन है तो अप्सरा सिद्धि होगी ही होगी।
बस यह है कि आप उसका प्रत्यक्षीकरण नहीं कर पाए। तो आप सतत साधना करते रहें, जैसे एक अनुष्ठान पूरा हुआ फिर अगले महीने अनुष्ठान ले लें या फिर एक-दो दिन छोड़ के फिर अनुष्ठान ले या फिर इसी अनुष्ठान को आगे बढ़ा दें।
तो अवश्य ही अप्सरा के दर्शन, सानिध्य प्राप्ति या वचन होते हैं अगर आप उसको लंबे समय तक करें। ठीक है, जबकि एक ही अनुष्ठान में उसका सानिध्य अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त हो जाता है और आप उसके चमत्कार अपने जीवन में देखना शुरू कर देंगे।
Urvashi apsara sadhana उर्वशी अप्सरा साधना के नियम
अब इसमें नियम क्या है? इसमें नियम है ब्रह्मचर्य का पालन रखें, जमीन पर शयन करें, अपना बिछौना चद्दर वदर जो भी लगाना है लगा के। ठीक है, एक समय भोजन करें बिना लहसुन प्याज का, गुस्सा नहीं करना।
मोबाइल वगैरह का कम उपयोग करें, किसी पर गुस्सा नहीं करें, किसी की बुराई चुगली ना करें, बेईमानी ना करें कहीं पे, इन सब चीजों का ध्यान रखें। यह तो नॉर्मल भी अपने जीवन में चीजें होनी चाहिए, साधना काल में तो होना ही चाहिए लेकिन सामान्य रूप से भी एक सही व्यक्ति के जीवन में यह सारे गुण होना चाहिए।
Urvashi apsara sadhana उर्वशी अप्सरा साधना के अंतिम प्रभाव
तो इस प्रकार अगर आप इस साधना को करेंगे अवश्य ही यह दिव्य साधना सिद्ध होगी और जीवन में चमत्कारिक अनुभव होंगे और जीवन में अनेक चमत्कार आपको दिखेंगे। जिस प्रकार गुलाब अपनी महक से आसपास के वातावरण को सुगंधित कर देता है, आप जहां भी जाएंगे आपका प्रभाव आसपास के वातावरण को दिव्य कर देगा, सम्मोहित कर देगा।
आप जहां बोलना शुरू करेंगे लोग सम्मोहन के मारे एकटक होकर सुनते जाएंगे। तो यह इसके प्रभाव है और हर व्यक्ति चाहता है कि उसे ऐसा मान सम्मान मिले।
उसके लिए ऐसी दिव्य साधनाएं बहुत जरूरी है, चाहे वो आपके चेहरे पर तेज और सम्मोहन के लिए हो, चाहे दूसरों को वशीभूत करने के लिए हो, अपनी कार्य सिद्धि के लिए हो या अप्सरा का सानिध्य प्राप्त करने के लिए हो। तो इस साधना को अवश्य करें।
अन्य जानकारी एवं संपर्क
चलिए आज के लिए इतना ही। guru mantra sadhna वेबसाइट पर तो हमने काफी सारे लेख दिए ही हैं इसके अलावा भी साधना के विभिन्न लेखजय महाकाली ज्योतिष केंद्र वाली वेबसाइट पर भी दिए गए हैं, आप उनको देख सकते हैं और उनसे संबंधित साधनाओं को करके अनेक लाभ उठा सकते हैं।
जो लोग अपना कुंडली विश्लेषण या ओरा स्कैनिंग करवाना चाहते हैं, नीचे नंबर दिया गया है उस पर संपर्क कर सकते हैं। बातचीत का समय दिन में 12:00 से चार है, मैसेज वगैरह आप कभी भी कर सकते हैं। चलिए आज के लिए इतना ही। जय गुरुदेव जय महाकाली। ph.85280 57364
मां भैरवी साधना रहस्य Bhairavi Sadhana rahasyaमां भैरवी के जो कॉन्सर्ट हैं वो भैरव हैं, गॉडेस ऑफ डेथ हैं और आपको वो सबसे पहला साइन ये देंगी कि आपके स्वप्न में आएंगी। थोड़ा डरा देने वाला भी स्वरूप जो है वो मां भैरवी का। पहले आपको मां काली को साधना होगा और उससे भी पहले मां दुर्गा को साधना। तो मां भैरवी की एनर्जी बहुत-बहुत फियर्स है, वो आराम से आपको नहीं बताएंगी।
तो इन्होंने अपनी जो शक्तियां थीं वो कम्बाइन करके अर्धनारीश्वर के फॉर्म में उसका संहार किया था। नहीं, हमें मां भैरवी की पूजा करनी चाहिए या नहीं करनी चाहिए? तो आप उनकी फियर्स फॉर्म में ही पूजा करें जो रात को आप करेंगे। सब 10 महाविद्या में आप पीरियड्स में पूजा कर सकते हैं। पांचवें दिन इनका हम जो है आह्वान कर सकते हैं। चेंज इज द रियलिटी ऑफ लाइफ।
नमस्कार, आज हम आपके लिए लेकर आए हैं 10 महाविद्याओं में से पांचवी महाविद्या मां भैरवी को लेकर एक खास लेख और इस लेख में हम बात करेंगे कि मॉडर्न वर्ल्ड में मां भैरवी का क्या महत्व है, किन बातों का खास ख्याल मां भैरवी की पूजा के लिए रखना चाहिए और बहुत सारे ऐसे किस्से और कहानियां मां भैरवी से जुड़ी हुई हैं जिनके रहस्य से आज हम पर्दा उठाने वाले हैं।
मां भैरवी का स्वरूप और आधुनिक महत्व
सबसे पहले तो यही कि मां भैरवी के रूप और स्वरूप को लेकर भी बहुत सारी बातें होती हैं। थोड़ा डरा देने वाला भी स्वरूप जो है वो मां भैरवी का और मॉडर्न वर्ल्ड में बात करें तो किस तरह से देखते हैं मां भैरवी को ?, मां भैरवी एक बहुत ही पावरफुल और फियर्स महाविद्या हैं।
यह जो हमारी महाविद्या की सीरीज है, उसमें मेरा यही प्रयत्न रहता है कि हम इन महाविद्याओं को एक आम आदमी तक बहुत ही सिंपल तरीके से पहुंचाएं।
मां भैरवी के जो कॉन्सर्ट हैं वो भैरव हैं और मां भैरवी अपने में इतनी परिपूर्ण और संपूर्ण हैं कि वो गॉडेस ऑफ डिस्ट्रक्शन हैं, गॉडेस ऑफ डेथ हैं।
अब आज की डेट में डेथ और डिस्ट्रक्शन को अगर कोई सुने तो वो एकदम डर जाएगा। लेकिन मैं ये बताना चाहती हूं अपने पाठकों को कि डेथ और डिस्ट्रक्शन से डरने की जगह हमें इसको अच्छे से समझना चाहिए। डेथ किसकी? डेथ हमारी ईगो की। डिस्ट्रक्शन किसका? डिस्ट्रक्शन हमारे अहंकार का।
मां भैरवी साधना रहस्य असुर प्रवृत्तियों का विनाश
पहले क्या होता था कि जब असुर होते थे और बहुत संग्राम होता था देवों और असुरों के बीच में तो हर एक चीज को मारना या किसी पर विजय प्राप्त करना एक असुर पर होता था।
लेकिन आज वो असुर क्या हैं? आज हम बाहु के काल में जी रहे हैं। मैं यह कहूंगी कि यह बिल्कुल गलत नहीं है कि हम सबके ऊपर एक-एक असुर ही सवार है।
जो हमारी प्रवृत्ति हो गई है कॉम्पिटिशन की, ट्रेड की, रेप की, जेलसी की, लस्ट की, ग्रीड की, किसी भी तरीके से अपना काम बनवाना, ये एक असुर प्रवृत्ति है।
वो अपने भीतर जो एकदम पल रहा है… हां, जो हमारी डार्कनेस है, वो एक असुर प्रवृत्ति है। तो जब हम मां भैरवी के बारे में बात करते हैं, इन्होंने लॉर्ड भैरव के साथ अंधक असुर को मारा था।
क्योंकि उसको यह वरदान था कि ना वो किसी स्त्री के हाथ से मर सकता है, ना किसी पुरुष के हाथ से। तो इन्होंने अपनी जो शक्तियां थीं वो कम्बाइन करके अर्धनारीश्वर के फॉर्म में उसका संहार किया था।
मां भैरवी साधना रहस्य – जीवन में विनाश का सकारात्मक पक्ष
तो कभी-कभी जब हम मां भैरवी की बात करते हैं, हम बात करते हैं डेथ और डिस्ट्रक्शन की। इससे डरने की जगह हमें यह सोचना चाहिए कि क्या हमारे शरीर में हर चीज की डिस्ट्रक्शनकॉन्स्टैंटली हो नहीं रही? आप ये देखिए ना, डेज़ के अंदर-अंदर हमारी सारी लाइनिंग जो है बॉडी की वो चेंज हो जाती है।
हमारी स्टमक की लाइनिंग चेंज हो जाती है, हमारे ब्रेन की लाइनिंग चेंज हो जाती है, हमारा ब्लड फिर से फ्रेश बनता है। तो जो डिस्ट्रक्शन है, जो लय है, जो एक साइकिल है डिस्ट्रक्शन का, वो तो ऑलरेडी सब जगह हो रहा है। तो हम डिस्ट्रक्शन को अलग से क्यों देखें? डिस्ट्रक्शन होगा तभी किसी नई अपॉर्च्युनिटी का जन्म होगा।
मां भैरवी की साधना और अनुभव
तो मां भैरवी को अगर हमें समझना है 10 महाविद्या में और जो मैं कोर्स कर रही हूं, जो वर्कशॉप मैं करा रही हूं, उसमें ऑलरेडी लोग जो हैं मां भैरवी से जुड़े हुए हैं। तो कल किसी ने बोला कि मां भैरवी प्रकट हुईं और अभी तो वो लोग अपने माइंड में देख पाते हैं, उनकी थर्ड आई खुलती है। और एक ने कहा कि मेरी पूरी बैक में दर्द हो रही है
। बाद में उसने जब मां भैरवी से पूछा तो पता चला कि उसकी बैक में जो प्रॉब्लम थी, स्पाइन की प्रॉब्लम, अब वो दर्द से शुरू हुई है और इस लेडी ने संकल्प लिया है कि 42 डेज में यह दर्द के साथ-साथ मेरी बैकरिन्यू हो जाए, पूरी नई उसके अंदर सेल्स आएं। तो मां भैरवी इस सृष्टि की अगर डिस्ट्रक्शन करती हैं, तो वहीं से जो है नई चीजें आती हैं।
मां भैरवी साधना रहस्य- पूजा से जुड़े डर और संशय
थोड़ा सा इसको बड़ा सिंपल से उसमें समझते हैं कि क्योंकि ये जो सवाल है, ये अपने आप में अहम हो जाता है क्योंकि जो डर, एक भय जो आता है हमें कि जब हम तंत्र और मंत्र, काली विद्या से जोड़कर जब चीजों को देखते हैं, तो फिर हमें ये लगता है कि कहीं कोई चूक हो गई, कोई गलती हो गई तो उसके जो प्रभाव हैं वो एकदम उलट हो जाएंगे, यानी कि आप विनाश की तरफ ना चले जाएं।
दूसरा जिस डिस्ट्रक्शन और डेथ की हम बात कर रहे हैं, उसको थोड़ा सा और अगर डिटेल में समझें क्योंकि इसी से भी एक डर, एक फियर जो मन में आता है कि नहीं, हमें मां भैरवी की पूजा करनी चाहिए या नहीं करनी चाहिए? हां, आई थिंक ये बड़ा इम्पोर्टेंट सवाल है कि क्या हमें पूजा करनी चाहिए?
कौन और कैसे करे मां भैरवी की पूजा ?
देखिए, मां भैरवी का जो… मां भैरवी एक तांत्रिक रूप हैं, 10 महाविद्या एक उग्र और तांत्रिक रूप हैं। इनकी पूजा सिर्फ उन लोगों को करनी चाहिए जिनको इनके मंत्र उच्चारण और सारी पूजा विधि पता है। यह वाम मार्ग है, यह सिंपल पूजा नहीं है।
मां भैरवी की पूजा आपके घर में बैठ के, आपके मंदिर में बहुत ही मुश्किल से होगी क्योंकि एकांत चाहिए उसके लिए, उसके लिए एक तरह की जगह चाहिए। बहुत सारे लोग जो है मां भैरवी की पूजा श्मशान में करते हैं।
तो मां भैरवी के 12 रूप हैं और 12 रूप में से कुछ रूप हैं लिंग भैरवी, कामेश्वरी भैरवी, कालभैरवी। तो हर एक मां भैरवी का जो रूप है, उसकी मंत्र अलग है, उसका उच्चारण अलग है, उसकी प्रक्रिया अलग है। तो एक आम आदमी को अगर करना है तो उसको यह दीक्षा लेनी पड़ेगी और इसको समझ के करना पड़ेगा।
यह बहुत आसानी से की जाने वाली नहीं है। किसी भी महाविद्या की अगर आपको साधना करनी है तो पहले आपको मां काली को साधना होगा और उससे भी पहले मां दुर्गा को साधना होगा। तो जो बहुत सारे लोग ये वर्कशॉप करते हैं।
वो बहुत सालों से दुर्गा सप्तशती का पाठ कर रहे हैं, नवार्ण मंत्र कर रहे हैं, तो उनकी एक प्रिपरेशन है। तो क्या एक आम आदमी जिसने कभी भी कोई प्रिपरेशन ना की हो, मैं नहीं सलाह दूंगी कि वो सीधा मां भैरवी के मंत्र से शुरू करे।
आधुनिक युग में मां भैरवी साधना का सरल मार्ग
लेकिन क्या मंत्र किए बिना हम इनको साध नहीं सकते? यहां आती है मॉडर्नस्पिरिचुअलिटी और यहां आता है हमारा माइंड, हमारी आत्मा और हमें जो भगवान ने शक्ति दी है। तो आप मानते हैं कि शिव जी ने बोला था पार्वती जी को कि आगे जाकर जो कलयुग आएगा।
इसमें एक आम आदमी के पास साधना करने के इतने सारे ना समय होगा, ना साधन होंगे, ना एकांत होगा, तो क्या किया जाए? वहां से… चक्र में फंसा हुआ है… वहां से आए शाबर मंत्र, वहां से आए छोटे मंत्र और ये भगवान भी देख रहे हैं कि हम इस तरीके से जो है पूरी साधना हर कोई नहीं कर सकता।
तो एक आम आदमी क्या करे ? मां भैरवी की पिक्चर ले और मां भैरवी की पिक्चर को नवरात्रों के दौरान देखे, उनको साधे, उनका जो मंत्र है उससे साधे और यह बोले कि मेरी लाइफ में जो जिस चीज की भी डिस्ट्रक्शन आपको लगता है कि होनी है, वो आराम से हो, वो चीज जाए ताकि कोई नई चीज आए।
तो डिस्ट्रक्शन का यह मतलब है जो चीज आपकी लाइफ से निकलनी है। हो सकता है आपके पास कुछ ऐसे दोस्त हों जो अच्छे ना हों लेकिन आपको पता ना हो, आपको लगता है कि वो अच्छे हैं लेकिन असल में पीछे से वो बुरे हैं आपके लिए। हो सकता है आपकी… आपने जो मांगा है मां से, उसके आड़े आपकी नौकरी आ रही है।
हो सकता है उस नौकरी का जाना जरूरी है। हो सकता है घर का जाना जरूरी है ताकि आप एक नया विला ले सकें। हो सकता है आपके जीवन से किसी आदत का जाना जरूरी है। तो डिस्ट्रक्शन मतलब किसी चीज का जाना, किसी चीज का डिस्ट्रॉय होना ताकि सामने से हमने जो मांगा है मां से वो आए।
मां भैरवी की कृपा के संकेत
तो आप पिक्चर देख सकते हैं और मां की आंखों में, ऐसा कहते हैं बहुत सारे लोग तो देख नहीं पाते 30 सेकंड के ऊपर, अगर आप मां भैरवी की पिक्चर को देख सकते हैं, नवार्ण मंत्र करते-करते या मां भैरवी का मंत्र करते-करते, इसका मतलब मां भैरवी की कृपा आप पर है और आपको वो सबसे पहला साइन यह देंगी कि आपके स्वप्न में आएंगी।
आपके स्वप्न में आएंगी और उसके साथ एक ऐसी चीज दिखाएंगी जिसका आपके जीवन से जाना जरूरी है। जब वो मेरे स्वप्न में आई थीं बहुत साल पहले, जब मुझे पता भी नहीं था कि यह मां भैरवी हैं, तो मुझे लगा था यह मां काली हैं,
जैसे आपने बोला कि मां काली और मां भैरवी का जो रूप है वो काफी सिमिलर है और मैं काफी डर गई थी क्योंकि उनका काफी फियर्सफॉर्म होता है और उसके साथ उन्होंने मेरा ऑफिस दिखाया और मुझे बिल्कुल भी समझ नहीं आई।
लेकिन तीन महीने के अंदर-अंदर मैंने अपना कॉर्पोरेट वर्ल्ड छोड़ दिया। अपने में यह एक सडन बात हो सकती है, लेकिन उस समय मुझे नहीं पता चला लेकिन
अब मैं अपने स्टूडेंट्स को… बात कर पा रही हूं… अब मैं रिलेट कर पा रही हूं क्योंकि उसका जाना जरूरी था ताकि मैं स्पिरिचुअलिटी की वर्ल्ड में आ सकती। तो डिस्ट्रक्शन का मतलब किसी चीज का जाना जिसकी जरूरत आपकी जीवन में नहीं है।
मां भैरवी का वास्तविक कार्य
यानी कि सीधे से अगर समझें कि मां भैरवी आपको उन चीजों से अवगत या एक तरह से परिचय कराती हैं जो आपकी लाइफ में सही नहीं हैं, आपके लिए हो सकती हैं कि वो बहुत ज्यादा प्रिय हैं आपके लिए वो चीजें लेकिन वो कहीं ना कहीं आपकी लाइफ को खराब कर रही हैं।
उस डिस्ट्रॉय की तरफ ले जा रही हैं जहां से आपको बचना चाहिए और मां भैरवी असल में उसको डिस्ट्रॉय करके आपको एक बेहतर जिंदगी की तरफ बढ़ाने की कोशिश करती हैं।
बिल्कुल। लेकिन राज जी, होता क्या है कि हम सब इतने अटैच्ड होते हैं चीजों के साथ कि हमें यूनिवर्स और मां जब बार-बार साइन दिखाती हैं, जैसे मां अपने बच्चे को बोलती है इस चीज को छोड़ दो, बच्चा नहीं सुनता, इस चीज को छोड़ दो, हम नहीं सुनते।
फिर वो एक उग्र फॉर्म में आके या तो डांट के या छीन के वो चीज को आपसे अलग करती हैं। तो मां भैरवी की एनर्जी बहुत सडन है, बहुत अनएक्सपेक्टेड है और वो एक आपकी लाइफ से जो है चीज छीन लेंगी, फिर आपको एकदम शॉक लगेगा कि ये क्या हो गया। तो मां भैरवी की एनर्जी बहुत-बहुत फियर्स है, वो आराम से आपको नहीं बताएंगी।
अगर वो आपके जीवन से कुछ निकाल रही हैं, इसका मतलब आपको 10 साल से संकेत आ रहे हैं लेकिन आप उसको छोड़ने को तैयार नहीं। उनकी एनर्जी फियर्स है, सडन है। जो भी मां भैरवी को साधता है, उसको अपनी लाइफ में एकदम से केओस का एहसास होता है।
लेकिन मैं अपने पाठकों को यह बता दूं कि 10 महाविद्या अपने में ही फियर्स हैं। अगर आप में वो एनर्जी है कि आप अपनी लाइफ को सरेंडर कर दें मां को और कहें कि जो आपने लेना है लीजिए, देना है दीजिए, मैं बिल्कुल प्रणाम करके यहीं खड़ा हूं क्योंकि मैं आपको ट्रस्ट करता हूं, आप मेरी मां हैं, तो इन नवरात्रों में, इन नौ दिनों में आपका जीवन पूरी तरह से परिवर्तित हो सकता है।
नवरात्रि में मां भैरवी की पूजा
ये बड़ी अहम है और चूंकि अब नवरात्र की शुरुआत और हर साल जब-जब नवरात्र आते हैं तो जाहिर सी बात है कि इन नौ दिनों में हम मां के अलग-अलग रूप और स्वरूप को पूजते हैं। तो यहां पर यह भी समझना जरूरी है कि मां भैरवी को किस दिन नवरात्रि के उनकी पूजा करनी चाहिए जिससे कि ज्यादा आपके लिए वह फलदायी हो, आपके जीवन में और ज्यादा सुख-समृद्धि और जो बुराई है वह आपके जीवन से हट सके?
मां भैरवी साधना रहस्य पूजा का सही दिन और विधि
पांचवा दिन होता है, यह पांचवी महाविद्या है और पांचवें दिन इनका हम जो है आह्वान कर सकते हैं। जी, इनको कालरात्रि के साथ भी जोड़ा जाता है। ऐसा कहते हैं कि कालरात्रि मां का भी एक फॉर्म है। तो यहां मैं अपने पाठकों को कहना चाहूंगी कि काल मतलब समय और रात्रि मतलब अंधेरा।
तो काल को भी दर्शाती हैं यह। महाकाल, कई लोग कहते हैं कि मां भैरवी का जो कॉन्सर्ट है वो महाकाल है, है ना, जो दक्षिणेश्वर शिव हैं वो इनका कॉन्सर्ट हैं। तो उस समय वो काल की बात कर रही हैं, जिस चीज का समय आपके जीवन में खत्म हो गया, जिस इंसान का समय खत्म हो गया। तो समय को दर्शाती हैं और रात्रि किसको दर्शाती है?
हमारे इग्नोरेंस को, हमारे फियर्स को, हमारे डाउट्स को। अगर किसी के भी दिल में बहुत भय है तो मां भैरवी की पूजा करे, वो अभय हैं। वैसे तो सब महाविद्या जो हैं अभय मुद्रा दिखाती हैं, इसका मतलब महाभय विनाशिनी, बड़े से बड़े डर को भी हटाने वाली।
लेकिन फिर भी मैं कहूंगी कि अगर आपको डर लगता है, आप में कॉन्फिडेंस की कमी है, आपके जीवन में कुछ भी ऐसा है, आपके शत्रु इतने बढ़ गए हैं और उनका विनाश बहुत जरूरी है,
आप किसी एब्यूजिव रिलेशनशिप में हैं, आप किसी नार्सिसिस्टिक रिलेशनशिप में हैं, तो मां भैरवी को हमें जरूर पूजना है। जो रात्रि आपके जीवन में खत्म नहीं होने को आ रही है, जिसकी सुबह नहीं हो रही है, वो मां भैरवी आपको एक मदर के रूप में प्रोटेक्ट करेंगी।
तो यह बहुत जरूरी है कि हम उनको एक मां के रूप में, स्पेशली क्योंकि हम… में नहीं जा रहे, हम तांत्रिकों की तरह उनकी वो पूजा नहीं कर रहे कि हमें कोई सिद्धि मिले।
हम उनकी मदर की तरह पूजा कर रहे हैं कि प्लीज मैं आपके पास मदद मांग रही हूं, यह पीरियड मेरी लाइफ में खत्म नहीं हो रहा, प्लीज आप मेरी मदद करें और मुझे इस अंधकार से निकालें। तो इस चलते क्योंकि सातवें दिन कालरात्रि की पूजा होती है नवरात्रि में, तो हमें मां भैरवी की पूजा फिफ्थ डे भी करनी चाहिए और सेवंथ डे भी करनी चाहिए।
मां भैरवी साधना रहस्य पूजा के नियम और सावधानियां
यहां घर में पूजा करें मां भैरवी की या घर में पूजा करने से अवॉइड करें? अगर आप महाविद्याओं की पूजा पहले से करते आ रहे हैं, अगर आप मां काली के साधक हैं, अगर मां काली की कृपा आप पर है तो आप घर में पूजा कर सकते हैं लेकिन इनकी साधना नहीं कर सकते। पूजा आप आराम से कर सकते हैं, पूजा करने में कोई भी प्रॉब्लम नहीं है।
जितनी भी महाविद्याएं हैं, उनकी पूजा साउथ डायरेक्शन में उनका ऑल्टर होता है और उनका जो ऑल्टर होता है वो बाकी मंदिर से अलग होता है। मां कालरात्रि के लिए, मां भैरवी के लिए आपको एक लाल कपड़े का आसन बिछाना है, उनको लाल गुड़हल के फूल चढ़ाने हैं, उनको आपको रुद्राक्ष की माला या लाल चंदन की माला पे उनका मंत्र करना है।
और हमेशा जब भी आप किसी महाविद्या की पूजा करें, शहद जरूर रखें क्योंकि हमें नहीं पता कि वो कब उग्र फॉर्म में आ जाएंगी। हम साधना नहीं कर रहे, हम तंत्र नहीं कर रहे, हम केवल उनकी ब्लेसिंग्स के लिए पूजा कर रहे हैं।
तो आप शहद रखें, गुड़हल का फूल रखें, गुड़ रखें, कोई मिठाई रख सकते हैं तो रखें, काली उड़द की दाल के वड़े बनाकर रखें, जरूर कुछ दक्षिणा दें और जितनी भी देवी की पूजा होती है, उसमें आप कंजक जरूर बिठाएं और छोटे बच्चों को खाना जरूर खिलाएं।
मां इससे ज्यादा खुश होती हैं रादर दैन बहुत सारे रिचुअल्स। और क्योंकि मैं हर लेख में यह कहती हूं कि हर एक इंसान को ना दीक्षा मिल पाती है, ना वो उसको साध पाते हैं, तो हमारे लिए जरूरी है कि हम उसको थोड़ा सिम्प्लिस्टिक बनाएं, ऐसा बनाएं कि एक आम आदमी भी कर सके।
पीरियड्स में पूजा का मिथक
और एक और बात, सब 10 महाविद्या में आप पीरियड्स में पूजा कर सकते हैं क्योंकि मां के यह उग्र फॉर्म होते हैं और मां कामाख्या जो इनके ऊपर, इन 10 महाविद्याओं के ऊपर जो डेटी हैं, वो हैं मां कामाख्या और मां कामाख्या के टेम्पल में भी जो है हम देवी की ही पूजा करते हैं और उनकी हम मेंस्ट्रुएशन में ही पूजा करते हैं।
तो जब हम… मतलब ये सवाल बहुत बार आता है कि नवरात्रि में ऐसा हो गया या अगर हम 10 महाविद्या की पूजा करें तो क्या हम हाथ ना लगाएं? ऐसा नहीं है। और मां भैरवी यही कहती हैं, कोई डिफरेंस नहीं है किसी भी इंसान में, आदमी और औरत में, शुद्ध-अशुद्ध, पवित्र-अपवित्र, महाविद्या इनके ऊपर हैं।
यानी कि एक तरह का मिथ है इसको लेकर क्योंकि मां फर्क नहीं कर रही हैं किसी में, उसके लिए तमाम बच्चे अपने एक जैसे, एक बराबर हैं।
मां काली और मां भैरवी का संबंध
बीच में जिस तरह से जिक्र हमने किया कि मां काली और मां भैरवी, मतलब एक तरह से एक अंश, एक रूप कहीं ना कहीं वो रिलेट करता दिखता, एक जैसा है। क्या मां भैरवी मां काली का ही एक रूप हैं? बहुत ही बढ़िया क्वेश्चन है, यह मेरा फेवरेट है क्योंकि बहुत सारे लोगों को मां भैरवी और मां काली के इमोशन में डिफरेंस नहीं पता। मां काली ट्रांसफॉर्मेशन की देवी हैं और मां भैरवी डिस्ट्रक्शन की देवी हैं। ट्रांसफॉर्मेशन मतलब कोई चीज का खत्म होना और बिल्कुल ट्रांसफॉर्म होके एक नया रूप आना।
मेरी जीवन में बहुत बार ट्रांसफॉर्मेशन आ चुका है, मैंने अपना कॉर्पोरेट करियर एक तरीके से खत्म किया और मैं स्पिरिचुअल साइड पे आई, ये ट्रांसफॉर्मेशन है। कहना बहुत आसान है, करना और इसके थ्रू गो करना बहुत मुश्किल है। लेकिन मां भैरवी केवल डिस्ट्रक्शन करती हैं। इसका मतलब अगर आपने उनको साध लिया और आपने उनको ये रिक्वेस्ट की कि मुझे ये चाहिए, मुझे अपने जीवन से ये निकालना है, तो वो आपकी डिस्ट्रक्शन में हेल्प करेंगी।
डिस्ट्रक्शनट्रांसफॉर्मेशन का एक पार्ट है। तो ऐसा कह सकते हैं कि मां भैरवी अ… एक तरीके से मां काली को अ… जैसे हम कॉर्पोरेट वर्ल्ड में कहते हैं, रिपोर्ट करती हैं क्योंकि उनका एक… वो उनका एक काम कर रही हैं, ट्रांसफॉर्मेशन का एक काम कर रही हैं जिसका नाम है डिस्ट्रक्शन।
अगर आपको कोई भी एनर्जी डिस्ट्रॉय करनी है तो आप मां भैरवी को वो करें और इनका जो चक्र होता है, इनका जो एलिमेंट होता है वो अर्थ होता है। तो वो अपने पैर को, ऐसा कहते हैं जब मां भैरवी अपने पैर को धरती पर जोर से रखती हैं तो एकदम भूकंप आता है और एक कपकपी सी होती है, अर्थक्वेक जिसको हम कहते हैं।
आप इसी पिक्चर को अपने जीवन में सोचिए, अगर आपने उनको साधा और उन्होंने अपना पैर ऐसे रख दिया तो फिर जो रिक्वायर्ड नहीं है वो निकल जाएगा।
घर और कारोबार में मां भैरवी की स्थापना
इसके अलावा जो स्थापना की बात करें, आमतौर पर होता है कि आप जिसको पूजते हैं, वो फिर कोई देव हो सकता है, देवी हो सकती हैं। मां भैरवी की बात कर रहे हैं, क्या मां भैरवी की स्थापना घर या कारोबार, दोनों जगह की जा सकती है? या फिर इनमें से किसी एक जगह करनी चाहिए या दोनों जगह से बचकर हमें रखना चाहिए कि नहीं, कोई दूसरे विकल्प हैं, उनको साधने की तरफ जाएं हम? मां भैरवी की स्थापना दोनों जगह की जा सकती है।
आप सिर्फ उनकी पूजा कर रहे हैं, पूजा और अर्चना कर रहे हैं। लेकिन आपके लिए, आपके जीवन में मां काली की एनर्जी फील होनी बहुत जरूरी है। मतलब अगर आपको अपने जीवन में कुछ बहुत बड़ा पाना है, आपके बहुत दुश्मन हैं, आप एक बहुत बड़ी चीज को करने जा रहे हैं, तभी आप 10 महाविद्या की तरफ जाएंगे।
अगर आपका लाइफ बहुत अच्छा चल रहा है, आपका गृहस्थ जीवन है और आप बहुत खुशी-खुशी हैं तो मैं हमेशा कहती हूं आप कृष्ण भक्ति की तरफ जाइए। तो मां 10 महाविद्या को साधने का मतलब है कि आपका लाइफ का जो पर्पस है, वह बहुत बड़ा है, कुछ ऐसा आपको करना है और आपको कोई सपोर्ट नहीं कर रहा, आपको लोग धोखा दे रहे हैं, आपको एक एनर्जी की जरूरत है। अ… तो आप घर में भी स्थापित कर सकते हैं और कारोबार में भी स्थापित कर सकते हैं।
जिनकी फैक्ट्रीज़ हैं, उनको मां भैरवी को जरूर रखना चाहिए। अ… जिनकी बड़ी-बड़ी मशीनें हैं, बहुत लोगों के साथ डीलिंग्स हैं, अ… जिनके बहुत बड़े दुश्मन हैं, उनके लिए मां भैरवी जो है बहुत स्ट्रांग एनर्जी है। लेकिन एक बात याद रखिए, फिर हमें मां भैरवी को सरेंडर करना होगा, फिर हम रो नहीं सकते, फिर हम छोटा बच्चा नहीं बन सकते। हमको भी यह समझना होगा कि जो वो कर रही हैं, जो कह रही हैं, जो दिखा रही हैं, वो समझाएंगी नहीं।
ये समझाने की देवी नहीं हैं, ये बस एकदम गला काट देंगी और बस फिर खत्म, आप डील करिए उसके साथ। तो आपको पहले सरेंडर मोड में आना होगा तभी आप मां भैरवी की तरफ जाएं। और मां भैरवी के साथ हमेशा जो है भैरव रहते हैं।
और एक और बात कि मां भैरवी को साधने से पहले, आप इनकी स्थापना करें, इससे पहले आपको कम से कम 11000 गणेश मंत्र करने हैं और 11000 शिव जी के मंत्र करने हैं। इन दोनों को साध कर, इनकी रिक्वेस्ट करके, इनकी पूजा करके ही आप किसी 10 महाविद्या, स्पेशली मां छिन्नमस्तिका, मां भैरवी, मां काली, मां तारा और मां धूमावती, इनको करके ही आप इन बहुत स्ट्रांग एनर्जीज़ को जो है ला सकते हैं।
आधुनिक जीवन और कर्म का महत्व
लेकिन अभी मॉडर्न वर्ल्ड की बात करें जहां अभी हम हैं, एक दौर होता था, सैटिस्फैक्शन था लाइफ में, बहुत ज्यादा लालच नहीं था, बहुत कुछ पाने की चाह नहीं थी। लेकिन आज के इस मॉडर्न वर्ल्ड में सब कुछ पाना चाहता है इंसान और इसमें कोई अछूता नहीं बचा है। तो यानी कि आप ये समझिए कि हर शरीर के भीतर वो असुर है, वो बुराई है।
उस असुर और बुराई के साथ वो कैसे मां भैरवी को साध सकता है? सबसे पहले उसे वो खत्म करना होगा? अगर वो लेकिन इसके साथ अगर साधता है, क्या चीजें उलट हो सकती हैं? नहीं, उलट नहीं हो सकतीं। आपके अंदर अगर असुर है तो आपके अंदर मां भैरवी भी हैं क्योंकि आपकी ऑलरेडी एक साइकिल चल रही है।
असुर आपको एक तरीके से लेके जा रहा है, मां भैरवी उसको एक तरीके से किल कर रही हैं। अगर आपको उनको साधना है तो आपको अपने माइंड से साधना होगा, अपने बिहेवियर से, अपनी इच्छाओं को देखना होगा कि क्या मेरी इच्छा ठीक डायरेक्शन में है कि नहीं।
क्योंकि मां भैरवी या कोई भी 10 महाविद्या आपको एक ही डायरेक्शन में लेके जाएगी और वो डायरेक्शन सिर्फ सक्सेस की नहीं होगी, अच्छे कर्म की भी होगी। तो मैं कहूंगी कि अगर आपको किसी भी महाविद्या को साधना है, आप अपने कर्म को नोटिस कीजिए और कर्म केवल करने वाला नहीं होता, सोचने वाला भी होता है।
तो अगर आप सोच रहे हैं कि यह मेरे सामने बैठा है, मैं इसका कैसे फायदा उठाऊं, तो आप मां भैरवी की जितनी मर्जी पूजा कर लीजिए, आप उसको साध नहीं पाएंगे। बहुत लोग अपने वाइव्स की इज्जत नहीं करते, बहुत लोग अपनी बेटियों को मारते हैं, अ… लेडीज की इज्जत नहीं करते और फिर जाकर मां कामाख्या में अपना सर पटकते रहते हैं और कहते हैं मैं देवी का साधक हूं।
लेकिन मैं यह कहती हूं कि अगर आप एक बेसिक लेवल पे जो देवी का लाइव रूप है, व्हिच इज अ वुमन, उसी का तो शोषण कर रहे हैं आप, उसी का बुरा चाह रहे हैं।
अगर आपको मां भैरवी या किसी भी दस महाविद्या का बहुत ज्यादा इफ़ेक्ट चाहिए तो आप लेडीज को सपोर्ट करें। आप ऐसे देखिए जिनके पास घर नहीं है, खाना नहीं है, उनके बच्चों की शादी नहीं हो रही, उनके पास कोई सपोर्ट नहीं है, आप उनके साथ काम करिए। आप मां भैरवी को उसके बाद केवल एक मंत्र से भी साध सकते हैं।
मां भैरवी साधना रहस्य की निरंतरता और समय
यह माना जाता है और यह कहा भी जाता है कि मां काली से इसलिए बार-बार हम रिलेट कर रहे हैं क्योंकि उनके रूप और उनके बारे में बहुत सारी बातें हमेशा होती रहती हैं।
लेकिन मां भैरवी के बारे में बहुत कम बातचीत होती है और आज जो तमाम पाठकपढ़ रहे हैं, उन्हें एक क्लैरिटी भी यहां पर आ रही है कि मां भैरवी कौन हैं, उनका रूप-स्वरूप किस तरह से है। लेकिन जो समय मां काली के लिए कहा जाता है कि अगर आप उनको पूज रहे हैं तो फिर वो आप रेगुलर रहें, आप उसमें फिर आप छोड़ नहीं सकते हैं चीजों को बीच में।
तो क्या मां भैरवी को लेकर भी इसी तरह की बातें हैं कि आप अगर एक बार मां भैरवी को पूजने लगे, आपको उनका पूजन, उनकी साधना रेगुलर रखनी होगी?
साथ ही साथ, क्या दिन का समय होना चाहिए उनकी साधना के लिए? क्योंकि बड़ा फर्क पड़ता है क्योंकि हम ग्रह-नक्षत्र के हिसाब से भी बहुत सारी चीजों को सोचते हैं। तो क्या इसका भी प्रभाव पूजा और साधना पर पड़ता है? जी, सब दस महाविद्या की जो पूजा होती है, वो रात के 9:00 बजे के बाद ही होती है।
तो आप अगर कर रहे हैं तो करें। साधना बहुत ज्यादा ना करें क्योंकि अगर आपके पास सही नॉलेज नहीं है तो ये हमें नहीं करना चाहिए। अगर आप उनका मंत्र कर रहे हैं तो आप सुबह भी कर सकते हैं, शाम को भी कर सकते हैं। आप मंत्र का एक संकल्प ले सकते हैं कि मैं 40 डेज तक मां भैरवी का करूंगा।
तो आपने शुरू में ही बता दिया कि मैं 40 डेज करूंगा। तो आप 40 डेज जो है 9:00 बजे के बाद करें और जो उनके मंत्र, जितने भी आपने मंत्र उच्चारण सोचे हैं, वो करें।
यह तब होगा जैसे हम एंटीबायोटिक लेते हैं, अगर हमें कोई बहुत अचानक से हेल्प की जरूरत है, हम बॉडी को वेट नहीं कर सकते कि खांसी और बुखार खुद ठीक हो या स्टेरॉयड लेते हैं, तो 10 महाविद्या एक इस टाइप की एनर्जी है। तो आप क्या कर सकते हैं कि आप 40 दिन का कर सकते हैं और फिर 40 दिन खत्म होने के बाद रोज सुबह एक नॉर्मल उनकी एक माला, सिंपल सी जो है वो कर सकते हैं।
मां भैरवी के दो स्वरूप
मां भैरवी के दो फॉर्म हैं, थोड़ा सा उसको भी एक बार डिटेल में एक्सप्लेन कीजिए पाठकों के लिए, किस फॉर्म की पूजा-साधना करनी चाहिए? जी, मां भैरवी के दो फॉर्म्स हैं। एक बहुत फियर्स फॉर्म है जो बिल्कुल मां काली की तरह दिखता है, जिसमें उनके केश खुले हुए हैं, बहुत पावरफुल हैं और थोड़ा डराने वाला फॉर्म भी है।
ये फॉर्म डिस्ट्रक्शन का फॉर्म है। और दूसरा फॉर्म है जिसमें वो कमल के फूल के ऊपर बैठी हुई हैं, उनके हाथ में एक किताब है और अभय मुद्रा में, दान मुद्रा में, यू नो, वर मुद्रा में हैं वो।
तो अगर आपको अपनी लाइफ में सच में मां भैरवी की असली एनर्जी को लाना है तो आप उनकी फियर्स फॉर्म में ही पूजा करें जो रात को आप करेंगे। और अगर आपको उनका सौम्य फॉर्म चाहिए, मदर फॉर्म चाहिए तो आप उनकी कमल वाले पे भी कर सकते हैं।
निष्कर्ष: परिवर्तन ही जीवन का सत्य है
यानी कि यह स्पष्ट है कि जो मां का एक रूप होता है अपने बच्चों के लिए कि जब उसके ऊपर कोई कष्ट आता है, कोई विपदा आती है, कोई परेशानी आती है, तो तब वो जो रूप होता है उसका, वो मां भैरवी का वो असल रूप है।
और मां किसी भी रूप में हों, अपने बच्चे, अपने परिवार के लिए हमेशा अच्छा सोचती हैं और उसकी यही एक कोशिश रहती है कि मेरे बच्चे जो हैं, उनके लाइफ में कुछ भी जो बुरा उनके साथ है… इसको थोड़ा सा इस तरह से भी समझें कि हमारे पेरेंट्स, खासतौर से मां, कई बार आपके साथ ऐसे यार-दोस्त होते हैं, आपको लगता है कि वो आपके बचपन के बहुत अजीज दोस्त हैं लेकिन आप उनकी बुराइयां नहीं देख पा रहे होते जो आपकी मां देख पा रही होती हैं।
और वो चाहती हैं कि आप इनसे दूर हो जाएं। बहुत सारी ऐसी लत होती है आपकी लाइफ में, आपको लगता है कि नहीं, यह जो सब आप कर रहे हैं, यह सब ठीक है, लेकिन उसके प्रभाव बहुत बुरे होते हैं जिससे कि मां आपको दूर रखना चाहती हैं। और मां भैरवी भी यही आपके जीवन में करती हैं।
बस मां भैरवी को आपको बहुत अच्छे से समझना है, उनकी साधना को समझना है और फिर आप देखेंगे कि आपकी लाइफ में कितने और किस तरह के बदलाव हों।
एक आखिरी सवाल आज के इस लेख का, मां भैरवी जो 10 की 10 महाविद्या, उसमें से एक मां भैरवी का जो रूप-स्वरूप है, वो मुझे को इस तरह से और प्रभावित करता है मेरी लाइफ का थीम ट्रांसफॉर्मेशन है और डिस्ट्रक्शन इसका बहुत बड़ा पार्ट है।
तो मेरी लाइफ में डिस्ट्रक्शन आता ही रहता है, केओस आता ही रहता है। तो मैं मां भैरवी को बहुत मानता हूं और मैं उनको समय-समय पर उनकी साधना जरूर करती हूं।
इन्होंने मुझे बहुत प्रभावित किया है यह बता के कि सब कुछ चेंज रिलेटेड है, कुछ भी स्थिर नहीं है, कुछ भी स्थाई नहीं है। चेंज इज द रियलिटी ऑफ लाइफ।
डिस्ट्रक्शन होगी तो न्यू बिगिनिंग होगी, डिस्ट्रक्शन नहीं होगी तो न्यू बिगिनिंग नहीं होगी। मैंने अपनी लाइफ में ये बहुत हार्ड तरीके से सीखा है। तो मैं… मैं मां भैरवी को बहुत-बहुत क्लोज उनके साथ रिलेट करती हूं और वो मेरी हर रोज की पूजा का एक हिस्सा हैं।
समापन
थोड़ा सा समय अगर हम साधना को दें लेकिन उसको समझते हुए हम दें, कहीं ऐसा ना हो कि आप बहुत ज्यादा साधक होने के चलते जो है गलत भी कुछ कर बैठें, तो उनका भी हमें ध्यान रखना है।
अगले लेख में आपसे एक बार फिर से मुलाकात होगी और तब 10 महाविद्याओं में से एक मां कमलात्मिका के बारे में बात करेंगे और उनके बारे में भी जानेंगे कि इस मां के रूप का जो है हमारे जीवन पर कितना और कैसा प्रभाव है। नमस्कार।
महाविद्या त्रिपुर भैरवी साधन रहस्य Tripura Bhairavi Sadhana
महाविद्या त्रिपुर भैरवी साधन रहस्य Tripura Bhairavi Sadhana
महाविद्या त्रिपुर भैरवी साधन रहस्य Tripura Bhairavi Sadhana यह सवाल का जवाब जितने लोग दे पाएंगे, कोई भी दो लोगों को और मैं अपनी तरफ से एक छोटा सा वाउचर दूंगा, जितनी भी मेरी क्षमता है उसके हिसाब से मैं आप लोगों को दूंगा। गले में मुंडमाला धारण की। अब सवाल उठता है कि वह मुंडमाला है क्या? जितनी भी गुप्त योगिनियां हैं, उनकी अधिष्ठात्री देवी हैं।
वो जो अंश अंदर गया, वो सूक्ष्म वाक् के रूप में स्थापित हुआ। तो हर पल त्रिपुर भैरवी की स्थापना, कितनी भैरवियां होंगी और वह कैसे स्थापित होंगी? जिस आमन में जो देवी स्थापित हैं, उनके अंडर में एक तंत्र है या ऐसा कह लीजिए उनके अंडर में कुछ तंत्र हैं और जितने भी तंत्र हैं, उनके उपतंत्र हैं।
इनके मंत्र का जो हृदय है और जो अगली महाविद्या उनके मंत्र का जो हृदय है, वह सेम है और वह क्यों है, यह आपके कुल देवता के माध्यम से करते हैं।
डीएनए से सुना होगा आपने, भाई एक ही डीएनए चला आ रहा है। अग्नि तत्व, हिरण्यगर्भा, सुंदरता, भुवन, लय और फिर वापस से। फिर आप बोलेंगे तो साइकिल कंप्लीट हो गई, पर बाकी महाविद्या कहां से? वहां पर अब शुरू होता है असली शो।
राम-राम, नमस्ते। मैं आज रात को यह लेख लिख रहा हूं क्योंकि दिन में क्या है कि यहां पर बहुत सारा शोर आता है, तो मैं लिख नहीं पा रहा था और कुछ व्यस्तता के कारण अब शायद मैं कुछ दिनों तक लिख नहीं पाऊंगा।
इसलिए मैं एक साथ दोनों लेख यहीं पर बना रहा हूं। नवरात्र का समय है, चैत्र नवरात्र शुरू हैं, तो हमारी जो श्रृंखला थी 10 महाविद्या की, उसी को आगे बढ़ाते हैं और आज हम बात करेंगे पांचवी महाविद्या की, जो कि त्रिपुर भैरवी हैं।
पिछली महाविद्याओं का संक्षिप्त पुनरावलोकन
हमने क्या देखा ? जब कुछ नहीं था, सब कुछ काला था, काली। फिर हिरण्यगर्भा, पहला हिरण्य गर्भ, अग्नि तत्व, उसकी उत्पत्ति, मातारा। फिर हमने देखा कि कैसे इन तीन पुरों में सुंदरता को व्यक्त किया गया। उसके बाद हमने देखा कि कैसे भुवन तैयार हुआ, उस भुवन की अधिष्ठात्री देवी भुवनेश्वरी, जो सभी भुवनों को धारण करती हैं और सभी भुवनों का निर्माण करती हैं। अब भुवन तो निर्माण हो गए, अब आगे क्या?
त्रिपुर भैरवी : नित्य लय की अधिष्ठात्री देवी
तो जब कोई भी चीज का निर्माण होता है, तो उसका लय भी होता है। विनाश उचित शब्द नहीं है यहां पे, लय होता है। तो लय बहुत किस्म से होते हैं। एक होता है जो पूर्ण रूप से सर्वत्र हो और एक होता है नित्य हो। तो जो नित्य लय होता है, उसकी देवी हैं त्रिपुर भैरवी।
जैसे त्रिपुर सुंदरी तीन पुरों की सुंदरता को धारण करती हैं, वैसे ही त्रिपुर भैरवी तीन पुरों के भय को। रव है, नित्य जितने भी लय हैं, इनके आदेश के बगैर या यह कह लीजिए कि इनके बगैर नहीं होते। यही उस नित्य लय की अधिष्ठात्री देवी हैं।
त्रिपुर भैरवी साधन के विभिन्न रूप
भैरवी के बहुत रूप हैं। अन्नपूर्णा भैरवी हैं, भुवनेश्वरी भैरवी हैं, सकल सिद्धिदा भैरवी, कालेश भैरवी, रुद्र भैरवी हैं, कामेश्वरी भैरवी हैं, नित्या भैरवी हैं। बहुत सारी भैरवी हैं। कैसे? जितने भैरव हैं, उतनी भैरवी हैं। 64 भैरव हैं, 64 भैरवी हैं।
32 भैरव हैं, 32 भैरवी हैं। अष्ट भैरव हैं, अष्ट भैरवी हैं। आप जिस परंपरा में, जिस व्याख्या के अनुसार भैरव को रखेंगे, उसी व्याख्या के अनुसार भैरवी भी स्थापित हो जाएंगी क्योंकि वह भैरवी ही भैरव की शक्ति है।
जैसे हमारे शरीर में रक्त की कोशिकाएं बनती हैं और बिगड़ती हैं, तो जहां-जहां जैसे जब तक आपके शरीर में रक्त है, काली स्थापित हैं, उस रक्त का पान निरंतर करती रहती हैं।
जब तक इस दुनिया में रक्त है, तब तक काली हैं। जैसे ही आपकी कोशिकाएं खत्म हुईं, तो उस कोशिका को खत्म करने की जो अधिष्ठात्री देवी हैं, वह त्रिपुर भैरवी हैं। नित्य लय, हर एक क्षण में, हर एक वस्तु में, हर एक अवस्था में।
त्रिपुर भैरवी का स्वरूप और विवाद
एक बहुत इंपॉर्टेंट चीज है कि त्रिपुर भैरवी का जो रूप है, वह अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग तरीके से बताया गया है, तो वहां पर काफी डिस्प्यूट है। अब कहीं बताया गया कि भई वह अरुण वस्त्र में हैं, लाल वस्त्रों में हैं और आभा उनकी बहुत ही चमकदार है, रक्त चंदन का स्तनों पर लेप करती हैं, गले में मुंडमाला है। मुंडमाला उनकी जितने भी रूप हैं।
सभी रूपों में दिया गया है। कहीं पर वस्त्र के साथ हैं, कहीं पर वस्त्र के बिना। त्रिपुर भैरवी का जो एक्चुअल रूप है, मतलब मैं किसी धारणा की और किसी किताब की बात नहीं कर रहा हूं, पर जो त्रिपुर भैरवी का एक्चुअल रूप है, वो अगर आप उस पद्धति से या उस विधि से देखें, तो वह काली की तरह ही होना चाहिए।
विवस्त्र, में पुस्तक रखी गई है, अक्षमाला रखी गई है, अभय मुद्रा और वर मुद्रा तो होती ही है। बट मुझे ऐसा लगता है कि जितनी भी भैरवियां हैं, सबके अलग-अलग रूप हैं क्योंकि अलग-अलग मंत्र। तो जब मंत्र बदलते हैं, तो अधिष्ठात्री देवता का स्वरूप भी बदलता है।
अन्नपूर्णा भैरवी रुद्र भैरवी की तरह नहीं दिखती होंगी। रुद्र भैरवी कभी भी नित्या भैरवी की तरह नहीं दिखती होंगी। नित्या भैरवी कभी भी कामेश्वरी भैरवी की तरह नहीं दिखती होंगी। इनका सबका रूप अलग-अलग है और ये सब लय कर रहे हैं किस-किस स्थिति में, यह बहुत डिटेल विषय है।
त्रिपुर भैरवी मुंडमाला का रहस्य: 50 वर्ण और शब्द ब्रह्म
तो भैरवी जो हैं, वह गले में मुंडमाला धारण की हुई हैं और यह मुंडमाला वाली बात सभी प्रकार के रूपों में बोला गया है, व्याख्या हुई है। अब सवाल उठता है कि वो मुंडमाला है क्या? मैंने आपको बताया था, त्रिपुर सुंदरी जो हैं, शशि जब वह सुंदरता को व्यक्त करती हैं, तो वह शब्दों के रूप में करती हैं।
इसे हम शब्द ब्रह्म कहते हैं और वह शब्द ब्रह्म इन 50 मातृकाओं से निर्मित होते हैं, जो 50 मातृकाएं अ से लेकर क्ष तक हैं, जिनसे अक्षर बनते हैं। अ क्ष अक्ष से लेकर क्र में अग्नि तत्व, प्रज्वलित जो तत्व है, जिसके कारण उस सुंदरता का व्याप्त होना, प्रकट होना पॉसिबल हुआ है। तो जो अक्षरों से वह इस सुंदरता को व्यक्त करती हैं।
भुवन, भुवनेश्वरी इस भुवन को बनाती हैं, उन अक्षरों को धारण करते हुए, उन्हीं अक्षरों का लय करते हुए त्रिपुर भैरवी स्थापित रहती हैं। तो क्योंकि जिन अक्षरों का वह लय कर रही हैं, वह भी 50 हैं, तो जो मुंडमाला है, वह भी 50 वर्णों की ही होगी।
अब इस वर्णमाला में एक भेद है, बहुत, बहुत ही इंटरेस्टिंग सा भेद है। अ से लेकर अः तक जो हमारे 16 स्वर हैं, वे 16 भैरव हैं। उनकी अभिव्यक्ति भैरव के रूप में की गई, जो कि 16 कला मैंने आपको पहले बताया था। और क से लेकर क्ष तक जो वर्ण हैं, वह भैरवी हैं। वह पुरुष है, यह प्रकृति है। क से लेकर क्ष तक व्यंजनों को योनि कहा गया है।
सूक्ष्म वाक् और भैरवी की स्थापना
यह जो 50 मातृकाओं का उन्होंने ह्रास करने के बाद, उस 50 मातृकाओं की मुंडमाला को धारण करती हैं। यह सूक्ष्म वाक् के रूप में धारण करती हैं। जैसे मैंने बताया था, चार वाणियां हैं: परा है, पश्यंति है, मध्यमा है, वैखरी है। वैखरी लोकल भाषा में बोली जाती है।
तो जो वैखरी वाणी है, उस वैखरी वाणी में वह स्वर अभिव्यक्त हुए, पर उस वैखरी वाणी जब वह बाहर गई, तो उसका एक अंश अंदर भी गया और वह जो अंश अंदर गया, वह जो अंश अंदर गया, वह सूक्ष्म वाक् के रूप में स्थापित हुआ। तो हर पल त्रिपुर भैरवी की स्थापना होती रहती है, ताकि वह नित्य लय कर सकें आपके शरीर में, इस प्रकृति में, हर एक तत्व में।
मां ललिता की रथ वाहिनी और गुप्त योगिनियों की अधिष्ठात्री
एक और बहुत इंटरेस्टिंग बात है इनकी, जो त्रिपुर भैरवी हैं, वह मां ललिता की रथ वाहिनी, मां ललिता की रथ वाहिनी हैं, रथ को वो चलाती हैं। और जितनी गुप्त योगिनियां हैं, जितनी भी गुप्त योगिनियां हैं, उनकी अधिष्ठात्री देवी हैं। कुछ-कुछ ग्रंथों में, कहीं-कहीं पर इनके जो भैरव हैं, वह काल भैरव कहे गए हैं दक्षिणामूर्ति रूप में।
अब काल भैरव क्यों कहे गए? इनको कालरात्रि का स्थान दिया गया है। जैसा मैंने आपको बताया था, जो हमारी 10 महाविद्या हैं, वह चार त्रियों में विभाजित की हुई हैं: महाविद्या, महामाया, महामेधा, महास्मृति, महामोहा च भवती, महादेवी, महासुरी, प्रकृतिस्त्वं च सर्वस्य गुणत्रयविभाविनी। कालरात्रि, महारात्रि, मोहारात्रि च दारुणा। चार रात्रियां। इनको कालरात्रि कहा गया है।
पाठकों के लिए एक सवाल: चार रात्रियां
कालरात्रि में तीन देवियां हैं: कालरात्रि, महारात्रि, मोहारात्रि। इन तीनों में, इन तीनों कैटेगरी में कौन-कौन सी देवियां हैं, यह सवाल का जवाब जितने लोग दे पाएंगे, अगर ज्यादा लोग देंगे, तो जस्ट रैंडम लॉटरी से पिक करूंगा, कोई भी दो लोगों को और मैं अपनी तरफ से एक छोटा सा वाउचर दूंगा, जितनी भी मेरी क्षमता है उसके हिसाब से मैं आप लोगों को दूंगा।
और ऐसे अब मैं और भी सवालों की सीरीज चलाऊंगा, मतलब पांच सवाल होंगे और पांचों सवाल के जो पांचों सही जवाब देगा, उस इंसान को, वह कोई पुरुष भी हो सकता है, कोई महिला भी हो सकती है, उस इंसान को मैं अपनी तरफ से एक वॉच… ऐसे दो लोगों को चूज करूंगा, उनको एक वाउचर दूंगा, जो भी होगा छोटा-मोटा, जो भी मेरी क्षमता में होगा।
तो यह सवाल रहा कि कालरात्रि, महारात्रि, मोहारात्रि में कौन-कौन सी देवियां हैं? क्योंकि दारुणा रात्रि तो वैसे भी सबको पता ही है कि उसमें एक ही देवी है।
तो जो बची हुई देवियां हैं, उनकी कैटेगरी आप बताइए। तो जो और सटीक, एक बार में सटीक जवाब देना होगा, ट्रायल-एरर नहीं चलेगा कि आज बोल दिया, फिर कल बोल दिया, ना। जिस लेख में कहा, एक ही बार में जवाब आना चाहिए और उस समय काल के अंतराल के अंदर आना चाहिए। ऐसा ना हो कि वो क्रॉस कर जाए, फिर आप जवाब दे रहे हैं।
काली, त्रिपुर सुंदरी और त्रिपुर भैरवी का कार्यक्षेत्र
अच्छा, अभी देखिए क्या होता है। जहां-जहां पर, जहां-जहां पर रक्त है, वहां-वहां पर काली हैं। जहां-जहां पर सुंदरता है, वहां-वहां पर त्रिपुर सुंदरी शोडशी हैं। जहां-जहां पर नित्य लय होता है, वहां-वहां पर त्रिपुर भैरवी हैं। यह मुख्य देवी हैं।
अब ये देवी, लय तो सब, सब जगह हो रहा है, सर्वत्र हो रहा है, हर एक वस्तु में हो रहा है, उस प्रकृति में, तो कितनी भैरवियां होंगी और वो कैसे स्थापित होंगी? देखिए, जितने भी आमन हैं, सभी आमन में एक देवियां स्थापित की गई हैं।
जिस आमन में जो देवी, इस पर मैं एक लेख दूंगा बहुत डिटेल में। जिस आमन में जो देवी स्थापित हैं, उनके अंडर में एक तंत्र है या ऐसा कह लीजिए उनके अंडर में कुछ तंत्र हैं और जितने भी तंत्र हैं, उनके उपतंत्र हैं। त्रिपुर भैरवी इन सब की अधिष्ठात्री हैं।
कुल देवता और डीएनए: लय की प्रक्रिया
बहुत ही रहस्यमय देवी हैं, जैसा मैंने बताया कि इनका रूप मल्टीपल जगहों पर, मल्टीपल तरीके से दिया गया है। अस्त्र भी लोगों ने बदल दिए हैं। पर यह मेरी धारणा, मेरे अनुसार, वे विवस्त्रा हैं, मुंडमाला गले में है और बहुत ही रौद्र रूप है इनका, कालरात्रि हैं।
अब सवाल उठता है कि यह जो नित्य लय करते हैं, यह देवियां डायरेक्टली करती हैं क्या? नहीं, यह आपके कुल देवता के माध्यम से करते हैं। डीएनए से सुना होगा आपने, भाई एक ही डीएनए चला आ रहा है, है ना ? वह जो सिंगल सेल है, आरएनए स्ट्रक्चर है, वह कैसे काम करता है? कुल, आपके पित्रों के थ्रू।
तो जो कुल की देवी हैं, उन देवी के माध्यम से। अच्छा, इसमें भी बहुत सारे अलग-अलग चेन हैं, बहुत डिटेल टॉपिक है, इस पर भी मैं आगे एक लेख दूंगा। नित्य जितने भी तने भी लय की जा रही है, यह इसी तरीके से की जा रही है।
त्रिपुर भैरवी के मंत्र और उनका रहस्य
एक बहुत इंटरेस्टिंग सी बात इनके, इनके मंत्र। एक तो इनके मंत्र 17-अक्षरी होते हैं क्योंकि अगर कम अक्षरों का मंत्र दिया जाए, तो उसकी क्षमता, उसकी एनर्जी बहुत ज्यादा होगी। तो आमतौर पर इनके जो मंत्र हैं, वह 17 अक्षरों का होता है या 19 अक्षरों का होता है।
इनके मंत्र का जो हृदय है और जो अगली महाविद्या हैं, उनके मंत्र का जो हृदय है, वह सेम है। और वह क्यों है, यह मैं आपको तब बताऊंगा जब मैं अगली महाविद्या पर बात करूंगा, तो मंत्र का हृदय होता है, यह इस पर भी अगर आप चाहें तो मैं आगे एक लेख दूंगा। बट जो हृदय है, इन दोनों का सेम है और इन दोनों को एक पर्टिकुलर नाम से बुलाया जाता है,
एक और, अच्छा यह वीर रात्रि में आती हैं, यह कालरात्रि भी हैं और वीर रात्रि भी हैं, एक और बात थी जो कई जगहों पर शास्त्रों में मेंशन है, जिसको मैं थोड़ा सा खंडन करता हूं कि इनको एक ही तरीके से एक ही जगह पर स्थापित किया गया है।
जैसे कि मैंने बताया कि काल भैरव इनके भैरव हैं, पर यह बहुत रहस्यमय देवी हैं, एक जगह पर स्थापित नहीं होती हैं। इनकी स्थापना अलग-अलग रूपों में होती है और इनके भैरव भी बदलते हैं। जैसे मैंने बताया, बहुत सारी भैरवी। लेकिन कब बदलते हैं, इसका कहीं भी विवरण नहीं है। यह साधना का विषय है।
राहु और केतु: त्रिपुर भैरवी के मुख्य साधक
इनके जो मुख्य साधक हुए, वे राहु और केतु हैं। अब आप खुद ही समझ लीजिए, कितनी मायावी हैं ये। इनके मुख्य जो साधक रहे हैं, वह केतु और राहु रहे हैं। राहु-केतु के बारे में तो आपको पता ही होगा। अब वो कथा तो कहकर कोई फायदा नहीं क्योंकि कथा का लाभ तो आप कहीं से भी ले सकते हैं, वो तो बहुत इजीली अवेलेबल है।
सृष्टि-स्थिति-लय का चक्र और अगली महाविद्या
तो मैंने आपको बहुत पहले एक बात बताई थी कि जो भी, जो भी लय होता है, वह एक, जैसे सृष्टि है, फिर स्थिति है, फिर लय है और यह साइकिल है, चलता रहता है, है ना? तो जो नित्य, तो नित्य सृष्टि भी होगी। तो मतलब जैसे ही लय हुआ, वैसे ही वापस से वही सेम प्रोसेस शुरू हो गई।
वही अग्नि तत्व, हिरण्यगर्भ, सुंदरता, भुवन, लय और फिर वापस सेम। फिर आप बोलेंगे तो साइकिल कंप्लीट हो गई, फिर बाकी महाविद्या कहां से हैं? वहां पर अब शुरू होता है असली शो। यहां तक तो ठीक है, अब शुरू होगा इसके बाद असली शो।
त्रिपुर भैरवी श्रोताओं के लिए संदेश और कुछ
महत्वपूर्ण बातें
तो आपके बहुत सारे सवाल थे, अब मैं इस लेख में सवाल तो नहीं ले रहा हूं। इसको मैं यहीं पर विराम देता हूं और आपसे अब कुछ एक-दो विषयों पर बात करूंगा, यहीं बैठे-बैठे लिख रहा हूं इसके, इस लेख के बाद। और लेखों को आप पूरा पढ़ें।
जैसे मैंने आपको बताया, अगर आपने इस वेबसाइट को फॉलो नहीं किया तो करिए क्योंकि उससे आपको नोटिफिकेशन मिलेगी नए लेख कब आ रहे हैं। और आप लेख पूरा पढ़ेंगे तो आपको बहुत सारे सवालों के जवाब स्वतः मिलेंगे। कोशिश करिए कि एकांत में या शांत वातावरण में पढ़ें ताकि डिस्टरबेंसस ना हों।
आपको कोई डिस्टरबेंस बीच में होगी तो आप शायद पॉइंट मिस कर जाएंगे। बहुत फोकस के साथ पढ़ें और समय जब हो, तब आराम से पढ़ें। ऐसा कोई नहीं है कि आपको अभी, आज लेख आया तो आज ही पढ़ना है।
अगर आपको बहुत ज्यादा इंटरेस्ट आ रहा है उसमें, तो आप उसका पूर्ण लाभ लें, इसलिए आप ध्यान से, बहुत फोकस के साथ पढ़ें जब भी आप स्थिति में बैठकर पढ़ पाएं,
एक और बात है कि बहुत सारे लोग मेल लिखते हैं, मैं जवाब देने में थोड़ा लेट हो जाता है क्योंकि व्यस्त होने के कारण कई बार मैं देख नहीं पाता हूं मेल, तो थोड़ा क्षमा करिएगा उस चीज के लिए।
और कई बार मैं जल्दी-जल्दी में कुछ ऐसा रिप्लाई भी लिख दूंगा जो शायद मुझे ही बाद में लगा कि मैंने पूर्ण रिप्लाई नहीं था क्योंकि मुझे नहीं लगता किसी को वेट कराना अच्छा नहीं लगता है। पर हो सकता है कि मैं आपको किश्तों में आंसर दूं, बाद में कभी।
अगेन, मैंने कहा ना कि अगर मेरे को समय रहा तो मैं जरूर उस चीज को करूंगा। चलिए, एक और बात आपसे बस बोल देता हूं कि 10 महाविद्याओं की जो यह सीरीज है, यह कंप्लीट नहीं है।
क्योंकि मैं बहुत शॉर्ट में आपको बता रहा हूं चीजों को लेकर, बहुत, बहुत ही बेसिक सा वो दे रहा हूं। बाद में मैं और डिटेल में आऊंगा वन बाय वन क्योंकि अभी डिटेल देने का प्रश्न इसलिए नहीं उठता क्योंकि इंट्रोडक्टरी है ये।
मतलब आप बस जानिए उस चीज को। बहुत स्पेसिफिक मंत्र का एक्सप्लेनेशन और वह सब चीजें मैं अभी नहीं कर रहा हूं। वो मैं बहुत बाद में करूंगा।
जो सवाल है, वह आप मुझे मेल करके लिखिए, कमेंट पे नहीं क्योंकि एक जन ने कमेंट लिखा, दूसरा उसको पढ़ के… तो मेल पर लिखना उचित है, बाकी आपकी इच्छा है।
आप अगर मेरी बात ना सुनकर कमेंट पर लिख रहे हैं, तो उसका भी सम्मान करूंगा मैं। पर यह आपका ही नुकसान है क्योंकि फिर आपका अगर आंसर सही हो और आपको देख के किसी ने बोल दिया, तो फिर तो दो लोग, दो उम्मीदवार हो गए उस वाउचर के। चलिए फिर, आज्ञा लेता हूं आपसे और दोबारा आपसे मुलाकात होगी। नमस्ते, राम-राम।
bhagwati tripur sundari sadhana ka rahasya भगवती त्रिपुरा सुंदरी साधना रहस्य ph.8528057364राजराजेश्वरी षोडशी इनकी कृपा कैसे प्राप्त करेंगे ? क्या वह कर्म हो सकते हैं, वह क्या क्रिया हो सकती है जिससे इनका जो महाफल है वह अति शीघ्र प्राप्त हो जाए ? यही प्रश्न भगवान परशुराम ने श्री दत्तात्रेय से पूछा था त्रिपुरा रहस्य के अंतिम भाग में, अर्थात इसके जो माहात्म्य खंड है उसके अंतिम भाग में और आज यह लेख इसी बारे में है। वह क्या कर्म होना चाहिए, वह क्या क्रियाएं होनी चाहिए जिससे कि हमें धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष इन सभी की प्राप्ति हो, सौभाग्य हमारा चमक उठे ?
त्रिपुरा सुंदरी – त्रिपुरा रहस्य: एक सुलभ मार्ग
अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जो महाविद्या होती हैं, उनकी जो विधि होती है, उनका जो विधान होता है, बहुत ही क्लिष्ट सा होता है, बहुत ही गूढ़ भी होता है और सरल भी नहीं होता है। अक्सर आपको कई जानकार व्यक्ति, पंडित, योगी, तांत्रिक मिल जाएंगे जो महाविद्याओं के बारे में कहते हैं कि बिना गुरु की कृपा के इसको हमें स्वयं से नहीं करना चाहिए।
परंतु जब हम त्रिपुरा रहस्य को पढ़ते हैं और इसमें जिस प्रकार का संवाद आता है, उसमें जो विधि विधान बताए हैं, वह ऐसे हैं कि वह आप स्वयं घर बैठे बहुत ही सुलभ रूप से कर सकते हैं। इसी बारे में आज के इस लेख में चर्चा है। तो बिना किसी विलंब के इस लेख को आप साझा अभी से ही कर लीजिए, हमें फॉलो करना न भूलें।
और इसमें मैं आपको केवल भगवती त्रिपुरा सुंदरी के बारे में नहीं बताऊंगा परंतु मैं आपको यह भी बताऊंगा कि वह जो पांच देवता होते हैं उनकी भी कृपा किस प्रकार से प्राप्त की जाए, वह विधान भी इसी ग्रंथ में लिखा हुआ है। तो आइए अब बिना किसी विलंब के चर्चा को आरंभ करते हैं।
त्रिपुरा सुंदरी – पंच देवों को प्रसन्न करने की विधि
भगवान परशुराम ने जो श्री दत्तात्रेय से प्रश्न किया था कि किस प्रकार सामान्य जन को भी भगवती की कृपा, इनका महाफल अति शीघ्र प्राप्त हो, कृपया करके वैसा कोई विधान बताइए। तब श्री दत्तात्रेय कहते हैं, ध्यान सुन।
और फिर वह कहते हैं कि जिस प्रकार यहां पर आप भी ध्यान से सुनिए क्योंकि यहां पर हम आरंभ कर रहे हैं पंच देवों के साथ।
त्रिपुरा सुंदरी- पंचदेव कौन से होते हैं?
गणपति, शिव, सूर्य, विष्णु और शक्ति। इनकी भी कृपा हमें किस प्रकार से प्राप्त हो?
तो श्री दत्तात्रेय कहते हैं कि महादेव को जिस प्रकार अभिषेक देकर के उनकी कृपा प्राप्त हो सकती है, अभिषेक करके उनका। अब इसमें भी बहुत सारी बातें आ जाती हैं कि जल से अभिषेक का लाभ कुछ और होता है, दूध से अलग होता है, शहद से अलग होता है, वह अलग बात है। परंतु अभिषेक, नित्य अभिषेक आप करिए और फल देखिए।
फिर गणपति को यहां पर दत्तात्रेय कहते हैं कि गणपति को मोदक देने से ही वह जिस प्रकार से प्रसन्न हो जाते हैं। सूर्य देवता को केवल प्रणाम करने से ही वे जिस प्रकार से प्रसन्न हो जाते हैं। अब बात यहां पर आती है भगवान विष्णु की, क्योंकि भगवान विष्णु के बारे में कहा जाता है कि इन्हें प्रसन्न करना बहुत मुश्किल है और बात भी सही है।
अब जब आप सुनेंगे तब आपको समझ में आएगा कि ये मुश्किल भी है तो क्यों है। भगवान विष्णु को यदि हमें प्रसन्न करना है तब आप इनकी नित्य अलंकारों से इनकी सज्जा करिए अर्थात इनको सजाइए। अलंकार अर्थात ऑर्नामेंटेशन, इनको आप सजाइए।
इसलिए आपने देखा होगा कि वह तिरुपति जी का मंदिर हो या फिर इस्कॉन का मंदिर हो या फिर बांके बिहारी लाल का मंदिर हो, इनकी जब भी नित्य पूजा होती है इनको सजाया जाता है। सजाना इनको बहुत प्रिय है।
अब यह सरल भी है परंतु प्रतिदिन सजाने का अपना एक क्रम होता है, सजाने में आपका मन लगना चाहिए, अलग-अलग चीजें आती हैं, मुकुट आता है, वस्त्र आते हैं, बहुत सारी चीजें आती हैं। परंतु ये बाकी सभी विधान के मुकाबले यह सरल ही है। तो ये हो गए हमारे चार देवता।
त्रिपुरा सुंदरी – भगवती की नित्य पूजन का सरल विधान
अब बात आती है देवी की, शक्ति की, भगवती त्रिपुरा सुंदरी की। तो यहां पर किस चीज की पूजा करनी है, क्या पूजना है, वह मैं आपको थोड़े समय बाद बताऊंगा। परंतु पहले हम बात करेंगे कि क्या-क्या करना है, कब-कब करना है, कैसे करना है। बहुत ही सरल है ये। यहां पर श्री दत्तात्रेय कहते हैं, देखिए बात यहां पर बहुत सरल सी है।
हम इस वेबसाइट पर भी बहुत सारे रहस्यों को हम उजागर करते हैं, तत्वों की बात करते हैं, परंतु यह सब ज्ञान जो है, यह बिना भक्ति के विकार है। यह मैं नहीं कह रहा हूं, सभी संत, ज्ञानवान पुरुष कहते हैं।
इसी ग्रंथ में श्री दत्तात्रेय ने भी यह बात कही है कि ज्ञान जो है वह बिना भक्ति के किसी काम का नहीं है और जो भक्ति है वह माहात्म्य को समझने से आती है, पढ़ने से आती है, महिमा को जानने से आती है। इसी कारण माहात्म्य खंड त्रिपुरा सुंदरी का, त्रिपुरा रहस्य का पहले आता है।
त्रिपुरा सुंदरी – पूजन का समय और सामग्री
यहां पर श्री दत्तात्रेय कहते हैं कि पांच बेला में, बेला अर्थात शुभ मुहूर्त, बहुत सारे शुभ मुहूर्त आते हैं दिन में, उनमें से किसी भी पांच बेला में अर्थात जैसे अभिजीत मुहूर्त आता है, गोधूली बेला आती इत्यादि, तो किसी भी पांच बेला में आप इनकी पूजन करें।
नहीं हो सकता है तो किसी भी चार समय आप इनकी पूजन कर लीजिए। अच्छा, चार समय नहीं हो सकता है, दो संध्याओं में आप कर लीजिए।
दो संध्या नहीं हो सकता है, तीन काल आप इनकी पूजन कर लीजिए अर्थात प्रातः काल, दोपहर, संध्याकाल इत्यादि। ये जो तीन काल हैं, इसमें आप इनकी पूजन कर लीजिए।
यह भी नहीं हो पाता है तो आप जो समय होता है अर्थात जैसे उष, इसी ग्रंथ में आता है उष। उष का अर्थ हो गया जो सुबह से पहले का जो समय होता है, ब्रह्म मुहूर्त जिसे हम कहते हैं।
तब, प्रातः काल, मध्याह्न अर्थात दोपहर को, प्रदोष काल या फिर अर्ध रात्रि को ही किसी भी, या तो आप इन पांचों समय ही कर लीजिए फिर किसी भी एक समय में इनको पूजन कर लीजिए।
और किस चीज से करना है? गंध, पुष्प, जल, अक्षत, फल। इनमें से किसी से भी नहीं कर सकते हैं तो इनमें से किसी एक भी वस्तु से आप इनका पूजन करिए। यानी कितना सरल कर दिया है।
किसी भी एक समय, किसी भी एक वस्तु से, वह जल हो, पुष्प हो, गंध हो, गंध अर्थात धूप, केवल एक धूप। किसी भी एक समय यदि हो सके तो अर्ध रात्रि को दीपक आप जला लीजिए। अर्ध रात्रि को। यह तो नित्य पूजन हो गया अर्थात प्रतिदिन इसे करें। अब प्रतिदिन यह करना कोई मुश्किल बात नहीं है, हम कर सकते हैं।
त्रिपुरा सुंदरी – विशेष पर्वों पर पूजन
उसके बाद कब करें ? किसी भी शुभ पर्व पर या फिर शुक्रवार से, यह भी दिया हुआ है इसी में, शुक्रवार से या किसी भी शुभ पर्व पर। अच्छा, यदि कोई महापर्व है, कोई विशेष मुहूर्त आ जाता है, दिवाली इत्यादि आ जाता है, तब पांच समय आप इनकी पूजन कर लीजिए विधिवत।
अब यह तो हम कर ही सकते हैं वर्ष में एक या दो बार तो। अच्छा, उसके बाद में यदि हो सके तो वाहन में, मैं जिस चीज के बारे में अभी बताने वाला हूं, उसको आप नगर का, नगर की आप परिक्रमा करवा दीजिए। नगर की नहीं हो सकता है तो घर की परिक्रमा करवा दीजिए, जहां रहते हैं उसके आसपास की परिक्रमा करवा दीजिए।
त्रिपुरा सुंदरी – श्री यंत्र: पूजा का केंद्र
अब देखिए कि कहां हम बात करते हैं महाविद्याओं की जिसमें बहुत सारे विधि विधान आते हैं, मंत्र, तंत्र इत्यादि बहुत सारी बातें आ जाती हैं, क्लिष्ट हो जाता है।
और यहां पर त्रिपुरा रहस्य, जो भगवान परशुराम ने प्राप्त करा, जिसका रहस्य श्री दत्तात्रेय से, जिस ग्रंथ में बहुत सी गूढ़ बातें हैं, जिसके बारे में मैंने पिछले लेख में भी बताया था, बाकी भी जो लेख हैं उनमें बताया गया था कि इसी में सभी वेदों का सार है।
सभी आगम शास्त्रों का सार है, ज्ञान खंड आता है, जो बातें विज्ञान भैरव में हैं वह भी इसमें ही हैं, जो गीता में है, जो योग वशिष्ठ में है, वह सभी इसमें है और इसी में श्री दत्तात्रेय कितनी सरल रूप से बता रहे हैं भगवती त्रिपुरा सुंदरी का विधान।
अब यहां पर आता है कि किस चीज का पूजन करना है, अंततः यह तो पता ही होना चाहिए। तो यहां पर यह कहते हैं कि श्री चक्र राज का अर्थात श्री यंत्र का। अब श्रीयंत्र भी हमें बहुत ही सुलभ रूप से प्राप्त हो सकता है। या तो आप उसका जो ३डी वाला जो होता है, बड़ा सा आप वो ले लीजिए, वो नहीं आप अफोर्ड कर सकते हैं।
अभी तो तांबे पर ही आपको बहुत ही कम दाम में आपको कितने सारे वेबसाइट्स वहां पर से आपको प्राप्त हो सकता है। कुछ नहीं कर सकते हैं तो कागज पर आप उसे बना सकते हैं, परंतु उसकी एक विधि है जो मैं इसी वेबसाइट पर, इसी लेख श्रृंखला में जो हमारी त्रिपुरा की श्रृंखला चल रही है, उसी में मैं आपको बताने भी वाला हूं कि श्री यंत्र, श्री चक्र को बनाएं कैसे।
त्रिपुरा सुंदरी- अतिरिक्त उपाय और मंत्र जाप
फिर यहां पर यह कहते हैं कि उसी में, उसी श्री चक्र में सभी दिक्पालों का, सभी देवताओं का आप आवाहन करिए, इष्टदेव का आवाहन करिए, उसी में इसे देखिए और उसी से आपको महाफल प्राप्त हो जाएगा। महाफल, वह भी अति शीघ्र।
इतना सरल यह पूरा विधि विधान है, या फिर मैं यूं कहूं कि विधि विधान है ही नहीं। केवल एक धूप जलाना है, एक समय इनकी पूजन करनी है, आपको शुक्रवार से आप आरंभ कर सकते हैं या फिर किसी भी शुभ मुहूर्त पर आप इसका आरंभ कर सकते हैं।
फिर यह भी बोला है कि यदि हो सके तो आप इसी को ही आप जल देकर के इसका भी अभिषेक कर सकते हैं, इसी चक्र के सामने रुद्राभिषेक भी कर सकते हैं। साथ ही साथ यदि हो सके तो सहस्त्रनाम का पाठ कर सकते हैं और सहस्त्रनाम का भी पाठ नहीं हो सके तो श्री सूक्त का पाठ कर सकते हैं।
यदि वह भी नहीं हो पा रहा है तो ह्रीं का आप जाप कर सकते हैं। ह्रीं का एक बहुत अद्भुत सी बात यह है कि त्रिपुरा रहस्य का आरंभ होता है ॐ नमः से और अंत होता है त्रिपुर ह्रीं ॐ से। आरंभ होता है, ह्रीं पर समाप्त होता है। इसी में संपूर्ण ब्रह्मांड है, यही मैक्सिमा मिनिमम है।
त्रिपुरा सुंदरी – निष्कर्ष
तो अब बिना किसी विलंब के आप त्रिपुरा सुंदरी भगवती राजराजेश्वरी माता षोडशी की कृपा प्राप्त करने में जुट जाइए। बहुत ही सरल विधि है और यदि आपको यह जानकारी, यह सारी बातें सुंदर लगी हों तो कृपया करके इस लेख को साझा अवश्य करिएगा, कमेंट में हमें बताइएगा कि आपको कैसा लगा और कमेंट सेक्शन में जो पहला कमेंट पिंड है वहां से पेटीएम, जीपे इत्यादि के माध्यम से जितना अधिक हो सके आप हमें श्री सहयोग भी प्रदान करें। इसके साथ मैं आपसे जाने की अनुमति लेता हूं। धन्यवाद।
Tripur sundari sadhana त्रिपुर सुंदरी साधना – रोग नाश और यौवनता के लिए
Tripur sundari sadhana त्रिपुर सुंदरी साधना – रोग नाश और यौवनता के लिए
tripur sundari sadhana त्रिपुर सुंदरी साधना – रोग नाश और यौवनता के लिए – नमस्कार दोस्तों जय महाकाल जय माता श्मशानी। आज के पोस्ट में मैं सभी रोगों का नाश करने वाली त्रिपुर सुंदरी माता की साधना दे रहा हूं और उसका सरल अति सरल विधि विधान उसका बता रहा हूं मैं। जिस विधान कर सकता है परंतु इस विधान जो विशेष मंत्र दे रहा हूं उसे मंत्र के प्रभाव से अवश्य ही हमारी हर प्रकार की समस्या दूर हो जाती है।
त्रिपुर सुंदरी साधना – के मुख्य लाभ
मुख्य तौर से देखिए इस साधना को रोगों नाश के लिए किया जाता है मतलब किसी भी प्रकार का आपको रोग है या बीमारी है ये कमजोरी है जो कुछ भी है तो यह सारे रोग जो है इस साधना से जो है समाप्त हो जाएगी आपकी।
सबसे बड़ा लाभ तो यह होता है की हर प्रकार के रोग का नाश हो जाता है मतलब सर हर प्रकार के रोग जो है हमारे खत्म हो जाते हैं। और दूसरा जो लाभ साधना का है वह यह है की हमारी यौवनता जो है वह हमेशा बने रहती है।
हमेशा हमारी यौवनता बने रहती चाहे उम्र कितनी भी आगे क्यों ना बन जाए लेकिन हमेशा में हमारी यौवनता हमारी शक्ति हम मानसिकता शारीरिक शक्तियां हमारे हमेशा बने रहती है एक जैसी। तो यह तो मुख्य कारण है वजह जिस वजह से इस साधना को किया जाता है मुख्य लाभ में ।
त्रिपुर सुंदरी साधना की विधि
अब साधना को विधान बता दे रहा हूं। वैसे अभी गुप्त नवरात्रि चल रहा है नवरात्रि में आप साधना कर सकते हैं बिल्कुल कर सकते हैं बहुत अच्छा समय चल रहा है। ऐसे समय में ये साधना बहुत ही जल्द होती है और बहुत ही ज्यादा लाभदायक भी होती है। इसके अलावा इस साधना को आप किसी भी सोमवार के दिन से भी शुरू कर सकते हैं किसी भी सोमवार के दिन से।
त्रिपुर सुंदरी साधना की तैयारी और स्थापना
तब साधना विधि में बता दे रहा हूं। साधना विधि देखिए इस प्रकार से हैं दिशा आपकी पूर्व रहेगी चौकी लगानी है उसके ऊपर पीले रंग का नया एक वस्त्र बिछाना है आपको और आपको जो है एक घी का एक दीपक लगाना है अपनी तरफ मुख करके एक बाती वाला और उसके सामने जो है थोड़ा सा अक्षत आपको चाहिए चावल चाहिए बिना टूटे हुए।
ऐसे अक्षत को आपको 16 हिस्से में रखना है तो 16 से मैं कैसे रखोगे मतलब एक लाइन में आप उसे चावल को चार हिस्सा करोगे चार हिस्सा करोगे इस प्रकार से चार लाइन आप बनाओगे तो आपका 16 जो है 16 चावल के ढेर जो है वह बन जाएंगे अलग-अलग।
ढेरो के ऊपर स्थापित करेंगे कच्ची हल्दी की जो टुकड़े आते हैं चल जो मिलती है उसके अब को छोटे-छोटे टुकड़े कर लेने हैं मतलब एक आधी उंगली से भी कम मतलब ऐसे टुकड़े एक टुकड़ा मतलब बिल्कुल छोटा करना है।
तो ऐसा एक छोटा एक टुकड़ा मतलब एक हिस्से में आप एक टुकड़ा रखेंगे इस प्रकार से सोलह सोलह सोलह जो हिस्सा आपने बनाया है चावल का तो उसमें 16 स्थान पर 16 आप हल्दी का जो कच्चे हल्दी का 16 टुकड़ा करके 16 जगह में आप स्थापित करेंगे।
त्रिपुर सुंदरी साधना विधि – मंत्र जाप और पूजा
इसके पक्ष आप जो है थोड़ा सा चुटकी मतलब माता का जो मंत्र होता है वह मंत्र पहले बता देता हूं वह मंत्र आपका इस प्रकार से हैं ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः। तो इस मंत्र को बोलते हुए एक बार बोलोगे तो थोड़ा सा दूर्वा कुमकुम जो है कुमकुम स्टार ने जो है कुमकुम का इस्तेमाल करिए इसमें से दूर का मत करिए कुमकुम का इस्तेमाल करें वो ज्यादा अच्छा रहेगा थोड़ा सा कुमकुम उसपे छोड़ देना।
इस प्रकार से 16 बरस मंत्र को बढ़ते हुए सोलह स्थान पर आपको इसका कुमकुम को थोड़ा सा छोड़ देना। यह पवित्रीकरण का मैं मंत्र दे चुका हूं उसको पवित्रीकरण के मंत्र से अपने में उसे अपने हाथों में जल लेकर उसे मंत्र के द्वारा पवित्रीकरण अपना कर लीजिए।
पूर्ण इत्यादि पवित्र स्थिति में साधना करनी है। भोग में देखिए आप मिष्ठान्न या मीठी कोई भी वस्तु के इत्यादि अब भोग में अपने अनुसार लगा सकते हैं या फल भी लगा सकते हैं कोई फल अप लगा सकते हैं दो प्रकार का फल लगा लिए बहुत। तो इस प्रकार से यह साधना होगी। अब इसमें कुछ पुष्प अर्पित कर दें आसन को कुछ लाल पुष्पों से या पीले पुष्पों से अब सजा ले।
त्रिपुर सुंदरी साधना में जाप का क्रम और समय
इस साधना को जो सबसे पहले तो देखिए इसमें जो है आपका जो बैठने का आसन होगा वह लाल होगा ठीक है माता का जो आसन होगा वो पीला होगा दिशा आपकी पूर्व होगी। इसमें जो है सबसे पहले गणेश जी के किसी भी मंत्र का आपको 108 बार पाठ कर लेना है।
इसमें वैसे माला विशेष मायने नहीं रखता आप किसी भी माला से कर सकते हैं ऐसा कोई बंधन नहीं है। तो 108 बार गणेश जी के मंत्र का पाठ कर ले यह आपके गुरु है तो सबसे पहले तो गुरु मंत्र का 108 बार पाठ कर ले उसके बाद गणेश जी के मंत्र का 108 बार पाठ कर ले उसका शिव मंत्र का 108 बार पाठ कर ले शिव के किसी भी मंत्र का।
उसके बाद श्री माता का जो मंत्र मैंने दिया है ॐ श्रीं त्रिपुर सुंदरी नमो नमः त्रिपुर सुंदरी माता का जो मंत्र दिया है मैंने उसे मंत्र का आपको 11 माला पाठ करना है।
समय क्या रहेगा समय आपका यह सुबह का समय भी हो सकता है सुबह 9:00 से लेकर शाम 5:00 बजे के बीच में या फिर शाम 6:00 बजे से लेकर मतलब संध्या से लेकर के रात 9:00 बजे के बीच में यह साधना सुबह या शाम के समय आप कर सकते हैं इस समय के अंदर का वो करनी है।
त्रिपुर सुंदरी साधना की अवधि और समापन
11 माला त्रिपुर सुंदरी माता का जो मंत्र दिया उसे 11 माला आपको पाठ करना है। अगर आपको जैसे थोड़ी बहुत समस्या है मतलब थोड़ी बहुत बीमारी मतलब थोड़ी बहुत अगर समस्याएं हैं आपको तो आप मात्रा तीन दिन साधना करेंगे मात्रा तीन दिन की अप्रत्यक्ष साधना होगी यह आप करेंगे।
उसके पक्ष सारी सामग्री भोग इत्यादि जो चढ़ता है वह एक साधना हो जाने की पक्ष एक घंटे बाद उसको स्वयं ग्रहण कर लेना है ठीक है। और इसके अलावा जो सामग्री बचती है 3 दिन की साधना में तो उसे सामग्री को आपको बहते हुए जल में विसर्जित कर देना है किसी भी जल में नदी तालाब तो कर इत्यादि में मतलब बहते हुए जल में भी शरीर कर देना है।
जिसको कम समस्या है उसके लिए और उसको बहुत ज्यादा समस्या है बहुत ज्यादा रोग है बहुत ज्यादा समस्या है उसको यह साधना कम से कम 9 दिन तो करनी चाहिए।
9 दिन करने से हर प्रकार की बड़ी से बड़ी बीमारी भी अगर होगी समस्याएं होगी तो वो समस्या दूर हो जाएगी और ये यौवनता की भी प्राप्ति होगी साथ में दोनों चीज होगी। तो उसके बाद फिर इन सब चीजों को अब विसर्जित कर दीजिए 9 दिनों के बाद साधना होने के बाद।
सुरक्षा घेरा कैसे बनाएं – साधना में सुरक्षा घेरा की आवश्यकता
सुरक्षा घेरा कैसे बनाएं – साधना में सुरक्षा घेरा की आवश्यकता
सुरक्षा घेरा क्यों आवश्यक है?
आज हम लोग डिस्कस करेंगे कि किस प्रकार आप सुरक्षा घेरा बना सकते हैं। अब देखो, हम सब लोग मंत्र जाप करते हैं, ध्यान करते हैं, कई बार साधना करते हैं और हमें बहुत डर लगता है कि अगर साधना करते वक्त, मंत्र जाप करते वक्त अगर नकारात्मकता यानी कि नेगेटिविटी हमने आकर्षित कर ली तो?
पोस्ट पढ़ी क्योंकि आप लोगों ने ना कई बार मेरी वीडियो भी देखी है और बहुत से लोगों की पोस्ट पढ़ी है, जो लोग बताते हैं कि मंत्र जाप अगर आप बिना प्रोटेक्शन के करते हो तो नेगेटिविटी आ जाती है। तो किस प्रकार प्रोटेक्शन बनाई जाए? किस प्रकार आप अपना सुरक्षा घेरा बना सकते हो मंत्र जाप करते वक्त, एक बिगिनर के लिए भी और एक एडवांस साधक के लिए भी?
दोनों के ऊपर आज हम लोग डिस्कस करेंगे। इस प्यारी सी पोस्ट में एंड आपको इन्फॉर्मेशन देंगे सुरक्षा घेरे के बारे में। लगभग मैंने पाँच पॉइंट अपने नोट्स में बनाए हैं, ताकि मैं टॉपिक से ना भटकूँ और उन पाँचों पॉइंट को डिस्कस कर सकूँ बहुत सारी बारीकियों के साथ।
तो आप जुड़े रहिए। देखिए, कोई भी डाउट अगर आपको आता है तो डेफिनेटली आप मेरे कमेंट सेक्शन में, मेरे इस लेख के, मुझे बता सकते हैं। हम लोग इस प्यारी सी पोस्ट को शुरू करेंगे जय माता दी के साथ। आप देख रहे हैं माँ आदिशक्ति मेडिटेशन केंद्र। हम सबके छोटे से प्यारे से वेबसाइट में आप सभी लोगों का हार्दिक स्वागत है।
सुरक्षा घेरा बनाने की विधियाँ
1. दीपक का प्रयोग (शुरुआती साधकों के लिए)
सबसे पहला पॉइंट होता है, देखिए, अगर आप मंत्र जाप कर रहे हैं और अगर आप आसन पर बैठकर जाप करते हैं, तो सबसे अच्छा होता है तरीका, एक बेसिक तरीका सुरक्षा का, कि आपके सामने दिया जल रहा हो।
अगर आपके सामने दिया जल रहा होता है, सामने आपने दिया जला लिया है, एक बाती लगाकर घी का दीपक अगर आप जला लेते हैं, तिल के तेल का दीपक अगर आप जला लेते हैं, तो आपकी सुरक्षा एक बेसिक-बेसिक मंत्रों के लिए, बिगिनर के लिए होती है।
अब अगर आपको ज़्यादा ही नकारात्मकता महसूस होती है, डर लगता है कि आपके घर में नकारात्मकता है, इस केस में क्या किया जाए? इस केस में उस दीपक की एक बाती ना करके चौमुख, यानी कि चारों डायरेक्शन में बाती लगाकर जला देनी चाहिए आपको।
भैरव जी के नाम से, हनुमान जी के नाम से, या इष्ट के नाम से या कुलदेवी के नाम से आप जला सकते हैं।
जो भी आपको लगे कि आपको उन पर ज़्यादा ट्रस्ट है, इष्ट पे ज़्यादा ट्रस्ट है, तो आप सुरक्षा के लिए, जो कि मूल रूप से या तो बजरंग बली या तो भैरव जी के लिए या माँ के लिए, कुलदेवी के लिए जलाई जाती है, चौमुख।
आप चाहो तो आपके पास अवेलेबल नहीं हो चौमुख, तो आप आटा गूँदकर भी अपनी मॉम की हेल्प लेकर या आपको खुद से भी आता हो, तो उससे भी आप चौमुख दीपक बनाकर, यानी कि चार मुँह वाला दीपक बनाकर या नॉर्मल से दीपक में भी चार बातियाँ लगा के, चारों डायरेक्शन में रखकर
उसमें क्या होता है, चारों दिशाओं से आपकी सुरक्षा होती है, ऐसी प्रार्थना कर कर आप सामने बैठकर मंत्र जप अगर करते हो, तो आपकी सुरक्षा होती है एक बिगिनर लेवल पर, एक तरीके से जब आप बेसिक साधना कर रहे हो तो।
2. अभिमंत्रित पीली सरसों
दूसरा आता है, अगर आपका मंत्र थोड़ा बहुत जाग्रत है तो आप इस दूसरे मेथड को कर सकते हो। सपोज, अब आपने ‘ओम नमः शिवाय’ का लगभग थोड़ा बहुत जाप किया हुआ है। अब आपको बगलामुखी माँ की साधना करनी है, थोड़ी एडवांस साधनाएँ, या आपको माँ काली की करनी है। इस केस में सुरक्षा कैसे की जाए?
अगर आपको डर लग रहा है कि कुछ गड़बड़ हो सकता है। इस केस में क्या किया जाता है कि आप ना अपने साथ कुछ पीली सरसों ले लेते हो। यह देखो, ये उन्हीं के लिए है जिनको लगता है उनका मंत्र थोड़ा बहुत एक्टिवेटेड है, पुराना वाला, नया सिद्ध कर रहे हैं तो।
इस केस में क्या होता है ना, आपको मैं एक अनुमान दे देता हूँ कि अगर आपने लगभग 3 महीने तक कोई मंत्र जपा है, लगभग-लगभग रोजाना आधा घंटा या 15-20 मिनट या ज़्यादा भी दिया तो बहुत अच्छा है, तो आप इस विधि को अपना सकते हैं। अदरवाइज नहीं, अदरवाइज पहली वाली आपके लिए सही है और जो मैं आगे बताऊँगा, वो आपके लिए सही है। इस केस में क्या किया जाता है ?
इस केस में आराम से आसन पर बैठकर एक पेपर में या एक कटोरी में आप पीली सरसों लीजिए। आप लगभग 2 मिनट तक मानसिक रूप से उस मंत्र का जप कीजिए और उस भगवान का ध्यान कीजिए, उन भगवान का जिनका आपने मंत्र जप किया है। प्रार्थना कीजिए, यह मंत्र जप मन में चलाइए और तीन बार उस पीली सरसों में आपको ब्लो करना है, फूँक मारनी है।
इसके बाद आपको इस उँगली को छोड़ के, इन दो फिंगर, मिडिल वाली और ये थंब से उठाकर 10 दिशाओं में थोड़ा-थोड़ा आपको यह फेंकना होता है साधना में जब आपने घेरा बनाया सुरक्षा का।
तब लेकिन मैं आपको एक बात बता दूँ, सुरक्षा घेरा बनाने के बाद आपको उठना नहीं होता है। अगर आप उठ गए हो ना, सुरक्षा घेरा ओपन हो जाता है।
फिर आप आसन पे बैठेंगे, तब आप फिर से बनाएँगे। दिए वाले केस में नहीं है, दिया तो परमानेंट जल रहा है। इस पीली सरसों वाले केस में होता है। तो जब आप दसों दिशाओं में फेंक देंगे, यानी चार आगे, चार पीछे, एक ऊपर, एक नीचे, इस केस में आपकी दसों दिशाओं लॉक्ड हो जाती हैं, माफ़ कीजिएगा, और कोई भी नकारात्मकता आपके इस घेरे में नहीं आ पाती है।
यह थोड़ा सा एडवांस वाला होता है। देखो, हम लोग तो सात्विक साधक हैं, सात्विक साधनाएँ करते हैं, लेकिन जो तंत्र मार्ग में होते हैं ना, जो बहुत अलग साधनाएँ करते हैं, उस केस में बड़े-बड़े लेवल पर भी ये साधनाओं में इस सुरक्षा घेरा का इस्तेमाल किया जाता है।
लेकिन आमतौर पर देखो, जो लोग मेरे साथ मेडिटेशन क्लासेस में जुड़े हैं ना, उन्हें मैंने यह प्रोसेस बगलामुखी की साधना में करवाया था। लेकिन क्योंकि हम लोग जुड़ के करते हैं ना, तो ज़रूरी नहीं है कि मैं हर किसी को यह प्रोसेस करवाता हूँ।
कई बार कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनके घर में पहले से नेगेटिविटी होती है ना, उन्हें कई बार मैं प्रोसेस करवाता हूँ। अदरवाइज जब आप किसी से कनेक्ट हो के साधना, आराधना या मंत्र जप सीखते हो या करते हो, तो सुरक्षा घेरे का आपको इस्तेमाल इतना नहीं होता।
अभी आगे उस टॉपिक पर आऊँगा, पहले मैं पाँचों पॉइंट डिस्कस कर लेता हूँ। फिर आगे हम और लोगों पर भी आते हैं, जो गुरु-दीक्षित हैं या जिनके इष्ट प्रबल हैं, उस टॉपिक पर आएँगे।
3. संकल्प का जल
अगला जो हमारा आता है, यह मेथड बहुत कॉमन है और मेरे मेडिटेशन ग्रुप में और मेरे चैनल को जो बहुत पूर्व से देखते आ रहे हैं ना, वो लोग ऑलरेडी फॉलो करते हैं।
संकल्प के जल से आप सुरक्षा घेरा बना सकते हो। किस प्रकार बनाया जाता है, पता है? आपको क्या करना है, अपने दाहिने हाथ में जल लेना है आसन पर बैठकर।
इस समय पर दीपक जल रहा हो तो बहुत अच्छा है, क्योंकि यह एडवांस लेवल का ऑरा लॉक करता है, आपका सुरक्षा घेरा बनाता है।
आपको दाहिने हाथ में जल लेकर ना प्रार्थना करनी होती है अपने इष्ट से, या आप हनुमान जी से या भैरव जी से प्रार्थना कर सकते हैं कि आप साधना करने जा रहे हैं, आपके संकल्प से और इस अग्नि को साक्षी मान के आप यह संकल्प लेते हुए, ऐसी प्रार्थना करके, अपना नाम बोलते हुए, अपने पिता का नाम बोलते हुए (जो महिलाएँ होती हैं, वो पिता का नाम बोलती हैं, लेकिन शादी के बाद पति का नाम बोलती हैं) से प्रार्थना करके, आपको प्रार्थना करनी होती है कि आप साधना करने जा रहे हो, कितने समय के लिए करोगे, एक घंटे के लिए करोगे।
ड्यूरिंग दैट पीरियड जब मैं साधना कर रहा हूँ, तो मुझे आप सुरक्षा प्रदान करना। ऐसे प्रार्थना करके जल को जो है, थोड़ा-थोड़ा अपने चारों दिशाओं में ऐसे गिरा दें, घेरा बना के गिरा देना होता है। ऐसा नहीं प्रॉपर घेरा बने, बट एज़ अ रिचुअल हल्का-सा घुमा के गिरा दिया जाता है। इस केस में आपका संकल्प से घेरा बन जाता है, आपके जाप की ऊर्जा से जो कि आपको बचाता है। इस केस में भी आपका थोड़ा बहुत मंत्र जाप पूर्व का होना चाहिए।
एज़ अ बिल्कुल बिगिनर अगर मैं हूँ, मैंने कोई चालीसा, कोई स्तोत्र, कुछ भी नहीं किया है अगर आज तक, तो यह घेरा आपके लिए काम नहीं करेगा। इस केस में आपके लिए दीपक का घेरा या चौमुखा वाला दीपक काम करता है। करेक्ट? लेकिन अगर आपकी कुलदेवी की एनर्जी थोड़ी सी घर में है, आप थोड़े से स्ट्रांग हो, थोड़ा बहुत स्पिरिचुअल रहे हो, मंदिर जाते हो, थोड़ा बहुत नाम जप किया है, थोड़ा बहुत ब्रह्मचर्य किया है, तो आप कोई भी घेरा इनमें से लगा पाते हैं।
4. कवच का पाठ
अगला आता है कि अगर आपने कोई कवच का पाठ कर रखा है। अब मैं एग्ज़ांपल देता हूँ। अगर आपने देवी कवच पढ़ रखा है, तो ‘ब्रह्मोवाच यद्गुह्यं परमं लोके सर्वरक्षाकरं नृणाम्।
यन्न कस्यचिदाख्यातं तन्मे ब्रूहि पितामह॥’ कि अगर आपने देवी कवच का पाठ कर रखा है, जो मैंने अभी पढ़ा थोड़ा सा, तो आप देवी कवच का पाठ उस वक्त कर कर, एक बार अगर आपने इस पाठ को बहुत समय से करते आ रहे हो, आपको लगता है कि माँ की बहुत कृपा है, यह पाठ आपका सिद्ध है, एक बार आप पढ़कर अगर बैठ जाओ
तो आप कोई भी साधना कर रहे हो, कोई नकारात्मकता आपको परेशान नहीं कर सकती। अगर बहुत कम किया है, तो उसको तीन बार आप लगातार बैठ के पढ़ लो, आपको काफी समय तक सुरक्षा मिलती है। इसके अलावा भैरव कवच है, राम रक्षा स्तोत्र है, कोई भी ऐसा स्तोत्र जो रक्षा, प्रोटेक्शन के लिए होता है। यहाँ तक कि आप हनुमान चालीसा को भी तीन बार पढ़कर अगर बैठ जाएँगे
हनुमान जी से प्रार्थना करके, तो भी आपकी सुरक्षा उस वक्त हनुमान जी की चालीसा की ऊर्जा के द्वारा आपकी होगी। यह बहुत अच्छा है। तो जिन भी भगवान पर विश्वास हो, जिस भी कवच पर विश्वास हो, अगर वो बहुत प्रबलता से आपने जाप किया है, तो एक बार और अगर उसको कम किया है, तो तीन बार पढ़कर अगर आप बैठते हो।
देखो, ये ना बेसिक साधनाओं के लिए नहीं होता है। सपोज, आप ‘ओम नमः शिवाय’ की कर रहे हो, तो इतनी रिक्वायरमेंट नहीं है। लेकिन हाँ, लगता है आपको कि घर में दिक्कत है, बहुत लोगों को लगता है कि उनके घर में प्रॉब्लम है, इस केस में फिर इस्तेमाल होता है यह। अब सोचिए कि आप एकदम से माँ तारा की साधना कर रहे हैं।
अब मेरे ग्रुप मेंबर्स को मैंने इस बारी, मेरे मेडिटेशन क्लासेस में जो नवरात्रि गए हैं, बहुत कम लोगों ने की, लेकिन माँ तारा की साधना भी कुछ लोगों ने की है।
उस केस में कुछ लोगों ने कवच जो है, कुछ लोगों ने सुरक्षा घेरा बना के साधना की थी, क्योंकि उनका यह पर्पस ही साधना करने का नकारात्मकता से मुक्त होना था कि उनके ऊपर कोई नेगेटिविटी परेशानी ना दे।
तो कई बार कुछ लोग साधना करवाने का, करने का सजेशन मैं देता हूँ, तो उन्होंने जब किया तो कुछ लोगों ने सुरक्षा घेरा लगाया और मैंने कहा लगाने को। कुछ को मैंने नहीं कहा जिनकी ऊर्जा ऑलरेडी प्रबल है, जिनको इष्ट की प्राप्ति हो चुकी है। अभी मैं आता हूँ इस बात पर, उनको इन चीज़ों की वैसे रिक्वायरमेंट नहीं होती है।
5. गुरु या शिक्षक द्वारा प्रदान किया गया कवच
अगला प्रश्न आता है, यह जो कवच वाला पॉइंट, यह चौथा पॉइंट था। मैं चार बता चुका हूँ: दिया, पीली सरसों का, संकल्प का जल, चौथा कवच। अगला है कि आपको ना कवच कोई और भी प्रदान कर सकता है। अब सपोज, जैसे आप किसी के अंडर रहकर साधना करते हो।
अब मैं आपको एक छोटी सी बात बताता हूँ। हमारा हीलिंग बैच चल रहा है। हीलिंग बैच में ना हम लोगों ने नारायण भगवान की छोटी सी एक साधना की है ताकि हम नारायण कवच प्रदान कर सकें किसी को भी, जिनको सुरक्षा चाहिए हो। हीलिंग बैच जो हमारा है ना, यह रेकी हीलिंग, आपने कई बार यह वर्ड सुना होगा, ऐसे ही मंत्र हीलिंग भी होता है।
हमारे यहाँ मंत्र हीलिंग सिखाई जाती है, जिसका बैच नया शुरू हो रहा है अप्रैल के लास्ट में, यानी इसी महीने के लास्ट में या अगले महीने की शुरुआत में शुरू होगा, जैसे ही हमारे पास मेंबर्स कलेक्ट हो जाते हैं, सब लोग आ जाते हैं, वैसे ग्रुप हमारा जो है, वो स्टार्ट हो जाएगा।
तो आप लोग जुड़ना चाहते हो तो दिए गए नंबर पे आप मैसेज कर सकते हो। इस इस बात पर हम लोग आगे डिस्कस कर लेंगे, लेकिन जो मेन हमारा है, वो यह है कि नारायण कवच जैसे वो प्रदान कर रहे हो ना कवच, ऐसे ही आप भी किसी को कवच प्रदान करके लगा सकते हो। आपके टीचर, आपके गुरु या जिसके साथ आप अंडर गाइडेंस में रह के कर रहे हो, वो भी आपको कई बार कवच प्रदान कर देता है। यह कवच कुछ समय के लिए होता है, परमानेंट लाइफ़टाइम नहीं होता। इसकी वैलिडिटी होती है।
जैसे नारायण कवच तीन दिन तक रहता है। सबसे प्रबल कवच होता है सूर्य कवच भी, बहुत अच्छा होता है किसी को प्रदान करने के लिए। आमतौर पर सूर्य नारायण कवच ही प्रदान किया जा सकता है, क्योंकि सूर्य भगवान तो बहुत जाग्रत होते हैं।
जिन्होंने सूर्य भगवान का ज़्यादा जाप भी ना किया हो ना और आध्यात्मिक रहे हैं, मंत्र जप करते आ रहे हैं अपने इष्ट का या कोई भी, तो वो सूर्य कवच तो लगा ही सकता है कोई भी व्यक्ति। किस प्रकार लगाया जाए, इसका प्रोसीजर होता है।
मैं कोशिश करूँगा, वैसे देखो, मेरे मेडिटेशन क्लासेस में तो ऑलरेडी सिखाया जा रहा है, लेकिन यह मैं डेफिनेटली आगे YouTube पर भी कोशिश करूँगा आगे जाके ले आऊँ, ताकि सब लोग इसका लाभ उठा सकें।
किन लोगों को सुरक्षा कवच की आवश्यकता नहीं होती?
प्रबल इष्ट वाले साधक
बाकी जिन लोगों को, मैं इस बात पर आ जाता हूँ जो पाँचवें पॉइंट से भी अलग है, इष्ट की प्राप्ति जिनको हो रखी है ना, जिनके इष्ट बहुत प्रबल हैं, जैसे कि मैं एग्ज़ांपल देता हूँ, अगर आप हनुमान जी को इष्ट मानते हो और हनुमान जी के आप बहुत अनुभूति, स्वप्न में दर्शन, ध्यान में दर्शन, प्रेम भाव है, हनुमान जी के मंदिर जाते हो, बहुत पॉजिटिव लगता है, आपको भरोसा है पूरा कि हनुमान जी मेरे आसपास हैं। देखो, सबसे बड़ा भगवान की प्राप्ति का जो अनुभव होता है
ना सबसे बड़ा, अभी रिसेंटली मैंने एक पॉडकास्ट भी किया है शूट, मेरा पॉडकास्ट नहीं, किसी और चैनल के लिए, आप लोगों तक जल्दी पहुँचेगा, उस पर भी मैंने एक बात बोली है कि भगवान की सबसे ज़्यादा कृपा अगर आपको पहचाननी आपके ऊपर है, भगवान का प्रेम, अपार प्रेम है आपके ऊपर, आपका प्रेम भगवान के ऊपर है, तो वो एक चीज़ प्रदान करते हैं
आपको, उनके मंत्र से या उनके नाम पर आपका प्रेम। यानी कि भगवान का मंत्र जब आपका करने का मन हो रहा है, भगवान का मंत्र जब आपका करने का मन होता है, उन पर भाव बहुत ज़्यादा है, उनके मंदिर जाने का मन करता है,
आपको कोई बाहर खेलने के लिए बुला रहा है, शॉपिंग के लिए बुला रहा है, वो छोड़ के आप कह रहे हो, ‘नहीं, मेरा जाप बचा है, मैं बैठ के मंत्र जपूँ।’ यह प्रेम अगर आपके अंदर है, तो मैं आपके चरण पकड़ सकता हूँ, इतना आप पवित्र और इतने आपके मन में भगवान बसे हैं।
यह बहुत बड़ी बात है। अगर भगवान के नाम के प्रति निष्ठा और प्रेम आपके अंदर है, तो इससे बड़ी भगवान की कृपा आपको कभी नहीं मिल सकती। तो ऐसे व्यक्तियों को किसी प्रकार के कवच की आवश्यकता नहीं होती है। साक्षात भगवान का प्रेम उनके साथ है, भावना उनके साथ है। कहीं पर भी बैठकर जाप करें, कुछ नहीं होगा।
कई बार ऐसा होता है, देखो, अभी आज भी ऐसा हुआ, मैं एक व्यक्ति से मिला, मैंने उनकी बॉडी में ऊर्जा देखी, जाप की ऊर्जा बिल्कुल भी नहीं थी, ध्यान की ऊर्जा बहुत सारी थी। इस केस में यही होता है, नेगेटिविटी आ जाती है।
आपका ऑरा नहीं बना होता ना, आप ऊर्जा से भरी हुई एक तिजोरी हो जिसका लॉक ही नहीं लगा हुआ, नेगेटिविटी आ जाती है। तो ज़रूरी होता है इस केस में कवच लगाना, कवच रह के करो, किसी की गाइडेंस में करो। लेकिन कुछ लोग डिफरेंट होते हैं, भगवान ने उनका अध्यात्म में रहना चुना है। इसलिए बहुत लोग यंग होकर भी अध्यात्म में बहुत आगे या बहुत यंग होकर भी अध्यात्म को बहुत ज़्यादा रुचि रखते हैं।
बहुत से छोटे-छोटे बच्चे देखोगे आप, बहुत से, आपको शायद आप इंटरनेट का जमाना है तो आपके पास रील्स, शॉर्ट्स, वीडियो आती हैं कि बचपन से अध्यात्म में हैं, बहुत छोटे-छोटे बच्चे भगवान के मंत्र बोलते हैं, भगवान के प्रति प्रेम है, सबको अच्छे-अच्छे आचरण सिखाते हैं। वो भगवान, वो पूर्व जन्म की भक्ति रही है, प्रेम, निष्ठा है। ऐसे लोगों को कुछ नहीं कर सकता।
गुरु-दीक्षित साधक
फिर अगला, गुरु। अगर आपने गुरु बनाए हुए हैं और गुरु आपके गुरु हैं, गुरु यानी कि समझिए आपकी प्रबल संत, गुरु जी की जो बहुत अच्छी एनर्जी है, गुरु का मंत्र देते ही, गुरु के सिर पे हाथ रखते ही, उसी वक्त आपके 12 के 12 गोले पूरे हो जाते हैं। 12 के 12 आपके, उसी वक्त आपको ना किसी की प्रोटेक्शन की रिक्वायरमेंट होती है। गुरु मंत्र आपको मिला होता है, वो आपको सब देता है, सुरक्षा भी, कवच भी, हर प्रकार की सुरक्षा प्रदान करता है।
निष्कर्ष एवं संपर्क
तो घर पर रहने वाले एक बिगिनर को, जिनको सुरक्षा चाहिए, अभी कोई गाइडेंस नहीं है, किस प्रकार साधना की जाती है, किस प्रकार प्रार्थना की जाती है, मैंने कोशिश की है अपनी तरफ से सभी पॉइंट्स कवर करने की। इन केस अगर कुछ मिस हो गया है, तो मैं डेफिनेटली आगे आपके लिए इसका पार्ट टू लाके आपको समझा दूँगा।
आप मुझे कमेंट सेक्शन में भी बताइएगा कि अगर आपको कुछ समझ में नहीं आया, तो मैं पूरी कोशिश करूँगा। आप मेरे Instagram पर भी मुझे फॉलो कर सकते हैं, डिस्क्रिप्शन पे लिंक और मेरे WhatsApp नंबर का लिंक भी आपके पास ऑलरेडी है, यानी कि आपकी स्क्रीन पे शायद मेंशन हो रहा होगा, मेरी एडिटिंग टीम लगा देगी।
बाकी डेफिनेटली हम मिलेंगे ऐसी बहुत सारी प्यारी-प्यारी और post के साथ। तब तक के लिए आप सभी को जय माता दी, जय श्री राम।
बाबा गंगाराम अघोरी की अघोर साधना Baba Gangaram Aghori Sadhna
बाबा गंगाराम अघोरी की अघोर साधना Baba Gangaram Aghori Sadhna
बाबा गंगाराम अघोरी की अघोर साधना Baba Gangaram Aghori Sadhna आज मैं , आपको अघोर विद्या की साधना बताने जा रहा हूँ। जैसे इस संसार में बहुत से अघोरी हुए, जैसे गंगाराम अघोरी, अघोरी नाथ, अघोरी बूचर नाथ, अघोरी मंसाराम अघोरी और किनाराम अघोरी, जो कि अघोर इल्म के बहुत ही विख्यात साधक हुए हैं और इन्होंने लोक भलाई के काम किए। उनकी ही मैं आपको आज साधना बताने जा रहा हूँ। इन अघोरियों में से गंगाराम अघोरी जी की साधना बताने जा रहा हूँ। यह अघोर साधना, आप श्मशान भूमि में इसका भोग प्रसाद देने के बाद इस अघोर इल्म को आप प्राप्त कर सकते हैं।
बाबा गंगाराम अघोरी की अघोर साधना के लिए आवश्यक शर्तें और चेतावनी
जो भी गंगाराम अघोरी जी की साधना करना चाहते हैं, इसका मैं आपको एक शाबर मंत्र और इनका भोग प्रसाद बताऊँगा। लेकिनों, यह जो अघोर इल्म की साधना है, यह साधना वही साधक करें जिन्होंने गुरु धारणा की हुई है, जिनको इल्म के बारे में पूर्ण रूप से जानकारी हो या फिर इससे पहले इन्होंने किसी और देवी-देवताओं की साधना पूर्ण रूप से प्राप्त की हुई है।
वही इस साधना को करें और इसके अलावा, जब भी आप यह साधना आरंभ करें तो अपने गुरु-पीर से आज्ञा ज़रूर लें और जो भी आपके घर के इष्ट हैं, पूर्वज हैं, उनका भोग प्रसाद लगाने के बाद आपने यह साधना आरंभ करनी है।
गंगाराम अघोरी और अघोर इल्म का परिचय
बहुत बड़े साधक हुए गंगाराम अघोरी जी। लगभग सौ-डेढ़ सौ साल पहले यह गंगाराम अघोरी हुए। इन्होंने पूर्ण रूप से अघोर इल्म की प्राप्ति की। अघोर विद्या सबसे कठिन लेकिन तत्काल फल देने वाली विद्या है।
इसको साधक को साधना करने से पहले पूर्ण रूप से मोह का त्याग करना पड़ता है। पूर्ण अघोरी उसे कहते हैं जिसके अंदर से अच्छे-बुरे, प्रेम-नफरत, ईर्ष्या, मोह जैसी सभी भावनाएँ मिट जाएँ, उसको कहते हैं पूर्ण रूप से अघोरी। जिस को भी इस अघोर इल्म की प्राप्ति हो गई, फिर कोई भी संसार में ऐसा इल्म नहीं जो उसके सामने टिक पाए।
इतनी शक्तिशाली यह साधना होती है अघोर इल्म की, वह भी बाबा गंगाराम अघोरी जी की, जो कि अघोर इल्म के सम्राट हैं। बाबा गंगाराम अघोरी, पहले मैंने एक साधना डाली थी इनके छोटे भाई मंसाराम अघोरी जी की, लेकिन आज, मैं आपको गंगाराम अघोरी जी की यह साधना बताने जा रहा हूँ।
बाबा गंगाराम अघोरी की अघोर साधना की संपूर्ण विधि
पहलेों, मैं आपको इसका भोग प्रसाद बता दूँ क्योंकि इसकी विधि क्या है, कि पूर्ण रूप से आपको पहले विधि को समझ लेना चाहिए कि इसका भोग प्रसाद आपने क्या देना है और कैसे इसकी आपने साधना करनी है। उसके बाद , आपने जो मैं आपको शाबर मंत्र बताऊँगा, उसका आपने जप करना है।
बाबा गंगाराम अघोरी की अघोर साधना भोग प्रसाद की सामग्री और विधि
गंगाराम अघोरी जी की यह अघोर इल्म की साधना करनी है, जो इसका भोग प्रसाद है, वह मैं आपको बताने जा रहा हूँ। इसको आप शुक्ल पक्ष के शनिवार से आप इस साधना को शुरू कर सकते हैं। और जो भी इसका भोग प्रसाद है, वह आप नोट कर लें।
आपने शनिवार को जो भोग प्रसाद लेकर जाना है: दो लड्डू बूँदी वाले, सात पतासे, एक मीठा पान, एक कड़वा पान और जोड़ा लौंगों का और आपने एक लेकर जानी है कलेजी, बकरे की कलेजी भी ले सकते हैं और आप मुर्गे की कलेजी भी ले सकते हैं।
और उस कलेजी के आप दो पीस बना लें, एक पीस को तो आपने कच्चा ही रखना है और एक पीस को आपने सरसों का तेल, थोड़ी सी लाल मिर्च और थोड़ा सा नमक लगाने के बाद उसको भून लेना है। और उसको भी यह जो भोग प्रसाद है, इसके साथ ही लेकर जाना है।
और दो सिगरेटों का जोड़ा और एक प्याला शराब का, एक प्याला लेकर जाना है आपने। और यह जो सारा भोग प्रसाद है, आपने शनिवार को श्मशान भूमि में जाकर यह भोग प्रसाद देना है।
यह जो भोग प्रसाद है, आपने पहले सरसों के तेल का दीया जलाना है, उसके बाद उसके आगे उपलों की आग (अंगारी) बनाने के बाद, उस अंगारी के आगे रखें और उसके ऊपर देसी घी और सरसों के तेल की आहुतियाँ डालें।
यह जो सारा भोग प्रसाद है, सारा आपने उनके ऊपर आहुतियाँ डालनी हैं होम के रूप में। और जो दो सिगरेट हैं, उसको आपने जला कर रखना है और जो प्याला है, उसका आपने भोग लगाना है।
बाबा गंगाराम अघोरी की अघोर साधना की अवधि और नित्यकर्म
सभी साधकों ने यह साधना पूर्ण रूप से अगर गंगाराम अघोरी की साधना करनी है, तो यह 41 दिन की होगी। और 41 दिन में, जो यह भोग प्रसाद है, आपने हर शनिवार को यह भोग प्रसाद देते रहना है भेंट के रूप में गंगाराम अघोरी जी को।
नित्य कर्मानुसार आपने जोड़ा लड्डुओं का, सात पतासे और जोड़ा लौंगों का और दो सिगरेटों का जोड़ा आपने नित्य कर्मानुसार, जब आपने साधना आरंभ करनी है, तो नित्य कर्मानुसार जो शनिवार के बीच में दिन आएँगे, यह भोग प्रसाद आप श्मशान भूमि में दे सकते हैं।
बाबा गंगाराम अघोरी की अघोर साधना के समय रक्षा कवच
जब भी आपने इसकी साधना करनी है, तो आप की रक्षा के लिए आपने एक ख्वाजा साहिब की कड़ाही बनानी है, ख्वाजा साहिब की नियाज़ बनानी है।
सवा किलो की आपने ख्वाजा साहिब की नियाज़ बनानी है और बढ़िया लोबान की धूनी देने के बाद जब वह नियाज़ बन जाए, तो उसके ऊपर आप दो लड्डू रखें, सात पतासे रखने और दो मीठे पान रखने और एक चौमुखा आपने चिराग लगाना है देसी घी का।
इसको चलती नहर में, चलते पानी में आपने इस जो कड़ाही है, इसको बहा देना है और चिराग उसकी पत्तल के ऊपर लगा देना है।
ख्वाजा गरीब नवाज से विनती करनी है कि हम गंगाराम अघोरी जी की साधना करने जा रहे हैं, आपको साक्षी मानकर आप पूर्ण रूप से हमारी रक्षा करना, हमारे ऊपर कोई भी ऐसी गैर-बाधा न आए और पूर्ण रूप से हमें गंगाराम अघोरी जी की इस साधना की प्राप्ति हो।
बाबा गंगाराम अघोरी की अघोर साधना का स्थान और नियम
जब आपने साधना करनी है, आप इसको श्मशान भूमि में बैठकर भी कर सकते हो और उसके बाद आप अपने घर में एक एकांत कमरे में बैठने के बाद भी यह साधना कर सकते हैं। आपने अपने सामने चिराग लगाना है और व पर एक जल का लेना है और जल के पातर को पानी से भरने के बाद आपने ख्वाजा साहिब को याद करने के बाद एक घेरा लगा लेना है जल का और इससे आपकी पूर्ण रूप से रक्षा होगी।
उसके बाद ही, जो मैं आपको शाबर मंत्र बताऊँगा, इसकाआपने जाप करना है। पहले आपने श्मशान भूमि में यह भोग प्रसाद दे कर आना है, उसके बाद आपने यह क्रिया करनी है। और 41 दिन ही आपने ब्रह्मचर्य का पालन करना है और जप करने के बाद आपने धरती के ऊपर ही रात को सोना है।
बाबा गंगाराम अघोरी का शाबर मंत्र
आपको बाबा गंगाराम अघोरी जी का यह शाबर मंत्र बताने जा रहा हूँ, जिसका आपने नित्य कर्मानुसार 11 माला का जप करना है। रुद्राक्ष की आपने माला लेनी है और रात्रि के समय इसका जप करना है। रात्रि 9:00 बजे के बाद ही आपने यह जाप आरंभ करना है। शुक्ल पक्ष के पहले शनिवार से आपने यह साधना आरंभ करनी है।
“चारों दिशाओं में गंगाराम अघोरी का डंका बाजे, ज तेरा नाम पुकारें, अघोरी आन बिराजे। मांस-मदिरा का भोग लगाएँ, लकड़ी जले, मुर्दा चिल्लाए। व अघोरी हाजिर हो जाए। मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति, चले मंत्र, फुरे वाचा। देखो गंगाराम अघोरी, तेरे अघोर इल्म का तमाशा।”
बाबा गंगाराम अघोरी की अघोर साधना अंतिम निर्देश और सारांश
यह है गंगाराम अघोरी जी की पूर्ण रूप से साधना। जो भी यह साधना करना चाहते हैं, तो पहले अपने गुरु से आज्ञा लें। श्मशान भूमि में आपने यह सारा भोग प्रसाद देना है और 41 दिन की यह साधना होगी।
जिस भी ने इस साधना की प्राप्ति कर ली, तो दुनिया में ऐसा कोई भी इल्म नहीं, कि भूत-प्रेत, मड़ी-मसान, किया-कराया, कोई काला इल्म, मुसलमानी इल्म, कोई भी इल्म, मूठ इल्म, कोई भी जो विद्या है, पूर्ण रूप से बाँधकर रख देंगे गंगाराम अघोरी।
अघोर इल्म के सम्राट, महा सम्राट अघोरी हैं यह बाबा गंगाराम अघोरी। और बहुत से घरों में तो यह कुल देवता के रूप में माने जाते हैं गंगाराम अघोरी। जो भी इनकी साधना करना चाहते हैं, तो पहले आप ख्वाजा साहब की आपने हाज़िरी लगानी है, इनकी साधना करने से पहले उनको साक्षी मानकर ही आपने यह साधना आरंभ करनी है।
और जब आपके 41 दिन पूरे हों, तो उस समय भी आपने ख्वाजा साहब की जो मैंने आपको नियाज़ बताई है, उसकी हाज़िरी देनी है। और जब आपको इस साधना की प्राप्ति हो जाए, तब भी आप यह भोग प्रसाद उनका कभी-कभी देते रहें।
इसी शाबर मंत्र का नित्य कर्मानुसार आप जाप करते रहें गंगाराम अघोरी जी के इस शाबर मंत्र का। , इसी तरह से एक नई विधि, एक नई विद्या के साथ फिर मिलेंगे। तब तक जय माता काली, जय बाबा भैरवनाथ।
बाबा मंसाराम और गंगाराम अघोरी की साधना: शक्तियाँ और विधान
बाबा मंसाराम और गंगाराम अघोरी की साधना: शक्तियाँ और विधान
नमस्ते, मैं आप सभी का गुरु मंत्र साधना ‘ में स्वागत करता हूँ। आज जो मैं आप लोगों के लिए पोस्ट लेकर आया हूँ, वह पोस्ट बहुत ही स्पेशल और लाजवाब होने वाली है। तो यह जो पोस्ट मैं देने जा रहा हूँ, यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी है।
साधना का परिचय और पृष्ठभूमि
जैसे मैंने अभी आप लोगों को पहली पोस्ट में, इससे पहले जो पोस्ट लिखी थी, उसमें बताया था आशु मेहतरानी के विषय में कि आशु मेहतरानी, इस्माइल जोगिनी के आगे क्यों कोई भी देवी-देवता नहीं आते, उनकी शक्ति के आगे कोई भी देवता क्यों नहीं टिक सकते हैं।
हमने बाण का प्रयोग कर दिया है तो अगर हम पूजते हैं तो हमारी मतलब है कि कोई काट नहीं सकता। आज मैं बताऊँगा कि आप अगर उनको पूजते हैं, उनकी साधना करते हैं तो आप क्या-क्या कर सकते हैं, किस हद तक कर सकते हैं और उनकी साधना करने के बाद आपको क्या फल हो सकता है।
सिद्ध गुरु: बाबा मंसाराम और गंगाराम अघोरी
बाबा मंसाराम और गंगाराम अघोरी की साधना: शक्तियाँ और विधान
तो जैसे कि सभी लोग जानते हैं, तंत्र जगत में बाबा मंसाराम अघोरी, गंगाराम बाबाजी, ये बहुत ही विख्यात हैं और ये सिद्ध गुरु हैं, यानी कि यह सिद्ध गुरु थे। उसके बाद जब इन्होंने देह त्यागी तो उसके बाद में इनका स्थान, बाबा गंगाराम जी का, जबलपुर में है और मंसाराम जी का मुझे ध्यान नहीं है कहाँ है, लेकिन मंसाराम जी का भी जिक्र है।
बहुत पावरफुल होते हैं बाबा मंसाराम और गंगाराम। इनके मंत्र अगर आप पढ़ोगे तो मेरे पास इतने प्रचंड गुरुमुखी मंत्र हैं इनके, मतलब आप मंत्र तो समझ सकते हैं कि पीपल पर मूतते, श्मशान में हगते, मैदान में। गाय, भैंस, सूअर, कुत्ता, चारों खाने वाला।
साधना से प्राप्त होने वाली सिद्धियाँ और शक्तियाँ
बाबा मंसाराम अघोरी, बाबा गंगाराम अघोरी, अगर आप बाबा मंसाराम या गंगाराम अघोरी की साधना करते हैं तो क्या प्राप्त कर सकते हैं? ये श्मशान में दर्शन देते हैं, सिर पर खेलते हैं। शरीर पर, और इसी प्रकार इनका नाम है कि अगर आप चाहें तो सिर पर खेलते हैं।
बाबा मंसाराम अघोरी एक मुर्गे पर भी मान जाते हैं, नहीं तो हंड्रेड परसेंट सूअर का बच्चा चाहिए इनको। अगर आप सूअर का बच्चा चढ़ाते हैं बाबा अघोरी को, मंसाराम अघोरी को, तो वे इतने प्रचंड और उपयोगी सिद्ध होते हैं कि ऐसा कोई कार्य नहीं जो आप उनके माध्यम से नहीं कर सकते।
ये तो स्वयं सिद्ध हैं और ऊपर से अघोरी हैं। और तीसरी बात, इन्होंने इतनी साधनाएँ कर रखी थीं, इतनी कर रखी हैं, मतलब इन्होंने अपने जीवन में इतनी साधना कर रखी होगी कि जो उनकी शक्तियाँ हैं, जो उनसे जुड़ी हैं – भूत, प्रेत, जिन्न, जिन्नात, किया-कराया, मसान, जागृत किया, कितने भी – तो जितनी इनके पास सिद्धियाँ हैं।
वह सारा ज्ञान आपको प्राप्त हो जाएगा अगर आप बाबा मंसाराम अघोरी को प्रत्यक्ष कर लेते हैं, उन्हें साध लेते हैं। इसी प्रकार गंगाराम जी को अगर प्रत्यक्ष कर लेते हैं, तो जो इनकी शक्तियाँ हैं, वह भी आपको प्राप्त हो जाएँगी।
गुप्त विद्याओं का ज्ञान
इन शक्तियों को सिद्ध करने से, जैसे ये सिद्ध गुरु हैं, सिद्ध पुरुष मतलब सिद्ध गुरु रहे हैं। ये गुप्त विद्या का ज्ञान देते हैं, ऐसे मंत्रों का ज्ञान देते हैं जिनका वर्णन कहीं नहीं है। गुप्त विद्या, गुप्त शक्तियों का ज्ञान, गुप्त मंत्रों का ज्ञान, गुप्त धन का ज्ञान और गुप्त औषधियों का, यानी कि जड़ी-बूटी का ज्ञान, हर चीज का ज्ञान इनके पास होता है। वह अद्भुत कार्य आप कर सकते हैं जिसका आपने अपने जीवन में कभी सोचा नहीं होगा कि यह कार्य भी आप उनके माध्यम से कर सकते हैं।
अघोरी साधना की विशिष्टताएँ
सबसे स्पेशलिस्ट होते हैं गंगाराम, मंसाराम। किसी की गद्दी बाँधना, किसी के ऊपर भूत चढ़ाना, प्रेत चढ़ाना, किसी की चीज में कुछ भी खिला देना। वशीकरण स्पेशलिस्ट। अगर बाबा मंसाराम अघोरी या गंगाराम अघोरी आपके सिद्ध हैं, उनको आपने प्रत्यक्ष कर रखा है। तो उनके नाम से केवल आप राख को उठाकर दे दीजिए और सामने वाला किसी चीज में मिला दे, आपका काम हो गया।
कुछ ताम-झाम करने की जरूरत नहीं होती है। बहुत पावरफुल हैं। इनकी गद्दियाँ लगती हैं, दरबार लगते हैं। कहने का मतलब अगर आप बाबा मंसाराम अघोरी या गंगाराम अघोरी की साधना करते हैं तो शेष कुछ नहीं रह जाता है।
इनकी शक्तियों की प्रचंडता
जिस प्रकार इस्माइल जोगिनी को इतनी जल्दी से कोई नहीं बाँध सकता, तो ठीक उसी प्रकार बाबा मंसाराम अघोरी को या गंगाराम अघोरी को भी कोई आसानी से नहीं बाँध सकता है। क्योंकि यह स्वयंसिद्ध हैं और इनके आगे कोई देवी-देवता सहज नहीं आते हैं।
क्योंकि ये देवी-देवता तक पर पलटवार करते हैं, देवी-देवताओं को भी बाँध लेते हैं। क्योंकि इन लोगों ने इतनी साधनाएँ स्वयं में कर रखी हैं कि आप इनके मंत्रों से ही समझ सकते हैं।
साधना का नैतिक पक्ष और उद्देश्य
कहने का मतलब है कि इनके द्वारा, अगर आप बाबा मंसाराम अघोरी या गंगाराम अघोरी की साधना कर लेते हैं, तो सात्विक कार्य आप कर सकते हैं जो सत्कर्म के अंतर्गत आते हैं। जरूरी नहीं है कि आप सोचें कि भाई मुझे कोई शक्ति सिद्ध करनी है।
यह तंत्र जगत में महारथी थे और आज भी हैं और आने वाले टाइम में भी महारथी रहेंगे। इन्हीं सिद्धात्माओं ने तंत्र की नींव रखी थी। बाबा गंगाराम, बाबा मंसाराम, कालूराम, ये नाम बहुत ही पावरफुल हैं। इनके नाम से ही लोगों का कल्याण हो जाता है, समझिएगा।
साधना का सही उपयोग
इसके माध्यम से भलाई भी कर सकते हैं और मारण भी हटा सकते हैं, उच्चाटन भी हटा सकते हैं। भूत-प्रेत तो हटाते ही हैं और मूठ करनी को भी कर सकते है। बहुत प्रचंड और उग्र, इनके बारे में सभी लोग भली भाँति जानते हैं कि बाबा गंगाराम अघोरी कैसे हैं, वह कैसे नहीं हैं और बाबा मंसाराम कैसे हैं। और बड़े हठी होते हैं।
एक बार अगर यह किसी से सिद्ध हो जाएँ तो उसकी दोबारा नैया पार है और एक बार किसी से अगर यह रुष्ट हो जाएँ, तो उसे बचाने वाला पैदा नहीं है, यह भी ध्यान रखना।
शक्तियों के उपयोग में सावधानी
ये जितनी भी शक्तियाँ होती हैं, जितनी जल्दी ऊपर लगती हैं, कृपा कराती हैं, जितना फल देती हैं, उससे चार गुना कष्ट देती हैं। तो मैं सभी लोगों से कहता आया हूँ कि जो भी व्यक्ति साधना करे, शक्तियाँ अर्जित करे, , शक्तियाँ आप अर्जित कीजिएगा, साधना कीजिएगा, लेकिन जनकल्याण में पैसा लेना, पैसा कमाना बुरी बात नहीं है।
लोगों ने एक अवधारणा बना रखी है कि कोई बाबा है, तांत्रिक है, तो पैसे नहीं लेता, खाना नहीं खाता है। खाना तो वह भी खाता है, जो तुम पहनते हो, वह भी वही पहनता है। तो यह अवधारणा गलत है।
अगर आपको कोई अपनी सर्विस दे रहा है, आपका काम करके दे रहा है, उसके एवज में फीस लेना है तो क्या गलत हुआ?
लेकिन हाँ, इन शक्तियों के माध्यम से दूसरे का बुरा नहीं करना है, जनकल्याण करना है। यानी कि किसी की समस्या का समाधान करना ही जनहित है, जो समाज की नजरों में अच्छा कार्य हो।
यह नहीं कि पड़ोस से कोई काम लेकर आए कि उसे पड़ोस की भाभी अच्छी लगे, तो समस्या तो उसकी है।
जनकल्याण का महत्व
कोई किसी की वाइफ गलत संगत में पड़ गई है, किसी का बेटा गलत संगत में पड़ गया, किसी की बेटी गलत संगत में पड़ गई है, किसी पर किया-कराया है, खिलाया-पिलाया है, जन कल्याण कीजिए।
जिस काम से दुआ मिले। और मैं यह भी कहता हूँ, सब कुछ पैसा ही नहीं होता है। पैसा और भी तरीकों से कमाया जा सकता है। किसी का बुरा करेंगे तो वह ज्यादा दिन नहीं टिकेगा, किसी का सही करेंगे तब ज्यादा दिन टिकेगा, यह सोचिएगा। तो जो भी करें, जनहित के उद्देश्य से करें।
आगामी साधना शिविर की घोषणा
तो अब जैसे कि मैंने आशु मेहतरानी के विषय में बताया, इस्माइल जोगिनी के विषय में बताया, बाबा मंसाराम के विषय में बताया, किसी अन्य के विषय में अगली पोस्ट में बताऊँगा कि उनके माध्यम से क्या-क्या कर सकते हैं।
यह जो मैं बता रहा हूँ, ये पूर्ण रूप से अघोरी होते हैं। और मैं आप सभी लोगों के बीच में, बहुत समय पहले मेरी वीडियो में मंसाराम के विषय में बता चुका हूँ।
पंजीकरण और तैयारी
जो साधना चाहते हैं, रजिस्ट्रेशन ओपन है। एक महीने पहले से रजिस्ट्रेशन कराएँ तो मैं बता देता हूँ कि शिविर में रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य इसलिए है क्योंकि जब आप रजिस्ट्रेशन करा लेंगे, तो जो भी आप साधना करना चाहते हैं।
उसका मंत्र आपको दे दिया जाएगा, प्रोवाइड कर दिया जाएगा या व्हाट्सएप कर दिया जाएगा। मंत्र जैसे ही आप रजिस्ट्रेशन कराते हैं, इस मंत्र को कंठस्थ करके आना है और आने का फल तभी है जब यह मंत्र आपको कंठस्थ होगा। आने का, जो मंत्र कंठस्थ नहीं होगा, तो कैसे मतलब फल मिल पाएगा? क्योंकि साबर मंत्र होते हैं, बड़े उग्र होते हैं, टेढ़े-मेढ़े होते हैं।
शिविर में शामिल होने का आह्वान
रजिस्ट्रेशन जल्दी से जल्दी कराइए जो आना चाहता है, जुड़ना चाहता है, साधना करना चाहता है, शक्तियाँ क्या होती हैं यह जानना चाहता है, तो वह शिविर ज्वाइन कर सकता है। और इसको प्रमाणित और परीक्षित यहीं किया जाएगा।
अगर आप रियल में साधक हैं, आप चाहते हैं कि शक्तियाँ कैसी होती हैं और शक्तियाँ आपके जीवन में आने से साधक के जीवन में क्या परिवर्तन होता है, अगर इन चीजों से रूबरू होना चाहते हैं, तो इस शिविर को ज्वाइन कीजिए। ज्वाइन करने के बाद जो भी आप साधना करना चाहते हैं, वह साधना कराई जाएगी, उसको चलाने का तरीका, प्रैक्टिकल, सब कुछ कराया जाएगा।
संपर्क जानकारी और समापन
आज के लिए इतना ही जो आना चाहता है, रजिस्ट्रेशन करा सकता है। हमारी हर वीडियो के डिस्क्रिप्शन में आपको अकाउंट नंबर मिल जाएगा। इसी नंबर पर हमारा फोन पे, गूगल पे, पेटीएम चालू है। रजिस्ट्रेशन फीस जमा करके आप स्क्रीनशॉट व्हाट्सएप कर सकते हैं, अपना आधार कार्ड और फोटो। अधिक जानकारी के लिए हमारी संस्था के नंबर पर कॉल करें। संस्था का नंबर है 85280 57364।
सुबह 10 से शाम 7 तक खुला है। इस बीच में एक घंटे का आराम का समय रहता है, एक से दो, उस टाइम कॉल ना करें। तो जो आना चाहता है, वेलकम। आइए और कुछ नया लेकर जाइए। तो दोस्तों, आज के लिए इतना ही। फिर मिलेंगे एक नई जानकारी के साथ और एक नई वीडियो के साथ। तब तक के लिए जय श्री महाकाल। शांति, शांति।