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तंत्र मंत्र साधना की शुरुआत: आसन, माला और सही विधि ph.85280 57364

तंत्र मंत्र साधना की शुरुआत: आसन, माला और सही विधि

gurumantrasadhna.com  में भी आपका फिर से स्वागत है। आज का जो हमारा टॉपिक रहने वाला है वो टॉपिक रहेगा। बहुत सारे साधकों की ओर से यह सवाल पूछा जाता है कि हम साधना के क्षेत्र में आना चाहते हैं। तो हमें क्या करना चाहिए? कि कैसे इस साधना के क्षेत्र में आना चाहिए। क्या-क्या हमें जो है शुरुआत में चीजें करनी चाहिए? इसी टॉपिक के ऊपर हम बात करेंगे।

शुरुआत में साधना की शुरुआत कैसे की जाती है?

तंत्र में आने से पहले क्या-क्या चीजें जरूरी हैं? इसी विषय में हमारी बातचीत रहेगी। आज हमारे साथ फिर से उपस्थित हैं सागरनाथ जी। जी आपका स्वागत है सागरनाथ जी। जी धन्यवाद रुद्रनाथ जी एक बार फिर से ब्रॉडकास्ट करने के लिए मेरे साथ। मैं सबसे पहले बोलूंगा राम राम और जय। राम राम जी। जय श्री हम सीधी-सीधी बात पे आते हैं कि जैसे बेसिक रूल क्या होते हैं? हर एक चीज के बेसिक रूल होते हैं।

तंत्र के क्षेत्र में जो पहले आना चाहते हैं, फर्स्ट टाइम जिनको कोई नॉलेज नहीं अनाड़ी हैं वो कैसे अपने आप को परफेक्ट करें अब हम बात करेंगे इस विषय पे। जी रुद्रनाथ जी आज डिस्कशन जो हमारी दोनों की एक साथ चलेगी इसके ऊपर। ठीक है जी तो सबसे पहले मैं बताऊंगा आप बताओगे।

जी जी जी जी तो आज बात करेंगे जैसे मान लो साधना के क्षेत्र में आपने आना है फर्स्ट टाइम किसी देव की भी साधना करनी है तो कैसे बेसिक रूल फॉलो किए जाते हैं वो सब पर लागू होते हैं। सबसे पहले आपके पास आसन होना चाहिए। आपके पास एक माला होनी चाहिए। आपके पास गुरु मंत्र होना चाहिए। आपके पास रक्षा कवच होना चाहिए। ये चार बातें पहले आप मेरी समझ लो। जी जो आपकी हर बात में चलेंगी। हर साधना में चलेंगी।

कैसे होता है रुद्रनाथ जी  ?

पहले सबसे पहले आसन का कोई भी कलर हो ये बाद में मैटर करेगा। सबसे पहले आपने नीचे आसन रखना है जमीन के ऊपर। सागरनाथ जी मैं ये चीज कहना चाहूंगा के इन लोगों को पहले हम बैठना सिखाएंगे।

बैठना कैसे चाहिए? जी यही नहीं इनको पता है। जैसे भगवान शंकर बैठते हैं ना पालथी मार के वैसे ही आपने बैठना है। नाथ पंथ में ऐसे ही बैठा जाता है। बिल्कुल बिल्कुल आपने मुस्लिम पद्धति से नहीं करनी है। चाहे मुस्लिम साधना भी करते हो तब भी पालथी ऐसे ही मारनी है। पद्मासन के अंदर ना। बिल्कुल पद्मासन हो गया।

तंत्र मंत्र साधना की शुरुआत: आसन, माला और सही विधि
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मैंने इसलिए बोला कि भोलेनाथ जैसे आसन पे बैठते हैं। इनको जल्दी पता लग जाएगा। जी फोटो निकाल के देख सकते हैं वह कैसे बैठते हैं। जी और दूसरी चीज इसमें सागरनाथ जी अहम बात यह है कि आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी होनी चाहिए। कोई बेंड नहीं चाहिए। बिल्कुल स्ट्रेट होनी चाहिए। 90 डिग्री होनी चाहिए।

बिल्कुल सीधी खंबे की तरह। और इसमें फायदा पता क्या है? जी जब हम आप मंत्र जाप करते हैं। मूलाधार से ऊर्जा निकलती है और सहस्रार दल तक जाती है। जब आपकी पीठ बेंड रहेगी तो वो ऊर्जा ऊपर तक नहीं जा पाएगी।

सपोज करो आप किसी चीज को बेंड कर देते हो। उसमें से फ्लो कैसे बनेगा? जैसे पानी की पाइप है। जब आप उसको बीच में से कुछ मोड़ देते हो तो पानी का फ्लो पीछे जाता है ना जहां से नल निकलता है। आगे तो नहीं निकलता। ये सिस्टम है। तो ये है कि इनको पीठ सीधी रखनी पड़ेगी। रीढ़ की हड्डी पहले तो ये आप देख लो। और मैं और चीज भी आपको बताता हूं।

अगर रीढ़ की हड्डी सीधी नहीं रख सकते आप तो अब दीवार का सहारा लेके सीधी रखने की प्रैक्टिस करो। पहले हां वो हो जाएगी। एक हफ्ते के भीतर बीच में बिल्कुल बिल्कुल आपका जो लेवल है सीधा हो जाएगा।

पांच-पांच मिनट करके इसको बढ़ाओ। इस तरीके से अगर आप एक दो घंटे बैठने लायक हो गए तब आप साधना के बारे में सोच सकते हैं कि कुछ करना सोच सकते हैं। बिल्कुल आपको पालथी मार के बैठना पद्मासन लगा के जैसे भोलेनाथ बैठते हैं हमारे वैसे आ जाएगा, सीधी रीढ़ की हड्डी भी करनी आ जाएगी।

ठीक है तो दो चीजें आपकी पहले ये प्रैक्टिस कर लें, सबसे पहली प्रैक्टिस ये है कि ये डेली करें। बिल्कुल बिल्कुल और देखिए मैं आपको चीज और बताता हूं जितने भी हाई लेवल के बड़े-बड़े लोग हैं। मैं उनमें एक चीज नोटिस करता हूं। उनकी रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है। तभी वह एक हाई लेवल के ऊपर हैं। अगर आपको हाई लेवल के ऊपर जाना है तो रीढ़ की हड्डी सीधी रखनी पड़ेगी।

सीधा ही बैठना पड़ेगा स्ट्रेट। तभी आप उस लेवल तक अपने लेवल को अचीव कर सकते हैं। और मन की भटकनाएं आपकी ऑटोमेटिक खत्म हो जाएंगी। अब आप इस तरीके से बैठना देखो आप जब शाबर मंत्र जाप करते हो ना तो जो आपकी कुंडलिनी है ना ऑटोमेटिक जाग्रत होना शुरू हो जाती है। बिल्कुल पहली बात ये है।

अब दूसरी चीज हम इसमें बताते हैं कि इंपॉर्टेंट बात वो बताओ आप माला कैसे पकड़नी है?

हां माला कैसे पकड़नी है? इसमें इतना मेन रोल गोमुखी का भी नहीं होता है। जो करने वाले कर सकते हैं नहीं करना तो भी चलेगा। दूसरी देखिए इसमें एक चीज ये है माला को छुपा के रखना सही बताया गया है शास्त्रों में। हां ठीक है माला को किसी को दिखाई ना पड़े।

सागरनाथ जी के कहने का मतलब ये था कि इंपॉर्टेंट तब नहीं है जब आप कमरे में अकेले हां मैं अकेला होता हूं इसलिए ये बात सही इसीलिए गोमुखी की जरूरत उन लोगों को नहीं है।

हां बिल्कुल सही बात बोले आप यही मैं बात बोलने वाला था आपने पहले ही बता दी बिल्कुल बिल्कुल और तो अगर घर में आना जाना है किसी का कुछ फिर गोमुखी करो भाई फिर गोमुखी करो किसको क्या दिखाना कि हम क्या कर रहे हैं बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल। और जो माला को जैसे पकड़ना है सुमेरु जो मान लो 108 मनके का होता है 109वें मनके को सुमेरु बोला जाता है जिसको गुरु का मनका भी बोला जाता है ठीक है शिव की जटा भी है।

जी वही की जटा है जी बिल्कुल टॉप होता है टॉप जो होता है उसके ऊपर जटा होती है ठीक है ये शिव का शिव का ही स्वरूप है माला बिल्कुल तो तकरीबन वहां से नहीं जपा जाता उसके नीचे एक मनका और आना पड़ता है। गुरु को कभी लांघा नहीं जाता है। माला का जपने के समय दौरान उसको क्रॉस नहीं करना है। मेरे कहने का मतलब शिव को क्रॉस नहीं किया जाता। शिव का शिवलिंग होता है ना तो उसको भी क्रॉस नहीं करना।

नहीं किया जाता है। तो यही सिस्टम है। जी माला पकड़ ली। नीचे आ गए। गुरु सुमेरु से नीचे आ गए। जहां से माला शुरू होती है तीन मनके छोड़ के गुरु को ऐड करके जैसे पहले गुरु हो गए सुमेरु उसके जो नीचे तीन मनके गिन लो वो तीन मनके के भीतर आपने क्या करना है एक मौली से गांठ बांध देनी है छोटी सी कि माला वहीं से ही आपने स्टार्ट करनी है जब भी करनी है कि ये सीधी माला है मेरी आज के बाद ये ये रूल हो गया।

दूसरी जो आपका अंगूठा है ना अंगूठे से नीचे जो छोटी जिसको नीचे की तरफ आके जो सेंटर वाली उंगली है ना आपकी पांचवे नंबर सॉरी तीसरे नंबर में सेंटर वाली आती है। पांच उंगलियां है ना हमारे हाथ में सेंटर वाली उंगली से जपना है। इसके साथ ही मनका फेरना है अंगूठे के साथ इसके ऊपर माला रख के। ये परफेक्शन होती है।

जी। ये माला जपने का परफेक्शन है। मतलब मोटा-मोटा बता दिया। पांच हाथ की उंगलियां है आपकी जो सेंटर वाली है ना उसके ऊपर माला रखनी है। जब फेरनी है तो कैसे करना है? अंगूठे के साथ उसको पीछे से हल्का सा खींचना है। जैसे एक जाप किया एक मनके के ऊपर फिर अगले मनके के ऊपर आए।

फिर एक मंत्र का जाप किया फिर ऐसे ऐसे माला फेरने का सिस्टम है। जी जब आप 108 के ऊपर आ जाते तकरीबन आपकी एक माला पूरी हो गई तो आपने माला को उसी समय पलटाना भी है उसी हाथ से।

जिस हाथ से पकड़ा हुआ है क्योंकि गुरु को लांघा नहीं है। मैंने पहले ही बोल दिया। बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल। फिर आपका पाठ दूसरी माला पे ऐसे ही शुरू होगा। ये बेसिक चीज है।

ये बेसिक चीज है। अच्छा मैं इनको प्राण प्रतिष्ठा की विधि बताता हूं।

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जी। लोग पूछते हैं कि प्राण प्रतिष्ठा करने। उसमें हम विधि बताने वाले हैं। तो आपको क्या करना है? अगर प्राण प्रतिष्ठा नहीं आती है बिल्कुल भी नहीं आती है। आपको किस नहीं मालूम है रुद्रनाथ जी आप बताइए मेरे को मालूम ही नहीं है। जी उसमें क्या करना होगा? जी कहीं अगर सिद्ध शक्तिपीठ है अवेलेबल है। तो आप वहां जाइए। पुजारी वहां होते हैं। उनको बोलिए कि यह जो माला है एक अमुक कार्य के लिए मैं इसका जाप कर रहा हूं। अगर नहीं भी बताना है।

सीधा बोलो कि आप इनको माता रानी के जो भी देवता है देवी है उनकी मूर्ति के साथ स्पर्श करवाएं। जी वो स्पर्श करवाएंगे। उनके गले में डाल देंगे एक आधे मिनट के लिए।

वह चीज फिर आप प्रार्थना कर दें कि हे जो भी देवता है तो उनको बोलिए कि यह जो माला है ये जाग्रत हो जाए ठीक है चैतन्य हो जाए आप इनको चैतन्यता प्रदान करें बिल्कुल बिल्कुल 15 मिनट में ही चैतन्य कर देते हैं वो ऐसे जैसे अभी माला वहां से निकालो ठीक है फिर आपकी वो चैतन्य होगी इसी तरीके आप यंत्र रखेंगे तो वहां से लेके आएंगे जी फिर आप उसको इस तरीके से करेंगे।

उसके पहले आप इसका जो है उसके बाद आपको क्या करना है? फिर इनका आप कर सकते हैं। पंचमेवा पंच प्रकार के जो होते हैं

पंच द्रव्यों से स्नान करा के तब आप इसको करा के अपने यूज़ में ले सकते हैं। बिल्कुल सही बात आपने बोली। ये माला संस्कार की मैंने आपको विधि बताई है। माला की भी और साथ में यंत्र की भी प्रतिष्ठा ऐसे ही करनी है। बिल्कुल बिल्कुल तो अगर सिद्ध शक्ति पीठ नहीं है तो किसी भी मंदिर में ये चीज ट्राई की जा सकती है। हां बिल्कुल वो भी करवा देंगे।

वो भी करवा देंगे क्योंकि पूजा अर्चना तो डेली होती है हर मंदिर में। प्राण प्रतिष्ठित मूर्ति हो वहां पर आप सब करवा देंगे। बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल अगर ऐसा नहीं होता है तो पंडित जी खुद भी करके आपको दे सकते हैं क्योंकि उनको ये विधि आती है।

जी अगर उस तरीके से ये सिर्फ मैं एक तरीके से सस्ते तरीके से बता रहा हूं अगर हां नहीं फिर भी अगर आपके पास है कुछ तो पैसा देके आप पंडित जी से दक्षिणा देके आप करवा सकते हो।

हां करवा सकते हो। मतलब कि रुद्रनाथ जी ने मैंने क्लियर आपको बता दिया है भटकने की जरूरत नहीं है। ऐसा भी होता है। जी आज के जमाने में ऐसा भी होता है क्योंकि हमारे पूजा पाठ चल चलती है सनातन धर्म में ऐसे प्राण प्रतिष्ठा करवाई जाती है।

जी अब आगे मैं बात करता हूं।

जी कोई भी साधक है। बैठना सीख गया। माला का पता चल गया। अब आगे की परिस्थिति क्या होगी? जाप की। आपको क्या करना है? जी जो भी इष्ट को मानते हो। उसके आपको कम से कम हो सके तो सवा लाख जाप करें। मंत्र नहीं मंत्र नहीं आता तो उनका नाम लेके भी कर सकते हैं।

नाम लिख के जैसे शिव का है ओम नमः शिवाय। चलो ये तो वैदिक मंत्र है। तो इसकी तो दीक्षा के बिना तो जाप करना नहीं चाहिए। जैसे कोई भी आप बोल सकते हैं हर हर महादेव। इस तरीके से जाप कर सकते हैं। जो भी आपको ठीक लगे आप वो जाप करिए और उसके बाद उनका हवन करिए।

दशांश दशांश इकट्ठा नहीं कर सकते तो थोड़ा-थोड़ा डेली करिए। और वह भी नहीं किया जा सकता तो सिंपल आप दो गुना जाप करके ठीक है अपना ब्राह्मण भोजन करा दें या कन्या का कन्या को भोजन करा के ठीक है दक्षिणा देके उनको कर दीजिए आप तो ये हो सकता है तो इस तरीके से करें तो आपका जो है मंत्र सिद्ध हो जाएगा कृपा प्राप्त होगी इष्ट देव की ठीक है इष्ट देव की कृपा प्राप्त होगी कोई भी आगे साधना में कोई भी गलती हो जाए तो इष्ट आपको संभालेगा। जैसे यह प्रक्रिया आपने कंप्लीट करी।

अगली प्रक्रिया आपकी चलेगी क्या? उसी इष्ट के रक्षा मंत्र के जाप करना। बिल्कुल। पहले आपका ग्राउंड बना। बिल्कुल। अब अब ग्राउंड में क्या लगेगा? फूल लगेंगे। फूल किसके? रक्षा मंत्र के। बिल्कुल। अब अब आप ग्राउंड तैयार हो गया आपका। अब मंत्र जाप भी हो गया। रक्षा मंत्र भी उनका हो गया।

अब रक्षा मंत्र कितना करना है? अगर स्तोत्र है देखिए अगर रक्षा मंत्र का स्तोत्र है तो कम से कम आपको एक माला डेली की करनी है 40 दिन तक। बिल्कुल। सही कह रहे हो आप। इस तरीके से अगर आप करेंगे अब आपका ग्राउंड तैयार हो चुका है। बिल्कुल। अब ग्राउंड तैयार हो गया साधना करने के लिए।

ये बेसिक चीजें हम इसलिए बता रहे हैं कि जो नए साधक हैं जो हाई लेवल है ये तो हमारे पास एडवांस लेवल की है जो बातें अभी इसके बीच नहीं अभी बताएंगे। जी वो तो अलग से पोस्ट बनेगा। ये बेसिक चीजें जो नए-नया आना चाहते हैं। जी तो उन लोगों के लिए ये चीज है। पहले इस चीज की प्रैक्टिस करें। अपना ग्राउंड अपनाएं।

उसके बाद फिर साधना क्षेत्र में कुछ देखो आपकी जब तक नींव अच्छी होगी ना मान लो आपकी टांगे मजबूत है ना तो शरीर अपने आप मजबूत बनेगा टांगे कमजोर है ऊपरला शरीर मजबूत बनाकर क्या करोगे जी क्योंकि आपकी मकान की नींव अच्छी होनी चाहिए तभी वो भूकंप को सहन कर सकती है अगर नीव अब ग्राउंड को और पक्का करने के तरीके अब आप आगे बताओ।

हां मैं बताता हूं मान लो कि जैसे आपने ये सब कुछ कर लिया है अब आपसे थोड़ी बहुत चूक रह रही कि मैंने साधना पे चलो मान लिया मैंने ये कर लिया है जो नए-नए अनाड़ी हैं हमने ये सब कुछ कर लिया थोड़ा सा एक स्टेप ऊपर और आना चाहते हैं

तो मैं यही उनसे बोलूंगा अगर आपने गुरु को धारण किया है तो सबसे बेटर बात है गुरु मंत्र मिला तो बेटर है नहीं है तो तो क्या करना है मान लो आपका इष्ट है जी इष्ट जो कुलदेव है कहने का मतलब जो घर में चल रहा है

तो क्या बोलना है ओम लगाना है पहले बीच में उसका नाम लेना है नमः बोलना है ये आपका आपका इष्ट का मंत्र बन गया। सिंपल है। ऐसे ही चलता है। जी। ओम। मान लो जैसे आपके हनुमान जी चल रहे। ओम हनुमते या हनुमान या हनुमते कह सकते हो। नमः कह सकते हो या भगवान शंकर चल सकते ओम ओम बोलकर उनका नाम लिया शिवाय नमः बोलना है।

या विष्णु देव जैसे ओम नमो भगवते वासुदेवाय। इसका प्रोसेस आपने डेली एक माला करना है। 41 दिन तक इससे कि आपकी एनर्जी का फ्लो और बढ़ जाएगा। जी जी इस साधना के क्षेत्र में बिल्कुल सिर्फ जाप ही उसमें करना है। आपने और विधि-विधान ऐड नहीं करना है। इससे आपका एनर्जी लेवल और बढ़ेगा।

ये कांसेप्ट क्लियर करने के बाद आपने क्या करना है? मान लो आसन का जो जाप होता है वो आपको आना चाहिए। एक कारण क्या है? जो हमारे पंडित लोग हैं जो वैदिक धर्म से चलते आ रहे हैं वो हमेशा अपने आसन का शुद्धिकरण करते हैं। संस्कृत मंत्र है वेबसाइट पे भी अवेलेबल है।

इंटरनेट पर भी अवेलेबल है। वो कर सकते हो। वो करना बेसिक रूल है क्योंकि अपना पवित्रीकरण करना अपनी आत्मा का बॉडी का और आसन का कंपलसरी होता है साधना के क्षेत्र में तंत्र के क्षेत्र में भी। जी। जी क्योंकि अगर ये आपने कर लिया तो आपकी जो साधना का जो मंत्र जपोगे वो आपको हजार गुना उसका फल मिलेगा ही मिलेगा

। जी ये बात है जी रुद्रनाथ जी मेरी तरफ से तो देखिए जो आसन मंत्र होता है यह भी गुरु से ही मिलता है आसन जाप बोलते हैं ठीक है ना संप्रदाय का अलग है वैदिक तरीके से अलग अलग है अलग है जो हमसे दीक्षा लेगा हमने तो उसको ट्रेंड करना ही करना है ए टू जेड जो भी है ठीक है और अब आगे गुरु दीक्षा भी हो गई आपकी अच्छा उसके बाद अब आगे की मैं कुछ चीजें बताता हूं ठीक है अब आगे जैसे सबसे पहले किए जाते हैं तंत्र में काल भैरव बिल्कुल कंपलसरी है कंपलसरी है ये तो काल भैरव पहले करेंगे फिर उसके बाद करोगे आप महाकाली ठीक है.

शक्ति साधना जगाएंगे हां तो इस तरीके से आपका ये आगे सीक्वेंस से फिर साधना चलेंगे बेसिक में काल भैरव चलेंगे चलेंगे चलेंगे भाई वो तो चलेंगे चलेंगे कंपलसरी है सीधी-सीधी बात जैसे बॉडी में दिमाग कंपलसरी है ना हार्ट कंपलसरी है दिमाग हो गए हमारे काल भैरव  हो गया महाकाली या दुर्गा जी मतलब कि आपको डरने की जरूरत नहीं है। उसके बाद आप आगे कोई भी गुरु आज्ञा से साधना करें। हां जो ये एक तरीके से आपका ग्राउंड बना है। बिल्कुल पक्का भाई जितना मर्जी तेज भूकंप आ जाएंगे आप हिलोगे नहीं आसन से।

बिल्कुल क्योंकि दूसरी चीज जो हमने शुरू में जो आपको बताया इष्ट देव का जाप का कवच।

उससे फायदा यह होगा अगर साधना में कोई चूक हो गई तो फिर क्या होगा उसमें? कि आपकी रक्षा होगी। वो करेगा। बिल्कुल। अब ऐसे ऐसे साधक कुछ हमारे थे। जैसे बिना गुरु आज्ञा के किसी ने प्रेत साधना करवा दी। और उनका पीछे इष्ट देव की कृपा थी। प्रेत आया। प्रेत ने पता है क्या बोला? तुम्हारा पीछे इष्ट खड़ा था। नहीं तो मैं तुम्हें देख लेता। बिल्कुल। मैं एक थप्पड़ मारता। और तुम यहां गिर जाते। गिर जाते खा जाता उसको खत्म ही कर देता। हां इसीलिए बचा है क्योंकि इष्ट देव है। इसीलिए बोलता हूं इष्ट देव की पावर बहुत जरूरी है।

बिल्कुल बिल्कुल आने वाले टाइम में मैं तुम्हें बताऊंगा भी लाइव होकर हम और रुद्रनाथ जी कैसे लाइव पोस्ट डाला जाता है। बेसिक चीजों के ऊपर आपको पता रहेगा। ये चीजें आएंगी। अब अगर नाथ संप्रदाय का बेसिक देखें तो उसमें फिर धूने का मंत्र भी सीखा जाता है।

वो चीजें मंत्र तो बिल्कुल बिल्कुल आसन जाप आना चाहिए रक्षा की कील आनी चाहिए धूने का मंत्र आना चाहिए धूने को चैतन्य कैसे करना है वो आना चाहिए जी जी मैं यही चीज कहूंगा कि जो भी साधक हैं पहले इस तरीके का अपना ग्राउंड बनाएं ठीक है उसके बाद किसी अच्छे गुरु से दीक्षा लेके फिर आगे बढ़े पहले योग्य बनो योग्यता लाओ अपने अंदर उसके बाद आगे बढ़ो आप देखो जब गुरु के पास आते हो सीधी बात है हमारे पास दोनों के पास आओ रुद्रनाथ जी और सागरनाथ जी के पास तो ब्लैंक पेपर बनके आना है।

पूरा पेपर बन के नहीं आना है। हमने तुम्हें नंबर नहीं देने। ब्लैंक पेपर बनोगे हमसे सीखोगे तो नंबर दुनिया देगी तुम्हें। हम नहीं देंगे। अगर तुम पहले से अपने आप को फिल करके आओगे पेपर को भर के तो हमारी तरफ से जीरो नंबर मिलेंगे। क्यों? हमारी साधनाएं जितनी है एडवांस लेवल की है।

जी जो एडवांस कर गया पीएचडी डिग्री कर गया समझो उससे नीचे ही है बाकी की डिग्री। बिल्कुल। और क्या है? ध्यान की प्रैक्टिस भी अच्छी करें। प्रारंभ में ध्यान की प्रैक्टिस के लिए त्राटक कर सकते हैं। त्राटक जरूरी है भाई। जो घर पे जोत लगाते हो उसको देखो। टकटकी ही लगा के बिल्कुल देखो।

पता रहे तो चीजें इसमें ये है पद्मासन के अंदर आप दो से तीन घंटा बैठ सकते हैं।

तभी आप फिर आगे और साधना के लिए एलिजिबल रहेंगे। एलिजिबल तो है ही। सही बात है रुद्र। आप अपने आप को पहले एलिजिबल बनाओ। उन तरीके से बैठना सीखो। बैठो। माला कैसे पकड़ी जाती है? तो ये चीजें जरूरी है। भाई सीधी बात है। हम पहले जब बच्चे का जन्म होता है।

जी पहले उसको बताया जाता है किस तरीके से तुम्हें चलना है कपड़े पहनने खाना है। हाथ पकड़ पकड़ के सारे काम करवाने हैं। जी तो वही चीज इस क्षेत्र में भी होगी। बिल्कुल। वो आपको बताएंगे। सागरनाथ जी भी बताएंगे और रुद्रनाथ जी भी बताएंगे। दोनों बताएंगे कैसे चलना है। चलना बाकी अब कोई है।

बिल्कुल देखो हम हम तो आपको सपोर्ट करेंगे गुरु बनके पूरी तरह। अब वो कर्म आगे आपने कैसे करना है कैसे चलाना है वो तो आपके ऊपर ही है ना हमने थोड़ी आपके भीतर घुस जाना है। जी जी जी पहले सिंपल आराधना करने वाले आप एक भगत बनो। बिल्कुल। फिर आगे प्रमोशन होगा तो साधना।

मतलब सारी बात इतनी है कि साधना अगर करनी है तो दो से ढाई घंटे अपने आप खुद को देने सीखो। बिल्कुल बिल्कुल जब वो आप देने शुरू कर गए समझो आप एलिजिबल हो जाते हो इस क्षेत्र में आने के लिए। बिल्कुल पहले तो रीढ़ की हड्डी सीधी कर लो पहले अपनी ना बाकी बातें बाद में करना।

बाकी बातें बाद में रीढ़ की हड्डी तो आपकी सीधी हुई नहीं। अभी तक इतने बिल्कुल क्या है? जिन सिद्ध करनी है, महाकाली सिद्ध करनी है, दुर्गा सिद्ध करनी है, हनुमान सिद्ध करनी है। वो तो बाकी बातें बाद में है। पहले बैठना जरूरी है। इनको बैठना कैसे है।

 खाना किस प्रकार से है ये भी बता देता हूं।

खाने की बात ये है। जब भी आप साधना करो भर पेट मत खाओ। उतना खाओ जिससे शरीर चले। बस चले बस। इतना भी ये नहीं है कि ज्यादा खाना। ठूसने की जरूरत नहीं है। ठूसने की जरूरत नहीं। बाद में ठूस सकते हो। साधना करने बाद उठ जाओगे। पहले नहीं ठूसना है। बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल क्योंकि पेट के भार बैठना है ना जैसे टांगे की पालथी मारी है।

पेट के ऊपर पूरा वजन रहता है उस समय। बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल उस चीज को कम करना है। पानी भी नहीं इतना ठूसना है कि बार-बार लघु शंका ही आती रहे आपको। बिल्कुल। लघु शंका पूछेंगे। पेशाब को बोलते हैं भाई। देखो मेरे हिसाब से ना साधना काल में ना फलाहार लेना चाहिए ज्यादा से ज्यादा। बिल्कुल। के ज्यादा मतलब दोपहर में ऐसा ना हो कि बहुत ज्यादा आप खा जाओ।

आप मतलब फलाहार लो सिंपल खाना खाओ सिंपल सा और शरीर को लाइट रखो। बस बहुत है। बिल्कुल। तभी आप लंबे समय तक बैठ पाओगे। ज्यादा खाना खाओगे और बाकी आएंगी। गैस बनेगी। पेट में गड़बड़ होगी। फिर कैसे आपका ध्यान लगेगा? बिल्कुल। पेट पहले ही भर गया तो फिर कहां भाई अपना सिमरन अंदर डालोगे भाई? सिमरन नहीं डाल सकते भाई। बिल्कुल।

तो ठीक है रुद्रनाथ जी मेरी तो हिसाब से तो हमने बहुत चीजें बेसिक इनको समझा दी है। अब समझाने की कोई जरूरत है नहीं है। जी जी जो एडवांस साधक है चलो फिर उनके लिए पोस्ट रह गया उनके से हम अलग बनाएंगे उनके लिए कैसे चलना है। बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल ठीक है रुद्रनाथ जी फिर तो जय माता दी समाप्त करते हैं। जी जय माता जय माता दी जय श्री महाकाल।

Brahmarakshas ब्रह्म राक्षस परिचय और भ्रांतियों पर विचार कौंन होता है

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Rodhar nathhttp://gurumantrasadhna.com
मैं रुद्र नाथ हूँ — एक साधक, एक नाथ योगी। मैंने अपने जीवन को तंत्र साधना और योग को समर्पित किया है। मेरा ज्ञान न तो किताबी है, न ही केवल शाब्दिक यह वह ज्ञान है जिसे मैंने संतों, तांत्रिकों और अनुभवी साधकों के सान्निध्य में रहकर स्वयं सीखा है और अनुभव किया है।मैंने तंत्र विद्या पर गहन शोध किया है, पर यह शोध किसी पुस्तकालय में बैठकर नहीं, बल्कि साधना की अग्नि में तपकर, जीवन के प्रत्येक क्षण में उसे जीकर प्राप्त किया है। जो भी सीखा, वह आत्मा की गहराइयों में उतरकर, आंतरिक अनुभूतियों से प्राप्त किया।मेरा उद्देश्य केवल आत्मकल्याण नहीं, अपितु उस दिव्य ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाना है, जिससे मनुष्य अपने जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझ सके और आत्मशक्ति को जागृत कर सके।यह मंच उसी यात्रा का एक पड़ाव है — जहाँ आप और हम साथ चलें, अनुभव करें, और उस अनंत चेतना से जुड़ें, जो हमारे भीतर है ।Rodhar nath https://gurumantrasadhna.com/rudra-nath/
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