Month: August 2023

दिव्य दृष्टि प्राप्त करने का मंत्र – दिव्य दृष्टि सिद्धि divya drshti praapt karane ka mantra ph. +91 85280-57364

दिव्य दृष्टि प्राप्त करने का मंत्र - दिव्य दृष्टि सिद्धि divya drshti praapt karane ka mantra

दिव्य दृष्टि प्राप्त करने का मंत्र – दिव्य दृष्टि सिद्धि divya drshti praapt karane ka mantra

दिव्य दृष्टि प्राप्त करने का मंत्र – दिव्य दृष्टि सिद्धि divya drshti praapt karane ka mantra यदि आप दिव्य दृष्टि प्राप्त करना चाहते हैं, तो हम आपको बताएंगे कि यह कैसे करना है, इसलिए हमारे साथ रहें, दोस्तों, हमारी साइट पर आपका स्वागत है।तांत्रिक साधु बनना उतना आसान नहीं है जितना हम सोचते हैं दोस्तों। साधक बनने के लिए आपको बहुत कुछ सहना पड़ता है, कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।

कई लोग सिर्फ साधक के नाम पर, केवल पैसे ठगने की प्रक्रिया में हैं। ऐसे कई ज्योतिषी हैं जहां वे बड़ी से बड़ी विपत्ति को भी दूर कर देते हैं। लेकिन कुछ ज्योतिषी धन धोखा देने के बारे में भी सोचते हैं।

तो दोस्तों आज मैं आपके सामने एक ऐसा मंत्र बताऊंगा  जहां आपको गर्व महसूस होगा। और आप इतना शक्तिशाली मंत्र सिद्ध कर सकते हैं, एक बार इस मंत्र को सिद्ध कर लेने के बाद आपको दिव्य दृष्टि की शक्ति प्राप्त हो जाएगी।

दिव्य दृष्टि प्राप्त करने का मंत्र - दिव्य दृष्टि सिद्धि divya drshti praapt karane ka mantra
दिव्य दृष्टि प्राप्त करने का मंत्र – दिव्य दृष्टि सिद्धि divya drshti praapt karane ka mantra

साधक दिव्य दृष्टि प्राप्त करने के लिए तंत्र किरया में मेहनत  करते हैं लेकिन अभी तक सफल नहीं हुए हैं।  क्योंकि दिव्य दृष्टि को पूरा करने के लिए अपने शरीर को पूर्णता के लिए समर्पित करना आवश्यक है।

आप इस शरीर में आराम नहीं कर सकते हैं और  आपको दिन में तीन बार नहीं खाना चाहिए? इसके कुछ महत्वपूर्ण नियम हैं और इस नियम का पालन करना आसान नहीं है। जी हां, अगर आपका मन शुद्ध है तो यह सब काम आपके लिए आसान हो सकता है। इतिहास में केवल कुछ ही महात्मा के पास दिव्य दृष्टि थी।

 

उदाहरण के लिए, महाभारत में युद्ध के दौरान, धृतराष्ट्र देख नहीं सकता था, और जन्म से अंधा था, इसलिए संजय उसके पास ही रहा। वह जानता है कि संजय को वेदव्यास से प्राप्त हुईदिव्य दृष्टि प्राप्त हुई थी इसलिए महाभारत में युद्ध का परिणाम जो भी हो, संजय अपनी दिव्य आंखों से सभी परिणामों को देखते थे और उन्हें राजा दरिताष्टर को सुनाते थे।

 

महाभारत  शुरू होने से पहले भगवान श्री कृष्ण ने बंदू अर्जुन को  को उपदेश दिया था, जिसे हम भागवत गीता के नाम से जानते हैं।  धर्मोपदेश देते समय भगवान श्री कृष्ण अर्जुन ने विराट  रूप के दर्शन दिए और उस समय दर्शन देने के कारण अर्जुन को दिव्य दृष्टि देनी पड़ी, अन्यथा अर्जुन इतने विशाल विराट रूप को अपनी आंखों से नहीं देख पाते।

तीसरा, आप रामायण के बारे में जानते हैं। उन्होंने रामायण होने से पहले ही पूरी रामायण लिख दी थी और यह तभी संभव हो पाया था जब कठोर साधना  किया और ब्रह्म देव से कृपा प्राप्त की और दिव्य दृष्टि भी प्राप्त की। वाल्मीकि जी  अपनी दिव्य दृष्टि से भूत, भविष्य और वर्तमान को जानने में सक्षम था।

 

आज हम जानेंगे कि दिव्य दृष्टि क्या होती है। हम इसे कैसे प्राप्त करते हैं और इसके बहुत मजबूत लोगो के क्या लाभ हैं?

 

आपने तीसरी आंख के बारे में सुना होगा और आपने इसे भगवान शिव की तस्वीर  में देखा होगा और यह दिव्य आंख,  दिव्य  दृष्टि है। जब आप इस आंख को खोलते हैं, तो ये शक्तियां मनुष्य के जीवन में संचारित होती हैं जिसका आप अनुमान भी नहीं लगा सकते हैं।

इस आंख को खोलते समय घर बैठे तीनों  लोकों की यात्रा करते हुए भूत, भविष्य और वर्तमान को आसानी से जाना जा सकता है। ये आंखें हम मनुष्यों को दिखाई नहीं देती हैं, लेकिन वेदिव्या दृष्टी  में दिखाई देती हैं, यदि आप आप तीसरी आंख को जगाना चाहते हैं या फिर उसी  से देखना चाहते हैं, आइए आपको बताते हैं कि आप कैसे सफल हो सकते हैं।

दिव्य दृष्टि प्राप्त करने का मंत्र

ॐ ह्रीं मम् मूलाधारे
तु सहस्रारे कुण्डलिणियाँ जाग्रय
स्फोटय समस्त ब्रह्माण्ड दिव्य
दर्शनाय चैत्तन्य परिपूर्णाय
ह्रीं नम:

सबसे पहले किसी सुनसान जगह पर हाथ में 108 मनको  की माला लेकर बैठ जाएं।  अगले मंत्र को पढ़ते  रहें।  आप तब तक मंत्र जप  करते रहे जब तक आपकी तीसरी आंख को अनुभव  नहीं हो जाता।  इस मंत्र का जाप करते समय अपने मन को एक प्रबल बल से जोड़ें और किसी अन्य चीज़  की ओर न अकृषित हो  ।  बस अपने मन और शरीर को पूरी तरह से भगवान को समर्पित कर दें। इस मंत्र का जाप करने से आप स्वयं समझ सकते हैं कि इस मंत्र में बहुत शक्ति है।

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भविष्य जानने का शिव मंत्र – भविष्य जानने की सरल विधि bhavishy jaanane ke lie shiv mantra ph. +91 85280-57364

भविष्य जानने का शिव मंत्र - भविष्य जानने की सरल विधि bhavishy jaanane ke lie shiv mantra

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भविष्य जानने का शिव मंत्र - भविष्य जानने की सरल विधि bhavishy jaanane ke lie shiv mantra
भविष्य जानने का शिव मंत्र – भविष्य जानने की सरल विधि bhavishy jaanane ke lie shiv mantra

 

भविष्य जानने का शिव मंत्र – भविष्य जानने की सरल विधि bhavishy jaanane ke lie shiv mantra गुरु मंत्र साधना में आपका स्वागत है आज मैं आपको भूत भविष्य जानने का शिव मंत्र प्रदान कर रहा हु यह साधना सात्विक और सौम्य है ,भगवन शिव की साधना है। जिसको सिद्ध करने के बाद आप किसी का भी भूत भविष्य वर्तमान जान सकते है।

इसके इलावा आप शेयर मार्किट और सट्टे के नंबर भगवन शिव की किरपा से प्राप्त कर सकते है। यह प्राचीन मंत्र मैं आपको प्रदान करूंगा जिसे आप की अन्य भी ख़तम हो जाएगी और आप अन्य लोगो की समस्या का भी समाधान कर सकते हो। 

भविष्य जानने का शिव मंत्र – भविष्य जानने की सरल विधि 

मंत्र:- ॐ अजाय त्रिनेत्राय पिंगलायै महात्मे वामाय विश्वरूपाय स्वपनाधिपत्ये नमः स्वपने कथय मैं कथयम् सर्व कार्य अवशेषत्, क्रिया सिद्धि सट्टा सिद्धि विद्या स्वामी तवत् प्रसादात् महेश्वर:।।

 

भविष्य जानने का शिव मंत्र – भविष्य जानने की सरल विधि

भविष्य जानने का शिव मंत्र – भविष्य जानने की सरल विधि  किसी भी शुक्लपक्ष के सोमवार को अपने घर पर शिवलिंग की स्थपना करे गुरु मंत्र का जप करे फिर गणेश मंत्र का जप करे 

 रुद्राभिषेक शिव की पूजा का एक महत्वपूर्ण रूप है। शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद, धातु, फल, फूल आदि का अर्पण करें । रुद्राभिषेक के साथ मंत्रों का उच्चारण करें 

शिवलिंग की पूजा शिव के प्रति आपकी भक्ति और समर्पण  से करे । शिवलिंग पर जल अर्पित करें और बिल्व पत्र, धातु और फूल चढ़ाएं। इसके साथ ही “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें।

फिर आप ऊपर दिए गए भविष्य जानने का शिव मंत्र का ५ माला जप करे।  शिव साधना के दौरान सदाचार का पालन करें और अपने आहार में सात्विक आहार का सेवन करें। ध्यान के द्वारा अपने आत्मा को शुद्ध करें और शिव के प्रति अपनी श्रद्धा को बढ़ावा दें।

इस तरह से साधना  करने से भूत भविष्य वर्तमान की जानकारी होने लगेगी लाटरी सट्टे का नंबर शेयर मार्किट और किसी का भी भूत भविष्य वर्तमान जान सकते हो। आप को आपार  धन दौलत और मन सामान की भी प्राप्ति होगी। 

शिव साधना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सेवा और दान करे । गरीबों की सेवा करें और दान देकर उनकी मदद करें।  यह शिव की कृपा प्राप्त करने का एक उत्तम तरीका है।

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बगलामुखी अनुष्ठान – बगलामुखी अनुष्ठान के फायदे – चमत्कारी Bagalamukhi Ritual – Benefits of Bagalamukhi Ritual – Miraculous ph. 85280-57364

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बगलामुखी अनुष्ठान – बगलामुखी अनुष्ठान के फायदे – चमत्कारी Bagalamukhi Ritual – Benefits of Bagalamukhi Ritual – Miraculous गुरु मंत्र साधना  में आपका स्वागत है। आज हम  बगलामुखी अनुष्ठान क्या लाभ है  ,क्या महत्व है। अनुष्ठान किस लिए करते हैं। इसकी पूरी जानकारी दे रहा हूं दर्शकों बहुत सारी कमेंट  मेरे पास आते हैं  कर्ज बहुत है, धन की समस्या है कोई  कहता है इस रोग से ग्रस्त है तकलीफ है। सभी समस्या का एक समाधान है बगलामुखी अनुष्ठान

कुछ लोग कहते है मेरी दुश्मनी बढ़ती जा रही है बहुत से मेरे गुपत शत्रु है उनका  पता नहीं है।  कोई व्यापारी लोग मेरे पास आते हैं प्रतिस्पर्धा के कारण मेरे को मेरे व्यापार में बहुत सारी दिक्कतें आ रही है। वह हमारे बारे में बुरा सोच रहे है। बगलामुखी अनुष्ठान करे 

हमारे बारे में बुरा  कर रहा है और कोई घरेलू संबंध में भी बगलामुखी का अनुष्ठान का महत्व है। जैसे की  घर में धन की समस्या है,बहुत कर्जा बढ़ गया है  काम बिलकुल बंद हो गया है।बगलामुखी अनुष्ठान करे  

कोई व्यक्ति जादू टोना कर रहा है।  दस विद्या  से बगलामुखी  यह सभी प्रकार के समस्या  को दूर करने के लिए बगलामुखी अनुष्ठान करे अपने शास्त्रों में आठ नंबर की जो देवी है, उसे बगलामुखी देवी कहते हैं। 

उसे सारे दुखों को दूर करते हुए किसी को कोर्ट कचहरी का प्रॉब्लम है।  किसी का झगड़ा चल रहा है,तो उसमें विजय प्राप्त करने के लिए पूर्वी के जमाने के राजा रजवाड़े में तो ब्राह्मणों के माध्यम से यह बगलामुखी का अनुष्ठान वह करते थे।  

अगर आप किसी कोई  पसंद करते है आप उसके साथ शादी करना चाहते है पर आप के प्रेम विवाह में बाधा  उत्पन्न हो रही है ,तो आप बगलामुखी अनुष्ठान जरूर करे आप की समस्या बहुत ही तीव्र गति से ख़तम होगी। 

इस अनुष्ठान के माध्यम से आप किसी भी कार्य जीत हासिल कर सकते है। वोटो में जीत हासिल करने के लिए  बड़े बड़े पॉलीटीशन माँ बगलामुखी अनुष्ठान करवाते है। 

आपार  धन ऐश्वर्य के लिए आप माँ बगलामुखी अनुष्ठान करवा  सकते है। वशीकरण उच्चाटन स्तंभन क्रिया इस अनुष्ठान से करवा सकते है। 

बगलामुखी की साधना उपासना करने से विरोधी हमारे सामने टिक नहीं पाते हैं। इनकी उपासना से जीवन और खुशहाल हो जाता है। यदि किसी व्यक्ति को अपने जीवन में लंबे समय से कोई कष्ट या चिंता है तो वह मां बगलामुखी माता अनुष्ठान करवा के पुण्य अर्जित करें जो भी व्यक्ति बगलामुखी की अनुष्ठान  करवाता  है। वह सभी दुखों से दूर हो जाता हैऔर सर्वशक्ति संपन्न हो जाता है। 

मां बगलामुखी देवी की जो भी अन्य इसी प्रकार की परेशानी किसी प्रकार की विपदा किसी प्रकार के रोग से ग्रसित हैं।   मां बगलामुखी देवी का दिव्य अनुष्ठान करवाए  और अपने जीवन में अनेक दुर्लभ लाभ प्राप्त करें। 

बगलामुखी अनुष्ठान का प्रभाव परचंड है इसको किसी भी कार्य के की सिद्धि के लिए  उपयोग कर सकते है। हर कामना की पूर्ति के लिए  अलग समाग्री का इस्तमाल होता है। 

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धन प्राप्ति के लिए बगलामुखी मंत्र – सबसे प्रभावशाली मंत्र Bagalamukhi Mantra for getting money ph. 85280-57364

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धन प्राप्ति के लिए बगलामुखी मंत्र - सबसे प्रभावशाली मंत्र

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धन प्राप्ति के लिए बगलामुखी मंत्र - सबसे प्रभावशाली मंत्र
धन प्राप्ति के लिए बगलामुखी मंत्र – सबसे प्रभावशाली मंत्र

धन प्राप्ति के लिए बगलामुखी मंत्र – सबसे प्रभावशाली मंत्र Bagalamukhi Mantra for getting money जय माई महारानी  की भक्तों को मेरा नमस्कार हमने अभी तक आप सभी को मां के कई अध्याय के बारे में बताएं। हम आपको भगवती साधारण तंत्र प्रयोग के बारे में बताएंगे जो सभी अत्यंत प्रभावकारी हैं और बगलामुखी का कोई भी साधना  इन प्रयोगों को आसानी से कर सकता है। उन्हें बताने जा रहा हु आपको बता दूं कि इस  प्रयोग से मंत्र जप से धन ऐश्वर्या को प्राप्त करोगे। यद्यपि देवी का मंत्र पिछली कई पोस्ट में हम ने आपको दिया है। 

लेकिन आज मैं एक बार फिर वह मंत्र वापस आपके लिए दोहरा रहे मंत्र इस प्रकार है

धन प्राप्ति के लिए बगलामुखी मंत्र – सबसे प्रभावशाली मंत्र Bagalamukhi Mantra for getting money

ओम् हलीं बगलामुखि
सर्वदशनां वाचं मखं पदं
स्तम्भय जिहवां कीलय बुद्धि
विनाशय ह्रीं ओम स्वाहा 

धन प्राप्ति के लिए बगलामुखी मंत्र Bagalamukhi Mantra for getting money- सबसे प्रभावशाली मंत्र साधना  विधि 

बगलामुखी देवी के मंत्र का सवा लाख जाप कर  शकर  के मधु गुड़ में शक्कर मिला के कर लिया जाए सरसों से हवन करने से अभीष्ट व्यक्ति वशीभूत हो जाता है, दूध मिश्रय चावलों हवन करने से धन संपति ऐश्वर्या की प्राप्ति होती है।

तेल में भिगोकर नीम की पत्तियों के हवन से विद्वेषण किरया हो सफल बनाया जा सकता है

तथा तेल नमक और हल्दी के हवन से सतंभन होता ४ लाख जपसे करके दशांश हवन गग्गल तिल के द्वारा हवन करने से जेल से छुटकारा मिलता है।

मंत्र का सवा लाख शब्द करने के बाद कुम्हार के चौक की मिट्टी 4 अंगुल की अरंड की लकड़ी और मीठा लास यानी मधु और शक्कर से बनाया हुआ भुने चावलों के द्वारा लाजा से हवन करने से शरीर के समस्त रूपरोग नष्ट हो जाते है

इस साधना को बिना गुरु के मार्गदर्शन और आज्ञा से न करे 

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अप्सरा साधना के नियम – यक्षिणी के साधना Rules of Apsara Sadhna – Rules of Sadhna of Yakshini ph. 85280-57364

अप्सरा साधना के नियम - यक्षिणी के साधना Rules of Apsara Sadhna - Rules of Sadhna of Yakshini

अप्सरा साधना के नियम – यक्षिणी के साधना Rules of Apsara Sadhna – Rules of Sadhna of Yakshini  ph. 85280-57364

अप्सरा साधना के नियम - यक्षिणी के साधना Rules of Apsara Sadhna - Rules of Sadhna of Yakshini
अप्सरा साधना के नियम – यक्षिणी के साधना Rules of Apsara Sadhna – Rules of Sadhna of Yakshini

अप्सरा साधना के नियम – यक्षिणी के साधना Rules of Apsara Sadhna – Rules of Sadhna of Yakshini हर साधना के नियम होते है जिनको फॉलो करना बहुत जरूरी है अगर आप इन  नियमो को फॉलो करते हो तो आप उस साधना में सफल हो सकते है  अप्सरा यक्षिणी और कारन पिशाचिनी इतर योनि की साधना के नियम एक जैसे होते है यह नियम निम्न लिखे अनुसार है 

 

1  अप्सरा साधना के नियम – यक्षिणी के साधना के नियम

 

अप्सरा साधना को कोई भी संपन्न कर सकता है, चाहे स्त्री हो या पुरुष।

१८ से लेकर ६०-७० वर्ष के बीच के व्यक्ति अप्सरा साधना कर सकते हैं।

साधना करने से पहले मार्गदर्शन प्राप्त करें।

मंत्र जाप करते समय आँखें बंद करें।

गुरु से दिक्षा प्राप्त करें।

साधना को बीच में छोड़कर न जाएं।

स्त्रियों को मासिक धर्म के कारण ३ दिन की छूट मिलती है।

साधना को निश्चित समय पर शुरू करें, और १०-१५ मिनट बढ़ते जाएं।

साधना में उपांशु जाप का प्रयोग करें, अर्थात् बुदबुदाने के साथ जाप करें और होंठ हिलने दें।

जल्दबाजी नहीं करें, साधना की निर्धारित अवधि में करें।

कुछ साधकों को बीच में ही साधना सफल हो गई मानकर उन्होंने साधना को छोड़ दिया, लेकिन अप्सराएँ परीक्षाओं का आयोजन करती रहती हैं।

 

2  अप्सरा साधना के नियम – यक्षिणी के साधना के नियम साधना के प्रति पूर्ण विश्वास रखें।

 

साधना के दौरान अपनी कामनाओं को नियंत्रित करें, और वासनाओं का कोई स्थान न दें, क्योंकि ऐसे विचार साधना को असफल बना सकते हैं।

कुछ साधक अप्सराओं के साथ शारीरिक संबंध की कल्पना करने लगते हैं, इसलिए ऐसी भावनाओं से बचें, क्योंकि ऐसी भावनाएँ साधना को असफल बना सकती हैं।

साधना के दौरान खुशबू का अहसास हो सकता है, और किसी के आस-पास चलने का भाव आ सकता है। सभी योग्यताओं को ध्यान में रखें।

कहा जाता है कि जब तक अप्सराएँ वचन नहीं देती, तब तक उनकी बातों पर विश्वास न करें।

साधना के प्रति पूर्ण विश्वास रखना जरूरी है, और साधना के प्रति समर्पण दिखाना भी।

उम्मीद है कि ये नियम आपके लिए उपयोगी सिद्ध होंगे।

 

3  अप्सरा साधना के नियम – यक्षिणी के साधना के नियम  के लिए स्थान का चयन:

साधना के लिए एकांतिक स्थान का चयन करें, जिससे कि आपकी पूजा या साधना में किसी प्रकार का व्यवधान न हो।

मंत्र जप की संख्या को पूरा करने के साथ-साथ, आपको एकाग्र भाव में पूजा अथवा साधना करनी चाहिए। जप के स्थान को शुद्ध और शांतिपूर्ण बनाए रखना आवश्यक है।

  • शास्त्रों में पवित्र नदियों के किनारे, पर्वतों, जंगलों, तीर्थ स्थलों, गुफाओं आदि को प्राथमिकता दी गई है। इन स्थलों पर मन स्वतः ही एकाग्र होने लगता है।
  • अपने घर में भी एकांतिक कमरे को शुद्ध और स्वच्छ बनाकर पूजा और साधना कर सकते हैं।

साधना के लिए एकांतिक स्थान का चयन करते समय आसन की विशेष ध्यान देना चाहिए।

 

 

3 अप्सरा साधना के नियम – यक्षिणी के साधना के नियम के लिए उपयुक्त आसन का चयन करें:

 

आप पालथी मारकर बैठ सकते हैं और मेरुदंड को सीधा रख सकते हैं।

कुशासन, रेशमी आसन, ऊनी आसन, म्रगचर्म आसन या व्याघ्र चर्म आसन में से साधना के अनुकूल आसन का चयन करें।

पूजा आराधना के समय उपयुक्त माला और यंत्र का उपयोग करें:

शिव-उपासना में रुद्राक्ष की माला और यंत्र का प्रयोग करें।

अप्सरा साधना के लिए अप्सरा माला और यंत्र गुटका का उपयोग करें।

लक्ष्मी उपासना में कमल गट्टे की माला का प्रयोग करें।

बगुलामुखी उपासना में हल्दी की माला का उपयोग करें।

4 अप्सरा साधना के नियम – यक्षिणी के साधना के नियम जप कार्य के लिए माला का उपयोग करें:

माला के सहाय्य से मंत्र जप करें। प्रातःकाल माला को नाभि के सामने, दोपहर को ह्रदय के सामने, सायंकाल मस्तक के सामने रखें।

मंत्र जप करते समय माला को गोमुखी में रखें।

5 अप्सरा साधना के नियम – यक्षिणी के साधना के नियम साधना के समय विशेष ध्यान दें

साधना काल में मल-मूत्र विसर्जन की विवशता होने पर पूनः हाथ-पैर और मुख धोकर आरंभ करें।

साधना किसी योग्य गुरु के निर्देशन में करना चाहिए।

साधना के दौरान दिशा का ध्यान रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नोट: शिव मंत्र और गणेश मंत्र की कम से कम 5 माला प्रतिदिन की अवश्यकता होती है।

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Exploring the Gayatri Mantra: Revealing its Significance, Advantages, and Historical Context ph. 85280-57364

Exploring the Gayatri Mantra: Revealing its Significance, Advantages, and Historical Context

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Exploring the Gayatri Mantra: Revealing its Significance, Advantages, and Historical Context
Exploring the Gayatri Mantra: Revealing its Significance, Advantages, and Historical Context

Exploring the Gayatri Mantra: Revealing its Significance, Advantages, and Historical Context The Gayatri mantra, an ancient Sanskrit incantation resonating across four millennia, occupies a profound space not only in antiquated spiritual traditions but also within contemporary popular culture.

This sacred utterance, revered by yogis and introduced to mainstream awareness through the Battlestar Galactica series and Deva Premal’s enchanting kirtan melodies, extends beyond being mere phonetic sounds.

It encapsulates deep-seated wisdom and cosmic enlightenment, thereby transforming the journey of understanding into a path of devotion and illumination.

In the forthcoming discourse, we embark on a voyage into the depths of the Gayatri mantra, wherein we unravel its core essence, merits, and origins.

The Gayatri Mantra: An Insight

At its core, the Gayatri mantra stands as a composition in Sanskrit that traces its origins to the Vedic era (1500-500 BCE). Serving as one of humanity’s oldest and most potent mantras, it encompasses within its syllables a reservoir of universal knowledge.

Revealing the Essence

Comprising 24 syllables, the Gayatri mantra is structured as follows:

Om bhuh, bhuvah, swaha (Aumm Bhoor Bhoo-va Su-va-ha)
Tat savitur varenyam (Tat Sa-vee-toor Var-ayn-yam)
Bhargo devasya dhimahi (Bar-go Day-vas-ya Dhee-ma-hee)
Dhiyo yo nah prachodayat (Dhee-yo Yo Nah Pra-cho-da-yaat)

Unraveling the Significance

The interpretation of the Gayatri mantra leads us to its fundamental message:

“O Divine mother, may the radiance of your pure divine light grace all dimensions (physical, mental, and spiritual) of our existence. Banish any shadows from our hearts and bestow upon us the illumination of true wisdom.”

Vyaas Houston’s rendition offers accessibility: “Earth, atmosphere, heavens. We meditate on the sacred light of the radiant source. Let that kindle our thoughts.” In the realm of yoga, the term “effulgent” symbolizes the luminous magnificence permeating celestial dimensions.

A Passage through the Components

Breaking down the Gayatri mantra uncovers layers of profound meaning:

Om: The primordial sound
Bhur: The human form, earth, corporeal existence
Bhuvah: Vital energies, celestial realm, consciousness
Suvah: The soul, inner expanse, spiritual domain, bliss
Tat: That
Savitur: The Sun, solar energies
Varenyam: To select, the finest, revere
Bhargo: Radiance, self-illuminating, divine light
Devasya: The divine, radiant
Dhimahi Dhiyo: the intellect
Yo: Which
Nah: Our, of us
Prachodayat: Illuminate, inspire
Embodiment of Illumination and Wisdom

Throughout diverse cultures and epochs, the sun has emblemized spiritual enlightenment. “Savitur” alludes to Savitri, the Vedic sun deity. The Gayatri mantra personifies universal light through Gayatri Devi, the cosmic mother and the force behind the sun. Chanting this mantra establishes a connection to cosmic frequencies, aligning us with higher dimensions.

Tracing the Origins

The narrative of the Gayatri mantra carries a tale of anger, envy, desire, and absolution. It commences with King Vishwamitra and Sage Vashista. Through trials, Vishwamitra’s pursuit of spiritual ascension culminated in the unveiling of the mantra. This narrative underscores the notion that enlightenment is attainable by all who diligently practice, transcending barriers of ego.

Illuminating Benefits

Regular recitation of the Gayatri mantra accumulates spiritual brilliance, elevating not only individual vibrations but also those of the collective. Chanting resonates with our intrinsic nature, reinforcing our inherent flawlessness and connection to the cosmos. This practice begets serenity, elation, elegance, abundance, and serves as a shield against negativity. Daily chanting is believed to dissolve karmic imprints from past incarnations.

Chanting Technique and Visual Deliberation

Reciting the Gayatri mantra at dawn and dusk, focusing on each syllable and its resonance, can evoke a profound impact. Visualizing the sun’s radiance permeating your heart, emanating outward to bless the world, enriches the experience. Silent recitation amplifies its potency.

Guidance in Nine Stages

Follow these steps for a potent chanting experience:

Sit in a serene enclave.
Close your eyes and inhale deeply.
Center your awareness on your breath.
Chant the mantra audibly, in a hushed tone, and then silently.
Sustain focus with each repetition.
Internalize the chant for a deeper connection.
Continue for as long as desired.
Breathe deeply after chanting to sense the mantra’s effects.
Engage in daily repetition for an inflow of positive energy.
Enhancing Practice through Visual Media

Engaging with Gayatri mantra videos aids in mastering pronunciation and rhythm. Diverse interpretations are accessible, each resonating distinctively. Explore platforms like YouTube for versions that harmonize with your being.

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हनुमान देह रक्षा मंत्र – शरीर रक्षा मंत्र- प्राण रक्षा मंत्र ph. 85280-57364

हनुमान देह रक्षा मंत्र - शरीर रक्षा मंत्र- प्राण रक्षा मंत्र इस शाबर मन्त्र के आराध्य देवता श्री हनुमानजी हैं। इसे सिद्ध करके कहीं भी आत्मरक्षा के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है।

हनुमान देह रक्षा मंत्र – शरीर रक्षा मंत्र- प्राण रक्षा मंत्र ph. 85280-57364

हनुमान देह रक्षा मंत्र - शरीर रक्षा मंत्र- प्राण रक्षा मंत्र
हनुमान देह रक्षा मंत्र – शरीर रक्षा मंत्र- प्राण रक्षा मंत्र

हनुमान देह रक्षा मंत्र – शरीर रक्षा मंत्र- प्राण रक्षा मंत्र इस शाबर मन्त्र के आराध्य देवता श्री हनुमानजी हैं। इसे सिद्ध करके कहीं भी आत्मरक्षा के लिए प्रयुक्त किया जा सकता है। शत्रुदल से घिर जाने पर अथवा भूत- प्रेतादि से आक्रांत होने पर इसका पाठ करते ही सारी आपदा दूर हो जाती है।

इस मन्त्र का जप करना ‘बीर चलाना’ कहा जाता है। यदि कोई व्यक्ति इसे विधिवत् सिद्ध कर चुका है, तो वह कैसे भी संकट के समय इसकी सहायता से संकट मुक्त हो सकता है।

कोई पैशाचिक विघ्न हो, प्रेतादि वायव्य आत्माओं का उत्पीड़न हो अथवा किसी के द्वारा किया गया कोई अभिचार कृत्य पीड़ा दे रहा हो या शत्रुओं ने घेर लिया हो अथवा हिंसक पशुओं के बीच पड़ जाने से प्राण संकट उत्पन्न हो गया हो तो ऐसे सभी अवसरों पर यह मन्त्र तुरन्त ही अपनी अमोघ शक्ति से आपदा का निवारण करके साधक को संकट मुक्त कर देता है।

हनुमान देह रक्षा मंत्र – शरीर रक्षा मंत्र- प्राण रक्षा मंत्र

जय हनुमान बारा वर्ष का जवान हाथ में लड्डू मुख में पान हांक मारत आय बाबा हनुमान मेरी भक्ति गुरु की शक्ति फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा ।

विशेष – जैसा कि कई बार इस बात को स्पष्ट किया जा चुका है कि किसी भी मन्त्र को प्रारम्भ में दीपावली या अन्य किसी शुभ तिथि को विधिवत् जपकर एवं हवन आदि क्रिया करके सिद्ध कर लेना चाहिए, क्योंकि सिद्ध मन्त्र ही प्रभावी होते हैं। सिद्ध किये जाने के बाद वे कभी भी पढ़े जाएं, तुरन्त अपना प्रभाव दिखलाते हैं।

साधक को प्रतिवर्ष दीपावली की आधी रात में अपने उस मन्त्र को इसी प्रकार पुनः सिद्ध करके वर्ष भर के लिए सशक्त कर लेना चाहिए। वैसे यदि कोई व्यक्ति अपने मन्त्र को प्रत्येक मंगलवार और रविवार की रात्रि में लोबान की धूनी देते हुए एक सौ पाँच सौ या एक हजार बार जप लिया करे तो वह मन्त्र निश्चित रूप से इन्द्र के वज्र की भांति अचूक, सशक्त और त्वरित परिणाम देने वाला हो जाता है।

प्रायः इस मन्त्र के सम्बन्ध में ग्रामीण जनों में कहा जाता है कि किसी ने ‘बीर चला दिया है, वस्तुतः बीर चलाना यही मन्त्र है। हनुमान जी स्वयं महावीर हैं, इसलिए उनका यह मन्त्र भी वीर की भांति चलकर अपना रहस्यमय एवं चमत्कारी प्रभाव दिखलाता है।

https://www.youtube.com/watch?v=3-dNYkY3I3c&pp=ygUmaGFudW1hYW4gYmFqcmFuZyBiYWFuIGhpc3RvcnkgaW4gaGluZGk%3D

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मुसलमानी अमल – मुसलमानी कलमा – धन दौलत प्रपात करने के लिए ph.85280 57364

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मुसलमानी अमल - मुसलमानी कलमा - धन दौलत प्रपात करने के लिए

मुसलमानी अमल – मुसलमानी कलमा – धन दौलत प्रपात करने के लिए

मुसलमानी अमल - मुसलमानी कलमा - धन दौलत प्रपात करने के लिए
मुसलमानी अमल – मुसलमानी कलमा – धन दौलत प्रपात करने के लिए

मुसलमानी अमल – मुसलमानी कलमा – धन दौलत प्रपात करने के लिए  इस अमल को पढ़ने से आपार धन दौलत के रस्ते खुलते है किसी  भी प्रकार की कोई  धन की कोई परेशानी  नहीं होती है। 

मुसलमानी अमल – मुसलमानी कलमा – धन दौलत प्रपात करने के लिए

या मुहम्मद दीन हजराफील भहक अल्लाह हो ।

सामग्री – जलपात्र, तेल का दीपक, लोबान, धूप आदि । माला – मूँगे की । समय – दिन का कोई भी समय आसन – किसी भी प्रकार का आसन । दिशा- पूर्व दिशा । जपसंख्या – नित्य ग्यारह सौ अवधि – चालीस दिन ।

विधि विधान 

यह मुसलमानी प्रयोग है तथा किसी भी शुक्रवार को प्रारम्भ किया जा सकता है । प्रातः उठकर व्यक्ति बिना किसी से बातचीत किये हुए सवा पाव उड़द के आटे की रोटी बनाये और उसे आंच पर अपने हाथों से सेके। इसके बाद रूमाल पर रोटी के चार टुकड़े करके रख दे।

उसमें से एक टुकड़े के पुनः ग्यारह टुकड़ें बनाये और उसको सामने रखकर उपर्युक्त मन्त्र का जप पूरा करे। जब ग्यारह सौ मन्त्रजप पूरा हो जाय तो वे छोटे-छोटे टुकड़े नदी या तालाब में ले जाकर डाल दे, जिससे कि मछलियाँ उनको खा जायें।

शेष रोटी के जो तीन भाग बचेंगे, उनमें से एक कुत्ते को खिला दे और दूसरा भाग कौवे को खिला दे एवं तीसरा भाग रास्ते में फेंक दे। इस प्रकार चालीस दिन नित्य करे तो उसे मनोवांछित नौकरी या रोजी प्राप्त होती है और आगे जीवन में किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं आती।

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नूरी जिन्न साधना | नेक जिन्न साधना जिन बनेगा दोस्त मंत्र से ph .8528057364

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नूरी जिन्न साधना | नेक जिन्न साधना जिन बनेगा दोस्त मंत्र से noori jinn sadhana|nek Jin sadhna ph .8528057364

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नूरी जिन्न साधना | नेक जिन्न साधना जिन बनेगा दोस्त मंत्र से noori jinn sadhana|nek Jin sadhna ph .8528057364

 

नूरी जिन्न साधना | नेक जिन्न साधना – जिन को दोस्त बनाने का मंत्र से ph .8528057364 जय महाकाल नूरी जिन्न साधना अमल आज आपकी प्रदान करेंगे यह एक अच्छा और नेक जिन्न है जो आपका दोस्त बनकर बड़े से बड़ा काम करेगा बहुत प्रकार के जिन्न  होते है उनमें से एक बड़ा है जिन्न  है जिसको  नूरी जिन कहा जाता है इससे आप कुछ  ही दिनो  में इसको बुलाकर कोई भी काम ले सकते हैं। 

लंबी चौड़ी साधना या वजीफा करने की आपको जरूरत नहीं है लेकिन यह आपको वचन  देगा कोई भी काम वह छोटा से छोटा हो या बड़ा से बड़ा हो कोई भी काम  हो आप इसे एक बार के अमल से कोई भी एक काम ले सकते हैं को हिंदू मुस्लिम सिख इसाई सभी कर सकते हैं। जो आपका काम होगा सिर्फ और सिर्फ जायज होना चाहिए नाजायज kaam होगा तो यह आपका काम नहीं करेगा

नूरी जिन्न साधना मंत्र  | नेक जिन्न साधना मंत्र | जिन को दोस्त बनाने का मंत्र  noori jinn sadhana – nek Jin sadhna

बिस्मिल्लाहेरहिमानिर्रहीम – या अलि मूल फत्ताहो नम्बरी, अल्लिमनी विस्सीद की बस्साऊ अति ।

नूरी जिन्न साधना विधि  | नेक जिन्न साधना विधि 

उत्तर या पश्चिमाभिमुख होकर आसन पर बैठें। अगरबत्ती या लोबान या दोनों की धूनी करें। ४१ दिनों तक नित्य ११०० बार उक्त मन्त्र का जप करें। १० वें या २५ वें दिन यदि विशालकाय ‘जिन बाबा’ के दर्शन हों तो पूर्ण श्रद्धा एवं निर्भयता के साथ गुलाब का फूल या चमेली का इत्र, बताशा, जलादि देकर मन की बात कहें। साथ ही प्रार्थना करें कि याद करने पर पधारने की कृपा करें। प्रसन्न होने पर जिन बाबा सभी कार्य पूरा करेंगे। साधना ४१ दिनों तक पूरी करें।

 

 

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काला जिन्न साधना -1 दिन की जिन साधना – जिन्न साधना सरल विधि ph. 85280 57364

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काला जिन्न साधना - 1 दिन की जिन साधना - जिन्न साधना सरल विधि ph. 85280 57364

काला जिन्न साधना – 1 दिन की जिन साधना – जिन्न साधना सरल विधि ph. 85280 57364

 

काला जिन्न साधना - 1 दिन की जिन साधना - जिन्न साधना सरल विधि ph. 85280 57364
काला जिन्न साधना – 1 दिन की जिन साधना – जिन्न साधना सरल विधि ph. 85280 57364

काला जिन्न साधना -1 दिन की जिन साधना – जिन्न साधना सरल विधि ph. 85280 57364 jay mahakal दोस्तों आज की post में मैं आपके लिए एक अजीब साधना लेकर आया हूं।  जिसको काला जादू बोलते है ठीक है।  इसके जरिए से आप जिन्न को बहुत ही जल्द बुला सकते हो सिर्फ 1 मिनट या 2 मिनट के अंदर ही हाजिर हो जाएगा  और मैं आपको बिल्कुल भी रिकमेंड नहीं करूंगा कि आप करो ही मैं आपको जबरदस्ती नहीं कर रहा हूं

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लेकिन बहुत ज्यादा अगर आपकी परेशानी है ज्यादा आपकी मुश्किलात है।  आपकी मर्जी से ही सबल कर करो।  इजाजत मैं इस अमल की नहीं देने वाला और इजाजत आप अगर आप करना चाहते हैं। तो खुद के दिल से आप इस साधना को कर सकते हैं ठीक है जो अमल है। 

यह है काला इल्म और ब्लैक मैजिक जिनको बोला जाता है और बहुत ही जल्द से आ जाता है 2 मिनट के अंदर ही जिन आपके सामने खड़ा हो जाएगा। मैंने तो कभी बुलाया है। अब वह कौन सी सूरत में कौन सी शक्ल में आपके सामने आता है देखना आप जाने और जिन्न जाने ठीक है। 

लेकिन यह मैं गारंटी देता हूं कि कम से काम समय से बहुत ही जल्द एक दो या लास्ट 3 मिनट के अंदर ही आपके सामने जिन हाजिर हो जाएगा।  जो कि काला जिन होगा और मतलब कल जिन मतलब वह जिन जो हर काम करके देगा। 

आपके काला जिन्न अगर आप इसको खुश करोगे तो यह आपको खुश करेगा। आखरी तक ठीक है पहले ही बता रहा हूं।  आपको अगर आप कर रहे हो और औरतों को तो मैं पहले ही बता देता हूं कि देखिए आपके दिल कमजोर होते हैं। 

कैसे सूरत में को ना करें ठीक है मर्दों के लिए बता रहा हूं। उनकी हिम्मत ही अच्छी होती है जो अच्छी हिम्मत क्या है। जिसमें हिम्मत है। जिसमें मतलब जो डरता नहीं है बिल्कुल भी वही संभल को कर सकता है। 

ज्यादा पढ़ना भी नहीं है ठीक है और लंबे समय तक करना भी नहीं है।  क्योंकि बात ही बहुत ही जल्द आ जाता है।

 जिन्न साधना सरल विधि

सबसे पहले आप एक काला कपड़ा ले ले रात के वक्त में 12 के बाद इस समय को करना है और काला कपड़ा बढ़ा ले जो भी आप रूम में करना चाहते हैं।  छत पर करना चाहते हैं कहीं बाहर करना चाहते हैं उसे जगह पर काला ही कपड़ा बिछाना पड़ेगा।

दूसरा कपड़ा नहीं चला ठीक है और उसके बाद में बैठ जाए उसे समय को इसमें कुछ भी आगे पीछे आगे दुरु शरीफ वगैरा लगाने की जरूरत नहीं है।  ठीक है करने के लिए काला कपड़ा बढ़ा दे और  इसको करने के लिए जिन्न फज  इतना ही आपको पढ़ने जाना है जब तक कि वह हाजिर नहीं हो जाता असल में यह देखिए यह काले इल्म में और इसके जरिए से बहुत जल्द वह आ जाता है। 

         जिंद जगाने का मंत्र – जिन को बुलाने का मंत्र हिंदी में

                              जिन्न फज

टाइम नहीं लगता ठीक है 2 – 4 मिनट बहुत हो गए इससे ज्यादा टाइम नहीं लेता और अगर नहीं आए तो 10 मिनट 10 मिनट जो है तो लास्ट है ज्यादा टाइम नहीं लगाना है  वह जल्दी ही आ जाएगा लेकिन  जो कर रहा है वह बहुत ज्यादा हिम्मतवाला हो ,पावर वाला हो ताकत वाला हो नहीं हो तो न करें तो अच्छा रहेगा कमजोर दिल के है और तो फिर आपके लिए खतरा हो सकता है। 

क्योंकि अगर आप डर गए कुछ भी हो सकता है ठीक है सांस भी बंद हो सकती है अगर आप डर गए तो रिकमेंड करूंगा कि आप कर तो रहे हो तो वही लोग करें जो कमजोर दिल के नहीं है और हिम्मत वाले हैं किसी भी चीज से नहीं डरते आगे पीछे दुरुद  शरीफ वगैरह कुछ भी नहीं पढ़ना  होता है।

काली इल्म  में  आपको तो पता है कोई उसको पढ़ना है जिन फर्ज को और जब तक के पढ़ना  है जब तक कि वह आ नहीं  जाता काले कपड़े बढ़ा ले काले कपड़े पर बैठ जाए जब तक कि वह हाजिर नहीं हो जाता आपके पास कपड़े अच्छे बुरे चाहे आप कैसे भी  नापाक कैसा भी बैठ जाओ इससे कोई इसका मतलब नहीं है

वह आएगा जरूर आएगा तो आप घबराना मत तुम्हारे जो मुश्किलात है मैं जानता हूं हर किसी की मुश्किल होती है बहुत ज्यादा प्रॉब्लम जाती है कुछ भी रास्ते इस्तेमाल करते लेकिन मैं आपको रिकमेंड नहीं कर रहा हूं क्या आप करो ही मतलब आपको मैं जबर्दस्ती नहीं कर रहा हूं क्या आप करो करके हाथ जोड़कर बोलता हूं

 मैंने एक सिर्फ आज वह पढ़ लिया तो मैंने यह आपको बता दिया कि इस तरीके से होता है बहुत जल्द आ जाता है जो भी हिम्मत वाले हैं वह बुला सकते हैं अपने काम के लिए इसमें मेरा कोई रोल नहीं है

मैं  इजाजत देने वाला हूं  सिर्फ मेरे पास जो मैंने पढ़ा है माध्यम से आपके सामने मैंने रखा है अब इसमें आपकी मर्जी है आप करना चाहते हो कर सकते हो नहीं करना चाहते हो नहीं कर सकते हो तो उम्मीद करता हूं आपको पोस्ट पसंद  आई होगी

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