Homeदैविक साधनाguru gorakhnath sadhna नाथ पंथ की प्राचीन गुरु गोरखनाथ साधना ph. 8528057364

guru gorakhnath sadhna नाथ पंथ की प्राचीन गुरु गोरखनाथ साधना ph. 8528057364

गुरु गोरखनाथ guru gorakhnath जी को भोग प्रसाद 

गुरु गोरखनाथ guru gorakhnath जी को भोग में आप और रोड का प्रसाद लगा सकते हो और गुरु गोरखनाथ guru gorakhnath जी को लंगोटा को अवश्य चढ़ाना चाहिए ठीक है उनको उनको केसरिया रंग का जो वस्त्र होता है जो संत लोग डालते हैं अपने ऊपर वह वाला वस्त्र आप उनको चढ़ा सकते हो सवा मीटर या फिर ढाई मीटर 5 मीटर इस प्रकार से जितना एक  मनुष्य के लिए उपयोग में हो जाता है उतना आपको कपड़ा आप उनके लिए कपड़ा भी रख सकते हो और आप उनको भी चढ़ा सकते हो 

और इसमें आपको भोग में उनको रोट  का भोग लगा सकते हो मालपुए का भोग लगा सकते हो  से दो लॉन्ग दो इलायची इसका वह भी आप लगा सकते हो इसके अलावा आप मिठाई चला सकते हो 5 प्रकार की सात प्रकार की पंच मेवे का भोग आप लगा सकते हो और इसमें आप देसी घी में देसी घी और ड्राई फ्रूट्स में बने हुए जो हम मालपुए बनाते हैं वह आप लगा सकते हो तो इन सभी में से जो भी प्रसाद चढ़ा  कर आपके पास कुछ भी भी  नहीं है

तो आप मिस्त्री के दाने भी चढ़ा सकते हो ठीक है सकते हो और अगर वह भी आपके पास नहीं है तो आप चीनी रखकर  साधना कर सकते हो भूरा रखकर भी साधना कर सकते हो देसी घी में थोड़ा सा बुरा मिला करके वह भी आप रख करके साधना कर सकते हो कि अपने सामर्थ्य के हिसाब से आपको सेवा करने अपने सामर्थ्य के हिसाब से गुरु गोरखनाथ guru gorakhnath जी को भोग प्रसाद आपको चढाना है ठीक है ऐसा नहीं है कि साधना करने के लिए आप  कर्जा लेने की कोई आवश्यकता नहीं है मित्रों जितनी आपकी औकात है जितनी आपकी क्षमता है सके अनुसार ठीक है

गुरु गोरखनाथ guru gorakhnath जी सब देख रहे हैं वह आपके ऊपर अवश्य कृपा करें वह तो  भाव के देवता हैं वैसे भी अगर आप कुछ भी अर्पित नहीं करोगे सिर्फ उनका उनके मंत्र का जाप भी करोगे ना तब भी आपको सिद्धि मिल जाएगी उनकी ठीक है ऐसी उनकी लीला है लेकिन हमें अपना फर्ज पूरा करना पड़ता है हमें अपना फर्ज का पूरा करना चाहिए हमें अपने भाव प्रकट करने चाहिए इन सारी चीजों को बड़ा करके करके भाव प्रकट होता है ठीक है  मंत्र भी आपको करना है होली की रात में रुद्राक्ष की माला पर जाप करना है ओम शिव गोरक्ष का जाप पूरी की पूरी आपको एक सौ आठ माला करनी है ठीक है 108 माला  करनी है 

 

 

Rodhar nathhttp://gurumantrasadhna.com
मैं रुद्र नाथ हूँ — एक साधक, एक नाथ योगी। मैंने अपने जीवन को तंत्र साधना और योग को समर्पित किया है। मेरा ज्ञान न तो किताबी है, न ही केवल शाब्दिक यह वह ज्ञान है जिसे मैंने संतों, तांत्रिकों और अनुभवी साधकों के सान्निध्य में रहकर स्वयं सीखा है और अनुभव किया है।मैंने तंत्र विद्या पर गहन शोध किया है, पर यह शोध किसी पुस्तकालय में बैठकर नहीं, बल्कि साधना की अग्नि में तपकर, जीवन के प्रत्येक क्षण में उसे जीकर प्राप्त किया है। जो भी सीखा, वह आत्मा की गहराइयों में उतरकर, आंतरिक अनुभूतियों से प्राप्त किया।मेरा उद्देश्य केवल आत्मकल्याण नहीं, अपितु उस दिव्य ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाना है, जिससे मनुष्य अपने जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझ सके और आत्मशक्ति को जागृत कर सके।यह मंच उसी यात्रा का एक पड़ाव है — जहाँ आप और हम साथ चलें, अनुभव करें, और उस अनंत चेतना से जुड़ें, जो हमारे भीतर है ।Rodhar nath https://gurumantrasadhna.com/rudra-nath/
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