Category: दस महाविद्या

दस महाविद्या साधना का सम्पूर्ण रहस्य और विस्तार सहित जानकारी प्रदान की जाएगी दस महा विद्या की साधना और रहस्य प्रदान किया जाएगा

Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या साधना विधि विधान मंत्र रहस्य गरीबी ख़त्म होगी

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Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या साधना विधि विधान मंत्र रहस्य गरीबी ख़त्म होगी

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Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या साधना विधि विधान मंत्र रहस्य गरीबी ख़त्म होगी हम आपके लिए गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर 10 महाविद्याओं की एक लेख श्रृंखला लेकर आए हैं और इस श्रृंखला में हम लगातार एक-एक कर तमाम महाविद्याओं के बारे में बात कर रहे हैं। 

उनसे जुड़ी हुई कहानी और किस्से क्या हैं, वह तमाम डिटेल में हम आपके लिए लेकर आ रहे हैं और आज हम बात करेंगे 10 महाविद्या में से आख़िरी महाविद्या मां कमला महाविद्या के बारे में और इनके रहस्य से और इनसे जुड़े किस्सों से पर्दा आज उठाएंगे डॉक्टर मनमीत कुमार।

 

Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या का परिचय और उत्पत्ति

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 10 महाविद्याओं के बारे में आपने तमाम डिटेल में बताया इससे पहले, किस तरह से उनका हमारे जीवन पर प्रभाव है और किस-किस तरह से उनकी साधना की जानी चाहिए। दसवीं और आख़िरी महाविद्या हैं मां कमला महाविद्या। एक बार मां कमला महाविद्या के बारे में थोड़ा सा समझना चाहेंगे कि इनका यह रूप क्यों है और किस तरह से इस रूप की उत्पत्ति हुई और इसका हमारी लाइफ पर किस तरह से प्रभाव पड़ता है?

 थैंक यू राज जी, यह लेख श्रृंखला मेरे लिए भी बहुत ही इंटरेस्टिंग है। मां कमला महाविद्या दसवीं महाविद्या हैं और शायद मां काली के साथ-साथ सबसे ज्यादा पूजी जाने वाली महाविद्या हैं। और इनकी जो उत्पत्ति है, वह समुद्र मंथन से हुई थी और जब सब कुछ नष्ट हो गया था, अमृत निकलने के बाद जब सब कुछ नष्ट हो गया था, तो मां लक्ष्मी का ही फॉर्म हैं मां कमला, मां कमला महाविद्या। 

और उनकी उत्पत्ति एक कमल के फूल पर हुई और उनको प्रे करके वापस इस धरती के ऊपर, जिसको हम कहते हैं फर्टिलिटी, धन, धान्य, वैभव, सब चीजों में जो जान है, जो धन है, जो ग्लो है, जो ब्यूटी है, वह मां कमला महाविद्या हैं।

तो इनकी जो उत्पत्ति है, वह समुद्र मंथन से ही हुई और ऐसा कहा जाता है यहां पर दो धारणाएं हैं। एक धारणा कहती है कि शिव शंभू का ही दसवां फॉर्म जो है, वह कमल है और मां पार्वती की ही उत्पत्ति से मां कमला महाविद्या का जन्म हुआ और यह मां काली का ही फॉर्म है और 10 महाविद्या का फॉर्म है।

 एक और थॉट प्रोसेस है जो कहती है कि ये तांत्रिक लक्ष्मी हैं और यह भगवान श्री हरि विष्णु की, और यह एक अकेली महाविद्या हैं जिनका शिव शक्ति के साथ कोई ऐसा संबंध नहीं है। 

तो दोनों जो धारणाएं हैं, वो लोगों के बीच में हैं लेकिन मैं यह मानती हूं कि ये तांत्रिक लक्ष्मी हैं और तांत्रिक लक्ष्मी दूसरी लक्ष्मी से, जो हम नॉर्मल मां लक्ष्मी को मानते हैं, उनसे थोड़ी सी जो है, वह अलग हैं।

 

मां लक्ष्मी और तांत्रिक लक्ष्मी (कमला महाविद्या) Kamla Mahavidya  कमला महाविद्या में अंतर

 

 किस तरह का अंतर आप यहां इसको अगर डिफरेंशिएट किया जाए, मां लक्ष्मी और तांत्रिक लक्ष्मी यानी कि मां कमला महाविद्या के बारे में ?

 तो जो तांत्रिक किसी भी फॉर्म का, किसी भी गॉडेस का जो तांत्रिक फॉर्म होता है, वह उनका थोड़ा सा उग्र फॉर्म होता है। एक तो उनको जल्दी साधा जा सकता है, उनसे हमें ज्यादा बेनिफिट्स मिलते हैं, लेकिन अगर गलत हो जाए तो उल्टा भी उतना ही पड़ता है। तो दोनों तरफ से इट्स अ डबल एज्ड सोर्ड। 

तांत्रिक लक्ष्मी जो हैं, उनके मंत्र मां लक्ष्मी से ज्यादा स्ट्रांग होते हैं। तांत्रिक इनको बहुत साधते हैं अपने फायदे के लिए और अगर हम चाहें तो हम भी इनको साध सकते हैं। 

ज्यादातर इनको साधा जाता है धन-धान्य के लिए और जो मॉडल्स होते हैं, जो फिल्म इंडस्ट्री में होते हैं, जो संगीतकार होते हैं, जिनका भी रूप जैसे कैमरे पे बहुत आता है और जो ब्यूटी के लिए यह करना चाहते हैं, जिनको पुत्र प्राप्ति के लिए चाहिए, चाइल्ड बर्थ के लिए चाहिए, फर्टिलिटी के लिए चाहिए, अगर आपके बहुत सारे खेत हैं या आपका खाने का काम है और आपको अपनी जमीन उपजाऊ चाहिए, ऐसी चीजों के लिए जो है, हम मां लक्ष्मी को मानते हैं।

 

 कमला महाविद्या का स्वरूप और महत्व

 

तो जो तांत्रिक लक्ष्मी हैं, जो मां कमला महाविद्या हैं, वे ऐसा कहते हैं कि मां लक्ष्मी के भी बहुत-बहुत ज्यादा सौम्य और उग्र स्वरूप हैं। तो अगर आप इनका चित्र देखें तो चार एलीफेंट्स हैं, चार हाथी हैं जो इनको नहला रहे हैं पानी से भी और शहद से भी, अमृत से भी। 

तो ये ऐसा कहते हैं कि जो मां कमला महाविद्या अगर किसी की साधना में आ जाएं या उनके स्वप्न में आ जाएं तो ऐसा लगता है कि 100 सूरज एक साथ चमक रहे हैं। 

इतनी रेडियंस है मां कमला महाविद्या में कि आदमी चकाचौंध हो जाता है। तो सोचिए अगर उनके स्वरूप मात्र में इतनी रेडियंस है, अगर उनकी 1% भी आपके ऊपर कृपा होती है, कृपा हो गई, तो आप यह समझ लीजिए कि वह जीवन, उस आदमी का जीवन जो है, कभी सेम नहीं रह सकता। हमारे बहुत बड़े-बड़े जो इंडस्ट्रियलिस्ट हैं, वहां पर मां कमला महाविद्या की पूजा तांत्रिक दिन-रात करते हैं।

 महाविद्याओं की बात करें, जो 10 महाविद्या हैं, उनमें से बाकी जो महाविद्या हैं, जो मां के जो स्वरूप हैं, बहुत उग्र स्वरूप हमने देखे, डिस्ट्रॉय की बात की, डेथ की बात की, लेकिन अगर मां कमला महाविद्या के बारे में बात करें, तो उनका रूप-स्वरूप किस तरह का है और जो यह मां हैं, वह आपके जीवन में किस तरह का प्रभाव डालती हैं? अगर सीधे तौर पर इसको समझने की कोशिश करें तो?

 

Kamla Mahavidya कमला महाविद्या  अष्टलक्ष्मी का स्वरूप

 

मां कमला महाविद्या अष्टलक्ष्मी भी अपने अंदर लेकर बैठती हैं। तो अष्टलक्ष्मी अलग-अलग तरह की लक्ष्मी हैं। ऐसा भी कहते हैं कि मां कमला महाविद्या गज लक्ष्मी का फॉर्म हैं, क्योंकि अगर आप उनका फॉर्म देखें तो उनके साइड पर जो है, चार गज हैं, जिसको हम हाथी, एलीफेंट भी कहते हैं। तो गज लक्ष्मी क्या देती है? हाथी में क्या होता है? स्ट्रेंथ। हाथी में क्या होता है? 

एक ऐसी क्षमता कि वह कुछ भी कर सकता है। तो इसको हम जो है, मां लक्ष्मी का स्वरूप मानते हैं। आप इनको पिंक कलर से डिनोट कर सकते हैं, रेड कलर से डिनोट कर सकते हैं और गोल्ड और वाइट से डिनोट कर सकते हैं।

 ये इनके कलर्स हैं। अगर किसी को भी मां कमला महाविद्या को देखना है या उनकी साधना या पूजा करनी है तो यह कलर्स वह खुद भी पहनें और यह कलर्स का वह आसन भी लगाएं।

तो जो अष्ट लक्ष्मियों का फॉर्म है, वह है आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी और विजय लक्ष्मी। अब अगर आप इन आठ फॉर्म्स को देखें तो यह आठ में इंसान जो-जो चाह सकता है, वह-वह सब इन आठ के अंदर ऑलरेडी इंबाइब्ड है।

 

Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या साधना का अंतिम पड़ाव और स्वतंत्र स्वरूप

 

तो मां कमला महाविद्या ऐसा कह सकते हैं कि जब नौ महाविद्या से हमने उग्र फॉर्म देख लिया, हमने डिस्ट्रक्शन देख ली, हमने लोगों का धोखा देख लिया, मां बगलामुखी की साधना कर ली, कोर्ट केसेस हो गए, दुश्मन हो गए, यह सब करते-करते जब एक साधक एंड में आता है, तो शिव-शक्ति उनको कहते हैं कि आइए, अब आपने यह सारे पड़ाव जो हैं, पूरे कर लिए हैं। अब मैं आपको एक फाइनल वेल्थ, एक धन-धान्य का वरदान देता हूं। 

तो ऐसे समझ लीजिए क्योंकि बहुत सारे लोग जो हैं, 10 महाविद्या को हर एक महीने में या 40 दिन में एक महाविद्या को साधते हैं। उस फॉर्म पर विजय पाकर, जितनी वह पा सकते हैं, उस बिहेवियर को अपनी लाइफ में लाकर, जैसे अगर वह मां भैरवी की साधना कर रहे हैं, तो डिस्ट्रक्शन को एक्सेप्ट करके, डिस्ट्रक्शन के थ्रू जाकर फिर नेक्स्ट फॉर्म में जाएंगे, फिर कंपटीशन को एक्सेप्ट करके फिर नेक्स्ट फॉर्म में जाएंगे। 

ऐसे करते-करते जब वह नौ पड़ाव पार कर लेते हैं, तो वह मां कमला महाविद्या पे आते हैं, जहां मैं कहूंगी कि सिर्फ गिफ्ट्स ही गिफ्ट्स हैं। उनका बहुत सौम्य रूप है। यह 10 महाविद्या का उग्र रूप नहीं है, लेकिन यह मां लक्ष्मी का, जिसे कहते हैं, उग्र रूप है।

क्योंकि मां लक्ष्मी हरि विष्णु के पैर दबाती हुई एक सौम्य एनर्जी में वह अपने आप को दर्शाती हैं। हम सबके घर में जो फोटोज होती हैं, वह वैसे ही दिखाती हैं कि मां लक्ष्मी विष्णु जी के जो हैं, पैर दबा रही हैं। लेकिन जो तांत्रिक लक्ष्मी हैं, मां कमला महाविद्या, वह अपने अंदर एक पोटेंशियल रखती हैं इविल को डिस्ट्रॉय करने का, उसका नाश करने का, विनाश करने का। तो वह किसी पर डिपेंडेंट नहीं हैं

इनका जो रूप है, वह अपने सब महाविद्यास का जो रूप है, वह अपने कंसोर्ट, मतलब अपने जो मेल भगवान हैं, उनके बिना है। तो यह दर्शाया जाता है कि हर महाविद्या अपने में संपूर्ण है। तो ऑल दो यह फीमेल फॉर्म है, लेकिन यह संपूर्ण फॉर्म है। यह किसी पर डिपेंडेंट नहीं है अपनी रक्षा के लिए, अपनी सुरक्षा के लिए या किसी भी और चीज के लिए।

 तो यह मां लक्ष्मी का जो तांत्रिक रूप है, वह किसी पे डिपेंडेंट नहीं है। वह अपने आप ही, देती तो मां लक्ष्मी भी हैं, लेकिन यह किसी पे भी, एनर्जी जो है, इंडिपेंडेंट है, डिवाइन फेमिनिन की एनर्जी है।

जिज्ञासु  नहीं, यह बहुत अच्छी बात आपने बताई क्योंकि हम जितने ही मां के रूप आमतौर पर देखते हैं, हम अपने घरों में जो तस्वीरें हैं या पूजा-पाठ करते हैं, तो कहीं ना कहीं एक देव भी उनके साथ होते हैं। महादेव की बात कर लें, पार्वती जी की बात कर रहे, हरि नारायण की बात कर रहे, लक्ष्मी जी की बात कर रहे, तो इस तरह से बहुत सारे रूप हैं। तो यह आपने बिल्कुल ठीक कहा कि यह इंडिपेंडेंट आइडेंटिटी यहां पर है।

 

Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या साधना की सही पूजन विधि

 

जिज्ञासु  अब मां लक्ष्मी और मां लक्ष्मी का ही जो तांत्रिक रूप है, है मां कमला महाविद्या। जो हम घर में मां लक्ष्मी की या लक्ष्मी मां की पूजा करते हैं, बहुत साधारण तरीके से करते हैं। अगर उनकी तस्वीर और मूर्ति है तो हम हाथ जोड़कर, फूल चढ़ाकर हम जो है, उन्हें साध लेते हैं। हमें लगता है कि हमने एक पूजा पूर्ण कर ली है।

 लेकिन अगर मां कमला महाविद्या की तरफ हम आते हैं, तो यहां जो पूजा के लिए क्या कुछ तरीके होने चाहिए? क्योंकि जो एक बात आपने कही, जो बेहद खास है, जो दर्शकों को भी जाननी चाहिए कि इन्हें साधना आसान तो है, लेकिन साधना करते-करते अगर आपने गलत तरीके से साधना की तो उसके असर, इंपैक्ट जो है, वह गलत भी आ सकता है। तो वहां किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है?

मां कमला महाविद्या की जो आराधना है, वह बाकी नौ महाविद्या से आसान है और यह गलत होना मुश्किल है क्योंकि हम उनसे बहुत प्रोस्पेरिटी मांग रहे हैं, धन-धान्य मांग रहे हैं।

 इसमें केवल एक चीज का ध्यान रखना जरूरी है कि हम किसी गलत चीज के लिए धन न मांगें या किसी और का अर्जित किया हुआ धन, उस पर अगर हमारी नजर है क्योंकि मां कमला महाविद्या कहती हैं कि यूनिवर्स में इतना धन है कि अगर आपको चाहिए तो मैं दूंगी। लेकिन अगर आपको गलत रीजन के लिए चाहिए या आप एक ड्रग डीलर हैं, आपको कुछ गलत काम के लिए धन चाहिए या वेपंस के लिए चाहिए या डिस्ट्रक्शन के लिए चाहिए तो नहीं होगा।

 

Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या साधना पूजा के नियम और स्थापना

 

इनकी पूजा हम सफेद आसन लगाकर करते हैं, पिंक आसन भी लगा सकते हैं, रेड भी लगा सकते हैं। और इनको वहां स्थापित करके, लेकिन एक बात है मां कमला महाविद्या के बारे में कि जितनी ब्यूटी आप उनकी देख रहे हैं, जितना सौंदर्य, जितना रूप आप उनका देख रहे हैं, वह रूप आपके अंदर जरूर होना चाहिए।

 इसका मतलब हमारे अंदर एक क्लीनलीनेस होनी चाहिए, एक सौंदर्य होना चाहिए जिसको हम कहेंगे कि जजमेंट नहीं करनी, किसी के लिए गॉसिप नहीं करनी, इवल थॉट्स नहीं सोचने क्योंकि अगर यह पार्ट हमारा क्लीन नहीं है, मां का कोई भी और, चाहे वह मां लक्ष्मी ही हों, आपके ऊपर कभी भी कृपा नहीं आ सकती।

जिज्ञासु घर में स्थापना करनी चाहिए मां कमला महाविद्या की?

बिल्कुल करनी चाहिए। और इनको अपने लॉकर के ऊपर स्थापित करना चाहिए, ऑफिस के लॉकर, जो तिजोरी होती है, उसके ऊपर स्थापित करना चाहिए। 

और इनके आगे तुलसी की सूखी हुई जड़ को धोकर, सुखाकर आपको अपने लॉकर में रखना चाहिए। इससे आपका जो धन है, वह बहुत ज्यादा मल्टीप्लाई हो जाएगा।

 

Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या साधना पूजा का समय, दिन और सही मंत्र

 

जिज्ञासु  पूजा का समय और दिन ?

पूजा का दिन दसवां दिन और पूजा का समय हमेशा महाविद्या का रात के 9:00 बजे के बाद।

जिज्ञासु  मां कमला महाविद्या को पूजने और साधने के लिए सही मंत्र क्या है? क्योंकि इसको लेकर भी बहुत सारे लोगों के मन में अलग-अलग मंत्र जो हैं, अलग-अलग बातें हमेशा रहती हैं। अगर हम गूगल पर सर्च करने जाएं तो वहां भी एक बड़ा कंफ्यूजन रहता है। एक सही मंत्र कौन सा है?

: देखिए, मां लक्ष्मी और मां कमला महाविद्या का जो बीज मंत्र है, वह है ‘श्रीं’। अगर आप कुछ नहीं कर सकते तो आप ‘श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं’ 108 बार करें स्फटिक की माला पर या कमल गट्टे की माला पर। 

तो यह आपको जो है, अपने में ही बहुत धन देगा। अगर आप गाड़ी चला रहे हैं, चल रहे हैं, बैठ रहे हैं, उठ रहे हैं, सिवाय वॉशरूम जाने के, आप जो भी कर रहे हैं, अगर आप उसमें ‘श्रीं श्रीं श्रीं’ करेंगे, यह एक मैग्नेटिक पुल है कि मां खिंची चली आएंगी। लेकिन मां कमला महाविद्या का जो मंत्र है, वह है ‘ॐ नमः कमल वासिन्यै स्वाहा’। 

जो भी तांत्रिक मंत्र होता है, उसको हम चलते-फिरते नहीं कर सकते। उसकी पूरी एक विधि-विधान होता है, जो अगर दर्शक इंटरेस्टेड हैं तो मैं उनके साथ ऑफलाइन शेयर कर लूंगी। वह उसी जगह पर, उसी आसन पर बैठकर, उसी विधि-विधान से करने चाहिए। 

लेकिन अगर सब लोग जैसे बहुत बिजी होते हैं और नहीं कर पा रहे यह मंत्र और उस तरह का शुद्धीकरण अपने घर का नहीं कर पा रहे या अपना नहीं कर पा रहे, तो ‘श्रीं’ उतना ही पावरफुल मंत्र है। आप ‘श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं’ जो है, करते हुए जा सकते हैं।

 

 मां की कृपा और उसके संकेत

 

मैं अभी आपको यही बता रही थी राज जी कि ‘श्रीं’ में और यह जो मां कमला महाविद्या का मंत्र है, इसमें यही फर्क है कि मां आपसे क्या बुलवाना चाहती हैं। तो जब बहुत साल पहले कोविड था, तो जैसे मेरे सपने में मां लक्ष्मी आईं और उन्होंने कहा कि आप अष्टलक्ष्मी का वर्कशॉप करवाइए। तो बहुत सारे मेरे दर्शक यहां जानते होंगे, आपने शायद अटेंड भी किया होगा। 

मां अष्टलक्ष्मी के जो आठ फॉर्म्स होते हैं, दिवाली से पहले वह वर्कशॉप होती है और बहुत हजारों की तादाद में लोगों ने ज्वाइन किया था और उस समय लोगों के बहुत सारे एक्सपीरियंस हुए थे इसको लेके। अगले साल मां ने कहा कि अब आप 10 महाविद्या की वर्कशॉप करवाइए।

 यह हमारा दूसरा साल है 10 महाविद्या की वर्कशॉप का और जो एक्सपीरियंस लोगों के हो रहे हैं ऑलरेडी, क्योंकि इसकी प्रिपरेशन जो है, सितंबर में ही शुरू हो गई थी, जो एक्सपीरियंस हो रहे हैं, वह इतने अमेजिंग हैं। तो आप और मैं यहां इस लेख पर चर्चा कर सकते हैं।

मैं पांच साल से इस एनर्जी से जुड़ी हुई हूं। जुड़े तो शायद हम सब बहुत पिछले जन्मों से हैं, पर जब मां लक्ष्मी चाहेंगी, जैसे वह चाहेंगी, अपना जो फॉर्म वह दिखाना चाहेंगी साधक को, वही फॉर्म मिलेगा।

लेकिन अगर आप यह लेख पढ़ रहे हैं तो आपके स्वप्न में मां लक्ष्मी या गजलक्ष्मी, जिसमें एलीफेंट के साथ मां लक्ष्मी आती हैं, या आपको अचानक से फेसबुक पर वह पिक्चर दिख जाना या आपके ऊपर एक छिपकली गिर जाना, व्हिच इज… पर अगर इनमें से कोई भी साइन आपको नवरात्रि के दौरान आते हैं, तो आप मेरे से कांटेक्ट करें। यह एक बहुत प्रोस्पेरिटी का, आपके जीवन में धन के खुलने का योग है।

जिज्ञासु यानी कि एक बदलाव का एक संकेत है सीधे-सीधे।

 बहुत-बहुत। और मां लक्ष्मी सबसे पहले संकेत देती हैं। एक मां काली और एक मां लक्ष्मी, ये आपको ऐसे संकेत देंगी एकदम कि अगर आपने उनसे दिल से मांग लिया कि मेरी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, मेरा यह लोन है, मुझे लोन उतारना है, मां आप मेरी मदद करें।

 जितने भी लोग यह लेख पढ़ रहे हैं, अगर उनके घर में किसी भी तरीके की दरिद्रता है, कोई लोन है जो चुक नहीं रहा, जॉब है जो मिल नहीं रही, कोई बच्चा पैदा नहीं हो रहा, फर्टिलिटी की प्रॉब्लम्स आ रही हैं, तो आप बिना कुछ भी सोचे आप मां कमला महाविद्या के आगे अपने आप को सरेंडर करते, आप यह करके देखें नौ दिन इनका मंत्र और आप बताइए मुझे, वह बदलाव जो है, आपको फिर महसूस होंगे। 

आप वहीं से आपको पता लगेगा कि किस तरह से आपकी जिंदगी बदल गई। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि आपके अंदर वह असुर नहीं होना चाहिए, वह बुराई नहीं होनी चाहिए। एक साफ नीयत, साफ मन के साथ अगर आप मां से कुछ मांगेंगे तो जाहिर सी बात है, मां जरूर देंगी।

 

Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या साधना नवरात्र में पूजा और महत्वपूर्ण सावधानियां

 

जिज्ञासु  नवरात्र की बात कर रहे थे डॉक्टर मनमीत, नवरात्रों में किस तरह का प्रभाव जो है, मां कमला महाविद्या का रहता है और नवरात्रों में खास तौर से कब, किस दिन मां कमला महाविद्या की पूजा करनी चाहिए?

10वें दिन करनी चाहिए मां कमला महाविद्या की और ऐसा कहते हैं कि इन नौ दिनों में जो मां हैं, वे अपने आप धरती पर आती हैं। और इन दिनों में अगर आपके घर में आपको कोई भी नई खरीदारी करनी है, अगर आपको कुछ भी करना है, आप मां कमला महाविद्या को डे वन से उन्हीं के मंत्र करें। आप बाकी सबको छोड़कर उन्हीं के मंत्र करें, उन्हीं की साधना शुरू करें। और यह भी आप कर सकते हैं कि नौ दिन के कुछ मंत्र का आप जो है, संकल्प ले सकते हैं।

 

 ईर्ष्या-द्वेष से परे कमला महाविद्या साधना

 

ऐसा भी कहते हैं कि मां कमला महाविद्या आपको टेस्ट करती हैं। जैसे अगर आपने कुछ मांगा, मुझे एक नई गाड़ी चाहिए, तो आपके साथ वाले को गाड़ी दे दी जाएगी। उस समय आपको यह नहीं सोचना कि इसको मिल गई, मुझे नहीं मिली। आपको यह बोलना है कि मां, इसको मिली है और भी मिले, लेकिन मुझे भी बहुत सारी मिले। यह सुनके मां खुश होती हैं कि आपके अंदर एक लालच नहीं है। 

मां के आगे केवल एक प्रेयर है कि मुझे भी गाड़ी चाहिए। लोग अक्सर ईर्ष्या में, जेलेसी में, एनवी, हेट, इसमें आ जाते हैं और उनको लगता है, वो इसने तो इतना काम नहीं किया फिर भी इसको मिल गई, मैं इतनी पूजा-पाठ करता हूं मुझे नहीं मिली। पूजा-पाठ एक ट्रांजैक्शन नहीं है। 

पूजा-पाठ एक प्रेयर है, एक सबमिशन है, एक अच्छा इंसान बनने की चेष्टा है इंसान की। डायरेक्टली प्रोपोर्शनल नहीं है कि आपने अगर 3 लाख मंत्र करे तो डायरेक्टली प्रोपोर्शनल आपको दो विला मिलना चाहिए। लेकिन लोग ऐसा ही सोचते हैं और हमेशा उनको लगता है कि जो दूसरे लोग हैं, वह तो कुछ नहीं कर रहे।

 

तांत्रिक पूजा की गोपनीयता

 

मैं आपको आज बता दूं कि तांत्रिक फॉर्म्स की पूजा, अगर आज कोई भी इंसान बहुत अच्छी आर्थिक तरक्की कर रहा है, तो वह तंत्र से पूजा कर रहा है। आपको दिखे, आपको न दिखे, क्योंकि यह सारी पूजा होती हैं, छुपा के करनी चाहिए। लोग, मैं देखती हूं, बोलते हैं, मैं तो एक साल से यह पूजा कर रहा हूं।

 जहां आपने यह बोल दिया, आपके ऊपर एक नेगेटिव एनर्जी का इंपैक्ट आएगा ही आएगा। मंत्र उच्चारण चोरी किए जा सकते हैं। आपकी जितनी भी साधना है, उसका जो कोश है, उसका जो बक्सा है, वह खाली किया जा सकता है। 

इसीलिए कहते हैं कि मंत्र उच्चारण बहुत जोर-जोर से अनाउंस करके नहीं करना चाहिए। जब पुराने समय में कहते थे, शांत जगह पर, एकांत में, बिना किसी को बताए आपको साधना करनी है। क्योंकि आपकी एनर्जी चुराने के लिए न सिर्फ लोग और उनके विचार हैं बल्कि यहां पर घूम रही बहुत सारी एंटिटीज हैं, आत्माएं हैं, जो आपका एकदम यह पॉजिटिव एनर्जी जो है, चुरा सकती हैं।

जिज्ञासु : क्या इसको यहां इस तरह से लिंक कर सकते हैं कि जो यह धारणा है कि तंत्र-मंत्र और जो काली विद्या है, वह शमशान में करने से उसके लाभ ज्यादा मिलते हैं? क्या उसके पीछे यही वजह है कि वह एक ऐसी जगह है जहां कोई भी आता नहीं है और आपको एकदम शांत, एकांत वाली जगह मिल जाती है? या फिर इसके पीछे का लॉजिक अलग है क्योंकि वहां पर साधने से इंपैक्ट ज्यादा मिलता है?

 दोनों ही रीजंस आपने जो कहे, वह बिल्कुल सही हैं। मैं नहीं कहूंगी कि मां कमला महाविद्या की तो डेफिनेटली प्रेयर हम शमशान में नहीं कर सकते हैं। शमशान में हम मां भैरवी, मां काली, इनकी पूजा कर सकते हैं या मां धूमावती की। एकांत केवल शमशान में नहीं होता, गुफा में भी हो सकता है, आपके कमरे में भी हो सकता है।

 आप एक घर रेंट पे ले सकते हैं जिसमें आप केवल साधना कर सकते हैं और उसमें और किसी प्रकार की कोई क्रिया नहीं होगी। तो एकांत के लिए पहले कहते थे कि शमशान, लेकिन शमशान का जो इंपैक्ट है, मातारा का जो मंदिर है, आपको मालूम ही है, हमने यह डिस्कस किया था कि मातारा शमशान में ही बेस्ड है। तो कुछ शक्तियां हैं जो शमशान से बढ़ जाती हैं, लेकिन मां कमला महाविद्या उनमें से नहीं हैं।

 

निष्कर्ष

जिज्ञासु  तो जाहिर सी बात है, अगर आपको अपने जीवन में कुछ अच्छा करना, वैभव चाहिए, धन चाहिए, लेकिन सबसे ज्यादा जरूरी है कि लालच नहीं होना चाहिए। और अगर लालच नहीं है तो आपके जीवन में सब कुछ मां कमला महाविद्या बेहतर तरीके से कर सकती हैं। 

लेकिन उन्हें साधने का, उनकी पूजा करने का तरीका सही होना चाहिए। और 10 की 10 महाविद्याओं के बारे में एक-एक कर इस पूरी लेख श्रृंखला में समझा है हमने कि किस-किस तरह से तमाम इन 10 महाविद्याओं की पूजा-अर्चना की जानी चाहिए।

इसके अलावा भी अगर आपके मन में कोई सवाल है, कोई इन 10 महाविद्या से जुड़ी हुई कोई बात अगर आप पूछना चाहते हैं, इसके अलावा भी आपको लगता है कि आपके जीवन में कुछ ऐसा चल रहा है। 

जिसे आप लगातार प्रयास करने के बावजूद भी ठीक नहीं कर पा रहे या वह ठीक नहीं हो रहा है, उससे जुड़ी हुई कोई भी बात, कोई भी सवाल हो, आप  से हमारी वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर या नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं।

 उनसे संपर्क करने का विवरण भी इस लेख के अंत में आपके लिए मौजूद होगा। और इसी तरह की इंटरेस्टिंग जो अलग-अलग किस्से हैं, अलग-अलग जो देव और देवियों से जुड़ी हुई बातें हैं, उस पर हम लेख लाते रहेंगे और आपसे इसी तरह से तमाम जो रहस्य हैं, उनसे पर्दा उठाने का काम करते रहेंगे। 

और इसमें जो हैं, , जो कि स्पिरिचुअल गुरु हैं, जिन्होंने 10 महाविद्याओं पर एक डिटेल रिसर्च भी किया है। और आई थिंक, मैं गलत नहीं हूं तो ऑक्सफोर्ड में? जी, मैं उसका लिंक इस लेख में ही नीचे दे दूंगीजिज्ञासु : जी चलिए, तो बहुत-बहुत शुक्रिया। आज के लेख में इतना ही। नमस्कार।

मां भैरवी साधना रहस्य Bhairavi Sadhana rahasya ph.85280 57364

मां भैरवी साधना रहस्य Bhairavi Sadhana rahasya ph.85280 57364

 

 

 दस महाविद्या: मां भैरवी का रहस्य और साधना

 

मां भैरवी साधना रहस्य Bhairavi Sadhana rahasya ph.85280 57364
मां भैरवी साधना रहस्य Bhairavi Sadhana rahasya ph.85280 57364

मां भैरवी साधना रहस्य Bhairavi Sadhana rahasya मां भैरवी के जो कॉन्सर्ट हैं वो भैरव हैं, गॉडेस ऑफ डेथ हैं और आपको वो सबसे पहला साइन ये देंगी कि आपके स्वप्न में आएंगी। थोड़ा डरा देने वाला भी स्वरूप जो है वो मां भैरवी का। पहले आपको मां काली को साधना होगा और उससे भी पहले मां दुर्गा को साधना। तो मां भैरवी की एनर्जी बहुत-बहुत फियर्स है, वो आराम से आपको नहीं बताएंगी।

तो इन्होंने अपनी जो शक्तियां थीं वो कम्बाइन करके अर्धनारीश्वर के फॉर्म में उसका संहार किया था। नहीं, हमें मां भैरवी की पूजा करनी चाहिए या नहीं करनी चाहिए? तो आप उनकी फियर्स फॉर्म में ही पूजा करें जो रात को आप करेंगे। सब 10 महाविद्या में आप पीरियड्स में पूजा कर सकते हैं। पांचवें दिन इनका हम जो है आह्वान कर सकते हैं। चेंज इज द रियलिटी ऑफ लाइफ। 

नमस्कार, आज हम आपके लिए लेकर आए हैं 10 महाविद्याओं में से पांचवी महाविद्या मां भैरवी को लेकर एक खास लेख और इस लेख में हम बात करेंगे कि मॉडर्न वर्ल्ड में मां भैरवी का क्या महत्व है, किन बातों का खास ख्याल मां भैरवी की पूजा के लिए रखना चाहिए और बहुत सारे ऐसे किस्से और कहानियां मां भैरवी से जुड़ी हुई हैं जिनके रहस्य से आज हम पर्दा उठाने वाले हैं। 


 

 मां भैरवी का स्वरूप और आधुनिक महत्व

 

सबसे पहले तो यही कि मां भैरवी के रूप और स्वरूप को लेकर भी बहुत सारी बातें होती हैं। थोड़ा डरा देने वाला भी स्वरूप जो है वो मां भैरवी का और मॉडर्न वर्ल्ड में बात करें तो किस तरह से देखते हैं मां भैरवी को ?, मां भैरवी एक बहुत ही पावरफुल और फियर्स महाविद्या हैं।

 यह जो हमारी महाविद्या की सीरीज है, उसमें मेरा यही प्रयत्न रहता है कि हम इन महाविद्याओं को एक आम आदमी तक बहुत ही सिंपल तरीके से पहुंचाएं।

मां भैरवी के जो कॉन्सर्ट हैं वो भैरव हैं और मां भैरवी अपने में इतनी परिपूर्ण और संपूर्ण हैं कि वो गॉडेस ऑफ डिस्ट्रक्शन हैं, गॉडेस ऑफ डेथ हैं। 

अब आज की डेट में डेथ और डिस्ट्रक्शन को अगर कोई सुने तो वो एकदम डर जाएगा। लेकिन मैं ये बताना चाहती हूं अपने पाठकों को कि डेथ और डिस्ट्रक्शन से डरने की जगह हमें इसको अच्छे से समझना चाहिए। डेथ किसकी? डेथ हमारी ईगो की। डिस्ट्रक्शन किसका? डिस्ट्रक्शन हमारे अहंकार का।

मां भैरवी साधना रहस्य असुर प्रवृत्तियों का विनाश

 

पहले क्या होता था कि जब असुर होते थे और बहुत संग्राम होता था देवों और असुरों के बीच में तो हर एक चीज को मारना या किसी पर विजय प्राप्त करना एक असुर पर होता था। 

लेकिन आज वो असुर क्या हैं? आज हम बाहु के काल में जी रहे हैं। मैं यह कहूंगी कि यह बिल्कुल गलत नहीं है कि हम सबके ऊपर एक-एक असुर ही सवार है।

जो हमारी प्रवृत्ति हो गई है कॉम्पिटिशन की, ट्रेड की, रेप की, जेलसी की, लस्ट की, ग्रीड की, किसी भी तरीके से अपना काम बनवाना, ये एक असुर प्रवृत्ति है। 

वो अपने भीतर जो एकदम पल रहा है… हां, जो हमारी डार्कनेस है, वो एक असुर प्रवृत्ति है। तो जब हम मां भैरवी के बारे में बात करते हैं, इन्होंने लॉर्ड भैरव के साथ अंधक असुर को मारा था। 

क्योंकि उसको यह वरदान था कि ना वो किसी स्त्री के हाथ से मर सकता है, ना किसी पुरुष के हाथ से। तो इन्होंने अपनी जो शक्तियां थीं वो कम्बाइन करके अर्धनारीश्वर के फॉर्म में उसका संहार किया था।

 

मां भैरवी साधना रहस्य – जीवन में विनाश का सकारात्मक पक्ष

 

तो कभी-कभी जब हम मां भैरवी की बात करते हैं, हम बात करते हैं डेथ और डिस्ट्रक्शन की। इससे डरने की जगह हमें यह सोचना चाहिए कि क्या हमारे शरीर में हर चीज की डिस्ट्रक्शन कॉन्स्टैंटली हो नहीं रही? आप ये देखिए ना, डेज़ के अंदर-अंदर हमारी सारी लाइनिंग जो है बॉडी की वो चेंज हो जाती है।

हमारी स्टमक की लाइनिंग चेंज हो जाती है, हमारे ब्रेन की लाइनिंग चेंज हो जाती है, हमारा ब्लड फिर से फ्रेश बनता है। तो जो डिस्ट्रक्शन है, जो लय है, जो एक साइकिल है डिस्ट्रक्शन का, वो तो ऑलरेडी सब जगह हो रहा है। तो हम डिस्ट्रक्शन को अलग से क्यों देखें? डिस्ट्रक्शन होगा तभी किसी नई अपॉर्च्युनिटी का जन्म होगा।


 

मां भैरवी की साधना और अनुभव

 

तो मां भैरवी को अगर हमें समझना है 10 महाविद्या में और जो मैं कोर्स कर रही हूं, जो वर्कशॉप मैं करा रही हूं, उसमें ऑलरेडी लोग जो हैं मां भैरवी से जुड़े हुए हैं। तो कल किसी ने बोला कि मां भैरवी प्रकट हुईं और अभी तो वो लोग अपने माइंड में देख पाते हैं, उनकी थर्ड आई खुलती है। और एक ने कहा कि मेरी पूरी बैक में दर्द हो रही है

। बाद में उसने जब मां भैरवी से पूछा तो पता चला कि उसकी बैक में जो प्रॉब्लम थी, स्पाइन की प्रॉब्लम, अब वो दर्द से शुरू हुई है और इस लेडी ने संकल्प लिया है कि 42 डेज में यह दर्द के साथ-साथ मेरी बैक रिन्यू हो जाए, पूरी नई उसके अंदर सेल्स आएं। तो मां भैरवी इस सृष्टि की अगर डिस्ट्रक्शन करती हैं, तो वहीं से जो है नई चीजें आती हैं।

मां भैरवी साधना रहस्य- पूजा से जुड़े डर और संशय

 

थोड़ा सा इसको बड़ा सिंपल से उसमें समझते हैं कि क्योंकि ये जो सवाल है, ये अपने आप में अहम हो जाता है क्योंकि जो डर, एक भय जो आता है हमें कि जब हम तंत्र और मंत्र, काली विद्या से जोड़कर जब चीजों को देखते हैं, तो फिर हमें ये लगता है कि कहीं कोई चूक हो गई, कोई गलती हो गई तो उसके जो प्रभाव हैं वो एकदम उलट हो जाएंगे, यानी कि आप विनाश की तरफ ना चले जाएं।

दूसरा जिस डिस्ट्रक्शन और डेथ की हम बात कर रहे हैं, उसको थोड़ा सा और अगर डिटेल में समझें क्योंकि इसी से भी एक डर, एक फियर जो मन में आता है कि नहीं, हमें मां भैरवी की पूजा करनी चाहिए या नहीं करनी चाहिए? हां, आई थिंक ये बड़ा इम्पोर्टेंट सवाल है कि क्या हमें पूजा करनी चाहिए?

 

कौन और कैसे करे मां भैरवी की पूजा ?

 

देखिए, मां भैरवी का जो… मां भैरवी एक तांत्रिक रूप हैं, 10 महाविद्या एक उग्र और तांत्रिक रूप हैं। इनकी पूजा सिर्फ उन लोगों को करनी चाहिए जिनको इनके मंत्र उच्चारण और सारी पूजा विधि पता है। यह वाम मार्ग है, यह सिंपल पूजा नहीं है। 

मां भैरवी की पूजा आपके घर में बैठ के, आपके मंदिर में बहुत ही मुश्किल से होगी क्योंकि एकांत चाहिए उसके लिए, उसके लिए एक तरह की जगह चाहिए। बहुत सारे लोग जो है मां भैरवी की पूजा श्मशान में करते हैं।

तो मां भैरवी के 12 रूप हैं और 12 रूप में से कुछ रूप हैं लिंग भैरवी, कामेश्वरी भैरवी, कालभैरवी। तो हर एक मां भैरवी का जो रूप है, उसकी मंत्र अलग है, उसका उच्चारण अलग है, उसकी प्रक्रिया अलग है। तो एक आम आदमी को अगर करना है तो उसको यह दीक्षा लेनी पड़ेगी और इसको समझ के करना पड़ेगा।

यह बहुत आसानी से की जाने वाली नहीं है। किसी भी महाविद्या की अगर आपको साधना करनी है तो पहले आपको मां काली को साधना होगा और उससे भी पहले मां दुर्गा को साधना होगा। तो जो बहुत सारे लोग ये वर्कशॉप करते हैं। 

 वो बहुत सालों से दुर्गा सप्तशती का पाठ कर रहे हैं, नवार्ण मंत्र कर रहे हैं, तो उनकी एक प्रिपरेशन है। तो क्या एक आम आदमी जिसने कभी भी कोई प्रिपरेशन ना की हो, मैं नहीं सलाह दूंगी कि वो सीधा मां भैरवी के मंत्र से शुरू करे।

 

आधुनिक युग में मां भैरवी साधना का सरल मार्ग

 

लेकिन क्या मंत्र किए बिना हम इनको साध नहीं सकते? यहां आती है मॉडर्न स्पिरिचुअलिटी और यहां आता है हमारा माइंड, हमारी आत्मा और हमें जो भगवान ने शक्ति दी है। तो आप मानते हैं कि शिव जी ने बोला था पार्वती जी को कि आगे जाकर जो कलयुग आएगा। 

इसमें एक आम आदमी के पास साधना करने के इतने सारे ना समय होगा, ना साधन होंगे, ना एकांत होगा, तो क्या किया जाए? वहां से… चक्र में फंसा हुआ है… वहां से आए शाबर मंत्र, वहां से आए छोटे मंत्र और ये भगवान भी देख रहे हैं कि हम इस तरीके से जो है पूरी साधना हर कोई नहीं कर सकता।

तो एक आम आदमी क्या करे ? मां भैरवी की पिक्चर ले और मां भैरवी की पिक्चर को नवरात्रों के दौरान देखे, उनको साधे, उनका जो मंत्र है उससे साधे और यह बोले कि मेरी लाइफ में जो जिस चीज की भी डिस्ट्रक्शन आपको लगता है कि होनी है, वो आराम से हो, वो चीज जाए ताकि कोई नई चीज आए।

तो डिस्ट्रक्शन का यह मतलब है जो चीज आपकी लाइफ से निकलनी है। हो सकता है आपके पास कुछ ऐसे दोस्त हों जो अच्छे ना हों लेकिन आपको पता ना हो, आपको लगता है कि वो अच्छे हैं लेकिन असल में पीछे से वो बुरे हैं आपके लिए। हो सकता है आपकी… आपने जो मांगा है मां से, उसके आड़े आपकी नौकरी आ रही है।

हो सकता है उस नौकरी का जाना जरूरी है। हो सकता है घर का जाना जरूरी है ताकि आप एक नया विला ले सकें। हो सकता है आपके जीवन से किसी आदत का जाना जरूरी है। तो डिस्ट्रक्शन मतलब किसी चीज का जाना, किसी चीज का डिस्ट्रॉय होना ताकि सामने से हमने जो मांगा है मां से वो आए।


 

 मां भैरवी की कृपा के संकेत

 

तो आप पिक्चर देख सकते हैं और मां की आंखों में, ऐसा कहते हैं बहुत सारे लोग तो देख नहीं पाते 30 सेकंड के ऊपर, अगर आप मां भैरवी की पिक्चर को देख सकते हैं, नवार्ण मंत्र करते-करते या मां भैरवी का मंत्र करते-करते, इसका मतलब मां भैरवी की कृपा आप पर है और आपको वो सबसे पहला साइन यह देंगी कि आपके स्वप्न में आएंगी।

आपके स्वप्न में आएंगी और उसके साथ एक ऐसी चीज दिखाएंगी जिसका आपके जीवन से जाना जरूरी है। जब वो मेरे स्वप्न में आई थीं बहुत साल पहले, जब मुझे पता भी नहीं था कि यह मां भैरवी हैं, तो मुझे लगा था यह मां काली हैं, 

जैसे आपने बोला कि मां काली और मां भैरवी का जो रूप है वो काफी सिमिलर है और मैं काफी डर गई थी क्योंकि उनका काफी फियर्स फॉर्म होता है और उसके साथ उन्होंने मेरा ऑफिस दिखाया और मुझे बिल्कुल भी समझ नहीं आई।

लेकिन तीन महीने के अंदर-अंदर मैंने अपना कॉर्पोरेट वर्ल्ड छोड़ दिया। अपने में यह एक सडन बात हो सकती है, लेकिन उस समय मुझे नहीं पता चला लेकिन 

अब मैं अपने स्टूडेंट्स को… बात  कर पा रही हूं… अब मैं रिलेट कर पा रही हूं क्योंकि उसका जाना जरूरी था ताकि मैं स्पिरिचुअलिटी की वर्ल्ड में आ सकती। तो डिस्ट्रक्शन का मतलब किसी चीज का जाना जिसकी जरूरत आपकी जीवन में नहीं है।

 

मां भैरवी का वास्तविक कार्य

 

यानी कि सीधे से अगर समझें कि मां भैरवी आपको उन चीजों से अवगत या एक तरह से परिचय कराती हैं जो आपकी लाइफ में सही नहीं हैं, आपके लिए हो सकती हैं कि वो बहुत ज्यादा प्रिय हैं आपके लिए वो चीजें लेकिन वो कहीं ना कहीं आपकी लाइफ को खराब कर रही हैं। 

उस डिस्ट्रॉय की तरफ ले जा रही हैं जहां से आपको बचना चाहिए और मां भैरवी असल में उसको डिस्ट्रॉय करके आपको एक बेहतर जिंदगी की तरफ बढ़ाने की कोशिश करती हैं।

बिल्कुल। लेकिन राज जी, होता क्या है कि हम सब इतने अटैच्ड होते हैं चीजों के साथ कि हमें यूनिवर्स और मां जब बार-बार साइन दिखाती हैं, जैसे मां अपने बच्चे को बोलती है इस चीज को छोड़ दो, बच्चा नहीं सुनता, इस चीज को छोड़ दो, हम नहीं सुनते।

फिर वो एक उग्र फॉर्म में आके या तो डांट के या छीन के वो चीज को आपसे अलग करती हैं। तो मां भैरवी की एनर्जी बहुत सडन है, बहुत अनएक्सपेक्टेड है और वो एक आपकी लाइफ से जो है चीज छीन लेंगी, फिर आपको एकदम शॉक लगेगा कि ये क्या हो गया। तो मां भैरवी की एनर्जी बहुत-बहुत फियर्स है, वो आराम से आपको नहीं बताएंगी।

अगर वो आपके जीवन से कुछ निकाल रही हैं, इसका मतलब आपको 10 साल से संकेत आ रहे हैं लेकिन आप उसको छोड़ने को तैयार नहीं। उनकी एनर्जी फियर्स है, सडन है। जो भी मां भैरवी को साधता है, उसको अपनी लाइफ में एकदम से केओस का एहसास होता है।

लेकिन मैं अपने पाठकों को यह बता दूं कि 10 महाविद्या अपने में ही फियर्स हैं। अगर आप में वो एनर्जी है कि आप अपनी लाइफ को सरेंडर कर दें मां को और कहें कि जो आपने लेना है लीजिए, देना है दीजिए, मैं बिल्कुल प्रणाम करके यहीं खड़ा हूं क्योंकि मैं आपको ट्रस्ट करता हूं, आप मेरी मां हैं, तो इन नवरात्रों में, इन नौ दिनों में आपका जीवन पूरी तरह से परिवर्तित हो सकता है।


 

 नवरात्रि में मां भैरवी की पूजा

 

 ये बड़ी अहम है और चूंकि अब नवरात्र की शुरुआत और हर साल जब-जब नवरात्र आते हैं तो जाहिर सी बात है कि इन नौ दिनों में हम मां के अलग-अलग रूप और स्वरूप को पूजते हैं। तो यहां पर यह भी समझना जरूरी है कि मां भैरवी को किस दिन नवरात्रि के उनकी पूजा करनी चाहिए जिससे कि ज्यादा आपके लिए वह फलदायी हो, आपके जीवन में और ज्यादा सुख-समृद्धि और जो बुराई है वह आपके जीवन से हट सके?

 

मां भैरवी साधना रहस्य पूजा का सही दिन और विधि

 

पांचवा दिन होता है, यह पांचवी महाविद्या है और पांचवें दिन इनका हम जो है आह्वान कर सकते हैं। जी, इनको कालरात्रि के साथ भी जोड़ा जाता है। ऐसा कहते हैं कि कालरात्रि मां का भी एक फॉर्म है। तो यहां मैं अपने पाठकों को कहना चाहूंगी कि काल मतलब समय और रात्रि मतलब अंधेरा।

तो काल को भी दर्शाती हैं यह। महाकाल, कई लोग कहते हैं कि मां भैरवी का जो कॉन्सर्ट है वो महाकाल है, है ना, जो दक्षिणेश्वर शिव हैं वो इनका कॉन्सर्ट हैं। तो उस समय वो काल की बात कर रही हैं, जिस चीज का समय आपके जीवन में खत्म हो गया, जिस इंसान का समय खत्म हो गया। तो समय को दर्शाती हैं और रात्रि किसको दर्शाती है?

हमारे इग्नोरेंस को, हमारे फियर्स को, हमारे डाउट्स को। अगर किसी के भी दिल में बहुत भय है तो मां भैरवी की पूजा करे, वो अभय हैं। वैसे तो सब महाविद्या जो हैं अभय मुद्रा दिखाती हैं, इसका मतलब महाभय विनाशिनी, बड़े से बड़े डर को भी हटाने वाली। 

लेकिन फिर भी मैं कहूंगी कि अगर आपको डर लगता है, आप में कॉन्फिडेंस की कमी है, आपके जीवन में कुछ भी ऐसा है, आपके शत्रु इतने बढ़ गए हैं और उनका विनाश बहुत जरूरी है,

आप किसी एब्यूजिव रिलेशनशिप में हैं, आप किसी नार्सिसिस्टिक रिलेशनशिप में हैं, तो मां भैरवी को हमें जरूर पूजना है। जो रात्रि आपके जीवन में खत्म नहीं होने को आ रही है, जिसकी सुबह नहीं हो रही है, वो मां भैरवी आपको एक मदर के रूप में प्रोटेक्ट करेंगी।

तो यह बहुत जरूरी है कि हम उनको एक मां के रूप में, स्पेशली क्योंकि हम… में नहीं जा रहे, हम तांत्रिकों की तरह उनकी वो पूजा नहीं कर रहे कि हमें कोई सिद्धि मिले।

हम उनकी मदर की तरह पूजा कर रहे हैं कि प्लीज मैं आपके पास मदद मांग रही हूं, यह पीरियड मेरी लाइफ में खत्म नहीं हो रहा, प्लीज आप मेरी मदद करें और मुझे इस अंधकार से निकालें। तो इस चलते क्योंकि सातवें दिन कालरात्रि की पूजा होती है नवरात्रि में, तो हमें मां भैरवी की पूजा फिफ्थ डे भी करनी चाहिए और सेवंथ डे भी करनी चाहिए।

मां भैरवी साधना रहस्य पूजा के नियम और सावधानियां

 

यहां घर में पूजा करें मां भैरवी की या घर में पूजा करने से अवॉइड करें? अगर आप महाविद्याओं की पूजा पहले से करते आ रहे हैं, अगर आप मां काली के साधक हैं, अगर मां काली की कृपा आप पर है तो आप घर में पूजा कर सकते हैं लेकिन इनकी साधना नहीं कर सकते। पूजा आप आराम से कर सकते हैं, पूजा करने में कोई भी प्रॉब्लम नहीं है।

जितनी भी महाविद्याएं हैं, उनकी पूजा साउथ डायरेक्शन में उनका ऑल्टर होता है और उनका जो ऑल्टर होता है वो बाकी मंदिर से अलग होता है। मां कालरात्रि के लिए, मां भैरवी के लिए आपको एक लाल कपड़े का आसन बिछाना है, उनको लाल गुड़हल के फूल चढ़ाने हैं, उनको आपको रुद्राक्ष की माला या लाल चंदन की माला पे उनका मंत्र करना है।

और हमेशा जब भी आप किसी महाविद्या की पूजा करें, शहद जरूर रखें क्योंकि हमें नहीं पता कि वो कब उग्र फॉर्म में आ जाएंगी। हम साधना नहीं कर रहे, हम तंत्र नहीं कर रहे, हम केवल उनकी ब्लेसिंग्स के लिए पूजा कर रहे हैं।

तो आप शहद रखें, गुड़हल का फूल रखें, गुड़ रखें, कोई मिठाई रख सकते हैं तो रखें, काली उड़द की दाल के वड़े बनाकर रखें, जरूर कुछ दक्षिणा दें और जितनी भी देवी की पूजा होती है, उसमें आप कंजक जरूर बिठाएं और छोटे बच्चों को खाना जरूर खिलाएं।

मां इससे ज्यादा खुश होती हैं रादर दैन बहुत सारे रिचुअल्स। और क्योंकि मैं हर लेख में यह कहती हूं कि हर एक इंसान को ना दीक्षा मिल पाती है, ना वो उसको साध पाते हैं, तो हमारे लिए जरूरी है कि हम उसको थोड़ा सिम्प्लिस्टिक बनाएं, ऐसा बनाएं कि एक आम आदमी भी कर सके।

पीरियड्स में पूजा का मिथक

और एक और बात, सब 10 महाविद्या में आप पीरियड्स में पूजा कर सकते हैं क्योंकि मां के यह उग्र फॉर्म होते हैं और मां कामाख्या जो इनके ऊपर, इन 10 महाविद्याओं के ऊपर जो डेटी हैं, वो हैं मां कामाख्या और मां कामाख्या के टेम्पल में भी जो है हम देवी की ही पूजा करते हैं और उनकी हम मेंस्ट्रुएशन में ही पूजा करते हैं।

तो जब हम… मतलब ये सवाल बहुत बार आता है कि नवरात्रि में ऐसा हो गया या अगर हम 10 महाविद्या की पूजा करें तो क्या हम हाथ ना लगाएं? ऐसा नहीं है। और मां भैरवी यही कहती हैं, कोई डिफरेंस नहीं है किसी भी इंसान में, आदमी और औरत में, शुद्ध-अशुद्ध, पवित्र-अपवित्र, महाविद्या इनके ऊपर हैं।

यानी कि एक तरह का मिथ है इसको लेकर क्योंकि मां फर्क नहीं कर रही हैं किसी में, उसके लिए तमाम बच्चे अपने एक जैसे, एक बराबर हैं।


 

 मां काली और मां भैरवी का संबंध

 

बीच में जिस तरह से जिक्र हमने किया कि मां काली और मां भैरवी, मतलब एक तरह से एक अंश, एक रूप कहीं ना कहीं वो रिलेट करता दिखता, एक जैसा है। क्या मां भैरवी मां काली का ही एक रूप हैं? बहुत ही बढ़िया क्वेश्चन है, यह मेरा फेवरेट है क्योंकि बहुत सारे लोगों को मां भैरवी और मां काली के इमोशन में डिफरेंस नहीं पता। मां काली ट्रांसफॉर्मेशन की देवी हैं और मां भैरवी डिस्ट्रक्शन की देवी हैं। ट्रांसफॉर्मेशन मतलब कोई चीज का खत्म होना और बिल्कुल ट्रांसफॉर्म होके एक नया रूप आना।

मेरी जीवन में बहुत बार ट्रांसफॉर्मेशन आ चुका है, मैंने अपना कॉर्पोरेट करियर एक तरीके से खत्म किया और मैं स्पिरिचुअल साइड पे आई, ये ट्रांसफॉर्मेशन है। कहना बहुत आसान है, करना और इसके थ्रू गो करना बहुत मुश्किल है। लेकिन मां भैरवी केवल डिस्ट्रक्शन करती हैं। इसका मतलब अगर आपने उनको साध लिया और आपने उनको ये रिक्वेस्ट की कि मुझे ये चाहिए, मुझे अपने जीवन से ये निकालना है, तो वो आपकी डिस्ट्रक्शन में हेल्प करेंगी।

डिस्ट्रक्शन ट्रांसफॉर्मेशन का एक पार्ट है। तो ऐसा कह सकते हैं कि मां भैरवी अ… एक तरीके से मां काली को अ… जैसे हम कॉर्पोरेट वर्ल्ड में कहते हैं, रिपोर्ट करती हैं क्योंकि उनका एक… वो उनका एक काम कर रही हैं, ट्रांसफॉर्मेशन का एक काम कर रही हैं जिसका नाम है डिस्ट्रक्शन

अगर आपको कोई भी एनर्जी डिस्ट्रॉय करनी है तो आप मां भैरवी को वो करें और इनका जो चक्र होता है, इनका जो एलिमेंट होता है वो अर्थ होता है। तो वो अपने पैर को, ऐसा कहते हैं जब मां भैरवी अपने पैर को धरती पर जोर से रखती हैं तो एकदम भूकंप आता है और एक कपकपी सी होती है, अर्थक्वेक जिसको हम कहते हैं।

आप इसी पिक्चर को अपने जीवन में सोचिए, अगर आपने उनको साधा और उन्होंने अपना पैर ऐसे रख दिया तो फिर जो रिक्वायर्ड नहीं है वो निकल जाएगा।


 

घर और कारोबार में मां भैरवी की स्थापना

 

इसके अलावा जो स्थापना की बात करें, आमतौर पर होता है कि आप जिसको पूजते हैं, वो फिर कोई देव हो सकता है, देवी हो सकती हैं। मां भैरवी की बात कर रहे हैं, क्या मां भैरवी की स्थापना घर या कारोबार, दोनों जगह की जा सकती है? या फिर इनमें से किसी एक जगह करनी चाहिए या दोनों जगह से बचकर हमें रखना चाहिए कि नहीं, कोई दूसरे विकल्प हैं, उनको साधने की तरफ जाएं हम? मां भैरवी की स्थापना दोनों जगह की जा सकती है।

आप सिर्फ उनकी पूजा कर रहे हैं, पूजा और अर्चना कर रहे हैं। लेकिन आपके लिए, आपके जीवन में मां काली की एनर्जी फील होनी बहुत जरूरी है। मतलब अगर आपको अपने जीवन में कुछ बहुत बड़ा पाना है, आपके बहुत दुश्मन हैं, आप एक बहुत बड़ी चीज को करने जा रहे हैं, तभी आप 10 महाविद्या की तरफ जाएंगे।

अगर आपका लाइफ बहुत अच्छा चल रहा है, आपका गृहस्थ जीवन है और आप बहुत खुशी-खुशी हैं तो मैं हमेशा कहती हूं आप कृष्ण भक्ति की तरफ जाइए। तो मां 10 महाविद्या को साधने का मतलब है कि आपका लाइफ का जो पर्पस है, वह बहुत बड़ा है, कुछ ऐसा आपको करना है और आपको कोई सपोर्ट नहीं कर रहा, आपको लोग धोखा दे रहे हैं, आपको एक एनर्जी की जरूरत है। अ… तो आप घर में भी स्थापित कर सकते हैं और कारोबार में भी स्थापित कर सकते हैं।

जिनकी फैक्ट्रीज़ हैं, उनको मां भैरवी को जरूर रखना चाहिए। अ… जिनकी बड़ी-बड़ी मशीनें हैं, बहुत लोगों के साथ डीलिंग्स हैं, अ… जिनके बहुत बड़े दुश्मन हैं, उनके लिए मां भैरवी जो है बहुत स्ट्रांग एनर्जी है। लेकिन एक बात याद रखिए, फिर हमें मां भैरवी को सरेंडर करना होगा, फिर हम रो नहीं सकते, फिर हम छोटा बच्चा नहीं बन सकते। हमको भी यह समझना होगा कि जो वो कर रही हैं, जो कह रही हैं, जो दिखा रही हैं, वो समझाएंगी नहीं।

ये समझाने की देवी नहीं हैं, ये बस एकदम गला काट देंगी और बस फिर खत्म, आप डील करिए उसके साथ। तो आपको पहले सरेंडर मोड में आना होगा तभी आप मां भैरवी की तरफ जाएं। और मां भैरवी के साथ हमेशा जो है भैरव रहते हैं।

और एक और बात कि मां भैरवी को साधने से पहले, आप इनकी स्थापना करें, इससे पहले आपको कम से कम 11000 गणेश मंत्र करने हैं और 11000 शिव जी के मंत्र करने हैं। इन दोनों को साध कर, इनकी रिक्वेस्ट करके, इनकी पूजा करके ही आप किसी 10 महाविद्या, स्पेशली मां छिन्नमस्तिका, मां भैरवी, मां काली, मां तारा और मां धूमावती, इनको करके ही आप इन बहुत स्ट्रांग एनर्जीज़ को जो है ला सकते हैं।


 

 आधुनिक जीवन और कर्म का महत्व

 

लेकिन अभी मॉडर्न वर्ल्ड की बात करें जहां अभी हम हैं, एक दौर होता था, सैटिस्फैक्शन था लाइफ में, बहुत ज्यादा लालच नहीं था, बहुत कुछ पाने की चाह नहीं थी। लेकिन आज के इस मॉडर्न वर्ल्ड में सब कुछ पाना चाहता है इंसान और इसमें कोई अछूता नहीं बचा है। तो यानी कि आप ये समझिए कि हर शरीर के भीतर वो असुर है, वो बुराई है।

उस असुर और बुराई के साथ वो कैसे मां भैरवी को साध सकता है? सबसे पहले उसे वो खत्म करना होगा? अगर वो लेकिन इसके साथ अगर साधता है, क्या चीजें उलट हो सकती हैं? नहीं, उलट नहीं हो सकतीं। आपके अंदर अगर असुर है तो आपके अंदर मां भैरवी भी हैं क्योंकि आपकी ऑलरेडी एक साइकिल चल रही है।

असुर आपको एक तरीके से लेके जा रहा है, मां भैरवी उसको एक तरीके से किल कर रही हैं। अगर आपको उनको साधना है तो आपको अपने माइंड से साधना होगा, अपने बिहेवियर से, अपनी इच्छाओं को देखना होगा कि क्या मेरी इच्छा ठीक डायरेक्शन में है कि नहीं।

क्योंकि मां भैरवी या कोई भी 10 महाविद्या आपको एक ही डायरेक्शन में लेके जाएगी और वो डायरेक्शन सिर्फ सक्सेस की नहीं होगी, अच्छे कर्म की भी होगी। तो मैं कहूंगी कि अगर आपको किसी भी महाविद्या को साधना है, आप अपने कर्म को नोटिस कीजिए और कर्म केवल करने वाला नहीं होता, सोचने वाला भी होता है।

तो अगर आप सोच रहे हैं कि यह मेरे सामने बैठा है, मैं इसका कैसे फायदा उठाऊं, तो आप मां भैरवी की जितनी मर्जी पूजा कर लीजिए, आप उसको साध नहीं पाएंगे। बहुत लोग अपने वाइव्स की इज्जत नहीं करते, बहुत लोग अपनी बेटियों को मारते हैं, अ… लेडीज की इज्जत नहीं करते और फिर जाकर मां कामाख्या में अपना सर पटकते रहते हैं और कहते हैं मैं देवी का साधक हूं।

लेकिन मैं यह कहती हूं कि अगर आप एक बेसिक लेवल पे जो देवी का लाइव रूप है, व्हिच इज अ वुमन, उसी का तो शोषण कर रहे हैं आप, उसी का बुरा चाह रहे हैं।

अगर आपको मां भैरवी या किसी भी दस महाविद्या का बहुत ज्यादा इफ़ेक्ट चाहिए तो आप लेडीज को सपोर्ट करें। आप ऐसे देखिए जिनके पास घर नहीं है, खाना नहीं है, उनके बच्चों की शादी नहीं हो रही, उनके पास कोई सपोर्ट नहीं है, आप उनके साथ काम करिए। आप मां भैरवी को उसके बाद केवल एक मंत्र से भी साध सकते हैं।


 

मां भैरवी साधना रहस्य की निरंतरता और समय

 

यह माना जाता है और यह कहा भी जाता है कि मां काली से इसलिए बार-बार हम रिलेट कर रहे हैं क्योंकि उनके रूप और उनके बारे में बहुत सारी बातें हमेशा होती रहती हैं। 

लेकिन मां भैरवी के बारे में बहुत कम बातचीत होती है और आज जो तमाम पाठक पढ़ रहे हैं, उन्हें एक क्लैरिटी भी यहां पर आ रही है कि मां भैरवी कौन हैं, उनका रूप-स्वरूप किस तरह से है। लेकिन जो समय मां काली के लिए कहा जाता है कि अगर आप उनको पूज रहे हैं तो फिर वो आप रेगुलर रहें, आप उसमें फिर आप छोड़ नहीं सकते हैं चीजों को बीच में।

तो क्या मां भैरवी को लेकर भी इसी तरह की बातें हैं कि आप अगर एक बार मां भैरवी को पूजने लगे, आपको उनका पूजन, उनकी साधना रेगुलर रखनी होगी?

 साथ ही साथ, क्या दिन का समय होना चाहिए उनकी साधना के लिए? क्योंकि बड़ा फर्क पड़ता है क्योंकि हम ग्रह-नक्षत्र के हिसाब से भी बहुत सारी चीजों को सोचते हैं। तो क्या इसका भी प्रभाव पूजा और साधना पर पड़ता है? जी, सब दस महाविद्या की जो पूजा होती है, वो रात के 9:00 बजे के बाद ही होती है।

तो आप अगर कर रहे हैं तो करें। साधना बहुत ज्यादा ना करें क्योंकि अगर आपके पास सही नॉलेज नहीं है तो ये हमें नहीं करना चाहिए। अगर आप उनका मंत्र कर रहे हैं तो आप सुबह भी कर सकते हैं, शाम को भी कर सकते हैं। आप मंत्र का एक संकल्प ले सकते हैं कि मैं 40 डेज तक मां भैरवी का करूंगा।

तो आपने शुरू में ही बता दिया कि मैं 40 डेज करूंगा। तो आप 40 डेज जो है 9:00 बजे के बाद करें और जो उनके मंत्र, जितने भी आपने मंत्र उच्चारण सोचे हैं, वो करें।

यह तब होगा जैसे हम एंटीबायोटिक लेते हैं, अगर हमें कोई बहुत अचानक से हेल्प की जरूरत है, हम बॉडी को वेट नहीं कर सकते कि खांसी और बुखार खुद ठीक हो या स्टेरॉयड लेते हैं, तो 10 महाविद्या एक इस टाइप की एनर्जी है। तो आप क्या कर सकते हैं कि आप 40 दिन का कर सकते हैं और फिर 40 दिन खत्म होने के बाद रोज सुबह एक नॉर्मल उनकी एक माला, सिंपल सी जो है वो कर सकते हैं।


 

 मां भैरवी के दो स्वरूप

 

मां भैरवी के दो फॉर्म हैं, थोड़ा सा उसको भी एक बार डिटेल में एक्सप्लेन कीजिए पाठकों के लिए, किस फॉर्म की पूजा-साधना करनी चाहिए? जी, मां भैरवी के दो फॉर्म्स हैं। एक बहुत फियर्स फॉर्म है जो बिल्कुल मां काली की तरह दिखता है, जिसमें उनके केश खुले हुए हैं, बहुत पावरफुल हैं और थोड़ा डराने वाला फॉर्म भी है।

ये फॉर्म डिस्ट्रक्शन का फॉर्म है। और दूसरा फॉर्म है जिसमें वो कमल के फूल के ऊपर बैठी हुई हैं, उनके हाथ में एक किताब है और अभय मुद्रा में, दान मुद्रा में, यू नो, वर मुद्रा में हैं वो।

तो अगर आपको अपनी लाइफ में सच में मां भैरवी की असली एनर्जी को लाना है तो आप उनकी फियर्स फॉर्म में ही पूजा करें जो रात को आप करेंगे। और अगर आपको उनका सौम्य फॉर्म चाहिए, मदर फॉर्म चाहिए तो आप उनकी कमल वाले पे भी कर सकते हैं।


 

 निष्कर्ष: परिवर्तन ही जीवन का सत्य है

 

यानी कि यह स्पष्ट है कि जो मां का एक रूप होता है अपने बच्चों के लिए कि जब उसके ऊपर कोई कष्ट आता है, कोई विपदा आती है, कोई परेशानी आती है, तो तब वो जो रूप होता है उसका, वो मां भैरवी का वो असल रूप है।

और मां किसी भी रूप में हों, अपने बच्चे, अपने परिवार के लिए हमेशा अच्छा सोचती हैं और उसकी यही एक कोशिश रहती है कि मेरे बच्चे जो हैं, उनके लाइफ में कुछ भी जो बुरा उनके साथ है… इसको थोड़ा सा इस तरह से भी समझें कि हमारे पेरेंट्स, खासतौर से मां, कई बार आपके साथ ऐसे यार-दोस्त होते हैं, आपको लगता है कि वो आपके बचपन के बहुत अजीज दोस्त हैं लेकिन आप उनकी बुराइयां नहीं देख पा रहे होते जो आपकी मां देख पा रही होती हैं।

और वो चाहती हैं कि आप इनसे दूर हो जाएं। बहुत सारी ऐसी लत होती है आपकी लाइफ में, आपको लगता है कि नहीं, यह जो सब आप कर रहे हैं, यह सब ठीक है, लेकिन उसके प्रभाव बहुत बुरे होते हैं जिससे कि मां आपको दूर रखना चाहती हैं। और मां भैरवी भी यही आपके जीवन में करती हैं।

बस मां भैरवी को आपको बहुत अच्छे से समझना है, उनकी साधना को समझना है और फिर आप देखेंगे कि आपकी लाइफ में कितने और किस तरह के बदलाव हों।

 एक आखिरी सवाल आज के इस लेख का, मां भैरवी जो 10 की 10 महाविद्या, उसमें से एक मां भैरवी का जो रूप-स्वरूप है, वो मुझे  को इस  तरह से और प्रभावित करता है मेरी लाइफ का थीम ट्रांसफॉर्मेशन है और डिस्ट्रक्शन इसका बहुत बड़ा पार्ट है।

तो मेरी लाइफ में डिस्ट्रक्शन आता ही रहता है, केओस आता ही रहता है। तो मैं मां भैरवी को बहुत मानता  हूं और मैं उनको समय-समय पर उनकी साधना जरूर करती हूं।

 इन्होंने मुझे बहुत प्रभावित किया है यह बता के कि सब कुछ चेंज रिलेटेड है, कुछ भी स्थिर नहीं है, कुछ भी स्थाई नहीं है। चेंज इज द रियलिटी ऑफ लाइफ।

डिस्ट्रक्शन होगी तो न्यू बिगिनिंग होगी, डिस्ट्रक्शन नहीं होगी तो न्यू बिगिनिंग नहीं होगी। मैंने अपनी लाइफ में ये बहुत हार्ड तरीके से सीखा है। तो मैं… मैं मां भैरवी को बहुत-बहुत क्लोज उनके साथ रिलेट करती हूं और वो मेरी हर रोज की पूजा का एक हिस्सा हैं।

 

समापन

थोड़ा सा समय अगर हम साधना को दें लेकिन उसको समझते हुए हम दें, कहीं ऐसा ना हो कि आप बहुत ज्यादा साधक होने के चलते जो है गलत भी कुछ कर बैठें, तो उनका भी हमें ध्यान रखना है।

अगले लेख में आपसे एक बार फिर से मुलाकात होगी और तब 10 महाविद्याओं में से एक मां कमलात्मिका के बारे में बात करेंगे और उनके बारे में भी जानेंगे कि इस मां के रूप का जो है हमारे जीवन पर कितना और कैसा प्रभाव है। नमस्कार।

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भगवती त्रिपुरा सुंदरी की कृपा कैसे प्राप्त करें?

bhagwati tripur sundari sadhana ka rahasya भगवती त्रिपुरा सुंदरी साधना रहस्य ph.8528057364 राजराजेश्वरी षोडशी इनकी कृपा कैसे प्राप्त करेंगे ? क्या वह कर्म हो सकते हैं, वह क्या क्रिया हो सकती है जिससे इनका जो महाफल है वह अति शीघ्र प्राप्त हो जाए ? यही प्रश्न भगवान परशुराम ने श्री दत्तात्रेय से पूछा था त्रिपुरा रहस्य के अंतिम भाग में, अर्थात इसके जो माहात्म्य खंड है उसके अंतिम भाग में और आज यह लेख इसी बारे में है। वह क्या कर्म होना चाहिए, वह क्या क्रियाएं होनी चाहिए जिससे कि हमें धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष इन सभी की प्राप्ति हो, सौभाग्य हमारा चमक उठे ?

 

त्रिपुरा सुंदरी – त्रिपुरा रहस्य: एक सुलभ मार्ग

अक्सर ऐसा देखा जाता है कि जो महाविद्या होती हैं, उनकी जो विधि होती है, उनका जो विधान होता है, बहुत ही क्लिष्ट सा होता है, बहुत ही गूढ़ भी होता है और सरल भी नहीं होता है। अक्सर आपको कई जानकार व्यक्ति, पंडित, योगी, तांत्रिक मिल जाएंगे जो महाविद्याओं के बारे में कहते हैं कि बिना गुरु की कृपा के इसको हमें स्वयं से नहीं करना चाहिए।

परंतु जब हम त्रिपुरा रहस्य को पढ़ते हैं और इसमें जिस प्रकार का संवाद आता है, उसमें जो विधि विधान बताए हैं, वह ऐसे हैं कि वह आप स्वयं घर बैठे बहुत ही सुलभ रूप से कर सकते हैं। इसी बारे में आज के इस लेख में चर्चा है। तो बिना किसी विलंब के इस लेख को आप साझा अभी से ही कर लीजिए, हमें फॉलो करना न भूलें।

और इसमें मैं आपको केवल भगवती त्रिपुरा सुंदरी के बारे में नहीं बताऊंगा परंतु मैं आपको यह भी बताऊंगा कि वह जो पांच देवता होते हैं उनकी भी कृपा किस प्रकार से प्राप्त की जाए, वह विधान भी इसी ग्रंथ में लिखा हुआ है। तो आइए अब बिना किसी विलंब के चर्चा को आरंभ करते हैं।

 

त्रिपुरा सुंदरी – पंच देवों को प्रसन्न करने की विधि

भगवान परशुराम ने जो श्री दत्तात्रेय से प्रश्न किया था कि किस प्रकार सामान्य जन को भी भगवती की कृपा, इनका महाफल अति शीघ्र प्राप्त हो, कृपया करके वैसा कोई विधान बताइए। तब श्री दत्तात्रेय कहते हैं, ध्यान सुन।

और फिर वह कहते हैं कि जिस प्रकार यहां पर आप भी ध्यान से सुनिए क्योंकि यहां पर हम आरंभ कर रहे हैं पंच देवों के साथ।

त्रिपुरा सुंदरी- पंचदेव कौन से होते हैं?

गणपति, शिव, सूर्य, विष्णु और शक्ति। इनकी भी कृपा हमें किस प्रकार से प्राप्त हो?

तो श्री दत्तात्रेय कहते हैं कि महादेव को जिस प्रकार अभिषेक देकर के उनकी कृपा प्राप्त हो सकती है, अभिषेक करके उनका। अब इसमें भी बहुत सारी बातें आ जाती हैं कि जल से अभिषेक का लाभ कुछ और होता है, दूध से अलग होता है, शहद से अलग होता है, वह अलग बात है। परंतु अभिषेक, नित्य अभिषेक आप करिए और फल देखिए।

फिर गणपति को यहां पर दत्तात्रेय कहते हैं कि गणपति को मोदक देने से ही वह जिस प्रकार से प्रसन्न हो जाते हैं। सूर्य देवता को केवल प्रणाम करने से ही वे जिस प्रकार से प्रसन्न हो जाते हैं। अब बात यहां पर आती है भगवान विष्णु की, क्योंकि भगवान विष्णु के बारे में कहा जाता है कि इन्हें प्रसन्न करना बहुत मुश्किल है और बात भी सही है।

अब जब आप सुनेंगे तब आपको समझ में आएगा कि ये मुश्किल भी है तो क्यों है। भगवान विष्णु को यदि हमें प्रसन्न करना है तब आप इनकी नित्य अलंकारों से इनकी सज्जा करिए अर्थात इनको सजाइए। अलंकार अर्थात ऑर्नामेंटेशन, इनको आप सजाइए।

इसलिए आपने देखा होगा कि वह तिरुपति जी का मंदिर हो या फिर इस्कॉन का मंदिर हो या फिर बांके बिहारी लाल का मंदिर हो, इनकी जब भी नित्य पूजा होती है इनको सजाया जाता है। सजाना इनको बहुत प्रिय है।

अब यह सरल भी है परंतु प्रतिदिन सजाने का अपना एक क्रम होता है, सजाने में आपका मन लगना चाहिए, अलग-अलग चीजें आती हैं, मुकुट आता है, वस्त्र आते हैं, बहुत सारी चीजें आती हैं। परंतु ये बाकी सभी विधान के मुकाबले यह सरल ही है। तो ये हो गए हमारे चार देवता।

 

त्रिपुरा सुंदरी – भगवती की नित्य पूजन का सरल विधान

अब बात आती है देवी की, शक्ति की, भगवती त्रिपुरा सुंदरी की। तो यहां पर किस चीज की पूजा करनी है, क्या पूजना है, वह मैं आपको थोड़े समय बाद बताऊंगा। परंतु पहले हम बात करेंगे कि क्या-क्या करना है, कब-कब करना है, कैसे करना है। बहुत ही सरल है ये। यहां पर श्री दत्तात्रेय कहते हैं, देखिए बात यहां पर बहुत सरल सी है।

हम इस वेबसाइट पर भी बहुत सारे रहस्यों को हम उजागर करते हैं, तत्वों की बात करते हैं, परंतु यह सब ज्ञान जो है, यह बिना भक्ति के विकार है। यह मैं नहीं कह रहा हूं, सभी संत, ज्ञानवान पुरुष कहते हैं।

इसी ग्रंथ में श्री दत्तात्रेय ने भी यह बात कही है कि ज्ञान जो है वह बिना भक्ति के किसी काम का नहीं है और जो भक्ति है वह माहात्म्य को समझने से आती है, पढ़ने से आती है, महिमा को जानने से आती है। इसी कारण माहात्म्य खंड त्रिपुरा सुंदरी का, त्रिपुरा रहस्य का पहले आता है।

 

त्रिपुरा सुंदरी – पूजन का समय और सामग्री

यहां पर श्री दत्तात्रेय कहते हैं कि पांच बेला में, बेला अर्थात शुभ मुहूर्त, बहुत सारे शुभ मुहूर्त आते हैं दिन में, उनमें से किसी भी पांच बेला में अर्थात जैसे अभिजीत मुहूर्त आता है, गोधूली बेला आती इत्यादि, तो किसी भी पांच बेला में आप इनकी पूजन करें।

नहीं हो सकता है तो किसी भी चार समय आप इनकी पूजन कर लीजिए। अच्छा, चार समय नहीं हो सकता है, दो संध्याओं में आप कर लीजिए।

दो संध्या नहीं हो सकता है, तीन काल आप इनकी पूजन कर लीजिए अर्थात प्रातः काल, दोपहर, संध्याकाल इत्यादि। ये जो तीन काल हैं, इसमें आप इनकी पूजन कर लीजिए।

यह भी नहीं हो पाता है तो आप जो समय होता है अर्थात जैसे उष, इसी ग्रंथ में आता है उष। उष का अर्थ हो गया जो सुबह से पहले का जो समय होता है, ब्रह्म मुहूर्त जिसे हम कहते हैं।

तब, प्रातः काल, मध्याह्न अर्थात दोपहर को, प्रदोष काल या फिर अर्ध रात्रि को ही किसी भी, या तो आप इन पांचों समय ही कर लीजिए फिर किसी भी एक समय में इनको पूजन कर लीजिए।

और किस चीज से करना है? गंध, पुष्प, जल, अक्षत, फल। इनमें से किसी से भी नहीं कर सकते हैं तो इनमें से किसी एक भी वस्तु से आप इनका पूजन करिए। यानी कितना सरल कर दिया है।

किसी भी एक समय, किसी भी एक वस्तु से, वह जल हो, पुष्प हो, गंध हो, गंध अर्थात धूप, केवल एक धूप। किसी भी एक समय यदि हो सके तो अर्ध रात्रि को दीपक आप जला लीजिए। अर्ध रात्रि को। यह तो नित्य पूजन हो गया अर्थात प्रतिदिन इसे करें। अब प्रतिदिन यह करना कोई मुश्किल बात नहीं है, हम कर सकते हैं।

 

त्रिपुरा सुंदरी – विशेष पर्वों पर पूजन

उसके बाद कब करें ? किसी भी शुभ पर्व पर या फिर शुक्रवार से, यह भी दिया हुआ है इसी में, शुक्रवार से या किसी भी शुभ पर्व पर। अच्छा, यदि कोई महापर्व है, कोई विशेष मुहूर्त आ जाता है, दिवाली इत्यादि आ जाता है, तब पांच समय आप इनकी पूजन कर लीजिए विधिवत।

अब यह तो हम कर ही सकते हैं वर्ष में एक या दो बार तो। अच्छा, उसके बाद में यदि हो सके तो वाहन में, मैं जिस चीज के बारे में अभी बताने वाला हूं, उसको आप नगर का, नगर की आप परिक्रमा करवा दीजिए। नगर की नहीं हो सकता है तो घर की परिक्रमा करवा दीजिए, जहां रहते हैं उसके आसपास की परिक्रमा करवा दीजिए।

 

त्रिपुरा सुंदरी – श्री यंत्र: पूजा का केंद्र

अब देखिए कि कहां हम बात करते हैं महाविद्याओं की जिसमें बहुत सारे विधि विधान आते हैं, मंत्र, तंत्र इत्यादि बहुत सारी बातें आ जाती हैं, क्लिष्ट हो जाता है।

और यहां पर त्रिपुरा रहस्य, जो भगवान परशुराम ने प्राप्त करा, जिसका रहस्य श्री दत्तात्रेय से, जिस ग्रंथ में बहुत सी गूढ़ बातें हैं, जिसके बारे में मैंने पिछले लेख में भी बताया था, बाकी भी जो लेख हैं उनमें बताया गया था कि इसी में सभी वेदों का सार है।

सभी आगम शास्त्रों का सार है, ज्ञान खंड आता है, जो बातें विज्ञान भैरव में हैं वह भी इसमें ही हैं, जो गीता में है, जो योग वशिष्ठ में है, वह सभी इसमें है और इसी में श्री दत्तात्रेय कितनी सरल रूप से बता रहे हैं भगवती त्रिपुरा सुंदरी का विधान।

अब यहां पर आता है कि किस चीज का पूजन करना है, अंततः यह तो पता ही होना चाहिए। तो यहां पर यह कहते हैं कि श्री चक्र राज का अर्थात श्री यंत्र का। अब श्रीयंत्र भी हमें बहुत ही सुलभ रूप से प्राप्त हो सकता है। या तो आप उसका जो ३डी वाला जो होता है, बड़ा सा आप वो ले लीजिए, वो नहीं आप अफोर्ड कर सकते हैं।

अभी तो तांबे पर ही आपको बहुत ही कम दाम में आपको कितने सारे वेबसाइट्स वहां पर से आपको प्राप्त हो सकता है। कुछ नहीं कर सकते हैं तो कागज पर आप उसे बना सकते हैं, परंतु उसकी एक विधि है जो मैं इसी वेबसाइट पर, इसी लेख श्रृंखला में जो हमारी त्रिपुरा की श्रृंखला चल रही है, उसी में मैं आपको बताने भी वाला हूं कि श्री यंत्र, श्री चक्र को बनाएं कैसे।

 

त्रिपुरा सुंदरी- अतिरिक्त उपाय और मंत्र जाप

फिर यहां पर यह कहते हैं कि उसी में, उसी श्री चक्र में सभी दिक्पालों का, सभी देवताओं का आप आवाहन करिए, इष्टदेव का आवाहन करिए, उसी में इसे देखिए और उसी से आपको महाफल प्राप्त हो जाएगा। महाफल, वह भी अति शीघ्र।

इतना सरल यह पूरा विधि विधान है, या फिर मैं यूं कहूं कि विधि विधान है ही नहीं। केवल एक धूप जलाना है, एक समय इनकी पूजन करनी है, आपको शुक्रवार से आप आरंभ कर सकते हैं या फिर किसी भी शुभ मुहूर्त पर आप इसका आरंभ कर सकते हैं।

फिर यह भी बोला है कि यदि हो सके तो आप इसी को ही आप जल देकर के इसका भी अभिषेक कर सकते हैं, इसी चक्र के सामने रुद्राभिषेक भी कर सकते हैं। साथ ही साथ यदि हो सके तो सहस्त्रनाम का पाठ कर सकते हैं और सहस्त्रनाम का भी पाठ नहीं हो सके तो श्री सूक्त का पाठ कर सकते हैं।

यदि वह भी नहीं हो पा रहा है तो ह्रीं का आप जाप कर सकते हैं। ह्रीं का एक बहुत अद्भुत सी बात यह है कि त्रिपुरा रहस्य का आरंभ होता है ॐ नमः से और अंत होता है त्रिपुर ह्रीं ॐ से। आरंभ होता है, ह्रीं पर समाप्त होता है। इसी में संपूर्ण ब्रह्मांड है, यही मैक्सिमा मिनिमम है।

 

त्रिपुरा सुंदरी – निष्कर्ष

तो अब बिना किसी विलंब के आप त्रिपुरा सुंदरी भगवती राजराजेश्वरी माता षोडशी की कृपा प्राप्त करने में जुट जाइए। बहुत ही सरल विधि है और यदि आपको यह जानकारी, यह सारी बातें सुंदर लगी हों तो कृपया करके इस लेख को साझा अवश्य करिएगा, कमेंट में हमें बताइएगा कि आपको कैसा लगा और कमेंट सेक्शन में जो पहला कमेंट पिंड है वहां से पेटीएम, जीपे इत्यादि के माध्यम से जितना अधिक हो सके आप हमें श्री सहयोग भी प्रदान करें। इसके साथ मैं आपसे जाने की अनुमति लेता हूं। धन्यवाद।

त्रिपुर सुंदरी साधना – रोग नाश और यौवनता के लिए

Tripur sundari sadhana त्रिपुर सुंदरी साधना - रोग नाश और यौवनता के लिए

Tripur sundari sadhana त्रिपुर सुंदरी साधना – रोग नाश और यौवनता के लिए

Tripur sundari sadhana त्रिपुर सुंदरी साधना - रोग नाश और यौवनता के लिए
Tripur sundari sadhana त्रिपुर सुंदरी साधना – रोग नाश और यौवनता के लिए

tripur sundari sadhana त्रिपुर सुंदरी साधना – रोग नाश और यौवनता के लिए – नमस्कार दोस्तों जय महाकाल जय माता श्मशानी। आज के पोस्ट  में मैं सभी रोगों का नाश करने वाली त्रिपुर सुंदरी माता की साधना दे रहा हूं और उसका सरल अति सरल विधि विधान उसका बता रहा हूं मैं। जिस विधान कर सकता है परंतु इस  विधान  जो विशेष मंत्र दे रहा हूं उसे मंत्र के प्रभाव से अवश्य ही हमारी हर प्रकार की समस्या दूर हो जाती है।

त्रिपुर सुंदरी साधना – के मुख्य लाभ

मुख्य तौर से देखिए इस साधना को रोगों नाश के लिए किया जाता है मतलब किसी भी प्रकार का आपको रोग है या बीमारी है ये कमजोरी है जो कुछ भी है तो यह सारे रोग जो है इस साधना से जो है समाप्त हो जाएगी आपकी।

 सबसे बड़ा लाभ तो यह होता है की हर प्रकार के रोग का नाश हो जाता है मतलब सर हर प्रकार के रोग जो है हमारे खत्म हो जाते हैं। और दूसरा जो लाभ साधना का है वह यह है की हमारी यौवनता जो है वह हमेशा बने रहती है। 

 हमेशा हमारी यौवनता बने रहती चाहे उम्र कितनी भी आगे क्यों ना बन जाए लेकिन हमेशा में हमारी यौवनता हमारी शक्ति हम मानसिकता शारीरिक शक्तियां हमारे हमेशा बने रहती है  एक जैसी। तो यह तो मुख्य कारण है वजह जिस वजह से इस साधना को किया जाता है मुख्य लाभ में । 

त्रिपुर सुंदरी साधना की विधि

 

अब साधना को विधान बता दे रहा हूं। वैसे अभी गुप्त नवरात्रि चल रहा है नवरात्रि में आप साधना कर सकते हैं बिल्कुल कर सकते हैं बहुत अच्छा समय चल रहा है। ऐसे समय में ये साधना बहुत ही जल्द होती है और बहुत ही ज्यादा लाभदायक भी होती है। इसके अलावा इस साधना को आप किसी भी सोमवार के दिन से भी शुरू कर सकते हैं किसी भी सोमवार के दिन से।

त्रिपुर सुंदरी साधना की  तैयारी और स्थापना

 

तब साधना विधि में बता दे रहा हूं। साधना विधि देखिए इस प्रकार से हैं दिशा आपकी पूर्व रहेगी चौकी लगानी है उसके ऊपर पीले रंग का नया एक वस्त्र बिछाना है आपको और आपको जो है एक घी का एक दीपक लगाना है अपनी तरफ मुख करके एक बाती वाला और उसके सामने जो है थोड़ा सा अक्षत आपको चाहिए चावल चाहिए बिना टूटे हुए। 

ऐसे अक्षत को आपको 16 हिस्से में रखना है तो 16 से मैं कैसे रखोगे मतलब एक लाइन में आप उसे चावल को चार हिस्सा करोगे चार हिस्सा करोगे इस प्रकार से चार लाइन आप बनाओगे तो आपका 16 जो है 16 चावल के ढेर जो है वह बन जाएंगे अलग-अलग।

 ढेरो के ऊपर स्थापित करेंगे कच्ची हल्दी की जो टुकड़े आते हैं चल जो मिलती है उसके अब को छोटे-छोटे टुकड़े कर लेने हैं मतलब एक आधी उंगली से भी कम मतलब ऐसे टुकड़े एक टुकड़ा मतलब बिल्कुल छोटा करना है। 

तो ऐसा एक छोटा एक टुकड़ा मतलब एक हिस्से में आप एक टुकड़ा रखेंगे इस प्रकार से सोलह सोलह सोलह जो हिस्सा आपने बनाया है चावल का तो उसमें 16 स्थान पर 16 आप हल्दी का जो कच्चे हल्दी का 16 टुकड़ा करके 16 जगह में आप स्थापित करेंगे।

त्रिपुर सुंदरी साधना  विधि  – मंत्र जाप और पूजा 

 

इसके पक्ष आप जो है थोड़ा सा चुटकी मतलब माता का जो मंत्र होता है वह  मंत्र पहले बता देता हूं वह मंत्र आपका इस प्रकार से हैं ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः। तो इस मंत्र को बोलते हुए एक बार बोलोगे तो थोड़ा सा दूर्वा कुमकुम जो है कुमकुम स्टार ने जो है कुमकुम का इस्तेमाल करिए इसमें से दूर का मत करिए कुमकुम का इस्तेमाल करें वो ज्यादा अच्छा रहेगा थोड़ा सा कुमकुम उसपे छोड़ देना।

 इस प्रकार से 16 बरस मंत्र को बढ़ते हुए सोलह स्थान पर आपको इसका कुमकुम को थोड़ा सा छोड़ देना। यह पवित्रीकरण का मैं मंत्र दे चुका हूं उसको पवित्रीकरण के मंत्र से अपने में उसे अपने हाथों में जल लेकर उसे मंत्र के द्वारा पवित्रीकरण अपना कर लीजिए।

 पूर्ण इत्यादि पवित्र स्थिति में साधना करनी है। भोग में देखिए आप मिष्ठान्न या मीठी कोई भी वस्तु के इत्यादि अब भोग में अपने अनुसार लगा सकते हैं या फल भी लगा सकते हैं कोई फल अप लगा सकते हैं दो प्रकार का फल लगा लिए बहुत। तो इस प्रकार से यह साधना होगी। अब इसमें कुछ पुष्प अर्पित कर दें आसन को कुछ लाल पुष्पों से या पीले पुष्पों से अब सजा ले।

त्रिपुर सुंदरी साधना  में जाप का क्रम और समय

 

 इस साधना को जो सबसे पहले तो देखिए इसमें जो है आपका जो बैठने का आसन होगा वह लाल होगा ठीक है माता का जो आसन होगा वो पीला होगा दिशा आपकी पूर्व होगी। इसमें जो है सबसे पहले गणेश जी के किसी भी मंत्र का आपको 108 बार पाठ कर लेना है।

 इसमें वैसे माला विशेष मायने नहीं रखता आप किसी भी माला से कर सकते हैं ऐसा कोई बंधन नहीं है। तो 108 बार गणेश जी के मंत्र का पाठ कर ले यह आपके गुरु है तो सबसे पहले तो गुरु मंत्र का 108 बार पाठ कर ले उसके बाद गणेश जी के मंत्र का 108 बार पाठ कर ले उसका शिव मंत्र का 108 बार पाठ कर ले शिव के किसी भी मंत्र का। 

उसके बाद श्री माता का जो मंत्र मैंने दिया है ॐ श्रीं त्रिपुर सुंदरी नमो नमः त्रिपुर सुंदरी माता का जो मंत्र दिया है मैंने उसे मंत्र का आपको 11 माला पाठ करना है। 

समय क्या रहेगा समय आपका यह सुबह का समय भी हो सकता है सुबह 9:00 से लेकर शाम 5:00 बजे के बीच में या फिर शाम 6:00 बजे से लेकर मतलब संध्या से लेकर के रात 9:00 बजे के बीच में यह साधना सुबह या शाम के समय आप कर सकते हैं इस समय के अंदर का वो करनी है।

 

त्रिपुर सुंदरी साधना की अवधि और समापन

 

 11 माला त्रिपुर सुंदरी माता का जो मंत्र दिया उसे 11 माला आपको पाठ करना है। अगर आपको जैसे थोड़ी बहुत समस्या है मतलब थोड़ी बहुत बीमारी मतलब थोड़ी बहुत अगर समस्याएं हैं आपको तो आप मात्रा तीन दिन साधना करेंगे मात्रा तीन दिन की अप्रत्यक्ष साधना होगी यह आप करेंगे। 

उसके पक्ष सारी सामग्री भोग इत्यादि जो चढ़ता है वह एक साधना हो जाने की पक्ष एक घंटे बाद उसको स्वयं ग्रहण कर लेना है ठीक है। और इसके अलावा जो सामग्री बचती है 3 दिन की साधना में तो उसे सामग्री को आपको बहते हुए जल में विसर्जित कर देना है किसी भी जल में नदी तालाब तो कर इत्यादि में मतलब बहते हुए जल में भी शरीर कर देना है।

 जिसको कम समस्या है उसके लिए और उसको बहुत ज्यादा समस्या है बहुत ज्यादा रोग है बहुत ज्यादा समस्या है उसको यह साधना कम से कम 9 दिन तो करनी चाहिए। 

9 दिन करने से हर प्रकार की बड़ी से बड़ी बीमारी भी अगर होगी समस्याएं होगी तो वो समस्या दूर हो जाएगी और ये यौवनता की भी प्राप्ति होगी साथ में दोनों चीज होगी। तो उसके बाद फिर इन सब चीजों को अब विसर्जित कर दीजिए 9 दिनों के बाद साधना होने के बाद।

tara sadhana – swarna tara sadhana स्वर्ण तारा साधना से रोज 2 तोले सोना प्रपात होगा tara sadhana

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गुरु मंत्र साधना में आप सबका फिर से स्वागत है। मैंने अभी तक तंत्र के ऊपर बहुत सारे पोस्ट लिखे हैं। आपका बहुत सारा स्नेह प्राप्त हुआ, इस चीज़ के लिए मैं दिल से आभार प्रकट करता हूँ। ठीक है, आज आप लोगों के लिए मैं ले के आया हूँ सुवर्ण तारा साधना।

जो सुवर्ण तारा साधना है, यह अपने आप में बहुत बड़ी साधना है। अगर आप इसको संपन्न कर लेते हो, तो आपको डेली दो तोला सोना प्राप्त होता है, तो यह निश्चित है। और यह चेटक साधना के अंतर्गत आने वाली साधना है। 

चेटक साधना वह होती है जिसमें कोई शक्ति आपको उपहार के तौर पर कीमती चीज़ देती है, उसको हम चेटक साधना बोलते हैं। चेटक साधना में ज़्यादातर आपको कीमती चीजें मिलती हैं। 

अगर कोई व्यक्ति सागर चेटक साधना करता है, तो उसको समुंदर के हीरे-जवाहरात प्राप्त होते हैं। और वहीं कोई स्वर्ण कुछ चीजें स्वर्ण प्रदान करती हैं। 

तो चेटक विद्या बहुत ही प्राचीन विद्या मानी गई है। इसमें एक और चेटक माना गया है, जिसको हम बोलते हैं अन्नपूर्णा चेटक। अन्नपूर्णा चेटक से क्या होता है ? एक अन्नपूर्णा माता के द्वारा एक कटोरा मिलता है, उस कटोरी के ज़रिए आपको डेली गेहूँ प्राप्त होता है। तो आप कुछ भी जो घर की सामग्री होती है, वह हासिल कर सकते हैं उस अन्नपूर्णा कटोरे के माध्यम से।

आज हम बात करने वाले हैं सुवर्ण तारा साधना के ऊपर। देखिए, जो स्वर्ण तारा साधना है, बहुत ही प्राचीन साधना है। आज से नहीं, बहुत लंबे समय से साधक करते हुए आ रहे हैं और बहुत लोगों ने इसको सिद्ध भी करा है।

 इस साधना का मक़सद यह होता है कि कोई भी अगर आप जैसे कोई भी स्वर्ण प्राप्त करते हैं, उस स्वर्ण का आपको गरीबों में दान भी करना होता है, लोगों के भले के लिए भी पैसा इस्तेमाल करना होगा। 

अगर आप लोक कल्याण के लिए उस पैसे का इस्तेमाल नहीं करते हैं, तो आपकी वह सिद्धि नष्ट हो जाएगी। दूसरी चीज़, आप अनुचित चीज़ों के ऊपर उसको खर्च मत करिए। अनुचित चीजें मतलब जैसे कि आप मान लीजिए शराब, मीट, अंडा। शराब वग़ैरह पीते हैं, लोग अय्याशी करने लगते हैं जब पैसा आता है खूब, तो उस तरीके से भी नहीं करना। 

अगर आप करोगे तो भाई पैसा आपका नष्ट होगा ही होगा, सिद्धि आपकी नष्ट होगी ही होगी। इसीलिए इन चीजों का ध्यान रखें, उन पैसों का ग़लत इस्तेमाल मत करें, अपनी अय्याशी के लिए यूज़ मत करें। 

आप उन पैसों से अच्छा कपड़ा पहन सकते हैं, अच्छा खाना खा सकते हैं, अच्छी कार ले सकते हो आप और भी जो भी अच्छी चीजें आप हासिल कर सकते हैं, पर आप उन पैसों का ग़लत इस्तेमाल ना करें। 

आप अपनी समृद्ध ज़िंदगी जी सकते हैं, इसमें कोई भी ग़लत चीज़ नहीं है, पर पैसों का अनुचित प्रयोग करने पर यह चीजें खत्म हो जाती हैं।

अगर कोई व्यक्ति इस शक्ति का अच्छे से प्रयोग करता है, मतलब लोक कल्याण के लिए इस्तेमाल करता है, तो उसका यह होता है, जैसे उसको दो तोले डेली सोना मिलता है ना, तो माँ उसको खुश होकर छह तोले कर देगी, बढ़ाती जाएगी। 

अगर पैसा आप सही जगह लगाते हो, ग़लत जगह लगाओगे तो भाई पैसा बढ़ने की बजाय कम ही होगा। जो आपने घर-मकान उस पैसे से खरीदा है ना, वह भी नष्ट हो जाएगा। 

यह मत समझना कि मैंने घर बना लिया, यह कर लिया, गाड़ी ले ली, ठीक है, अब मैं जो कुछ मर्ज़ी करूँ। जो भी पुराना तुम्हारा होगा, वह सारा कुछ ले लिया जाएगा। इसीलिए क्या है भाई, पैसे का सही इस्तेमाल करना।

अब बहुत सारे लोग यह बोलेंगे कि अब यह स्वर्ण तारा जो साधना है, ऐसे तो सब लोग करके सभी अमीर बन जाएँ। सब लोग करके सब अमीर बन सकते हैं, पर क्या है कि लोग करते नहीं हैं। साधना एक बहुत बड़ा चैलेंज होता है, हर व्यक्ति उस चैलेंज को पूरा नहीं कर सकता है। 

जैसे एक आईपीएस का एग्ज़ाम होता है, तो लाखों लोग एग्ज़ाम देते हैं, कुछ लोग ही उनमें से सफल होते हैं। जैसे डॉक्टर के लिए नीट का एग्ज़ाम होता है, उसमें भी लाखों-करोड़ों लोग अप्लाई करते हैं और कुछ चंद लोग ही उस सीट को हासिल कर पाते हैं। तो उसमें भी ऐसा ही है। 

तो हर व्यक्ति साधना को सिद्ध नहीं कर सकता। उसका कारण यह है, बहुत सारी परीक्षाएं होती हैं, तो उन परीक्षाओं को पार करना संभव नहीं है। मतलब असंभव बात कुछ भी नहीं है, पर आपके अंदर वह जज़्बा होना चाहिए और वह आपके अंदर वह बल होना चाहिए, तभी आप उस चीज़ को कर पाओगे। अगर वह चीज़ आपके अंदर नहीं है, तो आप साधक कैसे बन सकते हैं? 

जब आप तारा की साधना करोगे तो बड़ी-बड़ी चीजें आपको दिखाई देंगी, कुछ डरावने अनुभव भी हो सकते हैं। तो इन सब चैलेंज को पार करने के बाद ही आप इनको सिद्ध कर सकते हो। जब आप सिद्ध कर लोगे तो दो तोले रोज़ सोना मिलेगा, आपकी गरीबी, कंगाली सब खत्म।

दूसरी चीज़ यह है, अब आप बोलोगे कि इसको सिद्ध करना कोई आसान काम नहीं है। हो सकती है सिद्ध, आपके अंदर वह जज़्बा चाहिए। बहुत सारे ऐसे साधकों को मैं पर्सनली जानता हूँ जिन्होंने इनको सिद्ध करा और अपना काम कर रहे हैं। कभी भी उन चीजों का वह शो-ऑफ नहीं करते हैं, कभी भी किसी को बताते नहीं हैं, सीक्रेट तरीके से अपनी ज़िंदगी जीते हैं। 

तो आपको भी अगर सिद्ध हो जाए तो आपको भी लोगों को दिखावा वग़ैरह नहीं करना, अपनी गुप्त तरीके से ज़िंदगी जीनी है। कुछ ऐसे संत-महात्मा भी हैं जो लोग डेली भंडारा लगाते हैं, गरीबों को खाना खिलाते हैं और भी बहुत सारे धार्मिक कार्य करते हैं। तो उनको जो भी पैसा प्राप्त हो रहा है, तो यह उसी साधना की बदौलत ही हो पा रहा है।

दूसरे नंबर के ऊपर, एक बहुत बड़े संत थे, आप सब लोग शायद जानते ही होंगे, उनके मरने के बाद जहाँ उनका आश्रम था, उसके नीचे कई टन सोना निकला। कई टन, मतलब उस सोने को गिनने के लिए भी अधिकारियों को छह से सात दिन लग गए थे, इतना ज़्यादा सोना। तो उनके पास वह सोना कैसे आया? उनके पास जो सोना आया था, यह स्वर्ण तारा साधना के माध्यम से आया था। यह चीजें कोई बताता नहीं है। 

बहुत सारे लोगों को ऐसे ही सोने की चेन दे देते थे, हवा में हाथ हिला के सोने की चेन प्रकट हो जाती थी, वह दे देते थे। तो ऐसे बहुत सारे साधक हैं जो गुप्त तरीके से इस सुवर्ण तारा को सिद्ध करके बैठे हैं और बहुत सारे लोक कल्याण के काम करते हैं। जितना ज़्यादा लोक कल्याण के कार्य करेंगे, भंडारे लगाएंगे, गरीबों की मदद करोगे, उतना ही ज़्यादा साधना आपकी बढ़ती जाएगी।

यह साधना बेसिकली उन लोगों के लिए है जो साधक गरीबों का भला करना चाहते हैं, लोक कल्याण की भावना रखते हैं। तो उन लोगों के लिए, ऐसी भावना रख के जो हैं, उन लोगों के लिए यह साधना है। अपनी समृद्धि से भरी ज़िंदगी जी सकते हैं और साथ में लोक कल्याण भी कर सकते हैं। 

तो हर कोई इस साधना को सिद्ध नहीं कर सकता, हर किसी के बस की बात नहीं है। करने को कर सकता है, पर आपके अंदर वह बल होना चाहिए, आपके अंदर वह जज़्बा होना चाहिए, आपके अंदर वह साधना करने की कैपेसिटी होनी चाहिए, रात-रात भर जागने की कैपेसिटी होनी चाहिए आपके अंदर, वही साधना को कर सकता है। कोई भी साधना ऐसी नहीं है कि आपको ऐसी ही सिद्ध हो जाएगी।

 रात-रात भर जागना पड़ता है, नींद को हराम करना पड़ता है, तब जाकर चीजें हासिल होती हैं। जब हासिल होती हैं, तो बहुत ज़्यादा मज़ा आता है साधक को। साधक की ज़िंदगी एक स्वर्ग में ही हो जाती है।

जैसे मैं साधकों को कुछ जानता हूँ जिनके पास यह सिद्धि थी, जब उनका पैसा आया तो उनका दिमाग खराब हो गया। उनका दिमाग खराब हो गया मतलब उस पैसे का ग़लत इस्तेमाल करने लगे। उसके बाद क्या हुआ? उनका पतन भी हो गया, मतलब कुछ भी नहीं बचा। 

जो भी साधना से मकान, घर, गाड़ी, सारा कुछ खत्म। जो भी आप इस साधना से ग़लत प्रयोग करोगे तो भाई सब खत्म होगा। रावण की सोने की लंका नहीं रही तो आपकी लंका कैसे रहेगी भाई?

एक साधक, अभी थोड़े दिन पहले ना, एक साधक गुरु भाई हैं, तो उनसे मेरी बात होती रहती है, तो वह बता रहे थे एक गुरु भाई है, उसको स्वर्ण सिद्धि प्राप्त हुई है। उसके बाद वह साधक अब की डेट में दुबई भाग गया है, दुबई चला गया है अपने सोने को बेचने के लिए। भाई, वह आलीशान ज़िंदगी वहाँ जीता है। 

यहाँ पर वह इंडिया में एक ट्रस्ट भी चला रहा है, तो वह पैसा ऑनलाइन ट्रांसफर करता रहता है ट्रस्ट के लिए। तो अगर आप भी अपनी गरीबी, कंगाली को खत्म करना चाहते हैं तो आप यह साधना ज़रूर करें। 

आपको यह साधना ज़रूर सिद्ध होगी अगर आपके अंदर जज़्बा है, आपकी भावना शुद्ध है। अगर बंदे की भावना सही नहीं है, तो उसको कुछ भी प्राप्त नहीं होता है। अगर बंदे की भावना सही है, तो कुछ भी हासिल कर लेगा।

आज के लिए बस इतना ही। जय श्री महाकाल। अगर आप भी यह साधना सीखना चाहते हैं, जानना चाहते हैं, तो इसके लिए मैं आपको अपना फ़ोन नंबर दे रहा हूँ स्क्रीन के ऊपर, तो आप संपर्क कर सकते हैं। जय श्री महाकाल।

बगलामुखी माता की कहानी – उत्पत्ति, महत्व और पौराणिक कथा devi baglamukhi ki kahani

devi baglamukhi ki kahani बगलामुखी माता की कहानी - उत्पत्ति, महत्व और पौराणिक कथा

devi baglamukhi ki kahani बगलामुखी माता की कहानी – उत्पत्ति, महत्व और पौराणिक कथा

devi baglamukhi ki kahani बगलामुखी माता की कहानी - उत्पत्ति, महत्व और पौराणिक कथा
devi baglamukhi ki kahani बगलामुखी माता की कहानी – उत्पत्ति, महत्व और पौराणिक कथा

बगलामुखी माता की कहानी – उत्पत्ति, महत्व और पौराणिक कथा devi baglamukhi ki kahani दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या माँ बगलामुखी को स्तंभन की देवी कहा जाता है। वे अपने भक्तों के शत्रुओं, बुरी शक्तियों और संकटों को स्तब्ध (पंगु) कर देती हैं। उनका वर्ण स्वर्ण के समान पीला है, वे पीले वस्त्र धारण करती हैं और उन्हें पीली वस्तुएं अत्यंत प्रिय हैं, इसीलिए उन्हें ‘पीताम्बरा’ भी कहा जाता है। उनकी पूजा मुख्य रूप से शत्रुओं पर विजय, मुकदमों में सफलता और सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा के लिए की जाती है।

माँ बगलामुखी की उत्पत्ति से जुड़ी पौराणिक कथा अत्यंत रोचक है, जो उनके प्रकट होने के उद्देश्य को स्पष्ट करती है।

1  बगलामुखी माता की कहानी – devi baglamukhi ki kahani पौराणिक उत्पत्ति कथा

 

यह कथा सत्ययुग काल की है। एक समय ब्रह्मांड में एक विनाशकारी तूफान उठा। यह तूफान इतना शक्तिशाली था कि ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो यह संपूर्ण सृष्टि को निगल जाएगा। इस विनाशकारी दृश्य को देखकर सभी देवता चिंतित हो गए और सृष्टि के रक्षक भगवान विष्णु के पास सहायता के लिए पहुँचे।

भगवान विष्णु ने देवताओं को आश्वासन दिया और इस संकट का समाधान खोजने के लिए सौराष्ट्र प्रदेश (वर्तमान गुजरात) के हरिद्रा सरोवर के किनारे पहुँचे। वहाँ उन्होंने सृष्टि के कल्याण के लिए कठोर तपस्या आरंभ की। वे माँ भगवती त्रिपुरसुंदरी को प्रसन्न करने के लिए तप कर रहे थे।

भगवान विष्णु की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर, उस हरिद्रा सरोवर से एक दिव्य तेजपुंज प्रकट हुआ। उस तेजपुंज में से मंगलवार के दिन, चतुर्दशी तिथि को, अर्द्धरात्रि के समय एक देवी का प्राकट्य हुआ। वे देवी स्वर्ण के समान कांति वाली थीं, पीले वस्त्रों से सुशोभित थीं और उनका स्वरूप अत्यंत दिव्य था। प्रकट होते ही उस देवी ने अपनी स्तंभन शक्ति से उस महाविनाशकारी तूफान को तुरंत शांत कर दिया।

सृष्टि को संकट से उबारने वाली यही देवी माँ बगलामुखी कहलाईं। ‘बगला’ शब्द संस्कृत के ‘वल्गा’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ है ‘लगाम’। ‘मुखी’ का अर्थ है ‘मुख वाली’। इस प्रकार, बगलामुखी का अर्थ है ‘वह देवी जिनके मुख में किसी भी गति को नियंत्रित करने या रोकने की शक्ति है’। उन्होंने अपनी शक्ति से तूफान की गति पर लगाम लगा दी थी। भगवान विष्णु और समस्त देवताओं ने उनकी स्तुति की और तभी से वे सृष्टि में ‘बगलामुखी’ के नाम से पूजी जाने लगीं।

 

2 बगलामुखी माता की कहानी  | Devi baglamukhi ki kahani  |  एक अन्य कथा: मदन नामक असुर का वध

 

एक और प्रचलित कथा के अनुसार, सतयुग में मदन नामक एक शक्तिशाली असुर था। उसे वाक्-सिद्धि का वरदान प्राप्त था, अर्थात वह जो कुछ भी कह देता था, वह सत्य हो जाता था। अपनी इस शक्ति का दुरुपयोग कर वह निर्दोष प्राणियों और देवताओं को कष्ट पहुँचाने लगा। वह अपनी वाणी से ही लोगों का संहार कर देता था।

उसके अत्याचारों से त्रस्त होकर सभी देवता माँ भगवती की शरण में गए। देवताओं की प्रार्थना सुनकर माँ बगलामुखी प्रकट हुईं। उन्होंने उस असुर मदन को युद्ध के लिए ललकारा। जब असुर ने देवी को नष्ट करने के लिए अपनी वाक्-सिद्धि का प्रयोग करना चाहा, तो माँ बगलामुखी ने तुरंत उसकी जीभ पकड़कर खींच ली, जिससे उसकी बोलने की शक्ति स्तब्ध हो गई। 

वाणी की शक्ति के बिना वह पंगु हो गया और देवी ने उसका वध कर दिया। यही कारण है कि माँ बगलामुखी की कई मूर्तियों और चित्रों में उन्हें असुर की जीभ खींचते हुए दर्शाया जाता है, जो वाणी को स्तंभित करने की उनकी शक्ति का प्रतीक है।

 

पूजा का महत्व

 

माँ बगलामुखी की उपासना करने वाले साधक को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • शत्रु नाश: माँ अपने भक्त के शत्रुओं की बुद्धि, गति और वाणी को स्तंभित कर देती हैं, जिससे वे कोई हानि नहीं पहुँचा पाते।
  • मुकदमों में विजय: अदालती मामलों और कानूनी विवादों में विजय के लिए उनकी पूजा अचूक मानी जाती है।
  • वाक्-सिद्धि: माँ की कृपा से साधक को वाणी की सिद्धि प्राप्त होती है, जिससे उसकी बातें प्रभावशाली और सत्य साबित होती हैं।
  • नकारात्मक शक्तियों से रक्षा: तंत्र-मंत्र, बुरी नजर और अन्य सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाओं से माँ अपने भक्त की रक्षा करती हैं।

माँ बगलामुखी की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है। भक्त पीले वस्त्र पहनकर, पीले आसन पर बैठकर, हल्दी की माला से उनके मंत्रों का जाप करते हैं और उन्हें पीली वस्तुएं जैसे पीले फूल, चने की दाल का प्रसाद और पीली मिठाई अर्पित करते हैं।

संक्षेप में, माँ बगलामुखी भक्तों को अभय प्रदान करने वाली और दुष्टों का दमन करने वाली एक अत्यंत शक्तिशाली देवी हैं। वे आज भी अपने भक्तों की हर संकट से रक्षा करती हैं।

जय माँ बगलामुखी!

बगलामुखी मंत्र के नुकसान और लाभ baglamukhi mantra ke nuksan ph.85280 57364

बगलामुखी मंत्र के नुकसान और लाभ baglamukhi mantra ke nuksan

बगलामुखी मंत्र के नुकसान और लाभ baglamukhi mantra ke nuksan

 

बगलामुखी मंत्र के नुकसान और लाभ baglamukhi mantra ke nuksan
बगलामुखी मंत्र के नुकसान और लाभ baglamukhi mantra ke nuksan

बगलामुखी मंत्र के नुकसान और लाभ baglamukhi mantra ke nuksan सभी भक्तों को जय माई की, जय श्री महाकाल माता श्री बगलामुखी पीतांबरा के मंत्र के नुकसान, बगलामुखी माता का मंत्र जप यदि आप करते हैं। 

 तो इसके नुकसान क्या हो सकते हैं आपके जीवन में और बगलामुखी मंत्र जपने के फायदे क्या होंगे, संपूर्ण जानकारी आपको मेरे द्वारा इस post के माध्यम से प्राप्त होगी। 

मां बगलामुखी मंत्र का जाप करने से नुकसान नहीं होता बल्कि इससे कई प्रकार के फायदे साधक के जीवन में होते हैं। 

हालांकि अगर आप मां बगलामुखी मंत्र को अनुचित तरीके से मंत्र जाप आप करते हैं या फिर बिना दीक्षा के आप बगलामुखी मंत्र जप यदि करते हैं, जिन लोगों के पास मां बगलामुखी मंत्र की दीक्षा नहीं है और बिना दीक्षा के, बिना विधान जाने, बिना विधि-विधान पता किए, बिना गुरु के मार्गदर्शन में, बिना गुरु आज्ञा यदि आप श्री बगलामुखी पीतांबरा का मंत्र जप यदि करते हैं तो इससे नुकसान भी आपका हो सकता है। 

और ऐसा नुकसान आपके जीवन में हो जाएगा जिसकी आप तमाम जीवन भरपाई नहीं कर पाएंगे।

तो मां बगलामुखी पीतांबरा के इस  वेबसाइट के माध्यम से मैं  में आप सभी भक्तों का हार्दिक स्वागत करता हूं, हार्दिक अभिनंदन करता हूं। मैं आशा करता हूं कि आप सभी स्वस्थ होंगे, मस्त होंगे। माता श्री बगलामुखी पीतांबरा की कृपा आप सभी भक्तों के जीवन में सदा-सदैव के लिए बनी रहे।

अभी सबसे पहले मैं आपको बगलामुखी मंत्र के नुकसान के विषय में जानकारी दूंगा। यदि आप मां बगलामुखी का मंत्र जपते हैं तो क्या नुकसान आपके जीवन में हो सकते हैं और किस प्रकार से आपको सावधानी अपने जीवन में बरतनी चाहिए यदि आप बगलामुखी मंत्र जप रहे हैं।

अगर आप बिना दीक्षा लिए बगलामुखी मंत्र का जाप करते हैं, मां बगलामुखी के वैदिक मंत्र का जाप यदि आप बिना दीक्षा लिए, बिना गुरु उपदेश के, बिना गुरु के निरीक्षण में, बिना गुरु आज्ञा के यदि आप इस मंत्र का जप करते हैं, अगर आपके पास दीक्षा नहीं है और आप भगवती का मंत्र जप रहे हैं तो मंत्र जाप किए जाएं तो मृत्यु, बीमारी, दुर्घटना और दुर्भाग्य, यह सब चीजें आपके साथ में हो सकती हैं यदि आप अज्ञानतावश इसको जप रहे हैं। 

एक बार आपके जीवन में पॉजिटिव प्रभाव आपको अवश्य नजर आएगा परंतु कहीं ना कहीं जैसे ही कुछ समय बाद आपके जीवन में उसका नकारात्मक प्रभाव आपको अवश्य देखने को मिलेगा। बहुत सारे जो सोशल मीडिया साइट हैं, हमसे बहुत सारे ऐसे लोग जुड़े जो लोग बताते हैं कि हमने उनसे पूछा, उन्होंने कहा कि मंत्र जप लो, बगलामुखी मंत्र जप लो, बगलामुखी मंत्र जप लो, बगलामुखी की साधना कर लो। भैया इसको खेल ना बनाओ।

सबसे पहले मैं आपको बता देना चाहता हूं कि शास्त्रानुचित यदि आप करेंगे तो उसका भुगतान आपको अवश्य ही करना पड़ेगा। इसलिए शास्त्र उचित कर्म करें। तो शास्त्र में कहा है कि बगलामुखी मंत्र या 10 महाविद्याओं में किसी भी एक महाविद्या की जो साधना है वो बिना गुरु दीक्षा के नहीं करनी। 

नहीं तो इसके दुष्प्रभाव के कारण, इसके नकारात्मक प्रभाव के कारण साधक की मृत्यु हो सकती है, असाध्य बीमारी आपको घेर सकती है, दुर्घटना आदि आपके साथ हो सकती है या फिर दुर्भाग्य भी आपका साथ घर कर सकता है। ऐसी दिक्कत आपके जीवन में हो सकती है।

अगर अनुचित तरीके से कोई भी साधक या कोई भी व्यक्ति बगलामुखी मंत्र का जाप करता है तो कुल और वंश, संपूर्ण कुल, समझ लीजिए इन बातों को, संपूर्ण कुल और पूरा का पूरा वंश इससे नष्ट हो सकता है।

अगर तीसरे नंबर पर बात करें तो अगर बगलामुखी माता का जो मंत्र है उसको अनुचित तरीके से यदि कोई जपता है तो व्यक्ति की मृत्यु के बाद भयानक ब्रह्मराक्षस के रूप में भी आपको भटकना पड़ सकता है। 

इसलिए किसी भी अन्य व्यक्ति के बहकावे में ना आकर आप यदि माता श्री बगलामुखी पीतांबरा का मंत्र जप करना चाहते हैं तो भैया दीक्षा उपरांत ही आप इसका जप करें। 

नहीं तो पूरा जो मृत्यु के बाद में भी आपको प्रेत योनि में ब्रह्मराक्षस के रूप में भटकना पड़ेगा और इसके दुष्प्रभाव आपके परिवार में, आपके कुल की वृद्धि को, आपके वंश की वृद्धि को या फिर उन सभी बातों को जो आप डिजर्व करते हैं उनको बाधित अवश्य करेंगे।

अब बगलामुखी मंत्र जो लोग दीक्षा प्राप्त हैं और बगलामुखी मंत्र जप कर रहे हैं, बगलामुखी मंत्र की जो साधना कर रहे हैं, 

 माता बगलामुखी मंत्र के फायदे क्या होंगे ?

बगलामुखी मंत्र जाप करने से दुश्मनों से रक्षा होती है, वाद-विवाद आदि से मुक्ति मिल जाती है। जिन लोगों का कोर्ट-कचहरी में मुकदमा चल रहा है, मुकदमे आदि से आपको मुक्ति मिल जाती है। और पूर्ण रूप से बगलामुखी माता का जो मंत्र है वो वित्तीय संकट, आर्थिक संकट से भी मुक्ति दिलाता है और जन्म-जन्मांतर की जो दरिद्रता है उसका समूल नाश कर देता है।

बगलामुखी मंत्र जाप करने से बुरी नजर, नकारात्मक ऊर्जा, तंत्र, अभिचार आदि क्रियाओं का प्रभाव, जादू-टोना या फिर कोई मारण आदि क्रिया यदि आपके घर परिवार पर यदि किसी अन्य व्यक्ति पर हुई है तो उसको पूर्ण रूप से यह खत्म कर देता है और नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को शांत करके, नष्ट करके सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह साधक के जीवन में, घर में अत्यधिक हो जाता है।

बगलामुखी मंत्र का जाप करने से झगड़ों और प्रतियोगी परीक्षा यदि आपकी है, कोई एंट्रेंस टेस्ट में आप सफलता प्राप्त करना चाहते हैं, किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी आप कर रहे हैं या फिर परीक्षा कोई आपने दी हुई है, तो माता श्री बगलामुखी की शरण में आप चले जाइए। 

मंत्र दीक्षा लेने के उपरांत बगलामुखी के मंत्र का जाप आप प्रारंभ करें। माता श्री की कृपा से आपके जीवन में धन-धान्य की वृद्धि होगी और बगलामुखी कृपा से आपके मनोरथ भी पूर्ण होगी। जय मां बगलामुखी। जय श्री महाकाल।

बगलामुखी हवन के फायदे – शत्रु नाश और सफलता प्राप्ति के उपाय ph.85280 57364

बगलामुखी हवन के फायदे (baglamukhi havan ke labh )- शत्रु नाश और सफलता प्राप्ति के उपाय

बगलामुखी हवन के फायदे (baglamukhi havan ke labh )- शत्रु नाश और सफलता प्राप्ति के उपाय

बगलामुखी हवन के फायदे - शत्रु नाश और सफलता प्राप्ति के उपाय
बगलामुखी हवन के फायदे – शत्रु नाश और सफलता प्राप्ति के उपाय
बगलामुखी हवन के फायदे – शत्रु नाश और सफलता प्राप्ति के उपाय जय माई की! माँ बगलामुखी का हवन करवाने से भक्तों को अनेक प्रकार के लाभ मिलते हैं। यह हवन यज्ञ जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करता है और शत्रुओं पर विजय दिलाता है। आज के युग में माँ पीतांबरा की साधना सभी दुखों का नाश कर सुख-समृद्धि प्रदान करती है।

माँ बगलामुखी का हवन करने से क्या लाभ मिलता है, क्यों बगलामुखी माता का हवन यज्ञ किया जाता है?

बगलामुखी हवन के फायदे - शत्रु नाश और सफलता प्राप्ति के उपाय
बगलामुखी हवन के फायदे – शत्रु नाश और सफलता प्राप्ति के उपाय

 आप सभी भक्तों को पता होगा बगलामुखी मंदिर में व बगलामुखी हवन यज्ञ करने का विशेष महत्व शास्त्र में बताया जाता है और आज के इस कलिकाल में यदि किसी व्यक्ति के जीवन में कोई दिक्कत समस्या यदि आती है, उस व्यक्ति को बोला जाता है, बहुत सारे साधक या फिर ब्राह्मण भी आज के समय में बगलामुखी हवन कराने को लेकर के बात करते हैं या फिर बोल देते हैं कि आप बगलामुखी माता का हवन करा लीजिए, इससे आपको लाभ मिलेगा। 

तो आज मैं आचार्य प्रदीप भारद्वाज माँ बगलामुखी पीतांबरा के इस यूट्यूब चैनल के माध्यम से बगलामुखी हवन के फायदे के विषय में आपको जानकारी दूँगा।

  यदि कोई भक्त माँ बगलामुखी हवन यज्ञ, बगलामुखी अनुष्ठान यदि हमारे संस्थान के द्वारा कराना चाहता है या फिर बगलामुखी मंदिर में हमारे द्वारा यदि बगलामुखी यज्ञ कराना चाहता है, तो हमारे संस्थान का जो व्हाट्सएप नंबर है 8528057364, इस नंबर पर संपर्क करके अपनी अपॉइंटमेंट बुक करके अपना हवन बुक करा सकता है।

तो माँ बगलामुखी का हवन करने से से कई प्रकार के फायदे होते हैं। तो कई प्रकार के फायदे कौन-कौन से होते हैं? अब इस विषय पर बात कर लेते हैं।  

1 बगलामुखी हवन के फायदे  कर्ज की स्थिति निज़ात 

बगलामुखी हवन के फायदे - शत्रु नाश और सफलता प्राप्ति के उपाय
बगलामुखी हवन के फायदे – शत्रु नाश और सफलता प्राप्ति के उपाय

जिन लोगों के जीवन में पैसे की तंगी है या फिर कर्ज की स्थिति जिन लोगों के जीवन में निरंतर बनी हुई है, तो ऐसे लोगों को बगलामुखी माता का हवन कराने से श्री की प्राप्ति होती है। तो बगलामुखी के हवन कराने से दरिद्रता दूर होती है।

2 बगलामुखी हवन के फायदे   धन, इतना पैसा, आर्थिक स्थिति पूर्ण रूप से इतनी मजबूत हो 

और श्री होती हैं नारायण के साथ में। नारायण और लक्ष्मी जी जिस घर में वास करते हैं, उस घर में इतना धन, इतना पैसा, आर्थिक स्थिति पूर्ण रूप से इतनी मजबूत हो जाती है कि जन्म जन्मांतर तक पुत्र और पौत्र चिर काल तक कई जन्मों तक जिसका भोग कर सकें, ऐसी लक्ष्मी उस घर में निवास करती है। 

क्योंकि माता बगलामुखी श्री कुल की देवी हैं, इसलिए दरिद्रता दहन के लिए भी माता श्री बगलामुखी का प्रयोग और हवन किया जाता है, ना कि केवल शत्रु बाधा से मुक्ति पाने के लिए।

3 बगलामुखी हवन के फायदे  –  कारागार से भी मुक्ति मिल 

अब दूसरे नंबर पर बात करूँ, यदि आपका कोई व्यक्ति कोई कारागार में फंसा हुआ है, कोई जेल के अंदर है और उसकी जमानत आदि नहीं हो रही या फिर कोर्ट केस चल रहा है, मुकदमा आदि निरंतर चल रहा है, तो जेल से यदि निकालना चाहते हैं तो बगलामुखी हवन इसमें विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होता है। तो बगलामुखी हवन करने से कारागार से भी मुक्ति मिल जाती है। तीसरे नंबर पर शत्रुओं का नाश करने के लिए बगलामुखी हवन की प्रयोग विधि शास्त्रों में विशेष रूप से बताई जाती है।

4 बगलामुखी हवन के फायदे   शत्रुओं पर विजय प्राप्ति के लिए

बगलामुखी माता 10 महाविद्याओं में अष्टम महाविद्या हैं और शत्रु संहारिणी माता को कहा जाता है। तो शत्रुओं पर विजय प्राप्ति के लिए या शत्रु के बुरे प्रभाव से मुक्ति पाने के लिए भी बगलामुखी हवन किया जाता है। 

5 बगलामुखी हवन के फायदे   वाक् सिद्धि प्राप्त होती है

बगलामुखी हवन करने से साधक को वाक् सिद्धि प्राप्त होती है, वाणी में सत्यता आती है। यदि आप अपना पक्ष या बात किसी अन्य व्यक्ति के समक्ष यदि आप रखते हैं, तो आपकी बातों से व्यक्ति प्रभावित होता है और आपकी वाणी में स्थिरता भी ये हवन यज्ञ के द्वारा आती है।

6  बगलामुखी हवन के फायदे  वाद-विवाद में जीत प्राप्त कर 

अब इस अगले नंबर पर यदि बात करें, तो बगलामुखी माता का हवन करने से वाद-विवाद यदि आपका कहीं चल रहा था, कोर्ट केस या फिर किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा कोई झगड़ा आपका हो गया जिसका समाधान या सोल्यूशन या फिर समझौता यदि नहीं हो पा रहा, तो बगलामुखी हवन आपके लिए श्रेष्ठ कार्य सिद्ध होगा।आप इस हवन के द्वारा अपने वाद-विवाद में जीत प्राप्त कर सकते हैं।

7 बगलामुखी हवन के फायदे संतानहीनता

 अब बगलामुखी हवन करने से जो लोग संतान हैं, संतानहीनता जिन लोगों के जीवन में घर कर गई है, काफी प्रयास और गृह दोष की पूजा आदि कराने के बाद में भी जिन लोगों को संतान की प्राप्ति नहीं हुई, तो ऐसे लोगों को विशेष रूप से माता श्री बगलामुखी पीतांबरा का हवन कराना चाहिए।

 बगलामुखी के हवन कराने से संतान प्राप्ति होती है और अनेकों प्रकार के सुख साधनों के द्वारा घर जो है सुव्यवस्थित हो जाता है।

8 बगलामुखी हवन के फायदे  बगलामुखी हवन कराने से उच्चाटन और वशीकरण 

बगलामुखी हवन कराने से उच्चाटन और वशीकरण भी होता है। यदि आपको कोई शत्रु अकारण परेशान कर रहा है, देखिए इस प्रयोग को अपने निज स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए कदापि ना करें। बगलामुखी हवन आप तभी करें जब अकारण ही कोई व्यक्ति आपको परेशान करता हो, आपसे शत्रुता रखता हो, तो उच्चाटन के लिए और वशीकरण के लिए आप माँ बगलामुखी का हवन करा सकते हैं। 

9 बगलामुखी हवन के फायदे  घर में कोई व्यक्ति असाध्य रोगों से ग्रस्त है

यदि आपके घर में कोई व्यक्ति असाध्य रोगों से ग्रस्त है, अनेकों प्रकार की बीमारी उसके शरीर में है या फिर बीमारी का पता नहीं चल पाता, निरंतर दवाई आदि चलती है, फिर हॉस्पिटल के चक्कर लगा-लगाकर यदि आप थक चुके हैं, तो बगलामुखी हवन आपके लिए ब्रह्मास्त्र का काम करेगा। 

10 बगलामुखी हवन के फायदे  रोगों से मुक्ति दिला सकते

आप माता श्री बगलामुखी पीतांबरा का हवन कराकर अपने घर को रोगों से मुक्ति दिला सकते हैं या फिर रोगी को स्वस्थ करने के लिए भी हवन का प्रयोग किया जाता है। माँ बगलामुखी का हवन करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और माता श्री बगलामुखी पीतांबरा का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

जानकारी अच्छी लगी हो तो यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें और जो भी भक्तजन माँ बगलामुखी का हवन कराना चाहते हैं, वो हमारे संस्थान के द्वारा दिए हुए नंबर 85280 57364, इस नंबर पर संपर्क करके माता श्री बगलामुखी पीतांबरा का हवन बुक कर सकते हैं। जानकारी अच्छी लगी हो तो.

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बगलामुखी साधना के नियम baglamukhi sadhna ke niyam

बगलामुखी साधना के नियम baglamukhi sadhna ke niyam सभी भक्तों को जय माई की। मां बगलामुखी की साधना के लिए नियम क्या होंगे? मैं , माता श्री बगलामुखी पीतांबरा के इस  website  के माध्यम से आप सभी भक्तों का हार्दिक स्वागत करता हूं, हार्दिक अभिनंदन करता हूं। मैं आशा करता हूं कि आप सभी स्वस्थ होंगे, मस्त होंगे। माता श्री बगलामुखी पीतांबरा की कृपा आप सभी भक्तों के ऊपर बनी रहे, ऐसी मैं भगवती बगलामुखी से कामना करता हूं

मैं आज इस एपिसोड के माध्यम से मां बगलामुखी की साधना के लिए क्या नियम आप अपने जीवन में अपनाएं, क्या सावधानी आपको अपने जीवन में रखनी होगी और कैसे आप गृहस्थ में रहकर के माता श्री बगलामुखी की साधना के किन नियमों का पालन कर सकते हैं। 

तो साधना के दिन आपको प्रातः काल सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके पीले वस्त्र पहनने चाहिए। उसके बाद पूजा के दौरान आपको पूर्व दिशा में मुंह आपको रखना होगा। 

पूर्व दिशा में आप मुंह रखें। माता श्री बगलामुखी की पूजा में पीले रंग का प्रयोग आप करें। जितनी भी सामग्री आप माता बगलामुखी को अर्पित करें, वह पीले रंग की होनी चाहिए, चाहे वस्त्र हैं, चाहे चावल हैं, फूल हैं, ठीक है, मिठाई है, जो-जो भी है, वह सब अधिकतर आप पीले रंग का ही भगवती को आप अर्पित करें। 

चंदन आदि जो है, पीले रंग का होना चाहिए और जिस भोजन को आप ग्रहण करते हैं, वह भोजन भी पीले रंग का ही होना चाहिए क्योंकि भगवती बगलामुखी को पीतांबरा नाम से जाना जाता है। माता बगलामुखी का जो वर्ण है, वह पीत वर्ण है और बगलामुखी माता को पीली वस्तुएं अत्यधिक प्रिय हैं।

माता बगलामुखी की पूजा में जिस आसन का प्रयोग करें, वह आसन भी आपका पीले रंग का होना चाहिए। वस्त्र जो आप पूजा में पहनें, वह वस्त्र भी आप पीले रंग के ही पहनें। 

फल पीले रंग के आप रखें और पूजन के बाद दान भी आपको अवश्य करना चाहिए। जो छोटी-छोटी बालिकाएं होती हैं, नौ वर्ष से छोटी जो बच्चियां होती हैं, कंजक होती हैं, उनको आप कुछ यथाशक्ति दक्षिणा भी अवश्य दें। 

व्रत रखने वाले लोग रात में फलाहार कर सकते हैं, परंतु उसमें भी आपको पीले रंग का ही फलाहार लेना होगा। साधना के दौरान आपको ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना होगा, आचार-विचार-व्यवहार से पवित्र रहना होगा। मंत्र जाप है, वह हल्दी की माला का ही आप इसमें प्रयोग करें।

 मंत्र जाप का जो समय है, वह रात्रि 10 बजे से लेकर प्रातः काल 4 बजे तक का जो समय है, यह सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। दीपक की बाती पीले रंग में रंग कर आप इसको सुखा लें, उसके बाद में इस बाती का आप प्रयोग करें।

साधना में सर्वश्रेष्ठ जो मंत्र है माता बगलामुखी का, वह मूल मंत्र है, वह 36 अक्षर का मंत्र है। यदि दीक्षा आपके पास है तो तभी आप इस मंत्र का जप करें, अन्यथा शतनाम का पाठ करें या माता बगलामुखी की चालीसा का आप पाठ करें। 

साधना अकेले में या तो फिर एकांत में हो या फिर मंदिर में हो, हिमालय या फिर किसी सिद्ध पुरुष के आश्रम में सानिध्य में बैठकर आप साधना करें। 

साधना में बगलामुखी माता का जो पूजन में यंत्र आपको चाहिए, वह या तो फिर ताम्रपत्र का होना चाहिए और वह भी अभिमंत्रित होना अत्यधिक जरूरी है या फिर आप यंत्र निर्माण करना यदि जानते हैं तो चने की दाल से आप यंत्र माता श्री बगलामुखी का बना सकते हैं।

 मां बगलामुखी के मंत्रों का जाप करने से दुखों का नाश हो जाता है और भगवती की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। भक्तों, मेरे द्वारा दी गई जानकारी यदि आपको अच्छी लगी हो तो चैनल और इंस्टा पेज को फॉलो अवश्य कर लें। जय मां बगलामुखी, जय श्री महाकाल।

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बगलामुखी के टोटके baglamukhi ke totke ph.85280 57364 मैं आप सभी दर्शकों का वेलकम करता हूं आप ही के अपने वेबसाइट पर ।  वेबसाइट  जो है, वो बेहद खास होने जा रहा है। जी हां, देवी बगलामुखी ऐसी हैं जो हमारे शत्रु का बुद्धि विनाशय, शत्रु की बुद्धि बिगाड़ देती हैं। 

यह भी है और ऐसे में जान लेना बहुत जरूरी है, कुछ ऐसे टोटके करके हम लोग व्याधि, शत्रु का अंत कर सकते हैं। 

1 बगलामुखी के टोटके (baglamukhi ke totke) शत्रु पीड़ा का अंत तुरंत  करना चाहते हैं

तुरंत व्याधि, शत्रु पीड़ा का अंत तुरंत  करना चाहते हैं तो क्या करें? आप हल्दी की माला से महाविद्या बगलामुखी के खास मंत्र ‘ॐ ह्लीं बगलायै नमः’ का जाप करें।

 2 बगलामुखी के टोटके(baglamukhi ke totke) मुकदमों में जीत पाना चाहते हैं

अगर आप मुकदमे में फंसे हुए हैं, मुकदमों में जीत पाना चाहते हैं तो उसके लिए मौली में आठ नींबू पिरोकर महाविद्या बगलामुखी पर माला चढ़ाइए। 

3 बगलामुखी के टोटके  (baglamukhi ke totke) शत्रुओं की बाधा से पीड़ित हैं

अगर आप शत्रुओं की बाधा से पीड़ित हैं और छुटकारा पाना चाहते हैं तो उसके लिए महाविद्या बगलामुखी के निमित्त पीपल की समिधा से हवन करें।

 4 बगलामुखी के टोटके (baglamukhi ke totke) कार्यक्षेत्र की बाधाओं से घिरे हैं

अगर आप कार्यक्षेत्र की बाधाओं से घिरे हैं और दूर करना चाहते हैं उन्हें तो उसके लिए महाविद्या बगलामुखी पर पीले फूल चढ़ाइए। अगर आप संपत्ति के विवाद में घिरे हैं और जीत पाना चाहते हैं तो उसके लिए महाविद्या बगलामुखी के निमित्त पीले कनेर के फूलों से हवन करें।

5 बगलामुखी के टोटके (baglamukhi ke totke) दांपत्य कलह से मुक्ति पाना चाहते हैं

देखिए, अगर आप दांपत्य कलह से मुक्ति पाना चाहते हैं तो क्या करें? सरसों के तेल में हल्दी मिलाकर महाविद्या बगलामुखी के निमित्त दीपक करें।

6 बगलामुखी के टोटके (baglamukhi ke totke) भाग्य में वृद्धि पाना चाहते हैं

अगर आप भाग्य में वृद्धि पाना चाहते हैं, तो उसके लिए पीली कनेर, क्षमा कीजिएगा, अगर आप रोगों से मुक्ति चाहते हैं तो उसके लिए पीली सरसों सिर से वारकर महाविद्या बगलामुखी के सामने कपूर से जला दें। 

 7 बगलामुखी के टोटके  (baglamukhi ke totke) वाद-विवाद को शांत करना चाहते हैं 

आप अगर वाद-विवाद को शांत करना चाहते हैं तो उसके लिए महाविद्या बगलामुखी पर सरसों के तेल से अभिषेक करें।

 8 बगलामुखी के टोटके (baglamukhi ke totke) आप सेहत में सुधार चाहते हैं

अगर आप सेहत में सुधार चाहते हैं, तबीयत बिगड़ी हुई है आपकी, तो उसके लिए देवी बगलामुखी पर दूध में हल्दी मिलाकर अभिषेक करें। 

9 बगलामुखी के टोटके – (baglamukhi ke totke) सरकारी बाधाओं से      मुक्ति पाना चाहते हैं

अगर आप सरकारी बाधाओं से मुक्ति पाना चाहते हैं तो उसके लिए देवी बगलामुखी के निमित्त हल्दी के चूर्ण से हवन करें। 

10 बगलामुखी के टोटके (baglamukhi ke totke) आपदा से मुक्ति पाना चाहते हैं

अगर आप आपदा से मुक्ति पाना चाहते हैं तो उसके लिए महाविद्या बगलामुखी पर पीले खसखस के फूल यानी कि येलो पॉपी फ्लावर, अगर आप कोर्ट केस में जीत हासिल करना चाहते हैं तो उसके लिए महाविद्या बगलामुखी के निमित्त सेंधा नमक से हवन करें।

11 बगलामुखी के टोटके(baglamukhi ke totke) शत्रुओं पर जीत हासिल करना चाहते हैं

अगर आप शत्रुओं पर जीत हासिल करना चाहते हैं तो उसके लिए देवी बगलामुखी पर पीले चंदन से तिलक करें। 

12 बगलामुखी के टोटके (baglamukhi ke totke) दांपत्य क्लेश से पीड़ित हैं और मुक्ति पाना चाहते हैं

अगर आप दांपत्य क्लेश से पीड़ित हैं और मुक्ति पाना चाहते हैं तो उसके लिए महाविद्या बगलामुखी पर दूध-शहद के मिश्रण से अभिषेक करें। 

13 बगलामुखी के टोटके (baglamukhi ke totke) दुर्घटनाओं से दो-चार होते रहते हैं

अगर आप दुर्घटनाओं से दो-चार होते रहते हैं और छुटकारा पाना चाहते हैं तो उसके लिए आठ नींबू सिर से वारकर महाविद्या बगलामुखी पर चढ़ाकर छोड़ दें।

14 बगलामुखी के टोटके (baglamukhi ke totke) –  सुख और समृद्धि चाहते हैं 

अगर आप जीवन में सुख और समृद्धि चाहते हैं तो उसके लिए देवी बगलामुखी पर गेंदे के फूल चढ़ाइए। अगर आप आर्थिक नुकसान से बचना चाहते हैं तो उसके लिए देवी बगलामुखी पर 12 केले चढ़ाकर किसी ब्राह्मण को खिलाएं। 

 तो ऐसे ही कल आपसे फिर मुलाकात होगी। आज के लिए बस इतना ही। इजाजत दीजिए, नमस्कार।