Category: दस महाविद्या

दस महाविद्या साधना का सम्पूर्ण रहस्य और विस्तार सहित जानकारी प्रदान की जाएगी दस महा विद्या की साधना और रहस्य प्रदान किया जाएगा

Maa Baglamukhi Sadhna मां बगलामुखी की साधना: रहस्य, प्रयोग और सावधानियां

Maa Baglamukhi Sadhna मां बगलामुखी की साधना: रहस्य, प्रयोग और सावधानियां

Maa Baglamukhi Sadhna मां बगलामुखी की साधना: रहस्य, प्रयोग और सावधानियां

Maa Baglamukhi Sadhna मां बगलामुखी की साधना: रहस्य, प्रयोग और सावधानियां
Maa Baglamukhi Sadhna मां बगलामुखी की साधना: रहस्य, प्रयोग और सावधानियां

 

कौन हैं मां बगलामुखी ? स्तंभन की देवी का रहस्य

सबसे पहले आपसे जानना चाहूंगी कि मां बगलामुखी स्तंभन की देवी कहा जाता है उन्हें। इसका क्या अर्थ है? देखिए मां बगलामुखी स्तंभन की देवी उनको इसलिए कहा जाता है कि सतयुग में एक ऐसा बहुत ही भयानक तूफान आया था।

ब्रह्मा जी से एक राक्षस ने तपस्या करके ऐसी सिद्धि प्राप्त कर ली थी कि उसने एक ऐसा तूफान बवंडर टाइप का प्रकट कर दिया था। वो सारी सृष्टि को निगल रहा था। तो जब वो सारी सृष्टि को निगल रहा था तो विष्णु भगवान जो कि सृष्टि के पालनहार हैं उनको चिंता हुई कि भाई हमारी सृष्टि खत्म हो रही है।

तो उन्होंने भगवान शिव से पूछा तो भगवान शिव ने कहा इस बवंडर को शक्ति के अतिरिक्त कोई नहीं रोक सकता। फिर उन्होंने सौराष्ट्र में हरिद्रा सरोवर के किनारे 10,000 वर्ष तक तपस्या की थी। मां त्रिपुर सुंदरी की। उनकी तपस्या से मां त्रिपुर सुंदरी प्रसन्न हुई और उनके हृदय से एक ज्योति पुंज निकला जिससे मां बगलामुखी माता प्रकट हुई।

अर्धरात्रि में माता का अवतरण हुआ था। पीत वस्त्र धारण किए स्वर्ण के आभूषण और सबसे बड़ी बात यह थी कि मां बगलामुखी माता स्तंभन की देवी इसलिए भी कही जाती है क्योंकि जब वो राक्षस के सामने आई उन्होंने उस बवंडर को स्तंभन कर दिया यानी रोक दिया। इसलिए उनको स्तंभन की देवी कहा जाता है। वो बवंडर जो पूरी पृथ्वी को निगल रहा था उनके एक इशारे से उनके हाथ के हिलाने मात्र से वो वहीं का वहीं रुक गया।

बगलामुखी साधना की उग्रता और नियम

Maa Baglamukhi Sadhna मां बगलामुखी की साधना: रहस्य, प्रयोग और सावधानियां
Maa Baglamukhi Sadhna मां बगलामुखी की साधना: रहस्य, प्रयोग और सावधानियां

10 महाविद्याओं में बगलामुखी जी को सबसे उग्र कहा जाता है। इसका क्या रहस्य है? बगलामुखी माता को उग्र इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह श्मशान वासिनी हैं।

इनकी साधना बहुत तीव्र होती है। इनकी साधना बिना गुरु के कभी नहीं करनी चाहिए। और इनकी साधना से अर्थ का अनर्थ भी हो जाता है। अगर आपने गलती करी।

उच्चारण मंत्रों का बहुत महत्वपूर्ण रहता है। अगर मंत्र का उच्चारण आपने गलत कर दिया तो अर्थ का अनर्थ होने की संभावना पूरी रहती है। इसलिए कहा जाता है कि इनकी साधना बहुत तीव्र होती है।

जैसे कि आपने बताया कि श्मशान वासिनी यानी कि सिर्फ श्मशान में ही इनकी साधना होती है या फिर कोई साधक अपने घर पे या फिर अन्य किसी सुनसान जगह पर भी इनकी साधना कर सकता है। देखिए हर किसी के रहने का एक स्थान होता है।

जैसे मां बगलामुखी माता श्मशान वासिनी हैं ना। श्मशान में उनका वास है। लेकिन उनकी साधना जरूरी नहीं कि आप श्मशान में ही करें। सात्विक रूप से भी उनकी साधना की जाती है और घर में भी आप इनकी साधना कर सकते हैं।

लेकिन मैं बार-बार यही बोलूंगा कि इनकी साधना बहुत तीव्र होती है। बिना गुरु के इनकी साधना नहीं करनी चाहिए।

क्या घर में सात्विक बगलामुखी की साधना  संभव है ?

Maa Baglamukhi Sadhna मां बगलामुखी की साधना: रहस्य, प्रयोग और सावधानियां
Maa Baglamukhi Sadhna मां बगलामुखी की साधना: रहस्य, प्रयोग और सावधानियां

जी जैसा कि आपने बताया कि बहुत तीव्र और बहुत गुस्से वाली देवी जी भी माना कहा जा सकता है। तो क्या तंत्र में बगलामुखी जी की साधना वो सात्विक तरीके से भी की जाती है ? जी हां बिल्कुल तंत्र में बगलामुखी माता की साधना सात्विक रूप से भी की जा सकती है। बगला अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र माता को बहुत प्रिय है।

उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए अगर इसका कोई पाठ करता है और इसका अनुष्ठान करता है तो यह सात्विक रूप से उनकी साधना की जा सकती है। लेकिन जब हम मंत्रों में जाते हैं तो मंत्र उनके सौम्य मंत्र भी हैं, तीव्र मंत्र भी हैं और अति तीव्र मंत्र भी हैं।

तो इस प्रकार तंत्र में अगर आपको साधना करनी है तो सौम्य रूप से भी आप साधना कर सकते हैं। और यह जो सौम्य रूप वाली आप साधना बता रहे हैं क्या यह बिना गुरु के संभव है ? सौम्य रूप की साधना में गुरु की ऐसी आवश्यकता नहीं है। इसको आप कोई भी व्यक्ति घर में कर सकता है। इसके लिए आप उनकी चालीसा पढ़ सकते हैं।

उनका स्तोत्र कर सकते हैं। इसके बाद ॐ ह्रीं बगलामुखी देव्यै नमः इस मंत्र का जाप कोई भी साधक घर में कर सकता है। यानी दर्शकों आपने देखा कि बगलामुखी देवी जी के नाम से ही एक कहना चाहिए कि एक डर सभी साधकों के मन में रहता है।

जन सामान्य के मन में रहता है। तो उत्कर्ष जी ने जैसा कि बताया कि आप साधारण तरीके से भी इसका घर में प्रयोग कर सकते हैं। मां बगलामुखी को प्रसन्न कर सकते हैं।

बगलामुखी की साधना – तंत्र-मंत्र और मारण प्रयोग की सच्चाई

 

उत्कर्ष जी एक बात और जानना चाहूंगी कि बगलामुखी जी की जो साधना है वह बहुत उग्र है। तो क्या इस साधना के फल स्वरूप जो साधक हैं और जब वह सिद्धि प्राप्त कर लेते हैं तो क्या उसमें मारण जैसी क्रियाओं का भी प्रयोग किया जाता है ? अवश्य मारण प्रयोग भी इस क्रिया में होता है।

बगलामुखी साधना में कई तरह की साधनाएं होती हैं। अलग-अलग साधनाएं अलग-अलग फल प्राप्त करने के लिए की जाती हैं। जिसमें मारण भी एक है। तो ये जो मारण जैसे मान लीजिए किसी ने प्रयोग किसी पर किया।

मारण के बारे में यदि मैं बात करूं तो यह मेरा एक निजी अनुभव है। जब मैं बहुत छोटी थी मान लीजिए शायद सिक्स्थ या सेवंथ क्लास में होगी और मैं मेरठ में थी मेरे मामा जी के यहां तब तो हमें ये सब चीजें पता नहीं थीं कि ऐसा कुछ होता है।

तो हम लोग ऐसे आसमान में देख रहे थे मामा जी के बच्चे थे और मैं तो वहां हमको कुछ आसमान में चलता हुआ दिखा एक हांडी टाइप की और ऐसे खुले आसमान में वो वैसे चल रही थी तो फिर हम लोगों ने पूछा मामा जी वगैरह और मामी से तब उन्होंने यह बताया कि ये किसी के नाम की हांडी छोड़ी हुई है।

उस समय हमें समझ में नहीं आया लेकिन आज जैसे कि वर्तमान में स्थितियां देखते हैं और जब पता चला कि तंत्र और यह सब कुछ बहुत तीव्र रूप में काम करता है।

मारण क्रियाएं भी होती हैं। तो यह जो हांडी वाला प्रयोग है क्या यह मारण का ही एक स्वरूप है? यह मारण का ही एक स्वरूप होता है। बेसिकली तंत्र जो है भगवान शिव का वरदान है। तो उसमें इस मतलब कई प्रकार की साधनाएं होती हैं।

कई प्रकार के प्रयोग होते हैं। लेकिन भगवान शिव ने सबको कीलित करके रखा हुआ है। क्योंकि कोई शक्ति का दुरुपयोग ना कर ले। तो इसके लिए साधना करनी पड़ती है। अनुष्ठान करने पड़ते हैं। अनुष्ठान होते हैं। फिर हवन होते हैं। फिर गुरु भोज होता है। पूरा प्रोसेस जब कंप्लीट होता है तब जाके वो मंत्र आपके लिए जागृत होता है। फिर वो आपके लिए काम करता है।

बगलामुखी की साधना  – मारण क्रिया का तोड़

 

तो जैसा कि अभी हम अभी हमने बात की मारण की तो क्या यह क्रिया जैसे किसी ने किसी के ऊपर कर दी तो क्या उसे वो रिवर्स कर सकते हैं या उसे वो खत्म कर सकते हैं। कोई यदि किसी के पास कोई सशन के पास जाता है जैसे कोई पीड़ित व्यक्ति है।

वो किसी और तांत्रिक या जानकार के पास गया तो क्या वो बगलामुखी से किया गया प्रयोग है तो क्या वह रिवर्स हो सकता है या वह उसको खत्म भी कर सकते हैं? जैसे स्टार्टिंग में ही मैंने आपको बताया कि बगलामुखी माता का प्रादुर्भाव जो हुआ है वह जगत के कल्याण के लिए हुआ है।

तो कोई व्यक्ति यदि शक्ति का दुरुपयोग करता है और ऐसे में कोई दूसरा बगलामुखी साधक उसको काटने की बात करता है तो माता उस व्यक्ति का साथ देती हैं और उसको काटा जा सकता है। मतलब कहा जा सकता है कि न्याय की देवी हैं और मां तो ममतामई ही होती हैं।

पर कलयुग में कि साधनाओं और सिद्धियों का गलत तरीके से कहीं ना कहीं हम कहें तो प्रयोग किया जा रहा है और यही आपसे मैं जानना चाहूंगी कि सिद्धि और साधना में क्या अंतर है?

सिद्धि और बगलामुखी की साधना में अंतर

 

सिद्धि और साधना में यह अंतर को इस तरीके से समझिए कि जो साधना है हम जो साधना करते हैं वह एक कारण है और उसको किसी चीज को जो हम प्राप्त करने के लिए साधना करते हैं जब वो चीज हमें प्राप्त हो जाती है उसका परिणाम है दैट इज सिद्धि।

मान लीजिए कि हम कोई चीज चाहते हैं कि भगवान के दर्शन करना चाहते हैं तो उसकी साधना अलग होगी। कोई चाहता है कि हमको मनोवांछित फल प्राप्त हो जाए। उसकी साधना अलग होगी। तो जो साधना हम करते हैं उसमें हमें तप श्रम परिश्रम करना पड़ता है।

हमारे तपोबल को बढ़ाना पड़ता है। संयम रखना पड़ता है। ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता है। यानी साधना के समय हमको नियम और अनुशासन का पूरी तरीके से पालन करना पड़ता है। जब हम लगातार ये करते हैं तब हमें कहीं जाकर सिद्धि प्राप्त होती है। जी।

 

बगलामुखी की साधना  – कोर्ट-कचहरी के मामलों में बगलामुखी हवन

 

बगलामुखी जी के बारे में सबसे ज्यादा जो प्रचलित बात है वो यह कही जाती है कि जो कोर्ट कचहरी या लड़ाई झगड़े के मामले होते हैं उनके लिए उनके हवन कराए जाते हैं। जैसे कि नलखेड़ा मध्य प्रदेश में जो जगह है वहां पर उनके हवन बहुत ज्यादा प्रचलित हैं।

इसके साथ ही दतिया में जो पीतांबरा माई हैं उनके यहां पे भी उनके हवन किए जाते हैं। तो इस बात में कितनी सत्यता है क्योंकि बहुत हजारों और लाखों की संख्या में लोग वहां जाकर हवन कराते हैं। तो वास्तविकता में क्या है इसके बारे में आप थोड़ा बताइए।

नलखेड़ा में जो बगलामुखी माता के हवन होते हैं उसमें यह सच्चाई है कि व्यक्ति यदि सत्य की तरफ है सही है तो मां उसका साथ देती है भले उसे किसी भी प्रकरण में फंसा दिया गया है। मां की कृपा से वो मुक्त हो जाता है।

यानी कि यहां यह कहा जा सकता है कि यदि गलत व्यक्ति है जिसने अपराध किया है और वो जाके हवन करा रहा है तो उसका हवन बिल्कुल भी सफल नहीं होगा। यानी न्याय की देवी माता है। वो जो सही व्यक्ति है उसका साथ अवश्य देती हैं। जी।

इसके साथ ही जैसे वहां पे हवन की बात कर रहे हैं अभी हम तो अलग-अलग और प्रकार से भी हवन किए जाते हैं और काफी लोगों ने देखा है और वहां पे जैसे हवन करते समय बहुत लोगों को जिनको जिनके शरीर में देवी जी का कुछ रहता है अंश या फिर अन्य चीजें तो वो भी वहां पर एकदम से प्रकट होती हैं।

तो वास्तविकता में इसका थोड़ा सा अर्थ आप समझाइए। देखिए देवी नलखेड़ा में स्वयंभू हैं। साक्षात विराजमान हैं। जब कोई साधक उनका वहां पर जाकर साधना करता है या हवन करता है तो मां प्रसन्न होती है। मां जब प्रसन्न होती है तो वो अपना एहसास कराती है, प्रकट हो जाती है। यानी कि यह कहा जा सकता है कि कुछ अनुभव जो हैं जो लोगों को होते हैं वो वास्तविकता में वो बिल्कुल सत्य अनुभव होते हैं।

एक साधक के अलौकिक  अनुभव – बगलामुखी की साधना

 

अच्छा यही इन्हीं अनुभवों के साथ बात हमारी हो रही है। तो मैं यह जानना चाहूंगी कि क्योंकि आप बगलामुखी जी के साधक हैं और अपनी कुछ साधना के बारे में यदि आप हमारे दर्शकों के साथ बात करना चाहे या बताना चाहें तो बताइए कि आपका कैसा अनुभव रहा ?

आप कब से साधना कर रहे हैं और इस साधना में क्या-क्या चीजों का आपने अनुभव किया है ? देखिए इस लेख के माध्यम से ज्यादा हम बता नहीं सकते हैं। यह चीजें गुप्त रहती है।

गुरु की आज्ञा से ही की जाती है साधना और जितना बताया जा सकता है मैं कुछ अनुभव आपको बताता हूं कि गुरु जी के ही अनुभव थे जो उन्होंने हमको शेयर किए थे कि मैं आपको यह बताना चाह रहा हूं कि बगलामुखी माता क्या-क्या कर सकती हैं उसको समझने की कोशिश कीजिए।

 

बगलामुखी की साधना – ब्रह्म राक्षस से सामना

 

एक व्यक्ति को ब्रह्म राक्षस लग गया था जो कि सबसे खतरनाक होता है। जी बिल्कुल। ब्रह्म राक्षस मतलब यह है कि अगर आप मंदिर के अंदर बैठ के जाप कर रहे हैं वो भी आपके बाजू में बैठ के जाप करेगा। इतना पावरफुल ब्रह्म राक्षस होता है।

मतलब आप उसको काट नहीं सकते कि आप सोचो कि मैं यह मंत्र कर रहा हूं तो उसको हटा दूं इससे तो वो भी बैठ के वही जाप कर रहा है। वो इतना पावरफुल होता है। लेकिन वो तो नकारात्मक है।

तो वो सकारात्मकता के बीच में बैठ के कैसे ब्राह्मण जो है जो गलत काम करके वो होते हैं वो ब्रह्म राक्षस में कन्वर्ट हुए हैं। तो इसलिए उनके अंदर वह पुरानी सिद्धियां तो हैं। वो तपोबल तो है कि वो वहां जा सकते हैं।

पर ये ब्रह्म राक्षस क्या-क्या कर सकते हैं किसी पे भी यदि किसी व्यक्ति के पीछे यदि पीछे अगर पड़ जाए तो उसकी पूरा जीवन बर्बाद कर देता है। सब कुछ खत्म कर देता है। तो मैं ये बता रहा था कि ब्रह्म राक्षस जो था वो किसी के पीछे पड़ गया था। तो गुरु जी ने साधना करी और उन्होंने बगला कल्प विधान का अनुष्ठान लिया।

बगला कल्प विधान उन्होंने एक पाठ किया। बगला कल्प विधान के एक पाठ को उन्होंने 1000 बार किया। यानी कि 1000 पाठ उन्होंने कंप्लीट किए। उसके बाद भी उनको कोई रिजल्ट नहीं मिला। उन्होंने दोबारा से अनुष्ठान किया बगला कल्प विधान का।

दोबारा हजार पाठ किए। उसके बाद भी जब उनको उसका कोई रिजल्ट नहीं मिला। तीसरी बार फिर उन्होंने संकल्प लिया। संकल्प लेकर अनुष्ठान किया। हजार पाठ का तो जब तीसरी बार उनके हजार पाठ पूरे हुए तो मां जो यंत्र है बगलामुखी माता का यंत्र है उसके सामने मां ने उसको प्रकट कर दिया।

उस ब्रह्म राक्षस को प्रकट कर दिया प्रकट हो गए मां ने सामने प्रकट कर दिया और गुरु जी और ब्रह्म राक्षस दोनों आमने सामने तो गुरु जी ने पूछा भाई तुम मेरे पीछे क्यों पड़े हो क्या कारण है तो उसने बताया कि आपके ही गांव के किसी व्यक्ति ने मुझे आपके पीछे लगाया था. 

अच्छा यानी कि ये जो इस तरीके के भूत प्रेत ब्रह्म राक्षस जिन्न होते हैं ये पीछे भी लगा दिए जाते हैं ये पीछे लगा दिए जाते हैं बिल्कुल और ज्यादातर ये पीछे लगाने का कारण आपसी आपसी जलन द्वेष किंतु यदि हम बात करें तो यह सब जो भी माहौल है क्या यह सही है? यह क्या सिद्धियों का सही प्रयोग है?

 

यदि किसी विषय में हमारी काफी अच्छी समझ है लेकिन हम उसका गलत प्रयोग कर रहे हैं तो यह तो ईश्वर भी देख रहा है। तो यह सब तो उचित नहीं है मेरे ख्याल से। देखिए कलयुग है, साधनाएं सब प्रकार की है। यहां पर सात्विक भी है, तामसिक भी है।

इच्छाएं भी लोगों की असीमित है, अलग-अलग हैं। सब अपनी-अपनी इच्छाओं के हिसाब से अपनी साधना का चयन करते हैं। तो ये कहना तो मुश्किल है कि मतलब यह साधना गलत है। कोई भी चीज अगर संसार में है तो भगवान की इच्छा से है। जी।

भगवान ने अगर पॉजिटिव दिया तो नेगेटिव भी दिया। सात्विक लोग हैं सात्विक साधना करेंगे। तामसिक लोग हैं तामसिक साधना करेंगे। अब जो अघोर की साधना करते हैं वो तो सात्विक साधना नहीं कर सकते ना। लेकिन उद्देश्य तो यही है ना भगवान की प्राप्ति। तो वो किसी भी माध्यम से जाएं साधनाएं अलग-अलग है लेकिन सबका रिजल्ट एक ही रहता है।

 

बगलामुखी की साधना सात्विक और तामसिक साधना का टकराव

 

अच्छा यहां पे हम जब साधनाओं की बात कर रहे हैं तो एक सात्विक साधक यदि एक तामसिक साधक के सामने आता है तो कैसी स्थिति होती है? देखिए सात्विक साधक जो होता है वह सौम्यता रहती है उसके अंदर और तामसिक जो साधक रहता है

उसके अंदर उग्रता रहती है लेकिन जब साधना एक अच्छे लेवल पर आ जाती है तो एक चेहरे पे आभा मंडल एक अलग अच्छा दिखने लगता है एक तेज दिखने लगता है वो तेज से पता चलता है कि ये साधक है जिसने साधना की है साधना तपोबल से आती है कि आपका कितना तपोबल है तो जब आपका तपोबल बहुत बढ़ जाता है तब आपके अंदर एक ऐसा तेज आ जाता है जिसको देख देख के कोई भी कह देता है यह साधक है।

गृहस्थों के लिए सरल बगलामुखी की साधना  विधि

 

या साधनाओं की हम जब बात कर रहे हैं तो कोई एक सामान्य जनसामान्य व्यक्ति घर में रह के ही साधना करना चाहता है। उसके पास ना कोई गुरु है ना उसे ज्यादा चीजों का ज्ञान है। तो कुछ सरल सा मार्ग बताइए कि वो साधना में भी खुद को तटस्थ रख सके और मां की प्राप्ति कर सके। जैसे आपने पूछा कि घर में साधना कर सकते हैं क्या?

तो घर में सौम्य रूप से साधना होती है। मां बगलामुखी माता की आप चालीसा पढ़ सकते हैं। उनके स्तोत्र पढ़ सकते हैं। जो मैं अभी बता रहा था बगला अष्टोत्तर शतनाम मां को अति प्रिय है। बहुत तेजी से उनकी कृपा प्राप्त होती है। कोई व्यक्ति यदि संकल्प लेके इनके पाठ को करता है तो डेफिनेटली वो यह साधना कर सकता है।

 

बगलामुखी की साधना  संकल्प लेने की सही प्रक्रिया

 

इसमें संकल्प का क्या सही तरीका होता है साधनाओं को करते समय? क्योंकि जब हम साधारण अपने घर की पूजा करते हैं और जो संकल्प लेते हैं और जब हम इस तरीके की कोई खास विशेष साधना में रत होते हैं तब के संकल्प में दोनों में क्या अंतर है ?

देखिए जो नॉर्मल हम संकल्प करते हैं वो नॉर्मल संकल्प पूजा पाठ में क्या होता है कि लोटे से हमने दाहिने हाथ में जल लिया उसमें अक्षत डाले एक पुष्प डाला एक का सिक्का रखा और बोला कि यह हमारी इच्छा पूर्ण हो।

इसके लिए हम इतने पाठ का संकल्प कर रहे हैं और वो जल जमीन पर छोड़ देते हैं। जी लेकिन जब हम विशेष साधना करते हैं जैसे मां बगलामुखी माता की हम साधना की बात कर रहे हैं। जिनको सब कुछ पीला पसंद है। पीला ही उनको प्रिय है। पीला ही भोग लगता है। यहीं पे मेरा सवाल है कि बगलामुखी जी को पीला ही क्यों इतना प्रिय है?

मां मां बगलामुखी माता को पीला इसलिए प्रिय है कि जब उनका अवतरण हुआ था तो वो पीत वस्त्र में आई थी। पूरी स्वर्ण के आभूषण थी। मतलब उनको पीला पसंद है। हल्दी उनको सबसे प्रिय है। उनके भोग में किशमिश लगती है। बेसन के लड्डू लगते हैं।

कोई भी पीली चीज का भोग लगाते हैं। तो मैं अब उसी प्रश्न पे आता हूं जो अभी आपने पूछा था कि संकल्प कैसे करते हैं? तो संकल्प करने का अलग तरीका होता है। यह संकल्प करने का जो तरीका होता है, उसमें क्या रहता है कि एक पीला कपड़ा लिया आपने।

उसके अंदर एक नारियल का गोला रखा। ठीक है ? उसमें पीली सरसों डाल दी, लौंग डाल दी। जी और कुछ दक्षिणा रख दी और उसको बांध के आपने रख दिया। ठीक है ? माता के चित्र के सामने। उसके बाद फिर आपने हाथ में जल ले संकल्प लिया कि मां मैं आपकी प्रसन्नता के लिए आपके इतने पाठ करने का संकल्प कर रहा हूं।

नॉर्मली हम जल कहां डालते हैं ? जमीन पे। यह हम उस नारियल के गोले के ऊपर डालते हैं। यह अंतर होता है। और वह जो नारियल का गोला है, जब हम साधना करते हैं, उसमें वो शक्ति आती है कि नकारात्मक शक्ति को रोकता है आप तक आने से।

 

बगलामुखी की साधना नकारात्मक ऊर्जाओं से बचाव

 

यही साधनाओं के बीच में हमेशा देखा गया है कि नकारात्मक ऊर्जाएं भी डिस्टर्ब करने के लिए कहना चाहिए कि आती हैं। तो इनको रोकने का क्या तरीका होता है ? किसी भी साधना में? देखिए नकारात्मक शक्ति को रोकने से पहले आपको जब कोई भी साधना की आप शुरुआत करें अपने ओरा को लॉक करना होता है। ठीक है ?

आप अपने ओरा को लॉक करेंगे और दूसरा जो प्रोसेस मैंने बताया नारियल का गोला रखते हैं। तो जो नारियल का गोला हम रख रहे हैं इसमें हम शक्ति समाहित हो रही है। यह शक्ति ही रोकती है नकारात्मक शक्ति को आप तक आने से।

और ओरा लॉक करना भी बता दीजिए कि किस तरीके से किया जाता है। देखिए ओरा लॉक करने का सिंपल सा प्रोसेस यह होता है कि आप इस तरीके से ऐसे क्रॉस टाइप का बनाइए यूं और ये आपका पूरा ओरा लॉक हो गया कि जो भी नेगेटिविटी सर पे ऐसे ले ऐसे लेके हृदय तक और लेफ्ट से राइट तक चली गई और मन में ये बोलना है कि जो भी मेरे आसपास चीजें हैं वो मेरे प्रवेश ना कर पाए मेरे शरीर में और मेरा अपना ओरा लॉक करता हूं।

सिर्फ इतना छोटा सा एक कार्य बिल्कुल ये आप मैं घर की साधना के लिए आपको बता रहा हूं नॉर्मल अगर हम घर में साधना करते हैं इतने से काम चल जाएगा और हम साधारण ध्यान पे बैठ रहे हैं यदि तो ये जो ओरा लॉक करने का आपने तरीका बताया है ये भी क्या हम रोज प्रयोग कर सकते हैं बिल्कुल कर सकते हैं आप तो इससे किसी भी प्रकार की नकारात्मक या अन्य जैसी भी ऊर्जाएं होती हैं वो आपके संपर्क में नहीं आ पाती हैं।

36 अक्षरीय बगलामुखी मंत्र: क्यों है गुरु की आवश्यकता ? 

 

सबसे महत्वपूर्ण सवाल एक मैं आपसे करना चाहती हूं। 36 अक्षरीय जो मंत्र होता है मां बगलामुखी का तो क्या उसकी पूजा या उसका जप साधारण लोग भी कर सकते हैं ? देखिए 36 अक्षरीय मंत्र जो है माता बगलामुखी को बहुत प्रिय है और दतिया वाले गुरु जी ने भी अपने जो बगलामुखी रहस्य उसमें इसी का वर्णन किया गया है। यह मंत्र इतना शक्तिशाली है। मूल मंत्र इसे कहा जाता है बेसिकली।

तो जो मूल मंत्र होता है मूल यानी जिसमें समूल सब कुछ समाहित है उस मंत्र को करने के लिए आपको गुरु की आवश्यकता होती है। बिना गुरु के इस मंत्र का जाप नहीं करना चाहिए। क्योंकि इस मंत्र के उच्चारण में अगर आप कहीं कोई त्रुटि करते हैं तो अर्थ का अनर्थ हो सकता है।

जैसे मैं दर्शकों को बता देता हूं। बगलामुखी मंत्र है। ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभ जिह्वां कील बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा। अब इसमें अगर आपने कहीं भी कोई भी त्रुटि कर दी तो वह चीज आपके लिए प्रॉब्लम क्रिएट कर सकती है।

तो दर्शकों आपकी जानकारी के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है कि 36 अक्षरीय बगलामुखी जी का जो यह जप किया जाता है मंत्र का इसे आप बिना गुरु के कभी भी घर में ना करें। अन्यथा अर्थ का अनर्थ हो सकता है।

कई साधक ऐसे होते हैं जो जिन्हें साधना का शुरू शुरू में कहना चाहिए कि एक मन होता है या शौक सवार होता है और वो खुद से गुरु मंत्र साधना डॉट कॉम से देखकर या आजकल बहुत गुरु बताते भी हैं तो वो गुरु मंत्र साधना डॉट कॉम से देखकर सारी साधनाएं करने लगते हैं।

तो ये कितना हानिकारक हो सकता है किसी के? यह डिपेंड करता है कि वह कौन सी साधना कर रहे हैं। अगर वह सात्विक साधना कर रहे हैं तो वह बिल्कुल कर सकते हैं। नहीं है। लेकिन अगर वह तामसिक साधना कर रहे हैं या माता की कोई उग्र साधना कर रहे हैं तो फिर बिना गुरु के नहीं करनी चाहिए।

क्योंकि नकारात्मक शक्ति जब वार करती है ऐसे में तो उसको संभालने के लिए गुरु की शक्ति ही काम आती है। जी यहां हम गुरु की बात कर रहे हैं और गुरु होना बहुत महत्वपूर्ण होता है।

लेकिन यह भी कहा जाता है कि जब तक समय नहीं आता तब तक हमें हमारे गुरु से हम मिल नहीं पाते हैं। तो गुरु का चुनाव करना या गुरु से मिलना ये सब कैसे संभव हो पाता है ?

गुरु का चुनाव हम नहीं कर सकते क्योंकि हमारी इतनी बुद्धि नहीं है कि हम गुरु को पहचान सके। समय आने पर गुरु खुद हमें चुनता है। जी यानी कि आपको जहां से गुरु दीक्षा प्राप्त हो गई स्वयं ही वही आपके गुरु हैं और आप आपको उनको स्वयं से स्वीकार कर लेना चाहिए।

साधना का फल क्यों नहीं मिलता? प्रारब्ध का प्रभाव

 

उत्कर्ष जी कई साधक जो जाप करते हैं साधना करते हैं। जैसे सवा लाख मंत्रों का जाप किया। किसी ने 10,000 लाख मंत्रों का जाप किया। अपनी-अपनी कैपेसिटी के अनुसार। लेकिन कई बार वो ऐसा कहते हैं कि हम इतनी आराधना पूजा कर रहे हैं उसके बाद भी इसका फल नहीं मिल रहा है। तो उसका क्या कारण होता है ?

बहुत ही बढ़िया क्वेश्चन आपने किया और मैं आपके माध्यम से दर्शकों को बताना चाहूंगा कि जो भी साधक साधना करता है जैसे मंत्र जाप उसने सवा लाख किए। एक मंत्र के सवा लाख किए। उसके बाद दूसरे मंत्र के सवा लाख किए। ऐसे कई प्रकार की साधनाएं उसने करी।

और उसका क्वेश्चन ये रहता है कि उसको रिजल्ट नहीं मिल रहा। तो उसका मेन कारण ये रहता है कि जो साधना से उसने तप अर्जित किया है वो तप जो साधना का अर्जित किया तप है वो उसके ओरा को क्लीन करने में जा रहा है ठीक है और ऊपर से सामने वाले के प्रारब्ध भी रहते हैं.

जब प्रारब्ध कटते हैं रिजल्ट उसके बाद मिलता है साधनाएं हम कर रहे हैं पूरे भाव से कर रहे हैं पूरी श्रद्धा से कर रहे हैं लेकिन आप किस किस मतलब कितने जन्मों से कौन-कौन से प्रारब्ध ले आए हैं ये नहीं पता तो जब वो प्रारब्ध आपके समाप्त होते हैं।

मां क्या कृपा करती है? ऐसा नहीं कि आपने साधना करी है, आप जप कर रहे हो और मां आपको कुछ नहीं दे रही। मां दे रही है लेकिन आपको दिखाई नहीं दे रहा। मां आपके उस प्रारब्ध को क्षीण कर रही है। वो एनर्जी वहां लग रही है जब वो आपका प्रारब्ध बिल्कुल क्षीण हो जाता है। उसके बाद जब आप एक साधना करते हैं क्वांटम जंप कर जाते हैं।

बगलामुखी वशीकरण: क्या इसका कोई तोड़ है ?

 

उत्कर्ष जी बगलामुखी साधना में जो भी तंत्रों का प्रयोग होता है उसके द्वारा जो वशीकरण का प्रयोग किया जाता है। क्या उसके कोई काट है ? देखिए मां बगलामुखी माता को ब्रह्मास्त्र विद्या कहते हैं। सबसे पहले तो यह समझिए।

ब्रह्मास्त्र मतलब त्रिलोक की अंतिम शक्ति। जब कोई भी पूजा पाठ करने के बाद रिजल्ट नहीं मिलता तो अंत में व्यक्ति बगलामुखी माता की शरण में जाता है और कोई यदि बगलामुखी माता का वशीकरण करता है तो उसकी कोई काट नहीं होती।

Maa Baglamukhi Sadhna बगलामुखी की साधना का निष्कर्ष

 

तो दर्शकों आज हमने बात की बगलामुखी मां के ऊपर उनकी साधना के ऊपर आपने जैसा देखा कि उत्कर्ष जी ने अपने भी कुछ अनुभव बताए उनके गुरु जी के भी कुछ अनुभव बताए तो मां की साधना करने वाले व्यक्ति के पास ढेर सारे अनुभवों का भंडार होता है और आज के कलयुग के युग में भी मां बगलामुखी बहुत ही जागृत देवी हैं।

और सच्चे मन से जो भी साधक जिस भी प्रकार से यानी कि सात्विक या तामसिक जो भी उनकी इच्छा अनुसार भक्ति करते हैं, उनकी साधना करते हैं, मां साक्षात आकर उनको दर्शन भी देती हैं और उनके सारे मनोरथ को पूर्ण भी करती हैं।

तो आज हमारी चर्चा बगलामुखी मां के बारे में थी। अगले लेख में एक नए विषय और एक नए मेहमान के साथ मैं फिर उपस्थित होऊंगी। तब तक के लिए जय माता दी। जय माता दी।

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बगलामुखी मंत्र के नुकसान – 5 बड़े नुकसान – यह गलतिया करने पर

बगलामुखी मंत्र के नुकसान: 5 बड़ी गलतियां और उनके प्रभाव (Baglamukhi Mantra ke Nuksan: 5 Badi Galtiyan aur Unke Prabhav)

बगलामुखी मंत्र के नुकसान: 5 बड़ी गलतियां और उनके प्रभाव (Baglamukhi Mantra ke Nuksan: 5 Badi Galtiyan aur Unke Prabhav)

बगलामुखी मंत्र के नुकसान: 5 बड़ी गलतियां और उनके प्रभाव (Baglamukhi Mantra ke Nuksan: 5 Badi Galtiyan aur Unke Prabhav)
बगलामुखी मंत्र के नुकसान: 5 बड़ी गलतियां और उनके प्रभाव (Baglamukhi Mantra ke Nuksan: 5 Badi Galtiyan aur Unke Prabhav)

अरे यार, सुनो! हर कोई चाहता है कि उसकी लाइफ में सब कुछ अच्छा हो, प्रॉब्लम सॉल्व हो जाएं। और इसके लिए, भाई, लोग अक्सर आध्यात्मिक रास्ते अपनाते हैं। इन्हीं में से एक है माँ बगलामुखी की साधना। जी, यह साधना बहुत ही पावरफुल है, शत्रुओं का नाश करने और हर तरह की रुकावट को दूर करने के लिए जानी जाती है। लेकिन, क्या बताऊँ, इसमें कुछ रूल्स होते हैं जिन्हें फॉलो करना बहुत ज़रूरी है। अगर आपने साधना को हल्के में लिया या कोई गलती कर दी जान बूझ   कर , तो इसके नेगेटिव इफेक्ट्स भी हो सकते हैं।

कोई भी शक्ति किसी भी साधक का कुछ बुरा नहीं करती अगर कोई साधक जान बुझ कर गलतिया करता है। तो वो शक्ति साधक पर रुष्ट  होती है इस लिए साधना के नियमो को फॉलो करो कोई भी गलती जान कर न करे साधना में शक्ति को हाज़िर नाजिर मान कर करो 

आज इस लेख में, हम आपको उन 5 बड़े नुकसानों के बारे में बताएंगे जो बगलामुखी मंत्र का गलत तरीके से जाप करने पर हो सकते हैं। तो ज़रा ध्यान दो, और इसे अच्छे से समझो।

बगलामुखी साधना रहस्य Baglamukhi Sadhna Rahsya
बगलामुखी साधना रहस्य Baglamukhi Sadhna Rahsya

 मानसिक अशांति और गुस्से का बढ़ना (Mansik Ashanti aur Gusse ka Badhna) – पहला बड़ा नुकसान

 

अरे भाई, सबसे पहला और सबसे कॉमन जो नुकसान देखने को मिलता है, वह है मेंटल पीस का खत्म हो जाना। देखो, यह मंत्र स्तंभन की शक्ति से जुड़ा है, मतलब किसी भी चीज़ को रोक देना। माँ बगलामुखी की एनर्जी बहुत उग्र और तेज होती है।

 

जब साधना गलत हो जाती है (Jab Sadhna Galat Ho Jati Hai)

बगलामुखी के टोटके baglamukhi ke totke ph.85280 57364
बगलामुखी के टोटके baglamukhi ke totke ph.85280 57364

मान लो, आपने बिना किसी गुरु के मार्गदर्शन के या गलत भावना से जाप शुरू कर दिया, तो क्या होगा? वो हाई-वोल्टेज एनर्जी आपके मन और दिमाग को अस्थिर कर सकती है। आपको हर छोटी-छोटी बात पर भयंकर गुस्सा आने लगेगा। आपको ऐसा फील होगा जैसे दिमाग में हर समय एक जंग चल रही है। रातों की नींद उड़ सकती है और आप हर समय एक अजीब सी बेचैनी महसूस करोगे। इसीलिए कहते हैं कि इस साधना को करने से पहले अपने मन को शांत और स्थिर करना बहुत ज़रूरी है, मानते हो न?

जरा सोचो, आप शांति पाने के लिए पूजा कर रहे हो और रिजल्ट उल्टा मिल जाए, तो कितना बुरा फील होगा, है ना?

 

परिवार और रिश्तों में दरार पड़ना (Parivar aur Rishton mein Darar Padna)

 

अच्छा भई, अब दूसरे पॉइंट पर आते हैं। यह मंत्र आपकी वाणी (स्पीच) को भी इफेक्ट करता है। सही तरीके से करने पर आपकी वाणी में ऐसी पावर आ जाती है कि आप जो बोलोगे, वो सच होने लगेगा। लेकिन, ज़रा सोच के देखो, अगर एनर्जी नेगेटिव दिशा में चली गई तो?

 

 वाणी का गलत इस्तेमाल और उसका असर (Vani ka Galat Istemal aur Uska Asar)

 

अगर मंत्र जाप में गलती हुई, तो आपकी वाणी कठोर और कड़वी हो सकती है। आप ना चाहते हुए भी अपने परिवार वालों को, अपने दोस्तों को कुछ ऐसा बोल सकते हो जो उन्हें बहुत हर्ट कर दे। भाई, गुस्से में इंसान क्या कुछ नहीं कह जाता, और जब आपकी वाणी में मंत्र की उग्र ऊर्जा हो, तो वो शब्द और भी ज़्यादा चुभते हैं।

इससे क्या होगा? आपके अच्छे-भले रिश्ते खराब होने लगेंगे। घर में रोज-रोज के झगड़े, क्लेश और तनाव का माहौल बन जाएगा। लोग आपसे दूर भागने लगेंगे। तुम मानो, यह एक ऐसा नुकसान है जिसका असर आपकी पूरी सोशल लाइफ पर पड़ता है। तो भई, जब भी साधना करो, अपनी वाणी पर कंट्रोल रखना बहुत ज़रूरी है। मंत्रों के प्रभाव के बारे में और जानकारी आप विकिपीडिया पर भी पढ़ सकते हैं।

 

आर्थिक और करियर में भारी गिरावट (Aarthik aur Career mein Bhari Girawat)

 

अरे बाप रे! यह वाला पॉइंट तो और भी सीरियस है। बहुत से लोग सोचते हैं कि मंत्र जाप से उनका करियर रॉकेट बन जाएगा, खूब पैसा आएगा। हाँ, यह सच है, लेकिन केवल तब जब सब कुछ सही हो।

 

ऊर्जा का असंतुलन और फाइनेंशियल लॉस (Energy ka Asantulan aur Financial Loss)

 

देखो जी, बगलामुखी साधना की ऊर्जा आपके औरा (Aura) को बदल देती है। अगर साधना सही से न की जाए, तो यह पॉजिटिव की जगह नेगेटिव हो जाती है। आपकी सोचने-समझने की शक्ति कमजोर पड़ सकती है। आप अपने काम में सही डिसीजन नहीं ले पाओगे।

मान लो, आप कोई बिज़नेस करते हो, तो गलत फैसलों से आपको बड़ा लॉस हो सकता है। अगर आप जॉब में हो, तो बॉस और सहकर्मियों के साथ आपके रिलेशन खराब हो सकते हैं, जिससे आपकी ग्रोथ रुक जाएगी। सच बताऊँ, मैंने ऐसे केस भी सुने हैं जहाँ गलत साधना के बाद अच्छा-भला चलता हुआ काम-धंधा ठप्प हो गया। यह सब एनर्जी के गलत फ्लो की वजह से होता है। आपकी पॉजिटिव वाइब्स नेगेटिव में बदल जाती हैं, और मौके आपके हाथ से फिसलने लगते हैं। क्या समझे?

 

 स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं (Swasthya Sambandhi Gambhir Samasyaen)

 

भाई देख, जान है तो जहान है। कोई भी पूजा-पाठ हम अच्छी हेल्थ और लंबी लाइफ के लिए करते हैं। लेकिन इसमें की गई गलती आपकी हेल्थ पर भारी पड़ सकती है।

यह मंत्र शरीर में मौजूद अग्नि तत्व को बहुत तेजी से बढ़ा देता है। अगर आप इसके लिए तैयार नहीं हैं या कोई गलती करते हैं, तो बॉडी का पूरा सिस्टम बिगड़ सकता है।

 

 शरीर पर पड़ने वाले नेगेटिव इफेक्ट्स (Sharir par Padne Wale Negative Effects)

 

  • हाई ब्लड प्रेशर: अरे सुनो, शरीर में गर्मी बढ़ने से आपका ब्लड प्रेशर हाई रहने लग सकता है।
  • पेट की समस्याएं: आपको एसिडिटी, अल्सर या पाचन से जुड़ी गंभीर प्रॉब्लम्स हो सकती हैं।
  • स्किन डिजीज: बहुत से लोगों को त्वचा पर फोड़े-फुंसी या किसी तरह की एलर्जी की शिकायत होने लगती है।
  • हार्मोनल इम्बैलेंस: खासकर महिलाओं में, गलत साधना से हार्मोनल साइकिल डिस्टर्ब हो सकता है।

तो भाई, शरीर को साधना के लायक बनाना, यानी कि पहले प्राणायाम और योग से उसे तैयार करना बहुत ज़रूरी है। वरना लेने के देने पड़ सकते हैं, ठीक बोला न?

 

विपरीत प्रभाव और शत्रु का आप पर हावी होना (Viprit Prabhav aur Shatru ka Aap par Havi Hona)

 

अरे राम! यह सबसे खतरनाक नुकसान है। ज़रा सोचो, आप जिस हथियार को अपने दुश्मन के लिए इस्तेमाल करना चाहते थे, वो उल्टा आप पर ही चल जाए।

बगलामुखी मंत्र को “शत्रु विनाशक” कहा जाता है। लेकिन अगर आपने मंत्र का संकल्प गलत तरीके से लिया, उच्चारण में भारी मिस्टेक की, या साधना को बीच में ही बिना किसी नियम के छोड़ दिया, तो मंत्र की शक्ति विपरीत दिशा में काम करने लगती है।

 

जब मंत्र उल्टा पड़ जाता है (Jab Mantra Ulta Pad Jata Hai)

जिस दुश्मन को आप कमजोर करना चाहते थे, वह और भी ज़्यादा पावरफुल होकर आप पर हमला कर सकता है। आपकी मुश्किलें कम होने की बजाय दोगुनी-चौगुनी हो जाएंगी। आपको हर काम में असफलता मिलने लगेगी। ऐसा लगेगा जैसे किसी ने आपका रास्ता ही रोक दिया है।

भाई मान लो, यह वैसा ही है जैसे आपने एक पावरफुल गार्ड रखा, लेकिन उसे ठीक से कमांड देना नहीं सीखा, तो वो आपकी ही प्रोटेक्शन करने की जगह आपको ही नुकसान पहुंचाने लगेगा। इसीलिए, इस साधना में गुरु का होना सबसे ज़्यादा इम्पोर्टेंट माना गया है। गुरु ही आपको सही रास्ता दिखाते हैं ताकि एनर्जी सही दिशा में काम करे।

 

निष्कर्ष: क्या हमें यह मंत्र नहीं करना चाहिए? (Nishkarsh: Kya Hamein Yeh Mantra Nahi Karna Chahiye?)

 

अरे नहीं! भाई, मेरे कहने का मतलब यह बिलकुल नहीं है। बगलामुखी मंत्र एक वरदान है, अगर इसे सही तरीके से, सही नीयत और एक योग्य गुरु के मार्गदर्शन में किया जाए। यह लेख आपको डराने के लिए नहीं, बल्कि सावधान करने के लिए है।

जैसे बिजली हमारे लिए बहुत यूज़फुल है, लेकिन गलत तरीके से छूने पर करंट मार देती है, वैसे ही यह मंत्र है। तो, अगर आप यह साधना करना चाहते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:

  1. योग्य गुरु बनाएं: किसी ऐसे गुरु को ढूंढें जिन्हें इस साधना का पूरा ज्ञान और अनुभव हो।
  2. नियमों का पालन करें: ब्रह्मचर्य, सात्विक भोजन, और स्वच्छता जैसे नियमों का सख्ती से पालन करें।
  3. नीयत साफ रखें: किसी का बुरा करने की भावना से मंत्र जाप कभी न करें।
  4. धैर्य रखें: यह मत सोचें कि आज जाप शुरू किया और कल रिजल्ट मिल जाएगा। इसमें समय लगता है।

तो भाई, पूरी तैयारी और सही जानकारी के साथ ही इस पावरफुल साधना के रास्ते पर आगे बढ़ें। क्या ख़याल है? सही कहा न? बताओ ज़रा।

Maa baglamukhi sadhna diksha माँ बगलामुखी की साधना बिना गुरु दीक्षा के कैसे करें

Maa baglamukhi sadhna diksha माँ बगलामुखी की साधना बिना गुरु दीक्षा के कैसे करें

Maa baglamukhi sadhna diksha माँ बगलामुखी की साधना बिना गुरु दीक्षा के कैसे करें

maa baglamukhi sadhna diksha माँ बगलामुखी की साधना बिना गुरु दीक्षा के कैसे करें
maa baglamukhi sadhna diksha माँ बगलामुखी की साधना बिना गुरु दीक्षा के कैसे करें

Maa baglamukhi sadhna diksha माँ बगलामुखी की साधना बिना गुरु दीक्षा के कैसे करेंय श्री महाकाल आप सब का स्वागत है गुरु मंत्र साधना डॉट काम में साधकों जनो , आप सब पर महामाई मां पीतांबरा की जो कृपा है, वह पहुँच रही  है इस बात की खुशी  है मुझे बहुत  खुशी सही तरह से धरम का प्रचार हो रहा है खुशी  की बात है । और ऐसा मैं क्यों कह रहा हूँ ? क्योंकि आप में से बहुत से लोगों ने पिछले कुछ दिनों में कमेंट बॉक्स में जो है, मुझसे सवाल किए हैं। 

और उससे यह साफ पता चलता है कि मां बगलामुखी महामाई, मां पीतांबरा को जानने की जो इच्छा है ना, वह आप में जागृत हो चुकी है। और अब मैं आपको सच बताऊँ, तो एक साधक की जो असली साधना है, वह यहीं से शुरू होती है। 

आपकी जिज्ञासा ही आपको मां बगलामुखी की शक्ति और ऊर्जा तक पहुँचाने का पहला मार्ग है, जिसे आप सब ने जो है, वह पार कर लिया है। तो मैं बहुत खुश हूँ कि आप सबके मन में मां बगलामुखी को जानने की, उनके बारे में जानने की, उनकी साधनाओं को जानने की जो यह इच्छा है ना, बस यही वो एक सही शुरुआत है जो एक साधक में होनी चाहिए।

आज इस पोस्ट  को मैं आपके ही एक सवाल से स्टार्ट कर रहा  हूँ, जिसमें आपने पूछा था कि क्या हम बिना गुरु दीक्षा के मां बगलामुखी की साधना कर सकते हैं ? तो साधकों, बिना गुरु के ज्ञान नहीं मिलता, यह बात बिल्कुल सच है। 

लेकिन जहाँ तक बात है मां बगलामुखी की साधना की, तो आपको पहले यह देखना है कि आपकी जो साधना है, उसका स्तर क्या है? आप किस लेवल पे हैं अभी? है ना ? अभी आप एडमिशन लेने की तैयारी कर रहे हो या आप प्राइमरी क्लास में आ चुके हो ? 

साधना आखिर आपकी कहाँ पहुँची है ? आप साधना में कहाँ तक पहुँचे हो? पहले यह पता करना बहुत ज्यादा ज़रूरी है। अगर आप मां बगलामुखी के मंत्र का जाप, पूजा-पाठ या भक्ति-भाव से उनकी आराधना करना चाहते हो, तो इसके लिए आपको कोई भी दीक्षा की आवश्यकता नहीं होती। 

अगर आपके पास किसी गुरु की दीक्षा है, तो आप उनके मंत्र जैसे कि ‘ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा’ इसका जप आप जो है कर सकते हो, या फिर जो है जो भी मंत्र आपको आपके गुरु से प्राप्त हुआ हो, यानी कि आपके गुरु ने आपको दिया हो, तो आपको उसका जप करना चाहिए। 

अगर गुरु दीक्षा नहीं है आपके पास में, है ना, तो ऐसा नहीं है कि आप बगलामुखी मां की साधना ही नहीं कर सकते। आप मां बगलामुखी की चालीसा से जो है, मां पीतांबरा की साधना शुरू कर सकते हो। चालीसा क्या होती है? है ना? यह आपके इष्ट की प्रशंसा होती है।

 तो आप क्यों ना जो है, आप अपनी महामाई की जो साधना है, वो उनकी प्रशंसा, उनकी चालीसा से ही शुरू करो। आप मां पीतांबरा की साधना गायत्री मंत्र से भी कर सकते हैं। ‘ॐ बगलामुखे च विद्महे स्तंभिनी च धीमहि तन्नो बगला प्रचोदयात’, यह मंत्र है और आप इसका जप कर सकते हैं। बिना किसी गुरु के जो है, आप महामाई की साधना भी शुरू कर सकते हैं। रोजाना पूजा, ध्यान या भक्ति के लिए यह बिल्कुल ठीक है, ठीक है? यहाँ श्रद्धा और सही भाव का होना सबसे ज्यादा ज़रूरी है। 

तो यहाँ तक तो सब ठीक है, लेकिन अगर आप सोच रहे हैं कि जो है, आप संसार में मां बगलामुखी के साधक के रूप में जाने जाएँ और आप महामाई की कठोर साधना के लिए भी तैयार हैं, तो कठोर साधना का मतलब है गंभीर तांत्रिक साधना, जिसमें खास मंत्र, यंत्र और विशेष विधि-विधान शामिल होते हैं। 

तो इसके लिए मेरा मानना है कि आपको गुरु दीक्षा बहुत ही ज्यादा ज़रूरी होती है। और वह क्यों ज़रूरी होती है? क्योंकि तंत्र शास्त्र में मां बगलामुखी की जो साधना है ना, उसको बहुत ही शक्तिशाली और मुश्किल भी माना जाता है। तो बिना सही मार्गदर्शन के गलतियाँ हो सकती हैं हमसे, जिससे आपको क्या होगा? फायदे के बदले पहले नुकसान हो जाएगा। 

इसीलिए गुरु दीक्षा बेहद ज़रूरी है, क्योंकि गुरु की सही गाइडेंस होगी, तभी आप सही मंत्र, सही उच्चारण और सही विधि भी सीख पाते हो। बगलामुखी साधना में जो है, मंत्रों का सही उच्चारण और नियम बहुत ही ज्यादा ज़रूरी होते हैं। कर्म दीक्षा भी बहुत ज़रूरी है।

 बीज मंत्रों को कैसे पढ़ना है, कैसे उच्चारण करना है, यह जानना भी बहुत ज्यादा ज़रूरी है। अब जैसे हम बीज मंत्र ‘ह्रीं’ का उच्चारण कर रहे हैं, अब इसमें क्या तत्व है? इस शब्द में ‘ह’ का क्या मतलब है, ‘र’ का क्या मतलब है, ‘ई’ का क्या मतलब है?

 यह आपको कौन बता सकता है? आप मान लीजिए ‘ह्रीं’ को ‘हलाम’ पढ़ रहे हैं, ‘ब्लूम’ पढ़ रहे हैं, तो यह कौन देखेगा, कौन बताएगा कि यह गलत है? पता चला आप सालों से ‘ह्रीं’ के बदले ‘हिलाम’ पढ़ रहे हैं और डाकिनी की ऊर्जा को बुलाने में लगे हुए हैं, है ना? 

आप हर दिन आसन बिछाकर, पीले वस्त्र धारण करके, संकल्प लेकर के ‘हिलीं’ को ‘ह्रीं’ का चांट करने में लगे हैं, बार-बार पढ़ रहे हैं, मंत्र जप कर रहे हैं और अपने साथ आपने क्या कर दिया? पिशाचिनी की ऊर्जा को लेकर के घूमना शुरू कर दिया। 

 इसीलिए अगर आप मां पीतांबरा, मां राजराजेश्वरी, मां बगलामुखी की गंभीर तांत्रिक साधना करना चाहते हो, तो गुरु की दीक्षा बहुत ज़रूरी है।

और यह मत सोचना कि गुरु का काम बस आपको बीज मंत्र का सही उच्चारण सिखाना है, पूजा विधि सिखाना है। गुरु ने मंत्र सिखा दिया, उच्चारण सिखा दिया, तो गुरु का काम खत्म। आप में से कई लोगों के मन में सवाल आ रहा होगा कि गुरु की ज़रूरत ही क्या है? है ना?

 क्यों चाहिए गुरु ? YouTube में से हम जो है, मंत्रों का उच्चारण सीख लेंगे और हमारा काम तो बन गया। अगर आप ऐसा सोच रहे हो तो यह आपकी सबसे बड़ी भूल होगी। 

बच्चों, जितने भी लोग है ना, आप मुझे सुन रहे हो, आप यह नोट कर लेना कि जो गंभीर साधना है, अगर आपको वो चाहिए, तो सही गुरु को भी ढूँढना ही होगा। क्योंकि गुरु का काम ही आपको सिर्फ मंत्र देने के बाद खत्म नहीं हो जाता या सिर्फ मंत्र देना नहीं होता। 

गुरु दीक्षा के दौरान जो है, गुरु अपनी शक्ति, अपनी ऊर्जा को आपको ट्रांसफर किया जाता है, जिससे आपकी साधना में और ज्यादा बल मिलता है। 

और यह भी आपको जो है, गाँठ बाँध लेनी चाहिए बात। तांत्रिक साधना में ऊर्जा बहुत ही तीव्र होती है। जब आप दीक्षा लेकर के मां बगलामुखी की साधना शुरू करते हैं, तो कई तरह की ऊर्जाएँ जो है, वह आपके संपर्क में आने की कोशिश करती हैं ताकि आपका ध्यान भटका सकें, है ना? आपकी साधना में रुकावट लेकर के आएँ।

 लेकिन एक गुरु ही होता है, जो आपको गलत और नेगेटिव प्रभावों से बचाने में और आपकी साधना को संतुलित करने में जो है, आपकी मदद करता है। तो साधकों, तंत्रशास्त्र में जो है, गुरु-शिष्य जो ये परंपरा है, यह बहुत इंपॉर्टेंट होती है। इसकी इंपॉर्टेंस बहुत ज्यादा हाई है। टीचर की गाइडेंस में जो है, आप स्पिरिचुअली डिसिप्लिन बनते हैं। 

लेकिन अगर आप बिना किसी दीक्षा के मां बगलामुखी, मां राजेश्वरी की साधना कर रहे हैं, तो रिस्क भी है। और यह रिस्क क्या है ? मंत्रों के उच्चारण में आपसे गलती हो सकती है। 

गलत मंत्र उच्चारण से साधना का प्रभाव जो है, वह बिल्कुल कम हो जाएगा। गलत विधि से जो है, नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव भी बढ़ सकता है। बिना गुरु के मार्गदर्शन के आप साधना के गहरे प्रभावों को समझ भी नहीं पाते हो, जिससे मानसिक या शारीरिक परेशानी हो सकती है आपको। कहता 

अब आपका सवाल होगा कि तो आखिर हम करें क्या? है ना? तो मैं यह नहीं कहता  कि आप सब कुछ छोड़ के गुरु की तलाश में निकल जाओ, क्योंकि तलाश करने से गुरु कभी भी नहीं मिल सकता। 

हम बोलते हैं ना, ‘व्हेन यू आर रेडी, गुरु अपीअर्स’। तो जब आप जो पात्र हैं, है ना, जब आप लेने के लिए तैयार हो जाएँगे, तो आपका गुरु भी आपके सामने अपने आप ही आ जाएगा। तो सबसे पहले तो अपनी तैयारी शुरू कर दो। तो हमेशा जो है, वो शुरुआत आपने आसानी से करनी है। धीरे-धीरे अपनी क्षमता को आपने यहाँ बढ़ाना है। 

मां बगलामुखी की सामान्य पूजा, मंत्र जाप, ध्यान से शुरू करो। इसके लिए आपको कोई दीक्षा की ज़रूरत नहीं है, है ना ? कोई पूजा करनी है, माँ का ध्यान लगाना है, इसके लिए आपको कोई दीक्षा नहीं चाहिए। माँ की मूर्ति या यंत्र के सामने आपने बैठ करके पीले फूल माँ को चढ़ाने हैं। दीप जलाइए। बाती को भी पीले रंग का रखिए। श्रद्धा के साथ जो है, वह आप पूजा करें। शुद्ध भाव रखें। 

साधना में आपका जो इरादा है और जो भक्ति है, यह दो चीजें जो है, वो बहुत ज़रूरी होती हैं। अगर आपका मन साफ है, तो मां बगलामुखी आपको संकेत ज़रूर और ज़रूर देंगी। और मेरी सलाह यही है आपको कि अगर आप मां बगलामुखी के भक्त हैं और बस उनकी कृपा पाना चाहते हैं, तो बिना दीक्षा के भी आप उनकी पूजा शुरू कर सकते हैं। 

महामाई की साधना आप उनके गायत्री मंत्र से जो है, वह शुरू कर सकते हैं। लेकिन अगर आप तांत्रिक साधना या बड़े स्तर की साधना करना चाहते हैं, तो किसी सच्चे गुरु से जो है, दीक्षा लेना ही आपके लिए उत्तम रहेगा। 

मां बगलामुखी की साधना बहुत शक्तिशाली है, इसीलिए आपने इसको श्रद्धा, विश्वास और सही विधि से भी करना है। बिना दीक्षा के आप शुरुआत तो कर सकते हैं, लेकिन अगर आप गहरी साधना में जाना चाहते हो, तो गुरु की जो गाइडेंस है, वो बहुत ज़रूरी है।

 इसीलिए अभी के लिए मां बगलामुखी की शक्ति को, मां बगलामुखी की ऊर्जा को आप समझिए। मां बगलामुखी जो है, वह स्तंभन की शक्ति है, शोडशी है। उनका ध्यान से ही जो है, आपको सही रास्ता खुद ब खुद मिल जाएगा। मां बगलामुखी सबकी रक्षा करती हैं। 

आपकी भी ज़रूर करेंगी और आपकी मन की बात भी ज़रूर सुनेंगी, है ना? मेरी जो महामाई है, मां बगलामुखी विश्वेश्वरी, सबका कल्याण करती हैं। आपकी कोई भी जिज्ञासा हो, आप कमेंट बॉक्स में जो है, मुझसे पूछ सकते हैं। 

आपकी हर जिज्ञासा का समाधान मां बगलामुखी की प्रेरणा से हल करने का जो है, मैं प्रयास करूँगा । जय मां पीतांबरा, जय मां माई, जय मां बगलामुखी

मातंगी साधना का रहस्य: ज्ञान और वाणी की देवी को कैसे जानें ? ph.85280 57364

मातंगी साधना का रहस्य: ज्ञान और वाणी की देवी को कैसे जानें ?

मातंगी साधना का रहस्य: ज्ञान और वाणी की देवी को 

कैसे जानें ?

मातंगी साधना का रहस्य: ज्ञान और वाणी की देवी को कैसे जानें ?
मातंगी साधना का रहस्य: ज्ञान और वाणी की देवी को कैसे जानें ?

 

अरे यार, अगर आप सच में कुछ अलग और पावरफुल साधना के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है। अरे वाह भई, क्या आपने कभी सोचा है कि कैसे कोई इंसान अपनी बातों से ही दूसरों को मंत्रमुग्ध कर सकता है ? 

कैसे कोई आर्टिस्ट (कलाकार) अपने हुनर से दुनिया को चौंका देता है ? इन सब के पीछे एक देवी का आशीर्वाद होता है – माँ मातंगी। अरे सुन ना, ये सिर्फ एक कहानी नहीं है, ये एक सच्चाई है जो सदियों से हमारे कल्चर (संस्कृति) का हिस्सा रही है।

मातंगी देवी, जिन्हें वाणी और संगीत की देवी कहा जाता है, दस महाविद्याओं में से एक हैं। उनकी साधना बहुत ही पावरफुल मानी जाती है, लेकिन इसके नियम भी उतने ही सख्त हैं। 

अरे जरा सुनो, लोग अक्सर सोचते हैं कि साधना बहुत मुश्किल होती है, पर अगर आप सही तरीके से, पूरे डेडिकेशन (समर्पण) और डिसिप्लिन (अनुशासन) के साथ इसे करें तो यह बहुत ही फलदायी होती है। 

इस लेख में, हम आपको मातंगी साधना के ऐसे ही कुछ रहस्य और जरूरी बातें बताएंगे, ताकि आप भी इस साधना को समझ सकें और अगर चाहें तो सही मार्गदर्शन में इसे कर सकें।

मातंगी देवी कौन हैं ?

अच्छा तो, सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि मातंगी देवी हैं कौन। वह दस महाविद्याओं में नौवीं महाविद्या हैं। उन्हें वाणी, संगीत, कला, ज्ञान और जादू की देवी माना जाता है। 

उनका रूप बहुत ही आकर्षक और मनमोहक है। वह हरे रंग के कपड़े और गहने पहनती हैं। उनके हाथ में वीणा, तोता और कभी-कभी तलवार भी होती है। उनका स्वभाव बहुत ही दयालु है, लेकिन वह अपने भक्तों से डिसिप्लिन भी चाहती हैं।

जरा सोचो, एक तरफ वह ज्ञान देती हैं, तो दूसरी तरफ कला और मनोरंजन का भी आशीर्वाद देती हैं। इसी वजह से जो लोग सिंगर, डांसर, लेखक, पोएट या पब्लिक स्पीकर बनना चाहते हैं, वे उनकी पूजा करते हैं। वह साधकों को बोलने की शक्ति, जिसे वाक्-सिद्धि भी कहते हैं, और क्रिएटिविटी (रचनात्मकता) का वरदान देती हैं। वैसे तो, उनकी पूजा तंत्र साधना से जुड़ी है, लेकिन आज के समय में लोग इसे अपनी लाइफ (जीवन) को बेहतर बनाने के लिए भी करते हैं।

मातंगी साधना क्यों करें ? इसके क्या फायदे हैं ?

यार, अब सबसे बड़ा सवाल है कि यह साधना क्यों करें? क्या सच में इससे कोई फर्क पड़ता है? सच बताऊँ, अगर आप यह साधना पूरे मन से करते हैं, तो आपको इसके बहुत सारे फायदे हो सकते हैं।

वाक्-सिद्धि: सबसे बड़ा फायदा है वाक्-सिद्धि। इसका मतलब है कि आप जो भी कहेंगे, वह सच हो सकता है। आपकी बातों में एक जादू जैसा इफेक्ट (असर) आ जाएगा। लोग आपकी बात ध्यान से सुनेंगे और मानेंगे। पॉलिटिशियन, टीचर, मोटिवेशनल स्पीकर और लीडर जैसी फील्ड (क्षेत्र) में यह बहुत काम आती है।

कला और ज्ञान में तरक्की: अरे सुनो, अगर आप किसी भी तरह की कला से जुड़े हैं, जैसे म्यूजिक, डांस, राइटिंग या पेंटिंग, तो यह साधना आपको बहुत आगे ले जा सकती है। मातंगी देवी की कृपा से आपके अंदर की क्रिएटिविटी बाहर आएगी और आप अपनी कला में और भी परफेक्ट हो जाएंगे।

ज्ञान और बुद्धि का विकास: यह देवी ज्ञान की भी देवी हैं। उनकी साधना से आपकी बुद्धि तेज होती है, आप नई चीजें जल्दी सीखते हैं और आपकी मेमोरी पावर (याददाश्त) भी बहुत अच्छी हो जाती है।

सुख और समृद्धि: तुम सोचो, जब आपकी बातों में पावर आ जाएगी और आप अपने काम में सफल होंगे, तो सुख और समृद्धि तो अपने आप ही आएगी, है ना? यह साधना आपकी लाइफ (जीवन) में बैलेंस और पॉजिटिविटी (सकारात्मकता) भी लाती है।

क्या बताऊँ, यह तो सिर्फ कुछ ही फायदे हैं। जो लोग सच में इस साधना से जुड़ते हैं, उन्हें इसका रियल फील होता है।

साधना के लिए क्या तैयारी करनी चाहिए ?

सुनिए, कोई भी साधना करने से पहले उसकी तैयारी बहुत जरूरी है। बिना तैयारी के आप सफल नहीं हो सकते। यह एक प्रोसेस (प्रक्रिया) है, जिसे फॉलो करना पड़ता है।

1. गुरु का मार्गदर्शन: भाईसाहब, सबसे जरूरी चीज है एक सच्चे गुरु का होना। यह साधना बहुत पावरफुल है और इसमें कुछ गलतियां हो सकती हैं। एक सच्चा गुरु आपको सही रास्ता दिखाता है, मंत्र देता है और आपको हर स्टेप पर गाइड करता है। गुरु के बिना यह साधना अधूरी और खतरनाक भी हो सकती है। अरे यार, सुन, गुरु ही आपको सही एनर्जी (ऊर्जा) और डिसिप्लिन सिखाता है।
2. सही जगह: साधना के लिए एक शांत और साफ जगह चुनें। ऐसी जगह जहाँ कोई आपको डिस्टर्ब (परेशान) न करे।
3. सामग्री: साधना के लिए कुछ जरूरी चीजें चाहिए होती हैं, जैसे:
मातंगी देवी की मूर्ति या फोटो।
मातंगी यंत्र: यह बहुत जरूरी होता है।
लाल आसन।
रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला।
पूजा की दूसरी चीजें, जैसे दीपक, धूप, फूल (खासकर लाल रंग के), फल और प्रसाद।

जरा बताओ तो, क्या आपने कभी सोचा था कि एक साधना के लिए इतनी तैयारी करनी पड़ती है? लगता है, हम सिर्फ रिजल्ट (परिणाम) देखते हैं, पर प्रोसेस को भूल जाते हैं।

 

मंत्र और उनका महत्व

सुनो, मातंगी साधना का दिल उसके मंत्रों में है। मंत्रों के बिना साधना अधूरी है। मातंगी देवी के कुछ खास मंत्र हैं, जिनका जप करना बहुत फलदायी होता है।

मूल मंत्र: `ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा`। यह मंत्र सबसे ज्यादा पॉपुलर है और इसे रोज 108 बार या उससे ज्यादा जप करना चाहिए।
एकाक्षरी मंत्र: `ह्रीं`। यह सबसे छोटा और पावरफुल मंत्र है।

मंत्रों का जप करते समय सही उच्चारण और ध्यान बहुत जरूरी है। मंत्रों में बहुत शक्ति होती है, जो आपके चारों तरफ एक पॉजिटिव फील्ड (क्षेत्र) बनाती है और आपको देवी से जोड़ती है। तुम मानो न, यह सिर्फ शब्द नहीं हैं, ये ब्रह्मांड की ऊर्जा का एक हिस्सा हैं।

 

साधना की विधि (प्रोसेस) क्या है ?

 

तो, अब बात करते हैं साधना की विधि के बारे में। यह साधना आम तौर पर रात में की जाती है, क्योंकि रात के समय एकाग्रता (कंसंट्रेशन) ज्यादा होती है।

1. संकल्प: सबसे पहले, स्नान करके साफ कपड़े पहनें। फिर अपनी साधना की जगह पर बैठें और अपने गुरु और देवी का ध्यान करें। एक साफ मन से यह संकल्प लें कि आप यह साधना किस मकसद के लिए कर रहे हैं।
2. ध्यान: अपनी आंखें बंद करके देवी मातंगी के रूप का ध्यान करें। उनकी सुंदरता, उनकी वीणा, तोता और उनका शांत स्वभाव अपने मन में लाएं।
3. जप: फिर अपनी माला से मंत्रों का जप शुरू करें। जप करते समय आपका पूरा ध्यान मंत्र के शब्दों और उसकी वाइब्रेशन (कंपन) पर होना चाहिए। जरा सोचो, जब आप मंत्र जपते हैं, तो उसकी आवाज और वाइब्रेशन आपके पूरे शरीर और मन में फैल जाती है।
4. हवन और आरती: साधना के बाद अगर संभव हो तो हवन करें और फिर देवी की आरती करें। प्रसाद चढ़ाएं और उसे सबको बांट दें।

क्या ख़याल है? ये प्रोसेस मुश्किल लगता है, लेकिन यकीन मानो, यह बहुत ही सुकून देने वाला होता है।

साधना के नियम और सावधानियां
 

भई देख, कोई भी पावरफुल चीज बिना नियम के अच्छी नहीं होती। मातंगी साधना के भी कुछ सख्त नियम और सावधानियां हैं, जिनका पालन करना बहुत जरूरी है।

पवित्रता (प्योरिटी): साधना के समय शारीरिक और मानसिक पवित्रता बनाए रखें। तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली, शराब और प्याज-लहसुन से दूर रहें। अरे मान लो न, यह जरूरी है।
ब्रह्मचर्य: साधना के समय ब्रह्मचर्य का पालन करना बहुत जरूरी है।


विश्वास और श्रद्धा: सबसे जरूरी है कि आपका देवी पर पूरा विश्वास हो। अगर आप आधे-अधूरे मन से यह साधना करेंगे, तो कोई फायदा नहीं होगा।


गुप्तता (सीक्रेसी): साधना के बारे में हर किसी को न बताएं। इसे गुप्त रखें। जब आप साधना करते हैं, तो एक खास तरह की एनर्जी (ऊर्जा) बनती है। दूसरों को बताने से वह एनर्जी कम हो सकती है।


गुरु की आज्ञा: अरे सुनो, बिना गुरु की अनुमति और उनके मार्गदर्शन के इस साधना को करने की कोशिश बिलकुल न करें। यह साधना बहुत पावरफुल है और अगर कोई गलती हुई, तो उसका उल्टा असर भी हो सकता है।

भाई मान लो, ये नियम इसलिए बनाए गए हैं, ताकि आप साधना का पूरा फायदा उठा सकें और किसी भी तरह के नुकसान से बच सकें। क्या कहते हो?

मातंगी साधना के अनुभव (एक्सपीरियंस)

भाई, जब कोई साधक इस साधना में आगे बढ़ता है, तो उसे कुछ खास एक्सपीरियंस (अनुभव) हो सकते हैं। शुरुआत में मन बहुत शांत होता है और एकाग्रता (कंसंट्रेशन) बढ़ती है। धीरे-धीरे, साधक को अपने आसपास एक पॉजिटिव फील्ड (क्षेत्र) महसूस होने लगता है।

कई बार मंत्र जप करते हुए साधक को खास आवाजें या रोशनी दिखाई देती है। यह सब साधना की सफलता के संकेत होते हैं। जरा सोच के देखो, जब आप किसी चीज पर पूरा फोकस करते हैं, तो आपको उसके रिजल्ट भी मिलते हैं। मातंगी साधना से साधक की वाणी में एक मिठास और आकर्षण आ जाता है, जिसका फील उसे और दूसरों को भी होता है।

यह बिल्कुल सच है, बहुत से साधकों ने अपनी लाइफ में बहुत बड़े बदलाव देखे हैं। कुछ ने अपनी कला में महारत हासिल कर ली, तो कुछ ने अपनी बातों से लोगों का दिल जीत लिया। अरे वाह, यह सब माँ मातंगी की कृपा से ही संभव है।

 

मातंगी निष्कर्ष

तो क्या, अब हम कह सकते हैं कि मातंगी साधना सिर्फ कोई पूजा-पाठ नहीं है, बल्कि यह अपने अंदर की शक्ति को जगाने का एक जरिया है। यह वाणी, कला और ज्ञान को पावरफुल बनाने की एक जर्नी (यात्रा) है। यार, अगर आप अपनी लाइफ में कुछ बड़ा करना चाहते हैं और अपनी क्रिएटिविटी को नेक्स्ट लेवल (अगले स्तर) पर ले जाना चाहते हैं, तो यह साधना आपके लिए एक अच्छा रास्ता हो सकती है।

लेकिन हमेशा याद रखें, गुरु का मार्गदर्शन सबसे जरूरी है। उनके बिना यह रास्ता अधूरा है। अगर आपको यह साधना करने की इच्छा हो, तो किसी सच्चे और ज्ञानी गुरु की तलाश जरूर करें।

समझ गए न? क्या सोचते हो? मज़ा आया न? ठीक है न?

ॐ ह्लीं बगलामुखी मंत्र: शत्रु विजय, हर बाधा का नाश और सफलता का महाउपाय

ॐ ह्लीं बगलामुखी मंत्र: शत्रुओं पर विजय और हर बाधा का अंत

 

ॐ ह्लीं बगलामुखी मंत्र: शत्रुओं पर विजय और हर बाधा का अंत

ॐ ह्लीं बगलामुखी मंत्र: शत्रुओं पर विजय और हर बाधा का अंत
ॐ ह्लीं बगलामुखी मंत्र: शत्रुओं पर विजय और हर बाधा का अंत

ॐ ह्लीं बगलामुखी मंत्र: शत्रु विजय, हर बाधा का नाश और सफलता का महा उपाय – क्या आप अपनी लाइफ में बार-बार आने वाली परेशानियों से तंग आ चुके हैं ? क्या आपको ऐसा महसूस होता है कि कोई अनदेखी ताकत आपके बनते हुए काम बिगाड़ रही है ? या फिर, आपके दुश्मन आपको बेवजह परेशान कर रहे हैं और आप खुद को हेल्पलेस फील कर रहे हैं ?

अच्छा तो, अगर इन सवालों का जवाब ‘हाँ’ है, तो भाईसाहब, आज आप बिलकुल सही जगह पर आए हैं। आज हम बात करेंगे एक ऐसी महाशक्ति की, एक ऐसे चमत्कारी मंत्र की, जिसके जाप मात्र से बड़े से बड़े शत्रु भी घुटने टेक देते हैं और जीवन की हर बाधा काफूर हो जाती है। जी, हम बात कर रहे हैं माँ बगलामुखी के महाशक्तिशाली मंत्र की।

यह कोई मामूली मंत्र नहीं है, जनाब। यह दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या, माँ पीताम्बरा का वो अस्त्र है जो अचूक है। इस लेख में, हम आपको इस मंत्र के बारे में सब कुछ, बिलकुल सरल शब्दों में बताएँगे। तो, चलिए शुरू करते हैं, क्या कहते हो?

 अरे भाई, आखिर कौन हैं ये माँ बगलामुखी ?

देखो, किसी भी मंत्र की शक्ति को समझने से पहले, उस देवता के स्वरूप और उनकी कथा को समझना बहुत ज़रूरी है, है ना? तो, माँ बगलामुखी कौन हैं?

पुराणों में एक बड़ी ही इंट्रेस्टिंग कहानी आती है। सतयुग में एक बार ब्रह्मांड में एक ऐसा भयंकर तूफ़ान आया कि पूरी सृष्टि में हाहाकार मच गया। ऐसा लगता था जैसे सब कुछ तबाह हो जाएगा। इस विनाश को देखकर सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु भी चिंतित हो गए।

उन्होंने सौराष्ट्र (आज के गुजरात) में हरिद्रा नामक सरोवर के किनारे बैठकर माँ शक्ति को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या शुरू की। उस तपस्या के तेज से, मंगलवार की चतुर्दशी को, आधी रात के समय, उस सरोवर से एक पीली आभा के साथ माँ शक्ति एक देवी के रूप में प्रकट हुईं। सुनो तो, उन्होंने ही भगवान विष्णु को आश्वासन दिया कि वो इस विनाश को रोक देंगी।

चूँकि वो पीली आभा और हल्दी (हरिद्रा) के सरोवर से प्रकट हुई थीं, इसीलिए उन्हें पीताम्बरा भी कहा जाता है। और भाई, उन्होंने अपनी शक्ति से उस पूरे तूफ़ान को, उस विनाश को एक पल में ‘स्तंभित’ कर दिया, यानी कि रोक दिया, फ्रीज कर दिया। बस, इसी स्तंभन शक्ति की देवी का नाम है बगलामुखी

उनका स्वरूप कैसा है? माँ पीले वस्त्र पहनती हैं, उनके आभूषण पीले हैं, उन्हें पीली चीज़ें ही पसंद हैं। उनके एक हाथ में गदा होती है और दूसरे हाथ से वो शत्रु की जीभ पकड़कर खींच रही होती हैं। यह सिम्बॉलिक है, समझे ? इसका मतलब है कि वो दुष्टों की बोलने की शक्ति, उनकी तर्क शक्ति और उनकी  बुद्धि को ही खत्म कर देती हैं। अरे वाह भई, कमाल की शक्ति है! आप माँ बगलामुखी के बारे में विकिपीडिया पर और पढ़ सकते हैं।

 ॐ ह्लीं बगलामुखी मंत्र: क्या है यह महामंत्र ?

जी, अब आते हैं मुद्दे की बात पर। बगलामुखी साधना में कई मंत्रों का प्रयोग होता है, लेकिन जो सबसे प्रमुख और शक्तिशाली मंत्र है, वो इस प्रकार है:

ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा।

अरे बाप रे! देखने में थोड़ा बड़ा और कठिन लग रहा है, है ना? पर घबराइए नहीं। इसका एक छोटा और बहुत ही पॉवरफुल बीज मंत्र भी है।

बीज मंत्र: ह्लीं

हाँ जी, सिर्फ एक शब्द – ह्लीं। यह माँ बगलामुखी का बीज मंत्र है। यूं कहें तो, इस एक शब्द में ही उनकी पूरी शक्ति समाई हुई है। जो लोग बड़े मंत्र का जाप नहीं कर सकते, वो सिर्फ ‘ह्लीं’ का जाप करके भी अद्भुत लाभ पा सकते हैं।

 इस चमत्कारी बगलामुखी मंत्र का मतलब क्या है ?

अच्छा सुनो, किसी भी मंत्र को जब आप उसके अर्थ के साथ जपते हो, तो उसका असर कई गुना बढ़ जाता है। तो चलो, इस मंत्र के गहरे मीनिंग को समझते हैं।

  • ॐ: यह तो ब्रह्मांड की आदि ध्वनि है, इसके बिना कोई मंत्र पूरा नहीं होता।
  • ह्लीं: यह माँ बगलामुखी का बीज मंत्र है, जो स्तंभन और आकर्षण की शक्ति रखता है।
  • बगलामुखी: यह माँ का संबोधन है।
  • सर्वदुष्टानां: यानी कि ‘सभी दुष्टों की’। इसमें सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि नेगेटिव विचार, बुरी आदतें और बुरी किस्मत भी शामिल है।
  • वाचं मुखं पदं स्तम्भय: अरे देखो, इसका मतलब है ‘वाणी (बोलने की शक्ति), मुख और पैरों को स्तंभित कर दो’, यानी रोक दो, जड़ कर दो।
  • जिह्वां कीलय: ‘जीभ को कील दो’। मतलब, जो आपके खिलाफ बुरा बोलते हैं, उनकी ज़बान पर ताला लगा दो।
  • बुद्धिं विनाशय: उनकी विनाशकारी बुद्धि का नाश कर दो। भाई, जब दुश्मन की सोचने-समझने की शक्ति ही खत्म हो जाएगी, तो वो आपका बुरा कैसे करेगा? सही है न?
  • ह्लीं ॐ स्वाहा: मंत्र को समाप्त करने और शक्ति को ब्रह्मांड में समर्पित करने की प्रक्रिया।

तो भाई, कुल मिलाकर यह मंत्र एक प्रार्थना है कि, “हे माँ बगलामुखी, मेरे सभी शत्रुओं (अंदर और बाहर के) की वाणी, मुख और गति को रोक दो, उनकी जीभ को कील दो और उनकी विनाशकारी बुद्धि का नाश कर दो।”


 बगलामुखी मंत्र जाप के अद्भुत फायदे (Benefits of Baglamukhi Mantra)

अरे वाह भई, अब आते हैं सबसे रोमांचक हिस्से पर! इस मंत्र को जपने से मिलता क्या-क्या है? देखो ना, फायदे इतने हैं कि गिनते-गिनते थक जाओगे। मैं आपको कुछ मेन बेनिफिट्स बताता हूँ:

  • शत्रुओं पर विजय (Victory over Enemies): यह तो इसका सबसे बड़ा फायदा है। अगर आपके गुप्त या खुले दुश्मन हैं, जो आपको परेशान करते हैं, तो यह मंत्र उनके लिए काल के समान है। वो आपका बुरा करना तो दूर, आपके बारे में सोच भी नहीं पाएँगे।
  • कोर्ट-कचहरी और मुकदमों में सफलता (Success in Legal Cases): अगर आप किसी झूठे कोर्ट केस में फँस गए हैं या किसी कानूनी लड़ाई को जीतना चाहते हैं, तो यह मंत्र आपके लिए वरदान है। सच बताऊँ, यह वकील की दलीलों और जज के फैसले को भी आपके पक्ष में मोड़ सकता है।
  • करियर और बिजनेस में तरक्की (Growth in Career and Business): ऑफिस में पॉलिटिक्स से परेशान हैं ? या बिजनेस में कॉम्पिटिटर आपको आगे नहीं बढ़ने दे रहे? तो भाई, यह मंत्र आपके रास्ते की हर रुकावट को हटाकर आपके करियर को एक नई उड़ान देता है।
  • नकारात्मक ऊर्जा और तंत्र-मंत्र से बचाव (Protection from Negative Energy): क्या आपको लगता है कि किसी ने आपके ऊपर कुछ करवा दिया है या आपके घर में नेगेटिविटी है? यह मंत्र एक ऐसा सुरक्षा कवच बना देता है कि कोई भी ब्लैक मैजिक या बुरी नज़र आपको छू भी नहीं सकती।
  • परीक्षा और इंटरव्यू में सफलता (Success in Exams and Interviews): यह मंत्र आपकी बुद्धि और वाणी को इतना प्रखर बना देता है कि आप किसी भी परीक्षा या इंटरव्यू में आत्मविश्वास के साथ सफलता पाते हैं। यह आपकी याददाश्त को भी तेज करता है।
  • कर्ज से मुक्ति और आर्थिक लाभ (Freedom from Debt): अगर आप कर्ज में डूबे हैं या पैसों की तंगी से जूझ रहे हैं, तो माँ पीताम्बरा की कृपा से आपके लिए धन के नए रास्ते खुलने लगते हैं।
  • वाणी की शक्ति (Power of Speech): जो लोग इस मंत्र का जाप करते हैं, उनकी वाणी में एक अजीब सा तेज और सम्मोहन आ जाता है। लोग उनकी बात सुनते हैं और मानते भी हैं। मानते हो न ?

 बगलामुखी मंत्र साधना की सही विधि क्या है ?

अजी, यह बहुत ज़रूरी सवाल है। देखो भाई, यह एक बहुत शक्तिशाली मंत्र है, इसलिए इसकी साधना पूरे नियम और अनुशासन के साथ करनी चाहिए। यूँ कहें तो, आप एक एटम बम को डिफ्यूज करने जा रहे हो, तो सावधानी तो बरतनी पड़ेगी, है ना?

साधना से पहले क्या तैयारी करें ?

  • सही समय: इस मंत्र का जाप शुरू करने के लिए गुरुवार (बृहस्पतिवार) का दिन सबसे बेस्ट माना जाता है। इसके अलावा, नवरात्रि, गुप्त नवरात्रि या किसी भी शुभ मुहूर्त में इसे शुरू कर सकते हैं।
  • दिशा: जाप करते समय आपका चेहरा उत्तर या पूर्व दिशा में होना चाहिए।
  • वस्त्र और आसन: आपको पीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए और पीले रंग के ऊनी आसन पर ही बैठना चाहिए।
  • माला (Rosary): इसके जाप के लिए ‘हल्दी की माला’ का ही प्रयोग किया जाता है। यह बहुत ज़रूरी है, इसे नोट कर लो।
  • पूजा की सामग्री: अपने सामने एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर माँ बगलामुखी की फोटो या यंत्र स्थापित करें। पीले फूल, पीली मिठाई (जैसे बेसन के लड्डू), पीले फल और धूप-दीप तैयार रखें।

 जाप कैसे शुरू करें और कितना करें ?

  1. शुद्धिकरण: सबसे पहले नहा-धोकर खुद को शुद्ध कर लें। पूजा की जगह को भी गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
  2. संकल्प: अब हाथ में थोड़ा जल, अक्षत (चावल) और एक फूल लेकर संकल्प लें। संकल्प का मतलब है कि आप अपना नाम, गोत्र बोलकर माँ को बताएं कि आप यह जाप किस इच्छा (जैसे शत्रु शांति) के लिए, कितनी संख्या में और कितने दिन तक करेंगे। फिर जल को जमीन पर छोड़ दें।
  3. गुरु और गणेश पूजन: भाई, सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें ताकि आपकी साधना बिना किसी विघ्न के पूरी हो। उसके बाद अपने गुरु का ध्यान करें और उनसे आज्ञा लें।
  4. मंत्र जाप: अब हल्दी की माला पर मंत्र का जाप शुरू करें। ॐ ह्लीं बगलामुखी... वाले बड़े मंत्र का या सिर्फ ह्लीं बीज मंत्र का।
  5. कितना जाप करें?: देखो, अगर आप किसी विशेष मकसद के लिए अनुष्ठान कर रहे हैं, तो आमतौर पर सवा लाख मंत्रों का जाप किया जाता है। लेकिन अगर आप रोज़ाना करना चाहते हैं, तो कम से कम 1, 3, 5 या 11 माला रोज़ कर सकते हैं। क्या समझे?
  6. आरती और क्षमा प्रार्थना: जाप पूरा होने के बाद माँ की आरती करें और पूजा में या जाप में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगें।
 मंत्र जाप करते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए ?

भाईसाहब, यह इस लेख का सबसे इम्पोर्टेंट पार्ट है। इसे बहुत ध्यान से पढ़ना।

  • गुरु का मार्गदर्शन: सच कहूँ तो, बगलामुखी जैसी तीव्र साधना हमेशा किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करनी चाहिए। उनके बिना इसमें खतरा हो सकता है।
  • ब्रह्मचर्य का पालन: जितने दिन भी आपकी साधना चले, आपको पूरी तरह से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। मन, वचन और कर्म, तीनों से।
  • गलत इरादा न रखें: इस मंत्र की शक्ति का उपयोग कभी भी किसी निर्दोष को परेशान करने या किसी का बुरा करने के लिए नहीं करना चाहिए। वरना इसका उल्टा असर आप पर ही हो सकता है, समझे?
  • सात्विक भोजन: साधना के दौरान लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा जैसी तामसिक चीज़ों से बिलकुल दूर रहें।
  • गोपनीयता: अपनी साधना के बारे में किसी को ढिंढोरा न पीटें। इसे जितना गुप्त रखेंगे, उतना ही अच्छा फल मिलेगा।
  • बीच में न छोड़ें: आपने जितने दिन या जितनी संख्या का संकल्प लिया है, उसे पूरा ज़रूर करें। बीच में साधना को अधूरा न छोड़ें।
 निष्कर्ष: आपकी हर समस्या का एक आध्यात्मिक हल
 

तो भाई, देखा आपने? माँ बगलामुखी का मंत्र कोई साधारण मंत्र नहीं, बल्कि यह तो एक महा-अस्त्र है। यह आपके जीवन की दिशा बदल सकता है। यह सिर्फ आपके बाहरी दुश्मनों को ही नहीं, बल्कि आपके अंदर के डर, आलस, नेगेटिव विचारों जैसे दुश्मनों को भी खत्म कर देता है।

लेकिन एक बात हमेशा याद रखना, प्रभु की लीला भी कुछ होती है। मंत्र एक टूल की तरह है, एक साधन है। असली शक्ति तो आपकी श्रद्धा, आपके विश्वास और आपकी भक्ति में है। जब आप पूरे दिल से, पूरी पवित्रता से माँ की शरण में जाते हैं, तो वो आपकी मदद ज़रूर करती हैं।

अगर आप जीवन में ऐसी किसी भी बाधा से परेशान हैं जिसके बारे में हमने ऊपर बात की, तो एक बार माँ पीताम्बरा की साधना करके देखिए। आपको जो अनुभव और जो रिजल्ट्स मिलेंगे, वो शायद आपने सोचे भी नहीं होंगे। सही है न?

जय माँ बगलामुखी!

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das mahavidya दस महाविद्या सनातन धर्म का एक गूढ़ रहस्य

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das mahavidya दस महाविद्या सनातन धर्म का एक गूढ़ रहस्य मैं लगातार सर्च कर रहा था 10 महाविद्याओं पर। ये महाविद्या शाक्त परंपरा के अंतर्गत आती हैं। ये मां के उग्र और सौम्य रूप हैं। एक जगह लिखा हुआ था कि यह तंत्र की देवियां हैं। मां काली एक आदि शक्ति का रूप हैं और उन्हीं के बाकी रूप उन्हीं के रूप हैं।

बहुत ज्यादा पोटेंट पावर है। क्यों 10 महाविद्या को एक सीक्रेट बनाकर रखा? विद्या एक्चुअली एक बहुत गूढ़ रहस्य है। ये एक मिस्ट्री से सराउंडेड है। तो क्या मां काली की जो पूजा है वो घर के मंदिर में होनी चाहिए?

महाकाली की आप फोटो रख सकते हैं, मूर्ति के बहुत सारे अपने विधि विधान होते हैं। द बेस्ट करना है अगर आप दिव्य रहना चाहते हैं हर जगह पर तो फिर आपको दस महाविद्याओं से जुड़ना चाहिए। मैं ये कहना चाहूंगी, दैट हमें अपने रूट्स पे वापस जाना चाहिए। हर घर में महाविद्या का ज्ञान सबको होना चाहिए।

हमें अपने घर की प्रोटेक्शन करनी आनी चाहिए। हमारा कनेक्शन अगर डायरेक्टली भगवान से है तो हमें तीसरे इंसान की जरूरत नहीं है। व्हाई डोंट यू बिकम ? भी शायद पुराने जमाने में लोग बहुत ज्यादा सफिशिएंट थे और अब वो कहीं ना कहीं कमी हमें खल रही है।

दस महाविद्याओं की खोज

सनातन धर्म के अंदर तीन संप्रदाय हुए। एक वैष्णव संप्रदाय जो भगवान विष्णु की पूजा करते थे, एक शैव संप्रदाय जो कि भगवान शिव की पूजा करते थे और तीसरा संप्रदाय शाक्त संप्रदाय जो मां शक्ति की, आदि शक्ति के रूपों की पूजा करते थे।

 शाक्त परंपरा को जब आप पढ़ने के लिए निकलते हैं तो आपको शाक्त परंपरा की 10 महाविद्याओं की बात पता लगती है। मैंने जब इसके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की तो मुझे, जब आप उनके फोटोज को देखते हैं तो आपको लगता है कि अरे ये एक दूसरे से इतना अलग हैं। 

और इतने ज्यादा विचित्र हैं कि आपको वह पहेली सुलझने की जगह उलझती चली जाए। और जैसे ही मुझे पता लगा कि  मेरे कांटेक्ट में एक ऐसे शख्स हैं जिन्होंने दस महाविद्या पर एक रिसर्च की है। 

जिसका रिसर्च पेपर ऑक्सफोर्ड में छपने जा रहा है, उन्होंने एक बुक पब्लिश उनकी होने वाली है जो कि 10 महाविद्याओं पर ही है तो मैं फिर खुद को नहीं रोक पाया और मैं सीधे डॉक्टर मनमीत को मैंने फोन लगाया और बात करने की कोशिश की।

उन्होंने मुझे कई ऐसी बातें बताईं 10 महाविद्याओं के बारे में जो मुझे नहीं मिल रही थीं कहीं जानने के लिए।  दस महाविद्याओं के बारे में हमसे बहुत कुछ छिपाया गया। क्यों? इस सवाल का जवाब आपको मिलेगा इस लेख में जो कि बहुत इंटरेस्टिंग है।

अगर आप अब तक हमारे लेख पढ़ते रहे हैं तो आप जानते हैं कि हमारे लेखों में आपका कोई टाइम वेस्ट नहीं होगा बल्कि आपको बहुत कुछ जानने के लिए मिलेगा। तो चलिए, हम शुरू करते हैं आज का यह लेख।

आपकी जिंदगी में इसकी बहुत जरूरत है लेकिन इससे आपको किसी ना किसी वजह से दूर रखा गया। ये एक अलग विषय है इस पर हम फिर कभी बात कर लेंगे।

लेकिन मैं लगातार सर्च कर रहा था काफी दिनों से बल्कि काफी हफ्तों से दस महाविद्याओं पर और दस महाविद्याओं पर मैंने जब सर्च करना शुरू किया तो एक जगह लिखा हुआ था कि ये तंत्र की देवियां हैं।

जी, अगर देवी तो देवी हैं, भगवान तो भगवान हैं। अब वो तंत्र की हैं तो क्या एक आम आदमी को उनकी पूजा नहीं करनी चाहिए ? दूसरा सवाल मेरे मन में ये आता है कि क्या ये तंत्र की ही देवियां हैं ? सिर्फ तांत्रिक लोग पूजा करें ? क्यों? क्योंकि देखिए वहां पर यह भी है कि यह 10 जो रूप हैं, यह एक्सपर्ट्स हैं, यह 10 महाविद्या हैं।

अब महाविद्या की जरूरत तो एक आम आदमी को भी होनी चाहिए। मैं अपने घर में मंदिर में अगर पूजा कर रहा हूं, मां लक्ष्मी से पैसा मांग रहा हूं, कृष्ण जी से अगर मैं सच्चा साथी मांग रहा हूं, किसी दूसरे भगवान से कुछ और मांग रहा हूं, तो दस महाविद्याओं के बारे में मैं क्यों नहीं पूजा कर रहा ? मैं उनके बारे में क्यों नहीं जानता ? मुझे बचपन से क्यों नहीं सिखाया गया दस महाविद्याओं के बारे में? क्यों दस महाविद्याओं को एक सीक्रेट बनाकर रखा गया ?

बहुत ही इंटरेस्टिंग पोस्ट है ये। 10 महाविद्या एक्चुअली एक बहुत गूढ़ रहस्य है। ये एक मिस्ट्री से सराउंडेड है। मां पार्वती के 10 रूप हैं और यह कहना ठीक नहीं होगा कि यह केवल तांत्रिकों को ही सिद्धियां देती हैं। यह अपनी अचूक सिद्धियां जो हैं वो भक्तों को भी देती हैं।

लेकिन इनके बारे में हमें क्यों नहीं बताया गया, इसके दो कारण हैं। सबसे पहला कारण यह है कि ये मां के उग्र और सौम्य रूप हैं लेकिन जो उग्र रूप हैं उनकी सही तरीके से जो पूजा की जानी चाहिए उसका ज्ञान कहीं ना कहीं जनरेशन टू जनरेशन खो गया है।

और यह सबको पता है कि अगर इनकी सही तरीके से पूजा ना की जाए तो इस एनर्जी को आप हैंडल नहीं कर सकते। दूसरा यह है कि रिलीजन के साथ आप मानेंगे, धर्म के साथ हमेशा फियर जुड़ा हुआ होता है।

कुछ ऐसे लोग हैं जो यह ज्ञान हर जगह पहुंचाना नहीं चाहते क्योंकि उनको लगता है कि अगर सबके पास ये गूढ़ ज्ञान चला गया तो उनकी वैल्यू लाइफ में खत्म हो जाएगी।

उनका बिजनेस बंद हो जाएगा। जी। तो जब पिछले साल जब मेरे को मां काली का सपना आया था, उन्होंने मुझे कहा था कि आप 10 महाविद्या की वर्कशॉप करो, आपको सच बताऊं तो काफी कन्फ्यूजिंग था मेरे लिए क्योंकि मैं सिर्फ ऐसे लोगों के साथ डील नहीं करती जो सिर्फ धर्म में और एक भक्ति मार्ग पर ही चलते हैं।

मैं बहुत प्रैक्टिकल लोगों के साथ भी डील करती हूं, कॉरपोरेट्स के साथ डील करती हूं। ऐसे लोगों के पास जिनके पास आधे से एक घंटे से ज्यादा दिन में भक्ति करने का वक्त नहीं है। उनके ऊपर बहुत रिस्पॉन्सिबिलिटीज हैं। तो 10 महाविद्या जैसा ज्ञान एक सिंपल आदमी को देना जिसके ऊपर बहुत सारी सांसारिक रिस्पॉन्सिबिलिटीज हैं, वह अपने में एक चैलेंज था।

लेकिन मेरे को यह दिखाया गया कि आप प्रैक्टिकल लाइफ में इसको बिल्कुल सिंपल बना के लोगों को समझाओ। और इसी के चलते हम आज यह लेख भी लिख रहे हैं और आपका क्वेश्चन जो है, इसको कैसे हम सिंपलीफाई कर सकते हैं और कैसे अपनी लाइफ में इस ज्ञान को यूज कर सकते हैं।

आपने एक बात बहुत इंटरेस्टिंग यहां पर कही कि कुछ लोगों ने इस महाज्ञान को, इस महाविद्या के ज्ञान को बहुत ही एक सीक्रेट बनाकर इसलिए रख दिया जिससे कि यह उनके पास रहे और जो एक आम आदमी है वो बेसिकली इसको दूर से ही देखे तभी वो मेरे पास आएगा और मुझसे पूछेगा कि ये क्या है फिर मैं अपना बिजनेस उससे रन करूंगा।

क्या हैं दस महाविद्या ?

अगर हम इससे हटकर भी आगे देखें, अगर एक आम आदमी महाविद्या से जुड़ना चाहता है, पहले तो मैं आपसे ये भी समझना चाहूंगा कि महाविद्या हैं क्या? क्योंकि जब मैं सर्च कर रहा था, जब मैं पढ़ रहा था इनके बारे में तो मुझे दस महाविद्याओं ने बड़ा ही एक शॉकिंग एक्सप्रेशन मेरे मन के अंदर आया।

क्यों? एक देवी हैं जो 16 साल के रूप में रहती हैं हमेशा, एक देवी उसमें ऐसी हैं जो विधवा के वेश में खड़ी हैं, एक ऐसी हैं जिन्होंने अपने ही हाथ से अपनी गर्दन काटी हुई है, एक मां काली का रूप है तो अलग-अलग रूप हैं और सब एक दूसरे से बहुत डिफरेंट हैं। और एक बहुत ही शॉकिंग है कि ऐसा क्यों? देवी का तो महाविद्या बेसिकली क्या हैं ? इनकी जरूरत क्यों पड़ी? यह हमारे धर्म के अंदर, सनातन धर्म में क्यों एग्जिस्ट करती हैं ? क्या है यह महाविद्या?

दस महाविद्याओं का स्वरूप और उद्देश्य

दस महाविद्या शाक्त परंपरा के अंतर्गत आती हैं और इनके बारे में कुछ भी बोलने से पहले मैं इस श्लोक से शुरू करना चाहूंगा 

दस महाविद्या के नाम

काली तारा महाविद्या षोडशी भुवनेश्वरी।

भैरवी छिन्नमस्ता च विद्या धूमावती तथा॥

बगला सिद्धि विद्या च मातंगी कमलात्मिका।

एता दस महाविद्या सिद्धि विद्या प्रकीर्तिता॥

यह जो श्लोक है, यह इसमें सब 10 महाविद्या के जो हैं वो नाम बताए गए हैं। अगर हम इसको बिल्कुल सिंपलीफाई करें अपने पाठकों के लिए भी, तो यह जो 10 महाविद्या, यह हमारी लाइफ की डिफरेंट स्टेजेस हैं।

जैसे हमारी लाइफ में एक स्टेज आती है जब हम, जब हमारी लाइफ से किसी की डेथ हो जाती है, उसका या हम अपनी लाइफ में ट्रांसफॉर्मेशन लाने की कोशिश करते हैं। तो वो क्या है? तो 10 महाविद्या से हम बहुत तरीके से अपनी लाइफ के साथ उनको को-रिलेट कर सकते हैं।

पहले यह 10 महाविद्या किस-किस तरीके से हैं, मैं उनके नाम आपको बताती हूं। सबसे पहले हैं मां काली। यह भी कहा जाता है कि मां काली के ही बहुत सारे बाकी जो रूप हैं वो बाकी की महाविद्यास हैं।

 मां काली एक आदि शक्ति का रूप हैं और उन्हीं के बाकी रूप बाकी की महाविद्या हैं, उन्हीं के रूप हैं वो। तो सबसे पहले मां काली हैं, उसके बाद मां तारा हैं, मां छिन्नमस्ता हैं, उसके बाद मां षोडशी हैं जिनको हम मां त्रिपुर सुंदरी भी कहते हैं, मां ललिता भी कहते हैं। उसके बाद मां भुवनेश्वरी हैं, उसके बाद मां भैरवी हैं जिनको हम त्रिपुर भैरवी भी कहते हैं।

उसके बाद मां धूमावती हैं, मां बगलामुखी हैं, मां मातंगी हैं और मां कमलात्मिका हैं। अब इनमें से कुछ के नाम आपने जरूर सुने होंगे जैसे कि मां बगलामुखी, इनके बारे में सब बात करते हैं कि यह दुश्मनों को हर लेती हैं और कोर्ट केसेस वगैरह में आपकी बहुत हेल्प करती हैं।

 कुछ-कुछ महाविद्या के बारे में हम जानते हैं और कुछ-कुछ के बारे में हम नहीं जानते। और जिनके बारे में जानते हैं उनके बारे में भी बहुत ही सीक्रेट तरीके से कहा जाता है कि नहीं, इनकी पूजा हर किसी को नहीं करनी है, गलत तरीके से नहीं करनी है, नहीं तो ये आपको नुकसान कर सकती हैं।

तो क्या कोई भी देवी नुकसान कर सकती हैं ?

कोई भी देवी नुकसान नहीं कर सकतीं पर यह जैसे कि आप समझिए कि यह बहुत ज्यादा पोटेंट पावर है। अगर एक छोटा बच्चा है और हम उसको बिजली की नंगी तार दे दें तो चांसेस हैं कि उसको शॉक लग सकता है।

वो एनर्जी हैंडल कैसे करे? क्योंकि वो एनर्जी वो जो फ्लो कर रही है, अगर उसके आसपास प्रोटेक्टिव लेयर नहीं लगाई गई तो वो जो करंट की तार है वो एक इंसान को मार भी सकती है।

तो उसके ऊपर जो वो प्लास्टिक की प्रोटेक्टिव वायर लगाई जाती है वो एक सही ज्ञान है जिससे वह एनर्जी आपकी लाइफ में एक अच्छा काम करेगी, लाइट देगी आपको लेकिन आपको शॉक नहीं देगी। तो शॉक से बचने के लिए, लेकिन अगर आपका क्वेश्चन मैं ऐसे आंसर करूं कि लोगों को क्या डरना चाहिए इनसे ? बिल्कुल नहीं डरना चाहिए।

यह मां का, इनके अंदर मातृत्व भी है, इनके अंदर स्ट्रिक्टनेस भी है, डिसिप्लिन भी है। लेकिन क्या उस टाइप के डिसिप्लिन को एक आम इंसान हैंडल करने के लिए तैयार है ?  आप छिन्नमस्ता की पूजा अगर करना चाहते हैं तो आपको पहले एक सौम्य रूप से शुरू करना होगा और फिर ग्रैजुअली वहां जाना होगा।

जैसे आप फोर्थ क्लास में सीधा 12th क्लास की पढ़ाई नहीं कर सकते, आप हैंडल ही नहीं कर पाएंगे, आपको समझ में ही नहीं आएगा। तो आपको फिफ्थ क्लास, सिक्स्थ क्लास, सेवंथ क्लास। तो क्या अगर जो लोग महाविद्या के द्वारा चुने गए होते हैं, मैं नहीं सोचती कि हम महाविद्या को चुन सकते हैं, ये हमें चुनते हैं हमारे पूर्व जन्मों के हिसाब से।

दस महाविद्या और नवग्रह

क्या मैं इन्हें अपने प्लेनेट से कनेक्ट कर सकता हूं कि मेरी लाइफ में इस तरीके की परेशानी या मैं इस तरीके की जिंदगी जी रहा हूं तो मुझे इस तरीके की एनर्जी ज्यादा चाहिए?

मान लीजिए कि मुझे कोई कार्डियो की दिक्कत है तो मैं कार्डियोलॉजिस्ट के पास, उनसे उस तरीके के ड्रग लूंगा या फिर दवाइयां लूंगा जो मेरी कार्डियोलॉजी की प्रॉब्लम को ठीक करते हों, दिल की बीमारी को ठीक करते हैं।

तो कैसे मैं ये समझूं कि मेरे प्लेनेट, क्या मुझे प्लेनेट बता सकते हैं, मेरी प्लेनेट पोजीशन बता सकती है कि मुझे इस महाविद्या को मनाना चाहिए, पूजा करनी चाहिए, इस महाविद्या का आशीर्वाद चाहिए? क्या ये पॉसिबल है?

बिल्कुल पॉसिबल है और ये उनको डिकोड करने का एक बहुत अच्छा तरीका है। तो सबसे आज की डेट में सबसे इंटरेस्टिंग प्लेनेट है राहु। क्यों? क्योंकि हम राहु की ही दुनिया में रह रहे हैं। सोशल मीडिया क्या है? राहु है। टेक्नोलॉजी क्या है? राहु है।

यह लेख कैसे प्रकाशित हो रहा है? राहु के थ्रू हो रहा है। तो राहु जो है वो आज की दुनिया को रूल करता है। जबकि राहु को सबसे खराब मानते हैं। हां, मानते हैं। लेकिन जिन लोगों को सक्सेस देता है, सक्सेस की जिन ऊंचाइयों पर राहु पहुंचा सकता है वो कोई भी नहीं पहुंचा सकता। तो राहु को रूल करती हैं मां छिन्नमस्ता। 

तो जब राहु की महादशा शुरू होती है या की अंतर्दशा चल रही होती है, राहु खराब रिजल्ट दे रहा होता है तो हमें जाना है मां छिन्नमस्तिका के मंदिर। मां छिन्नमस्तिका का मंदिर है राजरप्पा, झारखंड में।

और नॉर्थ में इनका जो टेंपल है उसको हम चिंतपूर्णी कहते हैं जो ऊना में है, हिमाचल में। तो मां छिन्नमस्ता राहु को रूल करती हैं। और दूसरा प्लेनेट हम जिससे बहुत डरते हैं शनि, वो है शनि। और शनि को कौन रूल करता है? महाकाली।

तो मां काली की साधना जब आपकी शनि की साढ़े साती, शनि की ढैया या आपका शनि वेल प्लेस्ड नहीं है तो मां काली की पूजा हम करेंगे। और तीसरा प्लेनेट जिसकी दशा में सब बहुत डरते हैं वो है केतु। क्योंकि केतु आपको हर चीज से डिटैच कर सकता है और कर देता है।

तो केतु एक बहुत ही डिवोशनल प्लेनेट भी है क्योंकि आपको भक्ति के मार्ग पे ले जाता है लेकिन कहीं से हटा के ही लेकर जाता है। तो अगर आपके सेकंड हाउस में केतु बैठ गया है तो आपको आपकी फैमिली से, धन से, आपको डिटैच कर देगा एक सर्टेन एज के बाद और आपको आध्यात्म में ले जाएगा अगर आपके बाकी प्लेनेट एक तरीके से हैं।

अगर आपका केतु आपके मैरिज के घर में बैठ गया है तो आपका डिवोर्स होने के काफी अच्छे चांसेस हैं। ठीक है? तो केतु को कौन रूल करता है? केतु को रूल करती हैं मां धूमावती।

तो अगर आपका केतु का प्लेसमेंट खराब है या केतु का आपको कोई डर है क्योंकि केतु बहुत सडनेस का प्लेनेट है, सडन आपको कुछ हो जाएगा, सडन डेथ, सडन एक बीमारी निकल आई, कहां से आई, कुछ नहीं पता। तो यह जो सडनेस का प्लानेट है वो है केतु और उनकी जो, उनसे बचने के लिए जो मां हैं वो हैं मां धूमावती।

एक और प्लेनेट जिसको बहुत सारे लोग जिससे डरते हैं वो है मंगल। अगर मंगल खराब हो तो बहुत चीजें खराब हो जाती हैं। मंगल क्या है? मंगल करेज है। क्या हमारे में वो करेज है कि हम किसी चीज को बोल्डली फेस कर सकें? और उसकी जो देवी हैं वो हैं मां बगलामुखी।

तो जब हम अपने शत्रुओं का पूरी तरीके से सामना कर सकते हैं और उनके सामने डरेंगे नहीं, ये स्ट्रेंथ लेने के लिए हमें मां बगलामुखी के पास जाना है जिनके टेंपल्स दतिया में भी हैं और हिमाचल में भी हैं। है ना? तो यह तो हो गए चार मेन प्लेनेट जो मैंने आपको बताए।

अब आया सन। सन को कौन रूल करता है? सन को रूल करती हैं मां मातंगी। अभी मैं आपको जैसे इन महाविद्यास के बारे में थोड़ा सा बताऊंगी। महाविद्या को किससे जोड़ते ? मां मातंगी सन को रूल करती हैं।

जुपिटर जो बृहस्पति है, उनको रूल करती हैं मां तारा। तो बहुत सारे लोग अपना जुपिटर ठीक करने के लिए तारापीठ जाते हैं जो कोलकाता से तीन से चार घंटे की दूरी पर है।

पर जैसा कि मैंने आपको कहा, आप नहीं जा सकते, मां आपको बुलाएंगी। अगर आपकी किस्मत में होगा तो ऐसा होगा। और ये सारे प्लानेट, अब रह गया बुध। बुध को रूल करती हैं मां षोडशी। तो यह सारे जो प्लेनेट हैं इनको यह महाविद्या रूल करती हैं।

दस महाविद्याओं का विस्तृत परिचय

 

1 मां काली (रूपांतरण की शक्ति)

gold and black hindu deity figurine

मां काली काल की भक्षक हैं, वो पूरा ब्रह्मांड हैं और वो एक ऐसी शक्ति हैं जो अपने में परिपूर्ण हैं। लेकिन मां काली का जन्म तब हुआ जब मां पार्वती को इतना तेज एंगर फील हुआ, इतना तेज गुस्सा फील हुआ कि उसके मारे वो क्रोध के मारे उनकी पूरी स्किन जो है वो ब्लैक हो गई और उनको अपने सौम्य रूप से उग्र रूप में आना पड़ा क्योंकि उनको दुनिया को यह दिखाना था कि एक नारी एक पुरुष के बिना भी कुछ कर सकती है।

डिवाइन फेमिनिन। तो उनको शिवजी ने बोला, उन्होंने कुछ तो बताया उनको। तो शिवजी ने उनको बोला कि यह आप खुद ही क्यों नहीं कर लेतीं? तो उनको लगा, चुनौती दी जैसे कि। तो उनको लगा कि हां, और यह जो उनका फॉर्मेट, आप यह भी देखिए कि हमारे वेदों में पहले सीता मां को ही आइडियल मानते थे। तो काफी टाइम तक जो एक नारी का फॉर्म था

जिसको सब लोग आइडियल मानते थे, वो थीं मां सीता। और फिर क्या हुआ कि इंडिया के ऊपर बहुत हमले होने लग गए, मुगलों के हमले होने लग गए और नारियों के लिए काफी नहीं था कि वो मां सीता ही बन के रहें। सही बात। उनको भी शस्त्र उठाने थे, उनको भी जंग लड़नी थी।

आप कितनी सारी वीरांगनाओं के बारे में जानते हैं जैसे कि मां लक्ष्मीबाई वगैरह जहां पे उन लोगों ने एक नारी होते हुए अपना बच्चा बांध के पूरी जंग उन्होंने लड़ी। बिल्कुल। तो ये शक्ति कहां से आई? जो भगवान होते हैं वो अपना रूप बार-बार बदलते रहते हैं संसार के साथ।

जैसे श्री कृष्ण ने पहले राम का अवतार लिया और उसके बाद कृष्ण का अवतार लिया। उस समय जो जरूरत थी दुनिया को, संसार को, वह जरूरत थी शक्ति की। तो जो शाक्त परंपरा है वो वहां से शुरू हुई और शक्ति के बहुत सारे फॉर्म्स जो हैं वो 10 महाविद्या हैं।

तो एक नारी को सिर्फ सौम्य रहना नहीं सिखाया गया, एक नारी को एक उग्र फॉर्म भी सिखाया गया कि अगर आपको अपने घर की, अपने बच्चों की रक्षा करनी है तो आपको भी एक पावरफुल फॉर्म में आना है।

तो मां काली वो पावरफुल फॉर्म का सबसे बड़ा रूप हैं। और मां काली का जो एक वर्ड मैं यूज करूंगी, ट्रांसफॉर्मेशन। मां काली ट्रांसफॉर्म कर देती हैं अपनी लाइफ को।

2  मां तारा (करुणा की शक्ति)

a statue of a hindu god with multiple arms and legs

मां तारा की एनर्जी कंपैशनेट है लेकिन और भी फियर्स है। आपको याद है कि मां तारा को रावण ने इनवाइट किया था और रावण ने उनकी, उनको सिद्ध किया था और उसने अपने एक-एक करके सारे सर उनको दान कर दिए थे हवन कुंड में कि कैसे नहीं आएंगी।

आखिर में उसने कहा कि अगर ऐसा नहीं है कि आप आ सकती हैं तो फिर मेरे जीवन का कोई अर्थ नहीं, मैं अपना आखिरी सर भी काट रहा हूं। और उनको विवश होकर आना पड़ा क्योंकि मां तारा को पता था कि रावण जो युद्ध लड़ रहा है वह धर्म के अगेंस्ट है।

 लेकिन फिर भी उनको मजबूर होकर आना पड़ा पर उन्होंने एक शर्त रखी थी। उन्होंने कहा कि अगर तुम धर्म के अगेंस्ट गए कम से कम लॉजिस्टिक्स में, तो मैं तुम्हारा साथ छोड़ दूंगी।

और यह हम सबको पता है कि रावण ने सूर्यास्त के बाद जो ब्रह्मास्त्र उठाया था और उसी समय मां तारा ने उनको छोड़ा और एक यह बहुत बड़ा रीजन है उसकी हार का।

उसको भी पता था कि जब तक मां तारा मेरे साथ, वो हालात बने जिसमें रावण का वध हो। बिल्कुल। वो हालात ही ऐसे बनाए गए कि उसका। तो यह है मां तारा की एनर्जी। मां तारा जहां कहते हैं, हम तारापीठ हैं, वहां पे मां सती के नेत्र गिरे थे।

3 मां छिन्नमस्ता (आत्म-बलिदान और अहंकार का नाश)

Chinnamasta Sadhana - छिन्नमस्ता साधना मंत्र प्रयोग सहित Ph.85280 57364
Chinnamasta Sadhana – छिन्नमस्ता साधना मंत्र प्रयोग सहित Ph.85280 57364

 मां छिन्नमस्ता। मां छिन्नमस्ता एक ऐसे फॉर्म हैं जैसे आपने कहा, उनका सर कटा है, उन्होंने खुद ही अपना सर काटा है और तीन रक्त की धाराएं बह रही हैं। एक जया विजया के मुंह में जा रही है, एक उनके खुद के मुंह में जा रही है।

तो एक तो सैक्रिफाइस की एनर्जी दिखाती हैं और एक ये यह दिखाता है कि हम कैसे अपनी ईगो को काट सकते हैं। तो जब हमारा सर, और इसीलिए यह मां जो हैं राहु को वो करती हैं। राहु का भी सर कटा हुआ है और राहु ईगो डोनेट करता है, राहु इल्यूजन दिखाता है।

 मां छिन्नमस्ता कहती हैं कि अपनी ईगो को मार दो और उनका जो पैर है वो कामदेव और रति के ऊपर है। तो अपनी वासनाओं को भी मारो, अपनी ईगो को भी मारो।

दस महाविद्या में बड़ा विचित्र सा रूप, सबसे ज्यादा विचित्र रूप अगर मैं कहूं तो छिन्नमस्ता का है। बहुत और बहुत पावरफुल है ये।

तो मैं ये नहीं कहूंगी कि कोई भी उनका मंत्र एकदम से शुरू कर दे। उनका जो एक बीज मंत्र है वो आप कर सकते हैं। बट आप इतनी बड़ी एनर्जी को टच करने से पहले स्टेप बाय स्टेप जाएं। इसीलिए इनका एक क्रमांक है, महाकाली से शुरू करें और इसी तरीके से जाएं।

4 मां षोडशी (त्रिपुर सुंदरी – सौंदर्य की देवी)

 

Tripur sundari sadhana त्रिपुर सुंदरी साधना - रोग नाश और यौवनता के लिए
Tripur sundari sadhana त्रिपुर सुंदरी साधना – रोग नाश और यौवनता के लिए

 मां षोडशी या मां त्रिपुर सुंदरी जिनको 16 साल की दिखाया गया है और उनको बताया गया है कि हम इस एज में भी इतने पावरफुल होते हैं। वो इतनी सुंदर हैं कि ब्रह्मांड की सारी सुंदरता उनके अंदर है और हम इसको सिर्फ सुंदर देखने की जगह अगर यह देखें कि अगर हम इनकी पूजा करें तो हमें हर चीज में और हर इंसान में सुंदरता दिखेगी कि हम, हमारा नजरिया सुंदर हो जाएगा।

 यह बहुत सारे लोग कहते हैं कि सौंदर्य की देवी हैं, अगर आपको अपना सौंदर्य बढ़ाना है तो आपको इनके पास जाना चाहिए। पर मैं कहती हूं कि अगर आपको अपनी आंखें बदलनी हैं तो आपको इनके पास जाना चाहिए क्योंकि आपकी आंखें सुंदर होंगी तो आपको सब कुछ सुंदर लगेगा, नजरिया आपका बेहतर हो जाएगा।

5 मां भुवनेश्वरी (ब्रह्मांड की शासक)

भुवनेश्वरी साधना के लाभ - bhuvaneshwari sadhana ki labh ph .85280 57364
भुवनेश्वरी साधना के लाभ – bhuvaneshwari sadhana ki labh ph .85280 57364

 मां भुवनेश्वरी। पूरी ब्रह्मांड की, को कॉस्मिक रूलर जिसे हम कहते हैं, वो मां भुवनेश्वरी हैं। उनसे आप क्या मांग सकते हो ? शी इज द गॉडेस ऑफ मेनिफेस्टेशन। कुछ भी मांग सकते हो। हां, वो उनका एक वो है, आधिपत्य है सारे ब्रह्मांड के ऊपर और उनसे आप कुछ भी मांग सकते हैं। शी इज द गॉडेस ऑफ मेनिफेस्टेशन।

6 मां काल भैरवी (काल को नियंत्रित करने वाली)

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 मां भैरवी जिनके कंसर्ट खुद काल भैरव हैं। जी, तो मां भैरवी काल को कंट्रोल करती हैं। मां भैरवी कहती हैं कि कुछ भी सुंदर और ना सुंदर नहीं है।

अगर दुनिया तुम्हारे अगेंस्ट जा रही है और तुम्हें अकेले के लिए खड़े रहना है तो तुम खड़े रहो। ना तुम दूसरों को जज करो, ना तुम किसी की जजमेंट को लो। तो जब लोगों को करेज की बहुत जरूरत होती है तो हम कहते हैं कि आप मां भैरवी की आराधना करें।

7 मां धूमावती (विधवा स्वरूप और त्याग)

 

dhumavati SADHNA प्राचीन धूमावती साधना अनुभव और लाभ PH.8528057364
dhumavati SADHNA प्राचीन धूमावती साधना अनुभव और लाभ PH.8528057364

 मां धूमावती। मां धूमावती को एक विधवा दिखाया गया है और सीक्रेट दिखाया गया है और वो बिल्कुल भक्ति के पथ पर हैं। मां धूमावती को आपको मालूम है कि उनका नाम कहां से आया? धुएं से आया जिसमें सती ने अपना सैक्रिफाइस किया था।

उसका जो, उस हवन से जो धुआं निकला था वो मां धूमावती को डिनोट करता है कि सैक्रिफाइस का धुआं भी वेस्ट नहीं जाता, वो भी अपने में एक एनर्जी इतनी स्ट्रॉन्ग लेके चलता है। तो यह केतु को कंट्रोल करती हैं, सडनेस को कंट्रोल करती हैं और इनको एक बहुत ही विडो के फॉर्म में दिखाया गया है, विद ओपन हेयर। और ओल्ड।

हां, और एक क्रो पे हैं और कहते हैं कि जो मैरिड लेडीज होती हैं उनको मां धूमावती के पास नहीं जाना चाहिए। मां धूमावती का एक टेंपल बनारस में है लेकिन ज्यादातर इन सब महाविद्यास का जो मेन टेंपल है, इनकी पीठ अलग होगी लेकिन मां कामाख्या के साथ इनके ये जो 10 महाविद्या हैं वो एस्टेब्लिश हैं।

8 मां बगलामुखी (शत्रुओं का नाश)

 

devi baglamukhi ki kahani बगलामुखी माता की कहानी - उत्पत्ति, महत्व और पौराणिक कथा
devi baglamukhi ki kahani बगलामुखी माता की कहानी – उत्पत्ति, महत्व और पौराणिक कथा

मां बगलामुखी। मां बगलामुखी आई थिंक सबसे ज्यादा फेवरेट और कॉमन हैं क्योंकि मां बगलामुखी शत्रुओं का नाश करती हैं और पीले कपड़ों से उनको डोनेट, वो डिनोट होती हैं और पीली चीजें, पीले वस्त्र, यही सब उनका होता है। वो बहुत ज्यादा पावरफुल हैं, बहुत ज्यादा पावरफुल हैं।

लेकिन लोग कहते हैं कि इनसे हमारे लीगल केसेस खत्म हो जाएंगे, इनसे हमारे शत्रु खत्म हो जाएंगे। लेकिन मैं यह कहती हूं कि आपके अंदर जो शत्रु है उसका क्या? हां, एक बाहर के शत्रु, एक आपके खुद के। और एक आप खुद के। तो अगर आपका फियर है, डाउट है, जेलेसी है, इंडिसीजन है, कहीं आप देखोगे लोग जिंदगी भर डिसीजन ही नहीं ले पाते।

घर खरीदना है, घर खरीदना चार साल से बोल रहे, खरीद ही नहीं पा रहे। बिल्कुल। कईयों को इतना ही डर लग जाता है कि वो दूसरों के एक एब्यूज रिलेशनशिप में भी रह जाते हैं कि अगर हमने छोड़ दिया तो फिर हम अकेले रह जाएंगे। तो ऐसे लोगों को ना सिर्फ बाहर की चीज जो कि लीगल केसेस वगैरह हैं .

लेकिन जो अगर आप अंदर अपने आप से जूझ रहे हैं, अंदर आपकी कशमकश चल रही है और शुरू से चल रही है, आप ओवरथिंकिंग करते हैं, आपको नींद नहीं आती तो आपको मां बगलामुखी के पास जरूर जाना चाहिए।

9 मां मातंगी (ज्ञान और कला का तांत्रिक रूप)

swapna matangi स्वप्न मातंगी साधना और स्वप्न वाराही साधना
swapna matangi स्वप्न मातंगी साधना और स्वप्न वाराही साधना

मां मातंगी का जन्म हुआ था जब भगवान शिव और माता पार्वती खाना खा रहे थे और उनका थोड़ा सा खाना बच गया था। तो उसको हम जो जूठन कह देते हैं, उससे उनका जन्म हुआ था। तो ये ऐसी क्लास की, क्लास को रिप्रेजेंट करती हैं जिनको बाकी लोग एक्सेप्ट नहीं करते। लोअर क्लास हम कह सकते हैं। लेकिन ये मां सरस्वती का तांत्रिक रूप हैं।

अगर हम मां मातंगी को, मुझे सबसे ज्यादा फैसिनेट करती हैं मां मातंगी, कि अगर कोई आराधना करे तो उसको इतना डीप ऑकल्ट का नॉलेज हो सकता है कि सबसे ज्यादा गूढ़ ज्ञान क्योंकि ज्ञान की देवी मां सरस्वती हैं और उसका तांत्रिक फॉर्म ये हैं।

तो ये एक वीणा के साथ हैं और उनके साथ एक ग्रीन पैरेट होता है। इट्स अ वेरी ब्यूटीफुल पिक्चर। और ये बिल्कुल मंद-मंद मुस्का रही हैं और ये इस तरीके से अपने आप को डिपिक्ट करती हैं।

10 मां कमलात्मिका (समृद्धि का तांत्रिक रूप)

 

कमला महाविद्या साधना ( करोड़पति बनने की साधना ) साधना अनुभव के साथ  kamala mahavidya sadhnaगुरु मंत्र साधना .कॉम में स्वागत है आज हम कमला महाविद्या साधना साधना पर
कमला महाविद्या साधना ( करोड़पति बनने की साधना ) साधना अनुभव के साथ  kamala mahavidya sadhnaगुरु मंत्र साधना .कॉम में स्वागत है आज हम कमला महाविद्या साधना साधना पर

और आखिरी में हैं मां कमलात्मिका, मां कमला जिनको हम कहते हैं, जो मां लक्ष्मी का तांत्रिक फॉर्म हैं और वो बिल्कुल अपने कमल पर बैठी हैं और चार हाथी उनको नहला रहे हैं और वो बिल्कुल बहुत, मतलब वो इतनी सुंदर हैं और इतनी सुंदर स्माइल है उनकी कि उनको देख के लगता है कि बस अब सब मिल गया।

तो जो 10 महाविद्यास हैं, अभी आपने देखा होगा मैंने दो बार यूज किया वर्ड, ये उनका तांत्रिक फॉर्म है। बिल्कुल, मैं इस पर आने वाला था। हां, तो जो तांत्रिक फॉर्म है इसका यह मतलब है कि इसको, इन फॉर्म से हमें एक डिफरेंट टाइप की नॉलेज मिलती है।

जैसे मां सरस्वती से हमें डिफरेंट टाइप की नॉलेज मिलती है, उन्हीं का एक फॉर्म है जिनसे हमें एक एक्स्ट्रा नॉलेज मिलती है।

11 दस महाविद्या की पूजा और साधना

11 दश महाविद्या की पूजा और साधना
11 दस महाविद्या की पूजा और साधना

जब यह महाविद्या हमें चुनती हैं तो हमें एक डिसीजन लेना होता है लाइफ में कि क्या हम इस पाथ पर चलना चाहते हैं। और अगर हमने डिसाइड किया कि हम इस पाथ पर चलना चाहते हैं तो फिर उसके बाद कोई दो राय नहीं है।

तो यहां क्वेश्चन आता है कि क्या अगर हम महाविद्या के पाथ पर चल रहे हैं तो क्या हमें अपनी नॉर्मल लाइफ को सैक्रिफाइस करना होगा? और यहां पर यह मैं अपने पाठकों को बताना चाहती हूं कि किसी भी भगवान को, स्पेशली दस महाविद्या को अप्रोच करने के दो तरीके हैं, एक पूजा का तरीका और एक साधना का तरीका।

12 पूजा और साधना में अंतर

पूजा और साधना में अंतर
पूजा और साधना में अंतर

पूजा का तरीका तो ठीक है लेकिन जो साधना का तरीका है उसके लिए आपको काफी कुछ गिव अप करना होता है। यह आपकी चॉइस है। ये और मैं थोड़ा सा डिफरेंस जानना चाहूंगा कि पूजा का तरीका क्या हो सकता है और एक साधना का तरीका क्या है ?

मतलब कैसे मैं आइडेंटिफाई करूं? तो आप उनकी ब्लेसिंग्स ले रहे हैं। तो इसकी पूजा जैसे हम आरती करते हैं और कोई भी एक मंत्र करते हैं जो इनका सौम्य मंत्र होता है। साधना एक बिल्कुल अलग तरीका है। उसमें आप एक संकल्प लेते हैं कि आप इतने मंत्र इतने दिन में करेंगे और हर रोज करेंगे और उसके बहुत सारे नियम होते हैं, बहुत सारा डिसिप्लिन होता है।

कई 10 महाविद्या की साधनाएं हैं जिसमें आपको ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है। तो क्या आप तैयार हैं? क्योंकि यह ऐसी एनर्जी नहीं है जिसके साथ आप खेल सकते हैं।

तो अगर आपने डिसाइड किया कि मुझे इनकी साधना करनी है और यह नहीं कि जिंदगी भर ही करनी है, आप यह भी कह सकते, एक साल साधना करना चाहता हूं।

फिर आप उस एक साल के लिए प्रिपेयर्ड हैं। फिर आप उसके बीच में ऑस्ट्रेलिया घूमने और पार्टी करने नहीं जा सकते। राइट? तो हम कितने तैयार हैं, वह ज्ञान है, वह पोटेंसी है पर हम कितने तैयार हैं उसके लिए, यह बहुत ज्यादा जरूरी हो जाता है।

क्या घर में मां काली की पूजा होनी चाहिए ?

a statue of a hindu god with multiple arms and legs

यह बहुत सारे लोगों का डाउट होता है, मेरा भी खुद का डाउट है। मां काली की पूजा घर के मंदिर में एक आम आदमी को कैसे करनी चाहिए? क्या उनकी मूर्ति को रखना चाहिए घर में मां काली की? क्योंकि लोग कहते हैं कि जैसे आपने खुद भी कहा कि ट्रांसफॉर्मेशन की देवी हैं, यह। ज्यादातर मां काली को एक युद्ध के मैदान में देखा गया, समझा गया। तो क्या मां काली की जो पूजा है वो घर के मंदिर में होनी चाहिए और उनकी मूर्ति होनी चाहिए?

मां काली की आप फोटो रख सकते हैं। मूर्ति के बहुत सारे अपने विधि विधान होते हैं और क्योंकि हम सब एक ऐसी जिंदगी में हैं जहां हमें ट्रैवल भी करना होता है, हम सब विधि विधान मान पाएं, ना मान पाएं, एक फोटो आप रख सकते हैं।

आपने कहा कि मां काली को हम युद्ध में देखते हैं। क्या आपको लगता है कि आज के एवरेज आदमी की जिंदगी एक युद्ध से कम है? हर कोई अपनी जिंदगी में हर रोज एक जंग लड़ रहा है। एक हर रोज एक जंग लड़ रहा है। मेरे पास जब महाकाली सपने में आई थीं और उन्होंने डिसाइड किया कि वो मेरे थ्रू कुछ-कुछ काम करवाएंगी, आपको मालूम है कि हम काली दरबार भी करते हैं और यह तभी से है जब से 2017 से मां काली मेरे सपने में आई थीं।

तो उन्होंने मुझे कहा कि आप ऐसा-ऐसा करें और मेरे को बिल्कुल नॉलेज नहीं थी कि हम कैसे कर सकते हैं। तो जैसे-जैसे उन्होंने मुझे बताया वैसे-वैसे मैंने किया और उसके बाद काली दरबार भी शुरू हुआ।

काली दरबार में मैं महाकाली को चैनल करके लोगों को मैसेजेस देती हूं। आज तक काली दरबार से बड़ा कोई भी हमारी वर्कशॉप उससे बड़ी हिट नहीं हुई है। क्या हमें महाकाली की पूजा करनी चाहिए? जरूर करनी चाहिए।

क्या हम सबको एक ऐसा अस्त्र चाहिए जिससे हम इस डार्कनेस को एक मुंहतोड़ जवाब दे सकें? जरूर। और वह अस्त्र है मां काली। लेकिन हम मां काली को किस रूप में पूजना चाहते हैं? क्या हम उन्हें पूजना चाहते हैं ? क्या हम उन्हें सिद्ध करना चाहते हैं ?

आप घर पर बैठ के उनको सिद्ध नहीं कर सकते या लेट्स से कि एक गृहस्थ आदमी के लिए सिद्ध करना काफी मुश्किल है। तो मैं यह कहूंगी कि हमें उनकी पूजा अर्चना करनी चाहिए, उनकी ब्लेसिंग्स लेनी चाहिए, उनके मातृत्व के फॉर्म, उनके मदरहुड के फॉर्म को इनवाइट करना चाहिए।

और जो लोग इसके एक लेवल आगे जाना चाहते हैं वो अमावस्या वाले दिन अपने घर में मां काली का हवन जरूर करें। स्पेशली जिनके घर में चीजें टूटती रहती हैं या उनको लगता है कि कोई एंटिटीज हैं या कुछ नजर दोष है, वो अपने घर में अमावस्या के अमावस्या मां काली का हवन जरूर करें।

मैं कहूंगी कि आप खुद हवन करें चाहे उसमें दो चीजें कम हो जाएं, इट डजंट मैटर। बिकॉज़ रिचुअल से ज्यादा जरूरी है इंटेंशन। और जो आप अपने लिए प्रे कर सकते हैं वो कोई आपके बिहाफ पे प्रे नहीं कर सकता।

किसी के दिमाग में उसके घर की चीजें चल रही होंगी जब वो आहुति डाल रहे होंगे लेकिन आप जब प्रे करेंगे, आप 100% उसमें घुस के प्रे करेंगे क्योंकि दर्द आपको है, ब्लेसिंग्स आप चाहते हैं।

क्यों छिपाया गया दस महाविद्याओं का ज्ञान?

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सबसे बड़ी बात यह है कि आज जिस टाइम पर हम रह रहे हैं उसमें इतनी डार्कनेस है कि हमें इन महाविद्यास के सिवाय कोई नहीं बचा सकता। यह एक उग्र फॉर्म है, यह स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स हैं और पेशेंट्स तो आप देख ही लीजिए। 

मेरे आखिरी लेख के बाद मैं आपको बता ही नहीं सकती कि जितनी हमारे पास कॉल्स आई हैं कि हमारे पे जिन्न है, भूत है, वशीकरण है, मैंने इतने केसेस अपनी जिंदगी में नहीं देखे जितने पिछले तीन हफ्ते में देखे। तो अगर दुनिया में इतना पेन है और यह डॉक्टर्स अवेलेबल हैं तो फिर इनको हम ब्रिज क्यों ना करें ? क्यों हम लोगों को सेल्फ सफिशिएंट ना बनाएं ? क्यों? भारत, आत्मनिर्भर भारत।

मैं भी ये कहना चाहता हूं कि आत्मनिर्भर भारत की जब हम बात करते हैं तो हमें तंत्र में भी आत्मनिर्भर होना चाहिए। हम एटलीस्ट इतना तो पता हो कि इसका इलाज क्या हो सकता है। ठीक है, दवा लेने के लिए मैं एक फार्मा के पास जाऊंगा या फार्मेसी के पास जाऊंगा, वहां से दवा ले लूंगा या डॉक्टर के पास जाऊंगा पर मुझे पता तो हो किसकी दवा क्या लेनी है। 

तो ये दस महाविद्याओं से हमें जुड़ना चाहिए, ये तो एक बहुत अच्छी बात आपने कही और आपने बहुत अच्छे तरीके से समझाया भी, मेरे भी बहुत सारे डाउट्स क्लियर हुए जिसमें दस महाविद्या कैसे हैं और वह हमारी लाइफ में कहां-कहां पर किस रोल में नजर आती हैं।

आत्मनिर्भरता की आवश्यकता

Woman reads a book surrounded by bookshelves.

जो रिसर्च पेपर है मेरा जो ऑक्सफोर्ड में मैंने पब्लिश जो होगा अभी, वो 10 महाविद्यास के डिवाइन फेमिनिन ऑर्डर के ऊपर है। बिकॉज़ इंडिया में जो स्पिरिचुअलिटी है उसमें जो डिवाइन डिवाइन फेमिनिन है और उसमें जो तंत्र है उसके ऊपर यह पेपर है कि इसकी क्या इंपॉर्टेंस है क्योंकि इंडिया में तंत्र बहुत एंशिएंट है, आप जानते हैं।

और इसको एक इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर प्रेजेंट करना कि स्पिरिचुअल सर्विस क्या है, डिवाइन फेमिनिन क्या है और कितने फॉर्म्स हैं मां के और वो हमारी लाइफ से कैसे रिलेट करते हैं। अब तो वेस्टर्न वर्ल्ड को भी बहुत इंटरेस्ट है डीप रिलीजन और तंत्र में।

लेकिन यह एक इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर डालना कि मां काली के कितने रूप हैं और हम उनको अपनी डे टू डे लाइफ में कैसे यूज कर सकते हैं। मेरी बुक इससे थोड़ी ज्यादा डिटेल है बट आई विल बी हैप्पी टू शेयर इट वंस इट्स आउट। लेकिन है इन्हीं पे। और आप मानें या नहीं कि 10 साल पहले मेरी लाइफ में 10 महाविद्या नहीं थीं।

तो यह अपने आप इन्विटेशन आया है, अपने आप चैनलिंग हुई है, डाउनलोड हुआ है क्योंकि बहुत सारे लोग पूछते हैं कि आपने कौन से टेक्स्ट्स पढ़े? टेक्स्ट सेकेंडरी है जब आपको डायरेक्टली ऊपर से नॉलेज मिल रही है। हां, अगर आपको ऑटोमेटिक राइटिंग से डायरेक्टली नॉलेज मिल रही है कि मां काली क्या कह रही हैं, मां षोडशी क्या कहना चाहती हैं, बहुत सारे जब मैं एंटिटी हीलिंग्स करती हूं तो उसमें मेरे को मां छिन्नमस्ता दिखती हैं, बहुत में मां भैरवी दिखती हैं और मां भैरवी बहुत सारी चीजें मुझे बताती हैं।

जब हम मीडियम शिप की वर्कशॉप करते हैं और हम पोर्टल खोलते हैं तो हम मां काली को बुलाते हैं क्योंकि उनके अंदर एक वो मदरहुड का भी है और उसके अंदर हम वो स्पिरिट्स को भेजते हैं।

हम जब अर्थ क्लीनिंग करते हैं मीडियम शिप का कोर्स सीख के, तो अर्थ क्लीनिंग का मतलब है कि जो आत्माएं हैं जिनको मुक्ति नहीं मिली उनको मीडियम शिप के थ्रू हम उनसे पूछ के कि आप जाना चाहते हैं, उनको लाइट की तरफ भेजते हैं।

मैं यह कहना चाहूंगी तुषार, दैट हमें अपने रूट्स पर वापस जाना चाहिए। हमें हर घर में एस्ट्रोलॉजी पता होनी चाहिए क्या है, हर घर में महाविद्या का ज्ञान सबको होना चाहिए। हमें अपने घर की प्रोटेक्शन करनी आनी चाहिए, हमें ऑटोमेटिक राइटिंग आनी चाहिए।

हमारा कनेक्शन अगर डायरेक्टली भगवान से है तो हमें तीसरे इंसान की जरूरत नहीं है। मैं 9 साल से यही बोल-बोल जा रही हूं सोशल मीडिया पे कि आपको किसी के पास क्यों जाना है?

आप खुद क्यों नहीं सीखते? कि जो आपने बात की, स्पिरिचुअली सफिशिएंट, व्हाई डोंट यू बिकम? आप खुद करिए। चाहे एंड में आपको, जैसे आपको खाना बनाना आना चाहिए, किसी दिन मन है तो रेस्तरां में जाके खा लीजिए। लेकिन अगर आपको खाना ही नहीं बनाना आता तो आप किसी पर डिपेंडेंट हैं फॉर योर डेली नीड्स।

और जिस तरीके की आज आपने कहा कि एक ब्लैक वर्ल्ड जो है, एक वॉर चल रही है लाइट वर्सेस डार्क, तो उस वक्त में तो आपको स्पिरिचुअली सफिशिएंट होना चाहिए क्योंकि आपको किसी भी परेशानी से डील करना बहुत स्टार्टिंग में ही आना चाहिए।

तभी शायद पुराने जमाने में लोग बहुत ज्यादा सफिशिएंट थे और अब वो कहीं ना कहीं कमी हमें खल रही है और यह बहुत जरूरी है।

वेल, आज के इस लेख में बहुत कुछ जानने को आपसे मिला है और 10 महाविद्याओं पर हमने बहुत डिटेल में बात की है। आई होप जो हमारे पाठक हैं उन्हें बहुत अच्छा लगा होगा, बहुत पसंद आया होगा यह लेख।

हमारी वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर और भी बहुत सारे लेख हैं। तो मैं अपने पाठकों से कहूंगा कि अगर आप वे लेख पढ़ना चाहते हैं तो हमारी वेबसाइट पर जाकर आप पढ़ सकते हैं क्योंकि बहुत सारी चीजों पर हमने मां कामाख्या पर हमने बात की है, हमने स्लीप पैरालिसिस पर बात की है, हमने डेथ पर बात की है।

   दस महाविद्या और उनके भैरव:
    • काली (Kali): काल भैरव (Kaal Bhairava)
    • तारा (Tara): अक्षोभ्य भैरव (Akshobhya Bhairava)
    • त्रिपुर सुंदरी/षोडशी (Tripura Sundari/Shodashi): पंचवक्त्र भैरव (Panchavaktra Bhairava)
    • भुवनेश्वरी (Bhuvaneshwari): विकृताक्ष भैरव (Vikritaksha Bhairava)
    • त्रिपुर भैरवी (Tripura Bhairavi): त्रिपुर भैरव (Tripura Bhairava)
    • छिन्नमस्ता (Chhinnamasta): कपाल भैरव (Kapala Bhairava)
    • धूमावती (Dhumavati): कोई भैरव नहीं है (No Bhairava)
    • बगलामुखी (Bagalamukhi): मृत्युंजय भैरव (Mrityunjaya Bhairava)
    • मातंगी (Matangi): मतंग भैरव (Matanga Bhairava)
    • कमला (Kamala): संहार भैरव (Samhara Bhairava) 

 

भुवनेश्वरी साधना के लाभ – bhuvaneshwari sadhana ki labh ph .85280 57364

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जय माता की, कैसे हैं आप सब? आशा करता  हूँ की आप सब ठीक-ठाक होंगी। आज का जो विषय है, वह है की भुवनेश्वरी साधना करने से आपके जीवन में क्या-क्या घटित होता है, भुवनेश्वरी साधना के लाभ क्या हैं, उनके बेनिफिट क्या हैं, किस प्रकार से आप माँ भुवनेश्वरी की शरण में जा सकते हैं। 

माता भुवनेश्वरी की साधना कैसे की जाती है ? माता भुवनेश्वरी की साधना के लाभ क्या हैं ? माता भुवनेश्वरी की साधना करने से जीवन में क्या-क्या घटित होता है? इन सब की जानकारी प्राप्त करने से पहले आपको यह बताते हैं की माता भुवनेश्वरी कौन हैं।

 

कौन हैं माँ भुवनेश्वरी ?

वह 10 महाविद्याओं में से एक हैं, पाँचवीं शक्ति हैं। माँ काली प्रथम रूप हैं, जैसे माँ काली जो है, माँ शक्ति का अंतिम रूप है ना, उसी प्रकार माँ भुवनेश्वरी जो है, वह शक्ति का प्रथम रूप मानी जाती हैं। 

अखिल ब्रह्मांड की रानी, ऊर्जा है की उनकी ऊर्जा को देख पाना मुमकिन ही नहीं है। बहुत कठिन तपस्याएं करने के पश्चात् भगवती प्रसन्न हो जाती है, तो कभी भी दर्शन नहीं देती है। उन्हें मनाना बहुत ही मुश्किल है। 

था उनके पैर के अंगूठे के नाखून में ही 33 कोटि देवी-देवता विराजमान होते हैं और माँ के पैर के अंगूठे के नाखून में करोड़ों ही पृथ्वियाँ हैं, करोड़ों ही आकाश, ब्रह्मा हैं, करोड़ों विष्णु हैं, करोड़ों ही महेश हैं। 

तो श्रीमद्देवी भागवत पुराण जो है, उसमें इस विषय के बारे में पूरी जानकारी दी गई है, जो अभी मैंने आपको बताई ना की उनके अंगूठे के पैर की नाखून में करोड़ों सृष्टियाँ, सब उसमें बताया गया है डिटेल्स से। आप चाहे तो श्रीमद्देवी भागवत पुराण पढ़ सकते हैं।

तो जो माँ भुवनेश्वरी हैं, वह भगवान शिव की स्वामिनी भी मानी जाती हैं। माता भुवनेश्वरी की ही अर्चना, पूजा-अर्चना सभी देवी-देवता करते हैं।

 जैसे भगवान शिव हैं, भगवान विष्णु करते हुए सृष्टि की और श्री हरि विष्णु ने पालन किया और भगवान भोलेनाथ ने सृष्टि का संहार भी करते हैं। तो यह जो कुछ भी सृष्टि में हो रहा है, वह आदि पराशक्ति भुवनेश्वरी की वजह से, उनकी कृपा से, उनकी इच्छा पर ही हो रहा है। 

जैसे एक कुम्हार खेल-खेलने के लिए मिट्टी का कोई खिलौना बनाता है और जब उनका मन करता है, वह खिलौने रचना करते हैं।

 उसी प्रकार से कुम्हार खिलौने की रचना करने के पश्चात् खिलौने से खेलता है, तो उसी प्रकार उनमें अनेकों लीलाएं करती है। 

खिलौने के साथ खेलने के पश्चात् उसी खिलौने को नष्ट करके एक नया खिलौना बनाता है। उसी प्रकार से माँ आदि पराशक्ति माँ भुवनेश्वरी भी जब सृष्टि में लीलाएं करके उनका मन भर जाता है, तब वह सृष्टि का संहार कर देती है। 

 माँ भुवनेश्वरी ही भगवान ब्रह्मा, विष्णु, इनकी शक्तियों से ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश प्रकट हुए और इनकी शक्तियों से ही रचना, पालन और संहार होता है। 

तो कुल मिलाकर माता भुवनेश्वरी के ऊपर कुछ भी नहीं है। तो जो माँ भुवनेश्वरी हैं, अखिल ब्रह्मांड की महारानी हैं, अधिष्ठात्री देवी हैं। माँ प्रकृति भी इन्हीं कहा गया है, माँ शाकम्भरी भी इन्हें कहा जाता है।

 भुवनेश्वरी साधना के लाभ

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1 भुवनेश्वरी साधना के लाभ –  दरिद्रता का नाश

माँ भुवनेश्वरी की साधना यदि कोई दरिद्र करता है, जो बहुत ही निर्धन व्यक्ति होता है, मान लो की किसी जन्म की दरिद्रता किसी को चिपक गई, जन्म-जन्म होता है, व्यक्ति धनवान होता है और उसकी सात पीढ़ियों को धन की कभी भी कोई कमी नहीं रहती।

2 भुवनेश्वरी साधना के लाभ – वाणी में मधुरता

अगर कोई व्यक्ति माँ भुवनेश्वरी की साधना, आराधना करता है तो क्या जाती है? उनकी पूजा-पाठ करते हैं, उनकी वाणी जो होती हो, इतनी मधुर होती है जैसे कान्हा जी की बांसुरी मधुर हुआ करती थी। उसी प्रकार से ऐसे लोगों की वाणी मधुर होती है जो भुवनेश्वरी शरण में होते हैं।

3 भुवनेश्वरी साधना के लाभ – ज्ञान की प्राप्ति

उन पर इतनी कृपा होती है की उन्हें ज्ञान अपने आप ही प्राप्त होने लगता है क्योंकि माँ में, माँ में इतना ज्यादा ज्ञान है, ज्ञान है इसीलिए तो उन्होंने सृष्टि की रचना की, पालन किया, संहार किया, है ना? सब ज्ञान से ही होता है। 

तो जो माँ के प्यारे भक्त होते हैं, प्यारे बच्चे होते हैं, उनमें भी ज्ञान की कोई कमी नहीं होती है, बहुत ज्ञान होता है उनमें और वह ज्ञान जो होता है, वह हर जन्म में उनके काम आता है।

4 भुवनेश्वरी साधना के लाभ – ऊर्जा, शक्ति और निर्भयता
 

माँ भुवनेश्वरी की जब साधना शुरू की जाती है, तब जो साधक होता है, उसमें एक ऊर्जा का एहसास होता रहता है। उसे लगता है की जैसे उसके अंदर बहुत ही ज्यादा एनर्जी है, उसके अंदर बहुत ही ज्यादा ऊर्जा है, बहुत ज्यादा शक्ति है। 

वह अपने आप को बहुत ही सेफ समझता है, अपने आप को बहुत ही मजबूत समझने लगता है और उसे किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता।

 बहुत भयभीत रहने वाले जो लोग होते हैं, जिन्हें बहुत ज्यादा डर लगता है, जिन्हें अंधेरे से भी डर लगता है, अगर कोई साथ है तब भी डर लगता है, अगर वह अकेले हैं तब भी डर लगता है, मतलब की अपने आप को इनसिक्योर फील करने वाले जो लोग होते हैं.

 उन्हें भुवनेश्वरी जरूर करनी चाहिए। ऐसे में यह लाभ होता है की व्यक्ति का भय जो है, उसका नाश हो जाता है और भय मुक्त होकर विचरण करने लगता है।

 

5  भुवनेश्वरी साधना के लाभ  – कार्यों में सफलता
 

जिस कार्य में भी हाथ डालता है, उस कार्य में उसे सफलता मिलती है। भगवती को मिलती है तब उस व्यक्ति का हाथ अगर रेत में भी लग जाता है, तो वह रेत भी सोना बन जाती है। की वह जिस काम में भी हाथ डालता है, उसी काम में उसे सफलता मिलती है। 

सफलता मिलती है इसीलिए तो गरीबी दूर जाती है, है ना ? गरीबी दूर तभी होगी जब सफलता प्राप्त होगी। सफलता भी कैसे प्राप्त होगी ?

 जब भी व्यक्ति कर्म करता है और उस कर्म में उसका विश्वास होता है की मैं जो कार्य कर रहा हूँ, मेरी इष्ट देवी मुझे उस कार्य में सफलता प्रदान करेगी।

 तब उस व्यक्ति का जो कॉन्फिडेंस होता है, वह कॉन्फिडेंस उसको सफलता की ओर ले जाता है। माता भुवनेश्वरी कॉन्फिडेंस लेवल को हाई करती है।

6 भुवनेश्वरी साधना के लाभ –  रोगों का निवारण

ऐसे लोग जिन्हें कोई व्याधि है, कोई रोग है, ऐसे लोग, ऐसा रोग लग गया है जिसका कोई इलाज नहीं है, तो माँ भुवनेश्वरी जो है, ऐसे रोगों को भी ठीक कर देती है।

7 भुवनेश्वरी साधना के लाभ – भाग्य परिवर्तन

कोई भी नहीं मिटा सकता है। वह प्रभु देव का लिखा हुआ भी मिटा सकती है और उसको उसी अकॉर्डिंग लिख सकती है जिस अकॉर्डिंग वह खुद चाहती है। 

अगर आपके जो कर्म हैं, वह अच्छे नहीं लिखे, आपके साथ कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा है, आपके लेख भगवान ने अच्छे नहीं लिखे हैं, तो आप भुवनेश्वरी की शरण में जा सकते हैं। 

 आप जब माँ भुवनेश्वरी की शरण में जाएंगे, उनसे प्रार्थना करेंगे की आपके जीवन में, आपके भाग्य में अगर गरीबी है तो उस गरीबी को दूर करें हूँ। तो माँ भुवनेश्वरी उस गरीबी को दूर करती है।

8 भुवनेश्वरी साधना के लाभ – संतान प्राप्ति

अगर मान लो की आपको किसी पंडित ने कहा है की आपकी कुंडली में पुत्र का योग नहीं है, संतान का योग नहीं है, है ना? तो ऐसे योग भी माँ बदल देती है। अगर आप माँ की शरण में जाते हैं, उनके साथ नाराज ना करते हैं, उनकी विधिवत पूजा करते हैं, तब आपको माँ पुत्र रत्न की भी प्राप्ति कराती है। 

कोई भी व्यक्ति निःसंतान नहीं रहता। संतान प्राप्ति करवाती है, चाहे आप पुत्र चाहें, चाहे पुत्री चाहें, आपको आपकी इच्छा अनुसार संतान प्राप्त होती है।

9 भुवनेश्वरी साधना के लाभ – तंत्र-मंत्र और नकारात्मकता से रक्षा

अगर किसी को भूत-प्रेत बाधा है, किसी को किया-कराया है, किसी को ऐसा तंत्र कर दिया गया है जिसकी काट ही नहीं है, तो माँ भुवनेश्वरी की शरण में आप जा सकते हैं। क्योंकि माँ भुवनेश्वरी से ही हर एक तंत्र-मंत्र का जन्म हुआ है।  माँ भुवनेश्वरी ने ही सृष्टि की रचना की है। तो जब हमारे भुवनेश्वरी की शरण में जाया जाता है, तब आप भुवनेश्वरी खुद हर तंत्र की काट कर देती है।

10 भुवनेश्वरी साधना के लाभ – सम्मान और ऐश्वर्य

माँ भुवनेश्वरी की शरण में जाने वाले व्यक्ति के जीवन में ऐसी-ऐसी घटनाएं होती है की उसके जो जीवन होता है, वह चमत्कारों से भर जाता है और ऐसा व्यक्ति, ऐसा व्यक्ति जो होता है, वह समाज में बहुत सम्मान प्राप्त करता है। 

 व्यक्ति अपने आप में राजा-महाराजा जैसी जिंदगी जीते हैं की उनके जीवन में इतना धन, इतना ऐश्वर्य होता है की उन्हें किसी चीज की कमी नहीं होती। जितने भी बड़े-बड़े दिग्गज अमीर लोग हैं, उनको सबकी पूजा-अर्चना करते हैं, चाहे वो गुप्त रूप से करते हैं, परंतु करती जरूर है।

 साधना की गोपनीयता और गुरु की अनिवार्यता

 

और यदि आप भी माँ भुवनेश्वरी की साधना, आराधना करते हैं, तो जितना हो सके, उसे गुप्त रखिए। माँ भुवनेश्वरी की जो साधना करते हैं, उनकी वाणी में ही माँ भुवनेश्वरी का वास होता है और ऐसे लोगों की वाणी से ही पता चलता है की यह लोग माँ भुवनेश्वरी की आराधना करते हैं।

 उनकी वाणी में इतनी मिठास होती है की मन करता है की ऐसे लोगों के पास बैठकर उनकी बातें सुनते रहे। 

आपको अगर कोई व्यक्ति अच्छा नहीं समझता है, आपसे बात करना अच्छा नहीं समझता है, तो आप भुवनेश्वरी की शरण में जाइए, तो ऐसे लोग जो आपसे बात करना नहीं चाहते हैं, तो वह लोग भी आपसे बात करने के लिए तड़प उठाते हैं। 

वह सारी लीलाएं, बहुत सारे चमत्कार हैं जो केवल एक ही पोस्ट  में बताना संभव नहीं है।

माँ भुवनेश्वरी जो है, वह 10 महाविद्याओं में से पाँचवीं महाविद्या है। महाविद्या का अर्थ है जो विद्या की बहुत ही हाई लेवल की विद्याएँ होती है ना, उन्हें महाविद्या कहा जाता है। 

तो इसलिए जो महाविद्याएँ होती हैं, जैसे यह 10 महाविद्याएँ, इनकी जो आराधना-साधना होती है, कि वो बिना गुरु के नहीं होती। 

इसलिए यदि आप माँ भुवनेश्वरी की साधना करना चाहती हैं, तो गुरु का हाथ सर पर होना बेहद जरूरी है। माँ भुवनेश्वरी करते हैं तो आपको उसका बहुत लाभ होता है, बहुत ही चमत्कारिक तरीके से भुवनेश्वरी की साधना से आपको लाभ होते हैं।

 मंत्र और उनका प्रभाव

 इसके भी बहुत से लाभ हैं। भुवनेश्वरी के अनेकों मंत्र हैं जिनकी दीक्षा दी जाती है और गुरु के द्वारा उनकी साधनाएं करके मंत्रों में, उन मंत्रों को जागृत किया जाता है और जैसे-जैसे यह मंत्र जागृत होते हैं। 

 वैसे-वैसे आपके जीवन में तरक्की, कामयाबी, धन, ऐश्वर्य होता है, गरीबी हटती है, गरीबी दूर होती है, संतान की प्राप्ति होती है। 

जिस प्रकार जीवन, जिस प्रकार से होता है, उसी प्रकार से भगवती भुवनेश्वरी के सभी साधकों का जीवन होता है। जीवन में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहती है ना? 

धनेश्वरी साधना से प्राप्त हो जाता है। शत्रुओं से भी छुटकारा मिलता है, तंत्र बाधा से छुटकारा मिलता है।

तो यह था आज का टॉपिक। आशा करती हूँ की आपको मेरा यह टॉपिक अच्छा लगा होगा। तो जल्दी से मेरी इस पोस्ट को लाइक कीजिए, कमेंट कीजिए, शेयर कीजिए और जय माता दी। खुश रहिए, खुशहाल से ही।

माँ मातंगी साधना विधि और लाभ maa matangi sadhna

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माँ मातंगी साधना विधि और लाभ maa matangi sadhna

 
माँ मातंगी साधना विधि और लाभ maa matangi sadhna
माँ मातंगी साधना विधि और लाभ maa matangi sadhna

नमस्कार प्रिय, आप का स्वागत है गुरु मंत्र साधना में अभी आगे कार्तिक नवरात्री शुरू होने वाले  है इस समय में यदि किसी प्रकार की कोई साधना की जाती है, किसी प्रकार के मंत्र का जप किया जाता है तो निश्चित ही उसका प्रभाव शीघ्रातिशीघ्र प्राप्त होता है क्योंकि यह समय साधना सिद्धि का ही समय होता है। माँ मातंगी साधना करने का उचित समय है 

माँ मातंगी साधना का महत्व

आज जिस सिद्धि की, जिस साधना की मैं बात करने जा रहा हूँ, वह है माँ मातंगी की साधना। माँ मातंगी की साधना एक ऐसी साधना है जो प्रत्येक व्यक्ति को और प्रत्येक गृहस्थ को अवश्य ही एक बार जीवन में करनी चाहिए क्योंकि यह साधना एक ऐसी साधना है जो जीवन की प्रत्येक सुख सुविधा के साथ-साथ प्रत्येक समस्याओं के समाधान के लिए भी जानी जाती है।

कौन हैं माँ मातंगी ?

माँ मातंगी सभी दश महाविद्याओं में नवें स्थान पर आती हैं। श्री कुल की साधना अति श्रेष्ठ मानी जाती है। मातंगी को पूर्ण गृहस्थ सुख, भोग विलास, शत्रुओं का नाश, अपार सम्मोहन और वाक् सिद्धि के साथ-साथ कालज्ञान दर्शन और इष्ट दर्शन की प्राप्ति के लिए भी माना जाता है। कहा जाता है जिन पर इनकी कृपा हो जाती है, उसे जीवन में कुछ भी शेष नहीं रहता। उसे हर प्रकार से सभी साधन सर्व सुलभ हो जाते हैं।

माँ मातंगी साधना से प्राप्त होने वाले लाभ

आज के इस भौतिकवादी युग में सभी की चाह होती है की उसके पास अच्छा घर हो, मकान हो, सभी प्रकार के सुख साधन उपलब्ध हों और माँ मातंगी सर्व प्रकार के सुख और भोग वैभव देने के लिए जानी जाती हैं। माँ मातंगी सरस्वती के भी एक रूप माना जाता है। 

मातंगी की कृपा जिस पर हो जाती है उसे स्वतः ही संपूर्ण शास्त्र-वेदों का या संपूर्ण ज्ञान प्राप्त हो जाता है। वह किसी से भी वाद-विवाद में हार नहीं सकता अर्थात उसे हमेशा जितना ही होता है। उसके मुख से एक धारा प्रवाह के रूप में सभी प्रकार की बातें और सभी प्रकार का ज्ञान उद्गत होने लगता है। 

बोलता है तो उसकी वाणी अमृतधारा बरसाती है, ऐसा शास्त्र कथन है। इसीलिए होगा कि प्रत्येक गृहस्थी को एक बार जीवन में यह साधना करनी चाहिए क्योंकि जीवन में अनेकों अनेक बार ऐसा समय आता है जब व्यक्ति अपनी बात समझा नहीं पाता, अपनी बात को ठीक से रख नहीं पता।

 यदि ये साधना की जाए तो निश्चित ही वह अपनी बात को समझाने में और अपनी बात को दूसरों के समक्ष रखने में सक्षम हो जाता है, जिससे कई बार विपरीत परिस्थितियों में भी आपके लिए सुलभता प्राप्त हो जाएगी। आपके कार्य शीघ्रता से, सुलभता से बनने लगेंगे। ये है माँ मातंगी की साधना का प्रभाव।

 माँ मातंगी को उच्छिष्ट चांडालिनी भी कहते हैं जो सब प्रकार के शत्रुओं का और विघ्नों का नाश करती है। साथ ही साथ कर्णमातंगी साधना भी इन्हीं के अधीन आती है।  

कर्ण मातंगी को सिद्ध करने के बाद में माँ मातंगी कान में प्रश्नों के उत्तर बताती हैं। इस साधना का ज्योतिष, तंत्र या इस प्रकार के क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए विशेष महत्व होता है।

माँ मातंगी साधना की विधि

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आज जिस साधना की बात कर रहा हूँ वह सरल होते हुए सभी गृहस्थियों के लिए है जिससे की जीवन में सुख शांति और वैभव की प्राप्ति हो, शत्रुओं का नाश हो और सब प्रकार से जीवन सुलभ और सुखमय बन सके। 

माँ मातंगी के विषय में महर्षि विश्वामित्र ने कहा है की जिसने मातंगी को सिद्ध कर लिया बाकी नौ महाविद्या उसे स्वतः प्राप्त हो जाती हैं। परंतु प्रियदर्शकों, सिद्धि प्राप्त करना कोई सरल नहीं है। 

लेकिन मैं ये मानता हूँ मातंगी की अगर कृपा भी मिल जाए तो भी हम सिद्धि के बिल्कुल निकट पहुँच गए हैं। चलिए जान लेते हैं ये साधना, ये सिद्धि कब से आरंभ करनी है, किस समय आरंभ करनी है, क्या हैं इसके नियम, क्या है इसकी साधना और किस प्रकार से साधना में सामग्री की आवश्यकता पड़ने वाली है।

माँ मातंगी साधना  कब और कैसे आरंभ करें ?

इस साधना को वैसे तो किसी भी सोमवार से या शुक्रवार से आरंभ किया जाता है परंतु गुप्त नवरात्रि का समय है तो प्रथम नवरात्रि से ही आप इस साधना को आरंभ कर सकते हैं। समय रहेगा रात्रि 9:00 बजे के बाद में। 

हमेशा बोलता हूँ वैसे 10:00 बजे के बाद साधना आरंभ करनी चाहिए लेकिन शास्त्र प्रमाण है रात्रि 9:00 बजे के बाद, तो आप 9:00 बजे के बाद में इस साधना को आरंभ कर सकते हैं।

 किसी शुभ समय को देखकर के रात्रि 9:00 बजे बाद शुभ चौघड़िया में, अमृत काल का चौघड़िया हो, शुभ का चौघड़िया हो, यह चर का चौघड़िया हो तो आप उस काल में इस साधना को आरंभ कर सकते हैं। तो ये साधना आपको रात्रि 9:00 बजे के बाद आरंभ करनी है। मुख आपको उत्तर या पश्चिम दिशा में करना है। आसन लाल होगा और वस्त्र भी लाल होंगे।

माँ मातंगी साधना आवश्यक सामग्री

जो बाजोट या पट्टे पर वस्त्र बिछाया जाएगा वह भी लाल रंग का ही होगा। मातंगी का चित्र और यंत्र रख करके आपको पूजा करनी है, साधना करनी है। यंत्र प्राण-प्रतिष्ठित होना चाहिए। प्राण प्रतिष्ठा विषय के संबंध में एक पोस्ट मैं पूर्व में दे चुका हूँ। 

वहाँ द्वारा प्राण प्रतिष्ठा विधि देख सकते हैं। निश्चित ही उस सूक्ष्म विधि से यंत्र की प्राण प्रतिष्ठा होती है और हर प्रकार से आपको लाभ मिलता है। लिंक आपको डिस्क्रिप्शन में दे दिया जाएगा।

यदि माँ मातंगी का चित्र उपलब्ध न हो तो उस परिस्थिति में जिस प्रकार से गणपति की स्थापना की जाती है सुपारी पर मौली लपेट करके, ठीक उसी प्रकार आप मातंगी का विग्रह की स्थापना कर सकते हैं। 

एक सुपारी पर थोड़ी सी मौली लगा करके, उस पर तिलक करके माँ मातंगी को यंत्र के समक्ष सुपारी को रख करके मातंगी का स्वरूप मानकर के साधना को संपन्न कर सकते हैं।

 माँ भगवती की तरह ही इनका पूजन करना है, षोडशोपचार रूप से। साथ ही साथ जब दश महाविद्याओं की पूजा की जाती है तो भैरव की पूजा अवश्य की जाती है, तो भैरव जी की पूजा इनके बायीं ओर करनी है।

 माँ भगवती का जहाँ आपने विग्रह रखा है, जहाँ यंत्र रखें उसके बायीं ओर भैरव जी की पूजा आपको करनी पड़ेगी। बात करें दीपक की, तो दीपक यहाँ पर शुद्ध देसी घी का आपको प्रज्वलित करना है। 

यदि आपके आसपास घी की व्यवस्था नहीं तो आप तिल तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। परंतु संभव हो तो घी का दीपक ही आप प्रज्वलित करें। माला या तो स्फटिक की हो, लाल हकीक या लाल मूंगे की हो या फिर हमेशा बोलता हूँ रुद्राक्ष की माला सर्व कार्य सिद्धि के लिए प्रयोग कर सकते हैं। 

तीनों में से कोई भी माला जो आपके पास उपलब्ध हो, प्राण प्रतिष्ठित माला हो, उससे आप इस साधना को कर सकते हैं। भोग प्रसाद में जो सामान्यतः माँ भगवती जगदंबा की, माँ काली की पूजा में जो सामग्री फल इत्यादि लगते हैं वही सामग्री रहेगी, अलग कुछ भी नहीं है।

 भोग के लिए आप लौंग, इलायची, बताशे के साथ-साथ कोई भी मीठी वस्तु या जैसे बेसन का लड्डू हो, बर्फी हो या कोई ऐसी वस्तु जो भोग के लिए आप समर्पित कर सकते हों। और कुछ न हो तो मिश्री को समर्पित अति प्रेम से कर सकते हैं लौंग, इलायची, बताशे के साथ।

माँ मातंगी साधना – पूजन और संकल्प की प्रक्रिया
 

हमेशा की तरह फिर कहूँगा साधना आरंभ करें उससे पूर्व माँ भगवती के मंदिर में जाकर साधना के लिए प्रार्थना कीजिएगा। भगवान शिव के मंदिर में भी जा सकते हैं, वहाँ प्रार्थना कीजिए साधना के लिए और फिर साधना में प्रवृत्त हो जाइए।

 बाकी साधना रात्रि 9:00 बजे आरंभ होगी तो आप दिन में उसकी पूरी तैयारी कर लीजिए। सर्वप्रथम उत्तर या पश्चिम मुख होकर के बाजोट पर माँ भगवती का चित्र, यंत्र, विग्रह स्थापित करके माँ भगवती के दायीं ओर आपकी बायीं ओर एक कलश स्थापित करना है। उस पर एक पानी का नारियल आपको स्थापित करना है। 

सर्वप्रथम अपने ऊपर आचमन कीजिए। थोड़ा सा जल अपने दाहिने हाथ में लेकर के शुद्धि के रूप में अपने ऊपर छिड़किए।

 आचमन शुद्धि के बाद में सर्वप्रथम आपको संकल्प लेना है। संकल्प के लिए अनेकों अनेक बार बता चुका हूँ, अपना नाम, गोत्र और अपना मनोरथ स्पष्ट करते हुए संकल्प लिया जाता है, उस दिन की तिथि, वार, नक्षत्र को बोलते हुए आप संकल्प लीजिए। 

संकल्प के लिए आपको अपने दाहिने हाथ में जल लेना है और उस जल को संकल्प बोलने के बाद में किसी प्लेट में, थाली में छोड़ देना है या फिर गणेश जी पर अर्पित कर देना। 

संकल्प के पश्चात् सर्वप्रथम गणेश जी का, उसके बाद गुरु का, कुलदेव, पितृदेव, स्थानदेव का पूजन करते हुए माँ भगवती का पूजन करना है। माँ भगवती मातंगी के पूजन के साथ-साथ भैरव जी का पूजन करना है और साथ ही आपको अपने इष्ट का ध्यान भी करना है, पूजन भी करना है। 

भगवान शंकर की ध्यान पूजन भी इसमें आपको करना चाहिए। सबका पूजन करने के बाद में आपको सर्वप्रथम गणेश जी की, उसके बाद गुरु मंत्र की एक-एक माला का जप करना है।

माँ मातंगी साधना  विनियोग एवं न्यास विधि

तत्पश्चात् आपको कम से कम 21 माला का जप मूल मंत्र का करना है, जो माँ भगवती मातंगी का मूल मंत्र है। लेकिन ये साधना तांत्रिक साधना है और पूर्व के अनेकों पोस्ट में बता चुका हूँ कि वैदिक और तांत्रिक साधनाओं में विनियोग, न्यास आदि होते हैं तो उनको करना अनिवार्य है।

 साधना में विनियोग, न्यास की विधि के लिए मैं आपको एक बार बता देता हूँ किस प्रकार से विनियोग होगा, किस प्रकार से न्यास होगा। वो आपको स्क्रीन पर मंत्र दिखाई भी दे रहे हैं। 

इन मंत्रों के माध्यम से आप विनियोग कर सकते हैं। यदि किसी को पढ़ने में, बोलने में असुविधा है तो उसके लिए मैं सूक्ष्म विधान और बता देता हूँ। 

विनियोग का तात्पर्य सिर्फ उस देवता को, जिसने इस मंत्र को बनाया उस ऋषि का नाम, उस देवता का नाम, जिसमें इस देवता की शक्ति है, उसको याद किया जाता है, उसके बारे में बताया जाता है।

 तो आप सिर्फ मातंगी का ध्यान कीजिए और अपने गुरु का ध्यान कीजिए। इतना भी करके आप विनियोग कर सकते हैं। हाथ में जल लेकर के न्यास के लिए क्या करना होता है ?

 सरल से सरल विधि देने का प्रयास कर रहा हूँ, क्योंकि जिनका अर्थ यही है, ऋषि ने न्यास, न्यास का अर्थ यही है कि मैं अपने इस अंग से भी आपको नमस्कार करता हूँ, अपने हृदय से भी नमस्कार करता हूँ, अपने मस्तक से भी नमस्कार करता हूँ, अपनी शिखा की तरफ से भी नमस्कार करता हूँ, अपनी पाँचों उंगलियों से नमस्कार करता हूँ एक-एक करके।

 तो यह न्यास है, इसे शुद्धि कहा जाता है कि हर प्रकार से मैंने शुद्धि कर ली है। यदि आपको बोलने में, मंत्रों को बोलने में असुविधा होती है तो आप बारी-बारी से सिर्फ ध्यान करके

 माँ भगवती को बारंबार प्रणाम करते हुए इस साधना को आरंभ कर सकते हैं और इतना करने के बाद भी आपको फल अवश्य ही प्राप्त होगा क्योंकि माँ मातंगी या कोई भी देवी की जब आराधना की जाती है तो हमेशा बताया है कि दुर्गा स्तुति, माँ भगवती जो हैं 

ये दुर्गा के ही स्वरूप हैं और दुर्गा जी भगवती स्तुति यानी प्रार्थना से प्रसन्न होती हैं, अन्य किसी साधन की आवश्यकता है ही नहीं। तो सिर्फ प्रार्थना कीजिए, मन से, हृदय से प्रार्थना कीजिए, अपने आप को समर्पित करते हुए, समर्पण भाव से प्रार्थना कीजिए अगर आपको कोई अन्य मंत्र उच्चारण करने में परेशानी आती है।

विनियोग मंत्र

चलिए सर्वप्रथम विनियोग की विधि देख लेते हैं। विनियोग का मंत्र आपकी स्क्रीन पर है। इस प्रकार है: दाहिने हाथ में जल लीजिएगा और फिर इस मंत्र को बोलिएगा:

ॐ अस्य मन्त्रस्य दक्षिणामूर्ति ऋषिः विराट् छन्दः मातंगी देवता ह्रीं बीजं हूं शक्ति विनियोगः।

जब आप इस मंत्र को बोल लें, दाहिने हाथ में जो जल लिया था उसे आप भूमि पर छोड़ दीजिए।

न्यास (ऋषि न्यास, करण्यास, हृदयादिन्यास)

चलिए अब न्यास करते हैं। सबसे पहले ऋषि न्यास है, फिर करण्यास है, फिर देहन्यासः। विधि मैंने पूर्व में बता दी कि सिर्फ इनसे नमस्कार करना है, इनसे प्रणाम करना है। सर्वप्रथम ऋषि न्यास। मैं बोलता जाऊँगा आप उसके अनुसार इसका ध्यान कर लीजिए। वैसे स्क्रीन पर पूर्ण रूप से लिखने का प्रयास किया है।

ऋषि न्यास:


सर्वप्रथम अपने सिर को स्पर्श करते हुए बोलिए: ॐ दक्षिणामूर्ति ऋषये नमः शिरसि।
दूसरे पर मुख को स्पर्श करना है आपने अपने दाहिने हाथ से और फिर बोलना है: विराट् छन्दसे नमो मुखे।फिर उसके बाद हृदय को स्पर्श करना है और बोलना है: मातंगी देवतायै नमो हृदि।

फिर उसके पश्चात् अपने गुप्त स्थान को, जांघ को स्पर्श करना है: ॐ ह्रीं बीजाय नमो गुह्ये।अपने पैरों को स्पर्श करना है: ॐ हूं शक्तये नमः पादयोःअपने नाभि को स्पर्श करना है: ॐ क्लीं कीलकाय नमः नाभौउसके बाद सभी अंग का स्पर्श करना है और बोलना है: विनियोगाय नमः सर्वांगे।

इस प्रकार से यह ऋषि न्यास हुआ। अब करण्यास है, अपनी हाथों से पाँचों उंगलियों से अलग-अलग न्यास, प्रणाम करना है। उसके बाद होता है हृदयादिन्यास अर्थात दोनों हाथों को जोड़ करके। 

तो जिस प्रकार मैंने बताया अंगों को स्पर्श करते हुए ठीक उसी प्रकार न्यास के सामने हिंदी में मैंने बताया है कि किस प्रकार से स्पर्श करना है। 

 अधिक विस्तारित न हो इसलिए मैं बोलकर नहीं बता रहा हूँ, सिर्फ आपको स्क्रीन पर दिखाई दे रहा है। इसके स्क्रीनशॉट ले सकते हैं, नोट कर सकते हैं। 

यदि फिर भी कोई समस्या आती है तो आप व्हाट्सएप करके मुझसे जान सकते हैं कि किस प्रकार न्यास करना है। करण्यास के बाद हृदयादिन्यास है, आपको स्क्रीन पर दिखाई दे रहा है।

 

ध्यान मंत्र

उसके बाद आपको मातंगी का ध्यान करना है। वहाँ पर पूर्ण समर्पण करते हुए आप इस मंत्र को बोलिए:

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपे संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

अर्थात, हे माँ आप मुझ पर दया करना, मुझे क्षमा भी करना यदि मुझसे कोई त्रुटि हो गई हो, कोई भूल हो गई हो और साथ ही साथ मुझे मेरी साधना में सिद्धि प्रदान कर देना। इस मंत्र का भाव है और माँ का विग्रह आप अपने सम्मुख रख कर के उनका ध्यान करते हुए इन तीन मंत्रों को आप सरलता से बोल सकते हैं।

 मातंगी साधना मूल मंत्र जाप

चलिए अब जान लेते हैं उस मंत्र को। वो मंत्र आपकी स्क्रीन पर है:

ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा॥

छोटा सा ये मंत्र है, 21 माला प्रतिदिन आपको करनी है। बहुत छोटा सा मंत्र है, 21 माला में ज्यादा समय नहीं लगने वाला। आपका प्रयास करेंगे तो निश्चित ही यह साधना आपकी सफल होगी। माँ भगवती मातंगी कृपा आपको प्राप्त होगी। 21 माला का आपको जप करना है। 

उससे पूर्व बता चुका हूँ, पहले गणेश जी की एक माला, फिर गुरु मंत्र की एक माला। यदि आपके गुरु नहीं हैं तो क्या करें ? पूर्व में अनेकों अनेक बार बता चुका हूँ, नमः शिवाय भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र का आप जप कर सकते हैं या फिर हमारे गुरुदेव द्वारा बताए गए मंत्र को भी मैं कई बार बता चुका हूँ: ॐ गुरुवे नमः। इस मंत्र का आप जप कर सकते हैं गुरु मंत्र के स्थान पर।

मातंगी साधना  का समापन (पूर्णाहुति)

जब आप मंत्र जाप पूर्ण कर लें, आपकी पूरी 21 माला पूर्ण हो जाए, उसके बाद अपने दाहिने हाथ में जल लीजिएगा और जल लेकर के माँ भगवती का ध्यान करके, माँ मातंगी का ध्यान करके उस जल को इस भाव से भूमि पर ही छोड़ दीजिए माँ के बाएं हाथ की तरफ कि माँ जो भी मैंने जप किया है, जो भी मैंने पुण्य किया है

 जो भी मैंने तप किया है वो सब मैं आपको समर्पित करता हूँ। यह हर साधना में मैं बोलता हूँ कि समर्पण के बाद आसन को प्रणाम करना है, तो यही समर्पण है। जो कुछ भी आपने जप किया है वो हाथ में जल लेकर के माँ के बाएं हाथ की तरफ छोड़ दीजिए। 

उसके बाद माँ भगवती की आपको आरती करनी है। आरती के पश्चात् लौंग, इलायची, बताशे के साथ-साथ किसी मीठे का आपको भोग लगाना है और भोग लगाकर उन्हें एक बार आचमन कराना है। उसके पश्चात् माँ को प्रणाम करके, आसन को प्रणाम करके आप खड़े हो जाइए।

माँ मातंगी साधना के नियम

संभव हो तो इन 9 दिनों में भूमि शयन करना। अपना भूमि पर ही आसन लगा करके, अपना बिस्तर लगा कर के वहीं शयन करना है जहाँ आपने दरबार लगा रखा है, जहाँ आपने माँ की चौकी लगा रखी है। वहीं पर आपको शयन करना है।


एक समय आपको भोजन करना है। भोजन सात्विक हो। संभव हो फलाहार करें, नहीं तो आप एक समय भोजन कर सकते हैं।

सात्विक रहते हुए साधना को आठ दिनों तक आपको करना है। नवें दिन इसकी पूर्णाहुति होगी।
नवें दिन जब आप साधना करेंगे तो उस दिन आपको सिर्फ प्रातःकाल माँ का पूजन करने के बाद में कम से कम एक माला का आपको इस जो मंत्र है, इस मंत्र से आपको माँ का हवन करना है।

 एक माला का हवन में गुरु मंत्र और गणेश जी की माला का भी आपको हवन करना है। ज्यादा नहीं करें गुरु मंत्र, गणेश मंत्र का, तो कम से कम 21-21 आहुति गुरु मंत्र, गणेश मंत्र की आपको अवश्य करनी है। भैरव जी की भी आहुति आपको इसमें करनी है। कम से कम 21 भैरव जी के भी करिएगा।

निश्चित ही माँ मातंगी की कृपा आपको प्राप्त हो जाएगी और आपके सभी कार्य सिद्ध होने लगेंगे। सर्व प्रकार से समाज में मान-सम्मान आपका बनने लगेगा। हर प्रकार की सफलता, सुख, वैभव मातंगी कृपा से आपको प्राप्त हो यही कामना है। माँ मातंगी कृपा आपको प्राप्त हो, उनकी सिद्धि प्राप्त हो यही दिल से कामना है।

मातंगी साधना  महत्वपूर्ण सूचना

 मेरा प्रयास रहता है की मैं प्रत्येक विषय वस्तु को बड़ी सरलता से, सहजता से आप तक पहुँचा सकूँ, परंतु फिर भी यदि किसी प्रश्न का, किसी विषय में समस्या आती है, किसी बात को समझने में आपको परेशानी आती है तो आप व्हाट्सएप कर सकते हैं। 

कृपया कॉल ना करें, फोन मेरे पास नहीं रहता है, वो जिस पर व्हाट्सएप चलता है तो आप व्हाट्सएप कर सकते हैं। संभवतः व्हाट्सएप का जवाब आपको कुछ विलंब से मिल जाए परंतु जवाब मैं अवश्य दूँगा और अभी तक जिन्होंने व्हाट्सएप किया है उन्हें ज्ञात होगा मैं रिप्लाई अवश्य करता हूँ। तो चलिए जानते हैं साधना की विधि को।

जय माता दी। जय श्री राम।

नोट बिना गुरु के साधना  न करे अगर मंत्र में या शलोक में कोई त्रुटि रह जाए तो बताओ 

माँ कमला महाविद्या साधना विधि विधान गरीब और कंगाली ख़तम होगी ph.85280 57364

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माँ कमला महाविद्या साधना विधि विधान गरीब और कंगाली ख़तम होगी ph.85280 57364 दोस्तों, हमारी वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर आपका एक बार फिर से हार्दिक स्वागत है। देखिए, आज मैं आपके सामने इस लेख के माध्यम से जो साधना बताने वाला हूँ, वह दस महाविद्याओं में दसवें नंबर पर जो महाविद्या की साधना आती है, वह माता कमला की साधना है। लक्ष्मी जी के बहुत रूप बताए गए हैं और एक नाम उनमें से दस महाविद्याओं में कमला के नाम से जाना जाता है। यह माता लक्ष्मी की ही साधना है, जो कि दशमहाविद्या में आती है।

 कमला महाविद्या साधना – की साधना क्यों करें?

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अगर आपके साथ में किसी भी प्रकार से आपके कारोबार में समस्या है, आपको अचानक से धन प्राप्ति की कामना है कि कहीं से आपकी लॉटरी लग जाए, कहीं से आपके लिए गड़ा धन मिल जाए, या कहीं से आपको बहुत सारा धन एकदम से अचानक से आपको कहीं से भी मिल जाए, किसी भी प्रॉपर्टी का, कहीं से भी, किसी भी रूप में आपको मिले, तो आपको माता कमला की साधना जरूर करनी चाहिए।

कमला महाविद्या साधना  के लाभ

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यह साधना करने से आपकी आर्थिक उन्नति होगी, आपके कारोबार में किसी प्रकार की समस्या हो, तो उसमें समस्या का निदान होता है। दूसरा, आप जो नौकरी करते हैं या कोई भी व्यवसाय है, उसमें आपको लगातार वृद्धि मिलती है।

कमला महाविद्या साधना अन्य लक्ष्मी साधनाएं

वैसे तो देखिए, मैंने और भी बहुत सारी साधनाएं लक्ष्मी जी की बताई हैं। साबर मंत्रों के द्वारा भी मैंने लक्ष्मी की साधना बताई है और अष्टलक्ष्मी साधना भी मैंने आपको बताई है। 

अष्ट लक्ष्मी की साधना भी बहुत अच्छी साधना है, जो कि नवरात्रि से लेकर के और दीपावली तक के टाइम में आप लगातार कर सकते हैं। और साधना देखिए, कभी भी की जा सकती है, किसी भी शुक्रवार से भी की जा सकती है। 

वह और बहुत ही अच्छी साधना है। जिन्होंने इस साधना को किया है, वास्तव में उनको बहुत अच्छा अनुभव भी मिला है और बहुत अच्छे उनके रोजगार या कारोबार, जो भी उनकी समस्याएं थीं, बिल्कुल एकदम सॉल्व हो गईं।

कमला महाविद्या साधना की शक्ति
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और माता कमला की साधना भी इसी तरह की साधना है। क्योंकि अगर आप किसी भी प्रकार से कोई भी आपको अकस्मात धन, जैसे कि बहुत से लोग बोलते हैं कि हमें लॉटरी का नंबर चाहिए, लॉटरी या फिर उसमें सफलता मतलब किसी भी प्रकार से आप अगर कोई भी ऐसा कार्य करते हैं जिसमें कि आपको धन चाहिए, तो आप हंड्रेड परसेंट आपको इस साधना से जरूर सफलता मिलेगी। क्योंकि यह दस महाविद्या, महाविद्या की साधना बहुत तीव्र, बहुत जल्दी से फल आपको प्राप्त होगा।

कमला महाविद्या साधना समस्याओं का निवारण
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अब देखिए, जो यह लोग महाविद्या की साधना करते हैं, उनके घर में भी अगर किसी भी प्रकार की कोई भी त्रुटि है, कि आपके घर में पितृदोष या फिर और दूसरे दोष आपके जीवन में जो पिछले जन्म से जो आपके साथ में आपके पाप जुड़े हुए हैं, उनकी वजह से आपके सामने समस्याएं खड़ी होती हैं, या इस जन्म के पापों की वजह से समस्याएं खड़ी होती हैं.

 तो या फिर किसी के किए-कराने से, जैसे कि मान लिया कोई किसी के घर पर या किसी भी व्यक्ति पर जादू-टोना करके उसके कारोबार को बर्बाद कर देते हैं, या चलता हुआ कारोबार अचानक से बर्बाद हो जाए, तो यह कमला माता की साधना, जो महाविद्या साधना है .

यह सभी कार्यों में आपको सफलता देती है और आपको एक पूर्णता की तरफ ले जाती है। गृहस्थी जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण साधना है कमला की साधना। क्योंकि माता लक्ष्मी का दूसरा नाम कमला भी कहा गया है।

कमला महाविद्या साधना कब करें ?

तो देखिए, यह साधना आप नवरात्रि में कर सकते हैं, नवरात्रि से आप शुरू कर सकते हैं, या फिर आप किसी भी शुभ दिन से शुरू कर सकते हैं, जैसे होली, दीपावली, दशहरा, जन्माष्टमी, इनसे भी आप शुरू कर सकते हैं। और अगर ऐसा कोई दिन बीच में नहीं है, तो फिर आप किसी भी शुक्रवार से यह साधना शुरू कर सकते हैं।

कमला महाविद्या साधना के लिए आवश्यक सामग्री

अब इस साधना के लिए जो आपको सामग्री चाहिए, वह मंत्र सिद्ध और प्राणप्रतिष्ठायुक्त होनी चाहिए। इसमें आपको कमला यंत्र और स्फटिक की माला भी आप इसमें ले सकते हैं, मूंगे की माला भी इसमें चल जाती है। 

तो आपको दोनों में से कोई भी एक माला हो तो चलेगी। जप के लिए माला होनी चाहिए और एक रक्षा माला होनी चाहिए, ठीक है? और एक सम्मोहन गुटिका। यह चार सामग्रियां इसमें लगेंगी, जो कि मंत्र सिद्ध और प्राणप्रतिष्ठायुक्त होनी चाहिए।

कमला महाविद्या साधना सामग्री कैसे प्राप्त करें?

और यह चारों सामग्रियां आप प्राप्त कर सकते हैं। मैंने व्हाट्सएप नंबर दिया हुआ है इस लेख में ही, आप वहां से मुझे व्हाट्सएप करें और उसके लिए आप आर्डर कर सकते हैं और सामग्री प्राप्त कर सकते हैं। देखिए, सामग्री आपको कोरियर से ही मिलेगी या स्पीड पोस्ट से मिलेगी, पेमेंट आपको पहले ही करनी होती है उसकी। 

और कोई भी व्यक्ति यह न समझे कि हमने पैसा दे दिया तो हमारा पैसा कहीं डूब न जाए या फिर हमें सामग्री न मिले, ऐसा आपके साथ में बिल्कुल नहीं होगा, हंड्रेड परसेंट। 

और जिन लोगों को सामग्री मिल गई है और जो साधना कर भी रहे हैं, आप तो शायद पहली बार लेंगे, लेकिन जो लोग पहले ले चुके हैं, तो वह कई बार उन्होंने सामग्री ले भी ली है।

 उन्हें पता है कि यहां से सामग्री मिल जाएगी और वह आपको यदा-कदा इस लेख के कमेंट में भी आपको बताते रहते हैं कि भई सामग्री हमें मिल गई है, हमें जरूर मिलती है सामग्री। 

यहां एक नंबर से ही काम होता है, यहां पर कोई फ्रॉड नहीं होता। ऐसा यह जो कमेंट है, कमेंट में भी ऐसा बहुत से जो व्यूअर्स हैं, वह बोलते हैं और उनको मिली है, उनको पता है, तो इसलिए वह लिख करके भी दूसरे लोगों को बताते हैं।

कमला महाविद्या साधना जीवन का दृष्टिकोण

और देखिए, बहुत से लोग तो खैर हर तरह के व्यक्ति, उनका तो कहना ही क्या है! कि जो लोग चतुराई से चलते हैं, मैं आपको एक सीधी बात बताता हूँ कि जो लोग चतुराई से चलते हैं कि हम ऐसा करेंगे तो ऐसा होगा, ऐसा करेंगे तो ऐसा होगा, वह लोग जीवन में प्राप्त नहीं कर पाते कुछ भी।

 आप बिल्कुल एकदम सीधे रास्ते से चलिए। बिल्कुल यह कहना कि वह व्यक्ति बहुत सीधा है, ज्यादा तिकड़मबाजी या फिर कोई दूसरी चीज नहीं है कि वह किसी के साथ में धोखाधड़ी ऐसा कुछ करे, वह व्यक्ति वास्तव में बहुत सही रहता है, शांत मन से रहता है .

 भगवान की कृपा उस पर जरूर होती है। और जो यह कहते हैं कि धोखेबाज हो, तरह-तरह के षड्यंत्र रचते हो, उस व्यक्ति को जीवन में कुछ नहीं मिलता, सिर्फ धोखा ही मिलता है।

कमला महाविद्या साधना की विधि

खैर, चलिए, यह साधना आपको नवरात्रि के दिनों में भी कर सकते हैं और नौ दिन के लिए साधना कर सकते हैं इसको। नवरात्रि में केवल नौ दिन, आगे भी आप इस साधना को बढ़ा सकते हैं, 15 दिन भी कर सकते हैं, 21 दिन भी कर सकते हैं, ठीक है? और रात्रि को 9:00 बजे के बाद ही आपको यह साधना शुरू करनी है।

कमला महाविद्या साधना तैयारी

आपको क्या करना है कि आप यह सामग्री लेकर स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और लाल रंग के वस्त्र धारण कर लें तो बड़ी अच्छी बात है, क्योंकि माता को लाल रंग पसंद है। सफेद रंग के वस्त्र भी धारण कर सकते हैं। तो स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें और घर के ही किसी भी एकांत कमरे में कर सकते हैं या फिर अपने पूजा घर में भी आप इस साधना को कर सकते हैं। इसमें किसी भी अवधि में किसी प्रकार के डरने की आवश्यकता नहीं है।

कमला महाविद्या साधना आसन और पूजा स्थल

आप साधना कक्ष में पूर्व दिशा की तरफ़ अपना मुंह करके बैठेंगे और लाल रंग का आसन आप अपने लिए रख लेंगे नीचे बैठने के लिए। सामने जो आपकी चौकी है, उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछा दें और एक तांबे की जो प्लेट है, उसमें एक कमल का फूल जरूर रखें, क्योंकि कमला की साधना है, तो इसलिए माता लक्ष्मी को कमल का फूल सर्वाधिक प्रिय है, तो वह कमल का फूल आप जरूर रखें उसमें, ठीक है?

कमला महाविद्या साधना पूजा की अन्य वस्तुएं

और घी का दीपक, शुद्ध घी का दीपक जलाएं, अगरबत्ती, धूपबत्ती जो भी आपके पास है सुगंधित, वह जलाएं। इत्र भी आप चढ़ा सकते हैं इसमें, क्योंकि लक्ष्मी जी को इत्र चढ़ाया जाता है। साथ ही, चावल भिगो के रख लें, कुछ भी आप मिष्ठान घर में बना करके रख सकते हैं। एक कटोरी में आप रख सकते हैं वह। और सुगंधित पुष्प हो गए, सिंदूर या रोली या कुंकुम जो भी आपके पास है टीका लगाने के लिए, वह भी आप इसमें ले लें।

कमला महाविद्या साधना श्रृंगार का सामान

अब आपको क्या करना होगा कि जब भी आप यह सारी सामग्रियां रख लेंगे, तो आप कमला माता के लिए आप श्रृंगार का सामान भी रख सकते हैं। देखिए, जैसे कि स्त्रियों के श्रृंगार का सामान होता है, वह भी आप रख सकते हैं। 

वह पैकेट बना-बनाया आता है या फिर आप ले लीजिए, दुकान से मिल जाता है, तो वह भी आप रख सकते हैं माता को प्रसन्न करने के लिए। और सामने ही अपने गुरु की तस्वीर, भगवान शिव की तस्वीर और कमला माता यानी कि लक्ष्मी जी की आप तस्वीर जरूर रखें।

कमला महाविद्या साधना पूजन विधि

अब आपको क्या करना होगा, जो आपकी सामग्री है, जैसे यंत्र हो गया, जप की माला, रक्षा माला और सम्मोहन गुटिका, तो आप क्या करेंगे, सबसे पहले आपको भगवान श्री गणेश का पूजन करना है। “वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”

 हाथ जोड़कर के भगवान श्री गणेश से प्रार्थना करें कि हे गणेश प्रभु, मैं यह कमला माता की साधना करने जा रहा हूँ और इस साधना में मुझे पूर्ण सफलता मिले और हर प्रकार से आप मेरी रक्षा करें। 

इतना कहकर भगवान गणेश जी को सिंदूर का टीका लगाएं, चावल चढ़ाएं, पुष्प चढ़ाएं, धूप-दीप दिखाएं। मंत्र बोलते हुए दिखा सकते हैं, “श्री गणेशाय नमः पुष्पं समर्पयामि, श्री गणेशाय नमः अक्षतान् समर्पयामि, श्री गणेशाय नमः धूपं समर्पयामि।”

 इस तरीके से बोल करके आप सारी चीजें कर सकते हैं, ठीक है? और भगवान श्री गणेश का जो मंत्र है, उनको सर्वाधिक प्रिय मंत्र है, “वक्रतुंडाय हुम्”। इस मंत्र का एक माला का जप जरूर करें और यह आप रुद्राक्ष की माला से ही कर सकते हैं, ठीक है?

 गुरु पूजन

जब भगवान श्री गणेश की आप पूजा-अर्चना कर लें, उसके बाद आपको अपने गुरु की पूजा करनी है। हाथ जोड़कर के प्रार्थना करें और “त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव। त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव॥” आप इस श्लोक को बोलकर, जो भी आपके गुरु हैं, उनका चित्र सामने होना चाहिए।

 और अगर भगवान शिव को गुरु माना है, तो भगवान शिव की तस्वीर, नारायण को गुरु माना है, तो नारायण की तस्वीर सामने रखें, जिसको भी आपने गुरु माना है। 

और आपके पास गुरु चित्र है, तो आप उसी की तस्वीर रखें। और अगर मेरे गुरु भाई हैं, तो डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली जी की तस्वीर सामने रखें और उसके बाद आपको पूजन करना है। इसी तरीके से, जैसे कि मान लिया मेरे गुरु भाई हैं, तो वह क्या करेंगे, “ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः, पुष्पं समर्पयामि।” इस तरीके से पुष्प, चावल, धूप-दीप, सिंदूर का टीका, गुरु जी को, यह सब आप उनको अर्पण करेंगे। 

छोटा सा पूजन करने के बाद आपको गुरू मंत्र का एक माला का जप जरूर कर लेना है और रुद्राक्ष की माला से ही कर सकते हो, ठीक है? जो रुद्राक्ष की माला है, वह मंत्र सिद्ध प्राण प्रतिष्ठायुक्त होनी चाहिए। अगर आपको ऐसी माला भी चाहिए, तो आप ले सकते हैं, आपको मिल जाएगी वह माला भी, ठीक है?

 और जिन साधकों ने किसी दूसरे को गुरु माना है, उनके पास गुरू मंत्र है, जैसे कि वह गोरखनाथ को भी बहुत से लोग गुरु मानते हैं, उनका गुरू मंत्र है, तो वह उसी गुरू मंत्र का जाप करेंगे और उन्हीं का पूजन करेंगे। 

भगवान शिव को आपने गुरु माना है, तो आप भगवान शिव का पूजन उसी प्रकार से करेंगे, “ॐ नमः शिवाय” बोलते हुए और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का ही आपको जप करना है, एक माला का जप रुद्राक्ष की माला से कर सकते हैं। 

और गुरुजी से हाथ जोड़कर प्रार्थना करें कि गुरुदेव, मैं यह साधना करने जा रहा हूँ और इस साधना में मुझे पूर्ण सफलता मिले, ऐसा मुझे आप आशीर्वाद दीजिए।

H4: बटुक भैरव पूजन

उसके बाद आपको भगवान बटुक भैरव का पूजन करना है। मानसिक रूप से आप उनका पूजन कर सकते हैं, अगर फोटो नहीं है तो। फोटो है तो बड़ी अच्छी बात है, सामने फोटो है तो उनका भी पूजन इसी प्रकार से करेंगे। और एक माला का जाप आपको इस मंत्र का जरूर करना है, “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ”। इस मंत्र का आपको जप करना है और इसी मंत्र को आप बोल करके आप उनका पूजन कर सकते हैं, जैसे कि पुष्प चढ़ाना हुआ, धूप-दीप दिखाना हुआ, यह सब कर सकते हो, ठीक है?

कमला महाविद्या साधना का पूजन

अब इसके बाद आपको क्या करना है कि जो माता कमला की या माता महालक्ष्मी की जो तस्वीर रखी हुई है, उस तस्वीर का भी पूजन आपको इसी प्रकार से करना है, ठीक है? अब उसके लिए आपको माता महालक्ष्मी का कोई भी मंत्र का इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे “ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः”। इस प्रकार से भी आप बोल सकते हैं।

 जैसा कि देखिए, भगवान का पूजन करने के लिए, माता का पूजन करने के लिए आपकी श्रद्धा होनी चाहिए। श्रद्धा सबसे पहले, श्रद्धा-भाव, विश्वास सबसे पहले। 

अगर यह नहीं है, तो फिर साधना व्यर्थ है, सीधी सी बात है। पूजन करेंगे और जो प्लेट में आपने, तांबे की प्लेट हो या स्टील की प्लेट हो, उसमें आपने जो कमल के पुष्प हैं, कमल की पंखुड़ियों को तोड़ करके और बिछा देंगे और उस पर आपको कमला यंत्र को स्थापित कर देना है। 

और उसके बाद कमला यंत्र के ठीक ऊपर ही आपको सम्मोहन गुटिका जो है, वह स्थापित कर देनी है। और आपको फिर पूजन करना है, कमला यंत्र का पूजन करेंगे, धूप से, दीप से, चावल से, कुमकुम से टीका लगाएंगे और प्रसाद के लिए आप थोड़ी सी कटोरी में कोई भी मिष्ठान अगर आप रख सकते हैं माता के लिए, ठीक है?

कमला महाविद्या साधना में रक्षा विधान

जब आप यह पूजन कर लेंगे, पूजन करने के बाद फिर आपको एक रक्षा माला जो मैंने आपको दी है, उस रक्षा माला को अपने गले में धारण कर लेंगे। और एक मंत्र का आपको जप करेंगे, जिसमें आप रक्षा बंधन करेंगे। उल्टे हाथ में चावल ले करके और सीधे हाथ से सभी दिशाओं में चावल फेंकते हुए आपको मंत्र बोलना है, “ॐ अपसर्पन्तु ये भूता ये भूता भूमि संस्थिता। ये भूता विघ्नकर्तारस्ते नश्यन्तु शिवाज्ञया॥ अपक्रामन्तु भूतानि पिशाचाः सर्वतो दिशम्। सर्वेषामविरोधेन पूजाकर्म समारभे॥” इस मंत्र का जाप करते हुए और सभी दिशाओं में, यानी अपने चारों तरफ कमरे में चावल आपको फेंक देने हैं। यह एक बहुत ही तीव्र और शक्तिशाली रक्षा विधान है।

कमला महाविद्या साधना में विनियोग

जब आप ऐसा कर लेंगे, करने के बाद आपको हाथ में जल लेकर के और विनियोग करना है। और मैं यह सब जो आपको बता रहा हूँ, यह सब मैं आपको लिख करके और इस लेख में ही दे दूंगा। हाथ में जल लेकर के, कुछ जल लेकर के सीधे हाथ में और आपको बोलना है, “ॐ अस्य श्री महालक्ष्मी मंत्रस्य ब्रह्मा ऋषिः, निचरत् छन्दः, श्री महालक्ष्मी देवता, श्रीं बीजं, ह्रीं शक्तिः, ऐं कीलकं, श्री महालक्ष्मी प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः।” यह बोलते हुए आपको यह विनियोग करना है और जल को पृथ्वी पर छोड़ देना है।

कमला महाविद्या साधना में न्यास

अब उसके बाद आपको क्या करना कि बाएं हाथ में जल लेकर के और दाहिने हाथ की सभी उंगलियों को उसमें जल से छुआ करके और पांचों उंगलियों को और मंत्र उच्चारण करते हुए अपने अलग-अलग अंगों का स्पर्श आपको करना है। और मन में आपको भावना देनी है कि यह सभी मेरे अंग तेजस्वी, पवित्र हो रहे हैं। और ऐसा करने से आपके जो अंग हैं, उनमें प्राण चेतना आ जाती है। तो यह ऋष्यादि न्यास है।

 इसमें आप बोलेंगे, “ब्रह्मर्षये नमः शिरसि” (अपने सिर को स्पर्श करेंगे), “निचरत् छंदसे नमः मुखे” (अपने मुख को स्पर्श करेंगे), “श्रीमहालक्ष्मी देवतायै नमः हृदि” (अपने हृदय को स्पर्श करेंगे), “श्रीं बीजाय नमः गुह्ये” (गुप्तांगों को स्पर्श करेंगे), “ह्रीं शक्तये नमः पादयोः” (दोनों पैरों को स्पर्श करेंगे), “ऐं कीलकाय नमः नाभौ” (नाभि को स्पर्श करेंगे), “विनियोगाय नमः सर्वांगे” (पूरे शरीर को स्पर्श करेंगे)।

कमला महाविद्या साधना  में  करन्यास

उसके बाद आपको करन्यास करना है। अपने दोनों हाथों की अंगूठे से अपनी उंगलियों के जो विभिन्न उंगलियां हैं, उनको स्पर्श आपको करना है। ऐसा करने से उंगलियों में प्राण चेतना प्राप्त होती है। “श्रां अंगुष्ठाभ्यां नमः, श्रीं तर्जनीभ्यां नमः, श्रूं मध्यमाभ्यां नमः, श्रैं अनामिकाभ्यां नमः, श्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः, श्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः।” इस प्रकार से करते हुए आपको करन्यास करना है।

कमला महाविद्या साधना में  हृदयादि न्यास

उसके बाद हृदयादि न्यास करना है। आपको क्या करना है कि दोबारा से अपने उल्टे हाथ में थोड़ा जल लेकर के, पांचों उंगलियों को एक साथ में समूह बना करके, जोड़कर और उनको उसमें पानी में लगा करके और पांचों उंगलियों से ही आपको अपने शरीर के विभिन्न अंगों को स्पर्श करना है। 

और मन में भावना करनी है कि मेरे सभी अंग तेजस्वी, पवित्र होते हैं, जिससे कि आप सभी अंग शक्तिशाली हों, उनमें चेतना प्राप्त होगी। “श्रां हृदयाय नमः” (अपने हृदय को स्पर्श करें), “श्रीं शिरसे स्वाहा” (अपने जो सिर है, उसको स्पर्श करेंगे), “श्रूं शिखायै वषट्” (अपनी शिखा को स्पर्श करेंगे), “श्रैं कवचाय हुम्” (दोनों कंधों पर स्पर्श करेंगे), “श्रौं नेत्रत्रयाय वौषट्” (अपने नेत्रों को स्पर्श करेंगे), “श्रः अस्त्राय फट्” (अपने पूरे शरीर पर आपको सीधा हाथ घुमाकर के चारों दिशाओं में आपको चुटकी बजानी है, सिर के ऊपर से), ठीक है?

कमला महाविद्या साधना में ध्यान और मंत्र जाप

और फिर उसके बाद आपको माता का ध्यान करना है। हाथ जोड़कर के माता भगवती से प्रार्थना करें कि हे मां, मैं आपका पूजन कर रहा हूँ और इस प्रकार से आपको जो यंत्र है, उसका भी आपने पूजन कर ही चुके हैं। 

और मैं आपके जो मंत्र का जाप कर रहा हूँ और मुझे इसमें आप सफलता प्रदान करना। और इसके साथ ही अगर मुझसे कोई गलती हो तो मुझे क्षमा करना। और उसके बाद आपको क्या करना है कि जो आपकी जप की माला है, उस जप की माला से आपको मंत्र जाप शुरू कर देना है।

कमला महाविद्या साधना में मंत्र

और जो मंत्र का आपको जप करना है, वह मैं आपको बता देता हूँ। मंत्र इस प्रकार से है: “ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं ह्सौः जगत्प्रसूत्यै नमः।”

कमला महाविद्या साधना  में जाप की संख्या

इस मंत्र का आपको जप करना है और यह मंत्र का जाप आप 21 माला प्रतिदिन आपको करनी है। आप चाहें तो ज्यादा भी कर सकते हैं, 51 माला का भी कर सकते हैं, ठीक है? अपनी श्रद्धा के अनुसार करें, जितनी देर बैठ सकते हैं। ऐसा नहीं है कि आप बैठ जाएं और फिर कमर दुखने लगे, पैर दुखने लगे, उसमें मंत्र जप करने का कोई फल भी प्राप्त नहीं होता है।

तो इसलिए केवल उतने मंत्रों का जाप करें, जितना आप आराम से बैठ सकें। अगर आप 11 माला का जप करते हैं, तो फिर 11 माला का भी कर सकते हैं आप। साधना को लगातार करें, फिर देखिए आपको जरूर फल तो मिलना ही मिलना है, निश्चित रूप से।

और कहते हैं कि अगर आपने सवा लाख मंत्रों का जाप कर लिया या डेढ़ लाख मंत्रों का लगातार आपने जाप किया, तो आपको साक्षात माता के दर्शन भी हो सकते हैं। यह भी हंड्रेड परसेंट सच है कि माता के दर्शन आपको जरूर हो सकते हैं, अगर आप एक तो लगातार आप साधना करते हैं। और यह आपके ऊपर डिपेंड है कि आप किस प्रकार से साधना करना चाहते हैं, ठीक है?

कमला महाविद्या साधना  में माला का चयन

तो देखिए, इसमें मैंने आपको जो माला बताई, माला आप स्फटिक की भी आप ले सकते हैं, इसमें मूंगे की माला भी चल जाती है, इसमें कमलगट्टे की भी चल जाती है, ठीक है? तीनों मालाएं चल जाती हैं। अगर आपको प्राण प्रतिष्ठित करके मेरे यहां से कोई भी तीनों में से एक माला मिलती है, तो आप उसको ग्रहण करेंगे, ठीक है?

कमला महाविद्या साधना के नियम और अनुभव

और इस मंत्र की जब साधना करेंगे, जब तक, तब तक आपको ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना है। यह नियम के सिद्धांत का पालन करना है। अब मैं आपको एक चीज बता दूं, धर्म के सिद्धांत का पालन करने के लिए आप सिर्फ यह सोचें कि आपको किसी का दिल नहीं दुखाना है, बस बात खत्म। सारी चीजें उसी के अंदर आ जाएंगी। आपके कुछ कार्य करने से किसी दूसरे व्यक्ति का दिल न दुखे, बस और कुछ नहीं करना है आपको, सिर्फ इस चीज का ध्यान रखना है।

कमला महाविद्या साधना संभावित अनुभव

अब इसमें जो आपके सामने अनुभव आ सकते हैं, वह आपके सामने सेम उसी तरीके से आ सकते हैं जैसे कि आपके एक योगिनी साधना में आते हैं या फिर अप्सरा साधना में आते हैं, ऐसे अनुभव आपके सामने आ सकते हैं। तो इसलिए विचलित होने की आवश्यकता नहीं है, साधना आपको कंटिन्यू जारी रखें, ठीक है?

कमला महाविद्या साधना के उपरांत

तो यह साधना बहुत महत्वपूर्ण साधना है जो मैंने आज आपको बताई है। इसमें किसी प्रकार की कोई भी आशंका न करें। जब आपकी साधना पूरी हो जाए, तो इस साधना सामग्री को आप अपने घर पर ही रखें और यदा-कदा आप इसका पूजन करते रहें। यह आपको कहीं विसर्जित करने की आवश्यकता नहीं है, ठीक है?

कमला महाविद्या साधना समापन

इसी के साथ मैं अपने इस लेख को यहीं पर समाप्त करता हूँ। तो मेरे साथ बोलिए, बोलिए वीर बजरंगबली हनुमान जी महाराज की जय! बोलिए मेरे परमहंस गुरुदेव की जय!

note बिना गुरु के न करे अच्छे विद्वान् गुरु के देख रेख में सीख कर करे 

मातंगी महाविद्या साधना का रहस्य तांत्रिक और कथा माता की ph.852857364

मातंगी महाविद्या साधना का रहस्य तांत्रिक और कथा माता की

 

मातंगी महाविद्या साधना का रहस्य तांत्रिक और कथा माता की

मातंगी महाविद्या साधना का रहस्य तांत्रिक और कथा माता की
मातंगी महाविद्या साधना का रहस्य तांत्रिक और कथा माता की

 मां मातंगी तांत्रिक सरस्वती हैं। मातंगी, मां मातंगी। कौन से खास तरीके हैं जिससे मां मातंगी की पूजा करें? मूंगे की माला को आप इस नवरात्रि में सिद्ध कर सकते हैं।

मां मातंगी से कौन सा प्लैनेट जुड़ा हुआ है? मातंगी से सन जुड़ा है, सूर्य। ओके। क्या माता की कृपा जब मिलने लगती है मातंगी की, तो कुछ खास तरीके के इंसिडेंट आपकी लाइफ में होने लगते हैं? सबसे पहले तो आपको चैनलिंग होने लगेगी।

जब आपके अंदर कॉन्फिडेंस और पावर आने लगे, समझ जाइए कि मां मातंगी आपने, उनकी कृपा आप पर हो गई। मां सरस्वती की पूजा करना और मां मातंगी की पूजा करना में अंतर कितना है? मां मातंगी की पूजा जो एक्सीलरेटेड फॉर्म है, आपके नीचे स्केट्स लग गए हैं।

अब आप बिल्कुल तेजी से भाग सकते हैं। लेकिन इसमें यह भी एक जरूरी है कि हमें केयरफुल रहना है। बहुत लोग 10 महाविद्या से डर जाते हैं, उनको लगता है ये बड़े उग्र फॉर्म हैं, क्या हो जाएगा?

म्यूजिशियन है कोई,  उसका बेटा भी सिंगर है। फैमिली में चेन में चली आती है सेम इंडस्ट्री में, क्या वो मां मातंगी की कृपा की वजह से हो रहा है? बिल्कुल।

तंत्र सब सक्सेसफुल लोग करते हैं। बड़े-बड़े लोग जो बड़े-बड़े पदों पर होते हैं, वो भले ही बाहर जाकर शो ऑफ करते हैं कि नहीं ये सब उनकी खुद की प्रैक्टिस की वजह से है, बट वो कहीं ना कहीं तंत्र हेल्प लेते हैं।

बिल्कुल लेते हैं। मेरे से हेल्प लेते हैं। जब तक आपकी इंटेंशन अच्छी है, तंत्र को यूज करना गलत नहीं। है।

 

मातंगी महाविद्या साधना – परिचय

हेलो, हाई, वेलकम। मैं हूं आपके साथ तुषार कौशिक। गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर आज का पोस्ट दश महाविद्याओं की सीरीज में सबसे ज्यादा इंटरेस्टिंग है क्योंकि मैं जो पोस्ट लिख रहा हूं या जो मेरा प्रोफेशन है, वह इन्हीं महाविद्या से जुड़ा हुआ है। आज की जो देवी रहेंगी, आज का जो 10 महाविद्याओं में रूप है, वो है मां मातंगी का।

मां मातंगी के बारे में जो मुझे बताया गया आज के इस पोस्ट में, वो यह है कि यह मां सरस्वती का तांत्रिक फॉर्म है।

यानी कि अगर मां सरस्वती की कृपा आपको एक्सीलरेशन के मोड में चाहिए, अगर आपको तंत्र के जरिए मां सरस्वती से कनेक्ट करना है, तो आपको मां मातंगी की पूजा करनी चाहिए।

और इस सीरीज को लगातार हम गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर कर रहे हैं डॉक्टर मनमीत के साथ। तो आइए, आज के इस पोस्ट को हम शुरू करते हैं और डॉक्टर मनमीत से जानना शुरू करते हैं मां मातंगी के बारे में।

आज की जो यह सीरीज है दश महाविद्याओं की, इसमें हम बात करेंगे आज मां मातंगी पर। और क्योंकि लगातार यह सीरीज बहुत पॉपुलर होती जा रही है और जितने भी पाठक हैं, वो कह रहे हैं कि अगला पोस्ट कब आएगा या अगली देवी के बारे में कब पता लगेगा।

तो आज मां मातंगी की बात करते हैं। रीजन बिहाइंड इट, जितना मैंने समझा, जितना मैंने पढ़ा, बाकी तो आप बताएंगी कि मां मातंगी जो हैं, वो परफेक्शन की देवी हैं।

वो स्किल्स की भी देवी कह सकता हूं, टैलेंट की भी देवी कह सकता हूं। पोस्ट लिखना भी एक टैलेंट है, तो बेसिकली मैं कहूंगा कि मुझे भी उनकी पूजा करनी चाहिए। तो बेसिकली, आप पहले मुझे मां मातंगी के बारे में बताइए, कौन हैं ये देवी? इनकी शुरुआत कैसे हुई है? कहां से इनका प्राकट्य हुआ?

मां मातंगी कौन हैं ?

 मां मातंगी तांत्रिक सरस्वती हैं।

और ये सरस्वती मां का जो, जिसको हम कहते हैं तांत्रिक फॉर्म है। ऑकल्ट की देवी हैं, लर्निंग की देवी हैं, स्पीच की देवी हैं, कम्युनिकेशन, एकेडेमिक्स, ऑकल्ट, एस्ट्रोलॉजी, डीपर साइंसेज, मैजिक, ओके, तंत्र। इसका जितना भी विजडम है, मां सरस्वती की जितनी भी लर्निंग्स हैं, वह आउटसाइड फोकस्ड है।

हमारी स्पीच, हमारी वाणी, हमारा बोलना, हमारा लिखना, पढ़ना। यह इनवर्ड फोकस्ड है। तो बाहर नॉलेज है, अंदर विजडम है। तो ये कहती हैं कि आप अपने सोल को टैप कीजिए, अपनी आत्मा को टैप कीजिए, अपने हायर सेल्फ के साथ मेडिटेशन में जाइए। तो यह बहुत मेडिटेटिव फॉर्म है मां का। और इनका कलर जो है, वह ग्रीन है एंड कपड़े इन्होंने रेड पहने हुए हैं।

मां मातंगी का प्राकट्य और स्वरूप

इनका जो पूरी काया है, वह एमरल्ड ग्रीन है। इनके पास एक पैरेट होता है। और इनका जो प्राकट्य है, वो कहते हैं इनको उच्छिष्ट चांडालिनी भी कहा जाता है।

ऐसा कहते हैं कि लॉर्ड शिवा और माता पार्वती जब एक बार खाना खा रहे थे और उन खानों में से कुछ थोड़ा जो खाना है, वो बच गया और नीचे गिर गया। उस नीचे गिरे हुए जो खाने से जो जन्म हुआ, वो इनका हुआ।

अच्छा, मतलब जो उनकी थाली से बाहर गिरा खाना, उससे मां मातंगी प्रकट हुईं।

मातंगी हैं, प्रकट हुईं। ऐसा कहते हैं कि वह मां पार्वती का उनके फादर के ऊपर एक वरदान था, एक विश थी जो उन्होंने उनको ग्रांट करी। ऋषि मातंग थे उनके फादर और उनकी बेटी हुईं मातंगी।

समाज में उपेक्षितों की देवी

अब क्योंकि वह आउटकास्ट फूड से जन्मीं, तो ऐसा भी कहते हैं कि शी इज द गॉडेस ऑफ द आउटकास्ट। जो शेड्यूल कास्ट होते हैं, या मैं यहां पे शेड्यूल कास्ट को कास्ट सिस्टम में नहीं गिनूंगी, मैं कहूंगी कि अगर आपको शेड्यूल कास्ट फील होता है अपने घर में, या अपने ऑफिस में, या अपनी सोसाइटी में, समाज में, अपने इन-लॉज के घर में, जहां भी आपको एज एन आउटसाइडर देखा जाता है या आपको एज एन आउटसाइडर फील होता है

तो यह वो देवी हैं जिनको आपको प्रसन्न करना है। क्योंकि ये आपकी फीलिंग को एकदम समझ सकती हैं और आपको बहुत कॉन्फिडेंस देती हैं स्पीच का, अपने लिए एक स्टैंड लेने का, खड़े होने का। तो जितने भी लोगों को बड़ा विक्टिमाइज्ड फील होता है, एब्यूज में रहते हैं या उनको लगता है कि हमें छोटी नजर से देखा जा रहा है, यह उनकी देवी है।

 

किन्हें करनी चाहिए मां मातंगी की साधना ?

 

ओके। ये जितने भी ऑकल्ट हैं, एस्ट्रोलॉजर्स हैं, हीलर्स हैं, कोचेस हैं, साइकिक्स हैं, मीडियम हैं, बनना चाहते हैं, इंट्यूशन स्ट्रांग करना चाहते हैं, ऐसे ज्ञान का कोष पाना चाहते हैं जो इजीली अवेलेबल नहीं है।

देखिए, कहते हैं कि ये सिद्धियां तो ऊपर से आती हैं या आप लोगों ने बहुत तंत्र-मंत्र किया होगा या साधना करी होगी पिछले जन्मों में, तब जाकर आपको ये स्थिति प्राप्त होगी।

यह कहीं पर लिखी नहीं हुई, इसकी बुक आप सीबीएसई या एनसीआरटी से खरीद के पढ़ नहीं सकते, कोई कोर्स नहीं है। तो इनको आप साधें।

मैं कहूंगी कि ना सिर्फ इन नवों में, पर अगर आप लाइट वर्कर हैं, एंपैथ, प्योर नॉलेज चाहिए, आपको आकाशिक रिकॉर्ड्स की नॉलेज चाहिए, पास्ट लाइव्स की नॉलेज चाहिए, किसी भी तरीके की यूनिवर्स की नॉलेज चाहिए, आपको इनको साधना चाहिए।

अगर हायर नॉलेज चाहिए, हायर नोट पर आपको जाकर कुछ सीखना है, कुछ अपने आप को टैलेंटेड बनाना है, तो आपको पूजा करनी चाहिए।

 

मां मातंगी की पूजा विधि

 

अच्छा, मां सरस्वती का आपने कहा कि यह तांत्रिक फॉर्म है। मां सरस्वती टैलेंट देती हैं, मां सरस्वती विजडम की गॉडेस हैं। और ऐसे में अगर मैं देखूं, जो लोग म्यूजिशियंस हैं, खासतौर पर जो लोग मां सरस्वती से रिलेटेड जो काम कर रहे हैं या उसमें परफेक्शन चाहते हैं, उन सब लोगों को पूजा करनी चाहिए। लेकिन आपने कहा ये तांत्रिक देवी हैं, तो जहां फॉर्म आ जाती है ना, बात आ जाती है तांत्रिक देवी हैं, तो कुछ खास तरीके भी होते हैं फिर उनकी पूजा के लिए। कौन से खास तरीके हैं जिससे मां मातंगी की पूजा करेंगे, तो बहुत जल्दी आपको वो कनेक्टिविटी बन जाएगी आपकी उनके साथ?

 

मातंगी महाविद्या साधना पूजा की सामग्री और मंत्र

 

बिल्कुल। मूंगे की माला लें और मूंगे की माला को आप इस नवरात्रि में सिद्ध कर सकते हैं। आपको वेस्ट की तरफ डायरेक्शन में बैठना है और कदंब के फूल से इनकी पूजा होती है, घी का दिया जला के होती है। और आप मां को बताएं कि आपको किस चीज में सिद्धि चाहिए।

सपोज आपको आकाशिक रिकॉर्ड्स पढ़ने हैं, सपोज आप म्यूजिशियन हैं या आपको किसी पर्टिकुलर इंस्ट्रूमेंट को साधना है, आपको वायलिन, तबला, गिटार, हारमोनियम, यह तो हो गए म्यूजिक के। अगर आपको किसी टाइप की नॉलेज चाहिए .

आप कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स में बैठ रहे हैं या आपको अपने बच्चों को वो करना है, तो आप एक पेन को साध सकते हैं, आप उनकी किताबें वहां पर रख सकते हैं उस टाइम के लिए, नवरात्रों के टाइम।

जिस भी फील्ड में आपको परफेक्शन चाहिए, कृपा चाहिए, उस चीज को, उसके उससे जुड़े इंस्ट्रूमेंट को आप वहां पर लेकर आइए।

आप वहां पर लेकर आइए और वहां पर आप रखिए और सब दिन उनका दिया जलाएं और उनका जो बीज मंत्र है, उनका जो मंत्र आप करेंगे, वह मंत्र जरूरी है कि आप या तो 10,000 बार करें या हजार बार करें या 100 बार करें, लेकिन नवरात्रों के टाइम पर ही करें। और वह मंत्र है:

ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा

। मैंने यहां स्क्रीन पर भी चला दिया है। एज ऑलवेज, हमें शुरू कहां से करना है? गणेश वंदना से करना है। उसके बाद इनके जो भैरव हैं, वह मातंग शिव हैं। और मातंग शिव का भी जो मंत्र है, आप सिंपली ओम नमः शिवाय भी कर सकते हैं।

आप एक बार कह दें कि मैं मातंग शिव से ले रही हूं कि मैं मातंगी को साधना चाहूंगी और फिर शुरू कर दें। रुद्राक्ष की माला पर ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय 108 बार करने के बाद आप मूंगे की माला ले लें, मां मातंगी का मंत्र करें।

और यह सारी मालाएं देखिए, अलग-अलग पाउच में जरूर होनी चाहिए, माला कभी गिरनी नहीं चाहिए। और आप इनको जो भी प्रसाद चढ़ाएं, वो ग्रीन कलर का हो या रेड कलर का हो। इनका नाइंथ डे होता है।

शी इज द नाइंथ महाविद्या। तो नाइंथ डे पर अगर आप इनको एक ग्रीन साड़ी चढ़ा सकते हैं या रेड साड़ी या ग्रीन एंड रेड साड़ी मिक्स करके चढ़ा सकते हैं।

गर आप ऐसी जगह जाते हैं जहां पर इनका टेंपल है, जैसे शृंगेरी में भी इनका टेंपल है, लेकिन अगर आप ऐसी जगह नहीं रहते जहां इनका डायरेक्ट टेंपल है, आप किसी भी टेंपल में मां को दे सकते हैं, नहीं तो आप इनको चढ़ा के किसी ब्राह्मण की वाइफ को दे सकते हैं।

मां मातंगी और सूर्य ग्रह का संबंध

अच्छा, प्लैनेट के अगर सिस्टम पर मैं जाऊं, तो आपने पहले के भी कई पोस्ट में मुझे बताया है कि जो हर महाविद्या है, वो किसी ना किसी प्लैनेट से जुड़ी हुई है। और आपको अगर उस पर्टिकुलर प्लैनेट को ठीक करना है, तो आप इन महाविद्या की पूजा कर सकते हैं। मां मातंगी से कौन सा प्लैनेट जुड़ा हुआ है?

मां मातंगी से सन जुड़ा है, सूर्य। और सूर्य से बड़ा… ग्रहों के राजा हैं।

नहीं, वो ग्रहों का राजा है। तो आप ये सोचिए कि इनकी कितनी पावर होगी कि इनका जो आधिपत्य है, वो सूर्य पर है। और अगर आप इनकी पूजा शाम को नहीं कर सकते और अगर करें भी, तो भी आपको सुबह जो है सूर्य को अर्घ्य देना ही देना है।

ओके। तो जो लोग मां मातंगी को साधते हैं, वो सूर्य को अर्घ्य जरूर देंगे।

वैसे भी आई थिंक हमें आदत बना ही लेनी चाहिए सूर्य को अर्घ्य देने की।

पक्की हो जानी चाहिए जिंदगी में। स्पेशली जो मेरे फ्रेंड्स हैं, जो इस फील्ड में हैं, जो और हायर नॉलेज चाहते हैं, उनको सूर्य को इसलिए भी अर्घ्य देना चाहिए क्योंकि उनकी लाइफ में सेल्फ-डिसिप्लिन आए। जैसे सूर्य देखिए, कितने डिसिप्लिन से रोज उठते हैं और उसी समय आते हैं।

हमें सनराइज और सनसेट का टाइम पता होता है। सो सन रिप्रेजेंट्स ब्रिलियंस, इट रिप्रेजेंट्स डिसिप्लिन, इट रिप्रेजेंट्स होप। सन कभी नहीं कहता, ‘आज मैं सैड हूं, आज मैं कम चमकूंगा।’ नहीं, वो तो बादल उनके सामने आ जाते हैं, वो तो उतने ही तेज से चमक रहे हैं।

सो ही रिप्रेजेंट्स इटरनल होप। मां मातंगी आल्सो रिप्रेजेंट्स इटरनल होप। अगर आपकी लाइफ में आपको लगता है कि आप कहीं आउटकास्ट हैं, आप ग्रीफ में हैं, आप डिप्रेशन में हैं, आपको लग रहा है कि शायद आप में टैलेंट पूरा नहीं है या टैलेंट होते हुए भी आपकी इज्जत पूरी नहीं है, बिल्कुल जैसा फील हो रहा है, तो मां मातंगी इज द गॉडेस टू प्रे टू।

 

कैसे जानें कि मां मातंगी की कृपा मिल रही है?

 

अच्छा, एक चीज और भी मैं यहां पर समझूंगा आपसे कि मां मातंगी की कृपा अगर किसी को मिल रही है, जैसे आपने अभी एक तरीका बताया कि नवरात्र में आप एक खास इंस्ट्रूमेंट जिसमें भी आपको अपना परफेक्शन चाहिए, आप उसमें पूजा करिए, क्या माता की कृपा जब मिलने लगती है मातंगी की, तो कुछ खास तरीके के इंसिडेंट आपकी लाइफ में होने लगते हैं?

जी बिल्कुल, बहुत ही अच्छा प्रश्न है। सबसे पहले तो आपको चैनलिंग होने लगेगी। चैनलिंग का मतलब, आप आपको एक आवाज अपने दिमाग में आएगी कि आप इसको ऐसा करिए, जिसे मन की आवाज कहते हैं।

हां, मन की आवाज, हायर कॉन्शसनेस।

बिल्कुल, स्पिरिट गाइड्स, मां मातंगी, कुछ भी कह सकते हैं। आपको यह लगेगा कि हां, अब मुझे ये ऐसे नहीं, ऐसे करना है। आपको गाइडेंस आती रहेगी अपने आप, आपको भी नहीं पता कि कैसे।

तो जो चीजों को आप शायद एक साल से ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं, किसी सुर को, ताल को, लय को या किताब पढ़ते-पढ़ते बहुत लोगों को नींद आ जाती है। आपको पता है तुषार, स्पिरिचुअल बुक्स जब लोग पढ़ते हैं, तो उनको लगता है… ओ, कई लोग सो भी जाते हैं ।

 क्योंकि हम, वो जो ज्ञान आ रहा है, वो हमारे अंदर एब्जॉर्ब ही नहीं हो पा रहा। हमारे में और उसमें वाइब्रेशन का फर्क है। इसमें मैं यह बताना चाहूंगी कि जो हमारा कामाख्या पर पोस्ट था, बहुत लोगों ने मुझे कहा कि हम, हमें चार या पांच अटेम्प्ट्स के बाद ही हम पूरा पढ़ पाए

क्यों? क्योंकि किसी को लगा कि मेरे सर में दर्द हो गई है, किसी को लगा कि मुझे नींद आ गई है, किसी को लगा कि मुझे समझ में नहीं आया, उनको तीसरी या चौथी बार समझ में आया।

इसका क्या मतलब है? कि आपकी वाइब्रेशन है और किसी बुक की या पोस्ट की जो वाइब्रेशन है, अगर वो मैच ना करे, तो आप एंड तक पढ़ नहीं सकते। वो जो नॉलेज निकल के आ रही है, वह आपके साथ मैच ही नहीं कर रही है।

ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहाज्ञान और सरलता का अनुभव

तो मां मातंगी को आप प्रे करें। कई लोग ना फॉरेन लैंग्वेजेस सीख रहे होते हैं, जर्मन, स्पैनिश, फ्रेंच जी, और सीख ही नहीं पा रहे होते। संस्कृत। और वो कहते रहते हैं कि ठीक से नहीं आ रहा।

एस्ट्रोलॉजी सीखने की कोशिश कर रहे हैं पर योग याद नहीं रह रहे, कारक याद नहीं रह रहा। तो इसमें आप मां मातंगी को प्रे करें कि आपकी लर्निंग को आसान कर दे। आपके अंदर एक ऐसी विजडम आ जाएगी, आपने कहा क्या साइंस हैं? ईज आ जाएगा, आराम आ जाएगा।

आपको वही काम करने में नए आइडियाज आएंगे, आपके अंदर उत्साह भर जाएगा, आपको किसी के सामने हिचकिचाहट नहीं होगी, आप कॉन्फिडेंस से बोल सकेंगे।

अगर ये सन को रूल करती हैं, तो सन कॉन्फिडेंस का कारक है, हमारे सोलर प्लेक्सस चक्र का कारक है। सोलर प्लेक्सस इज अबाउट पावर। ओके। तो जब आपके अंदर कॉन्फिडेंस और पावर आने लगे, समझ जाइए कि मां मातंगी आप पर, उनकी कृपा आप पर हो गई है।

 

मां सरस्वती और मां मातंगी की पूजा में अंतर

 

तो जो लोग स्पिरिचुअल पाथ पर लगातार आगे बढ़ रहे हैं, मुझे लगता है कि उन लोगों को तो मां मातंगी से सबसे पहले जुड़ जाना चाहिए।

लोग मां सरस्वती से भी बहुत जुड़े हुए हैं, वाग् सिद्धि के लिए भी जुड़े हुए हैं। और मां मातंगी आपको बिल्कुल इन्हीं इंटेंस ऑकल्ट की एनर्जी की तरफ लेके जा सकती हैं।

जितने भी लोग तांत्रिक हैं, जो भी हीलर्स बनना चाह रहे हैं, वो मातंगी से जुड़ें और मातंगी मां की कृपा अगर मिली, तो हायर नोट पर वो ऑकल्ट की प्रैक्टिस कर पाएंगे, मंत्र सिद्धि के लिए कर पाएंगे। सपोज वो अपने हाथों से किसी को मंत्र लिख के देते हैं, तो वो मंत्र उस इंसान को काम कर जाएगा।

अगर आप कोई दवाई बनाते हैं, जैसे मैं बैच फ्लॉवर बनाती हूं, तो मैं मां मातंगी को ही याद करके बनाती हूं। तो जो ड्रॉप्स उसके अंदर जा रहे हैं, वो सिद्ध ड्रॉप्स हैं।

जब दवाई मेरा स्टाफ बनाता है या जब दवाई मैं बनाती हूं या मेरे क्लाइंट्स बनाते हैं, इन तीनों में बहुत फर्क है। तो मां मातंगी को आप ऑकल्ट के किसी भी काम में यूज कर सकते हैं और उनकी पावर्स को यूज कर सकते हैं ताकि वो आपको इजी कर दे, आपके लिए यह पाथ खोल दें

जन्मजात प्रतिभा और पिछले जन्म के कर्म

तो तुषार, स्पिरिचुअल पाथ को हम चूज नहीं करते, स्पिरिचुअल पाथ हमको चूज करता है। और यह डिपेंड करता है कि आप अपने पूर्व जन्म से क्या कोष लेकर आए हैं।

हो सकता है पूर्व जन्म में आप बस कुछ बनने ही वाले थे और आपकी मृत्यु हो गई। या आपको इतनी नॉलेज आ गई पर आप उसको इंप्लीमेंट ही नहीं कर सके किसी भी कारणवश, ठीक है?

लेकिन इस जन्म में जब आप आओगे और आप मां मातंगी के साथ जुड़ोगे, तो आपको सबसे पहले यह पता चलेगा कि आप वहां कहां छोड़ के आए। कैसे? आपको सडनली एक विद्या आ जाएगी जो लोगों को साल लगेंगे समझने में, आपके सामने वो नंबर्स बोलेंगे, चार्ट बोलेगा, आपके सामने एक इंट्यूशन लाई जाएगी

। क्लाइंट आपके सामने बैठा है, आपके सामने एक इमेज आ जाएगी कि इन दोनों की कल लड़ाई हुई थी, यह डेंजर में है। क्लाइंट ने आपको कुछ भी नहीं बोला, पर ये जो सामने पिक्चर आ गई, यह बताती है कि आपने पिछले जन्म में अपनी दिव्य दृष्टि को खोलने की कोशिश की थी जो इस जन्म में आपको खुली है।

आपकी, आपको उसका फल मिल गया या मिलने वाला है और आपको मां मातंगी से जुड़ना है। तो ऐसे लोग तो या तो 10 महाविद्या की वर्कशॉप करें या इन्हीं 10 दिनों में मां मातंगी को जरूर साधें।

अच्छा, जो लोग कहते हैं कि यह बॉर्न टैलेंट है, जैसे कहते हैं कि अरे, ये बच्चा तो बचपन से बहुत अच्छा सिंगर है। या ये कुछ अलग तरह की सुपर नेचुरल ताकतें किसी को मिलती हैं। ये आपने जो अभी कहा कि पिछले जन्मों में आपने उसकी प्रैक्टिस की थी, उस जन्म में आपको रिजल्ट नहीं मिल पाया और इस जन्म में आपको रिजल्ट मिल रहा है।

बिल्कुल, बिल्कुल सही कहा आपने। और कुछ ऐसे भी तो लोग हैं जिन्होंने पिछले जन्म में बहुत कुछ किया और इस जन्म में वो एक्टिवेट ही नहीं हुआ। उनके अंदर एक चाह ही रह जाती है, एक-एक इच्छा ही रह जाती है और उनको लगता रहता है कि मुझे ये करना है पर टाइम ही नहीं मिलता।

लेट्स से कथक, लेट्स से सिंगिंग, लेट्स से एस्ट्रोलॉजी, उनको कुछ तो खिंचाव आता है। ऐसे लोगों को इन नौ दिनों में मां मातंगी को जरूर साधना चाहिए क्योंकि वो उसके बाद आपको क्लियर कर देंगी कि आपका रास्ता क्या है।

आपने कहा कि यह मां सरस्वती का तांत्रिक फॉर्म है, तो मां सरस्वती की पूजा करना और मां मातंगी की पूजा करना में अंतर कितना है?

मां मातंगी की पूजा जो एक्सीलरेटेड फॉर्म है, आपके नीचे स्केट्स लग गए हैं। अब आप बिल्कुल तेजी से भाग सकते हैं। लेकिन इसमें यह भी एक जरूरी है कि हमें केयरफुल रहना है क्योंकि एनर्जी हाई है।

मतलब एक छोटी-सी तार है जिसमें से थोड़ा करंट लग सकता है और एक बहुत बड़ी तार है। तो बहुत बड़ी तार आपको जल्दी तो करा देगी, लेकिन आपको जुड़ना होगा। बहुत लोग 10 महाविद्या से डर जाते हैं, उनको लगता है बड़े उग्र फॉर्म हैं, क्या हो जाएगा?

जी, जब तक आप कुछ बहुत गलत ना करें, तो कुछ भी नहीं होगा। तो अपने मन का भाव साफ रखिए, एक बच्चे की तरह मां को अप्रोच कीजिए।

आपको फीलिंग खुद ही आ जाएगी। हो ही नहीं सकता कि आप ये पोस्ट पढ़ रहे हैं जब तक आप इस सब्जेक्ट के साथ पिछले जन्म में नहीं जुड़े हैं। हो ही नहीं सकता। अगर आप यह पोस्ट पढ़ रहे हैं, इसका मतलब आप पिछले जन्म में या तो हीलर थे, ऑकल्टिस्ट थे, मीडियम थे, साइकिक थे, कुछ तो थे, आकाशिक रिकॉर्ड रीडर थे, कीपर थे, पिरामिड्स के साथ आपका जुड़ाव रह चुका है।

इस जर्नी को आपको जरूर फिर आगे पर्स्यू करना है। और यह नवरात्रों का टाइम बहुत पावरफुल टाइम है इस जर्नी के ऊपर लाइट डालने के लिए, इसको, इसको, इसके आगे से पर्दा हटाने के लिए। तो मां मातंगी इज द परफेक्ट चॉइस फॉर दैट।

क्या सफल लोग तंत्र की सहायता लेते हैं?

मां मातंगी की पूजा कौन लोग करें, यह तो आपने बताया। लेकिन कुछ ऐसी फैमिलीज होती हैं, जैसे क्योंकि मां मातंगी की हम बात कर रहे हैं, तो मैं ये बात कर रहा हूं जहां पर पीढ़ी दर पीढ़ी आप देखेंगे, तो सब एक ही लाइन में हैं। जैसे म्यूजिशियन है कोई, उसके सिंगर है उसका, तो वो भी सिंगर है। चेन में चली आती है। क्या वो मां मातंगी से हो रहा है?

बिल्कुल। जो उनका जुड़ाव है और जो उनकी उन्नति है। चलो जुड़ाव तो हो गया, उसके बाद उनकी प्रोग्रेस, उनकी उन्नति। तो कहीं ना कहीं या वो मां मातंगी को बहुत मानते हैं। यहां पर मैं आपको यह कहना चाहूंगी कि लोग प्रिटेंड करते हैं कि वे यह सब नहीं करते। तंत्र सब सक्सेसफुल लोग करते हैं।

ओके। जितने भी लोग किसी… आपके तो बड़े हाई-प्रोफाइल क्लाइंट्स हैं, तो आप नाम तो मत लीजिएगा, लेकिन आप क्या इस बात को कह सकते हैं कि बड़े-बड़े लोग जो बड़े-बड़े पदों पर होते हैं, वो भले ही बाहर जाकर शो ऑफ करते हैं कि नहीं ये सब उनकी खुद की प्रैक्टिस की वजह से है, बट वो कहीं ना कहीं तंत्र हेल्प लेते हैं?

बिल्कुल लेते हैं। मेरे से हेल्प लेते हैं। मेरे से पूजाएं कराते हैं। मेरे पुलिस और बिल्कुल पॉलिटिशियंस, बॉलीवुड के लोग आते हैं, सिंगर्स आते हैं, सिंगर्स की वाइफ्स आती हैं, एथलीट्स आते हैं, जो लोग बहुत इंटरनेशनल लेवल पर खेलने जाते हैं, वो आते हैं हरियाणा से। तो वो सब, वो, हां, वो सब तंत्र की हेल्प लेते हैं। बिल्कुल सब तंत्र की। बिजनेसमैन लेते हैं।

ओके। बिजनेसमैन लेते हैं। कुछ ऐसे लोग आते हैं जो प्रिजन में जा चुके हैं, जेल जा चुके हैं, उनको अपनी लाइफ में आगे कोई कुछ करना है। बहुत सारे तरह के लोग आते हैं और सब तंत्र की हेल्प लेते हैं। लोग कहते हैं सिर्फ कि वे हो, ये नहीं, वो नहीं। लेकिन तंत्र एक सटीक तरीका है किसी चीज को सिद्ध करने का। और जब तक आपकी इंटेंशन अच्छी है, तंत्र को यूज करना गलत नहीं है।

 

निष्कर्ष

चलिए, बहुत अच्छा लगा मुझे आज के इस पोस्ट में आपसे बात करके कि मां मातंगी पर हमने बात की और क्योंकि पोस्ट लिखना और इस फील्ड में आगे बढ़ना, यह भी कहीं ना कहीं मां मातंगी की कृपा बहुत जरूरी है। तो मुझे लगता है मुझ पर और आप पर, दोनों पर मां मातंगी की कृपा बनी रहनी चाहिए। आज के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

थैंक यू।