Author: Rodhar nath

मैं रुद्र नाथ हूँ — एक साधक, एक नाथ योगी। मैंने अपने जीवन को तंत्र साधना और योग को समर्पित किया है। मेरा ज्ञान न तो किताबी है, न ही केवल शाब्दिक यह वह ज्ञान है जिसे मैंने संतों, तांत्रिकों और अनुभवी साधकों के सान्निध्य में रहकर स्वयं सीखा है और अनुभव किया है।मैंने तंत्र विद्या पर गहन शोध किया है, पर यह शोध किसी पुस्तकालय में बैठकर नहीं, बल्कि साधना की अग्नि में तपकर, जीवन के प्रत्येक क्षण में उसे जीकर प्राप्त किया है। जो भी सीखा, वह आत्मा की गहराइयों में उतरकर, आंतरिक अनुभूतियों से प्राप्त किया।मेरा उद्देश्य केवल आत्मकल्याण नहीं, अपितु उस दिव्य ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाना है, जिससे मनुष्य अपने जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझ सके और आत्मशक्ति को जागृत कर सके।यह मंच उसी यात्रा का एक पड़ाव है — जहाँ आप और हम साथ चलें, अनुभव करें, और उस अनंत चेतना से जुड़ें, जो हमारे भीतर है ।Rodhar nath https://gurumantrasadhna.com/rudra-nath/

krodh bhairav sadhna anubhav क्रोध भैरव की साधना रहस्य 24 घंटे में चमत्कार देखो

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krodh bhairav sadhna anubhav क्रोध भैरव की साधना रहस्य 24 घंटे में चमत्कार देखो

 

krodh bhairav sadhna क्रोध भैरव की साधना करो और 24 घंटे में चमत्कार देखो एक ऐसा मंत्र जिसके प्रभाव से यक्षिणी, गंधर्व, सर्प, पिशाचिनी आदि देवी-देवताओं को अपने पास बुला सकते हैं। पहली बार यह प्रयोग, यह अनुष्ठान, इस मंत्र का अनुष्ठान आप लोग सुनेंगे। आशा करता हूं आज की इस पोस्ट  से आप लोगों को सीखने के लिए, कुछ जानने के लिए मिलेगा।

जो तंत्र शिक्षार्थी, जो तंत्र सीखना चाहते हैं, मंत्र सिद्धि करना चाहते हैं, मंत्र का अनुष्ठान करना चाहते हैं, उन लोगों के लिए आज का यह कंटेंट है। आप लोग देखिए, आशा करता हूं जरूर आज का अनुष्ठान आप लोगों को पसंद आएगा। किसी भी देवी को अपने पास बुला सकते हैं।


 

क्रोध भैरव की साधना अनुष्ठान की तैयारी और मंत्र का परिचय

 1 शुभ तिथि का चयन

इस मंत्र का अनुष्ठान करने के लिए आप लोगों को एक विशेष शुभ तिथि निर्वाचन करना है। विशेष शुभ तिथि कैसा है? अमावस्या, पूर्णिमा, अष्टमी, चतुर्दशी, संक्रांति या साल में और कई भी शुभ तिथियां चलती हैं, आती हैं, जाती हैं। उस तिथि का निर्वाचन करके अनुष्ठान करने के लिए बैठें।

 

 2  क्रोध भैरव मंत्र की शक्ति

 

अनुष्ठान का मूल विषय है, पहले मंत्र के बारे में आप लोगों को मैं थोड़ा बताना चाहता हूं। यह मंत्र जो है, क्रोध भैरव, अष्ट भैरव का नाम आप लोग जानते होंगे, तो यह है क्रोध भैरव का मंत्र। भैरव का मंत्र है, इसमें तंत्र में उन्मत्त भैरव का मंत्र और देवता को कंट्रोल करके रखते हैं।

उन्मत्त भैरव महादेव का ही एक रूप है। यह क्रोध, नाम से ही पता लग रहा है, क्रोध यानी कि गुस्सा। क्रोध भैरव, उन्मत्त भैरव, तो नाम से ही आप लोगों को मंत्र का पावर या मंत्र की शक्ति के बारे में थोड़ा बहुत आइडिया लग गया होगा।


 

क्रोध भैरव की साधना में सफलता के रहस्य

 

इस मंत्र का अनुष्ठान या मंत्र का अप्लाई कब किया जाता है? जब यक्षिणी की साधना आप लोग करेंगे या पिशाचिनी की साधना करेंगे, यक्ष की साधना करेंगे, तो उस साधना में मुद्रा का विशेष प्रचलन है। इत्यादि कई प्रकार की मुद्राएं आप लोगों को दिखानी पड़ेंगी।

तो मुद्रा के साथ-साथ विशेष मंत्र का भी अनुष्ठान है। यक्षिणी को आकर्षण करने के लिए मंत्र के साथ-साथ मुद्रा का भी प्रचलन है, दिखाना पड़ेगा, नहीं तो सक्सेसफुल नहीं होगा। सीधा अगर कोई व्यक्ति मंत्र अनुष्ठान करता है, कई लोग आकर बोलते हैं, गुरुजी, मैं तो बहुत दिन से पिशाचिनी की साधना कर रहा हूं, यक्षिणी की साधना कर रहा हूं, मेरे गुरु ने मुझे मंत्र दिया है या कोई जगह से मुझे मंत्र मिला है या कोई अनुष्ठान से मुझे मंत्र मिला।

कोई सभा चलता है, सभा से मुझे मंत्र मिला है, यक्षिणी का यंत्र मिला, ताबीज का चीज मिलता है लोगों को, सिर्फ ताबीज मिलता है और यक्षिणी का फोटो देते हैं। ऐसे सभा होकर डिस्ट्रीब्यूशन होता है, फ्री ऑफ कॉस्ट होता है।

यक्षिणी का यंत्र तो ठीक है, यक्षिणी का ताबीज होता है, यक्षिणी का फोटो, इत्यादि माला और यक्षिणी का स्क्रिप्ट, ये सब कुछ सेल होता है। ठीक है। चलिए, तो ये सब मुझे मिला लेकिन अनुष्ठान करने के बाद कुछ सफलता नहीं मिली।


 

क्रोध भैरव की साधना – टोटका और साधना में अंतर

 

तो सब चीज के आगे और पीछे कुछ बात है। इसीलिए तंत्र शिक्षार्थी को मैं बोलता हूं, तंत्र, टोटका, उपाय और तांत्रिक प्रयोग, दोनों में जमीन-आसमान का फर्क है। टोटका-उपाय सामूहिक एक छोटा सा मनोकामना पूर्ण हेतु आप लोग कर रहे हैं। आपका परीक्षा है, परीक्षा में अच्छा रिजल्ट हो, इस सबसे प्रार्थना करके एक टोटका अप्लाई किया।

यह एक छोटा सा अनुष्ठान है। इसका मतलब यह नहीं कि वो टोटका को रोज अप्लाई करते हैं। आप लोग विशेष मनोकामना पूर्ति हेतु टोटका करते हैं। लेकिन साधना एक अलग विषय है। जब तक मनोकामना पूर्ण न हो, मंत्र को जोड़ते नहीं, उस मंत्र को खींचते हुए चाहते हैं आजीवन, यानी कि जब तक साधक जीवित स्थिति में है, तब तक उस मंत्र को साधक खींचते हुए जाएंगे। इसको साधना बोलते हैं। यह कलिकाल है।

सतयुग में अगर 1000 मंत्र जाप से सिद्धि होती, कलिकाल में वह 4000 मंत्र जाप से सिद्ध होगा। कलिकाल में मंत्र सिद्धि, मंत्र सिद्धि इतना आसान है? मैं पहले भी आप लोगों को बोला, मंत्र सिद्धि करने के लिए रामायण, महाभारत, इत्यादि जो पुराण हैं, ये सब को देखिए। देखने के बाद पता लग जाएगा, उस समय के लोग कितना मेहनत करते थे मंत्र सिद्ध करने के लिए।

रावण को देखिए, कितना मेहनत किया मंत्र सिद्धि करने के लिए। कलिकाल में हैं, रावण अगर 1000 जाप किया, तो आप लोगों को 4000। राम ने अगर एक लाख जाप किया, तो अभी वर्तमान समय में चार लाख जाप करना पड़ेगा। इतना आसान थोड़ी है।


क्रोध भैरव की साधना तांत्रिक प्रयोग की मुख्य प्रक्रिया

 

तो ये जो आज का ये प्रयोग है, आज का प्रयोग तांत्रिक प्रयोग है। बहुत सीधा, बहुत सटीक प्रयोग है, लेकिन यह प्रयोग मुश्किल है। मंत्र बहुत जटिल है, मुश्किल है मंत्र अनुष्ठान करना। मंत्र का दो-एक शब्द मैं आप लोगों को बता दूंगा, पूरा मंत्र उच्चारण करके नहीं बता पाऊंगा। मंत्र में जो तीन शब्द हैं, वो मैं बता दूंगा।

इस मंत्र का अनुष्ठान करने हेतु आप लोगों को मात्र दस हजार बार मंत्र जाप करना है। जहां पर अमुक शब्द लिखा है, उस अमुक शब्द में आप लोगों को जिस भी देवी-देवता को बुलाना चाहते हैं अपने पास, उसका नाम बिठाना है। मान लीजिए, आप सुरसुंदरी यक्षिणी को बुलाना चाहते हैं, बिठा दीजिए अमुक की जगह पर सुरसुंदरी नाम होगा।

यही तंत्र है, यही मंत्र है, यही नियम है। शास्त्र में जो बोला, मैं वही चीज आप लोगों के सामने प्रेजेंट कर रहा हूं, ना कुछ बढ़ा-चढ़ा कर, जो है सीधा, स्ट्रेट आप लोगों के सामने लेके आया हूं। तंत्र में यही बोला है। और क्रोधराज के इर्द-गिर्द, मैं पहली बार लोगों को पढ़ा था, दसों दिशा से सिद्धि क्रोधराज के निकट रहता है। बाकी किसके दसों दिशाओं में सिद्धि रहता है, मुझे पता नहीं।

लेकिन क्रोधराज या क्रोध भैरव के पास सभी सिद्धियां मौजूद रहती हैं। तो हम लोग अगर क्रोधराज का ही मंत्र का अनुष्ठान करते हैं, उसमें अगर सिद्धि प्राप्त कर लेते हैं, तो सारी सिद्धियां, गंधर्व, राक्षस, पिशाच, देव, दानव, यक्ष, किन्नर, इत्यादि सभी अपने मुट्ठी के अंदर या करगत हो जाएंगे। इसीलिए क्रोधराज का यह मंत्र का प्रयोग आज आप लोगों के लिए मैं प्रस्तुत कर रहा हूं।

 

क्रोध भैरव की साधना – वेश-भूषा, दिशा, और समय

 

तो ये सब उस टाइम शुरू में बता दिया कैसे करना है। आप लोग जो भी वस्त्र पहनना चाहते हैं, लाल पहनें, काला पहनें, हरा पहनें, नीला पहनें, जो भी, वस्त्र का कोई बंधन नहीं है।

तो वस्त्र पहनकर आप लोगों को पूर्व या ईशान की ओर मुंह करके आप लोगों को इस अनुष्ठान में बैठना है। अनुष्ठान को बैठने के लिए कोई टाइम नहीं है।

तांत्रिक अनुष्ठान हर समय रात में ही किया जाता है, तो रात में अनुष्ठान करने के लिए बैठें। जब भी आप लोगों को समय मिले, लेकिन सही समय में अनुष्ठान करने के लिए बैठें।

 

 जाप की संख्या और अवधि

 

इस मंत्र का आप लोगों को पहले ही बताया, दस हजार बार मंत्र का जाप आप लोगों को करना है। मानसिक संकल्प लें। भोलेनाथ के मंदिर में, भैरव जी के मंदिर में पूजा-अर्चना देकर आएं, उसके बाद अनुष्ठान शुरू कर दीजिए।

पहले पूजा देकर आ सकते हैं या उसी दिन पूजा देकर आ सकते हैं। कुल मिलाकर दस हजार जाप आप लोगों को करना है।

एक दिन में कर सकते हैं, तीन दिन में दस हजार कर सकते हैं, दस दिन में दस हजार कर सकते हैं, इससे ऊपर मत जाइए। एक, तीन, दस, ये हिसाब से आप लोगों को अनुष्ठान करना है। अनुष्ठान के समय पहले बताया, अमुक की जगह पर नाम बिठाना है।


 

क्रोध भैरव की साधना अनुष्ठान का विशेष नियम: स्केच का प्रयोग

 

अनुष्ठान कर लिए, अभी अनुष्ठान का एक विशेष जो नियम है, उस नियम को मैं आप लोगों को बताना चाहता हूं। नियम क्या है? जब आप लोग किसी देवी-देवता को बुलाना चाहते हैं, जब बुलाएंगे, तब स्केच बनाना पड़ेगा आप लोगों को। सफेद कागज में बनाइए, भोजपत्र में स्केच बनाइए। किसी पुरुष देवता को बुलाना चाहते हैं, तो आप लोग जानते हैं पुरुष देवता का स्केच कैसा होगा।

पुरुष की आकृति में उस देवता को अंकन कीजिए। महिला देवता को बुलाना चाहते हैं, यक्षिणी को बुलाना चाहते हैं, कि सुरसुंदरी यक्षिणी को बुलाना चाहते हैं, मेनका को बुलाना चाहते हैं, रंभा को बुलाना चाहते हैं, ठीक है? तो उस जैसा आप लोगों को आकृति का स्केच बनाना है। ठीक है? अपने बाएं पैर के नीचे स्केच को दबाकर मंत्र को जाप करना है।

माला लें, रुद्राक्ष, स्फटिक, ये दो माला बेस्ट हैं। नहीं है, तो उंगली से मंत्र जाप करने की कोशिश कीजिए। प्रतिदिन जाप संख्या आप अपने हिसाब से निर्धारण करके जाप कीजिए। यह है संपूर्ण प्रक्रिया। अनुष्ठान संपन्न हो जाने के बाद कोई हवन का इसमें उल्लेख तो है नहीं, इसलिए हवन करने का जरूरत नहीं है।


 

क्रोध भैरव की साधना – अनुष्ठान के बाद की अनिवार्यताएं और दान-दक्षिणा का महत्व

 

अनुष्ठान संपन्न हो जाने के बाद अपने हिसाब से कम से कम तीन ब्राह्मण को या तीन पंडित को या तीन साधु-संत को भोजन करवा के दान-दक्षिणा जरूर दें। कोई भी टोटका, टोना-टोटका कुछ भी करें, करने के बाद ब्राह्मण को या पंडित को जरूर खिलाएं। जब तक खिलाएंगे नहीं, दान नहीं करेंगे, प्रोग्राम या अनुष्ठान असफल माना जाएगा या इनकंप्लीट माना जाएगा।

आशा करता हूं समझ में आया जो बोल रहा हूं। सनातन हिंदू धर्म में है, कोई मेरे शब्द के ऊपर उंगली भी नहीं उठा पाएगा। जो बोल रहा हूं, देख लीजिए, थोड़ा रिसर्च कर लीजिए, देख लीजिए। कोई बताया नहीं, टोटका तो हजारों मिलेंगे, टोटका के बाद यह नहीं बताया, टोटका के बाद कर्म करने के बाद कुछ दान करो, कुछ दक्षिणा दो, किसी को खिलाओ।

पक्षी को खिलाने के लिए बोलेगा, लेकिन इंसान को खिलाओ। पक्षी को तो कोई भी एक मुट्ठी चावल लेकर पक्षी को खिला दो, कोई बात नहीं। किसी इंसान को खिलाओ, पंडित को खिलाओ और उनको दान-दक्षिणा दो और बोलो जी, इस मनोकामना हेतु आज आपको मैं यह खिलाया। पक्षी तो बात समझेगा नहीं, समझेगा नहीं, समझेगा। इसीलिए संपूर्ण अनुष्ठान पद्धति मैं बता दिया।


 

अंतिम विचार और मंत्र का सारांश

 

क्रोधराज के इर्द-गिर्द, मैंने पहले बताया, अगर क्रोधराज के इस मंत्र के ऊपर आप लोगों का कंट्रोल आ जाता है, मंत्र को एक बार अगर जागृत करके सिद्ध कर लिए, तो सारे सिद्धियां आपके करगत हो जाएंगी। इधर-उधर सिद्धि के लिए यह मंत्र, वो मंत्र, यह मंत्र करने का जरूरत नहीं है। अच्छी तरह से सुस्पष्ट मंत्र का अनुष्ठान कीजिए।

मंत्र, यंत्र सब कुछ  वेबसाइट के अंदर रहेगा। शुरू से अंत तक योग व्यक्ति पोस्ट को एक बार पढ़ना , आशा करता हूं उस व्यक्ति को मंत्र जरूर मिलेगा। ना कमेंट करना पड़ेगा, ना मैसेज करना पड़ेगा। आज का पोस्ट आप लोगों को कैसा लगा, एक लाइक और कमेंट के माध्यम से मुझे जरूर बताइए। पसंद आए तो  पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिए।

क्रोध भैरव की साधना मंत्र का उच्चारण और स्थान

 

मंत्र उच्चारण करके मैं आप लोगों के लिए बता रहा हूं, देखिए, मंत्र में सबसे पहले  आशा करता हूं इसके आगे आप लोगों को कुछ भी पूछने का जरूरत नहीं पड़ेगा। तो यह जो शब्द मैं बोला, उसके बाद अमुक शब्द का उल्लेख होगा और मंत्र का पाठ होगा। जाप करने की विधि-विधान, संपूर्ण अनुष्ठान मैं बता दिया।

मेरे हिसाब से कोई पॉइंट मैं छोड़ा नहीं। बाकी अगर कोई पॉइंट मुझसे छूटता है, तो जरूर कमेंट करके बताइए। महादेव के सामने मंदिर में भी बैठकर यह अनुष्ठान आप कर सकते हैं। घर के शिवलिंग के सामने आप लोग बैठकर अनुष्ठान कर सकते हैं।

किसी भी देवी-देवता के मंदिर में जाकर भी बैठकर अनुष्ठान कर सकते हैं, कोई समस्या नहीं है। जो घर में करना है या बाहर में नहीं कर सकते, हां आप लोगों को ठीक लगे। लेकिन एक बात ध्यान में रखें, मंदिर में करते हैं, तो अनुष्ठान टोटल मंदिर में ही होगा। घर में करते हैं, तो घर में ही होगा। कभी मंदिर में, कभी घर में, यह नहीं चलेगा। जहां पे अनुष्ठान शुरू होगा, वहीं पे अनुष्ठान समाप्त होगा।


 

क्रोध भैरव की साधना आगामी  की घोषणा

 

आज का कंटेंट यहीं पर विराम देता हूं, लंबा पोस्ट  हो रहा है। बुधवार को मैं एक प्रयोग विधि लेके आ रहा हूं, महालक्ष्मी का प्रयोग। अचानक धन प्राप्ति के लिए। रात को सोने से पहले बस यह नाम तीन बार अगर आप लोग लेते हैं, तो आपका रुका हुआ पैसा, फंसा हुआ पैसा, अचानक धन प्राप्ति के लिए अद्भुत, अचूक प्रयोग मैं लेकर आ रहा हूं।

ucchishta ganapati sadhana rahsya उच्छिष्ट गणपति: तंत्र का एक रहस्यमयी स्वरूप

ucchishta ganapati sadhana rahsya उच्छिष्ट गणपति तंत्र का एक रहस्यमयी स्वरूप

 

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गणपति तंत्र का एक रहस्यमयी स्वरूप

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ucchishta ganapati sadhana rahsya उच्छिष्ट गणपति तंत्र का एक रहस्यमयी स्वरूप

ucchishta ganapati sadhana rahsya उच्छिष्ट गणपति: तंत्र का एक रहस्यमयी स्वरूप अमोघ शक्ति देखने वाले सभी पाठकों को पंडित अखिलेश जी का प्रणाम, नमन। मित्रों, उच्छिष्ट गणपति के बारे में बात करने जा रहा हूँ। बहुत ही अद्भुत लेख होने वाला है। उच्छिष्ट गणपति कवच के बारे में। मूल विषय हमारा उच्छिष्ट गणपति कवच रहेगा, लेकिन उससे पहले थोड़ा-सा समझेंगे उच्छिष्ट गणपति भगवान के बारे में।

उच्छिष्ट गणपति वाम मार्ग और दक्षिण मार्ग का अर्थ

ucchishta ganapati sadhana rahsya उच्छिष्टगणपति तंत्र का एक रहस्यमयी स्वरूप
ucchishta ganapati sadhana rahsya उच्छिष्ट गणपति तंत्र का एक रहस्यमयी स्वरूप

वाम मार्ग और दक्षिण मार्ग, दो पद्धतियां हैं हमारे तंत्र-शास्त्र के अंदर पूजन करने की या मंत्र सिद्ध करने की। वामाचार बाईं तरफ़ वाला, दक्षिणाचार दाईं तरफ़ वाला। इसके भी कई सारे भेद हैं। लोग समझते हैं कि वामाचार का मतलब पंच-मकार हो गया।

मांस, मदिरा, मैथुन, मुद्रा, यह सब जो है, यह चलता है। यह सब वामाचार उस अर्थ में लिया जाता है। एक्चुअल अर्थ क्या है? वाम मतलब बायां।

जो काम आप राइट हैंड से, जो नॉर्मली अपने जीवन में जो हाथ आपका काम करता है, वह आप जो आप कर रहे हो, लेकिन उल्टे हाथ से जितने भी आप काम करते हैं, उल्टे स्टाइल से जो काम करते हैं, विपरीत स्टाइल से जो काम किए जाते हैं, विपरीत तरीके से, वह वामाचार हो गया।

बहुत छोटा सा तरीका बताता हूँ। किसी देवता को किसी कठिन परिस्थिति में सिद्ध करना हो, उनको मनाना हो, उनकी कृपा प्राप्त करनी हो, उनका कोई उपाय सिद्ध करना हो, आप बहुत परेशानी में हों। जैसे मैंने लोम-विलोम पाठ बताया था।

एक, एक लेख लिखा था लोम-विलोम पाठ पर। अद्भुत उपाय है। अगर नहीं पढ़ा हो तो ज़रूर देखिएगा। पहली बार आए हैं तो आपको इस वेबसाइट से बहुत कुछ मिलने वाला है।

देखिए, टिके रहिए। जो काम सीधे तरीके से नहीं होते, वह काम उल्टे तरीके से करने पड़ते हैं। भगवान को भी कई बार जब एक पिता के सामने जब बच्चा कोई चीज़ माँगता है और पिता मना कर देते हैं तो कई बार वह उल्टे तरीके अपनाता है।

जैसे जिद करी, ज़मीन पर लोटने लग गया, चिल्लाने-चीखने लग गया, रोने लग गया या इस तरीके की चीज़ें जो एक बेटे को अपने पिता के साथ नहीं करनी चाहिए।

लेकिन छोटा बालक होता है। पिता को उसकी इस जिद को देखते हुए उसकी इच्छा पूरी करनी पड़ती है और वह उस वक्त हल हो सकता है, थोड़ा-सा गुस्सा हो जाए लेकिन फिर भी है अल्टीमेटली पिता, तो उसको समझेगा कि चलो ठीक है, बच्चे को चाहिए, दे दो।

इसमें एक फ़ैक्टर और काम करता है माँ का। माँ कई बार इंसिस्ट करती है कि दिला दो, क्यों रुलाना बच्चे को। तो चलो ठीक है, दे दो।

पूरा कॉन्सेप्ट समझना मैं क्या बोलने जा रहा हूँ। उच्छिष्ट गणपति भगवान को वामाचार पूजा से जो है, संतुष्ट किया जाता है हमारे तंत्र मार्ग में। तंत्र मार्ग में गणपति का जो सर्वश्रेष्ठ तांत्रिक का स्वरूप है, वह उच्छिष्ट गणपति है। वामाचार, देवी, जिद, यह सब चीज़ें अभी आएंगी तो मैं रिलेट कर दूँगा।

‘उच्छिष्ट’ का वास्तविक रहस्य

ucchishta ganapati sadhana rahsya उच्छिष्टगणपति तंत्र का एक रहस्यमयी स्वरूप
ucchishta ganapati sadhana rahsya उच्छिष्ट गणपति तंत्र का एक रहस्यमयी स्वरूप

 उच्छिष्ट का अर्थ होता है छोड़ा हुआ या खाकर जो अंत में कुछ छूट जाता है, जूठा। यानी अब जो बिल्कुल अंत में बचा है, उसको उच्छिष्ट कहा जाता है। जिसको अब कोई हाथ नहीं लगा रहा। थाली में से जो जूठन छूट जाता है अंत में, थोड़े-बहुत जो दाने बच जाते हैं या जो कुछ भी, उसे उच्छिष्ट कहा जाता है। याद रखना।

उच्छिष्ट गणपति कैसे नाम पड़ा ?

असलियत में इनका नाम उत्कृष्ट गणपति है। कालांतर में धीरे-धीरे अपभ्रंश होते हुए, तंत्र मार्ग में वामाचार का उपयोग करते हुए इनका नाम उच्छिष्ट गणपति पड़ा।  वामाचार की जितनी पूजाएं हैं, जितने अभ्यास हैं हमारे तंत्र मार्ग के अंदर, वह सब हमारी आत्मा को परमात्मा से मिलाने के लिए, यानी एक सर्वोच्च लक्ष्य के लिए तंत्र का प्रतिपादन किया था।

भगवान शिव ने, पैसा, धन, माया, इन सब चीज़ों के लिए नहीं किया था, अपने आत्म-कल्याण के लिए, ईश्वर से मिल जाने के लिए तंत्र का जो है, उत्सर्ग हुआ था।

 अब इन सब चीज़ों को आपको लग रहा होगा, ये क्या बात कर रहे हैं? मैं इन सब चीज़ों को मिला दूँगा थोड़ी देर, पाँच मिनट और रुकिए। छूटा हुआ, उच्छिष्ट, जिन्हें हम कहते हैं, वास्तव में अंत में क्या छूटता है? जब हमारे प्राण निकल जाते हैं, अंत में क्या छूटता है?

आत्मा। आत्मा से उत्कृष्ट कुछ नहीं है। यह सबको पता है। यानी जो उत्कृष्ट है, वही अंत में छूट जाता है। लेफ़्ट ओवर। जो सबसे श्रेष्ठ है, वही सबसे अकेला अपने आप को खड़ा पाता है।

वही सबसे अलग अपने आप को खड़ा पाता है। सबसे अलग होना भी उच्छिष्ट है। बिल्कुल जो श्रेष्ठ, श्रेष्ठता जो सबसे अंत में बच जाती है, वह भी उच्छिष्ट है। दूध का उच्छिष्ट जो है, वह क्या है पता है आपको? घी। वह सबसे श्रेष्ठ उसकी योनि है।

दूध की सबसे श्रेष्ठ योनि क्या है? घी। तो उच्छिष्ट हम इसको इस अर्थ में, तंत्र में इसको वामाचार में इस अर्थ में लिया जाता है जैसे जूठा छूट गया हो। अब आप इसका सारा अर्थ समझ लीजिए। मैंने आपको समझा दिया कि इसका, इसके पीछे रहस्य क्या है? उच्छिष्ट के, उत्कृष्ट जो सबसे अंत में बच जाता है।

दूध का उच्छिष्ट या उत्कृष्ट क्या है? घी। हमारे शरीर का उच्छिष्ट, उत्कृष्ट क्या है? आत्मा। ‘नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः’। जिसको आग जला नहीं सकती, पानी गला नहीं सकता।

जो श्रेष्ठतम स्वरूप है, आत्मा, सो ही परमात्मा, जो परमात्मा का ही स्वरूप होता है, अंत में वह बचता है। तो सर्वश्रेष्ठ परमात्मा के रूप में भगवान गणपति की साधना की जाती है तंत्र मार्ग के अंदर उच्छिष्ट गणपति के रूप में। हम बोलचाल में उसको उच्छिष्ट गणपति ही बोलेंगे पूरे इस लेख में।

उच्छिष्ट गणपति  विंध्यावान राक्षस की कथा

इनकी सामान्य छोटी-सी कथा इनकी मैं सुना देता हूँ। इनकी उत्पत्ति कैसे हुई? प्राचीन काल में विंध्यावान नाम का एक राक्षस हुआ। भयंकर दैत्य हुआ। उसने ब्रह्मा जी की तपस्या की, जो होता है। अब सारी कथाओं में इसी प्रकार से चलता है। 

विंध्यावान ने तपस्या की। ब्रह्मा जी प्रसन्न हुए। वह आ गए। भैया, क्या चाहिए? बोलो। विंध्यावान ने कहा कि अमरत्व चाहिए, अमरता दे दो। ब्रह्मा जी ने कहा, अमरता नहीं दे सकता, और कुछ माँग ले। कुछ ऐसा माँग ले जिससे तेरा काम भी पूरा हो जाए। विंध्यावान ने कहा कि ठीक है, वह कुछ स्पेशल उसने माँग लिया।

 उसने कहा कि मुझे ऐसा कोई मारे जो अपनी पत्नी से रति-क्रिया में रत हो। उसी अवस्था में कोई मारे तो मैं मरूँ। अब बताओ, उसके माँगने के पीछे और इस उच्छिष्ट गणपति के रहस्य के पीछे कितनी चीज़ें छुपी हैं? कितना बड़ा तंत्र है? कितनी चीज़ें इससे सॉल्व हो सकती हैं? ‘कलौ चण्डी विनायकौ’, जो तंत्र में कहा जाता है न, आगम में, हमारे आगम शास्त्र में कहा जाता है

कि कलि में चंडी और विनायक की उपासनाएँ श्रेष्ठ कही जाती हैं। विनायक के कई स्वरूप हैं, 52 स्वरूप हैं भगवान गणपति के। उनमें से एक है उच्छिष्ट गणपति, जो तांत्रिक स्वरूप है।

अब उसने माँग लिया कि जो कोई भी अपनी सहचारिणी से रति-क्रिया में रत हो, उस अवस्था में अगर मुझे मारे तो ही मेरा वध हो, वरना न हो। अब ऐसी अवस्था में कौन मारे?

सारे देवता दुखी, स्वर्ग, आकाश, पाताल, नरक, सप्तलोक, तीनों भुवन दुखी कर दिए उसने। सब लोग गए ब्रह्मा, विष्णु, महेश के पास, तीनों त्रिदेवों के पास कि महाराज, कुछ करो इसका। उन्होंने भी हाथ जोड़ लिए कि भैया, इसका, इसको कैसे मारें?

इसने तो शर्त ही ऐसी रख दी। अब अपनी पत्नी के साथ समागम करते हुए युद्ध करना, आप समझना, थोड़ा-सा इसके स्पिरिचुअल रहस्यों पर भी आएँगे। तब जाकर भगवान गणपति आगे आए। भगवान श्री महागणपति आगे आए। उन्होंने कहा कि मैं यह करूँगा।


 

उच्छिष्ट गणपति का प्रतीकात्मक स्वरूप

 

इसके पीछे एक रहस्य और समझो कि भगवान महागणपति इतने उदार देवता हैं, इतना उनका ऐसा स्वभाव है कि थोड़े समय में वह प्रसन्न हो जाते हैं। उसके बाद अपने भक्तों के लिए जब कोई आर्त पुकार उनके सामने करता है, त्राहि-त्राहि कर-करके उनके पास जाता है या अपने आप को सर्वस्व समर्पित कर देता है।

जब पूरी दुनिया आपसे मुख मोड़ ले, तब भगवान गणपति आपका साथ देने के लिए आ जाते हैं, अगर उन्हें पूजा जाए, उनसे, उनको पूरे दिल से पुकारा जाए। भगवान गणपति आ गए। मैं जाऊँगा।

अपना जो सबसे श्रेष्ठ छूट जाता है, उस उच्छिष्ट स्वरूप में भगवान गणपति ने अपनी सहचारिणी विघ्नेश्वरी को अपनी बाईं जंघा पर बिठाकर रति-क्रीड़ा में रत रहते हुए उस विंध्यावान राक्षस का उन्होंने वध किया। अब इनका आइकनइज़्म देखो। आप इनका सिम्बॉलिज़्म देखो।

प्रतीकात्मकता देखो। इस सब पर बात करेंगे। ऐसा मत समझना कि लिटरली यही हुआ। समझना, मैं समझा दूँगा सारी चीज़ें। क्योंकि उस राक्षस ने माँगा ही ऐसा वर था कि कोई रति-क्रीड़ा में रत रहते हुए कोई व्यक्ति मुझे मारे, कोई मुझे मारे।

तो भगवान गणेश ने अपनी बाईं जंघा पर अपनी प्रिया विघ्नेश्वरी, जिनका नाम हस्तिपिशाची भी कहा गया है, उनको अपनी जंघा पर बिठाया।

प्रतीक में इस प्रकार से आता है, प्रतीकात्मक चित्रण में इस प्रकार से आता है कि भगवान की सूंड देवी की योनि के अंदर है और देवी का राइट हैंड में कमल का पुष्प है और लेफ़्ट हैंड में भगवान गणपति का प्राइवेट पार्ट है।

इतना सघन चित्रण, इतना सघन प्रतीकात्मकता आपने और किसी कथा में, किसी देवता में नहीं देखी होगी। उस अवस्था में उन्होंने उस राक्षस का वध किया।

 

 उच्छिष्ट गणपति संभोग से समाधि का अर्थ

 

अब इसका मूल समझाता हूँ। ओशो ने एक, एक लाइन कही थी, बड़ी क्रांति आ गई थी—संभोग से समाधि की ओर। अर्थ क्या है इसका?

इसका अर्थ भगवान उच्छिष्ट गणपति समझाते हैं कि जिस अवस्था में आप अपने चरम पर होते हैं, चरम सुख पर होते हैं, उस अवस्था में आप अपनी ऊर्जा को इतना ऊपर बढ़ा लें कि आपके अंदर के राक्षसों को आप समाप्त कर दें और आपका फ़ोकस बने, ईश्वर से आप मिल जाएँ।

आप अपनी प्रकृति से इस प्रकार से जुड़ जाएँ, उसमें इस प्रकार से एकाग्र हो जाएँ कि उन, उस सुखों से ऊपर बढ़कर आप एकात्म कर लें ईश्वर के साथ, अपने अंदर के राक्षसों को समाप्त करते हुए, अंदर की मलिन, मलिनताओं को नष्ट करते हुए, यह इसका अर्थ है।

 

 उच्छिष्ट गणपति शिव के अट्टहास से उत्पत्ति

 

एक और कथा के अनुसार, भगवान उच्छिष्ट गणपति का जो जन्म है, वह भगवान महाशिव की हँसी से हुआ था। भगवान शिव के अट्टहास से हुआ था। जब उन्होंने काली के नृत्य को देखा, जब काली ब्रह्मांडीय नृत्य करती हैं, महाकाली, तब उनको देखकर भगवान शिव जो हँसते हैं, जो मुस्कुराते हैं, उनकी हँसी से भगवान उच्छिष्ट गणपति का जन्म होता है।

उच्छिष्ट, यानी जूठा, जूठन। तो भगवान के मुख से, जो भगवान की उस, उस हँसी से जो, जो जन्म हुआ भगवान से, उनको उच्छिष्ट गणपति कहा गया। ये एक अघोर, महान तांत्रिक स्वरूप है भगवान गणपति का।


 

 उच्छिष्ट गणपति साधना का महत्व

 

इनकी पूजा के बारे में ऐसा कहा जाता है कि कलियुग में देखो, तंत्र तो कोई भी शुरू करे, तंत्र-शास्त्र में जितने भी लोग हैं, कोई शायद आपसे खुलकर बोले चाहे न बोले, हक़ीक़त यह है कि जितने बड़े-बड़े मंत्रज्ञ हैं, जितने बड़े-बड़े मंत्रवेत्ता हैं, जितने बड़े-बड़े साधक हैं इस दुनिया के अंदर, इस ब्रह्मांड के अंदर, वह सबसे पहले अपना स्टार्टिंग भगवान गणपति से ही करते हैं।

वह महागणपति से करो, चाहे वामाचारी है तो उच्छिष्ट गणपति से करो। गणपति की साधना किए बिना कोई साधना आपकी सफल नहीं हो सकती। यह तय बात है। मैं हो सकता है किसी और लेख में दोबारा न बताऊँ। यह बात सच है।

अगर आप भगवान गणपति को इंक्लूड नहीं कर रहे हैं या अपनी मूल साधना, जो पुरश्चरण आप करते हैं, करना चाहते हैं, उससे पहले आप अगर गणपति का कोई छोटा-मोटा आपने पुरश्चरण, छोटा-मोटा तो एक शब्द है, गणपति की कोई-न-कोई सामान्य साधना अगर आपने नहीं करी, पाँच दिन, 25 दिन, महीना-भर, साल-भर, जो भी, वो, वो देखने पर पता लगता है कितना किसको चाहिए।

अगर आपने ऐसा नहीं कर रखा है तो आपको फल मिलना मुश्किल है, लगभग नामुमकिन है। आप करते रहो, घिसते रहो, पाप कटेंगे, कुछ-न-कुछ तो उस साधना का मिलेगा ज़रूर, लेकिन जितना आप चाहते हैं न कि मुझे इस मंत्र का फल मिल जाए, इसमें यह मंत्र मुझे सिद्ध हो जाए, मंत्र-सिद्धि भगवान गणपति की पूर्व-साधना के बिना हो ही नहीं सकती।

और उसमें से जो वामाचार में जो है, जो वाम मार्ग में जो अपनी पूजाएँ, तंत्र-साधनाएँ करते हैं, उसमें उच्छिष्ट गणपति का बहुत बड़ा स्थान है।

उच्छिष्ट गणपति का सही वास्तविक अर्थ है

उत्कृष्ट गणपति, जो हमारे शरीर का, जो हमारा उत्कृष्ट एम है, जो संपूर्ण लक्ष्य है, जो परम लक्ष्य है, उससे मिला देना उच्छिष्ट गणपति का कार्य है।

उच्छिष्ट गणपति को शत्रुहंता के रूप में, विजयप्रदा साधना के रूप में माना जाता है और मूल रूप से यह कुंडलिनी जागरण की विद्या है, मोक्ष की साधना है।

 

 उच्छिष्ट गणपति में देवी की भूमिका

 

फिर इसमें एक प्रतीक आया देवी का। उन्होंने अपनी बाईं जंघा पर देवी को स्थापित कर रखा है और उनसे रति में निमग्न हैं और उस अवस्था में उन्होंने उसे मारा। बिना देवी की कृपा के, बिना उस पर्टिकुलर देवता की शक्ति की कृपा के, उस पर्टिकुलर देवता का आशीर्वाद आपको नहीं मिल सकता। यह भी एक तथ्य है। यह भी एक सच है।

शिव की कृपा पाना चाहते हैं तो देवी दुर्गा की कृपा, पार्वती की कृपा, भुवनेश्वरी की कृपा आप पर होनी ही चाहिए। उनके आशीर्वाद से, उनकी अनुमति से आप, शिव आप पर प्रसन्न होंगे। ऋद्धि, सिद्धि, विघ्नेश्वरी, हस्तिपिशाची, इनकी कृपा के बिना आप भगवान गणपति की कृपा प्राप्त नहीं कर सकते।

माता जानकी की कृपा के बिना राम जी की कृपा कैसे मिलेगी ? माता लक्ष्मी की कृपा के बिना विष्णु की कृपा कैसे प्राप्त होगी ? यानी यह तो मैंने नाम लिए। असल बात यह है कि उस देवता की शक्ति जब आपसे प्रसन्न होगी, तब देवता आप पर प्रसन्न होंगे।

यानी उनको इंक्लूड करके आपको रखना ही पड़ेगा। भगवान महादेव की उपासना करते हैं तो आपको साथ-ही-साथ महादेव की, अब इसका समझ लो, सीधी भाषा में सर समझ लो, जिस देवी या देवता की आप उपासना करते हैं, उसके साथ में आपको उस पर्टिकुलर की शक्ति या शिव की उपासना आपको करनी ही चाहिए।

जिस प्रकृति की आप उपासना करते हैं तो उसके साथ पुरुष की उपासना करनी पड़ेगी, पुरुष की करते हैं तो प्रकृति की करनी पड़ेगी। शिव के मंत्र-सिद्धि में आप लगे हैं, मुझे शिव के मंत्र को सिद्ध करने का है, तो उसके साथ में आपको देवी का कोई भी पाठ, कोई भी मंत्र, मंत्र आपको साथ में रखना पड़ेगा।

विष्णु की उपासना करते हैं, विष्णु भगवान नारायण की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो लक्ष्मी का कोई भी पाठ, कनकधारा स्तोत्र, श्री सूक्त या कोई लक्ष्मी जी का मंत्र या कोई लक्ष्मी कवच या लक्ष्मी स्तोत्र, इस प्रकार से आपको करना पड़ेगा। यह जल्दी, शीघ्र, जल्दी सिद्धि के साधन बता रहा हूँ।


 

उच्छिष्ट गणपति से जुड़ी भ्रांतियों का खंडन

 

जो तंत्र-सिद्धि जो होती है, जो एक्यूरेट, अरे आपको क्या पता कि मंत्र क्या-क्या दे सकता है? हमें लगता है कि मैंने तो आज तक कभी देवी की उपासना नहीं की, सब हमेशा शिव की करी, लेकिन फिर भी मेरे पे तो बहुत कृपा है। मेरे तो पास तो बहुत पैसा है। बहुत ज़मीन-जायदाद हो गई।

बहुत ज्ञान आ गया। सब कुछ हो गया। यह तुच्छ है। यह सबसे अधम सिद्धियों में माना जाता है तंत्र के अंदर। यह तो कण मात्र भी नहीं है। मंत्र से तो तुम इतना ले सकते हो।

तो मैं तो वह तरीके बता रहा हूँ जिससे आप सब कुछ प्राप्त कर सको। बात उच्छिष्ट गणपति की चल रही है। अगले लेख में मैं आपको बताऊँगा कि उच्छिष्ट गणपति कवच, यह कितना महान है।

उसकी हम बात करेंगे अगले लेख में। इस साधना को जब आप करते हैं तो आपको अनंत तक देखने की दृष्टि प्राप्त हो जाती है। अपने चारों तरफ़ देखने का एक, एक भाव उत्पन्न अंदर होने लग जाता है। देखने का मतलब ऐसा लिटरली ऐसा देखने का नहीं। त्रिकालदर्शी जिसे बोला जाता है, त्रिकालज्ञ व्यक्ति हो सकता है अगर भगवान उच्छिष्ट गणपति की उपासना अगर ठीक-ठीक तरीके से कर ले।

बुद्धि और ज्ञान के देवता तो हम मानते हैं न सामान्य भाषा में। हम तंत्र की बातें कर रहे हैं। उसके आधार पर अगर उस, उस पर्सपेक्टिव में जाया जाए तो त्रिकाल, त्रिकालज्ञ, त्रिकालज्ञ से ऊपर, कुछ बियॉन्ड स्पेस एंड टाइम, वह व्यक्ति देखने लगता है।

उसकी इतनी एबिलिटी उसकी बढ़ जाती है, जिसको हम कहते हैं कुंडलिनी जागृत हो गई। इसकी कुंडलिनी में मूलाधार के देवता कौन हैं? गणपति। स्टार्टिंग वहाँ से होती है।

यही कारण है कि उच्छिष्ट गणपति की साधना करने वाले के विज़न फैल जाते हैं। उनकी दृष्टि उसकी विस्तृत हो जाती है।

हम जो अभी जीवन जी रहे हैं, आप समझना, यह मेरा भाई, यह मेरी बहन, यह मेरे पापा जी, यह मेरी मम्मी जी, यह मेरी पत्नी, यह मेरा पैसा, यह मेरी गाड़ी, यह मेरा, यह मेरा, वह मेरा, ये या और भी कुछ चीज़ें, ईर्ष्या, जलन, गुस्सा, लोभ, मोह, क्रोध, इस प्रकार का, ये सब जो हम इस चारों, इस प्रपंच में जो हम फँसे पड़े हैं, इसको तोड़ने का काम करते हैं भगवान उच्छिष्ट गणपति।

आपकी सोच से इस एक्चुअल सोच को मिलाने का काम कर देते हैं कि वास्तव में चल क्या रहा है। उस दर्शन को, चिदाकाश में भ्रमण करने की प्रवृत्ति आपके अंदर आ, पैदा हो सकती है, अगर उच्छिष्ट गणपति सिद्ध हो जाएँ। शत्रुओं का नाश और विजय और भयों से रक्षा और ये तो बहुत छोटी-छोटी बातें हैं।

ये तो करेंगे ही, बाद में कर ही लेंगे। यह तो सब लिखा पड़ा है। यह तो लिखा होता है। मैं वह बोल रहा हूँ जो लिखा नहीं गया। जो लिखा है, उसके पीछे की बातें हम समझने की कोशिश कर रहे हैं। तो यह तो वह विद्या है जो आपका सर्वश्रेष्ठ निचोड़कर, जो सर्वश्रेष्ठ आपके अंदर का है, वह लाके बाहर छोड़ देगी, जो उच्छिष्ट है।

प्रसाद और गृहस्थ साधना पर विचार

 

इस प्रकार से कहा गया कि उच्छिष्ट गणपति का प्रसाद खुद को नहीं, स्वयं नहीं खाना चाहिए। इनकी साधना जो है, गृहस्थों को नहीं करनी चाहिए। अगर, श्मशान जैसा हो जाता है या आपका, देखो यार, ऐसा है बाबा, कोई भी साधना हो, वाम मार्ग, दक्षिण मार्ग से घबराने की आवश्यकता नहीं है।

हाँ, यह बात अवश्य है कि आपकी कुंडली में, आपके प्रारब्ध से आप इस प्रकार के ग्रह-योग लेकर आए हैं तो आप साधना यह कर सकते हैं। कोई भी व्यक्ति कर सकता है और थोड़े-से प्रयास में तो कर ही सकता है। वह कुंडली देखकर ज़्यादा अच्छे से पता लगाया जा सकता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि बिल्कुल कर ही नहीं सकते।

सामान्य स्तोत्र-पाठ तो कर ही सकते हैं। कवच-पाठ आप कर ही सकते हैं। इसमें कोई बुराई नहीं है, कोई नुकसान भी नहीं है। फिर यह कहा जाता है कि इनका जूठा नहीं, ऐसा नहीं है, जूठा इनका, इनका भोग नहीं ले सकते। अरे भैया, जब इनका भोग चढ़ाओगे, प्रसाद चढ़ाओगे, भगवान की साधना करोगे तो उस प्रसाद को किसको खिलाओगे ? भगवान का जूठा किसको खिलाओगे ? कुत्ते को डाल दोगे ? क्या करो ? उस प्रसाद का क्या करोगे?

ईश्वर का प्रसाद नहीं खाओगे?

मतलब प्रसाद के बारे में तो ऐसा कहा गया है कि प्रसाद का नियम है, जब भी आप मंदिर में जाते हो और कोई हाथ में प्रसाद थमाता है तो प्रसाद को हाथों-हाथ उसी समय आपको खा लेना चाहिए, पा लेना चाहिए, उस प्रसाद को ग्रहण कर लेना चाहिए। और प्रसाद को कभी भी अपने हाथ से उठाकर नहीं, खुद खाना चाहिए।

प्रसाद हमेशा दूसरों से लेना चाहिए। याचक की भांति, भिखारी की भांति हाथ फैलाकर प्रसाद को माँगा जाता है। प्रभु का आशीर्वाद होता है वह प्रसाद। खा सकते हैं।

 

 उच्छिष्ट गणपति  स्वरूप और पूजा का भय

 

फिर एक, एक और बात जो मुझे प्रॉब्लेमैटिक लगी कि श्मशान हो जाता है। आपका शरीर क्या है? आपका जीवन है क्या ? यह बताओ। आपके शरीर में, आपके मन में, आपके आस-पास झूठ, निंदा, चोरी, कपट, ईर्ष्या, द्वेष, लोभ, मोह, काम, अब्रह्मचर्य, अभक्ष्य-भक्षण, व्यभिचार, इतना कुछ यह जो कचरा फैला हुआ है न, यह जो कचरा-पट्टी फैल रखी है। 

यह क्या श्मशान से कम है? उच्छिष्ट गणपति तो आपको श्मशान से बाहर निकालने की, मुक्त कर देने की विद्या है। समझने की बातें हैं। उनके स्वरूप को देखकर कई लोग जो है, इस प्रकार से ऑब्जेक्शन करते हैं कि यह इस प्रकार का कैसा स्वरूप है भगवान का।

क्योंकि भगवान गणेश जी को तो गणपति बप्पा मोरया और एक हंसते हुए, प्यारे से, गोलू-मोलू जो हम बताते रहते हैं न, वैसा, वैसा लोग मान के चलते हैं। तंत्र के जो हैं न, सुप्रीम होते हैं भगवान गणपति।

तंत्र के अंदर ऐसे-ऐसे प्रयोग हैं कि मारण, मोहन, उच्चाटन, वशीकरण, विद्वेषण, यह सारे जो षट्कर्म हैं, भगवान गणपति के ऐसे-ऐसे प्रयोग हैं कि आपकी हवा टाइट हो जाएगी।

भगवान का स्वरूप अपनी शक्ति के साथ एकात्म होकर अपनी बुराइयों को नाश करने में है। यानी जब आप अपने सबसे अति आनंद की अवस्था में हों, जब आप सबसे ज़्यादा आनंदित हों, सुखी हों, तब भी कोई बुरा कर्म आपके ऊपर प्रभाव न डाल सके, उसको भी आप नष्ट कर दें। यह इसका प्रतीकात्मक चित्रण इस प्रकार से है बाबा।


 

 उच्छिष्ट गणपति का सच्चा उद्देश्य और निष्कर्ष

 

 99% तो यही नाटक है हमारे हिंदुओं में कि जब हमें ज़रूरत होती है, जब हम पर कोई संकट आता है, तब हमें भगवान याद आते हैं।

अगर आपके जीवन से सारे संकट मिट जाएँ, आनंद हो जाए, अंबानी जितना पैसा आ जाए और आपके बच्चे बढ़िया हो जाएँ सब और आपकी आयु 100 वर्ष और 100 वर्ष तक निरोगी रहें। 

घूमते-फिरते रहें जीवन में, ऐसा हो जाए आपके जीवन में दुख ही न हो, मैं बताता हूँ 99% हिंदू पूजा-पाठ करना छोड़ देंगे, भगवान को छोड़ देंगे, मंदिर जाना बंद कर देंगे।

भगवान का कॉन्सेप्ट है हमारे लिए कोई देने वाला और हमारा अपने मन में कॉन्सेप्ट है, हम हैं भिखारी। भगवान के सामने मंगतों की तरह, भिखारियों की तरह माँगने जाते हैं बस। और ईश्वर का कुछ लेना-देना है नहीं।

तो तंत्र, जो कि ईश्वर से मिला देने की विद्या है, वह कहाँ समझोगे? उसके पैटर्न कहाँ समझोगे? उसके प्रतीक कहाँ समझोगे? उसके, उसके सिम्बल्स कहाँ समझोगे? भगवान के फ़ोटो हमारे पैरों में आ रहे हैं। भगवान के कैसे-कैसे रूप बना के, कैसे-कैसे खिलौने बनके, चल रहा तमाशा तो हमने बना रखा है इसका।

 अभी तो मुख्य, मूल बात उच्छिष्ट गणपति का जो कॉन्सेप्ट है, वह अपनी, अपने, अपने आनंद पर विजय प्राप्त करते हुए, अपने चरम सुख के समय भी आप अपने कुकर्मों को मार सकें, अपनी बुराइयों को नष्ट कर सकें, तो उच्छिष्ट गणपति का आनंद है। यह उनकी कृपा है। यह उनका कॉन्सेप्ट है।

फिर इसकी साधना कैसे की जाती है? सामान्य चीज़ें ही बताऊँगा। ऐसा नहीं कि कोई घनघोर कोई मंत्र बताकर और ऐसा कोई, ऐसा विद्या, देखो, वह तो इंटरनेट पे यहाँ पर पोस्ट में तो नहीं बताई जा सकती कि कोई मैं मंत्र बताऊँ और उसके विनियोग, न्यास और पूरा आवरण-पूजा, ये तो इंपॉसिबल है यहाँ बताना।

तो अगले लेख में मैं उसका कवच लेकर अवश्य आऊँगा। उच्छिष्ट गणपति कवच, ज़रूर पढ़िए। ठीक अगला लेख, बने रहिए। इसी को कंटिन्यू कीजिए।

जीवन बदल देने वाली विद्या है उच्छिष्ट गणपति कवच। चलिए, इसी के साथ, लेख अच्छा लगा हो, बात अच्छी लगी हो, सच्ची लगी हो, पसंद आई हो तो पोस्ट को लाइक करें, वेबसाइट को फॉलो करें।

हम बार-बार यही विनती करते हैं कि 4-5 साल हो चुके हैं मुझे इस वेबसाइट के ऊपर अपना कंटेंट, अपनी पूरी ईमानदारी से अच्छी, सच्ची बात करने का प्रयास करता हूँ।

लेकिन उस, हो सकता है कोई कमी रही हो क्योंकि बहुत ज़्यादा शोर-शराबा, ताम-झाम नहीं होता मेरे लेखों में। बहुत ज़्यादा धूम-धाम, ये सब नहीं होता। सिंपल सी बात करते हैं।

समझाने का प्रयास करता हूँ। लेकिन ठीक है। चलो, आगे बढ़ाओ बाबा, साथ रहो। तो इस वेबसाइट से आपको निराशा हाथ नहीं लगेगी। कभी भी गलत सूचना नहीं लगेगी। कोई हवाबाज़ी नहीं होगी।

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श्री हरिद्रा गणेश साधना पूजा के लाभ और क्यों करना चाहिए ?

श्री हरिद्रा गणेश साधना पूजा के लाभ और क्यों करना चाहिए ?

श्री हरिद्रा गणेश साधना पूजा के लाभ और क्यों करना चाहिए ?

श्री हरिद्रा गणेश साधना पूजा के लाभ और क्यों करना चाहिए ?
श्री हरिद्रा गणेश साधना पूजा के लाभ और क्यों करना चाहिए ?

ॐ गं गणपतये नमः। हरिद्रा गणेशाय नमः।

Haridra Ganesh Sadhana आज का जो विषय है, वह है श्री हरिद्रा गणेश पूजा-साधना के लाभ और क्यों करनी चाहिए हरिद्रा गणेश की साधना।  श्री हरिद्रा गणेश की साधना के लाभ और क्यों करना चाहिए हरिद्रा गणेश की साधना ? देखो, सबसे पहली चीज क्या है, हरिद्रा गणेश की साधना। भई, भगवान श्री गणेश के अलग-अलग रूप हैं, ठीक है ना? भगवान श्री गणेश के अलग-अलग रूप हैं, लेकिन अगर आप हरिद्रा गणेश जी की साधना करते हैं तो सर्वप्रथम यह गणपति, हरिद्रा गणपति, मां बगलामुखी के पुत्र स्वरूप गणपति माने जाते हैं

 

माँ बगलामुखी का आशीर्वाद और तेज बुद्धि

 

हरिद्रा गणेश, हरिद्रा मतलब हल्दी और मां का एक नाम पीतांबरा। मां को पीला रंग और हल्दी बहुत प्रिय है, तो भगवान श्री गणेश की अगर हरिद्रा रूप में हम पूजन करते हैं तो सर्वप्रथम मां बगलामुखी का आपको आशीर्वाद प्राप्त होता है।

भगवान श्री गणेश से बुद्धि आपकी बहुत प्रखर हो जाती है, बहुत तेज हो जाती है। यानी कि जैसे सामने वाला व्यक्ति आपसे कुछ बात कर रहा है या आप कहीं कोई व्यापार कर रहे हो, नौकरी कर रहे हो, काम कर रहे हो, तो आपकी बुद्धि के अंदर वो चीज आएगी जो आप अपनी वाणी से बोलेंगे, जो आपको सफल बनाएगी।

 

धन, मान-सम्मान और आध्यात्मिक उन्नति

 

 जब बुद्धि अच्छी होती है और जब वाणी अच्छी होती है तो धन के रास्ते बेहतर हो जाते हैं क्योंकि जो ज्योतिष के अंदर जो गले का स्थान होता है, यह द्वितीय स्थान माना जाता है, उसको कुटुंब का स्थान माना जाता है, इसको परिवार का स्थान माना जाता है, मुख्यतः आपके धन का स्थान माना जाता है।

तो हरिद्रा गणेश जी की साधना करने से जब आपकी बुद्धि अच्छी होगी, प्रखर होगी और उसके संग-संग जब आप जो है, अच्छा बोलेंगे, आपका कंठ का स्थान यानी कि कुंडली के अंदर दूसरा घर आपका जब एक्टिवेट होगा, तो आपके परिवार के लोग, आपके आसपास के लोग आपका सहयोग करेंगे, आपका काम बढ़ेगा और आपका धन बढ़ेगा।

जब बुद्धि अच्छी होगी, वाणी अच्छी होगी, धन की मात्रा आगे बढ़ेगी तो आपका मान-सम्मान, प्रतिष्ठा स्वयं बढ़ जाएगी। और जब व्यक्ति का मन शांत होता है, बुद्धि स्थिर होती है, प्रबल होती है, धन का आगमन आपकी जरूरत के अनुसार  होता रहता है,  आपका जो विश्वास है, आध्यात्मिक  हो जाता है।

 जब आप आध्यात्मिक हो जाते हैं तो ईश्वर भी आपकी जरूरतों को, जैसे भौतिक उन्नति को बढ़ाता है। और जब भौतिक उन्नति बढ़ती है तो आपके जीवन में सुख बढ़ता है, पारिवारिक सुख बढ़ता है और सकारात्मक विकास होता है

साधना का सार

तो इसलिए हमें हरिद्रा गणेश की आराधना करना चाहिए। अगर आप चाहते हो जीवन के अंदर कि मां बगलामुखी का आशीर्वाद आप पर बरसता रहे, उत्तम वाणी हो, उत्तम बुद्धि हो, मान-सम्मान-प्रतिष्ठा बढ़े, आध्यात्मिक ज्ञान बढ़े, भौतिकता की जो जरूरत की चीजें हैं।  वो आपको प्राप्त होती रहें, सुखी दांपत्य जीवन, सुखी पारिवारिक जीवन, सुखी सकारात्मक सोच का विकास हो, तो उसके लिए हरिद्रा गणेश की आराधना करना अति आवश्यक है।

 

ज्योतिषीय दृष्टिकोण: ग्रहों पर प्रभाव

 

आप बुद्धि के देवता भगवान श्री गणेश को बोला जाता है और मैं आपको यहां पर ज्योतिष का, अध्यात्म के संग में थोड़ा एस्ट्रोलॉजी की बात यहां पर आपको मैं बताना चाहूंगा कि भगवान श्री गणेश की पूजा कर रहे थे, सबसे पहली चीज क्या है कि कुंडली के अंदर जो आपके केतु ग्रह होते हैं, जो राहु ग्रह होते हैं, वो पॉजिटिव होने लगते हैं, साथ ही साथ बुध ग्रह पॉजिटिव हो जाते हैं।

गुरु ग्रह की विशेष कृपा

 

लेकिन यहां पर हरिद्रा गणेश की पूजा हो रही है यानी हल्दी स्वरूप गणेश की पूजा हो रही है तो आपके गुरु ग्रह भी अच्छे हो जाएंगे। तो अब आप यह देखिएगा कि भगवान श्री गणेश की आराधना करने से सबसे पहले क्या है कि  केतु यानी कि भ्रमजाल यानी आपके मन में जो भ्रम पैदा होता है, जो अचानक आपके जीवन में परिवर्तन होता है, तो उस पर आपका कंट्रोल होने लगता है, आप कंट्रोल करने लगते हो।

उसके बाद राहु जो आपको भ्रमित भी करता है और अचानक समस्या लाकर खड़ा कर देता है, तो वो भी पॉजिटिव होकर आपका सहयोग करने लगता है।

आपकी कुंडली के दो ग्रह हो गए। तीसरे नंबर पर वाणी का, क्रिएटिविटी का, नॉलेज का जो ग्रह है बुध, वो आपको सहयोग करने लगता है भगवान हरिद्रा गणेश की साधना से।

 उसके बाद में भगवान श्री गणेश का पीतांबरा स्वरूप होना यानी क्या होता है कि देव गुरु बृहस्पति जो आपकी कुंडली के अंदर हैं, वह पॉजिटिव हो जाते हैं

 जैसे वह पॉजिटिव होते हैं, सकारात्मक होते हैं, तो देव गुरु बृहस्पति संतान के, अध्यात्म के, सुख के, ऊंचाइयों के, स्वर्ण के, देवत्व के, पितरों के, गुरु के स्वरूप माने जाते हैं, तो वो आपकी कुंडली में इन सब चीजों का सकारात्मक प्रभाव देने लगते हैं, आपको प्राप्त होने लगती हैं।

निष्कर्ष

नेक्स्ट  भगवान श्री गणेश की, हरिद्रा गणेश की किस प्रकार से मंत्र जाप किया जाएगा, बहुत आसानी से कर सकते हैं, उस विषय में चर्चा करेंगे। आज की चर्चा यहीं समाप्त करते हैं।

आशा करता हूं post  आपको पसंद आई होगी। कुंडली विश्लेषण, कुंडली मिलान, किसी मुहूर्त की जानकारी के बारे में और ऑरा स्कैनिंग के लिए आप संपर्क कर सकते हैं। जय माता दी।

Ucchishta Ganapati Sadhana उच्छिष्ट गणपति साधना विधि विधान

Ucchishta Ganapati Sadhana उच्छिष्ट गणपति साधना विधि विधान

Ucchishta Ganapati Sadhana उच्छिष्ट गणपति साधना विधि विधान

 

 

Ucchishta Ganapati Sadhana उच्छिष्ट गणपति साधना विधि विधान गणेश ऐसे देवता हैं जिनकी वैदिक, तांत्रिक और पौराणिक, सभी प्रकार की साधनाएं और पूजा होती हैं। जी हां, यहां हम इनकी तंत्र साधना के बारे में बात करते हैं। तंत्र साधना के अंतर्गत गणपति की वक्रतुंड गणपति साधना, लक्ष्मी विनायक गणपति साधना, हरिद्रा गणपति साधना, उच्छिष्ट गणपति की साधना जैसी अनेक प्रकार की साधनाएं होती हैं, जिनको तंत्र में बहुत अधिक महत्त्व दिया जाता है। इन सब में उच्छिष्ट गणपति की साधना सबसे अधिक तीव्र और प्रभावी मानी जाती है।

 तो आज हम आपको उच्छिष्ट गणपति साधना के बारे में विस्तार से बताते हैं, क्या विधान उपयोग होते हैं, कौन-कौन से मंत्र होते हैं, इन मंत्रों के क्या-क्या प्रयोग हैं, कैसे इनको आप कर सकते हैं और कैसे इनका लाभ उठा सकते हैं। 

हालांकि आप बिना गुरु के उच्छिष्ट गणपति या गणपति की तंत्र साधना नहीं कर सकते, किंतु गुरु की सुरक्षा प्राप्त होने पर, इनकी आप जानकारी प्राप्त कर साधना कर सकते हैं और लाभ उठा सकते हैं। यह बहुत अधिक तीव्र प्रभाव और त्वरित परिणाम देने वाले होते हैं।


 

उच्छिष्ट गणपति नवार्ण मंत्र

three Lord Ganesha statuettes

उच्छिष्ट गणपति का नवार्ण मंत्र भी होता है। मंत्र महोदधि के अनुसार, इनका नवार्ण मंत्र होता है: “हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा”। ‘हस्ति पिशाचि लिखे’ के कारण इनको यह नाम दिया गया है और इस मंत्र का प्रभाव बहुत तीव्र होता है।

  • विनियोग: ॐ अस्य श्रीउच्छिष्टगणेश-नवाण-मन्त्रस्य कङ्कोल ऋषिः, विराट् छन्दः, उच्छिष्टगणपतिर्देवता, मम अभीष्टसिद्धये जपे विनियोगः।
    •  ऋष्यादिन्यास:
    • ॐ कङ्कोलर्षये नमः शिरसि:
    • ॐ विराट् छन्दसे नमः मुखे:
      ॐ उच्छिष्टगणपतिदेवतायै नमः हृदि:
    • ॐ विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे:
    •  
  • करन्यास: ॐ हस्ति अंगुष्ठाभ्यां नमः। ॐ पिशाचि तर्जनीभ्यां नमः। ॐ लिखे मध्यमाभ्यां नमः। ॐ स्वाहा अनामिकाभ्यां नमः। ॐ हस्ति पिशाचि लिखे कनिष्ठिकाभ्यां नमः। ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः।
  • हृदयादि षडङ्गन्यास: ॐ हस्ति हृदयाय नमः। ॐ पिशाचि शिरसे स्वाहा। ॐ लिखे शिखायै वषट्। ॐ स्वाहा कवचाय हुम्। ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा नेत्रत्रयाय वौषट्। ॐ हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा अस्त्राय फट्।

जिनको न्यास करना नहीं आता है, गुरु सिखा नहीं पा रहे हैं या गुरु पास में उपलब्ध नहीं हैं, वह सीधे अपने सर्वांगो में गणपति की भावना करते हुए भी मंत्र जप कर सकते हैं।

  • ध्यान: चतुर्भुजं रक्ततनुं त्रिनेत्रं पाशांकुशौ मोदकपात्रदन्तौ। करैर्दधानं सरसीरुहस्थमुच्छिष्ट गणपतिं भजेत्।।

इस प्रकार ध्यान करके इनका मन से आप जप कर सकते हैं। इसके बाद इनका यंत्र बनाया जाता है, जिसकी पूजा की जाती है, जो कि गुरु विस्तार से बताता है। पर गुरु नहीं है तो आप इनकी मूर्ति या चित्र स्थापित करके सीधे पूजा करते हुए भी साधना कर सकते हैं, किंतु गुरु की अनुमति जरूरी है और उनका सुरक्षा कवच भी जरूरी है।


 

मंत्र प्रयोग और विधान

white and gold hindu deity figurine

इस मंत्र के प्रयोग हम आपको बताते हैं। पूजा पद्धति तो गुरु ही समझा पाएंगे, पूजा पद्धति यहां बताने से आपके समझ में नहीं आएगी और बिना गुरु के आप कर भी नहीं सकते। हम बस मंत्र का प्रयोग बता रहे हैं।

  • राज्य प्राप्ति: अपने स्वयं के अंगूठे के आकार जितनी गणेश की प्रतिमा की रम्य कल्पना करते हुए लाल चंदन या श्वेतार्क (सफेद मदार) से मूर्ति निर्मित करें। फिर विधिवत् प्राण-प्रतिष्ठा करके मधु से स्नान कराएं। चतुर्दशी से शुक्ल चतुर्दशी तक प्रत्येक दिन गुड़ युक्त खीर का नैवेद्य तैयार करें और एकांत स्थान में बैठकर उच्छिष्ट मुख (बिना कुल्ला किए), वस्त्रहीन होते हुए “मैं स्वयं गणेश हूँ” की भावना से घी व तिल की 1000 आहुति दें। इस विधि का प्रभाव ऐसा है कि साधक राजकुल में उत्पन्न होता है अथवा 15 दिन में ही राजा जैसा सुख प्राप्त करता है, ऐसा शास्त्रों में कहा गया है।
  • अन्य प्रयोग:
    • कुम्हार की मिट्टी से प्रतिमा का निर्माण करके गणेश पूजन करने से राज्य की उपलब्धि होती है।
    • वाल्मीक की बांबी (जो चींटियां मिट्टी को अपने बिल से बाहर निकालती हैं) की मिट्टी से निर्मित प्रतिमा के पूजन से इच्छित मनोकामना सिद्ध होती है।
    • गोमय (गाय के गोबर) की प्रतिमा का पूजन सौभाग्यवर्धक है।
    • लावण (नमक) की प्रतिमा के पूजन से शत्रु रोगभीत होते हैं।
    • नील की प्रतिमा के पूजन से शत्रु नष्ट होते हैं।

हम आपको बताना चाहेंगे कि उच्छिष्ट गणपति की प्रतिमा सफेद मदार की जड़ से (यानी कि श्वेतार्क की जड़ से), नीम की जड़ से, मधुमक्खी के छत्ते के मोम से, मिट्टी की बांबी (यानी कि चींटी द्वारा निकाली हुई मिट्टी से) बनाई हुई मूर्ति से इनकी पूजा की जाती है और यह सब बहुत अधिक प्रभावी और तीव्र परिणाम देने वाले होते हैं।


 

विभिन्न तांत्रिक प्रयोग

Lord Ganesha

  • वशीकरण: घृत (घी) और तिल का मिश्रण करके होम किया जाए तो अखिल जगत वश में होता है। उच्छिष्ट मुख से तैयार पान पर फूंक कर जप किया जाए तो शत्रुओं को वश में किया जा सकता है।
  • शत्रु भेद: सरसों के तेल व राजिक (राई) पुष्पों को मिश्रित करके होम किया जाए तो शत्रुओं में विभेद होता है।
  • विजय प्राप्ति: द्यूत (जुआ), विवाद, वादियोंग (बहस) में इस मंत्र के जप से विजयश्री प्राप्त होती है। इसी मंत्र के जप से कुबेर अक्षक्रीड़ा के स्वामी बने और सुग्रीव-विभीषण को सहजता से राज्य प्राप्ति हुई।
  • अन्य विधान: रुद्रयामल के अनुसार, माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी से शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तक प्रतिदिन नियमपूर्वक 1000 जप करें। मूलतः यहां पर श्वेतार्क की प्रतिमा का ही प्रयोग होता है। नैवेद्य के रूप में खीर, फल आदि दें। भोजनोपरांत उच्छिष्ट मुख से जप करना गणेश को सहज प्रिय है।
  • मंत्र सिद्धि: अंगूठे के आकार की गणेश की प्रतिमा श्वेतार्क अथवा लाल चंदन से बनाएं और उसे अग्नि और गुरु के सम्मुख स्थापित करें, फिर 16 हजार जप करें। यह एक मत है। दूसरा मत है कि बुद्धिमान यक्षराज कुबेर ने भी उच्छिष्ट मुख से गणेश का जप करने का समर्थन किया है। उपहारों से युक्त और उच्छिष्टमुख से आराधित गणेश सभी फलदायक हैं। इस विधान से जप करने से जपकर्ता वाञ्छित धनैश्वर्य को उपलब्ध करता है, यह सत्य है।

 

अत्यंत तीव्र प्रयोग

gold and blue crown on green leaves

चेतावनी: ये प्रयोग अत्यंत तीव्र हैं और केवल गुरु के मार्गदर्शन में ही किए जाने चाहिए। इनका दुरुपयोग साधक के लिए हानिकारक हो सकता है।

  • उच्चाटन: 108 बार अभिमंत्रित अपामार्ग की समिधाओं से होम किया जाए तो सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस मंत्र से अभिमंत्रित बन्दर व घोड़े की हड्डी की कील जिस किसी के घर में गाड़ दी जाए, उसका परम उच्चाटन होता है। मनुष्य की हड्डी की कील मंत्र से अभिमंत्रित कर जिस किसी के घर में गाड़ दी जाए, उसका मरण निश्चित है। यदि अस्थि की कील निकाल दी जाए तो प्रभावित व्यक्ति स्वास्थ्य लाभ कर सकता है, इसमें संदेह नहीं।
  • वशीकरण: साधक जिसका नाम लेकर जप करता है, वह वशीभूत होता है। यदि साधक पाँच हजार मरुपुष्पों का होम करे तो वह उत्तम स्त्री का वरण करता है। दस हजार मंत्र से होम किया जाए तो राजा तत्काल वशीभूत होता है।
  • सिद्धि प्राप्ति: एक लाख मंत्र जपने से राजा तथा दो लाख मंत्र जपने से अनगिनत राजा वशीभूत होते हैं। दस लाख मंत्र जपने से साधक इष्ट को सर्वथा वश में करता है। एक करोड़ मंत्र जपने से अणिमा, पूर्ण शक्ति और सर्वज्ञता आदि महासिद्धियां प्राप्त होती हैं।

इस मंत्र को लिखकर शीश अथवा कंठ में धारण किया जाए तो सौभाग्य व रक्षा मिलना सुनिश्चित है। यह मंत्र अजितेन्द्रिय को हानि करता है। समस्त पापों में गोपनीय माने गए इस मंत्र को अजितेन्द्रिय के लिए प्रकाशित नहीं किया गया है। इसमें तिथि, उपवास अथवा नक्षत्र आदि का विधान नहीं है। मंत्र का यथेष्ट चिंतन ही सर्व कामनाओं को प्रदान करता है, सर्व फल प्रदान करता है।


 

अन्य उच्छिष्ट गणपति मंत्र

 

ऐसे ही गणेश के अन्य मंत्र भी हैं, जिनके विनियोग, ऋष्यादिन्यास, करन्यास, हृदयादिन्यास आदि अलग हो जाते हैं।

  • द्वादशाक्षर मंत्र: ॐ ह्रीं गं हस्तिपिशाचि लिखे स्वाहा।
  • ऊनविंशत्यक्षर मंत्र: ॐ नमो उच्छिष्ट गणेशाय हस्ति पिशाचि लिखे स्वाहा।
  • चतुस्त्रिंशदक्षर मंत्र (चौंतीस अक्षर): ॐ नमो भगवते एकदंष्ट्राय हस्तिमुखाय लम्बोदराय उच्छिष्टमहात्मने आं क्रों ह्रीं गं घे घे स्वाहा।

इस तरह से अनेक मंत्र भी मिलते हैं उच्छिष्ट गणपति के। इन मंत्रों से अभीष्ट की सिद्धि हेतु जैसा कि पीठ बनाया जाता है, जैसी की पूजा की जाती है, यंत्र आदि की और कुछ भेदों से पूजन करने से, एक लाख जप करके घी की आहुतियां देने से, या कृष्णाष्टमी से चतुर्दशी तक प्रत्येक दिन पाँच हजार जप करें, तदनंतर इसके दशांश का क्रमशः होम और तर्पण करें, इससे मंत्र सिद्धि को प्राप्त होता है और धन-धान्य, पुत्र-परिवार, सौभाग्य, अतुल यश मिलता है।

tara sadhana – swarna tara sadhana स्वर्ण तारा साधना से रोज 2 तोले सोना प्रपात होगा tara sadhana

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गुरु मंत्र साधना में आप सबका फिर से स्वागत है। मैंने अभी तक तंत्र के ऊपर बहुत सारे पोस्ट लिखे हैं। आपका बहुत सारा स्नेह प्राप्त हुआ, इस चीज़ के लिए मैं दिल से आभार प्रकट करता हूँ। ठीक है, आज आप लोगों के लिए मैं ले के आया हूँ सुवर्ण तारा साधना।

जो सुवर्ण तारा साधना है, यह अपने आप में बहुत बड़ी साधना है। अगर आप इसको संपन्न कर लेते हो, तो आपको डेली दो तोला सोना प्राप्त होता है, तो यह निश्चित है। और यह चेटक साधना के अंतर्गत आने वाली साधना है। 

चेटक साधना वह होती है जिसमें कोई शक्ति आपको उपहार के तौर पर कीमती चीज़ देती है, उसको हम चेटक साधना बोलते हैं। चेटक साधना में ज़्यादातर आपको कीमती चीजें मिलती हैं। 

अगर कोई व्यक्ति सागर चेटक साधना करता है, तो उसको समुंदर के हीरे-जवाहरात प्राप्त होते हैं। और वहीं कोई स्वर्ण कुछ चीजें स्वर्ण प्रदान करती हैं। 

तो चेटक विद्या बहुत ही प्राचीन विद्या मानी गई है। इसमें एक और चेटक माना गया है, जिसको हम बोलते हैं अन्नपूर्णा चेटक। अन्नपूर्णा चेटक से क्या होता है ? एक अन्नपूर्णा माता के द्वारा एक कटोरा मिलता है, उस कटोरी के ज़रिए आपको डेली गेहूँ प्राप्त होता है। तो आप कुछ भी जो घर की सामग्री होती है, वह हासिल कर सकते हैं उस अन्नपूर्णा कटोरे के माध्यम से।

आज हम बात करने वाले हैं सुवर्ण तारा साधना के ऊपर। देखिए, जो स्वर्ण तारा साधना है, बहुत ही प्राचीन साधना है। आज से नहीं, बहुत लंबे समय से साधक करते हुए आ रहे हैं और बहुत लोगों ने इसको सिद्ध भी करा है।

 इस साधना का मक़सद यह होता है कि कोई भी अगर आप जैसे कोई भी स्वर्ण प्राप्त करते हैं, उस स्वर्ण का आपको गरीबों में दान भी करना होता है, लोगों के भले के लिए भी पैसा इस्तेमाल करना होगा। 

अगर आप लोक कल्याण के लिए उस पैसे का इस्तेमाल नहीं करते हैं, तो आपकी वह सिद्धि नष्ट हो जाएगी। दूसरी चीज़, आप अनुचित चीज़ों के ऊपर उसको खर्च मत करिए। अनुचित चीजें मतलब जैसे कि आप मान लीजिए शराब, मीट, अंडा। शराब वग़ैरह पीते हैं, लोग अय्याशी करने लगते हैं जब पैसा आता है खूब, तो उस तरीके से भी नहीं करना। 

अगर आप करोगे तो भाई पैसा आपका नष्ट होगा ही होगा, सिद्धि आपकी नष्ट होगी ही होगी। इसीलिए इन चीजों का ध्यान रखें, उन पैसों का ग़लत इस्तेमाल मत करें, अपनी अय्याशी के लिए यूज़ मत करें। 

आप उन पैसों से अच्छा कपड़ा पहन सकते हैं, अच्छा खाना खा सकते हैं, अच्छी कार ले सकते हो आप और भी जो भी अच्छी चीजें आप हासिल कर सकते हैं, पर आप उन पैसों का ग़लत इस्तेमाल ना करें। 

आप अपनी समृद्ध ज़िंदगी जी सकते हैं, इसमें कोई भी ग़लत चीज़ नहीं है, पर पैसों का अनुचित प्रयोग करने पर यह चीजें खत्म हो जाती हैं।

अगर कोई व्यक्ति इस शक्ति का अच्छे से प्रयोग करता है, मतलब लोक कल्याण के लिए इस्तेमाल करता है, तो उसका यह होता है, जैसे उसको दो तोले डेली सोना मिलता है ना, तो माँ उसको खुश होकर छह तोले कर देगी, बढ़ाती जाएगी। 

अगर पैसा आप सही जगह लगाते हो, ग़लत जगह लगाओगे तो भाई पैसा बढ़ने की बजाय कम ही होगा। जो आपने घर-मकान उस पैसे से खरीदा है ना, वह भी नष्ट हो जाएगा। 

यह मत समझना कि मैंने घर बना लिया, यह कर लिया, गाड़ी ले ली, ठीक है, अब मैं जो कुछ मर्ज़ी करूँ। जो भी पुराना तुम्हारा होगा, वह सारा कुछ ले लिया जाएगा। इसीलिए क्या है भाई, पैसे का सही इस्तेमाल करना।

अब बहुत सारे लोग यह बोलेंगे कि अब यह स्वर्ण तारा जो साधना है, ऐसे तो सब लोग करके सभी अमीर बन जाएँ। सब लोग करके सब अमीर बन सकते हैं, पर क्या है कि लोग करते नहीं हैं। साधना एक बहुत बड़ा चैलेंज होता है, हर व्यक्ति उस चैलेंज को पूरा नहीं कर सकता है। 

जैसे एक आईपीएस का एग्ज़ाम होता है, तो लाखों लोग एग्ज़ाम देते हैं, कुछ लोग ही उनमें से सफल होते हैं। जैसे डॉक्टर के लिए नीट का एग्ज़ाम होता है, उसमें भी लाखों-करोड़ों लोग अप्लाई करते हैं और कुछ चंद लोग ही उस सीट को हासिल कर पाते हैं। तो उसमें भी ऐसा ही है। 

तो हर व्यक्ति साधना को सिद्ध नहीं कर सकता। उसका कारण यह है, बहुत सारी परीक्षाएं होती हैं, तो उन परीक्षाओं को पार करना संभव नहीं है। मतलब असंभव बात कुछ भी नहीं है, पर आपके अंदर वह जज़्बा होना चाहिए और वह आपके अंदर वह बल होना चाहिए, तभी आप उस चीज़ को कर पाओगे। अगर वह चीज़ आपके अंदर नहीं है, तो आप साधक कैसे बन सकते हैं? 

जब आप तारा की साधना करोगे तो बड़ी-बड़ी चीजें आपको दिखाई देंगी, कुछ डरावने अनुभव भी हो सकते हैं। तो इन सब चैलेंज को पार करने के बाद ही आप इनको सिद्ध कर सकते हो। जब आप सिद्ध कर लोगे तो दो तोले रोज़ सोना मिलेगा, आपकी गरीबी, कंगाली सब खत्म।

दूसरी चीज़ यह है, अब आप बोलोगे कि इसको सिद्ध करना कोई आसान काम नहीं है। हो सकती है सिद्ध, आपके अंदर वह जज़्बा चाहिए। बहुत सारे ऐसे साधकों को मैं पर्सनली जानता हूँ जिन्होंने इनको सिद्ध करा और अपना काम कर रहे हैं। कभी भी उन चीजों का वह शो-ऑफ नहीं करते हैं, कभी भी किसी को बताते नहीं हैं, सीक्रेट तरीके से अपनी ज़िंदगी जीते हैं। 

तो आपको भी अगर सिद्ध हो जाए तो आपको भी लोगों को दिखावा वग़ैरह नहीं करना, अपनी गुप्त तरीके से ज़िंदगी जीनी है। कुछ ऐसे संत-महात्मा भी हैं जो लोग डेली भंडारा लगाते हैं, गरीबों को खाना खिलाते हैं और भी बहुत सारे धार्मिक कार्य करते हैं। तो उनको जो भी पैसा प्राप्त हो रहा है, तो यह उसी साधना की बदौलत ही हो पा रहा है।

दूसरे नंबर के ऊपर, एक बहुत बड़े संत थे, आप सब लोग शायद जानते ही होंगे, उनके मरने के बाद जहाँ उनका आश्रम था, उसके नीचे कई टन सोना निकला। कई टन, मतलब उस सोने को गिनने के लिए भी अधिकारियों को छह से सात दिन लग गए थे, इतना ज़्यादा सोना। तो उनके पास वह सोना कैसे आया? उनके पास जो सोना आया था, यह स्वर्ण तारा साधना के माध्यम से आया था। यह चीजें कोई बताता नहीं है। 

बहुत सारे लोगों को ऐसे ही सोने की चेन दे देते थे, हवा में हाथ हिला के सोने की चेन प्रकट हो जाती थी, वह दे देते थे। तो ऐसे बहुत सारे साधक हैं जो गुप्त तरीके से इस सुवर्ण तारा को सिद्ध करके बैठे हैं और बहुत सारे लोक कल्याण के काम करते हैं। जितना ज़्यादा लोक कल्याण के कार्य करेंगे, भंडारे लगाएंगे, गरीबों की मदद करोगे, उतना ही ज़्यादा साधना आपकी बढ़ती जाएगी।

यह साधना बेसिकली उन लोगों के लिए है जो साधक गरीबों का भला करना चाहते हैं, लोक कल्याण की भावना रखते हैं। तो उन लोगों के लिए, ऐसी भावना रख के जो हैं, उन लोगों के लिए यह साधना है। अपनी समृद्धि से भरी ज़िंदगी जी सकते हैं और साथ में लोक कल्याण भी कर सकते हैं। 

तो हर कोई इस साधना को सिद्ध नहीं कर सकता, हर किसी के बस की बात नहीं है। करने को कर सकता है, पर आपके अंदर वह बल होना चाहिए, आपके अंदर वह जज़्बा होना चाहिए, आपके अंदर वह साधना करने की कैपेसिटी होनी चाहिए, रात-रात भर जागने की कैपेसिटी होनी चाहिए आपके अंदर, वही साधना को कर सकता है। कोई भी साधना ऐसी नहीं है कि आपको ऐसी ही सिद्ध हो जाएगी।

 रात-रात भर जागना पड़ता है, नींद को हराम करना पड़ता है, तब जाकर चीजें हासिल होती हैं। जब हासिल होती हैं, तो बहुत ज़्यादा मज़ा आता है साधक को। साधक की ज़िंदगी एक स्वर्ग में ही हो जाती है।

जैसे मैं साधकों को कुछ जानता हूँ जिनके पास यह सिद्धि थी, जब उनका पैसा आया तो उनका दिमाग खराब हो गया। उनका दिमाग खराब हो गया मतलब उस पैसे का ग़लत इस्तेमाल करने लगे। उसके बाद क्या हुआ? उनका पतन भी हो गया, मतलब कुछ भी नहीं बचा। 

जो भी साधना से मकान, घर, गाड़ी, सारा कुछ खत्म। जो भी आप इस साधना से ग़लत प्रयोग करोगे तो भाई सब खत्म होगा। रावण की सोने की लंका नहीं रही तो आपकी लंका कैसे रहेगी भाई?

एक साधक, अभी थोड़े दिन पहले ना, एक साधक गुरु भाई हैं, तो उनसे मेरी बात होती रहती है, तो वह बता रहे थे एक गुरु भाई है, उसको स्वर्ण सिद्धि प्राप्त हुई है। उसके बाद वह साधक अब की डेट में दुबई भाग गया है, दुबई चला गया है अपने सोने को बेचने के लिए। भाई, वह आलीशान ज़िंदगी वहाँ जीता है। 

यहाँ पर वह इंडिया में एक ट्रस्ट भी चला रहा है, तो वह पैसा ऑनलाइन ट्रांसफर करता रहता है ट्रस्ट के लिए। तो अगर आप भी अपनी गरीबी, कंगाली को खत्म करना चाहते हैं तो आप यह साधना ज़रूर करें। 

आपको यह साधना ज़रूर सिद्ध होगी अगर आपके अंदर जज़्बा है, आपकी भावना शुद्ध है। अगर बंदे की भावना सही नहीं है, तो उसको कुछ भी प्राप्त नहीं होता है। अगर बंदे की भावना सही है, तो कुछ भी हासिल कर लेगा।

आज के लिए बस इतना ही। जय श्री महाकाल। अगर आप भी यह साधना सीखना चाहते हैं, जानना चाहते हैं, तो इसके लिए मैं आपको अपना फ़ोन नंबर दे रहा हूँ स्क्रीन के ऊपर, तो आप संपर्क कर सकते हैं। जय श्री महाकाल।

Dattatreya lakshmi sadhana दत्तात्रेय लक्ष्मी साधना जो गरीबी को ख़तम करेगी PH.8528057364

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Dattatreya lakshmi sadhana दत्तात्रेय लक्ष्मी साधना जो गरीबी को ख़तम करेगी PH.8528057364 दोस्तों, आज मैं आपको एक ऐसा मंत्र बताऊँगा कि यदि लक्ष्मी प्राप्ति की सारी साधनाएँ आपकी फेल हो गई हैं या किसी भी साधना से या किसी भी मंत्र से आपको कोई फल नहीं मिल रहा है, तो मैं एक ऐसी महत्वपूर्ण साधना बताऊँगा जो कभी आज तक असफल नहीं हुई।

और जिसने भी इस साधना को किया है, यह शाबर साधना इतनी गजब की साधना है कि जो कोई भी इस साधना को करता है, अपना मनोरथ इस साधना के माध्यम से वह अवश्य पूरा कर सकता है। इसके लिए हमारे ऋषि-मुनियों ने अनेक साधना प्रयोग दिए हैं।

दोस्तों, इन साधनाओं में साधना सामग्री की इतनी आवश्यकता तो नहीं होती, फिर भी अगर आप शाबर सिद्धि यंत्र या श्री दत्तात्रेय यंत्र या श्री यंत्र अपने पास रख लेते हैं तो ज्यादा उचित रहता है। यहाँ मैं लक्ष्मी जी की एक अद्भुत साधना दे रहा हूँ।

इसे आप कभी भी सिद्ध कर सकते हैं, फिर भी नवरात्रि से दीपावली तक का समय बहुत उचित होता है या फिर जिस दिन रोहिणी नक्षत्र हो, उस दिन इस साधना को शुरू करने से सफलता का संशय नहीं रहता।

दोस्तों, पूर्णिमा के दिन, पूर्णिमा का दिन क्या होता है, इस साधना का, जो भी साधना आप कर लेते हैं, इसका हवन करना पड़ता है। और हवन में क्या करना पड़ता है, घी और शक्कर मिलाकर के आपको आहुतियाँ देनी पड़ती हैं।

दोस्तों, ध्यान रखें, तो सबसे बढ़िया रहता है। पंडित जी को कुछ दक्षिणा वगैरह दे दिया तो वह आपके लिए पूरी व्यवस्था कर देंगे।

तो ऐसी व्यवस्था करने के बाद में आप मंदिर में यदि उसका हवन कर लेते हो तो सबसे बढ़िया रहता है। इस साधना में क्या होता है, लक्ष्मी जी को सौगंध दी जाती है कि आप हमेशा उनके घर परिवार, हमारे घर परिवार पर अपनी कृपा बरसाती रहेंगी और धन के कारण से हमारे जो भी कार्य रुके जा रहे हैं, वो कार्य आपकी कृपा से पूरे होंगे और प्रत्यक्ष होकर आप हमारे कार्यों में सहयोग दें। इस प्रकार की सौगंध माता लक्ष्मी को दी जाती है।

तो सौगंध देने से माता लक्ष्मी का यह जो मंत्र है ना, वो ज्यादा सफल हो जाता है। कारण यह है दोस्तों कि इसमें मैं छोटी सी बात बताता हूँ, आप इस रहस्य से भी परिचित होंगे कि लक्ष्मी सागर मंथन से प्रकट हुईं, जिसे नारायण ने अपनी पत्नी बनाया था, धर्म पत्नी बनाया था।

और लक्ष्मी जी के साथ में चंद्रमा और अप्सराएँ सागर मंथन से प्रकट हुई थीं। चंद्रमा को भगवान शंकर जी ने धारण कर लिया और अप्सराएँ देवराज इंद्र के सामने कथक करने के लिए चली गईं। चंद्रमा जो है ना, वह लक्ष्मी जी का भाई है।

इंसान को जब भी जरूरत पड़ती है, वह किसी न किसी प्रयत्न से उस स्थिति को पाना चाहता है जिसमें उसे श्रेष्ठता मिले, दूसरों का मोहताज नहीं बनना पड़ेगा।

ऐसी साधना वीडियो का निर्माण किया जो उसे एक श्रेष्ठ तत्व प्रदान कर लघु से महान बनाती है। विज्ञान के युग में समय के साथ वह क्रियाएँ लुप्त होती गईं और इंसान इसी आध्यात्मिकता की कमी से आर्थिक और भौतिक पक्ष में कमजोर होता चला गया।

दोस्तों, असुरों ने मंत्रों की बहुत गजब की साधनाएँ कर-करके देवताओं से उनके अधिकार छीन लिए, तो शंकर जी को क्या करना पड़ा, जितने भी वैदिक मंत्र थे, उन सारे मंत्रों को कीलित करना पड़ा।

और इसी से कभी प्रयत्न के बाद जब सिद्धि नहीं हुई तो ऋषियों ने उत्कीलन की प्राप्ति के लिए तप किया और नाथ पंथ के योगियों, जिनमें गोरखनाथ जी का नाम आप सबसे पहले सुनते हैं, गोरखनाथ जी का नाम, गोरखनाथ जी जो हैं वह सिद्ध पुरुषों में नंबर वन गिने जाते हैं।

उन्हीं के माध्यम से शाबर साधनाएँ आपके पास आईं। अलग-अलग संप्रदायों में अलग-अलग विधान हैं। या ये साधना प्रयोग दे रहा हूँ, इससे हम यह तो नहीं कह सकते कि लक्ष्मी आपके सामने प्रकट हो जाएँगी, मगर धन के नए-नए आयाम, रास्ते आपके जीवन में खुल जाएँगे और सुख-सुविधा से आपका घर ज़रूर भर जाएगा क्योंकि सभी सुख लक्ष्मी का रूप होते हैं।

मित्रों, इसलिए इस साधना का करना बहुत बेहतर रहता है। ये सारे प्रयत्न फेल हो जाने के बाद भी यह प्रयत्न, यह साधना कभी फेल नहीं होती।

Dattatreya lakshmi sadhana  VIDHI  दत्तात्रेय लक्ष्मी साधना  की विधि

Dattatreya lakshmi sadhana दत्तात्रेय लक्ष्मी साधना जो गरीबी को ख़तम करेगी PH.85280 57364
Dattatreya lakshmi sadhana दत्तात्रेय लक्ष्मी साधना जो गरीबी को ख़तम करेगी PH.85280 57364

दोस्तों, इस साधना की विधि कुछ इस प्रकार है कि आप इसे रोहिणी नक्षत्र से शुरू करें। यह 21 दिन की साधना है। कमलगट्टे की माला से 21 माला मंत्र का जाप करना पड़ता है। वस्त्र वही पहनें जो आपको अच्छे लगते हों, बस काला रंग आपको नहीं पहनना है, इस बात का ख्याल रखें। साधना समय शाम को 7 बजे से लेकर के 10 बजे तक कभी भी आप शुरू कर सकते हैं।

अपने सामने एक बाजोट पर पीला वस्त्र बिछाकर श्री यंत्र स्थापित कर लें और उसी का पूजन करें। गुरु पूजन और गणेश पूजन के बाद नवनाथों को नमस्कार करें और उनके, नवनाथों में क्या होता है, नमस्कार करने के बाद में “आदेश-आदेश” ऐसा बोला जाता है, “आदेश-आदेश”।

तो फिर आप नवनाथ का पूजन करके उसके बाद में यह ध्वनि निकालें, “आदेश-आदेश”। और अगर मिल जाए तो दत्तात्रेय भगवान का जो यंत्र होता है, वो दत्तात्रेय भगवान का यंत्र आपको अपने उसमें, पूजा में शामिल करना चाहिए।

क्या होता है कि दत्तात्रेय भगवान एक और तत्व हैं और वो सारी जगह विद्यमान रहते हैं। तो कोई भी प्रकार से पूजा का आपका दोष नहीं लगता है।

आपने कुछ भी गलती कर दी हो, कुछ भी कर दिया छोटा-मोटा, देखो ज्यादा गलती कर दी हो तो अलग बात है, जानबूझ के की जाने वाली गलती तो कभी माफ नहीं होती, लेकिन भूल-चूक से आपसे कोई गलती हो गई तो उसका दोष नहीं लगता है।

क्योंकि अगर तत्व सब जगह विद्यमान है और भगवान दत्तात्रेय के नाम से एक चुटकी रेत भी अगर उड़ा दी जाए तो आपकी साधना सफल हो जाती है, आपको पूजा का पूरा फल मिल जाता है। दोस्तों, इस यंत्र की मान्यता बहुत है। आपके पास कभी भी धन की कमी नहीं आने देता।

आप किसी भी तरह प्रयत्न कर इसे गुरु के हाथ से ले लें तो सबसे बढ़िया रहता है। अगर गुरु हाथ आपके पास नहीं हो या गुरु जी से नहीं मिले, तो गुरु जी का चित्र सामने रख करके उनका पूजन करके फिर आप दत्तात्रेय भगवान के यंत्र को अपनी पूजा उसमें स्थापित कर सकते हैं।

कमलगट्टे की माला से 21 माला मंत्र जाप कर लें। उसी माला से पहले और बाद में एक-एक माला गुरु मंत्र का जाप करें। मंत्र छोटा सा है, ज्यादा टाइम आपको लगेगा नहीं। घी का दीपक जलता रहना चाहिए और ज्योत जलती रहनी चाहिए। अगरबत्ती आदि लगा दें।

मंत्र इस प्रकार है दोस्तों:
ॐ सागर-सुता नारायण की प्यारी, चंद्र-भ्राता की सौगंध, हाजिर हो।
ॐ सागर-सुता नारायण की प्यारी, चंद्र-भ्राता की सौगंध, हाजिर हो।
ॐ सागर-सुता नारायण की प्यारी, चंद्र-भ्राता की सौगंध, हाजिर हो।

पुतली तंत्र प्रयोग रहस्य putalee tantra prayog rahasy ph .85280 57364

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पुतली तंत्र प्रयोग रहस्य putalee tantra prayog rahasy ph .85280 57364
पुतली तंत्र प्रयोग रहस्य putalee tantra prayog rahasy ph .85280 57364

पुतली तंत्र प्रयोग रहस्य putalee tantra prayog rahasy ph .85280 57364 हमारी वेबसाइट  में आप सभी भाई-बंधुओं का स्वागत है। मैं हूँ, आज हम आपको बताएँगे कि बारह श्मशान में जो पुतले के ऊपर प्रयोग किया जाता है। तो आज जो है, श्मशान का एक प्रयोग है, श्मशान का जप जो कि शत्रु के ऊपर बहुत सारे तांत्रिक करते हैं।

बहुत पहले से, पुरातन समय से ही यह तंत्र जो है, चलता आ रहा है। इसमें होता यूँ है कि जो व्यक्ति होता है, उसका नाम, पता लिया जाता है और उसका बाल या फिर नाखून, उम्र या फिर कोई पेशाब की ऐसी वस्तु ली जाती है, जैसे कि मिट्टी, जहाँ उसने पेशाब किया हो, उस मिट्टी को लिया जाता है।

यानी कि कोई शारीरिक चीज़ ली जाती है, चाहे उसके सिर के बाल हों, उसका कोई नाखून हो या उसका कोई कपड़ा हो।

तो भी यानी कि कोई भी शारीरिक स्पर्श हो जाए, उसके शरीर का कोई भी अंग हो या वस्तु, उसके ऊपर तांत्रिक क्या करते हैं और करते आए हैं, कि यह एक पुतला बना लेते हैं, आटे का पुतला बना लेते हैं और मंत्रों द्वारा उसको जो है, फूँक देते हैं।

और उसका सीधा संबंध जो है, उस व्यक्ति का उस पुतले से हो जाता है। क्योंकि कैसे हो जाता है? तंत्र यही तो तंत्र है, जो आप दूर से नहीं कर सकते, वह होने लग जाता है।

तो फिर जो वह कहीं भी, अगर वह कहीं भी उस पुतले के अंदर, मान लो बड़ी सुई डालता है या फिर साही जानवर का काँटा होता है, बहुत लंबा, वह डालता है, तो वहीं-वहीं उसके दर्द होता है।

तो यह करते थे या करते हैं कि उस काँटे को दिल के आर-पार करके वहाँ पर गाड़ देते हैं। उस व्यक्ति का धीरे-धीरे इतना ज़्यादा दर्द बढ़ जाता है कि उसको कोई भी इलाज रास नहीं आता।

वह कोई भी इलाज करवाता है, वह सही नहीं हो पाता क्योंकि जब तक उस पुतले का तंत्र नहीं कटेगा, तब तक वह भले ही लाखों रुपए खर्च कर ले, तब तक उसको कोई भी प्रभाव उस पर नहीं पड़ेगा।

तो ऐसा हुआ भी है, मेरे पास केस आए हैं। नई दिल्ली से मेरे पास बहुत सारे केस आए एक ही बार में। वहाँ पर किसी तांत्रिक ने, मतलब दिल्ली में भी ऐसे तांत्रिक हैं जो इस तरीके की तांत्रिक प्रक्रिया जानते हैं, जो कि इस तरीके के कार्य करते हैं।

तो वह व्यक्ति जो है, मरणासन्न पर पड़ा हुआ था जब उन्होंने मेरे को फोन किया। तो अगर वह कुछ दिन लेट कर देते, तो उसकी स्थिति ही ऐसी थी कि उसको दुनिया छोड़कर जाना ही पड़ता। शरीर है, कब तक झेल सकता है, कोई सीमा होती है।

तो ऐसा करने से सारे शरीर पर ज़्यादा प्रभाव आना शुरू हो जाता है और सीरियस व्यक्ति मरणासन्न से ऊपर पहुँच जाता है।

तो उसको मेरे पास लाया गया गाड़ी पर और उसका मैंने तंत्र काट जो विधि-विधान से किया, उसके चार-पाँच दिन तक वह पूरा जो है, चलने-फिरने लग गया और दस दिन तक वह पूरा तंदुरुस्त हो गया। उसको टेस्ट वगैरह करवाए, कुछ भी नहीं आया था, ना ही पहले आया था और ना ही अब आ रहा था।

बस डॉक्टर उनको बोल रहे थे कि हुआ क्या है, यह समझ से परे है कि उनको कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। लेकिन उस व्यक्ति की जो जान पर आई हुई थी, तो वह दस दिन के बाद पूर्ण स्वस्थ हो गया।

और पहले वह पता नहीं महीनों-महीनों जो है, कभी इस डॉक्टर के, कभी उस डॉक्टर के। डॉक्टर वही ठीक कर सकता है अगर आपको कोई मामूली सी प्राकृतिक दिक्कत हो गई है।

आपकी सर्जरी करके वह आपको ठीक कर सकता है, बहुत पावर होती है डॉक्टर में भी। वह आपको कोई भी बीमारी अगर है तो बड़ी से बड़ी बीमारी का इलाज आज जो है, डॉक्टर जो है, कर सकते हैं, इतनी उनमें शक्ति है।

लेकिन इस बीमारी का इलाज वह नहीं कर सकते हैं। अगर यह बीमारी उनको भी दे दी जाए तो डॉक्टर खुद भी कहीं भी चला जाए, बड़े से बड़े हॉस्पिटल में चला जाए, वह ठीक नहीं होगा। तो तंत्र इतनी घातक बीमारी है।

क्योंकि पहले समय में इसीलिए कई बार होता था, तांत्रिक को मार भी दिया जाता था क्योंकि आज मारोगे तो आपके ऊपर पुलिस केस तो होगा ही होगा।

इसलिए जो है, पहले समय में लोग मार दिया करते थे अगर कोई ज़्यादा दुष्ट हो जाता था। तो इसलिए आज भी जो है, गुप्त तरीके से लोग काम करते हैं, किसी को परेशान करते हैं।

यह विद्या हमारे पास भी है लेकिन उपयोग में यह विद्याएँ तभी लाई जाती हैं जब कोई बड़ा ही दुष्ट इतना किसी को पीड़ित कर दे कि उसके पैर रखने की भी जगह ना हो, कि मैं कहाँ पैर रखकर साँस ले लूँ, कहाँ मैं किसके पास जाकर साँस ले लूँ।

साँस लेना तक दूभर कर दिया हो, उसके लिए यह प्रयोग किया जाता है। और हमने किया भी है ऐसे व्यक्ति पर किया है जिसको देखकर, जिसके कार्य, जिसके कर्म देखकर खून खौल जाए। ऐसे व्यक्ति पर किया था हमने, जब कि अंदर से हमारा खून खौला था तब किया था।

किसी लालच में इसका प्रयोग नहीं किया था। लालच में तो लाखों रुपए देने के लिए तैयार हो जाते हैं कि हमारे दुश्मन को यह कर दो, वह कर दो।

देखो, आप उसके दुश्मन हैं, वह आपका दुश्मन है, लेकिन दुश्मनी बनी है तो आप जो है, खुद लड़ो। कुछ भी हो सकता है, आप गलत हों, वह सही हो। दुश्मन का यह मतलब नहीं होता कि कोई दुश्मन है आपका, तो वह गलत है और आप भी तो उसके दुश्मन हैं, आप भी गलत हो सकते हैं उसके लिए।

इसलिए अगर वह ज़्यादा गलत करता है आपके साथ तो आप मुझे बता सकते हो कि यह बिना वजह इसने किया है।

अगर आपस में बहस कोई छोटी-मोटी बात को लेकर बढ़ गई, कल को उसके लिए यह नहीं कि आप मारण प्रयोग करवा दो। ऐसा है कि अगर मान लो हम भी जैसे एक इंसानियत के नाते जो होता है ना, तो ही किया जाता है।

मान लो इंसानियत के नाते हमें लगता है कि उसने, दरिंदों से भी… दरिंदा भी ऐसे गंदे कार्य नहीं करता जैसे तुमने कार्य किए हैं, तो हम उस व्यक्ति के लिए प्रयोग कर सकते हैं।

व्यक्ति हमसे संपर्क भी कर सकता है कि ऐसे कर्म करने वाला व्यक्ति है, कि आप उस पर प्रयोग कर देंगे? हम सोच-विचार के उसको बता सकते हैं, हाँ या ना में उत्तर दे सकते हैं। 

अगर कोई ऐसा दुश्मन है, दुश्मन ऐसा है आपका कोई, या कोई व्यक्ति ऐसा हो सकता है आपका दुश्मन ना हो, किसी को पीड़ित कर रहा है, गलत कार्य कर रहा है। 

वह आप उसके बारे में या आपको भी परेशान कर रखा है, उसके लिए मुझे बोल सकते हैं। उसके लिए मैं हाज़िर हूँ, लेकिन आपकी अपनी निजी दुश्मनी के लिए मुझे फोन ना करें क्योंकि उस निजी दुश्मनी में मैं किसी का भी घर बर्बाद नहीं कर सकता। मैं सिर्फ अच्छाई के लिए शक्तियों का प्रयोग कर सकता हूँ, बस।

तो यह जो है, अर्द्धरात्रि में जो यह पुतले की क्रिया होती है, इसको जब किया जाता है, एक घंटे के अंदर-अंदर पूरा जो है, जागृत हो जाता है पुतला। जब जागृत होता है तो आप क्रिया करते हैं, जैसी पीड़ा उसको देनी है, वैसी देते हो और फिर उसको गाड़ देते हो। 

उसको उखाड़ने वाला भी कोई नहीं, अगर उखाड़ देता है वहाँ से, तुरंत वहाँ से उसका तंत्र कट जाएगा।

मान लो पिन घुसेड़ दिया, तो पिन निकाल दोगे तो उसका तंत्र खत्म हो जाएगा। काट दोगे बीच में से पकड़कर, कोई अच्छा शांति मंत्र पढ़कर, तो कट जाएगा। 

लेकिन जब तक उसको उखाड़ेगा नहीं, तब तक नहीं हो सकता है। और पुतले में, पुतले के भी बंधन तंत्र बहुत सारे आते हैं, घातक से घातक।

मिलते हैं आपके लिए कोई और नई जानकारी लेकर, नए तंत्र के ऊपर कोई नई जानकारी लेकर मैं। तब तक के लिए नमस्कार।

mohini sadhna anubhav मोहिनी साधना अनुभव मोहिनी विद्या से कैसा बदला जीवन सच्चा अनुभव mohini sadhna

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mohini sadhna anubhav मोहिनी साधना अनुभव मोहिनी विद्या से कैसा बदला जीवन सच्चा अनुभव मंत्र साधना.कॉम में आप सबका फिर से स्वागत है। देखिए, आज के समय में एक भ्रांति चल रही है कि जो मोहिनी विद्या होती है, बहुत सारे लोगों के मन में यह चीज होती है कि जो मोहिनी विद्या है केवल वशीकरण के काम आती है।

यह एक बहुत बड़ा भ्रम है,  यह बहुत प्रकार के काम कर सकती है, तमाम प्रकार के आप काम ले सकते हैं,  बहुत प्रकार के काम मैं ले चुका हूं। उसके कुछ एक्सपीरियंस आप लोगों के साथ शेयर करने वाला हूं, ? चलिए शुरू करते हैं।

देखिए, मेरा एक भतीजा था, उसकी एक लड़के के साथ थोड़ी सी लड़ाई-झगड़ा हुआ, और सामने वाले लड़के का दांत टूट गया, उससे मतलब उसने मुक्का वगैरह मारा होगा, तो उस केस के अंदर कोई जमानत नहीं होती है। मतलब कि अच्छी खासी धाराएं लगती हैं।

तो उसके ऊपर भी धाराएं लगीं और इस तरीके से हुआ तो उनको जमानत नहीं हो रही थी और फिर मैंने क्या करा, पीपल के पेड़ के ऊपर माता मोहिनी का प्रसाद लगा दिया और उनके कुछ मंत्रों का जाप करा और बोला कि यह जो लड़का है, इसको जमानत मिलनी चाहिए।

तो एक घंटे के अंदर-अंदर ही सामने वाली जो पार्टी है, उन्होंने केस वापस ले लिया, और जमानत मिल गई। ये चमत्कार देख के मैं तो एक बार दंग ही रह गया कि इस तरीके से भी, इतनी जल्दी, फास्ट तरीके से मोहिनी विद्या ने काम करा। 

एक अनुभव मैं और बताता हूं आप लोगों को। मेरे जो एक गुरु भाई हैं,  उनके ऊपर, मेरे जो दादा गुरु हैं, वह बताते थे, बहुत सारे केसेस थे उनके ऊपर। मतलब वो एक गैंगस्टर टाइप आदमी था। वो बदमाश टाइप, जो लोगों को टाइप पे था वो और बहुत सारे केसेस चल रहे थे। बहुत पुरानी बात है ये।

तो उनको अपनी गलती का रियलाइज होगा कि मैं यह जो भी है, गलत कर रहा हूं। तो फिर उन्होंने क्या करा कि वो जो मतलब गलत रास्ता है, उसको खत्म कर दिया। मतलब यह उन्होंने सोचा कि मैं सही रास्ते के ऊपर चलूंगा।

तो तभी जो हमारे दादा गुरु थे, उन्होंने उसकी ऐसी भावना को देखकर मोहिनी विद्या प्रदान कर दी कि आप जब भी सुनवाई के लिए जाना तो यह पढ़ के जाना, तो उन्होंने उस तरीके से मोहिनी विद्या का भोग प्रसाद लगा के, उसका जाप करके गए। सभी केसों के अंदर लगभग वह बरी हो चुके। तो यह चमत्कार है मोहिनी विद्या का। बहुत सारे लोग इसका लाभ उठा चुके हैं,

एक कार्य मैंने स्वयं भी करा था इस पे। बहुत सारे काम मैं कर चुका हूं पर एक केस मैं आपको और बताता हूं। एक प्रिंसिपल सर हैं किसी स्कूल के, उनको ट्रस्टी वहां का परेशान करता था बहुत ज्यादा। वो यह चाहता था कि स्कूल छोड़ के वहां से भाग जाएं, पर वो स्कूल नहीं छोड़ रहे थे।

इसी चीज के चलते मेरे पास यह केस आया कि आप इस चीज को हैंडल करिए। मैंने इसका जाप करा मोहिनी विद्या का, करने के बाद वो प्रसाद लगा दिया। वो व्यक्ति कुछ सालों के लिए गायब ही हो गया, पता नहीं वो कहां चला गया, मतलब अपने काम में वो मशरूफ़ हो गया और जो प्रिंसिपल सर हैं, उनको परेशान करना बिल्कुल बंद कर दिया।

मतलब इस तरीके से होता है, यह चीज बहुत जबरदस्त है। तो इनसे आप काम ले सकते हैं मोहिनी विद्या से। एक वे आपके हर मोड़ के ऊपर सहायता करेगी, आप किस तरीके से उसका यूज़ करते हैं। तो ये चीजें आपके ऊपर डिपेंड करती हैं।

कौन सी मोहिनी मैंने इस्तेमाल करी? मैंने इस्तेमाल करी थी शामकौर। इसके बहुत ज्यादा रिजल्ट मैं देख चुका हूं। इसके अलावा बहुत सारी मोहिनी मैं इस्तेमाल कर चुका हूं।

कामेश्वरी मोहिनी का इस्तेमाल मैंने एक अपने दोस्त की शादी करवाने के लिए करा था, तो उसके भी रिजल्ट बहुत अच्छे आते हैं, किसी को पागलपन तक लेके जाना हो, तो काम आप कर दीजिए, वो व्यक्ति आपके प्यार में पागल हो जाएगा।

तो हर शक्ति की अपनी-अपनी मोहिनी होती है, तो यह होता है सिस्टम इसके अंदर कि आप यह मत सोचिए कि मेरे को वशीकरण करना है, उसके अलावा भी यह बहुत सारे काम करती है। कुछ भी आप इससे काम ले सकते हैं। तो आज का जो पोस्ट है, इसी बात को बताने के लिए था। तो अगर आपको पसंद आया हो तो आप मेरे को जरूर बताइए। जय श्री महाकाल।

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mohini vidya rahasya मोहिनी विद्या रहस्य दुनिया को वश में करने की देवी का रहस्य mohini vidya

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mohini vidya rahasya मोहिनी विद्या रहस्य दुनिया को वश में करने की देवी का रहस्य mohini vidya गुरु मंत्र साधना में आप सबका फिर से स्वागत है। देखिए, आज मैं आपको एक मोहिनी विद्या का अनूठा अनुभव बताने वाला हूँ। कृपया आप इस पोस्ट  को अंत तक ज़रूर सुनें।

मेरा एक दोस्त था बचपन का और वह एक लड़की से प्रेम करने लगा। ठीक है, कुछ लड़कियाँ ऐसी होती हैं कि खुले स्वभाव की होती हैं, मतलब हर किसी के साथ प्रेम से बातें करती हैं, हर किसी के साथ मुस्कुराकर बात करती हैं, या फिर हर किसी के साथ जल्दी से घुल-मिल जाती हैं और सामने वाला व्यक्ति क्या होता है, उस मामले में कि ग़लत समझ लेता है। तो उसी तरीक़े से जो मेरा दोस्त था, उसे भी थोड़ी ग़लतफ़हमी हो गई कि वह मेरी ओर आकर्षित है और या मेरे को पसंद करती है।

 

उसने उसके प्यार के चलते ही उसको प्रपोज़ भी कर दिया। उस लड़की ने साफ़ तौर पर मना कर दिया कि मैं इस रिलेशन में आगे नहीं बढ़ सकती, मेरे को इन चीज़ों में इंटरेस्ट ही नहीं है।

जब यह चीज़ बोली गई तो उसके दिल पर बहुत धक्का लगा कि उसने ऐसा बोल दिया, क्योंकि वह तो बहुत ज़्यादा एक्सपेक्ट कर चुका था चीज़ों को कि मैं उसके साथ शादी करूँगा, यह करूँगा, वह करूँगा, यहाँ घूमने जाएँगे, यह करेंगे। वह सारे ही सपने एक मिनट में ही उसके चकनाचूर हो गए।

और फिर मेरे को बोला कि मैं तो सुसाइड कर लूँगा। पहले तो मैंने उसको समझाया कि आप ऐसा क़दम मत उठाओ। तो फिर वह मान ही नहीं रहा था बात के लिए क्योंकि वह प्यार में उसके अंधा हो चुका था।

वह एकतरफ़ा ही प्यार था, उसकी ओर से कोई भी ऐसा रिस्पॉन्स नहीं था। और फिर मेरे को लगा कि मेरे को कुछ करना चाहिए क्योंकि बहुत ज़्यादा समझाने पर अगर कोई व्यक्ति न माने, तो फिर मेरा दोस्त था तो इसीलिए मेरे को कुछ करना था उसके लिए।

फिर मैंने सोचा कि चलो उसके लिए मैं मोहिनी विद्या का ही प्रयोग करता हूँ। मैंने उस लड़की की फ़ोटो ली और उसके ऊपर मैंने मोहिनी विद्या का प्रयोग करा। वह लड़की कुछ ही दिनों में उससे जो है, प्रेम से बातें करने लगी। उसने भी उसको प्रपोज़ कर दिया। आगे इतनी ज़्यादा वह लड़की उसके प्यार में पागल हो चुकी और दोनों तरफ़ से अब प्यार हो गया था।

सारा कुछ सही चल रहा था। मेरे को भविष्य में होने वाली घटना के बारे में नहीं पता था क्या होगा। तो अभी सब कुछ सही चल रहा था। तो क्या होता है, उस लड़की की एक्सीडेंट में हो जाती है डेथ। सुबह वह एक्टिवा से गई किसी काम के लिए।

बहुत ज़्यादा कोहरा पड़ने के कारण पीछे से कोई वाहन आया, उसने टक्कर मार दी और वहीं पर ही उस लड़की की ऑन द स्पॉट डेथ हो गई। जब यह चीज़ उसको पता चली, तो उसको बहुत ज़्यादा धक्का लगा क्योंकि उन्होंने बहुत ज़्यादा बड़े-बड़े सपने सजाए थे।

ठीक है, आगे चलके क्या होता है, वह जो लड़की होती है, मरने के बाद भी उसके पास आने लगी। तो यहीं पर ही गड़बड़ शुरू हो गई क्योंकि वह इतना ज़्यादा तीव्र वशीकरण था, मरने के बाद भी वह वशीकरण काम कर रहा था।

मरने के बाद भी वह अट्रैक्शन उसकी ओर ख़त्म नहीं हुआ था। वह अक्सर उस लड़के को बोलती कि मैं अपनी दुनिया में तुम्हें लेकर जाऊँगी। सपने के अंदर उसको ऐसा बोलती तो लड़का घबरा के उठ जाता था। ऐसा बहुत दिन हुआ।

फिर आगे की कहानी क्या हुई, उस लड़के का भी पीछे से कोई गाड़ी आई तो उसने टक्कर मार दी, उसका एक्सीडेंट हो गया।

पर उस लड़के की जान बच गई। वह हॉस्पिटल में भी वही लड़की उसको दिखाई देने लगी कि अब मैं तुम्हें अपनी दुनिया में ले जाऊँगी, तुम मेरे साथ चलो। वही चीज़ उसने मेरे को बताई आगे कि मेरे साथ यह हो रहा है, अब मैं करूँ क्या।

जब मैंने यह चीज़ें सुनीं तो मेरा भी दिमाग़ एकदम सुन्न फिर गया कि मैं अब क्या करूँ। जब व्यक्ति जीवित होता है तो उसका वशीकरण उतारना आसान होता है। मरने के बाद जब वह वशीकरण उतारना मुश्किल हो जाता है, तो फिर मैं थोड़ा डरने लगा कि कुछ अनहोनी न हो जाए या इस लड़के की डेथ न हो जाए। तो मेरे मन में ये चीज़ें चल रही थीं।

फिर मैं इस चीज़ के लिए भी डर रहा था, अगर मैं अपने गुरुदेव को बताऊँगा, वो क्या रिएक्ट करेंगे, मेरे को कुछ नहीं पता है, वो क्या बोलेंगे मेरे को। तो फिर जब जान पर बात आई उसकी, तो फिर मेरे को भी लगा कि मेरे को भी जल्दबाज़ी में यह सारा कुछ गुरुदेव को बताना चाहिए।

डरते-डरते मैंने यह सारी बातें उनको बताईं। उन्होंने मेरे को बहुत ज़्यादा फटकारा कि तुम्हें विद्याएँ देनी ही नहीं चाहिए थीं, मैंने बहुत बड़ी ग़लती करी है कि मैंने तुम्हें जो कुछ भी सिखाया है, आज मेरे को पश्चात्ताप हो रहा है।

और मैं भी बहुत ज़्यादा शर्मिंदा था कि मैंने यह एक काम क्यों करा। पर मैं अपनी दोस्ती के चलते यह काम मैंने किया था और जब मेरे को यह नहीं पता था कि भविष्य में ऐसी चीज़ें हो सकती हैं।

फिर आगे क्या होता है, मेरे जो गुरुदेव हैं, ठीक है, उस आत्मा को बुलाते हैं। बुलाने के बाद उस आत्मा के लिए क्रिया की जाती है, उसके बाद उस आत्मा को मोक्ष मिल जाता है। हालाँकि यह काम बहुत आसान नहीं था, बहुत ही हमें मुश्किल का सामना करना पड़ा क्योंकि एक आत्मा को उस चीज़ के लिए मनाना बहुत मुश्किल था।

वह तो इस चीज़ के लिए उतारू थी कि मैं इसको लिए बिना नहीं जा सकती। पर जैसे-तैसे करके बहुत मुश्किल से हमने उसका जो है, समाधान करा। तब वही जो आगे जाकर लड़की होती है, अपने लोक में चली गई।

तो इसमें मैं आपको एक चीज़ और बताता हूँ, जब भी कोई मोहिनी विद्या का अगर प्रयोग किया जाता है तो यह मरने के बाद भी काम करता है। इतना ज़्यादा पावरफ़ुल होता है। दूसरी चीज़, कोई तांत्रिक जल्दी से काट नहीं सकता है। इसका साइड इफ़ेक्ट यह होता है कि अगर वह व्यक्ति मर जाए तो फिर भी आपका पीछा छूटने वाला नहीं है।

ठीक है, एक मेरे लोकल में अंकल जी हैं, उन्होंने भी ऐसे ही शादी करी थी अपनी पत्नी से। वशीकरण करवाया उन्होंने। उन्होंने भभूति दी कि आप इसको किसी भी खाने-पीने की वस्तु में दे दो। जैसे ही उन्होंने खाने-पीने की वस्तु में दिया, तो वशीकरण को होना ही था, तो उसका रिज़ल्ट आ गया।

तो जैसे ही उस औरत की डेथ हुई, जैसे औरत बूढ़ी हो गई तो उसके बाद उसकी डेथ हो गई, तो कुछ दिन बाद ही अंकल की भी डेथ हो गई। मतलब यह होता है कि वह शक्ति का आकर्षण ख़त्म नहीं होता है। मरने के बाद भी वह शक्ति आपको, जब वह आपके लिए काम करती है, मोहिनी विद्या मरने के बाद भी काम करती है। तो यह होता है सिस्टम।

वह व्यक्ति ज़्यादातर तो नहीं करनी चाहिए। अगर कोई व्यक्ति प्यार के अंदर पागल है तो वह कर सकता है। शादी वग़ैरह हो जाए, कुछ समय बीत जाए, तो उससे आपको फिर से छुटकारा दिलवाना चाहिए। अगर आप इसका नहीं करोगे तो फिर आगे जाकर प्रॉब्लम हो सकती है।

तो कुछ चीज़ें और भी हैं, जब भी आप किसी लड़की के साथ वशीकरण के थ्रू शादी करके, मोहिनी विद्या चलाकर शादी करते हैं, एक रियलिटी मैं आपको और बताता हूँ।

जब उसका वशीकरण कटेगा, वही औरत आपके साथ सबसे ज़्यादा नफ़रत करने लगेगी। यह भी सच्चाई सबसे बड़ी है। दुश्मन वही आपकी, क्योंकि वह आपको पसंद नहीं करती थी, आपने ज़बरदस्ती उस विद्या का उपयोग करके उसके साथ शादी करी, आपने अपने आप को पसंद करवाया।

तो उसकी जो आगे जब उसका साइड इफ़ेक्ट होता है, जब वह चीज़ उतरती है, तो उसको एहसास होता है कि मैंने इसके साथ शादी क्यों करी। तो फिर उसके बाद नफ़रत पैदा होती है। तो ऐसे काम हमें जो हैं, नहीं करने चाहिए।

खैर, यह पोस्ट  यहीं तक का था। अगर आपको इस पोस्ट  से कुछ जानकारी मिली हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर लिखिए। तो मैं आपका हार्दिक धन्यवाद करता हूँ। जय श्री महाकाल।

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mohini sadhna anubhav मोहिनी साधना अनुभव – कैसे एक गलती से मेरा दोस्त मरते मरते बचा एक सच्चा अनुभव ph.85280 57364 गुरु मंत्र साधना में आप सबका फिर से स्वागत है। देखिए, आज मैं आपको एक मोहिनी विद्या का अनूठा अनुभव बताने वाला हूँ। कृपया आप इस पोस्ट  को अंत तक ज़रूर पढ़े ।

मेरा एक दोस्त था बचपन का और वह एक लड़की से प्रेम करने लगा। ठीक है, कुछ लड़कियाँ ऐसी होती हैं कि खुले स्वभाव की होती हैं, मतलब हर किसी के साथ प्रेम से बातें करती हैं, हर किसी के साथ मुस्कुराकर बात करती हैं

या फिर हर किसी के साथ जल्दी से घुल-मिल जाती हैं और सामने वाला व्यक्ति क्या होता है, उस मामले में कि ग़लत समझ लेता है। तो उसी तरीक़े से जो मेरा दोस्त था, उसे भी थोड़ी ग़लतफ़हमी हो गई कि वह मेरी ओर आकर्षित है और या मेरे को पसंद करती है।

 

उसने उसके प्यार के चलते ही उसको प्रपोज़ भी कर दिया। उस लड़की ने साफ़ तौर पर मना कर दिया कि मैं इस रिलेशन में आगे नहीं बढ़ सकती, मेरे को इन चीज़ों में इंटरेस्ट ही नहीं है।

जब यह चीज़ बोली गई तो उसके दिल पर बहुत धक्का लगा कि उसने ऐसा बोल दिया, क्योंकि वह तो बहुत ज़्यादा एक्सपेक्ट कर चुका था चीज़ों को कि मैं उसके साथ शादी करूँगा, यह करूँगा, वह करूँगा, यहाँ घूमने जाएँगे, यह करेंगे। वह सारे ही सपने एक मिनट में ही उसके चकनाचूर हो गए।

और फिर मेरे को बोला कि मैं तो सुसाइड कर लूँगा। पहले तो मैंने उसको समझाया कि आप ऐसा क़दम मत उठाओ। तो फिर वह मान ही नहीं रहा था बात के लिए क्योंकि वह प्यार में उसके अंधा हो चुका था।

वह एकतरफ़ा ही प्यार था, उसकी ओर से कोई भी ऐसा रिस्पॉन्स नहीं था। और फिर मेरे को लगा कि मेरे को कुछ करना चाहिए क्योंकि बहुत ज़्यादा समझाने पर अगर कोई व्यक्ति न माने, तो फिर मेरा दोस्त था तो इसीलिए मेरे को कुछ करना था उसके लिए।

फिर मैंने सोचा कि चलो उसके लिए मैं मोहिनी विद्या का ही प्रयोग करता हूँ। मैंने उस लड़की की फ़ोटो ली और उसके ऊपर मैंने मोहिनी विद्या का प्रयोग करा। वह लड़की कुछ ही दिनों में उससे जो है, प्रेम से बातें करने लगी। उसने भी उसको प्रपोज़ कर दिया। आगे इतनी ज़्यादा वह लड़की उसके प्यार में पागल हो चुकी और दोनों तरफ़ से अब प्यार हो गया था।

सारा कुछ सही चल रहा था। मेरे को भविष्य में होने वाली घटना के बारे में नहीं पता था क्या होगा। तो अभी सब कुछ सही चल रहा था। तो क्या होता है, उस लड़की की एक्सीडेंट में हो जाती है डेथ। सुबह वह एक्टिवा से गई किसी काम के लिए।

बहुत ज़्यादा कोहरा पड़ने के कारण पीछे से कोई वाहन आया, उसने टक्कर मार दी और वहीं पर ही उस लड़की की ऑन द स्पॉट डेथ हो गई। जब यह चीज़ उसको पता चली, तो उसको बहुत ज़्यादा धक्का लगा क्योंकि उन्होंने बहुत ज़्यादा बड़े-बड़े सपने सजाए थे।

ठीक है, आगे चलके क्या होता है, वह जो लड़की होती है, मरने के बाद भी उसके पास आने लगी। तो यहीं पर ही गड़बड़ शुरू हो गई क्योंकि वह इतना ज़्यादा तीव्र वशीकरण था, मरने के बाद भी वह वशीकरण काम कर रहा था।

मरने के बाद भी वह अट्रैक्शन उसकी ओर ख़त्म नहीं हुआ था। वह अक्सर उस लड़के को बोलती कि मैं अपनी दुनिया में तुम्हें लेकर जाऊँगी। सपने के अंदर उसको ऐसा बोलती तो लड़का घबरा के उठ जाता था। ऐसा बहुत दिन हुआ।

फिर आगे की कहानी क्या हुई, उस लड़के का भी पीछे से कोई गाड़ी आई तो उसने टक्कर मार दी, उसका एक्सीडेंट हो गया। पर उस लड़के की जान बच गई।

वह हॉस्पिटल में भी वही लड़की उसको दिखाई देने लगी कि अब मैं तुम्हें अपनी दुनिया में ले जाऊँगी, तुम मेरे साथ चलो। वही चीज़ उसने मेरे को बताई आगे कि मेरे साथ यह हो रहा है, अब मैं करूँ क्या।

जब मैंने यह चीज़ें सुनीं तो मेरा भी दिमाग़ एकदम सुन्न फिर गया कि मैं अब क्या करूँ। जब व्यक्ति जीवित होता है तो उसका वशीकरण उतारना आसान होता है। मरने के बाद जब वह वशीकरण उतारना मुश्किल हो जाता है, तो फिर मैं थोड़ा डरने लगा कि कुछ अनहोनी न हो जाए या इस लड़के की डेथ न हो जाए। तो मेरे मन में ये चीज़ें चल रही थीं।

फिर मैं इस चीज़ के लिए भी डर रहा था, अगर मैं अपने गुरुदेव को बताऊँगा, वो क्या रिएक्ट करेंगे, मेरे को कुछ नहीं पता है, वो क्या बोलेंगे मेरे को। तो फिर जब जान पर बात आई उसकी, तो फिर मेरे को भी लगा कि मेरे को भी जल्दबाज़ी में यह सारा कुछ गुरुदेव को बताना चाहिए। डरते-डरते मैंने यह सारी बातें उनको बताईं।

उन्होंने मेरे को बहुत ज़्यादा फटकारा कि तुम्हें विद्याएँ देनी ही नहीं चाहिए थीं, मैंने बहुत बड़ी ग़लती करी है कि मैंने तुम्हें जो कुछ भी सिखाया है, आज मेरे को पश्चात्ताप हो रहा है।

और मैं भी बहुत ज़्यादा शर्मिंदा था कि मैंने यह एक काम क्यों करा। पर मैं अपनी दोस्ती के चलते यह काम मैंने किया था और जब मेरे को यह नहीं पता था कि भविष्य में ऐसी चीज़ें हो सकती हैं।

फिर आगे क्या होता है, मेरे जो गुरुदेव हैं, ठीक है, उस आत्मा को बुलाते हैं। बुलाने के बाद उस आत्मा के लिए क्रिया की जाती है, उसके बाद उस आत्मा को मोक्ष मिल जाता है। हालाँकि यह काम बहुत आसान नहीं था, बहुत ही हमें मुश्किल का सामना करना पड़ा क्योंकि एक आत्मा को उस चीज़ के लिए मनाना बहुत मुश्किल था।

वह तो इस चीज़ के लिए उतारू थी कि मैं इसको लिए बिना नहीं जा सकती। पर जैसे-तैसे करके बहुत मुश्किल से हमने उसका जो है, समाधान करा। तब वही जो आगे जाकर लड़की होती है, अपने लोक में चली गई।

तो इसमें मैं आपको एक चीज़ और बताता हूँ, जब भी कोई मोहिनी विद्या का अगर प्रयोग किया जाता है तो यह मरने के बाद भी काम करता है। इतना ज़्यादा पावरफ़ुल होता है। दूसरी चीज़, कोई तांत्रिक जल्दी से काट नहीं सकता है। इसका साइड इफ़ेक्ट यह होता है कि अगर वह व्यक्ति मर जाए तो फिर भी आपका पीछा छूटने वाला नहीं है।

ठीक है, एक मेरे लोकल में अंकल जी हैं, उन्होंने भी ऐसे ही शादी करी थी अपनी पत्नी से। वशीकरण करवाया उन्होंने। उन्होंने भभूति दी कि आप इसको किसी भी खाने-पीने की वस्तु में दे दो।

जैसे ही उन्होंने खाने-पीने की वस्तु में दिया, तो वशीकरण को होना ही था, तो उसका रिज़ल्ट आ गया। तो जैसे ही उस औरत की डेथ हुई, जैसे औरत बूढ़ी हो गई तो उसके बाद उसकी डेथ हो गई, तो कुछ दिन बाद ही अंकल की भी डेथ हो गई।

मतलब यह होता है कि वह शक्ति का आकर्षण ख़त्म नहीं होता है। मरने के बाद भी वह शक्ति आपको, जब वह आपके लिए काम करती है, मोहिनी विद्या मरने के बाद भी काम करती है। तो यह होता है सिस्टम।

वह व्यक्ति ज़्यादातर तो नहीं करनी चाहिए। अगर कोई व्यक्ति प्यार के अंदर पागल है तो वह कर सकता है। शादी वग़ैरह हो जाए, कुछ समय बीत जाए, तो उससे आपको फिर से छुटकारा दिलवाना चाहिए। अगर आप इसका नहीं करोगे तो फिर आगे जाकर प्रॉब्लम हो सकती है।

तो कुछ चीज़ें और भी हैं, जब भी आप किसी लड़की के साथ वशीकरण के थ्रू शादी करके, मोहिनी विद्या चलाकर शादी करते हैं, एक रियलिटी मैं आपको और बताता हूँ। जब उसका वशीकरण कटेगा, वही औरत आपके साथ सबसे ज़्यादा नफ़रत करने लगेगी।

यह भी सच्चाई सबसे बड़ी है। दुश्मन वही आपकी, क्योंकि वह आपको पसंद नहीं करती थी, आपने ज़बरदस्ती उस विद्या का उपयोग करके उसके साथ शादी करी, आपने अपने आप को पसंद करवाया। तो उसकी जो आगे जब उसका साइड इफ़ेक्ट होता है, जब वह चीज़ उतरती है, तो उसको एहसास होता है कि मैंने इसके साथ शादी क्यों करी। तो फिर उसके बाद नफ़रत पैदा होती है। तो ऐसे काम हमें जो हैं, नहीं करने चाहिए।

खैर, यह पोस्ट  यहीं तक का था। अगर आपको इस पोस्ट  से कुछ जानकारी मिली हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर लिखिए। तो मैं आपका हार्दिक धन्यवाद करता हूँ। जय श्री महाकाल।