Author: Rodhar nath

मैं रुद्र नाथ हूँ — एक साधक, एक नाथ योगी। मैंने अपने जीवन को तंत्र साधना और योग को समर्पित किया है। मेरा ज्ञान न तो किताबी है, न ही केवल शाब्दिक यह वह ज्ञान है जिसे मैंने संतों, तांत्रिकों और अनुभवी साधकों के सान्निध्य में रहकर स्वयं सीखा है और अनुभव किया है।मैंने तंत्र विद्या पर गहन शोध किया है, पर यह शोध किसी पुस्तकालय में बैठकर नहीं, बल्कि साधना की अग्नि में तपकर, जीवन के प्रत्येक क्षण में उसे जीकर प्राप्त किया है। जो भी सीखा, वह आत्मा की गहराइयों में उतरकर, आंतरिक अनुभूतियों से प्राप्त किया।मेरा उद्देश्य केवल आत्मकल्याण नहीं, अपितु उस दिव्य ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाना है, जिससे मनुष्य अपने जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझ सके और आत्मशक्ति को जागृत कर सके।यह मंच उसी यात्रा का एक पड़ाव है — जहाँ आप और हम साथ चलें, अनुभव करें, और उस अनंत चेतना से जुड़ें, जो हमारे भीतर है ।Rodhar nath https://gurumantrasadhna.com/rudra-nath/

Bhuvaneshvari Sadhna भुवनेश्वरी साधना: शिव द्वारा प्रदत्त एक वरदान

Bhuvaneshvari Sadhna भुवनेश्वरी साधना और भुवनेश्वरी मंत्र

Bhuvaneshvari Sadhna भुवनेश्वरी साधना: शिव द्वारा प्रदत्त एक वरदान

Bhuvaneshvari Sadhna भुवनेश्वरी साधना और भुवनेश्वरी मंत्र
Bhuvaneshvari Sadhna भुवनेश्वरी साधना और भुवनेश्वरी मंत्र

 

Bhuvaneshvari Sadhna भुवनेश्वरी साधना: शिव द्वारा प्रदत्त एक वरदान वरदायक स्वरूप है वह 10 महाविद्याओं में से एक महाविद्यालय माता भुवनेश्वरी शक्ति माना गया सर्वोच्च शिखर पर आप पहुंच सकते हैं आदित्य दरिद्रता आपकी कोसों-कोसों दूर चली जाती है।

 भुवनेश्वरी पूर्ण लक्ष्मी युक्त बन कर के 16 श्रृंगार करके आपके घर के अंदर स्थापित हो जाती है और जीवन में कुछ भी आपको प्रदान करने के लिए सफल भी रहती है। यह साधना और सही भी है।

वास्तव में क्या है कि वास्तव में जो भुवनेश्वरी साधना है वो जीवन का एक वरदान है जो कि शिव के द्वारा यह साधना दी गई है। देखिए हम सब इस भुवनेश्वरी साधना के माध्यम से सब कुछ प्राप्त कर सकते हैं। 

जो हमें अपने जीवन में चाहिए। धन, यश, मान, प्रतिष्ठा, ऐश्वर्य, भोग, विलास, पूर्णता, सफलता, अनुकूलता, व्यापार वृद्धि, सब कुछ जो अपने जीवन में आप प्राप्त करना चाहते हैं, वो सारी चीजें आप भुवनेश्वरी के द्वारा प्राप्त कर सकते हैं।

 

भुवनेश्वरी साधना – त्र्यात्मक शक्ति: लक्ष्मी, सरस्वती और महाकाली का समन्वित रूप

देखिए लक्ष्मी जहां इसमें व्यापार वृद्धि, आर्थिक उन्नति और भौतिक समृद्धि देने में बिल्कुल समर्थ है वहीं पर सरस्वती जो कि माँ विद्या, प्रतिष्ठा, सम्मान व सिद्धि और कला, संगीत आदि में, इन क्षेत्रों में आपको पूर्णतः समर्थ है, वो शक्ति पूर्णतः सहायक है। 

वहीं पर महाकाली शत्रु संहार करने में, विरोधियों पर विजय प्राप्त करने में और जीवन की जितनी भी समस्त विपरीत जो परिस्थिति है, उन सबको दूर करने में और उन आपके कार्य बनाने में वो भी समर्थ है। ऐसी कोई शक्ति नहीं है कि जो इनसे बाहर हो।

 देखिए माता भुवनेश्वरी को तीनों शक्तियों का समन्वित रूप कहा गया है। यानी कि भुवनेश्वरी की जो साधना करते हैं, तीनों शक्तियां एक ही साधना से संपन्न हो जाती हैं – लक्ष्मी, सरस्वती भी और महाकाली भी, और जीवन में किसी भी प्रकार का अभाव रहता ही नहीं है बिल्कुल भी।

 इसीलिए इस साधना को त्र्यात्मक साधना कहा गया है क्योंकि एक अकेली भुवनेश्वरी की साधना करने से तीनों शक्तियां यह सिद्ध हो जाती हैं और जब तीनों शक्तियां यह सिद्ध हो जाएंगी तो फिर आगे बचा ही क्या।

 

एक सौम्य और सुरक्षित भुवनेश्वरी साधना

देखिए वैसे तो जो 10 महाविद्या कलयुग में बहुत जल्दी आपको सफलता प्रदान करती हैं , वह इन 10 महाविद्याओं में एक ऐसी साधना है जो सौम्य साधना है। जिस साधना को करने से किसी भी प्रकार की हानि नहीं हो सकती, चाहे साधना बीच में छूट जाए तब भी किसी प्रकार की हानि नहीं हो सकती। 

ऐसी साधना पूर्णता प्राप्त करने के लिए जरूर करनी चाहिए। इस साधना को करने से किसी भी प्रकार का कोई नुकसान होता ही नहीं है। सच्चाई जो है, एक भुवनेश्वरी एक ऐसी देवी है 10 महाविद्याओं में कि जिनकी साधना करने में आपको किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं है। इस साधना को कोई भी स्त्री कर सकती है, कोई भी पुरुष कर सकता है, कोई व्यक्ति कर सकता है या फिर युवा कर सकता है, किसी प्रकार की कोई प्रॉब्लम नहीं।

 

भुवनेश्वरी साधना में सफलता के लिए आवश्यक विश्वास

 

आवश्यकता है सिर्फ एक चीज की: विश्वास। गुरु के ऊपर विश्वास, सामग्री के ऊपर विश्वास, अपने ऊपर पूर्ण विश्वास, साधना के ऊपर और माता के ऊपर पूर्ण विश्वास। केवल यह चीज आपके पास होनी चाहिए, साधना आपकी 100% सफल होगी ही होगी, किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत हो ही नहीं सकती है। केवल 21 दिन की साधना करो और सारी चीजें प्राप्त करो।

 

भुवनेश्वरी साधना के लाभ: पापों का नाश और भोग-मोक्ष की प्राप्ति

 

मैं नहीं मानता कि इससे बड़ी साधना कोई और दूसरी हो सकती है क्योंकि भुवनेश्वरी साधना की जो देवी है, उसकी आराधना करने से आपके जीवन के जो पाप हैं, वह सभी समाप्त होते हैं। पूर्व जन्म के जो भी आपके किए गए बुरे कर्म हैं, वह भी सब समाप्त हो जाते हैं, वह सब दूर हो जाते हैं 

और साधक भौतिक पदार्थों को भोक्ता हुआ पूर्ण सुख और सम्मान प्राप्त करता है और अंत में वह मोक्ष प्राप्त करता है इस साधना को करने वाला। क्योंकि यह जो भुवनेश्वरी साधना है, यह भोग की और मोक्ष की, दोनों रूपों को देने वाली यह उच्च कोटि की साधना है। इस साधना को करने से आपको लाभ ही लाभ होगा, नुकसान तो कुछ होने वाला ही नहीं है।

 

भुवनेश्वरी साधना की सरलता और सुगमता

 

और अगर आप यह जो महत्वपूर्ण साधना अगर इसको करते हो तो मात्र भुवनेश्वरी की साधना करने से जीवन के सारे कार्य सहज ही संभव हो जाते हैं। हालांकि जो ये भुवनेश्वरी साधना है, ये एक महाशक्ति साधना है और 10 महाविद्याओं में से एक महाविद्या है, पर फिर भी यह साधना जो और दूसरी साधनाएं हैं, उनकी अपेक्षा बहुत ही सरल और सुगम साधना भी है।

 इसका कोई भी विपरीत प्रभाव होता है, वह नहीं पड़ता है बिल्कुल भी। इस साधना को कोई गृहस्थ भी कर सकता है, योगी भी कर सकता है, स्त्री-पुरुष कोई भी कर सकता है, जो थोड़ा बहुत पढ़ा-लिखा है वह भी कर सकता है और अपने जो जीवन की उसके अंदर अभाव है, उन सभी को खत्म कर सकता है।

 

नवरात्रि में भुवनेश्वरी साधना का विशेष महत्व

 

और सबसे बड़ी बात तो यह है कि अगर आप इस साधना को नवरात्रि में, इस साधना को संपन्न करते हैं ना, तो प्रत्यक्ष दर्शन भी संभव होते हैं। इस साधना से आप इस साधना से देखेंगे कि पांचवें-छठे दिन से ही आपको अनुभूति प्रारंभ हो जाती है और साधना समाप्त होते-होते भगवती के दर्शन हो सकते हैं आपको।

 क्योंकि कलयुग में देखिए यह हम लोगों का सौभाग्य है कि ऐसी साधना है जो हमारे बीच में है कि हम देवी का प्रत्यक्ष दर्शन कर सकें और अपने आप को धन्य कर सकें। 

लेकिन आवश्यकता किस बात की है कि कम से कम 1 लाख जाप उन 9 दिनों के अंदर पूरा हो जाना चाहिए, मतलब कि 15000 मंत्रों का जाप डेली होना चाहिए। 

और इस साधना को सुबह में भी कर सकते हो, शाम में भी कर सकते हो, किसी दोनों टाइम कर सकते हो, कोई प्रॉब्लम नहीं है इसमें।

 

भुवनेश्वरी साधना के लिए आवश्यक सामग्री

 

और देखिए इस साधना को सिद्ध करने के लिए जो आवश्यक सामग्री है वह मैं आपको बता देता हूं। एक तो भुवनेश्वरी सर्व सिद्धि प्रदायिनी गुटिका, भुवनेश्वरी माला, और एक रक्षा माला। यह चार सामग्रियों की आपको आवश्यकता होगी इस साधना में। 

और यह चारों सामग्री प्राण प्रतिष्ठित और प्राण चैतन्य होनी चाहिए। और अगर आपको ऐसी सामग्री चाहिए तो मैंने व्हाट्सएप नंबर दिया हुआ है, आप वहां से मुझे व्हाट्सएप कर सकते हो,लेख  में ही मैंने दिया है और आप यह सामग्री प्राप्त कर सकते हो और साधना शुरू कर सकते हो। 

अगर आप ऑर्डर करते हैं तो फिर हंड्रेड परसेंट आपको सामग्री मिलेगी ही मिलेगी, आप बेझिझक करके ऑर्डर कर सकते हैं सामग्री के लिए, किसी भी प्रकार से आपके साथ अन्याय नहीं होगा, यह मेरा दावा है।

 

भुवनेश्वरी साधना के नियम और ध्यान रखने योग्य बातें

 

और देखिए जब आपको यह सामग्री प्राप्त हो जाए तो आप इस साधना को शुरू करें। आप किसी कभी नवरात्रि में आप इसको शुरू कर सकते हैं या फिर किसी भी महीने की जो शुक्ल पक्ष आता है, उसकी चतुर्दशी को भी यह साधना प्रारंभ कर सकते हैं।

 

भुवनेश्वरी साधना के लिए समय और स्थान

 

साधना रात और दिन, दोनों टाइम कर सकते हो, किसी प्रकार की कोई प्रॉब्लम नहीं है। अब मैं इसमें जो कुछ ध्यान रखने योग्य जो बातें हैं, जो साधना के नियम हैं, उसको मैं कुछ समझा देता हूं तुम्हें। पहले देखिए, साधना गृहस्थ व्यक्ति भी कर सकता है और उनको इन नियमों का पालन करना ही होगा।

भुवनेश्वरी साधना किसी भी समय आप प्रारंभ कर सकते हो, परंतु नवरात्रि में करने से इस साधना में विशेष महत्व होता है। नवरात्रि के प्रथम दिन से ही आप इस साधना को प्रारंभ करना चाहिए और अष्टमी तक या नवमी तक इसका समापन कर देना चाहिए।

 

भुवनेश्वरी साधना में व्यक्तिगत शुद्धि और आचरण

ठीक है, इस साधना को कोई भी स्त्री-पुरुष कर सकता है। हां, यदि स्त्री साधना काल में रजस्वला हो जाए तो यह साधना उसी दिन से आपको समाप्त कर देनी है, आगे उस साधना को फिर नहीं करना है। 

जब आप ठीक हो जाए तब उसके बाद ही साधना शुरू करें। साधना काल में स्त्री संग वर्जित है। साधक शराब बिल्कुल ना पिए, जुआ ना खेले और स्त्री का संगम ना करे। स्त्री संग आप समझ रहे हैं कि आपको ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना है।

 

भुवनेश्वरी साधना में पूजन सामग्री और आसन

 

साधना रात्रि माला की आवश्यकता होगी, उसका ही आपको उपयोग करना है। रुद्राक्ष की माला इस साधना में बिल्कुल भी प्रयोग नहीं करनी है। सफेद रंग का आसन होना चाहिए और पूर्व दिशा या उत्तर दिशा की तरफ मुंह करके ही आपको बैठना है। 

सामने जो आपके तेल का दीपक लगा हुआ हो, ठीक है, और तेल का दीपक किसी भी तेल का, जैसे तिल का तेल हो गया या किसी सरसों का तेल हो गया, इसका आप दीपक लगा सकते हैं। और साधना काल में चाहे तो आप अखंड दीपक भी लगा सकते हैं और नहीं तो फिर आप ऐसा भी कर सकते हैं कि जब तक मंत्र जाप चले तब तक दीपक जो वह जलता रहना चाहिए।

 अगरबत्ती लगाना कोई अनिवार्य भी नहीं है और लगाना चाहो तो लगा भी सकते हो। ठीक है, जो भुवनेश्वरी यंत्र है, वह प्राण प्रतिष्ठित होना चाहिए और चित्र भी इसके साथ होना चाहिए। चित्र चाहे तो आप नेट से भी निकाल करके उसको मढ़वा करके रख सकते हैं।

 

भुवनेश्वरी साधना  विधि की सरलता
 

और जो पहला दिन है, पहले दिन से ही पूजन करके, ध्यान करके मंत्र जप प्रारंभ करना कर देना चाहिए। इसमें कोई जटिल विधि-विधान नहीं है। इसमें आप पंचोपचार पूजन कर सकते हो। यदि केवल तुम भुवनेश्वरी का दर्शन करना हो तो मात्र भुवनेश्वरी मंत्र का ही जाप करना चाहिए, पर यदि कोई विशेष इच्छा हो तो इस मंत्र में और पहले और अंत में उससे संबंधित जो बीज मंत्र है। 

उसको लगा देना चाहिए। जैसे कि उदाहरण के लिए, रोग निवारण के लिए जो बीज मंत्र होता है, वह होता है ‘वं’। तो अब और जो देवी का मंत्र है वह है ‘ह्रीं’। तो आपको क्या करना है कि जब आप रोग मुक्ति के लिए मंत्र जाप करें तो इसमें आपको बोलना होगा ‘वं ह्रीं वं’।

इस प्रकार से मतलब कि आगे भी और पीछे भी। इस मंत्र का जाप इस प्रकार से होना चाहिए। इस प्रकार से जो है भुवनेश्वरी के जो मंत्र हैं, दोनों तरफ लगा करके बीच और उसको एक मंत्र माना गया है।

 

भुवनेश्वरी साधना में  वस्त्रों से संबंधित नियम
 

प्रातः ही स्वच्छ वस्त्र धारण करके साधक जो है, मंत्र जाप में उसमें बैठना चाहिए और चाहे तो वह दूसरी बार रात्रि में भी पुनः साधना कर सकता है और स्नान करने के बाद ही रात्रि को बैठे। मतलब कि स्नान करना चाहिए। यदि सर्दी हो तो कंबल ले सकता है, ऊनी वस्त्र ओढ़ सकता है।

 वह सिले हुए वस्त्र आपको इसमें नहीं पहनने हैं। कच्छा-बनियान जिसे पहनकर के बैठते हैं, बिल्कुल नहीं। इसमें आपको धोती बांधनी है और धोती ही ओढ़नी है, चाहे आप स्त्री हैं चाहे आप पुरुष हैं।

 अच्छा एक चीज और, अगर रेशमी वस्त्र है तो उसे आप एक बार साधना कर ली तो दूसरे दिन भी उसका उपयोग कर सकते हैं। 

लेकिन अगर आपके वस्त्र ऊनी हैं या मतलब कि जैसे कि सूती वस्त्र हैं तो उन्हें एक बार पहनने के बाद फिर धो करके ही उसको उपयोग में लाना है। ठीक है, उसको जरूर धो लेना।

 

भुवनेश्वरी साधना में  आहार और शयन के नियम

 

रात्रि में भूमि में शयन करेंगे, मतलब पृथ्वी पर लेटना है, खटिया-पलंग पर आपको नहीं लेटना है। भोजन एक समय, एक स्थान पर बैठकर के जितना भी किया जा सके आप भोजन करें, ऐसा नहीं कि जगह-जगह खाते रहेंगे। पर शराब, मांस, लहसुन, प्याज ये सब इसमें वर्जित है।

 इसके अलावा आप दिन में दो बार फल भी खा सकते हैं और दूध, चाय, पानी यह तो आप जितनी बार चाहे उतनी बार पी सकते हैं, कोई दिक्कत नहीं है इसमें। ठीक है, और भुवनेश्वरी देवी का जो चित्र है उसको कांच के फ्रेम में मढ़वा करके सामने रख लें। बिना यंत्र के और बिना चित्र के मंत्र जाप निरर्थक है इसके अंदर। ठीक है।

 

भुवनेश्वरी साधना में  विभिन्न कामनाओं के लिए बीज मंत्र

 

देखिए इस साधना में अगर आप किसी विशेष कार्य के लिए साधना कर रहे हैं तो फिर मैं आपको बता देता हूं और लिख करके भी दे दूंगा कि देखिए अगर आप निष्काम भाव के लिए साधना कर रहे हैं तो ‘ह्रीं’ का इस्तेमाल आपको करना है आगे पीछे। अगर माता के प्रत्यक्ष दर्शन करना है तो ‘ऐं ह्रीं ऐं’, इस मंत्र का भी आप जाप कर सकते हैं।

अगर आर्थिक उन्नति के लिए करना है तो केवल ‘ह्रीं’ का ही आप जाप करेंगे। अगर व्यापार वृद्धि के लिए कर रहे हैं तो ‘आं ह्रीं आं’। इस प्रकार से। अगर सुख-समृद्धि के लिए कर रहे हैं तो ‘श्रीं’ का आपको इस्तेमाल करना है। शत्रु संहार के लिए ‘रां’ बीज का इस्तेमाल करना है।

 रोग निवारण के लिए, मैं बता चुका हूं, ‘वं’। भाग्योदय के लिए ‘हं’। पुत्र प्राप्ति के लिए ‘यं’। मोक्ष प्राप्ति के लिए ‘लं’। और राज्य के पद के लिए या फिर अपनी नौकरी में पद के लिए, जैसे कि चाहते कि पदोन्नति हो, उसके लिए ।

अगर मुकदमा है तो उसमें सफलता के लिए इसमें आप ‘ढं’ का इस्तेमाल । ठीक है, सुख-शांति के लिए ‘जं’। अगर पत्नी अपने पति के लिए कर रही है या पति अपनी पत्नी के लिए कर रहा है तो ‘नं’ का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

सम्मान चाहिए, यश चाहिए तो आप इसमें ‘क्षं’ का इस्तेमाल कर सकते हैं। विद्या प्राप्ति के लिए ‘हं’ का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति जैसे खो जाता है, उसके लिए आप साधना कर रहे हैं इसको तो आप करेंगे ‘ॐ’ का इस्तेमाल और उसके ऊपर बिंदी।

अगर तांत्रिक प्रभाव किया या तो आप खाली ‘ह्रीं’ का मंत्र जाप करें या फिर इसमें तीन शब्दों का उच्चारण होता है, इनको मिलाकर के भी आप जाप कर सकते हैं। 

यह संपूर्ण मंत्र जैसे कि ‘ऐं’ का इस्तेमाल करते हैं तो माता सरस्वती के लिए, ‘ह्रीं’ का इस्तेमाल करते हैं तो यह महालक्ष्मी के लिए और अगर आप केवल ‘ह्रीं ह्रीं ह्रीं’ इसका ही उच्चारण करते हैं तो भी कोई दिक्कत नहीं है, तब भी भुवनेश्वरी का ही बीज मंत्र है। ठीक है, दोनों में से किसी भी मंत्र का आप जाप कर सकते हैं।

 

भुवनेश्वरी साधना  संपूर्ण साधना विधि

 

अब देखिए मैं आपको इस साधना को किस प्रकार से करना है, वो मैं आपको बता देता हूं। देखिए वीडियो तो इसमें लंबा हो जाएगा 100% है क्योंकि समझाना है तो वीडियो लंबा होगा ही होगा, इसलिए व्यर्थ की बातें तो करें ना कोई कि भई वीडियो लंबा है, फलाना है, यह सब चीजें ना करें। जिनको देखना है, वही देखें और प्यार से देखें।

 

भुवनेश्वरी साधना में  पूजन की तैयारी

 

अब देखिए आपको इसमें क्या करना है कि जो सामग्री है, आप उसे प्राप्त कर चुके हैं तो आप प्रातः काल ही स्नान आदि करके और अपना वस्त्र धारण करके अपने पूजा कक्ष में चले जाएं या एकांत कक्ष में चले जाएं। प्रतिदिन जिस समय साधना पहले दिन शुरू करेंगे, प्रतिदिन आपको उसी समय साधना शुरू करनी है, शाम में भी और सुबह में भी।

 और साधना आपको लगातार 21 दिन करनी है यह। ठीक है, उस चौकी पर आप लाल रंग का वस्त्र बिछा लें और थोड़े से चावल लेकर के उस पर ‘ह्रीं’ (ह पर बड़ी ई की मात्रा और अं की बिंदी) यह चावल से लिखें। ठीक है, थोड़े से चावल डालकर के उसको लिख लें चावल से और उस पर आपको भुवनेश्वरी यंत्र को स्थापित कर देना है। उसके साथ ही साथ भुवनेश्वरी का चित्र आप सामने रखेंगे।

 बराबर में भगवान शिव का चित्र, परिवार का हो तो अच्छी बात है और साथ में ही अपने गुरु का चित्र, जो भी आपके गुरु हैं। अगर आपके गुरु कोई देहधारी हैं तो उनका चित्र, अगर भगवान शिव को गुरु माना है तो फिर उनका चित्र आप रख सकते हैं। 

अब इसमें आपको कुंकुम चाहिए, थोड़े चावल चाहिए, पुष्प चाहिए। अगर आप चाहें तो इसमें भोग भी आप रख सकते हैं, उस भोग को आप स्वयं ग्रहण कर लेंगे पूजा करने के बाद। 

सबसे पहले आपको दीपक जलाना है। ठीक है, दीपक मैं बता चुका हूं कौन सा जलाना है। धूपबत्ती, अगरबत्ती भी जला सकते हो। अगर आपको इस साधना में पूर्ण सफलता प्राप्त करनी है तो एकाग्रचित होकर के आप इस साधना को करें।

 

भुवनेश्वरी साधना गुरु पूजन और आज्ञा
 

जब आप यह सारी क्रियाएं कर लें, सबसे पहले आपको अपने गुरु का स्मरण करना है, उनका पंचोपचार पूजन करना है। पंचोपचार का मतलब यह होता है कि टीका लगा दें, चावल चढ़ा दें, पुष्प चढ़ा दें, धूप-दीप दिखा दें, बस। 

और अगर चाहते हैं तो प्रसाद भी रख सकते हैं। जब आप पंचोपचार पूजन कर लेंगे, पूजन करने के बाद गुरुजी से हाथ जोड़कर के प्रार्थना करें कि “गुरुदेव, मैं भुवनेश्वरी महाविद्या की साधना करने जा रहा हूं और इस साधना में मुझे पूर्ण सफलता मिले, जिसके लिए मुझे आप आशीर्वाद दीजिए और मुझे आज्ञा प्रदान कीजिए।” 

और गुरु मंत्र का कम से कम एक माला या दो माला का जाप जरूर कर लें, जो भी आपका गुरु मंत्र है। ठीक है, अगर आपने भगवान शिव को गुरु माना है तो फिर भगवान शिव का आपको पूजन उसी तरीके से करना है और आप ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र का जाप कर सकते हैं।

 और यह रुद्राक्ष की माला से ही करना है आपको गुरु मंत्र और रुद्र, जो भी शिव मंत्र है या फिर कोई भी दूसरा मंत्र है, तो उसका आप जो भी आपका गुरु मंत्र है, रुद्राक्ष की माला से ही आपको जाप करना है इसमें।

 

भुवनेश्वरी साधना में  रक्षा विधान

 

जब आप इतना कार्य कर लेंगे, उसके बाद आपको क्या करना है, एक रक्षा विधान करना है। क्योंकि जब यह साधना कितनी भी सौम्य हो, लेकिन फिर भी आप रक्षा विधान का इस्तेमाल जरूर करें क्योंकि अगर आप एक हवन भी करते हैं तो वहां भी आपको रक्षा विधान करना चाहिए। 

अब आपको क्या करना होगा कि अपने जो बायां हाथ है, उस पर थोड़े से चावल रखें और उन चावलों से आपको क्या करना होगा, सभी दिशाओं में फेंकते हुए एक मंत्र जाप करना है। वो मैं आपको बता देता हूं, “ओम अपसर्पन्तु ये भूता ये भूता भूमि संस्थिताः ये भूता विघ्नकर्तारस्ते नश्यन्तु शिवाज्ञया।” 

ऐसा कुछ मंत्र होता है जो आपको बोलते हुए सारे चावल सभी दिशाओं में फेंक देने हैं। यह बहुत ही तीव्र और प्रभावशाली रक्षा विधान है। इस विधान को करने से आपके पूजा के अंदर कोई भी नेगेटिव एनर्जी प्रवेश नहीं कर सकती।

 

भुवनेश्वरी साधना में  यंत्र और गुटिका पूजन
 

उसके बाद आप माता का पंचोपचार पूजन करें। जैसे मैंने बताया, टीका लगाएं, चावल चढ़ाएं, पुष्प चढ़ाएं और जो यंत्र है, यंत्र का, भुवनेश्वरी यंत्र का भी आपको पूजन करना है।

 यंत्र का पूजन आप कुंकुम से टीका लगाकर के, अक्षत यानी कि चावल से, पुष्प से और जो धूप-दीप है, उसे दिखाकर के आप यंत्र का पूजन करें। 

उसी प्रकार से गुटिका जो है, जो सर्व सिद्धि गुटिका है, उस गुटिका को यंत्र के ठीक बाएं तरफ आपको स्थापित करना है, यंत्र के बाएं तरफ। जैसे आपने यंत्र का किया है, जब आप उसका पूजन कर लेंगे।

 

भुवनेश्वरी साधना में  ध्यान और संकल्प
 

ठीक है, उसके बाद आप माता भुवनेश्वरी का ध्यान करेंगे। आंख बंद करके आपको 2 मिनट माता का ध्यान करना है। ठीक है, माता का ध्यान करने के बाद उनसे आज्ञा लेंगे और साथ में ही आप संकल्प भी ले सकते हैं अगर किसी विशेष कार्य के लिए आप कर रहे हैं तो।

 अगर किसी विशेष कार्य के लिए आप कर रहे हैं तब आपको संकल्प लेना है। यदि आप माता के दर्शन के लिए प्रार्थना कर रहे हैं तो आप माता के दर्शन के उद्देश्य से भी आप संकल्प ले सकते हैं कि “मैं (अपना नाम), (अपने गोत्र), मैं माता भुवनेश्वरी की साधना करने जा रहा हूं और माता भुवनेश्वरी प्रत्यक्ष रूप से मुझे दर्शन देकर के मुझे कृतार्थ करें, मुझे आशीर्वाद प्रदान करें।”

 ऐसा आप कर सकते हैं संकल्प। अगर आप संकल्प नहीं लेते हैं तो तब भी कोई प्रॉब्लम नहीं है। माता की इच्छा होगी तो जरूर आपको दर्शन देगी, लेकिन संकल्प लेकर के माता बंध जाती है कि आपने संकल्प लिया है। तो इसलिए यह सब माता के ऊपर ही छोड़ दें तो बहुत अच्छा रहेगा।

 

भुवनेश्वरी साधना में  मंत्र जाप
 

और इसके बाद रक्षा बंधन कर लेना है और फिर आपको मंत्र जाप शुरू करना है। मंत्र मैंने आपको पहले भी बता दिया है, मैं फिर दोबारा आपको बता रहा हूं। जो मंत्र आपको जपना है, वो मंत्र है ‘ऐं ह्रीं श्रीं’, केवल इतना छोटा सा मंत्र है। और अगर आप यह मंत्र नहीं जप सकते हैं 

तो केवल आपको जपना चाहते हैं तो ‘ह्रीं’ शब्द का, ‘ह्रीं’ जो बीज मंत्र है, इसको भी जप सकते हैं। मतलब कि ‘ऐं’ और ‘श्रीं’ को हटाकर के केवल ‘ह्रीं’ जो है, उसको भी जप सकते हैं ‘ह्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं’, इस तरीके से। और भुवनेश्वरी माला से मंत्र जाप करेंगे। प्रतिदिन आपको 51 माला का जाप करना है अगर आप 21 दिन की साधना कर रहे हैं। 

जैसे कि मान लिया आप किसी शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी से साधना शुरू की है, 21 दिन की साधना करना चाहते हैं तो 51 माला का आप जाप करेंगे। ऐसा भी कर सकते हैं कि 51 माला रात्रि में, 51 माला का आपका जाप हो जाएगा, उस प्रकार से 11 दिन में ही आपकी साधना संपन्न हो जाएगी। 

और अगर एक ही वक्त आपको करनी है साधना तो फिर आप 51 माला का जाप करेंगे तो 21 दिन में आपके मंत्र जाप पूरे हो जाएंगे। और अगर नवरात्रि में कर रहे हैं, आपको नौ दिन में साधना पूरी करनी है तो कम से कम 150 माला आपको करनी है, वह सुबह-रात्रि दोनों को मिलाकर के 150 माला होनी चाहिए। ठीक है, तब भी आप इस साधना को पूर्ण कर सकते हो।

 

भुवनेश्वरी साधना  का समापन

और अगर आप चाहते हैं कि अब इसके बाद साधना हमें नहीं करनी है तो आप क्या करेंगे, यंत्र को, माला को, गुटिका को और रक्षा माला को आप बहते हुए पानी में विसर्जित कर देंगे। और देखिए प्रतिदिन साधना करने के बाद माता से रक्षा की प्रार्थना जरूर आपको करनी है कि “हे माता, आप ही मेरी रक्षक हैं, इसलिए आप ही मेरी रक्षा करेंगी।” 

और कुछ आपको नहीं बोलना है। “और जो भी मैंने जाप किया है, मैं आपको समर्पित करता हूं।” ठीक है, यह कहकर के साधना से फिर आपको उठ जाना है प्रणाम करके। और हो सके तो बाद में गुरु मंत्र का एक माला या दो माला का जाप कर लें तो अच्छा रहेगा। अगर करना चाहते तो कर सकते हैं, एक माला गुरु मंत्र कर लीजिए फिर बाद में।

 

भुवनेश्वरी साधना अंतिम शब्द

 

देखिए इस साधना में मैं आपको यह भी बता चुका हूं कि आपको अनुभूतियां भी होंगी, आपको यह भी बता चुका हूं कि किन-किन बातों का आपको ध्यान रखना है। सारी कुछ चीजें मैं इस साधना में ही आपको बता चुका हूं, इसलिए मुझे कुछ एक्स्ट्रा बताने की अब आवश्यकता है

 नहीं। ठीक है, इसी के साथ अब मैं  post को यहीं पर समाप्त करता हूं। मेरे साथ बोलिए, बोलिए वीर बजरंगबली हनुमान जी महाराज की जय, बोलिए मेरे परमहंस गुरुदेव की जय।

किसी को अपने प्यार में पागल करने का तरीका ph.85280 57364

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प्रेम समस्याओं का समाधान

किसी को अपने प्यार में पागल करने का तरीका ph.85280 57364 बहुत सारे लोगों का समस्या है कि उनका प्यार उन सब बात ही नहीं करता है उनका प्यार उनके पास फोन नहीं करता है मिलता नहीं है यानि कि लव की समस्या है आज मैं आप सभी को एक ऐसा चमत्कारी और अचूक टोटका बताने जा रहा हूं जिसके मात्र एक प्रयोग से आपका प्यार जन्मो जन्म के लिए आपके वश में हो जाएगा।

यदि आप भी इधर-उधर भटक रहे हैं अपने प्यार को पाना चाहते हैं तो अपने दिल पर हाथ रखकर के इस मंत्र को सिर्फ सात बार बोले चमत्कार दिखेगा। जैसे ही सात बार मंत्र बोलिएगा आधे घंटे में असर होगा और आपके प्यार के दिल में आपके लिए मोहब्बत भर जाएगा।

किसी को अपने प्यार में पागल करने का तरीका –  प्यार में दीवानगी लाने का उपाय

मेरे प्यारे कर भक्तों बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो किसी स्त्री को पल भर में अपने प्यार में दीवानी बनाना चाहते हैं, चाहते हैं कि वह स्त्री उनके आगे-पीछे घूमे और हर पल पल उसके सभी बातों को माने, सभी बातों को समझे और उसके कहे हिसाब चले।

मेरे प्यारे पर वक्त तो यदि आपका प्यार रूठ गया या कहीं पर भी चला गया है, आपको छोड़ दिया है या आपके प्यार में कोई और आ गया है डिस्टर्ब कर रहा है और आप अपने प्यार को पाना चाहते हैं लव सलूशन चाहते हैं तो आप अपने दिल पर हाथ रखकर के इस मंत्र को सिर्फ सात भरभोलिए गाय। 

जैसे ही बोलिएगा तुरंत चमत्कार होगा घंटे के भीतर में और आपका प्यार आपसे मिले बगैर आपसे बात किए बिना नहीं रह पाएगा।

किसी को अपने प्यार में पागल करने का तरीका – वशीकरण टोटका करने की विधि

मेरे प्यार पर बस तो कैसे इस चमत्कारी वशीकरण टोटका को करना है ताकि आपका प्यार खुद चलकर आपके पास आए, वह खुद आप से बातें करें, वह खुद आपके पास फोन करे और यदि कोई आपके प्यार के बीच में आ ही गया है तो एकदम क्लियर हो जाए हट जाए तो आइए बताते हैं। उसके पहले छोटा सा आपसे विनती है, बहुत सारे लोग वीडियो देखते हैं मेरा ठिकाना लेकिन कोई सबस्क्राइब करते हैं कोई सब्सक्राइब है पैसा प्लीज चैनल को सब्सक्राइब जरुर कीजिएगा ताकि हम जितने छोड़ेंगे सबसे पहले आप के पास में जाएगा।

किसी को अपने प्यार में पागल करने का तरीका  सही तरीका और तैयारी

 

करना क्या होगा ध्यान से देखिएगा। यदि आपके पास में लव प्रॉब्लम है और आप अपने प्यार को पाना चाहते हैं, हासिल करना चाहते हैं, प्रेम विवाह करना चाहते हैं, चाहते हैं कि अपने पार्टनर को अपने पास बुला ले और आपको छोड़कर नहीं जाए तो आप अपने दिल पर हाथ रखकर के इस शब्द को इस मंत्र को जरुर बोलिएगा। सिर्फ यही बोलना है। 

कौन सा मंत्रालय सुनिएगा? सबसे पहले करने का सही तरीका ढूंढ लेकिन वशीकरण बहुत सारे लोग करते हैं और मानवी की एक हजार लोगों में से नौ लोगों का काम हो जाता है और कुछ ऐसे लोग हैं जिनका काम नहीं हो पाता है। क्यों नहीं हो पाता है?

 क्योंकि वह post सही से आप सही से नहीं कुंवर सहित से हॉस्पिटल नहीं कर पाते हैं। इसलिए वशीकरण करने से पहले वशीकरण को समझना जरूरी है। इसलिए आप इसे सेकंड को समझे कि कैसे करना है और कैसे अपने प्यार को पाना है उसके बाद आपको यहां पर आपको छोड़कर कभी भी नहीं जाएगा।

वशीकरण करने का सही तरीका है सबसे पहले आप स्नान कर ले ठीक है ना। यह वशीकरण टोटका को आपको सुबह में ही करना है या रात में सोने जाते हैं उस समय करना है। दोनों में आपको जो भी समय अच्छा लगे उस समय पर कीजिएगा।

 सबसे पहले आप स्नान कर ले, क्या करें स्नान। कोई भी कलर का कपड़ा हो, साफ़ कपड़ा आपको पहन लेना है, धारण कर लेना है और अपने हाथ में एक मुट्ठी में आपको चावल का 24 दाने आपको रखना है। चावल अक्षत, इसको जादू टोना और पूजा के भाषा में है इसको अक्षत बोला जाता है और जैसे इसको अपने मुट्ठी में बंद करके वशीकरण कीजिएगा 100 प्रतिशत आपका वशीकरण होगा और 100 गुना तेजी में होगा और आपका प्यार आपको चाहने लगेगा।

मंत्र बोलने की प्रक्रिया

करना चाहूंगा ढूंढ उस चावल को मुट्ठी में बंद कर ले ठीक रहें और इसको क्या करना है अपने दिल पर रखना है यानि कि इस हाथ को अपने दिल पर रखना है। रखने के बाद मैं आपको क्या करना है ध्यान लगाना है, ध्यान को केंद्रित करना है। 

वशीकरण का यही मेन पॉइंट होता है, आपको समझना जरूरी है। ध्यान को केंद्रित करना है, ध्यान को भटकाना नहीं है। इन है कि बैठे हैं पूजा पर और मन है भूजा पर, बहुत सारे लोग ऐसे सोच सकते हैं, समझ सकते हैं इस बात को। ठीक है ना? 

करना क्या होगा आपको एकदम मन लगाना है, ध्यान लगाना है और ध्यान को भटकाना नहीं है और ध्यान लगाकर आपको सिर्फ इस मंत्र को सात बार बोलना है। आपका प्यार सब कोई को छोड़कर आपके पास आ जाएगा, आपके बगैर नहीं रह पाएगा, पल-पल तड़पेगा आपके प्यार में आपके लिए हू श्याम को करेगा।

शक्तिशाली वशीकरण मंत्र

कैसे करना होगा ध्यान से देखिए। जैसे ही अपने दिल पर हाथ रख आपके मन में आप इस मंत्र को बोलिए ओम बना रहता है ॐ विघ्न सर्व मोहने अमुखी मोहिनी स्वाहा। इस प्रकार आपको बोलना है। इस मंत्र में अमुखी की जगह पर आप अपने प्यार का नाम ले, उस प्यार का नाम ले जिस प्यार को पाना चाहते हैं। 

 उस स्त्री का नाम ले जिस स्त्री को अपने प्यार में दीवानी बनाना चाहते हैं, अपने पीछे घुमाना चाहते हैं। और जैसे ही दिल पर हाथ रखकर के इस मंत्र को बोलिएगा उसी समय से, उसी समय से यह चमत्कार होगा, यह असर दिखाना शुरू करेगा और आपके प्यार के दिल में आपके लिए मोहब्बत भरेगा और आपका प्यार हर तरह से हर तरह से आपके तरफ आकर्षित हो जाएगा, आपको चाहने लगेगा यानी कि वह आपके प्यार ने मोहित हो जाएगा।

 

सावधानियां और अंतिम निवेदन

मेरे प्यार पर बस तो यह बहुत ही शक्तिशाली अचूक वशीकरण टोटका जो कि कभी भी खाली नहीं जाता है। वह सावधानीपूर्वक करना है, इसके बारे में किसी को बताना नहीं है और वशीकरण को करते समय कोई देखे नहीं कोई टोके नहीं। आपका प्यार पल भर में आपके वश में होगा। 

karna matangi sadhna anubhav कर्ण मातंगी साधना अनुभव: एक साधक का भयानक अनुभव PH.85280 57364

कर्ण मातंगी साधना अनुभव: एक साधक का भयानक अनुभव PH.85280 57364

 

कर्ण मातंगी साधना अनुभव: एक साधक का भयानक अनुभव PH.85280 57364

कर्ण मातंगी साधना अनुभव: एक साधक का भयानक अनुभव PH.85280 57364
कर्ण मातंगी साधना अनुभव: एक साधक का भयानक अनुभव PH.85280 57364

karna matangi sadhna anubhav कर्ण मातंगी साधना अनुभव: एक साधक का भयानक अनुभव आप सभी लोगों को मेरा नमस्कार, जय माँ चंडी जय शंकर। मैं आप सब लोगों का और एक नए लेख में स्वागत करता हूँ। आज के इस लेख में मैं आप सब लोगों को मेरे गुरु जी का एक कर्ण मातंगी साधना का अनुभव बताने जा रहा हूँ। 

 जिसको सुनने के बाद आप सब लोगों को पता चल जाएगा तंत्र साधना कितना भयानक रहता है तथा यह साधना को अगर सही तरीके से संपन्न कर लिया जाए तो यह एक मनुष्य का जीवन भी बदल सकता है और बहुत फायदा उसको दे सकता है। तो चलिए शुरू करते हैं आज के इस लेख को और जानते हैं उस साधना के अनुभव के ऊपर।

गुरु से मार्गदर्शन और तीन गुप्त साधनाएँ

एक दिन मेरे गुरु जी अपने गुरु के पास बैठे थे और वह अपने गुरु से बातचीत कर रहे थे। गुरु जी के मन में एक प्रश्न आया कि ऐसा कोई साधना हो जिस साधना के माध्यम से हम अपने सारे प्रश्नों का उत्तर ले सकें और वो साधना हमको एक तरह से गुरु की तरह गाइड भी करे।

 तो इस प्रश्न को मेरे गुरु जी ने अपने गुरु से पूछा तो उनके गुरु ने आंसर दिया कि ऐसे तो तीन ही साधनाएँ हैं, एक उन्होंने बताया वार्ता साधना, दूसरा है कर्ण पिशाचिनी साधना और तीसरा है कर्ण मातंगी साधना। इन तीन साधना के बारे में बताया। 

उनके जो गुरु थे वो कौलाचार मार्ग से थे। जिन लोगों को नहीं पता कि मेरे गुरु जी कौन थे, उनका साधना क्या था, किस तरह से थे, तो हमारी वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर आपको मेरे गुरु जी से जुड़े सारे अनुभव और साधनाओं की श्रेणी मिल जाएगी, जहाँ जाकर आप जरूर ही उन्हें पढ़ सकते हैं। 

उनके सारे अनुभव को भी आप सुन सकते हैं। पहले के लेख जिन लोगों ने पढ़े हैं उन लोगों को पता है कि मेरे गुरु जी को कर्ण मातंगी माता सिद्ध थीं। तो उस हिसाब से मैं आज उस सिद्धि का अनुभव लोगों को बता रहा हूँ।

तो उनके गुरु ने बताया तीन साधना। तो तीन साधना में उनके गुरु ने बताया कि कर्ण पिशाचिनी वर्तमान और भूतकाल का ज्ञान देती है। वार्ताली साधना तीन समयों का ज्ञान देती है, भूत, वर्तमान और भविष्यत्काल का ज्ञान देती है।

 लेकिन वार्ताली साधना एक उग्र तरीके का साधना है और यह नक्षत्र वाइज़ किया जाता है। अगर नक्षत्र अगर आपके पास सही नहीं है या फिर आपका जन्म नक्षत्र सही नहीं है तो वार्ता साधना में आपको बहुत सारी दिक्कतों को झेलनी पड़ सकता है।

 तो उनके गुरु ने बताया सर्वोत्तम रहता है कर्ण मातंगी साधना। कर्ण मातंगी बहुत जल्दी सिद्ध होती है। साधना जो विधि रहता है वो तीन से चार दिनों का रहता है। तीन से चार दिन की साधना में यह माता आपको दे देती है बोलके उनके गुरु ने बताया।

 

कर्ण मातंगी साधना अनुभव – साधना की पात्रता: उच्छिष्ट चांडालिनी की महा साधना

तो गुरु जी ने आग्रह पूर्वक उनसे बोला कि कृपया यह मेरे इस विद्या को मेरे को प्रकाशित कीजिए बोलके उन्होंने अपने गुरु से प्रार्थना किया। 

तो उनके गुरु ने बोला कि कर्ण मातंगी साधना करने से पहले तुमको महामातंगी माता का यानी कि उच्छिष्ट चांडालिनी का एक महा साधना संपन्न करना पड़ेगा तभी तुम्हारे पास एक एलिजिबिलिटी आएगी या फिर एक पात्रता आएगी तभी जाकर तुम कर्ण मातंगी माता को सिद्ध कर पाओगे या फिर उनसे कृपा प्राप्ति करके उनकी सिद्धि प्राप्त कर पाओगे। 

 बोलके बहुत सारी चीजें उन्होंने कर्ण मातंगी माता के ऊपर बताईं कि माता सात्विक हैं तथा जो साधक को भोग, ऐश्वर्य और सारे संसार की शक्तियों को प्रदान करने वाली रहती हैं और बहुत सारे ऐसे-ऐसे रहस्य कर्ण मातंगी माता के जो साधकों को बहुत कम पता रहते हैं। उसके बाद उन्होंने बताया कि किस तरह से साधना करना है।

तो उनके गुरु ने बोला कि आने वाले अमावस्या को मेरे पास आ जाना रात को, मैं तुमको महामातंगी मंत्र का दीक्षा प्रदान करूँगा। दीक्षा के बाद तुम महामातंगी का एक महा साधना संपन्न करना। संपन्न करने के बाद तुम फिर कर्ण मातंगी माता की साधना में लग जाना और तुम सिद्धि प्राप्त कर सकते हो इस हिसाब से। 

तो लगभग 20-30 दिन के बाद जो उनका अमावस्या आ गया था, अमावस्या आने के बाद गुरु जी मेरे, मेरे जो गुरु जी थे वो रात को अपने गुरु के पास गए, उन्होंने उधर दीक्षा प्राप्त की महामातंगी माता की और आके उन्होंने लगातार 51 दिनों तक महामातंगी साधना विधिपूर्वक ब्रह्मचर्य आदि के नियम से, बहुत कठोर नियम थे उनके, उस साधना को संपन्न किए। 

किसी और लेख में उस महामातंगी साधना का जिक्र करूँगा, उसका अनुभव बताऊँगा लेकिन अभी के लिए इतना जान लीजिए कि वो बहुत कठोर था और कठोर महामातंगी साधना था। माता से आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद, महामातंगी का आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद, वह उन्होंने शुरू किया कर्ण मातंगी साधना

कर्ण मातंगी साधना के प्रयास और विफलता

मेरे गुरु जी ने शुक्ल पक्ष से यह कर्ण मातंगी साधना शुरू किया। यह साधना जो था चार दिन का साधना था या फिर लगातार बोल सकते तीन दिन का प्रॉपर साधना था लेकिन इसके कुछ विधियों के अनुसार यह चार दिन का भी रहता है। 

तो इस विधि से उन्होंने साधना शुरू किया। पहले टाइम जब उन्होंने साधना शुरू किया, मेरे गुरु जी ने, पहला टाइम का जो उनका साधना का अनुभव था, वो फेल हो गया। पहला टाइम का साधना उन्होंने फेल हो गया, ना कोई अनुभव हुए, ना किसी भी प्रकार की सिद्धि प्राप्त हुई।

 लेकिन पहला टाइम का साधना फेल हो गया। दूसरा टाइम जब उन्होंने ट्राई किया कर्ण मातंगी साधना को सिद्ध करने के लिए, आखिरी दिन जब वो जाप कर रहे थे, बस उनको ऐसा लगा कि उनकी जोर-जोर से हवा चलने लगी थी। 

 जिसके वजह से उनके कान में वो हवा लगी और इतना जोर से हवा लग रही थी कि उनका सिर दर्द शुरू हो गया था जाप के बस टाइम। तो यही था दूसरे बार का साधना का अनुभव। दूसरे बार का साधना इतना में ही खत्म हो गया था।

 

कर्ण मातंगी साधना अनुभव  -सिद्धि का अनुभव: तीसरा और अंतिम प्रयास

लेकिन जब गुरु जी ने तीसरे बार का साधना किया तो तीसरे बार में उनको सिद्धि मिली और तीसरे बार का साधना का अनुभव कुछ इस प्रकार था कि जब उन्होंने तीसरे बार साधना शुरू किया, वो भी शुक्ल पक्ष के अंदर ही शुरू किया था उन्होंने।

 

कर्ण मातंगी साधना अनुभव – पहला दिन – सूक्ष्म ध्वनियों का तीव्र होना

तो साधना के पहले ही दिन जब उन्होंने संकल्प लेके पूजा करते हुए महामातंगी यंत्र के सामने जाप करना शुरू कर दिया, तो उनको ऐसा लगा कि बहुत सूक्ष्म तरीके की आवाज उनके कान में आ रही है। अभी सूक्ष्म बोलूँगा तो आप सब लोगों को समझ नहीं आएगा।

 तो अगर सीधा बोला जाए तो उनको पेड़ों से पत्ते हिलने की आवाज, जो खुद की जो सांस लेते हैं ना, वह सांसों का आवाज भी उनको सुनाई दे रहा था और बहुत दूर-दूर के अगर कोई लोग बात कर रहे हैं तो उनका बातों भी गुरु जी को सुनाई दे रही थी साधना के समय। 

साधना का समय था रात का, तो रात के समय यह गुरु जी साधना कर रहे थे। फल स्वरूप क्या हुआ कि गुरु जी को इतने मतलब सूक्ष्म आवाज भी जब सुनाई देने लगी और तीव्र स्वर में सुनाई देने लगी तो उनको ऐसा लगने लग गया था। 

 यह छोटी-छोटी आवाज भी बहुत बड़ी-बड़ी आवाज कर रहे हैं और उसके वजह से इनका बहुत सिर दर्द शुरू हो गया था और जिसके वजह से वह उस सिर दर्द के वजह से साधना के बाद ना ही ध्यान कर पाए थे और वह रात को सो भी नहीं पाए।

 

कर्ण मातंगी साधना अनुभव  दूसरा दिन: बहरेपन की भयानक परीक्षा

इस दूसरे दिन के जब सुबह हुआ तो दूसरे दिन वो बहुत चिड़चिड़ा, फ्रेश नहीं था। जैसे-तैसे करके उन्होंने दूसरे दिन की सुबह काट दी। अभी आ गया था रात यानी कि शाम ढल गया था और रात होने को आई थी। 

रात होने के जब आ गई तो उन्होंने वह साधना में बैठ गए। जब साधना में वह बैठ गए तो जब वह जाप करना शुरू कर दिए थे तो उनको ऐसा लगा कि उनके कानों में एक पतली सी छोटी सी आवाज आ रही है।

 तो वो जब उसको इग्नोर करते हुए फिर से जाप कंटिन्यू करने लगे धीरे-धीरे तो उनको ऐसा लगने लगा कि धीरे-धीरे वो आवाज बढ़ रही है और एक्चुअली में वो आवाज बढ़ भी रही थी। 

तो जब इतना हो गया कि वो आवाज इतना जोर से आने लगा कि वो एकदम कोई भी चीज सुन नहीं पाए और उनके चारों तरफ अपने उनके ही कानों में बस वही आवाज गूंजने लग गई थी जिसके वजह से कुछ समय के बाद वो जाप भी नहीं कर पाए और उनके कानों से खून आने लगा और अचानक से उनका कान सुन्न पड़ गया और उनको कुछ सुनाई देना बंद हो गया।

जब यह बंद हो गया यानी कि वह खुद के आवाज को भी उस समय सुन नहीं पा रहे थे यानी कि जो खुद वह मंत्र जाप कर रहे थे, वो मंत्र जाप की आवाज को भी वह सुन नहीं पा रहे थे। इतना हो गया।

 जब इतना हो गया तो उन्होंने जैसे-तैसे करके साधना संपन्न किया और साधना के उठ जाने के बाद जब उन्होंने आदमी आगे वाला बात कर भी रहा था तो वह बात इनको बिल्कुल भी सुनाई नहीं दे रही थी यानी कि एक तरीके से वो दूसरे दिन के साधना के प्रभाव के वजह से एकदम बहरे हो गए थे। 

जब उन्होंने ऐसा हो गया तो वह एकदम बहुत वरीड हो गए और वरीड होकर एक जगह पर बैठ गए और अपने इष्ट को स्मरण करने लगे। तो थोड़े देर के बाद उनको आईडिया आया कि थोड़ा ध्यान में देखा जाए कि ये क्या हो रहा है।

 तो उन्होंने अपने गुरु मंत्र आदि का प्रयोग करते हुए जब उन्होंने ध्यान में देखा तो उनको पता चला कि यह साधना का एक प्रभाव है जिसके वजह से वह बहरे हो गए हैं। 

अगर साधना अगर इधर ही आप वो छोड़ देंगे या फिर डर के छोड़ देते हैं कि मैं बहरा हो गया हूँ बोलके तो इनको सिद्धि भी नहीं मिलेगी और उल्टा ये जीवन भर बहरे ही रह जाएँगे यानी कि इनको कुछ सुनाई नहीं देगा, ये बहरे होकर रह जाएँगे बोलके इनको पता चला।

 तो देखिए मैं जब जैसे पहले ही बोला था कि तांत्रिक साधना इतनी भयानक रहती है, अगर सही तरीके से कर लिया जाए तो बहुत अच्छा प्रभाव देती है और अगर गलत तरीके से किया जाए तो यह नकारात्मक प्रभाव भी देती है। 

साधना को बीच में छोड़ना यह सबसे बड़ी गलती रहती है साधक की, तो ऐसा कभी ना कीजिएगा। तो अभी हम आगे बढ़ते हैं अनुभव के ऊपर।

 

कर्ण मातंगी साधना अनुभव तीसरा दिन: माता का प्राकट्य और सिद्धि

अब जैसे-तैसे करके उन्होंने ध्यान में देख लिया उसके बाद सो गए और उन्होंने रात काटा। सुबह हो गई, तीसरे दिन आ गया। तीसरे दिन जब आ गया तो तीसरे दिन के बाद क्या हुआ, सुबह-सुबह जब वो नहा-धोकर आ रहे थे तो उनके कानों से फिर से खून आने लगा और उनके कान और सिर में बहुत जोर से पेन होने लग गई थी।

 तो ये पूरा वो जो पेन था वो उनका पूरा दिन भर रहा जिसके वजह से उनके उनको ऐसा लगने लगा कि आज का साधना बहुत कठिन जाएगा। फिर भी उन्होंने माता के स्मरण करते हुए अपने इष्ट और गुरु को स्मरण करते हुए तीसरे दिन का साधना शाम को शुरू किया।

 साधना शुरू करते ही जहाँ पर वह बैठते थे, वह उनसे इधर से सीधा देख पा रहे थे कि जोर-जोर से हवा चलने लग गए थे और पेड़ बहुत जोरों से न से पेड़ हिलने लग गए थे जिसके वजह से एक भयावह वातावरण उनके साधना स्थल में शुरू हो गया था या फिर देखने को मिल रहा था।

जब साधना थोड़ा और आगे बढ़ा, जब-जब वो जाप को और आगे बढ़ाते गए, जब-जब खत्म होने लग गया था, तो उनका पूरा शरीर में एकदम गर्मी सी आ गई थी, एकदम पूरा गर्मी आ गई थी और वो एकदम पसीने से लथपथ हो गए थे। 

वजह कि उनके साइड में बहुत सारे हवा चल रहे थे फिर भी वो पसीने से लथपथ थे। जब उन्होंने पहले चरण का जाप कंप्लीट किया और उसमें क्या होता है साधना का, यह पड़ाव अगर नहीं बताऊँगा तो आप लोगों को पता नहीं चलेगा। 

तो जान लीजिए उस साधना में क्या होता है कि उसमें दीपक को बुझा देते हैं, कुछ जाप करने के बाद दीपक को बुझा दिया जाता है और दीपक के जो तेल है अपने शरीर पर लगा लिया जाता है। 

उसी तरह से गुरु जी ने दीपक को बुझा दिया और उस सारे तेल को अपने शरीर पर लगाकर स्नान करने के लिए चले गए। स्नान करने जाने के बाद वो स्नान करके आ गए, आसन पर बैठ गए, फिर से मंत्र जाप शुरू कर दिया। 

जब उन्होंने इस बार मंत्र जाप शुरू किया तो थोड़ी देर के बाद उन्होंने देखा कि एक छोटी सी लाइट है वो उनके पास धीरे-धीरे आ रही है। वो जब-जब उनका थोड़ा और आगे बढ़ता गया तो वो लाइट अब उनके पास धीरे-धीरे आती रही, आती रही और एकदम बड़ा आकार हो गया।  

 एक तरह से ऐसा हुआ कि वो आँखें बंद करते हुए भी उनको वो लाइट इतना प्रभावशाली था कि उनको उन्होंने जबरदस्ती आँखें खोली थीं। जब उन्होंने आँखें खोल दीं तो तभी भी, तभी भी उनको वो लाइट आँखों के सामने दिखाई दी और एकदम उनके आँखों के सामने घना अंधेरा छा गया थोड़े समय के लिए और जब उनका अंधेरा टूटा तो उनके सामने माता कर्ण मातंगी खड़ी थीं यानी कि कर्ण मातंगी माता उनके सामने प्रकट हो गई थीं।

 तो गुरु जी उसको वर्णन करते हुए बोलते हैं कि माता एक रक्त कमल के ऊपर आरूढ़ थीं, उनके एक हाथ में कपाल था और एक हाथ में जो तोता था, एक हाथ में खड्ग था और एक हाथ में वो वरदमुद्रा धारण किए रहती थीं। 

इस तरह से उनका चार हाथ था और वो इस तरह से रहती थीं। उनका जो वर्ण था शरीर का वो श्याम वर्ण था यानी कि पूरा काला नहीं, श्याम वर्ण था और उन्होंने आशीर्वाद प्रदान किया बोलके गुरु जी वर्णन करते हैं। 

जब उनका दर्शन हुए तो अचानक से उनके कानों में फिर से सारी चीजें उनको सुनाई देने लग गई थीं। माता ने आशीर्वाद दिया और माता उधर से गायब हो गईं बाद में। तो इस हिसाब से उनका अनुभव था।

 

कर्ण मातंगी साधना अनुभव सिद्धि का प्रमाण: खोई हुई गाय का मिलना

चौथे दिन, तीसरे दिन का साधना संपन्न करने के बाद गुरु जी ने चौथे दिन विधिपूर्वक गुप्त हवन सामग्रियों के माध्यम से गुप्त मंत्रों के माध्यम से महामातंगी का हवन संपन्न किया। महामातंगी हवन जब उन्होंने संपन्न करने के बाद, अभी बारी थी उनके गुरु से बताने का। 

तो वो अपने गुरु के पास गए और यह सारा वृत्तांत उनको बताया। तो उनके गुरु ने उनको बताया कि कर्ण मातंगी का किस तरह से प्रयोग किया जाता है। जो प्रयोग विधि है, उन्होंने प्राप्त की और आके उन्होंने प्रयोग भी किया। 

तो वह प्रयोग कुछ इस प्रकार था, वह उसका एक प्रयोग मैं आपको बता दूँ। एक दिन क्या हुआ कि गुरु जी अपने दोस्तों के साथ, वह खेती-बाड़ी का टाइम था तो खेती-बाड़ी करते थे सब लोग, तो एक बैठ के बातचीत कर रहे थे। 

तभी उनका एक दोस्त आया और उनका दोस्त का नाम था घनश्याम। तो घनश्याम जो थे उन्होंने आए और दुखी मन से गुरु जी के पास बैठ गए। तो तभी गुरु जी ने पूछा कि घनश्याम क्या हुआ। 

तो वो जो घनश्याम थे उन्होंने बताया कि मेरा एक गाय था, वह लगातार दो दिनों से लापता है जंगल में। उनका बहुत खोजा, बहुत लोगों के साथ उसको खोजने की कोशिश की लेकिन वह नहीं मिले, कहाँ गई हमको नहीं पता।

 तभी गुरु जी ने समझा कि यही उचित समय है माता कर्ण मातंगी के सिद्धि को प्रयोग करने का। उन्होंने मन ही मन मंत्र जाप किया, प्रार्थना किया और माता से बोला कि माता रास्ता दिखाइए। तभी उनके कानों में एक आवाज आई।

 उनके कानों में एक आवाज आई कि वो जो गाय है, वो पुराने जो पीपल का पेड़ है, पुराने पीपल के पेड़ के एक साइड में कुआँ है, उस कुएँ के अंदर गिर गया है। अभी भी वो जिंदा है, जाके उसको निकाल लो। 

तो उन्होंने वो पीपल के पेड़ के पास गए तो सच में उधर उस पीपल के पेड़ के पास एक कुआँ था और उस कुएँ में वो गाय गिर गई थी और चिल्ला रही थी और एक तरह से वो उधर नहीं निकल पा रही थी। तो सभी लोगों ने मिलके उस तरह से निकाला था। तो इस तरह का उन्होंने प्रयोग किया था।

कर्ण मातंगी साधना अनुभव – तंत्र साधना से मिली सीख

तो सभी को पता ही चल गया होगा कि ये जो मेरे गुरु जी ने कर्ण मातंगी साधना किया था, कितना भयानक था। तो अगर वह डर के वह साधना छोड़ देते कि अभी मैं बहरा हो गया हूँ, अभी कुछ मेरे घर का मर जाएगा, यह हो जाएगा, वो हो जाएगा बोलके छोड़ देते तो गुरु जी हमेशा बहरे ही रह जाते या फिर उनको कभी उनका इलाज ही नहीं हो पाता। 

 तो उन्होंने धैर्य पूर्वक साधना संपन्न किया, माता का आशीर्वाद लिया और उन्होंने अपने जीवन में आगे बढ़े। तो साधना में, तंत्र साधना में, इससे हमको यह सीखने को मिलता है कि तंत्र साधना में धैर्य की बहुत आवश्यकता है। 

बिना धैर्य के हम अगर तंत्र साधना करते हैं या फिर किसी भी प्रकार की उग्र शक्तियों की साधना करते हैं तो उसमें हमको बहुत क्षति प्राप्त हो सकता है। तो साधक को चाहिए धैर्य पूर्वक गुरु कृपा, अपने इष्ट की कृपा से वो तांत्रिक साधनाएँ संपन्न करे।

और एक बात, इस लेख में मैंने ये विधियाँ क्यों नहीं दीं और क्यों इन विधियों का ज्ञान नहीं दिया, आप सब लोगों को मैं बता दूँ इसीलिए क्योंकि अगर ये विधियों का ज्ञान अगर मैं आप सब लोगों को दे दूँगा, अगर अयोग्य साधक हुआ और ये विधियों का उसने प्रयोग कर दिया तो तो वो खुद को भी डुबा देगा और उसके साथ उसके घर वालों को भी ही डुबा देगा। 

क्योंकि यह एक तरह से पूर्ण तरीके से तांत्रिक साधना है। सात्विक साधना होने के बावजूद यह तांत्रिक साधना है और इसका नकारात्मक प्रभाव भी सभी को देखने को मिल सकता है। 

ध्यान रखिए, माता जितना सौम्य हैं, उतना उग्र प्रभाव की भी हैं। तो इसीलिए साधक को चाहिए धैर्य पूर्वक वो साधना और भक्ति भाव से साधना करे ताकि वो सिद्धि पा सके।

तो यही था कुछ आज का यह लेख। अगर सभी को यह लेख अच्छा लगता है तो इसे लाइक कर दें और शेयर कर दें। हमारी वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम को फॉलो करें ताकि मैं जो भी नया पोस्ट प्रकाशित करूँ, उसकी सूचना आप सब लोगों तक पहले पहुँच जाए।

 तो आज के लिए यह लेख इतना ही था। सभी को मेरा नमस्कार, जय माँ चंडी जय शंकर। मिलता हूँ आप सब लोगों से और एक किसी नए लेख में।

माँ मातंगी साधना विधि और लाभ maa matangi sadhna

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माँ मातंगी साधना विधि और लाभ maa matangi sadhna

 
माँ मातंगी साधना विधि और लाभ maa matangi sadhna
माँ मातंगी साधना विधि और लाभ maa matangi sadhna

नमस्कार प्रिय, आप का स्वागत है गुरु मंत्र साधना में अभी आगे कार्तिक नवरात्री शुरू होने वाले  है इस समय में यदि किसी प्रकार की कोई साधना की जाती है, किसी प्रकार के मंत्र का जप किया जाता है तो निश्चित ही उसका प्रभाव शीघ्रातिशीघ्र प्राप्त होता है क्योंकि यह समय साधना सिद्धि का ही समय होता है। माँ मातंगी साधना करने का उचित समय है 

माँ मातंगी साधना का महत्व

आज जिस सिद्धि की, जिस साधना की मैं बात करने जा रहा हूँ, वह है माँ मातंगी की साधना। माँ मातंगी की साधना एक ऐसी साधना है जो प्रत्येक व्यक्ति को और प्रत्येक गृहस्थ को अवश्य ही एक बार जीवन में करनी चाहिए क्योंकि यह साधना एक ऐसी साधना है जो जीवन की प्रत्येक सुख सुविधा के साथ-साथ प्रत्येक समस्याओं के समाधान के लिए भी जानी जाती है।

कौन हैं माँ मातंगी ?

माँ मातंगी सभी दश महाविद्याओं में नवें स्थान पर आती हैं। श्री कुल की साधना अति श्रेष्ठ मानी जाती है। मातंगी को पूर्ण गृहस्थ सुख, भोग विलास, शत्रुओं का नाश, अपार सम्मोहन और वाक् सिद्धि के साथ-साथ कालज्ञान दर्शन और इष्ट दर्शन की प्राप्ति के लिए भी माना जाता है। कहा जाता है जिन पर इनकी कृपा हो जाती है, उसे जीवन में कुछ भी शेष नहीं रहता। उसे हर प्रकार से सभी साधन सर्व सुलभ हो जाते हैं।

माँ मातंगी साधना से प्राप्त होने वाले लाभ

आज के इस भौतिकवादी युग में सभी की चाह होती है की उसके पास अच्छा घर हो, मकान हो, सभी प्रकार के सुख साधन उपलब्ध हों और माँ मातंगी सर्व प्रकार के सुख और भोग वैभव देने के लिए जानी जाती हैं। माँ मातंगी सरस्वती के भी एक रूप माना जाता है। 

मातंगी की कृपा जिस पर हो जाती है उसे स्वतः ही संपूर्ण शास्त्र-वेदों का या संपूर्ण ज्ञान प्राप्त हो जाता है। वह किसी से भी वाद-विवाद में हार नहीं सकता अर्थात उसे हमेशा जितना ही होता है। उसके मुख से एक धारा प्रवाह के रूप में सभी प्रकार की बातें और सभी प्रकार का ज्ञान उद्गत होने लगता है। 

बोलता है तो उसकी वाणी अमृतधारा बरसाती है, ऐसा शास्त्र कथन है। इसीलिए होगा कि प्रत्येक गृहस्थी को एक बार जीवन में यह साधना करनी चाहिए क्योंकि जीवन में अनेकों अनेक बार ऐसा समय आता है जब व्यक्ति अपनी बात समझा नहीं पाता, अपनी बात को ठीक से रख नहीं पता।

 यदि ये साधना की जाए तो निश्चित ही वह अपनी बात को समझाने में और अपनी बात को दूसरों के समक्ष रखने में सक्षम हो जाता है, जिससे कई बार विपरीत परिस्थितियों में भी आपके लिए सुलभता प्राप्त हो जाएगी। आपके कार्य शीघ्रता से, सुलभता से बनने लगेंगे। ये है माँ मातंगी की साधना का प्रभाव।

 माँ मातंगी को उच्छिष्ट चांडालिनी भी कहते हैं जो सब प्रकार के शत्रुओं का और विघ्नों का नाश करती है। साथ ही साथ कर्णमातंगी साधना भी इन्हीं के अधीन आती है।  

कर्ण मातंगी को सिद्ध करने के बाद में माँ मातंगी कान में प्रश्नों के उत्तर बताती हैं। इस साधना का ज्योतिष, तंत्र या इस प्रकार के क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए विशेष महत्व होता है।

माँ मातंगी साधना की विधि

माँ मातंगी साधना विधि और लाभ maa matangi sadhna
माँ मातंगी साधना विधि और लाभ maa matangi sadhna

आज जिस साधना की बात कर रहा हूँ वह सरल होते हुए सभी गृहस्थियों के लिए है जिससे की जीवन में सुख शांति और वैभव की प्राप्ति हो, शत्रुओं का नाश हो और सब प्रकार से जीवन सुलभ और सुखमय बन सके। 

माँ मातंगी के विषय में महर्षि विश्वामित्र ने कहा है की जिसने मातंगी को सिद्ध कर लिया बाकी नौ महाविद्या उसे स्वतः प्राप्त हो जाती हैं। परंतु प्रियदर्शकों, सिद्धि प्राप्त करना कोई सरल नहीं है। 

लेकिन मैं ये मानता हूँ मातंगी की अगर कृपा भी मिल जाए तो भी हम सिद्धि के बिल्कुल निकट पहुँच गए हैं। चलिए जान लेते हैं ये साधना, ये सिद्धि कब से आरंभ करनी है, किस समय आरंभ करनी है, क्या हैं इसके नियम, क्या है इसकी साधना और किस प्रकार से साधना में सामग्री की आवश्यकता पड़ने वाली है।

माँ मातंगी साधना  कब और कैसे आरंभ करें ?

इस साधना को वैसे तो किसी भी सोमवार से या शुक्रवार से आरंभ किया जाता है परंतु गुप्त नवरात्रि का समय है तो प्रथम नवरात्रि से ही आप इस साधना को आरंभ कर सकते हैं। समय रहेगा रात्रि 9:00 बजे के बाद में। 

हमेशा बोलता हूँ वैसे 10:00 बजे के बाद साधना आरंभ करनी चाहिए लेकिन शास्त्र प्रमाण है रात्रि 9:00 बजे के बाद, तो आप 9:00 बजे के बाद में इस साधना को आरंभ कर सकते हैं।

 किसी शुभ समय को देखकर के रात्रि 9:00 बजे बाद शुभ चौघड़िया में, अमृत काल का चौघड़िया हो, शुभ का चौघड़िया हो, यह चर का चौघड़िया हो तो आप उस काल में इस साधना को आरंभ कर सकते हैं। तो ये साधना आपको रात्रि 9:00 बजे के बाद आरंभ करनी है। मुख आपको उत्तर या पश्चिम दिशा में करना है। आसन लाल होगा और वस्त्र भी लाल होंगे।

माँ मातंगी साधना आवश्यक सामग्री

जो बाजोट या पट्टे पर वस्त्र बिछाया जाएगा वह भी लाल रंग का ही होगा। मातंगी का चित्र और यंत्र रख करके आपको पूजा करनी है, साधना करनी है। यंत्र प्राण-प्रतिष्ठित होना चाहिए। प्राण प्रतिष्ठा विषय के संबंध में एक पोस्ट मैं पूर्व में दे चुका हूँ। 

वहाँ द्वारा प्राण प्रतिष्ठा विधि देख सकते हैं। निश्चित ही उस सूक्ष्म विधि से यंत्र की प्राण प्रतिष्ठा होती है और हर प्रकार से आपको लाभ मिलता है। लिंक आपको डिस्क्रिप्शन में दे दिया जाएगा।

यदि माँ मातंगी का चित्र उपलब्ध न हो तो उस परिस्थिति में जिस प्रकार से गणपति की स्थापना की जाती है सुपारी पर मौली लपेट करके, ठीक उसी प्रकार आप मातंगी का विग्रह की स्थापना कर सकते हैं। 

एक सुपारी पर थोड़ी सी मौली लगा करके, उस पर तिलक करके माँ मातंगी को यंत्र के समक्ष सुपारी को रख करके मातंगी का स्वरूप मानकर के साधना को संपन्न कर सकते हैं।

 माँ भगवती की तरह ही इनका पूजन करना है, षोडशोपचार रूप से। साथ ही साथ जब दश महाविद्याओं की पूजा की जाती है तो भैरव की पूजा अवश्य की जाती है, तो भैरव जी की पूजा इनके बायीं ओर करनी है।

 माँ भगवती का जहाँ आपने विग्रह रखा है, जहाँ यंत्र रखें उसके बायीं ओर भैरव जी की पूजा आपको करनी पड़ेगी। बात करें दीपक की, तो दीपक यहाँ पर शुद्ध देसी घी का आपको प्रज्वलित करना है। 

यदि आपके आसपास घी की व्यवस्था नहीं तो आप तिल तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। परंतु संभव हो तो घी का दीपक ही आप प्रज्वलित करें। माला या तो स्फटिक की हो, लाल हकीक या लाल मूंगे की हो या फिर हमेशा बोलता हूँ रुद्राक्ष की माला सर्व कार्य सिद्धि के लिए प्रयोग कर सकते हैं। 

तीनों में से कोई भी माला जो आपके पास उपलब्ध हो, प्राण प्रतिष्ठित माला हो, उससे आप इस साधना को कर सकते हैं। भोग प्रसाद में जो सामान्यतः माँ भगवती जगदंबा की, माँ काली की पूजा में जो सामग्री फल इत्यादि लगते हैं वही सामग्री रहेगी, अलग कुछ भी नहीं है।

 भोग के लिए आप लौंग, इलायची, बताशे के साथ-साथ कोई भी मीठी वस्तु या जैसे बेसन का लड्डू हो, बर्फी हो या कोई ऐसी वस्तु जो भोग के लिए आप समर्पित कर सकते हों। और कुछ न हो तो मिश्री को समर्पित अति प्रेम से कर सकते हैं लौंग, इलायची, बताशे के साथ।

माँ मातंगी साधना – पूजन और संकल्प की प्रक्रिया
 

हमेशा की तरह फिर कहूँगा साधना आरंभ करें उससे पूर्व माँ भगवती के मंदिर में जाकर साधना के लिए प्रार्थना कीजिएगा। भगवान शिव के मंदिर में भी जा सकते हैं, वहाँ प्रार्थना कीजिए साधना के लिए और फिर साधना में प्रवृत्त हो जाइए।

 बाकी साधना रात्रि 9:00 बजे आरंभ होगी तो आप दिन में उसकी पूरी तैयारी कर लीजिए। सर्वप्रथम उत्तर या पश्चिम मुख होकर के बाजोट पर माँ भगवती का चित्र, यंत्र, विग्रह स्थापित करके माँ भगवती के दायीं ओर आपकी बायीं ओर एक कलश स्थापित करना है। उस पर एक पानी का नारियल आपको स्थापित करना है। 

सर्वप्रथम अपने ऊपर आचमन कीजिए। थोड़ा सा जल अपने दाहिने हाथ में लेकर के शुद्धि के रूप में अपने ऊपर छिड़किए।

 आचमन शुद्धि के बाद में सर्वप्रथम आपको संकल्प लेना है। संकल्प के लिए अनेकों अनेक बार बता चुका हूँ, अपना नाम, गोत्र और अपना मनोरथ स्पष्ट करते हुए संकल्प लिया जाता है, उस दिन की तिथि, वार, नक्षत्र को बोलते हुए आप संकल्प लीजिए। 

संकल्प के लिए आपको अपने दाहिने हाथ में जल लेना है और उस जल को संकल्प बोलने के बाद में किसी प्लेट में, थाली में छोड़ देना है या फिर गणेश जी पर अर्पित कर देना। 

संकल्प के पश्चात् सर्वप्रथम गणेश जी का, उसके बाद गुरु का, कुलदेव, पितृदेव, स्थानदेव का पूजन करते हुए माँ भगवती का पूजन करना है। माँ भगवती मातंगी के पूजन के साथ-साथ भैरव जी का पूजन करना है और साथ ही आपको अपने इष्ट का ध्यान भी करना है, पूजन भी करना है। 

भगवान शंकर की ध्यान पूजन भी इसमें आपको करना चाहिए। सबका पूजन करने के बाद में आपको सर्वप्रथम गणेश जी की, उसके बाद गुरु मंत्र की एक-एक माला का जप करना है।

माँ मातंगी साधना  विनियोग एवं न्यास विधि

तत्पश्चात् आपको कम से कम 21 माला का जप मूल मंत्र का करना है, जो माँ भगवती मातंगी का मूल मंत्र है। लेकिन ये साधना तांत्रिक साधना है और पूर्व के अनेकों पोस्ट में बता चुका हूँ कि वैदिक और तांत्रिक साधनाओं में विनियोग, न्यास आदि होते हैं तो उनको करना अनिवार्य है।

 साधना में विनियोग, न्यास की विधि के लिए मैं आपको एक बार बता देता हूँ किस प्रकार से विनियोग होगा, किस प्रकार से न्यास होगा। वो आपको स्क्रीन पर मंत्र दिखाई भी दे रहे हैं। 

इन मंत्रों के माध्यम से आप विनियोग कर सकते हैं। यदि किसी को पढ़ने में, बोलने में असुविधा है तो उसके लिए मैं सूक्ष्म विधान और बता देता हूँ। 

विनियोग का तात्पर्य सिर्फ उस देवता को, जिसने इस मंत्र को बनाया उस ऋषि का नाम, उस देवता का नाम, जिसमें इस देवता की शक्ति है, उसको याद किया जाता है, उसके बारे में बताया जाता है।

 तो आप सिर्फ मातंगी का ध्यान कीजिए और अपने गुरु का ध्यान कीजिए। इतना भी करके आप विनियोग कर सकते हैं। हाथ में जल लेकर के न्यास के लिए क्या करना होता है ?

 सरल से सरल विधि देने का प्रयास कर रहा हूँ, क्योंकि जिनका अर्थ यही है, ऋषि ने न्यास, न्यास का अर्थ यही है कि मैं अपने इस अंग से भी आपको नमस्कार करता हूँ, अपने हृदय से भी नमस्कार करता हूँ, अपने मस्तक से भी नमस्कार करता हूँ, अपनी शिखा की तरफ से भी नमस्कार करता हूँ, अपनी पाँचों उंगलियों से नमस्कार करता हूँ एक-एक करके।

 तो यह न्यास है, इसे शुद्धि कहा जाता है कि हर प्रकार से मैंने शुद्धि कर ली है। यदि आपको बोलने में, मंत्रों को बोलने में असुविधा होती है तो आप बारी-बारी से सिर्फ ध्यान करके

 माँ भगवती को बारंबार प्रणाम करते हुए इस साधना को आरंभ कर सकते हैं और इतना करने के बाद भी आपको फल अवश्य ही प्राप्त होगा क्योंकि माँ मातंगी या कोई भी देवी की जब आराधना की जाती है तो हमेशा बताया है कि दुर्गा स्तुति, माँ भगवती जो हैं 

ये दुर्गा के ही स्वरूप हैं और दुर्गा जी भगवती स्तुति यानी प्रार्थना से प्रसन्न होती हैं, अन्य किसी साधन की आवश्यकता है ही नहीं। तो सिर्फ प्रार्थना कीजिए, मन से, हृदय से प्रार्थना कीजिए, अपने आप को समर्पित करते हुए, समर्पण भाव से प्रार्थना कीजिए अगर आपको कोई अन्य मंत्र उच्चारण करने में परेशानी आती है।

विनियोग मंत्र

चलिए सर्वप्रथम विनियोग की विधि देख लेते हैं। विनियोग का मंत्र आपकी स्क्रीन पर है। इस प्रकार है: दाहिने हाथ में जल लीजिएगा और फिर इस मंत्र को बोलिएगा:

ॐ अस्य मन्त्रस्य दक्षिणामूर्ति ऋषिः विराट् छन्दः मातंगी देवता ह्रीं बीजं हूं शक्ति विनियोगः।

जब आप इस मंत्र को बोल लें, दाहिने हाथ में जो जल लिया था उसे आप भूमि पर छोड़ दीजिए।

न्यास (ऋषि न्यास, करण्यास, हृदयादिन्यास)

चलिए अब न्यास करते हैं। सबसे पहले ऋषि न्यास है, फिर करण्यास है, फिर देहन्यासः। विधि मैंने पूर्व में बता दी कि सिर्फ इनसे नमस्कार करना है, इनसे प्रणाम करना है। सर्वप्रथम ऋषि न्यास। मैं बोलता जाऊँगा आप उसके अनुसार इसका ध्यान कर लीजिए। वैसे स्क्रीन पर पूर्ण रूप से लिखने का प्रयास किया है।

ऋषि न्यास:


सर्वप्रथम अपने सिर को स्पर्श करते हुए बोलिए: ॐ दक्षिणामूर्ति ऋषये नमः शिरसि।
दूसरे पर मुख को स्पर्श करना है आपने अपने दाहिने हाथ से और फिर बोलना है: विराट् छन्दसे नमो मुखे।फिर उसके बाद हृदय को स्पर्श करना है और बोलना है: मातंगी देवतायै नमो हृदि।

फिर उसके पश्चात् अपने गुप्त स्थान को, जांघ को स्पर्श करना है: ॐ ह्रीं बीजाय नमो गुह्ये।अपने पैरों को स्पर्श करना है: ॐ हूं शक्तये नमः पादयोःअपने नाभि को स्पर्श करना है: ॐ क्लीं कीलकाय नमः नाभौउसके बाद सभी अंग का स्पर्श करना है और बोलना है: विनियोगाय नमः सर्वांगे।

इस प्रकार से यह ऋषि न्यास हुआ। अब करण्यास है, अपनी हाथों से पाँचों उंगलियों से अलग-अलग न्यास, प्रणाम करना है। उसके बाद होता है हृदयादिन्यास अर्थात दोनों हाथों को जोड़ करके। 

तो जिस प्रकार मैंने बताया अंगों को स्पर्श करते हुए ठीक उसी प्रकार न्यास के सामने हिंदी में मैंने बताया है कि किस प्रकार से स्पर्श करना है। 

 अधिक विस्तारित न हो इसलिए मैं बोलकर नहीं बता रहा हूँ, सिर्फ आपको स्क्रीन पर दिखाई दे रहा है। इसके स्क्रीनशॉट ले सकते हैं, नोट कर सकते हैं। 

यदि फिर भी कोई समस्या आती है तो आप व्हाट्सएप करके मुझसे जान सकते हैं कि किस प्रकार न्यास करना है। करण्यास के बाद हृदयादिन्यास है, आपको स्क्रीन पर दिखाई दे रहा है।

 

ध्यान मंत्र

उसके बाद आपको मातंगी का ध्यान करना है। वहाँ पर पूर्ण समर्पण करते हुए आप इस मंत्र को बोलिए:

या देवी सर्वभूतेषु दयारूपे संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

अर्थात, हे माँ आप मुझ पर दया करना, मुझे क्षमा भी करना यदि मुझसे कोई त्रुटि हो गई हो, कोई भूल हो गई हो और साथ ही साथ मुझे मेरी साधना में सिद्धि प्रदान कर देना। इस मंत्र का भाव है और माँ का विग्रह आप अपने सम्मुख रख कर के उनका ध्यान करते हुए इन तीन मंत्रों को आप सरलता से बोल सकते हैं।

 मातंगी साधना मूल मंत्र जाप

चलिए अब जान लेते हैं उस मंत्र को। वो मंत्र आपकी स्क्रीन पर है:

ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा॥

छोटा सा ये मंत्र है, 21 माला प्रतिदिन आपको करनी है। बहुत छोटा सा मंत्र है, 21 माला में ज्यादा समय नहीं लगने वाला। आपका प्रयास करेंगे तो निश्चित ही यह साधना आपकी सफल होगी। माँ भगवती मातंगी कृपा आपको प्राप्त होगी। 21 माला का आपको जप करना है। 

उससे पूर्व बता चुका हूँ, पहले गणेश जी की एक माला, फिर गुरु मंत्र की एक माला। यदि आपके गुरु नहीं हैं तो क्या करें ? पूर्व में अनेकों अनेक बार बता चुका हूँ, नमः शिवाय भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र का आप जप कर सकते हैं या फिर हमारे गुरुदेव द्वारा बताए गए मंत्र को भी मैं कई बार बता चुका हूँ: ॐ गुरुवे नमः। इस मंत्र का आप जप कर सकते हैं गुरु मंत्र के स्थान पर।

मातंगी साधना  का समापन (पूर्णाहुति)

जब आप मंत्र जाप पूर्ण कर लें, आपकी पूरी 21 माला पूर्ण हो जाए, उसके बाद अपने दाहिने हाथ में जल लीजिएगा और जल लेकर के माँ भगवती का ध्यान करके, माँ मातंगी का ध्यान करके उस जल को इस भाव से भूमि पर ही छोड़ दीजिए माँ के बाएं हाथ की तरफ कि माँ जो भी मैंने जप किया है, जो भी मैंने पुण्य किया है

 जो भी मैंने तप किया है वो सब मैं आपको समर्पित करता हूँ। यह हर साधना में मैं बोलता हूँ कि समर्पण के बाद आसन को प्रणाम करना है, तो यही समर्पण है। जो कुछ भी आपने जप किया है वो हाथ में जल लेकर के माँ के बाएं हाथ की तरफ छोड़ दीजिए। 

उसके बाद माँ भगवती की आपको आरती करनी है। आरती के पश्चात् लौंग, इलायची, बताशे के साथ-साथ किसी मीठे का आपको भोग लगाना है और भोग लगाकर उन्हें एक बार आचमन कराना है। उसके पश्चात् माँ को प्रणाम करके, आसन को प्रणाम करके आप खड़े हो जाइए।

माँ मातंगी साधना के नियम

संभव हो तो इन 9 दिनों में भूमि शयन करना। अपना भूमि पर ही आसन लगा करके, अपना बिस्तर लगा कर के वहीं शयन करना है जहाँ आपने दरबार लगा रखा है, जहाँ आपने माँ की चौकी लगा रखी है। वहीं पर आपको शयन करना है।


एक समय आपको भोजन करना है। भोजन सात्विक हो। संभव हो फलाहार करें, नहीं तो आप एक समय भोजन कर सकते हैं।

सात्विक रहते हुए साधना को आठ दिनों तक आपको करना है। नवें दिन इसकी पूर्णाहुति होगी।
नवें दिन जब आप साधना करेंगे तो उस दिन आपको सिर्फ प्रातःकाल माँ का पूजन करने के बाद में कम से कम एक माला का आपको इस जो मंत्र है, इस मंत्र से आपको माँ का हवन करना है।

 एक माला का हवन में गुरु मंत्र और गणेश जी की माला का भी आपको हवन करना है। ज्यादा नहीं करें गुरु मंत्र, गणेश मंत्र का, तो कम से कम 21-21 आहुति गुरु मंत्र, गणेश मंत्र की आपको अवश्य करनी है। भैरव जी की भी आहुति आपको इसमें करनी है। कम से कम 21 भैरव जी के भी करिएगा।

निश्चित ही माँ मातंगी की कृपा आपको प्राप्त हो जाएगी और आपके सभी कार्य सिद्ध होने लगेंगे। सर्व प्रकार से समाज में मान-सम्मान आपका बनने लगेगा। हर प्रकार की सफलता, सुख, वैभव मातंगी कृपा से आपको प्राप्त हो यही कामना है। माँ मातंगी कृपा आपको प्राप्त हो, उनकी सिद्धि प्राप्त हो यही दिल से कामना है।

मातंगी साधना  महत्वपूर्ण सूचना

 मेरा प्रयास रहता है की मैं प्रत्येक विषय वस्तु को बड़ी सरलता से, सहजता से आप तक पहुँचा सकूँ, परंतु फिर भी यदि किसी प्रश्न का, किसी विषय में समस्या आती है, किसी बात को समझने में आपको परेशानी आती है तो आप व्हाट्सएप कर सकते हैं। 

कृपया कॉल ना करें, फोन मेरे पास नहीं रहता है, वो जिस पर व्हाट्सएप चलता है तो आप व्हाट्सएप कर सकते हैं। संभवतः व्हाट्सएप का जवाब आपको कुछ विलंब से मिल जाए परंतु जवाब मैं अवश्य दूँगा और अभी तक जिन्होंने व्हाट्सएप किया है उन्हें ज्ञात होगा मैं रिप्लाई अवश्य करता हूँ। तो चलिए जानते हैं साधना की विधि को।

जय माता दी। जय श्री राम।

नोट बिना गुरु के साधना  न करे अगर मंत्र में या शलोक में कोई त्रुटि रह जाए तो बताओ 

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माँ कमला महाविद्या साधना विधि विधान गरीब और कंगाली ख़तम होगी ph.85280 57364 दोस्तों, हमारी वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर आपका एक बार फिर से हार्दिक स्वागत है। देखिए, आज मैं आपके सामने इस लेख के माध्यम से जो साधना बताने वाला हूँ, वह दस महाविद्याओं में दसवें नंबर पर जो महाविद्या की साधना आती है, वह माता कमला की साधना है। लक्ष्मी जी के बहुत रूप बताए गए हैं और एक नाम उनमें से दस महाविद्याओं में कमला के नाम से जाना जाता है। यह माता लक्ष्मी की ही साधना है, जो कि दशमहाविद्या में आती है।

 कमला महाविद्या साधना – की साधना क्यों करें?

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अगर आपके साथ में किसी भी प्रकार से आपके कारोबार में समस्या है, आपको अचानक से धन प्राप्ति की कामना है कि कहीं से आपकी लॉटरी लग जाए, कहीं से आपके लिए गड़ा धन मिल जाए, या कहीं से आपको बहुत सारा धन एकदम से अचानक से आपको कहीं से भी मिल जाए, किसी भी प्रॉपर्टी का, कहीं से भी, किसी भी रूप में आपको मिले, तो आपको माता कमला की साधना जरूर करनी चाहिए।

कमला महाविद्या साधना  के लाभ

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यह साधना करने से आपकी आर्थिक उन्नति होगी, आपके कारोबार में किसी प्रकार की समस्या हो, तो उसमें समस्या का निदान होता है। दूसरा, आप जो नौकरी करते हैं या कोई भी व्यवसाय है, उसमें आपको लगातार वृद्धि मिलती है।

कमला महाविद्या साधना अन्य लक्ष्मी साधनाएं

वैसे तो देखिए, मैंने और भी बहुत सारी साधनाएं लक्ष्मी जी की बताई हैं। साबर मंत्रों के द्वारा भी मैंने लक्ष्मी की साधना बताई है और अष्टलक्ष्मी साधना भी मैंने आपको बताई है। 

अष्ट लक्ष्मी की साधना भी बहुत अच्छी साधना है, जो कि नवरात्रि से लेकर के और दीपावली तक के टाइम में आप लगातार कर सकते हैं। और साधना देखिए, कभी भी की जा सकती है, किसी भी शुक्रवार से भी की जा सकती है। 

वह और बहुत ही अच्छी साधना है। जिन्होंने इस साधना को किया है, वास्तव में उनको बहुत अच्छा अनुभव भी मिला है और बहुत अच्छे उनके रोजगार या कारोबार, जो भी उनकी समस्याएं थीं, बिल्कुल एकदम सॉल्व हो गईं।

कमला महाविद्या साधना की शक्ति
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और माता कमला की साधना भी इसी तरह की साधना है। क्योंकि अगर आप किसी भी प्रकार से कोई भी आपको अकस्मात धन, जैसे कि बहुत से लोग बोलते हैं कि हमें लॉटरी का नंबर चाहिए, लॉटरी या फिर उसमें सफलता मतलब किसी भी प्रकार से आप अगर कोई भी ऐसा कार्य करते हैं जिसमें कि आपको धन चाहिए, तो आप हंड्रेड परसेंट आपको इस साधना से जरूर सफलता मिलेगी। क्योंकि यह दस महाविद्या, महाविद्या की साधना बहुत तीव्र, बहुत जल्दी से फल आपको प्राप्त होगा।

कमला महाविद्या साधना समस्याओं का निवारण
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अब देखिए, जो यह लोग महाविद्या की साधना करते हैं, उनके घर में भी अगर किसी भी प्रकार की कोई भी त्रुटि है, कि आपके घर में पितृदोष या फिर और दूसरे दोष आपके जीवन में जो पिछले जन्म से जो आपके साथ में आपके पाप जुड़े हुए हैं, उनकी वजह से आपके सामने समस्याएं खड़ी होती हैं, या इस जन्म के पापों की वजह से समस्याएं खड़ी होती हैं.

 तो या फिर किसी के किए-कराने से, जैसे कि मान लिया कोई किसी के घर पर या किसी भी व्यक्ति पर जादू-टोना करके उसके कारोबार को बर्बाद कर देते हैं, या चलता हुआ कारोबार अचानक से बर्बाद हो जाए, तो यह कमला माता की साधना, जो महाविद्या साधना है .

यह सभी कार्यों में आपको सफलता देती है और आपको एक पूर्णता की तरफ ले जाती है। गृहस्थी जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण साधना है कमला की साधना। क्योंकि माता लक्ष्मी का दूसरा नाम कमला भी कहा गया है।

कमला महाविद्या साधना कब करें ?

तो देखिए, यह साधना आप नवरात्रि में कर सकते हैं, नवरात्रि से आप शुरू कर सकते हैं, या फिर आप किसी भी शुभ दिन से शुरू कर सकते हैं, जैसे होली, दीपावली, दशहरा, जन्माष्टमी, इनसे भी आप शुरू कर सकते हैं। और अगर ऐसा कोई दिन बीच में नहीं है, तो फिर आप किसी भी शुक्रवार से यह साधना शुरू कर सकते हैं।

कमला महाविद्या साधना के लिए आवश्यक सामग्री

अब इस साधना के लिए जो आपको सामग्री चाहिए, वह मंत्र सिद्ध और प्राणप्रतिष्ठायुक्त होनी चाहिए। इसमें आपको कमला यंत्र और स्फटिक की माला भी आप इसमें ले सकते हैं, मूंगे की माला भी इसमें चल जाती है। 

तो आपको दोनों में से कोई भी एक माला हो तो चलेगी। जप के लिए माला होनी चाहिए और एक रक्षा माला होनी चाहिए, ठीक है? और एक सम्मोहन गुटिका। यह चार सामग्रियां इसमें लगेंगी, जो कि मंत्र सिद्ध और प्राणप्रतिष्ठायुक्त होनी चाहिए।

कमला महाविद्या साधना सामग्री कैसे प्राप्त करें?

और यह चारों सामग्रियां आप प्राप्त कर सकते हैं। मैंने व्हाट्सएप नंबर दिया हुआ है इस लेख में ही, आप वहां से मुझे व्हाट्सएप करें और उसके लिए आप आर्डर कर सकते हैं और सामग्री प्राप्त कर सकते हैं। देखिए, सामग्री आपको कोरियर से ही मिलेगी या स्पीड पोस्ट से मिलेगी, पेमेंट आपको पहले ही करनी होती है उसकी। 

और कोई भी व्यक्ति यह न समझे कि हमने पैसा दे दिया तो हमारा पैसा कहीं डूब न जाए या फिर हमें सामग्री न मिले, ऐसा आपके साथ में बिल्कुल नहीं होगा, हंड्रेड परसेंट। 

और जिन लोगों को सामग्री मिल गई है और जो साधना कर भी रहे हैं, आप तो शायद पहली बार लेंगे, लेकिन जो लोग पहले ले चुके हैं, तो वह कई बार उन्होंने सामग्री ले भी ली है।

 उन्हें पता है कि यहां से सामग्री मिल जाएगी और वह आपको यदा-कदा इस लेख के कमेंट में भी आपको बताते रहते हैं कि भई सामग्री हमें मिल गई है, हमें जरूर मिलती है सामग्री। 

यहां एक नंबर से ही काम होता है, यहां पर कोई फ्रॉड नहीं होता। ऐसा यह जो कमेंट है, कमेंट में भी ऐसा बहुत से जो व्यूअर्स हैं, वह बोलते हैं और उनको मिली है, उनको पता है, तो इसलिए वह लिख करके भी दूसरे लोगों को बताते हैं।

कमला महाविद्या साधना जीवन का दृष्टिकोण

और देखिए, बहुत से लोग तो खैर हर तरह के व्यक्ति, उनका तो कहना ही क्या है! कि जो लोग चतुराई से चलते हैं, मैं आपको एक सीधी बात बताता हूँ कि जो लोग चतुराई से चलते हैं कि हम ऐसा करेंगे तो ऐसा होगा, ऐसा करेंगे तो ऐसा होगा, वह लोग जीवन में प्राप्त नहीं कर पाते कुछ भी।

 आप बिल्कुल एकदम सीधे रास्ते से चलिए। बिल्कुल यह कहना कि वह व्यक्ति बहुत सीधा है, ज्यादा तिकड़मबाजी या फिर कोई दूसरी चीज नहीं है कि वह किसी के साथ में धोखाधड़ी ऐसा कुछ करे, वह व्यक्ति वास्तव में बहुत सही रहता है, शांत मन से रहता है .

 भगवान की कृपा उस पर जरूर होती है। और जो यह कहते हैं कि धोखेबाज हो, तरह-तरह के षड्यंत्र रचते हो, उस व्यक्ति को जीवन में कुछ नहीं मिलता, सिर्फ धोखा ही मिलता है।

कमला महाविद्या साधना की विधि

खैर, चलिए, यह साधना आपको नवरात्रि के दिनों में भी कर सकते हैं और नौ दिन के लिए साधना कर सकते हैं इसको। नवरात्रि में केवल नौ दिन, आगे भी आप इस साधना को बढ़ा सकते हैं, 15 दिन भी कर सकते हैं, 21 दिन भी कर सकते हैं, ठीक है? और रात्रि को 9:00 बजे के बाद ही आपको यह साधना शुरू करनी है।

कमला महाविद्या साधना तैयारी

आपको क्या करना है कि आप यह सामग्री लेकर स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और लाल रंग के वस्त्र धारण कर लें तो बड़ी अच्छी बात है, क्योंकि माता को लाल रंग पसंद है। सफेद रंग के वस्त्र भी धारण कर सकते हैं। तो स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें और घर के ही किसी भी एकांत कमरे में कर सकते हैं या फिर अपने पूजा घर में भी आप इस साधना को कर सकते हैं। इसमें किसी भी अवधि में किसी प्रकार के डरने की आवश्यकता नहीं है।

कमला महाविद्या साधना आसन और पूजा स्थल

आप साधना कक्ष में पूर्व दिशा की तरफ़ अपना मुंह करके बैठेंगे और लाल रंग का आसन आप अपने लिए रख लेंगे नीचे बैठने के लिए। सामने जो आपकी चौकी है, उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछा दें और एक तांबे की जो प्लेट है, उसमें एक कमल का फूल जरूर रखें, क्योंकि कमला की साधना है, तो इसलिए माता लक्ष्मी को कमल का फूल सर्वाधिक प्रिय है, तो वह कमल का फूल आप जरूर रखें उसमें, ठीक है?

कमला महाविद्या साधना पूजा की अन्य वस्तुएं

और घी का दीपक, शुद्ध घी का दीपक जलाएं, अगरबत्ती, धूपबत्ती जो भी आपके पास है सुगंधित, वह जलाएं। इत्र भी आप चढ़ा सकते हैं इसमें, क्योंकि लक्ष्मी जी को इत्र चढ़ाया जाता है। साथ ही, चावल भिगो के रख लें, कुछ भी आप मिष्ठान घर में बना करके रख सकते हैं। एक कटोरी में आप रख सकते हैं वह। और सुगंधित पुष्प हो गए, सिंदूर या रोली या कुंकुम जो भी आपके पास है टीका लगाने के लिए, वह भी आप इसमें ले लें।

कमला महाविद्या साधना श्रृंगार का सामान

अब आपको क्या करना होगा कि जब भी आप यह सारी सामग्रियां रख लेंगे, तो आप कमला माता के लिए आप श्रृंगार का सामान भी रख सकते हैं। देखिए, जैसे कि स्त्रियों के श्रृंगार का सामान होता है, वह भी आप रख सकते हैं। 

वह पैकेट बना-बनाया आता है या फिर आप ले लीजिए, दुकान से मिल जाता है, तो वह भी आप रख सकते हैं माता को प्रसन्न करने के लिए। और सामने ही अपने गुरु की तस्वीर, भगवान शिव की तस्वीर और कमला माता यानी कि लक्ष्मी जी की आप तस्वीर जरूर रखें।

कमला महाविद्या साधना पूजन विधि

अब आपको क्या करना होगा, जो आपकी सामग्री है, जैसे यंत्र हो गया, जप की माला, रक्षा माला और सम्मोहन गुटिका, तो आप क्या करेंगे, सबसे पहले आपको भगवान श्री गणेश का पूजन करना है। “वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥”

 हाथ जोड़कर के भगवान श्री गणेश से प्रार्थना करें कि हे गणेश प्रभु, मैं यह कमला माता की साधना करने जा रहा हूँ और इस साधना में मुझे पूर्ण सफलता मिले और हर प्रकार से आप मेरी रक्षा करें। 

इतना कहकर भगवान गणेश जी को सिंदूर का टीका लगाएं, चावल चढ़ाएं, पुष्प चढ़ाएं, धूप-दीप दिखाएं। मंत्र बोलते हुए दिखा सकते हैं, “श्री गणेशाय नमः पुष्पं समर्पयामि, श्री गणेशाय नमः अक्षतान् समर्पयामि, श्री गणेशाय नमः धूपं समर्पयामि।”

 इस तरीके से बोल करके आप सारी चीजें कर सकते हैं, ठीक है? और भगवान श्री गणेश का जो मंत्र है, उनको सर्वाधिक प्रिय मंत्र है, “वक्रतुंडाय हुम्”। इस मंत्र का एक माला का जप जरूर करें और यह आप रुद्राक्ष की माला से ही कर सकते हैं, ठीक है?

 गुरु पूजन

जब भगवान श्री गणेश की आप पूजा-अर्चना कर लें, उसके बाद आपको अपने गुरु की पूजा करनी है। हाथ जोड़कर के प्रार्थना करें और “त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव। त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देव॥” आप इस श्लोक को बोलकर, जो भी आपके गुरु हैं, उनका चित्र सामने होना चाहिए।

 और अगर भगवान शिव को गुरु माना है, तो भगवान शिव की तस्वीर, नारायण को गुरु माना है, तो नारायण की तस्वीर सामने रखें, जिसको भी आपने गुरु माना है। 

और आपके पास गुरु चित्र है, तो आप उसी की तस्वीर रखें। और अगर मेरे गुरु भाई हैं, तो डॉ. नारायण दत्त श्रीमाली जी की तस्वीर सामने रखें और उसके बाद आपको पूजन करना है। इसी तरीके से, जैसे कि मान लिया मेरे गुरु भाई हैं, तो वह क्या करेंगे, “ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः, पुष्पं समर्पयामि।” इस तरीके से पुष्प, चावल, धूप-दीप, सिंदूर का टीका, गुरु जी को, यह सब आप उनको अर्पण करेंगे। 

छोटा सा पूजन करने के बाद आपको गुरू मंत्र का एक माला का जप जरूर कर लेना है और रुद्राक्ष की माला से ही कर सकते हो, ठीक है? जो रुद्राक्ष की माला है, वह मंत्र सिद्ध प्राण प्रतिष्ठायुक्त होनी चाहिए। अगर आपको ऐसी माला भी चाहिए, तो आप ले सकते हैं, आपको मिल जाएगी वह माला भी, ठीक है?

 और जिन साधकों ने किसी दूसरे को गुरु माना है, उनके पास गुरू मंत्र है, जैसे कि वह गोरखनाथ को भी बहुत से लोग गुरु मानते हैं, उनका गुरू मंत्र है, तो वह उसी गुरू मंत्र का जाप करेंगे और उन्हीं का पूजन करेंगे। 

भगवान शिव को आपने गुरु माना है, तो आप भगवान शिव का पूजन उसी प्रकार से करेंगे, “ॐ नमः शिवाय” बोलते हुए और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का ही आपको जप करना है, एक माला का जप रुद्राक्ष की माला से कर सकते हैं। 

और गुरुजी से हाथ जोड़कर प्रार्थना करें कि गुरुदेव, मैं यह साधना करने जा रहा हूँ और इस साधना में मुझे पूर्ण सफलता मिले, ऐसा मुझे आप आशीर्वाद दीजिए।

H4: बटुक भैरव पूजन

उसके बाद आपको भगवान बटुक भैरव का पूजन करना है। मानसिक रूप से आप उनका पूजन कर सकते हैं, अगर फोटो नहीं है तो। फोटो है तो बड़ी अच्छी बात है, सामने फोटो है तो उनका भी पूजन इसी प्रकार से करेंगे। और एक माला का जाप आपको इस मंत्र का जरूर करना है, “ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ”। इस मंत्र का आपको जप करना है और इसी मंत्र को आप बोल करके आप उनका पूजन कर सकते हैं, जैसे कि पुष्प चढ़ाना हुआ, धूप-दीप दिखाना हुआ, यह सब कर सकते हो, ठीक है?

कमला महाविद्या साधना का पूजन

अब इसके बाद आपको क्या करना है कि जो माता कमला की या माता महालक्ष्मी की जो तस्वीर रखी हुई है, उस तस्वीर का भी पूजन आपको इसी प्रकार से करना है, ठीक है? अब उसके लिए आपको माता महालक्ष्मी का कोई भी मंत्र का इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे “ॐ श्रीं लक्ष्म्यै नमः”। इस प्रकार से भी आप बोल सकते हैं।

 जैसा कि देखिए, भगवान का पूजन करने के लिए, माता का पूजन करने के लिए आपकी श्रद्धा होनी चाहिए। श्रद्धा सबसे पहले, श्रद्धा-भाव, विश्वास सबसे पहले। 

अगर यह नहीं है, तो फिर साधना व्यर्थ है, सीधी सी बात है। पूजन करेंगे और जो प्लेट में आपने, तांबे की प्लेट हो या स्टील की प्लेट हो, उसमें आपने जो कमल के पुष्प हैं, कमल की पंखुड़ियों को तोड़ करके और बिछा देंगे और उस पर आपको कमला यंत्र को स्थापित कर देना है। 

और उसके बाद कमला यंत्र के ठीक ऊपर ही आपको सम्मोहन गुटिका जो है, वह स्थापित कर देनी है। और आपको फिर पूजन करना है, कमला यंत्र का पूजन करेंगे, धूप से, दीप से, चावल से, कुमकुम से टीका लगाएंगे और प्रसाद के लिए आप थोड़ी सी कटोरी में कोई भी मिष्ठान अगर आप रख सकते हैं माता के लिए, ठीक है?

कमला महाविद्या साधना में रक्षा विधान

जब आप यह पूजन कर लेंगे, पूजन करने के बाद फिर आपको एक रक्षा माला जो मैंने आपको दी है, उस रक्षा माला को अपने गले में धारण कर लेंगे। और एक मंत्र का आपको जप करेंगे, जिसमें आप रक्षा बंधन करेंगे। उल्टे हाथ में चावल ले करके और सीधे हाथ से सभी दिशाओं में चावल फेंकते हुए आपको मंत्र बोलना है, “ॐ अपसर्पन्तु ये भूता ये भूता भूमि संस्थिता। ये भूता विघ्नकर्तारस्ते नश्यन्तु शिवाज्ञया॥ अपक्रामन्तु भूतानि पिशाचाः सर्वतो दिशम्। सर्वेषामविरोधेन पूजाकर्म समारभे॥” इस मंत्र का जाप करते हुए और सभी दिशाओं में, यानी अपने चारों तरफ कमरे में चावल आपको फेंक देने हैं। यह एक बहुत ही तीव्र और शक्तिशाली रक्षा विधान है।

कमला महाविद्या साधना में विनियोग

जब आप ऐसा कर लेंगे, करने के बाद आपको हाथ में जल लेकर के और विनियोग करना है। और मैं यह सब जो आपको बता रहा हूँ, यह सब मैं आपको लिख करके और इस लेख में ही दे दूंगा। हाथ में जल लेकर के, कुछ जल लेकर के सीधे हाथ में और आपको बोलना है, “ॐ अस्य श्री महालक्ष्मी मंत्रस्य ब्रह्मा ऋषिः, निचरत् छन्दः, श्री महालक्ष्मी देवता, श्रीं बीजं, ह्रीं शक्तिः, ऐं कीलकं, श्री महालक्ष्मी प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः।” यह बोलते हुए आपको यह विनियोग करना है और जल को पृथ्वी पर छोड़ देना है।

कमला महाविद्या साधना में न्यास

अब उसके बाद आपको क्या करना कि बाएं हाथ में जल लेकर के और दाहिने हाथ की सभी उंगलियों को उसमें जल से छुआ करके और पांचों उंगलियों को और मंत्र उच्चारण करते हुए अपने अलग-अलग अंगों का स्पर्श आपको करना है। और मन में आपको भावना देनी है कि यह सभी मेरे अंग तेजस्वी, पवित्र हो रहे हैं। और ऐसा करने से आपके जो अंग हैं, उनमें प्राण चेतना आ जाती है। तो यह ऋष्यादि न्यास है।

 इसमें आप बोलेंगे, “ब्रह्मर्षये नमः शिरसि” (अपने सिर को स्पर्श करेंगे), “निचरत् छंदसे नमः मुखे” (अपने मुख को स्पर्श करेंगे), “श्रीमहालक्ष्मी देवतायै नमः हृदि” (अपने हृदय को स्पर्श करेंगे), “श्रीं बीजाय नमः गुह्ये” (गुप्तांगों को स्पर्श करेंगे), “ह्रीं शक्तये नमः पादयोः” (दोनों पैरों को स्पर्श करेंगे), “ऐं कीलकाय नमः नाभौ” (नाभि को स्पर्श करेंगे), “विनियोगाय नमः सर्वांगे” (पूरे शरीर को स्पर्श करेंगे)।

कमला महाविद्या साधना  में  करन्यास

उसके बाद आपको करन्यास करना है। अपने दोनों हाथों की अंगूठे से अपनी उंगलियों के जो विभिन्न उंगलियां हैं, उनको स्पर्श आपको करना है। ऐसा करने से उंगलियों में प्राण चेतना प्राप्त होती है। “श्रां अंगुष्ठाभ्यां नमः, श्रीं तर्जनीभ्यां नमः, श्रूं मध्यमाभ्यां नमः, श्रैं अनामिकाभ्यां नमः, श्रौं कनिष्ठिकाभ्यां नमः, श्रः करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः।” इस प्रकार से करते हुए आपको करन्यास करना है।

कमला महाविद्या साधना में  हृदयादि न्यास

उसके बाद हृदयादि न्यास करना है। आपको क्या करना है कि दोबारा से अपने उल्टे हाथ में थोड़ा जल लेकर के, पांचों उंगलियों को एक साथ में समूह बना करके, जोड़कर और उनको उसमें पानी में लगा करके और पांचों उंगलियों से ही आपको अपने शरीर के विभिन्न अंगों को स्पर्श करना है। 

और मन में भावना करनी है कि मेरे सभी अंग तेजस्वी, पवित्र होते हैं, जिससे कि आप सभी अंग शक्तिशाली हों, उनमें चेतना प्राप्त होगी। “श्रां हृदयाय नमः” (अपने हृदय को स्पर्श करें), “श्रीं शिरसे स्वाहा” (अपने जो सिर है, उसको स्पर्श करेंगे), “श्रूं शिखायै वषट्” (अपनी शिखा को स्पर्श करेंगे), “श्रैं कवचाय हुम्” (दोनों कंधों पर स्पर्श करेंगे), “श्रौं नेत्रत्रयाय वौषट्” (अपने नेत्रों को स्पर्श करेंगे), “श्रः अस्त्राय फट्” (अपने पूरे शरीर पर आपको सीधा हाथ घुमाकर के चारों दिशाओं में आपको चुटकी बजानी है, सिर के ऊपर से), ठीक है?

कमला महाविद्या साधना में ध्यान और मंत्र जाप

और फिर उसके बाद आपको माता का ध्यान करना है। हाथ जोड़कर के माता भगवती से प्रार्थना करें कि हे मां, मैं आपका पूजन कर रहा हूँ और इस प्रकार से आपको जो यंत्र है, उसका भी आपने पूजन कर ही चुके हैं। 

और मैं आपके जो मंत्र का जाप कर रहा हूँ और मुझे इसमें आप सफलता प्रदान करना। और इसके साथ ही अगर मुझसे कोई गलती हो तो मुझे क्षमा करना। और उसके बाद आपको क्या करना है कि जो आपकी जप की माला है, उस जप की माला से आपको मंत्र जाप शुरू कर देना है।

कमला महाविद्या साधना में मंत्र

और जो मंत्र का आपको जप करना है, वह मैं आपको बता देता हूँ। मंत्र इस प्रकार से है: “ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं ह्सौः जगत्प्रसूत्यै नमः।”

कमला महाविद्या साधना  में जाप की संख्या

इस मंत्र का आपको जप करना है और यह मंत्र का जाप आप 21 माला प्रतिदिन आपको करनी है। आप चाहें तो ज्यादा भी कर सकते हैं, 51 माला का भी कर सकते हैं, ठीक है? अपनी श्रद्धा के अनुसार करें, जितनी देर बैठ सकते हैं। ऐसा नहीं है कि आप बैठ जाएं और फिर कमर दुखने लगे, पैर दुखने लगे, उसमें मंत्र जप करने का कोई फल भी प्राप्त नहीं होता है।

तो इसलिए केवल उतने मंत्रों का जाप करें, जितना आप आराम से बैठ सकें। अगर आप 11 माला का जप करते हैं, तो फिर 11 माला का भी कर सकते हैं आप। साधना को लगातार करें, फिर देखिए आपको जरूर फल तो मिलना ही मिलना है, निश्चित रूप से।

और कहते हैं कि अगर आपने सवा लाख मंत्रों का जाप कर लिया या डेढ़ लाख मंत्रों का लगातार आपने जाप किया, तो आपको साक्षात माता के दर्शन भी हो सकते हैं। यह भी हंड्रेड परसेंट सच है कि माता के दर्शन आपको जरूर हो सकते हैं, अगर आप एक तो लगातार आप साधना करते हैं। और यह आपके ऊपर डिपेंड है कि आप किस प्रकार से साधना करना चाहते हैं, ठीक है?

कमला महाविद्या साधना  में माला का चयन

तो देखिए, इसमें मैंने आपको जो माला बताई, माला आप स्फटिक की भी आप ले सकते हैं, इसमें मूंगे की माला भी चल जाती है, इसमें कमलगट्टे की भी चल जाती है, ठीक है? तीनों मालाएं चल जाती हैं। अगर आपको प्राण प्रतिष्ठित करके मेरे यहां से कोई भी तीनों में से एक माला मिलती है, तो आप उसको ग्रहण करेंगे, ठीक है?

कमला महाविद्या साधना के नियम और अनुभव

और इस मंत्र की जब साधना करेंगे, जब तक, तब तक आपको ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना है। यह नियम के सिद्धांत का पालन करना है। अब मैं आपको एक चीज बता दूं, धर्म के सिद्धांत का पालन करने के लिए आप सिर्फ यह सोचें कि आपको किसी का दिल नहीं दुखाना है, बस बात खत्म। सारी चीजें उसी के अंदर आ जाएंगी। आपके कुछ कार्य करने से किसी दूसरे व्यक्ति का दिल न दुखे, बस और कुछ नहीं करना है आपको, सिर्फ इस चीज का ध्यान रखना है।

कमला महाविद्या साधना संभावित अनुभव

अब इसमें जो आपके सामने अनुभव आ सकते हैं, वह आपके सामने सेम उसी तरीके से आ सकते हैं जैसे कि आपके एक योगिनी साधना में आते हैं या फिर अप्सरा साधना में आते हैं, ऐसे अनुभव आपके सामने आ सकते हैं। तो इसलिए विचलित होने की आवश्यकता नहीं है, साधना आपको कंटिन्यू जारी रखें, ठीक है?

कमला महाविद्या साधना के उपरांत

तो यह साधना बहुत महत्वपूर्ण साधना है जो मैंने आज आपको बताई है। इसमें किसी प्रकार की कोई भी आशंका न करें। जब आपकी साधना पूरी हो जाए, तो इस साधना सामग्री को आप अपने घर पर ही रखें और यदा-कदा आप इसका पूजन करते रहें। यह आपको कहीं विसर्जित करने की आवश्यकता नहीं है, ठीक है?

कमला महाविद्या साधना समापन

इसी के साथ मैं अपने इस लेख को यहीं पर समाप्त करता हूँ। तो मेरे साथ बोलिए, बोलिए वीर बजरंगबली हनुमान जी महाराज की जय! बोलिए मेरे परमहंस गुरुदेव की जय!

note बिना गुरु के न करे अच्छे विद्वान् गुरु के देख रेख में सीख कर करे 

मातंगी महाविद्या साधना का रहस्य तांत्रिक और कथा माता की ph.852857364

मातंगी महाविद्या साधना का रहस्य तांत्रिक और कथा माता की

 

मातंगी महाविद्या साधना का रहस्य तांत्रिक और कथा माता की

मातंगी महाविद्या साधना का रहस्य तांत्रिक और कथा माता की
मातंगी महाविद्या साधना का रहस्य तांत्रिक और कथा माता की

 मां मातंगी तांत्रिक सरस्वती हैं। मातंगी, मां मातंगी। कौन से खास तरीके हैं जिससे मां मातंगी की पूजा करें? मूंगे की माला को आप इस नवरात्रि में सिद्ध कर सकते हैं।

मां मातंगी से कौन सा प्लैनेट जुड़ा हुआ है? मातंगी से सन जुड़ा है, सूर्य। ओके। क्या माता की कृपा जब मिलने लगती है मातंगी की, तो कुछ खास तरीके के इंसिडेंट आपकी लाइफ में होने लगते हैं? सबसे पहले तो आपको चैनलिंग होने लगेगी।

जब आपके अंदर कॉन्फिडेंस और पावर आने लगे, समझ जाइए कि मां मातंगी आपने, उनकी कृपा आप पर हो गई। मां सरस्वती की पूजा करना और मां मातंगी की पूजा करना में अंतर कितना है? मां मातंगी की पूजा जो एक्सीलरेटेड फॉर्म है, आपके नीचे स्केट्स लग गए हैं।

अब आप बिल्कुल तेजी से भाग सकते हैं। लेकिन इसमें यह भी एक जरूरी है कि हमें केयरफुल रहना है। बहुत लोग 10 महाविद्या से डर जाते हैं, उनको लगता है ये बड़े उग्र फॉर्म हैं, क्या हो जाएगा?

म्यूजिशियन है कोई,  उसका बेटा भी सिंगर है। फैमिली में चेन में चली आती है सेम इंडस्ट्री में, क्या वो मां मातंगी की कृपा की वजह से हो रहा है? बिल्कुल।

तंत्र सब सक्सेसफुल लोग करते हैं। बड़े-बड़े लोग जो बड़े-बड़े पदों पर होते हैं, वो भले ही बाहर जाकर शो ऑफ करते हैं कि नहीं ये सब उनकी खुद की प्रैक्टिस की वजह से है, बट वो कहीं ना कहीं तंत्र हेल्प लेते हैं।

बिल्कुल लेते हैं। मेरे से हेल्प लेते हैं। जब तक आपकी इंटेंशन अच्छी है, तंत्र को यूज करना गलत नहीं। है।

 

मातंगी महाविद्या साधना – परिचय

हेलो, हाई, वेलकम। मैं हूं आपके साथ तुषार कौशिक। गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर आज का पोस्ट दश महाविद्याओं की सीरीज में सबसे ज्यादा इंटरेस्टिंग है क्योंकि मैं जो पोस्ट लिख रहा हूं या जो मेरा प्रोफेशन है, वह इन्हीं महाविद्या से जुड़ा हुआ है। आज की जो देवी रहेंगी, आज का जो 10 महाविद्याओं में रूप है, वो है मां मातंगी का।

मां मातंगी के बारे में जो मुझे बताया गया आज के इस पोस्ट में, वो यह है कि यह मां सरस्वती का तांत्रिक फॉर्म है।

यानी कि अगर मां सरस्वती की कृपा आपको एक्सीलरेशन के मोड में चाहिए, अगर आपको तंत्र के जरिए मां सरस्वती से कनेक्ट करना है, तो आपको मां मातंगी की पूजा करनी चाहिए।

और इस सीरीज को लगातार हम गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर कर रहे हैं डॉक्टर मनमीत के साथ। तो आइए, आज के इस पोस्ट को हम शुरू करते हैं और डॉक्टर मनमीत से जानना शुरू करते हैं मां मातंगी के बारे में।

आज की जो यह सीरीज है दश महाविद्याओं की, इसमें हम बात करेंगे आज मां मातंगी पर। और क्योंकि लगातार यह सीरीज बहुत पॉपुलर होती जा रही है और जितने भी पाठक हैं, वो कह रहे हैं कि अगला पोस्ट कब आएगा या अगली देवी के बारे में कब पता लगेगा।

तो आज मां मातंगी की बात करते हैं। रीजन बिहाइंड इट, जितना मैंने समझा, जितना मैंने पढ़ा, बाकी तो आप बताएंगी कि मां मातंगी जो हैं, वो परफेक्शन की देवी हैं।

वो स्किल्स की भी देवी कह सकता हूं, टैलेंट की भी देवी कह सकता हूं। पोस्ट लिखना भी एक टैलेंट है, तो बेसिकली मैं कहूंगा कि मुझे भी उनकी पूजा करनी चाहिए। तो बेसिकली, आप पहले मुझे मां मातंगी के बारे में बताइए, कौन हैं ये देवी? इनकी शुरुआत कैसे हुई है? कहां से इनका प्राकट्य हुआ?

मां मातंगी कौन हैं ?

 मां मातंगी तांत्रिक सरस्वती हैं।

और ये सरस्वती मां का जो, जिसको हम कहते हैं तांत्रिक फॉर्म है। ऑकल्ट की देवी हैं, लर्निंग की देवी हैं, स्पीच की देवी हैं, कम्युनिकेशन, एकेडेमिक्स, ऑकल्ट, एस्ट्रोलॉजी, डीपर साइंसेज, मैजिक, ओके, तंत्र। इसका जितना भी विजडम है, मां सरस्वती की जितनी भी लर्निंग्स हैं, वह आउटसाइड फोकस्ड है।

हमारी स्पीच, हमारी वाणी, हमारा बोलना, हमारा लिखना, पढ़ना। यह इनवर्ड फोकस्ड है। तो बाहर नॉलेज है, अंदर विजडम है। तो ये कहती हैं कि आप अपने सोल को टैप कीजिए, अपनी आत्मा को टैप कीजिए, अपने हायर सेल्फ के साथ मेडिटेशन में जाइए। तो यह बहुत मेडिटेटिव फॉर्म है मां का। और इनका कलर जो है, वह ग्रीन है एंड कपड़े इन्होंने रेड पहने हुए हैं।

मां मातंगी का प्राकट्य और स्वरूप

इनका जो पूरी काया है, वह एमरल्ड ग्रीन है। इनके पास एक पैरेट होता है। और इनका जो प्राकट्य है, वो कहते हैं इनको उच्छिष्ट चांडालिनी भी कहा जाता है।

ऐसा कहते हैं कि लॉर्ड शिवा और माता पार्वती जब एक बार खाना खा रहे थे और उन खानों में से कुछ थोड़ा जो खाना है, वो बच गया और नीचे गिर गया। उस नीचे गिरे हुए जो खाने से जो जन्म हुआ, वो इनका हुआ।

अच्छा, मतलब जो उनकी थाली से बाहर गिरा खाना, उससे मां मातंगी प्रकट हुईं।

मातंगी हैं, प्रकट हुईं। ऐसा कहते हैं कि वह मां पार्वती का उनके फादर के ऊपर एक वरदान था, एक विश थी जो उन्होंने उनको ग्रांट करी। ऋषि मातंग थे उनके फादर और उनकी बेटी हुईं मातंगी।

समाज में उपेक्षितों की देवी

अब क्योंकि वह आउटकास्ट फूड से जन्मीं, तो ऐसा भी कहते हैं कि शी इज द गॉडेस ऑफ द आउटकास्ट। जो शेड्यूल कास्ट होते हैं, या मैं यहां पे शेड्यूल कास्ट को कास्ट सिस्टम में नहीं गिनूंगी, मैं कहूंगी कि अगर आपको शेड्यूल कास्ट फील होता है अपने घर में, या अपने ऑफिस में, या अपनी सोसाइटी में, समाज में, अपने इन-लॉज के घर में, जहां भी आपको एज एन आउटसाइडर देखा जाता है या आपको एज एन आउटसाइडर फील होता है

तो यह वो देवी हैं जिनको आपको प्रसन्न करना है। क्योंकि ये आपकी फीलिंग को एकदम समझ सकती हैं और आपको बहुत कॉन्फिडेंस देती हैं स्पीच का, अपने लिए एक स्टैंड लेने का, खड़े होने का। तो जितने भी लोगों को बड़ा विक्टिमाइज्ड फील होता है, एब्यूज में रहते हैं या उनको लगता है कि हमें छोटी नजर से देखा जा रहा है, यह उनकी देवी है।

 

किन्हें करनी चाहिए मां मातंगी की साधना ?

 

ओके। ये जितने भी ऑकल्ट हैं, एस्ट्रोलॉजर्स हैं, हीलर्स हैं, कोचेस हैं, साइकिक्स हैं, मीडियम हैं, बनना चाहते हैं, इंट्यूशन स्ट्रांग करना चाहते हैं, ऐसे ज्ञान का कोष पाना चाहते हैं जो इजीली अवेलेबल नहीं है।

देखिए, कहते हैं कि ये सिद्धियां तो ऊपर से आती हैं या आप लोगों ने बहुत तंत्र-मंत्र किया होगा या साधना करी होगी पिछले जन्मों में, तब जाकर आपको ये स्थिति प्राप्त होगी।

यह कहीं पर लिखी नहीं हुई, इसकी बुक आप सीबीएसई या एनसीआरटी से खरीद के पढ़ नहीं सकते, कोई कोर्स नहीं है। तो इनको आप साधें।

मैं कहूंगी कि ना सिर्फ इन नवों में, पर अगर आप लाइट वर्कर हैं, एंपैथ, प्योर नॉलेज चाहिए, आपको आकाशिक रिकॉर्ड्स की नॉलेज चाहिए, पास्ट लाइव्स की नॉलेज चाहिए, किसी भी तरीके की यूनिवर्स की नॉलेज चाहिए, आपको इनको साधना चाहिए।

अगर हायर नॉलेज चाहिए, हायर नोट पर आपको जाकर कुछ सीखना है, कुछ अपने आप को टैलेंटेड बनाना है, तो आपको पूजा करनी चाहिए।

 

मां मातंगी की पूजा विधि

 

अच्छा, मां सरस्वती का आपने कहा कि यह तांत्रिक फॉर्म है। मां सरस्वती टैलेंट देती हैं, मां सरस्वती विजडम की गॉडेस हैं। और ऐसे में अगर मैं देखूं, जो लोग म्यूजिशियंस हैं, खासतौर पर जो लोग मां सरस्वती से रिलेटेड जो काम कर रहे हैं या उसमें परफेक्शन चाहते हैं, उन सब लोगों को पूजा करनी चाहिए। लेकिन आपने कहा ये तांत्रिक देवी हैं, तो जहां फॉर्म आ जाती है ना, बात आ जाती है तांत्रिक देवी हैं, तो कुछ खास तरीके भी होते हैं फिर उनकी पूजा के लिए। कौन से खास तरीके हैं जिससे मां मातंगी की पूजा करेंगे, तो बहुत जल्दी आपको वो कनेक्टिविटी बन जाएगी आपकी उनके साथ?

 

मातंगी महाविद्या साधना पूजा की सामग्री और मंत्र

 

बिल्कुल। मूंगे की माला लें और मूंगे की माला को आप इस नवरात्रि में सिद्ध कर सकते हैं। आपको वेस्ट की तरफ डायरेक्शन में बैठना है और कदंब के फूल से इनकी पूजा होती है, घी का दिया जला के होती है। और आप मां को बताएं कि आपको किस चीज में सिद्धि चाहिए।

सपोज आपको आकाशिक रिकॉर्ड्स पढ़ने हैं, सपोज आप म्यूजिशियन हैं या आपको किसी पर्टिकुलर इंस्ट्रूमेंट को साधना है, आपको वायलिन, तबला, गिटार, हारमोनियम, यह तो हो गए म्यूजिक के। अगर आपको किसी टाइप की नॉलेज चाहिए .

आप कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स में बैठ रहे हैं या आपको अपने बच्चों को वो करना है, तो आप एक पेन को साध सकते हैं, आप उनकी किताबें वहां पर रख सकते हैं उस टाइम के लिए, नवरात्रों के टाइम।

जिस भी फील्ड में आपको परफेक्शन चाहिए, कृपा चाहिए, उस चीज को, उसके उससे जुड़े इंस्ट्रूमेंट को आप वहां पर लेकर आइए।

आप वहां पर लेकर आइए और वहां पर आप रखिए और सब दिन उनका दिया जलाएं और उनका जो बीज मंत्र है, उनका जो मंत्र आप करेंगे, वह मंत्र जरूरी है कि आप या तो 10,000 बार करें या हजार बार करें या 100 बार करें, लेकिन नवरात्रों के टाइम पर ही करें। और वह मंत्र है:

ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा

। मैंने यहां स्क्रीन पर भी चला दिया है। एज ऑलवेज, हमें शुरू कहां से करना है? गणेश वंदना से करना है। उसके बाद इनके जो भैरव हैं, वह मातंग शिव हैं। और मातंग शिव का भी जो मंत्र है, आप सिंपली ओम नमः शिवाय भी कर सकते हैं।

आप एक बार कह दें कि मैं मातंग शिव से ले रही हूं कि मैं मातंगी को साधना चाहूंगी और फिर शुरू कर दें। रुद्राक्ष की माला पर ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय 108 बार करने के बाद आप मूंगे की माला ले लें, मां मातंगी का मंत्र करें।

और यह सारी मालाएं देखिए, अलग-अलग पाउच में जरूर होनी चाहिए, माला कभी गिरनी नहीं चाहिए। और आप इनको जो भी प्रसाद चढ़ाएं, वो ग्रीन कलर का हो या रेड कलर का हो। इनका नाइंथ डे होता है।

शी इज द नाइंथ महाविद्या। तो नाइंथ डे पर अगर आप इनको एक ग्रीन साड़ी चढ़ा सकते हैं या रेड साड़ी या ग्रीन एंड रेड साड़ी मिक्स करके चढ़ा सकते हैं।

गर आप ऐसी जगह जाते हैं जहां पर इनका टेंपल है, जैसे शृंगेरी में भी इनका टेंपल है, लेकिन अगर आप ऐसी जगह नहीं रहते जहां इनका डायरेक्ट टेंपल है, आप किसी भी टेंपल में मां को दे सकते हैं, नहीं तो आप इनको चढ़ा के किसी ब्राह्मण की वाइफ को दे सकते हैं।

मां मातंगी और सूर्य ग्रह का संबंध

अच्छा, प्लैनेट के अगर सिस्टम पर मैं जाऊं, तो आपने पहले के भी कई पोस्ट में मुझे बताया है कि जो हर महाविद्या है, वो किसी ना किसी प्लैनेट से जुड़ी हुई है। और आपको अगर उस पर्टिकुलर प्लैनेट को ठीक करना है, तो आप इन महाविद्या की पूजा कर सकते हैं। मां मातंगी से कौन सा प्लैनेट जुड़ा हुआ है?

मां मातंगी से सन जुड़ा है, सूर्य। और सूर्य से बड़ा… ग्रहों के राजा हैं।

नहीं, वो ग्रहों का राजा है। तो आप ये सोचिए कि इनकी कितनी पावर होगी कि इनका जो आधिपत्य है, वो सूर्य पर है। और अगर आप इनकी पूजा शाम को नहीं कर सकते और अगर करें भी, तो भी आपको सुबह जो है सूर्य को अर्घ्य देना ही देना है।

ओके। तो जो लोग मां मातंगी को साधते हैं, वो सूर्य को अर्घ्य जरूर देंगे।

वैसे भी आई थिंक हमें आदत बना ही लेनी चाहिए सूर्य को अर्घ्य देने की।

पक्की हो जानी चाहिए जिंदगी में। स्पेशली जो मेरे फ्रेंड्स हैं, जो इस फील्ड में हैं, जो और हायर नॉलेज चाहते हैं, उनको सूर्य को इसलिए भी अर्घ्य देना चाहिए क्योंकि उनकी लाइफ में सेल्फ-डिसिप्लिन आए। जैसे सूर्य देखिए, कितने डिसिप्लिन से रोज उठते हैं और उसी समय आते हैं।

हमें सनराइज और सनसेट का टाइम पता होता है। सो सन रिप्रेजेंट्स ब्रिलियंस, इट रिप्रेजेंट्स डिसिप्लिन, इट रिप्रेजेंट्स होप। सन कभी नहीं कहता, ‘आज मैं सैड हूं, आज मैं कम चमकूंगा।’ नहीं, वो तो बादल उनके सामने आ जाते हैं, वो तो उतने ही तेज से चमक रहे हैं।

सो ही रिप्रेजेंट्स इटरनल होप। मां मातंगी आल्सो रिप्रेजेंट्स इटरनल होप। अगर आपकी लाइफ में आपको लगता है कि आप कहीं आउटकास्ट हैं, आप ग्रीफ में हैं, आप डिप्रेशन में हैं, आपको लग रहा है कि शायद आप में टैलेंट पूरा नहीं है या टैलेंट होते हुए भी आपकी इज्जत पूरी नहीं है, बिल्कुल जैसा फील हो रहा है, तो मां मातंगी इज द गॉडेस टू प्रे टू।

 

कैसे जानें कि मां मातंगी की कृपा मिल रही है?

 

अच्छा, एक चीज और भी मैं यहां पर समझूंगा आपसे कि मां मातंगी की कृपा अगर किसी को मिल रही है, जैसे आपने अभी एक तरीका बताया कि नवरात्र में आप एक खास इंस्ट्रूमेंट जिसमें भी आपको अपना परफेक्शन चाहिए, आप उसमें पूजा करिए, क्या माता की कृपा जब मिलने लगती है मातंगी की, तो कुछ खास तरीके के इंसिडेंट आपकी लाइफ में होने लगते हैं?

जी बिल्कुल, बहुत ही अच्छा प्रश्न है। सबसे पहले तो आपको चैनलिंग होने लगेगी। चैनलिंग का मतलब, आप आपको एक आवाज अपने दिमाग में आएगी कि आप इसको ऐसा करिए, जिसे मन की आवाज कहते हैं।

हां, मन की आवाज, हायर कॉन्शसनेस।

बिल्कुल, स्पिरिट गाइड्स, मां मातंगी, कुछ भी कह सकते हैं। आपको यह लगेगा कि हां, अब मुझे ये ऐसे नहीं, ऐसे करना है। आपको गाइडेंस आती रहेगी अपने आप, आपको भी नहीं पता कि कैसे।

तो जो चीजों को आप शायद एक साल से ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं, किसी सुर को, ताल को, लय को या किताब पढ़ते-पढ़ते बहुत लोगों को नींद आ जाती है। आपको पता है तुषार, स्पिरिचुअल बुक्स जब लोग पढ़ते हैं, तो उनको लगता है… ओ, कई लोग सो भी जाते हैं ।

 क्योंकि हम, वो जो ज्ञान आ रहा है, वो हमारे अंदर एब्जॉर्ब ही नहीं हो पा रहा। हमारे में और उसमें वाइब्रेशन का फर्क है। इसमें मैं यह बताना चाहूंगी कि जो हमारा कामाख्या पर पोस्ट था, बहुत लोगों ने मुझे कहा कि हम, हमें चार या पांच अटेम्प्ट्स के बाद ही हम पूरा पढ़ पाए

क्यों? क्योंकि किसी को लगा कि मेरे सर में दर्द हो गई है, किसी को लगा कि मुझे नींद आ गई है, किसी को लगा कि मुझे समझ में नहीं आया, उनको तीसरी या चौथी बार समझ में आया।

इसका क्या मतलब है? कि आपकी वाइब्रेशन है और किसी बुक की या पोस्ट की जो वाइब्रेशन है, अगर वो मैच ना करे, तो आप एंड तक पढ़ नहीं सकते। वो जो नॉलेज निकल के आ रही है, वह आपके साथ मैच ही नहीं कर रही है।

ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहाज्ञान और सरलता का अनुभव

तो मां मातंगी को आप प्रे करें। कई लोग ना फॉरेन लैंग्वेजेस सीख रहे होते हैं, जर्मन, स्पैनिश, फ्रेंच जी, और सीख ही नहीं पा रहे होते। संस्कृत। और वो कहते रहते हैं कि ठीक से नहीं आ रहा।

एस्ट्रोलॉजी सीखने की कोशिश कर रहे हैं पर योग याद नहीं रह रहे, कारक याद नहीं रह रहा। तो इसमें आप मां मातंगी को प्रे करें कि आपकी लर्निंग को आसान कर दे। आपके अंदर एक ऐसी विजडम आ जाएगी, आपने कहा क्या साइंस हैं? ईज आ जाएगा, आराम आ जाएगा।

आपको वही काम करने में नए आइडियाज आएंगे, आपके अंदर उत्साह भर जाएगा, आपको किसी के सामने हिचकिचाहट नहीं होगी, आप कॉन्फिडेंस से बोल सकेंगे।

अगर ये सन को रूल करती हैं, तो सन कॉन्फिडेंस का कारक है, हमारे सोलर प्लेक्सस चक्र का कारक है। सोलर प्लेक्सस इज अबाउट पावर। ओके। तो जब आपके अंदर कॉन्फिडेंस और पावर आने लगे, समझ जाइए कि मां मातंगी आप पर, उनकी कृपा आप पर हो गई है।

 

मां सरस्वती और मां मातंगी की पूजा में अंतर

 

तो जो लोग स्पिरिचुअल पाथ पर लगातार आगे बढ़ रहे हैं, मुझे लगता है कि उन लोगों को तो मां मातंगी से सबसे पहले जुड़ जाना चाहिए।

लोग मां सरस्वती से भी बहुत जुड़े हुए हैं, वाग् सिद्धि के लिए भी जुड़े हुए हैं। और मां मातंगी आपको बिल्कुल इन्हीं इंटेंस ऑकल्ट की एनर्जी की तरफ लेके जा सकती हैं।

जितने भी लोग तांत्रिक हैं, जो भी हीलर्स बनना चाह रहे हैं, वो मातंगी से जुड़ें और मातंगी मां की कृपा अगर मिली, तो हायर नोट पर वो ऑकल्ट की प्रैक्टिस कर पाएंगे, मंत्र सिद्धि के लिए कर पाएंगे। सपोज वो अपने हाथों से किसी को मंत्र लिख के देते हैं, तो वो मंत्र उस इंसान को काम कर जाएगा।

अगर आप कोई दवाई बनाते हैं, जैसे मैं बैच फ्लॉवर बनाती हूं, तो मैं मां मातंगी को ही याद करके बनाती हूं। तो जो ड्रॉप्स उसके अंदर जा रहे हैं, वो सिद्ध ड्रॉप्स हैं।

जब दवाई मेरा स्टाफ बनाता है या जब दवाई मैं बनाती हूं या मेरे क्लाइंट्स बनाते हैं, इन तीनों में बहुत फर्क है। तो मां मातंगी को आप ऑकल्ट के किसी भी काम में यूज कर सकते हैं और उनकी पावर्स को यूज कर सकते हैं ताकि वो आपको इजी कर दे, आपके लिए यह पाथ खोल दें

जन्मजात प्रतिभा और पिछले जन्म के कर्म

तो तुषार, स्पिरिचुअल पाथ को हम चूज नहीं करते, स्पिरिचुअल पाथ हमको चूज करता है। और यह डिपेंड करता है कि आप अपने पूर्व जन्म से क्या कोष लेकर आए हैं।

हो सकता है पूर्व जन्म में आप बस कुछ बनने ही वाले थे और आपकी मृत्यु हो गई। या आपको इतनी नॉलेज आ गई पर आप उसको इंप्लीमेंट ही नहीं कर सके किसी भी कारणवश, ठीक है?

लेकिन इस जन्म में जब आप आओगे और आप मां मातंगी के साथ जुड़ोगे, तो आपको सबसे पहले यह पता चलेगा कि आप वहां कहां छोड़ के आए। कैसे? आपको सडनली एक विद्या आ जाएगी जो लोगों को साल लगेंगे समझने में, आपके सामने वो नंबर्स बोलेंगे, चार्ट बोलेगा, आपके सामने एक इंट्यूशन लाई जाएगी

। क्लाइंट आपके सामने बैठा है, आपके सामने एक इमेज आ जाएगी कि इन दोनों की कल लड़ाई हुई थी, यह डेंजर में है। क्लाइंट ने आपको कुछ भी नहीं बोला, पर ये जो सामने पिक्चर आ गई, यह बताती है कि आपने पिछले जन्म में अपनी दिव्य दृष्टि को खोलने की कोशिश की थी जो इस जन्म में आपको खुली है।

आपकी, आपको उसका फल मिल गया या मिलने वाला है और आपको मां मातंगी से जुड़ना है। तो ऐसे लोग तो या तो 10 महाविद्या की वर्कशॉप करें या इन्हीं 10 दिनों में मां मातंगी को जरूर साधें।

अच्छा, जो लोग कहते हैं कि यह बॉर्न टैलेंट है, जैसे कहते हैं कि अरे, ये बच्चा तो बचपन से बहुत अच्छा सिंगर है। या ये कुछ अलग तरह की सुपर नेचुरल ताकतें किसी को मिलती हैं। ये आपने जो अभी कहा कि पिछले जन्मों में आपने उसकी प्रैक्टिस की थी, उस जन्म में आपको रिजल्ट नहीं मिल पाया और इस जन्म में आपको रिजल्ट मिल रहा है।

बिल्कुल, बिल्कुल सही कहा आपने। और कुछ ऐसे भी तो लोग हैं जिन्होंने पिछले जन्म में बहुत कुछ किया और इस जन्म में वो एक्टिवेट ही नहीं हुआ। उनके अंदर एक चाह ही रह जाती है, एक-एक इच्छा ही रह जाती है और उनको लगता रहता है कि मुझे ये करना है पर टाइम ही नहीं मिलता।

लेट्स से कथक, लेट्स से सिंगिंग, लेट्स से एस्ट्रोलॉजी, उनको कुछ तो खिंचाव आता है। ऐसे लोगों को इन नौ दिनों में मां मातंगी को जरूर साधना चाहिए क्योंकि वो उसके बाद आपको क्लियर कर देंगी कि आपका रास्ता क्या है।

आपने कहा कि यह मां सरस्वती का तांत्रिक फॉर्म है, तो मां सरस्वती की पूजा करना और मां मातंगी की पूजा करना में अंतर कितना है?

मां मातंगी की पूजा जो एक्सीलरेटेड फॉर्म है, आपके नीचे स्केट्स लग गए हैं। अब आप बिल्कुल तेजी से भाग सकते हैं। लेकिन इसमें यह भी एक जरूरी है कि हमें केयरफुल रहना है क्योंकि एनर्जी हाई है।

मतलब एक छोटी-सी तार है जिसमें से थोड़ा करंट लग सकता है और एक बहुत बड़ी तार है। तो बहुत बड़ी तार आपको जल्दी तो करा देगी, लेकिन आपको जुड़ना होगा। बहुत लोग 10 महाविद्या से डर जाते हैं, उनको लगता है बड़े उग्र फॉर्म हैं, क्या हो जाएगा?

जी, जब तक आप कुछ बहुत गलत ना करें, तो कुछ भी नहीं होगा। तो अपने मन का भाव साफ रखिए, एक बच्चे की तरह मां को अप्रोच कीजिए।

आपको फीलिंग खुद ही आ जाएगी। हो ही नहीं सकता कि आप ये पोस्ट पढ़ रहे हैं जब तक आप इस सब्जेक्ट के साथ पिछले जन्म में नहीं जुड़े हैं। हो ही नहीं सकता। अगर आप यह पोस्ट पढ़ रहे हैं, इसका मतलब आप पिछले जन्म में या तो हीलर थे, ऑकल्टिस्ट थे, मीडियम थे, साइकिक थे, कुछ तो थे, आकाशिक रिकॉर्ड रीडर थे, कीपर थे, पिरामिड्स के साथ आपका जुड़ाव रह चुका है।

इस जर्नी को आपको जरूर फिर आगे पर्स्यू करना है। और यह नवरात्रों का टाइम बहुत पावरफुल टाइम है इस जर्नी के ऊपर लाइट डालने के लिए, इसको, इसको, इसके आगे से पर्दा हटाने के लिए। तो मां मातंगी इज द परफेक्ट चॉइस फॉर दैट।

क्या सफल लोग तंत्र की सहायता लेते हैं?

मां मातंगी की पूजा कौन लोग करें, यह तो आपने बताया। लेकिन कुछ ऐसी फैमिलीज होती हैं, जैसे क्योंकि मां मातंगी की हम बात कर रहे हैं, तो मैं ये बात कर रहा हूं जहां पर पीढ़ी दर पीढ़ी आप देखेंगे, तो सब एक ही लाइन में हैं। जैसे म्यूजिशियन है कोई, उसके सिंगर है उसका, तो वो भी सिंगर है। चेन में चली आती है। क्या वो मां मातंगी से हो रहा है?

बिल्कुल। जो उनका जुड़ाव है और जो उनकी उन्नति है। चलो जुड़ाव तो हो गया, उसके बाद उनकी प्रोग्रेस, उनकी उन्नति। तो कहीं ना कहीं या वो मां मातंगी को बहुत मानते हैं। यहां पर मैं आपको यह कहना चाहूंगी कि लोग प्रिटेंड करते हैं कि वे यह सब नहीं करते। तंत्र सब सक्सेसफुल लोग करते हैं।

ओके। जितने भी लोग किसी… आपके तो बड़े हाई-प्रोफाइल क्लाइंट्स हैं, तो आप नाम तो मत लीजिएगा, लेकिन आप क्या इस बात को कह सकते हैं कि बड़े-बड़े लोग जो बड़े-बड़े पदों पर होते हैं, वो भले ही बाहर जाकर शो ऑफ करते हैं कि नहीं ये सब उनकी खुद की प्रैक्टिस की वजह से है, बट वो कहीं ना कहीं तंत्र हेल्प लेते हैं?

बिल्कुल लेते हैं। मेरे से हेल्प लेते हैं। मेरे से पूजाएं कराते हैं। मेरे पुलिस और बिल्कुल पॉलिटिशियंस, बॉलीवुड के लोग आते हैं, सिंगर्स आते हैं, सिंगर्स की वाइफ्स आती हैं, एथलीट्स आते हैं, जो लोग बहुत इंटरनेशनल लेवल पर खेलने जाते हैं, वो आते हैं हरियाणा से। तो वो सब, वो, हां, वो सब तंत्र की हेल्प लेते हैं। बिल्कुल सब तंत्र की। बिजनेसमैन लेते हैं।

ओके। बिजनेसमैन लेते हैं। कुछ ऐसे लोग आते हैं जो प्रिजन में जा चुके हैं, जेल जा चुके हैं, उनको अपनी लाइफ में आगे कोई कुछ करना है। बहुत सारे तरह के लोग आते हैं और सब तंत्र की हेल्प लेते हैं। लोग कहते हैं सिर्फ कि वे हो, ये नहीं, वो नहीं। लेकिन तंत्र एक सटीक तरीका है किसी चीज को सिद्ध करने का। और जब तक आपकी इंटेंशन अच्छी है, तंत्र को यूज करना गलत नहीं है।

 

निष्कर्ष

चलिए, बहुत अच्छा लगा मुझे आज के इस पोस्ट में आपसे बात करके कि मां मातंगी पर हमने बात की और क्योंकि पोस्ट लिखना और इस फील्ड में आगे बढ़ना, यह भी कहीं ना कहीं मां मातंगी की कृपा बहुत जरूरी है। तो मुझे लगता है मुझ पर और आप पर, दोनों पर मां मातंगी की कृपा बनी रहनी चाहिए। आज के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

थैंक यू।

Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या साधना विधि विधान मंत्र रहस्य गरीबी ख़त्म होगी

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Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या साधना विधि विधान मंत्र रहस्य गरीबी ख़त्म होगी

Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या साधना विधि विधान मंत्र रहस्य गरीबी ख़त्म होगी
Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या साधना विधि विधान मंत्र रहस्य गरीबी ख़त्म होगी

Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या साधना विधि विधान मंत्र रहस्य गरीबी ख़त्म होगी हम आपके लिए गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर 10 महाविद्याओं की एक लेख श्रृंखला लेकर आए हैं और इस श्रृंखला में हम लगातार एक-एक कर तमाम महाविद्याओं के बारे में बात कर रहे हैं। 

उनसे जुड़ी हुई कहानी और किस्से क्या हैं, वह तमाम डिटेल में हम आपके लिए लेकर आ रहे हैं और आज हम बात करेंगे 10 महाविद्या में से आख़िरी महाविद्या मां कमला महाविद्या के बारे में और इनके रहस्य से और इनसे जुड़े किस्सों से पर्दा आज उठाएंगे डॉक्टर मनमीत कुमार।

 

Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या का परिचय और उत्पत्ति

Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या साधना विधि विधान मंत्र रहस्य गरीबी ख़त्म होगी
Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या साधना विधि विधान मंत्र रहस्य गरीबी ख़त्म होगी

 10 महाविद्याओं के बारे में आपने तमाम डिटेल में बताया इससे पहले, किस तरह से उनका हमारे जीवन पर प्रभाव है और किस-किस तरह से उनकी साधना की जानी चाहिए। दसवीं और आख़िरी महाविद्या हैं मां कमला महाविद्या। एक बार मां कमला महाविद्या के बारे में थोड़ा सा समझना चाहेंगे कि इनका यह रूप क्यों है और किस तरह से इस रूप की उत्पत्ति हुई और इसका हमारी लाइफ पर किस तरह से प्रभाव पड़ता है?

 थैंक यू राज जी, यह लेख श्रृंखला मेरे लिए भी बहुत ही इंटरेस्टिंग है। मां कमला महाविद्या दसवीं महाविद्या हैं और शायद मां काली के साथ-साथ सबसे ज्यादा पूजी जाने वाली महाविद्या हैं। और इनकी जो उत्पत्ति है, वह समुद्र मंथन से हुई थी और जब सब कुछ नष्ट हो गया था, अमृत निकलने के बाद जब सब कुछ नष्ट हो गया था, तो मां लक्ष्मी का ही फॉर्म हैं मां कमला, मां कमला महाविद्या। 

और उनकी उत्पत्ति एक कमल के फूल पर हुई और उनको प्रे करके वापस इस धरती के ऊपर, जिसको हम कहते हैं फर्टिलिटी, धन, धान्य, वैभव, सब चीजों में जो जान है, जो धन है, जो ग्लो है, जो ब्यूटी है, वह मां कमला महाविद्या हैं।

तो इनकी जो उत्पत्ति है, वह समुद्र मंथन से ही हुई और ऐसा कहा जाता है यहां पर दो धारणाएं हैं। एक धारणा कहती है कि शिव शंभू का ही दसवां फॉर्म जो है, वह कमल है और मां पार्वती की ही उत्पत्ति से मां कमला महाविद्या का जन्म हुआ और यह मां काली का ही फॉर्म है और 10 महाविद्या का फॉर्म है।

 एक और थॉट प्रोसेस है जो कहती है कि ये तांत्रिक लक्ष्मी हैं और यह भगवान श्री हरि विष्णु की, और यह एक अकेली महाविद्या हैं जिनका शिव शक्ति के साथ कोई ऐसा संबंध नहीं है। 

तो दोनों जो धारणाएं हैं, वो लोगों के बीच में हैं लेकिन मैं यह मानती हूं कि ये तांत्रिक लक्ष्मी हैं और तांत्रिक लक्ष्मी दूसरी लक्ष्मी से, जो हम नॉर्मल मां लक्ष्मी को मानते हैं, उनसे थोड़ी सी जो है, वह अलग हैं।

 

मां लक्ष्मी और तांत्रिक लक्ष्मी (कमला महाविद्या) Kamla Mahavidya  कमला महाविद्या में अंतर

 

 किस तरह का अंतर आप यहां इसको अगर डिफरेंशिएट किया जाए, मां लक्ष्मी और तांत्रिक लक्ष्मी यानी कि मां कमला महाविद्या के बारे में ?

 तो जो तांत्रिक किसी भी फॉर्म का, किसी भी गॉडेस का जो तांत्रिक फॉर्म होता है, वह उनका थोड़ा सा उग्र फॉर्म होता है। एक तो उनको जल्दी साधा जा सकता है, उनसे हमें ज्यादा बेनिफिट्स मिलते हैं, लेकिन अगर गलत हो जाए तो उल्टा भी उतना ही पड़ता है। तो दोनों तरफ से इट्स अ डबल एज्ड सोर्ड। 

तांत्रिक लक्ष्मी जो हैं, उनके मंत्र मां लक्ष्मी से ज्यादा स्ट्रांग होते हैं। तांत्रिक इनको बहुत साधते हैं अपने फायदे के लिए और अगर हम चाहें तो हम भी इनको साध सकते हैं। 

ज्यादातर इनको साधा जाता है धन-धान्य के लिए और जो मॉडल्स होते हैं, जो फिल्म इंडस्ट्री में होते हैं, जो संगीतकार होते हैं, जिनका भी रूप जैसे कैमरे पे बहुत आता है और जो ब्यूटी के लिए यह करना चाहते हैं, जिनको पुत्र प्राप्ति के लिए चाहिए, चाइल्ड बर्थ के लिए चाहिए, फर्टिलिटी के लिए चाहिए, अगर आपके बहुत सारे खेत हैं या आपका खाने का काम है और आपको अपनी जमीन उपजाऊ चाहिए, ऐसी चीजों के लिए जो है, हम मां लक्ष्मी को मानते हैं।

 

 कमला महाविद्या का स्वरूप और महत्व

 

तो जो तांत्रिक लक्ष्मी हैं, जो मां कमला महाविद्या हैं, वे ऐसा कहते हैं कि मां लक्ष्मी के भी बहुत-बहुत ज्यादा सौम्य और उग्र स्वरूप हैं। तो अगर आप इनका चित्र देखें तो चार एलीफेंट्स हैं, चार हाथी हैं जो इनको नहला रहे हैं पानी से भी और शहद से भी, अमृत से भी। 

तो ये ऐसा कहते हैं कि जो मां कमला महाविद्या अगर किसी की साधना में आ जाएं या उनके स्वप्न में आ जाएं तो ऐसा लगता है कि 100 सूरज एक साथ चमक रहे हैं। 

इतनी रेडियंस है मां कमला महाविद्या में कि आदमी चकाचौंध हो जाता है। तो सोचिए अगर उनके स्वरूप मात्र में इतनी रेडियंस है, अगर उनकी 1% भी आपके ऊपर कृपा होती है, कृपा हो गई, तो आप यह समझ लीजिए कि वह जीवन, उस आदमी का जीवन जो है, कभी सेम नहीं रह सकता। हमारे बहुत बड़े-बड़े जो इंडस्ट्रियलिस्ट हैं, वहां पर मां कमला महाविद्या की पूजा तांत्रिक दिन-रात करते हैं।

 महाविद्याओं की बात करें, जो 10 महाविद्या हैं, उनमें से बाकी जो महाविद्या हैं, जो मां के जो स्वरूप हैं, बहुत उग्र स्वरूप हमने देखे, डिस्ट्रॉय की बात की, डेथ की बात की, लेकिन अगर मां कमला महाविद्या के बारे में बात करें, तो उनका रूप-स्वरूप किस तरह का है और जो यह मां हैं, वह आपके जीवन में किस तरह का प्रभाव डालती हैं? अगर सीधे तौर पर इसको समझने की कोशिश करें तो?

 

Kamla Mahavidya कमला महाविद्या  अष्टलक्ष्मी का स्वरूप

 

मां कमला महाविद्या अष्टलक्ष्मी भी अपने अंदर लेकर बैठती हैं। तो अष्टलक्ष्मी अलग-अलग तरह की लक्ष्मी हैं। ऐसा भी कहते हैं कि मां कमला महाविद्या गज लक्ष्मी का फॉर्म हैं, क्योंकि अगर आप उनका फॉर्म देखें तो उनके साइड पर जो है, चार गज हैं, जिसको हम हाथी, एलीफेंट भी कहते हैं। तो गज लक्ष्मी क्या देती है? हाथी में क्या होता है? स्ट्रेंथ। हाथी में क्या होता है? 

एक ऐसी क्षमता कि वह कुछ भी कर सकता है। तो इसको हम जो है, मां लक्ष्मी का स्वरूप मानते हैं। आप इनको पिंक कलर से डिनोट कर सकते हैं, रेड कलर से डिनोट कर सकते हैं और गोल्ड और वाइट से डिनोट कर सकते हैं।

 ये इनके कलर्स हैं। अगर किसी को भी मां कमला महाविद्या को देखना है या उनकी साधना या पूजा करनी है तो यह कलर्स वह खुद भी पहनें और यह कलर्स का वह आसन भी लगाएं।

तो जो अष्ट लक्ष्मियों का फॉर्म है, वह है आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी और विजय लक्ष्मी। अब अगर आप इन आठ फॉर्म्स को देखें तो यह आठ में इंसान जो-जो चाह सकता है, वह-वह सब इन आठ के अंदर ऑलरेडी इंबाइब्ड है।

 

Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या साधना का अंतिम पड़ाव और स्वतंत्र स्वरूप

 

तो मां कमला महाविद्या ऐसा कह सकते हैं कि जब नौ महाविद्या से हमने उग्र फॉर्म देख लिया, हमने डिस्ट्रक्शन देख ली, हमने लोगों का धोखा देख लिया, मां बगलामुखी की साधना कर ली, कोर्ट केसेस हो गए, दुश्मन हो गए, यह सब करते-करते जब एक साधक एंड में आता है, तो शिव-शक्ति उनको कहते हैं कि आइए, अब आपने यह सारे पड़ाव जो हैं, पूरे कर लिए हैं। अब मैं आपको एक फाइनल वेल्थ, एक धन-धान्य का वरदान देता हूं। 

तो ऐसे समझ लीजिए क्योंकि बहुत सारे लोग जो हैं, 10 महाविद्या को हर एक महीने में या 40 दिन में एक महाविद्या को साधते हैं। उस फॉर्म पर विजय पाकर, जितनी वह पा सकते हैं, उस बिहेवियर को अपनी लाइफ में लाकर, जैसे अगर वह मां भैरवी की साधना कर रहे हैं, तो डिस्ट्रक्शन को एक्सेप्ट करके, डिस्ट्रक्शन के थ्रू जाकर फिर नेक्स्ट फॉर्म में जाएंगे, फिर कंपटीशन को एक्सेप्ट करके फिर नेक्स्ट फॉर्म में जाएंगे। 

ऐसे करते-करते जब वह नौ पड़ाव पार कर लेते हैं, तो वह मां कमला महाविद्या पे आते हैं, जहां मैं कहूंगी कि सिर्फ गिफ्ट्स ही गिफ्ट्स हैं। उनका बहुत सौम्य रूप है। यह 10 महाविद्या का उग्र रूप नहीं है, लेकिन यह मां लक्ष्मी का, जिसे कहते हैं, उग्र रूप है।

क्योंकि मां लक्ष्मी हरि विष्णु के पैर दबाती हुई एक सौम्य एनर्जी में वह अपने आप को दर्शाती हैं। हम सबके घर में जो फोटोज होती हैं, वह वैसे ही दिखाती हैं कि मां लक्ष्मी विष्णु जी के जो हैं, पैर दबा रही हैं। लेकिन जो तांत्रिक लक्ष्मी हैं, मां कमला महाविद्या, वह अपने अंदर एक पोटेंशियल रखती हैं इविल को डिस्ट्रॉय करने का, उसका नाश करने का, विनाश करने का। तो वह किसी पर डिपेंडेंट नहीं हैं

इनका जो रूप है, वह अपने सब महाविद्यास का जो रूप है, वह अपने कंसोर्ट, मतलब अपने जो मेल भगवान हैं, उनके बिना है। तो यह दर्शाया जाता है कि हर महाविद्या अपने में संपूर्ण है। तो ऑल दो यह फीमेल फॉर्म है, लेकिन यह संपूर्ण फॉर्म है। यह किसी पर डिपेंडेंट नहीं है अपनी रक्षा के लिए, अपनी सुरक्षा के लिए या किसी भी और चीज के लिए।

 तो यह मां लक्ष्मी का जो तांत्रिक रूप है, वह किसी पे डिपेंडेंट नहीं है। वह अपने आप ही, देती तो मां लक्ष्मी भी हैं, लेकिन यह किसी पे भी, एनर्जी जो है, इंडिपेंडेंट है, डिवाइन फेमिनिन की एनर्जी है।

जिज्ञासु  नहीं, यह बहुत अच्छी बात आपने बताई क्योंकि हम जितने ही मां के रूप आमतौर पर देखते हैं, हम अपने घरों में जो तस्वीरें हैं या पूजा-पाठ करते हैं, तो कहीं ना कहीं एक देव भी उनके साथ होते हैं। महादेव की बात कर लें, पार्वती जी की बात कर रहे, हरि नारायण की बात कर रहे, लक्ष्मी जी की बात कर रहे, तो इस तरह से बहुत सारे रूप हैं। तो यह आपने बिल्कुल ठीक कहा कि यह इंडिपेंडेंट आइडेंटिटी यहां पर है।

 

Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या साधना की सही पूजन विधि

 

जिज्ञासु  अब मां लक्ष्मी और मां लक्ष्मी का ही जो तांत्रिक रूप है, है मां कमला महाविद्या। जो हम घर में मां लक्ष्मी की या लक्ष्मी मां की पूजा करते हैं, बहुत साधारण तरीके से करते हैं। अगर उनकी तस्वीर और मूर्ति है तो हम हाथ जोड़कर, फूल चढ़ाकर हम जो है, उन्हें साध लेते हैं। हमें लगता है कि हमने एक पूजा पूर्ण कर ली है।

 लेकिन अगर मां कमला महाविद्या की तरफ हम आते हैं, तो यहां जो पूजा के लिए क्या कुछ तरीके होने चाहिए? क्योंकि जो एक बात आपने कही, जो बेहद खास है, जो दर्शकों को भी जाननी चाहिए कि इन्हें साधना आसान तो है, लेकिन साधना करते-करते अगर आपने गलत तरीके से साधना की तो उसके असर, इंपैक्ट जो है, वह गलत भी आ सकता है। तो वहां किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है?

मां कमला महाविद्या की जो आराधना है, वह बाकी नौ महाविद्या से आसान है और यह गलत होना मुश्किल है क्योंकि हम उनसे बहुत प्रोस्पेरिटी मांग रहे हैं, धन-धान्य मांग रहे हैं।

 इसमें केवल एक चीज का ध्यान रखना जरूरी है कि हम किसी गलत चीज के लिए धन न मांगें या किसी और का अर्जित किया हुआ धन, उस पर अगर हमारी नजर है क्योंकि मां कमला महाविद्या कहती हैं कि यूनिवर्स में इतना धन है कि अगर आपको चाहिए तो मैं दूंगी। लेकिन अगर आपको गलत रीजन के लिए चाहिए या आप एक ड्रग डीलर हैं, आपको कुछ गलत काम के लिए धन चाहिए या वेपंस के लिए चाहिए या डिस्ट्रक्शन के लिए चाहिए तो नहीं होगा।

 

Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या साधना पूजा के नियम और स्थापना

 

इनकी पूजा हम सफेद आसन लगाकर करते हैं, पिंक आसन भी लगा सकते हैं, रेड भी लगा सकते हैं। और इनको वहां स्थापित करके, लेकिन एक बात है मां कमला महाविद्या के बारे में कि जितनी ब्यूटी आप उनकी देख रहे हैं, जितना सौंदर्य, जितना रूप आप उनका देख रहे हैं, वह रूप आपके अंदर जरूर होना चाहिए।

 इसका मतलब हमारे अंदर एक क्लीनलीनेस होनी चाहिए, एक सौंदर्य होना चाहिए जिसको हम कहेंगे कि जजमेंट नहीं करनी, किसी के लिए गॉसिप नहीं करनी, इवल थॉट्स नहीं सोचने क्योंकि अगर यह पार्ट हमारा क्लीन नहीं है, मां का कोई भी और, चाहे वह मां लक्ष्मी ही हों, आपके ऊपर कभी भी कृपा नहीं आ सकती।

जिज्ञासु घर में स्थापना करनी चाहिए मां कमला महाविद्या की?

बिल्कुल करनी चाहिए। और इनको अपने लॉकर के ऊपर स्थापित करना चाहिए, ऑफिस के लॉकर, जो तिजोरी होती है, उसके ऊपर स्थापित करना चाहिए। 

और इनके आगे तुलसी की सूखी हुई जड़ को धोकर, सुखाकर आपको अपने लॉकर में रखना चाहिए। इससे आपका जो धन है, वह बहुत ज्यादा मल्टीप्लाई हो जाएगा।

 

Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या साधना पूजा का समय, दिन और सही मंत्र

 

जिज्ञासु  पूजा का समय और दिन ?

पूजा का दिन दसवां दिन और पूजा का समय हमेशा महाविद्या का रात के 9:00 बजे के बाद।

जिज्ञासु  मां कमला महाविद्या को पूजने और साधने के लिए सही मंत्र क्या है? क्योंकि इसको लेकर भी बहुत सारे लोगों के मन में अलग-अलग मंत्र जो हैं, अलग-अलग बातें हमेशा रहती हैं। अगर हम गूगल पर सर्च करने जाएं तो वहां भी एक बड़ा कंफ्यूजन रहता है। एक सही मंत्र कौन सा है?

: देखिए, मां लक्ष्मी और मां कमला महाविद्या का जो बीज मंत्र है, वह है ‘श्रीं’। अगर आप कुछ नहीं कर सकते तो आप ‘श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं’ 108 बार करें स्फटिक की माला पर या कमल गट्टे की माला पर। 

तो यह आपको जो है, अपने में ही बहुत धन देगा। अगर आप गाड़ी चला रहे हैं, चल रहे हैं, बैठ रहे हैं, उठ रहे हैं, सिवाय वॉशरूम जाने के, आप जो भी कर रहे हैं, अगर आप उसमें ‘श्रीं श्रीं श्रीं’ करेंगे, यह एक मैग्नेटिक पुल है कि मां खिंची चली आएंगी। लेकिन मां कमला महाविद्या का जो मंत्र है, वह है ‘ॐ नमः कमल वासिन्यै स्वाहा’। 

जो भी तांत्रिक मंत्र होता है, उसको हम चलते-फिरते नहीं कर सकते। उसकी पूरी एक विधि-विधान होता है, जो अगर दर्शक इंटरेस्टेड हैं तो मैं उनके साथ ऑफलाइन शेयर कर लूंगी। वह उसी जगह पर, उसी आसन पर बैठकर, उसी विधि-विधान से करने चाहिए। 

लेकिन अगर सब लोग जैसे बहुत बिजी होते हैं और नहीं कर पा रहे यह मंत्र और उस तरह का शुद्धीकरण अपने घर का नहीं कर पा रहे या अपना नहीं कर पा रहे, तो ‘श्रीं’ उतना ही पावरफुल मंत्र है। आप ‘श्रीं श्रीं श्रीं श्रीं’ जो है, करते हुए जा सकते हैं।

 

 मां की कृपा और उसके संकेत

 

मैं अभी आपको यही बता रही थी राज जी कि ‘श्रीं’ में और यह जो मां कमला महाविद्या का मंत्र है, इसमें यही फर्क है कि मां आपसे क्या बुलवाना चाहती हैं। तो जब बहुत साल पहले कोविड था, तो जैसे मेरे सपने में मां लक्ष्मी आईं और उन्होंने कहा कि आप अष्टलक्ष्मी का वर्कशॉप करवाइए। तो बहुत सारे मेरे दर्शक यहां जानते होंगे, आपने शायद अटेंड भी किया होगा। 

मां अष्टलक्ष्मी के जो आठ फॉर्म्स होते हैं, दिवाली से पहले वह वर्कशॉप होती है और बहुत हजारों की तादाद में लोगों ने ज्वाइन किया था और उस समय लोगों के बहुत सारे एक्सपीरियंस हुए थे इसको लेके। अगले साल मां ने कहा कि अब आप 10 महाविद्या की वर्कशॉप करवाइए।

 यह हमारा दूसरा साल है 10 महाविद्या की वर्कशॉप का और जो एक्सपीरियंस लोगों के हो रहे हैं ऑलरेडी, क्योंकि इसकी प्रिपरेशन जो है, सितंबर में ही शुरू हो गई थी, जो एक्सपीरियंस हो रहे हैं, वह इतने अमेजिंग हैं। तो आप और मैं यहां इस लेख पर चर्चा कर सकते हैं।

मैं पांच साल से इस एनर्जी से जुड़ी हुई हूं। जुड़े तो शायद हम सब बहुत पिछले जन्मों से हैं, पर जब मां लक्ष्मी चाहेंगी, जैसे वह चाहेंगी, अपना जो फॉर्म वह दिखाना चाहेंगी साधक को, वही फॉर्म मिलेगा।

लेकिन अगर आप यह लेख पढ़ रहे हैं तो आपके स्वप्न में मां लक्ष्मी या गजलक्ष्मी, जिसमें एलीफेंट के साथ मां लक्ष्मी आती हैं, या आपको अचानक से फेसबुक पर वह पिक्चर दिख जाना या आपके ऊपर एक छिपकली गिर जाना, व्हिच इज… पर अगर इनमें से कोई भी साइन आपको नवरात्रि के दौरान आते हैं, तो आप मेरे से कांटेक्ट करें। यह एक बहुत प्रोस्पेरिटी का, आपके जीवन में धन के खुलने का योग है।

जिज्ञासु यानी कि एक बदलाव का एक संकेत है सीधे-सीधे।

 बहुत-बहुत। और मां लक्ष्मी सबसे पहले संकेत देती हैं। एक मां काली और एक मां लक्ष्मी, ये आपको ऐसे संकेत देंगी एकदम कि अगर आपने उनसे दिल से मांग लिया कि मेरी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, मेरा यह लोन है, मुझे लोन उतारना है, मां आप मेरी मदद करें।

 जितने भी लोग यह लेख पढ़ रहे हैं, अगर उनके घर में किसी भी तरीके की दरिद्रता है, कोई लोन है जो चुक नहीं रहा, जॉब है जो मिल नहीं रही, कोई बच्चा पैदा नहीं हो रहा, फर्टिलिटी की प्रॉब्लम्स आ रही हैं, तो आप बिना कुछ भी सोचे आप मां कमला महाविद्या के आगे अपने आप को सरेंडर करते, आप यह करके देखें नौ दिन इनका मंत्र और आप बताइए मुझे, वह बदलाव जो है, आपको फिर महसूस होंगे। 

आप वहीं से आपको पता लगेगा कि किस तरह से आपकी जिंदगी बदल गई। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि आपके अंदर वह असुर नहीं होना चाहिए, वह बुराई नहीं होनी चाहिए। एक साफ नीयत, साफ मन के साथ अगर आप मां से कुछ मांगेंगे तो जाहिर सी बात है, मां जरूर देंगी।

 

Kamla Mahavidya Sadhna कमला महाविद्या साधना नवरात्र में पूजा और महत्वपूर्ण सावधानियां

 

जिज्ञासु  नवरात्र की बात कर रहे थे डॉक्टर मनमीत, नवरात्रों में किस तरह का प्रभाव जो है, मां कमला महाविद्या का रहता है और नवरात्रों में खास तौर से कब, किस दिन मां कमला महाविद्या की पूजा करनी चाहिए?

10वें दिन करनी चाहिए मां कमला महाविद्या की और ऐसा कहते हैं कि इन नौ दिनों में जो मां हैं, वे अपने आप धरती पर आती हैं। और इन दिनों में अगर आपके घर में आपको कोई भी नई खरीदारी करनी है, अगर आपको कुछ भी करना है, आप मां कमला महाविद्या को डे वन से उन्हीं के मंत्र करें। आप बाकी सबको छोड़कर उन्हीं के मंत्र करें, उन्हीं की साधना शुरू करें। और यह भी आप कर सकते हैं कि नौ दिन के कुछ मंत्र का आप जो है, संकल्प ले सकते हैं।

 

 ईर्ष्या-द्वेष से परे कमला महाविद्या साधना

 

ऐसा भी कहते हैं कि मां कमला महाविद्या आपको टेस्ट करती हैं। जैसे अगर आपने कुछ मांगा, मुझे एक नई गाड़ी चाहिए, तो आपके साथ वाले को गाड़ी दे दी जाएगी। उस समय आपको यह नहीं सोचना कि इसको मिल गई, मुझे नहीं मिली। आपको यह बोलना है कि मां, इसको मिली है और भी मिले, लेकिन मुझे भी बहुत सारी मिले। यह सुनके मां खुश होती हैं कि आपके अंदर एक लालच नहीं है। 

मां के आगे केवल एक प्रेयर है कि मुझे भी गाड़ी चाहिए। लोग अक्सर ईर्ष्या में, जेलेसी में, एनवी, हेट, इसमें आ जाते हैं और उनको लगता है, वो इसने तो इतना काम नहीं किया फिर भी इसको मिल गई, मैं इतनी पूजा-पाठ करता हूं मुझे नहीं मिली। पूजा-पाठ एक ट्रांजैक्शन नहीं है। 

पूजा-पाठ एक प्रेयर है, एक सबमिशन है, एक अच्छा इंसान बनने की चेष्टा है इंसान की। डायरेक्टली प्रोपोर्शनल नहीं है कि आपने अगर 3 लाख मंत्र करे तो डायरेक्टली प्रोपोर्शनल आपको दो विला मिलना चाहिए। लेकिन लोग ऐसा ही सोचते हैं और हमेशा उनको लगता है कि जो दूसरे लोग हैं, वह तो कुछ नहीं कर रहे।

 

तांत्रिक पूजा की गोपनीयता

 

मैं आपको आज बता दूं कि तांत्रिक फॉर्म्स की पूजा, अगर आज कोई भी इंसान बहुत अच्छी आर्थिक तरक्की कर रहा है, तो वह तंत्र से पूजा कर रहा है। आपको दिखे, आपको न दिखे, क्योंकि यह सारी पूजा होती हैं, छुपा के करनी चाहिए। लोग, मैं देखती हूं, बोलते हैं, मैं तो एक साल से यह पूजा कर रहा हूं।

 जहां आपने यह बोल दिया, आपके ऊपर एक नेगेटिव एनर्जी का इंपैक्ट आएगा ही आएगा। मंत्र उच्चारण चोरी किए जा सकते हैं। आपकी जितनी भी साधना है, उसका जो कोश है, उसका जो बक्सा है, वह खाली किया जा सकता है। 

इसीलिए कहते हैं कि मंत्र उच्चारण बहुत जोर-जोर से अनाउंस करके नहीं करना चाहिए। जब पुराने समय में कहते थे, शांत जगह पर, एकांत में, बिना किसी को बताए आपको साधना करनी है। क्योंकि आपकी एनर्जी चुराने के लिए न सिर्फ लोग और उनके विचार हैं बल्कि यहां पर घूम रही बहुत सारी एंटिटीज हैं, आत्माएं हैं, जो आपका एकदम यह पॉजिटिव एनर्जी जो है, चुरा सकती हैं।

जिज्ञासु : क्या इसको यहां इस तरह से लिंक कर सकते हैं कि जो यह धारणा है कि तंत्र-मंत्र और जो काली विद्या है, वह शमशान में करने से उसके लाभ ज्यादा मिलते हैं? क्या उसके पीछे यही वजह है कि वह एक ऐसी जगह है जहां कोई भी आता नहीं है और आपको एकदम शांत, एकांत वाली जगह मिल जाती है? या फिर इसके पीछे का लॉजिक अलग है क्योंकि वहां पर साधने से इंपैक्ट ज्यादा मिलता है?

 दोनों ही रीजंस आपने जो कहे, वह बिल्कुल सही हैं। मैं नहीं कहूंगी कि मां कमला महाविद्या की तो डेफिनेटली प्रेयर हम शमशान में नहीं कर सकते हैं। शमशान में हम मां भैरवी, मां काली, इनकी पूजा कर सकते हैं या मां धूमावती की। एकांत केवल शमशान में नहीं होता, गुफा में भी हो सकता है, आपके कमरे में भी हो सकता है।

 आप एक घर रेंट पे ले सकते हैं जिसमें आप केवल साधना कर सकते हैं और उसमें और किसी प्रकार की कोई क्रिया नहीं होगी। तो एकांत के लिए पहले कहते थे कि शमशान, लेकिन शमशान का जो इंपैक्ट है, मातारा का जो मंदिर है, आपको मालूम ही है, हमने यह डिस्कस किया था कि मातारा शमशान में ही बेस्ड है। तो कुछ शक्तियां हैं जो शमशान से बढ़ जाती हैं, लेकिन मां कमला महाविद्या उनमें से नहीं हैं।

 

निष्कर्ष

जिज्ञासु  तो जाहिर सी बात है, अगर आपको अपने जीवन में कुछ अच्छा करना, वैभव चाहिए, धन चाहिए, लेकिन सबसे ज्यादा जरूरी है कि लालच नहीं होना चाहिए। और अगर लालच नहीं है तो आपके जीवन में सब कुछ मां कमला महाविद्या बेहतर तरीके से कर सकती हैं। 

लेकिन उन्हें साधने का, उनकी पूजा करने का तरीका सही होना चाहिए। और 10 की 10 महाविद्याओं के बारे में एक-एक कर इस पूरी लेख श्रृंखला में समझा है हमने कि किस-किस तरह से तमाम इन 10 महाविद्याओं की पूजा-अर्चना की जानी चाहिए।

इसके अलावा भी अगर आपके मन में कोई सवाल है, कोई इन 10 महाविद्या से जुड़ी हुई कोई बात अगर आप पूछना चाहते हैं, इसके अलावा भी आपको लगता है कि आपके जीवन में कुछ ऐसा चल रहा है। 

जिसे आप लगातार प्रयास करने के बावजूद भी ठीक नहीं कर पा रहे या वह ठीक नहीं हो रहा है, उससे जुड़ी हुई कोई भी बात, कोई भी सवाल हो, आप  से हमारी वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर या नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं।

 उनसे संपर्क करने का विवरण भी इस लेख के अंत में आपके लिए मौजूद होगा। और इसी तरह की इंटरेस्टिंग जो अलग-अलग किस्से हैं, अलग-अलग जो देव और देवियों से जुड़ी हुई बातें हैं, उस पर हम लेख लाते रहेंगे और आपसे इसी तरह से तमाम जो रहस्य हैं, उनसे पर्दा उठाने का काम करते रहेंगे। 

और इसमें जो हैं, , जो कि स्पिरिचुअल गुरु हैं, जिन्होंने 10 महाविद्याओं पर एक डिटेल रिसर्च भी किया है। और आई थिंक, मैं गलत नहीं हूं तो ऑक्सफोर्ड में? जी, मैं उसका लिंक इस लेख में ही नीचे दे दूंगीजिज्ञासु : जी चलिए, तो बहुत-बहुत शुक्रिया। आज के लेख में इतना ही। नमस्कार।

मेनिका अप्सरा साधना अनुभव | menka Apsara Sadhna anubhav

मेनिका अप्सरा साधना अनुभव | menka Apsara Sadhna anubhav

मेनिका अप्सरा साधना अनुभव | menka Apsara Sadhna anubhav

मेनिका अप्सरा साधना अनुभव | menka Apsara Sadhna anubhav
मेनिका अप्सरा साधना अनुभव | menka Apsara Sadhna anubhav

परिचय: एक अप्रत्याशित लेख

मेनिका अप्सरा साधना अनुभव | menka Apsara Sadhna anubhav मैं यह लेख सीधे नहीं लिखना चाह रहा था क्योंकि यह पोस्ट पहले से ही तैयार थी, लेकिन किसी कारणवश वह उपलब्ध नहीं है, इसलिए मैं यह अनुभव आपको सीधे इस लेख के माध्यम से बता रहा हूँ।

एक साधक हैं जिन्होंने अप्सरा साधना करी थी और उनको क्या-क्या दिक्कतें आईं अप्सरा साधना में, क्या-क्या फेसिंग करना पड़ा, उसके रिलेटेड यह लेख है जिससे कि आप लोग भी सतर्क रहें और सहज रहें कि कोई दिक्कत अगर होती है तो क्या करना चाहिए आपको, कैसे क्या होना चाहिए और कहीं यह विधि सही है या गलत है, इन सब चीजों के रिलेटेड भी यह लेख बनाया जा रहा है।

 

 अप्सरा साधना की भ्रामक और सही विधियाँ

 

तो सबसे पहले पॉइंट ऑफ व्यू पर आते हैं कि अप्सरा साधना जो थी, इन्होंने जो किया, क्या वह सही था ? पहली बात, अप्सरा साधना की तांत्रिक विधि कि शीघ्र सिद्ध, जल्दी होने, कैसे अप्सरा को सिद्ध करें और क्या-क्या इसकी सही विधि है, इसके रिलेटेड आज मैं आपको इस पूरे लेख में बताऊंगा और अच्छे से समझना जिससे की कोई दिक्कत ना हो क्योंकि लोगों का कंफ्यूजन ही बढ़ता है और फिर होती है दिक्कत।

तो इस लेख का उद्देश्य यही है, तो पूरी तरीके से समझ लो। अप्सरा साधना चाहे वह साधारण हो या तांत्रिक हो, किसी भी माध्यम से साधना कर रहे हो आप लोग, यह साधना में कभी भी मांस और मदिरा का भोग नहीं देते हैं।

हाँ, जब आपके गुरु आपके साथ बैठे हों, शमशान में अगर तांत्रिक क्रिया द्वारा अप्सरा को बुलाया जा रहा है तब इसका उपयोग आप करेंगे मांस और मदिरा का, वैसे यह साधना कभी भी मांस और मदिरा के साथ नहीं करनी चाहिए।

एक साधक का चौंकाने वाला अनुभव

अब मैं आपको इसकी स्टोरी बताता हूँ कि लोगों के साथ क्या हो रहा है। कहाँ हूँ? काफी ठंड लग रही है आपको। अब कहाँ हूँ, क्या हूँ, वो सब छोड़ दो, ठंड लग रही है, कैसे लग रही है, वो सब बाद की बात है, है ना? पहाड़ों पर तो लगेगी।

अब यह समझ लो कि जो सिचुएशन है, उसका यही कंडीशन है कि आपको कैसे अप्सरा साधना करनी है, क्या करना है, उसके लिए आपको अप्सरा साधना में कभी भी ठंड, कभी भी ऐसा सिचुएशन आए कि आपसे बोला जाए मांस और मदिरा का भोग लगाओ तो समझ लेना यह विधि गलत है। ठीक है?

अब एक साधक, एक ऐसे ही आप लोगों जैसे साधक थे, ठीक है? उन्होंने साधना करी अप्सरा साधना किसी वेबसाइट से देखकर। किसी ने लिखा था कि अप्सरा बहुत जल्दी सिद्ध हो जाएगी मेरी विधि से और उन्होंने उस वेबसाइट के लेख-वेख देखे, अच्छे से उन्होंने साधना करी।

₹11,000 लिए गए उनसे, उनके बाद बोला गया कि संस्कारित माला और हवन और यंत्र भी दिया जाएगा। आप लोगों को अच्छे से पता है कि संस्कारित माला में आपको दो से ढाई घंटे का समय लगता है, ठीक है?

इससे पहले तो वह जागृत होगी नहीं, एक माला और यंत्र अलग। तो संस्कारित करके तो कोई देता नहीं है। अब आ जाते हैं कि जब माला और यंत्र संस्कारित नहीं है, तो एक मिनट रुक जाओ, अभी दिखा, बता रहा हूँ, बता रहा हूँ, ठीक है? आपका भी रिप्लाई दूंगा।

उसके बाद फिर यही कंडीशन आई कि संस्कारित माला और हवन का उनको बता दिया गया। उन्होंने की पहले दिन साधना अपना बढ़िया तरीके से, हाँ हाँ हूँ हूँ करके अपना मंत्र जाप। पहले दिन कुछ नहीं हुआ, दूसरे दिन कुछ नहीं हुआ, तीसरे दिन उनको लगा कि कोई आया।

इनको लगा, हाँ, साधना सही हो रही है। चौथे दिन भी इनको लगा हाँ, फिर कोई आया। पाँचवें दिन इनको हल्का सा डर लगा, थोड़ी सी आवाज, नेगेटिविटी आई, है ना?

तो उसमें थोड़ा सा दिक्कत भी हुआ उनको। उसके बाद छठवें दिन इनको कुछ ऐसा ही अनुभव हुआ, सातवें दिन इनको फिर ऐसा अनुभव हुआ कि कोई मेरे बगल में बैठ गया है, अप्सरा है। तो इन्होंने सोचा यार अप्सरा आ रही है। ऐसे करके इनको 11 दिन कंप्लीट हो चुके और कुछ नहीं हुआ उसके बाद तो।

हाँ, एक मिनट रुकिए। हाँ, तो जो कंडीशन थी कि जैसे कि मान लीजिए कि अप्सरा जो थी, ठीक है? तो अब इन्होंने 11 दिन के बाद इनसे बोला गया कि आपके ऊपर तंत्र का प्रयोग हो गया और तंत्र की वजह से यह दिक्कतें आने लगीं।

तो जब इनको लगा यार, यह तो गड़बड़ हो गया, तो इनसे बोला कि अब ₹31,000 शुल्क लगेगा और आपको जो विधान दिया गया है कि मांस के साथ-साथ मदिरा भी चढ़ानी है। इन्होंने कहा, ठीक है, कोई दिक्कत नहीं।

इन्होंने बोले, अब साधना कितने दिन की होगी? बोले 21 दिन की। इन्होंने 21 दिन साधना करी, बीच-बीच में थोड़े बहुत अनुभव हुए, फिर कुछ नहीं हुआ।

तो 21 दिन बाद उन्होंने बोला तो बोले कि अरे, आपके ऊपर तो तंत्र था, वह काट दिया है पर शक्ति नाराज हो गई है, उसे ढंग से भोग नहीं मिला है, इसलिए ₹51,000 लगेंगे। इन्होंने कहा, अप्सरा तो आ रही है तो चलो ₹51,000 भी देने में क्या दिक्कत है।

तो इन्होंने ₹51,000 दिए। ₹51,000 देने के बाद इन्होंने साधना करी, इनको बोला गया कि हवन में भोग जो है वह मदिरा का देना। इन्होंने साधना करी बैठ के आराम से बाकायदा और रात में इन्होंने मंत्र जाप किया अपना जो भी जैसे करते थे।

मंत्र जाप होने के बाद तीसरे दिन इनको लगा कि कोई इनके बिस्तर पर आकर बैठ गया। अब इनको लगा हाँ, अप्सरा आ रही है क्योंकि इनका भाव ही ऐसा था कि अप्सरा आएगी तो संभोग करेंगे, यह सब, वो सब।

तो इन्होंने, इनको तो लगा कि बहुत अच्छा चल रहा है मेरा तो, है ना? उसके बाद जब यह सब हो गया तो इन्होंने सोचा यार कैसे होगा, क्या होगा, करते रहे। फिर छठवें दिन इनको लगा कि कोई इनकी ओर बिस्तर पर लेट गया इनके साथ। इनको दिखाई नहीं दिया और कोई इनको टच कर रहा है।

अब ये जब सुबह उठे, 10, दो-चार मिनट का अनुभव होगा इनका, सुबह उठे तो इन्होंने देखा कि मेरे हाथ में स्क्रैचेज पड़े हुए हैं। तो उन्होंने उनसे पूछा तो बोले, अरे, वो कुछ नहीं, वो होता है। अब जब स्क्रैचेज आदमी के पड़ जाएँ, निशान नोचने जैसे, तो आदमी को डर तो लगता ही है। ऐसे ही करके इनको 15 दिन गुजर गए। 15 दिन बाद वह चीज रात में आती, इनके साथ उल्टा-सीधा काम करना शुरू कर दिया उसने।

कहीं यहाँ हाथ लगाना, कहीं वहाँ और सुबह देखते हैं तो खून फटा हुआ मिलता है, कहीं खून निकलता है, ऐसे करके होने लगा। उसके बाद फिर 15-20वें दिन, 21वें दिन के बाद इनके साथ गलत संबंध बनाने लगी वो जबरदस्ती और इनको खून जैसा भी आने लगा सुबह-सुबह। और सुबह ऐसे उठते थे तो यह लगता था कि ताकत ही खत्म हो गई है।

अब इन्होंने उनसे कांटेक्ट किया तो उन्होंने बोला कि क्या करूँ, आप जानो, कोई तो आया, मेरी रिस्पांसिबिलिटी खत्म। अब यह समझ लो। और सामने वाले ने उसको डिनाई करके ब्लॉक कर दिया।

₹51,000 भी लिए, ₹31,000 भी लिए, ₹11,000 भी लिए, ब्लॉक भी मार दिया। अब यह यहाँ-वहाँ घूमे, वही रोज का कंडीशन होने लगा इनके साथ।

वो रोज रात को आती थी, उल्टा-सीधा काम करती थी और कहीं-कहीं खून निकल जाता था, कहीं कुछ होता था। अब यह आवारा भटकने लगे। कोई बोला तुम्हारे ऊपर तंत्र हो गया है, इसका पैसा दो, इसका पैसा दो। ऐसे करके इनका पूरा बर्बाद हो गया।

 

 समाधान और मुक्ति का मार्ग

अब यह लौटते-फिरते, पढ़ते-पढ़ते जाने कहाँ से किसी ने मेरी वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम का सुझाव दिया, उन्होंने कहा, आप इनसे बात करिए, यही सॉल्यूशन करेंगे।

तो मैंने कहा, ठीक है भाई, देखते हैं। मैंने बात करी, मैंने समझा उसको, फिर मैंने बोला, देखो आपने जो साधना करी है, उसमें भूतनी आई है, अप्सरा नहीं आई है क्योंकि अप्सरा साधना की प्रॉपर विधि में यह विधान ही नहीं है। तो इन्होंने बोला, अच्छा, क्या करना चाहिए? तो उसके हिसाब से फिर मैंने इनको प्रोसेस को समझाया।

जैसे कि मैं आप लोगों को प्रोसेस समझाता हूँ, कोई भी, अब जैसे बटुक भैरव साधना है, जिसमें पाँच रजिस्ट्रेशन होने थे, शिवरात्रि में मैं दे रहा हूँ, तो जिसमें से तीन की जगह चार लोग फुल हो गए, सिर्फ एक सीट बची है, 15 तारीख तक मुझे लगता है, वो भी फुल हो जाएगी।

तो जो मैं पाँच आदमियों को सिखा रहा हूँ, उनको प्रॉपर सिखाऊंगा, प्रॉपर बताऊंगा व्हाट्सएप पर, ऐसे-ऐसे करो। कोई दिक्कत होगी तो कॉल पर भी समझा देता हूँ। तो प्रॉपर विधि के साथ ही साधना करनी चाहिए, यही मैंने उनको समझाया।

अब जैसे मान लो किसी को बटुक भैरव साधना करनी है, तो वह क्या करेगा? वो मेरे से व्हाट्सएप पर कांटेक्ट करेगा, नंबर मेरी वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर दिया हुआ है, वहाँ से कांटेक्ट करके मुझसे पूछेगा कि भैया सीट बची है?

हाँ, तो बस जो प्रोसेस बता के वो ज्वाइन हो जाएगा। पाँच लोग ऐसे ही तो करते हैं हम लोग। उनका क्या है कि वह तो जितने आ जाओ, सब कम हैं, पैसे देते जाओ, काम करते जाओ, हमें क्या मतलब। ऐसे लोग थे वो। अब बाद में जब वह फंस गए तो अब मेरे पास, तो मैंने कहा, देखो भैया, ऐसे कुछ नहीं कर सकता मैं।

पहले गुरु मंत्र, रक्षा मंत्र करो। वो बोले, ब्रह्मचर्य नहीं रुकता है तो मैं क्या करूँ? तो मैंने कहा, कोई दिक्कत नहीं, ब्रह्मचर्य रुकता हो ना रुकता हो, आप गुरु मंत्र तो शुरू करो। गुरु मंत्र शुरू किया, पहले दिन, दूसरे दिन, तीसरे दिन के बाद चौथे दिन से इन्हें आराम मिलने लगा।

अब वो दूर खड़ी होने लगी, पास में नहीं आने लगी, दूर-दूर से बात करती है।

उसके बाद जब इन्होंने 21 दिन गुरु मंत्र का पूरा कर लिया, वह दूर से कह रही है, आओ, आओ, मुझे बुलाओ, मेरा मंत्र जाप करो, मैं अप्सरा ही हूँ। उसके बाद फिर रक्षा मंत्र किया तो वह कमरे के बाहर से बुला रही है। अब इतना होने के बाद कुछ गुप्त क्रियाएँ भी मैंने उनको दी थीं जिससे वह आपके शरीर को टच ना कर पाए, वह गुप्त क्रिया सिर्फ उन्हीं को बताई थी मैंने।

यह सब होने के बाद फिर क्या हुआ? जब उन्होंने यह सब किया तो उनको फायदा मिला, रिलीफ मिला, आराम आया थोड़ा सा।

अब इसके बाद बोले कि मुझे फिर अप्सरा साधना करनी है। मैंने कहा, अभी एक से भुगत निकल नहीं पाए, तुम्हें फिर अप्सरा साधना करनी है। बोले, करनी है, मैं इनकी कही की है। तो फिर मैंने क्या किया कि फिर मैंने उनको एक विसर्जन प्रक्रिया बताई, शक्ति को विसर्जन करने की एक प्रक्रिया होती है, वो गुप्त तरीके से कराई जाती है।

नारियल और, सूखा नारियल, गीला नारियल और कच्चा नारियल, तीनों तरीके के नारियल होते हैं। फिर उसके बाद उसमें सिंदूर लगाया जाता है, मतलब पूरा एक दो-चार घंटे का लेंथी प्रोसेस है। उसके बाद कोई भी शक्ति हो, वो विसर्जित हो जाएगी आपकी।

आप चाहो तो एक बार में अपनी सारी शक्तियाँ विसर्जित कर सकते हो, यह समझ लो। ऐसे करके उनकी शक्तियों को फिर आखिरी में, ऑल ऑफ सडन, मेरे को ही जाना पड़ा, मैं तुम्हारे बस की नहीं, मैं ही आता हूँ, जो खर्चा लगे देखना। फिर मैंने जाकर उनका पूरा विसर्जन का प्रोसेस अपनाया, विसर्जन कराई शक्ति।

अप्सरा साधना की प्रामाणिक तांत्रिक विधि

फिर मैंने उनको बताया कि ऐसे-ऐसे यह अप्सरा साधना होती है। जैसे मेनका अप्सरा उनको बोला था, तो मेनका का जो तांत्रिक विधान है, उसमें आपको करना क्या होता है, मैं समझा देता हूँ जिससे कि कंफ्यूजन ना हो।

रात्रि के 12:00 बजे आपको नहा-धो के, स्नान हो के, बढ़िया बैठ जाना है। वाइट कलर के कपड़े होने चाहिए, एकदम श्वेत, एकदम वाइट, साफ कपड़े, साफ आसन, बाहर सामने एक चौकी।

उसके बाद इत्र लगा होना चाहिए, इत्र रुई में आता है, बढ़िया से लेना, बहुत बढ़िया खुशबू, कान में लगा लो इत्र और इधर भी लगा लो, बढ़िया एकदम हाथों, पूरे शरीर में लगा लो।

गुलाब के फूल-वूल बिखेर, उस चौकी पर रख के अप्सरा का यंत्र रखो, नेट से कोई भी पेंटिंग अप्सरा को मान के उसकी फोटो रख लो।

उसके बाद मानसिक रक्षा, पहले रक्षा मंत्र लगा लो, मानसिक पूजन करो गुरु का, गणेश का और फिर अप्सरा का आवाहन करो, फिर उनका पूजन करो। यह सब करने के बाद फिर आपको मंत्र जाप करना होता है, तांत्रिक विधि से।

जैसे कि अप्सरा का हिसाब है तो उसके लिए शं, उसके बाद थोड़ा सा मंत्र और है, उसके बाद नं का और फिर आगे लास्ट में स्वाहा, ऐसे करके वह पूरा मंत्र है।

उस मंत्र की 21 माला करनी होती है और कितने दिन? 41 दिन तक। 21 माला के बाद अगर आपकी पॉसिबिलिटी है तो हवन करो।

41 दिन में अप्सरा गारंटी है, वह आपके सामने खड़ी ही हो जाएगी, यह मेरा चैलेंज है। लेकिन करना मन से है, यह मत देखो टाइम कितना हो रहा है। भोग में मिठाई का भोग लें, मांस-मदिरा का कभी कुछ मत करो, बहुत जल्दी सिद्ध होती है मेनका इस विधान से।

सामान्य भ्रांतियाँ और महत्वपूर्ण सावधानियाँ

हालांकि अभी आप लोग इतने कैपेबल नहीं हुए, एक मंत्र ऐसा है जिसमें 108 अप्सरा सिद्ध होती हैं, वह बिल्कुल तांत्रिक है, वह शमशान में बैठ के किया जाता है, जो मैंने ट्राई किया था, ठीक है?

तो वह चीज अलग है, उसमें विधान ही अलग है, उसमें अप्सरा सौम्य रूप में नहीं आती, उसमें तो कटार ले के खिंची चली आती एकदम, कौन बुला रहा है यार, तो काट ही डालेंगे, यह पावर होता है फिर उस समय तो क्योंकि तुम खींच रहे हो, बुला नहीं रहे हो, खींच रहे हो उनको।

और यह जो तरीके हैं, यह सौम्य हैं, इसमें अप्सरा आएगी, दिखेगी भी, बात भी करेगी, नहीं होगी तो ध्यान प्रणाली में आँख बंद करके जब तुम सोने जाओगे तब तुम्हारे सपने जैसा लगेगा तुम्हें, पर वह अनुभव होंगे, वो आएगी, बात करेगी, चाहिए क्या, क्या कर रहे हो, ऐसे करके होता है। तो मेनका अप्सरा की जो विधि है, वो ऐसे ही करते हैं।

अब इसमें कभी-कभी कोई कहता है कि अप्सरा साधना में नग्न होकर साधना करनी पड़ती है, चाहे पुरुष हो या स्त्री। नहीं, नग्न अगर साधना करोगे तो तो भूतनी ही आएगी, अप्सरा नहीं आएगी। रक्षा मंत्र क्यों लगाना पड़ता है?

क्योंकि रात के 12, 1, 2 बजे, 3 बजे, तुम साधना रात के 12:00 बजे शुरू करोगे, दो-तीन तो बज ही जाएँगे और तुम इत्र लगाए हो, फूल लगाए हो, चौकी को कवर करते, इसीलिए यह रक्षा मंत्र लगाया जाता है, पूरा घेरा क्योंकि तुम्हें प्रोटेक्शन अपनी लेनी है। तो जब तुम वह करते हो, तब तुम्हारे पास वह आती है।

अप्सरा साधना में कोई ज्यादा बड़ा लेंदी नहीं है, ना कोई बवाल है पर यह है कि करना ढंग से होता है। लोगों के बहकावे में कि मैं अंगूठी में अप्सरा दे रहा हूँ, ताबीज में दे रहा हूँ, यंत्र में दे रहा हूँ, माला में दे रहा हूँ, वो सब पागल बना रहे हैं, सब लूट रहे हैं।

अगर आपको अप्सरा साधना करनी है, सिद्धि करनी है, जल्दी से जल्दी पाना है, तो खुद करना पड़ेगा, याद रख लो। गुप्त क्रिया, हवन आदि क्रियाएँ वो अपने जो योग्य गुरु हैं, उससे करवाओ, मंत्र उससे लो। जब मैं कहता हूँ ना कि अप्सरा किसी भी शक्ति का ट्रांसफर दे रहा हूँ, तो क्या करता हूँ मैं?

मैं खुद हवन आदि क्रिया, गुप्त क्रिया करके आपको मंत्र कौन सा देता हूँ? तांत्रिक मंत्र, जिसका मंत्र मैंने जाप करके ऊर्जा बना के आपको दे दिया, सिद्ध करके कि अब इसको तुम करो, अब आएगी।

और सादा साधना में क्या होता है, उसमें आपको एक शाबर मंत्र दिया जाता है, तांत्रिक मंत्र नहीं दिया जाता है, उसमें आपको ऊर्जा बनानी होती है, गुप्त क्रियाएँ, हवन होगा लेकिन ऊर्जा बनानी होती है दोबारा से और फिर बुलाना होता है, बस इतना अंतर आता है।

यह सब बात आपको समझ में ही नहीं आती। सिंपल सी बात है कि ट्रांसफर अंगूठी और लॉकेट, इसमें नहीं होता, वो ऊर्जा है, बहती रहती है। उस ऊर्जा को कंट्रोल करके सामने वाले साधक को दी जाती है।

 

H2: प्रश्नोत्तर और आगामी साधना की जानकारी

 

अब यह तो हो गया अप्सरा साधना, मेनका अप्सरा साधना के विषय में। अगर आपको यह तांत्रिक विधि चाहिए तो भी मेरे व्हाट्सएप पर कांटेक्ट कर लेना, अगर आप दमदार हैं तो मैं आपको दे दूंगा, ठीक है? व्हाट्सएप नंबर हमारी वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर दिया है।

 बटुक भैरव साधना की घोषणा

बाकी का जो बचा आपका और शिवरात्रि को आपको जो साधना करनी है, बटुक भैरव साधना, उसका यंत्र क्या है? यंत्र मेरे से ले लेना, मतलब व्हाट्सएप पर मैं यंत्र दे दूंगा, उसमें से अगर चेंजमेंट करना होगा तो पूछ लेना, नहीं तो एज इट इज कॉपी बना लेना पेपर पे, चाहे भोजपत्र पे, रेड स्केच से या अष्टगंध से, जैसे भी सूटेबल लगे, उसी को रखना है, ठीक है?

और वही यंत्र बाद में काम आएगा तुम्हारे, याद रखो। उसी का पूजन-वजन करके मंत्र को सिद्ध करके वह यंत्र आपको रखना है, फिर मैं बताऊंगा कैसे रखना है।

तो बटुक भैरव साधना में पाँच लोगों की जरूरत थी, चार लोग फिल हो चुके, एक लोग चाहिए, जिसको करना है वही आए, फालतू के लोगों की भीड़ नहीं चाहिए, फालतू लोगों की जरूरत नहीं है मेरे को अपनी वेबसाइट पे। सिंपल कहना, मेहनत करोगे तो सिद्धियाँ मिलेंगी।

भले ही मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर दूँ, गुप्त क्रिया, हवन करके आपको ट्रांसफर दे के, सब दे दूँ, फिर भी अगर आप मेहनत नहीं करोगे, आपको कुछ हासिल नहीं होगा। इसलिए मेहनत करना है अगर, तो आना वरना मत आना। सिंपल सी बात है।

एक लोग बचा है। देखो, 500 साधक हैं मेरे पास इस समय, सब अपनी-अपनी धुन में मगन हैं, अपने-अपने हिसाब से कर रहे हैं। अगर आपको भी साधक बनना है, कुछ शक्तियाँ महसूस करनी हैं और शक्तियों को पाना है, तो जुड़ो।

यह मत करो, कुछ लोग मेरे में ऐसे भी हैं, मैं तो पूजा करता हूँ, मैं वह अपनी पूजा नहीं छोड़ सकता, आपकी की बंद कर सकता हूँ, ठीक है?

तो यह काम मत करो कि मैं अपनी तरफ से 100% कर रहा हूँ, एक बार की जगह दो बार नहीं, तीन बार आपका हवन कर रहा हूँ, मैं आपसे बोल रहा हूँ कि ऐसे नहीं, ऐसे करो, ऐसे नहीं, ऐसे करो। आपने तो कह दिया, तुक्का मार दिया, यह कर दिया, आप तो कुछ कर नहीं रहे हो और यह है, वह है। तो ऐसे साधकों की भाई जरूरत नहीं मेरे को।

 गुरु का महत्व और पाठकों के प्रश्न

भाई अगर गुरु कुछ बता रहा है तो सीखना पड़ेगा। जब सब, मैंने भी तंत्र लाइन में जब जुड़ा था, तो मैंने भी बहुत चीजें सीख चुका था पहले पर मेरे गुरु ने कहा, अगर तुमको सीखना है तो यह सब चीजें भूल जाओ, जिस-जिस तरीके से मैं सिखाऊंगा, उस-उस तरीके से चलना, अपना कोई दिमाग नहीं लगाना, तब मैं सिखाऊं।

भाई, हर गुरु की नॉलेज और एक्सपीरियंस और ज्ञान अलग है, वह अपने लेवल से सिखाएगा। अगर आपको उसके लेवल पर जुड़ना है तो जुड़ो, उसकी चीजें अच्छी लग रही हैं, उसकी बातें अच्छी लग रही हैं, उसकी, उसके करने का तरीका, उसका विधान सही लग रहा है तो जुड़ो, वरना मत जुड़ो।

अगर तुम्हें अपने ही रूल के हिसाब से चलना है तो चलो, जैसे इनके साथ हुआ, यह भी अपने रूल के हिसाब से चल रहे थे और मान लो कि अगर यह मेरे पे कांटेक्ट में नहीं आते तो क्या होता इनका?

इनका तो राम नाम सत्य था ना। इसलिए एक गुरु होना जरूरी है, जो भी आप चुनें, चाहे किसी को, मैं नहीं कहता मेरे को चुनो, किसी को चुनो, उसी के साथ रहो, उसी से सीखो, चाहे भले ही वो आपके फोन से कांटेक्ट में हो, चाहे सामने से कांटेक्ट में हो, उसी से सब कुछ करो, तब अच्छा रहता है।

खुद से करोगे, बचाने वाला कोई नहीं होगा। आदमी बोलता है, मैंने शिव को गुरु बना लिया। भाई, शिव तो सबके गुरु हैं, किस-किस को देखेंगे वो? और दूसरी बात, अगर कोई दिक्कत हो जाएगी तो शिव-शिव से तुम एकदम बात-बात कर लोगे मैसेज पे या फोन पे ?

शिव जी, हाँ शिव जी, यह दिक्कत हो गई, भूत आ गया, अब मैं बताऊँ कैसे भगाऊँ? नहीं ना। इसलिए जीवित गुरु का जरूरी है, कुछ सवालों के समाधान जीवित गुरु ही देता है, भौतिक सुख अगर तुम्हें संसार में रहना है तो। तो यह सब बातें आपको समझ में आ गई।

अब मैं कुछ टिप्पणियों (कमेंट्स) का जवाब देता हूँ।

काफी ठंड लग रही है आपको? हाँ, ठीक है भाई।
मुझे भी बुलाया पर आज तक कोई नहीं आया। क्या आप बता सकते हो भूतनी कहाँ है ? भूतनी कहाँ है? अब तो भाई विसर्जन हो गया उसका।

Kindly reply, when I see, can I see the bhootni? हाँ, भूतनी, अब देखो चैलेंज की बात मत करो मालिक। बहुत से ऐसे तरीके होते हैं जिसमें अगर मैं आपको बता दूँ कि कर लो, ठीक है? तो फिर वह छोड़ेगा नहीं आपको।

आदमी बोलता है ना बबूल के पेड़ की सिद्धि, एक काम करना, बबूल के पेड़ में जाना, ठीक है? डंडा लेना, उसको मारना, उसके बाद उस पर बाथरूम कर देना, पुराने से पुराना और बोल देना, मैं तुम्हारे जैसों से नहीं डरता, जो उखाड़ना है, उखाड़ लो।

पता चल जाएगा क्या होता है। वह चीज हफ्ते भर में ना हॉस्पिटल पहुँच जाओ तो नाम बदल देना। लेकिन उसके बाद क्या होगा, मैं बता रहा हूँ। उसके बाद कम से कम नहीं तो तुम्हें बचाने के लिए दो गुरुओं की जरूरत पड़ेगी ढंग के।

फिर तुम्हें मंत्र-तंत्र से बाँधा जाएगा, फिर तुम्हारे हवन आदि क्रिया बिठा के कराए जाएँगे, तब वो छूटेगा। समझ गए? चैलेंज मत करो, मैं सीधा सिंपल बता देता हूँ।

एप्रिसिएशन जी, राधे राधे सर जी, फ्री हो तो… मैं फ्री हो तो बता तो दिया।

और किसी का कोई सवाल हो तो पूछ लो। आप लोगों का बहुत सवाल था, मेनका अप्सरा कैसे सिद्ध करी जाती है, तो वह भी बता दिया तांत्रिक विधि से।

अब आ जाते हैं कृत्या, तो कृत्या अगला स्टेप बता दूंगा, नहीं तो अगर आपको लग रहा है कि मेनका के बारे में एक विस्तृत पोस्ट आनी चाहिए तो एक विस्तृत पोस्ट भी आ जाएगी। और अगर किसी का कोई सवाल हो तो पूछ लो।

कृत्या साधना का अनुभव कब बताओगे? कृत्या साधना का अनुभव तो मैं तभी बताऊंगा जब मैं कृत्या साधना के विषय में बताऊंगा। यह समझ लो, क्या नाम है, शशि जी, कृत्या वह शक्ति है जो आपके शरीर के अंदर है, एक आत्मा।

अब उसे सब पता है आपके बारे में, तो जब वह उसी को सिद्ध करोगे तो क्या-क्या अनुभव करेगी, वह आप ही सोच लो। मैं अपना बताऊंगा तो मजा ही आ जाएगा, ठीक है? राधे राधे सर जी। जी राधे राधे राहुल तिवारी जी।

भूतनी सिद्धि… भूतनी सिद्धि अभी आएगी महाराज, जब तंत्र, जब कालिक यंत्र उसमें घुसेंगे ना कापालिक, अभी तो आपकी राजसिक विधि चल रही है, इसके बाद टोने-टोटके आएँगे, वह तो शॉर्ट्स में, छोटे-छोटे लेख बनाकर निपटा दूंगा, वो सब टोने-टोटके, छोटे-छोटे झाड़ा-फूँकी के मंत्र, बिच्छू भगाने के मंत्र और यह सब, वो छोटे लेखों में ही निपटा दूंगा।

उसके बाद फिर आएँगे दूसरे, उसके बाद उल्लू तंत्र आएगा, फिर कौवा तंत्र आएगा, उसके बाद पशु तंत्र आएगा, उसके बाद आएगा शमशानिक कापालिक, तब आएगा, तब कुछ हो पाएगा, आप लोग यह समझो।

अब दूसरा सवाल आपका क्या है, मैं पढ़ लेता हूँ।

क्या अप्सरा साधना करना सही है? हाँ, सही है अगर कर सकते हो, कोई दिक्कत नहीं।
सर रिसर्च फील्ड में जाने के लिए कौन सी साधना करें ?

रिसर्च फील्ड में तारा साधना क्योंकि ज्ञान प्रकृति की वही हैं। और अगर आपको और कुछ जानना है, अपनी मृत्यु, भूत, वर्तमान और यह सब पुराना सब पंचांग-वंचांग, तो मातंगी या पंचांगुली साधना करो।

आपको प्रणाम करता हूँ, अगर आपके पास सिद्धि है तो बताइए मेरे बारे में कि निरंजन कुमार है, मेरे ऊपर कौन सा तंत्र लगा हुआ है? रंजन, निरंजन और रंजन भैया, पहले तो अपना ना, यह सब चीजें व्हाट्सएप पर पूछी जाती हैं, ठीक है?

और आपके ऊपर कोई तंत्र नहीं लगा हुआ है, आप जो फैंटम बने घूम रहे हो ना, वो मत घूमो, ठीक है? कि आपके ऊपर कोई तंत्र लगा हुआ है। जब-जब बृहस्पतिवार को मांस-मदिरा का सेवन करोगे तो कहाँ से बच पाओगे, माया तो रुकेगी ही नहीं, पैसे के पीछे भागोगे, पैसा रुकेगा ही नहीं।

क्या अप्सरा साधना सही है और सिद्धि करना सही है? गलत-सही है महाराज।
आप कहाँ से हो? यूपी से।
सर मैं शमशान में जाकर देखता हूँ, नहीं मिला। हाँ तो मैंने तरीका बता दिया, फैंटम बन रहे हो तो आप भी कर लो।

श्री गणेश जी की साधना दीजिए। गणेश जी की साधना आएगी, अभी आएगी। गणेश जी की इसमें है, गुरु वाली बुक में जो मंत्र हैं, उसमें गणेश साधना भी है, उच्छिष्ट गणपति भी है और हमारे वाले गणपति हैं, पर वो दूंगा नहीं और दो-तीन गणपति की साधना है, ठीक है?

आपको प्रणाम करता हूँ, अगर आपके पास… बता दिया भाई।
जी सर, आपका नंबर तो दीजिए। नंबर मेरी वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर उपलब्ध है, ठीक है?

सर मैं चैलेंज नहीं कर रहा था। ठीक है, अगर आपको करना हो तो कर लो, कोई दिक्कत नहीं है, मैंने तरीका बता दिया।

आपको प्रणाम करता हूँ, अगर आपके पास सिद्धि… फिर वही बात।

राधे, एक बार बता दीजिए, मैं सुन नहीं पाया। इस लेख को दोबारा ऊपर से पढ़ लेना।
सर जी, आपका नंबर सेंड कर दीजिए। मेरा नंबर वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर है, लास्ट में 902 है।

मेरा मतलब साइंटिफिक रीजन, साइंटिफिक रिसर्च। हाँ, वही उसके लिए सबसे बढ़िया है।
बारिश को रोकने के लिए साधना दीजिए। देखिए, यह सब चीजें तो आजकल आम बात हो गई यार, बारिश बरसाना, बारिश को रोकना, यह सब चीजें आम बात हो गई।

यह जब साइंस करने लगा है तो फिर मंत्रों की साधना की जरूरत क्या है?

अब आप बोलोगे मुझे हवा में उड़ना है, उसके लिए आप 20 साल बर्बाद करोगे क्या आकाश सिद्धि पाने के लिए? इससे अच्छा 10,000 दो, फ्लाइट में कहीं भी चले जाओ। टाइम ज्यादा इंपॉर्टेंट है या पैसा? क्या बात करते हो यार तुम लोग भी।

महाराज कृपा करके मेरा मार्गदर्शन करिए। आप व्हाट्सएप पर मैसेज कर दीजिए, बता दूंगा आपको क्या दिक्कत आ रही है।

भैया प्रणाम भैया, ‘अल मनियत की दुनिया’… नहीं, मेरी सिर्फ एक ही वेबसाइट है गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम।

एक और संबंधित ब्लॉग है, साधना सिद्धि ज्ञान, जिस पर बहुत ही कभी-कभार पोस्ट आती है। लेकिन मुख्य वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम ही है।

इसके अलावा अगर आपको मेरे नाम या फोटो से कोई और कुछ चला रहा है, तो वह फ्रॉड है, समझ लो।

गुरु जी, तांत्रिक बनने के लिए कौन सी सिद्धि की जरूरत होती है?

सबसे पहले गुरु मंत्र, रक्षा मंत्र, उसके बाद 5000 सिद्धियाँ।

गुरु जी, अपने अनुसार आज के समय के जातक के जीवन में किस साधना का करना योग्य रहता है ?

सबसे पहले गुरु मंत्र करो, रक्षा मंत्र करो, उसके बाद कोई भी एक सिद्धि, वो बड़ी, पहले छोटी करो, जब वह सिद्ध हो जाए धीरे-धीरे तब एक बड़ी कर लो कोई भी, 10 महाविद्या से या कोई भी, उसे लाइफ टाइम करते रहो, बस हो गया तुम्हारा जीवन पार, सब कुछ, सब बेस्ट रहेगा हमेशा।

गुरु जी, तारा या मातंगी साधना साइंस रिसर्च करने के लिए ?

हाँ।तांत्रिक दुनिया में से सबसे ज्यादा, तांत्रिक दुनिया में किस शक्ति का सबसे ज्यादा चलता है? अभी नहीं बता सकता, आदेश नहीं है, ठीक है?

बस इतना बता सकता हूँ कि रावण जो था, लंकापति लंकेश, उसने यह साधना करी थी, उसके बाद उसको बहुत सारी सिद्धियाँ मिली थीं, पर वह काली नहीं थीं, उनका कुछ और नाम है, ठीक है ?

लास्ट में जरूर काली आता है, ठीक है ? वो काली नहीं हैं, वो पूरे समस्त संसार की सबसे बड़ी शक्ति है, उसका बोलबाला है। अब उन्होंने मना कर दिया अपने आपको बताने से तो मैं मना कर रहा हूँ, ठीक है?

‘अनायत की दुनिया ऑफिशियल चैनल’ किसका है फिर? पता नहीं, कोई होगा, मुझे नहीं पता, मेरा नहीं है पर।

आप कहाँ से सिद्धि किया हुआ है? भैया, हमारे तो इस समय छह गुरु हैं तो मैं किसका-किसका बता दूँ ?

धन्यवाद आपका, किंतु महाविद्या के लिए काम रुक जाना होता है? नहीं ना, काम रोक, ना शमशान, कहीं नहीं। आप घर पर भी बैठकर साधना कर सकते हैं, कोई ऐसा जरूरी नहीं है कि काम रुक ही जाना पड़ेगा।

आप घर पर बैठ के साधना भी कर सकते हैं किसी भी सिद्धि की, कोई मना नहीं करता कि नहीं, मेरा यहाँ मत करो, वहाँ मत करो। कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिसको घर के बाहर करना चाहिए, बस।

रक्षा मंत्र बता सकते हैं क्या? वो अपने गुरु से पूछिए भाई, जिस साधना के हिसाब से आपको किस साधना की विधि दे रहा है, किस हिसाब से, तो रक्षा मंत्र, गुरु मंत्र उसी हिसाब से चलता है।

अशोक मिश्रा, प्रतापगढ़ से हूँ, मेरे ऊपर किस-किस की कृपा है? आपके नहीं है क्या? किस-किस की कृपा है? आपके गुरु भी तो होंगे, आप उनसे पूछ लीजिए। मंत्र अगर आप करते हैं तो

आपके गुरु भी होंगे, उनसे कंफर्म कर लो महाराज । पूर्व जन्म की सिद्धि के बारे में बताइए कृपा करके। पूर्व जन्म की सिद्धि के लिए जब आप तंत्र साधना में घुसते हो तो धीरे-धीरे आपको सब याद आने लगता है कि पुराने जन्म में आपने क्या-क्या किया था।

कुलदेवी, पितृ मनवाने होंगे ना साधना के लिए? नहीं, उसमें आवाहन करोगे, अपने आप आ जाएँगे सब हवन में।

गुरु जी, मिले 10 साल से माता रानी की सेवा करता हूँ। तो भाई, गुरु मिले 10 साल से तो माता रानी की सेवा करते हो, फिर भी मुझसे पूछ रहे हो कि मेरे ऊपर किसकी कृपा है?

अगर इतना ही आप लोगों को जानने का शौक है अपने बारे में या तंत्रों की सिद्धियों को मजे में लेने के लिए तो मुझसे बोला करो कि मुझे, मुझे तंत्रों की दुनिया में मजा लेना है, जो भी होगा, मैं जिम्मेदार हूँ उसका, तो मैं दूंगा ऐसे-ऐसे मंत्र आपको जिसमें आपको भी पता चल जाएगा कि होता क्या है तंत्र। बस।माता का रोग पाठ करने पर माता जो गड्डियाँ देखने लग जाती हैं। पता नहीं, ठीक है।

 

अंतिम शब्द और संपर्क जानकारी

 

अब और कोई सवाल हो तो पूछ लो। अगर नहीं सवाल है तो मैं इजाज़त चाहता हूँ और आपको जो भी पूछना है तो मेरा नंबर वेबसाइट पर है, लास्ट में 902 है, उससे पूछ लो। मेरी मुख्य वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम है और एक सम्बंधित ब्लॉग साधना सिद्धि ज्ञान है।

वही सब जेन्युइन हैं। उसके अलावा आप ग्रुप के अंदर भी अगर आप और किसी को पैसा देते हो, किसी से कुछ करवाते हो तो उसके जिम्मेदार आप होंगे, मैं या मेरी वेबसाइट नहीं क्योंकि आजकल बहुत होशियार आदमी बैठ के ग्रुप में घुस-घुस के मैसेज करते हैं।

आप अगर हम पर कृपा कर देंगे तो हमें गुरु मंत्र ले सकते हैं? हमारे गुरु बन के गुरु दत्त का मंत्र धारण कर, का जाप कर सकता हूँ क्या ?

मेरे गुरु बन, कृपा करके मार्गदर्शन… अब गुरु बनना ना बनना, मैंने बता दिया, आप मेरी वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर कुछ और लेख देखो, समझ में आए आपको कि मैं अच्छा लगता हूँ, मेरी बातें सही लग रही हैं तो आप मेरे से कांटेक्ट करोगे, हाँ भाई, मैं आपको गुरु बनाना चाहता हूँ, क्या प्रोसेस है, ठीक है? अगर नहीं समझ में आ रहा तो आप किसी और को ढूंढो।

तो यही था। अब मेरे को इजाज़त दो। अगले लेख में आपको मेनका के बारे में जानना हो, मेनका अप्सरा के बारे में, तो विधान बता दूंगा, नहीं तो अगर आपको कृत्या के बारे में जानना हो तो भी बता दूंगा।

और अभी जो है, वह आपका चल रहा है शिवरात्रि पे स्पेशल है जो, क्योंकि हर शिवरात्रि कुछ ना कुछ आता है, इस बार बटुक भैरव साधना है, जिसको करना है, वह एक ही लोग बचा, कर सकता है, पाँच लोगों की सीट में एक सीट बची है, चार फुल हो चुकी हैं। 15 तारीख से पहले मेरे…

menka apsara sadhna मेनका अप्सरा साधना विधि विधान और परिचय

menka apsara sadhna मेनका अप्सरा साधना विधि विधान और परिचय

 

menka apsara sadhna मेनका अप्सरा साधना विधि विधान और परिचय

 

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मेनका अप्सरा साधना का परिचय और स्वागत

menka apsara sadhna मेनका अप्सरा साधना विधि विधान और परिचय जय श्मशान कालिका देवी दोस्तों नमस्कार गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम वेबसाइट पर मैं आप सभी लोगों का हार्दिक स्वागत करता हूं और आज मैं बहुत बेहतरीन एक साधना लेकर आ चुका हूं मेनका अप्सरा की साधना दोस्तों जो इंद्र दरबार की उच्च कोटि की मेनका अप्सरा है दोस्तों आज उनकी मैं साधना लेकर आ चुका हूं और यह जो साधना यह जो मेनका अप्सरा की मैं साधना जो देने जा रहा हूं यह प्रेमिका के रूप में जीवन भर आपके साथ रहने वाली है

और इस जन्म में नहीं अगले जन्म में भी जन्म जन्मांतर के भी साथ में रह सकती है दोस्तों। तो यह मेनका अप्सरा की साधना क्या है किस तरह से है कैसे करना है इसका विधि विधान क्या है

यह जानने से पहले अगर आप लोग हमारी वेबसाइट पर नए हैं तो हमें फॉलो कीजिए ताकि जो मैं अलग-अलग लेख डालता रहूं उसकी सूचना फौरन आप तक पहुंच जाए दोस्तों और आपके जीवन में सुख शांति समृद्धि ऐश्वर्य ये सभी प्राप्त हो जाए आपको और आपके जीवन में से विघ्न समस्याएं शत्रुओं को दूर कर सके दोस्तों तो इसीलिए हमारी वेबसाइट को फॉलो कीजिए दोस्तों।

 

मेनका अप्सरा साधना  के पूर्व अनिवार्य नियम: गुरु और रक्षा कवच

 

मेनका अप्सरा की साधना जो आज मैं देने जा रहा हूं दोस्तों मगर एक रिक्वेस्ट करूंगा कि बगैर गुरु की यह साधनाएं मत कीजिए भले कौन सी भी साधना हो अच्छी साधना हो बुरी साधना हो बगैर गुरु के नहीं करना है।

पहला सर्वप्रथम आपको एक अच्छे गुरु की तलाश करनी है उनके तरफ से शिष्य दीक्षा ही लेकर ही उसके बाद साधना शुरू करनी है दोस्तों क्या क्योंकि वेबसाइटों पर इतना अच्छी तरह से बताते हैं ना साधना कि उसको पढ़ने के बाद साधना साधक इतना मोहित हो जाता है कि मैं अभी ऐसे चुटकी बजा के कर लूंगा करके समझता है तो प्राण घात हो जाता है दोस्तों।

मेनका अप्सरा साधना में सुरक्षा का महत्व

क्या बगैर गुरु के अगर आप साधनाएं करने जाओगे तो आपको हानि मिलेगी मृत्यु भी हो सकता है शरीर को लकवा भी मार सकता है या आप पागल भी हो सकते हो। तो बगैर गुरु के साधना नहीं करना है और बगैर रक्षा कवच के भी यह साधना नहीं करना है दोस्तों। कोई भी साधना हो बगैर रक्षा कवच के भी नहीं करना है।

कुछ साधक लोग मुझे कहते हैं नहीं हमारे पास रक्षा मंत्र है रक्षा घेरा है यह है उन्होंने कितने ध्यान से किया है कितनी सिद्धि प्राप्त की है उनको पता और उस माता को पता दोस्तों। फिर भी मैं कहता हूं कि रक्षा कवच गले में धारण करके साधना करने से कोई प्रॉब्लम तो नहीं है सिवाय आपकी जिंदगी बच सकती है और रक्षा कवच का मूल्य सिर्फ और सिर्फ ₹2000 है दोस्तों ज्यादा नहीं है। क्या उसमें 18-20 नमूने की जड़ी-बूटी बना के आपके नाम से बनाया जाता है।

 

मेनका अप्सरा साधना पारिवारिक जिम्मेदारी का एहसास

 

यह क्यों बता रहा हूं क्योंकि आपकी फैमिली की जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए आपको। आपकी फैमिली पीछे है उसका वो भी पता होना चाहिए। कुछ साधक और साधिका या कुछ भक्त लोग चलो साधना मिली है करके बगैर गुरु के बगैर रक्षा कवच के साधना करते हैं और मृत्यु लोक पहुंच जाते हैं दोस्तों।

तो उसके बाद उस परिवार की हालत क्या होगी उनके माताजी पिताजी की क्या हालत होगी उसके बीवी बच्चों की क्या हालत होगी यह भी सोचना बहुत जरूरी है।

यह मैं क्यों बता रहा हूं क्योंकि मेरे लेख में मैं सही तरह से विधि विधान सब कुछ बताता हूं और मंत्र भी मैं सही तरह से बताता हूं इसके लिए जो मैं दे रहा हूं साधनाएं बहुत पावरफुल रहती है और जल्दी ही सिद्धि प्राप्त हो जाती है आपको।

तो सिद्धि प्राप्ति के चक्कर में आपको हानि ना हो जाए आपके परिवार को नुकसान ना हो जाए इसलिए मैं इतने ईमानदारी के साथ आपको सभी बातें बताता हूं दिल से बताता हूं।

 

मेनका अप्सरा साधना आध्यात्मिक ज्ञान का सही प्रसार

 

पैसा कमाने का कोई इरादा नहीं है दोस्तों। जब आप मेरे घर पर आओगे मेरा बंगला गाड़ियां वगैरह देखोगे तो आप खुद ही कहोगे कि गुरुजी आपको पैसे की कोई जरूरत नहीं है।

मगर कुछ ढोंगी लोगों के वजह से क्या हो रहा है आध्यात्मिक का नाम बहुत खराब होते जा रहा है इसलिए मेरे गुरुवर्य ने मेरे पर जिम्मेदारी डाली है कि आध्यात्मिक को सभी तरफ फैलाना है सही जानकारी सही विधि विधान देना है।

तो इसीलिए मैं ये कार्य कर रहा हूं दोस्तों तो सहकार्य करें क्या और आपकी जिंदगी अनमोल है आपके परिवार के लिए तो रक्षा कवच लेकर ही साधना करें और गुरु बना के ही साधना करें।

 

कौन हैं मेनका अप्सरा ?

 

तो चलिए दोस्तों मेनका अप्सरा की साधना क्या है किस तरह से इसके बारे में थोड़ी सी जानकारी लेंगे। मेनका अप्सरा जो है इंद्र दरबार में की उच्च कोटि की अप्सरा है दोस्तों ये इसका स्थान बहुत बड़ा है क्या इसको बहुत ऋषि मुनियों ने हासिल किया हुआ है इस मेनका अप्सरा के साथ संसार बसाया हुआ है उसके साथ भोग विलास करके बच्चे भी पैदा किए हैं दोस्तों। क्या सांसारिक सुख वगैरह सब कुछ उन्होंने हासिल किया है।

तो एक कोई साधक को अगर सांसारिक सुख वगैरह चाहिए भोग विलास भी चाहिए सुख शांति समृद्धि चाहिए तो जिंदगी में मेनका अप्सरा की साधना एक बार जरूर कर लेना दोस्तों क्योंकि इसमें डरावने अनुभव ज्यादा नहीं होते हैं। मेनका अप्सरा की साधना में बहुत सरल विधि विधान है इसका बहुत शांत की तरह से है मेनका अप्सरा कोई डराती नहीं कुछ भी नहीं है दोस्तों आपके साथ उपस्थित एक सुंदर स्त्री के रूप में आके रुक जाती है दोस्तों।

मेनका अप्सरा साधना में दुष्ट शक्तियों से बचाव

 

क्या मगर रक्षा कवच क्यों धारण करना चाहिए मैं बताता हूं दोस्तों जब आप साधना का मंत्र जप करते रहते हो उस मंत्र जितना आप जप कर रहे हो उस मंत्र को मोहित होकर आजूबाजू में जो दुष्ट शक्तियां रहती है ना जिन जिन्नात भूत प्रेत डाकिनी शाकिनी वगैरह वो मोहित होकर आ जाते हैं और आपके सामने आके हाहाकार मचाना शुरू कर देते तो आपको डर लग जाता है या कोई इतने नीच शक्तियां रहती है कि वो आपके ऊपर हमला भी कर सकती है तो उससे बचने के लिए मैं बताता हूं क्या। तो यह सौम्य रूप की मैं आज साधना दे रहा हूं आप यह साधना घर पर भी कर सकते हो।

 

साधना की संपूर्ण विधि

 

स्थान और वातावरण की तैयारी

 

देखिए दोस्तों यह साधना करने के लिए आपको एकांत कमरा कमरे की जरूरत है साफ सुथरा हो थोड़ा सा भीड़ भाड़ से जरा दूर लीजिए कमरा अगर क्या क्योंकि क्या हो जाता है भीड़ भाड़ की दुनिया में शक्तियां आने के लिए संकोच करती है शक्तियां नहीं आती है।

क्या तो थोड़ा सा भीड़भाड़ मतलब मान लीजिए आपका कोई खेत-खलिहान है क्या तो वहां पर भी एक छोटी सी कुटिया बांधी रहती है ना उसको साफ सुथरा कर लीजिए वहां पर भी कर सकते हैं। नहीं है तो थोड़ा सा बांध लीजिए अगर साधना में हासिल शक्तियां हासिल करना चाहते हो तो थोड़ा सा खर्चा हो जाएगा मगर कर लीजिए सिद्धि तो प्राप्ति हो जाएगी शक्ति तो मिल जाएगी आपको बाद में आपकी लाइफ चेंज हो सकती है दोस्तों। तो वरना नहीं है तो ऐसा रूम देखिए जहां पर आपके अलावा उस रूम में कोई आता-जाता न हो सिर्फ आपको ही आना जाना है वहां पर।

 

साधना की अवधि और नियम

 

और यह जो साधना बहुत दिनों की नहीं है दोस्तों सिर्फ और सिर्फ सात दिन की साधना मैं बताने जा रहा हूं मेनका अप्सरा की साधना सिर्फ और सिर्फ सात दिन की है ज्यादा नहीं है। तो क्या कर लीजिए एकांत कमरा आपको पहले से ढूंढ के रख लीजिए उसको साफ सुथरा एकदम सुगंधित कर लीजिए क्या अच्छी तरह से खुशबू वगैरह लगा दीजिए अंदर वगैरह।

और आपको भी सात दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना है सात्विक भोजन खाना है मांस मदिरा मछली अंडे वगैरह कुछ भी नहीं खाना है।

जितना सौम्य भोजन हो जाएगा जितना लाइटली हो जाएगा उतना ही खाना आज पेट भर के करके खाते हो ना इतना मत खाना है आधे पेट से आपको खाना खाना है क्या आधे पेट ही खाना खाकर उठना है मान लीजिए चार रोटियां खाते हो तो दो रोटी खा लीजिए तो यह हिसाब से निवेदन कर लीजिए .

क्योंकि शक्ति में आलस नहीं चाहिए जब मंत्र पठन करते हो तो आलस आ के नींद आना शुरू हो जाता है तो इसलिए लोग शाम के सूर्यास्त होने के बाद कोई भी खाना नहीं खाता था तो सूर्यास्त के पहले ही खा लीजिए।

शुभ मुहूर्त और आचरण

और यह जो साधना करनी है आपको इसका टाइमिंग रहेगा रात के 10 बजे के बाद। क्या एकादशी और पूर्णिमा क्या एकादशी और पूर्णिमा के बीच में एक शुभ मुहूर्त देख के आपको ये साधना शुरू करनी है दोस्तों। शुभ मुहूर्त निकाल लीजिए एकादशी और पूर्णिमा के बीच में मतलब साधना के लाभ बहुत हो जाते हैं क्या शीघ्र ही साधना ये सिद्ध हो जाती है।

तो अच्छा सा मुहूर्त निकाल लिया यहां पर आपको ब्रह्मचर्य का तो पालन करना ही है सात्विक भोजन आहार करना है और साफ सुथरा रहना बहुत जरूरी है और सात दिन मौन व्रत धारण करना है।

कम बोलिए अगर जरूरी है तो ही बात कीजिए वरना कुछ भी बात मत निकाले अब शब्द ही बात मत निकाले किसी औरतों की तरफ देखना करना यह सब बंद कर दीजिए। सात दिन जितना मेनका अप्सरा के ख्यालों में आप डूबे रहोगे उतना सिद्धि के चांसेस बढ़ जाएंगे दोस्तों।

पूजन सामग्री और मंत्र जाप

क्या तो मान लीजिए आपने एकादशी और पूर्णिमा के बीच में एक बहुत बेहतरीन सा एक मुहूर्त निकाल लिया अच्छा मुहूर्त निकाल लिया तो रात्रि के 10 बजे के बाद आपको यह साधना करना है। दिशा जो आपकी रहेगी दोस्तों उत्तर की ओर रहने वाली है। मुख जो आपका करना है उत्तर की ओर करके बैठना है।

वस्त्र जो रहेंगे यह पूरी तरह से सफेद वस्त्र रहने वाले हैं। आसन जो रहेगा पूरी तरह से सफेद आसन रहने वाला है। और माला जो यहां पर दी है वो स्फटिक की माला दी है। स्फटिक की माला से आपको यह मंत्र जाप करना है। और जो मैं यहां पर मंत्र दिया हूं इसकी डेली 51 माला का जाप आपको पूरा करना है।

क्या कितने माला का 51, 51 माला का वहां पर जाप करना है। और सामने एक देसी घी का चिराग़ लगा दीजिए दीपक लगा दीजिए क्या दीपक लगा के आपको यह साधना करनी है दोस्तों। दिशा उत्तर की ओर रहने वाली है मंत्र आपको कंटिन्यू पठन करते जाना है और यहां पर जो मैं यंत्र दिया हूं क्या मेनका अप्सरा का जो यंत्र दिया है इसको आपको भोज पत्र के ऊपर स्थापित करना है।

भोज पत्र के ऊपर लिख के लीजिए उसकी प्राण प्रतिष्ठा कर लीजिए पूजा अर्चना कर लीजिए और सामने रख लीजिए एक चौकी के ऊपर रख सकते हैं आप चौकी नहीं तो एक पाटी वगैरह लीजिए उसके पर रख दीजिए क्या थोड़ा सा हल्दी कुमकुम वगैरह अगरबत्ती लगा दीजिए धूप वगैरह डाल दीजिए इत्र वगैरह डाल दीजिए एकदम कमरे को खुशबूदार कर दीजिए और मंत्र पठन करना स्टार्ट कर दीजिए दोस्तों।

ॐ ह्रीं मेनका मम प्रिय मम चित्तानुरंजन करि करि फट

साधना के दौरान होने वाले अनुभव

धीरे धीरे धीरे धीरे मंत्र पठन करते करते करते अलग से अनुभव आना शुरू हो जाएंगे दोस्तों। डे वन से अनुभव स्टार्ट हो जाते हैं यहां पे अच्छे अनुभव स्टार्ट हो जाते हैं। अगर किसी का बैड लक है इर्दगिर्द भूत पिशाच वगैरह बहुत है तो बैंड भी बज सकती है क्या।

तो अलग-अलग बहुत बेहतरीन अनुभव होना शुरू हो जाते हैं। कोई स्त्री ऐसी भागते हुए छम छम छम छम पायल की आवाज आती है घुंघरुओं की आवाज आती है खुशबू आना शुरू हो जाती है क्या एकदम फर्स्ट क्लास मोगरे की गुलाब की चंपा की ऐसे अलग-अलग खुशबू आना वहां पर जो शुरू हो जाती है ठंडी हवाएं आना शुरू हो जाती है क्या लहराते हुए बलखाती हुए कोई लड़की आ रही है ऐसा लगेगा आपको।

मतलब एक अच्छा एक स्वर्ग के जैसा ही आनंद आपको वहां पर प्राप्त हो जाएगा दोस्तों। क्या बिल्कुल स्वर्ग के जैसा ही आनंद आपको वहां पर प्राप्त होने वाला है। तो ध्यान लगा के आप मंत्र करना है और आपके सेक्स पावर के ऊपर आपको कंट्रोल रखना है।

 

सिद्धि प्राप्ति और वचन

 

क्या ऐसा करते करते करते अलग-अलग अनुभव होते जाएंगे डेली 51 माला होने के बाद आपको उसी रूम में आपको सोना है क्या एक चादर वगैरह बिछा लीजिए और वहीं पर सो जाइए दोस्तों जमीन पर आराम से। ऐसा करते करते सात दिन आप यह साधना पूरी करनी है और सातवें दिन मेनका अप्सरा एक खूबसूरत औरत के रूप में आपके सामने प्रकट हो जाएगी।

 

अप्सरा के प्रकट होने पर क्या करें?

 

प्रकट होते ही वह आपके साथ भोग विलास करने की बहुत कोशिश करेगी क्या भोग विलास करने की बहुत कोशिश करेगी तो उसको नमन कीजिए हे देवी थोड़ा सा रुक जाओ क्या विनम्रता से उसके पास से कुछ वचन मांग लीजिए नम्रता से हे देवी करके बोलिए नम्रता से उसके पास से मैं भोग विलास आपके साथ करूंगा मगर मुझे कुछ वचन चाहिए वह वचन दीजिए।

तो उसी में वह वचन देती है तो इतना प्रसन्न होती है इतना प्रसन्न हो जाती है दोस्तों आपके ऊपर क्या बताऊं क्या बहुत अच्छी तरह से प्रसन्न होकर आपको सुख शांति समृद्धि ऐश्वर्य यवन भोग विलास सब कुछ दे देती है।

 

साधना भंग होने का खतरा

 

मगर कुछ साधकों की साधना भंग भी हो चुकी है दोस्तों। जैसे ही वो आकर उसका सौंदर्य वगैरह देख लिया तो उसके साथ सीधा ही भोग विलास करना शुरू कर देते हैं तो वचन मांगना ही भूल जाते हैं तो वो देवी मेनका अप्सरा आपसे नाराज होकर चली जाती है।

क्या मेनका अप्सरा आपसे नाराज होकर चली जाती है तो इसके लिए सेक्स के ऊपर यवन के ऊपर आपके कंट्रोल रखना जरूरी है क्या। और जब भी वह प्रकट हो जाएगी तो नम्रता से उसके पास से वचन आदि मांग लीजिए फिर उसके बाद आप भोग विलास वगैरह जो चाहिए उस मेनका अप्सरा के साथ कर दीजिए दोस्तों कोई दिक्कत नहीं है।

 

साधना के दीर्घकालिक लाभ

 

क्या बहुत सरल सी साधना है दोस्तों आसान से सिद्धि होने वाली साधना है क्या इसमें कोई भयानक अनुभव नहीं है जो भी अनुभव रहेंगे स्वर्ग की तरह ही अनुभव रहने वाले हैं। तो यह साधना जीवन में आए हो तो एक बार करके देखना जिसको भी जरूरत है।

 

जन्म-जन्मांतर का साथ

 

क्या कीजिए ये प्रेमिका के रूप में आपके साथ जन्म-जन्मांतर रहती है दोस्तों। अगर आपने उससे वचन में मांग लिया मेरे साथ प्रेमिका के रूप में मैं पुनर्जन्म यह देह भी त्याग दूंगा पुनर्जन्म मेरा जिधर भी हो जाएगा .

इस उम्र में जब आपका अंतिम समय आता है तब वचन ले सकते हो इस उम्र में मैं किधर भी पैदा हो जाऊं इस उम्र में आकर मुझे तुमको मिलना है क्या। तो ऐसा भी वचन मांग के ले सकते हो दोस्तों क्या ऐसा वचन वो दे देती है मेनका अप्सरा दोस्तों। तो अगले जन्म मान लीजिए आपने इधर दूसरी जगह पर पैदा हो गए जो भी अपने उम्र बताई है मान लीजिए 20 साल बताई है 25 साल बताई उस एज में उस उम्र में वह आके मेनका अप्सरा आपको प्रकट हो जाती है।

तो तब कहती है स्वामी आप मेरे पिछले जन्म में प्रेम थे और आपने मेरे पास से वचन लिया था कि मैं जहां पर भी जन्म ले लू तो मेरे सामने आकर प्रकट होना है इसलिए मैं मेरा वचन निभाने के लिए आई हूं। ऐसा करके फिर उसी जन्म में भी आपको सुख शांति समृद्धि भोग विलास वगैरह सब कुछ मिलना शुरू हो जाता है दोस्तों।

संपर्क और अन्य सेवाएं

बहुत अच्छी सरल साधना है दोस्तों घर बैठे संसार साधक भी कर सकता है। संसार साधक ने की तो आपके पत्नी को वगैरह कोई प्रॉब्लम नहीं होने वाला है तो बिंदास आप कर सकते हैं साधक भी कर सकता है कोई दिक्कत नहीं है नया भक्त भी कर सकता है यह साधना मगर गुरु के मार्गदर्शन में कीजिए रक्षा कवच धारण करके कीजिए।

 

व्यक्तिगत मुलाकात

 

अगर कोई साधक मुझे मिलना चाहता है या साधिका मिलना चाहती है नया भक्त मिलना चाहता है तो दोस्तों मैं कर्नाटक बेलगाम में रहता हूं सीधा मेरे घर पे आके मुझे मिल सकते हो।

ना मैं किसी को किधर जंगल में मिलता हूं ना श्मशान में मिलता हूं ना होटल में मिलता हूं सीधा मेरे घर पर मैं आपको मिलूंगा दोस्तों। क्या तो मैं कर्नाटक बेलगाम में रहता हूं तो सीधा घर पे आ जाइए दोस्तों और जो मैंने मेरा मोबाइल नंबर दे चुका हूं उसके ऊपर मुझे कांटेक्ट कीजिए और आप सभी लोगों से रिक्वेस्ट है कि सभी लेख सही तरह से पढ़ लीजिए।

 

उपलब्ध सेवाएं

 

क्या और और एक विनंती करता हूं दोस्तों कि चैटिंग मत कीजिए बहुत चैटिंग होता है दोस्तों इतने मैसेज आ जाते जितने का मैं रिप्लाई भी नहीं दे सकता हूं मुझे क्षमा करें हां फोन कीजिए मैं बात करूंगा मिस्ड कॉल गिरी है तो मैं बाद में जैसा वक्त मिलता है मैं कॉल करूंगा आप लोगों को और आपकी समस्या निवारण करने की कोशिश करूंगा दोस्तों।

क्या और किसी साधक साधिका या नए भक्त को शक्ति ट्रांसफर चाहिए तो शक्ति ट्रांसफर भी मेरे पास से मिल जाएगी उसके लिए कंडीशन एक ही है मेरे घर पर आपको आना पड़ेगा क्योंकि शक्ति ट्रांसफर दोस्तों ऑनलाइन फोन पे नहीं होती है मेरे पास तो नहीं होती है बाकी गुरु का मुझे कुछ पता नहीं है।

मगर एक एग्जांपल देना चाहूंगा अगर आपको भूख लगी है तो खाना मैंने फोन में से भेज दिया तो आप खा सकते हो क्या? नहीं ना। तो उसके लिए खाने के पास बर्तन अपने प्लेट अपने हाथ में रहना चाहिए तब हम खाना खा सकते हैं।

तो शक्ति ट्रांसफर भी ऐसे ही है बाकी आप समझदार हो आपकी मर्जी आपको जो चाहिए वो कीजिए। और दूसरी किसी साधक साधिका या भक्त को साधना सीखना चाहते हैं तो वह भी मैं सिखा दूंगा क्या आराम से साधना सीख सकते हो जब तक आपको सिद्धि प्राप्त नहीं होगी तब तक मार्गदर्शन देता रहूंगा।

या किसी साधक साधिका या भक्त को सिर्फ सामग्री चाहिए तो सामग्री भी मेरे पास ही मिल जाएगी। क्या और रक्षा कवच चाहिए सिर्फ और सिर्फ रक्षा कवच चाहिए तो रक्षा कवच भी मेरे पास से मिल जाएगा दोस्तों।

 

सामग्री प्राप्ति की प्रक्रिया

क्या आप दूर रहते हैं तो ये जो मैंने नंबर दिया है यह गूगल पे फोन पे अमाउंट डाल दीजिए आपके बाइक कूरियर से स्पीड पोस्ट से आपके घर तक पहुंच जाएगा।

अंतिम निवेदन

 

क्या और दोस्तों यह मेनका अप्सरा का साधना जो मैंने आज इतनी अच्छी दी है यह कैसे लगी पसंद करके जरूर बताना। मुझे ढेर सारे लाइक आ रहे हैं आपका कोटि कोटि धन्यवाद सभी सब्सक्राइबर का सभी लोगों का साधकों का आप मुझे इतना पसंद कर रहे हैं इतने मेरे साधना को पसंद कर रहे हैं कोटि कोटि धन्यवाद दोस्तों।

ऐसे ही मेरे पे प्यार करते रहिए और इस लेख को जितना हो जाए उतना शेयर कीजिए दोस्तों क्या पता किसी साधु को अगर अच्छी साधना चाहिए तो ये मिल जाएगी और उसका वो लाभ उठा सके मन वंचित फल उसको प्राप्त हो जाए दोस्तों। एक अच्छा गुरु मिल जाए अच्छी साधना मिल जाए तो इससे बड़ा पुण्य का कार्य और कुछ भी नहीं है दोस्तों।

क्या तो जितना हो सके उतना इस लेख को शेयर कीजिए, पसंद कीजिए और हमारी वेबसाइट को फॉलो कीजिए दोस्तों। तो दोस्तों मिलते हैं अगले पोस्ट में जय श्मशान कालिका देवी।

नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव | nabhi Darshana Apsara Sadhana Anubhav

नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव | nabhi Darshana Apsara Sadhana Anubhav

नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव | nabhi Darshana Apsara Sadhana Anubhav

नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव | nabhi Darshana Apsara Sadhana Anubhav
नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव | nabhi Darshana Apsara Sadhana Anubhav

नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव | nabhi Darshana Apsara Sadhana Anubhav  मित्रों जय श्री महाकाल जैसा कि आप सभी जानते ही हैं कि नवरात्रि काल अब बीत चुका है तो इन नवरात्रि के समय में तीन साधकों ने मुझसे संपर्क किया था और तीनों ने ही अलग-अलग साधनाएं मुझ से प्राप्त की थीं।

इसी में से एक साधक हैं जिन्होंने नाभि दर्शना अप्सरा की साधना इस नवरात्रि काल में संपन्न की और न ही संपन्न की, इन्हें सिद्धि भी प्राप्त हुई। नाभि दर्शना अप्सरा के प्रत्यक्ष दर्शन हुए।

नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव – साधक की पहचान और प्रारंभिक यात्रा

साधक के विषय में ज्यादा तो नहीं बता सकता क्योंकि साधक ने मुझसे कहा है कि इनका नाम गुप्त रखा जाए, लेकिन केवल इतना बता दूं कि यह जो साधक है, यह मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं और अच्छे खासे घराने से ताल्लुकात हैं। यानी कि बड़ी फैमिली है इनकी और बहुत ही नामचीन व्यक्ति हैं।

तो साधक की बहुत पुरानी इच्छा थी कि इन्हें नाभि दर्शना अप्सरा की सिद्धि प्राप्त हो और मुझसे संपर्क करने से पहले साधक ने लगभग कई प्रकार के तांत्रिकों से भी संपर्क किया था और कई प्रकार की साधनाएं भी इन्होंने कीं।

जिसमें से इन्होंने अघोर काली की भी साधना संपन्न की है और अघोर काली की कृपा इनके ऊपर थी लेकिन नाभि दर्शना अप्सरा की सिद्धि इन्हें नहीं प्राप्त हो पा रही थी।

नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव – दीक्षा और साधना की शुरुआत

तो साधक ने मुझसे संपर्क किया था इस नवरात्रि काल से पहले, और नवरात्रि काल में ही साधक को मैंने नाभि दर्शना अप्सरा के सिद्ध मंत्र की दीक्षा दी और इन्हें संपूर्णता सारी जानकारी भी प्रदान की।

इसी जानकारी के अनुसार, जैसा कि मैंने इन्हें बताया कि आपको ऐसे ही साधना करनी है उसी अनुसार इस साधक ने नवरात्रि काल में ही साधना की।

नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव की पहली लहर

इस साधना काल के दौरान पहले ही दिन जब साधक ने मंत्र जप आरंभ किया तो यह जो मंत्र था यह थोड़ा उग्र था और तांत्रिक मंत्र था। नाभि दर्शना अप्सरा का, तो साधक के शरीर में गर्मी बहुत ही बढ़ने लगी।

पहले ही दिन जब साधक ने साधना संपन्न की तो अगले दिन सुबह को साधक ने मुझसे संपर्क किया और इन्होंने कहा कि मेरे शरीर में जो गर्मी है वह बहुत ही बढ़ रही है।

तभी इन्हें मैंने कुछ प्रयोग बताए, इन्होंने किए और फिर इनके शरीर की गर्मी शांत हुई। एक प्रकार से इन्हें बुखार सा लगने लगा था।

नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव में अदृश्य शक्तियों का अनुभव

 

इस के नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव बाद साधक ने दूसरे दिन जब साधना आरंभ की तो इन्हें अपने आसपास किसी शक्ति का आभास हो रहा था, मानो कोई ऊर्जा इनके आसपास घूम रही है।

तीसरे दिन साधक ने जब साधना आरंभ की तो इन्हें पायल की आवाज़ सुनाई देने लगी।
साधक को इस घटना पर विश्वास नहीं हो रहा था। साधक को ऐसा लग रहा था मानो इन्हें मति विक्षिप्त हो रही है या फिर यह कहें कि मति भ्रम हो रहा है।

क्योंकि मंत्र थोड़ा उग्र है, मंत्र जो मैंने दिया वह तांत्रिक मंत्र था और इस मंत्र की सिद्धि मैंने स्वयं करके रखी हुई है।

तो जब साधक को मैंने गुरु दीक्षा दी तो अवश्य ही ऐसे अनुभव होना बहुत ही सामान्य सी बात है।

नाभि दर्शना अप्सरा साधना  अनुभवों का क्षणिक विलुप्त होना

 

तो तीसरे दिन जब साधक को इस प्रकार से पायल की आवाज़ सुनाई देने आरंभ हुई तो साधक को इन सभी बातों पर विश्वास नहीं हो रहा था।और जब भी कोई साधक अपने मन में इस प्रकार के विचार रखता है तो उसकी भी कहीं ना कहीं भरपाई भी करनी पड़ती है।

जो नाभि दर्शना अप्सरा देवी हैं, उन्हें भी इनके इस प्रकार के विचार करने से हो सकता है कुछ कष्ट हुआ हो। तो अचानक से ही इन्हें अनुभव होने बंद हो गए। पूरी साधना इन्होंने बिना अनुभव के ही की।

नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव नवमी की रात – चमत्कारी अनुभव

लेकिन अचानक से नवमी की रात्रि को, यह जिस मंत्र की दीक्षा मैंने इन्हें दी थी और जिस मंत्र की इन्होंने साधना की थी, उसी मंत्र का यह हवन कर रहे थे।

और हवन करने के दौरान ही साधक की दिव्य दृष्टि अचानक से ही जागृत हुई।
सर्वप्रथम तो कुंडलिनी शक्ति जागृत हुई साधक की, इनके शरीर पर बाकायदा शक्ति पात हो रहा था।
साधक को संपूर्ण अनुभव प्रत्यक्ष हो रहे थे।

नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव दिव्य दर्शन और देवताओं की कृपा

जब इनकी कुंडलिनी जागृत हुई, इनकी दिव्य दृष्टि जागृत हुई, तो साधक ने सर्वप्रथम अपने दाई तरफ हनुमान जी को देखा। क्योंकि जो इनके पिताश्री हैं, वह हनुमान जी के बहुत ही परम भक्त हैं और हनुमान जी की सिद्धि इनके घर परिवार पर, आप कह सकते हैं, कि उनकी कृपा है।

तो इन्होंने सर्वप्रथम हनुमान जी के दर्शन किए और इन्हें यह पता लगा कि भाई, हमारे ऊपर हनुमान जी की कृपा है।

इसके बाद साधक ने दिव्य दृष्टि के माध्यम से यह देखा कि इनके पीछे माता अघोर काली खड़ी हैं।

और यह जो दृश्य इन्हें दिखाई दिया, यह एक प्रकार से माता अघोर काली का आशीर्वाद है साधक के ऊपर।

क्योंकि साधक ने बहुत पहले माता अघोर काली की साधना संपन्न करके रखी हुई है।
तो उनका आशीर्वाद भी साधक के ऊपर है।

नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव – का प्रकट होना

और जब तीसरा जो दृश्य इन्होंने देखा कि जो हवन कुंड है, उसी में से नाभि दर्शना अप्सरा धीरे-धीरे बाहर निकल रही हैं,

जैसा कि आपने फिल्मों में देखा होगा कि देवी-देवता हवन कुंड से निकलते हैं, उसी प्रकार का दृश्य इस साधक को नवमी की रात्रि को दिखाई दिया।

तो साधक ने जब इस प्रकार से दर्शन प्राप्त किए तो इन्हें बहुत ही आनंद आया, इनके आंखों से आंसू आने लगे। साधक बहुत ही भाव-विभोर हो गए।

पूर्ण विश्वास और साधना का सार

और इस प्रकार के संपूर्ण अनुभव जब साधक के साथ हुए तो इन्हें फिर पूर्णतः विश्वास हुआ साधना जगत की शक्तियों के ऊपर।

और साधक ने संपूर्णता यह जब अनुभव प्राप्त कर लिए तब इन्होंने अगले दिन मुझे अपने अनुभव के विषय में बताया।

निष्कर्ष और आपकी राय

तो मित्रों, यह इस साधक का प्रत्यक्ष अनुभव था। साधक ने नाभि दर्शना अप्सरा की साधना से ना ही अपनी कुंडलिनी शक्ति जागृत की, बल्कि इन्होंने दिव्य दृष्टि भी प्राप्त की।और इनके घर परिवार पर जिन देवताओं की कृपा है, उनके भी इस साधक ने प्रत्यक्ष दर्शन प्राप्त किए।

तो इस अनुभव को सुनकर आपको कैसा लगा, इस विषय में अवश्य ही मुझे कमेंट में बताएं।
और आपको क्या सीख मिली है इस अनुभव को सुनकर, इस विषय में भी अवश्य ही मुझे कमेंट में बताएं।आज के लिए इतना ही। जय श्री महाकाल।