Author: Rodhar nath

मैं रुद्र नाथ हूँ — एक साधक, एक नाथ योगी। मैंने अपने जीवन को तंत्र साधना और योग को समर्पित किया है। मेरा ज्ञान न तो किताबी है, न ही केवल शाब्दिक यह वह ज्ञान है जिसे मैंने संतों, तांत्रिकों और अनुभवी साधकों के सान्निध्य में रहकर स्वयं सीखा है और अनुभव किया है।मैंने तंत्र विद्या पर गहन शोध किया है, पर यह शोध किसी पुस्तकालय में बैठकर नहीं, बल्कि साधना की अग्नि में तपकर, जीवन के प्रत्येक क्षण में उसे जीकर प्राप्त किया है। जो भी सीखा, वह आत्मा की गहराइयों में उतरकर, आंतरिक अनुभूतियों से प्राप्त किया।मेरा उद्देश्य केवल आत्मकल्याण नहीं, अपितु उस दिव्य ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाना है, जिससे मनुष्य अपने जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझ सके और आत्मशक्ति को जागृत कर सके।यह मंच उसी यात्रा का एक पड़ाव है — जहाँ आप और हम साथ चलें, अनुभव करें, और उस अनंत चेतना से जुड़ें, जो हमारे भीतर है ।Rodhar nath https://gurumantrasadhna.com/rudra-nath/

Maa baglamukhi sadhna diksha माँ बगलामुखी की साधना बिना गुरु दीक्षा के कैसे करें

Maa baglamukhi sadhna diksha माँ बगलामुखी की साधना बिना गुरु दीक्षा के कैसे करें

Maa baglamukhi sadhna diksha माँ बगलामुखी की साधना बिना गुरु दीक्षा के कैसे करें

maa baglamukhi sadhna diksha माँ बगलामुखी की साधना बिना गुरु दीक्षा के कैसे करें
maa baglamukhi sadhna diksha माँ बगलामुखी की साधना बिना गुरु दीक्षा के कैसे करें

Maa baglamukhi sadhna diksha माँ बगलामुखी की साधना बिना गुरु दीक्षा के कैसे करेंय श्री महाकाल आप सब का स्वागत है गुरु मंत्र साधना डॉट काम में साधकों जनो , आप सब पर महामाई मां पीतांबरा की जो कृपा है, वह पहुँच रही  है इस बात की खुशी  है मुझे बहुत  खुशी सही तरह से धरम का प्रचार हो रहा है खुशी  की बात है । और ऐसा मैं क्यों कह रहा हूँ ? क्योंकि आप में से बहुत से लोगों ने पिछले कुछ दिनों में कमेंट बॉक्स में जो है, मुझसे सवाल किए हैं। 

और उससे यह साफ पता चलता है कि मां बगलामुखी महामाई, मां पीतांबरा को जानने की जो इच्छा है ना, वह आप में जागृत हो चुकी है। और अब मैं आपको सच बताऊँ, तो एक साधक की जो असली साधना है, वह यहीं से शुरू होती है। 

आपकी जिज्ञासा ही आपको मां बगलामुखी की शक्ति और ऊर्जा तक पहुँचाने का पहला मार्ग है, जिसे आप सब ने जो है, वह पार कर लिया है। तो मैं बहुत खुश हूँ कि आप सबके मन में मां बगलामुखी को जानने की, उनके बारे में जानने की, उनकी साधनाओं को जानने की जो यह इच्छा है ना, बस यही वो एक सही शुरुआत है जो एक साधक में होनी चाहिए।

आज इस पोस्ट  को मैं आपके ही एक सवाल से स्टार्ट कर रहा  हूँ, जिसमें आपने पूछा था कि क्या हम बिना गुरु दीक्षा के मां बगलामुखी की साधना कर सकते हैं ? तो साधकों, बिना गुरु के ज्ञान नहीं मिलता, यह बात बिल्कुल सच है। 

लेकिन जहाँ तक बात है मां बगलामुखी की साधना की, तो आपको पहले यह देखना है कि आपकी जो साधना है, उसका स्तर क्या है? आप किस लेवल पे हैं अभी? है ना ? अभी आप एडमिशन लेने की तैयारी कर रहे हो या आप प्राइमरी क्लास में आ चुके हो ? 

साधना आखिर आपकी कहाँ पहुँची है ? आप साधना में कहाँ तक पहुँचे हो? पहले यह पता करना बहुत ज्यादा ज़रूरी है। अगर आप मां बगलामुखी के मंत्र का जाप, पूजा-पाठ या भक्ति-भाव से उनकी आराधना करना चाहते हो, तो इसके लिए आपको कोई भी दीक्षा की आवश्यकता नहीं होती। 

अगर आपके पास किसी गुरु की दीक्षा है, तो आप उनके मंत्र जैसे कि ‘ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा’ इसका जप आप जो है कर सकते हो, या फिर जो है जो भी मंत्र आपको आपके गुरु से प्राप्त हुआ हो, यानी कि आपके गुरु ने आपको दिया हो, तो आपको उसका जप करना चाहिए। 

अगर गुरु दीक्षा नहीं है आपके पास में, है ना, तो ऐसा नहीं है कि आप बगलामुखी मां की साधना ही नहीं कर सकते। आप मां बगलामुखी की चालीसा से जो है, मां पीतांबरा की साधना शुरू कर सकते हो। चालीसा क्या होती है? है ना? यह आपके इष्ट की प्रशंसा होती है।

 तो आप क्यों ना जो है, आप अपनी महामाई की जो साधना है, वो उनकी प्रशंसा, उनकी चालीसा से ही शुरू करो। आप मां पीतांबरा की साधना गायत्री मंत्र से भी कर सकते हैं। ‘ॐ बगलामुखे च विद्महे स्तंभिनी च धीमहि तन्नो बगला प्रचोदयात’, यह मंत्र है और आप इसका जप कर सकते हैं। बिना किसी गुरु के जो है, आप महामाई की साधना भी शुरू कर सकते हैं। रोजाना पूजा, ध्यान या भक्ति के लिए यह बिल्कुल ठीक है, ठीक है? यहाँ श्रद्धा और सही भाव का होना सबसे ज्यादा ज़रूरी है। 

तो यहाँ तक तो सब ठीक है, लेकिन अगर आप सोच रहे हैं कि जो है, आप संसार में मां बगलामुखी के साधक के रूप में जाने जाएँ और आप महामाई की कठोर साधना के लिए भी तैयार हैं, तो कठोर साधना का मतलब है गंभीर तांत्रिक साधना, जिसमें खास मंत्र, यंत्र और विशेष विधि-विधान शामिल होते हैं। 

तो इसके लिए मेरा मानना है कि आपको गुरु दीक्षा बहुत ही ज्यादा ज़रूरी होती है। और वह क्यों ज़रूरी होती है? क्योंकि तंत्र शास्त्र में मां बगलामुखी की जो साधना है ना, उसको बहुत ही शक्तिशाली और मुश्किल भी माना जाता है। तो बिना सही मार्गदर्शन के गलतियाँ हो सकती हैं हमसे, जिससे आपको क्या होगा? फायदे के बदले पहले नुकसान हो जाएगा। 

इसीलिए गुरु दीक्षा बेहद ज़रूरी है, क्योंकि गुरु की सही गाइडेंस होगी, तभी आप सही मंत्र, सही उच्चारण और सही विधि भी सीख पाते हो। बगलामुखी साधना में जो है, मंत्रों का सही उच्चारण और नियम बहुत ही ज्यादा ज़रूरी होते हैं। कर्म दीक्षा भी बहुत ज़रूरी है।

 बीज मंत्रों को कैसे पढ़ना है, कैसे उच्चारण करना है, यह जानना भी बहुत ज्यादा ज़रूरी है। अब जैसे हम बीज मंत्र ‘ह्रीं’ का उच्चारण कर रहे हैं, अब इसमें क्या तत्व है? इस शब्द में ‘ह’ का क्या मतलब है, ‘र’ का क्या मतलब है, ‘ई’ का क्या मतलब है?

 यह आपको कौन बता सकता है? आप मान लीजिए ‘ह्रीं’ को ‘हलाम’ पढ़ रहे हैं, ‘ब्लूम’ पढ़ रहे हैं, तो यह कौन देखेगा, कौन बताएगा कि यह गलत है? पता चला आप सालों से ‘ह्रीं’ के बदले ‘हिलाम’ पढ़ रहे हैं और डाकिनी की ऊर्जा को बुलाने में लगे हुए हैं, है ना? 

आप हर दिन आसन बिछाकर, पीले वस्त्र धारण करके, संकल्प लेकर के ‘हिलीं’ को ‘ह्रीं’ का चांट करने में लगे हैं, बार-बार पढ़ रहे हैं, मंत्र जप कर रहे हैं और अपने साथ आपने क्या कर दिया? पिशाचिनी की ऊर्जा को लेकर के घूमना शुरू कर दिया। 

 इसीलिए अगर आप मां पीतांबरा, मां राजराजेश्वरी, मां बगलामुखी की गंभीर तांत्रिक साधना करना चाहते हो, तो गुरु की दीक्षा बहुत ज़रूरी है।

और यह मत सोचना कि गुरु का काम बस आपको बीज मंत्र का सही उच्चारण सिखाना है, पूजा विधि सिखाना है। गुरु ने मंत्र सिखा दिया, उच्चारण सिखा दिया, तो गुरु का काम खत्म। आप में से कई लोगों के मन में सवाल आ रहा होगा कि गुरु की ज़रूरत ही क्या है? है ना?

 क्यों चाहिए गुरु ? YouTube में से हम जो है, मंत्रों का उच्चारण सीख लेंगे और हमारा काम तो बन गया। अगर आप ऐसा सोच रहे हो तो यह आपकी सबसे बड़ी भूल होगी। 

बच्चों, जितने भी लोग है ना, आप मुझे सुन रहे हो, आप यह नोट कर लेना कि जो गंभीर साधना है, अगर आपको वो चाहिए, तो सही गुरु को भी ढूँढना ही होगा। क्योंकि गुरु का काम ही आपको सिर्फ मंत्र देने के बाद खत्म नहीं हो जाता या सिर्फ मंत्र देना नहीं होता। 

गुरु दीक्षा के दौरान जो है, गुरु अपनी शक्ति, अपनी ऊर्जा को आपको ट्रांसफर किया जाता है, जिससे आपकी साधना में और ज्यादा बल मिलता है। 

और यह भी आपको जो है, गाँठ बाँध लेनी चाहिए बात। तांत्रिक साधना में ऊर्जा बहुत ही तीव्र होती है। जब आप दीक्षा लेकर के मां बगलामुखी की साधना शुरू करते हैं, तो कई तरह की ऊर्जाएँ जो है, वह आपके संपर्क में आने की कोशिश करती हैं ताकि आपका ध्यान भटका सकें, है ना? आपकी साधना में रुकावट लेकर के आएँ।

 लेकिन एक गुरु ही होता है, जो आपको गलत और नेगेटिव प्रभावों से बचाने में और आपकी साधना को संतुलित करने में जो है, आपकी मदद करता है। तो साधकों, तंत्रशास्त्र में जो है, गुरु-शिष्य जो ये परंपरा है, यह बहुत इंपॉर्टेंट होती है। इसकी इंपॉर्टेंस बहुत ज्यादा हाई है। टीचर की गाइडेंस में जो है, आप स्पिरिचुअली डिसिप्लिन बनते हैं। 

लेकिन अगर आप बिना किसी दीक्षा के मां बगलामुखी, मां राजेश्वरी की साधना कर रहे हैं, तो रिस्क भी है। और यह रिस्क क्या है ? मंत्रों के उच्चारण में आपसे गलती हो सकती है। 

गलत मंत्र उच्चारण से साधना का प्रभाव जो है, वह बिल्कुल कम हो जाएगा। गलत विधि से जो है, नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव भी बढ़ सकता है। बिना गुरु के मार्गदर्शन के आप साधना के गहरे प्रभावों को समझ भी नहीं पाते हो, जिससे मानसिक या शारीरिक परेशानी हो सकती है आपको। कहता 

अब आपका सवाल होगा कि तो आखिर हम करें क्या? है ना? तो मैं यह नहीं कहता  कि आप सब कुछ छोड़ के गुरु की तलाश में निकल जाओ, क्योंकि तलाश करने से गुरु कभी भी नहीं मिल सकता। 

हम बोलते हैं ना, ‘व्हेन यू आर रेडी, गुरु अपीअर्स’। तो जब आप जो पात्र हैं, है ना, जब आप लेने के लिए तैयार हो जाएँगे, तो आपका गुरु भी आपके सामने अपने आप ही आ जाएगा। तो सबसे पहले तो अपनी तैयारी शुरू कर दो। तो हमेशा जो है, वो शुरुआत आपने आसानी से करनी है। धीरे-धीरे अपनी क्षमता को आपने यहाँ बढ़ाना है। 

मां बगलामुखी की सामान्य पूजा, मंत्र जाप, ध्यान से शुरू करो। इसके लिए आपको कोई दीक्षा की ज़रूरत नहीं है, है ना ? कोई पूजा करनी है, माँ का ध्यान लगाना है, इसके लिए आपको कोई दीक्षा नहीं चाहिए। माँ की मूर्ति या यंत्र के सामने आपने बैठ करके पीले फूल माँ को चढ़ाने हैं। दीप जलाइए। बाती को भी पीले रंग का रखिए। श्रद्धा के साथ जो है, वह आप पूजा करें। शुद्ध भाव रखें। 

साधना में आपका जो इरादा है और जो भक्ति है, यह दो चीजें जो है, वो बहुत ज़रूरी होती हैं। अगर आपका मन साफ है, तो मां बगलामुखी आपको संकेत ज़रूर और ज़रूर देंगी। और मेरी सलाह यही है आपको कि अगर आप मां बगलामुखी के भक्त हैं और बस उनकी कृपा पाना चाहते हैं, तो बिना दीक्षा के भी आप उनकी पूजा शुरू कर सकते हैं। 

महामाई की साधना आप उनके गायत्री मंत्र से जो है, वह शुरू कर सकते हैं। लेकिन अगर आप तांत्रिक साधना या बड़े स्तर की साधना करना चाहते हैं, तो किसी सच्चे गुरु से जो है, दीक्षा लेना ही आपके लिए उत्तम रहेगा। 

मां बगलामुखी की साधना बहुत शक्तिशाली है, इसीलिए आपने इसको श्रद्धा, विश्वास और सही विधि से भी करना है। बिना दीक्षा के आप शुरुआत तो कर सकते हैं, लेकिन अगर आप गहरी साधना में जाना चाहते हो, तो गुरु की जो गाइडेंस है, वो बहुत ज़रूरी है।

 इसीलिए अभी के लिए मां बगलामुखी की शक्ति को, मां बगलामुखी की ऊर्जा को आप समझिए। मां बगलामुखी जो है, वह स्तंभन की शक्ति है, शोडशी है। उनका ध्यान से ही जो है, आपको सही रास्ता खुद ब खुद मिल जाएगा। मां बगलामुखी सबकी रक्षा करती हैं। 

आपकी भी ज़रूर करेंगी और आपकी मन की बात भी ज़रूर सुनेंगी, है ना? मेरी जो महामाई है, मां बगलामुखी विश्वेश्वरी, सबका कल्याण करती हैं। आपकी कोई भी जिज्ञासा हो, आप कमेंट बॉक्स में जो है, मुझसे पूछ सकते हैं। 

आपकी हर जिज्ञासा का समाधान मां बगलामुखी की प्रेरणा से हल करने का जो है, मैं प्रयास करूँगा । जय मां पीतांबरा, जय मां माई, जय मां बगलामुखी

मातंगी साधना का रहस्य: ज्ञान और वाणी की देवी को कैसे जानें ? ph.85280 57364

मातंगी साधना का रहस्य: ज्ञान और वाणी की देवी को कैसे जानें ?

मातंगी साधना का रहस्य: ज्ञान और वाणी की देवी को 

कैसे जानें ?

मातंगी साधना का रहस्य: ज्ञान और वाणी की देवी को कैसे जानें ?
मातंगी साधना का रहस्य: ज्ञान और वाणी की देवी को कैसे जानें ?

 

अरे यार, अगर आप सच में कुछ अलग और पावरफुल साधना के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है। अरे वाह भई, क्या आपने कभी सोचा है कि कैसे कोई इंसान अपनी बातों से ही दूसरों को मंत्रमुग्ध कर सकता है ? 

कैसे कोई आर्टिस्ट (कलाकार) अपने हुनर से दुनिया को चौंका देता है ? इन सब के पीछे एक देवी का आशीर्वाद होता है – माँ मातंगी। अरे सुन ना, ये सिर्फ एक कहानी नहीं है, ये एक सच्चाई है जो सदियों से हमारे कल्चर (संस्कृति) का हिस्सा रही है।

मातंगी देवी, जिन्हें वाणी और संगीत की देवी कहा जाता है, दस महाविद्याओं में से एक हैं। उनकी साधना बहुत ही पावरफुल मानी जाती है, लेकिन इसके नियम भी उतने ही सख्त हैं। 

अरे जरा सुनो, लोग अक्सर सोचते हैं कि साधना बहुत मुश्किल होती है, पर अगर आप सही तरीके से, पूरे डेडिकेशन (समर्पण) और डिसिप्लिन (अनुशासन) के साथ इसे करें तो यह बहुत ही फलदायी होती है। 

इस लेख में, हम आपको मातंगी साधना के ऐसे ही कुछ रहस्य और जरूरी बातें बताएंगे, ताकि आप भी इस साधना को समझ सकें और अगर चाहें तो सही मार्गदर्शन में इसे कर सकें।

मातंगी देवी कौन हैं ?

अच्छा तो, सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि मातंगी देवी हैं कौन। वह दस महाविद्याओं में नौवीं महाविद्या हैं। उन्हें वाणी, संगीत, कला, ज्ञान और जादू की देवी माना जाता है। 

उनका रूप बहुत ही आकर्षक और मनमोहक है। वह हरे रंग के कपड़े और गहने पहनती हैं। उनके हाथ में वीणा, तोता और कभी-कभी तलवार भी होती है। उनका स्वभाव बहुत ही दयालु है, लेकिन वह अपने भक्तों से डिसिप्लिन भी चाहती हैं।

जरा सोचो, एक तरफ वह ज्ञान देती हैं, तो दूसरी तरफ कला और मनोरंजन का भी आशीर्वाद देती हैं। इसी वजह से जो लोग सिंगर, डांसर, लेखक, पोएट या पब्लिक स्पीकर बनना चाहते हैं, वे उनकी पूजा करते हैं। वह साधकों को बोलने की शक्ति, जिसे वाक्-सिद्धि भी कहते हैं, और क्रिएटिविटी (रचनात्मकता) का वरदान देती हैं। वैसे तो, उनकी पूजा तंत्र साधना से जुड़ी है, लेकिन आज के समय में लोग इसे अपनी लाइफ (जीवन) को बेहतर बनाने के लिए भी करते हैं।

मातंगी साधना क्यों करें ? इसके क्या फायदे हैं ?

यार, अब सबसे बड़ा सवाल है कि यह साधना क्यों करें? क्या सच में इससे कोई फर्क पड़ता है? सच बताऊँ, अगर आप यह साधना पूरे मन से करते हैं, तो आपको इसके बहुत सारे फायदे हो सकते हैं।

वाक्-सिद्धि: सबसे बड़ा फायदा है वाक्-सिद्धि। इसका मतलब है कि आप जो भी कहेंगे, वह सच हो सकता है। आपकी बातों में एक जादू जैसा इफेक्ट (असर) आ जाएगा। लोग आपकी बात ध्यान से सुनेंगे और मानेंगे। पॉलिटिशियन, टीचर, मोटिवेशनल स्पीकर और लीडर जैसी फील्ड (क्षेत्र) में यह बहुत काम आती है।

कला और ज्ञान में तरक्की: अरे सुनो, अगर आप किसी भी तरह की कला से जुड़े हैं, जैसे म्यूजिक, डांस, राइटिंग या पेंटिंग, तो यह साधना आपको बहुत आगे ले जा सकती है। मातंगी देवी की कृपा से आपके अंदर की क्रिएटिविटी बाहर आएगी और आप अपनी कला में और भी परफेक्ट हो जाएंगे।

ज्ञान और बुद्धि का विकास: यह देवी ज्ञान की भी देवी हैं। उनकी साधना से आपकी बुद्धि तेज होती है, आप नई चीजें जल्दी सीखते हैं और आपकी मेमोरी पावर (याददाश्त) भी बहुत अच्छी हो जाती है।

सुख और समृद्धि: तुम सोचो, जब आपकी बातों में पावर आ जाएगी और आप अपने काम में सफल होंगे, तो सुख और समृद्धि तो अपने आप ही आएगी, है ना? यह साधना आपकी लाइफ (जीवन) में बैलेंस और पॉजिटिविटी (सकारात्मकता) भी लाती है।

क्या बताऊँ, यह तो सिर्फ कुछ ही फायदे हैं। जो लोग सच में इस साधना से जुड़ते हैं, उन्हें इसका रियल फील होता है।

साधना के लिए क्या तैयारी करनी चाहिए ?

सुनिए, कोई भी साधना करने से पहले उसकी तैयारी बहुत जरूरी है। बिना तैयारी के आप सफल नहीं हो सकते। यह एक प्रोसेस (प्रक्रिया) है, जिसे फॉलो करना पड़ता है।

1. गुरु का मार्गदर्शन: भाईसाहब, सबसे जरूरी चीज है एक सच्चे गुरु का होना। यह साधना बहुत पावरफुल है और इसमें कुछ गलतियां हो सकती हैं। एक सच्चा गुरु आपको सही रास्ता दिखाता है, मंत्र देता है और आपको हर स्टेप पर गाइड करता है। गुरु के बिना यह साधना अधूरी और खतरनाक भी हो सकती है। अरे यार, सुन, गुरु ही आपको सही एनर्जी (ऊर्जा) और डिसिप्लिन सिखाता है।
2. सही जगह: साधना के लिए एक शांत और साफ जगह चुनें। ऐसी जगह जहाँ कोई आपको डिस्टर्ब (परेशान) न करे।
3. सामग्री: साधना के लिए कुछ जरूरी चीजें चाहिए होती हैं, जैसे:
मातंगी देवी की मूर्ति या फोटो।
मातंगी यंत्र: यह बहुत जरूरी होता है।
लाल आसन।
रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला।
पूजा की दूसरी चीजें, जैसे दीपक, धूप, फूल (खासकर लाल रंग के), फल और प्रसाद।

जरा बताओ तो, क्या आपने कभी सोचा था कि एक साधना के लिए इतनी तैयारी करनी पड़ती है? लगता है, हम सिर्फ रिजल्ट (परिणाम) देखते हैं, पर प्रोसेस को भूल जाते हैं।

 

मंत्र और उनका महत्व

सुनो, मातंगी साधना का दिल उसके मंत्रों में है। मंत्रों के बिना साधना अधूरी है। मातंगी देवी के कुछ खास मंत्र हैं, जिनका जप करना बहुत फलदायी होता है।

मूल मंत्र: `ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा`। यह मंत्र सबसे ज्यादा पॉपुलर है और इसे रोज 108 बार या उससे ज्यादा जप करना चाहिए।
एकाक्षरी मंत्र: `ह्रीं`। यह सबसे छोटा और पावरफुल मंत्र है।

मंत्रों का जप करते समय सही उच्चारण और ध्यान बहुत जरूरी है। मंत्रों में बहुत शक्ति होती है, जो आपके चारों तरफ एक पॉजिटिव फील्ड (क्षेत्र) बनाती है और आपको देवी से जोड़ती है। तुम मानो न, यह सिर्फ शब्द नहीं हैं, ये ब्रह्मांड की ऊर्जा का एक हिस्सा हैं।

 

साधना की विधि (प्रोसेस) क्या है ?

 

तो, अब बात करते हैं साधना की विधि के बारे में। यह साधना आम तौर पर रात में की जाती है, क्योंकि रात के समय एकाग्रता (कंसंट्रेशन) ज्यादा होती है।

1. संकल्प: सबसे पहले, स्नान करके साफ कपड़े पहनें। फिर अपनी साधना की जगह पर बैठें और अपने गुरु और देवी का ध्यान करें। एक साफ मन से यह संकल्प लें कि आप यह साधना किस मकसद के लिए कर रहे हैं।
2. ध्यान: अपनी आंखें बंद करके देवी मातंगी के रूप का ध्यान करें। उनकी सुंदरता, उनकी वीणा, तोता और उनका शांत स्वभाव अपने मन में लाएं।
3. जप: फिर अपनी माला से मंत्रों का जप शुरू करें। जप करते समय आपका पूरा ध्यान मंत्र के शब्दों और उसकी वाइब्रेशन (कंपन) पर होना चाहिए। जरा सोचो, जब आप मंत्र जपते हैं, तो उसकी आवाज और वाइब्रेशन आपके पूरे शरीर और मन में फैल जाती है।
4. हवन और आरती: साधना के बाद अगर संभव हो तो हवन करें और फिर देवी की आरती करें। प्रसाद चढ़ाएं और उसे सबको बांट दें।

क्या ख़याल है? ये प्रोसेस मुश्किल लगता है, लेकिन यकीन मानो, यह बहुत ही सुकून देने वाला होता है।

साधना के नियम और सावधानियां
 

भई देख, कोई भी पावरफुल चीज बिना नियम के अच्छी नहीं होती। मातंगी साधना के भी कुछ सख्त नियम और सावधानियां हैं, जिनका पालन करना बहुत जरूरी है।

पवित्रता (प्योरिटी): साधना के समय शारीरिक और मानसिक पवित्रता बनाए रखें। तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली, शराब और प्याज-लहसुन से दूर रहें। अरे मान लो न, यह जरूरी है।
ब्रह्मचर्य: साधना के समय ब्रह्मचर्य का पालन करना बहुत जरूरी है।


विश्वास और श्रद्धा: सबसे जरूरी है कि आपका देवी पर पूरा विश्वास हो। अगर आप आधे-अधूरे मन से यह साधना करेंगे, तो कोई फायदा नहीं होगा।


गुप्तता (सीक्रेसी): साधना के बारे में हर किसी को न बताएं। इसे गुप्त रखें। जब आप साधना करते हैं, तो एक खास तरह की एनर्जी (ऊर्जा) बनती है। दूसरों को बताने से वह एनर्जी कम हो सकती है।


गुरु की आज्ञा: अरे सुनो, बिना गुरु की अनुमति और उनके मार्गदर्शन के इस साधना को करने की कोशिश बिलकुल न करें। यह साधना बहुत पावरफुल है और अगर कोई गलती हुई, तो उसका उल्टा असर भी हो सकता है।

भाई मान लो, ये नियम इसलिए बनाए गए हैं, ताकि आप साधना का पूरा फायदा उठा सकें और किसी भी तरह के नुकसान से बच सकें। क्या कहते हो?

मातंगी साधना के अनुभव (एक्सपीरियंस)

भाई, जब कोई साधक इस साधना में आगे बढ़ता है, तो उसे कुछ खास एक्सपीरियंस (अनुभव) हो सकते हैं। शुरुआत में मन बहुत शांत होता है और एकाग्रता (कंसंट्रेशन) बढ़ती है। धीरे-धीरे, साधक को अपने आसपास एक पॉजिटिव फील्ड (क्षेत्र) महसूस होने लगता है।

कई बार मंत्र जप करते हुए साधक को खास आवाजें या रोशनी दिखाई देती है। यह सब साधना की सफलता के संकेत होते हैं। जरा सोच के देखो, जब आप किसी चीज पर पूरा फोकस करते हैं, तो आपको उसके रिजल्ट भी मिलते हैं। मातंगी साधना से साधक की वाणी में एक मिठास और आकर्षण आ जाता है, जिसका फील उसे और दूसरों को भी होता है।

यह बिल्कुल सच है, बहुत से साधकों ने अपनी लाइफ में बहुत बड़े बदलाव देखे हैं। कुछ ने अपनी कला में महारत हासिल कर ली, तो कुछ ने अपनी बातों से लोगों का दिल जीत लिया। अरे वाह, यह सब माँ मातंगी की कृपा से ही संभव है।

 

मातंगी निष्कर्ष

तो क्या, अब हम कह सकते हैं कि मातंगी साधना सिर्फ कोई पूजा-पाठ नहीं है, बल्कि यह अपने अंदर की शक्ति को जगाने का एक जरिया है। यह वाणी, कला और ज्ञान को पावरफुल बनाने की एक जर्नी (यात्रा) है। यार, अगर आप अपनी लाइफ में कुछ बड़ा करना चाहते हैं और अपनी क्रिएटिविटी को नेक्स्ट लेवल (अगले स्तर) पर ले जाना चाहते हैं, तो यह साधना आपके लिए एक अच्छा रास्ता हो सकती है।

लेकिन हमेशा याद रखें, गुरु का मार्गदर्शन सबसे जरूरी है। उनके बिना यह रास्ता अधूरा है। अगर आपको यह साधना करने की इच्छा हो, तो किसी सच्चे और ज्ञानी गुरु की तलाश जरूर करें।

समझ गए न? क्या सोचते हो? मज़ा आया न? ठीक है न?

ॐ ह्लीं बगलामुखी मंत्र: शत्रु विजय, हर बाधा का नाश और सफलता का महाउपाय

ॐ ह्लीं बगलामुखी मंत्र: शत्रुओं पर विजय और हर बाधा का अंत

 

ॐ ह्लीं बगलामुखी मंत्र: शत्रुओं पर विजय और हर बाधा का अंत

ॐ ह्लीं बगलामुखी मंत्र: शत्रुओं पर विजय और हर बाधा का अंत
ॐ ह्लीं बगलामुखी मंत्र: शत्रुओं पर विजय और हर बाधा का अंत

ॐ ह्लीं बगलामुखी मंत्र: शत्रु विजय, हर बाधा का नाश और सफलता का महा उपाय – क्या आप अपनी लाइफ में बार-बार आने वाली परेशानियों से तंग आ चुके हैं ? क्या आपको ऐसा महसूस होता है कि कोई अनदेखी ताकत आपके बनते हुए काम बिगाड़ रही है ? या फिर, आपके दुश्मन आपको बेवजह परेशान कर रहे हैं और आप खुद को हेल्पलेस फील कर रहे हैं ?

अच्छा तो, अगर इन सवालों का जवाब ‘हाँ’ है, तो भाईसाहब, आज आप बिलकुल सही जगह पर आए हैं। आज हम बात करेंगे एक ऐसी महाशक्ति की, एक ऐसे चमत्कारी मंत्र की, जिसके जाप मात्र से बड़े से बड़े शत्रु भी घुटने टेक देते हैं और जीवन की हर बाधा काफूर हो जाती है। जी, हम बात कर रहे हैं माँ बगलामुखी के महाशक्तिशाली मंत्र की।

यह कोई मामूली मंत्र नहीं है, जनाब। यह दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या, माँ पीताम्बरा का वो अस्त्र है जो अचूक है। इस लेख में, हम आपको इस मंत्र के बारे में सब कुछ, बिलकुल सरल शब्दों में बताएँगे। तो, चलिए शुरू करते हैं, क्या कहते हो?

 अरे भाई, आखिर कौन हैं ये माँ बगलामुखी ?

देखो, किसी भी मंत्र की शक्ति को समझने से पहले, उस देवता के स्वरूप और उनकी कथा को समझना बहुत ज़रूरी है, है ना? तो, माँ बगलामुखी कौन हैं?

पुराणों में एक बड़ी ही इंट्रेस्टिंग कहानी आती है। सतयुग में एक बार ब्रह्मांड में एक ऐसा भयंकर तूफ़ान आया कि पूरी सृष्टि में हाहाकार मच गया। ऐसा लगता था जैसे सब कुछ तबाह हो जाएगा। इस विनाश को देखकर सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु भी चिंतित हो गए।

उन्होंने सौराष्ट्र (आज के गुजरात) में हरिद्रा नामक सरोवर के किनारे बैठकर माँ शक्ति को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या शुरू की। उस तपस्या के तेज से, मंगलवार की चतुर्दशी को, आधी रात के समय, उस सरोवर से एक पीली आभा के साथ माँ शक्ति एक देवी के रूप में प्रकट हुईं। सुनो तो, उन्होंने ही भगवान विष्णु को आश्वासन दिया कि वो इस विनाश को रोक देंगी।

चूँकि वो पीली आभा और हल्दी (हरिद्रा) के सरोवर से प्रकट हुई थीं, इसीलिए उन्हें पीताम्बरा भी कहा जाता है। और भाई, उन्होंने अपनी शक्ति से उस पूरे तूफ़ान को, उस विनाश को एक पल में ‘स्तंभित’ कर दिया, यानी कि रोक दिया, फ्रीज कर दिया। बस, इसी स्तंभन शक्ति की देवी का नाम है बगलामुखी

उनका स्वरूप कैसा है? माँ पीले वस्त्र पहनती हैं, उनके आभूषण पीले हैं, उन्हें पीली चीज़ें ही पसंद हैं। उनके एक हाथ में गदा होती है और दूसरे हाथ से वो शत्रु की जीभ पकड़कर खींच रही होती हैं। यह सिम्बॉलिक है, समझे ? इसका मतलब है कि वो दुष्टों की बोलने की शक्ति, उनकी तर्क शक्ति और उनकी  बुद्धि को ही खत्म कर देती हैं। अरे वाह भई, कमाल की शक्ति है! आप माँ बगलामुखी के बारे में विकिपीडिया पर और पढ़ सकते हैं।

 ॐ ह्लीं बगलामुखी मंत्र: क्या है यह महामंत्र ?

जी, अब आते हैं मुद्दे की बात पर। बगलामुखी साधना में कई मंत्रों का प्रयोग होता है, लेकिन जो सबसे प्रमुख और शक्तिशाली मंत्र है, वो इस प्रकार है:

ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा।

अरे बाप रे! देखने में थोड़ा बड़ा और कठिन लग रहा है, है ना? पर घबराइए नहीं। इसका एक छोटा और बहुत ही पॉवरफुल बीज मंत्र भी है।

बीज मंत्र: ह्लीं

हाँ जी, सिर्फ एक शब्द – ह्लीं। यह माँ बगलामुखी का बीज मंत्र है। यूं कहें तो, इस एक शब्द में ही उनकी पूरी शक्ति समाई हुई है। जो लोग बड़े मंत्र का जाप नहीं कर सकते, वो सिर्फ ‘ह्लीं’ का जाप करके भी अद्भुत लाभ पा सकते हैं।

 इस चमत्कारी बगलामुखी मंत्र का मतलब क्या है ?

अच्छा सुनो, किसी भी मंत्र को जब आप उसके अर्थ के साथ जपते हो, तो उसका असर कई गुना बढ़ जाता है। तो चलो, इस मंत्र के गहरे मीनिंग को समझते हैं।

  • ॐ: यह तो ब्रह्मांड की आदि ध्वनि है, इसके बिना कोई मंत्र पूरा नहीं होता।
  • ह्लीं: यह माँ बगलामुखी का बीज मंत्र है, जो स्तंभन और आकर्षण की शक्ति रखता है।
  • बगलामुखी: यह माँ का संबोधन है।
  • सर्वदुष्टानां: यानी कि ‘सभी दुष्टों की’। इसमें सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि नेगेटिव विचार, बुरी आदतें और बुरी किस्मत भी शामिल है।
  • वाचं मुखं पदं स्तम्भय: अरे देखो, इसका मतलब है ‘वाणी (बोलने की शक्ति), मुख और पैरों को स्तंभित कर दो’, यानी रोक दो, जड़ कर दो।
  • जिह्वां कीलय: ‘जीभ को कील दो’। मतलब, जो आपके खिलाफ बुरा बोलते हैं, उनकी ज़बान पर ताला लगा दो।
  • बुद्धिं विनाशय: उनकी विनाशकारी बुद्धि का नाश कर दो। भाई, जब दुश्मन की सोचने-समझने की शक्ति ही खत्म हो जाएगी, तो वो आपका बुरा कैसे करेगा? सही है न?
  • ह्लीं ॐ स्वाहा: मंत्र को समाप्त करने और शक्ति को ब्रह्मांड में समर्पित करने की प्रक्रिया।

तो भाई, कुल मिलाकर यह मंत्र एक प्रार्थना है कि, “हे माँ बगलामुखी, मेरे सभी शत्रुओं (अंदर और बाहर के) की वाणी, मुख और गति को रोक दो, उनकी जीभ को कील दो और उनकी विनाशकारी बुद्धि का नाश कर दो।”


 बगलामुखी मंत्र जाप के अद्भुत फायदे (Benefits of Baglamukhi Mantra)

अरे वाह भई, अब आते हैं सबसे रोमांचक हिस्से पर! इस मंत्र को जपने से मिलता क्या-क्या है? देखो ना, फायदे इतने हैं कि गिनते-गिनते थक जाओगे। मैं आपको कुछ मेन बेनिफिट्स बताता हूँ:

  • शत्रुओं पर विजय (Victory over Enemies): यह तो इसका सबसे बड़ा फायदा है। अगर आपके गुप्त या खुले दुश्मन हैं, जो आपको परेशान करते हैं, तो यह मंत्र उनके लिए काल के समान है। वो आपका बुरा करना तो दूर, आपके बारे में सोच भी नहीं पाएँगे।
  • कोर्ट-कचहरी और मुकदमों में सफलता (Success in Legal Cases): अगर आप किसी झूठे कोर्ट केस में फँस गए हैं या किसी कानूनी लड़ाई को जीतना चाहते हैं, तो यह मंत्र आपके लिए वरदान है। सच बताऊँ, यह वकील की दलीलों और जज के फैसले को भी आपके पक्ष में मोड़ सकता है।
  • करियर और बिजनेस में तरक्की (Growth in Career and Business): ऑफिस में पॉलिटिक्स से परेशान हैं ? या बिजनेस में कॉम्पिटिटर आपको आगे नहीं बढ़ने दे रहे? तो भाई, यह मंत्र आपके रास्ते की हर रुकावट को हटाकर आपके करियर को एक नई उड़ान देता है।
  • नकारात्मक ऊर्जा और तंत्र-मंत्र से बचाव (Protection from Negative Energy): क्या आपको लगता है कि किसी ने आपके ऊपर कुछ करवा दिया है या आपके घर में नेगेटिविटी है? यह मंत्र एक ऐसा सुरक्षा कवच बना देता है कि कोई भी ब्लैक मैजिक या बुरी नज़र आपको छू भी नहीं सकती।
  • परीक्षा और इंटरव्यू में सफलता (Success in Exams and Interviews): यह मंत्र आपकी बुद्धि और वाणी को इतना प्रखर बना देता है कि आप किसी भी परीक्षा या इंटरव्यू में आत्मविश्वास के साथ सफलता पाते हैं। यह आपकी याददाश्त को भी तेज करता है।
  • कर्ज से मुक्ति और आर्थिक लाभ (Freedom from Debt): अगर आप कर्ज में डूबे हैं या पैसों की तंगी से जूझ रहे हैं, तो माँ पीताम्बरा की कृपा से आपके लिए धन के नए रास्ते खुलने लगते हैं।
  • वाणी की शक्ति (Power of Speech): जो लोग इस मंत्र का जाप करते हैं, उनकी वाणी में एक अजीब सा तेज और सम्मोहन आ जाता है। लोग उनकी बात सुनते हैं और मानते भी हैं। मानते हो न ?

 बगलामुखी मंत्र साधना की सही विधि क्या है ?

अजी, यह बहुत ज़रूरी सवाल है। देखो भाई, यह एक बहुत शक्तिशाली मंत्र है, इसलिए इसकी साधना पूरे नियम और अनुशासन के साथ करनी चाहिए। यूँ कहें तो, आप एक एटम बम को डिफ्यूज करने जा रहे हो, तो सावधानी तो बरतनी पड़ेगी, है ना?

साधना से पहले क्या तैयारी करें ?

  • सही समय: इस मंत्र का जाप शुरू करने के लिए गुरुवार (बृहस्पतिवार) का दिन सबसे बेस्ट माना जाता है। इसके अलावा, नवरात्रि, गुप्त नवरात्रि या किसी भी शुभ मुहूर्त में इसे शुरू कर सकते हैं।
  • दिशा: जाप करते समय आपका चेहरा उत्तर या पूर्व दिशा में होना चाहिए।
  • वस्त्र और आसन: आपको पीले रंग के कपड़े पहनने चाहिए और पीले रंग के ऊनी आसन पर ही बैठना चाहिए।
  • माला (Rosary): इसके जाप के लिए ‘हल्दी की माला’ का ही प्रयोग किया जाता है। यह बहुत ज़रूरी है, इसे नोट कर लो।
  • पूजा की सामग्री: अपने सामने एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर माँ बगलामुखी की फोटो या यंत्र स्थापित करें। पीले फूल, पीली मिठाई (जैसे बेसन के लड्डू), पीले फल और धूप-दीप तैयार रखें।

 जाप कैसे शुरू करें और कितना करें ?

  1. शुद्धिकरण: सबसे पहले नहा-धोकर खुद को शुद्ध कर लें। पूजा की जगह को भी गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
  2. संकल्प: अब हाथ में थोड़ा जल, अक्षत (चावल) और एक फूल लेकर संकल्प लें। संकल्प का मतलब है कि आप अपना नाम, गोत्र बोलकर माँ को बताएं कि आप यह जाप किस इच्छा (जैसे शत्रु शांति) के लिए, कितनी संख्या में और कितने दिन तक करेंगे। फिर जल को जमीन पर छोड़ दें।
  3. गुरु और गणेश पूजन: भाई, सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें ताकि आपकी साधना बिना किसी विघ्न के पूरी हो। उसके बाद अपने गुरु का ध्यान करें और उनसे आज्ञा लें।
  4. मंत्र जाप: अब हल्दी की माला पर मंत्र का जाप शुरू करें। ॐ ह्लीं बगलामुखी... वाले बड़े मंत्र का या सिर्फ ह्लीं बीज मंत्र का।
  5. कितना जाप करें?: देखो, अगर आप किसी विशेष मकसद के लिए अनुष्ठान कर रहे हैं, तो आमतौर पर सवा लाख मंत्रों का जाप किया जाता है। लेकिन अगर आप रोज़ाना करना चाहते हैं, तो कम से कम 1, 3, 5 या 11 माला रोज़ कर सकते हैं। क्या समझे?
  6. आरती और क्षमा प्रार्थना: जाप पूरा होने के बाद माँ की आरती करें और पूजा में या जाप में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगें।
 मंत्र जाप करते समय क्या सावधानियां बरतनी चाहिए ?

भाईसाहब, यह इस लेख का सबसे इम्पोर्टेंट पार्ट है। इसे बहुत ध्यान से पढ़ना।

  • गुरु का मार्गदर्शन: सच कहूँ तो, बगलामुखी जैसी तीव्र साधना हमेशा किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करनी चाहिए। उनके बिना इसमें खतरा हो सकता है।
  • ब्रह्मचर्य का पालन: जितने दिन भी आपकी साधना चले, आपको पूरी तरह से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। मन, वचन और कर्म, तीनों से।
  • गलत इरादा न रखें: इस मंत्र की शक्ति का उपयोग कभी भी किसी निर्दोष को परेशान करने या किसी का बुरा करने के लिए नहीं करना चाहिए। वरना इसका उल्टा असर आप पर ही हो सकता है, समझे?
  • सात्विक भोजन: साधना के दौरान लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा जैसी तामसिक चीज़ों से बिलकुल दूर रहें।
  • गोपनीयता: अपनी साधना के बारे में किसी को ढिंढोरा न पीटें। इसे जितना गुप्त रखेंगे, उतना ही अच्छा फल मिलेगा।
  • बीच में न छोड़ें: आपने जितने दिन या जितनी संख्या का संकल्प लिया है, उसे पूरा ज़रूर करें। बीच में साधना को अधूरा न छोड़ें।
 निष्कर्ष: आपकी हर समस्या का एक आध्यात्मिक हल
 

तो भाई, देखा आपने? माँ बगलामुखी का मंत्र कोई साधारण मंत्र नहीं, बल्कि यह तो एक महा-अस्त्र है। यह आपके जीवन की दिशा बदल सकता है। यह सिर्फ आपके बाहरी दुश्मनों को ही नहीं, बल्कि आपके अंदर के डर, आलस, नेगेटिव विचारों जैसे दुश्मनों को भी खत्म कर देता है।

लेकिन एक बात हमेशा याद रखना, प्रभु की लीला भी कुछ होती है। मंत्र एक टूल की तरह है, एक साधन है। असली शक्ति तो आपकी श्रद्धा, आपके विश्वास और आपकी भक्ति में है। जब आप पूरे दिल से, पूरी पवित्रता से माँ की शरण में जाते हैं, तो वो आपकी मदद ज़रूर करती हैं।

अगर आप जीवन में ऐसी किसी भी बाधा से परेशान हैं जिसके बारे में हमने ऊपर बात की, तो एक बार माँ पीताम्बरा की साधना करके देखिए। आपको जो अनुभव और जो रिजल्ट्स मिलेंगे, वो शायद आपने सोचे भी नहीं होंगे। सही है न?

जय माँ बगलामुखी!

क्या ख़याल है? इस जानकारी से आपको मदद मिली न? बताओ ज़रा!

मोहिनी कामदेव मंत्र: आकर्षण और प्रेम का वो सीक्रेट, जो आपकी लाइफ बदल सकता है!

मोहिनी कामदेव मंत्र: आकर्षण और प्रेम का वो सीक्रेट, जो आपकी लाइफ बदल सकता है!

मोहिनी कामदेव मंत्र: आकर्षण और प्रेम का वो सीक्रेट,

जो आपकी लाइफ बदल सकता है!

मोहिनी कामदेव मंत्र: आकर्षण और प्रेम का वो सीक्रेट,जो आपकी लाइफ बदल सकता है!
मोहिनी कामदेव मंत्र: आकर्षण और प्रेम का वो सीक्रेट, जो आपकी लाइफ बदल सकता है!

अरे यार सुन, क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोगों में एक अजीब सी कशिश, एक मैग्नेटिक अट्रैक्शन क्यों होता है ? लोग उनकी तरफ खींचे चले जाते हैं, उनकी बातों को ध्यान से सुनते हैं और उनसे इम्प्रेस हो जाते हैं।

सच बताऊँ, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन प्राचीन भारतीय विज्ञान में इसका एक बहुत ही गहरा और आध्यात्मिक रहस्य बताया गया है। जी, हम बात कर रहे हैं मोहिनी कामदेव मंत्र की। यह सिर्फ एक मंत्र नहीं है, भाई, यह तो एनर्जी और वाइब्रेशन्स का एक ऐसा कॉम्बिनेशन है जो आपकी पर्सनालिटी में एक गजब का चार्म भर सकता है।

देखो, आजकल की भागदौड़ भरी लाइफ में हम सब कहीं न कहीं अपने रिलेशनशिप को और बेहतर बनाना चाहते हैं, अपनी सोशल लाइफ में ज्यादा पॉपुलर होना चाहते हैं या बस अपने अंदर एक पॉजिटिव कॉन्फिडेंस फील करना चाहते हैं। अगर आप भी ऐसा ही कुछ सोचते हैं, तो यह लेख आपके लिए ही है। तो चलो, बिना किसी देरी के इस रहस्यमयी मंत्र की दुनिया में चलते हैं। क्या कहते हो?

 

आखिर ये मोहिनी और कामदेव हैं कौन?

 

अच्छा तो, मंत्र को समझने से पहले यह जानना ज़रूरी है कि हम किन शक्तियों का आह्वान कर रहे हैं।

  • मोहिनी: अरे बाबा, मोहिनी भगवान विष्णु का एकमात्र स्त्री अवतार है। समुद्र मंथन की कथा तो सुनी ही होगी? जब देवताओं और असुरों में अमृत के लिए लड़ाई हुई, तो भगवान विष्णु ने एक बेहद खूबसूरत और आकर्षक अप्सरा, मोहिनी का रूप लिया था। उनकी सुंदरता और आकर्षण ऐसा था कि बड़े-बड़े असुर भी अपना सब कुछ भूलकर उन पर मोहित हो गए। तो, मोहिनी रूप आकर्षण, सम्मोहन और एक ऐसी ब्यूटी का प्रतीक है जिसे कोई इग्नोर नहीं कर सकता।
  • कामदेव: दूसरी तरफ हैं कामदेव, जिन्हें हिंदू धर्म में प्रेम, इच्छा और आकर्षण का देवता माना जाता है। (विकिपीडिया पर और पढ़ें)। यूं कहें तो, किसी भी रिश्ते में प्यार और रोमांस की जो फीलिंग होती है, उसके पीछे कामदेव की ही एनर्जी होती है।

जरा सोचो, जब इन दोनों शक्तिशाली énergies को एक मंत्र में मिला दिया जाए तो क्या होगा? अरे वाह भई, परिणाम तो चमत्कारी होगा ही, है ना?

 

 तो ये है वो पावरफुल मोहिनी कामदेव मंत्र

 

सुनिए, मंत्र का हर शब्द बहुत मायने रखता है और इसका सही उच्चारण बहुत ज़रूरी है। यह मंत्र इस प्रकार है:

 

इसका सरल शब्दों में मतलब (मीनिंग) क्या है ?

 

अरे देखो, इसका मतलब बहुत गहरा है। इसमें आप प्रार्थना कर रहे हैं: “हे भगवान कामदेव, मैं जिसके भी सामने जाऊँ या जो भी मेरे चेहरे को देखे, वह मेरी ओर मोहित हो जाए, मुझ पर आकर्षित हो।” यह एक तरह से अपनी ऑरा और एनर्जी को चार्ज करने का तरीका है। मानते हो न?

 

 मंत्र जाप करने का सही प्रोसीजर (विधि) क्या है?

 

भाई देख, किसी भी मंत्र की शक्ति तभी काम करती है जब उसे सही नियम और विधि से किया जाए। ऐसा नहीं कि कभी भी, कहीं भी शुरू हो गए। जरा मानो, इसके लिए कुछ डिसिप्लिन की ज़रूरत होती है।

  1. सही समय और स्थान: इस मंत्र के जाप के लिए सबसे अच्छा दिन फ्राइडे (शुक्रवार) माना जाता है। आपको शाम के समय, नहा-धोकर, एक शांत और साफ़ जगह पर बैठना चाहिए। जहाँ पॉजिटिव वाइब्स महसूस हों।
  2. पहनावा: अगर हो सके तो पिंक (गुलाबी) या किसी भी हल्के रंग के साफ़ कपड़े पहनें। पिंक कलर प्रेम और आकर्षण से जुड़ा माना जाता है, समझे?
  3. आसन और दिशा: एक ऊनी आसन पर बैठें और आपका मुँह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
  4. पूजा की तैयारी: अपने सामने एक छोटी सी चौकी पर भगवान कृष्ण या कामदेव की तस्वीर स्थापित करें। एक घी का दीया और कुछ खुशबूदार अगरबत्ती जलाएं। इससे एक अच्छा माहौल बनता है।
  5. माला (Rosary): इस मंत्र के जाप के लिए स्फटिक की माला को सबसे बेस्ट माना गया है। यह पॉजिटिव एनर्जी को अपनी ओर खींचती है।
  6. संकल्प (Intention): भाई, यह सबसे इम्पॉर्टेंट स्टेप है। जाप शुरू करने से पहले हाथ में थोड़ा जल लेकर अपना संकल्प लें। मतलब, आप यह जाप क्यों कर रहे हैं, आपका उद्देश्य क्या है, यह मन में स्पष्ट करें। लेकिन एक बात याद रखना, आपका इंटेंशन हमेशा पॉजिटिव होना चाहिए। किसी का बुरा करने के लिए इसका इस्तेमाल कभी न करें।
  7. जाप की संख्या: हर रोज़ कम से कम एक माला, यानी 108 बार इस मंत्र का जाप करें।
  8. रेगुलैरिटी: सबसे ज़रूरी चीज़ है रेगुलैरिटी। आपको इस साधना को कम से कम 21 या 41 दिनों तक बिना नागा किए करना होगा। तुम देखो, तभी इसका पूरा असर देखने को मिलेगा।

 

 इस मंत्र के फायदे (बेनिफिट्स) तो जान लो

 

  • गजब का आकर्षण: सच कहूँ, इसका सबसे पहला फायदा तो यही है कि आपकी पर्सनालिटी में एक मैग्नेटिक अट्रैक्शन आ जाता है। लोग आपकी तरफ ध्यान देने लगते हैं।
  • रिलेशनशिप में सुधार: अगर आपके अपने पार्टनर के साथ रिश्ते में कोई प्रॉब्लम चल रही है, तो यह मंत्र उस रिश्ते में फिर से प्यार और मिठास घोल सकता है।
  • कॉन्फिडेंस बूस्ट: जब लोग आपको पसंद करने लगते हैं और आपको महत्व देते हैं, तो आपका सेल्फ-कॉन्फिडेंस अपने आप ही बूस्ट हो जाता है। आप ज्यादा एक्सप्रेसिव और सोशल फील करते हैं।
  • प्रोफेशनल लाइफ में हेल्प: क्या बताऊँ, आपकी बढ़ी हुई पर्सनालिटी और कॉन्फिडेंस आपको आपकी प्रोफेशनल लाइफ, जैसे कि जॉब इंटरव्यू या क्लाइंट मीटिंग्स में भी बहुत हेल्प करता है।
  • मन की शांति: यह मंत्र केवल बाहरी आकर्षण ही नहीं, बल्कि आपके मन को भी शांत और पॉजिटिव बनाता है।
 कुछ जरूरी सावधानियां (Precautions) भी हैं, अरे सुन भाई!

 

हर शक्तिशाली चीज़ की तरह, इस मंत्र के उपयोग में भी कुछ सावधानियां बरतनी ज़रूरी हैं।

  • गलत इरादे से बचें: इसका उपयोग कभी भी किसी को नुकसान पहुँचाने, किसी का घर तोड़ने या किसी पर ज़बरदस्ती कंट्रोल करने के इरादे से न करें। याद रखें, गलत काम का नतीजा हमेशा गलत ही होता है।
  • विश्वास और धैर्य रखें: भाई, यह कोई मैजिक नहीं है कि आज मंत्र पढ़ा और कल असर दिख गया। इसमें पूरा विश्वास और पेशेंस (धैर्य) रखना बहुत ज़रूरी है।
  • पवित्रता बनाए रखें: जब तक आप इस मंत्र का जाप कर रहे हैं, तब तक अपने मन, वचन और कर्म से पवित्रता बनाए रखने की कोशिश करें।
  • गुरु का मार्गदर्शन: अगर पॉसिबल हो, तो किसी जानकार गुरु से गाइडेंस लेकर ही इस साधना को शुरू करें। यह सबसे सेफ और बेस्ट तरीका है।

तो भाई, मोहिनी कामदेव मंत्र वास्तव में हिंदू धर्म का एक छिपा हुआ खजाना है। यह आपकी पर्सनालिटी को निखारने और आपके जीवन में प्रेम और पॉजिटिविटी लाने का एक आध्यात्मिक टूल है। बस ज़रूरत है इसे पूरी श्रद्धा, सही नीयत और सही विधि के साथ करने की।

क्या ख़याल है ? मुझे लगता है कि अब आप इस मंत्र के बारे में काफी कुछ समझ गए होंगे। इसका उपयोग जिम्मेदारी से करें और अपनी लाइफ को बेहतर बनाएं। सही है न? याद रखोगे न?

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mohini vashikaran mantra – मोहिनी वशीकरण मंत्र – वशीकरण मंत्र – मोहिनी मंत्र क्या आप किसी को अपनी तरफ आकर्षित करना चाहते हैं? क्या आप चाहते हैं कि लोग आपकी बातों को सुनें और आपसे प्रभावित हों? सुनो, अगर आपका इरादा नेक है और आप किसी अच्छे काम के लिए किसी का ध्यान अपनी ओर खींचना चाहते हैं, तो मोहिनी वशीकरण मंत्र आपकी मदद कर सकता है। भाईसाहब, यह कोई काला जादू या तंत्र-मंत्र की डरावनी दुनिया नहीं है, बल्कि यह तो पूरी तरह से पॉजिटिव एनर्जी और आकर्षण की शक्ति पर आधारित एक प्राचीन विद्या है।

आज के इस 2000 शब्दों के लेख में, हम आपको मोहिनी वशीकरण मंत्र के बारे में पूरी डिटेल में जानकारी देंगे। हम आपको कुछ पावरफुल मंत्र भी बताएँगे और उनके इस्तेमाल का सही तरीका भी समझाएंगे। तो भाई, इस लेख को पूरा पढ़ना, क्योंकि आधी-अधूरी जानकारी खतरनाक हो सकती है, समझे?

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 मोहिनी वशीकरण मंत्र: रहस्य, विधि और सावधानियां (2000 शब्दों का सम्पूर्ण गाइड)
अच्छा तो, सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि यह मोहिनी आखिर हैं कौन और यह वशीकरण काम कैसे करता है। देखो, जब तक आप बेसिक कॉन्सेप्ट नहीं समझेंगे, तब तक आपको इसका असली मतलब फील नहीं होगा।

आखिर कौन हैं मोहिनी? (एक पौराणिक कथा का रहस्य)


अरे भाई, मोहिनी कोई साधारण देवी नहीं हैं। वह स्वयं भगवान विष्णु का स्त्री अवतार हैं। जी हाँ, आपने सही सुना। इनकी कहानी बड़ी ही दिलचस्प है।

पुराणों के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, तो उसमें से चौदह रत्न निकले। उन्हीं में से एक था अमृत कलश। अब क्या था, अमृत पीने के लिए देवताओं और असुरों में भयंकर लड़ाई छिड़ गई। असुर बहुत ताकतवर थे और वे देवताओं से अमृत छीनना चाहते थे।

तब, देवताओं की मदद करने के लिए भगवान विष्णु ने एक अति सुंदर, मन को मोह लेने वाली अप्सरा का रूप धारण किया। इसी रूप को “मोहिनी” कहा गया। उनका रूप इतना आकर्षक था कि सारे असुर अपनी सुध-बुध खो बैठे और उनके मायाजाल में फँस गए। मोहिनी ने अपनी चतुराई से सारा अमृत देवताओं को पिला दिया और असुरों को वंचित रखा।

तो समझे? मोहिनी का मतलब ही है ‘मन को मोह लेने वाली’। इसीलिए, उनके नाम से जुड़े मंत्रों में आकर्षण की अद्भुत शक्ति मानी जाती है। यह आकर्षण किसी को नुकसान पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी पॉजिटिव एनर्जी से किसी को प्रभावित करने के लिए होता है।

 मोहिनी वशीकरण मंत्र क्या है और यह कैसे काम करता है ?


भाई देख, “वशीकरण” शब्द सुनते ही लोगों के माइंड में अक्सर नेगेटिव ख्याल आते हैं। लेकिन सच बताऊँ, वशीकरण का असली मतलब है ‘वश में करना’ यानी किसी को अपने प्रभाव में लाना। यह प्रभाव प्यार, सम्मान और अच्छी भावना से जुड़ा होता है।

मोहिनी वशीकरण मंत्र एक ऐसा ही शक्तिशाली मंत्र है जो साउंड वाइब्रेशन्स (ध्वनि की तरंगों) और आपकी इंटेंशन (इरादे) की शक्ति पर काम करता है। 

जब आप पूरे विश्वास और एकाग्रता के साथ इस मंत्र का जाप करते हैं, तो ब्रह्मांड में एक खास तरह की एनर्जी उत्पन्न होती है। यह एनर्जी आपके औरा (आभामंडल) को इतना पॉजिटिव और मैग्नेटिक (चुंबकीय) बना देती है कि लोग स्वाभाविक रूप से आपकी ओर आकर्षित होने लगते हैं।

मान लो, यह आपके पर्सनालिटी को एक चार्म देने जैसा है। इसका मुख्य उद्देश्य किसी के मन पर जबरदस्ती कब्ज़ा करना नहीं, बल्कि उसके दिल में अपने लिए एक सॉफ्ट कॉर्नर बनाना है। इसका यूज़ पति-पत्नी के बीच बिगड़ते रिलेशनशिप को सुधारने, अपने बॉस या कलीग्स को प्रभावित करने, या किसी खास इंसान को अपनी जिंदगी में लाने के लिए किया जा सकता है, बशर्ते आपका इरादा नेक हो।

सबसे प्रभावशाली और सिद्ध मोहिनी वशीकरण मंत्र


चलिए, अब मुद्दे की बात पर आते हैं। यहाँ हम आपको कुछ सरल और बहुत इफेक्टिव मोहिनी मंत्र बता रहे हैं। आप अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से किसी एक को चुन सकते हैं।

मंत्र 1: सर्वजन मोहिनी वशीकरण मंत्र

यह मंत्र सबसे ज्यादा पॉपुलर और शक्तिशाली माना जाता है। इसका प्रयोग किसी भी व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए किया जा सकता है।

मंत्र: ॐ नमो भगवते मोहिनी रूपाय सर्वजन वशीकरणाय कुरु कुरु स्वाहा।

इसका मतलब क्या है ?

अरे सुनो, इसका सरल सा मतलब है, “हे भगवान, जो मोहिनी रूप में हैं, मैं आपको नमन करता हूँ। कृपया सभी लोगों को मेरे वश में करें (यानी मुझसे प्रभावित करें)।”

मंत्र 2: तेल से सिद्ध होने वाला मोहिनी मंत्र

इस मंत्र को तेल पर सिद्ध किया जाता है और फिर उस तेल का तिलक लगाया जाता है। माना जाता है कि जो भी उस तिलक को देखता है, वह आकर्षित हो जाता है।

मंत्र: ॐ मोहिनी-मोहिनी कहाँ चली? राजा की बारी, मोहने चली। तेल का दीपक, घी की बाती। जो देखे मेरे तिलक को, वो सोती नींद जाग उठे। न माने तो दुहाई कामरू कामाख्या की।

भाई, यह मंत्र थोड़ा तांत्रिक प्रभाव वाला है, इसलिए इसे बहुत सावधानी से और किसी एक्सपर्ट की गाइडेंस में ही करना चाहिए।

मंत्र 3: जल से सिद्ध होने वाला मोहिनी मंत्र

इस मंत्र को जल पर सिद्ध करके उस जल को किसी को पिलाने से वह व्यक्ति आपके प्रति आकर्षित होता है। इसका प्रयोग अक्सर पति-पत्नी के बीच प्यार बढ़ाने के लिए किया जाता है।

मंत्र: ॐ नमो भगवती, मोहिनी देवी, (जिसको वश में करना हो उसका नाम) में वश्यं वश्यं कुरु कुरु स्वाहा।

तो, ये कुछ पॉपुलर मंत्र थे। लेकिन भाई, सिर्फ मंत्र जान लेना ही काफी नहीं है। असली खेल तो इसे सिद्ध करने की विधि का है। मानते हो न?

 मोहिनी वशीकरण मंत्र जाप की सही विधि (Step-by-Step गाइड)


देखो यार, किसी भी मंत्र की शक्ति तभी जागृत होती है जब उसे सही विधि-विधान से किया जाए। यह एक तरह का आध्यात्मिक प्रोसेस है जिसमें नियम बहुत मैटर करते हैं।

समय और स्थान (टाइम एंड प्लेस):

इस मंत्र का जाप करने के लिए सबसे अच्छा समय देर रात का माना जाता है, खासकर 11 बजे से 1 बजे के बीच।

ऐसी जगह चुनें जहाँ बिलकुल शांति हो और कोई आपको डिस्टर्ब न करे।

अपना मुँह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।

शुद्धता और आसन (प्योरिटी एंड पोस्चर):

मंत्र जाप से पहले स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहनें। लाल या पीले रंग के कपड़े पहनना ज्यादा शुभ माना जाता है।

एक साफ ऊनी आसन या कुशा के आसन पर बैठें।

जरूरी सामग्री (रिक्वायर्ड मैटेरियल्स):

अपने सामने एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।

उस पर भगवान विष्णु या मोहिनी देवी की एक तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।

एक घी का दीपक और कुछ अगरबत्तियां जलाएं।

पूजा में ताजे फूल, फल और मिठाई का प्रसाद चढ़ाएं।

जाप करने के लिए स्फटिक या रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करें।

संकल्प (इंटेंशन):

अब भाई, यह सबसे जरूरी स्टेप है। आँखें बंद करके, हाथ जोड़कर भगवान विष्णु और मोहिनी देवी का ध्यान करें।

अब अपना संकल्प लें। संकल्प का मतलब है कि आप यह पूजा क्यों कर रहे हैं, आपका मकसद क्या है। अपना नाम, गोत्र और जिस व्यक्ति को आप आकर्षित करना चाहते हैं, उसका नाम मन में लेकर अपनी इच्छा कहें। याद रहे, आपकी इंटेंशन एकदम क्लियर और पॉजिटिव होनी चाहिए।

मंत्र जाप (चैंटिंग):

अब अपनी माला लेकर चुने हुए मंत्र का 108 बार (यानी एक माला) जाप करें।

जाप करते समय आपका पूरा फोकस मंत्र के शब्दों और उसके वाइब्रेशन पर होना चाहिए।

यह प्रक्रिया आपको कम से कम 21 दिनों या 41 दिनों तक लगातार करनी होती है।

ध्यान (मेडिटेशन):

जाप पूरा होने के बाद, कुछ देर शांत बैठकर मोहिनी देवी के रूप का या उस व्यक्ति का ध्यान करें जिसे आप पाना चाहते हैं। विसुअलाइज करें कि आपका काम सफल हो गया है।

यह पूरी विधि बहुत धैर्य और विश्वास की मांग करती है। अरे भाई, यह कोई इंस्टेंट नूडल्स नहीं है कि दो मिनट में तैयार हो जाए, है ना?

 मंत्र जाप के दौरान बरतने वाली महत्वपूर्ण सावधानियां


अरे दोस्त, शक्ति के साथ जिम्मेदारी भी आती है। इन मंत्रों का प्रयोग करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, वरना इनका उल्टा इफेक्ट भी हो सकता है।

गलत इरादे से बचें: किसी को नुकसान पहुँचाने, धोखा देने या किसी का बुरा करने के इरादे से इस मंत्र का प्रयोग कभी न करें। ऐसा करने पर यह मंत्र आप पर ही भारी पड़ सकता है।

गोपनीयता बनाए रखें (कीप इट सीक्रेट): जब आप यह साधना कर रहे हों, तो इसके बारे में किसी को न बताएं। हल्ला करने से इसकी एनर्जी खत्म हो जाती है।

गुरु का मार्गदर्शन (गुरु गाइडेंस): अगर संभव हो, तो यह साधना किसी जानकार गुरु या पंडित की देखरेख में ही करें। वो आपको सही रास्ता दिखा सकते हैं और गलती होने से बचा सकते हैं। लेकिन प्रैक्टिकल ज्ञान गुरु से ही मिलता है।

धैर्य रखें (बी पेशेंट): इस काम में समय लगता है। निराश न हों और विश्वास के साथ अपनी साधना जारी रखें।

ब्रह्मचर्य का पालन: साधना के दिनों में मांस, मदिरा, और तामसिक भोजन से दूर रहें। हो सके तो ब्रह्मचर्य का पालन करें। इससे आपकी आध्यात्मिक एनर्जी बढ़ती है।

 मोहिनी एकादशी का क्या महत्व है?

भाई साहब, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया था। इसलिए, इस दिन मोहिनी वशीकरण मंत्र का जाप करना या साधना शुरू करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। इस दिन की गई पूजा का इफेक्ट कई गुना बढ़ जाता है।

 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)


1. क्या मोहिनी वशीकरण मंत्र सच में काम करता है ?

जवाब: देखो भाई, यह पूरी तरह से आपकी श्रद्धा, विश्वास, इरादे और जाप करने की विधि पर निर्भर करता है। अगर आपका इरादा सच्चा है और आप सही विधि का पालन करते हैं, तो आपको पॉजिटिव रिजल्ट्स जरूर मिल सकते हैं।

2. मंत्र का असर दिखने में कितना समय लगता है ?

जवाब: यार, इसका कोई फिक्स टाइम नहीं है। यह आपकी साधना की गहराई और सामने वाले व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है। किसी को 21 दिन में असर दिखता है, तो किसी को कुछ महीने भी लग सकते हैं।

3. क्या मैं इसका प्रयोग किसी को नुकसान पहुँचाने के लिए कर सकता हूँ ?

जवाब: बिलकुल नहीं! अरे बाबा, ऐसी गलती कभी मत करना। यह विद्या केवल अच्छे कामों के लिए है। गलत इस्तेमाल करने पर इसका भयानक उल्टा असर होता है, जो आपका जीवन बर्बाद कर सकता है।

4. क्या कोई भी यह मंत्र कर सकता है ?

जवाब: जी हाँ, कोई भी स्त्री या पुरुष, जिसका इरादा नेक हो, इस मंत्र का जाप कर सकता है। लेकिन जैसा मैंने कहा, किसी एक्सपर्ट की गाइडेंस लेना हमेशा बेस्ट होता है।

5. अगर मंत्र काम न करे तो क्या करें ?

जवाब: हो सकता है आपकी विधि में कोई कमी हो या आपकी एकाग्रता में कमी हो। निराश न हों। अपनी विधि को फिर से चेक करें और पूरे विश्वास के साथ दोबारा प्रयास करें। प्रभु की लीला पर भरोसा रखें।

 निष्कर्ष (Conclusion)


तो भाई, मोहिनी वशीकरण मंत्र (Mohini के बारे में और पढ़ें) एक बहुत ही शक्तिशाली आध्यात्मिक टूल है, लेकिन यह कोई खिलौना नहीं है। इसका सम्मान करना और इसे सही उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है। यह आपके जीवन में प्यार, सफलता और पॉजिटिव रिलेशनशिप लाने में मदद कर सकता है, पर तभी जब आपका दिल और इरादा साफ हो।

यह आपकी पर्सनालिटी के मैग्नेटिज्म को बढ़ाता है ताकि लोग आपकी अच्छी बातों और गुणों से प्रभावित हों। याद रखें, सच्चा आकर्षण जबरदस्ती से नहीं, बल्कि प्यार और सम्मान से ही हासिल होता है।

तो, क्या कहते हो? उम्मीद है आपको यह जानकारी अच्छी लगी होगी और आपके सारे डाउट्स क्लियर हो गए होंगे। ठीक है न?

वशीकरण कितने दिन में होता है ? (Vashikaran Kitne Din Mein Hota Hai) जानिए पूरा सच!

वशीकरण कितने दिन में होता है? (Vashikaran Kitne Din Mein Hota Hai) जानिए पूरा सच!

 वशीकरण कितने दिन में होता है ? (Vashikaran 

Kitne Din Mein Hota Hai)  जानिए पूरा सच!

 

 वशीकरण कितने दिन में होता है? (Vashikaran Kitne Din Mein Hota Hai) जानिए पूरा सच!
वशीकरण कितने दिन में होता है? (Vashikaran Kitne Din Mein Hota Hai) जानिए पूरा सच!

Introduction (परिचय)

वशीकरण कितने दिन में होता है? (Vashikaran Kitne Din Mein Hota Hai) जानिए पूरा सच !सुनो! कभी न कभी आपके मन में ये सवाल तो जरूर आया होगा कि आखिर ये वशीकरण होता क्या है और, सबसे जरूरी बात, वशीकरण कितने दिन में होता है? देखो भाई, इंटरनेट पर तो तरह-तरह की बातें हैं। कोई कहता है 24 घंटे में काम पक्का, तो कोई महीनों की बात करता है। तो सच क्या है? भई देख, आज हम इसी गुत्थी को सुलझाने वाले हैं। हम आपको बताएंगे कि इस प्रोसेस में कितना टाइम लगता है और कौन सी बातें इस पर असर डालती हैं। सच बताऊँ, ये कोई मैजिक की छड़ी नहीं है जिसे घुमाया और काम हो गया। इसमें एनर्जी और विश्वास का बहुत बड़ा खेल है। समझे?

 वशीकरण कितने दिन में होता है? (Vashikaran Kitne Din Mein Hota Hai) जानिए पूरा सच!
वशीकरण कितने दिन में होता है? (Vashikaran Kitne Din Mein Hota Hai) जानिए पूरा सच!

सबसे पहले, ये वशीकरण है क्या बला? ( What is Vashikaran Actually ?)

अच्छा तो, इससे पहले कि हम टाइम की बात करें, ये समझना जरूरी है कि वशीकरण आखिर है क्या। देखो ना, वशीकरण एक बहुत पुरानी विद्या है। इसका मतलब किसी को जबरदस्ती कंट्रोल करना नहीं होता, जैसा कि फिल्मों में दिखाते हैं। अरे भाई, इसका असली मकसद होता है किसी इंसान की सोच को पॉजिटिव तरीके से अपनी तरफ अट्रैक्ट करना। 

यूँ कहें तो, ये एक एनर्जी का खेल है, जिसमें मंत्रों और कुछ खास तरीकों से एक पॉजिटिव वाइब (positive vibe) क्रिएट की जाती है, जिससे सामने वाले इंसान के मन में आपके लिए अच्छी फीलिंग्स आने लगती हैं। मानते हो?

 

 तो फिर, वशीकरण कितने दिन में होता है ? ( The Main Question: What’s the Timeframe? )

भाईसाहब, अब आते हैं असली सवाल पर। इसका कोई फिक्स जवाब नहीं है। जी हाँ, आपने सही सुना। कोई भी अगर आपको 100% गारंटी देता है कि 3 घंटे या 1 दिन में काम हो जाएगा, तो समझो दाल में कुछ काला है। सच कहूँ, वशीकरण का रिजल्ट कई बातों पर डिपेंड करता है। चलो, जरा सोचो, हर इंसान अलग है, हर सिचुएशन अलग है, तो रिजल्ट एक जैसा कैसे हो सकता है, है ना?

यहाँ कुछ फैक्टर्स हैं जो असर डालते हैं:

 

1. वशीकरण का मेथड (Method of Vashikaran)

देखो, वशीकरण करने के बहुत सारे तरीके होते हैं। जैसे कि:

मंत्र द्वारा वशीकरण: इसमें मंत्रों का जाप होता है। ये कितना पावरफुल होगा, ये इस बात पर डिपेंड करता है कि मंत्र कितना सिद्ध है और जाप करने वाला कितनी श्रद्धा से कर रहा है।

फोटो से वशीकरण: इसमें इंसान की फोटो का इस्तेमाल होता है।

नाम से वशीकरण: इसमें नाम और कुछ और डिटेल्स का यूज होता है।

लौंग, इलायची जैसी चीजों से वशीकरण: ये तांत्रिक क्रियाओं का हिस्सा होता है।

भाई, हर मेथड का असर होने का टाइम अलग-अलग होता है। कोई मेथड जल्दी रिजल्ट दे सकता है, तो किसी में वक्त लगता है।

 

 2. करने वाले की एनर्जी और एक्सपीरियंस (Practitioner’s Energy and Experience)

जरा सोच के देखो, अगर कोई काम किसी एक्सपर्ट से करवाओगे तो रिजल्ट अच्छा मिलेगा न? बिलकुल वैसे ही, जो भी यह पूजा या क्रिया कर रहा है, चाहे वो आप खुद हों या कोई गुरु, उनका एक्सपीरियंस और उनकी आध्यात्मिक शक्ति बहुत मैटर करती है। एक अनुभवी इंसान सही तरीके से एनर्जी को डायरेक्शन दे सकता है, जिससे रिजल्ट जल्दी मिलने के चांस बढ़ जाते हैं।

 

 3. जिस पर वशीकरण हो रहा है उसकी मानसिक स्थिति (Mental State of the Target Person)

अरे भाई, ये बहुत जरूरी पॉइंट है। मान लो, जिस इंसान पर आप वशीकरण करना चाहते हो, उसका मन बहुत स्ट्रांग है या वो बहुत ज्यादा नेगेटिव एनर्जी से घिरा हुआ है, तो उस पर असर होने में ज्यादा टाइम लगेगा। उसकी विल पावर (will power) और औरा (aura) को भेदने में समय लगता है। समझे?

 

 4. आपका इंटेंशन यानी इरादा (Your Intention)

आप वशीकरण क्यों कर रहे हैं? आपका इरादा क्या है? क्या आप किसी का अच्छा चाहते हैं, जैसे अपने रिश्ते को बचाना? या आपका इरादा नेगेटिव है? देखो, पॉजिटिव कामों के लिए यूनिवर्स भी मदद करता है और असर जल्दी हो सकता है। लेकिन अगर इरादा गलत है, तो इसका असर या तो होगा ही नहीं या फिर उल्टा भी पड़ सकता है। अरे बाप रे! सच में, ये कोई मज़ाक नहीं है।

 

 5. ग्रह-नक्षत्रों की चाल (Planetary Positions)

जी, ज्योतिष और तंत्र में ग्रहों की स्थिति को बहुत महत्व दिया जाता है। कभी-कभी किसी इंसान पर ग्रहों का ऐसा प्रभाव होता है कि उस पर कोई भी बाहरी शक्ति जल्दी असर नहीं कर पाती। एक अच्छा एक्सपर्ट सही मुहूर्त और समय देखकर ही कोई काम शुरू करता है। इसके बारे में और जानने के लिए आप ज्योतिष की विकिपीडिया पढ़ सकते हैं।

 

 एक अंदाज़ा: सामान्य तौर पर कितना समय लग सकता है? (A General Estimate)

हालांकि कोई पक्का टाइम नहीं है, फिर भी एक मोटा-मोटा अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

बहुत तेज असर (3 से 7 दिन): अगर सब कुछ परफेक्ट हो – सही मुहूर्त, पावरफुल मंत्र, मजबूत इरादा और सामने वाले का कमजोर औरा – तो 3 से 7 दिन में भी हल्का-फुल्का असर दिखना शुरू हो सकता है।

सामान्य असर (11 से 21 दिन): ज्यादातर मामलों में, असर दिखने में 11, 21 या 41 दिन का समय लग जाता है। ये एक पूरा साइकिल होता है, जिसमें एनर्जी अपना काम करती है।

देर से असर (कुछ महीने): अगर सिचुएशन बहुत कॉम्प्लिकेटेड है, बहुत ज्यादा नेगेटिविटी है, तो इसमें कुछ महीने भी लग सकते हैं। भाई, इसमें पेशेंस यानी धैर्य की बहुत जरूरत पड़ती है।

 

 कुछ जरूरी बातें और सावधानियां (Important Things and Precautions)

अरे सुन भाई, अगर तुम ये करने की सोच रहे हो, तो कुछ बातें गांठ बांध लो:

पॉजिटिव रहो: तुम्हारा इरादा बिलकुल साफ और पॉजिटिव होना चाहिए। किसी का बुरा करने की सोचोगे तो तुम्हारा ही बुरा होगा।

विश्वास रखो: जो भी प्रोसेस तुम कर रहे हो, उस पर पूरा विश्वास रखो। शक करने से एनर्जी कमजोर होती है।

धैर्य रखो: जैसा बताया, ये कोई इंस्टेंट नूडल्स नहीं है। धैर्य रखना पड़ेगा। रिजल्ट के लिए जल्दबाज़ी मत करो।

सही एक्सपर्ट चुनो: अगर किसी से करवा रहे हो, तो किसी ज्ञानी और सच्चे इंसान को ही चुनो। आजकल फ्रॉड बहुत हैं, भाई बच के रहना।

गोपनीयता: इस बारे में ढिंढोरा मत पीटो। इसे सीक्रेट रखो, तभी एनर्जी सही जगह फोकस होगी। इस प्रक्रिया में मंत्रों की शक्ति का सही उच्चारण और उपयोग महत्वपूर्ण होता है।

वशीकरण कितने दिन में होता है ?

अरे देखो, जब बात वशीकरण की होती है ना, तो लोगों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है — “वशीकरण कितने दिन में असर करता है?” या “इसका रिजल्ट कब मिलेगा?” भाईसाहब, ये सवाल एकदम जायज़ है। आखिर जब कोई व्यक्ति किसी को अपने वश में करने की सोचता है, तो वो चाहता है कि वो काम जल्दी हो, है ना?

वशीकरण क्या होता है ? 

अरे देखो, पहले तो ये समझ लो कि वशीकरण कोई जादू-टोना नहीं, बल्कि एक मानसिक और ऊर्जा आधारित प्रक्रिया है। इसमें मंत्र, तंत्र, और साधना का सहारा लिया जाता है। वशीकरण का मकसद किसी के मन, सोच, और भावना को इस तरह से प्रभावित करना होता है कि वो व्यक्ति आपके अनुसार सोचने और व्यवहार करने लगे।

वशीकरण कितने प्रकार का होता है ? 

अच्छा भई, वशीकरण कई प्रकार के होते हैं:

मोहिनी वशीकरण
आकर्षण वशीकरण
फोटो वशीकरण
नाम वशीकरण
लौंग या तेजपत्ता वशीकरण

हर प्रकार की विधि और उसका असर अलग-अलग समय लेता है। अबे, ये कोई इंस्टेंट नूडल्स नहीं कि 2 मिनट में बन जाए।

वशीकरण कितने दिन में असर करता है ? 

भाई देख, ये एकदम fix नहीं है कि वशीकरण कितने दिन में असर करेगा। लेकिन कुछ बातें हैं जो समय को प्रभावित करती हैं:

1. किस विधि का प्रयोग किया गया है ? 

जैसे कि तेजपत्ता वशीकरण, लौंग वशीकरण, या चिट्ठी वशीकरण – हर एक की टाइमिंग अलग होती है। तेजपत्ता वाला अगर सही तरीके से किया जाए तो 7 से 21 दिन के अंदर असर दिखा सकता है।

2. आपकी साधना में कितनी शक्ति है ? 

भाई सुन, अगर आप मन से साधना कर रहे हो, श्रद्धा है, तो प्रभाव जल्दी होगा। आधे मन से करोगे, तो नतीजा भी आधा ही मिलेगा। है कि नहीं?

3. सामने वाला व्यक्ति कौन है ? 

जरा सोचो, अगर सामने वाला व्यक्ति spiritually strong है या उसका ध्यान हमेशा ईश्वर में लगा है, तो उस पर असर करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। लेकिन अगर वो emotionally weak है, तो वशीकरण जल्दी असर करेगा।

आमतौर पर वशीकरण का असर कब दिखता है ? 

अरे जी, आमतौर पर देखा गया है कि यदि साधना सही तरीके से हो, मंत्र सही उच्चारण से पढ़े जाएं, और नियमों का पालन किया जाए — तो 11 दिन से लेकर 45 दिन तक के अंदर असर दिखना शुरू हो जाता है।

जल्दी असर करने वाला वशीकरण मंत्र 

 नीचे एक साधारण पर असरकारक वशीकरण मंत्र दिया गया है जो 7 से 11 दिन में प्रभाव दिखा सकता है

ॐ नमो भगवते कामदेवाय अमुकं मे वशमानय स्वाहा॥

उपयोग कैसे करें ?

रोज़ सुबह स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें
शांत मन से इस मंत्र का 108 बार जाप करें
“अमुकं” की जगह उस व्यक्ति का नाम लें
कम से कम 21 दिन तक नियमपूर्वक करें

सावधानी: बिना गुरु निर्देश या अनुभव के, कोई भी तंत्र या साधना हानि पहुँचा सकती है। इसलिए ज़रूरी जानकारी लें या किसी जानकार से सलाह लें।

क्या वशीकरण हमेशा काम करता है ? 

अजी, ऐसा नहीं है कि हर वशीकरण काम करेगा। कुछ बातें ध्यान में रखनी चाहिए:

कर्म की शुद्धता: अगर आपका इरादा गलत है तो वशीकरण काम नहीं करेगा।
आत्मिक शक्ति: आपमें आत्मबल होना चाहिए।
गुरु मार्गदर्शन: बिना गुरु के राह भटक सकते हो यार।

वशीकरण के अनुभव और फीलिंग 

सच बताऊँ, कई बार लोग वशीकरण के बाद अजीब सी फीलिंग महसूस करते हैं — जैसे कि सामने वाला अचानक बदल गया हो, बात-बात में मान जाता हो, या फिर खुद से संपर्क करने लगे।

भाई, इस फीलिंग को शब्दों में बताना मुश्किल है। कई लोग कहते हैं — “जैसे कोई शक्ति उस व्यक्ति को आपकी ओर खींच रही हो।”

वशीकरण को सफल बनाने के टिप्स 

पूजा में मन लगाओ
शक मत करो
आधे मन से ना करो
रोज़ समय पर जाप करो
सामने वाले के लिए नकारात्मक भावना मत रखो

क्या वशीकरण करना सही है ? 

अबे भाई, यही सबसे बड़ा सवाल है — क्या वशीकरण करना सही है?

देखो, अगर आप किसी को कष्ट देने के लिए, या जबरदस्ती करने के लिए वशीकरण कर रहे हो तो ये गलत है। लेकिन अगर आपका प्रेम सच्चा है, आप सिर्फ उन्हें अपनी भावना समझाना चाहते हो, तो प्रभु की कृपा से मार्ग मिल सकता है।

निष्कर्ष: वशीकरण कितने दिन में होता है ? 

अच्छा सुनो, कुल मिलाकर बात ये है:

असर दिखने का समय 7 से 45 दिन के बीच हो सकता है
हर व्यक्ति, विधि और परिस्थिति के अनुसार अलग समय लगता है
श्रद्धा, नियम, और सही मंत्र से जल्दी असर संभव है

वशीकरण कितने दिन में होता है – यही सबसे बड़ा सवाल है जो अब तुम्हें समझ आ गया न?

अंतिम शब्द 

भाई मान लो, वशीकरण कोई गेम नहीं है। ये एक गहरी साधना है। अगर सही उद्देश्य और श्रद्धा से किया जाए, तो जीवन में चमत्कार संभव हैं।

अब बताओ ज़रा, क्या तुमने वशीकरण आज़माया है ? या आज़माना चाहते हो ? क्या तुमने किसी से सलाह ली है ?

Conclusion (निष्कर्ष)

तो भाई, अब आप समझ गए होंगे कि “वशीकरण कितने दिन में होता है” का कोई एक जवाब नहीं है। यह एक आध्यात्मिक प्रोसेस है जो पूरी तरह से श्रद्धा, नियम और एनर्जी पर टिका है। इसमें कुछ दिन भी लग सकते हैं और कुछ महीने भी। सबसे जरूरी आपका पॉजिटिव इरादा और धैर्य है। उम्मीद है, आपको आपके सवाल का जवाब मिल गया होगा। क्या कहते हो? सही है न? अब आप किसी के बहकावे में तो नहीं आओगे न? अपना ख्याल रखना! ठीक है क्या?

तेजपत्ता वशीकरण – तेजपत्ता से वशीकरण कैसे होता है ?

तेजपत्ता वशीकरण - तेजपत्ता से वशीकरण कैसे होता है ?

🔮 तेजपत्ता वशीकरण – तेजपत्ता से वशीकरण कैसे   होता है ?

तेजपत्ता वशीकरण - तेजपत्ता से वशीकरण कैसे होता है ?
तेजपत्ता वशीकरण – तेजपत्ता से वशीकरण कैसे होता है ?

भाईसाहब, क्या आप कभी सोच सकते हो कि रसोई में पड़ा एक मामूली तेजपत्ता किसी के मन को मोहित कर सकता है? अजी हाँ, तेजपत्ता वशीकरण एक ऐसा रहस्यमय उपाय है जो सदियों से तंत्र विद्या में इस्तेमाल होता आ रहा है। अरे यार, ये कोई मनगढ़ंत बात नहीं है, बल्कि आस्थावान तांत्रिकों और साधकों का अनुभव है। [Wikipedia – Bay leaf]


🌿 तेजपत्ता क्या होता है और इसका आध्यात्मिक महत्व

अरे देखो, तेजपत्ता यानी Bay Leaf, आमतौर पर मसाले के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन भाई, ये सिर्फ स्वाद बढ़ाने वाला नहीं, बल्कि एक ऊर्जा युक्त पौधा है। पुरानी मान्यताओं के अनुसार, तेजपत्ता के पत्ते नकारात्मक ऊर्जा को दूर करते हैं और सकारात्मक कंपन (vibrations) को आकर्षित करते हैं।

Source: [NDTV Food – Bay Leaf Benefits]


🧘‍♂️  ये वशीकरण किस लिए किया जाता है?

सुनिए ज़रा, वशीकरण शब्द सुनते ही कुछ लोगों को गलत सोच आ जाती है। लेकिन जी, इसका मतलब किसी को हानि पहुँचाना नहीं होता, बल्कि प्रेम, आकर्षण, और आपसी समझ को बढ़ाना होता है। जैसे अगर आप किसी से प्यार करते हो और वो आपको इग्नोर कर रहा है, तो ये उपाय काम आ सकता है। वैसे, तेजपत्ता वशीकरण का इस्तेमाल निम्न कारणों से किया जाता है:

  • प्रेम संबंधों को मजबूत करने के लिए

  • पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ाने के लिए

  • किसी की गलतफहमी को दूर करने के लिए

  • प्रेमी/प्रेमिका को मनाने के लिए

🔥 वशीकरण में तेजपत्ता कैसे काम करता है?

भाई देख, तेजपत्ता जलाने पर इसमें से जो धुआँ निकलता है, वो मानसिक तरंगों को प्रभावित करता है। ऐसा माना जाता है कि जब आप सच्चे मन से नाम लेकर तेजपत्ता को जलाते हो और मंत्र पढ़ते हो, तो सामने वाला व्यक्ति आपके प्रति आकर्षित होता है।

वैसे तो कई तरीके हैं, लेकिन नीचे दिए गए उपाय सबसे प्रभावशाली माने जाते हैं।


📿 तेजपत्ता वशीकरण के लिए आवश्यक सामग्री

भाई, पहले तो ज़रूरी चीजें इकट्ठी कर लो:

  • 3 सूखे तेजपत्ते

  • लाल रंग का धागा

  • एक साफ सफेद कागज

  • गुलाब की अगरबत्ती

  • एक चुपचाप और शांत स्थान

  • और सबसे जरूरी – आपकी नीयत शुद्ध होनी चाहिए

🕉️ तेजपत्ता वशीकरण मंत्र
 

चलो अच्छा भई, अब बात करते हैं सबसे ज़रूरी चीज की – वशीकरण मंत्र। जब भी आप ये उपाय करें, नीचे दिया गया मंत्र कम से कम 21 बार ज़रूर जपें।

🔔 “ॐ नमो कामदेवाय अमुकं मे वशं कुरु कुरु स्वाहा।”
(यहाँ ‘अमुकं’ की जगह उस व्यक्ति का नाम लें जिसे आप वश में करना चाहते हैं)

👉 [Source – speakingtree.in on Vashikaran]

🔥 वशीकरण की विधि (Step-by-step तरीका)

अरे दोस्त, ध्यान से सुनो:

  1. सबसे पहले तेजपत्ते को एक सफेद कागज पर रखो और उस व्यक्ति का नाम लिखो।

  2. अब उस तेजपत्ते को मोड़ कर लाल धागे से बांध दो।

  3. अगरबत्ती जलाकर, उसके धुएं में उस पत्ते को घुमाते हुए मंत्र पढ़ो।

  4. अब उस तेजपत्ते को किसी साफ स्थान पर रख दो, जहाँ कोई न देखे।

  5. यह उपाय 3 दिन लगातार करना होता है।

  6. चौथे दिन उस तेजपत्ते को किसी जलधारा में प्रवाहित कर दो।

बस हो गया काम।

💡 कुछ ज़रूरी बातें – ध्यान देना जरूरी है भाई

  • यह उपाय केवल तभी करें जब आपकी नीयत साफ हो।

  • किसी को नुकसान पहुँचाने के इरादे से यह उपाय न करें।

  • उपाय के समय आपका मन एकाग्र और शांत होना चाहिए।

  • वशीकरण का असर व्यक्ति विशेष की ऊर्जा पर निर्भर करता है।


🙏 क्या यह उपाय वास्तव में काम करता है?

भाई कहूँ तो, तेजपत्ता वशीकरण कोई चमत्कार नहीं है, यह मानसिक ऊर्जा और विश्वास पर आधारित एक विधि है। अरे मान लो न, अगर आपका दिल साफ है और इरादा नेक है, तो ये उपाय ज़रूर असर करेगा।

कई लोगों ने इसे आज़माया और सकारात्मक परिणाम मिले। हालांकि, इसका परिणाम हर व्यक्ति में अलग हो सकता है। [Reference: Dainik Bhaskar – Vashikaran Totke]

🧠 अरे सोचो, क्या यह सही है?

देखो यार, किसी को वश में करना सुनने में अजीब लगता है। लेकिन जब बात प्यार की हो, रिश्तों की हो, तो थोड़ा आध्यात्मिक उपाय करना बुरा नहीं है। जब हम मंदिर में भगवान से मनोकामना करते हैं, तो ये उपाय भी उसी का एक रूप है।

🌺 क्या सिर्फ तेजपत्ता ही काफी है?

अरे नहीं, वशीकरण के और भी कई तरीके हैं – जैसे नींबू, लौंग, कपूर, लेकिन तेजपत्ता को खास इसलिए माना जाता है क्योंकि:

  • ये आसानी से मिल जाता है

  • इसे जलाने पर विशेष ऊर्जा उत्पन्न होती है

  • इसका उपयोग देवी-देवताओं की पूजा में भी होता है

🔚 निष्कर्ष – अरे सुनो , ये सब फालतू नहीं है

तो भाई, अब आपने जान ही लिया कि तेजपत्ता वशीकरण कोई मज़ाक नहीं, बल्कि एक प्राचीन तांत्रिक विद्या है। अगर सही तरीके से, सच्चे मन से और नेक नीयत से किया जाए, तो इसका असर जरूर होता है।

हाँ, मैं ये नहीं कह रहा कि ये कोई जादू है – लेकिन जैसा भाव होता है, वैसी शक्ति उत्पन्न होती है। और याद रखना – प्रेम में किया गया उपाय कभी व्यर्थ नहीं जाता।

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अरे यार, जब भी “सबसे शक्तिशाली वशीकरण मंत्र” की बात होती है, तो लोगों के मन में न जाने कितने सवाल और कैसी-कैसी छवियाँ उभरने लगती हैं। कोई इसे किसी को अपने काबू में करने का अचूक हथियार मानता है, तो कोई इसे रिश्तों को बचाने का आखिरी सहारा। 

सच बताऊँ, तो यह विषय जितना आकर्षक है, उतना ही गहरा और रहस्यमयी भी है। आज हम इसी विषय की तह तक जाएँगे और समझेंगे कि आखिर वशीकरण है क्या, क्या सच में कोई एक “सबसे शक्तिशाली” मंत्र होता है, और अगर हाँ, तो उसका सच क्या है। भाई देख, यह लेख लगभग 2000 शब्दों का होगा, तो आराम से बैठो और इस रहस्यमयी दुनिया को समझने की कोशिश करो।

वशीकरण का असली मतलब क्या है? ( What is the real meaning of Vashikaran? )

अच्छा तो, सबसे पहले ये समझना बहुत ज़रूरी है कि वशीकरण का मतलब क्या है। ज़्यादातर लोग इसे किसी के मन और मस्तिष्क पर कब्ज़ा करना समझते हैं, जो कि एक बहुत ही अधूरी और, सच कहूँ तो, ग़लत धारणा है।

“वशीकरण” शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है – ‘वशी’ और ‘करण’। ‘वशी’ का अर्थ है किसी को अपने वश में करना, प्रभावित करना या आकर्षित करना। ‘करण’ का अर्थ है उस क्रिया को करने की प्रक्रिया या विधि। तो, वशीकरण का शाब्दिक अर्थ हुआ – किसी को अपने प्रभाव में लाने की क्रिया।

लेकिन भाई, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप किसी को कठपुतली बना सकते हैं। प्राचीन तंत्र ग्रंथों में वशीकरण का उद्देश्य कभी भी किसी का बुरा करना या उसकी स्वतंत्रता छीनना नहीं था। 

इसका मूल उद्देश्य था बिखरे हुए रिश्तों को जोड़ना, मनमुटाव को दूर करना, किसी के मन में अपने प्रति सकारात्मक भावनाएँ जगाना और एक सामंजस्यपूर्ण वातावरण बनाना। जैसे कि, पति-पत्नी के बीच अगर प्रेम खत्म हो रहा हो, तो उसे फिर से जगाने के लिए इसका प्रयोग होता था। जरा सोचो, इसका उद्देश्य विनाश नहीं, बल्कि निर्माण था।

क्या कोई एक “सबसे शक्तिशाली” मंत्र मौजूद है?

अब आते हैं उस सवाल पर, जिसके लिए आप यहाँ हैं। “सबसे शक्तिशाली वशीकरण मंत्र कौन सा है?”

सुनो, अगर मैं आपको एक सीधा-सा जवाब दूँ, तो वो ये है – कोई एक अकेला मंत्र “सबसे शक्तिशाली” नहीं होता। अरे चौंक गए न? पर यही सच है। मंत्र की शक्ति सिर्फ उसके शब्दों में नहीं होती। भाई मान लो, अगर ऐसा होता तो कोई भी किताब से मंत्र पढ़कर दुनिया पर राज कर लेता, है ना?

मंत्र की शक्ति कई चीज़ों पर निर्भर करती है:

1. साधक की भावना और नीयत (Practitioner’s Intention): आपकी नीयत क्या है? क्या आप किसी का भला चाहते हैं या उसे नुकसान पहुँचाना चाहते हैं? एक सकारात्मक और शुद्ध नीयत से किया गया साधारण मंत्र भी अचूक हो सकता है, जबकि बुरी नीयत से किया गया बड़े से बड़ा मंत्र भी निष्फल हो सकता है या उल्टा असर कर सकता है।

2. साधक की ऊर्जा और साधना (Practitioner’s Energy and Practice): 

मंत्र को सिद्ध करने के लिए जो तप, अनुशासन और ऊर्जा लगती है, वही उसकी असली शक्ति है। सालों की साधना से एक साधक अपनी वाणी में वो तेज और ऊर्जा पैदा करता है कि उसके मुँह से निकला सामान्य शब्द भी मंत्र बन जाता है।

3. मंत्र का सही उच्चारण और विधि (Correct Pronunciation and Ritual):

हर मंत्र की एक खास ध्वनि-तरंग (vibration) होती है। उसका सही उच्चारण, सही समय, सही दिशा और सही विधि-विधान से जाप करना बेहद ज़रूरी है। इसमें ज़रा सी भी चूक से उसका प्रभाव शून्य या नकारात्मक हो सकता है।

4. गुरु का मार्गदर्शन (Guidance of a Guru):

तंत्र-मंत्र का मार्ग बहुत जटिल है। बिना किसी सिद्ध गुरु के मार्गदर्शन के इन रास्तों पर चलना बहुत खतरनाक हो सकता है। गुरु ही आपको मंत्र की सही ऊर्जा को संभालने और उसे सही दिशा देने का तरीका सिखाता है।

तो भाई, अब तुम समझे ? शक्तिशाली मंत्र नहीं, साधक शक्तिशाली होता है। उसकी नीयत, उसकी साधना और उसका ज्ञान ही किसी मंत्र को “शक्तिशाली” बनाता है।

कुछ प्रसिद्ध और शक्तिशाली वशीकरण मंत्र (Some Famous and Powerful Vashikaran Mantras)

हालांकि मैंने ये साफ़ कर दिया है कि शक्ति साधक में होती है, फिर भी कुछ ऐसे मंत्र हैं जिन्हें तंत्र परंपरा में बहुत प्रभावी माना गया है। मैं यहाँ कुछ उदाहरण दे रहा हूँ, लेकिन याद रखना, इनका प्रयोग बिना गुरु की आज्ञा और सही विधि के ज्ञान के बिना कभी नहीं करना चाहिए।

1. कामदेव वशीकरण मंत्र (Kamdev Vashikaran Mantra)

अरे यार, जब बात आकर्षण और प्रेम की हो, तो कामदेव का ज़िक्र तो आएगा ही। कामदेव को प्रेम और आकर्षण का देवता माना जाता है। उनका मंत्र किसी के मन में प्रेम की भावना जगाने के लिए सबसे प्रसिद्ध है।

मंत्र:
ॐ नमो भगवते कामदेवाय यस्य यस्य दृश्यो भवामि यस्य यस्य मम मुखं पश्यति तं तं मोहयतु स्वाहा

अर्थ: “मैं भगवान कामदेव को नमन करता हूँ। मैं जिसके भी सामने आऊँ और जो भी मेरे चेहरे को देखे, वह मेरी ओर मोहित हो जाए।”

उद्देश्य: इस मंत्र का प्रयोग मुख्य रूप से किसी के मन में अपने लिए आकर्षण और प्रेम पैदा करने के लिए किया जाता है। मानते हो, यह एक बहुत सौम्य और सकारात्मक मंत्र माना जाता है, बशर्ते आपकी नीयत पवित्र हो। इसका उद्देश्य किसी को नुकसान पहुँचाना नहीं, बल्कि अपने खोए हुए प्यार को वापस पाना या किसी के दिल में जगह बनाना होता है।

2. मोहिनी वशीकरण मंत्र (Mohini Vashikaran Mantra)

देखो, भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के समय असुरों को मोहित करने के लिए मोहिनी का रूप धारण किया था। उन्हीं के नाम पर यह मोहिनी वशीकरण मंत्र है, जो किसी को भी सम्मोहित करने की अद्भुत क्षमता रखता है।

मंत्र:
ॐ नमो भगवते मोहिनी रूपाय, (जिसका वशीकरण करना है उसका नाम) मम वश्यं कुरु कुरु स्वाहा॥

अर्थ: “मैं भगवान के मोहिनी रूप को प्रणाम करता हूँ। आप (अमुक व्यक्ति का नाम) को मेरे वश में करें।”

उद्देश्य: यह मंत्र किसी विशेष व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करने और उसे अपने प्रभाव में लाने के लिए इस्तेमाल होता है। इसकी ऊर्जा बहुत तीव्र मानी जाती है, इसलिए इसका प्रयोग बहुत सोच-समझकर और केवल नेक इरादे से ही किया जाना चाहिए।

3. शाबर वशीकरण मंत्र (Shabar Vashikaran Mantra)

भाईसाहब, शाबर मंत्रों की दुनिया ही अलग है। इन मंत्रों की रचना गुरु गोरखनाथ और अन्य नवनाथ सिद्धों ने की थी। ये मंत्र आम बोलचाल की ग्रामीण भाषा में होते हैं और बहुत जल्दी असर दिखाते हैं। इन्हें “सिद्ध” मंत्र माना जाता है, यानी इन्हें अलग से सिद्ध करने की बहुत ज़्यादा ज़रूरत नहीं होती।

एक उदाहरण:

तेल तेल महातेल, देखूँ री मोहिनी तेरा खेल।
लौंग लौंगा लौंगावंती, एक लौंग मेरी आती पाती।
(अमुक व्यक्ति का नाम) को लागे ऐसी कि करे ना खाना पीना।
मेरे पास दौड़ी चली आवे, मेरी आन मेरे गुरु की शान।
दुहाई गोरखनाथ की॥

उद्देश्य: शाबर मंत्र बहुत सीधे और अचूक होते हैं। वे किसी विशेष कार्य को साधने के लिए ही बनाए गए हैं। लेकिन भाई, एक बात कान खोलकर सुन लो, ये जितने शक्तिशाली होते हैं, उतने ही खतरनाक भी। इनमें की गई एक छोटी सी गलती भी बहुत भारी पड़ सकती है। इसलिए बिना गुरु के तो इनके बारे में सोचना भी नहीं चाहिए, समझे?

मंत्र साधना की सही विधि क्या है? ( What is the correct procedure 
for Mantra Sadhana? )
 

अच्छा सुनो, सिर्फ़ मंत्र जान लेना ही काफ़ी नहीं है। उसे सिद्ध करने की एक पूरी प्रक्रिया होती है, जिसे साधना कहते हैं। मैं यहाँ एक सामान्य विधि बता रहा हूँ, लेकिन हर मंत्र की अपनी विशेष विधि हो सकती है।

1. संकल्प (Sankalpa – The Vow): किसी भी साधना को शुरू करने से पहले संकल्प लिया जाता है। आप अपना नाम, गोत्र, स्थान बोलकर यह संकल्प लेते हैं कि आप यह साधना किस उद्देश्य से, कितने दिनों तक और कितनी संख्या में करेंगे।


2. स्थान और समय (Place and Time): साधना के लिए एक शांत, पवित्र और साफ़-सुथरी जगह चुनें। हो सके तो एक ही स्थान और एक ही समय पर रोज़ साधना करें। ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 3 से 5 बजे) या मध्यरात्रि का समय इसके लिए उत्तम माना जाता है।


3. आसन और दिशा (Seat and Direction): कुश या ऊन का आसन बिछाकर बैठें। वशीकरण जैसी साधनाओं के लिए अक्सर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठने की सलाह दी जाती है।


4. पवित्रता (Purity): साधना के दौरान शारीरिक और मानसिक पवित्रता बहुत ज़रूरी है। स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें। मन में किसी के प्रति द्वेष, क्रोध या वासना की भावना न रखें।

5. जाप (Chanting): जिस मंत्र का जाप करना है, उसे रुद्राक्ष, स्फटिक या मूंगे की माला से करें। जाप की संख्या निश्चित होनी चाहिए (जैसे 108 बार, 11 माला, आदि)। जाप करते समय पूरा ध्यान मंत्र के उच्चारण और उसके अर्थ पर होना चाहिए।


6. अनुष्ठान की अवधि (Duration of Ritual): किसी भी मंत्र को सिद्ध करने के लिए उसे एक निश्चित संख्या में और निश्चित दिनों तक जपना पड़ता है। यह 21 दिन, 41 दिन या इससे भी ज़्यादा हो सकता है।

जरा सोच के देखो, यह कितनी कठिन तपस्या है। यह कोई दो मिनट का काम नहीं है। इसके लिए धैर्य, विश्वास और अनुशासन की ज़रूरत होती है।

वशीकरण का नैतिक और कर्मिक पहलू – सबसे ज़रूरी बात

भाई, अब तक हमने मंत्र और विधि की बात की। लेकिन अब जो मैं बताने जा रहा हूँ, वह इन सबसे ज़्यादा ज़रूरी है। यह है वशीकरण का नैतिक और कर्मिक पहलू।

कर्म का सिद्धांत:


भगवद्गीता में साफ़ कहा गया है – “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।” यानी, तेरा कर्म करने में ही अधिकार है, उसके फल में कभी नहीं। जब आप वशीकरण का प्रयोग किसी की इच्छा के विरुद्ध उसे नियंत्रित करने के लिए करते हैं, तो आप एक बहुत भारी नकारात्मक कर्म का निर्माण करते हैं। क्या कहते हो? इसका फल आज नहीं तो कल आपको ज़रूर भोगना पड़ेगा।

स्वतंत्र इच्छा का सम्मान (Respect for Free Will):


हर आत्मा इस दुनिया में अपनी स्वतंत्र इच्छा के साथ आई है। किसी की स्वतंत्र इच्छा के साथ ज़बरदस्ती करना प्रकृति के नियम के खिलाफ है। यह वैसा ही है जैसे आप किसी के घर में ज़बरदस्ती घुस जाएँ। आप भले ही कुछ समय के लिए उसे नियंत्रित कर लें, लेकिन अंत में आपको उसकी कीमत चुकानी पड़ती है। आपका मन कभी शांत नहीं रह सकता, क्योंकि आप हमेशा इस डर में रहेंगे कि आपका नियंत्रण कब खत्म हो जाए।

सकारात्मक बनाम नकारात्मक प्रयोग:

क्या इसका मतलब वशीकरण हमेशा गलत है? नहीं। नीयत सब कुछ है।
सकारात्मक प्रयोग: अगर पति-पत्नी के रिश्ते में दरार आ गई है और दोनों इसे बचाना चाहते हैं, लेकिन अहंकार के कारण बात नहीं कर पा रहे, तो उनके बीच प्रेम बढ़ाने की नीयत से किया गया प्रयोग सकारात्मक है। अगर आपका बॉस या कोई सहकर्मी आपसे अकारण ही द्वेष रखता है और आप उसके मन में अपने प्रति सद्भावना जगाना चाहते हैं, तो यह सकारात्मक है। यहाँ उद्देश्य किसी को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि नकारात्मकता को खत्म करना है।


नकारात्मक प्रयोग: किसी की पत्नी या पति को छीनने की कोशिश करना, किसी से ज़बरदस्ती अपनी बात मनवाना, किसी को उसकी संपत्ति से बेदखल करने के लिए उसे नियंत्रित करना – यह सब नकारात्मक प्रयोग हैं और इनका परिणाम भी भयानक होता है।

निष्कर्ष: सबसे शक्तिशाली मंत्र आपकी अपनी “नीयत” है

तो भाई, इस 2000 शब्दों की लंबी बातचीत के अंत में हम कहाँ पहुँचे?

हम इस नतीजे पर पहुँचे कि कोई एक मंत्र “सबसे शक्तिशाली” नहीं है। असली शक्ति आपकी अपनी नीयत, आपकी साधना और आपके गुरु के आशीर्वाद में है। वशीकरण का मार्ग दोधारी तलवार की तरह है, जो रक्षा भी कर सकता है और विनाश भी।

अरे यार सुन, किसी को मंत्रों से बाँधने की कोशिश करने से लाख गुना बेहतर है कि आप उसे अपने प्रेम, अपने व्यवहार और अपनी अच्छाई से जीतें। अगर आप सच में किसी को पाना चाहते हैं, तो खुद को इतना बेहतर बनाइए कि वो खुद आपकी ओर आकर्षित हो। अपने भीतर सकारात्मक ऊर्जा पैदा कीजिए, लोगों का भला सोचिए, और फिर देखिए, आपको किसी वशीकरण मंत्र की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी। पूरी दुनिया आपसे प्रेम करेगी।

सबसे शक्तिशाली वशीकरण मंत्र है – निःस्वार्थ प्रेम और एक पवित्र हृदय। इससे बड़ा कोई मंत्र इस ब्रह्मांड में नहीं बना। क्या ख़याल है? सही है न?

das mahavidya दस महाविद्या सनातन धर्म का एक गूढ़ रहस्य

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das mahavidya दस महाविद्या सनातन धर्म का एक गूढ़ रहस्य ph.85280 57364

das mahavidya दस महाविद्या सनातन धर्म का एक गूढ़ रहस्य मैं लगातार सर्च कर रहा था 10 महाविद्याओं पर। ये महाविद्या शाक्त परंपरा के अंतर्गत आती हैं। ये मां के उग्र और सौम्य रूप हैं। एक जगह लिखा हुआ था कि यह तंत्र की देवियां हैं। मां काली एक आदि शक्ति का रूप हैं और उन्हीं के बाकी रूप उन्हीं के रूप हैं।

बहुत ज्यादा पोटेंट पावर है। क्यों 10 महाविद्या को एक सीक्रेट बनाकर रखा? विद्या एक्चुअली एक बहुत गूढ़ रहस्य है। ये एक मिस्ट्री से सराउंडेड है। तो क्या मां काली की जो पूजा है वो घर के मंदिर में होनी चाहिए?

महाकाली की आप फोटो रख सकते हैं, मूर्ति के बहुत सारे अपने विधि विधान होते हैं। द बेस्ट करना है अगर आप दिव्य रहना चाहते हैं हर जगह पर तो फिर आपको दस महाविद्याओं से जुड़ना चाहिए। मैं ये कहना चाहूंगी, दैट हमें अपने रूट्स पे वापस जाना चाहिए। हर घर में महाविद्या का ज्ञान सबको होना चाहिए।

हमें अपने घर की प्रोटेक्शन करनी आनी चाहिए। हमारा कनेक्शन अगर डायरेक्टली भगवान से है तो हमें तीसरे इंसान की जरूरत नहीं है। व्हाई डोंट यू बिकम ? भी शायद पुराने जमाने में लोग बहुत ज्यादा सफिशिएंट थे और अब वो कहीं ना कहीं कमी हमें खल रही है।

दस महाविद्याओं की खोज

सनातन धर्म के अंदर तीन संप्रदाय हुए। एक वैष्णव संप्रदाय जो भगवान विष्णु की पूजा करते थे, एक शैव संप्रदाय जो कि भगवान शिव की पूजा करते थे और तीसरा संप्रदाय शाक्त संप्रदाय जो मां शक्ति की, आदि शक्ति के रूपों की पूजा करते थे।

 शाक्त परंपरा को जब आप पढ़ने के लिए निकलते हैं तो आपको शाक्त परंपरा की 10 महाविद्याओं की बात पता लगती है। मैंने जब इसके बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश की तो मुझे, जब आप उनके फोटोज को देखते हैं तो आपको लगता है कि अरे ये एक दूसरे से इतना अलग हैं। 

और इतने ज्यादा विचित्र हैं कि आपको वह पहेली सुलझने की जगह उलझती चली जाए। और जैसे ही मुझे पता लगा कि  मेरे कांटेक्ट में एक ऐसे शख्स हैं जिन्होंने दस महाविद्या पर एक रिसर्च की है। 

जिसका रिसर्च पेपर ऑक्सफोर्ड में छपने जा रहा है, उन्होंने एक बुक पब्लिश उनकी होने वाली है जो कि 10 महाविद्याओं पर ही है तो मैं फिर खुद को नहीं रोक पाया और मैं सीधे डॉक्टर मनमीत को मैंने फोन लगाया और बात करने की कोशिश की।

उन्होंने मुझे कई ऐसी बातें बताईं 10 महाविद्याओं के बारे में जो मुझे नहीं मिल रही थीं कहीं जानने के लिए।  दस महाविद्याओं के बारे में हमसे बहुत कुछ छिपाया गया। क्यों? इस सवाल का जवाब आपको मिलेगा इस लेख में जो कि बहुत इंटरेस्टिंग है।

अगर आप अब तक हमारे लेख पढ़ते रहे हैं तो आप जानते हैं कि हमारे लेखों में आपका कोई टाइम वेस्ट नहीं होगा बल्कि आपको बहुत कुछ जानने के लिए मिलेगा। तो चलिए, हम शुरू करते हैं आज का यह लेख।

आपकी जिंदगी में इसकी बहुत जरूरत है लेकिन इससे आपको किसी ना किसी वजह से दूर रखा गया। ये एक अलग विषय है इस पर हम फिर कभी बात कर लेंगे।

लेकिन मैं लगातार सर्च कर रहा था काफी दिनों से बल्कि काफी हफ्तों से दस महाविद्याओं पर और दस महाविद्याओं पर मैंने जब सर्च करना शुरू किया तो एक जगह लिखा हुआ था कि ये तंत्र की देवियां हैं।

जी, अगर देवी तो देवी हैं, भगवान तो भगवान हैं। अब वो तंत्र की हैं तो क्या एक आम आदमी को उनकी पूजा नहीं करनी चाहिए ? दूसरा सवाल मेरे मन में ये आता है कि क्या ये तंत्र की ही देवियां हैं ? सिर्फ तांत्रिक लोग पूजा करें ? क्यों? क्योंकि देखिए वहां पर यह भी है कि यह 10 जो रूप हैं, यह एक्सपर्ट्स हैं, यह 10 महाविद्या हैं।

अब महाविद्या की जरूरत तो एक आम आदमी को भी होनी चाहिए। मैं अपने घर में मंदिर में अगर पूजा कर रहा हूं, मां लक्ष्मी से पैसा मांग रहा हूं, कृष्ण जी से अगर मैं सच्चा साथी मांग रहा हूं, किसी दूसरे भगवान से कुछ और मांग रहा हूं, तो दस महाविद्याओं के बारे में मैं क्यों नहीं पूजा कर रहा ? मैं उनके बारे में क्यों नहीं जानता ? मुझे बचपन से क्यों नहीं सिखाया गया दस महाविद्याओं के बारे में? क्यों दस महाविद्याओं को एक सीक्रेट बनाकर रखा गया ?

बहुत ही इंटरेस्टिंग पोस्ट है ये। 10 महाविद्या एक्चुअली एक बहुत गूढ़ रहस्य है। ये एक मिस्ट्री से सराउंडेड है। मां पार्वती के 10 रूप हैं और यह कहना ठीक नहीं होगा कि यह केवल तांत्रिकों को ही सिद्धियां देती हैं। यह अपनी अचूक सिद्धियां जो हैं वो भक्तों को भी देती हैं।

लेकिन इनके बारे में हमें क्यों नहीं बताया गया, इसके दो कारण हैं। सबसे पहला कारण यह है कि ये मां के उग्र और सौम्य रूप हैं लेकिन जो उग्र रूप हैं उनकी सही तरीके से जो पूजा की जानी चाहिए उसका ज्ञान कहीं ना कहीं जनरेशन टू जनरेशन खो गया है।

और यह सबको पता है कि अगर इनकी सही तरीके से पूजा ना की जाए तो इस एनर्जी को आप हैंडल नहीं कर सकते। दूसरा यह है कि रिलीजन के साथ आप मानेंगे, धर्म के साथ हमेशा फियर जुड़ा हुआ होता है।

कुछ ऐसे लोग हैं जो यह ज्ञान हर जगह पहुंचाना नहीं चाहते क्योंकि उनको लगता है कि अगर सबके पास ये गूढ़ ज्ञान चला गया तो उनकी वैल्यू लाइफ में खत्म हो जाएगी।

उनका बिजनेस बंद हो जाएगा। जी। तो जब पिछले साल जब मेरे को मां काली का सपना आया था, उन्होंने मुझे कहा था कि आप 10 महाविद्या की वर्कशॉप करो, आपको सच बताऊं तो काफी कन्फ्यूजिंग था मेरे लिए क्योंकि मैं सिर्फ ऐसे लोगों के साथ डील नहीं करती जो सिर्फ धर्म में और एक भक्ति मार्ग पर ही चलते हैं।

मैं बहुत प्रैक्टिकल लोगों के साथ भी डील करती हूं, कॉरपोरेट्स के साथ डील करती हूं। ऐसे लोगों के पास जिनके पास आधे से एक घंटे से ज्यादा दिन में भक्ति करने का वक्त नहीं है। उनके ऊपर बहुत रिस्पॉन्सिबिलिटीज हैं। तो 10 महाविद्या जैसा ज्ञान एक सिंपल आदमी को देना जिसके ऊपर बहुत सारी सांसारिक रिस्पॉन्सिबिलिटीज हैं, वह अपने में एक चैलेंज था।

लेकिन मेरे को यह दिखाया गया कि आप प्रैक्टिकल लाइफ में इसको बिल्कुल सिंपल बना के लोगों को समझाओ। और इसी के चलते हम आज यह लेख भी लिख रहे हैं और आपका क्वेश्चन जो है, इसको कैसे हम सिंपलीफाई कर सकते हैं और कैसे अपनी लाइफ में इस ज्ञान को यूज कर सकते हैं।

आपने एक बात बहुत इंटरेस्टिंग यहां पर कही कि कुछ लोगों ने इस महाज्ञान को, इस महाविद्या के ज्ञान को बहुत ही एक सीक्रेट बनाकर इसलिए रख दिया जिससे कि यह उनके पास रहे और जो एक आम आदमी है वो बेसिकली इसको दूर से ही देखे तभी वो मेरे पास आएगा और मुझसे पूछेगा कि ये क्या है फिर मैं अपना बिजनेस उससे रन करूंगा।

क्या हैं दस महाविद्या ?

अगर हम इससे हटकर भी आगे देखें, अगर एक आम आदमी महाविद्या से जुड़ना चाहता है, पहले तो मैं आपसे ये भी समझना चाहूंगा कि महाविद्या हैं क्या? क्योंकि जब मैं सर्च कर रहा था, जब मैं पढ़ रहा था इनके बारे में तो मुझे दस महाविद्याओं ने बड़ा ही एक शॉकिंग एक्सप्रेशन मेरे मन के अंदर आया।

क्यों? एक देवी हैं जो 16 साल के रूप में रहती हैं हमेशा, एक देवी उसमें ऐसी हैं जो विधवा के वेश में खड़ी हैं, एक ऐसी हैं जिन्होंने अपने ही हाथ से अपनी गर्दन काटी हुई है, एक मां काली का रूप है तो अलग-अलग रूप हैं और सब एक दूसरे से बहुत डिफरेंट हैं। और एक बहुत ही शॉकिंग है कि ऐसा क्यों? देवी का तो महाविद्या बेसिकली क्या हैं ? इनकी जरूरत क्यों पड़ी? यह हमारे धर्म के अंदर, सनातन धर्म में क्यों एग्जिस्ट करती हैं ? क्या है यह महाविद्या?

दस महाविद्याओं का स्वरूप और उद्देश्य

दस महाविद्या शाक्त परंपरा के अंतर्गत आती हैं और इनके बारे में कुछ भी बोलने से पहले मैं इस श्लोक से शुरू करना चाहूंगा 

दस महाविद्या के नाम

काली तारा महाविद्या षोडशी भुवनेश्वरी।

भैरवी छिन्नमस्ता च विद्या धूमावती तथा॥

बगला सिद्धि विद्या च मातंगी कमलात्मिका।

एता दस महाविद्या सिद्धि विद्या प्रकीर्तिता॥

यह जो श्लोक है, यह इसमें सब 10 महाविद्या के जो हैं वो नाम बताए गए हैं। अगर हम इसको बिल्कुल सिंपलीफाई करें अपने पाठकों के लिए भी, तो यह जो 10 महाविद्या, यह हमारी लाइफ की डिफरेंट स्टेजेस हैं।

जैसे हमारी लाइफ में एक स्टेज आती है जब हम, जब हमारी लाइफ से किसी की डेथ हो जाती है, उसका या हम अपनी लाइफ में ट्रांसफॉर्मेशन लाने की कोशिश करते हैं। तो वो क्या है? तो 10 महाविद्या से हम बहुत तरीके से अपनी लाइफ के साथ उनको को-रिलेट कर सकते हैं।

पहले यह 10 महाविद्या किस-किस तरीके से हैं, मैं उनके नाम आपको बताती हूं। सबसे पहले हैं मां काली। यह भी कहा जाता है कि मां काली के ही बहुत सारे बाकी जो रूप हैं वो बाकी की महाविद्यास हैं।

 मां काली एक आदि शक्ति का रूप हैं और उन्हीं के बाकी रूप बाकी की महाविद्या हैं, उन्हीं के रूप हैं वो। तो सबसे पहले मां काली हैं, उसके बाद मां तारा हैं, मां छिन्नमस्ता हैं, उसके बाद मां षोडशी हैं जिनको हम मां त्रिपुर सुंदरी भी कहते हैं, मां ललिता भी कहते हैं। उसके बाद मां भुवनेश्वरी हैं, उसके बाद मां भैरवी हैं जिनको हम त्रिपुर भैरवी भी कहते हैं।

उसके बाद मां धूमावती हैं, मां बगलामुखी हैं, मां मातंगी हैं और मां कमलात्मिका हैं। अब इनमें से कुछ के नाम आपने जरूर सुने होंगे जैसे कि मां बगलामुखी, इनके बारे में सब बात करते हैं कि यह दुश्मनों को हर लेती हैं और कोर्ट केसेस वगैरह में आपकी बहुत हेल्प करती हैं।

 कुछ-कुछ महाविद्या के बारे में हम जानते हैं और कुछ-कुछ के बारे में हम नहीं जानते। और जिनके बारे में जानते हैं उनके बारे में भी बहुत ही सीक्रेट तरीके से कहा जाता है कि नहीं, इनकी पूजा हर किसी को नहीं करनी है, गलत तरीके से नहीं करनी है, नहीं तो ये आपको नुकसान कर सकती हैं।

तो क्या कोई भी देवी नुकसान कर सकती हैं ?

कोई भी देवी नुकसान नहीं कर सकतीं पर यह जैसे कि आप समझिए कि यह बहुत ज्यादा पोटेंट पावर है। अगर एक छोटा बच्चा है और हम उसको बिजली की नंगी तार दे दें तो चांसेस हैं कि उसको शॉक लग सकता है।

वो एनर्जी हैंडल कैसे करे? क्योंकि वो एनर्जी वो जो फ्लो कर रही है, अगर उसके आसपास प्रोटेक्टिव लेयर नहीं लगाई गई तो वो जो करंट की तार है वो एक इंसान को मार भी सकती है।

तो उसके ऊपर जो वो प्लास्टिक की प्रोटेक्टिव वायर लगाई जाती है वो एक सही ज्ञान है जिससे वह एनर्जी आपकी लाइफ में एक अच्छा काम करेगी, लाइट देगी आपको लेकिन आपको शॉक नहीं देगी। तो शॉक से बचने के लिए, लेकिन अगर आपका क्वेश्चन मैं ऐसे आंसर करूं कि लोगों को क्या डरना चाहिए इनसे ? बिल्कुल नहीं डरना चाहिए।

यह मां का, इनके अंदर मातृत्व भी है, इनके अंदर स्ट्रिक्टनेस भी है, डिसिप्लिन भी है। लेकिन क्या उस टाइप के डिसिप्लिन को एक आम इंसान हैंडल करने के लिए तैयार है ?  आप छिन्नमस्ता की पूजा अगर करना चाहते हैं तो आपको पहले एक सौम्य रूप से शुरू करना होगा और फिर ग्रैजुअली वहां जाना होगा।

जैसे आप फोर्थ क्लास में सीधा 12th क्लास की पढ़ाई नहीं कर सकते, आप हैंडल ही नहीं कर पाएंगे, आपको समझ में ही नहीं आएगा। तो आपको फिफ्थ क्लास, सिक्स्थ क्लास, सेवंथ क्लास। तो क्या अगर जो लोग महाविद्या के द्वारा चुने गए होते हैं, मैं नहीं सोचती कि हम महाविद्या को चुन सकते हैं, ये हमें चुनते हैं हमारे पूर्व जन्मों के हिसाब से।

दस महाविद्या और नवग्रह

क्या मैं इन्हें अपने प्लेनेट से कनेक्ट कर सकता हूं कि मेरी लाइफ में इस तरीके की परेशानी या मैं इस तरीके की जिंदगी जी रहा हूं तो मुझे इस तरीके की एनर्जी ज्यादा चाहिए?

मान लीजिए कि मुझे कोई कार्डियो की दिक्कत है तो मैं कार्डियोलॉजिस्ट के पास, उनसे उस तरीके के ड्रग लूंगा या फिर दवाइयां लूंगा जो मेरी कार्डियोलॉजी की प्रॉब्लम को ठीक करते हों, दिल की बीमारी को ठीक करते हैं।

तो कैसे मैं ये समझूं कि मेरे प्लेनेट, क्या मुझे प्लेनेट बता सकते हैं, मेरी प्लेनेट पोजीशन बता सकती है कि मुझे इस महाविद्या को मनाना चाहिए, पूजा करनी चाहिए, इस महाविद्या का आशीर्वाद चाहिए? क्या ये पॉसिबल है?

बिल्कुल पॉसिबल है और ये उनको डिकोड करने का एक बहुत अच्छा तरीका है। तो सबसे आज की डेट में सबसे इंटरेस्टिंग प्लेनेट है राहु। क्यों? क्योंकि हम राहु की ही दुनिया में रह रहे हैं। सोशल मीडिया क्या है? राहु है। टेक्नोलॉजी क्या है? राहु है।

यह लेख कैसे प्रकाशित हो रहा है? राहु के थ्रू हो रहा है। तो राहु जो है वो आज की दुनिया को रूल करता है। जबकि राहु को सबसे खराब मानते हैं। हां, मानते हैं। लेकिन जिन लोगों को सक्सेस देता है, सक्सेस की जिन ऊंचाइयों पर राहु पहुंचा सकता है वो कोई भी नहीं पहुंचा सकता। तो राहु को रूल करती हैं मां छिन्नमस्ता। 

तो जब राहु की महादशा शुरू होती है या की अंतर्दशा चल रही होती है, राहु खराब रिजल्ट दे रहा होता है तो हमें जाना है मां छिन्नमस्तिका के मंदिर। मां छिन्नमस्तिका का मंदिर है राजरप्पा, झारखंड में।

और नॉर्थ में इनका जो टेंपल है उसको हम चिंतपूर्णी कहते हैं जो ऊना में है, हिमाचल में। तो मां छिन्नमस्ता राहु को रूल करती हैं। और दूसरा प्लेनेट हम जिससे बहुत डरते हैं शनि, वो है शनि। और शनि को कौन रूल करता है? महाकाली।

तो मां काली की साधना जब आपकी शनि की साढ़े साती, शनि की ढैया या आपका शनि वेल प्लेस्ड नहीं है तो मां काली की पूजा हम करेंगे। और तीसरा प्लेनेट जिसकी दशा में सब बहुत डरते हैं वो है केतु। क्योंकि केतु आपको हर चीज से डिटैच कर सकता है और कर देता है।

तो केतु एक बहुत ही डिवोशनल प्लेनेट भी है क्योंकि आपको भक्ति के मार्ग पे ले जाता है लेकिन कहीं से हटा के ही लेकर जाता है। तो अगर आपके सेकंड हाउस में केतु बैठ गया है तो आपको आपकी फैमिली से, धन से, आपको डिटैच कर देगा एक सर्टेन एज के बाद और आपको आध्यात्म में ले जाएगा अगर आपके बाकी प्लेनेट एक तरीके से हैं।

अगर आपका केतु आपके मैरिज के घर में बैठ गया है तो आपका डिवोर्स होने के काफी अच्छे चांसेस हैं। ठीक है? तो केतु को कौन रूल करता है? केतु को रूल करती हैं मां धूमावती।

तो अगर आपका केतु का प्लेसमेंट खराब है या केतु का आपको कोई डर है क्योंकि केतु बहुत सडनेस का प्लेनेट है, सडन आपको कुछ हो जाएगा, सडन डेथ, सडन एक बीमारी निकल आई, कहां से आई, कुछ नहीं पता। तो यह जो सडनेस का प्लानेट है वो है केतु और उनकी जो, उनसे बचने के लिए जो मां हैं वो हैं मां धूमावती।

एक और प्लेनेट जिसको बहुत सारे लोग जिससे डरते हैं वो है मंगल। अगर मंगल खराब हो तो बहुत चीजें खराब हो जाती हैं। मंगल क्या है? मंगल करेज है। क्या हमारे में वो करेज है कि हम किसी चीज को बोल्डली फेस कर सकें? और उसकी जो देवी हैं वो हैं मां बगलामुखी।

तो जब हम अपने शत्रुओं का पूरी तरीके से सामना कर सकते हैं और उनके सामने डरेंगे नहीं, ये स्ट्रेंथ लेने के लिए हमें मां बगलामुखी के पास जाना है जिनके टेंपल्स दतिया में भी हैं और हिमाचल में भी हैं। है ना? तो यह तो हो गए चार मेन प्लेनेट जो मैंने आपको बताए।

अब आया सन। सन को कौन रूल करता है? सन को रूल करती हैं मां मातंगी। अभी मैं आपको जैसे इन महाविद्यास के बारे में थोड़ा सा बताऊंगी। महाविद्या को किससे जोड़ते ? मां मातंगी सन को रूल करती हैं।

जुपिटर जो बृहस्पति है, उनको रूल करती हैं मां तारा। तो बहुत सारे लोग अपना जुपिटर ठीक करने के लिए तारापीठ जाते हैं जो कोलकाता से तीन से चार घंटे की दूरी पर है।

पर जैसा कि मैंने आपको कहा, आप नहीं जा सकते, मां आपको बुलाएंगी। अगर आपकी किस्मत में होगा तो ऐसा होगा। और ये सारे प्लानेट, अब रह गया बुध। बुध को रूल करती हैं मां षोडशी। तो यह सारे जो प्लेनेट हैं इनको यह महाविद्या रूल करती हैं।

दस महाविद्याओं का विस्तृत परिचय

 

1 मां काली (रूपांतरण की शक्ति)

gold and black hindu deity figurine

मां काली काल की भक्षक हैं, वो पूरा ब्रह्मांड हैं और वो एक ऐसी शक्ति हैं जो अपने में परिपूर्ण हैं। लेकिन मां काली का जन्म तब हुआ जब मां पार्वती को इतना तेज एंगर फील हुआ, इतना तेज गुस्सा फील हुआ कि उसके मारे वो क्रोध के मारे उनकी पूरी स्किन जो है वो ब्लैक हो गई और उनको अपने सौम्य रूप से उग्र रूप में आना पड़ा क्योंकि उनको दुनिया को यह दिखाना था कि एक नारी एक पुरुष के बिना भी कुछ कर सकती है।

डिवाइन फेमिनिन। तो उनको शिवजी ने बोला, उन्होंने कुछ तो बताया उनको। तो शिवजी ने उनको बोला कि यह आप खुद ही क्यों नहीं कर लेतीं? तो उनको लगा, चुनौती दी जैसे कि। तो उनको लगा कि हां, और यह जो उनका फॉर्मेट, आप यह भी देखिए कि हमारे वेदों में पहले सीता मां को ही आइडियल मानते थे। तो काफी टाइम तक जो एक नारी का फॉर्म था

जिसको सब लोग आइडियल मानते थे, वो थीं मां सीता। और फिर क्या हुआ कि इंडिया के ऊपर बहुत हमले होने लग गए, मुगलों के हमले होने लग गए और नारियों के लिए काफी नहीं था कि वो मां सीता ही बन के रहें। सही बात। उनको भी शस्त्र उठाने थे, उनको भी जंग लड़नी थी।

आप कितनी सारी वीरांगनाओं के बारे में जानते हैं जैसे कि मां लक्ष्मीबाई वगैरह जहां पे उन लोगों ने एक नारी होते हुए अपना बच्चा बांध के पूरी जंग उन्होंने लड़ी। बिल्कुल। तो ये शक्ति कहां से आई? जो भगवान होते हैं वो अपना रूप बार-बार बदलते रहते हैं संसार के साथ।

जैसे श्री कृष्ण ने पहले राम का अवतार लिया और उसके बाद कृष्ण का अवतार लिया। उस समय जो जरूरत थी दुनिया को, संसार को, वह जरूरत थी शक्ति की। तो जो शाक्त परंपरा है वो वहां से शुरू हुई और शक्ति के बहुत सारे फॉर्म्स जो हैं वो 10 महाविद्या हैं।

तो एक नारी को सिर्फ सौम्य रहना नहीं सिखाया गया, एक नारी को एक उग्र फॉर्म भी सिखाया गया कि अगर आपको अपने घर की, अपने बच्चों की रक्षा करनी है तो आपको भी एक पावरफुल फॉर्म में आना है।

तो मां काली वो पावरफुल फॉर्म का सबसे बड़ा रूप हैं। और मां काली का जो एक वर्ड मैं यूज करूंगी, ट्रांसफॉर्मेशन। मां काली ट्रांसफॉर्म कर देती हैं अपनी लाइफ को।

2  मां तारा (करुणा की शक्ति)

a statue of a hindu god with multiple arms and legs

मां तारा की एनर्जी कंपैशनेट है लेकिन और भी फियर्स है। आपको याद है कि मां तारा को रावण ने इनवाइट किया था और रावण ने उनकी, उनको सिद्ध किया था और उसने अपने एक-एक करके सारे सर उनको दान कर दिए थे हवन कुंड में कि कैसे नहीं आएंगी।

आखिर में उसने कहा कि अगर ऐसा नहीं है कि आप आ सकती हैं तो फिर मेरे जीवन का कोई अर्थ नहीं, मैं अपना आखिरी सर भी काट रहा हूं। और उनको विवश होकर आना पड़ा क्योंकि मां तारा को पता था कि रावण जो युद्ध लड़ रहा है वह धर्म के अगेंस्ट है।

 लेकिन फिर भी उनको मजबूर होकर आना पड़ा पर उन्होंने एक शर्त रखी थी। उन्होंने कहा कि अगर तुम धर्म के अगेंस्ट गए कम से कम लॉजिस्टिक्स में, तो मैं तुम्हारा साथ छोड़ दूंगी।

और यह हम सबको पता है कि रावण ने सूर्यास्त के बाद जो ब्रह्मास्त्र उठाया था और उसी समय मां तारा ने उनको छोड़ा और एक यह बहुत बड़ा रीजन है उसकी हार का।

उसको भी पता था कि जब तक मां तारा मेरे साथ, वो हालात बने जिसमें रावण का वध हो। बिल्कुल। वो हालात ही ऐसे बनाए गए कि उसका। तो यह है मां तारा की एनर्जी। मां तारा जहां कहते हैं, हम तारापीठ हैं, वहां पे मां सती के नेत्र गिरे थे।

3 मां छिन्नमस्ता (आत्म-बलिदान और अहंकार का नाश)

Chinnamasta Sadhana - छिन्नमस्ता साधना मंत्र प्रयोग सहित Ph.85280 57364
Chinnamasta Sadhana – छिन्नमस्ता साधना मंत्र प्रयोग सहित Ph.85280 57364

 मां छिन्नमस्ता। मां छिन्नमस्ता एक ऐसे फॉर्म हैं जैसे आपने कहा, उनका सर कटा है, उन्होंने खुद ही अपना सर काटा है और तीन रक्त की धाराएं बह रही हैं। एक जया विजया के मुंह में जा रही है, एक उनके खुद के मुंह में जा रही है।

तो एक तो सैक्रिफाइस की एनर्जी दिखाती हैं और एक ये यह दिखाता है कि हम कैसे अपनी ईगो को काट सकते हैं। तो जब हमारा सर, और इसीलिए यह मां जो हैं राहु को वो करती हैं। राहु का भी सर कटा हुआ है और राहु ईगो डोनेट करता है, राहु इल्यूजन दिखाता है।

 मां छिन्नमस्ता कहती हैं कि अपनी ईगो को मार दो और उनका जो पैर है वो कामदेव और रति के ऊपर है। तो अपनी वासनाओं को भी मारो, अपनी ईगो को भी मारो।

दस महाविद्या में बड़ा विचित्र सा रूप, सबसे ज्यादा विचित्र रूप अगर मैं कहूं तो छिन्नमस्ता का है। बहुत और बहुत पावरफुल है ये।

तो मैं ये नहीं कहूंगी कि कोई भी उनका मंत्र एकदम से शुरू कर दे। उनका जो एक बीज मंत्र है वो आप कर सकते हैं। बट आप इतनी बड़ी एनर्जी को टच करने से पहले स्टेप बाय स्टेप जाएं। इसीलिए इनका एक क्रमांक है, महाकाली से शुरू करें और इसी तरीके से जाएं।

4 मां षोडशी (त्रिपुर सुंदरी – सौंदर्य की देवी)

 

Tripur sundari sadhana त्रिपुर सुंदरी साधना - रोग नाश और यौवनता के लिए
Tripur sundari sadhana त्रिपुर सुंदरी साधना – रोग नाश और यौवनता के लिए

 मां षोडशी या मां त्रिपुर सुंदरी जिनको 16 साल की दिखाया गया है और उनको बताया गया है कि हम इस एज में भी इतने पावरफुल होते हैं। वो इतनी सुंदर हैं कि ब्रह्मांड की सारी सुंदरता उनके अंदर है और हम इसको सिर्फ सुंदर देखने की जगह अगर यह देखें कि अगर हम इनकी पूजा करें तो हमें हर चीज में और हर इंसान में सुंदरता दिखेगी कि हम, हमारा नजरिया सुंदर हो जाएगा।

 यह बहुत सारे लोग कहते हैं कि सौंदर्य की देवी हैं, अगर आपको अपना सौंदर्य बढ़ाना है तो आपको इनके पास जाना चाहिए। पर मैं कहती हूं कि अगर आपको अपनी आंखें बदलनी हैं तो आपको इनके पास जाना चाहिए क्योंकि आपकी आंखें सुंदर होंगी तो आपको सब कुछ सुंदर लगेगा, नजरिया आपका बेहतर हो जाएगा।

5 मां भुवनेश्वरी (ब्रह्मांड की शासक)

भुवनेश्वरी साधना के लाभ - bhuvaneshwari sadhana ki labh ph .85280 57364
भुवनेश्वरी साधना के लाभ – bhuvaneshwari sadhana ki labh ph .85280 57364

 मां भुवनेश्वरी। पूरी ब्रह्मांड की, को कॉस्मिक रूलर जिसे हम कहते हैं, वो मां भुवनेश्वरी हैं। उनसे आप क्या मांग सकते हो ? शी इज द गॉडेस ऑफ मेनिफेस्टेशन। कुछ भी मांग सकते हो। हां, वो उनका एक वो है, आधिपत्य है सारे ब्रह्मांड के ऊपर और उनसे आप कुछ भी मांग सकते हैं। शी इज द गॉडेस ऑफ मेनिफेस्टेशन।

6 मां काल भैरवी (काल को नियंत्रित करने वाली)

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 मां भैरवी जिनके कंसर्ट खुद काल भैरव हैं। जी, तो मां भैरवी काल को कंट्रोल करती हैं। मां भैरवी कहती हैं कि कुछ भी सुंदर और ना सुंदर नहीं है।

अगर दुनिया तुम्हारे अगेंस्ट जा रही है और तुम्हें अकेले के लिए खड़े रहना है तो तुम खड़े रहो। ना तुम दूसरों को जज करो, ना तुम किसी की जजमेंट को लो। तो जब लोगों को करेज की बहुत जरूरत होती है तो हम कहते हैं कि आप मां भैरवी की आराधना करें।

7 मां धूमावती (विधवा स्वरूप और त्याग)

 

dhumavati SADHNA प्राचीन धूमावती साधना अनुभव और लाभ PH.8528057364
dhumavati SADHNA प्राचीन धूमावती साधना अनुभव और लाभ PH.8528057364

 मां धूमावती। मां धूमावती को एक विधवा दिखाया गया है और सीक्रेट दिखाया गया है और वो बिल्कुल भक्ति के पथ पर हैं। मां धूमावती को आपको मालूम है कि उनका नाम कहां से आया? धुएं से आया जिसमें सती ने अपना सैक्रिफाइस किया था।

उसका जो, उस हवन से जो धुआं निकला था वो मां धूमावती को डिनोट करता है कि सैक्रिफाइस का धुआं भी वेस्ट नहीं जाता, वो भी अपने में एक एनर्जी इतनी स्ट्रॉन्ग लेके चलता है। तो यह केतु को कंट्रोल करती हैं, सडनेस को कंट्रोल करती हैं और इनको एक बहुत ही विडो के फॉर्म में दिखाया गया है, विद ओपन हेयर। और ओल्ड।

हां, और एक क्रो पे हैं और कहते हैं कि जो मैरिड लेडीज होती हैं उनको मां धूमावती के पास नहीं जाना चाहिए। मां धूमावती का एक टेंपल बनारस में है लेकिन ज्यादातर इन सब महाविद्यास का जो मेन टेंपल है, इनकी पीठ अलग होगी लेकिन मां कामाख्या के साथ इनके ये जो 10 महाविद्या हैं वो एस्टेब्लिश हैं।

8 मां बगलामुखी (शत्रुओं का नाश)

 

devi baglamukhi ki kahani बगलामुखी माता की कहानी - उत्पत्ति, महत्व और पौराणिक कथा
devi baglamukhi ki kahani बगलामुखी माता की कहानी – उत्पत्ति, महत्व और पौराणिक कथा

मां बगलामुखी। मां बगलामुखी आई थिंक सबसे ज्यादा फेवरेट और कॉमन हैं क्योंकि मां बगलामुखी शत्रुओं का नाश करती हैं और पीले कपड़ों से उनको डोनेट, वो डिनोट होती हैं और पीली चीजें, पीले वस्त्र, यही सब उनका होता है। वो बहुत ज्यादा पावरफुल हैं, बहुत ज्यादा पावरफुल हैं।

लेकिन लोग कहते हैं कि इनसे हमारे लीगल केसेस खत्म हो जाएंगे, इनसे हमारे शत्रु खत्म हो जाएंगे। लेकिन मैं यह कहती हूं कि आपके अंदर जो शत्रु है उसका क्या? हां, एक बाहर के शत्रु, एक आपके खुद के। और एक आप खुद के। तो अगर आपका फियर है, डाउट है, जेलेसी है, इंडिसीजन है, कहीं आप देखोगे लोग जिंदगी भर डिसीजन ही नहीं ले पाते।

घर खरीदना है, घर खरीदना चार साल से बोल रहे, खरीद ही नहीं पा रहे। बिल्कुल। कईयों को इतना ही डर लग जाता है कि वो दूसरों के एक एब्यूज रिलेशनशिप में भी रह जाते हैं कि अगर हमने छोड़ दिया तो फिर हम अकेले रह जाएंगे। तो ऐसे लोगों को ना सिर्फ बाहर की चीज जो कि लीगल केसेस वगैरह हैं .

लेकिन जो अगर आप अंदर अपने आप से जूझ रहे हैं, अंदर आपकी कशमकश चल रही है और शुरू से चल रही है, आप ओवरथिंकिंग करते हैं, आपको नींद नहीं आती तो आपको मां बगलामुखी के पास जरूर जाना चाहिए।

9 मां मातंगी (ज्ञान और कला का तांत्रिक रूप)

swapna matangi स्वप्न मातंगी साधना और स्वप्न वाराही साधना
swapna matangi स्वप्न मातंगी साधना और स्वप्न वाराही साधना

मां मातंगी का जन्म हुआ था जब भगवान शिव और माता पार्वती खाना खा रहे थे और उनका थोड़ा सा खाना बच गया था। तो उसको हम जो जूठन कह देते हैं, उससे उनका जन्म हुआ था। तो ये ऐसी क्लास की, क्लास को रिप्रेजेंट करती हैं जिनको बाकी लोग एक्सेप्ट नहीं करते। लोअर क्लास हम कह सकते हैं। लेकिन ये मां सरस्वती का तांत्रिक रूप हैं।

अगर हम मां मातंगी को, मुझे सबसे ज्यादा फैसिनेट करती हैं मां मातंगी, कि अगर कोई आराधना करे तो उसको इतना डीप ऑकल्ट का नॉलेज हो सकता है कि सबसे ज्यादा गूढ़ ज्ञान क्योंकि ज्ञान की देवी मां सरस्वती हैं और उसका तांत्रिक फॉर्म ये हैं।

तो ये एक वीणा के साथ हैं और उनके साथ एक ग्रीन पैरेट होता है। इट्स अ वेरी ब्यूटीफुल पिक्चर। और ये बिल्कुल मंद-मंद मुस्का रही हैं और ये इस तरीके से अपने आप को डिपिक्ट करती हैं।

10 मां कमलात्मिका (समृद्धि का तांत्रिक रूप)

 

कमला महाविद्या साधना ( करोड़पति बनने की साधना ) साधना अनुभव के साथ  kamala mahavidya sadhnaगुरु मंत्र साधना .कॉम में स्वागत है आज हम कमला महाविद्या साधना साधना पर
कमला महाविद्या साधना ( करोड़पति बनने की साधना ) साधना अनुभव के साथ  kamala mahavidya sadhnaगुरु मंत्र साधना .कॉम में स्वागत है आज हम कमला महाविद्या साधना साधना पर

और आखिरी में हैं मां कमलात्मिका, मां कमला जिनको हम कहते हैं, जो मां लक्ष्मी का तांत्रिक फॉर्म हैं और वो बिल्कुल अपने कमल पर बैठी हैं और चार हाथी उनको नहला रहे हैं और वो बिल्कुल बहुत, मतलब वो इतनी सुंदर हैं और इतनी सुंदर स्माइल है उनकी कि उनको देख के लगता है कि बस अब सब मिल गया।

तो जो 10 महाविद्यास हैं, अभी आपने देखा होगा मैंने दो बार यूज किया वर्ड, ये उनका तांत्रिक फॉर्म है। बिल्कुल, मैं इस पर आने वाला था। हां, तो जो तांत्रिक फॉर्म है इसका यह मतलब है कि इसको, इन फॉर्म से हमें एक डिफरेंट टाइप की नॉलेज मिलती है।

जैसे मां सरस्वती से हमें डिफरेंट टाइप की नॉलेज मिलती है, उन्हीं का एक फॉर्म है जिनसे हमें एक एक्स्ट्रा नॉलेज मिलती है।

11 दस महाविद्या की पूजा और साधना

11 दश महाविद्या की पूजा और साधना
11 दस महाविद्या की पूजा और साधना

जब यह महाविद्या हमें चुनती हैं तो हमें एक डिसीजन लेना होता है लाइफ में कि क्या हम इस पाथ पर चलना चाहते हैं। और अगर हमने डिसाइड किया कि हम इस पाथ पर चलना चाहते हैं तो फिर उसके बाद कोई दो राय नहीं है।

तो यहां क्वेश्चन आता है कि क्या अगर हम महाविद्या के पाथ पर चल रहे हैं तो क्या हमें अपनी नॉर्मल लाइफ को सैक्रिफाइस करना होगा? और यहां पर यह मैं अपने पाठकों को बताना चाहती हूं कि किसी भी भगवान को, स्पेशली दस महाविद्या को अप्रोच करने के दो तरीके हैं, एक पूजा का तरीका और एक साधना का तरीका।

12 पूजा और साधना में अंतर

पूजा और साधना में अंतर
पूजा और साधना में अंतर

पूजा का तरीका तो ठीक है लेकिन जो साधना का तरीका है उसके लिए आपको काफी कुछ गिव अप करना होता है। यह आपकी चॉइस है। ये और मैं थोड़ा सा डिफरेंस जानना चाहूंगा कि पूजा का तरीका क्या हो सकता है और एक साधना का तरीका क्या है ?

मतलब कैसे मैं आइडेंटिफाई करूं? तो आप उनकी ब्लेसिंग्स ले रहे हैं। तो इसकी पूजा जैसे हम आरती करते हैं और कोई भी एक मंत्र करते हैं जो इनका सौम्य मंत्र होता है। साधना एक बिल्कुल अलग तरीका है। उसमें आप एक संकल्प लेते हैं कि आप इतने मंत्र इतने दिन में करेंगे और हर रोज करेंगे और उसके बहुत सारे नियम होते हैं, बहुत सारा डिसिप्लिन होता है।

कई 10 महाविद्या की साधनाएं हैं जिसमें आपको ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है। तो क्या आप तैयार हैं? क्योंकि यह ऐसी एनर्जी नहीं है जिसके साथ आप खेल सकते हैं।

तो अगर आपने डिसाइड किया कि मुझे इनकी साधना करनी है और यह नहीं कि जिंदगी भर ही करनी है, आप यह भी कह सकते, एक साल साधना करना चाहता हूं।

फिर आप उस एक साल के लिए प्रिपेयर्ड हैं। फिर आप उसके बीच में ऑस्ट्रेलिया घूमने और पार्टी करने नहीं जा सकते। राइट? तो हम कितने तैयार हैं, वह ज्ञान है, वह पोटेंसी है पर हम कितने तैयार हैं उसके लिए, यह बहुत ज्यादा जरूरी हो जाता है।

क्या घर में मां काली की पूजा होनी चाहिए ?

a statue of a hindu god with multiple arms and legs

यह बहुत सारे लोगों का डाउट होता है, मेरा भी खुद का डाउट है। मां काली की पूजा घर के मंदिर में एक आम आदमी को कैसे करनी चाहिए? क्या उनकी मूर्ति को रखना चाहिए घर में मां काली की? क्योंकि लोग कहते हैं कि जैसे आपने खुद भी कहा कि ट्रांसफॉर्मेशन की देवी हैं, यह। ज्यादातर मां काली को एक युद्ध के मैदान में देखा गया, समझा गया। तो क्या मां काली की जो पूजा है वो घर के मंदिर में होनी चाहिए और उनकी मूर्ति होनी चाहिए?

मां काली की आप फोटो रख सकते हैं। मूर्ति के बहुत सारे अपने विधि विधान होते हैं और क्योंकि हम सब एक ऐसी जिंदगी में हैं जहां हमें ट्रैवल भी करना होता है, हम सब विधि विधान मान पाएं, ना मान पाएं, एक फोटो आप रख सकते हैं।

आपने कहा कि मां काली को हम युद्ध में देखते हैं। क्या आपको लगता है कि आज के एवरेज आदमी की जिंदगी एक युद्ध से कम है? हर कोई अपनी जिंदगी में हर रोज एक जंग लड़ रहा है। एक हर रोज एक जंग लड़ रहा है। मेरे पास जब महाकाली सपने में आई थीं और उन्होंने डिसाइड किया कि वो मेरे थ्रू कुछ-कुछ काम करवाएंगी, आपको मालूम है कि हम काली दरबार भी करते हैं और यह तभी से है जब से 2017 से मां काली मेरे सपने में आई थीं।

तो उन्होंने मुझे कहा कि आप ऐसा-ऐसा करें और मेरे को बिल्कुल नॉलेज नहीं थी कि हम कैसे कर सकते हैं। तो जैसे-जैसे उन्होंने मुझे बताया वैसे-वैसे मैंने किया और उसके बाद काली दरबार भी शुरू हुआ।

काली दरबार में मैं महाकाली को चैनल करके लोगों को मैसेजेस देती हूं। आज तक काली दरबार से बड़ा कोई भी हमारी वर्कशॉप उससे बड़ी हिट नहीं हुई है। क्या हमें महाकाली की पूजा करनी चाहिए? जरूर करनी चाहिए।

क्या हम सबको एक ऐसा अस्त्र चाहिए जिससे हम इस डार्कनेस को एक मुंहतोड़ जवाब दे सकें? जरूर। और वह अस्त्र है मां काली। लेकिन हम मां काली को किस रूप में पूजना चाहते हैं? क्या हम उन्हें पूजना चाहते हैं ? क्या हम उन्हें सिद्ध करना चाहते हैं ?

आप घर पर बैठ के उनको सिद्ध नहीं कर सकते या लेट्स से कि एक गृहस्थ आदमी के लिए सिद्ध करना काफी मुश्किल है। तो मैं यह कहूंगी कि हमें उनकी पूजा अर्चना करनी चाहिए, उनकी ब्लेसिंग्स लेनी चाहिए, उनके मातृत्व के फॉर्म, उनके मदरहुड के फॉर्म को इनवाइट करना चाहिए।

और जो लोग इसके एक लेवल आगे जाना चाहते हैं वो अमावस्या वाले दिन अपने घर में मां काली का हवन जरूर करें। स्पेशली जिनके घर में चीजें टूटती रहती हैं या उनको लगता है कि कोई एंटिटीज हैं या कुछ नजर दोष है, वो अपने घर में अमावस्या के अमावस्या मां काली का हवन जरूर करें।

मैं कहूंगी कि आप खुद हवन करें चाहे उसमें दो चीजें कम हो जाएं, इट डजंट मैटर। बिकॉज़ रिचुअल से ज्यादा जरूरी है इंटेंशन। और जो आप अपने लिए प्रे कर सकते हैं वो कोई आपके बिहाफ पे प्रे नहीं कर सकता।

किसी के दिमाग में उसके घर की चीजें चल रही होंगी जब वो आहुति डाल रहे होंगे लेकिन आप जब प्रे करेंगे, आप 100% उसमें घुस के प्रे करेंगे क्योंकि दर्द आपको है, ब्लेसिंग्स आप चाहते हैं।

क्यों छिपाया गया दस महाविद्याओं का ज्ञान?

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सबसे बड़ी बात यह है कि आज जिस टाइम पर हम रह रहे हैं उसमें इतनी डार्कनेस है कि हमें इन महाविद्यास के सिवाय कोई नहीं बचा सकता। यह एक उग्र फॉर्म है, यह स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स हैं और पेशेंट्स तो आप देख ही लीजिए। 

मेरे आखिरी लेख के बाद मैं आपको बता ही नहीं सकती कि जितनी हमारे पास कॉल्स आई हैं कि हमारे पे जिन्न है, भूत है, वशीकरण है, मैंने इतने केसेस अपनी जिंदगी में नहीं देखे जितने पिछले तीन हफ्ते में देखे। तो अगर दुनिया में इतना पेन है और यह डॉक्टर्स अवेलेबल हैं तो फिर इनको हम ब्रिज क्यों ना करें ? क्यों हम लोगों को सेल्फ सफिशिएंट ना बनाएं ? क्यों? भारत, आत्मनिर्भर भारत।

मैं भी ये कहना चाहता हूं कि आत्मनिर्भर भारत की जब हम बात करते हैं तो हमें तंत्र में भी आत्मनिर्भर होना चाहिए। हम एटलीस्ट इतना तो पता हो कि इसका इलाज क्या हो सकता है। ठीक है, दवा लेने के लिए मैं एक फार्मा के पास जाऊंगा या फार्मेसी के पास जाऊंगा, वहां से दवा ले लूंगा या डॉक्टर के पास जाऊंगा पर मुझे पता तो हो किसकी दवा क्या लेनी है। 

तो ये दस महाविद्याओं से हमें जुड़ना चाहिए, ये तो एक बहुत अच्छी बात आपने कही और आपने बहुत अच्छे तरीके से समझाया भी, मेरे भी बहुत सारे डाउट्स क्लियर हुए जिसमें दस महाविद्या कैसे हैं और वह हमारी लाइफ में कहां-कहां पर किस रोल में नजर आती हैं।

आत्मनिर्भरता की आवश्यकता

Woman reads a book surrounded by bookshelves.

जो रिसर्च पेपर है मेरा जो ऑक्सफोर्ड में मैंने पब्लिश जो होगा अभी, वो 10 महाविद्यास के डिवाइन फेमिनिन ऑर्डर के ऊपर है। बिकॉज़ इंडिया में जो स्पिरिचुअलिटी है उसमें जो डिवाइन डिवाइन फेमिनिन है और उसमें जो तंत्र है उसके ऊपर यह पेपर है कि इसकी क्या इंपॉर्टेंस है क्योंकि इंडिया में तंत्र बहुत एंशिएंट है, आप जानते हैं।

और इसको एक इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर प्रेजेंट करना कि स्पिरिचुअल सर्विस क्या है, डिवाइन फेमिनिन क्या है और कितने फॉर्म्स हैं मां के और वो हमारी लाइफ से कैसे रिलेट करते हैं। अब तो वेस्टर्न वर्ल्ड को भी बहुत इंटरेस्ट है डीप रिलीजन और तंत्र में।

लेकिन यह एक इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर डालना कि मां काली के कितने रूप हैं और हम उनको अपनी डे टू डे लाइफ में कैसे यूज कर सकते हैं। मेरी बुक इससे थोड़ी ज्यादा डिटेल है बट आई विल बी हैप्पी टू शेयर इट वंस इट्स आउट। लेकिन है इन्हीं पे। और आप मानें या नहीं कि 10 साल पहले मेरी लाइफ में 10 महाविद्या नहीं थीं।

तो यह अपने आप इन्विटेशन आया है, अपने आप चैनलिंग हुई है, डाउनलोड हुआ है क्योंकि बहुत सारे लोग पूछते हैं कि आपने कौन से टेक्स्ट्स पढ़े? टेक्स्ट सेकेंडरी है जब आपको डायरेक्टली ऊपर से नॉलेज मिल रही है। हां, अगर आपको ऑटोमेटिक राइटिंग से डायरेक्टली नॉलेज मिल रही है कि मां काली क्या कह रही हैं, मां षोडशी क्या कहना चाहती हैं, बहुत सारे जब मैं एंटिटी हीलिंग्स करती हूं तो उसमें मेरे को मां छिन्नमस्ता दिखती हैं, बहुत में मां भैरवी दिखती हैं और मां भैरवी बहुत सारी चीजें मुझे बताती हैं।

जब हम मीडियम शिप की वर्कशॉप करते हैं और हम पोर्टल खोलते हैं तो हम मां काली को बुलाते हैं क्योंकि उनके अंदर एक वो मदरहुड का भी है और उसके अंदर हम वो स्पिरिट्स को भेजते हैं।

हम जब अर्थ क्लीनिंग करते हैं मीडियम शिप का कोर्स सीख के, तो अर्थ क्लीनिंग का मतलब है कि जो आत्माएं हैं जिनको मुक्ति नहीं मिली उनको मीडियम शिप के थ्रू हम उनसे पूछ के कि आप जाना चाहते हैं, उनको लाइट की तरफ भेजते हैं।

मैं यह कहना चाहूंगी तुषार, दैट हमें अपने रूट्स पर वापस जाना चाहिए। हमें हर घर में एस्ट्रोलॉजी पता होनी चाहिए क्या है, हर घर में महाविद्या का ज्ञान सबको होना चाहिए। हमें अपने घर की प्रोटेक्शन करनी आनी चाहिए, हमें ऑटोमेटिक राइटिंग आनी चाहिए।

हमारा कनेक्शन अगर डायरेक्टली भगवान से है तो हमें तीसरे इंसान की जरूरत नहीं है। मैं 9 साल से यही बोल-बोल जा रही हूं सोशल मीडिया पे कि आपको किसी के पास क्यों जाना है?

आप खुद क्यों नहीं सीखते? कि जो आपने बात की, स्पिरिचुअली सफिशिएंट, व्हाई डोंट यू बिकम? आप खुद करिए। चाहे एंड में आपको, जैसे आपको खाना बनाना आना चाहिए, किसी दिन मन है तो रेस्तरां में जाके खा लीजिए। लेकिन अगर आपको खाना ही नहीं बनाना आता तो आप किसी पर डिपेंडेंट हैं फॉर योर डेली नीड्स।

और जिस तरीके की आज आपने कहा कि एक ब्लैक वर्ल्ड जो है, एक वॉर चल रही है लाइट वर्सेस डार्क, तो उस वक्त में तो आपको स्पिरिचुअली सफिशिएंट होना चाहिए क्योंकि आपको किसी भी परेशानी से डील करना बहुत स्टार्टिंग में ही आना चाहिए।

तभी शायद पुराने जमाने में लोग बहुत ज्यादा सफिशिएंट थे और अब वो कहीं ना कहीं कमी हमें खल रही है और यह बहुत जरूरी है।

वेल, आज के इस लेख में बहुत कुछ जानने को आपसे मिला है और 10 महाविद्याओं पर हमने बहुत डिटेल में बात की है। आई होप जो हमारे पाठक हैं उन्हें बहुत अच्छा लगा होगा, बहुत पसंद आया होगा यह लेख।

हमारी वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर और भी बहुत सारे लेख हैं। तो मैं अपने पाठकों से कहूंगा कि अगर आप वे लेख पढ़ना चाहते हैं तो हमारी वेबसाइट पर जाकर आप पढ़ सकते हैं क्योंकि बहुत सारी चीजों पर हमने मां कामाख्या पर हमने बात की है, हमने स्लीप पैरालिसिस पर बात की है, हमने डेथ पर बात की है।

   दस महाविद्या और उनके भैरव:
    • काली (Kali): काल भैरव (Kaal Bhairava)
    • तारा (Tara): अक्षोभ्य भैरव (Akshobhya Bhairava)
    • त्रिपुर सुंदरी/षोडशी (Tripura Sundari/Shodashi): पंचवक्त्र भैरव (Panchavaktra Bhairava)
    • भुवनेश्वरी (Bhuvaneshwari): विकृताक्ष भैरव (Vikritaksha Bhairava)
    • त्रिपुर भैरवी (Tripura Bhairavi): त्रिपुर भैरव (Tripura Bhairava)
    • छिन्नमस्ता (Chhinnamasta): कपाल भैरव (Kapala Bhairava)
    • धूमावती (Dhumavati): कोई भैरव नहीं है (No Bhairava)
    • बगलामुखी (Bagalamukhi): मृत्युंजय भैरव (Mrityunjaya Bhairava)
    • मातंगी (Matangi): मतंग भैरव (Matanga Bhairava)
    • कमला (Kamala): संहार भैरव (Samhara Bhairava) 

 

भुवनेश्वरी साधना के लाभ – bhuvaneshwari sadhana ki labh ph .85280 57364

भुवनेश्वरी साधना के लाभ - bhuvaneshwari sadhana ki labh ph .85280 57364

भुवनेश्वरी साधना के लाभ – bhuvaneshwari sadhana ki labh ph .85280 57364

भुवनेश्वरी साधना के लाभ - bhuvaneshwari sadhana ki labh ph .85280 57364
भुवनेश्वरी साधना के लाभ – bhuvaneshwari sadhana ki labh ph .85280 57364

जय माता की, कैसे हैं आप सब? आशा करता  हूँ की आप सब ठीक-ठाक होंगी। आज का जो विषय है, वह है की भुवनेश्वरी साधना करने से आपके जीवन में क्या-क्या घटित होता है, भुवनेश्वरी साधना के लाभ क्या हैं, उनके बेनिफिट क्या हैं, किस प्रकार से आप माँ भुवनेश्वरी की शरण में जा सकते हैं। 

माता भुवनेश्वरी की साधना कैसे की जाती है ? माता भुवनेश्वरी की साधना के लाभ क्या हैं ? माता भुवनेश्वरी की साधना करने से जीवन में क्या-क्या घटित होता है? इन सब की जानकारी प्राप्त करने से पहले आपको यह बताते हैं की माता भुवनेश्वरी कौन हैं।

 

कौन हैं माँ भुवनेश्वरी ?

वह 10 महाविद्याओं में से एक हैं, पाँचवीं शक्ति हैं। माँ काली प्रथम रूप हैं, जैसे माँ काली जो है, माँ शक्ति का अंतिम रूप है ना, उसी प्रकार माँ भुवनेश्वरी जो है, वह शक्ति का प्रथम रूप मानी जाती हैं। 

अखिल ब्रह्मांड की रानी, ऊर्जा है की उनकी ऊर्जा को देख पाना मुमकिन ही नहीं है। बहुत कठिन तपस्याएं करने के पश्चात् भगवती प्रसन्न हो जाती है, तो कभी भी दर्शन नहीं देती है। उन्हें मनाना बहुत ही मुश्किल है। 

था उनके पैर के अंगूठे के नाखून में ही 33 कोटि देवी-देवता विराजमान होते हैं और माँ के पैर के अंगूठे के नाखून में करोड़ों ही पृथ्वियाँ हैं, करोड़ों ही आकाश, ब्रह्मा हैं, करोड़ों विष्णु हैं, करोड़ों ही महेश हैं। 

तो श्रीमद्देवी भागवत पुराण जो है, उसमें इस विषय के बारे में पूरी जानकारी दी गई है, जो अभी मैंने आपको बताई ना की उनके अंगूठे के पैर की नाखून में करोड़ों सृष्टियाँ, सब उसमें बताया गया है डिटेल्स से। आप चाहे तो श्रीमद्देवी भागवत पुराण पढ़ सकते हैं।

तो जो माँ भुवनेश्वरी हैं, वह भगवान शिव की स्वामिनी भी मानी जाती हैं। माता भुवनेश्वरी की ही अर्चना, पूजा-अर्चना सभी देवी-देवता करते हैं।

 जैसे भगवान शिव हैं, भगवान विष्णु करते हुए सृष्टि की और श्री हरि विष्णु ने पालन किया और भगवान भोलेनाथ ने सृष्टि का संहार भी करते हैं। तो यह जो कुछ भी सृष्टि में हो रहा है, वह आदि पराशक्ति भुवनेश्वरी की वजह से, उनकी कृपा से, उनकी इच्छा पर ही हो रहा है। 

जैसे एक कुम्हार खेल-खेलने के लिए मिट्टी का कोई खिलौना बनाता है और जब उनका मन करता है, वह खिलौने रचना करते हैं।

 उसी प्रकार से कुम्हार खिलौने की रचना करने के पश्चात् खिलौने से खेलता है, तो उसी प्रकार उनमें अनेकों लीलाएं करती है। 

खिलौने के साथ खेलने के पश्चात् उसी खिलौने को नष्ट करके एक नया खिलौना बनाता है। उसी प्रकार से माँ आदि पराशक्ति माँ भुवनेश्वरी भी जब सृष्टि में लीलाएं करके उनका मन भर जाता है, तब वह सृष्टि का संहार कर देती है। 

 माँ भुवनेश्वरी ही भगवान ब्रह्मा, विष्णु, इनकी शक्तियों से ही ब्रह्मा, विष्णु, महेश प्रकट हुए और इनकी शक्तियों से ही रचना, पालन और संहार होता है। 

तो कुल मिलाकर माता भुवनेश्वरी के ऊपर कुछ भी नहीं है। तो जो माँ भुवनेश्वरी हैं, अखिल ब्रह्मांड की महारानी हैं, अधिष्ठात्री देवी हैं। माँ प्रकृति भी इन्हीं कहा गया है, माँ शाकम्भरी भी इन्हें कहा जाता है।

 भुवनेश्वरी साधना के लाभ

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भुवनेश्वरी साधना के लाभ – bhuvaneshwari sadhana ki labh ph .85280 57364

1 भुवनेश्वरी साधना के लाभ –  दरिद्रता का नाश

माँ भुवनेश्वरी की साधना यदि कोई दरिद्र करता है, जो बहुत ही निर्धन व्यक्ति होता है, मान लो की किसी जन्म की दरिद्रता किसी को चिपक गई, जन्म-जन्म होता है, व्यक्ति धनवान होता है और उसकी सात पीढ़ियों को धन की कभी भी कोई कमी नहीं रहती।

2 भुवनेश्वरी साधना के लाभ – वाणी में मधुरता

अगर कोई व्यक्ति माँ भुवनेश्वरी की साधना, आराधना करता है तो क्या जाती है? उनकी पूजा-पाठ करते हैं, उनकी वाणी जो होती हो, इतनी मधुर होती है जैसे कान्हा जी की बांसुरी मधुर हुआ करती थी। उसी प्रकार से ऐसे लोगों की वाणी मधुर होती है जो भुवनेश्वरी शरण में होते हैं।

3 भुवनेश्वरी साधना के लाभ – ज्ञान की प्राप्ति

उन पर इतनी कृपा होती है की उन्हें ज्ञान अपने आप ही प्राप्त होने लगता है क्योंकि माँ में, माँ में इतना ज्यादा ज्ञान है, ज्ञान है इसीलिए तो उन्होंने सृष्टि की रचना की, पालन किया, संहार किया, है ना? सब ज्ञान से ही होता है। 

तो जो माँ के प्यारे भक्त होते हैं, प्यारे बच्चे होते हैं, उनमें भी ज्ञान की कोई कमी नहीं होती है, बहुत ज्ञान होता है उनमें और वह ज्ञान जो होता है, वह हर जन्म में उनके काम आता है।

4 भुवनेश्वरी साधना के लाभ – ऊर्जा, शक्ति और निर्भयता
 

माँ भुवनेश्वरी की जब साधना शुरू की जाती है, तब जो साधक होता है, उसमें एक ऊर्जा का एहसास होता रहता है। उसे लगता है की जैसे उसके अंदर बहुत ही ज्यादा एनर्जी है, उसके अंदर बहुत ही ज्यादा ऊर्जा है, बहुत ज्यादा शक्ति है। 

वह अपने आप को बहुत ही सेफ समझता है, अपने आप को बहुत ही मजबूत समझने लगता है और उसे किसी भी प्रकार का भय नहीं रहता।

 बहुत भयभीत रहने वाले जो लोग होते हैं, जिन्हें बहुत ज्यादा डर लगता है, जिन्हें अंधेरे से भी डर लगता है, अगर कोई साथ है तब भी डर लगता है, अगर वह अकेले हैं तब भी डर लगता है, मतलब की अपने आप को इनसिक्योर फील करने वाले जो लोग होते हैं.

 उन्हें भुवनेश्वरी जरूर करनी चाहिए। ऐसे में यह लाभ होता है की व्यक्ति का भय जो है, उसका नाश हो जाता है और भय मुक्त होकर विचरण करने लगता है।

 

5  भुवनेश्वरी साधना के लाभ  – कार्यों में सफलता
 

जिस कार्य में भी हाथ डालता है, उस कार्य में उसे सफलता मिलती है। भगवती को मिलती है तब उस व्यक्ति का हाथ अगर रेत में भी लग जाता है, तो वह रेत भी सोना बन जाती है। की वह जिस काम में भी हाथ डालता है, उसी काम में उसे सफलता मिलती है। 

सफलता मिलती है इसीलिए तो गरीबी दूर जाती है, है ना ? गरीबी दूर तभी होगी जब सफलता प्राप्त होगी। सफलता भी कैसे प्राप्त होगी ?

 जब भी व्यक्ति कर्म करता है और उस कर्म में उसका विश्वास होता है की मैं जो कार्य कर रहा हूँ, मेरी इष्ट देवी मुझे उस कार्य में सफलता प्रदान करेगी।

 तब उस व्यक्ति का जो कॉन्फिडेंस होता है, वह कॉन्फिडेंस उसको सफलता की ओर ले जाता है। माता भुवनेश्वरी कॉन्फिडेंस लेवल को हाई करती है।

6 भुवनेश्वरी साधना के लाभ –  रोगों का निवारण

ऐसे लोग जिन्हें कोई व्याधि है, कोई रोग है, ऐसे लोग, ऐसा रोग लग गया है जिसका कोई इलाज नहीं है, तो माँ भुवनेश्वरी जो है, ऐसे रोगों को भी ठीक कर देती है।

7 भुवनेश्वरी साधना के लाभ – भाग्य परिवर्तन

कोई भी नहीं मिटा सकता है। वह प्रभु देव का लिखा हुआ भी मिटा सकती है और उसको उसी अकॉर्डिंग लिख सकती है जिस अकॉर्डिंग वह खुद चाहती है। 

अगर आपके जो कर्म हैं, वह अच्छे नहीं लिखे, आपके साथ कुछ भी अच्छा नहीं हो रहा है, आपके लेख भगवान ने अच्छे नहीं लिखे हैं, तो आप भुवनेश्वरी की शरण में जा सकते हैं। 

 आप जब माँ भुवनेश्वरी की शरण में जाएंगे, उनसे प्रार्थना करेंगे की आपके जीवन में, आपके भाग्य में अगर गरीबी है तो उस गरीबी को दूर करें हूँ। तो माँ भुवनेश्वरी उस गरीबी को दूर करती है।

8 भुवनेश्वरी साधना के लाभ – संतान प्राप्ति

अगर मान लो की आपको किसी पंडित ने कहा है की आपकी कुंडली में पुत्र का योग नहीं है, संतान का योग नहीं है, है ना? तो ऐसे योग भी माँ बदल देती है। अगर आप माँ की शरण में जाते हैं, उनके साथ नाराज ना करते हैं, उनकी विधिवत पूजा करते हैं, तब आपको माँ पुत्र रत्न की भी प्राप्ति कराती है। 

कोई भी व्यक्ति निःसंतान नहीं रहता। संतान प्राप्ति करवाती है, चाहे आप पुत्र चाहें, चाहे पुत्री चाहें, आपको आपकी इच्छा अनुसार संतान प्राप्त होती है।

9 भुवनेश्वरी साधना के लाभ – तंत्र-मंत्र और नकारात्मकता से रक्षा

अगर किसी को भूत-प्रेत बाधा है, किसी को किया-कराया है, किसी को ऐसा तंत्र कर दिया गया है जिसकी काट ही नहीं है, तो माँ भुवनेश्वरी की शरण में आप जा सकते हैं। क्योंकि माँ भुवनेश्वरी से ही हर एक तंत्र-मंत्र का जन्म हुआ है।  माँ भुवनेश्वरी ने ही सृष्टि की रचना की है। तो जब हमारे भुवनेश्वरी की शरण में जाया जाता है, तब आप भुवनेश्वरी खुद हर तंत्र की काट कर देती है।

10 भुवनेश्वरी साधना के लाभ – सम्मान और ऐश्वर्य

माँ भुवनेश्वरी की शरण में जाने वाले व्यक्ति के जीवन में ऐसी-ऐसी घटनाएं होती है की उसके जो जीवन होता है, वह चमत्कारों से भर जाता है और ऐसा व्यक्ति, ऐसा व्यक्ति जो होता है, वह समाज में बहुत सम्मान प्राप्त करता है। 

 व्यक्ति अपने आप में राजा-महाराजा जैसी जिंदगी जीते हैं की उनके जीवन में इतना धन, इतना ऐश्वर्य होता है की उन्हें किसी चीज की कमी नहीं होती। जितने भी बड़े-बड़े दिग्गज अमीर लोग हैं, उनको सबकी पूजा-अर्चना करते हैं, चाहे वो गुप्त रूप से करते हैं, परंतु करती जरूर है।

 साधना की गोपनीयता और गुरु की अनिवार्यता

 

और यदि आप भी माँ भुवनेश्वरी की साधना, आराधना करते हैं, तो जितना हो सके, उसे गुप्त रखिए। माँ भुवनेश्वरी की जो साधना करते हैं, उनकी वाणी में ही माँ भुवनेश्वरी का वास होता है और ऐसे लोगों की वाणी से ही पता चलता है की यह लोग माँ भुवनेश्वरी की आराधना करते हैं।

 उनकी वाणी में इतनी मिठास होती है की मन करता है की ऐसे लोगों के पास बैठकर उनकी बातें सुनते रहे। 

आपको अगर कोई व्यक्ति अच्छा नहीं समझता है, आपसे बात करना अच्छा नहीं समझता है, तो आप भुवनेश्वरी की शरण में जाइए, तो ऐसे लोग जो आपसे बात करना नहीं चाहते हैं, तो वह लोग भी आपसे बात करने के लिए तड़प उठाते हैं। 

वह सारी लीलाएं, बहुत सारे चमत्कार हैं जो केवल एक ही पोस्ट  में बताना संभव नहीं है।

माँ भुवनेश्वरी जो है, वह 10 महाविद्याओं में से पाँचवीं महाविद्या है। महाविद्या का अर्थ है जो विद्या की बहुत ही हाई लेवल की विद्याएँ होती है ना, उन्हें महाविद्या कहा जाता है। 

तो इसलिए जो महाविद्याएँ होती हैं, जैसे यह 10 महाविद्याएँ, इनकी जो आराधना-साधना होती है, कि वो बिना गुरु के नहीं होती। 

इसलिए यदि आप माँ भुवनेश्वरी की साधना करना चाहती हैं, तो गुरु का हाथ सर पर होना बेहद जरूरी है। माँ भुवनेश्वरी करते हैं तो आपको उसका बहुत लाभ होता है, बहुत ही चमत्कारिक तरीके से भुवनेश्वरी की साधना से आपको लाभ होते हैं।

 मंत्र और उनका प्रभाव

 इसके भी बहुत से लाभ हैं। भुवनेश्वरी के अनेकों मंत्र हैं जिनकी दीक्षा दी जाती है और गुरु के द्वारा उनकी साधनाएं करके मंत्रों में, उन मंत्रों को जागृत किया जाता है और जैसे-जैसे यह मंत्र जागृत होते हैं। 

 वैसे-वैसे आपके जीवन में तरक्की, कामयाबी, धन, ऐश्वर्य होता है, गरीबी हटती है, गरीबी दूर होती है, संतान की प्राप्ति होती है। 

जिस प्रकार जीवन, जिस प्रकार से होता है, उसी प्रकार से भगवती भुवनेश्वरी के सभी साधकों का जीवन होता है। जीवन में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रहती है ना? 

धनेश्वरी साधना से प्राप्त हो जाता है। शत्रुओं से भी छुटकारा मिलता है, तंत्र बाधा से छुटकारा मिलता है।

तो यह था आज का टॉपिक। आशा करती हूँ की आपको मेरा यह टॉपिक अच्छा लगा होगा। तो जल्दी से मेरी इस पोस्ट को लाइक कीजिए, कमेंट कीजिए, शेयर कीजिए और जय माता दी। खुश रहिए, खुशहाल से ही।