Author: Rodhar nath

मैं रुद्र नाथ हूँ — एक साधक, एक नाथ योगी। मैंने अपने जीवन को तंत्र साधना और योग को समर्पित किया है। मेरा ज्ञान न तो किताबी है, न ही केवल शाब्दिक यह वह ज्ञान है जिसे मैंने संतों, तांत्रिकों और अनुभवी साधकों के सान्निध्य में रहकर स्वयं सीखा है और अनुभव किया है।मैंने तंत्र विद्या पर गहन शोध किया है, पर यह शोध किसी पुस्तकालय में बैठकर नहीं, बल्कि साधना की अग्नि में तपकर, जीवन के प्रत्येक क्षण में उसे जीकर प्राप्त किया है। जो भी सीखा, वह आत्मा की गहराइयों में उतरकर, आंतरिक अनुभूतियों से प्राप्त किया।मेरा उद्देश्य केवल आत्मकल्याण नहीं, अपितु उस दिव्य ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाना है, जिससे मनुष्य अपने जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझ सके और आत्मशक्ति को जागृत कर सके।यह मंच उसी यात्रा का एक पड़ाव है — जहाँ आप और हम साथ चलें, अनुभव करें, और उस अनंत चेतना से जुड़ें, जो हमारे भीतर है ।Rodhar nath https://gurumantrasadhna.com/rudra-nath/

satri betal sadhna स्त्री बेताल साधना 3 दिन में सिद्ध होने वाली १००१% सफल होगा

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satri betal sadhna स्त्री बेताल साधना 3 दिन में सिद्ध होने वाली १००१% सफल होगा नमस्कार, गुरुमन्त्रसाधना  में आप सभी का स्वागत है। आज मैं आपको बताने वाला हूँ स्त्री बेताल साधना के बारे में। जैसे मैंने वायु बेताल, अग्नि बेताल, ऐसे पुरुष बेताल की साधनाएँ दी हैं, तो बहुत सारे लोगों ने लाइव में पूछा भी है कि स्त्री बेताल की साधना कैसे करते हैं। तो इसके बारे में मैं, वैसे मेरे पास यह विधि बहुत दिन पहले से ही है।

यह ज्यादा डिफरेंस नहीं है नॉर्मल साधना में से, लेकिन इसमें कुछ-कुछ नियम अलग हैं और इस साधना से जो है बहुत सारे कार्य ऐसे आप कर सकते हैं जो आप नॉर्मल बेताल साधना करके नहीं कर सकते। जैसे पिछले समय में, जैसे जब राजा का समय था, ठीक है ?

जैसे विक्रम-बेताल आपने सुना है नाम, हाँ, तो राजा विक्रम जो थे वह बेताल की साधना इसलिए किए थे ताकि वो साम्राज्य को बढ़ा सकें, दूसरे शत्रु से विजय पा सकें, ताकि कोई उनको हरा न पाए, इसलिए वह बेताल की साधना करते थे।

और बेताल जो होता है, वह महाकाल के सेवक होते हैं, उनके साथ चलते हैं और महाकाल से ही बेतालिन का उत्पत्ति हुआ है। लेकिन बेताली, जिसे हम लोग स्त्री बेताल कहते हैं, वह भी महाकाल के ही एक तरीके से सेवक हैं और इनकी जो शक्तियाँ हैं, वह थोड़ा-सा भिन्न हैं बेताल से, मतलब पुरुष बेताल से।

स्त्री बेताल की अगर आप साधना करते हैं तो आपको जो है बहुत सारी शक्तियों का एक तरीके से आभास होता है। मतलब एक स्त्री बेताल के साथ जो है लगभग 3 से 4 पुरुष बेताल चलते हैं।

मतलब अगर आपने एक स्त्री की साधना कर ली तो लगभग उसके साथ आपको दो-तीन बेताल की शक्ति जो है आपको मिल जाएगी। ठीक है? कोई भी स्त्री बेताल अकेली नहीं रहती है।

तो इसीलिए वह भी एक तरीके से सोचें तो सही रहता है। आप तंत्र में बहुत ज्यादा ऊपर तक पहुँच सकते हो, बहुत कुछ सीख सकते हो आप उनसे। ब्लैक मैजिक में ऐसे भयानक यंत्र बनाना सीख जाओगे, उससे आप खुद क्रिया करना सीख जाओगे, वशीकरण तो चुटकियों में कर सकते हो।

लेकिन क्या है कि स्त्री बेताल की साधना जो है थोड़ा-सा उग्र है और यह सब लोगों के बस की बात नहीं है क्योंकि इसमें बहुत सारी डरावनी अनुभूतियाँ और खतरा होता है जीवन में। सुरक्षा कवच बहुत ही स्ट्रॉन्ग करना पड़ेगा क्योंकि अब आगे की वीडियो जैसे आएँगे वैसे-वैसे मैं सबकुछ ही डालूँगा, लेकिन कुछ-कुछ साधनाएँ मैं बहुत ही कठिन डालने वाला हूँ क्योंकि इतना दिन से तो मैं दो-तीन साल से डाल रहा हूँ साधनाएँ।

इसमें लोग भूत-प्रेतनी, ये सब कुछ तरीके की साधना आप लोग देख रहे हो, लेकिन यह जो साधनाएँ हैं ना, ये नॉर्मली आपको बहुत ही कम जगह देखने को मिलेंगी। स्त्री बेताल साधना, स्त्रियों में भी बहुत सारे और भी टाइप के बेताल होते हैं, वह भी मैं डालूँगा आगे और साधना। तो सुरक्षा घेरा के बिना नहीं करना है, न गुरु-दीक्षा के बिना करना है।

बहुत ही पावरफुल साधना है और अमावस्या के दिन से यह साधना करनी है। 31 डेज़ की साधना है। अगर आप किसी विशेष दिन में करते हैं, जैसे चंद्र ग्रहण हो गया, शिवरात्रि है, नवरात्रि है, तो उसमें जो है यह सिर्फ 11 दिन की साधना होगी। ठीक है?

और एक विधि है जो मैं नेक्स्ट वीडियो में बताऊँगा जिसमें आप इस चीज को 3 दिन में भी सिद्ध कर सकते हो, लेकिन उसके लिए जिगर वाला दिल होना चाहिए क्योंकि यह जो साधना तीन दिन में होती है उसमें एक तरीके से किसी मरी हुई औरत की बॉडी के ऊपर बैठकर यह साधना करनी पड़ती है और बहुत ही खतरनाक होती है ये सब, ठीक है?

तो एक तरीके से वह इल्लीगल भी है, नहीं करना चाहिए। लेकिन जो तरीका मैं बता रहा हूँ वह आप नॉर्मली खुद भी कर सकते हैं। तरीका यह है कि आपको अमावस्या का दिन चुनना है, ठीक है? बता रहा हूँ और इसमें आपको खून लगेगा, ठीक है?

आप बकरे का खून ले सकते हैं, हिरन का खून ले सकते हैं, जो भी है, लेकिन जो भी आप खून दे रहे हो उसी से कैटिगरी में रखिएगा, ठीक है? और हर दिन लगेगा। एक छोटा-सा ग्लास जैसे मिट्टी का ग्लास होता है ना, वह आपको लगेगा। मिट्टी का प्याला आप ले सकते हैं या फिर कोई नॉर्मल डिस्पोजल प्याला भी लें। ठीक है?

और आपको बकरे का भोग देना पड़ेगा उनको, जैसे मुर्गी का भी दे सकते हैं और आपको जो है यहाँ पर देसी दारू, वह आपको चढ़ाना है हर दिन उनके नाम पर, ठीक है? और इसमें जो है आपको सुरक्षा घेरा जो मैंने बताया था माता काली का, वह भी लगाना है और हनुमान जी का भी लगाना है, दोनों ही सुरक्षा घेरा, मतलब डबल सुरक्षा घेरा बनेगा

। हाँ, और एक कवच मैं बना के देता हूँ हर इंसान, मतलब जो भी मेरे से दीक्षा लेता है, जो भी शिष्य है मेरे, तो वह कवच अगर आप चाहें तो ले सकते हैं। मैं तो सजेशन यही दूँगा कि ले लीजिएगा कवच। इससे क्या होगा आपकी जान, सोचिए आप साधना नहीं कर रहे हो उस टाइम पे, जिस टाइम पर आप साधना जैसे दिन में आप हो या शाम में उस टाइम पे हम साधना नहीं कर रहे होते हैं, तो उस टाइम पर शरीर की रक्षा हो।

तो शरीर बंधन एक रक्षा कवच होता है, तो वह दिया जाता है। बाकी साधना में जब बैठोगे तब तो कवच लगा ही लोगे, सुरक्षा घेरा लगा ही लोगे, नो प्रॉब्लम। ठीक है? इसमें आपको जो है साधना को करने का समय एक महादेव, ठीक है? महादेव, छोटी-सी एक शिवलिंग ले लीजिएगा, ठीक है? और माता काली की छोटी-सी मूर्ति या एक फोटो ले लीजिएगा, ठीक है?

यह आपको लेकर जाना है जहाँ पर भी आप करोगे। कोशिश करना, ठीक है? कोई जंगल वगैरह, खाली जगह में यह साधना को करो ताकि उसको पूर्ण अनुभव और पूर्ण सिद्धि आपको मिल सके। ठीक है? जगह थोड़ी इसलिए आपको सुनसान रखनी है, आसपास में ऐसे भीड़भाड़ वाले जगह से थोड़ा-सा दूर। और आपको जो है काले वस्त्र का धारण करना है, ठीक है?

और आपको लाल सिंदूर का टीका लगाना है यहाँ पे, ठीक है? सर पे काले कलर का कपड़ा बाँध लीजिएगा, ठीक है? उसके बाद काले आसन में आपको दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके बैठना है। एक बाजोट लेना है, उसके ऊपर शिवजी और माता काली का जो भी फोटो या फिर जो मैं शिवलिंग बोला वह रखना है, ठीक है?

और उनको जो है स्नान आदि कराना है गंगाजल से, ठीक है? यह इसीलिए ताकि आप उस शक्ति को कंट्रोल कर पाओ, इसीलिए मैं इन दोनों की मूर्ति या शिवलिंग को लेने बोल रहा हूँ। ठीक है? पूजा कर लो। पूजा करने के बाद उनके सामने रक्त वगैरह नहीं चढ़ाना है, गलती मत करिएगा। थोड़ा-सा, क्योंकि सुरक्षा घेरा जो है थोड़ा बड़ा करके बनाओगे तो उनसे एक-दो फीट दूर में साइड में आपको जो है एक यंत्र बनाना है जिसे कहते हैं त्रिबेताल यंत्र।

वह जो साधना करेगा, जो लोग, उनको दिया जाएगा। बेताल यंत्र में थोड़ा-सा चेंज होता है, यह स्त्री बेताल यंत्र है। उस यंत्र के ऊपर, ठीक है? एक छोटा-सा घी का या सरसों का दीया जलाना है और दीया जला के, ठीक है? वह दीया के आसपास में एक जो सिंदूर होता है ना लाल कलर वाला, ऑरेंज वाला नहीं, लाल वाला सिंदूर से दीये के चारों तरफ जो है एक राउंड मार देना है और उसके नीचे जो है यंत्र को रख देना। व्हाइट कलर के कागज़ में भी बना सकते हैं, उसका कोई इशू नहीं है, ठीक है?

और यंत्र को आपको सिंदूर से बनाना है, सिंदूर के साथ थोड़ा-सा बकरे का खून मिलाकर यह बना लिए। उसके बाद जो है उसके सामने जो देसी दारू आपने रखा है वह रखना है, उसके बाद आपको जो मांस चढ़ाना है, ठीक है? और आपको जो है थोड़ा-बहुत आप जो है फूल वगैरह चढ़ा सकते हैं, बाकी आप न भी चढ़ाएँ वह भी चलेगा, ठीक है?

और इसमें जो है जो माला है, रुद्राक्ष का इस्तेमाल होगा क्योंकि बेताल साधना है और इसमें जो है गंगाजल जो आप सुरक्षा घेरा या फिर शरीर बंधन के लिए इस्तेमाल करेंगे। तो यह हो गया पूरा विधि और यह जब शुरू करोगे, शुरुआत के 2 से 3 दिन तक आपको कोई अनुभव नहीं मिलेगा, आपको लगेगा कोई साधना नहीं हो रहा है, क्या कोई अनुभव नहीं हो रहा है।

लेकिन आपको जैसे ही 7 दिन आप कंप्लीट कर लोगे, उसके बाद से आपका परीक्षा शुरू हो जाएगा। इसीलिए बोल रहा हूँ क्योंकि यह शक्तियाँ पहले न आने की एक्टिंग करते हैं ताकि आपको ऐसा लगे कि कुछ नहीं हो रहा है। उसके सात दिन बाद से आपको ऐसा लगेगा कि कुछ मैंने भयंकर कुछ स्टार्ट कर दिया है और मेरे साथ कुछ भी हो सकता है। ठीक है?

कुछ-न-कुछ बाधाएँ आएँगी, आप साधना करने जाओगे तो कुछ-न-कुछ बाधा आपको रोकने की कोशिश करेंगी, तो ये सब चीजें आएँगी। तो नेक्स्ट 7 दिन आपका जो है बहुत भयावह गुजरेगा। उसके बाद का जो सात दिन होगा, वह और भयानक होगा। मतलब आप जब साधना करने बैठोगे ऐसा लगेगा कोई जंगली जानवर आप पे हमला करने आ रहे हैं या फिर कोई पेड़ आपके ऊपर गिर रहे हैं, लेकिन नहीं गिरेगा, वो माया होती है, ठीक है?

बस सुरक्षा पर कंसन्ट्रेट करिएगा और अपना ध्यान और थर्ड आई पर अगर कोशिश करके थर्ड आई पे रखना और अपना जो मंत्र है, जो मैं दूँगा, वैसे बेताल का यह शाबर मंत्र है स्त्री बेताल का, उससे क्या होगा वह आकर्षित होती है जल्दी, ठीक है?

और यह लगभग 31 डेज़ के अंदर-अंदर यह शक्ति, 31 डेज़ का जो लास्ट दिन होगा, तो उस दिन जो यह शक्ति पूछती है, ठीक है? कि तुझे क्या चाहिए, मुझे क्यों बुलाया, ठीक है? इतना दिन से अब क्यों बुला रहा है तू? ठीक है? तब आपको आँखें खोलना है और उससे जो है अपना वचन ले लेना है। वचन तीन सभी को पता है कि आप मेरी हर बात मानोगी, जो मैं कहूँगा वह करोगी, आप मेरी और मेरे परिवार का कभी अहित नहीं करोगी, ठीक है?

और जब मैं चाहूँ तब आप मुझे छोड़कर चली जाएँ। ये तीन वचन का हमेशा ध्यान रखिए, लेना। क्योंकि यह जितना पॉज़िटिव काम करती है, उतना निगेटिव काम भी करती है, यह दोनों तरफ की खिलाड़ी है। इसीलिए बोल रहा हूँ कि यह शक्ति अगर आप सिद्ध कर लेते हैं, तो यह आपको पॉज़िटिव शक्तियों का भी काम आएगा और निगेटिव शक्तियों का भी काम करेगा और इसके अंडर में बेताल लोग रहते हैं बहुत सारे, ठीक है?

तो यह साधना जो है बहुत सारे लोगों ने माँगा था, पिछले में दिया स्त्री बेताल साधना और आगे और ठीक है? जो इस टाइप की शक्ति है और कम पावरफुल वाली भी है, वह आगे-आगे मैं दूँगा और आसान तरीका देखो अगर ढूँढोगे तो समय आपको ज्यादा देना पड़ेगा और अगर आप कठिन तरीका ढूँढोगे तो समय आपको कम लगेगा, ठीक है?

तो यही था स्त्री बेताल का साधना और बिना गुरु-दीक्षा के न करें, ठीक है? और बाकी चीजें, जो भी इंसान करना चाहता है कॉन्टैक्ट करिए, बता दूँगा। तो आज के लिए इतना ही, अपना ख्याल रखिएगा। जय माँ काली।

अगिया बेताल साधना विधि विधान और मंत्र Agiya betal sadhana ph.85280 57364

अगिया बेताल साधना विधि विधान और मंत्र Agiya betal sadhana ph.85280 57364

अगिया बेताल साधना विधि विधान और मंत्र Agiya betal sadhana ph.85280 57364

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अगिया बेताल साधना विधि विधान और मंत्र Agiya betal sadhana ph.85280 57364 नमस्कार दोस्तों! जय महाकाल, आज के पोस्ट में मैं बेताल की साधना दे रहा हूँ। हालाँकि इस बेताल की साधना के बारे में पहले के पोस्ट  में बहुत कुछ बता चुका हूँ, साधना विधि भी दिया हूँ, लेकिन वह मार्ग कुछ अलग था और यह जो विधान इसका देने जा रहा हूँ, वह विधान बहुत ही अलग है और इस विधान से बहुत ही जल्द इस साधना में सिद्धि प्राप्त होती है।

अब सबसे पहले तो इसके फायदे बता दूँ। वैसे फायदे तो अनगिनत हैं और बेताल की जो शक्ति होती है, वह भूत, प्रेत, जिन्न, आत्मा, परी इत्यादि से कहीं बढ़कर होती है। तो इसकी शक्ति बहुत ही ज्यादा होती है। तो यह हर प्रकार का कार्य, मतलब हर प्रकार का कार्य करने में हमारे लिए सक्षम होता है।

साधक के लिए यह हर प्रकार के कार्य करने में सक्षम होता है, लेकिन इसकी साधना भी उसी प्रकार से कठिन होती है। इस बारे में तो बहुत कुछ कर पाए हैं, जैसे भूत, वर्तमान, भविष्य की जानकारी प्राप्त कर लेना, धन प्रदान करती है यह शक्ति।

और सांसारिक कोई भी कार्य हो, कोर्ट-कचहरी इत्यादि कोई भी कार्य हो, वो हमारा संपन्न करती है। स्टूडेंट के लिए पढ़ाई में बहुत उन्नति देता है, पढ़ाई तथा काम-काज में बहुत ही उन्नति देता है, बरकत देता है, ज्ञान प्रदान करता है, धनवर्षा करता है।

सांसारिक सभी कार्य, लौकिक तथा अलौकिक कार्य हमारे बनाता है, षट्कर्म करता है। मतलब एक तरह से हर प्रकार का कार्य यह शक्ति हमारे लिए करती है सिद्ध होने के पश्चात्।

परंतु यह बहुत ही शक्तिशाली और बड़ी शक्ति है, तो इस प्रकार की शक्ति को सिद्ध करने के लिए हमारा मन भी वैसा स्ट्रांग होना चाहिए, क्योंकि विकराल रूप में भी हमारे सामने आ सकता है और अधिकांश तो विकराल रूप में ही हमारे सामने आता है।

तो हमको दृढ़ निश्चय के साथ इस साधना को करना है। जो भी करना चाहें, जिसमें दृढ़ निश्चय है, साहस है, वही इस प्रकार की साधना को करें, यही कहूँगा। क्योंकि अधिकांश लोग तो कर लेते हैं, लेकिन जब शक्ति सामने उपस्थित हो जाती है, तब वह उसको संभाल नहीं सकते और पीछे हट जाते हैं।

तो इसका बहुत ही विपरीत और बुरा प्रभाव हम पर कहीं न कहीं पड़ता ही पड़ता है। विघ्न भी बहुत होता है, कई प्रकार के नुकसान हो सकते हैं हमको और नुकसान भी होता है। इसलिए, जिसमें शौर्य और पूर्ण निष्ठा एवं दृढ़ संकल्प हो, वही इस प्रकार की उच्च कोटि की साधना को करें और इसमें सफलता प्राप्त करें।

Agiya betal sadhana vidhi अगिया बेताल साधना  विधि 

तो मैं उसका विधान बता देता हूँ। विधान इसका इस प्रकार है कि इस साधना को घर पर नहीं किया जा सकता है।

इस साधना को या तो श्मशान में किया जा सकता है या किसी ऐसे वीरान स्थान पर किया जा सकता है जहाँ पास कोई आता-जाता न हो, या फिर इस साधना को किसी शिव मंदिर के आसपास किया जा सकता है। इस साधना में दिशा दक्षिण की रहेगी और स्वयं के बैठने का आसन काला रहेगा इसमें।

और सुरक्षा घेरा बहुत ही जाग्रत आपका होना चाहिए, स्ट्रांग होना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की समस्या न आए साधना के दौरान। तो सुरक्षा घेरा आपको लगाना है, क्योंकि इस साधना में बहुत सारी बाधाएँ और बहुत सारी समस्याएँ आती हैं।

और इसमें उस बेताल के नाम से आपको भोग में शराब का भोग लगाना है। किसी भी पात्र में, पात्र ले लीजिए आप, तांबे का कोई भी पात्र ले लीजिए, कांसे का कोई पात्र ले लीजिए, उस पात्र में आप शराब भरकर उसके नाम से अर्पित करें।

इस साधना को ऐसे किसी भी दिन किया जा सकता है, किसी भी सोमवार के दिन से शुरू किया जा सकता है और इस साधना को किसी भी पक्ष में किया जा सकता है, चाहे आप कृष्ण पक्ष में करें, चाहे शुक्ल पक्ष में क्यों न करें। सोमवार शाम को शुरू किया जा सकता है।

यह 31 दिन की साधना होती है और 31 दिनों में हमको इस साधना में पूर्ण सफलता प्राप्त होती है। तो उसके पश्चात् हमको इस साधना में विशेष हमको ब्रह्मचर्य का ध्यान रखना है, सात्विक भोजन करना है तथा शुद्धता बिल्कुल बनाए रखना है।

स्नान इत्यादि करके शुद्ध, स्वच्छ वस्त्र पहन कर ही इस साधना को करना है। समय आपका रात्रि 10:00 बजे के बाद से, कभी भी इस साधना को शुरू कर सकते हैं।

दिशा तो आपकी दक्षिण रहेगी और इसमें आप एक दीपक लगा लें, घी का एक दीपक लगा लें और उस दीपक में उड़द के कुछ दाने छोड़ दें आप, पाँच साबुत उड़द दाल जो है, उसके पाँच दाने आप उस दीपक पर छोड़ दें।

इस प्रकार से आपको दीपक अपनी तरफ मुँह करके जलाना है। चाहें तो आप धूप इत्यादि भी, सुगंधित अगरबत्ती इत्यादि जला सकते हैं।

अब आपको उक्त मंत्र का नित्य 12 माला पाठ करना है। यह अमल आपको 21 दिनों तक पाठ करना है। 21 दिन का जब आपका साधना पूर्ण हो जाता है, अच्छा इसमें जो है, आप मंत्र का पाठ करने से पहले आप किसी भी शिव मंत्र का एक माला, मतलब 108 बार पाठ करेंगे। इसमें रुद्राक्ष की माला का प्रयोग होगा।

और इसमें आप इस बेताल के मंत्र का पाठ करने से पहले आप किसी भी शिव मंत्र का 108 बार आप पाठ कर लें, उसके बाद ही आप इस उक्त मंत्र का, बेताल मंत्र का पाठ करें। तो इस प्रकार से 21 दिन तक आपको 12 माला का पाठ करना है।

21 दिन जब आपके पूरे हो जाएँ, तो पूरे होने के पश्चात् आपको हवन करना है। इसके नाम से हवन आप आम की लकड़ी से कर सकते हैं। आम की लकड़ी और घी इसमें मिलाकर आपको अग्नि जला लेनी है किसी पात्र या जमीन पर कहीं पर भी।

तो जलाने के पश्चात् जो है, वह अग्नि में आपको उड़द के दाने से होम चढ़ाना है, इसमें मतलब आहुति चढ़ानी है आपको उड़द के दाने से। इस मंत्र को पूरा पढ़कर आपको उड़द के दानों से 108 बार आहुति चढ़ानी है।

तो इस प्रकार से आपको 11 दिनों तक आहुति चढ़ानी है। 21 दिन की साधना पूर्ण होने के पश्चात् उसी मंत्र से आपको 11 दिनों तक आहुति चढ़ानी है।

तो इस प्रकार से ग्यारह दिनों के अंतर्गत जो है, यह साधना पूरी तरह से सिद्ध हो जाती है और उसी अग्नि में से बेताल जो है, अगिया बेताल जो है, वह उत्पन्न होता है और आपके सामने प्रत्यक्ष भी होता है।

होने के पश्चात् उससे आपको वचन ले लेना है और वचन लेने के पश्चात् यह शक्ति हमेशा के लिए आपसे जुड़ जाएगी, आपके अनुकूल हो जाएगी। तो उसके पश्चात् आपकी साधना संपन्न हो जाएगी।

और इसमें जिन भी वस्तुओं का आपने प्रयोग किया, उस वस्तुओं को जिस स्थान पर आपने साधना की, वहीं पर छोड़ देना है और इसी उक्त मंत्र को पढ़कर इस शक्ति को जब भी आह्वान करेंगे, बुलाएँगे, तो वह शक्ति आपके सामने उपस्थित हो जाएगी। इतना ही विधान है साधना का। वह विशेष मंत्र मैं आपको बता देता हूँ:

अगिया बेताल साधना मंत्र  Agiya betal sadhana mantra

अगिया बेताल साधना विधि विधान और मंत्र Agiya betal sadhana ph.85280 57364
अगिया बेताल साधना विधि विधान और मंत्र Agiya betal sadhana ph.85280 57364

मंत्र बस इतना ही है और इतना ही संपूर्ण विधान है साधना का। तो आज के वीडियो में इतना ही। नमस्कार!

अगिया बेताल रहस्य agiya betal sadhna rahasya PH.85280 57364

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अगिया बेताल रहस्य कौंन होता है – क्या है इस की शक्ति agiya betal sadhna rahasya

 

अगिया बेताल रहस्य कौंन होता है - क्या है इस की शक्ति agiya betal sadhna rahasya
अगिया बेताल रहस्य कौंन होता है – क्या है इस की शक्ति agiya betal sadhna rahasya

agiya betal sadhna rahasya ओम नमः शिवाय। जय श्री राम।आज का हमारा विषय है अगिया बेताल। सबसे पहले प्रश्न उठता है कि कौन होते हैं। अगिया बेताल क्या है ? और दूसरा प्रश्न होता है कि कौन बनते हैं अगिया बेताल? तीसरा प्रश्न, कहाँ रहते हैं अगिया बेताल? और चौथा प्रश्न, कैसे सिद्ध होते हैं अगिया बेताल?

आज इस पोस्ट  के माध्यम से हम आप लोगों को अगिया बेताल की पूरी जानकारी देंगे, प्रामाणिकता के साथ, शोध के साथ, उदाहरण के साथ।

Agiya betal अगिया बेताल का अर्थ

 क्योंकि सोशल मीडिया पर जितनी जानकारी आप लोगों को अगिया बेताल के विषय में मिली है, उसमें से 98 प्रतिशत जानकारी सिर्फ कोरी कल्पना है और असत्य है, जिसका अगिया बेताल से कोई भी लेना-देना नहीं है।

उदाहरण दे रहा हूँ, लोग बोलते हैं कि अगिया बेताल के मुख से अग्नि निकलती है, आग की लपटें निकलती हैं। यह पूर्णतः गलत है। क्यों पड़ा अगिया बेताल नाम, यह भी बताएँगे।

बेताल में कई सारी प्रजातियाँ हैं, कई सारे बेताल हैं। उसमें से एक प्रजाति का बेताल ऐसा होता है कि जिसके शरीर के रोम-रोम से ताप निकलता है, मुख से ताप निकलता है, रोम-रोम से ताप निकलता है। उस बेताल को अगिया बेताल कहते हैं। यह ताप क्यों निकलता है, इसे पोस्ट में आगे जानेंगे।

एक उदाहरण दे रहे हैं कि जैसे एक गाँव में कई सारी बिरादरी के लोग रहते हैं और एक स्कूल में सबके बच्चे पढ़ने जाते हैं, तो कोई बच्चा तेज होता है, कोई कम तेज होता है, लेकिन स्कूल, क्लास, स्टैंडर्ड एक ही होता है। उसी प्रकार कई सारे बेताल होते हैं।

उनमें से जो बेताल सबसे तेज माना गया है, उस बेताल को अगिया बेताल कहते हैं। और आखिर अगिया बेताल तेज क्यों माना गया है, इसके विषय में आप लोगों को अब बताते हैं।

कौन बनते हैं अगिया बेताल agiya betal ?

इसमें याद रखिए, बहुत ध्यान से सुनिए, जितने भी साधक पॉडकास्ट पर बैठे हैं और आँख मूँदकर ज्ञान देते हैं, जीवन में कभी भी अगिया बेताल के विषय में यह रहस्य नहीं जानते होंगे।

दो ही शक्तियाँ अग्नि तत्व शक्ति हैं, हिंदू धर्म में ब्रह्म की शक्ति और मुस्लिम धर्म में जिन्न की शक्ति। यह दोनों शक्तियाँ अग्नि तत्व की हैं।

अब देखिए, गुरुकुल में रह के वेदों का अध्ययन करने वाला, यज्ञ परंपरा को मानने वाला, नियम से यज्ञ करने वाला, वह ब्राह्मण बालक जिसका कभी भी ब्रह्मचर्य खंडित न हुआ हो और उसका विवाह भी न हुआ हो और जो यज्ञोपवीत धारण कर चुका हो, ऐसे ब्राह्मण बालक की, जिनका विवाह न हुआ हो, ब्रह्मचर्य खंडित न हुआ हो और यज्ञोपवीत धारण किया हो और गुरुकुल में पढ़ रहा हो, ऐसा ब्राह्मण पुत्र जब मरता है और उसके अंदर कोई मोह व्याप्त रहता है, कोई उसकी अभिलाषा व्याप्त रहती है, तो वह बनता है अगिया बेताल।

एक नार्मल ब्राह्मण व्यक्ति मरता है, जो कर्मकांड करता है, पूजा-पाठ करता है या हनुमान जी की भक्ति करता है, तो ब्रह्मदेव बन जाता है, ब्रह्म राक्षस बन जाता है। आग लगाने की शक्ति उनमें भी होती है।

लेकिन गुरुकुल में रह के ब्राह्मण पुत्र पढ़ने वाला, जिसे वेद कंठस्थ हों, वेद का अध्ययन कर रहा हो, यज्ञ कर रहा हो और उस बालक का विवाह न हुआ हो, यज्ञोपवीत हो चुका हो और उसका वीर्य खंडित न हुआ हो, ब्रह्मचर्य खंडित न हुआ हो, ऐसा बालक एक शुद्ध बालक होता है।

एक उच्चकोटि की योनि उसको मिलती है, यदि उसके अंदर कोई अभिलाषा या मोह बचा रहता है। तो ऐसा युवा बालक बनता है अगिया बेताल। क्योंकि वेदों में अग्नि का बहुत महत्व है, बहुत सारे मंडल, ऋचा, सूत्र अग्नि को समर्पित हैं। तो ऐसा ही बालक बनता है अगिया बेताल।

अब आप लोगों को बताते हैं कि अगिया बेताल रहता कहाँ है और इसको सिद्ध कैसे किया जाता है।

इसके विषय में भी पूरी जानकारी आप लोगों को देंगे। लेकिन अगिया बेताल के ऊपर कुछ उदाहरण भी दे देते हैं और बाकी जानकारी, बेताल के विषय में और गूढ़ रहस्य जो हमने शोध में पाया है, यह आप लोगों को 2 फरवरी 2025, दिन रविवार, दोपहर 2:00 बजे अगिया बेताल के विषय में पूरी जानकारी खोल के देंगे क्योंकि थोड़ा समय का भी अभाव है।

जैसे उदाहरण दे रहे हैं, एक नार्मल आदमी मरता है तो भूत-प्रेत बनता है। एक पहलवान व्यक्ति मरता है तो वीर पहलवान बन जाता है। एक ब्राह्मण कर्मकांडी मरता है तो ब्रह्म बनता है।

नार्मल ब्राह्मण मरता है तो अपने घर का ब्रह्म बनता है और थोड़ा कर्मकांडी ब्राह्मण बनता है तो गाँव का ब्रह्म बन जाता है।

एक मंदिर का कोई पुजारी खत्म होता है, गिरी, गोसाईं, गोसाईं बाबा बन जाते हैं। एक औघड़ अगर मरता है, इच्छा बाकी है तो मसान बन जाता है।

इसी प्रकार जिनकी जैसी क्षमता है, वैसे ही मृत्यु के उपरांत उनकी योनि निर्धारित की गई है। तुमने ऐसा कर्म किया, तुम्हारे अंदर इतना अज्ञान था, इसलिए तुम इस कैटेगरी के बनोगे।

और जो बेताल हैं, यह उच्चकोटि के हैं। जो बेताल हैं, उच्चकोटि के हैं, बेताल ज्ञानियों में आते हैं।

अभी उसी गुरुकुल में 100 बच्चे पढ़ रहे हैं, अगर उन 100 बच्चों की अकाल मृत्यु हो जाए तो बाकी जो अलग बिरादरी के हैं, जो राजपूत हैं, यादव हैं, ये लोग अलग बेताल बनेंगे। लेकिन उसी में अगर ब्राह्मण पुत्र है, तो अगिया बेताल बनेगा। यह बात याद रखिएगा। आज के लिए इतना ही। जय श्री राम।

बगलामुखी मंत्र के नुकसान और लाभ baglamukhi mantra ke nuksan ph.85280 57364

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बगलामुखी मंत्र के नुकसान और लाभ baglamukhi mantra ke nuksan

बगलामुखी मंत्र के नुकसान और लाभ baglamukhi mantra ke nuksan सभी भक्तों को जय माई की, जय श्री महाकाल माता श्री बगलामुखी पीतांबरा के मंत्र के नुकसान, बगलामुखी माता का मंत्र जप यदि आप करते हैं। 

 तो इसके नुकसान क्या हो सकते हैं आपके जीवन में और बगलामुखी मंत्र जपने के फायदे क्या होंगे, संपूर्ण जानकारी आपको मेरे द्वारा इस post के माध्यम से प्राप्त होगी। 

मां बगलामुखी मंत्र का जाप करने से नुकसान नहीं होता बल्कि इससे कई प्रकार के फायदे साधक के जीवन में होते हैं। 

हालांकि अगर आप मां बगलामुखी मंत्र को अनुचित तरीके से मंत्र जाप आप करते हैं या फिर बिना दीक्षा के आप बगलामुखी मंत्र जप यदि करते हैं, जिन लोगों के पास मां बगलामुखी मंत्र की दीक्षा नहीं है और बिना दीक्षा के, बिना विधान जाने, बिना विधि-विधान पता किए, बिना गुरु के मार्गदर्शन में, बिना गुरु आज्ञा यदि आप श्री बगलामुखी पीतांबरा का मंत्र जप यदि करते हैं तो इससे नुकसान भी आपका हो सकता है। 

और ऐसा नुकसान आपके जीवन में हो जाएगा जिसकी आप तमाम जीवन भरपाई नहीं कर पाएंगे।

तो मां बगलामुखी पीतांबरा के इस  वेबसाइट के माध्यम से मैं  में आप सभी भक्तों का हार्दिक स्वागत करता हूं, हार्दिक अभिनंदन करता हूं। मैं आशा करता हूं कि आप सभी स्वस्थ होंगे, मस्त होंगे। माता श्री बगलामुखी पीतांबरा की कृपा आप सभी भक्तों के जीवन में सदा-सदैव के लिए बनी रहे।

अभी सबसे पहले मैं आपको बगलामुखी मंत्र के नुकसान के विषय में जानकारी दूंगा। यदि आप मां बगलामुखी का मंत्र जपते हैं तो क्या नुकसान आपके जीवन में हो सकते हैं और किस प्रकार से आपको सावधानी अपने जीवन में बरतनी चाहिए यदि आप बगलामुखी मंत्र जप रहे हैं।

अगर आप बिना दीक्षा लिए बगलामुखी मंत्र का जाप करते हैं, मां बगलामुखी के वैदिक मंत्र का जाप यदि आप बिना दीक्षा लिए, बिना गुरु उपदेश के, बिना गुरु के निरीक्षण में, बिना गुरु आज्ञा के यदि आप इस मंत्र का जप करते हैं, अगर आपके पास दीक्षा नहीं है और आप भगवती का मंत्र जप रहे हैं तो मंत्र जाप किए जाएं तो मृत्यु, बीमारी, दुर्घटना और दुर्भाग्य, यह सब चीजें आपके साथ में हो सकती हैं यदि आप अज्ञानतावश इसको जप रहे हैं। 

एक बार आपके जीवन में पॉजिटिव प्रभाव आपको अवश्य नजर आएगा परंतु कहीं ना कहीं जैसे ही कुछ समय बाद आपके जीवन में उसका नकारात्मक प्रभाव आपको अवश्य देखने को मिलेगा। बहुत सारे जो सोशल मीडिया साइट हैं, हमसे बहुत सारे ऐसे लोग जुड़े जो लोग बताते हैं कि हमने उनसे पूछा, उन्होंने कहा कि मंत्र जप लो, बगलामुखी मंत्र जप लो, बगलामुखी मंत्र जप लो, बगलामुखी की साधना कर लो। भैया इसको खेल ना बनाओ।

सबसे पहले मैं आपको बता देना चाहता हूं कि शास्त्रानुचित यदि आप करेंगे तो उसका भुगतान आपको अवश्य ही करना पड़ेगा। इसलिए शास्त्र उचित कर्म करें। तो शास्त्र में कहा है कि बगलामुखी मंत्र या 10 महाविद्याओं में किसी भी एक महाविद्या की जो साधना है वो बिना गुरु दीक्षा के नहीं करनी। 

नहीं तो इसके दुष्प्रभाव के कारण, इसके नकारात्मक प्रभाव के कारण साधक की मृत्यु हो सकती है, असाध्य बीमारी आपको घेर सकती है, दुर्घटना आदि आपके साथ हो सकती है या फिर दुर्भाग्य भी आपका साथ घर कर सकता है। ऐसी दिक्कत आपके जीवन में हो सकती है।

अगर अनुचित तरीके से कोई भी साधक या कोई भी व्यक्ति बगलामुखी मंत्र का जाप करता है तो कुल और वंश, संपूर्ण कुल, समझ लीजिए इन बातों को, संपूर्ण कुल और पूरा का पूरा वंश इससे नष्ट हो सकता है।

अगर तीसरे नंबर पर बात करें तो अगर बगलामुखी माता का जो मंत्र है उसको अनुचित तरीके से यदि कोई जपता है तो व्यक्ति की मृत्यु के बाद भयानक ब्रह्मराक्षस के रूप में भी आपको भटकना पड़ सकता है। 

इसलिए किसी भी अन्य व्यक्ति के बहकावे में ना आकर आप यदि माता श्री बगलामुखी पीतांबरा का मंत्र जप करना चाहते हैं तो भैया दीक्षा उपरांत ही आप इसका जप करें। 

नहीं तो पूरा जो मृत्यु के बाद में भी आपको प्रेत योनि में ब्रह्मराक्षस के रूप में भटकना पड़ेगा और इसके दुष्प्रभाव आपके परिवार में, आपके कुल की वृद्धि को, आपके वंश की वृद्धि को या फिर उन सभी बातों को जो आप डिजर्व करते हैं उनको बाधित अवश्य करेंगे।

अब बगलामुखी मंत्र जो लोग दीक्षा प्राप्त हैं और बगलामुखी मंत्र जप कर रहे हैं, बगलामुखी मंत्र की जो साधना कर रहे हैं, 

 माता बगलामुखी मंत्र के फायदे क्या होंगे ?

बगलामुखी मंत्र जाप करने से दुश्मनों से रक्षा होती है, वाद-विवाद आदि से मुक्ति मिल जाती है। जिन लोगों का कोर्ट-कचहरी में मुकदमा चल रहा है, मुकदमे आदि से आपको मुक्ति मिल जाती है। और पूर्ण रूप से बगलामुखी माता का जो मंत्र है वो वित्तीय संकट, आर्थिक संकट से भी मुक्ति दिलाता है और जन्म-जन्मांतर की जो दरिद्रता है उसका समूल नाश कर देता है।

बगलामुखी मंत्र जाप करने से बुरी नजर, नकारात्मक ऊर्जा, तंत्र, अभिचार आदि क्रियाओं का प्रभाव, जादू-टोना या फिर कोई मारण आदि क्रिया यदि आपके घर परिवार पर यदि किसी अन्य व्यक्ति पर हुई है तो उसको पूर्ण रूप से यह खत्म कर देता है और नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को शांत करके, नष्ट करके सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह साधक के जीवन में, घर में अत्यधिक हो जाता है।

बगलामुखी मंत्र का जाप करने से झगड़ों और प्रतियोगी परीक्षा यदि आपकी है, कोई एंट्रेंस टेस्ट में आप सफलता प्राप्त करना चाहते हैं, किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी आप कर रहे हैं या फिर परीक्षा कोई आपने दी हुई है, तो माता श्री बगलामुखी की शरण में आप चले जाइए। 

मंत्र दीक्षा लेने के उपरांत बगलामुखी के मंत्र का जाप आप प्रारंभ करें। माता श्री की कृपा से आपके जीवन में धन-धान्य की वृद्धि होगी और बगलामुखी कृपा से आपके मनोरथ भी पूर्ण होगी। जय मां बगलामुखी। जय श्री महाकाल।

चौराहे वाली माता की कहानी – चौराहे वाली माता कौंन है

चौराहे वाली माता की कहानी - चौराहे वाली माता कौंन है

चौराहे वाली माता की कहानी – चौराहे वाली माता कौंन है

चौराहे वाली माता की कहानी - चौराहे वाली माता कौंन है
चौराहे वाली माता की कहानी – चौराहे वाली माता कौंन है

चौराहे वाली माता की कहानी – चौराहे वाली माता कौंन है जय मां काली, तो आज का यह पोस्ट  बहुत ही ज्यादा खास होने वाला है क्योंकि इस पोस्ट  के माध्यम से मैं आपको यह बताऊंगी कि चौराहे वाली माता कौन है क्योंकि एक भाई ने प्रश्न किया था कि क्या चौराहे वाली माता ही माता शीतला है

तो अगर आपके मन में भी कुछ इसी प्रकार से प्रश्न चल रहे हैं कि कौन है चौराहे वाली माता या माता शीतला, क्या वे एक ही हैं, तो यह वीडियो आपके लिए ही है। तो अगर आप भी इस बारे में जानना चाहते हैं तो post को अंत तक जरूर पढ़े और इसके साथ ही 

 

तो आप सब ने मुझे यह कहते हुए कई पोस्ट  में पढ़ा  होगा कि माता चौराहे वाली को कोई भी साधना करने से पहले या किसी भी देवी-देवता को भोग देने से पहले या हवन करने से पहले इन माता को या चौराहे वाली माता को भोग देना बहुत ज्यादा जरूरी होता है।

तो अब मैं आपको यही बताऊंगी कि क्यों माता चौराहे वाली को भोग देना इतना ज्यादा जरूरी होता है, क्यों किसी भी साधना में माता चौराहे वाली को भोग दिया जाता है, क्या है इनका किसी भी साधना में स्थान, किस प्रकार से इनकी शक्तियां कार्य करती हैं, यह किस-किस प्रकार के कार्यों को करती हैं, कौन हैं माता चौराहे वाली।

लेकिन उससे पहले मैं आपको यह बता देती हूं कि कई व्यक्तियों के मन में यह कन्फ्यूजन होती है कि माता शीतला और माता चौराहे वाली एक ही हैं, लेकिन ऐसा नहीं है।

जो माता शीतला हैं, जो गर्दभ पर सवार होती हैं, जिनके एक हाथ में झाड़ू होता है, एक हाथ में जल का कलश होता है, वो माता पार्वती का स्वरूप हैं, वो स्वयं जगत जननी का ही एक अवतार हैं, जिनको माता शीतला कहा जाता है।

और माता शीतला, जिनका होली के बाद जो बसोड़े शुरू होते हैं, इस दिन माता की पूजा की जाती है, वह माता शीतला हैं।

और जो माता चौराहे वाली हैं, यह चौराहे वाली माता अलग हैं। इनको माता चौगानन, माता मदानन, माता मसानी, छोटी माता, चौराहे वाली माता, थानों वाली माता, कलरों वाली माता और बाहरली माता के नाम से जाना जाता है।

यानी कि जो माता चौराहे वाली हैं, इनका वास चौराहे, मैदान, चौगान, मसान, इन सभी स्थानों पर होता है और इनकी शक्तियां इन सभी स्थानों पर अपना कार्य करती हैं और अपनी पूर्ण शक्तियों के साथ ही इन स्थानों पर माता का वास होता है।

और चौराहे पर विशेष रूप से और मैदान में इस देवी का भोग दिया जाता है। और जो माता चौराहे वाली हैं, यह देवी सात्विक रूप से भी चलती हैं और तामसिक रूप से भी चलती हैं। और माता चौराहे वाली यानी जो माता मदानन हैं, माता मसानी हैं, माता चौगानन हैं, यह देवी बहुत ही ज्यादा शक्तिशाली होती हैं।

यानी कि इस देवी में इतना सामर्थ्य है कि यह देवी नकारात्मक शक्तियों के साथ-साथ सकारात्मक शक्तियों को भी रोक सकती हैं।

यानी कि भूत, प्रेत, जिन्न, मसान, इस प्रकार की जो नकारात्मक शक्तियां होती हैं, यह चाहे कितनी भी ताकतवर हों, कितनी भी भयानक शक्तियां हों, यह माता मदानन यानी कि जो माता चौराहे वाली होती हैं, इनके समक्ष नहीं टिक पातीं।

यानी कि अगर किसी व्यक्ति ने किसी का बुरा करने के लिए किसी नकारात्मक शक्ति को भेजा है और अगर वो व्यक्ति माता मसानी की यानी कि जो चौराहे वाली माता हैं, माता मदानन, माता चौगानन, इनकी शरण में चला जाए तो वह नकारात्मक शक्ति उस व्यक्ति का कुछ भी बुरा नहीं कर पाती।

और अब मैं आपको यह बता देती हूं कि मैं आपको चौराहे वाली माता को सभी साधना करने से पहले या हवन करने से पहले या भोग देने से पहले क्यों कहती हूं कि इस देवी का भोग देना जरूरी होता है।

क्योंकि जैसे मैंने आपको बताया कि इस देवी का वास चौराहे और मैदान में होता है, तो जब कोई सकारात्मक शक्ति या नकारात्मक शक्ति, यानी कि कई बार ऐसा होता है कि कोई भगत, साधक या तांत्रिक अपनी दुश्मनी को पूरा करने के लिए या किसी भी कारण से नकारात्मक शक्ति को व्यक्ति के ऊपर भेजता है, तो जब वो नकारात्मक शक्ति आप तक आती है तो वह नकारात्मक शक्ति चौराहे, मैदानों के माध्यम से होकर ही आप तक पहुंचती है।

तो अगर ऐसे में आपने चौराहे वाली माता को प्रसन्न किया हुआ है, चौराहे वाली माता आप से प्रसन्न हैं और आप चौराहे वाली माता को भोग देते हैं तो वो नकारात्मक शक्ति कभी भी आप तक नहीं आती। वो माता चौराहे वाली वहीं से ही उस नकारात्मक शक्ति को वापस भेज देती हैं और आपको बचा लेती हैं।

और उसी तरीके से जब आप कोई साधना करते हैं और जब आप साधना करते हैं तो उस साधना से प्रसन्न होकर सकारात्मक शक्तियां आपकी तरफ आकर्षित होती हैं और आपके घर तक आती हैं, आपके पास तक आती हैं।

और जब वह सकारात्मक शक्तियां आपके पास आती हैं तो वह सकारात्मक शक्तियां भी चौराहे और मैदान से होकर ही आपके पास आती हैं। और अगर ऐसे में आपने उस साधना में या उस हवन के दौरान या उस पूजा के दौरान आपने चौराहे वाली माता को भोग नहीं दिया होता तो ऐसे में वो चौराहे वाली माता उस सकारात्मक शक्ति को भी वहीं रोक लेती हैं।

और अगर आपने चौराहे वाली माता को भोग दिया होता है तो चौराहे वाली माता उस सकारात्मक शक्ति को आपके घर तक आने देती हैं और आप पर कृपा करने देती हैं।

तो इसीलिए ही मैं आपको अपनी हर पोस्ट में कहता हूं कि जब भी आप कोई साधना करें या जब भी आप कुछ हवन करते हैं, अनुष्ठान करते हैं या किसी भी देवी-देवता की कोई साधना करते हैं तो उस समय पर आप चौराहे वाली माता को भोग जरूर दें क्योंकि चौराहे वाली माता ही हैं जो आप तक शक्तियों को पहुंचा भी सकती हैं और शक्तियों को रोक भी सकती हैं।

और इसके साथ-साथ इसका फायदा यह भी है कि अगर आप चौराहे वाली माता को भोग देते हैं तो यह माता आपसे प्रसन्न हो जाती हैं।

और जब चौराहे वाली माता आपसे प्रसन्न हो जाती हैं तो आपको किसी भी नकारात्मक शक्ति का कोई भय नहीं रहता क्योंकि माता चौराहे वाली के समक्ष कोई भी शक्ति अपना कार्य कर ही नहीं पाती क्योंकि यह शक्ति एक पल में उस नकारात्मक शक्ति को नष्ट करने में समर्थ है।

यानी अगर किसी व्यक्ति के ऊपर कुछ बुरी शक्ति है या तांत्रिक क्रिया की हुई है या कोई भयंकर शक्ति उस व्यक्ति के ऊपर छोड़ी हुई है, अगर वह व्यक्ति चौराहे वाली माता का कोई उतारा करता है 

या चौराहे वाली माता के माध्यम से अपने संकटों को कटवाता है तो माता चौराहे वाली, माता मदानन, माता मसानी, माता चौगानन पल भर में उस व्यक्ति के ऊपर से नकारात्मक शक्ति को खत्म कर देती हैं। तो इस प्रकार से हैं माता चौराहे वाली।

तो आशा है जिन भाई ने यह प्रश्न किया था कि चौराहे वाली माता, माता शीतला एक ही हैं या कौन हैं चौराहे वाली माता, तो उनको समझ आया होगा। तो आपको जानकारी पसंद आई है तो पोस्ट  को लाइक करें और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर करें।

 

शीतला मसानी साधना रहस्य मसानियों की रानी बडी़ मसानी रहस्य

शीतला मसानी साधना रहस्य मसानियों की रानी बडी़ मसानी रहस्य

शीतला मसानी साधना रहस्य मसानियों की रानी बडी़ मसानी रहस्य

 

शीतला मसानी साधना रहस्य मसानियों की रानी बडी़ मसानी रहस्य ओम नमः शिवाय, जय श्री राम, जय माँ विंध्यवासिनी।आज हम आप लोगों को एक अद्भुत साधना के विषय में बताने वाले हैं। यह साधना है महाशक्ति, बड़ी माता, मसानियों की रानी, भगवती शीतला की।

इस साधना में कोई मिन्नत, मंत्र जाप नहीं करना है और ना ही हवन करना है। इस साधना को करने के पश्चात व्यक्ति के अंदर बहुत सारे परिवर्तन होते हैं, नज़र खुलने लगती है जिसे दृष्टि का खुलना कहते हैं, मन में भाव आने लगते हैं, दूसरे के विषय में जानकारी मिल जाती है।

भगवती शीतला की कृपा प्राप्त होती है, तंत्र बाधा से दूर रहते हो आप, आपके बिगड़े हुए काम बनने लगते हैं, शत्रु का नाश हो जाता है और आपका यश, गौरव बढ़ जाता है और आपके चेहरे पर चमक आ जाती है।

अर्थात भगवती शीतला जो कि मसानियों की रानी हैं, बड़ी माता हैं, इनकी सिद्धि से क्या संभव नहीं है? फिर आप सोच रहे होंगे आचार्य जी इतनी बड़ी साधना बता रहे हैं लेकिन न तो मंत्र जाप के लिए बोल रहे, न तो हवन के लिए बोल रहे हैं, तो देवी शीतला सिद्ध कैसे होंगी?

देवी शीतला को स्त्री-पुरुष दोनों सिद्ध कर सकते हैं लेकिन जिस प्रकार हनुमान जी की मर्यादा है जो महिलाओं के शरीर पर सवारी नहीं लेते हैं, उसी प्रकार भगवती शीतला की मर्यादा है, वो पुरुषों के शरीर पर सवारी नहीं लेतीं। अर्थात सिद्ध हो जाएंगी, आपका काम करेंगी, आपकी दृष्टि खोल देंगी परंतु पुरुष के शरीर पर सवारी नहीं लेंगी।

 हमने कहा कि जाओ माँ के धाम के, उसी धाम में दरबार लगाओ और उनके ही चरण पकड़ के बैठो, सब संभव हो जाता है जब उनकी कृपा मिल जाती है।

जब शीतला दाहिने हों तो किसी तंत्र में किसी की औकात ही नहीं है, सिर्फ माँ विंध्यवासिनी को छोड़कर। अगर शीतला दाहिने हैं तो तंत्र में, पढ़ाई-विद्या में, किसी की औकात नहीं है कि शीतला के भगत को छू दे।

शीतला अगर दृष्टि डाल देती हैं तो कुल का नाश हो जाता है। शीतला वो देवी हैं, अगर अनसुनी पर आ गईं तो गर्भ का बच्चा गिरा देती हैं, जानवर बीमार कर देती हैं और जब धर्म पर आ जाएं तो ये सब कुछ देने में सक्षम हैं। जब अनसुनी हो जाती हैं, मसानी बन जाती हैं, बख्शती नहीं।

जितनी भी महामारी हैं, सब शीतला के अंतर्गत चलती हैं। है जहाँ बहन भवानी, छींकियन माता, रक्ता मणि, पटना धाम, शायर माता, समय माता, तो लोग कहते हैं कि माता हैं, माता कभी गलत नहीं करेंगी। लेकिन माता के लिए तुम पुत्र नहीं हो, जो उनका भगत है वही पुत्र है। उनके लिए सब समान हैं, अगर उनका आदर निकल गया जो रास्ते में आएगा, निपट जाएगा। है तो शीतला, वो महाशक्ति हैं, सब संभव है। जगदंबा शीतला की आराधना से सब संभव है।

कैसे करोगे सिद्धि? आचार्य बोल रहे हैं मंत्र जाप नहीं करना है, हवन नहीं करना है, तो सिद्ध कैसे होंगी? बताएंगे, इसी लेख में बताएंगे, पूरा विधि-विधान बताएंगे। उससे पहले कुछ विशेष सूचना।

जैसा कि आप लोग जानते हैं कि हम मसान सिद्ध करवा कर दे रहे हैं दो घंटे में और बहुत सारे लोग सिद्ध करके गए, नाम नहीं लेंगे क्योंकि वो लोग निष्ठ पद पर हैं, रेपुटेड हैं। लखनऊ से एक लोग आए थे, बहुत बड़े पद पर थे, उनकी नौकरी जाने वाली थी, २ दिसंबर को मीटिंग थी लेकिन उन्होंने एक ही रात में दो मसान सिद्ध किए थे, दो घंटे में, गंगाराम गोरी और मंसाराम होरी। मसान के दम पे उन्होंने अपनी नौकरी भी बचा ली और नए साल में उनके प्रमोशन के भी योग बने हुए हैं।

ऐसे एक ब्रह्म बाबा की साधना हमारी एक शिष्या ने की, वो अपने दोस्तों के साथ दिल्ली गईं, दरबार में, बालाजी का दरबार था, वहां पर सब पूछ रहे थे तो हमारी शिष्या ने कौतूहलवश पूछ लिया तो बताए, दो चीज दिख रही है, एक चीज नहीं समझ में आ रही है, एक चीज और है, उसको पकड़ने की कोशिश की, लेने की कोशिश की, दरबार वाले थक-हार के उल्टा हमारे शिष्य के, जिसके यहां हजार लोग, दो-चार सौ लोग रोज आकर काम करते हैं, जो देख के ही भूत-वर्तमान बताते हैं, जो हमारी शिष्या के सामने छिप गए।

नाम नहीं लेंगे क्योंकि वह भी किसी गुरु पद पर हैं। अब बोले कि क्यों आज तक जीवन में नहीं हुआ कि मैं शक्तियों को खींच लेता था, हनुमान जी महाराज खींच लेते थे, आज ऐसा कैसे हो गया कि हम किसी को पकड़ नहीं पा रहे हैं ? कितने साल से हो साधना में ?

बोले फरवरी से जुड़ा हूं लेकिन गुरु जी से मिला था एक दिन, गुरु जी ने हाथ रखा था एक बार, माँ के दरबार में लेके गए और हमें मंत्र दे दिए कुछ जपो। तो ज्यादा किया ही नहीं हूं, ज्यादा से ज्यादा दो-तीन महीने का अनुभव है। वो गुरु खुद उनके सामने घुटने टेक दिए क्योंकि अगर ब्रह्म और दूत होते तो उनको उठा ले जाते, उल्टा उनके देवता तक गए क्योंकि उसके पीछे हमारी गुरुवासिनी लगी थी।

हम अपने शिष्यों को कहते हैं कि हमारे हो, विश्वास पूरा है और माँ जगदंबा महिषासुर मर्दिनी विंध्यवासिनी के ऊपर विश्वास पूरा है तो डरना मत।

औघड़, फलाना-धिमाका तांत्रिक, भगत जो होगा सब देख लेंगे चाहे वो दरबार लगाने वाले होंगे, धर्म में रहना, गलत मत करना, डरना मत। जो भी होगा देख लेंगे, तुम्हारा कोई कुछ भी नहीं कर पाएगा।

ये मसान नहीं बनेगा, आपका नुकसान नहीं करेगा, आपके लिए काम करेगा और काम करने के बाद वापस घाट पर चला जाएगा। आपके घर पे नहीं आएगा, जब संकट देखेगा तभी आपके घर पर आएगा। मसानधारी होते हैं, गुणी होते हैं, तंत्र क्रियाओं के जानकार होते हैं। ये योग-प्रयोग से आपका काम सफल करवा देते हैं।

, जीवन में इन्होंने सिद्धियां की हैं और हम जब मसान सिद्ध करते हैं तो एक नहीं, एक साथ में दो मसान सिद्ध करवाते हैं, एक साथ में दोनों साथ।

 

तो जिनको भी मसान सिद्धि करना है, मसान साधना उनके लिए जो रियल एस्टेट से ताल्लुक रखते हैं, जो शेयर मार्केट से ताल्लुक रखते हैं, उनके लिए मसान साधना रामबाण है। इसकी साधना करो, उपयोग करो, राम जी का नाम लेते रहो।

बाद में एक अवस्था के बाद जब इच्छा न हो तो इनको गंगा जी ले जाइए, कमर भर पानी में बाख की लकड़ी लीजिए, जो मंत्र गुरु ने आपको दिया है, उस मंत्र को जाप कीजिए, इनको बुलाइए और बाख की लकड़ी को काट के इनसे अलग हो जाइए, झंझट खत्म।

कुछ लोग कहते हैं कि मसान साधना क्यों करते हो? गीता में श्री कृष्ण भगवान ने कहा यदि छल का आशय धर्म है तो छल भी धर्म है। ये सिद्धियां विनाशकारी हैं, गुरु अच्छे नहीं हैं कि वो मसान बनी हैं या उनको बनाया जा रहा है, आपका काम नहीं है। जीवन में दुख, कचरा है तो कचरे को सोने से नहीं उठाया जाता कि कचरे के लिए हम सोने से उठाएंगे।

वो कचरा है, उसे साफ करने के लिए झाड़ू का उपयोग किया जाता है। इनका उपयोग कर लेना चाहिए, गलत नहीं करना चाहिए, गलत करना हमेशा गलत होता है।

तो अब आते हैं माता शीतला के विषय में। एक लोटा पानी लीजिए, उसमें पक्की धार डालिए, दो लौंग डालिए, एक फूल डालिए, हाथ में सात अगरबत्ती लीजिए। नहाने के तुरंत बाद शरीर गीला रहे, नीम के पेड़ पर एक लोटा धार माँ शीतला के नाम से डालिए, सात अगरबत्ती जलाइए और उसी मिट्टी को माथे पर लगाइए।

न तो मंत्र जाप, न तो माला जाप, न करो हवन, इतना करिए लगातार एक नवरात्र से एक नवरात्र तक और दिन में एक बार पचरा जरूर भगवती के लिए गाइए, उन्हें पचरा बहुत पसंद है। परिवर्तन आँखों से देखोगे, कानों से सुनोगे, अपने जीवन में परिवर्तन होता देखोगे, ये हम कह रहे हैं।

आज के लिए इतना ही, शीतला माँ की सेवा कीजिए, भक्ति कीजिए, बड़ी माता की, मसानियों की रानी की, जगदंबा आदिशक्ति शीतला की, जीवन से दुख दूर होने लगेंगे। आज के लिए इतना ही, जय श्री राम।

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माँ शीतला मसानी की साधना कौंन शीतला मसानी और क्या लाभ sheetla masani sadhna ph.85280 57364 यह लेख माँ शीतला मसानी की साधना के विषय में है, जिन्हें तंत्र की एक शक्तिशाली देवी माना जाता है। इसमें बताया गया है कि जो साधक तंत्र के क्षेत्र में उन्नति करना चाहते हैं या अपने जीवन से बाधाओं को दूर करना चाहते हैं, उनके लिए यह साधना किस प्रकार फलदायी हो सकती है। लेख में साधना की विधि, आवश्यक सामग्री और मंत्र का भी उल्लेख किया गया है।


हर हर महादेव। आज आपको साधना देने जा रहा हूँ जो आपको तंत्र सम्राट बना देगी। क्या बना देगी ? तंत्र सम्राट। रियल में जो तांत्रिक हैं, तंत्र भगत हैं, ओझा हैं, औघड़ हैं, जो तंत्र सम्राट बनना चाहते हैं, जो तंत्र की साधना करना चाहते हैं, अपनी गद्दी को चलाना चाहते हैं, जो लोग चाहते हैं कि उनके पास आएँ और उनके हर कार्य बनें, भूत, प्रेत, जिन्न, मसान को हटा सकें तो उनको शीतला मसानी की साधना करनी ही चाहिए।

माता देवियों की देवी महादेवी बोली जाती हैं, महा-क्रूरी महादेवी माता पार्वती की ही अवतार हैं, माता पार्वती का ही एक रूप हैं।

तंत्र की वह योगिनी हैं, तंत्र की वह सम्राज्ञी हैं कि 64 जो 360 मसानियाँ हैं, इसके अधीन चलते हैं। मसान इसके अधीन चलते हैं, भूत, जिन्न, मसान, देव सब इसके अधीन चलें। धरती पर मैक्सिमम जो मौतें होती हैं बीमारी से, वह माँ शीतला के ही ज़रिए होती हैं।

तो जो भी व्यक्ति माँ शीतला की साधना करता है उसके अंदर में एक अद्भुत साधना के ज़रिए शक्ति जागृत होती है। मैं आप लोगों को यही बोलना चाहूँगा कि माता शीतला की साधना हर व्यक्ति को करनी ही करनी चाहिए।

जिसने यह साधना नहीं करी, इसका मतलब है कि तुम समझ लो कि आपके घर पर कोई भी तंत्र कर सकता है। माँ शीतला तंत्र की देवी हैं।

शीतला मसानी, दो सौम्य रूप हैं माता के, एक सौम्य रूप माता शीतला और एक है शीतला मसानी। शीतला मसानी तंत्र की सम्राज्ञी हैं, 360 मसानियाँ उसके अंडर में चलती हैं, मसान उसके अंडर में चलते हैं, 84 मसान उसके अंडर में चलते हैं।

जो काली कुल की मसानियाँ हैं, वो भी उसके अंडर में चलती हैं, जो शीतला कुल की मसानियाँ हैं, वो भी उसके अंडर में चलती हैं।

माता धरती पर, इस धरा पर कुछ भी कर सकती हैं। इस धरा की, धरती की मालकिन हैं वो, इस धरा की मालकिन हैं और भैरव जी उसके साथ में चलते हैं, हनुमान जी उसके साथ में चलते हैं, छप्पन कलवा उसके साथ में चलते हैं।

समझ लो बंगाल का काला जादू जिसको बोला जाता है, बंगाल का काला जादू भी उसके अधीन आता है, उसको भी रोक लेती हैं। पूर्व की विद्या को भी रोक लेती हैं।

भारत में क्या छोड़ो, धरती पर किसी भी तरह की कोई भी काला जादू, पीला जादू, हरा जादू, जो भी तरीके की विद्याएँ हैं, सब माता शीतला के अंडर में ही चलता है, सबको वह रोक सकती हैं।

अब माँ शीतला की आपको साधना कैसे करनी है, मैं आपको बताऊँगा। माँ बहुत ही करुणामयी हैं, अपने बच्चों के लिए बहुत ही दयालु हैं और हर साधक को, हर भगत को यह साधना करनी चाहिए। माता शीतला के आटे के कुछ पुए बनाने चाहिए।

माँ शीतला मसानी  का भोग sheetla masani bhog 

जो साधना सामग्री है, कुछ पुए, आठ पूड़ी, घी का हलवा और खीर, यह माता का भोग है। और दो, तीन, चार जायफल, लौंग, बताशे। सर्वप्रथम जब माता शीतला की आपको साधना करनी है, माता चौगानन मसानी जो शीतला मसानी हैं, उनसे करनी है, तो यह सब तैयारी करके आपको यज्ञ पूजा सजानी है, हवन करना है।

हवन हर शुक्रवार-शुक्रवार करना होता है या फिर सोमवार, ये दोनों में से आपको एक बार, यह रेगुलर जो भगत हैं उनको करनी चाहिए। जो साधना करना चाहते हैं, वो लोग कम से कम स्टार्टिंग में 11 दिन की साधना करें।

sheetla masani sadhna तो आपको साधना करने से पहले क्या करना है?

किसी भी चार रास्ते पर जाकर सात कंकड़ उठाकर लेकर आना है और माता से प्रार्थना करनी है कि, “हे माँ, मैं आपकी साधना करना चाहता हूँ, आप मेरे साथ में वहाँ पर मेरे घर पर जो स्थान पर मैं साधना करूँ, वहाँ चलो।” सवा किलो चावल ले लें या सवा किलो जौ ले लें, कोरे पात्र में रख के उसके ऊपर सातों पत्थर रख देना है और एक सरसों के तेल का मिट्टी का दीया जलाना है।  यह सब सामान पहले तैयार कर लें।

माँ शीतला मसानी की साधना  विधि  sheetla masani  sadhna vidhi 

सामान तैयार कर पवित्रीकरण करें, पवित्रीकरण करने के बाद आप तीन बार आचमनी करें। आचमन करने के बाद सर्वप्रथम गणेश भगवान को याद करें, फिर अपने गुरु देवता को याद करें, काल भैरव को याद करें, इनकी एक-एक माला फिर आप जाप करना है, तीनों की। और एक-एक माला जाप करने के बाद फिर संकल्प लेके, “हे माँ,” विष्णु विष्णु विष्णु बोल के तीन बार संकल्प लें।

हाथ में थोड़ा जल लेकर उसमें थोड़ा अक्षत रख लें, अक्षत रख के एक-दो रुपये रख लें, सुपारी ले लें और आपको संकल्प लेना है।

संकल्प लेकर अपना नाम बोलें, पिताजी का नाम बोलें व दादाजी का नाम बोलते हुए कि, “मेरे कुल का उद्धार करो और मेरे परिवार में किसी भी प्रकार की तंत्र बाधा हो, तंत्र बाधा कट जाए, लक्ष्मी को अबाध करो और मेरे परिवार में किसी भी तरीके का रोग हो, उस रोग को काटें।”

हो सके तो आप इस संकल्प में पूरे परिवार का नाम भी ले सकते हैं, नाम लेते हुए अपनी मनोकामना की पूर्ति बोलते हुए आपको जल माता के चरणों में समर्पण कर देना है।

यह करने के बाद में आपको क्या करना है? मंत्र जप तो किया हुआ है, फिर 11-11 बार गुरु मंत्र जाप करें, 11 बार आपको गणपति मंत्र जाप करें, 11 बार आपको भैरव जी का मंत्र जाप करें। यह करने के बाद जो विशिष्ट मंत्र दे रहा हूँ, उस मंत्र का जाप करें।

माँ शीतला मंत्र sheetla masani  mantra

मंत्र है: “मंत्र “ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं ह्रीं शीतला देव्यै ह्रीं क्रीं ह्रीं नमो नमः।”

इसका 33 माला जाप करें। यह मंत्र आपको डिस्क्रिप्शन में लिखित रूप में दे दूँगा। इस मंत्र का आपको 33 माला जाप करना चाहिए। जैसे ही 11 दिन आपका यह जाप हो जाएगा, जाप होने के बाद आपको कम से कम 11 कन्याओं को भोज कराना चाहिए।

जैसे मैंने बोला हवन करना है आपको, उस दिन जाप हो गया, दूसरे दिन ही आपको आठ पूड़ी बना लेनी है, थोड़ा हलवा बना लेना है, खीर बना लेनी है, पुए बना लेने हैं, आटे के पुए बनते हैं, वो पुए बना लेने हैं। यह और पाँच-दस बताशे, लौंग ले लेने हैं।

हवन कुंड में अग्नि को सजा लेना है, अग्नि को सजाते हुए अपना पवित्रीकरण कर लें। पवित्रीकरण करके सभी को आह्वान करना है अपने देवी-देवताओं को, जिस तरीके से मैं हमेशा बताता हूँ।

देवी-देवता, गुरु देवता को, गणपति देवता को, काल भैरव को ध्यान करते हुए, वास्तु देवताओं को, ग्राम देवता को, क्षेत्रपाल देवताओं को, आपको आह्वान कर, पंच देवताओं को, प्रजापति दक्ष को और माता शीतला को आह्वान करते हुए सबको पहले पाँच-पाँच, एक-एक, दो-दो आहुतियाँ दे दें आप।

आहुति देने के बाद जो मंत्र मैंने बताया उस मंत्र की आप कम से कम 11 माला का हवन करें, ना हो सके पाँच माला का हवन करें और ना हो सके तीन माला का हवन करें। हवन किससे करना है? घी से करना है, उसमें चावल, जो सवा किलो चावल है, वो डालें। ठीक है?

वो हवन करें, पूरे परिवार को बिठा लें, हवन कर लें। और उसके बाद में आठों पूड़ी में थोड़ी-थोड़ी पूड़ी तोड़ के, हलवा लेकर, पूड़ी लेके और पुए लेकर माँ को भोग अर्पण करें। भोग अर्पण करने के बाद में माँ को दक्षिणा अर्पण करें, दक्षिणा अर्पण करने के बाद माँ से क्षमा याचना करें

कि, “माता, कोई भी हमसे त्रुटि हो गई है तो हमको क्षमा करना, हम आपके बच्चे हैं और हमारी मनोकामना की पूर्ति करना, जो हमने संकल्प लिया है उस संकल्प को सिद्ध करना।” ऐसे बोलते हुए फिर माता से क्षमा याचना करते हुए फिर माँ को जल अर्पण करना है, शांति देनी है। जल अर्पण करके प्रार्थना करें।

जो सामग्री बची होगी, जो अंदर जो भस्म बची है, उस भस्म से थोड़ी सी भस्म आप छान के रख लें और बाकी की पूरी भस्म और सवा किलो चावल आपको माता गंगा में, गंगा नदी में अर्पण करना चाहिए, गंगा नदी में विसर्जन कर देना चाहिए।

याद रहे, उसमें फूल वगैरह कुछ भी नहीं होने चाहिए, सिर्फ़ जली हुई सामग्री होनी चाहिए और सवा किलो जौ, बस यही होना चाहिए। आप देखेंगे कि सवा महीने में आपके पूरे परिवार में कोई तंत्र बाधा, कोई परेशानी, वह सब खत्म हो जाएगी और आपके परिवार में खुशहाली आएगी।

और आप अगर निरंतर शनिवार के दिन या शुक्रवार के दिन या रविवार के दिन यह पूजा को करते रहेंगे, आप तंत्र सम्राट ही बन जाएँगे।

देखेंगे धीरे-धीरे एक-दो साल में, तीन साल में आपके माँ का आपको प्रत्यक्षीकरण भी हो सकता है, माँ आपको प्रत्यक्ष रूप से भी दिख सकती हैं। और मेरे जितने भी साधक हैं, जिनको मैंने साधना कराई है, माँ प्रत्यक्ष दिखी ही दिखी हैं।

माँ शीतला इतना विशाल रूप दिखता है उनका, विशाल रूप, सर इतना विशाल, सबको दिखती हैं। जो भी साधकों को मैंने सिद्ध कराई, साधकों को माँ शीतला के दर्शन हुए हुए हैं। तो आपको तंत्र सम्राट बनना है तो शीतला की साधना, शीतला मसानी की साधना करनी ही करनी चाहिए। हर हर महादेव।

यह साधना बिना गुरु के मार्ग दर्शन से न करे 

बगलामुखी हवन के फायदे – शत्रु नाश और सफलता प्राप्ति के उपाय ph.85280 57364

बगलामुखी हवन के फायदे (baglamukhi havan ke labh )- शत्रु नाश और सफलता प्राप्ति के उपाय

बगलामुखी हवन के फायदे (baglamukhi havan ke labh )- शत्रु नाश और सफलता प्राप्ति के उपाय

बगलामुखी हवन के फायदे - शत्रु नाश और सफलता प्राप्ति के उपाय
बगलामुखी हवन के फायदे – शत्रु नाश और सफलता प्राप्ति के उपाय
बगलामुखी हवन के फायदे – शत्रु नाश और सफलता प्राप्ति के उपाय जय माई की! माँ बगलामुखी का हवन करवाने से भक्तों को अनेक प्रकार के लाभ मिलते हैं। यह हवन यज्ञ जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करता है और शत्रुओं पर विजय दिलाता है। आज के युग में माँ पीतांबरा की साधना सभी दुखों का नाश कर सुख-समृद्धि प्रदान करती है।

माँ बगलामुखी का हवन करने से क्या लाभ मिलता है, क्यों बगलामुखी माता का हवन यज्ञ किया जाता है?

बगलामुखी हवन के फायदे - शत्रु नाश और सफलता प्राप्ति के उपाय
बगलामुखी हवन के फायदे – शत्रु नाश और सफलता प्राप्ति के उपाय

 आप सभी भक्तों को पता होगा बगलामुखी मंदिर में व बगलामुखी हवन यज्ञ करने का विशेष महत्व शास्त्र में बताया जाता है और आज के इस कलिकाल में यदि किसी व्यक्ति के जीवन में कोई दिक्कत समस्या यदि आती है, उस व्यक्ति को बोला जाता है, बहुत सारे साधक या फिर ब्राह्मण भी आज के समय में बगलामुखी हवन कराने को लेकर के बात करते हैं या फिर बोल देते हैं कि आप बगलामुखी माता का हवन करा लीजिए, इससे आपको लाभ मिलेगा। 

तो आज मैं आचार्य प्रदीप भारद्वाज माँ बगलामुखी पीतांबरा के इस यूट्यूब चैनल के माध्यम से बगलामुखी हवन के फायदे के विषय में आपको जानकारी दूँगा।

  यदि कोई भक्त माँ बगलामुखी हवन यज्ञ, बगलामुखी अनुष्ठान यदि हमारे संस्थान के द्वारा कराना चाहता है या फिर बगलामुखी मंदिर में हमारे द्वारा यदि बगलामुखी यज्ञ कराना चाहता है, तो हमारे संस्थान का जो व्हाट्सएप नंबर है 8528057364, इस नंबर पर संपर्क करके अपनी अपॉइंटमेंट बुक करके अपना हवन बुक करा सकता है।

तो माँ बगलामुखी का हवन करने से से कई प्रकार के फायदे होते हैं। तो कई प्रकार के फायदे कौन-कौन से होते हैं? अब इस विषय पर बात कर लेते हैं।  

1 बगलामुखी हवन के फायदे  कर्ज की स्थिति निज़ात 

बगलामुखी हवन के फायदे - शत्रु नाश और सफलता प्राप्ति के उपाय
बगलामुखी हवन के फायदे – शत्रु नाश और सफलता प्राप्ति के उपाय

जिन लोगों के जीवन में पैसे की तंगी है या फिर कर्ज की स्थिति जिन लोगों के जीवन में निरंतर बनी हुई है, तो ऐसे लोगों को बगलामुखी माता का हवन कराने से श्री की प्राप्ति होती है। तो बगलामुखी के हवन कराने से दरिद्रता दूर होती है।

2 बगलामुखी हवन के फायदे   धन, इतना पैसा, आर्थिक स्थिति पूर्ण रूप से इतनी मजबूत हो 

और श्री होती हैं नारायण के साथ में। नारायण और लक्ष्मी जी जिस घर में वास करते हैं, उस घर में इतना धन, इतना पैसा, आर्थिक स्थिति पूर्ण रूप से इतनी मजबूत हो जाती है कि जन्म जन्मांतर तक पुत्र और पौत्र चिर काल तक कई जन्मों तक जिसका भोग कर सकें, ऐसी लक्ष्मी उस घर में निवास करती है। 

क्योंकि माता बगलामुखी श्री कुल की देवी हैं, इसलिए दरिद्रता दहन के लिए भी माता श्री बगलामुखी का प्रयोग और हवन किया जाता है, ना कि केवल शत्रु बाधा से मुक्ति पाने के लिए।

3 बगलामुखी हवन के फायदे  –  कारागार से भी मुक्ति मिल 

अब दूसरे नंबर पर बात करूँ, यदि आपका कोई व्यक्ति कोई कारागार में फंसा हुआ है, कोई जेल के अंदर है और उसकी जमानत आदि नहीं हो रही या फिर कोर्ट केस चल रहा है, मुकदमा आदि निरंतर चल रहा है, तो जेल से यदि निकालना चाहते हैं तो बगलामुखी हवन इसमें विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होता है। तो बगलामुखी हवन करने से कारागार से भी मुक्ति मिल जाती है। तीसरे नंबर पर शत्रुओं का नाश करने के लिए बगलामुखी हवन की प्रयोग विधि शास्त्रों में विशेष रूप से बताई जाती है।

4 बगलामुखी हवन के फायदे   शत्रुओं पर विजय प्राप्ति के लिए

बगलामुखी माता 10 महाविद्याओं में अष्टम महाविद्या हैं और शत्रु संहारिणी माता को कहा जाता है। तो शत्रुओं पर विजय प्राप्ति के लिए या शत्रु के बुरे प्रभाव से मुक्ति पाने के लिए भी बगलामुखी हवन किया जाता है। 

5 बगलामुखी हवन के फायदे   वाक् सिद्धि प्राप्त होती है

बगलामुखी हवन करने से साधक को वाक् सिद्धि प्राप्त होती है, वाणी में सत्यता आती है। यदि आप अपना पक्ष या बात किसी अन्य व्यक्ति के समक्ष यदि आप रखते हैं, तो आपकी बातों से व्यक्ति प्रभावित होता है और आपकी वाणी में स्थिरता भी ये हवन यज्ञ के द्वारा आती है।

6  बगलामुखी हवन के फायदे  वाद-विवाद में जीत प्राप्त कर 

अब इस अगले नंबर पर यदि बात करें, तो बगलामुखी माता का हवन करने से वाद-विवाद यदि आपका कहीं चल रहा था, कोर्ट केस या फिर किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा कोई झगड़ा आपका हो गया जिसका समाधान या सोल्यूशन या फिर समझौता यदि नहीं हो पा रहा, तो बगलामुखी हवन आपके लिए श्रेष्ठ कार्य सिद्ध होगा।आप इस हवन के द्वारा अपने वाद-विवाद में जीत प्राप्त कर सकते हैं।

7 बगलामुखी हवन के फायदे संतानहीनता

 अब बगलामुखी हवन करने से जो लोग संतान हैं, संतानहीनता जिन लोगों के जीवन में घर कर गई है, काफी प्रयास और गृह दोष की पूजा आदि कराने के बाद में भी जिन लोगों को संतान की प्राप्ति नहीं हुई, तो ऐसे लोगों को विशेष रूप से माता श्री बगलामुखी पीतांबरा का हवन कराना चाहिए।

 बगलामुखी के हवन कराने से संतान प्राप्ति होती है और अनेकों प्रकार के सुख साधनों के द्वारा घर जो है सुव्यवस्थित हो जाता है।

8 बगलामुखी हवन के फायदे  बगलामुखी हवन कराने से उच्चाटन और वशीकरण 

बगलामुखी हवन कराने से उच्चाटन और वशीकरण भी होता है। यदि आपको कोई शत्रु अकारण परेशान कर रहा है, देखिए इस प्रयोग को अपने निज स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए कदापि ना करें। बगलामुखी हवन आप तभी करें जब अकारण ही कोई व्यक्ति आपको परेशान करता हो, आपसे शत्रुता रखता हो, तो उच्चाटन के लिए और वशीकरण के लिए आप माँ बगलामुखी का हवन करा सकते हैं। 

9 बगलामुखी हवन के फायदे  घर में कोई व्यक्ति असाध्य रोगों से ग्रस्त है

यदि आपके घर में कोई व्यक्ति असाध्य रोगों से ग्रस्त है, अनेकों प्रकार की बीमारी उसके शरीर में है या फिर बीमारी का पता नहीं चल पाता, निरंतर दवाई आदि चलती है, फिर हॉस्पिटल के चक्कर लगा-लगाकर यदि आप थक चुके हैं, तो बगलामुखी हवन आपके लिए ब्रह्मास्त्र का काम करेगा। 

10 बगलामुखी हवन के फायदे  रोगों से मुक्ति दिला सकते

आप माता श्री बगलामुखी पीतांबरा का हवन कराकर अपने घर को रोगों से मुक्ति दिला सकते हैं या फिर रोगी को स्वस्थ करने के लिए भी हवन का प्रयोग किया जाता है। माँ बगलामुखी का हवन करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और माता श्री बगलामुखी पीतांबरा का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

जानकारी अच्छी लगी हो तो यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें और जो भी भक्तजन माँ बगलामुखी का हवन कराना चाहते हैं, वो हमारे संस्थान के द्वारा दिए हुए नंबर 85280 57364, इस नंबर पर संपर्क करके माता श्री बगलामुखी पीतांबरा का हवन बुक कर सकते हैं। जानकारी अच्छी लगी हो तो.

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बगलामुखी साधना के नियम baglamukhi sadhna ke niyam सभी भक्तों को जय माई की। मां बगलामुखी की साधना के लिए नियम क्या होंगे? मैं , माता श्री बगलामुखी पीतांबरा के इस  website  के माध्यम से आप सभी भक्तों का हार्दिक स्वागत करता हूं, हार्दिक अभिनंदन करता हूं। मैं आशा करता हूं कि आप सभी स्वस्थ होंगे, मस्त होंगे। माता श्री बगलामुखी पीतांबरा की कृपा आप सभी भक्तों के ऊपर बनी रहे, ऐसी मैं भगवती बगलामुखी से कामना करता हूं

मैं आज इस एपिसोड के माध्यम से मां बगलामुखी की साधना के लिए क्या नियम आप अपने जीवन में अपनाएं, क्या सावधानी आपको अपने जीवन में रखनी होगी और कैसे आप गृहस्थ में रहकर के माता श्री बगलामुखी की साधना के किन नियमों का पालन कर सकते हैं। 

तो साधना के दिन आपको प्रातः काल सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके पीले वस्त्र पहनने चाहिए। उसके बाद पूजा के दौरान आपको पूर्व दिशा में मुंह आपको रखना होगा। 

पूर्व दिशा में आप मुंह रखें। माता श्री बगलामुखी की पूजा में पीले रंग का प्रयोग आप करें। जितनी भी सामग्री आप माता बगलामुखी को अर्पित करें, वह पीले रंग की होनी चाहिए, चाहे वस्त्र हैं, चाहे चावल हैं, फूल हैं, ठीक है, मिठाई है, जो-जो भी है, वह सब अधिकतर आप पीले रंग का ही भगवती को आप अर्पित करें। 

चंदन आदि जो है, पीले रंग का होना चाहिए और जिस भोजन को आप ग्रहण करते हैं, वह भोजन भी पीले रंग का ही होना चाहिए क्योंकि भगवती बगलामुखी को पीतांबरा नाम से जाना जाता है। माता बगलामुखी का जो वर्ण है, वह पीत वर्ण है और बगलामुखी माता को पीली वस्तुएं अत्यधिक प्रिय हैं।

माता बगलामुखी की पूजा में जिस आसन का प्रयोग करें, वह आसन भी आपका पीले रंग का होना चाहिए। वस्त्र जो आप पूजा में पहनें, वह वस्त्र भी आप पीले रंग के ही पहनें। 

फल पीले रंग के आप रखें और पूजन के बाद दान भी आपको अवश्य करना चाहिए। जो छोटी-छोटी बालिकाएं होती हैं, नौ वर्ष से छोटी जो बच्चियां होती हैं, कंजक होती हैं, उनको आप कुछ यथाशक्ति दक्षिणा भी अवश्य दें। 

व्रत रखने वाले लोग रात में फलाहार कर सकते हैं, परंतु उसमें भी आपको पीले रंग का ही फलाहार लेना होगा। साधना के दौरान आपको ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करना होगा, आचार-विचार-व्यवहार से पवित्र रहना होगा। मंत्र जाप है, वह हल्दी की माला का ही आप इसमें प्रयोग करें।

 मंत्र जाप का जो समय है, वह रात्रि 10 बजे से लेकर प्रातः काल 4 बजे तक का जो समय है, यह सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। दीपक की बाती पीले रंग में रंग कर आप इसको सुखा लें, उसके बाद में इस बाती का आप प्रयोग करें।

साधना में सर्वश्रेष्ठ जो मंत्र है माता बगलामुखी का, वह मूल मंत्र है, वह 36 अक्षर का मंत्र है। यदि दीक्षा आपके पास है तो तभी आप इस मंत्र का जप करें, अन्यथा शतनाम का पाठ करें या माता बगलामुखी की चालीसा का आप पाठ करें। 

साधना अकेले में या तो फिर एकांत में हो या फिर मंदिर में हो, हिमालय या फिर किसी सिद्ध पुरुष के आश्रम में सानिध्य में बैठकर आप साधना करें। 

साधना में बगलामुखी माता का जो पूजन में यंत्र आपको चाहिए, वह या तो फिर ताम्रपत्र का होना चाहिए और वह भी अभिमंत्रित होना अत्यधिक जरूरी है या फिर आप यंत्र निर्माण करना यदि जानते हैं तो चने की दाल से आप यंत्र माता श्री बगलामुखी का बना सकते हैं।

 मां बगलामुखी के मंत्रों का जाप करने से दुखों का नाश हो जाता है और भगवती की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। भक्तों, मेरे द्वारा दी गई जानकारी यदि आपको अच्छी लगी हो तो चैनल और इंस्टा पेज को फॉलो अवश्य कर लें। जय मां बगलामुखी, जय श्री महाकाल।

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बगलामुखी के टोटके baglamukhi ke totke ph.85280 57364 मैं आप सभी दर्शकों का वेलकम करता हूं आप ही के अपने वेबसाइट पर ।  वेबसाइट  जो है, वो बेहद खास होने जा रहा है। जी हां, देवी बगलामुखी ऐसी हैं जो हमारे शत्रु का बुद्धि विनाशय, शत्रु की बुद्धि बिगाड़ देती हैं। 

यह भी है और ऐसे में जान लेना बहुत जरूरी है, कुछ ऐसे टोटके करके हम लोग व्याधि, शत्रु का अंत कर सकते हैं। 

1 बगलामुखी के टोटके (baglamukhi ke totke) शत्रु पीड़ा का अंत तुरंत  करना चाहते हैं

तुरंत व्याधि, शत्रु पीड़ा का अंत तुरंत  करना चाहते हैं तो क्या करें? आप हल्दी की माला से महाविद्या बगलामुखी के खास मंत्र ‘ॐ ह्लीं बगलायै नमः’ का जाप करें।

 2 बगलामुखी के टोटके(baglamukhi ke totke) मुकदमों में जीत पाना चाहते हैं

अगर आप मुकदमे में फंसे हुए हैं, मुकदमों में जीत पाना चाहते हैं तो उसके लिए मौली में आठ नींबू पिरोकर महाविद्या बगलामुखी पर माला चढ़ाइए। 

3 बगलामुखी के टोटके  (baglamukhi ke totke) शत्रुओं की बाधा से पीड़ित हैं

अगर आप शत्रुओं की बाधा से पीड़ित हैं और छुटकारा पाना चाहते हैं तो उसके लिए महाविद्या बगलामुखी के निमित्त पीपल की समिधा से हवन करें।

 4 बगलामुखी के टोटके (baglamukhi ke totke) कार्यक्षेत्र की बाधाओं से घिरे हैं

अगर आप कार्यक्षेत्र की बाधाओं से घिरे हैं और दूर करना चाहते हैं उन्हें तो उसके लिए महाविद्या बगलामुखी पर पीले फूल चढ़ाइए। अगर आप संपत्ति के विवाद में घिरे हैं और जीत पाना चाहते हैं तो उसके लिए महाविद्या बगलामुखी के निमित्त पीले कनेर के फूलों से हवन करें।

5 बगलामुखी के टोटके (baglamukhi ke totke) दांपत्य कलह से मुक्ति पाना चाहते हैं

देखिए, अगर आप दांपत्य कलह से मुक्ति पाना चाहते हैं तो क्या करें? सरसों के तेल में हल्दी मिलाकर महाविद्या बगलामुखी के निमित्त दीपक करें।

6 बगलामुखी के टोटके (baglamukhi ke totke) भाग्य में वृद्धि पाना चाहते हैं

अगर आप भाग्य में वृद्धि पाना चाहते हैं, तो उसके लिए पीली कनेर, क्षमा कीजिएगा, अगर आप रोगों से मुक्ति चाहते हैं तो उसके लिए पीली सरसों सिर से वारकर महाविद्या बगलामुखी के सामने कपूर से जला दें। 

 7 बगलामुखी के टोटके  (baglamukhi ke totke) वाद-विवाद को शांत करना चाहते हैं 

आप अगर वाद-विवाद को शांत करना चाहते हैं तो उसके लिए महाविद्या बगलामुखी पर सरसों के तेल से अभिषेक करें।

 8 बगलामुखी के टोटके (baglamukhi ke totke) आप सेहत में सुधार चाहते हैं

अगर आप सेहत में सुधार चाहते हैं, तबीयत बिगड़ी हुई है आपकी, तो उसके लिए देवी बगलामुखी पर दूध में हल्दी मिलाकर अभिषेक करें। 

9 बगलामुखी के टोटके – (baglamukhi ke totke) सरकारी बाधाओं से      मुक्ति पाना चाहते हैं

अगर आप सरकारी बाधाओं से मुक्ति पाना चाहते हैं तो उसके लिए देवी बगलामुखी के निमित्त हल्दी के चूर्ण से हवन करें। 

10 बगलामुखी के टोटके (baglamukhi ke totke) आपदा से मुक्ति पाना चाहते हैं

अगर आप आपदा से मुक्ति पाना चाहते हैं तो उसके लिए महाविद्या बगलामुखी पर पीले खसखस के फूल यानी कि येलो पॉपी फ्लावर, अगर आप कोर्ट केस में जीत हासिल करना चाहते हैं तो उसके लिए महाविद्या बगलामुखी के निमित्त सेंधा नमक से हवन करें।

11 बगलामुखी के टोटके(baglamukhi ke totke) शत्रुओं पर जीत हासिल करना चाहते हैं

अगर आप शत्रुओं पर जीत हासिल करना चाहते हैं तो उसके लिए देवी बगलामुखी पर पीले चंदन से तिलक करें। 

12 बगलामुखी के टोटके (baglamukhi ke totke) दांपत्य क्लेश से पीड़ित हैं और मुक्ति पाना चाहते हैं

अगर आप दांपत्य क्लेश से पीड़ित हैं और मुक्ति पाना चाहते हैं तो उसके लिए महाविद्या बगलामुखी पर दूध-शहद के मिश्रण से अभिषेक करें। 

13 बगलामुखी के टोटके (baglamukhi ke totke) दुर्घटनाओं से दो-चार होते रहते हैं

अगर आप दुर्घटनाओं से दो-चार होते रहते हैं और छुटकारा पाना चाहते हैं तो उसके लिए आठ नींबू सिर से वारकर महाविद्या बगलामुखी पर चढ़ाकर छोड़ दें।

14 बगलामुखी के टोटके (baglamukhi ke totke) –  सुख और समृद्धि चाहते हैं 

अगर आप जीवन में सुख और समृद्धि चाहते हैं तो उसके लिए देवी बगलामुखी पर गेंदे के फूल चढ़ाइए। अगर आप आर्थिक नुकसान से बचना चाहते हैं तो उसके लिए देवी बगलामुखी पर 12 केले चढ़ाकर किसी ब्राह्मण को खिलाएं। 

 तो ऐसे ही कल आपसे फिर मुलाकात होगी। आज के लिए बस इतना ही। इजाजत दीजिए, नमस्कार।