Author: Rodhar nath

मैं रुद्र नाथ हूँ — एक साधक, एक नाथ योगी। मैंने अपने जीवन को तंत्र साधना और योग को समर्पित किया है। मेरा ज्ञान न तो किताबी है, न ही केवल शाब्दिक यह वह ज्ञान है जिसे मैंने संतों, तांत्रिकों और अनुभवी साधकों के सान्निध्य में रहकर स्वयं सीखा है और अनुभव किया है।मैंने तंत्र विद्या पर गहन शोध किया है, पर यह शोध किसी पुस्तकालय में बैठकर नहीं, बल्कि साधना की अग्नि में तपकर, जीवन के प्रत्येक क्षण में उसे जीकर प्राप्त किया है। जो भी सीखा, वह आत्मा की गहराइयों में उतरकर, आंतरिक अनुभूतियों से प्राप्त किया।मेरा उद्देश्य केवल आत्मकल्याण नहीं, अपितु उस दिव्य ज्ञान को जन-जन तक पहुँचाना है, जिससे मनुष्य अपने जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझ सके और आत्मशक्ति को जागृत कर सके।यह मंच उसी यात्रा का एक पड़ाव है — जहाँ आप और हम साथ चलें, अनुभव करें, और उस अनंत चेतना से जुड़ें, जो हमारे भीतर है ।Rodhar nath https://gurumantrasadhna.com/rudra-nath/

tantra mantra black magic kala jadu तंत्र मंत्र ब्लैक मैजिक काला जादू से अमीर बनने के तरीके

Tantra Mantra Black Magic Kala jadu तंत्र मंत्र ब्लैक मैजिक काला जादू से अमीर बनने के तरीके
dedh footiya jinn डेढ़ फूटिया जिन्न जो बना सकता है किसी भी व्यक्ति को एक दिन में अमीर dedh footiya
dedh footiya jinn डेढ़ फूटिया जिन्न जो बना सकता है किसी भी व्यक्ति को एक दिन में अमीर dedh footiya

देखिए, जो आज का विषय रहेगा, बेसिकली तंत्र विद्या के बारे में ही रहेगा। आज का जो हमारा टॉपिक यह रहेगा कि क्या तंत्र से अमीर बना जा सकता है? तो इस टॉपिक के ऊपर मैं बात करूँगा। तो यह सवाल बहुत सारे लोगों के मन में आता है कि क्या हम तंत्र से अमीर बन सकते हैं? तंत्र कोई भी हो सकता है, ब्लैक मैजिक हो, उसकी बात ही नहीं कर रहा हूँ मैं।  

किसी भी तरीके का जो तंत्र है, उससे हम अमीर बन सकते हैं? 

तो इसका जवाब है हाँ। 

बहुत सारे लोग हमने बनते हुए देखे हैं और बहुत सारे लोगों ने हमारे यहाँ से साधना करके भी सफलता को प्राप्त किया है। देखिए, तंत्र से अमीर बनने के बहुत सारे तरीके होते हैं। कुछ तरीके अच्छे हैं, कुछ तरीके बुरे हैं। तो उन्हीं तरीकों के ऊपर बात करूँगा।

देखिए, आज की डेट में ब्लैक मैजिक के थ्रू भी अमीर बना जा सकता है। लोग बन भी रहे हैं। उसमें तरीका-कार क्या होता है? किसी व्यक्ति को, जैसे कोई पहचान में आपके व्यक्ति है, उसका पूरा बायोडाटा आपको चाहिए होगा। उसका पूरा बायोडाटा आपके पास होना चाहिए और फिर आगे करना क्या है? आपको उसको थोड़े से पैसे देने हैं।

 तो आप उनको पैसे किसी न किसी बहाने से दोगे। आप मतलब यह बोल सकते हो कि अब मेरे यहाँ पर पैसे रखने की जगह नहीं है, कुछ भी आप बोल सकते हो अनाप-शनाप भी। पैसे रख लो आप, और जैसे ही वह बंदा पैसे रख लेगा, तो वहीं से ही उसकी उल्टी गिनती शुरू। मतलब जो पैसा उसको आना चाहिए था, वह आपको आना शुरू हो जाएगा। 

तो आपके घर में क्लेश पड़ते थे, उसके घर में पड़ने लगेंगे। इस तरीके से लोग काम करते हैं ब्लैक मैजिक के थ्रू। और एक चीज मैं आपको और बताता हूँ, जब वही व्यक्ति उनको वही पैसा वापस लौटा देता है, तो फिर से जो उनके वहाँ पर दिक्कतें आनी शुरू हो जाती हैं और आप धीरे-धीरे फिर से अमीर बनना शुरू हो जाते हैं। तो यह तरीके होते हैं। यह तरीका बहुत ज्यादा फेमस है आज की डेट में, बहुत ज्यादा चल रहा है।

 

एक व्यक्ति का कनाडा से मेरे को फोन आया। वह बंदा बोलता था, मेरे पास 10 बसें थीं, अच्छी-खासी प्रॉपर्टी थी, सारा कुछ हो गया जीरो। सिर्फ एक मेरे रिश्तेदार ने मेरे को एक नोट दिया कि आप यह नोट रख लो। और फिर मैंने उस नोट को रख लिया। उसने यह बोल के दिया था, यह नोट बहुत ही लकी नोट है, जिसके पास भी जाता है, वह अमीर बन जाता है बंदा। तो उस रिश्तेदार ने दे दिया, वह धीरे-धीरे अमीर बन गया, यह गरीब हो गए। तो ऐसा संभव है। यह गलत तरीके से संभव है।

उसके बाद सही तरीके से भी मैं आपको बताऊँगा कैसे संभव होता है। फिर एक यही चांस मेरी सिस्टर के साथ भी हुआ था। उनके बिजनेस, जीजा जी का, बहुत अच्छा चल रहा था और पैसा आ रहा था हर जगह से, घर में कोई कलह-क्लेश नहीं, कुछ नहीं। 

अचानक से हमारे मामा जी की लड़की का जो पति था, वह नशेड़ी था और गलत काम करता था और उनके पास पैसों की भी बहुत कमी रहती थी। तो उसने जबरदस्ती ही मेरी सिस्टर को ₹1000 पकड़ा दिए। 

उसे लगा, चलो पैसा आता हुआ किसको बुरा लगता है। उसने पैसा रख लिया और जैसे ही पैसा रखा, उसके बाद उनकी उल्टी गिनती शुरू। फिर उसने मेरे से बात करी कि जब से पैसा लिया है उनका, तब से ये दिक्कतें आनी शुरू हो गई हैं। फिर मैंने उनको बताया कि वह पैसा वापस लौटा दो अगर बचना है तो, नहीं तो सारा कुछ जीरो हो जाएगा। 

पैसा वापस लौटाया, सब सही हो गया। एक बार ऐसे हो गया। दूसरी बार क्या, हमारे जीजा जी को जबरदस्ती ₹2000 पकड़ाए गए। फिर से, बड़ी मुश्किल से वापस लौटाया। वह तो जीजा जी तो इस बात को मानते नहीं थे, ना तो उनको पता था ये चीजें। 

मेरी सिस्टर ने बहुत ज़बरदस्ती करके वापस कर दिया। फिर बोलने लगी, अगर आप ₹2000 नहीं रखोगे तो मेरे को कोई सामान दे दो। यहाँ सामान का मकसद यह था, उनको पता था कि यह पैसा समय पर नहीं लौटाती है, तो सामान देने में इनको कोई समझदारी नहीं थी। 

इसीलिए इनको पैसा मजबूरीवश रखना पड़ा। वह बाद में ऐसा बोलने लगे, ₹2000 फ्री में ही पकड़ा के चली गई। तो उसके बाद फिर से दिक्कत आनी शुरू हो गई।

तो यह चीजें बहुत ही ज्यादा चल रही हैं। किसी से भी आज के समय में कोई आपको किसी बहाने पैसा दे रहा है, तो आपको नहीं लेना है। जिस तरीके से वह पैसा दे रहा है, उसको आप वापस कर दो। अब पहली बात तो पैसा लाओ ही ना। तो ब्लैक मैजिक के थ्रू इस तरीके से भी अमीर बनाया जा सकता है। मतलब यह तरीका गलत है, पर ऐसा पैसा फलित भी कभी नहीं होता।

दूसरा तरीका क्या है, जो बहुत सारी ऐसी चीजें हैं। अब मैं पहले गलत तरीके ही बताऊँगा, फिर बाद में सही तरीके बताऊँगा, सही तरीके से कैसे बन सकते हैं। जैसे कुछ शक्तियाँ ऐसी हैं, फॉर एग्जांपल के लिए मैं आपको बताता हूँ, डेढ़ फुटिया हो गया। डेढ़ फुटिया करोड़ों रुपए में बिकता है। अब एक की लगाइए आप, वही जो डेढ़ फुटिया है, उससे लोग क्या करते हैं बाद में? बड़े-बड़े अमीर लोगों के घर में चोरियाँ करवाते हैं।

 बड़े-बड़े चीजें इधर से उधर करके। इस तरीके से भी लोग कर रहे हैं। तो यह भी गलत तरीका है। ऐसे तरीकों को हम प्रमोट नहीं करते। जो डेढ़ फुटिया खरीदते हैं, तो उस काम के लिए ही खरीदते हैं। तो मैं सबको यही बोलूँगा, गलत चीज के चक्कर में मत पड़ो आप।

 तो मैं इसलिए यह बता रहा हूँ कि आप भी थोड़ा सावधान हो जाएँ। क्योंकि अगर आप सावधान होंगे तो बचे रहेंगे, नहीं तो फिर कल को कोई आपके साथ भी वैसा ही कर सकता है। किसी भी अनजान व्यक्ति से पैसा ना लें, घर की सुरक्षा को बढ़ा दें। आप इतना ज्यादा जाप वगैरह करिए कि कोई भी नेगेटिव चीज आपके घर में प्रवेश ही ना कर पाए। 

अगर आप जाप करने में समर्थ नहीं हैं, तो आप एक चीज और कर सकते हैं, आप कवच मँगवा सकते हैं अपने घर के लिए। तो आप वह कवच की स्थापना करिए, जिससे क्या होगा कि कोई भी नेगेटिव चीज आपके घर के ऊपर अफेक्ट नहीं करेगी। खुद भी कवच अगर हो सके धारण कीजिए, बच्चों को भी करवाइए और तभी सेफ्टी हो सकती है।

देखिए, आप एक चीज देखते होंगे, बड़े-बड़े पॉलिटिशियन, बड़े-बड़े नेता, क्यों इन चीजों से, तंत्र से, बचे रहते हैं? क्योंकि वह महँगे-महँगे कवच पहनते हैं, इन्वेस्टमेंट करते हैं, उनसे उन चीजों की रक्षा होती है। नहीं तो कोई भी तांत्रिक उनको कुछ भी करवा सकते हैं। ऐसा संभव नहीं होता है। दूसरी चीज क्या है, जब भी कोई चीजें करवाई जाती हैं, तो आपके दोस्त और रिश्तेदार ही करवाते हैं। 

तो यह लोग होते हैं बहुत खतरनाक क्योंकि केवल आपकी एक-एक चीज के बारे में इन लोगों को ही पता है। आपकी किस तरीके से ऊर्जा है, क्या सिस्टम है, उनको यह सब पता है। इस तरीके से ये करते रहते हैं। तो ऐसे जो गुप्त शत्रु हैं, इनसे बच के रहना चाहिए। रिश्तेदारों से भी बच के रहना चाहिए। किसी के मन में क्या चल रही है बात, कुछ पता नहीं होता है।

उसके बाद मैं आगे बात करता हूँ कुछ और तरीकों के बारे में, जिससे तंत्र में लोग करते हैं काम। कुछ तांत्रिक गलत होते हैं। जैसे कोई व्यक्ति उनके पास आया कोई एक चीज लेके कि हमें यह परेशानी है। वह परेशानी ठीक कर देंगे कुछ समय तक, दूसरी परेशानी उसके अंदर पैदा कर देंगे। फिर वही व्यक्ति उनके पास फिर पैसा देगा उनको।

 बार-बार ऐसा करते रहते हैं, जिससे क्या है कि आदमी परमानेंट फँस जाता है, उनको पैसा देता रहता है। जब वह आदमी जीरो हो जाता है, तब उसका पीछा छोड़ते हैं वह। तो ऐसे तांत्रिकों से भी सावधान रहना चाहिए। हो सकता है जिससे आप समाधान करा रहे हों, वह एक चीज आपकी ठीक कर दे, दो-चार चीजें बिगाड़ दे। ऐसा हो रहा है। 

बहुत सारे लोग हमारे पास आते हैं कि फलानी जगह से हमने एक चीज सही करवाई थी, बाद में चार चीजें बिगड़ गईं। वह बिगड़ी नहीं हैं, इन्होंने बिगाड़ी हैं, जानबूझ के आपसे पैसा ठगने के लिए, आप उनके पास बार-बार आ सको। कौन नहीं चाहता है कि उनका क्लाइंट उनके पास बार-बार उसको पैसा दे?

तो इस तरीके से भी जो होता है, लोग तंत्र में कर रहे थे। कुछ मूठ होती हैं। मूठ भी एक बुरी चीज होती है, उसको आदिवासियों से लिया जाता है। वह जो मूठ होती है, वह भी जैसे मान लो, किसी को आपने नोट दिया तो कुछ खरीदने के लिए, तो वही नोट वह वापस आपके घर के ऊपर आ जाएगा। 

इस तरीके से मूठ का भी लोग प्रयोग करते हैं। एक शक्ति दिवालन होती है। उसका प्रयोग भी चोरी करवाने के लिए ही किया जाता है। वह क्या करती है कि जो टारगेट होता है, उसके घर में जाके वह उसका सोना, गहना, सब चुरा लेती है, चुरा के आपको देती रहती थी। 

उसको दिवालन बोला गया। एक जगह ऐसे ही हुआ था, एक व्यक्ति ने दिवालन निकाल रखी थी। उस इलाके के जितने भी लोग थे, उनके घर में चोरियाँ हुईं। पर जब चोरी हुई, तो किसी के घर का ताला-वाला कुछ नहीं टूटा था, ना कोई लोक खोला किसी ने, ना कुछ। ऐसे ही घर से ही सोना गायब हो गया। 

तो इस तरीके से दिवालन का उन्होंने प्रयोग करा। पर देखिए, यह चीज गलत है, ऐसा पैसा फलित भी नहीं होता है। तो कुछ दिन बाद ही उस औरत के मन में लालच आया और उस औरत ने क्या करा, बिना सुरक्षा कवच पहने ही दिवालन को बुला लिया। 

उस दिवालन ने उसका गला दबा के उसको और उसके पति को खत्म कर दिया। जब उनकी मौत हुई तो उनके घर में देखा गया हिसाब-किताब, तो लाखों-करोड़ों का सोना निकला। क्योंकि वही लोग चोरियाँ करवाते थे उसके।

ऐसे भी लोग हैं तंत्र में जो कुछ भी कर सकते हैं। चोरियाँ उनके घर में ही होती हैं, जिनका जो सिस्टम होता है घर का, सुरक्षित नहीं होता है। उन्हीं के घर में यह मामला होता है। तो फिर से मैं अगेन एक चीज बोलता हूँ कि ऐसे चक्करों में ना पड़ें आप, गलत तरीके से कुछ भी ना करें। अगर आप एक-दो परसेंट भी कर लेंगे किसी के साथ धोखाधड़ी, खून-पसीने की कमाई लूटोगे, तो आप का हिसाब-किताब आप सोच लीजिए, कुदरत क्या करती है फिर। एक मिनट में छीन लेती है। तो जो भी पैसा कमाइए, सही तरीके से कमाइए। सही तरीके से भी कमाया जा सकता है।

तो यह कुछ मैंने आपको चीजें बताई हैं जो काम करती हैं। अब आगे एक बात करते हैं, कर्ण पिशाचिनी। देखिए, जो कर्ण पिशाचिनी है, अगर वह व्यक्ति कोई सिद्ध कर लेता है, तो दिनों में ही करोड़पति बना देती है। दिनों में! इतना पैसा, दौलत रख देती है घर में कि कोई भी कमी नहीं रहती है, आदमी करोड़ों, अरबोंपति बन जाता है। 

तो इस तरीके से भी हो सकता है। कोई व्यक्ति अमीर बन जाए। किसी भी गलत तरीके को मैं प्रमोट नहीं करता हूँ। मैं पहले ही बता दूँ कि हम सात्विक चीजें करते हैं। मैं सिर्फ आपको बता रहा हूँ कि लोग किस तरीके से, दुनिया में काम चल रहा है अभी। आप भी अलर्ट रहें। मेरा मकसद आपको अलर्ट करना है, ऐसा नहीं कि आप इन कामों में लग जाओ। 

कर्ण पिशाचिनी भी घर वालों को पैसों से, दौलत से, किसी चीज की कोई कमी नहीं रहने देती है। अगेन, यह भी एक पिशाचिनी वर्ग है, तो इसके लिए भी गुरु चाहिए प्रॉपर, सारा कुछ चाहिए। तो इस तरीके से भी हो सकता है। कुछ लोग गोदाम शिफ्टिंग का भी आज की डेट में चलन हो रहा है। उस तरीके से भी लोग कर रहे हैं। 

पर बहुत सारी चीजें मैं आपको वीडियो के अंदर नहीं बता सकता। कुछ चीजें ऐसी भी हैं जो मतलब बताना सही नहीं है। क्योंकि हर चीज की प्राइवेसी है। बता दूँगा तो फिर प्रॉब्लम भी हो सकती है। पर्सनली कोई बंदा बोलेगा तो बहुत सारे तरीके होते हैं। चलो, यह तो हो गया, ये कुछ मैंने गलत तरीके बताए हैं। पर ऐसे तरीके नहीं करने चाहिए, जिनसे लोग अमीर बन सकते हैं तंत्र के माध्यम से।

एक-आधी कोई चीज बच गई हो तो आप कमेंट बॉक्स में नीचे बता सकते हैं। और अब मैं सही तरीकों के बारे में बात करता हूँ। सही तरीके क्या हो सकते हैं? जैसे… मतलब सही तरीके यह हैं… एक तरीका और बच गया, जो कि वह चीज मैं बताना ही भूल गया। एक तरीका यह भी है, लोग ना सट्टे की साधना भी करते हैं। 

उसके माध्यम से भी उनको नंबर मिलते हैं और वह जो नंबर होते हैं, उन नंबर लगा के वह पैसा कमाते हैं। ऐसे लोग भी हैं जो मतलब लॉटरी के, जिनको सट्टे के नंबर आते हैं सपने के अंदर कि आज यह गली खुलेगा, दिशावर खुलेगा। इस तरीके से भी हैं और मेरे पहचान में भी कुछ लोग हैं जो इस तरीके से सट्टा खेलते हैं और उनकी अच्छी-खासी इनकम है। 

मतलब महीने का अच्छा-खासा वह कमा लेते हैं सट्टे की साधना से। अगेन, यह भी एक गलत तरीका है सट्टा भी। और सही भी है, कुछ गलत भी है। अगर कोई भी व्यक्ति अगर सट्टा लगाता है, जो कर्जे के अंदर फँसा पड़ा है, तो वह साधना करके नंबर हासिल करके, तो कर सकता है। आगे लोक कल्याण के लिए भी काम करने के लिए भी सट्टा साधना की जा सकती है। 

वही पैसा सही जगह लगाया जाए तो तो ठीक है, वरना नहीं तो गलत है। वैसे तो मैं कोई सट्टा, लॉटरी को प्रमोट नहीं करता हूँ। सीधी बात मैं यहाँ बोलता हूँ। मैं कुछ नहीं कहता हूँ कि आप जुआ खेलो, सट्टा खेलो। एक तरीका है, मैं इसलिए बोल रहा हूँ क्योंकि यह भी एक पार्ट है तंत्र का, तो मेरे को बताना चाहिए। देखिए, इस तरीके से भी लोग जो हैं, मतलब सट्टे से भी करते हैं काम। 

तो बताते हैं, नंबर वगैरह आते हैं उनको, तो नंबर लगाते हैं। कुछ लोगों को भी नंबर देते हैं, जिससे मतलब उनको पैसा आ जाता है। तो सट्टा साधना भी की जा सकती है। उसकी अलग कंडीशन है, अलग तरीके से। तो वह अलग वीडियो के अंदर हम डिस्कस करेंगे, नहीं तो यह वीडियो लंबा हो जाएगा।

तो ये तो कुछ चीजें हो गईं गलत तरीके से पैसे कमाने की। अब मैंने बहुत सारी चीजें बता दीं। एक-आधी चीज रह गई हो तो फिर वह भी मैं बताऊँगा इस वीडियो के अंदर, अगर याद आ गई तो बता दूँगा। वैसे देखिए, तंत्र में एक और गलत तरीका है जिससे लोग पैसा कमाते हैं। 

जैसे उनके पास कोई बंदा आ गया, फलाने बंदे के ऊपर आप मारण क्रिया कर दीजिए, मैं आपको 1 लाख देता हूँ, 2 लाख देता हूँ। इस तरीके से भी लोग जो हैं, कर रहे हैं पैसे के लालच में। किसी के ऊपर हाँडी जला दी, किसी के ऊपर मारण क्रिया कर दी, कुछ ना कुछ करते रहते हैं। तो ये गलत तरीका है।

 कुछ फ्रॉड लोग हैं, तंत्र के नाम के ऊपर पैसा ठग रहे हैं, वह करते-धरते कुछ हैं नहीं। फोन ही स्विच ऑफ कर देते हैं। इस तरीके से भी लोग कर रहे हैं। तो वशीकरण के नाम के ऊपर भी लोग पैसा कमा रहे हैं। बोल देंगे फलानी लड़की को कर देंगे सेट। कुछ लोग सही हैं, जो कर देते हैं। कुछ लोग पैसा लेके भी सामने वाले के साथ फ्रॉड कर देते हैं। तो यह होता है सिस्टम। तो ये भी गलत तरीके से लोग कमा रहे हैं। यह चीज भी गलत है। 

तो किसी भी गलत तरीके को मैं प्रमोट नहीं करता हूँ। मैं बोलता हूँ, आप सही तरीके से कमाइए। देवी शक्ति की कृपा से कमाइए, वह चीज बेस्ट है। कोई भी अगर आपका सवाल है, नीचे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हो। ऐसा-बस। अब नीचे कोई तंज कसने वाला काम मत करिए। कोई बुरा कमेंट मत करिए। आप जिज्ञासा रख सकते हैं। आप, फोन नंबर दे रखा है, तो आप फोन भी कर सकते हैं भाई। और अगर पर्सनल कोई है सिस्टम… चलो, हम आगे शुरू करते हैं।

सही तरीके से तंत्र से पैसा कैसे हासिल किया जाए? देखिए, सही तरीके भी बहुत हैं और गलत भी बहुत। सही तरीका यह है, श्रीविद्या साधना। जैसे दिवाली आई, आपने श्रीविद्या साधना के लिए बैठ जाना है। और एक दिन के अंदर ही लोगों के ऊपर मैंने कृपा होते हुए देखा है। एक दिन के अंदर! मतलब किसी का पैसा अटका हुआ था। 

मतलब जैसी सोच ले कि जो बंदा करता है, तो वैसा काम होता है। किसी बंदे ने सोचा कि मेरा फलानी जगह पैसा अटका है, वह आ जाए तो बेहतर। तो वह आ जाता है। बाद में पछताते हैं कि यार, कोई बड़ा माँग देते तो बड़ी चीज भी मिल जाती। 

तो श्रीविद्या साधना से बहुत सारे लोगों को पैसों के मामले में सफलता लोगों ने हासिल करी है, मात्र एक दिन। एक मेरी प्लेलिस्ट है, उसमें आप देख सकते हो। किस तरीके से वह कर रहे हैं सिस्टम। तो किन-किन लोगों को फायदा हुआ? एक दिन में बहुत लोगों को मैं करवा चुका हूँ, बहुत लोगों की जिंदगी बदलती देखी है।

 एक वीडियो डायरेक्टर था, उसकी जिंदगी बदल दी इसी चीज के चलते। बिल्कुल वह आदमी जीरो था, उसको कोई भी, कहीं से भी प्रोजेक्ट नहीं मिलता था।

 तो उसको अचानक से प्रोजेक्ट मिलने शुरू हो गए। तो इस तरीके से होता है मामला। तो आप श्रीविद्या कर सकते हैं, इससे भी करोड़पति बना जा सकता है। अगर एक श्रीविद्या कृपा कर दे, तो आदमी को एक दिन में ही करोड़पति बना सकती है। कोई बड़ी बात नहीं है। उसके मैंने अनुभव डाल रखे हैं, उनके वीडियो डाल रखे हैं श्रीविद्या के। वह आप देख सकते हैं।

पहला पॉइंट। दूसरा है, अप्सरा साधना। कुछ ही दिन पहले मैंने, मतलब कुछ दिन नहीं, मतलब महीने हो गए, और एक लड़का है चंद्र प्रकाश, उसको मैंने करवाई थी उर्वशी अप्सरा साधना। उसकी भी रिकॉर्डिंग मैंने सबूत के सहित अपने चैनल में डाल रखी है, वह आप देख सकते हैं। अप्सरा साधना से उसको फ्लैट मिला। एक तरीके से, उनके पास फ्लैट नहीं था रहने के लिए। अप्सरा ने खुद दिलाया। और उसको पैसे की कोई दिक्कत नहीं है, अच्छा-खासा उसके पास बैंक बैलेंस है। 

तो मैं ज्यादा डिटेल से इतना तो नहीं बताऊँगा, आप वह वीडियो देख सकते हो। उर्वशी अप्सरा साधना से भी, आप कोई भी अप्सरा साधना कर लो, उससे हम जिंदगी में अपार धन-दौलत हासिल कर सकते हैं। जैसे महाकवि कालिदास जी को भी नाभि दर्शना से धन की प्राप्ति हुई थी। ये सब साक्षी आपके सामने हैं। 

उनके ऊपर अलग वीडियो बने हुए हैं, तो आप देख सकते हो। अप्सरा है और जो आदि गुरु शंकराचार्य थे, उनके शिष्य थे पद्मपाद, उन्होंने भी अप्सरा साधना से, अप्सरा की कृपा से बहुत कुछ प्राप्त किया था, अपार धन-दौलत। अप्सरा देने में सक्षम है। आपकी जिंदगी को सुखद बना देती है। तो अप्सरा साधना से भी आप कर सकते हैं।

दूसरे के ऊपर आती है यक्षिणीयक्षिणी यक्ष लोक की होती है। यक्षराज हैं कुबेर, पैसे के स्वामी। और कुबेर साधना से भी पैसा प्राप्त किया जा सकता है। अब मैं कुबेर साधना तो नहीं बताऊँगा, यक्षिणी साधना से आप हासिल कर सकते हैं। यक्षिणी भी कई तरीके की हैं। सुरसुंदरी यक्षिणी है और भी बहुत, भोग्या यक्षिणी है, कई तरीके की यक्षिणी जो आदमी को स्वर्ण मुद्राएँ देती हैं, कीमती उपहार देती हैं। तो इस तरीके से भी आप अमीर बन सकते हो, जिंदगी में पैसा हासिल कर सकते हो।

और उसके बाद सही तरीके से अगर बात करें, स्वर्णतारा साधना। स्वर्णतारा साधना से भी आप अमीर बन सकते हैं। कुछ ऐसे हमने स्वर्णतारा के साधक देखे हैं और उन्होंने लाइव दिखाया भी है हमें, उनको मुद्राएँ हासिल होती हैं। रोज उनको 10 तोले सोना मिलता है। तो इस तरीके से वह कुछ, स्वर्णतारा साधना से भी आप हासिल कर सकते हैं।

 इसके लिए एक अलग से वीडियो बना है, तो आप मेरे इसी चैनल में देख सकते हैं कि स्वर्णतारा साधना कैसे आदमी को अमीर बना देती है, कैसे 10 तोले देती है। 

वह जो 10 तोले देती है, उसमें से भी आपको कुछ पैसे धार्मिक कार्यों के लिए लगाने पड़ते हैं। वह पैसा अगर गलत कामों में लगना शुरू हो गया, तो वह आदमी को जीरो कर देते हैं। गलत काम ऐसे होते हैं, दारू, मीट, अंडा का प्रयोग करना। व्यर्थ इन गलत कामों में नहीं लगना चाहिए पैसा। एक यह भी तरीका है स्वर्णतारा साधना का। तो ऐसे साधक हैं, जिनको मिलता है 10 तोले डेली बेसिस पे। 

और धीरे-धीरे यह अपडेट भी होता जाता है, बढ़ता भी जाता है। गलत कामों में लगता जाता है, तो कम भी होता है। अगर इसका जाप करता रहे जिंदगी भर, तो बढ़ता ही जाता है। तो यह साधना है स्वर्णतारा साधना, इससे आप बन सकते हैं अमीर।

और देखिए, आप अगर त्रिकालदर्शी वाली साधना कर लेते हैं। त्रिकालदर्शी में आप स्वप्नमातंगी, मातंगी कर लीजिए आप, स्वप्नमातंगी कर लीजिए, वाराही कर लीजिए, स्वप्न वाराही कर लीजिए, बुलंदनी कर लीजिए, कोई भी ऐसी साधना कर लीजिए जो भूत, भविष्य, वर्तमान काल बता सके। उसके माध्यम से भी आप अच्छा-खासा पैसा कमा सकते हैं। 

आपको आने वाले शेयर मार्केट में पता चल जाएगा कि क्या चल रहा है, किस में इन्वेस्ट करना है, किस में नहीं करना। अगर केवल यह जानकारी भी मिल जाए तो बंदे की जिंदगी बदल सकती है। दिनों में ही वह कहीं से कहीं चला जाए। 

क्योंकि आपको पता चल जाएगा कि यह स्टॉक ऊपर जाएगा और यह नीचे जाएगा। जो नीचे जाएगा, उसमें पैसा नहीं लगाना है, जो ऊपर जाएगा, आप उसी में लगाओगे, आप आबाद हो जाओगे दिनों में। वह इस तरीके से जो साधना होती है, तो वह आप कर सकते हो। उससे भी आप अमीर बन सकते हैं। इन्हीं से ही आप आगे चलके कुछ भी जानकारी दे सकते हैं।

उसके अलावा देखिए, कुछ आप ऐसी साधनाएँ हैं, जिससे भी आपके ऊपर कृपा हो सकती है। जैसे आप लगा लीजिए कि लक्ष्मी साधना हो गई, कुबेर हो गई, तो ये भी साधनाएँ आप कर सकते हो। अब आप बोलोगे, लक्ष्मी में भी कई तरीके की हैं। अब लक्ष्मी से भी सबसे पावरफुल शक्ति है श्रीविद्या। श्रीविद्या के अंदर तो हमने रिजल्ट एक दिन में ही देखे हैं, मात्र 1 दिन के अंदर। सारे वीडियो हमने सबूत सहित अपने चैनल में डाल रखे हैं, तो आप देख सकते हैं। 

एक साधना है स्वर्ण आकाश भैरव साधना। अगर कोई यह साधना कर लेता है, तो उसकी जिंदगी में भी पैसे की कोई दिक्कत नहीं आती। पैसा कई तरीके से आता है। चाहे वह लॉटरी के थ्रू हो सकता है, चाहे वह आपको डायरेक्ट सोना मिलने लगे, वह हो सकता है। बहुत सारे वे हैं। तो आप वह कर सकते हैं।

तो ये कुछ चीजें मैंने आपको बताई हैं, इस तरीके से आप तंत्र के माध्यम से अमीर बन सकते हैं। कुछ परियाँ हैं, वह भी देती हैं धन-दौलत, तो उनसे भी आप कर सकते हैं, आगे अमीर बन सकते हैं। देखिए, तरीके तो बहुत सारे हैं तंत्र के माध्यम से, जिनसे आप कर सकते हैं। देखिए, सागर की साधना होती है। केवल समुंदर के किनारे होती है। अगर वह सिद्ध हो जाए, आपको जो समुंदर के नीचे कीमती चीजें रहती हैं, तो वह आपको मिलनी शुरू हो जाती हैं। एक कालिका साधना है, उससे भी आपको डेली बेसिस के ऊपर सोना मिलता है।

 तो यह शक्तियाँ हैं जो आपको जिंदगी में, आपकी बरकत पैदा कर सकती हैं, जिंदगी में आपको अमीर बना सकती हैं। कोई भी दैविक शक्ति है, तो वह धीरे-धीरे आदमी को अमीर बनाती है, एकदम से नहीं बनाती। 

एकदम से भी लोग बनते हैं। वह अलग चीज है, अलग लोग होते हैं। ज्यादातर केसेस में धीरे-धीरे देती हैं, धीरे-धीरे आदमी अमीर बनता जाता है। देखो, जो काली चीजें हैं, वह आदमी को एक दिन में ही बना सकती हैं, पर उसका साइड इफेक्ट बहुत है। गलत कामों के थ्रू पैसा कमाया जाता है, तो इन चीजों से भी बचना चाहिए।

तो और भी बहुत सारी शक्तियाँ हैं, जिनसे कमाया जा सकता है। तो वीडियो लंबा हो गया थोड़ा सा, तो मैं यहीं पर ही विराम देता हूँ। अगर आप भी कुछ बताना चाहते हैं, तो नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए या फोन नंबर मैंने दे रखा है तो उसके ऊपर फोन करिए। आज का यह वीडियो यहीं समाप्त होता है। आपका कोटि-कोटि धन्यवाद, आपने वीडियो अंत तक सुना। जय श्री महाकाल।

karna pishachini sadhana पर्चा बनाने वाले बाबा इस्तेमाल करते है कर्ण पिशाचिनी साधना karna pishachini

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karna pishachini sadhana पर्चा बनाने वाले बाबा इस्तेमाल करते है कर्ण पिशाचिनी साधना karna pishachini गुरु मंत्र साधना.com में आप सबका फिर से स्वागत है। आज का विषय रहेगा पर्चा बनाने वाले बाबाओं को लेकर रहेगा। ठीक है, जो भी बात करूँगा, तथ्य के आधार पर करूँगा। मैंने स्वयं अपने शिष्यों को, अपने लोगों को इन बाबाओं के पास भेजा है, ठीक है, सच्चाई पता लगाने के लिए।

 ठीक है, जो सच्चाई हमें पता चली है, जो हमें नॉलेज मिली है, तो वही नॉलेज हम बताएँगे। इसके पीछे क्या ज्ञान है, क्या विज्ञान है, ठीक है, कैसे यह बाबा लोगों का बताते हैं भूत, भविष्य, वर्तमान का। ठीक है, कौन सा व्यक्ति किस काम के लिए आ रखा है, तो यह पहले ही सारा कुछ बता देते हैं। 

तो इसी टॉपिक को लेकर मैं बात करूँगा बिल्कुल एक प्रैक्टिकल वे में। ठीक है, सुनी-सुनाई बातें न तो मैं करता हूँ, न तो फिर मैं उनके ऊपर कोई यकीन करता हूँ, न तो मैं उनके ऊपर कोई post बनाता हूँ। सीधी सी बात है, प्रैक्टिकल वे में ही मैं बात करूँगा।

आज के समय में जो पर्चा बनाने वाले बाबा हैं, उनमें से बागेश्वर धाम वाले बाबा बहुत ही फेमस हो चुके हैं। ठीक है, आप सभी लोग जानते होंगे। ठीक है, बहुत ही कम समय में ये उस लेवल तक पहुँचे, जिस लेवल के ऊपर बड़े-बड़े संतों को पहुँचने के लिए कई साल लगते हैं, क्योंकि चमत्कार को ही नमस्कार है। ठीक है, इनसे भी पहले एक बाबा होते थे पर्चा बनाने वाले, पंडोखर सरकार। सबसे पहले पर्चा बनाने वाले जो बाबा थे, वो पंडोखर सरकार ही थे। ठीक है, उनके बाद यह कई साल बाद ही यह बागेश्वर धाम वाले बाबा आए, उनसे पहले पंडोखर सरकार थे।

पंडोखर सरकार की मैं सच्चाई बताऊँगा कि क्या है सिस्टम, उसके बाद फिर हम इस विषय के ऊपर चर्चा करेंगे। देखिए, जो पंडोखर सरकार का चलन बहुत ज़्यादा था 2014 के करीब। ठीक है, उस समय हमने एक अपने शिष्य को उस बाबा के पास भेजा। 

ठीक है, उस बाबा के पास पहुँचने के लिए भी आपको 2100, 5100, 21000 की पर्चियाँ लगती हैं। कौन सी पर्ची आप कटवाना चाहते हो, वो कटवाओ। ठीक है, उसके बाद आपका नंबर आएगा। तो हमारा जो शिष्य था, वह समर्थ था 21,000 की पर्ची लेने में, इसीलिए उसने 21,000 की पर्ची ली। ठीक है, सामने ही बाबा के होटल भी थे। 

कोई व्यक्ति अगर होटल में रहना चाहे, तो वहाँ कमरे लेकर रह सकता है। कहने का मतलब पक्का बिज़नेस उनका चलता था इस तरीके से। जिसको होटल में नहीं रहना है, एक हॉल होता था बहुत बड़ा, हॉल के अंदर लोग सो जाते थे। ठीक है, तो ये कहानी थी पंडोखर सरकार की।

उसके बाद होता क्या है कि 21,000 की पर्ची लेकर वो हमारा शिष्य वहाँ पहुँचा और बाबा ने उनको बुलाया। बाबा ने बोला कि तुम्हारे पिता का नाम यह है, चाचा का नाम यह है, साले का नाम यह है, सारा खानदान का हिस्ट्री बता दिया। इस मन, इस कामना के लिए आए हो, इस सवाल के लिए आए हो।

 ठीक है, उन्होंने बोला, चलो ठीक है, लेकिन आप मेरी समस्या बताओ और उसका समाधान बताइए। ठीक है, भविष्य में मैं क्या करूँगा, उसके बारे में बताएँ। तब बाबा के क्रोध की कोई सीमा नहीं रही। बाबा क्रोधित हो गए, बोले कि उसको बाहर ले जाओ।

 ठीक है, उस व्यक्ति ने बोला कि मैंने ₹21,000 दिया है, ठीक है, और अपने सवालों का जवाब जाने बिना मैं नहीं जा सकता। फिर उसको बाहर भेज दिया गया, तो बाहर उनका शिष्य बैठा था, बोला ₹51,000 दीजिए, तब आगे की बात पता चलेगी। तो ₹51,000 एक व्यक्ति ने वहाँ पर दिया था। ठीक है, उससे जब रिव्यू पता किया गया कि क्या है, इसके बारे में उसने बताया कि बाबा भविष्य बताने में टाल-मटोल कर जाते हैं।

 ठीक है, भूतकाल और वर्तमान काल का खूब बताते हैं। ठीक है, और जैसे कोई समस्या के बारे में पूछा जाए, तो बता देते हैं, पर उसका समाधान बताने में सक्षम नहीं। तो वहीं पर ही हम समझ गए कि इनके पास कोई भी दैवीय शक्ति नहीं, क्योंकि दैवीय शक्ति भूत, भविष्य, वर्तमान, तीनों काल की जानकारी देने में समर्थ होती है। पर जो इनके पास है, केवल भूतकाल और वर्तमान काल। ठीक है, इससे आगे और कुछ नहीं है।

तो फिर हमें इस चीज़ का पता चला कि यह तो भूत-प्रेत पकड़ के बैठे हैं, उसके ज़रिए ही अपने सवालों के जवाब हासिल करते हैं। इन बाबाओं के पास कोई भी दैवीय शक्ति नहीं है।

 ठीक है, ये जो साधनाएँ ज़्यादातर बाबा करके बैठते हैं, ठीक है, तो इसी तरीके की करके बैठते हैं। अच्छा, वह बाबा स्वयं सीएम पद के लिए उस बाबा ने टिकट ली थी, ठीक है, इलेक्शन में भी खड़े थे। बाबा बुरी तरीके से हार गए और ज़मानत तक ज़ब्त हो गई। 

जब यह चीज़ मीडिया के माध्यम से और बहुत सारे लोगों को पता चली, तो बहुत सारी पब्लिक बाबा से टूट गई। तो लोग बोलते थे कि अगर बाबा को खुद का भविष्य नज़र नहीं आता है, तो लोगों का भविष्य क्या देखेंगे। ठीक है, खुद को तो इलेक्शन जिता नहीं पाए, लोगों की समस्या कैसे दूर करेंगे?

 अपनी समस्या तो दूर हुई नहीं। ठीक है, अब तो इलेक्शन जीत नहीं पाए। ठीक है, अगर बाबा के पास वाकई शक्ति थी, तो भविष्य के माध्यम से देख लेते कि वह जीतना है या उसको हारना है। ठीक है, कम से कम जो ज़मानत थी, वो ज़ब्त नहीं होती। 

ठीक है, दूसरी चीज़, इज़्ज़त तो बच जाती। अब समाज में इज़्ज़त भी गई, पैसा भी गया। उसके बाद बाबा की जो लोकप्रियता थी, बहुत ही कम हो गई, नाम मात्र ही लोग जानने लगे।

तो यह सच्चाई होती है। जितने भी यह बाबा होते हैं, यह केवल छोटी-मोटी शक्तियाँ ले बैठते हैं और लोगों को बताते हैं। इनके पल्ले कुछ नहीं है। इनको भविष्यवक्ता हम नहीं बोल सकते, एक तरीके से मदारी बोल सकते हैं कि मदारी जैसे तमाशा दिखाता है, तो उसके माध्यम से ये केवल तमाशा दिखाकर पैसा इकट्ठा करते हैं, मदारी की तरह। 

ठीक है, इनके पास न तो कोई शक्ति है, न तो कोई सिद्धि है, जो त्रिकाल ज्ञान दे सके। जो व्यक्ति त्रिकालदर्शी बन जाता है, तो अपने आप में वह शांत हो जाता है। ठीक है, क्योंकि उसको कर्मचक्र के बारे में, कर्म चक्र का रहस्य पता चल जाता है, उसको अंदर से ज्ञान हासिल हो जाता है, तो ऐसे वो मदारीगीरी वाले काम करके पैसा इकट्ठा नहीं करता है। 

जो बर्तन खाली होता है, उसी में ही ज़्यादा आवाज़ आती है। जो बर्तन भरा हुआ होता है, वह कभी आवाज़ नहीं करता है। तो यह बाबा बस सिर्फ और सिर्फ कुछ भूत-प्रेत को कैद करके, कोई कर्ण पिशाचिनी को करके बस बताते हैं और इनके पल्ले कुछ है ही नहीं।

कुछ और भी बाबा आ रहे हैं, जो बताते हैं। अच्छा, एक चीज़ इनकी और भी है, ये कुछ ही लोगों का बताते हैं। ठीक है, बहुत सारे ऐसे लोग हैं, उनको बता ही नहीं पाते। लोगों के मन में डाउट भी खड़ा होता है कि यह हर किसी को क्यों नहीं बताते। ठीक है जी, उनके कुछ आदमी हैं, तो उनका ही बताते हैं। 

ज़्यादा पोल तो मैं इस वीडियो के अंदर नहीं खोलूँगा। आपको पता है कि एक लेवल तक की ही बात करूँगा। ठीक है, इन बाबाओं के चक्कर में आप पैसा वेस्ट मत करिए, टाइम वेस्ट मत कीजिए। ठीक है, ये कोई भी ऐसे सिद्ध साधक नहीं हैं, ये सिर्फ मदारी हैं। 

मदारी ही बोलो आप। ठीक है, मदारी और साधक में फ़र्क होता है। साधक वो होता है, जो अपनी सिद्धियों का कभी भी प्रदर्शन नहीं करता है और प्रदर्शन करके लोगों से पैसा इकट्ठा नहीं करता है। जो मदारी होता है, अपनी हाथ की कला दिखाता है या अपनी स्किल दिखाता है, उससे पैसा इकट्ठा करता है।

 तो ये साधक नहीं हैं, ये एक नंबर के, हम बोल सकते हैं कि, मदारी हैं, केवल मदारीगीरी करते हैं, तो उनके पल्ले और कुछ है ही नहीं। ठीक है, तो आप यह बात आप समझ गए होंगे। तो आज के लिए बस इतना ही। ठीक है, अगर कोई आपका डाउट है या सवाल है, तो नीचे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। ठीक है, जय श्री महाकाल।

karna pishachini sadhna कर्ण पिशाचिनी साधना का सच विस्तार सहित जानकरी karna pishachini sadhna

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गुरुमंत्रसाधना.कॉम में आपका हार्दिक स्वागत है। देखिए, जो आज का टॉपिक रहने वाला है, वह कर्ण पिशाचिनी साधना के सच के बारे में रहेगा। बहुत सारे लोग प्रश्न पूछते हैं कि कर्ण पिशाचिनी जो है, उसको करने के बाद जीवन में क्या होता है?

देखिए, अगर आप कर्ण पिशाचिनी कर रहे हैं, ठीक है? सबसे पहला ज़िंदगी में बदलाव यही होगा कि आप वर्तमान और भूतकाल की जो ख़बर है, आपको पता चल जाएगी। ठीक है? वर्तमान में क्या चल रहा है और भूतकाल में क्या हो चुका है?

इतनी ही ख़बर होगी। बस इससे ज़्यादा और कुछ नहीं। ठीक है? तो इस इन्फ़ॉर्मेशन से आप कर क्या सकते हैं? ठीक है? आप अपना भूतकाल जान सकते हैं कि भूतकाल में कौन सी ऐसी ग़लतियाँ मैंने करी हैं जो आज का जो वर्तमान है, वह ख़राब हो चुका है। तो ये चीज़ आप जान सकते हैं इससे। ठीक है?

दूसरी चीज़, जिन लोगों को थोड़ा लोगों के बीच में फ़ेमस होना है, ठीक है? जैसे बागेश्वर धाम वाले बाबा हैं, तो उस तरीक़े से भी आप फ़ेमस हो सकते हैं। ठीक है? तो यह फ़ायदा है। उसके बाद इसका और यह फ़ायदा है कि जैसे बड़े से बड़े जो महापुरुष हैं या कोई व्यक्ति है जो किसी भी चीज़ का जानकार है, उसके बारे में भी आपको बता देगी।

फ़लानी जगह के ऊपर फ़लाना जानकार व्यक्ति बैठा है तो आप उससे नॉलेज ले सकते हैं। तो केवल इतनी ही जानकारी बताएगी। ठीक है? कर्ण पिशाचिनी के क्या लाभ हैं, इसके बारे में अलग वीडियो फिर बनाऊँगा। तो ये चीज़, यह जानकारी केवल आपको बताती है – भूतकाल और वर्तमान काल। ठीक है?

फिर उसके बाद क्या है? जैसे कि आपने इसको कर लिया, ठीक है? अब जिसको मदारीगीरी वाले काम करने हैं, तो मैं उसको मदारी ही बोलता हूँ जो लोगों के बीच में चमत्कार दिखाता है, पर्चा बनाता है और लोगों से फिर पैसे ऐंठता है या ठगता है।

तो वह मदारी से कम नहीं है। वह साधक नहीं, वह मदारी है। जिसको मदारीगीरी वाले काम करने हैं, तो उसके लिए भी यह चीज़ बेस्ट है। वह कर सकता है।

इससे ज़्यादा और कुछ नहीं है। ठीक है? यही इसका सत्य है। ठीक है? अगर आप बोलोगे मैं सट्टा जान जाऊँगा, बिल्कुल नहीं जान पाओगे। लॉटरी का नंबर पता चल जाएगा, शेयर मार्केट का पता चल जाएगा, कुछ नहीं पता चलेगा। ठीक है ?

ये सब बकवासबाज़ी चीज़ें हैं। ठीक है? इतना ही जान पाओगे केवल। ठीक है? इससे ज़्यादा और कुछ नहीं। अगर यह इन्फ़ॉर्मेशन आपके लिए पर्याप्त है, तो आप यह कर्ण पिशाचिनी की साधना ज़रूर करिए। ठीक है?

जो भविष्य जानने वाली साधना होती है, वो उच्च स्तर की साधना होती हैं। यह थोड़ी निम्न स्तर की साधना होती है। ठीक है? उच्च स्तर की साधना होती है, वो भविष्य भी बताती है।

तो भविष्य बताने वाली साधनाएँ कौन सी हैं? तो उसमें पंचांगुलि महाविद्या है, कर्ण मातंगी है। ठीक है? तो यह कुछ साधनाएँ ऐसी हैं जो भविष्य बताती हैं।

भूतकाल तो बताएंगी, साथ में भविष्य भी बताती हैं। जो निम्न कोटि की साधना होती है, या तो भूतकाल बताती है या भूतकाल के साथ वर्तमान काल बताती है। इससे ज़्यादा और कुछ नहीं। ठीक है?

आपको दूसरी चीज़ यह है, धन-ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी, समाज में सम्मान मिलेगा। ठीक है? जो भौतिक सुख चाहते हो, तो वह सब मिलेंगे। ठीक है? पर दूसरा सत्य यह भी है, ठीक है? अगर आप इसको करते हैं, तो शक्ति के विसर्जन करवाने वाला व्यक्ति भी चाहिए होगा।

अगर नहीं मिलता है, तो आपकी ज़िंदगी में बहुत ही बड़ी दिक़्क़त होने वाली है। ठीक है? तो जिस व्यक्ति से आप दीक्षा लीजिए, गुरु दीक्षा लो, ठीक है? कर्ण पिशाचिनी साधना की, तो उसी से ही आप इसके विसर्जन की भी विधि पूछ लो।

किस तरीक़े से विसर्जन होगा और उन गुरु से बोलो कि जब भी विसर्जन करना होगा, तो आप ही करिएगा। ठीक है? इस चीज़ का भी वचन लो आप। ठीक है? तो अपनी ओर से पूरी सेफ़्टी के साथ चलना। नहीं चलोगे तो भाई आपकी गति करवाने वाला कोई व्यक्ति नहीं होगा।

फिर आप भी पिशाच बनोगे फिर। तो यह रियलिटी मैं बता देता हूँ। तो पूरी सेफ़्टी के साथ ही चलना।

दूसरी चीज़, यह सात्विक, सौम्य तरीक़े से भी कर सकते हैं और तामसिक, वाममार्गी, अघोर तरीक़े से भी की जा सकती है। ठीक है? अब आपको ये चीज़ देखनी है। ठीक है? यह इतनी आसान भी नहीं होती है। जिस तरीक़े से लोग बोलते हैं यह भी कर लोगे, यह होगा, वह होगा, इतना आसान नहीं है।

अगर रियलिटी देखें तो बताती है बहुत कुछ, तो उस लेवल तक आपको नहीं बताएगी। एक लेवल तक की ही बातें पूछ सकते हैं। ठीक है? तो ये होता है इसके अंदर सिस्टम। अगर आप इतने में संतुष्ट हैं भूतकाल और वर्तमान काल से, तो आप इसको ज़रूर करिए। ठीक है?

वैसे तो मैं रिकमेंड यही करता हूँ, आप पंचांगुलि महाविद्या की साधना कर लीजिए। बिल्कुल सात्विक विषय है और आपको भूत, भविष्य, वर्तमान काल की तो जानकारी बताएगी, साथ में आपके अंदर वह ज्ञान पैदा हो जाएगा। फिर आप शांत हो जाओगे।

मदारीगीरी वाले काम करोगे नहीं। जिसको त्रिकालदर्शी हो जाता है, तो वह मदारीगीरी वाले काम नहीं करता है जो आज की डेट में बाबा लोग कर रहे हैं।

तो उनको बहुत बार पूछा गया एक ही सवाल, मदारियों को, कि “मदारियों, जो दुनिया के अंदर घटनाएँ हो रही हैं, ठीक है? उसको तो आप बता के रोक सकते हो, क्यों नहीं रोकते?” तो मदारियों के पास कोई सवाल नहीं है, सवाल का कोई जवाब नहीं। ठीक है?

कुछ मदारी बोलते हैं कि भाई भगवान का जो सिर्फ़ लिखा है, तो उसको हम मिटा नहीं सकते भाई। ठीक है? फिर आप लोगों का जो भगवान ने लिखा है, लोगों की ज़िंदगी में दुख, तो वो क्यों मिटा रहे हो आप? ठीक? तो ये मेरा मदारियों से सवाल है। जो मदारीगीरी करके पैसा कमाते हैं, तो उनसे यही सवाल, तो आप बताओ। ठीक है?

तो इससे भी आप लोगों के कर्मों में विघ्न-बाधा उत्पन्न कर रहे हो, उनके कष्टों को हर रहे हो। ठीक है? पता नहीं हरते हैं या नहीं हरते, जैसा उनका दावा है। ठीक है? क्या वह चीज़ फिर ग़लत नहीं है? उसमें भी कर्म-चक्र डिस्टर्ब होता है। ठीक है?

तो जो यह सवाल मैंने पूछा, तो आप उनसे पूछो, जो मदारीगीरी करके पैसा इकट्ठा करते हैं, पर्चा बनाते हैं, तो उनके पास कोई सवाल नहीं होगा। क्योंकि यह निम्न कोटि की सिद्धियाँ लेके बैठे हैं। बताते यह हैं कि हनुमान जी की सिद्धि कर रखी है। यह सरासर झूठ है और लोगों के साथ धोखा है। ठीक है?

कर रखी है तो बताओ भविष्य भाई किसी का भी। भविष्य बताने की इनकी औक़ात नहीं है। ठीक है? भविष्य बता पाते तो इनका जो पंडोखर सरकार है, वह तो सीएम के पद की कुर्सी के ऊपर हार गया। उसको पता चलता तो वह भविष्यवक्ता होता, तो अपने ज़मानत का पैसा बचा लेता और समाज में जो इज़्ज़त है, वह भी बच जाती।

समाज में इज़्ज़त भी गई और लोगों के सामने पोल भी खुल गई। इसके पल्ले कुछ नहीं है। अब कोई नहीं पूछता। बहुत कम लोग आते हैं। ये क्या है? तो भाई ये सिस्टम है। ये सब, यह मदारी हैं। तो मदारियों से आप सावधान रहें। साधक कहलाने का इनका हक़ नहीं है। ठीक है? केवल यह मदारी रहे।

अब इतिहास उठा के देख लो। क्या भगवान शिव ने ऐसे जाके चमत्कार दिखा के लोगों से पैसा इकट्ठा किया? नहीं किया भाई। ठीक है? तो किसी भगवान ने भी चमत्कार दिखा के लोगों से पैसा नहीं ठगा, ना ही हमारे जो ऋषि-मुनि हैं, तो उनकी ऐसी परंपरा रही है कि लोगों का पर्चा बना के और उनका भविष्य बताकर उनसे पैसा ठगना।

आज तक किसी ऋषि-मुनि ने ऐसे काम नहीं करे। वही लोग करते हैं जो आज के कलियुगी मदारी हैं। वो अपने आप को ऋषि, ब्रह्मर्षि बोलते हैं। भाई, ऐसे लोगों से सावधान रहें। ठीक है? जो चीज़ हमारे पूर्वज नहीं करते हैं, तो वही चीज़ अगर कोई दूसरा करेगा और सनातन धर्म का नाम ख़राब करेगा, तो ऐसे लोगों को हम नहीं छोड़ेंगे। ठीक है? ऐसे लोगों के पास जाने वाले लोग भी बेवकूफ़ हैं। तो आज के लिए बस इतना ही। जय श्री महाकाल।

मारण क्रिया से बचने के उपाय maran kriya se kaise bachne ke upay

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ओम नमः शिवाय मित्रों! गुरु मंत्र साधना में  आपका हार्दिक स्वागत करता है। आज मैं आपको बताने जा रहा हूँ कि जिन लोगों के ऊपर मारण तंत्र का प्रयोग होता है, कैसे होता है, कौन करते हैं, क्या लक्षण होते हैं, उनका बचाव क्या है, उसका निवारण क्या हो सकता है। इन सभी बिंदुओं पर आज चर्चा करूँगा।

तो मित्रों, मारण क्रिया तंत्र की एक क्रिया होती है। हमारा जो तंत्र शास्त्र है, उसमें छह अंग होते हैं, छह प्रधान अंग होते हैं। कौन-कौन से होते हैं? मारण, मोहन, वशीकरण या आकर्षण, विद्वेषण और उच्चाटन।

 इसके अलावा जो छठा अंग होता है, वह स्तंभन है। यह छह तंत्र के अंग माने जाते हैं। हमारे ऋषियों ने जब इसका उद्भव किया था तो यह दृष्टिगत रखते हुए किया था कि इससे मानव अपनी परेशानियों को दूर कर सकेगा, मानव का हित मानव कर सकेगा। 

लेकिन आज इसका उल्टा हो रहा है क्योंकि हमने तंत्र की अवधारणा को समझा ही नहीं। तो जिन लोगों के ऊपर मारण क्रिया की जाती है, उनके साथ क्या होता है? 

तो सबसे पहले मैं आपको यह बता दूँ कि तंत्र क्रिया करवाता कौन है? मैं आपको बताऊँ कि जैसा नाम से स्पष्ट है, मारण, तो जिसके ऊपर, जिस व्यक्ति के ऊपर यह तंत्र क्रिया होती है, उसका मरना निश्चित हो जाता है। 

कुछ अवधि के साथ यह तंत्र क्रिया की जाती है और उस अवधि के अंदर यदि वह अपना उपचार नहीं कर पाता है तो उसकी मृत्यु हो जाती है।

तंत्र के बारे में आप यह समझ लीजिए, अच्छे तरीके से मन में बिठा लीजिए, तंत्र क्रिया कभी भी कोई कराएगा तो आपका अपना ही होगा। 

आपके घर का सदस्य हो सकता है, आपके परिवार का सदस्य हो सकता है, आपका रिश्तेदार हो सकता है, आपका पड़ोसी हो सकता है या वह व्यक्ति हो सकता है जिसका कि संबंध आपकी जर, जमीन और जोरू के साथ जुड़ा हुआ है। 

कोई भी तांत्रिक कभी भी आपके ऊपर तांत्रिक क्रिया नहीं कर सकता है जब तक कि इनमें से उसे कोई व्यक्ति सहायता न पहुँचाए क्योंकि इसमें बहुत सी चीजों की आवश्यकता पड़ती है जो जानकार व्यक्ति ही उन्हें उपलब्ध करता है या करा सकता है। 

तो जहाँ पर धन से संबंधित कोई मामला हो, जमीन से संबंधित कोई मामला हो, या स्त्री से संबंधित कोई मामला हो, या आपके बिजनेस से संबंधित कोई मामला हो, या आपकी तरक्की से संबंधित कोई मामला हो।

 हमारा जो मस्तिष्क है, मानवीय मस्तिष्क है, इसके अंदर एक अवगुण अक्सर पाया जाता है, अधिकतर पाया जाता है, वह होता है जलन का। यदि हम तरक्की करते हैं तो हमसे जलन करने वाले बहुत पैदा हो जाएँगे और उन्हें हमारी तरक्की आँखों से नहीं भाएगी। 

तो प्रत्यक्षतः वह कुछ हमारा कर नहीं सकते, इसलिए वह अप्रत्यक्ष रूप से तांत्रिकों का सहारा लेकर के हमारे ऊपर तंत्र क्रिया करवाते हैं। तो हमें इसमें विशेष सावधानी की भी आवश्यकता है।

अब मैं आपको बताऊँ, तंत्र क्रिया कैसे की जाती है। यह तंत्र क्रिया जो होती है, यह तंत्र का एक अंग है लेकिन इसके अंदर तामसिक चीजों की भरमार होती है। 

तामसिकता के आधार पर ही यह तंत्र क्रिया होती है। जब भी कभी आपको लगे कि हमारे घर में, हमारे घर के आसपास या फिर हमारी छत पर कुछ चीजें दिखाई दे जाएँ तो आप समझ लीजिए आपके ऊपर तंत्र क्रिया की जा रही है। 

यह तंत्र क्रिया नींबू से हो जाती है, पान आपको खिलाया जा सकता है, उससे भी हो जाएगी, शराब पिलाई जा सकती है आपको, उससे भी तंत्र क्रिया हो जाती है। मांस का टुकड़ा अगर घर पर या छत पर मिल जाए तो समझें कि तंत्र क्रिया हमारे ऊपर हो रही है।

 मासिक धर्म के रक्त से भी, पान में वह चीज आपको खिलाई जा सकती है, उससे भी तांत्रिक क्रिया हो जाती है। लड़कियों के चुंबन लेने से भी यह तंत्र क्रिया हो जाती है। 

तामसिक चीजों पर ही यह आधारित होती है। इसमें आप लौंग, एक लौंग से भी आपके ऊपर तंत्र क्रिया हो सकती है, जायफल से भी तंत्र क्रिया हो सकती है, चाय इत्यादि में, खाने-पीने की चीजों में मिलाकर के भी तंत्र क्रिया हो जाती है।

यह तंत्र क्रिया हमेशा श्मशान घाट पर होती है। इसकी सारी तैयारी तांत्रिक लोग श्मशान में करते हैं और उसको श्मशान काली का नाम देते हैं। 

यह माता महाकाली की बात नहीं है और न ही उनका इससे कोई संबंध है। यह जो श्मशान काली जो नाम दिया गया है, वह मिलता-जुलता नाम दे दिया गया है, अलंकारिक तौर पर दे दिया गया है। श्मशान काली एक तांत्रिक शक्ति होती है जो श्मशान में वास करती है।

 श्मशानी राख आपको किसी भी चीज में मिलाकर के दी जा सकती है, उससे भी तंत्र क्रिया हो जाएगी। कोई बाबा आकर के आपके शरीर पर फूँक मारता है या आशीर्वाद देता है आपको तो समझो तंत्र क्रिया हो रही है, आपको सतर्क हो जाना चाहिए। 

आपको अपने बुद्धि और विवेक का सहारा लेना चाहिए। कोई भी भभूत दे सकता है, वह आपके माथे पर टीका लगा सकता है, आपके हाथ में धागा बाँध सकता है, पैर में धागा बाँध सकता है। अगर आप सतर्क नहीं हुए तो फिर तंत्र क्रिया का शिकार आप हो जाएँगे, मारण क्रिया का शिकार आप हो सकते हैं।

अब किन लोगों पर होता है यह? जो दिल से कमजोर होते हैं। यदि तंत्र क्रिया किसी पर हो गई तो यह समझ लीजिए वह मानसिक तौर पर कमजोर है, पूजा-पाठ नहीं किया है उसने या पूजा-पाठ नहीं कर रहा है या फिर उसका आहार-विहार सही नहीं है, वह तामसिक प्रवृत्ति का है, तो उसके ऊपर यह तंत्र क्रिया हो जाना स्वाभाविक है और बहुत शीघ्र हो जाती है। तामसिक आहार-विहार हमारे शास्त्रों में इसीलिए मना किया गया है।

अच्छा हाँ, इसमें कुछ चीजें और छूट गई हैं क्योंकि तंत्र क्रिया के लिए कोई एक मीडिएटर चाहिए होता है तो वह अपना रिश्तेदार, पड़ोसी वगैरह कोई भी हो सकता है। 

तो जिसके ऊपर तंत्र क्रिया की जानी है, जिसके ऊपर मारण का प्रयोग किया जाना है, उसका कोई साबुत कपड़ा चाहिए होता है, बाल चाहिए होते हैं, या फिर नाखून चाहिए होता है, उसका नाम, पिता का नाम, गोत्र, स्थान, सबकी जानकारी होनी चाहिए। औ

र यह जानकारी कौन उपलब्ध कराता है? हमारा अपना, जिसको हम अपना समझते हैं, वह हमारा मित्र, पड़ोसी, रिश्तेदार ही कोई होगा जो वहाँ तक यह सारी बातें पहुँचाएगा और तभी तंत्र क्रिया हो पाएगी।

अब बात यह करते हैं कि वे लक्षण कौन-कौन से हैं जिनसे हम यह जान सकते हैं कि हमारे ऊपर तंत्र क्रिया हो चुकी है। तो जिस व्यक्ति के ऊपर तंत्र क्रिया होती है, इसमें समय, इसमें अवधि डाल दी जाती है। तंत्र क्रिया में, मारण क्रिया में जो अवधि डाली जाती है कि यह मारण क्रिया कम से कम 40 दिन पर अपना असर शुरू करेगी और अधिकतम 100 दिन तक। 

100 दिन में उसे वह समाप्त कर देगी, मतलब तीन साल में, अधिकतम समय तीन साल होता है, इसी बीच में वह व्यक्ति चल बसता है। 

जब तंत्र क्रिया हो जाती है तो सबसे पहले उसका शरीर पीला पड़ना शुरू होता है, शरीर की रौनक खत्म हो जाती है, चमक खत्म हो जाती है, शरीर फीका पड़ जाता है, ठीक है?

 उसके शरीर में खून बनना बंद हो जाता है। लगातार उसको पतली टट्टी आती रहती है, दवाइयाँ देने के बावजूद भी टट्टी बंद नहीं होती। चाहे आप बोतल चढ़ा दो, चाहे ड्रिप लगाओ, चाहे कुछ करो, थोड़े समय के लिए रुकेगी, फिर ज्यों की त्यों पतली टट्टी आना शुरू हो जाएगी जिससे उसके शरीर का जो पानी है, वह निकलना शुरू हो जाता है, शरीर में खून में पानी की कमी हो जाती है। 

उसकी आँखें बाहर निकलना शुरू हो जाती हैं, उसका चेहरा भयानक होने लगता है और हो सकता है कि इसी बीच में वह इलाज करा रहा है लेकिन कोई दवा काम नहीं कर रही है। इस बीच में वह कोमा में भी जा सकता है और या उसको अटैक भी आ सकता है, हार्ट अटैक भी आ सकता है क्योंकि ब्लड में खून की मात्रा, खून जो है गाढ़ा हो चुका है, इतना गाढ़ा हो चुका है, पंप नहीं हो पा रहा, तो अटैक भी आ सकता है।

एक तो यह लक्षण हुआ। दूसरा लक्षण मैं आपको बताऊँ, उसके पूरे शरीर में दर्द रहता है, भूख नहीं लगती, स्वाभाविक भूख चली जाती है उसकी। यदि तंत्र क्रिया शराब में की गई है तो वह शराब लगातार पीता है, अपनी क्षमता से अधिक शराब पीता रहता है और लगातार पीता रहता है।

अगर ऐसा कुछ आपको दिखाई दे कि अस्वाभाविक उसका क्रियाकलाप हो रहा है तो समझ लीजिए कि उसके ऊपर मारण प्रयोग किया गया है। 

उसके शरीर में गाँठें बनना शुरू हो जाती हैं। फिर क्या होता है? या तो उसको टीबी हो जाएगी या फिर उसको कैंसर जैसी कोई बीमारी लग जाएगी जो वर्षों चलेगी, जिसमें सबसे पहले उसका धन बर्बाद होगा और उसे ठीक नहीं होना है। दवा कोई काम नहीं करेगी, चिकित्सक परेशान हो जाएँगे, डायग्नोसिस सही नहीं होगा और अंततः उसकी मृत्यु हो जाएगी।

एक तो यह लक्षण हुआ। नकारात्मक विचार उसके अंदर आना शुरू हो जाते हैं। कैसे नकारात्मक विचार आते हैं? उसका खुद को मरने का, खुद को मारने का जी करता है और उन नकारात्मक विचारों के आते-आते, कभी-कभी जब वह विचार ज्यादा हावी हो जाते हैं तो व्यक्ति डिप्रेशन में जाकर के आत्महत्या भी कर लेता है। 

और इसी के साथ-साथ में यदि उस बीच में अगर उसको आध्यात्मिक तौर पर, आध्यात्मिक क्रियाकलापों को करने वाला व्यक्ति मिल जाता है या घर में कोई आध्यात्मिक क्रिया होती है, कोई पूजा-पाठ होता है तो उसे बड़ी बेचैनी हो जाएगी, वह घर छोड़ देगा, भाग जाएगा और जब क्रिया समाप्त हो जाएगी तब आएगा। 

उसको वह सहन नहीं कर सकता क्योंकि उस समय उसके शरीर में जो है, वह नकारात्मक शक्ति बैठी हुई है जो उसको सहन नहीं हो सकता, कोई भी धार्मिक क्रियाकलाप।

यह लक्षण अगर दिखाई देते हैं, इनमें से एकाध लक्षण दिखाई दे जाए तो ऐसा मत समझ लेना कि हमारे ऊपर मारण प्रयोग किया गया है। मेरा उद्देश्य अंधविश्वास को बढ़ावा देना नहीं है। मेरा उद्देश्य है वस्तुस्थिति से अवगत कराना क्योंकि तंत्र में यह क्रियाएँ होती हैं। 

यदि आदि शंकराचार्य जी को टोटके लग सकते हैं, दिए जा सकते हैं, उनका असर हो सकता है, तो हम-आप तो साधारण जीव हैं, ऐसा क्यों नहीं हो सकता? तो लेकिन मैं साथ-साथ यह भी कहना चाहूँगा कि आप विवेक, बुद्धि का इस्तेमाल करिए। 

सबसे अधिक तांत्रिक क्रिया करता कौन है? जब हम दरगाह पर जाते हैं न, तो वहाँ पर वह फूँक मारते हैं और कोई चीज देते हैं। हम, वह चीज बहुत ही घातक होती है और सबसे अधिक श्मशान की साधना जो करते हैं, वह यही लोग करते हैं। इसलिए मैं आपको सावधान करना चाहूँगा कि दरगाह वगैरह पर आप न जाइए।

 आप बार-बार अपने गुरु को मत बदलिए, अपने सनातन धर्म पर विश्वास रखिए। इसमें कोई भी ऐसी चीज नहीं है, कोई भी ऐसा संकट नहीं है जिसको टालने की, जिसको नष्ट करने की ताकत हमारे सनातन धर्म में न हो। सब कुछ सही हो सकता है, सब कुछ बिगड़ा हुआ सही हो सकता है। आपको विश्वास करना है।

अब मैं आपको बताता हूँ कि यह जो तांत्रिक क्रिया होती है, इसे हर तांत्रिक भी नहीं कर सकता। इसको हर तांत्रिक नहीं कर सकता। 

सके लिए एक विशेष तपस्या की आवश्यकता होती है जिसमें वह तामसिक चीजों का आहार करता है, तामसिक चीजें अपने इष्ट देव पर चढ़ाता है और कभी-कभी तो वह मुर्गा चढ़ाता है, बकरे की बलि देता है, यानी कि इसमें बलि भी चढ़ती है। 

गुपचुप तरीके से चढ़ाते हैं, इसका प्रयोग करते हैं और तब कहीं जाकर के उसे ऐसी श्मशानी शक्ति मिल पाती है जो मारण का प्रयोग उसका सफल कर पाती है। तो साधारण व्यक्ति कर भी नहीं पाता है।

मैंने आपको लक्षण बताए, कौन करवाता है, किससे करवाता है, क्यों करवाता है और इसके साथ-साथ में मैंने आपको बताया कि वे लक्षण कौन से हैं जो प्रकट होते हैं। अब मैं आपको बताता हूँ कि यदि किसी के अंदर 100% यह सिद्ध हो जाए कि इसके ऊपर तंत्र क्रिया की गई है, मारण प्रयोग किया गया है, तो उसे क्या करना चाहिए?

 उसे कहीं भी जाने की आवश्यकता नहीं। आपके जो भी इष्ट हों, आप जिनका भी, जिन पर भी भरोसा करते हों, जिस देवता की तरफ आपकी श्रद्धा हो, विश्वास हो, आप उसी देवता का कम से कम एक घड़ी, मैं आपका ज्यादा समय नहीं लेता, एक घड़ी यानी 24 मिनट, 24 मिनट आसन पर बैठकर के उसका मंत्र जाप कर लीजिए, उसके चालीसा का पाठ कर लीजिए, उसकी पूजा कर लीजिए, जो भी आपको रुचिकर लगे।

 क्योंकि कितनी भी तगड़ी नकारात्मक शक्ति हो, सकारात्मक शक्ति से हमेशा ही सामना नहीं कर सकती और भाग जाती है। सकारात्मक शक्ति ही जीतती है क्योंकि वह परमात्मा विभिन्न रूपों में स्वयं ही तो है। तो आप जो है, चाहे हनुमान चालीसा का पाठ कर लीजिए, लगातार करिए, एक दिन भी नागा मत होने दीजिए। 

अपने मन का मनोबल बढ़ाइए, आत्मबल बढ़ाइए। इससे आपका आत्मबल बढ़ेगा। जो नकारात्मक शक्ति, जो तांत्रिक शक्ति आपके ऊपर हावी हुई है, वह आपके सूक्ष्म, स्थूल शरीर तक ही सीमित है। उसका प्रभाव आपके स्थूल शरीर तक है।

 कुछ मामलों में यह सूक्ष्म शरीर तक पहुँच जाती है लेकिन अधिकतर यह शक्ति हमारे अन्नमय कोष तक ही सीमित रहती है, यानी स्थूल शरीर तक सीमित रहती है। और स्थूल शरीर की शुद्धि स्थूल क्रियाओं के द्वारा हम कर सकते हैं। तो यह तंत्र क्रिया फेल हो जाएगी और आप इससे उभर सकते हैं।

दूसरे की दी हुई चीज पर विशेष नजर रखें, विशेष सावधानी बरतें। आप शुद्ध सात्विक आहार का संकल्प ले लें और शुद्ध सात्विक आहार पर रहें। 

आपको गंगा, गीता, गौ, गायत्री और गोविंद, इन पाँच में से किसी का भी आप सेवन करना शुरू कर दीजिए। यह पाँच जो गकार हैं, यह हमारे हिंदू के, हमारी सनातन संस्कृति के स्तंभ हैं। कैसी भी, कितनी भी भयानक से भयानक क्रिया की गई हो, इनके आगे नहीं टिकेगी क्योंकि गौ में भी सभी देवताओं का निवास होता है, गायत्री में सभी देवताओं का निवास है, गोविंद में सभी देवताओं का निवास है और गंगा जी में सभी को पवित्र करने की शक्ति। 

और गीता जो स्वयं भगवान जी के मुख से निकली है, उनकी सामर्थ्य की तुलना नहीं की जा सकती क्योंकि वह स्वयं भगवान के मुख से निकली है। जब भी आप भोजन करें तो भोजन का एक ग्रास छोटा सा लीजिए और भगवान को निवेदित करिए, जिन्हें भी मानते हैं आप, उनको निवेदित कर दीजिए या फिर यह कहिए “त्वदीयं वस्तु गोविन्द तुभ्यमेव समर्पये”।

 भगवान को वह समर्पित कर दीजिए पहला ग्रास, तो कोई भी नकारात्मकता होगी, वह गोविंद को समर्पित हो गई है और वह भोजन आपके लिए अमृत बन गया। चाय, दूध वगैरह पीते हैं तो भगवान का स्मरण कर लीजिए और स्मरण करके तब आप उसे ग्रहण कीजिए। कोई भी नकारात्मक शक्ति आपके शरीर में प्रवेश नहीं कर पाएगी।

सावधानी आपको यह रखना है कि आपको दरगाहों पर नहीं जाना है और किसी से भी आशीर्वाद लेते समय आपको सतर्क रहना है। आशीर्वाद ही लेना है तो सिर्फ अपने गुरु का आशीर्वाद लीजिए, बाकी किसी का आशीर्वाद के लिए आप बाध्य नहीं हैं, आप नहीं लें। 

तो यह जो बातें मैंने आपको बताई हैं, अगर इन्हें आपने फॉलो कर लिया तो तंत्र के मारण प्रयोग से आप बच सकते हैं। बच सकते नहीं हैं, बच जाएँगे। आपको कहीं जाने की आवश्यकता नहीं।

आज के लिए बस इतना ही। मिलूँगा अगले पोस्ट में नई जानकारी के साथ। तब तक के लिए ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय, ओम नमः शिवाय।

kamakhya maran mantra कामाख्या मारण मंत्र एक प्रचंड शत्रु मारण प्रयोग ph.85280 57364

kamakhya maran mantra कामाख्या मारण मंत्र एक प्रचंड शत्रु मारण प्रयोग

 

kamakhya maran mantra कामाख्या मारण मंत्र एक प्रचंड शत्रु मारण प्रयोग

 

kamakhya maran mantra कामाख्या मारण मंत्र एक प्रचंड शत्रु मारण प्रयोग
kamakhya maran mantra कामाख्या मारण मंत्र एक प्रचंड शत्रु मारण प्रयोग

परिचय: चामुंडा तंत्र मंत्र साधना

kamakhya maran mantra कामाख्या मारण मंत्र एक प्रचंड शत्रु मारण प्रयोग जय माँ श्मशान काली, जय काल भैरव, जय बाबा गंगाराम।  आज मैं फिर से आप सभी के बीच में एक बहुत ही प्रचंड और शक्तिशाली शत्रु मारण का एक प्रयोग लेकर आया हूँ। और ये जो प्रयोग और मंत्र हम विधि भी जानते हैं, इसमें मंत्र भी चलेगा, तंत्र भी चलेगा, और यंत्र, तीनों चीज़ का प्रयोग किया गया है।और ये जो मंत्र है, ये कामाख्या माता का मंत्र है और इसमें साथ ही साथ वन दुर्गा भी चलती हैं। ठीक है?

 

वन दुर्गा का रहस्य

 

वन दुर्गा क्या हैं, पहले इसको समझ लेते हैं। पहले देखिए, नव दुर्गा का विवरण आप लोग जानते होंगे, ठीक है? नव दुर्गा का ही प्रारूप, मतलब चांडाल रूप ही वन दुर्गा बोली जाती हैं। ठीक है? जब नव दुर्गा अपना रूप परिवर्तन करती हैं, चांडाल रूप में बनती हैं, विपरीत रूप में चलने लगती हैं, तो उनको नव दुर्गा से वन दुर्गा बन जाती हैं। प्रचंड रूप, भयंकारी रूप चलेगा, उसी का मंत्र हम देने वाले हैं।ठीक है? तो इसमें आपको ज़्यादा कुछ नहीं करना, ये एक दिन की ही क्रिया है, एक रात्रि की क्रिया है, और बहुत ही प्रचंड है। ठीक है? तो इसमें विधि-विधान और क्या-क्या लगने वाला है, क्या विधि-विधान है, जो ए टू जेड चीज़ हम बताएँगे। तो चलिए आगे बढ़ते हैं।

 

आवश्यक सामग्री

 

इसमें सामग्री क्या-क्या चाहिए, उसको आप सभी लोग नोट कर लीजिए और क्या-क्या है, उसको आप सभी लोग ध्यान से सुनिएगा। ठीक है?

  • 9 पान के पत्ते
  • 9 लौंग-इलायची
  • 9 सुपारी
  • थोड़ा सा अक्षत (चावल)
  • एक पानी वाला नारियल
  • लाल वस्त्र
  • श्रृंगार की सामग्री
  • भोग स्वरूप बताशे
  • 9 छोटी सुई
  • आम की लकड़ी
  • धूप (जिसमें लोबान, गूगल, कपूर, काला तिल, अरवा चावल मिक्स हो)
  • काली मिर्च और लाल मिर्च (धूप में मिलाने के लिए)
  • गोरोचन
  • भोजपत्र
  • केसर
  • गंगाजल
  • सरसों का तेल या नीम का तेल
  • दीपक और बाती
  • रुद्राक्ष की माला

 

प्रयोग का विधान और समय

 

इतना सब सामग्री इकट्ठा करने के बाद में आपको इंतज़ार करना है। इस क्रिया को करने का विशेष समय होता है।

 

शुभ मुहूर्त

 

इस क्रिया को आपको नवरात्रि के सप्तमी के दिन या फिर नवमी वाले दिन आपको करना होगा, या फिर मंगलवार या फिर शनिवार के दिन अमावस्या पड़ती है, तो उस दिन इस क्रिया को किया जाएगा।

 

महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय

 

ठीक है? इस क्रिया में, किया जाता है, पहले आप इस क्रिया को करने के लिए शरीर सुरक्षा, आसन कीलन और घेरा मंत्र आपका तगड़ा होना आवश्यक है और गुरु सान्निध्य और गुरु कृपा से, गुरु निर्देशन में इस क्रिया को करना चाहिए। ठीक है? जिसको श्मशान में शरीर सुरक्षा, आसन कीलन, घेरा मंत्र आता है, तो ही जाए।

 

क्रिया विधि

 

  1. शरीर सुरक्षा करके आप सब सामान लेकर घर से निकल जाएँ, स्नान-ध्यान करके, कोई भी शुद्ध वस्त्र धारण करके आप निकल जाएँ। इसमें आसन का कोई बंधन नहीं है। क्रिया करते समय आपकी दिशा दक्षिण रहेगी।
  2. श्मशान में पहुँचकर एक न्यूज़पेपर बिछा लीजिए। उसके ऊपर नौ जगह पान के पत्ते रखें।
  3. नौ पान के पत्तों के ऊपर थोड़ा-थोड़ा अरवा चावल रखें और उसके ऊपर प्रत्येक पान के ऊपर एक-एक लौंग, एक-एक इलायची, एक-एक सुपारी रख दें।
  4. प्रत्येक पान के पत्ते के ऊपर थोड़ा-थोड़ा लाल सिंदूर और एक-एक बताशा रख दीजिए। साथ ही प्रत्येक पान के पत्ते पर एक-एक छोटी सुई भी रख दें।
  5. अब घेरा मंत्र लगाकर सुरक्षा घेरा बना लें।
  6. घेरा लगाने के बाद दीये में नीम या सरसों के तेल का दीपक और नौ अगरबत्ती प्रज्वलित करें।
  7. सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पण करें।
  8. पानी वाले नारियल पर नौ जगह सिंदूर लगाकर उसे लाल वस्त्र में लपेटकर पान के पत्तों के आगे रख दें।

 

मंत्र जाप और यंत्र निर्माण

 

  1. सबसे पहले रुद्राक्ष की माला से ‘ॐ क्रीं कालिकायै नमः’ का एक माला जाप करें, फिर ‘ॐ नमः शिवाय’ का एक माला जाप करें। यदि आपके पास गुरु मंत्र है, तो उसका भी अपनी श्रद्धानुसार (7, 21, 54 या 108 बार) जाप कर लें।
  2. जाप करने के बाद श्मशान काली, श्मशान भैरव, घटवारिन माई, घटवार बाबा और कलुआ मसान को प्रणाम करके आशीर्वाद लें।
  3. अब भोजपत्र पर यंत्र का निर्माण करें। गोरोचन, केसर और गंगाजल को मिलाकर एक स्याही बना लें। इसी स्याही से भोजपत्र पर यंत्र बनाना है। यंत्र के भीतर जहाँ ‘अमुक’ की जगह आएगी, वहाँ पर आपको अपने शत्रु का नाम लिखना है।
  4. जब यंत्र निर्माण हो जाए तो उसे अपने सामने, नौ पान के पत्तों के आगे रख दें।
  5. अब मुख्य मंत्र का दस हज़ार बार जाप करना है।

 

मुख्य मंत्र

 

मंत्र को ध्यान से सुनिए:

ॐ चण्डालिनी कामाख्या वासिनी वन दुर्गे क्लीं क्लीं ठः ठः स्वाहा।

एक बार और सुनिए:

ॐ चण्डालिनी कामाख्या वासिनी वन दुर्गे क्लीं क्लीं ठः ठः स्वाहा।

 

आहुति और अंतिम चरण

 

  1. दस हज़ार बार जाप करने के बाद आम की लकड़ी को प्रज्वलित करके, तैयार की हुई धूप से तीन माला (324 बार) या कम से कम एक माला (108 बार) मंत्र बोलते हुए आहुति दें।
  2. आहुति के बाद, बनाए हुए यंत्र को हाथ में लेकर उस पर 108 बार मंत्र पढ़कर फूँक लगाएँ।
  3. अब उस यंत्र का ताबीज़ बनाकर अपने गले में धारण कर लेना है।

 

प्रयोग का प्रभाव

 

जब आप गले में ताबीज़ धारण कर लेंगे तो आप देखेंगे कि एक महीना या फिर 21 दिन के अंदर-अंदर ही शत्रु का मृत्यु निश्चित हो जाता है। 1001% आपका शत्रु ज़रूर मृत्यु को प्राप्त होगा ही होगा। अब जिस भी तरीके से हो, बीमारी के तरीके से हो या फिर अचानक उसका एक्सीडेंट हो, मतलब 21 दिन से लेकर एक महीने के अंदर में शत्रु का मृत्यु निश्चित होता ही होता है। ठीक है?

तो आज के लिए बस इतना ही। जय माँ श्मशान काली, जय काल भैरव, जय बाबा गंगाराम।

नीम के पत्ती से शत्रु का विनाश neem ke patte se shatru ka vinaash

a close-up of a tree

नीम के पत्ती से शत्रु का विनाश neem ke patte se shatru ka vinaash

नीम के पत्ते से शत्रु बाधा दूर करने की परंपरा: एक सोचने वाला पहलू
नीम के पत्ते से शत्रु बाधा दूर करने की परंपरा: एक सोचने वाला पहलू

नीम के पत्ती से शत्रु का विनाश neem ke patte se shatru ka vinaash अगर व्यक्ति आपको बहुत पेरशान  कर रहा और सब रास्ते  बंद है तब यह प्रयोग को करे बिना वजह  किसी को नुकसान पहुँचाने का इरादा न रखें। कोई भी तांत्रिक प्रयोग बिना गुरु  की सलाह के न करे । हमारे देश में नीम को न सिर्फ औषधीय माना गया है, बल्कि इसे नकारात्मक ऊर्जा से बचाने वाला भी कहा गया है। पुराने जमाने से नीम के पत्ते कई तांत्रिक और लोक प्रयोगों में इस्तेमाल होते आए हैं — खासकर तब, जब कोई व्यक्ति खुद को शत्रु बाधा से घिरा महसूस करता है।

क्यों खास है नीम ?

नीम में एक अजीब-सी शक्ति मानी जाती है – इसकी कड़वाहट और तेज गंध ऐसी होती है जो बुरी शक्तियों को दूर भगाने का काम करती है। कुछ लोगों का मानना है कि ये शत्रु की सोच और चाल को कमजोर कर सकती है।

कुछ पुराने लोक प्रयोग

  1. शत्रु का नाम नीम की पत्तियों पर लिखना:
    सिंदूर या कोयले से शत्रु का नाम लिखकर उन पत्तों को मिट्टी में दबा दिया जाता है। मान्यता है कि जैसे-जैसे पत्ते सूखते हैं, शत्रु की शक्ति भी कमजोर होती जाती है।

  2. नीम की धूनी या हवन:
    नीम की सूखी पत्तियों से धुआं बनाकर घर में घुमाया जाता है। इससे बुरी ऊर्जा दूर होती है – ऐसा लोग मानते हैं।

  3. नीम की कील:
    नीम की लकड़ी से बनी एक कील को खास मंत्रों से सिद्ध कर शत्रु के घर के पास लगाया जाता है। इसे शांति भंग करने का प्रतीक माना जाता है।

कौन-सा मंत्र जपा जाता है?

इन उपायों के दौरान आमतौर पर देवी बगलामुखी का यह मंत्र बोला जाता है:

“ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।”

यह मंत्र उन लोगों के लिए है जो खुद को बहुत परेशान और असहाय महसूस करते हैं।


आख़िर में बात साफ़ है…

इन सब चीजों का मकसद किसी को नुकसान पहुँचाना नहीं होना चाहिए। हम नीम के तांत्रिक पक्ष को एक लोक परंपरा या सांस्कृतिक परछाईं के तौर पर समझ सकते हैं। अगर कोई वाकई परेशानी में है, तो शांति और आत्मबल बढ़ाने के लिए योग, ध्यान और प्रार्थना ज्यादा बेहतर रास्ते हैं।

🙋‍♂️ सवाल उठता है — क्या हम नफरत से शांति पा सकते हैं? शायद नहीं। लेकिन खुद को मजबूत बनाकर ज़रूर पा सकते हैं।

बगलामुखी माता की कहानी – उत्पत्ति, महत्व और पौराणिक कथा devi baglamukhi ki kahani

devi baglamukhi ki kahani बगलामुखी माता की कहानी - उत्पत्ति, महत्व और पौराणिक कथा

devi baglamukhi ki kahani बगलामुखी माता की कहानी – उत्पत्ति, महत्व और पौराणिक कथा

devi baglamukhi ki kahani बगलामुखी माता की कहानी - उत्पत्ति, महत्व और पौराणिक कथा
devi baglamukhi ki kahani बगलामुखी माता की कहानी – उत्पत्ति, महत्व और पौराणिक कथा

बगलामुखी माता की कहानी – उत्पत्ति, महत्व और पौराणिक कथा devi baglamukhi ki kahani दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या माँ बगलामुखी को स्तंभन की देवी कहा जाता है। वे अपने भक्तों के शत्रुओं, बुरी शक्तियों और संकटों को स्तब्ध (पंगु) कर देती हैं। उनका वर्ण स्वर्ण के समान पीला है, वे पीले वस्त्र धारण करती हैं और उन्हें पीली वस्तुएं अत्यंत प्रिय हैं, इसीलिए उन्हें ‘पीताम्बरा’ भी कहा जाता है। उनकी पूजा मुख्य रूप से शत्रुओं पर विजय, मुकदमों में सफलता और सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा के लिए की जाती है।

माँ बगलामुखी की उत्पत्ति से जुड़ी पौराणिक कथा अत्यंत रोचक है, जो उनके प्रकट होने के उद्देश्य को स्पष्ट करती है।

1  बगलामुखी माता की कहानी – devi baglamukhi ki kahani पौराणिक उत्पत्ति कथा

 

यह कथा सत्ययुग काल की है। एक समय ब्रह्मांड में एक विनाशकारी तूफान उठा। यह तूफान इतना शक्तिशाली था कि ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो यह संपूर्ण सृष्टि को निगल जाएगा। इस विनाशकारी दृश्य को देखकर सभी देवता चिंतित हो गए और सृष्टि के रक्षक भगवान विष्णु के पास सहायता के लिए पहुँचे।

भगवान विष्णु ने देवताओं को आश्वासन दिया और इस संकट का समाधान खोजने के लिए सौराष्ट्र प्रदेश (वर्तमान गुजरात) के हरिद्रा सरोवर के किनारे पहुँचे। वहाँ उन्होंने सृष्टि के कल्याण के लिए कठोर तपस्या आरंभ की। वे माँ भगवती त्रिपुरसुंदरी को प्रसन्न करने के लिए तप कर रहे थे।

भगवान विष्णु की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर, उस हरिद्रा सरोवर से एक दिव्य तेजपुंज प्रकट हुआ। उस तेजपुंज में से मंगलवार के दिन, चतुर्दशी तिथि को, अर्द्धरात्रि के समय एक देवी का प्राकट्य हुआ। वे देवी स्वर्ण के समान कांति वाली थीं, पीले वस्त्रों से सुशोभित थीं और उनका स्वरूप अत्यंत दिव्य था। प्रकट होते ही उस देवी ने अपनी स्तंभन शक्ति से उस महाविनाशकारी तूफान को तुरंत शांत कर दिया।

सृष्टि को संकट से उबारने वाली यही देवी माँ बगलामुखी कहलाईं। ‘बगला’ शब्द संस्कृत के ‘वल्गा’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ है ‘लगाम’। ‘मुखी’ का अर्थ है ‘मुख वाली’। इस प्रकार, बगलामुखी का अर्थ है ‘वह देवी जिनके मुख में किसी भी गति को नियंत्रित करने या रोकने की शक्ति है’। उन्होंने अपनी शक्ति से तूफान की गति पर लगाम लगा दी थी। भगवान विष्णु और समस्त देवताओं ने उनकी स्तुति की और तभी से वे सृष्टि में ‘बगलामुखी’ के नाम से पूजी जाने लगीं।

 

2 बगलामुखी माता की कहानी  | Devi baglamukhi ki kahani  |  एक अन्य कथा: मदन नामक असुर का वध

 

एक और प्रचलित कथा के अनुसार, सतयुग में मदन नामक एक शक्तिशाली असुर था। उसे वाक्-सिद्धि का वरदान प्राप्त था, अर्थात वह जो कुछ भी कह देता था, वह सत्य हो जाता था। अपनी इस शक्ति का दुरुपयोग कर वह निर्दोष प्राणियों और देवताओं को कष्ट पहुँचाने लगा। वह अपनी वाणी से ही लोगों का संहार कर देता था।

उसके अत्याचारों से त्रस्त होकर सभी देवता माँ भगवती की शरण में गए। देवताओं की प्रार्थना सुनकर माँ बगलामुखी प्रकट हुईं। उन्होंने उस असुर मदन को युद्ध के लिए ललकारा। जब असुर ने देवी को नष्ट करने के लिए अपनी वाक्-सिद्धि का प्रयोग करना चाहा, तो माँ बगलामुखी ने तुरंत उसकी जीभ पकड़कर खींच ली, जिससे उसकी बोलने की शक्ति स्तब्ध हो गई। 

वाणी की शक्ति के बिना वह पंगु हो गया और देवी ने उसका वध कर दिया। यही कारण है कि माँ बगलामुखी की कई मूर्तियों और चित्रों में उन्हें असुर की जीभ खींचते हुए दर्शाया जाता है, जो वाणी को स्तंभित करने की उनकी शक्ति का प्रतीक है।

 

पूजा का महत्व

 

माँ बगलामुखी की उपासना करने वाले साधक को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं:

  • शत्रु नाश: माँ अपने भक्त के शत्रुओं की बुद्धि, गति और वाणी को स्तंभित कर देती हैं, जिससे वे कोई हानि नहीं पहुँचा पाते।
  • मुकदमों में विजय: अदालती मामलों और कानूनी विवादों में विजय के लिए उनकी पूजा अचूक मानी जाती है।
  • वाक्-सिद्धि: माँ की कृपा से साधक को वाणी की सिद्धि प्राप्त होती है, जिससे उसकी बातें प्रभावशाली और सत्य साबित होती हैं।
  • नकारात्मक शक्तियों से रक्षा: तंत्र-मंत्र, बुरी नजर और अन्य सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाओं से माँ अपने भक्त की रक्षा करती हैं।

माँ बगलामुखी की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है। भक्त पीले वस्त्र पहनकर, पीले आसन पर बैठकर, हल्दी की माला से उनके मंत्रों का जाप करते हैं और उन्हें पीली वस्तुएं जैसे पीले फूल, चने की दाल का प्रसाद और पीली मिठाई अर्पित करते हैं।

संक्षेप में, माँ बगलामुखी भक्तों को अभय प्रदान करने वाली और दुष्टों का दमन करने वाली एक अत्यंत शक्तिशाली देवी हैं। वे आज भी अपने भक्तों की हर संकट से रक्षा करती हैं।

जय माँ बगलामुखी!

what is betal बेताल क्या होता है कहाँ पाया जाता है और ऐतिहासिक तथ्य ph.85280 57364

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what is betal बेताल क्या होता है कहाँ पाया जाता है और ऐतिहासिक तथ्य ph.85280 57364

 what is betal बेताल क्या होता है कहाँ पाया जाता है और ऐतिहासिक तथ्य ph.85280 57364 भारतीय पौराणिक कथाओं और लोककथाओं का संसार अनगिनत रहस्यमयी और आकर्षक पात्रों से भरा पड़ा है। इन्हीं पात्रों में से एक है ‘बेताल’, जिसे ‘वेताल’ भी कहा जाता है। बेताल का नाम सुनते ही हमारे मन में राजा विक्रमादित्य और उनके कंधे पर बैठे बेताल की छवि उभर आती है, जो हर बार एक नई कहानी और एक कठिन प्रश्न के साथ राजा की बुद्धि और न्याय की परीक्षा लेता है। लेकिन बेताल केवल एक कहानी सुनाने वाला भूत नहीं है, बल्कि वह ज्ञान, रहस्य और नैतिकता का प्रतीक है।

कौन है बेताल ? what is betal ?

शाब्दिक रूप से, ‘वेताल’ संस्कृत का शब्द है, जिसका संबंध उन आत्माओं या प्राणियों से है जो शवों (मृत शरीरों) में प्रवेश कर उन्हें अस्थायी रूप से जीवित कर देते हैं। ये साधारण भूत-प्रेत से अलग होते हैं। बेताल को अक्सर श्मशान घाट में पेड़ों, विशेषकर पीपल या बरगद के पेड़ पर उल्टा लटका हुआ चित्रित किया जाता है।

इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये केवल एक डरावने प्राणी नहीं हैं, बल्कि इनके पास अपार ज्ञान, तर्क शक्ति और भविष्य देखने की क्षमता होती है। वे मानव स्वभाव और धर्म-अधर्म की गहरी समझ रखते हैं।

बेताल की प्रमुख विशेषताएँ

  1. शवों पर नियंत्रण: बेताल की सबसे प्रमुख शक्ति किसी मृत शरीर में प्रवेश करके उसे अपनी इच्छानुसार चलाना है। शरीर भले ही मृत हो, लेकिन बेताल उसे बोलने, चलने और यहाँ तक कि लड़ने में भी सक्षम बना देता है।
  2. अपार ज्ञान: बेताल त्रिकालदर्शी होते हैं, यानी वे भूत, वर्तमान और भविष्य की घटनाओं को जानते हैं। यही कारण है कि उनकी कहानियाँ ज्ञान और रहस्यों से भरी होती हैं।
  3. उल्टा लटकना: लोककथाओं में बेताल को हमेशा पेड़ से उल्टा लटका हुआ दिखाया जाता है, जो उनकी अलौकिक और प्रकृति के नियमों से परे होने की स्थिति को दर्शाता है।
  4. नैतिक प्रश्न: बेताल की कहानियों का अंत हमेशा एक पहेलीनुमा नैतिक प्रश्न से होता है, जो श्रोता को धर्म, न्याय और कर्तव्य की दुविधा में डाल देता है।

विक्रम और बेताल की अमर कथा

बेताल का सबसे प्रसिद्ध वर्णन ‘बेताल पच्चीसी’ (वेतालपंचविंशति) नामक कथा संग्रह में मिलता है। यह कथा राजा विक्रमादित्य के शौर्य, धैर्य और न्यायप्रियता की परीक्षा है।

कहानी के अनुसार, एक तांत्रिक राजा विक्रमादित्य से एक अनुष्ठान के लिए मदद मांगता है। वह राजा को श्मशान में एक पेड़ पर लटके बेताल को लाने का कार्य सौंपता है। तांत्रिक की शर्त होती है कि राजा को बेताल को लाते समय पूरी तरह मौन रहना होगा। यदि राजा एक भी शब्द बोला, तो बेताल वापस उड़कर पेड़ पर जा लटकेगा।

राजा विक्रम अपनी तलवार से बेताल को उतारकर अपने कंधे पर लादकर चल पड़ते हैं। रास्ता लंबा और सुनसान होता है, इसलिए बेताल राजा का मौन तुड़वाने के लिए उन्हें एक कहानी सुनाना शुरू करता है। हर कहानी के अंत में, बेताल राजा के सामने एक ऐसा जटिल प्रश्न रखता है, जिसका उत्तर दिए बिना राजा रह नहीं पाते, क्योंकि एक न्यायप्रिय राजा होने के नाते वे अन्याय होते नहीं देख सकते। जैसे ही राजा सही उत्तर देने के लिए अपना मुँह खोलते हैं, शर्त टूट जाती है और बेताल वापस पेड़ पर जा पहुँचता है।

यह सिलसिला चौबीस बार चलता है। हर बार राजा अपनी दृढ़ता से बेताल को फिर पकड़कर लाते हैं और हर बार बेताल की पहेली का उत्तर देकर उसे खो देते हैं। पच्चीसवीं और अंतिम कहानी में, बेताल राजा के ज्ञान और धैर्य से इतना प्रभावित होता है कि वह तांत्रिक के बुरे इरादों का खुलासा कर देता है और राजा को उसे हराने का उपाय बताता है।

सांस्कृतिक महत्व और प्रतीक

विक्रम-बेताल की कहानियाँ केवल मनोरंजन के लिए नहीं हैं, बल्कि ये नीतिशास्त्र, राजनीति और धर्म के गहरे पाठ पढ़ाती हैं।

  • ज्ञान का प्रतीक: बेताल उस गुरु का प्रतीक है जो कठिन प्रश्न पूछकर अपने शिष्य के ज्ञान और विवेक को परखता है।
  • न्याय की आवाज: बेताल के प्रश्न समाज की उन जटिल परिस्थितियों को दर्शाते हैं जहाँ सही और गलत का निर्णय करना अत्यंत कठिन होता है।
  • आधुनिक संस्कृति में: बेताल की कहानियों ने पीढ़ियों को प्रेरित किया है। रामानंद सागर द्वारा निर्मित प्रसिद्ध टीवी धारावाहिक ‘विक्रम और बेताल’ ने इस कथा को घर-घर पहुँचाया। इसके अलावा, कॉमिक्स, फिल्मों और किताबों में भी बेताल को कई रूपों में चित्रित किया गया है।
निष्कर्ष

संक्षेप में, बेताल भारतीय लोककथाओं का एक बहुआयामी पात्र है। वह एक पिशाच या भूत से कहीं बढ़कर है। वह एक ज्ञानी, एक परीक्षक और एक मार्गदर्शक है, जो अपनी रहस्यमयी कहानियों और चुनौतीपूर्ण प्रश्नों के माध्यम से हमें आज भी नैतिकता और विवेक के पथ पर सोचने के लिए मजबूर करता है। बेताल का चरित्र यह सिखाता है कि सच्चा ज्ञान केवल शास्त्रों में नहीं, बल्कि जीवन की जटिल पहेलियों को सुलझाने में निहित है।

Brahm Betal Sadhana ब्रह्म बेताल साधना सबसे शक्तिशाली बेताल ph.85280 57364

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Brahm Betal Sadhana ब्रह्म बेताल साधना सबसे शक्तिशाली बेताल जय श्री महाकाल! आज मैं आप लोगों के लिए एक बहुत ही बेहतरीन साधना लेकर आया हूँ। यह साधना अपने आप में गुप्त साधना है और गुरुमुखी साधना है। यह बहुत प्रचंड साधना, यानी कि महाप्रचंड बोल सकते हो। शायद मेरा मानना है कि  इंटरनेट  पर पहली बार,  पहली बार आपको देखने को मिलेगी।यह जो साधना है, खेतेश्वर बेताल, वीर बेताल, अगिया बेताल, जो अपने आप में एक बहुत ही प्रचंड साधना है, आप अनुमान भी नहीं लगा सकते कि यह कितनी पावरफुल है।

एक बार यदि कोई साधक हमारी इस साधना को कर लेता है, तो श्मशान का ऐसा कोई कार्य नहीं है जो वह इस साधना के माध्यम से नहीं कर सकता हो, तंत्र बाधा काटनी हो, वशीकरण, मारण, उच्चाटन। यह गुरुमुखी साधना है।

यह जो मैं साधना यूट्यूब पर दे रहा हूँ, यह ऐसी साधना देने की नहीं होती है। क्योंकि इन साधनाओं को अगर कोई गलत तरीके से, मतलब पूरे विधि-तरीके से अगर इंसान न करे, तो इसका घातक परिणाम भुगतना पड़ जाता है। क्योंकि यह जो मंत्र होते हैं, यह गुरुमुखी मंत्र हैं।

इसमें बहुत ही ऊर्जा और यह तीक्ष्ण कार्य करते हैं। मंत्र जो गुरु-मुख से लिए होते हैं, वे जितनी जल्दी इफ़ेक्ट दिखाते हैं, उतनी ही जल्दी उनका साइड-इफेक्ट भी होता है।

यह विक्रम बेताल जो है, बहुत उच्च कोटि की साधना है। यह जो विक्रम बेताल है, यह वचनबद्ध होता है और एक बात बता दूँ, इसकी खासियत यह है कि यह रूप बदलने में माहिर है।

अगर आप इससे कहो, आपको एक बार सिद्ध हो गई, किसी को मतलब दिखाना है कि भई मेरे पास माँ काली हैं, तो यह माँ काली का रूप धारण कर लेता है, भैरव का रूप धारण कर लेता है, यहाँ तक कि परम शिव का भी रूप धारण कर लेता है।

यह बहुत प्रचंड साधना है, विक्रम बेताल यानी मायावी बेताल, यह पलक झपकते ही कार्य-सिद्धि कर देता है।

लेकिन साधना का विधान बता देता हूँ, कोई भी साधक इस साधना को अगर एक बार शुरू कर ले, तो पूरी करके ही छोड़ेगा, मतलब समाप्ति करेगा। बीच में अगर छोड़ देता है, तो उसके साथ कुछ भी हो सकता है।

कुछ भी का मतलब है कि मृत्यु हो सकती है या कुछ भी ए टू जेड अनहोनी हो सकती है उसके साथ। ऐसी साधना को बीच में नहीं छोड़ा जाता है और गुरु महाराज के निर्देशन में और गुरु की देख-रेख में ही ऐसी साधना को करना चाहिए, वरना 100% नुकसान देगा।

लेकिन यह अपने साधक से जितनी जल्दी प्रसन्न होता है, उससे ज्यादा जल्दी रूठता भी है। यह हर कार्य करता है, जिसका आप अनुमान भी नहीं लगा सकते कि कितनी कार्यक्षमता है।

तो काफी समय से सोच रहा था आप लोगों को साधना दूँ। आज वैसे भी टाइम नहीं मिल पाता, सिविल की तैयारी में लगा था मैं, तो सोचा आपके लिए लेख  बना दी जाए, कोई-न-कोई नया टॉपिक दे दिया जाए। तो इस साधना को आप नवरात्रि में भी कर सकते हैं।

Brahm Betal Sadhana ब्रह्म बेताल साधना विधि 

नवरात्रि से शुरू कीजिए, 21 दिन साधना कीजिए। आम दिनों में यह साधना आपको 21 या 41 दिन करनी पड़ेगी। अगर आप इस साधना को आम दिनों में करते हैं तो, अब इसका विधान बता देता हूँ। मैंने फायदे और नुकसान दोनों बता दिए हैं। इस साधना को आपको रात्रि 10 बजे से शुरू करनी है। वस्त्र सफ़ेद या काले, यह आप निर्वस्त्र होकर भी कर सकते हैं।

माला रुद्राक्ष की, दिशा दक्षिण और आपका जो दीपक रहेगा, सरसों के तेल का रहेगा। यह साधना श्मशान में कर सकते हैं या फिर आप अपने घर पर ही करना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको एक एकांत कमरा चाहिए।

जब तक आप साधना करेंगे, यानी साधना काल 21 दिन या 40 दिन, उस कमरे में अन्य व्यक्ति का प्रवेश वर्जित है। आप ही जाएँगे।

साधना का एक विधान और है, साधना करेंगे तो हमेशा आपको नीचे सोना पड़ेगा धरती पर, न कि पलंग पर या तखत पर। नॉनवेज का इस्तेमाल नहीं करना है, न ही कोई नशा करना है।

और जो दीपक सरसों के तेल का रहेगा, वह खड़ी बाती का रहेगा, बाती सीधी होनी चाहिए। इसमें भोग में आपको शराब, बकरे की कलेजी, कुछ गुलाब के फूल, कोई-सा भी काला फूल, इतना रख लें।

प्रतिदिन एक नींबू काटकर, सिंदूर लगाकर, प्रतिदिन एक नींबू की बलि देनी है। बस इतना-सा विधान है इसका, कोई ताम-झाम की ज्यादा जरूरत नहीं है। और लास्ट वाले दिन 108 आहुति आपको बकरे के मांस की करनी है।

यह साधना इतनी डरावनी है जिसका अनुमान भी नहीं लगा सकते और जब बेताल की साधना होती है, तो अनुभव में मांस की खुशबू आनी आती है, मांस-मदिरा की खुशबू आएगी। जैसे श्मशान में कोई अंतिम संस्कार करके आते हैं, मुर्दा जलते हैं, मांस जलने की खुशबू आती है, इसी प्रकार खुशबू आती है। साधक को साधना में कोई भी नया साधक तो कर ही नहीं सकता। दूसरी बात, यह साधना, बस इसमें नियम बहुत कठोर हैं।

एक तो साधना कक्ष में कोई जाए नहीं अगर घर पर करें तो, बाहर का खाना नहीं खाना, धरती पर सोना है इसमें। और साधना में चल जाता है, लेकिन इस पर धरती पर ही शयन करना है। तो विधान आपका हो गया।

Brahm Betal mantra  ब्रह्म बेताल मंत्र 

जिसको भी साधना करनी है, वह कर सकता है, संपर्क करे। मंत्र यहाँ नहीं दूँगा, सारी चीजें क्लियर करने की नहीं होती हैं। अगर सही से इसका इस्तेमाल किया जाए तो यह बहुत उपयोगी है और गलत तरीके से अगर इसे गलत हाथों में दे दिया जाए, तो पता नहीं किस-किस का बुरा करेगा और अपना तो बुरा करेगा ही पहले।

काफी मैंने मंत्र दिए हैं, जिसको मंत्र चाहिए, हमारी संस्था के नंबर पर कांटेक्ट करे, जानकारी प्राप्त करे। साधना करने के लिए अपने जो भी गुरु हैं, उनके निर्देशन में साधना करे। तो मंत्र नहीं दे रहा हूँ, जिसको चाहिए वह हमारी संस्था के नंबर पर कांटेक्ट कर सकता है, मंत्र प्राप्त कर सकता है।

Hanuman Betal Sadhna हनुमान बेताल साधना 11 दिन में सिद्ध होगा ph.85280 57364

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Hanuman Betal Sadhna हनुमान बेताल साधना 11 दिन में सिद्ध होगा ph.85280 57364 जय माँ कामाख्या, जय माँ जगदंबा। दोस्तों, सभी साधक-साधिकाओं का स्वागत है  gurumantrasadhna.com में। दोस्तों, आज मैं आप लोगों के लिए एक बहुत बड़ी शक्ति की साधना लेकर आज उपस्थित हुआ हूँ, और यह जो शक्ति की साधना बताने जा रहा हूँ, यह बहुत लोगों के रिक्वेस्ट पर डालने जा रहा हूँ। वो लोग जो बेताल साधना को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानते हैं, कई लोगों का सवाल है कि, “गुरुजी,

 

गुरुजी,सबसे ताकतवर बेतालों में से कौन है?” हनुमान बेताल साधना  Hanuman Betal Sadhna

और “कोई भी ताकतवर बेताल की साधना बताइए जो बलशाली हो, ठीक है, और हर आज्ञा का पालन करे, जो एक झटके में उसका काम पूरा करके दिखाए, और ताकतवर होने के साथ हमें नॉलेज भी दे सके।” और कुछ साधकों का ऐसा सवाल आया कि, “

तो उसी के लिए ही, इन दोनों के जो फासले हैं, उसको दूर करने के लिए आज हनुमान बेताल की साधना बताने आप लोगों को जा रहा हूँ, क्योंकि कई लोग इससे अनभिज्ञ हैं कि हनुमान बेताल, बेतालों में से कौन से नंबर में आते हैं, तो सबसे पहला होता है, बेतालों में सबसे ताकतवर बेताल है ग्यारह बेतालों में से श्मशान बेताल, और दूसरा होता है, जो दो नंबर में आएगा, वो होता है हनुमान बेताल,

कई लोग बोलते हैं कि, “गुरुजी, हनुमान बेताल Hanuman Betal Sadhna का प्रत्यक्ष होता है या नहीं? या फिर उनको हम क्या अदृश्य रूप में पूज सकते हैं?” देखो, यह एक ऐसी चीज़ है, इसका ऐसा विधान होता है जो आपको वह दिखाई नहीं देता, लेकिन आपके साथ चौबीसों घंटे अदृश्य रूप में रहता है। लेकिन उसको प्रत्यक्ष भी किया जा सकता है।

और कई लोगों का ऐसा सवाल है कि, “गुरुजी, कई लोग बताते हैं कि हनुमान बेताल देखने में इतने भयानक होते हैं, जिसको देखकर आप मर भी सकते हो। क्या ऐसा संभव है? क्या उसका कोई सौम्य रूप नहीं आ सकता?”

Hanuman Betal Sadhna हनुमान बेताल साधना सौम्य रूप में करना संभव है 

लेकिन इसका जवाब मैं आपको इस प्रकार दूँगा कि जो बेताल होते हैं, वो शिव के अंश हैं, शिव का एक रूप हैं, यह समझ सकते हैं। तो उसके हिसाब से क्या होता है, सत्यम शिवम् सुंदरम। तो उसमें भी एक सौम्य रूप होता है। जैसे एक भयानक रूप है, उसी प्रकार एक सौम्य रूप भी होता है, जो इतना खूबसूरत होता है कि राजकुमार से कम नहीं, एक राजा से कम नहीं, एक तेजस्वी योद्धा से कम नहीं।


तो बताते हैं इसकी विधि को, जानते हैं हम लोग अभी कि विधि इस प्रकार क्या होती है, कैसे किया जाएगा, कैसे इसको पूरा किया जा सकता है, कितने मंत्र होते हैं, हर चीज़ मैं आप लोगों को बता रहा हूँ, आप यहाँ पर सुनो। सबसे पहला होता है कि बेताल साधना को संपन्न करने के लिए आप लोगों के लिए विशेष मुहूर्त क्या-क्या होते हैं?

Hanuman Betal Sadhna हनुमान बेताल साधना  को संपन्न करने के लिए आप लोगों के लिए विशेष मुहूर्त क्या-क्या होते हैं?

किसी भी चंद्रग्रहण का दिन सबसे अच्छा माना गया है, दूसरा होता है किसी भी अमावस्या, या फिर जिस दिन मंगलवार या शनिवार पड़े, उस दिन भी आप कर सकते हैं। या फिर शिवरात्रि, या फिर होली के दिन, या फिर आप दीपावली के दिन भी कर सकते हो। यह विशेष मुहूर्त होते हैं कुछ, जिसमें आप बेताल की साधना Hanuman Betal Sadhna  कर सकते हो। शिवरात्रि हो तो और बढ़िया होता है, दीपावली हो तो और बढ़िया होता है, ग्रहण के दिन हो तो और बढ़िया है। यह तीनों दिन सबसे अच्छे होते हैं, या फिर श्रावण महीने में भी कर सकते हो,


Hanuman Betal Sadhna  – हनुमान बेताल साधना में क्या-क्या सामग्री आपको लेनी है

 

तो अभी बढ़ते हैं कि विधि में क्या-क्या सामग्री आपको लेनी है। सबसे पहला होता है कि यह कौन सी जगह में करना पड़ेगा आप लोगों को, यूँ तो होता है कि हनुमान बेताल की अगर साधना करनी है, तो आप लोगों को उजाड़ जगह में करना होगा, जंगल में करना होगा, वटवृक्ष के नीचे करना होगा, या फिर पीपल के वृक्ष के नीचे,

पीपल में करोगे तो जल्दी से आपको सफलता हासिल होगी, अगर मान लो आप बाहर नहीं कर सकते, तो एक ऐसा कमरा लेना होगा जो मिट्टी का हो, नीचे का जो भू-तल हो, वो मिट्टी का हो। ऐसे कमरे में आप कर सकते हैं, लेकिन कमरा घर के साथ जुड़ा हुआ नहीं होना चाहिए। कई लोग बताते हैं घर के साथ जुड़ा हो, ऐसा नहीं है, घर से अलग होना पड़ेगा वो कमरा, तीसरा हो गया कि अगर मान लो आप लोगों को इसमें और प्रभावी बनाना है, तो उसके लिए आप लोग श्मशान का भी चुनाव कर सकते हो, यह तीन जगह हो जाती हैं,

अभी इसका जो समय होता है करने का, वो होता है अर्धरात्रि, अर्थात मैंने बताया ही है कि 12:00 से लेकर 12:30 बजे के अंदर, उसके बीच में कर सकते हो। अभी वस्त्र आपको क्या लेने होंगे? देखो, अगर इसके वस्त्र आप लोग लेने के लिए जाओगे, तो सिर्फ काला लो, बिना सिले वाला, और काला ऊनी आसन लेना होगा। लेकिन याद रखना, इसमें कोई भी वस्तु चमड़े की पहन के नहीं जा सकते।

चप्पल, जूता, कुछ भी पहन रहे हो, तो अगर वह चमड़े का होगा, वो आप लोगों को नहीं लेना है, वो चमड़े की कोई भी वस्तु आप लोग पास मत रखो। और जितने भी दिन साधना करोगे, उतने ही दिन कोई भी चमड़े की वस्तु का कोई भी उपयोग मत करना,


यह हो गया एक चीज़। दूसरा होता है कि इस साधना में माला आपको क्या लेनी होगी, इसमें आप लोग रुद्राक्ष की माला लोगे, ठीक है, अगर घर में कर रहे हो तो, और घर में लेने की सामग्री भी अलग होती है। लेकिन अभी मैं आप लोगों को बता क्या रहा हूँ?

विधान, जो बाहर और श्मशान में करने का नियम है। तो उसके लिए आपको दो माला होंगी। एक तो होगा कमलगट्टे की माला, जो सात्विक विधि से या फिर तामसिक विधि से संस्कारित की जा चुकी हो।

अन्यथा आप लोग जो ओरिजिनल काले हकीक की माला होती है, वो काले हकीक की माला से जप कर सकते हो, या फिर मुंड माला से भी जप कर सकते हो, या फिर अस्थि माला से भी जप कर सकते हो, तो यह तीन-चार प्रकार की मालाएं हैं, इससे आप कर सकते हो: अस्थि माला, कमलगट्टे की माला, काला हकीक और मुंड माला।

यह चार मालाओं को आप लोग इस्तेमाल कर सकते हो, कोई दिक्कत नहीं है इसमें, और इसमें जो यह विधान है, यह तामसिक है।

इसमें आप उसको भोग दोगे क्योंकि बेताल होता है राजसिक शक्ति, रजोगुण इसके अंदर होते हैं, जो सात्विक, रजोगुणी भी है। सात्विक भोजन लोगे तो भी कर सकता है, अगर तामसिक वृत्ति का है, वो भी करेगा, बेताल सिर्फ तामसिक में ही नहीं आता। इसकी एक ही विधि होती है जो घर में करोगे, उसमें सात्विक भोग दिया जाता है, जैसे मिठाई हो गया, फल हो गया, इत्यादि चीजें है 


Hanuman Betal Sadhna  हनुमान बेताल – साधना में कौंन सी
सामग्री  जरूरत होगी 

 

तो अभी आप लोगों को इसमें क्या-क्या ले जाना है, श्मशान में करोगे या फिर बाहर में करोगे? सबसे पहला होता है, जो आसन लोगे वो कुशा का लो। उसमें, जिस प्रकार आप लोगों को मैंने एक में बताया था, यह कंकालेश्वर में, तो उसमें आप लोग कुशा का आसन लो, उस पर काला ऊनी आसन, उस पर बिछा लो, उस पर बैठो। ठंड का मौसम है, अगर कोई इसी समय करता है, तो इस प्रकार करेगा, और दूसरा होता है जो भोग में आप लोगों को साथ ले जाना होगा, वो क्या-क्या लेना होगा?

एक तो होगा आप लोगों को हर दिन एक बोतल शराब ले जाना होगा, दूसरा होता है आप लोगों को एक मुर्गा ले जाना होगा जो लाल हो या फिर काला हो। ऐसा काला मुर्गा, लाल मुर्गा, यह कुछ भी ले जाओ, तो मुर्गा एक ले जाओ और एक जो दारू है, वो ले जाओ। एक मीठा पान लेकर जाना है, उसके बाद आप लोगों को क्या करना होगा कि बकरे का सिर भी ले जाना है, बकरे का इसमें छाग भी ले जाना होगा। और दीया दो ले जाना है।

एक में होगा सरसों का तेल और एक जलेगा आप लोगों को क्या होता है, उसे, च़र्बी से, अभी आप लोगों को करना क्या है कि ये जो आप लोग चीजों को ले जाकर, उसी के साथ ही साथ आप लोग क्या ले जाना है कि भस्म ले जाना होगा, अभी देखिए, अगर किसी साधक ऐसा पूछे कि, “गुरुजी, हम सिटी में रहते हुए कहाँ मिलेगा?”

फिर, “गांव में रहते हैं, कभी-कभार यहाँ पर शहरों के श्मशान में ज्यादा लोग जलाते हैं, तो वहाँ पर राख मिल जाता है। लेकिन यहाँ पर कभी-कभी देहाती लोग मरते हैं, तो हमें भस्म कैसे प्राप्त होगा?” अगर मान लो भस्म नहीं मिलता है, तो आप लोग एक चीज़ ले सकते हो, वो होता है जल। लेकिन जल में जो होगा, वो गंगा का पानी थोड़ा-सा मिश्रण करके ले जाना है,


Hanuman Betal Sadhna हनुमान बेताल साधना विधि 

इसमें सुरक्षा घेरा तगड़ा लगेगा। एक तो होता है सुरक्षा मंत्र को सिद्ध करने के बाद, फूँक मारकर उसको संस्कारित करके, उसी से घेरा खींचा जाता है। दूसरा होता है, वो पानी से, आपको सुरक्षा का पानी के ऊपर दम करके मंत्र को, और यह जो वस्तु ले जाकर, उसमें छुरा या चाकू भी लेकर जाना है। 

तो आप लोगों को सबसे पहले क्या होता है, शिव के मंत्र को एक माला जप करना है, सबसे पहले, एक माला जप करने के बाद… देखो, एक माला के लिए इसमें आप लोग एक रुद्राक्ष की माला ले जाओ, ठीक है, जो सात्विक विधि से संस्कारित हो।

तो उस माला से ही शिव के मंत्र का जप करो, लेकिन उनसे भी पहले गणेश जी की स्तुति कर लेना, उनको सबसे पहले पूज लेना है उनका, उन्हें याद कर लेना है। उसके बाद साधना की सफलता हेतु उनको प्रार्थना करो।

उसके बाद शिव को आप लोग, उनका स्मरण करके दीया जलाओ, उसमें कौन-सा दीया जलाने के लिए मंत्र पढ़ा जाता है, ज्योत जलाने का वो मंत्र आप लोगों को बता दूँगा।

उसके बाद ज्योत जलाकर उनका एक माला जप करो। उसके बाद होता है हनुमान बेताल का आवाहन करके बेताल का जो दीया होता है, वो आप लोगों को जलाना पड़ता है।

यह साधना दो दिशा की ओर मुँह करके आप लोग कर सकते हो: एक होता है उत्तर, दूसरा होता है दक्षिण। यह दोनों दिशा की ओर मुँह करके आप कर सकते हो, इसमें कोई बंधन नहीं है।

कई लोग बताते हैं कि दक्षिण दिशा की ओर ही मुँह करके बैठना है, लेकिन ऐसी चीज़ नहीं है। दक्षिण करो या उत्तर करो, दोनों में से एक का चुनाव कर लो, बस उस तरफ आप लोगों को करना होगा, जो आप लोग दीयों को जलाओगे, एक दीया को आप घेरे के बाहर रखो, लेकिन जो आप लोग हनुमान बेताल Hanuman Betal Sadhna  का दीया सुरक्षा घेरे के अंदर जलाओ।

अगर मान लो ऐसा होता है कि तेल खत्म हो गया तो उसमें च़र्बी खत्म हुई तो दे सकते हो, तो च़र्बी थोड़ी-सी इतनी ले जाओ कि कम हो तो भी आप लोगों को कोई दिक्कत न हो, तो उसमें डाल सको। च़र्बी को पिघलाकर ले जाएं तो और बढ़िया है, तेल की तरह काम करेगी,


तो जैसे ही दीया जला दो, उसमें आप लोगों को क्या करना होगा कि यह जो लोबान होता है, लोबान का धूप लेकर जाना है, या फिर लोबान ही ले जाओ।

थोड़ा-सा कोयला जलाकर उस पर जला देना है, और सामने आप लोगों को एक केले का पत्ता ले जाना है, जो कोमल पत्ता हो जाता है, तो उस केले के पत्ते के ऊपर जो देसी दारू है, वो आप लोगों को रखना होगा, जो बोतल है दारू की, और वो बोतल को खोल के रखना होगा, उसके बाद जैसे उनका आवाहन कर लिया, उनका एक आकर्षण मंत्र होता है बेताल का।

उस बेताल का आकर्षण मंत्र को आप लोगों को इसमें आपको सात माला जप करना होगा, और हाँ, एक चीज़ भूल गया मैं आप लोगों को बताना कि शिव के मंत्र को जप करने के बाद गुरू मंत्र का आपको एक माला जप करना होगा, और जैसे यह करोगे, तब माँ काली का आवाहन करो, आवाहन के बाद आप लोगों को बेताल का जो आकर्षण मंत्र है। 

उसको आपको सात माला जप करना होगा, इस सीरियल से आप लोगों को आना होगा, लाइन के हिसाब से। तो उसका जप सात माला जैसे ही हो गया, उसके बाद आप लोग जो मुर्गा ले गए थे न, उसको बलि देना है, उसका सिर काटकर उसमें बस रख देना है। 

सिर को भी रख देना है, बस वो कर देना है। अगरबत्ती जलाने की जरूरत नहीं है, बस जो लोबान जलाया है, वही सही है, तो उसके बाद आप लोगों को करना है कि मूल मंत्र का जप करना होगा। अभी मूल मंत्र कितना जप करना है आप लोगों को?

हर रोज़ इक्कीस माला जप करना होगा इसमें भी, एक होता है विधान, जो सात्विक विधि से, उसमें आप लोगों को 51 माला जप करना पड़ता है, लेकिन इसमें आप लोग सिर्फ इक्कीस माला जप करोगे, तो यह समझ लो, कुल मिलाकर 28 माला, उसके आकर्षण मंत्र के साथ, बाकी गुरू मंत्र और शिव का मंत्र अलग हो गया, तो आप लोगों को हर रोज़ 36 माला जप करना होगा, पूरा कुल मिलाकर।

लेकिन जब यह सामग्री को लेकर वो चीजों को स्थापित कर दोगे उस स्थान में, तो आप लोगों को क्या करना होगा, सुरक्षा घेरा भी खींचना है। बिना सुरक्षा घेरे के इस साधना को कभी भूल से भी मत करना।

सुरक्षा के साथ शरीर का भी कीलन कर लेना है, उसके बाद आप लोगों को भूमि बंधन करना होगा, क्योंकि उस जगह में कोई भी दिगपाल जैसी चीजें या फिर कोई भी शक्ति का वास हो सकता है, तो उसके लिए आपके साधना में कोई विघ्न उत्पन्न न करें, जैसे क्षेत्रपाल हो गया, कभी-कभार क्षेत्रपाल भी इसमें डिस्टर्ब करता है लोगों को। तो उसके लिए क्या होता है, आप लोगों को जो भूमि बंधन होता है। 

वो भूमि को कीलन कर लो, भूमि बंधन कर दो, तो उसके बाद वह आप लोगों के बैठने के लायक बन जाता है, उसके बाद जैसे ही यह विधि कर दी, तो शरीर जारण… अगर मेरे से कोई साधना सीखेगा तो या फिर जो कर रहे हैं, मैं अपने साधकों को पहले शरीर जारण कराता हूँ। तो शरीर को जारित कर लेना अपनी मुद्राओं से, तो शरीर जारण के पश्चात साधना शुरू कर दो, जैसे उसका आकर्षण मंत्र हो, मूल मंत्र हो,


तो जैसे ही इन मंत्रों का आप लोग जब जप करोगे, तो उसमें अनुभव क्या-क्या होने लगता है, वो मैं आपको बताता हूँ। सबसे पहला क्या होता है कि हनुमान बेताल का जैसे ही आगमन घटता है, तो उसमें मैंने आप लोगों को बेताल की जानकारी में एक चीज़ बताया था कि बेताल पंचभूतों के अधिपति होते हैं, और जितनी भी शक्तियाँ होती हैं, बेताल सबसे अलग होते हैं।

तो यह याद रखना, जैसे ही हनुमान बेताल के मंत्रों को कम-से-कम, ज्यादा-से-ज्यादा आप लोग 11 माला के ऊपर कर दो, ग्यारह माला हो गया, उसके ऊपर जैसे पहुँच गया, 12, 13, 14 माला से, तो उसी में ही शक्तियों का अनुभव आप लोगों तक हो जाएगा।

आप जिस किसी मंत्र का जप करते हो, और यह एक ऐसा शाबर मंत्र होता है, जिसको जप करने के बाद उसके चारों ओर रहने वाले भूत, प्रेत, पिशाच जैसी अतृप्त आत्माएं आपको दिखना शुरू हो जाती हैं, और नग्न आंखों से देख पाओगे। लेकिन अगर मान लो ऐसा होता है कि साधक उसमें भयभीत होता है, तो साधक को तब क्या करना चाहिए?

शिव को याद करके, ठीक है, बेताल के मंत्र के जाप में आप लोगों को ज्यादा एकाग्रचित्त होकर, आपको बहुत ज्यादा ध्यान देना होगा, बस आँखों को बंद करके रखो।

Hanuman Betal Sadhna हनुमान बेताल साधना  के अनुभव 

 

जितने भी डरावने आवाज आएं, ऐसा लगेगा कोई पीठ पर आप लोगों को कोई नाखून से खरोंच रहा है, आपको नाखून धंसा रहा है, ऐसा लगेगा कि कोई शक्तियां आपके कान में आकर बहुत जोर से चिल्ला रही हैं, ऐसा लगे कि कान से खून निकल रहा है, लेकिन ऐसा नहीं होता है, उसके बाद ऐसा लगेगा कि कोई आग जला रहे हैं, इतनी बदबू आए, नाले-जैसी, सड़ी-गली चीज़ों की, भांति-भांति की बदबू आ सकती है।

अगर बाहर करोगे, तो इसमें आप लोगों को घबराना नहीं होता है। इसमें बस संयम की जरूरत है। ध्यान लगाना कि आप लोग मंत्रों में फोकस करो, मंत्र जप में फोकस करो। तो आप लोगों को बाहर ध्यान नहीं देना है। जो कोई जो कर रहा है करने दो, जो हो रहा है होने दो, जो सामने आ रहा है आने दो। बस आप लोगों को यह करना है कि जप को पूरा करना है।

और कई लोगों का असफल होने का कारण यह होता है कि जो लोग जप की संख्या को भूल जाते हैं, मंत्र गलत पढ़ लेते हैं। ऐसे जब उन लोगों को अजीब-अजीब अनुभव आते हैं, तो डर के मारे वो गलत मंत्र को पढ़ लेते हैं।

तो ऐसा न हो, मंत्र चाहे थोड़ा-सा एक-दो ज्यादा हो जाए, लेकिन एक-दो कम नहीं होना चाहिए। यह हमेशा याद रखना मेरी बात को, तो ध्यान उसमें लगाओ।

तो बाकी चाहे शक्तियां चारों तरफ से आएं या फिर जितने भी तरफ से, कोई दिक्कत नहीं, क्योंकि आप ऐसे एक बाघ और शेर को बुला रहे हो, जो उसमें अगर प्रवेश कर ले, तो उस शक्ति को अगर सामने मिल गया, तो भाग जाएगा। तो वो भी उससे डरते हैं।

चुड़ैल भी आ सकती है, अगर श्मशान में यह सब करोगे, तो उसका प्रभाव ज्यादा होता है। और अगर बाहर में करोगे, तो श्मशान से थोड़ा कम होता है, तो बाहर में रहने वाले कम-से-कम 200-400-500 मीटर में रहने वाले, इसमें भी शक्तियां होती हैं, वो सब आपके आसपास आना शुरू कर देंगी।

शायद पेड़ से कोई बोले, “कि भाग जा यहाँ से, नहीं तो मारे जाओगे।” तो कुछ भी बोल सकता है यहाँ पर, ऐसा कोई बहुत जोर से मंदिर में जो घंटा है, उसको बजा रहा है, तो ऐसा भी अनुभव होता है, क्योंकि यह अनुभव मैं अपने अनुभव से बता रहा हूँ कि ऐसा मेरे साथ भी हुआ था कि कोई मेरे कानों के पास आकर कोई घंटा बजा रहा है, बहुत जोरों से,


तो जैसे ही यह सब होता है, तो उसके बाद आप लोगों को यह साधना कितने दिन करनी होगी, बेताल की साधना, यह जो आप लोगों को बता रहा हूँ, यह आप लोगों के लिए ग्यारह दिन की साधना बता रहा हूँ, ग्यारह दिन का। ग्यारह दिन आप लोगों को करना होगा।

जैसे ही आप लोग इस अनुभव के साथ करोगे, तो आखिरी माला के बाद जितनी भी हलचल मची हुई थी, हर चीज़ शांत हो जाएगा, एकदम से सन्नाटा हो जाएगा। उसमें बस आपको करना क्या है कि जैसे पेड़ में कर रहे हो, अगर श्मशान में करो, जहाँ पर लोगों को जलाता है, चिता के ऊपर, वहाँ पर आप लोग अपने भोग को रखकर चले आओ, बिना पीछे देखे।

जैसे ही एक बार रखा जाएगा, बिना पीछे देखे चले आना है। लेकिन सिर को काटने से पहले यह जरूरी होता है खुद के शरीर का फिर से सुरक्षा करना, चाहे पेड़ के नीचे करो या फिर वहाँ पर। अगर पेड़ के नीचे कर रहे हो, तो सामग्रियों को उसी पेड़ के नीचे रखकर बस आप उनको प्रार्थना करो कि, “आपके लिए मैंने भोग रखा है, बेताल महाराज, आप इसको ग्रहण करो,” तो बस वो चीज़ें करके घर के लिए निकलना है।

और आने के बाद नहा कर ही आप लोगों को आपके कक्ष में या फिर घर में प्रवेश करना होगा। तो जैसे ही यह साधना कार्य हो गया, ऐसे आप लोग कम-से-कम नौ दिन करो, नौवें दिन तक पहुँचोगे, नौ दिन करो बस, नौवें दिन जैसे होगा, उसी में ही तब बेताल का आगमन होता है। , बेताल दूसरे दिन से आपको देखता ही रहता है कि साधक मेरे लिए जो प्रार्थना कर रहा है, कैसे कर रहा है, क्या कर रहा है। तुम्हारी हर गतिविधि उनके पास होती है, लेकिन तुम्हारे पास नहीं होती।

जैसे ही नौवें दिन होगा, या फिर आप लोग सातवें दिन के बाद, जितने भी दिन होगा, आठवें, नौवें, दसवें-ग्यारहवें दिन होगा, उन्हीं दिनों में बेताल आपके पास आएगा।

और जैसे ही बेताल पास… कितनी माला में वो प्रत्यक्ष होते हैं, मैं आपको बताता हूँ। ज्यादा-से-ज्यादा आप लोगों का 15-16 माला जैसे ही पार हो जाएगा, उसी में ही बेताल का आगमन होगा, और अभी बेताल के आगमन में कौन-सा एक जरूरी बात होता है, जो मैं बता रहा हूँ, ध्यान से सुनना सभी लोग।

जो शक्तियाँ आप लोगों को विचलित कर रही हैं आपको डिगने के लिए, ठीक है, बैठने के बाद मंत्र जप में विचलित कर रही हैं, डराने की कोशिश कर रही हैं, वो सभी चीखती-चिल्लाती हुई एकदम से शांत हो जाएंगी।

उस समय एक पत्ता तक नहीं हिलेगा, कीड़े-मकोड़े तक नहीं होंगे, यह समझ सकते हो। और उस समय में ऐसा होगा कि आंधी-तूफ़ान भी आ सकता है, ज्यादा हवा तेज भी हो सकती है। लेकिन याद रखना, इसमें बहुत लक्ष्य करने वाली बात है। देखना, अगर बहुत ज्यादा तूफान भी आ रहा है, हवा भी चल रही है, ठीक है, लेकिन आप लोगों के सामने जो दीया होगा न, वो दीया नहीं बुझेगा। इतना भी आप लोग लिखकर बता रहा हूँ।

जैसे आप लोग इसको लक्ष्य करोगे, तब आप लोगों को पता चलेगा, ऐसा लगेगा कि हर तरफ सन्नाटा छा जाता है, कोई आहट तक नहीं होती, और उसी में ही हवाओं से आवाज आएगी, “क्यों बुला रहा है मुझे?” लेकिन उस आवाज़ का कोई जवाब नहीं देना है।

आपके चारों ओर वो देखना शुरू कर देगा। चारों ओर आप लोगों को आभास कराएगा। आपका नाम पुकार कर भी आ सकता है कि, “चले जाओ यहाँ से,” “तुझे कुछ नहीं मिलने वाला यह सब करके,” तो आप लोगों को उसमें ध्यान नहीं देना, बस अपने काम को करते रहना है।

और जैसे ही आखिरी माला हो जाएगी, वो जगह शांत हो जाएगी, उसमें कुछ भी नहीं रहेगा। और जैसे ही बेताल का आगमन होता है, उसके बाद शक्तियाँ नहीं आएंगी आपके पास, बिल्कुल भी नहीं आएंगी, तो उसी प्रकार हर दिन की तरह भोग रखकर चले आना है।


और जैसे ही आप लोगों का ग्यारहवां दिन होगा, ग्यारहवें दिन आप लोग बस मूलमंत्र को जब जप करना शुरू ही करोगे, उसी में ही बेताल आप लोगों के सामने आकर खड़ा हो जाएगा। अभी सबसे पहले बेताल क्या होता है, एक भयंकर शक्ल लेकर आप लोगों के सामने खड़ा होता है, तो इसमें जो होता है कि पहले जो आप लोगों की मंत्र संख्या पूरी न हुई, तो भयंकर शक्ल लेकर आपके सामने प्रकट होगा।

तो उसके लिए एक तरकीब बता रहा हूँ, एक ट्रिक बता रहा हूँ, वो आप लोग इस्तेमाल करना तब। कि बेताल जैसे भयंकर शक्ल को अगर आप लोग देखोगे, तो थोड़ा-सा, मतलब, अगर कोई दिल का मरीज होगा, वो थोड़ा-सा उसमें भयभीत हो सकता है,

मतलब ज्यादा दिल का दौरा भी पड़ सकता है, ज्यादा डर भी सकते हैं बहुत ज्यादा, क्योंकि भयंकर अवश्य होता है, यह सही है। अगर किसी ने बताया है, तो बहुत भयंकर होता है, बिल्कुल भयंकर से भयंकर होता है, तो उसके लिए आखिरी दिन आप लोग बस विशेषकर ही इस माला का जप करते जाओ। अगर जैसे आपको लग रहा है कि किसी चीज़ का पैर देखने को मिलेगा, ठीक ह

अगर थोड़ा-सा पैर को भी देख लिया, किसी चीज़ को देख लिया, उस क्षण, तो थोड़ा-सा एकदम काला होगा वो, ऐसे, और काला-काला धुएं के जैसा होगा, और आकार में बड़ा एक इंसान, जिसका हाइट कम-से-कम 10-11 फिट होगा, 22 भी हो सकता है। तो कोई समय विकराल रूप लेकर आप लोगों के सामने आ सकता है, कोई भी विशाल रूप लेगा, तो उसमें डरना नहीं है, बस आप लोग दृष्टा बने रहना, कंट्रोल करते रहना है।

तो जैसे ही आप लोगों की आखिरी माला होगी, उसी में ही बेताल आप लोगों के सामने सौम्य शक्ल लेकर आप लोगों के सामने हाजिर होगा। और सौम्य रूप में क्या होता है? सफेद वस्त्र पहना हुआ एक इंसान होता है जो वृद्ध रूप में होते हैं, वृद्ध जैसे इंसान होते हैं, इसकी दाढ़ी-मूंछ बहुत ज्यादा होती है।

ऐसा लगता है, बहुत बड़े ज्ञानी होते हैं, बाबा होते हैं, एक अघोरी टाइप का होगा, लेकिन हाथ में एक तलवार भी हो सकती है या फिर कोई भी लाठी भी हो सकती है या फिर नहीं भी हो सकती है, लेकिन सफेद वस्त्र का वो इंसान होगा, और ऐसा उसमें सौंदर्य भरा होगा, ऐसा आकर्षक होगा कि आप लोग देखते ही दंग रह जाओगे कि यह सामने है क्या चीज़, बेताल जैसी चीज़ ही नहीं हो सकती आपके सामने।

और तब आप लोग बताओगे मुझे कि, “गुरुजी, बेताल कितना खूबसूरत होता है।” अगर उसका सौम्य रूप आप लोगों ने देखा होगा, तो उसी में ही मोहित हो जाओगे। ऐसा आकर्षक रूप होता है। और उसके जो आंखें होती हैं, अगर किसी को भी देख लिया, तो किसी भी इंसान को वो वश में करने के लिए एक क्षण ही काफी होगा।


तो उसी में ही आप लोगों से प्रसन्न होकर बेताल आपसे वरदान मांगने के लिए बोलता है, वर मांगने के लिए बोलता है हनुमान बेताल कि, “क्या इच्छा है? अपना बताइए, क्या चाहते हो आप? इतने दिन जो मेरी आपने आराधना की, मेरी साधना की, क्या चाहते हो आप मुझसे?” तो तब बोलना है कि,

“हे महाराज, मैं यही चाहता हूँ कि आप हमेशा मेरे साथ रहो, हमेशा मेरे परिवार की रक्षा करो, मेरी रक्षा करो, और मेरा जो भी कार्य आपको पूरा करना है, मेरी मदद कीजिए, जब भी मैं आपका आवाहन करूँ, उसी क्षण, उसी पलक झपकते ही आप मेरे सामने प्रकट होना है आपको, और समय के अनुसार अच्छा-बुरा जैसा भी कार्य मैं आपको दूँ, वह कार्य आप को करना होगा,” तो बेताल उसमें वचन देता है, और बेताल से कितने वचन लेना है?

कुल मिलाकर बेताल, हनुमान बेताल से आप लोग पाँच वचन लेना ही काफी है, और जो पाँच वचन होते हैं, क्या-क्या हैं प्रमुख वचन, वो मैं आपको बता दूँगा, वचन लेने के बाद बेताल पूछा जाता है कि, “आपको बुलाने का तरीका बताइए,” और या फिर एक ऐसा भी काम कर सकते हो कि उसमें आप एक शर्त बना सकते हो कि आपके जो माला है,

वो मैंने बता दी, या फिर आप मूलमंत्र ही बता दिए कि, “आपके मूलमंत्र को अगर मैं 11 बार जप कर आपका आवाहन करूँगा, तो उसी समय आपको आ जाना है मेरे पास।” तो उसी में ही बेताल उसमें हामी भर देगा, तो यह होता है। या फिर आप उससे बोल भी सकते हो कि, “आपको बुलाने का तरीका बताइए।”

तब बेताल आपको बता देगा कि, “इस प्रकार मेरे को आप बुला सकते हो, इतने बार जप करने पर मैं आ जाऊँगा,” जहाँ पर भी करो। और आप लोगों को पहले ही बोला है कि मुँह से नहीं, मन से भी बोलोगे तो भी आ जाएगी शक्ति।

तो उसमें कोई बड़ी बात नहीं है, तो जैसे ये सब हो जाता है, तो बेताल को आप लोग अपना जो भोग है, वो उन्हें अर्पित करो और उनको बताओ कि, “आपके लिए मैंने भोग रखा है, इस भोग को आप ग्रहण करो और हमारे ऊपर हमेशा आशीष बनाए रखो।”

तो बेताल उसको ग्रहण करके आपसे इजाजत मांगेगा, आदेश मिलने पर वो अपने स्वधाम लौट जाएगा। तो उसके बाद आप लोगों की साधना जैसे ही कंप्लीट हो गई, तो बताए गए तरीके से, उनको बुलाए गए तरीके से उनको बुलाओगे, आवाहन करोगे, वो तत्क्षण सिद्ध हो जाएगा आपके कार्यों को संपन्न करने के लिए,


अभी बताता हूँ आखिरी बात कि यह काम क्या-क्या कर सकता है, इससे लाभ क्या होता है। हनुमान बेताल की साधना से साधक को यह लाभ होता है कि साधक में बाहुबल बहुत ज्यादा होता है। कोई और उसको हरा नहीं सकता, और जो हनुमान बेताल होता है, ऐसा अंगरक्षक शक्ति होता है, जो कोई भी तंत्र से आप लोगों की रक्षा कर सकता है।

कैसा भी शत्रु हो, एक ही बार में पछाड़ सकता है, कोई भी स्थान में आप लोग आसानी से जा सकते हो, कई जादूगर अगर इसकी साधना करते हैं, तो इससे जादू के खेल भी दिखाते हैं। अब वस्तुओं को हवा में उठाना तथा अदृश्य कर देना, धन भी लाकर देता है। 

वो हनुमान बेताल अगर साधक आदेश करे तो, इसके जरिए कोई भी वज़नदार से वज़नदार, साधक चाहे सौ कुंतल का हो, ऐसे वजनदार वस्तु को भी आप उठा सकते हो, साधक निरोगी बनता है और उसे पूरे परिवार को निरोगी बना देता है।

कोई भी, किसी भी इंसान के बारे में भूत, भविष्य, वर्तमान, इन तीनों कालों के ज्ञान को आप लोग पता कर सकते हो। और एक छोटे से संकेत के बराबर बात को ही बता देगा, जो इंसान छुपा नहीं सकता। अगर पेट के अंदर की बात है, तो भी आपको पता चल जाएगा, लेकिन सामने होना आवश्यक है, तो यह जो बहुत जरूरी बातें हैं और

Hanuman Betal Sadhna  हनुमान बेताल साधना नियम क्या है 

 

इसमें जो नियम-विधि होता है, तो इसमें आप लोगों को सात्विक नियमों का अनुरूप चलना होगा, मांस, मछली, अंडा, शराब, इन चीजों के सेवन से दूर रहना है, संभोग इत्यादि, लड़कियों से, औरतों से दूर रहना है, खुद के बनाए हुआ हाथों का भोजन करो या फिर अपनी माता का, उसके बाद किसी का भी नहीं चलेगा। 

बस माता का या फिर स्वयं खुद के हाथों का बनाया हुआ भोजन करो, और हर सोमवार को, जितने दिन साधना चले, उसमें अगर बीच में सोमवार आया, तो शिव आराधना के लिए निराहार रहना होगा शाम 6:00 बजे तक, मतलब संध्या तक, यह समझ सकते हो, जब तक ज्योत न जलाओ, तो निराहार रहकर आप लोगों को व्रत रखना होगा और बाकी के दिन रखने की आवश्यकता नहीं है,


तो इस प्रकार आप लोगों के जो बेताल होते हैं, कार्य करता है। और ऐसा होता है कोई एक शत्रु आपको परेशान कर रहा है, तो वो शत्रु को आप लोगों के सामने उठाकर लाकर गिरा सकता है, कोई भी जगह में आप अकेले हो, तो वो उसके हाथों में बैठकर, कंधे पर बैठकर, कहीं पर भी पहुँच सकते हो, ट्रैवलिंग कर सकते हो, यह समझ सकते हो, और ऐसा होता है कि खाने की कोई वस्तु को आप उसके जरिए मंगा सकते हो, तत्क्षण आपको ला देगा।

और बेताल का ही बोलते हैं कि बेताल इतना काम नहीं कर सकता। बेताल के जैसी गति में करने वाला शक्ति मतलब सौ में से दो-तीन शक्ति ही होगी, जैसे हमजाद हो गया, ठीक है, लाल परी हो गई, देव शक्तियां हो गईं।

ऐसे गिने-चुने शक्ति ही होंगी जो बेताल के जैसा काम करेंगी, क्योंकि उसके काम में गति होती है। एक बेताल इतना समर्थ होता है कि मान लो एक लोहे का पुल है, पक्की पुल है। पुल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचा सकता है या फिर उसको तोड़ सकता है। 

 

इतना सामर्थ्य होता है। और इसका किस्सा मैं कभी आप लोगों को बताऊँगा, इस पुल का, तो एक जगह ऐसा घटित हुआ था। और उस बेताल की जानकारी बहुत जल्दी आप लोगों को दूँगा। तो दोस्तों, कैसा लगा आप लोगों को यह साधना की जानकारी?

यही आप लोगों से निवेदन करता हूँ मैं। और अगर किसी साधक या साधिका को यह साधना करना है या फिर बेताल का ट्रांसफर लेना है, तो हमसे संपर्क कर सकता है। तो अभी मैं सभी लोगों से इजाजत लेता हूँ। जय माँ कामाख्या, जय माँ जगदंबा।

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