ईस श्रेणी में हम अप्सरा साधना Apsara sadhna के बारे में रहस्य और रोमांचक जानकारी प्रदान करेंगे ! कैसे आप अप्सरा को प्रीमिका रूप में सिद्ध कर अपने अकेलेपन दूर कर सकते है
दौलत परी साधना: मंत्र, विधि और नियम (Daulat Pari Sadhana: Mantra, Vidhi Aur Niyam)
दौलत परी साधना: मंत्र, विधि और नियम (Daulat Pari Sadhana: Mantra, Vidhi Aur Niyam)
अरे वाह भाई, क्या आप भी ज़िंदगी में बहुत सारा धन (wealth) और सक्सेस (success) पाना चाहते हैं? क्या आपको भी लगता है कि आपकी मेहनत का पूरा फल आपको नहीं मिल पा रहा है? तो भई, आज हम जिस विषय पर बात करेंगे, वो शायद आपकी इस फील को खत्म कर दे।
मैं आपको एक बहुत ही ख़ास और powerful साधना के बारे में बताऊँगा, जिसका नाम है दौलत परी साधना। पाठक दोस्तों, यह साधना सिर्फ़ धन की नहीं, बल्कि जीवन में खुशहाली और सफलता लाने की भी है।
आपको लगेगा कि ये सब कहानियों की बातें हैं, लेकिन भाई, इसमें बहुत गहराई है। क्या कहते हो? आपने भी कभी परी साधना के बारे में सुना होगा, है ना? अच्छा सुनो, ये एक बहुत ही pure और सही रास्ता है अपनी financial problems को दूर करने का। तो चलिए, बिना किसी देरी के इस पूरे प्रोसेस को detail में समझते हैं।
दौलत परी साधना क्या है ?(Daulat Pari Sadhana Kya Hai ?)
दौलत परी साधना एक तरह का spiritual practice है जो दौलत परी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। मान लो, जैसे हम किसी भी देवी-देवता की पूजा करते हैं, ठीक वैसे ही इस साधना में दौलत परी का आह्वान किया जाता है ताकि उनकी कृपा से हमें धन, समृद्धि (prosperity) और ऐश्वर्य मिल सके। देखो, ये कोई जादू नहीं है, बल्कि एक spiritual process है जिसमें आपकी श्रद्धा (faith) और मेहनत बहुत जरुरी है। क्या आपको पता है, जब कोई भी काम दिल से किया जाता है तो उसका result कितना अच्छा होता है? बस, इसमें भी यही बात है।
वैसे तो, हर इंसान अमीर बनना चाहता है, लेकिन सबको सही रास्ता नहीं मिलता। दौलत परी साधना आपको वह रास्ता दिखाती है। यह आपके लिए positive energy create करती है जिससे आपकी ज़िंदगी में धन के नए-नए रास्ते खुलने लगते हैं। कहो तो, यह आपके भाग्य को जागृत करती है।
दौलत परी कौन हैं ?(Who Is Daulat Pari ?)
अब आप सोच रहे होंगे कि ये दौलत परी कौन हैं? क्या वो सच में exist करती हैं? जनाब, दौलत परी एक celestial being यानी एक दिव्य शक्ति हैं। उन्हें धन और समृद्धि की देवी (goddess of wealth) माना जाता है। वो angels की तरह बहुत ही दयालु और कोमल हृदय वाली होती हैं। उनका काम उन लोगों की help करना है जो सच्चे मन से और पूरी श्रद्धा के साथ उन्हें पुकारते हैं। सच बताऊँ, उन्हें ‘angels of fortune’ भी कहते हैं। जब आप अपनी ज़िंदगी में परेशानी महसूस करते हैं और आपको लगता है कि आप अकेले हैं, तब आप इनका आशीर्वाद पा सकते हैं।
एक बात समझो, वो सिर्फ़ उन लोगों को पसंद करती हैं जिनका दिल साफ़ होता है। अगर आपका मकसद सिर्फ़ लालच है, तो शायद आपको उतना फ़ायदा न हो। इसीलिए, मन को शुद्ध रखना सबसे जरूरी है।
दौलत परी साधना के फ़ायदे (Benefits of Daulat Pari Sadhana)
दौलत परी साधना के सिर्फ़ एक नहीं, बल्कि बहुत सारे फ़ायदे हैं। क्या बताऊँ, ये साधना आपकी पूरी ज़िंदगी को बदल सकती है। तो, आइए जानते हैं इसके क्या फ़ायदे हैं:
धन में वृद्धि: सबसे बड़ा फ़ायदा तो यही है कि आपकी financial condition improve होने लगेगी। व्यापार में फ़ायदा (profit) होगा, job में promotion मिलेगा और रुके हुए पैसे वापस आने लगेंगे।
सफलता: आपको हर काम में सफलता मिलेगी। चाहे वो कोई नया business start करना हो, या फिर कोई project पूरा करना हो, आपको success मिलेगी।
ख़ुशी और शांति: जब आपके पास पैसे की टेंशन नहीं होगी तो आप automatically खुश और शांत महसूस करेंगे। इससे आपके परिवार में भी खुशहाली आएगी।
अच्छी क़िस्मत: इस साधना से आपकी किस्मत भी चमक उठेगी। आपको हर जगह से good news मिलेगी।
नकारात्मकता से मुक्ति: ये साधना आपके आस-पास की सारी negative energy को दूर करती है और एक positive aura बनाती है।
जरा सोचो, ये सब कितना अच्छा है, है ना?
साधना के लिए ज़रूरी चीज़ें (Required Items for Sadhana)
किसी भी पूजा या साधना को शुरू करने से पहले हमें कुछ सामान की ज़रूरत पड़ती है। दौलत परी साधना के लिए भी कुछ ख़ास चीज़ें चाहिए। तो, देखो जरा, आपको क्या-क्या चाहिए होगा:
लाल आसन: एक साफ़ लाल रंग का कपड़ा या आसन जिस पर बैठकर आप साधना करेंगे।
दौलत परी यंत्र: यह यंत्र इस साधना का सबसे important part है। इसे किसी विश्वसनीय दुकान से लें।
दौलत परी माला: मंत्र जाप के लिए एक ख़ास तरह की माला चाहिए।
मूर्ती या फोटो: दौलत परी की एक छोटी मूर्ती या एक सुंदर photo.
सामान:
घी का दीपक (diya)
अगरबत्ती या धूप (incense sticks)
लाल रंग के फूल (red flowers)
मिठाई (sweets) या खीर
एक साफ़ पानी का बर्तन (pitcher of clean water)
दौलत परी साधना की विधि (Method of Daulat Pari Sadhana)
अब हम आते हैं सबसे ज़रूरी हिस्से पर, यानी साधना करने के तरीके पर। क्या कहूँ, ये विधि बहुत ही सरल है, लेकिन इसे पूरी sincerity के साथ करना बहुत ज़रूरी है।
साधना का समय और स्थान:
इस साधना को शुक्रवार (Friday) के दिन शुरू करना सबसे अच्छा माना जाता है।
साधना का समय रात 10 बजे के बाद का हो।
कोई शांत कमरा (quiet room) चुनें जहाँ कोई आपको disturb न करे।
विधि के चरण:
1. तैयारी: सबसे पहले, नहा-धोकर साफ़ कपड़े पहन लें। अपने पूजा-स्थल को साफ़ कर लें।
2. आसन और दिशा: लाल आसन बिछाकर उस पर बैठें। आपका मुँह (face) पूरब (east) या उत्तर (north) दिशा की ओर होना चाहिए।
3. संकल्प: एक हाथ में थोड़ा पानी लेकर मन ही मन संकल्प लें कि “मैं (अपना नाम) यह साधना धन और समृद्धि प्राप्त करने के लिए कर रहा हूँ।” फिर उस पानी को ज़मीन पर छोड़ दें।
4. स्थापना: आसन पर दौलत परी यंत्र स्थापित करें। इसके पास दीपक जलाएँ और अगरबत्ती लगाएँ। दौलत परी की फोटो या मूर्ती भी रखें।
5. पूजा: सबसे पहले गणपति जी का ध्यान करें। फिर फूल और मिठाई दौलत परी को अर्पित करें।
6. मंत्र जाप: अब माला लेकर मंत्र का जाप शुरू करें। आपको कम से कम 108 बार मंत्र का जाप करना है, लेकिन अगर हो सके तो 51 माला या 101 माला का जाप करें। यह साधना 21 दिनों की होती है, तो आपको रोज यही विधि करनी पड़ेगी।
मंत्र का सही उच्चारण और जाप (Correct Pronunciation and Chanting of the Mantra)
दौलत परी साधना का मंत्र बहुत ही powerful है। इसे सही तरीक़े से जाप करना बहुत ज़रूरी है।
(Om Hreem Shreem Daulat Pari Mam Grihe Aagachchha Aagachchha Swaha)
यह मंत्र बहुत simple है, लेकिन इसके शब्दों का बहुत गहरा मतलब है।
“ॐ” सृष्टि की सबसे बड़ी ध्वनि है।
“ह्रीं” और “श्रीं” माया और धन से जुड़े बीज मंत्र हैं।
“दौलत परी” देवी का नाम है।
“मम गृहे” का मतलब है ‘मेरे घर में’।
“आगच्छ आगच्छ” का मतलब है ‘आओ, आओ’।
“स्वाहा” का मतलब है ‘मैं अर्पण करता हूँ’।
जरा सोच के देखो, इस मंत्र का मतलब है ‘हे दौलत परी, धन और समृद्धि के साथ मेरे घर में आओ’। जब आप इस मंत्र को पूरे दिल से बोलेंगे तो क्या कहते हो, वो ज़रूर आएंगी।
दौलत परी साधना के नियम और सावधानियाँ (Rules and Precautions of Daulat Pari Sadhana)
कोई भी साधना बिना नियमों के पूरी नहीं हो सकती। भाईसाहब, अगर आप सच में चाहते हैं कि आपको फ़ायदा हो तो इन नियमों का पालन करना बहुत ज़रूरी है।
पवित्रता: साधना के दौरान आपको पूरी तरह पवित्र रहना है। किसी भी तरह के बुरे काम या विचार से दूर रहें।
शाकाहार: आपको साधना के 21 दिनों तक non-veg food और alcohol से दूर रहना होगा।
साफ़-सफ़ाई: आपका शरीर, मन, और कपड़े सब कुछ साफ़ होने चाहिए।
ब्रह्मचर्य: 21 दिनों तक ब्रह्मचर्य का पालन करना बहुत ज़रूरी है।
विश्वास: सबसे ज़रूरी बात, आपको अपनी साधना पर पूरा विश्वास होना चाहिए। शक़ करोगे तो कुछ भी फ़ायदा नहीं होगा।
सच कहूँ तो, ये नियम बहुत strict नहीं हैं, लेकिन इन्हें मानना पड़ेगा।
साधना के दौरान अनुभव और परिणाम (Experiences and Results During the Sadhana)
भई देख, जब तुम साधना करोगे तो तुम्हें कुछ अलग-अलग तरह के अनुभव हो सकते हैं। मान लो, तुम्हें अचानक से हल्कापन फील हो सकता है, या फिर कमरे में एक अच्छी सी सुगंध आ सकती है। कुछ साधकों को सपनों में दौलत परी के दर्शन भी होते हैं। यह सब आपकी spiritual journey का हिस्सा है। तुम देखोगे कि धीरे-धीरे तुम्हारी ज़िंदगी में छोटे-छोटे positive बदलाव आने लगेंगे। हो सकता है, तुम्हें कहीं से रुका हुआ पैसा मिल जाए या कोई नया काम मिल जाए।
वैसे तो, हर किसी का experience अलग होता है, लेकिन एक बात पक्की है – तुम्हारी ज़िंदगी में खुशहाली और prosperity जरूर आएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)
क्या दौलत परी साधना कोई भी कर सकता है?
जी, कोई भी व्यक्ति जो इस साधना को पूरी श्रद्धा और साफ़ मन से करना चाहता है, वो कर सकता है।
क्या ये साधना सिर्फ़ पैसे के लिए है?
नहीं, ये साधना overall happiness और prosperity के लिए भी है।
साधना का सबसे अच्छा समय क्या है?
रात 10 बजे के बाद, विशेषकर शुक्रवार से शुरू करना अच्छा है।
निष्कर्ष (Conclusion)
तो, पाठक भाइयों, दौलत परी साधना एक बहुत ही powerful और असरदार practice है। अगर आप इसे पूरे दिल से, सच्चाई और dedication के साथ करेंगे, तो आपको ज़रूर फ़ायदा मिलेगा। ये कोई magic नहीं है, बल्कि आपकी खुद की मेहनत और faith का परिणाम है।
अच्छा भई, अब आपको दौलत परी साधना के बारे में सब कुछ पता चल गया है। तो क्या आप तैयार हैं इस spiritual journey पर जाने के लिए? मान लिया न? बोलो तो सही, क्या सोचते हो?
Chandra grahan me apsara sadhna एक रात की अप्सरा साधना: चंद्र ग्रहण पर पाएं धन-दौलत का वरदान
chandra-grahan-me-apsara-sadhna एक रात की अप्सरा साधना: चंद्र ग्रहण पर पाएं धन-दौलत का वरदान
chandra-grahan-me-apsara-sadhna एक रात की अप्सरा साधना: चंद्र ग्रहण पर पाएं धन-दौलत का वरदान अरे यार, क्या आप जानते हैं कि चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan) का समय कितना पावरफुल होता है? जी, खासकर उन लोगों के लिए जो स्पिरिचुअल प्रैक्टिसेज में विश्वास रखते हैं। भाईसाहब, यह एक ऐसा टाइम होता है जब ब्रह्मांड की एनर्जी अपने पीक पर होती है।
और सुनो, इसी समय में की गई साधनाएं, जैसे कि अप्सरा साधना, कई गुना ज़्यादा फल देती हैं। अच्छा तो, आज हम इसी टॉपिक पर डिटेल में बात करने वाले हैं। देखो, यह कोई मज़ाक नहीं है, बल्कि एक बहुत ही सीरियस और पावरफुल साधना है। तो चलिए, बिना किसी देरी के इस रहस्यमयी दुनिया में चलते हैं और जानते हैं कि चंद्र ग्रहण में अप्सरा साधना कैसे की जाती है।
चंद्र ग्रहण में अप्सरा साधना क्या है? (Chandra Grahan me Apsara Sadhna Kya Hai?)
भाई देख, अप्सरा साधना एक बहुत ही पुरानी और गुप्त साधना है। इसमें साधक अप्सराओं को, जो कि देवलोक की सुंदर और दिव्य शक्तियां मानी जाती हैं, उन्हें सिद्ध करने की कोशिश करता है। मानते हो? अप्सराएं सौंदर्य, कला, और प्रेम की देवी मानी जाती हैं।
अरे वाह भई, इनकी सिद्धि करने से साधक को जीवन में सुख, समृद्धि, और ऐश्वर्य मिलता है। और जब यह साधना चंद्र ग्रहण के विशेष समय में की जाती है, तो इसका इम्पैक्ट और भी गहरा हो जाता है। ज़रा सोचो, ग्रहण के समय ब्रह्मांड के सारे पोर्टल्स खुल जाते हैं और पॉजिटिव एनर्जी का फ्लो बहुत तेज़ होता है। इसी एनर्जी का फायदा उठाकर साधक अपनी साधना को सफल बनाने की कोशिश करते हैं।
अप्सरा साधना के लिए चंद्र ग्रहण ही क्यों चुनें? (Apsara Sadhna ke liye Chandra Grahan hi kyu chunein?)
ओहो जी, यह सवाल तो आपके मन में ज़रूर आया होगा। देखो ना, नॉर्मल दिनों में की गई साधना और ग्रहण काल में की गई साधना में ज़मीन-आसमान का फर्क होता है। भाई, ज्योतिष और तंत्र शास्त्र के अनुसार, चंद्र ग्रहण के समय चंद्रमा की एनर्जी पृथ्वी पर बहुत ज़्यादा होती है। चंद्रमा को मन का कारक माना गया है, और अप्सरा साधना में मन की एकाग्रता, मतलब कंसंट्रेशन, सबसे ज़रूरी है।
एनर्जी का मल्टीप्लाई होना: अरे सुनो, ग्रहण काल में किया गया एक मंत्र जाप, हज़ार गुना ज़्यादा फल देता है। इसका मतलब है कि कम समय में ज़्यादा रिजल्ट्स मिल सकते हैं। सही है न?
सिद्धि की गारंटी: वैसे तो कोई गारंटी नहीं होती, लेकिन हाँ, ग्रहण काल में साधना के सफल होने के चांसेज बहुत बढ़ जाते हैं। यह एक शॉर्टकट की तरह काम करता है।
मानसिक शक्ति का विकास: चंद्र ग्रहण के दौरान ध्यान और जप करने से साधक की मेंटल पावर और इंट्यूशन पावर स्ट्रांग होती है। तुम समझो, यह आपकी सिक्सथ सेंस को जगाने जैसा है।
साधना की तैयारी कैसे करें? (Sadhna ki Taiyari Kaise Karein?)
अच्छा भई, अब सबसे इम्पोर्टेंट पार्ट पर आते हैं। साधना की तैयारी। भाई मान लो, अगर तैयारी ही ठीक नहीं हुई, तो साधना का सफल होना मुश्किल है। तो, आपको कुछ चीज़ों का खास ध्यान रखना पड़ेगा।
सही जगह का चुनाव (Sahi Jagah ka Chunav)
जनाब, सबसे पहले तो एक शांत और साफ-सुथरी जगह चुनें। यह आपका पूजा घर हो सकता है या कोई एकांत कमरा, जहाँ कोई आपको डिस्टर्ब न करे। उस जगह को गंगाजल से पवित्र कर लीजिए। अरे देखो, शुद्धता बहुत ज़रूरी है। उस जगह पर एक पीला या गुलाबी कपड़ा बिछाकर अपना आसन लगाएं।
ज़रूरी सामग्री (Zaruri Samagri)
भाई, साधना के लिए कुछ ख़ास चीज़ों की ज़रूरत पड़ेगी। इन्हें पहले से ही इकठ्ठा कर लें ताकि साधना के बीच में उठना न पड़े।
अप्सरा यंत्र: यह सबसे ज़रूरी है। इसे किसी सिद्ध पंडित से ही प्राप्त करें।
स्फटिक की माला: मंत्र जाप के लिए स्फटिक की माला बेस्ट मानी जाती है।
गुलाब के फूल: अप्सराओं को गुलाब के फूल बहुत पसंद होते हैं।
इत्र (गुलाब या चमेली का): खुशबू वाला माहौल बनाना बहुत ज़रूरी है।
शुद्ध घी का दीपक: दीपक पूरी साधना के दौरान जलते रहना चाहिए।
फल और मिठाई: प्रसाद के लिए।
सुंदर वस्त्र: साधना के समय सुंदर और साफ कपड़े पहनें, जैसे कि गुलाबी या पीले रंग के।
चंद्र ग्रहण में अप्सरा साधना की पूरी विधि (Chandra Grahan me Apsara Sadhna ki Puri Vidhi)
तो चलिए, अब स्टेप-बाय-स्टेप विधि जानते हैं। इसे बहुत ध्यान से फॉलो करना है। ज़रा सोच के देखो, एक छोटी सी गलती भी साधना को असफल कर सकती है।
शुद्धिकरण और संकल्प (Step 1: Shuddhikaran aur Sankalp)
अरे दोस्त, ग्रहण शुरू होने से पहले स्नान करके साफ कपड़े पहन लें। अपने आसन पर बैठें और अपने गुरु और इष्टदेव का ध्यान करें। फिर, हाथ में थोड़ा जल लेकर संकल्प लें। संकल्प में अपना नाम, गोत्र, और साधना का उद्देश्य (अप्सरा सिद्धि) बोलें और जल को ज़मीन पर छोड़ दें। कहो तो, यह एक तरह का रजिस्ट्रेशन है कि आप यह साधना करने जा रहे हैं।
यंत्र स्थापना और पूजन (Step 2: Yantra Sthapna aur Pujan)
अब अपने सामने एक लकड़ी की चौकी पर गुलाबी कपड़ा बिछाएं। उस पर गुलाब की पंखुड़ियां फैला दें और उसके ऊपर “अप्सरा यंत्र” को स्थापित करें। यंत्र का पूजन करें। उसे गंगाजल से स्नान कराएं, सिंदूर और चावल चढ़ाएं, गुलाब के फूल अर्पित करें और इत्र लगाएं। मानते हो न? पूजन पूरी श्रद्धा से करना चाहिए।
मंत्र जाप (Step 3: Mantra Jaap)
भाईसाहब, अब आता है सबसे मेन काम – मंत्र जाप। शुद्ध घी का दीपक जलाएं और अप्सरा का ध्यान करते हुए स्फटिक की माला से मंत्र जाप शुरू करें। मंत्र बिलकुल सही उच्चारण के साथ होना चाहिए।
मंत्र:
“ॐउर्वशी प्रियायै आगच्छ आगच्छ स्वाहा“
या
“ॐरम्भे आगच्छ आगच्छ स्वाहा“
आप किसी एक अप्सरा को चुनकर उनके मंत्र का जाप कर सकते हैं। ग्रहण की पूरी अवधि में आपको लगातार मंत्र जाप करते रहना है। भाई, मन को भटकने नहीं देना है, पूरा फोकस मंत्र पर रखना है।
स्टेप 4: ध्यान और अनुभव (Step 4: Dhyan aur Anubhav)
जब आप मंत्र जाप कर रहे होंगे, तो आपको ध्यान की गहरी अवस्था में जाने की कोशिश करनी है। अपनी आंखों को बंद करके अप्सरा के सुंदर रूप की कल्पना करें। ज़रा मानो, आपको ऐसा फील करना है कि वो आपके सामने ही हैं। इस दौरान आपको कुछ अजीब अनुभव हो सकते हैं। जैसे कि:
घुंघरुओं की आवाज़: आपको ऐसा लग सकता है कि कहीं आस-पास घुंघरुओं की आवाज़ आ रही है।
खुशबू का एहसास: अचानक से गुलाब या किसी और फूल की तेज़ खुशबू आ सकती है।
दिव्य प्रकाश: आपको अपनी बंद आंखों के सामने एक तेज़ रोशनी दिख सकती है।
अरे बाबा, इन अनुभवों से डरना नहीं है। यह इस बात का संकेत है कि आपकी साधना सही दिशा में जा रही है। समझे?
साधना के दौरान ध्यान रखने योग्य नियम (Sadhna ke dauran dhyan rakhne yogya Niyam)
अरे भाई, साधना करना जितना ज़रूरी है, उतना ही ज़रूरी है उसके नियमों का पालन करना। एक भी नियम टूटा तो साधना खंडित हो सकती है।
पूर्ण ब्रह्मचर्य: साधना के दिनों में आपको पूरी तरह से ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा। मन में कोई भी गलत विचार न लाएं।
गोपनीयता: इस साधना के बारे में किसी को भी न बताएं। यह जितनी गुप्त रहेगी, उतनी ही सफल होगी। क्या कहते हो?
अखंड दीपक: साधना के दौरान जो दीपक आपने जलाया है, वो बुझना नहीं चाहिए।
एक ही आसन: एक बार आसन पर बैठने के बाद, ग्रहण समाप्त होने तक उठना नहीं है।
डरे नहीं: साधना के दौरान अगर कोई डरावना अनुभव हो, तो डरें नहीं। अपने गुरु का ध्यान करें और मंत्र जाप जारी रखें।
सात्विक भोजन: साधना से एक दिन पहले और एक दिन बाद तक केवल सात्विक भोजन ही करें।
अप्सरा साधना के फायदे और नुकसान (Apsara Sadhna ke Fayde aur Nuksan)
भाई देख, हर चीज़ के दो पहलू होते हैं। अगर अप्सरा साधना के फायदे हैं, तो कुछ रिस्क भी हैं। इसीलिए पूरी जानकारी होना बहुत ज़रूरी है।
फायदे (Fayde)
सौंदर्य और आकर्षण: साधक का व्यक्तित्व बहुत अट्रैक्टिव हो जाता है। उसके चेहरे पर एक अलग ही चमक आ जाती है।
धन और समृद्धि: अप्सरा की कृपा से जीवन में कभी भी धन की कमी नहीं होती।
कला में निपुणता: अगर आप किसी कला, जैसे कि म्यूजिक, डांस, या एक्टिंग में हैं, तो आपको उसमें परफेक्शन मिलता है।
मनोकामना पूर्ति: अप्सरा सिद्ध होने पर साधक की हर जायज़ इच्छा पूरी करती है।
दिव्य ज्ञान: साधक को भविष्य में होने वाली घटनाओं का आभास होने लगता है।
नुकसान और सावधानियां (Nuksan aur Savdhaniyan)
अरे बाप रे, अब ज़रा इसके डार्क साइड की भी बात कर लेते हैं।
मानसिक संतुलन बिगड़ना: अगर साधना गलत तरीके से की जाए या बीच में छोड़ दी जाए, तो साधक का मेंटल बैलेंस बिगड़ सकता है।
नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव: कभी-कभी अप्सरा की जगह कोई और नेगेटिव एनर्जी आकर्षित हो सकती है, जो बहुत खतरनाक हो सकती है।
भ्रम की स्थिति: साधक भ्रम और सच्चाई में फर्क नहीं कर पाता और अपनी असल दुनिया से कट जाता है।
गुरु के बिना न करें: यह सबसे बड़ी चेतावनी है। बिना किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन के यह साधना कभी न करें। गुरु ही आपको हर खतरे से बचाता है। तुम मानो, गुरु एक सेफ्टी शील्ड की तरह काम करता है।
तो भाई, चंद्र ग्रहण में अप्सरा साधना एक बहुत ही पावरफुल प्रक्रिया है, लेकिन यह बच्चों का खेल नहीं है। इसमें जितनी संभावनाएं हैं, उतने ही खतरे भी हैं। सच बताऊँ, यह साधना केवल उन लोगों को करनी चाहिए जो आध्यात्मिक रूप से मज़बूत हैं और जिनके पास एक योग्य गुरु का मार्गदर्शन है।
बिना सोचे-समझे और अधूरी जानकारी के साथ इसे करना बहुत बड़ी मुसीबत को न्योता देने जैसा है। उम्मीद है आपको यह जानकारी अच्छी लगी होगी। अपनी बुद्धि और विवेक का इस्तेमाल करें और कोई भी कदम उठाने से पहले उसके हर पहलू पर अच्छी तरह से विचार कर लें।
यह याद रखना बेहद ज़रूरी है कि यह मार्ग केवल सांसारिक लाभ या इच्छा-पूर्ति का शॉर्टकट नहीं है। यह एक गहरा आध्यात्मिक अनुशासन है, जो साधक से पूर्ण समर्पण, पवित्रता और मानसिक स्थिरता की मांग करता है। बिना किसी सिद्ध गुरु के मार्गदर्शन के इस ऊर्जावान क्षेत्र में उतरना ख़तरनाक हो सकता है, क्योंकि शक्तिशाली ऊर्जाओं को संभालना हर किसी के बस की बात नहीं होती।
अध्यात्म की राह पर हमेशा धैर्य, श्रद्धा और सही मार्गदर्शन को अपना साथी बनाएं। आपकी आध्यात्मिक यात्रा मंगलमय हो, यही हमारी कामना है। सही है न?
उर्वशी अप्सरा साधना: Urvashi Apsara Sadhana Ki Vidhi Aur Fayde
उर्वशी अप्सरा साधना: Urvashi Apsara Sadhana Ki Vidhi Aur Fayde
उर्वशी अप्सरा साधना: Urvashi Apsara Sadhana Ki Vidhi Aur Fayde अरे यार, आज हम एक ऐसे टॉपिक पर बात करने वाले हैं जिसके बारे में बहुत से लोग जानना चाहते हैं, लेकिन सही जानकारी आसानी से मिलती नहीं है। जी, हम बात कर रहे हैं ‘उर्वशी अप्सरा साधना’ की। सुनो, spiritual दुनिया में अप्सरा साधना एक बहुत ही रहस्यमयी और शक्तिशाली साधना मानी जाती है।
और जब बात उर्वशी की हो, तो भाईसाहब, वो तो अप्सराओं में भी सबसे श्रेष्ठ मानी जाती हैं। इस साधना का मकसद सिर्फ सुंदरता या आकर्षण पाना नहीं है, बल्कि यह आपकी पूरी पर्सनालिटी को ही बदलकर रख सकती है। तो चलिए, इस अनोखी साधना की दुनिया में गहराई से उतरते हैं और इसके हर पहलू को समझने की कोशिश करते हैं। ठीक है न?
उर्वशी अप्सरा कौन हैं? Who is Urvashi Apsara ?
अच्छा तो, साधना विधि पर जाने से पहले, यह जानना बहुत ज़रूरी है कि उर्वशी आखिर हैं कौन। भाई देख, हिन्दू माइथोलॉजी के अनुसार, उर्वशी स्वर्ग की सबसे सुंदर अप्सराओं में से एक हैं। अप्सराएं, जैसा कि हम जानते हैं, देवलोक में रहती हैं और वे सुंदरता, कला, संगीत और नृत्य में माहिर होती हैं।
उर्वशी का जन्म समुद्र मंथन से नहीं हुआ था, जैसा कि कई लोग सोचते हैं। उनकी कहानी थोड़ी अलग है। एक कथा के अनुसार, भगवान नारायण ने अपनी जांघ (उरु) से उन्हें उत्पन्न किया था, इसीलिए उनका नाम ‘उर्वशी’ पड़ा।
अरे वाह भई, क्या दिव्य कल्पना है! वह इंद्र देव के दरबार की शोभा थीं और उनकी सुंदरता इतनी बेमिसाल थी कि बड़े-बड़े ऋषि-मुनि भी उनकी एक झलक देखकर अपना तप भूल जाते थे। मानते हो?
उर्वशी अप्सरा साधना क्या है? What is Urvashi Apsara Sadhana?
अब आते हैं मेन मुद्दे पर। देखो, उर्वशी अप्सरा साधना एक ऐसी आध्यात्मिक प्रैक्टिस है जिसमें साधक मंत्र, यंत्र और तंत्र के माध्यम से उर्वशी अप्सरा की ऊर्जा को साधने की कोशिश करता है। जरा सोचो, इसका मतलब यह नहीं है कि आप उन्हें बुलाकर गुलाम बना रहे हैं, नहीं, बिलकुल नहीं। यह साधना उन्हें एक माँ, बहन या मित्र के रूप में सिद्ध करने के लिए की जाती है ताकि उनका दिव्य आशीर्वाद और गाइडेंस आपको मिल सके।
इस साधना का मुख्य उद्देश्य साधक के अंदर की नेगेटिव एनर्जी को खत्म करके उसे पॉजिटिव एनर्जी से भर देना है। जब आप यह साधना करते हैं, तो आपकी पर्सनालिटी में एक मैग्नेटिक अट्रैक्शन आ जाता है। आपका कॉन्फिडेंस लेवल बढ़ जाता है और आप जीवन में सक्सेस की सीढ़ियां चढ़ने लगते हैं। समझे?
उर्वशी अप्सरा साधना के फायदे क्या हैं? What are the Benefits of Urvashi Apsara Sadhana?
भाई, इस साधना के फायदे इतने हैं कि गिनते-गिनते थक जाओगे। सच बताऊँ, यह सिर्फ आपकी लव लाइफ या मैरिड लाइफ को ही बेहतर नहीं बनाती, बल्कि हर फील्ड में आपको फायदा पहुँचाती है। चलो, कुछ मेन फायदों पर नजर डालते हैं:
अद्भुत आकर्षण और सम्मोहन शक्ति (Amazing Attraction and Hypnotic Power): साधक के चेहरे पर एक अलग ही तेज और नूर आ जाता है। लोग उससे बात करने के लिए, उससे जुड़ने के लिए खुद-ब-खुद खिंचे चले आते हैं।
कला और रचनात्मकता में निखार (Enhancement in Arts and Creativity): क्योंकि उर्वशी खुद कला की देवी हैं, तो वह साधक को भी संगीत, नृत्य, लेखन या किसी भी क्रिएटिव फील्ड में ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती हैं।
कॉन्फिडेंस और निडरता (Confidence and Fearlessness): यह साधना आपके अंदर के डर को खत्म कर देती है। आप लोगों के सामने अपनी बात पूरे कॉन्फिडेंस से रख पाते हैं।
धन और समृद्धि (Wealth and Prosperity): जब आपकी पर्सनालिटी अच्छी होती है और आप हर काम कॉन्फिडेंस से करते हैं, तो भाई, धन और समृद्धि तो आपके पीछे-पीछे आती ही है, है ना?
यौवन और सुंदरता (Youthfulness and Beauty): यह साधना आपकी उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकती है। साधक लंबे समय तक जवान और सुंदर दिखाई देता है। उसकी स्किन पर एक अलग ही ग्लो रहता है।
दिव्य मार्गदर्शन (Divine Guidance): सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको जीवन के हर मुश्किल मोड़ पर उर्वशी का दिव्य मार्गदर्शन मिलता है। वो सपनों के माध्यम से या किसी और तरीके से आपको सही रास्ता दिखाती हैं।
उर्वशी अप्सरा साधना की विधि क्या है? What is the Method of Urvashi Apsara Sadhana?
अरे भाई, अब सबसे ज़रूरी हिस्से पर आते हैं – साधना की विधि। देखो, यह कोई बच्चों का खेल नहीं है। इसमें पूरे डेडिकेशन और अनुशासन की ज़रूरत होती है। अगर आप सच में इसे करना चाहते हैं, तो किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करें। यहाँ मैं आपको एक सामान्य और सुरक्षित विधि बता रहा हूँ।
साधना के लिए तैयारी कैसे करें ? How to Prepare for the Sadhana ?
तैयारी सबसे इम्पोर्टेंट स्टेप है। जरा सोच के देखो, अगर नींव ही कमजोर होगी तो इमारत कैसे टिकेगी? ठीक बोला न?
सही समय चुनें (Choose the Right Time): इस साधना के लिए सबसे अच्छा समय होली, दिवाली, नवरात्रि या किसी भी पूर्णिमा की रात होती है। आप इसे शुक्ल पक्ष के शुक्रवार से भी शुरू कर सकते हैं।
जगह का चुनाव (Select the Place): एक ऐसा शांत और साफ-सुथरा कमरा चुनें जहाँ आपके अलावा कोई और न आता हो। साधना के दौरान आपको कोई डिस्टर्ब न करे, इसका पूरा ध्यान रखें।
मन की पवित्रता (Purity of Mind): साधना शुरू करने से कुछ दिन पहले से ही अपने मन से काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार जैसी नेगेटिव फीलिंग्स को निकालना शुरू कर दें।
शरीर की शुद्धता (Purity of Body): साधना के दिनों में रोज़ स्नान करें। साफ, धुले हुए कपड़े पहनें। वैसे तो, गुलाबी या पीले रंग के कपड़े बेस्ट माने जाते हैं।
ब्रह्मचर्य का पालन (Practice Celibacy): यह सबसे ज़रूरी नियम है। साधना के पूरे पीरियड में, यानी कम से कम 41 दिनों तक आपको पूरी तरह से ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा, मन, वचन और कर्म से। समझे?
साधना के लिए आवश्यक सामग्री क्या है ? What are the Required Materials for the Sadhana ?
अच्छा सुनो, साधना शुरू करने से पहले ये सारी चीजें अपने पास रख लीजिए:
उर्वशी का एक सुंदर सा फोटो या चित्र।
एक सिद्ध ‘उर्वशी यंत्र’।
गुलाब के फूलों की माला।
एक ‘स्फटिक की माला’ (मंत्र जाप के लिए)।
गुलाब का इत्र (Rose Perfume)।
गाय के घी का दीपक।
अगरबत्ती या धूप।
कुछ मिठाइयां, फल और पान का बीड़ा प्रसाद के लिए।
उर्वशी अप्सरा साधना मंत्र और जाप विधि क्या है? What is the Urvashi Apsara Sadhana Mantra and Chanting Method?
अब आता है साधना का दिल, यानी मंत्र जाप।
रात में लगभग 10 बजे के बाद, स्नान करके गुलाबी या पीले कपड़े पहनें। उत्तर दिशा की ओर मुंह करके एक आसन पर बैठ जाएं। अपने सामने एक लकड़ी की चौकी पर गुलाबी कपड़ा बिछाएं। उस पर गुलाब के फूल फैलाएं और बीच में ‘उर्वशी यंत्र’ स्थापित करें। यंत्र के सामने उर्वशी का चित्र रखें।
अब, सबसे पहले गुरु और गणेश जी का ध्यान करें। फिर, घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं। यंत्र और चित्र पर इत्र लगाएं, फूल चढ़ाएं। अब, स्फटिक की माला से नीचे दिए गए मंत्र का जाप शुरू करें।
मंत्र:
ॐ श्रीं उर्वशी आगच्छ आगच्छ स्वाहा
इस मंत्र का आपको रोज़ 11 माला या 21 माला जाप करना है। यह साधना आपको लगातार 21 दिन या 41 दिन तक करनी है। याद रहे, जितने दिन की साधना का संकल्प लें, उसे पूरा ज़रूर करें। बीच में छोड़ना नहीं है। मान लोगे न?
साधना के नियम और सावधानियां क्या हैं? What are the Rules and Precautions of the Sadhana?
अरे देखो, साधना में सफलता के लिए नियमों का पालन करना बहुत ज़रूरी है, वर्ना मेहनत बेकार जा सकती है।
गोपनीयता (Secrecy): अपनी साधना के बारे में किसी को भी, अपने सबसे करीबी दोस्त या परिवार वाले को भी न बताएं। यह आपके और आपकी इष्ट के बीच की बात है।
डरना मना है (Don’t Be Afraid): साधना के दौरान आपको कुछ अजीब एक्सपीरियंस हो सकते हैं। जैसे कि किसी के चलने की आहट, पायल की आवाज़, या अचानक इत्र की खुशबू आना। इन सबसे डरना नहीं है। यह पॉजिटिव साइन हैं कि आपकी साधना सही दिशा में जा रही है।
नियमितता (Consistency): रोज़ एक ही समय पर और एक ही जगह पर पूजा और मंत्र जाप करें। इसमें कोई भी ब्रेक नहीं होना चाहिए।
सात्विक भोजन (Sattvic Food): साधना के दिनों में पूरी तरह से शाकाहारी भोजन करें। लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा जैसी तामसिक चीज़ों से दूर रहें।
मन पर नियंत्रण (Control Over Mind): जाप करते समय अपना पूरा ध्यान मंत्र पर और उर्वशी के स्वरूप पर लगाएं। मन को भटकने न दें। अगर मन भटके, तो उसे वापस खींचकर लाएं।
साधना के दौरान होने वाले अनुभव कैसे होते हैं ? What are the Experiences During Sadhana ?
भाई, यह एक बहुत ही पर्सनल सवाल है। हर साधक का एक्सपीरियंस अलग-अलग होता है। यह उसकी श्रद्धा, एकाग्रता और मानसिक स्थिति पर डिपेंड करता है। लेकिन कुछ कॉमन अनुभव हैं जो ज़्यादातर साधकों को फील होते हैं।
जैसे कि, शुरुआत में हो सकता है आपको कुछ भी महसूस न हो। लेकिन जैसे-जैसे आप साधना में गहरे उतरते जाएंगे, आपको पॉजिटिव एनर्जी फील होने लगेगी। आपको अपने आस-पास किसी की मौजूदगी का अहसास हो सकता है। कभी-कभी बहुत ही मीठी खुशबू आने लगती है। कुछ साधकों को सपनों में उर्वशी के दर्शन भी होते हैं, जो उन्हें आगे के लिए गाइड करते हैं।
यार, एक बात समझ लो, अगर आपको कोई डरावना अनुभव हो, तो साधना रोकनी नहीं है। अपने गुरु से बात करें और निडर होकर जाप करते रहें। यह आपकी परीक्षा भी हो सकती है। सही है न?
उर्वशी अप्सरा सिद्धि के लक्षण क्या हैं ? What are the Signs of Attaining Siddhi ?
जरा सोचो, आपको कैसे पता चलेगा कि आपकी साधना सफल हो गई है? इसके कुछ साफ संकेत होते हैं।
जब उर्वशी अप्सरा खुद आपके सामने प्रकट होकर आपको दर्शन दें और आपसे बात करें। यह सिद्धि की सर्वोच्च अवस्था है।
जब वह आपको कोई वचन दें या कोई वस्तु (जैसे फूल या माला) प्रदान करें।
जब आपके सिर्फ सोचने भर से आपके काम बनने लगें।
जब आपकी आकर्षण शक्ति इतनी बढ़ जाए कि हर कोई आपकी तरफ खिंचा चला आए।
जब आपको भविष्य में होने वाली घटनाओं का पहले से ही आभास होने लगे।
भाई मान लो, सिद्धि मिलने के बाद इसका कभी भी गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। यह एक दिव्य शक्ति है और इसका उपयोग हमेशा अच्छे कामों के लिए ही करना चाहिए। क्या कहते हो?
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions – FAQ)
चलो, अब कुछ ऐसे सवालों के जवाब देते हैं जो अक्सर लोगों के मन में आते हैं।
Q1. क्या महिलाएं उर्वशी साधना कर सकती हैं? A: जी बिलकुल। महिलाएं भी यह साधना कर सकती हैं। वो उर्वशी को एक बड़ी बहन या सखी के रूप में सिद्ध कर सकती हैं। इससे उनकी सुंदरता और कलात्मक गुणों में और भी निखार आएगा।
Q2. इस साधना में कितना समय लगता है? A: यह साधक की लगन और श्रद्धा पर निर्भर करता है। किसी को 21 दिन में अनुभव होने लगते हैं, तो किसी को 41 दिन या उससे ज़्यादा भी लग सकते हैं।
Q3. क्या बिना गुरु के यह साधना कर सकते हैं? A: भाईसाहब, यह गलती कभी मत करना। तंत्र साधनाएं एक दोधारी तलवार की तरह होती हैं। एक योग्य गुरु आपको हर कदम पर प्रोटेक्ट करता है और सही रास्ता दिखाता है। बिना गुरु के साधना करने से फायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है।
Q4. क्या उर्वशी अप्सरा साधक को नुकसान पहुँचा सकती हैं? A: अरे बाबा, बिलकुल नहीं। वो एक दिव्य और सौम्य शक्ति हैं। वो आपकी माँ की तरह हैं। वो आपको कभी नुकसान नहीं पहुंचाएंगी, बशर्ते आपकी नीयत साफ हो और आप उनका अपमान न करें।
निष्कर्ष (Conclusion)
तो भाई, उर्वशी अप्सरा साधना सिर्फ किसी को वश में करने की साधना नहीं है, बल्कि यह खुद को बदलने की, अपनी पर्सनालिटी को निखारने की और जीवन में सक्सेस पाने की साधना है। यह आपके अंदर की सोई हुई शक्तियों को जगाती है।
लेकिन, एक बात हमेशा याद रखना, इस रास्ते पर चलने के लिए सच्ची श्रद्धा, अटूट विश्वास और एक काबिल गुरु का हाथ पकड़ना बहुत-बहुत ज़रूरी है। अगर आप इन नियमों का पालन करते हुए पूरी पवित्रता से यह साधना करते हैं, तो यकीन मानिए, आपको सक्सेस ज़रूर मिलेगी और आपका जीवन पूरी तरह से बदल जाएगा। समझ गए न?
मेनिका अप्सरा साधना अनुभव | menka Apsara Sadhna anubhav
मेनिका अप्सरा साधना अनुभव | menka Apsara Sadhna anubhav
परिचय: एक अप्रत्याशित लेख
मेनिका अप्सरा साधना अनुभव | menka Apsara Sadhna anubhav मैं यह लेख सीधे नहीं लिखना चाह रहा था क्योंकि यह पोस्ट पहले से ही तैयार थी, लेकिन किसी कारणवश वह उपलब्ध नहीं है, इसलिए मैं यह अनुभव आपको सीधे इस लेख के माध्यम से बता रहा हूँ।
एक साधक हैं जिन्होंने अप्सरा साधना करी थी और उनको क्या-क्या दिक्कतें आईं अप्सरा साधना में, क्या-क्या फेसिंग करना पड़ा, उसके रिलेटेड यह लेख है जिससे कि आप लोग भी सतर्क रहें और सहज रहें कि कोई दिक्कत अगर होती है तो क्या करना चाहिए आपको, कैसे क्या होना चाहिए और कहीं यह विधि सही है या गलत है, इन सब चीजों के रिलेटेड भी यह लेख बनाया जा रहा है।
अप्सरा साधना की भ्रामक और सही विधियाँ
तो सबसे पहले पॉइंट ऑफ व्यू पर आते हैं कि अप्सरा साधना जो थी, इन्होंने जो किया, क्या वह सही था ? पहली बात, अप्सरा साधना की तांत्रिक विधि कि शीघ्र सिद्ध, जल्दी होने, कैसे अप्सरा को सिद्ध करें और क्या-क्या इसकी सही विधि है, इसके रिलेटेड आज मैं आपको इस पूरे लेख में बताऊंगा और अच्छे से समझना जिससे की कोई दिक्कत ना हो क्योंकि लोगों का कंफ्यूजन ही बढ़ता है और फिर होती है दिक्कत।
तो इस लेख का उद्देश्य यही है, तो पूरी तरीके से समझ लो। अप्सरा साधना चाहे वह साधारण हो या तांत्रिक हो, किसी भी माध्यम से साधना कर रहे हो आप लोग, यह साधना में कभी भी मांस और मदिरा का भोग नहीं देते हैं।
हाँ, जब आपके गुरु आपके साथ बैठे हों, शमशान में अगर तांत्रिक क्रिया द्वारा अप्सरा को बुलाया जा रहा है तब इसका उपयोग आप करेंगे मांस और मदिरा का, वैसे यह साधना कभी भी मांस और मदिरा के साथ नहीं करनी चाहिए।
एक साधक का चौंकाने वाला अनुभव
अब मैं आपको इसकी स्टोरी बताता हूँ कि लोगों के साथ क्या हो रहा है। कहाँ हूँ? काफी ठंड लग रही है आपको। अब कहाँ हूँ, क्या हूँ, वो सब छोड़ दो, ठंड लग रही है, कैसे लग रही है, वो सब बाद की बात है, है ना? पहाड़ों पर तो लगेगी।
अब यह समझ लो कि जो सिचुएशन है, उसका यही कंडीशन है कि आपको कैसे अप्सरा साधना करनी है, क्या करना है, उसके लिए आपको अप्सरा साधना में कभी भी ठंड, कभी भी ऐसा सिचुएशन आए कि आपसे बोला जाए मांस और मदिरा का भोग लगाओ तो समझ लेना यह विधि गलत है। ठीक है?
अब एक साधक, एक ऐसे ही आप लोगों जैसे साधक थे, ठीक है? उन्होंने साधना करी अप्सरा साधना किसी वेबसाइट से देखकर। किसी ने लिखा था कि अप्सरा बहुत जल्दी सिद्ध हो जाएगी मेरी विधि से और उन्होंने उस वेबसाइट के लेख-वेख देखे, अच्छे से उन्होंने साधना करी।
₹11,000 लिए गए उनसे, उनके बाद बोला गया कि संस्कारित माला और हवन और यंत्र भी दिया जाएगा। आप लोगों को अच्छे से पता है कि संस्कारित माला में आपको दो से ढाई घंटे का समय लगता है, ठीक है?
इससे पहले तो वह जागृत होगी नहीं, एक माला और यंत्र अलग। तो संस्कारित करके तो कोई देता नहीं है। अब आ जाते हैं कि जब माला और यंत्र संस्कारित नहीं है, तो एक मिनट रुक जाओ, अभी दिखा, बता रहा हूँ, बता रहा हूँ, ठीक है? आपका भी रिप्लाई दूंगा।
उसके बाद फिर यही कंडीशन आई कि संस्कारित माला और हवन का उनको बता दिया गया। उन्होंने की पहले दिन साधना अपना बढ़िया तरीके से, हाँ हाँ हूँ हूँ करके अपना मंत्र जाप। पहले दिन कुछ नहीं हुआ, दूसरे दिन कुछ नहीं हुआ, तीसरे दिन उनको लगा कि कोई आया।
इनको लगा, हाँ, साधना सही हो रही है। चौथे दिन भी इनको लगा हाँ, फिर कोई आया। पाँचवें दिन इनको हल्का सा डर लगा, थोड़ी सी आवाज, नेगेटिविटी आई, है ना?
तो उसमें थोड़ा सा दिक्कत भी हुआ उनको। उसके बाद छठवें दिन इनको कुछ ऐसा ही अनुभव हुआ, सातवें दिन इनको फिर ऐसा अनुभव हुआ कि कोई मेरे बगल में बैठ गया है, अप्सरा है। तो इन्होंने सोचा यार अप्सरा आ रही है। ऐसे करके इनको 11 दिन कंप्लीट हो चुके और कुछ नहीं हुआ उसके बाद तो।
हाँ, एक मिनट रुकिए। हाँ, तो जो कंडीशन थी कि जैसे कि मान लीजिए कि अप्सरा जो थी, ठीक है? तो अब इन्होंने 11 दिन के बाद इनसे बोला गया कि आपके ऊपर तंत्र का प्रयोग हो गया और तंत्र की वजह से यह दिक्कतें आने लगीं।
तो जब इनको लगा यार, यह तो गड़बड़ हो गया, तो इनसे बोला कि अब ₹31,000 शुल्क लगेगा और आपको जो विधान दिया गया है कि मांस के साथ-साथ मदिरा भी चढ़ानी है। इन्होंने कहा, ठीक है, कोई दिक्कत नहीं।
इन्होंने बोले, अब साधना कितने दिन की होगी? बोले 21 दिन की। इन्होंने 21 दिन साधना करी, बीच-बीच में थोड़े बहुत अनुभव हुए, फिर कुछ नहीं हुआ।
तो 21 दिन बाद उन्होंने बोला तो बोले कि अरे, आपके ऊपर तो तंत्र था, वह काट दिया है पर शक्ति नाराज हो गई है, उसे ढंग से भोग नहीं मिला है, इसलिए ₹51,000 लगेंगे। इन्होंने कहा, अप्सरा तो आ रही है तो चलो ₹51,000 भी देने में क्या दिक्कत है।
तो इन्होंने ₹51,000 दिए। ₹51,000 देने के बाद इन्होंने साधना करी, इनको बोला गया कि हवन में भोग जो है वह मदिरा का देना। इन्होंने साधना करी बैठ के आराम से बाकायदा और रात में इन्होंने मंत्र जाप किया अपना जो भी जैसे करते थे।
मंत्र जाप होने के बाद तीसरे दिन इनको लगा कि कोई इनके बिस्तर पर आकर बैठ गया। अब इनको लगा हाँ, अप्सरा आ रही है क्योंकि इनका भाव ही ऐसा था कि अप्सरा आएगी तो संभोग करेंगे, यह सब, वो सब।
तो इन्होंने, इनको तो लगा कि बहुत अच्छा चल रहा है मेरा तो, है ना? उसके बाद जब यह सब हो गया तो इन्होंने सोचा यार कैसे होगा, क्या होगा, करते रहे। फिर छठवें दिन इनको लगा कि कोई इनकी ओर बिस्तर पर लेट गया इनके साथ। इनको दिखाई नहीं दिया और कोई इनको टच कर रहा है।
अब ये जब सुबह उठे, 10, दो-चार मिनट का अनुभव होगा इनका, सुबह उठे तो इन्होंने देखा कि मेरे हाथ में स्क्रैचेज पड़े हुए हैं। तो उन्होंने उनसे पूछा तो बोले, अरे, वो कुछ नहीं, वो होता है। अब जब स्क्रैचेज आदमी के पड़ जाएँ, निशान नोचने जैसे, तो आदमी को डर तो लगता ही है। ऐसे ही करके इनको 15 दिन गुजर गए। 15 दिन बाद वह चीज रात में आती, इनके साथ उल्टा-सीधा काम करना शुरू कर दिया उसने।
कहीं यहाँ हाथ लगाना, कहीं वहाँ और सुबह देखते हैं तो खून फटा हुआ मिलता है, कहीं खून निकलता है, ऐसे करके होने लगा। उसके बाद फिर 15-20वें दिन, 21वें दिन के बाद इनके साथ गलत संबंध बनाने लगी वो जबरदस्ती और इनको खून जैसा भी आने लगा सुबह-सुबह। और सुबह ऐसे उठते थे तो यह लगता था कि ताकत ही खत्म हो गई है।
अब इन्होंने उनसे कांटेक्ट किया तो उन्होंने बोला कि क्या करूँ, आप जानो, कोई तो आया, मेरी रिस्पांसिबिलिटी खत्म। अब यह समझ लो। और सामने वाले ने उसको डिनाई करके ब्लॉक कर दिया।
₹51,000 भी लिए, ₹31,000 भी लिए, ₹11,000 भी लिए, ब्लॉक भी मार दिया। अब यह यहाँ-वहाँ घूमे, वही रोज का कंडीशन होने लगा इनके साथ।
वो रोज रात को आती थी, उल्टा-सीधा काम करती थी और कहीं-कहीं खून निकल जाता था, कहीं कुछ होता था। अब यह आवारा भटकने लगे। कोई बोला तुम्हारे ऊपर तंत्र हो गया है, इसका पैसा दो, इसका पैसा दो। ऐसे करके इनका पूरा बर्बाद हो गया।
समाधान और मुक्ति का मार्ग
अब यह लौटते-फिरते, पढ़ते-पढ़ते जाने कहाँ से किसी ने मेरी वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम का सुझाव दिया, उन्होंने कहा, आप इनसे बात करिए, यही सॉल्यूशन करेंगे।
तो मैंने कहा, ठीक है भाई, देखते हैं। मैंने बात करी, मैंने समझा उसको, फिर मैंने बोला, देखो आपने जो साधना करी है, उसमें भूतनी आई है, अप्सरा नहीं आई है क्योंकि अप्सरा साधना की प्रॉपर विधि में यह विधान ही नहीं है। तो इन्होंने बोला, अच्छा, क्या करना चाहिए? तो उसके हिसाब से फिर मैंने इनको प्रोसेस को समझाया।
जैसे कि मैं आप लोगों को प्रोसेस समझाता हूँ, कोई भी, अब जैसे बटुक भैरव साधना है, जिसमें पाँच रजिस्ट्रेशन होने थे, शिवरात्रि में मैं दे रहा हूँ, तो जिसमें से तीन की जगह चार लोग फुल हो गए, सिर्फ एक सीट बची है, 15 तारीख तक मुझे लगता है, वो भी फुल हो जाएगी।
तो जो मैं पाँच आदमियों को सिखा रहा हूँ, उनको प्रॉपर सिखाऊंगा, प्रॉपर बताऊंगा व्हाट्सएप पर, ऐसे-ऐसे करो। कोई दिक्कत होगी तो कॉल पर भी समझा देता हूँ। तो प्रॉपर विधि के साथ ही साधना करनी चाहिए, यही मैंने उनको समझाया।
अब जैसे मान लो किसी को बटुक भैरव साधना करनी है, तो वह क्या करेगा? वो मेरे से व्हाट्सएप पर कांटेक्ट करेगा, नंबर मेरी वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर दिया हुआ है, वहाँ से कांटेक्ट करके मुझसे पूछेगा कि भैया सीट बची है?
हाँ, तो बस जो प्रोसेस बता के वो ज्वाइन हो जाएगा। पाँच लोग ऐसे ही तो करते हैं हम लोग। उनका क्या है कि वह तो जितने आ जाओ, सब कम हैं, पैसे देते जाओ, काम करते जाओ, हमें क्या मतलब। ऐसे लोग थे वो। अब बाद में जब वह फंस गए तो अब मेरे पास, तो मैंने कहा, देखो भैया, ऐसे कुछ नहीं कर सकता मैं।
पहले गुरु मंत्र, रक्षा मंत्र करो। वो बोले, ब्रह्मचर्य नहीं रुकता है तो मैं क्या करूँ? तो मैंने कहा, कोई दिक्कत नहीं, ब्रह्मचर्य रुकता हो ना रुकता हो, आप गुरु मंत्र तो शुरू करो। गुरु मंत्र शुरू किया, पहले दिन, दूसरे दिन, तीसरे दिन के बाद चौथे दिन से इन्हें आराम मिलने लगा।
अब वो दूर खड़ी होने लगी, पास में नहीं आने लगी, दूर-दूर से बात करती है।
उसके बाद जब इन्होंने 21 दिन गुरु मंत्र का पूरा कर लिया, वह दूर से कह रही है, आओ, आओ, मुझे बुलाओ, मेरा मंत्र जाप करो, मैं अप्सरा ही हूँ। उसके बाद फिर रक्षा मंत्र किया तो वह कमरे के बाहर से बुला रही है। अब इतना होने के बाद कुछ गुप्त क्रियाएँ भी मैंने उनको दी थीं जिससे वह आपके शरीर को टच ना कर पाए, वह गुप्त क्रिया सिर्फ उन्हीं को बताई थी मैंने।
यह सब होने के बाद फिर क्या हुआ? जब उन्होंने यह सब किया तो उनको फायदा मिला, रिलीफ मिला, आराम आया थोड़ा सा।
अब इसके बाद बोले कि मुझे फिर अप्सरा साधना करनी है। मैंने कहा, अभी एक से भुगत निकल नहीं पाए, तुम्हें फिर अप्सरा साधना करनी है। बोले, करनी है, मैं इनकी कही की है। तो फिर मैंने क्या किया कि फिर मैंने उनको एक विसर्जन प्रक्रिया बताई, शक्ति को विसर्जन करने की एक प्रक्रिया होती है, वो गुप्त तरीके से कराई जाती है।
नारियल और, सूखा नारियल, गीला नारियल और कच्चा नारियल, तीनों तरीके के नारियल होते हैं। फिर उसके बाद उसमें सिंदूर लगाया जाता है, मतलब पूरा एक दो-चार घंटे का लेंथी प्रोसेस है। उसके बाद कोई भी शक्ति हो, वो विसर्जित हो जाएगी आपकी।
आप चाहो तो एक बार में अपनी सारी शक्तियाँ विसर्जित कर सकते हो, यह समझ लो। ऐसे करके उनकी शक्तियों को फिर आखिरी में, ऑल ऑफ सडन, मेरे को ही जाना पड़ा, मैं तुम्हारे बस की नहीं, मैं ही आता हूँ, जो खर्चा लगे देखना। फिर मैंने जाकर उनका पूरा विसर्जन का प्रोसेस अपनाया, विसर्जन कराई शक्ति।
अप्सरा साधना की प्रामाणिक तांत्रिक विधि
फिर मैंने उनको बताया कि ऐसे-ऐसे यह अप्सरा साधना होती है। जैसे मेनका अप्सरा उनको बोला था, तो मेनका का जो तांत्रिक विधान है, उसमें आपको करना क्या होता है, मैं समझा देता हूँ जिससे कि कंफ्यूजन ना हो।
रात्रि के 12:00 बजे आपको नहा-धो के, स्नान हो के, बढ़िया बैठ जाना है। वाइट कलर के कपड़े होने चाहिए, एकदम श्वेत, एकदम वाइट, साफ कपड़े, साफ आसन, बाहर सामने एक चौकी।
उसके बाद इत्र लगा होना चाहिए, इत्र रुई में आता है, बढ़िया से लेना, बहुत बढ़िया खुशबू, कान में लगा लो इत्र और इधर भी लगा लो, बढ़िया एकदम हाथों, पूरे शरीर में लगा लो।
गुलाब के फूल-वूल बिखेर, उस चौकी पर रख के अप्सरा का यंत्र रखो, नेट से कोई भी पेंटिंग अप्सरा को मान के उसकी फोटो रख लो।
उसके बाद मानसिक रक्षा, पहले रक्षा मंत्र लगा लो, मानसिक पूजन करो गुरु का, गणेश का और फिर अप्सरा का आवाहन करो, फिर उनका पूजन करो। यह सब करने के बाद फिर आपको मंत्र जाप करना होता है, तांत्रिक विधि से।
जैसे कि अप्सरा का हिसाब है तो उसके लिए शं, उसके बाद थोड़ा सा मंत्र और है, उसके बाद नं का और फिर आगे लास्ट में स्वाहा, ऐसे करके वह पूरा मंत्र है।
उस मंत्र की 21 माला करनी होती है और कितने दिन? 41 दिन तक। 21 माला के बाद अगर आपकी पॉसिबिलिटी है तो हवन करो।
41 दिन में अप्सरा गारंटी है, वह आपके सामने खड़ी ही हो जाएगी, यह मेरा चैलेंज है। लेकिन करना मन से है, यह मत देखो टाइम कितना हो रहा है। भोग में मिठाई का भोग लें, मांस-मदिरा का कभी कुछ मत करो, बहुत जल्दी सिद्ध होती है मेनका इस विधान से।
सामान्य भ्रांतियाँ और महत्वपूर्ण सावधानियाँ
हालांकि अभी आप लोग इतने कैपेबल नहीं हुए, एक मंत्र ऐसा है जिसमें 108 अप्सरा सिद्ध होती हैं, वह बिल्कुल तांत्रिक है, वह शमशान में बैठ के किया जाता है, जो मैंने ट्राई किया था, ठीक है?
तो वह चीज अलग है, उसमें विधान ही अलग है, उसमें अप्सरा सौम्य रूप में नहीं आती, उसमें तो कटार ले के खिंची चली आती एकदम, कौन बुला रहा है यार, तो काट ही डालेंगे, यह पावर होता है फिर उस समय तो क्योंकि तुम खींच रहे हो, बुला नहीं रहे हो, खींच रहे हो उनको।
और यह जो तरीके हैं, यह सौम्य हैं, इसमें अप्सरा आएगी, दिखेगी भी, बात भी करेगी, नहीं होगी तो ध्यान प्रणाली में आँख बंद करके जब तुम सोने जाओगे तब तुम्हारे सपने जैसा लगेगा तुम्हें, पर वह अनुभव होंगे, वो आएगी, बात करेगी, चाहिए क्या, क्या कर रहे हो, ऐसे करके होता है। तो मेनका अप्सरा की जो विधि है, वो ऐसे ही करते हैं।
अब इसमें कभी-कभी कोई कहता है कि अप्सरा साधना में नग्न होकर साधना करनी पड़ती है, चाहे पुरुष हो या स्त्री। नहीं, नग्न अगर साधना करोगे तो तो भूतनी ही आएगी, अप्सरा नहीं आएगी। रक्षा मंत्र क्यों लगाना पड़ता है?
क्योंकि रात के 12, 1, 2 बजे, 3 बजे, तुम साधना रात के 12:00 बजे शुरू करोगे, दो-तीन तो बज ही जाएँगे और तुम इत्र लगाए हो, फूल लगाए हो, चौकी को कवर करते, इसीलिए यह रक्षा मंत्र लगाया जाता है, पूरा घेरा क्योंकि तुम्हें प्रोटेक्शन अपनी लेनी है। तो जब तुम वह करते हो, तब तुम्हारे पास वह आती है।
अप्सरा साधना में कोई ज्यादा बड़ा लेंदी नहीं है, ना कोई बवाल है पर यह है कि करना ढंग से होता है। लोगों के बहकावे में कि मैं अंगूठी में अप्सरा दे रहा हूँ, ताबीज में दे रहा हूँ, यंत्र में दे रहा हूँ, माला में दे रहा हूँ, वो सब पागल बना रहे हैं, सब लूट रहे हैं।
अगर आपको अप्सरा साधना करनी है, सिद्धि करनी है, जल्दी से जल्दी पाना है, तो खुद करना पड़ेगा, याद रख लो। गुप्त क्रिया, हवन आदि क्रियाएँ वो अपने जो योग्य गुरु हैं, उससे करवाओ, मंत्र उससे लो। जब मैं कहता हूँ ना कि अप्सरा किसी भी शक्ति का ट्रांसफर दे रहा हूँ, तो क्या करता हूँ मैं?
मैं खुद हवन आदि क्रिया, गुप्त क्रिया करके आपको मंत्र कौन सा देता हूँ? तांत्रिक मंत्र, जिसका मंत्र मैंने जाप करके ऊर्जा बना के आपको दे दिया, सिद्ध करके कि अब इसको तुम करो, अब आएगी।
और सादा साधना में क्या होता है, उसमें आपको एक शाबर मंत्र दिया जाता है, तांत्रिक मंत्र नहीं दिया जाता है, उसमें आपको ऊर्जा बनानी होती है, गुप्त क्रियाएँ, हवन होगा लेकिन ऊर्जा बनानी होती है दोबारा से और फिर बुलाना होता है, बस इतना अंतर आता है।
यह सब बात आपको समझ में ही नहीं आती। सिंपल सी बात है कि ट्रांसफर अंगूठी और लॉकेट, इसमें नहीं होता, वो ऊर्जा है, बहती रहती है। उस ऊर्जा को कंट्रोल करके सामने वाले साधक को दी जाती है।
H2: प्रश्नोत्तर और आगामी साधना की जानकारी
अब यह तो हो गया अप्सरा साधना, मेनका अप्सरा साधना के विषय में। अगर आपको यह तांत्रिक विधि चाहिए तो भी मेरे व्हाट्सएप पर कांटेक्ट कर लेना, अगर आप दमदार हैं तो मैं आपको दे दूंगा, ठीक है? व्हाट्सएप नंबर हमारी वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर दिया है।
बटुक भैरव साधना की घोषणा
बाकी का जो बचा आपका और शिवरात्रि को आपको जो साधना करनी है, बटुक भैरव साधना, उसका यंत्र क्या है? यंत्र मेरे से ले लेना, मतलब व्हाट्सएप पर मैं यंत्र दे दूंगा, उसमें से अगर चेंजमेंट करना होगा तो पूछ लेना, नहीं तो एज इट इज कॉपी बना लेना पेपर पे, चाहे भोजपत्र पे, रेड स्केच से या अष्टगंध से, जैसे भी सूटेबल लगे, उसी को रखना है, ठीक है?
और वही यंत्र बाद में काम आएगा तुम्हारे, याद रखो। उसी का पूजन-वजन करके मंत्र को सिद्ध करके वह यंत्र आपको रखना है, फिर मैं बताऊंगा कैसे रखना है।
तो बटुक भैरव साधना में पाँच लोगों की जरूरत थी, चार लोग फिल हो चुके, एक लोग चाहिए, जिसको करना है वही आए, फालतू के लोगों की भीड़ नहीं चाहिए, फालतू लोगों की जरूरत नहीं है मेरे को अपनी वेबसाइट पे। सिंपल कहना, मेहनत करोगे तो सिद्धियाँ मिलेंगी।
भले ही मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर दूँ, गुप्त क्रिया, हवन करके आपको ट्रांसफर दे के, सब दे दूँ, फिर भी अगर आप मेहनत नहीं करोगे, आपको कुछ हासिल नहीं होगा। इसलिए मेहनत करना है अगर, तो आना वरना मत आना। सिंपल सी बात है।
एक लोग बचा है। देखो, 500 साधक हैं मेरे पास इस समय, सब अपनी-अपनी धुन में मगन हैं, अपने-अपने हिसाब से कर रहे हैं। अगर आपको भी साधक बनना है, कुछ शक्तियाँ महसूस करनी हैं और शक्तियों को पाना है, तो जुड़ो।
यह मत करो, कुछ लोग मेरे में ऐसे भी हैं, मैं तो पूजा करता हूँ, मैं वह अपनी पूजा नहीं छोड़ सकता, आपकी की बंद कर सकता हूँ, ठीक है?
तो यह काम मत करो कि मैं अपनी तरफ से 100% कर रहा हूँ, एक बार की जगह दो बार नहीं, तीन बार आपका हवन कर रहा हूँ, मैं आपसे बोल रहा हूँ कि ऐसे नहीं, ऐसे करो, ऐसे नहीं, ऐसे करो। आपने तो कह दिया, तुक्का मार दिया, यह कर दिया, आप तो कुछ कर नहीं रहे हो और यह है, वह है। तो ऐसे साधकों की भाई जरूरत नहीं मेरे को।
गुरु का महत्व और पाठकों के प्रश्न
भाई अगर गुरु कुछ बता रहा है तो सीखना पड़ेगा। जब सब, मैंने भी तंत्र लाइन में जब जुड़ा था, तो मैंने भी बहुत चीजें सीख चुका था पहले पर मेरे गुरु ने कहा, अगर तुमको सीखना है तो यह सब चीजें भूल जाओ, जिस-जिस तरीके से मैं सिखाऊंगा, उस-उस तरीके से चलना, अपना कोई दिमाग नहीं लगाना, तब मैं सिखाऊं।
भाई, हर गुरु की नॉलेज और एक्सपीरियंस और ज्ञान अलग है, वह अपने लेवल से सिखाएगा। अगर आपको उसके लेवल पर जुड़ना है तो जुड़ो, उसकी चीजें अच्छी लग रही हैं, उसकी बातें अच्छी लग रही हैं, उसकी, उसके करने का तरीका, उसका विधान सही लग रहा है तो जुड़ो, वरना मत जुड़ो।
अगर तुम्हें अपने ही रूल के हिसाब से चलना है तो चलो, जैसे इनके साथ हुआ, यह भी अपने रूल के हिसाब से चल रहे थे और मान लो कि अगर यह मेरे पे कांटेक्ट में नहीं आते तो क्या होता इनका?
इनका तो राम नाम सत्य था ना। इसलिए एक गुरु होना जरूरी है, जो भी आप चुनें, चाहे किसी को, मैं नहीं कहता मेरे को चुनो, किसी को चुनो, उसी के साथ रहो, उसी से सीखो, चाहे भले ही वो आपके फोन से कांटेक्ट में हो, चाहे सामने से कांटेक्ट में हो, उसी से सब कुछ करो, तब अच्छा रहता है।
खुद से करोगे, बचाने वाला कोई नहीं होगा। आदमी बोलता है, मैंने शिव को गुरु बना लिया। भाई, शिव तो सबके गुरु हैं, किस-किस को देखेंगे वो? और दूसरी बात, अगर कोई दिक्कत हो जाएगी तो शिव-शिव से तुम एकदम बात-बात कर लोगे मैसेज पे या फोन पे ?
शिव जी, हाँ शिव जी, यह दिक्कत हो गई, भूत आ गया, अब मैं बताऊँ कैसे भगाऊँ? नहीं ना। इसलिए जीवित गुरु का जरूरी है, कुछ सवालों के समाधान जीवित गुरु ही देता है, भौतिक सुख अगर तुम्हें संसार में रहना है तो। तो यह सब बातें आपको समझ में आ गई।
अब मैं कुछ टिप्पणियों (कमेंट्स) का जवाब देता हूँ।
काफी ठंड लग रही है आपको? हाँ, ठीक है भाई। मुझे भी बुलाया पर आज तक कोई नहीं आया। क्या आप बता सकते हो भूतनी कहाँ है ? भूतनी कहाँ है? अब तो भाई विसर्जन हो गया उसका।
Kindly reply, when I see, can I see the bhootni? हाँ, भूतनी, अब देखो चैलेंज की बात मत करो मालिक। बहुत से ऐसे तरीके होते हैं जिसमें अगर मैं आपको बता दूँ कि कर लो, ठीक है? तो फिर वह छोड़ेगा नहीं आपको।
आदमी बोलता है ना बबूल के पेड़ की सिद्धि, एक काम करना, बबूल के पेड़ में जाना, ठीक है? डंडा लेना, उसको मारना, उसके बाद उस पर बाथरूम कर देना, पुराने से पुराना और बोल देना, मैं तुम्हारे जैसों से नहीं डरता, जो उखाड़ना है, उखाड़ लो।
पता चल जाएगा क्या होता है। वह चीज हफ्ते भर में ना हॉस्पिटल पहुँच जाओ तो नाम बदल देना। लेकिन उसके बाद क्या होगा, मैं बता रहा हूँ। उसके बाद कम से कम नहीं तो तुम्हें बचाने के लिए दो गुरुओं की जरूरत पड़ेगी ढंग के।
फिर तुम्हें मंत्र-तंत्र से बाँधा जाएगा, फिर तुम्हारे हवन आदि क्रिया बिठा के कराए जाएँगे, तब वो छूटेगा। समझ गए? चैलेंज मत करो, मैं सीधा सिंपल बता देता हूँ।
एप्रिसिएशन जी, राधे राधे सर जी, फ्री हो तो… मैं फ्री हो तो बता तो दिया।
और किसी का कोई सवाल हो तो पूछ लो। आप लोगों का बहुत सवाल था, मेनका अप्सरा कैसे सिद्ध करी जाती है, तो वह भी बता दिया तांत्रिक विधि से।
अब आ जाते हैं कृत्या, तो कृत्या अगला स्टेप बता दूंगा, नहीं तो अगर आपको लग रहा है कि मेनका के बारे में एक विस्तृत पोस्ट आनी चाहिए तो एक विस्तृत पोस्ट भी आ जाएगी। और अगर किसी का कोई सवाल हो तो पूछ लो।
कृत्या साधना का अनुभव कब बताओगे? कृत्या साधना का अनुभव तो मैं तभी बताऊंगा जब मैं कृत्या साधना के विषय में बताऊंगा। यह समझ लो, क्या नाम है, शशि जी, कृत्या वह शक्ति है जो आपके शरीर के अंदर है, एक आत्मा।
अब उसे सब पता है आपके बारे में, तो जब वह उसी को सिद्ध करोगे तो क्या-क्या अनुभव करेगी, वह आप ही सोच लो। मैं अपना बताऊंगा तो मजा ही आ जाएगा, ठीक है? राधे राधे सर जी। जी राधे राधे राहुल तिवारी जी।
भूतनी सिद्धि… भूतनी सिद्धि अभी आएगी महाराज, जब तंत्र, जब कालिक यंत्र उसमें घुसेंगे ना कापालिक, अभी तो आपकी राजसिक विधि चल रही है, इसके बाद टोने-टोटके आएँगे, वह तो शॉर्ट्स में, छोटे-छोटे लेख बनाकर निपटा दूंगा, वो सब टोने-टोटके, छोटे-छोटे झाड़ा-फूँकी के मंत्र, बिच्छू भगाने के मंत्र और यह सब, वो छोटे लेखों में ही निपटा दूंगा।
उसके बाद फिर आएँगे दूसरे, उसके बाद उल्लू तंत्र आएगा, फिर कौवा तंत्र आएगा, उसके बाद पशु तंत्र आएगा, उसके बाद आएगा शमशानिक कापालिक, तब आएगा, तब कुछ हो पाएगा, आप लोग यह समझो।
अब दूसरा सवाल आपका क्या है, मैं पढ़ लेता हूँ।
क्या अप्सरा साधना करना सही है? हाँ, सही है अगर कर सकते हो, कोई दिक्कत नहीं। सर रिसर्च फील्ड में जाने के लिए कौन सी साधना करें ?
रिसर्च फील्ड में तारा साधना क्योंकि ज्ञान प्रकृति की वही हैं। और अगर आपको और कुछ जानना है, अपनी मृत्यु, भूत, वर्तमान और यह सब पुराना सब पंचांग-वंचांग, तो मातंगी या पंचांगुली साधना करो।
आपको प्रणाम करता हूँ, अगर आपके पास सिद्धि है तो बताइए मेरे बारे में कि निरंजन कुमार है, मेरे ऊपर कौन सा तंत्र लगा हुआ है? रंजन, निरंजन और रंजन भैया, पहले तो अपना ना, यह सब चीजें व्हाट्सएप पर पूछी जाती हैं, ठीक है?
और आपके ऊपर कोई तंत्र नहीं लगा हुआ है, आप जो फैंटम बने घूम रहे हो ना, वो मत घूमो, ठीक है? कि आपके ऊपर कोई तंत्र लगा हुआ है। जब-जब बृहस्पतिवार को मांस-मदिरा का सेवन करोगे तो कहाँ से बच पाओगे, माया तो रुकेगी ही नहीं, पैसे के पीछे भागोगे, पैसा रुकेगा ही नहीं।
क्या अप्सरा साधना सही है और सिद्धि करना सही है? गलत-सही है महाराज। आप कहाँ से हो? यूपी से। सर मैं शमशान में जाकर देखता हूँ, नहीं मिला। हाँ तो मैंने तरीका बता दिया, फैंटम बन रहे हो तो आप भी कर लो।
श्री गणेश जी की साधना दीजिए। गणेश जी की साधना आएगी, अभी आएगी। गणेश जी की इसमें है, गुरु वाली बुक में जो मंत्र हैं, उसमें गणेश साधना भी है, उच्छिष्ट गणपति भी है और हमारे वाले गणपति हैं, पर वो दूंगा नहीं और दो-तीन गणपति की साधना है, ठीक है?
आपको प्रणाम करता हूँ, अगर आपके पास… बता दिया भाई। जी सर, आपका नंबर तो दीजिए। नंबर मेरी वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर उपलब्ध है, ठीक है?
सर मैं चैलेंज नहीं कर रहा था। ठीक है, अगर आपको करना हो तो कर लो, कोई दिक्कत नहीं है, मैंने तरीका बता दिया।
आपको प्रणाम करता हूँ, अगर आपके पास सिद्धि… फिर वही बात।
राधे, एक बार बता दीजिए, मैं सुन नहीं पाया। इस लेख को दोबारा ऊपर से पढ़ लेना। सर जी, आपका नंबर सेंड कर दीजिए। मेरा नंबर वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर है, लास्ट में 902 है।
मेरा मतलब साइंटिफिक रीजन, साइंटिफिक रिसर्च। हाँ, वही उसके लिए सबसे बढ़िया है। बारिश को रोकने के लिए साधना दीजिए। देखिए, यह सब चीजें तो आजकल आम बात हो गई यार, बारिश बरसाना, बारिश को रोकना, यह सब चीजें आम बात हो गई।
यह जब साइंस करने लगा है तो फिर मंत्रों की साधना की जरूरत क्या है?
अब आप बोलोगे मुझे हवा में उड़ना है, उसके लिए आप 20 साल बर्बाद करोगे क्या आकाश सिद्धि पाने के लिए? इससे अच्छा 10,000 दो, फ्लाइट में कहीं भी चले जाओ। टाइम ज्यादा इंपॉर्टेंट है या पैसा? क्या बात करते हो यार तुम लोग भी।
महाराज कृपा करके मेरा मार्गदर्शन करिए। आप व्हाट्सएप पर मैसेज कर दीजिए, बता दूंगा आपको क्या दिक्कत आ रही है।
भैया प्रणाम भैया, ‘अल मनियत की दुनिया’… नहीं, मेरी सिर्फ एक ही वेबसाइट है गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम।
एक और संबंधित ब्लॉग है, साधना सिद्धि ज्ञान, जिस पर बहुत ही कभी-कभार पोस्ट आती है। लेकिन मुख्य वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम ही है।
इसके अलावा अगर आपको मेरे नाम या फोटो से कोई और कुछ चला रहा है, तो वह फ्रॉड है, समझ लो।
गुरु जी, तांत्रिक बनने के लिए कौन सी सिद्धि की जरूरत होती है?
सबसे पहले गुरु मंत्र, रक्षा मंत्र, उसके बाद 5000 सिद्धियाँ।
गुरु जी, अपने अनुसार आज के समय के जातक के जीवन में किस साधना का करना योग्य रहता है ?
सबसे पहले गुरु मंत्र करो, रक्षा मंत्र करो, उसके बाद कोई भी एक सिद्धि, वो बड़ी, पहले छोटी करो, जब वह सिद्ध हो जाए धीरे-धीरे तब एक बड़ी कर लो कोई भी, 10 महाविद्या से या कोई भी, उसे लाइफ टाइम करते रहो, बस हो गया तुम्हारा जीवन पार, सब कुछ, सब बेस्ट रहेगा हमेशा।
गुरु जी, तारा या मातंगी साधना साइंस रिसर्च करने के लिए ?
हाँ।तांत्रिक दुनिया में से सबसे ज्यादा, तांत्रिक दुनिया में किस शक्ति का सबसे ज्यादा चलता है? अभी नहीं बता सकता, आदेश नहीं है, ठीक है?
बस इतना बता सकता हूँ कि रावण जो था, लंकापति लंकेश, उसने यह साधना करी थी, उसके बाद उसको बहुत सारी सिद्धियाँ मिली थीं, पर वह काली नहीं थीं, उनका कुछ और नाम है, ठीक है ?
लास्ट में जरूर काली आता है, ठीक है ? वो काली नहीं हैं, वो पूरे समस्त संसार की सबसे बड़ी शक्ति है, उसका बोलबाला है। अब उन्होंने मना कर दिया अपने आपको बताने से तो मैं मना कर रहा हूँ, ठीक है?
‘अनायत की दुनिया ऑफिशियल चैनल’ किसका है फिर? पता नहीं, कोई होगा, मुझे नहीं पता, मेरा नहीं है पर।
आप कहाँ से सिद्धि किया हुआ है? भैया, हमारे तो इस समय छह गुरु हैं तो मैं किसका-किसका बता दूँ ?
धन्यवाद आपका, किंतु महाविद्या के लिए काम रुक जाना होता है? नहीं ना, काम रोक, ना शमशान, कहीं नहीं। आप घर पर भी बैठकर साधना कर सकते हैं, कोई ऐसा जरूरी नहीं है कि काम रुक ही जाना पड़ेगा।
आप घर पर बैठ के साधना भी कर सकते हैं किसी भी सिद्धि की, कोई मना नहीं करता कि नहीं, मेरा यहाँ मत करो, वहाँ मत करो। कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिसको घर के बाहर करना चाहिए, बस।
रक्षा मंत्र बता सकते हैं क्या? वो अपने गुरु से पूछिए भाई, जिस साधना के हिसाब से आपको किस साधना की विधि दे रहा है, किस हिसाब से, तो रक्षा मंत्र, गुरु मंत्र उसी हिसाब से चलता है।
अशोक मिश्रा, प्रतापगढ़ से हूँ, मेरे ऊपर किस-किस की कृपा है? आपके नहीं है क्या? किस-किस की कृपा है? आपके गुरु भी तो होंगे, आप उनसे पूछ लीजिए। मंत्र अगर आप करते हैं तो
आपके गुरु भी होंगे, उनसे कंफर्म कर लो महाराज । पूर्व जन्म की सिद्धि के बारे में बताइए कृपा करके। पूर्व जन्म की सिद्धि के लिए जब आप तंत्र साधना में घुसते हो तो धीरे-धीरे आपको सब याद आने लगता है कि पुराने जन्म में आपने क्या-क्या किया था।
कुलदेवी, पितृ मनवाने होंगे ना साधना के लिए? नहीं, उसमें आवाहन करोगे, अपने आप आ जाएँगे सब हवन में।
गुरु जी, मिले 10 साल से माता रानी की सेवा करता हूँ। तो भाई, गुरु मिले 10 साल से तो माता रानी की सेवा करते हो, फिर भी मुझसे पूछ रहे हो कि मेरे ऊपर किसकी कृपा है?
अगर इतना ही आप लोगों को जानने का शौक है अपने बारे में या तंत्रों की सिद्धियों को मजे में लेने के लिए तो मुझसे बोला करो कि मुझे, मुझे तंत्रों की दुनिया में मजा लेना है, जो भी होगा, मैं जिम्मेदार हूँ उसका, तो मैं दूंगा ऐसे-ऐसे मंत्र आपको जिसमें आपको भी पता चल जाएगा कि होता क्या है तंत्र। बस।माता का रोग पाठ करने पर माता जो गड्डियाँ देखने लग जाती हैं। पता नहीं, ठीक है।
अंतिम शब्द और संपर्क जानकारी
अब और कोई सवाल हो तो पूछ लो। अगर नहीं सवाल है तो मैं इजाज़त चाहता हूँ और आपको जो भी पूछना है तो मेरा नंबर वेबसाइट पर है, लास्ट में 902 है, उससे पूछ लो। मेरी मुख्य वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम है और एक सम्बंधित ब्लॉग साधना सिद्धि ज्ञान है।
वही सब जेन्युइन हैं। उसके अलावा आप ग्रुप के अंदर भी अगर आप और किसी को पैसा देते हो, किसी से कुछ करवाते हो तो उसके जिम्मेदार आप होंगे, मैं या मेरी वेबसाइट नहीं क्योंकि आजकल बहुत होशियार आदमी बैठ के ग्रुप में घुस-घुस के मैसेज करते हैं।
आप अगर हम पर कृपा कर देंगे तो हमें गुरु मंत्र ले सकते हैं? हमारे गुरु बन के गुरु दत्त का मंत्र धारण कर, का जाप कर सकता हूँ क्या ?
मेरे गुरु बन, कृपा करके मार्गदर्शन… अब गुरु बनना ना बनना, मैंने बता दिया, आप मेरी वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पर कुछ और लेख देखो, समझ में आए आपको कि मैं अच्छा लगता हूँ, मेरी बातें सही लग रही हैं तो आप मेरे से कांटेक्ट करोगे, हाँ भाई, मैं आपको गुरु बनाना चाहता हूँ, क्या प्रोसेस है, ठीक है? अगर नहीं समझ में आ रहा तो आप किसी और को ढूंढो।
तो यही था। अब मेरे को इजाज़त दो। अगले लेख में आपको मेनका के बारे में जानना हो, मेनका अप्सरा के बारे में, तो विधान बता दूंगा, नहीं तो अगर आपको कृत्या के बारे में जानना हो तो भी बता दूंगा।
और अभी जो है, वह आपका चल रहा है शिवरात्रि पे स्पेशल है जो, क्योंकि हर शिवरात्रि कुछ ना कुछ आता है, इस बार बटुक भैरव साधना है, जिसको करना है, वह एक ही लोग बचा, कर सकता है, पाँच लोगों की सीट में एक सीट बची है, चार फुल हो चुकी हैं। 15 तारीख से पहले मेरे…
menka apsara sadhna मेनका अप्सरा साधना विधि विधान और परिचय
मेनका अप्सरा साधना का परिचय और स्वागत
menka apsara sadhna मेनका अप्सरा साधना विधि विधान और परिचय जय श्मशान कालिका देवी दोस्तों नमस्कार गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम वेबसाइट पर मैं आप सभी लोगों का हार्दिक स्वागत करता हूं और आज मैं बहुत बेहतरीन एक साधना लेकर आ चुका हूं मेनका अप्सरा की साधना दोस्तों जो इंद्र दरबार की उच्च कोटि की मेनका अप्सरा है दोस्तों आज उनकी मैं साधना लेकर आ चुका हूं और यह जो साधना यह जो मेनका अप्सरा की मैं साधना जो देने जा रहा हूं यह प्रेमिका के रूप में जीवन भर आपके साथ रहने वाली है
और इस जन्म में नहीं अगले जन्म में भी जन्म जन्मांतर के भी साथ में रह सकती है दोस्तों। तो यह मेनका अप्सरा की साधना क्या है किस तरह से है कैसे करना है इसका विधि विधान क्या है
यह जानने से पहले अगर आप लोग हमारी वेबसाइट पर नए हैं तो हमें फॉलो कीजिए ताकि जो मैं अलग-अलग लेख डालता रहूं उसकी सूचना फौरन आप तक पहुंच जाए दोस्तों और आपके जीवन में सुख शांति समृद्धि ऐश्वर्य ये सभी प्राप्त हो जाए आपको और आपके जीवन में से विघ्न समस्याएं शत्रुओं को दूर कर सके दोस्तों तो इसीलिए हमारी वेबसाइट को फॉलो कीजिए दोस्तों।
मेनका अप्सरा साधना के पूर्व अनिवार्य नियम: गुरु और रक्षा कवच
मेनका अप्सरा की साधना जो आज मैं देने जा रहा हूं दोस्तों मगर एक रिक्वेस्ट करूंगा कि बगैर गुरु की यह साधनाएं मत कीजिए भले कौन सी भी साधना हो अच्छी साधना हो बुरी साधना हो बगैर गुरु के नहीं करना है।
पहला सर्वप्रथम आपको एक अच्छे गुरु की तलाश करनी है उनके तरफ से शिष्य दीक्षा ही लेकर ही उसके बाद साधना शुरू करनी है दोस्तों क्या क्योंकि वेबसाइटों पर इतना अच्छी तरह से बताते हैं ना साधना कि उसको पढ़ने के बाद साधना साधक इतना मोहित हो जाता है कि मैं अभी ऐसे चुटकी बजा के कर लूंगा करके समझता है तो प्राण घात हो जाता है दोस्तों।
मेनका अप्सरा साधना में सुरक्षा का महत्व
क्या बगैर गुरु के अगर आप साधनाएं करने जाओगे तो आपको हानि मिलेगी मृत्यु भी हो सकता है शरीर को लकवा भी मार सकता है या आप पागल भी हो सकते हो। तो बगैर गुरु के साधना नहीं करना है और बगैर रक्षा कवच के भी यह साधना नहीं करना है दोस्तों। कोई भी साधना हो बगैर रक्षा कवच के भी नहीं करना है।
कुछ साधक लोग मुझे कहते हैं नहीं हमारे पास रक्षा मंत्र है रक्षा घेरा है यह है उन्होंने कितने ध्यान से किया है कितनी सिद्धि प्राप्त की है उनको पता और उस माता को पता दोस्तों। फिर भी मैं कहता हूं कि रक्षा कवच गले में धारण करके साधना करने से कोई प्रॉब्लम तो नहीं है सिवाय आपकी जिंदगी बच सकती है और रक्षा कवच का मूल्य सिर्फ और सिर्फ ₹2000 है दोस्तों ज्यादा नहीं है। क्या उसमें 18-20 नमूने की जड़ी-बूटी बना के आपके नाम से बनाया जाता है।
मेनका अप्सरा साधना पारिवारिक जिम्मेदारी का एहसास
यह क्यों बता रहा हूं क्योंकि आपकी फैमिली की जिम्मेदारी का एहसास होना चाहिए आपको। आपकी फैमिली पीछे है उसका वो भी पता होना चाहिए। कुछ साधक और साधिका या कुछ भक्त लोग चलो साधना मिली है करके बगैर गुरु के बगैर रक्षा कवच के साधना करते हैं और मृत्यु लोक पहुंच जाते हैं दोस्तों।
तो उसके बाद उस परिवार की हालत क्या होगी उनके माताजी पिताजी की क्या हालत होगी उसके बीवी बच्चों की क्या हालत होगी यह भी सोचना बहुत जरूरी है।
यह मैं क्यों बता रहा हूं क्योंकि मेरे लेख में मैं सही तरह से विधि विधान सब कुछ बताता हूं और मंत्र भी मैं सही तरह से बताता हूं इसके लिए जो मैं दे रहा हूं साधनाएं बहुत पावरफुल रहती है और जल्दी ही सिद्धि प्राप्त हो जाती है आपको।
तो सिद्धि प्राप्ति के चक्कर में आपको हानि ना हो जाए आपके परिवार को नुकसान ना हो जाए इसलिए मैं इतने ईमानदारी के साथ आपको सभी बातें बताता हूं दिल से बताता हूं।
मेनका अप्सरा साधना आध्यात्मिक ज्ञान का सही प्रसार
पैसा कमाने का कोई इरादा नहीं है दोस्तों। जब आप मेरे घर पर आओगे मेरा बंगला गाड़ियां वगैरह देखोगे तो आप खुद ही कहोगे कि गुरुजी आपको पैसे की कोई जरूरत नहीं है।
मगर कुछ ढोंगी लोगों के वजह से क्या हो रहा है आध्यात्मिक का नाम बहुत खराब होते जा रहा है इसलिए मेरे गुरुवर्य ने मेरे पर जिम्मेदारी डाली है कि आध्यात्मिक को सभी तरफ फैलाना है सही जानकारी सही विधि विधान देना है।
तो इसीलिए मैं ये कार्य कर रहा हूं दोस्तों तो सहकार्य करें क्या और आपकी जिंदगी अनमोल है आपके परिवार के लिए तो रक्षा कवच लेकर ही साधना करें और गुरु बना के ही साधना करें।
कौन हैं मेनका अप्सरा ?
तो चलिए दोस्तों मेनका अप्सरा की साधना क्या है किस तरह से इसके बारे में थोड़ी सी जानकारी लेंगे। मेनका अप्सरा जो है इंद्र दरबार में की उच्च कोटि की अप्सरा है दोस्तों ये इसका स्थान बहुत बड़ा है क्या इसको बहुत ऋषि मुनियों ने हासिल किया हुआ है इस मेनका अप्सरा के साथ संसार बसाया हुआ है उसके साथ भोग विलास करके बच्चे भी पैदा किए हैं दोस्तों। क्या सांसारिक सुख वगैरह सब कुछ उन्होंने हासिल किया है।
तो एक कोई साधक को अगर सांसारिक सुख वगैरह चाहिए भोग विलास भी चाहिए सुख शांति समृद्धि चाहिए तो जिंदगी में मेनका अप्सरा की साधना एक बार जरूर कर लेना दोस्तों क्योंकि इसमें डरावने अनुभव ज्यादा नहीं होते हैं। मेनका अप्सरा की साधना में बहुत सरल विधि विधान है इसका बहुत शांत की तरह से है मेनका अप्सरा कोई डराती नहीं कुछ भी नहीं है दोस्तों आपके साथ उपस्थित एक सुंदर स्त्री के रूप में आके रुक जाती है दोस्तों।
मेनका अप्सरा साधना में दुष्ट शक्तियों से बचाव
क्या मगर रक्षा कवच क्यों धारण करना चाहिए मैं बताता हूं दोस्तों जब आप साधना का मंत्र जप करते रहते हो उस मंत्र जितना आप जप कर रहे हो उस मंत्र को मोहित होकर आजूबाजू में जो दुष्ट शक्तियां रहती है ना जिन जिन्नात भूत प्रेत डाकिनी शाकिनी वगैरह वो मोहित होकर आ जाते हैं और आपके सामने आके हाहाकार मचाना शुरू कर देते तो आपको डर लग जाता है या कोई इतने नीच शक्तियां रहती है कि वो आपके ऊपर हमला भी कर सकती है तो उससे बचने के लिए मैं बताता हूं क्या। तो यह सौम्य रूप की मैं आज साधना दे रहा हूं आप यह साधना घर पर भी कर सकते हो।
साधना की संपूर्ण विधि
स्थान और वातावरण की तैयारी
देखिए दोस्तों यह साधना करने के लिए आपको एकांत कमरा कमरे की जरूरत है साफ सुथरा हो थोड़ा सा भीड़ भाड़ से जरा दूर लीजिए कमरा अगर क्या क्योंकि क्या हो जाता है भीड़ भाड़ की दुनिया में शक्तियां आने के लिए संकोच करती है शक्तियां नहीं आती है।
क्या तो थोड़ा सा भीड़भाड़ मतलब मान लीजिए आपका कोई खेत-खलिहान है क्या तो वहां पर भी एक छोटी सी कुटिया बांधी रहती है ना उसको साफ सुथरा कर लीजिए वहां पर भी कर सकते हैं। नहीं है तो थोड़ा सा बांध लीजिए अगर साधना में हासिल शक्तियां हासिल करना चाहते हो तो थोड़ा सा खर्चा हो जाएगा मगर कर लीजिए सिद्धि तो प्राप्ति हो जाएगी शक्ति तो मिल जाएगी आपको बाद में आपकी लाइफ चेंज हो सकती है दोस्तों। तो वरना नहीं है तो ऐसा रूम देखिए जहां पर आपके अलावा उस रूम में कोई आता-जाता न हो सिर्फ आपको ही आना जाना है वहां पर।
साधना की अवधि और नियम
और यह जो साधना बहुत दिनों की नहीं है दोस्तों सिर्फ और सिर्फ सात दिन की साधना मैं बताने जा रहा हूं मेनका अप्सरा की साधना सिर्फ और सिर्फ सात दिन की है ज्यादा नहीं है। तो क्या कर लीजिए एकांत कमरा आपको पहले से ढूंढ के रख लीजिए उसको साफ सुथरा एकदम सुगंधित कर लीजिए क्या अच्छी तरह से खुशबू वगैरह लगा दीजिए अंदर वगैरह।
और आपको भी सात दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना है सात्विक भोजन खाना है मांस मदिरा मछली अंडे वगैरह कुछ भी नहीं खाना है।
जितना सौम्य भोजन हो जाएगा जितना लाइटली हो जाएगा उतना ही खाना आज पेट भर के करके खाते हो ना इतना मत खाना है आधे पेट से आपको खाना खाना है क्या आधे पेट ही खाना खाकर उठना है मान लीजिए चार रोटियां खाते हो तो दो रोटी खा लीजिए तो यह हिसाब से निवेदन कर लीजिए .
क्योंकि शक्ति में आलस नहीं चाहिए जब मंत्र पठन करते हो तो आलस आ के नींद आना शुरू हो जाता है तो इसलिए लोग शाम के सूर्यास्त होने के बाद कोई भी खाना नहीं खाता था तो सूर्यास्त के पहले ही खा लीजिए।
शुभ मुहूर्त और आचरण
और यह जो साधना करनी है आपको इसका टाइमिंग रहेगा रात के 10 बजे के बाद। क्या एकादशी और पूर्णिमा क्या एकादशी और पूर्णिमा के बीच में एक शुभ मुहूर्त देख के आपको ये साधना शुरू करनी है दोस्तों। शुभ मुहूर्त निकाल लीजिए एकादशी और पूर्णिमा के बीच में मतलब साधना के लाभ बहुत हो जाते हैं क्या शीघ्र ही साधना ये सिद्ध हो जाती है।
तो अच्छा सा मुहूर्त निकाल लिया यहां पर आपको ब्रह्मचर्य का तो पालन करना ही है सात्विक भोजन आहार करना है और साफ सुथरा रहना बहुत जरूरी है और सात दिन मौन व्रत धारण करना है।
कम बोलिए अगर जरूरी है तो ही बात कीजिए वरना कुछ भी बात मत निकाले अब शब्द ही बात मत निकाले किसी औरतों की तरफ देखना करना यह सब बंद कर दीजिए। सात दिन जितना मेनका अप्सरा के ख्यालों में आप डूबे रहोगे उतना सिद्धि के चांसेस बढ़ जाएंगे दोस्तों।
पूजन सामग्री और मंत्र जाप
क्या तो मान लीजिए आपने एकादशी और पूर्णिमा के बीच में एक बहुत बेहतरीन सा एक मुहूर्त निकाल लिया अच्छा मुहूर्त निकाल लिया तो रात्रि के 10 बजे के बाद आपको यह साधना करना है। दिशा जो आपकी रहेगी दोस्तों उत्तर की ओर रहने वाली है। मुख जो आपका करना है उत्तर की ओर करके बैठना है।
वस्त्र जो रहेंगे यह पूरी तरह से सफेद वस्त्र रहने वाले हैं। आसन जो रहेगा पूरी तरह से सफेद आसन रहने वाला है। और माला जो यहां पर दी है वो स्फटिक की माला दी है। स्फटिक की माला से आपको यह मंत्र जाप करना है। और जो मैं यहां पर मंत्र दिया हूं इसकी डेली 51 माला का जाप आपको पूरा करना है।
क्या कितने माला का 51, 51 माला का वहां पर जाप करना है। और सामने एक देसी घी का चिराग़ लगा दीजिए दीपक लगा दीजिए क्या दीपक लगा के आपको यह साधना करनी है दोस्तों। दिशा उत्तर की ओर रहने वाली है मंत्र आपको कंटिन्यू पठन करते जाना है और यहां पर जो मैं यंत्र दिया हूं क्या मेनका अप्सरा का जो यंत्र दिया है इसको आपको भोज पत्र के ऊपर स्थापित करना है।
भोज पत्र के ऊपर लिख के लीजिए उसकी प्राण प्रतिष्ठा कर लीजिए पूजा अर्चना कर लीजिए और सामने रख लीजिए एक चौकी के ऊपर रख सकते हैं आप चौकी नहीं तो एक पाटी वगैरह लीजिए उसके पर रख दीजिए क्या थोड़ा सा हल्दी कुमकुम वगैरह अगरबत्ती लगा दीजिए धूप वगैरह डाल दीजिए इत्र वगैरह डाल दीजिए एकदम कमरे को खुशबूदार कर दीजिए और मंत्र पठन करना स्टार्ट कर दीजिए दोस्तों।
ॐ ह्रीं मेनका मम प्रिय मम चित्तानुरंजन करि करि फट
साधना के दौरान होने वाले अनुभव
धीरे धीरे धीरे धीरे मंत्र पठन करते करते करते अलग से अनुभव आना शुरू हो जाएंगे दोस्तों। डे वन से अनुभव स्टार्ट हो जाते हैं यहां पे अच्छे अनुभव स्टार्ट हो जाते हैं। अगर किसी का बैड लक है इर्दगिर्द भूत पिशाच वगैरह बहुत है तो बैंड भी बज सकती है क्या।
तो अलग-अलग बहुत बेहतरीन अनुभव होना शुरू हो जाते हैं। कोई स्त्री ऐसी भागते हुए छम छम छम छम पायल की आवाज आती है घुंघरुओं की आवाज आती है खुशबू आना शुरू हो जाती है क्या एकदम फर्स्ट क्लास मोगरे की गुलाब की चंपा की ऐसे अलग-अलग खुशबू आना वहां पर जो शुरू हो जाती है ठंडी हवाएं आना शुरू हो जाती है क्या लहराते हुए बलखाती हुए कोई लड़की आ रही है ऐसा लगेगा आपको।
मतलब एक अच्छा एक स्वर्ग के जैसा ही आनंद आपको वहां पर प्राप्त हो जाएगा दोस्तों। क्या बिल्कुल स्वर्ग के जैसा ही आनंद आपको वहां पर प्राप्त होने वाला है। तो ध्यान लगा के आप मंत्र करना है और आपके सेक्स पावर के ऊपर आपको कंट्रोल रखना है।
सिद्धि प्राप्ति और वचन
क्या ऐसा करते करते करते अलग-अलग अनुभव होते जाएंगे डेली 51 माला होने के बाद आपको उसी रूम में आपको सोना है क्या एक चादर वगैरह बिछा लीजिए और वहीं पर सो जाइए दोस्तों जमीन पर आराम से। ऐसा करते करते सात दिन आप यह साधना पूरी करनी है और सातवें दिन मेनका अप्सरा एक खूबसूरत औरत के रूप में आपके सामने प्रकट हो जाएगी।
अप्सरा के प्रकट होने पर क्या करें?
प्रकट होते ही वह आपके साथ भोग विलास करने की बहुत कोशिश करेगी क्या भोग विलास करने की बहुत कोशिश करेगी तो उसको नमन कीजिए हे देवी थोड़ा सा रुक जाओ क्या विनम्रता से उसके पास से कुछ वचन मांग लीजिए नम्रता से हे देवी करके बोलिए नम्रता से उसके पास से मैं भोग विलास आपके साथ करूंगा मगर मुझे कुछ वचन चाहिए वह वचन दीजिए।
तो उसी में वह वचन देती है तो इतना प्रसन्न होती है इतना प्रसन्न हो जाती है दोस्तों आपके ऊपर क्या बताऊं क्या बहुत अच्छी तरह से प्रसन्न होकर आपको सुख शांति समृद्धि ऐश्वर्य यवन भोग विलास सब कुछ दे देती है।
साधना भंग होने का खतरा
मगर कुछ साधकों की साधना भंग भी हो चुकी है दोस्तों। जैसे ही वो आकर उसका सौंदर्य वगैरह देख लिया तो उसके साथ सीधा ही भोग विलास करना शुरू कर देते हैं तो वचन मांगना ही भूल जाते हैं तो वो देवी मेनका अप्सरा आपसे नाराज होकर चली जाती है।
क्या मेनका अप्सरा आपसे नाराज होकर चली जाती है तो इसके लिए सेक्स के ऊपर यवन के ऊपर आपके कंट्रोल रखना जरूरी है क्या। और जब भी वह प्रकट हो जाएगी तो नम्रता से उसके पास से वचन आदि मांग लीजिए फिर उसके बाद आप भोग विलास वगैरह जो चाहिए उस मेनका अप्सरा के साथ कर दीजिए दोस्तों कोई दिक्कत नहीं है।
साधना के दीर्घकालिक लाभ
क्या बहुत सरल सी साधना है दोस्तों आसान से सिद्धि होने वाली साधना है क्या इसमें कोई भयानक अनुभव नहीं है जो भी अनुभव रहेंगे स्वर्ग की तरह ही अनुभव रहने वाले हैं। तो यह साधना जीवन में आए हो तो एक बार करके देखना जिसको भी जरूरत है।
जन्म-जन्मांतर का साथ
क्या कीजिए ये प्रेमिका के रूप में आपके साथ जन्म-जन्मांतर रहती है दोस्तों। अगर आपने उससे वचन में मांग लिया मेरे साथ प्रेमिका के रूप में मैं पुनर्जन्म यह देह भी त्याग दूंगा पुनर्जन्म मेरा जिधर भी हो जाएगा .
इस उम्र में जब आपका अंतिम समय आता है तब वचन ले सकते हो इस उम्र में मैं किधर भी पैदा हो जाऊं इस उम्र में आकर मुझे तुमको मिलना है क्या। तो ऐसा भी वचन मांग के ले सकते हो दोस्तों क्या ऐसा वचन वो दे देती है मेनका अप्सरा दोस्तों। तो अगले जन्म मान लीजिए आपने इधर दूसरी जगह पर पैदा हो गए जो भी अपने उम्र बताई है मान लीजिए 20 साल बताई है 25 साल बताई उस एज में उस उम्र में वह आके मेनका अप्सरा आपको प्रकट हो जाती है।
तो तब कहती है स्वामी आप मेरे पिछले जन्म में प्रेम थे और आपने मेरे पास से वचन लिया था कि मैं जहां पर भी जन्म ले लू तो मेरे सामने आकर प्रकट होना है इसलिए मैं मेरा वचन निभाने के लिए आई हूं। ऐसा करके फिर उसी जन्म में भी आपको सुख शांति समृद्धि भोग विलास वगैरह सब कुछ मिलना शुरू हो जाता है दोस्तों।
संपर्क और अन्य सेवाएं
बहुत अच्छी सरल साधना है दोस्तों घर बैठे संसार साधक भी कर सकता है। संसार साधक ने की तो आपके पत्नी को वगैरह कोई प्रॉब्लम नहीं होने वाला है तो बिंदास आप कर सकते हैं साधक भी कर सकता है कोई दिक्कत नहीं है नया भक्त भी कर सकता है यह साधना मगर गुरु के मार्गदर्शन में कीजिए रक्षा कवच धारण करके कीजिए।
व्यक्तिगत मुलाकात
अगर कोई साधक मुझे मिलना चाहता है या साधिका मिलना चाहती है नया भक्त मिलना चाहता है तो दोस्तों मैं कर्नाटक बेलगाम में रहता हूं सीधा मेरे घर पे आके मुझे मिल सकते हो।
ना मैं किसी को किधर जंगल में मिलता हूं ना श्मशान में मिलता हूं ना होटल में मिलता हूं सीधा मेरे घर पर मैं आपको मिलूंगा दोस्तों। क्या तो मैं कर्नाटक बेलगाम में रहता हूं तो सीधा घर पे आ जाइए दोस्तों और जो मैंने मेरा मोबाइल नंबर दे चुका हूं उसके ऊपर मुझे कांटेक्ट कीजिए और आप सभी लोगों से रिक्वेस्ट है कि सभी लेख सही तरह से पढ़ लीजिए।
उपलब्ध सेवाएं
क्या और और एक विनंती करता हूं दोस्तों कि चैटिंग मत कीजिए बहुत चैटिंग होता है दोस्तों इतने मैसेज आ जाते जितने का मैं रिप्लाई भी नहीं दे सकता हूं मुझे क्षमा करें हां फोन कीजिए मैं बात करूंगा मिस्ड कॉल गिरी है तो मैं बाद में जैसा वक्त मिलता है मैं कॉल करूंगा आप लोगों को और आपकी समस्या निवारण करने की कोशिश करूंगा दोस्तों।
क्या और किसी साधक साधिका या नए भक्त को शक्ति ट्रांसफर चाहिए तो शक्ति ट्रांसफर भी मेरे पास से मिल जाएगी उसके लिए कंडीशन एक ही है मेरे घर पर आपको आना पड़ेगा क्योंकि शक्ति ट्रांसफर दोस्तों ऑनलाइन फोन पे नहीं होती है मेरे पास तो नहीं होती है बाकी गुरु का मुझे कुछ पता नहीं है।
मगर एक एग्जांपल देना चाहूंगा अगर आपको भूख लगी है तो खाना मैंने फोन में से भेज दिया तो आप खा सकते हो क्या? नहीं ना। तो उसके लिए खाने के पास बर्तन अपने प्लेट अपने हाथ में रहना चाहिए तब हम खाना खा सकते हैं।
तो शक्ति ट्रांसफर भी ऐसे ही है बाकी आप समझदार हो आपकी मर्जी आपको जो चाहिए वो कीजिए। और दूसरी किसी साधक साधिका या भक्त को साधना सीखना चाहते हैं तो वह भी मैं सिखा दूंगा क्या आराम से साधना सीख सकते हो जब तक आपको सिद्धि प्राप्त नहीं होगी तब तक मार्गदर्शन देता रहूंगा।
या किसी साधक साधिका या भक्त को सिर्फ सामग्री चाहिए तो सामग्री भी मेरे पास ही मिल जाएगी। क्या और रक्षा कवच चाहिए सिर्फ और सिर्फ रक्षा कवच चाहिए तो रक्षा कवच भी मेरे पास से मिल जाएगा दोस्तों।
सामग्री प्राप्ति की प्रक्रिया
क्या आप दूर रहते हैं तो ये जो मैंने नंबर दिया है यह गूगल पे फोन पे अमाउंट डाल दीजिए आपके बाइक कूरियर से स्पीड पोस्ट से आपके घर तक पहुंच जाएगा।
अंतिम निवेदन
क्या और दोस्तों यह मेनका अप्सरा का साधना जो मैंने आज इतनी अच्छी दी है यह कैसे लगी पसंद करके जरूर बताना। मुझे ढेर सारे लाइक आ रहे हैं आपका कोटि कोटि धन्यवाद सभी सब्सक्राइबर का सभी लोगों का साधकों का आप मुझे इतना पसंद कर रहे हैं इतने मेरे साधना को पसंद कर रहे हैं कोटि कोटि धन्यवाद दोस्तों।
ऐसे ही मेरे पे प्यार करते रहिए और इस लेख को जितना हो जाए उतना शेयर कीजिए दोस्तों क्या पता किसी साधु को अगर अच्छी साधना चाहिए तो ये मिल जाएगी और उसका वो लाभ उठा सके मन वंचित फल उसको प्राप्त हो जाए दोस्तों। एक अच्छा गुरु मिल जाए अच्छी साधना मिल जाए तो इससे बड़ा पुण्य का कार्य और कुछ भी नहीं है दोस्तों।
क्या तो जितना हो सके उतना इस लेख को शेयर कीजिए, पसंद कीजिए और हमारी वेबसाइट को फॉलो कीजिए दोस्तों। तो दोस्तों मिलते हैं अगले पोस्ट में जय श्मशान कालिका देवी।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव | nabhi Darshana Apsara Sadhana Anubhav मित्रों जय श्री महाकाल जैसा कि आप सभी जानते ही हैं कि नवरात्रि काल अब बीत चुका है तो इन नवरात्रि के समय में तीन साधकों ने मुझसे संपर्क किया था और तीनों ने ही अलग-अलग साधनाएं मुझ से प्राप्त की थीं।
इसी में से एक साधक हैं जिन्होंने नाभि दर्शना अप्सरा की साधना इस नवरात्रि काल में संपन्न की और न ही संपन्न की, इन्हें सिद्धि भी प्राप्त हुई। नाभि दर्शना अप्सरा के प्रत्यक्ष दर्शन हुए।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव – साधक की पहचान और प्रारंभिक यात्रा
साधक के विषय में ज्यादा तो नहीं बता सकता क्योंकि साधक ने मुझसे कहा है कि इनका नाम गुप्त रखा जाए, लेकिन केवल इतना बता दूं कि यह जो साधक है, यह मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं और अच्छे खासे घराने से ताल्लुकात हैं। यानी कि बड़ी फैमिली है इनकी और बहुत ही नामचीन व्यक्ति हैं।
तो साधक की बहुत पुरानी इच्छा थी कि इन्हें नाभि दर्शना अप्सरा की सिद्धि प्राप्त हो और मुझसे संपर्क करने से पहले साधक ने लगभग कई प्रकार के तांत्रिकों से भी संपर्क किया था और कई प्रकार की साधनाएं भी इन्होंने कीं।
जिसमें से इन्होंने अघोर काली की भी साधना संपन्न की है और अघोर काली की कृपा इनके ऊपर थी लेकिन नाभि दर्शना अप्सरा की सिद्धि इन्हें नहीं प्राप्त हो पा रही थी।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव – दीक्षा और साधना की शुरुआत
तो साधक ने मुझसे संपर्क किया था इस नवरात्रि काल से पहले, और नवरात्रि काल में ही साधक को मैंने नाभि दर्शना अप्सरा के सिद्ध मंत्र की दीक्षा दी और इन्हें संपूर्णता सारी जानकारी भी प्रदान की।
इसी जानकारी के अनुसार, जैसा कि मैंने इन्हें बताया कि आपको ऐसे ही साधना करनी है उसी अनुसार इस साधक ने नवरात्रि काल में ही साधना की।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव की पहली लहर
इस साधना काल के दौरान पहले ही दिन जब साधक ने मंत्र जप आरंभ किया तो यह जो मंत्र था यह थोड़ा उग्र था और तांत्रिक मंत्र था। नाभि दर्शना अप्सरा का, तो साधक के शरीर में गर्मी बहुत ही बढ़ने लगी।
पहले ही दिन जब साधक ने साधना संपन्न की तो अगले दिन सुबह को साधक ने मुझसे संपर्क किया और इन्होंने कहा कि मेरे शरीर में जो गर्मी है वह बहुत ही बढ़ रही है।
तभी इन्हें मैंने कुछ प्रयोग बताए, इन्होंने किए और फिर इनके शरीर की गर्मी शांत हुई। एक प्रकार से इन्हें बुखार सा लगने लगा था।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव में अदृश्य शक्तियों का अनुभव
इस के नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव बाद साधक ने दूसरे दिन जब साधना आरंभ की तो इन्हें अपने आसपास किसी शक्ति का आभास हो रहा था, मानो कोई ऊर्जा इनके आसपास घूम रही है।
तीसरे दिन साधक ने जब साधना आरंभ की तो इन्हें पायल की आवाज़ सुनाई देने लगी। साधक को इस घटना पर विश्वास नहीं हो रहा था। साधक को ऐसा लग रहा था मानो इन्हें मति विक्षिप्त हो रही है या फिर यह कहें कि मति भ्रम हो रहा है।
क्योंकि मंत्र थोड़ा उग्र है, मंत्र जो मैंने दिया वह तांत्रिक मंत्र था और इस मंत्र की सिद्धि मैंने स्वयं करके रखी हुई है।
तो जब साधक को मैंने गुरु दीक्षा दी तो अवश्य ही ऐसे अनुभव होना बहुत ही सामान्य सी बात है।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभवों का क्षणिक विलुप्त होना
तो तीसरे दिन जब साधक को इस प्रकार से पायल की आवाज़ सुनाई देने आरंभ हुई तो साधक को इन सभी बातों पर विश्वास नहीं हो रहा था।और जब भी कोई साधक अपने मन में इस प्रकार के विचार रखता है तो उसकी भी कहीं ना कहीं भरपाई भी करनी पड़ती है।
जो नाभि दर्शना अप्सरा देवी हैं, उन्हें भी इनके इस प्रकार के विचार करने से हो सकता है कुछ कष्ट हुआ हो। तो अचानक से ही इन्हें अनुभव होने बंद हो गए। पूरी साधना इन्होंने बिना अनुभव के ही की।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव नवमी की रात – चमत्कारी अनुभव
लेकिन अचानक से नवमी की रात्रि को, यह जिस मंत्र की दीक्षा मैंने इन्हें दी थी और जिस मंत्र की इन्होंने साधना की थी, उसी मंत्र का यह हवन कर रहे थे।
और हवन करने के दौरान ही साधक की दिव्य दृष्टि अचानक से ही जागृत हुई। सर्वप्रथम तो कुंडलिनी शक्ति जागृत हुई साधक की, इनके शरीर पर बाकायदा शक्ति पात हो रहा था। साधक को संपूर्ण अनुभव प्रत्यक्ष हो रहे थे।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव दिव्य दर्शन और देवताओं की कृपा
जब इनकी कुंडलिनी जागृत हुई, इनकी दिव्य दृष्टि जागृत हुई, तो साधक ने सर्वप्रथम अपने दाई तरफ हनुमान जी को देखा। क्योंकि जो इनके पिताश्री हैं, वह हनुमान जी के बहुत ही परम भक्त हैं और हनुमान जी की सिद्धि इनके घर परिवार पर, आप कह सकते हैं, कि उनकी कृपा है।
तो इन्होंने सर्वप्रथम हनुमान जी के दर्शन किए और इन्हें यह पता लगा कि भाई, हमारे ऊपर हनुमान जी की कृपा है।
इसके बाद साधक ने दिव्य दृष्टि के माध्यम से यह देखा कि इनके पीछे माता अघोर काली खड़ी हैं।
और यह जो दृश्य इन्हें दिखाई दिया, यह एक प्रकार से माता अघोर काली का आशीर्वाद है साधक के ऊपर।
क्योंकि साधक ने बहुत पहले माता अघोर काली की साधना संपन्न करके रखी हुई है। तो उनका आशीर्वाद भी साधक के ऊपर है।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना अनुभव – का प्रकट होना
और जब तीसरा जो दृश्य इन्होंने देखा कि जो हवन कुंड है, उसी में से नाभि दर्शना अप्सरा धीरे-धीरे बाहर निकल रही हैं,
जैसा कि आपने फिल्मों में देखा होगा कि देवी-देवता हवन कुंड से निकलते हैं, उसी प्रकार का दृश्य इस साधक को नवमी की रात्रि को दिखाई दिया।
तो साधक ने जब इस प्रकार से दर्शन प्राप्त किए तो इन्हें बहुत ही आनंद आया, इनके आंखों से आंसू आने लगे। साधक बहुत ही भाव-विभोर हो गए।
पूर्ण विश्वास और साधना का सार
और इस प्रकार के संपूर्ण अनुभव जब साधक के साथ हुए तो इन्हें फिर पूर्णतः विश्वास हुआ साधना जगत की शक्तियों के ऊपर।
और साधक ने संपूर्णता यह जब अनुभव प्राप्त कर लिए तब इन्होंने अगले दिन मुझे अपने अनुभव के विषय में बताया।
निष्कर्ष और आपकी राय
तो मित्रों, यह इस साधक का प्रत्यक्ष अनुभव था। साधक ने नाभि दर्शना अप्सरा की साधना से ना ही अपनी कुंडलिनी शक्ति जागृत की, बल्कि इन्होंने दिव्य दृष्टि भी प्राप्त की।और इनके घर परिवार पर जिन देवताओं की कृपा है, उनके भी इस साधक ने प्रत्यक्ष दर्शन प्राप्त किए।
तो इस अनुभव को सुनकर आपको कैसा लगा, इस विषय में अवश्य ही मुझे कमेंट में बताएं। और आपको क्या सीख मिली है इस अनुभव को सुनकर, इस विषय में भी अवश्य ही मुझे कमेंट में बताएं।आज के लिए इतना ही। जय श्री महाकाल।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना विधि एक विस्तृत मार्गदर्शन
नाभि दर्शना अप्सरा साधना विधि एक विस्तृत मार्गदर्शन
कई लोगों के मैसेज आए कि आप एक बार नाभि दर्शन अप्सरा पर पुनः लेख लिख दीजिए। वैसे तो नाभि दर्शन लेख का, नाभि दर्शन अप्सरा का जो लेख है, वो हम गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम वेबसाइट पर दे चुके हैं। लेकिन फिर भी कई लोगों के मैसेज आए थे कि एक बार फिर से बना दिया जाए तो हमने सोचा कि इस वेबसाइट पर आप लोगों को दे देते हैं लिखकर।
और जिन लोगों को और भी लेख, जो नए साधक हैं, जो नए लोग यहां पर जुड़े हुए हैं, वो गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम वेबसाइट से जाकर पुराने लेखों में काफी सारी साधनाएं हैं जिनको सर्च कर रहे हैं, वहां से आप ले सकते हैं।
यहां पर आज पुनः साधना दे रहे हैं, इससे पूर्व हम हमारी उस वेबसाइट पर दे चुके हैं। इस दिन इसका विशेष मुहूर्त है क्योंकि चंद्र ग्रहण है। रात्रि को 11:30 से 3:30 बजे तक मुहूर्त है। चंद्र ग्रहण करने से बड़े लाभ हैं। इसके दोनों ही प्रयोग बताएंगे जो आपको आर्थिक, आध्यात्मिक और प्रत्यक्ष लाभ प्रदान करेंगे।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना के अभूतपूर्व लाभ
जबरदस्त साधना जिसको करने से व्यक्ति के निराश जीवन में उमंग आ जाती है, यौवन बढ़ने लगता है। स्त्री-पुरुष कोई भी कर सकते हैं, उनका सौंदर्य बढ़ता है, उनकी जो कामुकता है, बढ़ती है, उनकी जो वशीकरण, सम्मोहन शक्ति है, वह बढ़ती है, धन प्राप्ति के रास्ते खुलते हैं। कोई रोग आदि है, उसमें सहायता मिलती है, उसे ठीक होने में सहायता मिलती है, उसमें मदद मिलेगी। बहुत जबरदस्त और शक्तिशाली साधना, कोई भी साइड इफेक्ट नहीं।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना की प्रक्रिया और सफलता की अपेक्षाएं
नया हो या पुराना, हम यह नहीं कहते कि एक ही दिन में इसका प्रत्यक्षीकरण हो जाएगा क्योंकि साधना तो एक ही दिन की करना है आपको सूर्य-चंद्र ग्रहण में। और इसके बाद आप जब इसको साधना को आगे बढ़ाएंगे तो वो एक अलग विषय होगा, उसमें गुरु दीक्षित होना बहुत जरूरी है।
लेकिन किस्मत का कोई ठीक नहीं, अगर आपके पूर्व पुण्य अच्छे हों, अच्छे योग हों तो हो सकता है आपको वो एक दिन में प्रत्यक्षीकरण हो भी जाए। ना भी हुआ तो चिंता की बात नहीं, इसके जो शुभ फल आपको प्राप्त होना है, वो तो अगले कई महीनों तक आपको होते ही रहेंगे।
प्रत्यक्षीकरण होता है तो वचनबद्ध हो जीवन पर्यंत सखी रूप में या मित्र रूप में आपकी सहायता करती है। तो बहुत प्रभावशाली साधना है। सिद्ध होने के बाद कभी भी एक माला यंत्र के सामने मंत्र जाप करेंगे और अपना उनसे चित कार्य प्रकट करेंगे तो अगर वो प्रत्यक्ष रूप से नहीं सिद्ध हुई तो भी आपका काम करेगी और अगर प्रत्यक्ष रूप से सिद्ध हो गई तो भी सामने आकर काम करेगी।
जब आपको मंत्र आदि की विधि कंठस्थ हो जाए तो माला जप की आवश्यकता भी नहीं है, कहीं पर भी हाथ-पैर धोकर बैठ जाओ, 100 बार मंत्र का जाप कर लें तो आपकी कार्य सिद्धि करेगी। प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हर प्रकार से बहुत प्रभावशाली साधना है।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना – सफलता के लिए दृढ़ता का महत्व
और अब तक हमारे पास जो पुराने वरिष्ठ गुरु भाइयों के गुजरात से या अन्य किसी जगह से फोन आए हैं, लगभग उन सभी ने सद्गुरुदेव से जब दीक्षा प्राप्त की थी तो नाभि दर्शन अप्सरा की ही की थी और उनके चौथे या पांचवें प्रयास में यह उनको सिद्ध हो गई थी।
खैर, उन लोगों के पास पहले इतना गाइडेंस नहीं था क्योंकि फोन वगैरह नहीं थे कि गुरुजी से बार-बार संपर्क हो सके, लेकिन फिर भी उन्होंने चार या पांच प्रयास में नाभि दर्शना के प्रत्यक्ष दर्शन किए थे।
जिनमें से गुजरात के एक गुरु भाई थे, उन्होंने प्रत्यक्ष रूप से दर्शन किया लेकिन सबसे पहले सवाल सिद्ध कर लेते हैं तो कोई दिक्कत नहीं, वो कभी भी नुकसान नहीं पहुंचाएगी। ठीक है? तो क्यों अप्सरा है, उसको उससे कोई लेना-देना है, आपकी एक पत्नी हो कि कुछ भी हो, उससे मतलब नहीं। उनको तो उन्होंने यह चांस गंवाया।
ऐसी कई घटनाएं, कई लोगों के फोन आए। तो दोबारा उन्होंने खूब प्रयास किया लेकिन वो चीज नहीं हो पाई। तो कुछ फिर अलग तरीके से हमने रास्ते बताएं जहां से वो प्रयास कर रहे हैं।
मानसिक तैयारी और नाभि दर्शना अप्सरा साधना की नींव
तो होता क्या है कि साधनात्मक पथ में आपको मानसिक रूप से बहुत अच्छे से तैयार होना पड़ता है। शक्ति कब सामने आ जाए, हो सकता है एक बार में आ जाए, हो सकता है 10 बार में। इससे पहले हमने एक गुरु भाई का लिंक भी डाला था, उन्होंने 75वीं बार में यक्षिणी को सिद्ध किया था, 75 बार साधना की थी। तो प्रयास करने से सिद्धि जरूर मिलती है।
जिस प्रकार आप किसी बच्चे को स्कूल में बिठाते हैं तो उसे नौकरी तक पहुंचते-पहुंचते सालों लग जाते हैं, तो फिर साधनात्मक दृष्टि में हम यह क्यों सोचें कि पहले ही अटेम्प्ट में क्लियर कर लेंगे? हमें यहां पर थोड़ी सी मेहनत क्यों चला है ?
तो ऐसा विश्वास होगा तब जाकर उसको आपके अनुभव बढ़ेंगे। आप दूसरे में भी इसी कॉन्फिडेंस के साथ, इसी आत्मविश्वास के साथ करोगे तब कहीं जाके आप कुछ उसमें दर्शन ले सकते हो या अनुभव को बढ़ा सकते हो।
तो हो सकता है आपका भाग्य अच्छा हो तो एक बार में हो जाए या थोड़ी मेहनत ज्यादा करनी पड़े लेकिन भाव के साथ अगर आप मेहनत कर रहे हैं, ज़िद के साथ कर रहे हैं, हठयोगी साधना कर रहे हैं, साधना सिद्ध होती है।
इससे पहले हम मुद्राओं के बारे में भी काफी कुछ बता चुके हैं, विस्थापन मुद्रा, आवाहन मुद्रा, गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम वेबसाइट पर भी जो लेख लिखे थे वहां पर भी हमने मुद्राओं की जानकारी दे दी है। उनके माध्यम से उनको बुलाना, उनको स्थापना करना, उनको प्रसन्न करने की मुद्राएं बताई हैं, वो करना चाहिए। तो वो करके और फिर आगे बढ़ेंगे तो लाभ मिलेगा।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना में ज्योतिष का महत्व
कुंडली में जिन लोगों की चंद्रमा की स्थिति बहुत अच्छी होती है, पंचम भाव में बैठा हो, किसी बुरे ग्रह की दृष्टि ना हो, तो मित्र की दृष्टि हो तो और जल्दी प्रत्यक्षीकरण के योग होते हैं। तो कुंडली विश्लेषण जरूर करवा लेना चाहिए।
कोई दोष आदि हों तो उनका पता चल जाए ताकि आप निवारण कर पाएं। कहते हैं ना कि कोई शत्रु और पता चल जाए तो उससे बच के रहें, वैसे ही सबसे बड़े जो आपके जीवन के शत्रु हैं, आपकी कुंडली के दोष हैं। तो आप पहले उनसे निवारण पाएं और फिर साधना चाहिए।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना गुरु के मार्गदर्शन का पालन
हम बहुत से लोगों को फोन आते हैं, हम बोलते हैं कि आपकी कुंडली में शनि की स्थिति खराब है, आप शनि प्रसन्न साधना कर लीजिए, उसके बाद दूसरी साधना करना। लेकिन पता नहीं उन्हें क्या कीड़ा रहता है, फिर मैसेज करेंगे 10 बार, साधना कर लें, हम यह साधना कर लें, वो साधना कर लें।
तो फिर हम जवाब नहीं देते हैं क्योंकि एक बार समझाने पर अगर व्यक्ति को समझ नहीं आता तो उसको 10 बार भी समझाओ, उससे कोई मतलब नहीं, समय खराब होगा। तो जब एक बार हम बोल रहे हैं कि आपको पहले यह साधना करनी चाहिए तो उसको एक फोकस करो, क्यों भटक रहे हो ?
हमारे अनुभव से ही बोल रहे हैं ना। तो फिर ऐसे लोगों को समझाने का कोई औचित्य नहीं रह जाता, इसीलिए हम फिर डबल उनको मैसेज नहीं करते, ना ही उनका मैसेज चेक करते हैं।
विश्लेषण और संपर्क के लिए निर्देश
ठीक है? बहुत से लोग सुबह से फोन लगाते हैं जबकि सबको पता है कि जो फोन पर बात करने का समय है, दिन में 11 से 4:00 बजे तक ही है। कई लोगों को फोन रात को आते, साल हमें दिन में टाइम नहीं मिलता।
तो क्या कर सकते हैं, रात में हमारे पास टाइम नहीं होता है। आप अपनी छुट्टी के दिन कॉल कर लीजिए। कुछ इमरजेंसी है तो मैसेज डाल दीजिए, हम चेक करके रिप्लाई कर देंगे। तो ऐसी सारी चीजें हैं।
जो लोग अपना कुंडली विश्लेषण करवाना चाहते हैं, अपना नाम, जन्म तारीख, जन्म का समय और जन्म स्थान नीचे दिए गए नंबर पर व्हाट्सएप करें। इस नंबर पर कुंडली विश्लेषण शुल्क ₹500 डालकर उसका स्क्रीनशॉट व्हाट्सएप कर दें।
जिन लोगों की कुंडली नहीं है, वे हस्तरेखा के लिए सर से पैर तक की फोटो भेजें, सीधे हाथ की हथेली की फोटो, पुरुष हैं तो, स्त्री हैं तो उल्टे हाथ की हथेली की फोटो, जिसमें हाथ की रेखाएं स्पष्ट दिखें।
फोटो खींचते समय तीन चीजें, तीन चीजों के बिना, एक फोटो, ₹1100 डाल के उसका स्क्रीनशॉट… हमने एक मणिपुर चक्र विधान स्तोत्र भी दी है गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम वेबसाइट पर, वहां जाकर देख लें और प्रतिदिन उसका एक पाठ करिए।
हालांकि उसकी पूरी विधि है उसको सिद्ध करने की, लेकिन एक पाठ भी प्रतिदिन करते रहेंगे तो जीवन को खूब आनंद आएगा। किसी भी साधना पद्धति को, आप सबसे पहले अपने दैनिक पूजन में ऐसी साधना पद्धति ऐड कर लीजिए।
कुंडली विश्लेषण से हम बता ही देते हैं क्या-क्या करना है जिससे कि अगले 6 महीने में आपका जीवन स्तर बहुत अच्छा होने लग जाए। जितना ज्यादा करते जाएं, उतना बढ़ता जाए। तो ऐसे ही हमेशा साधना लेखों को अपना के अपने जीवन स्तर को सुधारना चाहिए, तब जाकर आपका प्रत्यक्षीकरण के लिए जो पर्याप्त औरा बनना चाहिए, आपका वह प्राप्त कर पाएंगे।
आपके पास पर्याप्त औरा नहीं है प्रत्यक्षीकरण के लिए तो शक्ति सामने होते हुए भी आप देख नहीं सकते, उसके लिए दिव्य मंडल की आवश्यकता होती है।
मुख्य नाभि दर्शना अप्सरा साधना विधि – मुहूर्त और तैयारी
स्नान आदि के पश्चात आप उत्तर मुख होकर बैठ जाएं आसन पर। एक पीला कपड़ा बिछा लें, स्वयं भी पीले वस्त्र धारण कर लें। सद्गुरुदेव का या आपके जो भी गुरुदेव हैं, उनकी तस्वीर रखें, उनका पंचोपचार पूजन करें। फिर एक ताम्र प्लेट में नाभि दर्शन महायंत्र स्थापित करें, उनका भी विधिवत पूजन करें, पंचोपचार पूजन करें और जो अप्सरा माला है, उसका भी पूजन करें।
पूजन करने के पश्चात हाथ में जल लेकर संकल्प लें। आपको स्क्रीन पर, आप चेक कर लीजिए ताकि आपको दिक्कत ना आए। डिटेल, “मैं… अमुक… गोत्र… यह साधना सिद्ध करना चाहता हूं जिससे वह जीवन भर मेरे वश में रहे और मुझे प्रिया की भांति सुख, आनंद, ऐश्वर्य प्रदान करे।” जल भूमि पर छोड़ दें। एक दीपक घी का, अप्सरा के सामने पूरे साधना काल में जलता रहे।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना मंत्र
ॐ ऐं श्रीं दर्शना अप्सरा प्रत्यक्षं श्रीं ऐं फट्।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना माला का महत्व
यह माला से जाप करें। ठीक है? क्यों नहीं बोला हमने लाल चंदन? क्यों नहीं बोला हमने हकीक? क्यों नहीं बोला? इसलिए कि हर माला को एक अलग तरीके से तैयार किया जाता है। मान लीजिए किसी माला में, जैसे वीर साधना होती है, उसमें तीन तरह के मोतियों की माला बनती है, सामान्यतः मार्केट में उपलब्ध नहीं होती है।
विशेष माला, विशेष संकल्प के साथ ही सिद्ध की जाती है जिससे आपको लाभ हो। इसलिए सही माला का प्रयोग करना। ठीक है?
नाभि दर्शना अप्सरा साधना जाप के दौरान और बाद की प्रक्रिया
आगे बढ़ते हैं। इस साधना में 21 माला जाप करने हैं वहीं रखकर और रात्रि को वहीं विसर्जन करें। साधना जाप के समय घुंघरू की आवाज आए, किसी के होने का एहसास हो तो आप डिस्टर्ब ना हों। आप चाहें 21 माला से ज्यादा मंत्र जाप करना तो भी कर सकते हैं।
और जब आपको एहसास हो कि कोई और है, आप अपना काम करते रहें। यदि शक्ति प्रत्यक्ष हो जाए तो नीचे रखी हुई माला उसे पहना दें और जो जाप की माला है, उसे स्वयं पहन लें। और एक-दो फूल माला रखनी हैं आपको, एक तो अप्सरा को पहना दें, एक खुद पहन लें।
अगर प्रत्यक्ष नहीं होती, केवल आभास होता है तो एक माला आप यंत्र के ऊपर पहना दें, अप्सरा वाली। जिससे आपने जाप किया, वो गले में पहन लें और फूल वाली माला भी गले में पहन लें।
वचन कैसे लें?
और मानसिक रूप से ही ध्यान करें कि मुझे पता है आप यहां पर प्रसन्न हैं, आप यहां पर उपस्थित हुई हैं तो आप मुझे वचन दीजिए कि मैं जब भी बुलाऊंगा, एक माला मंत्र जाप करके या सौ बार मंत्र पढ़कर, आप अवश्य आएंगी, जो काम आपसे निवेदन करूंगा।
वह आप करेंगी और मित्र या सखी रूप में सदैव मेरे साथ रहकर मेरे कार्य सिद्ध करेंगी, मेरी तरक्की करवाएंगी, हर प्रकार से धन-ऐश्वर्य से युक्त रखेंगी, यौवन-सौंदर्यता से युक्त रखेंगी, उत्तम स्वास्थ्य से मुझे युक्त रखेंगी। इस प्रकार बोलकर और जल छोड़ दें। जल हाथ मिले जाएगा।
नाभि दर्शना अप्सरा साधना सिद्ध होने के बाद
फिर जब भी आपको कोई काम हो, एक माला मंत्र जप… यंत्र को, माला को छुपा के रखें। किसी और साहब ने, बॉक्स में पैक करके अपनी ऐसी जगह रखें जहां कोई छुए भी ना, जैसे की परछाई ना पड़े क्योंकि घर में लेडीज़ का टाइमिंग वगैरह आता है, उनकी परछाई पड़ती है तो ऐसे में अशुद्ध मानी जाती है शास्त्रों में।
तो आप उसको अलग रखें। और फिर जब भी हो, मुंह-हाथ धो के, स्नान करके बैठ जाएं, उसको सामने रखकर एक माला जाप करके अपनी इच्छित मनोकामना उनके सामने प्रकट कर दें। चाहे वो प्रत्यक्ष हों, चाहे ना हों, तो आपके अवश्य ही वो कार्य को सिद्ध करती हैं। चलिए, आज के लिए इतना ही। जय गुरुदेव, जय महाकाली
rambha apsara रंभा अप्सरा साधना: एक दिवसीय सिद्धि प्रयोग
जय गुरुदेव, जय महाकाली! आप सभी साधकों का हमारी वेबसाइट गुरु मंत्र साधना डॉट कॉम के इस लेख में स्वागत है। रंभा अप्सरा प्रयोग एक ऐसी साधना जो अद्भुत यौन, अद्भुत सम्मोहन शक्ति प्रदान करने वाली, इच्छाओं की पूर्ति करने वाली और प्रेमिका रूप में सिद्ध होने वाली।
रंभा अप्सरा साधना और साधकों के भय
बहुत से लोगों में एक कॉमन सा डर बना रहता है कि अप्सरा को प्रेमिका रूप में अगर सिद्ध कर लें तो विवाह में समस्या तो नहीं आएगी ? अगर प्रेमिका रूप में सिद्ध कर लें तो शादीशुदा जीवन में गड़बड़ तो नहीं होगी ? तो आपको बता दें कि अप्सरा में ऐसी कोई भी समस्या नहीं होती है।
यक्षिणी साधनाओं के विधान अलग होते हैं, लेकिन अप्सरा में आप उसको शादीशुदा होने पर भी प्रेमिका रूप में सिद्ध करेंगे तो भी शादीशुदा जीवन में प्रेम बढ़ेगा। अगर आप शादीशुदा नहीं हैं और आप अप्सरा साधना करके प्रेमिका रूप में सिद्ध कर रहे हैं, सुंदर पत्नी की प्राप्ति होगी, प्रेम करने वाली पत्नी की प्राप्ति होगी।
रंभा अप्सरा साधना में चूक के परिणाम
rambha apsara रंभा अप्सरा साधना: एक दिवसीय सिद्धि प्रयोग
लेकिन साधना में अगर आपने चूक कर दी, साधना में अगर आपने कोई गड़बड़ कर दी या साधना को खंडित कर दिया तो आपसे लड़ने वाली पत्नी भी प्राप्त होगी, इसमें भी कोई संदेह नहीं है।
लेकिन साधना को सोच समझकर, पहले से प्री-प्लान करके बनाएं कि आप इतने दिन की साधना करेंगे, कोई काम तो नहीं है, आपको कोई डिस्टर्ब तो नहीं करेगा? इन सब चीजों का ध्यान रखें।
रंभा अप्सरा साधना के लाभ और विकल्प
rambha apsara रंभा अप्सरा साधना: एक दिवसीय सिद्धि प्रयोग
क्योंकि लोग बड़े परेशान रहते हैं, इसलिए हम कहते हैं कि अगर अप्सरा को प्रत्यक्ष रूप में ना सिद्ध कर सकते या इतना समय नहीं है तुम्हारे पास 11 दिन, 21 दिन, 41 दिन या सवा लाख मंत्र जप अनुष्ठान करने की क्षमता नहीं है, तो एक दिवसीय प्रयोग कर लिया करो अप्सरा से संबंधित।
उससे होगा क्या ? आपके जो स्वभाव है, जो आपका व्यक्तित्व है, उसमें सम्मोहन शक्ति आएगी। चमत्कारिक रूप से आपका जो उम्र है वो आपकी उम्र से कम दिखने लगेगी, आपमें नवीनता आ जाएगी।
सिर्फ मन में नहीं, तन में भी बहुत चमत्कारिक आपका व्यवहार हो जाएगा। लोग आपकी बातों को जो इग्नोर करते थे, वे लोग भी आपकी तरफ आकर्षित होंगे। ये अप्सरा साधना के प्रभाव हैं, इसमें मतलब कोई अलग से ऐसी बात नहीं है, सामान्य अप्सरा साधना में ये होता ही है।
रंभा अप्सरा साधना सिद्धि की विशेषताएं
rambha apsara रंभा अप्सरा साधना: एक दिवसीय सिद्धि प्रयोग
अप्सरा की विशेषता यह है कि अगर उसको प्रेमिका रूप में आपने सिद्ध कर लिया है तो जीवन पर्यंत उसके मंत्र से उसका आवाहन करने पर आपके कार्य सिद्ध कर देती है और प्रत्यक्ष रूप से सिद्ध होने पर तो व्यक्ति के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, अप्सरा साधना सतत अलग-अलग विधि से एक वर्ष तक की जाए तो सिद्धि हो ही जाती है।
साधना की विधियां
rambha apsara रंभा अप्सरा साधना: एक दिवसीय सिद्धि प्रयोग
अलग विधि से कैसे ? तो अलग विधि से आपने दिशा का चयन कर लिया, आप दिशा बदल दें। दक्षिण को छोड़कर तीनों दिशाओं में अलग-अलग साधना कर सकते हैं, अलग-अलग अनुष्ठान कर सकते हैं। कपड़ों में आप उससे संबंधित जैसे इस साधना में गुलाबी वस्त्र, पीले वस्त्र पहने जा सकते हैं, सफेद वस्त्र पहने जा सकते हैं, तो अलग-अलग वस्त्रों के साथ आप उसको पहन सकते हैं।
मुख्य रूप से गुलाबी वस्त्र पहने जाते हैं अप्सरा साधना में। इसके साथ और स्थान का परिवर्तन कि आप अन्य किसी स्थान पर जाकर साधना या प्रयोग कर रहे हैं, तो स्थान को भी आप बदल सकते हैं।
लेकिन अगर आपके पास परमानेंट एक ही कमरा है जहां पर आप साधना कर सकते हैं और आपके अलावा वहां कोई नहीं जाएगा, तो फिर स्थान बदलने की आवश्यकता नहीं, फिर उसी में करें कि आपके अलावा कोई नहीं जाता।
लगता है कि इस बार आपने साधना की, फिर उसके बाद आपको रूम छोड़ना पड़ेगा, घर परिवार वाले आते-जाते रहते हैं, तो फिर आप स्थान चेंज करें बार-बार, उससे आपको ज्यादा लाभ होगा।
लेकिन अगर परमानेंट है जहां पर आपके अलावा कोई नहीं जाएगा, भले चार महीने, 10 महीने भी साधना करें तो दिक्कत नहीं, तो फिर आप वहां पर करें। एक अनुष्ठान कंप्लीट हो, दूसरा अनुष्ठान ले लें।
रंभा अप्सरा साधना के अलौकिक अनुभव
rambha apsara रंभा अप्सरा साधना: एक दिवसीय सिद्धि प्रयोग
साधनाएं और उनके प्रभाव ऐसे हैं कि कभी-कभी जब हम साधना में बैठते ना, तो हमारे साथ जो घटनाएं होती हैं, हम खुद आश्चर्यचकित हो जाते हैं कि ऐसा कैसे हुआ। क्योंकि वो शक्तियां हैं, वो हमारी सोच से बहुत परे है, बहुत परे।
वो बहुत एडवांस हैं, एडवांस लाइजेशन, वे एडवांस हैं। तो वो हम जो नहीं सोचते उससे ज्यादा है। क्योंकि हमने जो चीजें देखीं, हम जिन चीजों को देखते हैं, जिनसे बात करते हैं, सामान्य सी हो गई सारी चीजें।
लेकिन जब विशेष शक्तियों की साधना करते हैं तो बहुत सारी ऐसी घटनाएं होती हैं जो चमत्कारिक रूप से प्रसन्न कर देती हैं मन को। क्योंकि शक्ति का, नई शक्ति का सामने आना या फिर उसके द्वारा आपको एक नया अनुभव देना, बहुत अलौकिक अनुभव होते हैं।
साधकों द्वारा की जाने वाली सामान्य गलतियां
साधना में इन चीजों का बड़ा महत्व है। लेकिन दिक्कत कहां हो जाती है सामान्य साधकों के लिए? अपनी साधना के बारे में या तो बहुत सारे लोगों को बता देते हैं।
हमने कई लोगों को देखा है कि वे लोग फोन करते हैं कि हमने हमारे गुरु जी से फलां साधना ली है, हम कर रहे हैं लेकिन अनुभव नहीं हो रहे।
हम बोले, कहां से अनुभव होंगे? तुमने तुम्हारे गुरुजी से साधना ली, पहला अनुष्ठान भी तुम्हारा कंप्लीट नहीं हुआ और तुमने हमें बता दिया।
भाई क्यों बता रहे हो? मैं तुम्हारी साधना पर और गुरु पर तुम्हें विश्वास नहीं है तो सिद्ध कैसे होगी? उसने तो तुम्हारी पहले ही परीक्षा ले रखी और जब हमें बताया तो तुमने 10 और लोगों को फोन लगाकर बताया होगा।
भाई, वो तो आपको कम से कम साधना के दो, चार, पांच, दस अनुष्ठान हों, उसके बाद भी आपको लग रहा है अनुभव नहीं हो रहा, जबकि मैंने अनुष्ठान अच्छे से किए हैं, सही मंत्र, नियम पालन करके किए हैं, उसके बाद भी कुछ नहीं हो रहा है, तब आप उसकी चर्चा करें किसी अन्य से, अपने गुरु से, अगर उसका समाधान नहीं हो रहा तो किसी अन्य गुरु से चर्चा करके उस संबंध में राय लें तो बात अलग है।
चलती साधना में कभी किसी को नहीं बताना चाहिए। हम लोग जब साधना में बैठते हैं, हम किसी को नहीं बताते। पारिवारिक सदस्यों को भी मालूम नहीं होता कि हम क्या कर रहे हैं। वो लोग बस है कि ठीक है पूजा चल रही है, सामान्य पूजा चल रही है। नहीं पता होता कि कोई साधना चल रही है, कुछ चल रहा है।
तो बहुत सारे लोग बखान कर देते हैं, सबके सामने बखान कर देते हैं। नहीं करना चाहिए। ऐसे में आप अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारते हैं, समय भी खराब होता है और साधना भी सिद्ध नहीं होती।
फिर गुरु को दोष देते हैं, मंत्र को दोष देते हैं, साधना को दोष देते हैं और सनातन को दोष देते हैं। तो भाई, ना धर्म की गलती है, ना गुरु की गलती है, ना मंत्र की गलती है, गलती सभी आपकी है। आंख बंद करके यदि विचार करोगे कि क्या-क्या गलतियां की हैं, सब सामने आ जाएगी।
रंभा अप्सरा साधना एक दिवसीय प्रेमिका सिद्धि प्रयोग
चलिए विषय वस्तु पर आते हैं। प्रेमिका रूप में इसको सिद्ध किया जाता है, रंभा अप्सरा साधना है। आप इसको 11 दिन, 21 दिन जैसा करना चाहें वैसा कर सकते हैं। लेकिन एक दिन की साधना यह करनी चाहिए अगर आप इसके तत्व को, इसकी कृपा को जीवन में उतारना चाहते हो तो एक दिन की साधना भी इसकी की जा सकती है।
रंभा अप्सरा साधना हेतु सामग्री और तैयारी
किसी भी शुक्ल पक्ष के शुक्रवार को रात्रि 11 बजे के बाद की यह साधना है। गुलाबी वस्त्र, आसन, पूर्व या उत्तर मुखी हों। स्नान के पश्चात पुराने कोई वस्त्र या किसी को ना छुएं, सीधे गुलाबी वस्त्र धारण करके, आसन गुलाबी हो।
बहुत से लोग कहते हैं साहब, आसन कहां से लाएं इतने कलर के? तो कोई बात नहीं, जो आसन हो उसके ऊपर गुलाबी कपड़ा बिछा लो। एक बाजोट सामने रखो जो आपकी नाभी से ऊपर हाइट हो, नहीं हाइट हो तो नीचे ईंट वगैरह लगा लो, कोई सामान लगाकर उसको हाइट दे दो।
अब लोग बहुत से लोग पूछते हैं बाजोट क्या होता है? बाजोट मतलब लकड़ी का वह पटिया जिसके ऊपर सामग्री रखी जाती है।
उसके ऊपर एक तांबे की प्लेट रखो और उसमें अप्सरा, रंभा अप्सरा सम्मोहन यंत्र को और अप्सरा माला को भी वहां पर भी कपड़ा बिछा देना है। प्लेट में एक अलग प्लेट में माला रखो, एक अलग प्लेट में यंत्र रखो।
रंभा अप्सरा साधना मंत्र और पूजन विधि
पहले अपना पवित्रीकरण, आचमन करो। घी का या चमेली के तेल का दीपक प्रज्वलित करो। इत्र खुद भी लगाना है चमेली का तो ज्यादा बढ़िया और अपने आसपास भी छिड़कें। हो सके तो एक माला खुद धारण कर लें, एक यंत्र के आसपास लपेट। यंत्र को स्नान करवा लें सामान्य जल से, उसके बाद कुमकुम, चावल, केसर, फल, अक्षत आदि से उसका पूजन करें। पूजन के पश्चात 51 माला मंत्र का जप करना है। मंत्र को नोट करिए, आगे की प्रोसेस बताते हैं:
ॐरंक्लींरंआगच्छक्षंरंनमः
यह संपुट बीज मंत्र है। 51 माला जप आपका मंत्र जप हो जाए, उसके बाद आपके बाएं हाथ या उल्टे हाथ में, लेफ्ट हैंड में यंत्र को दबा लें और खड़े होकर एकदम सामने दीवार हो तो दीवार पर त्राटक करते हुए, कोशिश करें त्राटक करने की, बहुत से लोगों को प्रैक्टिस नहीं, कर पाते। त्राटक करते हुए 15 मिनट तक फिर मंत्र जप करें और उसके बाद वापस यंत्र को उसके यथा स्थान रख दें।
रंभा अप्सरा साधना प्रयोग समाप्ति के बाद की प्रक्रिया
मिठाई का भोग लगाएं और प्रयोग समाप्ति जब आपकी हो जाती है उसके बाद 11 दिन तक उस माला को गले में धारण करके रखें। ग्यारहवें दिन रात्रि को या बारहवें दिन यंत्र और माला को पवित्र नदी, सरोवर, जल में विसर्जित कर दें।
यह इसका रंभा अप्सरा सिद्धि का चमत्कारिक एक दिवसीय प्रयोग है। मंत्र जप तो एक ही दिन करना, बाकी माला धारण करना है, तो आप इसके लाभ ले सकते हैं। आप चाहें तो इस प्रयोग को कितने भी दिन आगे बढ़ा सकते हैं, 11 दिन, 21 दिन, 41 दिन, आपके ऊपर है।
निष्कर्ष और अन्य सेवाएं
चलिए आज के लिए इतना ही। जो लोग जीवन में विभिन्न समस्याओं से परेशान हैं लेकिन समझ में नहीं आया कि जीवन संघर्ष क्यों है, उन्हें अपनी कुंडली विश्लेषण या ऑरा स्कैनिंग जरूर करवानी चाहिए।
कुंडली विश्लेषण के लिए अपना नाम, जन्म तारीख, समय और स्थान नीचे दिए गए नंबर पर, तो राइट हैंड, माता बहनें हो तो लेफ्ट हैंड। कुंडली विश्लेषण शुल्क ₹500, ऑरा स्कैनिंग शुल्क ₹500। चलिए आज के लिए इतना ही। जय गुरुदेव, जय महाकाली!
Pari sadhna vs Apsara sadhna परी और अप्सरा में क्या अंतर है कौंन जायदा शक्तिशाली pari apsara sadhna
pari sadhna vs apsara sadhna परी और अप्सरा में क्या अंतर है कौंन जायदा शक्तिशाली pari apsara sadhna- GurumantraSadhna.com में आप सबका फिर से स्वागत है। आज का हमारा विषय रहेगा हमारी साधना और अप्सरा साधना को लेकर रहेगा, कौन सी साधना हमें करनी चाहिए, कौन सी साधना सर्वश्रेष्ठ है, इस विषय में हम बात करेंगे। पहले हमने अप्सरा और यक्षिणी के बारे में वीडियो बनाया था, आज हम बना रहे हैं अप्सरा और परी के बारे में।
देखिए, जो अप्सरा है और परी है, एक ही, लगभग दोनों एक जैसी चीजें होती हैं। इनमें ज्यादा कोई फर्क नहीं है। पहले हम बताते हैं अप्सरा। अप्सरा एक दैविक साधना है। यह सनातन धर्म की साधना है। वहीं पर जो परी होती है, यह मुस्लिम धर्म में आती है, यह मुस्लिम धर्म की साधना होती है।
तो इनमें यह फर्क होता है। अप्सरा साधना को भी प्रेमिका रूप में किया जाता है, परी को भी प्रेमिका रूप में ही किया जाता है। इसमें कोई दूसरा ऑप्शन नहीं है।
अप्सरा साधना को करने के लिए थोड़ा सा कर्मकांड की जरूरत पड़ती है, लेकिन परी साधना में कोई कर्मकांड, कुछ नहीं, जीरो। अप्सरा साधना के जो मंत्र हैं, वो निष्कीलित हैं और जो परी साधना के मंत्र हैं, वह भी निष्कीलित हैं।
उनके लिए कीलन-कूलन कुछ करने की जरूरत नहीं। अप्सरा साधना अगर कोई व्यक्ति कर लेता है, ठीक है, तो गलती करने पर, बड़ी गलती करने पर, उसको भयानक दंड भोगना पड़ता है।
और यही जो परी साधना है, इसमें अगर आप गलती करते हो, ठीक है, उसमें आपको परी श्राप दे सकती है, आपको श्रापित कर सकती है। श्राप देने के बाद, श्रापित होने के बाद, आपकी जिंदगी खराब हो जाएगी पूरी तरीके से।
इनमें यह फर्क है। परी साधना जैसे मुस्लिम साधना होती है, ठीक है, तो इनके लिए जो कवच हम लगाते हैं, आयतुल कुर्सी लगाते हैं और दुरूद शरीफ लगाते हैं।
और वहीं ही अप्सरा साधना के लिए आप जो कवच लगाते हो, ठीक है, वो आप वज्र कवच लगा सकते हैं या फिर आप हनुमान जी का कोई भी, बजरंग बाण या कोई भी, पढ़ के आप लगा सकते हैं घेरा।
अप्सरा का जो स्थान है, या तो धरती पर रहती है या तो स्वर्ग पर रहती है, लेकिन जो परी होती है, यह कोह-क़ाफ़ में रहती है। परी का एक क्षेत्र निर्धारित होता है, उस क्षेत्र के बाहर वह काम नहीं करती। तो जो अप्सरा साधना है, इसका कोई क्षेत्र नहीं है।
कहीं पर भी आ-जा सकती है, कहीं पर भी आपका काम कर सकती है। सबसे जल्दी सिद्ध होने वाली जो साधना है, वह परी है। अप्सरा साधना सिद्ध होने में समय लेती है।
अप्सरा साधना करने वाले की जो बॉडी है, उससे गुलाब की खुशबू आती है। वहीं जो परी साधना करता है, तो उससे चमेली की खुशबू आती है। यह भी इसमें फर्क होता है। दोनों ही साधना घर के अंदर की जा सकती हैं।
अगर एकांत जगह में करोगे, तो उसका ज्यादा बेनिफिट है। जो परी साधना है, ठीक है, इनमें जो फर्क होता है, फर्क किस चीज का होता है, ये, आज के लिए बस इतना ही। जय श्री महाकाल। अगर आपको यह वीडियो पसंद आया हो, तो हमें जरूर बताएं।
APSARA SADHNA KI NIYAM अप्सरा साधना के नियम – अप्सरा प्रत्यक्ष होगी कुछ दिनों में PH.85280 57364
APSARA SADHNA KI NIYAM अप्सरा साधना के नियम – अप्सरा प्रत्यक्ष होगी कुछ दिनों में PH.85280 57364
APSARA SADHNA KI NIYAM अप्सरा साधना के नियम – अप्सरा प्रत्यक्ष होगी कुछ दिनों में गुरु मंत्र साधना में आप सबका फिर से स्वागत है। तो मैं आपको अप्सरा साधना के ऐसे नियम बताऊंगा जिससे अप्सरा आपके सामने प्रत्यक्ष हो जाएगी। तो सबसे पहला नियम यही है कि आप इसको प्रेमिका रूप में ही करें, माँ या बहन रूप में आप इसको नहीं कर सकते।
उसके पीछे का जो कारण है कि ये एक ऐसे वर्ग की साधना होती है, इसको प्रेमिका रूप में ही किया जाता है, ये जोड़े में नहीं होती है। बहुत सारी शक्तियाँ जोड़े के अंदर होती हैं, यक्ष के साथ यक्षिणी होती है, देवता के साथ देवी होती है। उसी तरीके से जो अप्सरा होती है बिल्कुल अकेली होती है। तो इसको आप देता हूं।
दूसरी चीज़ क्या है, अप्सरा स्वयं सिद्ध होना चाहती है और साधक को संकेत देती है। मैं आपको संकेत बताता हूँ। अगर आपको सपने के अंदर अप्सरा दिखाई देती है, बार-बार सपने के अंदर आती है, तो समझ लेना चाहिए कि अप्सरा आपको सिद्ध होना चाहती है।
दूसरे नंबर के ऊपर क्या होता है, कभी-कभी दूर से घुंघरुओं की आवाज़ सुनाई देती है, तो भी आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि अप्सरा आपको सिद्ध होना चाहती है।
तीसरे नंबर के ऊपर हल्की सी सुगंध आपको आती है, हल्की सी, तो आप समझ सकते हैं कि अप्सरा आपको सिद्ध हो चुकी है। केवल वह इसलिए प्रत्यक्ष नहीं हो पा रही है क्योंकि वहाँ का जो वातावरण है उसके लिए सूटेबल नहीं है, कुछ शक्तियाँ उसको रोक रही हैं।
जहाँ आप रह रहे हो, हर एक क्षेत्र के अंदर बहुत सारी गुप्त शक्तियाँ होती हैं, कभी-कभी वो रोकती हैं, कभी-कभी कुल का पितर रोकता है, तो कभी-कभी क्षेत्रपाल रोकता है। तो इन्हीं कारण वो अप्सरा आती है लेकिन सामने रूप में आपको दिखाई नहीं देती।
तो उसके लिए डिमांड यह होती है, उपयुक्त स्थान आपको ढूंढना पड़ेगा, वहाँ पर यह अप्सरा आएगी। संकेत आपको दे रही है, वह चाहती है कि आप उसको मतलब आप उसके साथ कांटेक्ट में आएं, पर दिक़्क़त यही आती है, कि आपका वातावरण अनुकूल नहीं है।
तीसरी चीज़ मैं आपको यह बताता हूँ कि इसके लिए गुरु की बहुत ज़रूरी है, ज़रूरत होती है। तीसरा नियम यह कहता है कि आपके पास अच्छा गुरु होना चाहिए। तो गुरु ही आपको बताएगा कि उपयुक्त स्थान कौन सा है, कहाँ आपके पास अप्सरा प्रत्यक्ष होगी।
तो एक तो यह है। चौथा नियम इसमें यह है कि आप जब भी अप्सरा करें तो बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू सब छोड़ दें। ज़ाहिर सी बात है कि कोई इंसान भी ऐसे लोगों के साथ कांटेक्ट में नहीं आना चाहेगा जिसके दाँत बीड़ी-सिगरेट के कारण ख़राब हो चुके हैं, सड़े हुए दाँत, दुर्गंध आती है, तो ऐसे लोगों से कौन बात करना चाहेगा?
इसीलिए क्या है, इन चीज़ों को त्याग दें। बिल्कुल शुद्ध रहें। एक तो यह है और डेली बेसिस के ऊपर स्नान करें। स्नान में आप दूध से स्नान कर सकते हैं। सबसे मेन चीज़ है दूध, दूध से आप स्नान कर सकते हैं। तो अगर आप करोगे तो बेस्ट है, अगर नहीं करते हो तो पानी में आप थोड़ा सा कोई पवित्र जल डाल लें, उससे स्नान करें। तब भी चल जाएगा। तो एक नियम यह हो गए।
और कुछ मैं आपको नियम बताता हूँ। अप्सरा के कभी भी आप प्रत्यक्षीकरण के पीछे मत भागिए। बहुत सारे लोग बोलते हैं प्रत्यक्षीकरण करना है, मेरे को अप्सरा का प्रत्यक्षीकरण करना है। प्रत्यक्षीकरण के चक्कर में क्या होता है, बहुत ज़्यादा परीक्षा होती है।
अब प्रत्यक्षीकरण के चक्कर में न पड़ें। उसको आप बोलें कि आप यहाँ मेरे पास आओ। आप उसको बुलाओ और वह अपनी उपस्थिति का एहसास कराएगी, इतना ही बहुत है। और केवल आपको काम करवाने से मतलब होना चाहिए कि आप उससे कोई काम करवाओ, अप्सरा से। वो काम अटके हुए वह करवाओ। तो इस तरीक़े से आप करिए।
प्रत्यक्षीकरण के पीछे भागोगे ना तो बहुत ही ज़्यादा इसके लिए परीक्षा होती है। ब्रह्मचर्य की परीक्षा होती है। तो ब्रह्मचर्य की परीक्षा का भी मैं आपको बताता हूँ, इसके लिए कुछ जड़ी-बूटियाँ होती हैं, कुछ मंत्र होते हैं जिससे ब्रह्मचर्य बचा रहता है, वो केवल आपको गुरु बता सकता है, गुरु के निर्देश में ही करें।
जहाँ आप अप्सरा की साधना कर रहे हो, तो उस जगह को अच्छे तरीक़े से धो लें, अगर दूध और गंगाजल डाल के उस जगह को स्नान कराएं। मैं यह नहीं बोल रहा हूँ 50 लीटर आप दूध से उसको धोएं, थोड़ा सा दूध डालें, थोड़ा सा गंगाजल डालें, उससे पोछा लगा लें। पहले सर्फ़ से पोछा लगा लें फिर उसके बाद इसका पोछा लगा दें, तो यह भी बेस्ट हो गया काम।
थोड़ा सा इत्र वग़ैरह ख़ूब छिड़काएं, उस कमरे को सुगंधित कर दें। और उस कमरे के अंदर कोई नहीं आना चाहिए, फ़ालतू सामान अगर उसमें पड़ा हुआ है तो वो निकाल दें।
बिल्कुल ख़ाली कमरा होना चाहिए, उसमें आपका आसन होना चाहिए, अप्सरा की फ़ोटो होनी चाहिए, अप्सरा का यंत्र होना चाहिए, बस इससे ज़्यादा कुछ नहीं।
जहाँ आप सोते हैं तो साथ में ही एक स्थान अप्सरा को भी दें कि वह आपके साथ सोए, एक जगह कि वो आपके सोने के लिए। उसके लिए भी थोड़ा सा स्थान रखें। पत्नी रूप में कर रहे हैं तो तब स्थान रख सकते हैं, प्रेमिका रूप में ज़रूरत नहीं है। तो ये चीज़ हो गई अप्सरा के लिए।
और उसके अलावा क्या होता है, सुरक्षा कवच। सुरक्षा कवच की बात करते हैं, बेहद ज़रूरी है। सुरक्षा कवच अगर आप नहीं लगाते तो अप्सरा के साथ कोई दूसरी नेगेटिव शक्ति भी आएगी जो आपको डिस्टर्ब कर देगी, आपको भटका देगी आपके लक्ष्य से। इसीलिए क्या है सुरक्षा कवच अति इंपॉर्टेंट चीज़ है, वह लगा के, घेरा लगा के ही बैठें। यह भी एक नियम है।
उसके अलावा कुछ और मैं नियम आपको बताता हूँ। जब भी, एक नियम और है। यह नियम बहुत ही इंपॉर्टेंट नियम है। अगर आप इस नियम को फ़ॉलो करोगे तो भाई बहुत अच्छी बात है, आपकी सेफ़्टी रहेगी नहीं तो आप ख़तरे में आ सकते हैं।
तो नियम यह कहता है कि अगर आप प्रेमिका रूप में उसके कारण सिद्ध हो, तो दूसरी प्रेमिका से आप संपर्क तोड़ दें। अगर आपकी प्रेमिका है तो उससे संपर्क तोड़ दें, अन्यथा आपको भी नुक़सान होगा, उस प्रेमिका को भी नुक़सान होगा।
अप्सरा आपको भी नहीं छोड़ेगी और न उस प्रेमिका को छोड़ेगी। पहले ही यह चीज़ बता चुका हूँ, फिर से बता रहा हूँ कि आप अपनी प्रेमिका को जो है छोड़ दीजिए अगर अप्सरा को प्रेमिका रूप में आप कर रहे हैं।
तो अप्सरा नहीं चाहेगी कि उसके अलावा आप दूसरे से प्रेम करें। तो यह नियम बहुत ही इंपॉर्टेंट है, कोई गुरु नहीं बताता है। तो यह नियम भी ज़रूरी है। ब्रह्मचर्य को सुरक्षित करने के लिए डाइट प्लान होता है, तो वो पूरा एक गुरु बताता है किस तरीक़े से आपको डाइट लेनी है, कौन सी लेनी है।
मैं सार से आपको निचोड़ एक ही निकालता हूँ कि आपको गर्म चीज़ें निषिद्ध हैं। गर्म चीज़ें जितनी ज़्यादा खाओगे, अंदर कामुकता आएगी, कामुकता आएगी तो ब्रह्मचर्य टूटेगा। तो यह नियम भी आप ध्यान में रखिए।
मैं यह चाहता हूँ कि कम से कम टाइम में मैं ज़्यादा से ज़्यादा बातें बता सकूँ। मेरा एक ही लक्ष्य है।
तो आगे हम बढ़ते हैं। कुछ नियम और हैं। जो भी आप आसन इस्तेमाल करें, जो भी माला, जो भी कपड़ा आप इस्तेमाल करें अप्सरा के लिए, अप्सरा साधना में जो भी चीज़ें आप इस्तेमाल करो, या तो व्हाइट होनी चाहिए या तो गुलाबी होनी चाहिए। यह भी एक नियम है।
इसको भी आप फ़ॉलो करिए, व्हाइट या गुलाबी। ये दो रंग ही अप्सरा को प्रिय होते हैं। बहुत ज़्यादा, अगर दीवार हो सके तो पूरी गुलाबी कर दीजिए, हल्का सा गुलाबीपन होना चाहिए। नहीं तो आप उसको व्हाइट कलर करवा सकते हैं, तब भी आपका चल जाएगा।
एकदम अच्छे से व्हाइट कलर होना चाहिए। तो यह नियम हैं अप्सरा के। एक-आध नियम कोई छूट गए तो फिर आप मेरे को कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। तो आज के लिए बस इतना ही, जय श्री महाकाल।