Day: November 1, 2025

Brahmarakshas ब्रह्म राक्षस परिचय और भ्रांतियों पर विचार कौंन होता है

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mq2 https://gurumantrasadhna.com/2025/11/01/

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🧐 ब्रह्म राक्षस: परिचय और भ्रांतियों पर विचार

Brahmarakshas ब्रह्म राक्षस परिचय और भ्रांतियों पर विचार कौंन होता है गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पोस्ट में आपका एक बार फिर से स्वागत है। आज हमारे साथ हैं रुद्रनाथ जी। रुद्रनाथ जी आज हमें बताएँगे कि जो जनता की मेल आ रही है, फोन आ रही है कि ब्रह्म राक्षस के बारे में जानना है। उनको सिद्ध कैसे किया जाता है।

आज वो हमारे पोस्ट पर विस्तार से बताएँगे कि ब्रह्म राक्षस की कैसे सिद्धि की जाती है और दूसरी बात इसकी शक्ति क्या है और इसको प्रयोग में कैसे लाना और इससे बचा भी कैसे जा सके। ठीक है? तो मैं अपने पोस्ट पर आपका स्वागत करता हूँ रुद्रनाथ जी एक बार फिर से जी धन्यवाद सबसे पहले। जी जय माता की, जय श्री महाकाल। जय श्री महाकाल।

तो जो मैंने आपसे तीन चार सवाल पूछे हैं इनको टॉपिक को बताओ कि कैसे कवर करना है। तो पहले तो मैं आपको ये चीज़ बताना चाहता हूँ जो हमारे नए विज़िटर आए हैं अभी जो नई ऑडियंस है तो उनको मैं एक चीज़ बताना चाहता हूँ कि ब्रह्म राक्षस है क्या, सबसे पहले तो उसकी जानकारी देना बहुत ज़रूरी है क्योंकि इसके बारे में ना बहुत सारी गलत धारणाएँ हैं। जी ठीक है।

किसी को कुछ पता भी नहीं है और फालतू में कोई भी वेबसाइट लेख बना के डाल रहा है। ठीक है? बिल्कुल बिल्कुल। और मैं इसका बिल्कुल कम से कम समय में मैं इसको कवर करूँगा। ज़्यादा मैं समय नहीं लूँगा। बिल्कुल। ठीक है।

🔱 ब्रह्म राक्षस का पौराणिक संबंध: कश्यप और विश्रवा ऋषि

तो देखिए जो ब्रह्म राक्षस है वो है क्या? मैं आपको चीज़ बताता हूँ। कॉन्सेप्ट समझिएगा, कोई बंदा भी है तो ब्रह्म राक्षस जो है ठीक है, जो कश्यप ऋषि हुए हैं, ठीक है, कश्यप ऋषि के साथ भी इनका रिलेशन है और विश्रवा ऋषि के साथ भी है, दोनों ऋषियों के साथ है इनका रिलेशन।

पहले तो मैं कश्यप ऋषि का रिलेशन बताता हूँ। कश्यप ऋषि की दो पत्नियां, वैसे तो काफी सारी पत्नियाँ थी, जो दो पत्नियाँ थी वो मेन थी दिति और अदिति मुख्य रूप से। हाँ, जो दिति थी, ठीक है, उसके यहाँ पर हो सकता है कि थोड़ा मैं उलटपुलट भी बोल सकता हूँ दिति और अदिति को लेके, तो आप अपने हिसाब से उसको मैनेज कर लेना।

गरुड़ हुए, मैं बता देता हूँ जिसमें आपको हाँ जी मैं कम्प्लीट करता हूँ। तो दिति थी, ठीक है जी, तो उनके वहाँ पर अगर मैं गलत हूँगा तो आप मेरे को टोकिएगा ज़रूर। जी जी। जिनके वहाँ पर जो हुए हैं, ठीक है, वो हुए थे जी देवता। बिल्कुल मैं सही हूँ जी क्योंकि मेरे को थोड़ा कन्फ़्यूज़न होता है को लेके। देखो जी, जो अदिति से सीधा देवता जाएँगे। अदिति से अदेवता जाएँगे। हाँ, जो अदिति थी, एक तो उसके वहाँ पर जो पैदा हुए थे, राक्षस पैदा हुए थे। बिल्कुल। ठीक है।

एक तो उनका रिलेशन यह है कश्यप और ऋषि से। ठीक है। जितने भी अदिति के आगे बेटे हुए हैं, जितने भी औलाद हुई है, सब राक्षस ही हुई है। हाँ हाँ हाँ। ठीक है। तो ये आप समझ जाओ कि जो कश्यप ऋषि थे, ब्राह्मण थे। ब्राह्मण होने के कारण जो आगे औलाद हुई।

मतलब एक ब्राह्मण की तेजस्वी औलाद थी। मतलब वो ऋषि कोई तेजस्वी थे पूरी तरीके से। पूर्ण रूप से तेजस्वी थे। भाई मैं ऑडियंस आपको बता देता हूँ। एक बेटा उनको वहाँ से मिला है गरुड़ जो भगवान विष्णु का सारथी है। जी वो दिति से हुआ है।

मतलब कि आपकी जनता को पता लग जाएगा। और जो इंद्र आदि देवता हुए हैं, दिति से पैदा हुए। इंद्र देव, वरुण देव, जितने भी है ये। देवी देवता सारे ही दिति के ही पुत्र थे। आगे इन्होंने फिर यज्ञ करके, तपस्या करके देव तत्व को प्राप्त कर लिया। ठीक है।

तो ये एक तो जो अदिति से आगे चीज़ें चली, वो हुए जी ब्रह्म राक्षस क्योंकि वो ब्राह्मण के बेटे थे। तेजस्वी थे। हम तो वो कहलाए ब्रह्म राक्षस। बिल्कुल। अब यहाँ पर कोई कन्फ़्यूज़न तो नहीं रहनी चाहिए। क्लियर है ना मैटर?

मैटर देखो जो जो ऋषि थे कश्यप ऋषि। ठीक है? वो एक ब्राह्मण थे। आगे इसीलिए जो राक्षस पैदा हुए उनकी कुल से वो ब्रह्म राक्षस पैदा हुए। दूसरा कॉन्सेप्ट मैं अभी बताता हूँ। पुलस्त्य ऋषि। ठीक है? ब्रह्मा जी के पुत्र हुए पुलस्त्य ऋषि। पुलस्त्य ऋषि के आगे पुत्र हुए विश्रवा ऋषि। ठीक है?

विश्रवा ऋषि से जो पहली पत्नी थी उससे कुबेर पैदा हुए। हम्म ठीक है। जिनको नल कुबेर बोला जाता है। कुबेर पैदा हुए। ठीक है। बिल्कुल। आगे चलके भगवान शिव ने उनकी ड्यूटी लगा दी कोषा अध्यक्ष के लिए। बिल्कुल।

रावण रावण के जो भाई थे भाई थे दूर के भाई थे आगे भाई हाँ जो आगे विश्रवा ऋषि के आगे दूसरी पत्नी हुई उससे पैदा हुए रावण, कुम्भकर्ण आदि। ये थे ब्रह्म राक्षस। बिल्कुल।

अगर आप पूरा कॉन्सेप्ट समझ गए हैं कि जो ऋषियों की कुल से जो पैदा हुए थे। वो ब्रह्म राक्षस पैदा हुए थे। जी वो ब्राह्मण होने के कारण वो ब्रह्म राक्षस कहलाए।

🚫 झूठी धारणाओं का खंडन: पूजा पाठ और ब्रह्म राक्षस बनना

अच्छा, अज्ञानी लोग मैं देखता हूँ वेबसाइटों के ऊपर बेवकूफ बैठे हुए हैं। जी वो कॉन्सेप्ट क्या बताते हैं? जी जो ब्राह्मण पूजा पाठ करता है। जी गलत काम करता है। उसके बाद वो ब्रह्म राक्षस बन जाता है। मूर्ख प्राणी हो। ऐसा कुछ नहीं है। ऐसा कुछ नहीं है। मैं एक चीज़ बोलता हूँ।

ऊपर कोई वो जातपात का भेदभाव नहीं है। गलत काम करेगा उसके लिए नर्क है। सही काम के लिए स्वर्ग है। वो वहाँ जातपात नहीं देखी जाती। ये धरती लोक के ऊपर जातपात का चक्कर है।

बिल्कुल। अगर कोई थोड़ा पूजा पाठ कर रहा है ना साधक, उसको एक मौका मिलता है। इंसान की जन्म फिर दोबारा मिलता है। थोड़ा अपने आप को सुधार ले।

जैसे भाई हमें मिला हुआ है दोनों को। बिल्कुल। तो उसी तरीके से ही उनको दोबारा जन्म मिलता है कि कुछ अधूरे काम करें अपने आप को मोक्ष की प्राप्ति को और आगे बढ़ें।

ये नहीं है कि अगर ब्राह्मण कोई गलत काम कर रहा है तो ब्रह्म राक्षस बन जाएगा। ये कहाँ के साले लॉजिक लगा रहे मेरे को यही नहीं पता। लॉजिक सबसे बड़ी बात ये है मैं।

🛡️ ब्रह्म राक्षस से सुरक्षा और उसकी शक्ति

अच्छा, दूसरी जी, मैं अब कॉन्सेप्ट के ऊपर आऊंगा। जी जी। क्लियर हो गया सबको कि आगे बताऊँगा। जी। लोग क्या बोलते हैं कि ब्रह्म राक्षस से बचा कैसे जाता है? अगर किसी के ऊपर ब्रह्म राक्षस लग गया, बड़े से बड़ा तांत्रिक नहीं बचा सकता। मैं सीधी बात बोलता हूँ।

लोग बोलते हैं कि हम हम तो हनुमान चालीसा पढ़ लेंगे। ठीक है। तुम क्या हनुमान चालीसा पढ़ोगे? ब्रह्म राक्षस तुमसे भी शुद्ध हनुमान चालीसा तुम्हें सुना देगा। वो बोलेगा महामृत्युंजय पढ़ेंगे, उससे भी शुद्ध सुना देगा। क्योंकि वो साला खुद ब्राह्मण है। जी। बिल्कुल। वो हाईलाइट है।

उनका दादा, परदादा या बाप वो हाई लेवल के ऋषि हैं। हाई लेवल के ऋषि हैं। वो तुमसे ज़्यादा शुद्ध सुना देंगे। जी। और आप तो चकरा जाओगे यार। अभी ये क्या चक्कर है? जी।

अब मैंने ऐसा केस देखा है जी और हम उनके सामने उनके घर के मेम्बर हनुमान चालीसा पढ़ते थे। वो आ गए। वो हनुमान चालीसा सुनाता था। बिल्कुल शुद्ध रूप में। बिल्कुल। गायत्री मंत्र उसने सुना दिए। बिल्कुल। वो बताता था इसका वो भी लगाओ। शाप में विमोचन भी करो उसका।

हाँ, शाप विमोचन करो। मक्खी पे मक्खी चलाएगा वो पूरी शुद्ध रूप में। उसमें आप एक चीज़ लगा लो। आप उसको मंत्रों से या हनुमान चालीसा से नहीं बाँध सकते। सबसे बड़ा कॉन्सेप्ट ये उसको कोई बड़े से बड़ा तांत्रिक नहीं बाँध सकता।

जो जिस ऋषि का ब्रह्म राक्षस के पिता का नाम लिया दिति, अदिति तो सतयुग में हुए हैं। ये तो कलयुग चल रहा है ना। तो लेवल किसका बड़ा, ब्रह्म राक्षस का या आज के तांत्रिक का? ब्रह्म राक्षस का लेवल बड़ा है। भाई दूसरी चीज़ आप एक चीज़ लगाओ ना कि वहाँ पर ब्रह्म तत्व चल रहा है। सबसे बड़ी ब्रह्मा का तत्व चल रहा है। ब्रह्म एक बहुत बड़े ऋषि का तत्व चल रहा है।

तो वहाँ वो कि कैसे आप उसको हरा पाओगे? और यही उल्लू के पठ्ठे को समझ नहीं ना। जिसका नाम ब्रह्म है। जी। राम जो श्री रामचंद्र जी थे, ठीक है, उनकी पूजा किसने करवाई थी? जी वो रावण ने करवाई थी जी। राम जी ने रावण खुद आए थे। रावण खुद आए थे।

उससे बड़ा ब्राह्मण कौन होगा? उन्होंने उस समय बोला था कि इस समय धरती पर इनसे बड़ा ब्राह्मण नहीं है कोई भी। उनको बुलाओ, वेद पाठी। वो कर्मकांड करेंगे। और वह आए थे। बिल्कुल आए थे। और दूसरी चीज़ मैं को एक चीज़ और बताता हूँ। जी।

सिम्पल कॉन्सेप्ट। ठीक है? रावण अगर हम एग्ज़ाम्पल लें ना ब्रह्म राक्षस की, तो रावण भी ब्रह्म राक्षस था। जी सीधी बात है। बिल्कुल। ठीक है। और दूसरी चीज़ जहाँ ब्रह्म राक्षस खड़ा हो जाएगा वहाँ बड़े से बड़ा तांत्रिक फेल हो जाएगा। सीधी बात है। बच ही नहीं सकता। जी।

वहाँ पर वहाँ पर ना वहाँ पर केवल नाथ योगी, उच्च लेवल का नाथ योगी ही बचा सकता है। नहीं तो कोई नहीं दुनिया की पावर बचा सकता। कोई नहीं बचा सकता। सही बात बोल रहे हो। यही चीज़ है जी कि मैं एक चीज़ बोलता हूँ। जी। ब्रह्म राक्षस की साधना भी होती है। ठीक है। इसके मान लो अगर अगर मान लो मैं आपको चीज़ और कॉन्सेप्ट बताता हूँ।

अगर कोई बंदा कर रहा है। ठीक है जी। अगर उस बंदे ने कर ली साधना हम तो बंदे की छोटी सी गलती होगी ना तो खुद नहीं मरेगा वो ब्रह्म राक्षस पूरा खानदान ही खत्म कर देगा उसको। अरे भाई उसको तो फिर बलि चाहिए ना। बलि चाहे उसकी साधक की हो या उनके परिवार की हो वो तो लेगा ही ना सीधी। नहीं वो किसी को नहीं छोड़ता जी। सबसे खतरनाक और डेंजर साधना है।

अगर आपने उसको कर लिया मैं आपको एक चीज़ और बोलता हूँ कि अगर आपने कर लिया दुनिया की सबसे पावरफुल व्यक्ति आप होंगे। सबसे पावरफुल व्यक्ति आप होंगे। आपके मुक़ाबले में कोई होगा ही नहीं पावरफुल। बिल्कुल। क्योंकि ब्रह्म राक्षस की सिद्धि कोई मज़ाक नहीं है। बड़ी बात है भाई। खेल ही नहीं है।

जैसे आप बात कर रहे हो बता रहे हो। एक-एक स्टेप बता रहे हो, बात बता रहे हो। खेल थोड़ी। हाँ, भाई ऐसा मत सोचना कि भई तांत्रिक बचा लेगा जी। भूत प्रेत है जी। हनुमान चालीसा पढ़ के बचाव कर लेंगे। नहीं, कोई नहीं छुड़वाने वाला नहीं मिलेगा आपको। बिल्कुल बिल्कुल।

करने को तो कर लोगे आप। तो मैं इसीलिए ये साधना में नहीं डाल रहा हूँ। सीधी बात है क्योंकि बहुत मेरे पास पड़ी है। ठीक है। हम नाथ संप्रदाय से हैं तो नाथ संप्रदाय में किसी चीज़ की कोई कमी नहीं छोड़ी है गुरु गोरखनाथ जी ने। ठीक है। तो हम ये चीज़ें रिवील नहीं कर सकते क्योंकि बंदा खुद नहीं मरेगा, लोगों को मारेगा। मैं आपकी बात रोक रहा हूँ।

सबसे बड़ी बात ये है कि अगर बंदर के हाथ में उस्तरा पकड़ा, खुद तो मरेगा, अगले को भी मार देगा। ये इसका तो वही लॉजिक निकलेगा। डेंजर साधना। अच्छा, ये की कहाँ जाएगी फिर ये साधना? ये की जाती है बिल्कुल एकांत जंगल साइड में।

जहाँ बिल्कुल बीयाबान होता है ना। ठीक है। जब ये आता है ब्रह्म राक्षस तो धरती हिलती है जी। पूरा क्योंकि ये ब्रह्म राक्षसों का स्थान जो है पाताल है। धरती फाड़ के एकदम प्रकट होगा। बिल्कुल बिल्कुल। धरती फाड़ेगा, घर उखाड़ेगा जी।

अगर आप घर पे करोगे तो घर का तो ऐसे ही उड़ जाएगी, घर की छत उड़ जाएगी और घर वाले सोचेंगे साला क्या भूचाल आ गया जी। घर वाले भी जो आसपास के हैं, क्या भूचाल आ गया जी। यही हाल होगा। हाँ, अगर बंदा साला कुछ देख के कर ले। हाँ, तो भाई घर ही फट जाएगा एकदम से। घर ही फट जाएगा।

बिल्कुल सही बात बोल रहे हो भाई। बिल्कुल भाई एक रियलिटी है जी। होती है साधना पर भाई सबको कोई हर एक चीज़ मैं नहीं दे सकता। नहीं नहीं, ठीक है आपकी बात। मरना है, मरने का काम ही करेंगे।

💡 निष्कर्ष और अगली कार्यवाई

कॉन्सेप्ट हमने बता दिया है। ब्राह्मण राक्षस है क्या? आपने ऐसे सिद्ध कैसे इसकी सिद्धि कैसे की जाती है और ये कौन है, ये आपने बिल्कुल बताया। कोई किसी का डाउट होगा तो नीचे कमेंट बॉक्स में बता दे। ठीक है? तो बस बाकी मैं एक चीज़ बोलता हूँ जहाँ ब्रह्म राक्षस आ जाए तो आप प्रणाम करके निकल लो बस। क्योंकि आप उसे जीत नहीं सकते। जी ठीक है जी।

तो ये सिस्टम है जी आज का हमारा यही टॉपिक था कि हम जानकारी दें ब्रह्म राक्षस के बारे में जो भ्रांतियाँ फैल रखी हैं, तो उसके बारे में हम बताएँ। एक चीज़ रह गई रुद्रनाथ जी। भ्रांतियाँ इसलिए फैल रही हैं, कुछ किया नहीं है, कुछ सीखा नहीं है, कुछ पाया नहीं है, तो सब चेपने पे लगे हुए हैं। बढ़िया कैमरा, बढ़िया कैमरा रख के चेपने पे लगे हुए। ऐसे कर रहे हैं।

ऐसे कर रहे हैं कि जैसे कि साला इनका जो है ना वो नेबर है ब्रह्म राक्षस। बस बस बस। पड़ोसी है। मैं फिर भी तंग रह गया जी। जब उस लेडीज़ का मैंने सुना जी। बहुत बड़े वेबसाइट लेख के ऊपर वो लेडी बोल रही है जी। ब्राह्मण राक्षस क्या है? जी जो ब्राह्मण गलत काम करता है जी वो ब्राह्मण राक्षस बन जाता है भाई साहब। वो थोड़ी है। वो तो साला कॉन्सेप्ट ही अलग उन्होंने बना दिया। बताओ। ये सीधी बात है। आएगा जी। नरक जाएगा।

मान लो अघोरी अघोरी एक बात लेता हूँ। वो जब से अघोरी बना है, मरने तक वो इतने मंत्र उच्चारण सिद्धियाँ कर चुका है। जब वो किसी के सामने पड़ेगा, इतनी जल्दी उसको पिंड छोड़ देगा। उनकी तो मुंडी भी पहले बुक होती है कि तू मरेगा, तेरी मुंडी मेरे को चाहिए क्योंकि उसमें ज्ञान होता है उसका सारी उम्र का। वो जब दूसरे अघोरी को मिलती है तो वो ज्ञान जो होता है ज़्यादा बड़ा हो जाता है उसका।

और मैं एक चीज़ और बोलना चाहूँगा जो अघोरी का मैं कॉन्सेप्ट बताता हूँ। या कोई भी सिद्ध व्यक्ति है, अगर उसका शरीर छूटता है, कोई काम अधूरे रह जाते हैं तो दोबारा उसका मनुष्य का ही जन्म होगा उसको। बिल्कुल। तो ये होता है सिस्टम केवल अच्छे लोगों के लिए ये कॉन्सेप्ट है। अगर वो ब्राह्मण है, अभी कोई भी जात का है ना, तो वहाँ ऊपर जात नहीं पूछी जाएगी।

सीधा नर्क में डाल दिए जाओगे गलत काम तो सीधी बात है। जात अब अब आप ये नहीं कोई बंदा बोल सकता है हाँ जी ब्राह्मण है तो चलो कोई बात नहीं इसको ब्रह्म राक्षस की श्रेणी में डाल दो। ये तो कुछ अलग कॉन्सेप्ट हुआ है। वो चीज़ ऐसी नहीं है। जी बिल्कुल।

तो केवल जो ऋषियों की कुल से जो कुल चली है तो ब्रह्म राक्षस है। सीधी बात है जी। भाई भाई मैंने सुना है कि जैसे कहीं बोलते हैं रावण को ऐसे सिद्ध करो, वैसे सिद्ध करो। सालों एक उपाय मैंने जो बताया था वो इतना धड़ल्ले के साथ फैल रहा है। अगर अच्छा किसी को अगर खुजली हो भी रही है ना ब्रह्म राक्षस की तो रावण ही कर ले। वह भी ब्रह्म राक्षस ही था भाई।

तो कर तो सही। करे तो सही। पहले ही उसको पता लग जाएगा ना हफ्ते, एक हफ्ते में पता लग जाएगा। और एक तरीके से उनकी दो इच्छाएँ पूरी हो गई। एक तो चलो उनका हो गया काम। ठीक है। ब्राह्मण राक्षस की खुजली दूर हो गई।

दूसरा चलो वो भी हो गया, दो काम हो गए ना। ऑप्शन मिल गई है। चाहे पहली ऑप्शन जाए, दूसरी ऑप्शन। बिल्कुल बिल्कुल। तो यही चीज़ है जी। बंदा ये चीज़ करे।

तो आज का जो टॉपिक है यहीं समाप्त करते हैं। जी बहुत मज़ा आया जी आपके साथ बातचीत करके। जी शुक्रिया भाई पोस्ट पे आने के लिए। रुद्रनाथ जी आपका एक बार फिर से। तो आज के लिए मैं यहाँ पर विराम करता हूँ। ठीक है। जय महाकाल और जय माता की

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ismail jogi sadhna इस्माइल जोगी साधना: नाथ पंथ और मुस्लिम साधना का समन्वय

🕌 इस्माइल जोगी साधना: नाथ पंथ और मुस्लिम साधना का समन्वय

ismail jogi sadhna इस्माइल जोगी साधना: नाथ पंथ और मुस्लिम साधना का समन्वय गुरु मंत्र साधना.com में आपका फिर से स्वागत है। आज हम एक नए विषय पर चर्चा कर रहे हैं। गुरु रुद्रनाथ और सागरनाथ। कभी रुद्रनाथ जिज्ञासु की भूमिका निभाते हैं तो कभी सागरनाथ जी जिज्ञासु की भूमिका निभाते हैं। दोनों ही एक से बढ़कर एक ज्ञानी हैं। कोई छोटा बड़ा नहीं है।

दोनों एक समान ज्ञानी हैं। हर बार इस मंच पर एक नया ज्ञान प्राप्त होता है साधक जन को। आज फिर इस श्रृंखला में नया ज्ञान लेकर आए हैं। चलो शुरू करते हैं। गुरु मंत्र साधना.com में आप सबका फिर से स्वागत है। जी।

आज का जो हमारा टॉपिक रहेगा इस इस्माइल योगी की साधना का रहेगा। ठीक है? इस इस्माइल योगी की साधना क्यों की जाती है? इसका क्या लाभ है? ठीक है? पूरा उस टॉपिक के ऊपर बातचीत करेंगे।

आज फिर हमारे गुरु मंत्र साधना.com पर सागरनाथ जी उपस्थित हैं जो आपको बताएंगे इस इस्माइल योगी की साधना का क्या महत्व है। जी जी सागरनाथ जी आप जी का स्वागत है फिर से। सबको एक बार राम राम। फिर से जय माता की। जय माता दी। राम राम जी।

तो रुद्रनाथ जी आपका एक बार फिर से धन्यवाद अपने वेबसाइट पे एक बार दोबारा फिर से बुलाने के लिए। जी तो आज हम ये लेके आए हैं इस्माइल जोगी। इस्माइल जोगी का जो मंत्र है या विधि-विधान है अक्सर नहीं मिलता। तो जिनके पास है उन्होंने अपने पास ही रख लिया है।

आगे बताया ही नहीं। ठीक है। इनका क्या महत्व है मैं बताता हूँ। तो ये गुरु के रूप में जैसे चलते हैं इस्माइल जोगी, जोगी तो हैं ही, इस्माइल जोगी के रूप में भी चलते हैं और दूसरी बात जहाँ पे कामरू का कामाख्या की पीठ है ना, कामरूपा जिसको आप बोल दो, कामाख्या मंदिर, वहाँ की स्थली, वहाँ पे ये बहुत ज्यादा पूजे जाते हैं।

साथ में इनके लूना चमारिन भी पूजी जाती है, जो लूना चमारिन है इनकी शिष्या मानी गई है, इनकी शिष्या मानी गई है और जो नार सिंह वीर है ना, वहाँ का जो मोहन का काम करता है, मोहन का जो वशीकरण बहुत प्रबल रूप से करता है, वो भी इनके साथ ही रहा है, लेकिन वो इनका शिष्य नहीं रहा जी। वो इनके साथ ही जैसे गुरु भाई बोल सकते हो आप। ठीक है?

📜 इस्माइल जोगी का महत्व और नाथ संप्रदाय से संबंध

 

और दूसरी चीज क्या है जी, जो ये इस्माइल जोगी जी हैं, गुरु गोरखनाथ जी ने शिक्षा प्राप्त करी है, शिक्षा हाँ, इनके शिष्य हैं। यही मैं बात बोलने लगा था। इनके शिष्य हैं। मतलब कि ये तंत्र के क्षेत्र में इनका जो लेवल है बहुत बड़ा है, जिसको बोलते हैं हाई डिग्रीहाई डिग्री

और दूसरी चीज क्या है जी, अब लोगों के मन-माइंड में आता है ना कि हिंदू धर्म में हम मुस्लिम साधना कर रहे हैं। जो मुस्लिम साधना का प्रचलन हुआ है, ये इस्माइल जोगी से ही हुआ है। जी ठीक है।

और दूसरी चीज, जो ये धर्म-कर्म के जो लोग ज्यादा करते हैं ना, मैं एक चीज बोलना चाहता हूँ जी, नाथ संप्रदाय के अंदर मुस्लिम साधना भी की जाती है और सनातन धर्म की भी की जाती है। ऐसे होती थी जब गुरु गोरखनाथ जी घर पे तो अभी हैं, लेकिन जब वो आए थे, प्रकट हुए थे, उन्होंने दीक्षा देनी शुरू की थी, जो मुसलमान थे, मुसलमान पद्धति के थे, ठीक है

उस समय वो उनके जब शिष्य बने, उनको पता लगा कि इनके अंदर नूर है, परमात्मा का दिया हुआ, कुछ कर सकते हैं। उन्होंने उनको दीक्षा दी, नाथ पंथ से ही दी और आगे उन्होंने क्या किया? जब उनसे दीक्षा ले ली, परफेक्ट हो गए, तो आगे अपना पंथ चलाना शुरू किया।

ये जो मंत्र आप मुस्लिम मंत्र पढ़ते हो ना, इल्म आलम, इल्म आलम, ये जितने भी पढ़ते हो, कालिम हाँ, आलम कालिम, ये वहीं से ही चले हुए हैं। बिल्कुल। देखो गुरु का तो मतलब होता है शिष्य को पावर देना।

शिष्य जैसे मर्जी उस गद्दी को आगे बढ़ाए, गुरु ऐसे नहीं बोलते। वो बोलते कि दूसरी चीज क्या है, नाथ संप्रदाय में मुस्लिम साधना भी एक समान की जाती है और यह भी की जाती है। दोनों का एक समानता है।

उसमें ये नहीं है तो कोई धर्म-कर्म का कोई आडंबर नहीं। गुरु तो सबके समान होते हैं। सीधी बात है। बिल्कुल। ठीक है ना? उनके घर में कोई ये धर्म मजहब नहीं चलता है। बिल्कुल वही चीज तो मैं बोल रहा हूँ उन लोगों को।

💡 साधना की विधि और स्वरूप

 

अब मैं बताता हूँ ये जो मेरे को साधना मिली थी, कहाँ से मिली थी? ये हरियाणा के जंगम थे। जंगम थे, उनके ऊपर भोलेनाथ की सवारी आती थी, बहुत गुस्से में आती थी, शांत रूप में नहीं आती थी, क्रोधित रूप में आती थी। क्रोधित रूप में सिगरेट ज्यादा पीते थे वो खुश हो के।

क्योंकि जब वो भजन करते थे, उनका चेहरा इतना लाल पड़ जाता था, जो जंगम खंजड़ी बजा के नहीं करते अपना भजन। हम हम वो करते थे। हमारे अच्छे मित्र मतलब कि अच्छे खासे मित्र बन गए थे। हम हम जैसे उनका लेवल बड़ा हुआ हमारा था। एक दूसरे को मेल-मिलाप हुआ। हम उनको अपना कुछ बताते, वो हमें अपना बताते।

जैसे लेन-देन चलता रहा। हम हम। तो वो आए शिवरात्रि में मेरे पास। भोलेनाथ का भोग लेने के लिए आते थे कि तू भाई इतना मेरे को उनके तरफ से दे दे। तो मैंने बोला कि उनके आपके लिए द्वार खुला है, जब मर्जी आओ, शिवरात्रि को छोड़ के भी आ सकते हो आप। कहते नहीं, जो उन्होंने मेरे को बोला है कि इसे शिवरात्रि की शिवरात्रि से मिलना है। जी जी जी।

तो वो अपने घर पे धुना लगा के उन्होंने उनको सिद्ध किया था इस्माइल जोगी। अच्छा जी। धुने के ऊपर किया था। उन्होंने मेरे को विधि क्या बताई थी? इतनी लंबी चौड़ी विधि नहीं है, जितनी हम सुनेंगे, यहाँ बताई जाएगी दूसरों के द्वारा। वो बोलते हैं इसमें पाँच लड्डू लगते हैं, पाँच पताशा। अच्छा जी।

धुना होता है, जो धुना, जो जिसको आप कंकड़-कंकड़ नहीं, उसको अँगीयारी बोलते हो ना, गोबर की गाय का उपला लेना है, उसके ऊपर उसको सुलगा के देना है। ये प्रतिदिन आपने 21 दिन करना है। उस धुने के साथ में 11 माला करनी है। तो 250 ग्राम बेसन भी लेना है इसके साथ में। ठीक ठीक ठीक ठीक।

इसके साथ क्या होगा, मैं अब आपको बताता हूँ। जो ख्वाजा साहब है ना, ख्वाजा पीर जिसको बोलते हैं, जो वरुण देव हैं हमारे इतिहास में सनातन धर्म में, ये वो रूप है। ये साथ में सिद्ध होंगे उनके। ठीक है? मतलब कि ये मल्टीपल कार्य करेंगे आपके लिए।

आपके सिर पे चौकी आनी, जैसे बैठे-बैठे किसी को हाल-चाल बताना, कान से निकालना, किसी की चौकी बाँधनी-खोलनी, ये भी कार्य करेंगे। यहाँ तक जब ये आपको सिद्ध हो जाएँगे, नरसिंह वीर की भी सिद्धि करवा देंगे, जो कामरूपा में पूजा जाता है, लूना चमारिन, मतलब जितने वीर तंत्र वाले ना, उनके आसपास के क्षेत्र में रहते हैं या उनके पास जो दीक्षा ली थी उन्होंने, वो सब आपके साथ चल पड़ेंगे।

📿 मंत्र, लाभ और अनुभव

 

और इनका स्वरूप कैसा है? जटाधारी हैं। सिर के ऊपर साफा बाँधते हैं जो नाथपंथ में बाँधा जाता है। हाथ में चिमटा है और कमंडल है। पाँव में खड़ाऊँ है। खड़ाऊँ है, ये इनकी पहचान है। ठीक ठीक ठीक ठीक। ठीक है? और इन्होंने गले में नादी पहनी हुई है, जैसे गुरु गोरखनाथ नहीं अपने शिष्यों को डलवाते थे। हम हम हम।

वैसा इनका। अब मैं मंत्र पे आता हूँ। अच्छा इनका, हाँ, चलो मंत्र के ऊपर आए, तो थोड़ा सा मैं यही पूछ रहा हूँ कि इसके क्या लाभ हैं? चलो आप पहले मंत्र बता दो। उसके बाद फिर हम लाभ पूछेंगे, क्या हैं इसके?

इस्माइल जोगी का शाबर मंत्र

 

मंत्र ऐसे है: खेरू ठेर करे, ख्वाजा सिजर परे, गुरु इस्मेल को हाजिर करे।

ये अढैया मंत्र है। फिर बोल देता हूँ। अढाई अक्षर का जिसको बोला जाता है, अढाई लाइन का। खेरू ठेर करे, ख्वाजा सिजर परे, गुरु इस्मेल को हाजिर करे। ठीक ठीक।

खेरू का मतलब होता है कि जो ना मुड़े, जो ना मुड़े, उसको खत्म कर दो। अगर जो खत्म हुआ हुआ है, उसको सही कर दो। ठीक है? ख्वाजा जो है, आपका साथ दे। सिजर परे का मतलब ये है जो गुरु इस्मेल हैं। मैंने पहले बोला था कि ये गुरु स्वरूप हैं। गुरु हैं। इनका नाम गुरु स्वरूप। गुरु इस्मेल को हाजिर करें। ठीक है?

जब भी वस्त्र डालने हैं, वस्त्र कोशिश करो कौन से डाल सको? सफेद डाल सको, पीले नहीं तो जोगिया कलर का डालो। या फिर तीसरा ग्रीन कलर का जो होता है, वो भी डाल सकता है। हाँ, ये भी चलेगा ना? चलेगा, चलेगा। लेकिन ज्यादातर असर इनका नाथ पंथ में ही चलेगा। कि मतलब कि ये भूल में मत रहें कि ये मैं आपको मुस्लिम मंत्र दे रहा हूँ। ये अढैया मंत्र है। ये नाथ पंथ का मंत्र है। प्रामाणिक मंत्र है।

अच्छा, अब आगे बात करते हैं। इसके क्या लाभ हैं? उसके बाद तीसरी चीज फिर हम बात करेंगे अनुभव की। फिर पोस्ट को करेंगे। लाभ, लाभ यही है कि सबसे पहले ये आपके गुरु बन जाएँगे। जब आप इस मंत्र को पढ़ोगे ना धुने के ऊपर, गुरु बन जाएँगे।

इस इस मंत्र से आपको भोलेनाथ की कृपा अपार मिल जाएगी। दूसरी ये जो मैंने आपको नरसिंह वीर के बारे में बोला है, लूना चमारिन के बारे में बोला है या गुरु गुरु गोरखनाथ जी के बारे में बोला है। इनकी भी आपको अपार कृपा मिल जाएगी।

आपके रुके हुए काम सारे चलने लग पड़ेंगे। आप गद्दी लगा सकते हो। सबसे बड़ी बात है जो गद्दी लगाना सीख गया, वो ऑलराउंडर बन गया। ठीक ठीक ठीक। ठीक। ठीक है।

और दूसरी चीज मैं आपको और बताता हूँ, जो ऐसी गुरु परंपरा की साधना की जाती है, तो आगे चलके जो गुरु होते हैं, सपने में आके आपको बहुत विचित्र साधना भी सिखाएँगे। जी।

भाई मेरे शिष्य ऐसे हैं, जो मेरे को खुद बोलते हैं कि आप मेरे पास आते हो, मेरे सपने में आते हो, मेरे से बात करते हो। मेरे को विधि बता-बताकर चले जाते हो आप। मेरा हल हो जाता है। ये ऐसा क्यों होता है? क्योंकि आपका गुरु परफेक्ट होना चाहिए। बिल्कुल बिल्कुल। सबसे बड़ी बात गुरु परंपरा से ये चीजें चलती हैं जी नाथ संप्रदाय में।

मैं एक यहाँ पे लास्ट सवाल ये कहना चाहता हूँ, ये मैं मंत्र या विधियाँ इतनी क्यों दे रहा हूँ? जैसे भगवान नारायण का जो स्वरूप है ना वेदव्यास जी, उन्होंने इतने पुराण रचे, 18 के 18 पुराण रचे, किस लिए? कि मनुष्य की भलाई के लिए, कि वो टस से मस न हों।

हमारा भी वही धर्म है। हमें ये नहीं कि मेरे पास पड़ा या गुरु जी ने दिया हुआ है, किताब में रख लिया। वो तो बात वहीं पे खत्म हो गई। जिसकी जितनी सोच है, वैसा करना है। बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल। हमें तो भंडारा लगाना है। सीधी बात है। बिल्कुल।

हमें चीजें लुप्त होने से बचानी हैं। सरेआम देना है लोगों को, अपने ठोक-बजा के, ठोक-ठोक के देना है। अगर कोई बंदा नहीं करेगा, तो उसके भी अपने कर्म हैं। अपने कर्म हैं। सीधी बात है। मेरा तो कर्म है देना। करना कि नहीं करना, वो तो उनकी अपनी जिम्मेवारी है। ठीक है जी।

इसके अनुभव क्या-क्या हो सकते हैं? लास्ट क्वेश्चन, उसके बाद समाप्त कर देंगे इसको। अनुभव सबसे ज्यादा कि ये सबसे पहले आपको ख्वाजा साहब दिखेंगे कि जैसे उनका पंजे जल में हाथ दिखता है ना, पंजा तरह में वो दिखेगा।

जब वो दिखने लग पड़ा, समझो आपको सीधी सीधी तरीके से सीधी डायरेक्ट मिलने वाली है। ठीक है ठीक ठीक ठीक। ये सपने में दिखेगा या वैसे दिखेगा?

नहीं, सपने में क्लियर होगा। आप बेड़ी-किश्ती में बैठकर जा रहे हो किसी पीर फ़कीर के साथ। ठीक है? क्योंकि ख्वाजा साहब भी इनके साथ चलते हैं ना वरुण स्वरूप पे। ठीक ठीक ठीक ठीक।

ठीक है? वीरों के भी दर्शन होंगे कि किसी ने कृपाण पकड़ा, किसी ने भाला पकड़ा, किसी ने ढाल पकड़ी हुई, आपकी रक्षा कर रहे हैं। ये वही साधना के जो वीर इनके साथ चलते हैं, वही आपकी रक्षा करेंगे। छोटी-छोटी निशानी आपको देते जाएँगे। जी।

जो आपने कभी देखी नहीं होंगी सपने में, वो बताएँगे बकायदा। ठीक है जी। बहुत ही बढ़िया पोस्ट हमारा अब बन चुका है। ठीक है। इस्माइल जोगी को लेकर। ठीक है। अगर कोई भी इंटरनेट पे, गूगल पे, कहीं पे भी ढूँढ़ लेना। नहीं मिलेगा। अच्छा, नहीं मिलेगा।

मैं बोलता हूँ, नहीं मिलेगा। जी। ठीक है जी। तो आज के लिए बस हम यहीं पर समाप्त करते हैं। ठीक है रुद्रनाथ जी। ठीक है जी। तो अगले जय माता की। हाँ जी। जय माता। और जय महाकाल की। जय श्री महाकाल।