Day: October 15, 2025

Dhanteras धनतेरस सरल और सिंपल पूजा साधना धन समृद्धि और ऐश्वर्य के लिए

Dhanteras धनतेरस सरल और सिंपल पूजा साधना धन समृद्धि और ऐश्वर्य के लिए

Dhanteras धनतेरस सरल और सिंपल पूजा साधना धन समृद्धि और ऐश्वर्य के लिए

Dhanteras धनतेरस सरल और सिंपल पूजा साधना धन समृद्धि और ऐश्वर्य के लिए
Dhanteras धनतेरस सरल और सिंपल पूजा साधना धन समृद्धि और ऐश्वर्य के लिए

विषय सूची (Table of Contents)

1. Dhanteras (धनतेरस) – क्यों है यह इतना ख़ास ? 
2. धनतेरस की पूजा से पहले की ज़रूरी तैयारी (Pre-Puja Preparations) 
3. शुभ मुहूर्त: पूजा का सही टाईम (Shubh Muhurat: Puja Ka Sahi Time) 
4. सरल पूजा विधि: कुबेर और लक्ष्मी जी की पूजा (Saral Puja Vidhi: Kuber aur Lakshmi Ji Ki Puja) 
पहला स्टेप: यम दीपक जलाना 
भगवान धन्वन्तरि की पूजा 
माँ लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा 
5. धन और समृद्धि के लिए विशेष मंत्र और साधना (Mantra aur Sadhana for Wealth)
6. पूजा सामग्री की लिस्ट (Puja Samagri Ki List)
7. धनतेरस से जुड़ी कथा और फीलिंग (Dhanteras Story and Feeling)
8. क्या खरीदें और क्या अवॉइड करें? 

9. निष्कर्ष और ज़रूरी बातें 

Dhanteras (धनतेरस) – क्यों है यह इतना ख़ास ?

Dhanteras धनतेरस सरल और सिंपल पूजा साधना धन समृद्धि और ऐश्वर्य के लिए अच्छा तो पाठक दोस्तों, आप सब धनतेरस की तैयारी में लगे होंगे, है ना? हर कोई चाहता है कि उसके घर में धन और समृद्धि आए और यह दिन इसके लिए सबसे परफेक्ट ‘टाईम’ होता है। देखो, धनतेरस दिवाली पर्व का पहला दिन होता है, और इस दिन हम सिर्फ माता लक्ष्मी की नहीं, बल्कि धन के देवता कुबेर और सेहत (हैल्थ) के देवता धन्वन्तरि की भी पूजा करते हैं।

भाईसाहब, सच बताऊँ, यह दिन सिर्फ सोना-चांदी खरीदने का नहीं है। यह दिन है ‘पॉज़िटिव’ (सकारात्मक) ऊर्जा को अपने घर में बुलाने का, ताकि आने वाले साल में आपको पैसे की और सेहत की कोई ‘टेंशन’ (चिंता) न हो। यार, अगर आप सही तरीके से सरल और सिंपल पूजा साधना कर लेते हैं, तो आपको धन और ऐश्वर्य ज़रूर ‘फ़ील’ (महसूस) होगा। तुम देखो ना, इस त्योहार का सीधा मतलब है “धन की तेरहवीं तिथि”। इसे आप सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि अपने जीवन में सुख-समृद्धि लाने का एक “मौका” (चांस) मानकर चलिए।

क्या बात, हम आपको यहाँ एकदम सरल ‘स्टेप्स’ (तरीके) बता रहे हैं, जिनका यूज़ (उपयोग) करके कोई भी व्यक्ति अपने घर में पूरी ‘फीलिंग’ (भावना) के साथ पूजा कर सकता है, माना न?

धनतेरस की पूजा से पहले की ज़रूरी तैयारी (Pre-Puja Preparations)

अरे वाह भई, पूजा करने से पहले की तैयारी भी उतनी ही ज़रूरी है, जितनी पूजा खुद। जी, आप यह तैयारी जितनी लगन से करेंगे, उतना ही अच्छा ‘रिज़ल्ट’ (परिणाम) आपको मिलेगा।

1. साफ़-सफ़ाई और शुद्धिकरण

सबसे पहले तो पूरे घर की अच्छे से साफ़-सफ़ाई करें। तुम मानो न, गंदगी में माता लक्ष्मी कभी नहीं आतीं। पूजा के स्थान को गंगाजल से या साफ़ पानी से शुद्ध कर लीजिए। घर से सारा पुराना, टूटा-फूटा सामान बाहर निकाल दें। अरे मान लो न, जब हम पुरानी चीज़ों को हटाते हैं, तभी तो नई चीज़ों के लिए जगह बनती है। यह सिर्फ घर की सफ़ाई नहीं है, यार, यह मन की ‘क्लींज़िंग’ (सफ़ाई) भी है।

2. ख़रीददारी का ‘प्लैन’

धनतेरस पर कुछ न कुछ खरीदना शुभ माना जाता है। भाई देख, ज़्यादातर लोग इस दिन बर्तन या कोई धातु (जैसे सोना या चांदी) खरीदते हैं। वैसे तो, झाड़ू खरीदना भी बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह दरिद्रता को घर से बाहर निकालती है। देखो जरा, ख़रीददारी पहले ही ‘प्लैन’ (योजना) कर लो, ताकि आख़िरी मिनट की भाग-दौड़ से बच सकें।

अच्छा भई, एक बात और, सच कहूँ तो आप अपनी ‘कैपेसिटी’ (क्षमता) के हिसाब से ही ख़रीददारी करें। ज़रूरी नहीं कि आप बहुत महंगा सामान खरीदें। छोटे से बर्तन या धनिया के बीज भी ख़रीदना शुभ माना जाता है।

3. पूजा के लिए आसान सामग्री जुटाना

हमें पूजा के लिए एक ‘सिंपल’ (आसान) लिस्ट बनानी पड़ेगी। आगे हम आपको सामग्री की पूरी लिस्ट दे रहे हैं, लेकिन अभी के लिए जान लो कि आपको एक चौकी, लाल कपड़ा, लक्ष्मी-गणेश-कुबेर और धन्वन्तरि जी की फोटो या मूर्ति और दीपक के लिए तेल या घी चाहिए होगा। क्या बताऊँ, पूजा का ‘फील’ तब आता है, जब सब कुछ तैयार हो।

ये ठीक है न? अब आगे बढ़ते हैं शुभ मुहूर्त की ओर।


शुभ मुहूर्त: पूजा का सही टाईम (Shubh Muhurat: Puja Ka Sahi Time)

अच्छा सुनो, किसी भी पूजा का सबसे ज़रूरी ‘पार्ट’ (हिस्सा) होता है सही समय। धनतेरस की पूजा हमेशा ‘प्रदोष काल’ में की जाती है। ‘प्रदोष काल’ का मतलब होता है, जब सूर्य अस्त हो रहा हो और रात शुरू हो रही हो।

भाई जरा, ‘पंडित जी’ से अपने शहर का एग्ज़ैक्ट (सही) ‘टाईमिंग’ ज़रूर पता कर लो, लेकिन आमतौर पर यह ‘टाईम’ शाम 5:30 बजे से रात 8:30 बजे के बीच होता है।

हमारा यह ‘टिप’ (सलाह) याद रखो: देखो जरा, पूजा उसी समय करना जब घर में शांति हो और आप पूरा ‘कंसन्ट्रेशन’ (ध्यान) दे सकें। अगर आप सही समय पर पूजा करते हैं, तो उसका ‘इफ़ेक्ट’ (असर) कई गुना बढ़ जाता है, मानते हो न?

सरल पूजा विधि: कुबेर और लक्ष्मी जी की पूजा (Saral Puja Vidhi: Kuber aur Lakshmi Ji Ki Puja)

अरे बाप रे, अब आती है सबसे ज़रूरी बात। यह पूजा विधि इतनी सरल है कि घर का कोई भी सदस्य आराम से कर सकता है। जनाब, बस मन में श्रद्धा होनी चाहिए।

पहला स्टेप: यम दीपक जलाना (Yam Deepam Jalana)

तो भई, धनतेरस की शाम को सबसे पहला काम होता है यमराज के लिए एक दीपक जलाना। यह दीपक घर के मुख्य द्वार पर या आंगन में रखा जाता है।

1. एक बड़ा आटा गूंथकर दीपक बनाओ या मिट्टी का दीपक लो।
2. इसमें सरसों का तेल डालो।
3. इस दीपक का मुख दक्षिण दिशा (South Direction) की ओर रखो।
4. यह दीपक घर की सभी ‘नेगेटिविटी’ (नकारात्मकता) को दूर करता है।

क्या ख़याल है? बहुत ही सरल ‘स्टार्ट’ (शुरुआत) है न?

भगवान धन्वन्तरि की पूजा (Bhagwan Dhanwantari Ki Puja)

जरा मान लो न, धन के साथ-साथ ‘हैल्थ’ (सेहत) भी बहुत ज़रूरी है। इसीलिए इस दिन भगवान धन्वन्तरि की पूजा भी ज़रूर करें।

1. उनकी मूर्ति या फोटो के सामने दीया जलाएं।
2. उन्हें पीले फूल चढ़ाएं।
3. उनसे अच्छी सेहत और लंबी उम्र का आशीर्वाद मांगें।
4. उनका सरल मंत्र:ॐ नमो भगवते वासुदेवाय धन्वन्तरये अमृतकलश हस्ताय सर्व रोग विनाशनाय त्रैलोक्य नाथाय श्री महाविष्णवे नमः” का जप 11 बार करें।

भाई सोच, अगर सेहत अच्छी नहीं होगी, तो धन का क्या करोगे, बोलो न?

माँ लक्ष्मी और कुबेर जी की पूजा (Maa Lakshmi Aur Kuber Ji Ki Puja)

अरे देखो, यह है मुख्य पूजा, जिसके लिए हम यह सब कर रहे हैं।

1. एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं।
2. उस पर माँ लक्ष्मी और कुबेर जी की मूर्ति/फोटो रखें।
3. एक कलश (पानी का बर्तन) भरकर चावल या गेहूं के ढेर पर रखें।
4. पूजा शुरू करने से पहले, भगवान गणेश जी को याद करें (क्योंकि कोई भी शुभ काम उनके बिना पूरा नहीं होता)।
5. सबसे पहले जल, रोली (कुमकुम), चावल, फूल चढ़ाएं।
6. माँ लक्ष्मी को कमल का फूल बहुत पसंद है, अगर मिल जाए तो ज़रूर चढ़ाएं।
7. कुबेर जी के सामने अपनी तिजोरी या जहाँ पैसे रखते हैं, उसे रखें। भई जरा, उसे भी कुमकुम लगाएं।
8. ‘नैवेद्य’ (भोग) में मिठाई, फल और धनिया के बीज ज़रूर चढ़ाएं।
9. घी का एक दीपक जलाकर आरती करें।

सच बताऊँ, इस तरह की पूजा करने से आपको एक अलग ही ‘पीस’ (शांति) और ‘संतुष्टि’ ‘फ़ील’ होगी, देख रहे हो न?

धन और समृद्धि के लिए विशेष मंत्र और साधना (Mantra Aur Sadhana For Wealth)

हे नाथ, अगर आप धनतेरस पर कुछ ‘एक्स्ट्रा’ (अधिक) करना चाहते हैं, तो ‘मंत्र जप’ (Mantra Jaap) से बेहतर कुछ नहीं।

1. कुबेर जी का सरल मंत्र

कुबेर जी को खुश करना बहुत आसान है। उनकी पूजा के बाद इस मंत्र का 108 बार जाप ज़रूर करें।

मंत्र: “ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पूरय पूरय नमः”

जरा सोचो, 108 बार जप करने में कितना ‘टाईम’ लगेगा? मुश्किल से 10-15 मिनट। पर यह आपके धन के ‘रिसोर्सेस’ (स्रोत) को बहुत बढ़ा देगा।

2. महालक्ष्मी मंत्र

धनतेरस से लेकर दिवाली तक, माँ लक्ष्मी को प्रसन्न रखने के लिए इस मंत्र का रोज़ जप करें:

मंत्र: “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा”

गुरु, यह मंत्र आपको सिर्फ धन ही नहीं, बल्कि मान-सम्मान और ऐश्वर्य भी दिलाएगा।

चलो, यह हो गई साधना की बात, अब लिस्ट देखते हैं।

पूजा सामग्री की लिस्ट (Puja Samagri Ki List)

तुम समझो, पूजा सामग्री की लिस्ट ‘कंप्लीट’ (पूरी) होने से ‘स्ट्रेस’ (तनाव) कम होता है।

| क्र.सं. | वस्तु का नाम (Hindi) | वस्तु का नाम (Hinglish) |
| 1 | लक्ष्मी-गणेश-कुबेर जी की मूर्ति/फोटो | Laxmi-Ganesh-Kuber Ji Ki Murti/Photo |
| 2 | आसन या चौकी | Aasan Ya Chowki |
| 3 | लाल कपड़ा | Lal Kapda |
| 4 | दीया (तेल/घी, रुई की बाती) | Diya (Tel/Ghee, Ruyi Ki Baati) |
| 5 | रोली, कुमकुम, हल्दी | Roli, Kumkum, Haldi |
| 6 | चावल | Chawal (Akshat) |
| 7 | फूल, कमल का फूल | Phool, Kamal Ka Phool |
| 8 | फल, मिठाई (नैवेद्य) | Fal, Mithai (Naivedya) |
| 9 | धनिया (साबुत बीज) | Dhaniya (Sabut Beej) |
| 10 | सिक्के या नया बर्तन | Sikke Ya Naya Bartan |
| 11 | गंगाजल (शुद्धिकरण के लिए) | Gangaajal |

याद रखोगे न? इस लिस्ट को संभालकर रखना, ठीक है न?

धनतेरस से जुड़ी कथा और फीलिंग (Dhanteras Story and Feeling)

अरे वाह, हर त्योहार के पीछे कोई न कोई कहानी होती है, जो उस दिन की ‘फीलिंग’ (भावना) को और बढ़ा देती है। धनतेरस की भी दो ख़ास कहानियाँ हैं।

1. धन्वन्तरि का जन्म

भई, पहली कहानी है भगवान धन्वन्तरि के जन्म की। कहते हैं कि समुद्र मंथन के दौरान धन्वन्तरि जी अपने हाथों में अमृत का कलश (बर्तन) लेकर प्रकट हुए थे। ‘वह’ (वो) चिकित्सा (मेडिसिन) के देवता हैं, इसीलिए इस दिन उनकी पूजा अच्छी सेहत के लिए की जाती है। प्रभु की लीला, यही कारण है कि इस दिन बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है, क्या कहते हो?

2. यम और राजा हेमा का पुत्र

जरा सुनो, दूसरी कहानी यमराज और राजा हेमा के पुत्र की है। ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी कि शादी के चौथे दिन साँप के काटने से राजकुमार की मृत्यु हो जाएगी। राजकुमार की पत्नी ने चौथे दिन सारा सोना-चांदी, गहने और दीये दरवाज़े के पास ढेर कर दिए। जब यमराज साँप के रूप में आए, तो उन दीयों और चमकती चीज़ों की रोशनी से उनकी आँखें चौंधिया गईं। ‘वह’ (वो) अंदर नहीं जा पाए और उन्हें बिना कुछ किए ही वापस जाना पड़ा।

क्या कहूँ, इस घटना के बाद से ही इस दिन यमराज को दीपक जलाकर ‘यम दीपम’ की परंपरा शुरू हुई, ताकि किसी की अकाल मृत्यु न हो। अरे वाह भई, ये कहानी हमें यह ‘फील’ (एहसास) कराती है कि धनतेरस सिर्फ धन के लिए नहीं, बल्कि जीवन की रक्षा के लिए भी है।

क्या खरीदें और क्या अवॉइड करें? (Kya Kharidein Aur Kya Avoid Karein?)

तो क्या हम बस कुछ भी खरीद लें? नहीं, भाई, कुछ चीज़ें शुभ होती हैं, और कुछ से बचना चाहिए।

ख़रीदें (Must Buy):

1. बर्तन (Utensils): ख़ासकर पीतल, तांबे या चांदी का। यह घर में आरोग्य (सेहत) और समृद्धि लाते हैं।
2. झाड़ू (Broom): यह दरिद्रता को घर से बाहर निकालती है। (Wikipedia Link: झाड़ू की धार्मिक मान्यताएं)
3. सोना/चांदी (Gold/Silver): ये धातुएं धन-समृद्धि और स्थायित्व (स्टेबिलिटी) का ‘सिंबल’ (प्रतीक) हैं।
4. धनिया बीज (Coriander Seeds): इन्हें लक्ष्मी जी को चढ़ाकर तिजोरी में रखें।

अवॉइड करें (Must Avoid):

1. लोहा (Iron): इस दिन लोहे से बनी कोई भी चीज़ न खरीदें।
2. प्लास्टिक (Plastic): प्लास्टिक से बनी चीज़ें न खरीदें, जरा मानो, यह समृद्धि को नहीं बढ़ाता।
3. कांच के बर्तन (Glass Items): कांच को राहु से जोड़ा जाता है, इसलिए इसे ‘अवॉइड’ करना बेहतर है।
4. तेज़ धार वाली चीज़ें (Sharp Objects): जैसे चाकू, कैंची, सुई। इन्हें खरीदने से बचें।

यूँ कहें तो, तुम बताओ न, यह एक तरह से ‘शॉपिंग टिप्स’ (खरीददारी के सुझाव) हैं।

निष्कर्ष और ज़रूरी बातें (Nishkarsh Aur Zaruri Baatein)

पाठक भाइयों, हमें ‘पूरा ‘श्योर’ (पक्का विश्वास) है कि अब आप धनतेरस की पूजा ‘बिना किसी ‘कंफ़्यूज़न’ (उलझन) के आराम से कर पाएंगे। तो हमने देखा कि धनतेरस की पूजा धन के साथ-साथ अच्छी सेहत और लंबी उम्र के लिए भी ज़रूरी है।

यह पूजा कोई कठिन ‘प्रोसेस’ (प्रक्रिया) नहीं है। देखो ना, यह सब मन की श्रद्धा का ‘खेल’ है। आप बस साफ़ मन से, पूरे विश्वास के साथ, इन सरल ‘स्टेप्स’ को फॉलो करें। माँ लक्ष्मी और कुबेर जी की कृपा आप पर ज़रूर होगी।

हे माँ, आप बस अपने घर में एक ख़ुशनुमा और सकारात्मक ‘एट्मॉस्फ़ेयर’ (माहौल) बनाए रखें। बस इतना ही चाहिए।

क्या कहते हो? इस पोस्ट को शेयर (बांटना) करोगे न, ताकि और लोग भी इसका फ़ायदा ले सकें?

बहुत हुआ, अब पूजा की तैयारी में लग जाइए। शुभकामनाएं!

मज़ा आया न?
करोगे न?

Dhanteras धनतेरस पर क्या ख़रीदे क्या न खरीदे विस्तार सहित

Dhanteras 2025 धनतेरस पर अष्टलक्ष्मी रहस्य धन वर्षा रहस्य

दिवाली के दिनों में मिठाई पर होने वाले तंत्र से सावधान

Dhanteras धनतेरस पर क्या ख़रीदे क्या न खरीदे विस्तार सहित

1 Comment
Dhanteras धनतेरस पर क्या ख़रीदे क्या न खरीदे विस्तार सहित

Dhanteras धनतेरस पर क्या ख़रीदे क्या न खरीदे विस्तार सहित

Dhanteras धनतेरस पर क्या ख़रीदे क्या न खरीदे विस्तार सहित
Dhanteras धनतेरस पर क्या ख़रीदे क्या न खरीदे विस्तार सहित

🙏 प्रस्तावना

Dhanteras धनतेरस पर क्या ख़रीदे क्या न खरीदे विस्तार सहित गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम पे आपका स्वागत करता हु । तो आइए दोस्तों, आज हम लोग जानते हैं कि धनतेरस पे सोना चांदी महंगा भी है और विश्वास दिलाती हूं कि उससे ज्यादा प्रभाव देने वाली वस्तु आपको बताऊँगी जिसे खरीद कर आप अपने घर में अगर धनतेरस के दिन लाते हैं, तो इससे घर में जो धन संपत्ति है, वह तो बढ़ती ही बढ़ती है, साथ-साथ परिवार वालों की उन्नति और तरक्की भी होती है।

अब देखिए, धनतेरस को लेकर भी इस बार विवाद की स्थिति है। क्योंकि उदया सूर्योदय कालीन की तिथि को आप 19 तारीख को लोग मान रहे हैं।

लेकिन धनतेरस में एक विशेषता होती है कि जिस दिन सायं कालीन त्रयोदशी होती है, क्योंकि धनतेरस की पूजा हम शाम के शाम के टाइम करते हैं, तो जिस दिन शाम के समय त्रयोदशी तिथि होती है, उस दिन ही धनतेरस मनाया जाता है। तो धनतेरस इस बार यानी 2025 में 18 तारीख को मनाया जाएगा, 18 अक्टूबर को।

🗓️ Dhanteras धनतेरस का शुभ मुहूर्त और खरीदारी

अब धनतेरस 18 अक्टूबर को मनाया जाएगा। पूजा करने का और खरीदारी करने का शुभ मुहूर्त कौन सा होगा, आज के पोस्ट में वह भी जानेंगे। साथ-साथ कौन सी ऐसी वस्तु है, वस्तु है जो आप खरीद कर लाएं, क्योंकि देखिए सोना चांदी अब सबके बस में नहीं रहा।

सोने का रेट सभी को पता है कि बहुत ज्यादा हो चुका है। तो ऐसे में कौन सी ऐसी वस्तु खरीद लें, जिससे मां लक्ष्मी हमारी तरफ आकर्षित हो जाए। फिर जब भी हमारा इच्छा हो, जब भी हमारी जरूरत हो, उस जरूरत के अनुसार हम सोना चांदी खरीद कर अपने घर में ला सकते हैं।

क्योंकि आप तो जानते हैं यह सारा खेल तो मां लक्ष्मी का ही है। जिसके ऊपर मां लक्ष्मी मेहरबान हैं, वह कभी भी सोना चांदी खरीद सकता है। उसे किसी भी विशेष अवसर की शुभ मुहूर्त की आवश्यकता नहीं होती है। तो आज कुछ ऐसा करेंगे जिससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होंगी।

देखिए दोस्तों, समुद्र मंथन से धन्वंतरि जी प्रकट हुए जिनको कि भगवान विष्णु का ही स्वरूप माना जाता है और इनके हाथ में था तांबे का कलश और इसी कारण यह परंपरा, यह मान्यता है और विशेष गूढ़ रहस्य है कि धनतेरस के दिन अगर आप एक तांबे का, पीतल का लोटा या पीतल का दिया या पीतल की कोई भी चीज धनतेरस पे अगर आप खरीद कर लाते हैं ना, तो यह आपके लिए विशेष बन जाता है। बहुत शुभ हो जाता है।

धनतेरस के दिन अगर आप कोई विशेष वस्तु खरीद करके लाते हैं तो। तो आप पहली चीज पीतल जरूर खरीद के लाइएगा धनतेरस पे।

🚫 Dhanteras धनतेरस – शनिवार को क्या न खरीदें

अब देखिए, शनिवार का दिन पड़ रहा है। शनिवार के दिन बहुत सारी भ्रांतियां रहती है। मन में नकारात्मकता भी रहती है कि शनिवार है तो क्या खरीदें? क्या नहीं खरीदें? तो देखिए, शनिवार है तो एक चीज तो आपको बिल्कुल नहीं खरीदना है।

आज के दिन आपको सरसों का तेल, सरसों, लोहे की कोई वस्तु यह सब नहीं खरीदना है। और एक चीज का ध्यान रखिएगा, स्टील में भी लोहे का तत्व माना जाता है।

तो हो सके तो आज स्टील खरीदने से बचें। अगर कोई जरूरत की चीज खरीदना है तो एक दिन, 2 दिन पहले आप खरीद लें। लेकिन इस दिन आप बिल्कुल न खरीदें। इस विशेष बात का ध्यान रखें।

🧹 Dhanteras धनतेरस से पहले की तैयारी

और एक आध चीज है जो धनतेरस से पहले हमें ध्यान रखना चाहिए। देखिए, नियम यह कहता है कि जो धनतेरस की पूजा हम करते हैं, उससे पहले हमारे घर की सफाई हो जानी चाहिए।

अब देखिए, पूरी सफाई तो नहीं हो पाती है, लेकिन कोशिश करना चाहिए कि जो मुख्य जगह हैं, जैसे जहां पे आप पैसा वगैरह रखते हैं, तो उस जगह की सफाई आप कर दीजिए।

जैसे पैसे रखने के स्थान पे आप जो कपड़े वगैरह लगाकर मतलब रखकर, नीचे बिछा करके और आप पैसे रखते हैं, उस कपड़े को बदल दें। थोड़ा उस जगह को साफ कर दें।

उसमें हो सके तो परफ्यूम वगैरह डाल दें और वहां पे नए कपड़े नीचे बिछा दें जहां आप अपने पैसे अपनी ज्वेलरी रखते हैं। तो यह कार्य आप धनतेरस से पहले कर लें। धनतेरस की पूजा से पहले कर लें।

💰 Dhanteras धनतेरस खरीदारी के नियम और वस्तुएं

 

अब आइए, खरीदारियों के बारे में जान लेते हैं कि क्या खरीदारी करना चाहिए और कैसे नहीं। देखिए दोस्तों, यहां पे एक मतभेद है। यहां पे कुछ लोगों के मतानुसार हर साल मिट्टी की मूर्तियां नहीं खरीदना चाहिए। पर मेरे मतानुसार दिवाली नवीनता का स्वरूप माना जाता है।

तो इसलिए दिवाली की पर अगर आप मिट्टी के गणेश जी और लक्ष्मी जी खरीद कर लाते हैं, तो इससे आपके घर में वृद्धि होती है। लेकिन एक बात का ध्यान रखिए, यह जरूरी नहीं है। अगर आप चाहें तो चांदी के रखे हैं तो आप उनकी पूजा कर सकते हैं।

पीतल के रखे हैं तो आप उनकी पूजा भी कर सकते हैं। लेकिन मिट्टी की मूर्तियों की अपनी बात होती है। अलग ही बात होती है। और अगर आप गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम से जुड़े हुए हैं ना, तो आप एक बात मान लीजिए।

आप मेरे कहे अनुसार बहुत महंगी मिट्टी की मूर्तियां नहीं मिलती है, तो आप उन्हें खरीद कर अपने घर में ले आइए। मेरे कहे अनुसार इस दिवाली मिट्टी की मूर्तियां जो शुभ मुहूर्त मैं बताऊँगी, उसी शुभ मुहूर्त में ले आइए और उसी शुभ मुहूर्त में आप धनतेरस की पूजा करिए।

एक गलती मत करिएगा। धनतेरस की पूजा में नई मूर्तियों की पूजा नहीं होती है, बल्कि जो पिछले साल के हमारी मूर्तियां या फोटो होते हैं, उन्हीं की पूजा की जाती है।

🧹 Dhanteras धनतेरस झाड़ू खरीदना और सावधानियाँ

 

धनतेरस के दिन शनिवार का दिन पड़ रहा है। तो झाड़ू खरीदना विशेष शुभ होता है। लेकिन ध्यान रखें, झाड़ू कभी भी अकेले मत खरीदिए आप लोग। झाड़ू आप एक साथ कम से कम दो खरीदिए, तीन खरीदिए, लेकिन अकेले झाड़ू मत खरीदिए।

एक झाड़ू आप वो झाड़ू भी खरीदिए जो सीक वाली होती है, जिससे फर्श पे गिरा हुआ पानी वगैरह साफ करते हैं। तो अगर इमेज मुझे मिला तो मैं हां बोल दूँगी लगाने को।

तो यह सीक वाली झाड़ू भी आप खरीद करके साथ में जरूर लाइए। मैं बता रही हूँ, आप करिए और आपसे गारंटी के साथ विश्वास के साथ कहती हूँ कि निश्चित तौर पे जो दिवाली पे साथ में जुड़ के चलेगा ना, उसका पूरा वर्ष निश्चित तौर पे मैं यह नहीं कह रही हूँ कि अंबानी बन जाएगा।

लेकिन इतना तो है कि फर्क दिखेगा। फर्क साफ आपको दिखेगा जो दिवाली पर। इसीलिए तो मैं आपको एक-एक बारीक-बारीक बातें भी बताती जा रही हूँ कि आप ऐसे करिए, ऐसे करिए। मतलब क्या बताऊँ, दिल से एकदम निकाल करके सारी बातें रख देती हूँ कि आप लोग समझिए। आपकी परेशानी दूर हो। आपके कर्जे दूर हों।

📱 Dhanteras धनतेरस वेबसाइट पोस्ट और लाइव कार्यक्रम

 

आपकी इसीलिए अब दिवाली तक तो एक भी पोस्ट आप छोड़िएगा मत। और एक चीज और बताती हूँ। लाइव आऊँगी मैं दिवाली पे 18, 19 और 20 को लाइव आऊँगी। जैसा कि आप जानते हैं, 18 तारीख को हमारा लक्ष्मी प्राप्ति वाला हवन भी है तो पूरे दिन हवन में बीत जाएगा। हालाँकि, बहुत सारे लोग तो आ भी नहीं पाएंगे।

कम लोग आ पाएंगे क्योंकि ये दिवाली की सबके घर पूजा वगैरह सफाई है। लेकिन चलिए तो मैं मुझे तो वहाँ रहना होगा तो मैं तो वहाँ रहूँगी और लाइव वगैरह भी नहीं हो पाएगा। मैं आपको उसकी क्लिप वीडियो काट करके और शाम को मैं जैसे ही घर आऊँगी, नेटवर्क वगैरह की व्यवस्था मुझे मिलेगी, मैं तुरंत आपको वो वीडियो पोस्ट करूँगी।

क्योंकि लाइव वगैरह करने में बहुत संकट है, समस्या है और मैं एक-एक व्यक्ति को अपने ऑफिस से बतवाती कहलवाती भी जा रही हूँ। तो यहाँ पे देखिए, मैं बात कर रही थी कि मैं लाइव जुड़ूँगी और इसीलिए लाइव का जो टाइम है, वो मैं 10:00 बजे रख रही हूँ।

8:30 बजे आती थी, लेकिन मैं 10:00 बजे रख रही हूँ, क्योंकि 10:00 बजे जो है, वो मैं अपनी भी खरीदारी करूँगी। जब शाम को आऊँगी आपके हवन से लौट करके, तो अपनी भी खरीदारी करूँगी। तो 10:00 बजे का टाइम रख रही हूँ कि 10:00 बजे मैं लाइव आऊँगी।

10:00 बजे 18 तारीख को आऊँगी। 19 तारीख और 20 तारीख को लाइव में जुड़ना मत भूलिएगा। अगर वो लोग देखिए, आप कमेंट करके बताने में शर्माते होंगे, नहीं शर्माते होंगे। लेकिन महादेव जानते हैं कि ये जो दिवाली पे साथ में जुड़ता है ना, लाइव जुड़ता है, पोस्ट को देखता है, उसके जीवन में परिवर्तन आना 100% तय हो ही जाता है।

इतना तो तजुर्बा मेरा भी बहुत लंबा है। तो आप एक-एक पोस्ट को देखिएगा। लाइव को तो बिल्कुल भी मिस मत करिएगा। तो भूलिएगा मत, लाइव में 18, 19 और 20 को मैं आपके साथ जुड़ूँगी। तो इस विशेष बात का ध्यान रखिएगा, क्योंकि एक चीज बता दूँ ना, जब आपको कोई भी कार्य फायदा होता है ना, तो ऑटोमेटिक ही वह चीजें मुझे प्राप्त होती है।

उसका कुछ अंश तो बस आपके साथ जुड़कर के आप मैं चाहती हूँ कि जो भी परेशान लोग हैं, उनके जीवन में सुख शांति और समृद्धि आए। मैं एक प्रयास कर रही हूँ यह और जरूर आएगी ऐसा दिन।

🛒 Dhanteras धनतेरस पर खरीदने योग्य वस्तुएँ

अब क्या खरीदें धनतेरस पे? तो देखिए दोस्तों, धनतेरस पे अच्छी क्वालिटी का धनिया खरीद कर आप जरूर लाइएगा। अच्छी क्वालिटी का धनिया खरीद कर लाइएगा। और एक और विशेष चीज है, हो सके तो आप एक पैकेट चावल खरीद कर लाएं। जो भी पैकेट जितना बड़ा भी खरीद के लाएं, वो खरीद कर जरूर लाएं।

बढ़िया अच्छी क्वालिटी के और इस चावल का अक्षत के रूप में आप पूरे वर्ष भगवान भोलेनाथ को और जो भी पूजा वगैरह में विशेषकर भोलेनाथ को आप समर्पित करें, क्योंकि आज धनतेरस के दिन धन त्रयोदशी भी होती है। तो इस कार्य को आप जरूर करिए। खरीद के जरूर लाइए।

तीसरी चीज है हल्दी। हल्दी की गांठ या पिसी हुई हल्दी भी आप खरीद के जरूर लाएं। जो लोग अपनी पोटली वगैरह बनाते हैं, वो लोग कमलगट्टे की कमलगट्टा, गोमती चक्र और कौड़ियाँ भी खरीद कर जरूर लाएं।

और जो लोग जिन जिन लोगों की पोटली गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम से जा रही है, उन्हें तो कोई जरूरी नहीं है। लेकिन जो लोग अपनी पोटली बनाते हैं, उन लोगों को यह सामग्री भी जरूर खरीद कर ले आना चाहिए। और क्या चीजें खरीद कर लाना चाहिए?

झाड़ू मैंने बता ही दिया। धनतेरस के दिन कुछ मीठी वस्तु भी अपने घर के अंदर खरीद कर अवश्य लेकर आए। और धनतेरस के दिन एक और वस्तु है, वो है मिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन खरीद कर लाने से भी समृद्धि आती है। तो आप इसे जरूर खरीद कर लाएं। इन सामग्रियों को अपने घर में जरूर शामिल करें।

⏰ Dhanteras धनतेरस पूजा और खरीदारी का शुभ मुहूर्त

 

अब आइए, बात कर लेती हूँ कि धनतेरस पर पूजा और खरीदारी का शुभ मुहूर्त क्या है? देखिए दोस्तों, धनतेरस की पूजा या खरीदारी हमेशा स्थिर लग्न यानी वृषभ लग्न, सिंह लग्न में करना चाहिए। तो इस बार धनतेरस के का जो शुभ मुहूर्त मिल रहा है, वह हमें मिल रहा है।

दिन में 18 तारीख को दिन में 12:16 से लेकर के और अगले दिन तक 19 तारीख की सुबह 6:24 तक हमें मिल रहा है। तो यानी 12:1 से आप पूरे दिन खरीदारी कर सकते हैं और इसी शुभ मुहूर्त में शाम की पूजा भी कर सकते हैं।

एक और शुभ मुहूर्त पूजा का होगा जो मैं यहाँ लगा दूँगी। बाकी आपको मोटे तौर पे बता दूँ कि इसी शुभ समय में, इसी मुहूर्त में आपको अपनी पूजा और खरीदारी, क्योंकि वृषभ लग्न स्थिर लग्न माना जाता है और सिंह लग्न स्थिर लग्न माना जाता है। इस मुहूर्त में अगर आप लक्ष्मी पूजा करते हैं, खरीद कर कुछ लाते हैं तो वह आपके लिए बहुत ही फायदेमंद।

🧼 Dhanteras धनतेरस झाड़ू की पूजा और इस्तेमाल

 

अच्छा एक चीज़ और बता दूँ। धनतेरस के दिन खरीदी गई झाड़ू की पूजा कभी भी आपको धनतेरस के दिन अह नहीं करना है। इसको आप पूजा अगर करते हैं तो दिवाली के दिन करिए।

धनतेरस के दिन केवल आप उस झाड़ू पे हल्दी, गंगाजल छिड़ककर के और आप इस झाड़ू को जहाँ पे गंदे झाड़ू रखते हैं, जिसे यूज़ करते हैं, वहाँ न रखें। आप उत्तर पूर्व में जहाँ मंदिर है, मंदिर के आसपास में आप इस झाड़ू को रख लीजिएगा।

धनतेरस की झाड़ू को बहुत लोग दिवाली के दिन इस्तेमाल करते हैं। परंतु ऐसा नहीं करना चाहिए। जब भी धनतेरस की झाड़ू यूज़ करें, वह दिवाली के अगले दिन, अगले दिन जब सुबह सफाई करें तो आप उस झाड़ू का इस्तेमाल कर सकते हैं।

🪔 Dhanteras धनतेरस कुबेर और महादेव का अचूक उपाय

अब एक अचूक उपाय बताती हूँ जो धनतेरस पर आप सभी को अवश्य करना है। देखिए दोस्तों, आपने कुबेर का नाम तो सुना होगा, क्योंकि धनतेरस पे कुबेर जी की पूजा होती है। धन्वंतरि के साथ कुबेर जी की और अगर आप भोलेनाथ को जानते हैं तो कुबेर को कुबेर बनाने वाला अगर कोई है तो वह है महादेव।

तो इसलिए आज के दिन त्रयोदशी यानी प्रदोष का दिन भी है। तो आप एक कार्य करिए। आप 11 दीपक ले लीजिए।

तिल के तिल का या घी का 11 दीपक ले लीजिए और किसी भी शिव मंदिर में जाकर शाम के टाइम, शाम के टाइम जब थोड़ा-थोड़ा अंधेरा होने लगे, तो यह दीपक प्रज्वलित करके भोलेनाथ को ₹11, ₹1, ₹21, ₹101 जितनी आपकी व्यवस्था हो, उतनी दक्षिणा समर्पित करके 11 दीप तो यह दीपक जलाकर प्रज्वलित करके, हाथ जोड़ के और कह के आइएगा सात लक्ष्मी न आए तो कहिएगा, आज के साथ ही लक्ष्मी आएँगी आप घर की पूजा करते हैं।

सब कुछ करते हैं। लेकिन यह महादेव का यह उपाय जो है, वह आप सभी जरूर कर लीजिएगा। बाकी तो जो जो जरूरी बातें हैं, उपाय हैं, वह मैं लाइव में बताती ही रहूँगी। इस समय एक भी पोस्ट आप छोड़िएगा मत, क्योंकि देखते हैं आप कमेंट में बहुत सारी बातें लिख करके पूछते हैं, लोग बताते हो और जब मैं चिल्ला रही हूँ कि यह अवसर है, इस अवसर को हाथ से मत छोड़िए। तो, बहुत कम लोग समझते हैं। इसे समझिए।

 यह अनुष्ठान काफी पावरफुल है। यह अनुष्ठान मैं स्वयं करवाती आई हूँ। करीब-करीब 9 साल से और यह अनुष्ठान बहुत ही ज्यादा मतलब पूरे साल इसका लाभ मिलता है। तो मुझे लगा है कि जब इस चीज का लाभ मुझे मिल रहा है, मुझे पूरा विश्वास है तो यह आप तक भी पहुँचे। तो मैं एक प्रयास कर रही हूँ।

अगर आप बहुत परेशान हैं, बहुत दिक्कत में हैं तो आप यहाँ आकर जुड़कर माँ लक्ष्मी का हवन करा सकते हैं, पूजन करा सकते हैं, मंत्र जप करा सकते हैं और इसमें साथ में जुड़ सकते हैं।

🎁 Dhanteras धनतेरस अभिमंत्रित पोटली और लॉकेट

अब देखिए, हर साल की तरह इस साल भी दिवाली पे पोटली अभिमंत्रित होने जा रही है। जैसा कि आप जानते हैं कि हर साल दिवाली पे गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम से एक पोटली जाती है। धन पोटली और यह अभिमंत्रित होने जा रही है और साथ में रहेगा लक्ष्मी वृद्धि लॉकेट जो चांदी में करके आपको जाता है।

बहुत सारे लोग कई सालों से, तीन सालों से जा रहा है तो लक्ष्मी वृद्धि लॉकेट भी जाता है जो कि चांदी के लॉकेट में होता है। गले में लाल धागे में आप इसे पहन सकते हैं।

तो इससे लक्ष्मी की प्राप्ति होती है और बहुत ही उत्तम होता है। जिन लोगों को शर्म लगती है, संकोच लगती है, जैसे महिलाएँ हैं, वह नहीं पहनना चाहती हैं, वह अपने मंगलसूत्र में भी एक लाल धागे में कर करके मंगलसूत्र में एक लाल धागे में कर कर और इसे अपने मतलब अंदर डाल करके पहन सकती हैं।

यह लॉकेट काफी पावरफुल है, क्योंकि इस लॉकेट का असर मुझे बहुत ज्यादा दिखा है, इसलिए मैं आप लोगों को यह लॉकेट बताती हूँ और काफी लोग जो है इससे लाभान्वित भी कई सालों से हो रहे हैं तो यह बताना नहीं है, आपको इसका लाभ आप स्वयं देखेंगे।

🕉️ Dhanteras धनतेरस लक्ष्मी-नारायण प्रतिमा

और दोस्तों, इस बार जो है एक अच्छी और नई चीज मैंने आपके लिए की है। तो इस बार जो है लक्ष्मीनारायण की छोटी सी चरण दबाती हुई प्रतिमा मैं अभिमंत्रित करा रही हूँ और गारंटी से कह रही हूँ कि जिन घरों में यह प्रतिमा विराजमान होगी और केवल और केवल प्रतिदिन आप इनका धूप, दीप, चंदन और थोड़ा सा जल से अभिषेक कर देंगे और वो अभिषेक किया हुआ जल अपने घर में छिड़क देंगे।

गारंटी से कहती हूँ या लिख के कहती हूँ, अगला साल आपका नौ बदला तो आप कहिएगा, क्योंकि यह चीजें मैं अपने लोगों को काफी हद तक देती रहती हूँ। कराती रहती हूँ। तो मुझे विश्वास बहुत बहुत दृढ़ है।

बस करना इतना है कि आपको जहाँ कहीं लक्ष्मी जी की मूर्ति आप अपने तिजोरी में भी स्थापित कर सकते हैं। वैसे अच्छा मंदिर में रहेगा। स्थापित करिए। रोज इनको जल से स्नान कराइए।

उस जल को पूरे घर में छिड़किए। थोड़ा सा धूप, दीप, चंदन लगा के भोग लगा दीजिए। देखिए यह मूर्ति कैसे आपके घर में चमत्कार करती है। तो तीन चीजें इस बार जा रही हैं।

एक लक्ष्मी वृद्धि लॉकेट है और एक है हमारी धनपोटली और दूसरा है हमारा मूर्ति जा रही है माँ लक्ष्मी के विष्णु जी के चरण दबाते हुए। तो ये तीनों चीजें गुरु मंत्र साधना डॉटकॉम से जा रही हैं।

जिन लोगों को भी यह चीजें चाहिए, वो चैनल पर चल रहे नंबर पर संपर्क करें और संपर्क करके ऑफिस में नाम लिखवाएँ और नाम लिखवा करके अब यह सामान प्राप्त कर सकते हैं।

📦 Dhanteras धनतेरस सामान की प्राप्ति और लाभ

अब देखिए दोस्तों, एक चीज बता दूँ, घबराइएगा मत। धीरे-धीरे यह सामग्रियाँ जाती हैं और जिनका नाम जैसे लिखा होता है, पहले से जिनकी बुकिंग होती है, उनका पहले जाता है, बाद में जिनका होता है, उनका बाद में जाता है तो धीरे-धीरे धैर्य के साथ यह चीजें आप तक पहुँचेंगी और इस चीज के लाभ की बात करूँ, तो लाभ पूछिए ही मत, इस चीज का अनगिनत लाभ है जो मैं कॉन्फिडेंस से विश्वास से कह रही हूँ, आप इस विश्वास को मेरे विश्वास को समझिए और आगे बढ़िए।

Dhanteras 2025 धनतेरस पर अष्टलक्ष्मी रहस्य धन वर्षा रहस्य

Dhanteras 2025 धनतेरस पर अष्टलक्ष्मी रहस्य धन वर्षा रहस्य

Dhanteras 2025 धनतेरस पर अष्टलक्ष्मी रहस्य धन वर्षा रहस्य

Dhanteras 2025 धनतेरस पर अष्टलक्ष्मी रहस्य धन वर्षा रहस्य
Dhanteras 2025 धनतेरस पर अष्टलक्ष्मी रहस्य धन वर्षा रहस्य

🌟 परिचय: लक्ष्मी के प्रकार और श्री का महत्व

आपके घर की दक्षिण दिशा में अगर पूरी रात तक कोई दीपक जला सके अखंड ज्योत, आपका असामयिक मृत्यु, अकाल मृत्यु टल जाएगा। यह यमराज जी का वरदान है। आयुर्वेद के अंदर यह जो धनिया है ना, यह जो सब्जी में हम खाते हैं, बहुत आपको लगता होगा साधारण सी चीज है, नहीं नहीं, यह बहुत महत्वपूर्ण एक जड़ी-बूटी है।

नमस्कार, नमो नारायण। दिवाली के पर्व की सजावट, दिवाली के पर्व की रोशनी घर-घर दिखाई देने लगी है, और हम आज धनतेरस, धनलक्ष्मी, वैभव लक्ष्मी की बात करने जा रहे हैं। जगत में किसको लक्ष्मी नहीं चाहिए ? लेकिन क्या आपको पता है, लक्ष्मी कितने प्रकार की होती है ?

आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गजलक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, भाग्य लक्ष्मी, विजयालक्ष्मी और विद्या लक्ष्मी। आठ प्रकार की लक्ष्मी होती है, और हम ज्यादातर लोग यही मानते हैं कि गांधी छाप एक ही लक्ष्मी होती है।

नहीं, जिस तरह से लक्ष्मी आठ प्रकार की होती है, उसी तरह से आठ स्त्रोतों की रक्षा करने वाली भी लक्ष्मी जो होती है, वह क्या आठ हैं? सोत्र आध्यात्मिक है, भौतिक धन है, कृषि है, राज परिवार है, ज्ञान है, साहस है, संतान है, और जीत है। इन सब में लक्ष्मी जी का बहुत बड़ा महत्व है।

जीवन में आपके पास सब कुछ हो अगर श्री नहीं है, क्योंकि श्री में ये आठों आठ आ जाएगी। गीता जी का वह श्लोक है ना: यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम जहां कृष्ण हैं, वहां श्री रहेगी।

तो सीधी सी बात है, जिस व्यक्ति के पास, जिस मनुष्य के पास श्री नहीं है, वह दरिद्र है, क्योंकि श्री के बिना श्रीहीन हो जाते हो। हम अपने नाम में श्री या श्रीमती क्यों लगाते हैं?

हम सबको श्री की आवश्यकता है। तो श्री का पर्व दिवाली पर धनतेरस, और धनतेरस के दिन अगर ठीक से लक्ष्मी पूजन आप करते हैं, तो पूरे वर्ष उसकी कृपा बनी रहती है।

🙏 धनतेरस पर विशेष पूजन और पंजीकरण

आप मित्रों के अनुरोध पर, जैसे कि मैंने बताया था कि ऑफलाइन तो हम नहीं, संसाधन सीमित होने से आपको नहीं बुला पाए संस्कार केंद्र पर, लेकिन ऑनलाइन हमारा धनतेरस का विशेष पूजन होने जा रहा है।

धनतेरस का योग सिर्फ दो घंटे, छ: से आठ। करना क्या है? विवरण में दिया हुआ लिंक है, उस लिंक पर जा करके आपको रजिस्टर करना है। जितनी जल्दी हो सके, आप इसको करेंगे, और धनतेरस के दिन आप अपने सामने अपना श्रीयंत्र अथवा तो लक्ष्मी जी की मूर्ति ले कर के बैठेंगे।

मैं स्वयं जो-जो चीजें लक्ष्मी जी की पूजा के लिए शास्त्रोक्त पद्धति से है, वह करेंगे, और साथ में इसमें होम भी होगा। सहस्रनाम का, ललिता सहस्रनाम के हजार नाम होंगे, श्री यंत्र का अभिषेक होगा। तो बाद में वह प्रोग्राम ही जाएगा, परंतु लाइव देखने का एक आनंद, उसमें भाग लेना एक अलग आनंद है। तो मिलते हैं 10 तारीख शुक्रवार को धनतेरस के दिन।

🛍️ धनतेरस पर खरीदारी और बचत का महत्व

तो धनतेरस का महत्व हजारों सालों से हमारे परंपरा में आपने अगर देखा होगा, तो हमारे नाना नानी, दादा दादी चांदी की कोई ना कोई चीज खरीद किया करते थे। चांदी की ही क्यों ? क्योंकि चांदी एक तो शुद्ध है, ठंडी है, और चांदी का लक्ष्मी जी से बहुत बड़ा संबंध है, जुड़ाव है।

बाद में जब हमारी इनकम थोड़ी बहुत कम हुई होगी, तो लोगों ने स्टील के बर्तन, तांबे के बर्तन, पीतल के बर्तन लेने भी शुरू किए, लेकिन इसमें एक दूसरा राज क्या है ?

हमारे ऋषि मुनि, हमारे पूर्वज इतने स्मार्ट थे, इतने इंटेलिजेंट थे कि वह उस समय तो बैंकिंग सिस्टम विकसित नहीं था ना, बैंकिंग सिस्टम था नहीं, यह पेपर करेंसी नहीं थी, सारे की सारी मेटल्स के ऊपर चल रहा था। तो प्रत्येक घर में कुछ बचत हो, हर साल कुछ उसके लिए सिक्योरिटी बढ़े, तो आप कैसे बढ़ाओगे ?

तो उसको धर्म से जोड़ कर के उन्होंने धनतेरस के दिन कुछ खरीदारी करो, सोने की, चांदी की, तांबे की, पीतल की, कम से कम कुछ जोड़ो, तोड़ो मत, जोड़ो। तो आप भी इस धनतेरस को कुछ जोड़ें, शुभ संकल्प ले कर के जोड़ें।

🪔 दीपदान का महत्व और यमराज का वरदान

 

दूसरा धनतेरस के दिन दीपदान भी होता है। यह जो पर्व है, ये तीन पर्व एक साथ आ जाते हैं। दीपदान का महत्व क्या है ? कहानी तो उसमें मैं आपको बताऊंगा अगर, चलते चलते राजा हेम की। कि राजा हेम जो हैं, उनको किसी ज्योतिषी ने बताया, पुराण की कहानी है, कि ज्योतिषियों ने बताया कि भई आप, आपके बेटे की अगर शादी होती है, तो चौथे दिन के बाद ही उसका मृत्यु का योग बनेगा।

तो राजा हेम ने कहा, तो फिर मुझे अपने बेटे को ऐसी जगह भेज देना चाहिए जहां पर उसको लड़की या कोई स्त्री का दर्शन ही ना हो, पर विधि के विधान को कोई तोड़ नहीं सकता।

राजा हेम ने अपने बेटे को ऐसी जगह भेजा, जहां कोई स्त्री का उसको दर्शन नहीं हो रहा था, लेकिन उस प्रकृति, उस विराट, उस कॉस्मिक डिज़ाइन के अंदर एक दिन एक राजकुमारी उसी एरिया से गुजरती है, और राजा हेम के पुत्र की उस पर नजर पड़ती है।

दोनों में प्रेम होता है, दोनों गांधर्व विवाह करते हैं। विवाह के होते ही चौथे दिन जो मृत्यु योग था, वह सामने आ गया।

अब जब चौथे दिन मृत्यु योग आ गया, तो यमराज के दूत उसको लेने के लिए पहुँच गए। तो राजा हेम की बहू, नवविवाहिता थी, चौथे दिन का मतलब विधवा योग।

खूब कल्पाती है, हृदय से रोदन करती हुई विलाप करती है, और ऐसा विलाप, ऐसा विलाप कि यम दूतों के हृदय भी पिघल गए।

तो उनमें से एक यमदूत यमराज जी से पूछता है कि प्रभु, आप इस तरह से जो यह मृत्यु के देवता हैं, और इस तरह से खींच के ले आते हैं, लोग इतना रोदन करते हैं, क्या कोई रास्ता नहीं है कि मृत्यु को असामयिक रोका जा सके? इतनी जवानी में यह राजा का बच्चा मर रहा है, तो उसको कैसे रोकें हम?

यमराज जी कहते हैं कि देखो, विधि के विधान को मैं भी नहीं बदल सकता हूँ। मैं भी एक ड्यूटी कर रहा हूँ, जैसे पुलिस वाला अगर किसी को पकड़ता है, तो वह ड्यूटी कर रहा है, उसका कोई व्यक्तिगत उससे दुश्मनी नहीं है। तो मैं ड्यूटी कर रहा हूँ, और ड्यूटी के तहत मृत्यु के अधीन मुझे वह आत्मा ले लेनी पड़ती है।

पर हाँ, मैं एक रास्ता बता देता हूँ कि अगर धनतेरस वाले इसी दिन, कार्तिक मास की जो ये आएगी त्रयोदशी, कि इसी दिन घर की दक्षिण दिशा में, आपके घर की दक्षिण दिशा में अगर पूरी रात तक कोई दीपक जला सके, अखंड ज्योत।

बहुत अच्छा, नहीं जला सकते हो, कम से कम सूर्यास्त के बाद थोड़ी देर के लिए ही दीप प्रज्वलित कर लो, तो आपका असामयिक मृत्यु, अकाल मृत्यु टल जाएगा। यह यमराज जी का वरदान है। तो धनतेरस का एक यह महत्व रहा।

⚕️ धनवंतरी भगवान और लक्ष्मी जी का प्राकट्य दिवस

 

फिर धनतेरस का दूसरा महत्व क्या है? ऐसा कहा जाता है कि अमृतमंथन के समय इसी दिन धनवंतरी भगवान का जन्म हुआ है। धनवंतरी भगवान अपने हाथ में अमृत का कलश ले कर के बाहर प्रकट होते हैं, और धनवंतरी भगवान, आपको पता ही है, आयुर्वेद के भगवान माने जाते हैं, और भारत सरकार ने इस दिन को आयुर्वेद दिवस घोषित किया हुआ है।

तो धनवंतरी जी आयुर्वेद के अंदर तो पूजनीय हैं ही, लेकिन मैं मानता हूँ कि जो भी सनातनी, उनको धनवंतरी भगवान के विषय में थोड़ा बहुत जान लेना चाहिए। थोड़ा सा गूगल करके पढ़ोगे, धनवंतरी जी की कृपा प्राप्त करोगे, तो आपको यह असामयिक रोग या बीमारियाँ, दुख, क्लेश नहीं होंगे, क्योंकि धनवंतरी जी जो हैं, वह इन सभी का निदान करने के लिए सक्षम माने जाते हैं।

दूसरा, इसी धनतेरस के दिन माँ लक्ष्मी जी का भी प्रकट दिवस माना जाता है कि वो अमृत मंथन हो रहा था, उसमें से लक्ष्मी जी प्रकट होती हैं।

तो यह दिन लक्ष्मी जी से भी जुड़ा हुआ है। अब जब हम लक्ष्मी जी का पूजन करते हैं, तो लक्ष्मी जी के पूजन में आपने देखा होगा जो सजावट होते हैं फोटोज के, वह धनवंतरी जी भी उनमें रखे जाते हैं .

कुबेर देवता या कुबेर का यंत्र होता है, माँ लक्ष्मी होती है, गणेश होता है, और भगवान विष्णु। भगवान विष्णु क्यों? क्योंकि लक्ष्मी जी तो विष्णु के साथ रहेंगी, तो विष्णु जी रहेंगे ही रहेंगे। तो श्री रहेगी तो श्रीपति रहेंगे, नाथ रहेंगे।

तो यह अपने आप में फ्रेम पूरा होता है, और गणेश जी और लक्ष्मी जी के संयुक्त होने की कहानी हम ऑलरेडी कहीं बोल चुके हैं, तो आप देख लेना कि जहाँ लक्ष्मी जी रहेंगी, वहाँ गणेश जी उनके मानस पुत्र के तरीके से रहते हैं।

🧘 ध्यान तेरस, धन्य तेरस और महावीर का निर्वाण

अब धनतेरस, इसमें तेरह ही क्यों है? तेरस मतलब तेरह। तेरह क्यों है ? अगर आप गहराई से सोचोगे, तो सब कुछ दीना आपने, बेटा, दरू क्या मैं नाथ। नमस्कार, बेटा हमारी आप स्वीकार कर लो, तेरा तेरा, सब कुछ तेरा है। नानक कहते हैं ना, सब तेरा है, मेरा कुछ नहीं।

लेकिन धनतेरस का एक और अर्थ जो हम मानते हैं, वह है धन्य तेरस और एक है ध्यान तेरस। धन्य और ध्यान क्यों? ध्यान तेरस इसीलिए कहा जाता है कि भगवान महावीर इसी दिन तीसरे और चौथे ध्यान में गए, और तीन दिन के बाद योग निरोध करते निर्वाण को प्राप्त होते हैं।

दिवाली के दिन महावीर जी की निर्वाण तिथि है वह। तो धनतेरस अपने आप में, क्योंकि दिवाली के यह जो दिन है ना, बड़े शुभ हैं।

जितना हो सके, किसी को उलझना मत, किसी से उलझन वाली बातें मत करना, बिल्कुल आनंद रहना, और जितना हो सके, पूजा पाठ है, नित-नेम, दान पुण्य, गरीबों को देखना, शुभ शुभ करना, तो सब शुभ शुभ होगा।

🌱 धनतेरस पर धनिया का प्रयोग और स्वास्थ्य लाभ

उसी दिन धनतेरस के दिन साबुत धनिया होते हैं, साबूत धनिया तो आप मसाला यूज़ करते हैं, तो धनिया जो होता है, साबूत धनिया भगवान धनवंतरी को अर्पित किए जाते हैं, और कुछ धनिये साबुत अपने तिजोरी में लोग रखते हैं।

वह धन का प्रतीक है, और कुछ लोग उन्हीं दानों को, उन जो धनिया के बीज हैं, उनको जमीन में बो देते हैं, और उनमें से हरे धनिये निकलते हैं। मैं आपको बताऊँ, आयुर्वेद के अंदर यह जो धनिया है ना, यह जो सब्जी में हम खाते हैं, बहुत आपको लगता होगा साधारण सी चीज है, नहीं नहीं, यह बहुत महत्वपूर्ण एक जड़ी-बूटी है, और उसकी बहुत से उपयोग, सदुपयोग हैं।

आज का विषय नहीं है, क्योंकि आज का आपका विषय तो लक्ष्मी से जुड़ा हुआ है, तो मैं उसको कहाँ सब्जी में ला रहा हूँ, लेकिन याद रखिएगा, यह जो धनिया है, बहुत ही उत्तम, स्वास्थ्यवर्धक, और काफी कुछ साधना में, आध्यात्मिकता में भी उसका महत्व होता है।

🛐 समापन और निवेदन

तो जैसे कि मैंने आपको बताया कि भगवान धनवंतरी जी की वह कहानी, कलश ले कर पैदा होना, और जैन आश्रम में धनतेरस को बहुत महत्व दिया गया है। धनतेरस के विषय में अगर हम और आगे आगे आगे आपको बताते जाएँगे, तो आप कहोगे कि धनतेरस के आगे दिवाली भी तो आती है, उसके विषय में कब बताओगे ? तो मैं तो यही कहूँगा कि अष्टलक्ष्मी की आप पूजा उस दिन व्यवस्थित करें।

अष्टलक्ष्मी का स्तोत्र का पाठ करें, पर आपको मिल जाता है, और जितना हो सके, दीपदान के मनोभाव से दक्षिण दिशा में दीप को प्रज्वलित करेंगे। धनिया वाली बात मैंने आपको कही है, उसका इस बार प्रयोग करेंगे, आपको बहुत बहुत फायदा होगा, पूरे साल फायदा होगा, और हर साल इसको नियम में बना दें।

आने वाली पीढ़ियों को यह संस्कार दें। हमारी संस्कृति और हमारे संस्कार जो हैं, वो इतने हजारों-हजारों सालों से यह वैज्ञानिक तरीके से जाने माने गए हैं।

इनको अपनी पीढ़ियों तक धरोहर समझकर पहुँचाएँ, और इन पर्वों पर, रोशनी के इन पर्वों पर अपने मन के भीतर भी रोशनी लाएँ, अड़ोस-पड़ोस में भी रोशनी लाए, अपने भाइयों, बहनों और धर्म से जुड़े हुए, संस्कृति से जुड़े हुए लोगों के मन में खुशियाँ आए, इसके लिए मिठाइयाँ वगैरह का अरेंजमेंट है।

पर एक करबद्ध हाथ जोड़ कर के निवेदन, स्वदेशी बनिए, स्वदेशी चीजों का उपयोग करिएगा। विदेशी और देश के जो दुश्मन हैं, उनके लिए कुछ भी आपको करना नहीं है।

तो आज इतना ही। फिर मिलेंगे अगले पोस्ट में, अगले विषय को ले कर। तब तक के लिए नमो नारायण।